सरकार ने सौर इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम प्रारूप का विस्तार किया

 यह 1 जून 2028 से प्रभावी होगा

नई दिल्ली – एमएनआरई ने 1 जून 2028 से प्रभावी होने वाले इंगोट्स और वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III को शामिल करने के लिए एएलएमएम आदेश का विस्तार किया है। पहले से जारी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए उपयुक्त प्रावधान किए गए हैं। एमएनआरई का वर्तमान आदेश, मॉड्यूल और सेल के लिए पहले से लागू एएलएमएम सूचियों से अनिवार्य सोर्सिंग आवश्यकताओं को सौर आपूर्ति श्रृंखला में एक कदम आगे बढ़ाकर इंगोट्स और वेफर्स को भी शामिल करता है, जो वर्तमान में आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि यह भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। मंत्री महोदय ने कहा कि इस कदम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में उच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

 

मुख्य प्रावधान

  • प्रभावी तिथि: 1 जून 2028 – वह तिथि जिससे सभी परियोजनाओं को एएलएमएम-सूचीबद्ध वेफर्स का उपयोग करना अनिवार्य होगा, जिसमें नेट मीटरिंग/ओपन एक्सेस परियोजनाएं भी शामिल हैं।
  • कट-ऑफ तिथि: वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III की प्रारंभिक सूची प्रकाशित होने के 7 दिन बाद। इस तिथि के बाद धारा 63 के तहत प्रस्तुत की गई बोलियों में एएलएमएम सूची-III के अनुरूप वेफर्स के उपयोग का उल्लेख करना अनिवार्य है।
  • प्रारंभिक सूची जारी करने की सीमा: कम से कम 3 स्वतंत्र विनिर्माण इकाइयां (जो एक ही स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन न हों) जिनकी संयुक्त क्षमता 15 गीगावाट हो, यह सुनिश्चित करते हुए कि सूची तभी जारी की जाए जब यह न्यूनतम घरेलू आपूर्ति उपलब्ध हो।
  • अनिवार्य पिंड क्षमता: वे निर्माता जो वेफर्स के लिए एएलएमएम सूची-III में सूचीबद्ध होना चाहते हैं, उनके पास समतुल्य पिंड निर्माण क्षमता भी होनी चाहिए, जिससे पिंडों के लिए अपस्ट्रीम एकीकरण को बढ़ावा मिले।
  • मॉड्यूल सूची की अखंडता: प्रभावी तिथि से आगे, एएलएमएम सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल) में केवल वे मॉड्यूल शामिल होंगे जो एएलएमएम-सूचीबद्ध सेल और वेफर का उपयोग करके निर्मित किए गए हैं। व्यवधान से बचने के लिए पूर्वस्थापित परियोजनाओं के लिए अलग सूचियां रखी जाएंगी।
  • डीसीआर प्रावधान: यह आदेश वर्तमान एमएनआरई योजनाओं के अंतर्गत किसी भी घरेलू सामग्री आवश्यकता (डीसीआर) प्रावधानों को कमजोर या निरस्त नहीं करता है।

अपेक्षित लाभ

वेफर्स, पॉलीसिलिकॉन और सोलर सेल के बीच का महत्वपूर्ण मध्यवर्ती चरण हैं। भारत में वर्तमान में घरेलू वेफर उत्पादन क्षमता सीमित है और यह काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

एएलएमएम सूची-III के लागू होने से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है:

  • भारत में इंगोट्स और वेफर निर्माण सुविधाओं में निवेश को बढ़ावा देना;
  • आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा में सुधार करें और आयात में व्यवधान के प्रति संवेदनशीलता को कम करें;
  • वेफर से लेकर मॉड्यूल तक, सौर घटकों की गुणवत्ता और पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित करें;
  • सौर ऊर्जा उत्पादन के प्रारंभिक चरण में कुशल रोजगार सृजित करना;
  • एएलएमएम का यह विस्तार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने की देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

भारत का अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (एएलएमएम) आदेश, 2019 एक गुणवत्ता और विश्वसनीयता ढांचा है जो यह सुनिश्चित करता है कि देश की सौर परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले सौर उपकरण घरेलू विनिर्माण मानकों को पूरा करते हैं। यह विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से आवंटित परियोजनाओं और नेट-मीटरिंग या ओपन-एक्सेस परियोजनाओं पर लागू होता है।

एएलएमएम की शुरुआत के बाद से, घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एएलएमएम सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल) 2021 में 8.2 गीगावाट से बढ़कर वर्तमान में लगभग 172 गीगावाट हो गया है। एएलएमएम सूची-II (सौर पीवी सेल), जिसे हाल ही में शुरू किया गया है, सात महीनों के भीतर ही 27 गीगावाट तक पहुंच गया है, जो घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने में इस ढांचे की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

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केंद्रीय सूचना और प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू ने आईआईसीटी का दौरा किया, विस्तार योजनाओं और कंटेंट-क्रिएटर प्रयोगशाला योजना की समीक्षा की

नई दिल्ली – सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू ने आज मुंबई के राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम परिसर में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) का दौरा किया और संस्थान की विकास यात्रा और विस्तार योजनाओं की समीक्षा की।

श्री जाजू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सभी बोर्ड सदस्य और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

श्री जाजू ने संस्थान की नेतृत्व टीम के साथ रणनीतिक रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की।

चर्चा का मुख्य केंद्र आईआईसीटी के शैक्षणिक कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे को रचनात्मक और डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांगों के अनुरूप विकसित करना था। उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से चल रही पहलों की भी समीक्षा की।

श्री जाजू ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा,“बुनियादी ढांचा तैयार है और लगभग 150 विद्यार्थियों ने आईआईसीटी में अपने अध्ययन कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। हमारा लक्ष्य जुलाई तक 400 विद्यार्थियों को शामिल करना है, साथ ही 20 स्टार्टअप भौतिक रूप से और कई अन्य वर्चुअल रूप से स्थापित करना है। संस्थान उत्पादन और पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाला बुनियादी ढांचा प्रदान करता है।” उन्होंने बताया कि वर्तमान में आईआईसीटी में 11 स्टार्टअप को इनक्यूबेट किया जा रहा है। श्री जाजू ने यह भी कहा कि शीघ्र  ही फिल्म सिटी, गोरेगांव में एक बड़ा परिसर विकसित किया जाएगा और वहां कक्षाएं 2028 में शुरू होने की संभावना है।

सूचना और प्रसारण सचिव ने बैठक में हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्रीय बजट में घोषित विजुअल गेमिंग, वीएफएक्स और कंटेंट क्रिएशन प्रयोगशाला के संबंध में उद्योग जगत के साथ भी बातचीत हुई।

श्री जाजू ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य रचनात्मक अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना था पिछले वर्ष, वेव्स शिखर सम्मेलन में “ऑरेंज इकोनॉमी” पहल के अंतर्गत 20 लाख लोगों को कंटेंट क्रिएशन और रचनात्मक क्षेत्रों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। श्री जाजू ने बताया कि आज की चर्चाओं में भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में कंटेंट क्रिएटर्स प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करना था। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना, मीडिया साक्षरता को बढ़ाना और विद्यार्थियों को रचनाकार अर्थव्यवस्था में उभरते अवसरों के अनुरूप कंटेंट निर्माण कौशल प्रदान करना है।

श्री जाजू ने संस्थान के अत्याधुनिक केंद्रों का दौरा किया, जिनमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पादन अवसंरचना और नवाचार केंद्र शामिल हैं। उन्होंने बोर्ड के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत के रचनात्मक प्रतिभा इकोसिस्टम को पोषित करने में आईआईसीटी की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

