नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी का सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को जिला रायसेन, मध्यप्रदेश में दौरा हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), भोपाल क्षेत्र के अधिकारियों के साथ प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश में चिन्हित सभी ब्लैक स्पॉट्स की समुचित पहचान कर उनका निर्धारित समय-सीमा में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर आवश्यकतानुसार ज्योमेट्रिकल सुधार, उपयुक्त साइनेज, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, लाइटिंग तथा अन्य इंजीनियरिंग उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और यातायात अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
मंत्री श्री गडकरी ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भूमि अधिग्रहण की स्थिति तथा कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि सड़क अवसंरचना का विकास केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है।
इस दौरान यह अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा सड़क सुरक्षा में सुधार परिलक्षित हो रहा है। साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों एवं औद्योगिक वस्तुओं के आवागमन में तेजी आई है, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है तथा सप्लाई चेन अधिक प्रभावी हुई है।
मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंच अधिक सुगम हुई है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिल रही है।
MoRTH एवं NHAI के अधिकारियों द्वारा मंत्री श्री गडकरी को अवगत कराया गया कि प्रदेश की अनेक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं तीव्र गति से प्रगति पर हैं तथा कुछ महत्वपूर्ण खंडों के पूर्ण होने के साथ ही आमजन को बेहतर, सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है।
विशेष रूप से बायपास, सर्विस रोड, मार्ग पुनर्संरेखन तथा आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग से सड़कों का इस प्रकार विकास किया जा रहा है कि यातायात का दबाव कम हो और यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सके।
नई दिल्ली – आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के स्वच्छ भारत मिशन – शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का संकल्प साकार करते हुए गोवा एक अनूठे पर्यावरण हितकारी परिवर्तन का साक्षी बनने जा रहा है। राज्य सरकार की इस ‘डिपॉजिट रिफंड स्कीम’ (Deposit Refund Scheme – DRS) के माध्यम से गोवा, भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है, जो ज़िम्मेदार कचरा प्रबंधन (Responsible Waste Management) को एक वित्तीय प्रोत्साहन देने वाले मॉडल के रूप में लागू कर रहे हैं। गोवा में पणजी नगर निगम (Corporation of the City of Panaji – CCP) के मुताबिक इस योजना का प्रथम चरण जल्द ही पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।
शहरी और पर्यटन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां : भारतीय शहरों में पैकेजिंग वेस्ट, विशेष रूप से पेय पदार्थों की खपत से उत्पन्न होने वाले कूड़े में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्लास्टिक एवं कांच की बोतलें, एल्युमीनियम की कैन और मल्टी-लेयर पैकेजिंग (Multilayer Packaging – MLP) जैसा अपशिष्ट अक्सर वर्तमान कचरा संग्रह प्रणालियों से बाहर रह जाता है। ये अपशिष्ट सामग्री विशेष रूप से समुद्र तटों, सड़कों, बाजारों और परिवहन केंद्रों पर अक्सर देखने को मिलती है। गोवा, एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के नाते, इस चुनौती का सामना और भी तीव्रता से कर रहा है।
योजना के तीन प्राथमिक उद्देश्य : नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Goa State Pollution Control Board – GSPCB) द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के ईको-सिस्टम को पूरी तरह अपशिष्ट एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखना है। यह योजना तीन मुख्य उद्देश्यों को हासिल करना चाहती है, जिनमें पहली स्रोत पर अपशिष्ट की रिकवरी कर कचरे को मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर्स पर पहुंचाकर मिश्रित कचरे में मिलने से पहले ही रोकना है। अक्सर दिखाई देने वाले कचरे को खत्म कर सार्वजनिक स्थलों और समुद्र तटों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को साफ बनाए रखना है। रीसाइक्लिंग में दक्षता हासिल करना है, ताकि स्वच्छ सामग्री के प्रवाह (Cleaner Material Streams) से रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना भी अहम है।
नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम : इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम है। इसके तहत, चिन्हित उत्पादों की खरीदारी के दौरान उनके बाजार मूल्य (Maximum Retail Price – MRP) के ऊपर मामूली ‘रिफंडेबल डिपॉजिट’ या ग्रीन डिपॉजिट देना होगा। ग्राहक द्वारा जमा की गई यह अतिरिक्त राशि तब तक पैकेजिंग यूनिट से जुड़ी रहती है, जब तक उसे वापस नहीं किया जाता। इस्तेमाल के बाद, उपभोक्ता द्वारा खाली पैकेजिंग या बोतल आदि को विभागों द्वारा निर्धारित केंद्रों पर लौटाने पर यह राशि तुरंत उसे लौटा दी जाएगी। योजना के अंतर्गत खरीदारी के समय ग्राहकों को QR-लिंक्ड उत्पाद (QR-linked products at purchase) उपलब्ध कराए जाएंगे, जो लौटाए जाने पर भुगतान से पहले आसानी से स्कैन किए जा सकेंगे।
शुरुआती चरण में, इस नीति को रणनीतिक रूप से केवल कांच की बोतलों (Glass Bottles) पर लागू किया जा रहा है, क्योंकि पर्यटन प्रधान राज्य होने के नाते गोवा में कांच का कचरा एक बड़ी चुनौती रहा है। आगामी चरणों में इसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक (Multi-Layer Plastic – MLP) और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (Polyethylene Terephthalate – PET) बोतलों तक विस्तारित करने की योजना है। खरीदारी के समय जमा की जाने वाली राशि प्रति बोतल ₹2 से ₹10 तक होगी, जो एक ‘behaviour-change incentive’ (व्यवहार बदलने वाले प्रोत्साहन) के रूप में कार्य करेगी।
व्यापक रिटर्न ईकोसिस्टम (Multi-channel Return Infrastructure) : इस पहल के अंतर्गत नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, जिसमें संग्रहण केंद्रों (Collection Centres) को शहरी ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रिटेल और कम्युनिटी पॉइंट्स को भी जोड़ा गया है, जिसमें खुदरा दुकानें और सामुदायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। यह सेवाएं डोर-स्टेप के कॉन्सेप्ट पर भी विकसित की जा रही हैं, ताकि घरों से लेकर बड़े संस्थानों (Bulk Generators) के लिए संग्रह की सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
DRS फ्रेमवर्क के तहत, हर एक बोतल या यूनिट पर एक निश्चित रिफंडेबल डिपॉजिट तय है। यह ‘पर-यूनिट वैल्यू मैकेनिज्म’ खास तौर पर सफाईमित्रों को कुछ सामग्रियों से काफी अधिक कमाई करने की अवसर देगा, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा। यह योजना न केवल सड़कों और लैंडफिल से कचरे का बोझ कम करेगी, बल्कि मुख्य रूप से समुद्र तटों की स्वच्छता व सुंदरता में भी अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का काम करेगी। यह योजना स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा देगी।
नई दिल्ली – श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज केंद्रीय श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी की उपस्थिति में पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और डिजिटल नौकरी मिलान को मजबूत करना है।
इस अवसर पर, श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “एनसीएस प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए उनकी कौशल क्षमता के अनुरूप रोजगार के अवसर तलाशने का एक प्रभावी और संपूर्ण समाधान बनकर उभरा है। पोर्टल पर वर्तमान में 7 लाख से अधिक रिक्तियां सक्रिय हैं और लगभग 59 लाख प्रतिष्ठान एनसीएस पर पंजीकृत हैं, इससे युवा नौकरी चाहने वालों के लिए अनेक अवसर खुल गए हैं।” केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि एनसीएस की गिगिन और पोर्टर प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी सभी हितधारकों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगी और एनसीएस पोर्टल को और सशक्त बनाएगी।
डॉ. मांडविया ने एनसीएस पोर्टल के ई-माइग्रेट, एसआईडीएच और माय भारत प्लेटफॉर्म के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के पोर्टलों के साथ एकीकरण पर प्रकाश डाला। इससे यह वास्तव में व्यापक और परिवर्तनकारी पहुंच वाला पोर्टल बन गया है। कौशल अंतर की समस्या को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने एनसीएस के साथ-साथ गिगिन और पोर्टर से पंजीकृत नौकरी चाहने वालों को सॉफ्ट स्किल्स में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तंत्र विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया, “नौकरी चाहने वालों की मांग और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किए गए अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, कौशल अंतर को पाटने और हमारे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायक होंगे।”
श्रम एवं रोजगार सचिव, सुश्री वंदना गुरनानी ने एनसीएस पोर्टल के व्यापक पैमाने और प्रभाव के बारे में कहा कि इसकी स्थापना के बाद से ही इसने 6 करोड़ से अधिक नौकरी चाहने वालों को पंजीकृत करने के साथ ही 9 करोड़ से अधिक रिक्तियों को सृजित किया है। यह भारत के रोजगार तंत्र के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी से बढ़ी हुई भागीदारी और सहयोग के माध्यम से इस मंच को और मजबूती मिलेगी। सचिव ने इस पहल को सफल बनाने में दोनों भागीदारों की सक्रिय भागीदारी की आशा व्यक्त की और कहा कि यह सहयोग देश भर में बड़ी संख्या में युवा नौकरी चाहने वालों के लिए स्थायी और सम्मानजनक आजीविका के अवसर खोलेगा, इससे अधिक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार श्रम बाजार में योगदान मिलेगा।
स्मार्टशिफ्ट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (पोर्टर) के प्रतिनिधि ने बताया कि पोर्टर एक अग्रणी प्रौद्योगिकी-आधारित माल परिवहन एजेंसी है जो तकनीकी प्लेटफार्मों के माध्यम से निर्बाध और टिकाऊ शहरी लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करती है। एनसीएस पोर्टल के साथ अपनी साझेदारी के माध्यम से, पोर्टर ड्राइविंग और लॉजिस्टिक्स से सम्बंधित अवसरों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा, पोर्टल की व्यापक पहुंच का लाभ उठाते हुए संभावित श्रमिकों और सेवा प्रदाताओं के लिए संरचित और पारदर्शी आजीविका के अवसरों तक वास्तविक समय में पहुंच प्रदान करेगा। पोर्टर का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोजगार के लिए एक संरचित और विस्तार योग्य मार्ग तैयार करने के लिए एनसीएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 6 लाख अवसर और 2030 तक लगभग 30 लाख अवसर सृजित करना है।
गिगिन के प्रतिनिधि ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म एक बहुआयामी प्रौद्योगिकी इको-सिस्टम के रूप में कार्य करता है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सत्यापन बुद्धिमत्ता और सर्वव्यापी पहुंच का उपयोग करके सम्मानजनक और सत्यापित रोजगार के अवसर प्रदान करता है। यह समझौता ज्ञापन सरकार के रोजगार सुविधा तंत्र के साथ डिजिटल भर्ती और सत्यापित नौकरी मिलान को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग के तहत, गिगिन प्रतिवर्ष कम से कम 2-3 लाख प्रामाणिक रोजगार के अवसर सृजित करने और 1.5 लाख से अधिक नियोक्ताओं के साथ जुड़ने में सहायता करेगा। इस साझेदारी के माध्यम से, नौकरी की सत्यापित सूचियां और नियोक्ता संपर्क एनसीएस पोर्टल के माध्यम से प्रसारित किए जाएंगे। इससे पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए पारदर्शी, विश्वसनीय और भरोसेमंद रोजगार के अवसरों तक पहुंच का विस्तार होगा। इस पहल से नौकरी मिलान की दक्षता में सुधार, नियोक्ताओं की भागीदारी में वृद्धि और पहुंच में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे अधिक समावेशी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और उत्तरदायी श्रम बाजार इको-सिस्टम में योगदान मिलेगा।
