त्योहारों के इस पावन मौसम में सरहुल एवं ईद की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ – हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखण्ड

जोहार!

त्योहारों के इस पावन मौसम में सरहुल एवं ईद की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

प्रकृति, संस्कृति और आस्था से जुड़े ये पर्व हमें प्रकृति संतुलन, भाईचारे और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

यह शुभ अवसर हम सभी के जीवन में खुशियाँ, अमन और समृद्धि लाए तथा समाज में सद्भाव और एकजुटता के बंधन को और सशक्त करे।

हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री, झारखण्ड

*****************************

 

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह का आगरा दौरा; कालीन, हस्तशिल्प, फुटवियर और तकनीकी वस्त्र क्षेत्रों की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कालीन, हस्तशिल्प, जूते और तकनीकी वस्त्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों की प्रगति और संभावनाओं की समीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा का आधिकारिक दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में स्थिरता, नवाचार को बढ़ावा देना और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना रहा।

 

दौरे के दौरान, मंत्री ने एक कालीन निर्माण इकाई का भ्रमण किया और उद्योग द्वारा अपनाई जा रही टिकाऊ उत्पादन प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इनमें वनस्पति रंगों (वेजिटेबल डाइज) का उपयोग, जैविक ऊन और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रियाओं का उपयोग शामिल था, जो इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और स्थिरता मानकों के अनुरूप बनाते हैं।

श्री गिरिराज सिंह ने निर्यातकों और डिजाइनरों सहित कालीन उद्योग के विभिन्न हितधारकों के साथ भी बातचीत की। चर्चा वैश्विक स्तर पर उभरते डिजाइन रुझानों, केले के रेशे (बनाना फाइबर) जैसे टिकाऊ और वैकल्पिक रेशों के बढ़ते महत्व और “इंडिया हैंडमेड” ब्रांड की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित थी। मंत्री ने डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए ‘विजन एनएक्सटी’  जैसे स्वदेशी ट्रेंड फोरकास्टिंग टूल की भूमिका पर जोर दिया।

इसके बाद मंत्री ने एक फुटवियर निर्माण इकाई का दौरा किया, जहाँ उन्होंने इस क्षेत्र में हुई प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तकनीकी वस्त्रों (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) के एकीकरण से उत्पाद की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता में काफी सुधार हो रहा है। उन्होंने फुटवियर उद्योग में नवाचार को बढ़ावा देने में युवा पेशेवरों की भूमिका की भी सराहना की।

फुटवियर उद्योग, तकनीकी वस्त्र क्षेत्र और संबद्ध उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ एक हितधारक बैठक आयोजित की गई। बैठक में निम्न प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई:

  • फुटवियर निर्माण में टेक्निकल टेक्सटाइल्स का उपयोग बढ़ाना।
  • उत्पादन और डिजाइन में एआई तथा उन्नत तकनीकों का विस्तार।
  • उत्पाद नवाचार और डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करना।
  • उच्च गुणवत्ता वाले, निर्यात-उन्मुख फुटवियर की ओर संक्रमण को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक फुटवियर बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार करना।
  • इस क्षेत्र में टेक्निकल टेक्सटाइल्स के प्रति जागरूकता और अपनाने को बढ़ावा देना।

श्री सिंह ने कहा कि तकनीकी वस्त्र भारत के फुटवियर उद्योग को उच्च-मूल्य, डिजाइन-संचालित और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कालीन और हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक उद्योगों और तकनीकी वस्त्रों जैसे उभरते क्षेत्रों को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

दौरे के दौरान एक हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कारीगरों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कौशल को प्रदर्शित किया गया।

कुल मिलाकर, इस दौरे ने भारत के वस्त्र और संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने तथा उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में स्थिरता, नवाचार, तकनीकी अपनाने और विभिन्न हितधारकों के सहयोग की अहम भूमिका को रेखांकित किया।

**************************

 

विद्युत मंत्री ने भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन (20.3.2026) केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विद्युत मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।

विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में चंडीगढ़ और पंजाब के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल, एमएनआरई के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026, विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि विद्युत आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे का आधार है। उन्होंने देश की 520 गीगावॉट से अधिक की क्षमता, डिस्कॉम के बेहतर प्रदर्शन, बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर और विद्युत आपूर्ति में सुधार आदि उपलब्धियों का भी उल्‍लेख किया।

श्री मनोहर लाल ने किफायती और कुशल विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की क्षमता को भी रेखांकित किया और शांति अधिनियम को एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

श्री मनोहर लाल ने राज्यों को आवश्यक सुधारों को लागू करने तथा कानूनी और प्रशासनिक उपाय में केंद्र से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

श्रीपाद नाइक ने विद्युत क्षेत्र के रूपांतरण में प्रौद्योगिकी और एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला और स्मार्ट मीटर को एक प्रमुख उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्थापित क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने विकसित भारत 2047 की रणनीतियों को रेखांकित करने वाली नई राष्ट्रीय विद्युत नीति के मसौदे के महत्व पर बल दिया।

 

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन-मुक्त ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। विद्युत और मानव संसाधन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सचिवों ने देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए सामूहिक और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया।

जारी की गई प्रमुख रिपोर्टें

इस बैठक के दौरान विद्युत मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए डिस्कॉम की उपभोक्ता सेवा रेटिंग (सीएसआरडी) और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वितरण उपयोगिता रैंकिंग (डीयूआर) रिपोर्ट जारी की।

डिस्कॉम्स की उपभोक्ता सेवा रेटिंग रिपोर्ट

सीएसआरडी उपभोक्ता सेवा में डिस्कॉम्स के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए आधारभूत मानक और अपेक्षाएँ निर्धारित करता है, जिनमें शीघ्र और सटीक मीटरिंग और बिलिंग, समय पर और प्रभावी शिकायत निवारण और निष्पक्ष, पारदर्शी टैरिफ निर्धारण शामिल हैं। सीएसआरडी रिपोर्ट का उद्देश्य उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने और अंतर-विषयक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करना है। यह उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला की जाँच करता है, प्रमुख क्षेत्रों में डिस्कॉम्स का आकलन करने के लिए विद्युत नियमों के सेवा मानकों का उपयोग करता है, और उनके अनुपालन की निगरानी, मूल्यांकन और कार्यान्वयन करता है।

प्रस्तुत आंकड़ों और प्राप्त अंकों के आधार पर, डिस्कॉम्स को सात श्रेणियों A+, A, B+, B, C+, C, या D। में से एक श्रेणी दी जाती है इस श्रेणीबद्ध ग्रेडिंग का उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करना है। मूल्यांकन किए गए 66 डिस्कॉम्स में से 6 को A+, 21 को A और 27 को B+ श्रेणी में रखा गया।

डिस्कॉम्स का बेहतर प्रदर्शन उच्च श्रेणी प्राप्त करने वाले डिस्कॉम्स के बढ़ते अनुपात और बेहतर सेवाओं से लाभान्वित होने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि और सकारात्मक राष्ट्रीय प्रगति का संकेत है। साथ ही, निम्न श्रेणी (सी और डी) में आने वाले डिस्कॉम्स और उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई है, जो पैमाने के निचले स्तर पर प्रगति को दर्शाता है।

वितरण उपयोगिता रैंकिंग (डीयूआर) रिपोर्ट

डीयूआर देश भर में बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन का व्यापक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। पिछले संस्करणों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर, यह रिपोर्ट पारंपरिक प्रदर्शन संकेतकों से आगे बढ़कर संस्थागत क्षमता, वित्तीय स्थिरता, परिचालन दक्षता और सेवा वितरण परिणामों को समाहित करते हुए एक बहुआयामी मूल्यांकन ढांचा अपनाती है। डीयूआर पहल का उद्देश्य देश के दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन और विकास लक्ष्यों का समर्थन करने वाली वित्तीय रूप से टिकाऊ, परिचालन रूप से कुशल और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली वितरण प्रणाली के निर्माण में योगदान देना है। इस वर्ष कुल 66 कंपनियों ने डीयूआर मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लिया है।

****************************

 

नई दिल्ली में पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार मेले का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के अधीन पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) ने 20 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के शंकर विहार सैन्य स्टेशन स्थित अरावली सभागार में पूर्व सैनिकों के लिए एक रोजगार मेला सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

इस आयोजन को उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिसमें 850 से अधिक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। साथ ही, 42 प्रमुख राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसमें शामिल हुईं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में 1,290 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।

रोजगार मेले का उद्घाटन मुख्यालय एटीवीपी के परियोजना निदेशक (पी एंड ए) रियर एडमिरल आर.के. सिंह और डीजीआर के प्रधान निदेशक कमोडोर विक्रांत किशोर द्वारा किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित पूर्व सैनिकों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया तथा रोजगार के बदलते परिदृश्य एवं उद्योग जगत की अपेक्षाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर कमोडोर सुमीत कपूर, एनएम, कमोडोर नौसेना के पूर्व सैनिक; ब्रिगेडियर ईशान दलाल, एसएम, ब्रिगेडियर डीआईएवी; और श्री नवीन पटवर्धन, सीनियर वीपी तथा एचएलई, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड भी उपस्थित थे।

श्नाइडर इलेक्ट्रिक, जीए डिजिटल वेब वर्ड प्राइवेट लिमिटेड, सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, केपी सिंह फाउंडेशन और केसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट सहित कई अन्य प्रतिष्ठित संगठन इस आयोजन के प्रमुख भर्तीकर्ताओं में शामिल थे।

