महँगी हवाई यात्रा पर लोकसभा में गूंज : रूडी ने विमानन क्षेत्र की चुनौतियों को किया उजागर

Lok Sabha echoes over costly air travel Rudy highlights challenges in aviation sector

नई दिल्ली, 28 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । लोकसभा में सारण सांसद एवं पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री  राजीव प्रताप रूडी ने भारतीय विमानन क्षेत्र में हवाई किराए में अनियंत्रित वृद्धि, बुनियादी ढाँचे की कमियाँ और नियामक तंत्र की अक्षमता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया।

रूडी ने बिहार में नालंदा, भागलपुर और पटना के निकट एक नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की आवश्यकता को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्य में हवाई संपर्क को बढ़ाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री को नागरिक विमानन क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल आने वाले समय में देश के आर्थिक विकास और हवाई यात्रा की सुलभता के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

रूडी ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन टिकटों की कीमतें आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं।

एयरलाइंस को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उच्च ईंधन लागत, भारी कर और हवाई अड्डों पर अतिरिक्त शुल्क प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए असमान करों पर चिंता जताई, जिससे किराए में भारी असमानता पैदा होती है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में यह कर 1% है, जबकि तमिलनाडु और बिहार में 29% तक जाता है।

विमानन क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे पर चिंता व्यक्त करते हुए  रूडी ने कहा कि कई महत्वपूर्ण रनवे बेकार पड़े हैं, जिससे यात्रियों को अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट के टू नाइन लेफ्ट और टू नाइन राइट रनवे का उदाहरण दिया, जहाँ अर्ध-लैंडिंग की समस्या बनी हुई है।

उड़ान योजना की सराहना करते हुए  रूडी ने कहा कि यह छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का एक अच्छा प्रयास है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार को बेहतर बुनियादी ढाँचा और सस्ता किराया सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने पायलटों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को अगले 10 वर्षों में 31,000 नए पायलटों की आवश्यकता होगी। लेकिन यहाँ प्रशिक्षण इतना महँगा है कि युवा इसमें शामिल होने से कतराते हैं, जबकि देश में पहले से ही 300 विदेशी पायलट कार्यरत हैं।

रूडी ने इन समस्याओं के समाधान के लिए टैरिफ पारदर्शिता बढ़ाने, किराए के निर्धारण पर सख्त दिशा-निर्देश लागू करने और नए एयरलाइंस के लिए आसान प्रवेश नीतियाँ बनाने की आवश्यकता बताई, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और टिकट की कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।

उन्होंने हवाई अड्डों के ऑपरेटरों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों की समीक्षा, एटीएफ कर को पूरे देश में समान करने और पायलट प्रशिक्षण लागत को कम करने पर भी जोर दिया, ताकि युवा आसानी से इस क्षेत्र में करियर बना सकें और भारत को आवश्यक संख्या में प्रशिक्षित पायलट मिल सकें।

राजीव प्रताप रूडी ने केंद्र सरकार से इन सभी मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की माँग की, ताकि आम जनता को सस्ती हवाई सेवा मिल सके और भारतीय विमानन क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

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ग्रेटर नोएडा : गर्ल्स हॉस्टल में आग से मची अफरा-तफरी

छात्राओं ने कूदकर बचाई जान

ग्रेटर नोएडा ,28 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित अन्नपूर्णा गर्ल्स हॉस्टल में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग हॉस्टल की दूसरी मंजिल पर एक कमरे में लगी थी, जिसका कारण एसी का कंप्रेसर फटना बताया जा रहा है।

आग लगते ही पूरे हॉस्टल में धुआं फैल गया, जिससे छात्राओं को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। कई छात्राएं घबराकर खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश करने लगीं, वहीं कुछ ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी।

छात्राओं के कूदने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाई दे रहा है कि छात्राएं बालकनी से बगल में खाली प्लॉट पर कूदने की कोशिश कर रही हैं और आसपास के लोग सीढ़ी लगाकर उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और दमकल विभाग को मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे। दमकलकर्मियों ने छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

दमकल की कई गाडिय़ों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का कार्य किया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने बताया कि आग लगते ही चारों तरफ धुआं फैल गया था, जिससे घबराहट और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई छात्राओं को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ छात्राएं घबराकर अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने को मजबूर हो गईं।

हालांकि, दमकलकर्मियों और पुलिस की तत्परता से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण एसी का कंप्रेसर फटना बताया जा रहा है, मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

अधिकारियों ने हॉस्टल प्रशासन को सुरक्षा उपायों को लेकर सख्त हिदायत दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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अरविंद केजरीवाल के खिलाफ FIR , अवैध होर्डिंग लगाने का आरोप

नई दिल्ली  28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।

यह मामला राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहा है और इसकी अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।

शिकायतकर्ता शिव कुमार सक्सेना ने अदालत में सबूत पेश किए कि द्वारका इलाके में आम आदमी पार्टी के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर अवैध रूप से लगाए गए थे।

अदालत ने इस मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि अवैध होर्डिंग्स न केवल शहर की सुंदरता को खराब करते हैं, बल्कि यातायात के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं। इस मामले को दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 की धारा 3 के तहत अपराध माना गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि देश में अवैध होर्डिंग्स गिरने से लोगों की मौत होना कोई नई बात नहीं है, इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केजरीवाल के अलावा, पूर्व विधायक गुलाब सिंह और पूर्व पार्षद नितिका शर्मा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल कर जानकारी दी कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

गौरतलब है कि साल 2019 में द्वारका में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर कथित तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी और अब कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।

इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। “आप” की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

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पीएम मोदी करेंगे थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा, बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में लेंगे भाग

नई दिल्ली  28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 अप्रैल से 6 अप्रैल तक थाईलैंड और श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे।

थाई प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा के निमंत्रण पर, पीएम मोदी 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 03-04 अप्रैल को बैंकॉक का दौरा करेंगे।

04 अप्रैल को होने वाले इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष थाईलैंड कर रहा है। यह पीएम मोदी की थाईलैंड की तीसरी यात्रा होगी।

यह 2018 में नेपाल के काठमांडू में आयोजित चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के बाद बिम्सटेक नेताओं की पहली आमने-सामने की बैठक भी होगी। 5वां बिम्सटेक शिखर सम्मेलन, मार्च 2022 में कोलंबो, श्रीलंका में वर्चुअली आयोजित किया गया था। छठे शिखर सम्मेलन का विषय है ‘बिम्सटेक – समृद्ध, लचीला और खुला।’

यात्रा की घोषणा करते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा, “नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान बिम्सटेक सहयोग को और अधिक गति देने के तरीकों पर विचार-विमर्श करने की उम्मीद है।”

बयान में कहा गया, “भारत क्षेत्रीय सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए बिम्सटेक में कई पहल कर रहा है, जिसमें सुरक्षा बढ़ाना, व्यापार, निवेश को सुविधाजनक बनाना, भौतिक, समुद्री, डिजिटल संपर्क स्थापित करना, खाद्य, ऊर्जा, जलवायु और मानव सुरक्षा में सहयोग करना, क्षमता निर्माण और कौशल विकास और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाना शामिल है।”

