उप-राष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के 66वें पाठ्यक्रम को संबोधित किया

नई दिल्ली,उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने  नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को “भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य” विषय पर संबोधित किया।

 

उपराष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ-साथ मित्र विदेशी देशों के 41 अधिकारियों सहित 122 प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में रणनीतिक सोच, एकीकृत नीति निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय मूल्य राष्ट्रीय पहचान की आधारशिला हैं और विश्व के साथ किसी देश के जुड़ाव का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने भारत के सभ्यतागत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) का उदाहरण दिया। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन मैत्री पहल, आपदाओं के दौरान प्राथमिक सहायता प्रदान करने वाली संस्था के रूप में इसकी भूमिका और जलवायु परिवर्तन और आपदा से निपटने की क्षमता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय पहलों में इसके नेतृत्व को इन मूल्यों के व्यावहारिक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता जैसे संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना; इसके लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय स्वरूप को बनाए रखना; इसके रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना; विकास और मानव विकास के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना; और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता में योगदान देना जैसी पांच व्यापक प्राथमिकताओं पर बल दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते परस्पर जुड़ाव का उल्लेख करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने आतंकवाद, साइबर खतरों, महामारियों, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा वैश्विक हितों को आगे बढ़ाना अक्सर परस्पर सहायक उद्देश्य होते हैं, जिनके लिए समन्वित कार्रवाई, सूचना साझाकरण और राष्ट्रों के बीच आपसी विश्वास की आवश्यकता होती है।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उपलब्ध संसाधनों, सुदृढ़ नीतिगत विकल्पों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण को संरेखित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत की भूमि, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा करना, साथ ही सतत विकास और समृद्धि के लिए परिस्थितियां बनाना शामिल है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना है, लेकिन दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करने या उन्हें अपनी शर्तें मनवाने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी देश हम पर अनैतिक शर्तें न थोपे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता और आत्मसम्मान का सम्मान किया जाना चाहिए और देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय सीमाओं का अतिक्रमण करने से बचना चाहिए।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने वैश्विक दक्षिण के साथ मजबूत जुड़ाव का आह्वान करते हुए पारस्परिक सम्मान, संप्रभु समानता और साझा विकास प्राथमिकताओं के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने देशों से चुनौतियों से परे देखने और प्रौद्योगिकी, व्यापार, संपर्क, शिक्षा, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार वैश्विक दक्षिण के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने भावी रणनीतिक नेताओं के रूप में उपस्थित प्रतिभागियों से संस्थागत और व्यावसायिक सीमाओं से परे एक एकीकृत और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने राष्ट्रों को परिभाषित करने वाले मूल्यों को समझने, संरक्षित किए जाने वाले हितों की पहचान करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उन्हें बुद्धिमानी से प्राथमिकता देने और राष्ट्रीय संकल्पों को मूर्त परिणामों में बदलने के लिए रणनीतियां विकसित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता, संकाय सदस्य और 66वें एनडीसी पाठ्यक्रम के प्रतिभागी उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन जी की शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया

 

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नेपाल द्वारा भारतीय आम के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं

नई दिल्ली – कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के ध्यान में यह बात आई है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह बताया गया है कि नेपाल ने भारत से आम के आयात पर प्रतिबंध लगाया है या आयात निलंबित किया है। ये रिपोर्टें तथ्यगत रूप से गलत और भ्रामक हैं।

नेपाल सरकार ने अपने पादप संगरोध और कीटनाशक प्रबंधन केंद्र (नेपाल राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन), के माध्यम से 10 जून 2026 को स्पष्ट किया है कि भारतीय आम के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। निर्धारित पादप-स्वच्छता (फाइटोसैनिटरी) आवश्यकताओं के तहत आयात की अनुमति दी जा रही है। इन आवश्यकताओं के अनुपालन और भारत सरकार द्वारा जारी वैध पादप-स्वच्छता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर आयात परमिट और रिलीज आदेश जारी किए जा रहे हैं।

नेपाल को भारतीय आम का निर्यात निर्बाध जारी है। जनवरी 2026 से अब तक कुल 149 खेपों में 2005 मीट्रिक टन आम नेपाल को भेजे जा चुके हैं। केवल जून 2026 में ही अब तक 18 खेपें, जिनकी कुल मात्रा 266 मीट्रिक टन है, निर्यात की जा चुकी हैं।

हालांकि, नेपाल ने हाल ही में कुछ आयात शर्तों में संशोधन किया है, जिसमें गर्म पानी उपचार (एचडब्लूटी) की आवश्यकता शामिल है, भारत ने निर्धारित आवश्यकताओं का अनुपालन करते हुए निर्यात की सुविधा प्रदान करना जारी रखा है। साथ ही, भारत ने बिना पूर्व परामर्श के नए पादप-स्वच्छता उपायों को पेश किये जाने के संबंध में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं और इस मामले को डब्ल्यूटीओ एसपीएस समझौते और अंतर्राष्ट्रीय पौध संरक्षण सम्मेलन (आईपीसीसी) ढांचे के अनुसार उपयुक्त द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।

हितधारकों, व्यापारियों और जनता को आयात और निर्यात नियमों से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और नेपाल को भारतीय आम के निर्यात पर किसी कथित व्यापार प्रतिबंधों के संबंध में किसी भी अप्रमाणित रिपोर्ट की अनदेखी करने की सलाह दी जाती है।

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उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को देश की सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सेवा करने के लिए बधाई दी

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को देश की सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सेवा करने के लिए बधाई दी

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सेवा करने के लिए बधाई दी।

उपराष्‍ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपने एक संदेश में इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जो प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में एक परिवर्तनकारी युग का संकेत है।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत ने आर्थिक विकास, अवसंरचना विस्तार, सामाजिक सशक्तिकरण और तकनीकी उन्नति सहित हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखी है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ी हुई वैश्विक प्रतिष्ठा और सभ्यतागत आत्मविश्वास इस कालखंड की प्रमुख विशेषताएं बनकर उभरी हैं।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता पर बात करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबीरेखा से बाहर निकालकर उन्‍होंने लाखों परिवारों को आशा, अवसर और सम्मान प्रदान किया।