यह रोजगार मेला पूर्व सैनिकों के लिए अपनी तकनीकी, प्रबंधकीय एवं प्रशासनिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। साथ ही, इसने उद्योग जगत को अनुशासित, कुशल और अनुभवी प्रतिभाओं से जुड़ने का सशक्त अवसर भी प्रदान किया। यह आयोजन पूर्व सैनिकों के लिए सार्थक द्वितीय करियर के अवसर सृजित करने और उन्हें असैन्य कार्यबल में प्रभावी रूप से एकीकृत करने की दिशा में डीजीआर की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।

**********************

 

श्री श्रीपाद येसो नाइक ने देश में वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गठित मंत्रियों के समूह की छठी बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने देश में वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गठित मंत्रियों के समूह की छठी बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज नई दिल्ली में भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 में विद्युत वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गठित मंत्रियों के समूह के साथ छठी बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री ए. के. शर्मा, मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर, राजस्थान के ऊर्जा राज्य मंत्री श्री हीरालाल नागर और ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीमती मेघना बोर्डीकर ने हिस्सा लिया। बैठक में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सदस्य राज्यों की राज्य विद्युत उपयोगिताओं और विद्युत वित्त निगम (पीएफसी) लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।

भारत सरकार की पीएफसी लिमिटेड की सीएमडी ने अपने स्वागत भाषण में सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डिस्कॉम को संरचनात्मक, वित्तीय एवं परिचालन अक्षमताओं से उत्पन्न दीर्घकालिक जोखिमों के कारण सतत आपूर्ति एवं बाधित गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति का सामना करना पड़ता है। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दी है, फिर भी गहरी जड़ें जमा चुकी संरचनात्मक कमजोरियां स्थायी परिणामों पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं। विद्युत उत्पादन और पारेषण तभी अपनी चरम क्षमता पर काम कर सकते हैं जब वितरण क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत और परिचालन की दृष्टि से सुदृढ़ हो। पिछली योजनाओं से सतत सुधार के बजाय छिटपुट लाभ ही प्राप्त हुए और केवल वास्तव में विश्वसनीय डिस्कॉम ही बिजली क्षेत्र को आवश्यक दीर्घकालिक निवेश दिला सकते हैं।

श्री नाइक ने अपने उद्घाटन भाषण में सदस्य राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का स्वागत किया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की बिजली वितरण कंपनियों ने पहली बार पूरे क्षेत्र में लाभ अर्जित किया है, जिसका मुख्य कारण एटी एंड सी घाटे में कमी और एसीएस-एआरआर अंतर में कमी है। उन्होंने कहा कि अब तक प्राप्त लाभ उल्लेखनीय हैं, फिर भी वे बहुत कम हैं और कंपनियों एवं क्षेत्रों में असमान रूप से वितरित हैं। हाल में हुए सुधारों के बावजूद, लगभग आधी वितरण कंपनियां अभी भी घाटे में चल रही हैं, जिससे यह क्षेत्र भारी कर्ज एवं बड़े पैमाने पर संचित घाटे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया लाभ दर्शाते हैं कि हम अंततः सही राह पर हैं लेकिन वे यह भी रेखांकित करते हैं कि हम अभी भी उस स्तर से बहुत दूर हैं जहां एक वास्तव में स्वस्थ विद्युत क्षेत्र को होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि लागत के अनुरूप न होने वाले टैरिफ़ और सब्सिडी जारी होने में देरी के कारण डिस्कॉम को अपना कामकाज चलाने के लिए महंगे अल्पकालिक ऋण लेने के दुष्चक्र में धकेल दिया जाता है। इसके अलावा, विकृत क्रॉस-सब्सिडी औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ओपन एक्सेस की ओर जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे डिस्कॉम्स की आय का आधार ही कमज़ोर हो रहा है। ये रुझान एक स्पष्ट चेतावनी दे रहे हैं कि सेवाओं की निरंतर अनुपलब्धता पहले से ही सेवा की गुणवत्ता में गिरावट एवं पतन को जन्म दे रही है।

श्री नाइक ने कहा कि विद्युत क्षेत्र को वास्तव में व्यवहार्य बनाने के लिए सुधार को तीन स्तंभों पर आधारित होने चाहिए। पहला स्तंभ है नियामक अनुशासन जिसमें समय पर और लागत के अनुरूप टैरिफ, जिसमें एफपीपीसीए का स्वतः लाभ मिलना एवं क्रॉस-सब्सिडी में भारी कमी लाने का स्पष्ट मार्ग शामिल है। दूसरा स्तंभ है निर्णायक सरकारी कार्रवाई जिसमें वितरण कंपनियों के ऋण का व्यापक पुनर्गठन एवं वितरण इकाइयों का पूरी तरह से पेशेवर और निष्पक्ष प्रबंधन शामिल है। तीसरा स्तंभ उपयोगिता-आधारित उत्कृष्टता है जिसमें स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटलीकरण और डेटा-आधारित हानि में कमी के माध्यम से नेटवर्क में निरंतर परिचालन दक्षता शामिल है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वित्तीय व्यवहार्यता वैकल्पिक नहीं बल्कि विद्युत क्षेत्र की आधारशिला है, जिसके बिना भारत का ऊर्जा परिवर्तन और विकसित भारत का दृष्टिकोण साकार करना बहुत मुश्किल होगा। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से इन सुधारों के प्रति दृढ़ और समयबद्ध प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का आग्रह किया, जिससे वितरण क्षेत्र की व्यवहार्यता केवल एक केंद्रीय योजना के बजाय एक साझा राष्ट्रीय मिशन बन सके।

भारत सरकार में विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वितरण) ने अपने प्रस्तुतीकरण में राज्य वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वर्तमान वित्तीय स्थिति और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में वितरण क्षेत्र की व्यवहार्यता में सुधार के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों पर भी प्रकाश डाला। इसमें वित्त आयोग की पिछली 5 बैठकों के निष्कर्षों और उनकी सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान यह विचार-विमर्श किया गया कि राज्य मंत्रियों के समूह की सिफारिशों का व्यापक रूप से समर्थन करते हैं, जो विद्युत क्षेत्र सुधारों की अगले पड़ाव पर आगे बढ़ने की साझा तत्परता का संकेत है। राज्यों ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि लागत-प्रतिबिंबित टैरिफ के लिए जनादेश लाया जाए या स्पष्ट नीतिगत नियमों के माध्यम से जो नियामकों को बाध्य करें, ताकि समय पर, लागत-आधारित मूल्य निर्धारण की दिशा में मजबूती से मार्गदर्शन किया जा सके। बैठक में यह सहमति बनी कि दीर्घकालिक डिस्कॉम अक्षमताओं के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिवर्ष भारी बोझ पड़ता है और हाल के वर्षों में इसके संचयी नुकसान कई लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुके हैं। राज्यों ने स्पष्ट रूप से डिस्कॉम के ऋण पुनर्गठन के लिए केंद्रीय सहायता का अनुरोध किया, जो सुधारों से जुड़ा होना चाहिए। इसके अलावा, राज्यों ने प्रत्येक हितधारक और मुद्दे के लिए स्पष्ट कार्रवाई बिंदुओं पर एक अनुवर्ती बैठक का अनुरोध किया और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन करने के लिए समयबद्ध दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया।

अपने समापन भाषण में, श्री नाइक ने सदस्य राज्यों के सभी मंत्रियों और केंद्रीय एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों को उनके पूर्ण सहयोग एवं समूह के कार्य में अमूल्य योगदान देने के लिए दिल से सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले वर्ष के दौरान, समूह ने गहन उद्देश्य की भावना के साथ कार्य किया है और इसकी सिफारिशें वितरण क्षेत्र सुधारों पर मुख्य प्रावधानों को महत्वपूर्ण रूप से आकार देंगी। उन्होंने राज्यों से विशेष रूप से वितरण खंड में संरचनात्मक सुधारों पर आगे बढ़ने का आग्रह किया ताकि मंत्रियों के समूह में प्रतिनिधित्व वाले राज्य प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य चुनौती का एक प्रमुख हिस्सा होने के बजाय समाधान का नेतृत्व कर सकें।

मंत्रियों के समूह ने वितरण सेवाओं की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर से व्यक्त की।

**************************

 

प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ट्रस्टियों से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के उद्देश्य से  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के ट्रस्टियों से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ट्रस्टियों से मुलाकात की और सांस्कृतिक संवर्धन की इस यात्रा में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इस बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री और ट्रस्टियों ने डिजिटल और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से पहुंच को मजबूत बनाने पर चर्चा की और भारत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने तथा बढ़ावा देने में कलाकारों और विद्वानों को सहयोग देने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

“आईजीएनसीए के ट्रस्टियों से मुलाकात की और भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। हमने इस यात्रा में और अधिक लोगों को जोड़ने, डिजिटल और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से पहुंच को मजबूत करने, तथा हमारी समृद्ध विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में कलाकारों और विद्वानों का समर्थन करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।”

 

*******************

 

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ यात्री सुविधाओं और सुरक्षा की समीक्षा की

समयबद्ध तरीके से पहुंच नियंत्रण और एआई-आधारित सुधार लागू करने के निर्देश दिए

नई दिल्ली – रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में वरिष्ठ रेल अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य स्टेशन पहुंच, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किए गए अन्य सुरक्षा संबंधी उपायों की प्रगति का आकलन करना था। बैठक में प्रवेश नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और स्टेशन परिसर के भीतर सुगम आवागमन जैसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ये सुधार सर्वप्रथम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लागू किए जाएंगे और प्राप्त अनुभवों के आधार पर इन्हें अन्य स्टेशनों पर भी क्रियान्वित किया जाएगा।

एआई-संचालित कैमरा नेटवर्क चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करेगा

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर व्यापक एआई-संचालित निगरानी प्रणाली को कैमरों के माध्यम से तैनात किया जाएगा, जो प्लेटफॉर्म, कॉनकोर्स, प्रवेश-निकास बिंदुओं और अनधिकृत प्रवेश की संभावना वाले क्षेत्रों सहित स्टेशन परिसर के हर कोने को कवर करेगी।

