परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा
दिनांक 07.12.2025 को रांची के विभिन्न 04 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई है परीक्षा
दिनांक 07.12.2025 के मध्याह्न 12:00 बजे से अपराह्न 07:00 बजे तक निषेधाज्ञा प्रभावी
रांची,06.12.2025 – CLAT-2026 परीक्षा दिनांक 07.12.2025 को रांची जिला के विभिन्न 04 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की गयी है। कदाचारमुक्त वातावरण में परीक्षा का आयोजन कराने एवं विधि-व्यवस्था संधारण हेतु अपर जिला दंडाधिकारी, विधि व्यवस्था, राँची द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है।
असामाजिक तत्व परीक्षा केन्द्रों पर भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं, इस आशंका को देखते हुए अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बी०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी की गई है, जो निम्न है :-
1- पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।
2- किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।
3- किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।
4- किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।
5- किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।
यह निषेधाज्ञा दिनांक 07.12.2025 के मध्याह्न 12:00 बजे से अपराह्न 07:00 बजे तक प्रभावी रहेगा।
परीक्षा केन्दों के नाम:-
1. National University of Study and Research in Law, Ranchi, At Nagari, P.O. Bukru, P.S.-Kanke, Ranchi.
2. Chotanagpur Law College, Nyay vihar Campus, Namkum, Ranchi.
06.12.2025 – काशी तमिल संगमम् 4.0 के चौथे दिन कार्यक्रम की थीम तमिल करकलाम (तमिल सीखें) के अनुरूप नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी), इंडिया द्वारा बच्चों के लिए कई शिक्षाप्रद और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। दिनभर चले इन सत्रों ने बच्चों में स्वास्थ्य जागरूकता, रचनात्मक सोच और डिजिटल सीख को प्रोत्साहित किया।
दिन की शुरुआत प्रशिक्षक आशीष द्वारा आयोजित योग सत्र “चलो, योग करें” से हुई, जिसमें बच्चों ने ऊर्जा, संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने वाले विभिन्न योगासन सीखे। इसके बाद “आओ, पुस्तक का कवर डिजाइन करें” प्रतियोगिता ने बच्चों की कल्पनाशक्ति और कला कौशल को मंच दिया। बच्चों ने रंगों और रचनात्मक विचारों से अनोखे पुस्तक कवर बनाकर सबका ध्यान आकर्षित किया।
इसके साथ ही राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का परिचय सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों को ई-बुक्स, डिजिटल पठन संसाधन और ऑनलाइन पुस्तकालय के उपयोग की जानकारी दी गई। एनबीटी द्वारा संचालित इन गतिविधियों ने काशी तमिल संगमम् के चौथे दिन को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद, मनोरंजक और प्रेरणादायक बना दिया।
एक नई स्टडी से पहला साफ़ सबूत मिलता है कि सिंगल-यूज़ PET बोतलों से बने नैनोप्लास्टिक सीधे तौर पर उन ज़रूरी बायोलॉजिकल सिस्टम को खराब कर सकते हैं जो इंसानी सेहत के लिए ज़रूरी हैं।
नैनो-प्लास्टिक दुनिया भर में चिंता का विषय है और इंसानी शरीर के अंदर इनका पता तेज़ी से चल रहा है। लेकिन इनके असली असर के बारे में अभी भी ठीक से पता नहीं है। कई स्टडीज़ में इस बात पर ध्यान दिया गया है कि प्लास्टिक कैसे पर्यावरण को प्रदूषित करता है या होस्ट टिशू को नुकसान पहुँचाता है, लेकिन इंसानी सेहत के लिए ज़रूरी फायदेमंद गट माइक्रोब्स पर इनके सीधे असर के बारे में लगभग कुछ भी पता नहीं था।
गट माइक्रोब्स हमारी हेल्थ को बचाने के लिए ज़रूरी हैं क्योंकि वे इम्यूनिटी, मेटाबॉलिज़्म और मेंटल हेल्थ को भी रेगुलेट करते हैं और इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि जब वे खुद नैनो-प्लास्टिक के संपर्क में आते हैं तो क्या होता है।
डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) के एक ऑटोनॉमस इंस्टीट्यूट, इंस्टिट्यूट ऑफ़ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मोहाली (INST) की एक टीम ने एक मल्टी-सिस्टम इन्वेस्टिगेशन किया। इसमें न सिर्फ़ गट बैक्टीरिया बल्कि रेड ब्लड सेल्स और ह्यूमन एपिथेलियल सेल्स को भी देखा गया। इसका मकसद एनवायरनमेंटल प्लास्टिक पॉल्यूशन को इंसानी सेहत पर इसके छिपे हुए लेकिन गंभीर असर से जोड़ना था।
उन्होंने लैब में PET बोतलों से नैनो-प्लास्टिक दोबारा बनाए और तीन खास बायोलॉजिकल मॉडल पर उनका टेस्ट किया। एक फायदेमंद गट बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस रैम्नोसस का इस्तेमाल यह देखने के लिए किया गया कि नैनो-प्लास्टिक माइक्रोबायोम पर कैसे असर डालते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि लंबे समय तक संपर्क में रहने से बैक्टीरिया की ग्रोथ, कॉलोनाइज़ेशन और प्रोटेक्टिव फंक्शन कम हो गए, जबकि स्ट्रेस रिस्पॉन्स और एंटीबायोटिक्स के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ गई।
चित्र: प्लास्टिक की बोतलों से नैनोप्लास्टिक बनाने और उनके बायोलॉजिकल असर का स्कीमैटिक इलस्ट्रेशन। इस प्रोसेस में नैनोप्लास्टिक को काटना, घोलना और सिंथेसाइज़ करना शामिल है, इसके बाद लैक्टोबैसिलस रैम्नोसस, रेड ब्लड सेल्स और A549 एपिथेलियल सेल्स में एक्सपोज़र स्टडीज़ की जाती हैं। नैनोप्लास्टिक के एक्सपोज़र से टेस्ट किए गए मॉडल सिस्टम में ऑक्सीडेटिव, मॉर्फोलॉजिकल और मेटाबोलिक बदलाव हुए।
ब्लड कम्पैटिबिलिटी टेस्ट करने के लिए रेड ब्लड सेल्स की जांच की गई। ज़्यादा कंसंट्रेशन में, नैनोप्लास्टिक्स ने सेल मेम्ब्रेन को खराब कर दिया और हीमोलिटिक बदलाव किए। आम सेलुलर रिस्पॉन्स को दिखाने के लिए ह्यूमन एपिथेलियल सेल्स की भी स्टडी की गई। यहां, लंबे समय तक एक्सपोजर से DNA डैमेज, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, एपोप्टोसिस और इन्फ्लेमेटरी सिग्नलिंग के साथ-साथ एनर्जी और न्यूट्रिएंट मेटाबॉलिज्म में बदलाव हुए।
कुल मिलाकर, ये नतीजे बताते हैं कि रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से बने नैनो-प्लास्टिक बायोलॉजिकली एक्टिव पार्टिकल हैं जो पेट की सेहत, खून की स्थिरता और सेलुलर काम में रुकावट डाल सकते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने पर ये इंसानी एपिथेलियल सेल्स में DNA डैमेज, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा करते हैं, जिससे इंसानी सेहत को ऐसे खतरे होते हैं जिनके बारे में पहले पता नहीं था।
नैनोस्केल एडव. जर्नल में पब्लिश यह काम नैनो-प्लास्टिक के छिपे हुए हेल्थ रिस्क को सामने लाता है, जो खाने, पानी और यहाँ तक कि इंसानी शरीर में भी तेज़ी से पाए जा रहे हैं और इंडस्ट्री और पॉलिसी को एक हेल्दी, ज़्यादा सस्टेनेबल भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।
इंसानी सेहत के अलावा, ये जानकारी खेती, न्यूट्रिशन और इकोसिस्टम की स्टडीज़ तक भी पहुँच सकती है, जहाँ माइक्रोबियल बैलेंस और प्लास्टिक प्रदूषण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
भारत सरकार ने “किसानों की आय दोगुनी करने” से संबंधित मुद्दों की जांच करने और इस लक्ष्य को प्राप्त करने की कार्यनीतियों की सिफारिश करने के लिए अप्रैल, 2016 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया था। समिति ने सितंबर, 2018 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इन सिफारिशों की प्रगति की निगरानी और समीक्षा करने हेतु दिनांक 23 जनवरी, 2019 को एक अधिकार प्राप्त निकाय का भी गठन किया गया है। किसानों की आय दोगुनी करने (डीएफआई) संबंधी समिति कृषि को मूल्य आधारित उद्यम के रूप में मान्यता देती है और विकास के सात प्रमुख स्रोतों की पहचान की है, अर्थात फसल उत्पादकता में सुधार; पशुधन उत्पादकता में सुधार; संसाधन उपयोग दक्षता या उत्पादन लागत में बचत; फसल सघनता में वृद्धि; उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण; किसानों को प्राप्त वास्तविक कीमतों में सुधार; और खेती से गैर-खेती व्यवसायों की ओर बदलाव। डीएफआई समिति की सिफारिशों पर कई पहल पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सभी स्कीम/योजनाएं इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संरेखित हैं।
