अल्ट्रासाउंड सेंटर के निबंधन और नवीकरण सहित अन्य बिंदुओं पर समिति ने लिया निर्णय
समिति द्वारा 06 सेंटर के निबंधन एवं 04 के नवीकरण की दी गई स्वीकृति
रांची,02.04.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज दिनांक 02.03.2026 को सदर अस्पताल राँची, सभागार में जिला सलाहकार समिति (PC & PNDT) की बैठक आयोजित की गई।
बैठक के दौरान समिति द्वारा अल्ट्रासाउंड सेंटर के निबंधन, रिन्यूअल, संस्थानों को मशीन के फॉर्म-B में एंट्री, चिकित्सकों की ज्वायनिंग एवं यूएसजी मशीन खरीदने पर विचार-विमर्श किया गया।
अल्ट्रासाउंड सेंटर के निबंधन और रिन्यूअल के लिए प्राप्त अभ्यावेदनों पर विचार-विमर्श करते हुए समिति द्वारा 06 सेंटर के निबंधन एवं 04 सेंटर के रिन्यूअल की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त बैठक में समिति द्वारा संस्थानों को मशीन के फॉर्म-B में इंट्री एवं सर्टिफिकेट जांच के बाद चिकित्सकों की ज्वाइनिंग का अनुमोदन प्रदान किया गया।
बैठक के दौरान उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अल्ट्रासाउंड सेंटर के निरीक्षण को लेकर आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेंटर का निश्चित समय अंतराल पर निरीक्षण करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक में समिति द्वारा यूएसजी मशीन को स्थानांतरित करने में कुल 01, क्लीनिक/अस्पतालों में नए डॉक्टर शामिल करने के लिए – कुल 07 आवेदन, यूएसजी मशीन खरीद अनुमति: – कुल 06 आवेदन, Form B में प्रविष्टि -कुल 19 एप्लीकेशन, (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद), सहमति प्रदान की गई। और Machine for dismantling / refurbishing करने को लेकर कुल-01 लाइसेंस जमा किया गया।
एमआरआई सीटी स्कैन मशीन रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में पीसीपीएनडीटी बैठक में जोड़ा गया।
बैठक में सिविल सर्जन, डॉ. प्रभात कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पाण्डेय, डॉ. वंदीता, डॉ. एस. बास्की, डीपीएम, श्री प्रवीण कुमार सिंह, समिति सदस्य सहित अन्य सदस्य एवं PC & PNDT को-ऑर्डिनेटर श्री राकेश कुमार राय उपस्थित थे ।
नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने आज छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईटीजी) 2026 के आयोजन स्थलों का दौरा किया और इस पहल को जनजातीय सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए एक परिवर्तनकारी मंच बताया।
केआईटीजी के पहले संस्करण में 9 खेल विधाओं में लगभग 3,800 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें एथलीट, कोच और अधिकारी शामिल हैं। इनमें 7 पदक खेल और 2 प्रदर्शन खेल शामिल हैं, जिनमें 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। आयोजन का शुभंकर ‘मोरवीर’ भारत के 700 से अधिक जनजातीय समुदायों के साहस, गौरव और शौर्य का प्रतीक है।
जनसभा को संबोधित करते हुए श्रीमती खडसे ने कहा कि खेल केवल एक प्रतिस्पर्धी गतिविधि नहीं है, बल्कि सशक्तिकरण, आत्मविश्वास निर्माण और राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली साधन है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारत की खेल विरासत को पुनर्जीवित करने, जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाने और एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए सामाजिक आंदोलन है, जहां हर गांव में एक चैंपियन हो।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2036 के ओलंपिक तक शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल होने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ शीर्ष 5 में प्रवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है और केआईटीजी जैसी पहल इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
श्रीमती खडसे ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसी पारंपरिक खेल पहलें जनजातीय क्षेत्रों में पहले से मौजूद मजबूत और जीवंत जमीनी स्तर की खेल संस्कृति को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि ये खेल मौजूदा प्रतिभाओं को पहचानने और उनका पोषण करने के लिए एक संस्थागत मार्ग प्रदान करते हैं।
महिलाओं की भागीदारी पर मंत्रालय के फोकस को रेखांकित करते हुए, उन्होंने अस्मिता लीग की सफलता का उल्लेख किया, जिसके तहत 124 लीगों ने संवेदनशील और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों सहित फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में लगभग 14,000 लड़कियों की भागीदारी को सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें खेलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की लड़कियों के लिए अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
श्रीमती खडसे ने आगे बताया कि खेलों के दौरान उभरती प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए सभी सात प्रतियोगिता स्थलों पर भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षकों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सीधे खेलो इंडिया प्रणाली में एकीकृत किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक का सुगम मार्ग प्रशस्त होगा।
भारत की सभ्यतागत खेल विरासत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय ऐतिहासिक रूप से तीरंदाजी सहित पारंपरिक खेलों में अग्रणी और बढ़िया अभ्यासकर्ता रहे हैं और ये खेल हजारों वर्षों की इस समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने और उसका जश्न मनाने का एक प्रयास भी हैं।
विभिन्न स्थानों पर उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय सशक्तिकरण, युवा विकास और राष्ट्रीय खेल उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरा है।
जगदलपुर दौरे के दौरान श्रीमती खडसे के साथ कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें श्री संजय पांडे, मेयर, जगदलपुर; श्री मयंक श्रीवास्तव, आईपीएस, डीडीजी खेलो इंडिया; श्री शलभ सिन्हा, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक; श्री आकाश छिकारा, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट; श्री प्रतीक जैन, आईएएस, सीईओ, जिला पंचायत; श्री ऋषिकेश तिवारी, एसडीएम, जगदलपुर; श्रीमती तनुजा सलाम, निदेशक (खेल), छत्तीसगढ़; सुश्री ममता श्री ओझा, निदेशक, खेलो इंडिया और श्री डोमन सिंह, आईएएस, आयुक्त, बस्तर शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों के साथ बातचीत और प्रतियोगिता स्थलों पर चल रहे प्रतिभा पहचान प्रयासों की समीक्षा के साथ हुआ।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बनासकांठा जिले के वाव-थराद में एक जनसभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने उत्तरी गुजरात के लिए लगभग ₹20,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। नवरात्रि का पवित्र त्यौहार अभी-अभी संपन्न हुआ है और आज भगवान महावीर जयंती भी है – इन बातों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने माँ अंबाजी और भगवान श्री धरणीधरजी को नमन किया।
पहली बार सीधे दीसा एयरबेस पर उतरने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इसके रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से मात्र 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उन्होंने बताया कि दीसा हवाई अड्डे का विस्तार दशकों से अटका हुआ था, जबकि किसानों ने इस परियोजना के लिए स्वेच्छा से अपनी ज़मीन दे दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ने इस काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया,” और यह हवाई अड्डा विकास से जुड़ी उपलब्धि होने के साथ-साथ देश के लिए एक प्रमुख रणनीतिक संपत्ति भी है।
वाव-थराद और बनासकांठा क्षेत्र के साथ अपने गहरे व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में बिताए अपने दिनों के बारे में बात की, जब वे इस क्षेत्र के गाँवों में लंबा समय बिताया करते थे। उन्होंने इस क्षेत्र की माताओं और बहनों द्वारा बड़े प्रेम से तैयार किए गए बाजरे के रोटले, घी, गुड़ और शीरे को स्नेहपूर्वक याद किया।
इस क्षेत्र के विकास के साथ अपने 25 साल के जुड़ाव को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की जिस कड़ी की शुरुआत करने का सौभाग्य उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर मिला था, वह बिना किसी रुकावट के जारी है, और 2014 से मौजूदा सरकार ने इसे और भी मजबूत किया है। यह बताते हुए कि आज शुरू की गई परियोजनाएँ ऊर्जा, सड़क, रेल और आवास जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, “20,000 करोड़ रुपये की ये परियोजनाएँ इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगी और यहाँ के जीवन को एक नई गति प्रदान करेंगी।”
सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के बारे में विस्तार से बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने ईडर से वडाली बाईपास तक 4-लेन वाले राजमार्ग, धोलावीरा से संतालपुर तक राजमार्ग के उन्नयन और पूरे अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के लोकार्पण का ज़िक्र किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की परिवहन-संपर्क सुविधा अपने साथ उद्योग, निवेश और अवसर लेकर आती है। रेल परिवहन-संपर्क के मामले में, उन्होंने हिम्मतनगर से खेड़ब्रह्मा तक रेल लाइन की चौड़ाई में बदलाव पर प्रकाश डाला, जो उत्तरी गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय ब्रॉड गेज नेटवर्क से जोड़ता है; साथ ही, उन्होंने खेड़ब्रह्मा, हिम्मतनगर और असरवा को जोड़ने वाली एक नई ट्रेन सेवा की शुरुआत का भी ज़िक्र किया। श्री मोदी ने कहा, “जब गांव बाजारों से, किसान अवसरों से और युवा रोज़गार से जुड़ते हैं, तो वही वास्तविक विकास है।”
औद्योगिक विकास और नए निवेश को बढ़ावा देने में ऊर्जा की अहम भूमिका पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क से जुड़ी पारेषण परियोजनाओं के बारे में बात की, जिनसे 4.5 गीगावॉट बिजली पैदा होगी। यह याद दिलाते हुए कि उन्होंने 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर चरंका में देश के पहले सोलर पार्क की शुरुआत की थी, उन्होंने उल्लेख किया कि इस शुरुआती पहल ने ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात की मौजूदा अग्रणी भूमिका की नींव रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे भरोसे के साथ कहा, “वह दिन दूर नहीं जब गुजरात नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया भारत की विकास गाथा पर चर्चा करती है, तो ‘गुजरात मॉडल’ की खूब तारीफ़ होती है, क्योंकि यह दिखाता है कि अवसंरचना विकास और जन कल्याण, दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। यह बताते हुए कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 40,000 परिवारों को पक्के घर मिले, उन्होंने कहा, “एक पक्का घर किसी परिवार की ज़िंदगी में जो बदलाव लाता है, उसे लाभार्थियों के चेहरों पर साफ़ देखा जा सकता है।श्री मोदी ने कहा, “सड़कें और राजमार्ग तो बनने ही चाहिए, लेकिन आम आदमी के जीवन स्तर में भी सुधार होना चाहिए।“
उत्तरी गुजरात ने दशकों तक जिन मुश्किलों—जैसे सूखा और पानी की भारी कमी—का सामना किया था, उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उस दौर की बात की जब महिलाओं को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था और किसानों को अपनी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता था। उन्होंने गुजरात के लोगों की उस भावना को इसका श्रेय दिया, जिसके तहत उन्होंने अपनी किस्मत बदलने का संकल्प लिया और ‘सुजलाम सुफलाम’ योजना तथा नर्मदा नदी के पानी को दूर-दूर तक पहुँचाने के काम को इस बदलाव का परिवर्तनकारी कार्यक्रम बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, “आज यहाँ का किसान अब सिर्फ़ एक ही फ़सल पर निर्भर नहीं है; आलू के उत्पादन में बनासकांठा का देश में सबसे आगे निकलना अपने आप में एक मिसाल है।”
