एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अपनी तरह का पहला ‘मधुमक्खी गलियारा’ विकसित करेगा

नई दिल्ली – सतत अवसंरचना विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे परागणकारी या मधुमक्खी गलियारे विकसित करने की एक अनूठी पहल की घोषणा की है।
सजावटी वृक्षारोपण से पारिस्थितिक वृक्षारोपण की ओर बदलाव को दर्शाते हुए इस ‘मधुमक्खी गलियारे’ में मधुमक्खी-अनुकूल वनस्पतियों, जिसमें फूलों के पेड़ और पौधे शामिल होंगे, की निरंतर रैखिक श्रृंखला होगी जो पूरे वर्ष मकरंद और पराग की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण परागणकारी संरक्षण में सहयोग करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह पहल मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों पर बढ़ते पारिस्थितिक तनाव को कम करने में मदद करेगी, जो परागण सेवाओं, कृषि और बागवानी उत्पादकता और समग्र पारिस्थितिक संतुलन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपनी वृक्षारोपण गतिविधियों को समर्पित परागणकारी या ‘मधुमक्खी गलियारे’ बनाने की दिशा में संरेखित करेगा। इस अनूठी पहल में वृक्षों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और घासों का मिश्रण शामिल होगा, जो मकरंद और पराग से भरपूर प्रजातियों को लगाकर जंगली तत्वों को संरक्षित करेगा। साथ ही, परागणकारी जीवों के लिए लाभकारी मृत लकड़ी और खोखले तने भी लगाए जाएंगे।

पौधों की प्रजातियों का चयन इस प्रकार किया जाएगा कि विभिन्न ऋतुओं में फूलों का खिलना अलग-अलग समय पर हो, जिससे पूरे वर्ष लगभग निरंतर फूल खिलने का चक्र बना रहे। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस सहित देशी प्रजातियों के पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे।

कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय उपयुक्तता के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों और एनएचएआई के अन्य खाली भू खंडो पर ऐसे गलियारे विकसित किए जाएंगे। देशभर में स्थित एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय उन राष्ट्रीय राजमार्ग के खंडों की पहचान करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलों वाले पेड़ों के समूह लगाए जा सकें, जो मधुमक्खियों और जंगली मधुमक्खियों की औसत चारा खोजने की दूरी के अनुरूप है।

एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय 2026-27 के दौरान कम से कम तीन परागणकारी गलियारों की योजना बनाएंगे और उन्हें विकसित करेंगे। एनएचएआई का लक्ष्य  वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख पेड़ लगाने का है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत वृक्ष ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल के अंतर्गत लगाए जाएंगे।

यह अनुठी ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल पारिस्थितिक परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करेगी, परागणकर्ताओं के संरक्षण में योगदान देगे और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए एनएचएआई की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।

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केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बिहार के उप-मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, बिहार सरकार में उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, बिहार सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी एवं खेल मंत्री सुश्री श्रेयासी सिंह, राज्यसभा सांसद श्री संजय कुमार झा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पंचायती राज मंत्रालय का यह पवेलियन जमीनी स्तर पर शासन में पारदर्शिता, सटीकता और दक्षता बढ़ाने के लिए मंत्रालय द्वारा विकसित एआई-सक्षम प्लेटफार्मों को प्रदर्शित कर रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026 के दौरान सभासार, प्रमाण (पीआरएएमएएन) और ईग्रामसाथी का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “सरपंच की चौपाल, एआई का कमाल” शीर्षक से नुक्कड़ नाटक है, जिसमें दर्शाया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस प्रकार ग्रामसभा की कार्य प्रणाली को संरचित दस्तावेज़ीकरण और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से सुदृढ़ कर सकती है। शिखर सम्मेलन के विषय “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के तहत मंत्रालय के हस्तक्षेप ग्राम सभा की कार्यवाही के विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड को संस्थागत बनाने, परिसंपत्ति निगरानी में प्रामाणिकता सुनिश्चित करने और वास्तविक समय में शासन सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं।

सभासार ग्राम स्थानीय भाषाओं में ग्रामसभा की बैठकों की एआई आधारित रिकॉर्डिंग, ट्रांसक्रिप्शन और संरचित बैठकों के कार्यवृत्त को स्वाचालित रूप से तैयार करने की सुविधा प्रदान करता है। प्रमाण (पीआरएएमएएन) विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत परिसंपत्ति की तस्वीरों के स्वचालित सत्यापन और गुणवत्ता जांच के लिए इमेज एनालिटिक्स का उपयोग करता है। ईग्रामसाथी पंचायत पदाधिकारियों और नागरिकों को एआई-संचालित, वास्तविक समय की सूचना सहायता प्रदान करता है। ये प्रौद्योगिकी-आधारित पहलें प्रधानमंत्री के उस विजन के अनुरूप हैं, जिसमें डिजिटल नवाचार का लाभ उठाकर सहभागी लोकतंत्र को गहरा करना और देश भर में अंतिम छोर तक शासन को मजबूत करना शामिल है।

आगंतुक 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम (हॉल 5, बूथ 5F5 एवं 5F9) में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का अनुभव कर सकते हैं। पवेलियन में “सरपंच बनें” नामक एक प्रत्यक्ष इंटरैक्टिव सिमुलेशन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पारंपरिक नुक्कड़ नाटक प्रारूप के माध्यम से एआई-सक्षम निर्णय दस्तावेजीकरण का प्रदर्शन किया जाता है, साथ ही मंत्रालय के एआई प्लेटफार्म के लाइव मार्गदर्शित प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।

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उपराष्ट्रपति ने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को उनकी पुण्य तिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

 

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने श्री कर्पूरी ठाकुर को एक सच्चे ‘जन नायक’ के रूप में याद किया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय, वंचितों के सशक्तिकरण और जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी सादगी, ईमानदारी और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता राष्ट्र को प्रेरित करती रहेगी और हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगी।

 

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए जनहित में बुद्धि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुणों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज के लिए सही मायने में उपयोगी बनाने में बुद्धिमत्ता, तर्कशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता के महत्व पर जोर दिया। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नागरिकों के कल्याण के लिए कैसे किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स  पर प्राचीन ज्ञान का हवाला देते हुए बुद्धि के शाश्वत गुणों पर विचार व्यक्त किया:

“बुद्धिमत्ता, तर्कशीलता और निर्णय-क्षमता विज्ञान और टेक्नोलॉजी को जन-जन के लिए उपयोगी बनाती हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्देश्य भी यही है कि कैसे एआई का इस्तेमाल सर्वजन के हित में हो।

शुश्रूषा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणां तथा।

ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः॥”

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चेन्नई में कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में प्रथम कैडेट प्रशिक्षण पोत – कृष्णा को लॉन्च किया गया

नई दिल्ली – तमिलनाडु में चेन्नई के कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में निर्माणाधीन तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों (सीटीएस) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपराओं के अनुरूप, श्रीमती अनुपमा चौहान ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उपस्थिति में इस जहाज को लॉन्च किया। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी और मेसर्स एल एंड टी शिपबिल्डिंग, चेन्नई के अधिकारी उपस्थित थे।

इस जहाज को स्वदेशी रूप से मेसर्स एल एंड टी ने डिजाइन और निर्मित किया है। इस जहाज को औपचारिक तौर पर वर्ष 2026 के अंत में भारतीय नौसेना को सौंपना है। इन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों का उपयोग बुनियादी प्रशिक्षण के बाद समुद्र में अधिकारी कैडेटों (महिलाओं सहित) और मित्र देशों के कैडेटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा।

