आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

नई दिल्ली – आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत दिशानिर्देशों के अनुसार, सूचीबद्ध अस्पताल पात्र लाभार्थियों को स्‍वास्‍थ्‍य सेवा से इनकार नहीं कर सकते।

यदि सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार में कोई अनियमितता हो या इलाज से इनकार किया जाए, तो लाभार्थी केंद्रीय शिकायत निवारण प्रबंधन प्रणाली (सीजीआरएमएस) या 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14555 के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। एबी-पीएमजेएवाई के तहत, ऐसी शिकायतों की निगरानी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से की जाती है। प्रत्येक स्तर पर, शिकायतों की जांच और समाधान नोडल अधिकारियों और शिकायत निवारण समितियों द्वारा किया जाता है।

एबी-पीएमजेएवाई योजना के तहत, अस्पतालों का पैनल में सूचीबद्ध होना एक सतत प्रक्रिया है और इसका कार्यान्वयन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पैनल में शामिल होने संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार मानदंडों को पूरा करने वाले स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की आवश्यकताओं और उपलब्धता के आधार पर किया जाता है। इस योजना के तहत निजी अस्पतालों का पैनल में शामिल होना पूरी तरह से स्वैच्छिक है।

28.02.2026 तक, इस योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या वित्त वर्ष 2018-19 में 6,917 (3,013 सरकारी और 3,904 निजी अस्पताल) से बढ़कर 19,483 सरकारी और 16,746 निजी अस्पतालों सहित 36,229 हो गई है। योजना के अंतर्गत सभी पात्र लाभार्थी देश भर में इन 36,229 सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं।

28.02.2026 तक, इस योजना के तहत कुल 11.69 करोड़ अस्पताल प्रवेशों को अधिकृत किया गया है, जिसमें निजी अस्पतालों में 6.74 करोड़ प्रवेश शामिल हैं।

इस योजना से जुड़े दावों का निपटारा एक नियमित और निर्बाध प्रक्रिया के तहत संबंधित राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है। राज्य में स्थित अस्पतालों के लिए दावा प्रस्तुत करने के 15 दिनों के भीतर और राज्य के बाहर स्थित अस्पतालों के मामले में दावा प्रस्तुत करने के 30 दिनों के भीतर निपटान की अनुमति है। इस योजना के तहत, सूचीबद्ध अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत दावों की जांच नैदानिक ​​दस्तावेजों, जांच रिपोर्टों और अन्य सहायक अभिलेखों के आधार पर, निर्धारित मानक उपचार दिशानिर्देशों के अनुसार की जाती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज शहीद दिवस के अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के लिए इन महान नायकों का बलिदान भारत की सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है; उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि कम उम्र में ही उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि औपनिवेशिक शासन की ताकत से विचलित हुए बिना, उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ बलिदान का मार्ग चुना और राष्ट्र को अपने जीवन से ऊपर रखा; न्याय, देशभक्ति और निडर प्रतिरोध के उनके आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों के मन में प्रेरणा का संचार करते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

“आज हम भारत माता के वीर सपूतों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। राष्ट्र के लिए उनका बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में सदा के लिए अंकित है।

कम उम्र में ही उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट निष्ठा का परिचय दिया। औपनिवेशिक शासन की ताकत से विचलित हुए बिना, उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ बलिदान का मार्ग चुना और राष्ट्र को अपने जीवन से ऊपर रखा; न्याय, देशभक्ति और निडर प्रतिरोध के आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों के मन में प्रेरणा का संचार करते हैं।

 

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को उनके ‘शहीदी दिवस’ पर स्मरण कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनका वंदन किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को उनके ‘शहीदी दिवस’ पर स्मरण कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनका वंदन किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के ऐसे युगपुरुष हुए, जिन्होंने अपने विचार और व्यवहार, दोनों से मातृभूमि की आजादी के लिए युवाओं को प्रेरित किया। इन वीरों के पराक्रम की गूँज ने पूरी अंग्रेजी हुकूमत को भयभीत कर दिया। मातृभूमि की आजादी के लिए फाँसी के फंदे पर झूल जाने वाले इन वीरों की वीरगाथा का स्मरण कर रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से भर उठता है। भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को उनके ‘शहीदी दिवस’ पर स्मरण कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनका वंदन करता हूँ।”

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केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए कोयला गैसीकरण महत्वपूर्ण है

नई दिल्ली – केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

उद्योग जगत के लीडर्स, विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, छात्रों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक संतुलित ऊर्जा दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो विकास को स्थिरता के साथ जोड़े। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विनिर्माण, अवसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और नवाचार के क्षेत्र में मजबूत विकास का अनुभव कर रहा है।

मंत्री ने भारत के विशाल कोयला भंडार को लेकर अनुमान लगाया कि यह लगभग 400 अरब टन है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े भंडारों में से एक है। यहां ऊर्जा मिश्रण में कोयले का हिस्सा लगभग 55% और बिजली उत्पादन में लगभग 74% है। वर्तमान में कोयले की वार्षिक मांग लगभग एक अरब टन है। 2047 तक इसमें काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। इसलिए उन्होंने कोयले के महत्व पर जोर दिया। भारत 2070 तक नेट जीरो (शून्य कार्बन उत्सर्जन) उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कोयला गैसीकरण को एक प्रमुख परिवर्तनकारी तकनीक बताते हुए उन्होंने समझाया कि यह कोयले को सिंथेटिक (हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का विभिन्न अनुपातों में मिश्रण) गैस में परिवर्तित करता है। इसका उपयोग आगे चलकर स्वच्छ ईंधन, रसायन, उर्वरक और हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण घरेलू संसाधनों के अधिक कुशल और बेहतर उपयोग को सक्षम बनाता है, साथ ही आर्थिक अनुकूलता को भी बढ़ाता है। उन्होंने कच्चे तेल के लगभग 83%, प्राकृतिक गैस के 50% और मेथनॉल एवं उर्वरकों के 90% से अधिक आयात पर भारत की निर्भरता की ओर भी इशारा किया, ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन जाती है।

इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन शुरू किया है। इसका लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को सहयोग देने के लिए 8,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देना शुरू किया गया है। इसमें कई बड़े उपक्रम पहले से ही चल रहे हैं और 64,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रक्रिया में है। भूमिगत कोयला गैसीकरण (यूसीजी) जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को भी पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करते हुए पहले से दुर्गम भंडारों का उपयोग करने की उनकी क्षमता के लिए उजागर किया गया।

मंत्री ने बिजली, तेल, गैस और उर्वरक सहित कई क्षेत्रों में कोयला गैसीकरण के प्रभाव को देखते हुए उद्योग जगत, शिक्षा जगत, स्टार्ट-अप और अनुसंधान संस्थानों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं, सहायक नीतियों और शीघ्र भागीदारी और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहनों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवाचार, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और समन्वित प्रयासों के साथ भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाते हुए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों में वैश्विक लीडर के रूप में उभर सकता है।

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दिशा योजना के अंतर्गत टेली-लॉ कार्यक्रम पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन कुरुक्षेत्र हरियाणा में किया गया

नई दिल्ली – केंद्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना (दिशा) योजना के अंतर्गत टेली-लॉ कार्यक्रम गतिविधियों पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला आज यानी 22.03.2026 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सभागार, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित की गई।

कार्यशाला प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और अंतिम छोर तक न्याय वितरण में शामिल संस्थानों के साथ हितधारकों के जुड़ाव को बढ़ाने के लिए विभाग के निरंतर प्रयासों का हिस्सा थी। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका के सदस्यों, सरकारी अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के प्रतिनिधियों, लॉ स्कूलों, छात्रों, फील्ड पदाधिकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने एक साथ लाया।

इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश, केन्द्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा सरकार के मंत्री श्री राव नरबीर सिंह के साथ-साथ न्याय विभाग और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और माननीय केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिशा जागरूकता वैन  को रवाना किया। यह इस पहल के अंतर्गत जागरूकता और पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समारोह समुदायों को शामिल करने, महत्वपूर्ण जानकारी का प्रसार करने और सार्वजनिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए एक समर्पित प्रयास की शुरुआत का प्रतीक था।

कार्यक्रम का शुभारंभ औपचारिक दीपक प्रज्वलित करने के साथ हुआ, जो ज्ञान और न्याय की विजय का प्रतीक है।

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक प्रदर्शन किया। इन्होंने देशभक्ति के इस कालातीत प्रतीक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।

केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने सभा को संबोधित करते हुए न्याय को अधिक सुलभ, किफायती और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टेली-लॉ, न्याय बंधु और कानूनी साक्षरता कार्यक्रम जैसी पहलें न्याय वितरण तंत्र को मजबूत करने और नागरिकों को जागरूकता और समय पर कानूनी सलाह के माध्यम से सशक्त बनाने के सरकारी प्रयासों का अभिन्न अंग हैं। ये पहलें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जागरूकता का विस्तार करने के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इससे अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।। निशुल्क सेवा के महत्व पर उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष ऐतिहासिक अलीपुर द्वार मामले में चितरंजन दास और श्री अरविंद घोष की प्रेरक विरासत का उल्लेख किया, जहां सी.आर. दास निस्वार्थ भाव से श्री अरविंद घोष का बचाव करने के लिए पेश हुए और न्याय के लिए जोरदार तर्क दिया, जिससे उन्हें बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि न्याय बंधु पहल के माध्यम से सेवा की यह भावना जारी है और नि:शुल्क अधिवक्ताओं को न्याय के संरक्षक की भूमिका निभाने वाला बताया। उन्होंने न्याय तक पहुंच को और मजबूत करने के लिए हरियाणा में नि:शुल्क वकीलों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया। मंत्री महोदय ने ग्राम स्तर के उद्यमियों (वीएलई), छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के साथ भी बातचीत की, जमीनी स्तर पर कानूनी सेवाओं के विस्तार में उनके योगदान की सराहना की और सभी को न्याय बंधु में शामिल होने और यह सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया कि न्याय का उद्देश्य बना रहे।

