प्रधानमंत्री ने ‘सदैव अटल’ पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर उनके स्मृति स्थल ‘सदैव अटल’ पर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि अटल जी का जीवन जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित था तथा वे देशवासियों को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर आज दिल्ली में उनके स्मृति स्थल ‘सदैव अटल’ जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य मिला। जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित उनका जीवन देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।”

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काशी तमिल संगम 4.0 का प्रथम छात्र प्रतिनिधि समूह वाराणसी पहुँचा

नई दिल्ली – काशी तमिल संगम 4.0 के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए छात्रों से मुख्य रूप से मिलकर बना प्रथम प्रतिनिधि समूह 1 दिसम्बर 2025 को वाराणसी पहुँच गया। प्रतिनिधि समूह का रेलवे स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत किया गया, जिसमें माला पहनाना और औपचारिक स्वागत मंत्रोच्चार शामिल थे।

प्रतिनिधि समूह का प्रथम दर्शन श्री काशी विश्वनाथ धाम में निर्धारित है, जहाँ छात्रों को मंदिर की आध्यात्मिक परंपराओं और स्थापत्य विरासत को देखने का अवसर मिलेगा। दर्शन के बाद, यह समूह गंगा नदी में क्रूज पर सवार होगा, जो अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट की ओर प्रस्थान करेगा।

छात्र नदी से गंगा आरती का साक्षात्कार भी करेंगे, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव है। यह उन्हें नदी तट के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा।काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन नमो घाट पर होगा, जहाँ केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।

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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने संशोधित झरिया मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने धनबाद दौरे के दूसरे दिन झरिया कोयला क्षेत्र में पुनर्वास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) के अंतर्गत बेलगरिया और करमाटांड पुनर्वास स्थलों पर जनहितैषी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। श्री रेड्डी को बीसीसीएल गेस्ट हाउस में सीआईएसएफ कर्मियों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने  25 जून 2025 को संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) अनुमोदित किया था जिसका उद्देश्य झरिया कोयला क्षेत्र में खदानों में आग लगने, भूमि धंसने और पुनर्वास से संबंधित दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करना है। आरजेएमपी के अंतर्गत संकटग्रस्त क्षेत्रों से गैर-बीसीसीएल परिवारों का पुनर्वास राज्य सरकार के अधीन झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) अपने परिचालन क्षेत्रों के भीतर परिवारों के पुनर्वास के लिए जिम्मेदार है।

 

बेलगारिया पुनर्वास टाउनशिप

श्री रेड्डी ने बेलगारिया पुनर्वास टाउनशिप में, जेआरडीए के प्रशासनिक भवन और एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान का उद्घाटन किया जिसे निवासियों के लिए चौबीसों घंटे शासन, कुशल कॉलोनी प्रबंधन और समयबद्ध शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है।

श्री रेड्डी ने प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए सड़क चौड़ीकरण कार्य (चरण II और III) शामिल हैं; सुरक्षा में सुधार और पर्यावरण के अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए 500 एलईडी सौर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना; चरण IV, VI, VII और VIII के लिए शेष विकास कार्य; और प्राथमिक विद्यालय को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण सुविधाओं, स्वच्छता अवसंरचना, बिजली बैकअप और बेहतर शैक्षिक सुविधाओं के साथ एक आदर्श विद्यालय में उन्नत करना शामिल है।

जेआरडीए द्वारा विकसित सबसे बड़ी पुनर्वास बस्ती बेलगारिया को एक व्यापक पुनर्वास केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। आठ चरणों में 1,191 ब्लॉकों के साथ विकसित इस बस्ती में कुल 18,272 घर हैं, जिन्हें मजबूत नागरिक, सामाजिक और सामुदायिक बुनियादी ढांचे  है। जेआरडीए प्रशासनिक भवन और पीडीएस दुकान ₹1.23 करोड़ की परियोजना लागत से बनकर तैयार हो चुके हैं।

आजीविका सहायता की एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत, बीसीसीएल के सीएसआर कार्यक्रम के तहत पुनर्वासित परिवारों को 11 ई-रिक्शा वितरित किए गए, जिससे स्थायी आय सृजन और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

श्री रेड्डी ने बेलगारिया में की गई प्रगति की सराहना की और  परिवारों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ जीवन स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन, उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण और आजीविका-उन्मुख पुनर्वास के महत्व पर जोर दिया।

कर्मतांड पुनर्वास स्थल

संकटग्रस्त क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों के लिए बीसीसीएल द्वारा विकसित कर्मतांड पुनर्वास स्थल पर, श्री रेड्डी ने उल्लेख किया कि सुनिश्चित जल और बिजली आपूर्ति, चौड़ी आंतरिक सड़कों, स्ट्रीट लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था के साथ 4,008 घरों का निर्माण किया गया है।

करमाटांड में सभा को संबोधित करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) असुरक्षित आवास, खदानों में आग और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने व्यापक और जन-केंद्रित पुनर्वास दृष्टिकोण के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीसीसीएल ने आरजेएमपी के तहत कई पुनर्वास स्थल विकसित किए हैं, जिनमें करमाटांड एक प्रमुख पुनर्वास केंद्र के रूप में उभरा है।

मंत्री महोदय ने करमाटांड में स्थित मिडिल/हाई स्कूल का उद्घाटन किया, जिसे लोदना क्षेत्र से एक नए पुनर्निर्मित भवन में स्थानांतरित किया गया है। यह विद्यालय 1 नवंबर 2025 से कार्यरत है और आधुनिक साज-सामान और सुविधाओं से सुसज्जित उन्नत बुनियादी ढांचे के माध्यम से पुनर्वासित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है।

मंत्री ने करमाटांड में विविध-कौशल विकास संस्थान (एमएसडीआई-IV) का भी उद्घाटन किया। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) के सहयोग से 27 नवंबर 2025 से कार्यरत ये संस्थान ग्राहक सेवा कार्यकारी, ब्यूटीशियन और सहायक फिटर जैसे व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है, और बाजार की मांग के आधार पर इसके विस्तार की भी संभावना है।

श्री रेड्डी ने  कहा कि करमाटांड में मुफ्त ई-बस परिवहन सेवाएं, एक बाजार परिसर और शिकायत निवारण तंत्र पहले से ही मौजूद हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सुविधाओं, सामुदायिक बुनियादी ढांचे और आंगनवाड़ी केंद्रों को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।

