राज्य सरकार की महत्वकांक्षी “झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना” अंतर्गत लाभुकों को सम्मान राशि का भुगतान
रांची जिले में योजना अंतर्गत नवंबर महीने की सम्मान राशि (2500 रूपये) का भुगतान
रांची जिला में 3 लाख 93 हजार 84 लाभुकों के खाते में आधार बेस्ड भुगतान
लाभुकों के मध्य 98 करोड़ 27 लाख 10 हजार की राशि का भुगतान
रांची, 23.12.2025 – क्रिसमस के पावन अवसर पर राज्य सरकार द्वारा झारखंड की महिलाओं को विशेष उपहार स्वरूप मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत नवंबर माह की सम्मान राशि का भुगतान किया जा रहा है।
इस योजना के तहत रांची जिले की कुल 03 लाख 93 हजार 84 महिलाओं के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 2500 रुपये प्रति लाभुक की दर से कुल 98 करोड़ 27 लाख 10 हजार रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया है।
विभिन्न प्रखंड एवं शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति (नवंबर माह)
अनगड़ा – 16,935 लाभुक
अरगोड़ा (शहरी क्षेत्र) – 13,207 लाभुक
बड़गाईं (शहरी क्षेत्र) – 9702 लाभुक
बेड़ो – 20,761 लाभुक
बुण्डू – 8,552 लाभुक
बुण्डू (नगर पंचायत) – 3,574 लाभुक
बुढ़मू – 18,152 लाभुक
चान्हो – 19,851 लाभुक
हेहल (शहरी क्षेत्र) – 15,537 लाभुक
ईटकी – 10,466 लाभुक
कांके – 31,781 लाभुक
कांके (शहरी क्षेत्र) – 1,336 लाभुक
खलारी – 9,699 लाभुक
लापुंग – 11,473 लाभुक
माण्डर – 23,308 लाभुक
नगड़ी – 18,084 लाभुक
नगड़ी (शहरी क्षेत्र) – 8,184 लाभुक
नामकुम – 18,053 लाभुक
नामकुम (शहरी क्षेत्र) – 9,151 लाभुक
ओरमांझी – 18,342 लाभुक
राहे – 9,691 लाभुक
रातू – 18,790 लाभुक
सिल्ली – 21,390 लाभुक
सोनाहातू – 13,269 लाभुक
तमाड़ – 18,758 लाभुक
सदर (शहरी क्षेत्र) – 25,038 लाभुक
उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि क्रिसमस का पर्व प्रेम, सेवा और खुशियाँ बांटने का संदेश देता है। इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत महिलाओं को सम्मान राशि का भुगतान राज्य सरकार की ओर से एक स्नेहपूर्ण उपहार है। यह सहायता महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल देती है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी सुदृढ़ करती है।
चुनाव आयोग ने प्रमुख राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षकों (एसआरओ) की नियुक्ति की है।
एसआरओ ने अपना काम शुरू कर दिया है और वे फरवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक इन राज्यों में सप्ताह में दो दिन मौजूद रहेंगे।
एसआरओ सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के साथ राज्य और जिला स्तरीय बैठकें करेंगे।
एसआरओ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) के साथ बैठकों में व्यक्तिगत या वर्चुअल माध्यम से भी भाग लेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और सहभागिता के साथ सुचारू रूप से पूरी हो।
एसआरओ विशेष गहन पुनरीक्षणका निरीक्षण करेंगे ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।
रांची,23.12.2025 – राँची जिला अन्तर्गत वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची के निर्देशानुसार लगातार भू-माफियाओं एवं आर्म्स एक्ट के अभियुक्तों की गतिविधियों का सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 22.12.25 की रात्रि में वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची को गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि कांके एवं गोंदा थाना क्षेत्र में सक्रिय भू-माफिया, जिनमें कुछ न्यायिक हिरासत में है, के द्वारा अपने संगठित गिरोह के माध्यम से हथियार के बल पर भूविवाद को उत्पन्न कर अवैध कब्जा किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।
सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के नियंत्रण में वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मु०) प्रथम के नेतृत्व में कांके, गोंदा थाना एवं पिठौरिया थाना की एक संयुक्त छापामारी दल का गठन किया गया।
छापामारी के क्रम में दिनांक-22.12.25 की मध्य रात्रि को एतवा टोप्पो, पे० डहरू टोप्पो सा० भीठा बस्ती नियर, चांदनी चौक, थाना गोंदा जिला रॉची के घर पहुँचकर घर की तलाशी के क्रम में एतवा टोप्पो के घर से एक 9 एम०एम० पिस्टल पाया गया, जिसे अनलॉक करने पर पिस्टर के मैगजीन में चार अदद जिन्दा गोली लोड पाया गया, जिसके पश्चात एतवा टोप्पो के घर से पाये गये आग्नेयास्त्र, जिन्दा गोली एवं एतवा टोप्पो के पैकेट में रखे ओप्पो कंपनी का एंड्रॉवाएड फोन को विधिवत जप्त किया गया। एतवा टोप्पो के द्वारा भी जमीन की खरीद-बिक्री का अवैध कार्य किया जाता है तथा यह भू-माफिया सींडीकेट का एक सक्रिय सदस्य है।
अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया एवं अवैध आग्नेयास्त्र के स्रोत व आपूर्तिकर्ता के संबंध में छानबीन की जा रही है तथा घटना में शामिल अन्य अभियुक्तों के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा रही है।उसके पास से 9 एम०एम० पिस्टल 01 और जिन्दा कारतूस बरामद किया गया.
नई दिल्ली – त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने 22 दिसंबर, 2025 को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अवसंरचना, रसद लागत एवं कनेक्टिविटी पर उच्च स्तरीय कार्य बल (एचएलटीएफ) की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा और केंद्रीय मंत्रालयों तथा अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
एचएलटीएफ ने क्षेत्रीय रसद एवं कनेक्टिविटी चुनौतियों की समीक्षा की, अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक अवसंरचना प्राथमिकताओं का आकलन किया और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संस्थागत तंत्र एवं अंतर-मंत्रालयी समन्वय पर चर्चा की।
प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने रसद, बहुआयामी कनेक्टिविटी, सीमा पार व्यापार गलियारों, डिजिटल एवं विद्युत सुविधाओं तथा संस्थागत एवं वित्तीय तंत्रों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक, चरणबद्ध रोडमैप प्रस्तुत किया। उत्तर-पूर्व को एक एकीकृत क्षेत्र मानने की आवश्यकता पर बल देते हुए, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने सड़क एवं राजमार्ग, रेलवे, नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग, विद्युत, सूचना एवं दूरसंचार तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सहित प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वन एवं पर्यावरण मंजूरी से जुड़ी चुनौतियों का सक्रिय समाधान करने आवश्यकता पर भी बल दिया।
मिजोरम के मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘’एक्ट ईस्ट पॉलिसी के अंतर्गत मिजोरम पड़ोसी देशों के लिए क्षेत्रीय प्रवेश द्वार के रूप में कार्य कर सकता है। उन्होंने कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट जैसी प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर त्वरित विचार-विमर्श करने सिफारिश की। उन्होंने कार्यबल के वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सीमा व्यापार, रसद एवं संस्थागत समर्थन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया।
केंद्रीय डोनर मंत्री ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री द्वारा एचएलटीएफ के अन्य सदस्यों के साथ परामर्श करके प्रस्तावित किए गए रोडमैप की सराहना की और इसे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में रसद एवं कनेक्टिविटी बढ़ाने की एक व्यापक रणनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की राज्य सरकारों के बीच सक्रिय सहयोग बहुत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यबल द्वारा प्रस्तावित संरचना की बहुक्षेत्रीय प्रकृति के मद्देनजर कार्यबल की रिपोर्ट को अंतिम रूप प्रदान करने पहले संबंधित मंत्रालयों जैसे कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय और नीति आयोग से सुझाव मांगे जा सकते हैं।
2025 की शुरुआत में, डोनर मंत्रालय ने आठ उच्च-स्तरीय कार्य बलों का गठन किया और प्रत्येक की अध्यक्षता उत्तर-पूर्वी राज्यों के एक-एक मुख्यमंत्री करते हैं और केंद्रीय डोनर मंत्री तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। इस पहल की शुरुआत 21 दिसंबर, 2024 को अगरतला में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के 72वें पूर्ण सत्र के दौरान बनी सहमति के आधार पर की गई।
नई दिल्ली – केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज यहां वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के 7वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। जीजीएसआईपीयू के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) महेश वर्मा और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा भी इस अवसर पर मौजूद थीं।
सभा को संबोधित करते हुए, श्रीमती पटेल ने उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को बधाई दी और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत बनाने में सार्वजनिक चिकित्सा संस्थानों की अहम भूमिका पर जोर दिया। “आज आपको जो डिग्रियां मिलेंगी, वे योग्यता प्रमाण पत्र से कहीं बढ़कर हैं। वे करुणा, समर्पण और लगन जैसे गुण एवं विशेषताएं हैं, जिन्हें आप अब से अपने चिकित्सा के पेशे में अपनायेंगे।” उन्होंने युवा डॉक्टरों से नैतिक चिकित्सीय कार्यप्रणाली, करूणा और जरूरतमंद एवं हाशिये पर पड़े समुदायों की सेवा करने के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता बनाए रखने का आग्रह किया।