न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए देश के संविधान के अनुच्छेद 39ए के अंतर्गत समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता के संवैधानिक दृष्टिकोण का उल्लेख किया और दिशा ढांचे की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। दिशा ढांचे में टेली-लॉ (वहाँ तक पहुँचना), न्याय बंधु (निःशुल्क कानूनी सेवाएं) और कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम जैसी पहलें शामिल हैं। इनका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में, कानूनी सहायता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जागरूकता सशक्तिकरण की दिशा में पहला कदम है और दिशा जैसी योजनाओं से न्याय वितरण को और मजबूत किया जा सकता है। सचिव (न्याय) ने टेली-लॉ जैसे प्रौद्योगिकी-आधारित प्लेटफार्मों का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया, ताकि किफायती और समय पर कानूनी सहायता सुनिश्चित की जा सके, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर नागरिकों के लिए। न्याय बंधु कार्यक्रम और कानूनी साक्षरता पहलों की भूमिका पर उन्होंने एक समावेशी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो, प्रत्येक नागरिक को जागरूकता, समर्थन और इस विश्वास के साथ सशक्त बनाया जाए कि कानूनी व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

कार्यक्रम के दौरान हरियाणा में दिशा योजना की प्रगति पर एक प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), टेली-लॉ मोबाइल एप्लिकेशन और टोल-फ्री हेल्पलाइन 14454 के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से मुकदमेबाजी से पहले कानूनी सलाह की पहुंच के विस्तार को रेखांकित किया गया। यह राज्य के सभी 22 जिलों में सुलभ और नागरिक-केंद्रित सेवाएं देता है। यह नोट किया गया कि टेली-लॉ को शुरू में 317 सीएससी के साथ आकांक्षी जिले नूंह (मेवात) में पेश किया गया था और तब से इसका काफी विस्तार हुआ है। वित्त वर्ष 2024-2025 और वित्त वर्ष 2025-2026 के दौरान सभी जिलों में 6,197 सीएससी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसमें सात आकांक्षी ब्लॉकों तक पहुंच भी शामिल है। प्रस्तुति में इस बात पर बल दिया गया कि न्याय तक समान पहुंच एक लोकतांत्रिक समाज के लिए मौलिक है और टेली-लॉ नागरिकों और न्याय प्रणाली के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। इसमें हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाभार्थियों, पैनल वकीलों, ग्राम स्तर के उद्यमियों (वीएलई) और न्याय सहायकों के साथ बातचीत की। इसमें वीएलई ने बताया कि कैसे टेली-लॉ पहुंच से वंचित लोगों तक पहुंच रहा है और कानूनी सेवाओं के घर पर वितरण को सक्षम कर रहा है।  मुख्यमंत्री ने “हर घर न्याय, सबको न्याय” के दृष्टिकोण को दोहराया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा कीं।

इसके बाद न्याय बंधु (प्रो बोनो लीगल सर्विसेज) कार्यक्रम पर एक समर्पित खंड आयोजित किया गया। यह दिशा (न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने) योजना के अंतर्गत न्याय विभाग की एक पहल है। कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों और पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वीडियो दिखाया गया। इसके बाद न्याय बंधु के अंतर्गत पंजीकृत नि:शुल्क वकीलों के साथ-साथ विभिन्न लॉ स्कूलों के संकाय सदस्यों और छात्रों के साथ एक संवादात्मक चर्चा की गई। सत्र में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने में निशुल्क कानूनी सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। इस बात पर बल दिया गया कि कैसे इस तरह के प्रयास बिना आवाज़ वालो को आवाज देते हैं और कानूनी जागरूकता और कानूनी सशक्तिकरण के बीच की खाई को पाटते हैं। इसने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे प्रो बोनो क्लब छात्रों के लिए सैद्धांतिक कानूनी शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव में बदल रहे हैं।

इस कार्यक्रम में देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के जनजातीय समुदायों के प्रथागत कानूनों का दस्तावेजीकरण करने वाली दो ई-पुस्तकें जारी की गईं। ये प्रकाशन गुवाहाटी उच्च न्यायालय के विधि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी कानूनी परंपराओं को संरक्षित करना और देश के व्यापक कानूनी ढांचे के भीतर प्रथागत शासन प्रणालियों की गहरी समझ में योगदान देना है।

दिशा योजना पर दूरदर्शन वृत्तचित्र जारी किया। यह देश भर में न्याय तक पहुंच बढ़ाने में पहल के परिवर्तनकारी प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण था। वृत्तचित्र में सफलता की कहानियों, जमीनी स्तर तक पहुंच और टेली-लॉ, न्याय बंधु की भूमिका और नागरिकों को सशक्त बनाने में कानूनी साक्षरता प्रयासों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। इसने इस बात का उल्लेख किया कि कैसे प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म और सामुदायिक भागीदारी लोगों और न्याय वितरण प्रणाली के बीच की खाई को पाट रही है। इसको दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया और यह योजना की उपलब्धियों और सभी के लिए समावेशी और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता के प्रेरक प्रतिबिंब के रूप में कार्य किया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मुख्य भाषण देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि हरियाणा को दिशा योजना के अंतर्गत पूरे देश में आयोजित होने वाली 5 क्षेत्रीय कार्यशालाओं में से कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि में क्षेत्रीय कार्यशाला की मेजबानी के लिए चुना गया है। कुरुक्षेत्र “गीता की भूमि” के रूप में पूजा जाता है और यहाँ भगवान कृष्ण ने न्याय और कर्तव्य का संदेश दिया था। उन्होंने दिशा पहल के अंतर्गत कार्यशाला को सार्थक और प्रेरक बताया और कहा कि न्याय अदालतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जागरूकता वैन, ई-पुस्तकों और आउटरीच पहल जैसे नागरिक-केंद्रित प्रयासों के माध्यम से आम नागरिकों के घरो तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा की सच्चा विकास तभी प्राप्त होता है जब इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है। अनुच्छेद 14, 21 और 39ए के अंतर्गत  संवैधानिक गारंटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टेली-लॉ सेवाओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर समय पर न्याय तक पहुंच को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिशा विशेष रूप से वित्तीय या भौगोलिक बाधाओं का सामना करने वालों के लिए प्रौद्योगिकी और हेल्पलाइन 14454 जैसी पहलों द्वारा समर्थित सुलभ, पारदर्शी और कुशल न्याय वितरण को बढ़ावा देती है। चित्तरंजन दास से प्रेरित प्रो बोनो कल्चर के महत्व और क्षेत्रीय भाषाओं में कानूनी जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक 109 लॉ कॉलेजों में प्रो बोनो क्लबों के साथ न्याय बंधु कार्यक्रम के अंतर्गत 10 हज़ार से अधिक अधिवक्ताओं ने पंजीकरण कराया था। उन्होंने केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल के सहयोग से हरियाणा में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन का उल्लेख  कहा कि इन सुधारों ने न्याय की सुगमता को बढ़ाया है। यह डिजिटल इंडिया की परिकल्पना और सतत विकास लक्ष्य 16 के अनुरूप है। उन्होंने अंत में कहा कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का सुलभ अधिकार होना चाहिए।

कार्यशाला ने सरकारी अधिकारियों, कानूनी पेशेवरों, सीएससी प्रतिनिधियों, कानून के छात्रों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं सहित हितधारकों के बीच अनुभव-साझाकरण, परामर्श और नीतिगत संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। चर्चा समन्वय को मजबूत करने, कार्यान्वयन तंत्र में सुधार और प्रौद्योगिकी-सक्षम न्याय पहलों की पहुंच का विस्तार करने पर केंद्रित थी।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा में क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन विधि और न्याय मंत्रालय, न्याय विभाग में संयुक्त सचिव श्री सुरेश कुमार के समापन भाषण के साथ हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और भागीदार संस्थानों को उनके बहुमूल्य योगदान और सक्रिय भागीदारी के लिए हार्दिक सराहना की गई। सत्र ने लोकतंत्र के मूलभूत स्तंभ के रूप में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और इस बात पर बल दिया कि कानून के समक्ष समानता प्रत्येक नागरिक तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री और अन्य प्रतिष्ठित नेताओं के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यशाला के सफल आयोजन में न्याय विभाग, हरियाणा सरकार, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड, एनएएलएसए, एसएलएसए और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की भूमिका को स्वीकार किया गया। न्याय सहायकों, ग्राम स्तर के उद्यमियों, पैरा लीगल वालंटियर्स और पैनल वकीलों सहित क्षेत्र-स्तर के पदाधिकारियों की विशेष सराहना की गई। इनके प्रयास नागरिकों और न्याय वितरण प्रणाली के बीच की खाई को पाटने के लिए जारी हैं। कार्यशाला का समापन विचार-विमर्श को कार्रवाई योग्य परिणामों में बदलने और दिशा ढांचे के तहत प्रौद्योगिकी-सक्षम, समावेशी और नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण को और मजबूत करने के नए संकल्प के साथ हुआ।

कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय को सुलभ, किफायती और समावेशी बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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भारत इनोवेट्स वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में भारत के उदय को दर्शाता है: श्री धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज आईआईटी बॉम्बे में भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री समिट के समापन सत्र को संबोधित किया।

 

इसी आयोजन के दैरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में लगभग 175 निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं ने एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने ऊर्जा, जलवायु एवं स्थिरता, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष एवं रक्षा, स्वास्थ्य सेवा एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी, उन्नत कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, परिवहन एवं स्मार्ट शहर और उद्योग 4.0 सहित विभिन्न क्षेत्रों के नवप्रवर्तकों के साथ भी बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनी स्टालों तथा संस्थानिक नवाचारों को प्रदर्शित करने वाले आईआईटी पवेलियन का भी दौरा किया।

श्री प्रधान ने निवेशकों और शिक्षाविदों के साथ गोलमेज चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि फ्रांस के नीस में आयोजित होने वाले भारत इनोवेट्स 2026 के पूर्वाभास के रूप में, आज के विचार-विमर्श सत्र का केंद्र बिंदु गहन तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना, उद्योग व शिक्षा जगत की साझेदारी को मजबूत करना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना था। उन्होंने उभरते उद्यमों में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उनका विस्तार हो सके, नवाचार को प्रोत्साहन मिले और अनुसंधान आधारित उद्यमिता को समर्थन मिल सके।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में भारत इनोवेट्स 2026 का उद्देश्य देश के हर कोने से अनुसंधान एवं विकास आधारित नवाचारों को वैश्विक मंच पर ले जाना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना, सार्थक सहयोग को बढ़ावा देना, निवेश के अवसरों को खोलना और स्थायी वैश्विक साझेदारी का निर्माण करना है।

समापन समारोह में आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री प्रधान ने कहा कि भारत इनोवेट्स, वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हजारों स्टार्टअप की भागीदारी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भारत के नवाचार इकोसिस्टम की जीवंतता और गहराई को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने लिए, बल्कि विश्व के लिए, विशेष रूप से विकसित देशों और लागत प्रभावी एवं विस्तार योग्य नवाचारों की तलाश कर रहे देशों के लिए समाधान विकसित करने की अनूठी क्षमता रखता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत इनोवेट्स एक ऐसा मंच है जो विचारों, प्रतिभाओं और संसाधनों के संगम को संभव बनाता है, जिससे नवाचार की गति तेज होती है।

श्री प्रधान ने नीतिगत समर्थन, संस्थागत सहयोग और अनुकूल वातावरण के माध्यम से नवप्रवर्तकों को सहयोग देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि वास्तविक असर पैदा करने के लिए नवाचार को प्रयोगशालाओं से बाजारों तक ले जाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत इनोवेट्स प्री-समिट में प्रदर्शित नवाचार प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व, विशेष रूप से विकसित देशों में भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

फ्रांस में आयोजित होने वाले भारत इनोवेट्स 2026 वैश्विक प्रदर्शनी के राष्ट्रीय पूर्वाभ्यास के रूप में आयोजित इस पूर्व-शिखर सम्मेलन में देश भर से प्राप्त 1,186 से अधिक आवेदनों में से चयनित 137 डीप-टेक स्टार्टअप एक साथ आए।

आज आईआईटी बॉम्बे में आयोजित पूर्व-शिखर सम्मेलन में स्टार्टअप पर आधारित सत्र हुए, जहां संस्थापकों ने उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की विनिर्माण प्रणालियों से संबंधित अत्याधुनिक नवाचारों को प्रस्तुत किया। इन सत्रों में निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं और नवाचार इकोसिस्टम के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम में स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटल फर्मों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, जिससे सार्थक साझेदारी को बढ़ावा मिला और स्टार्टअप्स को व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार विस्तार के रास्ते तलाशने में मदद मिली।

आईआईटी बॉम्बे में आयोजित भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट ने शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर भारत की नवाचार यात्रा को एक महत्वपूर्ण गति प्रदान की है। चयनित स्टार्टअप्स से अपेक्षा की जाती है कि वे फ्रांस में होने वाले आगामी भारत इनोवेट्स 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम का प्रतिनिधित्व करें, जिससे प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

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आवेदन प्रक्रिया की समाप्ति के उपरांत DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी संबंधित पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक की

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संचालित की जा रही है

पोर्टल के माध्यम से कुल 1499 आवेदन प्राप्त हुए

इन आवेदकों द्वारा कुल 3908 सीटों को प्राथमिकता (विकल्प) के रूप में चयनित किया गया

जिला प्रशासन पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है

रांची,23.03.2026 – रांची जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संचालित की जा रही है। यह प्रक्रिया जिला स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल rteranchi.in के माध्यम से की जा रही है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 16 फरवरी 2026 से शुरू होकर मूल रूप से 15 मार्च 2026 तक निर्धारित थी। अभिभावकों की मांग एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 22 मार्च 2026 कर दिया था।

आवेदन प्रक्रिया की समाप्ति के उपरांत, आज दिनांक 23 मार्च 2026 को समाहरणालय ब्लॉक – ए स्थित कॉन्फ्रेंस कक्ष में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी संबंधित पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक आयोजित की। बैठक में जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा राँची, श्री रविशंकर मिश्रा उपस्थित थे।

बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु उजागर किए गए:

*जिले के 117 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कुल 1161 आरक्षित सीटें उपलब्ध थीं।

* पोर्टल के माध्यम से कुल 1499 आवेदन प्राप्त हुए।

* इन आवेदकों द्वारा कुल 3908 सीटों को प्राथमिकता (विकल्प) के रूप में चयनित किया गया।

*उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि:

*सभी आवेदकों द्वारा अपलोड किए गए प्रमाण-पत्रों (जैसे आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि) की जांच 26 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी की जाए।

*जांच संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, रांची नगर निगम के पदाधिकारी, सिविल सर्जन (सदर अस्पताल), RIMS प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन की जाएगी।

*प्रमाण-पत्रों की जांच पूर्ण होने के पश्चात ऑनलाइन लॉटरी (कंप्यूटरीकृत रैंडम चयन) की तिथि उपायुक्त द्वारा शीघ्र निर्धारित की जाएगी।

जिला प्रशासन पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह प्रक्रिया RTE अधिनियम की भावना के अनुरूप समाज के हर बच्चे को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अभिभावक अपने आवेदन की स्थिति rteranchi.in पोर्टल पर नियमित रूप से जांच सकते हैं। किसी भी प्रकार की सहायता या शिकायत के लिए पोर्टल पर दिए गए संपर्क नंबरों का उपयोग करें।

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झारखंड मुक्ति मोर्चा-असम में  19 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

रांची,23.03.2026 –  : असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हो पाया। अब जेएमएम तीर-कमान के सिंबल पर 19 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि पार्टी ने भाकपा माले के लिए एक सीट छोड़ी है।

सोमवार को नामांकन करने की अंतिम तिथि है. 

हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन दिल्ली रवाना

असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस से नहीं बनी बात

जेएमएम ने असम में 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा ठोका था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगई से इस संबंध में बात भी हुई थी। कांग्रेस असम में जेएमएम को 5 सीटें देने को तैयार थी।

रविवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन दिल्ली गये और वहां बातचीत के दौरान 7 सीटों पर कांग्रेस अड़ी रही। इसके बाद जेएमएम ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

उधर, जेएमएम ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के यहां अपना परंपरागत चुनाव चिन्ह्र तीर-कमान आवंटित करने का आवेदन दिया था। इसे मंजूर कर लिया गया अब वो झारखंड के बाद असम में भी तीर-कमान चुनाव चिन्ह्र पर मैदान में उतरेगी।

असम में अनुसूचित जनजाति के लिए 19 सीटें आरक्षित है, जेएमएम उन सभी आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ रही है। रविवार को सबसे पहला सिंबल जेएमएम प्रत्याशी प्रीति रेखा बारला को मंत्री चमरा लिंडा और विनोद पांडेय ने दिया। मजबत से प्रीति को उम्मीदवार बनाया गया है और सोनारी से बलदेव तेली को टिकट दिया गया है।असम में अभी बीजेपी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी की भूमिका में है।

जेएमएम का दावा है कि इस चुनाव में वो अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराने जा रहे है। चाय बगान में काम करने वाले टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक के सहारे वो हिमंता बिस्व सरमा का किला ध्वस्त करना चाह रहे है।

जेएमएम ने असम चुनाव के लिए स्टार प्रचारक की सूची पहले ही जारी कर दी थी जिसमें हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन भी थे। हेमंत सोरेन चुनाव से पहले असम में दो बड़ी रैली को संबोधित कर चुके है।

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और राहत उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और चल रहे तथा प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों कीसमिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की।

कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा नियोजित राहत उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सभी प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश में समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। बैठक में भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और तत्काल तथा दीर्घकालिक, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर चर्चा की गई।

भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।  किसानों पर पड़ने वाले असर और खरीफ मौसम के लिए उनकी खाद की ज़रूरतों का आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनसे समय पर खाद की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भविष्य में खाद की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई।

