6 से 18 आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों हेतु जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता, फुटबॉल, एथलेटिक्स, सॉफ्टबॉल एवं अन्य प्रकार के मनोरंजक खेल का आयोजन

राज्य सरकार के समावेशी शिक्षा के आलोक में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशन में 

मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय बरियातू में आयोजन

खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत फुटबॉल, 100 मीटर एवं 50 मी. दौड़, म्यूजिकल चेयर रेस, चम्मच गोली रेस, 20 मी. बिस्किट रेस, चक्का फेंक, बॉल थ्रो बास्केट इत्यादि का आयोजन किया गया

प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया

खेलकूद प्रतियोगिता की समाप्ति के उपरांत बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण अंतर्गत साइंस सिटी का भ्रमण कराया गया

राँची,20.03.2026 – राज्य सरकार के समावेशी शिक्षा के आलोक में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशन में 6 से 18 आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों हेतु जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता, फुटबॉल, एथलेटिक्स, सॉफ्टबॉल एवं अन्य प्रकार के मनोरंजक खेल का आयोजन मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय बरियातू में किया गया।

साथ ही साथ शैक्षणिक भ्रमण साइंस सिटी, राँची में जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। रांची जिले के सभी प्रखंडों से आए बच्चों ने खेलकूद प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लिया। खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत फुटबॉल, 100 मीटर एवं 50 मी. दौड़, म्यूजिकल चेयर रेस, चम्मच गोली रेस, 20 मी. बिस्किट रेस, चक्का फेंक, बॉल थ्रो बास्केट इत्यादि का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी बच्चों को इस अवसर पर टी शर्ट भी प्रदान किया गया। खेलकूद प्रतियोगिता की समाप्ति के उपरांत बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण अंतर्गत साइंस सिटी का भ्रमण कराया गया। साइंस सिटी में अवस्थित विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों को बच्चों ने बहुत ही रुचि लेकर देखा एवं केंद्र में अवस्थित 3D एनीमेशन का भी आनंद उठाया। सभी बच्चे उक्त आयोजन से बहुत ही प्रफुल्लित नजर आए।

कार्यक्रम के सफल संचालन में जिले के शारीरिक शिक्षा शिक्षक, समावेशी शिक्षा अंतर्गत कार्यरत रिसोर्स शिक्षक, थेरेपिस्ट, आभा कुमारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रांची सदर, अखिलेश कुमार एवं सतीश कुमार मिश्र, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी एवं पंकज कुमार अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का योगदान रहा।

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माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आगामी पर्वाें के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था संधारण हेतु दिये गये निर्देश के आलोक में बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

ईद, सरहुल एवं रामनवमी में माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश

संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष सतर्कता बरतने, जुलूस एवं शोभायात्रा रुट का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश

सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश

अभिभावकों से जिला प्रशासन की अपील, पर्व के दौरान बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिखकर रखें

रांची,19.03.2026 – माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्वों के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु दिये गये निर्देशों के आलोक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक का उद्देश्य सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए पर्वों के दौरान शांति, सौहार्द एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक नगर श्री पारस राणा, पुलिस अधीक्षक यातायात श्री राकेश सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर श्री कुमार रजत, उपसमाहर्त्ता नजारत श्री सुदेश कुमार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सभी पदाधिकारी माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूर्व से ही समुचित तैयारी रखें। उन्होंने निर्देश दिया कि संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए तथा पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की तैनाती की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

ईद पर्व के दौरान सभी ईदगाहों एवं नमाज स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को साफ-सफाई एवं पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि पर्व के दौरान आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए, इसके लिए सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

सरहुल एवं रामनवमी पर्व के अवसर पर निकलने वाली शोभायात्राओं को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी निर्धारित रूटों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) किया जाए तथा मार्ग में आने वाली संभावित बाधाओं को पूर्व में ही दूर कर लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शोभायात्राओं के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने हेतु प्रभावी ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए। साथ ही पर्याप्त दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की जाए।

बैठक में सरना समितियों एवं रामनवमी पूजा समितियों से अपील की गयी कि वे माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। झंडों एवं झांकियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने का आग्रह किया गया। साथ ही कहा कि कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मोटरसाइकिल रैली न निकालें।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पर्वों के दौरान संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण एवं त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा की गयी। अभिभावकों से अपील की गयी कि वे सरहुल एवं रामनवमी के दौरान अपने बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिखकर रखें, ताकि यदि बच्चे भीड़ में बिछड़ जाते हैं तो उन्हें शीघ्र उनके अभिभावकों से मिलाया जा सके।

सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के भड़काऊ, आपत्तिजनक या अफवाह फैलाने वाले पोस्ट, वीडियो अथवा संदेशों पर प्रशासन द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके लिए साइबर सेल एवं संबंधित एजेंसियों को सक्रिय रखते हुए लगातार मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें तथा यह सुनिश्चित करें कि सभी पर्व शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न हों। उन्होंने आम नागरिकों से भी प्रशासन का सहयोग करने एवं आपसी भाईचारे एवं सद्भाव की परंपरा को बनाए रखने की अपील की।

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रांची नगर निगम अंतर्गत उपमहापौर एवं बुंडू नगर पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव संपन्न

38 वोट के साथ नीरज कुमार रांची नगर निगम के उपमहापौर निर्वाचित, परमजीत सिंह को मिले 15 वोट

मेयर रोशनी खलखो ने नीरज कुमार को दिलायी पद एवं गोपनीयता की शपथ

रवीन्द्र उरांव निर्विरोध बुण्डू नगर पंचायत उपाध्यक्ष निर्वाचित

रांची,19.03.2026 – रांची नगर निगम उपमहापौर एवं बुंडू नगर पंचायत उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समाहरणालय सभागार में लोकतांत्रिक परंपराओं का अनुपालन करते हुए जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन किया गया।

रांची नगर निगम के उपमहापौर पद के लिए हुए चुनाव में नीरज कुमार ने 38 मत प्राप्त कर विजय हासिल की। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी परमजीत सिंह को 15 मत प्राप्त हुए। स्पष्ट बहुमत के साथ नीरज कुमार को उपमहापौर निर्वाचित घोषित किया गया।

निर्वाचन उपरांत रांची नगर निगम की महापौर रोशनी खलखो द्वारा समाहरणालय सभागार में नीरज कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने नव-निर्वाचित उपमहापौर को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

वहीं, बुंडू नगर पंचायत में उपाध्यक्ष पद के लिए रवीन्द्र उरांव निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।

इस दौरान प्रशासनिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

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रांची नगर निगम एवं बुंडू नगर पंचायत के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण सम्पन्न

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ

रांची,19.03.2026 – रांची नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों तथा बुंडू नगर पंचायत के अध्यक्ष एवं वार्ड सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आज समाहरणालय भवन, ब्लॉक-A के कमरा संख्या-207 एवं 608 में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। समारोह के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं जनसेवा की भावना के साथ करने का संकल्प लिया।

शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रशासनिक पदाधिकारियों, संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का आयोजन सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण तरीके से किया गया।

इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि नगर विकास, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी जनप्रतिनिधि आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए शहर एवं क्षेत्र के समग्र विकास में सक्रिय योगदान देंगे।

शपथ ग्रहण के दौरान अपर समाहर्ता रांची, एडीएम (नक्सल), जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी-सह-पंचायती राज पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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संसद प्रश्न: परमाणु ईंधन चक्र में स्वदेशी क्षमता में वृद्धि

नई दिल्ली – भारत में यूरेनियम अयस्क के खनन और प्रसंस्करण के लिए अधिकृत परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने यूरेनियम खनन की स्वदेशी क्षमता को बढ़ाने के लिए पहल की है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप नई यूरेनियम खनन परियोजनाओं को शुरू करने की योजना बनाई है। राजस्थान के सीकर जिले के रोहिल में 2,500 टन प्रति दिन की क्षमता वाली खदान और मिल स्थापित करने तथा छत्तीसगढ़ के जाजवाल यूरेनियम परियोजना में एक और खदान और मिल स्थापित करने की पहल की है, जो वैधानिक मंजूरी प्राप्त करने के विभिन्न चरणों में हैं।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली परमाणु ईंधन परिसर (एनएफसी) परमाणु न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के लिए स्वदेशी रूप से ईंधन असेंबली का निर्माण करती है। न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यूरेनियम को कच्चे माल के रूप में उपयोग करके प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और बॉइलिंग वाटर रिएक्टर (बीडब्ल्यूआर) संचालित करता है, जिसकी आपूर्ति यूसीआईएल से की जाती है और आयात भी किया जाता है। एनएफसी ने एनपीसीआईएल के रिएक्टर तैनाती कार्यक्रम और यूसीआईएल से प्राप्त आपूर्ति के अनुसार समय-समय पर अपनी ईंधन उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए पहल की है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसंधान एवं विकास इकाई और परमाणु पुनर्चक्रण बोर्ड (एनआरबी) तारापुर स्थित एकीकृत परमाणु पुनर्चक्रण संयंत्र (आईएनआरपी) तथा कल्पक्कम स्थित तीव्र रिएक्टर ईंधन चक्र सुविधा (एफआरएफसीएफ) में घरेलू स्रोतों से प्राप्त प्रयुक्त ईंधन के पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रबंधन तथा तीव्र रिएक्टरों के लिए ईंधन निर्माण हेतु उच्च क्षमता वाली एकीकृत परमाणु पुनर्चक्रण सुविधाओं का निर्माण कर रहे हैं। इन सुविधाओं से देश में ईंधन निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन की स्वदेशी क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

