Category Archives: life style

कुछ मिनटों में बनाएं ये चॉकलेट डेजर्ट, जानिए इनकी रेसिपी

07.06.2020 – चॉकलेट का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ गया न! यह होना तो लाजमी है क्योंकि इसका स्वाद ही इतना बेमिसाल होता है कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई इसका शौकीन है। अगर आपका परिवार भी चॉकलेट का बहुत बड़ा फैन है तो आप उनके लिए घर पर बड़ी आसानी से कुछ ही मिनटों में तरह-तरह के स्वादिष्ट चॉकलेट डेजर्ट बना सकते हैं। चलिए फिर आज हम आपको कुछ चॉकलेट डेजर्ट की रेसिपी बताते करते हैं।

चॉकलेट मूस

सबसे पहले डबल बॉयलर विधि का उपयोग करके एक कटोरे में चॉकलेट, मक्खन, एक चुटकी नमक और कॉफी को पिघलाएं, फिर एक स्पैटुला से सभी सामग्रियों को अच्छे से मिलाएं। अब इस मिश्रण को कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें। अब एक कटोरे में वनिला क्रीम और को फेंटें, फिर इसमें चॉकलेट वाला मिश्रण डालकर अच्छे से मिलाएं। इसके बाद मिश्रण को एक छोटे कंटेनर में डालकर फ्रिज में रख दें, फिर कुछ घंटे बाद इसका सेवन करें।

नो बेक चीज़केक

सबसे पहले ओरियो बिस्कुट को क्रश करके पिघले हुए मक्खन के साथ मिलाएं। अब इस मिश्रण को एक स्प्रिंगफॉर्म पैन में डालकर दबाते हुए फैलाएं और इसे फ्रिज में रखें। इसके बाद एक कटोरे में क्रीम चीज़, चीनी और वनीला एसेंस को फेंटें, फिर इसमें पिघली हुई चॉकलेट मिलाएं। अंत में स्प्रिंगफॉर्म पैन को फ्रिज से बाहर निकालकर उसमें क्रीम चीज़ वाला मिश्रण डालें और दोबारा इसे कुछ देर के लिए फ्रिज में रखें। इसके बाद केक का आनंद लें।

चॉकलेट कप-केक्स

सबसे पहले एक कटोरे में मैदा, बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, कोकोआ पाउडर और एक चुटकी नमक को डालकर मिलाएं। अब एक बड़े कटोरे में चीनी, अंडे और मक्खन को डालकर स्पैटुला से तब तक फेंटें, जब तक मिश्रण फुला-फुला सा न लगे, फिर इसमें कुछ वेनिला एसेंस में मिलाएं। इसके बाद मैदे के मिश्रण में दूध मिलाएं और इसे मफिन कप में डालने के बाद इन्हें ओवन में बेक करें, फिर कप-केक को ठंडा करके परोसें।

चॉकलेट पुडिंग

सबसे पहले एक कटोरे में चीनी, कोकोआ पाउडर, कॉर्नस्टार्च और एक चुटकी नमक को डालकर मिलाएं, फिर मिश्रण में दूध डालकर फेंटें। अब इस मिश्रण को गर्म करें और मध्यम आंच पर धीरे-धीरे हिलाते हुए उबालें और दो मिनट तक मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद करके मिश्रण में वेनिला एसेंस और मक्खन मिलाएं, फिर इस मिश्रण को छह घंटे के लिए फ्रिज में रखने के बाद खाएं। (एजेंसी)

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बॉडी वॉश घर पर बहुत आसानी से तैयार किए जा सकते हैं

06.06.2022 – आजकल बॉडी वॉश काफी चलन में है क्योंकि यह साबुन की तुलना में त्वचा पर हार्श नहीं होता और गहराई से साफ करने के साथ-साथ त्वचा को मॉइश्चराइज भी करता है। वैसे तो आजकल मार्केट में कई तरह के बॉडी वॉश मौजूद है, लेकिन अगर आप बिना पैसे खर्च किए बॉडी वॉश चाहते हैं तो आप इसे खुद ही घर पर बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। चलिए फिर आज चार तरह के बॉडी वॉश बनाने के तरीके जानते हैं।

तैलीय त्वचा के लिए बेहतरीन है यह बॉडी वॉश

सामग्री: आधा कप लिक्विड कैस्टाइल साबुन, दो बड़ी चम्मच शुद्ध नारियल का तेल, दो बड़ी चमम्च ग्लिसरीन, एक बड़ी चम्मच जैतून का तेल, एक बड़ी चम्मच विटामिन-श्व का तेल और किसी भी खट्टे फल से बने एसेंशियल ऑयल की 20-30 बूंदें। बॉडी वॉश बनाने का तरीका: सबसे पहले एक कटोरे में सभी सामग्रियों को डालकर अच्छे से मिला लें, फिर इस मिश्रण को पंप डिस्पेंसर वाली बोतल में डालें। बस बॉडी वॉश तैयार है। शेल्फ लाइफ: दो साल।

रूखे प्रकार की त्वचा के लिए बॉडी वॉश

सामग्री: आधा कप बिना चीनी वाला नारियल का दूध, ढाई कप बिना गंध वाला लिक्विड कैस्टाइल साबुन, तीन चम्मच जोजोबा ऑयल, दो चम्मच ग्लिसरीन, एक छोटा चम्मच कच्चा शहद और पांच बूंद टी ट्री एसेंशियल ऑयल। बॉडी वॉश बनाने का तरीका: सबसे पहले एक कटोरे में सभी सामग्रियों को डालकर अच्छे से मिला लें, फिर इस मिश्रण को किसी बोतल में डालें। इस्तेमाल के लिए बॉडी वॉश को स्नान स्पंज पर डालकर इस्तेमाल करें। शेल्फ लाइफ: एक साल।

मिश्रित त्वचा के लिए बॉडी वॉश

सामग्री: डेढ़ कप लिक्विड कैस्टाइल साबुन, चार चम्मच ग्लिसरीन, 10 बूंद पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल और 10 बूंद इलंग-इलंग एसेंशियल ऑयल। बॉडी वॉश बनाने का तरीका: सबसे पहले एक पंप वाली डिस्पेंसर बोतल में लिक्विड कैस्टाइल साबुन और ग्लिसरीन डालें, फिर इसमें दोनों एसेंशियल ऑयल डालकर बोतल को अच्छे से हिलाएं और इसका बतौर बॉडी वॉश इस्तेमाल करें। शेल्फ लाइफ: इस बॉडी वॉश की शेल्फ लाइफ एक साल है।

संवेदनशील त्वचा के लिए बॉडी वॉश

सामग्री: आधा कप लिक्विड कैस्टाइल साबुन, आधा कप कच्चा शहद, दो बड़ी चम्मच अरंडी का तेल, दो बड़ी चम्मच जैतून का तेल और 10 बूंदे आपके पंसदीदा एसेंशियल ऑयल की। बॉडी वॉश बनाने का तरीका: सबसे पहले एक बोतल में लिक्विड कैस्टाइल साबुन डालें, फिर इसमें बाकि की सारी सामग्रियों को डालकर बोतल को अच्छे से हिलाएं। इसके बाद यह बॉडी वॉश तैयार है। शेल्फ लाइफ: यह बॉडी वॉश दो साल तक चल सकता है। (एजेंसी)

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टांगों में अकडऩ होने पर इन एसेंशियल ऑयल्स का करें इस्तेमाल

06.06.2022 – टांगों में अकडऩ होना एक कष्टदायक समस्या है, जिसे नजरअंदाज करना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इसके कारण चलने-फिरने में काफी दिक्कत होने लगती है। अगर आपको कभी भी किसी कारणवश ऐसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिले और उनकी बताई दवाओं के सेवन के साथ कुछ एसेंशियल ऑयल्स का इस्तेमाल करें। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे एसेंशियल ऑयल्स के बारे में बताते हैं, जिनके इस्तेमाल से टांगों की अकडऩ जल्द दूर होगी।

जिंजर एसेंशियल ऑयल

टांगों की अकडऩ से राहत पाने के लिए जिंजर एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल करना लाभदायक साबित हो सकता है। समस्या से राहत पाने के लिए सबसे पहले एक मुलायम तौलिए को गर्म पानी (ध्यान रखें कि पानी ज्यादा गर्म न हो) में भिगोएं, फिर इसे निचोड़कर इस पर दो-तीन बूंद जिंजर ऑयल की डालें। इसके बाद तौलिए को दर्द से प्रभावित टांग पर लपेटें और जब तौलिया ठंडा हो जाए तो फिर से इसे पानी से भिगोकर पैर पर लगाएं।

पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल

पेपरमिंट ऑयल यानी पुदीने के तेल का इस्तेमाल करने से भी टांगों की अकडऩ दूर हो सकती है। पुदीने के तेल में कई ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो टांगों को अकडऩ से आराम दिला सकते हैं। राहत के लिए पुदीने के तेल की कुछ बूंदें दर्द से प्रभावित टांग पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। इसके अलावा, आप चाहें तो पानी में पुदीने के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर नहा भी सकते हैं। इससे भी आपको आराम मिलेगा।

लैवेंडर एसेंशियल ऑयल

अगर मांसपेशियों में खिंचाव के कारण किसी टांग में अकडऩ हो तो इससे राहत पाने के लिए आप लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। लैवेंडर के तेल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रभावित टांग की मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें अकडऩ से प्रभावित टांग पर लगाएं, फिर हल्के हाथों से मसाज करें। बेहतर परिणाम के लिए दिन में दो बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

रोजमेरी एसेंशियल ऑयल

अगर कभी भी टांग में अकडऩ हो तो इससे राहत पाने के लिए आप रोजमेरी ऑयल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। रोजमेरी ऑयल से अकडऩ वाली टांग की मालिश करने से प्रभावित हिस्से का रक्त प्रवाह बेहतर होता है और अकडऩ से राहत मिल सकती है। दरअसल, इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड समेत कई तरह के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जिनका टांग के हिस्से वाली मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। (एजेंसी)

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कहीं पपीते का सेवन ना बिगाड़ दे आपकी सेहत, यहां जानें अती के दुष्परिणाम

05.06.2022 – पपीते में मौजूद पोषक तत्व उसे सेहत के लिए गुणकारी बनाते हैं। पपीते का सेवन पाचन को दुरुस्त करने के साथ ही शरीर को स्वस्थ बनाता हैं। लेकिन कहते हैं ना कि किसी भी चीज की अती खराब ही होती हैं। ऐसा ही कुछ पपीते के साथ भी हैं जिसका अधिक सेवन आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं। जी हां, पपीते का अधिक सेवन आपको कई तरीकों से नुकसान पहुंचा सकता हैं। आज इस कड़ी में हम आपको पपीते के अधिक सेवन से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देने जा रहे हैं।