यह भी तय किया गया कि सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई। इसी तरह, भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में निर्यात के नए गंतव्य विकसित किए जाएंगे।

विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कई उपायों को सभी हितधारकों से परामर्श के बाद आने वाले दिनों में तैयार और लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाया जाए, जो ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण के तहत पूरी लगन से काम करे। प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के साथ परामर्श से काम करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष लगातार बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। ऐसी स्थिति में, नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें, ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने के लिए भी कहा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं

नई दिल्ली –   केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक ऐसा मील का पत्थर हासिल किया है, जिसकी नींव सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर टिकी है।

X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट्स में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर आधारित एक मील का पत्थर हासिल करते हुए आज, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए, भारत में किसी भी सरकार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रमुख बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 8,931 दिन—पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और अब प्रधानमंत्री के रूप में—’राष्ट्र-प्रथम’ शासन, कार्यों में ईमानदारी और प्रत्येक नागरिक की अथक सेवा के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाते हैं। यह एक ऐसी दुर्लभ विरासत है, जो अभूतपूर्व विश्वास और बेजोड़ सेवा पर निर्मित है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की दशकों की सेवा ने अपने आप में एक युग का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि चाहे गरीबों को उनके अधिकार दिलाना हो, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करना हो, या वैश्विक मंचों पर राष्ट्र का गौरव बढ़ाना हो—मोदी युग ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। श्री शाह ने कहा कि ‘नए भारत’ को गढ़ने के लिए जीवन भर प्रयास करने की ज़रूरत थी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वह कर दिखाया। उन्होंने कहा कि 24 वर्षों से भी अधिक समय तक बिना अवकाश लिए राष्ट्र और लोगों की सेवा करना, प्रधानमंत्री मोदी जी के अटूट समर्पण का ही एक प्रमाण है। श्री शाह ने कहा कि इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी जी को लोगों से अभूतपूर्व स्नेह प्राप्त हुआ—तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति लोगों का विश्वास, स्नेह और समर्थन, हर दिन बढ़ रहा है।

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं और मतदाता सहायता प्रदान की जाएगी

नई दिल्ली – भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी किए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि 2,18,807 मतदान केंद्रों में से प्रत्येक मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और मतदाता सहायता से सुसज्जित हो।
एएमएफ में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत शामिल हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।

मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, स्वीकृत पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।

प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ)/कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या खोजने में सहायता करेगी ।

वीएबी पर प्रमुख चिह्न लगे होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।

मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कई कदमों में से एक के तहत, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाताओं के लिए मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मतदाता स्टेशन में प्रवेश करने से पहले अपना फोन (बंद करके) एक नामित स्वयंसेवक को सौंप सकते हैं और मतदान के बाद उसे वापस ले सकते हैं।

आयोग दोहराता है कि मतदान केंद्रों पर ज़रूरी सुविधाएं और संबंधित सुगम्यता उपाय उपलब्ध कराना अनिवार्य है और सभी मतदान केंद्रों पर इनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा । सभी फील्ड कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान की तारीखों से काफी पहले आवश्यक कार्य पूरे कर लें ताकि सभी मतदाताओं को सुचारू और सुखद मतदान का अनुभव मिल सके।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ’ और ‘केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ’ सहित कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की

नई दिल्ली – सेवा से जुड़े मामलों में लगातार जुड़ाव और समय पर समाधान की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान और राज्य मंत्री पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि सभी विभागों में प्रशासनिक दक्षता और करियर में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ व्यवस्थित बातचीत ज़रूरी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह “सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ” और “केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ” सहित कर्मचारी निकायों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें सर्वे ऑफ इंडिया, इसरो, इंडिया पोस्ट और अन्य संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे, जहां कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके नेतृत्व में कैडर प्रबंधन और पदोन्नति प्रक्रियाओं में हाल ही में कई नई शुरूआत की गई हैं।

उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सक्रिय दृष्टिकोण के चलते हाल के वर्षों में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है, जिससे कर्मचारियों को काफी लाभ हुआ है और कई सेवाओं में विकास की बाधाओं को दूर करने में मदद मिली है। उन्होंने इन सुधारों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन और सहयोग देने के लिए मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को धन्यवाद दिया और स्वीकार किया कि इन उपायों का सभी विभागों में करियर की उन्‍नति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

प्रतिनिधिमंडलों ने मंत्री के समक्ष कैडर पुनर्गठन, वेतन समानता, भत्ते और पदोन्नति के अवसरों से संबंधित कुछ विषय भी रखे, विशेष रूप से सर्वे ऑफ इंडिया और इसरो जैसे संगठनों में। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के निरंतर मार्गदर्शन में, इन विषयों को एक सुनियोजित और आपसी सहयोग के माध्‍यम से हल किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने पदोन्नति की गति के लिए विभाग की प्रशंसा की और कहा कि अपेक्षाकृत कम समय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लाभ मिला है। उन्होंने पाया अभी की गई शुरूआतों ने लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद की है और इनसे काफी मदद मिली है। कार्यान्वयन की समयसीमा और विभागों में एकरूपता से संबंधित कुछ चिंताएं भी उठाई गईं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उठाए गए विषयों का जवाब देते हुए प्रतिनिधिमंडलों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं की जांच संबंधित विभागों के परामर्श से की जाएगी। उन्होंने व्यवस्थित अनुवर्ती कार्रवाई, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय और सेवा संबंधी मामलों के समय पर समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक का समापन विचारों के रचनात्मक आदान-प्रदान और कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने तथा सभी विभागों में प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने के लिए संवाद जारी रखने के परस्‍पर सहयोग के साथ हुआ।

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भारतीय नौसेना के जहाज त्रिखंड ने सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया में अपना ठहराव पूरा किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट जहाज त्रिखंड, संवर्धन संबंधी बंदरगाह यात्रा पूरी करने के बाद 20 मार्च 2026 को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया से रवाना हो गया।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की। जहाज ने सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण पुर्जे और आवश्यक सामग्री भी सौंपी।

भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और सेशेल्स रक्षा बलों (एसडीएफ) के सदस्यों के साथ, आईएनएस त्रिखंड ने अभ्यास लामितिये 2026 के पहले त्रि-सेवा संस्करण में भाग लिया। यह अभ्यास लामितिये के 11वें संस्करण में भारतीय नौसेना की पहली भागीदारी है।

बंदरगाह चरण के दौरान, जहाज पर विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर (वीबीएसएस) प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें संयुक्त बोर्डिंग अभ्यास भी शामिल थे। इसके बाद अभ्यास का समुद्री चरण शुरू हुआ, जिसके दौरान जहाज ने एससीजीएस ले विजिलेंट के साथ अभ्यास किया और भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो और एसडीएफ के विशेष बलों की एक टीम द्वारा समुद्र में संयुक्त बोर्डिंग अभियान चलाया गया। इसके बाद भारतीय सेना और सेशेल्स रक्षा बलों के सैनिकों ने प्रस्लिन द्वीप पर लैंडिंग की। एसडीएफ के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज मेजर जनरल माइकल रोसेट, एसडीएफ के डिप्टी चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज ब्रिगेडियर जीन अट्टाला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अभ्यास के संचालन को देखने के लिए समुद्री चरण के दौरान आईएनएस त्रिखंड पर सवार हुए।

इस अभ्यास ने भारत और सेशेल्स के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाने और समुद्री सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। क्रियोल भाषा में ‘मित्रता’ का अर्थ रखने वाला ‘ लामितिये ‘ दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।

यह बंदरगाह पर आगमन भारत के महासागर (क्षेत्र भर में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण को दर्शाता है, और हिंद महासागर क्षेत्र में पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता बने रहने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सिख धर्म के दूसरे गुरु, श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया

नई दिल्ली –   केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सिख धर्म के दूसरे गुरु, श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “गुरु अंगद देव जी ने महान गुरुमुखी लिपि को विकसित कर गुरु नानक देव जी की वाणी को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने लंगर और संगत की परंपरा को सशक्त बनाकर सेवा, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उनके आदर्श आज भी समाज को मार्गदर्शन देते हैं। सिख धर्म के दूसरे गुरु, श्री अंगद देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”

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राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस मनाया

नई दिल्ली – नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) ने 21 मार्च, 2024 को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस मनाया। इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस का विषय “वन और नवाचार: एक बेहतर दुनिया के लिए नए समाधान” है। इस आयोजन का उद्देश्य आगंतुकों के बीच पौधों और हमारे जीवन में उनके महत्व के बारे में जागरूकता जगाना है।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के शिक्षा केंद्र में डूडल कला गतिविधि के साथ किया गया। इस अवसर पर उद्यान में उपस्थित आगंतुकों को गतिविधियों में सहभागी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके पश्चात मिशन-लाइफ पर एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इन गतिविधियों को पूर्ण करने के बाद, आगंतुकों के लिए हाल ही में पुनर्जीवित जल निकाय के आसपास वृक्षारोपण अभियान चलाया गया और इस स्थल पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कर्मचारियों ने पौधा रोपण किया।

वनों का स्थायी प्रबंधन और उनके संसाधनों का उपयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की समृद्धि एवं कल्याण में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह हम सभी पर निर्भर करता है कि नवीन तकनीकों के उपयोग से इन बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हम किस प्रकार से करते हैं।

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आईआईटी बॉम्बे में ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ का उद्घाटन किया गया