गुजरात की लगातार 25 साल की विकास यात्रा का जश्न मनाते हुए, प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि कैसे राज्य ने लगातार अपने ही रिकॉर्ड बनाए हैं और उन्हें तोड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2005 में ‘शहरी विकास वर्ष’ की शुरुआत ₹650 करोड़ के बजट के साथ की गई थी, जो अब बढ़कर ₹33,000 करोड़ से ज़्यादा हो गया है। 9 नए नगर निगमों के लिए ₹2,300 करोड़ के लगभग 300 प्रस्तावों की मंजूरी, 72 नगर पालिकाओं का उन्नयन और ₹4 लाख करोड़ से ज़्यादा के राज्य बजट का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास हर गांव, कस्बे और शहर तक पहुँचेगा। श्री मोदी ने कहा, “जब तक पंचायत से लेकर संसद तक आपका विश्वास बना रहेगा, विकास की सुपरफास्ट एक्सप्रेस इसी रफ़्तार से चलती रहेगी।”
वैश्विक परिस्थिति की बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाँ कई देश युद्ध, अस्थिरता और ईंधन की आसमान छूती कीमतों से जूझ रहे हैं—यहाँ तक कि महाशक्ति देशों में भी डीजल और पेट्रोल की कीमतें 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं—वहीं भारत ने अपनी सफल विदेश नीति और अपने लोगों की एकता के दम पर हालात को काबू में रखा है।
कोविड महामारी के दौरान देश की एकजुट प्रतिक्रिया को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से मौजूदा मुश्किल समय में भी एक साथ खड़े रहने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जहाँ पूरी दुनिया संघर्ष कर रही है, वहीं भारत ने न सिर्फ़ स्थिरता बनाए रखी है, बल्कि वह हर दिन विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, और आज की परियोजनाएं इसी संकल्प का एक अन्य उदाहरण हैं।”
नई दिल्ली – गोवा में श्रीमती शगुन सोबती द्वारा नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती की उपस्थिति में 11 नेक्स्ट जेनरेशन अपतटीय पेट्रोल जहाजों (एनजीओपीवी) में से पहले जहाज 1280 (शाची) को 31 मार्च 2026 को मेसर्स जीएसएल में लॉन्च किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन नौसैनिक परंपराओं के साथ किया गया। इस अवसर पर नौसेना, रक्षा मंत्रालय और जीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एनजीओपीवी का निर्माण दो शिपयार्डों (जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता) में एक साथ किया जा रहा है। स्वदेशी रूप से निर्मित ये जहाज रक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री आपदा जोखिम प्रबंधन (एचएडीआर) और समुद्री लूट विरोधी अभियानों जैसे बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए मौजूदा 10 ओपीवी/एनओपीवी की संख्या को बढ़ाएंगे।इन जहाजों के नाम देश की पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं, जिनमें से पहले जहाज (पूर्व-जीएसएल) का नाम ‘शाची‘ रखा गया है, जिसका मतलब है सहायता प्रदान करने वाला। एनजीओपीवी के प्रतीक चिन्ह में सप्तर्षि तारामंडल और एक लाल एवं सफेद प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है।
नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में उठाया गया यह एक और महत्वपूर्ण कदम है और यह भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और ‘मेक इन इंडिया‘ पहलों के अनुरूप है।
नई दिल्ली – डब्ल्यूटीओ का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन कैमरून के याउंडे में 30 मार्च, 2026 को पूरा हुआ। इस सम्मेलन में डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों/ वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। एमसी-14 के प्रमुख एजेंडा मुद्दे: डब्ल्यूटीओ सुधार, मत्स्य पालन पर सब्सिडी; विकास के लिए निवेश सुविधा समझौते का समावेश; ई-कॉमर्स कार्य कार्यक्रम और स्थगन; कृषि; और कम विकसित देशों के मुद्दे और विकास रहे। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने एमसी-14 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
याउंडे में, मंत्रियों ने मत्स्य पालन सब्सिडी पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते के अनुच्छेद 12 में दिए गए मत्स्य पालन सब्सिडी पर विस्तृत नियमों को प्राप्त करने के लिए एमसी-15 को सिफारिशें देना था। मंत्रियों ने एमसी-14 के दो फैसलों: छोटी अर्थव्यवस्थाओं को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में बेहतर ढंग से एकीकृत करना; और स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपायों (एसपीएस) व व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) पर समझौतों में विशेष और विभेदक व्यवहार प्रावधानों के सटीक, प्रभावी और संचालनात्मक कार्यान्वयन को बढ़ाने को भी अपनाया, जिन्हें पहले जेनेवा में सदस्यों ने मंजूर किया था। डब्ल्यूटीओ सुधार, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य; टीआरआईपीएस उल्लंघन न करने और स्थिति संबंधी शिकायतों; और सबसे कम विकसित देश (एलडीसी) पैकेज से संबंधित एजेंडा मदों पर चर्चा अब जेनेवा में जारी रहेगी।
डब्ल्यूटीओ सुधार एजेंडा पर श्री गोयल ने इस विषय पर जोर दिया कि सर्वसम्मति से निर्णय लेना डब्ल्यूटीओ की वैधता का आधार है, और यह जरूरी है कि डब्ल्यूटीओ प्रत्येक सदस्य के उस संप्रभु अधिकार की अनदेखी न करे कि वे उन नियमों का पालन न करें, जिनसे वे सहमत नहीं हैं। समयबद्ध तरीके से सुधार प्रयासों को दोबारा शुरू करने और महत्वपूर्ण पड़ावों को निर्धारित करने के लिए भारत के सहयोग को जताते हुए, श्री गोयल ने मौजूदा गतिरोध और इसके मूल कारणों का पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित मूल्यांकन करने के लिए डब्ल्यूटीओ के महत्व पर बल दिया। भारत ने यह भी बताया कि एक एकीकृत बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली अपने संस्थागत ढांचे के भीतर विखंडन के साथ फल-फूल नहीं सकती है और सर्वसम्मति प्रक्रिया को खुलेपन, पारदर्शिता, समावेशिता, सहभागिता और सदस्य-संचालित सिद्धांतों पर आधारित करने का आह्वान किया। श्री गोयल ने संरचनात्मक विषमताओं को दूर करने के लिए नए मुद्दों पर विचार करते समय खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, कपास पर मानक बिक्री तथा मानक बिक्री जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया। विवाद निपटान प्रणाली का लगातार विफलता होना एक ऐसा मुद्दा था, जिसे भारत ने उजागर किया। भारत ने व्यापारिक प्रतिशोध को उचित ठहराने या वैध घरेलू नीतियों को चुनौती देने के लिए पारदर्शिता का दुरुपयोग करने के खिलाफ भी चेतावनी दी और सभी सदस्यों के लिए उत्पादक क्षमता का निर्माण करने, रोजगार निर्माण करने और वैश्विक व्यापार में सार्थक तौर पर हिस्सा लेने के उचित मौके प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया।
मत्स्य पालन पर सब्सिडी के विषय पर श्री गोयल ने मत्स्य पालन प्रशासन के प्रति भारत के संतुलित और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि भारत में मत्स्य पालन आजीविका और खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो 90 लाख से अधिक मछुआरों का सहयोग करता है, जिनमें अधिकतर छोटे, पारंपरिक और पारंपरिक मछुआरे शामिल हैं, जो संपोषित तरीकों का अभ्यास करते हैं। भारत के सक्रिय और ऐतिहासिक संरक्षण प्रयासों, जिनमें 61 दिनों का वार्षिक मत्स्य पालन प्रतिबंध भी शामिल है, पर जोर देते हुए श्री गोयल ने वैश्विक प्राथमिकता बनने से बहुत पहले ही स्थिरता के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। भारत ने यह भी रेखांकित किया कि अधिक क्षमता और अत्यधिक मत्स्य पालन की चुनौती भारी सब्सिडी प्राप्त औद्योगिक बेड़ों से पैदा होती है, न कि भारत और अन्य विकासशील देशों के छोटे मछुआरों से। इसलिए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हो रहे निर्णय निष्पक्ष हों और कमजोर समुदायों पर असमान रूप से प्रभाव न डालें। श्री गोयल ने मत्स्य पालन पर सब्सिडी संबंधी मसौदा मंत्रिस्तरीय निर्णय को अपनाने के लिए भारत के सहयोग को भी व्यक्त किया, साथ ही इस विषय पर जोर दिया कि आगे के निर्णयों से एक न्यायसंगत और विकास की ओर परिणाम प्राप्त होना चाहिए जो समुद्री संसाधनों और आजीविका दोनों की रक्षा करे।
भारत ने इस विषय पर जोर दिया कि आईएफडी को डब्ल्यूटीओ में शामिल करने से इसके मूलभूत सिद्धांतों और कार्यात्मक सीमाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा है। भारत ने बताया कि डब्ल्यूटीओ सुधार संबंधी चर्चाओं के अंतर्गत, सदस्य देश किसी भी विशिष्ट बहुपक्षीय समझौते के परिणाम को एकीकृत करने से पहले बहुपक्षीय समझौतों के लिए सुरक्षा उपाय और कानूनी सुरक्षा चाहते हैं। इसलिए, भारत ने आईएफडी को डब्ल्यूटीओ फ्रेमवर्क में अनुलग्नक 4 समझौते के तौर पर शामिल करने पर सहमति नहीं दी। इस प्रणालीगत मुद्दे को देखते हुए, भारत ने डब्ल्यूटीओ सुधार एजेंडा के अंतर्गत सद्भावनापूर्ण व्यापक चर्चा और रचनात्मक सहयोग के लिए तत्परता दिखाई।
ई-कॉमर्स के मुद्दे पर, भारत ने डब्ल्यूटीओ में डिजिटल विभाजन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल तथा नियामक फ्रेमवर्क जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस कार्य के लिए अपना सहयोग व्यक्त किया, जिससे विकासशील देशों और कम विकसित देशों को अपने डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक साधन मिल सकें। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क पर रोक की अवधि बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए सदस्य देशों के प्रयासों में रचनात्मक रूप से योगदान दिया। काफी प्रयास के बाद भी, सदस्य देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी। सीमा शुल्क पर रोक और ई-कॉमर्स पर कार्य कार्यक्रम का मुद्दा अब जेनेवा में होने वाली महासभा की अगली बैठक में निर्णय के लिए उठाया जाएगा।
कृषि के मुद्दे पर, भारत ने वैश्विक आबादी के लिए भूख-मुक्त भविष्य के महत्व पर जोर दिया, जो अधिकतर विकासशील देशों और अल्प विकसित देशों में रहती है। भारत ने यह भी कहा कि कृषि वार्ताओं में मौजूदा गतिरोध भरोसे की कमी से पैदा हुआ है, जिसे केवल पिछली मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में सहमत प्रतिबद्धताओं को पूरा करके ही दूर किया जा सकता है। इस संदर्भ में, भारत ने कृषि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए संभावित नए दृष्टिकोणों पर भारत की ओर से प्रस्तुत सुझावों पर सदस्य देशों से रचनात्मक सहयोग का आह्वान किया। यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया गया कि वार्ताओं का ध्यान भटके नहीं और यह पिछली मंत्रिस्तरीय बैठकों के अनुसार पीएसएच, एसएसएम और कपास से संबंधित लंबे समय से लंबित मुद्दों पर प्राथमिकता वाले परिणाम प्राप्त करने के अनुरूप बना रहे। भारत ने सदस्य देशों से पीएसएच पर स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए विकास-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया, साथ ही विकासशील देशों की आवश्यकताओं के प्रति डब्ल्यूटीओ की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का भी आग्रह किया।
