Category Archives: life style

अंडरआर्म्स शेविंग करते समय रखें इन बातों का ध्यान

29.07.2022 – अंडरआर्म्स शेविंग करते समय रखें इन बातों का ध्यान. शरीर में ऐसी कई ऐसी अनचाही जगहें हैं जहां बाल आते हैं और उन्हें हटाने के लिए कई तरीके आजमाए जाते हैं। इन्हीं अनचाहे बालों में से हैं अंडरआर्म्स के बाल जो कई बार आपको दूसरों के सामने शर्मिंदा कर सकते हैं। पुरुष हो या महिलाएं दोनों ही अपने अंडरआर्म्स को साफ रखना पसंद करते हैं और ये बाल हटाने के लिए अंडरआर्म्स की शेविंग करते हैं। लेकिन देखा गया हैं कि कई लोगों को शेविंग के बाद अंडरआर्म्स का कालापन और खुजली या रैशेज की समस्या का सामना करना पड़ता हैं। अगर आप अंडरआर्म्स हेयर रिमूवल के दौरान कुछ टिप्स आजमाएंगे तो आप इस तरह की समस्याओं से बची रहेंगी। आइये जानते हैं अंडरआर्म्स शेविंग के दौरान ध्यान रखी जाने वाली बातों के बारे में…

त्वचा को एक्सफोलिएट करें

जैसे आपको त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने के लिए त्वचा को एक्सफोलिएट करने की जरूरत होती है उसी तरह से आपको अंडरआर्म्स के बाल हटाने से पहले और बाद में भी अंडरआर्म्स की त्वचा को एक्सफोलिएट करना जरूरी है। अगर आप बालों को हटाने के लिएशेविंग कर रही हैं तो उसके ठीक पहले अपने अंडरआर्म्स को एक्सफोलिएट करें। एक्सफोलिएट करने से मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है और आपको बालों को हटाने के बाद त्वचा स्मूद हो जाती है।

रेजर यूज करते समय रखें सावधानी

मल्टी ब्लेड रेजर यूज न करें क्योंकि इस तरह के रेजर स्किन के बेहद नजदीक के बालों को भी खींचते और काटते हैं जिससे स्किन की सतह के नीचे इनग्रोन हेयर के उगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। धार खराब हो चुके रेजर का इस्तेमाल बिलकुल न करें। क्लीन और बेहतर शेविंग चाहती हैं तो शार्प रेजर या इलेक्ट्रिक ट्रिमर यूज करें। अगर आपको लगे कि रेजर स्किन पर स्मूथ तरीके से नहीं चल रहा तो यह इस बात का संकेत है कि आपको अपना रेजर बदल देना चाहिए।

हर स्ट्रोक के बाद ब्लेड को करें वॉश

पूरी तरह अंडरआर्म के बाल हटाने के बाद तो रेजऱ को धोएं ही लेकिन इसके साथ ही हर एक स्ट्रोक के बाद भी ब्लेड को धोएं। अगर आप ऐसा नहीं करेंगी, तो बाल और डेड स्किन ब्लेड में फंसते जाएंगे और शेविंग अच्छी तरह नहीं होगी। इसलिए परफेक्ट शेव के लिए इसे हर स्ट्रोक के बाद ज़रूर धोएं। साथ ही लंबे की जगह स्ट्रोक छोटे रखें।

हाथों को अच्छी तरह स्ट्रेच करें

अंडरआर्म्स के बाल हटाने वक्त हाथों को अच्छी तरह से स्ट्रेच करके ऊपर उठाएं। अगर आप शेविंग करते वक्त अंडरआर्म्स को ठीक तरीके से स्ट्रेच नहीं करेंगे तो इससे आपकी स्किन ढीली रह जाएगी और शेविंग करते वक्त स्किन कट सकती है।

ना करें ज्यादा बार शेविंग

महिलाएं अपने अंडरआर्म को साफ़ रखने के लिए कई बार बिना कारण के ही शेविंग करती हैं। अंडरआर्म जैसे नाजुक हिस्से में ज्यादा बार शेविंग करना त्वचा के कालेपन और रूखेपन का कारण बन सकता है। शेविंग त्वचा को शुष्क और संवेदनशील बनती है और त्वचा की सुरक्षात्मक परत को भी हटा देती है। इसलिए जब आवश्यक हो तभी शेविंग करें और इसे जल्दबाजी में करने की बजाय धीरे से करें।

सही डायरेक्शन में निकाले बाल

अंडरआर्म्स के बाल हटाने के लिए शेविंग का सहारा ले रही हैं तो हमेशा सही डायरेक्शन में ही बाल निकालें। बाल हटाते वक्त हमेशा रेजर की मूवमेंट ग्रोथ के ऑपोजिट डायरेक्शन में ही रखें। जैसे अगर आपके बालों की ग्रोथ ऊपर से नीचे की तरफ है तो रेजर का इस्तेमाल नीचे से ऊपर की तरफ करें।

ड्राई शेविंग की गलती

शेविंग क्रीम खासतौर पर शेविंग को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। लेकिन लड़कियां जल्दबाजी में किसी भी क्रीम का इस्तेमाल करने की बजाय ड्राई शेविंग करती हैं। ड्राई शेविंग स्किन को हार्ड और ज्यादा रूखा बना देती है। इसलिए आप जब भी अंडरआर्म्स के बाल हटा रही हैं तब ड्राई शेविंग करने से बचना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि कोई भी पुरानी शेविंग क्रीम या साबुन का इस्तेमाल न करें। किसी भी तरह के इरिटेशन से बचना चाहती हैं तो अंडरआर्म्स में शेविंग जेल यूज करें। ऐसा करने से रेजर आसानी से स्किन पर चलेगा। (एजेंसी)

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चेहरे के टी-जोन वाला हिस्सा रहता है ऑयली, अपनाए ये स्किन केयर टिप्स

28.07.2022 – क्या आपने अपने शरीर के टी-जोन हिस्से के बारे में सुना है, जो बहुत ज्यादा ऑयली होता है। शायद ये पढ़कर आप भी आश्चर्यचकित होंगे कि भला, ये टी-जोन क्या है ? दरअसल हमारे शरीर के अलग-अलग हिस्से कई तरह के आकार बनाते है, जिसमें माथा, नाक और ठोड़ी वाले हिस्से को देखा जाए तो इससे ञ्ज का आकार बनता है, इसलिए इस हिस्से को टी-जोन कहा जाता है। जो कि चेहरे के अन्य हिस्सों की अपेक्षा में ज्यादा ऑयली होता है। क्यूंकि इसमें प्राकृतिक रूप से ज्यादा तेल निकलता है।

अब जिन लोगों की स्किन पहले से ऑयली है, तो उनके लिए इस कारण समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि हम इस हिस्से को क्लीन रखें। यहां हम आपको टी-जोन में ऑयल आने के कारण बताने के साथ ही वो तरीकें बताने जा रहे है जिसे आजमाकर आप ऑयल को कंट्रोल करते हुए इस समस्या से निजात पा सकते है।क्या वजह है टी-जॉन पर ऑयल आने की दरअसल हमारे शरीर में सिबेशियस ग्रंथियों के जरिए ऑयल का प्रोडक्शन होता है।

जो कि टी-जोन के पीछे मौजूद रहती हैं। ऐसे में जब ये ऑयल उत्पन्न करती हैं तो वो रोमछिद्रों के जरिए स्किन पर नजर आता है। और यही वजह है कि बाकी चेहरे की तुलना में इस हिस्से में ब्लैकहेड्स/व्हाइटहेड्स की समस्या भी ज्यादातर होती है।

*कैसे करेंऑयल कंट्रोल – चूंकि हमारे पोरस यानि रोमछिद्रों के जरिए चेहरे पर ऑयल नजर आता है। ऐसे में सबसे पहले ऑयल को कंट्रोल करने के लिए आपको चेहरे के रोमछिद्रों को साफ रखना चाहिए।इसके लिए आप फेशियल क्लींजर का इस्तेमाल कर सकते है। अब जिनकी स्किन ऑयली या मिक्स है, वो एक ही तरह के फेशियल क्लींजर का इस्तेमाल लंबे समय तक कर सकते हैं। लेकिन जिनकी स्किन ड्राई है, उन्हें गर्मियों में ऑयल कंट्रोल क्लींजर का इस्तेमाल करना चाहिए। वरना दूसरी अन्य परेशानियां बढ़ सकती है।

* ये बहुत जरूरी है कि हम चेहरे को बार-बार केवल पानी से धोते रहें। और बात चूंकि टी-जोन पर ऑयल कंट्रोल करने की हो रही है तो इसके लिए दिन में कम से कम 5-6 बार अपना चेहरा अवश्य रूप से धोएं।लेकिन याद रखें चेहरे को धोते समय हर बार फेस वॉश का इस्तेमाल न करें। सिर्फ सुबह और रात को यानि इन दो टाइम में ही आपको फेसवॉश यूज करना है। बाकी समय में हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को धोए। ताकि उस पर जमा गंदगी हट जाए।

*मॉइश्चराइजर हमारी स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए बहुत जरूरी है। और टी-जोन को ऑयल फ्री बनाने के लिए आप वॉटर बेस मॉइश्चराइजर का यूज कर सकते है। क्यूंकि ये ऑयल फ्री होता है।

* टी-जोन को साफ करने में ऱोज वॉटर यानि गुलाब जल भी काफी मददगार है। आप चाहे तो कॉटन बॉल को गुलाब जल में भिगोकर अपना चेहरा साफ कर सकती है या फिर गुलाब जल को स्प्रे बॉटल में ड़ालकर चेहरे पर स्प्रे करके उसे क्लीन कर सकती है।

* टी-जोन पर एलोवेरा जेल लगाने से भी काफी फायदा मिलता है। इसके लिए आधे घंटे तक एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाकर छोड़ दें और इसके बाद गुनगुने पानी से फेसवॉश कर लें। इससे यहां होने वाले ऑयल प्रोडक्शन को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। (एजेंसी)

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पाइलेट्स बनाम एरोबिक्स: जानिए किस एक्सरसाइज का चयन है ज्यादा बेहतर

28.07.2022 – रोजाना कुछ मिनट एक्सरसाइज करने से कई तरह के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से से जुड़े लाभ मिल सकते हैं और यह बात लगभग हर कोई जानता है, इसलिए अधिक से अधिक लोग फिटनेस फ्रीक बनते जा रहे हैं। वैसे लोगों के बीच आजकल एरोबिक और पाइलेट्स नाम की दो एक्सरसाइज काफी ट्रेंड में हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से किसे चुनना ज्यादा अच्छा है? चलिए फिर आज हम आपकी सही एक्सरसाइज चुनने में मदद करते हैं।

एरोबिक्स क्या है?एरोबिक्स एक्सरसाइज को कार्डियो के रूप में भी जाना जाता है, जिससे हृदय में ऑक्सीजन युक्त रक्त को पंप करने की जरूरत होती है ताकि काम करने वाली मांसपेशियों को ऑक्सीजन पहुंचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, एरोबिक अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाती है। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है और मोटापे से भी बचाती है। एरोबिक एक्सरसाइज के तौर पर आप अपने रूटीन में स्वीमिंग, जॉगिंग, साइकिलिंग और रस्सी कूदना आदि को शामिल कर सकते हैं।

पाइलेट्स क्या है?पाइलेट्स एक्सरसाइज का एक रूप है, जिसे जोसेफ पाइलेट्स ने नर्तकियों और एथलीटों की चोट को जल्दी ठीक करने के लिए बनाया था। इसमें कई ऐसे मूवमेंट्स शामिल हैं, जो आपके कोर को स्थिर और मजबूत करते हैं। यह नॉन-कार्डियो वर्कआउट आपके शरीर को लचीलापन और जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है। पाइलेट्स में कैलीस्थेनिक्स, योग और बैले जैसी एक्सरसाइज शामिल हैं, जिनका अगर रोजाना 20-25 मिनट अभ्यास किया जाए तो कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

