पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 10 पत्रकारों को ‘सुधा सिन्हा मेमोरियल सम्मान

रोजलिन लकड़ा, किसलय और कुलदीप सिंह दीपक को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

रांची,08.05.2026 –  रांची की पहली महिला पत्रकार सुधा सिन्हा की स्मृति में सुधा सिन्हा मेमोरियल पत्रकारिता सम्मान समारोह शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। सुधा अरमान मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट ‘रे ऑफ होप’ एवं रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मीडिया कर्मियों को सम्मानित किया गया।

इस वर्ष का प्रतिष्ठित “सुधा सिन्हा मेमोरियल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती रोजलिन लकड़ा (सुगिया बहन), वरिष्ठ पत्रकार किसलय और वरिष्ठ छायाकार कुलदीप सिंह दीपक को प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें पत्रकारिता और छायांकन के क्षेत्र में लंबे समय तक की गई उनकी समर्पित और उल्लेखनीय सेवा के लिए दिया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री बलबीर दत्त, वरिष्ठ पत्रकार व पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्र, प्रभात खबर के पूर्व झारखंड संपादक अनुज कुमार सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवास, शर्मिष्ठा मजुमदार और सुधा अरमान मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष शुब नारायण दत्त ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इन अतिथियों ने विभिन्न श्रेणियों में चयनित पत्रकारों को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों, रांची में पत्रकारिता के स्वर्णिम इतिहास और विशेष रूप से रांची की पहली महिला पत्रकार सुधा सिन्हा के कार्यों व उनके संघर्षपूर्ण जीवन की चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि सुधा सिन्हा ने उस दौर में पत्रकारिता की मशाल जलाई थी जब महिलाओं का इस क्षेत्र में आना बहुत कठिन माना जाता था।

समारोह के दौरान श्रेयसी मिश्रा और आरती सहुलियार को “एक्सीलेंस अवार्ड इन जर्नलिज्म”, कुंदन कुमार चौधरी को “एक्सीलेंस इन सोशल इम्पैक्ट अवार्ड”, धर्मेंद्र स्वरूप को “जेम अवार्ड”, आनंद दत्ता को “सुधा सिन्हा मेमोरियल जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर”, कुमार गौरव को “यूथ एंडेवर अवार्ड” और करिश्मा सिन्हा को “बेस्ट इमर्जिंग जर्नलिस्ट अवार्ड” से नवाजा गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रभात खबर के स्थानीय संपादक संजय मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार रजत गुप्ता, दिवाकर प्रसाद, सुनील सिंह बादल, दिलीप श्रीवास्तव नीलू, गंगेश गुंजन, प्रमोद झा, नवेंदु उन्मेष, किरण जी सहित प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी, उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय, सचिव अभिषेक सिन्हा, कार्यकारिणी सदस्य राजन बॉबी, चंदन वर्मा, विजय गोप, क्लब के पूर्व अघ्यक्ष राजेश सिंह, सुरेंद्र सोरेन, सत्यप्रकाश पाठक सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद रहे।

मंच संचालन मृदुला जी ने किया अतिथियों ने कहा कि इस तरह के सम्मान समारोहों से निष्पक्ष और जन-सरोकार की पत्रकारिता करने वालों का मनोबल बढ़ता है।

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झारखण्ड लोक सेवा आयोग, राँची द्वारा आयोजित झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2023 परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी

झारखण्ड लोक सेवा आयोग, राँची द्वारा आयोजित झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या-06/2026) के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किए गए

श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निषेधाज्ञा जारी किया

यह निषेधाज्ञा दिनांक-10.05.2026 के पूर्वाह्नः-07.00 बजे से अपराह्न 08.00 बजे तक प्रभावी रहेगा

रांची,08.05.2026 – झारखण्ड लोक सेवा आयोग, राँची द्वारा आयोजित झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या-06/2026) के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची, श्री राकेश रंजन के संयुक्तादेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया :-

1. पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

2. किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

3. किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

4. किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)

5. किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक-10.05.2026 के पूर्वाह्नः-07.00 बजे से अपराह्न 08.00 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केंद्र

1. DORANDA COLLEGE, DORANDA, OPP. SRI KRISHNA PARK, NEAR A.G. MORE, RANCHI

2. ST. KULDEEP HIGH SCHOOL, HARMU HOUSING COLONY, HARMU, RANCHI.

3. ANITA GIRILS SCHOOL, KANKE, P.O+PS.-KANKE, RANCHL

4. NIRMALA COLLEGE, DORANDA, RANCHI, P.O+P.S- DORANDA, RANCHI.

5. SHADHANAND BAL MANDIR SENIOR SECONDARY SCHOOL, KAMRE, RATU
ROAD, RANCHI.

6. R.T.C HIGH SCHOOL (C.B.S.E) KH TOLA, P.H.E.D BUTI, RANCHI.

7. D.A.V. NANDRAJ MODERN SCHOOL, BURDWAN COMPOUND, LALPUR, RANCHI.

8. CHHOTANAGPUR RAJ +2 HIGH SCHOOL, RATU, P.O+P.S-RATU, RANCHI.

9. FIRYALAL PUBLIC SCHOOL, 5, MAIN ROAD, NERA RAILWAY OVERBRIDGE, RANCHI

10. BERLIN PUBLIC SCHOOL, NEAR HOLIDAY HOMEM KANKE ROAD, RANCHI.

11. MARWARI +2 HIGH SCHOOL, UPPER BAZAR, PUSTAK PATH, RANCHI.

12. BETHESDA WOMEN’S INTERMEDIATE COLLEGE, G.E.L CHURCH COMPOUND, RANCHI

13. C.M. SCHOOL OF EXCELLENCE, KANKE, NEAR B.IT MORE, RAMGARH ROAD, MESRA, KANKE, RANCHI.

14. PREMCHAND HIGH SCHOOL, MESRA, AT-MESRA, P.O.- NEROI VIKASH, P.S.-SADAR, RANCHI

15. BIRSA INSTITUTE OF TECHNOLGY (TRUST), GETALATU, DEVI DARSHAN ROAD, P.O.-NEORI VIKASH, RANCHI.

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विधानसभा आम चुनाव और उपचुनाव 2026

  1. निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और 5 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों के उपचुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए थे। पश्चिम बंगाल के 144-फलता विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अब आदर्श आचार संहिता लागू नहीं है।
  2. चुनाव के दौरान, आयोग ने चुनाव वाले राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और उनके सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सीईओ, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें आयोजित कीं।
  3. हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आईआरएस (आईटी), आईआरएस (सी एंड आईटी), आईए एंड एएस, आईआरएएस, आईडीएएस, आईपी एंड टीएएफएस और आईसीएएस से लिए गए 376 व्यय पर्यवेक्षकों, 7,470 फ्लाइंग स्क्वाड टीमों (एफएसटी) और 7,470 स्थैतिक निगरानी टीमों (एसएसटी) को भी तैनात किया गया था।
  4. आईटी प्लेटफॉर्म- चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ईएसएमएस) की मदद से जब्ती की यह कार्रवाई संभव हो पाई। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ा और उपयोगी जानकारी साझा की जा सकी। 26 फरवरी, 2026 को ईएसएमएस के सक्रिय होने के बाद से 6 मई, 2026 तक जब्त की गई कुल सामग्री का विवरण इस प्रकार है:

 

क्रमांक राज्य नकद

(करोड़ रुपए में)

शराब की मात्रा

(लीटर)

शराब का मूल्य (करोड़ रुपए में) मादक पदार्थों का मूल्य (करोड़ रुपए में) बहुमूल्य धातु का मूल्य (करोड़ रुपए में) मुफ्त की सामग्री

/अन्य (करोड़ रुपए में)

कुल

(करोड़ रुपए में)

1. तमिलनाडु 105. 22 137248. 53 4. 94 78. 61 165. 86 307. 65 662. 28
2. पश्चिम बंगाल 31.14 5858648. 98 151. 86 130. 28 69. 36 190. 77 573. 41
3. असम 6.07 828248. 33 22. 71 70. 08 3. 68 14. 7 117. 24
4. केरल 12. 12 78215. 3 2. 51 58. 47 2. 25 5. 33 80. 67
5. पुदुचेरी 0. 33 18340. 35 0. 39 0 8.99 0.02 9. 72
कुल 154. 89 6988793. 38 183. 33 337. 88 250. 14 518. 73 1444. 96
  1. इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 के आम चुनाव की तुलना में इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जब्त की गई संपत्ति की मात्रा 40.14 प्रतिशत बढ़ी है। 2021 में यह राशि 1029.93 करोड़ रुपए थी। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 68.92 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और तमिलनाडु में 2026 में जब्त की गई संपत्ति की मात्रा में 48.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2021 के आम चुनाव के दौरान यह वृद्धि इसी अवधि की तुलना में अधिक थी।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने डीए–जेजीयूए, पीएम-जनमन और अनुच्छेद 275(1) कार्यक्रमों पर संबंधित मंत्रालयों और राज्यों के जनजातीय कल्याण विभागों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा बैठक की