तो आइये जानते हैं इनके बारे में…हार्ट बीट कर सकता है धीमादिल से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित लोगों को पपीते के अधिक सेवन से बचना चाहिए। अधिक पपीते के सेवन से आपके दिल की धड़कनों की दर अनिश्चित रूप से कम होती है। इसके साथ ही यह दिल से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में अगर आपको हृदय से जुड़ी कोई परेशानी हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।लो ब्लड शुगरहाई ब्लड शुगर रोगियों के लिए पपीता का सेवन फायदेमंद हो सकता है।

लेकिन लो ब्लड शुगर रोगियों के लिए पपीता का अधिक सेवन नुकसानदेय माना जाता है। वहीं, अगर आप ब्लड शुगर की दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से पूछ कर ही पपीता का सेवन करें।स्किन के लिए है हानिकारकपपीता स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसमें पपैन नामक एंजाइम मौजूद होता है, जिसका अधिकतर इस्तेमाल स्किन केयर क्रीम को बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन यह एंजाइम सभी टाइप के स्किन के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

ऐसे में अगर किसी को इस एंजाइम से एलर्जी है, तो उनके स्किन पर रैशेज और जलन की शिकायत हो सकती है। इसलिए पपीता का सेवन सीमित मात्रा में ही करना आपके स्किन के लिए बेहतर होता है।बढ़ा सकती है रेस्पिरेटरी एलर्जीपपीता में मौजूद पपैन नामक एंजाइम एक शक्तिशाली एलर्जीन है। अगर आपको किसी तरह की श्वास संबंधी समस्या है। उदाहरण के लिए अस्थमा, एलर्जी तो इसका सेवन सावधानी पूर्वक करें। अगर आप काफी ज्यादा पपीता खाते हैं, तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

अधिक पपीता खाने से अस्थमा, घबराहट और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।बढ़ सकती है पेट की समस्याअति से ज्यादा पपीते का सेवन करने से हमारा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम प्रभावित होता है। इसके कारण पेट में गैस, जलन जैसी समस्या बढ़ सकती हैं। दरअसल, पपीते में फाइबर की अधिकता होती है। अधिक फाइबर का सेवन पाचन को प्रभावित करता है। जिसके कारण कब्ज, एसिडिटी और दस्त की शिकायतें हो सकती है।गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेयइस बात से शायद आप अच्छे से वाकिफ होंगे कि गर्भवती महिलाओं को पपीता का सेवन नहीं करना चाहिए।

क्योंकि पपीता का सेवन करने से गर्भवती के भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, पपीते में लेटेक्स की अधिकता होती है, जिसके कारण गर्भाशय सिकुडऩे की संभावना होती है। इसके अलावा इसमें मौूद पपैन भ्रूण के विकास की झिल्ली को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को पपीता का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। (एजेंसी)

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लीची गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है,सेवन से ये कमाल के फायदे

05.06.2022 – लीची गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है। स्वाद और फ्लेवर ही नहीं लीची में आपको सेहत का खजाना भी मिलता है। गर्मियों में आने वाले ज्यादातर फलों में पानी की मात्रा अच्छी होती है। ठीक इसी तरह लीची में भी पानी की भरपूर मात्रा होती है। यह विटामिन सी, विटामिन बी6, नियासिन, राइबोफ्लेविन, फोलेट, तांबा, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्निशियम और मैगनीज जैसे खनिज पाए जाते हैं, यह शरीर और पेट को ठंडक देती है। पाचन क्रिया सही रखने के साथ ही मस्तिष्क के विकास में भी इसकी बड़ी भूमिका है। लीची में विटामिन-सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। प्रति 100 ग्राम लीची में विटामिन-सी की मात्रा 71.5 मिलीग्राम होती है, जो प्रतिदिन की आवश्यकता का 119 प्रतिशत है ।

तो चलिए आइए विस्तार से जानते है लीची के फायदों के बारे में…पाचन के लिए फायदेमंदलीची में मौजूद विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया के लिए जरूरी है। लीची के रस में पेक्टिन और फाइबर होता है।यह आपकी आंत को साफ करने और पेट के स्वास्थ्य में सुधार करता है। इसके अलावा, यह एसिडिटी और हार्टबर्न के खिलाफ भी काम करता है।गले की खराशगले में खराश या दर्द हो तो आप एक लीची खा सकते है। दरअसल, गले की शराश को कम करने में भी लीची बहुत फायदेमंद है।ग्लोइंग त्वचा के लिएलीची के जूस में पॉलीफेनोल, ऑलिगोनोल्स, बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सिडेंट जैसे जैव-रासायनिक पदार्थों की प्रचुर मात्रा होती है। ये सभी एंटी-ऑक्सीडेंट डार्क सर्कल्स और पिंपल्स को दूर करने में सहायक होते हैं। इतना ही नहीं यह आपकी उम्र बढऩे की प्रक्रिया को भी धीमा करने में सहायक होते है। आप अपनी त्वचा पर लीची के और केले का फेस मास्क बनाकर, इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं, यह मुहासों को ठीक करने में सहायक है।सेहत का खजानालीची को बतौर फल ही नहीं खाया जाता, इसका जूस और शेक भी बहुत पसंद किया जाता है। जैम, जैली, मार्मलेड, सलाद और व्यंजनों की गार्निशिंग के लिए भी लीची का इस्तेमाल किया जाता है। छोटी-सी लीची में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, विटामिन ए और बी कॉम्प्लेक्स, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन जैसे खनिज लवण पाए जाते हैं, जो इसे काफी फायदेमंद बना देते हैं।इम्यूनिटी बढ़ाती हैलीची एक अच्छा ऐंटीऑक्सिडेंट भी है।लीची में बीटा कैरोटीन, नियासिन, राइबोफ्लेविन और फोलेट भरपूर होता है। यह सभी चीजें बॉडी के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मददगार होती हैं। इसमें मौजूद विटामिन सी हमारे शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और लोहे के अवशोषण में भी मदद करता है, जो एक प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने के लिए जरूरी है।वजन कम करने में सहायकअगर आप बढ़ते वजन से परेशान है तो आप लीची जूस का सेवन शुरू कर दे। क्योंकि लीची फाइबर और पानी से भरी हुई है। इसमें कोई फैट नहीं होता है और कैलोरी में भी लो होता है। लीची जूस या लीची खाने से आपकी खाने की लालसा कम हो जाती है और आपको पेट भरा हुआ महसूस होता है। यदि आप वजन घटाने की कोशिश करते हैं या इच्छा रखते हैं, तो आप लीची के जूस का नियमित सेवन करें।पेट के लिए फायदेमंदहल्के दस्त, उल्टी, पेट की खराबी, पेट के अल्सर और आंतरिक सूजन से उबरने में लीची का सेवन फायदेमंद है। यह कब्ज या पेट में हानिकारक टॉक्सिन के प्रभाव को कम करती है। गुर्दे की पथरी से होने वाले पेट दर्द से आराम पहुंचाती है।ऊर्जा का प्रमुख स्रोतलीची ऊर्जा का स्रोत है। थकान और कमजोरी महसूस करने वालों के लिए लीची बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद नियासिन हमारे शरीर में ऊर्जा के लिए आवश्यक स्टेरॉयड हॉर्मोन और हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है।हड्डियां मजबूत बनाने मेंलीची में कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम मौजूद होते है, जो शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं और हड्डियों के लिए बहुत अच्छे हैं। लीची हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस रोकने में सहायक है।पानी की आपूर्ति करती हैलीची का रस एक पौष्टिक तरल है।यह गर्मी के मौसम से संबंधित समस्याओं को दूर करता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है। लीची हमारे शरीर में संतुलित अनुपात में पानी की आपूर्ति करती है।प्रजनन स्वास्थ्य और कैंसर-रोधीयदि आप नियमित रूप से लीची के रस का सेवन करते हैं, तो यह प्रजजन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में भी मददगार है। इसके अलावा, इसमें अलग-अलग फाइटो-रसायन पदार्थ हैं जैसे- फ्लेवोनोइड, पॉलीफेनोल, विटामिन सी और प्रोएन्थोसायनाइड्स। यह सभी फ्री रेडिकल्स से लडऩे में मददगार हैं और कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक।सर्दी-जुकाम से बचावलीची विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत होने के कारण खांसी-जुकाम, बुखार और गले के संक्रमण को फैलने से रोकती है।

बालों को लंबा करने और मजबूत बनाने के लिएलीची में कॉपर की उपस्थिति होती है, जिसके कारण यह आपके बालों को बढ़ाने में मदद करता है। आप लीची के जूस के सेवन के अलावा, लीची के रस को आप बालों में लगा सकते हैं। इसके लिए आप लीची और एलोवेरा के 2 छोटे चम्मच रस लें। अब आप इसे अच्छी तरह से मिलाएं और अपने बालों के रोम पर समान रूप से मालिश करें।

लगभग 15 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर इसके बाद बालों को धो लें।ब्लड प्रेशर पर नियंत्रणलीची में काफी पॉटेशियम और सोडियम होता है। यही वजह है कि लीची खाने से नसों में खून का संचार सही रहता है और इस वजह से ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है। (एजेंसी)

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नारियल के तेल से बनाएं ये लिपबाम, होठों को रुखेपन से बचाएंगे

04.06.2022 – नारियल के तेल से बनाएं ये लिपबाम, होठों को रुखेपन से बचाएंगे. रूखेपन के कारण होंठ फटते हैं और अगर वक्त रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो कई बार होंठ इतने फट जाते हैं कि उनसे खून तक निकलने लगता है। नारियल का तेल एक प्राकृतिक मॉइश्चराइजर है, जो होंठो के रूखेपन को दूर करके इन्हें फटने से बचा सकता है।

आइए आज हम आपको नारियल के तेल से तरह-तरह के लिपबाम बनाने के तरीके बताते हैं, जिनके इस्तेमाल से आप अपने होंठो को रूखेपन से बचा सकते हैं। नारियल के तेल और पेट्रोलियम जेली का लिपबामसामग्री: एक चम्मच नारियल का तेल और एक चम्मच पेट्रोलियम जेली। लिपबाम बनाने का तरीका: सबसे पहले पेट्रोलियम जेली को एक छोटे पैन में गर्म करें या फिर माइक्रोवेव में रखकर पिघलाएं, फिर इसे नारियल के तेल के साथ मिलाएं। अब एक छोटे कंटेनर में इस मिश्रण को डालें और जब यह कमरे के तापमान पर ठंडा हो जाए तो इसे 20-30 मिनट के लिए फ्रीज में रखें। इसके बाद मिश्रण का बतौर लिपबाम इस्तेमाल करें।

