राष्ट्रपति को जीओसी-इन-सी द्वारा एआरटीआरएसी के विकास क्रम, भारतीय सेना के कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान कर परिचालन दक्षता बढ़ाने में इसकी उत्कृष्ट भूमिका तथा एआरटीआरएसी की प्रमुख पहलों के बारे में जानकारी दी गई। एआरटीआरएसी की नवोन्मेषी पहलों का उल्लेख करते हुए जीओसी-इन-सी ने ड्रोन प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाने हेतु उठाए गए कदम, ‘रेड टीमिंग’ की अवधारणा की शुरुआत तथा भारतीय सेना में डिजिटलीकरण और स्वचालन की दिशा में की गई पहलों पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि एआरटीआरएसी भारतीय सेना के लिए युद्ध संबंधी अवधारणाओं के निर्माण, संसाधन विकास तथा मित्र देशों और अन्य रक्षा सेवाओं के साथ व्यापक सहभागिता में सर्वसमावेशी भूमिका निभाता है। यह सैन्य गौरव, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। एआरटीआरएसी अपने 32 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से भारतीय सेना में व्यावसायिक उत्कृष्टता के क्षेत्र को सुदृढ़ करता है, जिससे उसे युद्धकला के सिद्धांत और व्यवहार—दोनों के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्राप्त होता है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्र को सुरक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना में प्रशिक्षण से संबंधित विषयों पर, हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता की उपस्थिति में, लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा के साथ विचार-विमर्श भी किया।
राष्ट्रपति ने एआरटीआरएसी से भारतीय सेना की परिचालन तैयारी को और सुदृढ़ करने के लिए पूरे उत्साह और समर्पण के साथ कार्य जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने एआरटीआरएसी के सभी रैंकों तथा रक्षा नागरिक कर्मियों की उत्कृष्ट कार्य के लिए सराहना की और उन्हें और अधिक जोश एवं उत्साह के साथ कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया।
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