एरोबिक्स और पाइलेट्स के बीच अंतरएरोबिक एक्सरसाइज एक तेज गति वाला वर्कआउट है, जिसमें जॉगिंग, तैराकी, साइकिल चलाना आदि शामिल हैं, जो हृदय गति को बढ़ाते हैं। पाइलेट्स एक्सरसाइज पेट पर नियंत्रण के साथ धीमी गति से किया जाने वाला वर्कआउट है और इसमें शामिल एक्सरसाइज को करते समय व्यक्ति का पूरा ध्यान अपनी सांस पर होना चाहिए। साफ शब्दों में कहें तो एरोबिक्स एक्सरसाइज उच्च ऊर्जा और तीव्र होती हैं, जबकि पाइलेट्स एक्सरसाइज आमतौर पर बैठकर या लेटकर धीमी गति में की जाती है।

एरोबिक और पाइलेट्स के बीच समानताएंसमग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए एरोबिक्स और पाइलेट्स दोनों ही शानदार हैं। ये आपकी शारीरिक ताकत को बढ़ाती हैं, मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती हैं और तेजी से कैलोरी बर्न करने में सहायक हैं। हालांकि, एक्सरसाइज के इन दोनों रूपों के लिए एक प्रशिक्षक का होना जरूरी है। अगर आप नियमित रूप से अभ्यास करते हैं तो दोनों ही एक्सरसाइज के रूप आपको स्वस्थ बनाए रखने में काफी मदद कर सकते हैं।

एरोबिक और पाइलेट्स में से किसका चयन करना है ज्यादा बेहतर?अगर आपका लक्ष्य वजन घटाना है तो एरोबिक व्यायाम आपके लिए एक बेहतर विकल्प है क्योंकि यह आपकी हृदय गति को बढ़ाती हैं, जिससे आप अधिक से अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

वहीं, कोर स्ट्रेंथ और मसल टोन को बेहतर बनाने के लिए पाइलेट्स बेहतर विकल्प है। धीमी गति वाली इस एक्सरसाइज यह सुनिश्चित होता है कि शरीर के सभी अंग प्रभावित हों, जिससे मांसपेशियों को बेहतर मजबूती मिले। (एजेंसी)

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सफर को बनाना चाहते हैं यादगार, तो आपके बड़े काम आ सकते हैं ये ट्रैवल टिप्स

27.072022 – घुमक्कड़ी लोग सफर को अच्छी तरह से एंजॉय कर लेते हैं, क्योंकि ये उनका शौक होता है। उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि यात्रा का आनंद कैसे लिया जा सकता है? लेकिन वो लोग जो कभी-कभी या साल में एक दो बार छुट्टियां बिताने के लिए सफर के लिए निकलते हैं। वो लोग कई बार अपने सफर का पूरा आनंद नहीं ले पाते हैं। वो लोग कुछ न कुछ ऐसा जरूर कर देते हैं जिससे सफर का मजा पूरी तरह से बरबाद हो जाता है। तो अगर आप भी खुद को उसी कैटेगरी में खड़ा पाते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है।

हम यहां आपके साथ कुछ ऐसे टिप्स शेयर करने जा रहे हैं, जिन्हें फॉलो कर आप अपने सफर का मजा दोगुना कर सकते हैं। साथ ही उसे यादगार भी बना सकते हैं।

तो आइये जानते हैं कौन सी हैं वो चमत्कारी टिप्सज्

1.ट्रैवल के समय धैर्य बनाए रखें। सफर में हर समय गुस्सा और नाराज होने से आपकी ट्रिप खराब हो सकती है। सफर पर छोटी बड़ी कठिनाईयों का सामना करना आम बात है। ऐसे में चिड़चिड़ाने, नाराज होने की जगह सब्र रखें, तभी आप समस्या का समाधान निकालने में सक्षम हो सकेंगे।

2.अच्छा होटल अच्छा रूम और उसकी सुख-सुविधा का आनंद लेते हुए देर तक सोते न रहें। सूर्योदय से पहले उठें और फिर सबसे अच्छे नजारों को एंजॉय करें।

3.ट्रिप को पूरी तरह से एंजॉय करने के लिए अपनी स्पीड को थोड़ा स्लो करना अच्छा हो सकता है। इससे आप चीजों को अच्छी तरह से देख सकेंगे। आप जब भी किसी जगह को एक्सप्लोर करें, तो उसे काफी आराम से देखें और एंजॉय करें। इससे आपका सफर काफी यादगार हो जाएगा।

4.ट्रिप पर अगर कोई काम कठिन लगे, तो निराश न हों, धैर्य पूर्वक उसे करने की कोशिश करते रहें। ध्यान रखें, कोई भी काम मुश्किल नहीं होता।

5.अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर ट्रिप की उन चीजों को करने में हाथ अजमाएं, जो आपको चुनौतीपूर्ण लगता हो, क्योंकि पता नहीं, अगली बार आपको इस जगह पर आने का मौका कब मिले, मिले भी या नहीं।

6.दूसरों की लाइफस्टाइल को जज किए बिना ट्रैवल करें। सफर के दौरान पूरी तरह से ओपेन माइंड हो जाएं, ताकि आप अपने ट्रैवल को अच्छी तरह से एंजॉय कर सकें। अपने ट्रैवल डेस्टिनेशन के लोकल फूड, ड्रेस और कल्चर का मजा जरूर लें। (एजेंसी)

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केला नेचुरल कंडीशनर का काम करता हैं, बालों को पोषण देंगे इससे बने ये 9 हेयर मास्क

27.072022 – केला नेचुरल कंडीशनर का काम करता हैं. बरसात के इन दिनों में बालों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं जिनसे बचाने के लिए इनकी खास देखभाल करने की जरूरत होती हैं। बारिश के इन दिनों में बालों के ड्राई और डैमेज होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं जिनसे छुटकारा दिलाने में आपकी मदद कर सकता हैं केला जो कि नेचुरल कंडीशनर का काम करता हैं। केले में मौजूद पोटेशियम, विटामिन बी-6, विटामिन सी, मैग्नीशियम, और प्रोटीन से भरपूर सभी पोषक तत्व बालों को सुंदर और स्वस्थ बनाने का काम करते हैं। आज इस कड़ी में हम आपको केले से बने विभिन्न हेयर मास्क की जानकारी देने जा रहे हैं जिन्हें आजमाने के बाद बाल स्मूथ सिल्की और शाइनी नजर आने लगेंगे।

आइये जानते हैं इन हेयर मास्क के बारे में…केला और शहद का हेयर मास्कअगर आपके बालों में ड्रायनेस आ गई है, तो आपको केला और शहद का हेयर मास्क इस्तेमाल करना चाहिए। यह मास्क कमजोर बालों में नमी जोडऩे के साथ लोच में सुधार भी करता है। हेयर पैक बनाने के लिए दो पके केले और दो बड़ा चम्मच शहद लें। केलों को अच्छी तरह से मसलकर इसमें शहद मिलाएं और इतना फेटें ताकि इसमें कोई गुठली ना रह जाए। इस मिश्रण को थोड़े नम बालों पर लगाएं और शॉवर कैप से ढंक दें। आधे घंटे बाद इसे धो लें।केला, एलोवेरा जेल और जैतून तेल का हेयर मास्कसबसे पहले आप एक कटोरी में कटा हुआ केला और एलोवेरा जेल डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें।

फिर केला और एलोवेरा के इस मिश्रण को एक मिक्सी में डालें। मिक्सी में डालने के बाद उसमें जैतून का तेल डालें और इसका पेस्ट तैयार करें। ध्यान रहे, मिश्रण स्मूथ हो ताकि आसानी से बालों पर लग जाए। अब सामग्री को एक कटोरी में निकाल लें और कुछ देर रख दें। आप चाहें तो इसमें नींबू की एक बूंद भी डाल सकती हैं। आप इसे बालों और स्कैल्प पर ब्रश की सहायता से अच्छी तरह लगाएं और मालिश करें। इसे बालों पर 30 मिनट तक लगा रहने दें और साथ ही बालों को एक पॉलिथीन या शॉवर कैप से कवर कर लें।

30 मिनट हो जाने के बाद आप माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। ध्यान रहे, इसे लगाने से पहले अपने बालों को अच्छी तरह सुलझा लें वर्ना बाल काफी टूट सकते हैं। बेहतर परिणामों के लिए यह हेयर मास्क हफ्ते में कम से कम 2 बार लगाएं केला पपीता और शहद का हेयर मास्कसूखेपन के साथ आपके बालों की शाइन खो गई है, तो प्रोटीन से भरपूर केला, पपीता, और शहद से तैयार हेयर मास्क बालों को चमक देने के साथ उन्हें मजबूत भी बना सकता है। इसके लिए एक पका हुआ केला लें और इसे दरदरा मैश कर लें। इसमें 4-5 क्यूब पके हुए पपीते के डालें और गूदे के साथ मैश करें।

इसमें 2 चम्मच शहद डालें और इन सबको अच्छी तरह से मिलाकर स्मूदी बना लें। इसे पूरे बालों और स्कैल्प पर अप्लाई करें। अब बालों को कैप से कवर कर लें। थोड़ी देर बाद बालों को गुनगुने पानी से धोकर बाद में शैंपू कर लें।केले और सरसो के तेल का हेयर मास्कसरसो तेल सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इसके साध ही यह आपकी खूबसूरती को बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है। केले और सरसो तेल का पैक तैयार करने के लिए 1 केला लें। इसे अच्छी तरह मैश करें। अब इसमें कुछ बूंदें सरसों तेल की डालें। अब इस पैक को अच्छे से मिक्स करने के बाद इसे अपने बालों में लगा लें।

करीब 30 मिनट बाद शैंपू से अपने बालों को अच्छे से धो लें। ध्यान रखें कि इसमें आपको ज्यादा सरसों तेल मिक्स नहीं करना है। इस पैक से आपके बालों की चमक बढ़ेगी। सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से बालों और सिर के स्कैल्प की मरम्मत होती है। इससे आपके रूखे और बेजान बालों में निखार आएगा।केला और नारियल के दूध से बना हेयर मास्ककेला और नारियल के दूध से बना हेयर मास्क बालों के लिए डीप कंडिशनिंग का काम करता है। इसे लगाने से बाल पहले से ज्यादा मुलायम और चिकने दिखते हैं। हेयर पैक बनाने के लिए दो पके केलों को आधा कप ताजा नारियल के दूध के साथ मिलाएं।

आप चाहें, तो इसमें शहद की कुछ बूंदें मिला सकते हैं। इस हेयर मास्क को हल्के गीले बालों पर लगाकर जड़ों की धीरे-धीरे मालिश करें। आधे घंटे के लिए इसे ऐसे ही रहने दें और किसी माइल्ड शैंपू से धो लें।केला और एवोकाडो का हेयर मास्कइस पैक को तैयार करने के लिए सबसे पहले 1 केले को मसल कर पेस्ट तैयार कर लें। अब इसमें 3 चम्मच नारियल का दूध और 2 चम्मच एवोकाडो का पेस्ट मिलाएं। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिक्स करके अपने रूखे बालों पर लगाएं। इस पैक को करीब 20 मिनट तक अपने बालों में लगा हुआ छोड़ दें। इसके बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें।

इस पैक को बालों में लगाने से आपके बाल मुलायम और चमकदार बनेंगे। इस पैक में आप एवोकाडो की जगह कोको भी डाल सकते है। इससे आपके बालों को प्राकृतिक रंग मिलेगा। केला, दही, और शहद का हेयर मास्ककेले से रूखे और बेजान बालों में नमी आती है। वहीं दही बालों के लिए एक नेचुरल कंडीशनर है। शहद भी एक नेचुरल मॉइश्चराइजर का काम करता है। इन तीनों सामग्री से बना हेयर मास्क डैंड्रफ से छुटकारा दिलाते हुए बालों को मॉइश्चराइज करने के लिए बेस्ट है। हेयर पैक बनाने के लिए एक पके हुए केले को मैश कर लें। इसमें 4-5 चम्मच दही और 1 से 2 चम्मच शहद मिलाएं।

