डीआरडीओ ने पिनाका लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया

नई दिल्ली – पिनाका लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर 120) का पहला उड़ान परीक्षण 29 दिसंबर, 2025 को चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज  में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस रॉकेट का परीक्षण उसकी 120 किलोमीटर की अधिकतम सीमा के लिए किया गया, जिसमें इसने योजना के अनुसार उड़ान के दौरान सभी युद्धाभ्यासों का प्रदर्शन किया। एलआरजीआर ने ‘टेक्स्टबुक प्रिसिजन’  के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार किया।

परीक्षण के दौरान तैनात किए गए सभी रेंज उपकरणों ने रॉकेट के पूरे ट्रैजेक्टरी  पर नज़र रखी। इस रॉकेट को आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट  द्वारा हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी के सहयोग और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी व रिसर्च सेंटर इमारत  के सहयोग से डिजाइन किया गया है।

उड़ान परीक्षण का समन्वय आईटीआर  और प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टेब्लिशमेंट द्वारा किया गया था। एलआरजीआर को वर्तमान में सेवा में मौजूद पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया, जो इसकी बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करता है और एक ही लॉन्चर से विभिन्न रेंज के पिनाका वेरिएंट लॉन्च करने की क्षमता प्रदान करता है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेटों का सफल डिजाइन और विकास सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाएगा और इसे उन्होंने ‘गेम चेंजर’ करार दिया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने परीक्षण का अवलोकन किया और मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सभी टीमों को बधाई दी।

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आईएनएसवी कौंडिन्य अपनी पहली यात्रा पर रवाना

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का नौकयन पोत कौंडिन्य, जो भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से बनाया गया पारंपरिक नौकायन पोत है, 29 दिसम्‍बर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से ओमान सल्तनत के मस्कट के लिए अपनी पहली विदेशी यात्रा पर रवाना हुआ। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को एक जीवित समुद्री यात्रा के माध्यम से पुनर्जीवित करने, समझने और मनाने के प्रयासों में एक प्रमुख मील का पत्थर है।

इस पोत को औपचारिक रूप से वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथनफ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफपश्चिमी नौसेना कमान नेभारत में ओमान सल्तनत के राजदूत महामहिम इस्सा सालेह अल शिबानी और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट मेहमानों की गरिमामयी उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

आईएनएसवी कौंडिन्य का निर्माण पारंपरिक सिलाई वाली जहाज निर्माण तकनीकों का उपयोग करके किया गया है, जिसमें प्राकृतिक सामग्री और तरीकों का इस्तेमाल किया गया है जो कई सदियों पुराने हैं। ऐतिहासिक स्रोतों और चित्रात्मक साक्ष्यों से प्रेरित, यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण, नाविकता और समुद्री नेविगेशन की समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। यह यात्रा उन प्राचीन समुद्री मार्गों का अनुसरण करती है जो कभी भारत के पश्चिमी तट को ओमान से जोड़ते थे, जिससे हिंद महासागर में व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और निरंतर सभ्यतागत बातचीत संभव होती थी।

इस अभियान से साझा समुद्री विरासत को मज़बूत करके और सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देकर भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी सुधार होने की उम्मीद है। मस्कट में आईएनएसवी कौंडिन्य का आगमन दोस्ती, आपसी विश्वास और सम्मान के स्थायी बंधन का एक शक्तिशाली प्रतीक होगा, जिसने सदियों से इन दोनों समुद्री देशों को जोड़ा है। यह यात्रा गुजरात और ओमान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को भी उजागर करती है, जो अब तक जारी सहयोग की एक विरासत को दर्शाती है।

इस अभियान के माध्यम से, भारतीय नौसेना समुद्री कूटनीति, विरासत संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आईएनएसवी कौंडिन्य की यात्रा भारत के सभ्यतागत समुद्री दृष्टिकोण और हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी समुद्री राष्ट्र के रूप में उसकी भूमिका का प्रमाण है।

कमांडर विकास शेओरान जहाज के कप्तान होंगे, जबकि कमांडर वाई हेमंत कुमार, जो इस परियोजना की शुरुआत से ही इससे जुड़े हुए हैं, अभियान के ऑफिसर-इन-चार्ज के रूप में काम करेंगे। चालक दल में चार अधिकारी और तेरह नौसैनिक शामिल हैं।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने हरियाणा में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सुधारों और टीबी मुक्त भारत से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली  –  केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन करने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को मजबूत करने हेतु आज हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के मुख्य विषयों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना, मरीज-केन्द्रित देखभाल, नियामक पर्यवेक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती के तौर पर क्षय रोग (टीबी) का उन्मूलन शामिल था।

 

दवाओं के मजबूत विनियमन की जरूरत पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के हेतु फार्मास्यूटिकल आपूर्ति श्रृंखला में निरंतर निगरानी अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से नियामक संबंधी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली को संस्थागत बनाने और मरीजों की संतुष्टि, नियामक संबंधी निगरानी एवं अनुपालन में सुधार को लगातार प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

मुफ्त दवाएं एवं नैदानिकी योजना के संबंध में, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मजबूत आपूर्ति-श्रृंखला प्रणाली और प्रभावी निगरानी की जरूरत को रेखांकित किया।

 

नैदानिकी की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि समय पर और गुणवत्तापूर्ण जांच सभी स्तर पर कारगर सवास्थ्य सेवा का आधार है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नियामक संबंधी अनुपालन में पेशेवर प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने ब्लड बैंकों, अस्पताल प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर कड़ी निगरानी रखने पर भी जोर दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में नैदानिकी संबंधी जांच की उपलब्धता बढ़ाने हेतु, प्रयोगशाला में उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मकों एवं अन्य वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एक मजबूत प्रणाली बनाने की जरूरत पर भी जोर  दिया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के अधिकारियों से यह भी कहा कि वे राज्य के हर जिला अस्पताल में अमृत रिटेल फार्मेसी स्टोर स्थापित करने हेतु एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के साथ मिलकर काम करें।

तकनीक पर आधारित स्वास्थ्य सेवा के महत्व पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि टेलीमेडिसिन, खासकर दूरदराज एवं पिछड़े इलाकों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता से संबंधित कमियों को दूर करने का एक कारगर साधन है। उन्होंने टेलीमेडिसिन की सुविधा को सक्रियतापूर्वक और कुशलता से अपनाने व लागू करने के लिए राज्य की सराहना की।

श्री नड्डा ने क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन के सरकार के संकल्प को दोहराया और जांच, नैदानिकी, इलाज का पालन तथा पोषण संबंधी सहायता पर अधिक ध्यान देते हुए लक्षित एवं  जिला-स्तर पर उपायों की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्तर पर क्षय रोग की जांच को मजबूत करने के लिए एआई-आधारित एक्स-रे इकाइयां शुरू की गई हैं, जबकि दवा-प्रतिरोधी क्षयरोग सहित विभिन्न प्रकार के क्षय रोग का जल्दी पता लगाने हेतु  प्रखंड स्तर पर एनएएटी मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। सामुदायिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि हरियाणा के 350 से अधिक माय भारत स्वयंसेवक नि-क्षय मित्र पहल में शामिल हुए हैं और उन्होंने मनोवैज्ञानिक-सामाजिक सहायता के साथ-साथ लगातार सामुदायिक स्तर पर जागरूकता पैदा करने हेतु क्षय रोग के मरीजों के साथ उनके प्रभावी जुड़ाव को सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जिला और प्रखंड स्तर पर कड़ी निगरानी के साथ मिशन मोड में क्षय रोग के उन्मूलन का कार्य किया जाना चाहिए।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित करने का आह्वान किया ताकि जिला परिषदों तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) के साथ नियमित जुड़ाव को बढ़ावा दिया जा सके और समीक्षा तंत्र को मजबूत किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं के नतीजों को बेहतर बनाने, जवाबदेही और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जनता का भरोसा बढ़ाने हेतु जन भागीदारी बेहद जरूरी है।

 

पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए, हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कार्यान्वयन को मजबूत बनाने और पूरे राज्य में स्वास्थ्य संबंधी बेहतर नतीजे देने हेतु केन्द्रीय  स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

केन्द्र-राज्य सहयोग पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने एनएचएम से जुड़े कदमों, पीपीपी मॉडल, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग) और आधुनिक एवं किफायती स्वास्थ्य सेवा देने हेतु अवसंरचना संबंधी सहयोग के जरिए हरियाणा को केन्द्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केन्द्र राज्य को सभी जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण एवं सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण के तहत आने वाले दिनों में दूसरे राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की परामर्श बैठकें की जाएंगी। श्री नड्डा ने पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्रियों से मुलाकात की थी।

बैठक का समापन दवाओं के विनियमन को मजबूत करने, नैदानिकी सेवाओं को बेहतर बनाने, अस्पताल प्रशासन को पेशेवर बनाने, चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने और क्षय रोग के उन्मूलन की दिशा में प्रगति को तेज करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को रेखांकित करता है।

हरियाणा राज्य की ओर से इस बैठक में हरियाणा सरकार की माननीया स्वास्थ्य मंत्री सुश्री आरती सिंह राव; अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) श्री सुधीर राजपाल; खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त श्री मनोज कुमार; राज्य औषधि नियंत्रक श्री ललित गोयल; स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव; पं. नेकी राम शर्मा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, भिवानी के निदेशक डॉ. धीरज परिहार; चिकित्सा शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. मालती; संयुक्त आयुक्त (खाद्य) श्री पृथ्वी सिंह; और पं. नेकी राम शर्मा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, भिवानी, हरियाणा के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार सिहमार शामिल हुए।