द्विपक्षीय मोर्चे पर, प्रधानमंत्री मोदी 3 अप्रैल को प्रधानमंत्री शिनावात्रा के साथ बैठक करेंगे। मीटिंग में मौजूदा सहयोग की समीक्षा की जाएगी और दोनों देशों के बीच भविष्य की साझेदारी के रोडमैप पर चर्चा की जाएगी।

भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों की समुद्री निकटता से और मजबूत होते हैं।

थाईलैंड की अपनी यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के निमंत्रण पर 04-06 अप्रैल तक राजकीय यात्रा पर श्रीलंका जाएंगे। यात्रा के दौरान, वे राष्ट्रपति दिसानायके के साथ चर्चा करेंगे

उच्च स्तरीय चर्चाओं के अलावा, पीएम मोदी वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों और राजनीतिक नेताओं से मिलेंगे। वह भारतीय वित्तीय सहायता वाली विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए अनुराधापुरा का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2019 में श्रीलंका का दौरा किया था। इससे पहले, श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना था, जो दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है।

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वाराणसी नगर निगम का बड़ा फैसला, नवरात्र में नहीं खुलेंगी मांस की दुकानें

वाराणसी 28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । वाराणसी नगर निगम ने नवरात्रि के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास बाबा ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में सभी मांस और मछली की दुकानें नवरात्र के दौरान बंद रहेंगी।

इस निर्णय को नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया। धार्मिक नगरी काशी की परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया गया है। नगर निगम ने साफ किया है कि अगर कोई दुकानदार इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।

काशी को सनातन संस्कृति का केंद्र माना जाता है, जहां नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना बड़े धूमधाम से होती है। ऐसे में इस आदेश को श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं के सम्मान में लिया गया निर्णय बताया जा रहा है।

इससे पहले नगर निगम ने जनवरी में ऐसा आदेश जारी किया था। नगर निगम ने काशी विश्वनाथ मंदिर के दो किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब मंदिर से दो किलोमीटर के क्षेत्र में किसी भी तरह की मांस-मछली की दुकान खोले जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय दुकानदारों ने इस फैसले का विरोध किया है।

इस संबंध में नगर निगम ने दुकानदारों को नोटिस भी भेजा था, जिस पर दुकानदारों ने आपत्ति जताई थी। नोटिस में यह कहा गया था कि निरीक्षण के दौरान पाया गया कि इन दुकानों का संचालन अवैध रूप से किया जा रहा है और इनमें कोई लाइसेंस भी नहीं है। इसके अलावा, इन दुकानों में साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा गया था।

वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने बताया था, “पिछले साल सदन और कार्यकारिणी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के दो किलोमीटर के दायरे में कोई भी मांस या मांसाहारी उत्पादों की दुकान नहीं होनी चाहिए।”

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दिल्ली सरकार के बजट पर विपक्ष ने उठाए सवाल

बताया झूठा और अवास्तविक

नई दिल्ली  28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । दिल्ली की भाजपा सरकार ने 25 मार्च को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 1 लाख करोड़ का बजट पेश किया। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आम आदमी पार्टी और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बजट पूरी तरह से झूठे आंकड़ों पर आधारित है और इसमें कोई ठोस वित्तीय योजना नहीं है।

आम आदमी पार्टी की नेता वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि पहली बार इतिहास में किसी बजट के आंकड़ों को लेकर इतनी गलत जानकारी दी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बजट को लेकर सिर्फ जुमलेबाजी की है, लेकिन इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि यह पैसा आएगा कहां से।

दिल्ली सरकार ने अपने बजट में टैक्स रेवेन्यू से 68,000 करोड़ की आय का अनुमान लगाया है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि यह आंकड़ा पूरी तरह से गलत है।

आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा कि दिल्ली की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वास्तविक टैक्स रेवेन्यू 63,000 करोड़ के आसपास होना चाहिए, जो सरकार के अनुमान से 5,000 करोड़ कम है।

उन्होंने भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया, जिससे स्पष्ट होता है कि बजट के आंकड़ों में हेरफेर किया गया है।

आमतौर पर आर्थिक सर्वेक्षण बजट से पहले पेश किया जाता है, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। दिल्ली सरकार ने अपने बजट में दावा किया कि वह नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (एन एस एस एफ) से 15,000 करोड़ का लोन लेगी। लेकिन विपक्षी नेताओं ने इस पर भी सवाल उठाए हैं।

आतिशी ने कहा कि नियमों के अनुसार दिल्ली सरकार अधिकतम 5,000 करोड़ का ही लोन एनएसएसएफ से ले सकती है, जबकि भाजपा सरकार 15,000 करोड़ का दावा कर रही है। आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर जनता को भ्रमित करने और झूठे वादे करने का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि सरकार ने बिना किसी ठोस योजना के 1 लाख करोड़ का बजट पेश कर दिया, लेकिन इस धनराशि की उपलब्धता को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी। इस बजट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है, और विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है कि आखिर यह पैसा आएगा कहां से।

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पंजाब-हरियाणा भाई-भाई, भगत सिंह पर विवाद नहीं होना चाहिए – भूपेंद्र सिंह हुड्डा

चंडीगढ़ 28 march, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)) । हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पंजाब कांग्रेस कार्यालय का दौरा किया। उन्होंने कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने पंजाब और हरियाणा को भाई-भाई बताया।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब और हरियाणा बड़े भाई-छोटे भाई हैं। मैं यहां बचपन से आता रहा हूं। हुड्डा ने पंजाब-हरियाणा के बीच रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों प्रदेश हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। इसके अलावा, हुड्डा ने पंजाब विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव पर भी अपनी राय व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस द्वारा विधानसभा में लाए गए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए था। यह एक महत्वपूर्ण कदम था, जो राज्य की बेहतरी के लिए आवश्यक था।

हुड्डा ने आगे कहा कि सरदार भगत सिंह के नाम पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उनके योगदान को हमेशा सम्मानित किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहें।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब विधानसभा के नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह को भारत रत्न देने की मांग की। मैंने इस पर प्रस्ताव लाने की मांग की थी।

लेकिन, इससे पहले आम आदमी पार्टी का प्लान था और मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल का संदेश आया हुआ था। जब मैंने बोलना शुरू किया तो सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।

प्रदेश के विकास के मुद्दे पर बाजवा ने कहा कि पंजाब में विकास के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों पर तकनीकी दृष्टिकोण से काम करना होगा, ताकि कोई ठोस और स्थायी मॉडल तैयार किया जा सके।

इससे पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा विधानसभा में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और महंगी होती शिक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों को जो किताब 50 रुपए में मिलनी चाहिए, उसे प्राइवेट स्कूल 150 रुपए में देते हैं और मनमानी फीस लेते हैं।

इस बात की जांच होनी चाहिए कि प्राइवेट स्कूल बच्चे को किस कीमत पर किताब दे रहे हैं और सरकारी स्कूल में वही किताब किस दर पर मिलती है।

सरकारी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं, इसलिए आम गरीब को मजबूरी में प्राइवेट स्कूलों में जाना पड़ता है। शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि आम गरीब को कर्ज लेकर अपने बच्चों को पढ़ाना पड़ता है।

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हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व विधायक की करोडो की संपत्ति जब्त