वर्तमान में यह संस्थान एनिमेशन, गेमिंग, पोस्ट-प्रोडक्शन और एक्सटेंडेड रियलिटी के क्षेत्र में 18 विशिष्ट पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इनमें गेमिंग में छह, पोस्ट-प्रोडक्शन में चार और एनिमेशन, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी में आठ पाठ्यक्रम शामिल हैं। प्रमुख कार्यक्रमों में एनिमेशन फिल्म डिजाइन, इंटरएक्टिव वीडियो गेम डिजाइन और विकास तथा पोस्ट-प्रोडक्शन और विजुअल इफेक्ट्स की कला तथा विज्ञान में 24 महीने के स्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, आईआईसीटी 3डी कैरेक्टर डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स, सिनेमैटिक वर्चुअल रियलिटी फिल्म निर्माण, ई-स्पोर्ट्स प्रबंधन और फिल्म निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में तीन से छह महीने के अल्पकालिक डिप्लोमा और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है।

यह दौरा भारत के तेजी से बढ़ते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र को समर्थन देने के लिए डिजिटल रचनात्मकता को बढ़ावा देने और संस्थागत ढाँचों को मजबूत करने पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निरंतर जोर को रेखांकित करता है।

एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स स्थित आईआईसीटी के दौरे के अवसर पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण सचिव ने राष्ट्रीय भारतीय सिनेमा संग्रहालय (एनएमआईसी) का भी अवलोकन किया, जहाँ श्री जाजू ने स्कूली बच्चों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।

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कोंकण में एएसआरआई का कार्यान्वयन

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई), पात्र अनुसूचित जनजातिय लोगों को आय सृजन, स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है।
यह ऋण सहायता विभिन्न योजनाओं जैसे सावधि ऋण योजना, आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना (एएमएसवाई), स्वयं सहायता समूहों के लिए सूक्ष्म ऋण योजना (एमसीएफ) और आदिवासी शिक्षा ऋण योजना (एएसआरवाई) के अंतर्गत प्रदान की जाती है। हालांकि, पिछले पांच वर्षों की अवधि में महाराष्ट्र राज्य में कार्यान्वयन एजेंसियों से आदिवासी शिक्षा ऋण योजना (एएसआरवाई) के अंतर्गत कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

दूरदराज एवं जनजातिय क्षेत्रों में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) अपने कार्यान्वयन एजेंसियों के सहयोग से जागरूकता शिविर आयोजित करता है और समय-समय पर प्रदर्शनी, राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों एवं आउटरीच गतिविधियों में हिस्सा लेता है ताकि जनजातिय समुदायों के बीच अपने रियायती ऋण योजनाओं की जानकारी का प्रसार कर सके। एनएसटीएफडीसी ऋण प्रस्तावों की प्रक्रिया के समय को बहुत हद तक कम करने के लिए एक ऋण प्रबंधन प्रणाली विकसित कर रहा है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और एनएसटीएफडीसी परिवारों को ऋण प्राप्त करने के लिए वित्तीय साक्षरता और परामर्श हेतु कोई विशेष योजना लागू नहीं करते हैं। हालांकि, रियायती वित्तीय सहायता और सरकारी सहायता तंत्रों की उपलब्धता के बारे में जागरूकता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और प्रदर्शनियों तथा राज्य स्तरीय आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से बढ़ावा दिया जाता है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, एनएसएफडीसी ने महाराष्ट्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा जनजातिय युवाओं, महिलाओं एवं इच्छुक उद्यमियों के बीच वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया।

भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के साथ ‘ग्रीन वर्ल्ड’ परिवर्तन की कुंजी रखता है; भविष्य की वृद्धि को ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर आगे बढ़ाएगा: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत “ग्रीन वर्ल्ड” परिवर्तन की कुंजी रखता है। दूसरे शब्दों में, मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर हरित भविष्य की ओर हो रहे परिवर्तन के एक निर्णायक चरण में खड़ा है और इसमें अग्रणी भूमिका निभाने की अच्छी स्थिति में है।

10वें सस्टेनेबल बिज़नेस फ्यूचर्स समिट 2026 में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी का हिस्सा होने के कारण, भारत की प्रगति वैश्विक ग्रीन ट्रांजिशन की सफलता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक जिम्मेदारी भी है और एक अवसर भी, जिससे वह ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के जरिए सतत विकास का बड़ा वैश्विक चालक बन सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक नेतृत्व दृष्टि का एक प्रमुख स्तंभ होगा। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था अब रीसाइक्लिंग, पुनर्जनन (रीजनरेशन) और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों की ओर बढ़ रही है, और भारत अपनी विकास यात्रा को इन नई प्राथमिकताओं के साथ जोड़ रहा है।

पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है, जिसे तेजी से बढ़ते नवाचार (इनोवेशन) तंत्र ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है, जहाँ दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें से लगभग आधे टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं—यह देशभर में उद्यमिता की बढ़ती सोच को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि भारत डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए अपने स्वच्छ ऊर्जा तंत्र का लगातार विस्तार कर रहा है, जिन्हें 24×7 भरोसेमंद ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में उन्होंने SHANTI अधिनियम (Sustainable Harnessing and Accelerating Nuclear Transformation of India) का उल्लेख किया और इसे एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी सहित व्यापक सहयोग के लिए खोलता है और स्वच्छ व भरोसेमंद ऊर्जा उत्पादन के नए रास्ते बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का ग्रीन ट्रांजिशन एक समग्र रणनीति पर आधारित है, जिसमें तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता का संयोजन है। इसमें अगली पीढ़ी की ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत ऊर्जा भंडारण, लचीले और डिजिटल रूप से सक्षम ग्रिड (जो सौर, पवन, परमाणु और हाइड्रोजन जैसे कई स्रोतों को जोड़ सकें), जलवायु मॉडलिंग, जोखिम विश्लेषण और उन्नत निर्माण तकनीकों का विकास शामिल है।

नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई नीतिगत दिशा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है और “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट (LiFE)” की अवधारणा को भी बढ़ावा दिया है, जो टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का आह्वान करती है। यह भारत की जिम्मेदार और समावेशी विकास की व्यापक सोच को दर्शाता है, जो वैश्विक पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सर्कुलर इकोनॉमी पर बढ़ते जोर का भी उल्लेख किया और कहा कि “कचरे” की अवधारणा को अब नए तरीके से परिभाषित किया जा रहा है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में वेस्ट-टू-वेल्थ पहल के माध्यम से न केवल स्थिरता बल्कि आर्थिक मूल्य भी पैदा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास में जलवायु अनुकूलता (क्लाइमेट रेजिलिएंस), टिकाऊ शहरी व्यवस्था, स्वच्छ परिवहन समाधान और जल सुरक्षा को शामिल करना होगा, जिसे सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ाया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आगे का रास्ता मजबूत सहयोग की मांग करता है। अब अलग-अलग काम करने का दौर खत्म हो चुका है, और दीर्घकालिक स्थिरता के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक होंगे।

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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के साहसी चालक दल से बातचीत की

नई दिल्ली – केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज यहां भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक’ और नंदा देवी’ के चालक  दल के साहसी सदस्यों से संवाद किया। उन्होंने रसोई गैस जैसे महत्वपूर्ण कार्गो का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने में चालक दल द्वारा दिखाए गए साहस और अटूट कर्तव्यनिष्ठा के लिए उनका राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