खनन और ईंधन निर्माण क्षेत्रों में की गई पहलों और एकीकृत परमाणु सुविधाओं के चालू होने से प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर के लिए ईंधन का उत्पादन बढ़ेगा और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के लिए मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। तारापुर और कलपक्कम में स्थित परमाणु पुनर्चक्रण सुविधाओं के अंतर्गत नए ईंधन निर्माण संयंत्र फास्ट रिएक्टरों के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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संसदीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया

नई दिल्ली – संसदीय कार्य मंत्रालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), जनजातीय छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) और संबंधित विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के साथ समन्वय में, संबंधित दिशानिर्देशों के तहत केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं का वार्षिक आयोजन करता है। प्रतियोगिताओं का उद्देश्य लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना, अनुशासन की स्वस्थ आदतों को विकसित करना, दूसरों के दृष्टिकोण के प्रति सहिष्णुता बढ़ाना, और छात्रों को संसद और संसदीय संस्थानों के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।

सीमित संख्या में शैक्षणिक संस्थान/विद्यार्थी ही राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं, जो भौतिक रूप में आयोजित की जाती हैं। दूसरी ओर, पूरे देश के सभी नागरिक/सभी शैक्षणिक संस्थानों/समूहों के विद्यार्थी और यहां तक कि व्यक्तिगत रूप से भी राष्ट्रीय युवा संसद योजना (एनवाईपीएस 2.0) में भाग ले सकते हैं, जो डिजिटल मोड में आयोजित की जाती है। वेब-पोर्टल आधारित एनवाईपीएस 2.0 में भागीदारी; संस्थागत भागीदारी, समूह भागीदारी और व्यक्तिगत भागीदारी के माध्यम से की जा सकती है। व्यक्तिगत भागीदारी श्रेणी के तहत, व्यक्तिगत नागरिक ‘भारतीय लोकतंत्र के कार्य’ थीम पर क्विज़ में प्रयास करके भाग ले सकते हैं। व्यक्तिगत भागीदारी के तहत 44,000 से अधिक व्यक्तिगत नागरिकों ने भाग लिया है।

युवा संसद प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को वित्तीय सहायता के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों द्वारा किए गए वास्तविक व्यय को संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमाओं तक प्रतिपूर्ति दी जाती है, बशर्ते उनसे दावा प्राप्त हो। जिन संघ शासित क्षेत्रों में विधानमंडल नहीं है, उनके लिए प्रत्यक्ष सीमा प्रत्येक संघ शासित क्षेत्र प्रति वर्ष ₹2 लाख है। चालू वित्त वर्ष के दौरान, अब तक किसी भी संघ शासित क्षेत्र, जिनके पास विधानमंडल नहीं है, से कोई प्रतिपूर्ति दावा प्राप्त नहीं हुआ है।

यह जानकारी केंद्रीय विधि और न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोक सभा में लिखित उत्तर में दी।

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सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 लागू किया

सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाया और एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम को प्रोत्साहन दिया

नई दिल्ली – सरकार देश में एक सुरक्षित, जिम्मेदार और जवाबदेह ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी संदर्भ में, सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स में नवाचार को प्रोत्साहन देने और ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन अधिनियम, 2025 (“गेमिंग अधिनियम”) लागू कर दिया है।

गेमिंग अधिनियम के अंतर्गत ऑनलाइन मनी गेम्स के सभी रूपों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है, चाहे वे संयोग के खेल हों, कौशल के खेल हों या दोनों का संयोजन हों। यह अधिनियम ऐसे खेलों के विज्ञापन, प्रचार और सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ बैंकों या भुगतान प्रणालियों के माध्यम से संबंधित वित्तीय लेनदेन के प्रसंस्करण पर भी रोक लगाता है। अधिनियम अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत अवैध प्लेटफार्म तक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार भी देता है।

गेमिंग अधिनियम के उल्लंघन के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश करना या ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स के लिए वित्तीय लेनदेन की सुविधा प्रदान करना तीन वर्ष तक की कैद या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों का दंड हो सकता है। ऑनलाइन मनी गेम्स की पेशकश करने या इसकी सुविधा प्रदान करने के लिए दूसरी/बाद की सजा पर कम से कम 3 वर्ष की कैद हो सकती है जिसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है जिसे दो करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करना दो वर्ष तक की कैद या पचास लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों के साथ दंडनीय है। ऐसे ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करने के लिए दूसरी/बाद की सजा पर कम से कम 2 वर्ष की कैद हो सकती है जिसे 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम पचास लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है जिसे एक करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

उपरोक्त के अतिरिक्त, गेमिंग अधिनियम ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स की मान्यता और प्रचार, भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना, ऑनलाइन गेम्स के लिए एक पारदर्शी पंजीकरण व्यवस्था, उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत निवारण प्रणाली और प्रतिबंधित ऑनलाइन मनी गेम्स तथा उनसे संबंधित नुकसानों से सुरक्षा का भी प्रावधान करता है।

राष्ट्रीय स्तर पर गठित ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण अनुमत खेलों का वर्गीकरण और पंजीकरण करने, यह निर्धारित करने कि कोई खेल धन-आधारित खेल है या नहीं, आचार संहिता जारी करने और जनता की शिकायतों का समाधान करने के लिए जिम्मेदार होगा। केंद्रीय नियामक प्राधिकरण को सशक्त बनाकर, अधिनियम का उद्देश्य समन्वित नीतिगत समर्थन, प्रभावी निगरानी प्रदान करना और भारत को ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी विकास राष्ट्रीय हित और उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गेमिंग अधिनियम को लागू करने के उद्देश्य से 2 अक्टूबर, 2025 को ऑनलाइन गेमिंग प्रचार और विनियमन नियम, 2025 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित किया था। कानून निर्माण के प्रति सरकार की समावेशी दृष्टिकोण की प्रतिबद्धता के अनुरूप, हितधारकों सहित जनता से प्रतिक्रिया आमंत्रित की गई थी।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा श्री राव राजेंद्र सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी आज लोकसभा में प्रस्तुत की गई।

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वित्तीय अंतरण के माध्यम से ग्राम पंचायतों का सुदृढ़ीकरण

नई दिल्ली – ‘पंचायत’, ‘स्थानीय सरकार’ होने के नाते, राज्य का विषय है और भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का हिस्सा है। पंचायतेँ संबंधित राज्य के पंचायती राज अधिनियमों के माध्यम से स्थापित की जाती हैं और संचालित होती हैं, जो संविधान के प्रावधानों के अधीन, हर राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं। पंचायतों का प्रदर्शन और विकास, संबंधित राज्यों द्वारा उन्हें हस्तांतरित किए गए अधिकारों और संसाधनों की मात्रा पर निर्भर करता है। तदनुसार, पंचायतों से संबंधित सभी विषय, जिनमें पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) का प्रभावी कार्य निष्पादन, पीआरआई की जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना, तथा उनके प्रदर्शन की निगरानी एवं मूल्यांकन शामिल हैं, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालाँकि, भारत के संविधान का अनुच्छेद 280(3)(ख ख) केंद्रीय वित्त आयोगों को यह आधार प्रदान करता है कि वे राज्य के पंचायतों के संसाधनों को पूरक करने के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाने हेतु अनुदान की सिफारिश कर सकें।