खेती राज्य का विषय है। भारत सरकार किसानों के कल्याण के लिए सही नीति निर्माण और स्कीमों में उचित बजट आवंटन के माध्यम से राज्यों की सहायता करती है। भारत सरकार की स्कीमों/कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों की पैदावार बढ़ाना, लाभकारी मूल्य प्रदान करना और आय में सहायता करना है। सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट आवंटन वर्ष 2013-14 के 21,933.50 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 1,27,290.16 करोड़ रुपए कर दिया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ये स्कीमें/कार्यक्रम किसानों, जिसमें छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हैं, के सामने आने वाली बढ़ती इनपुट लागत, फसलों के सही दाम न मिलना, प्राकृतिक आपदा ऋण और मार्केटिंग की कठिनाईयों जैसी चुनौतियों का समाधान करती हैं, साथ ही किसानों की आय भी बढ़ाती हैं:
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान)
2. प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना (पीएम-किसान)
3. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)/ पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईसी)
4. संशोधित ब्याज अनुदान योजना (एमआईएसएस)
5. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ)
6. 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) सृजित करना और उन्हें बढ़ावा देना
7. राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम)
8. नमो ड्रोन दीदी
9. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ)
10. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)
26. पूर्वोत्तर क्षेत्र जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन
27. डिजिटल कृषि मिशन
28. राष्ट्रीय बांस मिशन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 75,000 किसानों की सफलता की कहानियों का एक संकलन जारी किया है, जिन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और संबद्ध मंत्रालयों/विभागों द्वारा चलाई जा रही स्कीमों के कन्वर्जेंस से अपनी आय दोगुनी से अधिक बढ़ाई है।
राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा एनएसएस के 77वें राउंड (जनवरी, 2019 – दिसंबर, 2019) के दौरान देश के ग्रामीण इलाकों में कृषि वर्ष जुलाई, 2018- जून, 2019 के संदर्भ में खेती करने वाले परिवारों का एक स्थिति आकलन सर्वेक्षण (एसएएस) किया गया था।
इस सर्वेक्षण के अनुसार, हर खेती करने वाले परिवार की अनुमानित औसत मासिक आय वर्ष 2012-13 (एनएसएस 70वां राउंड) में ₹6,426 से बढ़कर वर्ष 2018-19 (एनएसएस का 77वां राउंड) में ₹10,218 हो गई।
एनएसएसओ के हाउस होल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे (2023-24) के अनुसार, पूरे भारत में हर महीने हर व्यक्ति के औसत खपत व्यय (एपमीसीई) के अनुमानों की तुलना इस प्रकार है:
क्षेत्र
विभिन्न अवधि में औसत एमपीसीई ( रु .)
2011-12 एनएसएस (68वां राउंड)
2023-2024
ग्रामीण
1,430
4,122
शहरी
2,630
6,996
ग्रामीण एमपीसीई के % में अंतर
83.9
69.7
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों द्वारा जिन शैक्षिक असमानताओं का सामना किया जा रहा है, उन्हें दूर करने और इन छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार निम्नलिखित योजनाएँ लागू कर रही है:
1. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (पीएमएस-एससी)
2. अनुसूचित जाति और अन्य छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना
3. अनुसूचित जातियों के युवा अचीवर्स के लिए उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति (श्रेयस), जिसमें शामिल हैं:
i. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सर्वोच्च स्तर की शिक्षा (टीसीएस);
ii. अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पीएम केयर्स चिल्ड्रन के लाभार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना (एफसीएस);
iii. अनुसूचित जाति (एससी) आदि के उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (एनओएस) योजना; और
iv. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफ़एससी)
4. लक्षित क्षेत्रों के हाई स्कूलों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठ)
5. प्रधान मंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत छात्रावास घटक।
6. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफ़डीसी) की शिक्षा ऋण योजना
7. प्रधान मंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) — कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए केंद्र शोषित छात्रवृत्ति योजना, जिसे उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लागू किया गया है।
8. राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) जिसे स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा लागू किया गया है।
इसके अलावा, केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (सीईआई) (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006, केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित, संचालित या सहायता प्राप्त केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों (सीईआई) में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए आरक्षण प्रदान करता है।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग 2018-19 से समग्र शिक्षा को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरे देश में सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान और समावेशी कक्षा वातावरण में पहुँच मिल सके, जिसमें अनुसूचित जाति क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यह पहल आवासीय स्कूलों/छात्रावासों, जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन), धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के हस्तक्षेपों का भी समर्थन करती है। समग्र शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य सभी स्तरों पर लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करना और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच मौज़ूद अंतर को पाटना है। यह योजना लड़कियों और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के बच्चों तक पहुँचती है। कक्षा 8 तक की सभी लड़कियों और एससी/एसटी/बीपीएल परिवारों के बच्चों को मुफ्त वर्दी प्रदान की जाती है, और प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों सहित एससी छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं। इसके अलावा, वर्ष 2025-26 के दौरान स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने समग्र शिक्षा के तहत सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), स्मार्ट क्लास और प्रयोगशालाओं को सघन रूप से लागू करने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं। उपरोक्त योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन किया जा रहा है।
निगरानी के लिए, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों के लिए नियमित क्षमता निर्माण एवं हैंड-होल्डिंग/क्लस्टर/क्षेत्रीय बैठकें और/या कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं, जिससे राज्यों की प्रगति की समीक्षा की जा सके और किसी भी लंबित समस्या का समाधान किया जा सके। इसके अतिरिक्त, विभिन्न एजेंसियों/साझेदारों को चैनलाइज किया जाता है, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) से सेवाओं का उपयोग किया जाता है, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों का आधार से लिंक सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तकनीकी मुद्दों के समाधान के लिए दैनिक “ओपन हाउस” शुरू किया है। आवेदनकर्ता अपनी शिकायतें केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपी-जीआरएएमएस) पोर्टल पर भी दर्ज कर सकते हैं, जहाँ सरकार द्वारा उनके मुद्दों का समाधान किया जाता है।
मूल्यांकन अध्ययन और प्रभाव अध्ययन की रिपोर्टों से पता चलता है कि उपरोक्त योजनाओं के तहत सहायता और वित्तीय मदद प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति (एससी) के कई छात्रों ने सफलता प्राप्त की है।
ये योजनाएँ समग्र रूप से अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के छात्रों के शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं।
यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री रामदास अठावले द्वारा दी गई।