नारियल के तेल और एलोवेरा का लिपबामसामग्री: एक बड़ी चम्मच नारियल का तेल, आधी बड़ी चम्मच कारनौबा वैक्स और एक चम्मच एलोवेरा जेल। लिपबाम बनाने का तरीका: सबसे पहले धीमी आंच पर एक छोटा पैन रखें, फिर उसमें कारनौबा वैक्स पिघलाएं। जब यह पिघल जाए तो गैस बंद करके इसे किसी कंटेनर में डालकर कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल और नारियल का तेल मिलाएं और इसे कुछ मिनट के लिए फ्रिज में रखने के बाद इस्तेमाल करें।

शिया बटर और नारियल के तेल का लिपबामसामग्री: एक बड़ी चम्मच नारियल का तेल, एक बड़ी चम्मच कारनौबा वैक्स और एक बड़ी चम्मच शिया बटर। लिपबाम बनाने का तरीका: सबसे पहले धीमी आंच पर एक पैन रखकर उसमें शिया बटर और कारनौबा वैक्स को पिघलाएं। जब यह मिश्रण पिघल जाए तो गैस बंद करके इसे एक कंटेनर में डालकर कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें, फिर इसमें नारियल का तेल मिलाएं और इसे कुछ मिनट के लिए फ्रिज में रखने के बाद बतौर लिपबाम इस्तेमाल करें। लैवेंडर एसेंशियल ऑयल और नारियल का तेलसामग्री: डेढ़ चम्मच नारियल का तेल, एक बड़ी चम्मच कारनौबा वैक्स और लैवेंडर एसेंशियल ऑयल की 10 बूंदें। लिपबाम बनाने का तरीका: सबसे पहले धीमी आंच पर एक पैन रखकर उसमें कारनौबा वैक्स पिघलाएं, फिर गैस बंद करके इसे कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें।

इसके बाद इसे एक छोटे कंटेनर में नारियल के तेल और लैवेंडर एसेंशियल ऑयल के साथ मिलाकर कुछ मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। फिर इसका होंठो पर इस्तेमाल करें। (एजेंसी)

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पाचन क्रिया भोजन को पचाकर पोषक तत्वों में बदलती है

04.06.2022 – पाचन क्रिया भोजन को पचाकर पोषक तत्वों में बदलती है। ये पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ देने में भी सहायक होते हैं। हालांकि, अगर किसी कारण से पाचन क्रिया प्रभावित हो जाए तो इसके कारण अपच और डायरिया जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचाकर पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने में कुछ पेय का सेवन काफी मदद कर सकता है। आइए आज ऐसे कुछ पेय के बारे में बताते हैं।

अदरक की चायअदरक में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो गैस्ट्रिक जूस के उत्पादन को उत्तेजित करके हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को तोडऩे और पाचन को बढ़ावा देने में मदद करती है। यहीं नहीं, अदरक में मौजूद गुण पेट की ऐंठन, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में भी मदद कर सकते हैं। इन लाभों के लिए एक कप अदरक वाली चाय का सेवन करें। कैमोमाइल चायएंटी-स्पास्मोडिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर कैमोमाइल चाय का सेवन भी पाचन को दुरुस्त करने में मदद कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, कैमोमाइल चाय एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक गुणों से समृद्ध होती है, इसलिए इसका सेवन कई तरह के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लाभ देने में सहायक है। इसलिए रोजाना एक कप कैमोमाइल चाय का सेवन जरूर करें। ध्यान रखें कि एक दिन में एक कप चाय पीना ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। नारियल पानीअगर आप रोज सुबह खाली पेट नारियल पानी का सेवन करते हैं तो इसका पाचन क्रिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

एक शोध के मुताबिक, नारियल पानी के सेवन से कब्ज, हैजा और अन्य पाचन संबंधी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। वहीं एक अन्य शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि नारियल पानी पेट में पहुंचकर डाइजैशन टॉनिक का काम कर सकता है। इसलिए रोजाना नारियल पानी का सेवन जरूर करें। चिया सीड ड्रिंकफाइबर से भरपूर चिया सीड्स भी पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद होते हैं।

ये प्रीबायोटिक के रूप में कार्य करके पेट में अच्छे बैक्टीरिया पैदा करने में मदद कर सकता है और आपकी पाचन क्रिया की कार्यक्षमता को प्रभावी तरीके से बढ़ा सकता है। अच्छी बात यह है कि चिया सीड्स पचाने में भी आसान होते हैं। पाचन को स्वस्थ रखने के लिए चिया सीड्स को पानी में भिगोकर खाली पेट इसका सेवन करें। (एजेंसी)

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हरे धनिये को लंबे समय तक फ्रेश रखने के लिए इन तरीकों से करें स्टोर

03.06.2022 – घर में सब्जी बनी हो या दाल अगर उसके ऊपर धनिये के पत्तों को गार्निश कर दिया जाए तो खाने का स्वाद बढऩा तय है। इसलिए कई लोग इसे घर में स्टोर करना सही समझते हैं। हालांकि, कुछ ही दिनों में धनिये के पत्ते मुरझा जाते हैं। अगर आपको भी अकसर इसी समस्या का सामना करना पड़ता है तो आपको किचन टिप्स की जरुरत है।

आइए पत्तेदार धनिये को स्टोर करने के तरीके जानते हैं। अन्य सब्जियों से पत्तेदार धनिया रखें दूरआमतौर पर लोग पत्तेदार धनिये को अन्य सब्जियों के साथ ही स्टोर कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना गलत है। दरअसल, कई सब्जियों में एथिलीन नामक केमिकल मौजूद होता है, जिससे धनिया जल्दी मुरझा सकता है। वहीं, कई सब्जियों में साइट्रिक एसिड होता है, जो धनिये के साथ-साथ अन्य सब्जियों को भी खराब कर सकता है, इसलिए बेहतर होगा कि आप धनिये को सभी सब्जियों से अलग ही स्टोर करें।

अच्छे से सुखाने के बाद स्टोर करें धनियापत्तेदार धनिये को अच्छे से सुखाकर भी स्टोर किया जा सकता है। इसके लिए पहले धनिये की सारी जड़ को तोड़ दे और इसे साफ पानी से धोएं, फिर धनिये को टिश्यू पेपर से पोंछ दें। इसके बाद इन्हें कुछ मिनट धूप में रख दें। ध्यान रखें कि धनिये को कुछ ही मिनट की धूप दिखानी है। इसके बाद पत्तेदार धनिये को एक एयर टाइट कंटेनर में डालकर फ्रिज में रख दें।

पेपर टॉवल में लपेटकर रखेंजब भी आप बाजार से पत्तेदार धनिया खरीदकर लाएं तो उसे सबसे पहले सामान्य पानी से धोकर धूप में सुखाएं। इसके बाद धनिये को किसी साफ और सूखे सूती कपड़े से पोंछकर एक प्लेट में रखें। ध्यान रखें कि इस दौरान धनिये की डंडी टूटनी नहीं चाहिए क्योंकि इनके टूटने से यह जल्दी खराब हो सकता है। इसके बाद धनिये को पेपर टॉवल में लपेटकर ही फ्रिज में रखें।इससे ये कुछ दिनों तक एकदम फ्रेश रहेगा। पत्तेदार धनिये को काटकर स्टोर करना है गलतअगर आप यह चाहते हैं कि पत्तेदार धनिया लंबे समय फ्रेश रहे तो इसे कभी काटकर स्टोर न करें क्योंकि इस वजह से इसके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।

हालांकि, अगर कभी किसी सब्जी या फिर कोई अन्य व्यंजन को बनाते समय कटा हुआ धनिया बच जाए तो इसे किसी एयर टाइट कंटेनर में स्टोर करके अगले ही दिन इसका इस्तेमाल कर लें। वहीं, अगर धनिया साबूत है तो उसे हमेशा जीप लॉक बैग में स्टोर करें। (एजेंसी)

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सनस्क्रीन खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान, होगा सही चयन

03.06.2022 – सनस्क्रीन एक स्किन केयर प्रोडक्ट है, जिसका इस्तेमाल त्वचा को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के साथ-साथ झुर्रियों, पिगमेंटेंशन और असमान रंगत को भी दूर कर सकती है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि सनस्क्रीन कौन-कौन सी सामग्रियों से युक्त होनी चाहिए और त्वचा के प्रकार के अनुसार कौन सी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए? आइए जानते हैं कि सनस्क्रीन खरीदने से पहले किन-किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

त्वचा के प्रकार के अनुसार चुनें सनस्क्रीनअगर आप यह चाहते हैं कि सनस्क्रीन से आपको भरपूर फायदा मिले तो इसे हमेशा अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार ही चुनें। बेहतर होगा कि रूखी त्वचा वाले लोग मॉइश्चराइजिंग सामग्रियों से युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। वहीं, तैलीय त्वचा वाले लोग ग्रीन टी एक्ट्रैक्ट, पेपरमिंट ऑयल, एल-कार्निटिन और निकोटिनैमाइड जैसी सामग्रियों से युक्त सनस्क्रीन लगाएं। संवेदनशील त्वचा वालों के लिए हाइड्रेटिंग और प्राकृतिक सामग्रियों से युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना फायदेमंद है।

सही फॉर्मूला चुनेंआजकल मार्केट में लोशन, स्टिक, स्प्रे और क्रीम फॉर्मूले में सनस्क्रीन उपलब्ध है और सनस्क्रीन स्प्रे हर तरह की त्वचा पर सूट करता है। वहीं, सनस्क्रीन क्रीम त्वचा को मॉइश्चराइज करने का काम करती है, इसलिए यह रूखे प्रकार की त्वचा के लिए बेस्ट है। सनस्क्रीन स्टिक रूखी और मिश्रित त्वचा के लिए बेहतरीन है। वहीं, तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करना अच्छा होगा।

सनस्क्रीन एसपीएफ युक्त होनी चाहिएजब भी आप सनस्क्रीन खरीदने जाएं तो यह जरूर चेक हैं कि वो एसपीएफ वाली है या नहीं। दरअसल, एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन की मदद से ही आप अपनी त्वचा को सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से बचाकर रख सकते हैं। बेहतर होगा कि आप अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार 50 या फिर 30 एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन खरीदें और धूप में निकलने से 15 मिनट पहले इसे त्वचा पर लगाएं। एक्सपायरी डेट करें चेकसनस्क्रीन या फिर कोई अन्य स्किन केयर प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट को चेक करना जरूरी है। सनस्क्रीन चेहरे से लेकर हाथों और पैरों तक पर लगाई जाती है.

इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आप एक्सरपायरी डेट चेक किए बिना इसे न खरीदें क्योंकि एक्सरपायर सनस्क्रीन को लगाने से त्वचा पर एलर्जी हो सकती है। जिस सनस्क्रीन की एक्सपायरी डेट छह-सात महीने बाद हो, केवल उसे ही खरीदें। (एजेंसी)

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हिचकी का मतलब याद आना नहीं, ये होती है असल वजह, ऐसे लगाएं इस पर ब्रेक…

02.06.2022 – हमारे जब कभी हिचकी आती है तो बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि कोई याद कर रहा है। हालांकि इसका असल कारण कुछ और होता है। दरअसल हमारे शरीर में डायाफ्राम नामक मांसपेशी हृदय और फेफड़े को पेट से अलग करती है। ब्रीदिंग यानी श्वसन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब इसमें कॉन्ट्रैक्शन अर्थात संकुचन होता है तब हमारे फेफड़ों में हवा के लिए जगह बनती है।

जब डायफ्राम मांसपेशी का संकुचन अचानक बार-बार होने लगता है तो हमें हिचकी आने लगती है। हिचकी के समय जो आवाज़ आती है वह ग्लोटिस (वोकल कॉर्ड्स के बीच की ओपनिंग, जिसे कंठद्वार कहा जाता है) के जल्दी-जल्दी बंद होने के चलते आती है।क्यों आती है हिचकी?वैसे तो हिचकी आने का एग्ज़ैक्ट कारण बता पाना संभव नहीं है,

पर इसके कुछ आम कारण हैं :—-

ज़रूरत से ज़्यादा खाना खा लेना। बहुत ज़्यादा तीखा या मसालेदार खाना या जल्दबाज़ी में खाना।

– अल्कोहल या एरेटेड ड्रिंक्स पीना। स्मोकिंग करना।

– तनाव, घबराहट, अतिउत्साह आदि के चलते भी कभी

-कभी हिचकी आने लगती है।

– हवा के तापमान में अचानक बदलाव आने से हिचकी का दौर शुरू हो सकता है।कैसे मिले हिचकी से राहत?वैसे तो हिचकी कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाती है, पर यदि ज़्यादा समय तक यह बनी रहे तो राहत के लिए ये घरेलू नुस्ख़े कारगर साबित होते रहे हैं।

– ठंडा पानी पिएं या आइसक्यूब्स मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें।- दालचीनी का एक टुकड़ा मुंह में डालकर कुछ देर चूसने से हिचकी में राहत मिलती है।

– गहरी सांस लें, जितनी देर हो सके सांस रोकें। यह प्रक्रिया दोहराएं आराम मिल जाएगा।- पेपरबैग में मुंह डालकर सांस लें, सांस छोड़ें। इससे श्वसन की प्रक्रिया को नॉर्मल होने में मदद मिलती है।

– लहसुन, प्याज़ या गाजर का रस सुंघाने से आराम पहुंचता है।- काली मिर्च को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें। दो ग्राम चूर्ण को शहद के साथ खाएं।- जीभ के नीचे शक्कर या चॉकलेट रखकर धीरे-धीरे चूसें।

– ज़मीन पर लेट जाएं। घुटनों को अपने सीने की ओर खींचें। ऐसा करने से कभी-कभी डायाफ्राम की गड़बड़ी दुरुस्त हो जाती है।- 20 ग्राम नींबू के रस में 6 ग्राम शहद और थोड़ा-सा काला नमक मिलाकर चाटने से हिचकियां बंद हो जाती हैं।यदि घरेलू उपायों से न रुके हिचकी तो क्या करें? वैसे तो कभी-कभी हिचकी लगातार 48 घंटे तक आपको परेशान कर सकती है, पर यदि ऐसा बार-बार हो तो समझ जाइए कि डॉक्टर से सलाह लेने का वक़्त आ गया है। घरेलू उपाय काम नहीं करने वाले।

लगातार आने वाली हिचकी अस्थमा, निमोनिया जैसे सांसों से संबंधित बीमारियों का संकेत हो सकती है। कई बार हृदय संबंधी गड़बड़ी भी हिचकी का कारण बनती है। पेट की सूजन, गैस होना, हाइटस हार्निया से भी हिचकी की समस्या शुरू हो जाती है। मेटाबॉलिक गड़बड़ी का संकेत भी हिचकी से मिलता है। डॉक्टर की सलाह लेना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि कई बार लगातार हिचकी आने से नींद में बाधा उत्पन्न होती है। लगातार आने वाली हिचकी वजऩ कम होने से लेकर डिप्रेशन तक का कारण बन सकती है।

डॉक्टर पेट, सीने, सिर और गले की जांच करने के साथ-साथ डायबिटीज़ लेवल की जांच कराने को कह सकते हैं। किडनी और लिवर फ़ंक्शन टेस्ट, ईसीजी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। (एजेंसी)

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गर्मियों में शहतूत खाने से महिलाओं की ये समस्याएं होंगी दूर, रोजाना करें सेवन

02.06.2022 – शहतूत गर्मियों के मौसम में पाया जाने वाला फल है जो स्वाद में खट्टा मीठा होता हैं , आपको बता दे इसका सेवन करने से सेहत को कई सारे फायदे होते हैं. सबसे पहले शहतूत की खेती चीन में हुई थी लेकिन अब दुनिया भर में इसकी खेती होती है. ये कई रंगों में पाया जाता है जैसे काला , नीला या लाल. शहतूत सिर्फ खाने में ही स्वादिष्ट नहीं होता बल्कि बेहद पौष्टिक भी होता है इसमें अच्छी मात्रा में विटामिन , पोटेशियम, आयरन , कैल्शियम आदि पाए जाते है जो शरीर के लिए लाभकारी है.

लेकिन यह फल महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि शहतूत खाने से महिलाओं को क्या फायदा होता है.शहतूत खाने से महिलाओं को फायदेआयरन से भरपूर अक्सर महिलाओं में आयरन की कमी होती है.ऐसे में उन्हें एनेमिया की शिकायत रहती है, ज्यादातर ये समस्या उन्हे प्रेगनेंसी के दौरान या उसके बाद होती है ऐसे में शहतूत का सेवन करना लाभकारी रहेगा क्योंकि इसमें आयरन की मात्रा अधिक होती है साथ ही में इसमें विटामिन भी पाया जाता है जो एनीमिया को कम करता है.

हड्डीयों के लिए कारगरमहिलाओं में 30 की उम्र के बाद कैल्शियम की कमी हो जाती है ऐसे में शहतूत फायदेमंद होता है ये हड्डियो और जोड़ों के दर्द को दूर करने में मदद करता है. ये कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन का अच्छा सोर्स है जो हड्डियों और मांसपेशियों की दर्द को ठीक करता है और काफी कारगर होता है.

वजन घटाने में कारगरकाफी महिलाएं अपने वजन को लेकर कॉन्शियस रहती है ऐसे में वे अपने हेल्थ को लेकर है कुछ न कुछ करती रहतीं हैं जैसे एक्सरसाइज करना , डाइटिंग करना आदि जिससे उनका वेट लॉस हो पाए.

ऐसे में शहतूत काफी फायदेमंद रहता है ये वजन कम करने में बेहद कारगर है. इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होती है जिससे वजन कम होता हैं और यही फाइबर होने की वजह से इसके सेवन के बाद लंबे समय तक भूख के लिए क्रेविंग नहीं होती है. (एजेंसी)

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टाइप-2 डायबिटीज होने पर इस तरह करना चाहिए एलोवेरा का सेवन, होगा लाभ

01.06.2022 – टाइप-2 डायबिटीज होने पर इस तरह करना चाहिए एलोवेरा का सेवन, होगा लाभ. एलोवेरा एक लोकप्रिय औषधीय पौधा है और इसका उपयोग हजारों वर्षों किया जाता आ रहा है। यह सनबर्न को दूर करने से लेकर घावों तक को ठीक करने वाले उत्पादों में एलोवेरा को प्रयोग में लाया जाता रहा है। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं इससे सेहत को होने वाले फायदों के बारे में। जी दरअसल इससे सेहत को कई लाभ होते हैं और आज हम आपको उन्ही लाभों के बारे में बताने जा रहे हैं।

टाइप-2 डायबिटीज में लाभदायक-

एलोवेरा जूस का सेवन करना डायबिटीज रोगियों के लिए विशेष लाभदायक हो सकता है। जी दरअसल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फाइटोथेरेपी एंड फाइटोफार्मेसी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, प्रतिदिन दो बड़े चम्मच एलोवेरा जूस पीने से टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित बना रह सकता है। जी हाँ, यानी यह माना जा सकता है कि एलोवेरा मधुमेह का संभावित इलाज या नियंत्रक है। हालाँकि जो लोग ग्लूकोज कम करने वाली दवाएं पहले से लेते हैं, उन्हें एलोवेरा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

कम कर सकता है स्तन कैंसर का खतरा

बहुत कम लोग जानते हैं कि एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि एलोवेरा में एलो इमोडिन नामक यौगिक पाया जाता है। जी हाँ और यह स्तन कैंसर के विकास को धीमा करने की क्षमता रखता है। एलोवेरा जूस का नियमित रूप से सेवन करना आपको इस कैंसर के जोखिम से बचाने में सहायक हो सकता है। हालाँकि इस सिद्धांत की पुष्टि के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है जो अब तक हुआ नहीं है। ऐसे में यह पूरी तरह कारगर है या नहीं कहा नहीं जा सकता। (एजेंसी)

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एप्पल साइडर विनेगर यानी सेब का सिरका सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है

01.06.2022 – (एजेंसी) एप्पल साइडर विनेगर यानी सेब का सिरका सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। एप्पल साइडर विनेगर को सेब के रस को फर्मेंट करके बनाया जाता है। वजन घटाने के लिए ज्यादातर लोग सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में सेब के सिरके का इस्तेमाल करते हैं। वैसे इसे कई प्रकार के व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ईरान में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि यह ट्राईग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाने का भी काम करता है। एक्सपर्ट कहते हैं, इसके कई फायदे हैं, लेकिन एपल साइडर विनेगर का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें वरना नुकसान भी हो सकता है। एक दिन में 30 एमएल से ज्यादा इसका इस्तेमाल न करें।

क्या है एपल साइडर विनेगर और काम कैसे करता है?