इन सहयोगों से पहुंच मजबूत होने, रोजगार के अवसरों की जानकारी बढ़ाने और प्रौद्योगिकी-आधारित एवं पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से श्रम बाजार में अधिक समावेश को बढ़ावा मिलने की आशा है। देश भर में समावेशी, सुरक्षित और डिजिटल रूप से सक्षम आजीविका को बढ़ावा देने के मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप, ये सहयोग नवोन्मेषी भारतीय कंपनियों के साथ काम करने और देश के कार्यबल के लिए टिकाऊ, सम्मानजनक, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार रोजगार मार्ग सृजित करने हेतु डिजिटल नवाचार और विश्वसनीय साझेदारियों का लाभ उठाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण कृषि मेले “उन्नत कृषि महोत्सव” का रायसेन में अत्यंत उत्साह, उमंग, नवाचार और हजारों किसानों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच भव्य समापन हुआ। समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने जहां सड़क विकास, कृषि तकनीक, जल संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि का व्यापक विजन रखा, वहीं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बीज से बाजार तक तैयार रोडमैप को जमीन पर उतारने का दृढ़ संकल्प दोहराया।
शिवराज सिंह चौहान द्वारा रखी गई क्षेत्रीय मांगों पर महत्वपूर्ण घोषणाएँ
रायसेन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आयोजित “उन्नत कृषि महोत्सव” के समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा रखी गई क्षेत्रीय मांगों पर महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए विकास की नई सौगात दी। उन्होंने रायसेन रिंग रोड/पूर्वी बायपास के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने, संबंधित डीपीआर तैयार करने, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा बढ़ाए जाने और पुलों के सौंदर्यीकरण संबंधी मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य सड़क संबंधी प्रस्तावों पर भी जो संभव सहयोग होगा, वह किया जाएगा।
ज्ञान को संपत्ति में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है
अपने संबोधन में श्री गडकरी ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि किसान के रूप में आए हैं। उन्होंने कहा कि खेती का भविष्य अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वेदर स्टेशन, सैटेलाइट आधारित सूचना, ड्रोन, नैनो यूरिया और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ चुका है, इसलिए किसानों को समय के साथ बदलना होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है और ज्ञान को संपत्ति में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने किसानों से इनोवेशन, रिसर्च, सफल प्रयोगों और तकनीक-आधारित खेती को अपनाने का आह्वान किया, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके।
श्री गडकरी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा दाता, ईंधन दाता, हवाई ईंधन दाता, डामर दाता और हाइड्रोजन दाता भी बनेगा। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेष, पराली, बायोमास, इथेनॉल, सीएनजी और हाइड्रोजन के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे, आयात घटेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।
जल संरक्षण पर विशेष बल
जल संरक्षण पर विशेष बल देते हुए श्री गडकरी ने कहा कि दौड़ते हुए पानी को चलने के लिए, चलने वाले पानी को रुकने के लिए और रुके हुए पानी को जमीन को पिलाने के लिए लगाना होगा। उन्होंने “गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में, घर का पानी घर में” का संदेश देते हुए कहा कि जैसे पैसा बैंक में जमा किया जाता है, वैसे ही पानी को जमीन में डिपॉजिट करना होगा।
उन्होंने कहा कि जहां सिंचाई का पानी सीधे नहीं पहुँच सकता, वहां जल संरक्षण की संरचनाएँ बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने डेयरी, मत्स्य पालन और ब्लू इकोनॉमी को किसानों की आय बढ़ाने के बड़े माध्यम बताते हुए कहा कि दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। श्री गडकरी ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग सिस्टम और वैल्यू एडिशन की मजबूत व्यवस्था भी बनानी होगी। उन्होंने कहा कि जब बाजार में उत्पादन अधिक होता है तो कीमतें गिर जाती हैं, इसलिए भंडारण और प्रसंस्करण की मजबूत व्यवस्था किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे मेले में लगे स्टॉल, मशीनरी प्रदर्शन, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स, एक एकड़ खेती के मॉडल, बकरी पालन, मछली पालन और अन्य तकनीकी सत्रों को देखकर जाएँ, सीखकर जाएँ और उसे खेत में लागू करें। उन्होंने कहा कि यही ज्ञान, यही तकनीक और यही प्रयोग किसानों का भविष्य बदलेंगे, गांवों को समृद्ध बनाएंगे और स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज की दिशा को मजबूत करेंगे।
शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल की म.प्र. की कृषि उपलब्धियों की सराहना
श्री गडकरी ने शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल में मध्य प्रदेश की कृषि उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को उन्नत बनाने के लिए इस तरह के आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं और यह महोत्सव किसानों को भविष्य की नई प्रेरणा देने वाला सिद्ध होगा।
यह समापन नहीं, बल्कि नई शुरुआत है
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “उन्नत कृषि महोत्सव” कोई कर्मकांड नहीं है और यह समापन नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि चार दिनों तक चले इस आयोजन ने किसानों के लिए पाठशाला का काम किया, जहाँ मिट्टी की महक, मशीन की शक्ति, नवाचार, तकनीक और विकास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र की माटी, जलवायु, जल उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर बीज से बाजार तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में यह तय किया गया है कि इस क्षेत्र में कौन-कौन सी फसलें, फल और सब्जियाँ अच्छी हो सकती हैं और उनके उत्पादन, प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग की संपूर्ण योजना कैसे बनेगी।
दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा, इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा
उन्होंने कहा कि अच्छे बीज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाए जाएंगे, दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा और इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ड्रिप और स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी की एक-एक बूंद का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा तथा कस्टम हायरिंग सेंटर और पंचायतों में मशीन बैंक बनाए जाएंगे, ताकि किसानों को आधुनिक मशीनें आसानी से मिल सकें। श्री चौहान ने कहा कि अच्छी नर्सरी और क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाएंगे, एफपीओ को मजबूत किया जाएगा, बैक हाउस और कोल्ड हाउस बनाए जाएंगे और किसानों को उत्पादन से बाजार तक बेहतर ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती के मॉडल के माध्यम से छोटे खेत के टुकड़े पर भी अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है और सरकार किसानों की आय बढ़ाकर ही चैन की सांस लेगी।
रोडमैप की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे रोडमैप की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी तथा राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि जो संकल्प लिए गए हैं, वे केवल घोषणा बनकर न रह जाएँ, बल्कि पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतरें।
किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील
श्री चौहान ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में खेती से जुड़ी अनेक सेवाएँ, योजनाएँ और प्रक्रियाएँ इससे आसान होंगी। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जिंदगी बदलने, उनके चेहरे पर मुस्कान लाने और खेती को लाभ का धंधा बनाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में कृषि को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा
अपने संबोधन में श्री चौहान ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का स्वागत करते हुए कहा कि वे ऐसे मंत्री हैं जो असंभव को संभव करके दिखाते हैं, नई तकनीक और नवाचार से देश में समृद्धि लाने का काम करते हैं और समयबद्ध कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में कृषि को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा और किसानों की सेवा ही सरकार के लिए सर्वोच्च दायित्व है।
किसानों को हितलाभों का वितरण
समापन सत्र में किसानों को हितलाभों का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, श्री नारायण सिंह पवार, श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, विधायक डॉ. सुरेन्द्र चौधरी, श्री रमाकांत भार्गव, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री हरि सिंह सप्रे, श्री मुकेश टंडन, श्री गोपाल सिंह इंजीनियर, श्री आशीष शर्मा, अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों किसान भाई-बहन उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के सहयोग से कैडेटों को साइबर जागरूकता, डिजिटल स्वच्छता और व्यावहारिक साइबर सुरक्षा कौशल में संरचित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी की उपस्थिति में एनसीसी और एनआईईएलआईटी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
पहले चरण में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम होगा। यह एक 15 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल है। इसे डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर स्वच्छता और साइबर खतरों के बारे में बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह चरण देश भर के सभी पंजीकृत एनसीसी कैडेटों के लिए खुला रहेगा और इसे एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
दूसरें चरण में साइबर रक्षा कार्यक्रम होगा। यहएक गहन 60 घंटे का ऑफ़लाइन प्रशिक्षण है। इसे योग्यता-आधारित स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित कैडेटों के लिए तैयार किया गया है। इस चरण में व्यावहारिक प्रशिक्षण, वास्तविक जीवन के सिमुलेशन और साइबर सुरक्षा उपकरणों और तकनीकों के व्यावहारिक अनुभव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे कैडेट साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने में सक्षम होंगे।
इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर साइबर जागरूकता फैलाने, सुरक्षित डिजिटल तौर-तरिकों को बढ़ावा देने और साइबर सुरक्षा पहलों का समर्थन करने में योगदान देने के लिए प्रशिक्षित एनसीसी साइबर कैडेटों का एक समूह तैयार करना है। यह कार्यक्रम डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के तहत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।
उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन के लिए फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है
प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स आगे अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके
राँची,13.04.2026 – उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन के लिए फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
द्वितीय बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 से CMMS पोर्टल एवं मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण के रूप में आयोजित किया जा रहा है। राँची जिले में कुल 70 फील्ड ट्रेनर्स* को दो बैचों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक बैच में 35 फील्ड ट्रेनर्स शामिल हैं।
द्वितीय बैच (35 फील्ड ट्रेनर्स) का प्रशिक्षण दिनांक 13, 15 एवं 16 अप्रैल 2026 को समाहरणालय के बी ब्लॉक, कमरा संख्या 505 में जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड, राँची के मार्गदर्शन में श्री रविशंकर मिश्रा एवं श्री संजीव कुमार द्वारा CMMS Portal एवं Mobile App के उपयोग, मकान सूचीकरण, मकानों की गणना, डिजिटल डेटा संग्रहण तथा हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
संबद्ध क्षेत्र (द्वितीय बैच):
नगर पंचायत बुण्डू
चान्हो
रातु
खलारी
ओरमांझी
नामकुम
ईटकी
अनगड़ा
प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स आगे अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
जनगणना 2027 भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना है, जो देश की विकास योजनाओं एवं नीति निर्धारण के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराएगी।