देश भर में सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए मेरा गांव मेरी धरोहर (एमजीएमडी) कार्यक्रम के तहत पहचाने गए गांवों की संख्या 6,38,365 है, जिनमें से अब तक 6,23,449 गांवों का डेटा एमजीएमडी पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।
अपने दस्तावेजीकरण कार्यों के तहत, एमजीएमडी, सांस्कृतिक तत्वों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करता है, जिसमें मूर्त और अमूर्त दोनों प्रकार के तत्व शामिल हैं, जिनमें मौखिक परंपराएं, विश्वास, रीति-रिवाज, ऐतिहासिक महत्व, कला के रूप, विरासत स्थल, पारंपरिक भोजन, प्रमुख कलाकार, मेले और त्यौहार, पारंपरिक पोशाक, आभूषण और स्थानीय स्थल शामिल हैं।
एमजीएमडी कार्यक्रम स्थानीय परंपराओं, प्रथाओं और विरासत संपदाओं को मान्यता प्रदान करने वाले प्रामाणिक, ग्राम-स्तरीय सांस्कृतिक प्रोफाइल तैयार करके ग्रामीण पहचान को सुदृढ़ करता है। यह एमजीएमडी पोर्टल के माध्यम से समुदाय-आधारित दस्तावेज़ीकरण और जन-आधारित सत्यापन को सक्षम करके सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।
एक ही राष्ट्रीय पोर्टल पर संरचित सांस्कृतिक डेटा की उपलब्धता सांस्कृतिक क्लस्टर विकास, विरासत पर्यटन और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने की योजना बनाने में सहायक होती है, जिससे सतत आजीविका सृजन और ग्रामीण आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
वायु प्रदूषण के लिए कई कारक सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के उच्च–घनत्व वाले आबादी वाले क्षेत्रों में मानवजनित गतिविधियों का उच्च स्तर शामिल है। विभिन्न क्षेत्रों जैसे वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस परियोजनाओं से उत्पन्न धूल, सड़क और खुले क्षेत्रों की धूल, बायोमास जलाना, नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट जलाना, लैंडफिल में आग लगना, बिखरे हुए स्रोतों से वायु प्रदूषण आदि के साथ–साथ विभिन्न मौसम संबंधी कारकों से उत्पन्न होता है। पराली जलाने को एक ऐसी घटना के रूप में पहचाना गया है जो वायु गुणवत्ता सूचकांक को बढ़ा देती है।
धान की पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकारों के प्रयासों का समर्थन करने और फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी देने के लिए, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2018-19 से फसल अवशेष प्रबंधन पर एक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की गई है।
इस योजना के तहत, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद के लिए किसानों को 50% की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और ग्रामीण उद्यमियों (ग्रामीण युवा और उद्यमी के रूप में किसान), किसानों की सहकारी समितियों (कृषि/बागवानी/मखाना आदि), डे–एनआरएलएम क्लस्टर स्तरीय संघों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए 80% की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
धान आपूर्ति श्रृंखला परियोजनाओं को उच्च एचपी ट्रैक्टर, कटर, टेडर, मध्यम से बड़े बेलर, रेकर, लोडर, ग्रैबर और टेली हैंडलर जैसी मशीनरी और उपकरणों की पूंजीगत लागत पर 65% (अधिकतम 1.50 करोड़ रुपये तक) की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
राज्यों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों में व्यापक जागरूकता लाने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियाँ चलाने हेतु वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। यह योजना फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आईसीएआर द्वारा अनुशंसित मशीनों और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देती है, चाहे वे फसल अवशेष प्रबंधन के साथ–साथ स्थानीय उपयोग के लिए भी हों।
2018-19 से 2025-26 (27.11.2025 तक) की अवधि के दौरान, केंद्र सरकार द्वारा उपर्युक्त योजना के अंतर्गत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को 4,090.84 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। किसानों को 3.45 लाख से अधिक फसल अवशेष मशीनें (सीआरएम) प्रदान की गई हैं और इन राज्यों में 43,270 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्र (सीएचसी) स्थापित किए गए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) धान की पराली के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पेलेटाइजेशन और टोरीफिकेशन संयंत्रों की स्थापना के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करता है। पेलेटाइजेशन संयंत्र की स्थापना के मामले में, 28 लाख रुपये प्रति टन प्रति घंटा (टीपीएच), या 1 टीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए विचार की गई पूंजीगत लागत का 40%, जो भी कम हो, प्रति प्रस्ताव 1.4 करोड़ रुपये की अधिकतम वित्तीय सहायता के साथ प्रदान किया जाता है। टोरीफिकेशन संयंत्रों की स्थापना के मामले में, 56 लाख रुपये प्रति टीपीएच, या 1 टीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए विचार की गई पूंजीगत लागत का 40%, जो भी कम हो, प्रति प्रस्ताव 2.8 करोड़ रुपये की अधिकतम वित्तीय सहायता के साथ प्रदान किया जाता है।
विद्युत मंत्रालय ने कृषि पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान हेतु कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग हेतु राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की है। कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास पेलेट्स के सह–प्रज्वलन हेतु एक व्यापक नीति 7 नवंबर, 2025 को जारी की गई है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) शहरी, औद्योगिक, कृषि अपशिष्टों और नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से बायोगैस, बायो–सीएनजी/संवर्धित बायोगैस/ कंप्रेस्ड बायोगैस, बिजली/प्रोड्यूसर या सिंथेटिक गैस उत्पादन हेतु अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हेतु केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करता है। वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है :
● ब्रिकेट विनिर्माण संयंत्र : 9 लाख रुपये/टीपीएच, अधिकतम 45 लाख रुपये प्रति परियोजना।
● गैर-टोरेफाइड पेलेट विनिर्माण संयंत्र : 21 लाख रुपये/टीपीएच उत्पादन क्षमता या 1 एमटीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए पूंजीगत लागत का 30%, जो भी कम हो (प्रति परियोजना अधिकतम 105 लाख रुपये)।
● टोरेफाइड पेलेट विनिर्माण संयंत्र : 42 लाख रुपये/टीपीएच उत्पादन क्षमता या 1 एमटीपीएच संयंत्र और मशीनरी के लिए पूंजीगत लागत का 30%, जो भी कम हो (प्रति परियोजना अधिकतम 210 लाख रुपये)।
● पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने धान की पराली के बाह्य प्रबंधन के लिए बायोमास एकत्रीकरण उपकरण की खरीद हेतु कंप्रेस्ड बायो-गैस उत्पादकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में उन्नत जैव ईंधन परियोजनाओं की स्थापना के लिए एकीकृत जैव–इथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री जी–वन (जैव ईंधन–पर्यावरण अनुकूल फसल अपशिष्ट निवारण) योजना शुरू की है, जिसमें लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक यानी कृषि और वानिकी अवशेष, औद्योगिक अपशिष्ट, संश्लेषण (सिन) गैस, शैवाल आदि का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनके कृषि अवशेषों के लिए लाभकारी आय प्रदान करना, पर्यावरण प्रदूषण को दूर करना, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में योगदान देना है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिनांक 09.05.2025 के निर्देश 90 के माध्यम से राज्यों को लघु/सीमांत किसानों के लिए सीआरएम मशीनों की किराया–मुक्त उपलब्धता की योजना बनाने का निर्देश दिया है। समन्वित प्रयासों से, पंजाब और हरियाणा राज्यों ने सामूहिक रूप से वर्ष 2025 में धान की कटाई के मौसम के दौरान वर्ष 2022 की इसी अवधि की तुलना में आग लगने की घटनाओं में लगभग 90% की कमी दर्ज की है।
यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में त्रिपुरा के माननीय मुख्यमंत्री श्री माणिक साहा द्वारा बुलाई गई लॉजिस्टिक्स, अवसंरचना और कनेक्टिविटी पर उच्च-स्तरीय कार्य बल की बैठक में भाग लिया।