करोड़ो के घोटाले में है फरार

चंडीगढ़ 28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । पूर्व कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छोक्कर और उनके बेटों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हरियाणा में बड़ी कार्रवाई चल रही है। ईडी ने उनके कारोबार मेसर्स साईं आइना फार्मर्स प्राइवेट लिमिटेड से 44 करोड़ रुपये का माल जब्त किया है, जो छोक्कर और उनके दो बेटों सिकंदर छोक्कर और विकास छोक्कर का है।

कुछ महीनों से भगोड़ा, कोर्ट के आदेश पर पेश होने का आदेश काफी समय से धर्म सिंह छोक्कर और उनके बच्चे कानूनी पचड़ों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद धर्म सिंह छोक्कर और विकास पेश नहीं हुए।

कोर्ट ने जवाब में कई नियम लागू करते हुए कार्रवाई की है साईं आइना फार्म्स और अन्य फर्मों की आड़ में छोक्कर और उसके साझेदारों ने कई लोगों को ठगा है। 500 करोड़ से ज्यादा के आरोप

धर्म सिंह छोक्कर हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी ने उन पर कार्रवाई की है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छोक्कर की कंपनी ने 3700 से ज्यादा घर खरीदारों को ठगा और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का गबन किया। घर गिरवी रखने वाले लोगों से रकम हासिल की गई, लेकिन न तो कोई रिफंड दिया गया और न ही घर दिया गया।

दिल्ली-एनसीआर में करोड़ों की संपत्ति जब्त

ईडी ने दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पानीपत में स्थित धर्म सिंह छोक्कर और उसके वंशजों की करोड़ों की संपत्ति जब्त की है। जब्त की गई वस्तुओं में शामिल हैं:13 अचल संपत्तियों में 2,487 वर्ग मीटर वाणिज्यिक भूमि, 3 एकड़ कृषि भूमि और आठ आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं।विभिन्न लोगों की 96 लाख रुपये की संपत्ति जिसे स्थानांतरित किया जा सकता है।बैंक खातों में जमा धन और सावधि जमा रसीदें (एफडीआर)

ईडी द्वारा आगे की कार्यवाही

ईडी ने कहा है कि अगर प्रतिवादी 19 मई को अदालत में पेश नहीं होते हैं, तो उनकी संपत्ति को स्थायी रूप से जब्त करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाएगी। इसके अलावा, भगोड़ों के रूप में कानूनी प्रतिबंधों की रेटिंग केवल उन्हें बढ़ाएगी। अब हम देखेंगे कि क्या धर्म सिंह छोक्कर अदालत में पेश होते हैं या उनके साथ और अधिक सख्ती से पेश आते हैं।

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मायावती ने अखिलेश यादव पर किया कटाक्ष

कहा- मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी याद कर लेना चाहिए

लखनऊ 28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । उत्तर प्रदेश के आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के घर हुए हमले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 30 वर्ष पुरानी घटना का जिक्र करते हुए पश्चाताप करने की मांग की है।

मायावती ने शुक्रवार सुबह एक्स पर दो पोस्ट किए। पहली पोस्ट में मायावती ने कहा, “आगरा की हुई घटना के साथ-साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव को इनकी सरकार में 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में इस पार्टी द्वारा मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी इनको जरूर याद कर लेना चाहिए तथा इसका पश्चाताप भी जरूर करना चाहिए।”

उन्होंने दूसरी पोस्ट में कहा, “अतः आगरा घटना की आड़ में अब सपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे और आगरा की हुई घटना की तरह यहां दलितों का उत्पीड़न और ज्यादा न कराए।”

इससे पहले गुरुवार को भी मायावती ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा था, “सपा अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके जो घिनौनी राजनीति कर रही है अर्थात उनको नुकसान पहुंचाने में लगी है, यह उचित नहीं। दलितों को इनके सभी हथकंडों से सावधान रहना चाहिए। आगरा की हुई घटना अति चिंताजनक है।”

उन्होंने कहा था, “साथ ही, सपा को अपने स्वार्थ में किसी भी समुदाय का अपमान करना ठीक नहीं, जिसके तहत अब इनको किसी समुदाय में दुर्गंध व किसी में सुगंध आ रही है। इससे समाज में अमन-चैन व सौहार्द बिगड़ेगा, जो ठीक नहीं।”

बता दें कि आगरा में दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने राणा सांगा के बारे में विवादित बयान देने वाले सपा के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर बुधवार को हमला किया था।

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क्रिप्टो माइनिंग : क्या भारत डिजिटल क्रांति का बड़ा मौका गंवा रहा है?

नई दिल्ली, 27 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। क्रिप्टो माइनिंग वह प्रक्रिया है जिसका उपयोग बिटकॉइन और कई अन्य क्रिप्टो संपत्तियां नए टोकन बनाने और लेनदेन को सत्यापित करने के लिए करती हैं। यह पूरी तरह विकेंद्रीकृत (Decentralized) नेटवर्क होता है, जिसमें विशेष कंप्यूटरों का उपयोग किया जाता है।

ये मशीनें जटिल गणनाएँ करती हैं, जिसे आमतौर पर क्रिप्टोग्राफ़िक पहेलियाँ हल करना कहा जाता है, ताकि हर लेनदेन की पुष्टि हो सके और इसे ब्लॉकचेन में सुरक्षित रूप से जोड़ा जा सके। ब्लॉकचेन एक डिजिटल खाता बही की तरह काम करता है, जिसमें हर लेनदेन दर्ज होता है। इस प्रक्रिया में योगदान देने वाले माइनर्स को नए टोकन के रूप में इनाम दिया जाता है, जिससे न केवल नेटवर्क सुरक्षित रहता है, बल्कि माइनर्स को भी इसे लगातार सक्रिय बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

दुनिया के कई देश पहले ही इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। अमेरिका, कनाडा और कजाकिस्तान ने अपने ऊर्जा संसाधनों, अनुकूल नीतियों और तकनीकी बुनियादी ढांचे का लाभ उठाकर क्रिप्टो माइनिंग को बड़े स्तर पर अपनाया है। अमेरिका फिलहाल वैश्विक बिटकॉइन माइनिंग का 37.8% हिस्सा संभाल रहा है, जो वहां की सस्ती ऊर्जा और उदार बाजार नीतियों का नतीजा है। वहीं, भूटान जैसे छोटे देशों ने भी अपने जलविद्युत संसाधनों का उपयोग करके संप्रभु माइनिंग संचालन विकसित कर लिया है

। टेक्सास में तो बिटकॉइन माइनिंग न केवल आर्थिक लाभ पहुंचा रही है, बल्कि ऊर्जा ग्रिड को स्थिर करने, गैस-आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं के लिए बिजली लागत को कम करने में भी मदद कर रही है।इसके विपरीत, भारत अब भी इस उभरते उद्योग में पीछे छूटा हुआ है। देश में 11% वैश्विक आईटी कार्यबल है और हर साल 15 लाख से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक तैयार होते हैं, फिर भी भारत की हिस्सेदारी वैश्विक क्रिप्टो माइनिंग में 1% से भी कम है।

