नई दिल्ली – नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) ने 21 मार्च, 2024 को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस मनाया। इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस का विषय “वन और नवाचार: एक बेहतर दुनिया के लिए नए समाधान” है। इस आयोजन का उद्देश्य आगंतुकों के बीच पौधों और हमारे जीवन में उनके महत्व के बारे में जागरूकता जगाना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के शिक्षा केंद्र में डूडल कला गतिविधि के साथ किया गया। इस अवसर पर उद्यान में उपस्थित आगंतुकों को गतिविधियों में सहभागी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके पश्चात मिशन-लाइफ पर एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इन गतिविधियों को पूर्ण करने के बाद, आगंतुकों के लिए हाल ही में पुनर्जीवित जल निकाय के आसपास वृक्षारोपण अभियान चलाया गया और इस स्थल पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कर्मचारियों ने पौधा रोपण किया।
वनों का स्थायी प्रबंधन और उनके संसाधनों का उपयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की समृद्धि एवं कल्याण में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह हम सभी पर निर्भर करता है कि नवीन तकनीकों के उपयोग से इन बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हम किस प्रकार से करते हैं।
नई दिल्ली – भारत के सबसे आशाजनक डीप-टेक उद्यमों के राष्ट्रीय प्रदर्शन के रूप में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ का उद्घाटन आज मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर – आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में किया गया।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और प्रधानमंत्री के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) के अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।
इस विशिष्ट कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 यात्रा का प्रारंभिक चरण है, जिसका समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में भारत के वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की थी।
अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डीप-टेक नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों, शोध तंत्र और स्टार्टअप्स की भूमिका को रेखांकित किया।
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है। यह दुनिया के सामने भारत की अत्याधुनिक डीप-टेक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग और रक्षा मंत्रालय को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल वैश्विक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का भी प्रयास है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा के अंक नहीं, बल्कि समाज में सार्थक योगदान देना है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है। उन्होंने निवेशकों और कॉरपोरेट्स से महानगरों से परे होनहार स्टार्टअप्स की पहचान करने का आह्वान किया।
आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों से राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया और कहा कि वे भारत के नवाचार इतिहास का नया अध्याय लिख सकते हैं। उन्होंने नवाचारकर्ताओं को भारत का राजदूत बताया और देश को गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने भारत के नवाचार परिदृश्य पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न हैं कंपनिया। उन्होंने बताया कि 2017–18 में यह संख्या केवल 24 यूनिकॉर्न थी। वर्तमान में भारत में 1,000 से अधिक निवेशक सक्रिय हैं और हाल के वर्षों में लगभग 70–80 अरब रुपये का वेंचर कैपिटल भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश किया गया है।
उन्होंने डीप-टेक वित्तपोषण में कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि कुल वेंचर कैपिटल निवेश में से केवल 4–5 अरब डॉलर ही डीप-टेक क्षेत्र में गया है। इस स्थिति को सुधारने के लिए जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष को मंजूरी दी, जो निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास और स्टार्टअप्स को इक्विटी भागीदारी और दीर्घकालिक वित्तपोषण के माध्यम से समर्थन देगा। इस फंड के प्रबंधन के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और बीआईआरएसी (डीबीटी) को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही वैकल्पिक निवेश कोष और आईआईटी अनुसंधान पार्कों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। डीएसटी वर्तमान में साइबर-फिजिकल सिस्टम पर राष्ट्रीय मिशन, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और निधि सीड सपोर्ट योजनाओं के माध्यम से भारत के अनुमानित 8,000-10,000 डीप-टेक स्टार्टअप में से लगभग 30-40% का पोषण कर रहा है।
आईआईटी और आईआईएससी के पारिस्थितिकी तंत्र की प्रशंसा करते हुए प्रोफेसर करंदीकर ने कहा, “डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने में आईआईटी और आईआईएससी की बड़ी भूमिका है।”
आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने स्वागत भाषण में कहा कि भारत इनोवेट्स केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक डीप-टेक इकोसिस्टम है, जो तीन स्तंभों-शिक्षा प्रणाली, रणनीतिक निवेशक और कॉर्पोरेट सेक्टर पर आधारित है, जो तकनीक को वास्तविक प्रभाव में बदलने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि देशभर से 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कड़े बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 थीमैटिक क्षेत्रों में 137 सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया।
उद्घाटन के बाद गणमान्य लोगों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत की और उनके नवाचारों का मुआयना किया। 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने विभिन्न पिच सत्रों में अपने विचार रखे, जिसके बाद निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से निवेश के प्राथमिक क्षेत्रों और उद्योग की तकनीकी आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसमें प्राथमिकता वाले निवेश क्षेत्रों और उद्योग-प्रेरित तकनीकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया।
भारत इनोवेट्स 2026 डीप-टेक प्री-समिट भारत के नवाचार इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाता है और उभरते स्टार्टअप्स को निवेशकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं से जुड़ने का राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम में 13 महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों-एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, एनर्जी एवं सस्टेनेबिलिटी, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज एवं मोबिलिटी, ब्लू इकोनॉमी, नेक्स्ट-जेन कम्युनिकेशन, एग्री एवं फूड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स, मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 तथा आपदा प्रबंधन में नवाचार प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
भारत इनोवेट्स के बारे में:
भारत इनोवेट्स 2026, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय के रणनीतिक मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों में विकसित अनुसंधान आधारित तकनीकी नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
यह कार्यक्रम 22 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता और ग्रैंड फिनाले एवं पुरस्कार समारोह आयोजित होगा, जहां सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।
नई दिल्ली – भारत सरकार का प्रमुख आयोजन ‘प्रकृति 2026’—कार्बन बाजारों पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन—आज नई दिल्ली में प्रारंभ हुआ। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा, विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित यह सम्मेलन ‘भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026’ के अंतर्गत हो रहा है। यह उच्च स्तरीय मंच राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं को एक साथ लाकर कार्बन बाजारों की बदलती गतिशीलता, जलवायु परिवर्तन में उनकी भूमिका तथा भारत के हरित विकास के अवसरों पर व्यापक विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है।
इस वर्ष की विषयवस्तु “वैश्विक साझेदारी और डिजिटल माध्यमों के माध्यम से एनडीसी कार्यान्वयन हेतु कार्बन वित्त को सुगम बनाना” है, जो जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए वित्तीय संसाधनों के संकलन, सहयोग को सुदृढ़ करने व डिजिटल नवाचार के उपयोग पर भारत के विशेष बल को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल, विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल (www.indiancarbonmarket.gov.in) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल भारतीय कार्बन बाजार के कार्यान्वयन और प्रशासन के लिए एक केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।
पोर्टल का उद्घाटन करते हुए श्री मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में जलवायु प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु संबंधी उत्तरदायित्व और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं। कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस), नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों जैसी पहलों के माध्यम से भारत एक पारदर्शी और विश्वसनीय कार्बन बाजार ढांचा तैयार कर रहा है। यह ढांचा न केवल उत्सर्जन में कमी लाने में सहायक होगा, बल्कि दीर्घकालिक रूप से राष्ट्रीय संपदा के रूप में भी कार्य करेगा।
श्री मनोहर लाल ने बताया कि भारत ने नौ अधिसूचित पद्धतियों और बायोगैस, हाइड्रोजन और वानिकी क्षेत्रों में परियोजनाएं प्रस्तुत करने वाली 40 से अधिक पंजीकृत संस्थाओं के साथ एक पारदर्शी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना स्थापित कर ली है। अनुपालन के लिहाज से, सात ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में लगभग 490 बाध्य संस्थाओं के लिए जीईआई लक्ष्य अधिसूचित किए गए हैं, जिससे उत्सर्जन में कमी की पुष्टि और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
श्री मनोहर लाल ने कारोबारियों से आग्रह किया कि वे कार्बन बाजारों को केवल अनुपालन आवश्यकता के रूप में नहीं बल्कि नवाचार, निवेश, सतत विकास और उद्यमिता के लिए एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि ये बाजार इन सभी को सुगम बनाने के लिए एक आर्थिक मंच के रूप में कार्य करेंगे।
विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने मजबूत कार्बन बाजारों के लिए आवश्यक तीन स्तंभों या तीन ‘सी’ पर जोर दिया – सत्यापन योग्य उत्सर्जन कटौती के लिए डिजिटल एमआरवी के माध्यम से विश्वसनीयता, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में खरबों डॉलर का निवेश करने के लिए पूंजी, और पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के माध्यम से सहयोग। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत के तेजी से बढ़ते नेतृत्व, ऊर्जा दक्षता में हुई प्रगति और विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों के साथ लागू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) 2023 पर प्रकाश डाला। श्रीपद नाइक ने इस बात पर बल दिया कि ये प्रगति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सतर्क कदम और आर्थिक विकास एक दूसरे के पूरक हैं, और कार्बन बाजार उच्च स्तरीय प्रतिबद्धताओं को बढ़ावा देने, लघु एवं मध्यम उद्यमों और किसानों को सशक्त बनाने और पारदर्शी वैश्विक मार्ग प्रशस्त करने के लिए तैयार हैं।
विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने मजबूत कार्बन बाजारों के लिए आवश्यक तीन प्रमुख स्तंभोंतीन ‘सी’ पर जोर पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहला स्तंभ है डिजिटल एमआरवी के माध्यम से सत्यापन योग्य उत्सर्जन कटौती सुनिश्चित कर विश्वसनीयता स्थापित करना। दूसरा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए पूंजी की उपलब्धता और तीसरा पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना। श्रीपद नाइक ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है और साथ ही ऊर्जा दक्षता में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों के साथ लागू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम 2023 इन प्रयासों को और सशक्त बना रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी प्रयास सिद्ध करते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किए जा रहे ठोस कदम और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। साथ ही, कार्बन बाजार न केवल उच्च स्तरीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि लघु एवं मध्यम उद्यमों और किसानों को सशक्त बनाते हुए एक पारदर्शी तथा समावेशी वैश्विक व्यवस्था का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में पेरिस समझौता के अंतर्गत वैश्विक कार्बन बाजारों (पीएसीएम) से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें अनुपालन ढांचे, डिजिटल एमआरवी प्रौद्योगिकियां, कार्बन सीमा नीतियां तथा भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम में इमारतों और शीतलन प्रणालियों के एकीकरण जैसे विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, किसानों को सशक्त बनाने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तपोषण को सुगम बनाने और कॉर्पोरेट स्तर पर जलवायु कार्रवाई को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। ये सभी मिलकर यह दर्शाते हैं कि भारत एक विश्वसनीय, समावेशी और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्बन बाज़ार विकसित करने के लिए सक्रिय और बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है, जो जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ सतत आर्थिक विकास को भी गति देता है।
प्रकृति 2026 जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में भारत के उदय की पुष्टि करता है। पारदर्शिता, विश्वसनीयता और नवाचार पर आधारित कार्बन बाजार का निर्माण करके, भारत न केवल अपने घरेलू हरित परिवर्तन को गति दे रहा है, बल्कि सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। यह सम्मेलन जलवायु समाधानों के लिए भारत को एक विश्वसनीय केंद्र और कम कार्बन वाले भविष्य की ओर वैश्विक गति में एक प्रेरक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज महाराष्ट्र के नागपुर स्थित महर्षि व्यास सभागृह में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का विषय था- “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047”।
नागपुर के महत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह शहर राष्ट्रीय चेतना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि है जिसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी। उन्होंने कहा कि एक छोटी पहल से राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित एक विशाल आंदोलन तक संगठन की यात्रा “राष्ट्र प्रथम” की भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
उन्होंने भारतीय युवा संसद राष्ट्रीय न्यास के दो दशकों से अधिक समय से कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रकार संगठन ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ावा दिया है।
उपराष्ट्रपति ने “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047” विषय पर बोलते हुए भारत की भाषाई विविधता को एक महान शक्ति बताया और कहा कि जब हम अपनी मातृभाषा में बोलते हैं, तो हम “क्षेत्रीय” नहीं बल्कि “मौलिक” होते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक भाषा अपनी विरासत समेटे रहती है और ये सभी मिलकर राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का निर्माण करती हैं। उन्होंने भारत के संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के हालिया प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और संरक्षित करना राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दूसरों के विचारों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है और भारत को अपनी मूल से नवाचार करना होगा, अपनी मूल भाषाओं और लिपियों में सोचना होगा और अपनी सभ्यतागत पहचान पर विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने संस्कृत और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत अनेक भारतीय भाषाओं को जोड़ती है और भारत की ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लोकतांत्रिक समाज में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव और सत्रों में चर्चा की अवधि में बढ़ोतरी पर विचार करते हुए कहा कि मतभेद अंततः रचनात्मक संवाद और समाधान की ओर ले जाने चाहिए, न कि संघर्ष की ओर। उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसे मंच सम्मानजनक बहस, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने और चर्चा और आम सहमति के माध्यम से समाधान तक पहुंचने के महत्व को सिखाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने युवा संसद को जीवन और नेतृत्व के लिए प्रशिक्षण मैदान बताते हुए कहा कि चरित्र निर्माण सच्चे नेतृत्व की नींव है और छात्रों से ऐसे मंचों का उपयोग नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा की भावना विकसित करने के लिए करने का आग्रह किया।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व भारत की ओर देख रहा है और आज के युवा “अमृत पीढ़ी” हैं जो 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में उभरते हुए देखेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा संसद इस राष्ट्रीय लक्ष्य में सार्थक योगदान देगी।
उपराष्ट्रपति ने इससे पहले दिन में, उपराष्ट्रपति ने नागपुर के डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा; महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुले; सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कृष्ण गोपाल; केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी; भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक श्री आशुतोष जोशी; और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ देश भर से बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आजकल का युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तक कि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है।” उन्होंने किसी भी परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में सक्षम, तैयार नागरिकों द्वारा समर्थित एक सशक्त सेना की आवश्यकता पर जोर दिया। 21 मार्च, 2026 को उत्तराखंड के घोराखाल स्थित सैनिक विद्यालय के स्थापना दिवस समारोह और हीरक जयंती को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्षों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, क्योंकि आज किसी भी राष्ट्र को आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध के माध्यम से कमजोर किया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक नागरिक को हर समय सतर्क और तैयार रहना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार रक्षा बलों को विशेष हथियारों और प्रौद्योगिकियों से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। जबकि रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों, विशेषकर युवाओं को अनुशासन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से मानसिक दृढ़ता और बौद्धिक स्पष्टता विकसित करने की आवश्यकता है ताकि वे राष्ट्र को हर परिस्थिति से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने वूका (अस्थिरता, अनिश्चिता, जटिलता और अस्पष्टता) की अवधारणा का उल्लेख करते हुए छात्रों से आग्रह किया कि वे आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए वूका का अपना संस्करण विकसित करें , जिसमें दूरदर्शिता, समझ, साहस और अनुकूलन क्षमता शामिल है।
राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक मूल्यों को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत देश भर में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि एक अन्य पहल में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा, “पहले एनसीसी में 17 लाख कैडेटों की भर्ती क्षमता थी; जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है।”
रक्षा मंत्री ने सैनिक विद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश के निर्णय को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया, जिससे देश की ‘नारी शक्ति’ को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये लड़कियां आने वाले समय में ‘नारी शक्ति’ की पथप्रदर्शक बनेंगी और विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुएंगी।
सैनिक स्कूल, घोराखाल द्वारा राष्ट्र की सेवा के 60 वर्ष पूरे करने पर छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि छात्र अनुशासन और समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए अपने परिवारों, संस्थान और राष्ट्र को गौरवान्वित करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “दशकों से, स्कूल ने 800 से अधिक छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा और वायु सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा जैसी विभिन्न प्रवेश योजनाओं के माध्यम से 2,000 से अधिक उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों में भेजा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्थान राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने वाले नेताओं का उत्पादन जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि स्कूल के विशिष्ट पूर्व छात्र, जिनमें पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”
नई दिल्ली – भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे दिन (21.3.2026) नई दिल्ली में भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने की।
बैठक में विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, मलावी सरकार के ऊर्जा एवं खनन मंत्री डॉ. जीन मथांगा, अफ्रीका50 के सीईओ एलेन एबोबिस, कई अफ्रीकी देशों के मंत्री, अफ्रीकी संघ और अफ्रीका50 के नेता, राजदूत, उच्चायुक्त, विद्युत कंपनियों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, विकास भागीदार और उद्योग जगत के नेता उपस्थित थे।