नई दिल्ली – भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने प्रमुख जनजातीय विकास पहलों की प्रगति की समीक्षा के लिए केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्यों के जनजातीय कल्याण विभागों के प्रधान सचिवों के साथ एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान(डीए–जेजीयूए), प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान(पीएम-जनमन) और भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव ने की।

 

ये प्रमुख पहलें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 विजन पर आधारित हैं, जिसमें पीएम-जनमन 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के समग्र विकास के लिए समर्पित है, और डीए-जेजीयूए का उद्देश्य देशभर में जनजातीय समुदायों का संतृप्ति-आधारित समग्र विकास सुनिश्चित करना है। ये कार्यक्रम समावेशी विकास, अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुंच और जनजातीय(आदिवासी) नागरिकों के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

डीए-जेजीयूए के तहत तीसरे वर्ष के कार्यान्वयन की अनिवार्यता

डीए-जेजीयूए के क्रियान्वयन के तीसरे वर्ष में प्रवेश करने के साथ यह बैठक विशेष महत्व रखता है, जिसे मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने के लिए एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में पहचाना है। योजना निर्माण और संसाधन जुटाने के चरण लगभग पूरे हो चुके हैं, और अब सारा ध्यान सभी डीए-जेजीयूए गांवों में बुनियादी ढांचे तथा आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हो गया है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए जनजातीय कार्य सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि आवास, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आजीविका और सड़क संपर्क सहित सभी अधिकारों एवं सुविधाओं की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करना कोई वैकल्पिक लक्ष्य नहीं, बल्कि यह एक अनिवार्य दायित्व है। उन्होंने कहा कि आंशिक या विलंबित क्रियान्वयन को योजना के उद्देश्य से विचलन माना जाएगा तथा अब प्रदर्शन का मूल्यांकन सिर्फ खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस और मापने योग्य परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

त्रैमासिक लक्ष्य और आंकड़ों के प्रति जवाबदेही

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों हेतु क्षेत्रवार त्रैमासिक(तिमाही) लक्ष्य निर्धारित किए हैं। एमओटीए के अतिरिक्त सचिव श्री मनीष ठाकुर ने मंत्रालयों से आग्रह किया कि वे इन लक्ष्यों की जानकारी शीघ्र संबंधित राज्य विभागों को उपलब्ध कराएं, संयुक्त सचिव स्तर पर डीए-जेजीयूए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें तथा भौतिक एवं वित्तीय प्रगति से संबंधित अद्यतन आंकड़ों को प्रत्येक माह साझा करना सुनिश्चित करें।

संबद्ध मंत्रालयों को राज्य जनजातीय कल्याण विभागों के साथ स्वतंत्र अभिसरण समीक्षा बैठकें आयोजित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व वाले समीक्षा प्रणाली से आगे बढ़ाकर जवाबदेही तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

केंद्र-राज्य तालमेल को मजबूत करना

डीए-जेजीयूए की अभिसरण-आधारित संरचना पर प्रकाश डालते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि यह पहल एक ही जनजातीय बस्तियों में विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन सुनिश्चित करती है। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे इस कार्यक्रम में सक्रिय सह-स्वामित्व की भूमिका निभाएं तथा जिला स्तर पर, विशेषकर जिलधिकारी, जिला मजिस्ट्रेटों और आईटीडीए परियोजना अधिकारियों के माध्यम से, क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन और प्रगति की निगरानी के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।

नई रणनीतिक पहलों की शुरुआत

  • सचिव ने एक मानकीकृत ढांचे के तहत लागू की जाने वाली नई पहलों की एक श्रृंखला की घोषणा की। इनमें शामिल हैं:
  • सतत जनजातीय आजीविका के लिए एकीकृत संरक्षण, कृषि-प्रौद्योगिकी और मूल्य-संवर्धित जैव-संसाधन उद्यम: (सीएसआईआर-एनबीआरआई के सहयोग से)
  • जनजातीय चिकित्सकों का क्षमता निर्माण: (आसीएमआर के सहयोग से)
  • प्रोजेक्ट दृष्टि(DRISTI) के तहत जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला
  • रोग उन्मूलन मिशन: जनजातीय जिलों में मलेरिया, कुष्ठ रोग और तपेदिक(टीबी) को लक्षित करने वाले कार्यक्रम
  • डीए-जेजीयूए के तहत जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्रों की स्थापना
  • जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी मॉडल गांवों का विकास
  • जनजातीय इको-टूरिज्म पायलट प्रोजेक्ट और जनजातीय होमस्टे विकास
  • जनजातीय सौर सहायक कार्यक्रम

आदि कर्मयोगी अभियान का संस्थागतकरण

अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संचालित आदि कर्मयोगी अभियान(एकेए) पर विशेष बल दिया गया। अभियान के वर्तमान चरण में आदि सेवा केंद्रों(एएसके) का मानचित्रण किया जा रहा है, जो शिकायत निवारण और अधिकारों तक पहुंच सुनिश्चित करने वाले ग्राम-स्तरीय सुविधा केंद्र हैं। साथ ही, आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों(एकेवी) का पंजीकरण भी किया जा रहा है, जो स्थानीय आदिवासी युवा हैं और जमीनी स्तर पर सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाते हैं।

राज्यों से इन प्रयासों में सक्रिय सहयोग करने और जिला स्तर पर प्रगति की साप्ताहिक निगरानी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।

पीएम-जनमन और अनुच्छेद 275(1) की समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान(पीएम-जनमन) के तहत कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों(पीवीटीजी) के लिए समर्पित कार्यक्रम है। इसके साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली धनराशि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। बैठक में यह स्वीकार किया गया कि भौगोलिक दृष्टि से दूरस्थ और ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित पीवीटीजी बस्तियों के लिए पारंपरिक कार्यक्रमों से अलग, विशेष रूप से अनुकूलित और लक्षित सेवा वितरण तंत्र की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में मंत्रालय ने 18 राज्यों और एक-केंद्र शासित प्रदेश में पीवीटीजी परिवारों को शामिल करते हुए चलाए जा रहे व्यापक घर-घर सर्वेक्षण पर विशेष बल दिया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य व्यक्तिगत स्तर पर अधिकारों एवं बुनियादी ढ़ांचे में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करना तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और विभिन्न सरकारी सुविधाओं तक पहुंच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सेवा वितरण में सुधार की संभावनाओं का आकलन करना है।

यह सर्वेक्षण राज्य जनजातीय कल्याण विभागों(टीडब्ल्यूडी) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग प्रदान कर रहा है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि सर्वे सेतु ट्राइबल ऐप के शुभारंभ के 20 दिनों के भीतर लगभग 2 लाख परिवारों की प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि जून 2026 के अंत तक लगभग 12 लाख प्रविष्टियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय(एमओटीए) ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और “सबका साथ, सबका विकास” के विजन के अनुरूप, पीएम-जनमन के माध्यम से पीवीटीजी समुदायों के लिए लक्षित और प्रभावशाली परिणाम सुनिश्चित करने हेतु मजबूत निगरानी और डेटा-संचालित हस्तक्षेपों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के समापन पर सचिव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप समग्र और बहु-क्षेत्रीय जनजातीय विकास के प्रति जनजातीय कार्य मंत्रालय(एमओटीए) की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विभिन्न हितधारकों से सेवा वितरण ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए तथा इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय क्रियान्वयन में एक सहयोगी, संवेदनशील और जवाबदेह भागीदार की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल में बहु-अंग दान से अनेक जीवनों की रक्षा; संस्थान में पहली बार प्रत्याेरोपण हेतु हृदय निकासी सम्पन्न

नई दिल्ली – परमार्थ और साहस के एक उल्लेखनीय उदाहरण के तहत, भारतीय सेना के एक सेवारत कर्नल की 41 वर्षीय पत्नी के परिवार ने 2 मई 2026 को हरियाणा के पंचकूला स्थित चंडीमंदिर के कमांड अस्पताल में उन्हें ब्रेन-स्‍टेम (मस्तिष्‍क-स्‍तंभ) मृत घोषित किए जाने के बाद उनके अंगदान के लिए सहमति दी। इस उदार पहल से एक 14 वर्षीय बालक सहित, चार गंभीर रूप से बीमार रोगियों के जीवनरक्षक प्रत्यारोपण संभव हुए, जो करुणा और राष्ट्रीय एकजुटता की भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

दाता को गंभीर मस्तिष्क रक्तस्राव हुआ था और स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार विधिवत गठित चिकित्सा बोर्ड द्वारा उन्हें ब्रेन-स्‍टेम मृत घोषित किया गया। गहन व्यक्तिगत शोक के बीच, उनके पति और दो युवा बेटियों ने उनका हृदय, गुर्दे, यकृत और अग्न्याशय दान करने का असाधारण निर्णय लिया, जिससे अनेक जीवनरक्षक प्रत्यारोपण प्रक्रियाएँ संभव हो सकीं।

अंगों की सफल निकासी और प्रत्यारोपण कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर; भारतीय वायु सेना; राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ); हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के यातायात पुलिस प्राधिकरणों; तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के बीच निर्बाध अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से संभव हुआ। त्वरित अनुमतियों और सूक्ष्म लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं ने अंगों के तृतीयक देखभाल संस्थानों—पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल—तक समयबद्ध परिवहन सुनिश्चित किया।