इस बैठक में मिजोरम के माननीय मुख्यमंत्री लालदुहोमा, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय तथा पूर्वोत्तर राज्यों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
विचार-विमर्श पूर्वोत्तर में सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के जरिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी में तेजी लाने पर केंद्रित रहा। कार्य बल ने ट्रेड कॉरिडोर को मजबूत करने, सीमा पर अवसंरचना को उन्नत करने, अंतिम-छोर तक संपर्क में सुधार करने और क्षेत्र के लिए एक एकीकृत मैक्रो-ग्रिड बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, क्षेत्रीय विद्युत पारेषण गलियारे, बेहतर अंतर-राज्यीय अवसंरचना सुनिश्चित करने और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए पूर्वोत्तर के रणनीतिक प्रवेश द्वार का लाभ उठाने पर भी चर्चा की गई।
त्रिपुरा के माननीय मुख्यमंत्री ने 6 अगस्त 2025 को हुई पहली एचएलटीएफ बैठक के दौरान माननीय केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री द्वारा निर्धारित पांच सूत्रीय एजेंडे और तीन राज्य के नेतृत्व वाली पहलों समेत एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के सामने आने वाली मुख्य कनेक्टिविटी चुनौतियों का भी उल्लेख किया, जिसमें सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में गैप, जलमार्ग और बॉर्डर ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं, डिजिटल कनेक्टिविटी में कमियां, और विभिन्न भौगोलिक व संरचनात्मक बाधाएं शामिल हैं।
मिजोरम के माननीय मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आवश्यक अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए चार-सूत्रीय एजेंडे का प्रस्ताव रखा:
विद्युत, परिवहन और डिजिटल कॉरिडोर को एकीकृत करके एनईआर इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रिड के विकास के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करना।
परिवहन और परिचालन लागत को कम करने के लिए रणनीतिक क्षेत्रीय जगहों की पहचान करके और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं डिजिटल नेटवर्क को एकीकृत करके मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) स्थापित करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करना।
अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए विद्युत और डिजिटल अवसंरचना के साथ-साथ परिवहन के सभी साधनों- सड़क, रेलवे, वायुमार्ग, जलमार्ग- को बेहतर बनाना।
एमएमएलपी के बेहतर इस्तेमाल, बेहतर कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, हर मौसम के लिए ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के माध्यम से से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना।
केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने तीन प्रमुख पहलों के बारे में बताया जिन्हें एचएलटीएफ को शुरू करने की ज़रूरत है:
एक एकीकृत मैक्रो ग्रिड के रूप में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करना। बाधाओं और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों की पहचान की जानी चाहिए तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
केन्द्र सरकार द्वारा वित्तपोषित की जाने वाली अवसंरचना विकास परियोजनाओं का राज्यवार मैट्रिक्स तैयार करना, जिसमें हर राज्य के लिए प्रत्येक क्षेत्र (जैसे सड़क, रेलवे, वायुमार्ग, विद्युत, अंतर्देशीय जलमार्ग) दो प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को सूचीबद्ध किया जाएगा।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के लिए उपयुक्त अवसंरचना परियोजनाओं का राज्य-वार मैट्रिक्स तैयार करना, जिसमें हर राज्य के लिए प्रत्येक क्षेत्र (जैसे, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन आदि) के लिए एक प्राथमिकता वाली परियोजना की पहचान की जाएगी।
इस साल की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने आठ उच्च-स्तरीय कार्य बल का गठन किया, जिनमें से प्रत्येक की अध्यक्षता एक मुख्यमंत्री करता है, जिसमें केंद्रीय मंत्री (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय) और अन्य राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य हैं। यह पहल 21 दिसंबर, 2024 को अगरतला में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद के 72वें पूर्ण सत्र के दौरान बनी आम सहमति से शुरू हुई है। केंद्र और राज्य के अधिकारियों ने मिलकर कनेक्टिविटी आधारित विकास को तेज़ करने और निवेश, नौकरियों और क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भविष्योन्मुखी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
सरकार ने वर्ष 2017 में न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनहितकारी संस्कृति को बढ़ावा देते हुए देश भर में निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए ढांचे का निर्माण करना है। यह विधिक सेवा प्राधिकरण (एलएसए), 1987 की धारा 12 के अंतर्गत मुफ्त कानूनी सहायता पाने के हकदार व्यक्तियों और जनहित में काम करने वाले अधिवक्ताओं के बीच संपर्क स्थापित करता है।
इस कार्यक्रम को 2021 से 2026 तक 5 वर्षों के लिए एक नागरिक केंद्रित योजना, डिजाइनिंग इनोवेटिव सोल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस इन इंडिया (दिशा) में सम्मिलित कर दिया गया है। न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य उन अधिवक्ताओं का पंजीकरण है जो स्वेच्छा से अपना समय और सेवाएं अदालत में मामला दायर करने और सहायता के लिए दे सकते हैं। न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) पोर्टल पर 30 नवंबर, 2025 तक अपना पंजीकरण करा चुके अधिवक्ताओं की संख्या 9776 है।
युवा विधिक कर्मियों में जनहित की संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से देश के 109 विधि विद्यालयों में जनहितकारी क्लब उपयोजना चलाई जा रही है। इसके अलावा, इन प्रयासों को संस्थागत रूप देने के लिए 23 उच्च न्यायालयों में न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) समितियां शुरू की गई हैं।
इसके अतिरिक्त समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से एलएसए अधिनियम, 1987 के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएलएएसए) की स्थापना की गई है। इन तबकों में एलएसए अधिनियम की धारा 12 के अधीन आने वाले लाभार्थी भी शामिल हैं।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए तालुका अदालत स्तर से उच्चतम न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थान स्थापित किए गए हैं। लेकिन एनएलएएसए और इसके अधीन आने वाले विधिक सेवा संस्थान उन मामलों में शामिल नहीं होते जिनमें अधिवक्ता अपनी ओर से निःशुल्क सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।
विधि और न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कृषि भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के निदेशक मंडल की 33वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित थे।
फ्लैगशिप कार्यक्रमों की समीक्षा और रणनीति निर्धारण- बैठक में श्री शिवराज सिंह चौहान ने NHB की योजनाओं की समीक्षा की। विशेष रूप से वाणिज्यिक बागवानी विकास योजनाएं, कोल्ड-चेन अवसंरचना परियोजनाएं, क्लस्टर विकास कार्यक्रम (CDP)- क्षेत्र-विशिष्ट बागवानी क्लस्टरों के माध्यम से उत्पादकता और बाजार जुड़ाव को बढ़ाने की नई पहल, क्लीन प्लांट कार्यक्रम-उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए रोग-मुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराने के बारे में चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और किसान-केंद्रित हो तथा किसानों को सब्सिडी भी समय पर दी जाएं, इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। साथ ही, श्री शिवराज सिंह ने किसानों के हित में, जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों के संबंध में विशेष रणनीति बनाने पर जोर दिया, ताकि इनकी सेल्फ लाइफ बढ़े, किसानों को नुकसान नहीं हो और नुकसान से बचने के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाए जाएं।