अल्पविकसित देशों सहित विकास के मुद्दों पर, भारत ने टीआरआईपीएस समझौते में उल्लंघन न करने और स्थिति संबंधी शिकायतों (एनवीएससी) पर रोक की अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। व्यापार के लिए प्रासंगिक और एडवांस प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर भारत के प्रस्ताव पर सदस्य देशों से रचनात्मक सहयोग का आह्वान करते हुए, भारत ने इस विषय पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण दक्षता और उत्पादकता बढ़ाकर वैश्विक आर्थिक हित में योगदान देता है और विशेष रूप से विकासशील और अल्प विकसित सदस्य देशों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा। विकास के दायरे में उभरते कृषि व्यापार मुद्दों पर चर्चा करते हुए, भारत का दृढ़ मत था कि ये चर्चाएं संबंधित डब्ल्यूटीओ समितियों के साथ ही होनी चाहिए और समानांतर चर्चाएं करने से मुख्य उद्देश्य में कमी आ सकती है और विकासशील सदस्य देशों की विकास प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण परिणामों में और देरी हो सकती है। एसएंडडीटी पर, भारत ने इस विषय पर बल दिया कि सुधार के बहाने एसएंडडीटी में संशोधन, उसे कमजोर या पुनर्परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए और एसएंडडीटी को अधिक सटीक, प्रभावी और संचालन योग्य बनाकर इसके कार्यान्वयन को मजबूत करने का आह्वान किया।
एमसी-14 सम्मेलन के दौरान, एचसीआईएम ने प्रमुख भागीदार देशों, व्यापारिक गुटों और प्रमुख अफ्रीकी देशों के साथ व्यापक द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में एमसी-14 के एजेंडे और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जनता दरबार का आयोजन
मंगलवार को अवकाश के कारण उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के आदेश पर बुधवार को जनता दरबार का आयोजन
विभिन्न अंचलों में सैकड़ों मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन
रांची,01.04.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार आज दिनांक 01.04.2026 को जिला के सभी अंचलों में जनता दरबार का आयोजन किया गया। मंगलवार को अवकाश होने के कारण उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर बुधवार को जनता दरबार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आमजन अपनी समस्याओं के समाधान हेतु उपस्थित हुए।
जनता दरबार के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा राजस्व एवं कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित मामलों का त्वरित एवं पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित किया गया, जिससे आम नागरिकों को मौके पर ही राहत मिली।
मांडर अंचल एवं प्रखंड में 50 मामलों का निष्पादन
मांडर अंचल में आयोजित जनता दरबार में विभिन्न आवेदकों को मौके पर ही प्रमाण पत्र निर्गत किए गए। ग्राम मेशाल निवासी मोहम्मद शामी शान को आय प्रमाण पत्र तथा ग्राम करगे निवासी अनिकेत भगत को जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
वहीं मांडर प्रखंड में वृद्धा पेंशन से संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम मलती के रहमान अंसारी एवं सैमुन खातून, ग्राम बरगडी की सरस्वती देवी तथा ग्राम मुडमा के नागा उरांव को वृद्धा पेंशन की स्वीकृति प्रदान की गई।
मांडर अंचल में कुल 50 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें 17 जाति प्रमाण पत्र, 12 आय प्रमाण पत्र, 09 आवासीय प्रमाण पत्र, 03 पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र, 04 सर्वजन पेंशन योजना सहित अन्य मामले शामिल हैं।
सिल्ली अंचल में 64 मामलों का निष्पादन
सिल्ली में आयोजित जनता दरबार में कुल 64 आवेदनों का निष्पादन किया गया। इसमें 15 आय प्रमाण पत्र, 12 पारिवारिक सदस्यता, 09 आवासीय प्रमाण पत्र, 08 जाति प्रमाण पत्र, 08 तत्काल प्रमाण पत्र, 04 पंजी सुधार, 04 दाखिल-खारिज, 02 नकल एवं 02 आचरण प्रमाण पत्र शामिल हैं।
खलारी अंचल में 17 मामलों का निपटारा
अंचल कार्यालय खलारी में आयोजित जनता दरबार में कुल 17 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें 05 आय प्रमाण पत्र, 04 आवासीय प्रमाण पत्र, 03 जाति प्रमाण पत्र, 02 पारिवारिक प्रमाण पत्र, 02 तत्काल आवेदन एवं 01 आचरण प्रमाण पत्र शामिल हैं।
अरगोड़ा अंचल में 62 आवेदन निष्पादित
अरगोड़ा अंचल में कुल 71 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 62 का निष्पादन किया गया। इसमें 32 आय प्रमाण पत्र, 18 जाति प्रमाण पत्र, 12 स्थानीय प्रमाण पत्र, 04 पेंशन, 03 पंजी-2 सुधार, 01 पारिवारिक सूची एवं 01 दाखिल-खारिज वाद शामिल हैं।
चान्हो अंचल में 212 मामलों पर कार्रवाई
चान्हो अंचल में कुल 212 मामलों पर कार्रवाई की गई, जिसमें 135 जाति प्रमाण पत्र, 70 आवासीय प्रमाण पत्र, 03 तत्काल आवेदन, 01 ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, 01 पारिवारिक सदस्यता एवं अन्य मामले शामिल हैं।
अनगड़ा अंचल में 137 मामलों का निष्पादन
अनगड़ा अंचल में कुल 137 मामलों का निष्पादन किया गया। इसमें 40 आय प्रमाण पत्र, 35 दाखिल-खारिज, 25 जाति प्रमाण पत्र, 22 आवासीय प्रमाण पत्र, 10 पंजी-2 सुधार, 02 परमिशन, 02 शुद्धि पत्र में जाति सुधार एवं 01 पारिवारिक सदस्यता शामिल हैं। ग्राम हेसल के कुवंर शाह के शुद्धि पत्र में सुधार तथा ग्राम चिलदाग के राजु कुमार के ऑनलाइन पंजी-2 में प्लॉट संख्या एवं नाम में सुधार करते हुए आवेदन का त्वरित निष्पादन किया गया।
जनता दरबार के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही त्वरित रूप से हो। राजस्व, प्रमाण पत्र, पेंशन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित मामलों में मौके पर ही कार्रवाई कर लोगों को राहत प्रदान की जा रही है।
जिला प्रशासन द्वारा आमजनों से अपील की गई है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान हेतु जनता दरबार में उपस्थित होकर इस पहल का लाभ उठाएं।
नई दिल्ली – दिल्ली के 21 स्थानों पर स्थित 34 प्री-पेड टैक्सी बूथों के प्रबंधन और डिजिटल एकीकरण के लिए एक सहयोगात्मक फ्रेमवर्क स्थापित करने हेतु दिनांक 4 फरवरी 2026 को सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) और दिल्ली यातायात पुलिस के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक स्पष्ट परिचालन फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिसमें:
दिल्ली यातायात पुलिस प्री-पेड बूथों के प्रबंधन और संचालन, बूथ कर्मचारियों की भर्ती, चालक सत्यापन और नियंत्रण कक्ष तंत्र की स्थापना सहित यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है।
एसटीसीएल डिजिटल एकीकरण, वित्तीय प्रबंधन ,कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सहित , बूथों के रखरखाव, और ब्रांडिंग/विपणन कार्यकलापों के लिए उत्तरदायी है।
इस समझौते का उद्देश्य डिजिटल सक्षमता के माध्यम से मौजूदा प्रीपेड टैक्सी प्रणाली का आधुनिकीकरण करते हुए सुरक्षा, पारदर्शिता, यात्रियों की सुगमता और चालक की आय में वृद्धि करना है । भारत टैक्सी ने इन बूथों पर मौजूदा पात्र जनशक्ति को प्रशिक्षित करने और उन्हें नियोजित करने के साथ-साथ अतिरिक्त कर्मियों को काम पर रखा है।
सहकारी फ्रेमवर्क के भीतर भर्ती प्रचालनात्मक आवश्यकताओं और सेवाओं के चरणबद्ध विस्तार के अनुसार की जाती है। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) अपनी अनुमोदित संगठनात्मक संरचना और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर नियोजित कर्मियों की संख्या का निर्धारण करता है। दिनांक 23 मार्च, 2026 की स्थिति के अनुसार इस प्लेटफॉर्म पर सहायता और परिचालन संबंधी भूमिकाओं में लगभग 130 कर्मियों को नियोजित किया गया है।
यह सहकारी समिति आत्म-निर्भर तथा बिना लाभ हानि के आधार पर कार्य करती है। कर्मियों का नियोजन परिचालन संबंधी आवश्यकताओं, वित्तीय मितव्ययिता और सेवा वितरण की जरूरतों के अनुरूप किया जाता है । सहकारी समिति द्वारा समय-समय पर किसी भी पुनर्गठन या नई नियुक्ति की प्रक्रिया, परिचालन दक्षता में सुधार, सेवाओं की संधारणीयता सुनिश्चित करने और बदलती मांग की स्थितियों के अनुरूप, लागू मानदंडों और प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित की जाती है।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
संविधान सदन की दीवारों पर लगे भित्तिचित्र भारत की गौरवगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं: लोक सभा अध्यक्ष
जो राष्ट्र अपनी विरासत से जुड़े रहते हैं और उससे शक्ति और प्रेरणा प्राप्त करते हैं, वे दृढ़ विश्वास से भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हैं: लोक सभा अध्यक्ष
भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और माननीय लोक सभा अध्यक्ष ने माननीया सांसद श्रीमती सुधा मूर्ति द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक “टाइड्स ऑफ टाइम: भारत’स हिस्ट्री थ्रू म्यूरल्स इन पार्लियामेंट” का विमोचन किया
नई दिल्ली – लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने आज देश के अतीत और उसके भविष्य के अंतर्निहित संबंध पर बल देते हुए ये विचार व्यक्त किए कि किसी राष्ट्र की शक्ति और उसके विकास की दिशा उसकी ऐतिहासिक चेतना से प्रभावित होती है। भारत की सभ्यतागत यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सदियों से अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, देश ने निरंतर दृढ़ता, साहस और प्रगति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।
श्री बिरला ने यह विचार प्रिंसेस चैंबर, संविधान सदन, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के माननीय सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के साथ संयुक्त रूप से संसद सदस्य, श्रीमती सुधा मूर्ति द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक “टाइड्स ऑफ टाइम: भारत’स हिस्ट्री थ्रू म्यूरल्स इन पार्लियामेंट” का विमोचन करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, पूर्व सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
श्री बिरला ने कहा कि यह पुस्तक संसद के भित्तिचित्रों में उकेरे गए समृद्ध इतिहास, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इस बात का उल्लेख भी किया कि ऐतिहासिक संविधान सदन की दीवारों पर लगे चित्र भारत की प्राचीन विरासत, समृद्ध संस्कृति और स्वतंत्रता के ऐतिहासिक संघर्ष को समाहित करते हुए भारत की गौरवगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं । उन्होंने आगे कहा कि यह कृति संसद की कलात्मक धरोहर, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करती है। इन आख्यानों को एक सम्मोहक और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने वाली यह पुस्तक अतीत और वर्तमान के बीच एक ऐसा सेतु है, जो भावी पीढ़ियों को सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देगी।
श्री बिरला ने श्रीमती सुधा मूर्ति की सहज अभिव्यक्ति और उनकी गहन अंतर्दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि वह अपनी स्पष्ट और संवेदनशील लेखन शैली से जटिल ऐतिहासिक विषयों को पाठकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए सहज बना देती हैं । उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक युवा पीढ़ियों को भारत की जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान से पुनः जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे उनमें गौरव और अपनेपन की भावना बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश अपनी विरासत से जुड़े रहते हैं, उससे शक्ति और प्रेरणा प्राप्त करते हैं, वे दृढ़ विश्वास से भविष्य की ओर कदम बढ़ाने में सक्षम होते हैं। श्री बिरला ने कहा कि यह पुस्तक देश के सांस्कृतिक और बौद्धिक आधार को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