पिछले 11 वर्षों के दौरान देश की स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए, श्रीमती पटेल ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवा की पूरी प्रणाली को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “प्राथमिक स्तर पर, देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं जो लोगों को प्राथमिक स्तर की देखभाल की पूरी सेवाएं दे रहे हैं, सरकार सीएचसी व जिला अस्पतालों जैसी द्वितीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में जरूरी कमियों को ठीक कर रही है और हम तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं के नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं तथा चिकित्सा शिक्षा के बारे में भी नए सिरे से सोच रहे हैं।”
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “पिछले 11 वर्षों में, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है। अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,28,000 हो गई हैं और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर आज लगभग 82,000 हो गई हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत–पीएमजेएवाई योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोगों को, जो भारत की आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक हैं, 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवरेज दिया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य कवरेज योजना है। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना और अमृत फार्मेसी जैसी योजनाएं भी हैं जो दवाएं, चिकित्सीय उपकरण और सर्जिकल इम्प्लांट रियायती दरों पर प्रदान कर रही हैं।”
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “आज, भारत डिजिटल स्वास्थ्य और अत्याधुनिक तकनीक के मामले में सबसे आगे है क्योंकि हम सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा के बड़े लक्ष्य को पूरा करना चाहते हैं”। अपने भाषण का समापन करते हुए, उन्होंने उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान देने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे कहा, “चिकित्सक के तौर पर आपने एक सामाजिक अनुबंध किया है, इसलिए मानवीयता का वह स्पर्श कहीं खोना नहीं चाहिए”।
इस अवसर पर, 217 से अधिक पोस्टग्रेजुएट छात्रों, 136 अंडरग्रेजुएट छात्रों एवं 40 सुपर-स्पेशियलिटी छात्रों को डिग्रियां दी गईं और 43 छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं समर्पण के लिए पदकों से सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. मनस्वी कुमार; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) संदीप बंसल; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) गीतिका खन्ना; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) चारू बंबा तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) को विभिन्न जिलों के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल सम्मेलन/वेबिनार आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसमें लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार के पूर्व विजेताओं को आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे अपने अनुभव साझा कर सकें। इसका उद्देश्य व्यापक प्रसार और अनुकरण करना है।
प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसरण में, डीएआरपीजी ने अप्रैल 2022 से अब तक राष्ट्रीय सुशासन पर 33 वेबिनार आयोजित किए हैं। इसके तहत प्रत्येक महीने एक वेबिनार का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार योजना के तहत पुरस्कार विजेता नामांकनों के प्रसार और प्रसार को प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में सम्बंधित विभागों, राज्य सरकारों, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।
ये वेबिनार न केवल पहल के संस्थागतकरण/स्थिरता की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि इसके दोहराव/विस्तार की स्थिति के बारे में भी जानकारी प्रदान करते हैं।
33 वां वेबिनार 22 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसमें ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 के लिए लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों के बारे में नीचे दिए गए विवरण के अनुसार पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी:
श्री शशांक शुभंकर, जिला मजिस्ट्रेट, गया, बिहार द्वारा बिहार की नालंदा जिला पहल
श्री आयुष गर्ग, उपायुक्त, शिवसागर, असम द्वारा असम की बारपेटा जिला पहल
वेबिनार की अध्यक्षता डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव श्री पुनीत यादव ने की और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। वेबिनार में देश भर के 800 से अधिक स्थानों से राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक सुधार विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, राज्य और जिला अधिकारियों, केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारियों ने भाग लिया।
राँची,23.12.2025 – चुटिया मेन रोड में फिर तेज रफ्तार का कहर।सोमवार की देर रात करीब एक बजे कार चालक जिसका गाड़ी नंबर है JH-01FB-5790 WagonR वाले ने दूसरे खड़ी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतना जोरदार था की आस-पास के लोग आवाज सुनकर जग गए।लोग जब तक गाड़ी के पास पहुँचे कार चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार को जब्त कर लिया।इस मामले में दुकानदार ने बताया कि उनकी कार दुकान के आगे सेड में खड़ी थी।रात में आवाज सुनकर बाहर निकले थे एक दूसरी कार ने जोरदार टक्कर मार दी।वहीं कार चालक लोगों की भीड़ जुटता देखकर गाड़ी छोड़कर भाग गया।
नई दिल्ली – श्वसन तंत्र (नाक, गला और फेफड़े) को प्रभावित करते वाले अत्यधिक संक्रामक इन्फ्लूएंजा (फ्लू) से बचाव और इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र – एनसीडीसी, विश्व स्वास्थ्य संगठन – भारत के सहयोग से, 22 से 23 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में इन्फ्लूएंजा की तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय सुदृढ़ करने विषय पर दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य देश में आगामी इन्फ्लूएंजा के मौसम से पहले तैयारी और इससे निपटने के तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रमुख हितधारकों के बीच विचार-विमर्श करने का संरचित मंच प्रदान करना है। इन्फ्लूएंजा से ग्रस्त होने पर बुखार, खांसी, शरीर दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिसके हल्के से लेकर गंभीर परिणाम तक हो सकते हैं।
चिंतन शिविर उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि यह शिविर सभी हितधारकों के लिए इन्फ्लूएंजा से बचने और उससे निपटने के अनुकूलन तैयारियों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का एक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्फ्लूएंजा के आगामी मौसम में तैयारियों और निपटने की योजना में आपातकालीन क्षमताएं भी शामिल हैं, जिनका सुचारू समन्वय आवश्यक है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम – आईडीएसपी के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश भर में मजबूत और सहयोगात्मक निगरानी प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के समन्वित और सहक्रियात्मक प्रयास आवश्यक हैं।
चिंतन शिविर में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों के लगभग 110 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जो बहुक्षेत्रीय सहभागिता को दर्शाता है। इसमें भाग लेने वालों में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय – डीजीएचएस, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद – आईसीएमआर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – आईसीएआर, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान – एनआईवी तथा सहयोगी संगठन और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हैं। इसमें ग्यारह राज्यों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से, जबकि अन्य राज्य आभासी माध्यम से भाग ले रहे हैं। बैठक में इन्फ्लूएंजा से बचाव और निपटने के सर्वोत्तम प्रचलन और अनुभव को साझा किए जा रहे हैं।
भारत और वैश्विक स्तर पर इन्फ्लूएंजा जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, जिसके समय-समय पर प्रकोप से गंभीर रुग्णता और मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को प्रभावित करता है। इसी दृष्टिगत चिंतन शिविर आयोजित किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय आईडीएसपी नेटवर्क माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौसमी इन्फ्लूएंजा के रुझानों की वास्तविक समय के साथ निकटता से निगरानी रख रहा है। बैठक में इस बात को रेखांकित किया गया कि इन्फ्लूएंजा की तैयारी अलग-थलग नहीं रखा जा सकती और इसके लिए निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी, प्रयोगशाला जांच तैयारी, नैदानिक तत्परता और जोखिम के बारे में प्रभावी संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।
चिंतन शिविर के प्रमुख उद्देश्य-परिणाम राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संस्थानों की तैयारियों की समीक्षा के लिए अधिक संरचित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। इसमें तैयारियों के आकलन में सहायता, कमियों की पहचान और समयबद्ध अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक व्यावहारिक तैयारी संबंधी जांच सूची तैयार करना शामिल है। चर्चा में समय पर सूचना साझा करने, भूमिकाओं और उत्तरदायित्व की स्पष्टता और विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इन्फ्लूएंजा से बचाव और निपटने के चिंतन शिविर मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य प्रणालियों को आपस में समन्वित कर “एक स्वास्थ्य आधारित तैयारियों” को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के माध्यम से सरकार के समग्र समन्वय को बढ़ावा देकर, यह पहल वसुधैव कुटुंबकम की भावना अनुरूप भारत की महामारी से निपटने की तैयारियों और बचाव क्षमता मजबूत करने तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में योगदान देती है।