एप्पल साइडर विनेगर का उपयोग औषधीय रूप से भी किया जाता है। इसमें एसिटिक एसिड और साइट्रिक एसिड होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी और सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद करते हैं। सिट्रिक एसिड होने के कारण पाचन बेहतर होता है। इसे पानी में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है।
एपल साइडर विनेगर के फायदे और इस्तेमाल करने का तरीका

बालों में संक्रमण खत्म करता है

अगर सिर में फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। एक चौथाई कप पानी में दो छोटे चम्मच एपल विनेगर को मिलाएं। शैंपू करने के बाद इसे स्कैल्प पर लगाएं। सिर को तौलिया से कवर करें और 20 बाद इसे पानी से धो लें। बालों में चमक आने के साथ पीएच लेवल भी मेंटेन रहता है।

पिंपल्स और धब्बों को दूर करता है

अगर चेहरे पर धब्बे, पिंपल्स और मुंहासों की समस्या है तो एक कप पानी में एक चम्मच एपल विनेगर मिलाएं। इसे रूई की मदद से प्रभावित हिस्से पर लगाएं। 10 मिनट बाद इसे धो लें। इसे दिन में आप दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

भूख कंट्रोल करके वजन को घटाता है

मोटापा आज के समय की एक आम समस्या में से एक है। अगर वजन बढ़ रहा है तो इसे डेली रूटीन में शामिल करें। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच एपल साइडर विनेगर को खाना खाने के 45 मिनट पहले पिएं। इससे वजन कम होने के साथ ही मेटाबॉलिज्म तेज होता है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल और भूख दोनों को कंट्रोल करता है।

बैड कोलेस्ट्रॉल को करता कम

कई अध्ययनों में भी सामने आया है कि यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम करता है। साथ ही खून को भी पतला करता है। जिससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है।

पाचन के लिए

सेब के सिरके का एसिडिक नेचर होता है और ये उन लोगों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, जिनको गैस की समस्या रहती है। यह खाने को पचाने और डाइजेशन को दुरुस्त रखने में भी मदद कर सकता है।

जोड़ों के दर्द के लिए

सुबह रोजाना एक चम्मच सिरके का सेवन कर आप जोड़ों के दर्द से राहत पा सकते हैं। सेब के सिरके में ऐसे बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।

डायबिटीज के लिए

डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है सेब के सिरके का सेवन। एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ सिरके का सेवन कर डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

साइड इफेक्ट से बचने के लिए ये बातें ध्यान रखें

कभी भी सेब के सिरके का इस्तेमाल अधिक मात्रा में न करें। ऐसा करने पर उल्टी की शिकायत हो सकती है। शरीर में ब्लड शुगर का लेवल अधिक गिर सकता है। एसिडिक होने के कारण यह पेट, स्किन और दांतों की ऊपरी लेयर को नुकसान हो सकता है।

घर पर तैयार करें विनेगर

– एक चौड़े मुंह वाला शीशे का जार लें, इसमें सेब के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर डाल दें।

– चेक कर लें अगर सेब के छिलके पर मोम की पर्त नहीं है तो छिलके समेत ही काटकर डाल सकती हैं वरना छिलका हटाकर डालें।

– टुकड़ों को जार में डालें। ऊपर से थोड़ी शक्कर डालें। अब जार में पानी डालें। ध्यान रखें इसे पूरा ऊपर तक न भरें।

– इसमें एपल विनेगर बैक्टीरिया डालें, ये मार्केट में उपलब्ध है। अब इसे लकड़ी के ही चम्मच से मिलाएं।

– ध्यान रखें कि इसे 360 डिग्री नहीं चलाना है मिलाने के लिए ऊपर से नीचे सेब के टुकड़ों को धकेलते हुए मिलाना है।

– जार पर सूती कपड़ा बांधकर अंधेरे में रख दें। करीब 3 महीने लगेगा इसे तैयार होने में। हर 7 दिन के अंतराल पर इसे चम्मच से हिलाएं।

– 3 महीने बाद यह तैयार होने के पर हल्का पीला दिखता है। इसे छानकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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गर्मी में संतरे का जूस पीने से सेहत में होने वाले फायदे 

26.05.2022 – गर्मी के मौसम में स्वस्थ और सेहतमंद रहने के लिए आप संतरे का सेवन करे संतरे खाना ज्यादातर लोगो को पसंद है ये काफी टेस्टी और पौष्टिक होते है इनका सेवन करने से शरीर से जुडी कई समस्या दूर होती है संतरे में कई पोषक तत्व पाए जाते है इसमें विटामिन,आयरन ,कैल्शियम मौजूद होता है इसे खाने से शरीर में अलग अलग लाभ होते है इस मौसम में आप संतरे का जूस का सेवन करे इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है तो चलिए जानते है संतरे का जूस पिने से होने वाले इन फायदों के बारे में
संतरे का जूस पीने से सेहत में कई लाभ होते है इसमें विटामिन ज्यादा पाया जाता है और एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद है ऐसे में इसका सेवन करने से त्वचा की चमक बढ़ती है इससे त्वचा से जुडी समस्या दूर होती है और चेहरे पर दाग धब्बे दूर होते है और संतरे का जूस पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है इससे शरीर कई बीमारियों से बचा रहता है।
जिन लोगो हार्ट से जुडी समस्या रहती है उन लोगो को संतरे का जूस पीना चाहिए संतरे का जूस पिने से दिल स्वस्थ रहता है इससे दिल से जुडी समस्या दूर होती है.

अगर आपका वजन बढ़ गया है तो ऐसे में आप संतरे के जूस का सेवन करे इससे वजन जल्दी कम होता है और शरीर में होने वाली सूजन से आराम मिलता है। (एजेंसी)

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आपका वजन ऑफिस में इन खराब आदतों की वजह से बढ़ सकता है

26.05.2022 – वजन घटाना सचमुच एक बड़ी समस्या बना हुआ है। वजन के लगातार बढऩे के पीछे आज सबसे बड़ा कारण है लंबे समय तक बैठे-बैठे काम करना। कई घंटों तक लगातार एक ही जगह पर बैठकर काम करने वालों का न सिर्फ वजन बढ़ता है, बल्कि इससे सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

ऐसे में अगर आपका भी काम लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहने का है तो हम आपको कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपना वजन घटा सकते हैं। जी हां, ऑफिस में कुछ हेल्दी टिप्स फॉलो करके शरीर के बढ़ते वजन को कंट्रोल किया जा सकता हैं। इन टिप्स की मदद से न सिर्फ वजन कंट्रोल में रहेगा साथ थी लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली शारीरिक परेशानियों से भी छुटकारा मिलेगा। इसके लिए बस आपको अपनी कुछ गलत आदतों को छोडऩा होगा।

डेस्क से चिपके रहना

कई लोग डेस्क पर लगातार बैठकर काम करने में लगे रहते हैं। अगर आपकी भी यह आदत है तो सबसे पहले इसको बदल दें। इस तरह की आदतों की वजह से शरीर का वजन तेजी से बढ़ सकता है। दरअसल, आप अपने ऑफिस का टास्क पूरा करने के लिए अपने शरीर की एक्टिविटी पर ध्यान नहीं देते हैं, जिसकी वजह से आपके शरीर की कैलोरी बर्न नहीं होती है। इस स्थिति में शरीर का वजन बढ़ सकता है।

काम का स्ट्रेस

काम का स्ट्रेस लंबे समय तक लेने की वजह से शरीर का वजन बढ़ सकता है। इसलिए ऑफिस के काम को कभी भी स्ट्रेस के रूप में न लें। बल्कि काम को आराम-आराम से दिल लगाकर पूरा करने की कोशिश करें। इससे आपके शरीर का वजन कंट्रोल रहेगा। वहीं, बढ़ते वजन की परेशानी से छुटाकारा मिल सकता है साथ ही मानसिक चिंता से भी छुटकारा मिलेगा।

लंच सही समय पर न करना

ऑफिस में काम के लोड के चलते कई बार हम लंच को स्किप कर देते हैं या फिर देरी से लंच करते हैं। ऐसा करना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। आपकी यह आदत आपका वजन बाधा सकती है। इसलिए कोशिश करें कि लंच हमेशा समय पर करें। कभी भी लंच को स्किप न करेँ। इसे आपके शरीर का वजन संतुलित रहेगा।

जल्दी-जल्दी खाना

काम के चक्कर में कई बार हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो आपको बता दे ऐसा बिलकुल ही न करें। ऐसा करने से आपकी पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है और आप मोटापे का शिकार हो सकते हैं।

अन हेल्दी खाना

काम में व्यस्त होने के कारण कई बार लोग कुकीज जैसी कई अन हेल्दी चीजों का सेवन दिनभर करते रहते है। जिसके कारण आपके शरीर में कैलोरी बढऩे लगती है और मोटापा बढ़ सकता है।

लेट नाइट शिफ्ट

लेट नाईट तक शिफ्ट करने के कारण कई लोग रात में देर से सोते है और ऐसे लोग भूख लगने पर जरूरत से ज्यादा कैलरी लेते है। जिस वजह से मोटापे की समस्या हो सकती है। लेट नाइट शिफ्ट में लोग अक्सर समय से खाना नहीं खा पाते। उनके खाने का समय रोजाना बदलता रहता है। (एजेंसी)

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डियोड्रेंट घर पर आसानी से बनाया जा सकता है, जानिए तरीके

25.05.2022 – गर्मियों में पसीने की बदबू और चिपचिपाहट से बचाने में डियोड्रेंट काफी मदद कर सकता है, लेकिन मार्केट की बजाय घर पर ही इसे बनाकर इस्तेमाल करें। दरअसल, मार्केट में मौजूद अधिकतर डियोड्रेंट केमिकल्स से युक्त होते हैं, जिनके इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। आइए आज हम आपको पांच तरह के डियोड्रेंट बनाने के तरीके बताते हैं, जिनका इस्तेमाल न सिर्फ काफी असरदार है बल्कि त्वचा के लिए सुरक्षित भी है।

बेकिंग सोडा और कॉर्नस्टार्च डियोड्रेंट

बेकिंग सोडा और कॉर्नस्टार्च से बना डियोड्रेंट पसीने को जल्दी सोखने और गंध पैदा करने वाले कीटाणुओं को खत्म करने में सहायक है। सबसे अच्छी बात यह है कि ये दोनों सामग्रियां किसी भी किराने की दुकान से आसानी से मिल सकती है। डियोड्रेंट बनाने के लिए एक कंटेनर में छह चम्मच कॉर्नस्टार्च और एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। ध्यान रखें कि इस मिश्रण में पानी नहीं मिलाना है। इसके बाद इस मिश्रण का इस्तेमाल अपनी कांख (्रह्म्द्वश्चद्बह्लह्य) पर करें।
नारियल के तेल और क्लारी सेज एसेंशियल ऑयल का डियोड्रेंट
नारियल के तेल और क्लारी सेज एसेंशियल ऑयल से बना डियोड्रेंट संवेदनशील त्वचा के लिए सुरक्षित है और इसका इस्तेमाल आपको तरोताजा महसूस कराने में मदद करेगा। डियोड्रेंट बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में पानी गर्म करके उसके अंदर एक कटोरी रखें, फिर उसमें शिया बटर और नारियल का तेल मिलाएं। इसके बाद इसमें ग्रेपफ्रूट और क्लारी सेज एसेंशियल ऑयल और विटामिन-श्व ऑयल मिलाएं। अब गैस बंद करके इसे ठंडा होने दें और आपका डिओडोरेंट तैयार है।