चौदहवें वित्त आयोग (FFC) के अवॉर्ड अवधि वित्तीय वर्ष2015-16 से 2019-20के अंतर्गत, 26 राज्यों (केरल सहित)में संविधान के भाग IX के तहत गठित ग्राम पंचायतों के लिए ₹2,00,292.20 करोड़ आवंटित किए गए थे। इन निधियों का उपयोग मूलभूत सेवाओं की आपूर्ति, जिनमें जलापूर्ति, स्वच्छता (सेप्टिक प्रबंधन सहित), सीवरेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल निकासी, सड़कों और फुटपाथों का रखरखाव आदि शामिल हैं के लिए किया जाना था। इस कुल आवंटन में से ₹ 1,83,248.54 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इसमें केरल को जारी किए गए ₹ 3774.20 करोड़ शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत ₹ 60,750 करोड़ की राशि अंतरिम अवधि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आवंटित की गई तथा ₹ 2,36,805 करोड़ की राशि वित्तीय वर्ष 2021-26 की अवधि के लिए पंचायतों (सभी तीन स्तरों पर), पारंपरिक स्थानीय निकायों तथा छठी अनुसूची क्षेत्रों में 28 राज्यों (केरल सहित) को आवंटित की गई। कुल आवंटन में से ₹ 2,67,250.78 करोड़ (दिनांक 11.03.2026 तक) जारी किए जा चुके हैं। इसमें केरल को जारी किए गए ₹ 7,321.50 करोड़ शामिल हैं।इस अनुदान को आगे दो भागों में विभाजित किया गया है—मूल (अबंधित) अनुदान, जिसे भारत के संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, परंतु वेतन और अन्य स्थापना व्यय के लिए नहीं। बंधित अनुदान, जिसका उपयोग विशेष रूप से पेयजल और स्वच्छता क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए किया जाना है।

पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और अनुप्रयोग विकसित किए हैं, ताकि देश के ग्रामीण स्थानीय शासन (केरल राज्य सहित) में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाई जा सके। इस मंत्रालय ने ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in) नामक एक उपयोगकर्ता-अनुकूल वेब-आधारित पोर्टल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य विकेन्द्रीकृत योजना, प्रगति रिपोर्टिंग, वित्तीय प्रबंधन, कार्य-आधारित लेखांकन और निर्मित परिसंपत्तियों के विवरण में बेहतर पारदर्शिता लाना है। इस अनुप्रयोग को आगे सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), और ऑडिटऑनलाइन अनुप्रयोगों के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि भुगतान में आसानी, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और पंचायत खातों का लेखा-परीक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान देशभर के कुल 2,64,211 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों में से 2,54,604 (96.36%) ने अपनी ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ ई-ग्रामस्वराज पर अपलोड की हैं और 2,42,871 (91.92%)ने ई-ग्रामस्वराज–पीएफएमएस इंटरफ़ेस के माध्यम से विक्रेताओं को ₹38,491 करोड़ का भुगतान किया है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में2.58 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थाओं ने अपने अनंतिम खातों को बंद किया है और 1.63 लाख पंचायती राज संस्थाओं ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान सभी राज्यों (केरल सहित) को आवंटित और जारी की गई निधियों का विवरण अनुबंध में प्रस्तुत किया गया है।

अनुबंध

पिछले तीन वर्षों के दौरान (दिनांक11.03.2026 तक) ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत अनुशंसित और जारी किए गए अनुदानों का राज्यवार विवरण

(रुकरोड़ में)

क्रसं राज्य 2023-24 2024-25 2025-26
आवंटन जारी आवंटन जारी आवंटन जारी
1 आंध्र प्रदेश 2031.00 1997.45 2152.00 2109.97 2099.00 2053.81
2 अरूणाचल प्रदेश 179.00 0.00 189.00 0.00 185.00 0.00
3 असम 1241.00 1241.00 1315.00 1315.00 1283.00 1283.00
4 बिहार 3884.00 3855.33 4114.00 4109.01 4012.00 2806.31
5 छत्तीसगढ़ 1125.00 1125.00 1192.00 1185.25 1163.00 802.06
6 गोवा 58.00 36.13 62.00 0.00 61.00 0.00
7 गुजरात 2473.00 2473.00 2619.00 2619.00 2555.00 1782.04
8 हरियाणा 979.00 953.59 1036.00 1012.51 1011.00 988.14
9 हिमाचल प्रदेश 332.00 318.04 352.00 352.00 343.00 341.50
10 झारखण्ड 1307.00 1307.00 1385.00 962.94 1351.00 0.00
11 कर्नाटक 2490.00 2086.59 2637.00 2133.25 2572.00 0.00
12 केरल 1260.00 1260.00 1334.00 1334.00 1301.00 650.50
13 मध्य प्रदेश 3083.00 2923.89 3265.00 3262.75 3185.00 630.65
14 महाराष्ट्र 4510.00 3629.21 4776.00 3169.72 4659.00 2507.25
15 मणिपुर 137.00 0.00 145.00 0.00 142.00 0.00
16 मेघालय 141.00 0.00 149.00 0.00 146.00 0.00
17 मिजोरम 72.00 72.00 76.00 76.00 74.00 37.00
18 नागालैंड 97.00 0.00 102.00 0.00 99.00 0.00
19 ओड़िशा 1747.00 1746.91 1851.00 1851.00 1805.00 1712.98
20 पंजाब 1074.00 1058.35 1138.00 1127.86 1110.00 555.00
21 राजस्थान 2989.00 2847.96 3166.00 3166.00 3087.00 757.60
22 सिक्किम 33.00 33.00 35.00 32.78 33.00 22.85
23 तमिलनाडु 2791.00 2791.00 2957.00 2957.00 2884.00 637.93
24 तेलंगाना 1430.00 1430.00 1514.00 640.07 1477.00 0.00
25 त्रिपुरा 148.00 148.00 157.00 156.31 153.00 153.00
26 उत्तर प्रदेश 7547.00 7547.00 7994.00 7994.00 7797.00 5441.38
27 उत्तराखण्ड 445.00 444.13 471.00 470.30 458.00 89.41
28 पश्चिम बंगाल 3415.00 3415.00 3617.00 3472.22 3528.00 3403.92
  कुल 47018.00 44739.57 49800.00 45508.95 48573.00 26656.33

 

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 18 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में दूरसंचार का विस्तार नए विकास प्रतिमान दर्शाता है: लोकसभा में केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

नई दिल्ली – केन्‍द्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज लोकसभा को भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी, और समावेशी डिजिटल अवसंरचना की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयासों पर बल दिया।

 

सीमावर्ती क्षेत्रों के गाँवों में मोबाइल टावर कनेक्टिविटी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में केन्‍द्रीय मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की पहली बस्ती से 0 से 50 किलोमीटर के भीतर स्थित गाँवों को सीमावर्ती गाँव के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत इन बस्तियों को अब देश के “अंतिम गाँव” नहीं, बल्कि “प्रथम गाँव” माना जाता है, जो विकास प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है।

केन्‍द्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने दूरसंचार क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाया है। उन्होंने बताया कि बीएसएनएल के लिए स्वदेशी 4जी टेलीकॉम स्टैक का विकास महत्वपूर्ण दूरसंचार उपकरणों के घरेलू निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी क्षमताएँ हैं।

बीएसएनएल के पुनरुद्धार का उल्लेख करते हुए केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि इस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ने वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान लगभग 18 वर्षों में तिमाही में पहली बार शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इसके ग्राहक आधार में 8.55 करोड़ से बढ़कर 9.27 करोड़ तक वृद्धि हुई है, जो उपभोक्ताओं के नए विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने आगे बताया कि 1,00,000 4जी टावर स्थापित किए जा चुके हैं और आगे विस्तार की योजना है, तथा 4जी नेटवर्क के स्थिर होने के बाद 5जी सेवाएँ शुरू की जाएंगी।

केन्‍द्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि जिन आबाद गाँवों में अब तक मोबाइल कवरेज नहीं है, वहाँ दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा उनकी तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के आधार पर सेवा प्रदान की जा रही है। सरकार ने डिजिटल भारत निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों, जिसमें राजस्थान भी शामिल है, में दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए अनेक योजनाओं को मंजूरी दी है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 97.28 प्रतिशत गाँवों और स्थानों पर पहले से ही मोबाइल कवरेज उपलब्ध है। इसके अलावा, सरकार ने देशभर में, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, मोबाइल कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं।

इनमें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंसिंग शर्तों में संशोधन शामिल है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास मोबाइल टावर स्थापित करने पर लगी पाबंदियों को हटाया जा सके। इसके साथ ही, दूरसंचार कानून, 2023 के तहत अधिसूचित दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम, 2024 को लागू किया गया है, जिससे दूरसंचार अवसंरचना के तेजी से और आसानी से विस्तार को संभव बनाया जा सके। गति शक्ति संचार पोर्टल भी शुरू किया गया है, ताकि किसी अन्‍य व्‍यक्ति की जमीन का उपयोग करने के कानूनी अधिकार की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