इस बैठक में केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; अतिरिक्त सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ. विनोद कोटवाल; अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक (एनएचएम) सुश्री आराधना पटनायक; भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रजित पुन्हानी; और भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी सहित केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज असम के नगांव जिले में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की जन्मस्थली बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का लोकार्पण किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज असम के नगांव जिले में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की जन्मस्थली बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का लोकार्पण किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल और विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वर्षों से घुसपैठियों के कब्जे में रहे नगांव में विश्व प्रसिद्ध श्रीमंत शंकरदेव जी के जन्म-स्थान को खाली करा कर उसे फिर से विकसित करने का काम आज पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी ने जन्म लिया और जहां से नव-वैष्णव धर्म को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में धर्म के रूप में प्रचारित करने का काम किया, उस नगांव की भूमि पर आना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी बात है। श्री शाह ने भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई जी का स्मरण करते हुए कहा कि अगर वे नहीं होते तो हमारा असम और पूरा उत्तर-पूर्व भारत का हिस्सा न होता। गोपीनाथ जी ने असम को भारत में रखने के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री को मजबूर कर दिया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बटाद्रवा थान में महापुरुष शंकरदेव जी का आविर्भाव क्षेत्र भी बनाया गया है। जहां महापुरुष शंकरदेव जी का जन्म हुआ, वहाँ सदियों तक नव वैष्णव धर्म का डंका बजा है। उन्होंने कहा कि इस स्थान का निर्माण तीन फेज में किया गया। इसमें ₹222 करोड़ से अधिक की लागत आई और 162 बीघा भूमि पर यह निर्माण कार्य किया गया। श्री शाह ने कहा कि इसमें सभी नव वैष्णव धर्म की परंपराओं को जमीन पर उतारने का काम किया गया है। श्रीमद भागवत के सभी धार्मिक चिह्नों का बहुत बारीकी से अध्ययन कर उन्हें मूर्त रूप देने का काम किया गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि बटाद्रवा थान कोई साधारण स्थान नहीं रहा; यह अब हमें 500 वर्षों की विरासत से जोड़ने वाला पवित्र तीर्थस्थल बन चुका है। गृह मंत्री ने कहा कि 26 दिसंबर 2020 को इसका भूमिपूजन भी उन्हीं के हाथों हुआ था और इसके लोकार्पण का सौभाग्य भी उन्हें ही प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने नव-वैष्णव धर्म की स्थापना करके पूरे पूर्वोत्तर भारत में इसे प्रस्थापित करने का महान कार्य किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भागवत में बताए गए मार्गों पर ईश्वर की भक्ति करना, अच्छा जीवन जीना तथा धर्म के आधार पर इस देश को अपनी मातृभूमि मानकर चलने का संदेश श्रीमंत शंकरदेव जी ने दिया। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान केवल एक पूजाघर और नामघर ही नहीं है, बल्कि यह असमिया सद्भाव का जीवंत प्रतीक है। श्री शाह ने कहा कि यह स्थान असम की साझा संस्कृति को आगे बढ़ाने वाला केन्द्र और सामूहिक भक्ति का भी स्थान बनेगा। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की ‘एकशरण नाम धर्म’ परंपरा को आगे बढ़ाने में यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महापुरुष शंकरदेव जी ने हमें मानवता और मातृभूमि दोनों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह युग धन्य है, मानव जीवन स्वयं में महान है और भारत-भूमि में जन्म लेना सबसे बड़े सौभाग्य की बात है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत को तोड़ने की चाह रखने वालों को श्रीमंत शंकरदेव जी ने 500 साल पहले ‘एक भारत’ का संदेश दिया था, जिसे आज हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकरदेव जी के पवित्र स्थान पर घुसपैठिए कब्जा कर बैठे थे, क्या यह ठीक था? श्री शाह ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा को हृदय से बधाई दी कि उन्होंने इन पवित्र स्थानों से घुसपैठियों को निकालकर नाम घर की पुनः स्थापना का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरे असम में जारी है। राज्य में 1.29 लाख बीघा से अधिक भूमि घुसपैठियों से मुक्त कराई गई है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में भी घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया था, लेकिन असम सरकार ने उन्हें खदेड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने वर्षों तक इन घुसपैठियों को संरक्षण दिया। विपक्षी पार्टियां असम की संस्कृति की बात तो करती थीं, लेकिन 1983 में Illegal Migrants Determination by Tribunals (IMDT) कानून लाकर उन्होंने घुसपैठियों को यहां बसने का कानूनी रास्ता दे दिया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि हम न केवल असम, बल्कि पूरे देश से चुन-चुनकर घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि असम की संस्कृति इन घुसपैठियों के दबाव में दबती जा रही थी, लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में यहां हिमंत बिस्वा सरमा ने इस संस्कृति को घुसपैठियों के प्रभाव से मुक्त कराया है। आज मृदंग और ताल की आवाज के साथ नामघर में भक्ति संगीत गूंजता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष की सरकार इतने साल रही, लेकिन उन्होंने असम आंदोलन के शहीदों के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन राज्य की मौजूदा सरकार ने असम आंदोलन के शहीदों की याद में भव्य ’शहीद स्मारक क्षेत्र’ का निर्माण किया है। असम की जनता 70 साल की ऐसी उपेक्षा कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर-पूर्व और विशेषकर असम के विकास के लिए मोदी जी के नेतृत्व में 11 प्रकार के विकास कार्य हुए हैं। असम में पहले पांच साल सर्बानंद सोनोवाल जी के नेतृत्व में और अब पांच साल हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, पिछले 10 वर्ष असम के विकास के लिए स्वर्णकाल साबित होंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी जी कुल मिलाकर उत्तर-पूर्व में 80 बार और असम में 11 साल में 36 बार आए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व और असम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले यदि कोई व्यक्ति हैं, तो वह हमारे मोदी जी हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री को असम से राज्यसभा भेजा था, लेकिन 10 साल में वे असम केवल 7 बार आए, जिनमें से दो बार तो सिर्फ राज्यसभा का पर्चा जमा करने आए थे। उनके लिए असम का पुनर्निर्माण, असम की संस्कृति, असम का विकास और असम की शांति सिर्फ भाषणों का मुद्दा रही। श्री शाह ने कहा कि सालों से असम में कई प्रकार के आंदोलन हुए, हमारे युवा हाथ में बंदूक लेकर खून की नदियाँ बहाते रहे। लेकिन भारत सरकार ने मोदी जी के नेतृत्व में 2020 में बोडो समझौता किया, 2021 में कार्बी समझौता किया, 2022 में आदिवासी समझौता किया, 2023 में DNLA समझौता किया और 2023 में ही ULFA समझौता किया। उन्होंने कहा कि पहले बम धमाकों से गूंजने वाले असम में आज श्रीमंत शंकरदेव जी के नाम-स्मरण से हमारे कान पवित्र हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इन 11 सालों में असम और पूर्वोत्तर की शांति के लिए श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई कदम उठाए हैं, और ये सभी समझौते सिर्फ कागज पर नहीं रहे—पांचों समझौतों में शामिल 92 प्रतिशत मुद्दे क्लियर हो चुके हैं। एक बार और हमारी सरकार बनी, तो हम शत-प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर देंगे।

श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ढेर सारे कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज 11 हजार से अधिक कलाकारों ने एक साथ बीहू नृत्य किया, जिसे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया देख रही है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ‘चराईदेव मोइदम’ को शामिल कराकर विश्व भर के पर्यटकों को असम लाने का कार्य किया गया है। लचित बरफुकन को पहले केवल असम जानता था, लेकिन मोदी जी ने उन्हें पूरे देश में पहुँचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि पहले लचित बरफुकन जी की वीरगाथा असम तक सीमित थी, हमारी सरकार ने उनकी जीवन गाथा को 23 भाषाओं में देश-दुनिया तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि ‘गमोसा’ को जीआई टैग दिलाने का काम भी मोदी जी और श्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने किया है। 16वीं शताब्दी का ‘वृंदावनी वस्त्र’, जिस पर वृंदावन में श्रीकृष्ण के बचपन के जीवन के सारे प्रसंग उकेरे जाते हैं और जिसे एक प्रकार से श्रीमंत शंकरदेव ने डिज़ाइन किया था, उस वस्त्र को भी प्रदर्शनियों के माध्यम से पूरे देश में लोकप्रिय बनाने का काम मोदी जी ने किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि असम का बोगीबील ब्रिज आज देखने के लिए पूरी दुनिया उमड़ पड़ती है। हमने 7 हजार करोड़ रुपये से असम में एनएच-715 के 85 किलोमीटर कालीबोर-नुमालिगढ़ सेक्शन को चार लेन बनाने का काम किया। 3,400 करोड़ रुपये से सिलचर-चुराईबाड़ी कॉरिडोर को स्वीकृत किया। 22,864 करोड़ रुपये से मेघालय से असम के पंचग्राम तक 166.80 किलोमीटर रोड को स्वीकृत किया। 6 हजार करोड़ रुपये से भारत के सबसे बड़े रेल-सड़क बोगीबील पुल का निर्माण पूरा किया गया। 5 हजार करोड़ रुपये से ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लेन का दुबरी-फुलबाड़ी पुल शुरू हो चुका है। 2,000 करोड़ रुपये से ढोला-सदिया पुल का निर्माण 2017 में पूरा किया गया। North East Special Infrastructure Development Scheme (NESIDS) के तहत 646 करोड़ रुपये से 19 सड़क और पुल की योजनाएँ शुरू की। ब्रह्मपुत्र पर छह लेन का एक अन्य पुल बन रहा है। रेलवे, एयरवेज और कई जलमार्गों के माध्यम से भी असम की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 8 हजार करोड़ रुपये खर्च कर भारत सरकार ने जलमार्ग विकास परियोजना के तहत देशभर के यात्रियों को असम तक जलमार्ग से लाने का काम किया है। लचित बरफुकन की 84 फीट ऊँची प्रतिमा बन चुकी है। भारत में निर्मित पहला स्वदेशी क्रूज ‘एमवी गंगा विलास’ वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक यात्रा कर चुका है। AIIMS सहित कई मेडिकल कॉलेज  की स्थापना हुई है, नवोदय विद्यालय खोले गए हैं। मोदी जी ने लगभग 1,123 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 750 बेड वाला AIIMS असम में समर्पित किया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि असम में 27 हजार करोड़ रुपये के लागत से टाटा का सेमिकंडक्टर यूनिट स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड (BVFCL) के परिसर में नया अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स 10,601 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है, जिसकी क्षमता ₹11 हजार करोड़ से 13 लाख मेट्रिक टन यूरिया उत्पादन प्रतिवर्ष होगी। साथ ही ढेर सारी प्राइवेट इंडस्ट्रीज असम में आ रही हैं। उन्होंने कहा कि असम अब आंदोलनों की जगह विकास की भूमि बन चुका है। दिल्ली में एक समय असम को समस्या खड़ी करने वाला राज्य माना जाता था, लेकिन आज असम पूरे पूर्वोत्तर का ग्रोथ इंजन बनकर देश को विकास के रास्ते पर ले जा रहा है। यह परिवर्तन पिछले 11 साल में मोदी जी की सरकार और असम में उनकी पार्टी की सरकार के दस साल के कार्यकाल में आया है। श्री शाह ने कहा कि विपक्ष ने घुसपैठियों को घुसाया, वोट बैंक बढ़ाने के लिए असम की संस्कृति का हनन किया, असम के संस्कारों, साहित्य, परंपराओं और राज्य की पूरी संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का काम किया। श्री अमित शाह ने राज्य के लोगों से अपील की कि वे एक बार और उनकी पार्टी की सरकार को मौका दें, हमारा यह संकल्प है कि हम असम को घुसपैठियों से पूरी तरह मुक्त करा देंगे। जो लोग घुसपैठियों को वोट बैंक समझते हैं, वे यह नहीं कर सकते। श्री शाह ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए और असम की संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं।