इन चर्चाओं में एक स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टिकोण यह उभर कर आया कि भारत और अफ्रीका ठोस परिणामों पर केंद्रित एक संरचित और कार्य-उन्मुख साझेदारी के माध्यम से अपने सहयोग को और गहरा करेंगे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और अफ्रीका नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, परस्पर जुड़े ग्रिड प्रणालियों के विकास, ऊर्जा भंडारण और लचीले समाधानों को बढ़ावा देने और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के माध्यम से क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसमें विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत के व्यापक अनुभव और अफ्रीका की बढ़ती क्षमता का लाभ उठाने पर बल दिया गया। दोनों पक्षों ने निवेश-आधारित सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के महत्व का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जो दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति प्रदान करने में सक्षम हो।
श्री मनोहर लाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास को गति देने, गरिमा सुनिश्चित करने और अवसरों को खोलने के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संपर्क के लिए एक परिवर्तनकारी मार्ग के रूप में ‘एक सूर्य, एक दुनिया, एक ग्रिड’ की परिकल्पना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने अफ्रीकी साझेदारों का हार्दिक स्वागत किया और विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा प्राप्त करने की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका, वैश्विक जनसंख्या का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं और समावेशी, न्यायसंगत तथा भविष्य के लिए तैयार विकास की समान आकांक्षाएं रखते हैं। उन्होंने ऊर्जा घाटे से अधिशेष की ओर भारत की यात्रा और नवीकरणीय ऊर्जा में इसकी तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अनुभव अफ्रीका के लिए व्यावहारिक एवं विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अफ्रीका50 और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच सहयोग, जिसमें केन्या ट्रांसमिशन परियोजना भी शामिल है, को इस बात का एक सशक्त उदाहरण बताया कि कैसे नवीन वित्तपोषण, तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक-निजी भागीदारी लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकती है।
श्री मनोहर लाल ने नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और लचीलापन तथा संस्थागत सुदृढ़ीकरण के साथ क्षमता निर्माण सहित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अफ्रीका के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अफ्रीका ऊर्जा सहयोग लेन-देन पर आधारित नहीं बल्कि परिवर्तनकारी है, जो सह-निर्माण पर आधारित है, और इस साझा यात्रा में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।
श्री श्रीपाद नाइक ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अफ्रीका साझेदारी को केवल इरादे से आगे बढ़कर कार्रवाई की ओर बढ़ना चाहिए। ऊर्जा तक पहुंच को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित न रखकर, आर्थिक परिवर्तन के एक प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी विकास की नींव के रूप में सभी के लिए विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से निर्देशित है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करना और भारत और अफ्रीका दोनों के समुदायों को सशक्त बनाना है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतत सुशासन के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रभावी सिंचाई जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के लिए साझेदारी, प्रभुत्व और प्रतिस्पर्धा के आधार के बजाय सहयोग एवं साझा मूल्यों पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच साझेदारी ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल शासन और कृषि सहयोग पर आधारित है।
अफ्रीका50 के सीईओ श्री एलेन एबोबिस ने वैश्विक निवेश परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि हम सहायता नहीं, बल्कि प्रभाव और प्रतिफल के लिए निवेश की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर का उल्लेख किया कि अफ्रीका एकीकृत योजना और नए निवेश ढांचों के समर्थन से, निवेश योग्य परियोजनाओं के विकास, संचरण विस्तार और निजी पूंजी जुटाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है।
डॉ. जीन मथांगा ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के माध्यम से सतत विकास और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए कम लागत वाले सौर समाधान, पवन ऊर्जा परियोजनाएं और भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए एक सशक्त ऊर्जा परिवर्तन शामिल है।
उन्होंने अफ्रीका के समावेशी विद्युत प्रणाली के एजेंडे के साथ सहज रूप से तालमेल बिठाते हुए विद्युतीकरण, पारेषण अवसंरचना विकास और स्मार्ट मीटरिंग, ग्रिड और माइक्रोग्रिड पर सहयोग को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इन प्रयासों से ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, खनिजों तक पहुंच और विस्तारित बाजारों जैसे बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है। अफ्रीका के लिए, ये किफायती प्रौद्योगिकी और अवसंरचना, बेहतर ग्रिड विश्वसनीयता, विद्युतीकरण और स्थायी साझेदारी प्रदान करते हैं, तथा भारत की तकनीकी क्षमताओं को अफ्रीका की विशाल संसाधन क्षमता के साथ पूरक करते हुए सुरक्षित और समावेशी विद्युत प्रणालियों का निर्माण करते हैं।
भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी सतत विकास के लिए सहयोगात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें ऊर्जा, अवसंरचना और क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया गया है। यह साझेदारी अफ्रीका के विकास पथ को गति देने के लिए भारत के अनुभव और क्षमताओं, विशेष रूप से विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक आदर्श के रूप में उपयोग करती है।
अफ्रीका50 जैसी संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से, यह साझेदारी निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सौर छत परियोजनाओं, जल-सौर एकीकरण, मिनी ग्रिड और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों जैसे व्यापक समाधानों को बढ़ावा देती है। यह समावेशी विकास को गति देने के लिए नीतिगत ढांचे, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान केंद्रित करती है। अंततः, इस साझेदारी का उद्देश्य ऊर्जा तक पहुंच में अंतर को कम करना, क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ाना और अफ्रीकी देशों में दीर्घकालिक परिवर्तनकारी प्रभाव पैदा करना है।
नई दिल्ली – कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में 22 मार्च 2026 को शाम 4:00 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने (दिशा) की टेली-लॉ पहल के तहत आयोजित 2026 का क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला, केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। यह भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है। यह कार्यशाला 22 मार्च 2026 को शाम 4:00 बजे से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित की जाएगी।
यह कार्यशाला विभाग द्वारा प्रौद्योगिकी-सक्षम कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और प्रमुख हितधारकों के बीच जानकारीपूर्ण विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के हिस्से के रूप में आयोजित की जा रही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों के आगमन और स्वागत के साथ होगा, जिसके बाद दिशा जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा, जो पहुंच और अंतिम छोर तक संपर्क का प्रतीक है। गणमान्य व्यक्ति मंच पर अपने-अपने स्थान ग्रहण करेंगे, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव होगा, जिसे स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को याद किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में न्याय विभाग के सचिव स्वागत भाषण देंगे, जिसमें कार्यशाला का संदर्भ प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद हरियाणा में दिशा योजना की प्रगति को प्रदर्शित करने वाला एक सत्र होगा, जिसमें टेली-लॉ पैनल के वकीलों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों और लाभार्थियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद शामिल होंगे, जो जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं के प्रभाव को दर्शाएंगे।
इस कार्यक्रम में हरियाणा के विधि महाविद्यालयों द्वारा शुरू की गई नि:शुल्क कानूनी सेवाओं (प्रो बोनो) की पहलों पर एक खंड भी शामिल होगा, जिसमें संकाय सदस्यों और सामुदायिक कानूनी सेवा में लगे छात्रों द्वारा अनुभव साझा किए जाएंगे।
इस आयोजन के अंतर्गत, भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के प्रथागत कानूनों पर पांच ई-पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया जाएगा, जो स्वदेशी कानूनी ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में योगदान देंगी। इसके अतिरिक्त, दिशा योजना पर दूरदर्शन द्वारा एक वृत्तचित्र का भी विमोचन किया जाएगा, जिसमें इसके दृष्टिकोण, कार्यान्वयन और देश भर में इसके प्रभाव को दर्शाया जाएगा।
इस कार्यशाला को केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी संबोधित करेंगे, जो न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और शासन में डिजिटल समाधान की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम का समापन स्मृति चिन्हों के वितरण के साथ होगा, जिसके बाद संयुक्त सचिव (न्याय तक पहुंच) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान होगा।
इस कार्यक्रम में लगभग 900 प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होंगे, जिनमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिकारी, हरियाणा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयों के बार एसोसिएशन के अधिवक्ता, सरकारी वकील, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई), टेली-लॉ पैनल के वकील, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत, एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम, जी.डी. गोयनका विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के विधि संकाय और विधि छात्र, गीता विधि संस्थान, पानीपत और नॉर्थकैप विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के विधि संकाय, निदेशक/पंजीयक और केंद्रीय एवं राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, न्याय विभाग के कई नागरिक और हितधारक वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे।