उत्तराखंड में प्रगति को उजागर करते हुए श्री सिंधिया ने बताया कि पहचाने गए 705 सीमावर्ती गाँवों में से 684 को पहले ही दूरसंचार कनेक्टिविटी प्रदान की जा चुकी है। शेष गाँवों में भी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं, जिनमें डिजिटल भारत निधि योजना के तहत लक्षित हस्तक्षेप शामिल हैं।

श्री सिंधिया ने जोर देकर कहा कि आज भारत के पास विश्व के सबसे व्यापक दूरसंचार नेटवर्कों में से एक नेटवर्क है, जो यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी बड़े पैमाने की डिजिटल सेवाओं को सक्षम बना रहा है। उन्होंने कहा कि किफायती, व्यापक और तेज़ तकनीकी अपनाने की वजह से भारत डिजिटल संचार के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है।

ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पर उन्होंने भारतनेट कार्यक्रम के तहत हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि 2,15,000 से अधिक ग्राम पंचायतों को पहले ही जोड़ा जा चुका है। लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित भारतनेट पहल विश्व के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक है। नेटवर्क को रिंग टोपोलॉजी में उन्नत किया जा रहा है, ताकि अधिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके, साथ ही मांग-आधारित तरीके से अतिरिक्त गाँवों को भी जोड़ा जा रहा है। केन्‍द्रीय मंत्री ने जोर देकर यह भी कहा कि पिछले एक दशक में भारत की दूरसंचार क्रांति ने डेटा की लागत को लगभग 97 प्रतिशत तक कम कर दिया है, साथ ही मोबाइल अवसंरचना का व्यापक विस्तार किया है और देशभर में 5जी सेवाओं के तेज़ी से विस्तार को संभव बनाया है।

उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि देश के सभी क्षेत्रों, विशेषकर सीमा और दूरस्थ इलाकों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

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भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 – देश के विद्युत भविष्य को आकार देने के लिए नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक मंच पर लाना

नई दिल्ली –  भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 विद्युत और बिजली क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वैश्विक सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी है। यह सम्मेलन 19 से 22 मार्च 2026 तक यशोभूमिनई दिल्ली में आयोजित होगा।

इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक उच्च स्तरीय सम्मेलन सत्रों, 300 से अधिक वक्ताओं, 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, 100 से अधिक स्टार्टअप सहित 500 से अधिक प्रदर्शकों और 25,000 से अधिक आगंतुकों के शामिल होने की उम्मीद है, जो इसे विश्व स्तर पर बिजली पर केंद्रित सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक बनाता है।

विकास को तीव्र करना, निरंतरता को सशक्त बनाना, वैश्विक स्तर पर जुड़ना विषय पर आधारित इस शिखर सम्मेलन में एक व्यापक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें रणनीतिक सम्मेलन, तकनीकी सम्मेलन, नेतृत्व पैनल और उद्योग जगत के साथ केंद्रित संवाद सहित कई उच्च स्तरीय सत्र होंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक विद्युत क्षेत्र के विकास के अगले चरण को आकार देना है।

इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के कई देशों के ऊर्जा मंत्री, देश के विभिन्न राज्यों के मंत्री और केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से मजबूत भागीदारी इस शिखर सम्मेलन को बिजली और स्वच्छ ऊर्जा परितंत्र में संवाद, सहयोग और नवाचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों में से एक के रूप में स्थापित करती है।

इस शिखर सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल; उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी; विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक; केंद्र सरकार के विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल; केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद; 10 देशों के ऊर्जा मंत्री, 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विद्युत मंत्री एवं सचिव, लगभग 60 देशों के राजदूत और सभी केंद्रीय विद्युत क्षेत्र उद्यमों के प्रमुखों सहित 100 से अधिक सीईओ शामिल होंगे।

इस प्रकार, यह आयोजन भारत के विकसित होते विद्युत परितंत्र को आकार देने वाली प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए वरिष्ठ नीति निर्माताओं, नियामकों, शिक्षाविदों, क्षेत्र विशेषज्ञों, उपयोगिता कंपनियों, निवेशकों, नवोन्मेषकों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक साथ लाएगा।

यह शिखर सम्मेलन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विक्रेता विकास पर विशेष बल देगा, जिसमें उत्सर्जन प्रणालियों, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, पारेषण अवसंरचना और डिजिटल वितरण प्रौद्योगिकियों सहित प्रमुख तकनीकों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वर्ष 2032 तक उत्पादन, पारेषण, वितरण और ऊर्जा भंडारण में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसरों के साथ इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य देश के विद्युत क्षेत्र में नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और सुदृढ़ता को बढ़ावा देना है।

80 से अधिक देशों के प्रतिभागियों की उपस्थिति भारत के तेजी से विकसित हो रहे विद्युत क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है और एक सुदृढ़, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा परिवर्तन को सक्षम बनाने में देश के उभरते नेतृत्व को उजागर करती है।

इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के अलावा, हरियाणा (रणनीतिक राज्य भागीदार), राजस्थान (भागीदार राज्य), उत्तर प्रदेश (रणनीतिक राज्य भागीदार), महाराष्ट्र (रणनीतिक राज्य भागीदार), आंध्र प्रदेश (केंद्रित राज्य), बिहार (केंद्रित राज्य), ओडिशा (केंद्रित राज्य), गुजरात (रणनीतिक राज्य भागीदार), पंजाब (भागीदार राज्य), मध्य प्रदेश (भागीदार राज्य), छत्तीसगढ़ (भागीदार राज्य) और दिल्ली (केंद्रित राज्य) सहित 25 से अधिक भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ नेतृत्व और अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। राज्य सरकारों की भागीदारी से भारत के विद्युत ढांचे को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तेजी लाने, ग्रिड अवसंरचना का आधुनिकीकरण करने और देश भर में बिजली वितरण दक्षता बढ़ाने पर महत्वपूर्ण संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली एक विशाल प्रदर्शनी, शिखर सम्मेलन का मुख्य आधार बनेगी, जिसमें बिजली मूल्य श्रृंखला में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और समाधानों का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी को विद्युत उत्पादन, पारेषण, नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, वितरण और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों को शामिल करने वाले विषयगत क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा। साथ ही ऊर्जा नवाचार, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए समर्पित क्षेत्र भी होंगे। ये क्षेत्र उद्योग जगत के दिग्गजों, नवोन्मेषकों और निर्माताओं को विद्युत उत्पादन प्रौद्योगिकियों, पारेषण प्रणालियों, वितरण और नियंत्रण समाधानों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा भंडारण और बैटरी नवाचारों, ऊर्जा दक्षता समाधानों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में हुई प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेंगे।

इस शिखर सम्मेलन में उच्च-प्रभावशाली संवाद और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रमों की एक श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी। इनमें एक अंतर्राष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय बैठक, एक राष्ट्रीय विद्युत मंत्रिस्तरीय बैठक, उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षेत्रों के सीईओ के लिए मंच, और एक समग्र क्षेत्रीय सीईओ संवाद (जिसमें हिताची यूएसए, रोसेटी रूस, एस्कॉम, टीएनबी मलेशिया, अफ्रीका50, ईडीएफ पावर सॉल्यूशंस, ज़ेस्को के सीईओ शामिल होंगे) शामिल हैं, जो प्रमुख उपयोगिता और ऊर्जा कंपनियों के दिग्गजों को एक साथ लाएगा। इसके अलावा, कई विषयगत सत्र स्थिर ऊर्जा भंडारण, पारेषण क्षेत्र में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों, जलविद्युत विकास, कार्बन बाजारों, कानूनी तथा नियामक ढांचे, और विद्युत मूल्य श्रृंखला में विक्रेता विकास के अवसरों जैसी प्रमुख उद्योग प्राथमिकताओं पर केंद्रित होंगे। विशेष सत्रों में ऊर्जा स्टार्टअप, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, युवाओं तथा युवा पेशेवरों, साथ ही विद्युत क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने वाली पहलों जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

इस शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मंच भी शामिल होंगे, जिनमें अफ्रीका सत्र, ब्रिटिश उच्चायोग और प्रमुख ऊर्जा संघों जैसे वैश्विक संस्थानों और भागीदारों के साथ सत्र शामिल हैं। केबलटेक 2026, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के लिए मीटर के पीछे ऊर्जा भंडारण पर चर्चा और इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) जैसे संगठनों से संचालित सत्रों सहित विशेष उद्योग संवाद, बिजली क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों और निवेश के अवसरों का पता लगाएंगे।