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उपराष्ट्रपति जी ने पुदुचेरी में स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संरक्षित करने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में एक नागरिक अभिनंदन समारोह को संबोधित किया और स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत एक आवासीय परियोजना का उद्घाटन किया, जिसमें उन्होंने 216 नए बने घरों की चाबियां लाभार्थियों को सौंपी, और समावेशी व स्थायी शहरी विकास के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

यह नागरिक अभिनंदन समारोह पुदुचेरी के विभिन्न संगठनों की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें पुदुचेरी नागरिक मंच के सदस्य, धार्मिक नेता, और अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, वाणिज्य और कारीगर संघों, बार काउंसिल और होटल संघों के प्रतिनिधि शामिल थे, और यह आयोजन उपराष्ट्रपति जी के पद संभालने के बाद पहली यात्रा के मौके पर किया गया था, इससे पहले वे पुदुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके हैं।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने अपने उपराज्यपाल के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल को याद किया और केंद्र शासित प्रदेश को अनूठी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व वाली भूमि बताया। रोमन दुनिया के साथ भारत के समुद्री संबंधों को दर्शाने वाले अरिकामेडु के प्राचीन बंदरगाह का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि पुदुचेरी हमेशा एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर दुनिया के लिए खुला रहा है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ऐतिहासिक कीझूर जनमत संग्रह का जिक्र किया, जहां भारी बहुमत ने पुदुचेरी के भारत में विलय के पक्ष में मतदान किया, जो लोगों की गहरी देशभक्ति और स्वतंत्रता की इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।

आवासीय परियोजना के जल्दी पूरा होने पर संतोष जताते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि घर केवल एक भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का जरिया है। उपराज्यपाल के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस परियोजना पर करीब से नजर रखी थी।

उपराष्ट्रपति जी ने कुमारगुरु पल्लम साइट पर सौंपे गए घरों का दौरा भी किया और लाभार्थियों से बातचीत की, जिन्होंने परियोजना को जल्दी पूरा करवाने के लिए उनका धन्यवाद किया।

 

भारत सरकार की कल्याणकारी पहलों पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का जिक्र किया, और कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली ने पारदर्शिता और सहायता की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की है।

उन्होंने “सभी के लिए आवास” के मिशन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुदुचेरी सरकार के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इसके बाद, भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में पेटिट सेमिनार सीबीएसई स्कूल के सीनियर सेकेंडरी ब्लॉक का उद्घाटन किया। उन्होंने संस्थान की 181 साल पुरानी विरासत पर आधारित संपूर्ण शिक्षा और मूल्य-आधारित अध्यापन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

 

शिक्षा को एकमात्र अविनाशी संपत्ति बताते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने छात्रों से ज्ञान को गहराई, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ हासिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी के मेल से बनेगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बदलाव लाने वाले असर पर भी जोर दिया, जिसने भारत की शिक्षा प्रणाली को रटने की बजाय आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और सर्वांगीण विकास की ओर मोड़ा है।

बाद में, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में भारतीयार मेमोरियल में महाकवि सुब्रमण्यम भारतीयार की प्रतिमा का अनावरण किया, और उस महान कवि को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने निडर शब्दों, क्रांतिकारी विचारों और तमिल व भारत के प्रति असीम प्रेम से एक राष्ट्र को जगाया।

 

गहरी प्रसन्नता जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि उस धरती पर मूर्ति का अनावरण किया जा रहा है, जहां महाकवि सुब्रमण्य भारती ने लगभग एक दशक तक स्वतंत्र विचार और रचनात्मक प्रतिभा के साथ जीवन बिताया। उन्होंने कहा कि पुदुचेरी में भारतीयार के साल, जो गहरी दार्शनिक खोज और ज्ञान की तलाश से भरे थे, उन्हें आधुनिक तमिल साहित्य का सुनहरा दौर माना जाता है।

इस कार्यक्रम में पुदुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी, जन प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य शामिल हुए।

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पीडीयूएनएएसएस और आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस ने सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में नैतिकता को समाहित करने के लिए ऐतिहासिक साझेदारी की

नई दिल्ली – देश में सार्वजनिक सेवा वितरण को पुनर्परिभाषित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम उठाते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (आईसीसीएफजी) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। आज नई दिल्ली में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) ईपीएफओ अधिकारियों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता के साथ नैतिक नेतृत्व और नैतिक अखंडता को एकीकृत करने हेतु एक व्यापक ढांचे को संस्थागत रूप देता है।

 

इस समझौता ज्ञापन पर पीडीयूएनएएसएस के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-प्रथम श्री राम आनंद और आईसीसीएफजी के महासचिव श्री शांति नारायण ने पीडीयूएनएस के निदेशक श्री कुमार रोहित की उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस समारोह में आईसीसीएफजी के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें उपाध्यक्ष श्री महेश कपूर और भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री बलविंदर कुमार और श्री अनुराग गोयल शामिल थे। इस मौके पर  वरिष्ठ सदस्य ब्रिगेडियर राजेंद्र कुमार, श्री राजीव सचदेवा, श्री सुनील कुमार, सुश्री अर्चना दुबे, श्री विनोद के. मौर्य और सुश्री रणनाही द्विवेदी भी उपस्थित थे। पीडीयूएनएस प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त श्री प्रशांत शर्मा, श्री हरीश यादव और श्री अंकुर पी. गुप्ता शामिल थे।

यह गठबंधन एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर किया गया है, जब ईपीएफओ द्वारा व्यापक “ईज़ ऑफ लिविंग” सुधारों और डिजिटल परिवर्तनों को लागू किया जा रहा है, जिसके लिए ऐसे कार्यबल की आवश्यकता है जो न केवल डिजिटल रूप से कुशल हो, बल्कि नैतिक रूप से सुदृढ़ भी हो।

भविष्य के लिए तैयार’ सिविल सेवा हेतु एक रणनीतिक गठबंधन

इस सहयोग का उद्देश्य नियम-आधारित अनुपालन से हटकर भूमिका-आधारित नैतिक दक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हुए “मिशन कर्मयोगी” की परिकल्पना को साकार करना है। यह लाखों भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सहानुभूति की बढ़ती आवश्यकता को संबोधित करता है।

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने इस साझेदारी की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत के सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में परिवर्तनकारी सुधारों के बीच ईपीएफओ की जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में हमारे अधिकारियों को केवल प्रक्रियात्मक दक्षता ही नहीं, बल्कि नैतिक योग्यता की भी आवश्यकता है। आईसीसीएफजी के साथ यह गठबंधन मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देगा, जिससे ऐसे सिद्धांतनिष्ठ नेतृत्वकर्ता तैयार होंगे जो संस्थागत विश्वसनीयता और जन-विश्वास को बनाए रखेंगे। हम कौशल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं।”

संरचित प्रशिक्षण व्यवस्था

यह समझौता ज्ञापन एक स्तरीय वार्षिक प्रशिक्षण ढांचा स्थापित करता है। इसमें समूह ‘ए’ के ​​अधिकारियों के लिए आईसीसीएफजी केंद्रों में नेतृत्व और नीति पर केंद्रित विशेष आवासीय कार्यक्रम और समूह ‘बी’ के अधिकारियों के लिए पीडीयूएनएएसएस में पेशेवर आचरण और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर केंद्रित समर्पित परिसर-आधारित प्रशिक्षण शामिल है। यह खंडित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि निर्णय लेने वालों से लेकर फील्ड फोर्स तक संपूर्ण कार्यबल उत्तरदायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए सुसज्जित हो।

सार्वजनिक शक्ति के लिए आंतरिक संरेखण

आईसीसीएफजी के अध्यक्ष, पूर्व कैबिनेट सचिव और झारखंड के पहले राज्यपाल श्री प्रभात कुमार ने इस पहल के दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सत्यनिष्ठा एक निजी सद्गुण और एक सार्वजनिक शक्ति दोनों है। हम अधिकारियों से कर्तव्य और अंतरात्मा के बीच आंतरिक सामंजस्य स्थापित करने का आग्रह करते हैं। जब कोई सिविल सेवक नैतिक समन्वय के साथ कार्य करता है, तब शासन एक दायित्व न रहकर सेवा बन जाता है। यह साझेदारी प्रत्येक अधिकारी के भीतर निहित ‘कर्मयोगी’ को जागृत करने के बारे में है।”

सुधारों की पृष्ठभूमि

यह पहल ईपीएफओ द्वारा 2025 में शुरू किए गए हालिया परिचालन सुधारों, जिनमें सरलीकृत निकासी ढांचा और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली शामिल है, का पूरक है। जैसे-जैसे संगठन स्वचालन के माध्यम से मैन्युअल प्रक्रियाओं को कम कर रहा है, जटिल मामलों में विवेकाधीन शक्तियों के प्रयोग हेतु उच्च नैतिक विवेक की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। पीडीयूएनएएसएस-आईसीसीएफजी साझेदारी यह सुनिश्चित करती है कि शासन का मानवीय पहलू डिजिटल पहलू के साथ तालमेल बनाए रखे।

संस्थानों के बारे में

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) के बारे में: पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला प्रमुख शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान है। अधिकारियों के सतत व्यावसायिक विकास को सुगम बनाने के उद्देश्य से स्थापित यह अकादमी नए श्रम संहिताओं तथा डिजिटल इंडिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप मानव संसाधनों को संरेखित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आईसीसीएफजी के बारे में: आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (आईसीसीएफजी) एक प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संस्था है, जो लोक प्रशासन के नैतिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित है। कार्यकारी शिक्षा और नीतिगत संवाद के माध्यम से यह संस्था आईएएस अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नेतृत्व सहित वरिष्ठ सिविल सेवकों के लिए उच्च-प्रभावशाली कार्यक्रम संचालित करती है। इसके “लोक शासन में नैतिकता” मॉड्यूल अपनी व्यावहारिक प्रासंगिकता और परिवर्तनकारी क्षमता के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त हैं।

