रांची नगर निगम एवं नगर पंचायत बुंडू चुनाव 2026: मतदाताओं से अपील

अपना नाम, मतदान केंद्र और एपिक नंबर तुरंत जांचें; आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर उपलब्ध जानकारी

ranchi.nic.in पर सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध

मतदाता को अपने वार्ड सेक्शन में जाकर सर्च टूल का उपयोग करना होगा। यहां एपिक नंबर दर्ज करके सर्च किया जा सकता है

रांची,21.02.2026 – 23 फरवरी 2026 को होने वाले नगर निगम चुनाव को लेकर जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से सभी मतदाताओं से अपील की जाती है कि वे अपना वोटर लिस्ट में नाम, मतदान केंद्र (बूथ लोकेशन) और एपिक नंबर (वोटर आईडी) की जांच कर सकते है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और हर मतदाता बिना किसी परेशानी के अपना वोट डाल सके, आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

वेबसाइट पर चेक करें

मतदाता सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर जाएं। होमपेज पर ‘MUNICIPAL ELECTION RANCHI 2026’ सेक्शन में क्लिक करें। यहां ‘VOTER LIST RANCHI 2026’ या ‘Voter List BUNDU’ का विकल्प उपलब्ध होगा।

वार्ड-वार बूथ लिस्ट का उपयोग

वेबसाइट पर वार्ड नंबर के अनुसार बूथ लिस्ट डाउनलोड या देखने की सुविधा है। मतदाता अपना वार्ड नंबर चुनें (उदाहरण: वार्ड 1 से वार्ड 53 तक, रांची नगर निगम के अनुसार)। प्रत्येक वार्ड की लिस्ट में बूथ नंबर, लोकेशन (जैसे स्कूल, सामुदायिक केंद्र आदि) और मैप लिंक उपलब्ध है। इससे मतदाता आसानी से अपने मतदान केंद्र तक पहुंच सकेंगे।

एपिक नंबर द्वारा जांच

मतदाता को अपने वार्ड सेक्शन में जाकर सर्च टूल का उपयोग करना होगा। यहां एपिक नंबर दर्ज करके सर्च किया जा सकता है यदि नाम सूची में है, तो एपिक नंबर (EPIC Number) दिखाई देगा। एपिक नंबर एक 10-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड है, जो वोटर आईडी कार्ड पर अंकित होता है।

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नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026: कल 22 फरवरी को मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों की रवानगी

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर का गहन निरीक्षण किया

सभी तैयारियां पूर्ण, राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी प्रक्रिया

रांची नगर निगम क्षेत्र तथा बुंडू नगर पंचायत क्षेत्र के मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को कल दिनांक 22 फरवरी 2026 को रवाना किया जाएगा

रांची,21.02.2026 – नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026 के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु रांची जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

इस निर्वाचन के अंतर्गत रांची नगर निगम क्षेत्र तथा बुंडू नगर पंचायत क्षेत्र* के मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को दिनांक 22 फरवरी 2026 को रवाना किया जाएगा। रवानगी का मुख्य केंद्र मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम डिस्पैच सेंटर बनाया गया है।

डिस्पैच सेंटर में मतदान सामग्री, बैलेट पेपर, सुरक्षा उपकरण, आवश्यक रिकॉर्ड, वाहन व्यवस्था, मतदान कर्मियों के लिए बैठने एवं प्रतीक्षा की उचित व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा बलों की तैनाती सहित सभी मूलभूत सुविधाएं पूर्ण रूप से सुनिश्चित कर ली गई हैं।

आज देर रात जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया तथा संबंधित पदाधिकारियों, नोडल अधिकारियों एवं टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों, प्रक्रियाओं एवं समय-सारिणी का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मालूम हो क़ि निर्वाचन प्रक्रिया को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं निर्भय वातावरण में संपन्न कराना है। पोलिंग पार्टियों की समयबद्ध एवं सुचारु रवानगी, मतदान दिवस (23 फरवरी 2026) को शांतिपूर्ण मतदान तथा मतगणना तक की सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तरीय निगरानी में की जा रही हैं।

मतदान 23 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। रांची नगर निगम के 53 वार्डों में कुल 909 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।

जिला प्रशासन सभी मतदाताओं, प्रत्याशियों, राजनीतिक दलों एवं आम जनता से अपील करता है कि वे निर्वाचन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें, शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करें तथा राज्य निर्वाचन आयोग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी किसी भी निर्देश का पालन करें।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं यातायात, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।

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23 फरवरी 2026 को होने वाले राँची नगर निगम एवं बुण्डू नगर पंचायत निर्वाचन 2026 के सम्पूर्ण तैयारी विधि व्यवस्था संधारण को लेकर चुनाव से जुड़े सभी सम्बंधित पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक

उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर निगम चुनाव 2026), श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे, जो मोरहाबादी के रेड क्रॉस सोसाइटी में स्थापित किए गए है

राँची नगर निगम क्षेत्र के कुल 909 मतदान केंद्रों पर कुल – 422 एवं नगर पंचायत बुंडू क्षेत्र के कुल – 16 बूथों पर कुल -16 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है

रांची,21.02.2026 – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा 23 फरवरी 2026 को होने वाले राँची नगर निगम एवं बुण्डू नगर पंचायत निर्वाचन 2026 के सम्पूर्ण तैयारी विधि व्यवस्था संधारण को लेकर चुनाव से जुड़े सभी सम्बंधित पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की गई।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं यातायात, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल तैनात किया जाए।

चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या बाधा न आने पाए।
मतदाताओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं। जानकारी हो कि कल दिनांक 22 फरवरी 2026 को मोरहाबादी अवस्थित डिस्पैच सेंटर से मतदान कर्मियों को रवाना किया जाएगा।

जानकारी हो क़ि मतदान केंद्रों में व्हील चेयर भी उपलब्ध कराया गया है। राँची नगर निगम क्षेत्र के कुल 909 मतदान केंद्रों पर कुल – 422 एवं नगर पंचायत बुंडू क्षेत्र के कुल – 16 बूथों पर कुल -16 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है। कुल – 438 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है।

07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे

राँची नगर निगम में कुल 53 वार्डों के लिए 909 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे, जो मोरहाबादी के रेड क्रॉस सोसाइटी में स्थापित रहेंगे।

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रांची प्रेस क्लब में 27 और 28 फरवरी को दो दिवसीय “वसंत मेला” का आयोजन किया जा जा रहा है

द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी की महिला पत्रकारों ने मंत्री दीपिका व नेहा शिल्पी तिर्की को दिया वसंत मेला में आने का आमंत्रण

द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी कर रही है दिवसीय बसंत मेले का आयोजन

रांची,21.02.2026। रांची प्रेस क्लब में 27 और 28 फरवरी को दो दिवसीय “वसंत मेला” का आयोजन किया जा जा रहा है। मेले की तैयारियों को लेकर वूमेंस वेलफेयर कमिटी जोर शोर से लगी हुई है।

इसी क्रम में आज द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी की वरिष्ठ पत्रकार रेखा पाठक, प्रतिमा सिंह, और नेहा वारसी ने ग्रामीण विकास एवं पंचयती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की को मेला में आने का आमंत्रण विधान सभा परिसर के कार्यालय में दिया। इन्होने मेला में शिरकत करने का आश्वासन दिया है।

आयोजन को सफल और व्यवस्थित रूप देने के लिए एक सब-कमेटी का गठन भी क्लब में किया गया है। इसमें राजन बॉबी, अशोक गोप, चंदन वर्मा और विजय गोप शामिल हैं।

दो दिवसीय इस मेले में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में लगभग 35 स्टॉल लगाए जाएंगे. आगंतुकों के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों के फूड स्टॉल, आकर्षक परिधानों और हस्तशिल्प से सजे बुटीक स्टॉल, हेल्थ एवं वेलनेस से संबंधित काउंटर, बच्चों और युवाओं के लिए गेम्स जोन सहित कई अन्य स्टॉल उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा महिलाओं और परिवारों की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से कई मनोरंजक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा, जिनमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

स्टॉल बुकिंग के इच्छुक व्यवसायी और उद्यमी रांची प्रेस क्लब कार्यालय अथवा सदस्यों से संपर्क कर सकते हैं। स्टाल बुकिंग 24 फरवरी तक जारी रहेगा , उसके उपरांत लॉटरी सिस्टम से स्टॉल धारको को स्टॉल आवंटित किया जायेगा।

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वस्त्र मंत्रालय ने बजट के बाद उद्योग जगत के साथ पहला राष्ट्रीय विमर्श किया

वस्त्र मंत्रालय ने 19 फरवरी, 2026, गुरुवार को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में बजट उपरांत पहली राष्ट्रीय उद्योग विमर्श बैठक आयोजित की।  इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, विकास साझेदार और टेक्सटाइल वैल्यू चेन के प्रतिनिधि केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं के बाद कार्यान्वयन प्राथमिकता पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर आए।

विचार विमर्श बैठक में बजट में घोषित की गई दो विशेष पहलों – वस्त्र विस्तार एवं रोज़गार (टीईईएम) स्कीम और टेक्स इको पहल – को संचालित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इनका उद्देश्य टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में प्रतिस्पर्धा क्षमता, आधुनिकीकरण, स्थिरता और रोज़गार सर्जन को मज़बूत करना है।

 

वस्त्र मंत्रालय में अपर सचिव श्री रोहित कंसल ने स्वागत और विषय की शुरुआत संबंधी भाषण दिया। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि केंद्रीय बजट खास तौर पर वस्त्रकेंद्रित रहा है, जिसमें रोज़गार सर्जन और विनिर्माण वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा वैल्यू चेन में निवेश, नीति समर्थन और सांस्थानिक प्रयासों को अलाइन करने के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराती है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बजट विनिर्माण को व्यापक करने, घरेलू क्षमता को मज़बूत करने और वस्त्र को समावेशी वृद्धि और रोज़गार सर्जन के मुख्य चालक के तौर पर स्थापित करने के स्पष्ट इरादे का संकेत देता है।