नई दिल्ली – गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारास्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आठ एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी पनडुब्बी रोधी उथले पानी के जहाजों में से एक यानी तीसरा अंजदीप जहाज,22 दिसंबर 2025 को चेन्नई में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी जहाजों को जीआरएसई और मेसर्स एल एंड टी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) के तहत इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह सहयोगी रक्षा विनिर्माण की सफलता को दर्शाता है।
लगभग 77 मीटर लंबाई वाले ये जहाज भारतीय नौसेना के सबसे बड़े वाटरजेट युद्धपोत हैं और अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी के सोनार से सुसज्जित हैं। यह पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम हैं। ये जहाज नौसेना की पनडुब्बी रोधी, तटीय निगरानी और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को मजबूत करेंगे।
यह जहाज 2003 में सेवामुक्त पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत आईएनएस अंजदीप का पुनर्जन्म है। जहाज का नामकर्नाटक के कारवार तट पर स्थित अंजदीप द्वीप से लिया गया है, जो भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
अंजदीप का शामिल किया जाना भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के विजन को साकार करती है। इसमें 80 प्रतिशतसे अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण इको-सिस्टम के विकास और आयात पर निर्भरता कम करने का प्रमाण है।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा लेखा विभाग की 275 वर्षों से अधिक की समृद्ध विरासत है और यह सरकार के सबसे पुराने विभागों में से एक है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर देश के इस स्वप्न को साकार करने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उपराष्ट्रपति ने अमृतकाल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान का स्मरण दिलाते हुए जोर देकर कहा कि यह विकास समावेशी और अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों की ऊर्जा और नवोन्मेषी विचार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से “सेवा भाव और कर्तव्य बोध” को मार्गदर्शक मंत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
भारतीय रक्षा लेखा सेवा के महत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधन प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि रक्षा सेवाओं के लेखा और वित्तीय प्राधिकृत संस्थान के अधिकारियों के रूप में उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सशस्त्र बलों की चुनौतियों को समझना और आत्मसात करना आवश्यक है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी बल दिया कि सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने के लिए विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन ज़रूरी है।
श्री राधाकृष्णन ने सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, सतर्कता और उत्तरदायित्व के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर बल दिया, क्योंकि सार्वजनिक धन करदाताओं के कठिन परिश्रम से अर्जित होता है।
उपराष्ट्रपति ने तेज़ी से बदलती तकनीक और वैज्ञानिक प्रगति के इस युग में निरंतर क्षमतावर्धन पर भी बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को आजीवन सीखने के लिए आईगॉट कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया।
सार्वजनिक सेवा में आदर्श मूल्यों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान आवश्यक है, पर चरित्र सर्वोपरि है। उन्होंने अधिकारियों को स्मरण कराया कि देश के 140 करोड़ नागरिकों में से समाज में उन्हें सकारात्मक परिवर्तन लाने का दुर्लभ अवसर मिला है और उन्हें इस दायित्व को विनम्रता और समर्पण से निभाना चाहिए।
विकसित भारत की ओर बढ़ते देश में सिविल सेवकों से अपेक्षाओं के बारे में एक प्रशिक्षु अधिकारी के प्रश्न का उत्तर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे नवीन विचारों से प्रेरित रहने, आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने, काम के प्रति उत्साह बनाए रखने, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखने और प्रशासनिक नैतिकता अपनाने को कहा।
कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, रक्षा लेखा महानिदेशक श्री विश्वजीत सहाय, रक्षा सेवा वित्तीय सलाहकार श्री राज कुमार अरोड़ा और अन्य विशिष्ट जन उपस्थित थे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान से सोमवार को भोपाल में अलग-अलग राज्यों के रोजगार सहायकों ने मुलाकात की और प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% किए जाने पर आभार व्यक्त किया, केन्द्रीय मंत्री को धन्यवाद दिया। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, रोजगार सहायकों, पंचायत सचिवों और तकनीकी स्टाफ को समय पर वेतन न मिलना एक बड़ी चिंता थी, जिसे दूर करने के लिए प्रशासनिक व्यय बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
केन्द्रीय मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पहले प्रशासनिक व्यय 6 प्रतिशत था, जिसे अब बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी इसे डेढ़ गुना किया गया है। इसका सीधा लाभ ये होगा कि, कुल प्रस्तावित बजट 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये में से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि यह राशि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त होगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशासनिक खर्च में किसी भी प्रकार का अपव्यय न हो। श्रीशिवराज सिंह ने कहा कि, जीप-गाड़ी या अन्य अनावश्यक मदों में खर्च न हो, इस पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि, रोजगार सहायकों ने वेतन में देरी और भुगतान रोके जाने की समस्याएं सामने रखी गई थीं, जिसके बाद नियमों में ऐसा प्रावधान किया गया है कि पहले वेतन का भुगतान हो और उसके बाद अन्य आवश्यक खर्च किए जाएं। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय कर आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, मनरेगा के तहत अब 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी है। साथ ही, खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को अधिकार दिया गया है कि वो कटाई-बुवाई के समय अधिकतम 60 दिन तक मजदूरों को कृषि कार्य में लगाने के लिए अधिसूचना जारी कर सकें, ताकि किसानों को भी श्रमिकों की कमी न झेलनी पड़े। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पुरानी कमियों को दूर कर VB- G RAM G योजना को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर जमीनी स्तर पर काम कर रहे साथियों की परेशानियों को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। वहीं शिवराज सिंह ने रोजगार सहायकों से कहा कि, इस संदेश को सही तरीके से नीचे तक पहुंचाया जाए और भरोसा दिलाया कि सुझावों पर राज्य सरकारों से चर्चा कर आगे भी सुधार किए जाते रहेंगे, ताकि पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारी पूरी क्षमता से काम कर सकें।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, विकसित भारत जी राम जी, एक ऐतिहासिक योजना है, जो अब विधेयक से आगे बढ़कर अधिनियम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जरूरी है कि, सच्चाई को समझा जाए और सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए। श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, अब तक मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, जिसे विकसित भारत रोजगार योजना के तहत बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि रोजगार की गारंटी को और मजबूत बनाया गया है। यदि किसी कारणवश रोजगार नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान पहले की तुलना में कहीं अधिक पुख्ता किया गया है। उन्होंने कहा कि, मजदूरी भुगतान को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि 15 दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं होता है और राशि लंबित रहती है, तो मजदूर को अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जाएगा। अब यह नहीं चलेगा कि मजदूरी महीनों तक अटकी रहे। मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया है। मौजूदा मजदूरी दरें जारी रहेंगी और हर साल मजदूरी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पिछले पांच वर्षों में मजदूरी में करीब 29% की बढ़ोतरी की है और आगे भी एक तय फार्मूले के आधार पर हर साल वृद्धि होती रहेगी।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, इस योजना के तहत चार प्रकार के काम किए जाएंगे। इनमें जल संरक्षण और पानी बचाने से जुड़े कार्य, जैसे तालाब, चेक डैम और अन्य संरचनाएं शामिल होंगी। इसके अलावा स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी, सड़क, नाली और गांव के अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े काम किए जाएंगे। आजीविका मिशन से जुड़ी बहनों और एफपीओ के लिए जरूरी संरचनाएं भी इसमें शामिल होंगी। तीसरे प्रकार के काम आजीविका आधारित होंगे, जो रोजगार को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे, जबकि चौथे प्रकार के काम प्राकृतिक आपदाओं से बचाव से जुड़े होंगे, जैसे रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज सिस्टम और नदी-नालों से संबंधित संरचनाएं। श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच है कि विकास के काम जमीन पर दिखें। विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत सभी योजनाएं बैठकर बनाई जाएंगी और गांव के विकास का फैसला गांव ही करेगा।
