झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत अपराध से हुई हानि/ क्षति के लिए दी जाएगी मुआवजा की राशि

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित/ आश्रित को मुआवजा का किया गया है प्रावधान

झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत अपराध से हुई हानि/ क्षति के लिए दी जाएगी मुआवजा की राशि

मुआवजा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समक्ष आवेदन किया जा सकता है

रांची,26.02.2026  –  झारखंड सरकार ने झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत किसी भी प्रकार के अपराध से हुई हानि या क्षति के लिए पीड़ित या आश्रित को यथोचित मुआवजा भुगतान का प्रावधान किया है । इसके लिए पीड़ित या उसके आश्रित को न्यूनतम राशि का भुगतान किया जाना है ।

अपराध से हुई हानि या क्षति पर तय की गई है न्यूनतम राशि

विभिन्न प्रकार के अपराध यथा तेजाब हमला से घायल व्यक्ति को क्षति या हानि होने पर प्रतिकर की न्यूनतम राशि 3 लाख रुपये है वहीं बलात्कार के लिए भी 3 लाख रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान है जबकि नाबालिग का शारीरिक शोषण के लिए 2 लाख, मानव तस्करी से पीड़ित का पुनर्वास के लिए 1 लाख , यौन प्रताड़ना (बलात्कार नहीं) के लिए 50 हज़ार ,किसी भी अपराध में हुई मृत्यु में 2 लाख ,स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक )में भी 2 लाख , आंशिक विकलांगता(40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत ) में 1 लाख रुपये, शरीर का 25 प्रतिशत से अधिक जलना (तेज़ाब हमला को छोड़कर) में 2 लाख रुपये, भूर्ण हानि में 50 हज़ार रुपये, प्रजनन क्षमता की हानि में 1.5 लाख रुपये, सीमा पर दो तरफ़ा फ़ायरिंग से पीड़ित महिला के स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक) या मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता (40 प्रतिशत या अधिक) पर 1 लाख रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान किया गया है साथ ही किसी भी अपराध में यदि शरीर के किसी भाग या अंग की हानि हो जिसके चलते 40 प्रतिशत से कम विकलांगता होने पर 50 हज़ार रुपये , बाल पीड़ित की साधारण हानि या क्षति 10 हज़ार रुपये और कोई अन्य पीड़ित का पुनर्वास पर 50 हज़ार रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान किया गया है ।

मुआवजा राशि का निर्धारण

मुआवजा राशि का निर्धारण पीड़ित व्यक्ति को हुई हानि या क्षति , उपचार में हुए व्यय,अन्त्येष्टि में हुए खर्च आदि के रूप में अनुषंगिक व्यय सहित पुनर्वास के लिए अपेक्षित न्यूनतम रकम के आधार पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा किया गया है ।

झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत मुआवज़ा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सक्षम आवेदन किया जा सकता है।

योजना में यह भी प्रावधान है कि यदि पीड़ित व्यक्ति की उम्र 14 वर्ष से कम है तो प्रतिकर की रकम में विनिर्दिष्ट रकम से 50 प्रतिशत अधिक की बढ़ोतरी की जा सकेगी ।

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने पारदर्शी और त्वरित एनओसी अनुमोदन के लिए संशोधित राजमार्ग प्रवेश पोर्टल का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ईंधन स्टेशनों, सड़क किनारे की सुविधाओं, निजी संपत्तियों, विश्राम  परिसरों, संपर्क सड़कों और ऐसी अन्य सुविधाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आसानी से प्राप्त करने के लिए उन्नत राजमार्ग प्रवेश वेब पोर्टल का शुभारंभ किया।

सरकार की व्यापार सुगमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप, मंत्रालय ने अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इस  पोर्टल का विकास किया है। पोर्टल को http://rajmargpravesh.morth.gov.in पर एक्सेस किया जा सकता है।

 

नए राजमार्ग प्रवेश पोर्टल के माध्यम से नागरिक, व्यवसाय और संगठन, राष्ट्रीय राजमार्गों से आने जाने तथा उसके आसपास निजी संपत्तियों, उद्योगों और राजमार्ग किनारे की सुविधाओं से सम्बन्धित अनुमतियों के लिए सरल तरीके से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पोर्टल का उपयोग सरकारी और निजी संगठन राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ साथ या उसके आसपास पानी की पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, विद्युत लाइनें और अन्य सेवाएं बिछाने की अनुमति प्राप्त करने के लिए भी कर सकते हैं।

नया पोर्टल अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा, जिससे नागरिकों और व्यवसायों को समय और प्रयास बचाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में सचिव (सड़क परिवहन) वी उमाशंकर, महानिदेशक (सड़क परिवहन) और विशेष सचिव विनय कुमार राजवत, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सदस्य (प्रशासन) विशाल चौहान और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने श्री बांके बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना की; हाथरस में कोल्ड स्टोरेज सुविधा का जायजा लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम ने आज मथुरा जिले के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर का दौरा किया और देश के सभी नागरिकों के लिए शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना की।

 

इसी बीच केंद्रीय मंत्री ने हाथरस जिले के सदाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बांस अमरू गांव में स्थित आलू के शीत भंडारण केंद्र का भी निरीक्षण किया। अपने दौरे के दौरान उन्होंने भंडारण व्यवस्था, शीत श्रृंखला प्रणाली और किसानों को प्रदान की जा रही अन्य सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और प्रबंधन को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, भंडारण क्षमता बढ़ाने और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बांस अमरू गांव में स्थानीय निवासियों और आलू किसानों से भी बातचीत की। इस अवसर पर किसानों ने कृषि उपज के उचित मूल्य, भंडारण सुविधाओं के विस्तार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनते हुए, उन्हें आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण, आय वृद्धि और कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस दौरे से सरकार की आध्यात्मिक मूल्यों, ग्रामीण विकास और किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

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केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने असम के माजुली में “एक पेड़ माँ के नाम” नामक वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने 25 फरवरी, 2026 को माजुली जिले के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान विभिन्न विकासात्मक और जन-संपर्क कार्यक्रमों में भाग लिया।

श्री कमलेश पासवान ने गरामुर स्थित कोर्ट फील्ड के समीप “एक पेड़ माँ के नाम” नामक वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके पश्चात, श्री पासवान ने गुबिनपुर मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र (AWC) और गुबिनपुर एल.पी. स्कूल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने वहाँ उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया, बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया और जमीनी स्तर पर शिक्षा एवं बाल कल्याण सेवाओं को मजबूत करने में अभिभावकों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, पोषण और बुनियादी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

 

इसके बाद श्री पासवान ने एकीकृत उपायुक्त कार्यालय (Integrated DC Office), गरामुर के सभागार में “विकसित भारत – रोजगार की गारंटी और आजीविका मिशन – ग्रामीण (VB-G RAM-G)” विषय पर आयोजित एक सेमिनार में भाग लिया । इस कार्यक्रम में माजुली के पंचायती राज संस्था (PRI) के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के कर्मचारी उपस्थित थे। सेमिनार के दौरान, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

सेमिनार के बाद, केंद्रीय राज्य मंत्री ने मीडिया को संबोधित किया और अपने दौरे के परिणामों के बारे में प्रेस को जानकारी दी । उन्होंने माजुली में विभिन्न ग्रामीण विकास पहलों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और समग्र एवं समावेशी ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग को दोहराया।

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साइबर धोखाधड़ी से सावधान रहें: रेलवे पेंशनभोगियों से जालसाजों से सतर्क रहने का आह्वान

नई दिल्ली – यह बात सामने आई है कि कुछ साइबर जालसाज रेलवे अधिकारियों के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर रहे हैं और एसएमएस/व्हाट्सएप संदेश भेज रहे हैं, जिसमें पीपीओ अपडेट, केवाईसी सत्यापन, अतिरिक्त पेंशन लाभ आदि के बहाने व्यक्तिगत और वित्तीय विवरण मांगे जा रहे हैं।

पेंशनभोगियों को सूचित किया जाता है कि रेलवे पीपीओ या सेवा रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए कोई लिंक या संदेश नहीं भेजता है। किसी भी रेलवे अधिकारी को फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक विवरण, ओटीपी, पासवर्ड या कोई भी गोपनीय जानकारी मांगने का अधिकार नहीं है।

पेंशनभोगियों को सतर्क रहने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इस संबंध में जागरूक करने की सलाह दी जाती है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत पुलिस साइबर सेल और संबंधित प्रशासनिक कार्यालय को दी जानी चाहिए।

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भारत रणभूमि दर्शन अभियान में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ध्वजारोहण किया