उपराष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भूले-बिसरे नायकों को सम्मानित करके, भारत की विविध परंपराओं और भाषाओं को बढ़ावा देकर, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करके तथा औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर राष्ट्रीय गौरव और सभ्यतागत चेतना को मजबूत किया है।

उपराष्‍ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिल वाक्यांश “याधुम ऊरे, यावरुम केलिर” (हर जगह हमारा घर है, हर कोई हमारा रिश्तेदार है) के आह्वान का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के शाश्वत लोकाचार “वसुधैव कुटुंबकम” और सार्वभौमिक भाईचारे एवं मानव एकता के स्थायी संदेश की पुष्टि करता है।

उपराष्ट्रपति ने भारत की सभ्यतागत एकता और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की गई कई पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें काशी तमिल संगमम, सौराष्ट्र तमिल संगमम, नए संसद भवन में पवित्र सेंगोल की स्थापना, चोलों की विरासत को सम्मान देने के लिए गंगईकोंडा चोलपुरम की उनकी यात्रा और विदेशों से अमूल्य कलाकृतियों एवं प्राचीन वस्तुओं की वापसी शामिल हैं।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में रेखांकित किया, जिन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, अथक सेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के आदर्श के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्र की क्षमताओं और आकांक्षाओं में विश्वास को पुनर्जीवित किया है। उन्‍होंने कहा कि वे समकालीन भारत के सच्चे ‘युगपुरुष’ के रूप में उभरे हैं।

उपराष्ट्रपति ने देश के “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर होने के साथ कहा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत और देश की प्रगति में मार्गदर्शक शक्ति बना हुआ है।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को राष्ट्र की सेवा जारी रखने के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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आत्मनिर्भर भारत: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जैमर के लिए 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (ईसीजीएनएसएस) जैमर की खरीद के लिए बेंगलुरु स्थित अकॉर्ड सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (एएसएसपीएल) के साथ 449 करोड़ रुपये की कुल लागत के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें न्यूनतम 75 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट शामिल है। स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण (बाय इंडिया-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) श्रेणी के तहत इस अनुबंध पर 10 जून, 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया।

इस प्रणाली की क्षमताओं में शत्रुओं के जीएनएसएस रिसीवर के उपग्रह सिग्नल अधिग्रहण और ट्रैकिंग प्रदर्शन को कम करना और सिग्नल स्पूफिंग या भ्रामक जैमिंग शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना के जहाजों द्वारा बहु-खतरे वाले वातावरण में सुरक्षित प्रचालन का मार्ग प्रशस्त होगा।

यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है, साथ ही देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को भी मजबूत करता है। यह रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्‍ली  में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की

नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की।

बैठक के दौरान, उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप पश्चिम बंगाल की विकास यात्रा को गति देने के तरीकों पर चर्चा की।

राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता के मुद्दे और केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा की गई।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के साथ निकट समन्वय में, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना और पीएम स्वनिधि जैसी प्रमुख योजनाओं का एक नया संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा, ताकि इन योजनाओं के तहत प्रत्‍येक पात्र लाभार्थी को कवर किया जा सके।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि ऋण उपलब्धता बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल के सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और प्रमुख उद्योग निकायों तथा सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम  (एमएसएमई) संघों के साथ गोलमेज बैठकें की जाएंगी। इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास, उद्यमशीलता के अवसरों को बढ़ाने और रोजगार सृजन में भारत की विकास यात्रा में राज्य की सहायता करना होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल ग्रामीण बैंक के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी, जिसमें राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और औपचारिक ऋण तक पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

श्रीमती सीतारमण ने राज्य में पूंजीगत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूंजीगत निवेश योजना (एसएएससीआई) के लिए राज्यों को विशेष सहायता के तहत पश्चिम बंगाल से योग्य प्रस्तावों की प्रक्रिया में सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने राज्य सरकार से एसएएससीआई योजना के संशोधित-लिंक कंपोनेंट के तहत पहचाने गए सुधारों के कार्यान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया।

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प्रधानमंत्री ने दमन के नमो हवाई अड्डे पर आधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम दमन के नमो हवाई अड्डे पर एक आधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह नई सुविधा केंद्र शासित प्रदेश की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करेगी। श्री मोदी ने कहा कि यह टर्मिनल भवन इस क्षेत्र में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों दोनों को महत्वपूर्ण बढ़ावा देने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

दमन के नमो हवाई अड्डे को एक आधुनिक टर्मिनल भवन मिला है, जो इस केंद्र शासित प्रदेश की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इससे पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आज शाम इस टर्मिनल भवन का उद्घाटन करके बेहद खुशी हुई।”

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केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 73वीं एनईसी पूर्ण बैठक में पूर्वोत्तर के लिए विकास के रोडमैप और परिवर्तनकारी पहलों पर चर्चा की

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) की 73वीं पूर्ण बैठक में, केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) एवं पूर्वोत्तर परिषद के उपाध्यक्ष श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्रालय की परिवर्तनकारी पहलों पर चर्चा की और आठ उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों की समीक्षा की।

आठ पूर्वोत्तर राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ‘कनेक्ट, कन्वर्ज और कैटलाइज़'(जोड़ना, समन्वय करना और गति देना) के ‘थ्री-सी’ फ्रेमवर्क के आधार पर इस क्षेत्र के विकास के लिए एक सहयोगी, संयोजक और सेतु के रूप में सामने है।

उन्होंने बताया कि 72वीं एनईसी पूर्ण बैठक के बाद गठित आठ उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स ने निवेश प्रोत्साहन, कृषि एवं बागवानी, हस्तशिल्प, अवसंरचना एवं संपर्क, आर्थिक गलियारों, पशुपालन और मत्स्य पालन में आत्मनिर्भरता, खेल तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए कार्य योजनाएं और सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। इन टास्क फोर्स का गठन मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में और केंद्र व राज्यों के प्रतिनिधियों के सहयोग से किया गया था। इन्हें पूर्वोत्तर के भविष्य के विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने तथा क्षेत्र को “विकसित भारत 2047” के विजन में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