स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में यह भारतीय नौसेना के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्वदेशी जहाज का यह लॉन्च भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है।

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वायु सेना प्रमुख मार्शल एपी सिंह का दक्षिणी वायु कमान कमांडरों के सम्मेलन के लिए मुख्यालय एसएसी का दौरा

नई दिल्ली – वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 16 फरवरी 2026 को दक्षिणी वायु कमान (एसएसी) के वार्षिक कमांडर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय पहुंचे। उनका स्वागत एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, एसएसी एयर मार्शल मनीष खन्ना ने किया और उनके आगमन पर उन्हें औपचारिक सलामी गारद दी गई।

सीएएस को जारी पहलों, दक्षिणी क्षेत्र की वायु रक्षा सहित प्रचालनगत तत्परता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय वायु सेना की पहुंच और क्षमताओं के निरंतर विस्तार के बारे में जानकारी दी गई। सम्मेलन की थीम ‘निर्णय स्वायत्तता के माध्यम से प्रचालनगत दक्षता’ थी, जिसने विकेंद्रीकृत नेतृत्व के माध्यम से आधुनिक युद्ध के प्रति भारतीय वायु सेना के विकसित होते दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान, सीएएस ने एसएसी के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों के फील्ड कमांडरों से परस्‍पर बातचीत की और गतिशील सुरक्षा वातावरण में त्वरित प्रतिक्रिया, मिशन की सफलता और प्रचालनगत लाभ बनाए रखने में विकेंद्रीकृत निर्णय लेने की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने अपील की कि विश्वास, जवाबदेही और स्पष्ट इरादे कमांडरों को रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुए स्वायत्तता का प्रयोग करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कमांडरों से नवोन्‍मेषण को  बढ़ावा देने, संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और संयुक्तता को सुदृढ़ करने का आग्रह किया जिससे कि भारतीय वायु सेना एक शक्तिशाली और भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस शक्ति बनी रहे।

 

 

 

 

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प्रधानमंत्री ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति से भेंट की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से भेंट की।

एक्स पर एक पोस्ट में, श्री मोदी ने लिखा:

“पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी से शानदार मुलाक़ात। विभिन्न विषयों पर उनकी अन्‍तर्दृष्टि सदैव विचारशील और समृद्ध करने वाली होती है।”

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प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज शाम उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन जी से मुलाकात की।

एक्‍स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

“आज शाम उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन जी से मुलाकात की।

“Called on Vice President Thiru CP Radhakrishnan Ji at Uprashtrapati Bhavan earlier this evening.

@VPIndia

@CPR_VP”

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रक्षा मंत्री ने बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में मिसाइल एकीकरण सुविधा का उद्घाटन किया

उन्होंने आकाश तृतीय एवं चतुर्थ रेजिमेंट की युद्ध प्रणालियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अत्याधुनिक माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का अनावरण भी किया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 16 फरवरी, 2026 को बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का दौरा किया और परिसर में स्थापित मिसाइल एकीकरण सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आकाश तृतीय एवं चतुर्थ रेजिमेंट की युद्ध प्रणालियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अत्याधुनिक माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का अनावरण किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पुणे स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एआई) का सुदूर से उद्घाटन किया और कंपनी की एआई नीति का औपचारिक रूप से शुभारंभ भी किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित एआई-आधारित समाधानों सहित अनेक उन्नत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी गई, जो रक्षा क्षेत्र में नवाचार एवं स्वदेशीकरण पर बढ़ते ध्यान को दर्शाती है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों, एवियोनिक्स, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स तथा टैंक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रगति के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) की सराहना की। उन्होंने कहा, “बीईएल ने नेटवर्क-केंद्रित संचालन को सशक्त बनाया है। इसकी एकीकृत प्रणालियां, वास्तविक समय में डेटा साझा करने की क्षमता तथा निर्णय समर्थन प्रणालियाँ हमारी युद्धक क्षमता को एक नए स्तर तक ले गई हैं।”

 

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) में संचालित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के बारे में अवगत कराया गया, जो प्रमुख राष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रमों के अनुरूप हैं। इनमें त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (क्यूआरएसएएम), लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट मार्क-II (एलसीए एमके-II), एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए), प्रोजेक्ट कुशा (एमआर-एसएएम/एलआर-एसएएम), काउंटर-ड्रोन प्रणाली, नौसेना हथियार नियंत्रण प्रणाली आदि शामिल हैं। प्रस्तुतीकरण में इस तथ्य पर विशेष बल दिया गया कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास पहल थल, वायु, नौसेना और रणनीतिक क्षेत्रों में परिचालन तत्परता को सुदृढ़ कर रही हैं, साथ ही विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता को कम कर रही हैं। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वायु क्षेत्र रक्षा तथा ड्रोन-रोधी अभियानों हेतु विकसित प्रणालियों ने भारत के स्वदेशी समाधान वैश्विक मानकों के अनुरूप सिद्ध किया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खतरों को निष्प्रभावी करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया गया। श्री सिंह ने कहा कि एआई के माध्यम से खतरे की भविष्यवाणी, पूर्व चेतावनी और प्रतिक्रिया तंत्र में हुई प्रगति से हमारे सैनिकों में परिचालन आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। उन्हें यह भरोसा है कि एक सशक्त वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रणाली सदैव उनके साथ खड़ी है। श्री सिंह ने वर्तमान समय में स्वदेशी हथियारों एवं प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विजय प्राप्त करने के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केवल आत्मनिर्भरता से अर्जित जीत ही राष्ट्र को नया आत्मविश्वास प्रदान करती है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग अब केवल भविष्य की अवधारणाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि वास्तविक समय में निर्णय-निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर रक्षा तथा सटीक अभियानों में इनके उपयोग से युद्धक्षेत्र की प्रकृति में व्यापक परिवर्तन आ रहा है। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में उन्होंने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), अन्य रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और उद्योग भागीदारों से आग्रह किया कि वे आने वाली नई तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने बीईएल के अनुसंधान एवं विकास समुदाय को प्रोत्साहित किया कि वह एआई व स्वायत्त प्रणालियों में नवीनतम प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए स्टार्टअप्स, उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर चुस्त उत्पाद विकास को बढ़ावा दे। इसके साथ ही, श्री सिंह ने बीईएल द्वारा विश्व-स्तरीय उत्पाद विकसित करने हेतु अंतर-विषयक सहयोग, नवाचार तथा तीव्र प्रोटोटाइपिंग को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह प्रयास ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप हो।

इस ब्रीफिंग के दौरान, बेल्जियम और यूरोपीय संघ (बीईएल) की केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं, सीओई-इलेक्ट्रॉनिक्स वॉरफेयर एंड फोटोनिक्स, सीओई-कम्युनिकेशन, सीओई-रडार एंड वेपन सिस्टम्स और उत्पाद विकास एवं नवाचार केंद्र द्वारा किए गए स्वदेशीकरण संबंधी उपायों को प्रदर्शित किया गया। स्टार्टअप्स और उद्योग भागीदारों ने भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने स्टार्टअप्स एवं युवा वैज्ञानिकों से संवाद किया और उन्हें अधिक से अधिक उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, अपर सचिव एवं अधिग्रहण महानिदेशक ए. अनबरासु और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मनोज जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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हेलेनिक नौसेना के जनरल स्टाफ प्रमुख वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस का भारत दौरा  