प्रशिक्षण के प्रथम दिन चार्ज पदाधिकारी प्रशिक्षण में उपस्थित रहे।
इस दौरान श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्त्ता (नक्सल) सह- नोडल पदाधिकारी, श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-उप जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची उपस्थित थे।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई
अनगड़ा सीओ को शोकॉज, फर्जी दस्तावेज के माध्यम से जमीन हड़पने की शिकायत पर जांच के आदेश
मंगलवार की जगह बुधवार को अंचल में आयोजित होगा जनता दरबार
रांची,13.04.2026 – बहुत अच्छा लगा…. आप लोगों को बहुत-बहुुत धन्यवाद करते हैं… हम आशा जो किये और वो पूरा हुआ… आज आये और एक बार एप्लीकेशन लिख कर दिये तो सीएम साहब ने निराश करके नहीं भेजे, हमको इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल मिल गया… ये शब्द दिव्यांग रामेश्वर महतो के हैं, जो ईटकी से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में आये थे। उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल के लिए आवेदन दिया, जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने फौरन उन्हें साईकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिये और रामेश्वर महतो बैशाखी के बजाए इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल से अपने घर लौटे।
रांची जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनता दरबार एक बार फिर आमजन के लिए राहत और न्याय का सशक्त मंच साबित हुआ। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की गई।
अनगड़ा सीओ को शोकॉज, जांच के आदेश
अनगड़ा अंचल के सुदेश कुमार ने जनता दरबार में अपनी जमीन की फर्जी दस्तावेज के माध्यम से जमीन हड़पने की शिकायत की। अनगड़ा सीओ से फौरन ऑनलाइन बात करते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पूरी जानकारी ली। उन्होंने अनगड़ी सीओ को शोकॉज करने के साथ पूरे मामले की जांच सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी द्वारा करने और प्रतिवेदन समर्पित करने के आदेश दिये।
पंजी-2 सुधार से संबंधित जनता दरबार में कई आवेदन प्राप्त हुए, जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित सीओ से तत्काल ऑनलाइन माध्यम से जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। बेड़ो अंचल से संबंधित पजी-2 सुधार के मामले में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अंचल में आयोजित होनेवाले जनता दरबार में मामले का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
इसके अतिरिक्त, भूमि सीमांकन, दाखिल-खारिज में विलंब, अतिक्रमण, एवं रसीद निर्गत नहीं होने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने इन सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करने का निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से संबंधित शिकायतों पर भी संज्ञान लेते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, ताकि पात्र लाभुकों को योजना का लाभ समय पर मिल सके।
मंगलवार की जगह बुधवार को अंचल में आयोजित होगा जनता दरबार
इस अवसर पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि मंगलवार को अवकाश के कारण अब सभी अंचलों में जनता दरबार बुधवार को आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक राजस्व मामलों का निष्पादन सुनिश्चित कर आम जनता को राहत प्रदान करें।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक
सभी निजी विद्यालयों को अनिवार्य रूप से अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन करना होगा।
इसकी सूचना हार्ड कॉपी एवं ईमेल के माध्यम से जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को अगले 3 दिनों के अंदर उपलब्ध करानी होगी
विद्यालय परिसर में पुस्तक विक्रय नहीं की जा सकेगी।
अभिभावक खुले बाजार से किसी भी विक्रेता से पुस्तकें खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।
विद्यालय किसी विशेष वेंडर से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा
राँची,13.04.2026 – दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजुनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में आज आर्यभट्ट सभागार मोरहाबादी में जिले के सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्यों/प्रतिनिधियों के साथ शुल्क निर्धारण एवं अन्य शिकायतों के निस्तारण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
इस बैठक में जिले के समस्त CBSE, ICSE एवं JAC बोर्ड से संबद्ध निजी विद्यालयों के प्राचार्य अथवा उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।
बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, श्री विनय कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी, श्री अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, श्री बादल राज, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, श्रीमती उर्वशी पांडेय, क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी एवं परियोजना पदाधिकारी सहित संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा अबुआ साथी पोर्टल पर प्राप्त विभिन्न शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण हेतु निजी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना था।
बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश
उपायुक्त श्री मंजुनाथ भजंत्री ने बैठक में सभी प्राचार्यों एवं प्रतिनिधियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर सख्त निर्देश दिए:
(1) अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन
सभी निजी विद्यालयों को अनिवार्य रूप से अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन करना होगा। इसकी सूचना हार्ड कॉपी एवं ईमेल के माध्यम से जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को अगले 3 दिनों के अंदर उपलब्ध करानी होगी।
अभी तक केवल 13 विद्यालयों ने ही यह सूचना उपलब्ध कराई है। उपायुक्त ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए सभी विद्यालयों को चेतावनी दी कि तीन दिनों के अंदर सूचना जमा न करने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
PTA गठन की सूचना विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट पर भी अपलोड करनी होगी तथा उसका लिंक जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को भेजना होगा।
(2) विद्यालय स्तरीय शुल्क समिति का गठन
झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुसार सभी विद्यालयों को विद्यालय स्तर पर शुल्क समिति का गठन करना अनिवार्य है। इसकी सूचना भी नोटिस बोर्ड, वेबसाइट पर प्रकाशित कर हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को 3 दिनों के अंदर उपलब्ध करानी होगी।
(3) शुल्क निर्धारण एवं वृद्धि
– विद्यालय स्तर पर शुल्क समिति 10% तक की शुल्क वृद्धि का अनुमोदन कर सकती है।
– 10% से अधिक वृद्धि के लिए जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति अनिवार्य होगी।
– किसी भी शुल्क वृद्धि को न्यूनतम 2 वर्ष के लिए प्रभावी बनाया जाएगा।
– सभी विद्यालयों को विगत तीन शैक्षणिक सत्रों तथा चालू सत्र 2026-27 में कक्षावार लिए गए समस्त शुल्कों का विस्तृत विवरण 20 अप्रैल 2026 (संध्या 5:00 बजे तक) जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा।
– शुल्क वृद्धि अधिनियम के प्रावधानों के पूर्ण अनुपालन में ही की जाएगी।
(4) पुनर्नामांकन शुल्क
अगली कक्षा में प्रमोशन के लिए किसी भी रूप में पुनर्नामांकन शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। यह अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। नए नामांकन के लिए केवल युक्तिसंगत एवं वास्तविक लागत के अनुरूप आवेदन शुल्क लिया जा सकेगा।
(5) परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देश
किसी भी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जा सकेगा। ऐसा करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम, बाल अधिकार अधिनियम तथा मानवाधिकार का उल्लंघन होगा, जिस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
(6) पुस्तक निर्धारण एवं विक्रय संबंधी नियम
– सभी विद्यालयों को कक्षा-वार पुस्तक सूची (प्रकाशक एवं मूल्य सहित) अगले 3 दिनों में जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी।
– CBSE संबद्ध विद्यालय केवल NCERT पुस्तकें ही पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे।
– कोई भी सहायक या संदर्भ पुस्तक बाध्यकारी नहीं होगी।
– पुस्तकें केवल 5 वर्ष अथवा बोर्ड द्वारा पाठ्यक्रम परिवर्तन की स्थिति में ही बदली जा सकेंगी।
– विगत वर्ष की अच्छी स्थिति वाली पुस्तकों का पुनः उपयोग किया जा सकेगा।
– विद्यालय परिसर में पुस्तक विक्रय नहीं की जा सकेगी।
– अभिभावक खुले बाजार से किसी भी विक्रेता से पुस्तकें खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। विद्यालय किसी विशेष वेंडर से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।
(7) पोशाक (यूनिफॉर्म) संबंधी नियम
– पोशाक के डिजाइन में बार-बार परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।
– कम से कम 5 वर्ष के अंतराल पर अभिभावक-शिक्षक संघ की सहमति से ही बदलाव संभव होगा।
– विद्यालय किसी विशेष दुकान या वेंडर से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।
– विद्यालय परिसर में यूनिफॉर्म की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
– अभिभावक खुले बाजार से यूनिफॉर्म खरीद या सिलवा सकते हैं। विद्यालय को डिजाइन, रंग आदि की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
(8) अन्य शुल्क
किसी भी नाम से लिया जाने वाला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क मासिक शुल्क का ही हिस्सा माना जाएगा और इसकी वृद्धि भी शुल्क निर्धारण के नियमों के अनुसार ही होगी।
(9) परिवहन शुल्क
परिवहन शुल्क की वृद्धि भी सामान्य शुल्क वृद्धि के नियमों के अधीन होगी। सभी स्कूल बसों में परिवहन नियमों एवं सुरक्षा मानकों का सख्त अनुपालन अनिवार्य होगा। भारती कुमारी मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा।
(10) शिकायत निस्तारण प्रक्रिया
अबुआ साथी पोर्टल एवं जिला स्तरीय कोषांग (समाहरणालय भवन, ब्लॉक-ए, कमरा संख्या 105) के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर सभी विद्यालयों को नोटिस जारी किया जा चुका है। विद्यालयों को साक्ष्य सहित समयबद्ध जवाब देना अनिवार्य है।
उल्लंघन पाए जाने पर ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना तथा गंभीर मामलों में RTE अनापत्ति रद्द करने की कार्रवाई की जा सकेगी।
(11) RTE के अंतर्गत 25% आरक्षण
सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं में कमजोर एवं वंचित वर्ग के लिए 25% सीटें आरक्षित हैं। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लॉटरी सिस्टम से पूरी की जाएगी। चयनित छात्रों की सूची विद्यालय के लॉगिन पर उपलब्ध कराई जाएगी और विद्यालय को समयबद्ध नामांकन सुनिश्चित करना होगा।
बैठक में जिले के कुल 272 निजी विद्यालयों में से 192 विद्यालयों के प्रधानाचार्य या उनके प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे।
अनुपस्थित विद्यालयों को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची के निर्देशानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है।
बैठक के दौरान जिन विद्यालयों के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुई थीं, उनसे सभागार में ही जवाब लिया गया।
अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी
उपायुक्त श्री मंजुनाथ भजंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी निजी विद्यालयों से अपील की कि वे अभिभावकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पारदर्शी एवं कानूनानुसार कार्य करें।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना के अग्रणी निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, आईएनएस त्रिकंद ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपना प्रवास समाप्त किया।
बंदरगाह पर जहाज का प्रवास पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग -इन-चीफ, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ हुआ। जहाज पर आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान, पश्चिमी नौसेना कमान के एफओसी – इन–सी ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओवोर ओटिएनो को इंसास राइफलें और गोला-बारूद औपचारिक रूप से सौंपे।
