राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा, “राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।

 

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को मिटाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत का औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति का सफर कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के क्षेत्र में एक सतत बदलाव है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दृष्टिकोण है, जिन्होंने लगातार उस औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की बात कही है जिसने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और मनोभावों को आकार दिया था।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की परिकल्पना को कई पहलों के माध्यम से साकार किया गया है, जिनमें राजभवनों का लोकभवनों में परिवर्तन; प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवा तीर्थ में परिवर्तन; केंद्रीय सचिवालय का नाम बदलकर कर्तव्य भवन करना; औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों को निरस्त करना; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित करना; और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण करना आदि शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “ये बदलाव महज प्रतीकात्मक नहीं हैं; ये सरकार की सेवा भावना के नजरिए को दर्शाते हैं।”

उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में शुरू की गई कई पहलों पर प्रकाश डाला। इन पहलों में उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप रखना; ब्रिटिश सहायक अधिकारियों की तस्वीरों की जगह परम वीर चक्र विजेताओं की तस्वीरें लगाना; और भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित पुस्तकालय और भंडार ‘ग्रन्थ कुटीर’ का उद्घाटन करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम जनमानस से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत को उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने राष्ट्र के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

एक वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और लेखक के रूप में राजाजी की बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि राजाजी ने निरंतर आर्थिक स्वतंत्रता की वकालत की और उनका मानना ​​था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अधिक जिम्मेदारियां ग्रहण करते समय अपने चरित्र को ऊंचा उठाएं, अपनी भूमिकाओं के विस्तार के साथ अपने विश्वासों को मजबूत करें और हमेशा राष्ट्र को स्वार्थ से ऊपर रखें।

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लोकायन-26 के दौरान मिस्र के सफागा बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शनी ने ऐतिहासिक आगमन किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शनी 21 फरवरी, 2026 को अपने चल रहे लोकयान-26 अभियान के हिस्से के रुप में मिस्र के सफागा पहुंचा। 16 दिनों में 1,832 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए, सलालाह से सफागा तक का यह सफर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो पोत के चालक दल के लचीलेपन, आत्मविश्वास और सहनशक्ति को दर्शाता है।

पोत के आगमन पर मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद से मुलाकात की।

इस मुलाकात में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया जो बेहतर नौसैनिक सहयोग और अंतर-संचालनीयता के साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। भारतीय नौसेना, बंदरगाह पर ठहरने के दौरान मिस्र के नौसैनिकों के साथ पेशेवर बातचीत करेगी, नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगी और द्विपक्षीय सद्भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सामुदायिक संपर्क गतिविधियों का संचालन करेगी।

अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना एक महत्वपूर्ण परिचालन चरण था, क्योंकि पोत ने चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थितियों और भारी समुद्री यातायात के बीच से सफलतापूर्वक यात्रा की, जो उच्च स्तर की व्यावसायिक दक्षता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन करती है। सफागा में आईएनएस सुदर्शनी की यात्रा “मैत्री के सेतु” पहल के तहत समुद्री संपर्क के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत और मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।

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डाक विभाग ने गुंटूर में मेगा जीडीएस सम्मेलन का आयोजन किया

नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश सर्कल के डाक विभाग ने 22 फरवरी, 2026 को गुंटूर में एक भव्य ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सभी सर्कलों से 9,000 से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों की जबरदस्त भागीदारी रही और यह ग्रामीण डाक सेवाओं को मजबूत करने के प्रति उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है।

(गुंटूर में जीडीएस सम्मेलन में 9,000 से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों की भागीदारी)

इस सम्मेलन में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय संचार और पूर्वोत्‍तर विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, डाक सेवा बोर्ड के सदस्य (कार्मिक) श्री सुवेंदु कुमार स्वैन, विधायक श्री मोहम्मद नसीर अहमद और गुंटूर के महापौर श्री कोवेलामुदी रविंद्र सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

इस अवसर पर, डाकघर बचत योजनाओं, सुकन्या समृद्धि योजना, डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सेवाओं को उत्कृष्ट रूप से प्रदान करने के लिए दस सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों को सम्मानित किया गया।

(जीडीएस सम्मेलन में ग्रामीण डाक सेवक को सम्मानित करते मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडूकेंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर)

इस अवसर पर संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डाक परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए ग्रामीण डाक सेवकों को देश के हर कोने को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में इंडिया पोस्ट लगभग 38 करोड़ डाकघर बचत बैंक खातों का प्रबंधन कर रहा है, जिनमें लगभग 22 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 3.8 करोड़ सुकन्या समृद्धि योजना खातों में लगभग 2.27 लाख करोड़ रुपये जमा हैं, जो डाक नेटवर्क के माध्यम से हासिल की गई वित्तीय समावेशन की व्यापकता को दर्शाते हैं।

उन्होंने बताया कि इंडिया पोस्ट के डाक और रसद नेटवर्क को दक्षता बढ़ाने के लिए कन्वेयर सिस्टम, कौशलपूर्ण छंटाई, आरएफआईडी, बारकोड और क्यूआर कोड-आधारित ट्रैकिंग के साथ तेजी से आधुनिक बनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अंतिम-छोर तक संपर्क को मजबूत करने के लिए ड्रोन-आधारित डिलीवरी सिस्टम भी शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के “सुधारप्रदर्शन और रूपांतरण” के आह्वान के अनुरूपविकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर विभाग लगभग 1.65 लाख डाकघरों के माध्यम से 4.5 लाख से अधिक कर्मचारियों के साथ कार्य करता है। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग का वार्षिक व्यय लगभग 35,000 करोड़ रुपये है, जबकि राजस्व लगभग 13,000 करोड़ रुपये है। आंध्र प्रदेश में पिछले वर्ष व्यय लगभग 1,800 करोड़ रुपये था, जबकि राजस्व 600 करोड़ रुपये था, जो इस वर्ष बढ़कर लगभग 850 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने बताया कि निरंतर निगरानी के कारण ‘शून्य लेनदेन’ वाले डाकघरों की संख्या पहले के लगभग एक लाख से घटकर लगभग 1,500 रह गई है और यह परिचालन दक्षता में सुधार को दर्शाता है।

सभा को संबोधित करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर शासन और कल्याणकारी कार्यों में जीडीएस कर्मचारियों की अपरिहार्य भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तीव्र तकनीकी प्रगति के बावजूद, जीडीएस कर्मियों का मानवीय दृष्टिकोण और समर्पण अद्वितीय बना हुआ है और जीडीएस कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के समर्थन सहित हरित पहलों के महत्व को रेखांकित किया।

यह सम्मेलन ग्रामीण डाक सेवकों के समर्पण और योगदान को सम्मानित करने का एक मंच साबित हुआ, जिन्होंने अंतिम छोर तक वित्तीय समावेशन और नागरिक-केंद्रित सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आंध्र प्रदेश डाक सर्कल ने इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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प्रधानमंत्री ने आगामी इजरायल दौरे से पहले भारत–इजराइल के मजबूत संबंधों पर जोर दिया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और इजरायल के बीच गहरी और स्थायी मित्रता को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध विश्वास, नवाचार और शांति एवं प्रगति के साझा संकल्प पर आधारित हैं।

श्री मोदी ने गर्मजोशी भरी भावनाओं के लिए आभार व्यक्त किया और भारत– इजरायल संबंधों की सुदृढ़ता तथा बहुआयामी प्रकृति पर पूर्ण सहमति जताई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, इजरायल के साथ अपनी साझेदारी को बहुत महत्व देता है, जो विश्वास, नवाचार और शांति एवं प्रगति के साझा संकल्प पर आधारित है। उन्होंने अपने आगामी इजरायल दौरे के दौरान सार्थक बातचीत की उम्मीद जताई।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक संदेश का जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा—

“धन्यवाद, मेरे मित्र, प्रधानमंत्री नेतन्याहू।

मैं भारत और इजरायल के बीच संबंधों की मजबूती तथा हमारे द्विपक्षीय संबंधों की विविध प्रकृति पर आपसे पूर्णतः सहमत हूं। भारत, इजरायल के साथ विश्वास, नवाचार और शांति एवं प्रगति के साझा संकल्प पर आधारित इस स्थायी मित्रता को बहुत महत्व देता है।

मैं अपने आगामी इजरायल यात्रा के दौरान हमारी बातचीत का इंतजार कर रहा हूं।@netanyahu”

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सरकार के प्रयासों से भारत की खेल प्रतिष्ठा बढ़ी, देशव्यापी फिट इंडिया साइकिलिंग अभियान के बीच एथलीटों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का स्वागत किया

नई दिल्ली – खेल जगत में एक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत की तीव्र प्रगति को उजागर करते हुए, शीर्ष एथलीट रुपिंदर पाल सिंह और रोहित टोकस ने 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी का पुरस्कार मिलने पर गहरी सराहना व्यक्त की।

रुपिंदर पाल सिंह, जो टोक्यो 2020 में 40 साल के अंतराल के बाद ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे, ने कहा कि भारत सरकार के व्यापक प्रयासों और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय (MYAS), भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और राष्ट्रीय खेल संघों (NSFs) के सामूहिक प्रयासों ने देश को इस बहु-विषयक आयोजन की मेजबानी का अधिकार दिलाने में मदद की है और यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2036 में देश में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी करने के सपने को साकार करने में उत्प्रेरक का काम करेगा।

रूपिंदर पाल सिंह ने इंदिरा गांधी स्टेडियम में ‘फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल’ कार्यक्रम के तहत साइकिल चालकों के एक बड़े समूह का नेतृत्व करने के बाद एसएआई मीडिया से कहा “20 साल के अंतराल के बाद राष्ट्रमंडल खेल भारत में आयोजित हो रहे हैं, जो सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए बड़ी खबर है।

यह मोदी सरकार, खेल मंत्रालय, भारतीय खेल संगठन (आईओए) और राष्ट्रीय महासंघों के संयुक्त प्रयासों से ही संभव हो पाया है। 2010 में जब भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी, तब मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण नहीं किया था। जिन खिलाड़ियों को अपने घरेलू प्रशंसकों के सामने प्रतिस्पर्धा करने और पदक जीतने का मौका मिलेगा, उनके लिए यह सबसे यादगार अवसर होगा। पिछली बार भी हमने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में 100 पदक जीते थे और मुझे विश्वास है कि हम 2030 में भी ऐसा ही प्रदर्शन करेंगे,”