एक एक्सेप्शन इवेंट डिस्प्ले आधारित नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां लाइव कैमरा फीड की एआई प्रोसेसिंग द्वारा निगरानी कर्मचारियों को असामान्य या असुरक्षित घटनाओं के बारे में वास्तविक समय में सूचित किया जाएगा। श्री वैष्णव ने कैमरों को सिस्टम की “आंखें” और एआई को “मस्तिष्क” बताया और इस बात पर बल दिया कि अधिकतम निगरानी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कैमरा कवरेज जोन में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को अतिरिक्त रूप से तैनात किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल टिकट धारक यात्री ही स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकें और मैनुअल चेकिंग के बजाय निगरानी-आधारित मॉनिटरिंग को अपनाया जाएगा।

सभी स्टेशन कर्मचारियों के लिए कलर-कोडेड वर्दी और पहचान पत्र

विशाल कार्यबल में एकरूपता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, स्टेशन पर कार्यरत सभी कर्मियों के लिए रंग-आधारित पहचान प्रणाली लागू की गई है। रेलवे कर्मचारी फ्लोरोसेंट जैकेट पहनेंगे, जबकि विक्रेता, स्टेशन सहायक, संविदा कर्मचारी और आईआरसीटीसी कर्मियों सहित गैर-कर्मचारी भी किसी अन्य रंग की जैकेट पहनेंगे। यह कदम स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों, कर्मचारियों और अन्य गैर-कर्मचारियों जैसे कुली, विक्रेताओं के कर्मचारी, भोजन, सफाई, पार्सल और रखरखाव कर्मियों की त्वरित पहचान सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है, जिनसे सुरक्षा अधिकारी और टिकट जांच कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करते समय संपर्क में रहते हैं।

सभी कर्मचारियों और गैर-कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिनमें पहचान के लिए आवश्यक सभी विवरण शामिल होंगे। इस एकसमान पहचान प्रणाली को धीरे-धीरे उत्तरी क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर लागू किया जाएगा, जिसमें नई दिल्ली स्टेशन को मॉडल के रूप में रखा जाएगा और बाद में इसे देश के अन्य हिस्सों में भी क्रियान्वित किया जाएगा।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर क्यूआर कोड आधारित प्रवेश नियंत्रण प्रणाली का प्रायोगिक परीक्षण किया जाएगा

दिवाली और छठ पर्व के दौरान संभावित भीड़भाड़ से पहले, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्यूआर कोड आधारित प्रवेश प्रबंधन प्रणाली शुरू की जा रही है। यह प्रणाली वैध टिकटों के आधार पर प्रवेश को नियंत्रित करेगी, जिससे आरक्षित टिकट धारकों, मासिक सीज़न टिकट धारकों और अनारक्षित यात्रियों को बेहतर ढंग से अलग किया जा सकेगा।

निर्बाध अंतिम-मील कनेक्टिविटी के लिए रेलवन ऐप को भारत टैक्सी के साथ एकीकृत किया जाएगा

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए, रेलवन ऐप को भारत टैक्सी के साथ एकीकृत किया जा रहा है। रेलटेल के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस एकीकरण का उद्देश्य स्टेशन परिसर के बाहर की अव्यवस्था को कम करना, यात्रियों की असुविधा को न्यूनतम करना और एक विश्वसनीय, पारदर्शी अंतिम-मील परिवहन विकल्प प्रदान करना है।

भारत टैक्सी भारत का पहला सहकारी समिति द्वारा संचालित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। यह भारत सरकार के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना के अनुरूप समावेशी, नागरिक-केंद्रित परिवहन समाधानों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भीड़ के सुचारू प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र

बैठक में 76 रेलवे स्टेशनों पर प्रतीक्षा क्षेत्रों के उन्नयन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अनारक्षित यात्रियों के लिए स्टेशन भवन के बाहर निर्दिष्ट प्रतीक्षा क्षेत्र बनाए जा रहे हैं, जिससे प्लेटफार्मों तक नियंत्रित और चरणबद्ध पहुंच सुनिश्चित होगी और कॉनकोर्स में भीड़भाड़ को रोका जा सकेगा, जो ऐतिहासिक रूप से भीड़भाड़ और सुरक्षा जोखिमों का कारण बनती रही है। सुगम आवागमन के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र से होकर यात्रियों के लिए निर्दिष्ट प्रवेश द्वार उपलब्ध होंगे।

सभी स्टेशनों पर साइनेज में सुधार के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों टिकट धारकों के लिए स्पष्ट और प्रमुखता से दिखाई देने वाले संकेत शामिल हैं। निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्रों में यात्रियों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ट्रेन सूचना सेवाओं को उन्नत किया जाएगा। रेल मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी जारी रहेगी ताकि नेटवर्क के सभी व्यस्त स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

ये उपाय भारतीय रेल की देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यात्री-अनुकूल स्थानों में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। प्रौद्योगिकी और उन्नत वास्तविक अवसंरचना के संयोजन से, रेलवे का लक्ष्य उन लाखों यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश से लेकर अंतिम मील कनेक्टिविटी तक निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना है जो प्रतिदिन इसकी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।

**********************

 

राष्ट्रपति ने वृंदावन में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के नंद किशोर सोमानी कैंसर चिकित्सा ब्लॉक का उद्घाटन किया

नई दिल्ली –  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नंद किशोर सोमानी कैंसर चिकित्सा ब्लॉक का उद्घाटन किया।

 

इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आध्यात्मिक चेतना और मानवतावादी सेवा के संगम का सशक्त प्रतीक है। रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया, जिसे उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने बाद में मानवता के कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया। रामकृष्ण मिशन ने निरंतर यह संदेश दिया है कि प्रेम, सेवा और करुणा ईश्वर प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस मिशन ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची निस्वार्थ सेवा और करुणा ही आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। कैंसर का समय पर निदान और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार की उपलब्धता रोगी के जीवन को बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, कई परिवारों के लिए आर्थिक तंगी के कारण इस बीमारी का इलाज मुश्किल या असंभव सा लगता है। ऐसे समय में, जनसेवा की भावना से प्रेरित संस्थाएं सामाजिक कल्याण में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। जागरूकता अभियानों और समय पर जांच की सुविधाओं के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और शीघ्र उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण स्वस्थ नागरिकों के माध्यम से ही संभव है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से लाखों नागरिकों को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कैंसर के उपचार को भी आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेवाभाव से प्रेरित चिकित्सा संस्थान समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि रोगियों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और सम्मान का संचार भी करते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय करुणा का संगम मानव कल्याण के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम से जुड़े सभी हितधारकों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान आने वाले वर्षों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

************************

 

श्री कृष्ण कुमार ठाकुर ने एनएमडीसी के निदेशक (कार्मिक) का पदभार ग्रहण किया

नई दिल्ली – भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (आईआरपीएस) के 1998 बैच के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार ठाकुर ने भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड में निदेशक (कार्मिक) के रूप में गुरुवार को कार्यभार संभाला।

भारतीय रेलवे और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ढाई दशक की सेवा के साथ श्री ठाकुर मानव संसाधन प्रबंधन और प्रशासन का व्यापक अनुभव रखते हैं। आपने सोलापुर, भोपाल और मुंबई सहित प्रमुख रेलवे डिवीजनों में महत्वपूर्ण मानव संसाधन कार्यों को संभाला है, और पश्चिमी रेलवे के भर्ती प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के रूप में बड़े पैमाने पर भर्ती का नेतृत्व किया है, जिसमें लगभग 12,000 कर्मचारियों की भर्ती की गई है। आपके नेतृत्व में बड़े पैमाने पर भर्तियां करने, जटिल औद्योगिक संबंधों का प्रबंधन तथा उत्पादकता और कर्मचारी कल्याण को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रगतिशील मानव संसाधन पहलें प्रारम्भ की गई हैं।

 

राइट्स(आरआईटीईएस) में अपने कार्यकाल के दौरान, वह सऊदी अरब में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन संचालन परियोजना से जुड़े थे। उन्होंने कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) में मानव संसाधन विभाग का नेतृत्व भी किया, जहां आपने मानव संसाधन नीतियों और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एनएमडीसी में कार्य ग्रहण करने से पूर्व, बीएचईएल में निदेशक (एचआर) के रूप में, श्री ठाकुर ने एचआर, विधि और एचएसई में कई पहलों का नेतृत्व किया, जिसमें कार्यप्रणालियों का पुनर्गठन, नीतिगत सुधार, एक समान प्रोत्साहन योजना की शुरुआत, और कार्यबल की क्षमता बढ़ाने और उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए बहु-कौशल पहल शामिल हैं। आपने कामगारों की तैनाती में गतिशीलता को बढ़ाने, और उसे बनाए रखने के लिए श्रम शेड के मानक दिशानिर्देश जारी किए गए।

आपने तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर से साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से मानव संसाधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीएम-एचआर) किया है।

भारतीय रेलवे और बड़े सीपीएसई में मानव संसाधन में श्री ठाकुर का अनुभव एनएमडीसी के जन- केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा, साथ ही संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ कर्मचारी विकास को संरेखित करेगा।

**************************

 

वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा के डिस्क के पास स्थित आणविक क्लाउड की तारा निर्माण में भूमिका को समझने के तरीके खोजे

नई दिल्ली – आकाशगंगा की डिस्क के पास स्थित छोटे आणविक बादलों का पता लगा रहे वैज्ञानिकों ने पहली बार उनके चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की बनावट का “अवलोकन” किया है। इसका लक्ष्यय ताराओं के निर्माण में इसकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझना है।