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डीएसी ने सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 79,000 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को स्वीकृति दी

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने तीनों सेनाओं से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों, जिनकी कुल लागत लगभग 79,000 करोड़ रुपए है, के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान कर दी है। 29 दिसंबर, 2025 को हुई बैठक में भारतीय सेना के लिए आर्टिलरी रेजिमेंट हेतु लॉइटर मुनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (एमआरएलएस) के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट गोला बारूद तथा एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली एमके-II की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई।

सामरिक लक्ष्यों पर सटीक हमले के लिए लोइटर मुनिशन का उपयोग किया जाएगा, जबकि लो लेवल लाइट वेट रडार छोटे आकार के, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मानवरहित हवाई प्रणालियों (एमआरएलएस) का पता लगाकर उन पर नज़र रखेंगे। लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट पिनाका एमआरएलएस की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाएंगे, जिससे उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकेगा। उन्नत मारक क्षमता वाली एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली एमके-II सामरिक युद्ध क्षेत्र और भीतरी इलाकों में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण संपत्तियों की रक्षा करेगी।

भारतीय नौसेना को बोलार्ड पुल (बीपी) टग्स, उच्च आवृत्ति सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एचएफ एसडीआर) मैनपैक और पट्टे पर हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज (एचएएलई) रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस) की खरीद के लिए एओएन प्रदान किया गया। बीपी टग्स के शामिल होने से नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को संकरे जलक्षेत्र/बंदरगाहों में बर्थिंग, अनबर्थिंग और युद्धाभ्यास में सहायता मिलेगी। एचएफ एसडीआर बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशन के दौरान लंबी दूरी के सुरक्षित संचार को बढ़ाएगा, जबकि एचएएलई आरपीएएस हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही तथा विश्वसनीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता सुनिश्चित करेगा।

भारतीय वायु सेना के लिए स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, एस्ट्रा एमके-II मिसाइलें, फुल मिशन सिमुलेटर और एसपीआईसीई-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट आदि की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई। स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम के शामिल होने से लैंडिंग और टेक-ऑफ की उच्च-स्तरीय, हर मौसम में स्वचालित रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराकर एयरोस्पेस सुरक्षा वातावरण में मौजूद कमियों को दूर किया जा सकेगा। बढ़ी हुई रेंज वाली एस्ट्रा एमके-II मिसाइलें लड़ाकू विमानों की क्षमता को बड़े स्टैंडऑफ रेंज से दुश्मन के विमानों को बे-असर करने के लिए बढ़ाएंगी। हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए फुल मिशन सिमुलेटर पायलटों के प्रशिक्षण को किफायती और सुरक्षित तरीके से बेहतर बनाएगा, जबकि एसपीआईसीई-1000 भारतीय वायु सेना की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को बढ़ाएगा।

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उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 11 निजी संस्थाओं को 12 जीएटीसी प्रमाणपत्र प्रदान किए, इससे कानूनी मापन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूती मिली

नई दिल्ली – उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा 11 निजी संस्थाओं को 12 सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (जीएटीसी) प्रमाणपत्र प्रदान करना महत्वपूर्ण कदम है। इससे संरचित सार्वजनिक-निजी भागीदारी ढांचे के माध्यम से देश के कानूनी माप सत्यापन तंत्र को मजबूती मिली है । माननीय केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने ये प्रमाणपत्र 24 दिसंबर 2025 को प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा भी उपस्थिति रहे।

 

यह ऐतिहासिक कदम देश की कानूनी माप प्रणाली में एक क्रांतिकारी सुधार का प्रतीक है, इसके तहत सत्यापन क्षमता को सार्वजनिक क्षेत्र से आगे बढ़ाकर योग्य निजी संस्थाओं की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाया गया है। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उपभोक्ता लेन-देन में प्रयुक्त वजन और माप की सटीकता और विश्वसनीयता को मजबूत करना, साथ ही व्यापार करने में सुगमता और नियामक दक्षता में सुधार करना है।

23 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम2013 में संशोधन किया गया था और अब निजी संस्थाओं को सरकारी मापन केंद्रों (जीएटीसी) के रूप में मान्यता दी गई है । संशोधित नियमों ने जीएटीसी के दायरे को काफी हद तक विस्तारित किया है और निर्धारित तकनीकी मानदंडों को पूरा करने वाली निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम तौर-तरीकों के अनुरूप वजन और मापन उपकरणों के सत्यापन और पुनः सत्यापन का कार्य करने में सक्षम बनाया है।

अब 18 श्रेणियों के उपकरणों को शामिल किया गया है।

संशोधित ढांचे के तहत अब वजन और माप उपकरणों की 18 श्रेणियां शामिल की गई हैं।  यह स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और उपभोक्ता सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रही तकनीकी और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • पानी के मीटर, ऊर्जा मीटर, गैस मीटर
  • प्रवाह मीटर, नमी मीटर
  • स्फिग्मोमैनोमीटर और क्लिनिकल थर्मामीटर
  • सांस विश्लेषक और वाहन गति मीटर
  • बहुआयामी मापन उपकरण
  • स्वचालित रेल वजन पुल
  • टेप मापक यंत्र, गैर-स्वचालित वजन मापने के उपकरण
  • लोड सेल, बीम स्केल, काउंटर मशीनें
  • सभी श्रेणियों का भार

संशोधित नियमों की अधिसूचना के बाद, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने जीएटीसी मान्यता के लिए पात्र निजी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। आवेदन प्रक्रिया 30 नवंबर 2025 तक खुली रही।  इससे पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित हुई और इसके परिणामस्वरूप त्वरित अनुमोदन और बेहतर सेवा वितरण संभव हुआ।

निजी जीएटीसी को मान्यता मिलने से सत्यापन सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होने, प्रक्रिया में लगने वाले समय में कमी आने और देश भर के निर्माताओं, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए तेजी से अनुपालन सुनिश्चित होने की उम्मीद है। वजन मापने की मशीन, पानी के मीटर और ऊर्जा मीटर जैसे उपभोक्ता-उन्मुख उपकरणों का नियमित और विकेंद्रीकृत सत्यापन त्रुटियों को कम करेगा। इससे उपभोक्ताओं को दैनिक लेन-देन में पूरा लाभ मिलना और बाजार में विश्वास मजबूत होना सुनिश्चित होगा।

यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप है । यह घरेलू तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठाती है और निजी संस्थाओं को एक समान, पारदर्शी और विनियमित ढांचे के भीतर भारत के विस्तारित सत्यापन नेटवर्क में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।

क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (आरआरएसएल) और राष्ट्रीय परीक्षण गृह (एनटीएच) प्रयोगशालाओं को जीएटीसी के रूप में निरंतर मान्यता मिलने से एक मजबूत राष्ट्रव्यापी सत्यापन प्रणाली सुनिश्चित होती है। सत्यापन गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से, यह सुधार राज्य विधिक मापन विभागों के लिए एक बल गुणक के रूप में कार्य करता है। इससे विधिक मापन अधिकारी निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

इन सुधारों के माध्यम से, सरकार वैज्ञानिकप्रौद्योगिकी-संचालित और भविष्य के लिए तैयार कानूनी माप प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के अनुरूप है। इससे उपभोक्ता विश्वास, नियामक दक्षता और व्यापार में निष्पक्षता मजबूत होती है।

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प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड की झलकियां साझा कीं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड की झलकियां साझा कीं।

नई दिल्ली  – श्री मोदी ने एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में कहा:

“140 करोड़ भारतीयों की शक्ति और कौशल की बदौलत, हमारे देश ने 2025 में विभिन्न सेक्‍टरों में बहुत कुछ अर्जित किया है।”

#MannKiBaat

 

“विकसित भारत युवा नेता संवाद राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने का एक शानदार मंच है। मैं 12 जनवरी 2026 को इस कार्यक्रम में भाग लेने और हमारे युवा शक्ति के विचारों और सुझावों को सुनने के लिए उत्सुक हूं।”

#MannKiBaat

 

“स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन हमारे युवाओं और नवोन्मेषकों को प्रमुख राष्ट्रीय और सामाजिक चुनौतियों के समाधान प्रदान करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।”

#MannKiBaat

 

“भारत के युवा सतत विकास के प्रति असीम उत्साह प्रदर्शित कर रहे हैं। इस संदर्भ में, मणिपुर के मोइरांगथेम सेठ द्वारा सौर ऊर्जा का उपयोग करके समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों की सराहना की।”

#MannKiBaat

 

“अगले महीने हम पार्बती गिरि जी की जन्म शताब्दी मनाएंगे, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया और गरीबों एवं हाशिए पर रहने वाले लोगों के उत्थान पर भी ध्यान केंद्रित किया। आज मन की बात के दौरान हमने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।”

#MannKiBaat

 

“रण पुकार रहा है!”