उन्होंने आगे कहा, “बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से हॉकी और शूटिंग को खेलों से हटा दिया गया था, जहां भारत ने ऐतिहासिक रूप से कई पदक जीते थे। इसलिए, मुझे लगता है कि ये खेल 2030 में वापसी करेंगे, जिससे हमारे खिलाड़ियों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर, यह सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए बहुत ही सुखद खबर है।”

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के सहयोग से उपमहाद्वीप के 1000 से अधिक स्थानों पर साइकिलिंग अभियान का 62वां संस्करण आयोजित किया गया, जो ईएसआईसी की 75 वर्ष की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के उत्सव के साथ मेल खाता था। रूपिंदर के साथ ईएसआईसी के महानिदेशक श्री अशोक कुमार सिंह (आईएएस), खेलो इंडिया के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव (आईपीएस) के अलावा फिट इंडिया चैंपियन तनवी तुतलानी और अतुल जिंदल भी शामिल हुए।

सक्रिय जीवनशैली अपनाने के फायदों पर प्रकाश डालते हुए रुपिंदर ने कहा, “आज आईजी स्टेडियम में 500 से अधिक लोगों को मेरे साथ साइकिल चलाते देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। फिट इंडिया अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अपनी व्यक्तिगत फिटनेस के लिए कम से कम 30 मिनट से 1 घंटे का समय देने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी से आग्रह करूंगा कि वे फिटनेस को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, स्वस्थ रहने के लिए कोई न कोई फिटनेस गतिविधि जरूर करें। मैं ईएसआईसी को 75 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा पूरी करने पर बधाई भी देना चाहता हूं।”

बर्मिंघम में 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने वाले रोहित टोकस ने कहा कि 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी से खेल अवसंरचना के विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और अधिक युवाओं को खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

“चार साल बाद राष्ट्रमंडल खेलों का भारत में होना हम खिलाड़ियों के लिए बहुत उत्साहजनक है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलना और प्रतिस्पर्धा के दौरान उनका उत्साहवर्धन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए जीवन भर का अनुभव होता है। यह रोंगटे खड़े कर देने वाला पल होता है। मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और मुझे यकीन है कि हम 2030 में गुजरात में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, जब किसी देश को इस स्तर के आयोजन की मेजबानी करने का मौका मिलता है, तो खेल अवसंरचना का विकास होता है, जैसा कि हमने दिल्ली 2010 संस्करण के दौरान देखा था। इससे अधिक युवाओं को खेल अपनाने की प्रेरणा मिलती है,” रोहित टोकस ने एसएआई मीडिया को बताया।

 

“फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल में भाग लेना मेरे लिए एक शानदार अनुभव रहा है, खासकर वहां का माहौल और ऊर्जा, जहां इतने सारे लोग योग, ज़ुम्बा और रस्सी कूद में हिस्सा ले रहे थे। मैं सभी से कहना चाहूंगा कि उन्हें एथलीटों की तरह अनुशासन का पालन करना चाहिए और फिटनेस को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। अगर वे बाहर नहीं जा सकते, तो घर पर ही योग या ज़ुम्बा करें,” उन्होंने आगे कहा।

डॉ. मांडविया द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू किया गया फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल, फिटनेस, पर्यावरण जागरूकता और सतत गतिशीलता को बढ़ावा देता है। यह पहल एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में तब्दील हो चुकी है, जिसमें 2 लाख से अधिक स्थानों पर 2.5 लाख से अधिक नागरिक भाग ले रहे हैं।

फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल का आयोजन युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय (MYAS) द्वारा भारतीय साइकिलिंग महासंघ (CFI), योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन, MY बाइक्स, रोपस्किपिंग टीम और MY भारत के सहयोग से किया जाता है। यह साइकिलिंग अभियान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ चलाया जाता है, जिसमें SAI क्षेत्रीय केंद्र, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE), SAI प्रशिक्षण केंद्र (STC), खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (KISCE) और खेलो इंडिया केंद्र (KIC) शामिल हैं।

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सीबर्ड परियोजना के चरण IIए के अंतर्गत कारवार नौसेना बेस में आवासीय परिसर का उद्घाटन

नई दिल्ली – पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 21 फरवरी, 2026 को कारवार नौसेना बेस में प्रोजेक्ट सीबर्ड फेज IIए के अंतर्गत भारतीय नौसेना के वरिष्ठ नौसैनिकों और रक्षा नागरिकों के लिए आवासीय परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सीबर्ड के महानिदेशक वाइस एडमिरल राजेश धनखड़ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंज़िल क्रीक और अमादल्ली के पूर्व में स्थित आवासीय परिसर में विवाहित वरिष्ठ नौसैनिकों के लिए भी एक आवासीय टावर है जिसमें 60 आवास इकाइयां (डीयू) हैं और नौसेना रक्षा नागरिकों के लिए चार टावर हैं जिनमें 240 आवास इकाइयां हैं। इन भवनों का निर्माण मेसर्स एनसीसी लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा किया गया है।

ये बुनियादी ढांचागत विकास परियोजना सीबर्ड के जारी चरण आईआईए का हिस्सा हैं, जो कारवार में बड़ी संख्या में पोत और पनडुब्बियों के ठहराव में सहायता प्रदान करेगी। इस परियोजना में एक नौसैन्‍य हवाई अड्डा, एक पूर्ण विकसित नौसेना गोदी, चार ढके हुए शुष्क बर्थ और जहाजों और विमानों के लिए रसद व्यवस्था भी शामिल है। इसमें लगभग 10,000 वर्दीधारी और नागरिक कर्मियों को उनके परिवारों के साथ आवास प्रदान किया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, उद्योग और पर्यटन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) के वर्तमान मानदंडों के अनुरूप है और पूर्ण होने पर इसे ‘आईजीबीसी गोल्ड रेटेड प्रोजेक्ट’ का दर्जा प्राप्त होगा। यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा के अनुरूप है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री और उपकरण घरेलू स्तर पर ही प्राप्त किए गए हैं।

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भारत की अगली कृषि क्रांति AI‑संचालित होगी: डॉ. जीतेंद्र सिंह

नई दिल्ली – भारत की अगली कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से संचालित होगी, यह बात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जीतेंद्र सिंह ने आज मुंबई में आयोजित AI4Agri 2026 शिखर सम्मेलन में कही। उन्होंने एआई (AI)को खेती नीति, अनुसंधान और निवेश ढांचे का केंद्रीय स्तंभ बताया।
यहां आयोजित “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन AI इन एग्रीकल्चर एंड इन्वेस्टर समिट 2026” के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि AI उन संरचनात्मक चुनौतियों के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान प्रस्तुत करता है जो लंबे समय से खेती उत्पादकता को सीमित कर रही हैं – अनियमित मौसम, जानकारी की असमानता और टुकड़े‑टुकड़े बाज़ार।

उन्होंने कहा, “AI जो प्रस्तुत करता है वह कोई नई रोग‑निदान नहीं है; यह अंततः एक ऐसा उपचार है जिसे पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी नोट किया कि वैश्विक दक्षिण के लगभग 60 करोड़ किसानों के लिए भी यदि उत्पादकता में केवल 10% की वृद्धि हो जाए, तो यह उनके अनुसार इस सदी का सबसे बड़ा गरीबी‑निवारण अवसर होगा।

कृषि को एक पुराने, परंपरागत क्षेत्र के बजाय एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए डॉ. जीतेंद्र सिंह ने इस AI‑प्रयास को 10,372 करोड़ रुपये के इंडिया AI मिशन से जोड़ा, जो स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता, डेटासेट और स्टार्टअप ढांचे का बड़े पैमाने पर निर्माण कर रहा है।

उन्होंने भारतजन (BharatGen) – भारत के सरकार‑स्वामित्व वाले बड़े भाषा‑मॉडल पारिस्थितिकी‑तंत्र – की चर्चा की, जिसने पहले ही “Agri Param” नामक एक क्षेत्र‑विशिष्ट कृषि मॉडल जारी किया है जो 22 भारतीय भाषाओं में काम करता है और किसानों को अपनी मातृभाषा में सलाह‑सहायता तक पहुँच देता है।

उन्होंने कहा, “यह वह AI है जो किसान से मराठी, भोजपुरी या कन्नड़ में बात करता है,” और भाषाई समावेशन के महत्व पर ज़ोर दिया। मंत्री ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) इंडिया AI ओपन स्टैक को समर्थन दे रहा है, जो एक खुला, अंतरसंचालित (interoperable) ढांचा है, ताकि देश के किसी भी हिस्से में विकसित किए गए Agri‑AI समाधान राष्ट्रीय फ्रेमवर्क में आसानी से जुड़ सकें।

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (Anusandhan NRF) IITs, IISc और ICAR के साथ मिलकर डीप‑टेक और AI अनुसंधान को वित्त पोषित कर रहा है, जिसमें कृषि अनुप्रयोग भी शामिल हैं। डॉ. सिंह ने ड्रोन और उपग्रह‑आधारित मैपिंग की ओर इशारा किया, जो पहले से ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड और स्वामित्व मिशन को मजबूत कर रही हैं, क्योंकि वे भूमि और मिट्टी के सत्यापित डेटा प्रदान करती हैं।

उन्होंने जलवायु बुद्धिमत्ता (climate intelligence) में निवेश की बात की, जहाँ पृथ्वी विज्ञान और AI को प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में एकीकृत किया जा रहा है, ताकि किसान “घबराएं नहीं, बल्कि योजना बनाएं।” उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) की भूमिका टिकाऊ और रोग‑प्रतिरोधी फसलों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, जिसमें कीट और पौधों के रोगों का शुरुआती, लक्षण‑रहित पता लगाना भी शामिल है, साथ ही एक चक्रीय फसल अर्थव्यवस्था (circular crop economy) को आगे बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देगी।