उल्लेखनीय है कि यह मामला कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में प्रत्‍यारोपण हेतु पहली बार हृदय निकासी किए जाने का संकेत देता है, जो अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

यह अनुकरणीय मामला देश में अंगदान और प्रत्यारोपण को आगे बढ़ाने में विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करता है। यह सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को अंगदान के लिए संकल्प लेने हेतु प्रोत्साहित करने की अपरिहार्य आवश्यकता को भी सुदृढ़ करता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय ढाँचे को और सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराता है तथा नागरिकों से इस जीवनरक्षक उद्देश्य के समर्थन में आगे आने का आग्रह करता है।

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केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) की प्रगति की समीक्षा की और जुलाई 2026 तक पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा

नई दिल्ली – केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोथल में निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) की प्रगति की समीक्षा की और इस परियोजना के पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य जुलाई 2026 निर्धारित किया है। समीक्षा के दौरान, श्री सोनोवाल ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और पैनल, भित्ति चित्र, छत निर्माण और फर्श सहित महत्वपूर्ण घटकों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने परिसर को निर्धारित समय सीमा के भीतर चालू करने के लिए समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री श्री सोनोवाल ने कहा, “राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) भारत की समृद्ध समुद्री धरोहर और समुद्रों से सभ्यतागत जुड़ाव को प्रदर्शित करने की एक ऐतिहासिक पहल है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में, हम एनएमएचसी को एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह हमारी धरोहर का जश्न मनाते हुए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। हमें उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ समय पर इस परियोजना का पूरा होना सुनिश्चित करना होगा।”

इस परियोजना के वैश्विक आयाम पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के साथ साझा समुद्री धरोहर और ऐतिहासिक संबंधों को प्रदर्शित करने के लिए आसियान देशों सहित पड़ोसी और समुद्री राष्ट्रों के साथ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। अधिकारियों को परिसर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए इस तरह की साझेदारियों को प्रमुखता से आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। भारत ने नीदरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, यूएई, पुर्तगाल, वियतनाम, ओमान, इज़राइल और थाईलैंड के साथ पहले ही 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि इटली, फ्रांस, म्यांमार और कंबोडिया सहित चार और देशों के साथ समुद्री इतिहास के वैश्विक केंद्र के रूप में एनएमएचसी के विकास में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने की संभावना है।

सोनोवाल ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने एनएमएचसी को एक प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से स्थापित करने और उसे प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के साथ घनिष्ठ सहयोग का निर्देश दिया। सोनोवाल ने राष्ट्रीय और राज्य पर्यटन विभागों के साथ समन्वय में एक व्यापक कार्यक्रम कैलेंडर तैयार करने का भी आह्वान किया ताकि पर्यटकों की निरंतर भागीदारी और भारी संख्या में उनका आगमन सुनिश्चित हो सके।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने परिसर के सतत रखरखाव और दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व मॉडल पर सफाई मांगी।

श्री सोनोवाल ने यह भी कहा, “एनएमएचसी सिर्फ एक अवसंरचना परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री भावना को श्रद्धांजलि और हमारे ऐतिहासिक वैश्विक संबंधों को समझने का द्वार है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर अटूट ध्यान के साथ, हम एक ऐसा मंच बना रहे हैं जो पर्यटन को बढ़ावा देगा, आर्थिक अवसर पैदा करेगा और एक समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत की पहचान को मजबूत करेगा।”

इस परियोजना के चरण 1ए को इस वर्ष जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें छह संग्रहालय दीर्घाएं, लोथल टाउनशिप, जलीय थीम, सार्वजनिक क्षेत्र थीम, एक जेटी वॉकवे और भारतीय नौसेना की कलाकृतियों का प्रदर्शन शामिल है।

अगले चरण 1बी में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इसमें आठ अतिरिक्त संग्रहालय दीर्घाएं, एक प्रकाशस्तंभ संग्रहालय, बगीचा परिसर, लोथल-एनआई-वीएवी घटक और 50 गुंबदों वाला एक थिएटर भी अन्य आकर्षणों के अलावा शामिल होंगे।

एनएमएचसी का काम पूरा हो जाने पर इसके समुद्री इतिहास, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है, जो आर्थिक विकास को गति देते हुए धरोहर संरक्षण के भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
सोनोवाल ने ईरान के पास जलडमरूमध्य की स्थिति और भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

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श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नई दिल्ली में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए। इस अवसर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद; छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव; स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव श्री संजय कुमार; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक कुमार मीणा तथा डीओएसईएल की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अर्चना एस. अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश–2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विज़न को देश के लगभग 15 लाख विद्यालयों में कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में एसएमसी को विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा में साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

श्री प्रधान ने इस बात पर बल दिया कि जहाँ एक ओर  सरकार बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समर्थन सुनिश्चित करने के प्रति वचनबद्ध है, वहीं एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने में सहयोग, मार्गदर्शन और सामुदायिक स्वामित्व के महत्व को भी मान्यता देते हैं। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एसएमसी को शैक्षिक परिणामों में सुधार की एक स्‍थायी संस्कृति और जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना है। विद्यांजलि जैसी पहलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से सामुदायिक नेतृत्व के अंतर्गत फली-फूली है, और नए एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को पुनः सामाजिक सहभागिता के केंद्र में स्थापित कर उसी भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं।

अपने संबोधन में श्री आशीष सूद ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल नए दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे गहन और परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो उसका मार्ग देश की कक्षाओं से होकर ही गुजरेगा।

श्री सूद ने नवप्रारंभित एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 को इस परिवर्तनकारी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद प्रारंभ किया गया पूर्ववर्ती एसएमसी ढाँचा मुख्यतः अनुदान निगरानी, अवसंरचना पर्यवेक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित था। किंतु आज की चुनौतियाँ और अपेक्षाएँ काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), डिजिटल पारदर्शिता, अधिगम (लर्निंग) परिणाम तथा सामुदायिक भागीदारी जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। नए एसएमसी दिशा-निर्देशों को इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मंत्री महोदय ने बल देते हुए कहा कि ये दिशा-निर्देश एसएमसी को मात्र निगरानी निकाय से आगे बढ़ाकर वास्तविक “विद्यालय समुदाय प्रशासनिक संस्थान” में परिवर्तित करते हैं। अब एसएमसी समग्र बाल विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता, छात्र कल्याण, सुरक्षा, समावेशन, डिजिटल प्रशासन तथा पारदर्शिता में सक्रिय योगदान देंगी। अपने संबोधन के अंत में श्री सूद ने विश्वास व्यक्त किया कि एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

अपने संबोधन में श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के नेतृत्व में प्रस्तुत किए गए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश विद्यालय प्रबंधन और संचालन में स्थानीय अभिभावकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित कर अभिभावकों और विद्यालयों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होंगे।

 

बैठक में हरियाणा के स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा; महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा एवं मराठी भाषा मंत्री श्री दादाजी भुसे; मिजोरम के स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना; त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री किशोर बर्मन; उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत; तथा नागालैंड के उच्च शिक्षा मंत्री श्री तेमजेन इम्ना आलोंग सहित कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

 

 

स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देशों हेतु जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

https://dsel.education.gov.in/sites/default/files/guidelines/School_Management_Committee_Guidelines.pdf

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मुख्यमंत्री ने प्रतिभाशाली बाल तैराक इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें 5 लाख रुपए का चेक, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर किया सम्मानित

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से रांची के सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह ने की मुलाकात।

मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह को अपनी ओर से हार्दिक बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

 इशांक सिंह की सफलता राज्य के लिए गौरव का क्षण

 राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत

 युवा खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी को और ऊर्जावान बनाएगी- श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड।

मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, रांची,07.05.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में रांची के सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तैराक इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें अपनी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा उज्जवल भविष्य की कामना की।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह को उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए उन्हें 5 लाख रुपए का चेक, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि रांची के इशांक सिंह ने विगत 30 अप्रैल 2026 के दिन लगातार 9 घंटे 50 मिनट तैरकर भारत और श्रीलंका के बीच स्थित चुनौतीपूर्ण पाल्क स्ट्रेट (palk Strait, 29 किलोमीटर) को पार करते हुए अपने नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए इशांक सिंह को कई विभिन्न खिताबों से सम्मानित किया गया है।

इशांक सिंह ने अपने प्रदर्शन से राज्य का नाम रोशन किया

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक ईशान सिंह ने पाक स्ट्रेट पार कर देश और दुनिया में झारखंड प्रदेश का नाम रोशन कर दिखाया है। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि तैराकी के क्षेत्र में इनकी सफलता पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

झारखंड में हमारी सरकार ने एक बेहतर खेल नीति बनाई है, जिसका लाभ यहां के खिलाड़ियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा झारखंड के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने विश्वास व्यक्त किया कि सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर झारखंड का मान बढ़ाएंगे।