नई दिल्ली – दिव्यांगता को सहानुभूति नहीं बल्कि समान अवसर और सम्मान की आवश्यकता है। इसी विचार को केंद्र में रखकर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) की ओर से आयोजित नौ दिवसीय ‘दिव्य कला मेला’ का आज इंडिया गेट स्थित कर्तव्य पथ पर सफलतापूर्वक समापन हुआ। 13 से 21 दिसंबर 2025 तक आयोजित यह मेला देश भर के दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की उद्यमशीलता की क्षमता, रचनात्मक उत्कृष्टता और आर्थिक योगदान को प्रदर्शित करने वाले एक प्रभावशाली राष्ट्रीय मंच के रूप में उभर कर सामने आया।
दिसंबर 2022 में इसी कर्तव्य पथ से शुरू हुई दिव्य कला मेला की यात्रा अपने 28वें पड़ाव पर दिल्ली लौटते हुए एक परिपक्व और प्रभावशाली राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है, जो एक सतत आंदोलन के रूप में मेले के विकास को रेखांकित करता है। अब तक देशभर में आयोजित 28 मेलों के माध्यम से 2,362 से अधिक दिव्यांग शिल्पियों और उद्यमियों ने भाग लिया है और कुल 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। दिल्ली में आयोजित मेले में देश के 20 राज्यों से आए लगभग 100 दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों और कौशल से आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। होम डेकोर, ऑर्गेनिक फूड और हस्तशिल्प उत्पादों की भारी मांग के चलते लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया गया, जो दिव्यांग-नेतृत्व वाले उद्यमों में बढ़ते जन विश्वास को दर्शाती है।
इस मेले ने रोजगार और वित्तीय समावेशन के रास्ते भी मजबूत किए। 16 दिसंबर को आयोजित एक विशेष रोजगार मेले में 157 दिव्यांग युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 99 को चुना गया और कई को प्रतिष्ठित कंपनियों से मौके पर ही नौकरी के प्रस्ताव मिले। उद्यमिता को और बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय दिव्यांग वित्त और विकास निगम (एनडीएफडीसी) ने दिव्यांग उद्यमियों को 1.05 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए, जबकि एएलआईएमसीओ ने सहायक उपकरणों के वितरण और पंजीकरण को सुगम बनाया, जिससे व्यावहारिक स्वतंत्रता और उत्पादकता में वृद्धि हुई।
समापन अवसर पर आयोजित ‘दिव्य कला शक्ति’ सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। दिल्ली-एनसीआर से आए दिव्यांग कलाकारों ने नृत्य और संगीत की सशक्त प्रस्तुतियों के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि कलात्मक अभिव्यक्ति किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। इसके साथ ही मेले में स्थापित ‘एक्सपीरियंस ज़ोन’ तथा ब्लाइंड क्रिकेट और बोचिया जैसे दिव्यांग खेलों ने आगंतुकों को दिव्यांगजनों की चुनौतियों के साथ-साथ उनकी क्षमताओं और आत्मविश्वास को नज़दीक से समझने का अवसर दिया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और एनडीएफडीसी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए दिल्ली के लोगों, स्थानीय प्रशासन और कर्तव्य पथ के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विभाग ने देश भर में इसी तरह की पहल आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। इसका उद्देश्य समावेशी, गरिमामय और अवसर-संचालित समाज का निर्माण करना है, जहां दिव्यांगजनों को भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में समान भागीदार के रूप में मान्यता दी जाए।
मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, रांची,22.25.2025 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में “ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन” एवं “जाहेरथान कमेटी” के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को आगामी 29 दिसंबर, 2025 को जमशेदपुर (दिशोम जाहेर, करनडीह) में आयोजित होने वाले 22वें संथाली “पारसी माहा” तथा ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।
इस अवसर पर ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन के महासचिव श्री रविंद्र नाथ मुर्मू, सहायक महासचिव, श्री मानसिंह मांझी, जाहेरथान कमेटी के कार्यकारी सदस्य श्री सागेन हंसदा एवं श्री शंकर हेंब्रम उपस्थित थे।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मध्य प्रदेश के इंदौर में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी समारोहों में भाग लिया। यह कार्यक्रम अटल फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था।
तमिल क्लासिक तिरुक्कुरल के एक दोहे को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जन्म से सभी मनुष्य समान होते हैं, जबकि महानता अपने कर्मों से प्राप्त की जाती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे बल्कि स्वयं एक मिशन थे, जो सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में हमेशा “अटल” बने रहे। उन्होंने देखा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक राजनेता, प्रशासक, सांसद, कवि के रूप में उनके उदाहरणीय कार्यों के लिए याद किया जाता है और सम्मानित किया जाता है, और सबसे ऊपर, एक महान मानव के रूप में।
उपराष्ट्रपति ने नोट किया कि श्री वाजपेयी संवाद, समावेशी विकास और मजबूत लेकिन मानवीय शासन में गहराई से विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा कि श्री अटल जी ने गरिमा और शालीनता के साथ सार्वजनिक विमर्श को ऊंचा उठाया और यह प्रदर्शित किया कि राजनीति सिद्धांतपूर्ण और करुणामय हो सकती है। उन्होंने जोड़ा कि यही कारण है कि श्री वाजपेयी का जन्मदिन अच्छे शासन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने याद किया कि श्री वाजपेयी सांसदों के लिए हमेशा सुलभ रहते थे और राष्ट्र-निर्माण के लिए सभी पक्षों से सुझावों के प्रति खुले रहते थे। उन्होंने श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्यों के गठन का उल्लेख किया, इसे शासन और प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए दूरदर्शी कदम बताते हुए।
राष्ट्र-निर्माता के रूप में श्री वाजपेयी के योगदान को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना जैसे ऐतिहासिक पहलों का उदाहरण दिया।
1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी के नेतृत्व ने भारत को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दृढ़ता से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का विज्ञान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर राष्ट्र को निर्देशित कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के तमिलनाडु से गहरे जुड़ाव को भी याद किया, उनकी भाषाई विविधता, सांस्कृतिक बहुलता और संवाद के प्रति सम्मान का उल्लेख करते हुए, जिसने उन्हें राजनीतिक और वैचारिक सीमाओं को पार करते हुए प्रशंसा दिलाई।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी को आधुनिक भारत को ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटल प्रतिबद्धता के साथ ढालने वाली एक ऊंचा व्यक्तित्व बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र की याद दिलाता है कि नेतृत्व केवल सत्ता के बारे में नहीं, बल्कि सेवा, जिम्मेदारी और लोगों के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में है।
उपराष्ट्रपति ने डेली कॉलेज परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का भी अनावरण किया। उपराष्ट्रपति ने अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा के उद्घाटन का हिस्सा बनने पर गौरवान्वित महसूस करने की बात कही। उन्हें लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए निस्वार्थ रूप से जीवन समर्पित करने वाली दूरदर्शी शासिका बताते हुए उन्होंने इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में लगातार शीर्ष स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी और इसे सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी का प्रतिबिंब बताया।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मांगूभाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, साथ ही अन्य गरिमामय व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने पूरे एक वर्ष के अनुभव को एक संक्षिप्त अपडेट में बताया। उन्होंने इस रविवार की सुबह एक्स पर लिखा: “2 लाख से अधिक स्थान, 20 लाख से अधिक लोग। एक मिशन – फिट इंडिया। #SundaysOnCycle के एक वर्ष पूरा होने का उत्सव मना रहे है।”
स्कूल के विद्यार्थियों, नमो साइकिलिंग क्लब, पुडुचेरी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा कई अन्य लोगों सहित जीवन के विभिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1500 से अधिक साइकिल चलाने वालों ने पुडुचेरी के खूबसूरत रॉक बीच को फिटनेस के एक जीवंत उत्सव में बदल दिया; जोकि इस आंदोलन के बढ़ते राष्ट्रीय महत्व और देश में साइकिल चालन के प्रति बढ़ते प्रेम को दर्शाता है।
पद्म भूषण से सम्मानित व खेल रत्न पुरस्कार विजेता पी. आर. श्रीजेश और शरथ कमल युवाओं के साथ साइकिल चलाकर प्रतिभागियों को खेल तथा फिटनेस को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
हर मामले में, पुडुचेरी में आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल की पहली वर्षगांठ का यह विशिष्ट संस्करण पूरी तरह से फिटनेस कार्निवल जोन बन गया क्योंकि जुम्बा, कैरम, शतरंज, मल्लखंब, सिलांबम, योग, रस्सी कूद जैसे कई मजेदार खेल एवं गतिविधियां भी आकर्षण का केन्द्र रहीं। संयोग से, 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस होने के कारण, सामूहिक रूप से यह संदेश भी दिया गया कि फिटनेस वास्तव में गति में ध्यान है!