यह स्थिति इसलिए नहीं है क्योंकि भारत में क्रिप्टो माइनिंग प्रतिबंधित है। वास्तव में, इस पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है, लेकिन नीतिगत अस्थिरता, भारी कराधान और सहयोगी ढांचे की कमी इस क्षेत्र के विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है। 2022 में क्रिप्टो आय पर 30% कर और लेनदेन पर 1% टीडीएस लागू करने के बाद कई स्टार्टअप भारत से बाहर निकलकर दुबई, सिंगापुर और एस्टोनिया जैसी जगहों पर बस गए, जहां नियामक नीतियां अधिक अनुकूल हैं। क्रिप्टो माइनिंग सिर्फ एक सट्टा बाजार नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वित्तीय समावेशन का एक नया रास्ता खोल सकता है।

भारत ने अब तक इस अवसर का पूरी तरह से लाभ नहीं उठाया है, लेकिन इसके पास विशाल तकनीकी प्रतिभा, बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं, जो इसे वैश्विक दक्षिण में डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करने की क्षमता प्रदान करती हैं। सवाल यह नहीं है कि भारत ने यह अवसर खो दिया है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या भारत समय रहते निर्णायक कदम उठाएगा या नहीं।

यदि देश अपने नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का सही उपयोग करता है और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपनाता है, तो भारत अभी भी वैश्विक क्रिप्टो माइनिंग क्षेत्र में अपनी जगह बना सकता है। अब जरूरत है सही दिशा में कदम बढ़ाने की।

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लोकसभा में इमिग्रेशन बिल पास: शाह बोले- देश में विकास के लिए स्वागत पर भारत धर्मशाला नहीं

नई दिल्ली 27 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)- आव्रजन और विदेशी नागरिकों से संबंधित विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में अल्पसंख्यक समूह सबसे सुरक्षित हैं और सरकार ने शरणार्थियों को हमेशा सुरक्षा प्रदान की है।

अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि आव्रजन राष्ट्रीय सुरक्षा से निकटता से जुड़ा हुआ है और देश की सीमाओं में प्रवेश करने वालों की निगरानी करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है।

देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि देश की सीमाओं में कौन प्रवेश करता है। हम देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर भी कड़ी नजर रखेंगे। यह ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025’ एक विधायी प्रस्ताव है, जो हमारी प्रणाली को सरल बनाएगा, इसे व्यवस्थित और सुरक्षित भी बनाएगा।”

सताए गए समुदायों को शरण देने में भारत की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा, “भारत एक भू-सांस्कृतिक राष्ट्र है, न कि भू-राजनीतिक राष्ट्र। फारसी लोग भारत आए और आज देश में सुरक्षित हैं। दुनिया का सबसे छोटा अल्पसंख्यक समुदाय केवल भारत में सुरक्षित है।

यहूदी इजरायल से भागकर यहां रह गए। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में पड़ोसी देशों के छह उत्पीड़ित समुदायों के लोग सीएए के जरिए देश में शरण ले रहे हैं।” इस विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार उन प्रवासियों का स्वागत करती है, जो भारत के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “जो लोग देश में शिक्षा, व्यापार या रिसर्च के लिए आते हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। पीएम मोदी का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बने, और इसी वजह से हमने कई पुराने कानूनों को खत्म किया है।” उन्होंने कहा, “यहां शरण के लिए नहीं बल्कि स्वार्थी उद्देश्यों से आने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

जो लोग देश की अर्थव्यवस्था और विकास में योगदान देने के लिए यहां आते हैं, उनका हमेशा स्वागत किया जाता है। लेकिन चाहे रोहिंग्या हों या बांग्लादेशी, अगर आप शांति भंग करने के लिए यहां आए हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसलिए हमें इस विधेयक में लचीलापन और दृढ़ता दोनों की आवश्यकता है।”

शाह ने कहा, “आव्रजन और विदेशी विधेयक के साथ, हम देश में प्रवेश करने वाले प्रत्येक विदेशी पर नजर रखने के लिए एक विस्तृत प्रणाली स्थापित करेंगे। इससे हमें देश का विकास करने और व्यापार के लिए आने वालों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे हम उन व्यक्तियों पर भी पैनी नजर रख सकेंगे जो हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।”

शाह ने आव्रजन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए इसकी गंभीरता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। यह देश के कई मुद्दों से जुड़ा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारी सीमाओं में कौन प्रवेश कर रहा है। जो लोग देश की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे, उन पर कड़ी नजर रखी जाएगी।” उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक स्थिति और आव्रजन पर इसके प्रभाव के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक उज्ज्वल स्थान बन गया है। भारत विनिर्माण का केंद्र बन गया है और दुनिया भर के लोगों का यहां आना स्वाभाविक है। हालांकि, निजी लाभ के लिए शरण लेने और अस्थिरता पैदा करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।”

अमित शाह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों को देश में घुसने नहीं दिया जाएगा। देश कोई धर्मशाला नहीं है। अगर कोई देश के विकास में योगदान देने के लिए यहां आता है, तो उसका हमेशा स्वागत है।”

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देश सेवा सर्वोपरि, ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का करें निर्वहन : CM योगी

लखनऊ  27 March, (rns) । गुरुवार को लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष विभाग और गृह विभाग के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) एवं उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा चयनित 283 चिकित्सा अधिकारियों और कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

इस दौरान सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सेवा नारों या भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से होती है।

उन्होंने नवचयनितों से अपील की कि वे पूरी तत्परता और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, ताकि उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

इस समारोह में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित 283 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

इनमें आयुष विभाग के 163 चिकित्सा अधिकारी, 2 रीडर (आयुर्वेद), 19 प्रोफेसर, 3 प्रवक्ता (होम्योपैथी) और गृह विभाग के तहत विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के 96 कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायक शामिल हैं। नियुक्ति पत्र पाकर सभी नवचयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खिल उठे।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए सीएम योगी की पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की जमकर सराहना की। सीएम योगी ने इस अवसर पर यूपीपीएससी और यूपीएसएसएससी को शासन की मंशा के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को ईमानदारी से संपन्न करने के लिए धन्यवाद दिया और सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई दी।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में पिछले 8 वर्षों की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 8 वर्षों में हमने प्रदेश में 8.30 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। अगर यह नियुक्तियां शुचिता और पारदर्शिता के साथ नहीं होतीं, तो ये सभी मामले कोर्ट में लंबित हो जाते और एक भी भर्ती पूरी नहीं हो पाती।

उन्होंने कहा कि इन 8 वर्षों में 1,56,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई, 60,200 पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है और साथ ही बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई है।

अन्य विभागों में भी इसी तत्परता के साथ भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। आज जब प्रशिक्षित और दक्ष कार्मिक शासकीय सेवा का हिस्सा बनते हैं, तो कार्य पद्धति में तेजी आती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

सीएम योगी ने 2017 से पहले की प्रदेश की स्थिति और पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 8 वर्ष पहले यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी और पुलिस भर्ती बोर्ड की कार्य पद्धति पर गंभीर सवाल उठते थे। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं लंबित रहती थीं। तत्कालीन सरकार और आयोगों की कार्य पद्धति पर माननीय न्यायालय ने भी सवाल खड़े किए थे।

उस समय उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, लेकिन असल में बीमारू तत्कालीन व्यवस्था थी। अनिर्णय की स्थिति के कारण समाज का हर तबका तबाह था। उन्होंने कहा कि आज सरकार की तत्परता, सुचिता और पारदर्शिता के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश नए भारत का नया उत्तर प्रदेश बनकर उभरा है, जो देश की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए तैयार है।