एनएचबी की भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मार्गदर्शन- बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु कई रणनीतिक सुझाव दिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, फसलोत्तर प्रबंधन, उत्पादकता वृद्धि पर विशेष ध्यान देने को कहा। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि पूरे समन्वय के साथ किसानों को बाजार, कोल्ड-चेन नेटवर्क और मूल्य संवर्धन के अवसरों से जोड़ने वाली व्यवस्था को सुदृढ़ करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों के फायदे के लिए एनएचबी राज्यवार, क्षेत्रवार रोडमैप बनाकर पूरी ताकत से श्रेष्ठ कार्य करें।
तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा तैयार गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, जैविक खेती मॉडल और उन्नत बागवानी तकनीकों पर आधारित तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया। ये संसाधन किसानों, उद्यमियों व कृषि विशेषज्ञों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित कृषि, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, बागवानी उद्योग से जुड़े गैर-आधिकारिक सदस्य उपस्थित रहे। इस व्यापक प्रतिनिधित्व से बैठक में क्षेत्रीय दृष्टिकोण व सहभागी संवाद को बल मिला। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है, जो देशभर में वाणिज्यिक बागवानी और कोल्ड-चेन अवसंरचना के सुदृढ़ विकास के लिए कार्यरत है।
एक ऐतिहासिक क्षण में, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने एस्ट्रोसैट पर अत्यधिक सफल अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (यूवीआईटी) के संचालन के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
यूआईवीटी, भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट पर प्राथमिक पेलोड है, जिसे इसरो द्वारा 28 सितंबर, 2015 को प्रक्षेपित किया गया था। एस्ट्रोसैट में पांच पेलोड हैं जो पराबैंगनी से लेकर सॉफ्ट एक्स-रे और हार्ड एक्स-रे तक का एक साथ अवलोकन करने में सक्षम हैं।
यूआईवीटी का डिजाइन, संयोजन, परीक्षण और वितरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान यानी भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) ने अपने होसाकोटे स्थित परिसर में किया था। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में और भविष्य के अंतरिक्ष यूवी दूरबीनों की योजना बनाने के लिए, आईआईए ने 30 नवंबर, 2015 को यूवीआईटी के उद्घाटन के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 4 दिसंबर, 2025 को एक दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन किया।
आईआईए की निदेशक और यूवीआईटी की अंशांकन वैज्ञानिक अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने बताया, “चूंकि यूवी किरणें हमारे वायुमंडल द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं, इसलिए इन्हें केवल अंतरिक्ष दूरबीनों का उपयोग करके ही देखा जा सकता है। यूवीआईटी भारत का पहला यूवी अंतरिक्ष दूरबीन है और हबल अंतरिक्ष दूरबीन के अलावा सुदूर यूवी में अवलोकन करने में सक्षम एकमात्र कार्यशील दूरबीन है।”
यूवीआईटी ने कई महत्वपूर्ण खोजें की हैं और आज भी भारत तथा विदेशों में खगोलविदों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक विशाल दृश्य क्षेत्र और आकाश के बेहतर स्थानिक विभेदन के संयोजन में दुनिया में अद्वितीय है।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. के. कस्तूरीरंगन के योगदान को याद करते हुए, इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री ए.एस. किरण कुमार ने कहा, “जब भी हम ब्रह्मांड को देखने और मापने के नए तरीके खोजते हैं, तो ब्रह्मांड को समझने की हमारी क्षमता में सुधार होता है और मैं आईआईए को आज हम सभी को एक साथ लाने के लिए बधाई देता हूं ताकि यह बताया जा सके कि एस्ट्रोसैट और यूवीआईटी को कैसे डिजाइन किया गया, निर्मित किया गया और अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक उड़ाया गया।”
यूवीआईटी पेलोड्स ऑपरेशन सेंटर के प्रभारी सीएस स्टालिन ने कहा, “यूवीआईटी एक जुड़वां दूरबीन प्रणाली है। इनमें से एक निकट-पराबैंगनी (एनयूवी; 200-300 नैनोमीटर) और दृश्य बैंड (दृश्य: 320-550 नैनोमीटर) में ब्रह्मांड का अवलोकन करती है और दूसरी सुदूर-पराबैंगनी (एफयूवी; 130-180 नैनोमीटर) में अवलोकन करती है।”
इसका विशाल दृश्य क्षेत्र और 1.5 आर्कसेकेंड से बेहतर उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन (गैलेक्स/नासा से बेहतर) का संयोजन इसे खगोल विज्ञान से संबंधित खोजों के लिए एक अद्वितीय उपकरण बनाता है।
यूवीआईटी के डिजाइन और निर्माण में कई संस्थान शामिल थे और पूरी परियोजना का नेतृत्व आईआईए द्वारा किया गया। इसमें एक राष्ट्रीय संगोष्ठी शामिल थी, जिसमें पुणे में आईयूसीएए, मुंबई में टीआईएफआर, इसरो के कई केंद्र शामिल थे। इन सभी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें आईएसएसी/यूआरएससी, एलईओएस, आईआईएसयू और एसएसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी शामिल थे।
सुब्रमण्यम ने कहा, “हमें संवेदनशील घटकों के संचालन हेतु ‘स्वच्छ कक्षों’ वाली एक विशेष प्रयोगशाला स्थापित करनी पड़ी ताकि किसी भी संदूषण से उन्हें ख़राब होने से बचाया जा सके। यह एमजीके मेनन प्रयोगशाला होसाकोटे स्थित हमारे सीआरईएसटी परिसर में स्थापित की गई थी, जिसका इस्तेमाल अन्य अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी किया गया है।” उन्होंने कहा कि यूवी खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उनके अनुभव का उपयोग करने के लिए कनाडा के साथ एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किया गया था। प्रक्षेपण के बाद, आईआईए में यूवीआईटी पेलोड ऑपरेशन सेंटर (पीओसी) की स्थापना की गई, जो खगोलविदों के लिए विज्ञान के अनुकूल डेटा के उत्पादन, यूवीआईटी की नियमित निगरानी, प्रस्तावों के तकनीकी मूल्यांकन और दूरबीन के सॉफ्टवेयर को उन्नत करने के लिए जिम्मेदार है।
कार्यशाला में यूवीआईटी अवलोकनों से प्राप्त कुछ प्रमुख खोजों और विज्ञान संबंधी विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला गया, जिनमें बी सितारों और ब्लू स्ट्रैगलर सितारों के गर्म कॉम्पैक्ट आसपास के सितारों की खोज, एंड्रोमेडा आकाशगंगा में तारा निर्माण, नोवा द्वारा सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक में फीडबैक प्रभाव, छोटी आकाशगंगाओं और ग्रहीय नेबुला में विस्तारित यूवी डिस्क की खोज, 1.42 के रेडशिफ्ट पर दूरस्थ आकाशगंगाओं से उत्सर्जन का पता लगाना, सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक से यूवी और एक्स-रे उत्सर्जन के बीच संबंध, और आकाशगंगाओं में युवा तारा निर्माण की विशेषताएं शामिल हैं।
इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि यूवीआईटी ने आकाश में कुल 1451 लक्ष्यों का अवलोकन किया है और पिछले 10 वर्षों के संचालन में, इसके माध्यम से लगभग 300 रिसर्च आर्टिकल और 19 पीएचडी थीसिस तैयार किए गए हैं। भारत और विदेश में कई अन्य छात्र भी अपने अनुसंधान कार्य के लिए यूवीआईटी के डेटा का उपयोग कर रहे हैं।
विज्ञान के अनुकूल अंतिम छवियों के उन्नत वर्जन को यूवीआईटी पीओसी द्वारा इसरो के आईएसएसडीसी के ‘प्रदान’ अभिलेखागार में अपलोड किया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में सभी खगोलविद अपने अनुसंधान के लिए इसका इस्तेमाल कर सकें।
अंत में, वहां एकत्रित खगोलविदों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस प्रकार यूवीआईटी में दो दशकों से अधिक के अनुभव के आधार पर, अगली पीढ़ी की एक बड़ी अंतरिक्ष सुविधा, अर्थात आईएनएसआईएसटी (भारतीय स्पेक्ट्रोस्कोपिक और इमेजिंग स्पेस टेलीस्कोप) को संभव बनाया जा सकता है।
भारतीय नौसेना ने 3 दिसंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के शंगुमुघम समुद्र तट पर एक शानदार ‘परिचालन प्रदर्शन’ के माध्यम से अपनी परिचालन क्षमता और समुद्री क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस विशाल आयोजन ने नौसेना की दुर्जेय युद्ध क्षमताओं, प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता और परिचालन तत्परता को जीवंत किया, साथ ही देश की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता को भी दर्शाया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने किया। आगमन पर मुख्य अतिथि को 150 जवानों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तथा केरल के मुख्यमंत्री श्री पिनाराई विजयन सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, वरिष्ठ केंद्रीय एवं राज्य के सरकारीअधिकाररियों, सैन्य अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने इस कार्यक्रम को देखा।