नई दिल्ली – भारत के सबसे आशाजनक डीप-टेक उद्यमों के राष्ट्रीय प्रदर्शन के रूप में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ का उद्घाटन आज मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर – आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में  किया गया।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और प्रधानमंत्री के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) के अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

इस विशिष्ट कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 यात्रा का प्रारंभिक चरण है, जिसका समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में भारत के वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की थी।

अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डीप-टेक नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों, शोध तंत्र और स्टार्टअप्स की भूमिका को रेखांकित किया।

 

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है। यह दुनिया के सामने भारत की अत्याधुनिक डीप-टेक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग और रक्षा मंत्रालय को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल वैश्विक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का भी प्रयास है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा के अंक नहीं, बल्कि समाज में सार्थक योगदान देना है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है। उन्होंने निवेशकों और कॉरपोरेट्स से महानगरों से परे होनहार स्टार्टअप्स की पहचान करने का आह्वान किया।

आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों से राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया और कहा कि वे भारत के नवाचार इतिहास का नया अध्याय लिख सकते हैं। उन्होंने नवाचारकर्ताओं को भारत का राजदूत बताया और देश को गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने भारत के नवाचार परिदृश्य पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न हैं कंपनिया। उन्होंने बताया कि 2017–18 में यह संख्या केवल 24 यूनिकॉर्न थी। वर्तमान में भारत में 1,000 से अधिक निवेशक सक्रिय हैं और हाल के वर्षों में लगभग 70–80 अरब रुपये का वेंचर कैपिटल भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश किया गया है।

उन्होंने डीप-टेक वित्तपोषण में  कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि कुल वेंचर कैपिटल निवेश में से केवल 4–5 अरब डॉलर ही डीप-टेक क्षेत्र में गया है। इस स्थिति को सुधारने के लिए जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष को मंजूरी दी, जो निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास और स्टार्टअप्स को इक्विटी भागीदारी और दीर्घकालिक वित्तपोषण के माध्यम से समर्थन देगा। इस फंड के प्रबंधन के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और बीआईआरएसी  (डीबीटी) को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही वैकल्पिक निवेश कोष और आईआईटी अनुसंधान पार्कों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। डीएसटी वर्तमान में साइबर-फिजिकल सिस्टम पर राष्ट्रीय मिशन, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और निधि सीड सपोर्ट योजनाओं के माध्यम से भारत के अनुमानित 8,000-10,000 डीप-टेक स्टार्टअप में से लगभग 30-40% का पोषण कर रहा है।

आईआईटी और आईआईएससी के पारिस्थितिकी तंत्र की प्रशंसा करते हुए प्रोफेसर करंदीकर ने कहा, “डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने में आईआईटी और आईआईएससी की बड़ी भूमिका है।”

आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने स्वागत भाषण में कहा कि भारत इनोवेट्स केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक डीप-टेक इकोसिस्टम है, जो तीन स्तंभों-शिक्षा प्रणाली, रणनीतिक निवेशक और कॉर्पोरेट सेक्टर पर आधारित है, जो तकनीक को वास्तविक प्रभाव में बदलने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि देशभर से 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कड़े बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 थीमैटिक क्षेत्रों में 137 सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया।

उद्घाटन के बाद गणमान्य लोगों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत की और उनके नवाचारों का मुआयना किया। 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने विभिन्न पिच सत्रों में अपने विचार रखे, जिसके बाद निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से निवेश के प्राथमिक क्षेत्रों और उद्योग की तकनीकी आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसमें प्राथमिकता वाले निवेश क्षेत्रों और उद्योग-प्रेरित तकनीकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया।

भारत इनोवेट्स 2026 डीप-टेक प्री-समिट भारत के नवाचार इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाता है और उभरते स्टार्टअप्स को निवेशकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं से जुड़ने का राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम में 13 महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों-एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, एनर्जी एवं सस्टेनेबिलिटी, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज एवं मोबिलिटी, ब्लू इकोनॉमी, नेक्स्ट-जेन कम्युनिकेशन, एग्री एवं फूड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स, मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 तथा आपदा प्रबंधन में नवाचार प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

भारत इनोवेट्स के बारे में:

भारत इनोवेट्स 2026, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय के रणनीतिक मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों में विकसित अनुसंधान आधारित तकनीकी नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।

यह कार्यक्रम 22 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता और ग्रैंड फिनाले एवं पुरस्कार समारोह आयोजित होगा, जहां सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।

अधिक जानकारी के लिए: https://bharatinnovates.in/ पर क्लिक कर सकते हैं।

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केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने प्रकृति 2026 का उद्घाटन किया और भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का शुभारंभ करते हुए भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ किया

नई दिल्ली – भारत सरकार का प्रमुख आयोजन ‘प्रकृति 2026’—कार्बन बाजारों पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन—आज नई दिल्ली में प्रारंभ हुआ। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा, विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित यह सम्मेलन ‘भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026’ के अंतर्गत हो रहा है। यह उच्च स्तरीय मंच राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं को एक साथ लाकर कार्बन बाजारों की बदलती गतिशीलता, जलवायु परिवर्तन में उनकी भूमिका तथा भारत के हरित विकास के अवसरों पर व्यापक विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है।
इस वर्ष की विषयवस्तु “वैश्विक साझेदारी और डिजिटल माध्यमों के माध्यम से एनडीसी कार्यान्वयन हेतु कार्बन वित्त को सुगम बनाना” है, जो जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए वित्तीय संसाधनों के संकलन, सहयोग को सुदृढ़ करने व डिजिटल नवाचार के उपयोग पर भारत के विशेष बल को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल, विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल (www.indiancarbonmarket.gov.in) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल भारतीय कार्बन बाजार के कार्यान्वयन और प्रशासन के लिए एक केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।

 

पोर्टल का उद्घाटन करते हुए श्री मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में जलवायु प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु संबंधी उत्तरदायित्व और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं। कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस), नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों जैसी पहलों के माध्यम से भारत एक पारदर्शी और विश्वसनीय कार्बन बाजार ढांचा तैयार कर रहा है। यह ढांचा न केवल उत्सर्जन में कमी लाने में सहायक होगा, बल्कि दीर्घकालिक रूप से राष्ट्रीय संपदा के रूप में भी कार्य करेगा।

 

श्री मनोहर लाल ने बताया कि भारत ने नौ अधिसूचित पद्धतियों और बायोगैस, हाइड्रोजन और वानिकी क्षेत्रों में परियोजनाएं प्रस्तुत करने वाली 40 से अधिक पंजीकृत संस्थाओं के साथ एक पारदर्शी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना स्थापित कर ली है। अनुपालन के लिहाज से, सात ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में लगभग 490 बाध्य संस्थाओं के लिए जीईआई लक्ष्य अधिसूचित किए गए हैं, जिससे उत्सर्जन में कमी की पुष्टि और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

श्री मनोहर लाल ने कारोबारियों से आग्रह किया कि वे कार्बन बाजारों को केवल अनुपालन आवश्यकता के रूप में नहीं बल्कि नवाचार, निवेश, सतत विकास और उद्यमिता के लिए एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि ये बाजार इन सभी को सुगम बनाने के लिए एक आर्थिक मंच के रूप में कार्य करेंगे।

विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने मजबूत कार्बन बाजारों के लिए आवश्यक तीन स्तंभों या तीन ‘सी’ पर जोर दिया – सत्यापन योग्य उत्सर्जन कटौती के लिए डिजिटल एमआरवी के माध्यम से विश्वसनीयता, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में खरबों डॉलर का निवेश करने के लिए पूंजी, और पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के माध्यम से सहयोग। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत के तेजी से बढ़ते नेतृत्व, ऊर्जा दक्षता में हुई प्रगति और विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों के साथ लागू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) 2023 पर प्रकाश डाला। श्रीपद नाइक ने इस बात पर बल दिया कि ये प्रगति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सतर्क कदम और आर्थिक विकास एक दूसरे के पूरक हैं, और कार्बन बाजार उच्च स्तरीय प्रतिबद्धताओं को बढ़ावा देने, लघु एवं मध्यम उद्यमों और किसानों को सशक्त बनाने और पारदर्शी वैश्विक मार्ग प्रशस्त करने के लिए तैयार हैं।

विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने मजबूत कार्बन बाजारों के लिए आवश्यक तीन प्रमुख स्तंभोंतीन ‘सी’ पर जोर पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहला स्तंभ है डिजिटल एमआरवी के माध्यम से सत्यापन योग्य उत्सर्जन कटौती सुनिश्चित कर विश्वसनीयता स्थापित करना। दूसरा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए पूंजी की उपलब्धता और तीसरा पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना। श्रीपद नाइक ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है और साथ ही ऊर्जा दक्षता में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों के साथ लागू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम 2023 इन प्रयासों को और सशक्त बना रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी प्रयास सिद्ध करते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किए जा रहे ठोस कदम और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। साथ ही, कार्बन बाजार न केवल उच्च स्तरीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि लघु एवं मध्यम उद्यमों और किसानों को सशक्त बनाते हुए एक पारदर्शी तथा समावेशी वैश्विक व्यवस्था का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में पेरिस समझौता के अंतर्गत वैश्विक कार्बन बाजारों (पीएसीएम) से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें अनुपालन ढांचे, डिजिटल एमआरवी प्रौद्योगिकियां, कार्बन सीमा नीतियां तथा भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम में इमारतों और शीतलन प्रणालियों के एकीकरण जैसे विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, किसानों को सशक्त बनाने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तपोषण को सुगम बनाने और कॉर्पोरेट स्तर पर जलवायु कार्रवाई को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। ये सभी मिलकर यह दर्शाते हैं कि भारत एक विश्वसनीय, समावेशी और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्बन बाज़ार विकसित करने के लिए सक्रिय और बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है, जो जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ सतत आर्थिक विकास को भी गति देता है।