प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक इशांक सिंह कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। इनकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भीतर इशांक सिंह जैसे प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा खेल के क्षेत्र में झारखंड प्रदेश निरंतर विकास कर रहा है। यहां के खेल प्रतिभाओं ने कई मौकों पर पूरे विश्व अपना लोहा मनवाया है। झारखंड के खिलाड़ी अपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं। राज्य के युवा खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी को और ऊर्जावान बनाएगी।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित पदाधिकारियों से कहा कि आने वाले दिनों में तैराकी प्रशिक्षण सहित सभी सुविधाओं के विस्तार हेतु कार्य योजना बनाते हुए राज्य सरकार आगे बढ़ेगी तथा राज्य में तैराकी प्रतिभावों को आधुनिक सुविधा प्रदान करेगी। मौके पर मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में तैराकी से संबंधित सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी उपस्थित खेल विभाग के अधिकारियों से ली। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह की माता, पिता तथा कोच को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री श्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, खेल विभाग के सचिव मुकेश कुमार, निदेशक खेल श्री आसिफ इकराम, उप निदेशक श्री राजेश कुमार, तैराकी संघ से श्री शैलेंद्र तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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रांची रेलवे स्टेशन पर 13 किलोग्राम गांजा बरामद

रांची,07.05.2026 – रेल सुरक्षा बल, रांची मंडल के कमांडेंट श्री पवन कुमार के निर्देशानुसार आरपीएफ द्वारा लगातार सतर्कता एवं गहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 06.05.2026 को आरपीएफ पोस्ट रांची एवं आरपीएफ टीम रांची के अधिकारी एवं स्टाफ, उप निरीक्षक सूरज पांडे के पर्यवेक्षण में रांची रेलवे स्टेशन पर चेकिंग ड्यूटी में तैनात थे।

चेकिंग के दौरान ट्रेन संख्या 18523 एक्सप्रेस मे रांची स्टेशन पहुचने पर जांच के क्रम में कोच संख्या A-2 की सीट संख्या 37 के नीचे एक हरे रंग का ट्रॉली बैग लावारिस एवं संदिग्ध अवस्था में पाया गया। संदेह होने पर उक्त ट्रॉली बैग की जांच की गई, जिसमें भूरे रंग के प्लास्टिक रैपर में लिपटे कई पैकेट पाए गए, जो प्रथम दृष्टया गांजा प्रतीत हो रहे थे। घटना की सूचना तत्काल सहायक सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ मुरी, श्री एस. सी. सहाय को दी गई। सूचना प्राप्त होने पर सहायक सुरक्षा आयुक्त मौके पर पहुंचे तथा उनके निर्देशानुसार सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए ट्रॉली बैग की जांच की गई।

जांच के दौरान हरे रंग के ट्रॉली बैग में कुल 13 पैकेट मादक पदार्थ (गांजा/मारिजुआना) बरामद हुआ। सहायक सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ मुरी के निर्देशानुसार सभी पैकेटों की जांच डीडी किट द्वारा की गई, जिसमें पदार्थ गांजा पाया गया। तत्पश्चात सभी 13 पैकेटों का वजन किया गया, जिसका कुल वजन 13 किलोग्राम पाया गया। अतः बरामद गांजा को आरपीएफ टीम रांची के एएसआई अनिल कुमार द्वारा सहायक सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ मुरी की उपस्थिति में जब्त किया गया।

सभी कानूनी औपचारिकताओं के उपरांत जब्त गांजा को आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु जीआरपीएस/रांची को सुपुर्द कर दिया गया। बरामद गांजा की अनुमानित कीमत लगभग ₹6,50,000/- आंकी गई है।

इस अभियान में आरपीएफ पोस्ट रांची  उप निरीक्षक सूरज पांडे एवं संजय कुमार, आरपीएफ टीम रांची एएसआई अनिल कुमार, आर. के. सिंह, दिनेश प्रसाद एवं हेमंत शामिल थे.

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माननीय मुख्य न्यायाधीश झारखंड ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण में अपनी स्व-गणना पूर्ण की

माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के इस कदम को जनगणना 2027 को सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

रांची,07.05.2026 – माननीय मुख्य न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय, श्री महेश शरदचंद्र सोनक ने आज जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत अपनी स्व-गणना पूर्ण कर ली।

इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के महानिबंधक श्री सत्य प्रकाश सिन्हा ने भी अपनी स्व-गणना पूर्ण की।

स्व-गणना के दौरान प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री, जनगणना निदेशक झारखण्ड राज्य, श्री प्रभात कुमार, संयुक्त निदेशक, जनगणना डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता एवं जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, रांची श्री शेषनाथ बैठा उपस्थित रहे।

माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के इस कदम को जनगणना 2027 को सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह स्व-गणना पूरे राज्य में जनगणना जागरूकता को बढ़ावा देने और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

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DC Ranchi मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण

अनुमण्डल पदाधिकारी, रांची सदर श्री कुमार रजत ने किया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, नगड़ी का निरीक्षण

मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

बीपीएचसी निर्माण कार्य प्रगति का भी निरीक्षण

रांची,07.05.2026 – जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार आज दिनांक 07.05.2026 को अनुमण्डल पदाधिकारी, रांची सदर श्री कुमार रजत द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, नगड़ी का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केन्द्र में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का आकलन करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के क्रम में अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा ओपीडी व्यवस्था का जायजा लेते हुए मरीजों को समय पर एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टॉफ की शिफ्टवार उपस्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि सभी कर्मी निर्धारित समय पर उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सुनिश्चित करें, ताकि आमजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

अनुमण्डल पदाधिकारी श्री कुमार रजत द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाए रखने का निर्देश दिया गया, ताकि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो सके।

निरीक्षण के दौरान अनुमण्डल पदाधिकारी श्री कुमार रजत द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र में दवाइयों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवश्यक जीवनरक्षक एवं सामान्य उपयोग की दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए। साथ ही अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, पेयजल एवं बिजली व्यवस्था का अवलोकन करते हुए नियमित निगरानी एवं बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अनुमण्डल पदाधिकारी, रांची द्वारा ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर के निर्माण कार्य प्रगति का भी जायजा लिया गया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्य एजेंसी एवं पदाधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया।

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भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग ने नई दिल्ली में उद्घाटन बैठक के दौरान रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति जताई

नई दिल्ली – भारत और अल्जीरिया के बीच 5 मई, 2026 को नई दिल्ली में संयुक्त आयोग की पहली बैठक का आयोजन हुआ। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा सहयोग और रक्षा उद्योगों क्षेत्र में पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग गतिविधियों को और अधिक विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों देशों ने भारत-अल्जीरिया रक्षा सहयोग के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए उत्‍तरदायी कार्यप्रणाली नियमों पर हस्ताक्षर किए, यह संयुक्त आयोग की बैठकों के लिए मार्गदर्शक प्रारूप के रूप में कार्य करेंगे। बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) श्री अमिताभ प्रसाद और अल्जीरिया की नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं, मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ, रक्षा उत्पादन विभाग, डीआरडीओ, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे।

भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा संबंध 2024 में रक्षा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद से निरंतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं और दोनों पक्षों की उच्च स्तरीय यात्राओं से यह संबंध और मजबूत हो रहे हैं। अल्जीरिया के नौसेना प्रमुख की यह यात्रा भारत-अल्जीरिया रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण पहल है और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में संयुक्‍त रूप से कार्य करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

बैठक से पहले, मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। अल्जीरिया का प्रतिनिधिमंडल इस यात्रा के दौरान रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों से भी वार्तालाप करेगा।

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स्वस्थ भारत पोर्टल का अनावरण : भारत के डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन को गति देने के लिए खंडित स्वास्थ्य प्रणालियों का एकीकरण

नई दिल्ली – भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वास्थ्य भारत पोर्टल का शुभारंभ हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा आयोजित नवाचार एवं समावेशिता विषय पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान किया गया। यह शुभारंभ एक अधिक एकीकृत, कुशल और व्यापक डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर निर्णायक बदलाव का प्रतीक है।

पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सेवा वितरण, निगरानी और रिपोर्टिंग में सहयोग हेतु कई डिजिटल अनुप्रयोग विकसित किए हैं। इन प्लेटफार्मों ने हालांकि बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा संग्रहण को सक्षम बनाया है, लेकिन ये काफी हद तक अलग-अलग ही संचालित होते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रयासों का दोहराव, खंडित डेटासेट और संसाधनों का सही उपयोग नहीं हुआ है।

इस चुनौती का समाधान करने के लिए स्वस्थ भारत पोर्टल को एक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के रूप में परिकल्पित किया गया है जो एपीआई-आधारित फेडरेटेड आर्किटेक्चर के माध्यम से मौजूदा कार्यक्रम प्रणालियों को एकीकृत करता है। यह अंतरसंचालनीयता और अभिसरण को सक्षम बनाता है, जिससे कार्यक्रमों में एक एकीकृत डिजिटल स्तर का निर्माण होता है। एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में परिकल्पित यह कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही इंटरफ़ेस पर लाता है, जिससे कई लॉगिन और बार-बार डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर प्रशासनिक बोझ काफी कम हो जाता है, जबकि सभी स्तरों पर दक्षता में वृद्धि होती है।