यह संवाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गयाजिसमें पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमारमहानिदेशक (नौवहनश्याम जगन्नाथनशिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन बीकेत्यागी‘शिवालिक’ के कैप्टन सुखमीत सिंह एवं उनके दल के सदस्यतथा नंदा देवी’ के कैप्टन धीरज कुमार अग्रवाल अपने दल के साथ शामिल हुए।

नाविकों को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह संवाद उच्च जोखिम वाले समुद्री वातावरण में कार्य करते हुए महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने वाले चालक दल के प्रति राष्ट्र की हार्दिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति” है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा“शिवालिक और नंदा देवी के चालक दल के साहससमर्पण और पेशेवर दक्षता को सम्मानित करना अत्यंत गर्व का विषय है। आपके प्रयासों से महत्वपूर्ण एलपीजी कार्गो का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित हुआजिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सुदृढ़ हुई।

केन्द्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों जहाज भारत की ओर अपनी यात्रा जारी रखने से पहले बढ़ी हुई सुरक्षा चिंताओं के बीच लगभग दो सप्ताह तक उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में तैनात रहे। सोनोवाल ने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी क्रू ने असाधारण धैर्यसतर्कता और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया।

इससे पहलेभारतीय ध्वज वाले दोनों एलपीजी वाहक जहाज 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचने से पूर्व सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर चुके थे। पश्चिम एशिया में बदलती भूराजनीतिक स्थिति के बीच सरकारफारस की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर चल रहे एमटी शिवालिक’ और एमटी नंदा देवी’ ने शुक्रवार13 मार्च2026 को सुबह के समय होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार किया।

सोनोवाल ने कहा“नाविक वैश्विक व्यापार के गुमनाम नायक हैं। अपने घरों और परिवारों से दूर रहकर आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे।” उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने में समुद्री कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

केंद्रीय मंत्री ने आगे जोर देते हुए कहा कि भारतीय ध्वज वाले इन दोनों जहाजों की सफल यात्राजिनका संचालन पूरी तरह भारतीय समुद्री कर्मियों द्वारा किया गयाभारत के समुद्री कार्यबल की शक्ति और दृढ़ता को दर्शाती है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम समुद्री क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षागरिमा और वैश्विक पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सोनोवाल ने कहा कि नाविकों के परिवारों का सहयोग भी सराहानीय है। उनके परिवार उनकी निष्ठा एवं सेवा के पीछे एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। दोनों जहाजों के मास्टर्सअधिकारियों और क्रू को बधाई देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। श्री सोनोवाल ने उनके भविष्य की सुरक्षित समुद्री यात्राओं की कामना की।

नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंगजहाज मालिकोंभर्ती एवं प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस (आर पी एस अलएजेंसियों तथा क्षेत्र में भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय कर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल स्वयं इस स्थिति की सक्रिय और प्रत्यक्ष रूप से निगरानी कर रहे हैं।

समुद्री परिचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार बंदरगाहोंशिपिंग लाइनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही हैताकि समुद्री व्यापार में किसी भी प्रकार की परिचालन बाधाओं को कम से कम किया जा सके। बंदरगाहों को आवश्यकता अनुसार राहत उपाय प्रदान करने की सलाह दी गई हैजिसमें एंकरेजबर्थ किराया तथा भंडारण शुल्क में रियायतें शामिल हैं।

प्रमुख बंदरगाह एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बर्थ प्रदान कर रहे हैंताकि कार्गो की समय पर अनलोडिंग सुनिश्चित हो सके और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनी रहे। पिछले कुछ दिनों में प्रमुख भारतीय बंदरगाहों पर छह एलपीजी जहाज पहुंचे हैं। इसके अतिरिक्तबंदरगाह उन जहाजों के लिए भी सुरक्षित एंकरेज क्षेत्र उपलब्ध करा रहे हैंजिन्हें खाड़ी क्षेत्र के लिए कार्गो लेकर रवाना होना था लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण अभी यात्रा आरंभ नहीं कर पा रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा कि वह विदेश मंत्रालयविदेशों में भारतीय मिशनोंशिपिंग कंपनियों तथा समुद्री यात्रा से जुड़े अन्य संबंधित पक्षों के साथ बेहतर समन्वय के साथ समुद्री स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय समुद्री कर्मियों के कल्याण की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भारत के समुद्र के रास्ते माल ढुलाई नेटवर्क की मजबूती बनाए रखना है।

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राष्ट्रपति ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के पांच बिलियन भोजन वितरण के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (17 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन के पांच बिलियन भोजन वितरण के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि शैक्षिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए पांच बिलियन भोजन परोसना अक्षय पात्र फाउंडेशन की उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस कार्यक्रम की थीम, ‘सुपोषित और शिक्षित भारत से विकसित भारत की ओर’, वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के हमारे राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सुपोषित और शिक्षित समाज के महत्व को रेखांकित करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे बच्चों के लिए एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य केवल सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। जब शिक्षक, माता-पिता, सामाजिक संगठन, कॉर्पोरेट जगत और समाज के सभी वर्ग मिलकर काम करते हैं, तभी हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत नींव रख सकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन, अच्छा स्वास्थ्य और स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिले। ये मूलभूत तत्व बच्चों के सर्वांगीण विकास को संभव बनाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा वह साधन है जो किसी व्यक्ति के जीवन में उपलब्ध अवसरों को निर्धारित करती है और उसकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। यह परिवर्तन और सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम है। सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया बच्चों के स्कूल जाना आरम्भ करने के क्षण से ही आकार लेना शुरू कर देती है। स्कूल बच्चों को दैनिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और जिम्मेदार, कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने के लिए आवश्यक कौशल और अनुभव प्रदान करता है। उन्होंने अक्षय पात्र फाउंडेशन की सराहना की, जो पिछले 25 वर्षों से स्कूलों में मध्याह्न भोजन पहुंचाकर बच्चों में कुपोषण की समस्या का समाधान करने और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे बच्चे, जो राष्ट्र का भविष्य हैं, उनके लिए पौष्टिक भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुगम उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार ने गर्भवती माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत कार्यान्वित विद्यालय दोपहर के भोजन कार्यक्रम से अभिभावकों को अपने बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। अनेक अध्ययनों से यह सिद्ध होता है कि इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप बच्चों के विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति और स्कूल में बने रहने की दर में वृद्धि हुई है। साथ ही, उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अक्षय पात्र फाउंडेशन ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चे केवल निशुल्क भोजन कार्यक्रम के लाभार्थी नहीं हैं। वे राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता हैं। आज उन्हें जो पौष्टिक भोजन मिल रहा है, वह हमारे राष्ट्र की मानव पूंजी में निवेश है। स्वस्थ, शिक्षित और ऊर्जावान बच्चे भारत के कार्यबल का निर्माण करेंगे और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के  पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रृद्धांजलि अर्पित की

 नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के  पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रृद्धांजलि अर्पित की ।

X पर जारी पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “मनोहर पर्रिकर जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि। एक दृढ़ राष्ट्रवादी और हृदय से सादगीपूर्ण व्यक्ति, पर्रिकर जी का जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान हमेशा याद किए जाएंगे। जननेता के रूप में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

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आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय के अधीन भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली के होटल सम्राट स्थित कौटिल्य हॉल में जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया।