न्याय विभाग की दिशा योजना के अंतर्गत आयोजित टेली-लॉ कार्यक्रम पर क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला, जागरूकता, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित सेवा वितरण के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के भारत सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है। राज्य प्रशासनों और हितधारकों को शामिल करने, कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने और न्याय वितरण तंत्र को और मजबूत करने के लिए देश भर में ऐसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यशाला, टेली-लॉ और न्याय तक पहुंच से संबंधित अन्य पहलों की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए केंद्रित विचार-विमर्श हेतु एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है.
नई दिल्ली- केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में ‘प्रारंभ (PRARAMBH) 2026’ लॉन्च किया, जो आयकर विभाग का ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के बारे में देशव्यापी जागरूकता अभियान है। प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया तक फैला यह मल्टीमीडिया अभियान, नए अधिनियम की मुख्य विशेषताओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। यह अधिनियम 01.04.2026 से लागू होने वाला है।
इस अभियान में रचनात्मक संचार की पहलें, आयकरदाताओं के लिए मार्गदर्शन करने वाली सामग्री (जैसे मार्गदर्शन नोट्स, शैक्षणिक वीडियो और ब्रोशर) और डिजिटल व ऑन-ग्राउंड प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ने के प्रयास शामिल हैं; इनमें ‘माईगॉव (MyGov) क्विज’ पहल भी शामिल है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने विभाग के चल रहे डिजिटल बदलाव के प्रयासों के तहत ‘इनकम टैक्स वेबसाइट 2.0’ का भी उद्घाटन किया। इस अपग्रेड किए गए प्लेटफॉर्म को करदाताओं के लिए बेहतर उपयोगिता, आसान नेविगेशन और ज्यादा कुशल सेवा देने के लिए तैयार किया गया है।
इस अवसर पर राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय में सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव; केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल; केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन श्री विवेक चतुर्वेदी; सीबीडीटी और सीबीआईसी बोर्डों के सदस्य तथा विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।
अपने मुख्य भाषण में, श्रीमती सीतारमण ने संसद में आयकर अधिनियम, 1961 के पारित होने की यात्रा का उल्लेख किया और इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए असाधारण प्रयासों पर प्रकाश डाला।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि “प्रारंभ” के तहत की गई पहलों सहित सीबीडीटी की सभी पहलें आयकर को सरल बनाने पर केंद्रित हैं और इनमें करदाताओं को दी जाने वाली सेवाओं पर विशेष ज़ोर दिया गया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों ही कर प्रणालियों में एक साथ व्यापक सुधार किए जा रहे हैं; यह बदलाव एक अधिक नागरिक-केंद्रित और जन-पहुंच उन्मुख प्रशासन की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह नया अधिनियम, जिसे व्यापक प्रयासों और विस्तृत परामर्श के बाद तैयार किया गया है, विभिन्न प्रावधानों को अधिक स्पष्टता के साथ पुनर्गठित करता है। इसका उद्देश्य विवादों को कम करना, नियमों के पालन में सुधार लाना और लोगों के रवैये को भ्रम व टालमटोल से हटाकर स्वीकार्यता व विश्वास की ओर ले जाना है।
कानून जितने ही महत्वपूर्ण इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि कर अधिकारी करदाताओं के सामने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, उन्हें एक सहानुभूतिपूर्ण और विश्वास-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, तथा मानवीय स्पर्श को बनाए रखते हुए, मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए।
आयकर विभाग द्वारा बहुभाषी पहुंच बनाने और डिजिटल मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए सरल भाषा में संवाद करने के प्रयासों की सराहना करते हुए, श्रीमती सीतारमण ने युवाओं और पेशेवरों के साथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया; इसमें एआई-आधारित समाधानों के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग करना भी शामिल है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन-एम.ए.एन.ए.वी. के माध्यम से एक मानव-केंद्रित डिजिटल युग का निर्माण- को याद किया, जिसे उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया था:
एम: नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियां
ए: जवाबदेह शासन
एन: राष्ट्रीय संप्रभुता
ए: सुलभ और समावेशी AI
वी: वैध और न्यायसंगत प्रणालियां
प्रधानमंत्री के इस विजन का हवाला देते हुए, श्रीमती सीतारमण ने इस बात को दोहराया कि आयकर अधिनियम, 2025 की नींव नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियों पर ही आधारित होनी चाहिए।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए अतीत की तरह बार-बार बहुत ज्यादा संशोधन करने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि नया कानून स्थिर, सरल और समझने में आसान होना चाहिए और इसमें तकनीक का इस्तेमाल इंसान-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए। इसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें नियमों का पालन करना एक स्वाभाविक विकल्प बन जाए-जो आसान हो, स्पष्टता और भरोसे पर आधारित हो।
अपने संबोधन में, राजस्व सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025, केवल एक नया कानून ही नहीं है, बल्कि यह एक सरल, स्पष्ट और ज़्यादा उपयोगकर्ता-अनुकूल कर व्यवस्था की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है। उन्होंने बताया कि नियमों और प्रपत्रों (फॉर्म) को एकरूप करने के साथ-साथ, विभाग ने अधिकारियों की क्षमता-निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे देश में अधिकारी करदाताओं की सहायता करने के लिए पूरी तरह से तैयार हों, क्योंकि जमीनी स्तर पर कानून को लागू करने का बहुत अधिक महत्व है।
श्री श्रीवास्तव ने विभाग द्वारा एफएक्यू, ब्रोशर, मार्गदर्शन करने वाले नोट्स और क्षेत्रीय भाषाओं के संसाधनों के माध्यम से जानकारी की पहुंच बढ़ाने के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि संचार रणनीतियां अब ज्यादा सहज और समझने लायक हो गई हैं; इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके छोटे वीडियो के जरिए करदाताओं तक ऐसे तरीकों से पहुंचा जा रहा है जिनसे वे पहले से परिचित हैं।
श्री श्रीवास्तव ने छात्रों के लिए शैक्षिक सामग्री के माध्यम से शुरुआती जागरूकता पैदा करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशव्यापी जागरूकता अभियान-जिसमें 300 से ज्यादा कार्यशाला शामिल हैं-न केवल जानकारी का प्रसार करेगा, बल्कि इसमें हितधारकों से सक्रिय रूप से फ़ीडबैक भी मांगा जाएगा। इससे यह सुधार एकतरफा संचार के बजाय एक निरंतर संवाद के रूप में मजबूत होगा।
इस आउटरीच पहल के व्यापक दायरे को देखते हुए, श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ‘प्रारंभ 2026’ (PRARAMBH 2026) केवल एक शुरुआत भर नहीं है, बल्कि यह एक अधिक खुली, जवाबदेह और सरल कर व्यवस्था की शुरुआत है।
इससे पहले, अपने स्वागत भाषण में सीबीडीटी के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल ने कहा कि ‘प्रारंभ’ (PRARAMBH – मिशन विकसित भारत के लिए नीतिगत सुधार और जिम्मेदारी के साथ काम) ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘आयकर अधिनियम, 2025’ भारत की कर प्रशासन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे सुचारू तथा करदाताओं के अनुकूल तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रारंभ’ को एक राष्ट्रव्यापी आउटरीच और सुविधा पहल के तौर पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य बहुभाषी अभियानों, शैक्षिक सामग्री, डिजिटल टूल्स, विस्तृत एफएक्यू और मार्गदर्शन सामग्री के जरिए स्पष्ट, सुलभ और भरोसेमंद संचार सुनिश्चित करना है, ताकि नियमों का पालन आसान हो सके और व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
उन्होंने एआई-आधारित चैटबॉट ‘कर साथी’ को लॉन्च करने की भी घोषणा की। यह चैटबॉट उन करदाताओं के लिए एक आसानी से उपलब्ध साथी है, जो नए अधिनियम, नियमों, प्रपत्रों और संबंधित सवालों के बारे में जानकारी चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आयकर सेवा केंद्रों के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध रहेगी, जो विभाग की नागरिक-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और संवेदनशील कर प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सीबीडीटी के सदस्य (आईटी), श्री संजय बहादुर ने ‘प्रारंभ’ के दौरान जारी की गई सामग्री-जिसमें ब्रोशर, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और ‘माईगॉव क्विज’ पहल शामिल हैं-का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
इस कार्यक्रम में सीबीडीटी के सदस्य (विधान) श्री प्रसेनजीत सिंह ने हितधारकों के साथ आयोजित विषयगत सत्रों पर एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इसके बाद, उन विषयगत सत्रों में शामिल विभिन्न हितधारकों की प्रतिक्रियाएं भी साझा की गईं।
इस कार्यक्रम का समापन सीबीडीटी की सदस्य (करदाता सेवाएं एवं राजस्व) श्रीमती जी. अपर्णा राव द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
‘प्रारंभ 2026’ आयकर विभाग की आधुनिकीकरण, हितधारकों के साथ जुड़ाव और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है; विशेष रूप से ऐसे समय में, जब विभाग ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के प्रभावी कार्यान्वयन की तैयारी कर रहा है।
संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस पदाधिकारी, दंडाधिकारी तथा सादे लिबास में पुलिस बल तैनात किया गया है
प्रमुख इलाकों, मस्जिदों, पूजा स्थलों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है
सरना समिति के सदस्यों, वॉलंटियर्स तथा सर्व धर्म सद्भावना समिति के पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अफवाह या विधि-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सूचना तत्काल जिला प्रशासन दे
चोरी, जेबकतरो असामाजिक तत्वों एवं अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है
आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं खुशहाल त्योहार मनाएं:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,21.03.2026 – आज ईद-उल-फितर (ईद) तथा सरहुल पर्व एक साथ मनाया जा रहा है। ये दोनों पर्व हमारी सांस्कृतिक विविधता एवं सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। ईद मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है जो रमजान के पवित्र महीने के समापन पर खुशी, दान एवं भाईचारे का संदेश देता है, जबकि सरहुल झारखंड के आदिवासी समुदाय का प्रकृति-पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें साल वृक्ष की पूजा, नृत्य एवं सामुदायिक उत्सव के माध्यम से बसंत ऋतु का स्वागत किया जाता है।
जिला प्रशासन इन त्योहारों को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य से व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्था के निम्नलिखित इंतजाम किए गए हैं:
1. पुलिस बल एवं दंडाधिकारी बल की तैनाती
संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस पदाधिकारी, दंडाधिकारी तथा सादे लिबास में पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य स्तर पर भी झारखंड पुलिस द्वारा अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई है।