अपने संबोधन में, श्रीमती सुधा मूर्ति ने इस पुस्तक के प्रकाशन में सहयोग के लिए लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला, लोक सभा के महासचिव, श्री उत्पल कुमार सिंह और लोक सभा सचिवालय के प्रति आभार व्यक्त किया। अपनी इस कृति की प्रेरणा को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के साथ संवाद करके उन्हें पता चला कि भारत के इतिहास और विरासत के बारे में जागरूकता की कमी है जो चिंताजनक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इतिहास केवल तारीखों या छिटपुट घटनाओं का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि निरंतर चलने वाला एक जीवंत क्रम है जो हमारी पहचान, मूल्यों और दुनिया को देखने के नजरिए को प्रभावित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे पूर्वजों के बलिदानों, संघर्षों और उपलब्धियों को युवा पीढ़ियों तक रोचक, प्रासंगिक और सार्थक ढंग से संप्रेषित किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि ऐसा करने से युवाओं में आत्मविश्वास, गौरव और अपनेपन की भावना उत्पन्न होगी और उन्हें राष्ट्र के भविष्य में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा सकता है।
लोक सभा के महासचिव, श्री उत्पल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया और कहा कि इस प्रकाशन से संसद की कलात्मक तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रलेखन में महत्वपूर्ण संवृद्धि हुई है ।
कॉफ़ी टेबल बुक लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित की गई है।
सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करना जिला प्रशासन की शिक्षकों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है
श्री जगदीश्वर प्रमाणिक को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया
उपायुक्त ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा: “जीवन की इस नई पारी में आप सभी नई ऊंचाइयों को छुएँ। स्वयं को व्यस्त रखें, समाज सेवा में सक्रिय रहें और नई उपलब्धियाँ हासिल करें। ईश्वर आपको लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।”
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समारोह
राँची,01.04.2026 – जिला प्रशासन द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोमवार को समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में पेंशन दरबार सह सेवानिवृत्ति विदाई सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने की। इस अवसर पर जिले के 10 सेवानिवृत्त शिक्षकों 01 कर्मी को उनके लंबे, समर्पित और अनुकरणीय सेवा काल के लिए सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने स्वयं सभी शिक्षकों को स्मृति चिह्न, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करना जिला प्रशासन की शिक्षकों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा, “शिक्षक समाज के निर्माणकर्ता होते हैं। उनके अथक योगदान से ही आने वाली पीढ़ियाँ मजबूत और सशक्त बनती हैं।”
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करना जिला प्रशासन की शिक्षकों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा: “जीवन की इस नई पारी में आप सभी नई ऊंचाइयों को छुएँ। स्वयं को व्यस्त रखें, समाज सेवा में सक्रिय रहें और नई उपलब्धियाँ हासिल करें। ईश्वर आपको लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।”
नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर श्री जगदीश्वर प्रमाणिक को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया, जिनकी काउंसलिंग वर्ष 2024 में हुई थी।
सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक एवं कर्मी:
1. श्री रंजीत मोहन, स.शि., रा.म.वि. तैमारा, बुण्डू
2. श्रीमती मरसी किरण पास्कली लकड़ा, स.शि., रा.म.वि. न्यू तुपुदाना, राँची-2
3. श्री संतोष कुमार महतो, प्रधानाध्यापक, रा. हरिजन मध्य विद्यालय, तमाड़
4. श्री रविन्द्र नाथ राय, स.शि., रा.प्रा.वि. बोधडीह, तमाड़
5. मो. करीम आलम, स.शि., रा.म.वि. रडगाँव, तमाड़
6. श्री खुर्शीद अनवर, स.शि., रा.प्रा.वि. खुदिया, ओरमाँझी
7. श्री नील कमल महतो, स.शि., रा.उत्क्र.म.वि. हजाम, सिल्ली
8. श्री भानु प्रताप यादव, स.शि., रा.प्रा.वि. रामपुर, सिल्ली।
9. श्री हेन्डरी बागे, स.शि., संत अलोईस मध्य विद्यालय, राँची-1
10. श्रीमती राधा लकड़ा, लिपिक, कार्यालय जिला शिक्षा अधीक्षक, राँची
11. श्री गोपाल तिवारी, कार्यालय अधीक्षक, विधि शाखा, राँची।
कार्यक्रम में जिला उप समाहर्ता राँची, श्री बिवेक सुमन एवं जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज उपस्थित रहे।
उपायुक्त ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए स्थापना उप समाहर्ता राँची, श्री बिवेक सुमन और जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज एवं उनके समस्त टीम को विशेष धन्यवाद दिया।
यह आयोजन जिला प्रशासन की उस निरंतर पहल का हिस्सा है जिसमें कर्मचारियों, विशेषकर शिक्षकों के कल्याण, सम्मान और समय पर पेंशन संबंधी लाभों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ाते हैं बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता और संवेदनशीलता को भी मजबूत करते हैं।
रांची, 0104.2026 – अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने बुधवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में हुए गंभीर मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
अंबा प्रसाद ने ज्ञापन में कहा कि विष्णुगढ़ थाना कांड संख्या 42/2026 में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे आम जनता का पुलिस प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारीबाग पुलिस अपराधियों तक पहुंचने में पूरी तरह विफल रही है, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 अप्रैल, 2026) कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्री श्री शिवकुमार महास्वामीजी के 119वें जन्मदिन समारोह और गुरुवंदना महोत्सव में भाग लिया।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि श्री शिवकुमार स्वामीजी जैसे संत हमारे समाज और राष्ट्र की आत्मा के साक्षात स्वरूप हैं। यद्यपि उनका भौतिक शरीर 2019 में परम सत्ता में विलीन हो गया, फिर भी उनकी आध्यात्मिकता की धारा समाज और देश दोनों को सदा पोषित और संरक्षित करती रहेगी। उन्होंने अपने आध्यात्मिक कार्यों से मानवता को समृद्ध किया। निर्धनों और वंचितों की सेवा के प्रति समर्पित उनका जीवन कल्याणकारी कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिकता को अभिव्यक्त करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
राष्ट्रपति ने स्वामीजी के नेक कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए श्री सिद्धगंगा मठ की सराहना की। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मठ ने प्राथमिक विद्यालय स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन में उच्च शिक्षा तक की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्री शिवकुमार स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित श्री सिद्धगंगा अस्पताल आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि श्री सिद्धगंगा मठ समकालीन युग में सेवा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए उसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में ज्ञान के वरदान को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। ज्ञान और शिक्षा व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की बुनियाद हैं। शिक्षा ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है। समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित छात्रों को शिक्षा प्रदान करके, मठ एक समावेशी समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, जनसेवा और राष्ट्रसेवा आपस में जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता जनसेवा और राष्ट्रसेवा दोनों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। कर्नाटक जनसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति के सबसे प्रभावशाली उदाहरणों की एक उत्कृष्ट मिसाल है। इसके लिए कर्नाटक के परिश्रमी और प्रतिभाशाली निवासियों की प्रशंसा की जानी चाहिए। कर्नाटक के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में निरंतर अग्रणी योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कर्नाटक राष्ट्र निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में आगे बढ़ता रहेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा के मार्ग पर चलकर ही हम श्री शिवकुमार स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।
नई दिल्ली – लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम ने आज सेना उप प्रमुख (वीसीओएएस) का पदभार ग्रहण किया। खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे। लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं।
उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया। सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव प्राप्त किया।
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है।
क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें मशीनीकृत बलों के लिए कर्नल क्षमता विकास, ब्रिगेडियर परिप्रेक्ष्य योजना और अधिग्रहण, और अपर महानिदेशक क्षमता विकास शामिल हैं और भारतीय सेना की दीर्घकालिक एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना और आधुनिकीकरण रोडमैप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जनरल ऑफिसर ने सभी पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और लगातार शीर्ष स्थान प्राप्त किए हैं। उन्होंने जूनियर कमांड कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्र अधिकारी पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने हायर कमांड कोर्स और प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस कॉलेज में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा, उन्होंने पेरिस में कमांड एंड स्टाफ कोर्स में भी भाग लिया है।
नई दिल्ली – जनता के भारी उत्साह और मांग को देखते हुए, जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने टीआरआईएफईडी के सहयोग से चल रहे भारत जनजाति महोत्सव 2026को 5 अप्रैल, 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
यह निर्णय आगंतुकों, हितधारकों और प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को दर्शाता है, और इसका उद्देश्य देश भर के आदिवासी कारीगरों, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए बाजार पहुंच और आजीविका के अवसरों को और मजबूत करना है।
नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में आयोजित यह महोत्सव भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक जीवंत राष्ट्रीय मंच बनकर उभरा है। इसमें पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, व्यंजन और उद्यम शामिल हैं। इस आयोजन में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। शामिल लोगों में 1,000 से अधिक आदिवासी कारीगर, वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके), आदिवासी रसोइये और देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांस्कृतिक दल हैं।
इस महोत्सव में 22 राज्यों के 78 आदिवासी समुदाय (वीडीवीके)), 28 राज्यों के 300 से अधिक कला और शिल्प प्रदर्शक और 21 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले 30 फूड स्टॉल संचालित करने वाले 120 आदिवासी व्यंजन प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
इस विस्तार से कारीगरों और उत्पादकों को उपभोक्ताओं के साथ सीधा संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी, जिससे आदिवासी उत्पादों की बेहतर कीमत और व्यापक दृश्यता सुनिश्चित होगी। साथ ही, इससे आगंतुकों को आदिवासी भारत की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अनुभव करने का विस्तारित अवसर भी मिलेगा।
प्रदर्शनियों और बिक्री के साथ-साथ, यह महोत्सव भारत ट्राइब्स बिजनेस कॉन्क्लेव , सीएसआर कॉन्क्लेव और विषयगत कार्यशालाओं, जो ज्ञान के आदान-प्रदान, साझेदारी और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देते हैं का आयोजन भी जारी रहेगा।