सीएम योगी ने आयुष विभाग में नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष, आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां भारत की प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए अलग मंत्रालय बनाया और आज इसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना हो चुकी है।

वर्तमान में 2,114 आयुर्वेद, 254 यूनानी और 1,585 होम्योपैथी चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं। लखनऊ और पीलीभीत में निर्माणाधीन आयुष चिकित्सालयों का कार्य अंतिम चरण में है।

15 जनपदों में 50 सैया वाले इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल शुरू हो चुके हैं, जबकि 3 जनपदों में निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं और 225 आयुष चिकित्सालयों में योग व वेलनेस सेंटर शुरू किए गए हैं।

सीएम योगी ने आयुष के क्षेत्र में हेल्थ टूरिज्म की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में शुद्ध वातावरण और प्रचुर जल संसाधन हेल्थ टूरिज्म के लिए अनुकूल हैं। हमने धार्मिक टूरिज्म में उत्तर प्रदेश को नंबर एक बनाया है, अब हेल्थ टूरिज्म में भी इसे शीर्ष पर ले जाएंगे।

आयुष हॉस्पिटल और वेलनेस सेंटर इसके नए केंद्र बन सकते हैं। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों से अपील की कि वे आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों और दादी के नुस्खों को संरक्षित करें और लोगों को प्राकृतिक खेती व संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूक करें।

उन्होंने एफएसएल लैब के 96 कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि जुलाई 2024 में लागू तीन नए कानूनों में एफएसएल लैब की भूमिका अहम है। किसी भी पीड़ित को समय से न्याय मिले और अपराधी को सजा दिलाने के लिए साक्ष्य जरूरी हैं।

पहले प्रदेश में केवल 4 एफएसएल लैब थीं, अब 12 हैं और 6 निर्माणाधीन हैं। हर रेंज स्तर पर एफएसएल लैब स्थापित करने और हर जनपद में 2-2 मोबाइल लैब उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है, जहां डिप्लोमा और डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं। सीएम योगी ने कहा कि अगले 10 वर्षों में इस इंस्टीट्यूट से निकलने वाले छात्रों के लिए देश-दुनिया में नौकरी की कमी नहीं होगी।

सीएम योगी ने आस्था और विरासत के सम्मान से रोजगार सृजन की बात करते हुए कहा कि महाकुंभ की सफलता में सभी विभागों के कार्मिकों की मेहनत दिखी। 45 दिनों के इस आयोजन में दुनिया भर से लोग आए और इसकी तारीफ की।

काशी, अयोध्या, चित्रकूट, गोरखपुर, नैमिषारण्य, मथुरा-वृंदावन और सुख तीर्थ जैसे क्षेत्रों में आस्था के सम्मान से लाखों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जब हम अपनी विरासत पर गर्व करते हैं, तो दुनिया उससे जुड़ती है। पहले लोग योग को हेय दृष्टि से देखते थे, लेकिन आज 193 देश विश्व योग दिवस मनाते हैं।

सीएम योगी ने आजमगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले आजमगढ़ के नौजवानों को होटल या धर्मशाला में जगह नहीं मिलती थी, लेकिन आज वहां से एफएसएल लैब के लिए टेक्निकल स्टाफ का चयन हो रहा है।

आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव विश्वविद्यालय, एयरपोर्ट और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ एक नई पहचान बन रही है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारें पहचान का संकट खड़ा करती थीं, लेकिन आज हमारी सरकार युवाओं को नई पहचान के साथ वैश्विक मंच पर स्थापित कर रही है।

सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों से अपील करते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यह न सोचें कि ड्यूटी न करना आपका अधिकार है। जैसा करेंगे, वैसा फल पाएंगे। देश की सेवा नारों या भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से होती है।

जो काम कल करना है, उसे आज ही निपटा लें। उन्होंने कहा कि तत्परता और पारदर्शिता से काम करने पर जनता उनकी कार्य पद्धति को स्वीकार करेगी और वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे।

सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने में अपना योगदान देंगे।

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भाजपा नेता की हत्या के बाद रांची बंद, जगह-जगह सड़क जाम

कई नेता गिरफ्तार

रांची  27 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। रांची में स्थानीय भाजपा नेता और जिला परिषद के पूर्व सदस्य अनिल टाइगर की हत्या के खिलाफ गुरुवार को आहूत रांची बंद का व्यापक असर दिख रहा है। रांची शहर में 15 से भी अधिक स्थानों पर बंद समर्थकों ने सड़कों पर जाम लगा दिया है। शहर के कई प्रमुख बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद करा दिए गए हैं। रांची पुलिस ने बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे 20 से अधिक भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ भाजपा नेता की हत्या के विरोध में रातू रोड में बीच सड़क पर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे हैं। रांची के कांके चौक पर भाजपा नेता अनिल महतो टाइगर की हत्या बुधवार की शाम करीब चार बजे उस वक्त गोली मारकर कर दी गई थी, जब वह एक होटल में बैठे थे। वारदात को अंजाम देकर बाइक से भाग रहे अपराधियों का स्थानीय लोगों ने पीछा किया था और इसी दौरान पुलिस ने शूटर रोहित वर्मा को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दूसरा अपराधी अमन कुमार भागने में सफल रहा था।

इस घटना के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी, आजसू पार्टी, जदयू और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने बंद बुलाया है। बंद समर्थक सुबह आठ बजे से ही रांची में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने बूटी मोड़, पिठोरिया, पिस्का मोड़, रातू रोड, कांके चौक समेत कई प्रमुख इलाकों की सड़कों को जाम कर दिया गया है।

पुलिस ने बीजेपी के कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया। इनमें भैरो सिंह, प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, बीजेपी धुर्वा मंडल के अध्यक्ष उमेश यादव, वरिष्ठ भाजपा नेता कामेश्वर सिंह शामिल हैं। इसी तरह सड़क पर बंद कराने उतरे भाजपा के हटिया मंडल अध्यक्ष राम मनोज साहु, प्रवीण झा और मोहन सिंह सहित कुछ अन्य को जगन्नाथपुर थाने की पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

कानून-व्‍यवस्‍था बनाए रखने के ल‍िए रांची शहर में 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। 12 डीएसपी और थाना प्रभारी समेत दो दर्जन से इंस्पेक्टरों को शहर के अलग-अलग इलाकों में विधि-व्यवस्था पर निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

डीआईजी सह एसएसपी चंदन सिन्हा ने कहा कि सीसीटीवी के कंट्रोल रूम से शहर में निगरानी रखी जा रही है। गड़बड़ी फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई जगहों पर महिला बटालियन, वज्र वाहन, रंगीन पानी का टैंकर, अश्रु गैस दस्ते और फायर ब्रिगेड की तैनाती की गई है।

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मूवी लवर के लिए आमिर खान ने लॉन्च किया ‘आमिर खान टॉकीज’

27.03.2025 – अभिनेता आमिर खान ने अपने प्रोडक्शन हाउस का यूट्यूब चैनल ‘आमिर खान टॉकीज’ लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह चैनल खासकर उन लोगों के लिए है, जो फिल्मों की दुनिया को करीब से जानना चाहते हैं। यहां पर्दे के पीछे की अनदेखी कहानियां, शूटिंग के मजेदार किस्से और फिल्मों को लेकर गहरी चर्चाएं देखने को मिलेंगी।