2. निगरानी व्यवस्था
प्रमुख इलाकों, मस्जिदों, पूजा स्थलों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
3. यातायात एवं भीड़ प्रबंधन
यातायात पुलिस द्वारा प्रमुख चौराहों, मार्गों एवं जुलूस/प्रक्रिया वाले क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की गई है। आवश्यकतानुसार डायवर्जन एवं पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ।
4. सामुदायिक सहयोग
सरना समिति के सदस्यों, वॉलंटियर्स तथा सर्व धर्म सद्भावना समिति के पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अफवाह या विधि-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सूचना तत्काल जिला प्रशासन को सूचित करें।
5. विशेष नजर
चोरी, जेबकतरो असामाजिक तत्वों एवं अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनता से अपील
*त्योहारों का आनंद लें, लेकिन अनावश्यक भीड़ से बचें।
*सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें; केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
* किसी भी प्रकार की समस्या, संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने, पर दें।
*आपसी भाईचारे, सद्भावना एवं सहयोग से ही हम इन पर्वों को यादगार बना सकते हैं।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी द्वारा अपील की गई की आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं खुशहाल त्योहार मनाएं।
21.03.2026 – महाराजा म्यूज़िक कंपनी ने अपना नया रोमांटिक म्यूजिक वीडियो ‘तेरे बिना क्या है जीना’ रिलीज़ कर दिया है। इस गाने को अश्विन महाराज ने प्रस्तुत किया है और इसके निर्माता व निर्देशक भी अश्विन महाराज हैं।
महाराजा म्यूज़िक के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध इस म्यूजिक वीडियो में टर्सी एम. फर्नांडिस और अक्षय सेठी नज़र आ रहे हैं। आनंद भकुनी ने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया है।
गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन कुमार ने की है, जबकि एडिट और डीआई सगीर चुडेसरा ने किया है।
गाने को शंकर दास ने अपनी आवाज़ दी है। इसका संगीत और बोल सतीश त्रिपाठी ने तैयार किया है।
नई दिल्ली – केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कालीन, हस्तशिल्प, जूते और तकनीकी वस्त्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों की प्रगति और संभावनाओं की समीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा का आधिकारिक दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में स्थिरता, नवाचार को बढ़ावा देना और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना रहा।
दौरे के दौरान, मंत्री ने एक कालीन निर्माण इकाई का भ्रमण किया और उद्योग द्वारा अपनाई जा रही टिकाऊ उत्पादन प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इनमें वनस्पति रंगों (वेजिटेबल डाइज) का उपयोग, जैविक ऊन और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रियाओं का उपयोग शामिल था, जो इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और स्थिरता मानकों के अनुरूप बनाते हैं।
श्री गिरिराज सिंह ने निर्यातकों और डिजाइनरों सहित कालीन उद्योग के विभिन्न हितधारकों के साथ भी बातचीत की। चर्चा वैश्विक स्तर पर उभरते डिजाइन रुझानों, केले के रेशे (बनाना फाइबर) जैसे टिकाऊ और वैकल्पिक रेशों के बढ़ते महत्व और “इंडिया हैंडमेड” ब्रांड की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित थी। मंत्री ने डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए ‘विजन एनएक्सटी’ जैसे स्वदेशी ट्रेंड फोरकास्टिंग टूल की भूमिका पर जोर दिया।
इसके बाद मंत्री ने एक फुटवियर निर्माण इकाई का दौरा किया, जहाँ उन्होंने इस क्षेत्र में हुई प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तकनीकी वस्त्रों (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) के एकीकरण से उत्पाद की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता में काफी सुधार हो रहा है। उन्होंने फुटवियर उद्योग में नवाचार को बढ़ावा देने में युवा पेशेवरों की भूमिका की भी सराहना की।
फुटवियर उद्योग, तकनीकी वस्त्र क्षेत्र और संबद्ध उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ एक हितधारक बैठक आयोजित की गई। बैठक में निम्न प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई:
फुटवियर निर्माण में टेक्निकल टेक्सटाइल्स का उपयोग बढ़ाना।
उत्पादन और डिजाइन में एआई तथा उन्नत तकनीकों का विस्तार।
उत्पाद नवाचार और डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करना।
उच्च गुणवत्ता वाले, निर्यात-उन्मुख फुटवियर की ओर संक्रमण को बढ़ावा देना।
वैश्विक फुटवियर बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार करना।
इस क्षेत्र में टेक्निकल टेक्सटाइल्स के प्रति जागरूकता और अपनाने को बढ़ावा देना।
श्री सिंह ने कहा कि तकनीकी वस्त्र भारत के फुटवियर उद्योग को उच्च-मूल्य, डिजाइन-संचालित और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कालीन और हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक उद्योगों और तकनीकी वस्त्रों जैसे उभरते क्षेत्रों को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
दौरे के दौरान एक हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कारीगरों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कौशल को प्रदर्शित किया गया।
कुल मिलाकर, इस दौरे ने भारत के वस्त्र और संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने तथा उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में स्थिरता, नवाचार, तकनीकी अपनाने और विभिन्न हितधारकों के सहयोग की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
नई दिल्ली – भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन (20.3.2026) केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विद्युत मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।
विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में चंडीगढ़ और पंजाब के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल, एमएनआरई के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026, विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि विद्युत आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे का आधार है। उन्होंने देश की 520 गीगावॉट से अधिक की क्षमता, डिस्कॉम के बेहतर प्रदर्शन, बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर और विद्युत आपूर्ति में सुधार आदि उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
श्री मनोहर लाल ने किफायती और कुशल विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की क्षमता को भी रेखांकित किया और शांति अधिनियम को एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
श्री मनोहर लाल ने राज्यों को आवश्यक सुधारों को लागू करने तथा कानूनी और प्रशासनिक उपाय में केंद्र से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
श्रीपाद नाइक ने विद्युत क्षेत्र के रूपांतरण में प्रौद्योगिकी और एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला और स्मार्ट मीटर को एक प्रमुख उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्थापित क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने विकसित भारत 2047 की रणनीतियों को रेखांकित करने वाली नई राष्ट्रीय विद्युत नीति के मसौदे के महत्व पर बल दिया।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन-मुक्त ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। विद्युत और मानव संसाधन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सचिवों ने देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए सामूहिक और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया।
जारी की गई प्रमुख रिपोर्टें
इस बैठक के दौरान विद्युत मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए डिस्कॉम की उपभोक्ता सेवा रेटिंग (सीएसआरडी) और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वितरण उपयोगिता रैंकिंग (डीयूआर) रिपोर्ट जारी की।
डिस्कॉम्स की उपभोक्ता सेवा रेटिंग रिपोर्ट
सीएसआरडी उपभोक्ता सेवा में डिस्कॉम्स के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए आधारभूत मानक और अपेक्षाएँ निर्धारित करता है, जिनमें शीघ्र और सटीक मीटरिंग और बिलिंग, समय पर और प्रभावी शिकायत निवारण और निष्पक्ष, पारदर्शी टैरिफ निर्धारण शामिल हैं। सीएसआरडी रिपोर्ट का उद्देश्य उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने और अंतर-विषयक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करना है। यह उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला की जाँच करता है, प्रमुख क्षेत्रों में डिस्कॉम्स का आकलन करने के लिए विद्युत नियमों के सेवा मानकों का उपयोग करता है, और उनके अनुपालन की निगरानी, मूल्यांकन और कार्यान्वयन करता है।
प्रस्तुत आंकड़ों और प्राप्त अंकों के आधार पर, डिस्कॉम्स को सात श्रेणियों A+, A, B+, B, C+, C, या D। में से एक श्रेणी दी जाती है इस श्रेणीबद्ध ग्रेडिंग का उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करना है। मूल्यांकन किए गए 66 डिस्कॉम्स में से 6 को A+, 21 को A और 27 को B+ श्रेणी में रखा गया।
डिस्कॉम्स का बेहतर प्रदर्शन उच्च श्रेणी प्राप्त करने वाले डिस्कॉम्स के बढ़ते अनुपात और बेहतर सेवाओं से लाभान्वित होने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि और सकारात्मक राष्ट्रीय प्रगति का संकेत है। साथ ही, निम्न श्रेणी (सी और डी) में आने वाले डिस्कॉम्स और उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई है, जो पैमाने के निचले स्तर पर प्रगति को दर्शाता है।
वितरण उपयोगिता रैंकिंग (डीयूआर) रिपोर्ट
डीयूआर देश भर में बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन का व्यापक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। पिछले संस्करणों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर, यह रिपोर्ट पारंपरिक प्रदर्शन संकेतकों से आगे बढ़कर संस्थागत क्षमता, वित्तीय स्थिरता, परिचालन दक्षता और सेवा वितरण परिणामों को समाहित करते हुए एक बहुआयामी मूल्यांकन ढांचा अपनाती है। डीयूआर पहल का उद्देश्य देश के दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन और विकास लक्ष्यों का समर्थन करने वाली वित्तीय रूप से टिकाऊ, परिचालन रूप से कुशल और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली वितरण प्रणाली के निर्माण में योगदान देना है। इस वर्ष कुल 66 कंपनियों ने डीयूआर मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लिया है।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के अधीन पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) ने 20 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के शंकर विहार सैन्य स्टेशन स्थित अरावली सभागार में पूर्व सैनिकों के लिए एक रोजगार मेला सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