इस दौरान आयोजित गतिविधियों में छोटे हथियारों और गोला-बारूद का रखरखाव, विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर क्रॉस डेक विजिट, सामुदायिक सेवा, खेल प्रतियोगिताएं और योग शामिल थे। आईएनएस त्रिकंद के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने केन्या नौसेना बेड़े के कमांडर ब्रिगेडियर मोहम्मद शी शेमोटे से भेंट की। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया।
जहाज आगे की परिचालन तैनाती के लिए रवाना हो गया है। मोम्बासा बंदरगाह पर इसका प्रवास भारत के महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण को दर्शाता हैऔर इससे सौहार्द, पारस्परिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली – भारतीय सेना की टुकड़ी भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘दुस्तलिक’ के 7 वें संस्करण के लिए आज रवाना हुई । यह अभ्यास 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगम स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में होगा। ‘दुस्तलिक’ अभ्यास एक वार्षिक अभ्यास है जो बारी-बारी से भारत और उज़्बेकिस्तान में किया जाता है। पिछला संस्करण अप्रैल 2025 में औंध (पुणे) स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड़ में आयोजित किया गया था।
भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी में 60 जवान शामिल हैं, जिनमें से 45 भारतीय सेना के जवान हैं, जिनमें से अधिकांश महार रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं, और 15 भारतीय वायु सेना के जवान हैं। उज्बेकिस्तान की टुकड़ी में भी लगभग 60 जवान शामिल हैं, जो उज्बेकिस्तान की सेना और वायु सेना से हैं।
अभ्यास दुस्तलिक का उद्देश्य सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त अभियानों को अंजाम देने के लिए संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाना है। इसमें उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना, संयुक्त सामरिक अभ्यास और विशेष शस्त्र कौशल के मूल सिद्धांतों पर ध्यान दिया जाएगा। यह अभ्यास संयुक्त अभियानों की योजना और क्रियान्वयन के लिए दोनों टुकड़ियों की कमान और नियंत्रण संरचनाओं के बीच एक एकीकृत परिचालन एल्गोरिदम भी स्थापित करेगा।
अभ्यास में शामिल किए जाने वाले प्रमुख परिचालन पहलुओं में भूमि नेविगेशन, शत्रु ठिकानों पर हमले और शत्रु के कब्जे वाले क्षेत्रों पर कब्जा करना शामिल हैं। भारतीय दल को उज्बेकिस्तान सशस्त्र बलों की परिचालन प्रक्रियाओं और अभ्यासों से परिचित होने और उज्बेकिस्तान दल के साथ अपने परिचालन अनुभवों को साझा करने का अवसर मिलेगा। संयुक्त प्रशिक्षण का समापन 48 घंटे के सत्यापन अभ्यास के साथ होगा, जिसका उद्देश्य संयुक्त अभियानों के लिए सामरिक अभ्यासों को मान्य करना है, जिसमें गैरकानूनी सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से संयुक्त विशेष अभियानों की तैयारी और निष्पादन पर जोर दिया जाएगा।
दुस्तलिक अभ्यास से दोनों पक्ष संयुक्त अभियानों के संचालन में अपनाई जाने वाली रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं के सर्वोत्तम तरीकों को साझा कर सकेंगे और टुकड़ियों के बीच अंतर-संचालनीयता, परिचालन तालमेल और संयुक्त कमान एवं नियंत्रण समन्वय को और मजबूत कर सकेंगे।
माय भारत के तहत 7,000 से अधिक युवा महिलाओं ने लोकतांत्रिक संवाद में भाग लिया
देश भर के सभी 17 क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व पर प्रस्ताव पारित; यह पहल समावेशी लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण को समर्थन देती है
नई दिल्ली – युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने मेरा युवा भारत (माय भारत) मंच (mybharat.gov.in) के माध्यम से, माय भारत बजट क्वेस्ट 2026 के ग्रैंड फिनाले से पहले12 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक राष्ट्रव्यापी नारी शक्ति युवा संसद का आयोजन किया। “नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज – समावेशी लोकतंत्र को सशक्त बनाना” विषय पर आधारित यह पहल एक साथ 17 क्षेत्रों में आयोजित की गई, जिसमें 7,000 से अधिक युवा महिलाओं को संगठित लोकतांत्रिक भागीदारी और युवा नेतृत्व वाले नीतिगत संवाद के एक ऐतिहासिक अभ्यास में एक साथ लाया गया।
यह व्यापक राष्ट्रीय भागीदारी नीति-निर्माण के केंद्र में युवा शक्ति को रखने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेष रूप से, केंद्रीय बजट 2026 में शामिल कई विचार विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग (वीबीवाईएलडी) 2026 के दौरान हुई चर्चाओं से प्रेरित हैं, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में संगठित युवा परामर्शों की भूमिका को सुदृढ़ करते हैं।
देश भर में फैले इस कार्यक्रम का आयोजन मुंबई (महाराष्ट्र), अमरावती (आंध्र प्रदेश), बेंगलुरु (कर्नाटक), भोपाल (मध्य प्रदेश), रायपुर (छत्तीसगढ़), भुवनेश्वर (ओडिशा), हिसार (हरियाणा), दिल्ली, चंडीगढ़, शिलांग (पूर्वोत्तर क्षेत्र), अहमदाबाद (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), जयपुर (राजस्थान), रांची (झारखंड), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), पटना (बिहार) और श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में किया गया, जो इस पहल के व्यापक दायरे, विविधता और समावेशिता को दर्शाता है।
नारी शक्ति यूथ पार्लियामेंट संसद ने विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमियों की युवा महिलाओं को एक साथ लाकर भारत की लोकतांत्रिक और विकास यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक विश्वसनीय और सुनियोजित मंच तैयार किया। सभी क्षेत्रों में प्रतिभागियों ने परामर्श और संसदीय शैली के संवाद में भाग लिया, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों, जानकारी से पूर्ण चर्चा और जनभागीदारी के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता प्रदर्शित हुई।
विचार-विमर्श का एक प्रमुख पहलू विधायी संस्थाओं में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर केंद्रित चर्चा थी। सत्रों का समापन सभी 17 क्षेत्रों में एक औपचारिक प्रस्ताव को अपनाने के साथ हुआ, जिसमें सामूहिक रूप से संविधान (संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन किया गया, जिसमें लोकसभा की सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, इसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। यह प्रस्ताव नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को 2029 के आम चुनाव से समय पर लागू करने का समर्थन करता है, साथ ही महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की तत्काल और प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन संबंधी बाधाओं से कार्यान्वयन को अलग करने की आवश्यकता पर जोर देता है, जिससे एक समावेशी और सहभागी लोकतंत्र की नींव मजबूत हो सके।
विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों और जन प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जिन्होंने भारत के विकास पथ में नारी शक्ति की अग्रणी और निर्णय-निर्माता के रूप में बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। युवा संसद युवा महिलाओं के लिए अपने दृष्टिकोण को व्यक्त करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और राष्ट्रीय चर्चा में सार्थक योगदान देने का एक सशक्त मंच बनकर उभरी।
इस राष्ट्रव्यापी नीतिगत पहल के पूरक के रूप में, मंत्रालय ने साथ ही साथ कई स्थानों पर ‘‘संडेज ऑन साइकिल’’ का आयोजन किया, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस पहल ने पर्यावरण जागरूकता, फिटनेस और सतत जीवन शैली को बढ़ावा दिया, जिससे हरित एवं विकसित भारत के निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बल मिला। इन समानांतर पहलों ने मिलकर युवा लामबंदी का एक समग्र मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें युवा महिलाओं ने संगठित नीतिगत चर्चा का नेतृत्व किया और युवाओं ने समुदाय-संचालित कार्रवाई का समर्थन किया, जिससे सहभागी और समावेशी राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाया जा सका।
इस व्यापक और समन्वित पहल का 17 क्षेत्रों में सफल क्रियान्वयन, युवाओं को व्यापक स्तर पर संगठित करने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सार्थक जमीनी स्तर की भागीदारी में बदलने की माय भारत की संस्थागत क्षमता का प्रमाण है। भारत, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ, नारी शक्ति युवा संसद एक ऐसी पीढ़ी के उदय को रेखांकित करती है जो जागरूक, मुखर और कर्मठ है – जहां नारी शक्ति न केवल शासन में भाग ले रही है, बल्कि सक्रिय रूप से राष्ट्र के भविष्य को आकार दे रही है।
बिजू महोत्सव समारोहों में सांस्कृतिक गौरव और जनजातीय विकास पर नीतिगत संवाद को प्रमुखता दी गई
नई दिल्ली – राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के माननीय अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने जनजातीय समुदायों के भविष्य को आकार देने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए जनजातीय युवाओं की शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए गहन प्रयास करने का आह्वान किया। वे राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित “चकमा युवा संवाद: जनजातीय युवाओं का सशक्तिकरण और बिजू महोत्सव का आयोजन” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
पॉलिसी संवाद द्वारा दिल्ली चकमा छात्र संघ (डीसीएसयू) के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, सामुदायिक नेताओं और युवा प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि जनजातीय सशक्तिकरण, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
अपने मुख्य भाषण में, श्री आर्य ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति समिति (एनसीएसटी) के जनादेश और देश भर में अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई पहलों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जनजातीय युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने और विकास के उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्रीमती निरुपमा चकमा, माननीय सदस्य, एनसीएसटी, जो विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं, ने चकमा समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला और आधुनिक विकास पथों को अपनाते हुए स्वदेशी पहचान को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया।
इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय आयाम प्रदान करते हुए, भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महामहिम सुश्री महिशिनी कोलोन ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई, जिससे चकमा समुदाय के व्यापक सांस्कृतिक और क्षेत्रीय महत्व को रेखांकित किया गया।
इस आयोजन में जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं, जो चकमा लोगों के बीच एकता, नवीनीकरण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माने जाने वाले पारंपरिक बिजू महोत्सव की भावना को प्रदर्शित करती हैं।
जनजातीय युवाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर केंद्रित तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई। पैनल चर्चा में नीति संवाद के संपादक श्री गौरव कुमार, सीएडीसी की कला एवं संस्कृति अधिकारी सुश्री रेणु चकमा और डीसीएसयू के सलाहकार तथा बिजू रेह बिजू आयोजन समिति के सह-संयोजक श्री वेनिश चकमा ने भाग लिया। वक्ताओं ने नीतिगत कमियों को दूर करने, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और समावेशी विकास के अवसरों को बढ़ावा देने पर बहुमूल्य विचार साझा किए।
इस कार्यक्रम का समापन, आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए संवाद को जारी रखने, नीतिगत भागीदारी को बढ़ाने और समुदाय-आधारित पहलों को बढ़ावा देने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध जारी, बीते कल 52.3 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडरों का वितरण
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने औचक निरीक्षण तेज किए, 219 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया गया, 56 की डिस्ट्रीब्यूटरशिप निलंबित किए गए
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने औचक निरीक्षण तेज किए, 219 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया गया, 56 वितरकों के डिस्ट्रीब्यूटरशिप निलंबित किए गए
मार्च 2026 से अब तक 4.24 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन शुरू, 4.66 लाख से ज्यादा नए ग्राहकों ने पंजीकरण कराया