नई दिल्ली – हेलेनिक नौसेना के जनरल स्टाफ के प्रमुख, वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास, समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से 16 से 19 फरवरी 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं।

वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास ने नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जिसका उद्देश्य संयुक्त अभियान, क्षमता निर्माण, संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर महत्व के अन्य मुद्दों सहित समुद्री गतिविधियों को आगे बढ़ाना था।

वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने गुरुग्राम स्थित इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर फॉर इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) का भी दौरा किया।

अपनी यात्रा के दौरान वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और मिलान-2026 में भाग लेंगे।

हेलेनिक नौसेना भारतीय नौसेना की एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है और वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस की यह यात्रा भारत-हेलेनिक नौसेना संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि है और इसका उद्देश्य साझा हितों और समग्र समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

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भारत सरकार ने आंशिक रूप से चालू राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए शुल्क नियमों में संशोधन किया

भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया।

इसके तहत जब कोई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक नहीं खोला जाता है, तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नियमों के अनुसार केवल पूर्ण किए गए राजमार्ग के लिए ही टोल शुल्क वसूला जाएगा।

संशोधित नियम 15 फरवरी, 2026 से प्रभावी होंगे।

नई दिल्ली – भारत सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (जो केवल आंशिक रूप से चालू हैं) के उपयोगकर्ताओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।

वर्तमान में राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर उपयोगकर्ता शुल्क पूरी लंबाई के लिए सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ता शुल्क से 25% अधिक है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का उद्देश्य आवागमन को नियंत्रित, तेज और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना है जो यात्रियों को आरामदायक यात्रा की सुविधा देता है।

यह शुल्क पूरे हो चुके हिस्से के लिए लिया जाता है, भले ही एक्सप्रेसवे अपनी पूरी लंबाई में शुरू से अंत तक पूरी तरह से खुला न हो।

नए प्रावधान के तहत जब तक राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पूरी तरह से नहीं खुल जाता, तब तक पूरी हो चुकी लंबाई के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के लिए लागू कम दर पर टोल शुल्क वसूला जाएगा।

इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के उपयोग को बढ़ावा देना है ताकि उपयोगकर्ताओं को खुले हुए हिस्सों से यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

इससे एक्सप्रेसवे के समानांतर मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग मार्गों पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी, माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी और साथ ही पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात जाम के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) (संशोधन) नियम, 2026 नामक संशोधित नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। यह नियम संशोधन के लागू होने की तारीख से एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से चालू होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

यह संशोधन भारत सरकार की एक और पहल है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के उपयोगकर्ताओं के लिए यात्रा को अधिक सुगम और किफायती बनाना है।

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संसद में प्रश्न: मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता

नई दिल्ली – भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मॉनसून के दौरान वर्षा के लिए सरलीकृत पूर्वानुमान रणनीति का पालन करता है। इस रणनीति के अनुसार यह अलग-अलग समय-सीमाओं और अलग-अलग स्थानिक-सीमाओं के लिए पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है।
मौसम पूर्वानुमान से सभी जिलों और लगभग 1200 स्टेशनों पर सभी प्रकार की गंभीर मौसम स्थितियों के लिए छह घंटे तक का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। यह शहरों, ब्लॉकों, जिलों और मौसम विज्ञान उपखंडों में वर्षा के लिए अल्प से मध्यम अवधि (7 दिनों तक) का पूर्वानुमान जारी करता है। 36 मौसम विज्ञान उपखंडों के लिए विस्तारित अवधि (4 सप्ताह तक) का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। पूरे देश और एक समान क्षेत्रों के लिए वर्षा के मासिक और मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान भी जारी किए जाते हैं।

वर्ष 2025 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए इसके मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान की सटीकता के नवीनतम आकलन से पता चलता है कि यह अत्यधिक सटीक था। अप्रैल 2025 में जारी पूर्वानुमान देश भर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) की वर्षा के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 105% था, जबकि देश भर में वास्तविक मौसमी वर्षा एलपीए का 108% थी, जो पूर्वानुमान त्रुटि की सीमा के भीतर है। देश के अधिकांश हिस्सों में पूर्वानुमान काफी हद तक सटीक थे। इसी प्रकार मासिक वर्षा का पूर्वानुमान भी काफी हद तक वास्तविक वर्षा से मेल खाता था और पूर्वानुमानित सीमा के भीतर ही रहा।

भारी वर्षा के पूर्वानुमान के प्रदर्शन की नवीनतम समीक्षा से पता चलता है कि 2025 में भारी वर्षा के पूर्वानुमान ने उच्च दक्षता का प्रदर्शन किया, जिसमें 0.85 की पहचान संभावना समग्र रूप से अच्छी सटीकता का संकेत देती है।

आईएमडी ने 2021 से मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) दृष्टिकोण पर आधारित मासिक और मौसमी पूर्वानुमान के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में विभिन्न वैश्विक जलवायु पूर्वानुमान और अनुसंधान केंद्रों के संयुक्त वैश्विक जलवायु मॉडल (सीजीसीएम) का उपयोग किया जाता है, जिसमें आईएमडी की मॉनसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) भी शामिल है। एमएमई-आधारित पद्धति को अपनाने के बाद से आईएमडी की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। वर्ष 2021 से 2025 की अवधि के लिए अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के आईएमडी के मौसम पूर्वानुमान के सत्यापन विवरण नीचे दिए गए हैं:

 

वर्ष अखिल भारतीय मॉनसून वर्षा (एलपीए)
वास्तविक (%) पूर्वानुमान (%) टिप्पणी
2021 99 101 सही
2022 106.5 103 सही
2023 95 96 सही
2024 108 106 सही
2025 108 106 सही
***मॉडल त्रुटि ± एलपीए का 4 प्रतिशत है

मौसमी और अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान के लिए आईएमडी अपने परिचालन पूर्वानुमान ढांचे के तहत कई उन्नत उपकरणों, मॉडलों और अवलोकन प्रणालियों का उपयोग करता है। मिशन मौसम के तहत भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS), एक उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया गया है, जो 6 किमी की बहुत उच्च स्थानिक रेजोल्यूशन पर पहले से ही संचालित है। इसमें 10 दिनों तक वर्षा घटनाओं की भविष्यवाणी करने की क्षमता है, जो अल्पकालिक और मध्यम-सीमा पूर्वानुमानों को कवर करती है।

इसके अलावा नियमित रूप से चलने वाले ऐसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल का समर्थन करने के लिए, कंप्यूटिंग सुविधाओं में भी काफी वृद्धि की गई है ताकि विशाल डेटा को एकीकृत किया जा सके और मेसो-स्केल, क्षेत्रीय और वैश्विक मॉडलों को उच्च रिजॉल्यूशन पर चलाया जा सके। हाल ही में उच्च शक्ति कंप्यूटिंग सिस्टम ‘अरुणिका’ और ‘अर्का के कार्यान्वयन के साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2025 में अपनी कुल कंप्यूटिंग क्षमता को 28 पेटा एफएलओपी तक बढ़ा दिया है, जो 2014 में पिछली क्षमता 6.8 पेटा एफएलओपी से काफी अधिक है।