इस आयोजन को उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिसमें 850 से अधिक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। साथ ही, 42 प्रमुख राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसमें शामिल हुईं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में 1,290 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।
रोजगार मेले का उद्घाटन मुख्यालय एटीवीपी के परियोजना निदेशक (पी एंड ए) रियर एडमिरल आर.के. सिंह और डीजीआर के प्रधान निदेशक कमोडोर विक्रांत किशोर द्वारा किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित पूर्व सैनिकों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया तथा रोजगार के बदलते परिदृश्य एवं उद्योग जगत की अपेक्षाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर कमोडोर सुमीत कपूर, एनएम, कमोडोर नौसेना के पूर्व सैनिक; ब्रिगेडियर ईशान दलाल, एसएम, ब्रिगेडियर डीआईएवी; और श्री नवीन पटवर्धन, सीनियर वीपी तथा एचएलई, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड भी उपस्थित थे।
श्नाइडर इलेक्ट्रिक, जीए डिजिटल वेब वर्ड प्राइवेट लिमिटेड, सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, केपी सिंह फाउंडेशन और केसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट सहित कई अन्य प्रतिष्ठित संगठन इस आयोजन के प्रमुख भर्तीकर्ताओं में शामिल थे।
यह रोजगार मेला पूर्व सैनिकों के लिए अपनी तकनीकी, प्रबंधकीय एवं प्रशासनिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। साथ ही, इसने उद्योग जगत को अनुशासित, कुशल और अनुभवी प्रतिभाओं से जुड़ने का सशक्त अवसर भी प्रदान किया। यह आयोजन पूर्व सैनिकों के लिए सार्थक द्वितीय करियर के अवसर सृजित करने और उन्हें असैन्य कार्यबल में प्रभावी रूप से एकीकृत करने की दिशा में डीजीआर की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।
केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने देश में वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गठित मंत्रियों के समूह की छठी बैठक की अध्यक्षता की
केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज नई दिल्ली में भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 में विद्युत वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गठित मंत्रियों के समूह के साथ छठी बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री ए. के. शर्मा, मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर, राजस्थान के ऊर्जा राज्य मंत्री श्री हीरालाल नागर और ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीमती मेघना बोर्डीकर ने हिस्सा लिया। बैठक में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सदस्य राज्यों की राज्य विद्युत उपयोगिताओं और विद्युत वित्त निगम (पीएफसी) लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।
भारत सरकार की पीएफसी लिमिटेड की सीएमडी ने अपने स्वागत भाषण में सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डिस्कॉम को संरचनात्मक, वित्तीय एवं परिचालन अक्षमताओं से उत्पन्न दीर्घकालिक जोखिमों के कारण सतत आपूर्ति एवं बाधित गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति का सामना करना पड़ता है। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दी है, फिर भी गहरी जड़ें जमा चुकी संरचनात्मक कमजोरियां स्थायी परिणामों पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं। विद्युत उत्पादन और पारेषण तभी अपनी चरम क्षमता पर काम कर सकते हैं जब वितरण क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत और परिचालन की दृष्टि से सुदृढ़ हो। पिछली योजनाओं से सतत सुधार के बजाय छिटपुट लाभ ही प्राप्त हुए और केवल वास्तव में विश्वसनीय डिस्कॉम ही बिजली क्षेत्र को आवश्यक दीर्घकालिक निवेश दिला सकते हैं।
श्री नाइक ने अपने उद्घाटन भाषण में सदस्य राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का स्वागत किया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की बिजली वितरण कंपनियों ने पहली बार पूरे क्षेत्र में लाभ अर्जित किया है, जिसका मुख्य कारण एटी एंड सी घाटे में कमी और एसीएस-एआरआर अंतर में कमी है। उन्होंने कहा कि अब तक प्राप्त लाभ उल्लेखनीय हैं, फिर भी वे बहुत कम हैं और कंपनियों एवं क्षेत्रों में असमान रूप से वितरित हैं। हाल में हुए सुधारों के बावजूद, लगभग आधी वितरण कंपनियां अभी भी घाटे में चल रही हैं, जिससे यह क्षेत्र भारी कर्ज एवं बड़े पैमाने पर संचित घाटे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया लाभ दर्शाते हैं कि हम अंततः सही राह पर हैं लेकिन वे यह भी रेखांकित करते हैं कि हम अभी भी उस स्तर से बहुत दूर हैं जहां एक वास्तव में स्वस्थ विद्युत क्षेत्र को होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि लागत के अनुरूप न होने वाले टैरिफ़ और सब्सिडी जारी होने में देरी के कारण डिस्कॉम को अपना कामकाज चलाने के लिए महंगे अल्पकालिक ऋण लेने के दुष्चक्र में धकेल दिया जाता है। इसके अलावा, विकृत क्रॉस-सब्सिडी औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ओपन एक्सेस की ओर जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे डिस्कॉम्स की आय का आधार ही कमज़ोर हो रहा है। ये रुझान एक स्पष्ट चेतावनी दे रहे हैं कि सेवाओं की निरंतर अनुपलब्धता पहले से ही सेवा की गुणवत्ता में गिरावट एवं पतन को जन्म दे रही है।
श्री नाइक ने कहा कि विद्युत क्षेत्र को वास्तव में व्यवहार्य बनाने के लिए सुधार को तीन स्तंभों पर आधारित होने चाहिए। पहला स्तंभ है नियामक अनुशासन जिसमें समय पर और लागत के अनुरूप टैरिफ, जिसमें एफपीपीसीए का स्वतः लाभ मिलना एवं क्रॉस-सब्सिडी में भारी कमी लाने का स्पष्ट मार्ग शामिल है। दूसरा स्तंभ है निर्णायक सरकारी कार्रवाई जिसमें वितरण कंपनियों के ऋण का व्यापक पुनर्गठन एवं वितरण इकाइयों का पूरी तरह से पेशेवर और निष्पक्ष प्रबंधन शामिल है। तीसरा स्तंभ उपयोगिता-आधारित उत्कृष्टता है जिसमें स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटलीकरण और डेटा-आधारित हानि में कमी के माध्यम से नेटवर्क में निरंतर परिचालन दक्षता शामिल है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वित्तीय व्यवहार्यता वैकल्पिक नहीं बल्कि विद्युत क्षेत्र की आधारशिला है, जिसके बिना भारत का ऊर्जा परिवर्तन और विकसित भारत का दृष्टिकोण साकार करना बहुत मुश्किल होगा। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से इन सुधारों के प्रति दृढ़ और समयबद्ध प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का आग्रह किया, जिससे वितरण क्षेत्र की व्यवहार्यता केवल एक केंद्रीय योजना के बजाय एक साझा राष्ट्रीय मिशन बन सके।
भारत सरकार में विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वितरण) ने अपने प्रस्तुतीकरण में राज्य वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वर्तमान वित्तीय स्थिति और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में वितरण क्षेत्र की व्यवहार्यता में सुधार के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों पर भी प्रकाश डाला। इसमें वित्त आयोग की पिछली 5 बैठकों के निष्कर्षों और उनकी सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान यह विचार-विमर्श किया गया कि राज्य मंत्रियों के समूह की सिफारिशों का व्यापक रूप से समर्थन करते हैं, जो विद्युत क्षेत्र सुधारों की अगले पड़ाव पर आगे बढ़ने की साझा तत्परता का संकेत है। राज्यों ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि लागत-प्रतिबिंबित टैरिफ के लिए जनादेश लाया जाए या स्पष्ट नीतिगत नियमों के माध्यम से जो नियामकों को बाध्य करें, ताकि समय पर, लागत-आधारित मूल्य निर्धारण की दिशा में मजबूती से मार्गदर्शन किया जा सके। बैठक में यह सहमति बनी कि दीर्घकालिक डिस्कॉम अक्षमताओं के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिवर्ष भारी बोझ पड़ता है और हाल के वर्षों में इसके संचयी नुकसान कई लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुके हैं। राज्यों ने स्पष्ट रूप से डिस्कॉम के ऋण पुनर्गठन के लिए केंद्रीय सहायता का अनुरोध किया, जो सुधारों से जुड़ा होना चाहिए। इसके अलावा, राज्यों ने प्रत्येक हितधारक और मुद्दे के लिए स्पष्ट कार्रवाई बिंदुओं पर एक अनुवर्ती बैठक का अनुरोध किया और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन करने के लिए समयबद्ध दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया।
अपने समापन भाषण में, श्री नाइक ने सदस्य राज्यों के सभी मंत्रियों और केंद्रीय एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों को उनके पूर्ण सहयोग एवं समूह के कार्य में अमूल्य योगदान देने के लिए दिल से सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले वर्ष के दौरान, समूह ने गहन उद्देश्य की भावना के साथ कार्य किया है और इसकी सिफारिशें वितरण क्षेत्र सुधारों पर मुख्य प्रावधानों को महत्वपूर्ण रूप से आकार देंगी। उन्होंने राज्यों से विशेष रूप से वितरण खंड में संरचनात्मक सुधारों पर आगे बढ़ने का आग्रह किया ताकि मंत्रियों के समूह में प्रतिनिधित्व वाले राज्य प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य चुनौती का एक प्रमुख हिस्सा होने के बजाय समाधान का नेतृत्व कर सकें।
मंत्रियों के समूह ने वितरण सेवाओं की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर से व्यक्त की।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के ट्रस्टियों से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ट्रस्टियों से मुलाकात की और सांस्कृतिक संवर्धन की इस यात्रा में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इस बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री और ट्रस्टियों ने डिजिटल और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से पहुंच को मजबूत बनाने पर चर्चा की और भारत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने तथा बढ़ावा देने में कलाकारों और विद्वानों को सहयोग देने के महत्व पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:
“आईजीएनसीए के ट्रस्टियों से मुलाकात की और भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। हमने इस यात्रा में और अधिक लोगों को जोड़ने, डिजिटल और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से पहुंच को मजबूत करने, तथा हमारी समृद्ध विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में कलाकारों और विद्वानों का समर्थन करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।”
समयबद्ध तरीके से पहुंच नियंत्रण और एआई-आधारित सुधार लागू करने के निर्देश दिए
नई दिल्ली – रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में वरिष्ठ रेल अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य स्टेशन पहुंच, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किए गए अन्य सुरक्षा संबंधी उपायों की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में प्रवेश नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और स्टेशन परिसर के भीतर सुगम आवागमन जैसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ये सुधार सर्वप्रथम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लागू किए जाएंगे और प्राप्त अनुभवों के आधार पर इन्हें अन्य स्टेशनों पर भी क्रियान्वित किया जाएगा।