देशभर में बंदरगाहों का परिचालन सामान्य, कहीं से भी भीड़भाड़ की सूचना नहीं
क्षेत्र में मौजूद भारतीय समुदाय की सुरक्षा और उनके कल्याण के लिए प्रयास तेज
28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र से लगभग 8.97 लाख यात्रियों का भारत आगमन
नई दिल्ली – पश्चिम एशिया की उभरती परिस्थितियों को देखते हुए, भारत सरकार लगातार वहां के घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कदम उठा रही है। निम्नलिखित विवरण ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए किए जा रहे उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है:
ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की निर्बाध उपलब्धता
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईंधन आपूर्ति की वर्तमान स्थिति पर जानकारी साझा की है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावित करने वाले हालिया घटनाक्रमों के बीच पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपायों की रूपरेखा दी गई है। इसमें निम्नलिखित बातों को रेखांकित किया गया है:
जनहित में परामर्श और नागरिकों के लिए जागरूकता
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के अनावश्यक भंडारण से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
एलपीजी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और वितरकों के पास जाने से बचें।
नागरिकों को पीएनजी और इलेक्ट्रिक या इंडक्शन कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
सभी नागरिकों से आग्रह है कि वर्तमान स्थिति के दौरान अपने दैनिक उपयोग में ऊर्जा का संरक्षण करें।
सरकार की कार्ययोजना और सुचारू आपूर्ति के उपाय
मौजूदा जियो पॉलिटिकल स्थिति के बावजूद, सरकार ने घरेलू एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है, साथ ही अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उच्च प्राथमिकता सुनिश्चित की है।
सरकार ने आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर कई सुधारात्मक उपाय लागू किए हैं, जिनमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, बुकिंग अंतराल को शहरी क्षेत्रों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक करना तथा आपूर्ति के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का निर्धारण करना शामिल है।
एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए मिट्टी के तेल (केरोसिन) और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराए गए हैं।
कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज को निर्देश दिया है कि वे लघु एवं मध्यम श्रेणी के उपभोक्ता को वितरण के लिए राज्यों को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति करें।
राज्यों को सलाह दी गई है कि वे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए पीएनजी कनेक्शन की सुविधा प्रदान करें।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वित प्रयास और संस्थागत तंत्र
राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के तहत पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की निगरानी करने और जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सशक्त बनाया गया है।
भारत सरकार ने 27.03.2026 और 02.04.2026 के अपने पत्रों के माध्यम से नागरिकों को ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के प्रति आश्वस्त करने के लिए सक्रिय जन-संवाद की आवश्यकता पर बल दिया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसी संदर्भ में, 02.04.2026 (सचिव, एमओपीएनजी की अध्यक्षता में) और 06.04.2026 (सचिव, एमओपीएनजी के साथ सूचना एवं प्रसारण और उपभोक्ता मामलों के सचिवों की अध्यक्षता में) बैठकें बुलाई गईं, जिनमें निम्नलिखित बातों पर जोर दिया गया:
दैनिक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित करना और नियमित रूप से सार्वजनिक परामर्श जारी करना।
सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों की सक्रियता से निगरानी करना और उनका खंडन करना।
जिला प्रशासन द्वारा दैनिक प्रवर्तन अभियानों को तेज करना और तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय में छापेमारी और निरीक्षण जारी रखना।
अपने संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन आदेश जारी करना।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित अतिरिक्त केरोसिन के लिए आवंटन आदेश जारी करना।
पीएनजी अपनाने और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना।
एलपीजी आपूर्ति, विशेष रूप से घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडरों का लक्षित वितरण अपनाना।
सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए नियंत्रण कक्ष और जिला निगरानी समितियों का गठन किया है।
वर्तमान में, 24 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश नियमित रूप से प्रेस ब्रीफिंग जारी कर रहे हैं।
प्रवर्तन और निरंतर निगरानी की कार्यवाही
एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए देश भर में कार्यवाही जारी है। 11.04.2026 को पूरे देश में 2700 से अधिक छापेमारी की गई।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने औचक निरीक्षण की प्रक्रिया को और मजबूत करते हुए इसे जारी रखा है। अब तक 219 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया गया है और 56 वितरकों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप को निलंबित कर दिया गया है।
एलपीजी आपूर्ति
घरेलू एलपीजी आपूर्ति की स्थिति:
मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित बनी हुई है।
एलपीजी वितरकों के पास स्टॉक खत्म होने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
पूरे उद्योग में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढ़कर लगभग 98 प्रतिशत हो गई है।
आपूर्ति के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) आधारित डिलीवरी बढ़कर लगभग 93 प्रतिशत हो गई है।
घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी सामान्य बनी हुई है।
11.04.2026 को देश भर में 52.3 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई।
वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति और आवंटन के उपाय:
कुल वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर संकट-पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है, जिसमें 10 प्रतिशत सुधार-संबद्ध आवंटन शामिल है।
भारत सरकार ने 06.04.2026 के पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि प्रत्येक राज्य में प्रवासी श्रमिकों को वितरण के लिए उपलब्ध 5 किलो एफटीएल सिलेंडरों की दैनिक मात्रा को दोगुना किया जा रहा है। यह वृद्धि 21.03.2026 के पत्र में उल्लिखित 20 प्रतिशत की सीमा से ऊपर है और इसका आधार 2-3 मार्च 2026 के दौरान प्रवासी श्रमिकों को की गई औसत दैनिक आपूर्ति है। ये 5 किलो के एफटीएल सिलेंडर तेल विपणन कंपनियों की सहायता से केवल प्रवासी श्रमिकों को आपूर्ति करने हेतु राज्य सरकार के पास उपलब्ध रहेंगे।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने पिछले 8 दिनों के दौरान 5 किलो एफटीएल सिलेंडरों के लिए लगभग 3300 जागरूकता शिविर आयोजित किए हैं, जिनमें 35,800 से अधिक सिलेंडरों की बिक्री भी हुई।
फरवरी-2026 के 77,000 के दैनिक औसत के मुकाबले 11.04.2026 को देश भर में 1 लाख से अधिक 5 किलो एफटीएल सिलेंडरों की बिक्री हुई।
23 मार्च 2026 से अब तक 13 लाख से अधिक 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री की जा चुकी है।
आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति वाणिज्यिक एलपीजी वितरण की योजना बनाने के लिए राज्य अधिकारियों और उद्योग निकायों के साथ समन्वय कर रही है।
14 मार्च 2026 से अब तक कुल 1,20,898 एमटी (जो 19 किलो के 63.6 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडरों के बराबर है) वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हुई है।
11.04.2026 को 7665 एमटी वाणिज्यिक एलपीजी (जो 19 किलो के 4 लाख से अधिक सिलेंडरों के बराबर है) की बिक्री की गई।
प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और पीएनजी नेटवर्क विस्तार के प्रयास
उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए घरेलू पीएनजी और सीएनजी परिवहन के लिए शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
उपलब्ध इन्वेंट्री और निर्धारित एलएनजी कार्गो के आगमन के आधार पर, उर्वरक संयंत्रों को कुल गैस आवंटन में 5 प्रतिशत की और वृद्धि की जा रही है, जिससे यह 09.04.2026 से उनके छह महीने के औसत उपभोग के लगभग 95 प्रतिशत तक पहुँच जाएगा।
सीजीडी संस्थाओं को सलाह दी गई है कि वे होटल, रेस्तरां और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता दें, ताकि वाणिज्यिक एलपीजी की उपलब्धता संबंधी चिंताओं को दूर किया जा सके।
आईजीएल, एमजीएल, गेल गैस और बीपीसीएल सहित सीजीडी कंपनियां घरेलू और वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शन के लिए प्रोत्साहन दे रही हैं।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों से सीजीडी नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक अनुमोदनों में तेजी लाने का अनुरोध किया गया है।
भारत सरकार ने 18.03.2026 के पत्र के माध्यम से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी के अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन की पेशकश की है, बशर्ते वे एलपीजी से पीएनजी की ओर दीर्घकालिक परिवर्तन में सहायता करें।
21 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले से ही पीएनजी विस्तार सुधारों से जुड़ा अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन प्राप्त कर रहे हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने आवेदनों पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने के लिए तीन महीने हेतु सीजीडी बुनियादी ढांचे के लिए एक त्वरित अनुमोदन ढांचा अपनाया है।
भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत 24.03.2026 को ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन बिछाने, निर्माण, संचालन और विस्तार तथा अन्य सुविधाओं के माध्यम से) आदेश, 2026’ अधिसूचित किया है। यह आदेश देश भर में पाइपलाइन बिछाने और विस्तार के लिए एक सुव्यवस्थित और समयबद्ध ढांचा प्रदान करता है, इससे अनुमोदन प्राप्त करने और भूमि अधिग्रहण की बाधाएं दूर होंगी, जिससे कार्य में तेजी आएगी। इससे आवासीय क्षेत्रों सहित प्राकृतिक गैस बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास में मदद मिलेगी।
पीएनजीआरबी ने पीएनजी विस्तार की गति को बनाए रखने के लिए ‘नेशनल पीएनजी ड्राइव 2.0’ को 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है।
एक स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य को प्रोत्साहित करने के लिए, भारत सरकार ने एक ‘मॉडल ड्राफ्ट स्टेट सीबीजी पॉलिसी’ विकसित की है। इस मॉडल नीति का उद्देश्य राज्यों को सीबीजी विकास के लिए अपना निवेशक-अनुकूल और कार्यान्वयन-उन्मुख इकोसिस्टम बनाने में सक्षम बनाना है। जो राज्य इसे अपनाएंगे, उन्हें वाणिज्यिक एलपीजी के अगले अतिरिक्त आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
मार्च 2026 से अब तक 4.24 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन शुरू किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 4.66 लाख से अधिक ग्राहकों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है।
11.04.2026 तक, 30,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने MYPNGD.in वेबसाइट के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।
कच्चे तेल की उपलब्धता और रिफाइनरियों की परिचालन स्थिति
सभी रिफाइनरियां कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, साथ ही पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जा रहा है।
घरेलू खपत को सहारा देने के लिए रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में वृद्धि की गई है।
भारत सरकार ने 01.04.2026 के आदेश के माध्यम से पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सहित भारत की रिफाइनिंग कंपनियों को फार्मास्यूटिकल्स विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए C3 और C4 स्ट्रीम की निश्चित न्यूनतम मात्रा उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। उपरोक्त विभागों से संबंधित कंपनियों के लिए 800 एमटी प्रतिदिन का प्रावधान किया गया है।
ईंधन की खुदरा उपलब्धता और कीमतों पर नियंत्रण हेतु उठाए गए कदम
