इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश–2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विज़न को देश के लगभग 15 लाख विद्यालयों में कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में एसएमसी को विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा में साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
श्री प्रधान ने इस बात पर बल दिया कि जहाँ एक ओर सरकार बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समर्थन सुनिश्चित करने के प्रति वचनबद्ध है, वहीं एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने में सहयोग, मार्गदर्शन और सामुदायिक स्वामित्व के महत्व को भी मान्यता देते हैं। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एसएमसी को शैक्षिक परिणामों में सुधार की एक स्थायी संस्कृति और जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना है। विद्यांजलि जैसी पहलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से सामुदायिक नेतृत्व के अंतर्गत फली-फूली है, और नए एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को पुनः सामाजिक सहभागिता के केंद्र में स्थापित कर उसी भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं।
अपने संबोधन में श्री आशीष सूद ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल नए दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे गहन और परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो उसका मार्ग देश की कक्षाओं से होकर ही गुजरेगा।
श्री सूद ने नवप्रारंभित एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 को इस परिवर्तनकारी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद प्रारंभ किया गया पूर्ववर्ती एसएमसी ढाँचा मुख्यतः अनुदान निगरानी, अवसंरचना पर्यवेक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित था। किंतु आज की चुनौतियाँ और अपेक्षाएँ काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), डिजिटल पारदर्शिता, अधिगम (लर्निंग) परिणाम तथा सामुदायिक भागीदारी जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। नए एसएमसी दिशा-निर्देशों को इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मंत्री महोदय ने बल देते हुए कहा कि ये दिशा-निर्देश एसएमसी को मात्र निगरानी निकाय से आगे बढ़ाकर वास्तविक “विद्यालय समुदाय प्रशासनिक संस्थान” में परिवर्तित करते हैं। अब एसएमसी समग्र बाल विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता, छात्र कल्याण, सुरक्षा, समावेशन, डिजिटल प्रशासन तथा पारदर्शिता में सक्रिय योगदान देंगी। अपने संबोधन के अंत में श्री सूद ने विश्वास व्यक्त किया कि एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
अपने संबोधन में श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के नेतृत्व में प्रस्तुत किए गए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश विद्यालय प्रबंधन और संचालन में स्थानीय अभिभावकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित कर अभिभावकों और विद्यालयों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होंगे।
बैठक में हरियाणा के स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा; महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा एवं मराठी भाषा मंत्री श्री दादाजी भुसे; मिजोरम के स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना; त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री किशोर बर्मन; उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत; तथा नागालैंड के उच्च शिक्षा मंत्री श्री तेमजेन इम्ना आलोंग सहित कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
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