प्रकृति 2026 जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में भारत के उदय की पुष्टि करता है। पारदर्शिता, विश्वसनीयता और नवाचार पर आधारित कार्बन बाजार का निर्माण करके, भारत न केवल अपने घरेलू हरित परिवर्तन को गति दे रहा है, बल्कि सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। यह सम्मेलन जलवायु समाधानों के लिए भारत को एक विश्वसनीय केंद्र और कम कार्बन वाले भविष्य की ओर वैश्विक गति में एक प्रेरक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने नागपुर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज महाराष्ट्र के नागपुर स्थित महर्षि व्यास सभागृह में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का विषय था- “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047”।

नागपुर के महत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह शहर राष्ट्रीय चेतना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि है जिसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी। उन्होंने कहा कि एक छोटी पहल से राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित एक विशाल आंदोलन तक संगठन की यात्रा “राष्ट्र प्रथम” की भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

उन्होंने भारतीय युवा संसद राष्ट्रीय न्यास के दो दशकों से अधिक समय से कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रकार संगठन ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ावा दिया है।

उपराष्ट्रपति ने “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047” विषय पर बोलते हुए भारत की भाषाई विविधता को एक महान शक्ति बताया और कहा कि जब हम अपनी मातृभाषा में बोलते हैं, तो हम “क्षेत्रीय” नहीं बल्कि “मौलिक” होते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक भाषा अपनी विरासत समेटे रहती है और ये सभी मिलकर राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का निर्माण करती हैं। उन्होंने भारत के संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के हालिया प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और संरक्षित करना राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दूसरों के विचारों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है और भारत को अपनी मूल से नवाचार करना होगा, अपनी मूल भाषाओं और लिपियों में सोचना होगा और अपनी सभ्यतागत पहचान पर विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने संस्कृत और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत अनेक भारतीय भाषाओं को जोड़ती है और भारत की ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लोकतांत्रिक समाज में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव और सत्रों में चर्चा की अवधि में बढ़ोतरी पर विचार करते हुए कहा कि मतभेद अंततः रचनात्मक संवाद और समाधान की ओर ले जाने चाहिए, न कि संघर्ष की ओर। उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसे मंच सम्मानजनक बहस, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने और चर्चा और आम सहमति के माध्यम से समाधान तक पहुंचने के महत्व को सिखाते हैं।

उपराष्ट्रपति ने युवा संसद को जीवन और नेतृत्व के लिए प्रशिक्षण मैदान बताते हुए कहा कि चरित्र निर्माण सच्चे नेतृत्व की नींव है और छात्रों से ऐसे मंचों का उपयोग नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा की भावना विकसित करने के लिए करने का आग्रह किया।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व भारत की  ओर देख रहा है और आज के युवा “अमृत पीढ़ी” हैं जो 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में उभरते हुए देखेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा संसद इस राष्ट्रीय लक्ष्य में सार्थक योगदान देगी।

उपराष्ट्रपति ने इससे पहले दिन में, उपराष्ट्रपति ने नागपुर के डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा; महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुले; सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कृष्ण गोपाल; केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी; भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक श्री आशुतोष जोशी; और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ देश भर से बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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आधुनिक समय का युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सशक्त सेना और तैयार नागरिकों का होना आवश्यक है: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आजकल का युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तक ​​कि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है।” उन्होंने किसी भी परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में सक्षम, तैयार नागरिकों द्वारा समर्थित एक सशक्त सेना की आवश्यकता पर जोर दिया। 21 मार्च, 2026 को उत्तराखंड के घोराखाल स्थित सैनिक विद्यालय के स्थापना दिवस समारोह और हीरक जयंती को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्षों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, क्योंकि आज किसी भी राष्ट्र को आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध के माध्यम से कमजोर किया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक नागरिक को हर समय सतर्क और तैयार रहना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार रक्षा बलों को विशेष हथियारों और प्रौद्योगिकियों से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। जबकि रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों, विशेषकर युवाओं को अनुशासन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से मानसिक दृढ़ता और बौद्धिक स्पष्टता विकसित करने की आवश्यकता है ताकि वे राष्ट्र को हर परिस्थिति से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने वूका (अस्थिरता, अनिश्चिता, जटिलता और अस्पष्टता) की अवधारणा का उल्लेख करते हुए छात्रों से आग्रह किया कि वे आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए वूका का अपना संस्करण विकसित करें , जिसमें दूरदर्शिता, समझ, साहस और अनुकूलन क्षमता शामिल है।

राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक मूल्यों को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत देश भर में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि एक अन्य पहल में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा, “पहले एनसीसी में 17 लाख कैडेटों की भर्ती क्षमता थी; जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है।”

रक्षा मंत्री ने सैनिक विद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश के निर्णय को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया, जिससे देश की ‘नारी शक्ति’ को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये लड़कियां आने वाले समय में ‘नारी शक्ति’ की पथप्रदर्शक बनेंगी और विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुएंगी।

सैनिक स्कूल, घोराखाल द्वारा राष्ट्र की सेवा के 60 वर्ष पूरे करने पर छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि छात्र अनुशासन और समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए अपने परिवारों, संस्थान और राष्ट्र को गौरवान्वित करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “दशकों से, स्कूल ने 800 से अधिक छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा और वायु सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा जैसी विभिन्न प्रवेश योजनाओं के माध्यम से 2,000 से अधिक उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों में भेजा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्थान राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने वाले नेताओं का उत्पादन जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि स्कूल के विशिष्ट पूर्व छात्र, जिनमें पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमके कटियार छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”

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भारत विद्युत शिखर सम्मेलन में भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे दिन (21.3.2026) नई दिल्ली में भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने की।

 

बैठक में विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, मलावी सरकार के ऊर्जा एवं खनन मंत्री डॉ. जीन मथांगा, अफ्रीका50 के सीईओ एलेन एबोबिस, कई अफ्रीकी देशों के मंत्री, अफ्रीकी संघ और अफ्रीका50 के नेता, राजदूत, उच्चायुक्त, विद्युत कंपनियों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, विकास भागीदार और उद्योग जगत के नेता उपस्थित थे।

इन चर्चाओं में एक स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टिकोण यह उभर कर आया कि भारत और अफ्रीका ठोस परिणामों पर केंद्रित एक संरचित और कार्य-उन्मुख साझेदारी के माध्यम से अपने सहयोग को और गहरा करेंगे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और अफ्रीका नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, परस्पर जुड़े ग्रिड प्रणालियों के विकास, ऊर्जा भंडारण और लचीले समाधानों को बढ़ावा देने और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के माध्यम से क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसमें विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत के व्‍यापक अनुभव और अफ्रीका की बढ़ती क्षमता का लाभ उठाने पर बल दिया गया। दोनों पक्षों ने निवेश-आधारित सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के महत्व का भी उल्‍लेख किया, जिसका उद्देश्य एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जो दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति प्रदान करने में सक्षम हो।

श्री मनोहर लाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास को गति देने, गरिमा सुनिश्चित करने और अवसरों को खोलने के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संपर्क के लिए एक परिवर्तनकारी मार्ग के रूप में ‘एक सूर्य, एक दुनिया, एक ग्रिड’ की परिकल्पना का भी उल्‍लेख किया।

उन्‍होंने अफ्रीकी साझेदारों का हार्दिक स्वागत किया और विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा प्राप्त करने की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका, वैश्विक जनसंख्या का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं और समावेशी, न्यायसंगत तथा भविष्य के लिए तैयार विकास की समान आकांक्षाएं रखते हैं। उन्होंने ऊर्जा घाटे से अधिशेष की ओर भारत की यात्रा और नवीकरणीय ऊर्जा में इसकी तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अनुभव अफ्रीका के लिए व्यावहारिक एवं विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अफ्रीका50 और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच सहयोग, जिसमें केन्या ट्रांसमिशन परियोजना भी शामिल है, को इस बात का एक सशक्त उदाहरण बताया कि कैसे नवीन वित्तपोषण, तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक-निजी भागीदारी लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकती है।

श्री मनोहर लाल ने नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और लचीलापन तथा संस्थागत सुदृढ़ीकरण के साथ क्षमता निर्माण सहित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों का उल्‍लेख किया। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अफ्रीका के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अफ्रीका ऊर्जा सहयोग लेन-देन पर आधारित नहीं बल्कि परिवर्तनकारी है, जो सह-निर्माण पर आधारित है, और इस साझा यात्रा में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।