कच्छ आइए और रण उत्सव का आनंद लीजिए।

आइए, लोक परंपराओं की लय, स्थानीय शिल्प कौशल की प्रतिभा और कच्छ की शाश्वत सुंदरता के साक्षी बनें।

#MannKiBaat

 

 

“दुबई में एक सराहनीय प्रयास को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच खूबसूरत कन्नड़ भाषा को लोकप्रिय बनाना है।”

#MannKiBaat

 

 

“नरसपुरम में किए गए इस प्रयास ने स्थानीय लेस शिल्प को पुनर्जीवित किया है और इस प्रकार कई लोगों को सशक्त बनाया है।”

#MannKiBaat

 

“ದುಬೈನಲ್ಲಿ ನೆಲೆಸಿರುವ ಭಾರತೀಯ ಅನಿವಾಸಿಗಳು, ಸುಂದರವಾದ ಕನ್ನಡ ಭಾಷೆಯನ್ನು ಜನಪ್ರಿಯಗೊಳಿಸಲು ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಶ್ಲಾಘನೀಯ ಪ್ರಯತ್ನದ ಬಗ್ಗೆ ಒತ್ತಿ ಹೇಳಿದೆ”

 

 

#MannKiBaat

“నరసాపురంలో చేపట్టిన ఈ ప్రయత్నం స్థానిక లేస్‌ క్రాఫ్ట్ కు మళ్లీ ప్రాణం పోసి అనేక మందికి సాధికారత చేకూర్చింది…”

 

#MannKiBaat

 

 

“ଆସନ୍ତା ମାସ ଆମେ ପାର୍ବତୀ ଗିରିଙ୍କ ଜନ୍ମ ଶତବାର୍ଷିକୀ ପାଳନ କରିବା, ଯିଏକିଆମ ସ୍ବାଧୀନତା ଆନ୍ଦୋଳନରେ ଯୋଗଦାନ କରିଥିଲେ ଏବଂ ଗରିବ ଓ ବଞ୍ଚିତଙ୍କକଲ୍ଯାଣ ପ୍ରତି ଧ୍ଯାନ ଦେଇଥିଲେ । ଆଜିର #MannKiBaat ରେ ତାଙ୍କୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳିଅର୍ପଣ କରୁଛି ।”

 

 

“फिजी में तमिल भाषा की लोकप्रियता बढ़ते देखना अच्छा लगता है, यह एक ऐसा राष्ट्र है जिसके साथ हमारे मजबूत सांस्कृतिक संबंध हैं।”

#MannKiBaat

 

“काशी के लोगों के बीच तमिल भाषा की लोकप्रियता को बढ़ते हुए देखना उत्साहजनक है, जो काशी तमिल संगमम के दौरान स्पष्ट रूप से देखा गया।”

#MannKiBaat

 

“நாம் வலுவான கலாச்சாரத் தொடர்புகளைக் கொண்டுள்ள நாடான ஃபிஜியில் தமிழ் பிரபலம் அடைவதைக் காண்பதும் மகிழ்ச்சி அளிக்கிறது.”

 

#MannKiBaat

 

“காசி தமிழ் சங்கமத்தின் போது, காசி மக்களிடையே தமிழ் பிரபலமடைந்து வருவது தெளிவாகக் காணப்பட்டது. இது மனநிறைவைத் தருகிறது.”

 

#MannKiBaat

 

 

“बारामूला के जेहनपोरा का बौद्ध परिसर बताता है कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान कितनी प्राचीन और समृद्ध रही है। यहां के बौद्ध स्तूपों का पता जिस तरह से चला, उसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है!”

#MannKiBaat

 

 

“भारत से हजारों किलोमीटर दूर फिजी हो या फिर हमारी काशी, यहां जिस तरह से तमिल भाषा के प्रसार के लिए सराहनीय पहल हो रही है, वो हृदय को छू लेने वाली है। मुझे खुशी है कि आज देश के कई और हिस्सों में भी दुनिया की इस सबसे प्राचीन भाषा को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है।”

#MannKiBaat

 

“आईसीएमआर यानि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की हाल ही की एक रिपोर्ट बताती है कि निमोनिया और यूटीआई जैसी बीमारियों में एंटीबॉयोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। इसका एक बड़ा कारण बिना सोचे-समझे इनका सेवन है। इसलिए मेरा आग्रह है कि डाक्‍टरों की सलाह के बिना एंटीबॉयोटिक दवाएं ना लें।”

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“मणिपुर के चुराचंदपुर की मार्गरेट रामथार्सीम पर गर्व है, जिन्होंने मणिपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प को लोकप्रिय बनाने और दूसरों के जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम किया है।”

#MannKiBaat

 

“मणिपुर के सेनापति जिले के, के. चोखोने कृचेना ने पुष्पकृषि के क्षेत्र में असाधारण कार्य किया है और कई किसानों के जीवन को भी बदल दिया है।”

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राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी शताब्दी समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (29 दिसंबर, 2025) झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में भाग लिया और उसे संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, एक शताब्दी पूर्व संथाली भाषा के लिए लिपि के अभाव में रोमन, देवनागरी, ओडिया और बंगाली जैसी विभिन्न लिपियों का प्रयोग किया जाता था। इन लिपियों में कई संथाली शब्दों का सही उच्चारण नहीं हो पाता था। वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने ओल चिकी लिपि का सृजन किया। तब से यह लिपि संथाल पहचान का एक सशक्त प्रतीक बन गई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर ओल चिकी लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत के संविधान को जारी करने का मौका मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब संथाली भाषी लोग अपनी मातृभाषा और ओल चिकी लिपि में लिखे संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी अन्य भाषा में शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ ओल चिकी लिपि में मातृभाषा संथाली सीखना भी संथाल समुदाय के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि लेखक और भाषा प्रेमी संथाली भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली संथाली समुदाय और अन्य जनजातीय समुदायों से सीखी जा सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संथाली साहित्य को संथाली समुदाय की मौखिक परंपराओं और गीतों से शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि कई लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से संथाली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के लोगों को जागृत करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने लेखकों से अपने लेखन के माध्यम से ऐसा करने का आग्रह किया।

श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भाषा और साहित्य समुदायों को आपस में जोड़ते हैं। विभिन्न भाषाओं के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान उन भाषाओं और समुदायों को समृद्ध करता है। अनुवाद इस आदान-प्रदान को संभव बनाते हैं। इसलिए, संथाली भाषा के छात्रों को अन्य भाषाओं से परिचित कराने की आवश्यकता है। संथाली साहित्य को अन्य भाषाओं के छात्रों तक पहुंचाने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अखिल भारतीय संथाली लेखक संघ इस कार्य को प्रभावी ढंग से करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, स्नातकों को ‘विकसित भारत @2047’ का शिल्पकार बताया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पुदुचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और स्नातक विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को ‘विकसित भारत @2047’ का शिल्पकार बताते हुए देश के भविष्य को गढ़ने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया।

स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक सफलता का उत्सव नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर क्षण है, जो अधिक ज़िम्मेदारी की ओर बढ़ने का आभास कराता है. उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि उनकी डिग्रियों के साथ यह दायित्व भी जुड़ा है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करें।

पुदुचेरी को सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत की भूमि बताते हुए उपराष्ट्रपति ने सुब्रमण्यम भारती, भरथिदासन और श्री अरबिंदो जैसे महान कवियों और विचारकों के स्थायी प्रभाव को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो का दर्शन आज भी उच्च शिक्षा को दिशा देता है, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और कर्म का समन्वय करता है तथा ऐसे मस्तिष्क तैयार करता है, जो राष्ट्रीय प्रगति और वैश्विक सद्भाव में योगदान देने में सक्षम हों।

उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय को NAAC के पांचवें मूल्यांकन चक्र में प्रतिष्ठित A+ ग्रेड प्राप्त करने पर बधाई दी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए 113 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) सहित इसके वैश्विक सहयोग की सराहना की। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में विश्वविद्यालय के 28 संकाय सदस्यों के शामिल होने को भी शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण बताया।

विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टि एक समृद्ध, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण के लिए समग्र रोडमैप प्रदान करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक मौलिक परिवर्तन का संकेत है-रटंत विद्या से आलोचनात्मक सोच की ओर, कठोर विषय सीमाओं से बहुविषयक अध्ययन की ओर और परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से समग्र विकास की ओर और स्नातकों से इसके भाव के दूत बनने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहलों- पीएम-उषा (PM-USHA), स्वयं (SWAYAM), दीक्षा (DIKSHA) और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालयका भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये पहलें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाती हैं और इस विश्वास को दर्शाती हैं कि शिक्षा कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सभी का अधिकार होनी चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से दुनिया में हो रहे तेज़ बदलावों को लेकर छात्रों को आगाह करते हुए उन्होंने तकनीकी उत्साह और नैतिक सजगता के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से यह भी आग्रह किया कि वे मज़बूती से “नशे को ना” कहें और अपने दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

प्राचीन तमिल ग्रंथ नालडियार (Naladiyar) का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों को याद दिलाया कि ज्ञान असीम है, लेकिन उसे अर्जित करने का समय सीमित है। उन्होंने स्नातकों से सूचना के विशाल सागर में से वही चुनने और आत्मसात करने का आग्रह किया जो मूल्यवान, नैतिक और सार्थक हो।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन का समापन करते हुए स्नातकों से आग्रह किया कि उनकी शिक्षा उन्हें अच्छे इंसान, जिम्मेदार नागरिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील पेशेवर बनाएं जहां ज्ञान विनम्रता से निर्देशित हो, तकनीक मानवीय मूल्यों से संचालित हो और सफलता सामाजिक जिम्मेदारी से परिभाषित हो।

इस कार्यक्रम में पुदुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी और पुदुचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. प्रकाश बाबू सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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राँची जिला प्रशासन द्वारा शीतलहर से बचाव हेतु जिले भर में अलाव की व्यापक व्यवस्था

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले भर में अलाव की व्यापक व्यवस्था

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी

जिला प्रशासन की अपील शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें

रांची,29.12.2025 – राज्य सरकार के निर्देशों के अनुपालन तथा रात के तापमान में निरंतर गिरावट और शीतलहर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने जिले के सभी जरूरतमंद नागरिकों के लिए बड़े स्तर पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

इस विशेष अभियान के तहत राँची शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन परिसर तथा खुले में रात बिताने वाले लोगों की बस्तियों में अलाव जलाए जा रहे हैं। साथ ही जिले के सभी प्रखंडों में भी यह व्यवस्था व्यापक रूप से की गई है।

प्रखंड मुख्यालयों, पंचायत भवन परिसरों, ग्रामीण हाट-बाजारों, धार्मिक स्थलों के निकट, मजदूर चौकियों तथा बेघर एवं दिहाड़ी मजदूरों की अधिकता वाले स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जल रहे हैं।

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि लकड़ी एवं कोयले की किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था की जाए।

“ठंड के इस मौसम में किसी भी नागरिक, विशेष रूप से बेघर लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा-ठेला चालकों तथा रात में ड्यूटी करने वालों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें

जिला प्रशासन आमजन से अपील करता है कि शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें।

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नव वर्ष 2026 के स्वागत एवं वर्ष 2025 के अंतिम दिन लोक शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम

जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई

रांची,29.12.2025 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार नव वर्ष 2026 के स्वागत एवं 31 दिसंबर 2025 को वर्षांत के अवसर पर लोक शांति, सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के संधारण हेतु व्यापक तैयारी की गई है। हर वर्ष की भांति इस बार भी विभिन्न डैम, नदी, जलाशय, जलप्रपात एवं पर्यटक स्थलों (जैसे दशम फॉल, जोन्हा फॉल, हुंडरू फॉल आदि) पर पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना है।

जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई

पिकनिक के दौरान बिना लाइफ जैकेट के बोटिंग, तैराकी या जलक्रीड़ा तथा रेस ड्राइविंग जैसी गतिविधियों से दुर्घटना की आशंका रहती है। साथ ही असमाजिक तत्वों द्वारा मौके का फायदा उठाने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारी ससमय अपने स्थल पर पहुंचकर सघन गश्ती एवं सक्रिय निगरानी सुनिश्चित करेंगे।

मुख्य सुरक्षा निर्देशः

1. नशे की हालत में वाहन चलाने वालों की सघन जांच की जाएगी। ऐसे वाहनों को जब्त कर चालक को पैदल जाने दिया जाएगा एवं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

2. रेस ड्राइविंग करने वालों के वाहन जब्त किए जाएंगे एवं पैदल जाने दिया जाएगा।

3. महिलाओं/युवतियों से छेड़छाड़ करने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी एवं पकड़े जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

4. जलाशयों में बोटिंग केवल लाइफ जैकेट पहनने वालों को ही अनुमति होगी। बिना लाइफ जैकेट के तैराकी/जलक्रीड़ा पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।

5. जलप्रपात के गिरने वाले स्थान के आसपास लोगों को जाने से रोका जाएगा, ताकि फिसलन से होने वाली दुर्घटना रोकी जा सके।

6. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बुंडू द्वारा दशम फॉल में स्थानीय गोताखोरों की व्यवस्था एवं खतरनाक स्थलों को चिन्हित कर निषेध व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

7. सदर अनुमंडल के सभी पुलिस उपाधीक्षक विभिन्न जलाशयों, डैम एवं तालाबों में गोताखोरों की तैनाती एवं खतरनाक स्थलों पर निषेध व्यवस्था करेंगे।

8. सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी अपने क्षेत्र के पिकनिक स्थलों पर समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

9. सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी प्रत्येक 02 घंटे में खैरियत प्रतिवेदन अनुमंडल पदाधिकारी/नगर नियंत्रण कक्ष को भेजेंगे।

यातायात एवं चिकित्सा व्यवस्थाः

यातायात पुलिस की पर्याप्त तैनाती की गई है।

सिविल सर्जन, रांची द्वारा 04 एम्बुलेंस चिकित्सकों, मेडिकल दल एवं जीवन रक्षक दवाओं सहित 31 दिसंबर 2025 की पूर्वाह्न 07:00 बजे से 01 जनवरी 2026 तक जिला नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त की गई हैं।

जिला प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन सभी नागरिकों से अपील करता है कि नव वर्ष का उत्सव सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं तथा सुरक्षा नियमों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में नियंत्रण कक्ष या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।

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माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन कल मोरहाबादी मैदान में JSSC CGL-2023 के चयनित अभ्यर्थियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र : नए साल से पूर्व युवाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अभ्यर्थियों को यह सौगात सौंपेंगे। यह आयोजन नए साल के पूर्व राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा उपहार साबित होगा

वित्त सचिव, श्री प्रशांत कुमार एवं डी.जी.पी. झारखंड, श्रीमती तदाशा मिश्रा ने भी कार्यक्रम के पूरी रूप रेखा को देखा और कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया

कार्यक्रम की सफलता एवं सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल मोरहाबादी का क्रमवार निरीक्षण किया

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं

रांची, 29.12.2025 – झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 में सफल अभ्यर्थियों को  30 दिसंबर 2025 को रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में एक भव्य समारोह में नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अभ्यर्थियों को यह सौगात सौंपेंगे। यह आयोजन नए साल से पूर्व राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा उपहार साबित होगा।

वित्त सचिव, श्री प्रशांत कुमार एवं डी.जी.पी. झारखंड, श्रीमती तदाशा मिश्रा ने भी कार्यक्रम के पूरी रूप रेखा को देखा और कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया।

आवश्यक तैयारियों का जायजा

कार्यक्रम की सफलता एवं सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल मोरहाबादी का क्रमवार निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मंच व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक तैयारियों का जायजा लिया।

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। चयनित अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि वे निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित हों तथा कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखें।

यह आयोजन राज्य सरकार की युवा सशक्तिकरण एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निम्न पदों में चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा

सहायक प्रशाखा पदाधिकारी,

प्रखण्ड कल्याण पदाधिकारी,

प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी,

श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक-सह-कानूनगो, कनीय सचिवालय सहायक, प्लानिंग असिस्टेंट।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनीया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर, श्री उत्कर्ष कुमार, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला नजारत उप समाहर्ता राँची, डॉ. सुदेश कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि यद्यपि संसदीय भाषण परंपरागत रूप से जन कल्याणकारी योजनाओं और शासन संबंधी उपायों पर केंद्रित रहा है लेकिन राष्ट्र का दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक स्वरूप विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सुधारों से अधिकाधिक निर्धारित होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तीसरा कार्यकाल, मोदी 3.0 की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया है।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक विज्ञान आधारित सुधारों को राष्ट्रीय परिवर्तन के केंद्र में रखकर परंपरा से एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस विधेयक को मोदी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के विकास, उद्योग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर इसके निर्णायक प्रभाव के बावजूद भारत ने कभी भी वैज्ञानिक प्रगति को सुधार के दायरे में नहीं रखा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शांति विधेयक को मोदी 3.0 के व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जहां सुधार के पिछले चरण ऐतिहासिक राजनीतिक और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े थे, वहीं मोदी 3.0 को उन क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए याद किया जाएगा जो भारत के तकनीकी और आर्थिक भविष्य को निर्धारित करते हैं।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक भारत के परमाणु क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार है जो सुरक्षा, संप्रभुता और जनहित के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण, स्वच्छ और सतत ऊर्जा की इसकी अपार संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा सुधार छह दशकों से अधिक समय तक अकल्पनीय था और प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी रूढ़ियों को तोड़ने और भारत की नीतियों को वैश्विक सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के अनुरूप ढालने की क्षमता के कारण ही संभव हो पाया है।

भारत की शांतिपूर्ण परमाणु उपयोग के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि डॉ. होमी भाभा के समय से ही भारत के परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना विकास, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि शांति विधेयक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा अनुप्रयोगों और उन्नत अनुसंधान जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए विस्तार को सक्षम बनाकर इस मूलभूत दर्शन को मजबूत करता है, जबकि शांतिपूर्ण इरादे से किसी भी विचलन को पूरी तरह से रोकता है।

उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और डेटा-आधारित अर्थव्यवस्था की मांगों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के अनिरंतर विद्युत उत्‍पादन के विपरीत परमाणु ऊर्जा निरंतर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति के लिए अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत जीवाश्म ईंधन और कोयले से दूर होता जा रहा है, परमाणु ऊर्जा उन्नत प्रौद्योगिकियों, डिजिटल बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षेत्रों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण गुणात्मक भूमिका निभाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2014 में लगभग 4.4 गीगावाट से बढ़कर आज लगभग 8.7 गीगावाट हो गई है और आने वाले वर्षों में इसमें काफी वृद्धि करने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना है जिससे परमाणु ऊर्जा भारत की लगभग 10 प्रतिशत विद्युत आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगी और राष्ट्रीय नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा में परमाणु विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिलाया, विशेष रूप से परमाणु चिकित्सा और आइसोटोप के माध्यम से कैंसर के निदान और उपचार में। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी जीवन रक्षक चिकित्सा उपायों में तेजी से योगदान दे रही है जिससे यह स्पष्ट होता है कि परमाणु विज्ञान आज मानव कल्याण और सामाजिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

भविष्य की तैयारियों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की ओर भी अग्रसर है, जो घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों और उभरते आर्थिक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि ये रिएक्टर पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक को वैज्ञानिक समुदाय, उद्योग जगत, स्टार्टअप और नवाचार तंत्र में व्यापक स्वीकृति मिली है, जो भारत के परमाणु क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मोदी 3.0 के सुधार-प्रथम दृष्टिकोण का उदाहरण है जिसके तहत विज्ञान आधारित नीतिगत निर्णय 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया X पर लिखा:

“दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”

 

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

 मिशन मोड में स्वास्थ्य सुधार और टीबी मुक्त भारत अभियान का आह्वान किया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का आकलन करने और प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, रोगी संतुष्टि बढ़ाने, नियामक निगरानी में सुधार करने और तपेदिक (टीबी) को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

श्री नड्डा ने सुदृढ़ औषधि विनियमन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर वितरण तक संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला की निरंतर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने विनियमन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया और रोगी संतुष्टि में सुधार, नियामक पर्यवेक्षण और अनुपालन को सुदृढ़ करने को एक सतत मिशन के रूप में लेने का आग्रह किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मुफ्त औषधि और मुफ्त निदान योजनाओं के संबंध में दोनों राज्यों को आपूर्ति श्रृंखला प्रणालियों को सुदृढ़ करने और निगरानी संबंधी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि मंत्रालय औषधि और निदान संबंधी खरीद में रसद, पारदर्शिता और जवाबदेही को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद के साथ मिलकर काम कर रहा है।

श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण निदान और समय पर परीक्षण प्रभावी स्वास्थ्य सेवा वितरण का आधर हैं और इन्हें प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि चिकित्सक नैदानिक ​​देखभाल के केंद्र में हैं, अस्पताल प्रशासन और नियामक अनुपालन के लिए समर्पित पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता है। रक्त बैंकों, अस्पताल प्रणालियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के विनियमन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टेलीमेडिसिन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने का, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में एक प्रभावी साधन है। उन्होंने दोनों राज्यों को विशेषज्ञ परामर्श तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए टेलीमेडिसिन प्लेटफार्मों को नियमित सेवा वितरण में अधिक गहराई से एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

श्री नड्डा ने टीबी उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए गहन स्क्रीनिंग, निदान, उपचार अनुपालन और पोषण संबंधी सहायता सहित जिला-विशिष्ट हस्तक्षेपों का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी उन्मूलन को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए और जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकों के लिए जागरूकता कार्यशालाओं का भी प्रस्ताव रखा और उन्हें नियमित समीक्षाओं के माध्यम से ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य परिणामों में सुधार, जवाबदेही सुनिश्चित करने और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए जन भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकारें कार्यान्वयन और परिणामों को मजबूत करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेंगी।