अपनी यात्रा के दौरान, श्री रेड्डी ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) का उद्घाटन किया जो सीसीटीवी निगरानी, ​​आरएफआईडी-आधारित एक्सेस कंट्रोल, वाहन ट्रैकिंग सिस्टम और स्वचालित वजन सुविधाओं सहित उन्नत डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करता है, जिससे बीसीसीएल के संचालन में सुरक्षा, पारदर्शिता और परिचालन दक्षता में वृद्धि होती है।

श्री रेड्डी ने बीसीसीएल के दुग्ध सौर ऊर्जा संयंत्र का भी उद्घाटन किया, जो स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ संचालन के लिए बीसीसीएल की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ये सभी पहलें मिलकर झारिया कोयला क्षेत्र में खनन गतिविधियों से प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास, बेहतर जीवन स्तर, आजीविका के अधिक अवसर और सतत विकास सुनिश्चित करने के प्रति भारत सरकार, जेआरडीए और बीसीसीएल की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, स्वच्छ ऊर्जा और स्मार्ट बुनियादी ढांचे को शामिल करने वाला यह एकीकृत दृष्टिकोण संशोधित झारिया मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनर्वास प्रक्रिया को गति देते हुए जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, एलवीएम3 ने सबसे भारी पेलोड की सफलता के साथ विश्व स्तरीय विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर इसरो टीम को बधाई दी। केन्द्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती ताकत, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करते हुए लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत में एलवीएम3-एम6 मिशन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन में भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा अब तक के सबसे भारी उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत करता है और भारी-भारित प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने की उल्लेखनीय सफलता दर्शाता है।

अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसए) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने घोषणा की कि एलवीएम3-एम6 प्रक्षेपण यान ने सफल प्रदर्शन करते हुए ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित निम्न पृथ्वी कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है और एलवीएम3 का तीसरा पूर्णतः वाणिज्यिक मिशन है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन प्रक्षेपण यान की उत्कृष्ट विश्वसनीयता और विश्वस्तरीय प्रदर्शन को दर्शाता है, इससे यह वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हो गया है।

इस मिशन में उपयोग किया गया उपग्रह, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, अगली पीढ़ी के उपग्रह समूह का हिस्सा है। इसे विशेष उपयोगकर्ता उपकरणों की आवश्यकता के बिना, सामान्य मोबाइल स्मार्टफोन को सीधे अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक वाणिज्यिक समझौते के तहत शुरू किया गया है। यह उन्नत वैश्विक संचार मिशनों के लिए एक विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

लॉन्च व्हीकल मार्क-3 की सफल उड़ान के साथ, भारत ने एक बार फिर जटिल भारी-भरकम मिशनों में अपनी तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया है। इससे स्वदेशी प्रक्षेपण प्रणालियों में विश्वास मजबूत हुआ है और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

 

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भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में विकसित अपने पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत – समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया

नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजीने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएलकी 2 पीसीवी परियोजना के तहत 23 दिसंबर 2025 को पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी)– समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से युक्त इस पोत का आईसीजी बेड़े में शामिल होना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। यह तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा पोत है, जो तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा, 4,170 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 30 मिमी सीआरएन91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोटनियंत्रित तोपें, स्वदेशी रूप से विकसित एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली और एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पोत भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा पोत है जो डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता (डीपी1) से लैस है और इसे एफआईएफआई2/एफएफवी2 प्रमाणन प्राप्त है। यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर और पीसी लैब उपकरण, जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों को चला सकता हैं। यह उच्च परिशुद्धता संचालन करने, गाढ़े तेल से प्रदूषकों को पुनर्प्राप्त करने, संदूषकों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है।

दीक्षांत समारोह में डीआईजी वीके परमार, पीडी (एमएटी), आईसीजी; श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीएसएल और आईसीजी तथा जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आरंभ आदिवासी पहलों की जानकारी दी

नई दिल्ली – संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज जनजातीय समुदायों की गरिमा, पहचान और वास्तविक सशक्तिकरण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज का योगदान बहुत बड़ा है, फिर भी दशकों तक उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में ‘भारतीय जनजातीय समाज’ (शिक्षित एवं सशक्त भूमिका में आत्मनिर्भरता की ओर) पुस्तक के विमोचन और चर्चा के अवसर पर यह बात कही।

 

 

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आरंभ की गई कई पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहली बार जनजातीय समुदायों के तीन सदस्यों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान को मान्यता देने पर प्रधानमंत्री के जोर और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित करने का भी जिक्र किया जिसे देश भर के सभी जनजातीय समुदायों का सम्मान बताया।

 

 

श्री रिजिजू ने यह भी कहा कि जनजातीय समुदायों ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन समुदाय के कई लोग अपने ऐतिहासिक योगदान और अंदरूनी ताकत से अनजान हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने ऐसे विद्वानों के काम के प्रकाशन को बहुत महत्वपूर्ण बताया, लेखक की प्रशंसा की और इस पुस्तक को बढ़ावा देने के लिए समर्थन का आश्वासन दिया।

श्री रिजिजू ने कहा कि आज़ादी के लगभग 60-70 वर्ष तक, जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व ज़्यादातर प्रतीकात्मक ही रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय में अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि कुछ ही संगठन और व्यक्ति थे जो सच में जनजातीय समाज को समझते थे और ईमानदारी से उनके बीच काम करते थे। उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम को ऐसा ही एक संगठन बताया जिसने समुदायों के साथ रहते हुए सेवा की। उन्होंने धर्मांतरण के बहाने सेवा के नाम पर जनजातीय समुदायों के साथ जुड़ने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं उनकी संस्कृति को कमजोर करती हैं और उनकी मूल पहचान को खत्म करती हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनजातीय समाज के लिए पहचान और सम्मान सबसे ज़रूरी हैं।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम आईजीएनसीए के जनपद संपदा प्रभाग ने अपनी ज्ञानपथ श्रृंखला के तहत आयोजित किया। श्री रिजिजू इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य विशिष्ट अतिथि थे। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लाकड़ा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रही।

 

एनसीएसटी के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने जनजातीय समाज से जुड़े समकालीन मुद्दों, नीतिगत हस्तक्षेपों और स्थायी सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर बात की। डॉ. आशा लाकड़ा ने कहा कि पुस्तक के विषय सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के व्यापक ढांचे में हैं।