देश भर के खुदरा आउटलेट सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।
मध्य पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में असामान्य वृद्धि हुई है; हालाँकि, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।
भारत सरकार ने 11.04.2026 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 55.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, ताकि घरेलू बाजार में इन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और खुदरा आउटलेट्स पर कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
केरोसिन की उपलब्धता और वितरण के उपाय
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित आवंटन के अतिरिक्त 48,000 केएल केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन प्रदान किया गया है।
18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने एसकेओ आवंटन आदेश जारी कर दिए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने किसी भी आवश्यकता न होने का संकेत दिया है।
समुद्री सुरक्षा और शिपिंग परिचालन
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा क्षेत्र में परिचालन कर रहे भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि:
क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी किसी भी घटना की सूचना नहीं मिली है।
शिपिंग कंट्रोल रूम 24×7 क्रियाशील है और सक्रिय होने के बाद से इसने 6,053 कॉल और 12,787 से अधिक ईमेल का समाधान किया है। पिछले 24 घंटों में, 80 कॉल और 112 ईमेल प्राप्त हुए हैं।
मंत्रालय ने शिपिंग महानिदेशालय के माध्यम से अब तक 2,084 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिनमें पिछले 24 घंटों के दौरान खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से लौटे 75 नाविक शामिल हैं।
पूरे भारत में बंदरगाह संचालन सामान्य बना हुआ है और कहीं से भी भीड़भाड़ की सूचना नहीं है।
मंत्रालय नाविकों के कल्याण और निर्बाध समुद्री संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ समन्वय जारी रखे हुए है।
क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
पूरे क्षेत्र में, भारतीय मिशन और पोस्ट भारतीय समुदाय के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं, साथ ही उनकी सुरक्षा और कुशलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सहायता प्रदान कर रहे हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
सरकार खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र के घटनाक्रमों की लगातार बारीकी से निगरानी कर रही है।
सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान और समन्वय के लिए विदेश मंत्रालय राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित संपर्क में है।
सभी प्रयास इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।
भारतीय मिशन और पोस्ट चौबीसों घंटे हेल्पलाइन संचालित कर रहे हैं और भारतीय नागरिकों की सक्रिय रूप से सहायता कर रहे हैं।
स्थानीय सरकारी दिशानिर्देशों, उड़ान और यात्रा की स्थिति तथा कांसुलर सेवाओं की जानकारी सहित अद्यतन परामर्श नियमित रूप से जारी किए जा रहे हैं।
हमारे मिशन इस क्षेत्र में भारतीय सामुदायिक संगठनों, पेशेवर समूहों, भारतीय कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
उन देशों से उड़ानें संचालित हो रही हैं जहाँ हवाई क्षेत्र खुला है। 28 फरवरी से अब तक, क्षेत्र से लगभग 8,97,000 यात्री भारत आ चुके हैं।
यूएई में, एयरलाइंस परिचालन और सुरक्षा कारणों के आधार पर भारत और यूएई के बीच सीमित विशेष व्यावसायिक उड़ानें संचालित कर रही हैं, आज लगभग 95 उड़ानों की उम्मीद है।
सऊदी अरब और ओमान के विभिन्न हवाई अड्डों से भारत के गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं।
कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला होने के कारण, कतर एयरवेज द्वारा आज भारत के लिए लगभग 8-10 उड़ानें संचालित किए जाने की उम्मीद है।
कुवैत का हवाई क्षेत्र बंद है। कुवैत की जज़ीरा एयरवेज और कुवैत एयरवेज सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के लिए सीमित विशेष व्यावसायिक उड़ानें संचालित कर रही हैं। कुवैत से भारतीय नागरिकों की यात्रा सऊदी अरब के माध्यम से सुगम बनाई जा रही है।
बहरीन का हवाई क्षेत्र खुला है। गल्फ एयर द्वारा जल्द ही बहरीन से भारत के लिए सीमित उड़ानें शुरू किए जाने की उम्मीद है; वर्तमान में यह सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के लिए गैर-निर्धारित उड़ानें संचालित कर रही है। बहरीन से भारतीय नागरिकों की यात्रा को सऊदी अरब के रास्ते भारत के लिए सुगम बनाया जा रहा है।
ईरान का हवाई क्षेत्र बंद है। हम आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते ईरान से भारतीय नागरिकों की भारत वापसी की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
इजरायल का हवाई क्षेत्र बंद है। भारतीय नागरिकों की यात्रा जॉर्डन और मिस्र के माध्यम से सुगम बनाई जा रही है।
इराक का हवाई क्षेत्र सीमित उड़ान संचालन के साथ खुला है। यहाँ से भारतीय नागरिकों की यात्रा जॉर्डन और सऊदी अरब के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है।
एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए फिट इंडिया आंदोलन में व्यापक भागीदारी का आह्वान किया
केंद्रीय खेल मंत्री ने 1000 प्रतिभागियों के साथ साइकिल चलाई, दिसंबर 2024 में शुरू हुए ‘संडेज़ ऑन साइकिल’ अभियान में 28 लाख लोग शामिल हो चुके हैं
राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता मुक्केबाज पिंकी जांगरा ने 2030 में भारत द्वारा खेलों की मेजबानी की सराहना की
राष्ट्र निर्माण में फिटनेस की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 69वें फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का नेतृत्व करते हुए नागरिकों से फिट इंडिया आंदोलन में शामिल होने और एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए सक्रिय जीवन शैली अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. मांडविया ने कहा, ‘संडे ऑन साइकिल’ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर देश के युवा फिटनेस के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘फिट इंडिया’ का संदेश दिया है। यह केवल एक संदेश नहीं है, बल्कि विकसित भारत के लिए एक आवश्यकता है।”
डॉ. मांडविया ने फिटनेस का महत्व बताते हुए कहा कि यदि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसके नागरिकों, विशेषकर युवाओं की फिटनेस ही इसकी आधारशिला है।
उन्होंने आगे कहा “एक स्वस्थ नागरिक एक स्वस्थ समाज का निर्माण करता है, और एक स्वस्थ समाज किसी राष्ट्र को विकसित बनाता है। मैं इस देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान में शामिल हों और ‘फिट इंडिया’ का संदेश फैलाएं।”
माननीय मंत्री जी ने फिट इंडिया ऐप के माध्यम से फिटनेस के साथ सततता के एकीकरण पर भी जोर दिया। इस ऐप से नागरिक साइकिल चलाकर कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देना और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है। अर्जित कार्बन क्रेडिट का उपयोग उत्पादों की खरीद के लिए किया जा सकता है और जल्द ही साइकिल चलाने के लीडरबोर्ड को भी प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
तेज संगीत, एक साथ किए जाने वाले ज़ुम्बा व्यायाम, गतिविधि क्षेत्रों में बिछी योगा मैट और प्रतीक्षा में कतार में खड़ी साइकिलों के साथ, सुबह-सुबह ही यह स्थान एक जीवंत फिटनेस केंद्र बन गया।
यहां योग प्रदर्शन, रस्साकशी प्रतियोगिताएं, रस्सी कूद, मनोरंजनात्मक खेल क्षेत्र, फोटो बूथ और विभिन्न प्रकार की इंटरैक्टिव फिटनेस गतिविधियां आयोजित की गई। सभी आयु वर्ग के प्रतिभागी – मशहूर हस्तियां, छात्र, पेशेवर, एथलीट और परिवार – बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।
राष्ट्रमंडल खेल 2014 की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज पिंकी जांगरा को भी फिटनेस इन्फ्लुएंसर दिनेश शेट्टी (एक मुए थाई मार्शल आर्टिस्ट और इंडियाज अल्टीमेट वॉरियर के विजेता) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनिया सिसोदिया के साथ सम्मानित किया गया।
इस बार के फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के विशेष साझेदार राहगिरी फाउंडेशन द्वारा “राज्य युवा नेता” विषय पर एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया गया। इस नुक्कड़ नाटक ने फिटनेस को जागरूकता और सामुदायिक संदेश के साथ जोड़ते हुए एक सामाजिक जुड़ाव का आयाम जोड़ा।
राज्य के युवा नेता भारत सरकार की ‘माई भारत’ पहल का भी हिस्सा थे; ‘माई भारत’ ‘फिट इंडिया’ का स्थायी भागीदार है। यह युवा स्वयंसेवकों के योगदान के माध्यम से इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है।
आयुष मंत्रालय की योग 365 पहल के तहत समर्थित एक विशेष योग परामर्श बूथ में, प्रतिभागियों ने निर्देशित सत्रों और परामर्शों के माध्यम से तनाव कम किया, जबकि तंत्रिका गतिविधि के लिए एक स्मार्ट वॉल फिटनेस चैलेंज ने सभी आयु वर्ग के उत्साही लोगों को आकर्षित किया।
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन रोप स्किपिंग फेडरेशन, योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन, माई बाइक्स और माई भारत के सहयोग से फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का आयोजन करता है।
यह साइकिलिंग अभियान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया जाता है, जिसमें एसएआई के क्षेत्रीय केंद्र, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी), खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (केआईएससीई) और खेलो इंडिया केंद्र (केआईसी) शामिल हैं।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू किया गया, फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल एक शक्तिशाली जन आंदोलन बन गया है। इसमें दिसंबर 2024 से अब तक देशभर में 2.63 लाख से अधिक स्थानों पर 28 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई है।
आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया
अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी
आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी
आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी
ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं। आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया। हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी। अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी। आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी। उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी। ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। ॐ शांति शांति शांति”
प्रधानमंत्री ने उनकी असाधारण संगीत यात्रा और शाश्वत प्रतिभा पर प्रकाश डाला
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आशा भोसले जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी दशकों की असाधारण संगीतमय यात्रा ने देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और विश्व भर में अनगिनत दिलों को छुआ। श्री मोदी ने कहा कि चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएँ, उनकी आवाज़ में एक शाश्वत दमक थी, और उन्होंने कहा कि उनके साथ हुई मुलाकातों को वे हमेशा संजोकर रखेंगे।
प्रधानमंत्री ने उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि वे पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत लोगों के जीवन में सदा गूंजते रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:
‘’भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उनकी दशकों की असाधारण संगीतमय यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं, उनकी आवाज में एक शाश्वत दमक थी। उनके साथ हुई मुलाकातों को मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।
उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। वे पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।‘’
“भारतातील सर्वात ख्यातनाम आणि अष्टपैलू आवाजांपैकी एक असलेल्या आशा भोसले जी यांच्या निधनाने अतिशय दुःख झाले. त्यांच्या अनेक दशकांच्या अद्वितीय संगीत प्रवासाने आपल्या सांस्कृतिक वारशाला समृद्ध केले आणि जगभरातील असंख्य लोकांच्या मनाला स्पर्श केला. भावपूर्ण गीतांपासून ते जोशपूर्ण संगीत रचनांपर्यंत, त्यांच्या आवाजात कालातीत तेज होते. त्यांच्याशी झालेल्या संवादांच्या आठवणी मी सदैव जपून ठेवेन.