नई दिल्ली – सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विशिष्ट नागरिक और रक्षा गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में भारत रणभूमि दर्शन अभियान को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का नेतृत्व भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट ने किया। सेना प्रमुख ने इस अवसर पर इसकी राष्ट्रीय महत्वता और रणनीतिक पहुंच की सराहना की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे प्रयास भारत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हैं और वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च आदर्शों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं। इस अभियान ने रणभूमि दर्शन पहल को भी बढ़ावा दिया और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, जो भारत की सुरक्षा रणनीति का आधार हैं।

गुजरात के तटीय शहर द्वारका से 3 फरवरी 2026 को आरंभ हुई 3,400 किलोमीटर लंबी एसयूवी यात्रा ने गुजरात और राजस्थान के प्रमुख युद्धक्षेत्रों और अग्रिम क्षेत्रों को पार किया, जिनमें कच्छ का रण और थार रेगिस्तान भी शामिल थे। अंत में यह यात्रा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर समाप्त हुई।

इस यात्रा मार्ग में द्वारका, भुज, कच्छ का रण, मुनाबाओ, गडरा, लोंगेवाला, जैसलमेर, बीकानेर, अंबाला और नई दिल्ली शामिल थे। यह यात्रा सीमावर्ती सड़कों और पगडंडियों से गुजरी, जिससे दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी का प्रदर्शन हुआ और परिचालन तत्परता तथा आम नागरिकों की पहुंच दोनों को सुगम बनाने वाले उन्नत बुनियादी ढांचे को रेखांकित किया गया।

35 सदस्यीय दल में तोपखाना रेजिमेंट के तोपची, भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। यह अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और राष्ट्रीय एकता की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप था। पूरी यात्रा के दौरान, दल ने पश्चिमी मोर्चे पर स्थित प्रमुख युद्ध स्मारकों और ऐतिहासिक युद्ध स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया।

यह अभियान वीर नारियों, वीरंगनाओं, पूर्व सैनिकों, एनसीसी कैडेटों, छात्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के साथ जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। प्रत्येक पड़ाव पर नागरिक अधिकारियों और स्थानीय समुदायों द्वारा दिखाए गए स्नेह और सम्मान ने सुरक्षा बलों और उनके द्वारा संरक्षित नागरिकों के बीच गहरे बंधन को रेखांकित किया।

पहले भारत रणभूमि दर्शन अभियान का सफल समापन सशस्त्र बलों की अतीत का सम्मान करने, वर्तमान से जुड़ने और भविष्य को प्रेरित करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है – जो भारत के वीर बलिदानों को एक सुरक्षित, एकजुट और गतिशील भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है।

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राष्ट्रपति ने शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (25 फरवरी, 2026) महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने आयुष स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले छह वरिष्ठ वैद्यों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा में कहा गया है कि आरोग्य यानि समग्र स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा सुख है। देश को सशक्त बनाने में स्वस्थ नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देशवासियों को स्वस्थ रखने में आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने अमूल्य योगदान दिया है। योग, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी प्रणालियां उस समय से लोगों की सेवा करती आ रही हैं जब आधुनिक चिकित्सा पद्धति का प्रचलन नहीं था।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे खेतों, रसोई घरों और जंगलों में औषधीय पौधों और स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटियों का बहुमूल्य भंडार मौजूद है। इस बहुमूल्य संपदा का संरक्षण और संवर्धन औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य और संरक्षण में भी योगदान देती है। इसलिए, आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने से न केवल लोगों का शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियां स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं। आज विश्व रोगों की रोकथाम में एकीकृत चिकित्सा के महत्व को पहचान रहा है। दुनिया भर के लोग तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग अपना रहे हैं और आयुर्वेदिक उपचारों और दवाओं से लाभ उठा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, औषधियों का मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदम आयुष प्रणालियों की मान्यता और स्वीकृति को और बढ़ाएंगे। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। अनुसंधान और औषधि विकास के लिए सामान्य दिशानिर्देश अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित किए गए हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के विश्वसनीय, वैज्ञानिक समाधान के रूप में स्थापित करने के लिए अनेक विज्ञान-सम्मत प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक वैज्ञानिक क्रियाकलापों, नवाचारों और वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अधिक सुलभ और लोकप्रिय बनाकर, हम उन्हें समग्र स्वास्थ्य देखभाल पद्धति का अभिन्न अंग बनाने में सफल होंगे।

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एचडी कुमारस्वामी ने निर्माण उपकरण वित्त सम्मेलन में वित्तपोषण इकोसिस्‍टम पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली – केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित छठे वार्षिक निर्माण उपकरण वित्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की अवसंरचना और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को गति देने में एक मजबूत वित्तपोषण संरचना की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

एचडी कुमारस्वामी ने उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा कि सम्मेलन का विषय, “एक लचीली अवसंरचना और निर्माण उपकरण वित्तपोषण इकोसिस्‍टम का निर्माण: वैश्विक पहुंच के लिए घरेलू निर्माण” समयोचित होने के साथ-साथ भारत के विकास पथ के साथ रणनीतिक रूप से भी संरेखित है।

एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और हम आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर मजबूती से अग्रसर हैं। यह विकास पथ बुनियादी ढांचे के विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती और निरंतर पूंजी निवेश से संचालित है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के बुनियादी ढांचे पर दिए जा रहे जोर को रेखांकित करते हुए एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार भौतिक संपत्तियों के साथ-साथ दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता का भी निर्माण कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम न केवल सड़कों और पुलों का निर्माण कर रहे हैं, बल्कि विकसित भारत 2047 की नींव भी रख रहे हैं।”

एचडी कुमारस्वामी ने लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों और प्रोत्साहन ढांचों के माध्यम से निर्माण उपकरण इकोसिस्‍टम को मजबूत करने में भारी उद्योग मंत्रालय की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आवंटन के माध्‍यम से सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई है। इससे आने वाले वर्षों में राजमार्गों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, बंदरगाहों, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना और शहरी विस्तार को संरचनात्मक प्रोत्साहन मिलेगा।

एचडी कुमारस्वामी ने भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित निर्माण और अवसंरचना उपकरण (सीआईई) संवर्धन के लिए प्रस्तावित योजना का भी उल्‍लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च मूल्य वाले और तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देश के भीतर रणनीतिक क्षमता का निर्माण करना और हमारे निर्माताओं को सुरक्षा के साथ नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाना है।”

एचडी कुमारस्वामी ने बताया कि भारतीय निर्माण उपकरण बाजार का वर्तमान मूल्य लगभग 9.5 अरब डॉलर है और वर्ष 2030 तक इसके दोगुने से अधिक होने की आशा है। इस क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025 में 1,40,000 से अधिक इकाइयों की बिक्री की और दशक के अंत तक 25 अरब डॉलर के बाजार में विकसित होने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

एचडी कुमारस्वामी ने उभरती प्रौद्योगिकियों के इस क्षेत्र पर पड़ने वाले परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि स्वचालन, एआई-सक्षम फ्लीट प्रबंधन, पूर्वानुमानित रखरखाव और इलेक्ट्रिक तथा हाइब्रिड निर्माण उपकरण परिचालन दक्षता को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव जैसी सरकारी पहल स्वच्छ और अधिक टिकाऊ औद्योगिक विकास को गति प्रदान कर रही हैं।

श्री कुमारस्‍वामी ने इस बात पर जोर दिया कि एक सुदृढ़ वित्तपोषण प्रणाली का अर्थव्यवस्था पर कई गुना सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निर्माण उपकरण वित्तपोषण की एक मजबूत प्रणाली न केवल निर्माताओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि इससे देश भर के ठेकेदारों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, लॉजिस्टिक्स संचालकों और अवसंरचना विकासकर्ताओं को भी लाभ होगा।

श्री एचडी कुमारस्वामी ने भारत को निर्माण उपकरण विनिर्माण और वित्तपोषण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि निर्माण उपकरण क्षेत्र न केवल भारत की विकास गाथा में भाग ले रहा है, बल्कि इसका निर्माण भी कर रहा है। उन्‍होंने हितधारकों से राष्ट्रीय विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से मजबूत इकोसिस्‍टम के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

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5वीं राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद ने विश्व बैंक समर्थित RAMP कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की

