वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे मौजूद
रांची,04.02.2026 – द रांची प्रेस क्लब की ओर से आयोजित मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट–2026 का बुधवार को शुभारंभ हो गया। जेके इंटरनेशनल क्रिकेट अकादमी, अगरु, रातू में आयोजित मीडिया कप टूर्नामेंट का शुभारंभ राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। पहले दिन टीम भैरवी ने टीम कारो को 18 रन से और टीम अमानत ने टीम अजय को सात विकेट से हराया।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने खिलाड़ियों से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने कहा कि मीडिया समाज का सजग प्रहरी है और इसे लोकतंत्र का ‘चतुर्थ स्तंभ’ भी कहा जाता है। पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जनचेतना को जागृत करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने कहा कि मीडिया से जुड़े सभी साथी दिन-रात परिश्रम कर जनहित के विषयों को प्रमुखता से सामने लाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। “मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट” जैसे आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपसी सौहार्द, समन्वय और आत्मीयता को प्रगाढ़ करने का माध्यम भी हैं राज्यपाल ने कहा कि क्रिकेट हमें धैर्य, रणनीति और सामूहिक प्रयास का महत्व सिखाता है। खेलों के विकास में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जब मीडिया किसी खिलाड़ी की उपलब्धि को प्रमुखता देता है, तो वह समाचार हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाता है और नई प्रतिभाओं को पहचान मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह टूर्नामेंट मीडिया जगत के साथियों के बीच सहयोग, भाईचारे और सकारात्मक संवाद को और सुदृढ़ करेगा।
इस अवसर पर उन्होंने हाल ही में सम्पन्न रांची प्रेस क्लब के चुनाव में निर्वाचित सभी पदाधिकारियों और कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को बधाई दी। इस मौके पर अदानी समूह के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स) संजीव शेखर, टाटा समूह के प्रतिनिधि अमृतांशु, रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों समेत बड़ी संख्या में जाने-माने पत्रकार मौजूद थे।
आरपीसी मीडिया कप 2026
मैच – 1
भैरवी बनाम कारो
भैरवी – 160/2. ओवर – 13
विक्की पासवान – 117 *, पिंटू दुबे – 18, कुमार सौरव – 2/28
कारो – 142/5. ओवर – 13
अनस रहनुमा – 68*, कुमार सौरव – 28, राजू सिंह – 2/25, विक्की पासवान – 2/31
रिजल्ट – भैरवी 18 रन से जीता
प्लेयर ऑफ द मैच – विक्की पासवान
मैच – 2
अजय बनाम अमानत
अजय – 124/3. ओवर – 13
राकेश सिंह – 83*, पंकज सिंह – 22, बिपिन पांडेय – 3/30
अमानत – 126/3. ओवर – 10.3
शमीम राजा – 52, रियाज आलम – 41*, अमित कुमार झा – 2/33
रिजल्ट – अमानत 7 विकेट से जीता
प्लेयर ऑफ द मैच – शमीम राजा
नई दिल्ली – केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को तेज करके, विकास की नींव को मजबूत करके और ‘विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में समुद्री क्षेत्र को लंगर के रूप में स्थापित करके’ भारत के आर्थिक परिवर्तन को शक्तिशाली बल प्रदान किया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बजट तीन कर्तव्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है – आर्थिक विकास को गति देना और बनाए रखना, क्षमता निर्माण करके आकांक्षाओं को पूरा करना और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के अनुरूप समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व के परिणामस्वरूप रिफॉर्म एक्सप्रेस में तेजी आई है और यह दृढ़ता से पटरी पर है। यह हमारे कर्तव्य, हमारे कर्तव्यों को पूरा करने में हमारी मदद करने के लिए अपनी गति बनाए हुए है। यह बजट उत्पादकता बढ़ाता है, आर्थिक लचीलापन बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि हर क्षेत्र, क्षेत्र और समुदाय के पास सार्थक योगदान के अवसरों तक पहुंच हो।
सोनोवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में समुद्री क्षेत्र को स्पष्ट रूप से भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता, साजो-सामान दक्षता और दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन के रणनीतिक प्रवर्तक के रूप में रखा गया है। उन्होंने कहा की “समुद्री क्षेत्र एक रणनीतिक विकास इंजन के रूप में उभरा है । बजट ने एक सक्षम इकोसिस्टम बनाया है।
यह हमारे हितधारकों, ट्रांसपोर्टरों और उद्योग भागीदारों को क्षमता निर्माण, परिचालन का विस्तार करने और आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाता है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया और इसे नीतिगत निरंतरता, सुधार, स्थिरता और महिला सशक्तिकरण का प्रमाण बताया। वित्त मंत्री ने लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया था।
केंद्रीय बजट का एक प्रमुख आकर्षण अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रूपये के कुल परिव्यय के साथ कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना की घोषणा है। इस योजना का उद्देश्य भारत में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण इकोसिस्टम स्थापित करना है। यह कंटेनरीकृत कार्गो के तेजी से विकास का समर्थन करता है और यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मूल्य का लगभग दो-तिहाई है।
इस पहल के अंतर्गत भारत ने अगले दशक में लगभग दस लाख टीईयू की वार्षिक घरेलू विनिर्माण क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस कार्यक्रम से लगभग 1.07 लाख करोड़ रुपये का कुल बाजार मूल्य उत्पन्न होने की उम्मीद है। यह सरकारी सहायता के लगभग आठ गुना के प्रभाव को दर्शाता है।
इसमें लगभग 3,000 प्रत्यक्ष नौकरियां और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होने का अनुमान है। जबकि कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम, विशेष स्टील और पानी आधारित पेंट जैसे सहायक उद्योगों के विकास को उत्प्रेरित करता है। यह पहल आयातित खाली कंटेनरों पर भारत की निर्भरता को काफी कम कर देगी। यह वर्तमान में लगभग दो मिलियन यूनिट है और राष्ट्रीय आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन को मजबूत करेगी।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा की “यह योजना एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम का निर्माण करेगी जो कंटेनरीकृत कार्गो की बढ़ती मांग को पूरा करने और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सक्षम होगी। यह योजना देश की समुद्री विकास यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम का प्रतिनिधित्व करती है।
अगले 10 वर्षों में सालाना दस लाख टीईयू की लक्षित क्षमता और 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संभावित बाजार निर्माण के साथ यह पहल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेगी, सहायक विनिर्माण को मजबूत करेगी और आयात निर्भरता को काफी कम करेगी। भारत कंटेनर शिपिंग लाइन के साथ, यह समुद्री आत्मनिर्भरता और देश के लिए अधिक लचीली रसद आपूर्ति श्रृंखला की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
यह बजट भारत की अंतर्देशीय जलमार्ग क्रांति को नई गति प्रदान करता है। भारत अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन करेगा, राष्ट्रीय नेटवर्क का और विस्तार करेगा और हरित, लागत प्रभावी कार्गो आवाजाही करेगा। सोनोवाल ने कहा कि 2014 से पहले केवल पांच राष्ट्रीय जलमार्ग थे, तब से राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम की संख्या बढ़कर 111 हो गई है।
अंतर्देशीय जलमार्गों पर कार्गो की आवाजाही 2013-14 में 18.1 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 145.5 मिलियन मीट्रिक टन हो गई है । इसमें लगभग 21 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। जलमार्गों की परिचालन लंबाई 2,716 किलोमीटर से बढ़कर 5,155 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इससे सड़क और रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम हो गई है।
उन्होंने कहा कि बजट ने भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग परिवर्तन को नई गति दी है। अगले पांच वर्षों में 20 अतिरिक्त जलमार्गों को चालू करने का निर्णय हरित, लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स को और मजबूत करेगा और सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम करेगा।
महानदी प्रणाली पर राष्ट्रीय जलमार्ग-5 का केंद्रित विकास खनिज बेल्टों, औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों को जोड़कर, देश की मल्टीमॉडल परिवहन और सतत विकास रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में जलमार्गों को मजबूत करके पूर्वी भारत की आर्थिक क्षमता को खोलेगा।
बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा ओडिशा में महानदी नदी प्रणाली पर राष्ट्रीय जलमार्ग-5 के विकास पर केंद्रित है। जलमार्ग तालचेर और अंगुल के खनिज समृद्ध क्षेत्रों को कलिंग नगर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और पारादीप और धामरा में बंदरगाहों से जोड़ेगा।
काकुडी, कुरुंती और पंकपाल में प्रमुख टर्मिनलों को कोयला, कोकिंग कोल और चूना पत्थर के साथ प्रमुख कार्गो के रूप में विकसित किया जाएगा। कॉरिडोर में 2032 तक लगभग 10 मिलियन टन की कार्गो क्षमता है। यह लगभग 13,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 2047 तक बढ़कर 20 मिलियन टन हो जाएगी।
क्षमता निर्माण के कर्तव्य को पूरा करने के लिए, बजट में अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र में कौशल विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आरसीओई) के रूप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गई है। कोलकाता और वाराणसी में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इससे पूरे जलमार्ग के युवाओं को विशेष समुद्री और रसद कौशल हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों को पूरा करने के लिए एक समर्पित जहाज मरम्मत इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा। इससे कुशल रोजगार सृजित करते हुए परिचालन विश्वसनीयता में सुधार होगा। असम के डिब्रूगढ़ में एक आरसीओई भी विकसित किया जा रहा है।
बजट में रेल और सड़क से जलमार्ग में बदलाव को प्रोत्साहित करने के लिए एक तटीय कार्गो संवर्धन योजना शुरू करने की घोषणा की गई है । इस योजना के अंतर्गत भारत का लक्ष्य 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्ग और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है।
इससे कम लॉजिस्टिक लागत, कम उत्सर्जन और बढ़ी हुई ऊर्जा दक्षता का समर्थन किया जा सके। मल्टीमॉडल एकीकरण को मजबूत करने के लिए बजट में पूर्व में दानकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के विकास का प्रस्ताव किया गया है।
इन कॉरिडोर से बंदरगाह कनेक्टिविटी, कार्गो निकासी दक्षता और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स में काफी सुधार होगा। प्रमुख बंदरगाहों, विशेष रूप से पारादीप और धामरा के साथ जलमार्गों के बढ़ते एकीकरण से सड़क और रेल परिवहन पर दबाव और कम होगा।
बजट में परिचालन का समर्थन करने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण योजना के साथ-साथ सीप्लेन निर्माण के स्वदेशीकरण का भी प्रस्ताव किया गया है। इस पहल का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप सहित दूरदराज और द्वीप क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाना है।
भारतीय जहाज स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए, बजट में गिफ्ट आईएफएससी और ऑफशोर बैंकिंग इकाइयों में इकाइयों के लिए कर कटौती की अवधि को 25 साल की अवधि के भीतर लगातार 10 से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है।
छोटे जहाजों के आयात पर सीमा शुल्क छूट के लिए सनसेट क्लॉज को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है। वही बड़े जहाजों पर छूट को स्थायी रूप से हटा दिया गया है। श्री सोनोवाल ने कहा कि इन उपायों से भारत की फ्लैगिंग, बेड़े के विस्तार और टन भार वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
बजट में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए केंद्रित पहलों के साथ ‘पूर्वोदय’ पर बल दिया गया है। प्रमुख घोषणाओं में ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास, पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों का निर्माण, 4,000 ई-बसों की तैनाती और असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए एक समर्पित योजना शामिल है।