भारत के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सीएचओ और चिकित्सा अधिकारियों (एमओ) को अक्सर कार्यक्रम रिपोर्टिंग के लिए कई एप्लिकेशन का उपयोग करने में काफी समय व्यतीत करना पड़ता है। स्वस्थ भारत पोर्टल एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर इस समस्या का समाधान करता है, जिससे डेटा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसमें डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल और स्थानीय स्तर पर निगरानी और साक्ष्य-आधारित योजना के लिए डेटा का उपयोग करने की सुविधा भी उपलब्ध है। यह पोर्टल एबीडीएम के अनुरूप है और एबीएचए (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जिससे रोगी स्वास्थ्य रिकॉर्ड का निर्बाध और सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होता है। इसे एक व्यापक और अंतःसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो आगे चलकर स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (एचपीआर) और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (एचएफआर) जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों के साथ एकीकृत होगा।

स्वस्थ भारत पोर्टल में निम्नलिखित परिकल्पनाएं हैं:

  • बुनियादी ढांचे की पुनरावृत्ति को कम करना : विभिन्न कार्यक्रमों में स्वतंत्र होस्टिंग, स्टोरेज और कंप्यूट संसाधन बनाए रखे जाते हैं, जो स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से इन्हें एकीकृत किए जाने पर कम हो जाएंगे।
  • बार-बार डेटा दर्ज करने की प्रक्रिया कम होगी : एक ही तरह का लाभार्थी डेटा जो कई सिस्टमों में दर्ज किया जाता था, अब एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा, जिससे बार-बार होने वाले काम कम हो जाएंगे।
  • एकीकृत मानव संसाधन कार्यान्वयन: सभी प्रोग्रामों में अलग-अलग विकास और रखरखाव टीमों की आवश्यकता होती है, एक एकीकृत प्रणाली से मानव संसाधन का बोझ कम होगा।
  • बेहतर अंतरसंचालनीयता : चूंकि सिस्टम एपीआई के माध्यम से फेडरेटेड आर्किटेक्चर पर डिज़ाइन किया गया है, इसलिए अंतरसंचालनीयता अधिक होगी।

स्वस्थ भारत पोर्टल से मौजूदा समय में विभिन्न कार्यक्रम विभागों द्वारा संचालित व्यक्तिगत पोर्टलों की तुलना में मानव संसाधन, समय और आईटी बुनियादी ढांचे के मामले में सरकार को काफी बचत होगी। स्वस्थ भारत पोर्टल एक एकीकृत, कुशल और विस्तार योग्य डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की ओर बदलाव को सक्षम बनाता है, जिससे दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

  • बुनियादी ढांचा: लगभग 20-30 प्रतिशत की कमी
  • डेटा एंट्री में लगने वाला समय: लगभग 20-40 प्रतिशत की कमी
  • मानव संसाधन दोहराव: लगभग 20-40 प्रतिशत की कमी
  • निर्णय लेने की गति: बढ़ेगी

इस प्रकार स्वस्थ भारत पोर्टल भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अभिसरण, दक्षता और डेटा-संचालित शासन की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम का प्रतिनिधित्व करता है।

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लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड 2026 समारोह संपन्न

07.05.2026 – भारतीय फिल्म जगत के पितामह दादा साहेब फाल्के की स्मृति में मुम्बई के रहेजा क्लासिक क्लब में कृष्णा चौहान फाउंडेशन (केसीएफ) के बैनर तले आयोजित लिजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड 2026 समारोह (7वें सीजन) पिछले दिनों बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा, संगीतकार दिलीप सेन, कॉमेडियन सुनील पाल,तरन्नुम मालिक जैन,डॉ सुनील बी गायकवाड़, डॉ आदित्य सिंघानिया,डॉ योगेश लखानी, लेखक दीपक देसाई दीपक के अलावा कई शख्सियतों को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि भजन सम्राट अनूप जलोटा थे।

अवार्ड समारोह के दौरान स्टेज पर शानदार केक काट कर आयोजक डॉ कृष्णा चौहान का जन्मदिन भी मनाया गया।

अपने व्यक्तव्य के दौरान भजन सम्राट अनूप जलोटा ने डॉ कृष्णा चौहान द्वारा किए जा रहे कार्यों के सराहना करते हुए जन्मदिन की बधाई दी और उनके दीर्घायु होने की मंगल कामना की। इस अवॉर्ड समारोह में पवन तोडी, गायक एन के नरेश, गायक सागर आचार्य, आरजे आरती (कार्यक्रम की एंकर), गोपाल सुथार, बाल कलाकार गूँज संदीप पाटिल, मॉडल ब्यूटी चड्ढा, मॉडल वैशाली, एएसआई कैप्टन मोइन, निर्देशक डी. पी. सिंह (देव), अभिनेता आकाश वैद्य, दिल्ली से आए आज़म खान, गायिका और मॉडल रूही जैन, किरण जे परमार, अभिनेता शांतनु भामरे, लेखक पी.के गुप्ता, गीतकार विक्की नागर, संगीतकार वैष्णव देवा, अगस्त्य कुमार, गायक मोहन कृष्णमूर्ति को भी अवॉर्ड दे कर सम्मानित किया गया। निर्देशक, निर्माता स्व धीरज कुमार के पुत्र आशुतोष कोचर को भी अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में रियाजुद्दीन सैफी, मालकॉम भैया, भेरू जैन, गायक समीर सईद, दिलीप पटेल, अंजलि पारीख, पुणे से आये सिमरन और कुंतल अरोड़ा (कलाकार), नागपुर से आये अभिनेत्री गायत्री, अनिल कुमार, अनूप जलोटा के साथ आई अपूर्वा खंडेलवाल जो इंटरप्रिनूर आईपी ​​विशेषज्ञ हैं,उन्होंने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विदित हो कि पिछले 20 वर्षों से बॉलीवुड में सक्रिय डॉ.कृष्णा चौहान न केवल एक कामयाब फ़िल्म निर्देशक एवं चर्चित समाज सेवक हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक सुर्खियों में रहने वाले पर्सनाल्टी माने जाते हैं। इन्होंने अपना फिल्मी सफर बतौर सहयक निर्देशक शुरू किया था। इन्होंने कई एड फिल्म्स, म्यूजिक वीडियो बनाया है। फिल्म निर्देशक व अवार्ड समारोह के आयोजक कृष्णा चौहान इस एवार्ड के अलावा प्रत्येक वर्ष बॉलीवुड आयकोनिक एवार्ड, बॉलीवुड लिजेंड एवार्ड, नारी शक्ति सम्मान, राष्ट्रीय रत्न सम्मान और महात्मा गांधी रत्न अवॉर्ड का आयोजन भी करते चले आ रहे हैं।

कृष्णा चौहान फाउंडेशन (केसीएफ) के संस्थापक डॉ कृष्णा चौहान इस अवॉर्ड समारोह के अलावा प्रत्येक वर्ष बॉलीवुड आयकोनिक एवार्ड, बॉलीवुड लिजेंड एवार्ड, नारी शक्ति सम्मान, राष्ट्रीय रत्न सम्मान और महात्मा गांधी रत्न अवॉर्ड का आयोजन भी पिछले कई वर्षों से करते चले आ रहे हैं।

डॉ कृष्णा चौहान द्वारा आयोजित सभी अवार्ड समारोह में उन शख्सियतों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी प्रतिभा के बदौलत अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है साथ ही समाज सेवा और मानव सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय व सराहनीय कार्य किया है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप-कमांडर और एचएनएलएमएस डी. रूयटर का कोच्चि दौरा

नई दिल्ली – रॉयल नीदरलैंड्स नेवी शिप एचएनएलएमएस डी रूयटर (एफ804) 04 मई 2026 को कोच्चि पहुंचा। यह डी ज़ेवेन प्रोविंसियन-क्लास का युद्धपोत है।

इस जहाज का आगमन  रॉयल नीदरलैंड्स नेवी के उप कमांडर (डीसीएन) मेजर जनरल (रॉयल मरीन) रॉब डी विट और कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (एसएनसी) में नीदरलैंड्स की राजदूत सुश्री मारिसा गेरार्ड्स सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के समय में हुआ है।

कोच्चि बंदरगाह पहुंचने पर, एचएनएलएमएस डी रूयटर युद्धपोत को भारतीय नौसेना के फास्ट इंटरसेप्टर जहाज के अनुरक्षण में लाया गया और नौसेना बैंड के साथ औपचारिक स्वागत किया गया।

यह युद्धपोत वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पांच महीने की तैनाती पर है और सहयोगी देशों के साथ यह विभिन्न समुद्री अभ्यासों में भाग लेगा। डीसीएन के नेतृत्व में नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ नीदरलैंड के नौसैनिक युद्धपोत का भारतीय बंदरगाह पर पहुंचना दोनों देशों के बीच मजबूत और घनिष्ठ समुद्री संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण है। रॉयल नीदरलैंड नौसेना के डीसीएन ने इससे पहले फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलान 26 के अंतर्गत आईओएस कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स कार्यक्रम में भाग लिया था।

नीदरलैंड के नौसेना प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात की। दोनों के बीच बातचीत में समुद्री क्षेत्र में पारस्परिक हित के मामलों को शामिल किया गया, जिसमें दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीके भी शामिल रहे।

नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय स्मरण दिवस (04 मई) के अवसर पर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, मेजर जनरल रॉब डी विट और राजदूत मारिसा गेरार्ड्स ने एसएनसी युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण कर किया शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