चिकना होने तक इन तीनों सामग्री को ब्लेंड करें। अब इस तैयार मास्क को अपने बालों की जड़ों पर लगाएं। 25-30 मिनट तक ऐसे ही रहने दें और फिर शैंपू से धो लें।केले, शहद और दलिया का हेयर मास्ककेले का हेयर मास्क बनाने के लिए आपको 1 पका हुआ केले, 100 मिली शहद और 1 चम्मच बारीक पीसे हुए दलिया की जरूरत होगी। इसके लिए सबसे पहले एक बाउल में केले को तब तक मैश करें जब तक कि आपको गाढ़ा पेस्ट न मिल जाए। फिर इसमें शहद और ओट्स मिलाएं और लगभग 5 मिनट तक अच्छी तरह मिलाएं, जब तक कि आपके पास बिना गांठ वाला मिश्रण न हो जाए। इसे पूरे बालों पर लगाएं।

10 मिनट के लिए छोड़ दें, और फिर हल्के गर्म पानी से धो लें।केला, अंडा, और शहद का हेयर मास्कअंडे में मौजूद प्रोटीन को बालों के विकास में तेजी लाने के लिए जाना जाता है। केला, अंडा, और शहद को मिलाकर बना ये हेयर मास्क सूखे बालों के लिए मॉइश्चराइजेशन का काम करता है।

मास्क बनाने के लिए दो पके हुए केले लें और इसमें एक अंडा डाल दें। दो चम्मच शहद डालें और चिकना करने के लिए इस मिश्रण को बीट करें। हर किसी को अंडे की स्मेल पसंद नहीं होती, ऐसे में खुशबू के लिए लैवेंडर, संतरा या नींबू का तेल मिलाएं। अब ब्रश का इस्तेमाल करके लंबाई में इसे बालों पर अप्लाई करें। 20 मिनट के लिए इसे रहने दें और फिर शैंपू से धो लें. (एजेंसी)

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ह्यूमिडिफायर जानिए क्या होता है और इसका इस्तेमाल करना कैसे है लाभदायक

26.07.2022 – ह्यूमिडिफायर एक ऐसा उपकरण है, जो घर में नमी को बढ़ाने का काम करता है। वैसे अमूमन मरीजों को आराम देने के लिए मेडिकल वेंटिलेटर में ह्यूमिडिफायर शामिल होता है क्योंकि गर्म और शुष्क जलवायु में जब नमी का स्तर 10-20त्न तक गिर जाता है तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। घरों में 30-50 प्रतिशत नमी होनी जरूरी है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि ह्यूमिडिफायर कैसे काम करता है और यह आपके लिए उपयोगी क्यों है।

ह्यूमिडिफायर के प्रकारकंसोल ह्यूमिडिफायर पूरे घर में नमी उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त होते हैं। स्टीम वेपोराइजर भाप बनाने के लिए बिजली का इस्तेमाल करते हैं, जिसे डिवाइस से बाहर निकलने से पहले ठंडा किया जाता है। अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडिफायर पानी को वाष्पीकृत करने के लिए कंपन का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर वाष्पीकरण करने वाले पानी के वाष्पीकरण से पहले हवा से नमी पैदा करते हैं। सेंट्रल एयर कंडीशनिंग से जुड़े सेंट्रल ह्यूमिडिफायर पूरी एक इमारत के लिए बेहतर होते हैं।

ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करने से मिलने वाले फायदेह्यूमिडिफायर कम नमी के कारण होने वाले एटोपिक डर्मेटाइटिस और सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। यही नहीं, यह सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस के रोगियों को होने वाली समस्याएं जैसे लालिमा, पपड़ीदार त्वचा के घावों और बालों का झडऩा आदि के जोखिम भी कम करता है। ह्यूमिडिफायर का उपयोग आपको ड्राई आई सिंड्रोम से बचाए रखने में भी सहायक है।

यह एक समस्या है, जिसमें आंखें पर्याप्त आंसू का निर्माण नहीं कर पाती हैं। ह्यूमिडिफायर के इस्तेमाल से घर को मिलने वाले लाभस्वास्थ्य से जुड़े लाभों के अलावा ह्यूमिडिफायर आपके फर्नीचर, घर की सजावट और फर्श के लिए भी लाभदायक है। दरअसल, कम नमी के कारण लकड़ी का फर्नीचर, घर की दीवारे और फर्श के खराब होने या इनमें दरारें उत्पन्न का कारण बन सकती है। बहुत कम नमी के कारण कागज से बनी चीजें जैसे किताबें और वॉलपेपर भी खराब हो सकते हैं।

ह्यूमिडिफायर के नुकसानअगर आप एक गंदे ह्यूमिडिफायर का उपयोग करते हैं तो इसके कारण आपको कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है क्योंकि गंदा ह्यूमिडिफायर बैक्टीरिया और फफूंद को उत्पन्न करता है। यहीं नहीं, इसका अधिक इस्तेमाल घर में अधिक नमी उत्पन्न करता है, जो दीवारों में सीलन समेत फफूंद का कारण बन सकता है।

इसके अतिरिक्त, स्टीम बेस्ड ह्यूमिडिफायर गर्म होते हैं और अगर सावधानी से इनका इस्तेमाल न किया जाए तो इससे त्वचा के जलने का खतरा रहता है। ह्यूमिडिफायर को साफ करने का तरीकासबसे पहले उपकरण को अनप्लग करें और इसे खाली करें, फिर इसके टैंक को रोजाना पानी से धोकर सुखाएं। हफ्ते में एक बार इसे कीटाणुरहित करने के लिए सिरके के घोल का उपयोग करें।

इसके टैंक को कई बार पानी से धोकर सुखाएं ताकि कोई भी सफाई रसायन न रहे और जब आप इसका उपयोग कर रहे हों तो इसकी भाप हवा में मिल जाए। इसके फिल्टर को बार-बार जांचें और निर्माता के निर्देशों के अनुसार उन्हें बदलें। (एजेंसी)

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मुंहासे ठीक होने के बाद छोड़ जाते हैं स्किन पर अपने दाग

२६.०७.२०२२ – चेहरे पर मुंहासे अर्थात पिंपल्स होना आम बात हैं जिसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। स्किन पर हुए ये मुंहासे दर्द तो देते ही हैं लेकिन इसी के साथ ही सुंदरता में भी कमी लाने का काम करते हैं। अक्सर देखने को मिलता हैं कि मुंहासे ठीक हो जाने के बाद स्किन पर दाग छोड़ जाते हैं जो चेहरे की सुंदरता खराब करते हैं। मुंहासों के दाग-धब्बे को कम करने के लिए महिलाएं कई तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट की मदद लेती हैं जो महंगे होने के साथ ही इतने प्रभावी साबित नहीं होते हैं।

इन दाग-धब्बों से छुटकारा पाने के लिए आपको जरूरत होती हैं प्राकृतिक चीजों की जो स्किन को अंदरूनी पोषण प्रदान करते हुए बेदाग स्किन पाने में आपकी मदद करें। आइए जानते हैं ऐसे नुस्खों के बारे में…ऑरेंज पील पाउडरसंतरा विटामिन ष्ट का प्रमुख स्रोत है। सेहत के साथ-साथ ये स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसके सिट्रिक एसिड दाग-धब्बों को हल्का करते हैं। संतरे के छिलके का पाउडर का बनाकर इसे शहद के साथ मिलाकर दाग वाली जगह पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।

इसे हर एक दिन छोड़कर लगाने से फायदा होगा।बेसनत्वचा का पीएच लेवल बनाए रखने व त्वचा साफ करने के लिए बेसन काफी उपयोगी है। मुंहासों के दाग-धब्बे हटाने के इस उपाय के लिए 1 चम्मच बेसन, गुलाब जल व आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को दाग-धब्बों पर लगाएं और सूखने के बाद सामान्य पानी से धो लें। बेहतर परिणाम के लिए एक दिन छोड़कर इस उपाय को अपनाएं।नारियल का तेलनारिलय में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइन्फ्लामेट्री गुण होते हैं जो जो स्किन की ज्यादातर दिक्कतों को ठीक कर देते हैं। इसमें विटामिन ए और के भी होता है जो स्किन में जलन की समस्या दूर करता है।

दाग वाली जगह पर नारियल का तेल लगाकर पूरी रात छोड़ दें और अगले दिन सुबह पानी से चेहरा धो लें। इसे आप हर दिन लगा सकते हैं।फ्रूट मास्क अगर मुंहासों के दाग अधिक डार्क हैं तो उसके लिए फ्रूट मास्क अप्लाई कर सकती हैं। इसके लिए पपीता का पल्प लें और उसमें टमाटर का पल्प मिक्स कर दें। आप चाहें तो इसमें ऑरेंज का भी पल्प मिक्स कर सकती हैं। अब इस फेस पैक को रोजाना अपने चेहरे पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद नॉर्मल पानी से चेहरे को साफ कर लें।

वहीं जब भी आपके चेहरे पर पिंपल्स आ जाए तो उसे हाथ लगाने से बचें। इससे एक्ने इंफेक्शन हो सकता है।एलोवेराएलोवेरा भी स्किन से जुड़ी सारी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो स्किन इंफेक्शन की समस्या को दूर करते हैं। ये स्किन की जलन को दूर कर ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं। ये मुंहासों के दाग को दूर करने में भी असरदार हैं। अगर आपके घर एलोवेरा का पौधा है तो आप सीधे इसका जेल निकालकर चेहरे पर लगा सकते हैं। इसे चेहरे पर रात भर लगाकर छोड़ दें और सुबह उठकर धो लें।

टी ट्री ऑयलमुंहासे वाली त्वचा के लिए टी ट्री ऑयल सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। इसमें भी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो त्वचा पर पिंपल्स और दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए टी ट्री ऑयल की तीन से चार बूंदें और नारियल या बादाम का तेल लें। एक बाउल लें। इसमें टी ट्री ऑयल को कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। अब, इसे प्रभावित जगहों पर समान रूप से अपने चेहरे पर लगाएं। इसे धोने से पहले रात भर या कम से कम एक या दो घंटे के लिए रखें।

बेकिंग सोडाबेकिंग सोडा स्किन को एक्सफोलिएट करता है। ये ब्लीचिंग का भी काम करता है। हर दिन इसके इस्तेमाल से बंद पोर्स खुल सकते हैं। बेकिंग सोडा मुंहासों के दाग-धब्बे दूर करता है। पानी में बेकिंग सोडा डालकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसे चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। 10-15 मिनट के बाद चेहरा धो लें।दालचीनी और शहदएक बड़ी चम्मच दालचीनी पाउडर और शहद मिक्स करें जब तक आपको एक गाढ़ा पेस्ट ना मिल जाए। ज़ख्म क्षेत्र पर यह पेस्ट लगाएँ, 10 मिनट के बाद इसे धो लें।

इसे दैनिक रूप से दोहराएँ जब तक आपको परिणाम नही मिल जाते हैं।नींबू का जूसनींबू भी विटामिन सी से भरपूर होता है जो दाग-धब्बों को हल्का करता है। एक छोटे से कटोरे में नींबू का रस निकालें और रूई की सहायता इसे दाग वाली जगह पर लगा लें। 10-15 मिनट तक छोडऩे के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें।हल्दीमुंहासों व फुंसी के दाग हटाने के लिए हल्दी का उपयोग काफी फायदेमंद होता है। इस उपाय को इस्तेमाल करने के लिए 1-2 चम्मच हल्दी पाउडर के साथ 1 चम्मच नींब का रस मिलाकर पेस्ट बना लें।

अब इस पेस्ट को दाग-धब्बों पर लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। एक दिन छोड़कर इस उपाय का इस्तेमाल करने से फायदा मिलेगा। (एजेंसी)

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एक्सरसाइज के बाद बॉडी में होता है दर्द, करें यह उपाय

25.07.2022 – एक्सरसाइज के बाद बॉडी में होता है दर्द. अपनी फिटनेस और बॉडी को शेप  में रखने के लिए लोग वर्कआउट करते हैं। लेकिन कई बार वर्कआउट के बाद मांसपेशियों में होने वाले दर्द की वजह से लोग अपने फिटनेस गोल को बीच में ही अधूरा छोड़ देते हैं। वर्कआउट के बाद दर्द होना इस बात का संकेत है कि आपने मजबूती से मांसपेशियों को रिपेयर करने का काम किया है। कई बार यह दर्द लगातार वर्कआउट करने से दूर भी हो जाता है। आपका शरीर इतना स्मार्ट है कि यह खुद आपको बताएगा कि कब आपकी मांसपेशियों की रिपेयरिंग का काम खत्म हो गया है।