श्री श्रीपाद नाइक ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अफ्रीका साझेदारी को केवल इरादे से आगे बढ़कर कार्रवाई की ओर बढ़ना चाहिए। ऊर्जा तक पहुंच को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित न रखकर, आर्थिक परिवर्तन के एक प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी विकास की नींव के रूप में सभी के लिए विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी एक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से निर्देशित है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक प्रभाव पैदा करना और भारत और अफ्रीका दोनों के समुदायों को सशक्त बनाना है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतत सुशासन के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रभावी सिंचाई जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के लिए साझेदारी, प्रभुत्व और प्रतिस्पर्धा के आधार के बजाय सहयोग एवं साझा मूल्यों पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच साझेदारी ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल शासन और कृषि सहयोग पर आधारित है।

अफ्रीका50 के सीईओ श्री एलेन एबोबिस ने वैश्विक निवेश परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि हम सहायता नहीं, बल्कि प्रभाव और प्रतिफल के लिए निवेश की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर का उल्‍लेख किया कि अफ्रीका एकीकृत योजना और नए निवेश ढांचों के समर्थन से, निवेश योग्य परियोजनाओं के विकास, संचरण विस्तार और निजी पूंजी जुटाने पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है।

डॉ. जीन मथांगा ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के माध्यम से सतत विकास और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए कम लागत वाले सौर समाधान, पवन ऊर्जा परियोजनाएं और भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए एक सशक्त ऊर्जा परिवर्तन शामिल है।

उन्होंने अफ्रीका के समावेशी विद्युत प्रणाली के एजेंडे के साथ सहज रूप से तालमेल बिठाते हुए विद्युतीकरण, पारेषण अवसंरचना विकास और स्मार्ट मीटरिंग, ग्रिड और माइक्रोग्रिड पर सहयोग को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इन प्रयासों से ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, खनिजों तक पहुंच और विस्तारित बाजारों जैसे बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है। अफ्रीका के लिए, ये किफायती प्रौद्योगिकी और अवसंरचना, बेहतर ग्रिड विश्वसनीयता, विद्युतीकरण और स्थायी साझेदारी प्रदान करते हैं, तथा भारत की तकनीकी क्षमताओं को अफ्रीका की विशाल संसाधन क्षमता के साथ पूरक करते हुए सुरक्षित और समावेशी विद्युत प्रणालियों का निर्माण करते हैं।

भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी सतत विकास के लिए सहयोगात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें ऊर्जा, अवसंरचना और क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया गया है। यह साझेदारी अफ्रीका के विकास पथ को गति देने के लिए भारत के अनुभव और क्षमताओं, विशेष रूप से विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक आदर्श के रूप में उपयोग करती है।

अफ्रीका50 जैसी संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से, यह साझेदारी निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सौर छत परियोजनाओं, जल-सौर एकीकरण, मिनी ग्रिड और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों जैसे व्यापक समाधानों को बढ़ावा देती है। यह समावेशी विकास को गति देने के लिए नीतिगत ढांचे, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान केंद्रित करती है। अंततः, इस साझेदारी का उद्देश्य ऊर्जा तक पहुंच में अंतर को कम करना, क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ाना और अफ्रीकी देशों में दीर्घकालिक परिवर्तनकारी प्रभाव पैदा करना है।

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न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने की टेली-लॉ पहल (दिशा) के तहत आयोजित किया जा रहा है 2026 का क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला

नई दिल्ली – कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में 22 मार्च 2026 को शाम 4:00 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करने (दिशाकी टेली-लॉ पहल के तहत आयोजित 2026 का क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला, केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। यह भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है। यह कार्यशाला 22 मार्च 2026 को शाम 4:00 बजे से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित की जाएगी।

यह कार्यशाला विभाग द्वारा प्रौद्योगिकी-सक्षम कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और प्रमुख हितधारकों के बीच जानकारीपूर्ण विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के हिस्से के रूप में आयोजित की जा रही है।

कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों के आगमन और स्वागत के साथ होगा, जिसके बाद दिशा जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा, जो पहुंच और अंतिम छोर तक संपर्क का प्रतीक है। गणमान्य व्यक्ति मंच पर अपने-अपने स्थान ग्रहण करेंगे, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव होगा, जिसे स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को याद किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में न्याय विभाग के सचिव स्वागत भाषण देंगे, जिसमें कार्यशाला का संदर्भ प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद हरियाणा में दिशा योजना की प्रगति को प्रदर्शित करने वाला एक सत्र होगा, जिसमें टेली-लॉ पैनल के वकीलों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों और लाभार्थियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद शामिल होंगे, जो जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं के प्रभाव को दर्शाएंगे।

इस कार्यक्रम में हरियाणा के विधि महाविद्यालयों द्वारा शुरू की गई नि:शुल्क कानूनी सेवाओं (प्रो बोनो) की पहलों पर एक खंड भी शामिल होगा, जिसमें संकाय सदस्यों और सामुदायिक कानूनी सेवा में लगे छात्रों द्वारा अनुभव साझा किए जाएंगे।

इस आयोजन के अंतर्गत, भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के प्रथागत कानूनों पर पांच ई-पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया जाएगा, जो स्वदेशी कानूनी ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में योगदान देंगी। इसके अतिरिक्त, दिशा योजना पर दूरदर्शन द्वारा एक वृत्तचित्र का भी विमोचन किया जाएगा, जिसमें इसके दृष्टिकोण, कार्यान्वयन और देश भर में इसके प्रभाव को दर्शाया जाएगा।

इस कार्यशाला को केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी संबोधित करेंगे, जो न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और शासन में डिजिटल समाधान की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।

कार्यक्रम का समापन स्मृति चिन्हों के वितरण के साथ होगा, जिसके बाद संयुक्त सचिव (न्याय तक पहुंच) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान होगा।

इस कार्यक्रम में लगभग 900 प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होंगे, जिनमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिकारी, हरियाणा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयों के बार एसोसिएशन के अधिवक्ता, सरकारी वकील, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई), टेली-लॉ पैनल के वकील, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत, एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम, जी.डी. गोयनका विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के विधि संकाय और विधि छात्र, गीता विधि संस्थान, पानीपत और नॉर्थकैप विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के विधि संकाय, निदेशक/पंजीयक और केंद्रीय एवं राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, न्याय विभाग के कई नागरिक और हितधारक वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे।

न्याय विभाग की दिशा योजना के अंतर्गत आयोजित टेली-लॉ कार्यक्रम पर क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला, जागरूकता, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित सेवा वितरण के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के भारत सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है। राज्य प्रशासनों और हितधारकों को शामिल करने, कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने और न्याय वितरण तंत्र को और मजबूत करने के लिए देश भर में ऐसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यशाला, टेली-लॉ और न्याय तक पहुंच से संबंधित अन्य पहलों की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए केंद्रित विचार-विमर्श हेतु एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है.

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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग का आयकर अधिनियम, 2025 पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान ‘प्रारंभ 2026’ लॉन्च किया

नई दिल्ली- केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में ‘प्रारंभ (PRARAMBH) 2026’ लॉन्च किया, जो आयकर विभाग का ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के बारे में देशव्यापी जागरूकता अभियान है। प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया तक फैला यह मल्टीमीडिया अभियान, नए अधिनियम की मुख्य विशेषताओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। यह अधिनियम 01.04.2026 से लागू होने वाला है।

इस अभियान में रचनात्मक संचार की पहलें, आयकरदाताओं के लिए मार्गदर्शन करने वाली सामग्री (जैसे मार्गदर्शन नोट्स, शैक्षणिक वीडियो और ब्रोशर) और डिजिटल व ऑन-ग्राउंड प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ने के प्रयास शामिल हैं; इनमें ‘माईगॉव (MyGov) क्विज’ पहल भी शामिल है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने विभाग के चल रहे डिजिटल बदलाव के प्रयासों के तहत ‘इनकम टैक्स वेबसाइट 2.0’ का भी उद्घाटन किया। इस अपग्रेड किए गए प्लेटफॉर्म को करदाताओं के लिए बेहतर उपयोगिता, आसान नेविगेशन और ज्यादा कुशल सेवा देने के लिए तैयार किया गया है।

इस अवसर पर राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय में सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव; केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल; केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन श्री विवेक चतुर्वेदी; सीबीडीटी और सीबीआईसी बोर्डों के सदस्य तथा विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

अपने मुख्य भाषण में, श्रीमती सीतारमण ने संसद में आयकर अधिनियम, 1961 के पारित होने की यात्रा का उल्लेख किया और इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए असाधारण प्रयासों पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि “प्रारंभ” के तहत की गई पहलों सहित सीबीडीटी की सभी पहलें आयकर को सरल बनाने पर केंद्रित हैं और इनमें करदाताओं को दी जाने वाली सेवाओं पर विशेष ज़ोर दिया गया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों ही कर प्रणालियों में एक साथ व्यापक सुधार किए जा रहे हैं; यह बदलाव एक अधिक नागरिक-केंद्रित और जन-पहुंच उन्मुख प्रशासन की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह नया अधिनियम, जिसे व्यापक प्रयासों और विस्तृत परामर्श के बाद तैयार किया गया है, विभिन्न प्रावधानों को अधिक स्पष्टता के साथ पुनर्गठित करता है। इसका उद्देश्य विवादों को कम करना, नियमों के पालन में सुधार लाना और लोगों के रवैये को भ्रम व टालमटोल से हटाकर स्वीकार्यता व विश्वास की ओर ले जाना है।

कानून जितने ही महत्वपूर्ण इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि कर अधिकारी करदाताओं के सामने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, उन्हें एक सहानुभूतिपूर्ण और विश्वास-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, तथा मानवीय स्पर्श को बनाए रखते हुए, मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए।