इस चैनल पर सिर्फ फिल्मों के बनने की कहानी नहीं, बल्कि एक्टर्स की बातें, ग्रुप डिस्कशन और फिल्ममेकिंग पर खुलकर चर्चा भी होगी। आमिर खान प्रोडक्शंस से जुड़े कलाकार अपने अनुभव बताएंगे, जिससे फैन्स को सिनेमा के अंदर की दुनिया को और करीब से समझने का मौका मिलेगा।

इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए लोग सिर्फ फिल्म बनाने की बारीकियां नहीं सीखेंगे, बल्कि इसकी कलात्मकता और तकनीकी कमाल को भी महसूस कर पाएंगे। अभिनेता आमिर खान अपने यूट्यूब चैनल के बारे में कहते हैं यह एक ऐसी जगह होगी, जहां स्टोरीटेलिंग और रियलिटी का मिलन होगा। यहां आपको पर्दे के पीछे के अनदेखे लम्हों से लेकर उन फिल्मों पर गहरी बातचीत तक सब कुछ मिलेगा, जिन फिल्मों ने हमें पहचान दी है।

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने 30 साल के कैरियर में अपनी फिल्मों से हमेशा लोगों का दिल जीता है। शानदार एक्टिंग के अलावा, प्रोड्यूसर के तौर पर भी उन्होंने आमिर खान प्रोडक्शंस के जरिए कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, जो सिनेमा की दुनिया में नया मुकाम बना चुकी हैं। प्रयोगात्मक दौर में आमिर खान के द्वारा लॉन्च किया गया ‘आमिर खान टॉकीज’ निःसंदेह सिनेप्रेमियों के लिए एक शानदार तोहफ़ा साबित होगा।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

https://www.instagram.com/reel/DHqUZX4It5O/?igsh=eTZvOXJucWV6YTlo

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जस्टिस वर्मा के घर नोट मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका

जल्द सुनवाई की मांग

नई दिल्ली,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां मिलने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता मैथ्यू नेदुम्पारा द्वारा दाखिल इस याचिका में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से संपर्क करने को कहा है ताकि मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन जजों की समिति बनाने का कोई औचित्य नहीं है और इसकी जांच पुलिस को करनी चाहिए।

याचिका में न्यायपालिका के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रभावी और सार्थक कार्रवाई की जरूरत बताई गई है। इसके तहत सरकार को न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक, 2010 को दोबारा लाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो पहले ही लैप्स हो चुका है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच तथा कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

इसके साथ ही यह मामला संसद से सड़क तक चर्चा का विषय बन गया है। खासकर विपक्ष के नेताओं ने इस मामले को काफी जोर-शोर से उठाया है, उनकी मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एस.एन. ढींगरा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर यह बरामदगी वास्तविक है, तो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना चाहिए था।

जस्टिस ढींगरा ने कहा, यह भ्रष्टाचार का एक ज्वलंत उदाहरण है। हमारी न्यायपालिका में कितना भ्रष्टाचार है, आप इसे इस मामले से समझ सकते हैं। इसके अलावा, कोई नहीं जानता कि और कितने जज हैं, जिनके पास ऐसी नकदी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जज होने का मतलब यह नहीं है कि वह कानून से ऊपर हैं। पुलिस को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और केवल उनका ट्रांसफर करना समस्या का हल नहीं है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवासीय बंगले में आग लगने से एक बड़ा खुलासा हुआ था। इस घटना ने न्यायिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था। जज के घर से भारी मात्रा में नोटों की अधजली गड्डियों की बरामदगी हुई थी। इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को भी तत्काल कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। इस मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया।

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कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

नईदिल्ली ,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह पर सोनिया गांधी का अपमान करने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश की ओर से सौंपे गए नोटिस में कहा गया है कि यद्यपि अमित शाह ने उच्च सदन में अपने उत्तर के दौरान सोनिया गांधी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के पूर्व नियोजित उद्देश्य से उनके विरुद्ध निराधार आरोप लगाए हैं।

जयराम ने पत्र राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को दिया है।

राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम ने पत्र में लिखा, 25 मार्च को अमित शाह ने आपदा प्रबंधन विधेयक 2024 पर बहस का जवाब देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष कांग्रेस के शासन में बना और पीएम केयर्स नरेंद्र मोदी एनडीए के शासन में बना।

कांग्रेस के शासन में एक ही परिवार का नियंत्रण होता था, इसके अंदर कांग्रेस के अध्यक्ष सदस्य होते थे। कांग्रेस अध्यक्ष सरकारी फंड में, क्या जवाब दोगे देश की जनता को?

जयराम ने पत्र में लिखा कि शाह ने सोनिया का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफतौर पर उनका उल्लेख किया था और प्रधानमंत्री राहत कोष के कामकाज के संबंध में उनकी मंशा पर संदेह जताया था।

उन्होंने लिखा, यह सर्वविदित है कि सदन के किसी भी सदस्य पर टिप्पणी करना या अपमानजनक बातें कहना विशेषाधिकार का हनन और सदन की अवमानना है। गृह मंत्री का बयान सरासर झूठा और मानहानिकारक है, जो सोनिया गांधी के विशेषाधिकार का हनन है।

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दिल्ली में कमल खिला अब बंगाल की बारी

लोकसभा में बोले गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में एक प्रकार से हर परिवार को छूता है। हर गांव में कोई न कोई ऐसी इकाई है, जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के काम में जुटी हुई है और देश के विकास में योगदान करती है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, और सामाजिक समावेशन बढ़ेगा।

गृह मंत्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यों का परिणाम है कि आज दिल्ली में भी कमल खिल गया और यहां भी आयुष्मान भारत योजना आ गई। देश के हर गरीब को इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक खर्च की चिंता नहीं करनी है।

अब बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा और आयुष्मान भारत आ जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड को एक राष्ट्रीय कोऑपरेटिव संस्था बनाया है। इनके माध्यम से देश के किसानों का उत्पाद विदेशों में निर्यात करने का काम चल रहा है।

अब तक 12 लाख टन सामग्री दुनिया के विभिन्न बाजारों में बेचकर इसका मुनाफा सीधा किसानों के पास पहुंचाया गया है।

अमित शाह ने कहा कि कई साल तक बड़े-बड़े कोऑपरेटिव लीडर कृषि मंत्री रहे, लेकिन सहकारी चीनी मिलों के समक्ष इनकम टैक्स की जो समस्या थी, वह कभी समाप्त नहीं होती थी।

सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद साल 2022 में एक असेसमेंट की समस्या को मोदी सरकार ने हमेशा के लिए समाप्त कर दिया, जो 2016 से चल रही थी।

उन्होंने कहा कि सहकार से समृद्धि सिर्फ एक नारा नहीं है, इसे जमीन पर उतारने के लिए साढ़े तीन साल में सहकारिता मंत्रालय ने दिन-रात एक किया है।

आने वाले दिनों में कुछ ही महीनों में कोऑपरेटिव बेसिस पर ओला-ऊबर जैसी एक बहुत बड़ी कोऑपरेटिव सहकार टैक्सी आने वाली है और इसका मुनाफा किसी धन्नासेठ के हाथ में नहीं जाएगा, वह ड्राइवर के पास जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। जब भी देश का इतिहास लिखा जाएगा, यह 10 साल का कालखंड इस देश के गरीबों के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