श्री सिंधिया ने कहा कि टास्क फोर्स की सिफारिशें आगे की समीक्षा और कार्यान्वयन हेतु एनईसी अध्यक्ष को सौंपी जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए संबंधित मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को शामिल करते हुए एक उच्च-स्तरीय संचालन समिति के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

मंत्रालय की हालिया उपलब्धियां बताते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का व्यय वित्त वर्ष 2022–23 में लगभग ₹1,000 करोड़ से बढ़कर पिछले दो वर्षों में लगभग ₹4,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय को ₹6,500 करोड़ का बजट आवंटन प्राप्त हुआ है। परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और धन-राशि के समय पर प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए कई सुधार भी लागू किए गए हैं।

मंत्री श्री सिंधिया ने “राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट” की सफलता पर प्रकाश डाला, जिसमें 100 से अधिक राजदूतों ने भाग लिया और लगभग ₹4.5 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया गया। उन्होंने बताया कि मई 2025 में आयोजित इस सम्मेलन के बाद से लगभग ₹40,000 करोड़ का निवेश जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका है, जो क्षेत्र में  निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

वित्तीय समावेशन के बारे में श्री सिंधिया ने बताया कि पिछले 15 महीनों में पूर्वोत्तर में 131 नई बैंक शाखाएं स्थापित की गई हैं, जबकि 6,500 ऐसे गांवों को औपचारिक बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ा गया है, जहां पहले बैंकिंग सुविधा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान का उपयोग लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

मंत्री श्री सिंधियाने ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन छात्र विनिमय कार्यक्रम’ और इसरो के एक्सपोज़र विज़िट्स की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिनके माध्यम से देश भर के और पूर्वोत्तर के छात्रों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैज्ञानिक शिक्षा के अवसर प्राप्त हुए हैं।

श्री सिंधिया ने आगे बताया कि मंत्रालय द्वारा सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिष्ठित पर्यटन सर्किट विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाया जा सके। उन्होंने त्रिपुरा के माताबाड़ी पर्यटन सर्किट और मेघालय के सोहरा पर्यटन सर्किट जैसी प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्हें पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, आगंतुक सुविधाओं में सुधार, संपर्क बढ़ाने और स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने, रोजगार सृजन और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

मंत्री ने ‘वन स्टेट वन प्रोडक्ट’ पहल के बारे में विस्तार बताया, जिसके तहत हरेक पूर्वोत्तर राज्य ने अपनी तुलनात्मक बढ़त और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर एक विशिष्ट उत्पाद या क्षेत्र की पहचान की है। इस पहल के अंतर्गत मेघालय का लाकाडोंग हल्दी, असम का मूगा रेशम, अरुणाचल प्रदेश का कीवी, त्रिपुरा का क्वीन अनानास और सिक्किम की जैविक खेती सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना, निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों, कारीगरों तथा उद्यमियों की आय के अवसर बढ़ाना है। श्री सिंधिया ने कहा कि हरेक राज्य की विशिष्ट क्षमताओं का लाभ उठाकर यह पहल पूर्वोत्तर से वैश्विक स्तर पर पहचाने जाने वाले ब्रांड बनाने में मदद करेगी और पूरे क्षेत्र में समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी।

मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे के विकास, बैंकिंग के विस्तार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन विकास में किए जा रहे निरंतर प्रयास एक समृद्ध और आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर की नींव रख रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह क्षेत्र भारत के एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरेगा और “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 
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भव्य पोर्टल लॉन्च: देशभर में बनेंगे 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क, निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली –  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने मंगलवार को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत विकसित भव्य पोर्टल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह योजना देश में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेगी और बड़े पैमाने पर निवेश तथा रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने बताया कि भव्य योजना के तहत अगले छह वर्षों में देशभर में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इन पार्कों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिस्पर्धी आधार पर परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उद्योग जगत के साथ मिलकर यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सा उद्योग सबसे उपयुक्त रहेगा, चाहे वह विनिर्माण, रसायन, डेटा सेंटर या अन्य उभरते क्षेत्र हों।

निवेशकों को मिलेगी पूरी जानकारी

भव्य पोर्टल निवेशकों के लिए एक डिजिटल वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से औद्योगिक पार्कों में उपलब्ध भूमि, सड़क-रेल संपर्क, बिजली, जल आपूर्ति, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इससे निवेशकों को तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

33,660 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस योजना का कुल परिव्यय 33,660 करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर औद्योगिक पार्कों का विकास करेंगी। भूमि राज्य सरकारें उपलब्ध कराएंगी, जबकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीीसी) सहयोग करेगा।

रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बल

श्री गोयल ने कहा कि इन पार्कों में प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं, श्रमिक आवास, सामाजिक अवसंरचना और डिजिटल सिंगल-विंडो क्लियरेंस जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे उद्योगों की स्थापना में लगने वाला समय कम होगा और लाखों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

2047 के विकसित भारत विजन को मिलेगा समर्थन

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भव्य योजना प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जुलाई से शुरू होगा पहला चरण

योजना के तहत 1 जून से 31 जुलाई तक प्राप्त आवेदनों के आधार पर पहले चरण में 20 औद्योगिक पार्कों का चयन किया जाएगा। इसके बाद सितंबर तक प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर अतिरिक्त 30 पार्कों को शामिल किया जाएगा। शेष पार्कों का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भव्य पोर्टल और योजना के माध्यम से भारत में औद्योगिक अवसंरचना को नई गति मिलेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत आधार प्राप्त होगा।

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सांस्कृतिक सहयोग के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक संपन्न