संभावनाओ के पैमाने पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जीतेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के लगभग 14 करोड़ खेती इकाइयाँ, जिनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, एक साथ वार्षिक लगभग 70,000 करोड़ रुपये का मूल्य उत्पन्न कर सकती हैं, अगर AI‑संचालित सलाह प्रत्येक किसान को बेहतर निवेश‑समय, कीट‑भविष्यवाणी और बाज़ार‑संबंधन के माध्यम से प्रति वर्ष केवल 5,000 रुपये भी बचा दे। उन्होंने महाराष्ट्र की 500 करोड़ रुपये की MahaAgri‑AI नीति 2025–29 को एक आदर्श मॉडल के रूप में उद्धृत किया और कहा कि केंद्र ऐसी राज्य‑स्तरीय पहलों को समन्वित और बढ़ावा देगा।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026–27 में ‘Bharat‑VISTAAR’ नामक एक बहुभाषी AI उपकरण का प्रस्ताव रखा गया है, जो AgriStack पोर्टल और ICAR के कृषि‑प्रथा पैकेज को AI प्रणालियों के साथ एकीकृत करके अनुकूलित सलाह‑सहायता प्रदान करेगा और खेती‑जोखिम को कम करेगा। उनका जोर छोटे, उद्देश्य‑विशिष्ट AI मॉडलों पर है, जो भारतीय मिट्टी के प्रकारों, जलवायु क्षेत्रों और फसल‑किस्मों पर प्रशिक्षित हों और मोबाइल फोनों और खेती उपकरणों के माध्यम से कम‑कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में भी तैनात किए जा सकें।

एक संघीय राष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि‑डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे MahaAgriX को एक राष्ट्रीय Agri Data Commons में विकसित होना चाहिए। उन्होंने हितधारकों से एक प्रस्तावित राष्ट्रीय Agri‑AI अनुसंधान नेटवर्क में योगदान करने का आह्वान किया, जो DST, राज्य सरकारों, ICRISAT, ICAR और वैश्विक संस्थानों के बीच सहयोग पर आधारित होगा और फसलों, मिट्टी और जलवायु के लिए भारत‑विशिष्ट आधारभूत डेटासेट विकसित करेगा।

मंत्री ने निवेशकों से सीधा अपील करते हुए कृषि‑AI को “दुनिया का सबसे बड़ा अनुपयोगित उत्पादकता बाज़ार” बताया और उनसे अलग‑थलग पायलट परियोजनाओं के बजाय पैमाने पर लागू होने वाले मंचों के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी (patient capital) लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की सफलता प्रस्तुतियों से नहीं, बल्कि इससे मापी जाएगी कि यहाँ किए गए संकल्पों के कारण अगले एक वर्ष में कितने पायलट मंच बन जाते हैं और कितने किसान बेहतर निर्णय लेने लगते हैं।

“किसान को AI बस इसलिए नहीं चाहिए कि वह हो; उसे उपयोगी होना चाहिए। यही हमारी दिशा‑सूचक होनी चाहिए,” उन्होंने कहा और सहयोगात्मक वितरण के आह्वान के साथ यह पुनरावृत्त किया कि भारत वैश्विक कृषि‑AI ढांचों में एक प्राप्तकर्ता (recipient) के बजाय एक सह‑वास्तुकार (co‑architect) के रूप में कार्य करने का इरादा रखता है।

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ब्राजील के राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 फरवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन में ब्राजील के राष्ट्रपति, महामहिम श्री लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा का औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने उनके सम्मान में एक राजकीय भोज का भी आयोजन किया।

 

राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति लूला का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मु ने एआई इम्पैक्ट समिट में उनकी भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने पिछले वर्ष ब्राजील में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और सीओपी-30 सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए भी उन्हें बधाई दी।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी कई प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रही है। इनमें व्यापार और निवेश, रक्षा, तेल और गैस, बायो-फ्यूल, कृषि और पशुपालन, स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक चिकित्सा, अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटल सहयोग और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि लैटिन अमेरिका में ब्राजील भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार और विविधीकरण की यहाँ असीम संभावनाएं हैं। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत मर्कोसुर (MERCOSUR) के साथ वरीयता व्यापार समझौते के विस्तार के लिए उत्सुक है और ब्राजील के साथ व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि हाल के वर्षों में कृषि के क्षेत्र में भारत-ब्राजील सहयोग और अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और द्वितीयक उत्पादों के साथ-साथ कृषि-रसायनों का हमारा व्यापार काफी बढ़ा है। राष्ट्रपति ने फसल उत्पादन, सिंचाई तकनीक, कटाई के बाद के प्रबंधन और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और तकनीक हस्तांतरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और ब्राजील के बीच एक मजबूत साझेदारी है, जिसमें पारंपरिक और अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ व्यापार और निवेश भी शामिल हैं। उन्होंने ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस के प्रति ब्राजील के निरंतर समर्थन की सराहना की। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के सदस्य के रूप में भी भारत-ब्राजील की यह साझेदारी अत्यंत फलदायी रही है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष बल दिया कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मैटेरियल्स के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने का यह सबसे सही समय है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आज इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाजों के रूप में, भारत और ब्राजील को बहुपक्षीय संस्थानों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संस्थानों में आज की वास्तविकताओं के अनुरूप सबकी बराबर भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत-ब्राजील द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा करने की अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति लूला के नेतृत्व में भारत और ब्राजील के संबंध और भी अधिक गहरे एवं मजबूत होंगे।

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नगर निकाय चुनाव: CM हेमंत सोरेन ने पत्नी कल्पना संग डाला वोट

रांची: झारखंड नगर निकाय चुनाव को लेकर  राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मुख्यमंत्री अपनी पत्नी और गांडेय विधानसभा सीट से विधायक कल्पना सोरेन के साथ रांची के हरमू स्थित संत कुलदीप हाई स्कूल में अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

मुख्यमंत्री ने मतदान के बाद लोगों से लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर नागरिक का वोट लोकतंत्र को मजबूत बनाता है और सभी को अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए.

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राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने नगर निकाय चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया

राँची,23.02.2026 – राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को नगर निकाय चुनाव के अंतर्गत श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान, स्थित मतदान केंद्र पर जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि मतदान लोकतंत्र का एक अनिवार्य एवं सशक्त अंग है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करने का आह्वान किया।

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सर्बानंद सोनोवाल ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में पुलिस सुधारों की सराहना की, गुवाहाटी में 10वीं असम पुलिस बटालियन(एपीबीएन) की आधारशिला रखी

नई दिल्ली  – केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि असम में कानून-व्यवस्था में बदलाव सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में निर्णायक राष्ट्रीय नेतृत्व का परिणाम है।उन्होंने गुवाहाटी में 10वीं असम पुलिस बटालियन(एपीबीएन) के आधारशिला समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2016 के बाद असम के पुलिसिंग ढांचे में हुए बदलाव “संगठनात्मक, प्रणालीगत और मापने योग्य” रहे हैं, जो मामूली सुधारों से कहीं आगे बढ़कर हैं।

श्री सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने स्मार्ट पुलिसिंग की संकल्पना को अपनाया है— जो सख्त और संवेदनशील, आधुनिक और गतिशील, सतर्क और जवाबदेह, भरोसेमंद और त्वरित, तथा तकनीक-सक्षम एवं प्रशिक्षित है। असम ने खुद को इस विजन के अनुरूप अपने पुलिसिंग संस्कृति को बदल दिया।”

श्री सोनोवाल ने केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना को पुनर्परिभाषित करने का श्रेय दिया, जिसमें खुफिया समन्वय को मजबूत करना, अवसंरचना आधुनिकीकरण में निवेश करना और पुलिसिंग को उपनिवेशीय काल के फोर्स मॉडल से नागरिक-केंद्रित, कल्याणोन्मुख सेवा में बदलना शामिल है। केन्द्रीय गृह मंत्री के सक्षम नेतृत्व में पूरे देश के हर कोने में स्थायी शांति का दौर स्थापित किया गया है।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत में कभी पुलिसिंग को दूरस्थ और अधिकार-संचालित के रूप में देखा जाता था। प्रधानमंत्री मोदी जी के गतिशील नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह जी के सक्षम मार्गदर्शन में, इसे एक उत्तरदायी, मानवतावादी और सेवा-केंद्रित संस्थान के रूप में परिवर्तित किया गया है, जो जवाबदेही और जनता के विश्वास में आधारित है।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने असम में भर्ती में सुधार सुनिश्चित किए और अपारदर्शी तरीकों को पारदर्शी, योग्यता-आधारित और तकनीक-सक्षम प्रक्रियाओं से बदल दिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर बिना विवादों वाली भर्तियां हुईं, यह राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ। प्रशासनिक पुनर्गठन और कर्मियों की संख्या के विस्तार ने जमीनी स्तर के शासन और संचालन क्षमता को मजबूत किया।

श्री सोनोवाल ने कहा कि MOITRI योजना—मिशन फॉर ओवरऑल इम्प्रूवमेंट ऑफ थाना फॉर रिस्पॉन्सिव इमेज— ने पुलिस थानों को आधुनिक, नागरिक-मित्रवत केंद्रों में बदल दिया है। 100 से अधिक नए पुलिस थाने पूरे हो चुके हैं और सैकड़ों का आधुनिकीकरण किया गया है, जिसमें 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड अवसंरचना निवेश भी रहा।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ये निवेश मोदी सरकार के इस विश्वास को दर्शाते हैं कि मजबूत संस्थानों के लिए मजबूत अवसंरचना आवश्यक है। लेकिन सिर्फ अवसंरचना ही पर्याप्त नहीं है— इसे संवेदना और पेशेवरता के साथ भी जोड़ा जाना चाहिए।”

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं, महिला प्रकोष्ठ, बच्चों के अनुकूल पुलिस स्थान और असम पुलिस शिशु-मित्र कार्यक्रम जैसी पहलों को सामने रखा, जिन्हें 24/7 बाल अधिकार संसाधन केंद्र के समर्थन से संचालित किया जा रहा है, और इन्हें पुलिसिंग को अधिक मानवीय और सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

श्री सोनोवाल ने कहा कि तकनीक को रोजमर्रा की पुलिसिंग में शामिल किया गया है, जिसमें डिजिटल केस ट्रैकिंग, ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और वास्तविक समय में शिकायत निवारण और युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया का रणनीतिक उपयोग शामिल है।

श्री सोनोवाल ने जोर देकर कहा कि असम और पूर्वोत्तर में स्थायी शांति संवाद और निर्णायक नेतृत्व के माध्यम से प्राप्त की गई। जनवरी 2020 में बोडो शांति समझौते के साथ ही उल्फा, एनडीएफबी और कार्बी समूहों से जुड़े समझौतों ने विद्रोह से एकीकरण की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव हुए थे।