नई दिल्ली – भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के पूसा रोड स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर(एनएएससी) में राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद की पांचवीं बैठक का आयोजन किया। राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद का गठन मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक समर्थित RAMP कार्यक्रम के प्रशासनिक एवं कार्यात्मक निकाय के रूप में किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के बीच समन्वय, केंद्र–राज्य तालमेल को सुदृढ़ करना तथा एमएसएमई क्षेत्र में अनिवार्य सुधारों की प्रगति पर सलाह देना और निगरानी करना है। RAMP कार्यक्रम का लक्ष्य बाजार और ऋण तक पहुंच में सुधार करना, केन्द्र और राज्यों में संस्थागत क्षमता एवं शासन व्यवस्था को मजबूत करना, केन्द्र–राज्य संबंधों और साझेदारियों को बेहतर बनाना, विलंबित भुगतानों की समस्याओं का समाधान करना तथा एमएसएमई के हरित(ग्रीन) रूपांतरण को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री जीतन राम मांझी ने की। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से एमएसएमई क्षेत्र के संवर्धन और विकास की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया, ताकि उनके प्रयासों से इस क्षेत्र में आय और रोजगार में वृद्धि हो सके तथा देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान मिल सके। उन्होंने एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए समर्थन की आवश्यकता को दोहराया और केंद्र तथा राज्य स्तर की पहलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर बल दिया।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने उद्यमी भारत पोर्टल(UBP) का शुभारंभ किया। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा विकसित एक एकीकृत पोर्टल है, जिसे डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप एमएसएमई सेवाओं के लिए वन-स्टॉप शॉप के रूप में तैयार किया गया है। उद्यमी भारत पोर्टल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के सभी पोर्टल और सेवाएं, साथ ही अन्य केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्य सरकारों के पोर्टल और सेवाओं को भी एकीकृत किया गया है। माननीय केंद्रीय मंत्री ने एमएसएमई टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म (MTTP) का भी शुभारंभ किया। यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो एमएसएमई को उन्नत प्रौद्योगिकियों, परीक्षण सुविधाओं, कौशल विकास तथा बौद्धिक संपदा (IP) के व्यावसायीकरण से संबंधित सहायता तक पहुँच प्रदान करता है।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने एमएसएमई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्लेटफ़ॉर्म(MTTP) की भी शुरूआत की, जो एक यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिससे एमएसएमई को उन्नत प्रौद्योगिकयां, परीक्षण सुविधाएं, कौशल और और आईपी व्यावसायीकरण समर्थन मिल सकेगा। माननीय मंत्री ने महिला उद्यमियों तथा वंचित वर्गों के स्वामित्व वाले एमएसएमई को समर्थन तेज़ी से और अधिक गहराई से देने की आवश्यकता पर  जोर दिया, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।

विश्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक, सेबेस्टियन एकार्ड्ट, ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के साथ RAMP कार्यक्रम के लिए साझेदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। यह कार्यक्रम एमएसएमई के हरित रूपांतरण, लैंगिक समावेशन, वित्त तक बेहतर पहुंच तथा ऑनलाइन विवाद समाधान जैसे नवाचारों को समर्थन प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत भर में निजी पूंजी को सक्षम और संगठित करने, उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने तथा सतत रोजगार सृजन को समर्थन देने के लिए विश्व बैंक के प्रयासों को और अधिक बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

अपर सचिव एवं विकास आयुक्त, डॉ. रजनीश, ने पिछले 4-वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र की वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में RAMP के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की पहलों का लाभ उठाएं, जिससे एमएसएमई योजनाओं के लाभ अधक-से-अधिक उद्यमों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि इससे RAMP कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित होगी और देश में एमएसएमई विकास के राष्ट्रीय एजेंडे की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश तथा गोवा, मणिपुर, नागालैंड और ओडिशा राज्यों के प्रतिनिधियों ने RAMP कार्यक्रम के अंतर्गत अपनी सफलता की कहानियां प्रस्तुत कीं। बैठक में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अधिकारियों के साथ भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(सिडबी), राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम(एनएसआईसी) और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।

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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने भोपाल-धनबाद और भोपाल-चोपन एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

नई दिल्ली – रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली स्थित रेल भवन से वर्चुअल माध्यम के ज़रिए ट्रेन संख्या 11631/32 भोपाल-धनबाद-भोपाल नई त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 11633/34 भोपाल-चोपन-भोपाल नई साप्ताहिक एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों में रेल संपर्क और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस परियोजना का शुभारंभ समारोह भोपाल रेलवे स्टेशन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेंद्र शुक्ला, संसद सदस्य श्री आलोक शर्मा और डॉ. राजेश मिश्रा, विधानसभा सदस्य श्रीमती राधा सिंह और श्रीमती रीति पाठक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया।

रेल यात्रियों की सुविधा और मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए सीधे संपर्क की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ये नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं।

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री के ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश में रेल विकास अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान मध्य प्रदेश से सीधे जुड़ने वाली लगभग 48,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

श्री वैष्णव ने कहा कि क्षेत्र के लिए एक बहुप्रतीक्षित परियोजना, इंदौर-मनमाड़ नई रेलवे लाइन को 18,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है। भुसावल-खंडवा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 3,500 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है, जबकि प्रयागराज-मानिकपुर तीसरी लाइन परियोजना को 1,640 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। रतलाम-नागदा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 1,000 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा, इटारसी-नागपुर चौथी रेलवे लाइन परियोजना को 5,400 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी गई है। महत्वपूर्ण इटारसी-भोपाल-बीना चौथी लाइन कॉरिडोर, जो एक बेहद व्यस्त मार्ग है, उसे 4,300 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत किया गया है। वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 8,800 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 5,200 करोड़ रुपए की लागत से गोंडिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दे दी है।

इसनके अलावा जारी अन्य प्रमुख परियोजनाओं में रामगंज मंडी-भोपाल, ललितपुर-सिंगरौली, इंदौर-बुडनी, बीना-कटनी तीसरी लाइन, सतना-रीवा और कटनी-सिंगरौली दोहरीकरण, कटनी ग्रेड सेपरेटर और गेज रूपांतरण परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे रेल क्षमता, समयबद्धता और माल ढुलाई में उल्लेखनीय सुधार होगा।

माल ढुलाई और रसद दक्षता बढ़ाने के लिए, केंद्रीय बजट में पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे का प्रस्ताव रखा गया है, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह नया माल ढुलाई गलियारा मध्य प्रदेश के बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। 2,052 किलोमीटर लंबा यह पूर्व-पश्चिम गलियारा, मौजूदा पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से जुड़ेगा, जिससे पश्चिमी बंदरगाहों तक माल की निर्बाध आवाजाही बेहतर हो पाएगी, मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और औद्योगिक विकास में तेजी आएगी।

उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के ज़रिए मध्य प्रदेश पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों से बेहतर ढंग से जुड़ पाएगा, जिनमें गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाह भी शामिल हैं। महाराष्ट्र में बन रहा वधवन बंदरगाह, जिसके पूरा होने पर दुनिया के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक होने की उम्मीद है, और हजीरा और मुंद्रा जैसे मौजूदा बंदरगाह भी साथ मिलकर राज्य की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएंगे।

इन बंदरगाहों से उच्च गति के माल ढुलाई संपर्क के साथ, मध्य प्रदेश के उद्योगों को कंटेनरीकृत कार्गो या थोक वस्तुओं के निर्यात और आयात दोनों कार्यों में काफी लाभ होगा। इस बेहतर लॉजिस्टिक्स प्रणाली से राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनिर्मित रेल सेवा के शुरू होने पर प्रसन्नता जताई, जिससे सिंगरौली को प्रतिदिन रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। उन्होंने इस विकास को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपहार बताया। उन्होंने श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया और कहा कि सिंगरौली के अलावा, यह ट्रेन सिंगरौली और धनबाद के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भी लाभ पहुंचाएगी, जहां कई निवासी व्यापार, व्यवसाय और रोजगार के ज़रिए जुड़े हुए हैं।

डॉ. यादव ने कहा कि इस सेवा के शुरू होने से झारखंड और बिहार के साथ सीधा रेल संपर्क स्थापित हो गया है, जिससे तीनों राज्यों के निवासियों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह नई रेल सेवा केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

भोपाल-धनबाद-भोपाल नई त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11631/32)

यह ट्रेन भोपाल और धनबाद के बीच कुल 30 स्टेशनों पर रुकेगी। नियमित सेवा के तहत, यह भोपाल से 20:55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 20:30 बजे धनबाद पहुंचेगी। वापसी में, यह धनबाद से 07:20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 07:00 बजे भोपाल पहुंचेगी।

इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के कुल 24 कोच होंगे।

भोपाल-चोपन-भोपाल नई साप्ताहिक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11633/34)

यह ट्रेन भोपाल और चोपन के बीच 15 स्टेशनों पर रुकेगी। नियमित सेवा के तहत, यह भोपाल से रात 8:55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 10:50 बजे चोपन पहुंचेगी। वापसी में, यह चोपन से शाम 17:10 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी।

इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के कोचों सहित कुल 24 कोच होंगे।

नई ट्रेन सेवाओं के लाभ

नई ट्रेन सेवाओं से विदिशा, गंज बसोदा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवारा, खन्ना बंजारी, ब्योहरी, सिंगरौली, चोपन, चंद्रपुरा और धनबाद आदि के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