नई दिल्ली –  ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक के दूसरे दिन की कार्यवाही का शुभारंभ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार के उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुआ। बैठक में पहले दिन आरंभ हुई सारगर्भित चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए विचार-विमर्श जारी रहा, जो सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम परिचर्चा सत्र, “सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक संपदा की वापसी हेतु संस्थागत रणनीतियां”, का संचालन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के डीन प्रोफेसर रमेश सी. गौर ने किया। इस सत्र ने सदस्य देशों को सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण, परिरक्षण और प्रत्यावर्तन से संबंधित अनुभवों तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा विरासत संरक्षण को साझा उत्तरदायित्व के रूप में रेखांकित किया। चर्चाओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत पहचान को सुदृढ़ करने, सामुदायिक अधिकारों की रक्षा करने तथा अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा सत्र, “साझा विरासत के संरक्षण हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण : यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तथा मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त नामांकन”, का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। इस सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों ने साझा मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, मान्यता और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया।

दिन के अंतिम परिचर्चा सत्र, “सतत विकास के प्रेरक के रूप में संस्कृति : 2030 के बाद का एजेंडा”, का संचालन भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अमृता सरभाई ने किया। इस सत्र में संस्कृति को सतत विकास के सक्षमकर्ता और उत्प्रेरक के रूप में मिल रही बढ़ती मान्यता पर विचार किया गया। चर्चा के दौरान संस्कृति, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक लचीलापन तथा सामुदायिक कल्याण के बीच अंतर्संबंधों को रेखांकित किया गया। साथ ही, वर्ष 2030 के बाद उभरते वैश्विक विकास विमर्श में सांस्कृतिक आयामों को समाहित करने के संभावित मार्गों का भी अन्वेषण किया गया।

दिन के कार्यक्रम में काशी की समृद्ध सभ्यतागत एवं जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रतिनिधियों ने गंगा आरती का अवलोकन किया, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण किया तथा लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थायी विरासत का सजीव अनुभव प्राप्त हुआ। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम विचार-विमर्श का उपयुक्त समापन सिद्ध हुआ और इसके साथ ही ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक ने सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा जन-से-जन संपर्क को और प्रगाढ़ बनाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।

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उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने की अपील की

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भाग लेने और वृक्षारोपण करके आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य में योगदान देने की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया।

 

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

 

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

 

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रांची: डोरंडा थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ब्राउन शुगर के साथ तीन गिरफ्तार

रांची,10.06.2026 –  वरीय पुलिस अधीक्षक रांची द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक (नगर) रांची के निर्देश पर डोरंडा थाना क्षेत्र में विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया। पुलिस उपाधीक्षक हटिया के नेतृत्व एवं डोरंडा थाना प्रभारी के निर्देशन में गठित छापामारी दल ने डोरंडा थाना क्षेत्र के धोबी मोहल्ला स्थित एक खटाल में कार्रवाई की।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने ड्रग्स की सप्लाई और सेवन में संलिप्त तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सानु कुमार उर्फ दानडी (न्यू कॉलोनी, जगन्नाथपुर), कासिफ अली उर्फ भोकरे (बेलदार मोहल्ला, डोरंडा) तथा आरिफ उर्फ मोनू (बेलदार मोहल्ला, डोरंडा) के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 28 पुड़िया ब्राउन शुगर, 3,880 रुपये नकद तथा एक मोबाइल फोन बरामद किया है। बरामदगी के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए डोरंडा थाना कांड संख्या 147/26, दिनांक 08 जून 2026 दर्ज किया तथा तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय, रांची भेज दिया।

इस कार्रवाई में डोरंडा थाना प्रभारी दीपिका प्रसाद, पुलिस अवर निरीक्षक रितेश कुमार पांडेय, पवन कुमार यादव, रितेश कुमार महतो, सहायक अवर निरीक्षक शोएब अहमद खान, अमीन मरांडी, सुखदेव रजक सहित डोरंडा थाना के अन्य पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में नशे के कारोबार और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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 जगन्नाथपुर रथयात्रा की तैयारी तेज, सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष जोर

रांची,09.06.2026 –  जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में रांची समाहरणालय के ब्लॉक-ए सभागार में गुरुवार को जगन्नाथपुर रथयात्रा महोत्सव-2026 की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में 16 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले 365वें रथयात्रा महोत्सव को भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न विभागों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि जगन्नाथ मेला अवधि के दौरान मेला क्षेत्र की 500 मीटर परिधि में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। संबंधित अधिकारियों को इसकी व्यापक जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद

रथयात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मेला क्षेत्र में वॉच टावर स्थापित किए जाएंगे तथा खोया-पाया केंद्र संचालित होगा। पूरे रथयात्रा मार्ग पर विशेष बैरिकेडिंग की जाएगी और बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। स्थानीय थाना प्रभारियों को रूट का निरीक्षण कर सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

भीड़ प्रबंधन, चोरी की घटनाओं की रोकथाम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सादे लिबास में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

सड़क, सफाई और पर्यावरण पर विशेष ध्यान

बैठक में मंदिर मार्ग एवं रथयात्रा पथ की सड़कों की मरम्मत कार्य की समीक्षा की गई तथा कार्य शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। मेला क्षेत्र में प्लास्टिक और सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा तथा पूरे क्षेत्र का लेआउट प्लान तैयार किया जाएगा।

आपातकालीन सेवाओं की रहेगी व्यवस्था

मेला क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की तैनाती, इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था, निर्बाध बिजली आपूर्ति तथा नगर निगम द्वारा विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा और उसका सार्वजनिक प्रदर्शन अनिवार्य होगा।

पर्यटन के रूप में विकसित करने पर जोर

बैठक में जगन्नाथपुर रथयात्रा को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनाने पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों की समीक्षा के लिए अलग से बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जगन्नाथपुर रथयात्रा रांची की सांस्कृतिक पहचान है। इस ऐतिहासिक महोत्सव को सभी विभागों के समन्वित प्रयास से भव्य, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा ताकि लाखों श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर सकें।