विस्तारित कार्यक्रम के अंतर्गत, ट्राईफेड 29 मार्च, 2026 (रविवार) को सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक निर्धारित स्थल पर वन धन सम्मेलनका आयोजन करेगा । सम्मेलन का उद्घाटन जनजातीय मामलों के माननीय राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके द्वारा विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इसमें सतत आजीविका, लघु वन उपज (एमएफपी) में मूल्यवर्धन, बाजार संपर्क और जनजातीय उद्यमशीलता को सुदृढ़ करने पर केंद्रित पांच विषयगत सत्र होंगे।
मंत्रालय ने सतत आजीविका को बढ़ावा देने, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने और बाजार संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पहलों के माध्यम से आदिवासी समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
आगंतुकों को विस्तारित कार्यक्रम का भरपूर लाभ उठाने और भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026 में आदिवासी भारत की भावना का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए आचार्य श्री कैलाश सागर सूरी ज्ञान मंदिर के किए जा रहे कार्यों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “मुझे गर्व है कि हमारे देश में ऐसी कई समर्पित टीमें हैं जो इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आने वाली पीढ़ियां हमारे समृद्ध इतिहास से जुड़ी रहें।”
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;
“मैंने आचार्य श्री कैलाश सागर सूरी ज्ञान मंदिर द्वारा पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की एक झलक देखी। मुझे गर्व है कि हमारे देश में ऐसी कई समर्पित टीमें हैं जो इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आने वाली पीढ़ियां हमारे समृद्ध इतिहास से जुड़ी रहें।”
नई दिल्ली – गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, राज्य के उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष भाई संघवी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी अश्विनी वैष्णव जी, राज्य के मंत्री भाई अर्जुन मोढवाडिया जी, केन्स और अल्फा ओमेगा सेमीकंडक्टर्स के प्रतिनिधिगण अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।
पिछले महीने के अंतिम दिन भी मैं साणंद में था, और इस महीने के अंतिम दिन भी मैं साणंद में हूं। 28 फरवरी को माइक्रोन के प्लांट में प्रोडक्शन की शुरुआत हुई, और आज 31 मार्च को, केन्स टेक्नॉलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट में प्रोडक्शन शुरु हो रहा है। ये मात्र संयोग नहीं है, ये इस बात का प्रमाण है कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, किस पेस से, किस गति से, किस स्पीड के साथ डेवलप हो रहा है। मैं केन्स टेक्नॉलॉजी की पूरी लीडरशिप को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। रमेश रघु congratulations. गुजरात सरकार को, इस प्लांट में काम कर रहे और सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
आज सुबह मैं एक डिवाइन वाले कार्यक्रम में था और अभी मैं डिजिटल वाले कार्यक्रम में हूं।
साथियों,
मुझे इस बात की भी बेहद खुशी है कि भारत की कंपनी ने semiconductor चिप्स बनाने में रुचि दिखाई, और नतीजा हम सबके सामने है। हमारे भारत की अपनी कंपनी केन्स अब ग्लोबल semiconductor सप्लाई चेन का एक मजबूत हिस्सा बन गई है। ये एक बहुत शानदार शुरुआत है, एक गर्व का पल है, हर भारतवासी के लिए गर्व का पल है। आने वाले दिनों में भारत की बहुत सारी कंपनियां, ग्लोबल collaboration के माध्यम से, दुनिया को एक resilient semiconductor सप्लाइ चेन देने जा रही है।
साथियों,
आज का ये दिन, मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, इस मंत्र को सही मायने में चरितार्थ करता है। इस प्रोजेक्ट में प्रोडक्शन शुरु होने से, भारत ग्लोबल मार्केट में, एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में अपना रोल और सशक्त कर रहा है। आज एक प्रकार से साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच नया ब्रिज सा बन गया है। कैलिफोर्निया की कंपनी के लिए, साणंद का ये प्लांट Intelligent Power Modules दे रहा है। मुझे बताया गया है कि यहां बनने वाले प्रोडक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा, पहले ही एक्सपोर्ट के लिए बुक हो चुका है। साणंद में बनने वाले modules अमेरिका की कंपनियों तक पहुंचेंगे, और वहां से पूरी दुनिया को पावर देंगे। मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड के मंत्र की सफलता की गूंज दुनिया के कोने-कोने में पहुंचेगी।
साथियों,
यहां बनने वाले इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स से, भारत और विश्व के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को, हैवी इंडस्ट्री को बहुत बल मिलेगा। यही ग्लोबल पार्टनरशिप ही दुनिया के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।
साथियों,
21वीं सदी का ये दशक आरंभ से दुनिया के लिए अनेक चुनौतियां लेकर आया है। संकट पेंडमिक का रहा है, conflicts का रहा है। इसमें भी सबसे बड़ी भुक्तभोगी, ग्लोबल सप्लाई चेन रही है। चाहे चिप्स हो, रेयर अर्थ मिनरल्स हों, एनर्जी हो, ये conflicts की वजह से बहुत प्रभावित हुए हैं। ये मानवता के तेज विकास से जुड़ी चीज़ें हैं, इनकी सप्लाई चेन में, इनके फ्लो में ब्रेक लगने से, पूरी ह्यूमैनिटी का विकास प्रभावित होता है। इसलिए भारत जैसे डेमोक्रेटिक देश का इस दिशा में आगे बढ़ना, पूरे विश्व के विकास के लिए बहुत अहम है।
साथियों,
हमने कोरोना की आपदा के समय ही तय कर लिया था, कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर का नया ग्लोबल हब बनेगा, इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा। और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता, सिर्फ एक चिप तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है, AI में, इलेक्ट्रिक व्हीकल में, क्लीन एनर्जी में, डिफेंस में, इलेक्ट्रॉनिक्स में, ऐसे अनेक सेक्टर में भी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। इसलिए, साल 2021 में भारत ने इंडिया-सेमीकंडक्टर मिशन शुरु किया। यह mission सिर्फ एक industrial policy नहीं है, यह भारत के आत्मविश्वास का ऐलान है। और इसका इंपैक्ट सबके सामने है। इस मिशन के तहत, देश के 6 राज्यों में एक लाख साठ हज़ार करोड़ रुपए के 10 प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। केन्स और माइक्रोन के प्रोजेक्ट्स भी इसी का हिस्सा हैं। सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन और मैन्यूफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लिए भारत ने ध्रुव Sixty Four जैसा, आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया है। इससे 5G इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, industrial automation, ऐसे अनेक सेक्टर्स के लिए हमें एक अपना सुरक्षित platform मिला है।
साथियों,
सेमीकंडक्टर मिशन की अब तक की सफलता के बाद, अब भारत ने इसके अगले फेज की तरफ कदम बढ़ाया है। इसी सोच के साथ, इस वर्ष के बजट में इंडिया-सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई है। इस फेज का फोकस, भारत में सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट्स और मटीरियल्स के प्रोडक्शन पर है। अब हमारा प्रयास, एक फुल स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने का है। ताकि हम डोमेस्टिक और ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी पार्टनरशिप कर सकें।
साथियों,
भारत आज industry led research and training centres को प्रोत्साहित कर रहा है। ताकि technology development भी हो और एक future ready skilled workforce भी तैयार हो। बहुत जल्द ही, देश में 85 हजार से अधिक डिजाइन प्रोफेशनल्स तैयार करने के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाएगा। साथ ही, पूरे इकोसिस्टम की जरूरतों को देखते हुए प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। सेमीकंडक्टर डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए चिप्स टू स्टार्टअप भी कार्यक्रम चल रहा है। आज देश की करीब 400 यूनिवर्सिटीज और स्टार्टअप्स को, आधुनिक डिजाइन टूल्स तक access दी गई है। इससे फिफ्टी फाइव से अधिक चिप्स का डिजाइन और निर्माण किया जा चुका है।
साथियों,
इंडस्ट्री एस्टीमेट्स के अनुसार, आज भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट करीब फिफ्टी बिलियन डॉलर, यानी करीब-करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपए का है। ये इस दशक के अंत तक सौ बिलियन डॉलर यानी नौ लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है। ये दिखाता है कि भारत में इस सेक्टर में कितनी ज्यादा संभावनाएं हैं। हमारा टारगेट अपनी ज़रूरतों की अधिक से अधिक चिप्स, भारत में ही बनाने का है। भारत के इस संकल्प को लेकर दुनियाभर के निवेशकों में जो उत्साह है, वो हमारे लिए बहुत बड़ी पूंजी है।
साथियों,
भारत एक सशक्त सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तो बना ही रहा है, साथ ही, रॉ मटीरियल की रिज़ीलियन्ट सप्लाई चेन के लिए भी बड़े प्रयास कर रहा है। पैक्स सिलिका में भारत का शामिल होना इसी प्रयास का ही एक हिस्सा है। दुनियाभर में जो हमारे पार्टनर्स हैं, उनके साथ मिलकर भारत में हम एक सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करना चाहते हैं।
साथियों,
क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता के लिए, भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन भी शुरु किया है। इसके तहत, क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग और प्रोडक्शन पर बल दिया जा रहा है। मिनरल्स की री-साइकलिंग के लिए भी 1500 करोड़ रुपए की स्कीम शुरु की गई है। इस वर्ष के बजट में, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरलम् जैसे कोस्टल स्टेट्स को मिलाकर रेयर अर्थ कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की गई है। ये कॉरिडोर,एक ऐसा Integrated नेटवर्क होगा, जो माइनिंग, रिफाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग की एक सशक्त चेन बनाएगा। हमारा प्रयास है कि देश में क्रिटिकल मिनरल्स का एक राष्ट्रीय भंडार हो। अच्छा होता कि, ये काम 30-40 वर्ष पहले शुरु होता। लेकिन अब भारत इसके लिए मिशन मोड पर काम कर रहा है।
साथियों,
भारत का मानना है, 21वीं सदी का ये कालखंड, सिर्फ economic competition का समय नहीं है। ये फ्यूचर के tech landscape को शेप करने का समय है। इसलिए, मैं इस दशक को, इस डैकेड को, भारत का टैकेड कहता हूं। इस दशक में भारत, टेक्नॉलॉजी से जुड़े जो initiatives ले रहा है, वो आने वाले दशकों में भारत की लीडरशिप को सशक्त करेंगे। आप सभी, हाल में हुई AI impact summit की सफलता से परिचित हैं। अगर AI adoption के मामले में देखें, तो भारत दुनिया में सबसे आगे है। हम भारतीय, टेक को एक्सप्लोर करते हैं। डिजिटल इंडिया की सफलता, फिनटेक में हो रहा शानदार काम, ये technology पर भारतीयों के भरोसे को ही हम देख पाते हैं, उसे दिखाता है। और भारत का जो AI इकोसिस्टम है, उसको हमारे सेमीकंडक्टर सेक्टर के उभार से बहुत मदद मिलेगी।
साथियों,
21वीं सदी का भारत केवल बदलाव का साक्षी नहीं, बल्कि बदलाव का नेतृत्व करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।हमारी नीतियां और हमारे निर्णय, आने वाले दशकों की टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टोरिटी की मजबूत नींव रख रहे हैं। इसलिए आज भारत हर क्रिटिकल टेक्नॉलॉजी पर अभूतपूर्व निवेश कर रहा है, रिफॉर्म्स कर रहा है। हमने space sector को private players के लिए खोला है, IN-SPACe जैसी संस्थाएं बनाई गईं हैं। इसका परिणाम आज दिख रहा है। स्पेस से जुड़े हमारे स्टार्ट अप्स बहुत ही शानदार काम कर रहे हैं। इसी तरह, हाल में ही हमने Nuclear sector में SHANTI Bill जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। ये रीन्युएबल एनर्जी मिक्स में, न्यूक्लियर एनर्जी के हिस्से को बहुत अधिक बढ़ाने जा रहा है। ये हमारे AI फ्यूचर के लिए भी बहुत ज़रूरी है।