ये ट्रेनें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच संपर्क को मजबूत करेंगी और सिंगरौली कोयला क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों को राजधानी भोपाल से जोड़ेंगी। इन सेवाओं से तीनों राज्यों में व्यापार, ऊर्जा और खनन क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और भरोसेमंद रेल सेवाओं का लाभ मिलेगा, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। नई ट्रेनें पर्यटन, स्थानीय व्यापार, उद्योग और शिक्षा को भी बढ़ावा देंगी और दैनिक यात्रियों और आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सुगम यात्रा सुनिश्चित करेंगी।

इन ट्रेनों का शुभारंभ सरकार की रेल अवसंरचना को मजबूत करने, यात्री सुविधाओं को बढ़ाने और क्षेत्रों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश में रेल विकास

भारत का हृदय कहलाने वाला मध्य प्रदेश, इस विकास यात्रा में अहम भूमिका निभा रहा है। राज्य में रेल संपर्क का विस्तार, नई लाइनों का निर्माण और बुनियादी ढांचे का मज़बूत होता व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं, जिससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि देश की समग्र प्रगति में भी योगदान मिल रहा है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में 2,93,030 करोड़ रुपए और सुरक्षा के लिए रिकॉर्ड 1.20 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश को रेलवे विकास के लिए 15,188 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो 2009-2014 की अवधि की तुलना में 24 गुना अधिक है। यह रिकॉर्ड आवंटन मध्य प्रदेश में रेलवे अवसंरचना, सुरक्षा, यात्री सुविधाओं और माल ढुलाई क्षमता को नई रफ्तार देगा।

वर्तमान में, राज्य में 1,18,379 करोड़ रुपए की रेल परियोजनाएं चल रही हैं और मध्य प्रदेश में रेलवे लाइनों का 100% विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 80 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें से कुछ का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा 2025 में किया जा चुका है।

सुरक्षा के क्षेत्र में, मध्य प्रदेश में 4,591 किलोमीटर मार्ग पर कवच प्रणाली लागू करने की योजना तैयार की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए, राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की 5 जोड़ी और अमृत भारत एक्सप्रेस की 4 जोड़ी ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इस वर्ष अतिरिक्त वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस और नई ट्रेनें भी शुरू की जाएंगी।

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भारत और केन्या ने वर्चुअल माध्यम से कृषि पर प्रथम संयुक्त कार्य समूह की बैठक की

नई दिल्ली – भारत और केन्या के बीच आज कृषि पर प्रथम संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक वर्चुअल माध्यम से गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (आईसी) श्री अजीत कुमार साहू और केन्या के विदेश एवं प्रवासी मामलों के मंत्री श्री स्टीफन रोनो ने की।

दोनों पक्षों के अधिकारियों ने अपने-अपने कृषि माहौल में वर्तमान प्राथमिकताओं, प्रमुख चुनौतियों और उभरते नए पहलों पर विचार साझा किए तथा कृषि और संबंधित क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के महत्व पर बल दिया।

दोनों पक्षों ने कृषि अनुसंधान, बाजार तक पहुंच, कृषि यंत्रीकरण, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण पहलों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा की।

इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के फसल प्रभाग, एम एंड टी प्रभाग, एनआरएम प्रभाग, पीपी प्रभाग, विस्तार प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी, केन्या में भारत के उच्चायोग तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने यशोदा मेडिसिटी में गंभीर स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में प्रौद्योगिकी का उपयोग सुदृढ़ करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – गंभीर स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन किया। यह कमांड सेंटर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केंद्रीकृत निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, ताकि नैदानिक परिणामों में सुधार हो तथा गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं समन्वित बनाया जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए 65 विभिन्न विशेषज्ञताओं में उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने तथा एक मल्टी स्पेशियलिटी तंत्र विकसित करने के लिए यशोदा मेडिसिटी की सराहना की। उन्होंने ई-आईसीयू सुविधा को एमएमजी जिला अस्पताल के साथ एकीकृत किए जाने को संस्थान की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु सहयोगात्मक प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एआई-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएं समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप, रोगों की पहचान में सटीकता तथा वास्तविक समय में निगरानी को एकीकृत करती हैं, जो आपातकालीन एवं गहन चिकित्सा परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहां तत्काल लिए जाने वाले निर्णय रोगी के उपचार परिणामों को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि एआई-की सहायता से आईसीयू प्रतिकूल नैदानिक परिस्थितियों में प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करते हैं, उच्च जोखिम वाले मामलों की बेहतर पहचान सुनिश्चित करते हैं तथा चिकित्सकों को डेटा-आधारित विश्लेषणात्मक सूचनाओं के माध्यम से अधिक प्रभावी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई आधारित ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन गंभीर देखभाल सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा रोगी सुरक्षा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केन्द्रीय मंत्री ने विस्तृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ‘डिजिटल एवं एआई-सक्षम भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण को प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने स्मरण कराया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रौद्योगिकी के माध्यम से रूपांतरित करने के उद्देश्य से डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप एक समग्र डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आधारशिला रखी थी।

 

उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में 1.81 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा चुके हैं, जिससे समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने एवं उन्हें सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनमें से 50,000 से अधिक केंद्र राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के अंतर्गत प्रमाणित किए जा चुके हैं, जो गुणवत्ता मानकों में सुधार की दिशा में ठोस प्रगति का प्रतीक है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को आगामी दो वर्षों के भीतर एनक्यूएएस प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि देशभर में प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के समान एवं उच्च गुणवत्ता मानकों को संस्थागत रूप दिया जा सके।

श्री नड्डा ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक देश भर में टेलीपरामर्श के माध्यम से 45.2 करोड़ से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं समावेशिता को सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए विकसित किए गए यू-विन (यू-डब्ल्यूआईएन) डिजिटल मंच का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण एवं सतत निगरानी की जाती है, ताकि समय पर प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) तथा टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि यू-विन के अंतर्गत पंजीकरण की संख्या 11.47 करोड़ से अधिक हो चुकी है। यह मंच सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत टीके के माध्यम से 12 रोगों से सुरक्षा हेतु 27 खुराकें प्रदान की जाती हैं, और जिसके परिणामस्वरूप देश में लगभग 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित किया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने रोग नियंत्रण में डिजिटल उपकरणों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों ने क्षय रोग (टीबी) की स्क्रीनिंग को सुदृढ़ बनाया है तथा जांच प्रक्रिया को अधिक सुलभ एवं प्रभावी किया है। उन्होंने बताया कि भारत में टीबी की घटनाओं में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत 7 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि मातृ मृत्यु दर एवं पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर से संबंधित सूचकों में भी भारत ने वैश्विक औसत से बेहतर प्रगति की है। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय डिजिटल ट्रैकिंग प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण तथा लक्षित हस्तक्षेपों के प्रभावी क्रियान्वयन को दिया।

केन्द्रीय मंत्री ने एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ‘साही’ (एस ए एच आई – स्ट्रैटेजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया) पोर्टल के शुभारंभ का भी उल्लेख किया। यह पोर्टल स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी, पारदर्शी एवं नैतिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ‘बोध’ (बी ओ डी एच – बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई) पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य एआई-आधारित स्वास्थ्य समाधानों के परीक्षण, सत्यापन एवं मानकीकरण की एक सुदृढ़ प्रणाली स्थापित करना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में इन प्रौद्योगिकियों का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि टीकाकरण एवं किफायती औषधि उत्पादन के क्षेत्र में भारत विश्व स्तर पर एक अग्रणी देश के रूप में उभरा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जहाँ पूर्व में टीकों एवं उपचारों के विकास में दशकों का समय लग जाता था, वहीं भारत ने मात्र नौ माह के भीतर दो स्वदेशी कोविड-19 टीकों का विकास किया तथा 220 करोड़ से अधिक खुराकें प्रदान कीं। यह व्यापक टीकाकरण अभियान पूर्णतः डिजिटल प्रमाणन प्रणाली के समर्थन से सफलतापूर्वक संचालित किया गया।

आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तपोषित स्वास्थ्य सहायता योजना है। इसके अंतर्गत लगभग 62 करोड़ लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक-आर्थिक स्तर के 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है। उन्होंने ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत विस्तारित वित्तीय सुरक्षा तथा उपचार तक सुव्यवस्थित पहुंच के कारण कैंसर की पहचान के 90 दिनों के भीतर उपचार प्रारंभ करना संभव हो पाया है। यह योजना समयबद्ध चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार में होने वाली देरी को कम करने में अपनी प्रभावशीलता प्रदर्शित कर रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य तंत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल नवाचार का एकीकरण एक परिवर्तनकारी नीतिगत बदलाव को दर्शाता है, जिससे देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, लागत, गुणवत्ता एवं समता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