आईएमडी मॉडल के प्रदर्शन को बेहतर बनाने, मॉडल आउटपुट की पोस्ट-प्रोसेसिंग, पैटर्न रिकग्निशन, बायस करेक्शन और प्रोबेबिलिस्टिक फोरकास्ट इंटरप्रिटेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित तरीकों को धीरे-धीरे एकीकृत कर रहा है। वर्तमान में मौसम अवलोकन प्रणाली में 48 डॉप्लर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) शामिल हैं जो देश के लगभग 92% हिस्से को कवर करने के साथ ही उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह-आधारित निगरानी और लगभग 6,300 वर्षामापी स्टेशन के साथ मिलकर काम करते हैं।

भारत में कुल 48 डीडब्ल्यूआर स्थापित और कार्यरत हैं। देश भर में जहां-जहां डीडब्ल्यूआर नेटवर्क स्थापित किया गया है, उन स्थानों की सूची परिशिष्ट-1 में दी गई है। इससे आईएमडी को बादल फटने, गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और चक्रवात जैसी गंभीर घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान में सुधार करने में मदद मिली है।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 12 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी थी।

परिशिष्ट-1

देश में वर्तमान डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) नेटवर्क के स्थान:

क्र.सं. राज्य स्थान
आंध्र प्रदेश मछलीपट्टनम
आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम
आंध्र प्रदेश श्रीहरिकोटा, इसरो
असम मोहनबाड़ी
असम जोरहाट
बिहार पटना
छत्तीसगढ़ रायपुर
गोवा गोवा
गुजरात भुज
हिमाचल प्रदेश जोत
हिमाचल प्रदेश मुरारी देवी
हिमाचल प्रदेश कुफरी
कर्नाटक मंगलौर
केरल कोच्चि
केरल वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम (इसरो)
मध्य प्रदेश भोपाल
मध्य प्रदेश सिलखेड़ा (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई
महाराष्ट्र नागपुर
महाराष्ट्र आईआईटीएम सोलापुर
महाराष्ट्र वेरावली
महाराष्ट्र मुंबई, जुहू (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, पनवेल (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, कल्याण, डोंबिवली (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, वसई, विरार (आईआईटीएम)
 
महाराष्ट्र महाबलेश्वर (आईआईटीएम)
मेघालय चेरापूंजी (इसरो)
ओडिशा गोपालपुर
ओडिशा पारादीप
पंजाब पटियाला
राजस्थान जयपुर
तमिलनाडु चेन्नई
तमिलनाडु कराईकल
तमिलनाडु एनआईओटी चेन्नई
तेलंगाना हैदराबाद
त्रिपुरा अगरतला
उत्तराखंड लैंसडाउन
उत्तराखंड मुक्तेश्वर
उत्तराखंड सुरकंडा देवी
उत्तर प्रदेश लखनऊ
पश्चिम बंगाल कोलकाता
जम्मू एवं कश्मीर बनिहाल टॉप
जम्मू एवं कश्मीर जम्मू
जम्मू एवं कश्मीर श्रीनगर
दिल्ली आयानगर
दिल्ली पालम
दिल्ली मुख्यालय मौसम भवन
लद्दाख लेह

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एनसीडीसी के अंतर्गत रोग निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम

नई दिल्ली – केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) वायरल हेपेटाइटिस की निगरानी के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (2012), राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (2017), लेप्टोस्पाइरोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्यक्रम (2013), जूनोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम (2013) चलाता है।
इसके लिए यह एनसीडीसी शाखाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण (2015) को लागू करता है और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) योजना के केंद्रीय क्षेत्र घटक के अंतर्गत संक्रामक रोगों की निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शाखाओं, जैव सुरक्षा स्तर-3 प्रयोगशाला (बीएसएल-3), एनसीडीसी क्षेत्रीय शाखाओं, महानगरीय निगरानी इकाइयों की स्थापना, एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) को सुदृढ़ करने और एनसीडीसी मुख्यालयों को सुदृढ़ और उन्नत करने के लिए कार्यक्रम लागू करता है।

इसके अतिरिक्त, एनसीडीसी कई अन्य कार्यक्रम भी चलाता है, जिनमें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी), सांप के काटने से होने वाले विष के निवारण एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, और जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) शामिल हैं। ये सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत आते हैं। एनसीडीसी के कार्यक्रमों/योजनाओं का विवरण निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है: https://ncdc.mohfw.gov.in/

सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि जारी करती है। (राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार पीआईपी का विवरण इस लिंक पर देखा जा सकता है: https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=1377&lid=744 

एनसीडीसी देश में रोग निगरानी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई उपाय करता है, जिनमें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) का कार्यान्वयन; कागज रहित, केस-आधारित तथा लगभग वास्तविक समय की निगरानी के लिए 2021 में एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) में संक्रमण; केंद्रीय, राज्य और जिला निगरानी इकाइयों की स्थापना; जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं (डीपीएचएल) को मजबूत करना; महानगरीय निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना; एनसीडीसी में वायरल हेपेटाइटिस प्रयोगशाला को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित करना और एनसीडीसी की राज्य तथा क्षेत्रीय शाखाओं की स्थापना और उन्हें मजबूत करना शामिल है।

महानगर निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना के लिए स्थानों की पहचान हेतु अपनाए गए मानदंडों में जनसंख्या का आकार और घनत्व, उच्च रोग भार और प्रकोप की संवेदनशीलता, शहरीकरण स्तर (टियर-I और टियर-II शहर), मौजूदा रोग निगरानी अवसंरचना में कमियां, सहायक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता शामिल हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्‍तर में यह बात कही।

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भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा और भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

नई दिल्ली – भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा और भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में चयन से उन्हें राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलता है। उन्होंने उन्हें यह याद रखने की सलाह दी कि ऐसे बहुत से युवा हैं जो ये सेवा करने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ को अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि वे कई लोगों के लिए प्रेरणा और रोल मॉडल बन सकते हैं और उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी उनके पूरे कार्यकाल के दौरान उनके साथ रहेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि उनके जैसे अधिकारी देश के विकास और प्रत्येक नागरिक की भलाई के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे तो हमारा राष्ट्र वैश्विक मंच पर मजबूत, अधिक सक्षम और अधिक सम्मानित होता रहेगा। उन्‍होंने कहा कि इन सेवाओं के अधिकारी जिस जुनून के साथ काम करते हैं, वह एक ऐसी ताकत है जो कल के भारत को बदल सकती है।

भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वे जनता के विश्वास और वित्तीय विवेक के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि शासन प्रणाली पर जवाबदेही के ढांचे का प्रभाव और मूल्यवर्धन तब बढ़ता है जब कार्यकारी और लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच तालमेल होता है। लेखा परीक्षा और कार्यकारी के बीच एक प्रभावी साझेदारी सार्वजनिक व्यय की प्रभावकारिता को बढ़ाने में मदद करती है और वांछित परिणामों की प्राप्ति में सहायता करती है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे हमेशा संविधान और सेवा की परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखने का प्रयास करें।