श्री सोनोवाल ने कहा कि ये पहल भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का सम्मान करती हैं और इस क्षेत्र को संस्कृति, वाणिज्य और कनेक्टिविटी के पावरहाउस में बदल देती हैं। सोनोवाल ने तेजपुर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक क्षेत्रीय शीर्ष निकाय में पदोन्नत करने के फैसले का भी स्वागत किया।
श्री सोनोवाल ने कहा कि बजट में जलमार्ग, जहाजरानी, जहाज निर्माण और कंटेनर निर्माण को स्पष्ट रूप से भारत की रसद और व्यापार प्रतिस्पर्धा के रणनीतिक समर्थकों के रूप में रखा गया है।
उन्होंने कहा की यह बजट भारत को एक अग्रणी वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनने की दिशा में प्रेरित करने में सहायक है। यह समावेशन के साथ महत्वाकांक्षा को संतुलित करता है और बयानबाजी के बजाय दुविधा और सुधार के बजाय कार्रवाई को चुनता है।
तीन कर्तव्यों- विकास में तेजी लाने, आकांक्षाओं को पूरा करने और ‘सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित करने पर बल देने के साथ यह बजट देश के विकास के अगले चरण के लिए एक ठोस नींव रखता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का दृष्टिकोण इस बजट के माध्यम से परिलक्षित होता है।
यह हमारे देश के लिए जन केंद्रित, कल्याण उन्मुख, क्षमता बढ़ाने और समग्र विकास है। यह बजट हर भारतीय का बजट है। यह हमारी युवा शक्ति को सशक्त बनाता है, क्षेत्रीय समानता को मजबूत करता है और विकास का लाभ अंतिम मील तक पहुंचे यह सुनिश्चित करता है।
नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज ‘माई भारत बजट क्वेस्ट 2026′ का शुभारंभ किया। यह एक राष्ट्रव्यापी युवा-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं के बीच केंद्रीय बजट की समझ को बढ़ाना और बजटीय प्रावधानों को अधिक सुलभ, प्रासंगिक तथा नागरिक-केंद्रित बनाना है। यह पहल एक संरचित और सहभागी ढांचे के माध्यम से देश भर के महाविद्यालयों, संस्थानों और कोचिंग केंद्रों के युवाओं को शामिल करके केंद्रीय बजट 2026 को नागरिकों के दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास करती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह प्रतियोगिता कल (3 फरवरी 2026) से ‘माई भारत’ प्लेटफॉर्म (https://mybharat.gov.in/) पर शुरू होगी। यह केंद्रीय बजट 2026 पर आधारित एक राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी है, जिसमें ‘माई भारत’ पोर्टल पर पंजीकृत युवा भाग ले सकते हैं। भाग लेने की अंतिम तिथि 17 फरवरी है। इसके बाद, प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा और वे 17 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक चलने वाले दूसरे चरण में भाग लेंगे, जो निबंध लेखन का दौर होगा। निबंध लेखन के इस चरण में युवाओं को विकसित भारत के विजन के अनुरूप केंद्रीय बजट से संबंधित 8 विषय दिए जाएंगे। प्रतिभागी निबंधों के माध्यम से अपने विचार और सुझाव साझा करेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “इस वर्ष के बजट भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने वीबीवाईएलडी के दौरान युवाओं द्वारा साझा किए गए नवोन्मेषी विचारों की सराहना की और उल्लेख किया कि कुछ विचारों को केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल किया गया है। ‘माई भारत बजट क्वेस्ट 2026’ के साथ हम इस भावना को जारी रखना चाहते हैं और एक बार फिर युवा की बातों को महत्व देना चाहते हैं।”
निबंधों का मूल्यांकन 3 मार्च से 10 मार्च, 2026 के बीच किया जाएगा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार योग्यता सूची 10 मार्च, 2026 को घोषित की जाएगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विजेताओं को बाद में‘विकसित भारत बजट’ के विजन पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ आभासी रूप से बातचीत करने का अवसर मिलेगा, जो राष्ट्रीय आर्थिक विमर्श और विकास प्राथमिकताओं में सूचित युवा भागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत करते हुए कहा है कि यह बजट पर्यटन और संस्कृति को अभूतपूर्व और उम्मीदों से बढ़कर प्रोत्साहन देने वाला है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में, मंत्री ने बजट को ‘दूरदर्शी और परिवर्तनकारी’ बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास की गति को तेज करेगा और भारत को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र तथा सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में मजबूती से स्थापित करेगा।
उन्होंने दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी और विरासत, आध्यात्मिकता, कौशल और संवहनीय पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा देने वाला बजट पेश करने के लिए माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया।
बजट में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, इको-टूरिज्म (प्राकृतिक क्षेत्रों का पर्यटन) को बढ़ावा देने और कौशल विकास को बढ़ाने के उद्देश्य से कई तरह की पहलों की रूपरेखा तैयार की गई है।
प्रमुख घोषणाएँ
बजट में पूरे भारत में विषय-आधारित (थीमैटिक) पर्यटन सर्किट/मार्ग विकसित करने का प्रस्ताव है, जिनमें शामिल हैं:
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय ट्रेल
अराकू घाटी (पूर्वी घाट) और पोधिगई मलाई (पश्चिमी घाट) में प्राकृतिक सौंदर्य और पारिस्थितिकी पर्यटन मार्ग
ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ देखने वाले मार्ग जिनमें प्रमुख प्रजनन स्थल भी रहेंगे
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की पुलिकट झील में पक्षी अवलोकन मार्ग
एक बड़ी सांस्कृतिक पहल के तहत लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत और अनुभवात्मक स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों के ‘संरक्षण’ के साथ-साथ ‘पर्यटकों की भागीदारी’ का अनूठा संगम तैयार करना है।
आध्यात्मिक पर्यटन को सुदृढ़ करने के लिए, पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध सर्किट के लिए एक नई योजना शुरू की जाएगी। जिसमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल होंगे। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थस्थलों के महत्व और इतिहास से अवगत कराने के लिए विशेष केंद्रों की स्थापना, बेहतर कनेक्टिविटी और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं शामिल होंगी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों का उपयोग करके भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के सहयोग से एक पायलट परियोजना के माध्यम से 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में 10,000 टूर गाइडों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने के प्रस्ताव के साथ कौशल विकास को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा।
एक बड़े शैक्षिक सुधार के रूप में, राष्ट्रीय होटल प्रबंधन परिषद को एक राष्ट्रीय आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जो पेशेवर प्रशिक्षण को मजबूत करेगा और आतिथ्य शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएगा।
भारत को चिकित्सा पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए, बजट में राज्यों को पांच क्षेत्रीय चिकित्सा पर्यटन केंद्र स्थापित करने के लिए सहायता देने का प्रस्ताव है।
भारत पहले ‘ग्लोबल बिग कैट समिट’ की मेजबानी भी करेगा, जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री शामिल होंगे। यह आयोजन वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण-पर्यटन कूटनीति में भारत के वैश्विक नेतृत्व को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
इसके अतिरिक्त, बजट में ‘पूर्वोदय’ राज्यों में पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जो संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देंगे।
श्री शेखावत ने इस बात पर जोर दिया कि ये पहलकदमियां न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेंगी, बल्कि संवहनीय पद्धतियों को भी बढ़ावा देंगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी और भारत की सभ्यतागत विरासत के साथ वैश्विक जुड़ाव को और गहरा करेंगी।
प्रमुख विशेषताएं
पहाड़ों, तटों, आर्द्रभूमि और जैव विविधता क्षेत्रों में विषय आधारित पर्यटन मार्गों की शुरुआत।
देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को अनुभवात्मक विरासत केंद्रों में बदला जाएगा।
संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध सर्किट का विकास।
आईआईएम के माध्यम से 10,000 गाइडों को विश्व स्तरीय पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा।
राष्ट्रीय होटल प्रबंधन परिषद को अब राष्ट्रीय स्तर के हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य) संस्थान के रूप में अपग्रेड किया जाएगा।
पांच क्षेत्रीय चिकित्सा पर्यटन केंद्रों की स्थापना और वन्यजीव संरक्षण के लिए ‘ग्लोबल बिग कैट समिट’ का आयोजन।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि यह अत्यंत सौभाग्य और गौरव की बात है कि आज संत रविदास जयंती के शुभ अवसर पर यह निर्णय लिया गया है कि आदमपुर हवाई अड्डे को अब से श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डे के नाम से जाना जाएगा। श्री मोदी ने कहा कि यह श्री गुरु रविदास महाराज जी के चिरस्थायी आदर्शों को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है और समानता, करुणा तथा सेवा का उनका संदेश हम सभी को अत्यधिक प्रेरित करता रहता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है:
“यह अत्यंत सौभाग्य और गौरव की बात है कि आज संत रविदास जयंती के शुभ अवसर पर यह निर्णय लिया गया है कि आदमपुर हवाई अड्डे को अब से श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डे के नाम से जाना जाएगा। यह असंख्य लोगों के लिए खुशी का दिन है। यह श्री गुरु रविदास महाराज जी के चिरस्थायी आदर्शों को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। समानता, करुणा और सेवा का उनका संदेश हम सभी को अत्यधिक प्रेरित करता रहता है।”
“ये हमारे लिए सौभाग्य और गौरव की बात है कि आज संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट को ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी’ एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा। ये हम सबके लिए अत्यंत खुशी का दिन है। ये श्री गुरु रविदास महाराज जी के शाश्वत आदर्शों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है। समानता, करुणा और सेवा का उनका संदेश हम सभी को गहराई से प्रेरित करता है।”
प्रधानमंत्री ने हलवारा हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया, इसे पंजाब, विशेषकर लुधियाना और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए अपार खुशी का क्षण बताया
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हलवारा हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन का उद्घाटन होना पंजाब, विशेषकर लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए अपार खुशी का क्षण है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि लुधियाना उत्तरी भारत का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्र है और सरकार इस शहर के लिए हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास कर रही है, जो आधुनिक हवाई अड्डे के लिए चल रहे कार्यों में परिलक्षित होता है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
“हलवारा हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन का उद्घाटन होना पंजाब, विशेषकर लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए अपार खुशी का क्षण है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, लुधियाना उत्तरी भारत का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्र है। यह शहर अपने ऊर्जावान लोगों के लिए जाना जाता है। हमारी सरकार इस शहर के लिए हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास कर रही है, जो आधुनिक हवाई अड्डे के लिए चल रहे कार्यों में परिलक्षित होता है।”
नई दिल्ली – तीनों सेनाओं के लिए तीसरा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 2 से 25 फरवरी, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह कोर्स एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के तत्वावधान में और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (सीईएनजेओडब्ल्यूएस) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसमें विशिष्ट विषयों और सैन्य अभियानों में क्षेत्र-विशिष्ट पर आधारित युद्धक क्षेत्र के बदलाव सहित उन्नत कोर्स प्रस्तुत किया गया है।