यशोदा मेडिसिटी में स्थापित एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर के बेस कमांड सेंटर को एमएमजी जिला अस्पताल की आईसीयू सुविधा से जोड़ता है, जिसके माध्यम से गंभीर रूप से बीमार रोगियों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित वास्तविक समय निगरानी संभव हो सकेगी। यह प्रणाली अस्पताल सूचना तंत्र एवं बेडसाइड उपकरणों को एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड से एकीकृत करती है, जहाँ एआई-आधारित विश्लेषण जोखिम वर्गीकरण में सहायता प्रदान करते हैं, नैदानिक स्थिति में गिरावट की स्थिति में प्रारंभिक चेतावनी जारी करते हैं और चौबीसों घंटे विशेषज्ञ निगरानी के माध्यम से समयबद्ध एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करते हैं।

यह पहल जिला अस्पताल स्तर पर गंभीर देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इससे नैदानिक समन्वय में सुधार, उपचार प्रोटोकॉल का मानकीकरण तथा स्थल पर कार्यरत चिकित्सकीय टीमों को ढांचागत मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकेगा। वंचित क्षेत्रों तक विशेषज्ञ निगरानी का विस्तार करते हुए यह मॉडल रोगी उपचार परिणामों में सुधार एवं गुणवत्तापूर्ण गहन चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास करता है, जो देश में डिजिटल स्वास्थ्य एवं गंभीर देखभाल से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के सरकार के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, यशोदा मेडिसिटी के प्रतिनिधि, चिकित्सक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाडे से मुलाकात की

नई दिल्ली – केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लालरिंपुई से मुलाकात की।

श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “आज कार्यालय में छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाडे से मुलाकात की।”

हमने महिलाओं और बच्चों के कल्याण, सशक्तिकरण और समग्र कल्याण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की।

 

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रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत

रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी धर्मपत्नी व विधायक कल्पना सोरेन ने किया.

मतगणना की तैयारियों हेतु संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार, उप विकास आयुक्त, राँची श्री सौरभ कुमार भुवनिया की अध्यक्षता में बैठक

मतगणना में प्रतिनियुक्त होने वाले पुलिस पदाधिकारियों एवं दंडाधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए

जनसामान्य से अपील है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें

रांची,25.02.2026 – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार, उप विकास आयुक्त, राँची श्री सौरभ कुमार भुवनिया की अध्यक्षता में आज दिनांक 25 फरवरी 2026 को ट्रांसपोर्ट नगर रिंग रोड स्थित बज्रगृह (मतगणना) स्थल पर एक महत्वपूर्ण संयुक्त ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दिनांक 27 फरवरी 2026 को राँची नगर निगम एवं बुंडू नगर पंचायत हेतु मतगणना कार्य को सुव्यवस्थित, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

ब्रीफिंग के दौरान मतगणना में प्रतिनियुक्त होने वाले पुलिस पदाधिकारियों एवं दंडाधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। इनमें सुरक्षा व्यवस्था, मतगणना हॉल में अनुशासन बनाए रखना, अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध, बैलट बॉक्सों की सुरक्षित हैंडलिंग, गणना टेबलों पर निगरानी, आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई तथा राज्य निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे।

श्री सौरभ भुवनिया ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 के मतगणना चरण को पूर्ण पारदर्शिता एवं शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूर्ण निष्ठा एवं सजगता के साथ निर्वहन करें।

इस महत्वपूर्ण बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर, राँची, श्री कुमार रजत, अनुमंडल पदाधिकारी बुंडू, श्री किस्टो कुमार बेसरा, पंचायती राज पदाधिकारी, राँची – श्री राजेश कुमार साहू, जिला खेल पदाधिकारी, राँची – श्री शिवेंद्र कुमार सिंह एवं मतगणना से जुड़े अन्य सभी संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

ट्रांसपोर्ट नगर स्थित बज्रगृह मतगणना स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे सुरक्षा घेरा, प्रकाश, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य लॉजिस्टिक तैयारियाँ पूरी कर ली गई है । जिला प्रशासन द्वारा मतगणना को सफल बनाने हेतु निरंतर समन्वय एवं निरीक्षण किया जा रहा है।

जनसामान्य से अपील है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

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भारत-जर्मनी सहयोग भविष्य में जल की निरंतर उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण: आईजीएसटीसी रणनीतिक सम्मेलन 2026 में वक्ताओं के विचार

नई दिल्ली – भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में “एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन” पर रणनीतिक सम्मेलन 2026 का आयोजन किया। इस आयोजन में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, संरक्षणवादियों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को सतत जल शासन और तकनीकी सहयोग पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया।

आईजीएसटीसी की निदेशक डॉ. कुसुमिता अरोरा ने कहा कि यह सम्मेलन प्रमुख हितधारकों यानी सरकारी क्षेत्र की हस्तियों, संरक्षण विशेषज्ञों, अकादमिक अनुसंधानकर्ताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है।

अपने ‘2+2 प्रोजेक्ट्स’ मॉडल के माध्यम से, आईजीएसटीसी भारत और जर्मनी दोनों के शिक्षाविदों और उद्योग जगत को एकजुट करके विभिन्न क्षेत्रों के बीच की बाधाओं को दूर करता है। यह अनूठा सहयोग सुनिश्चित करता है कि अनुसंधान केवल जर्नलों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे औद्योगिक समाधानों और सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में परिवर्तित हो।

भारत का जलपुरुष” के रूप में विख्यात डॉ. राजेंद्र सिंह ने उद्घाटन भाषण में सामुदायिक नेतृत्व वाले जल संरक्षण मॉडल और जल संचयन में पारंपरिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने नदियों के जीर्णोद्धार, पारंपरिक जलाशयों के पुनरुद्धार और स्थानीय समुदायों को जल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए सशक्त बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जल प्रशासन जन-केंद्रित होना चाहिए।  उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दीर्घकालिक स्थिरता न केवल इंजीनियरिंग समाधानों पर बल्कि सामाजिक भागीदारी, व्यवहार परिवर्तन और जल संसाधनों के जमीनी स्वामित्व पर भी निर्भर करती है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जीआईजेड के डॉ. विक्रांत त्यागी ने जल संकट और अपशिष्ट जल प्रबंधन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी क्रियाकलापों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुरक्षित और सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विकेंद्रीकृत उपचार प्रणालियों, चक्रीय जल अर्थव्यवस्था से जुड़े दृष्टिकोणों और उपचार की उन्नत प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के महत्व से अवगत कराया। शिक्षा जगत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनुसंधान को प्रयोगशाला नवाचार से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर क्षेत्र-स्तरीय कार्यान्वयन की ओर बढ़ना चाहिए, विशेष रूप से उन शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां जल की गंभीर कमी है।

प्रोफेसर लिगी फिलिप (आईआईटी मद्रास) ने जल स्थिरता के लिए वैज्ञानिक और प्रणाली-आधारित दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल में उभरते नए रसायनों के कारण होने वाले प्रदूषण के निवारण की तात्कालिकता पर बल दिया।

अपने संबोधन में, भारत में जर्मनी के राजदूत महामहिम डॉ. फिलिप एकरमैन ने विज्ञान, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन के क्षेत्र में भारत-जर्मनी की बढ़ती साझेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन एक साझा वैश्विक चुनौती है। इसके लिए उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और नीतिगत ढांचों में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व पर बल दिया। संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान के प्रति जर्मनी की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए, उन्होंने जलवायु अनुकूलन, पर्यावरण प्रौद्योगिकियों और सतत इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में आईजीएसटीसी जैसे मंचों के माध्यम से भारत-जर्मनी सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

समापन भाषण देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के डॉ. अरिंदम भट्टाचार्य ने जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण और बढ़ती औद्योगिक मांग के संदर्भ में एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जल संबंधी चुनौतियां बहुक्षेत्रीय हैं और इनके लिए प्रौद्योगिकी, शासन और सामुदायिक सहभागिता को मिलाकर अंतःविषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने जमीनी स्तर की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक अनुसंधान, प्रायोगिक परियोजनाओं और नीतिगत एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस सम्मेलन ने सतत जल प्रौद्योगिकियों और सुदृढ़ जल शासन ढांचों को आगे बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। इस सम्मेलन के माध्यम से, आईजीएसटीसी ने स्पष्ट किया कि वह एकीकृत जल प्रबंधन को जलवायु अनुकूलन और स्थिरता मिशनों के अंतर्गत एक प्राथमिकता क्षेत्र मानता है, जिसमें प्रौद्योगिकी विकास, प्रणाली एकीकरण और व्यापक प्रदर्शन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

