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रांची जिला के विभिन्न प्रखण्ड एवं अंचल में जनता दरबार का आयोजन

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जनता दरबार का आयोजन

जनता दरबार में सैकड़ों आवेदनों का निष्पादन, प्रमाण पत्रों का ऑन-द-स्पॉट वितरण

रांची,12.05.2026 – nजिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार की भांति आज भी जिले के सभी प्रखण्ड एवं अंचलों में जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों एवं आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निष्पादन करते हुए विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्र एवं राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा किया गया। जिला प्रशासन की इस जनोन्मुखी पहल से लोगों में संतोष एवं विश्वास का वातावरण देखने को मिला।

सोनाहातु अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान ग्राम जामुदाग निवासी आवेदिका सुनीता देवी एवं ग्राम दानाडीह निवासी प्रकाश साहू को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। वहीं मांडर अंचल में आयोजित जनता दरबार में आवेदिका अनीता बाड़ा (ग्राम कटचाचो) एवं गुलजहां खातून (ग्राम करगे) को आय प्रमाण-पत्र तथा साहिल उरांव (ग्राम टांगर बसली) को जाति प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

इसी क्रम में मांडर अंचल के नवाटांड़ मौजा निवासी अमीना खातुन के म्युटेशन आवेदन से संबंधित मामले में शुद्धि पत्र प्रदान कर त्वरित कार्रवाई की गई। जनता दरबार में आए आवेदनों पर त्वरित एवं पारदर्शी निष्पादन जिला प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली को दर्शाता है।

जिले के विभिन्न अंचलों में प्राप्त एवं निष्पादित आवेदनों का विवरण इस प्रकार रहा :-

खलारी अंचल में कुल 68 आवेदनों का निष्पादन किया गया, जिनमें आवासीय, जाति, आय, पारिवारिक सदस्यता एवं अन्य आवेदन शामिल रहे।

मांडर अंचल में कुल 87 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें सर्वाधिक आय एवं आवासीय प्रमाण पत्र निर्गत किए गए।

चान्हो अंचल में 132 आवेदनों का निष्पादन करते हुए आय, जाति, आवासीय प्रमाण पत्र, शुद्धि पत्र से संबंधित मामलों का समाधान किया गया।

नामकुम अंचल में कुल 97 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें दाखिल-खारिज, अनुमति वाद एवं विभिन्न प्रमाण पत्रों से संबंधित आवेदन शामिल रहे।

सिल्ली अंचल में 77 आवेदनों का निष्पादन करते हुए आय, जाति, आवासीय, पारिवारिक एवं दाखिल-खारिज मामलों का समाधान किया गया।

राहे अंचल में कुल 71 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें आय, जाति, आवासीय एवं पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र प्रमुख रहे।

बुंडू अंचल में 37 आवेदनों का निष्पादन किया गया।

अरगोड़ा अंचल में कुल 100 आवेदनों का निष्पादन हुआ, जिसमें वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, आय, स्थानीय, जाति प्रमाण पत्र एवं दाखिल-खारिज से संबंधित मामलों का समाधान किया गया।

ईटकी अंचल में कुल 75 आवेदनों का निष्पादन करते हुए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, केसीसी प्रमाण पत्र, पेंशन एवं अन्य मामलों का निपटारा किया गया।

जनता दरबार के माध्यम से जिला प्रशासन ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के नागरिकों तक प्रशासनिक सेवाओं को सरल, सुलभ एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाने का कार्य निरंतर कर रहा है। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

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प्रधानमंत्री ने गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाने में सामूहिक प्रयास और साझा जिम्मेदारी की शक्ति को रेखांकित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने राष्ट्र की समग्र प्रगति को आगे बढ़ाने में सरकार, समाज और 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास की शक्ति को रेखांकित किया।

एक्‍स पर सिलसिलेवार किए गए पोस्ट ‍में श्री मोदी ने कहा:

“वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन कर अत्यंत संतोष और गर्व की अनुभूति हुई है।”

“बड़े बदलाव और बेहतर परिणाम के लिए समाज और सरकार का साथ मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका एक बड़ा उदाहरण है।”

“हमारे बेटे-बेटियों के लिए सभी क्षेत्रों में संभावनाओं के नए-नए द्वार खुलें, ये सरकार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है। मुझे खुशी है कि सरदारधाम इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभा रहा है।”

“गुजरात के साथ ही पूरा देश ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बने, इस दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है।”

“140 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं, तो देश भी 140 करोड़ कदम आगे बढ़ता है। इसलिए वैश्विक संकट के मौजूदा दौर में देशवासियों से मेरे कुछ विशेष आग्रह…”

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राष्ट्रमंडल खेल से पहले भारतीय खेल प्राधिकरण और मायभारत ने राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किए हैं

राष्ट्रमंडल खेल अभियानों में शामिल होने के लिए देश भर के युवा आमंत्रित किए गए

ये तीनों पहल नि:शुल्क हैं और इनका उद्देश्य, विशेषकर युवाओं के बीच सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है

गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेल (सीडब्ल्यूजी) 2030 की तैयारियों के मद्देनजर, भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) ने मायभारत के सहयोग से तीन राष्ट्रव्यापी जागरूकता पहल शुरू की हैं।

इन पहलों का उद्देश्य देशभर में खेल भावना, रचनात्मकता और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इस अभियान के तहत, प्रतिभागी ‘राष्ट्रमंडल खेल 2030 मशाल डिजाइन प्रतियोगिता’, ‘राष्ट्रमंडल खेल रील चैलेंज’ और ‘ राष्ट्रमंडल खेल 2030 प्रश्नोत्तरी’ में भाग ले सकते हैं।

इन प्रतियोगिताओं में मायभारत के सभी उपयोगकर्ता शामिल हो सकते हैं। इनका उद्देश्य ‘#सीडब्ल्यूजी2030इनभारत’ के विजन के प्रति जागरूकता और उत्साह पैदा करना है।

*राष्ट्रमंडल खेल 2030 मशाल डिजाइन प्रतियोगिता*

‘राष्ट्रमंडल खेल 2030 मशाल डिजाइन प्रतियोगिता’ में नागरिकों को भारत की संस्कृति, विरासत, नवाचार, सतत विकास और खेल उत्कृष्टता से प्रेरित मशाल का डिज़ाइन प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रविष्टियां डिजिटल या हस्तनिर्मित प्रारूप में 200 शब्दों तक के वैकल्पिक अवधारणा नोट के साथ प्रस्तुत की जा सकती हैं।

यह प्रतियोगिता 11 मई, 2026 से 20 मई, 2026 तक ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। प्रतिभागी केवल एक ही प्रविष्टि जमा कर सकते हैं। चयनित विजेताओं को फिट इंडिया उपहार और मान्यता प्रमाण पत्र प्राप्त होंगे, जबकि पात्र प्रतिभागियों को डिजिटल भागीदारी प्रमाण पत्र प्राप्त होंगे।

अधिक जानकारी के लिए, इस लिंक पर जाएं:

https://mybharat.gov.in/pages/event_detail?event_name=CWG-2030-Torch-Design-Contest&key=644159126644

*राष्ट्रमंडल खेल रील चैलेंज*

‘राष्ट्रमंडल खेल रील चैलेंज’ प्रतिभागियों को भारत की विकसित होती खेल संस्कृति, स्थानीय खेल अवसंरचना, फिटनेस और सीडब्ल्यूजी 2030 की मेजबानी के प्रति उत्साह को प्रदर्शित करने वाली मौलिक रील बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

प्रतिभागियों को यह भी प्रोत्साहित किया जाता है कि वे राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए भारत की तैयारियों का समर्थन करने वाले संदेश शामिल करें और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए भारतीय दल की सफलता की कामना करें। रील की अवधि 60 सेकंड से अधिक नहीं होनी चाहिए।

यह प्रतियोगिता 7 मई, 2026 से 16 मई, 2026 तक चलेगी, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी को केवल एक बार भाग लेने की अनुमति होगी। शीर्ष पांच रील निर्माताओं को एसएआई की ओर से फिट इंडिया उपहार पुस्तिकाएं प्राप्त होंगी।

अधिक जानकारी के लिए, यहां जाएं:

https://mybharat.gov.in/pages/event_detail?event_name=CWG-Reel-Challenge&key=139158851139

*राष्ट्रमंडल खेल 2030 प्रश्नोत्तरी*

‘राष्ट्रमंडल खेल 2030 प्रश्नोत्तरी’ भारत की खेल विरासत का जश्न है और राष्ट्रमंडल खेल में देश की उपलब्धियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य है।

इस प्रश्नोत्तरी में 10 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिन्हें 5 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। प्रतिभागियों को उत्तीर्ण होने के लिए कम से कम 8 अंक प्राप्त करने होंगे। प्रत्येक प्रतिभागी को केवल एक ही प्रयास करने की अनुमति है।