श्री नड्डा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में सुलभ, किफायती और आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हस्तक्षेप, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल, चिकित्सा शिक्षा विस्तार, व्यवहार्यता अंतर निधि और अवसंरचना सहायता तंत्र के माध्यम से केंद्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र कुष्ठ रोग प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को सभी आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र सुधारों के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण के तहत आने वाले दिनों में अन्य राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की परामर्श बैठकें आयोजित की जाएंगी।

बैठक का समापन औषधि विनियमन को सुदृढ़ करने, निदान में सुधार करने, अस्पताल प्रशासन को पेशेवर बनाने, चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार करने और टीबी मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को गति देने के साझा संकल्प के साथ हुआ, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहकारी संघवाद की भावना को बल मिला।

मध्य प्रदेश प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला; उपमुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी श्री देवेंद्र द्विवेदी; स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री तरुण राठी; और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की प्रबंध निदेशक डॉ. सलोनी सिदाना शामिल थीं।

छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव श्री अमित कटारिया; राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)  के प्रबंध निदेशक श्री रणबीर शर्मा; चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री रितेश अग्रवाल; और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित थे। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल; अतिरिक्त सचिव और प्रबंध निदेशक (एनएचएम) सुश्री आराधना पटनायक; भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री राजित पुन्हानी; और भारतीय महाऔषधि नियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी आदि शामिल थे।

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उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में 31 क्षेत्रों में 45 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलवाई

नई दिल्ली – भारत सरकर के उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख पहल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच), देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रभावी, समयबद्ध और मुकदमेबाजी से पहले निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 तक आठ महीने की अवधि के दौरान, हेल्पलाइन ने 31 क्षेत्रों में राशि वापिस दिलवाने के दावों से संबंधित 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए 45 करोड़ रुपये की राशि के वापिस दिलवाई है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुकदमेबाजी से पहले, एनसीएच विवादों के त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण समाधान को सक्षम बनाती है जिससे उपभोक्ता आयोगों पर बोझ कम होता है।

क्षेत्रवार निष्पादन

 -कॉमर्स क्षेत्र में शिकायतों और वापिस दिलवाई गई राशि की मात्रा और संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई जिसमें 39,965 शिकायतों के परिणामस्वरूप 32 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई। इसके बाद यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का स्थान रहा जिसमें 4,050 शिकायतें दर्ज की गई और 3.5 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई।

ई-कॉमर्स क्षेत्र से राशि वापिस दिलवाने से संबंधित शिकायतें देश के सभी हिस्सों से प्राप्त हुई जिनमें प्रमुख महानगरों से लेकर दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। यह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की राष्ट्रव्यापी पहुंच, सुगमता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

कुल वापिस दिलवाई गई राशि में 85 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले शीर्ष पांच क्षेत्रों, प्राप्त शिकायतों की संख्या और संबंधित वापिस दिलवाई गई राशि का विवरण नीचे दिया गया है:

क्रम संख्या क्षेत्र कुल शिकायतें कुल वापसी राशि ( रुपये में )
1 ई-कॉमर्स 39,965 320,680,198
2 यात्रा पर्यटन 4,050 35,222,102
3 एजेंसी सेवाएं 957 13,497,714
4 इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 635 11,725,231
5 एयरलाइंस 668 9,556,843
  कुल 46,275 39,06,82,088

 

इस उपलब्धि के पीछे का एक प्रमुख कारण साझेदारों की संख्या में विस्तार है जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की सामूहिक क्षमता में वृद्धि हुई है। यह संबंधित हितधारकों की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है जो उपभोक्ता कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए उनकी जवाबदेही की पुष्टि करता है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 की अवधि में 45 करोड़ रुपये की राशि की त्वरित वापसी न केवल हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और तत्परता दर्शाती है बल्कि समयबद्ध और परेशानी मुक्त शिकायत निवारण सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी दर्शाती है। यह मुकदमेबाजी से पहले के चरण में एक आवश्यक माध्यम के रूप में एनसीएच के महत्व को और मजबूत करता है जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

उपभोक्ता पर प्रभाव – उदाहरण:

राजस्थान के जोधपुर के एक उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खराब कुर्सियाँ प्राप्त करने के बाद शिकायत दर्ज कराई। समाधान चाहा, उपभोक्ता ने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन लगातार पाँच बार समान वापिस लेना रद्द कर दिया गया जिससे मामला अनसुलझा रह गया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के हस्तक्षेप से मामले का तुरंत समाधान हुआ और उपभोक्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई। उपभोक्ता ने हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे जैसे ठगे गए उपभोक्ताओं की सहायता करने के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन का बहुत-बहुत धन्यवाद… आपका बहुत-बहुत आभार।”

कर्नाटक के बेंगलुरु निवासी एक उपभोक्ता ने वार्षिक इंटरनेट प्लान खरीदा था और उसके खाते से राशि काट ली गई थी। हालांकि, कनेक्शन कभी लगाया ही नहीं गया। जब उसने ग्राहक सेवा से संपर्क किया तो उसे आश्वासन दिया गया कि 10 कार्य दिवसों के भीतर राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। कई बार कॉल करने और शिकायत करने के बावजूद, उपभोक्ता को चार महीने बाद भी राशि वापिस नहीं मिली। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के प्रभावी हस्तक्षेप से कंपनी ने तुरंत राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी। समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “यह एक अच्छा अनुभव रहा। अन्यथा, राशि वापिस पाना मुश्किल था।”

तमिलनाडु के चेन्नई के एक उपभोक्ता ने उड़ान से 96 घंटे से अधिक पहले अपना टिकट रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, उपभोक्ता के बार-बार अनुरोध करने पर भी कंपनी ने राशि वापिस नहीं लौटाई। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के त्वरित हस्तक्षेप से राशि वापिस लौटा दी गई। एनसीएच के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “एनसीएच को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद। मैं आपके प्रयासों से बहुत प्रसन्न हूं।”

ये मामले मुकदमेबाजी से पहले की प्रभावी व्यवस्था के रूप में एनसीएच की भूमिका को दर्शाते हैं जो उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी कार्यवाही के बिना सुलभ और समय पर शिकायत निवारण प्रदान करता है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन तक पहुंच

यह हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए मुकदमेबाजी से पहले ही शिकायतों के निवारण हेतु एक सुलभ केंद्र के रूप में उभरी है । उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतें एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम) के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं। यह एक सर्वसुलभ, सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम केंद्रीय पोर्टल है। इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध हैं,

जिनमें व्हाट्सएप (8800001915), एसएमएस (8800001915), ईमेल (nch-ca[at]gov[dot]in), एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल ( www.consumerhelpline.gov.in ) और उमंग ऐप शामिल हैं जो उपभोक्ताओं को लचीलापन और सुविधा प्रदान करते हैं।

विभाग उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है और सभी उपभोक्ताओं से अपने अधिकारों की रक्षा करने और समय पर निवारण प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन का उपयोग करने का आग्रह करता है।

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सीमा शुल्क मंजूरी सुविधा समिति की बैठक ने हितधारकों के विश्वास को मजबूत किया

नई दिल्ली – दिल्ली सीमा शुल्क विभाग द्वारा इंदिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे के कल्पना चावला सम्मेलन कक्ष में दिल्ली जोन के मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त की अध्यक्षता में सीमा शुल्क मंजूरी सुविधा समिति (सीसीएफसी) की बैठक आयोजित की गई ।

इस बैठक में एफएसएसएआई, प्लांट क्वारंटाइन और ड्रग कंट्रोलर सहित सहयोगी सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ कस्टम्स ब्रोकर, एसोचैम और जीजेईपीसी जैसे व्यापार संघों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सीमा शुल्क मंजूरी प्रणाली में शामिल हितधारकों की व्यापक विविधता को दर्शाते हुए, इसमें संरक्षक, आयातक, निर्यातक और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

विचार-विमर्श के दौरान, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा शुरू की गई हालिया नीति और डिजिटल पहलों का उल्‍लेख किया गया। जिसमें दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र के भीतर उनके कार्यान्वयन ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया। हितधारकों ने प्रमुख परिचालन संबंधी मुद्दे उठाए जिन पर रचनात्मक रूप से चर्चा की गई, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे व्यावहारिक परिणाम निकले जो इस सुविधा को मजबूत करेंगे और दक्षता में सुधार करेंगे। बैठक के पारदर्शी और सहयोगात्मक संचालन की व्यापक रूप से सराहना की गई, जिससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में विश्वास बढ़ा और निर्यात एवं आयात समुदाय में समन्वय को बढ़ावा मिला।

दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र ने व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और कानून के दायरे में व्यापार सुविधा को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र का मार्गदर्शक सिद्धांत पारदर्शितासुलभता और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है। ये मूल्य न केवल सीमा शुल्क के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि विश्वास निर्माण और यह सुनिश्चित करने के लिए भी आधार का काम करते हैं कि हितधारक प्रशासन के साथ खुलकर संवाद करने में सक्षम महसूस करें।

भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यापार में सुगमता एक निरंतर प्रक्रिया है जिसके लिए सीमा शुल्क विभाग, सहयोगी एजेंसियों, संरक्षकों और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। निर्णय लेने में पारदर्शिता, प्रक्रियाओं में सुगमता और संवाद एवं समस्या-समाधान के लिए खुली नीति को अपनाकर, दिल्ली सीमा शुल्क विभाग विश्वास, दक्षता और साझा उत्तरदायित्व की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है। सीसीएफसी बैठक के परिणाम इन मूल्यों को संस्थागत रूप देने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम हैं कि निर्यात, आयात और आयात (एक्जिम) समुदाय सुविधा ढांचे पर अपना भरोसा बनाए रखे।

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सीएक्यूएम ने 26.12.2025 को गुरुग्राम में एमसीजी के रखरखाव वाले 125 सड़क खंडों का व्यापक निरीक्षण किया

नई दिल्ली – दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने गुरुग्राम में 26.12.2025 को सड़क सफाई और झाड़ू लगाने के कार्यों की समीक्षा करने और गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) के रखरखाव वाले 125 सड़क खंडों की जांच के लिए एक व्यापक अभियान चलाया।