विशेष भाषण में वस्त्र मंत्रालय में सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने बताया कि वैश्विक मुश्किलों के बीच मज़बूती से चलने वाले एक वर्ष के बाद, भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए उम्मीदें तेज़ी से बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि अब लागू हुए विशेष मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाज़ार के अवसर खोल रहे हैं, शुल्क प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ा रहे हैं और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की जगह मज़बूत कर रहे हैं।

उन्होंने ज़ोर दिया कि इन व्यापार समझौतों का विशेष  वस्त्रकेंद्रित केन्द्रीय बजट के साथ मिलना इस क्षेत्र के लिए समय पर और रणनीतिक फ़ायदा देता है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई बाज़ार पहुंच, नीतिगत स्पष्टता और फोकस्ड सरकारी समर्थन के साथ, उद्योग उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बनाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

वस्त्र विस्तार और रोज़गार मिशन पर विस्तृत प्रस्तुति में सिलाई, प्रोसेसिंग और गारमेंटिंग सेगमेंट को आधुनिक बनाने, निवेश जुटाने, एमएसएमई साझेदारी को मज़बूत करने और बड़े पैमाने पर रोज़गार सर्जन के लिए रूपरेखा बताई गई  है। इसके बाद टेक्स इको इनिशिएटिव की संक्षिप्त जानकारी दी गई।

उसका उद्देश्य टेक्सटाइल वैल्यू चेन में स्थिरता, सर्कुलरिटी, संसाधन दक्षता और हरित विनिर्माण परिपाटियों को मुख्यधारा में शामिल करना है।

इस विचार-विमर्श सत्र में संबंधित पक्षों ने अतिसक्रिय और रचनात्मक तरीके से हिस्सा लिया। उन्होंने टीईईएम और टेक्स इको के  भावी सोच वाले डिज़ाइन की तारीफ़ की और संरचनात्मक कमियों को दूर करने और वैश्विक अवसरों का फ़ायदा उठाने के लिए एकीकृत ढांचे का समर्थन किया।

उद्योग जगत ने व्यावहारिक सुझाव दिए, जिनमें समयबद्ध ढंग से अनुमति, बेहतर एमएसएमई फाइनेंसिंग, क्लस्टर अवसंरचना, लक्षित कौशल प्रदान करना, डिजिटल निगरानी और स्थिरता से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हैं।

इसके साथ ही राज्य के नीति और निर्यात उपायों के साथ तालमेल बिठाने की भी अपील की गई। ​​कई प्रतिभागियों ने व्यापक और एकीकृत वस्त्र पैकेज शुरू करने में सरकार की कोशिशों की तारीफ़ की।

श्री रोहित कंसल ने सारांश रूप में नीति के इरादे को ज़मीन पर ठोस, मापने लायक नतीजों में बदलने के लिए मिलकर काम करने के तरीके के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।

उन्होंने उद्योग जगत की अतिसक्रिय भागीदारी और साफ़ फ़ीडबैक के लिए तारीफ़ की उन्होंने कहा कि इस तरह के रचनात्मक विमर्श असरदार और जवाबदेह नीति बनाने को आकार देते रहेंगे।

उन्होंने उद्योग जगत से संबंधित पक्षों से मंत्रालय की टीम के साथ विस्तृत लिखित इनपुट और विशेष सुझाव साझा करने का आग्रह किया ताकि समय पर उन्हें अंतिम रूप दिया जा सके और असरदार तरीके से लागू किया जा सके।

सत्र का अंत वस्त्र आयुक्त श्रीमती वृंदा मनोहर देसाई के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने संबंधित पक्षों के कीमती योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने मंत्रालय के समय-बद्ध और परिणाम-उन्मुख कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

बजट के बाद राष्ट्रीय उद्योग विमर्श, संरचनात्मक सरकार, उद्योग संवाद को मजबूत करने और भरोसेमंद, प्रतिस्पर्धी और सतत वैश्विक वस्त्र केंद्र के तौर पर भारत की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए समन्वित रूपरेखा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम है।

चर्चाओं में सरकार और उद्योग के बीच भारत को भरोसेमंद और विश्वसनीय वैश्विक वस्त्र साझेदार के तौर पर स्थापित करने के साझा इरादे को दिखाया गया, जो स्केल, स्थिरता और विश्वसनीयता पर आधारित हो।

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आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड (आईसीपी) 2026 की समीक्षा की

नई दिल्ली – अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट समीक्षा (आईएफआर) 2026 के हिस्से के रूप में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड (आईसीपी) में जनता की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। यह एक प्रमुख जनसंपर्क पहल के रूप में कार्य करती है जो परिचालन क्षमता, औपचारिक प्रदर्शन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भारत के समुद्री लोकाचार को दर्शाती है।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस अब्दुल नज़ीर मुख्य इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित थे  और कार्यक्रम का संचालन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने किया। इस कार्यक्रम में राज्य के मंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख नौसेना प्रमुख और भाग लेने वाले मित्र देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख, भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक भी शामिल हुए।

भारतीय नौसेना, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और कर्मियों से युक्त परेड में शामिल टुकड़ियों के साथ-साथ भाग लेने वाली विदेशी नौसेनाओं, सी कैडेट कोर, राष्ट्रीय कैडेट कोर और राज्य पुलिस की टुकड़ियों ने परेड का मुख्य आकर्षण प्रस्तुत किया। पूर्ण वर्दी युक्‍त इन परेड और सांस्कृतिक टुकड़ियों ने विश्व भर की नौसेनाओं की साझा समुद्री परंपराओं, अनुशासन और पेशेवर सौहार्द को प्रतिबिंबित किया, जो एकता और सहयोग का प्रतीक था।

अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड की भव्यता में वृद्धि करते हुए  नौसेना और वायु सेना ने प्रदर्शन किया, जो भारतीय नौसेना की एकीकृत और बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं को दर्शाता है। नौसेना की विमान इकाइयों की भागीदारी ने समुद्री और हवाई अभियानों के बीच निर्बाध तालमेल को दर्शाया जिससे दर्शकों को नौसेना की पहुंच, बहुमुखी प्रतिभा और समुद्री हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की झलक मिली।

परिचालन और औपचारिक प्रदर्शनों के बाद, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सभा को संबोधित किया और अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड के महत्व को भारतीय नौसेनाभाग लेने वाली विदेशी नौसेनाओं और नागरिकों के बीच एक अद्वितीय संपर्क के रूप में रेखांकित किया। समुद्री सहयोग के स्थायी महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड समुद्र में अंतर्राष्ट्रीय सौहार्द की भावना को दर्शाती है और सहयोगविश्वास और सामूहिक समुद्री सुरक्षा के प्रति नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन पेशेवर संबंधों को मजबूत करके और इसमें शामिल होने वाले देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ाकर परिचालन संबंधी संवाद को पूरक बनाते हैं।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने अपने संबोधन में विशाखापत्तनम के एक प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड न केवल भारत की समुद्री शक्ति और व्यावसायिकता को प्रदर्शित करती हैबल्कि समुद्री और रक्षा क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की बढ़ती प्रमुखता को भी दर्शाती है।‘ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के समुद्री दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने में ऐसे वैश्विक आयोजनों के सकारात्मक प्रभाव का भी उल्‍लेख किया।

अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड का समापन बंदरगाह पर खड़े जहाजों की रोशनी से हुआ, जिसके बाद लेजर और ड्रोन शो और आतिशबाजी से एक शानदार दृश्य का निर्माण हुआ। इस आयोजन के दौरान तटवर्ती क्षेत्र और परेड मार्गों पर भारी भीड़ देखी गई। अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड का सफल आयोजन सुनियोजित योजना, प्रभावी अंतर-एजेंसी समन्वय और मजबूत जन सहयोग का प्रमाण था। नागरिक प्रशासन ने भारतीय नौसेना के साथ बेहतर समन्वय में व्यापक प्रशासनिक, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन व्यवस्था लागू की  जिससे कार्यक्रम का सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित हुआ।

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डॉ. मनसुख मांडविया दिल्ली में ईएसआईसी के साथ साइकिल पर 62वीं फिट इंडिया संडेज का नेतृत्व करेंगे, रूपिंदर पाल सिंह और रोहित टोकस भी शामिल होंगे

नई दिल्ली – भारत को 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का सफलतापूर्वक अधिकार मिलने का जश्न मनाते हुए, 22 फरवरी 2026 को देशभर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के सहयोग से 62वीं फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल का आयोजन किया जाएगा।
यह आयोजन ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के जश्न के साथ भी मेल खाता है, जो स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली के माध्यम से फिट इंडिया की भावना को मजबूत करता है।माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत 2019 में शुरू किया गया फिट इंडिया आंदोलन, भारत सरकार के एक स्वस्थ और सक्रिय राष्ट्र निर्माण के मिशन का आधार स्तंभ है, जो 2047 तक भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने के दीर्घकालिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ है। इस यात्रा में, अहमदाबाद, गुजरात को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का अधिकार दिया गया है, जबकि भारत ने 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अपनी बोली भी प्रस्तुत की है।

“भारत 20 वर्षों के अंतराल के बाद 2030 में एक बहु-विषयक आयोजन, कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। मोदी सरकार नीति सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास, प्रतिभा पहचान और एथलीट पोषण को कवर करने वाले एक सतत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के माध्यम से भारत को खेल शक्ति में बदलने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। हम माननीय प्रधानमंत्री के 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के दृष्टिकोण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे,” युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा।