यह प्रश्नोत्तरी 9 मई 2026 से 26 सितंबर 2026 तक खुला रहेगा, और प्रत्येक सप्ताह शीर्ष पांच विजेताओं की घोषणा की जाएगी। सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें:

https://mybharat.gov.in/quiz/quizdashboard/c09vUVNQUjlMKytsTStSQUkyVFhWQT09

ये तीनों पहलें नि:शुल्क हैं और इनका उद्देश्य भारत के खेल अभियान में जनता, विशेष रूप से युवाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है, साथ ही रचनात्मकता, राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रमंडल खेल 2030 की सफल मेजबानी के लिए सामूहिक उत्साह को बढ़ावा देना है

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राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 प्रदान किए

नर्सिंग कर्मी सेवा के उच्चतम मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर नर्सिंग कर्मियों को वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए।

राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार- 2026 के लिए अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर उन नर्सिंग कर्मियों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के अमूल्य योगदान को यथोचित सम्‍मान है जो करुणा और अथक समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करते हैं। नर्सिंग कर्मी सेवा के उच्चतम मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और अक्सर सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को कर्तव्य के प्रति उनकी प्रेरणादायक निष्ठा और रोगी देखभाल के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के उनके अथक प्रयासों के लिए बधाई देती हूं।

राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा समाज को नर्सिंग कर्मियों द्वारा प्रदान की गई सराहनीय सेवाओं की मान्यता के प्रतीक के रूप में की गई थी।

 

पुरस्कार विजेताओं की सूची देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें।

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जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री का जनता दरबार

दिव्यांग के चेहरे पर लौटी मुस्कान, उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने तत्काल उपलब्ध करायी इलेक्ट्रिक ट्राईसाईकिल

अनगड़ा में जमीन म्यूटेशन में लापरवाही पर सख्ती, तत्कालीन कर्मचारी पर आरोप पत्र गठित करने का आदेश

प्लॉट सुधार में देरी पर अंचल अधिकारी को फटकार, एक माह के भीतर सभी लंबित मामलों के निष्पादन का निर्देश

कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे की शिकायत पर जांच के आदेश

सरकारी भूमि अतिक्रमण पर अंचल अधिकारियों को एक बार से चेतावनी

लंबित भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में तेजी लाने का निर्देश

प्रशासन और जनता के बीच कोई गैप न हो – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,11.05.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में एक बार फिर संवेदनशील प्रशासनिक कार्यशैली की मिसाल देखने को मिली। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक दिव्यांग युवक की समस्या का त्वरित समाधान करते हुए उसे इलेक्ट्रिक ट्राईसाईकिल उपलब्ध करायी।

रांची के रहनेवाले शाहनवाज आलम, जो अपने पैरों से चलने में असमर्थ हैं, हाथों के सहारे जनता दरबार पहुंचे थे। उन्होंने जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के समक्ष अपनी पीड़ा और दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को साझा किया। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उनके प्रमाण-पत्रों की जांच करायी और कुछ ही देर में शाहनवाज को इलेक्ट्रिक ट्राईसाईकिल उपलब्ध करा दी गयी।

मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण इस पहल में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री स्वयं शाहनवाज को ट्राईसाईकिल तक लेकर गये और उन्हें कार्यालय परिसर से बाहर तक छोड़ा। हाथों में नई ट्राईसाईकिल और चेहरे पर संतोष एवं खुशी की मुस्कान लिये शाहनवाज अपने घर लौटे।

जनता दरबार में उमड़ी लोगों की भारी भीड़

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे। देर शाम तक उपायुक्त द्वारा लोगों की समस्याएं सुनी गयी। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों को प्राथमिकता देते हुए उनकी शिकायतें पहले सुनी गयी। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रत्येक मामले को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित एवं पारदर्शी समाधान प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

आंगनबाड़ी सेविकाओं की शिकायत पर उपायुक्त गंभीर

जनता दरबार में आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अनियमित मानदेय भुगतान तथा पोषाहार राशि में अनियमितता की शिकायत जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के समक्ष रखी। सेविकाओं ने बताया कि समय पर भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी शिकायतों की नियमानुसार जांच कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाये। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभुकों एवं सेविकाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

दस्तावेजों को नजरअंदाज कर म्यूटेशन करनेवाले कर्मचारी पर आरोप पत्र गठित करने का आदेश

अनगड़ा निवासी सेवाराम महतो ने जनता दरबार में पंजी-2 में नाम दर्ज नहीं होने की शिकायत दर्ज करायी। आवेदक ने बताया कि उनके पिता की जमीन को दोनों भाइयों के नाम से दाखिल-खारिज हेतु आवेदन दिया गया था, लेकिन रसीद केवल एक भाई के नाम से निर्गत हो रही है। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद ऑनलाइन जुड़े अनगड़ा अंचल अधिकारी को मामले के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने तत्कालीन कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने का आदेश दिया। उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि दस्तावेजों को दरकिनार कर एक ही व्यक्ति के नाम पर म्यूटेशन किया जाना गंभीर त्रुटि है।

प्लॉट सुधार में देरी पर अंचल अधिकारी को फटकार

सोनाहातू अंचल से आये एक आवेदक ने प्लॉट सुधार से संबंधित लंबित मामले की शिकायत जनता दरबार में की। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पाया कि मामले का समय पर निष्पादन नहीं किया गया है। इस पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित अंचल अधिकारी को कड़ी फटकार लगायी। उन्होंने निर्देश दिया कि प्लॉट सुधार से संबंधित सभी लंबित मामलों का निष्पादन एक महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया जायेगा।

कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे की शिकायत पर जांच के आदेश

माण्डर अंचल के एक आवेदक ने महुआजाड़ी मौजा स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर एक पुलिसकर्मी द्वारा कब्जा करने की शिकायत जनता दरबार में की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों को फिर से चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। यदि किसी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित अंचल अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जायेगी।

लंबित भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में तेजी लाने का निर्देश

जनता दरबार में भूमि अधिग्रहण के बाद लंबित मुआवजा भुगतान से संबंधित आवेदन भी प्राप्त हुए। आवेदकों ने बताया कि लंबे समय से मुआवजा राशि नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को एनएचएआई से समन्वय स्थापित कर यथाशीघ्र मुआवजा राशि भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

प्रशासन और जनता के बीच कोई गैप न हो – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री

जनता दरबार के दौरान जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक बार फिर दोहराया कि प्रशासन और आम जनता के बीच किसी प्रकार की दूरी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान अंचल एवं प्रखंड कार्यालय स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाये ताकि लोगों को जिला मुख्यालय तक आने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों एवं प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहें और समयबद्ध तरीके से शिकायतों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन ही जनता का विश्वास मजबूत करता है।

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प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण टीम द्वारा किए गए रोमांचक फ्लाईपास्ट का अवलोकन किया

प्रधानमंत्री ने इस प्रदर्शन को गौरव और शौर्य का अद्भुत संगम बताया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम द्वारा प्रस्तुत एक रोमांचक फ्लाईपास्ट का अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि आकाश में गौरव और शौर्य का भव्य संगम सोमनाथ मंदिर पर केसरिया और तिरंगे का प्रकाश फैला रहा था। श्री मोदी ने कहा कि भक्ति और शक्ति की यह अद्भुत छटा प्रत्येक हृदय को गहन आनंद से भर देती है और प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित करती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में लिखा:

“आज सोमनाथ में आकाश में गौरव और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण टीम ने एक रोमांचक फ्लाईपास्ट का प्रदर्शन किया। भक्ति और शक्ति की इस भावना ने प्रत्येक हृदय को असीम प्रसन्नता से भर दिया।”

“सोमनाथ अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर आकाश में गौरव और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय वायु सेना की ‘सूर्य किरण’ एरोबेटिक टीम ने सोमनाथ मंदिर के ऊपर अपने फ्लाईपास्ट से केसरिया और तिरंगे की आभा बिखेर दी। श्रद्धा और शक्ति के इस दृश्य ने हर भारतीय के मन को गौरव से भर दिया!”