नीदरलैंड्स प्रतिनिधिमंडल प्रशिक्षण सहयोग बढ़ाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने पर केंद्रित द्विपक्षीय बैठकों की एक श्रृंखला में भाग लेगा। प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी नौसेना कमान के विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा करेगा और उन्नत सिमुलेटरों तथा अत्याधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना के प्रदर्शन देखेगा। यह प्रतिनिधिमंडल भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने और औद्योगिक सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का भी दौरा करेगा। दोनों नौसेना कर्मियों के बीच कई पेशेवराना और सामाजिक मेलजोल की भी योजना बनाई गई है।

कोच्चि से प्रस्थान करने पर, एचएनएलएमएस डी रुयटर भारतीय नौसेना के किसी जहाज के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लेगा, जिससे अंतरसंचालनीयता और परिचालन तालमेल को और मजबूत किया जा सकेगा।

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आईआईएमसी ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘संचार माध्यम’ का विशेषांक जारी किया

नई दिल्ली – राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश ने 5 मई को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) की प्रमुख शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेष स्मारक अंक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। यह विशेषांक भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर को दर्शाता है। इस अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ तथा संयुक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, डॉ. के.के. निराला की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत और उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि त्‍वरित परिवर्तन के इस दौर में साक्षर और निरक्षर की परिभाषा पारंपरिक पढ़ने-लिखने के दायरे से आगे बढ़ चुकी है। निरंतर सीखते रहने और उभरती ज्ञान प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अनिवार्य हो गई है। जो प्रौद्योगिकियाँ पहले विकसित होने में सदियाँ लेती थीं, वे अब कुछ वर्षों और महीनों में ही बदल रही हैं।

इसी पृष्‍ठभूमि में, उन्होंने व्यक्तियों, विशेषकर युवा संचारकों से आह्वान किया कि वे इस बदलते परिदृश्य में सार्थक सपने देखें और उन्हें अटूट प्रतिबद्धता के साथ साकार करें। उन्होंने कहा, “केवल तभी, कोई व्यक्ति अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है, ठीक उसी तरह, जैसे 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ ने छोड़ी थी।”

‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने भारत के भविष्य को आकार देने में संचार, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान युग को “कौशल-प्रधान युग” करार दिया, जहाँ कौशल का अर्जन और उसका प्रभावी उपयोग जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। आर्थिक परिवर्तन की महत्‍वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यही व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा निर्धारित करता है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में हाल के वर्षों में हाई-स्‍पीड रेल, आधुनिक बंदरगाहों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों सहित बुनियादी ढाँचे में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस युग में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने के लिए नवाचार तथा पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ने के साहस की आवश्यकता है। श्री हरिवंश ने कहा कि पत्रकारिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचनाओं का सबसे छोटा अंश भी जन-जन तक पहुँचे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुविज्ञ सार्वजनिक चर्चा हो सके और आम सहमति बन सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संचारकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास होना चाहिए।

आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि ‘संचार माध्यम’ का यह विशेषांक प्रमुख शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों के आलेखों का संकलन है, जो पिछली दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर यह पत्रिका पत्रकारिता के उभरते रुझानों पर निरंतर नजर रखती है, वहीं भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के तत्वों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुअल ओराम ने देशभर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की

माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, श्री जुअल ओराम ने देशभर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के निर्माण की प्रगति की समीक्षा हेतु एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

 

बैठक का आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा किया गया और इसमें केंद्रीय एवं राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/प्रबंध निदेशक तथा वरिष्ठ अधिकारी, और असम, छत्तीसगढ़, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल राज्यों के प्रतिनिधि आभासी माध्यम से सम्मिलित हुए।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों को कक्षा VI से XII तक गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करना है। यह योजना शैक्षिक अंतराल को पाटने तथा जनजातीय बच्चों के समग्र विकास, जिसमें शिक्षा, खेलकूद और कौशल शामिल हैं, को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान में पर चल रहे ईएमआरएस निर्माण कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की व्यापक समीक्षा की। बैठक के दौरान सीपीडब्ल्यूडी, एचएससीएल, टीसीआईएल, वैपकोस, बी एंड आर, ईपीआईएल, मैनिडको, एमटीडीसी, एनपीसीसी तथा राज्य सरकार की एजेंसियों जैसी प्रमुख क्रियान्वयन एजेंसियों ने अपनी प्रगति तथा पूर्णता हेतु निर्धारित समय-सीमा प्रस्तुत की।

एजेंसी-वार एवं राज्य-वार प्रदर्शन की समीक्षा की गई, जिसमें समय-सीमा, गुणवत्ता मानकों के पालन तथा बाधाओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने ईएमआरएस परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता के महत्व पर बल दिया, क्योंकि यह दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी क्रियान्वयन एजेंसियों, जिनमें पीएसयू, सीपीडब्ल्यूडी तथा राज्य सरकार के विभाग शामिल हैं, को परियोजना स्थलों पर जनशक्ति एवं संसाधनों की तैनाती का अनुकूलन करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निकट पर्यवेक्षण हेतु नियमित क्षेत्रीय दौरे करने के भी निर्देश दिए।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य स्तर पर लंबित सभी मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें, जिसमें भूमि एवं वन स्वीकृतियों से संबंधित विषय भी शामिल हैं।

निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे ईएमआरएस-वार मुद्दों तथा समयबद्ध पूर्णता हेतु कार्य-योजनाओं सहित, सभी चल रही परियोजनाओं की अद्यतित मासिक प्रगति रिपोर्ट मंत्रालय/एनईएसटीएस को प्रस्तुत करें। परियोजनाओं में विलंब के लिए संबंधित निर्माण एजेंसी को उत्तरदायी ठहराया जाएगा।

जनजातीय कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि करते हुए, माननीय केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ईएमआरएस एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य जनजातीय बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली आवासीय शिक्षा तक पहुँच के माध्यम से सशक्त बनाना है।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि ईएमआरएस का विस्तार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप है, जिसमें समावेशी और न्यायसंगत विकास पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि जनजातीय क्षेत्रों में शैक्षिक अवसंरचना को सुदृढ़ करना इस बात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जनजातीय युवा राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें, जिससे एक विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान हो।

श्रीमती रंजना चोपड़ा, सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय, ने रेखांकित किया कि ईएमआरएस योजना मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है। उन्होंने परियोजना की प्रगति को प्रभावित करने वाली बाधाओं, अर्थात् पहुँच मार्ग, जल की कमी तथा एचटी/एलटी विद्युत लाइनों के स्थानांतरण जैसे मुद्दों को शीघ्रातिशीघ्र हल करने पर बल दिया। उन्होंने क्रियान्वयन एजेंसियों से आग्रह किया कि वे इन मुद्दों के समयबद्ध समाधान हेतु राज्य सरकारों एवं जिला प्रशासन के साथ निकट समन्वय स्थापित करें। उन्होंने ईएमआरएस परियोजनाओं के लिए पीएम गति शक्ति पोर्टल के उपयोग पर भी बल दिया।

डॉ. प्रतिमा वर्मा, आयुक्त, नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (एनईएसटीएस) ने निर्माण की समग्र स्थिति तथा पूर्णता के लिए निर्धारित कार्य-योजना प्रस्तुत की। अवगत कराया गया कि मंत्रालय ने 728 ईएमआरएस को स्वीकृति प्रदान की है, जिनमें से 428 विद्यालय भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, 249 निर्माणाधीन हैं, तथा 46 पूर्व-निर्माण चरण में हैं। उन्होंने तेज़ी से क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने हेतु एनईएसटीएस द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला।

बैठक का समापन जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव (ईएमआरएस) श्री बी. एन. प्रसाद द्वारा अध्यक्ष को धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

 

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चर्चाओं के बीच : गायिका खुशी ठाकुर

07.05.2026 – इन दिनों संगीत की दुनिया में सैड और रोमांटिक गानों में माहिर, एक वर्सटाइल सिंगर के रूप में गायिका खुशी ठाकुर का नाम तेजी से उभर रहा है। अपनी मधुर आवाज और कड़ी मेहनत के दम पर खुशी ठाकुर वर्तमान समय में लाइव सिंगिंग और प्लेबैक सिंगिंग दोनों में शानदार पहचान बना रही हैं। इस कारण बॉलीवुड में खुशी ठाकुर काफी चर्चा का विषय भी बनी हुई हैं। खुशी ठाकुर ने अपने प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत फिल्म ‘लव के फंडे’ के ‘अनमोल मस्का’ गीत से की।

इसके बाद उन्होंने लगातार सफलता की ओर कदम बढ़ाए। अब तक वह 20 से अधिक हिंदी और पंजाबी म्यूजिक वीडियो में अपनी आवाज दे चुकी हैं। इसके साथ ही वह नृत्य में भी निपुण हैं और उन्होंने भरतनाट्यम की शिक्षा भी प्राप्त की है। लाइव परफॉर्मेंस में भी खुशी पीछे नहीं हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध सैफई महोत्सव में अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीता है।