त्यांच्या कुटुंबीयांना, चाहत्यांना आणि संगीतप्रेमींना माझ्या भावपूर्ण संवेदना. त्या पुढील पिढ्यांना प्रेरणा देत राहतील आणि त्यांची गाणी सदैव लोकांच्या आयुष्यात गुंजत राहतील.”
सिदो-कान्हू उद्यान, मोरहाबादी, रांची,12.04.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज हूल विद्रोह के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती (12.04.2026) के अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है।
झारखंड प्रदेश भारतवर्ष का एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनेक वीर सपूतों ने जन्म लिया। इस राज्य के आदिवासी तथा मूलवासियों ने जल, जंगल, जमीन की संरक्षा एवं अपने हक-अधिकार की लड़ाई तब से लड़ी जब देश के लोगों ने आजादी का सपना नहीं देखा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अन्याय ,शोषण और अत्याचार के विरुद्ध ऐतिहासिक बिगुल फूंका, जो हम सबों को संघर्ष ,साहस और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। झारखंड के वीर सपूतों ने अलग-अलग समय काल में अपने दायित्वों एवं राज्य के प्रति अपने आप को समर्पित किया।*
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीद सिदो-कान्हू जयंती का यह शुभ दिन भारत के इतिहास के पन्नों में अमिट रूप से दर्ज है। आज के दिन हम सभी लोग वीर शहीद सिदो-कान्हू के संघर्ष, अदम्य साहस और उनके आदर्श को याद करते हैं।
इन महान विभूतियों को उनके जयंती पर आज पूरे आदर और सम्मान के साथ अलग-अलग जगहों पर स्थापित उनकी प्रतिमा, तस्वीर, जन्मस्थली तथा शहादत स्थल पर लाखों की संख्या में लोग भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें शत-शत नमन करते हैं।*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज के दिन देश के आदिवासी समुदाय सहित पूरे देशवासी गर्व महसूस करते हैं कि ऐसे वीर सपूतों ने इस धरती पर जन्म लिया और यहां के लोगों के साथ-साथ संपूर्ण व्यवस्था को एक न समाप्त होने वाली दिशा देने का काम किया।
“भारत मूल्य-वर्धित समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाएगा और ईईजेड तथा खुले समुद्र से समुद्री क्षमता का उपयोग करेगा”
“भारत के समुद्री खाद्य निर्यात ने एक नया मील का पत्थर पार कर लिया है, जो पिछले साल के ₹62,000 करोड़ से बढ़कर इस साल लगभग ₹68,000 करोड़ हो गया है, जो लगभग ₹6,000 करोड़ की शुद्ध वृद्धि को दर्शाता है।”
नई दिल्ली – मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया। इस बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। इस बैठक का उद्देश्य सरकार और उद्योग से जुड़े हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक व्यवस्थित मंच प्रदान करना था, साथ ही निर्यातकों से बाजार तक पहुंच, मूल्य निर्धारण के दबाव और अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित वर्तमान चुनौतियों पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना तथा द्वीपों, ईईजेड(विशेष आर्थिक क्षेत्र) और खुले समुद्र से मूल्य संवर्धन, बाज़ार विविधीकरण और समुद्री निर्यात के विस्तार के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।
न केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, उन्होंने बताया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन रहा है। बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया और बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया। निर्यातकों से ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं, विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि बजट 2026 के बाद आयोजित वेबिनार के अनुरूप, मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। समुद्री खाद्य निर्यात में उत्साहजनक वृद्धि को देखते हुए उन्होंने निर्यातकों के निरंतर प्रयासों की सराहना की और जोर दिया कि निर्यात वृद्धि को बनाए रखने के लिए कड़े नियामकीय अनुपालन—जिसमें पता लगाने की क्षमता और प्रमाणन शामिल हैं—के साथ-साथ मजबूत लॉजिस्टिक्स और मूल्य श्रृंखला का विकास अत्यंत आवश्यक है।
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि एमपीईडीए, ईआईसी और वाणिज्य विभाग के समन्वय से एक केंद्रित बाजार विविधीकरण रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि लगभग चालीस देशों के राजदूतों के साथ कूटनीतिक संवाद से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं और इस बात पर जोर दिया कि बाजार विविधीकरण को लक्षित उत्पादों—विशेष रूप से रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य खंड—के साथ जोड़ना आवश्यक है। विभाग द्वारा समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों और विदेशों में भारतीय मिशनों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करने में सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही, एमपीईडीए से आग्रह किया गया कि वह निर्यातकों के समर्थन के लिए क्षमता निर्माण पहलों को सुदृढ़ करे, ताकि अनुपालन, प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात तैयारी को बढ़ाया जा सके।
बैठक में हितधारकों ने भारत सरकार के सक्रिय सहयोग की सराहना की और समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और अवसरों को रेखांकित किया। इनमें कैच सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में समुद्री शैवाल की खेती के लिए परमिट सुविधा प्रदान करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले फिश फीड मील के वैज्ञानिक विकास और उत्पादन विस्तार के लिए मछली आहार निर्माताओं को लक्षित समर्थन देने की आवश्यकता शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी तट पर अंतर्देशीय मत्स्य पालन और समुद्री कृषि के निर्यात संभावनाओं का पता लगाने और उन्हें मजबूत करने की जरूरत है। हितधारकों ने समुद्री खाद्य निर्यात को प्रभावित करने वाली कई व्यापक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण सीमित बाजार पहुंच, उच्च अनुपालन लागत, मूल्यवर्धित प्रसंस्करण क्षमता में कमी, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बाधाएं, तथा मजबूत पता लगाने योग्य और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों की आवश्यकता शामिल हैं।
इस बैठक में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड(एनएपडीबी), निर्यात निरीक्षण परिषद(ईआईसी), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम(एनसीडीसी), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड(एनसीईएल), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, और अन्य संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। निर्यात संघों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया, जिनमें भारत समुद्री खाद्य निर्यातक संघ, भारतीय समुद्री सामग्री संघ और भारत समुद्री शैवाल संघ शामिल थे; साथ ही सी6 एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, साशिमी फूड्स प्राइवेट लिमिटे, एक्वाग्री प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, एनेमको प्राइवेट लिमिटेड, सागरीय क्षितिज जैसी कंपनियों के उद्योग प्रतिनिधियों, सहकारी समितियों और निर्यातकों ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ओडिशा, गुजरात, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप के मत्स्य विभागों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
पृष्ठभूमि
भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में पिछले 11 वर्षों के दौरान औसतन 7% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो मजबूत और निरंतर विकास को दर्शाती है। इस अवधि में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है, जो 2013–14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹62,408 करोड़ हो गया। इस वृद्धि में प्रमुख योगदान झींगा निर्यात का रहा है, जिसका मूल्य ₹43,334 करोड़ रहा।
भारत का समुद्री खाद्य निर्यात एक व्यापक और विविधतापूर्ण श्रेणी में फैला हुआ है, जिसमें 350 से अधिक प्रकार के उत्पाद लगभग 130 वैश्विक बाजारों में भेजे जाते हैं। अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार बना हुआ है, जहां 2024-25 में कुल एक्सपोर्ट मूल्य का 36.42% हिस्सा गया; इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व का नंबर आता है, जबकि बाकी बाज़ारों का कुल हिस्सा लगभग 9% है। कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार निर्यात टोकरी के विविधीकरण पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, मत्स्य पालन विभाग पूरी मूल्य श्रृंखला में कई तरह के उपायों को बढ़ावा देता है, जिनमें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन, खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार और विविधीकरण, निर्यात-उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी अपनाना, रोग प्रबंधन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और क्षमता निर्माण शामिल हैं। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निर्बाध कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाहों और मछली उतारने के केंद्रों के विकास में भी निवेश किया जा रहा है।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 11 अप्रैल, 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ छावनी स्थित स्मृतिका युद्ध स्मारक में अत्याधुनिक लेजर, लाइट और साउंड शो का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 30 मिनट के इस मल्टीमीडिया शो में हिंदी भाषा में एडवांस प्रोजेक्शन, साउंड और लाइटिंग तकनीकों के माध्यम से भारतीय सेना के इतिहास, सैन्य अभियानों में उसकी उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को प्रस्तुत किया गया। यह शो स्मृतिका युद्ध स्मारक में हर शाम आयोजित किया जाएगा और जल्द ही आम जनता के लिए भी खोल दिया जाएगा।
मल्टीमीडिया प्रस्तुति में भारत के प्रमुख युद्धों का संक्षिप्त विवरण दिया गया, जिसमें विशेष तौर पर 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के संघर्षों के महत्वपूर्ण परिचालन पहलुओं और मेघदूत एवं विजय अभियानों में किए गए विशिष्ट योगदानों पर प्रकाश डाला गया। कई अभियानों में सेंट्रल कमान की अहम भूमिका को भी प्रमुखता से दिखाया गया। इसके साथ ही, अवध क्षेत्र के परम वीर चक्र विजेताओं की अद्वितीय वीरता को भी उजागर किया गया, साथ ही अवध की समृद्ध युद्ध परंपराओं और राष्ट्र की रक्षा में उनके विशिष्ट योगदान का संक्षिप्त विवरण भी प्रस्तुत किया गया।
इस प्रदर्शनी में उभरते खतरों और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप भारतीय सेना के निरंतर आधुनिकीकरण और रूपांतरण को भी शामिल किया गया। भारतीय रक्षा उद्योग की हाल ही में हुई प्रगति पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसका पहला इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नजर आया, और उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता पहल के केंद्र के तौर पर उभरा, जिसका उदाहरण राज्य का रक्षा गलियारा है।
इस लेजर, लाइट और साउंड शो को सुगम बनाने और प्रदर्शित करने के लिए, स्मृतिका युद्ध स्मारक परिसर का व्यापक स्तर पर जीर्णोद्धार किया जा रहा है। शो के लिए अत्याधुनिक प्रोजेक्टर और स्पीकर लगाने के साथ-साथ नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और युद्ध ट्रॉफियों को दर्शाने वाले भित्तिचित्र भी लगाए जा रहे हैं, और एक आधुनिक एम्फीथिएटर का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही, तीन विशेष भित्तिचित्र दीवारें भी बनाई जा रही हैं, जो सैन्य इतिहास के प्रमुख प्रदर्शन के साथ-साथ लेजर, लाइट और साउंड शो के लिए जीवंत कैनवास का काम करेंगी। यह पहल मुख्यालय सेंट्रल कमान की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के सहयोग से कार्यान्वित की गई है।