यह कोर्स इस बात की गहन समझ विकसित करने पर केंद्रित है कि प्रौद्योगिकी युद्ध संचालन को कैसे प्रभावित कर रही है। इसके लिए हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों और युद्ध रणनीति पर पुनर्विचार करना आवश्यक है। इसमें महत्वपूर्ण विषयों का गहन अध्ययन, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन और रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा भी शामिल है।
इस कोर्स में तीनों सेनाओं के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप, एमएसएमई, डीपीएसयू और निजी उद्योगों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। सेना के प्रतिभागियों में अधिकारियों की वरिष्ठता मेजर से लेकर मेजर जनरल (और उनके समकक्ष) तक भिन्न-भिन्न है, जहां कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञता का योगदान देते हैं, वहीं वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव और रणनीतिक ज्ञान को साझा करते हैं।
फ्यूचर वॉरफेयर संबंधी कोर्स सशस्त्र बलों की संचालन से जुड़ी प्राथमिकताओं को रक्षा क्षेत्र के स्वदेशी उद्योग की क्षमताओं के साथ तालमेल बिठाएगा और आधुनिक एवं भविष्य के युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर मुक्त चर्चा को सार्थक बनाएगा। पूर्व-सैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व-राजदूतों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और अकादमिक पेशेवरों सहित विविध प्रकार के विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समग्र विश्लेषण गहन और पेशेवर तरीके से किया जाए।
इसके अतिरिक्त, इस कोर्स में महत्वपूर्ण और रेयर अर्थ एलिमेंट, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और भविष्य में होने वाले अभियानों को प्रभावित करने वाली क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीति जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं। इससे भविष्य में अभियानों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन और विश्लेषण किए जाने वाले विषयों की संख्या में विस्तार होगा।
सितंबर 2024 में आयोजित प्रथम कोर्स की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, इस विस्तारित तीन-सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान के उस दृष्टिकोण को साकार करना है जिसके तहत अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पंजाब में डेरा सचखंड बल्लां के दर्शन किए। श्री मोदी ने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी की जयंती पर डेरा सचखंड बल्लां में होना एक बहुत ही खास एहसास है।
श्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया:
“श्री गुरु रविदास महाराज जी की जयंती पर डेरा सचखंड बल्लां में होना एक बहुत ही खास एहसास था।”
रांची,02.02.2026 – 31.01.2026 को रात्रि करीब 08.00 बजे लोवर वर्द्धमान कम्पाउण्ड धोबी घाट लालपुर, थाना-लालपुर जिला राँची के पास वादी पियुष कुमार सिंह, पिता स्व० मधेश्वर सिंह, शिव मंदिर के पास, लोवर वर्द्धमान कम्पाउण्ड धोबी घाट, थाना लालपुर जिला राँची के पिताजी मधेश्वर सिंह टहलने के लिए निकले थे।
इसी दौरान मोहल्ले के ही रहने वाले मुन्ना कच्छप के पुत्र अमन कच्छप एवं अनिकेत कच्छप के द्वारा मधेश्वर सिंह से किसी बात को लेकर कहा-सुनी हो गयी। इसी दौरान अमन कच्छप एवं अनिकेत कच्छप के द्वारा मधेश्वर सिंह के साथ मारपीट किया गया मारपीट में मुन्ना कच्छप के द्वारा भी अपने बेटे का साथ दिया गया।
उनके द्वारा मारपीट करने के कारण मधेश्वर सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गये तथा अचेत अवस्था में घटनास्थल पर ही गिर गये। जिसे ईलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया जहाँ पर चिकित्सक द्वारा मृत घोषित किया गया।
इस संबंध में लालपुर थाना काण्ड संख्या 21/26 दिनांक 01.02.26 धारा 127(2)/308(4)/115(2)/351(2)/117(2)/109/103(1)/3(5) BNS 2023 के अन्तर्गत प्राथमिकी अभियुक्तों (1) अमन कच्छप (2) अनिकेत कच्छप दोनों पिता मुन्ना कच्छप (3) मुन्ना कच्छप एवं (4) मुन्ना कच्छप की पत्नी के विरूद्ध कांड दर्ज किया गया है एवं अभियुक्तों को गिरफ्तारी हेतु छापामारी टीम का गठन किया गया। छापामारी टीम के द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी अभियुक्तों (1) अमन कच्छप उर्फ अमन उराँव (2) अनिकेत कच्छप उर्फ अनिकेत कच्छप, दोनों पिता मुन्ना कच्छप एवं (3) मुन्ना कच्छप पिता स्व० जगरनाथ कच्छप, सभी सा०- लोवर वर्द्धमान कम्पाउण्ड झीपा कोचा टोला, थाना लालपुर जिला राँची को गिरफ्तार किया गया है। सभी लोवर वर्द्धमान कम्पाउण्ड झीपा कोचा टोला, थाना लालपुर जिला राँची के रहने वाले हैं.
छापामारी दल में थाना प्रभारी लालपुर, रूपेश कुमार सिंह के अलावे ऋषि कान्त,उत्तम कुमार,मसीह किस्कू,मुकेश उराँव,अजय कुमार शामिल थे.
केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज संसद में वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। बजट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:-
कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट तीन कर्तव्यों से प्रेरित है:-
पहला कर्तव्य – उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्य में लचीलापन लाकर आर्थिक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना
दूसरा कर्तव्य– भारत की समृद्धि के पथ में सशक्त साझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना।
तीसरा कर्तव्य – सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूल- यह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्ध हो।
बजट अनुमान
गैर ऋण प्राप्तियां और कुल व्यय क्रमश: 36.5 लाख करोड और 53.5 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड रुपए और दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
गैर ऋण प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 34 लाख करोड रुपए है जिसमें से केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ 26.7 लाख करोड रुपए हैं।
कुल व्यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड रुपए है जिसका पूंजी व्यय करीब 26.1 लाख करोड रुपए है।
बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वर्ष 2025-26 के बजट में संशोधित राजकोषीय घाटा 2025-26 के बजट अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के समान है।
ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
पहला कर्तव्य– आर्थिक विकासको तेज करना और बनाए रखना तथा छह हस्तक्षेपों का प्रस्ताव है
सात रणनीतिक और फ्रंटियर क्षेत्रों में विनिर्माण
बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर करने की रणनीति) की घोषणा। भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केन्द्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अगले पांच वर्ष के लिए दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्ताव।
तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों (एन.आई.पी.ई.आर.) के निर्माण तथा सात मौजूदा संस्थानों के उन्नयन के लिए बायोफार्मा केन्द्रित नेटवर्क।
एक हजार से अधिक मान्यता प्राप्त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्स स्थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।
उपकरण और सामग्री बनाने, फुलस्टेक इंडिया आई.पी. डिजाइन करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा।
अप्रैल 2025 में आरंभ इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे विनिर्माण योजना को गति देने के लिए बजट बढ़ाकर चालीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव।
खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए समर्पित दुर्लभ धातु गलियारों की स्थापना के उद्देश्य से खनिज समृद्ध ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को सहायता देने का प्रस्ताव।
घरेलू रसायन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कलस्टर आधारित बनाओ और चलाओ मॉडल के आधार पर तीन समर्पित कैमिकल पार्क स्थापित करने की योजना लाई जाएगी।
पूंजी सामान क्षमता मजबूत करना
डिजिटल रूप से सक्षम ऑटोमेटेड सर्विस ब्यूरो के रूप में दो स्थानों सी.पी.एस.ई. द्वारा हाईटेक टूल रूप स्थापित किए जाएंगे, जो उच्च गुणवत्ता के कलपुर्जों का बड़े पैमाने पर और कम लागत से स्थानीय स्तर पर डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे।
उच्च मूल्य और प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्नत सी.आई.ई. के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण संवर्धन और अवसंरचना उपकरण योजना(सी.आई.ई.) शुरू की जाएगी।
पांच वर्ष की अवधि में दस हजार करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना लाने प्रस्ताव।
वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा
रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानवनिर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना।
मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण तथा प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजी सहायता के साथ आधुनिक पारंपरिक क्लस्टरों के लिए वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना।
चैलेंज मोड में मेगाटेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव
खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प की मजबूती के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का प्रस्ताव। इससे देश के बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला-एक उत्पाद पहल और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।
इससे वैश्विक बाजार संपर्क, ब्रांडिंग करने में मदद मिलेगी और प्रशिक्षण, कौशल, गुणवत्ता और उत्पादन को समर्थन मिलेगा।
लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना
अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्नयन के जरिए लागत स्पर्धा और दक्षता में सुधार के लिए दो सौ लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना लाने का प्रस्ताव।
चैंपियन एस.एम.ई. बनाना और सूक्ष्म उद्यमियों को समर्थन
एम.एस.एम.ई. को चैंपियनों के रूप में विकास करने में सहायता के लिए त्रिस्तरीय दृष्टिकोण- दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एस.एम.ई. ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्ताव।
दो हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ वर्ष 2021 में बनाए गए आत्मनिर्भर भारत फंड को समर्थन जारी रहेगा।
विशेष रूप से टीयर टू और टीयर थ्री शहरों में कॉर्पोरेट मित्र कार्डर विकसित करने के लिए आई.सी.ए.आई., आई.सी.एस.आई, आई.सी.एम.ए.आई. जैसे व्यवसायिक शिक्षा संस्थानों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अवसंरचना को ठोस प्रोत्साहन
वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजी व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।
ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी उपलब्ध कराने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड स्थापित करने का प्रस्ताव।
समर्पित आर.ई.आई.टी. स्थापित करने के जरिए सी.पी.एस.ई. की महत्वपूर्ण रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तेज करने का प्रस्ताव।
पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोड़ने के लिए नए समर्पित माल गलियारे बनाए जाएंगे।
जलचर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोडने के लिए ओडिशा में एनडब्ल्यू-5 से शुरुआत के साथ अगले पांच वर्ष में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे।
अपेक्षित श्रम शक्ति के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
इनलैंड जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गो प्रोमोशन स्कीम आरंभ की जाएगी।
सी-प्लेन के स्वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा और लास्ट माइल तथा दूरदराज क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाया जाएगा और पर्यटन को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
संचालन को समर्थन उपलब्ध कराने के लिए सी-प्लेन वी.जी.एफ. स्कीम शुरू की जाएगी।
दीर्घावधि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चत करना।
कार्बन टैक्चर उपयोग और भंडारण (सी.सी.यू.एस.) प्रौद्योगिकियों के लिए अगले पांच वर्ष की अवधि के लिए 20 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा।
शहर आर्थिक क्षेत्रों का विकास
शहर आर्थिक क्षेत्र (सी.ई.आर.) के लिए पांच वर्षों की अवधि के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा।