आयकर विभाग द्वारा बहुभाषी पहुंच बनाने और डिजिटल मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए सरल भाषा में संवाद करने के प्रयासों की सराहना करते हुए, श्रीमती सीतारमण ने युवाओं और पेशेवरों के साथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया; इसमें एआई-आधारित समाधानों के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग करना भी शामिल है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन-एम.ए.एन.ए.वी. के माध्यम से एक मानव-केंद्रित डिजिटल युग का निर्माण- को याद किया, जिसे उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया था:

एम: नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियां

ए: जवाबदेह शासन

एन: राष्ट्रीय संप्रभुता

ए: सुलभ और समावेशी AI

वी: वैध और न्यायसंगत प्रणालियां

प्रधानमंत्री के इस विजन का हवाला देते हुए, श्रीमती सीतारमण ने इस बात को दोहराया कि आयकर अधिनियम, 2025 की नींव नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियों पर ही आधारित होनी चाहिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए अतीत की तरह बार-बार बहुत ज्यादा संशोधन करने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि नया कानून स्थिर, सरल और समझने में आसान होना चाहिए और इसमें तकनीक का इस्तेमाल इंसान-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए। इसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें नियमों का पालन करना एक स्वाभाविक विकल्प बन जाए-जो आसान हो, स्पष्टता और भरोसे पर आधारित हो।

अपने संबोधन में, राजस्व सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025, केवल एक नया कानून ही नहीं है, बल्कि यह एक सरल, स्पष्ट और ज़्यादा उपयोगकर्ता-अनुकूल कर व्यवस्था की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है। उन्होंने बताया कि नियमों और प्रपत्रों (फॉर्म) को एकरूप करने के साथ-साथ, विभाग ने अधिकारियों की क्षमता-निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे देश में अधिकारी करदाताओं की सहायता करने के लिए पूरी तरह से तैयार हों, क्योंकि जमीनी स्तर पर कानून को लागू करने का बहुत अधिक महत्व है।

श्री श्रीवास्तव ने विभाग द्वारा एफएक्यू, ब्रोशर, मार्गदर्शन करने वाले नोट्स और क्षेत्रीय भाषाओं के संसाधनों के माध्यम से जानकारी की पहुंच बढ़ाने के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि संचार रणनीतियां अब ज्यादा सहज और समझने लायक हो गई हैं; इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके छोटे वीडियो के जरिए करदाताओं तक ऐसे तरीकों से पहुंचा जा रहा है जिनसे वे पहले से परिचित हैं।

श्री श्रीवास्तव ने छात्रों के लिए शैक्षिक सामग्री के माध्यम से शुरुआती जागरूकता पैदा करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशव्यापी जागरूकता अभियान-जिसमें 300 से ज्यादा कार्यशाला शामिल हैं-न केवल जानकारी का प्रसार करेगा, बल्कि इसमें हितधारकों से सक्रिय रूप से फ़ीडबैक भी मांगा जाएगा। इससे यह सुधार एकतरफा संचार के बजाय एक निरंतर संवाद के रूप में मजबूत होगा।

इस आउटरीच पहल के व्यापक दायरे को देखते हुए, श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ‘प्रारंभ 2026’ (PRARAMBH 2026) केवल एक शुरुआत भर नहीं है, बल्कि यह एक अधिक खुली, जवाबदेह और सरल कर व्यवस्था की शुरुआत है।

इससे पहले, अपने स्वागत भाषण में सीबीडीटी के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल ने कहा कि ‘प्रारंभ’ (PRARAMBH – मिशन विकसित भारत के लिए नीतिगत सुधार और जिम्मेदारी के साथ काम) ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘आयकर अधिनियम, 2025’ भारत की कर प्रशासन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे सुचारू तथा करदाताओं के अनुकूल तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

श्री अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रारंभ’ को एक राष्ट्रव्यापी आउटरीच और सुविधा पहल के तौर पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य बहुभाषी अभियानों, शैक्षिक सामग्री, डिजिटल टूल्स, विस्तृत एफएक्यू और मार्गदर्शन सामग्री के जरिए स्पष्ट, सुलभ और भरोसेमंद संचार सुनिश्चित करना है, ताकि नियमों का पालन आसान हो सके और व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

उन्होंने एआई-आधारित चैटबॉट ‘कर साथी’ को लॉन्च करने की भी घोषणा की। यह चैटबॉट उन करदाताओं के लिए एक आसानी से उपलब्ध साथी है, जो नए अधिनियम, नियमों, प्रपत्रों और संबंधित सवालों के बारे में जानकारी चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आयकर सेवा केंद्रों के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध रहेगी, जो विभाग की नागरिक-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और संवेदनशील कर प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सीबीडीटी के सदस्य (आईटी), श्री संजय बहादुर ने ‘प्रारंभ’ के दौरान जारी की गई सामग्री-जिसमें ब्रोशर, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और ‘माईगॉव क्विज’ पहल शामिल हैं-का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम में सीबीडीटी के सदस्य (विधान) श्री प्रसेनजीत सिंह ने हितधारकों के साथ आयोजित विषयगत सत्रों पर एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इसके बाद, उन विषयगत सत्रों में शामिल विभिन्न हितधारकों की प्रतिक्रियाएं भी साझा की गईं।

इस कार्यक्रम का समापन सीबीडीटी की सदस्य (करदाता सेवाएं एवं राजस्व) श्रीमती जी. अपर्णा राव द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

‘प्रारंभ 2026’ आयकर विभाग की आधुनिकीकरण, हितधारकों के साथ जुड़ाव और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है; विशेष रूप से ऐसे समय में, जब विभाग ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के प्रभावी कार्यान्वयन की तैयारी कर रहा है।

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ईद-उल-फितर (ईद) तथा सरहुल पर्व को लेकर विधि व्यवस्था संधारण हेतु व्यापक व्यवस्था की गई

संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस पदाधिकारी, दंडाधिकारी तथा सादे लिबास में पुलिस बल तैनात किया गया है

प्रमुख इलाकों, मस्जिदों, पूजा स्थलों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है

सरना समिति के सदस्यों, वॉलंटियर्स तथा सर्व धर्म सद्भावना समिति के पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अफवाह या विधि-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सूचना तत्काल जिला प्रशासन दे

चोरी, जेबकतरो असामाजिक तत्वों एवं अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है

आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं खुशहाल त्योहार मनाएं:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,21.03.2026 – आज ईद-उल-फितर (ईद) तथा सरहुल पर्व एक साथ मनाया जा रहा है। ये दोनों पर्व हमारी सांस्कृतिक विविधता एवं सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। ईद मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है जो रमजान के पवित्र महीने के समापन पर खुशी, दान एवं भाईचारे का संदेश देता है, जबकि सरहुल झारखंड के आदिवासी समुदाय का प्रकृति-पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें साल वृक्ष की पूजा, नृत्य एवं सामुदायिक उत्सव के माध्यम से बसंत ऋतु का स्वागत किया जाता है।

जिला प्रशासन इन त्योहारों को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य से व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्था के निम्नलिखित इंतजाम किए गए हैं:

1. पुलिस बल एवं दंडाधिकारी बल की तैनाती

संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस पदाधिकारी, दंडाधिकारी तथा सादे लिबास में पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य स्तर पर भी झारखंड पुलिस द्वारा अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई है।

2. निगरानी व्यवस्था

प्रमुख इलाकों, मस्जिदों, पूजा स्थलों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।

3. यातायात एवं भीड़ प्रबंधन

यातायात पुलिस द्वारा प्रमुख चौराहों, मार्गों एवं जुलूस/प्रक्रिया वाले क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की गई है। आवश्यकतानुसार डायवर्जन एवं पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ।

4. सामुदायिक सहयोग

सरना समिति के सदस्यों, वॉलंटियर्स तथा सर्व धर्म सद्भावना समिति के पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अफवाह या विधि-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सूचना तत्काल जिला प्रशासन को सूचित करें।

5. विशेष नजर

चोरी, जेबकतरो असामाजिक तत्वों एवं अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जनता से अपील

*त्योहारों का आनंद लें, लेकिन अनावश्यक भीड़ से बचें।

*सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें; केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

* किसी भी प्रकार की समस्या, संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने, पर दें।

*आपसी भाईचारे, सद्भावना एवं सहयोग से ही हम इन पर्वों को यादगार बना सकते हैं।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी द्वारा अपील की गई की आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं खुशहाल त्योहार मनाएं।

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म्यूज़िक वीडियो ‘तेरे बिना क्या है जीना’ रिलीज़

21.03.2026 – महाराजा म्यूज़िक कंपनी ने अपना नया रोमांटिक म्यूजिक वीडियो ‘तेरे बिना क्या है जीना’ रिलीज़ कर दिया है। इस गाने को अश्विन महाराज ने प्रस्तुत किया है और इसके निर्माता व निर्देशक भी अश्विन महाराज हैं।

महाराजा म्यूज़िक के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध इस म्यूजिक वीडियो में टर्सी एम. फर्नांडिस और अक्षय सेठी नज़र आ रहे हैं। आनंद भकुनी ने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया है।

गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन कुमार ने की है, जबकि एडिट और डीआई सगीर चुडेसरा ने किया है।

गाने को शंकर दास ने अपनी आवाज़ दी है। इसका संगीत और बोल सतीश त्रिपाठी ने तैयार किया है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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