यह पुस्तक जानी-मानी समाजशास्त्री और शिक्षाविद डॉ. स्वीटी तिवारी ने लिखी है। उन्होंने अपने काम के बारे में बात करते हुए जनजातीय समाज की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा पर बात की। उन्होंने कहा कि सबसे मुश्किल समय में भी जनजातीय समाज की लौ कभी धीमी नहीं पड़ी। सामाजिक उपेक्षा की ओर ध्यान दिलाते हुए, उन्होंने कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब के बारे में तो बहुत बात होती है, लेकिन गंगा-दामोदर तहज़ीब के बारे में कम बात होती है। उन्होंने कहा कि दामोदर नदी झारखंड से बहती है, जो ऐसा राज्य है जहाँ बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी रहती है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शिक्षा सिर्फ़ साक्षरता नहीं है, बल्कि अधिकारों के बारे में जागरूकता है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जनपद संपदा प्रभाग के चेयरमैन प्रो. के. अनिल कुमार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने ज्ञानपथ श्रृंखला की अवधारणा को समकालीन बौद्धिक चर्चा के लिए मज़बूत मंच बताया। इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के श्री सुरेश कुलकर्णी भी मौजूद थे।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों ने हिस्सा लिया, और भारतीय जनजातीय समाज की गहरी, बहुआयामी समझ में योगदान दिया।

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युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के खेल पेशेवरों को तैयार करने हेतु व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की

नई दिल्ली –  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) ने आज युवा प्रतिभाओं को निखारने और   भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने हेतु एक व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने का प्लेटफॉर्म बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की।

‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और उसके स्वायत्त निकायों के लिए व्यापक इंटर्नशिप नीति’ कॉलेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मंत्रालय और उसके स्वायत्त निकायों में सार्थक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी, जिससे उन्हें खेलों से जुड़े शासन एवं  प्रशासन और संबंधित पेशेवर क्षेत्रों का सीधा अनुभव हासिल हो सकेगा।

केन्द्रीय  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यह पहल युवा प्रतिभाओं  को भारत की खेल यात्रा में सार्थक योगदान देने हेतु सशक्त बनाएगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “भारत के खेल इकोसिस्टम को बदलने के लिए कुशल पेशेवरों और युवा प्रतिभाओं के साथ-साथ मजबूत संस्थागत समर्थन की जरूरत है। इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के जरिए, हम अपने युवाओं के लिए खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन के दरवाजे खोल रहे हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके और वे खेल के जरिए राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक असर डाल पायें।”

नई नीति के तहत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) जैसे इसके मुख्य संस्थानों में हर वर्ष 452 इंटर्नशिप प्रदान की जायेंगी।

इस पहल का उद्देश्य खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन, खेल विज्ञान, डोपिंग-रोधी, प्रतियोगिता  प्रबंधन और एथलीट खेल सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिभाओं का एक मजबूत समूह तैयार करना है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति 2025 के उद्देश्यों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें युवा सशक्तिकरण, क्षमता विकास और खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने पर जोर दिया गया है।

यह नीति भारत के उस दीर्घकालिक विजन का भी समर्थन करती है, जिसमें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक ऐसा खेल इकोसिस्टम विकसित करना है जो बेहतरीन प्रदर्शन को बनाए रख सके और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सके।

डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि यह कार्यक्रम पेशेवर रूप से प्रशिक्षित जनशक्ति की बढ़ती जरूरत को पूरा करता है, क्योंकि भारत अपने खेल अवसंरचना का विस्तार कर रहा है, शासन संबंधी सुधारों को मजबूत कर रहा है और वैश्विक स्तर पर खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ा रहा है।

प्रशिक्षुओं को व्यवस्थित ऑनबोर्डिंग, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और नीतियां  बनाने एवं उन्हें लागू करने का वास्तविक अनुभव मिलेगा। वे खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप (टैग) जैसी प्रमुख पहलों में सीधे योगदान देंगे और साई स्टेडियम, क्षेत्रीय केन्द्रों (आरसी) और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों (एनसीओई) में अनुभव प्राप्त करेंगे।

ये इंटर्नशिप खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, प्रतियोगिता संचालन, मीडिया एवं संचार, कानूनी मामले, आईटी प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन और डोपिंग-रोधी सहित 20 कार्यात्मक क्षेत्रों में होंगी। खेल विज्ञान अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, आंकड़ों के विश्लेषण और एथलीटों को वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नाडा में रखे गए इंटर्न डोपिंग-रोधी  जागरूकता, कानूनी अनुपालन, मामलों का प्रबंधन और नीतिगत सहायता में सहयोग करेंगे, जबकि एनडीटीएल में काम करने वालों को नमूनों का विश्लेषण एवं शोध सहित उन्नत प्रयोगशाला-आधारित डोपिंग-रोधी प्रक्रियाओं का अनुभव मिलेगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी, डिजिटल जानकारी, रचनात्मकता और उद्यमिता  को बढ़ावा देना है। साथ ही, ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम तैयार करना है जो नीति, अवसंरचना विकास, मीडिया संपर्क, वैधानिक ढांचे, खेल विज्ञान और खेल प्रबंधन में योगदान दे सकें।

एक केन्द्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर वर्ष भर्ती के दो चक्र होंगे; जनवरी और जुलाई में, जिससे पारदर्शिता, समावेशन और योग्यता पर आधारित चयन सुनिश्चित होगा।

यह व्यापक इंटर्नशिप कार्यक्रम स्वच्छ खेल, पारदर्शी शासन और वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो निष्पक्ष खेल, एथलीटों के कल्याण और खेल प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

इस व्यापक इंटर्नशिप नीति के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह थर्मल पावर प्लांटों को बायोमास को-फायरिंग मानदंडों का पालन न करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है

नई दिल्ली – एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस पर्यावरण (तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के तहत अधिसूचित फसल अवशेषों से बने पेलेट या ब्रिकेट के सह-दहन से संबंधित अनिवार्य प्रावधानों का अनुपालन न करने के लिए जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2024-25 के अनुपालन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई है।

पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांट द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के अनुसार, सभी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले के साथ फसल अवशेषों से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का न्यूनतम 5% मिश्रण उपयोग करना अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सह-दहन की न्यूनतम सीमा 3% से अधिक निर्धारित की गई है ताकि पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) से बचा जा सके। इन वैधानिक प्रावधानों को धान के पराली के बहिर्गमन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। आयोग ने 2021 से कई वैधानिक निर्देश जारी किए हैं, जिनमें 17.09.2021 का निर्देश संख्या 42 भी शामिल है, और आवधिक समीक्षाओं और निरीक्षणों के माध्यम से कार्यान्वयन की लगातार निगरानी की है।

इन उपायों के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान निम्नलिखित थर्मल पावर प्लांटों की अनुपालन स्थिति असंतोषजनक पाई गई है, जिसमें बायोमास सह-दहन का स्तर निर्धारित सीमा से काफी नीचे रहा है। परिणामस्वरूप, संबंधित संयंत्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें ईसी लागू करने का प्रस्ताव है, जैसा कि नीचे विस्तार से बताया गया है:

  • तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल – वेदांता), मानसा, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹33.02 करोड़;
  • पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस), पानीपत, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹8.98 करोड़;
  • दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन (डीसीआरटीपीएस), यमुनानगर, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹6.69 करोड़;
  • राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (आरजीटीपीपी), हिसार, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹5.55 करोड़;
  • पीएसपीसीएल – गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट, लेहरा मोहब्बत, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹4.87 करोड़;
  • हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन, यूपीआरवीयूएनएल, उत्तर प्रदेश – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹2.74 करोड़।
  • इन 6 थर्मल पावर प्लांट परियोजनाओं में प्रस्तावित कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगभग ₹61.85 करोड़ है।

निर्देश संख्या 42 जारी होने के बाद से, आयोग ने थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) सहित सभी संबंधित हितधारकों के साथ इस मामले की गहन समीक्षा की। अनुपालन में भारी देरी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए, आयोग ने 2024 की शुरुआत में सीएक्यूएम अधिनियम, 2021 की धारा 14 के तहत 4 थर्मल पावर प्लांटों को नोटिस जारी किए, जिनका प्रदर्शन इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से लगातार खराब रहा है। आयोग ने 7 थर्मल पावर प्लांटों और सभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांटों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की चिंता भी व्यक्त की। यहां तक ​​कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि के लिए गैर-अनुपालन करने वाले थर्मल पावर प्लांटों (यदि कोई हो) के अभ्यावेदनों की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया।

संबंधित टीपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।

आयोग इस बात को दोहराता है कि तापसंधि संयंत्रों में बायोमास का सह-दहन, फसल अवशेषों के प्रभावी बहिर्गमन प्रबंधन और एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय है। आयोग सभी विनियमित संस्थाओं द्वारा समय पर और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक निर्देशों का कड़ाई से प्रवर्तन जारी रखेगा।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025” प्रदान किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित दूसरे “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” समारोह में प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। देश की चर्चित “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर उद्यमिता को गति प्रदान करने वाली उद्यमी विज्ञान टीम सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को “राष्ट्रीय विज्ञान टीम पुरस्कार 2025” या विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों के 24 वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को पुरस्कार प्रदान किए ।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना मोदी सरकार द्वारा की गई थी।

‘X’ पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विश्व को ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ की अवधारणा से परिचित कराने और ‘लैवेंडर’ को कृषि-उद्यमिता के एक नए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने में आपके योगदान को मान्यता देते हुए, प्रतिष्ठित #राष्ट्रीयविज्ञानपुरस्कार 2025 के लिए ‘टीम अरोमा’ को बधाई… हिमालय के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी आकर्षक आजीविका की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए।”

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत अरोमा मिशन टीम को हिमालयी क्षेत्र में सुगंधित फसलों, विशेष रूप से लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर के परिणामों में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके कार्य ने जम्मू और कश्मीर के किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार खोले, आवश्यक तेलों के आयात पर निर्भरता कम की और यह प्रदर्शित किया कि समन्वित वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

इस मान्यता से राष्ट्रीय पुरस्कारों के ढांचे के केंद्र में सहयोगात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख विज्ञान को स्थान मिलता है। जम्मू-कश्मीर के भदेरवाह और गुलमर्ग कस्बों से शुरू हुई लैवेंडर की खेती और उद्यमशीलता अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की नई संरचना के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य जीवन भर की उपलब्धियों से लेकर प्रारंभिक करियर की उत्कृष्टता और टीम आधारित नवाचार तक, विज्ञान के सभी क्षेत्रों में किए गए कार्यों को मान्यता देना है। इस वर्ष का समारोह पुरस्कारों का दूसरा संस्करण था। यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक संरचित, समकालीन प्रारूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान प्रदान करने के सरकार के इरादे को रेखांकित करता है।

प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया और कई विज्ञान श्री और विज्ञान युवा पुरस्कारों ने भौतिकी, कृषि, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान को मान्यता दी गई। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ 45 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ता भी शामिल हैं, जो अनुभव और उभरती प्रतिभा दोनों पर पुरस्कार के जोर को दर्शाता है।

विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती विज्ञान श्री श्रेणी के अंतर्गत डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), डॉ. के. थंगराज (जीव विज्ञान), प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), प्रो. महान एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान), और श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह विभिन्न विषयों में उनके निरंतर और क्षेत्र-परिभाषित कार्य को उजागर करते हैं।

विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिकों के लिए है। यह नवोन्मेषी योगदान देने वाले उभरते शोधकर्ताओं को सम्मानित करता है। पुरस्कार पाने वालों में भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुरहुद श्रीकांत मोरे; कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीश गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौथिया; जीव विज्ञान में डॉ. दीपा अगाशे और श्री देबरका सेनगुप्ता; रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास; भूविज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान; इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अर्कप्रवा बसु; गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल; चिकित्सा में डॉ. सुरेश कुमार; अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में श्री अंकुर गर्ग; और प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम शामिल हैं।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका रही। इन्हें कई श्रेणियों और विषयों में मान्यता मिली। डॉ. दीपा अगाशे और प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल जैसी शोधकर्ताओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह देश के वैज्ञानिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों में देश की वैज्ञानिक प्रतिभा की गहराई और विविधता झलकती है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया है।

राष्ट्रपति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की उपस्थिति को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और इसके सार्वजनिक उपयोग को दी जाने वाली राष्ट्रीय प्राथमिकता को सुदृढ़ करने वाला माना गया। पुरस्कारों के ढांचे का उद्देश्य आयु और उपलब्धि मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके श्रेणियों, विशेष रूप से युवा वैज्ञानिक वर्ग, में स्पष्टता लाना भी है।