साथियों,
भारत क्वांटम कंप्यूटिंग को भी एक स्ट्रटीजिक एसेट मानकर, मिशन मोड पर काम कर रहा है। ये भारत के डिजिटल फ्यूचर को सशक्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। यानी भारत, आज टेक्नॉलॉजी के विकास और टेक्नॉलॉजी के यूज, दोनों ही मामलों में बहुत तेज़ी से काम कर रहा है। ये पूरी दुनिया के इन्वेस्टर्स के लिए बहुत बड़ा अवसर है। हम Ease of Doing Business, Ease of Manufacturing, Ease in Logistics, इस पर भी निरंतर काम कर रहे हैं।
साथियों,
मुझे विश्वास है, केन्स के इस प्लांट से निकलने वाले प्रोडक्ट factory of the world के रूप में भारत के सफर को और मज़बूती देंगे। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत बहुत धन्यवाद।
नई दिल्ली – राजकोट स्थित आरके विश्वविद्यालय में “विकसित भारत युवा संवाद” प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें 1000 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ मनसुख मांडविया उपस्थित हुए और युवा शक्ति को भारत के विकास यात्रा की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रेरित किया।
माननीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने संवाद का शुभारंभ करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी केवल राष्ट्र का भविष्य ही नहीं है, बल्कि यह आज भी परिवर्तन की दिशा तय कर रही है। उन्होंने युवाओं से ‘नेशन फर्स्ट’ दृष्टिकोण अपनाने और भारत की विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने नेतृत्व में नवीनता की आवश्यकता पर भी बाल दिया और 15 अगस्त 2024 को लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्मरण किया, जिसमें उन्होंने गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले 1 लाख युवाओं को देश की व्यवस्था में सम्मिलित करने की बात कही थी। डॉ मांडविया ने कहा कि नेतृत्व का निर्माण नीयत और कर्म से होता है। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़कर सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं द्वारा ठोस कदम उठाने के विषय पर बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री डॉ मांडविया ने माई भारत पोर्टल (mybharat.gov.in) का उल्लेख किया, जो युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसरों से जोड़ने और सेवा में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026 युवाओं की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। इसके साथ ही उन्होंने ‘बजट क्वेस्ट’ जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो युवाओं को बजट को समझने की प्रक्रिया में सम्मिलित करती हैं, और ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वी बी वाई अल डी)’ के माध्यम से जिम्मेदार और जागरूक युवा नेतृत्व तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने भारत की जड़ों से जुड़े रहने के महत्व पर भी बाल दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी सोच को बदलने की आवश्यकता है और धोलावीरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने “विकास भी, विरासत भी” के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया, ताकि हम अपनी संस्कृति को संजोते हुए प्रगति कर सकें।
युवा संवाद में छात्रों की सक्रिय भागीदारी, विचार करने योग्य प्रश्न और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने की साझा प्रतिबद्धता देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन एक रोचक संवाद के साथ हुआ, जिसमें छात्रों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल रहा। एनसीसी कैडेट्स ने माननीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया को एक पेंटिंग और आरके विश्वविद्यालय सोशल क्लब ने “बायोडायवर्सिटी बुक” भेंट की। संवाद सत्र का समापन विश्वविद्यालय के कार्यकारी उपाध्यक्ष डेनिश पटेल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
रांची,01.04.2026 – रांची जिले में पुलिस पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने कम्पोजिट कंट्रोल रूम में एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जिले में चल रहे सभी पेट्रोलिंग वाहनों की गतिविधियों पर आधुनिक तकनीक के जरिए प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
पेट्रोलिंग वाहनों में लगाया गया जीपीएस सिस्टम
बैठक में बताया गया कि जिले के सभी पेट्रोलिंग वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा चुका है। इस सिस्टम के जरिए पुलिस को हर वाहन की लोकेशन, मूवमेंट, किस दिशा में जा रहा है, गंतव्य तक पहुंचने में कितना समय लगेगा जैसी पूरी जानकारी मिल रही है। यह जानकारी पूरी तरह सटीक और रियल टाइम में उपलब्ध हो रही है।
कंट्रोल रूम से होगी सीधी निगरानी
एसएसपी ने बताया कि इन सभी वाहनों की निगरानी अब सीधे कम्पोजिट कंट्रोल रूम से की जा रही है। इससे पुलिस अधिकारियों को यह तुरंत पता चल सकेगा कि किस इलाके में कौन-सी गाड़ी मौजूद है और कहां पेट्रोलिंग कमजोर है। पुलिस का कहना है कि इस व्यवस्था से हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
इमरजेंसी में तुरंत पहुंचेगी पुलिस
इस तकनीकी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस जल्दी से प्रतिक्रिया दे सकेगी। किसी भी घटना की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम से नजदीकी पेट्रोलिंग वाहन को निर्देश देकर तुरंत घटनास्थल पर भेजा जा सकेगा। इससे घटना स्थल पर पुलिस की शीघ्र पहुंच सुनिश्चित होगी और समय पर कार्रवाई संभव हो पाएगी।
अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस हाईटेक निगरानी प्रणाली से अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। साथ ही आम लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ेगा।
नई दिल्ली – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय राष्ट्रीय राजधानी और अन्य महानगरों में वेश्यावृत्ति की ओर रुख करने वाली महिलाओं की संख्या और पकड़ी गई महिला भिखारियों की संख्या के संबंध में केंद्रीकृत आंकड़े नहीं रखता है।
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने, और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जांच एवं अभियोजन का दायित्व संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों पर है; वे मौजूदा कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सक्षम हैं।
भारत सरकार ने मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण तथा संबंधित अपराधों से निपटने के लिए अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए) लागू किया है। यह अधिनियम व्यावसायिक यौन शोषण के संदर्भ में वेश्यावृत्ति को परिभाषित करता है और ऐसे शोषण को सुगम बनाने, बढ़ावा देने या उससे लाभ कमाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है। अधिनियम का कार्यान्वयन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की जिम्मेदारी है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ‘मिशन शक्ति’ नामक एक मिशन-आधारित योजना का संचालन करता है, जिसका उद्देश्य देशभर में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को सुदृढ़ करना है। मिशन शक्ति के दो मुख्य क्षेत्र हैं: महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘संबल’ और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए ‘समर्थ्य’। ‘संबल’ के अंतर्गत, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर एक ही छत के नीचे एकीकृत सहायता और सहयोग प्रदान करते हैं। यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनोसामाजिक परामर्श सहित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला भी प्रदान करता है। इसके अलावा, ‘संबल’ के अंतर्गत महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल) का उद्देश्य टेलीफोन शॉर्टकोड 181 के माध्यम से महिलाओं को पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, अस्पताल, कानूनी सेवा प्राधिकरण आदि जैसे उपयुक्त अधिकारियों से जोड़कर 24x7x365 आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान करना है। साथ ही, यह महिला कल्याण योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी भी प्रदान करता है। महिला हेल्पलाइन 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत है और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) के साथ एकीकृत है। ‘समर्थ्य’ योजना के अंतर्गत, शक्ति सदन संकटग्रस्त महिलाओं, जिनमें तस्करी पीड़ित महिलाएं भी शामिल हैं, के लिए एकीकृत राहत एवं पुनर्वास गृह प्रदान करता है। इसका उद्देश्य ऐसी कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाना है, ताकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों से उबर सकें। संकटग्रस्त महिलाओं को राहत एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ने 22 जनवरी, 2025 को मिशन शक्ति डैशबोर्ड (https://missionshakti.wcd.gov.in/) शुभारंभ किया। डैशबोर्ड में मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू), विभिन्न योजनाओं के नोडल अधिकारियों (ओएससी, महिला हेल्पलाइन, शक्ति सदन आदि) की अद्यतन सूचियां उपलब्ध हैं। पोर्टल पर सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक पहुंच के लिए समेकित हैं। मिशन शक्ति डैशबोर्ड का डेटा मिशन शक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी उपलब्ध है। संकट में फंसी कोई भी महिला अब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन दोनों के माध्यम से अपने निकटतम ओएससी (ऑक्यूपेशनल सपोर्ट सेंटर) में अपॉइंटमेंट बुक कर सकती है।
भारत सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के कार्यान्वयन हेतु “निर्भया कोष” नामक एक समर्पित कोष स्थापित किया है। निर्भया कोष के अंतर्गत सभी परियोजनाएं/योजनाएं मांग आधारित हैं। यह कोष मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जैसे कि ईआरएसएस-112, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी), अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई सहित 8 प्रमुख शहरों में सुरक्षित नगर परियोजना, पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क (डब्ल्यूएचडी), मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (एएचटीयू), राज्य फोरेंसिक प्रयोगशालाओं (एसएफएसएल) में डीएनए विश्लेषण, साइबर फोरेंसिक और संबंधित सुविधाओं को सुदृढ़ करना, बलात्कार और पीओसीएसओ अधिनियम के अंतर्गत लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष पीओसीएसओ अदालतों सहित त्वरित विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की स्थापना आदि।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
नई दिल्ली – कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में से चौथा, ‘एग्रे’, 30 मार्च 2026 को कोलकाता में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।
कोलकाता के जीआरएसई द्वारा भारतीय जहाजरानी रजिस्टर (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार इन एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी का डिजाइन और निर्माण किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण की सफलता को रेखांकित करता है।