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प्रधानमंत्री ने वडोदरा जाते समय सोमनाथ मंदिर की एक तस्वीर साझा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ से वडोदरा जाते समय ली गई सोमनाथ मंदिर की एक तस्वीर साझा की।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि प्रभास पाटन के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर भक्ति, इतिहास और सभ्यतागत भावना के एक तेजस्वी प्रतीक के रूप में शान से खड़ा है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह शाश्वत मंदिर बर्बर हमलों, आक्रमणों और सदियों के बीतने के बावजूद अडिग रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ प्रत्येक भारतीय को शक्ति, साहस और आशा प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में लिखा:

“सोमनाथ से वडोदरा जाते समय यह तस्वीर खींची है…

प्रभास पाटन के तट पर सोमनाथ मंदिर श्रद्धा, भक्ति और भारत की सनातन संस्कृति का दिव्य प्रतीक बनकर आज भी अडिग खड़ा है। इस पावन मंदिर ने बर्बर आक्रमणों, विदेशी हमलों और सदियों के चुनौतीपूर्ण कालखंड को पार करते हुए अपनी अमर चेतना को अक्षुण्ण रखा है। सोमनाथ हर भारतीय के लिए शक्ति, साहस और उम्मीद का प्रतीक है।

हर हर महादेव!”

 

 

 

“सोमनाथ से वडोदरा जाते समय यह तस्वीर खींची है…

प्रभास पाटन के तट पर सोमनाथ मंदिर श्रद्धा, भक्ति और भारत की सनातन संस्कृति का दिव्य प्रतीक बनकर आज भी अडिग खड़ा है। इस पावन मंदिर ने बर्बर आक्रमणों, विदेशी हमलों और सदियों के चुनौतीपूर्ण कालखंड को पार करते हुए अपनी अमर चेतना को अक्षुण्ण रखा है। सोमनाथ हर भारतीय के लिए शक्ति, साहस और उम्मीद का प्रतीक है।

हर हर महादेव!”

 

 

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18 माह की मासूम बच्ची अदिति पांडे के लापता होने के मामले में रांची पुलिस की छापेमारी और जांच जारी

रांची,11.05.2026 – रांची के सदर थाना क्षेत्र से 18 माह की मासूम बच्ची अदिति पांडे के लापता होने के मामले में रांची पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। बच्ची की तलाश में लगातार छापेमारी और जांच जारी है।

सदर थाना क्षेत्र के कोकर स्थित खोरहा टोली से लापता हुई 18 माह की अदिति पांडे की जानकारी देने वाले को रांची पुलिस की ओर से 50 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को बच्ची के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पता पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

📞 संपर्क नंबर:
रांची एसएसपी – 9431706136

सिटी एसपी – 9431706137

सदर डीएसपी – 9431102090

सदर थाना प्रभारी – 9431706160

रांची पुलिस की अपील —

“18 माह की मासूम बच्ची अदिति पांडे को सकुशल खोजने में पुलिस का सहयोग करें। आपकी एक सूचना बच्ची को उसके परिवार से मिला सकती है।”

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमें Zero Casualty Disaster Management के दृष्टिकोण को अमल में लाने पर काम करना होगा

देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) का गठन हो

Heat Wave से कृषि क्षेत्र को न्यूनतम नुकसान हो, मौसम संबंधी हमारी योजनाएं धरातल तक पहुँचें

आपदाओं पर जारी NDMA के दिशानिर्देशों के राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर पालन की समीक्षा हो

जल संचय और चेक डैम्स की परियोजनाओं से जल संरक्षण और जलस्तर में सुधार की और अधिक संभावनाओं को तलाशा जाए

CAMPA Fund का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को बहुआयामी बनाने के लिए करें

कम से कम 60 जोखिम भरी झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम हो, राज्य स्तरीय एकीकृत जलाश्य परिचालन सभी राज्यों में लागू हो

मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार हो

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक में देश में संभावित बाढ़ और Heat Wave से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 30 जोखिम भरी झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना में कम से कम 60 झीलों को शामिल किया जाए। श्री शाह ने यह भी कहा कि केन्द्र और राज्यों के स्तर पर बाढ़ के पूर्वानुमानों की एक समेकित व्यवस्था होनी चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) का गठन कर इसे सक्रिय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदाओं पर जारी NDMA के दिशानिर्देशों के माध्यम से बेहतर जागरूकता और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण विकसित हुआ है, लेकिन राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर इन दिशानिर्देशों के पालन की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि NDMA को अध्ययन करना चाहिए कि जंगलों में लगने वाली आग, Heat Wave और बाढ़ से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के निर्देशों और NDMA के दिशानिर्देशों का कितने राज्य पालन कर रहे हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमें Zero Casualty Disaster Management के दृष्टिकोण को अमल में लाने पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जल संचय और चेक डैम्स की परियोजनाओं से जल संरक्षण और जलस्तर में सुधार की और अधिक संभावनाओं को तलाशा जाए। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि Heat Wave से कृषि क्षेत्र को न्यूनतम नुकसान हो, साथ ही नदियों पर चेक डैम्स बना कर जल संरक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि CAMPA Fund का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को बहुआयामी (Multi-dimensional) बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि एक ऐसा मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या के कारण मौसम में आ रहे बदलावों और उनकी वजह से बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों से Whole of Gvernment तथा Whole of Society दृष्टिकोण अपना कर निपटा जा सके। उन्होंने बैठक में शामिल हुए मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों से कहा कि वे अब नए-नए ऐप या पोर्टल बनाने के बजाय मौजूद ऐप और पोर्टल को consolidate कर बेहतर बनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा की मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आगामी मॉनसून को लेकर हमारे अनुमान और और मॉनसून में होने वाली Casualty एवं हमारे पूर्वानुमान और कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान का अध्ययन कर इसमें और सुधार करने की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए।

श्री अमित शाह ने बैठक में शामिल हुए मंत्रालयों/विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों और उनके बीच के समन्वय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मौसम संबंधी हमारी योजनाएं धरातल तक पहुँचें।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने हेतु तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रत्येक वर्ष केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाती है तथा उनके निर्देशों के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इनमें भारतीय मौसम विभाग (IMD) और केन्द्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा वर्षा एवं बाढ़ पूर्वानुमान की अग्रिम अवधि को 3 दिनों से बढ़ाकर 7 दिन करना तथा हीट वेव पूर्वानुमान के मानकों में सुधार शामिल हैं।

बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, केन्द्रीय गृह सचिव, विभिन्न मंत्रलायें के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी,राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा भारतीय मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एवं केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ में श्री श्री रविशंकर जी से मुलाकात की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बेंगलुरु यात्रा के दौरान ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी से मुलाकात की।

नई दिल्ली – श्री मोदी ने कहा कि उनकी श्री श्री रविशंकर जी के साथ विभिन्न विषयों पर उत्कृष्ट चर्चा हुई, विशेष रूप से ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से बातचीत हुई।

प्रधानमंत्री ने सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति श्री श्री रविशंकर जी की प्रतिबद्धता की सराहना की और विभिन्न पहलों के माध्यम से समाज की सेवा में इस संस्थान के प्रयासों को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“आर्ट ऑफ लिविंग में प्रवास के दौरान श्री श्री रविशंकर जी से भेंट हुई। हमने विभिन्न विषयों पर उत्कृष्ट चर्चा की, विशेष रूप से ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर सार्थक बातचीत हुई। सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति उनकी निष्ठा अत्यंत प्रशंसनीय है।

@ArtofLiving

@Gurudev”

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प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में सिंधु अस्पताल का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने सिंधु अस्पताल में नवीनतम आधुनिक और नवाचार पर दिए गए जोर की सराहना की

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अस्पताल शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने अस्पताल की टीम द्वारा नवीनतम तकनीक और नवाचार को एकीकृत करने पर दिए गए विशेष जोर की भी प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा;

“हैदराबाद में सिंधु अस्पताल का उद्घाटन किया। शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है। अस्पताल की टीम द्वारा नवीनतम तकनीक और नवाचार को एकीकृत करने पर दिया गया जोर प्रशंसनीय है।”

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केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी की जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील

नागपुर में 17 और 18 मई को ‘जल-संवाद’ और ‘जलक्रांति’ सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ को किसान आत्महत्या के क्षेत्र के कलंक से मुक्त करने और विदर्भ के गाँवों में जल समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना चाहिए।

विदर्भ में जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती समारोह के अवसर पर 17 और 18 मई को नागपुर में “जलसंवाद” (जल संवाद) और “जलक्रांति” (जल क्रांति) सम्मेलनों का आयोजन किया गया है।

श्री गडकरी आज आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थेजिसमें विधायक चरणसिंह ठाकुर और उमेश यावलकर भी मौजूद थे।

श्री गडकरी ने आगे कहा कि देश में जल की कमी नहीं हैबल्कि जल संसाधनों की उचित योजना और प्रबंधन की कमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक खेतीड्रिप सिंचाई और कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जल प्रबंधन संभव है।