आईजीएसटीसी और अन्य द्विपक्षीय मंचों के माध्यम से, डीएसटी का उद्देश्य संयुक्त अनुसंधान पहलों को बढ़ावा देना, उद्योग-अकादमिक साझेदारी को प्रोत्साहित करना और पर्यावरण स्थिरता, जन स्वास्थ्य और दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा का समर्थन करने वाले नवीन जल समाधानों के कार्यान्वयन में तेजी लाना है। चर्चाओं में इस बात पर बल दिया गया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, सामुदायिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को संयोजित करने वाले एकीकृत दृष्टिकोण भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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रांची के सदर अस्पताल में आयोजित शोकसभा

 रांची के सदर अस्पताल में आयोजित शोकसभा में हमारे प्रिय चिकित्सक डॉ. विकास गुप्ता को श्रद्धांजलि देने पहुँचे स्वास्थ्य मंत्री।

उन्होंने कहा – मैं वहाँ स्वास्थ्य मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक चिकित्सक और एक साथी के रूप में पहुँचा था। सफेद कोट पहनने वाला जब दूसरे सफेद कोट को खो देता है, तो वह पीड़ा शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। सच में ऐसा लगा जैसे हमने अपना एक सगा भाई, अपना हमदर्द, अपना साथी खो दिया हो।

पूरा वातावरण शोक में डूबा था… हर डॉक्टर की आँखें नम थीं, हर चेहरा उदास था। सन्नाटा भी मानो रो रहा था।

डॉ. विकास एक साधारण परिवार से उठकर सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल बने। वे सिर्फ एक डॉक्टर नहीं थे, वे उम्मीद थे… वे भरोसा थे… वे उन गरीब मरीजों की आस थे जो अस्पताल में इलाज के साथ सहारा भी ढूंढते हैं।

विमान एम्बुलेंस में उनका असामयिक निधन हम सभी के लिए गहरी और अपूरणीय क्षति है। उनका जाना चिकित्सा जगत के लिए एक ऐसी रिक्तता है जिसे भर पाना संभव नहीं।

मैं स्वयं एक डॉक्टर हूँ, इसलिए इस दर्द को दिल की गहराइयों से महसूस कर रहा हूँ। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मैंने उनके परिवार को भरोसा दिलाया है कि सरकार हर संभव सहायता देगी। लेकिन सच यह है कि किसी अपने की कमी को कोई सहायता पूरा नहीं कर सकती।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।

डॉ. विकास गुप्ता अमर रहें।

आपकी सेवा, आपका समर्पण हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने दिल्ली-एनसीआर में धूल रहित और टिकाऊ शहरी सड़कों के लिए मानक संरचना और सड़क परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली के कार्यान्वयन हेतु समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कार्यक्रम की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सड़क धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन में आज एनसीआर राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान) के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)/शहरी विकास विभागों, सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और नई दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के बीच चार समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

ये समझौता ज्ञापन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्‍यूएम) द्वारा जारी शहरी सड़कों के पक्कीकरण और हरियालीकरण के मानक ढांचे तथा दिनांक 07.01.2025 के विस्तृत दिशानिर्देश के अनुरूप हैं। इस संरचना का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सड़क चौराहों, मार्ग के उपयोग, हरियालीकरण उपायों और सड़क रखरखाव प्रोटोकॉल में सुधार करना है। सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल नियंत्रण के लिए संरचित कार्य योजना तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों में इस प्रकार के समन्वित कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

 

श्री यादव ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि एनसीआर राज्यों और उनके संबंधित नगर निगमों की वार्षिक कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई है, जिनमें अकेले दिल्ली में 448 कार्य बिंदु शामिल हैं। धूल प्रदूषण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री यादव ने कहा कि धूल इस क्षेत्र में पीएम 10 प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि इस पहल के सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया जाना चाहिए और यातायात जाम एवं धूल प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित सड़कों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाना चाहिए। हरियाली के महत्व पर जोर देते हुए श्री यादव ने कहा कि खुले क्षेत्रों में कम पानी की आवश्यकता वाले पौधे लगाए जाने चाहिए, जिनकी लगभग 30 उपयुक्त प्रजातियों की पहचान पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पहले ही की जा चुकी है।

श्री यादव ने सड़कों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक उपायों को आगे बढ़ाने में सीएक्यूएम, एनसीआर राज्य सरकारों, सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के समन्वित प्रयासों की सराहना की और समयबद्ध कार्यान्वयन तथा सशक्त डिजिटल निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए से अनुरोध किया गया कि वे अपनी सड़क डिजाइन योजनाओं में हरित घटकों को शामिल करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनसीआर में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के तहत ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी हरित दिशानिर्देशों को विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

श्री यादव ने इस पहल को ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रयास के माध्यम से नीति निर्माता, विशेषज्ञ और कार्यान्वयन एजेंसियां ​​एकजुट हुई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यकलापों में कण पदार्थ उत्सर्जन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्‍होंने रेखांकित किया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना मात्र एक प्रक्रियागत अभ्‍यास नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रतिबद्धता और मिशन है जिसका उद्देश्य ठोस सामाजिक प्रभाव के साथ जमीनी स्तर पर स्‍पष्‍ट परिवर्तन लाना है।

इससे पूर्व, 10.06.2025 को सीएक्यूएम ने मानक संरचना के कार्यान्वयन को सुगम बनाने और संस्थागत एवं तकनीकी निगरानी प्रदान करने के लिए एक परियोजना निगरानी प्रकोष्ठ (पीएमसी) की स्थापना हेतु सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। आज हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन, राज्य सड़क स्वामित्व एजेंसियों को सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के साथ औपचारिक रूप से एकीकृत करके इस ढांचे को विस्तारित और प्रचालित करते हैं।

इन समझौता ज्ञापनों का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित मॉड्यूल के माध्यम से सीएक्यूएम मानक ढांचे के अनुसार सड़क विकास कार्यों का व्यवस्थित कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करना है:

  • मार्गाधिकार (आरओडब्ल्यू), ज्यामितीय डिजाइन और क्रॉस-सेक्शनल तत्वों को मानकीकृत करने के लिए स्थान मानक और क्रॉस-सेक्शन डिजाइन;
  • धूल को दबाने के लिए हरियाली उपायों के माध्यम से सड़क की धूल में कमी;
  • निवारक और पूर्वानुमानित रखरखाव के लिए वेब-जीआईएस आधारित सड़क परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली (आरएएमएस) को संस्थागत रूप देने हेतु आरएएमएस के माध्यम से सड़क रखरखाव कार्यप्रणालियों को लागू करना;
  • सड़क निर्माण के लिए नई प्रौद्योगिकियां रखरखाव, यंत्रीकरण और निगरानी प्रौद्योगिकियों को सुदृढ़ करेंगी।

दायरा और कार्यान्वयन

समझौता ज्ञापनों के तहत:

  • संबंधित एनसीआर राज्य एजेंसियां ​​सीएक्यूएम दिशानिर्देशों के अनुसार सड़क विकास, पक्कीकरण और हरियाली कार्यों को लागू करेंगी ;
  • सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए तकनीकी सहायतासलाहकार सेवाएंमार्गदर्शन और निगरानी संबंधी जानकारी प्रदान करेंगे ;
  • डेटा-संचालित योजनाप्राथमिकता निर्धारण और रखरखाव अनुसूची को सक्षम बनाने के लिए रैम्स को विकसित और कार्यान्वित किया जाएगा ;
  • आवश्यकतानुसार, तकनीकी दायरे और वित्तीय व्यवस्थाओं का विवरण देते हुए अलग-अलग परियोजना समझौते निष्पादित किए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्तनिम्नलिखित प्रमुख घटकों को लक्षित किया जाएगा :

  • पीसीआई (पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स) जैसी अवधारणाओं और सड़क अवसंरचना के समय पर रखरखाव का उपयोग करके सड़क पुनर्विकास का मूल्यांकन;
  • सड़क मार्ग के भीतर संरचित हरियाली उपायों के माध्यम से सड़क की धूल को कम करना, जिसमें डिवाइडर, फुटपाथ, यातायात के हॉटस्पॉट और फ्लाईओवर के नीचे देशी प्रजातियों के वृक्षारोपण शामिल हैं;
  • वैज्ञानिक सड़क स्थिति आकलन, रखरखाव योजना और निगरानी के लिए वेब-जीआईएस आधारित रैम्स का विकास और चालू करना;
  • सड़क निर्माण और रखरखाव में टिकाऊ और कम उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाना;
  • एनसीआर राज्यों में चिन्हित सड़क नेटवर्क की व्यापक सड़क सूची तैयार करना और डिजिटल मानचित्रण करना;
  • आधुनिक डेटा संग्रह प्रौद्योगिकियों का उपयोग, जिनमें नेटवर्क सर्वे व्हीकल्स (एनएसवी), फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर (एफडब्ल्यूडी), ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर), ऑटोमैटिक व्हीकल काउंटर एंड क्लासिफायर (एवीसीसी) आदि शामिल हैं।