श्री सोनोवाल ने कहा, “10,800 से अधिक पूर्व उग्रवादी मुख्यधारा में लौट आए और 1,500 से अधिक हथियार जमा कर दिए। यह सिर्फ एक सुरक्षा उपलब्धि नहीं थी— यह एक सामाजिक परिवर्तन भी था। केन्द्रीय गृ मंत्री श्री अमित शाह जी के सक्षम नेतृत्व में, हमने असम में स्थायी शांति सुनिश्चित की है।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि शांति और सुरक्षा ने औद्योगिक विकास, अवसंरचना विस्तार और निवेशकों का भरोसा हासिल किया है, जिससे असम को पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास कॉरिडोर के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया गया है।

गुवाहाटी में 10वें असम पुलिस बटालियन(एबीपीएन) के आधारशिला समारोह में श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह परियोजना असम की पुलिस सुधार यात्रा में निरंतरता का प्रतीक है। 260 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 42,000 वर्ग मीटर से अधिक के निर्मित क्षेत्र के साथ विकसित किया गया, यह एकीकृत परिसर आवासीय, संचालन और उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं को संयोजित करता है।

श्री सोनोवाल ने कहा, “यह बटालियन सिर्फ एक सुरक्षा अधिष्‍ठान नहीं है। यह एक आधुनिक, पेशेवर और कल्याणोन्मुख पुलिसिंग प्रणाली का प्रतीक है,” और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-37 और प्रस्तावित गुवाहाटी रिंग रोड के माध्यम से इसकी रणनीतिक कनेक्टिविटी के बारे में बात करते हुए कहा कि इससे तेजी से तैनाती और भविष्य में विस्तार सुनिश्चित होगा।

श्री सोनोवाल ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के समर्थन से हुए पुलिस सुधारों ने असम को एक राष्ट्रीय उदाहरण बना दिया है और कैसे मजबूत नेतृत्व कानून-व्यवस्था को विकास का स्तंभ बना सकता है।

श्री सोनोवाल ने कहा, “मजबूत पुलिसिंग ने मजबूत शासन को संभव बनाया है। और मजबूत शासन असम और भारत को और अधिक मजबूत बना रहा है।”

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एचसीएल-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर यूनिट के भूमिपूजन समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एचसीएल-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर यूनिट के भूमिपूजन समारोह में भाग लिया। यह समारोह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करता है, जिसे नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट के तुरंत बाद आयोजित किया गया है।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने लाल किले की प्राचीर से कहा है, भारत के पास रुकने या ठहरने का समय नहीं है। 2026 की शुरुआत से, भारत ने अपनी गति तेज कर दी है।

“ श्री मोदी ने हाल ही में हासिल की गयी उपलब्धियों के उदाहरण दिए, जैसे विकसित भारत युवा नेता संवाद, राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस जिसने भारत में स्टार्टअप क्रांति को ऊर्जा दी, और भारत ऊर्जा शिखर सम्मेलन, जिसने भारत की ताकत को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि विकसित भारत के लिए बजट ने देश की प्रगति में नई गति का संचार किया है, जिससे यह सप्ताह वास्तव में भारत के लिए ऐतिहासिक बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट में, विश्व के राजनेता, राष्ट्राध्यक्ष और तकनीकी दिग्गज भारत की एआई क्षमताओं को देखने के लिए एकत्र हुए और अंततः देश की रणनीतिक दृष्टि को मान्यता दी और इसकी सराहना की।

उन्होंने कहा कि कल एआई समिट के समापन के तुरंत बाद, देश आज ही इस विशाल कार्यक्रम के साथ भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “भारत अब आधुनिक दुनिया को चलाने के लिए आवश्यक प्रसंस्करण शक्ति (प्रोसेसिंग पावर) प्रदान करने में विश्व की शीर्ष राष्ट्रों के साथ कदम मिलाने का प्रयास कर रहा है और साथ ही सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर दोनों पहलुओं पर काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान दशक को भारत का ‘टेकएड’ घोषित करते हुए अपने दृष्टिकोण को दोहराया और कहा कि हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक और एआई में निवेश; 21वीं सदी की क्षमता की आधारशिला तैयार करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि भारत आज हर उस तकनीक में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है जो मानवता का भविष्य निर्धारित करेगी और भारत में इस मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास इसका एक प्रमुख उदाहरण है।

चिप्स के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में इनके मूल्य की तुलना 20वीं सदी के तेल से की। श्री मोदी ने कहा, “कोरोना महामारी के दौरान, दुनिया ने चिप आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी की अनुभव किया। जब आपूर्ति रुक गई, वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं डगमगा गईं।

“ उन्होंने बताया कि भारत ने उस संकट से यह सीख ली कि इसे एक अवसर में बदला जा सकता है और भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनना चाहिए। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “आज का कार्यक्रम इसी दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है।“

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “मेड-इन-इंडिया” चिप्स, विकसित भारत की रीढ़ हैं, जो एआई और 6जी से लेकर रक्षा और इलेक्ट्रिक वाहनों तक के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को ऊर्जा प्रदान कर रही हैं।

इस दृष्टि का समर्थन करने के लिए, उन्होंने चिप्स से स्टार्टअप पहल को उजागर किया, जो 85,000 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार है, साथ ही बजट से संचालित प्रगति, जैसे सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण और संपूर्ण अनुसंधान और विकास एवं निर्माण समर्थन के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना।

उत्तर प्रदेश से सांसद के रूप में, प्रधानमंत्री ने राज्य के परिवर्तन पर अत्यंत गर्व व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है, जो प्रदेश में डिजाइन हाउसेस, अनुसंधान और विकास केंद्रों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को लाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे।”

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपने औद्योगिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में छह गुनी वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, “यह वृद्धि सबसे अधिक मोबाइल क्रांति में स्पष्ट होती है, जहां घरेलू उत्पादन 28 गुना बढ़ा है और निर्यात में आश्चर्यजनक रूप से 100 गुनी वृद्धि हुई है।” श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश इस सफलता गाथा में एक ताकतवर केंद्र और मजबूत स्तंभ के रूप में उभरा है, जो वर्तमान में देश में निर्मित कुल मोबाइल फोन के आधे से अधिक हिस्से का निर्माण करता है। यह परिवर्तन भारत की वैश्विक निर्माण केंद्र बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश की पहचान को बदलने का श्रेय “डबल इंजन वाली सरकार” को दिया, प्रदेश की पहचान पहले अपराध और पलायन से जुड़े राज्य के रूप में होती थी, लेकिन अब राज्य एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडॉर तथा जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और समर्पित फ्रेट कॉरिडॉर जैसी विश्व स्तरीय अवसंरचना के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “वैश्विक निवेशक यूपी आ रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके निवेश में शानदार रिटर्न की गारंटी है।” श्री मोदी ने यह भी घोषणा की कि वे कल दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन कॉरिडॉर का उद्घाटन करेंगे, जिससे क्षेत्र के परिवहन-संपर्क में और वृद्धि होगी।

अपना संबोधन समाप्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ की अध्यक्ष रोशनी नादर और फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर बिज़नेस ग्रुप के अध्यक्ष बॉब चेन को उनकी साझेदारी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि फॉक्सकॉन की मौजूदगी एक वैश्विक संदेश देती है: “एक लोकतांत्रिक भारत एक भरोसेमंद साझेदार है। मूल्य श्रृंखला में हमारी भागीदारी इसकी सुदृढ़ता बढ़ाती है, जो भारत और दुनिया, दोनों के लिए लाभकारी है।”

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गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव 2026 ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के साझा दृष्टिकोण को किया और मजबूत

नई दिल्ली – गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव का 5वां संस्करण (जीएमसी-26), 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में हिंद महासागर क्षेत्र के 15 देशों के नौसेना प्रमुखों और वरिष्ठ समुद्री नेताओं ने हिस्सा लिया। इस कॉन्क्लेव ने हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहकारी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में क्षेत्रीय भागीदारों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का मुख्य थीम आईओआर में सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ – गतिशील खतरों को कम करने के लिए प्रयासों की रेखाओं (एलएसओईको आगे बढ़ाना” था। जीएमसी-26 ने संरचित समुद्री संवाद के संयोजक और क्षेत्र में सहयोगी सुरक्षा ढांचे के सक्षमकर्ता के रूप में भारत की निरंतर भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री के महासागर-म्युचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रास रीजन्स‘  के विजन के अनुरूप आयोजित इस सम्मेलन ने ठोस परिणामों और सहयोगी कार्यान्वयन ढांचे पर केंद्रित विचार-विमर्श के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया।

अपने मुख्य भाषण में, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) ने इस बात कपर जोर दिया कि उभरता हुआ समुद्री सुरक्षा वातावरण अब एक समन्वित क्षेत्रीय प्रतिक्रिया की मांग करता है, जो रियल टाइम के सूचना आदान-प्रदान, संस्थागत समन्वय तंत्र और निरंतर क्षमता विकास पर आधारित हो। उन्होंने रेखांकित किया कि आईयूयू मछली पकड़ने, तस्करी नेटवर्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराधों जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आईओआर क्षेत्र के देशों के बीच सामूहिक स्वामित्व और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता है।

पूर्व राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक, वाइस एडमिरल जी. अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) के संचालन में आयोजित पहले सत्र में, समुद्री सूचनाओं के रियल टाइम  में आदान-प्रदान और परिचालन समन्वय को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसका उद्देश्य अवैध, बिना सूचना वाली और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों का मुकाबला करना था।

इस सत्र के वक्ता भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल टीवीएन प्रसन्ना और मालदीव के कर्नल अमानुल्लाह अहमद रशीद थे। वक्ताओं ने समुद्री डोमेन जागरूकता नेटवर्क को मजबूत करने, सूचना साझा करने वाली प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता  और विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया को सक्षम करने के लिए संरचित संस्थागत संबंधों की आवश्यकता जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रकाश डाला।

दूसरे सत्र में आईओआऱ की समुद्री एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण और योग्यता वृद्धि के लिए सहयोगी मार्गों का परीक्षण किया गया। रियर एडमिरल श्रीनिवास मद्दुला और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सीनियर फेलो कैप्टन (आईएन) रणेन्द्र एस सावन ने अपने विचार साझा किए।