उन्होंने बताया कि फार्म तालाबों से निकाली गई मिट्टी का उपयोग अकोलावाशिम और बुलढाणा जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया गया हैजिससे पश्चिमी विदर्भ में भूजल स्तर बढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि क्षेत्र के किसानों ने अपनी फसल पैटर्न बदल ली है। श्री गडकरी ने यह जोर दिया कि गैर सरकारी संगठनों की जल संरक्षण में भागीदारी महत्वपूर्ण हैलेकिन जनता की सक्रिय भागीदारी समान रूप से मूल्यवान हैइसलिए जल संरक्षण को जन आंदोलन बनना चाहिए । उन्होंने आगे कहा कि वारूडमोरशी और कटोलनरखेड़ के भूजलकमी वाले डार्क जोन” क्षेत्रों में नदियों और नालों के गहनकरण संबंधी संरक्षण कार्य जनभागीदारी से किए जा रहे हैं और इन प्रयासों से क्षेत्र में जल संरक्षण परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। गडकरी ने स्थानीय स्वशासन निकायों से इन पहलों में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपील भी की।

पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था पिछले 25 वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संगठन द्वारा विकसित तमस्वदा मॉडल’ को देशभर में मान्यता मिल रही है।

संगठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नागपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। रजत जयंती समारोह दो चरणों में होंगे — 17 मई 2026 को नागपुर जलसंवाद2026” और 18 मई 2026 को जलक्रांति सम्मेलन

देशभर से प्रमुख जल विशेषज्ञपद्म पुरस्कार विजेता और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ इन आयोजनों में भाग लेने वाली हैं।

रजत जयंती समारोह के पहले दिनरविवार 17 मई 2026 को दोपहर 4:00 बजेसिविल लाइन्स के डॉवसंतराव देशपांडे सभागार में राष्ट्रीय सम्मेलन नागपुर जलसंवाद 2026” का आयोजन होगा।

“जल संरक्षण, किसान आत्महत्या मुक्त विदर्भ विषय  का समाधान” पर गहन चर्चा होगी। राष्ट्रीय स्तर का यह सिम्पोजियम विदर्भ में जल संकट को संबोधित करने, सिंचाई समस्याओं के समाधान खोजने और किसानों के लिए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी करेंगे। इस अवसर पर डॉ. अनिल प्रकाश जोशी (देहरादून), उमाशंकर पांडे (चित्रकूट) और सेठपाल सिंह (सहारनपुर) जैसी प्रमुख हस्तियाँ विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित होकर अपना मार्गदर्शन देंगे।

इसके अलावा, केशोब कृष्ण चत्राधर (असम), संजय कश्यप (वाटर पीस सेंटर), जल विशेषज्ञ श्रीमती स्वेदेविनो नात्सो (नागालैंड) तथा राज्य मंत्री अशीष जायस्वाल और डॉ. पंकज भोयर भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

अगले दिन, 18 मई 2026 को सुबह 11:00 बजे, रेशिमबाग के कविवर्य सूर्यभट सभागार में ‘जलक्रांति सम्मेलन’ आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में संगठन के 25 वर्षों के विशाल सफर की समीक्षा की जाएगी, जिसमें विदर्भ में ‘तमस्वदा पैटर्न’ जैसी सफल जल संरक्षण पहल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सम्मेलन की विशेष आकर्षण पानी फाउंडेशन के संस्थापक और प्रसिद्ध अभिनेता आमिर खाननाम फाउंडेशन के अध्यक्ष नाना पाटेकर और सचिव मकरंद अनासपुरे की उपस्थिति होगी ।

उनके अलावामहाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठोड़डॉपंजाबराव देशमुखकृषि विद्यापीठ के कुलपति डॉशरद गडाख तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉप्रशांत बोकारे भी कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति से सम्मानित करेंगे।

विदर्भ से बड़ी संख्या में किसान और ग्राम सरपंचों के जलक्रांति सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है।

18 मई को मुख्य कार्यक्रम के बाद दोपहर 2:30 बजे जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर गहन विचार-विमर्श होगा। चर्चा में पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था द्वारा पिछले ढाई दशकों में किए गए कार्यों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संगठन के अध्यक्ष प्रफुल्लदत्त जामदार और सचिव माधव कोटास्थाने ने नागरिकों से इस महत्वपूर्ण जल संरक्षण आंदोलन में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है।

रजत जयंती समारोह के अवसर पर जलपर्व, ‘जलक्रांति, ‘कृषिकल्याण’ और कॉरिडोर ऑफ वाटर सिक्योरिटी’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी प्रमुख अतिथियों द्वारा किया जाएगा।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता की किताबें The Bench, the Bar, and the Bizarre और The Lawful and the Awful का विमोचन किया

मैं अपनी माता के चरण स्पर्श प्रतिदिन किया करता था, उनके न रहने पर नित्य उनकी तस्वीर के सामने दीप जलाता हूँ, हमारे देश में हर दिन माता को समर्पित है

तुषार मेहता जी ने अपनी पुस्तकों में अदालती जीवन के हास्य, व्यंग्य और मानवीय स्वभाव को सुंदरता से दर्शाया है

हमारे देश के लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत गहरी हैं, जिसे मजबूत बनाने में संविधान और न्यायपालिका का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान है

विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सुंदर संतुलन और मर्यादा हमारे लोकतंत्र की ख़ूबसूरती है

आम आदमी की आस्था, समाज का संचालन और राष्ट्र के चरित्र का प्रमाण मजबूत न्याय व्यवस्था है, जिसका विश्वास बनाए रखने में हम एक समाज के नाते सफल हुए हैं

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता की किताबें The Bench, the Bar, and the Bizarre और The Lawful and the Awful का विमोचन किया। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति श्री सूर्य कांत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे देश के संविधान की 76 साल की यात्रा में हमने अपने लोकतंत्र की जड़ें काफी गहरी कर ली हैं। हमारी बहुदलीय लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली को हमने निश्चित रूप से मजबूत किया है और 1947 से लेकर आज तक इस देश में संसद और विधानसभाओं के जरिए जितने भी परिवर्तन हुए, वह स्वीकार किए गए। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि हमारे लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें हमारे संविधान, देश की जनता और हमारी न्यायपालिका का बहुत बड़ा योगदान है।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश की जनता को विश्वास है कि अगर उसके साथ कोई अन्याय हुआ, तो संविधान जाग रहा है। अगर उसके अधिकारों पर आघात होगा तो न्याय के द्वार खुले हैं और कहीं भी यदि कमजोर व्यक्ति की आवाज या कमजोर विचार को दबाया जाएगा तो न्यायालय में आवाज जरूर सुनी जाएगी। इन तीनों मूल चीजों के आधार पर ही हमारा लोकतंत्र मजबूत हुआ है और मोटे तौर पर देखें तो न्याय को लेकर आम आदमी की आशा ही समाज का संतुलन और राष्ट्र के चरित्र का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस व्यवस्था में भी जो छोटे-छोटे लूप होल्स हैं, उन्हें न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों मिलकर सुधारने का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए कंक्रीट टाइम बाउंड रोड मैप के साथ आगे आना पड़ेगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे लोकतंत्र की सुंदरता यह है कि संविधान ने विभिन्न संस्थाएँ एक-दूसरे का विरोध करने के लिए नहीं, परंतु एक-दूसरे को संतुलित करने के लिए बनाए हैं। इस स्पिरिट को हमें सही अर्थ में समझना पड़ेगा। कार्यपालिका निर्णय लेती है। न्यायपालिका उन निर्णयों की संवैधानिक समीक्षा करती है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संवाद, मर्यादा और संतुलन तीनों को बनाए रखने के लिए बहुत अच्छे तरीके से एक स्पिरिट के साथ संविधान को लिखा है। 76 साल में शायद ही किसी देश ने इन सभी मर्यादाओं को संभालते हुए देश को आगे बढ़ाया होगा। हम सबके लिए बहुत हर्ष का विषय है कि हमारे यहां मोटे तौर पर सारी मर्यादाएं बनी रही और हमने इन परंपराओं को आगे भी बढ़ाया।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन और पारस्परिक मर्यादाओं से ही होती है। जब मैं पारस्परिक मर्यादा की बात करता हूं तब इसकी स्पिरिट के रूप में हमारे संविधान ने कई जगह पर इसकी स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि हमारे देश में कार्यपालिका और न्यायपालिका एक दूसरे के साथ संतुलित भाव से कार्य कर रही है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब किसी किताब में श्री तुषार मेहता जी की किताब की तरह निष्पक्ष मीमांसा सामने आती है तो हमें अपने बारे, अपने इंस्टीट्यूशन के बारे में और कुल मिलाकर समूचे क्षेत्र के बारे में मीमांसा करके पुनर्विचार करने का बड़ा अवसर प्राप्त होता है। कैसे कभी कोर्ट में कविता की गूंज सुनाई देती है तो कभी काफी सारे जजों के मौलिक अंदाज का भी श्री तुषार मेहता ने अपनी किताब में जिक्र किया है। एक देश में दो जुड़वा बहनों ने वकील और न्यायाधीश बनकर एक-दूसरे की भूमिका कैसे निभाई थी और कभी एक जज ने शिकार करते-करते निर्णय कर दिया, यह सारी चीजें हमें सोचने को मजबूर करती हैं और कोर्ट के गंभीर वातावरण से हमें बाहर भी निकालती हैं। उन्होंने कहा कि श्री तुषार मेहता की किताब एक जिज्ञासु व्यक्ति की तरह दिखाई पड़ती है, जिसमें एआई और आधुनिक तकनीकों, न्यायपालिका के सामने भविष्य में आने वाली चुनौतियों के ठोस उदाहरण हैं। इन चेतावनियों पर हमें विचार करना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि श्री तुषार मेहता ने अपनी किताब में कानून की गंभीरता और मर्यादा बनाए रखते हुए उन्होंने अदालती प्रक्रियाओं में छिपे जीवन, हास्य, व्यंग्य और मानवीय स्वभाव की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति बारीकी के साथ की है। उन्होंने कहा कि श्री मेहता ने पुस्तक अपनी मां को समर्पित किया है और आज ‘मदर्स डे’ के दिन पुस्तक का विमोचन हुआ है। श्री शाह ने कहा कि मैं अपनी माता के चरण स्पर्श प्रतिदिन किया करता था, उनके न रहने पर नित्य उनकी तस्वीर के सामने दीप जलाता हूँ, हमारे देश में हर दिन माता को समर्पित है।