भारतीय व्यापार सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वे निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन करने और भारतीय व्यवसाय वैश्विक स्तर पर नवाचार, विस्तार और प्रतिस्पर्धा कर सकने योग्‍य वातावरण को बढ़ावा देने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शक दिशा-निर्देश हमेशा देश का राष्ट्रीय हित होना चाहिए। उन्होंने उन्हें यह याद रखने की सलाह दी कि वे जिस भी नीति को लागू करते हैं, प्रत्येक व्यापार बाधा को दूर करते हैं, प्रत्येक समझौता जिसका वे समर्थन करते हैं – भारत को एक मजबूत और विश्व स्तर पर अधिक सम्मानित व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरने में योगदान देगा।

 

रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि यह उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है कि वे हमारे रक्षा बलों के लिए तकनीकी रूप से उन्नत और विश्व स्तरीय हथियारों और गोला-बारूद के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करें। उनकी भूमिका उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और राष्ट्रीय रक्षा के एक महत्‍वपूर्ण  स्‍थान पर रखती है। उन्होंने अधिकारियों से सशस्त्र बलों को बहु-डोमेन एकीकृत संचालन में सक्षम तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध-तैयार बल में बदलने में योगदान देने के लिए नवीन दृष्टिकोण के साथ आने का आग्रह किया।

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भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास मिलन 2026 के अंतर्गत मिलन विलेज का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना ने अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 के अंतर्गत 15 फरवरी 2026 को पूर्वी नौसेना कमान में मिलन विलेज का अनावरण किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता वाइस एडमिरल संजय भल्ला, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान ने की। उन्होंने भाग लेने वाली मित्र नौसेनाओं के लिए औपचारिक रूप से मिलन विलेज का शुभारंभ किया और वैश्विक समुद्री सहयोग को प्रोत्साहित करने हेतु विकसित की गई सुविधाओं का निरीक्षण किया।

काफी विचार-विमर्श व सोच-समझ के बाद विकसित किया गया मिलन विलेज एक विशिष्ट अनुभव क्षेत्र है, जिसे 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और नौसेना कर्मियों को सौहार्द एवं मित्रता के वातावरण में एक साथ लाने के उद्देश्य से परिकल्पित व निर्मित किया गया है। यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र है, जो पेशेवर सीमाओं से आगे बढ़कर आपसी जुड़ाव और समझ को सशक्त बनाता है।

मिलन विलेज की एक प्रमुख विशेषता सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर इसका विशेष बल है, जो भारत की विविधतापूर्ण विरासत और परंपराओं की समृद्ध एवं जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। यह गांव गायकों की सजीव प्रस्तुतियों, पारंपरिक लोक नृत्य कार्यक्रमों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की मेजबानी करेगा, जो भारत की जीवंत व बहुरंगी कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करेंगे।

मिलन विलेज में नौसेना से संबंधित स्मृति चिन्हों के साथ-साथ हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों की अनेक दुकानें स्थापित की गई हैं, जो देशभर की समृद्ध कारीगरी का सुंदर प्रदर्शन करती हैं। इसके अतिरिक्त, आगंतुकों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के स्वादिष्ट एवं पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर भी प्राप्त होगा।

पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि मिलन विलेज सौहार्द और सांस्कृतिक जुड़ाव की उस भावना का प्रतीक है, जो पेशेवर नौसैनिक सहयोग को सुदृढ़ बनाती है। विशाखापत्तनम में आईएफआर, मिलन और आईओएनएस का क्रमिक आयोजन भारत की समुद्री पहुंच के विस्तार व मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोगात्मक जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मिलन विलेज के उद्घाटन के साथ ही भारतीय नौसेना द्वारा विशाखापत्तनम में आयोजित किए जाने वाले व्यापक कार्यक्रमों और गतिविधियों की श्रृंखला का शुभारंभ हो गया है। 15 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास मिलन 2026, अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (आईएफआर) 2026 और आयन्स कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स के साथ मिलकर भारत के ऐतिहासिक समुद्री अभिसरण का एक प्रमुख स्तंभ बनेगा।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आयोजित होने वाले सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक मिलन 2026 विश्व की अनेक नौसेनाओं को एक मंच पर लाएगा, ताकि आपसी सहभागिता, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ किया जा सके। अभ्यास के बंदरगाह और समुद्री चरण पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा, खोज व बचाव तथा सहयोगात्मक सुरक्षा अभियानों सहित जटिल समुद्री परिचालनों पर केंद्रित होंगे, जो स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित समुद्री सीमा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करेंगे।

मिलन 2026 के सांस्कृतिक केंद्रबिंदु के रूप में मिलन विलेज “भाईचारा, सहयोग और सहभागिता” की विषय-वस्तु को सजीव रूप प्रदान करता है। यह पारस्परिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने, मित्रता के सेतु को सुदृढ़ करने और सामूहिक समुद्री साझेदारी को मजबूत करने हेतु भाग लेने वाली नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का स्वागत किया।

“सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम पर आधारित यह शिखर सम्मेलन, मानव-केंद्रित प्रगति और समावेशी विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित विभिन्न सेक्‍टरों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं एआई के नवाचार, सहयोग और जिम्मेदार उपयोग पर वैश्विक विमर्श को समृद्ध करेंगी, जिससे एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक एआई परिवर्तन में भारत के नेतृत्व पर बल दिया, जो इसकी 1.4 बिलियन की जनसंख्या, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान की शक्ति से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई में भारत की प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है, जिसने देश को प्रौद्योगिकीय उन्नति में अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है।

श्री मोदी ने एक्स पर एक थ्रेड पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“एआई पर चर्चा करने के लिए पूरी दुनिया ए‍कत्रित है!”

आज से भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है। मैं इस समिट में वैश्विक नेताओं, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकीय को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। समिट की थीम “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

“आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई सेक्‍टरों में बदलाव ला रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट एआई के विविध पहलुओं, जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा। मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।”

उन्‍होंने कहा, “भारत की 1.4 बिलियन जनता की बदौलत हमारा देश एआई परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।”

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प्रधानमंत्री ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट को युवाओं की शक्ति और तकनीकी प्रगति का प्रमाण बताते हुए सराहा और एक संस्कृत सुभाषित साझा किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर से आए नेताओं, नवप्रवर्तकों और विशेषज्ञों के एकत्र होने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण पल बताते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के युवाओं में मौजूद अपार क्षमता तथा वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के बढ़ते कद को साफ तौर पर दिखाता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक प्राचीन श्लोक का संदर्भ देते हुए X पर लिखा:

“यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है।

“दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये।

विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”

 

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चेन्नई में अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप-उद्यमिता सम्मेलन 2026 संपन्न

नई दिल्ली – चेन्नई स्थित ट्रेड सेंटर में दो दिवसीय अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप-उद्यमिता (आरआईएसई) सम्मेलन 2026 आज संपन्न हो गया। इसमें शैक्षिक जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में सरकार ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप नवाचार-आधारित विकास सुदृढ़ करने और वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों में प्रयुक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

राइज़ 2026 चार महत्वपूर्ण स्तंभ अनुसंधान, उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमिता का अनूठा संगम है जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आवश्यक हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 फरवरी 2026 को इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के अनुसंधान-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में स्टार्टअप की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्टार्टअप एक्सपो का भी उद्घाटन किया और प्रतिभागी उद्यमियों से बातचीत की।

सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण स्टार्टअप एक्सपो में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएलआरआई), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय विद्युत रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीईसीआरआई) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एसईआरसी) सहित वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी से जुड़े 100 से अधिक स्टार्टअप शामिल हुए। एक्सपो में उन्नत सामग्री, विद्युत रासायनिक प्रौद्योगिकियों, अवसंरचना प्रणालियों, सतत विनिर्माण और गहन तकनीकी समाधानों के क्षेत्र में अत्याधुनिक नवाचार प्रदर्शित किये गये। यह सीएसआईआर के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण प्रयासों के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई विषयगत सत्र आयोजित किए गए। विज्ञान संचार पर एक पैनल परिचर्चा में वैज्ञानिक सोच प्रोत्साहित करने और अनुसंधान एवं नवाचार में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रभावी संचार के महत्व पर विमर्श हुआ। अकादमी-संस्थान-उद्योग साझेदारी पर एक अन्य पैनल परिचर्चा में वैज्ञानिक ज्ञान और कौशल के उपयोग, व्यावसायीकरण और उद्योग-अनुकूल समाधानों को गति देने तथा राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के सहयोगात्मक ढांचे पर बातचीत हुई।

कार्यक्रमों में विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी विशेषज्ञों की उद्योग वार्ता भी हुई, जिसमें उन्होंने सिस्टम इंजीनियरिंग (जटिल प्रणालियों के विकास, एकीकरण और प्रबंधन पर केंद्रित अंतर्विषयक क्षेत्र), उत्पाद विकास, इंजीनियर निर्माण समाधान और उद्यमशीलता के अनुभवों पर अपने विचार साझा किए। इन चर्चाओं ने सतत अनुसंधान-उद्योग सहयोग के महत्व और भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता विकसित करने में एकीकृत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

सम्मेलन के समापन सत्र में सीएसआईआर-सीएलआरआई निदेशक डॉ. पी. थानिकैवेलन, सीएसआईआर-एसईआरसी निदेशक डॉ. एन. आनंदवल्ली और सीएसआईआर-सीईसीआरआई निदेशक डॉ. के. रामेशा ने प्रतिभागी स्टार्टअप्स और छात्रों की विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किये। कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीएलआरआई के उत्कृष्ट वैज्ञानिक और पूर्व निदेशक डॉ. केजे श्रीराम ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच समन्वय और साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकी के व्यावसायिक अनुप्रयोग, उद्यमिता और नवाचार-संचालित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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एनबीए ने भारत के 24 जिलों में जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए एबीएस वितरण के माध्यम से ₹10.40 लाख की राशि जारी की

नई दिल्ली – जैव-विविधता के संरक्षण को मजबूती प्रदान करने और स्थानीय समुदायों का समर्थन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण(एनबीए) ने देशभर के लाभार्थियों को पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) ढांचे के तहत 10.40 लाख रूपए की राशि जारी की है।
एबीएस ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के संरक्षण में लगे समुदायों को उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ का न्यायसंगत हिस्सा प्राप्त हो, और यह भारत की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करता है।

वर्तमान एबीएस वितरण से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, मेघालय, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और हरियाणा सहित नौ-राज्यों और एक-केंद्र शासित प्रदेश के 24 जिलों के जैव-विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को लाभ मिलेगा।

ये बीएमसी ग्रामीण गांवों, तटीय क्षेत्रों और शहरी स्थानीय निकायों सहित विविध पारिस्थितिक परिदृश्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां स्थानीय समुदाय जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा, हरियाणा में डेयरी फार्म चलाने वाले किसान को भारत की प्रसिद्ध मुर्रा नस्ल के भैंस प्रदान करने के लिए एबीएस राशि दी गई, जिससे देशी जानवरों के महत्व को मान्यता मिली।

एबीएस निधि कई जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से बनाई गई थी, जो भारत के बायो-आर्थिक क्षेत्र के विकास में मदद करती हैं। इनमें जैव-प्रौद्योगिकी और दवाईयों में उपयोग किए जाने वाले सूक्ष्मजीव जैसे लाभकारी बैक्टीरिया, पौष्टिक-औषधीय पदार्थों और टिकाऊ जैव-उत्पादों में लगाए जाने वाले समुद्री सूक्ष्म शैवाल एवं कृषि, प्रसाधन सामग्री और खाद्य उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले सीवीड शामिल हैं।

प्राप्त जैविक संसाधनों में तुलसी के पत्ते, सहजन (मोरिंगा) के बीज, नीम के बीज, रीठा के बीज, रोज़मेरी के पत्ते, अश्वगंधा की जड़ें, मशरूम से प्राप्त कीटोसैन, और पैसिफिक व्हाइट श्रिम्प शामिल हैं। ये उदाहरण दिखलाते हैं कि जैव विविधता न सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार, उद्योगों के विकास और ग्रामीण आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एबीएस तंत्र के माध्यम से, जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं द्वारा होने वाले लाभ का एक हिस्सा उन स्थानीय समुदायों के साथ साझा किया जाता है, जो इन जैविक संसाधनों का संरक्षण करते हैं। यह प्रणाली संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को भी बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय स्तर पर एबीएस वितरण का संचयी मूल्य ₹145 करोड़ (लगभग 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुका है, जो भारत के जैव-विविधता शासन ढांचे के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) भारत की पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) के लिए जैव-विविधता पर सम्मेलन और नागोया प्रोटोकॉल के तहत प्रतिबद्धताओं को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है, साथ ही राष्ट्रीय जैव-विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा में भी योगदान दे रहा है।

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रांची प्रेस क्लब मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट की चैंपियन बनी स्वर्णरेखा

टीम स्वर्णरेखा ने टीम गंगा को 7 रन से हराया

शिव राम बने मैन ऑफ द मैच

रांची,16.02.2026 –  रांची प्रेस क्लब मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में टीम गंगा को सात रन से हराकर टीम स्वर्णरेखा चैंपियन बनी।

जेके इंटरनेशनल क्रिकेट एकेडमी में आयोजित इस मुकाबले में ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए स्वर्णरेखा के शिव राम को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

वहीं, पूरे टूर्नामेंट में अपने बल्ले, गेंद से कमाल करने वाले मोनू कुमार को मैन ऑफ द सीरीज, बेस्ट बैट्समैन, बेस्ट बॉल का खिताब मिला।

दोनों फाइनलिस्ट टीम के सभी सदस्यों का 10-10 लाख का दुर्घटना बीमा भी कराया गया।

गंगा और स्वर्णरेखा के बीच खेले गए फाइनल मुकाबले में गंगा की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी स्वर्णरेखा की टीम ने निर्धारित 16 ओवरों में 6 विकेट खोकर 133 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया।

स्वर्णरेखा की ओर से विजय कुमार ने सर्वाधिक 49 रनों का योगदान दिया, जबकि शिव राम ने 36 रन और मोनू कुमार ने 24 रन की उपयोगी पारी खेली। गंगा की ओर से गेंदबाजी में ओम प्रकाश झा सबसे सफल रहे। उन्होंने 2 विकेट झटके, वहीं दिवाकर और संतोष को 1-1 विकेट मिला।

134 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गंगा की टीम 16 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 126 रन ही बना सकी और लक्ष्य से चूक गई. गंगा की तरफ से ओम प्रकाश झा ने 52 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी और समीर सृजन ने 38 रन की पारी खेली, लेकिन वे अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए।