बैठक में अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री धनंजय, सदर अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, स्वास्थ्य, विद्युत, जल, यातायात विभाग तथा जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: शुचिता और सिद्धांतों की लड़ाई, कांग्रेस पर भाजपा के गंभीर आरोप

रांची,09.06.2026 –  झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर कांग्रेस और सत्तारूढ़ गठबंधन पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने तथा जोड़-तोड़ की राजनीति करने का आरोप लगाया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह चुनाव जीतने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव और धनबल के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा हमेशा राजनीतिक शुचिता, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों की राजनीति में विश्वास करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सिद्धांतों से समझौता कर सत्ता प्राप्त करने की राजनीति नहीं करती।

प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने राज्यसभा के निर्दलीय प्रत्याशी Parimal Nathwani के कार्यों की भी सराहना की। उनका कहना था कि परिमल नथवानी ने झारखंड के विकास और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि भाजपा ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से किसी विशेष उम्मीदवार के पक्ष में व्हिप जारी नहीं किया गया है और पार्टी कार्यकर्ता तथा विधायक अपने स्वविवेक के आधार पर मतदान करेंगे।

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में संख्या बल और जनादेश का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीति में नैतिकता और सिद्धांतों को बचाने का संघर्ष भी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं, जो झारखंड की राजनीति की आगामी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 : परिमल नाथवानी की संपत्ति 754 करोड़ पार, अन्य प्रत्याशी भी करोड़पति

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन के साथ दाखिल शपथ-पत्रों में उम्मीदवारों की संपत्ति और आय का ब्यौरा सामने आने के बाद चुनावी चर्चा और भी गर्म हो गई है। इस बार चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी सबसे अधिक संपत्ति वाले प्रत्याशी के रूप में उभरे हैं।

शपथ-पत्र के अनुसार परिमल नाथवानी के पास कुल 754.86 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनकी वार्षिक आय 35.70 करोड़ रुपये दर्ज की गई है, जो अन्य उम्मीदवारों की संपत्ति की तुलना में भी काफी अधिक है। जानकारी के मुताबिक वे Reliance Industries को पेशेवर सेवाएं प्रदान करते हैं, जिसके एवज में उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 24.99 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होती है। उनकी पत्नी की वार्षिक आय भी 4.09 करोड़ रुपये बताई गई है।

वहीं वैद्यनाथ राम, जिन्हें Jharkhand Mukti Morcha (JMM) ने अपना उम्मीदवार बनाया है, की कुल संपत्ति 4.56 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। उनकी वार्षिक आय 15.52 लाख रुपये बताई गई है।

दूसरी ओर प्रणव झा, जो Indian National Congress के उम्मीदवार हैं, के पास कुल 1.91 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनकी सालाना आय 11.93 लाख रुपये दर्ज की गई है।

सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि चुनाव मैदान में मौजूद तीनों उम्मीदवार करोड़पति हैं, लेकिन परिमल नाथवानी की वार्षिक आय ही अन्य दोनों उम्मीदवारों की कुल संपत्ति से कई गुना अधिक है। शपथ-पत्रों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर उम्मीदवारों की संपत्ति और आय से जुड़े आंकड़े अब राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। चुनावी मुकाबले के साथ-साथ प्रत्याशियों की आर्थिक स्थिति भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

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झारखंड के 8 हॉकी सितारों का रांची में भव्य स्वागत, एशिया कप में देश का बढ़ाया मान

रांची,09.06.2026 –  जापान के काकामीगाहारा में आयोजित अंडर-18 एशिया कप 2026 में भारत का गौरव बढ़ाने वाले झारखंड के 8 हॉकी खिलाड़ियों का शुक्रवार को रांची में जोरदार स्वागत किया गया। दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया के सम्मान समारोह में शामिल होने के बाद सभी खिलाड़ी अपने गृह राज्य झारखंड पहुंचे।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 29 मई से 6 जून 2026 तक जापान में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर पूरे एशिया में भारत का परचम लहराया।

झारखंड के खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का गौरव

स्वर्ण पदक विजेता भारतीय पुरुष टीम में झारखंड के आशीष तनी पूर्ति और प्रेमचंद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कांस्य पदक विजेता भारतीय महिला टीम में झारखंड की संदीपा कुमारी, पुष्पा मांझी, सुगन सांगा, खिली कुमारी, नीलम टोपनो और श्रुति कुमारी ने शानदार प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन किया।

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर पारंपरिक स्वागत

रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर पहुंचते ही हॉकी झारखंड की अगुवाई में सभी खिलाड़ियों का भव्य स्वागत किया गया। पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज के तहत खिलाड़ियों के हाथ धुलवाए गए, उन्हें फूल-मालाएं पहनाई गईं और सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर हॉकी झारखंड के महासचिव विजय शंकर सिंह, अशोक भगत, आश्रिता लकड़ा, दशरथ महतो, हॉकी कोच करुणा पूर्ति, दूलारी टोपनो, मनीष सहित बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और समर्थक मौजूद रहे।

खिलाड़ियों के स्वागत के दौरान पूरा एयरपोर्ट परिसर “भारत माता की जय” और “हॉकी जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से पूरे झारखंड में उत्साह और गर्व का माहौल है।

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झारखंड पात्रता परीक्षा 2024 को लेकर रांची में निषेधाज्ञा लागू

रांची,08.06.2026 : सचिव, झारखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा-2024 (विज्ञापन संख्या 08/2025) के कदाचार मुक्त एवं शांतिपूर्ण संचालन तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से रांची प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर रांची, श्री कुमार रजत ने बीएनएसएस की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा जारी की है। यह आदेश 14 जून 2026 को प्रातः 7:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक प्रभावी रहेगा।

प्रशासन के अनुसार परीक्षा के सफल संचालन के लिए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रांची राकेश रंजन के संयुक्त आदेश से पुलिस बल एवं दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इसके बावजूद असामाजिक तत्वों द्वारा परीक्षा केंद्रों पर भीड़ लगाकर कानून-व्यवस्था प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

निषेधाज्ञा के तहत प्रतिबंध

परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में निम्नलिखित गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी—

  • पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का एक स्थान पर एकत्र होना (सरकारी कार्य में लगे कर्मियों एवं शवयात्रा को छोड़कर)।
  • किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग।
  • बंदूक, राइफल, रिवॉल्वर, बम, बारूद आदि अस्त्र-शस्त्र लेकर चलना (अधिकृत सरकारी कर्मियों को छोड़कर)।
  • लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा, भाला आदि हरवे हथियार लेकर चलना (अधिकृत सरकारी कर्मियों को छोड़कर)।
  • किसी प्रकार की बैठक, सभा या आमसभा का आयोजन।

परीक्षा केंद्र

रांची में निम्नलिखित पांच परीक्षा केंद्रों के आसपास यह निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी—

  1. St. Paul’s College, चर्च रोड, रांची
  2. St. John’s High School, करबला टैंक रोड, रांची
  3. Ram Tahal Choudhary High School, बुटी, रांची
  4. St. Margaret’s Girls High School, बहु बाजार, चर्च रोड, रांची
  5. St. Anne’s Intermediate College, डॉ. कैमिल बुल्के पथ, पुरुलिया रोड, रांची

प्रशासन ने अभ्यर्थियों एवं आम नागरिकों से परीक्षा के दौरान जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

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अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी, तीन आरोपी गिरफ्तार

रांची,07.06.2026 –  जिला प्रशासन रांची ने अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंडरा क्षेत्र से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग बिना वैध पंजीकरण के गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर रहे थे, जो PC & PNDT Act (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) का गंभीर उल्लंघन है।

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजन्त्री के कड़े निर्देश पर शनिवार को पंडरा इलाके में छापेमारी की गई। जिला प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि रवि स्टील चौक के पास एक अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है।

असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर गठित टीम ने जब मौके पर छापेमारी की तो तीन व्यक्तियों को एक पोर्टेबल USG मशीन (Micromaxx) के साथ अल्ट्रासाउंड करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, रातू थाना पुलिस, पीसी एंड पीएनडीटी सेल के कर्मी तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरंजन कुमार, आकाश कुमार और शीला कुमारी के रूप में हुई है। प्रशासन ने मौके से अल्ट्रासाउंड मशीन समेत अन्य आवश्यक साक्ष्य भी जब्त कर लिए हैं।

प्रशासन के अनुसार बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है। PC & PNDT Act के तहत भ्रूण के लिंग निर्धारण (Sex Determination) पर पूर्ण प्रतिबंध है। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखना है।

मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने रातू थाना को पत्र भेजकर तीनों आरोपियों के विरुद्ध PC & PNDT एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। मामले से संबंधित सभी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे।

इस संबंध में अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की नीति के अनुरूप अवैध अल्ट्रासाउंड और लिंग निर्धारण जैसी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मशीन जब्ती, लाइसेंस रद्द करने और कारावास तक का प्रावधान है।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र या लिंग निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस अथवा मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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रिपोर्ट: FinalJustice.in

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सांस्कृतिक सहयोग के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक संपन्न

नई दिल्ली – ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक के दूसरे दिन की कार्यवाही का शुभारंभ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार के उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुआ। बैठक में पहले दिन आरंभ हुई सारगर्भित चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए विचार-विमर्श जारी रहा, जो सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम परिचर्चा सत्र, “सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक संपदा की वापसी हेतु संस्थागत रणनीतियां”, का संचालन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के डीन प्रोफेसर रमेश सी. गौर ने किया। इस सत्र ने सदस्य देशों को सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण, परिरक्षण और प्रत्यावर्तन से संबंधित अनुभवों तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा विरासत संरक्षण को साझा उत्तरदायित्व के रूप में रेखांकित किया। चर्चाओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत पहचान को सुदृढ़ करने, सामुदायिक अधिकारों की रक्षा करने तथा अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा सत्र, “साझा विरासत के संरक्षण हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण : यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तथा मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त नामांकन”, का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। इस सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों ने साझा मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, मान्यता और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया।

दिन के अंतिम परिचर्चा सत्र, “सतत विकास के प्रेरक के रूप में संस्कृति : 2030 के बाद का एजेंडा”, का संचालन भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अमृता सरभाई ने किया। इस सत्र में संस्कृति को सतत विकास के सक्षमकर्ता और उत्प्रेरक के रूप में मिल रही बढ़ती मान्यता पर विचार किया गया। चर्चा के दौरान संस्कृति, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक लचीलापन तथा सामुदायिक कल्याण के बीच अंतर्संबंधों को रेखांकित किया गया। साथ ही, वर्ष 2030 के बाद उभरते वैश्विक विकास विमर्श में सांस्कृतिक आयामों को समाहित करने के संभावित मार्गों का भी अन्वेषण किया गया।

दिन के कार्यक्रम में काशी की समृद्ध सभ्यतागत एवं जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रतिनिधियों ने गंगा आरती का अवलोकन किया, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण किया तथा लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थायी विरासत का सजीव अनुभव प्राप्त हुआ। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम विचार-विमर्श का उपयुक्त समापन सिद्ध हुआ और इसके साथ ही ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक ने सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा जन-से-जन संपर्क को और प्रगाढ़ बनाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।

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मुंबई में भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल कार्यशाला आयोजित की गई

नई दिल्ली – हाल ही में शुरू किए गए भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआईपी) पर एक कार्यशाला का आयोजन आज मुंबई में भारतीय नौवहन निगम के सभागार में किया गया। यह कार्यक्रम नौवहन महानिदेशालय और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया गया था।

इस कार्यशाला में समुद्री क्षेत्र के प्रमुख हितधारक, जिनमें जहाज मालिक, माल मालिक और नौवहन कंपनियां शामिल थीं, एक साथ आए और मैरीटाइम इंश्योरेंस समाधानों और इस क्षेत्र के भविष्य के विकास पर चर्चा की।