इसके अलावा कई स्टेज शो और सरकारी कार्यक्रमों में भी अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा है।खुशी ठाकुर को मुंबई में ‘वॉइस ऑफ वैली’ के नाम से भी जाना जाता है। अपनी सुरीली, दिल को छू लेने वाली आवाज और शानदार परफॉर्मेंस के कारण उन्होंने यह खास पहचान हासिल की है, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता और प्रतिभा को दर्शाती है।खुशी ने पुराने गीतों के रीक्रिएट, कवर सॉन्ग और रीमिक्स वर्जन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।

वह किशोर कुमार, अरिजीत सिंह, विशाल मिश्रा और श्रेया घोषाल के गाने सुनना पसंद करती हैं। साथ ही वह सुरों की मलिका लता मंगेशकर और आशा भोसले की बड़ी प्रशंसक हैं और उन्हें अपना आदर्श मानती हैं। खुशी का सपना बॉलीवुड में एक सफल प्लेबैक सिंगर बनना है। उनके संगीत गुरु कमलेश समान्या हैं, जिनसे उन्हें निरंतर मार्गदर्शन मिलता है।

उन्होंने पंजाबी फिल्म में दर्शन लख्खेवाला के साथ डुएट सॉन्ग भी गाया है और वेबसीरीज़ के लिए भी गाना गाया है। खुशी के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में ‘राइजिंग रोनाल्डो’ शामिल है जो एक ट्रिब्यूट सॉन्ग है। इसके अलावा ‘वो जो पास था मेरे’ और ‘तू मुझमें क्यों नहीं’ जैसे गाने जल्द ही आने वाले हैं।

विदित हो कि सिंगिंग के साथ-साथ खुशी ठाकुर ने 50 से अधिक पहाड़ी गढ़वाली म्यूजिक वीडियो में अभिनय भी किया है, जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा सामने आती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी ने दिल्ली के सीआर पार्क स्थित काली बाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की

नई दिल्ली – भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी ने आज मंगलवार को नई दिल्ली के चितरंजन पार्क स्थित काली बाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा, सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज सहित अन्य नेतागण भी उपस्थित रहे।

श्री नितिन नवीन ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता का बहुत-बहुत अभिनंदन है। पांच राज्यों में हुए चुनावों के लिए सभी राज्यों की जनता का भी बहुत-बहुत अभिवादन है। मां काली और मां कामाख्या की पवित्र भूमि में जो विजयश्री मिली है, उसके लिए हम आज मां काली के दरबार में मत्था टेकने आए हैं।

मां काली, मां दुर्गा और मां कामाख्या हम सभी को आशीर्वाद दें, ताकि हम पश्चिम बंगाल और असम समेत पूरे भारत के विकास में योगदान दे सकें। हमारे नेता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, जो राष्ट्र नायक के रूप में लगातार इस देश में प्रधान सेवक के रूप में कार्य कर रहे हैं, वे विकास के साथ-साथ हमारी विरासत और संस्कृति को भी संजोते हुए आगे बढ़ा रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल की संस्कृति और विरासत को यदि किसी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा सकता है, तो वह यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव है। हम यह भी मानते हैं कि पूरे देश की जनता ने वर्ष 2024 में जो कसक रह गई थी, उस कसक और जनता के मन में जो टीस थी, उसे कहीं न कहीं लगातार विजयश्री देकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है।

हम आज मां काली के दरबार में आए, आशीर्वाद लिया है और यही कामना करते हैं कि पूरे देश, पश्चिम बंगाल और समस्त राज्यों में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे तथा विकास और विरासत के संकल्प के साथ हम आगे बढ़ें।

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विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय में कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) की खुली वेधशाला का उद्घाटन

नई दिल्ली – भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय उष्णदेशीय  मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय (एयू) में एक कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) की स्थापना की है। आंध्र विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में एक खुली मौसम विज्ञान वेधशाला स्थापित करने हेतु भूमि आवंटित की है, जिससे निरंतर और एकीकृत अवलोकन एवं अनुसंधान संबंधी सहयोग संभव हो सकेगा।

कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) की खुली वेधशाला का उद्घाटन 1 मई  2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन द्वारा माननीय कुलपति प्रोफेसर  जी.पी. राजा शेखर और आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की मिशन मौसम पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसका उद्देश्य अवलोकन संबंधी नेटवर्क और मॉडल पूर्वानुमान को बढ़ाना है।

इस समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि एमओईएस के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, सम्मानित अतिथि आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जी.पी. राजा शेखर, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव, एयू के मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सी.वी. नायडू, एयू के प्राचार्य प्रोफेसर एमवीआर राजू और आईआईटीएम की परियोजना निदेशक डॉ. बी. पद्मा कुमारी के स्वागत के साथ हुई।

आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने स्वागत भाषण दिया। अपने भाषण में, उन्होंने आईआईटीएम की अनुसंधान संबंधी गतिविधियों और पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम में कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड की स्थापना के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एयू में मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान विभाग में उपकरणों की स्थापना के पहले चरण और कोस्टल रिसर्च टेस्टबेड के अंतर्गत आने वाले अत्याधुनिक रिमोट सेंसिंग, प्रोफाइलिंग और यथास्थान उपकरणों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।

एमओईएस के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने “कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड” पर एक विवरण पुस्तिका जारी की। इस पुस्तिका में अनुसंधान संबंधी उद्देश्यों, कार्यान्वयन की रणनीति, संस्थागत सहयोग, उन्नत मौसम संबंधी उपकरणों और क्षेत्रीय प्रभाव का विवरण दिया गया है। उन्होंने विशाखापत्तनम स्थित “कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड” से संबंधित एक लघु फिल्म भी जारी की।

एयू के माननीय कुलपति प्रोफेसर जी. पी. राजा शेखर ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विशाखापत्तनम में इस रिसर्च टेस्टबेड की स्थापना में एयू और आईआईटीएम के संयुक्त प्रयास कितने महत्वपूर्ण रहे। यह केन्द्र आईआईटीएम और एयू के बीच दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

माननीय सचिव एम. रविचंद्रन ने मिशन मौसम के तहत वर्तमान अवलोकन क्षमता (स्थानिक और सामयिक सहित) में सुधार लाने हेतु एमओईएस की योजनाओं एवं पहलों पर जोर दिया, ताकि मौसम संबंधी सभी स्थितियों, विशेष रूप से गंभीर मौसम की निगरानी की जा सके और बेहतर मौसम पूर्वानुमान में सहायता मिल सके। उन्होंने एमओईएस के संस्थानों और राज्यों  के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया।

इस टेस्टबेड से पहली बार अवलोकन करने के उपलक्ष्य में, एमओईएस के सचिव, एयू के कुलपति और आईआईटीएम के निदेशक द्वारा एक मौसम संबंधी गुब्बारे का प्रक्षेपण किया गया। इस स्थल पर इम्पैक्ट डिसड्रोमीटर, 2-डायमेंशनल वीडियो डिसड्रोमीटर (2डीवीडी), 3डी  प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (3डी-पीएडब्ल्यूएस), कन्वेक्शनल एडब्ल्यूएस और एडी कोवेरियंस टावर जैसे अन्य उपकरण भी स्थापित हैं। इन उपकरणों ने विशाखापत्तनम में आज हुई पहली गरज के साथ बारिश के माप दर्ज किए। ये उपकरण बूंदों के आकार एवं आकृति सहित उनके आकार के वितरण, वर्षा की सूक्ष्म भौतिकी, अशांति प्रवाह और हवा की जानकारी की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली निगरानी में सक्षम बनाएंगे – जो प्रक्रिया की समझ को बेहतर बनाने और संख्यात्मक मॉडलों में उनके प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण है।

इस टेस्टबेड के लिए भविष्य में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में स्कैनिंग विंड लिडार, पोलारिमेट्रिक क्लाउड एवं प्रेसिपिटेशन डॉप्लर रडार, फेज एरे रडार, प्रोटॉन ट्रांसफर रिएक्शन मास स्पेक्ट्रोमीटर शामिल होंगे, जो न केवल हमें वायुमंडल को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे बल्कि चरम स्थितियों का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाने में भी सहायक होंगे।

यह कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) मानसून संवहन के प्रक्रिया-स्तरीय निदान में सहायता हेतु अनुसंधान संबंधी अवलोकन प्रदान करने, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में पैरामीटराइजेशन योजनाओं को बेहतर बनाने, पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने और मॉडल मूल्यांकन के लिए डेटा एसिमिलेशन प्रयोगों को सक्षम करने हेतु एक राष्ट्रीय उपयोगकर्ता सुविधा के रूप में कार्य करेगा। इससे चक्रवातों और चरम मौसमों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने और आपदा प्रबंधन में सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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भारत की राष्ट्रपति ने सेना प्रशिक्षण कमान मुख्यालय का दौरा किया

नई दिल्ली – भारत की महामहिम राष्ट्रपति तथा सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान (एआरटीआरएसी) मुख्यालय का दौरा किया। एआरटीआरएसी पहुंचने पर उनका स्वागत हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता तथा एआरटीआरएसी के जीओसी-इन-सी, लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने किया।