इस ऑपरेशन डेमो में अग्रिम पंक्ति के प्लेटफार्मों द्वारा समन्वित युद्धाभ्यास का एक रोमांचक प्रदर्शन किया गया, जो नौसेना की समुद्री क्षेत्र में शक्ति और सटीकता प्रदान करने की क्षमता का प्रतीक था। स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत सहित बीस से अधिक नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों ने एयर असेट्स और इलीट मरीन कमांडो (एमएआरसीओएस) के साथ नौसेना की ताकत और परिचालन उत्कृष्टता का शानदार प्रदर्शन किया।
इसके अतिरिक्त, सी कैडेट कोर द्वारा हॉर्नपाइप नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नौसैनिक कर्मियों द्वारा तेजी से किए गए क्रमबद्ध ड्रिल ‘कंटीन्यूटी ड्रिल्स’ ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना बैंड द्वारा बीटिंग रिट्रीट और नौसेना के जहाजों की रोशनी के साथ पारंपरिक सूर्यास्त समारोह के साथ हुआ।
नौसेना दिवस भारतीय इतिहास के पन्नों में एक महत्वपूर्ण दिन है, जो 1971 के युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में भारतीय नौसेना की निर्णायक भूमिका का स्मरण कराता है । दशकों से भारतीय नौसेना लगातार मजबूत हुई है और देश के समुद्री हितों के लिए उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर विकसित होते हुए दृढ़ और मजबूत बनी हुई है। इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर भारत के मार्गदर्शक विजन के तहत भारतीय नौसेना अपने तेज आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ रही है और एक ‘खरीददार नौसेना’ से एक ‘निर्माता नौसेना’ में पूरी तरह परिवर्तित हो गई है।
ऑप डेमो 2025 ने नौसेना की समुद्री उत्कृष्टता और एक विश्वसनीय बल के रूप में इसकी अटल भूमिका को रेखांकित किया, जो महासागरों में विश्वास प्रेरित करता है, साझेदारी बनाता है और सामूहिक सुरक्षा को बरकरार रखता है। यह एक ऐसी भूमिका है, जो एमएएचएसएजीएआर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) के विजन पर आधारित एक स्वतंत्र, खुली और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
लिंक:- नौसेना दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संबोधन
काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय समूह के आगमन पर काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिकारियों ने परंपरागत गरिमा के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंदिर प्रशासन द्वारा पुष्प वर्षा और डमरू वादन की ध्वनि के बीच सम्पूर्ण समूह का स्वागत किया गया जिससे सभी सदस्यों ने काशी की समृद्ध आध्यात्मिक धारा का अनुभव किया।
स्वागत के उपरांत सदस्यों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और दर्शन के पश्चात मंदिर प्रशासन द्वारा समूह को काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर का विस्तृत भ्रमण करवाया गया। भ्रमण के दौरान सभी ने धाम के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य कला, नवनिर्मित सुविधाओं और निरंतर बढ़ती श्रद्धा-धारा के बारे में जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण पूर्ण होने पर सभी अतिथियों के लिए मंदिर द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई। अन्नक्षेत्र में परोसे गए प्रसाद ने सभी को काशी की सेवा-परंपरा और अतिथि-भावना का गहरा अनुभव कराया।
काशी तमिल संगमम् के इस द्वितीय समूह का दर्शन और भ्रमण दोनों समुदायों के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ। यह दिवस काशी और तमिल परंपराओं के संगम का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर स्मरणीय रहेगा।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही अलाव की पर्याप्त व्यवस्था
ठंड से किसी भी नागरिक को असुविधा न हो, यह जिला प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता – श्री मंजूनाथ भजन्त्री, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची।
रांची, 04.12.2025 – लगातार गिरते तापमान को देखते हुए राँची जिला प्रशासन द्वारा आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जिले में व्यापक स्तर पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त अलाव की व्यवस्था की गई है।
जिले के सभी प्रखंडों के पंचायत भवनों, प्रमुख हाट-बाजारों और जरूरतमंद आबादी वाले स्थानों पर भी अलाव की व्यवस्था सुचारू रूप से की जा रही है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा प्रत्येक प्रखंड में आवश्यक स्थानों पर अलाव निरंतर जलते रहें, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पूर्व से ही सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय महिला आयोग ने देश भर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए त्वरित और अधिक सुलभ सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक नई 24×7 संक्षिप्त कोड हेल्पलाइन – 14490 शुरू की है। यह टोल-फ्री नंबर एनसीडब्ल्यू की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा एक आसानी से याद रखने योग्य संक्षिप्त कोड के रूप में कार्य करता है। इस पर संपर्क कर महिलाएं बिना किसी लागत या देरी के सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
नया संक्षिप्त कोड हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यू के चल रहे प्रयासों को मजबूत करता है। प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में हेल्पलाइन मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कराएगा और समय पर सहायता प्रदान करना सुनिश्चित करेगा।
एनसीडब्ल्यू लोगों, सामुदायिक समूहों, संस्थानों और भागीदारों को इस जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक रहें।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।
नई दिल्ली – पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर असम दिवस का एक शानदार जश्न मनाया। उन्होंने अहोम साम्राज्य के संस्थापक और ग्रेटर असम के आर्किटेक्ट चाओलुंग सुकाफा को श्रद्धांजलि दी। सोनोवाल ने सुकाफा की तस्वीर के सामने पुष्प अर्पित किए और उनकी अनोखी विरासत के बारे में बताया।
इस मौके पर सोनोवाल ने कहा, “ग्रेटर असमिया समुदाय के पूज्य पूर्वज चाओलुंग सुकाफा को समर्पित इस खास जश्न में हिस्सा लेना बहुत गर्व की बात है। 13वीं सदी की शुरुआत में असम के मूल निवासियों को एकजुट करने के लिए उन्होंने जो कदम उठाए, उन्होंने शांति और सद्भाव वाले समाज की नींव रखी। पूरा असमिया राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।”
सोनोवाल ने देश की राजधानी में असम दिवस का खास महत्व बताते हुए कहा: “इसका उद्देश्य भारत के लोगों के सामने असम की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, विरासत और शानदार इतिहास को दिखाना है।”
सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि सुकाफा का नेतृत्व दया, न्याय और एकता पर आधारित था। सोनोवाल ने कहा, “चाओलुंग सुकाफा ने ग्रेटर असम की नींव रखने के लिए पटकाई पहाड़ियों को पार किया। उन्होंने महसूस किया कि एकता, सद्भावना, विश्वास और सहानुभूति के जरिए लोगों का दिल जीते बिना, पूरा विकास और खुशहाली नामुमकिन है। अलग-अलग इलाकों में भाषा, संस्कृति और परंपरा में अलग-अलग होने के बावजूद, उन्होंने सद्भाव की ताकत से एकता बनाई और सभी के लिए समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित किए।”
आधुनिक देश के निर्माण में सुकाफा की अहमियत बताते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “इतिहास हमें सिखाता है कि जब नेतृत्व मजबूत, ईमानदार और भरोसेमंद होता है, तो देश का तेज विकास जरूरी हो जाता है। सुकाफा के दिखाए रास्ते पर ही माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच से प्रेरित एक गवर्नेंस (शासन) मॉडल बनाया है। अच्छे शासन और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास के जरिए, प्रधानमंत्री ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की नींव मजबूत की है।”