कार्यशाला का उद्घाटन डीएफएस में अतिरिक्त सचिव डॉ. देबाशीष प्रुस्टी ने किया, जिसमें नौवहन और सामान्य बीमा उद्योग के विभिन्न प्रमुख प्रतिनिधियों, जैसे कि जहाजरानी महानिदेशक श्री श्याम जगन्नाथन, निदेशक (भारतीय नौवहन निगम), जीआई काउंसिल, जीआईसी आरई और एनआईएसीएल में सीएमडी सुश्री गिरिजा सुब्रमणियन आदि ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

श्री प्रुस्टी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और बीएमआई पूल के माध्यम से उपलब्ध वर्तमान कवर को समझने और भारत में पीएंडआई कवर और पीएंडआई क्लब पर उद्योग की जरूरतों और अपेक्षाओं पर विचार-विमर्श करने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ लाने में जीआई काउंसिल, डीजी शिपिंग और जीआईसी आरई की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की। यह भी बताया गया कि बीएमआई पूल के अंतर्गत हल वॉर और कार्गो वॉर जोखिम कवर की पॉलिसियों के प्रीमियम में क्रमशः 27-48% की कमी आई है। उन्होंने तीन चरणों: घरेलू स्तर पर पीएंडआई उत्पाद तैयार करके समुद्री व्यापार में संप्रभुता प्राप्त करना, एमओपीएसडब्ल्यू के सहयोग से चुनिंदा समुद्री जहाजों के लिए बीएमआई पूल कवर का विस्तार करना और अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों के अनुरूप पारस्परिक क्लब गठन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय समूह पीएंडआई क्लबों (आईजी) के साथ संभावित एकीकरण की संभावना तलाशना, में भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया।

महानिदेशक (नौवहन) श्री श्याम जगन्नाथन ने जानकारी दी कि 2015 से भारतीय नौवहन में भारतीय जहाजों की संख्या में 36% की बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़कर कुल 1600 हो गई है। उन्होंने 1 मार्च, 2026 तक होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात में 86% की गिरावट और मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते तेल की कीमतों में 10% की तेजी का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआईपी) के जरिए समुद्री व्यापार के लिए निरंतर बीमा कवरेज सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयासों की सराहना की।

एनआईएसीएल में सीएमडी सुश्री गिरिजा सुब्रमणियन ने बीएमआईपी को भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय, संपोषित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित पीएंडआई (पीएंडआई) फ्रेमवर्क प्राप्त करने के तरीकों का पता लगाने के मंच के रूप में संबोधित किया। जीआईसी आरई सीएमडी ने समुद्री जोखिमों के बीमा के लिए जरूरी मदद प्रदान करने और देश के व्यापार के एक महत्वपूर्ण पहलू पर संप्रभु नियंत्रण प्राप्त करने में बीएमआई पूल की क्षमता को भी स्वीकार किया। जीआईसी आरई के पूल प्रबंधक ने जहाज मालिकों और उनके संघों की ओर से पूल के अंतर्गत कवरेज के संबंध में पूछे गए प्रश्नों/ स्पष्टीकरणों का उत्तर दिया। इसके साथ ही, देश की तत्काल पीएंडआई बीमा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक पीएंडआई बीमा उत्पाद तैयार करने के संबंध में समुद्री बीमाकर्ताओं, जहाज मालिकों और अन्य हितधारकों जैसे समायोजकों और संवाददाताओं के साथ विचार-विमर्श किया गया।

वर्तमान वैश्विक माहौल में, जहां अस्थिरता और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती जा रही है, समुद्री व्यापार पर काफी दबाव है। इसके साथ ही, भारतीय पोत तृतीय-पक्ष देनदारियों को कवर करने वाले बीमा के लिए आईजी पीएंडआई क्लबों पर अत्यधिक निर्भर हैं। इस पूल के अंतर्गत संप्रभु गारंटी का लाभ ग्राहकों/ जहाज मालिकों को कम प्रीमियम लेकर दिया जाता है, जिससे समुद्री व्यापार के लिए बीमा किफायती हो जाता है।

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रेल मंत्री ने शकूर बस्ती डिपो में हाइड्रोजन ट्रेन और अत्याधुनिक रखरखाव सुविधाओं की समीक्षा की

केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज उत्तर रेलवे के तिलक ब्रिज–शकूर बस्ती रेल खंड का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरे में उन्होंने वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की और क्षेत्र में विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं और वर्तमान में जारी कार्यों की प्रगति का आकलन किया।

शकूर बस्ती डिपो में उन्नत तकनीकों और रखरखाव सुविधाओं का निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान, रेल मंत्री ने शकूर बस्ती स्टेशन का दौरा किया, जहाँ उन्होंने अत्याधुनिक वापस लेने योग्य ओवरहेड उपकरण (रिट्रैक्टेबल ओवरहेड इक्विपमेंट; ओएचई) प्रणाली का गहन निरीक्षण किया। यह तकनीक इंजन और रेलों के रखरखाव शेड में सुरक्षित और कुशल रखरखाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने बोगी पिट और बोगी उठाने की सुविधाओं का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर परिचालन दक्षता को और बढ़ाने का निर्देश दिया।

हाइड्रोजन ट्रेन का निरीक्षण

इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण हाइड्रोजन ट्रेन का निरीक्षण था। रेल मंत्री ने इस पर्यावरण–अनुकूल हरित तकनीक पहल की प्रगति की समीक्षा की, जो भविष्य में भारतीय रेलवे को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विश्व पर्यावरण दिवस और हरित रेलवे के लिए प्रतिबद्धता

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, रेल मंत्री ने डिपो परिसर में आयोजित एक वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया और एक पौधा लगाया। इस अवसर पर, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारतीय रेलवे की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय रेलवे तेजी से 100% विद्युतीकरण की ओर आगे बढ़ रहा है, जो एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और जो नेट–जीरो कार्बन उत्सर्जक बनने की देश की प्रतिबद्धता को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