दशकों से खगोलविदों को यह ज्ञात है कि गुरुत्वाकर्षण आणविक क्लाउड को अंदर की ओर खींचकर तारों का निर्माण करता है, जबकि आंतरिक दबाव उन्हें बाहर की ओर धकेलता है। लेकिन इस खींचतान में एक तीसरा, मूक कारक यानी चुंबकीय क्षेत्र भी शामिल है।

एल1604 और एल121 छोटे आणविक बादल हैं, जो मामूली तारकीय नर्सरी हैं, जिनमें से एल1604 आकाशगंगा के प्रतिकेंद्र की ओर और एल121 भीड़भाड़ वाले आकाशगंगा केंद्र की ओर स्थित है।

चुंबकीय क्षेत्र अदृश्य होते हैं, इसलिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और असम विश्वविद्यालय के एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस) की अनुसंधान टीम ने नैनीताल स्थित 104 सेंटीमीटर के एआरआईईएस टेलीस्कोप पर लगे एआरआईईएस इमेजिंग पोलारिमीटर (एआईएमपीओएल) के साथ आर-बैंड पोलारिमेट्री का उपयोग करके यह मापा कि दूर के तारों से आने वाला प्रकाश आणविक बादलों में मौजूद धूल से गुजरते समय किस प्रकार ध्रुवीकृत होता है। जब तारों का प्रकाश चुंबकीय क्षेत्र द्वारा संरेखित धूल के कणों से टकराता है, तो प्रकाश एक विशिष्ट दिशा में कंपन करता है। इन हजारों प्रकाश तरंगों का मानचित्रण करके, टीम ने पहली बार एल1604 और एल121 के आसपास के चुंबकीय क्षेत्रों की संरचना का “अवलोकन” किया।

शोधकर्ताओं ने दो बिल्कुल अलग-अलग विशेषताओं वाले बादल पाए। ये दोनों बादल बहुत अलग-अलग दूरियों पर स्थित हैं – एल1604 लगभग 816 पारसेक की दूरी पर और एल121 लगभग सात गुना कम दूरी पर, मात्र 124 पारसेक की दूरी पर। एल1604 बादल अत्यधिक घना और अधिक विशाल है और इसमें कई नए तारे बनाने के लिए पर्याप्त पदार्थ मौजूद है। एल121 आकाशगंगा के केंद्र की ओर स्थित है। यह एल1604 की तुलना में कम घना और कम विशाल है, लेकिन इसका चुंबकीय क्षेत्र अधिक मजबूत है। इसके अलावा, इसके चुंबकीय क्षेत्र की संरचना अधिक व्यवस्थित प्रतीत होती है, जिससे पता चलता है कि यह अभी तक उस तीव्र गुरुत्वाकर्षण पतन से प्रभावित नहीं हुआ है जो अधिक सक्रिय तारा-निर्माण क्षेत्रों की विशेषता है।

चित्र: काले बादलों एल1604 और एल121 के ध्रुवीकरण मानचित्र। ठोस रेखाएं संबंधित पृष्ठभूमि तारों के ध्रुवीकरण सदिश को दर्शाती हैंजिन्हें संबंधित बादलों की समग्र डीएसएस छवियों पर अंकित किया गया है। आकाशगंगा तल की दिशा को एक खंडित रेखा से दर्शाया गया है। क्रॉस प्रत्येक बादल की केंद्रीय स्थिति को दर्शाता है। हर्शेल स्पायर 500 μधूल-कण के निरंतर उत्सर्जन की रूपरेखा भी अंकित की गई है।

चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता का आकलन करके वैज्ञानिकों ने पाया कि दोनों बादल ठोस रूप से दूसरे दर्जे की महत्वपूर्ण अवस्था में हैं, जिसका अर्थ है कि चुंबकीय क्षेत्र दोनों बादलों के पूरे भाग में गुरुत्वाकर्षण पतन का प्रतिरोध करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत हैं। चुंबकीय क्षेत्र केवल “मुश्किल से” ही टिके नहीं हैं – वे गुरुत्वाकर्षण और व्यवधान दोनों पर हावी हैं, जहां चुंबकीय ऊर्जा अशांत गतिज ऊर्जा से अधिक है, जो इसके परिणामस्वरूप आवरण स्तर पर गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा से अधिक है। हालांकि, इन बादलों के भीतर गहराई में स्थित घने कोर में, गुरुत्वाकर्षण धीरे-धीरे हावी हो रहा है, जिससे ये कोर भविष्य में तारों के जन्म के वास्तविक केंद्र बन रहे हैं, भले ही आसपास का आवरण चुंबकीय रूप से सुरक्षित रहे।

यह कहानी सिर्फ दो बादलों के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक तारे के निर्माण की विधि के बारे में है। यह अध्ययन दर्शाता है कि चुंबकीय क्षेत्र किस प्रकार इन छोटे बादलों को घेरते हैं और उनमें व्याप्त होते हैं। साथ ही, यह बताता है कि चुंबकत्व ही वह अदृश्य शक्ति है जो तारा निर्माण की प्रक्रिया को धीमा करती है, जिससे आकाशगंगा अपनी सारी गैस को एक साथ तारों में परिवर्तित होने से रोकती है।

एल1604 और एल121 अब मानचित्र पर केवल काले धब्बे मात्र नहीं हैं; वे सक्रिय प्रयोगशालाएं हैं जहां हम ब्रह्मांड की मूलभूत शक्तियों, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकत्व को लाखों वर्षों के नाजुक आलिंगन में नृत्य करते हुए देख सकते हैं।

प्रकाशन का लिंक:

https://academic.oup.com/mnras/article/545/4/staf2228/8382486?login=true

राँची कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में ईद/सरहुल/ रामनवमी को लेकर निकालने वाला शोभा यात्रा और जुलूस रूट और संवेदनशील मार्गों का ड्रोन के माध्यम से निरीक्षण किया गया

राँची,20.03.2026 – राँची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में आज दूसरे दिन भी कोतवाली,सुखदेवनगर, डेली मार्केट और हिंदपीड़ी क्षेत्र में ईद/सरहुल/ रामनवमी को लेकर निकलने वाला शोभा यात्रा /जुलूस रूट और संवेदनशील मार्गों का ड्रोन के माध्यम से निरीक्षण किया गया

 जिस क्षेत्र का निरीक्षण किया गया वो हनुमान मंदिर, उर्दू लाइबरी, लेक रोड, बड़ा तालाब, अंजुमन प्लाजा, एकरा मस्जिद, संग्राम चौक, पुरानी राँची, अपर बाज़ार और महावीर चौक शामिल हैं.

************************

 

राँची जिले में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय समिति का गठन

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया

निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी

उल्लंघन की स्थिति में ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, दोषी विद्यालय की मान्यता समाप्त करने हेतु उचित कार्रवाई की जाएगी

अनुरोध है कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें

नई दिल्ली – झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुपालन में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया है।

निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी

इस अधिनियम के आलोक में, निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलने वाले विद्यालयों पर जिला स्तरीय कमिटी द्वारा उचित निर्णय लिया जा सकेगा। कमिटी के गठन से निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।

जिला स्तरीय कमिटी के सदस्य निम्नलिखित हैं:

*अध्यक्ष: उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची

*सदस्य: जिला शिक्षा पदाधिकारी

* सदस्य: जिला शिक्षा अधीक्षक

*सदस्य: जिला परिवहन पदाधिकारी

*सदस्य: एक सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटेंट)

*सदस्य: निजी विद्यालयों के दो प्राचार्य – गुरूनानक सीनियर सेकेण्डरी स्कूल, राँची एवं डी.ए.वी. कपिलदेव, राँची

* सदस्य: दिल्ली पब्लिक स्कूल, राँची के एक अभिभावक

* सदस्य: जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली, राँची के एक अभिभावक

इसके अतिरिक्त, राँची जिले के सभी माननीय सांसद एवं विधायकगण भी इस समिति के सदस्य हैं।

महत्वपूर्ण प्रावधान एवं निर्देश:

* प्रत्येक निजी विद्यालय को विद्यालय स्तरीय शुल्क निर्धारण कमिटी के साथ-साथ अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का भी गठन करना अनिवार्य होगा।

*कमिटी के गठन एवं सदस्यों की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए।

* जिला स्तरीय कमिटी को शुल्क निर्धारण के साथ-साथ गवाहों को सम्मन जारी करने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण एवं साक्ष्यों की प्राप्ति का पूर्ण अधिकार होगा।

* विद्यालय परिसर में पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्रियों का क्रय-विक्रय नहीं किया जाएगा। विद्यालय किसी विशेष प्रतिष्ठान से सामग्री खरीदने हेतु अभिभावकों/छात्रों को बाध्य या प्रेरित नहीं कर सकेगा।

* अधिनियम की धारा 7(अ)(3) के अनुसार, विद्यालय भवन एवं परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। कियोस्क या अन्य माध्यमों से अनिवार्य खरीद पर रोक रहेगी।

* उल्लंघन की स्थिति में ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, दोषी विद्यालय की मान्यता समाप्त करने हेतु उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह कदम अभिभावकों के हित में एवं शिक्षा की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी निजी विद्यालयों से अनुरोध है कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर जिला स्तरीय कमिटी से संपर्क करें।

***************************

 

वस्त्र मंत्रालय की सचिव ने जूट की खेती की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की; पूर्वोत्तर क्षेत्र में जूट मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

नई दिल्ली  – वस्त्र मंत्रालय की ओर से आज मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव की अध्यक्षता में जूट पर राज्य कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें जूट की खेती की स्थिति और मौजूदा फसल सीजन के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई।

सम्मेलन में असम, ओडिशा, नागालैंड और मेघालय सहित प्रमुख जूट उत्पादक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं था। बैठक में जूट विकास निदेशालय (डीओजेडी), आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ, राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी), जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और इसरो के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

बैठक में निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई :

  • बुवाई की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रफल
  • प्रमाणित जूट बीजों की उपलब्धता और वितरण
  • उन्नत कृषि पद्धतियों के कार्यान्वयन की स्थिति
  • अपगलन (गीला करना) अभ्यास और फाइबर की गुणवत्ता में सुधार के लिए तैयारी

मंत्रालय ने जूट-आईसीएआरई (बेहतर कृषि और उन्नत अपगलन अभ्यास) योजना के निरंतर कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जो बेहतर बीज वितरण, मशीनीकरण उपकरणों और क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को सहायता प्रदान करती है।

बैठक के दौरान एनआरएससी और इसरो ने जूट फसल सूचना प्रणाली प्रस्तुत की। इसमें फसल की निगरानी, रकबे का अनुमान लगाने और निर्णय लेने में सहायता के लिए भू-स्थानिक तकनीकों के उपयोग को प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित योजना और निगरानी को मजबूत करना है।

इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में जूट की खेती को लेकर कच्चे माल की आपूर्ति और ग्राहक या वितरक के संपर्कों को मजबूत के लिए पूर्वोत्तर हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी), राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) और जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य निम्नलिखित को सुगम बनाना है :

  • जूट किसानों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति
  • खरीद और संग्रह करने की पद्धतियों को सुदृढ़ बनाना
  • क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना

वस्त्र सचिव ने निम्नलिखित की आवश्यकता पर जोर दिया :

  • प्रमाणित जूट बीजों की उच्च उपज देने वाली किस्मों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना
  • अपगलन अभ्यास अवसंरचना और प्रक्रियाओं को मजबूत करना
  • कठिन परिश्रम को कम करने के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देना
  • केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बनाना

सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्यों को जमीनी स्तर पर हुई प्रगति की बारीकी से निगरानी करने और सीजन के दौरान परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय उपाय करने की सलाह दी गई।

मंत्रालय ने देश में जूट की खेती के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्पादकता, फाइबर की गुणवत्ता और किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से समन्वित प्रयासों के माध्यम से जूट क्षेत्र का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

*********************

 

उपराष्ट्रपति ने नव संवत्सर, चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेटीचंड, नवरेह, साजिबू चेइराओबा और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले पारंपरिक नव वर्ष उत्सव के अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दी हैं।

उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में नव संवत्सर, चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेटीचंड, नवरेह, साजिबू चेइराओबा और चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ जैसे शुभ अवसरों पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मनाए जाने वाले ये त्योहार पारंपरिक नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक हैं, वसंत ऋतु के आगमन की घोषणा हैं और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता की अटूट भावना को दर्शाते हैं।

उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि ये शुभ अवसर सभी नागरिकों के बीच खुशी, समृद्धि और आशावाद की एक नई भावना लेकर आएंगे।

*********************

 

6 से 18 आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों हेतु जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता, फुटबॉल, एथलेटिक्स, सॉफ्टबॉल एवं अन्य प्रकार के मनोरंजक खेल का आयोजन

राज्य सरकार के समावेशी शिक्षा के आलोक में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशन में 

मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय बरियातू में आयोजन

खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत फुटबॉल, 100 मीटर एवं 50 मी. दौड़, म्यूजिकल चेयर रेस, चम्मच गोली रेस, 20 मी. बिस्किट रेस, चक्का फेंक, बॉल थ्रो बास्केट इत्यादि का आयोजन किया गया

प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया

खेलकूद प्रतियोगिता की समाप्ति के उपरांत बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण अंतर्गत साइंस सिटी का भ्रमण कराया गया

राँची,20.03.2026 – राज्य सरकार के समावेशी शिक्षा के आलोक में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशन में 6 से 18 आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों हेतु जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता, फुटबॉल, एथलेटिक्स, सॉफ्टबॉल एवं अन्य प्रकार के मनोरंजक खेल का आयोजन मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय बरियातू में किया गया।

साथ ही साथ शैक्षणिक भ्रमण साइंस सिटी, राँची में जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। रांची जिले के सभी प्रखंडों से आए बच्चों ने खेलकूद प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लिया। खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत फुटबॉल, 100 मीटर एवं 50 मी. दौड़, म्यूजिकल चेयर रेस, चम्मच गोली रेस, 20 मी. बिस्किट रेस, चक्का फेंक, बॉल थ्रो बास्केट इत्यादि का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी बच्चों को इस अवसर पर टी शर्ट भी प्रदान किया गया। खेलकूद प्रतियोगिता की समाप्ति के उपरांत बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण अंतर्गत साइंस सिटी का भ्रमण कराया गया। साइंस सिटी में अवस्थित विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों को बच्चों ने बहुत ही रुचि लेकर देखा एवं केंद्र में अवस्थित 3D एनीमेशन का भी आनंद उठाया। सभी बच्चे उक्त आयोजन से बहुत ही प्रफुल्लित नजर आए।

कार्यक्रम के सफल संचालन में जिले के शारीरिक शिक्षा शिक्षक, समावेशी शिक्षा अंतर्गत कार्यरत रिसोर्स शिक्षक, थेरेपिस्ट, आभा कुमारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रांची सदर, अखिलेश कुमार एवं सतीश कुमार मिश्र, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी एवं पंकज कुमार अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का योगदान रहा।

************************

 

माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आगामी पर्वाें के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था संधारण हेतु दिये गये निर्देश के आलोक में बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

ईद, सरहुल एवं रामनवमी में माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश

संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष सतर्कता बरतने, जुलूस एवं शोभायात्रा रुट का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश

सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश

अभिभावकों से जिला प्रशासन की अपील, पर्व के दौरान बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिखकर रखें

रांची,19.03.2026 – माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्वों के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु दिये गये निर्देशों के आलोक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक का उद्देश्य सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए पर्वों के दौरान शांति, सौहार्द एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक नगर श्री पारस राणा, पुलिस अधीक्षक यातायात श्री राकेश सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर श्री कुमार रजत, उपसमाहर्त्ता नजारत श्री सुदेश कुमार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सभी पदाधिकारी माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूर्व से ही समुचित तैयारी रखें। उन्होंने निर्देश दिया कि संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए तथा पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की तैनाती की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

ईद पर्व के दौरान सभी ईदगाहों एवं नमाज स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को साफ-सफाई एवं पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि पर्व के दौरान आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए, इसके लिए सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

सरहुल एवं रामनवमी पर्व के अवसर पर निकलने वाली शोभायात्राओं को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी निर्धारित रूटों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) किया जाए तथा मार्ग में आने वाली संभावित बाधाओं को पूर्व में ही दूर कर लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शोभायात्राओं के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने हेतु प्रभावी ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए। साथ ही पर्याप्त दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की जाए।

बैठक में सरना समितियों एवं रामनवमी पूजा समितियों से अपील की गयी कि वे माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। झंडों एवं झांकियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने का आग्रह किया गया। साथ ही कहा कि कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मोटरसाइकिल रैली न निकालें।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पर्वों के दौरान संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण एवं त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा की गयी। अभिभावकों से अपील की गयी कि वे सरहुल एवं रामनवमी के दौरान अपने बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिखकर रखें, ताकि यदि बच्चे भीड़ में बिछड़ जाते हैं तो उन्हें शीघ्र उनके अभिभावकों से मिलाया जा सके।

सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के भड़काऊ, आपत्तिजनक या अफवाह फैलाने वाले पोस्ट, वीडियो अथवा संदेशों पर प्रशासन द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके लिए साइबर सेल एवं संबंधित एजेंसियों को सक्रिय रखते हुए लगातार मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें तथा यह सुनिश्चित करें कि सभी पर्व शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न हों। उन्होंने आम नागरिकों से भी प्रशासन का सहयोग करने एवं आपसी भाईचारे एवं सद्भाव की परंपरा को बनाए रखने की अपील की।

***************************

 

रांची नगर निगम अंतर्गत उपमहापौर एवं बुंडू नगर पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव संपन्न

38 वोट के साथ नीरज कुमार रांची नगर निगम के उपमहापौर निर्वाचित, परमजीत सिंह को मिले 15 वोट

मेयर रोशनी खलखो ने नीरज कुमार को दिलायी पद एवं गोपनीयता की शपथ

रवीन्द्र उरांव निर्विरोध बुण्डू नगर पंचायत उपाध्यक्ष निर्वाचित

रांची,19.03.2026 – रांची नगर निगम उपमहापौर एवं बुंडू नगर पंचायत उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समाहरणालय सभागार में लोकतांत्रिक परंपराओं का अनुपालन करते हुए जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन किया गया।

रांची नगर निगम के उपमहापौर पद के लिए हुए चुनाव में नीरज कुमार ने 38 मत प्राप्त कर विजय हासिल की। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी परमजीत सिंह को 15 मत प्राप्त हुए। स्पष्ट बहुमत के साथ नीरज कुमार को उपमहापौर निर्वाचित घोषित किया गया।

निर्वाचन उपरांत रांची नगर निगम की महापौर रोशनी खलखो द्वारा समाहरणालय सभागार में नीरज कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने नव-निर्वाचित उपमहापौर को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

वहीं, बुंडू नगर पंचायत में उपाध्यक्ष पद के लिए रवीन्द्र उरांव निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।

इस दौरान प्रशासनिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

**************************

 

रांची नगर निगम एवं बुंडू नगर पंचायत के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण सम्पन्न

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ

रांची,19.03.2026 – रांची नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों तथा बुंडू नगर पंचायत के अध्यक्ष एवं वार्ड सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आज समाहरणालय भवन, ब्लॉक-A के कमरा संख्या-207 एवं 608 में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। समारोह के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं जनसेवा की भावना के साथ करने का संकल्प लिया।

शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रशासनिक पदाधिकारियों, संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का आयोजन सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण तरीके से किया गया।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि नगर विकास, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी जनप्रतिनिधि आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए शहर एवं क्षेत्र के समग्र विकास में सक्रिय योगदान देंगे।

शपथ ग्रहण के दौरान अपर समाहर्ता रांची, एडीएम (नक्सल), जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी-सह-पंचायती राज पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

**************************

 

संसद प्रश्न: परमाणु ईंधन चक्र में स्वदेशी क्षमता में वृद्धि

नई दिल्ली – भारत में यूरेनियम अयस्क के खनन और प्रसंस्करण के लिए अधिकृत परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने यूरेनियम खनन की स्वदेशी क्षमता को बढ़ाने के लिए पहल की है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप नई यूरेनियम खनन परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बनाई है। राजस्थान के सीकर जिले के रोहिल में 2,500 टन प्रति दिन की क्षमता वाली खदान और मिल स्थापित करने तथा छत्तीसगढ़ के जाजवाल यूरेनियम परियोजना में एक और खदान और मिल स्थापित करने की पहल की है, जो वैधानिक मंजूरी प्राप्त करने के विभिन्न चरणों में हैं।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली परमाणु ईंधन परिसर (एनएफसी) परमाणु न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के लिए स्वदेशी रूप से ईंधन असेंबली का निर्माण करती है। न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यूरेनियम को कच्चे माल के रूप में उपयोग करके प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और बॉइलिंग वाटर रिएक्टर (बीडब्ल्यूआर) संचालित करता है, जिसकी आपूर्ति यूसीआईएल से की जाती है और आयात भी किया जाता है। एनएफसी ने एनपीसीआईएल के रिएक्टर तैनाती कार्यक्रम और यूसीआईएल से प्राप्त आपूर्ति के अनुसार समय-समय पर अपनी ईंधन उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए पहल की है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसंधान एवं विकास इकाई और परमाणु पुनर्चक्रण बोर्ड (एनआरबी) तारापुर स्थित एकीकृत परमाणु पुनर्चक्रण संयंत्र (आईएनआरपी) तथा कल्पक्कम स्थित तीव्र रिएक्टर ईंधन चक्र सुविधा (एफआरएफसीएफ) में घरेलू स्रोतों से प्राप्त प्रयुक्त ईंधन के पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रबंधन तथा तीव्र रिएक्टरों के लिए ईंधन निर्माण हेतु उच्च क्षमता वाली एकीकृत परमाणु पुनर्चक्रण सुविधाओं का निर्माण कर रहे हैं। इन सुविधाओं से देश में ईंधन निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन की स्वदेशी क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

खनन और ईंधन निर्माण क्षेत्रों में की गई पहलों और एकीकृत परमाणु सुविधाओं के चालू होने से प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर के लिए ईंधन का उत्पादन बढ़ेगा और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के लिए मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। तारापुर और कलपक्कम में स्थित परमाणु पुनर्चक्रण सुविधाओं के अंतर्गत नए ईंधन निर्माण संयंत्र फास्ट रिएक्टरों के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

**********************

 

संसदीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया

नई दिल्ली – संसदीय कार्य मंत्रालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), जनजातीय छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) और संबंधित विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के साथ समन्वय में, संबंधित दिशानिर्देशों के तहत केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं का वार्षिक आयोजन करता है। प्रतियोगिताओं का उद्देश्य लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना, अनुशासन की स्वस्थ आदतों को विकसित करना, दूसरों के दृष्टिकोण के प्रति सहिष्णुता बढ़ाना, और छात्रों को संसद और संसदीय संस्थानों के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।

सीमित संख्या में शैक्षणिक संस्थान/विद्यार्थी ही राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं, जो भौतिक रूप में आयोजित की जाती हैं। दूसरी ओर, पूरे देश के सभी नागरिक/सभी शैक्षणिक संस्थानों/समूहों के विद्यार्थी और यहां तक कि व्यक्तिगत रूप से भी राष्ट्रीय युवा संसद योजना (एनवाईपीएस 2.0) में भाग ले सकते हैं, जो डिजिटल मोड में आयोजित की जाती है। वेब-पोर्टल आधारित एनवाईपीएस 2.0 में भागीदारी; संस्थागत भागीदारी, समूह भागीदारी और व्यक्तिगत भागीदारी के माध्यम से की जा सकती है। व्यक्तिगत भागीदारी श्रेणी के तहत, व्यक्तिगत नागरिक ‘भारतीय लोकतंत्र के कार्य’ थीम पर क्विज़ में प्रयास करके भाग ले सकते हैं। व्यक्तिगत भागीदारी के तहत 44,000 से अधिक व्यक्तिगत नागरिकों ने भाग लिया है।

युवा संसद प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को वित्तीय सहायता के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों द्वारा किए गए वास्तविक व्यय को संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमाओं तक प्रतिपूर्ति दी जाती है, बशर्ते उनसे दावा प्राप्त हो। जिन संघ शासित क्षेत्रों में विधानमंडल नहीं है, उनके लिए प्रत्यक्ष सीमा प्रत्येक संघ शासित क्षेत्र प्रति वर्ष ₹2 लाख है। चालू वित्त वर्ष के दौरान, अब तक किसी भी संघ शासित क्षेत्र, जिनके पास विधानमंडल नहीं है, से कोई प्रतिपूर्ति दावा प्राप्त नहीं हुआ है।

यह जानकारी केंद्रीय विधि और न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोक सभा में लिखित उत्तर में दी।

*************************

 

सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 लागू किया

सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाया और एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम को प्रोत्साहन दिया

नई दिल्ली – सरकार देश में एक सुरक्षित, जिम्मेदार और जवाबदेह ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी संदर्भ में, सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स में नवाचार को प्रोत्साहन देने और ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन अधिनियम, 2025 (“गेमिंग अधिनियम”) लागू कर दिया है।

गेमिंग अधिनियम के अंतर्गत ऑनलाइन मनी गेम्स के सभी रूपों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है, चाहे वे संयोग के खेल हों, कौशल के खेल हों या दोनों का संयोजन हों। यह अधिनियम ऐसे खेलों के विज्ञापन, प्रचार और सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ बैंकों या भुगतान प्रणालियों के माध्यम से संबंधित वित्तीय लेनदेन के प्रसंस्करण पर भी रोक लगाता है। अधिनियम अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत अवैध प्लेटफार्म तक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार भी देता है।

गेमिंग अधिनियम के उल्लंघन के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश करना या ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स के लिए वित्तीय लेनदेन की सुविधा प्रदान करना तीन वर्ष तक की कैद या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों का दंड हो सकता है। ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश करने या इसकी सुविधा प्रदान करने के लिए दूसरी/बाद की सजा पर कम से कम 3 वर्ष की कैद हो सकती है जिसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है जिसे दो करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करना दो वर्ष तक की कैद या पचास लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों के साथ दंडनीय है। ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करने के लिए दूसरी/बाद की सजा पर कम से कम 2 वर्ष की कैद हो सकती है जिसे 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम पचास लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है जिसे एक करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

उपरोक्त के अतिरिक्त, गेमिंग अधिनियम ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स की मान्यता और प्रचार, भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना, ऑनलाइन गेम्स के लिए एक पारदर्शी पंजीकरण व्यवस्था, उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत निवारण प्रणाली और प्रतिबंधित ऑनलाइन मनी गेम्स तथा उनसे संबंधित नुकसानों से सुरक्षा का भी प्रावधान करता है।

राष्ट्रीय स्तर पर गठित ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण अनुमत खेलों का वर्गीकरण और पंजीकरण करने, यह निर्धारित करने कि कोई खेल धन-आधारित खेल है या नहीं, आचार संहिता जारी करने और जनता की शिकायतों का समाधान करने के लिए जिम्मेदार होगा। केंद्रीय नियामक प्राधिकरण को सशक्त बनाकर, अधिनियम का उद्देश्य समन्वित नीतिगत समर्थन, प्रभावी निगरानी प्रदान करना और भारत को ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी विकास राष्ट्रीय हित और उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गेमिंग अधिनियम को लागू करने के उद्देश्य से 2 अक्टूबर, 2025 को ऑनलाइन गेमिंग प्रचार और विनियमन नियम, 2025 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित किया था। कानून निर्माण के प्रति सरकार की समावेशी दृष्टिकोण की प्रतिबद्धता के अनुरूप, हितधारकों सहित जनता से प्रतिक्रिया आमंत्रित की गई थी।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा श्री राव राजेंद्र सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी आज लोकसभा में प्रस्तुत की गई।

***********************

 

वित्तीय अंतरण के माध्यम से ग्राम पंचायतों का सुदृढ़ीकरण

नई दिल्ली – ‘पंचायत’, ‘स्थानीय सरकार’ होने के नाते, राज्य का विषय है और भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का हिस्सा है। पंचायतेँ संबंधित राज्य के पंचायती राज अधिनियमों के माध्यम से स्थापित की जाती हैं और संचालित होती हैं, जो संविधान के प्रावधानों के अधीन, हर राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं। पंचायतों का प्रदर्शन और विकास, संबंधित राज्यों द्वारा उन्हें हस्तांतरित किए गए अधिकारों और संसाधनों की मात्रा पर निर्भर करता है। तदनुसार, पंचायतों से संबंधित सभी विषय, जिनमें पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) का प्रभावी कार्य निष्पादन, पीआरआई की जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना, तथा उनके प्रदर्शन की निगरानी एवं मूल्यांकन शामिल हैं, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालाँकि, भारत के संविधान का अनुच्छेद 280(3)(ख ख) केंद्रीय वित्त आयोगों को यह आधार प्रदान करता है कि वे राज्य के पंचायतों के संसाधनों को पूरक करने के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाने हेतु अनुदान की सिफारिश कर सकें।