इस शिखर सम्मेलन में रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बिंदु वैश्विक ऊर्जा परितंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विषय होंगे और इसमें रणनीतिक पैनलों में 120 से अधिक प्रमुख निर्णयकर्ता और दिग्गज शामिल होंगे। इनमें विश्व स्तर पर परस्पर जुड़े विद्युत तंत्रों को सुदृढ़ करना, वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में भारत के नेतृत्व को आगे बढ़ाना, सुदृढ़ विद्युत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना, विद्युत क्षेत्र में वित्त और निवेश के नए रास्ते खोलना, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की तैनाती में तेजी लाना और विद्युत मूल्य श्रृंखला में उन्नत तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।

सत्रों में इस क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी बढ़ाने, समावेशी ऊर्जा पहुंच का विस्तार करने और तेजी से विकसित हो रहे बिजली परिदृश्य का समर्थन करने के लिए आवश्यक अगली पीढ़ी के कार्यबल को विकसित करने के तरीकों की भी जांच की जाएगी।

इस आयोजन में सरकार में नेतृत्व स्तर पर बैठे दिग्गजों, परियोजना मालिकों, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण कंपनियों, अवसंरचना विकसित करने में शामिल लोगों, योग्य अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र के दिग्गजों, वित्तीय संस्थानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), बड़े निर्माताओं, उद्योग संघों और शिक्षाविदों सहित विविध वैश्विक दर्शकों के आने की उम्मीद है। इस शिखर सम्मेलन में संरचित खरीदार-विक्रेता बैठकें भी आयोजित की जाएंगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीद एजेंसियों, उपयोगिताओं और अवसंरचना विकसित करने में लगे लोगों को भारतीय निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और वैश्विक नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, शिखर सम्मेलन से वैश्विक विद्युत परितंत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की उम्मीद है।

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया www.bharatelectricitysummit.com पर जाएं।

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सरकार ने सौर इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम प्रारूप का विस्तार किया

 यह 1 जून 2028 से प्रभावी होगा

नई दिल्ली – एमएनआरई ने 1 जून 2028 से प्रभावी होने वाले इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III को शामिल करने के लिए एएलएमएम आदेश का विस्तार किया है। पहले से जारी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए उपयुक्त प्रावधान किए गए हैं। एमएनआरई का वर्तमान आदेश, मॉड्यूल और सेल के लिए पहले से लागू एएलएमएम सूचियों से अनिवार्य सोर्सिंग आवश्यकताओं को सौर आपूर्ति श्रृंखला में एक कदम आगे बढ़ाकर इंगोट्स और वेफर्स को भी शामिल करता है, जो वर्तमान में आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि यह भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। मंत्री महोदय ने कहा कि इस कदम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में उच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

 

मुख्य प्रावधान

  • प्रभावी तिथि: 1 जून 2028 – वह तिथि जिससे सभी परियोजनाओं को एएलएमएम-सूचीबद्ध वेफर्स का उपयोग करना अनिवार्य होगा, जिसमें नेट मीटरिंग/ओपन एक्सेस परियोजनाएं भी शामिल हैं।
  • कट-ऑफ तिथि: वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III की प्रारंभिक सूची प्रकाशित होने के 7 दिन बाद। इस तिथि के बाद धारा 63 के तहत प्रस्तुत की गई बोलियों में एएलएमएम सूची-III के अनुरूप वेफर्स के उपयोग का उल्लेख करना अनिवार्य है।
  • प्रारंभिक सूची जारी करने की सीमा: कम से कम 3 स्वतंत्र विनिर्माण इकाइयां (जो एक ही स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन न हों) जिनकी संयुक्त क्षमता 15 गीगावाट हो, यह सुनिश्चित करते हुए कि सूची तभी जारी की जाए जब यह न्यूनतम घरेलू आपूर्ति उपलब्ध हो।
  • अनिवार्य पिंड क्षमता: वे निर्माता जो वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III में सूचीबद्ध होना चाहते हैं, उनके पास समतुल्य पिंड निर्माण क्षमता भी होनी चाहिए, जिससे पिंडों के लिए अपस्ट्रीम एकीकरण को बढ़ावा मिले।
  • मॉड्यूल सूची की अखंडता: प्रभावी तिथि से आगे, एएलएमएम सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल) में केवल वे मॉड्यूल शामिल होंगे जो एएलएमएम-सूचीबद्ध सेल और वेफर का उपयोग करके निर्मित किए गए हैं। व्यवधान से बचने के लिए पूर्वस्थापित परियोजनाओं के लिए अलग सूचियां रखी जाएंगी।
  • डीसीआर प्रावधान: यह आदेश वर्तमान एमएनआरई योजनाओं के अंतर्गत किसी भी घरेलू सामग्री आवश्यकता (डीसीआर) प्रावधानों को कमजोर या निरस्त नहीं करता है।

अपेक्षित लाभ

वेफर्स, पॉलीसिलिकॉन और सोलर सेल के बीच का महत्वपूर्ण मध्यवर्ती चरण हैं। भारत में वर्तमान में घरेलू वेफर उत्पादन क्षमता सीमित है और यह काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

एएलएमएम सूची-III के लागू होने से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है:

  • भारत में इंगोट्स और वेफर निर्माण सुविधाओं में निवेश को बढ़ावा देना;
  • आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा में सुधार करें और आयात में व्यवधान के प्रति संवेदनशीलता को कम करें;
  • वेफर से लेकर मॉड्यूल तक, सौर घटकों की गुणवत्ता और पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित करें;
  • सौर ऊर्जा उत्पादन के प्रारंभिक चरण में कुशल रोजगार सृजित करना;
  • एएलएमएम का यह विस्तार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने की देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

भारत का अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (एएलएमएम) आदेश, 2019 एक गुणवत्ता और विश्वसनीयता ढांचा है जो यह सुनिश्चित करता है कि देश की सौर परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले सौर उपकरण घरेलू विनिर्माण मानकों को पूरा करते हैं। यह विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से आवंटित परियोजनाओं और नेट-मीटरिंग या ओपन-एक्सेस परियोजनाओं पर लागू होता है।

एएलएमएम की शुरुआत के बाद से, घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एएलएमएम सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल) 2021 में 8.2 गीगावाट से बढ़कर वर्तमान में लगभग 172 गीगावाट हो गया है। एएलएमएम सूची-II (सौर पीवी सेल), जिसे हाल ही में शुरू किया गया है, सात महीनों के भीतर ही 27 गीगावाट तक पहुंच गया है, जो घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने में इस ढांचे की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

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केंद्रीय सूचना और प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू ने आईआईसीटी का दौरा किया, विस्तार योजनाओं और कंटेंट-क्रिएटर प्रयोगशाला योजना की समीक्षा की

नई दिल्ली – सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू ने आज मुंबई के राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम परिसर में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) का दौरा किया और संस्थान की विकास यात्रा और विस्तार योजनाओं की समीक्षा की।

श्री जाजू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सभी बोर्ड सदस्य और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

श्री जाजू ने संस्थान की नेतृत्व टीम के साथ रणनीतिक रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की।

चर्चा का मुख्य केंद्र आईआईसीटी के शैक्षणिक कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे को रचनात्मक और डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांगों के अनुरूप विकसित करना था। उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से चल रही पहलों की भी समीक्षा की।

श्री जाजू ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा,“बुनियादी ढांचा तैयार है और लगभग 150 विद्यार्थियों ने आईआईसीटी में अपने अध्ययन कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। हमारा लक्ष्य जुलाई तक 400 विद्यार्थियों को शामिल करना है, साथ ही 20 स्टार्टअप भौतिक रूप से और कई अन्य वर्चुअल रूप से स्थापित करना है। संस्थान उत्पादन और पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाला बुनियादी ढांचा प्रदान करता है।” उन्होंने बताया कि वर्तमान में आईआईसीटी में 11 स्टार्टअप को इनक्यूबेट किया जा रहा है। श्री जाजू ने यह भी कहा कि शीघ्र  ही फिल्म सिटी, गोरेगांव में एक बड़ा परिसर विकसित किया जाएगा और वहां कक्षाएं 2028 में शुरू होने की संभावना है।

सूचना और प्रसारण सचिव ने बैठक में हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्रीय बजट में घोषित विजुअल गेमिंग, वीएफएक्स और कंटेंट क्रिएशन प्रयोगशाला के संबंध में उद्योग जगत के साथ भी बातचीत हुई।

श्री जाजू ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य रचनात्मक अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना था पिछले वर्ष, वेव्स शिखर सम्मेलन में “ऑरेंज इकोनॉमी” पहल के अंतर्गत 20 लाख लोगों को कंटेंट क्रिएशन और रचनात्मक क्षेत्रों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। श्री जाजू ने बताया कि आज की चर्चाओं में भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में कंटेंट क्रिएटर्स प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करना था। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना, मीडिया साक्षरता को बढ़ाना और विद्यार्थियों को रचनाकार अर्थव्यवस्था में उभरते अवसरों के अनुरूप कंटेंट निर्माण कौशल प्रदान करना है।