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प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण के आवास पर गए और उनसे तथा उनके परिजनों से मुलाकात की।

इस दौरानप्रधानमंत्री ने श्री पवन कल्याण का हालचाल पूछा और उनकी अच्छी सेहत की कामना की।

एक्स पर एक पोस्ट में इस दौरे की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:

“आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण गारू के आवास पर गया और उनसे तथा उनके परिजनों से मुलाकात की। पवन कल्याण गारू का हालचाल पूछा और उनकी अच्छी सेहत की कामना की।

@PawanKalyan”

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प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एनचंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार से हैदराबाद स्थित उनके आवास पर मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार से मिलना तथा विभिन्न विषयों और विविध मुद्दों पर विचारों का आदानप्रदान करना हमेशा आनंददायक होता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“हैदराबाद में, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू गारू के आवास पर गया और उनसे तथा उनके परिवार से मुलाकात की। उनसे मिलना और अनेक विविध विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करना हमेशा आनंददायक होता है।

@ncbn”

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आरपीएफ की महिला सिपाही ने बचायी महिला यात्री की जान

बच्चे को दिया मदर्स डे का सबसे बड़ा तोहफा

रांची,राँची रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की महिला कांस्टेबल सविता ने अपनी सतर्कता और बहादुरी से ऑपरेशन जीवन रक्षा के तहत एक महिला यात्री की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की।

शनिवार (9 मई) को को ट्रेन संख्या-18611 राँची-बनारस एक्सप्रेस खुलने के दौरान एक यात्री अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ जल्दबाजी में ट्रेन पर चढ़ने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म गैप में गिरकर चलती ट्रेन के साथ घसीटने लगी।

ड्यूटी पर तैनात महिला कांस्टेबल साविता ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत महिला को पकड़ लिया और ट्रेन रुकने तक मजबूती से थामे रखा। उनकी सूझबूझ और साहस के कारण महिला की जान बच गई।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने तेलंगाना के वारंगल में पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन किया

,यह देश के औद्योगिक और वस्त्र उद्योग के विकास में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है

नई दिल्ली –  यह भारत के औद्योगिक और वस्त्र विकास में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है। 1695.54 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह देश का पहला कार्यरत पीएम मित्र पार्क है और भारत सरकार की 5 एफ परिकल्पना – फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन – को साकार करता है। प्रधानमंत्री ने परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा कि वारंगल स्थित पीएम मित्र पार्क हमारे देश में वस्त्र क्रांति को गति देगा और विशेष रूप से महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा।

प्रस्तावित नागपुर विजयवाड़ा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (एनएच-163 जी) के निकट और एनएच-163 के करीब स्थित यह पार्क प्रमुख रेलवे नेटवर्क और बंदरगाहों से उत्कृष्ट मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे वैश्विक व्यापार के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित होता है। विश्व स्तरीय औद्योगिक इकोसिस्टम के रूप में डिजाइन किया गया यह पार्क अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है। इसमें एक व्यापक आंतरिक सड़क नेटवर्क, समर्पित विद्युत उप केंद्र और सुनिश्चित जल आपूर्ति शामिल है। यह जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक वाले कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से सतत विकास पर भी बल देता है।

यह पार्क भारत के वस्त्र उद्योग के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जिसमें 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना है और इसमें पहले से ही महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। पार्क का 62 प्रतिशत हिस्सा पहले ही आवंटित किया जा चुका है। 1,327 एकड़ में फैला यह पार्क वस्त्र मूल्य श्रृंखला में व्यापक अवसर पैदा करने के लिए तैयार है, जिससे 24,400 से अधिक नौकरियों के सृजन की संभावना है। इसके अंतर्गत हजारों नौकरियां पहले ही सृजित हो चुकी हैं।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने देश में वस्त्र अवसंरचना के लिए एक राष्ट्रीय इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मार्च 2023 में तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश राज्यों में सात पीएम मित्र पार्कों की स्थापना को मंजूरी दी थी।
तेलंगाना सरकार ने मार्च 2022 में पीएम मित्र पार्क योजना के अंतर्गत सात स्थलों में से एक के रूप में वारंगल स्थित काकातिया मेगा टेक्सटाइल पार्क (केएमटीपी) के चयन का प्रस्ताव रखा था।

इसका उद्देश्य पार्क में उद्योगों की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार और सुविधा प्रदान करना था।

पीएम मित्र पार्क योजना के अंतर्गत ब्राउनफील्ड श्रेणी में मंजूरी मिलने पर, केएमटीपी 200 करोड़ रुपये की विकास पूंजी सहायता और पार्क में स्थापित होने वाले उद्योगों के लिए 300 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धात्मक प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) के लिए पात्र हो गया।

पीएम मित्र पार्क, वारंगल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को 1695.54 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ मंजूरी दी गई।

इसमें सीईटीपी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज फैसिलिटी में अपग्रेड करना, प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कॉमन बॉयलर सुविधा, श्रमिक छात्रावासों का विस्तार, 10 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र आदि जैसी विस्तारित सामान्य बुनियादी ढांचा सुविधाएं शामिल हैं।

पार्क में उद्योग के लिए आवंटित कुल 548 एकड़ भूमि में से, पीएम मित्रा पार्क की घोषणा के बाद 310 एकड़ भूमि उद्योग को आवंटित की  गई है।
पार्क में स्थापित होने वाले उद्योगों को न केवल वस्त्र क्षेत्र के लिए विश्व स्तरीय अवसंरचना सुविधाएं (वैश्विक स्तर पर वस्त्र मेगा पार्कों के अनुरूप) उपलब्ध होंगी, बल्कि पीएम मित्र योजना के अंतर्गत प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) भी प्राप्त होगी।

विनिर्माण इकाइयां प्रोत्साहन सहायता के लिए पात्र हो जाती हैं, जिसके लिए प्रत्येक पार्क के लिए कुल 300 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है, जिससे ये पार्क निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बन जाते हैं।

पीएम मित्र पार्कों में स्थित इकाइयां भारत सरकार की अन्य योजनाओं के साथ समन्वय में लाभ प्राप्त करने के लिए भी पात्र हैं। विशेष रूप से, वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र क्षेत्र के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के माध्यम से नए निवेश को आकर्षित करने पर काफी जोर दिया है।

इस समन्वय के उदाहरण के रूप में, पीएम मित्र पार्क वारंगल की एक इकाई, एवरटॉप टेक्सटाइल एंड अपैरल कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड भी पीएलआई योजना की लाभार्थी है।

कंपनी से 1051 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और 1990 करोड़ रुपये के अनुमानित वार्षिक कारोबार के साथ लगभग 12,800 लोगों को रोजगार सृजित करने की आशा है।

पीएम मित्र पार्क योजना न केवल वीजीएफ के रूप में केंद्र सरकार की फंडिंग लाती है, बल्कि निवेशकों का विश्वास, आधुनिक साझा बुनियादी ढांचा और भारत की राष्ट्रीय वस्त्र रणनीति में एकीकरण भी सुनिश्चित करती है – ये सभी तेलंगाना सरकार द्वारा वस्त्र पार्क स्थापित करने के लिए किए गए प्रयास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देते हैं।