ये समझौता ज्ञापन प्रारंभ में हस्ताक्षर की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेंगे और आपसी सहमति से इन्हें बढ़ाया जा सकता है। रोडमैप के अनुसार, प्रत्येक राज्य एक नोडल एजेंसी की पहचान करेगा और समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित पक्कीकरण एवं हरियाली प्रकोष्ठ स्थापित करेगा । सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे और आरएएमएसएस के तहत डेटा एकीकरण, तकनीकी विश्लेषण, डिजाइन सत्यापन और रखरखाव रणनीतियों की तैयारी के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करेंगे।

इस पहल के अंतर्गत एनसीआर राज्यों द्वारा सूचित की गई कुल सड़क लंबाई में दिल्ली में लगभग 10,099 किमी, हरियाणा में 10,133 किमी, उत्तर प्रदेश में 6,891 किमी और राजस्थान में 1,747 किमी शामिल हैं। कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसके तहत तीन वर्षों की अवधि में लक्षित कार्य योजनाएं विकसित की जाएंगी। मानकीकृत सड़क विकास पद्धतियों और मानकीकृत सड़क विकास प्रक्रियाओं के सुव्यवस्थित कार्यान्वयन से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है:

  • एनसीआर में पीएम 10 के स्तर में प्रमुख योगदान देने वाले सड़क की धूल के उत्सर्जन में अत्‍यधिक कमी;
  • शहरी सड़क अवसंरचना की मजबूती और सेवा जीवन में सुधार करना;
  • एकीकृत हरितकरण और टिकाऊ गलियारा डिजाइन को बढ़ावा देना;
  • प्रौद्योगिकी आधारित सड़क रखरखाव व्यवस्थाओं का सुदृढ़ीकरण;
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सीएक्‍यूएम के समग्र मार्गदर्शन में एनसीआर राज्यों में अंतर-एजेंसी समन्वय में वृद्धि।

गर्मी का मौसम निकट आने के साथ ही, सड़कों से उड़ने वाली धूल से क्षेत्र में वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि होने की आशंका है। इस दिशा में आयोग ने दिल्ली में गहन कार्रवाई आरंभ कर दी है और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सभी धूल नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रकोष्ठों (डीसीएमसी) को सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सख्‍त  उपाय करने का निर्देश दिया है। यह सहयोगात्मक पहल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्वच्छ, हरित और धूल-मुक्त शहरी परिवहन गलियारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित ‘पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में ‘संकला फाउंडेशन’ के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

 

उपराष्ट्रपति ने एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए आयोजकों की सराहना की, जो न केवल पर्यटन की संभावनाओं का जश्न मनाता है, बल्कि यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र में भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप भी तैयार करता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि पर्यटन मात्र एक उद्योग नहीं है, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का एक चालक और सॉफ्ट कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बताया।

 

उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पर्यटन लोगों के बीच गहरे संबंधों, साझा मूल्यों, उद्यमशीलता की भावना और भारतीय प्रवासी समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है।

भारत की दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में सुदृढ़ अवसंरचना और वैश्विक आतिथ्य मानकों के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता डिजिटल एकीकरण और समृद्ध आगंतुक अनुभवों सहित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम पर केंद्रित है।

भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध भूदृश्यों और युवा जनसांख्यिकी लाभांश को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर पर्यटन को पुनर्परिभाषित करने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के सरंक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, जिसमें बेहतर आगंतुक सुविधाएं, व्याख्या केन्द्र, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, सतत प्रथाएं औऱ डिजिटल कहानी-वाचन शामिल हों।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि पर्यटन विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जलवायु-सचेत अवसंरचना, समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की वकालत की।

उन्होंने अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले नए युग के पर्यटन स्थलों के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर भी बल दिया।

पर्यटन को रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने समावेशी और समुदाय-संचालित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में अधिक निवेश करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के समापन में श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि यह शिखर सम्मेलन सततता, नवाचार, समावेशिता और साझा समृद्धि पर आधारित भारत-अमेरिका सहयोग के एक नए अध्याय की शुरूआत करेगा।

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मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ राज्य के नाम को बदलकर “केरलम” करने को मंजूरी दी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। केरल राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया, जो इस प्रकार है:

मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम केरलम‘ है। नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी नवंबर को ही मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की प्रबल मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल‘ ही दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद के अनुसार तत्काल कदम उठाकर राज्य का नाम बदलकर केरलम‘ करने की अपील करती है।”

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 3 में आगे प्रावधान है कि इस उद्देश्य से कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, और यदि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल को निर्दिष्ट अवधि के भीतर या राष्ट्रपति द्वारा अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए संदर्भित किया जाना चाहिए और इस प्रकार निर्दिष्ट या अनुमत अवधि समाप्त हो जानी चाहिए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के विषय पर विचार किया गया और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों और विधायी विभाग को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि और विधायी विभाग ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है।

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टीआरएआई ने पूरे दिल्ली शहर में नेटवर्क की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया

नई दिल्ली – भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) ने जनवरी 2026 में दिल्ली लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) के लिए किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष जारी किए हैं जिसमें शहर के कई भीड़भाड़ वाले मार्गों को शामिल किया गया। टीआरएआई के दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की देखरेख में किए गए ये ड्राइव टेस्ट शहरी क्षेत्रों, संस्थागत हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और हाई-स्पीड गलियारे के समान उपयोग के विविध परिवेशों में वास्तविक समय में मोबाइल नेटवर्क के प्रदर्शन को मापने के लिए डिज़ाइन किए गए थे।

टीआरएआई के दलों ने 6 जनवरी 2026 से 9 जनवरी 2026 के बीच 249.1 किलोमीटर के सिटी ड्राइव टेस्ट, 8 हॉटस्पॉट स्थानों, 9.6 किलोमीटर के वॉक टेस्ट और एक स्थान पर इंटर-ऑपरेटर कॉलिंग सहित विस्तृत परीक्षण किए। इस दौरान जिन प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन किया गया उनमें 2जी, 3जी, 4जी और 5जी शामिल थीं जो विभिन्न क्षमताओं वाले हैंडसेट में उपयोगकर्ताओं के सेवा अनुभव को दर्शाती हैं। आईडीटी के निष्कर्ष सभी संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को पहले ही सूचित कर दिए गए हैं।

जिन प्रमुख मापदंडों पर मूल्यांकन किया गया, वे हैं:

ए) वॉइस सेवाएं : कॉल सेटअप सफलता दर (सीएसआर), कॉल ड्रॉप दर (डीसीआर), कॉल सेटअप समय, कॉल साइलेंस दर, आवाज की स्पष्टता की गुणवत्ता (एमओएस), कवरेज।

बी) डेटा सेवाएं : डाउनलोड/अपलोड थ्रूपुट, विलंब, उतार-चढ़ाव, पैकेट ड्रॉप दर और वीडियो स्ट्रीमिंग में विलंब।

कॉल सेटअप सफलता दर: एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल का ऑटो-सिलेक्शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी) में कॉल सेटअप सफलता दर क्रमशः 100.00 प्रतिशत, 82.82 प्रतिशत, 99.22 प्रतिशत और 100.00 प्रतिशत है।

ड्रॉप कॉल दर: ऑटो-सिलेक्शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी) में एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल की कॉल ड्रॉप दर क्रमशः 0.39 प्रतिशत, 6.34 प्रतिशत, 0.53 प्रतिशत और 0.00 प्रतिशत है।

सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) के प्रमुख मापदंडों पर प्रदर्शन

सीएसएसआर : कॉल सेटअप सफलता दर (प्रतिशत में), सीएसटी: कॉल सेटअप समय (सेकंड में), डीसीआर: कॉल ड्रॉप दर (प्रतिशत में) और एमओएस: औसत राय स्कोर।

 

सारांश- वॉइस सेवाएं

कॉल सेटअप सफलता दर : एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल की ऑटो-सिलेक्शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी) में कॉल सेटअप सफलता दर क्रमशः 100.00 प्रतिशत, 82.82 प्रतिशत, 99.22 प्रतिशत और 100.00 प्रतिशत है।

कॉल सेटअप समय : ऑटो-सिलेक्शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी) में एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल का कॉल सेटअप समय क्रमशः 0.79, 3.20, 0.63 और 0.56 सेकंड है।

कॉल ड्रॉप दर : ऑटो-सिलेक्शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी) में एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल की कॉल ड्रॉप दर क्रमशः 0.39 प्रतिशत, 6.34 प्रतिशत, 0.53 प्रतिशत और 0.00 प्रतिशत है।