श्री जाजू ने संस्थान के अत्याधुनिक केंद्रों का दौरा किया, जिनमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पादन अवसंरचना और नवाचार केंद्र शामिल हैं। उन्होंने बोर्ड के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत के रचनात्मक प्रतिभा इकोसिस्टम को पोषित करने में आईआईसीटी की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

वर्तमान में यह संस्थान एनिमेशन, गेमिंग, पोस्ट-प्रोडक्शन और एक्सटेंडेड रियलिटी के क्षेत्र में 18 विशिष्ट पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इनमें गेमिंग में छह, पोस्ट-प्रोडक्शन में चार और एनिमेशन, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी में आठ पाठ्यक्रम शामिल हैं। प्रमुख कार्यक्रमों में एनिमेशन फिल्म डिजाइन, इंटरएक्टिव वीडियो गेम डिजाइन और विकास तथा पोस्ट-प्रोडक्शन और विजुअल इफेक्ट्स की कला तथा विज्ञान में 24 महीने के स्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, आईआईसीटी 3डी कैरेक्टर डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स, सिनेमैटिक वर्चुअल रियलिटी फिल्म निर्माण, ई-स्पोर्ट्स प्रबंधन और फिल्म निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में तीन से छह महीने के अल्पकालिक डिप्लोमा और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है।

यह दौरा भारत के तेजी से बढ़ते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र को समर्थन देने के लिए डिजिटल रचनात्मकता को बढ़ावा देने और संस्थागत ढाँचों को मजबूत करने पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निरंतर जोर को रेखांकित करता है।

एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स स्थित आईआईसीटी के दौरे के अवसर पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण सचिव ने राष्ट्रीय भारतीय सिनेमा संग्रहालय (एनएमआईसी) का भी अवलोकन किया, जहाँ श्री जाजू ने स्कूली बच्चों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।

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कोंकण में एएसआरआई का कार्यान्वयन

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई), पात्र अनुसूचित जनजातिय लोगों को आय सृजन, स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है।
यह ऋण सहायता विभिन्न योजनाओं जैसे सावधि ऋण योजना, आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना (एएमएसवाई), स्वयं सहायता समूहों के लिए सूक्ष्म ऋण योजना (एमसीएफ) और आदिवासी शिक्षा ऋण योजना (एएसआरवाई) के अंतर्गत प्रदान की जाती है। हालांकि, पिछले पांच वर्षों की अवधि में महाराष्ट्र राज्य में कार्यान्वयन एजेंसियों से आदिवासी शिक्षा ऋण योजना (एएसआरवाई) के अंतर्गत कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

दूरदराज एवं जनजातिय क्षेत्रों में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) अपने कार्यान्वयन एजेंसियों के सहयोग से जागरूकता शिविर आयोजित करता है और समय-समय पर प्रदर्शनी, राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों एवं आउटरीच गतिविधियों में हिस्सा लेता है ताकि जनजातिय समुदायों के बीच अपने रियायती ऋण योजनाओं की जानकारी का प्रसार कर सके। एनएसटीएफडीसी ऋण प्रस्तावों की प्रक्रिया के समय को बहुत हद तक कम करने के लिए एक ऋण प्रबंधन प्रणाली विकसित कर रहा है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और एनएसटीएफडीसी परिवारों को ऋण प्राप्त करने के लिए वित्तीय साक्षरता और परामर्श हेतु कोई विशेष योजना लागू नहीं करते हैं। हालांकि, रियायती वित्तीय सहायता और सरकारी सहायता तंत्रों की उपलब्धता के बारे में जागरूकता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और प्रदर्शनियों तथा राज्य स्तरीय आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से बढ़ावा दिया जाता है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, एनएसएफडीसी ने महाराष्ट्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा जनजातिय युवाओं, महिलाओं एवं इच्छुक उद्यमियों के बीच वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया।

भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के साथ ‘ग्रीन वर्ल्ड’ परिवर्तन की कुंजी रखता है; भविष्य की वृद्धि को ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर आगे बढ़ाएगा: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत “ग्रीन वर्ल्ड” परिवर्तन की कुंजी रखता है। दूसरे शब्दों में, मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर हरित भविष्य की ओर हो रहे परिवर्तन के एक निर्णायक चरण में खड़ा है और इसमें अग्रणी भूमिका निभाने की अच्छी स्थिति में है।

10वें सस्टेनेबल बिज़नेस फ्यूचर्स समिट 2026 में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी का हिस्सा होने के कारण, भारत की प्रगति वैश्विक ग्रीन ट्रांजिशन की सफलता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक जिम्मेदारी भी है और एक अवसर भी, जिससे वह ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के जरिए सतत विकास का बड़ा वैश्विक चालक बन सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक नेतृत्व दृष्टि का एक प्रमुख स्तंभ होगा। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था अब रीसाइक्लिंग, पुनर्जनन (रीजनरेशन) और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों की ओर बढ़ रही है, और भारत अपनी विकास यात्रा को इन नई प्राथमिकताओं के साथ जोड़ रहा है।

पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है, जिसे तेजी से बढ़ते नवाचार (इनोवेशन) तंत्र ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है, जहाँ दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें से लगभग आधे टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं—यह देशभर में उद्यमिता की बढ़ती सोच को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि भारत डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए अपने स्वच्छ ऊर्जा तंत्र का लगातार विस्तार कर रहा है, जिन्हें 24×7 भरोसेमंद ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में उन्होंने SHANTI अधिनियम (Sustainable Harnessing and Accelerating Nuclear Transformation of India) का उल्लेख किया और इसे एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी सहित व्यापक सहयोग के लिए खोलता है और स्वच्छ व भरोसेमंद ऊर्जा उत्पादन के नए रास्ते बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का ग्रीन ट्रांजिशन एक समग्र रणनीति पर आधारित है, जिसमें तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता का संयोजन है। इसमें अगली पीढ़ी की ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत ऊर्जा भंडारण, लचीले और डिजिटल रूप से सक्षम ग्रिड (जो सौर, पवन, परमाणु और हाइड्रोजन जैसे कई स्रोतों को जोड़ सकें), जलवायु मॉडलिंग, जोखिम विश्लेषण और उन्नत निर्माण तकनीकों का विकास शामिल है।

नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई नीतिगत दिशा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है और “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट (LiFE)” की अवधारणा को भी बढ़ावा दिया है, जो टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का आह्वान करती है। यह भारत की जिम्मेदार और समावेशी विकास की व्यापक सोच को दर्शाता है, जो वैश्विक पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सर्कुलर इकोनॉमी पर बढ़ते जोर का भी उल्लेख किया और कहा कि “कचरे” की अवधारणा को अब नए तरीके से परिभाषित किया जा रहा है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में वेस्ट-टू-वेल्थ पहल के माध्यम से न केवल स्थिरता बल्कि आर्थिक मूल्य भी पैदा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास में जलवायु अनुकूलता (क्लाइमेट रेजिलिएंस), टिकाऊ शहरी व्यवस्था, स्वच्छ परिवहन समाधान और जल सुरक्षा को शामिल करना होगा, जिसे सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ाया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आगे का रास्ता मजबूत सहयोग की मांग करता है। अब अलग-अलग काम करने का दौर खत्म हो चुका है, और दीर्घकालिक स्थिरता के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक होंगे।

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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के साहसी चालक दल से बातचीत की

नई दिल्ली – केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज यहां भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक’ और नंदा देवी’ के चालक  दल के साहसी सदस्यों से संवाद किया। उन्होंने रसोई गैस जैसे महत्वपूर्ण कार्गो का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने में चालक दल द्वारा दिखाए गए साहस और अटूट कर्तव्यनिष्ठा के लिए उनका राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

यह संवाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गयाजिसमें पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमारमहानिदेशक (नौवहनश्याम जगन्नाथनशिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन बीकेत्यागी‘शिवालिक’ के कैप्टन सुखमीत सिंह एवं उनके दल के सदस्यतथा नंदा देवी’ के कैप्टन धीरज कुमार अग्रवाल अपने दल के साथ शामिल हुए।

नाविकों को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह संवाद उच्च जोखिम वाले समुद्री वातावरण में कार्य करते हुए महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने वाले चालक दल के प्रति राष्ट्र की हार्दिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति” है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा“शिवालिक और नंदा देवी के चालक दल के साहससमर्पण और पेशेवर दक्षता को सम्मानित करना अत्यंत गर्व का विषय है। आपके प्रयासों से महत्वपूर्ण एलपीजी कार्गो का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित हुआजिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सुदृढ़ हुई।