इस सत्र का संचालन पूर्व नौसेना प्रमुख और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह (सेवानिवृत्त) ने किया। इस दौरान हुई चर्चाओं ने क्षेत्रीय प्रशिक्षण संसाधनों को एकजुट करने, पेशेवर विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार करने और दीर्घकालिक समुद्री लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। इस सत्र ने इस समझ को और पुख्ता किया कि आईओआर में स्थायी समुद्री स्थिरता, समन्वित क्षमता विकास और संरचित सहयोग पर निर्भर है।

सम्मेलन का समापन नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के संबोधन के साथ हुआ, जिन्होंने गतिशील समुद्री खतरों को कम करने के लिए सहयोगी प्रयासों की रेखाओं को आगे बढ़ाने पर अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए।

सीएनएस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने सभी भागीदार देशों की भागीदारी और हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुकूलनशील समुद्री खतरों के इस युग में, हमें ‘महासागर’  के दृष्टिकोण के तहत तकनीक, निर्बाध सूचना साझाकरण और केंद्रित संचालन का लाभ उठाकर ‘साझा जागरूकता’ से ‘समन्वित कार्रवाई’ की ओर बढ़ना चाहिए।

सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं में क्षेत्रीय समुद्री साझेदारी को मजबूत करने, सहयोग तंत्र को संस्थागत बनाने और सामूहिक क्षमता बढ़ाने पर मजबूत सहमति दिखाई दी।

अपने पांचवें संस्करण में, गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव ने हिंद महासागर क्षेत्र में समावेशी, परामर्शात्मक और कार्रवाई-उन्मुख समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। जीएमसी-26 ने एक बार फिर संरचित सहयोग, वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वित क्षमता विकास पहलों के माध्यम से सुरक्षित और स्थिर समुद्र बनाए रखने का संकल्प लिया।

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खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुलमर्ग लेग की तारीखों की घोषणा करते हुए कहा, ‘खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के लिए यह बिल्कुल सही समय है’

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बुधवार को खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के गुलमर्ग लेग की तिथियों की घोषणा की। ये खेल 23 से 26 फरवरी तक जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित किए जाएंगे। यह खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का छठा संस्करण होगा।

आइस खेलों को शामिल करते हुए खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 का पहला लेग 20 से 26 जनवरी तक लद्दाख में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया जबकि गुलमर्ग में स्‍नो खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में अपने समग्र चैम्पियनशिप खिताब का बचाव करेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “गुलमर्ग लेग शीतकालीन ओलंपिक के तुरंत बाद हो रहा है और खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की मेजबानी के लिए यह बिल्कुल सही समय है। लेह (लद्दाख) में हमारा पहला लेग बहुत सफल रहा और निश्चित रूप से, जम्मू-कश्मीर में भी हमें वैसा ही उत्साह देखने को मिलेगा क्योंकि एथलीट एक बार फिर प्रकृति और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के हर सीजन में रोमांचक प्रदर्शन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। लेह में फिगर स्केटिंग के जुड़ने से प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई और गुलमर्ग में हम कोंगदूरी की ढलानों पर कुछ प्रभावशाली समय की उम्मीद कर रहे हैं।”

खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की शुरुआत से पहले, भारत में शीतकालीन खेलों को देखने वालों की संख्‍या, जागरूकता और व्‍यवस्थित प्रतियोगिता बहुत सीमित थी। आइस और स्‍नो से जुड़े खेल काफी हद तक सीमित रुचियों तक ही सीमित थे। इनमें आम जनता की भागीदारी बहुत कम थी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी भी कम थी।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों ने आइस और स्‍नो खेलों दोनों के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मंच बनाकर भारत के शीतकालीन खेल तंत्र को बदल दिया है। इससे भागीदारी, प्रदर्शन मानकों और जन जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जो खेल कभी हाशिए पर था, वह अब धीरे-धीरे एक सुनियोजित प्रतिभा विकास केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

यह बदलाव अंतर्राष्ट्रीय परिणामों में पहले से ही झलक रहा है। भारतीय शीतकालीन एथलीट विदेशों में पोडियम पर जगह बनाने और प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करने लगे हैं। यह प्रतिभा की एक नई पीढ़ी के उदय का संकेत है। विशेष रूप से, भारतीय फिगर स्केटर तारा प्रसाद ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले प्रदर्शन किए हैं, जबकि भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने 2025 आईएचएफ महिला एशिया कप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। यह किसी अंतर्राष्ट्रीय आइस हॉकी चैंपियनशिप में भारत का पहला पोडियम प्रदर्शन था। टीम ने टूर्नामेंट के दौरान कई महत्वपूर्ण जीत भी दर्ज की। यह विश्‍व स्तर पर आइस स्पोर्ट्स में हो रही तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

ये उपलब्धियां इस बात को दर्शाती हैं कि खेलो इंडिया शीतकालीन खेल किस प्रकार निरंतर अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी के लिए नींव रख रहे हैं, जिससे भारत उस दौर से आगे बढ़ रहा है जब शीतकालीन ओलंपिक में भागीदारी अक्सर एक या शून्य एथलीटों तक ही सीमित रहती थी। नियमित घरेलू प्रतियोगिताओं, उच्च दबाव वाले वातावरणों के अनुभव और विभिन्न खेलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ, आने वाले वर्षों में इस प्रगति के और मजबूत होने की उम्मीद है।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के गुलमर्ग लेग का समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शीतकालीन ओलंपिक मिलानो कोर्टिना 2026 के समापन के तुरंत बाद हो रहा है, जिनमें भारत का प्रतिनिधित्व अल्पाइन स्कीयर आरिफ खान और क्रॉस-कंट्री स्कीयर स्टैनज़िन लुंडुप कर रहे हैं। इससे वैश्विक गति, उत्साह और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा को घरेलू शीतकालीन खेल कैलेंडर में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और खिलाड़ियों की प्रेरणा, लोगों की रुचि और शीतकालीन खेलों के विकास पर राष्ट्रीय ध्यान में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

गुलमर्ग में चार पदक-योग्य स्पर्धाएं होंगी, जिनमें स्की पर्वतारोहण, अल्पाइन स्कीइंग, नॉर्डिक स्कीइंग (क्रॉस-कंट्री) और स्नोबोर्डिंग शामिल हैं, जिनमें लगभग 400 एथलीटों के भाग लेने की उम्मीद है और अल्पाइन स्कीइंग में सबसे अधिक भागीदारी होगी।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2025 सीजन के समापन पर, भारतीय सेना ने 18 पदकों के साथ टीम तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्‍त किया, जबकि हिमाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, उसके बाद लद्दाख, महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान रहा। खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के लद्दाख लेग के अंत में, हरियाणा ने चार स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, ये सभी स्वर्ण पदक उसके फिगर और आइस स्केटर्स ने जीते थे, उसके बाद लद्दाख, महाराष्ट्र और तेलंगाना का स्थान रहा।

पदक तालिका के लिए: https://www.winter.kheloindia.gov.in/medal-tally पर क्लिक करें।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया www.winter.kheloindia.gov.in पर क्लिक करें।

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ट्राई ने ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘टेलीकॉम में उत्तरदायी एआई’ सत्र आयोजित किया, जो डिजिटल लचीलापन, शासन और नेटवर्क परिवर्तन पर रहा फोकस

नई दिल्ली – भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में “टेलीकॉम में उत्तरदायी एआई” विषय पर इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत एक सत्र आयोजित किया। इस सत्र में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, उद्योग संघों और सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्र हुए, जिन्होंने दूरसंचार नेटवर्क और उपभोक्ता-उन्मुख अनुप्रयोगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग के लिए नीतिगत और परिचालन दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श किया।
यह सत्र व्यापक शिखर सम्मेलन कार्यक्रम का हिस्सा था और इसमें अंतरराष्ट्रीय उद्योग संगठनों तथा वैश्विक हितधारकों की भागीदारी भी रही। कार्यक्रम ने शासन संबंधी प्राथमिकताओं—जैसे विश्वास, जवाबदेही और सुरक्षा—पर चर्चा के साथ-साथ नेटवर्क संचालन, उपभोक्ता संरक्षण और सेवा प्रदायगी में एआई के उत्तरदायी विस्तार के लिए नवाचारी मार्गों पर विचार का मंच प्रदान किया। चर्चाओं में एआई और दूरसंचार के बढ़ते अभिसरण को स्वीकार किया गया, जिसे नेटवर्क डिज़ाइन, संचालन और ग्राहक अनुभव को आकार देने वाली एक आधारभूत परत के रूप में देखा जा रहा है।

सत्र का शुभारंभ TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी द्वारा उद्घाटन एवं स्वागत संबोधन के साथ हुआ। अपने प्रारंभिक वक्तव्य में श्री लाहोटी ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब दूरसंचार के लिए कोई परिधीय तकनीक नहीं रही; यह नेटवर्क के डिज़ाइन, प्रबंधन और उपयोग के तरीके का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। जैसे-जैसे एआई प्रणालियाँ जनसंख्या स्तर पर निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं, उनके कार्यान्वयन के लिए विश्वास मूलभूत बन जाता है। दक्षता में वृद्धि के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, मानवीय निगरानी और स्पष्ट रूप से परिभाषित सुरक्षा-सीमाएँ भी आवश्यक हैं, जो निष्पक्ष और पूर्वाग्रह-रहित परिणाम सुनिश्चित करें। हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि दूरसंचार में एआई समावेशी, लचीला, सुरक्षित और जनहित के अनुरूप बना रहे।”

उन्होंने आगे कहा कि दूरसंचार नेटवर्क भारत के एआई अवसंरचना का एक केंद्रीय स्तंभ हैं, और भारत के विशाल दूरसंचार ग्राहक आधार को देखते हुए एआई-आधारित स्वचालन अनिवार्य होता जा रहा है। नेटवर्क प्रदर्शन को अनुकूलित करने, खराबियों का पूर्वानुमान लगाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, ग्राहक अनुभव सुधारने तथा धोखाधड़ी और स्पैम संचार से निपटने के लिए एआई का उपयोग पहले से किया जा रहा है। सुदृढ़ प्रवर्तन और एआई-आधारित फ़िल्टरिंग तंत्र के माध्यम से स्पैम से जुड़े कनेक्शनों पर कार्रवाई संभव हुई है, और वाणिज्यिक संचार में सत्यापनीय उपभोक्ता सहमति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल कंसेंट ढाँचे लागू करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने नवाचार को सक्षम बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता अधिकारों और जनहित की रक्षा हेतु जोखिम-आधारित नियामकीय दृष्टिकोण और रेगुलेटरी सैंडबॉक्स-आधारित परीक्षण के प्रति ट्राई की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में दूरसंचार में एआई एकीकरण के महत्वपूर्ण आयामों पर केंद्रित दो विशेष पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं—पहली में यह विचार किया गया कि नेटवर्क को उत्तरदायी रूप से एआई क्षमताओं को समाहित करने के लिए किस प्रकार विकसित होना चाहिए, और दूसरी में एआई-आधारित दूरसंचार संचालन में उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने के महत्वपूर्ण प्रश्न पर चर्चा की गई। दोनों पैनलों ने मिलकर नेटवर्क बुद्धिमत्ता को सुदृढ़ करने और एआई-सक्षम पारितंत्र में उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने की दोहरी प्राथमिकता को रेखांकित किया।