लखनऊ छावनी में स्थित स्मृतिका युद्ध स्मारक, भारतीय रक्षा बलों के सैनिकों की वीरता, बलिदान और अदम्य भावना को 1994 से ही अटूट श्रद्धांजलि अर्पित करता आ रहा है। सेंट्रल कमान मुख्यालय के तत्वावधान में स्थापित यह स्मारक राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने, सैन्य विरासत के संरक्षण और आम जनता, विशेषकर युवाओं में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक, सेंट्रल कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेंगपुटा, भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।
विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 की चर्चाओं में नैदानिक प्रमाण और नवाचार प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए
आयुष मंत्रालय ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में होम्योपैथी के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की
नई दिल्ली – विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय समारोह आज नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें सतत और समेकित स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाने में होम्योपैथी के बढ़ते महत्व पर एक बार फिर से प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रमुख होम्योपैथिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह आयोजन नैदानिक प्रगति, नीतिगत ढांचे, अनुसंधान प्राथमिकताओं और होम्योपैथी के भविष्य की रूपरेखा पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
समापन समारोह में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुश्री अलारमेलमंगई डी. मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत होम्योपैथी को व्यापक स्वास्थ्य सेवा ढांचे में प्रोत्साहित और समेकित किया जा रहा है। उन्होंने सुलभ, सतत और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने में इसकी बढ़ती भूमिका पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के उप महानिदेशक डॉ. सुनील एस. रामटेके के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच) के निदेशक डॉ. प्रलय शर्मा; केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक; तथा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने इस दो दिवसीय सम्मेलन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख विचार-विमर्श, वैज्ञानिक चर्चाओं और नीतिगत दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला गया।
इस समारोह में होम्योपैथी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। आयुष चेयर डॉ. नंदिनी कुमार, पद्मश्री डॉ. वी.के. गुप्ता और पद्मश्री डॉ. कल्याण बनर्जी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए स्मृति-चिन्ह प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में चिकित्सकों की अगली पीढ़ी का भी उत्साहवर्धन किया गया, जिसके अंतर्गत एसटीएसएच और एमडी पुरस्कार विजेताओं सहित लगभग 90 विद्यार्थियों के साथ एक सामूहिक फ़ोटो-सत्र आयोजित किया गया।
यह सम्मेलन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 10 और 11 अप्रैल को “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” विषय और “अनंत संभावनाएं” के विजन के तहत आयोजित किया गया, यह एक ऐसे व्यापक मंच के रूप में सामने आया, जिसने पारंपरिक सिद्धांतों और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के मेल को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सभागारों में छह अलग-अलग सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें विविध विषयों पर चर्चा हुई।
पहला दिन: नैतिकता, नैदानिक उत्कृष्टता और उभरते आयाम
उद्घाटन दिवस ने होम्योपैथी में पेशेवर ईमानदारी और विविध नैदानिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक मजबूत आधार स्थापित किया।
पेशेवर मानक: इस कार्यक्रम की शुरुआत नैतिकता एवं आचरण पर एक पूर्ण सत्र के साथ हुई, जिसमें राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) विनियम, 2022 पर प्रकाश डाला गया और नैतिक चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित किया गया।
नैदानिक अनुसंधान: राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच) ने जटिल रोग स्थितियों—जैसे ब्रेन ट्यूमर, ऑटोइम्यून विकार और एंडोमेट्रिओटिक सिस्ट—पर साक्ष्य-आधारित केस प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी नैदानिक नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया।
विशेष सत्र: विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्रों में बाल चिकित्सा होम्योपैथी, कैसिया फिसतुला(Cassia fistula) जैसी नई दवाओं की चिकित्सीय क्षमता, और कृषि कार्यों में एग्रो-होम्योपैथी के उभरते क्षेत्र पर चर्चा की गई।
समेकित देखभाल: एक बहु-विषयक सत्र में पल्मोनोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट एक साथ आए, जहाँ पारंपरिक चिकित्सा के साथ होम्योपैथी की भूमिका पर चर्चा की गई और रोगी की सहयोगात्मक देखभाल पर विशेष ज़ोर दिया गया।
दूसरा दिन: नीतियां, वैश्विक रणनीति और भविष्य की रूपरेखा
दूसरे दिन का ज़ोर प्रणालीगत विकास, जन स्वास्थ्य के एकीकरण और दीर्घकालिक स्थिरता पर रहा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं प्रणाली: प्रमुख चर्चाओं में सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पारदर्शिता तथा पेशेवर जवाबदेही को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया।
नियामक एवं सुरक्षा: सत्रों में औषधियों के मानकीकरण और मजबूत फार्माकोविजिलेंस प्रणालियों पर जोर दिया गया, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाया जा सके।
वैश्विक एवं आधुनिक दृष्टिकोण: विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति के अंतर्गत होम्योपैथी की भूमिका का विश्लेषण किया गया, जिसमें वैश्विक अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। चर्चा का मुख्य केंद्र वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से चिकित्सा पद्धतियों का आधुनिकीकरण करना और दवा प्रतिरोध जैसी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित करना रहा।
विशिष्ट चिकित्सा: होम्योपैथी का दायरा पशु चिकित्सा विज्ञान तक विस्तारित किया गया, और इसने पशुओं की देखभाल के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
संस्थागत रूपरेखा: आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के नेतृत्व में आयोजित एक उच्च-स्तरीय सत्र में, इस क्षेत्र में अनुसंधान की रणनीतिक प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को रेखांकित किया गया।
इस कार्यक्रम का समापन निरंतर सहयोग, क्षमता निर्माण और अनुसंधान में प्रगति के माध्यम से होम्योपैथी क्षेत्र को मज़बूत बनाने की एक नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
इसने आयुष मंत्रालय की उस विजन को और मजबूती प्रदान की, जिसके तहत होम्योपैथी को समेकित और सतत स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है; और इस प्रयास को केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच), राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच), राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) तथा अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का सहयोग प्राप्त है।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा
“राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता”
राँची,11.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 11.04.2026 को समाहरणालय ब्लॉक-A, कमरा संख्या-203 के सभागार में आंतरिक संसाधनों से राजस्व संग्रहण संबंधी समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अपर समाहर्ता राँची, श्री रामनारायण सिंह, जिला परिवहन पदाधिकारी राँची, श्री अखिलेश कुमार, जिला खनन पदाधिकारी राँची, अबु हुसैन, रजिस्टार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, राँची, जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी, राँची, एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।
विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रस्तुत प्रमुख बिंदु एवं निर्देश:
1. परिवहन विभाग: जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लक्ष्य ₹41047.51 लाख था , जिसके विरुद्ध ₹47501.13. लाख प्राप्त हुआ। जो 115 % है।
2. उत्पाद विभाग: सहायक आयुक्त उत्पाद ने बताया कि वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध 123.98% कल वसूली की गई।
3. खनन विभाग: जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि गतिवितीय वर्ष में लक्ष्य के विरुद्ध 129.6 0% राजस्व संग्रहण किया गया।
4. मत्स्य विभाग: जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध 60.52% राजस्व संग्रहण किया गया। जिसपर उपायुक्त ने सम्बंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया की शत-प्रतिशत लक्ष्य सुनिश्चित करें।
“राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता”
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी विभागों द्वारा विगत वित्तीय वर्ष में लक्ष्य प्राप्ति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रहण को गति प्रदान की जाए और लक्ष्य की पूर्ति के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त-सह-अध्यक्ष अनुकंपा समिति श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
समिति द्वारा की गयी कुल 27 अभ्यावेदनों की समीक्षा
समिति द्वारा 06 अभ्यावेदन को किया गया स्वीकृत
रांची,11.06.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त-सह-अध्यक्ष अनुकंपा समिति श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 11.04.2026 जिलास्तरीय अनुकंपा समिति की बैठक आयोजित की गयी।
बैठक में समिति द्वारा सामान्य एवं चौकीदार से संबंधित अभ्यावेदनों की विस्तार से समीक्षा की गई। समिति द्वारा कुल 27 अभ्यावेदनों की समीक्षा की गयी। अभ्यावेदनों पर विचार विमर्श के बाद समिति ने 06 अभ्यावेदनों पर स्वीकृति प्रदान की गयी। शेष अन्य अभ्यावेदनों पर त्रुटि सुधार का निर्देश दिया गया।
बैठक में अपर समाहर्त्ता रांची, प्रभारी जिला स्थापना उप समाहर्त्ता-सह- सामान्य शाखा, कार्यपालक अभियंता भवन निर्माण विभाग, रांची एवं संबंधित विभाग के पदाधिकारी/प्रतिनिधि उपस्थित थे।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार बैठक
गैस एजेंसियों को बैकलॉग शीघ्र खत्म करने और होम डिलीवरी सुनिश्चित करने का निर्देश
IOCL प्रतिनिधि को एजेंसियों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश
रांची,11.06.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारू बनाने के उद्देश्य से अनुमण्डल पदधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी श्री कुमार रजत की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, रांची, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि तथा उरांव गैस एजेंसी, आनंद गैस एजेंसी एवं इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा तीनों गैस एजेंसियों की बैकलॉग की समीक्षा की। समीक्षा में यह पाया गया कि इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी में 4164, आनंद गैस एजेंसी में 6800 तथा उरांव गैस एजेंसी में 3733 गैस सिलेंडरों की डिलीवरी लंबित है, जिनके डीएसी नंबर भी जनरेट किए जा चुके हैं। इस पर अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे यथाशीघ्र उपभोक्ताआंे को गैस की डिलीवरी सुनिश्चित करें। साथ ही, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि एजेंसियों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करें, जिससे वितरण प्रक्रिया बाधित न हो।
भीड़ नियंत्रण एवं उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी गैस एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे अधिक से अधिक होम डिलीवरी व्यवस्था को प्रभावी बनाएं, ताकि सड़कों पर अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सके और उपभोक्ताओं को घर बैठे गैस सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध हो।