केन्द्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों जहाज भारत की ओर अपनी यात्रा जारी रखने से पहले बढ़ी हुई सुरक्षा चिंताओं के बीच लगभग दो सप्ताह तक उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में तैनात रहे। सोनोवाल ने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी क्रू ने असाधारण धैर्यसतर्कता और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया।

इससे पहलेभारतीय ध्वज वाले दोनों एलपीजी वाहक जहाज 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचने से पूर्व सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर चुके थे। पश्चिम एशिया में बदलती भूराजनीतिक स्थिति के बीच सरकारफारस की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर चल रहे एमटी शिवालिक’ और एमटी नंदा देवी’ ने शुक्रवार13 मार्च2026 को सुबह के समय होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार किया।

सोनोवाल ने कहा“नाविक वैश्विक व्यापार के गुमनाम नायक हैं। अपने घरों और परिवारों से दूर रहकर आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे।” उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने में समुद्री कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

केंद्रीय मंत्री ने आगे जोर देते हुए कहा कि भारतीय ध्वज वाले इन दोनों जहाजों की सफल यात्राजिनका संचालन पूरी तरह भारतीय समुद्री कर्मियों द्वारा किया गयाभारत के समुद्री कार्यबल की शक्ति और दृढ़ता को दर्शाती है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम समुद्री क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षागरिमा और वैश्विक पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सोनोवाल ने कहा कि नाविकों के परिवारों का सहयोग भी सराहानीय है। उनके परिवार उनकी निष्ठा एवं सेवा के पीछे एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। दोनों जहाजों के मास्टर्सअधिकारियों और क्रू को बधाई देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। श्री सोनोवाल ने उनके भविष्य की सुरक्षित समुद्री यात्राओं की कामना की।

नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंगजहाज मालिकोंभर्ती एवं प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस (आर पी एस अलएजेंसियों तथा क्षेत्र में भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय कर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल स्वयं इस स्थिति की सक्रिय और प्रत्यक्ष रूप से निगरानी कर रहे हैं।

समुद्री परिचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार बंदरगाहोंशिपिंग लाइनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही हैताकि समुद्री व्यापार में किसी भी प्रकार की परिचालन बाधाओं को कम से कम किया जा सके। बंदरगाहों को आवश्यकता अनुसार राहत उपाय प्रदान करने की सलाह दी गई हैजिसमें एंकरेजबर्थ किराया तथा भंडारण शुल्क में रियायतें शामिल हैं।

प्रमुख बंदरगाह एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बर्थ प्रदान कर रहे हैंताकि कार्गो की समय पर अनलोडिंग सुनिश्चित हो सके और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनी रहे। पिछले कुछ दिनों में प्रमुख भारतीय बंदरगाहों पर छह एलपीजी जहाज पहुंचे हैं। इसके अतिरिक्तबंदरगाह उन जहाजों के लिए भी सुरक्षित एंकरेज क्षेत्र उपलब्ध करा रहे हैंजिन्हें खाड़ी क्षेत्र के लिए कार्गो लेकर रवाना होना था लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण अभी यात्रा आरंभ नहीं कर पा रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा कि वह विदेश मंत्रालयविदेशों में भारतीय मिशनोंशिपिंग कंपनियों तथा समुद्री यात्रा से जुड़े अन्य संबंधित पक्षों के साथ बेहतर समन्वय के साथ समुद्री स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय समुद्री कर्मियों के कल्याण की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भारत के समुद्र के रास्ते माल ढुलाई नेटवर्क की मजबूती बनाए रखना है।

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राष्ट्रपति ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के पांच बिलियन भोजन वितरण के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (17 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन के पांच बिलियन भोजन वितरण के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि शैक्षिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए पांच बिलियन भोजन परोसना अक्षय पात्र फाउंडेशन की उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस कार्यक्रम की थीम, ‘सुपोषित और शिक्षित भारत से विकसित भारत की ओर’, वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के हमारे राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सुपोषित और शिक्षित समाज के महत्व को रेखांकित करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे बच्चों के लिए एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य केवल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। जब शिक्षक, माता-पिता, सामाजिक संगठन, कॉर्पोरेट जगत और समाज के सभी वर्ग मिलकर काम करते हैं, तभी हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव रख सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन, अच्छा स्वास्थ्य और स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिले। ये मूलभूत तत्व बच्चों के सर्वांगीण विकास को संभव बनाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा वह साधन है जो किसी व्यक्ति के जीवन में उपलब्ध अवसरों को निर्धारित करती है और उसकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। यह परिवर्तन और सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम है। सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया बच्चों के स्कूल जाना आरम्भ करने के क्षण से ही आकार लेना शुरू कर देती है। स्कूल बच्चों को दैनिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और जिम्मेदार, कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने के लिए आवश्यक कौशल और अनुभव प्रदान करता है। उन्होंने अक्षय पात्र फाउंडेशन की सराहना की, जो पिछले 25 वर्षों से स्कूलों में मध्याह्न भोजन पहुंचाकर बच्चों में कुपोषण की समस्या का समाधान करने और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे बच्चे, जो राष्ट्र का भविष्य हैं, उनके लिए पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुगम उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार ने गर्भवती माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत कार्यान्वित विद्यालय दोपहर के भोजन कार्यक्रम से अभिभावकों को अपने बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। अनेक अध्ययनों से यह सिद्ध होता है कि इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप बच्चों के विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति और स्कूल में बने रहने की दर में वृद्धि हुई है। साथ ही, उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अक्षय पात्र फाउंडेशन ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चे केवल निशुल्क भोजन कार्यक्रम के लाभार्थी नहीं हैं। वे राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता हैं। आज उन्हें जो पौष्टिक भोजन मिल रहा है, वह हमारे राष्ट्र की मानव पूंजी में निवेश है। स्वस्थ, शिक्षित और ऊर्जावान बच्चे भारत के कार्यबल का निर्माण करेंगे और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के  पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रृद्धांजलि अर्पित की

 नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के  पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रृद्धांजलि अर्पित की ।

X पर जारी पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि। एक दृढ़ राष्ट्रवादी और हृदय से सादगीपूर्ण व्यक्ति, पर्रिकर जी का जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान हमेशा याद किए जाएंगे। जननेता के रूप में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

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आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय के अधीन भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली के होटल सम्राट स्थित कौटिल्य हॉल में जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया।

यह पहल सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देश भर में जनजातीय होमस्टे संचालकों के पेशेवर आतिथ्य कौशल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय कार्य मंत्रालय के आईटीडीसी के आईएचएम अशोक द्वारा आयोजित संरचित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से सेवा मानकों को बढ़ाना, आगंतुकों के अनुभवों को बेहतर बनाना और जनताीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसरों का समर्थन करना है। इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गुजरात से 40 प्रतिभागियों के पहले बैच ने भाग लिया।

इस समारोह में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा , आईएएस, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव श्री मनीष ठाकुरआईएएस , आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक सुश्री मुग्धा सिन्हा,  आईएएस, जनजातीय कार्य मंत्रालय की निदेशक डॉ. वरनाली डेकाआईएएस और आईटीडीसी के वाणिज्य एवं विपणन निदेशक श्री राजेश राणा उपस्थित थे