सर्बानंद सोनोवाल ने याद किया कि असम के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके समय में, राज्य ने पहली बार 2 दिसंबर, 2016 को सुकाफा की याद में चराईदेव में आधिकारिक असम दिवस मनाया था। सोनोवाल ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री के समर्थन से, महान अहोम राजाओं से जुड़े चराईदेव मैदाम को यूनेस्को वैश्विक धरोहर की पहचान मिली है, जो असम के लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में मिली पहचान आने वाली पीढ़ियों को एकता की ताकत की याद दिलाती रहेगी। उन्होंने कहा, “जैसे सुकाफा ने हर समुदाय और संस्कृति का सम्मान करके एक एकजुट, विकसित और आत्मनिर्भर असम बनाया, वैसे ही हमें भी उसी भावना के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।”
इस समारोह में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर जितेन हजारिका; गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रो. राजीब संदिकोई; और आईसीएचआर दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. ओमजी उपाध्याय ने भी अपने विचार रखे, जिन्होंने असम दिवस के महत्व और राष्ट्र-निर्माण में सुकाफा की भूमिका पर रोशनी डाली।
कार्यक्रम के आखिर में, सोनोवाल ने दिल्ली में पढ़ रहे असम और उत्तर-पूर्व के छात्रों से बातचीत की।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और शांतनु ठाकुर, सांसद दिलीप सैकिया, रामेश्वर तेली, रंजीत दत्ता, बीरेंद्र प्रसाद बैश्य, जयंत बसुमतारी, कृपानाथ मल्लाह, बिजुली कलिता मेधी, भुवनेश्वर कलिता, परिमल शुक्लबैद्य, प्रदान बरुआ, और अमर सिंह टिचू के साथ-साथ असम के पूर्व मुख्य सचिव जिष्णु बरुआ, और कई प्रतिष्ठित मेहमान शामिल हुए।
वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी बना आकर्षण का केंद्र, प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं एवं आम लोगों द्वारा प्रदर्शनी का किया गया अवलोकन
वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बना रहा। प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज हजारों की संख्या में लोगों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया, इसमें छात्र-छात्राये, विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए हुए शिक्षक, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश के पत्रकारगण एवं जन सामान्य द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने वाले ‘काशी तमिल संगमम्’ के इस चतुर्थ संस्करण में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगायी गयी चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु एवं काशी की महान विभूतियों के राष्ट्र निर्माण में योगदान एवं उनकी उपलब्धियां को दर्शाया गया है। चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु की महान विभूतियों जैसे ऋषि अगस्त्य, तमिल महिला कवि संत अव्वैयार, तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर, कवयित्री और संत कारैकल अम्माइयार, भक्ति आंदोलन की कवि एवं संत अंडाल (कोधाई), थिरूनावुक्कारसर, तमिल कवि और समाज सुधारक श्री रामलिंग स्वामी (वल्लालर), तमिल विद्वान यू. वी. स्वामीनाथ अय्यर, अग्रणी समाज सुधारक, चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश भारत में पहली महिला विधायक डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी, गणितज्ञ श्री निवास रामानुजन, अविष्कारक और उद्योगपति जी.डी. नायडू, खगोलशास्त्री सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, भारत में हरित क्रांति के जनक डा. एम. एस. स्वामीनाथन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, नोवेल पुरस्कार विजेता वेंकटरामन रामकृष्णन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, नोबेल पुरस्कार विजेता एवं महान वैज्ञानिक चंदशेखर वेंकट रमन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सुप्रसिद्ध राजनेता एवं भारत रत्न के. कामराज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सुप्रसिद्ध राजनेता चिदंबरम सुब्रमण्यम, महान अभिनेता एवं राजनेता एम. जी. रामचंद्रन इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों एवं शब्दों में दर्शाया गया है।
इसी प्रकार काशी की महान विभूतियां जैसे – संत कबीरदास, संत रविदास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं शिक्षाविद पंडित मदन मोहन मालवीय, सुप्रसिद्ध शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर, महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों शब्दों के माध्यम से दर्शाया गया है।
चित्र प्रदर्शनी में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में किये जा रहे सरकार के जन कल्याणकारी नीतियों, प्रयासों एवं योजनाओं को भी दर्शाया गया है। जिसमें केंद्र सरकार द्वारा हाल में श्रम सुधार के लिए बनाये गये कानूनो, विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी के दरों को कम करने के लिये किए गये प्रयासों की जानकारी दर्शकों और जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है। यह प्रदर्शनी 15 दिसंबर तक निरंतर रहेगी।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर दिव्यांग बहनों और भाइयों के लिए सम्मान, पहुंच और अवसर सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है। श्री मोदी ने कहा कि दिव्यांगों ने अपनी रचनात्मकता और पक्के इरादे की वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है और हमारे देश की तरक्की को काफी बढ़ाया है। श्री मोदी ने कहा, “पिछले कुछ सालों में, भारत ने कानूनों, आसान इंफ्रास्ट्रक्चर, सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा नीति और मददगार प्रौद्योगिकी में नवाचार के जरिए दिव्यांग कल्याण की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। हम आने वाले समय में और भी बहुत कुछ करते रहेंगे।”
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:
“अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर, हम अपने दिव्यांग बहनों और भाइयों के लिए हमेशा सम्मान, पहुंच और अवसर सुनिश्चित करने के लिए अपना वादा दोहराते हैं। उन्होंने अपनी रचनात्मकता और पक्के इरादे की वजह से अलग-अलग क्ष्ोत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। साथ ही, उन्होंने हमारे देश की तरक्की को काफी बढ़ाया है। पिछले कुछ सालों में, भारत ने कानूनों, आसान इंफ्रास्ट्रक्चर, सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा नीति और मददगार प्रौद्योगिकी में नवाचार के जरिए दिव्यांग कल्याण की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। हम आने वाले समय में और भी बहुत कुछ करते रहेंगे।”
नई दिल्ली – सरकार ने लोगों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, सभी स्मार्टफ़ोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह ऐप सुरक्षित है और इसे पूरी तरह साइबर दुनिया के खतरनाक तत्वों से लोगों को बचाने के लिए विकसित किया गया है।
यह उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के साथ ही लोगों को साइबर अपराधियों की हरकतों की सूचना देने के जनभागीदारी में भी सहायक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐप का उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के अलावा कोई अन्य इस्तेमाल नहीं है और लोग जब चाहें तब इसे हटा सकते हैं।
इस ऐप को अब तक 1.4 करोड़ उपयोगकर्ता डाउनलोड कर चुके हैं और यह हर रोज धोखाधड़ी की दो हजार कोशिशों की सूचना देकर उन्हें नाकाम करने में योगदान दे रहा है। इस ऐप के इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और इसे इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने और अल्प जागरूक लोगों तक ऐप को सुगमता से सुलभ बनाने के लिए दिया गया था। पिछले एक दिन में ही, छह लाख लोगों ने संचार साथी ऐप डाउनलोड करने के लिए पंजीकरण कराया है, जो इसके उपयोग में 10 गुना वृद्धि दर्शाता है। यह सरकार द्वारा इस ऐप के माध्यम से लोगों को प्रदान की गई आत्म-सुरक्षा के प्रति विश्वास की पुष्टि करता है।
संचार साथी की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए इस ऐप का प्री-इंस्टालेशन अनिवार्य न बनाने का निर्णय लिया है।
नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि सोशल मीडिया और फर्जी खबरों से जुड़ा मुद्दा बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि फर्जी खबरें लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, गलत सूचनाओं और एआई-जनित डीपफेक पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग या समूह जिस तरह से सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे लगता है कि ये भारत के संविधान या संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन नहीं करना चाहते। उन्होंने इस मामले सख्त कार्रवाई और कड़े नियम बनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