लेमनग्रास डियोड्रेंट स्प्रे

लेमनग्रास की खुबियों से भरपूर डियोड्रेंट पसीने के कीटणुओं को दूर करके त्वचा को साफ और महकाने में मदद कर सकता है। डियोड्रेंट बनाने के लिए सबसे पहले एक स्प्रे बोतल में सेब का सिरका, लैवेंडर एसेंशियल ऑयल, लेमनग्रास एसेंशियल ऑयल और टी ट्री एसेंशियल ऑयल मिलाएं, फिर इसमें डिस्टिल्ड वॉटर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब बोतल का ढक्कन लगाएं, फिर इस मिश्रण का इस्तेमाल बतौर डियोड्रेंट करें।

शिया बटर और कोकोआ बटर का डियोड्रेंट

डियोड्रेंट बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में पानी गर्म करके उसके अंदर एक कटोरी रखें, फिर उसमें शिया बटर और कोकोआ बटर समेत अपने पसंदीदा एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें डालें। जब शिया बटर और कोकोआ बटर पिघल जाए तो उसमें बेकिंग सोडा और अरारोट पाउडर मिलाएं। अब गैस बंद करके इस मिश्रण को 24 घंटे के लिए ढककर रख दें, फिर इसे फ्रिज में सेट होने के लिए रखें। इसके बाद आपका डियोड्रेंट तैयार हो जाएगा।

गुलाब जल और लैवेंडर एसेंशियल ऑयल का डियोड्रेंट

गुलाब जल शरीर की दुर्गंध को दूर रखने में बेहद कारगर है और यह पसीने के उत्पादन को कम करने में भी मदद करता है, जबकि लैवेंडर एसेंशियल ऑयल में मौजूद गुण त्वचा को पोषण प्रदान करने के साथ इसे महकाने में सहायक है। डियोड्रेंट बनाने के लिए एक स्प्रे बोतल में ताजा गुलाब जल, सेब का सिरका, लैवेंडर एसेंशियल ऑयल और टी ट्री ऑयल मिलाएं। अब इसका इस्तेमाल बतौर डियोड्रेंट करें। (एजेंसी)

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आलू से बनाएं ये लजीज व्यंजन, आसान है रेसिपी

25.05.2022 – अगर आपको आलू से बने व्यंजनों का सेवन करना पसंद है तो यकीनन आप इससे तरह-तरह की रेसिपी को ट्राई करना भी काफी पसंद करेंगे। आइए आज हम आपको आलू से बनाए जाने वाले कुछ व्यंजनों की रेसिपी बताते हैं, जिन्हें आप सिर्फ 30 से 45 मिनट में इन्हें तैयार कर सकते हैं। वहीं, इन्हें आप अपने मेहमानों के लिए चाय-कॉफी या फिर सॉफ्ट ड्रिंक के साथ परोस सकते हैं।

स्पाइरल आलू

सबसे पहले आलू को एक बड़ी तीली में डालें, फिर आली को गोल-गोल करके स्पाइरल के आकार में पतला काटें। इसी तरह तीन से चार आलू को तैयार कर लें। इसके बाद सभी स्पाइरल आलू को कढ़ाई में गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें। इसके बाद एक कटोरी में लाल मिर्च का पाउडर, थोड़ा सा औरिगैनो और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छे से मिलाएं, फिर इस मसाले को स्पाइरल आलुओं के ऊपर छिड़ककर उनका स्वाद लें।

ट्वाइस बेक्ड पोटैटो कैसरोल

घर पर ट्वाइस बेक्ड पोटैटो कैसरोल बनाने के लिए सबसे पहले आवश्यकतानुसार आलू लें, फिर उन्हें साफ पानी में अच्छे से धो लें। अब सभी आलुओं को एक मिनट के लिए माइक्रोवेव में गर्म कर लें ताकि आलू थोड़े नरम हो जाएंगे, फिर आलुओं को माइक्रोवेव से निकालकर छीलें। इसके बाद एक कटोरे में आलू को मैश करके डालें, फिर इसमें मक्खन, चीज, दूध, हरी प्याज और सॉर क्रीम मिलाकर इस मिश्रण को बेक करें, फिर इसका सेवन करें।

फ्राइड मैश पोटैटो बॉल्स

फ्राइड मैश्ड पोटैटो बॉल्स बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरे में उबले हुए आलू को मैश करके डालें, फिर इसमें पका हुआ बेकन और चेडर चिव्स मिलाएं। इसके बाद कटोरे में थोड़ा गार्लिक पाउडर, स्वादानुसार नमक और एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाएं। अब इस मिश्रण की छोटी-छोटी बॉल्स बनाकर उन्हें कढ़ाई में गोल्डन ब्राउन करने तक तल लें, फिर तैयार फ्राइड मैश पोटैटो बॉल्स को हरी चटनी के साथ खाएं।

इंस्टेंट पॉट पोटैटो सूप

घर पर इंस्टेंट पॉट पोटैटो सूप बनाना काफी आसान है। इसके लिए पहले एक इंस्टेंट पॉट में मक्खन डालें, फिर इसमें बारीक प्याज, लहसुन और कुछ करी पत्ते डालें। इसके बाद इंस्टेंट पॉट में थोड़े उबले आलू और चिकन शोरबा डालकर इसे 8-10 मिनट के लिए पकाएं। अब दूध, मलाई और कॉर्नस्टार्च का घोल बनाएं, फिर इसे इंस्टेंट पॉट में डालकर पांच मिनट पकाएं, फिर सूप में स्वादानुसार नमक और एक चुटकी काली मिर्च का पाउडर मिलाकर इसका सेवन करें। (एजेंसी)

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शरीर को मजबूती प्रदान करने में सहायक हैं ये एक्सरसाइज

24.05.2022 – शरीर को मजबूती प्रदान करने में सहायक हैं ये एक्सरसाइज, घर में ही करें अभ्यास. आमतौर पर लोग शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिम का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह काम घर में ही कुछ आसान एक्सरसाइज के जरिये भी पूरा किया जा सकता है? कई ऐसी एक्सरसाइज हैं, जो न सिर्फ प्राकृतिक रूप से मजबूती प्रदान कर सकती हैं बल्कि शरीर में लचीलापन भी ला सकती हैं। आइए आज आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज के बारे बताते हैं, जिनकी मदद से शरीर को मजबूत बनाया जा सकता है।

स्क्वाट

स्क्वाट एक्सरसाइज करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथ सामने की ओर खोलकर सीधे खड़े हो जाएं। इस दौरान आपकी छाती एकदम तनी हुई होनी चाहिए। अब धीरे-धीरे अपने घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें, जिस तरह से कुर्सी पर बैठा जाता है। इसके बाद सांस भरते हुए धीरे-धीरे नीचे झुकें, फिर ऊपर आते समय सांस छोड़ें। ऐसा आप 10 मिनट तक कर सकते हैं। शुरूआत में 10 स्क्वाट करें और फिर धीरे-धीरे 12-15 तक ले जाएं।

लंज

लंज एक्सरसाइज के लिए सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े होकर अपने दाएं पैर को आगे बढ़ाएं और उसको घुटनों से मोड़ते हुए 90 डिग्री का कोण बनाएं। अब बायां पैर पीछे के ओर सीधा करें और दोनों पैरों के बीच में कम से कम दो-तीन फीट की दूरी कायम करें। कुछ सेकेंड इसी स्थिति में रहने के बाद खुद को ऊपर की ओर उछालें। इससे आप प्रारंभिक स्थिति में आ जाएंगे। इसी तरह दोनों पैर से 12-15 रेप्स करें।

पुश अप्स

पुश अप्स के लिए सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं, फिर गर्दन को सीधा रखें और हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। वहीं, पंजे जमीन से सटे हुए हों। अब हाथों पर जोर डालते हुए शरीर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें, लेकिन इस दौरान ध्यान रखें कि शरीर को नीचे लाते समय छाती जमीन से छूनी चाहिए। इसके बाद अपने हाथों को सीधा करें और 10 सेकंड इसी अवस्था में रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं।

जंपिंग जैक

जंपिंग जैक के लिए सबसे पहले जमीन पर सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं, फिर पैरों को अपने कूल्हों की चौड़ाई के बराबर खोलें। इसके बाद कूदें और इस दौरान अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर ले जाते हुए मिलाएं, फिर से कूंदें और अपनी बाजुओं को नीचे लाने के साथ ही पैरों को एक साथ चिपकाएं। कुछ सेकेंड के बाद आप अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं और इस क्रिया को बार-बार दोहराएं। (एजेंसी)

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पैरों की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं ये स्क्रब, जानिए बनाने..

24.05.2022 – पैरों की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं ये स्क्रब, जानिए बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका. चेहरे को निखारने के लिए लोग न जाने क्या कुछ नहीं करते हैं, लेकिन वे शरीर के अन्य अंगों पर ध्यान देना भूल जाते हैं, खासकर पैरों की सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में पैरों पर डेड स्किन सेल्स जमने या फिर कालेपन की समस्या हो सकती है। हालांकि, आप चाहें तो कुछ होममेड स्क्रब का इस्तेमाल करके अपने पैरों को खूबसूरत बना सकते हैं। चलिए फिर इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका जानते हैं।

एप्सम सॉल्ट और नारियल के तेल का फुट स्क्रब

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नारियल का तेल पैरों को मॉइश्चराइज और पोषण प्रदान करने में सहायक है, जबकि एप्सम सॉल्ट डेड स्किन सेल्स को हटाता है। बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका: सबसे पहले एक कटोरी में एप्सम सॉल्ट और नारियल का तेल मिलाएं, फिर इसमें किसी भी एसेंशियल ऑयल की तीन-चार बूंदें और विटामिन-श्व ऑयल मिलाएं। इसके बाद गीले पैरों पर इस मिश्रण से 20 मिनट तक स्क्रब करने के बाद उन्हें पानी से धो लें।

कॉफी और ब्राउन शुगर का फुट स्क्रब

कॉफी और ब्राउन शुगर का फुट स्क्रब पैरों को डेड स्किन सेल्स और कालेपन से छुटकारा दिलाने के साथ-साथ इन्हें कोमल और मुलायम बनाने में काफी मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह आपके पैरों के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी मदद करता है। बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका: थोड़ा नारियल तेल गर्म करें, फिर उसमें पिसी हुई कॉफी और ब्राउन शुगर मिलाएं। अब इस मिश्रण का इस्तेमाल पैरों पर बतौर स्क्रब करें।

शहद और नींबू का फुट स्क्रब

यह शहद और नींबू का फुट स्क्रब आपके पैरों को एक्सफोलिएट और मॉइश्चराइज करेगा और कुछ ही समय में इनकी समान रंगत को भी ठीक कर देगा। बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका: पहले एक कटोरी में एप्सम सॉल्ट, नारियल का तेल और चीनी मिलाएं, फिर इसमें थोड़ा शहद और ताजा नींबू का रस मिलाएं। अब इस मिश्रण को अपने पैरों पर लगाएं और धोने से पहले कुछ मिनट के लिए हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।