पीएम मित्र पार्क होने से केएमटीपी एक राज्य औद्योगिक पार्क से राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता प्राप्त, वैश्विक स्तर पर स्थापित वस्त्र इकोसिस्टम में परिवर्तित हो जाता है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने वाराणसी स्थित बीएचयू में स्थापित अंतःविषयक केंद्र “साथी” का जायजा लिया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का दौरा किया और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से स्थापित अंतःविषयक सुविधा “साथी” का निरीक्षण किया।

मंत्री महोदय ने कुलपति प्रोफेसर एके चतुर्वेदी और संकाय सदस्यों को दूसरों के लिए अनुकरणीय एक सफल कहानी प्रस्तुत करने के लिए बधाई दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) देश में उन्नत प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैज्ञानिक सुविधाओं तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे और अनुसंधान सहायता प्रणालियों का विस्तार कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि साथी, एफआईएसटी, एआरआरएफ से जुड़े अनुसंधान सहायता तंत्र और अन्य संस्थागत कार्यक्रम जैसी पहलें अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योग-अकादमिक सहयोग के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद कर रही हैं, विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं, एमएसएमईज और उभरते उद्यमों के लिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीएसटी के आउटरीच कार्यक्रम विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके देश भर में उन्नत वैज्ञानिक अवसंरचना और तकनीकी शिक्षा तक व्यापक पहुंच बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवा शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार-आधारित शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अंतरिक्ष से संबंधित प्रयोगशालाओं और अनुसंधान कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक एवं तकनीकी सहायता संस्थान (साथी) का दौरा किया और बुनियादी ढांचे, विश्लेषणात्मक क्षमताओं, उपलब्धियों और भविष्य की कार्य योजना सहित संस्थान की व्यापक समीक्षा की। इस दौरे के दौरान मंत्री जी को केंद्र के कामकाज की जानकारी दी गई और उन्होंने संस्थान में स्थापित प्रमुख वैज्ञानिक उपकरणों और उच्च स्तरीय विश्लेषणात्मक सुविधाओं का भी निरीक्षण किया।

इस यात्रा के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, संकाय सदस्य और साथी केंद्र के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लगभग 72 करोड़ रुपये के सहयोग से स्थापित साथी-बीएचयू एक राष्ट्रीय स्तर की साझा वैज्ञानिक अवसंरचना सुविधा है, जो शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को उन्नत उपकरण, विश्लेषणात्मक सेवाएं और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करती है। यह सुविधा विश्वविद्यालय के भीतर एक धारा 8 कंपनी मॉडल के माध्यम से संचालित होती है और एक प्रमुख बहुविषयक विश्लेषणात्मक और अनुसंधान सहायता केंद्र के रूप में विकसित हुई है।

मंत्री जी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने और उभरती प्रौद्योगिकियों एवं उन्नत अनुसंधान क्षेत्रों में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक अवसंरचना को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने लक्षित वैज्ञानिक हस्तक्षेपों और सहयोगात्मक अनुसंधान मंचों के माध्यम से संस्थागत अनुसंधान क्षमता, स्वदेशी नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित विकास को लगातार प्रोत्साहित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह को सूचित किया गया कि साथी-भू विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त सुपर रेज़ोल्यूशन कन्फोकल माइक्रोस्कोपी विद लाइव सेल इमेजिंग, उन्नत एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी सिस्टम, हाई रेज़ोल्यूशन एक्यूरेट मास स्पेक्ट्रोमेट्री, स्वच्छ कक्ष सुविधाएं, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन, क्रोमैटोग्राफी प्लेटफॉर्म और आइसोटोप विश्लेषण सिस्टम जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर्स, खाद्य विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में अनुसंधान गतिविधियों में सहयोग प्रदान करती हैं।

मंत्री जी को यह भी बताया गया कि केंद्र ने परिचालन शुरू होने के बाद से शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों से जुड़े लगभग 1,100 उपयोगकर्ताओं को सेवाएं प्रदान की हैं, 30,000 से अधिक नमूनों का प्रसंस्करण किया है और लगभग 1,000 शोधकर्ताओं और हितधारकों को प्रशिक्षण दिया है। क्षमता निर्माण और उपयोगकर्ता जागरूकता के लिए लगभग 60 अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।

मंत्री महोदय ने एनएबीएल मान्यता प्राप्त करने और उद्योग एवं अनुसंधान क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी से एक स्थायी विश्लेषणात्मक सेवा मॉडल विकसित करने में साथी-बीएचयू द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। इस संस्थान ने उच्च-प्रभावशाली अनुसंधान प्रकाशनों, पेटेंटों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तथा औद्योगिक हितधारकों के साथ सहयोगात्मक साझेदारियों में भी योगदान दिया है, जिससे विज्ञान, नवाचार और आर्थिक विकास के बीच संबंध और मजबूत हुआ है।

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भेरूंदा से PMGSY-IV का शुभारंभ कर म.प्र. को दी हजारों करोड़ रुपए की बड़ी सौगात

नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में PMGSY IV का शुभारंभ करते हुए राज्य को सड़क, आवास और ग्रामीण विकास की अनेक बड़ी सौगातें समर्पित कीं। इस अवसर पर म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान सहित राज्य के मंत्री श्री करण सिंह वर्मा तथा विधायकगण भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस समारोह में PMGSY IV का शुभारंभ करते हुए कहा कि गांव की सड़क केवल रास्ता नहीं, बल्कि समृद्धि, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बाजार और अवसर का प्रवेश-द्वार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उन्होंने यह संदेश भी दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गांव, गरीब, किसान और बहनों के जीवन में ठोस बदलाव लाने के लिए संकल्पबद्ध है।

श्री चौहान ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत वैभवशाली, गौरवशाली, आत्मनिर्भर, संपन्न और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

कार्यक्रम में म.प्र. को PMGSY IV के तहत 2,117.52 किलोमीटर लंबाई की 973 सड़कों की मंजूरी मिली, जिनकी कुल लागत 1763.08 करोड़ रु. है और जिनसे 987 बसावटों को लाभ होगा। इसी क्रम में विदिशा क्षेत्र को 600.393 किलोमीटर लंबाई की 259 सड़कें स्वीकृत हुईं, जिनसे 264 बसावटों को लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।

श्री चौहान ने कहा कि विदिशा संसदीय क्षेत्र में 500 करोड़ रु. से अधिक की सड़कें बनेंगी और उनकी प्राथमिकता है कि कोई भी गांव सड़क से वंचित न बचे। उन्होंने यह भी साफ कहा कि PMGSY के मापदंड में आने वाली म.प्र. की सभी पात्र सड़कें स्वीकृत की जाएंगी।

PM JANMAN के तहत 384.34 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं को 261.81 करोड़ रु. की मंजूरी मिली है, जिनसे 168 बसावटें लाभान्वित होंगी। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के कुल 18,907 करोड़ रु. के सांकेतिक आवंटन में से 830 करोड़ रु. म.प्र. को दिए गए हैं, जिसे श्री चौहान ने राज्य की विकास रफ्तार को नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 2055 करोड़ रु. की मदर सैंक्शन मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपते हुए श्री चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई गरीब बिना पक्के घर के न रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए सर्वे के आधार पर पात्र परिवारों का भौतिक सत्यापन कर उन्हें आवास योजना का लाभ दिया जाएगा, ताकि गरीब की छत का सपना अधूरा न रहे।

बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी अभियान को और तेजी दी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिबद्धता के साथ म.प्र. में हर दीदी को आय, सम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

किसानों के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि गेहूं खरीदी में किसी पात्र किसान के साथ अन्याय नहीं होगा, लंबित सत्यापन का निपटारा होगा और किसानों की उपज की खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही भूमि अधिग्रहण के मामलों में अधिक लाभकारी तंत्र बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी रहेंगे।

श्री चौहान ने भावनात्मक लहजे में कहा कि जब तक सांस है, तब तक जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी श्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए उनका अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि म.प्र. सरकार, भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है और जनता व जनप्रतिनिधियों की जो व्यवहारिक मांगें सामने आई हैं, उन्हें पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। श्री चौहान ने मंच से क्षेत्रीय मांगों पर सकारात्मक संकेत दिए।

नर्मदा जल को शेष गांवों तक पहुंचाने, स्थानीय सड़कों की स्वीकृति, पट्टा वितरण, शिक्षा संस्थानों की मांग, मंदिर क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास और सिंचाई परियोजनाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समन्वित रुख दिखाया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने पिछले 25 वर्षों में ग्रामीण भारत की विकास यात्रा को नई दिशा देने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और सामाजिक सशक्तिकरण तक पहुंच सुनिश्चित करने का मजबूत आधार बना है।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि PMGSY IV के माध्यम से दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों तक बेहतर सड़क संपर्क पहुंचने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्यों को सम्मान