मोदी सरकार ने देश के गरीबों को घर देने का काम किया, शौचालय देने का काम किया, पीने का शुद्ध पानी देने का काम किया, हर महीने पांच किलोग्राम अनाज मुफ्त देने का काम किया, और गरीबों के घर गैस और बिजली पहुंचाने का काम किया।

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वक्फ विधेयक को लेकर पटना में मुस्लिम संगठनों का प्रदर्शन

लालू-तेजस्वी भी शामिल हुए

पटना ,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देशभर में प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में आज बिहार की राजधानी पटना में भी प्रदर्शन किया गया।

पटना के गर्दनी बाग में मुस्लिम संगठनों ने विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसे राष्ट्रीय जनता दल ने अपना समर्थन दिया। प्रदर्शन में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव भी शामिल हुए।

इस दौरान तेजस्वी ने कहा कि राजद हमेशा मुस्लिमों के साथ खड़ी रही है।

तेजस्वी ने कहा, जो विधेयक लाया गया है, इसके विरोध में आप सब लोगों का महाजुटान हुआ है। हमारी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, हम लोगों के नेता लालू प्रसाद यादव जी बीमार अवस्था में भी यहां आप लोगों का साथ देने पहुंचे हैं।

हम लोग किसी भी कीमत पर, चाहे सत्ता रहे या जाए, हम लोगों को इसकी परवाह नहीं है। आप लोगों की इस लड़ाई में हम लोग पूरी मजबूती के साथ आपके साथ खड़े हैं।
लालू यादव ने कहा, यह विधेयक अन्यायपूर्ण है और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। हम इसके विरोध में हैं। यह गलत हो रहा है, जनता सब समझ रही है।

प्रदर्शन को कई पार्टियों का भी समर्थन मिला। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी पटना पहुंचे। उन्होंने कहा, जिनके भी अधिकारों पर हमला होगा, उसकी रक्षा के लिए आगे आएंगे।

विकासशील इंसान पार्टी ने भी विधेयक को संविधान के खिलाफ बताया।

भाजपा सांसद और वक्फ संशोधन विधेयक पर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो देश के मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहा है।

उन्होंने कहा, सरकार की ओर से लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के हित में है। खासकर गरीबों, पसमांदा, महिलाओं, विधवाओं और बच्चों के लिए। विधेयक से कोई भी धार्मिक स्थल, मस्जिद या कब्रिस्तान प्रभावित नहीं होगा, जैसा कि बोर्ड आरोप लगा रहा है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, 90 प्रतिशत से अधिक संपत्तियां मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह और इमामबाड़ों के रूप में हैं। इन संपत्तियों से कोई आय नहीं होती है।

इसलिए, इसमें आपत्तियां उठाने का कोई कारण नहीं है। सैकड़ों वर्षों से मुस्लिम समुदाय इन संपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है। इसलिए सरकार की ओर से किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईद के बाद सरकार संसद में वक्फ विधेयक को पेश कर सकती है। अगल हफ्ते ईद है, ऐसे में अगले हफ्ते विधेयक के पेश किए जाने की संभावना है।

इससे पहले मंत्रिमंडल ने जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक में प्रस्तावित 23 में से 14 बदलावों को मंजूरी दी थी। तब विपक्षी सांसदों ने कहा था कि उनके एक भी बदलाव को स्वीकार नहीं किया गया।

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अब मैदानी इलाकों में कहर बरपाएगी गर्मी, राजस्थान में पारा 40 डिग्री के पार

नईदिल्ली,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। पश्चिमी विक्षोभ से पिछले कुछ दिनों से मैदानी इलाकों में गर्मी से मिली राहत अब तापमान में इजाफा होने से खत्म हो जाएगी। पहाड़ों पर बारिश से तापमान सामान्य रहेगा, लेकिन मैदानों में पारा चढऩे से लोगों को पसीने छूटने वाले हैं।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिम में अगले 2 दिनों में तापमान 2-3 डिग्री, पश्चिम और पूर्वोत्तर हिस्सों में अगले 4-5 दिनों में 4-6 डिग्री के अलावा मध्य में 2-4 डिग्री बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में 25 और 26 मार्च को मौसम साफ रहने से तापमान में बढ़ोतरी होने के आसार हैं। प्रदेश में अगले 4 दिनों में पारा 4-6 डिग्री तक ऊपर जा सकता है।

इसी के साथ राजस्थान में भी भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर और चित्तौडग़ढ़ में तापमान 40 डिग्री के पार जाने से लू के हालात बने हुए हैं।

अगले 2 दिनों तक उत्तर-पूर्वी हवाओं से तापमान में उतार-चढ़ाव होगा।

उत्तराखंड में शुष्क मौसम होने के चलते तापमान में 3-4 डिग्री तक बढ़ गया है। 27 और 28 मार्च को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में गर्मी बढऩे लगी है, जबकि पहाड़ों पर सुबह-शाम ठंड का अहसास हो रहा है। आज लाहुल स्पीति और चंबा में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।

जम्मू-कश्मीर के अधिकांश इलाकों में बादल छाए रहने के साथ पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी या बारिश हो सकती है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में आज मौसम साफ रहेगा, जिससे अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम 17 डिग्री तक जा सकता है।

26 और 27 मार्च को गर्मी के तेवर तीखे होंगे। 27 मार्च को दोपहर बाद तेज हवा चल सकती है। दोनों दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।

इसके बाद 28 से 30 मार्च तक बादल छाने और 20-30 किमी/घंटा की हवा चलने से तापमान में थोड़ी कमी आएगी।

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सड़क दुर्घटनाओं के कारण जीडीपी में तीन प्रतिशत का नुकसान: नितिन गडकरी

नई दिल्ली, 25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि हम सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत का नुकसान हो रहा है।

नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजधानी में सड़क सुरक्षा के लिए तकनीकी हस्तक्षेप : भारत-अमेरिका साझेदारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं हमारी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक हैं। हर साल देश में 4,80,000 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें 1,88,000 लोगों की मौत होती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, जान गंवाने वाले लोगों में 18 से 45 वर्ष की आयु के 66 प्रतिशत लोग होते हैं। युवा, प्रतिभाशाली, इंजीनियरिंग स्नातक, मेडिकल छात्रों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। वहीं, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का यह आंकड़ा 10,000 है।

अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं स्कूलों के आसपास वाले इलाकों में होती हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हम इन दुर्घटनाओं के साथ अपनी जीडीपी का तीन प्रतिशत खो रहे हैं।

उन्होंने सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय परिदृश्य में एक समस्या यह है कि हम डीपीआर सलाहकार के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिसमें कभी-कभी लागत और बचत आदि पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सकता है। इन सुधारों के साथ मौजूदा सरकार ने सड़क हादसों में मौत के आंकड़ों में 48 प्रतिशत और सड़क दुर्घटनाओं में 49 प्रतिशत की कमी की है।

उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को 100 प्रतिशत सही बनाने के लिए सड़क इंजीनियरिंग में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब दुर्घटनाओं के आंकड़े में 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए उनके सही कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों का लाभ उठाते हुए, अब हम बेहतरीन यातायात प्रणाली के संबंध में बहुत सारे कदम उठा रहे हैं। इसके कार्यान्वयन के संबंध में बहुत सारे निर्णय लिए गए हैं।

गडकरी ने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए स्कूली शिक्षा में यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी देने की जरूरत पर जोर दिया।

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कठुआ में तीसरे दिन भी सेना का ऑपरेशन जारी

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

कठुआ,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के सानियाल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों का आतंकियों के खिलाफ अभियान तीसरे दिन भी जारी है. सुरक्षा बल, जिनमें सेना, पुलिस स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और अन्य सुरक्षा बल शामिल हैं, 5 से 6 आतंकियों की तलाश में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.