यह निरीक्षण मौजूदा श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के वैधानिक ढांचे के तहत निरंतर निगरानी और प्रवर्तन प्रयासों के हिस्से के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य धूल कम करने के उपायों के साथ जमीनी स्तर पर अनुपालन का मूल्यांकन करना और सड़क की धूल, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू), निर्माण और तोड़फोड़ से संबंधित (सी एंड डी) अपशिष्ट और खुले में जलाने के मामलों जैसे संबंधित मुद्दों की पहचान करना था।

आयोग ने गुरुग्राम में एमसीजी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 125 सड़क खंडों के निरीक्षण के लिए कुल 17 निरीक्षण दल गठित किए, जिनमें हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की 15 टीमें और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की दो टीमें शामिल थीं। निरीक्षण दलों द्वारा भू-टैग और समय-चिह्नित फोटोग्राफिक दस्तावेज एकत्र किए गए और समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के भाग के रूप में आयोग के समक्ष प्रस्तुत किये।

निष्कर्षों से पता चला कि निरीक्षण किए गए 125 सड़क खंडों में से 34 खंडों में धूल का स्तर अत्यधिक था, 58 खंडों में मध्यम स्तर की धूल थी, 29 खंडों में धूल की तीव्रता कम थी, जबकि केवल चार खंड पूरी तरह धूल रहित थे। अत्यधिक धूल वाले कई खंडों में ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं तोड़फोड़ अपशिष्ट का भारी संचय पाया गया। इसके साथ ही खुले में जलाने के कई मामले भी सामने आए, जो सड़क रखरखाव, अपशिष्ट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर प्रवर्तन में गंभीर कमियों को दर्शाते हैं।

गुरुग्राम के विभिन्न वार्डों और सेक्टरों में कई सड़क खंडों, जिनमें आवासीय कॉलोनियां, आंतरिक सड़कें और मुख्य मार्ग शामिल हैं जिन पर लगातार धूल जमा होने और कचरा फेंके जाने की समस्या पाई गई। कई स्थानों पर खुले में कचरा जलाने और अव्यवस्थित कचरे ने धूल की समस्या को और भी बदतर बना दिया जिससे तत्काल सुधारात्मक उपायों और संबंधित एजेंसी द्वारा कड़ी निगरानी की आवश्यकता महसूस की गई है।

आयोग ने पाया कि समग्र निरीक्षण परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि एमसीजी की ओर से जमीनी स्तर पर कार्यों को काफी मजबूत करने की आवश्यकता है। इसमें विशेष रूप से नियमित यांत्रिक सफाई, एकत्रित धूल और कचरे को समय पर उठाकर वैज्ञानिक तरीके से निपटाने, सक्रिय जल छिड़काव और धूल-नियंत्रण उपायों के संबंध में, और खुले में आग जलाने पर सख्त रोक लगाने के संबंध में ध्यान दिया गया है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सड़कों की स्थिति में स्पष्ट सुधार सुनिश्चित करने और धूल एवं कचरे के पुनः संचय को रोकने के लिए निरंतर और केंद्रित प्रयास आवश्यक हैं।

आयोग ने दोहराया कि धूल नियंत्रण और खुले में आग जलाने की रोकथाम के लिए वैधानिक निर्देशों और जीआरएपी उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने हेतु ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान पूरे एनसीआर में नियमित रूप से जारी रहेंगे। आयोग क्षेत्र में स्वच्छ, हरित और धूल रहित सड़कों को सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है।

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प्रधानमंत्री ने पवित्र प्रकाश उत्सव पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को नमन किया

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पवित्र प्रकाश उत्सव के अवसर पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को नमन किया। श्री मोदी ने कहा कि वे साहस, करुणा और बलिदान के प्रतीक हैं। श्री मोदी ने कहा, “उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए खड़ा होने की प्रेरणा देती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की दृष्टि पीढ़ियों को सेवा और निःस्वार्थ कर्तव्य करने का मार्गदर्शन देती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उनके सामने श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। वे साहस, करुणा और त्याग के प्रतीक रहे हैं। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए खड़ा होने की प्रेरणा देती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की दृष्टि पीढ़ियों को सेवा और निःस्वार्थ कर्तव्य करने का मार्गदर्शन देती है।

यहाँ इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब की मेरी यात्रा की कुछ तस्वीरें हैं, जहाँ मैंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के पवित्र जोरे साहिब का भी दर्शन किया था।

 

 

“ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਤਸਵ ‘ਤੇ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰਧਾ ਸਹਿਤ ਪ੍ਰਣਾਮ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਉਹ ਹਿੰਮਤ, ਹਮਦਰਦੀ ਅਤੇ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਕ ਹਨ।ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਸਾਨੂੰ ਸੱਚ, ਨਿਆਂ, ਧਰਮ ਲਈ ਖੜ੍ਹੇ ਹੋਣ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖੀ ਮਾਣ-ਸਨਮਾਨ ਦੀ ਰਾਖੀ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਸੇਵਾ ਅਤੇ ਨਿਰਸਵਾਰਥ ਕਰਤੱਵ ਦੇ ਰਾਹ ‘ਤੇ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਕਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ।

ਇਸ ਸਾਲ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿੱਚ ਤਖ਼ਤ ਸ੍ਰੀ ਹਰਿਮੰਦਰ ਜੀ ਪਟਨਾ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਮੇਰੀ ਯਾਤਰਾ ਦੀਆਂ ਇੱਥੇ ਤਸਵੀਰਾਂ ਹਨ, ਜਿੱਥੇ ਮੈਨੂੰ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਅਤੇ ਮਾਤਾ ਸਾਹਿਬ ਕੌਰ ਜੀ ਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਜੋੜਾ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਦਰਸ਼ਨ ਵੀ ਹੋਏ ਸਨ।”

 

 

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एआरओ रांची में अग्निवीर भर्ती : द्वितीय चरण की डिस्पैच प्रक्रिया जारी

इस चरण के अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 100 से 150 अभ्यर्थियों को विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों के लिए डिस्पैच किया जा रहा है। यह प्रक्रिया मध्य जनवरी तक लगातार चलती रहेगी

कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) से लगभग 800 से 900 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है

एआरओ रांची ने सभी शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से पूर्ण एवं तैयार रखें, ताकि रैली और आगे की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो

सेना भर्ती कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित सभी आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और निर्देशों पर ही भरोसा करें

रांची,28.12.2025 – आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (एआरओ), रांची के माध्यम से अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया का द्वितीय चरण सफलतापूर्वक जारी है। इस चरण के अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 100 से 150 अभ्यर्थियों को विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों के लिए डिस्पैच किया जा रहा है। यह प्रक्रिया मध्य जनवरी तक लगातार चलती रहेगी।

एआरओ रांची से झारखंड राज्य के चयनित अभ्यर्थियों को चरणबद्ध तरीके से भेजा जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण केंद्रों में समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके।

सेना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण डिस्पैच प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से प्रतिदिन छोटे-छोटे समूहों में किया जा रहा है।

इसके साथ ही, पिछली कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) से लगभग 800 से 900 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों की भर्ती रैली मार्च माह में गया (बिहार) में आयोजित की जाएगी।

एआरओ रांची ने सभी शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से पूर्ण एवं तैयार रखें, ताकि रैली और आगे की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सेना भर्ती कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित सभी आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और निर्देशों पर ही भरोसा करें।

यह भर्ती प्रक्रिया युवाओं के लिए भारतीय सेना में सेवा का सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उत्साहपूर्वक इसमें भाग ले रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित वीर बाल दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित वीर बाल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। श्री मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए उन 20 बच्चों से भी संवाद किया, जिन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। श्री मोदी ने कहा, “उनसे संवाद करना अत्यंत सुखद अनुभव रहा।”

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“नई दिल्ली के भारत मंडपम में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम में हमारे नौनिहालों के जोश और उत्साह ने नई ऊर्जा से भर दिया।”

“वीर बाल दिवस पर हमारे बेटे-बेटियों को शौर्य-पराक्रम और मानवता की शिक्षा देने वाली नाट्य प्रस्तुति ‘नए भारत के नन्हे रक्षक’ ने हृदय को छू लिया।”

“इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आज उनसे संवाद कर अत्यंत प्रसन्नता हुई है।”

“वीर बाल दिवस में सर्वोच्च बलिदान का गौरव है तो भविष्य की प्रेरणा भी है। औरंगजेब की क्रूरता के खिलाफ छोटी सी उम्र में वीर साहिबजादों ने जिस पराक्रम और शौर्य का परिचय दिया, वो देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।”

“अब भारत ने तय किया है कि आने वाले 10 वर्षों में देश को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह से मुक्त करना है। 140 करोड़ देशवासियों का यही संकल्प होना चाहिए।”

“आज की पीढ़ी ही देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। मुझे उनकी योग्यता और आत्मविश्वास पर पूरा भरोसा है।

 

“आज का युवा ऐसे समय में बड़ा हो रहा है, जब अवसर पहले से कहीं ज्यादा हैं। इसलिए उन्हें ही राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखकर हम नई पॉलिसी बनाने में जुटे हैं।”

“आज कार्यक्रम में युवाओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी।”

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर रांची में सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां तेज

रांची जोनल आईजी श्री मनोज कौशिक, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन द्वारा पुलिस पदाधिकारियों, दंडाधिकारियों एवं जवानों की संयुक्त ब्रीफिंग

रांची जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा शहर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है

जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो तथा सभी कार्यक्रम सुचारू रूप सें संपन्न हों

रांची,27.12.2025 – माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू 28 से 30 दिसंबर 2025 तक झारखंड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए रांची जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को पूर्णतया चाक-चौबंद बनाया गया है।

रांची जोनल आईजी श्री मनोज कौशिक, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन द्वारा 27 दिसंबर 2025 को पुलिस पदाधिकारियों, दंडाधिकारियों एवं जवानों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित की गई। इस ब्रीफिंग में सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया तथा सभी संबंधित पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंपी गईं।

प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान

ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति के रूट, कार्यक्रम स्थलों, सुरक्षा प्रोटोकॉल एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारियां प्रदान की गईं। विशेष रूप से सड़क मार्ग के प्रमुख चौराहों, कट्स एवं संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों को वायरलेस सेट के साथ मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो

राष्ट्रपति के आगमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से संबंधित रूटों पर नो फ्लाई जोन सहित अन्य आवश्यक प्रतिबंध लागू किए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो तथा सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हों।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन को दें

रांची जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सभी नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन को दें।

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