“इसके साथ ही, फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल जैसी पहलें, जिसमें आगामी संस्करण ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के हिस्से के रूप में आयोजित हो रहा है, सामूहिक भागीदारी के माध्यम से एक फिट, सक्रिय और स्वस्थ भारत बनाने पर हमारे जोर को दर्शाती हैं।उन्होंने जोड़ा ऐसे कार्यक्रम फिटनेस को जन आंदोलन बनाने और भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए अविभाज्य हैं,” ।

गुजरात सरकार ने अहमदाबाद को विश्व स्तरीय खेल शहर में बदलने के उद्देश्य से खेल-केंद्रित बजट पेश किया है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को केवल एक खेल आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत की व्यापक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो शहरी बुनियादी ढांचे, गतिशील प्रणालियों और भविष्य के मेगा खेल आयोजनों के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करेगा।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा के लिए भारत की तैयारियां विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर योजना और संलग्नता के माध्यम से आकार ले रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय खेल शासन और ओलंपिक से जुड़े मंचों ने हाल की टिप्पणियों में भारत के प्रमुख खेल आयोजनों को शहरी गतिशीलता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक शहर नियोजन से जोड़ने के दृष्टिकोण को नोट किया है।भारत के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशनों के साथ जुड़ाव में भी अंतरराष्ट्रीय रुचि है, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आयोजन प्रोग्रामिंग और अनुशासन समावेशन से संबंधित विचार-विमर्श शामिल हैं।

ऐसे संपर्क भारत के मेजबानी योजनाओं को वैश्विक खेल ढांचों के साथ संरेखित करने और विभिन्न अनुशासनों में एथलीट भागीदारी को व्यापक बनाने के प्रयासों को दर्शाते हैं। ये विकास दर्शाते हैं कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स को व्यापक और सतत तरीके से आयोजित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बुनियादी ढांचागत क्षमताओं का निर्माण कर रहा है, जबकि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा को आगे बढ़ा रहा है।

“भारत 20 वर्षों के अंतराल के बाद 2030 में एक बहु-अनुशासनिक आयोजन, कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। मोदी सरकार नीति सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास, प्रतिभा पहचान और एथलीट पोषण को कवर करने वाले एक सतत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के माध्यम से भारत को खेल शक्ति में बदलने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। हम माननीय प्रधानमंत्री के 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के दृष्टिकोण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे,” युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा।“इसके साथ ही, फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल जैसी पहलें, जिसमें आगामी संस्करण ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के हिस्से के रूप में आयोजित हो रहा है, सामूहिक भागीदारी के माध्यम से एक फिट, सक्रिय और स्वस्थ भारत बनाने पर हमारे जोर को दर्शाती हैं। ऐसे कार्यक्रम फिटनेस को जन आंदोलन बनाने और भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए अविभाज्य हैं,” उन्होंने जोड़ा।

गुजरात सरकार ने अहमदाबाद को विश्व स्तरीय खेल शहर में बदलने के उद्देश्य से खेल-केंद्रित बजट पेश किया है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को केवल एक खेल आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत की व्यापक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो शहरी बुनियादी ढांचे, गतिशीलता प्रणालियों और भविष्य के मेगा खेल आयोजनों के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करेगा।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा के लिए भारत की तैयारियां विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर योजना और संलग्नता के माध्यम से आकार ले रही हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल शासन और ओलंपिक से जुड़े मंचों ने हाल की टिप्पणियों में भारत के प्रमुख खेल आयोजनों को शहरी गतिशीलता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक शहर नियोजन से जोड़ने के दृष्टिकोण को नोट किया है।भारत के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशनों के साथ जुड़ाव में भी अंतरराष्ट्रीय रुचि है, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आयोजन प्रोग्रामिंग और अनुशासन समावेशन से संबंधित विचार-विमर्श शामिल हैं। ऐसे संपर्क भारत के मेजबानी योजनाओं को वैश्विक खेल ढांचों के साथ संरेखित करने और विभिन्न अनुशासनों में एथलीट भागीदारी को व्यापक बनाने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

ये विकास दर्शाते हैं कि भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को व्यापक और सतत तरीके से आयोजित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बुनियादी ढांचागत क्षमताओं का निर्माण कर रहा है, जबकि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा को आगे बढ़ा रहा है।डॉ. मांडविया द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू की गई फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल फिटनेस, पर्यावरण चेतना और सतत गतिशीलता को बढ़ावा देती है। यह पहल एक राष्ट्रीय जन आंदोलन में विकसित हो चुकी है, जिसमें 2 लाख से अधिक स्थानों पर 25 लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया है।

इस रविवार, डॉ. मांडविया प्रतीकात्मक मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम से एक बड़ी साइकिलिस्ट समूह का नेतृत्व करेंगे, जिसमें ओलंपिक कांस्य पदक विजेता रूपिंदर पाल सिंह और कॉमनवेल्थ गेम्स कांस्य पदक विजेता रोहित टोकस भी शामिल होंगे। सभी आयु वर्गों, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित योग, रस्सी कूद और जुम्बा जोन भी स्थापित किए जाएंगे।रूपिंदर पाल सिंह भारत की पुरुष हॉकी टीम के प्रमुख सदस्य थे, जिसने टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता।

उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण (2014) और कांस्य (2018) पदक, 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक, तथा एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग और एशियन चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट्स में कई पोडियम फिनिश हासिल किए हैं। 223 अंतरराष्ट्रीय मैचों और 125 गोलों के साथ, रूपिंदर को अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिक विशेषज्ञों में से एक माना जाता है।रोहित टोकस, एक कुशल भारतीय मुक्केबाज, ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता है और वर्तमान में अपने टोकस बॉक्सिंग क्लब के माध्यम से युवा एथलीटों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जो अगली पीढ़ी के कॉम्बैट-स्पोर्ट एथलीटों के विकास में योगदान दे रहे हैं।

फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल के पूर्व संस्करणों में भारतीय सेना, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू), जीएसटी काउंसिल और भारत फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन (पीईएफआई) जैसे संगठनों के कर्मियों ने उत्साहपूर्ण भागीदारी की है। इस पहल को ग्रेट खली, लवलीना बोरगोहैन, प्रियंका गोस्वामी, रानी रामपाल, दीपिका कुमारी, अतनु दास, तथा पेरिस पैरालंपिक पदक विजेता नितेश कुमार, मनीषा रामदास, रुबीना फ्रांसिस और सिमरन शर्मा जैसे प्रसिद्ध खिलाड़ियों का भी समर्थन प्राप्त है।

प्रसिद्ध फिल्म हस्तियां आयुष्मान खुराना, रोहित शेट्टी, सैयामी खेर, शर्वरी, अमित सियाल, राहुल बोस, मधुरिमा तुली, मिया मेल्जर और गुल पनाग ने भी फिट इंडिया आइकॉन के रूप में अपना समर्थन दिया है।फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल का आयोजन युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) द्वारा इंडियन साइक्लिंग फेडरेशन (सीएफआई), इंडियन रोप स्किपिंग फेडरेशन, योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन, एमवाई बाइक्स और एमवाई भारत के सहयोग से किया जाता है। साइकिलिंग अभियान सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में एक साथ आयोजित किया जाता है, जिसमें एसएआई क्षेत्रीय केंद्र, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी), खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (केआईएससीई) और खेलो इंडिया केंद्र (केआईसी) शामिल हैं।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन ने कृषि कौशल और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन (डीआरएफ) ने हैदराबाद स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (आईसीएआर-एनएएआरएम) कार्यालय में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना, किसान विस्तार सेवाओं को मजबूत करना और आधुनिक कृषि पद्धतियों में क्षमता निर्माण करना है।

 

यह पहल कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट के समग्र मार्गदर्शन में की जा रही है। इस साझेदारी के लिए रणनीतिक समन्वय और संस्थागत अभिसरण को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (समन्वय) डॉ. अनिल कुमार द्वारा सुगम बनाया जा रहा है।

हैदराबाद के राजेंद्र नगर स्थित आईसीएआर-एनएएआरएम में दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते को औपचारिक रूप दिया गया जो कृषि विकास और कौशल संवर्धन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

समझौता ज्ञापन के दस्तावेज औपचारिक रूप से डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के निदेशक (ग्रामीण आजीविका) श्री सुमन एस. और आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह द्वारा आईसीएआर-एनएएआरएम हैदराबाद के निदेशक, आईसीएआर-एटीआरआई हैदराबाद के निदेशक, आईसीएआर-एटीआरआई बेंगलुरु के निदेशक और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन, हैदराबाद के वरिष्ठ तकनीकी सहयोगियों की उपस्थिति में एक-दूसरे को सौंपे गए।

सहयोग का रणनीतिक ढांचा

इस समझौता ज्ञापन के तहत आईसीएआर और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विकास और वितरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए कई मोर्चों पर सहयोग करेंगे। छोटे और सीमांत किसानों की क्षमता निर्माण के लिए डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के लीड फार्मर्स प्लेटफॉर्म (एलएफपी) मॉडल का उपयोग किया जाएगा।

जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और टिकाऊ खेती के तरीकों पर संयुक्त अनुसंधान पहलों को आईसीएआर की तकनीकी विशेषज्ञता को डीआरएफ के समुदाय-आधारित विस्तार मॉडल के साथ एकीकृत करके बढ़ाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी और कृषि और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

पूरक शक्तियों का लाभ उठाना

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान, विस्तार, ज्ञान प्रबंधन, क्षमता निर्माण और नीतिगत वकालत में लगभग दस दशकों की विशेषज्ञता रखता है। परिषद भारत भर में फैले तकनीकी मार्गदर्शन, पाठ्यक्रम विकास सहायता और अपने कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करेगी।

डॉ. रेड्डी फाउंडेशन ने अपने एकीकृत विकास कार्यक्रमों के माध्यम से 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है जिसमें विशेष रूप से युवाओं, दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) और ग्रामीण समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। फाउंडेशन के प्रमुख एमआईटीआरए कार्यक्रम ने कई राज्यों में 80 हजार से अधिक किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने में सफलतापूर्वक सक्षम बनाया है, जो इसके किसान-से-किसान विस्तार मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