पर्यावरण अनुकूल टिकाउ यात्री प्रणाली को प्रोत्साहन देने के लिए मुम्बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बैंगलुरू, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुडी़ के बीच सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
वित्तीय स्थिरता, समावेश और उपभोक्ता सुरक्षा के उपाय करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के साथ कदम-ताल मिलाते हुए बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के उद्देश्य से ‘’विकसित भारत के लिए बैंकिंग’’ पर उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव।
पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के पुनर्गठन का प्रस्ताव।
भारत की उभरती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार विदेशी निवेश के लिए अधिक समकालीन और उपयोक्ता अनुकूल रूपरेखा के लिए विदेश मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियमावली की व्यापक समीक्षा का प्रस्ताव।
बड़े शहरों द्वारा उच्च मूल्य के म्यूनिसिपल बॉण्ड जारी करने को प्रोत्साहन करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सिंगल बॉण्ड जारी करने पर सौ करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव।
दूसरा कर्तव्य– लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और क्षमता बढ़ाना
विकसित भारत के मुख्य संचालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए उपायों की सिफारिश करने हेतु उच्चाधिकार प्राप्त ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव। यह फैसला भारत को वर्ष 2047 तक दस प्रतिशत की वैश्विक हिस्सेदारी के साथ अग्रणी बनाएगा।
विकसित भारत के लिए पेशेवर लोग तैयार करने
संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशवरों (ए.एच.पी.) के लिए मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा और निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए ए.एच.पी. संस्थानों की स्थापना की जाएगी।
अगले पांच वर्ष में एक लाख ए.एच.पी. जोड़े जाएंगे।
वृद्धों की चिकित्सा और संबद्ध देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए मजबूत देखभाल सेवा परिवेश बनाया जाएगा। अगले कुछ वर्षों में डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
आयुष
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे
प्रमाणन परिवेश के उच्च मानकों के लिए आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन करने तथा अधिक कुशल कार्मिक उपलब्ध कराने और पारंपरिक दवाओं के लिए साक्ष्य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्ल्यू.एच.ओ. वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केन्द्र के उन्नयन का प्रस्ताव।
पशुपालन
सरकार 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता करेगी।
निजी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्य महाविद्यालय, पशु अस्पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्ताव।
ऑरेंज इकोनॉमी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी, मुम्बई को 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्थापित करने में सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव।
शिक्षा
सरकार बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के आसपास चुनौती मार्ग के माध्यम से पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप का निर्माण करने में राज्यों की सहायता करेगी।
वी.जी.एफ./पूंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना की जाएगी।
पर्यटन
मौजूदा राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और केटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्नयन करते हुए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव।
आई.आई.एम. के सहयोग से हाईब्रिड मोड में मानकीकृत, उच्च गुणवत्ता वाले 12 सप्ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए 20 पर्यटन स्थलों में 10 हजार गाइडों के कौशल उन्नयन के लिए प्रायोगिक योजना शुरू की जाएगी।
सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत महत्व वाले सभी स्थानों के डिजिटल दस्तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना की जाएगी।
विरासत और संस्कृति पर्यटन
लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, अदिचनाल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत और अनुभवजन्य सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव।
खेल
अगले दशक में खेल-कूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव।
तीसरा कर्तव्य– सबका साथ– सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसके लिए निम्नलिखित चार क्षेत्रों में लक्षित प्रयास करने की आवश्यकता है:–
किसानों की आय बढ़ाना
किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, पशुपालन, उच्च मूल्य वाली कृषि को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उच्च मूल्य कृषि
सरकार उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती समर्थन देगी जैसे:-
तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों को सहायता प्रदान की जाएगी।
नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव।
पूर्वोत्तर में अगर के पेड़ों और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के लिए, भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्ताव।
भारत–विस्तार
केन्द्रीय बजट में भारत-विस्तार का प्रस्ताव, जो बहुभाषीय ए.आई. टूल है और जिसे ए.आई. प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए, आई.सी.ए.आर. पैकेज सहित एग्रीस्टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर के लिए प्रतिबद्धता
उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए निमहंस-टू की स्थापना की जाएगी।
रांची और तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नयन किया जाएगा।
पूर्वोदय राज्यों और उत्तर–पूर्व क्षेत्र पर ध्यान
दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास, 5 पूर्वोत्तर राज्यों में 5 पर्यटन स्थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्ताव।
अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए नई योजना।
16वां वित्त आयोग
सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्त आयोग अनुदान के रूप में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराए।
भाग-2
प्रत्यक्ष कर
नया आय कर अधिनियम
नया आय कर अधिनियम, 2025, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो जाएगा।
सरलीकृत आय कर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। नए फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि, आम नागरिक आसानी से उसका अनुपालन कर सके।
जीवन जीने की सुगमता
किसी साधारण व्यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ब्याज को आय कर से छूट दी जाएगी और इस मद में स्रोत पर काटा गया कर देय नहीं होगा।
टी.सी.एस. को तार्किक बनाना
विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर टी.सी.एस. दर को बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव।
मानव श्रम आपूर्ति के लिए सरलीकृत टी.डी.एस. प्रावधानों से श्रम गहन कारोबारियों को लाभ होगा।
छोटे करदाताओं के लिए नई योजना का प्रस्ताव, जिसमें नियम आधारित स्वचालित प्रक्रिया से, कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्थान पर कम अथवा शून्य कटौती प्रमाण-पत्र करना संभव हो सकेगा।
करदाताओं की सुविधा के लिए डिविडेंट, निवेश से प्रपत्र 15जी अथवा प्रपत्र 15एच स्वीकार करने के लिए सिंगल विंडो।
संशोधित रिटर्न के लिए समयसीमा मामूली शुल्क के भुगतान के साथ 31 दिसम्बर से बढ़ाकर 31 मार्च की गई।
कर रिटर्न फाइल करने के लिए अलग-अलग समय सीमा का प्रस्ताव।
किसी अनिवासी द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर टी.डी.एस. की कटौती की जाने और टैन की आवश्यकता के बजाए निवासी क्रेता के पैन आधारित चालान के माध्यम से जमा कराए जा सकते हैं।
छोटे करदाताओं को अपनी विदेशी आय या संपत्ति की घोषणा के लिए एकमुश्त छह महीने की छूट की योजना।
जुर्माने और मुकद्दमेबाजी को तार्किक रूप देना।
आई.टी. आकलन और जुर्माने की कार्यवाही को सामान्य रूप से एकीकृत करने का प्रस्ताव है।
करदाताओं को अपनी पुन: आकलन कार्यवाही के बाद रिटर्न अपडेट कराने की अनुमति होगी।
आय का गलत विवरण देने पर अतिरिक्त आय कर के भुगतान के साथ छूट दी जा सकेगी।
आय कर अधिनियम के तहत मुकद्दमेबाजी की रूपरेखा को तार्किक बनाया गया है।
सहकारिता
दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की आपूर्ति में लगी प्राथमिक सहकारी संस्थाओं को पहले से उपलब्ध कटौती का विस्तार अब पशुचारे और बिनौले की आपूर्ति करने वालों तक भी किया गया है।
किसी अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में दिए गए उनके निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का प्रस्ताव।
भारत के विकास इंजन के रूप में आई.टी. क्षेत्र को सहायता
सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आई.टी. समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित सेवाएं 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के तहत आएंगी।
आई.टी. सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्त करने की सीमा को तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किया जा रहा है।
ए.पी.ए. में शामिल होने वाली कम्पनी को उपलब्ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्थाओं को भी प्रदान की जाएगी।
वैश्विक व्यापार और निवेश आकर्षित करना
किसी ऐसी विदेशी कंपनी के लिए 2047 तक कर मे रियायत दी जाएगी, जो भारत से डाटा केन्द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक तौर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती है।
यदि, डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी संबंधित कंपनी है तो उसे लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर भी प्रदान किया जाएगा।
कर प्रशासन
भारतीय लेखांकन मानक में ही आय परिकलन और प्रकटन मानकों के लिए अपेक्षाएं शामिल करने के हेतू कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। वर्ष 2027-28 से आय परिकलन और प्रकटन मानकों पर आधारित प्रथक लेखांकन अपेक्षाओं को समाप्त कर दिया जाएगा।
अन्य कर प्रस्ताव
बायबैक के कराधान में परिवर्तन को इसलिए लाया गया कि प्रवर्तकों द्वारा बायबैक रूट का अनुचित उपयोग रोका जा सके। कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कराधान 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट के लिए 30 प्रतिशत होगा।
एल्कोहल युक्त लिकर, स्क्रैप और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 2 प्रतिशत किया जाएगा और तेंदु पत्ते पर 5 प्रतिशत की दर को घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।
वायदा सौदों पर ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन कार्यकलाप दोनों पर एसटीटी की मौजूदा 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर लगेगा।
मैट को अंतिम कर बनाए जाने का प्रस्ताव है, इसलिए 01 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा। इस परिवर्तन के अनुरूप 15 प्रतिशत की मौजूदा मैट दर को कम करके 14 प्रतिशत किया जा रहा है।
अप्रत्यक्ष कर :
शुल्क सरलीकरण
समुद्री, चमड़ा और वस्त्र उत्पाद
निर्यात हेतु सी-फूड उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु इस्तेमाल किए गए विशेष घटकों के कर मुक्त निर्यात की सीमा को एफओबी वैल्यू के मौजूदा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा।
चमड़ा अथवा सिंथेटिक फूटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध कर मुक्त निर्यात, उसके विशेष उत्पादों के लिए भी अनुमत होगा।
ऊर्जा संक्रमण एवं सुरक्षा :
बैटरियों के लिए लीथियम-आयन सेलों के निर्माण हेतु इस्तेमाल में आने वाली पूंजीगत सामग्रियों के लिए मूलभूत सीमाशुल्क की छूट का विस्तार।
सोलर ग्लास के निर्माण में इस्तेमाल हेतु सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर मूलभूत सीमाशूल्क से छूट मिलेगी।
न्यूक्लियर पावर:
न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्रियों के आयात पर मौजूदा मूल-भूत सीमा शुल्क का वर्ष 2035 तक विस्तार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण खनिज:
महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत सामग्रियों के आयात के लिए मूल-भूत सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी।
बायोगैस मिश्रित सीएनजी:
बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के भुगतान की गणना के समय बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट दी जाएगी।
असैनिक एवं रक्षा विमानन:
असैनिक, प्रशिक्षण एवं अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।
रक्षा क्षेत्र की ईकाइयों द्वारा रख-रखाव, मरम्मत अथवा अन्य आवश्यकताओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।
इलैक्ट्रॉनिक्स:
माइक्रोवेब ओवन के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष पुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।
विशेष आर्थिक क्षेत्र:
विशेष आर्थिक क्षेत्रों से लेकर घरेलू टैरिफ क्षेत्र में पात्र विनिर्माण संयंत्रों द्वारा विक्रय की सुविधा हेतु एक विशेष एकबारगी उपाए का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए रियायती दरों का प्रस्ताव किया गया है। ऐसे विक्रय की मात्रा उनके निर्यात के निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी।
जीवन की सुगमता:
व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली सभी कर योग्य सामग्रियों पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत के घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।
17 दवाओं/औषधियों पर मूलभूत सीमाशूल्क में छूट दी जाएगी।
7 अतिरिक्त असाध्य रोगों के लिए दवाओं/औषधियों के व्यक्तिगत निर्यात को करमुक्त किया जाएगा।
सीमा–शुल्क सरलीकरण प्रक्रिया
वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचालन में कम से कम हस्तक्षेप
विश्वास आधारित प्रणालियां
एईओ के रूप में परिचित टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक प्रचालकों के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया गया है। पात्र विनिर्माणकर्ता और आयातकों के लिए भी समान शुल्क स्थगन सुविधा का प्रस्ताव।
सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया।
कार्गों के समाशोधन के लिए अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रमाणन का लाभ लेने के लिए सरकारी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिन वस्तुओं के आयात के लिए किसी अनुपालन की आवश्यकता नहीं है, विश्वस्त आयातक द्वारा प्रवेश बिल दायर करने और वस्तुओं के आगमन पर सीमा-शुल्क को उनके समाशोधन औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने आप सूचना मिल जाएगी।
सीमा-शुल्क भंडारण,ऱ स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम आधारित लेखा-परीक्षा के साथ एक भंडार संचालक केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।
व्यापर सुगमता
विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा।
खाद्य, औषधि, पौध, पशु और अन्य वन्य जीव उत्पादों, जो निषिद्ध कार्गों का 70 प्रतिशत होता है, के समाशोधन शामिल प्रक्रियाओं को अप्रैल 2026 तक संचालन रूप दिया जाएगा।
जिन वस्तुओं के लिए कोई अनुपालन आवश्यकता नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद समाशोधित किया जाएगा।
सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा-शुल्क एकीकृत प्रणाली 2 वर्षों में शुरु की जाएगी।
गैर-सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में कंटेनर को स्कैन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
निर्यात के नए अवसर
विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा बीच समुद्र में मछ्ली पकड़ने वाले भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली के उतराई को निर्यात वस्तु के रूप में माना जाएगा।
ई-कॉमर्स के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुंच के लिए भारत के छोटे व्यवसाय, कारीगरों और स्टार्टअप की आकांक्षाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यात प्रति खेप 10 लाक रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरफ से हटाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान निकासी से जुड़े प्रावधानों के संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी।
सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का समाधान चाहने वाले ईमानदार करदाता अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामले बंद कर सकेंगे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संत श्री गुरु रविदास महाराज जी की जन्म जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।”
श्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया:
“मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।”
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज रेड फोर्ट लॉन्स पर भारत पर्व 2026 के समापन समारोह में भाग लिया। भारत पर्व को मात्र एक उत्सव से अधिक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की एकता में विविधता को प्रतिबिंबित करता है, राष्ट्र की सांस्कृतिक जीवंतता और पर्यटन क्षमता को उजागर करता है तथा विकसित भारत@2047 की ओर सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।
समागम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत आधुनिक इतिहास में अभूतपूर्व स्तर पर परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि अवसंरचना विस्तार, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा युवा नवाचार अर्थव्यवस्था और समाज की नींव को नया आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रगति लोगों के देशभर में यात्रा करने के बढ़ते आत्मविश्वास में भी दिखाई दे रही है। भारत ने 2025 में 400 करोड़ से अधिक आंतरिक पर्यटक यात्राओं का रिकॉर्ड दर्ज किया, जो न केवल महामारी-पूर्व स्तर पर पूर्ण पुनरुद्धार को दर्शाता है बल्कि नागरिकों में अपनी ही धरती की खोज के लिए नई उत्साह को भी प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का यादगार प्रदर्शन करने के लिए एकत्रित सभी कलाकारों, कारीगरों और शिल्पकारों को बधाई दी।
समापन समारोह के दौरान, पर्यटन एवं पेट्रोलियम राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने कहा कि भारत पर्व भारत के रंगों, ध्वनियों, स्वादों और परंपराओं को एक छत के नीचे लाकर देश की विविधता में निहित असाधारण एकता की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्सव नागरिकों को राष्ट्र की आत्मा के निकट लाते हैं, राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करते हैं तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत उसके सबसे बड़े राजदूत के रूप में अपनी प्रासंगिकता को पुनः पुष्ट करते हैं।
भारत पर्व 2026, एक छह दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन उत्सव, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 26 से 31 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक रेड फोर्ट के सामने लॉन्स तथा ज्ञान पथ पर आयोजित किया गया। समापन समारोह में पर्यटन एवं पेट्रोलियम राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने भी शिरकत की।
भारत पर्व पर्यटन मंत्रालय का प्रमुख वार्षिक आयोजन है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक, पाक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव मनाता है तथा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” और “देखो अपना देश” जैसे राष्ट्रीय पहलों को बढ़ावा देता है। वर्षों से यह उत्सव भारत की एकता में विविधता तथा अपार पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने वाले प्रमुख मंच के रूप में विकसित हुआ है।
यह उत्सव भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने, आंतरिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने, कारीगरों एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मंच प्रदान करने, पर्यटन जागरूकता बढ़ाने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष के आयोजन में 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 25 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा देश भर से प्रमुख संस्थानों और संगठनों ने भाग लिया।
इस वर्ष का भारत पर्व विशेष महत्वपूर्ण था क्योंकि यह “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक था—वह प्रतिष्ठित गीत जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया और आज भी एकता, सांस्कृतिक गौरव तथा मातृभूमि के प्रति प्रेम का प्रतीक बना हुआ है।भारत पर्व 2026 में भारी जन भागीदारी दर्ज की गई, जिसमें औसतन प्रतिदिन लगभग 40,000 आगंतुकों की उपस्थिति रही।
रांची,01.02.2026 – महावीर टावर मेन रोड रांची में योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन ऑफ झारखंड की बार्षिक आम बैठक अधिवक्ता संजय कुमार की अध्यक्षता में की गई, इस बैठक में 16 जिला के अध्यक्ष एवं सचिव मौजूद रहे |
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026-27 की सब- जुनियर एवं जुनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता लातेहार एवं सीनियर की प्रतियोगिता जामताड़ा में सितम्बर माह में कराने का निर्णय लिया गया, सभी जिला को पांच – पांच नए निर्णायक तैयार करना है, जिला योग केन्द्र को जिला संघ द्वारा एक वर्ष का संबंध्ता दे सकते हैं |
इस बैठक में सर्वसम्मति से विपिन कुमार पाण्डेय को राज्य संघ का मुख्य सलाहकार बनाया गया | इस बैठक में मुख्य रुप से राज्य संघ के अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी सचिव चन्दू कुमार एवं कोषाध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह, संतोषी साहु, मलय कुमार दे, कुणाल कुमार, पूजा सिंह, दीपक कुमार रजक, सर्वेश कुमार सिंह, जन्मेजय सिंह, प्रहलाद भगत, रवि शंकर नेवार, दयनन्द जयसवाल, अमित स्वर्णकार, प्रदीप कुमार ठाकुर, डा. परासर, आकाश सेठ, राहुल सिंह, विनित सिंह, सुरभी सिंह, उपस्थित रहे |
नई दिल्ली – ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित भारत पर्व 2026 के पावन अवसर पर, 30 जनवरी 2026 आंध्र प्रदेश दिवस के रूप में मनाई गयी, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का एक जीवंत प्रदर्शन था।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित भारत पर्व, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हथकरघा और विरासत को दर्शाने वाला एक भव्य राष्ट्रीय मंच है।
आंध्र प्रदेश पवेलियन एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरा, जिसमें जीवंत थीम-आधारित पर्यटन प्रदर्शन, एक पारंपरिक फूड कोर्ट और एक उत्कृष्ट हथकरघा प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई। इसमें आगंतुकों को राज्य की ऐतिहासिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और रचनात्मक उत्कृष्टता की एक जीवंत झलक मिली।
आंध्र प्रदेश दिवस का एक प्रमुख आकर्षण 46 प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा भव्य कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति थी, जिसने आंध्र प्रदेश की शास्त्रीय नृत्य परंपरा की गरिमा, भव्यता और आध्यात्मिक गहराई को जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और राज्य की गहरी सांस्कृतिक भावना और शास्त्रीय कला रूपों के संरक्षण के प्रति समर्पण को दर्शाया।
भारतीय संस्कृति के प्रशंसक, पर्यटक और उत्सव में शामिल होने वाले लोग बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए। इन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर आंध्र प्रदेश के गौरव में भागीदार बने।
भारत पर्व 2026 में आंध्र प्रदेश दिवस का उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की एक सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में इस उत्सव की भूमिका को और मजबूत किया है।
नई दिल्ली – अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (उम्मीद) केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनहितैषी और जवाबदेह बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत 30 जनवरी 2026 को दो अतिरिक्त मॉड्यूल – सर्वेक्षण मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति पट्टा मॉड्यूल लॉन्च किए।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नए मॉड्यूल्स का शुभारंभ किया।
सर्वेक्षण मॉड्यूल इस पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित जानकारी को एकत्रित करने, प्रबंधित करने और अद्यतन करने के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है।
वक्फ संपत्ति पट्टा प्रबंधन मॉड्यूल को पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों की पट्टा संबंधी जानकारी के संपूर्ण प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मॉड्यूल पट्टा संबंधी जानकारी, पट्टा अवधि, पट्टा राशि और अन्य प्रासंगिक विवरणों को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड करने और उनकी निगरानी करने में सक्षम बनाता है, जिससे वक्फ संपत्तियों के पट्टा में जवाबदेही और निगरानी को मजबूती मिलती है।
