केंद्रीय मंत्री श्री सोनोवाल ने कहा, “राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) भारत की समृद्ध समुद्री धरोहर और समुद्रों से सभ्यतागत जुड़ाव को प्रदर्शित करने की एक ऐतिहासिक पहल है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में, हम एनएमएचसी को एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह हमारी धरोहर का जश्न मनाते हुए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। हमें उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ समय पर इस परियोजना का पूरा होना सुनिश्चित करना होगा।”
इस परियोजना के वैश्विक आयाम पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के साथ साझा समुद्री धरोहर और ऐतिहासिक संबंधों को प्रदर्शित करने के लिए आसियान देशों सहित पड़ोसी और समुद्री राष्ट्रों के साथ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। अधिकारियों को परिसर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए इस तरह की साझेदारियों को प्रमुखता से आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। भारत ने नीदरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, यूएई, पुर्तगाल, वियतनाम, ओमान, इज़राइल और थाईलैंड के साथ पहले ही 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि इटली, फ्रांस, म्यांमार और कंबोडिया सहित चार और देशों के साथ समुद्री इतिहास के वैश्विक केंद्र के रूप में एनएमएचसी के विकास में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने की संभावना है।
सोनोवाल ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने एनएमएचसी को एक प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से स्थापित करने और उसे प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के साथ घनिष्ठ सहयोग का निर्देश दिया। सोनोवाल ने राष्ट्रीय और राज्य पर्यटन विभागों के साथ समन्वय में एक व्यापक कार्यक्रम कैलेंडर तैयार करने का भी आह्वान किया ताकि पर्यटकों की निरंतर भागीदारी और भारी संख्या में उनका आगमन सुनिश्चित हो सके।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने परिसर के सतत रखरखाव और दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व मॉडल पर सफाई मांगी।
श्री सोनोवाल ने यह भी कहा, “एनएमएचसी सिर्फ एक अवसंरचना परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री भावना को श्रद्धांजलि और हमारे ऐतिहासिक वैश्विक संबंधों को समझने का द्वार है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर अटूट ध्यान के साथ, हम एक ऐसा मंच बना रहे हैं जो पर्यटन को बढ़ावा देगा, आर्थिक अवसर पैदा करेगा और एक समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत की पहचान को मजबूत करेगा।”
इस परियोजना के चरण 1ए को इस वर्ष जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें छह संग्रहालय दीर्घाएं, लोथल टाउनशिप, जलीय थीम, सार्वजनिक क्षेत्र थीम, एक जेटी वॉकवे और भारतीय नौसेना की कलाकृतियों का प्रदर्शन शामिल है।
अगले चरण 1बी में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इसमें आठ अतिरिक्त संग्रहालय दीर्घाएं, एक प्रकाशस्तंभ संग्रहालय, बगीचा परिसर, लोथल-एनआई-वीएवी घटक और 50 गुंबदों वाला एक थिएटर भी अन्य आकर्षणों के अलावा शामिल होंगे।
एनएमएचसी का काम पूरा हो जाने पर इसके समुद्री इतिहास, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है, जो आर्थिक विकास को गति देते हुए धरोहर संरक्षण के भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
सोनोवाल ने ईरान के पास जलडमरूमध्य की स्थिति और भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
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