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 25 वर्षों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्यों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

योजना के तहत सर्वाधिक सड़क लंबाई पूर्ण करने की श्रेणी में मध्य प्रदेश (90,766 किमी) को प्रथम, राजस्थान (75,868 किमी) को द्वितीय तथा उत्तर प्रदेश (75,695 किमी) को तृतीय स्थान के लिए सम्मानित किया गया।

सर्वाधिक बसावटों को जोड़ने की श्रेणी में बिहार (31,287) को प्रथम, मध्य प्रदेश (17,493) को द्वितीय तथा ओडिशा (16,990) को तृतीय स्थान दिया गया।

हरित प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग में गुजरात (98.42 प्रतिशत), तमिलनाडु (98.39 प्रतिशत) तथा हरियाणा (97.92 प्रतिशत) को सम्मानित किया गया।

ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश (654 करोड़ रुपये), बिहार (553 करोड़ रुपये) और पश्चिम बंगाल (497.62 करोड़ रुपये) को सम्मान दिया गया।

वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मध्य प्रदेश को प्रथम, राजस्थान एवं तमिलनाडु को द्वितीय तथा गुजरात को तृतीय स्थान दिया गया।

दोष दायित्व अवधि के बाद ग्रामीण सड़कों के रखरखाव की श्रेणी में मध्य प्रदेश (1044 करोड़ रुपये), छत्तीसगढ़ (490 करोड़ रुपये) तथा उत्तर प्रदेश (284 करोड़ रुपये) को सम्मानित किया गया।

उत्तर-पूर्वी, पहाड़ी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की उपलब्धियों को भी मिला सम्मान

उत्तर पूर्वी, पहाड़ी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में सर्वाधिक सड़क लंबाई पूर्ण करने के लिए असम (32,169 किमी), हिमाचल प्रदेश (23,081 किमी) तथा उत्तराखंड (21,874 किमी) को सम्मानित किया गया। सर्वाधिक बसावटों को जोड़ने में असम (13,720), हिमाचल प्रदेश (2,556) तथा ओडिशा (2,132) को सम्मान दिया गया। हरित प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग के लिए उत्तराखंड (75 प्रतिशत), असम (74 प्रतिशत) और मेघालय (71 प्रतिशत) को सम्मानित किया गया। ग्रामीण सड़कों के रखरखाव में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए असम (357 करोड़ रुपये), उत्तराखंड (151 करोड़ रुपये) तथा जम्मू-कश्मीर (132 करोड़ रुपये) को सम्मान दिया गया। वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अंडमान एवं निकोबार, लद्दाख एवं पुडुचेरी को प्रथम, सिक्किम को द्वितीय तथा त्रिपुरा को तृतीय स्थान के लिए सम्मानित किया गया।

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प्रधानमंत्री ने श्री सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने उनके नए कार्यकाल के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं और राज्य के लोगों के कल्याण और विकास के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर श्री सी. जोसेफ विजय को बधाई। उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सरकार लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

@TVKVijayHQ”

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व्यवहार न्यायालय राँची परिसर में “पलाश आजीविका कैफे” का उद्घाटन

दीदियों को मिला आजीविका का नया अवसर

“पलाश आजीविका कैफे” का उद्घाटन माननीय न्यायमूर्ति श्री सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा के द्वारा किया गया

इस कार्यक्रम में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री भी उपस्थित थे

पलाश आजीविका कैफे न्यायालय परिसर में काम करने वाले वकीलों, मुवक्किलों, कर्मचारियों तथा आम नागरिकों को एक ही छत के नीचे अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है

रांची,09.05.2026 – सिविल कोर्ट परिसर, कचहरी रांची में आज “पलाश आजीविका कैफे” का उद्घाटन माननीय न्यायमूर्ति श्री सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कैफे का उद्घाटन करते हुए उपस्थित दीदियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण बताया।

यह कैफे नगड़ी प्रखंड की सरोजनी महिला स्वयं सहायता समूह एवं शांति महिला स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा संचालित किया जाएगा। कैफे में नियमित खाद्य सामग्री के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजन भी उपलब्ध होंगे, जिनमें चावल-मड़ुआ का चिल्का रोटी, डुम्बू, धुस्का आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। यह पहल स्थानीय पारंपरिक खानपान को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी।

पलाश आजीविका कैफे न्यायालय परिसर में काम करने वाले वकीलों, मुवक्किलों, कर्मचारियों तथा आम नागरिकों को एक ही छत के नीचे अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने की दिशा में एक सराहनीय कदम है

ऐसे कैफे न केवल सुविधा प्रदान करेंगे, बल्कि स्वरोजगार के अवसर भी सृजित करेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं को लाभ मिलेगा। श्री भजन्त्री ने इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा संचालकों को बधाई दी और भविष्य में भी ऐसी उपयोगी पहलों को प्रोत्साहन देने का आश्वासन दिया।

“तीसरा पलाश आजीविका कैफे” अब रांची कचहरी परिसर में अपने तीसरे चरण में शुरू हो गया है, जो पहले से चल रहे दो कैफों की सफलता के बाद शुरू किया गया है। यह कैफे सुबह से शाम तक उच्च गुणवत्ता वाले नाश्ता, भोजन, चाय-कॉफी और अन्य पेय उपलब्ध कराएगा।

कार्यक्रम में सदस्य सचिव झालसा, कुमारी रंजना स्थाना, न्यायिक आयुक्त, श्री अनिल कुमार मिश्रा, वरीय पुलिस अधीक्षक रांची, श्री राकेश रंजन, सचिव रांची डालसा, श्री राकेश रौशन, अध्यक्ष रांची जिला बार संगठन, श्री शम्भू प्रसाद अग्रवाल, महासचिव रांची जिला बार संगठन, श्री संजय कुमार विद्रोही एवं अन्य उपस्थित थे ।

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निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ जिलास्तरीय समीक्षा बैठक

जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम-2017 के प्रावधानों के अंतर्गत जिलास्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पूर्व की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा

अभिभावक शिक्षक संघ (PTA) का गठन नहीं करनेवाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

बैठक में अनुपस्थित रहनेवाले स्कूलों पर जिला प्रशासन गंभीर, नोटिस जारी करने का निर्देश

नियम का उल्लंघन कर शुल्क बढ़ाने वाले स्कूलों को इसी सत्र में फी एडजस्टमेंट करने का निर्देश

संबंधित स्कूलों को 15 दिनों में फी एडजस्टमेंट प्लान तैयार करने को कहा गया

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के नामांकन के लिए स्कूलों की सराहना

आरटीई के तहत इस सत्र में भी शत प्रतिशत नामांकन लेने का निर्देश

डिजिटल माध्यम से स्वगणना के लिए प्राचार्यों को दी गयी जानकारी

रांची,09.05.2026 – जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों/प्रतिनिधियों के साथ शुल्क निर्धारण एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत वंचित वर्ग के बच्चों के नामांकन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी।

मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री विनय कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी एवं परियोजना पदाधिकारी सहित जिले के निजी विद्यालयों (CBSE, ICSE, JAC एवं अन्य बोर्ड) के प्राचार्य/प्रतिनिधि उपस्थित थे।

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम-2017 के प्रावधानों के अंतर्गत जिलास्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पूर्व की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

बैठक में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावक शिक्षक संघ के गठन की समीक्षा की गयी। जिले में CBSE एवं ICSE द्वारा संचालित कुल 149 स्कूलों में से 129 द्वारा अभिभावक शिक्षक संघ का गठन कर लिया गया है। शेष 20 स्कूल जिन्होंने (PTA) के गठन की जानकारी नहीं दी है उनके ऊपर अधिनियम के अनुसार कार्रवाई की जायेगी।

स्कूलों के पिछले तीन वर्षों में शुल्क वृद्धि के विश्लेषण के दौरान 129 स्कूलों में से 92 स्कूलों द्वारा शुल्क वृद्धि में नियमों का उल्लंघन पाया गया है। सभी संबंधित स्कूलों के प्राचार्य/प्रतिनिधि को इसी सत्र के मासिक शुल्क में एडजस्टमेंट करने का निर्देश दिया गया। संबंधित स्कूलों को 15 दिनों में फी-एडजस्टमेंट प्लान तैयार करने को कहा गया है।

बैठक में अनुपस्थित रहनेवाले स्कूलों को जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया, उन्होंने कहा कि अनुपस्थित स्कूलों का फिजिकल वेरिफिकेशन भी करें ताकि यह पता चल सके कि उनका संचालन हो रहा है या नहीं ?