ओटमील फुट स्क्रब

अगर आप पैरों की रूखी और खुजली वाली त्वचा से परेशान हैं तो यह ओटमील स्क्रब आपके लिए एकदम सही विकल्प है। ओटमील पैरों से डेड स्किन सेल्स को धीरे-धीरे हटा देगा और त्वचा के रोगों को भी ठीक कर सकता है। बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका: सबसे पहले एक कटोरी में ओटमील, बेकिंग सोडा और पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें, फिर इस मिश्रण का इस्तेमाल बतौर फुट स्क्रब करें। (एजेंसी)

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गर्मियों में बचना है लू से तो जरूर अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

17.05.2022 – गर्मियों में बचना है लू से तो जरूर अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय. गर्मी अकेले नहीं आती, बल्कि अपने साथ-साथ हमें परेशान करने के लिए अन्य कई तरह की समस्याएं भी ले आती है। इन समस्याओं में चिलचिलाती धूप, उमस और गर्म हवाएं शामिल हैं। इन दिनों दोपहर के समय बाहर बहुत तेज गर्म हवाएं चलती हैं, इन गर्म हवाओं को ही लू कहते हैं। मजबूत इम्युनिटी वाले लोग इन गर्म हवाओं को सहन कर लेते हैं लेकिन बहुत से लोग इन हवाओं को सहन नहीं कर पाते हैं और संपर्क में आते ही बीमार पड़ जाते हैं। देश में हर साल काफी बड़ी तादात में लोग लू की चपेट में आ जाते हैं।

लू लगने के कारण

गर्मी में बढ़ता पारा हवाओं को लू में बदल देता है। ऐसे में अगर हम धूप में शरीर पूरा ढंके बिना बाहर निकलते हैं, तो लू लगने का पूरी-पूरी संभावना रहती है। इसके अलावा तेज़ धूप में नंगे पैर चलना, घर से बिना कुछ खाए निकलना, कम पानी पीना, एसी वाली जगह से निकलकर तुरंत धूप में चले जाना, धूप से बाहर आकर तुरंत ठंडा पानी पीना और कम पानी पीने वालों को लू जल्दी अपनी चपेट में लेती है।

लू से बचने के असरदार घरेलू उपाय

-प्याज को भून लें और इसे एक साधारण प्याज के साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण में जीरा पाउडर और मिश्री मिलाकर खाने से भी लू से आराम मिलता है। इसके अलावा रोजाना खाने में कच्चे प्याज का इस्तेमाल करें।

-ज्यादा देर तक धूप में रहना हो तो छाते का इस्तेमाल करें।

-अधिक मात्रा में पानी पिएं। बाहर जाते समय पानी की बोतल साथ लेकर जाएं।

-घर पर ही आम का पना बनाकर पियें। लू से बचने का यह सबसे असरदार घरेलू उपाय है।

-धनिये और पुदीने दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। लू से बचने के लिए गर्मियों में रोजाना धनिये और पुदीने का जूस बनाकर पिएं।

– प्याज के रस को निकाले और उसे पीये। साथ ही उसी रस को छाती पर भी मलें।

-गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करें

-पूरी बांह के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें।

-हल्के रंगों वाले सूती कपड़े पहनें, सिंथेटिक कपड़ों से परहेज करें।

-गर्मी के दिनों में कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकलें

-ऐसे में आप पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसमें दो लौंग मिलाएं और दोबारा से पीस लीजिये। अब पानी मिलाकर उसका सेवन करें।

-सब्जियों का सूप बनाकर रोजाना सेवन करें।

-लू लगने पर कभी बहुत ठंडा पानी न दें ,मटके का पानी दे या सामान्य पानी दें।

-शरीर को ठंडा रखने के लिए दिन में एक या दो बार नींबू पानी का सेवन ज़रुर करें।

-लू से बचने के आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों के दिनों में ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंडी तासीर वाली चीजों को खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू नहीं लगती है

सेब का सिरका : लू लगने पर शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है खासतौर पर पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे ज़रुरी मिनरल की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे में सेब के सिरके का सेवन करने से ये खोए हुए मिनरल वापस मिल जाते हैं और शरीर में इनका संतुलन बना रहता है।

खुराक और सेवन का तरीका : दो चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें।

चंदनासव : यह चंदन और कई तरह की जड़ी बूटियों से निर्मित एक आयुर्वेदिक पेय औषधि (आसव) है। आयुर्वेद के अनुसार चंदनासव में शीतल गुण होता है। ठंडी तासीर होने के कारण जब शरीर में गर्मी या जलन काफी बढ़ जाती है तो इसका इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद रहता है। लू लगने पर इसका सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है।

खुराक और सेवन का तरीका : तीन से चार चम्मच चंदनासव और समान मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार खाना खाने के बाद इसका सेवन करें।

बेल का शरबत : गर्मियों में बेल का शरबत अमृत के समान होता है। बेल में विटामिन सी और फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू से बचाव होता है। बेल का शरबत पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

खुराक और सेवन का तरीका : रोजाना दिन में दो-तीन बार इस जूस का सेवन खाना खाने से पहले करें।

गिलोय का जूस : गिलोय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करती है। आयुर्वेद के अनुसार गिलोय वात, पित्त और कफ शामक माना जाता है। यह लू में होने वाले तेज बुखार को जल्दी ठीक करती है और शरीर के तापमान को और बढऩे से रोकती है।

खुराक और सेवन का तरीका : आजकल बाज़ार में गिलोय का रस आसानी से उपलब्ध है। आप इसे ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं। दो से तीन चम्मच गिलोय रस में समान मात्रा में पानी मिलाकर रोजाना सुबह नाश्ते से पहले इसका सेवन करें।

उशीरासव : उशीरासव (खस) एक आयुर्वेदिक पेय औषधि है। यह पित्तशामक है और लू लगने पर यह शरीर में होने वाली गर्मी और जलन को शांत करने में मदद करती है. इसके अलावा पित्त संबंधी सभी रोगों में आप उशीरासव का इस्तेमाल कर सकते हैं।

खुराक और सेवन का तरीका : तीन से चार चम्मच उशीरासव और समान मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार खाना खाने के बाद इसका सेवन करें। (एजेंसी)

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आंखें खोलती हैं इन 6 गंभीर बीमारियों का राज

17.05.2022 – आंखें खोलती हैं इन 6 गंभीर बीमारियों का राज. आंखे आपकी सेहत के बारे में भी बहुत कुछ बताती हैं। आंखों के बदलते रंग से आप आसानी से पता लगा सकते है कि आपको कौनसी बीमारी होने वाली है। आप जितनी जल्दी इनकी पहचान कर लेंगे, उतनी जल्दी किसी बीमारी को गंभीर होने से रोक सकेंगे। तो आइए जानते हैं कि आंखों के जरिए किस तरह सेहत का हाल जाना जा सकता है।

डायबिटीज

आंखों से धुंधला दिखाई देना टाइप-2 डायबिटीज के संकेत हो सकते है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर नसों पर दबाव डालता है। इसकी वजह से आंखों के पिछले हिस्से में खून के धब्बे से दिखाई देते हैं। इन खून के धब्बों का मतलब है कि आपका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और आपको इसको तुरंत कम करने के बारे में सोचना चाहिए। अगर ब्लड शुगर के इस स्तर पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इससे आंखों की रोशनी खोने का डर बना रहता है।

कैंसर

ब्रेस्ट कैंसर के भी लक्षण आंखों में नजर आ सकते है। जब कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करने लगती हैं, तो इसका असर आंखों पर पडऩे लगता है। यूविया (आंखों के बीच की परत) ये संकेत देती है कि कैंसर कोशिकाएं आपकी आंखों में भी फैल चुकी हैं। अगर आपको धुंधली नजर, आंखों में दर्द, या फ्लैश जैसी समस्याएं महसूस होती हैं तो ऐसी स्तिथि में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हाई कोलेस्ट्रॉल

खून में बढ़ा कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे आंखों में जमा होने लगता है। जिसके बाद आपकी आंखों की पुतली के चारों ओर एक सफेद या नीले रंग का रिंग बनने लगता है। हालांकि कई मामलों में ये बढ़ती उम्र की भी निशानी है लेकिन इसका एक अन्य कारण हाई कोलेस्ट्रॉल भी है। आगर आपको कोई ऐसा लक्षण नजर आता है तो अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर कराएं। ये दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है।

खराब रेटिना

रेटिना के आसपास छोटे-छोटे धब्बे जैसे निशान को आई फ्लोटर्स कहते हैं। ये बहुत सामान्य है और हर कोई इसे महसूस कर सकता है लेकिन इन फ्लोटर्स की बढ़ती संख्या रेटिनल टियर यानी इसके अलग होने का संकेत देती है। इस संकेत को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि एक समय के बाद ये आपकी आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इंफेक्शन

कॉर्निया पर दिखाई देने वाला सफेद धब्बा कॉर्नियल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। यह ज्यादातर उन लोगों में देखा जाता है जो चश्मे के बजाय कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं। लेंस में बैक्टीरिया आसानी से लग जाते हैं और इनकी वजह से इंफेक्शन फैल जाता है। इसकी वजहे से कॉर्नियल स्कारिंग और दर्द हो सकता है।

पीलिया

आंखों का सफेद भाग पीला हो जाए तो ये पीलिया का संकेत हो सकता है। पीलिया तब होता है, जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बहुत अधिक हो जाता है। बिलीरुबिन की अत्यधिक मात्रा होने से लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है, और इससे लिवर के काम करने की क्षमता कमजोर पड़ जाती हैं। बिलीरुबिन धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता हैं जिससे व्यक्ति को पीलिया रोग हो जाता है। ऐसी स्थित में यूरीन और स्किन भी पीली होने लगती है। (एजेंसी)

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चेहरा जानिए गर्मी में दिन में कितनी बार धोना चाहिए

16.05.2022 – चेहरा जानिए गर्मी में दिन में कितनी बार धोना चाहिए . गर्मी में ताजगी बने रहने के लिए लोग दिन में कई बार चेहरा धोते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि बार-बार फेस वॉश करने से चेहरे पर निखार आ जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं बार-बार चेहरा धोने की आदत आपको नुकसान पंहुचा सकता है। इससे आपके चेहरे की नमी गायब हो सकती है।

सिर्फ फेसवॉश करने से चेहरा साफ नहीं होता है। इसके लिए आपके फेस वॉश करने का सही तरीका और समय पता होना जरूरी है। इसके अलावा फेस पर ग्लो लाने के लिए सही डाइट भी जरूरी है। आज हम आपको बता रहे हैं कि गर्मी हो या सर्दी आपको दिन में कितनी बार चेहरा धोना चाहिए।