आज पुडुचेरी में रविवार सुबह की सभा में उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन. रंगासामी, विधानसभा अध्यक्ष आर. सेल्वम और पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमस्सिवयम और अन्य प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी शामिल थे। साथ ही, माननीय केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी मौजूद थे – जिन्होंने एक वर्ष पहले नई दिल्ली में पहले आयोजन को हरी झंडी दिखाई थी।
सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. मांडविया ने बताया कि कैसे फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल एक छोटी सी शुरुआत से आगे बढ़कर एक देशव्यापी जन आंदोलन बन गया है।
उन्होंने कहा, “जब हमने एक वर्ष पहले यह पहल शुरू की थी, तो इसे मात्र पांच स्थानों पर लगभग 500 लोगों के साथ आयोजित किया गया था। आज, देश भर में 10,000 से अधिक स्थानों पर हर रविवार को इसमें हिस्सा लिया जाता है। इसमें 10 लाख से अधिक नागरिक नियमित रूप से जुड़ते हैं। यह एक जुनून, एक संस्कृति और प्रदूषण से निपटने का एक सशक्त समाधान बन गया है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस आंदोलन को मोटापे के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई बनाने में मदद की है।”
पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने इस पहल को समाज के लिए एक सही समय पर दिया गया संदेश बताया।
उन्होंने कहा, “गुजरात के भावनगर में स्थित डॉ. मांडविया के अपने गांव में मात्र 4000 लोग रहते हैं। और वहां हर कोई साइकिल से यात्रा करता है, कोई दूसरा दो-पहिया या चार-पहिया वाहन नहीं है। एक नागरिक के तौर पर, हम अक्सर यह महसूस नहीं कर पाते कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव मिलकर पर्यावरण, खासकर कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के मामले में कितना बड़ा अंतर ला सकते हैं।”
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने आसान फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए फिट इंडिया आंदोलन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “स्वस्थ रहने के लिए साइकिल चलाना सबसे आसान और कारगर तरीकों में से एक है। जब हमारा शरीर फिट होगा, तभी हम ज़िंदगी में अपने लक्ष्य हासिल कर पाएंगे। मैं पूरे फिट इंडिया आंदोलन के पीछे प्रधानमंत्री के विजन की सही मायने में सराहना करता हूं।”
आज देश में 10000 से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित हुए इन गतिविधियों को भारतीय खेल प्राधिकरण और हजारीबाग, कारगिल, पटियाला, लखनऊ, गोलाघाट, छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव, हिसार, तिनसुकिया, विशाखापत्तनम, उत्तराखंड के काशीपुर, कटक तथा कई अन्य स्थानों पर स्थित खेलो इंडिया केन्द्रों ने देश भर के विभिन्न बैंकों, जो विशेष सहयोगी थे, के साथ मिलकर आयोजित किया।
इन आयोजनों में भाग लेने वाले प्रसिद्ध हस्तियों में साई सोनीपत के अर्जुन पुरस्कार विजेता तीरंदाज ज्योति सुरेखा और अभिषेक वर्मा भी शामिल थे। ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान का एक अहम हिस्सा रहने वाले नमो फिट इंडिया साइकिलिंग क्लब और माय भारत वॉलंटियर्स ने इस अभियान को काफी बढ़ावा दिया है।
पुडुचेरी में सुबह के कार्यक्रम में बहुप्रतीक्षित फिट इंडिया मोबाइल ऐप कार्बन क्रेडिट प्रोत्साहन का शुभारंभ भी किया गया, जिससे साइकिल चालन के प्रेमियों को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक कार्बन क्रेडिट हासिल करने वाले तीन साइकिल चालकों – भरतभाई परमार, शशिकांत वीरकर और गोविंद सिंह – को सम्मानित किया गया।
नागरिक साइकिल चलाकर कार्बन क्रेडिट कमा सकते हैं, जिन्हें बाद में भुनाया जा सकता है। डॉ. मांडविया ने आगे कहा, “अब से, हर महीने, हर राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेश के साइकिल चलाने वालों को फिट इंडिया मोबाइल ऐप के जरिए पहचाना जाएगा और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन लोगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह कदम नागरिकों को साइकिल चालन को रोजाना की आदत बनाने के लिए प्रोत्साहित करने और इनाम देने हेतु है।”
‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान में अहम रहने और इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाले फिट इंडिया एंबेसडरों और इन्फ्लुएंसरो को भी सम्मानित किया गया। इनमें निधि निगम, ऐश्वर्या राज (चैंपियन) और एंबेसडर डॉ. शिखा गुप्ता, युक्ति आर्य, पर्वतारोही दिव्या अरुल, तमिलनाडु में साइकिल चालन की राज्य चैंपियन शिवा सेंथिल के नाम शामिल हैं।
साइकिल चालन आंदोलन की पूरी यात्रा को भारतीय हॉकी के ‘वॉल’ पी.आर. श्रीजेश ने बहुत अच्छे से बताया।
पद्म भूषण से सम्मानित इस खिलाड़ी ने कहा, “फिट रहने का मतलब सिर्फ पदक के लिए ट्रेनिंग करना नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में अनुशासन और संतुलन बनाना है। साइकिल चलाना एक आसान आदत है, लेकिन जब इसे सब मिलकर अपनाते हैं, तो इससे एक स्वस्थ समाज और एक मजबूत देश बनता है। मुझे खुशी है कि केन्द्रीय खेल मंत्री की फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल पहल ने फिटनेस को एक ऐसे जन आंदोलन में बदल दिया है, जिसमें परिवार, युवा और पेशेवर लोग समान उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं।”
जैसे ही पुडुचेरी में खूबसूरत समुद्र तट के किनारे साइकिल चालकों को हरी झंडी दिखाई गई, वर्षगांठ वाले इस संस्करण ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ‘संडे ऑन साइकिल’ महज एक आयोजन से बदलकर एक ऐसी देशव्यापी संस्कृति बन गया है, जो देश भर में फिटनेस, स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है।
नई दिल्ली, 21 दिसंबर: आज भारत मंडपम में आयोजित इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) एक्सपो के अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से लेकर रोजगार सृजन तक, इलेक्ट्रिक वाहन भारत की अगली विकास गाथा को गति दे रहे हैं।
मंत्री ने प्रदर्शकों से बातचीत की और घरेलू कंपनियों द्वारा प्रदर्शित इलेक्ट्रिक परिवहन समाधानों और मेक इन इंडिया ईवी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला का अवलोकन किया।
अपने दौरे के दौरान, मंत्री ने प्रदर्शनी में कई स्टालों का दौरा किया और इलेक्ट्रिक वाहनों, पुर्जों और स्वच्छ गतिशीलता प्रौद्योगिकियों में भारतीय निर्माताओं द्वारा की जा रही तीव्र प्रगति को सराहा। उन्होंने स्वदेशी ईवी कंपनियों के बढ़ते आत्मविश्वास और क्षमता की प्रशंसा करते हुए इस क्षेत्र को भारत के स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर संक्रमण का एक प्रमुख स्तंभ बताया।
मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही पर्यावरण संरक्षण और ई-मोबिलिटी के बारे में व्यापक जन जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया है, साथ ही वैश्विक स्तर पर उपलब्ध नए तकनीकी विकल्पों की भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल इन वैश्विक नवाचारों से लाभान्वित हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन की दिशा में इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक सक्रिय भागीदार के रूप में भी उभर रहा है।
मंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा तंत्र में सुधारों और हालिया नीतिगत पहलों के बीच समानता बताते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शांति विधेयक, 2025 का पारित होना स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी स्वच्छ ऊर्जा की ओर वैश्विक बदलाव के अनुरूप है और साथ ही भारत के विकासात्मक और पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रकृति के बारे में बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईवी पारंपरिक वाहनों की तुलना में ड्राइविंग में काफी आसानी प्रदान करते हैं, जिनमें शारीरिक श्रम कम होता है और संचालन सरल होता है। उन्होंने ईवी की बहुपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि एम्बुलेंस, ई-रिक्शा, यात्री वाहन और वाणिज्यिक उपयोगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इनका उपयोग बढ़ रहा है। इस प्रकार ये विविध परिवहन आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त हैं।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी न केवल परिवहन, पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि विशेष रूप से युवाओं के लिए उद्यमिता, रोजगार और आजीविका का एक शक्तिशाली इंजन बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में निर्मित तंत्र ने युवा उद्यमियों को सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहायता प्राप्त करते हुए मामूली निवेश के साथ इलेक्ट्रिक वाहन से संबंधित उद्यम शुरू करने और उन्हें कम समय में उच्च कारोबार वाले उद्यमों में बदलने में सक्षम बनाया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अवसरों के बारे में युवाओं के बीच जागरूकता और व्यापक पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नवाचार-आधारित विकास, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का एक आशाजनक मार्ग है।