यह पहल सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देश भर में जनजातीय होमस्टे संचालकों के पेशेवर आतिथ्य कौशल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय कार्य मंत्रालय के आईटीडीसी के आईएचएम अशोक द्वारा आयोजित संरचित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से सेवा मानकों को बढ़ाना, आगंतुकों के अनुभवों को बेहतर बनाना और जनताीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसरों का समर्थन करना है। इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गुजरात से 40 प्रतिभागियों के पहले बैच ने भाग लिया।

इस समारोह में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा , आईएएस, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव श्री मनीष ठाकुरआईएएस , आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक सुश्री मुग्धा सिन्हा,  आईएएस, जनजातीय कार्य मंत्रालय की निदेशक डॉ. वरनाली डेकाआईएएस और आईटीडीसी के वाणिज्य एवं विपणन निदेशक श्री राजेश राणा उपस्थित थे

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईएचएम अशोक द्वारा विकसित प्रकाशन ट्राइबल होमस्टे-  ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट मैनुअल 2026 का विमोचन था। यह मैनुअल भारत भर में जनजातीय होमस्टे के विकास और पेशेवर प्रबंधन के लिए एक संरचित प्रारूप प्रदान करता है। इच्छुक और वर्तमान होमस्टे संचालकों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया यह प्रकाशन बहुभाषी संसाधन के रूप में विकसित किया गया है और समुदायों के बीच व्यापक पहुंच और प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने के लिए इसे हिंदी और गुजराती में अनुवादित किया गया है।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव ने कहा है भारतीय पर्यटकों की सोच बदल रही है। आज के यात्री भीड़-भाड़ से दूर, प्रकृति के करीब और प्रदूषण मुक्त स्थलों की तलाश कर रहे हैं, साथ ही वे इन वातावरणों का वास्तविक अनुभव करने के लिए अधिक समय तक ठहरना पसंद करते हैं। ऐसे देश में जहां होटल के कमरों की भारी कमी है, होमस्टे मॉडल एक सशक्त समाधान प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि यह न केवल आधुनिक यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करता है, बल्कि जनजातीय परिवारों, विशेष रूप से प्राकृतिक पगडंडियों से समृद्ध पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सार्थक आजीविका के अवसरों का भी सृजन करता है। होमस्टे मालिकों को आतिथ्य सत्कार के बुनियादी सिद्धांतों से अवगत कराकर, यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बदलने की क्षमता रखती है। आईटीडीसी द्वारा उत्कृष्टता के साठ वर्ष पूरे किए जा रहे हैं, ऐसे में जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आज हम जो छोटा सा बीज बो रहे हैं, वह एक मजबूत और दीर्घकालिक मॉडल के रूप में विकसित होगा जो कई और समुदायों को पर्यटन आधारित आजीविका के अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक, आईएएस सुश्री मुग्धा सिन्हा ने कहा कि भारत में होमस्टे अभियान प्रधानमंत्री मोदी के देश भर में एक लाख होमस्टे स्थापित करने के दृष्टिकोण से प्रेरित है। 1,500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का हमारा तात्कालिक प्रयास मात्र शुरुआत है। हमारा व्यापक लक्ष्य उन्हें अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षक बनने के लिए सशक्त बनाना है, जिससे यह मॉडल तेजी से विस्तारित हो सके और यह सुनिश्चित हो सके कि समुदाय अपने घर के पास ही प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि यह पहल अलगाव को दूर करने और सार्थक सहयोग के माध्यम से कार्य करने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। जनजातीय कार्य मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय और अतुलनीय भारत मंच की शक्तियों और सामंजस्‍य को एक साथ लाकर, हम एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे हैं जो सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश भर के समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा करता है।

आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच यह सहयोग समावेशी विकास और पर्यटन के माध्यम से आजीविका सृजन पर सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसका उद्देश्य जनजातीय होमस्टे संचालकों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुभव प्रदान करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करके समुदाय-आधारित पर्यटन को मजबूत करना भी है। यह जनजातीय परंपराओं को संरक्षित करते हुए सार्थक आर्थिक अवसरों का सृजन करके सतत विकास में भी योगदान देता है।

भारत पर्यटन विकास निगम के बारे में:

आईटीडीसी की स्थापना 1966 में देश में पर्यटन अवसंरचना के विकास और विस्तार के उद्देश्य से की गई थी। निगम अपने अतिथियों को विश्व स्तरीय सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। होटलों के संचालन के अलावा, आईटीडीसी ने टिकट बुकिंग, टूर और ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग, प्रचार और मुद्रण परामर्श, इंजीनियरिंग परामर्श, साउंड एंड लाइट शो का आयोजन, आतिथ्य शिक्षा और कौशल विकास जैसे गैर-होटल क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं एक ही बैनर तले प्रदान की हैं।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के कर्मियों को बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली –  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के कर्मियों को बल के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दी।

X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “NCB कर्मियों को उनके स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे युवाओं को नशे की विभीषिका से बचाने के लिए समर्पित एक प्रमुख एजेंसी एनसीबी अपनी जिम्मेदारी को कुशलता और दक्षता के साथ निभा रही है तथा मोदी जी के ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को उल्लेखनीय गति से साकार कर रही है। राष्ट्र उनके समर्पण और देशभक्ति को सलाम करता है।”

 

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संसदीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा संसद योजना के वेब पोर्टल का उन्‍नत संस्‍करण लॉन्च किया

जिसे एनवाईपीएस 2.0 के नाम से जाना जाता है

रांची,18.03.2026 – युवा संसद कार्यक्रम को और अधिक विस्तार देने तथा छात्रों/ नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय ने 11 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय युवा संसद योजना (एनवाईपीएस) का उन्नत संस्करण लॉन्च किया, जिसे एनवाईपीएस 2.0 के नाम से जाना जाता है।

पिछला संस्करण केवल मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों के छात्रों तक सीमित था, इसके विपरीत एनवाईपीएस 2.0 में देश भर के सभी शैक्षिक संस्थान, समूह और नागरिक इसमें क्रमश:संस्थान के माध्यम से भागीदारी, समूह के माध्यम से भागीदारी और व्यक्तिगत भागीदारी के माध्‍यम से भाग ले सकते हैं। इसमें लिंग, जाति, पंथ, धर्म, नस्ल, क्षेत्र या देश में रहने के स्थान आदि की परवाह किए बगैर भागीदारी की जा सकती है।

इसके लॉन्च के बाद से, देश में कुल 4,586 संस्‍थानों ने संस्थान के माध्यम से भागीदारी के तहत पंजीकरण कराया है और 44,222 लोगों ने व्यक्तिगत भागीदारी के तहत हिस्सा लिया है। इसके अलावा, एनवाईपीएस की पहुँच को और बढ़ाने के लिए, मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन; राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों; अलग-अलग शैक्षणिक बोर्ड (सीबीएसई, सीआईएससीई) को लिखा है, और समय-समय पर संसद टीवी पर एक प्रचार वीडियो ट्यूटोरियल भी दिखाया जाता है।

यह जानकारी संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

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चतरा में एसएसबी जवान ने की आत्महत्या, रायफल से खुद को मारी गोली

चतरा,18.03.2026 – एसएसबी के एक जवान द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. घटना मंगलवार की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार 35वीं बटालियन में तैनात जवान ने अपने ही रायफल से खुद को गोली मार ली.

घटना सिमरिया थाना क्षेत्र के शिला पिकेट की है, जहां वह पदस्थापित था. मृतक की पहचान प्रह्लाद सिंह, निवासी देवघर के रूप में की गई है. घटना की सूचना मिलते ही एसपी सुमित कुमार अग्रवाल व एसएसबी कमांडेंट मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेज दिया है. साथ ही मृतक जवान के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है.