यह शुभारंभ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल शासन विधियों का लाभ उठाने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्डों को इन मॉड्यूल के व्यापक कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और पात्र लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने 6 जून 2025 को उम्मीद केंद्रीय पोर्टल की शुरूआत की थी। यह एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों के वास्तविक समय में अपलोड करने, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।
इस पोर्टल का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देकर पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन के तरीके में एक मौलिक बदलाव लाना है।
इसकी प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग के साथ एक व्यापक डिजिटल सूची का निर्माण, समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी पट्टे और उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस विधियों के साथ एकीकरण और सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट तक सार्वजनिक पहुंच शामिल हैं।
अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय देश भर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
नई दिल्ली – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (IICA) ने नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की, जिसका नेतृत्व महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर तथा उप महानिदेशक (ग्रुप) श्री उमाशंकर प्रसाद ने किया। इस बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन सहयोग के क्षेत्रों में संभावित साझेदारी की तलाश करना था।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया और अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए ने उद्योग जगत से उभरती और निरंतर बदलती मांगों पर प्रकाश डाला तथा संस्थानों के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रासंगिक बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के नेतृत्व ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की है और “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थानों को व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों स्तरों पर योगदान देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एनपीसी जैसे संस्थागत साझेदारी उभरती चुनौतियों—शासन, उत्पादकता, स्थिरता और नवाचार—का प्रभावी समाधान खोजने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर आईआईसीए के विभिन्न स्कूलों और केन्द्रों के प्रमुखों द्वारा संस्थान की भूमिका और गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रस्तुतियों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, वकालत (एडवोकेसी) और परामर्श सेवाओं के माध्यम से सरकार एवं निजी क्षेत्र की पहलों को समर्थन देने में आईआईसीए की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया गया।
संवाद के दौरान एनपीसी की महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर ने बताया कि एनपीसी की स्थापना 1958 में, स्वतंत्रता के तुरंत बाद उस समय हुई जब देश सीमित संसाधनों और उत्पादकता बढ़ाने की तात्कालिक आवश्यकता से जूझ रहा था। उन्होंने जापान की ऐतिहासिक उत्पादकता यात्रा का उल्लेख किया, जिसने भारत में संस्थागत रूप से उत्पादकता आंदोलन की नींव रखी। तब से एनपीसी ने अपना दायरा उद्योग से आगे बढ़ाकर कृषि, सेवाएँ, एमएसएमई, स्थिरता, हरित उत्पादकता और ईएसजी आधारित पहलों तक विस्तारित किया है।
उन्होंने एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन सहयोग में एनपीसी की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिसमें पर्यावरण ऑडिट, ऊर्जा अनुपालन, जल प्रबंधन, बीआरएसआर रिपोर्टिंग और ईएसजी परामर्श शामिल हैं। एनपीसी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ भी उभरते अनुपालन ढाँचों और उद्योग की नियामकीय आवश्यकताओं के समर्थन हेतु पेशेवर क्षमता निर्माण पर कार्य कर रहा है।
अपने संबोधन में आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ने कहा कि अब प्रशिक्षण संस्थान, शोध निकाय और नीति संगठन अलग-अलग काम नहीं कर सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र कार्यक्रम, सीएसआर प्रभाव ढाँचे, अनुपालन क्षमता निर्माण और अनुप्रयुक्त अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को तत्काल सहयोग के प्रमुख बिंदुओं के रूप में चिन्हित किया, जहाँ दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
दोनों संस्थानों ने आगे मिलकर कार्य करने की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि आईआईसीए की नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श क्षमता को एनपीसी की व्यवहारिक और कार्यान्वयन आधारित उत्पादकता विशेषज्ञता के साथ जोड़कर भारत को एक उच्च आय, प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और सतत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जा सके। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख –
स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, आईआईसीए द्वारा किया गया।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया है। श्री मोदी ने स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की पोस्ट का जवाब देते हुए एक्स पर पोस्ट किया:
“यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल किया गया है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।”
नई दिल्ली – राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में अपना 34वां स्थापना दिवस मनाया। यह पूरे भारत में महिलाओं के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने, बढ़ावा देने और उनकी उन्नति के प्रति तीन दशकों से अधिक की अटूट प्रतिबद्धता का स्मरण किया।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।
एनसीडब्ल्यू की 34 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए, स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन “स्वास्थ्य ही सशक्तिकरण” विषय के इर्द-गिर्द किया गया, जो इस विचार को सुदृढ़ करता है कि महिलाओं का स्वास्थ्य सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और राष्ट्रीय विकास के मूल में निहित है।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के स्वास्थ्य की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक स्वस्थ महिला एक स्वस्थ पीढ़ी को जन्म देती है, और एक स्वस्थ पीढ़ी एक मजबूत, लचीले और समृद्ध राष्ट्र का आधार होती है।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं के स्वास्थ्य में निवेश करना केवल एक कल्याणकारी उपाय नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने संबोधन में पोषण अभियान के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पोषण और स्वास्थ्य देखभाल को ध्यान में रखकर किए गए प्रयासों ने देश भर में महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने में बहुत योगदान दिया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर ने आयोग का दृष्टिकोण दोहराया।
समारोह के अंतर्गत, एनसीडब्ल्यू के कैलेंडर 2026 में शामिल आईएसआरओ और डीआरडीओ के प्रख्यात वैज्ञानिकों को राष्ट्र निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भारत की मिसाइल महिला के रूप में प्रसिद्ध डॉ. टेसी थॉमस को रक्षा विज्ञान में उनकी अनुकरणीय सेवा और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया।
आयोग ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और आईआईटी मद्रास के निदेशक श्री वी. कामाकोटी को “तेरे मेरे सपने” के लिए एआई मॉड्यूल विकसित करने में उनके अमूल्य सहयोग के लिए सम्मानित किया, यह विवाह पूर्व व्यवहार और परामर्श को मजबूत करने के उद्देश्य से एनसीडब्ल्यू का एक प्रमुख कार्यक्रम है।
इस कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, नीतिगत समर्थन, नवाचार और समावेशी साझेदारी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के लिए एनसीडब्ल्यू की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की आयोग भारत में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, स्वस्थ और अधिक न्यायसंगत समाज के निर्माण के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।
नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य इसके युवाओं और उनकी नवाचार (इन्नोवेशन) की क्षमता से तय होगा। उन्होंने युवा नवाचारियों को ‘विकसित भारत @2047’ के वास्तुकार के रूप में वर्णित किया।
मंत्री महोदय 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में देश भर के अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) के स्कूली छात्रों के साथ बातचीत कर रहे थे।
विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के छात्रों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, जिसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है। उन्होंने कहा कि यह जनसांख्यिकीय शक्ति अवसर और जिम्मेदारी दोनों लेकर आती है। आने वाले दशक, विशेष रूप से वर्ष 2047 का विजन, आज के छात्रों के विचारों, कौशल और नवाचार करने के उनके आत्मविश्वास से आकार लेगा।
मंत्री ने समझाया कि अटल इनोवेशन इकोसिस्टम की परिकल्पना जीवन में जल्दी ही इस आत्मविश्वास को जगाने के लिए की गई थी, जिससे छात्र अपनी ताकत को पहचान सकें, वास्तविक दुनिया की समस्याओं का पता लगा सकें और तकनीक के माध्यम से समाधान विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल युवा मस्तिष्क को निष्क्रिय शिक्षण (पैसिव लर्निंग) से समस्या-समाधान, टीम वर्क और प्रयोग की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
छात्रों के साथ खुलकर संवाद करते हुए, मंत्री महोदय ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे तकनीक को केवल उपभोग के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सृजन के एक मंच के रूप में देखें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा अब पूरी तरह से भौतिक पुस्तकालयों या कोचिंग केंद्रों पर निर्भर नहीं है, क्योंकि डिजिटल पहुंच ने ज्ञान का लोकतांत्रीकरण कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह है तकनीक का समझदारी, उत्पादकता और नैतिकता के साथ उपयोग करने की क्षमता।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरुआती वर्षों के दौरान मार्गदर्शन (मेंटरिंग) के महत्व पर भी बात की और उल्लेख किया कि किशोरावस्था वह चरण है जहाँ रुचियाँ, क्षमताएँ और जीवन के मार्ग आकार लेना शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब्स जैसे व्यवस्थित नवाचार मंच छात्रों को यह पहचानने में मदद करते हैं कि वे क्या सबसे बेहतर कर सकते हैं, बजाय इसके कि वे एक समान या पारंपरिक करियर विकल्पों के पीछे भागें।
संवाद के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, पर्यावरण और पीयर-टू-पीयर लर्निंग (सहपाठियों से सीखना) जैसे विषयों पर छात्रों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों की विस्तृत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ये विचार दर्शाते हैं कि नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने गौर किया कि आज भारत के लगभग आधे स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, और यह बदलाव निरंतर संस्थागत सहयोग और अवसरों तक समान पहुंच के कारण संभव हुआ है।
मंत्री ने छात्रों को क्षेत्र-विशिष्ट नवाचारों को खोजने के लिए भी प्रोत्साहित किया और कहा कि स्थानीय भूगोल और संसाधन अनूठी संभावनाएँ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि तटीय, द्वीप, पहाड़ी और खनन क्षेत्रों के छात्र ऐसे समाधान विकसित करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं जो दूसरे नहीं कर सकते, जिससे एक अलग पहचान और टिकाऊ नवाचार मार्ग तैयार होते हैं।
नवाचार और उद्यमिता के बढ़ते मेल पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों को केवल प्रोटोटाइप (नमूनों) से आगे सोचने और उनके विस्तार (स्केलेबिलिटी), बाजार संपर्कों और दीर्घकालिक व्यवहार्यता की दिशा में काम करने की सलाह दी। उन्होंने युवा नवाचारियों के लिए बढ़ते सहायता तंत्र के बारे में बात की, जिसमें विभिन्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के माध्यम से वित्त पोषण, परामर्श, पेटेंट सुविधा और उद्योग जगत से जुड़ाव शामिल है।