चौदहवें वित्त आयोग (FFC) के अवॉर्ड अवधि वित्तीय वर्ष2015-16 से 2019-20के अंतर्गत, 26 राज्यों (केरल सहित)में संविधान के भाग IX के तहत गठित ग्राम पंचायतों के लिए ₹2,00,292.20 करोड़ आवंटित किए गए थे। इन निधियों का उपयोग मूलभूत सेवाओं की आपूर्ति, जिनमें जलापूर्ति, स्वच्छता (सेप्टिक प्रबंधन सहित), सीवरेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल निकासी, सड़कों और फुटपाथों का रखरखाव आदि शामिल हैं के लिए किया जाना था। इस कुल आवंटन में से ₹ 1,83,248.54 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इसमें केरल को जारी किए गए ₹ 3774.20 करोड़ शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत ₹ 60,750 करोड़ की राशि अंतरिम अवधि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आवंटित की गई तथा ₹ 2,36,805 करोड़ की राशि वित्तीय वर्ष 2021-26 की अवधि के लिए पंचायतों (सभी तीन स्तरों पर), पारंपरिक स्थानीय निकायों तथा छठी अनुसूची क्षेत्रों में 28 राज्यों (केरल सहित) को आवंटित की गई। कुल आवंटन में से ₹ 2,67,250.78 करोड़ (दिनांक 11.03.2026 तक) जारी किए जा चुके हैं। इसमें केरल को जारी किए गए ₹ 7,321.50 करोड़ शामिल हैं।इस अनुदान को आगे दो भागों में विभाजित किया गया है—मूल (अबंधित) अनुदान, जिसे भारत के संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, परंतु वेतन और अन्य स्थापना व्यय के लिए नहीं। बंधित अनुदान, जिसका उपयोग विशेष रूप से पेयजल और स्वच्छता क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए किया जाना है।

पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और अनुप्रयोग विकसित किए हैं, ताकि देश के ग्रामीण स्थानीय शासन (केरल राज्य सहित) में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाई जा सके। इस मंत्रालय ने ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in) नामक एक उपयोगकर्ता-अनुकूल वेब-आधारित पोर्टल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य विकेन्द्रीकृत योजना, प्रगति रिपोर्टिंग, वित्तीय प्रबंधन, कार्य-आधारित लेखांकन और निर्मित परिसंपत्तियों के विवरण में बेहतर पारदर्शिता लाना है। इस अनुप्रयोग को आगे सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), और ऑडिटऑनलाइन अनुप्रयोगों के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि भुगतान में आसानी, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और पंचायत खातों का लेखा-परीक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान देशभर के कुल 2,64,211 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों में से 2,54,604 (96.36%) ने अपनी ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ ई-ग्रामस्वराज पर अपलोड की हैं और 2,42,871 (91.92%)ने ई-ग्रामस्वराज–पीएफएमएस इंटरफ़ेस के माध्यम से विक्रेताओं को ₹38,491 करोड़ का भुगतान किया है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में2.58 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थाओं ने अपने अनंतिम खातों को बंद किया है और 1.63 लाख पंचायती राज संस्थाओं ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान सभी राज्यों (केरल सहित) को आवंटित और जारी की गई निधियों का विवरण अनुबंध में प्रस्तुत किया गया है।

अनुबंध

पिछले तीन वर्षों के दौरान (दिनांक11.03.2026 तक) ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत अनुशंसित और जारी किए गए अनुदानों का राज्यवार विवरण

(रुकरोड़ में)

क्रसं राज्य 2023-24 2024-25 2025-26
आवंटन जारी आवंटन जारी आवंटन जारी
1 आंध्र प्रदेश 2031.00 1997.45 2152.00 2109.97 2099.00 2053.81
2 अरूणाचल प्रदेश 179.00 0.00 189.00 0.00 185.00 0.00
3 असम 1241.00 1241.00 1315.00 1315.00 1283.00 1283.00
4 बिहार 3884.00 3855.33 4114.00 4109.01 4012.00 2806.31
5 छत्तीसगढ़ 1125.00 1125.00 1192.00 1185.25 1163.00 802.06
6 गोवा 58.00 36.13 62.00 0.00 61.00 0.00
7 गुजरात 2473.00 2473.00 2619.00 2619.00 2555.00 1782.04
8 हरियाणा 979.00 953.59 1036.00 1012.51 1011.00 988.14
9 हिमाचल प्रदेश 332.00 318.04 352.00 352.00 343.00 341.50
10 झारखण्ड 1307.00 1307.00 1385.00 962.94 1351.00 0.00
11 कर्नाटक 2490.00 2086.59 2637.00 2133.25 2572.00 0.00
12 केरल 1260.00 1260.00 1334.00 1334.00 1301.00 650.50
13 मध्य प्रदेश 3083.00 2923.89 3265.00 3262.75 3185.00 630.65
14 महाराष्ट्र 4510.00 3629.21 4776.00 3169.72 4659.00 2507.25
15 मणिपुर 137.00 0.00 145.00 0.00 142.00 0.00
16 मेघालय 141.00 0.00 149.00 0.00 146.00 0.00
17 मिजोरम 72.00 72.00 76.00 76.00 74.00 37.00
18 नागालैंड 97.00 0.00 102.00 0.00 99.00 0.00
19 ओड़िशा 1747.00 1746.91 1851.00 1851.00 1805.00 1712.98
20 पंजाब 1074.00 1058.35 1138.00 1127.86 1110.00 555.00
21 राजस्थान 2989.00 2847.96 3166.00 3166.00 3087.00 757.60
22 सिक्किम 33.00 33.00 35.00 32.78 33.00 22.85
23 तमिलनाडु 2791.00 2791.00 2957.00 2957.00 2884.00 637.93
24 तेलंगाना 1430.00 1430.00 1514.00 640.07 1477.00 0.00
25 त्रिपुरा 148.00 148.00 157.00 156.31 153.00 153.00
26 उत्तर प्रदेश 7547.00 7547.00 7994.00 7994.00 7797.00 5441.38
27 उत्तराखण्ड 445.00 444.13 471.00 470.30 458.00 89.41
28 पश्चिम बंगाल 3415.00 3415.00 3617.00 3472.22 3528.00 3403.92
  कुल 47018.00 44739.57 49800.00 45508.95 48573.00 26656.33

 

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 18 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

************************

 

सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में दूरसंचार का विस्तार नए विकास प्रतिमान दर्शाता है: लोकसभा में केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

नई दिल्ली – केन्‍द्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज लोकसभा को भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी, और समावेशी डिजिटल अवसंरचना की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयासों पर बल दिया।

 

सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में मोबाइल टावर कनेक्टिविटी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में केन्‍द्रीय मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की पहली बस्ती से 0 से 50 किलोमीटर के भीतर स्थित गाँवों को सीमावर्ती गाँव के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत इन बस्तियों को अब देश के “अंतिम गाँव” नहीं, बल्कि “प्रथम गाँव” माना जाता है, जो विकास प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है।

केन्‍द्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने दूरसंचार क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाया है। उन्होंने बताया कि बीएसएनएल के लिए स्वदेशी 4जी टेलीकॉम स्टैक का विकास महत्वपूर्ण दूरसंचार उपकरणों के घरेलू निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी क्षमताएँ हैं।

बीएसएनएल के पुनरुद्धार का उल्लेख करते हुए केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि इस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ने वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान लगभग 18 वर्षों में तिमाही में पहली बार शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इसके ग्राहक आधार में 8.55 करोड़ से बढ़कर 9.27 करोड़ तक वृद्धि हुई है, जो उपभोक्ताओं के नए विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने आगे बताया कि 1,00,000 4जी टावर स्थापित किए जा चुके हैं और आगे विस्तार की योजना है, तथा 4जी नेटवर्क के स्थिर होने के बाद 5जी सेवाएँ शुरू की जाएंगी।

केन्‍द्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि जिन आबाद गाँवों में अब तक मोबाइल कवरेज नहीं है, वहाँ दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा उनकी तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के आधार पर सेवा प्रदान की जा रही है। सरकार ने डिजिटल भारत निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों, जिसमें राजस्थान भी शामिल है, में दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए अनेक योजनाओं को मंजूरी दी है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 97.28 प्रतिशत गाँवों और स्थानों पर पहले से ही मोबाइल कवरेज उपलब्ध है। इसके अलावा, सरकार ने देशभर में, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, मोबाइल कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं।

इनमें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंसिंग शर्तों में संशोधन शामिल है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास मोबाइल टावर स्थापित करने पर लगी पाबंदियों को हटाया जा सके। इसके साथ ही, दूरसंचार कानून, 2023 के तहत अधिसूचित दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम, 2024 को लागू किया गया है, जिससे दूरसंचार अवसंरचना के तेजी से और आसानी से विस्तार को संभव बनाया जा सके। गति शक्ति संचार पोर्टल भी शुरू किया गया है, ताकि किसी अन्‍य व्‍यक्ति की जमीन का उपयोग करने के कानूनी अधिकार की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

उत्तराखंड में प्रगति को उजागर करते हुए श्री सिंधिया ने बताया कि पहचाने गए 705 सीमावर्ती गाँवों में से 684 को पहले ही दूरसंचार कनेक्टिविटी प्रदान की जा चुकी है। शेष गाँवों में भी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं, जिनमें डिजिटल भारत निधि योजना के तहत लक्षित हस्तक्षेप शामिल हैं।

श्री सिंधिया ने जोर देकर कहा कि आज भारत के पास विश्व के सबसे व्यापक दूरसंचार नेटवर्कों में से एक नेटवर्क है, जो यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी बड़े पैमाने की डिजिटल सेवाओं को सक्षम बना रहा है। उन्होंने कहा कि किफायती, व्यापक और तेज़ तकनीकी अपनाने की वजह से भारत डिजिटल संचार के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है।

ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पर उन्होंने भारतनेट कार्यक्रम के तहत हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि 2,15,000 से अधिक ग्राम पंचायतों को पहले ही जोड़ा जा चुका है। लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित भारतनेट पहल विश्व के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक है। नेटवर्क को रिंग टोपोलॉजी में उन्नत किया जा रहा है, ताकि अधिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके, साथ ही मांग-आधारित तरीके से अतिरिक्त गाँवों को भी जोड़ा जा रहा है। केन्‍द्रीय मंत्री ने जोर देकर यह भी कहा कि पिछले एक दशक में भारत की दूरसंचार क्रांति ने डेटा की लागत को लगभग 97 प्रतिशत तक कम कर दिया है, साथ ही मोबाइल अवसंरचना का व्यापक विस्तार किया है और देशभर में 5जी सेवाओं के तेज़ी से विस्तार को संभव बनाया है।

उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि देश के सभी क्षेत्रों, विशेषकर सीमा और दूरस्थ इलाकों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

*************************

 

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 – देश के विद्युत भविष्य को आकार देने के लिए नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक मंच पर लाना

नई दिल्ली –  भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 विद्युत और बिजली क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वैश्विक सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी है। यह सम्मेलन 19 से 22 मार्च 2026 तक यशोभूमिनई दिल्ली में आयोजित होगा।

इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक उच्च स्तरीय सम्मेलन सत्रों, 300 से अधिक वक्ताओं, 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, 100 से अधिक स्टार्टअप सहित 500 से अधिक प्रदर्शकों और 25,000 से अधिक आगंतुकों के शामिल होने की उम्मीद है, जो इसे विश्व स्तर पर बिजली पर केंद्रित सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक बनाता है।

विकास को तीव्र करना, निरंतरता को सशक्त बनाना, वैश्विक स्तर पर जुड़ना विषय पर आधारित इस शिखर सम्मेलन में एक व्यापक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें रणनीतिक सम्मेलन, तकनीकी सम्मेलन, नेतृत्व पैनल और उद्योग जगत के साथ केंद्रित संवाद सहित कई उच्च स्तरीय सत्र होंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक विद्युत क्षेत्र के विकास के अगले चरण को आकार देना है।

इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के कई देशों के ऊर्जा मंत्री, देश के विभिन्न राज्यों के मंत्री और केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से मजबूत भागीदारी इस शिखर सम्मेलन को बिजली और स्वच्छ ऊर्जा परितंत्र में संवाद, सहयोग और नवाचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों में से एक के रूप में स्थापित करती है।

इस शिखर सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल; उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी; विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक; केंद्र सरकार के विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल; केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद; 10 देशों के ऊर्जा मंत्री, 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विद्युत मंत्री एवं सचिव, लगभग 60 देशों के राजदूत और सभी केंद्रीय विद्युत क्षेत्र उद्यमों के प्रमुखों सहित 100 से अधिक सीईओ शामिल होंगे।

इस प्रकार, यह आयोजन भारत के विकसित होते विद्युत परितंत्र को आकार देने वाली प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए वरिष्ठ नीति निर्माताओं, नियामकों, शिक्षाविदों, क्षेत्र विशेषज्ञों, उपयोगिता कंपनियों, निवेशकों, नवोन्मेषकों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक साथ लाएगा।

यह शिखर सम्मेलन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विक्रेता विकास पर विशेष बल देगा, जिसमें उत्सर्जन प्रणालियों, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, पारेषण अवसंरचना और डिजिटल वितरण प्रौद्योगिकियों सहित प्रमुख तकनीकों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वर्ष 2032 तक उत्पादन, पारेषण, वितरण और ऊर्जा भंडारण में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसरों के साथ इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य देश के विद्युत क्षेत्र में नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और सुदृढ़ता को बढ़ावा देना है।

80 से अधिक देशों के प्रतिभागियों की उपस्थिति भारत के तेजी से विकसित हो रहे विद्युत क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है और एक सुदृढ़, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा परिवर्तन को सक्षम बनाने में देश के उभरते नेतृत्व को उजागर करती है।

इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के अलावा, हरियाणा (रणनीतिक राज्य भागीदार), राजस्थान (भागीदार राज्य), उत्तर प्रदेश (रणनीतिक राज्य भागीदार), महाराष्ट्र (रणनीतिक राज्य भागीदार), आंध्र प्रदेश (केंद्रित राज्य), बिहार (केंद्रित राज्य), ओडिशा (केंद्रित राज्य), गुजरात (रणनीतिक राज्य भागीदार), पंजाब (भागीदार राज्य), मध्य प्रदेश (भागीदार राज्य), छत्तीसगढ़ (भागीदार राज्य) और दिल्ली (केंद्रित राज्य) सहित 25 से अधिक भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ नेतृत्व और अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। राज्य सरकारों की भागीदारी से भारत के विद्युत ढांचे को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तेजी लाने, ग्रिड अवसंरचना का आधुनिकीकरण करने और देश भर में बिजली वितरण दक्षता बढ़ाने पर महत्वपूर्ण संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली एक विशाल प्रदर्शनी, शिखर सम्मेलन का मुख्य आधार बनेगी, जिसमें बिजली मूल्य श्रृंखला में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और समाधानों का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी को विद्युत उत्पादन, पारेषण, नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, वितरण और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों को शामिल करने वाले विषयगत क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा। साथ ही ऊर्जा नवाचार, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए समर्पित क्षेत्र भी होंगे। ये क्षेत्र उद्योग जगत के दिग्गजों, नवोन्मेषकों और निर्माताओं को विद्युत उत्पादन प्रौद्योगिकियों, पारेषण प्रणालियों, वितरण और नियंत्रण समाधानों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा भंडारण और बैटरी नवाचारों, ऊर्जा दक्षता समाधानों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में हुई प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेंगे।

इस शिखर सम्मेलन में उच्च-प्रभावशाली संवाद और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रमों की एक श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी। इनमें एक अंतर्राष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय बैठक, एक राष्ट्रीय विद्युत मंत्रिस्तरीय बैठक, उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षेत्रों के सीईओ के लिए मंच, और एक समग्र क्षेत्रीय सीईओ संवाद (जिसमें हिताची यूएसए, रोसेटी रूस, एस्कॉम, टीएनबी मलेशिया, अफ्रीका50, ईडीएफ पावर सॉल्यूशंस, ज़ेस्को के सीईओ शामिल होंगे) शामिल हैं, जो प्रमुख उपयोगिता और ऊर्जा कंपनियों के दिग्गजों को एक साथ लाएगा। इसके अलावा, कई विषयगत सत्र स्थिर ऊर्जा भंडारण, पारेषण क्षेत्र में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों, जलविद्युत विकास, कार्बन बाजारों, कानूनी तथा नियामक ढांचे, और विद्युत मूल्य श्रृंखला में विक्रेता विकास के अवसरों जैसी प्रमुख उद्योग प्राथमिकताओं पर केंद्रित होंगे। विशेष सत्रों में ऊर्जा स्टार्टअप, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, युवाओं तथा युवा पेशेवरों, साथ ही विद्युत क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने वाली पहलों जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

इस शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मंच भी शामिल होंगे, जिनमें अफ्रीका सत्र, ब्रिटिश उच्चायोग और प्रमुख ऊर्जा संघों जैसे वैश्विक संस्थानों और भागीदारों के साथ सत्र शामिल हैं। केबलटेक 2026, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के लिए मीटर के पीछे ऊर्जा भंडारण पर चर्चा और इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) जैसे संगठनों से संचालित सत्रों सहित विशेष उद्योग संवाद, बिजली क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों और निवेश के अवसरों का पता लगाएंगे।

इस शिखर सम्मेलन में रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बिंदु वैश्विक ऊर्जा परितंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विषय होंगे और इसमें रणनीतिक पैनलों में 120 से अधिक प्रमुख निर्णयकर्ता और दिग्गज शामिल होंगे। इनमें विश्व स्तर पर परस्पर जुड़े विद्युत तंत्रों को सुदृढ़ करना, वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में भारत के नेतृत्व को आगे बढ़ाना, सुदृढ़ विद्युत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना, विद्युत क्षेत्र में वित्त और निवेश के नए रास्ते खोलना, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की तैनाती में तेजी लाना और विद्युत मूल्य श्रृंखला में उन्नत तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।

सत्रों में इस क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी बढ़ाने, समावेशी ऊर्जा पहुंच का विस्तार करने और तेजी से विकसित हो रहे बिजली परिदृश्य का समर्थन करने के लिए आवश्यक अगली पीढ़ी के कार्यबल को विकसित करने के तरीकों की भी जांच की जाएगी।

इस आयोजन में सरकार में नेतृत्व स्तर पर बैठे दिग्गजों, परियोजना मालिकों, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण कंपनियों, अवसंरचना विकसित करने में शामिल लोगों, योग्य अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र के दिग्गजों, वित्तीय संस्थानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), बड़े निर्माताओं, उद्योग संघों और शिक्षाविदों सहित विविध वैश्विक दर्शकों के आने की उम्मीद है। इस शिखर सम्मेलन में संरचित खरीदार-विक्रेता बैठकें भी आयोजित की जाएंगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीद एजेंसियों, उपयोगिताओं और अवसंरचना विकसित करने में लगे लोगों को भारतीय निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और वैश्विक नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, शिखर सम्मेलन से वैश्विक विद्युत परितंत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की उम्मीद है।

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया www.bharatelectricitysummit.com पर जाएं।

************************

 

हर समय हर वक्त सच के साथ

Exit mobile version