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रांची जिला के विभिन्न अंचलों में जनता दरबार का आयोजन

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जनता दरबार का आयोजन

जनता दरबार के माध्यम से राजस्व सेवाओं का त्वरित निष्पादन, सैकड़ों आवेदनों का मौके पर निष्पादन

रांची,17.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जिले के विभिन्न अंचलों में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस पहल के तहत राजस्व से जुड़े विभिन्न कार्यों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जिससे आमजन को पारदर्शी एवं सुलभ सेवाएं मिल रही हैं।

अंचल कार्यालय, सोनाहातु में आयोजित जनता दरबार में कई आवेदनों का निष्पादन किया गया। मुरुतडीह निवासी तुला देवी एवं जाहेरडीह निवासी मलिका कुमारी को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। वहीं, बरेडीह निवासी बिरसिंह महतो को आचरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

अंचल कार्यालय, राहे में कुल 71 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें पंजी-2 सुधार, लगान रसीद, पारिवारिक सदस्यता, आय, आवासीय एवं जाति प्रमाण पत्र से संबंधित आवेदन शामिल हैं।

अंचल कार्यालय, खलारी में कुल 20 आवेदनों का निष्पादन किया गया। इनमें जाति, आवासीय, आय, पारिवारिक प्रमाण पत्र एवं तत्काल आवेदन शामिल हैं।

अंचल कार्यालय, मांडर में आयोजित जनता दरबार में कुल 45 मामलों का निष्पादन किया गया। इस दौरान झिंझरी निवासी फेंकू महतो एवं गोरे निवासी शेख हमीद खान को प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। साथ ही कन्दरी निवासी विजेश्वर नंद तिवारी के भूमि अभिलेख (पंजी-2) में नाम सुधार किया गया। इसके अतिरिक्त दाखिल-खारिज, आय, आवासीय, जाति प्रमाण पत्र एवं केसीसी से संबंधित मामलों का भी निष्पादन किया गया।

अरगोड़ा अंचल में आयोजित जनता दरबार में कुल 84 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 75 का निष्पादन किया गया। इनमें पंजी सुधार, पारिवारिक सूची, दाखिल-खारिज वाद, पेंशन, आय, स्थानीय एवं जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य राजस्व कार्य शामिल हैं।

जनता दरबार के माध्यम से अंचल कार्यालयों में निम्नलिखित प्रमुख राजस्व कार्यों का निष्पादन किया गया :-

पंजी-2 में सुधार

दाखिल-खारिज

लगान रसीद निर्गत करना

आय, जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र जारी करना

पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र

आचरण प्रमाण पत्र

पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित आवेदन

जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि आम जनता को उनकी समस्याओं का समाधान उनके निकटतम अंचल स्तर पर ही त्वरित रूप से उपलब्ध कराया जाए। जनता दरबार इस दिशा में एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा आमजनों से अपील की गई है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान हेतु प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में भाग लें एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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ओडिशा के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

 

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;

“मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, @डा.मोहनयादव51 ने प्रधानमंत्री@नरेन्द्रमोदी से मुलाकात की।”

 

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्वास्थ्य और व्यायाम के महत्व का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया

रांची,17.03.2026 – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अच्‍छा स्वास्‍थ्‍य ही जीवन का सबसे बड़ा धन है और इसे बनाए रखने में व्यायाम की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया।

“व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

सुभाषितम् में कहा गया है कि व्यायाम से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, शक्ति और सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्वास्थ्य सबसे बड़ा वरदान है। स्वास्थ्य ही सब कुछ का आधार है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर एक पोस्‍ट में लिखा;

“अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसमें व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करता हूं।

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

 

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नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन

रांची,16.03.2026 – फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं डॉ. लालचंद बगड़िया एक्युप्रेशर संस्थान, रांची के संयुक्त तत्वावधान में चैंबर भवन में नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न रोगों से ग्रसित लगभग 30 लोगों को एक्युप्रेशर चिकित्सा के माध्यम से उपचार एवं परामर्श प्रदान किया गया। शिविर का शुभारंभ चैंबर के उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, महासचिव रोहित अग्रवाल तथा संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया द्वारा गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर महासचिव रोहित अग्रवाल ने संस्थान के थैरेपिस्टों एवं उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि चैंबर व्यवसायियों एवं उद्यमियों के व्यवसायिक विकास के साथ-साथ उनके स्वस्थ जीवन को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानता है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है।

उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने कहा कि ब्रह्मलीन गुरुदेव स्व. लालचंद बगड़िया ने वर्ष 1989 में रांची के बड़ा तालाब के पास लक्ष्मीनारायण मंदिर के ऊपर एक्युप्रेशर चिकित्सा केंद्र की शुरुआत की थी। एक्युप्रेशर के माध्यम से शरीर के हाथ-पैर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर रक्त संचार को संतुलित किया जाता है, जिससे कई प्रकार के रोगों में लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि आज व्यवसायिक तनाव के कारण कई लोग अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते, ऐसे में एक्युप्रेशर जैसी प्राकृतिक पद्धति काफी लाभकारी साबित हो रही है। संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया ने कहा कि चैंबर के सहयोग से एक्युप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार को और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। सुश्री खुशी गुप्ता ने स्वास्थ्य जागरूकता विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड और शारीरिक श्रम की कमी के कारण लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हमें अपनी जीवनशैली में सुधार करते हुए योग, ध्यान, व्यायाम और संतुलित आहार को अपनाना चाहिए।

डॉ. संतोष झा ने एक्युप्रेशर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पूर्णत: भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जिसका उल्लेख अथर्ववेद में मर्म चिकित्सा के रूप में मिलता है। इसमें शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर रोगों से राहत दिलाई जाती है और यह पद्धति आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। शिविर में मुख्य रूप से शुगर, बीपी, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, घुटने का दर्द तथा माइग्रेन से ग्रसित रोगियों का उपचार किया गया। शिविर को सफल बनाने में संस्थान के लगभग 30 थैरेपिस्टों ने अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौधरी ने किया तथा अंत में राष्ट्रगान के साथ शिविर का समापन हुआ।

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झारखंड विधानसभा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया

रांची,16.03.2026 – आज झारखंड विधानसभा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह एक बेहतरीन पहल है, जिससे जनता को यह एहसास हुआ कि हमारी सरकार संवेदनशील है और जरूरत पड़ने पर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

इस अवसर पर राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी Hemant Soren , झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो जी, गांडेय की लोकप्रिय विधायक श्रीमती Kalpana Murmu Soren कल्पना सोरेन जी सहित कई माननीय मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों ने रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

निश्चित तौर पर रक्तदान महादान है—आपकी एक बूंद रक्त किसी जरूरतमंद की जान बचा सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते मैं इस पुनीत पहल के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय स्पीकर साहब एवं सभी जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। रक्त संग्रहण की दिशा में यह एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है।

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बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए का क्लीन स्वीप, सभी पांच सीटों पर दर्ज की जीत

पटना,16.03.2026 – बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुई वोटिंग का रिजल्ट आ गया है।इस चुनाव में एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है।

एनडीए को कुल 202 वोट मिले हैं, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 37 वोट ही मिल पाए।वोटिंग के दौरान महागठबंधन को एक झटका लगा।

उसके चार विधायक मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे।इनमें तीन विधायक कांग्रेस के और एक विधायक राजद के थे।

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सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण एवं भव्य रूप से मनाने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