भारत मंडपम में आयोजित हो रहे ईवी एक्सपो में अग्रणी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी प्रदाता और नीतिगत हितधारक एक मंच पर एकत्रित हुए हैं ताकि नवाचारों का प्रदर्शन किया जा सके, विचारों का आदान-प्रदान किया जा सके और मेक इन इंडिया और विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप स्वच्छ और स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में भारत की प्रगति को गति दी जा सके।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28वीं बैठक और परियोजना हाथी की 22वीं संचालन समिति की बैठक 21 दिसंबर 2025 को पश्चिम बंगाल के सुंदरबन बाघ अभ्यारण्य में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इन बैठकों में बाघ और हाथी बहुल राज्यों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों और क्षेत्र विशेषज्ञों के साथ-साथ प्रमुख संरक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने परियोजना बाघ और परियोजना हाथी की प्रगति की समीक्षा करने और भारत में बाघों और हाथियों के संरक्षण के लिए भावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए भाग लिया।
एनटीसीए की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, श्री यादव ने भारत के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त बाघ संरक्षण मॉडल पर जोर दिया और विज्ञान-आधारित प्रबंधन, भू-भाग स्तर की योजना, सामुदायिक भागीदारी, अंतर-राज्यीय समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व का उल्लेख किया।
18 अप्रैल 2025 को आयोजित 27वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई और उसमें लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा की गई। चार क्षेत्रीय बैठकों के परिणामों पर चर्चा की गई जिसमें बाघ अभ्यारण्यों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। मानव-बाघ संघर्ष से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई जिसमें एक त्रिपक्षीय रणनीति और ‘बाघ अभ्यारण्यों के बाहर बाघों का प्रबंधन’ परियोजना का शुभारंभ शामिल है। कर्मचारियों की कमी, वित्तीय बाधाओं, पर्यावास क्षरण और आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की गई और राज्यों तथा संबंधित अधिकारियों को उचित अनुवर्ती कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए गए।
इस बैठक में एनटीसीए की तकनीकी समिति की बैठकों के निर्णयों की पुष्टि की गई जिनमें बाघ संरक्षण योजनाओं की स्वीकृति; चीता परियोजना का विस्तार और विकास; बाघों का स्थानांतरण; शिकार संवर्धन; भूदृश्य प्रबंधन योजना; मांसाहारी जानवरों के स्वास्थ्य प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम; और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति को परियोजना प्रस्तावों पर एनटीसीए द्वारा दिए गए सुझाव शामिल हैं।
7वें राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन पर अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई जिसमें गुजरात के गांधीसागर वन्यजीव अभ्यारण्य और बन्नी घास के मैदान में चीता परियोजना का विस्तार और कैम्पा के तहत समर्थित पहलों की प्रगति शामिल है। प्रस्तावित ग्लोबल बिग कैट समिट के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
मंत्री ने अखिल भारतीय बाघ गणना के छठे चक्र में हुई प्रगति, विभिन्न क्षेत्रों में भू-स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों, नवंबर 2025 से जमीनी सर्वेक्षणों की शुरुआत और प्रोजेक्ट चीता के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग सहित एनटीसीए की प्रमुख चल रही गतिविधियों की समीक्षा की। इन गतिविधियों में दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना के प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं भी शामिल थीं। बैठक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी ध्यान दिया गया और बाघ संरक्षण एवं प्रबंधन पर इसके प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रोजेक्ट एलिफेंट की संचालन समिति की बैठक 21 वीं संचालन समिति की बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट की पुष्टि के साथ शुरू हुई जिसके बाद संचालन समिति के सदस्यों और स्थायी आमंत्रितों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी भारत में हाथी संरक्षण के लिए क्षेत्रीय कार्य योजनाओं की स्थिति पर प्रस्तुतियाँ दी गई जिसमें हाथी के आवास वाले राज्यों द्वारा हासिल की गई प्रगति पर प्रकाश डाला गया और अंतर-राज्यीय समन्वय के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।
संचालन समिति ने अखिल भारतीय समन्वित हाथी गणना पर अद्यतन जानकारी की समीक्षा की जो प्रमाण-आधारित योजना और निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। नीलगिरी हाथी अभ्यारण्य के लिए आदर्श हाथी संरक्षण योजना के तहत हुई प्रगति और बंदी हाथियों के डीएनए प्रोफाइलिंग पर चल रहे कार्यों पर भी चर्चा की गई जिसमें वैज्ञानिक प्रबंधन और कल्याण मानकों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
देश भर में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। समिति ने संघर्ष के कारणों और निवारण उपायों पर चल रहे अध्ययनों के निष्कर्षों के साथ-साथ हाथियों के क्षेत्र वाले राज्यों द्वारा अपनाए गए मुआवज़ा व्यवस्था की स्थिति और पर्याप्तता पर चर्चा की।
बैठक में हाथियों की गणना का आकलन करने की विधियों के मूल्यांकन, रिपु-चिरंग हाथी अभ्यारण्य के लिए एकीकृत संरक्षण और प्रबंधन रणनीतियों की प्रगति और भावी कार्य योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें कैम्पा द्वारा वित्त पोषित सभी हाथी अभ्यारण्यों के लिए प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन का संचालन और बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथी गलियारों, पर्यावास उपयोग और संघर्ष के प्रमुख क्षेत्रों पर प्रस्तावित अध्ययन शामिल हैं।
संचालन समिति ने हाथियों और हाथियों के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने हेतु विज्ञान-आधारित संरक्षण, अंतर-राज्यीय समन्वय, तकनीकी नवाचार और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोणों के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर श्री यादव ने छह प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें शामिल हैं: भारत में परियोजना चीता, जिसमें वैज्ञानिक प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से परियोजना चीता के तहत हासिल की गई प्रगति पर प्रकाश डाला गया है; एनटीसीए की प्रचार पत्रिका स्ट्राइप्स का नवीनतम अंक, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी, बाघों के फैलाव और अखिल भारतीय बाघ गणना (एआईटीई) के छठे चक्र के प्रारंभ पर केंद्रित है; भारत के बाघ संरक्षण ढांचे और संस्थागत उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एनटीसीए की एक पुस्तिका; टाइगरवर्स – भारत के बाघ अभ्यारण्यों के कुछ अनसुने तथ्य, जो देश भर के बाघ अभ्यारण्यों से जैव विविधता, संस्कृति और संरक्षण की कहानियों को प्रदर्शित करता है; हाथी संचालकों के लिए बंदी हाथी प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाएं और ट्रम्पेट त्रैमासिक पत्रिका का दिसंबर 2025 अंक।
नई दिल्ली – भारत और नीदरलैंड ने समुद्री विरासत के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और डच विदेश मंत्री डेविड वैन वील के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान समझौते ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता ज्ञापन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत विकसित किए जा रहे एनएमएचसी और एम्स्टर्डम स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय को साथ लाता है।