लेकिन वर्कआउट के एक सप्ताह के बाद भी अगर आपकी मांसपेशियों में दर्द बना रहता है तो आप ये उपाय अपनाकर इस दर्द को कम कर सकते हैं।स्ट्रेचिंग- वर्कआउट के बाद मांसपेशियां रिकवरी मोड में रहती हैं। जिसकी वजह से उनमें कसाव आ जाता है और व्यक्ति को दर्द महसूस होने लगता है। इस दर्द से बचने के लिए स्ट्रेचिंग धीरे-धीरे करें। इससे मांसपेशियों में कसाव और दर्द दोनों कम होगा।हल्की मसाज- दर्द वाली मांसपेशियों में मसाज करने से कसाव कम होने के साथ रक्त संचार भी बढ़ता है।

रक्त संचार अच्छा होने से मांसपेशियों की रिकवरी में तेजी आती है और इससे मांसपेशियों का दर्द जल्दी खत्म होता है।गुनगुने पानी से नहाना- गुनगुने पानी से नहाने से मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं और रक्त संचार में तेजी आती है। बेहतर रक्त संचार का मतलब है दर्द भरी मांसपेशियों में अधिक ऑक्सीजन और रक्त का पहुंचना। इससे दर्द से जल्दी राहत मिलती है।गरम या ठंडा इलाज- मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने के लिए 15 मिनट उस विशेष स्थान पर बर्फ का पैक लगाएं, जहां दर्द हो रहा है। इसके बाद उसी स्थान पर 15 मिनट के लिए गरम पैक लगाएं।

ऐसा कई बार दोहराएं। गर्म के बाद ठंडे से रक्त संचार में तेजी आती है और मांसपेशियां जल्दी ही खुद को मजबूत बनाने के साथ-साथ रिपेयर भी करती हैं।

दर्द से बचने के लिए ध्यान रखें ये बातें

* वर्कआउट के दौरान दर्द न हो, इसके लिए अपने शरीर की क्षमता और स्टैमिना की जांच करें कि हम कैसे खुद को एक्सरसाइज के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं। वर्कआउट ऐसे करें कि आपको खुशी का अहसास हो।

* दूसरा, वर्कआउट करते समय अपने पहनावे पर विशेष ध्यान दें। अच्छे जूते पहनकर ही वॉक करें।

* ध्यान रखें कि आपके जूते में पैडिंग अच्छी हो ताकि घुटने और टखने सुरक्षित रह सकें।कपड़े भी हल्के और ढीले पहनें।

* तीसरा, एरोबिक डांस करती हैं तो नी पैड जरूर पहनें।

* चौथा, अगर आपकी मांसपेशियों में पहले से किसी तरह का दर्द है तो वर्कआउट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।         (एजेंसी)

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जुम्बा बनाम एरोबिक्स: जानिए इनमें से किसका चयन करना है अधिक बेहतर

25.07.2022  -जुम्बा बनाम एरोबिक्स: शरीर को फिट एंड फाइन रखने के लिए कई तरह की एक्सरसाइज हैं, इसलिए अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि कौन-सी एक्सरसाइज को चुनना सबसे अच्छा है। हालांकि, मनोरंजन और एक्सरसाइज का मजेदार संयोजन लोगों को बिना कुछ सोचे-समझे अपना लेना चाहिए, जैसे जुम्बा और एरोबिक्स। यह उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है, जो अपनी फिटनेस यात्रा शुरू कर रहे हैं। आइए आज हम आपको जुम्बा और एरोबिक्स के अंतर को समझाते हैं।

जुम्बा क्या है?जुम्बा लैटिन नृत्य की विभिन्न शैलियों के साथ फिटनेस को जोड़ती है। संगीत के साथ इसके कुछ सत्र होते हैं। इसका अभ्यास पूरे शरीर की कसरत सुनिश्चित करता है और आपको मस्ती करते हुए अधिक से अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जुम्बा आपकी सहनशक्ति को बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने में भी मददगार है। यह शारीरिक लचीलापन बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर करने में भी सहायक है।

एरोबिक्स क्या है?एरोबिक्स एक्सरसाइज को कार्डियो के रूप में भी जाना जाता है, जिससे हृदय में ऑक्सीजन युक्त रक्त को पंप करने की जरूरत होती है ताकि काम करने वाली मांसपेशियों को ऑक्सीजन पहुंचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, एरोबिक अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाती है और रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है और मोटापे से भी बचाती है। एरोबिक एक्सरसाइज के तौर पर आप अपने रूटीन में स्वीमिंग, जॉगिंग, साइकिलिंग और रस्सी कूदना आदि को शामिल कर सकते हैं।

आपके लिए कौन-सी एक्सरसाइज है बेहतर?जुम्बा और एरोबिक एक्सरसाइज, दोनों ही वजन कम करने और शारीरिक सहनशक्ति में सुधार करने में सहायक हैं और इनसे मिलने वाले अन्य स्वास्थ्य फायदों में भी कुछ ज्यादा अंतर नहीं है। फिर भी अगर आपका लक्ष्य मांसपेशियों को मजबूत करना है तो एरोबिक एक्सरसाइज को चुनना आपके लिए बेहतर है। हालांकि, अगर आपको नृत्य करना पसंद है और अपने पूरे कसरत सत्र में मनोरंजन करना चाहते हैं तो जुम्बा का चयन करें।

आप खुद से कौन-सी एक्सरसाइज कर सकते हैं?एरोबिक एक्सरसाइज को खुद से किया जा सकता है। इससे हमारा मतलब है कि इसके लिए आपको किसी प्रशिक्षक की जरूरत नहीं है। आप आसानी से टहलने से लेकर दौडऩे जैसी एक्सरसाइज के लिए खुद जा सकते हैं।

हालांकि, स्वीमिंग या साइकिलिंग करने के लिए पूरी जानकारी होनी चाहिए। एरोबिक्स के विपरीत, जु्म्बा के लिए आपको एक अच्छे प्रशिक्षक की जरूरत है ताकि आपको इसके सारे फायदे मिल सकें। (एजेंसी)

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ब्लास्ट हो सकता है स्मार्टफोन, न करें यह गलती

स्मार्टफोन में विस्फोट होना कोई बड़ी बात नहीं है। चाहे फोन कितने भी प्रीमियम क्यों न हो फोन में कुछ गलतियों के चलते आग लग सकती है या फिर फोन एक्सप्लोड हो सकता है। कई बार ये मैन्यूफैक्चर की गलती होती है तो कई बार इसमें हमारी भी गलती होती है। अब जरूरी बात यह है कि आखिर ये गलतियां क्या हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आखिर वो कौन-सी गलतियां हैं जो करने से फोन में विस्फोट होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

चलिए जानते हैं।मैन्यूफैक्चरिंग फॉल्टफोन के फटने का एक मेजर कारण उसकी मैन्युफैक्चरिंग में खराबी है। फोन में दी गई लिथियम-आयन बैटरी को अगर ठीक से टेस्ट न किया जाए तो यह खराबी के चलते विस्फोट हो सकती है। यह आमतौर पर तब होता है जब बैटरी के अंदर के सेल्स ज्यादा टैम्प्रेचर तक पहुंच जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप थर्मल बाहर निकलता है। ऐसा माना जाता है कि सस्ती बैटरीज के शॉर्ट सर्किट होने की संभावना अधिक होती है।

थर्ड पार्टी चार्जर का इस्तेमाल करनायह एक नॉर्मल गलती है। हम में से ज्यादातर लोग ऐसा करते होंगे। किसी थर्ड पार्टी चार्जर से फोन को चार्ज करना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। थर्ड-पार्टी चार्जर में अक्सर उन चीजों की कमी होती है जिनकी जरूरत हैंडसेट में सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में थर्ड पार्टी चार्जर फोन को डैमेज कर सकती हैं और फोन में शॉर्ट सर्कट हो सकता है।

रात भर चार्ज करनाफोन को रातभर चार्जर पर लगाना बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सोते समय फोन को चार्जिंग पर लगा देते हैं। यह बैटरी पर काफी प्रेशर बनाता है। फोन को ज्यादा चार्ज करने से ओवरहीटिंग, ओवरचार्जिंग, शॉर्ट-सर्किट जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, कई स्मार्टफोन अब एक चिप के साथ आते हैं जो बैटरी लेवल 100 फीसद होने पर करंट के प्रवाह को रोक देता है।

लेकिन पुराने फोन्स में ऐसी सुविधा मौजूद नहीं है।फोन को गर्मी में या धूप में रखनाज्यादा गर्मी फोन की बैटरी को खराब कर सकती है। इससे सेल्स थोड़े अस्थिर हो जाते हैं और एक्जोथिर्मिक ब्रेकडाउन खो देती हैं।

इससे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैस निकलती हैं और फिर फोन में विस्फोट हो सकता है। (एजेंसी)

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त्वचा का सुरक्षा कवच बन सकता है नीलगिरी तेल

24.07.2022 – त्वचा की देखभाल में एसेंशियल ऑयल की लोकप्रियता बढ़ रही है। ये तेल कम से कम साइड इफेक्ट के साथ महत्वपूर्ण त्वचा लाभ प्रदान करते हैं। ऐसा ही एक एसेंशियल ऑयल है नीलगिरी का तेल यानी यूकेलिप्टस ऑयल है। यह तेल नीलगिरी के पेड़ से आता है, जो ऑस्ट्रेलिया मूल से सम्बन्ध रखता है। यह कई फाइटोकेमिकल यौगिकों में समृद्ध है, जिसमें फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड और टैनिन शामिल हैं। तेल में महत्वपूर्ण एंटी- इन्फ्लेमेट्री, जीवाणुरोधी, एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण इसे खास बनाते हैं।

पर्यावरण से सुरक्षा करता हैएक अध्ययन के मुताबिक़ इसमें काफी मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट पर्यावरणीय आक्रमणकारियों से स्किन को होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इसलिए अगर आप धूल या प्रदूषण वाले माहौल में रहती हैं, तो आपको नीलगिरी के तेल का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।अब जानिए त्वचा के लिए कैसे करना है नीलगिरी के तेल का उपयोगत्वचा को साफ़ करने के बाद आप यूकेलिप्टस एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल कर सकती हैं। नीलगिरी के तेल को सीधे त्वचा पर लगाने से जलन हो सकती है, क्योंकि यह काफी प्रभावकारी होता है। इसलिए आप इस तेल को डिफ्यूजऱ या शॉवर में भी मिला सकती हैं।

अपनी त्वचा पर दिन में एक से अधिक बार एक एसेंशियल ऑयल का उपयोग करना अच्छा नहीं है।खुराकनीलगिरी के तेल की कुछ बूंदों को जेल या किसी अन्य सपोर्टिंग तेल के साथ मिलाएं, जो आपकी त्वचा के अनुकूल हो। फिर आप इस मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगा सकती हैं। हालांकि नीलगिरी के तेल का उपयोग करना आसान है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उनके बारे में जानना भी जरूरी है।त्वचा के लिए नीलगिरी के तेल के दुष्प्रभावअगर आप सोच रहीं हैं कि नीलगिरी के तेल को बिना डिफ्यूज़ किए अपनी त्वचा पर लगा सकती हैं, तो ऐसा बिलकुल न करें। अधिकांश एसेंशियल ऑयल तेलों की तरह, यह भी आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है।

नीलगिरी का तेल संवेदनशील त्वचा पर सूजन भी पैदा कर सकता है। इसलिए, नीलगिरी के तेल का उपयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।नीलगिरी की पत्तियों से निकाले गए इस तेल का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसके संभावित त्वचा लाभों के लिए इसके जीवाणुरोधी, एंटीसेप्टिक और एंटी इन्फ्लेमेट्री गुण जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, तेल के इस्तेमाल से आपकी स्किन को होने वाले लाभ समझने के लिए आप त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।

यह भी सुनिश्चित करें कि आप इसके इस्तेमाल से पहले एक पैच टेस्ट ज़रूर करें।सनबर्न में राहत दे सकता हैब्यूटी एक्सपर्ट सुवर्णा के अनुसार नीलगिरी का तेल सनबर्न को शांत करने में मदद कर सकता है। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की लालिमा को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में और अधिक शोध की आवश्यकता है। घावों को कीटाणुरहित करता हैत्वचा पर घाव भरने के लिए आप नीलगिरी के एसेंशियल ऑयल का उपयोग कर सकती हैं।