अरोमा मिशन को मिली मान्यता के साथ, समारोह ने रेखाकिंत किया की कैसे सरकार समर्थित वैज्ञानिक कार्यक्रम, जब स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों और टीम वर्क के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएं, तो प्रयोगशालाओं और पत्रिकाओं से परे परिणाम दे सकते हैं। भारत अपने विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर प्रभाव से जोड़ने वाले एक मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी)-2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं की सूची

 

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मध्य प्रदेश के धार और बेतूल में पीपीपी मॉडल आधारित चिकित्सा महाविद्यालयों के भूमि पूजन में भाग लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज धार और बेतूल जिलों में अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के आधार पर दो नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण कार्य की शुरुआत के उपलक्ष्य में आयोजित भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। ये संस्थान राज्य में विकसित किए जा रहे चार पीपीपी आधारित चिकित्सा महाविद्यालयों (धार, बेतूल, कटनी और पन्ना) का हिस्सा हैं, जो मौजूदा जिला अस्पतालों से जुड़े हुए हैं ताकि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा वितरण दोनों को मजबूत किया जा सके।

 

इस मॉडल के आधार पर राज्य सरकार ने 25 एकड़ तक की भूमि पट्टे पर दी है, जबकि निजी सेवा प्रदाता चिकित्सा महाविद्यालय भवन, छात्रावास, प्रयोगशालाएं और आवासीय परिसरों सहित शैक्षणिक और नैदानिक ​​अवसंरचना का निर्माण करेंगे। संबद्ध जिला अस्पतालों का उन्नयन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानदंडों के अनुसार किया जाएगा, जबकि निर्बाध जन स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए वे राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेंगे।

श्री नड्डा ने मध्य प्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस अवसर को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। स्वास्थ्य मंत्री महोदय ने कहा कि पीपीपी मॉडल चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा वितरण के विस्तार के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली, जो कभी मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2017 से एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुज़री है, और अब निवारक, संवर्धक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल सेवा की ओर अग्रसर है।

श्री नड्डा ने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ, विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, गर्भावस्था से लेकर सुरक्षित संस्थागत प्रसव और टीकाकरण की सुविधा प्रदान करने में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित यू-विन पोर्टल की सफलता का भी उल्लेख किया, जो देश भर में लगभग 2.5 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.5 करोड़ बच्चों के लिए वास्तविक समय में टीकाकरण निगरानी को सक्षम बनाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री महोदय ने मध्य प्रदेश के बेतूल में अपने संबोधन के दौरान प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण देश में संस्थागत प्रसव लगभग 89 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में गिरावट वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक है। 40 करोड़ से अधिक लोगों की उच्च रक्तचाप की जांच की गई है, जिनमें से 6.80 करोड़ लोगों का निदान किया गया है और उनका उपचार चल रहा है। 40 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह की जांच की गई है, जिनमें से 4.60 करोड़ लोगों का निदान किया गया है और उन्हें उपचार मिल रहा है। कैंसर स्क्रीनिंग पहलों के माध्यम से लाखों लोगों की जांच की गई है, जिससे हजारों मामलों की शीघ्र पहचान हुई है। श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि व्यवस्थित स्क्रीनिंग और शीघ्र निदान से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व वृद्धि पर भी प्रकाश डाला:

  • चिकिस्ता महाविद्यालयों की संख्या वर्ष 2014 में 387 से बढ़कर वर्तमान में 819 हो गई है।
  • एमबीबीएस की सीटें दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 51,000 से 1.28 लाख से अधिक हो गई हैं।
  • सरकार वर्ष 2029 तक 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के मानव संसाधनों को मजबूती मिलेगी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने में केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नए चिकिस्ता महाविद्यालयों को जिला अस्पतालों से जोड़ने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में विशेषज्ञ और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं विस्तारित होंगी और उन्नत उपचार के लिए रोगियों को बड़े शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम होगी। यह पहल राज्य के “स्वस्थ जीवन समृद्धि का आधार” के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना और नर्सिंग, पैरामेडिकल और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना है।

इस समारोह में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइकले, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और राज्य स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य के अन्य प्रतिष्ठित नेता उपस्थित थे।

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संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आधुनिकीकरण को गति देने के लिए सभी डाक सर्किल के प्रदर्शन की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने भारतीय डाक विभाग को व्यावसायिक प्रगति के लिए सक्रिय और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया है, जिसमें उच्च वस्तु और सेवा कर भुगतान करने वाले व्यवसायों और संस्थाओं तक पहुंच बनाना शामिल है। उन्होंने प्रत्येक डाक मंडल में उत्पाद या सेवा में रुचि दिखाने वाले व्यक्तियों और कंपनियों को भुगतान करने वाले ग्राहक में बदलने और अर्जित राजस्व की दैनिक स्तर पर निगरानी के लिए समर्पित मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव टीमों की स्थापना की वकालत की। साथ ही उन्होंने डाक मंडल प्रमुखों से स्थानीय स्थिति, कारोबार और व्यावसायिक क्षमता अनुरूप वहां की क्षेत्रीय शक्ति का लाभ उठाकर अनुकूलित विकास रणनीतियां लागू करने का आह्वान किया।

संचार राज्य मंत्री प्रमुख डाक सर्किलों के कामकाज पर नज़दीकी नज़र रखने के लिए मासिक स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर रहे हैं। संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा निर्धारित त्रैमासिक निगरानी ढांचे के अंतर्गत इन बैठकों का नेतृत्व हर महीने डॉ. चंद्र शेखर स्वयं करते हैं ताकि इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित हो। इन समीक्षाओं का उद्देश्य समस्याओं की शीघ्र पहचान, त्वरित सुधार और सुनिश्चित करना है कि भारतीय डाक विभाग अपने सेवा और प्रदर्शन लक्ष्यों को निरंतर पूरा करे।

सभी 24 डाक सर्किलों से संबंधित चर्चा में परिचालन दक्षता, वित्तीय समावेशन, प्रचालन विस्तार और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत दृष्टिकोण के अनुरूप प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का उल्लेख करते हुए संचार राज्य मंत्री ने वितरण सेवा मजबूत करने और बचत एवं बीमा पॉलिसी विस्तारित करने के लिए संसाधनों के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया, जिससे देश की परिचालन संबंधी आवश्यकताएं पूरी की जा सकें। उन्होंने सभी प्रदर्शन मापदंडों – डाक और पार्सल संचालन, बचत और बीमा सेवाओं में – जन कल्याण के साथ ही वित्तीय समझदारी का संतुलन बनाए रखने का भी निर्देश दिया।