लगभग 77 मीटर लंबे ये जहाज जलजेट द्वारा संचालित भारतीय नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोत हैं और अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार से सुसज्जित हैं, जो पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम बनाते हैं। इस जहाज के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी और बारूदी सुरंग रोधी क्षमताओं के साथ-साथ तटीय निगरानी में और वृद्धि होगी।
यह जहाज पूर्व के आईएनएस एग्रे का पुनरोद्धार है, जो 1241 पीई श्रेणी के गश्ती पोतों में से चौथा था और जिसे वर्ष 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। इस प्रकार यह प्रतिष्ठित विरासत वाले नामों को बनाए रखने की नौसेना की परंपरा को जारी रखता है।
एग्रे की डिलीवरी भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती शक्ति और आयात पर निर्भरता कम करने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।
पहली बार, जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, और पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना, और 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक ‘मकान सूचीकरण और आवास जनगणना’ आयोजित की जाएगी
स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी, उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे
प्रगणक (Enumerators) अपने स्मार्टफ़ोन का उपयोग करके, सीधे मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे और जमा करेंगे
डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं
पूरे देश में जनगणना 2027 में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे
भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज नई दिल्ली में जनगणना-2027 पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसका पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। पहली बार, जनगणना डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, और पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना और 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और आवास जनगणना आयोजित की जाएगी।
भारत की जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 (समय-समय पर संशोधित) के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है। भारत की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। जनगणना 2027 श्रृंखला की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।
भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 आयोजित करने के आशय को 16 जून, 2025 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया है। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की 00:00 बजे होगी (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की 00:00 बजे होगी)।जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी।
पहला चरण – मकान सूचीकरणएवंमकानोंकीगणना (HLO), जो अप्रैल से सितंबर, 2026 के दौरान राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही मकान सूचीकरण कार्य से पूर्व 15 दिनों की स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा उनके पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। पहले चरण के प्रश्न जनवरी 2026 में अधिसूचित किए जा चुके हैं।
दूसरा चरण – जनसंख्यागणना (Population Enumeration) फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में आयोजित होगा)। CCPA के निर्णयानुसार, इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी।
इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। जनसंख्या गणना की सटीक तिथियां एवं प्रश्नावली समयानुसार अधिसूचित की जाएगी।
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगर पालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा तथा सिक्किम में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 अप्रैल से 15 मई, 2026 के बीच आयोजित होगी, तथा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़,छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा में यह कार्य 1 मई से 30 मई, 2026 तक होगा तथा 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की अवधि रहेगी। राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार विस्तृत कार्यक्रम परिशिष्ट में संलग्न है।
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें प्रगणकों के मानदेय, प्रशिक्षण, आईटी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स आदि के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
जनगणना 2027 को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा।
प्रगणक मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने स्मार्टफोन द्वारा सीधे डेटा एकत्र एवं प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में स्व-गणना के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप एवं स्व-गणना पोर्टल हिंदी एवं अंग्रेज़ी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। जनगणना से संबंधित विभिन्न गतिविधियों जैसे— प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के नियुक्ति पत्र एवं पहचान पत्र का निर्माण, कार्य आवंटन, प्रशिक्षण प्रबंधन, HLB निर्माण, डैशबोर्ड के माध्यम से कार्य की निगरानी, कुछ जनगणना अभिलेखों सारांशों का स्वतः निर्माण आदि के लिए एक पोर्टल विकसित किया गया है। मकानसूचीकरण ब्लॉक, HLB वेब मैपिंग एप्लिकेशन के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। डेटा सुरक्षा हेतु आवश्यक सभी उपाय किए गए हैं।
स्व-गणना के लिए, व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर एवं अन्य मूलभूत विवरणों के माध्यम से पोर्टल में लॉगइन कर अपनी सुविधा अनुसार जनगणना प्रपत्र भर सकते हैं। सफल सबमिशन के पश्चात एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी (SE ID) प्राप्त होगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करना होगा। स्व-गणना सुविधा से लोगों को प्रगणक के आगमन से पूर्व अपनी सुविधा अनुसार जानकारी भरने की स्वतंत्रता मिलेगी। पूर्व की भांति प्रगणक अपने आवंटित ब्लॉकों में घर-घर जाकर गणना करेंगे, जबकि स्व-गणना इस बार एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में प्रदान की गई है।
(एसई पोर्टलपरजाएं (se.census.gov.in) →मोबाइलनंबरसेलॉगइनकरें→मानचित्रपरस्थानचिन्हितकरें→परिवारकाविवरणभरें→जानकारीसबमिटकरें→ SE ID प्राप्तकरें→प्रगणकको SE ID दें→डेटाकोपुष्टिकरजनगणनामेंसम्मिलितकिया जाएगा)
जनगणना के प्रथम चरण (HLO) का पूर्व-परीक्षण नवंबर 2025 में सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में लगभग 5000 ब्लॉकों में किया गया। इसमें गणना पद्धति, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण, प्रश्नावली,ऐप एवं पोर्टल सहित डेटा संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण तक सभी गतिविधियों का परीक्षण किया गया।
01.01.2026 से 31.03.2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों को स्थिर (फ्रीज़) कर दिया गया है। जनगणना 2027 का संचालन 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों, 7,092 उप-जिलों, 5,128 सांविधिक नगरों, 4,580 जनगणना नगरों तथा लगभग 6,39,902 गांवों में किया जाएगा।
जनगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु व्यापक व्यवस्था की गई है। 100राष्ट्रीय प्रशिक्षकों को विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिन्होंने लगभग 2000 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया है। ये मास्टर ट्रेनर्स लगभग 45,000 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जो आगे लगभग 31 लाख प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को लगभग 80,000 बैचों में प्रशिक्षण देंगे। सभी प्रशिक्षण सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की गई है ताकि अंतिम स्तर पर कार्यरत प्रगणक एवं पर्यवेक्षक समय पर गुणवत्तापूर्ण डेटा एकत्र कर सकें।
अनुलग्नक
राज्य एवं संघराज्यक्षेत्रवारमकानसूचीकरणएवंमकानोंकीगणनातथास्व-गणना अवधि
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
स्व-गणना (Self-Enumeration) अवधि
मकानसूचीकरण एवं मकानोंकीगणना (Houselisting & Housing Census) अवधि
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम
1 अप्रैल से 15 अप्रैल
16 अप्रैल से 15 मई
गुजरात*, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव
5 अप्रैल से 19 अप्रैल
20 अप्रैल से 19 मई
उत्तराखंड
10 अप्रैल से 24 अप्रैल
25 अप्रैल से 24 मई
मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा
16 अप्रैल से 30 अप्रैल
1 मई से 30 मई
बिहार
17 अप्रैल से 1 मई
2 मई से 31 मई
तेलंगाना
26 अप्रैल से 10 मई
11 मई से 9 जून
पंजाब
30 अप्रैल से 14 मई
15 मई से 13 जून
दिल्ली (दिल्ली नगर निगम), महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान और झारखंड**
1 मई से 15 मई
16 मई से 14 जून
उत्तर प्रदेश
7 मई से 21 मई
22 मई से 20 जून
जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी
17 मई से 31 मई
1 जून से 30 जून
हिमाचल प्रदेश
1 जून से 15 जून
16 जून से 15 जुलाई
केरल और नागालैंड
16 जून से 30 जून
1 जुलाई से 30 जुलाई
तमिलनाडु और त्रिपुरा
17 जुलाई से 31 जुलाई
1 अगस्त से 30 अगस्त
असम
2 अगस्त से 16 अगस्त
17 अगस्त से 15 सितंबर
मणिपुर
17 अगस्त से 31 अगस्त
1 सितंबर से 30 सितंबर
पश्चिम बंगाल
निर्धारित किया जाना है
* गुजरात – परिवर्तन संभव
** झारखंड – जनगणना कराने की मंशा की अधिसूचना जारी, HLO अवधि अधिसूचित की जाएगी
जनता दरबार में आये दिव्यांग को मिली इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल
लंबित म्यूटेशन के मामलों को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री का कड़ा रुख
कई अंचल अधिकारियों को लगायी फटकार, समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश
रांची,31.03.2026 समाहरणालय में आयोजित साप्ताहिक जनता दरबार(30.03.2026) में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक बार फिर संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की।
जहां एक ओर दिव्यांग को त्वरित सहायता देकर उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाई गई, वहीं दूसरी ओर राजस्व एवं जनकल्याणकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। जनता दरबार में प्राप्त प्रत्येक शिकायत पर गंभीरता से सुनवाई करते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दिव्यांग को मिली नई इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल
रामबाबू शर्मा जब जनता दरबार में अपनी समस्या लेकर समाहरणालय पहुंचे तो दूसरे तल्ले तक आने में उन्हें काफी कठिनाई हुई। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने उनकी परेशानी को समझते हुए तत्काल इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। समाहरणालय से लौटते समय उनके चेहरे की मुस्कान प्रशासन की संवेदनशीलता की गवाही दे रही थी। उन्होंने उपायुक्त द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।
माण्डर अंचल में लंबित म्यूटेशन पर सख्त रुख
उपायुक्त न्यायालय के आदेश के बावजूद नामांतरण लंबित रहने की शिकायत पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा माण्डर सीओ से जवाब-तलब किया गया। दो दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश के साथ चेतावनी दी गई कि लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
नगड़ी अंचल में बार-बार म्यूटेशन अस्वीकृति पर जवाबदेही तय
दाखिल-खारिज आवेदन को बार-बार अस्वीकृत किए जाने पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सीओ नगड़ी को फाइल के साथ समाहरणालय तलब किया। साथ ही संबंधित सीआई एवं कर्मचारी को शो-कॉज जारी करने का निर्देश दिया गया।