यह उपचार प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद कर सकता है। मेयो क्लीनिक के एक अध्ययन से पता चलता है कि नीलगिरी का तेल घाव भरने की प्रक्रिया में तेजी लाता है।

मॉइस्चराइज़ करता हैअध्ययनों से पता चला है कि नीलगिरी का तेल त्वचा को नमीयुक्त रखने, सूजन को कम करने और यूवीबी-प्रेरित कोलेजन गिरावट को रोकने के लिए सेरामाइड उत्पादन बढ़ा सकता है जिससे स्किन ड्राइनेस हटाने में मदद मिलती है। (एजेंसी)

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डायपर बारिश के मौसम में बेबी को पहनाते हैं , पहले ध्यान में रखें ये बातें

23.07.2022 – डायपर आजकल के पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए  का इस्तेमाल जरूरी समझते हैं। डायपर का इस्तेमाल सुविधाजनक होता है। लेकिन इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। बेबी की स्किन सॉफ्ट होती है, हार्ड कुछ भी उनकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ डायपर निर्माण कंपनियां अक्सर डायपर बनाने में सिंथेटिक फाइबर, डाई या दूसरे हार्ड केमिकल का इस्तेमाल करती हैं, जो स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं और एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

डायपर से बेबी को रैशेज होना बहुत कॉमन हैं। गीले गंदे डायपर में बैक्टीरिया हो सकते हैं और इससे रैशेज हो सकते हैं। रैशेज के जोखिम को कम करने के लिए अपने बच्चे के डायपर को समय-समय पर बदलते रहें। डायपर एक ऐसी चीज से बने होते हैं जो आपके बच्चे के पेशाब को अवशोषित करने में मदद करते है। ऐसे में आपके बच्चे के डायपर के अंदर हवा के आसान फ्लो में बाधा डाल सकता है और बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणुओं के पनपने का कारण बन सकते हैं।

डायपर के इस्तेमाल से बच्चे को स्किन और दूसरे संक्रमणों की चपेट में आने का खतरा होता है।

बेबी को ज्यादा समय तक डायपर पहनाने से आपके बच्चे को टॉयलेट ट्रैनिंग देने में समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चों को डायपर में पेशाब करने और शौच करने की आदत हो जाती है।

रिपोर्ट्स की मानें तो अगर आप बच्चे को पूरा दिन डायपर में रखते हैं तो दिन में कम से कम 8 से 10 बार इसे बदलना चाहिए, कुछ मामलों में तो इससे भी ज्यादा। ऐसे में आपका खर्चा भी बढ़ सकता है।

आप अपने बच्चे के लिए कपड़े के डायपर का इस्तेमाल कर सकती हैं। ये न केवल आपके बच्चे की स्किन और हेल्थ के लिए अच्छे हैं, बल्कि इनको धोने के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

बाजार में कपड़ा डायपर के कई प्रकार मिलते हैं। आप कार्बनिक कपास उठा सकते हैं जो अच्छी तरह से अवशोषित हो जाते हैं। हालांकि, कुछ अतिरिक्त काम के लिए तैयार रहें, क्योंकि जैसे ही यह गंदा हो जाता है, आपको अपने बच्चे का डायपर बदलना और धोना होगा।
डायपर चुनते समय मुलायम, केमिकल फ्री डायपर नाजुक स्किन को परेशान नहीं करते हैं, किसी भी रैश को रोकते हैं। अपने बच्चे को आरामदेह और एलर्जी/रैश फ्री रखने के लिए सॉफ्ट डायपर देखें। (एजेंसी)

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थायराइड के मोटापे से हैं परेशान? फॉलो करें यह डाइट

23.07.2022 – थायराइड के मोटापे से हैं परेशान? फॉलो करें यह डाइट. हाइपोथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जब शरीर पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करता है। थायराइड हार्मोन बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह विकास, कोशिका की मरम्मत और चयापचय को नियंत्रित करने में मदद करते हैं – वह प्रक्रिया जिसके द्वारा आपका शरीर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

थाइराइड में क्यों बढऩे लगता है वजन, इसकी वजह है आपका मेटाबॉलिज्म, यह आपके शरीर के तापमान को प्रभावित करता है और आप किस दर से कैलोरी बर्न करते हैं। इसलिए हाइपोथायरायडिज्म से पीडि़त लोगों को अक्सर ठंड और थकान महसूस होती है और उनका वजन आसानी से बढ़ सकता है। इसलिए जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए वजन घटाने की यात्रा को बढ़ावा देने के लिए अपनी थायराइड की समस्या को ठीक करना बहुत जरूरी है।

आपको हाइपोथायरायडिज्म के साथ अपना वजन बनाए रखना मुश्किल लगता है, तो मध्यम या उच्च तीव्रता वाले कार्डियो करने का प्रयास करें। इसमें तेज गति से चलना, दौडऩा, लंबी पैदल यात्रा और रोइंग जैसे व्यायाम शामिल हैं। इसके अलावा खाने में कुछ विटामिन्स और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा को सुनिश्चित करने से भी आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी।
फाइबर कम करेगा थाइराइड का मोटापा

फाइबर युक्त सामग्री पाचन में सुधार करने में मदद करती है और खराब विषाक्त पदार्थों को भी खत्म करती है। इसके अलावा यह कैलोरी की मात्रा पर नियंत्रण रखने में मदद करती है और अंत में वजन घटाने में मदद भी करती है। ऐसे में दैनिक आहार में फाइबर युक्त फलों, सब्जियों और दालों को शामिल करने का सुझाव दिया जाता है।

आयोडीन युक्त पदार्थों का करें सेवन

विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन एक आवश्यक खनिज के रूप में शरीर में थायराइड फंक्शन को प्रोत्साहित करने में मदद करता है। इस प्रकार, यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म है, तो मछली, नमक, डेयरी और अंडे के माध्यम से अपने आयोडीन का सेवन बढ़ाने से शरीर में टीएसएच उत्पादन में वृद्धि होगी। और थायराइड के दुष्प्रभाव भी कम हो सकते हैं।

ग्लूटेन फ्री फूड है फायदेमंद

ग्लूटेन फ्री उत्पादों के नियमित सेवन से हाइपोथायरायडिज्म को प्रबंधित करने और प्रभावी वजन घटाने में मदद मिल सकती है। यह पाया गया है कि ग्लूटेन संवेदनशीलता और हाशिमोटो के थायरॉयडिटिस के बीच एक संबंध है, जिसके परिणामस्वरूप थायराइड निष्क्रिय हो जाता है।

सेलेनियम से भरपूर आहार लें

सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे ब्राजील नट्स, सार्डिन, अंडे और फलियां अपने आहार में शामिल करना शुरू करें, क्योंकि वे बहुत सारे टीएसएच हार्मोन उत्पन्न करने में मदद करते हैं। भोजन में सेलेनियम मुक्त कणों को खत्म करने और शरीर के इम्यून फंक्शन को मजबूत करने में मदद करता है।

बॉडी को रखें हाइड्रेड

वजन घटाने के लिए हाइड्रेशन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शरीर से पाचन और विष उन्मूलन में सुधार करता है। यह आपकी भूख को भी कम करता है। जो लंबे समय में वजन घटाने में मदद करता है। (एजेंसी)

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ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं के लिए जरूरी आसन

22.07.2022 – ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं के लिए जरूरी आसन. ब्रेस्टफीडिंग मदर को अपनी सेहत का बहुत ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि कुछ महीनों तक बेबी के लिए पोषण और आहार का एकमात्र जरिया मां का दूध ही होता है। ब्रेस्टफीडिंग मदर जितनी हेल्दी होगी, उनका मिल्क भी बच्चे को उतना ही ज्यादा फायदा पहुंचा पाएगा। ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं के लिए योग बहुत ज्यादा लाभकारी होता है।

दिनभर शिशु को गोद में उठाए रखने की वजह से पीठ पर दबाव पड सकता है इसलिए योग की मदद से पोस्चर को सुधारा जा सकता है और शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ संपूर्ण सेहत में सुधार लाने का काम किया जा सकता है। ऐसे कई योगासन हैं जो ब्रेस्टफीडिंग करवाने के पीरियड में आपकी सेहत का ख्याल रख सकते हैं।

हालांकि, डिलीवरी के बाद कोई भी एक्टिविटी शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।मार्जरी आसनडिलीवरी के बाद और ब्रेस्टफीडिंग के समय मार्जरी आसन करने से रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है, कलाई मजबूत होती है, पेट के अंग जैसे कि किडनी और एड्रेनल ग्लैंड उत्तेजित होते हैं, गर्दन स्ट्रेच होती है और मासिक धर्म की ऐंठन से राहत मिलती है।

अधोमुख श्वानासनइस आसन को करने से शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां टोन होती हैं, छाती की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और फेफड़ों की क्षमता बेहतर होती है, बांह, कंधों, टांगों और पैरों को मजबूती मिलती है।सेतुबंधासनइस आसन से पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, पीठ को आराम मिलता है, छाती, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में स्ट्रेच आता है, मस्तिष्क को आराम मिलता है जिससे एंग्जायटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन दूर होता है, फेफड़ें खुलते हैं, थायराइड की प्रॉब्लम नहीं होती, पाचन में सुधार होता है।

ताड़ासनयह आसन ब्रेस्टफीडिंग मदर्स के कूल्हों, जांघों, कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से को स्ट्रेच करता है। इससे शरीर में संतुलन आता है, पिंडलियों को मजबूती मिलती है, साइटिका और रूमेटिज्म का दर्द कम होता है।ऊर्ध्व मुख श्वानासनइस आसन को करने से पीठ को मजबूती मिलती है, पीठ दर्द कम होता है, कलाई और बांहों को मजबूती मिलती है, पोस्चर ठीक होता है और पेट के अंग उत्तेजित होते हैं। (एजेंसी)

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सफेद प्याज एक बेहतरीन कूलिंग एजेंट माना जाता है

22.07.2022 – सफेद प्याज एक बेहतरीन कूलिंग एजेंट माना जाता है।शरीर को ठंडक देता है यह शरीर के तापमान को कम करने में मदद करता है और इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है। इसके अलावा, सफेद प्याज सनबर्न के कारण होने वाली सूजन को रोकने में भी मदद करता है।हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता हैइसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में रक्तचाप के स्तर को प्रबंधित करते हैं।

यह आगे धमनी में सजीले टुकड़े के गठन को रोकता है और सुनने से संबंधित बीमारियों के जोखिम को कम करता है।फाइबर का बेहतर स्रोतसफेद प्याज स्वस्थ घुलनशील फाइबर से समृद्ध होता है जिसे फ्रुक्टेन कहा जाता है। ये फाइबर पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और आंत-स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं, जो मल त्याग को नियमित करते हैं और आंत से संबंधित कई बीमारियों का इलाज करते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूरसफेद प्याज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो इसे डिटॉक्सीफिकेशन के लिए एक बेहतरीन घटक बनाता है। उचित विषहरण समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और हमें भीतर से पोषण देने में मदद करता है। इसके अलावा नसों और धमनियों में भी रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने में मदद करता है।एंटी बैक्टीरियल गुणसफेद प्याज में जीवाणुरोधी गुण इसे हमारे गर्मियों के आहार में शामिल करने और कई मौसमी बीमारियों को दूर रखने के लिए एक बेहतरीन सामग्री बनाते हैं।

कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि सफेद प्याज हैजा और ऐसे कई संक्रमणों के विकास को रोकने के लिए भी प्रभावी हो सकता है। (एजेंसी)

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मानसून में इस तरह सजाएं अपनी बालकनी, लगेगी खूबसूरत

19.07.2022 – अपनी बालकनी मानसून में इस तरह सजाएं . बारिश का लुत्फ उठाने के लिए बालकनी एक आदर्श स्थान है, इसलिए इसे मानसून के लिए सजाना तो बनता है। आप चाहें तो कुछ तरीकों को फॉलो कर अपनी बालकनी को मानसून के हिसाब से न सिर्फ आरामदायक बना सकते हैं, बल्कि इसे बारिश के नुकसानों से बचाकर खूबसूरत भी बनाए रख सकते हैं। आइए आज हम आपको पांच आसान टिप्स देते हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी बालकनी को मानसून के लिहाज से सजा सकते हैं।