एआई-संचालित कैमरा नेटवर्क चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करेगा
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर व्यापक एआई-संचालित निगरानी प्रणाली को कैमरों के माध्यम से तैनात किया जाएगा, जो प्लेटफॉर्म, कॉनकोर्स, प्रवेश-निकास बिंदुओं और अनधिकृत प्रवेश की संभावना वाले क्षेत्रों सहित स्टेशन परिसर के हर कोने को कवर करेगी।
एक एक्सेप्शन इवेंट डिस्प्ले आधारित नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां लाइव कैमरा फीड की एआई प्रोसेसिंग द्वारा निगरानी कर्मचारियों को असामान्य या असुरक्षित घटनाओं के बारे में वास्तविक समय में सूचित किया जाएगा। श्री वैष्णव ने कैमरों को सिस्टम की “आंखें” और एआई को “मस्तिष्क” बताया और इस बात पर बल दिया कि अधिकतम निगरानी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कैमरा कवरेज जोन में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को अतिरिक्त रूप से तैनात किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल टिकट धारक यात्री ही स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकें और मैनुअल चेकिंग के बजाय निगरानी-आधारित मॉनिटरिंग को अपनाया जाएगा।
सभी स्टेशन कर्मचारियों के लिए कलर-कोडेड वर्दी और पहचान पत्र
विशाल कार्यबल में एकरूपता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, स्टेशन पर कार्यरत सभी कर्मियों के लिए रंग-आधारित पहचान प्रणाली लागू की गई है। रेलवे कर्मचारी फ्लोरोसेंट जैकेट पहनेंगे, जबकि विक्रेता, स्टेशन सहायक, संविदा कर्मचारी और आईआरसीटीसी कर्मियों सहित गैर-कर्मचारी भी किसी अन्य रंग की जैकेट पहनेंगे। यह कदम स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों, कर्मचारियों और अन्य गैर-कर्मचारियों जैसे कुली, विक्रेताओं के कर्मचारी, भोजन, सफाई, पार्सल और रखरखाव कर्मियों की त्वरित पहचान सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है, जिनसे सुरक्षा अधिकारी और टिकट जांच कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करते समय संपर्क में रहते हैं।
सभी कर्मचारियों और गैर-कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिनमें पहचान के लिए आवश्यक सभी विवरण शामिल होंगे। इस एकसमान पहचान प्रणाली को धीरे-धीरे उत्तरी क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर लागू किया जाएगा, जिसमें नई दिल्ली स्टेशन को मॉडल के रूप में रखा जाएगा और बाद में इसे देश के अन्य हिस्सों में भी क्रियान्वित किया जाएगा।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर क्यूआर कोड आधारित प्रवेश नियंत्रण प्रणाली का प्रायोगिक परीक्षण किया जाएगा
दिवाली और छठ पर्व के दौरान संभावित भीड़भाड़ से पहले, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्यूआर कोड आधारित प्रवेश प्रबंधन प्रणाली शुरू की जा रही है। यह प्रणाली वैध टिकटों के आधार पर प्रवेश को नियंत्रित करेगी, जिससे आरक्षित टिकट धारकों, मासिक सीज़न टिकट धारकों और अनारक्षित यात्रियों को बेहतर ढंग से अलग किया जा सकेगा।
निर्बाध अंतिम-मील कनेक्टिविटी के लिए रेलवन ऐप को भारत टैक्सी के साथ एकीकृत किया जाएगा
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए, रेलवन ऐप को भारत टैक्सी के साथ एकीकृत किया जा रहा है। रेलटेल के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस एकीकरण का उद्देश्य स्टेशन परिसर के बाहर की अव्यवस्था को कम करना, यात्रियों की असुविधा को न्यूनतम करना और एक विश्वसनीय, पारदर्शी अंतिम-मील परिवहन विकल्प प्रदान करना है।
भारत टैक्सी भारत का पहला सहकारी समिति द्वारा संचालित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। यह भारत सरकार के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना के अनुरूप समावेशी, नागरिक-केंद्रित परिवहन समाधानों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भीड़ के सुचारू प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र
बैठक में 76 रेलवे स्टेशनों पर प्रतीक्षा क्षेत्रों के उन्नयन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अनारक्षित यात्रियों के लिए स्टेशन भवन के बाहर निर्दिष्ट प्रतीक्षा क्षेत्र बनाए जा रहे हैं, जिससे प्लेटफार्मों तक नियंत्रित और चरणबद्ध पहुंच सुनिश्चित होगी और कॉनकोर्स में भीड़भाड़ को रोका जा सकेगा, जो ऐतिहासिक रूप से भीड़भाड़ और सुरक्षा जोखिमों का कारण बनती रही है। सुगम आवागमन के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र से होकर यात्रियों के लिए निर्दिष्ट प्रवेश द्वार उपलब्ध होंगे।
सभी स्टेशनों पर साइनेज में सुधार के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों टिकट धारकों के लिए स्पष्ट और प्रमुखता से दिखाई देने वाले संकेत शामिल हैं। निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्रों में यात्रियों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ट्रेन सूचना सेवाओं को उन्नत किया जाएगा। रेल मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी जारी रहेगी ताकि नेटवर्क के सभी व्यस्त स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
ये उपाय भारतीय रेल की देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यात्री-अनुकूल स्थानों में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। प्रौद्योगिकी और उन्नत वास्तविक अवसंरचना के संयोजन से, रेलवे का लक्ष्य उन लाखों यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश से लेकर अंतिम मील कनेक्टिविटी तक निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना है जो प्रतिदिन इसकी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नंद किशोर सोमानी कैंसर चिकित्सा ब्लॉक का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आध्यात्मिक चेतना और मानवतावादी सेवा के संगम का सशक्त प्रतीक है। रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया, जिसे उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने बाद में मानवता के कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया। रामकृष्ण मिशन ने निरंतर यह संदेश दिया है कि प्रेम, सेवा और करुणा ईश्वर प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस मिशन ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची निस्वार्थ सेवा और करुणा ही आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। कैंसर का समय पर निदान और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार की उपलब्धता रोगी के जीवन को बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, कई परिवारों के लिए आर्थिक तंगी के कारण इस बीमारी का इलाज मुश्किल या असंभव सा लगता है। ऐसे समय में, जनसेवा की भावना से प्रेरित संस्थाएं सामाजिक कल्याण में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। जागरूकता अभियानों और समय पर जांच की सुविधाओं के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और शीघ्र उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण स्वस्थ नागरिकों के माध्यम से ही संभव है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से लाखों नागरिकों को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कैंसर के उपचार को भी आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सेवाभाव से प्रेरित चिकित्सा संस्थान समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि रोगियों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और सम्मान का संचार भी करते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय करुणा का संगम मानव कल्याण के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम से जुड़े सभी हितधारकों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान आने वाले वर्षों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (आईआरपीएस) के 1998 बैच के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार ठाकुर ने भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड में निदेशक (कार्मिक) के रूप में गुरुवार को कार्यभार संभाला।
भारतीय रेलवे और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ढाई दशक की सेवा के साथ श्री ठाकुर मानव संसाधन प्रबंधन और प्रशासन का व्यापक अनुभव रखते हैं। आपने सोलापुर, भोपाल और मुंबई सहित प्रमुख रेलवे डिवीजनों में महत्वपूर्ण मानव संसाधन कार्यों को संभाला है, और पश्चिमी रेलवे के भर्ती प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के रूप में बड़े पैमाने पर भर्ती का नेतृत्व किया है, जिसमें लगभग 12,000 कर्मचारियों की भर्ती की गई है। आपके नेतृत्व में बड़े पैमाने पर भर्तियां करने, जटिल औद्योगिक संबंधों का प्रबंधन तथा उत्पादकता और कर्मचारी कल्याण को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रगतिशील मानव संसाधन पहलें प्रारम्भ की गई हैं।
राइट्स(आरआईटीईएस) में अपने कार्यकाल के दौरान, वह सऊदी अरब में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन संचालन परियोजना से जुड़े थे। उन्होंने कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) में मानव संसाधन विभाग का नेतृत्व भी किया, जहां आपने मानव संसाधन नीतियों और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एनएमडीसी में कार्य ग्रहण करने से पूर्व, बीएचईएल में निदेशक (एचआर) के रूप में, श्री ठाकुर ने एचआर, विधि और एचएसई में कई पहलों का नेतृत्व किया, जिसमें कार्यप्रणालियों का पुनर्गठन, नीतिगत सुधार, एक समान प्रोत्साहन योजना की शुरुआत, और कार्यबल की क्षमता बढ़ाने और उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए बहु-कौशल पहल शामिल हैं। आपने कामगारों की तैनाती में गतिशीलता को बढ़ाने, और उसे बनाए रखने के लिए श्रम शेड के मानक दिशानिर्देश जारी किए गए।
आपने तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर से साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से मानव संसाधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम-एचआर) किया है।
भारतीय रेलवे और बड़े सीपीएसई में मानव संसाधन में श्री ठाकुर का अनुभव एनएमडीसी के जन- केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा, साथ ही संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ कर्मचारी विकास को संरेखित करेगा।
नई दिल्ली – आकाशगंगा की डिस्क के पास स्थित छोटे आणविक बादलों का पता लगा रहे वैज्ञानिकों ने पहली बार उनके चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की बनावट का “अवलोकन” किया है। इसका लक्ष्यय ताराओं के निर्माण में इसकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझना है।
दशकों से खगोलविदों को यह ज्ञात है कि गुरुत्वाकर्षण आणविक क्लाउड को अंदर की ओर खींचकर तारों का निर्माण करता है, जबकि आंतरिक दबाव उन्हें बाहर की ओर धकेलता है। लेकिन इस खींचतान में एक तीसरा, मूक कारक यानी चुंबकीय क्षेत्र भी शामिल है।
एल1604 और एल121 छोटे आणविक बादल हैं, जो मामूली तारकीय नर्सरी हैं, जिनमें से एल1604 आकाशगंगा के प्रतिकेंद्र की ओर और एल121 भीड़भाड़ वाले आकाशगंगा केंद्र की ओर स्थित है।