अपेक्षित परिणाम

यह सहयोग कई प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:

  • व्यावसायिक कौशल विकास : राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा डीआरएफ को हाल ही में एक पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था (मानक) के रूप में मान्यता मिलने के आधार पर, यह साझेदारी उद्योग-संरेखित कृषि-कौशल कार्यक्रमों का विकास और वितरण करेगी।
  • मृदा स्वास्थ्य से एक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर संक्रमण : यह साझेदारी एक स्वास्थ्य प्रणाली के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए बायोचार-आधारित और मृदा जैविकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देगी, साथ ही जलवायु-टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन और कार्बन प्रोत्साहन को आगे बढ़ाएगी।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए लचीलापन : यह सहयोग प्रौद्योगिकी-सक्षम विस्तार, कार्बन-प्रोत्साहित-संसाधन-कुशल प्रथाओं और स्थानीय रूप से अनुकूलित जलवायु-जोखिम शमन रणनीतियों के माध्यम से किसानों को जलवायु-स्मार्ट, पुनर्योजी कृषि अपनाने में मार्गदर्शन करेगा।
  • कृषि विस्तार सेवाएं एवं बाज़ार संपर्क : यह सहयोग लीड फार्मर्स प्लेटफॉर्म को व्यापक स्तर पर विस्तारित करेगा ताकि सीमांत तक पहुंचने वाली विस्तार सेवाओं की कमियों को दूर किया जा सके और साथ ही छोटे एवं सीमांत किसानों के बाज़ार संपर्कों, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता को मजबूत किया जा सके और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संरेखण

यह साझेदारी देश के कृषि कार्यबल के लिए समावेशी, लचीले और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण मार्ग बनाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है। यह सहयोग कौशल भारत मिशन और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति, किसानों की आय दोगुनी करने की पहल, जलवायु-अनुकूल कृषि और सतत विकास लक्ष्यों सहित प्रमुख सरकारी पहलों के अनुरूप है। राष्ट्रीय ऋण ढांचा (एनसीआरएफ) के साथ एनसीवीईटी के माध्यम से यह तालमेल शिक्षार्थियों को क्रेडिट अर्जित करने और स्थानांतरित करने में सक्षम बनाएगा जिससे कृषि में व्यावसायिक विकास और निरंतर शैक्षणिक उन्नति दोनों को समर्थन मिलेगा।

इस समझौता ज्ञापन के तहत विकसित कार्यक्रम उन अनेक राज्यों में लागू किए जाएंगे जहां दोनों संगठनों की परिचालन उपस्थिति है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश पर प्रारंभिक ध्यान केंद्रित होगा।

नेतृत्व से उद्धरण

इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन कृषि में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीएआर की अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं को डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के सिद्ध सामुदायिक सहभागिता मॉडल के साथ मिलाकर, हमारा लक्ष्य ग्रामीण आजीविका और कृषि स्थिरता पर स्थायी प्रभाव पैदा करना है।

डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि 80 हजार से अधिक किसानों के साथ काम करने के हमारे अनुभव ने हमें गुणवत्तापूर्ण विस्तार सेवाओं और कौशल विकास के महत्व को दिखाया है।

आईसीएआर के साथ यह साझेदारी हमें तकनीकी सटीकता और राष्ट्रीय ढांचों के साथ तालमेल सुनिश्चित करते हुए अपने प्रभाव को बढ़ाने में मदद करेगी। हम विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों, जिनमें दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल हैं, के लिए इससे उत्पन्न होने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

कार्यान्वयन समयरेखा और निगरानी

यह समझौता ज्ञापन 16 फरवरी, 2026 से प्रभावी है। प्रारंभ में यह समझौता 5 वर्षों के लिए वैध रहेगा जिसमें आपसी सहमति और प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर नवीनीकरण का प्रावधान है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त निगरानी समिति कार्यान्वयन की देखरेख करेगी, सहमत लक्ष्यों के सापेक्ष प्रगति पर नजर रखेगी और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने को सुनिश्चित करेगी।

यह साझेदारी जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए आईसीएआर अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और ग्रामीण भारत में डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के क्षेत्रीय केंद्रों के नेटवर्क सहित मौजूदा बुनियादी ढांचे का भी लाभ उठाएगी।

संगठनों के बारे में

आईसीएआर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भारत में एक स्वायत्त निकाय है जो कृषि अनुसंधान और शिक्षा के समन्वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। 16 जुलाई, 1929 को स्थापित  इस संस्थान का  मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह विश्व की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि प्रणालियों में से एक का संचालन करता है जिसमें 113 संस्थान और 74 विश्वविद्यालय शामिल हैं।

आईसीएआर का जनादेश कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशु विज्ञान में अनुसंधान और शिक्षा को शामिल करता है ताकि खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और इसने हरित क्रांति और उसके बाद के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे खाद्यान्न, दूध और मछली उत्पादन में भारी वृद्धि संभव हुई है। यह कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के अधीन कार्यरत है। केंद्रीय कृषि मंत्री आईसीएआर सोसायटी के अध्यक्ष हैं।

डीआरएफ: डॉ. रेड्डीज़ फाउंडेशन (डीआरएफ) डॉ. रेड्डीज़ परिवार द्वारा स्थापित एक पारिवारिक ट्रस्ट है जो 1996 से शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक विकास में स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए कार्यरत है। फाउंडेशन ने युवाओं, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ग्रामीण कृषि समुदायों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्रमों में मित्रा (ग्रामीण आजीविका), सशक्त (बालिका शिक्षा), ग्रो (व्यावसायिक प्रशिक्षण) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) शामिल हैं। दिसंबर 2025 में, फाउंडेशन को एनसीवीईटी द्वारा एक पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई जिससे यह अनुमोदित योग्यताओं में शिक्षार्थियों को पुरस्कार प्रदान करने, उनका मूल्यांकन करने और उन्हें प्रमाणित करने में सक्षम हो गया।

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सेशेल्स गणराज्य के उपराष्ट्रपति, महामहिम सेबेस्टियन पिल्लई ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की

नई दिल्ली – सेशेल्स गणराज्य के उपराष्ट्रपति, महामहिम सेबेस्टियन पिल्लई ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में माननीय उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की।

 

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा में सहयोग बढ़ाने, ट्रांसशिपमेंट के अवसरों को तलाशने और दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच में सुधार के महत्व पर जोर दिया। नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत के व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, पूरे सेशेल्स में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के विस्तार पर भी चर्चा की।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य और आवास क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें जन-केंद्रित और  सस्टेनेबल डेवलपमेंट पहलों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो सीधे नागरिकों को लाभान्वित करती हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि भारत और सेशेल्स इस वर्ष राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने दोनों राष्ट्रों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रवासी संबंधों और सुदृढ़ सांस्कृतिक एवं आपसी जन-संपर्क की सराहना की और आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को इसकी पूर्ण क्षमता तक ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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MSP पर खरीद को और सुदृढ़, पारदर्शी एवं समयबद्व करने के निर्देश – श्री शिवराज सिंह चौहान

 नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान  ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास 12, सफदरजंग पर National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India Ltd (NAFED) (नाफेड) की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में दलहन एवं तिलहन की खरीद व्यवस्था, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ सुनिश्चित करने तथा संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान मूल्य समर्थन योजना (PSS) एवं मूल्य स्थिरीकरण निधि (PSF) के अंतर्गत संचालित खरीद कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि MSP पर खरीद को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य बिना किसी विलंब के प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर बल दिया कि खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध हों और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विशेष रूप से तुअर, उड़द तथा मसूर जैसी प्रमुख दलहनों के उत्पादन एवं खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। इन फसलों के लिए प्रस्तावित 6 वर्षीय “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” के तहत उत्पादन वृद्धि, उन्नत बीजों की उपलब्धता, तकनीकी सहयोग एवं प्रभावी विपणन तंत्र विकसित करने पर चर्चा हुई। इस मिशन का उद्देश्य देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।

 

श्री चौहान ने कहा कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्यों के साथ समन्वय मजबूत किया जाए तथा खरीद एवं भंडारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहे और किसानों के हितों की रक्षा हो सके।

बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव  डॉ देवेश चतुर्वेदी, अपर सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा,  अपर सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी,  नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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जनजातीय विरासत के संरक्षण हेतु ‘मेरी परंपरा-मेरी विरासत’ विषय पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया

नई दिल्ली – पंचायती राज मंत्रालय ने नई दिल्ली में “मेरी परंपरा- मेरी विरासत” विषय पर एक दिवसीय विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), शिक्षाविदों, विद्वानों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों, पंचायत प्रतिनिधियों और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के नेताओं ने भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन पंचायती राज मंत्रालय ने IGNCA, संस्कृति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से किया।

सत्र को संबोधित करते हुए श्री विवेक भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि परंपराएं और रीति-रिवाज किसी समुदाय की पहचान होते हैं और इनके लुप्त होने से उसका विशिष्ट चरित्र नष्ट हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यह पहल अपने समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए उल्लेखनीय है, जो जनजातीय विरासत के सभी पहलुओं को व्यापक रूप से कवर करती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समुदायों द्वारा स्वयं दस्तावेजीकृत और संरक्षित विरासत प्रामाणिक और स्थायी मूल्य रखती है, और उन्होंने साझा उद्देश्य से प्रेरित सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह ने राज्य के कार्यान्वयन ढांचे को प्रस्तुत किया और इस पहल में भागीदार बनने की तत्परता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की समृद्ध जनजातीय विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराएं इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि जनजातीय परंपराओं का दस्तावेजीकरण स्थानीय स्तर पर, उन लोगों द्वारा किया जाना जो इन परंपराओं को जानते और जीते हैं, प्रामाणिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय परंपराओं का डिजिटलीकरण जीवित विरासत को संरक्षित करने, युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी सांस्कृतिक कथा पर समुदाय के स्वामित्व को मजबूत करने में सहायक होगा।

राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन के अंतर्गत ‘मेरा गाँव मेरी धरोहर (एमजीएमडी)’ पोर्टल के उन्नयन पर भी एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें इसे संस्कृति मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में उजागर किया गया। इसके तहत, ग्राम सभा को ग्राम-स्तरीय सांस्कृतिक प्रलेखन के प्राथमिक मंच के रूप में अपनाया गया है, और पंचायतों में संरचित ग्राम सभा बैठकों के माध्यम से व्यवस्थित डेटा संग्रह और सत्यापन संभव हो पाता है।

विचार-विमर्श सत्र दो व्यापक विषयों पर केंद्रित था: छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रलेखन और डिजिटल संरक्षण, और परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कार्यान्वयन ढांचे को अंतिम रूप देना। दस विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा आयोजित की गई: ज्ञान परंपराएँ (दर्शन, मौखिक परंपराएँ, चिकित्सा पद्धतियाँ); दृश्य और भौतिक कलाएँ (मूर्तिकला, वस्त्र); प्रदर्शन कलाएँ (नृत्य, संगीत, कठपुतली); प्रथाएँ और अनुष्ठान (त्योहार, व्यंजन, जीवन-चक्र अनुष्ठान); इतिहास (स्थान, आंदोलन, सामाजिक परिवर्तन); साहित्य और भाषाएँ (लेखक, रचनाएँ, भाषा इतिहास); निर्मित स्थान (पूजा स्थल, स्मारक, ऐतिहासिक स्थल); प्राकृतिक पर्यावरण (पारिस्थितिकी तंत्र, देशी प्रजातियाँ, राष्ट्रीय उद्यान); संस्थान (संग्रहालय, विश्वविद्यालय, सांस्कृतिक केंद्र); और लोग (कलाकार, विद्वान, व्यवसायी)।

पृष्ठभूमि

“मेरी परंपरा- मेरी विरासत” पहल पंचायती राज मंत्रालय द्वारा परिकल्पित और समर्थित है। इसे राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का व्यापक दस्तावेजीकरण और डिजिटल संरक्षण करना है, जिसमें उनके लोकगीत, त्योहार, पूजा पद्धतियाँ, मौखिक परंपराएँ, कला रूप और पारंपरिक शासन प्रणाली शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ इस पहल को अपनाने वाला दूसरा राज्य है। जनसंपर्क मंत्रालय द्वारा परिकल्पित और समर्थित यह अभियान सर्वप्रथम झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा 26 जनवरी 2025 को “हमारी परंपरा हमारी विरासत” विषय के अंतर्गत शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों की पारंपरिक शासन प्रणाली से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। छत्तीसगढ़ में 42 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियाँ हैं, जिनमें विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (पीवीटीजी) भी शामिल हैं, जो इस प्रयास के लिए एक समृद्ध और विविधतापूर्ण पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता।

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संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील के संचार मंत्री श्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो ने भारत-ब्राजील दूरसंचार सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय बैठक की

नई दिल्ली – दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए आज संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील गणराज्य के संचार मंत्री श्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो के बीच एक द्विपक्षीय बैठक हुई।

इन चर्चाओं से भारत और ब्राजील के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि हुई और समावेशी विकास, सामाजिक-आर्थिक विकास और तकनीकी संप्रभुता के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी को एक मूलभूत स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया। ब्रिक्स ढांचे में प्रमुख साझेदारों के रूप में, दोनों पक्षों ने लचीले, भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल इको-सिस्टम को आकार देने के महत्व पर बल दिया।

 

ब्राज़ील के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने ब्राज़ील पक्ष को भारत सरकार द्वारा पिछले ग्यारह वर्षों में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामर्थ्य को बढ़ावा देने और समावेशी कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए किए गए व्यापक प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सबसे कम डेटा दरों इंटरनेट सुविधा प्रदान करने की भारत की उपलब्धि के बारे में बताया और नागरिकों को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए “सेवाओं का एक व्यापक पैकेज” सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

उपग्रह संचार एक प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में उभरा। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया में उपग्रह संचार एक रणनीतिक भूमिका निभाएगा, और भारत में उपग्रह आधारित सेवाएं शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि भारत और ब्राजील जैसे भौगोलिक रूप से विशाल देशों के लिए, कम सेवा वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का विस्तार करना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि एक दायित्व है।

श्री सिंधिया ने भारतनेट परियोजना की प्रगति के बारे में बताया कि यह विश्व के सबसे बड़े ग्रामीण ऑप्टिकल फाइबर वितरण कार्यक्रमों में से एक है और इसका उद्देश्य देश भर की ग्राम पंचायतों को जोड़ना है। इस परियोजना में महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश का सहयोग प्राप्त है। उन्होंने आधार और यूपीआई सहित इंडिया स्टैक पहलों के बारे में भी विस्तार से बताया और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के परिणामस्वरूप मोबाइल आधारित डिजिटल लेनदेन में हुई तीव्र वृद्धि का उल्लेख किया।

 

ब्राजील की ओर से भारत की डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के परिचालन ढांचे को समझने में रुचि व्यक्त की गई, और श्री सिंधिया ने इसके वित्तपोषण तंत्र के बारे में विस्तार से बताया। इसमें 5 प्रतिशत समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) योगदान मॉडल भी शामिल है और यह ग्रामीण और दूरस्थ कनेक्टिविटी परियोजनाओं का समर्थन करता है।

ब्राजील के मंत्री ने दूरसंचार क्षेत्र में सुनियोजित सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि व्यक्त की और डिजिटल समावेशन के लिए ब्राजील की पहलों के बारे में बताया, जिनमें अमेज़न क्षेत्र में लगभग 40,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के लिए लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश वाला एक बड़ा कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने पीआईएक्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में ब्राजील की सफलता को भी रेखांकित किया और उपग्रह और पनडुब्बी कनेक्टिविटी पहलों में देश की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।

श्री सिंधिया ने 5जी नवाचार और इसके उपयोग के पहलुओं पर भारत के विशेष ध्यान पर बल दिया। इसमें उद्योग-अकादमिक सहयोग और अनुप्रयोग-आधारित तैनाती को बढ़ावा देने के लिए देश भर में 5जी के लिए 100 उपयोग केस प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल है। साइबर सुरक्षा को सहयोग के एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया, इसमें भारत ने सुरक्षित नेटवर्क, दूरसंचार धोखाधड़ी की रोकथाम और लचीले डिजिटल बुनियादी ढांचे में ब्राजील के साथ सहयोग को मजबूत करने की तत्परता व्यक्त की। ब्राजील के बढ़ते 5जी ग्राहक आधार को ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के अवसर के रूप में देखा गया।

दोनों पक्षों ने नियमित आधिकारिक स्तर के परामर्शों, संयुक्त कार्य योजना के विकास और परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख हितधारकों की पहचान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही समावेशी, नवाचार-संचालित और सुरक्षित डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में एआई और डीपटेक स्टार्टअप्‍स के सीईओ के साथ गोलमेज सम्मेलन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने  सेवा तीर्थ में एआई और डीपटेक स्टार्टअप के सीईओ के साथ एक गोलमेज बैठक की।

नई दिल्ली – इस गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने वाले स्टार्टअप्‍स प्रमुख सेक्‍टरों में जनसंख्या-स्तरीय चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा में, वे उन्नत निदान, जीन थेरेपी और कुशल रोगी रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए एआई का उपयोग करते हैं जिससे कि अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचाई जा सके।

कृषि में, वे उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु जोखिमों के प्रबंधन में सहायता के लिए भू-स्थानिक और अंडरवॉटर इंटेलीजेंस का लाभ उठाते हैं। इस समूह में साइबर सुरक्षा, नैतिक एआई, अंतरिक्ष, न्याय और शिक्षा तक स्थानीय भाषा में पहुंच के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण और उद्यम उत्पादकता को सुदृढ़ करने के लिए पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित उद्यम भी शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक ऐसे इकोसिस्‍टम का प्रतिनिधित्व करते हैं जो स्थानीय आवश्‍यकताओं को पूरा करते हुए एआई-संचालित नवोन्‍मेषण में वैश्विक नेतृत्व का निर्माण करता है।

एआई स्टार्टअप्स ने भारत द्वारा अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस सेक्‍टर के तीव्र विस्तार और अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई नवोन्‍मेषण और तैनाती की वैश्विक गति तेजी से भारत की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि देश अब एआई विकास के लिए एक सहायक और गतिशील वातावरण प्रदान करता है, जिससे वैश्विक एआई परिदृश्य में इसकी मजबूत उपस्थिति स्थापित हो रही है। उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की भी प्रशंसा की और इसे एआई से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को आकार देने में देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब बताया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने साहसिक कदम उठाने और प्रभावशाली समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों को बधाई दी। उन्होंने कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न सेक्‍टरों में एआई प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, जिसमें मृदा स्वास्थ्य की रक्षा के लिए फसल उत्पादकता और उर्वरक उपयोग की निगरानी शामिल है। भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए एआई टूल्‍स के विस्तार का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ डेटा प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया, गलत सूचनाओं के प्रति सावधान किया और भारत की आवश्‍यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने का आग्रह किया।

यूपीआई को सरल और विस्तार योग्य डिजिटल नवोन्‍मेषण का एक मॉडल बताते हुए, उन्होंने भारतीय कंपनियों में विश्वास जताया और घरेलू उत्पादों पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अंतरिक्ष सेक्‍टर में निजी भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही और भारतीय स्टार्टअप्‍स में निवेशकों की मजबूत रुचि का उल्लेख किया।