हरियाली के बिना बालकनी की खूबसूरती है फीकीहरियाली के बिना तो बालकनी की सजावट हो ही नहीं सकती। इसके लिए आप इसमें छोटे-छोटे रंग-बिरंगे प्लास्टिक या मिट्टी के गमले रखकर उसमें फूलों के पौधे या मनी प्लांट जैसे कई तरह के पौधे लगा सकते हैं क्योंकि मनी प्लांट की बेल दीवार पर चढ़ी हुई अच्छी लगती है।

वहीं, फूल वाले पौधे बालकनी की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। पौधों से बालकनी में हरियाली छाई रहेगी और हर मौसम में आपको ताजगी का अहसास मिलता रहेगा। ट्रांसपेरेंट ब्लाइंड्स से अपनी बालकनी को सुरक्षित रखेंअपनी बालकनी में ट्रांसपेरेंट ब्लाइंड्स लगाने से आप यहां के फर्नीचर को बारिश के पानी से गीला होने से बचा सकते हैं। आजकल मार्केट में कई तरह के अच्छी फिनिश वाले क्कङ्कष्ट ब्लाइंड उपलब्ध हैं, जो न केवल बारिश को बालकनी में आने से रोकेंगे बल्कि कुछ हद तक तेज धूप से भी बचाएंगे। वहीं, जब आप चाहें तो इन्हें आसानी से रोल अप करके बंद कर सकते हैं।

बालकनी में जरूर रखें ये चीजेंसुहानी शाम हो या दिलकश बरसात का मौसम, बालकनी में बैठकर चाय की चुस्कियां लेने का मजा ही कुछ और होता है। अगर आप अपनी बालकनी में सुकून के दो पल बिताना चाहते हैं तो यहां जूट या फिर केन का फर्नीचर रखें और उनको रंग-बिरंगी गद्दियों से सजा दें। इसी के साथ अगर सुंदर क्रॉकरी का भी इस्तेमाल किया जाए तो आपकी बालकनी बेहद खूबसूरत लगेगी। लाइट्स की व्यवस्था करना न भूलेंबालकनी की खूबसूरती को निखारने में लाइट्स अहम भूमिका अदा कर सकती हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल भी जरूर करें।

अगर आप अपनी बालकनी की किसी दीवार को हाइलाइट करना चाहते हैं तो स्पॉटलाइट या ट्रैक लाइट का उपयोग करें। वहीं, अगर आप सॉफ्ट मूड लाइटिंग चाहते हैं तो सीलिंग लाइट्स या वॉल लाइट्स का इस्तेमाल करें और किसी भी असुविधा से बचने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले तारों में निवेश करें। ये चीजें बनाएंगी आपकी बालकनी को अधिक आकर्षिकअगर आपकी बालकनी बड़ी है तो उसमें आप एक झूला भी लगा सकते हैं। आजकल बाजार और ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर स्विंग चेयर्स उपलब्ध हैं, जिनसे आप अपनी बालकनी को काफी आकर्षक लुक दे सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, आप अपनी बालकनी में फाउंटेन लगा सकते हैं। हम जानते हैं कि बालकनी में सचमुच का फाउंटेन नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन आप इलेक्ट्रॉनिक फाउंटेन तो लगा ही सकते हैं। (एजेंसी)

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एकाग्रता को मजबूत करने में सक्षम हैं ये पांच तरीके, जरूर आजमाकर देखें

19.07.2022 – अपने कार्यस्थल पर किसी विशेष कार्य पर ठीक से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता काफी हद तक सफलता को निर्धारित करती है। आप अपने हर एक टास्क पर जितना अधिक ध्यान और समय देंगे, आप उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। हालांकि, व्याकुलता आपके ध्यान और एकाग्रता को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। आइए आज हम आपको पांच ऐसी टिप्स देते हैं, जिन्हें आजमाकर आप अपने ध्यान भटकने से बचाकर अपनी एकाग्रता क्षमता को मजबूत कर सकते हैं। ध्यान भटकाने वाली चीजों से बनाएं दूरीव्याकुलता एक प्रमुख कारण है, जो किसी विशेष कार्य पर आपकी एकाग्रता को प्रभावित करता है। रेडियो या टेलीविजन की आवाज, मोबाइल की नॉटिफिकेशन, बाहर का शोर आदि व्याकुलता के मुख्य स्रोत हैं।

इससे निपटने के लिए और अपना ध्यान अपने काम पर केंद्रित करने के लिए एक शांत क्षेत्र पर बैठें और अपने फोन को साइलेंट पर कर दें। इसके अतिरिक्त, अपने सहकर्मियों से अनुरोध करें कि काम करते समय आपको किसी ओर बात में न लगाएं। पोमोडोरो तकनीक को अपनाएंउचित ध्यान आपको कम समय में अधिक कार्यों को पूरा करने में मदद करता है और ऐसा करना कहने से आसान है। कम समय में कार्यों को पूरा करने के लिए पोमोडोरो तकनीक अपनाएं, जो आपके काम पर ध्यान लगाने में काफी मदद कर सकती है।

इसके लिए 25 मिनट का टाइमर सेट करके अपना काम शुरू करें। बजर बजने के बाद पांच मिनट का ब्रेक लें। ऐसा चार बार करें, फिर 20-30 मिनट का लंबा ब्रेक लें। व्यायाम है जरूरीशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, इसलिए नियमित व्यायाम से न केवल शारीरिक ताकत और स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि यह मस्तिष्क को तरोताजा रखने में भी सहयोग प्रदान करता है।

इसके लिए रोजाना 30-40 मिनट के लिए एरोबिक एक्सरसाइज करना कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा, हर रोज कम से कम 10 मिनट के लिए मेडिटेशन जरूर करें क्योंकि इससे भी एकाग्रता क्षमता मजबूत हो सकती है। थोड़ा-बहुत कैफीन का सेवन करेंकॉफी या ग्रीन टी जैसे कैफीन युक्त पेय का थोड़ी मात्रा में सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होगा। कैफीन एक ऐसा तत्व है, जो आपकी एकाग्रता क्षमता में सुधार करने में काफी मदद कर सकता है।

अगर आप कैफीन युक्त पेय पसंद नहीं करते हैं तो आप कोको की 70त्न या उससे अधिक मात्रा वाली डार्क चॉकलेट का सेवन भी कर सकते हैं। समान कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंमल्टीटास्किंग बंद करें और समान कार्यों पर एक साथ ध्यान लगाने की कोशिश करें। अपने काम को सहज बनाने के लिए सभी कार्यों को एक-एक करके पूरा करें। एक कार्य को बीच छोड़कर दूसरे कार्य को करने से आप भ्रमित हो सकते हैं और आप तनाव या चिंता जैसे मानसिक विकारों से घिर सकते हैं।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, मल्टीटास्किंग से उत्पादकता लगभग 40त्न कम हो जाती है। यह तरीका बच्चों की एकाग्रता में भी काम आएगा। (एजेंसी)

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बड़े कमाल का है सेब की तरह दिखने वाला फल नाशपाती

डायबिटीज-कैंसर जैसी बिमारियों को रखता है आपसे दूर

17.06.2022 – सेहतमंद रहने के लिए सब्जियों के साथ-साथ फलों का सेवन करना भी जरुरी होता हैं। ऐसे में एक फल है जो कुछ-कुछ हरे सेब की तरह दिखता है। इस फल का नाम है नाशपाती। नाशपाती कई सारे औषधीय गुणों से भरपूर होता है। स्वाद में खट्टा-मीठा लगने वाला यह फल फोलेट, विटामिन सी, कॉपर और पोटेशियम और पॉलीफेनोल एंटीऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्रोत माना जाता हैं।नाशपाती में मौजूद पोषक तत्व आपके शरीर को कोलेस्ट्रॉल, कब्ज, मधुमेह से बचाने के साथ ही दिल के दौरे और कुछ तरह के कैंसर से भी बचाने का काम करते है।

तो चलिए आज हम विस्तार से नाशपाती खाने से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं…कॉलेस्ट्रोल को कम करता हैएक्सपर्ट्स का कहना है कि नाशपाती में पेक्टिन की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो एलडीएल, ट्राइग्लिसराइड्स और वीएलडीएल के स्तर को कम करती है।उच्च कोलेस्ट्रॉल का खतरा कम होता है।कब्ज से राहत नाशपाती में मौजूद पेक्टिन पोषक तत्व एक सौम्य रेचक तरह काम करते है।

पेक्टिन एक प्रकार का फाइबर है, जो पाचन संबंधी परेशानियों में राहत देने का काम करता है।डायबिटीज में फायदेमंदडायबिटीज आज के समय में सर्दी-जुकाम की तरह आम समस्या बन चुकी है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। बस इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। ऐसे में नाशपाती डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद कर सकती है। दरअसल, इसमें उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो मधुमेह रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर को बनाए रखता है।

कैंसर से बचावमूत्राशय, फेफड़े और भोजन नली में होने वाले कैंसर के खतरे से बचा सकती है नाशपाती। नाशपाती में यूरोसोलिक एसिड (ह्म्शह्यशद्यद्बष् ्रष्द्बस्र) होता है जो एरोमाटेज गतिविधि को रोकता है जिससे कैंसर से बचाव होता है। रजोनिवृत्ति के दौरान नाशपाती खाने से महिलाओं में कैंसर का जोखिम कम हो सकता है। फलों में मौजूद आइसोक्वेरसिट्रिन डीएनए को सेहतमंद बनाए रखता है।वजन कमबढ़ते वजन से आज हर कोई परेशान है।

ऐसे में अगर आप भी अपने बढ़े हुए वजन को लेकर परेशान है तो नाशपाती आपके काम का फल है। हाल ही में हुए एक शोध में अधिक वजन वाली महिलाओं को 12 हफ्तों तक रोजाना तीन नाशपाती का सेवन कराया गया। परिणामस्वरूप उनके वजन में कमी दर्ज की गई।दिल ले लिए फायदेमंददिल की बीमारी आज एक आम समस्या हो गई है। बदलती जीवनशैली इसका मुख्य कारण है।

ऐसे में अगर आप अपने दिल को बिमारियों से बचाना चाहते है तो नाशपाती को अपनी डाइट में शामिल कर लें। नाशपाती उच्च रक्तचाप (हृदय रोग का कारण) और दिल के दौरे के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।इम्युनिटी बढ़ाने के लिएरोग-प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत रखना है तो आज से ही नाशपाती का सेवन शुरू कर दे। नाशपाती में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।गर्भावस्था के दौरान नाशपातीगर्भावस्था में खान-पान का विशेष ध्यान रखा जाता है।

इस दौरान महिलाओं को कई तरह के पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन सबसे ज्यादा जो महत्वपूर्ण होता है, वो है फोलेट। यह शिशु में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसे जन्मदोष से बचाव कर सकता है। ऐसे में नाशपाती का सेवन गर्भवती के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। हालाकि, गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें।ब्लड प्रेशर अगर आपको ब्लड प्रेशर है या आप उच्च रक्तचाप की समस्या से खुद को बचाना चाहते हैं, तो नाशपाती को अपने डाइट में शामिल करें।यह उच्च रक्तचाप की समस्या से बचाव कर आपको स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है।

गले की समस्या से राहत नाशपाती का जूस गले में खराश या सांस लेने में परेशानी से निजात दिला सकता है। यह वोकल कॉर्ड के सूजन को कम कर सकता है और गले को पोषण प्रदान कर गले की समस्या से राहत दिला सकता है।लिवर नाशपाती का सेवन लिवर के लिए लाभकारी हो सकता है।

इसमें हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं, जो लिवर को किसी भी तरह की क्षति से बचा सकते हैं। आप लिवर को सही रखने के लिए अपने आहार में नाशपाती फल को शामिल कर सकते हैं। (एजेंसी)

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झड़ते बालों की समस्या से चाहते हैं छुटकारा? अपनाएं ये पांच तरीके

