Union Minister Dr Jitendra Singh held a bilateral meeting with UK Minister for AI and Online Safety, Mr Kanishka Narain, on the sidelines of the India AI Impact Summit

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री श्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दीर्घकालिक द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी के ढांचे के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान आधारित नवाचार में भारत-ब्रिटेन सहयोग को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत और ब्रिटेन विज्ञान एवं नवाचार परिषद (एसआईसी) के अंतर्गत एक संस्थागत तंत्र के तहत काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग की समीक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था है। एसआईसी की अगली बैठक अप्रैल 2026 में भारत में आयोजित होने वाली है।

दोनों पक्षों ने अप्रैल 2023 में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन अनुसंधान एवं नवाचार समझौता ज्ञापन के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की, जो दीर्घकालिक सतत विकास के लिए सरकारी एजेंसियों, उच्च शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की तीव्र प्रगति के बारे में बताया, जो वैश्विक नवाचार सूचकांक में 2015 में 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंचने में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल आकार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बढ़ता स्टार्टअप आधार और मजबूत अनुसंधान क्षमता इसे वैश्विक प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए एक पसंदीदा भागीदार बनाती है।

चर्चा में दूरसंचार अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि, महासागर और जलवायु विज्ञान, उन्नत सामग्री और विनिर्माण तथा क्वांटम प्रौद्योगिकियों में चल रही संयुक्त पहलों को शामिल किया गया। डीएसटी-यूकेआरआई दूरसंचार सहयोग के तहत, अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गई हैं। औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में, दोनों देश नेट जीरो प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और सतत प्रणालियों में परियोजनाओं का समर्थन कर रहे हैं।

भारत-ब्रिटेन नेट ज़ीरो इनोवेशन पार्टनरशिप, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइड्रोजन, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और कार्बन कैप्चर पहलों सहित स्केलेबल स्वच्छ प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा दे रही है। ये सहयोग भारत के हरित विकास और सतत विकास के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

बैठक में दोनों देशों के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, इनोवेशन हब और उद्योग के बीच साझेदारी को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक अनुसंधान और नवाचार गलियारे की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस पहल से प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को मजबूती मिलने और सहयोगात्मक उद्यमिता को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

भारत ने अपने प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों पर प्रकाश डाला, जिनमें अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणाली पर राष्ट्रीय मिशन, क्वांटम प्रौद्योगिकी मिशन, भू-स्थानिक मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल, डीप ओशन मिशन और बायोमैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम शामिल हैं, जो वैश्विक साझेदारी के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमासुंदरम शामिल थे। और डॉ. सुलक्षणा जैन, वैज्ञानिक एफ, डीएसटी।

ब्रिटेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री कनिष्क नारायण ने किया, जो ब्रिटेन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों, सेमीकंडक्टर, बौद्धिक संपदा, तकनीकी विकास और ऑनलाइन सुरक्षा की देखरेख करते हैं, उनके साथ ब्रिटिश उच्चायोग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी नेटवर्क की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री सोफिया नेस्टियस-बूथ, विज्ञान और नवाचार प्रमुख श्री जैक लैंडर्स; और मंत्री के निजी सचिव श्री जैक कॉलिन्स भी थे।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत भारत और ब्रिटेन की अग्रणी प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने और अप्रैल 2026 में होने वाली विज्ञान और नवाचार परिषद की बैठक से पहले नीतिगत संवाद को ठोस परिणामों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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