श्री अश्विनी वैश्नव ने शकूर बस्ती डिपो में कार्यरत कर्मचारियों, रखरखाव कर्मियों और अन्य रेलवे कर्मचारियों के साथ बातचीत की। एक गर्मजोशी भरे और सौहार्दपूर्ण माहौल में, रेल मंत्री ने उनके अनुभवों को सुना, व्यक्तिगत रूप से उनके प्रयासों की प्रशंसा करके उन्हें प्रोत्साहित किया और उनके दैनिक काम में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और समस्याओं की गहरी समझ प्राप्त की। केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारियों द्वारा उठाई गई समस्याओं के तत्काल और समयबद्ध समाधान के लिए वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए।

गुरुग्राम रेलवे स्टेशन का निरीक्षण

रेल मंत्री ने गुरुग्राम रेलवे स्टेशन का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। उन्होंने वर्तमान में जारी विश्व–स्तरीय पुनर्विकास कार्यों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। स्टेशन का पुनर्विकास 300 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने स्टेशन पर उपस्थित यात्रियों के साथ सीधे बातचीत करके अपनी जमीन से जुड़ी नेतृत्व क्षमता को दिखाया। उन्होंने रेल सेवाओं, यात्रा अनुभवों और यात्राओं के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में उनके साथ विस्तृत चर्चा की।

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राॅंची में बारिश और वज्रपात का अलर्ट, मौसम ने बदली करवट

राॅंची,06.06.2026 –  देश में मानसून की सक्रियता के बीच झारखंड में भी मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विभाग ने रांची और आसपास के क्षेत्रों में आज और कल गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई है।

विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। वज्रपात की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने तथा खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व गतिविधियों के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है। इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं किसानों के लिए भी यह बारिश लाभदायक साबित हो सकती है।

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झारखंड की संदीपा कुमारी को उसके शानदार खेल के प्रदर्शन के लिए बेस्ट प्लेयर ऑफ द मैच का पुरुस्कार दिया गया

काकामीगाहारा जापान में 29 मई से 06 जून 2026 तक आयोजित अंडर 18 एशिया कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कोरिया को 3-0 से पराजित कर कांस्य पदक अपने नाम किया।

तीसरे-चौथे स्थान के लिए खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने कल पेनल्टी शूटआउट में मिली हार से सबक लेते हुए आक्रामक शुरुआत की। मैच के दूसरे मिनट में ही झारखंड की संदीपा कुमारी ने फील्ड गोल कर भारत को बढ़त दिलाई और कांस्य पदक की ओर पहला कदम बढ़ाया।

दूसरे क्वार्टर के शुरुवात में भी मैच के 16 वे मिनट में कप्तान स्वीटी कुजूर ने दूसरा गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। उसी तरह तीसरे क्वार्टर के सुरु में ही में मैच के 33 वे मिनट में टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल करने वाली नौशीन नाज ने भारत की ओर से एक और गोल दागकर स्कोर 3-0 कर दिया, जो निर्णायक साबित हुआ।

झारखंड की 6 खिलाड़ियों ने बढ़ाया मान

कांस्य पदक विजेता भारतीय टीम में झारखंड की 6 खिलाड़ी शामिल रहीं – संदीपा कुमारी, पुष्पा मांझी, श्रुति कुमारी, सुगन सांगा, नीलम टोपनो और खिल्ली कुमारी है,और इन्होंने जबरजजस्त खेल का प्रदर्शन कर कई गोल भी किए है, झारखंड की संदीपा कुमारी और श्रुति कुमारी ने दो दो गोल किए जबकि पुष्पा मांझी ने एक गोल की।

संदीपा कुमारी को बेस्ट प्लेयर ऑफ द मैच का पुरुस्कार

मैच के दूसरे मिनट में ही भारत की ओर से गोल कर भारत की ओर से आक्रमण की शुरुआत करने करने वाली झारखंड की संदीपा कुमारी जिसने पूरे मैच के दौरान शानदार प्रदर्शन कर भारत को कांस्य पदक जितने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसके शानदार खेल के प्रदर्शन के लिए आयोजन समिति की ओर से बेस्ट प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

यह बड़ा संयोग का अवसर है आज से ठीक 10 वर्ष पहले 2016 में भी U 18 एशिया कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक प्राप्त की थी और उसके भी कांस्य पदक विजेता टीम में संदीपा कुमारी की बड़ी बहन संगीता कुमारी का महत्वपूर्ण योगदान था, उसे भी उस मैच में बेस्ट प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया था और अब संगीता कुमारी सीनियर भारतीय हॉकी टीम की स्ट्राइकर है।

मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद हॉकी इंडिया के महासचिव श्री भोलानाथ सिंह और कोषाध्यक्ष शेखर जे मनोहरण ने जीत के बाद भारतीय टीम को बधाई दी।

झारखंड में होगा भव्य स्वागत

भारत की जीत पर हॉकी झारखंड और खेल विभाग झारखंड सरकार के पदाधिकारियों ने बधाई दी। हॉकी झारखंड की ओर से कहा गया कि झारखंड आगमन पर पदक विजेता सभी खिलाड़ियों का भव्य स्वागत किया जाएगा।

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झारखंड मुक्ति मोर्चा: राज्यसभा उम्मीदवार वैद्यनाथ राम 

रांची,06.06.2026 – झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में पूर्व मंत्री वैद्यनाथ राम के नाम की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण निर्णय पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन द्वारा वरिष्ठ नेताओं के साथ गहन विचार-विमर्श और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के आकलन के बाद लिया गया।

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे अपने विधायकों के समर्थन से उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे और वे सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस रणनीतिक कदम के पीछे आगामी राजनीतिक चुनौतियों और गठबंधन की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है।

इसके अतिरिक्त, सहयोगी दलों के साथ भविष्य की चर्चाओं के लिए भी रास्ते खुले रखे गए हैं ताकि चुनावी सफलता प्राप्त की जा सके। यह पूरी प्रक्रिया पार्टी की आंतरिक एकजुटता और नेतृत्व के प्रति अटूट विश्वास को प्रदर्शित करती है।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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