इस बैठक में एब्रिज, अदालत एआई, ब्रेनसाइटएआई, क्रेडो एआई, एका केयर, ग्लीन, इनोगल, इनवीडियो, माइको, ओरिजिन, प्रोफेज़, रासेन, रूब्रिक, सैटश्योर, सुपरनोवा और साइफा एआई के सीईओ और संस्थापक उपस्थित थे। प्रधान सचिव श्री पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 श्री शक्तिकांत दास और राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद भी बैठक में उपस्थित थे।

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राँची में नगर निगम चुनाव 23.02.2026 दिन सोमवार को मतदान की तिथि निर्धारित है

महत्वपूर्ण जानकारी:

राज्य निर्वाचन आयोग, झारखण्ड, राँची से प्राप्त अधिसूचना के अनुसार :- 

मतदान के दौरान मतदाता, की पहचान ठीक ढंग से होनी चाहिए इसलिए ऐसे निर्वाचकों की पहचान साबित करने के लिए निम्न दस्तावेज आयोग द्वारा निर्धारित किये गये हैं:-

1. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया मतदाता पहचान पत्र (EPIC)

2. निर्वाचन तंत्र द्वारा जारी प्रमाणिक फोटोयुक्त मतदाता पर्ची

3. पासपोर्ट

4. ड्राईविंग लाइसेंस

5. राज्य / केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रम, स्थानीय निकाय या पब्लिक लिमिटेड कम्पनी द्वारा उनके कर्मचारियों को जारी किये जाने वाले फोटो युक्त सेवा पहचान पत्र।

6. बैंक / डाकघर फोटोयुक्त पास बुक

7. आयकर पहचान पत्र (पैन कार्ड)

8. आधार कार्ड

9. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

10. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत जारी फोटोयुक्त जॉब कार्ड।

11. फोटोयुक्त स्वास्थ बीमा योजना (स्माट कार्ड)

12. फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज

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श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा मंगोलिया में भारत को पवित्र भूभाग और ‘आध्यात्मिक पड़ोसी’ माना जाता है

नई दिल्ली – भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों के सत्तर वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र-आईजीएनसीए के बृहत्तर भारत और क्षेत्र अध्ययन विभाग द्वारा ‘भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान’ संबंधी दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आज नई दिल्ली में आरंभ हुआ।

आईजीएनसीए के समवेत सभागार में आयोजित सम्मेलन में भारत, मंगोलिया, अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों के 31 विद्वान भाग ले रहे हैं। दो दिवसीय आयोजन में 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इस अवसर पर मंगोलियाई संस्कृति दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जो आईजीएनसीए की दर्शनम दीर्घा में 25 फरवरी तक लोगों के लिए खुली रहेगी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मेलन भारत और मंगोलिया के बीच साझा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान धर्म से परे खगोल विज्ञान, पंचांग विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन जैसे क्षेत्रों तक व्याप्त है। उन्होंने मंगोलियाई कांग्यूर का उल्लेख करते हुए इसे भाषाई एवं दार्शनिक विद्वत्ता का महत्वपूर्ण अभिलेख बताया और जोर दिया कि इसका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण सभ्यतागत संवाद और सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ करता है। श्री शेखावत ने प्रधानमंत्री द्वारा 2015 में मंगोलिया यात्रा के दौरान भारत को ‘आध्यात्मिक पड़ोसी’ कहे जाने का स्मरण किया और रेखांकित किया कि यह सम्मेलन राजनयिक संबंधों के सत्तर वर्ष और सदियों पुरानी सभ्यतागत बंधन का प्रतीक है।

 

संस्कृति सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत और मंगोलिया साझा सभ्यतागत स्मृति और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित साझेदारी को आकार दे रहे हैं। उन्होंने तेल शोधन परियोजना, रक्षा, शिक्षा और मंगोलियाई कांग्यूर के प्रसार जैसी पांडुलिपि संरक्षण पहल सहित रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौसम परियोजना और बृहत्तर भारत परियोजना के तहत, यूनेस्को में बहुराष्ट्रीय मान्यता के लिए साझा अमूर्त विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत में मंगोलिया के राजदूत गनबोल्ड दंबाजाव ने भारत को मंगोलिया का आध्यात्मिक पड़ोसी और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार देश बताया। बौद्ध धर्म को केंद्रीय साझा मूल्य के रूप में रेखांकित करते हुए उन्होंने कंग्यूर और तेंग्यूर सहित शास्त्रीय बौद्ध ग्रंथों के संरक्षण और अनुवाद की चर्चा की। उन्होंने इन ग्रंथों के प्रसार में भारत के सहयोग की सराहना की और दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी का उल्लेख किया।

यह सम्मेलन विद्वानों को भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा का मंच प्रदान करता है, जिसमें पुरातात्विक संबंध, धार्मिक और साहित्यिक परंपराएं, मंगोलिया में संस्कृत पांडुलिपियां, कलात्मक आदान-प्रदान और साझा भौतिक विरासत शामिल हैं।

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रेल भवन में रेलवे हिंदी सलाहकार समिति की 62वीं बैठक आयोजित हुई

नई दिल्ली – रेलवे हिंदी सलाहकार समिति की 62वीं बैठक आज रेल भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने की। इस अवसर पर माननीय रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना तथा माननीय सांसद श्री राज कुमार चहर भी उपस्थित रहे।
बैठक में समिति के माननीय सदस्य — डॉ. अरुण कुमार (पूर्व सांसद), श्री कुंतक मिश्रा, श्रीमती संध्या लल्ल, श्री निशांत कुमार सिंह, श्री जयराम विप्लव, डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान, श्रीमती राखी राठौर तथा श्री हिमांशु दुबे — ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय की संसदीय राजभाषा समिति की सचिव सुश्री राधा कत्याल नारंग भी बैठक में सम्मिलित हुईं।

 

बैठक में रेलवे बोर्ड के सदस्य भी उपस्थित रहे। साथ ही विभिन्न रेल मंडलों, उत्पादन इकाइयों, उपक्रमों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा रेलवे भर्ती बोर्डों के प्रमुख, मुख्य राजभाषा अधिकारी तथा राजभाषा से संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

बैठक के प्रारंभ में रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (मानव संसाधन) ने उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उसके उपरांत पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन का विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षााधीन अर्धवार्षिक अवधि के दौरान संसदीय राजभाषा समिति द्वारा निरीक्षित कार्यालयों की जानकारी भी दी गई। इस अवधि में रेलवे बोर्ड तथा अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा के प्रयोग और प्रोत्साहन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षााधीन अर्धवार्षिक अवधि में रेलवे बोर्ड में आयोजित हिंदी कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के उपरांत रेलवे हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों ने अपने सुझाव प्रदान किए।

बैठक में श्री वी. सोमन्ना एवं श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने रेलवे हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों का समुचित रूप से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने यूरोपीय संसद की एफईएमएम समिति के प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की

नई दिल्ली – भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 16-20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के आधिकारिक मिशन पर आए यूरोपीय संसद की महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता समिति (एफईएमएम समिति) के 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एफईएमएम समिति की अध्यक्ष सुश्री लीना गाल्वेज़ (एस एंड डी, स्पेन) ने किया।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि भारत यूरोपीय संघ के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है और लैंगिक समानता को भारत-ईयू संयुक्त रणनीतिक एजेंडा 2030 के एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखता है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह बैठक पहले के उच्च-स्तरीय जुड़ाव के दौरान शुरू हुई चर्चाओं पर आधारित है और महिलाओं के अधिकारों तथा समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण भारत के संवैधानिक और नीतिगत ढांचे में मजबूती से स्थापित हैं और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के केंद्र में हैं।

उन्होंने मुख्य प्रगति की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की:

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एकतिहाई आरक्षण प्रदान करता है, साथ ही स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46% है।
  • बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के माध्यम से लड़कियों की शिक्षा और स्टेम  क्षेत्रों में भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
  • वित्तीय समावेशन का विस्तार हुआ है, जिसमें लगभग 70% मुद्रा ऋण और 31 करोड़ से अधिक जन धन खातों का लाभ महिलाओं को मिला है।
  • मिशन शक्ति, वन स्टॉप सेंटर, फास्टट्रैक अदालतों और समर्पित हेल्पलाइन के माध्यम से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने में स्वाभाविक भागीदार हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर संवाद से जेंडर-रिस्पॉन्सिव ट्रेड, डिजिटल समावेशन, जलवायु कार्रवाई और जन-दर-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।

बैठक का समापन दोनों पक्षों द्वारा लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने और महिलाओं तथा बच्चों के सशक्तिकरण एवं सुरक्षा के लिए सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के साथ हुआ।

 

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वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन खाता पैकेज संबंधी सुविधा शिविर का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन खाता पैकेज पहल के अंतर्गत पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) द्वारा 17 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित वित्तीय सेवा विभाग के जीवन दीप भवन परिसर में एक सुविधा शिविर का आयोजन किया गया। पंजाब नेशनल बैंक ने अन्य सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को सहयोगात्मक तरीके से इस शिविर में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। इस शिविर का उद्घाटन वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू और पीएनबी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीएफएस और अन्य सहभागी बैंकों के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में बोलते हुए सचिव महोदय ने कहा कि यह पहल केंद्र सरकार के कर्मचारियों तक वित्तीय सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने एकीकृत बैंकिंग समाधान विकसित करने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के समन्वित प्रयासों की सराहना की तथा इन शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेने और अनुकूलित वेतन खाता पैकेज का लाभ उठाने का आग्रह किया।