कॉल साइलेंस/म्यूट दर : पैकेट स्विच्ड नेटवर्क (4जी/5जी) में एयरटेल, RJIL और VIL की साइलेंस कॉल दर क्रमशः 0.00 प्रतिशत, 2.23 प्रतिशत और 6.61 प्रतिशत है।

औसत राय स्कोर (एमओएस) : एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल का औसत एमओएस क्रमशः 4.03, 2.75, 4.46 और 4.40 है।

 

सारांश- डेटा सेवाएं

डेटा डाउनलोड प्रदर्शन (कुल मिलाकर) : एयरटेल (5जी/4जी) की औसत डाउनलोड गति 231.97 एमबीपीएस, एमटीएनएल (3जी) की 3.83 एमबीपीएस, आरजेआईएल (5जी/4जी) की 266.99 एमबीपीएस और वीआईएल (5जी/4जी/2जी) की 24.55 एमबीपीएस है।

डेटा अपलोड प्रदर्शन (कुल मिलाकर) : एयरटेल (5जी/4जी) की औसत अपलोड गति 31.39 एमबीपीएस, एमटीएनएल (3जी) की 1.04 एमबीपीएस, आरजेआईएल (5जी/4जी) की 23.93 एमबीपीएस और वीआईएल (5जी/4जी/2जी) की 11.00 एमबीपीएस है।

विलंब (कुल मिलाकर) : एयरटेल, एमटीएनएल, आरजेआईएल और वीआईएल की 50 वीं परसेंटाइल लेटेंसी क्रमशः 20.80 एमएस, 21.65 एमएस, 20.62 एमएस और 38.98 एमएस है।

डेटा प्रदर्शन – हॉटस्पॉट (एमबीपीएस में):

एयरटेल – 4जी डाउनलोड: 22.72 4जी उपयोग: 4.79

5जी डी/एल: 214.10 5जी यू/एल: 29.95

आरजेआईएल- 4जी डी/एल: 41.50 4जी यू/एल: 13.97

5जी डी/एल: 361.84 5जी यू/एल: 31.96

वीआईएल- 4जी डी/एल: 22.27 4जी यू/एल: 6.67

5जी डी/एल: 44.13 5जी यू/एल: 29.46

नोट- D/L” डाउनलोड स्पीड, “U/L” अपलोड स्पीड। एमटीएनएल में 4जी और 5जी तकनीक का उपयोग नहीं किया गया है।

दिल्ली शहर में किए गए मूल्यांकन में भजनपुरा, शाहदरा, दिलशाद गार्डन, गांधी नगर, कृष्णा नगर, आनंद विहार, पटपड़गंज, आईपी एक्सटेंशन, मयूर विहार चरण-3 और खिचड़ीपुर आदि जैसे सघन आबादी वाले इलाके शामिल थे। टीआरएआई ने एमिटी इंटरनेशनल स्कूल मयूर विहार चरण 1, भाई परमानंद इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज शकरपुर, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय राजा राम कोहली मार्ग गीता कॉलोनी, दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन, कड़कड़डूमा कोर्ट, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पटपड़गंज, शाहदरा मेट्रो स्टेशन और वी3एस मॉल लक्ष्मी नगर में वास्तविक समय की स्थितियों का भी मूल्यांकन किया।

8 जनवरी 2026 को दिल्ली शहर में आयोजित पैदल परीक्षण में जिन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया उनमें आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्र जिनमें आईएसबीटी, गांधी नगर बाजार, स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर शामिल हैं ताकि पैदल यात्रियों की भीड़ वाले क्षेत्रों में यह समझा जा सके कि मोबाइल नेटवर्क कैसा चल रहा है।

ये परीक्षण टीआरएआई की ओर से सुझाए गए उपकरणों और मानकीकृत प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए वास्तविक समय के वातावरण में किए गए थे। विस्तृत रिपोर्ट टीआरएआई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है । किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए टीआरएआई के सलाहकार (क्षेत्रीय कार्यालय, दिल्ली) श्री विवेक खरे से ईमेल adv.ca@trai.gov.in या दूरभाष संख्या +91-11-20907772 पर संपर्क किया जा सकता है।

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एनआईएम और जिम एंड डब्ल्यूएस के संयुक्त दल ने अर्जेंटीना में माउंट एकांकागुआ पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की

नई दिल्ली – नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम), उत्तरकाशी और जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (जेआईएम एंड डब्ल्यूएस), पहलगाम के छह सदस्यीय दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
इस संयुक्त दल ने दक्षिण अमेरिका के सबसे ऊंचे शिखर और एशिया के बाहर दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ पर 22 फरवरी 2026 को दोपहर 2:10 बजे सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कर्नल हेम चंद्र सिंह (प्रधानाचार्य, एनआईएम और जेआईएम एंड डब्ल्यूएस) के नेतृत्व में इस दल को 5 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। प्रस्थान के बाद यह दल 8 फरवरी 2026 को अर्जेंटीना पहुंचा और वहां से अपनी चढ़ाई शुरू की।

 

इस दल ने माउंट एकांकागुआ की बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करने से पहले वातावरण के अनुकूल ढलने के लिए बोनेट पीक (5,050 मीटर) पर विजय प्राप्त की। कैप्टन जी संतोष कुमार, श्री दीप बहादुर साही, श्री विनोद गुसाई, नायब सिपाही भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार सहित दल के सदस्यों ने तेज हवाओं और -20 डिग्री सेंटीग्रेड से -30 डिग्री सेंटीग्रेड  तापमान की चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करते हुए असाधारण साहस, आपसी सहयोग और तालमेल के साथ पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया।

यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्व स्तरीय मानकों पर हमारे प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों के प्रशिक्षण को रेखांकित करती है।

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चर्च रोड फातुल्लाह रोड में ईद का दुकान लगाने को लेकर दो गुटों में चाकूबाजी की वारदात,तीन घायल 

राँची,25.02.2026 –  लोअर बाजार थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात चर्च रोड फातुल्लाह रोड में ईद का दुकान लगाने को लेकर दो गुटों में चाकूबाजी की वारदात हुई है।

यह वारदात दुकान लगाने को लेकर हुए, विवाद के दौरान एक गुट के लोगों ने तीन युवकों पर चाकू से हमला कर दिया गया, जिससे दो नाबालिग सहित तीन गंभीर रूप से घायल हो गया है। सभी का इलाज जारी है।

मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की शाम फतुल्लाहरोड में ईद बाजार का दुकान लगाने का विवाद हुआ था। उसके बाद स्थानीय लोगों ने समझाकर मामला शांत कराया था। वहीं पुलिस की भी जनाकारी दी गई थी। लेकिन पुलिस उस समय नहीं आई थी। मामला स्थानीय लोगों ने खत्म करा दिया था। लेकिन रात लगभग 11 बजे फिर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई।

चाकूबाजी होने लगी। जिसमें एक गुट के तीन युवकों को चाकू मारकर घायल कर दिया है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हमलावर मौके से फरार हो गए।

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राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा, “राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।

 

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को मिटाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत का औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति का सफर कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के क्षेत्र में एक सतत बदलाव है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दृष्टिकोण है, जिन्होंने लगातार उस औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की बात कही है जिसने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और मनोभावों को आकार दिया था।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की परिकल्पना को कई पहलों के माध्यम से साकार किया गया है, जिनमें राजभवनों का लोकभवनों में परिवर्तन; प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवा तीर्थ में परिवर्तन; केंद्रीय सचिवालय का नाम बदलकर कर्तव्य भवन करना; औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों को निरस्त करना; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित करना; और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण करना आदि शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “ये बदलाव महज प्रतीकात्मक नहीं हैं; ये सरकार की सेवा भावना के नजरिए को दर्शाते हैं।”

उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में शुरू की गई कई पहलों पर प्रकाश डाला। इन पहलों में उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप रखना; ब्रिटिश सहायक अधिकारियों की तस्वीरों की जगह परम वीर चक्र विजेताओं की तस्वीरें लगाना; और भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित पुस्तकालय और भंडार ‘ग्रन्थ कुटीर’ का उद्घाटन करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम जनमानस से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत को उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने राष्ट्र के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

एक वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और लेखक के रूप में राजाजी की बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि राजाजी ने निरंतर आर्थिक स्वतंत्रता की वकालत की और उनका मानना ​​था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अधिक जिम्मेदारियां ग्रहण करते समय अपने चरित्र को ऊंचा उठाएं, अपनी भूमिकाओं के विस्तार के साथ अपने विश्वासों को मजबूत करें और हमेशा राष्ट्र को स्वार्थ से ऊपर रखें।

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