पहली पैनल चर्चा, “प्रिपेरिंग टेलीकॉम नेटवर्क फॉर एआई एरा” की अध्यक्षता रितु रंजन मित्तारसदस्यट्राई ने की। पैनल में Ericsson के सीटीओ श्री मैग्नस एवेरब्रिंगQualcomm के वीपी पीएम श्री विनेश सुकुमारनोकिया के एसवीपी स्ट्रैटेजिक गवर्नमेंट एंड इंडस्ट्री इनिशिएटिव्स श्री पासी टोइवानन तथा तेजस नेटकवर्क्स के सीनियर वीपी एवं हेड एनएमएस श्री शांति ग्राम जगन्नाथ शामिल थे। चर्चा का केंद्र दूरसंचार नेटवर्क में एआई के अपनाने और एआई-आधारित प्रणालियों में पारदर्शिता तथा व्याख्येयता बढ़ाने पर रहा। साथ ही, एआई परिनियोजन में “डिज़ाइन द्वारा उत्तरदायित्व” को समाहित करने, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा और संरक्षा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने इस पर विचार किया कि बुद्धिमान स्वचालन और एआई-नेटिव आर्किटेक्चर किस प्रकार विस्तारित हो रहे 5G पारितंत्रों में नेटवर्क प्रबंधन को रूपांतरित कर रहे हैं।

दूसरी पैनल चर्चा, “बिल्डिंग कस्टमर ट्रस्ट एआई ड्रिवन ऑप्शन्स” की अध्यक्षता डॉ. एमपी टंगीराला, सदस्य, ट्राई ने की। पैनल में जुलियन गोर्मैन, एपीएसी प्रमुख, जीएसएमए; डॉ. राजकुमार उपाध्याय, सीईओ एवं चेयरमैन (बोर्ड), C-DOT; श्री मथान बाबू कासीलंगम, सीटीएसओ एवं डेटा प्राइवेसी अधिकारी, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड; तथा श्री सईद तौसिफ अब्बास, वरिष्ठ डीडीजी एवं प्रमुख, दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र, दूरसंचार विभाग शामिल थे। विचार-विमर्श में स्वचालित नेटवर्क निर्णयों में जवाबदेही, एआई-आधारित ग्राहक संवाद में पारदर्शिता, स्पैम रोकथाम में उत्तरदायी एआई के तंत्र, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए नैतिक शासन ढाँचे, तथा एआई-संबंधित विफलताओं—विशेषकर दूरसंचार और महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना में—के विश्लेषण हेतु एक व्यापक एआई घटना डेटाबेस विकसित करने के मानकों की आवश्यकता पर चर्चा की गई। पैनल ने उभरते 5G और भविष्य के 6G परिवेश में, विशेष रूप से धोखाधड़ी पहचान और ग्राहक-उन्मुख विश्लेषण के लिए, उत्तरदायी ढंग से एआई के विस्तार पर भी विचार किया।

इन सत्रों में उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की भागीदारी रही, जिन्होंने एआई-सक्षम दूरसंचार प्रणालियों में नवाचार को बढ़ावा देते हुए उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के उपायों पर अपने विचार साझा किए। चर्चाओं ने इस बात पर बल दिया कि दूरसंचार में एआई का परिनियोजन संतुलित और सुरक्षित बना रहे, इसके लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। प्रतिभागियों ने उल्लेख किया कि विश्वसनीय एआई अपनाने के लिए नियामकों, उद्योग और प्रौद्योगिकी हितधारकों के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा।

इस सेशन में हुई बातचीत इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बड़े मकसद में मदद करेगी, और टेलीकॉम सेक्टर में ज़िम्मेदार, सबको साथ लेकर चलने वाले और डेवलपमेंट पर ध्यान देने वाले AI को अपनाने के भारत के विज़न को सपोर्ट करेगी।

ज़्यादा जानकारी या क्लैरिफिकेशन के लिए, कृपया TRAI के एडवाइजर (नेटवर्क्स, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग (NSL) श्री समीर गुप्ता से adv-nsl1@trai.gov.in पर कॉन्टैक्ट करें।

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री एंटोनियो गुटेरस ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आज (20 फरवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

नई दिल्ली – राष्ट्रपति ने महासचिव गुटेरेस की उस पहल का स्वागत किया जिसमें मानवता के हित में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक वैश्विक वैज्ञानिक पैनल बनाने की बात कही गई है।

 

महासचिव गुटेरेस ने सफल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के आयोजन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे सहयोग की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में, बहुपक्षवाद को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें विश्वास की कमी का बढ़ता स्तर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा पुराने ढांचे में समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए सुधार की आवश्यकता है, और विकासशील देशों को निर्णय लेने में अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि ‘यूएन-80’ पहल सुधारों के लिए एक अच्छा मंच प्रदान करती है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में विकासशील देशों की विकासात्मक प्राथमिकताओं की रक्षा की जाए।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में श्री गुटेरस के शेष कार्यकाल के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं और बहुपक्षवाद के प्रति भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराया।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री श्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दीर्घकालिक द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी के ढांचे के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान आधारित नवाचार में भारत-ब्रिटेन सहयोग को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत और ब्रिटेन विज्ञान एवं नवाचार परिषद (एसआईसी) के अंतर्गत एक संस्थागत तंत्र के तहत काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग की समीक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था है। एसआईसी की अगली बैठक अप्रैल 2026 में भारत में आयोजित होने वाली है।

दोनों पक्षों ने अप्रैल 2023 में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन अनुसंधान एवं नवाचार समझौता ज्ञापन के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की, जो दीर्घकालिक सतत विकास के लिए सरकारी एजेंसियों, उच्च शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की तीव्र प्रगति के बारे में बताया, जो वैश्विक नवाचार सूचकांक में 2015 में 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंचने में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल आकार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बढ़ता स्टार्टअप आधार और मजबूत अनुसंधान क्षमता इसे वैश्विक प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए एक पसंदीदा भागीदार बनाती है।

चर्चा में दूरसंचार अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि, महासागर और जलवायु विज्ञान, उन्नत सामग्री और विनिर्माण तथा क्वांटम प्रौद्योगिकियों में चल रही संयुक्त पहलों को शामिल किया गया। डीएसटी-यूकेआरआई दूरसंचार सहयोग के तहत, अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गई हैं। औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में, दोनों देश नेट जीरो प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और सतत प्रणालियों में परियोजनाओं का समर्थन कर रहे हैं।

भारत-ब्रिटेन नेट ज़ीरो इनोवेशन पार्टनरशिप, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइड्रोजन, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और कार्बन कैप्चर पहलों सहित स्केलेबल स्वच्छ प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा दे रही है। ये सहयोग भारत के हरित विकास और सतत विकास के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

बैठक में दोनों देशों के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, इनोवेशन हब और उद्योग के बीच साझेदारी को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक अनुसंधान और नवाचार गलियारे की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस पहल से प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को मजबूती मिलने और सहयोगात्मक उद्यमिता को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

भारत ने अपने प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों पर प्रकाश डाला, जिनमें अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणाली पर राष्ट्रीय मिशन, क्वांटम प्रौद्योगिकी मिशन, भू-स्थानिक मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल, डीप ओशन मिशन और बायोमैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम शामिल हैं, जो वैश्विक साझेदारी के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमासुंदरम शामिल थे। और डॉ. सुलक्षणा जैन, वैज्ञानिक एफ, डीएसटी।

ब्रिटेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री कनिष्क नारायण ने किया, जो ब्रिटेन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों, सेमीकंडक्टर, बौद्धिक संपदा, तकनीकी विकास और ऑनलाइन सुरक्षा की देखरेख करते हैं, उनके साथ ब्रिटिश उच्चायोग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी नेटवर्क की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री सोफिया नेस्टियस-बूथ, विज्ञान और नवाचार प्रमुख श्री जैक लैंडर्स; और मंत्री के निजी सचिव श्री जैक कॉलिन्स भी थे।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत भारत और ब्रिटेन की अग्रणी प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने और अप्रैल 2026 में होने वाली विज्ञान और नवाचार परिषद की बैठक से पहले नीतिगत संवाद को ठोस परिणामों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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केंद्रीय अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू द्वारा चिंतन शिविर के औपचारिक उद्घाटन

केंद्रीय अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज चिंतन शिविर के औपचारिक उद्घाटन के दौरान मंत्रालय के निगरानी ऐप, हज कलाई पट्टी (रिस्ट बैंड) और एआई चैटबॉट लॉन्च किए
नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का समापन किया। इसमें केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर अल्पसंख्यक कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नीति-आधारित कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया गया।

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने पीएमजेवीके, पीएमविकास, एनएमडीएफसी, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल, हज आधुनिकीकरण और डिजिटल पहलों जैसी अपनी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से अपनी प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया और प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के अपने दृष्टिकोण को भी प्रस्तुत किया।

 

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने पीएमजेवीके योजना के तहत निगरानी ऐप का शुभारंभ किया, जो देश भर में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने में योगदान देगा। उन्होंने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की हज कलाई पट्टी (रिस्ट बैंड) और एआई चैटबॉट का भी शुभारंभ किया।

श्री रिजिजू ने नालंदा विश्वविद्यालय में चिंतन शिविर के आयोजन के लिए मंत्रालय की टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि नालंदा देश की प्राचीन सभ्यतागत विरासत का प्रतीक और उत्कृष्टता का एक प्रमुख केंद्र है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि चिंतन शिविर की चर्चाओं से केंद्र-राज्य समन्वय को सुव्यवस्थित करने, हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने और जमीनी स्तर पर सफल कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।

अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएमजेवीके योजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना ने देश भर के अल्पसंख्यक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया है। मंत्रालय की पीएमविकास, एनएमडीएफसी, उम्मीद केंद्रीय पोर्टल और हज पहल अल्पसंख्यक कल्याण और विकास में योगदान दे रही हैं।

अल्पसंख्यक मंत्रालय में सचिव श्री चंद्र शेखर कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया और चिंतन शिविर को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार और नालंदा स्थित अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व और उसकी अहमियत पर भी जोर दिया।

चिंतन शिविर का उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के माध्यम से विकसित भारत के लिए नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘सुधार, क्रियान्वयन, रूपांतरण और सूचना’ का लक्ष्य सार्वजनिक-निजी-सामुदायिक भागीदारी और जन भागीदारी के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागालैंड के विधायक और रेशम उत्पादन विभाग एवं अल्पसंख्यक कार्य सलाहकार श्री इम्कोंग मार ने भारत में अल्पसंख्यक कल्याण की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने नागालैंड के अल्पसंख्यक समुदायों की सांस्कृतिक और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बुनियादी ढांचे और कौशल विकास में आई कमियों को दूर करने के लिए पीएमजेवीके और पीएमविकास योजनाओं की सराहना की।

अरुणाचल प्रदेश के खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री श्री केंटो जिनी ने मंत्रालय की योजना और बुनियादी ढांचे एवं सामुदायिक कमियों को दूर करने में मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और सचिव डॉ. सी. एस. कुमार को निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

सिक्किम के समाज कल्याण मंत्री श्री समदुप लेपचा ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की योजनाओं के जमीनी स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव पर जोर दिया और कहा कि चिंतन शिविर अल्पसंख्यकों के कल्याण और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

त्रिपुरा के सहकारिता, जनजातीय कल्याण (टीआरपी एवं पीटीजी) और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री शुक्ला चरण नोतिया ने कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है।

इसके अलावा, कार्यक्रम में पांच विषयों पर केंद्रित समूह चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल थे:

i. अवसंरचना विकास (पीएमजेवीके)

ii. सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण (पीएमविकास + एनएमडीएफसी)

iii. वक्फ प्रबंधन

iv. हज प्रबंधन

v. छात्रवृत्ति योजनाएं

यह सत्र संवादात्मक प्रारूप में आयोजित किया गया था, जिसमें सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। प्रतिभागियों ने निर्देशित प्रश्नों और समूह अभ्यासों के माध्यम से अनुभवों, चुनौतियों और समाधानों को जानने के लिए पांच विषयगत क्षेत्रों में सुगम और समयबद्ध चर्चाओं में भाग लिया।

इन सत्रों में सहकर्मी अभ्यास, सहयोगात्मक समस्या-समाधान और आम सहमति निर्माण पर जोर दिया गया, जिससे ठोस अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई। इसे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की नीति और कार्यक्रम सुधारों में शामिल किया जाएगा।

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नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कृषि ड्रोन का वितरण

नई दिल्ली – सरकार ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹1261 करोड़ के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए ‘नमो ड्रोन दीदी’ को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी है। उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1094 ड्रोन वितरित किए हैं। वितरित किए गए इन 1094 ड्रोनों में से 500 ड्रोन ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत वितरित किए गए हैं। ड्रोन प्राप्त करने वाली ड्रोन दीदियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत विभिन्न रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) में ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जनवरी 2026 तक एलएफसी (एलएफसी) द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण अनुलग्नक-I में दर्शाया गया है।

बेंगलुरु स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट एंड रूरल ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर (एडीआरटीसी) ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए इन 500 ड्रोनों के संचालन की आर्थिक और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वयं सहायता समूह पहले मुख्य रूप से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए थे, और उन्हें दिए गए ड्रोनों ने ड्रोन तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों तक उनकी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, ड्रोन को अपनाने से स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

अनुलग्नक-I

जनवरी 2026 तक लीड फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण

क्रम संख्या  राज्य का नाम  एलएफसी द्वारा ड्रोन प्रदान किए गए एसएचजी की संख्या और ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित महिला एसएचजी के सदस्यों की संख्या
1 आंध्र प्रदेश 108
2 असम 28
3 बिहार 32
4 छत्तीसगढ़ 15
5 गोवा 1
6 गुजरात 58
7 हरियाणा 102
8 हिमाचल प्रदेश 4
9 जम्मू और कश्मीर 2
10 झारखंड 15
11 कर्नाटक 145
12 केरल 51
13 मध्य प्रदेश 89
14 महाराष्ट्र 60
15 ओडिशा 16
16 पंजाब 57
17 राजस्थान 40
18 तमिलनाडु 44
19 तेलंगाना 81
20 उत्तर प्रदेश 128
21 उत्तराखंड 3
22 पश्चिम बंगाल 15
कुल 1094

 

यह जानकारी आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 : मतदान हेतु पोलिंग पार्टियों की विधिवत रवानगी

* जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने डिस्पैच सेंटर पहुंचकर संपूर्ण व्यवस्था का किया गहन निरीक्षण

* सामग्री वितरण काउंटर, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन प्रबंधन, हेल्प डेस्क, चिकित्सा सहायता काउंटर तथा नियंत्रण कक्ष का लिया जायजा, संबंधित पदाधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

* मतदान कर्मियों से बैलट बॉक्स खोलने एवं बंद करने की सही तकनीक के संबंध में ली जानकारी

* मतदान के दौरान निष्पक्षता, गोपनीयता एवं शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता हो – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

” किसी भी अप्रिय स्थिति या विधि-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम एवं संबंधित दंडाधिकारी को दें “

* जिला प्रशासन की मतदाताओं से अपील, 23 फरवरी 2026 को अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाएं

रांची,22.02.2026 – नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 अंतर्गत दिनांक 23.02.2026 को निर्धारित मतदान को लेकर आज मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम अवस्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों को विधिवत रूप से उनके निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने डिस्पैच सेंटर पहुंचकर संपूर्ण व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने निर्वाचन सामग्री वितरण काउंटर, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन प्रबंधन, हेल्प डेस्क, चिकित्सा सहायता काउंटर तथा नियंत्रण कक्ष का जायजा लिया और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इस दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सभी पोलिंग पार्टियों को बैलट बॉक्स, मतपत्र, सील, प्रपत्र, निर्वाचन रजिस्टर, पहचान पत्र सूची सहित सभी सामग्री सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाए तथा सामग्री प्राप्ति के उपरांत उसका मिलान कर ही प्रस्थान सुनिश्चित किया जाए।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने मतदान कर्मियों से बैलट बॉक्स खोलने एवं बंद करने की सही तकनीक के संबंध में जानकारी ली तथा कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करते हुए सीलिंग एवं सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जाए।

पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश:-

• सभी पोलिंग पार्टियां अपने निर्धारित वाहन से समय पर प्रस्थान करें एवं मार्ग में अनुशासन बनाए रखें।

• मतदान केंद्र पहुंचते ही सामग्री का पुनः सत्यापन करें तथा किसी भी कमी/त्रुटि की सूचना तत्काल सेक्टर पदाधिकारी को दें।

• मतदान के दौरान निष्पक्षता, गोपनीयता एवं शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता हो।

• किसी भी अप्रिय स्थिति या विधि-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम एवं संबंधित दंडाधिकारी को दें।

• मतदान समाप्ति के उपरांत बैलट बॉक्स की विधिवत सीलिंग कर निर्धारित स्ट्रांग रूम में सुरक्षित जमा सुनिश्चित करें।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी मतदान कर्मियों से कर्तव्यनिष्ठा, सतर्कता एवं संयम के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

जिला प्रशासन द्वारा सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, पेयजल, शौचालय, विद्युत, रैम्प सहित मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि मतदाता निर्भीक एवं सुगम वातावरण में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

जिला प्रशासन ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे 23 फरवरी 2026 को अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाएं।

इस अवसर पर उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक यातायात, श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी श्री राजेश्वरनाथ आलोक, जिला उप निर्वाचन-सह-पंचायती राज पदाधिकारी श्री राजेश कुमार साहू सहित विभिन्न कोषांगों के वरीय एवं नोडल पदाधिकारी उपस्थित थे।

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नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026 को लेकर : आम सूचना

रांची,22.02.2026 – कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के अधिसूचना संख्या 886 दिनांक 13.02.2026 एवं अधिसूचना संख्या 887 दिनांक 13.02.2026 के द्वारा मतदान के अवसर पर निगोशिएबुल इन्स्ट्रूमेंट् एक्ट, 1881 की धारा-25 के तहत् मतदान की तिथि अर्थात दिनांक 23.02.2026 (सोमवार) को संबंधित नगरपालिका क्षेत्रों में अवस्थित सभी सरकारी कार्यालय / सार्वजनिक प्रतिष्ठान दिनांक-23.02.2026 (सोमवार) को बंद रहेंगे।

अतएव उक्त अधिसूचना के आलोक में राँची जिला के अन्तर्गत पड़ने वाले 02 (दो) नगरपालिका क्षेत्र राँची नगर निगम एवं नगर पंचायत बुण्डू में दिनांक 23 फरवरी 2026 (सोमवार) को मतदान के अवसर पर सभी सरकारी कार्यालय / सार्वजनिक प्रतिष्ठान में अवकाश घोषित किया जाता है। उक्त के संबंध में निम्नांकित निर्णय संसूचित है :-

(क) मतदान के दिन अर्थात 23.02.2026 (सोमवार) को राँची नगर निगम एवं नगर पंचाय बुण्डू निर्वाचन क्षेत्र में सभी दुकान एवं प्रतिष्ठान बन्द रहेंगे।

(ख) कभी-कभी ऐसी भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि कोई व्यक्ति सामान्य तौर पर नगर निकाय क्षेत्र में निवास करता हो और उस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता भी हो, परन्तु वह नगर निकाय क्षेत्र के बाहर के औद्योगिक इकाई, प्रतिष्ठान या दुकान में कार्यरत हो या अपनी सेवाएँ दे रहा हो, तो उसे भी मतदान के दिन नियोक्ता द्वारा सवैतनिक अवकाश मंजूर किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त वैसे कामगार जो Casual Worker के रूप में निर्वाचन क्षेत्र के बाहर के संस्थान, प्रतिष्ठान आदि में कार्यरत हैं, एवं यदि वे उक्त निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता है, तो उन्हें भी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B (1) सहपठित झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 590 (3)

