दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहभागिता को वायु युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में क्रियान्वित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के एसयू-30एमकेआई बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान तथा रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साब (एसएएबी) ग्रिपेन जेट सम्मिलित थे। समुद्री क्षेत्र के ऊपर आईएएफ विमानों की विस्तृत दूरी की परिचालन क्षमता को आईएएफ के आईएल-78 मिड एयर रीफ़्यूलिंग टैंकर विमानों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास आईएएफ के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) विमानों की उन्नत निगरानी एवं कमान क्षमताओं तथा आरटीएएफ के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (जीसीआई) एलीमेंट के अंतर्गत संचालित किया गया।
आईएएफ की प्रतिभागी सेनाओं ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित एयरबेस से संचालन किया, जबकि थाई ग्रिपेन विमानों ने थाईलैंड स्थित एयरबेस से उड़ान भरी। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मैत्रीपूर्ण विदेशी देश के साथ आईएएफ की पहुँच तथा पारस्परिक कार्य-संगतता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस अभ्यास से प्रतिभागी सेनाओं को परिचालन अनुभव प्राप्त हुआ तथा आईएएफ और आरटीएएफ के बीच सर्वोत्तम पद्धतियों का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहन होती “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को प्रतिबिंबित करता है, जो अब एयरोस्पेस क्षेत्र तक विस्तृत हो रही है।
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