पर्व के भव्य आयोजन, ट्रैफिक, सुरक्षा व साफ-सफाई पर विशेष जोर

बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता-उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

प्रशासन और सरना समितियों के बीच समन्वय एवं संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक-उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,16.03.2026 – प्रकृति पर्व सरहुल के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित उपायुक्त सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय सरना समिति के साथ-साथ विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सरहुल पर्व के आयोजन को लेकर अपने सुझाव जिला प्रशासन के समक्ष रखे।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमण्डल पदाधिकारी सदर श्री कुमार रजत, परियोजना निदेशक आईटीडीए श्री संजय भगत, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय, नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति एवं अन्य आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरहुल पर्व के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा शोभायात्रा के सुचारु संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरहुल पर्व को पूरे उत्साह, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा।

बैठक में नगर निगम द्वारा प्रमुख सरना स्थलों एवं शोभायात्रा मार्गों पर साफ-सफाई और लाइट की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई। साथ ही प्रमुख स्थानों पर शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को उनके घर तक पहुंचाने के लिए नगर निगम की ओर से बस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बिजली विभाग के अधिकारियों ने सभी सरना समितियों से अनुरोध किया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में झंडा एवं झांकी की ऊंचाई 6 मीटर से अधिक न रखी जाए, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना से बचा जा सके। साथ ही सरना समितियों द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही गयी।

बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

इस अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरना समितियों के बीच समन्वय एवं संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरना समिति के सदस्यों से प्रशासन द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने का आग्रह किया, ताकि सूचना का त्वरित आदान-प्रदान हो सके।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की सकारात्मक सोच के साथ हम “टीम रांची” के रूप में मिलकर आगे बढ़ेंगे और सरहुल पर्व को सफल बनाएंगे। उन्होंने आदिवासी संस्कृति और परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित “दुनिया की जतरा” कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री की पहल से ही संभव हो पाया, जिसमें पूरे राज्य से आदिवासी कलाकारों ने भाग लिया और दुनिया ने आदिवासी अस्मिता और संस्कृति की झलक देखी।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कुछ व्यवस्थाएं और नियम बनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन और समाज के सहयोग से सरहुल पर्व पूरे उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाएगा।

वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन ने कहा कि पर्व के दौरान सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी। सभी के सहयोग से सरहुल पर्व का सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन होगा।

बैठक में सरहुल पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा तथा शोभायात्रा के सुचारु संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

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राजस्वो आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने दिल्ली और कोलकाता में सक्रिय सोने की संगठित तस्करी और अवैध रूप से सोना पिघलाने वाले गिरोह पर कड़ी कार्यवाही की

14.13 करोड़ रुपये मूल्य का सोना, चांदी और नकदी जब्त की गई; छह लोगों को गिरफ्तार किया गया

नई दिल्ली – राजस्‍व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने विदेशी मूल के सोने की भारत में तस्करी, रेल मार्ग से परिवहन, अवैध संयंत्रों में पिघलाने और उसमें मिलावट करने तथा घरेलू बाजार में गुपचुप तरीके से बिक्री करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान में 14.13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा जब्त की गई और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के अंतर्गत कुल मिलाकर, 13.41 करोड़ रुपये मूल्य का 8286.81 ग्राम सोना, 19.67 लाख रुपये मूल्य का 7350.4 ग्राम चांदी और 51,74,100 रुपये की भारतीय मुद्रा जब्त की गई।

विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, डीआरआई के अधिकारियों ने कोलकाता से ट्रेन द्वारा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आए एक यात्री को रोका जिसके पास विदेशी मुहर वाला सोना था जिसे स्टेशन के बाहर एक प्राप्तकर्ता को सौंपना था। यात्री और प्राप्तकर्ता दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

प्राप्त जानकारियों के आधार पर दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में सोने की पिघलाने की एक अवैध स्‍थान का पता चला। इस स्‍थान का उपयोग विदेशी मूल के सोने को स्थानीय बाजार में बेचने से पहले उसमें मिलावट करने के लिए किया जाता था। परिसर से अतिरिक्त सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा बरामद की गई और स्‍थान का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

आगे की जांच कोलकाता तक पहुंची, जहां गिरोह के सरगना का पता एक अन्य अवैध सोना पिघलाने वाली इकाई में चला। वहां उसके पास और भी मिलावटी सोना था। उसे सोना ले जाने वाले दो व्‍यक्तियों के साथ गिरफ्तार किया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में तस्करी करके लाया गया विदेशी चिह्नों वाला सोना उन्होंने प्राप्त किया था, उस पर से पहचान चिह्न हटाने के लिए उसे पिघलाया था, और आगे देने के लिए रेल मार्ग से दिल्ली ले जाया जाना था।

सोने की तस्करी, परिवहन, पिघलाने और निपटान में शामिल सभी छह व्यक्तियों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं” पहल के अंतर्गत समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने दूरसंचार विभाग की “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं” पायलट पहल के अंतर्गत मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में एकीकृत फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) सेवा केंद्र समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया।

यह पहल भारतनेट के तहत निर्मित उच्च गति ब्रॉडबैंड अवसंरचना का उपयोग करते हुए डिजिटल कनेक्टिविटी को ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक-केंद्रित सेवाओं की एकीकृत आपूर्ति के मंच में परिवर्तित करने का प्रयास करती है।

समृद्धि केंद्र की परिकल्पना एक सिंगल-विंडो ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में की गई है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, वित्तीय सेवाएं, ई-गवर्नेंस सहायता, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा डिजिटल कनेक्टिविटी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

कनेक्टिविटी से ग्रामीण सशक्तिकरण की ओर

इस अवसर पर श्री सिंधिया ने कहा, “गुना के उमरी में समृद्ध ग्राम पहल के शुभारंभ के साथ हम दुनिया को उमरी तक ला रहे हैं। शिक्षा और कृषि से लेकर स्वास्थ्य तथा सरकारी सेवाओं तक, प्रौद्योगिकी हमारे नागरिकों के हाथों में नए अवसर सीधे पहुंचा रही है।”

पहल के लाभों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किसानों को मिट्टी की नमी, पोषक तत्वों तथा फसल के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त होगी, जिससे कृषि अधिक स्मार्ट और उत्पादक बनेगी। छात्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। उमरी के नागरिकों को यहीं पर जांच सुविधाएं तथा दिल्ली और अन्य राज्यों के चिकित्सकों से टेली-परामर्श के माध्यम से त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। रक्त परीक्षण रिपोर्ट 30 मिनट से भी कम समय में प्राप्त की जा सकेगी। प्रमाणपत्रों से लेकर ई-बैंकिंग तक आवश्यक सरकारी सेवाएं अब समृद्ध ग्राम के भीतर ही उपलब्ध होंगी। यह वास्तव में ‘भविष्य का कार्यक्रम’ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास की गति हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचे।”

मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि भारतनेट के माध्यम से देश में विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड अवसंरचनाओं में से एक का निर्माण हुआ है। भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण में इस कनेक्टिविटी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

माननीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकीकृत फिजिटल सेवा केंद्र ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय तथा ई-गवर्नेंस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने में सहायक होगा। उन्होंने आगे कहा कि समृद्ध ग्राम पहल केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर, ग्रामीण भारत में एकीकृत डिजिटल सेवा वितरण तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि इस प्रकार के फिजिटल सेवा केंद्र डिजिटल समावेशनग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देनेसरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करनेअंतिम छोर तक सेवा वितरण को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