इस ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को भी शामिल किया गया है. सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने अपने ठिकाने बदले हैं, लेकिन सेना के जवान पूरे इलाके को घेरे हुए हैं और उन्हें पकडऩे के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

यह अभियान रविवार शाम 6:30 बजे हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद शुरू हुआ था. लगभग तीन घंटे तक चली यह मुठभेड़ कम दृश्यता के कारण रोक दी गई थी. सुबह होते ही ऑपरेशन फिर से शुरू हुआ और आज यह तीसरे दिन भी जारी है. इलाके में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जो आतंकियों को पकडऩे के लिए कोई भी कसर नहीं छोडऩा चाहते.

सुरक्षाबलों को अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगभग 5 किलोमीटर दूर सान्याल गांव में 4-5 आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी. इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया. बताया जा रहा है कि आतंकियों ने एक पति-पत्नी को बंधक बना लिया था. मौका मिलने पर महिला भागने में सफल रही, हालांकि आतंकियों ने उसे गोली मारने की धमकी दी. महिला के भागने के बाद, उसका पति भी आतंकियों के चंगुल से भाग निकला. इस घटना में एक बच्ची को मामूली चोटें आई हैं.

इस पूरे ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी नलिन प्रभात स्वयं ग्राउंड से मॉनिटर कर रहे हैं, वे खुद भी जवानों के साथ इस ऑपरेशन में शामिल हुए हैं. ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है. घटनास्थल से चार एम-4 राइफल मैगजीन, 4 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस पैक, बुलेटप्रूफ जैकेट, कई जोड़ी जूते, स्लीपिंग बैग और ट्रैक सूट बरामद हुए हैं. इससे आतंकियों की तैयारी और उनके नापाक मंसूबों का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी की याचिका खारिज की

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड

नई दिल्ली,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में पूर्व उत्तर प्रदेश मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. मधुमिता शुक्ला, जो उस समय गर्भवती थीं, की 9 मई 2003 को लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने कवि की बहन निधि शुक्ला को इस मामले में संबंधित उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश दिया. पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से यह भी पूछा कि कौन से मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है, और कहा कि राज्य के फैसले को चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.

अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को उत्तर प्रदेश कारागार विभाग द्वारा 2018 की छूट नीति के अनुसार समयपूर्व रिहाई का आदेश दिया गया था, क्योंकि उन्होंने 16 साल की सजा पूरी कर ली थी.

यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि अमरमणि त्रिपाठी उस समय मंत्री थे और मधुमिता शुक्ला के साथ उनके संबंध बताए जाते हैं.

त्रिपाठी को सितंबर 2003 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में अक्टूबर 2007 में देहरादून की एक अदालत ने उन्हें और उनकी पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. नैनीताल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने बाद में सजा को बरकरार रखा. इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी.

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दिल्ली से बेंगलुरु जा रही फ्लाइट की ईंधन कम होने के कारण चेन्नई में इमरजेंसी लैंडिंग?

चेन्नई,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली के डोमेस्टिक एयरपोर्ट से हर रोज भारत के विभिन्न हिस्सों के लिए 100 से अधिक उड़ानें संचालित हो रही हैं. इनमें कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट भी शामिल है, जिसने सोमवार दोपहर दिल्ली से 172 यात्रियों के साथ उड़ान भरी.

उड़ान भरने के बाद बीच हवा में उड़ते समय पायलट को एहसास हुआ कि विमान में ईंधन कम हो रहा है. इसको लेकर उसने हवाई अड्डे के कंट्रोल रूम को सूचित किया और कहा कि इससे विमान को बेंगलुरु में उतारने में समस्या होगी. इसके बाद कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने तुरंत विमान को चेन्नई की ओर मोडऩे और वहां ईंधन भरने का आदेश दिया.

इसके बाद पायलट ने विमान को कल दोपहर करीब 1 बजे चेन्नई एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार और उसमें ईंधन भरा, जिस समय एयर इंडिया के विमान में ईंधन भरा जा रहा था, उस समय सभी यात्री विमान में बैठे हुए थे. इसके बाद विमान दोपहर करीब 2 बजे चेन्नई एयरपोर्ट से रवाना हुआ. यह दोपहर करीब 3 बजे बेंगलुरु पहुंचा.

वहीं, विमान के बेंगलुरु पहुंचने में देरी होने से यात्री नाराज हो गए. हालांकि, यात्रियों सहित सभी ने विमान में ईंधन कम होने का एहसास होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के लिए पायलट की सराहना की.

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आपदा प्रबंधन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, 10 सालों में बेहतरी काम हुआ

संसद में बोले गृह मंत्री अमित शाह 

नई दिल्ली ,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। आपदा प्रबंधन में आर्थिक सहायता देने में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन के मामले में राष्ट्रीय ही नहीं क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा है तथा इसे दुनिया भी यह स्वीकार कर रही है.

उच्च सदन में शाह ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसमें सत्ता के केंद्रीयकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में इस विधेयक में न केवल प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने बल्कि पहले से तैयारी करने, अभिनव प्रयासों वाले और सभी की भागीदारी वाले रवैये को अपनाने पर जोर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा के जोखिमों को घटाने के लिए विश्व के समक्ष जो 10 सूत्री एजेंडा रखा है, उसे 40 देशों ने अपना लिया है और उसका पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विधयक में न केवल राज्य सरकारों बल्कि आम लोगों की भागीदारी का प्रावधान किया गया है.

शाह ने कहा, ”पिछले दस सालों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, हम राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरे हैं, यह पूरी दुनिया स्वीकार करती है. भारत की सफलता गाथा को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सफलता गाथा सरकार की नहीं पूरे देश की है.

शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन की लड़ाई संस्थाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ-साथ जवाबदेह बनाये बिना नहीं लड़ी जा सकती है. उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है.

उन्होंने कहा कि आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है. उन्होंने कहा कि आपदा रोकने के लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जाए और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए. उन्होंने वेदों का जिक्र किया और कहा कि इसमें न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष तक को बचाने की बात कही गयी है. गृह मंत्री ने सृष्टि को बचाने के लिए भारत द्वारा प्राचीन समय से किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए हड़प्पा सभ्यता का भी उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि सदस्यों ने सत्ता के केंद्रीयकरण को लेकर चिंता व्यक्त की है किंतु यदि विधेयक को ध्यान से देखा जाए तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है जो राज्य सरकार के तहत आता है. शाह ने कहा कि विधेयक में कहीं भी संघीय ढांचे को नुकसान करने की संभावना ही नहीं है.

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