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईएचएम अशोक द्वारा विकसित प्रकाशन ट्राइबल होमस्टे-  ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट मैनुअल 2026 का विमोचन था। यह मैनुअल भारत भर में जनजातीय होमस्टे के विकास और पेशेवर प्रबंधन के लिए एक संरचित प्रारूप प्रदान करता है। इच्छुक और वर्तमान होमस्टे संचालकों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया यह प्रकाशन बहुभाषी संसाधन के रूप में विकसित किया गया है और समुदायों के बीच व्यापक पहुंच और प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने के लिए इसे हिंदी और गुजराती में अनुवादित किया गया है।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव ने कहा है भारतीय पर्यटकों की सोच बदल रही है। आज के यात्री भीड़-भाड़ से दूर, प्रकृति के करीब और प्रदूषण मुक्त स्थलों की तलाश कर रहे हैं, साथ ही वे इन वातावरणों का वास्तविक अनुभव करने के लिए अधिक समय तक ठहरना पसंद करते हैं। ऐसे देश में जहां होटल के कमरों की भारी कमी है, होमस्टे मॉडल एक सशक्त समाधान प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि यह न केवल आधुनिक यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करता है, बल्कि जनजातीय परिवारों, विशेष रूप से प्राकृतिक पगडंडियों से समृद्ध पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सार्थक आजीविका के अवसरों का भी सृजन करता है। होमस्टे मालिकों को आतिथ्य सत्कार के बुनियादी सिद्धांतों से अवगत कराकर, यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बदलने की क्षमता रखती है। आईटीडीसी द्वारा उत्कृष्टता के साठ वर्ष पूरे किए जा रहे हैं, ऐसे में जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आज हम जो छोटा सा बीज बो रहे हैं, वह एक मजबूत और दीर्घकालिक मॉडल के रूप में विकसित होगा जो कई और समुदायों को पर्यटन आधारित आजीविका के अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक, आईएएस सुश्री मुग्धा सिन्हा ने कहा कि भारत में होमस्टे अभियान प्रधानमंत्री मोदी के देश भर में एक लाख होमस्टे स्थापित करने के दृष्टिकोण से प्रेरित है। 1,500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का हमारा तात्कालिक प्रयास मात्र शुरुआत है। हमारा व्यापक लक्ष्य उन्हें अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षक बनने के लिए सशक्त बनाना है, जिससे यह मॉडल तेजी से विस्तारित हो सके और यह सुनिश्चित हो सके कि समुदाय अपने घर के पास ही प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि यह पहल अलगाव को दूर करने और सार्थक सहयोग के माध्यम से कार्य करने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। जनजातीय कार्य मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय और अतुलनीय भारत मंच की शक्तियों और सामंजस्‍य को एक साथ लाकर, हम एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे हैं जो सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश भर के समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा करता है।

आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच यह सहयोग समावेशी विकास और पर्यटन के माध्यम से आजीविका सृजन पर सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसका उद्देश्य जनजातीय होमस्टे संचालकों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुभव प्रदान करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करके समुदाय-आधारित पर्यटन को मजबूत करना भी है। यह जनजातीय परंपराओं को संरक्षित करते हुए सार्थक आर्थिक अवसरों का सृजन करके सतत विकास में भी योगदान देता है।

भारत पर्यटन विकास निगम के बारे में:

आईटीडीसी की स्थापना 1966 में देश में पर्यटन अवसंरचना के विकास और विस्तार के उद्देश्य से की गई थी। निगम अपने अतिथियों को विश्व स्तरीय सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। होटलों के संचालन के अलावा, आईटीडीसी ने टिकट बुकिंग, टूर और ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग, प्रचार और मुद्रण परामर्श, इंजीनियरिंग परामर्श, साउंड एंड लाइट शो का आयोजन, आतिथ्य शिक्षा और कौशल विकास जैसे गैर-होटल क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं एक ही बैनर तले प्रदान की हैं।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के कर्मियों को बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली –  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के कर्मियों को बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दी।

X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “NCB कर्मियों को उनके स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे युवाओं को नशे की विभीषिका से बचाने के लिए समर्पित एक प्रमुख एजेंसी एनसीबी अपनी जिम्मेदारी को कुशलता और दक्षता के साथ निभा रही है तथा मोदी जी के ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को उल्लेखनीय गति से साकार कर रही है। राष्ट्र उनके समर्पण और देशभक्ति को सलाम करता है।”

 

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संसदीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा संसद योजना के वेब पोर्टल का उन्‍नत संस्‍करण लॉन्च किया

जिसे एनवाईपीएस 2.0 के नाम से जाना जाता है

रांची,18.03.2026 – युवा संसद कार्यक्रम को और अधिक विस्तार देने तथा छात्रों/ नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय ने 11 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय युवा संसद योजना (एनवाईपीएस) का उन्नत संस्करण लॉन्च किया, जिसे एनवाईपीएस 2.0 के नाम से जाना जाता है।

पिछला संस्करण केवल मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों के छात्रों तक सीमित था, इसके विपरीत एनवाईपीएस 2.0 में देश भर के सभी शैक्षिक संस्थान, समूह और नागरिक इसमें क्रमश:संस्थान के माध्यम से भागीदारी, समूह के माध्यम से भागीदारी और व्यक्तिगत भागीदारी के माध्‍यम से भाग ले सकते हैं। इसमें लिंग, जाति, पंथ, धर्म, नस्ल, क्षेत्र या देश में रहने के स्थान आदि की परवाह किए बगैर भागीदारी की जा सकती है।

इसके लॉन्च के बाद से, देश में कुल 4,586 संस्‍थानों ने संस्थान के माध्यम से भागीदारी के तहत पंजीकरण कराया है और 44,222 लोगों ने व्यक्तिगत भागीदारी के तहत हिस्सा लिया है। इसके अलावा, एनवाईपीएस की पहुँच को और बढ़ाने के लिए, मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन; राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों; अलग-अलग शैक्षणिक बोर्ड (सीबीएसई, सीआईएससीई) को लिखा है, और समय-समय पर संसद टीवी पर एक प्रचार वीडियो ट्यूटोरियल भी दिखाया जाता है।

यह जानकारी संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

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चतरा में एसएसबी जवान ने की आत्महत्या, रायफल से खुद को मारी गोली

चतरा,18.03.2026 – एसएसबी के एक जवान द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. घटना मंगलवार की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार 35वीं बटालियन में तैनात जवान ने अपने ही रायफल से खुद को गोली मार ली.

घटना सिमरिया थाना क्षेत्र के शिला पिकेट की है, जहां वह पदस्थापित था. मृतक की पहचान प्रह्लाद सिंह, निवासी देवघर के रूप में की गई है. घटना की सूचना मिलते ही एसपी सुमित कुमार अग्रवाल व एसएसबी कमांडेंट मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेज दिया है. साथ ही मृतक जवान के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है.

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रांची जिला के विभिन्न अंचलों में जनता दरबार का आयोजन

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जनता दरबार का आयोजन

जनता दरबार के माध्यम से राजस्व सेवाओं का त्वरित निष्पादन, सैकड़ों आवेदनों का मौके पर निष्पादन

रांची,17.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जिले के विभिन्न अंचलों में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस पहल के तहत राजस्व से जुड़े विभिन्न कार्यों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जिससे आमजन को पारदर्शी एवं सुलभ सेवाएं मिल रही हैं।

अंचल कार्यालय, सोनाहातु में आयोजित जनता दरबार में कई आवेदनों का निष्पादन किया गया। मुरुतडीह निवासी तुला देवी एवं जाहेरडीह निवासी मलिका कुमारी को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। वहीं, बरेडीह निवासी बिरसिंह महतो को आचरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

अंचल कार्यालय, राहे में कुल 71 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें पंजी-2 सुधार, लगान रसीद, पारिवारिक सदस्यता, आय, आवासीय एवं जाति प्रमाण पत्र से संबंधित आवेदन शामिल हैं।

अंचल कार्यालय, खलारी में कुल 20 आवेदनों का निष्पादन किया गया। इनमें जाति, आवासीय, आय, पारिवारिक प्रमाण पत्र एवं तत्काल आवेदन शामिल हैं।

अंचल कार्यालय, मांडर में आयोजित जनता दरबार में कुल 45 मामलों का निष्पादन किया गया। इस दौरान झिंझरी निवासी फेंकू महतो एवं गोरे निवासी शेख हमीद खान को प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। साथ ही कन्दरी निवासी विजेश्वर नंद तिवारी के भूमि अभिलेख (पंजी-2) में नाम सुधार किया गया। इसके अतिरिक्त दाखिल-खारिज, आय, आवासीय, जाति प्रमाण पत्र एवं केसीसी से संबंधित मामलों का भी निष्पादन किया गया।

अरगोड़ा अंचल में आयोजित जनता दरबार में कुल 84 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 75 का निष्पादन किया गया। इनमें पंजी सुधार, पारिवारिक सूची, दाखिल-खारिज वाद, पेंशन, आय, स्थानीय एवं जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य राजस्व कार्य शामिल हैं।

जनता दरबार के माध्यम से अंचल कार्यालयों में निम्नलिखित प्रमुख राजस्व कार्यों का निष्पादन किया गया :-

पंजी-2 में सुधार

दाखिल-खारिज

लगान रसीद निर्गत करना

आय, जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र जारी करना

पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र

आचरण प्रमाण पत्र

पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित आवेदन

जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि आम जनता को उनकी समस्याओं का समाधान उनके निकटतम अंचल स्तर पर ही त्वरित रूप से उपलब्ध कराया जाए। जनता दरबार इस दिशा में एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा आमजनों से अपील की गई है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान हेतु प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में भाग लें एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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ओडिशा के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

 

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;

“मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, @डा.मोहनयादव51 ने प्रधानमंत्री@नरेन्द्रमोदी से मुलाकात की।”

 

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