समृद्धि केंद्र में उपलब्ध सेवाएं

उमरी (गुना) स्थित समृद्धि केंद्र में विभिन्न प्रकार की एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें टेलीमेडिसिन परामर्श, बुनियादी स्वास्थ्य जांच के लिए हेल्थ एटीएम तथा प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के माध्यम से किफायती दवाओं की उपलब्धता शामिल है।

 

 

केंद्र में शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए स्मार्ट क्लासरूम अवसंरचनाडिजिटल लर्निंग सुविधाएंराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा समर्थित डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम उपलब्ध होंगे।

कृषि संबंधी सेवाओं के अंतर्गत मिट्टी परीक्षण सहायताकृषि परामर्श सेवाएंआधुनिक खेती की तकनीकों तक पहुंच तथा ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा।

केंद्र के माध्यम से गवर्नेंस सेवाओं तक सहायक पहुंच भी उपलब्ध होगी, जिसमें सरकारी योजनाओं की जानकारी, प्रमाणपत्र जारी करना, डिजिटल दस्तावेजीकरण तथा ऑनलाइन नागरिक सेवाओं में सहायता शामिल है।

वित्तीय और डिजिटल सेवाओं के अंतर्गत बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान सेवाएंवित्तीय साक्षरता सहायता तथा कॉमर्स प्लेटफार्मों तक सहायक पहुंच प्रदान की जाएगी।

कनेक्टिविटी सेवाएं भारतनेट समर्थित उच्च गति एफटीटीएच (FTTH) ब्रॉडबैंड तथा पीएमवाणी ढांचे के अंतर्गत सार्वजनिक वाईफाई के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

समृद्धि केंद्र के माध्यम से समुदाय सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी तथा सरकारी जनसंपर्क शिविरों एवं सेवा वितरण कार्यक्रमों के आयोजन में सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

समुदाय आधारित और सतत मॉडल

यह केंद्र समुदाय आधारित मॉडल पर संचालित होगा, जिसमें प्रशिक्षित स्थानीय युवा विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर (VLE) के रूप में कार्य करेंगे। इससे ग्रामीण रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा पहल की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।

इस पहल का क्रियान्वयन दूरसंचार विभाग द्वारा डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। यह संस्था क्षेत्रीय संचालन तथा सामुदायिक सहभागिता के लिए सहयोगी भागीदार के रूप में कार्य करते हुए स्थानीय भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा संचालन प्रबंधन में सहयोग प्रदान कर रही है।

इस मॉडल में सेवा वितरण से प्राप्त राजस्व, सामुदायिक सहभागिता, डिजिटल उद्यमिता तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के साथ समन्वय के माध्यम से एक सतत (टिकाऊ) व्यवस्था को शामिल करता है।

अपेक्षित प्रभाव

समृद्धि केंद्र से उमरी तथा आसपास के गांवों के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। इसके साथ ही डिजिटल शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे, किसानों को आधुनिक कृषि सेवाओं का लाभ मिलेगा, डिजिटल तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर सृजित होंगे।

यह पहल एकीकृत सेवा वितरण के माध्यम से आसपास के क्षेत्र के हजारों ग्रामीण नागरिकों को लाभान्वित करने की अपेक्षा रखती है और यह दर्शाती है कि किस प्रकार डिजिटल अवसंरचना का उपयोग समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह में अपने भाषण की कुछ झलकियाँ साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने और उद्घाटन समारोह की झलकियाँ साझा कीं। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है।

श्री मोदी ने एक्स पर कई पोस्टों की एक श्रृंखला में कहा:

“देशभर में रेलवे को आधुनिक बनाने के हमारे अभियान में पश्चिम बंगाल पीछे न रहे, इसलिए हम यहां भी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। छह अमृत भारत स्टेशनों के उद्घाटन और पुरुलिया-आनंद विहार टर्मिनल के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन का शुभारंभ भी इसी दिशा में अहम कदम हैं।”

“कोलकाता में आज पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जिन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, उनसे न केवल कार्गो ऑपरेशन और तेज होगा, बल्कि बंदरगाह की क्षमता बढ़ने के साथ ही व्यापार के लिए भी नई सुविधाएं तैयार होंगी।”

“कोलकाता के विकास कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल के लोगों का जोश अभिभूत कर देने वाला है।”

“कोलकाता के विकास कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल के लोगों का जोश अभिभूत कर देने वाला है।”

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केन्द्रीय मंत्रियों डॉ. मनसुख मांडविया और श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मांड्या में इनडोर खेल परिसर की आधारशिला रखी

नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक के मांड्या में भारत सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना के अंतर्गत स्वीकृत 14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुउद्देश्यीय इनडोर खेल परिसर के लिए भूमि पूजन किया और आधारशिला रखी।

यह नई सुविधा मांड्या के वीसी फार्म स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की जा रही है। आधारशिला रखते हुए, दोनों मंत्रियों ने जिले के युवाओं से “खेलो इंडिया! वाइब्रेंट मांड्या!” के नारे के अनुरूप मांड्या में खेल संस्कृति को सुदृढ़ करने और इस क्षेत्र से अधिक-से-अधिक चैंपियन खिलाड़ी तैयार करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, दोनों केन्द्रीय मंत्रियों ने शिलान्यास कार्यक्रम के विधि-विधानों में भाग लिया। पूर्व मंत्री श्री सी.एस. पुट्टाराजू, मेलुकोटे के विधायक श्री दर्शन पुट्टन्नैया, के.आर. पेटे के विधायक श्री मंजूनाथ, तथा कई जन प्रतिनिधि और जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

खेल उपलब्धियों के लिए मांड्या की सराहना

मंच कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया पहल केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करना और भारत को एक अग्रणी खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।

केन्द्रीय खेल मंत्री ने कहा कि मांड्या में इस सुव्यवस्थित खेल परिसर की स्थापना उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी और एनडीए नेता श्री एच. डी. कुमारस्वामी के प्रयासों से संभव हो पाया है।

श्री कुमारस्वामी को संबोधित करते हुए श्री मांडविया ने कहा कि लोगों द्वारा दिखाया गया स्नेह उनके द्वारा किए गए कार्यों को दर्शाता है।

उन्होंने दिव्यांगजनों के प्रति श्री कुमारस्वामी की करुणा और प्रतिबद्धता की भी सराहना की। श्री मांडविया ने कहा कि उन्होंने स्वयं दिव्यांगजनों के प्रति श्री कुमारस्वामी की चिंता को देखा है और इलेक्ट्रिक वाहनों के वितरण की इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न सिर्फ दिव्यांगजनों के उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाने में सहायक होते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक योगदान देते हैं।

श्री मांडविया ने आगे कहा कि मांड्या ने कई ऐसे खिलाड़ी दिए है जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ राज्य बल्कि देश का भी नाम भी रोशन किया है। उन्होंने विकास गौड़ा और के.पी. शिल्पा जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख किया, जिन्होंने मांड्या की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है।

विशेष रूप से उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस खिलाड़ी के.पी. शिल्पा का उल्लेख किया, जो वर्तमान में भारत की नंबर एक व्हीलचेयर टेनिस खिलाड़ी हैं और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मांड्या से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने आएं और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करें।

केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 11 वर्षों में भारत में खेल पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक कार्य किया है। उन्होंने बताया कि हालिया केंद्रीय बजट में खेल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि एक दशक पहले यह राशि 1,200 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार खेल क्षेत्र के लिए आवंटन में तीन गुना से अधिक वृद्धि की गई है।