समझौते के तहत, दोनों पक्ष समुद्री संग्रहालयों के डिजाइन, क्यूरेशन और संरक्षण में ज्ञान, विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर सहयोग करेंगे। यह साझेदारी संयुक्त प्रदर्शनियों, अनुसंधान परियोजनाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी सुगम बनाएगी साथ ही आगंतुकों के अनुभव, शिक्षा और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए नए पहलुओं का पता लगाएगी।
लोथल स्थित एनएमएचसी की भारत की 4,500 साल पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने वाले विश्व स्तरीय धरोहर परिसर के रूप में परिकल्पना की गई है। एम्स्टर्डम स्थित संग्रहालय के साथ सहयोग से इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूती मिलने, समावेशी शिक्षा और पर्यटन को बढ़ावा मिलने और विद्यार्थियों, स्थानीय समुदायों और वंचित समूहों के लिए किफायती पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) और एम्स्टर्डम स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय के बीच हस्ताक्षर किया गया समझौता ज्ञापन भारत की 4,500 साल पुरानी समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह साझेदारी संरक्षण, क्यूरेशन और संग्रहालय डिजाइन में विश्व स्तरीय विशेषज्ञता लाएगी साथ ही भारत और नीदरलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी। यह साझेदारी समावेशी शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ावा देने के लिए विरासत को नवाचार से जोड़ने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है।”
यह समझौता ज्ञापन समुद्री विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है साथ ही दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है। मंत्रालय समझौते के प्रावधानों को लागू करने के लिए घनिष्ठ सहयोग की आशा करता है।
भारत और नीदरलैंड के लंबे समुद्री इतिहास को याद करते हुए, दोनों मंत्रियों ने साझेदारी का स्वागत किया और समुद्री और नौपरिवहन क्षेत्रों में चल रहे सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा की जिसमें हरित नौपरिवहन पहल, बंदरगाह विकास और जहाज निर्माण शामिल हैं।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन की भव्य झलकियाँ साझा कीं। यह नया टर्मिनल असम की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने, आर्थिक विकास को गति देने और वैश्विक स्तर पर राज्य की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:
“गुवाहाटी में आज एयरपोर्ट की जिस टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ है, उसमें कदम रखते ही ये पता चल जाता है कि ‘विकास भी और विरासत भी’ का मंत्र कितना महत्वपूर्ण है।”
“आज असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट भारत के विकास और पर्यटन का नया प्रवेशद्वार बन रहा है। वाराणसी से डिब्रूगढ़ के गंगा विलास क्रूज से नॉर्थ ईस्ट, ग्लोबल क्रूज टूरिज्म के मानचित्र पर स्थापित हो गया है।”
“कांग्रेस की सरकारों ने असम और पूर्वोत्तर को विकास से दूर रखने का जो पाप किया था, उसका बहुत बड़ा खामियाजा देश की सुरक्षा को उठाना पड़ा। बीते 10-11 वर्षों में हमारे प्रयासों से यह सुनिश्चित हो रहा है कि असम के संसाधन असम के लोगों के ही काम आएं।”
“गुवाहाटी हवाई अड्डे पर लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा का अनावरण किया। उनका जीवन और आदर्श, साथ ही असम की प्रगति में उनका योगदान, आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”
“गुवाहाटी के लिए यह एक विशेष दिन है, क्योंकि लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को आज नया टर्मिनल भवन मिला है। यह नया टर्मिनल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा और पर्यटन को बढ़ावा देगा। इस भवन में तकनीकी नवाचारों पर जोर देने के साथ प्रकृति और सस्टेनेबिलिटी के साथ जो तालमेल दिखाया गया है, वह भी अत्यंत सराहनीय है।”
“इस शानदार स्वागत के लिए गुवाहाटी का हृदय से आभार। इस जीवंत शहर में आना हमेशा एक सुखद अनुभव होता है।”
“আজি গুৱাহাটীত উদ্বোধন হোৱা বিমানবন্দৰৰ টাৰ্মিনেল ভৱনত ভৰি দিয়াৰ লগে লগে উপলব্ধি হয় যে ‘উন্নয়নৰ লগতে ঐতিহ্য’ৰ মন্ত্ৰটো কিমান গুৰুত্বপূৰ্ণ।”
“আজি অসমকে ধৰি সমগ্ৰ উত্তৰ-পূব ভাৰতৰ উন্নয়ন আৰু পৰ্যটনৰ এক নতুন প্ৰবেশদ্বাৰ হৈ পৰিছে। বাৰাণসীৰ পৰা ডিব্ৰুগড়লৈ গংগা বিলাস ক্ৰুজে বিশ্ব ক্ৰুজ পৰ্যটন মানচিত্ৰত উত্তৰ-পূবক প্ৰতিষ্ঠা কৰিছে।”
“গুৱাহাটীৰ বাবে আজি এক বিশেষ দিন কাৰণ লোকপ্ৰিয় গোপীনাথ বৰদলৈ আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰে নতুন টাৰ্মিনেল লাভ কৰিলে। এই নতুন টাৰ্মিনেলটোৱে স্থানীয় অৰ্থনীতিক উন্নীত কৰাৰ লগতে পৰ্যটনক উৎসাহিত কৰিব। প্ৰযুক্তিগত উদ্ভাৱনৰ ওপৰত গুৰুত্ব দিয়াৰ লগতে প্ৰকৃতি আৰু বহনক্ষমতাৰ সৈতে সংযোগ স্থাপন কৰাটোও গভীৰভাৱে প্ৰশংসনীয়।”
“এই ব্যতিক্ৰমী আদৰণিৰ বাবে গুৱাহাটীক ধন্যবাদ। এই স্পন্দনশীল চহৰখনত উপস্থিত হৈ সদায় আনন্দিত হওঁ ৷”
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्लू) सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असम और पूर्वोत्तर के परिवर्तन के पथ–प्रदर्शक और वास्तुकार हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सहभागिता की। श्री मोदी ने हवाई अड्डे पर भारत रत्न लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की मूर्ति का भी अनावरण किया।
प्रधानमंत्री की असम यात्रा को याद करते हुए, सोनोवाल ने कहा कि 2014 से, मोदी के सक्षम नेतृत्व में असम और पूरे पूर्वोत्तर का विकास–परिदृश्य तेजी से बदल गया है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा क्षेत्र, जो कांग्रेस सरकारों के दौरान पहले उपेक्षित था, अब भारत की आर्थिक वृद्धि की प्रमुख ताकतों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर, राष्ट्र की “अष्टलक्ष्मी” और नये भारत के नये इंजन के रूप में उभरा है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “नई टर्मिनल का उद्घाटन असम में अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क के एक नए अध्याय की शुरुआत को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में, इस टर्मिनल के निर्माण का निर्णय 2018 में पहले एडवांटेज असम सम्मेलन के दौरान हुए समझौता ज्ञापन के माध्यम से लिया गया था और उसी वर्ष इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी।”
मोदी के “परिवहन के माध्यम से परिवर्तन” पर जोर का उल्लेख करते हुए, सोनोवाल ने कहा कि आज जिस नई टर्मिनल भवन का उद्घाटन हुआ है, वह समृद्धि और प्रगति की दिशा में असम की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक राज्य का प्रमुख हवाई अड्डा सीमित क्षमता के साथ संचालित होता रहा। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया के लिए प्रवेश द्वार के रूप में गुवाहाटी की बढ़ती भूमिका ने इस विस्तार को हवाई संपर्क और गतिशीलता मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बना दिया है।
नई सुविधा 1.40 लाख वर्ग मीटर में फैली हुई है और पिछली टर्मिनल से लगभग सात गुना बड़ी है, जो हवाई अड्डे की यात्री संभालने की वार्षिक क्षमता को 34 लाख से बढ़ाकर 1.3 करोड़ से अधिक कर देगी। सोनोवाल ने कहा कि लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह टर्मिनल गुवाहाटी को विश्व स्तरीय विमानन सेवाओं से जोड़ता है।
मंत्री ने गुवाहाटी के हवाई अड्डे पर भारत रत्न लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की मूर्ति के अनावरण का भी स्वागत किया। बोरदोलोई का विज़न, साहस और निर्णायक नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में असम की पहचान और अस्तित्व को सुरक्षित रखा तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “एक महान नेता, जिन्होंने असम के भविष्य को सुरक्षित किया, अब भारत के दक्षिण–पूर्व एशिया के प्रवेश–द्वार पर एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने आगे कहा कि बोरदोलोई की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विकास के लिए उत्कृष्ट सेवा, आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत और विकसित भारत बनाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वस्त्र अनुसंधान संघों (टीआरए) की समन्वय समिति की पहली बैठक बुलाई। यह बैठक केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में और सचिव (वस्त्र) श्रीमती नीलम शमी राव की अध्यक्षता में हुई। यह देश में वस्त्र अनुसंधान और विकास गतिविधियों के समन्वय, प्रभावशीलता और परिणामोन्मुखीकरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, वस्त्र अनुसंधान संघ, ईपीसी, आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने भाग लिया। यह पूरे दिन चली गहन विचार-मंथन बैठक थी।