बैठक में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी दिये गये।

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने RTE के तहत सभी निजी विद्यालयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले सत्र में आप सभी का सहयोग सराहनीय रहा। उन्होंने इस सत्र में सभी स्कूलों से बेहतर सहयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल एक्ट के अनुसार उपलब्ध सीटों पर वंचित वर्ग के बच्चों का शत प्रतिशत नामांकन लेना सुनिश्चित करें, नामांकन के लिए ऑनलाइन लॉटरी जल्द ही की जायेगी।

CENSUS 2027 के तहत स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश

बैठक में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य/प्रतिनिधियों को CENSUS 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्वगणना करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है, इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें ताकि वो अपने माता-पिता/अभिभावक को डिजिटल माध्यम से स्वगणना करने को कहें।

जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज द्वारा बताया गया कि स्व-गणना (Self Enumeration) अंतर्गत ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपने परिवार एवं आवास संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है।

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10 मई 2026 को रांची में चलेगा विशेष “SELF ENUMURATION DRIVE”

जिला प्रशासन द्वारा दोपहर 12 बजे से 01 बजे तक डिजिटल माध्यम से स्वगणना में भाग लेने की अपील

नागरिक se.census.gov.in पर जाकर स्वयं दर्ज कर सकते हैं अपना विवरण

“SELF ENUMURATION DRIVE” में अधिकाधिक संख्या में शामिल होकर डिजिटल स्वगणना अभियान को सफल बनाएँ – उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री की जिलावासियों से जनगणना-2027 के स्वगणना अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील

रांची,09.05.2026 – उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार पूरे रांची जिले में “SELF ENUMURATION CAMPAIGN” व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत समाहरणालय स्थित विभिन्न कार्यालयों में कार्यालय प्रधानों एवं कर्मियों द्वारा डिजिटल माध्यम से स्वगणना में भाग लेकर जनगणना-2027 के प्रति जागरूकता एवं सहभागिता का संदेश दिया जा रहा है।

इसी क्रम में विभिन्न प्रखण्ड एवं अंचल कार्यालयों में भी पदाधिकारी एवं कर्मियों द्वारा ऑनलाइन स्वगणना कर अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। पंचायत सचिवालयों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी स्वगणना कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जोड़ा जा रहा है।

उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा है कि दिनांक 10 मई 2026 को मध्याह्न 12ः00 बजे से अपराह्न 01ः00 बजे तक जिले में अधिक से अधिक संख्या में नागरिक डिजिटल माध्यम से स्वगणना में भाग लें तथा जनगणना-2027 को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि यह अभियान जनभागीदारी आधारित है और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं दर्ज कर सकते हैं जानकारी

नागरिकों की सुविधा के लिए स्व-गणना की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। नागरिक se.census.gov.in पर जाकर स्वयं अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना पूर्ण होने के बाद प्राप्त SE-ID को सुरक्षित रखना आवश्यक होगा, जिसे प्रगणक के घर आने पर साझा करना होगा। स्व-गणना प्रक्रिया पूर्णतः ऐच्छिक है। यदि कोई नागरिक स्वयं ऑनलाइन विवरण दर्ज नहीं करता है, तो निर्धारित अवधि में प्रगणक घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी संग्रहित करेंगे।

जनगणना-2027 के प्रथम चरण को दो भागों में किया गया विभाजित

जनगणना-2027 के प्रथम चरण को दो भागों में विभाजित किया गया है। प्रथम भाग के अंतर्गत 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जबकि दूसरे भाग में 16 मई से 14 जून 2026 तक मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य किया जाएगा। इस दौरान जिले के प्रत्येक क्षेत्र के प्रत्येक मकान एवं परिवार का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा।

16 मई से प्रारंभ होगा मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य

16 मई से 14 जून 2026 तक प्रगणक प्रत्येक घर का भ्रमण कर मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं एवं अन्य मूलभूत जानकारियों का संकलन करेंगे। प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक परिवार का सही, पूर्ण एवं अद्यतन विवरण सुनिश्चित करना है।

जनगणना से जुड़ी सभी सूचनाएँ रहेंगी पूर्णतः गोपनीय

जनगणना से संबंधित सभी जानकारियाँ पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत प्राप्त सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। सभी डेटा सुरक्षित सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहित किए जाते हैं तथा प्रकाशित रिपोर्ट में केवल सामूहिक आँकड़े ही प्रदर्शित किए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती तथा इसका उपयोग टैक्स, पुलिस अथवा किसी जांच संबंधी कार्य में नहीं किया जाता है।

नागरिकों की सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर 1855 उपलब्ध

जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी, सहायता अथवा तकनीकी सहयोग के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 उपलब्ध कराया गया है।

उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे जनगणना-2027 में सक्रिय भागीदारी निभाएँ, सही एवं सत्य जानकारी उपलब्ध कराएँ तथा 10 मई 2026 को निर्धारित विशेष “SELF ENUMURATION DRIVE” में अधिकाधिक संख्या में शामिल होकर डिजिटल स्वगणना अभियान को सफल बनाएँ।

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भारत ने पहली बार ‘अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन’ पर आईएसओ की अंतरराष्ट्रीय उपसमिति की बैठकों की मेजबानी की

नई दिल्ली – भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), जो भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है, ने नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) की आईएसओ टीसी 20/ एससी 14 ‘अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन’ उपसमिति की 35 वीं प्‍लेनरी और कार्य समूह की बैठकों का आयोजन किया। स

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव सुश्री निधि खरे ने मानकों को आगे बढ़ाने में वैश्विक सहयोग के महत्व और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मानक इकोसिस्‍टम को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत के लिए इस बैठक की मेजबानी करना अत्‍यंत गौरव का विषय है, क्‍योकि हम वैश्विक अंतरिक्ष परिवर्तन के अग्रणी के रूप में खड़े हैं। महत्वपूर्ण सुधारों और आईएन-एसपीएसीई की स्थापना के माध्यम से भारत सरकार ने एक उभरते हुए अंतरिक्ष केंद्र की नींव रखी है, जहां स्टार्टअप और स्थापित उद्योग समान रूप से फल-फूल सकते हैं। इस तरह के वैश्विक सहयोग और विशेषज्ञता द्वारा विकसित मानक मानवता के लिए अंतरिक्ष को सुरक्षित, सतत और समावेशी बनाने में मदद करेंगे।”

इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के महानिदेशक संजय गर्ग ने भारत के बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्‍मकता सुनिश्चित करने में मानकीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीआईएस अंतरिक्ष उद्योग की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से होते बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्‍होंने उल्‍लेख किया कि बीआईएस मानक निजी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रहे हैं उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इस बैठक की मेजबानी करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय विशेषज्ञों को मानकीकरण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने का अवसर देती है, जिससे राष्ट्रीय इकोसिस्‍टम और वैश्विक मानकीकरण प्रयासों दोनों को मजबूती मिलती है।

डॉ. पवन गोयनका (अध्यक्षआईएन-एसपीएसीई) ने नीतिगत सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रेरित भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्‍टम के परिवर्तनकारी विकास पर बल दिया। उन्‍होंने नवाचार को सक्षम करने, उद्योग के विश्वास को बढ़ाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत के एकीकरण को सुविधाजनक बनाने में मजबूत मानकों के महत्व को रेखांकित किया।

इस कार्यक्रम में 13 देशों के 131 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लियाजिनमें विभिन्‍न राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रतिनिधि, भारत की आईएसआरओ सहित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के विशेषज्ञ, अंतरिक्ष उद्योग और शिक्षाविद् शामिल थे

 

उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव सुश्री निधि खरे; बीआईएस के महानिदेशक श्री संजय गर्ग; डॉ. पवन गोयनका (आईएन-एसपीएसीई के अध्यक्ष); बीआईएस की उप महानिदेशक (मानकीकरण) सुश्री रीना गर्ग; श्री फ्रेडरिक स्लेन (आईएसओ टीसी 20 / एससी 14 के अध्यक्ष) और श्री राजीव ज्योति (एयर एंड स्पेस व्हीकल्स संबंधी बीआईएस समिति टीईडी 14 के अध्‍यक्ष) उपस्थित थे।

आईएसओ/टीसी 20/एससी 14 डिजाइन और उत्पादन से लेकर प्रक्षेपण, संचालन और अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं तक अंतरिक्ष प्रणालियों के संपूर्ण जीवनचक्र के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करता है, जिससे यह वैश्विक अंतरिक्ष गतिविधियों में सुरक्षा, अंतर-संचालनीयता और सततता सुनिश्चित होती है। इस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करना वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती स्थिति को दर्शाता है, जिसे आईएसआरओ की उपलब्धियों और आईएन-एसपीएसीई के माध्‍यम से सक्षम हुई निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से बल मिला है। यह बैठक अंतरिक्ष सततताकचरे को कम करने और मिशन संचालन जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक मानकों को आकार देने में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाती है

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