नवाचार को एक निरंतर यात्रा बताते हुए, मंत्री ने छात्रों से सहयोग करने, विचारों का आदान-प्रदान करने, सहकर्मी समूह बनाने और सामूहिक रूप से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा सहयोग न केवल समाधानों को मजबूत करता है, बल्कि नेतृत्व, संचार और उद्यमशीलता के कौशल भी विकसित करता है जो भविष्य के कार्यबल के लिए आवश्यक हैं।
संवाद के अंत में मंत्री ने छात्रों को वर्तमान दशक में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और इसे व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय परिवर्तन दोनों के लिए एक निर्णायक चरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिज्ञासा, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ, आज के युवा नवाचारी एक आत्मनिर्भर, तकनीक-संचालित और समावेशी भारत को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने केन्द्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा के साथ मिलकर डिब्रूगढ़ में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। यह डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इन 5 परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कुल 1,715 करोड़ रूपए की लागत से पूरा होने की उम्मीद है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कई अहम पहलों का उद्घाटन किया और उनकी आधारशिला रखी, जिनमें नई असम विधानसभा भवन और एमएलए आवासीय परिसर का निर्माण, विश्व स्तरीय बहुउद्देश्यीय खेल परिसर, वन्यजीव स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना, और डिब्रूगढ़ क्षेत्र में तालाबों और वेटलैंड्स(जलभूमियों) का बड़े पैमाने पर कायाकल्प शामिल है। ये पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक कार्यों के विकेंद्रीकरण, शासन संरचना को मजबूत करने और ऊपरी असम में क्षेत्रीय विकास को तेज करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
इस अवसर पर बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “आज डिब्रूगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। जैसे ही माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी ने कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी, यह परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिब्रूगढ़, ऊपरी असम और पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए उठाए जा रहे परिवर्तनकारी कदमों को दर्शाते हैं। पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में असम में अभूतपूर्व बदलाव आया है, जहां जनता की आकांक्षाओं को सुशासन के माध्यम से वास्तविक नतीजों में बदला गया है।”
सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि नया विधानसभा परिसर, विधायक आवास, अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, वन्यजीव अनुसंधान संस्थान और जलभूमि(वेटलैंड) को फिर से बेहतर बनाने जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं डिब्रूगढ़ को नई गति देंगे और असम के समग्र विकास को भी मजबूत करेंगें। प्रशासनिक क्षमता को मजबूती प्रदान करने के लिए, गृह मंत्री अमित शाह ने डिब्रूगढ़ में नई असम विधान सभा भवन की आधारशिला रखी, जिसका अनुमानित लागत 284 करोड़ रूपए है। यह परियोजना डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके अलावा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खानिकर परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय आपदा शमन कोष(एनडीएमएफ) फंड के तहत असम वेटलैंड बहाली और कायाकल्प परियोजना का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम असम के लंबे समय से चले आ रहे बाढ़ रोकथाम और जलवायु लचीलापन ढांचा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। 692 करोड़ रूपए के निवेश से लागू की गई यह परियोजना असम के 9-जिलों में फैले 125-वेटलैंड्स के पुनर्जीवन पर केंद्रित है। इस पहल ने जलभराव, गाद जमा होने और पर्यावरण के खराब होने जैसी लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का भी समाधान किया।
खेल विकास को बढ़ावा देने के लिए शाह ने डिब्रूगढ़ के खानिकार में बहुउद्देश्यीय खेल परिसर के पहले चरण का उद्घाटन किया और मुख्य स्टेडियम में बैठने की क्षमता 5,000 से बढ़ाकर 35,000 करने के लिए आधारशिला रखी, ताकि शहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर सके। असम की दूसरी राजधानी के रूप में डिब्रूगढ़ का उभरना और मिसिंग समुदाय की समृद्ध विरासत का उत्सव, मोदी सरकार में पूर्वोत्तर के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है।
सोणोवाल ने कहा कि डिब्रूगढ़ ने ने राज्य की दूसरी राजधानी के रूप में खुद को स्थापित करने में बड़ा कदम उठाया है। सोनोवाल ने कहा, “डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी घोषित किए जाने के बाद, राज्य सरकार ने ज़रूरी बुनियादी ढ़ांचे और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण करने के लिए तेज़ी से काम किया, जिससे आज के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करना संभव हो पाया।”
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में असम में निरंतर शांति और स्थिरता बनी रही है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ विकास हो रहा है।
सोणोवाल ने कहा, “स्थायी शांति ने राज्य में आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार की नींव रखी है। पीएम मोदी जी के गतिशील नेतृत्व और क्षेत्र पर विशेष ध्यान के कारण असम देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है, जिसे केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग प्राप्त हुआ है।”
सर्बानंद सोणोवाल ने पूर्व की कांग्रेस सरकारों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें लंबे समय तक चली उपेक्षा, भ्रष्टाचार और शासन विफलताओं का प्रतीक बताया, जिसने असम के विकास की अमूल्य संभावनाओं और अवसरों को खत्म कर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने असम के विकास के लिए निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने विकास पहलों को तेजी और समन्वय के साथ को आगे बढ़ाया।
सोणोवाल ने कहा कि वर्ष 2014 से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसमें असम और पूर्वोत्तर के राज्य भारत की राष्ट्रीय विकास यात्रा के हिस्से के रूप में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं।ये पहल सरकार के अमृत काल विजन के अनुरूप है, जो समावेशी विकास, बुनियादी ढांचा निर्माण और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है।
सोणोवाल ने कहा कि एनडीए की “डबल इंजन” सरकार औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सभी समुदायों के लिए समान विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बराक और ब्रह्मपुत्र घाटियों, पहाड़ियों और मैदानों के लोगों से असम के विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट रहने की अपील की।
सोणोवाल ने असम और पूर्वोत्तर में शांति, बुनियादी ढांचा विकास, सांस्कृतिक सशक्तिकरण और दीर्घकालिक समृद्धि को बढ़ावा देने वाली पहलों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम ने अभूतपूर्व विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का दौर देखा है, जिसमें बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और स्वदेशी पहचान पर नए सिरे से जोर दिया गया है।
सोणोवाल ने कहा कि दो कार्यक्रम-डिब्रूगढ़ में असम वेटलैंड्स रिस्टोरेशन एंड रीजुवनेशन प्रोजेक्ट का शुभारंभ और ढेमाजी में 10वें मिसिंग युवा महोत्सव का समापन- विकास, आपदा राहत और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
सोणोवाल ने कहा कि असम की वेटलैंड्स ने ऐतिहासिक रूप से बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और लोगों की आजीविका समर्थन में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन दशकों से अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और गाद जमने होने से उनकी प्राकृतिक क्षमता कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि इस बहाली के प्रयास से पारिस्थितिक संतुलन, भूजल पुनर्भरण और सतत बाढ़ प्रबंधन प्रणालियों को मजबूती मिली है।
इस पहल से लगभग 7.5 लाख लोगों को बाढ़ से राहत मिलेगी, करीब 77,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी, बाढ़ की तीव्रता कम होगी और पानी जमा करने की क्षमता बढ़ने से भूजल स्तर में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि इन 15 बड़े तालाबों से सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे असम के किसान वर्ष में तीन बार फसल उगा सकेंगे, पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा और डेयरी उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। ये जलाशय जलक्रीड़ा के लिए भी उपयोगी होंगे और पर्यटन के आकर्षण केंद्र बनेंगे।
डिब्रूगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, असम के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशब महंता, असम के जल संसाधन मंत्री पिजुश हजारिका तथा राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। गृह मंत्री अमित शाह धेमाजी के करेंग चपोड़ी में आयोजित 10वें मिसिंग युवा महोत्सव के समापन समारोह में भी शामिल हुए। यह महोत्सव असम सरकार द्वारा मिसिंग समुदाय की एकता, संस्कृति और पहचान के उत्सव के रूप में आयोजित किया गया था। विदेश एवं वस्त्र मंत्रालय में राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी डिब्रूगढ़ में आयोजित समारोह में उपस्थित थे।
सोणोवाल ने कहा कि यह महोत्सव स्वदेशी परंपराओं के संरक्षण, युवाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम असम के सबसे जीवंत स्वदेशी समुदायों में से एक की जीवित विरासत को उजागर करता है और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तथा सामाजिक एकता का मंच प्रदान करता है।
समापन समारोह में असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, लखीमपुर के सांसद प्रदन बरुआ और मिसिंग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य परमानंद चायांगिया भी उपस्थित थे।
सोणोवाल ने अंत में कहा कि सरकार “विकसित भारत” के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी असम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली – जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज गणतंत्र दिवस समारोह (आरडीसी) 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित देश भर से आए 90 विशिष्ट जनजातीय अतिथियों के सम्मान में एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। यह स्वागत समारोह जनजातीय कार्य मंत्री और जनजातीय कार्य के राज्य मंत्री की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें भारत के जनजातीय समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, योगदान और राष्ट्रीय भावना का उत्सव मनाया गया। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम समावेशी विकास और राष्ट्रीय भागीदारी के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जनजातीय अतिथियों ने राष्ट्रीय राजधानी में सप्ताह भर के कार्यक्रम में भाग लिया। इसका उद्देश्य उन्हें भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था। विश्व युवक केंद्र पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत किया गया और उन्होंने मंत्रालय के संयुक्त सचिव के साथ स्वागत बैठक में भाग लिया। यात्रा कार्यक्रम के तहत अतिथियों ने संसद भवन का दौरा किया, जिससे उन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के कामकाज की जानकारी मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय का भी भ्रमण किया और म्यूजियम मेट्रो ट्रेन एवं मेट्रो की सवारी का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उन्हें भारत के नेतृत्व के सफर और आधुनिक बुनियादी ढांचे की झलक मिली।
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मेहमानों ने भव्य परेड देखी और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रेजिडेंट एट होम समारोह में भाग लिया और प्रधानमंत्री की एनसीसी रैली में भी हिस्सा लिया, जो समावेशी राष्ट्रीय भागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय चिड़ियाघर का दौरा और बीटिंग द रिट्रीट समारोह में भाग लेना भी शामिल था, जिससे उनका प्रवास यादगार और ज्ञानवर्धक बन गया।
स्वागत समारोह में एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसमें पांच राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और ओडिशा के झांकी कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो भारत की पारंपरिक कला रूपों की असाधारण विविधता को प्रदर्शित करती हैं।