समिति ने फाइबर विज्ञान, तकनीकी वस्त्र, स्थिरता और नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाने में वस्त्र अनुसंधान संघ (टीआरए)) की रणनीतिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया। “उद्योग के लिए अनुसंधान” दृष्टिकोण पर जोर दिया गया, जिसमें विशेष रूप से स्थिरता और रीसाइक्लिंग के क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों को मजबूत करने पर केंद्रित चर्चा हुई। चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों तक अपग्रेड करना, उद्योग-संचालित और अनुप्रयोगउन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देना, टिकाऊ और चक्रीय वस्त्र समाधानों का विकास, और समन्वित राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान ढांचे का निर्माण शामिल था।
मंत्रालय ने स्मार्ट टेक्सटाइल के बढ़ते महत्व की जानकारी दी सीएसआईआर के अंतर्गत योजनाओं सहित अन्य सरकारी अनुसंधान एवं विकास पहलों के साथ तालमेल के माध्यम से अनुसंधान को बढ़ाने और प्रभावी ज्ञान प्रसार के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग पर बल दिया गया। भविष्य की जानकारी देने वाली मॉडलिंग, पर्यावरण-कुशल सामग्री मिश्रण, इलेक्ट्रॉनिक फाइबर, और स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और इंटेलीजेंट वातावरण के लिए उन्नत ई-टेक्सटाइल सिस्टम जैसे उभरते अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम), पी एम मित्र पार्क्स, और अलग-अलग निर्यात संवर्धन और समर्थन योजनाओं जैसी प्रमुख सरकारी पहल नवाचार को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने और भारत को वस्त्र क्षेत्र में ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित करने के लिए मुख्य साधन हैं।
वस्त्र अनुसंधान संघों के बीच समन्वय को मजबूत करने और भारतीय वस्त्र उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि और वैश्विक स्थिति को समर्थन करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और सहयोग का लाभ उठाने के साझा संकल्प के साथ बैठक संपन्न हुई।
नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने, केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा के साथ, आज कर्नाटक के विजयनगर जिले के हम्पी में वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की।
वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के सभी सचिव, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीडीटी) चेयरमैन, और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी मौजूद थे, साथ ही वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
“एआई, ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और विकसित भारत के लिए फाइनेंसिंग” के कार्यक्रम में, चर्चा इस विषय पर केंद्रित थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड सिस्टम और प्रक्रिया सुधार का इस्तेमाल करके ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत क्षमता और पॉलिसी बनाने को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
चर्चा में प्रक्रियाओं को आसान बनाने, नियामक पूर्वानुमेयता, विभागों के बीच तालमेल से काम करना, कुशल फंड फ्लो, भविष्य के लिए तैयार कर प्रशासन, लगातार प्रगति के लिए फाइनेंसिंग के तरीके, और पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करना शामिल था।
अपने संबोधन में, वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने विजयनगर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर बात की, और कहा कि यह लगभग 500 वर्ष पहले अपने चरम पर रहे एक भारतीय साम्राज्य के सबसे करीबी उदाहरणों में से एक है, जिसके निशान पूरे उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों में दिखाई देते हैं।
उन्होंने उसी ज़िले के अंदर मौजूद विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया — जहां शानदार स्मारक सूखे की चपेट में आने वाले इलाकों के साथ मौजूद हैं, जहाँ खेती की पैदावार कम है और इंसान-जानवर संघर्ष होता है — जो आज की डेवलपमेंट की असलियतों से जुड़े रहने की जरूरत को दिखाता है।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज हैदराबाद में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया और भारत की शासन प्रणाली की गुणवत्ता, ईमानदारी और प्रभावशीलता को आकार देने में लोक सेवा आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया ।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह भारत विकसित भारत@2047 के विज़न की ओर बढ़ रहा है,ऐसे में शासन की गुणवत्ता, और उससे भी कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण संस्थानों को चलाने वाले लोगों की गुणवत्ता निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने लोक सेवा आयोगों को संवैधानिक संस्थाएँ करार दिया, जिन्हें देश की सेवा करने के लिए योग्य, निष्पक्ष और नैतिक लोगों को चुनने की अहम ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में प्रतिष्ठापित लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता, सरकारी भर्ती में योग्यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। उन्होंने कहा कि दशकों से, केंद्र और राज्य स्तर पर आयोगों ने प्रशासनिक निरंतरता, संस्थागत स्थिरता और लोक सेवकों का तटस्थ चयन सुनिश्चित करते हुए जनता के भरोसे को मज़बूत किया है।
लोक सेवाओं के संबंध में बदलती मांगों पर ज़ोर देते हुए उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि डिजिटल शासन, सामाजिक समावेशन, अवसंरचना विकास, जलवायु कार्रवाई और आर्थिक परिवर्तन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को कुशलतापूर्वक कार्यान्वित करना आज चुने गए प्रशासनिकों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
नैतिक मानकों के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि निष्पक्षता सरकारी भर्ती का नैतिक आधार है और भेदभाव खत्म करने के लिए पारदर्शिता ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि छोटी-मोटी गड़बड़ियाँ भी संस्थानों की विश्वसनीयता कम कर सकती हैं, और उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी को कतई बर्दाश्त न करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आज प्रभावशाली शासन के लिए शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ मज़बूत नैतिक फ़ैसले, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता और टीमवर्क वाले लोक सेवकों की ज़रूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोक सेवा आयोग ज्ञान पर आधारित परीक्षाओं के साथ-साथ व्यवहार और नैतिक योग्यता के निष्पक्ष और सुनियोजित आकलन की संभावनाओं के बारे में विचार कर सकते हैं।
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि केवल भर्ती आजीवन बेहतरीन कार्य किया जाना सुनिश्चित नहीं कर सकती, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संस्थागत ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रदर्शन का आकलन, सतर्कता एवं निगरानी और समय-समय पर समीक्षा करने के तरीकों को बिना किसी भेदभाव के तथा पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चरित्र और नैतिक व्यवहार राष्ट्र निर्माण और जनता के भरोसे की बुनियाद हैं।
भारत के जनसांख्यिकीय लाभाँश का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोक सेवा आयोगों को प्रतिभा मानचित्रण और रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिभा सेतु जैसी पहल सहित नवोन्मेषी तरीके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि सही प्रतिभा को सही भूमिका मिल सके।
अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि लोक सेवा आयोग सुशासन की नींव मज़बूत करते रहेंगे तथा विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।