(क) के तहत सवैतनिक अवकाश की मंजूरी दी जाएगी।

(ग) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B (1) के अनुसार Daily Wage/Casual Workers को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।

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भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साथ एक संयुक्त इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया

नई दिल्ली – भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 09 से 12 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साथ एक इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग सुदृढ़ हुआ और पारस्परिक समझ में वृद्धि हुई।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहभागिता को वायु युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में क्रियान्वित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के एसयू-30एमकेआई बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान तथा रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साब (एसएएबी) ग्रिपेन जेट सम्मिलित थे। समुद्री क्षेत्र के ऊपर आईएएफ विमानों की विस्तृत दूरी की परिचालन क्षमता को आईएएफ के आईएल-78 मिड एयर रीफ़्यूलिंग टैंकर विमानों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास आईएएफ के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) विमानों की उन्नत निगरानी एवं कमान क्षमताओं तथा आरटीएएफ के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (जीसीआई) एलीमेंट के अंतर्गत संचालित किया गया।

आईएएफ की प्रतिभागी सेनाओं ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित एयरबेस से संचालन किया, जबकि थाई ग्रिपेन विमानों ने थाईलैंड स्थित एयरबेस से उड़ान भरी। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मैत्रीपूर्ण विदेशी देश के साथ आईएएफ की पहुँच तथा पारस्परिक कार्य-संगतता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस अभ्यास से प्रतिभागी सेनाओं को परिचालन अनुभव प्राप्त हुआ तथा आईएएफ और आरटीएएफ के बीच सर्वोत्तम पद्धतियों का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहन होती “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को प्रतिबिंबित करता है, जो अब एयरोस्पेस क्षेत्र तक विस्तृत हो रही है।

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आधार-आधारित प्रमाणीकरण, बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी-रोधी उपाय

आधार-आधारित प्रमाणीकरण, बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी-रोधी उपायों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में 3.03 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय की गईं, जिससे असली उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध बुकिंग सुनिश्चित हुई

नई दिल्ली – भारतीय रेल की आरक्षण टिकट बुकिंग प्रणाली एक सुदृढ़ और अत्यंत सुरक्षित सूचना प्रौद्योगिकी मंच है, जो उद्योग-मानक, अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा नियंत्रणों से सुसज्जित है। इंटरनेट के माध्यम से तत्काल टिकट बुकिंग में हैकिंग उपकरणों द्वारा स्वचालित ढंग से फॉर्म भरे जाने से रोकने तथा धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और प्रणाली को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने हेतु भारतीय रेल द्वारा निम्नलिखित उपाय किए गए हैं :

1. तत्काल टिकट बुकिंग हेतु आधार प्रमाणीकरण – तत्काल बुकिंग में दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग हेतु आधार-आधारित वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन लागू किया गया है। तत्काल टिकट बुकिंग की समय-संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आधार प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता की अनन्‍यता का त्वरित सत्यापन करता है। यह अनन्‍यता की शर्त लागू कर फर्जी अथवा अनधिकृत एजेंट-नियंत्रित मल्‍टी-यूज़र अकाउंट के सृजन एवं संचालन को रोकने में सहायक है। यह उपाय अकाउंट-मल्‍टीप्लिकेशन और स्वचालित दुरुपयोग के विरुद्ध एक प्रभावी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है, जिससे तत्काल टिकटों का निष्पक्ष आवंटन सुनिश्चित होता है। इससे वास्तविक यात्रियों के लिए टिकट उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा ऑनलाइन तत्काल बुकिंग प्रणाली में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया गया है।

2. एप्लिकेशन स्तर सुरक्षा नियंत्रण – स्क्रिप्टिंग, ब्रूट-फोर्स अटैक तथा डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमलों की रोकथाम हेतु बहु-स्तरीय कैप्चा (कम्प्लीटली ऑटोमेटेड पब्लिक ट्यूरिंग टेस्ट टू टेल कम्प्यूटर्स एंड ह्यूमन्स अपार्ट) तंत्र सहित विभिन्न एप्लिकेशन-स्तरीय सुरक्षा नियंत्रण लागू किए गए हैं।

एप्लिकेशन सुरक्षा कमजोरियों के प्रबंधन के लिए ओडब्ल्युएएसपी (ओपन वेब एप्लिकेशन सिक्योरिटी प्रोजेक्ट) दिशानिर्देशों के अनुसार कई सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।

सिस्टम प्रदर्शन को अनुकूलित करने के लिए भारतीय रेल ने स्थिर सामग्री को ऑफ़लोड करने और इंटरनेट टिकट बुकिंग वेबसाइट प्रणाली पर सीधे ट्रैफ़िक को कम करने हेतु कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन) लागू किया है। इसके अलावा, एंटी-बॉट समाधान जैसे कि एकामाई (AKAMAI) का प्रयोग किया गया है, जो असत्यापित उपयोगकर्ताओं को फ़िल्टर करता है और इंटरनेट टिकट बुकिंग वेबसाइट प्रणाली पर दुर्भावनापूर्ण / संदिग्ध प्रयासों को कम करने में मदद करता है, जिससे वास्तविक यात्रियों के लिए सुचारू बुकिंग सुनिश्चित होती है। इससे दुर्भावनापूर्ण ट्रैफ़िक की निगरानी और नियंत्रण में सहायता मिलती है।

सिस्टम को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क फायरवॉल, घुसपैठ रोकथाम प्रणाली, एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसे कई सुरक्षा परतों का उपयोग किया गया है।

3. नेटवर्क और अवसंरचना स्तर सुरक्षा नियंत्रण – पूरे आईसीटी (इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज) अवसंरचना को उच्च उपलब्धता मोड पर तैनात किया गया है, जिससे विफलताओं को न्यूनतम किया जा सके।

सिस्टम को उद्योग-मानकों के अनुरूप, अत्याधुनिक और डेटा सेंटर ग्रेड नेटवर्क एवं सुरक्षा उपकरणों द्वारा सुरक्षित किया गया है, जिनमें नेटवर्क फायरवॉल, नेटवर्क घुसपैठ रोकथाम प्रणाली, एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल शामिल हैं।

सिस्टम को वॉल्यूम-आधारित डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमलों से भी सुरक्षित किया गया है, जिसमें इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) स्तर, डीडीओएस डिटेक्शन और शमन सेवाओं का उपयोग किया गया है। यह बहु-आईएसपी तंत्रों के माध्यम से संचालित होता है, जिनकी संयुक्त डीडीओएस शमन क्षमता लगभग 30 जीबीपीएस है।

उन्नत सुरक्षा, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, वेब ट्रैफ़िक लोड में कमी, संसाधन अनुकूलन और खतरे को कम करने के लिए एंटरप्राइज स्तर की कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन), एंटी-बॉट, सुरक्षित डीएनएस और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (डब्ल्यूएएफ) सेवाएँ तैनात की गई हैं।

व्यापक साइबर खतरा खुफिया सेवाओं के लिए, रेलटेल को डीप-डार्क वेब निगरानी, डिजिटल जोखिम सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया सुधार के कार्यों के लिए नियुक्त किया गया है।

4. भौतिक सुरक्षा नियंत्रण – सिस्टम नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित कैप्टिव डेटा सेंटर सुविधा में स्‍थापित किया गया है, जिसे सीसीटीवी निगरानी और सीमित भौतिक प्रवेश के माध्यम से सुरक्षित किया गया है। यह सुविधा आईएसओ 27001 (आईएसएमएस) प्रमाणित है।

5. सुरक्षा ऑडिट और निगरानी – सुरक्षा संबंधी घटनाओं और घटनाक्रम की 24×7 निगरानी के लिए सिस्टम को सीईआरटी-इन टीएसएपी (थ्रेट एवं सिचुएशनल अवेयरनेस प्रोजेक्ट्स) के साथ एकीकृत किया गया है।

सिस्टम को सीईआरटी-इन के “मधु-संजाल” के साथ एकीकृत किया गया है, जिसमें सीईआरटी-इन ने हमलावरों के व्यवहार, संदिग्ध घटनाओं/घुसपैठ प्रयासों की निगरानी, उनकी रणनीतियों का अध्ययन करने और साइबर खतरों के खिलाफ रक्षा को सुदृढ़ करने के लिए हनीपॉट सेंसर तैनात किया है।

सुरक्षा घटनाओं का पता लगाने और इन्हें न्‍यूनतम करने के लिए परिसर में तैनात सुरक्षा टीम द्वारा सिस्टम की सुरक्षा लॉग निगरानी की जा रही है।

6. प्रशासनिक उपाय – अनधिकृत पहुँच को रोकने और वास्तविक उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध बुकिंग सुनिश्चित करने हेतु कई धोखाधड़ी-रोधी उपाय अपनाए गए हैं।

– यूज़र अकाउंट्स का सख्त पुनःसत्यापन और जाँच की गई है। वर्ष 2025 में लगभग 3.03 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय की गई हैं।

–   आरक्षण प्रणाली के नियमित सुरक्षा ऑडिट सीईआरटी-इन द्वारा नामांकित सूचना सुरक्षा ऑडिट एजेंसियों द्वारा किए जाते हैं। इसके अलावा, टिकटिंग प्रणाली से संबंधित इंटरनेट ट्रैफ़िक की लगातार निगरानी सीईआरटी-इन और नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) द्वारा साइबर हमलों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए की जाती है।

– राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर 3.99 लाख संदिग्ध बुकिंग से संबंधित 376 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

– वर्ष 2025 में 12,819 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए हैं।

पिछले छह महीनों के दौरान ई-टिकटिंग प्रणाली तक पहुँचने के संदर्भ में असत्यापित प्रयासों के अस्वीकृत होने का विवरण इस प्रकार है:

दिसम्‍बर 2025 14.28 अरब अनुरोधों में से  07.25 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
नवम्‍बर 2025 20.07 अरब अनुरोधों में से 14.03 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
अक्‍तूबर 2025 24.04  अरब अनुरोधों में से 17.00  अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
सितम्‍बर 2025 19.04   अरब अनुरोधों में से 12.05 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
अगस्‍त 2025 11.04   अरब अनुरोधों में से 05.07 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
जुलाई 2025 09.06   अरब अनुरोधों में से 05.03 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा प्रदान की गई।

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पर्यटन के लिए गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए नए प्रयास

नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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