प्रसार रणनीति के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों भवनों में सुविधा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को नोडल बैंक के रूप में नियुक्त किया गया है, ताकि वे संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सकें और अन्य पीएसबी की भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों ने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में शिविर आयोजित करना शुरू कर दिया है और शेष मंत्रालयों/विभागों के साथ शिविरों की तिथियों को अंतिम रूप देने के लिए समन्वय कर रहे हैं।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने 14 जनवरी 2026 को सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के सहयोग से ‘केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन खाता पैकेज’ का शुभारंभ किया था। इस पहल का उद्देश्य केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा, बेहतर सेवा प्रदायगी तथा अधिक बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना है। यह पैकेज तीन प्रमुख घटकों – बैंकिंग, बीमा और कार्ड- को समाहित करते हुए एक ही स्थान पर कर्मचारियों को सभी वित्तीय समाधान प्रदान करता है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डीएफएस ने सभी पीएसबी को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में सुविधा शिविर आयोजित करने की सलाह दी थी।

इस पैकेज में तीन मुख्य खंड बैंकिंग, बीमा और कार्ड शामिल हैं, जो कर्मचारियों के लिए एक ही स्थान पर सभी वित्तीय समाधान प्रदान करता है। इस पैकेज की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

    • उन्नत सुविधाओं सहित शून्य-बैलेंस वेतन खाता
    • निःशुल्क प्रेषण (जैसे आरटीजीएस/एनईएफटी/यूपीआई) और चेक बुक सुविधा।
    • लॉकर किराए और ऋण प्रोसेसिंग शुल्क में छूट।
    • आवास, शिक्षा, वाहन और व्यक्तिगत ऋणों पर रियायती ब्याज दर।
    • 150 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (पीएआई)
    • 200 लाख रुपये तक का हवाई दुर्घटना बीमा (एएआई)
    • 150 लाख रुपये तक का स्थायी पूर्ण एवं आंशिक दिव्यांगता कवर (टीपीडी/पीपीडी)
    • 20 लाख रुपये तक का जीवन बीमा लाभ वैकल्पिक टॉप-अप कवरेज सहित
    • स्वयं/परिवार के लिए व्यापक चिकित्सा बीमा टॉ-अप कवरेज सहित।
    • डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर बेहतर लाभ

यह पहल डीएफएस और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और सेवा प्रदायगी को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

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डीआरडीओ ने गगनयान ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालीफिकेशन परीक्षण किया

नई दिल्ली – भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान औऱ विकास संगठन (डीआरडीओ) के चण्डीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (टीबीआरएल) के ‘रेल ट्रेक रॉकेट स्लेड’ केन्द्र में गगनयान कार्यक्रम के लिए पैराशूट का क्वालीफिकेशन स्तर का लोड परिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। आरटीआरएस एक विशिष्ट गतिशील परिक्षण सुविधा है, जिसका उपयोग उच्च गति वाले एरोडायनिमक और बैलस्टिक मूल्यांकन के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।

यह परीक्षण 18 फरवरी, 2026 को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, इसरो, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, डीआरडीओ और टीबीआरएल की विभिन्न समर्पित टीमों के साथ मिलकर किया गया था। आरटीआरएस डायनिमिक परीक्षण के दौरान क्वालीफिकेशन स्तर के उन भारों (लोड) का अनुकरण किया गया, जो अधिकतम उड़ान भार से अधिक भी अधिक होते है। यह पैराशूट के अतिरिक्त डिजाइन सुरक्षा मार्जिन को प्रदर्शित करता है।

यह परीक्षण उच्च शक्ति वाले ‘रिबन पैराशूट’ के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता को सिद्ध करता है। यह उपलब्धि एक बार फिर अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों के लिए उन्नत परीक्षण सुविधाएं, उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने में टीबीआऱएल के विशाल योगदान को रेखांकित करती है।

केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने गगनयान ड्रोग पैराशूट के सफल क्वालीफिकेशन परीक्षण पर डीआरडीओ, इसरो और उद्योग जगत को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल क्वालीफिकेशन स्तरीय लोड परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी है।

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एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मौके पर प्रधानमंत्री से स्विस कन्फेडरेशन के अध्‍यक्ष श्री गाय पारमेलिन ने भेंट की

स्विस कन्फेडरेशन के अध्‍यक्ष एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 में हिस्सा लेने के लिए 19-20 फरवरी 2026 को दो दिन के भारत दौरे पर हैं।

दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दोस्ताना और विभिन्न रिश्तों को मजबूत किया। उन्होंने व्‍यापार और निवेश, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, नवोन्‍मेष, कौशल विकास, सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों सहित दोनों देशों के रिश्तों के दायरे की समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।

दोनों नेताओं ने आर्थिक रिश्तों के गहरे होने का स्वागत किया और हाल ही में हुए ऐतिहासिक इंडिया-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के बीच संपन्‍न व्‍यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को लागू करने से उत्‍पन्‍न सकारात्‍मक रफ़्तार पर ज़ोर दिया। स्विट्जरलैंड इसका एक अहम सदस्य है। टीईपीए में दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश प्रवाह बढ़ाए जाने की अपार संभावना है।

दोनों पक्ष नवोन्‍मेष से होने वाली वृद्धि, संयुक्‍त अनुसंधान, सर्वश्रेष्‍ठ कार्य प्रणाली को साझा करने और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास पहल के ज़रिए क्षमता निर्माण में सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमत हुए। बैठक भारत-स्विट्ज़रलैंड साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की समान कल्‍पना के साथ संपन्‍न हुई।

प्रधानमंत्री ने अगले एआई समिट की मेजबानी के लिए स्विट्ज़रलैंड की पहल का स्वागत किया, जिसके बाद संयुक्‍त अरब अमीरात इसकी मेजबानी करेगा।

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झारखंड की कोयला खदानों ने की लंबे समय से खोई हुई दुनिया को फिर से खोजने में मदद

नई दिल्ली – झारखंड की खुली कोयला खदानों से एक लुप्त इकोसिस्‍टम के प्रमाण मिले हैं जो मनुष्यों या डायनासोरों के अस्तित्व से भी बहुत पहले विद्यमान था। खदानों में दबे साक्ष्यों से घने दलदली जंगलों और नदियों के जाल का पता लगाने में मदद मिली है जो लगभग 30 करोड़ वर्ष पहले दक्षिणी महाद्वीप गोंडवानालैंड के हिस्से के रूप में भारत में व्याप्त थे।

यह अध्ययन गोंडवाना के उस वातावरण का पुनर्निर्माण करता है जो कभी-कभार समुद्र के स्पर्श से प्रभावित होता था और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि महाद्वीपीय वातावरण को कैसे नया रूप दे सकती है, इस बारे में जानकारी प्रदान कर सकता है।

पूर्व के अध्ययनों में अनेक सिद्धांत प्रस्‍तुत किए गए थे, जिनमें भारत भर के विभिन्न चट्टानी क्षेत्रों और कोयला क्षेत्रों से एकत्रित जीव-जंतुओं और तलछटों में पाए गए साक्ष्यों के आधार पर समुद्री जल के अतिक्रमण के मार्गों को समझाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, यह अध्ययन क्षेत्र अभी भी अत्‍यंत विवादास्पद बना हुआ है, क्योंकि प्रागैतिहासिक समुद्री बाढ़ या पर्मियन काल में समुद्र के अतिक्रमण की घटनाएं छिटपुट हैं और केवल कुछ ही स्थानों पर इनका प्रलेखन किया गया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, बीरबल साहनी जीवाश्म विज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के नेतृत्व में किए गए एक नए बहुविषयक अध्ययन में झारखंड के उत्तरी करणपुरा बेसिन में स्थित अशोक कोयला खदान से पुरावनस्पति विज्ञान और भू-रासायनिक साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। इस अध्ययन में प्राचीन पौधों के असाधारण जीवाश्म रिकॉर्ड और सूक्ष्म रासायनिक संकेतों का पता चला है, जो मिलकर उस समय के इस लुप्त हो चुके इकोसिस्‍टम का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करते हैं, जब भारत, अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिलकर गोंडवानालैंड का हिस्सा थे।

 

चित्र 1 : अशोक कोयला खदान खंड से प्राप्त पादप जीवाश्म (लगभग 290 मिलियन वर्ष पुराने): क) ग्लॉसॉप्टेरिस सीयरसोलेन्सिस, बीएसआईपी- 48382, ख) जी. गिरिडीहेन्सिस, बीएसआईपी- 48383, ग) जी. सबटिलिस, बीएसआईपी- 48384, घ) जी. स्टेनोन्यूरा, बीएसआईपी- 48385, ङ) अज्ञात अंडाणुयुक्त फल संरचना, बीएसआईपी- 48390, च) अज्ञात फल संरचना का पुनर्निर्माण, छ) ग्लॉसॉप्टेरिस नौटियाली, बीएसआईपी- 48394, ज) जी. ज़ीलेरी, बीएसआईपी- 48395।

 

गोंडवाना पर्यावरण और उससे जुड़ी पुरावनस्पति के पुनर्निर्माण से ग्लॉसॉप्टेरिस की प्रचुरता का पता चला, जो बीज वाले पौधों का एक विलुप्त समूह है जिनका कभी दक्षिणी महाद्वीपों पर प्रभुत्‍व था।

ग्लॉसॉप्टेरिस और उसकी निकटस्‍थ प्रजातियों की कम से कम 14 अलग-अलग प्रजातियों के जीवाश्म कोयला खदान में शेल की परतों में नाजुक पत्ती के निशान, जड़ों, बीजाणुओं और पराग कणों के रूप में संरक्षित पाए गए।

दामोदर बेसिन में ग्लॉसॉप्टेरिस के पहले किशोर नर शंकु की खोज एक वैश्विक महत्व की खोज है। यह वनस्पति विज्ञान का एक ऐसा ‘अधूरा हिस्सा’ है जो वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकता है कि ये प्राचीन वृक्ष कैसे उत्‍पन्‍न हुए।