स्वर्णरेखा की ओर से आसिफ नईम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन ओवर में 18 रन देकर दो विकेट लिये, जबकि मोनू कुमार और शिव राम को 1-1 विकेट मिला। शिव राम को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

फाइनल मुकाबले का उद्घाटन झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने किया। उन्होंने दोनों टीम के खिलाड़ियों के परिचय प्राप्त किया, जबकि टॉस कराकर विधिवत उद्घाटन किया।

फाइनल के समापन पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने खिलाड़ियों को खिताब और अन्य पुरस्कार दिये।

जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव, टाटा के कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन हेड राजेश रंजन, टाटा स्पोट्स हेड मनीष सिन्हा, टाटा के मीडिया रिलेशन एसोसिएट डायरेक्टर अमित गुप्ता, मैनेजर, कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन निभा शर्मा, टाटा स्टील के सीनियर मैनेजर सीएम एंथोनी, टाटा स्टील सीआरई ऑफिस सूरज कुमार शर्मा समेत अन्य मौजूद थे।

फाइनल : स्वर्णरेखा – गंगा

विजयी टीम : स्वर्ण रेखा (छह रन से जीती)

मैन ऑफ द मैच : शिव राम

मैन ऑफ द सीरीज : मोनू कुमार

बेस्ट बैट्समैन : मोनू कुमार

बेस्ट बॉलर : मोनू कुमार

बेस्ट फिल्डर : संतोष सिन्हा

बेस्ट विकेटकीपर : विजय कुमार

वेटरन प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट : ओपी झा

बेस्ट डिसिप्लिन टीम : अमानत

मीडिया कप क्रिकेट प्रतियोगिता 2026 के आयोजन को सफल बनाने में जुटे सभी 421 खिलाड़ी व उनके परिजन, दर्शक, सभी गण्यमान अतिथितिगण, संसाधन उपलब्ध करानेवाले समस्त वेंडर-संस्थाएं, सभी अंपायर-स्कोरर-कैमरामैन, सफाई में जुटे सभी साथी, सुरक्षा प्रहरी, जेके स्टेडियम के ग्राउंडसमैन व अन्य सभी स्टाफ और प्रतियोगिता के सभी प्रायोजकों का हृदय से आभार।

आप सभी की मेहनत व सहयोग के बगैर ये आयोजन संभव नहीं था।

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उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत सत्र 2026-27 में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया

सभी आवेदन जिला की आधिकारिक RTE वेबसाइट www.rteranchi.in पर भरे जाएंगे

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ 16 फरवरी 2026 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 दस्तावेज़ सत्यापन 16 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026, लॉटरी द्वारा चयन सूची प्रकाशन 28 मार्च 2026 (संभावित)

हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिले:- उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री

राँची,16.02.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत सत्र 2026-27 में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया।

इस दौरान जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज एवं जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी राँची, श्री राजीव कुमार एवं इससे सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राँची जिला प्रशासन द्वारा समाज के कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री, के निर्देशन में राँची जिले के CBSE/ICSE एवं अन्य मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग , अभिवंचित समूह तथा दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत प्रवेश स्तर की कक्षाओं (नर्सरी/एल.के.जी./यू.के.जी./कक्षा-1) में कुल 1176 सीटें 25% आरक्षण के अंतर्गत आरक्षित की गई हैं।

इस वर्ष सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, ऑनलाइन एवं रैंडमाइज्ड लॉटरी सिस्टम पर आधारित होगी, ताकि किसी भी प्रकार की पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश न रहे। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे भी उत्कृष्ट निजी विद्यालयों में पढ़ाई कर सकें और मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें।

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी — कोई भी आवेदन ऑफलाइन नहीं लिया जाएगा।

चयन प्रक्रिया — रैंडमाइज्ड लॉटरी (कंप्यूटरीकृत रैंडम सिलेक्शन) के माध्यम से विद्यालय आवंटन।

सहायता व्यवस्था — अभिभावकों की सुविधा हेतु जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), राँची के कार्यालय में हेल्प डेस्क/सहायता काउंटर स्थापित किया गया है, जहाँ आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की जाएगी।

चयन सूची का प्रकाशन — निर्धारित तिथि पर आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी।

आवेदन पोर्टल — सभी आवेदन जिला की आधिकारिक RTE वेबसाइट www.rteranchi.in पर भरे जाएंगे।

महत्वपूर्ण तिथियाँ (सत्र 2026-27)

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ : 16 फरवरी 2026
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि : 15 मार्च 2026
दस्तावेज़ सत्यापन : 16 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026
लॉटरी द्वारा चयन सूची प्रकाशन : 28 मार्च 2026 (संभावित)
प्रथम चरण नामांकन : 31 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026

पात्रता मानदंड निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चे इस योजना के लिए पात्र हैं (आयु की गणना 31 मार्च 2026 के आधार पर की जाएगी)

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग — परिवार की वार्षिक आय ₹72,000/- से कम।
अभिवंचित समूह — अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि।
दिव्यांग बच्चे — 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले बच्चे।
-बच्चे का निवास राँची जिले के निर्धारित क्षेत्र में होना चाहिए।

आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज़

– बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र/आयु प्रमाण।
– आय प्रमाण पत्र
– निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, आधार आदि)।
– दिव्यांगता प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

पूर्ण विवरण एवं आवेदन प्रक्रिया के लिए कृपया आधिकारिक वेबसाइट www.rteranchi.in पर जाएँ। गलत या अपूर्ण जानकारी/दस्तावेज़ देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा की शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार आइए मिलकर साकार करें। हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिले। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अनुपालन में, राँची जिला प्रशासन द्वारा सत्र 2026-27 के लिए CBSE/ICSE/निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं (नर्सरी/एल.के.जी./यू.के.जी./कक्षा-1) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया।

इस वर्ष राँची जिले में कुल 1176 सीटें RTE कोटे के अंतर्गत आरक्षित हैं, जिन पर बीपीएल (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग), वंचित समूहों तथा 40% या अधिक दिव्यांगता वाले बच्चों को निःशुल्क एवं उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

जिला प्रशासन, राँची सभी योग्य अभिभावकों से अपील करता है कि वे निर्धारित अवधि (16 फरवरी से 15 मार्च 2026) के भीतर अपना आवेदन अवश्य जमा करें और इस जनहितकारी योजना का लाभ उठाएँ। शिक्षा हर बच्चे का है अधिकार आइए, मिलकर करें साकार।

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026: सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु (नगर निगम क्षेत्र) ने सामग्री कोषांग का किया निरीक्षण

सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु (नगर निगम क्षेत्र) ने सामग्री कोषांग का किया निरीक्षण

मतदान दलों को उपलब्ध कराए जाने वाली सामग्री का सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश

नई दिल्ली –  नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 के सफल, निष्पक्ष एवं पारदर्शी संचालन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां जारी हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23.02.2026 को मतदान संपन्न कराया जाएगा, जबकि 21.02.2026 को फुटबॉल स्टेडियम अवस्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों को मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए सामग्री कोषांग में सभी आवश्यक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

इसी क्रम में रांची नगर निगम क्षेत्र के सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु द्वारा सामग्री कोषांग का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मतदान में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की उपलब्धता, पैकेजिंग, लेबलिंग, सीलिंग एवं सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था का जायजा लिया।

सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु द्वारा मतदान दलों को उपलब्ध कराए जाने वाले किट की तैयारी, स्टेशनरी सामग्री की समुचित पैकिंग तथा प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए सामग्री का सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिया गया। उन्होंने डिस्पैच के दिन किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए चेकलिस्ट आधारित सत्यापन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रत्येक स्तर पर सतर्कता एवं समन्वय आवश्यक है।

इस अवसर पर वरीय पदाधिकारी कार्मिक कोषांग-सह-उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया, नोडल पदाधिकारी श्रीमती मनीषा तिर्की सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। अधिकारियों द्वारा सामान्य प्रेक्षक को सामग्री संधारण, अभिलेखीकरण, सुरक्षा प्रबंध तथा मतदान दलों को सामग्री वितरण की चरणबद्ध प्रक्रिया से अवगत कराया गया।

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झारखंड विधानसभा के पंचम (बजट) सत्र को लेकर निषेधाज्ञा

झारखंड विधानसभा परिसर (नया विधानसभा) के 750 मीटर के दायरे में (माननीय उच्च न्यायालय झारखंड, रांची को छोड़कर) निषेधाज्ञा

दिनांक 18.02.2026 के प्रातः 08:00 बजे से दिनांक 19.03.2026 के रात्रि 10:00 तक के लिए निषेधाज्ञा लागू

रांची,16.02.2026 – षष्ठम झारखंड विधानसभा का पंचम (बजट) सत्र रांची में दिनांक 18.02.2026 से 19.03.2026 तक आहूत है। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची एवं अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था, राँची के संयुक्तादेश में निहित निर्देश के आलोक में विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में किसी तरह के जुलूस, रैली, प्रदर्शन, घेराव आदि आयोजित नहीं किये जा सकेंगे।

इसके मद्देनजर सुरक्षा की दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बी०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झारखंड विधानसभा (नया विधानसभा) परिसर के 750 मीटर के दायरे में (माननीय उच्च न्यायालय झारखंड, रांची को छोड़कर) निषेधाज्ञा जारी की गई है, जो निम्न है :-

1. उक्त क्षेत्र में पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

2. किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

3. किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।

4. किसी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली या आम सभा का आयोजन करना।

5. किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 18.02.2026 के प्रातः 08:00 बजे से दिनांक 19.03.2026 के रात्रि 10:00 तक के लिए तक प्रभावी रहेगा।

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भारत सरकार ने गुजरात में सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड कूपन पायलट की शुरुआत की

नई दिल्ली – भारत सरकार ने गुजरात में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी, गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया भी उपस्थित रहीं।

 

इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) की शुरुआत भारत की खाद्य सुरक्षा संरचना में पारदर्शिता, दक्षता और लाभार्थियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। गुजरात में सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट परियोजना का शुभारंभ करते हुए उन्होंने जोर दिया कि 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवा प्रदान करने वाली भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी खाद्य वितरण व्यवस्था है, जो तकनीक-आधारित सुधारों के माध्यम से निरंतर विकसित हो रही है। “हर दाना, हर रुपया, हर अधिकार” का नारा देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल पात्रता संबंधी जागरूकता को बढ़ाएगी, लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगी तथा रियायती खाद्यान्न के वितरण में जवाबदेही को सुदृढ़ करेगी।

श्री जोशी ने जानकारी दी कि सीबीडीसी ढांचे के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तैयार किया गया डिजिटल कूपन लाभार्थियों के खातों में प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा (ई रुपया) के रूप में सीधे जमा किए जाएंगे। लाभार्थी अपने निर्धारित खाद्यान्न की मात्रा को उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) पर सीबीडीसी कूपन अथवा वाउचर कोड के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा ई-पीओएस संचालन से संबंधित चुनौतियों का समाधान करेगी और साथ ही सुरक्षित, ट्रैसेबल तथा वास्तविक समय (रियल-टाइम) लेनदेन सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि इस पायलट परियोजना का विस्तार शीघ्र ही चंडीगढ़, पुडुचेरी तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी किया जाएगा।

यह पहल भारत सरकार द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक तथा गुजरात सरकार के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अहमदाबाद, आणंद, वलसाड और सूरत जिलों में प्रारंभ की गई है। इसके विस्तार की रणनीति के अंतर्गत अगले चरणों में इस पहल को पुडुचेरी, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा।

इस अवसर पर श्री अमित शाह ने कहा कि सीबीडीसी पायलट योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ‘डिजिटल इंडिया’ की परिकल्पना का एक महत्वपूर्ण विस्तार है। उन्होंने इस प्रणाली को अधिक पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और त्रुटि-रहित बनाने में सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की तथा उल्लेख किया कि आज विश्व के लगभग आधे डिजिटल लेनदेन भारत में संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीडीसी ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की सरकार की परिकल्पना को और सुदृढ़ करेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि लाभार्थियों को उनके निर्धारित खाद्यान्न अधिक पारदर्शिता और अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ प्राप्त हों। उन्होंने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के क्रियान्वयन में सीबीडीसी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

सीबीडीसी-सक्षम प्रणाली के अंतर्गत लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया उपलब्ध रहेगा, जिससे वे उचित मूल्य दुकानों पर अपने निर्धारित खाद्यान्न की खरीद के लिए क्यूआर कोड अथवा कूपन कोड आधारित निर्बाध लेनदेन कर सकेंगे। यह प्रणाली बार-बार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता को समाप्त करती है, लेनदेन की दक्षता में सुधार लाती है तथा वास्तविक समय में डिजिटल ट्रेल तैयार करती है, जिससे पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को सुदृढ़ किया जा सके। उचित मूल्य दुकान संचालकों को भी उनका कमीशन वास्तविक समय के आधार पर प्राप्त होगा, जिससे एक पारस्परिक रूप से लाभकारी तंत्र का निर्माण होगा।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक डिजिटल रूपांतरण की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पहलों में राशन कार्डों का एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण तथा ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) ढांचे के अंतर्गत देशव्यापी पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करना, आधार-सक्षम प्रमाणीकरण एवं वास्तविक समय में लेनदेन अभिलेखन हेतु ई-पीओएस उपकरणों की तैनाती, तथा ‘राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड’ के माध्यम से डेटा-आधारित सत्यापन व्यवस्था का कार्यान्वयन शामिल है। ‘अन्न चक्र’ के माध्यम से डिजिटल आपूर्ति-श्रृंखला का अनुकूलन तथा ‘अन्न सहायता’ जैसे सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्रों ने पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रदायगी को और अधिक सशक्त बनाया है। सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की संरचना में एक प्रोग्रामेबल संप्रभु डिजिटल भुगतान व्यवस्था को एकीकृत करते हुए, इस सुधार के प्रयास के अगले चरण का प्रतिनिधित्व करता है।

लाभार्थियों की सीमित संख्या के साथ प्रारंभ की गई इस पायलट योजना से प्रौद्योगिकी को कल्याणकारी वितरण प्रणाली के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध होने की अपेक्षा है। यह पहल पारदर्शिता को सुदृढ़ करने तथा अंतिम छोर तक सेवा वितरण के लिए अधिक दक्ष और जवाबदेह शासन ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष साँघवी, गुजरात के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमणभाई भिकाभाई सोलंकी, गुजरात के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री पूनमचंद छानाभाई बरांडा तथा गांधीनगर की महापौर मीराबेन पटेल की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार, गुजरात सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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