श्री वैष्णव ने संसद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि हाल ही में नए नियम लागू किए गए हैं, जिनमें छत्तीस घंटों के भीतर वीडियो हटाने का प्रावधान भी शामिल है। एआई-जनित डीपफेक की पहचान करने और उन पर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए एक मसौदा नियम भी प्रकाशित किया गया है और इस पर विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने संसदीय समिति के कार्य की सराहना की और कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रमुख सिफारिशों वाली एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए श्री निशिकांत दुबे और सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।
सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि फर्जी खबरें तथा सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा के बीच एक नाज़ुक संतुलन की आवश्यकता है और सरकार इस संतुलन को बनाए रखने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, डिजिटल इंडिया पहल ने एक बड़ा बदलाव लाया है और तकनीक का लोकतांत्रिकरण किया है जिसके सकारात्मक प्रभावों को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने भी प्रत्येक नागरिक को एक मंच प्रदान किया है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार संस्थाओं और समाज की नींव रखने वाले विश्वास को मज़बूत करने के लिए काम कर रही
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजन समानता के हकदार हैं। समाज और देश की विकास यात्रा में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना सभी हितधारकों का कर्तव्य है, न कि कोई दान-पुण्य। दिव्यांगजनों की समान भागीदारी से ही किसी समाज को वास्तविक अर्थों में विकसित माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस -2025 का विषय, ‘सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाजों को बढ़ावा’ भी इसी प्रगतिशील विचार पर आधारित है।
राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि हमारा देश कल्याणकारी मानसिकता से आगे बढ़ते हुए, दिव्यांगजनों के लिए अधिकार-आधारित, सम्मान-केंद्रित व्यवस्था अपना रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का समावेश हमारी राष्ट्रीय विकास यात्रा का एक अभिन्न अंग है। 2015 से “दिव्यांगजन” शब्द के प्रयोग का निर्णय दिव्यांगजनों के प्रति विशेष सम्मान प्रदर्शित करने के लिए लिया गया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के समावेशन और सशक्तिकरण के लिए इको-सिस्टम को मजबूत कर रही है। उनके लिए सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास और खेल प्रशिक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित किए गए हैं। लाखों दिव्यांगजनों को विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें विशेष सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजनों के हितों के लिए सरकार के साथ-साथ समाज को भी जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए। इससे सरकार के प्रगतिशील प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की गरिमा, स्वावलंबन और आत्म-सम्मान सुनिश्चित करना सभी नागरिकों का दायित्व है। प्रत्येक नागरिक को सामाजिक और राष्ट्रीय प्रगति के अपने प्रयासों में दिव्यांगजनों को भागीदार बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।
नई दिल्ली – 1987 बैच की भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) अधिकारी सुश्री अपर्णा गर्ग ने 01 दिसम्बर, 2025 को रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) के रूप में कार्यभार संभाला। वे भारत सरकार के वरिष्ठतम सिविल सेवकों में से एक हैं, जिनके पास 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
सुश्री गर्ग ने कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिनमें मैसूर में मंडल रेल प्रबंधक, रेल व्हील फैक्ट्री में प्रधान वित्तीय सलाहकार तथा आईआरआईएफएम में महानिदेशक शामिल हैं।
वे शेवनिंग फेलो हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, ब्रिटेन से परिवहन अर्थशास्त्र में एडवांस्ड मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने बोकोनी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, मिलान; आईएनएसईएडी, सिंगापुर; और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद से एग्जीक्यूटिव प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय में अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज संसद को बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो द्वारा हाल में एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप का सफल परीक्षण भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, के लिए मिशन-तैयारी योजना को मज़बूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह परीक्षण, अंतरिक्ष यान चालक दल के पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली के योग्यता अभियान का महत्वपूर्ण घटक है, जो इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डॉ. सिंह ने बताया कि नवीनतम एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप में सबसे चरम अवतरण स्थितियों में से एक का अनुकरण किया गया और दो मुख्य पैराशूटों के बीच डिसरीफिंग क्रम में जानबूझकर समय का अंतर रखा गया। इसमें असममित बलों के तहत प्रणाली की संरचनात्मक जुड़ाव और भार वहन क्षमता, दोनों की पुष्टि हुई। श्री सिंह ने कहा कि यह सफल परीक्षण मानव-योग्यता निर्धारण प्रक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाता है और 2027 की पहली तिमाही तक पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन प्रक्षेपित करने के सरकार के लक्ष्य का समर्थन करता है।
संसद में प्रश्नकाल के दौरान तृतीय-पक्ष सत्यापन और तकनीकी निगरानी पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में डॉ. सिंह ने कहा कि इसरो नियमित रूप से क्रू मॉड्यूल पैराशूट प्रणाली और उससे संबंधित सभी परीक्षण परिणामों की स्वतंत्र और कठोर समीक्षा करता है। इनमें डिज़ाइन समीक्षा दल, स्वतंत्र मूल्यांकन समिति और मानव योग्यता निर्धारण एवं प्रमाणन के लिए देश भर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों वाली राष्ट्रीय सलाहकार समिति शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये संस्थागत मंच सभी मानव-मूल्यांकन तत्वों की गहन जांच करते हैं।
पारदर्शिता से संबंधित मुद्दों पर श्री सिंह ने कहा कि इसरो निरंतर और समय-समय पर प्रमुख परीक्षण परिणामों की जानकारी देता रहता है, जिसमें हाल ही किये गए आई.एम.ए.टी. के परिणाम भी शामिल हैं। वह आगे भी कार्यक्रम की प्रगति के बारे में सूचित करना जारी रखेगा।
यान चालक दल की तैयारियों से संबंधित मुददों पर, डॉ. सिंह ने दोहराया कि गगनयान मिशन के लिए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी प्रणालियों का गहन परीक्षण और विशेषज्ञ समीक्षा की जाती है, और प्रत्येक योग्यता परीक्षण के परिणामों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर प्रणाली में सुधार किया जाता है। इसके बाद फिर उनका पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में आपातकालीन परिदृश्यों का व्यापक अनुकरण, ऑफ-नॉमिनल लैंडिंग की उत्तरजीविता प्रक्रियाएं, आपातकालीन किट का संचालन और गगनयात्रियों की समग्र तैयारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल है।
श्री सिंह ने सदन को यह भी बताया कि इसरो ने स्थापित वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ जोखिम-मूल्यांकन और न्यूनीकरण ढांचे को संस्थागत रूप दिया है। मानव मूल्यांकन प्रमाणन बोर्ड और राष्ट्रीय सलाहकार पैनल जैसी संस्थाएं इन प्रक्रियाओं की निगरानी करती हैं ताकि सुनिश्चित हो कि समग्र मिशन के दौरान जोखिम नियंत्रण में रहे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि हाल के आईएमएटी सहित प्रत्येक परीक्षण का महत्वपूर्ण प्रणालियों को मान्य बनाने के साथ ही चालक दल के प्रशिक्षण, ग्राउंड रिकवरी तैयारियों और भारत के ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के सुरक्षित निष्पादन में योगदान है।