17.07.2022 – झड़ते बालों की समस्या से चाहते हैं छुटकारा?. पुरुषों और महिलाओं के लिए बालों का झडऩा एक आम समस्या बनकर रह गई है और यह हार्मोनल परिवर्तन, आनुवंशिकता, तनाव और बीमारियों सहित कई कारणों से आपको घेर सकती है। इस समस्या से बचने के लिए लोग कई तरह महंगे-महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स भी इस्तेमाल करने लगते हैं, फिर भी उन्हें बेहतर परिणाम नहीं मिलता।

हालांकि, आप चाहें तो अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके और अपने बालों की उचित देखभाल करके उन्हें झडऩे से बचा सकते हैं। हीट स्टाइलिंग हेयर टूल्स से बनाएं दूरीकर्लिंग आयरन, ब्लो ड्रायर और स्ट्रेटनर जैसे हीट स्टाइलिंग हेयर टूल्स के इस्तेमाल से बालों के झडऩे का खतरा बढ़ सकता है।दरअसल, इनका बार-बार इस्तेमाल करने से आपके स्ट्रैंड्स से नमी दूर होने लगती है, जिससे वे शुष्क और बेजान हो सकते हैं।

ऐसे बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप ऐसे हेयर टूल्स से बनाकर रखें, लेकिन अगर कभी आप इनका इस्तेमाल करें तो उससे पहले अपने बालों पर हीट प्रोटेक्टेंट जरूर लगा लें। जल्दबाजी में न करें कंघीजल्दबाजी में कंघी करने से बाल काफी तेजी से खिंचते हैं और उनकी जड़ें कमजोर होने लगती हैं। जड़ें कमजोर होने की वजह से बाल काफी ज्यादा टूटने लगते हैं। इसलिए अपने बालों को समय दें और उन्हें धीरे-धीरे कंघी करें।

.इसके अलावा, बालों को कंघी करने के लिए प्लास्टिक की बजाय लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करें क्योंकि प्लास्टिक की कंघी से बालों को नुकसान पहुंचता है। माइल्ड शैंपू का करें इस्तेमालशैंपू करने से स्कैल्प से अतिरिक्त तेल और गंदगी को खत्म करने में मदद मिलती है। हालांकि, अपने बालों को अधिक धोने से बचें क्योंकि शैंपू में मौजूद सल्फेट्स और कई अन्य तत्व आपके बालों को घुंघराला, सूखा और नाजुक बना सकते हैं, जिससे बाल झड़ सकते हैं।

बेहतर होगा कि आप हफ्ते में दो बार किसी माइल्ड शैंपू से अपना सिर धोएं।इसके लिए सल्फेट-फ्री और ऑर्गेनिक शैंपू का इस्तेमाल करना अच्छा है। एसेंशियल ऑयल्स से अपने सिर की मालिश करेंतनाव एक बहुत बड़ा कारण है, जिसके कारण बालों के झडऩे की समस्या बढ़ सकती है। चिंता और तनाव से छुटकारा पाने के लिए रोजाना कुछ मिनट मेडिटेशन का अभ्यास करें और कुछ एसेंशियल ऑयल्स से सिर की मालिश करें क्योंकि ये आपके दिमाग को शांत करेक तनाव जैसे मानसिक विकारों से राहत दिला सकते हैं।

रोजमेरी या लैवेंडर आवश्यक तेल से अपने सिर की मालिश करें।तौलिये का गलत इस्तेमाल करनाअगर आप गीले बालों को तौलिये से रगड़कर लपेट लेते हैं तो यह आपकी सबसे बड़ी गलती है जो बालों के झडऩे का मुख्य कारण हो सकती है।

इसलिए गीले बालों को सुखाने के लिए न तो उन्हें तौलिये से रगड़ें और न ही लपेटें।दरअसल, इससे बालों की जड़ नरम हो जाती हैं और फिर जब आप कंघी करते हैं तो बाल झडऩे लगते हैं। इसी तरह बालों को तौलिये से झाड़-झाड़ कर भी न पोंछें। (एजेंसी)

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चाय के साथ न खाएं ये पदार्थ पकौड़ा तो बिलकुल नहीं

16.07.2022 – चाय के साथ न खाएं ये पदार्थ पकौड़ा तो बिलकुल नहीं. दुनिया भर में लोग अपने दिन की शुरुआत एक कप ताजा और कड़क चाय से करते हैं. चाय पीकर शरीर में स्फूर्ति आ जाती है और फ्रेश लगने लगतदा है. यदि आप भी टी-लवर्स हैं तो आप दिन में भी कई बार चाय पीते होंगे. सुबह हो, दोपहर हो या शाम, चाय का हर एक कप आपको सुकून देता है। दूध वाली चाय के अलावा दुनिया भर के लोग चाय के कई अलग-अलग प्रकारों का सेवन करते हैं.

ग्रीन टी और ब्लैक टी से लेकर कैमोमाइल और हिबिस्कस टी तक, चाय की कई किस्में मौजूद हैं. चाय के साथ कोई बिस्किट खाना पसंद करता है तो कोई पकौड़ी. लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें चाय के साथ कभी नहीं खाना चाहिए. अगर ऐसा करते हैं तो सेहत को नुकसान हो सकता है. तो आइए उन चीजों के बारे में जान लीजिए जिन्हें चाय के साथ नहीं खाना चाहिए.बेसन पकोड़े या नमकीन के साथ चाय पीना भारत में काफी कॉमन है.

हममें से अधिकतर लोग ऐसा करते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि चाय के साथ बेसन से बनी चीजों को खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और यह शरीर की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को भी कम कर देता है. इसलिए कभी भी चाय के साथ बेसन से बनी चीजों का सेवन ना करें.मेवे दूध के साथ आयरन युक्त चीजें खाने से बचना चाहिए. नट्स आयरन से भरपूर होते हैं इसलिए चाय के साथ नट्स खाने से सेहत पर गलत असर हो सकता है इसलिए चाय के साथ नट्स खाने से भी बचें.

आयरन से भरपूर चीजों को चाय के साथ नहीं खाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि चाय में टैनिन और ऑक्सालेट होते हैं जो आयरन से भरी चीजों को अब्जॉर्ब होने से रोकते हैं. इसलिए आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे नट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, अनाज, दाल और अनाज को चाय के साथ खाने से बचना चाहिए.नींबू वाली चाय पीने की सलाह फिटनेस इंडस्ट्री में काफी दी जाती है क्योंकि कुछ लोगों का मानना होता है कि इससे तेजी से वजन कम होता है.

लेकिन उन लोगों को यह भी जान लेना चाहिए कि चाय में नींबू के रस के साथ मिलाने से वह अम्लीय हो सकती है और शरीर में सूजन का कारण बन सकती है. नींबू की चाय का सेवन अगर सुबह खाली पेट किया जाए तो एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न जैसी समस्या भी हो सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि आप इस चाय से पूरी तरह परहेज करें.हल्दी चाय पीते समय हल्दी वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि इससे भी पेट में गैस, एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

हल्दी और चाय की पत्तियां एक दूसरे के अनुकूल नहीं होतीं इसलिए कभी भी हल्दी वाली चीजों का चाय के साथ सेवन ना करें.ठंडी चीजें कभी भी किसी ठंडी चीजों को गर्म चाय के साथ या चाय के तुरंत बाद ना खाएं. ऐसा करने से डाइजेशन संबंधित समस्याएं हो सकती हैं. इसका कारण है.

अलग-अलग तापमान के खाद्य पदार्थों का एक साथ सेवन करने से पाचन प्रक्रिया कमजोर हो सकती है और मिचली की समस्या हो सकती है. गर्म चाय पीने के बाद कम से कम 30 मिनट तक कुछ भी ठंडा खाने से बचें. (एजेंसी)

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मेकअप को रखें लॉन्ग लास्टिंग

16.07.20221 – मेकअप को रखें लॉन्ग लास्टिंग. जानिए कुछ टिप्स जो मानसून के दौरान आपके मेकअप को खराब होने से बचाएंगीचेहरे पर आइस क्यूब लगाएंबारिश के मौसम में मेकअप को जल्दी खराब होने से बचाने के लिए आप चेहरे पर बर्फ  लगा सकती हैं। अगर आप इसे लगाने से 5’0 मिनट पहले चेहरे पर बर्फ लगाती हैं तो मेकअप ज्यादा समय तक बना रहेगा।लाइट मेकअप करेंअपने ब्यूटी प्रॉडक्ट्स को बर्बाद करने के डर से कुछ लोग भारी मात्रा में मेकअप लगाते हैं।

मगर इससे आपका लुक मेकअप आसानी से खराब हो सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि मानसून के दौरान कम से कम मेकअप का इस्तेमाल करें और इसे अच्छे से ब्लेन्ड करें।सही मेकअप प्रॉडक्ट का चयन करेंकेवल वाटरप्रूफ प्रॉडक्ट्स का ही चुनाव करें। इसके लिए आप मैट कॉम्पैक्ट और वाटरप्रूफ लाइनर का इस्तेमाल कर सकती हैं। मानसून में भारी मॉइश्चराइजर, ऑयली फाउंडेशन और क्रीम बेस्ड कलर्स, के इस्तेमाल से बचें। साथ ही, काजल तो भूल कर भी न लगाएं।

आइब्रो पेंसिल से दूर रहेंमानसून में आइब्रो को हाईलाइट करने के लिए आइब्रो पेंसिल के इस्तेमाल से बचें। आइब्रो को सेट रखने के लिए ब्रो जेल का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है। साथ ही समय-समय पर आइब्रो की थ्रेडिंग करना न भूलें।इसे सेटिंग स्प्रे से सेट करेंअपना मेकअप लगाने के बाद, इसे मेकअप सेटिंग स्प्रे से सेट करना न भूलें। एक सेटिंग स्प्रे अंतिम टच-अप के रूप में काम करता है और आपके मेकअप को इंटैक्ट रखने में मदद करता है।

यह त्वचा को चमकदार बनाता है और आपकी त्वचा के मेकअप जादा लंबे समय तक चलता है। इसलिए एक बेहतरीन सेटिंग स्प्रे से अपने लुक को पूरा करें। (एजेंसी)

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योगा में करें सही कपड़ों का चुनाव

15.07.2022 – योगा में करें सही कपड़ों का चुनाव. बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा अपनी फिटनेस और ग्लैमर से आज भी यंग अभिनेत्रियों को टक्कर देती हैं। उन्हें देख ये कहना मुश्किल है कि मलाइका 47 साल की हैं। उनकी फिटनेस और ग्लैमर का राज रोजाना योग करना और हेल्दी लाइफस्टाइल जीना है। एक्ट्रेस चाहें जितनी भी बिजी क्यों न हों वह अपनी हेल्थ को मेंटेन करने के लिए रोजाना के अपने एक्सरसाइज रूटीन को फॉलो करती हैं। एक्ट्रेस को अक्सर उनके जिम के बाहर या फिर योगा क्लास की ओर जाते देखा जाता है।

फिट रहने के लिए अगर आप एक्सरसाइज करते हैं तो आपको उसके साथ ही सही कपड़ों का चुनाव भी करना जरूरी है। यहां देखें योग के लिए कैसे चुनें सही आउटफिट’ ऐसा कपड़ा चुनें जिसमें हवा पास होहालांकि कुछ लोगों को ढीले कपड़े योग के लिए आदर्श लगते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इस तरह के कपड़े आरामदायक हो।

दरअसल, आपको बहुत ढीले या बहुत टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए। योग के दौरान कुछ आसन ऐसे कपड़ों में करने से मुश्किल भरे हो सकते हैं। उन कपड़ों को खरीदें जो एक ही समय में सांस लेने योग्य और आरामदायक हों। आप जैविक कॉटन, बांस और लिनन के कपड़ों को चुन सकते हैं।

2) स्ट्रेच करने में मदद करते हैं इलास्टिक टॉप्स योग के लिए ऐसे कपड़े चुनें जो आरामदायक हों और मामूली कवरेज के साथ हों। कॉटन मिक्स के साथ स्ट्रेचेबल टी-शर्ट, जो धड़ को कवर करे। वह पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अच्छी तरह से काम करती हैं। महिलाएं बिल्ट-इन ब्रा के साथ योगा टॉप चुन सकती हैं।