आदिचुंचनगिरि मठ के पीठाधीश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हुआ

आदिचुंचनगिरि महासंस्थान के पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई और अपने आशीर्वचन प्रदान किए।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री श्री सी.एस. पुट्टराजू और श्री डी.सी. थम्मन्ना, विधायक श्री मंजुनाथ, पूर्व विधायक डॉ. के. अन्नादानी, विधान परिषद सदस्य श्री विवेकानंद, मांड्या जिला जेडी(एस) अध्यक्ष श्री रमेश सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और नेता उपस्थित थे।

दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहनों का वितरण

मंच कार्यक्रम के पश्चात 388 दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहनों का वितरण किया गया। ये वाहन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज(टीसीएस) और स्टील प्राधिकरण ऑफ इंडिया लिमिटेड(सेल) के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व(सीएसआग) पहलों के अंतर्गत प्रदान किए गए।

इसके अलावा, इन्फोसिस द्वारा दिए गए 500-डेस्कटॉप और 100-लैपटॉप सरकारी विद्यालयों को प्रदान किए गए। साथ ही हिंदुजा समूह द्वारा सीएसआर पहल के तहत प्रदान किया गया एक संपूर्ण सुसज्जित एम्बुलेंस मांड्या चिकित्सा विज्ञान संस्थान(एमआईएमएस) को सौंपा गया।

श्री कुमारस्वामी के लिए भावुक पल

केंद्रीय मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहन सौंपते समय भावुक हो गए। जब लाभार्थियों ने वाहन प्राप्त करते समय उनके प्रति आभार व्यक्त किया, तो मंत्री स्पष्ट रूप से भावुक नजर आए। आंखों में आंसू लिए श्री कुमारस्वामी ने उन सभी का धन्यवाद किया, जो वाहन प्राप्त करने के लिए दूर-दराज से आए थे।

इस भावनात्मक क्षण के साक्षी केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, आदिचुंचनगिरि मठ के पीठाधीश्वर, तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति बने।

गुड़ की माला से भव्य स्वागत

इनडोर स्टेडियम के भूमि पूजन के बाद दोनों केन्द्रीय मंत्रियों को एक भव्य खुली गाड़ी के जुलूस में मंच कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया।

वीसी फार्म के गेट पर समर्थकों ने मांड्या की विशिष्टता गुड़ से बनी भव्य माला से उनका स्वागत किया। इस अनोखे स्वागत को देखकर श्री मांडविया साफ तौर पर हैरान रह गए।

श्री कुमारस्वामी ने उन्हें मांड्या के गुड़ के महत्व और प्रतिष्ठा के बारे में बताया, जो अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है।

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वस्त्र मंत्रालय ने नागपुर में “कपास की उत्पादकता को दोगुना करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूपरेखा” विषय पर चिंतन शिविर का आयोजन किया

नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय ने आज नागपुर में “कपास की उत्पादकता को दोगुना करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा” विषय पर एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस मंच पर नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रेणेताओं तथा कृषि विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया, जहां कपास की उत्पादकता बढ़ाने, रेशे की गुणवत्ता में सुधार करने और वैश्विक कपास मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रणनीतिक पहलों पर विचार-विमर्श किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने विचार-विमर्श को ठोस और क्रियान्वित किए जा सकने वाले परिणामों में बदलने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के कपास क्षेत्र की प्रगति के लिए पूरे मूल्य शृंखला में सुधारों तथा नवाचार को आगे बढ़ाना आवश्यक है। यह कार्य सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन और जानकारी के मार्गदर्शक स्तंभों के तहत किया जाना चाहिए, ताकि एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कपास पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

सचिव ने उल्लेख किया कि ड्रिप सिंचाई के विस्तार, कृषि प्रसार तंत्र को सुदृढ़ करने, किसानों को बेहतर परामर्श उपलब्ध कराने तथा जिला स्तर पर मृदा मानचित्रण के माध्यम से किसानों को उपयुक्त कपास किस्मों के चयन में मार्गदर्शन देकर कपास की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कपास बीज पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक नवाचार तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों को सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट ‘कॉटन कैलेंडर’ विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव(फाइबर) श्रीमती पद्मिनी सिंगला ने कहा कि कपास क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए पूरे मूल्य शृंखला में समन्वित तथा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिससे उत्पादकता बढ़ाई जा सके, रेशे की गुणवत्ता में सुधार हो तथा किसानों की आय में वृद्धि हो। उन्होंने उभरती चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्र के लिए नए अवसरों को सामने लाने हेतु सामूहिक विचार-विमर्श तथा सहयोगात्मक नीति-निर्माण के महत्व पर भी बल दिया।

चिंतन शिविर में चार विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कपास मूल्य शृंखला के प्रमुख आयामों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:

सत्र 1: समृद्ध किसान– उत्पादकता दोगुनी, आय दोगुनी विषय के अंतर्गत उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए मृदा आधारित फसल योजना, उच्च घनत्व रोपण प्रणालियां(एचडीपीएस), कृषि मशीनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) आधारित कीट निगरानी, तथा सुदृढ़ डिजिटल परामर्श प्रणालियों जैसी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

सत्र 2: प्रिसिजन जिनिंग और गुणवत्ता आश्वासन विषय के अंतर्गत आधुनिक जिनिंग प्रौद्योगिकियों को अपनाने, संदूषण नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करने, उन्नत फाइबर परीक्षण प्रणालियों के उपयोग तथा मजबूत पता लगाने वाले तंत्र विकसित करने पर बल दिया गया, ताकि वैश्विक बाजारों में प्रीमियम गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध कराया जा सके।

सत्र 3: स्थिरता और परिपत्रता विषय के अंतर्गत जलवायु- अनुकूल कृषि पद्धतियों, टिकाऊ कपास उत्पादन प्रणालियों, परिपत्र वस्त्र अर्थव्यवस्था मॉडलों तथा विकसित हो रहे वैश्विक सततता मानकों के अनुरूपता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

सत्र 4: कस्तूरी कॉटन भारत– भारत को एक वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करना विषय के अंतर्गत पता लगाने की प्रणालियों को सुदृढ़ करने, गुणवत्ता प्रमाणन ढांचे को मजबूत बनाने, ब्रांडिंग रणनीतियों को विकसित करने तथा कस्तूरी कॉटन भारत को भारत के प्रीमियम कपास ब्रांड के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने समापन संबोधन में वस्त्र सचिव ने कपास पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़, दक्ष, प्रौद्योगिकी-संचालित तथा उभरती चुनौतियों के प्रति सक्षम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को सुनिश्चित करने तथा कपास क्षेत्र में समग्र मूल्य संवर्धन को बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा नवोन्मेषी कृषि एवं औद्योगिक पद्धतियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने भविष्य के लिए तैयार कपास पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण तथा कपास और वस्त्र क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत से जुड़े हितधारकों और किसानों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।

चिंतन शिविर का समापन केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह के मार्गदर्शन में कपास मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 5एफ परिकल्पना— फार्म टू फाइबर(खेत से रेशा), फाइबर टू फैब्रिक(रेशे से कपड़ा), फैब्रिक टू फैशन(कपड़े से फैशन) और फैशन टू फॉरेन(फैशन से वैश्विक बाज़ार/निर्यात तक) के अनुरूप है। विचार-विमर्श के दौरान किसानों की समृद्धि, कपास का टिकाऊ उत्पादन, उच्च गुणवत्ता वाले रेशे तथा वस्त्र मूल्य शृंखला में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के प्रति सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि की गई।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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