सिल्ली अंचल में लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश
लंबित दाखिल-खारिज के मामले में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सीओ को निर्देश दिया कि आवेदक से मिलकर नियमानुसार शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।
नामकुम अंचल में ऑनलाइन रसीद निर्गत नहीं होने पर जांच
लंबे समय से ऑनलाइन रसीद निर्गत नहीं होने की शिकायत पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जांच के आदेश दिए और संबंधित कर्मियों को शोकॉज करने का निर्देश दिया।
मंईयां सम्मान योजना से वंचित महिलाओं को राहत
राहे प्रखंड के होटलो पंचायत की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलने पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बीडीओ को निर्देशित किया कि सत्यापन कर लाभ पुनः शुरू कराया जाए।
गंभीर बीमारी के इलाज हेतु राशन कार्ड में नाम जोड़ने का निर्देश
सदर अंचल की मशुदा के आवेदन पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित पदाधिकारी को निर्देशित किया। राजस्व एवं कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ीं अन्य शिकायतों पर भी उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।
जनता दरबार के माध्यम से उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि आमजनों की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की प्राथमिकता है कि हर पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ समय पर मिले तथा राजस्व से जुड़े मामलों का पारदर्शी एवं त्वरित निष्पादन सुनिश्चित हो।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, की अध्यक्षता में बैठक
जिले में वर्तमान समय में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता में आई कमी तथा इससे प्रभावित आम नागरिकों, छोटे-बड़े होटल-रेस्तरां, ढाबा संचालकों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा
किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
CCL अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी उत्पादन क्षमता, परिवहन व्यवस्था और वितरण नेटवर्क को मजबूत करें ताकि राँची जिले में कोयले की कोई कमी न रहे
राँची,31.03.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, की अध्यक्षता में आज समाहरणालय ब्लॉक-ए स्थित सभागार में LPG सिलेंडरों की कमी को देखते हुए स्थानीय एवं आम जनता के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिले में वर्तमान समय में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता में आई कमी तथा इससे प्रभावित आम नागरिकों, छोटे-बड़े होटल-रेस्तरां, ढाबा संचालकों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। LPG की कमी के कारण कई क्षेत्रों में कोयले की मांग बढ़ी है, जिसके दृष्टिगत जिला प्रशासन ने कोयले की नियमित, पर्याप्त और सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का निर्णय लिया है।
श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने देना चाहता। LPG संकट की स्थिति में कोयला एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम आ सकता है, इसलिए कोयले की सप्लाई चेन को मजबूत करना और कालाबाजारी को रोकना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने जोर दिया कि कोयले की उपलब्धता न केवल मात्रा में पर्याप्त हो, बल्कि गुणवत्ता वाली और उचित मूल्य पर आम जनता तक पहुंचे।
बैठक में श्री के. दीपाकृष्णन, महाप्रबंधक सेल, श्री दिनेश गुप्ता, महाप्रबंधक NK क्षेत्र, श्री विशंभर प्रबंधक सेल, जिला खनन पदाधिकारी राँची, मो. अबु हुसैन और मुख्यालय के सभी संबंधित Central Coalfields Limited (CCL) अधिकारियों शामिल हुए।
जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु निम्नलिखित निर्देश देते हुए इन बिंदुओं पर चर्चा की गई :
– कोयले की उपलब्धता बढ़ाने संबंधी प्रासंगिक योजनाएँ और कार्यक्रम।
– स्थानीय स्तर पर कोयला वितरण की व्यवस्था।
– *CSR गतिविधियों* के अंतर्गत आम जनता, छोटे व्यापारियों और प्रभावित समुदायों के लिए सहयोगात्मक पहल।
– कालाबाजारी और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र।
सभी पक्षों ने समन्वय बनाकर त्वरित समाधान निकालने पर सहमति जताई।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने CCL अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी उत्पादन क्षमता, परिवहन व्यवस्था और वितरण नेटवर्क को मजबूत करें ताकि राँची जिले में कोयले की कोई कमी न रहे। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिया कि बैठक में उठाए गए सभी बिंदुओं पर शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए और उसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि LPG की कमी की स्थिति में आम नागरिकों को वैकल्पिक ईंधन (कोयला) की सुविधा प्रदान करना हमारा दायित्व है। साथ ही, किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह बैठक जिला प्रशासन की जनहितैषी सोच और त्वरित प्रतिक्रिया का उदाहरण है, जिसमें आम जनता की सुविधा को सर्वोपरि रखा गया है।
पर्यटन स्थलों पर सौर ऊर्जा लाइट, सुरक्षा व्यवस्था एवं विकास कार्यों को गति देने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय
*राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर
“झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है:- उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,30.03.2026 – उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय ब्लॉक – ए स्थित सभागार में जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची की शासी निकाय एवं कार्यकारिणी समिति की संयुक्त वार्षिक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में माननीय लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों के प्रतिनिधि, माननीय विधायकों के प्रतिनिधि तथा उप विकास आयुक्त, राँची, श्री सौरभ भुवनिया, वन प्रमंडल पदाधिकारी/वन संरक्षक, राँची, श्रीकांत, वन प्रमंडल पदाधिकारी, खूँटी, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर राँची, श्री कुमार रजत, जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची, श्री अखिलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक मुख्यालय -1, श्री अमर कुमार पांडेय, सहायक नगर आयुक्त, राँची नगर निगम; कार्यपालक अभियंता, NREP-I एवं NREP-II, राँची; कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्, राँची; जिला अभियंता, जिला परिषद्, राँची एवं अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हुए।
राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर
बैठक में विगत वर्षों में पर्यटन विकास हेतु किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी योजनाओं पर गहन चर्चा हुई। राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं अनुशंसाएँ:
(1) विगत वर्षों के कार्यों की समीक्षा: बैठक में पिछले वर्षों में पर्यटन विकास के अंतर्गत कराए गए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
(2) कार्य योजना की समीक्षा: गत वर्ष जिला के पर्यटकीय स्थलों के विकास एवं पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था हेतु तैयार की गई कार्य योजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
(3) सौर ऊर्जा संचालित लाइटों का अधिष्ठापन: राँची जिले अंतर्गत सभी अधिसूचित पर्यटक स्थलों पर आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा से संचालित लाइटें लगाने का निर्णय लिया गया। इससे पर्यटक स्थलों पर रात्रिकालीन सुविधा बढ़ेगी तथा पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित होगा।
(4) मारशली पहाड़ का पर्यटकीय विकास: राँची जिले में स्थित मारशली (मारसिल्ली) पहाड़ में हाई मास्ट लाइट लगाने एवं समग्र पर्यटकीय विकास करने संबंधी विस्तृत योजना तैयार करने की अनुशंसा की गई। यह पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण एवं धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
(5) सूचना पट्टों का अधिष्ठापन: सभी पर्यटक स्थलों पर पर्यटन स्थल की जानकारी, निकटवर्ती क्षेत्र के पुलिस पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूचना वाले सूचना पट्ट शीघ्रातिशीघ्र स्थापित करने की अनुशंसा की गई। इससे पर्यटकों को आवश्यक जानकारी एवं आपात स्थिति में मदद आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
(6) देवड़ी मंदिर का विकास: राँची जिले अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध देवड़ी (देवरी) मंदिर के पर्यटकीय विकास को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण करने की अनुशंसा की गई। यह 700 वर्ष पुराना मंदिर 16 भुजाओं वाली मां देवरी (दुर्गा का रूप) को समर्पित है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
(7) तकनीकी जाँच समिति का गठन: उपायुक्त ने सभी माननीयों से प्राप्त पर्यटन विकास संबंधी प्रस्तावों का स्थलीय निरीक्षण कर उनके क्रियान्वयन की संभावनाओं पर प्रतिवेदन तैयार करने हेतु जिला स्तर पर एक तकनीकी विशेषज्ञों की जाँच समिति गठित करने की अनुशंसा की।
(8) सुरक्षा एवं गुणवत्ता पर जोर: उपायुक्त ने सभी पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही, वर्तमान में क्रियान्वित पर्यटकीय विकास योजनाओं की गुणवत्ता को उच्च मानक स्तर पर बनाए रखने हेतु कार्यकारी एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक में राँची जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों जैसे दशम जलप्रपात, हुंडरू जलप्रपात, जोन्हा जलप्रपात, टैगोर हिल, रॉक गार्डन, देवड़ी मंदिर, मारशली पहाड़ आदि के समग्र विकास पर चर्चा हुई। इन स्थलों को और अधिक आकर्षक बनाने, बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, प्रकाश, शौचालय, बैठने की व्यवस्था तथा सुरक्षा को मजबूत करने पर सहमति बनी।
“झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है
उपायुक्त, राँची ने कहा कि राँची को “झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। बैठक में लिए गए निर्णयों को शीघ्र क्रियान्वित किया जाएगा ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और जिले का पर्यटन उद्योग फले-फूले।
नवपदस्थापित अधिकारियों ने आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की
जिला प्रशासन और नवप्रशिक्षित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है
सभी अधिकारियों को जिला प्रशिक्षण के दौरान सक्रिय रहते हुए स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रोत्साहित किया
रांची,30.03.2026 – संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, 2023 के माध्यम से चयनित एवं नियुक्त उप समाहर्त्ताओं को जिला प्रशिक्षण प्राप्त करने के उद्देश्य से राँची जिले में पदस्थापित किया गया है।
जिसपर नवपदस्थापित अधिकारियों ने आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने नवपदस्थापित अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा जिला प्रशासन में अपनी भूमिका निभाते हुए जनसेवा के प्रति समर्पित रहने के साथ-साथ विभिन्न दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, निष्ठा तथा तेज गति से कार्य संपादन पर जोर दिया।
मुलाकात के दौरान उपस्थित नवपदस्थापित अधिकारी निम्न हैं:
1. श्री प्रिंस कुमार
2. श्री दीपक कुमार बर्णवाल
3. श्रीमती दीपमाला
4. सुश्री प्रियंका भारती
5. सुश्री कुमारी श्रेया
6. श्री सतीश कुमार रजक
7. सुश्री अंजली रानी
8. सुश्री पिंकी प्रियंका हेम्ब्रम
9. श्री अनिल कुमार चौधरी
10. श्री पुनीत लॉरेंस एक्का
उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को जिला प्रशिक्षण के दौरान सक्रिय रहते हुए स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रोत्साहित किया।