चुंबकीय क्षेत्र अदृश्य होते हैं, इसलिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और असम विश्वविद्यालय के एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस) की अनुसंधान टीम ने नैनीताल स्थित 104 सेंटीमीटर के एआरआईईएस टेलीस्कोप पर लगे एआरआईईएस इमेजिंग पोलारिमीटर (एआईएमपीओएल) के साथ आर-बैंड पोलारिमेट्री का उपयोग करके यह मापा कि दूर के तारों से आने वाला प्रकाश आणविक बादलों में मौजूद धूल से गुजरते समय किस प्रकार ध्रुवीकृत होता है। जब तारों का प्रकाश चुंबकीय क्षेत्र द्वारा संरेखित धूल के कणों से टकराता है, तो प्रकाश एक विशिष्ट दिशा में कंपन करता है। इन हजारों प्रकाश तरंगों का मानचित्रण करके, टीम ने पहली बार एल1604 और एल121 के आसपास के चुंबकीय क्षेत्रों की संरचना का “अवलोकन” किया।
शोधकर्ताओं ने दो बिल्कुल अलग-अलग विशेषताओं वाले बादल पाए। ये दोनों बादल बहुत अलग-अलग दूरियों पर स्थित हैं – एल1604 लगभग 816 पारसेक की दूरी पर और एल121 लगभग सात गुना कम दूरी पर, मात्र 124 पारसेक की दूरी पर। एल1604 बादल अत्यधिक घना और अधिक विशाल है और इसमें कई नए तारे बनाने के लिए पर्याप्त पदार्थ मौजूद है। एल121 आकाशगंगा के केंद्र की ओर स्थित है। यह एल1604 की तुलना में कम घना और कम विशाल है, लेकिन इसका चुंबकीय क्षेत्र अधिक मजबूत है। इसके अलावा, इसके चुंबकीय क्षेत्र की संरचना अधिक व्यवस्थित प्रतीत होती है, जिससे पता चलता है कि यह अभी तक उस तीव्र गुरुत्वाकर्षण पतन से प्रभावित नहीं हुआ है जो अधिक सक्रिय तारा-निर्माण क्षेत्रों की विशेषता है।
चित्र:काले बादलों एल1604 और एल121 के ध्रुवीकरण मानचित्र। ठोस रेखाएं संबंधित पृष्ठभूमि तारों के ध्रुवीकरण सदिश को दर्शाती हैं, जिन्हें संबंधित बादलों की समग्र डीएसएस छवियों पर अंकित किया गया है। आकाशगंगा तल की दिशा को एक खंडित रेखा से दर्शाया गया है। क्रॉस प्रत्येक बादल की केंद्रीय स्थिति को दर्शाता है। हर्शेल स्पायर 500 μm धूल-कण के निरंतर उत्सर्जन की रूपरेखा भी अंकित की गई है।
चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता का आकलन करके वैज्ञानिकों ने पाया कि दोनों बादल ठोस रूप से दूसरे दर्जे की महत्वपूर्ण अवस्था में हैं, जिसका अर्थ है कि चुंबकीय क्षेत्र दोनों बादलों के पूरे भाग में गुरुत्वाकर्षण पतन का प्रतिरोध करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत हैं। चुंबकीय क्षेत्र केवल “मुश्किल से” ही टिके नहीं हैं – वे गुरुत्वाकर्षण और व्यवधान दोनों पर हावी हैं, जहां चुंबकीय ऊर्जा अशांत गतिज ऊर्जा से अधिक है, जो इसके परिणामस्वरूप आवरण स्तर पर गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा से अधिक है। हालांकि, इन बादलों के भीतर गहराई में स्थित घने कोर में, गुरुत्वाकर्षण धीरे-धीरे हावी हो रहा है, जिससे ये कोर भविष्य में तारों के जन्म के वास्तविक केंद्र बन रहे हैं, भले ही आसपास का आवरण चुंबकीय रूप से सुरक्षित रहे।
यह कहानी सिर्फ दो बादलों के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक तारे के निर्माण की विधि के बारे में है। यह अध्ययन दर्शाता है कि चुंबकीय क्षेत्र किस प्रकार इन छोटे बादलों को घेरते हैं और उनमें व्याप्त होते हैं। साथ ही, यह बताता है कि चुंबकत्व ही वह अदृश्य शक्ति है जो तारा निर्माण की प्रक्रिया को धीमा करती है, जिससे आकाशगंगा अपनी सारी गैस को एक साथ तारों में परिवर्तित होने से रोकती है।
एल1604 और एल121 अब मानचित्र पर केवल काले धब्बे मात्र नहीं हैं; वे सक्रिय प्रयोगशालाएं हैं जहां हम ब्रह्मांड की मूलभूत शक्तियों, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकत्व को लाखों वर्षों के नाजुक आलिंगन में नृत्य करते हुए देख सकते हैं।
राँची,20.03.2026 – राँची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में आज दूसरे दिन भी कोतवाली,सुखदेवनगर, डेली मार्केट और हिंदपीड़ी क्षेत्र में ईद/सरहुल/ रामनवमी को लेकर निकलने वाला शोभा यात्रा /जुलूस रूट और संवेदनशील मार्गों का ड्रोन के माध्यम से निरीक्षण किया गया
जिस क्षेत्र का निरीक्षण किया गया वो हनुमान मंदिर, उर्दू लाइबरी, लेक रोड, बड़ा तालाब, अंजुमन प्लाजा, एकरा मस्जिद, संग्राम चौक, पुरानी राँची, अपर बाज़ार और महावीर चौक शामिल हैं.
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया
निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी
उल्लंघन की स्थिति में ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, दोषी विद्यालय की मान्यता समाप्त करने हेतु उचित कार्रवाई की जाएगी
अनुरोध है कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें
नई दिल्ली – झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुपालन में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया है।
निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी
इस अधिनियम के आलोक में, निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलने वाले विद्यालयों पर जिला स्तरीय कमिटी द्वारा उचित निर्णय लिया जा सकेगा। कमिटी के गठन से निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।
जिला स्तरीय कमिटी के सदस्य निम्नलिखित हैं:
*अध्यक्ष: उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची
*सदस्य: जिला शिक्षा पदाधिकारी
* सदस्य: जिला शिक्षा अधीक्षक
*सदस्य: जिला परिवहन पदाधिकारी
*सदस्य: एक सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटेंट)
*सदस्य: निजी विद्यालयों के दो प्राचार्य – गुरूनानक सीनियर सेकेण्डरी स्कूल, राँची एवं डी.ए.वी. कपिलदेव, राँची
* सदस्य: दिल्ली पब्लिक स्कूल, राँची के एक अभिभावक
* सदस्य: जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली, राँची के एक अभिभावक
इसके अतिरिक्त, राँची जिले के सभी माननीय सांसद एवं विधायकगण भी इस समिति के सदस्य हैं।
महत्वपूर्ण प्रावधान एवं निर्देश:
* प्रत्येक निजी विद्यालय को विद्यालय स्तरीय शुल्क निर्धारण कमिटी के साथ-साथ अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का भी गठन करना अनिवार्य होगा।
*कमिटी के गठन एवं सदस्यों की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए।
* जिला स्तरीय कमिटी को शुल्क निर्धारण के साथ-साथ गवाहों को सम्मन जारी करने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण एवं साक्ष्यों की प्राप्ति का पूर्ण अधिकार होगा।
* विद्यालय परिसर में पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्रियों का क्रय-विक्रय नहीं किया जाएगा। विद्यालय किसी विशेष प्रतिष्ठान से सामग्री खरीदने हेतु अभिभावकों/छात्रों को बाध्य या प्रेरित नहीं कर सकेगा।
* अधिनियम की धारा 7(अ)(3) के अनुसार, विद्यालय भवन एवं परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। कियोस्क या अन्य माध्यमों से अनिवार्य खरीद पर रोक रहेगी।
* उल्लंघन की स्थिति में ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, दोषी विद्यालय की मान्यता समाप्त करने हेतु उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम अभिभावकों के हित में एवं शिक्षा की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी निजी विद्यालयों से अनुरोध है कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर जिला स्तरीय कमिटी से संपर्क करें।
नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय की ओर से आज मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव की अध्यक्षता में जूट पर राज्य कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें जूट की खेती की स्थिति और मौजूदा फसल सीजन के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई।
सम्मेलन में असम, ओडिशा, नागालैंड और मेघालय सहित प्रमुख जूट उत्पादक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं था। बैठक में जूट विकास निदेशालय (डीओजेडी), आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ, राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी), जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और इसरो के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
बैठक में निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई :
बुवाई की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रफल
प्रमाणित जूट बीजों की उपलब्धता और वितरण
उन्नत कृषि पद्धतियों के कार्यान्वयन की स्थिति
अपगलन (गीला करना) अभ्यास और फाइबर की गुणवत्ता में सुधार के लिए तैयारी
मंत्रालय ने जूट-आईसीएआरई (बेहतर कृषि और उन्नत अपगलन अभ्यास) योजना के निरंतर कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जो बेहतर बीज वितरण, मशीनीकरण उपकरणों और क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को सहायता प्रदान करती है।
बैठक के दौरान एनआरएससी और इसरो ने जूट फसल सूचना प्रणाली प्रस्तुत की। इसमें फसल की निगरानी, रकबे का अनुमान लगाने और निर्णय लेने में सहायता के लिए भू-स्थानिक तकनीकों के उपयोग को प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित योजना और निगरानी को मजबूत करना है।
इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में जूट की खेती को लेकर कच्चे माल की आपूर्ति और ग्राहक या वितरक के संपर्कों को मजबूत के लिए पूर्वोत्तर हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी), राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) और जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य निम्नलिखित को सुगम बनाना है :
जूट किसानों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति
खरीद और संग्रह करने की पद्धतियों को सुदृढ़ बनाना
क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना
वस्त्र सचिव ने निम्नलिखित की आवश्यकता पर जोर दिया :
प्रमाणित जूट बीजों की उच्च उपज देने वाली किस्मों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना
अपगलन अभ्यास अवसंरचना और प्रक्रियाओं को मजबूत करना
कठिन परिश्रम को कम करने के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देना
केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बनाना
सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्यों को जमीनी स्तर पर हुई प्रगति की बारीकी से निगरानी करने और सीजन के दौरान परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय उपाय करने की सलाह दी गई।
मंत्रालय ने देश में जूट की खेती के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्पादकता, फाइबर की गुणवत्ता और किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से समन्वित प्रयासों के माध्यम से जूट क्षेत्र का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले पारंपरिक नव वर्ष उत्सव के अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दी हैं।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में नव संवत्सर, चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेटीचंड, नवरेह, साजिबू चेइराओबा और चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ जैसे शुभ अवसरों पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मनाए जाने वाले ये त्योहार पारंपरिक नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक हैं, वसंत ऋतु के आगमन की घोषणा हैं और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता की अटूट भावना को दर्शाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि ये शुभ अवसर सभी नागरिकों के बीच खुशी, समृद्धि और आशावाद की एक नई भावना लेकर आएंगे।