महाराष्ट्र ने कोल्हापुर के पवित्र ज्योतिबा मंदिर उत्सव से जुड़ा पारंपरिक सासन काठी लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जो भक्ति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश में नृत्य नाटक ‘रक्तबीज’ का मंचन किया गया, जिसमें देवी काली द्वारा बुराई पर विजय और धर्म की जीत को दर्शाया गया।
तमिलनाडु ने भरतनाट्यम और प्राचीन तमिल मार्शल आर्ट सिलंबम को मिलाकर एक शानदार महिला समूह का प्रदर्शन किया, जिसमें अनुशासन, शक्ति और सुंदरता को दर्शाया गया।
गुजरात ने गरबा परंपरा पर आधारित जीवंत लोक नृत्य डकला का प्रदर्शन किया, जो नारी शक्ति और देवी दुर्गा के प्रति भक्ति का प्रतीक है।
ओडिशा ने भगवान विष्णु के दशावतार की ओडिसी शैली पर आधारित प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें रंगारंग लोक नृत्यों का समावेश था और जिसका समापन ‘वंदे मातरम’ के भावपूर्ण गायन के साथ हुआ।
समारोह में उनके योगदान को मान्यता देते हुए भाग लेने वाले कलाकारों और अतिथियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
यह पहल जनजातीय गौरव को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जनजातीय समुदायों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर, मंत्रालय ने विविधता में एकता और समावेशी राष्ट्र-निर्माण के अपने दृष्टिकोण की पुष्टि की।
स्वागत समारोह का समापन सांस्कृतिक सद्भाव और साझा राष्ट्रीय गौरव के भाव के साथ हुआ, जिससे अतिथियों को गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में अपनी भागीदारी की अविस्मरणीय यादें प्राप्त हुईं।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने स्वयं कुल 24 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट करके सम्मानित किया
सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करने की अनूठी पहल
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में इस पहल को तुरंत लागू किया जाए, ताकि राँची जिले के सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमित रूप से यह लाभ और सम्मान मिल सके। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और कर्मचारी-केंद्रित दृष्टिकोण मजबूत होगा
यह पहल केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए:- जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री
रांची,31.01.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को उनके समर्पित सेवा-काल के लिए सम्मानित करना तथा रिटायरमेंट के ठीक उसी दिन सभी पेंशन संबंधी लाभ उपलब्ध कराना था।
24 शिक्षकों को व्यक्तिगत सम्मान
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने स्वयं कुल 24 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट करके सम्मानित किया।
इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के योगदान को समाज के निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षक ही वह मजबूत नींव हैं, जिस पर आने वाली पीढ़ियां खड़ी होती हैं।
सम्मानित होने वाले शिक्षक/शिक्षिकाओं के नाम
1. श्री आत्म प्रकाश पंडा, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. एदलपीड़ी, तमाड़।
2. श्री महेन्द्र सिंह मुण्डा, स.शि. रा.म.वि. लुंगटू तमाड़।
3. श्री लक्ष्मी कान्त सेठ, स.शि. रा.म.वि. रगड़ाबाड़ांग, तमाड़।
4. श्री काशीनाथ महतो, स.शि. रा.प्रा.वि पातसायडीह, तमाड़।
5.श्री अरूण कोनगाड़ी, स.शि. संत पौल्स मध्य विद्यालय चर्च रोड, राँची।
6. श्री त्रिदीप कुमार साहु, स.शि. रा.म.वि. चंदवे, काँके जिला- राँची।
23. शीला कुमारी तिग्गा, स.शि. रा.प्रा.वि. गड़गाँव, कन्या इटकी, बेड़ो-2।
रिटायरमेंट के दिन ही लाभ वितरण – प्रशासन की बड़ी उपलब्धि
उपायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा,
“सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सभी रिटायरमेंट लाभ प्रदान करना जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और कर्मचारी-हितैषी नीति का जीता-जागता प्रमाण हैं । यह प्रयास है कि हमारे शिक्षक बिना किसी चिंता के अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकें।”
नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं एवं सलाह
शिक्षकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा:
“जीवन की इस नई पारी में आप सभी नई ऊंचाइयों को छुएं। स्वयं को व्यस्त रखें, समाज सेवा में योगदान दें, नई रुचियों को अपनाएं और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। ईश्वर आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सदा खुशहाली प्रदान करे।”
कार्यक्रम के संयोजन में सराहना
कार्यक्रम के सुचारु आयोजन के लिए उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज एवं उनके कार्यालय के समस्त कर्मचारियों का विशेष आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधीक्षक सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता
यह समारोह राँची जिला प्रशासन की उस निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सम्मान, कल्याण एवं समयबद्ध लाभ वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे प्रयास न केवल सेवानिवृत्त व्यक्तियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं विश्वास की भावना को मजबूत करते हैं।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान एवं पेंशन दरबार के सफल आयोजन के बाद एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए अन्य विभागों को भी इस तरह की पहल अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक आदर्श मॉडल है।
अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा:
“अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए, ताकि सेवानिवृत्त होने वाले हर कर्मचारी को उनके योगदान के लिए उचित सम्मान मिले और रिटायरमेंट के ठीक उसी दिन सभी पेंशनरी लाभ (पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट आदि) उपलब्ध हो सकें।”
इस खास पहल की कड़ी में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय भी शामिल हो
उपायुक्त ने खास तौर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय को निर्देशित किया कि वे भी जल्द से जल्द इस तरह के पेंशन दरबार एवं विदाई सम्मान समारोह की शुरुआत करें।
उन्होंने कहा: “जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में इस पहल को तुरंत लागू किया जाए, ताकि राँची जिले के सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमित रूप से यह लाभ और सम्मान मिल सके। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और कर्मचारी-केंद्रित दृष्टिकोण मजबूत होगा।”
शिक्षकों के कल्याण को प्राथमिकता देने वाली नीति
उपायुक्त ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षक समाज के मूल निर्माणकर्ता हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। ऐसे आयोजन करके हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर कर्मचारी सम्मानजनक तरीके से अपनी नई जिंदगी शुरू कर सके। उन्होंने अन्य विभागाध्यक्षों से अपील की कि वे इस मॉडल को अपनाकर अपने-अपने क्षेत्र में लागू करें।
यह निर्देश राँची जिला प्रशासन की उस व्यापक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसमें कर्मचारियों—विशेषकर शिक्षकों—के सम्मान, कल्याण एवं समयबद्ध लाभ वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जानकारी हो की जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पिछले वर्ष जनवरी 2025 से इसका हर माह आयोजन किया जा रहा है।
राँची,31.01.2026 – राँची में शनिवार को ट्रैफिक एसपी और ग्रामीण एसपी की अगुवाई में शहर में 250 से ज्यादा प्रेशर हॉर्न और करीब 400 साइलेंसर पर बुलडोजर चलाया गया।
ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाकर 700 से ज्यादा साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न जब्त किए थे, बता दें कि हाल के दिनों में राँची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह को कई बुजुर्गों ने यह शिकायत की थी कि खासकर अस्पताल के बाहर और रात के समय मोडिफाइड साइलेंसर की वजह से बाइक काफी तेज आवाज करती है।
जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह की शिकायतें अन्य लोगों के द्वारा भी ट्रैफिक एसपी तक पहुंचाई गई थी। जिसके बाद एक बड़ा अभियान चलाकर यह कार्रवाई की गई।
नई दिल्ली – भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद(आईआईएम अहमदाबाद) ने आज आईआईएम, अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन के साथ एक समझौता ज्ञापन(MoU)पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार के शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली में तथा राजदूत श्री विनय क्वात्रा की वर्चुअल उपस्थिति में (संयुक्त राज्य अमेरिका से) संपन्न हुआ।
यह स्कूल आईआईएम अहमदाबाद के पीजीपी बैच 1975 की पूर्व छात्रा सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए के बड़े दान से स्थापित किया जाएगा।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईएम,अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन(MoU)के आदान–प्रदान पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले यह समझौता ज्ञापन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा वैश्विक एआई महाशक्ति बनने की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों का एक मजबूत उदाहरण है।
श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस लोगों, प्रगति और धरती को सशक्त करने वाला माध्यम बनेगा। भारत का एआई नेतृत्व सिर्फ प्रौद्योगिकी से नहीं, बल्कि हमारे संस्थानों और मानव संसाधन की मजबूती से आकार लेगा। माननीय मंत्री ने आईआईएम, अहमदाबाद की गौरवशाली पूर्व छात्रा चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन जी और उनके पति रंजन टंडन जी द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए से इस एआई स्कूल की स्थापना हेतु किए गए परोपकारी योगदान की सराहना की। यह पहल पूर्व छात्रों द्वारा अपने शिक्षण संस्थान को वापस देने की एक उत्कृष्ट परंपरा को स्थापित और सुदृढ़ करती है।
उन्होंने कहा कि कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस भारत की एआई क्षमताओं को बढ़ाने, एआई को सबके लिए सुलभ बनाने, वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था के लिए भारत में रोजगार सृजित करने तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और सामाजिक कल्याण के लिए वैश्विक प्रभाव उत्पन्न करने में एआई का इस्तेमाल करने की दिशा में कार्य करेगा।
भारत में किसी प्रबंधन संस्थान के अंदर स्थापित एक अग्रणी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस स्कूल के रूप में, कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और सार्वजनिक प्रभाव के साथ कार्य करेगा। वैश्विक दृष्टिकोण के साथ, यह स्कूल एआई के जिम्मेदार और प्रभावी अनुप्रयोग के माध्यम से भारत की विशिष्ट एवं जटिल चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगा।
आईआईएम अहमदाबाद का नेतृत्व, सुशासन और संस्थान निर्माण की पुरानी विरासत से प्रेरित यह स्कूल इस बात को आकार देना चाहता है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को किस प्रकार विकसित किया जाए, लागू किया जाए और शासित किया जाए, ताकि स्थायी व्यावसायिक और सामाजिक मूल्य का सृजन हो सके। यह एआई-संचालित विश्व में प्रबंधन शिक्षा के भविष्य को आगे बढ़ाने के आईआईएम अहमदाबाद के मिशन का स्वाभाविक विस्तार होगा।
बिज़नेस-केंद्रित और ट्रांसलेशनल एआई के एक केंद्र के रूप में परिकल्पित यह स्कूल विश्वस्तरीय संकाय सदस्यों, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, नीति निर्माताओं और वैश्विक भागीदारों को एक साथ लाएगा, ताकि एआई अनुसंधान और अनुप्रयोग की नई सीमाओं को परिभाषित किया जा सके। इसका अनुसंधान एजेंडा अनुप्रयोग-आधारित और केस-आधारित होगा, जो वास्तविक प्रबंधकीय, संस्थागत और सामाजिक चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा। यह स्कूल अत्याधुनिक एआई अनुसंधान का व्यावहारिक समाधान, उपकरण, ढांचे और स्केलेबल प्रणालियों में बदलने पर फोकस करेगा जिन्हें लागू किया जा सके, जो फैसले लेने की क्षमता को बेहतर बनाए, उत्पादकता बढ़ाए और उद्योग, सरकार तथा समाज में जटिल चुनौतियों का समाधान करे।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी; भारतीय प्रबंधन संस्थान,अहमदाबाद के निदेशक प्रो. भारत भास्कर; संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) श्री पूर्णेंदु बनर्जी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।