राष्ट्रपति को जीओसी-इन-सी द्वारा एआरटीआरएसी के विकास क्रम, भारतीय सेना के कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान कर परिचालन दक्षता बढ़ाने में इसकी उत्कृष्ट भूमिका तथा एआरटीआरएसी की प्रमुख पहलों के बारे में जानकारी दी गई। एआरटीआरएसी की नवोन्मेषी पहलों का उल्लेख करते हुए जीओसी-इन-सी ने ड्रोन प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाने हेतु उठाए गए कदम, ‘रेड टीमिंग’ की अवधारणा की शुरुआत तथा भारतीय सेना में डिजिटलीकरण और स्वचालन की दिशा में की गई पहलों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि एआरटीआरएसी भारतीय सेना के लिए युद्ध संबंधी अवधारणाओं के निर्माण, संसाधन विकास तथा मित्र देशों और अन्‍य रक्षा सेवाओं के साथ व्यापक सहभागिता में सर्वसमावेशी भूमिका निभाता है। यह सैन्य गौरव, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। एआरटीआरएसी अपने 32 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से भारतीय सेना में व्यावसायिक उत्कृष्टता के क्षेत्र को सुदृढ़ करता है, जिससे उसे युद्धकला के सिद्धांत और व्यवहार—दोनों के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्राप्त होता है।

राष्ट्रपति ने राष्ट्र को सुरक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना में प्रशिक्षण से संबंधित विषयों पर, हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता की उपस्थिति में, लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा के साथ विचार-विमर्श भी किया।

राष्ट्रपति ने एआरटीआरएसी से भारतीय सेना की परिचालन तैयारी को और सुदृढ़ करने के लिए पूरे उत्साह और समर्पण के साथ कार्य जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने एआरटीआरएसी के सभी रैंकों तथा रक्षा नागरिक कर्मियों की उत्कृष्ट कार्य के लिए सराहना की और उन्हें और अधिक जोश एवं उत्साह के साथ कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया।

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केन्द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास सचिव श्री संजय जाजू तीन दिवसीय दौरे पर त्रिपुरा पहुंचे

नई दिल्ली  – पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव संजय जाजू त्रिपुरा राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर आज दोपहर अगरतला पहुंचे। दोपहर में, उन्होंने काइलाशहर स्थित पुरातात्विक एवं पर्यटन स्थल उनाकोटी का दौरा किया। वहां उन्होंने पहाड़ी की ढलानों पर उकेरी गई अद्भुत रॉक-कट वास्तुकला और मूर्तियों का अवलोकन किया और इस स्थल के इतिहास, विरासत के महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उनाकोटी के विकास के लिए किए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा चलाए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस दौरे के दौरान, उनके साथ पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास निदेशक विवेक गोयल, राज्य योजना विभाग के सचिव एल.टी. डरलॉन्ग और उनाकोटि के जिलाधिकारी डॉ. तमल मजूमदार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। उनाकोटि पहुंचने पर, उनका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शैव तीर्थ स्थल उनाकोटी के भ्रमण के बाद, श्री जाजू ने कहा कि उनका त्रिपुरा का तीन दिवसीय दौरा केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित चल रही और पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की प्रगति की जमीनी स्तर पर समीक्षा करना है। उन्होंने उनाकोटी की वास्तुकला और मूर्तिकला विरासत के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त की।

बाद में श्री जाजू ने उत्तरी त्रिपुरा जिले के धर्मनगर उपमंडल के फूलबारी स्थित अगर की खेती वाले गांव का दौरा किया। उन्होंने अगर की खेलती करने वाले किसानों से बातचीत की और राज्य में इसकी खेती की विशाल संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अगर किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर अगर की खेती के विस्तार के लिए कई पहलें की जा रही हैं।

रविवार को, श्री जाजू सिपाहीजला वन्यजीव अभयारण्य का दौरा करेंगे और विश्रामगंज में ‘PM-DevINE’ परियोजना का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे नीरमहल होते हुए माताबारी स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर जाएंगे। कल वे महारानी बैराज का निरीक्षण करेंगे और फिर चबीमुरा तथा डम्बूर में नारियल के बागान भी देखने जाएंगे।

 

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वेब सीरीज ‘मेरा आईना’ का मुहूर्त संपन्न

06.05.2026 – प्राजक्ता शिंदे प्रोडक्शन्स की नवीनतम वेब सीरीज ‘मेरा आईना’ का मुहूर्त पिछले दिनों मुंबई में संपन्न हुआ।
प्राजक्ता शिंदे के निर्देशन में बनने वाली यह वेब सीरीज डिजिटल स्टोरीटेलिंग की दुनिया में एक नई और रोमांचक पहल है, जो दमदार कहानी और प्रभावशाली अभिनय का वादा करता है।

अपनी रचनात्मक सोच और समर्पण के लिए जानी जाने वाली प्राजक्ता शिंदे इस प्रोजेक्ट से बतौर लेखिका, निर्मात्री और अभिनेत्री के रूप में भी जुड़ी हुई हैं और दर्शकों के लिए एक अनोखी और भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली कहानी प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखती हैं।

इस वेब सीरीज के क्रिएटिव डायरेक्टर धीरज आदिक,कास्टिंग डायरेक्टर शाहज़ाद आलम खान, डीओपी के. विजय, मेकअप टीम निर्भय सिंह (टीम) और हेयर ड्रेसर इंदु दीदी हैं। इस वेब सीरीज के मुख्य कलाकार प्राजक्ता शिंदे, आशी शर्मा, विवेक चौधरी, स्मिता डोंगरे, फरहान खान, हरभजन भट्टी एवं शुभांगी आदि।

‘मेरा आईना’ गहरी भावनाओं, रिश्तों और आत्म-चिंतन को दर्शाने वाली कहानी है, जो दर्शकों को एक अर्थपूर्ण और जुड़ाव भरा सिनेमाई अनुभव देगी।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक एवं प्रचंड विजय पर बधाई दी

बंगाल में प्रचंड जनादेश भय, तुष्टिकरण और घुसपैठियों के संरक्षकों को बंगाल की जनता का करारा जवाब है।

यह टीएमसी के ‘भय’ के खिलाफ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पर जनता के ‘भरोसे’ की जीत है।

बंगाल में भाजपा को मिली यह ऐतिहासिक जीत हमारे असंख्य कार्यकर्ताओं के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। यह उन परिवारों के धैर्य की जीत है, जिन्होंने हिंसा सहकर भी भगवा ध्वज नहीं छोड़ा।

बंगालवासियों ने घुसपैठियों और उनके हितैषियों को ऐसा सबक सिखाया है, जिसे तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली पार्टियाँ कभी भूल नहीं पाएँगी।

बंगाल ने जिन आशाओं और आकांक्षाओं के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व पर यह विश्वास जताया है, हम निश्चित रूप से उन्हें पूरा करेंगे।

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड विजय को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के विकास और जनकल्याण कार्यों पर पश्चिम बंगाल की जनता की मुहर बताया। श्री शाह ने इस ऐतिहासिक विजय के लिए पश्चिम बंगाल की जनता का धन्यवाद देते हुए भाजपा के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री समिक भट्टाचार्य और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष श्री सुवेंदु अधिकारी सहित प्रदेश के सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई दी।

श्री शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बंगाल की जनता को कोटि-कोटि नमन किया और कहा कि यह प्रचंड जनादेश भय, तुष्टिकरण और घुसपैठियों के संरक्षकों को बंगाल की जनता का करारा जवाब है। यह टीएमसी के ‘भय’ के ऊपर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पर ‘भरोसे’ की जीत है। मेरे जैसे हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए यह गर्व का क्षण है कि गंगोत्री में माँ गंगा के उद्गम से लेकर गंगासागर तक आज हर जगह भाजपा का भगवा ध्वज शान से लहरा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे लिखा कि बंगाल में भाजपा को मिली यह ऐतिहासिक जीत हमारे असंख्य कार्यकर्ताओं के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। यह उन परिवारों के धैर्य की जीत है, जिन्होंने हिंसा सहकर भी भगवा ध्वज नहीं छोड़ा। भाजपा की शून्य से आज प्रचंड बहुमत तक पहुँचने की इस कठिन यात्रा में जिन कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी, हिंसा झेली, यातनाएँ सहीं और फिर भी विचारधारा के पथ से डिगे नहीं, उन सभी कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों को नमन करता हूँ। बंगाल की जनता ने इस प्रचंड बहुमत से भाजपा के उन सभी शहीद कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी है। इस ऐतिहासिक विजय के लिए मैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन, पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री समिक भट्टाचार्य, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री शुभेंदु अधिकारी और बंगाल के कोने-कोने में डटे हर एक कार्यकर्ता को बधाई देता हूँ।

श्री शाह ने लिखा कि बंगालवासियों ने घुसपैठियों और उनके हितैषियों को ऐसा सबक सिखाया है, जिसे तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली पार्टियाँ कभी भूल नहीं पाएँगी। बंगाल ने जिन आशाओं और आकांक्षाओं के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व पर यह विश्वास जताया है, हम निश्चित रूप से उन्हें पूरा करेंगे। चैतन्य महाप्रभु, स्वामी विवेकानंद, कविगुरु टैगोर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों की पावन भूमि बंगाल का खोया गौरव लौटाने और ‘सोनार बांग्ला’ के स्वप्न को साकार करने के लिए भाजपा दिन-रात एक कर देगी।

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