सुबह – जब आप सोकर उठते हैं तो आलस छाया रहता है। इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले सादा पानी से अपना चेहरा धो लें। चेहरा धोने से फुर्ती महसूस होगी और फेस के पोर्स भी साफ हो जाएगे। सुबह आप ठंडे पानी से चेहरा धोएं। आप चाहें को कोई माइल्ड फेसवाश का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

दोपहर – अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको फेस वॉश करते वक्त अपनी त्वचा के हिसाब से साबुन या फेसवॉश का इस्तेमाल करना चाहिए। ऑयली स्किन पर दोपहर तक ऑयल आने लगता है। कई बार आप बाहर निकलते हैं तो चेहरे पर धूल जम जाती हैं ऐसे में दोपहर में भी ठन्डे पानी या फेसवाश से चेहरे को अच्छी तरह साफ करना चाहिए।

शाम – अगर आप कहीं बाहर जाते हैं तो शाम को घर लौटने के बाद चेहरा जरूर साफ करे लें। ऑफिस से घर आने के बाद दिनभर की गंदगी को साफ करना जरूरी है। जो महिलाएं मेकअप करके ऑफिस जाती हैं, उन्हें अपने फेस को जरूर साफ करके सोना चाहिए। फेस वॉश करने से दिनभर की थकान दूर हो जाती है। आप फ्रेश फील करते हैं।
चेहरा धोते समय इन बातों का रखे ध्यान

हाथ जरूर साफ करें

चेहरा साफ करने से पहले अपने हाथ जरूर साफ कर लें। गंदे हाथ से चेहरे धोने पर निखार कम हो जाता है। साथ ही चेहरा धोने के बाद इसे हल्के हाथों से पोछें। रगडऩे से स्किन खराब होती है।

सॉफ्ट स्क्रबिंग

चेहरे पर स्क्रबिंग कोमल हाथों से करें। वरना चेहरे पर रगड़ के निशान भी बन सकते हैं। स्क्रबिंग के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करें और हफ्ते में 2 बार स्किन एक्सफोलिएट करें।

चेहरे पर ना लगाएं ये चीजें

चेहरे पर वॉशक्लॉथ, मेश स्पॉन्ज या उंगलियों के अलावा किसी और चीज का इस्तेमाल ना करें। इससे आपकी त्वचा में जलन हो सकती है।
क्लीजिंग मिल्क जरूर करें

मेकअप उतारने के लिए पहले क्लीजिंग मिल्क करें और फिर कॉटन से चेहरे पोछें। इसके बाद पानी से धोएं। वरना मेकअप रोमछिद्रों में जाकर उन्हें बंद कर देगा।

दिन में 2 बार चेहरा धोएं

कई लोगों का मानना है कि मेकअप हटाने के लिए या जब यह गंदा दिखता है तो सिर्फ चेहरा धोने की जरूरत होती है। जबकि ऐसा नहीं है। हर किसी को कम से कम दिन में दो बार चेहरा धोना चाहिएं।

फेसवॉश से धोएं चेहरा

साबुन की बजाए फेसवॉश से चेहरा धोएं। वैसे आप इसके लिए बेसन, मक्की या चावल का आटा भी चूज करेंगे तो बेस्ट है।

पसीने के बाद चेहरा धोएं

भारी पसीने के बाद अपना चेहरा धो लें, खासकर टोपी या हेलमेट पहनने पर त्वचा में जलन होती है। ऐसे में पसीने के बाद जितनी जल्दी हो सके चेहरे धो लें। साथ ही कोशिश करें कि दिन में 2 बार चेहरा धोएं। (एजेंसी)

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गर्मियों के दौरान इस तरह करें मेकअप, नहीं रहेगा फैलने का डर

16.05.2022 – गर्मियों के दौरान इस तरह से करें मेकअप, नहीं रहेगा इसके फैलने का डर. गर्मियों में पसीने के कारण मेकअप फैल जाता है, जिसके चलते चेहरे का पूरा लुक बिगड़ जाता है। इसके अलावा, कई मेकअप प्रोडक्ट्स पसीने के साथ मिलकर आपकी त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, अगर सही मेकअप प्रोडक्ट्स को चुनें और उन्हें सही तरीके से लगाते हैं तो इनके फैलने कि संभावना काफी कम हो सकती है। आइए जानते हैं गर्मियों में किस तरह से मेकअप करना चाहिए ताकि आपको इससे कोई परेशानी न हो।

सबसे पहले चेहरे पर सीरम और सनस्क्रीन लगाएं

अधिकतर लड़कियां और महिलाएं यह सोचकर गर्मियों के दौरान चेहरे को मॉइश्चराइज करने से बचती हैं कि इससे उन्हें और ज्यादा पसीना आएगा, लेकिन यह त्वचा के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए अपने चेहरे को माइल्ड क्लींजर से साफ करने के बाद हाइड्रेटिंग गुणों से समृद्ध फेस सीरम लगाएं, फिर अपनी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए कम से कम एसपीएफ 50 वाला हल्की जेल बेस्ड सनस्क्रीन लगाएं।

चेहरे पर प्राइमर लगाना है जरूरी

गर्मियों के दौरान मेकअप की शुरूआत फेस प्राइमर से करना अच्छा है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि बाजार में कई तरह के फेस प्राइमर मौजूद हैं और ऐसे में गलत प्राइमर को चुनने की संभावना बढ़ जाती है। बेहतर होगा कि आप अच्छे ब्रांड के ही प्राइमर का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, जब भी आप प्राइमर खरीदें तो अपनी त्वचा के प्रकार और जरूरतों को जरूर ध्यान में रखें।
फाउंडेशन की जगह बीबी क्रीम से बनाएं मेकअप बेस
फाउंडेशन भले ही कितना भी महंगा या गुणवत्ता पूर्ण हो, चेहरे पर पसीना आते ही उसके फैलने की संभावना रहती ही है। इसलिए बेहतर होगा कि आप गर्मियों के दौरान फाउंडेशन की जगह बीबी क्रीम से मेकअप बेस बनाएं। यह क्रीम त्वचा को मॉइश्चराइज करने के साथ-साथ सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से भी बचाने में मदद कर सकती है। वहीं, अगर आपकी चेहरे पर मुंहासे हो रखे हैं तो इन्हें छुपाने में भी बीबी क्रीम बेस्ट है।

इन मेकअप टिप्स को भी जरूर अपनाएं

अगर आप मेकअप के दौरान कॉम्पैक्ट पाउडर लगाती हैं तो गर्मियों के दौरान इसे न लगाएं। इसके अतिरिक्त, पाउडर ब्लश की जगह क्रीम ब्लश चुनें और चेहरे के जिस भी हिस्से को आप हाइलाइट करना चाहते हैं तो उस पर ब्रोंजर का इस्तेमाल करें। इसके बाद अपने मेकअप को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए चेहरे पर मेकअप सेटिंग स्प्रे का छिड़काव करें। अंत में होंठो पर न्यूड शेड की लिपस्टिक लगाएं।(एजेंसी)

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 इस चाय का सेवन गर्मी में करें बॉडी को जाएगी तरोताजा

15.05.2022 –  इस चाय का सेवन गर्मी में करें बॉडी को जाएगी तरोताजा. यूनाइटेड किंगडम के 19वें पूर्व पीएम विलियम इवार्ट ग्लैडस्टोन ने बोला था, अगर आप ठंडे हैं, तो चाय आपको गर्म करेगी, अगर आप गर्म हैं, तो यह आपको ठंडा करने वाली है। इंडिया जैसे देश में जहां हर स्थान पर चाय आम बात है और जब एक गर्म कप गाढ़ी, दूधिया, शक्कर वाली चाय की चुस्की लेने का मौका मिले तो जिस वक्त तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाता है, शायद अधिकतर लोगों के दिमाग में आखिरी शब्द चाय ही आएगा। लेकिन जिस वक्त लोग चाय के परंपरागत स्वाद के आदी हैं, इसके माहिर ऐसी कई अनोखी चाय बनाने का प्रयास करने और स्वाद लेने में लगे हुए हैं जो शरीर को ठंडा और तरोताजा कर देती है।

बुरांश चाय या रोडोडेंड्रोन चाय एक ऐसा ही पेय है जो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के आसपास के उत्तरी इलाकों में बहुत लोकप्रिय है। यह चाय मार्च के अंत से मई तक हिमालयी इलाके की ठंडी पहाडिय़ों में खिलने वाले सुर्ख लाल रोडोडेंड्रोन फूलों की सूखी पंखुडिय़ों से बनाई जाती है। बुरांश चाय पाचन में सहायक, एलर्जी से लडऩे और फेफड़ों की सेहत में सुधार के अलावा इसके सूजन कम करने वाले गुणों के लिए भी पहचानी जाती है।

रोडोडेंड्रोन फूलों की पंखुडिय़ों को हाथ से चुनने का काम भी किया जाता है, फिर धूप में सुखाया जाता है और चीनी के साथ पानी में उबाला जाने लगा है। जिसको छानने और परोसने से पहले, स्वाद को बढ़ाने के लिए तुलसी के पत्ते और कुछ ग्रीन टी भी दाल रही है। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ऐप पर उत्तराखंड टूरिज्म ने बुरांश चाय की एक पोस्ट डालते हुए लिखा- लव एट फर्स्ट सिप! बुरांश चाय को ठंडे या गर्म पेय के रूप में दिन में किसी भी वक़्त किया जा सकता है। इस फूलदार मिश्रण की तरह, फ्रूटी आइस्ड टी इस गर्मी में चाय प्रेमियों को तेजी से आकर्षित कर रही है।

विशेष रूप से सेब और अंगूर की आइस्ड टी, जो अपने एंटीऑक्सीडेंट बूस्ट के लिए भी पहचानी जाती है। इंडिया चाय बोर्ड ने कू यूजर्स से उनकी चाय की पसंद के बारे में पूछा- आइस्ड टी का आपका पसंदीदा फ्लेवर कौन सा है?, जाता है, जिससे पानी में इसका स्वाद अच्छी तरह से मिल जाता है। यह प्रक्रिया टैनिन के कारण इसमें मौजूद किसी भी कड़वाहट को कम करती है, इस मिश्रण को एक बेहतरीन बनाती है और इसे सोडा पेय के स्थान पर एक बेहतरीन विकल्प बनाती है।

चाय पीने वाले एक देश में, जहां प्रति व्यक्ति खपत लगभग 750 ग्राम हर साल है, तरोताज़ा करने वाले नए मिश्रण धीरे-धीरे चाय पीने वालों के लिए पसंदीदा पेय बन बनाने का काम कर रहे है, विशेष रूप से मिलेनियल्स के लिए, जो अनोखे, मौसमी और स्थानीय पेय को इस्तेमाल करने और बेहतर बनान के लिए उत्सुक हैं। (एजेंसी)

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