3) लॉन्ग या शॉर्ट, सही पैंट को चुनेंयोग करने के लिए इलास्टिक वेस्ट के साथ योग पैंट को चुनें या फिर जो शरीर के आकार के मुताबिक हों। महिलाओं के लिए, योग पैंट फोल्डेबल वेस्ट के साथ आती हैं, जो काफी आरामदायक होती हैं। कैपरी स्टाइल के योग पैंट भी पुरुषों और महिलाओं दोनों के बीच काफी फेमस हैं।

4) सही कलर का करें चुनावऐसे रंग चुनें जो हल्के और मिट्टी के रंग से अच्छी तरह मेल खाते हैं। फैशन डीवाज के लिए, योग के कपड़े प्रिंट और कढ़ाई जैसे डिजाइन विवरण के साथ मिल सकते हैं। हालांकि आप आरामदायक कपड़ों को चुनना अपनी प्राथमिकता रखें।

5) समय के मुताबिक चुनें कपड़ेदिन के समय के आधार पर कपड़ों को सिलेक्ट करें अगर आप सुबह में तो आप कुछ लेयरिंग के साथ आउटफिट चुन सकते हैं, क्योंकि बिल्कुल सुबह थोड़ी ठंडक हो सकती है। टैंक टॉप के ऊपर हल्की जैकेट या श्रग पहन सकते हैं। क्योंकि गर्मी लगने पर आप इन्हें आसानी से उतार सकते हैं।

इस तरह के कपड़ों को न पहनें

1) बहुत ज्यादा ढीली पैंट फिसल सकती है और योग आसन करते समय बीच में आ सकती है।

2) पेट के बल लेटने पर ड्रॉस्ट्रिंग पैंट असहज होती है।

3) ढीले नेकलाइन या कॉलर वाले टॉप से बचें, आसन के बीच में इस तरह के टॉप आपको परेशान कर सकते हैं।

4) शॉर्ट्स पहनने से बचें।

(एजेंसी)

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सौंफ खाना खाने के बाद एक चम्मच खाएं

15.07.2022 – सौंफ के फायदों के बारे में हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। पर क्या आप जानती हैं कि आपके किचन में इस्तेमाल होने वाली यह छोटी सी चीज आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। क्योंकि अनगिनत हेल्थ बेनेफिट देने के साथ यह आपको कई बीमारियों से बचाने में मदद करती है। तो चलिए जानते है कि आयुर्वेद और रिसर्च के अनुसार सौंफ कैसे हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीने से जल्दी वजन घटाने में मदद मिलती है। वहीं जब आप खाना खाने के बाद सौंफ का सेवन करती हैं, तो ये एक बेहतरीन माउथ फ्रेशनर का काम करती है।सौंफ के फायदेआयुर्वेद के अनुसार सौंफ के दानों को चबाने से मुह की बदबू से राहत मिल सकती है। साथ ही यह पाचन क्रिया को स्वस्थ बनाए रखती है। इसके अलावा यह पेट की गैस, एसिडिटी, खट्टी डकार आना तथा खाना पचने में परेशानी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए बेहतरीन मानी जाती है।

रोज सही मात्रा में सौंफ के इस्तेमाल से आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिल सकती है।

1. आपके हार्ट का रखे ध्याननेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार सौंफ में भरपूर मात्रा में फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम और कैल्शियम पाया जाता है। जो आपके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें पाया जाने वाला फाइबर रहृदय रोगों के खतरों जैसे कि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करता है।

2. एंटी कैंसर प्रॉपर्टी से भरपूरसौंफ स्वास्थ्य लाभ देने के साथ कई बीमारियों से दूर रहने में मदद करती है। टेस्टिंग एंड एनिमल स्टडीज की 2011 की रिपोर्ट केअनुसार सौंफ में एंटी कैंसर प्रॉपर्टीज पाई जाती है। क्योंकि सौंफ में एनेथोल कंपाउंड पाया जाता है। जिसमें कैंसर फाइटिंग प्रॉपर्टीज पाई जाती है। इस रिसर्च में यह भी पाया गया की सौंफ ब्रेस्ट और लिवर कैंसर सपने में भी मदद करती है।

3. सूजन कम करने में कारगरसौंफ में भरपूर मात्रा में पोषण तत्व पाए जाते है जैसे कि विटामिन-सी और क्वेरसेटिन। जो शरीर की सूजन कम करने में मदद करते हैं। साथ ही सूजन बढ़ाने वाले कारणों से भी दूर रखते है।

4. ब्लड प्रेशर को संतुलित रखेसौंफ का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने के लिए भी किया जाता है। जनरल ऑफ फूड साइंस कि में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार सौंफ के दाने चबाने से आपके सलाइवा में पाचक एंजाइम की मात्रा बढ़ती है। जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है। इसके साथ ही सौंफ में पोटेशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर और हर्ट रेट को कंट्रोल करता है।

5. वेट लॉस में लाभदायकवजन कम करने के लिए सौंफ का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता है। अपनी डाइट में सौंफ के इस्तेमाल से लंबे समय तक भूख नही लगती। साथ ही सही मात्रा में इसका सेवन करने से अत्यधिक वजन कम करने में मदद मिलती है।बेहतर लाभ के लिए इस तरह करें सौंफ का सेवनआप एक चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर रख सकती हैं। फिर सुबह खाली पेट इस पानी का सेवन करने के साथ सौंफ के दानों को चबाकर खा लें।खाना बनाते वक्त आप इसे दाल या सब्जी में मसाले के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। आप इसे अपने रोजाना चूरण में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे यह आपकी पाचन क्रिया स्वस्थ बनाने में मदद करेगी।

आप आधा चम्मच सौंफ को भोजन करने के बाद एक माउथ फ्रेशनर के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती हैं।दिन में दो-तीन बार सौंफ के कुछ दाने चबाने से मुंह की बदबू से जल्द राहत मिलेगी। (एजेंसी)

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हृदय रोग स्टडी में आया सामने-डेस्क वर्क करने वाले लोगों में ज्यादा होता है

14.07.2022 – हृदय रोग स्टडी में आया सामने-डेस्क वर्क करने वाले लोगों में ज्यादा होता है. यदि आप एक कार्यालय में काम करते हैं, तो आप शायद अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा अपने डेस्क पर बैठकर बिताते हैं। पूरे दिन एक डेस्क पर बैठना आपकी पीठ, आपके आसन और आपके सामान्य स्वास्थ्य के लिए खराब है। हाल ही में चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज और पेकिंग यूनियन मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए शोध में सामने आया है कि जो लोग दिन में 8 घंटे अपने डेस्क पर बैठते हैं, उनमें दूसरे लोगों के मुकाबले दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की संभावना 20 प्रतिशत अधिक होती है।

11 वर्षों के दौरान, शोधकर्ताओं ने 21 देशों के 105,677 लोगों के रिकॉर्ड की जांच की। अध्ययन के अंत में यह बात सामने आई है कि लगभग 6,200 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। जिसमें से 2,300 दिल के दौरे, 3,000 स्ट्रोक और हार्ट फेल के 700 मामले थे।आपको बता दे, हृदय रोग साइलेंट किलर रूप में तेजी से फेल रहा है। इसका प्रकोप से भारत भी नहीं बचा हुआ है। हृदय रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुमानों के अनुसार, विश्व के कुल हृदय रोग के मामले का 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत का है। इसमें सबसे ज्यादा इस्केमिक, हाई ब्लड प्रेशर और रक्त धमनियों से संबंधित रोग शामिल हैं।शोधकर्ताओं ने सुझाया बचाव का तरीकाहालाकि, शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि डेस्क पर बिताए जाने वाले समय को कम करने और शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के साथ धूम्रपान जैसी आदतों को छोडऩे से हृदय रोग का खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

अध्ययनों से पता चला है कि लंबे समय तक बैठने के साथ-साथ शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण 8.8 प्रतिशत मौतें और 5.8 प्रतिशत हृदय रोग के मामले सामने आए हैं। इसलिए डॉक्टर लोगों को काम के बीच में नियमित ब्रेक लेने की सलाह भी देते हैं।लंबे समय तक बैठने से होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याएंहाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉललंबे समय तक बैठे रहने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या हो सकती है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

अग्नाशय या पाचक ग्रंथि में बदलावलंबे समय तक बैठे रहने से अग्नाशय या पाचक ग्रंथि अधिक सक्रिय हो जाती है और इस कारण से अधिक इंसुलिन पैदा करता है। इस हॉर्मोन से कोशिकाओं को ग्लूकोज के तौर पर एक उर्जा स्रोत पहुंचाए जाने का काम होता है, लेकिन चूंकि ऐसी अवस्था में मांसपेशियों की कोशिकाएं निष्क्रिय होती हैं इसलिए इंसुलिन को प्रयोग में नहीं ला पाता है। इसके चलते ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि इंसुलिन की अधिकता से मधुमेह और अन्य बीमारियां पैदा हो जाती हैं।कोलोन कैंसर का खतरालंबे समय तक बैठे रहने से कोलोन कैंसर का खतरा बना रहता है।

इतना ही नहीं, किन्हीं कारणों से स्तन और अन्तर्गर्भाशयकला (एन्डोमेट्रीअल) कैंसर होने का भी खतरा बना रहता है।मांसपेशियों में कमजोरीअधिक समय तक बैठे रहने से पीठ और पेट की मांसपेशियां ढीली पडऩे लगती हैं। इसी स्थिति के चलते आपके कूल्हे और पैरों की मांशपेशियां कमजोर पडऩे लगती हैं। लंबे समय तक एक स्थिति में बैठने का परिणाम यह भी हो सकता है कि आपकी रीढ़ की हड्डी भी पूरी तरह से सीधी न रह सके। इसी के परिणाम स्वरूप कूल्हे और पैरों की सक्रियता प्रभावित होती है और ये अंग सख्त होते जाते हैं और इनकी स्वाभाविक नमनीयता खत्म होने लगती है।

दिमाग पर असरमस्तिष्क पर भी अधिक समय तक बैठे रहना बुरा असर डालता है। मस्तिष्क की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। मांसपेशियों की सक्रियता से मस्तिष्क में ताजा खून और ऑक्सीजन की मात्रा पहुंचती है, जिसके ऐसे रसायन उत्पन्न होते हैं जोकि दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो मस्तिष्क की क्षमता पर भी विपरीत असर पढ़ता है।गर्दन में तनावलंबे समय तक कम्प्यूटर पर बैठने या टाइप करने से गर्दन भी सख्त हो जाती है। इस अस्वाभाविक हालत का परिणाम यह होता है कि गर्दन में तनाव पैदा हो जाती है। इसके कारण कंधों और पीठ में भी दर्द होने लगता है।

पीठ पर बुरा असरएक जैसी स्थिति में बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी की नमनीयता की विशेषता दुष्प्रभावित होती है और इसमें डिस्क क्षतिग्रस्त भी हो सकते हैं।करें ये उपायनेक स्ट्रेचिंग है फायदेमंदनेक स्ट्रेचिंग आप खड़े और बैठे दोनों स्थिति में कर सकते है, बस सिर को बाईं ओर और फिर दाईं ओर झुकाने की जरूरत है। ज्यादा बेहतर अनुभव के लिए आप कुर्सी के किनारे को पकड़कर नेक स्ट्रेच कर सकते हैं।शोल्डर श्रग करने से मिलेगी राहतशोल्डर श्रग करने के लिए आप अपने कंधों को ऊपर उठाएं कुछ सेकंड के लिए इसी अवस्था में रहें और फिर उन्हें वापस नीचे लाएं। ऐसा ही 4-5 बार दोहराएं।

साथ ही कंधों में पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए आप कंधों को आगे और पीछे भी घुमा सकते हैं।टोर्सो स्ट्रेचिंग से रहेंगे तनाव मुक्तबैठे हुए लैपटॉप पर लगातार काम करने से आपको धड़ में तनाव महसुस हो सकाता है।

इसे दूर करने के लिए आप दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में मिला लें और अपनी बाहों को छत की ओर फैलाएं। ऐसा करते वक्त गहरी सांस लें और सांस छोड़ते वक्त बाजुओं को नीचे लाएं। (एजेंसी)

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