चित्र 2 : कोयले के नमूनों के विभिन्न पेट्रोग्राफिक घटकों के फोटोमाइक्रोग्राफ – ab) कोलोटलिनाइट; c) कॉर्पोजेलिनाइट (तीर); d) तेल धब्बा (तीर); efg) स्पोरिनाइट; h) एक्ससुडाटिनाइट (d का प्रतिदीप्ति दृश्य); i) सेमीफ्यूसिनाइट (तीर); j) फ्यूसिनाइट; k) इनर्टोडेट्रिनाइट (तीर; g का सामान्य दृश्य); lm) फंगिनाइट; np) पाइराइट – क्रमशः विशाल, फ्रैम्बोइडल और कोशिका-भरने वाले रूप में। फोटोमाइक्रोग्राफ ad और ip आपतित सफेद प्रकाश के अंतर्गत लिए गए थे; फोटोमाइक्रोग्राफ gh नीले प्रकाश उत्तेजना (प्रतिदीप्ति) मोड के अंतर्गत लिया गया था।

सूक्ष्मदर्शी से कोयले और शेल के कणों की जांच करने पर, उनमें फ्रैम्बोइडल पाइराइट (छोटे रास्पबेरी के आकार के खनिज समूह) और कोयले और शेल में सल्फर का असामान्य रूप से उच्च स्तर पाया गया। इससे खारे पानी की स्थिति का संकेत मिलता है, जो इस बेसिन में कोयले के भंडारों के लिए असामान्य है और इस प्रकार समुद्री घुसपैठ और उसके मार्ग का प्रमाण मिलता है।

कार्बनिक अणुओं के रासायनिक विश्लेषण (गैस क्रोमेटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री का उपयोग करते हुए) से पता चलता है कि लगभग 280-290 मिलियन वर्ष पहले दामोदर बेसिन में समुद्री जीवों का प्रवेश संभव था और यह पूर्वोत्तर भारत से मध्य भारत की ओर बढ़ते हुए पर्मियन सागर के मार्ग को दर्शाता है।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कोल जियोलॉजी में प्रकाशित निष्कर्षों ने उत्तरी करणपुरा कोयला क्षेत्र में अशोका कोयला खदान में समुद्री संकेतों के साथ-साथ कोयला युक्त अनुक्रम के सेडिमेंटेशन इतिहास में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।

अतीत में समुद्री अतिक्रमणों और ध्रुवीय बर्फ पिघलने से जुड़े वर्तमान समुद्र स्तर में वृद्धि के बीच समानताएं बताते हुए, यह अध्ययन चल रहे वैश्विक तापक्रम परिवर्तन के तहत महाद्वीपीय भूदृश्यों पर समुद्री वातावरण के संभावित भविष्य के अतिक्रमण के निहितार्थों पर प्रकाश डाल सकता है।

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प्रधानमंत्री ने रमज़ान के पवित्र महीने की शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पवित्र माह रमज़ान के शुरू होने पर भारतवासियों तथा वैश्विक समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा:

रमज़ान मुबारक!

“यह पावन माह हमारे समाज में एकजुटता की भावना को और सुदृढ़ करे। हर जगह शांति और समृद्धि बनी रहे।”

 

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने नई दिल्ली में अपना 23वां स्थापना दिवस मनाया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) का 23वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली के विनय मार्ग स्थित सिविल सेवा अधिकारी संस्थान में मनाया गया। इस अवसर पर माननीय केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। माननीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गा दास उइके भी इस समारोह में शामिल हुए। एनसीएसटी के माननीय अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य और माननीय सदस्य श्री निरुपम चकमा एवं डॉ. आशा लकरा, वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ एनसीएसटी के सचिव के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने आयोग के संवैधानिक अधिदेश, उद्देश्यों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन हेतु की गई विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम के दौरान आयोग के विभिन्न कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक लघु वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई। इस फिल्म में जनजातीय समुदायों के हित में एनसीएसटी के उपायों, नीतिगत सुझावों और राज्यों व केन्द्र-शासित प्रदेशों के साथ समन्वय के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर श्री जुएल ओराम ने आयोग के कामकाज और जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण देने वाली “एनसीएसटी हैंडबुक” और जुलाई से दिसंबर 2025 तक आयोग की विभिन्न गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एक पत्रिका का विमोचन किया। जनजातीय सशक्तिकरण से संबंधित आयोग की उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। इस समारोह के हिस्से के रूप में जनजातीय अधिकारों पर केन्द्रित एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री जुएल ओराम ने कहा कि सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने एनसीएसटी की सक्रिय भूमिका की सराहना की और कहा कि आयोग की सिफारिशों एवं जमीनी स्तर के दौरों ने नीति निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केन्द्रीय मंत्री ने जनजातीय समुदायों के उत्थान हेतु शिक्षास्वास्थ्यआजीविकावन अधिकार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।

अपने संबोधन में, श्री दुर्गा दास उइके ने जनजातीय समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोग और मंत्रालय के बीच समन्वय से शिकायत निवारण तंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि अत्याचारों से संबंधित शिकायतों में कमी आई है और जनजातीय समुदाय विकास संबंधी मुद्दों पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।

आयोग की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, माननीय अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने कहा कि एनसीएसटी अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में सक्रिय और सतर्क बनी हुई है। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ नियमित संवाद, अनुसूचित क्षेत्रों का दौरा और शिकायतों का समय पर निपटान आयोग की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। उन्होंने जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

माननीय सदस्य श्री निरुपम चकमा ने वन अधिकारोंभूमि संबंधी मामलों और टिकाऊ आजीविका से संबंधित मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि आयोग इन मामलों पर राज्यों के साथ निरंतर संवाद में है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

माननीय सदस्या डॉ. आशा लकरा ने कौशल विकास के साथ-साथ शिक्षा, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की लड़कियों की शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने से विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ती है।

कार्यक्रम का समापन एनसीएसटी के संयुक्त सचिव श्री अमित निर्मल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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गूगल और अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुंदर पिचाई ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत जीआई कॉफी लाउंज का दौरा किया

नई दिल्ली  – गूगल और अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुंदर पिचाई ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा आयोजित भारत जीआई कॉफी लाउंज का दौरा किया।
मालाबार अरेबिका का स्वाद लेते हुए श्री पिचाई ने बरिस्ता से बातचीत की और भारत की प्रीमियम जीआई-टैग्ड कॉफी के रिच फ्लेवर का अनुभव किया।

फिनलैंड, फ्रांस, जापान, नाइजीरिया, बोत्सवाना, लिथुआनिया, कजाकिस्तान, पोलैंड और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने भी कई अन्य देशों के अलावा कॉफी एक्सपीरियंस सेंटर का दौरा किया  उन्होंने भारत की जीआई कॉफी विरासत में गहरी रुचि व्यक्त की।

फिनलैंड के प्रतिनिधि ने विशेष रूप से मानसून मालाबार अरेबिका के मधुर, स्मूद स्वाद की सराहना की  उन्होंने इसके अद्वितीय चरित्र और विशिष्ट प्रसंस्करण परंपरा की प्रशंसा की जो इसे वैश्विक मंच पर विशेष स्थान प्रदान करती है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने X पर इस पल को पोस्ट किया,

“जब @SundarPichai इसका स्वाद लेने के लिए आते हैं, तो आप जानते हैं कि यह वास्तव में इसके लायक है! दुनिया #IndiaAIImpactSummit2026 में भारत जीआई कॉफी के लिए एक कप उठा रही है।

भारत जीआई कॉफी लाउंज, भारत मंडपम (हॉल 14, प्रथम तल) 17-20 फरवरी।”  ट्वीट का लिंक – https://x.com/PiyushGoyal/status/2024386674072179011

भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दूसरे दिन भारत जीआई कॉफ़ी एक्सपीरियंस सेंटर, हॉल 14 प्रथम तल का दौरा किया और भारत की जीआई-रजिस्टर्ड कॉफ़ी की रिचनेस का उत्सव मनाया।

उन्होंने बताया कि कैसे ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑथेंटिसिटी को बनाए रखते हैं, स्थानीय समुदाय को मज़बूत बनाते हैं, और भारत के अलग-अलग तरह के कॉफ़ी ओरिजिन को ग्लोबल पहचान दिलाते हैं।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, भारत जीआई कॉफ़ी भारत के विशेष ज्योग्राफिकल इंडिकेशन उत्पादों की खूबी का उत्सव मनाने वाले विशेष शोकेस के ज़रिए दुनिया भर का ध्यान खींच रही है। 16-20 फरवरी तक नई दिल्ली में हो रहे सबसे बड़े एआई इवेंट ने ‘भारत जीआई’ नाम की नई राष्ट्रीय पहल के हिस्से के तौर पर दुनिया भर का ध्यान खींचा।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने भारत जीआई को समेकित राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा  ब्रांड के तौर पर पेश किया है।

इसका उद्देश्य “ए वर्ल्ड एक्सक्लूसिव” टैगलाइन के साथ भारत के विशेष जीआई उत्पादों को दुनिया भर में दिखाना है। डीपीआईआईटी, कॉफ़ी बोर्ड के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक आयोजन में आगंतुकों को देश के समृद्ध, अलग -अलग फ्लेवर और भारतीय कॉफ़ी की विरासत का शानदार अनुभव दे रहा है।

हॉल नंबर 14 फर्स्ट फ्लोर पर बने कॉफ़ी एक्सपीरियंस सेंटर ने कई जिज्ञासु लोगों को अलग-अलग भारतीय जीआई रजिस्टर्ड कॉफ़ी को एक्सप्लोर करने और अनुभव करने के लिए आकर्षित किया।  कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि टिकाऊ तरीके से छाया में उगाई गई, हाथ से चुनी गई और प्राकृतिक धूप में सुखाई गई भारत जीआई कॉफ़ी का स्वाद लेने आए हैं।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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