संचार राज्य मंत्री ने कर्नाटक सर्कल के बेहतर प्रदर्शन और नए ग्राहकों और बाजार पहुंच की सराहना की। उन्होंने पूर्वोत्तर सर्कल द्वारा एक लाख 54 हज़ार नए बचत खाते खोलने, डाक जीवन बीमा/ग्रामीण डाक जीवन बीमा के तहत 276 करोड़ रुपये जुटाने और सुनियोजित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तक संरचित पहुंच बनाने की भी प्रशंसा की।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि डाक नेटवर्क द्वारा 1.4 अरब से अधिक लोगों को कुशल सेवा प्रदान करना दायित्व और अवसर दोनों है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत डाक विभाग को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार संस्था बनाने में कुशल सेवा, डिजिटल सत्यनिष्ठा और वित्तीय समझदारी की अहम भूमिका है।

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काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय चरण की शुरुआत ; काशी से 300 छात्रों का दल तमिलनाडु रवाना

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय चरण के तहत वाराणसी से 300 छात्रों का एक विशेष दल तमिलनाडु के लिए रवाना हुआ। इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने छात्रों के दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। छात्रों के प्रस्थान से पहले काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में वाराणसी के विभिन्न विश्वविद्यालयों से चयनित 300 छात्र और 5 शिक्षक शामिल हुए। ओरिएंटेशन सत्र के दौरान छात्रों को इस यात्रा के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक लक्ष्यों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नोडल ऑफिसर प्रो. अंचल श्रीवास्तव ने काशी तमिल संगमम् की अवधारणा, उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं, बल्कि भारत की एकता और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने का अवसर है।

 

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष काशी तमिल संगमम् 4.0 की थीम तमिल करकलाम-आओ तमिल सीखें रखी गई है। इसके तहत छात्र तमिल भाषा, साहित्य, संस्कृति और शैक्षणिक परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे। दल में शामिल काशी के छात्र, तमिलनाडु के विभिन्न विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण करेंगे।

यह काशी तमिल संगमम् के इतिहास में पहली बार है जब काशी से छात्रों का एक संगठित समूह तमिलनाडु की यात्रा पर जा रहा है। यह पहल युवाओं के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देगी। यह पहल “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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अंतर-पीढ़ीगत संबंधों का उत्सव कार्यक्रम आयोजित

नई दिल्ली – केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 22 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में महल गेट स्थित पुराने तहसील परिसर में अंतर-पीढ़ीगत संबंधों का उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य विभिन्न पीढ़ियों के बीच भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन सुदृढ़ करना और सक्रिय तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था सुनिश्चत करना था।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं उनके माता-पिता और परिवार के वृद्धजनों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य परिवार में पीढ़ियों के बीच स्नेह, संवाद, सहयोग और परस्पर सम्मान की भावना प्रगाढ़ बनाना था। ऐसी पहल समाज को जोड़ने, मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाने और सामूहिक सामाजिक चेतना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम से अंतर-पीढ़ीगत सहभागिता, सामुदायिक भागीदारी और सक्रिय वृद्धावस्था को प्रोत्साहित कर समावेशी और बुजुर्ग-हितैषी समाज निर्मित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इससे रेखांकित हुआ कि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, ज्ञान और मूल्य, बच्चों और युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और जिज्ञासा के साथ मिलकर संतुलित, संवेदनशील और प्रगतिशील समाज के निर्माण में योगदान देते हैं।

कार्यक्रम में अंतर-पीढ़ीगत सद्भाव और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने से संबंधित कई तरह की गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवादात्मक सत्र, सामूहिक संकल्प और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के नेतृत्व में पदयात्रा हुई।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि वरिष्ठ नागरिक अनुभव, परंपरा और मूल्यों के संरक्षक के साथ ही राष्ट्र की अमूल्य शक्ति हैं। श्री वीरेंद्र कुमार ने सामुदायिक पहल और अंतर-पीढ़ीगत सहभागिता द्वारा सक्रिय, स्वस्थ और गरिमामय वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने मंत्रालय की कई महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय वयोश्री योजना भी शामिल है। इस योजना में वरिष्ठ नागरिकों को चलने-फिरने और देखने-सुनने से संबंधित सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे सम्मानपूर्वक स्वतंत्र और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकें। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि देश भर में अब तक 72 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। श्री वीरेंद्र कुमार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन एल्डरलाइन 14567 को और सुदृढ़ बनाने की बात कही। इस हेल्पलाइन पर बुजुर्गों द्वारा 27 लाख से अधिक कॉल किये गये हैं, जिससे उन्हें सहायता, मार्गदर्शन और आपातकालीन सहायता प्रदान की गई है। इसी कड़ी में देश भर में सांस्कृतिक, सामुदायिक और जनसंपर्क कार्यक्रमों द्वारा अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने और विद्यालयों में दादा-दादी दिवस मनाने का प्रावधान भी किया गया है।

छतरपुर के महल गेट स्थित पुराने तहसील परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, युवा और समुदाय के सदस्य सम्मान, सहभागिता और सहयोग की साझा भावना के साथ एकजुट हुए। सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, संवाद, शारीरिक गतिविधियां और सामूहिक प्रतिबद्धता के माध्यम से, इस आयोजन ने यह संदेश और सुदृढ़ किया कि एक स्वस्थ, समावेशी और करुणापूर्ण समाज निर्मित करने के लिए अंतर-पीढ़ीगत सद्भाव आवश्यक है।

विकसित भारत@2047 की भविष्य योजना अनुरूप, इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों की मार्गदर्शक और आदर्शवादी अहम भूमिका रेखांकित हुई। साथ ही इसने युवा पीढ़ी को वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों से सीखने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित किया। यह आयोजन वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के राष्ट्रीय उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और सामंजस्यपूर्ण, सशक्त और समावेशी भारत को बढ़ावा देने की दिशा में एक और सार्थक कदम रहा।

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विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव का ऊर्जा से भरपूर पेसा रन और दिनभर चले आदिवासी खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ शुभारंभ हुआ

नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आज से दो दिवसीय पेसा महोत्सव (23-24 दिसंबर 2025) का शुभारंभ प्रतिष्ठित रामकृष्ण बीच पर पेसा दौड़ के साथ हुआ। पेसा महोत्सव पंचायती राज मंत्रालय द्वारा मनाया जाने वाला एक वार्षिक उत्सव है, जो पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत जनजातीय समुदायों के स्वशासन और सशक्तिकरण का जश्न मनाता है, जिसमें पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है

सुबह आयोजित पेसा दौड़ में सभी आयु वर्ग के लोगों, विशेषकर आदिवासी युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौड़ को अर्जुन पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध भारतीय तीरंदाज सुश्री ज्योति सुरेखा वेन्नम ने पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, आंध्र प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान एवं पंचायती राज आयुक्त श्री मुत्यालाराजू रेवु, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं निदेशक श्री वी.आर. कृष्ण तेजा मैलावरपु, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. एम. सुधाकर राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर शुरू किया। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पेसा की भावना और अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सामुदायिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने तथा ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

पेसा रन के बाद पेसा महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन श्रीमती मुक्ता शेखर, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, डॉ. बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय और श्री वी.आर. कृष्णा तेजा मैलावरपु, आयुक्त एवं निदेशक (पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास), आंध्र प्रदेश सरकार ने किया। इस कड़ी में दिन भर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजन में शिल्प बाजार और खाद्य महोत्सव सहित प्रदर्शनी स्टालों में आदिवासी हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित किए गए। कबड्डी और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। कबड्डी के सेमीफाइनल मैच दिन भर चले और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं क्वालीफाइंग, एलिमिनेशन और मेडल राउंड के माध्यम से आगे बढ़ीं।

कार्यक्रम के पहले दिन के दूसरे भाग में कई पेसा राज्यों की टीमों ने आदिवासी खेलों का प्रदर्शन किया, जिसमें चोलो, येदु पेनकुलता, गेडी दौद, रस काशी, उप्पन्ना बारेलू, पिथूल, सिकोर, मल्लखंबा और चक्की खेल जैसे पारंपरिक स्वदेशी खेल प्रस्तुत किये गये। ये आदिवासी समुदायों की समृद्ध खेल विरासत को दर्शाते हैं।

इसके साथ ही अल्लूरी सीताराम राजू जिले के अंतर्गत दस पीईएसए ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजन की गईं, जिनमें ग्राम सभाओं को सुदृढ़ बनाने, भूमि हस्तांतरण रोकने, लघु वन उत्पादों के स्वामित्व, लघु खनिजों पर नियंत्रण, सामुदायिक संसाधनों और लघु जल निकायों के प्रबंधन, मादक पदार्थों और साहूकारी प्रथा पर नियंत्रण तथा रीति-रिवाजों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

पीईएसए महोत्सव में कल तकनीकी सत्र, महत्वपूर्ण पहल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण समारोह और समापन सत्र होंगे, जो पेसा दिवस उत्सव मनाते हुए, अनुसूचित क्षेत्रों में सहभागी शासन के संदेश को सुदृढ़ और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ पुस्तक का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने  नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति निवास में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने श्री देवनानी को पुस्तक लिखने के लिए बधाई दी और इसे एक समयोचित एवं महत्वपूर्ण योगदान कहा, विशेषकर तब जब देश पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी मना रहा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं में एक संस्था थे, जिनका जीवन और नेतृत्व सिद्धांतों एवं मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि उन्हें 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए उनसे सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने जनसंघ के दिनों की सुखद यादें साझा कीं, जिनमें आपातकाल से पहले कोयंबटूर में श्री वाजपेयी के लिए एक बड़े सार्वजनिक सम्मेलन का आयोजन करना शामिल था, यह अनुभव उनके जीवन में गहरा एवं अमिट छाप छोड़ा।

राष्ट्रनिर्माण में श्री वाजपेयी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी की दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को कई क्षेत्रों में रूपांतरित किया। मई 1998 में ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में सफल परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का निर्णायक नेतृत्व वैश्विक मंच पर भारत के आत्मविश्वास एवं संकल्प को प्रदर्शित करता है। उन्होंने अटलजी के प्रेरणादायक नारे “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” को भी याद किया, जो राष्ट्रीय शक्ति के लिए उनकी समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड राज्यों के गठन में श्री वाजपेयी की दूरदर्शिता को भी रेखांकित किया, जो क्षेत्रीय आकांक्षाओं तथा विकेंद्रीकृत एवं उत्तरदायी शासन की आवश्यकता की उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना भी श्री वाजपेयी की समावेशी विकास एवं सबसे दूरदराज़ लोगों के लिए न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इन दूरदर्शी निर्णयों के दूरगामी प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी हमेशा सुशासन पर बल देते थे, यही कारण है कि उनका जन्मदिवस ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और विद्युत क्षेत्र में सुधार जैसी महत्वपूर्ण पहलों का उल्लेख किया, जिन्होंने भारत के विकास के लिए मजबूत नींव रखी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और पुस्तक के लेखक श्री वासुदेव देवनानी सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए।

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सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान ने 25 ट्रांसजेंडरों को उद्यमिता प्रशिक्षण दिया

नई दिल्ली – 25 ट्रांसजेंडरों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का समापन हो गया है। यह प्रशिक्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा प्रायोजित और कौशल एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा आयोजित किया गया। नई दिल्ली के शास्त्री भवन स्थित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सम्मेलन कक्ष में आज इसके समापन समारोह की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत ने और सह-अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री मोनाली पी. ढाकाटे और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान की महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा ने की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सामुदायिक संगठन ट्वीट फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री अभिना अहेर भी समापन समारोह में उपस्थित रहीं।

 एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक श्री बृजेश कुमार ने राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा दिये गये प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। इसमें भाग लेने वाली प्रतिभागियों मानवी, ज़िया खान, आर्यन, राहत सिंह और कथा ने अपने प्रशिक्षण अनुभव सुनाए। नौकरी चाहने की बजाय रोजगार देने वाले बनने के लिए उद्यमिता को जीवन वृत्ति के रूप में अपनाने में रुचि दिखाते हुए, प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण मॉड्यूल के बाद दिए गए मार्गदर्शन की सराहना की। कुछ प्रतिभागी पहले से ही बेकरी, कृत्रिम आभूषण आदि के लघु व्यवसाय में शामिल हैं और वे इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्राप्त कौशल द्वारा इसे और आगे ले जाने की योजना बना रहे हैं। ट्वीट फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी सुश्री अभिना अहेर ने एनआईईएसबीयूडी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के इस संयुक्त प्रशिक्षण के लिए धन्यवाद देते हुए सुझाव दिया कि ऐसे प्रशिक्षण को अन्य मंत्रालयों और विभागों की कल्याणकारी योजनाओं में भी शामिल किया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत ने उद्यमिता को करियर के रूप में अपनाने और भारत सरकार द्वारा ट्रांसजेंडरों के सामाजिक स्तर को मुख्यधारा में लाने तथा उनके उत्थान के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह छोटा लेकिन काफी अहम प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण पूरे देश में आयोजित होने चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षित ट्रांसजेंडरों का डेटा एनआईईएसबीयूडी के पास रखने का सुझाव दिया और कहा कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों की नौकरी या स्वरोजगार में प्रगति की समय-समय पर निगरानी रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडरों के उद्यमिता विकास प्रशिक्षण का अगला बैच मुंबई में आयोजित करने की योजना है।

समापन समारोह में एनआईएसईबीयूडी की निदेशक डॉ. शिवानी डे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। समारोह में डीओएसजेई, एनआईएसईबीयूडी और ट्वीट फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित हुए।

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सीएक्यूएम ने 26वीं बैठक में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की और संशोधित जीआरएपी को स्वीकृति दी

नई दिल्ली – वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा ने 22.12.2025 को आयोग की 26वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में एजेंडे के निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और उनकी समीक्षा की गई:
  • आयोग की वार्षिक रिपोर्ट (2024-25) और लेखा परीक्षा के बाद वार्षिक खातों (2024-25) को अलग लेखा परीक्षा रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट के साथ संलग्न कार्रवाई योग्य बिंदुओं के साथ स्वीकार करना।
  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दिनांक 21.11.2025 की संशोधित श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) का अनुमोदन। आयोग ने इसकी रूपरेखा की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि जीआरएपी के उच्च चरणों के अंतर्गत किए जाने वाले उपायों में पूर्ववर्ती चरणों के अंतर्गत आने वाली कार्रवाइयों को शामिल किया जाए। साथ ही, वर्तमान मौसम के दौरान जीआरएपी के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई जिसमें विभिन्न चरणों के अंतर्गत की गई कार्रवाइयां और जीआरएपी के चरण-1 और 2 के अंतर्गत अतिरिक्त उपायों पर विचार-विमर्श शामिल है, जैसे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, यातायात में भीड़भाड़ को कम करना, लोगों के लिए परामर्श जारी करना और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि।
  • गाड़ियों के उत्सर्जन से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन के संबंध में दिनांक 10.12.2025 के कार्यालय आदेश का अनुमोदन। समिति की अध्यक्षता आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला करेंगे। समिति के कार्यों में उत्सर्जन के मूल्यांकन, स्वास्थ्य पर प्रभाव, स्वच्छ आवागमन से संबंधित रणनीतियां, इलेक्ट्रिक वाहन से संबधित तैयारी और नियामक उपायों को शामिल करते हुए संदर्भ की परिभाषित शर्तें शामिल हैं।
  • मोटर वाहन एग्रीगेटरों, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स संस्थाओं की ओर से शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए दिनांक 03.06.2025 के निर्देश संख्या 94 में संशोधन पर चर्चा हुई। आयोग ने हितधारकों के सुझावों पर विचार किया और 31.12.2026 तक मौजूदा बेड़े में बदलाव करके पेट्रोल से चलने वाले बीएस-VI दोपहिया वाहनों को शामिल करने की अनुमति देने के संबंध में प्रावधानों का प्रस्ताव रखा जबकि अन्य निर्दिष्ट श्रेणियों में 01.01.2026 से पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले वाहनों को शामिल करने पर प्रतिबंध जारी रखा गया है।
  • 2025 के दौरान धान की पराली जलाने की स्थिति की समीक्षा: आयोग ने पाया कि एकीकृत निगरानी और ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई के प्रयासों के कारण उनमें उल्लेखनीय कमी आई है। उनमें समग्र रूप से 2021 की तुलना में एनसीआर में लगभग 92% कमी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को 2026 के कटाई मौसम के लिए गेहूं की पराली जलाने के संबंध में निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया जिसके आधार पर वैधानिक निर्देश जारी किए जाएंगे।
  • प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की ओर से औद्योगिक इकाइयों को बंद करने और पुनः शुरू करने की स्थिति और शिकायतों/अभियोजन की स्थिति सहित प्रवर्तन कार्रवाइयों की समीक्षा।
  • निर्माण और तोड़फोड़ (सी एंड डी) के अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा: आयोग ने पाया कि दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों से निकलने वाली धूल पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण है और धूल पर नियंत्रण के उपायों के अनुपालन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। आयोग ने नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों की ओर से देखरेख की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर बल दिया और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि तोड़फोड़ से पैदा अपशिष्ट के संग्रहण केंद्र, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था की जाए, निर्माण की अनुमति देने से पहले अपशिष्ट के निपटान की जांच़-पड़ताल के लिए तंत्र स्थापित किया जाए तथा निर्माण और तोड़फोड़ से पैदा अपशिष्ट का पर्यावरणीय प्रबंधन किया जाए।
  • हाल में हुए न्यायिक निर्णयों के आलोक में गाड़ियों के जीवनकाल समाप्त होने (ईओएल) के मुद्दे की समीक्षा की गई। आयोग ने पाया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 17.12.2025 के आदेश के अनुसार, बीएस-IV और उसके बाद के उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के संबंध में दंडात्मक कार्रवाई से बचाव जारी है जबकि अत्यधिक प्रदूषण वाली बीएस-III और उससे नीचे के उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों के विरुद्ध कार्रवाई पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

आयोग ने विशेष रूप से शीत ऋतु के दौरान सभी क्षेत्रों में निरंतर कड़ी निगरानी, ​​समन्वित कानूनी कार्रवाई और वैधानिक निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की नियमित समीक्षा करने और जीआरएपी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई

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एसएआई शासी निकाय ने अनेक अवसंरचना विकास और उन्नयन परियोजनाओं को मंजूरी दी, केंद्रीय खेल मंत्री ने युवा खेल परिवेश को समर्थन देने के लिए एथलीट केंद्रित फैसलों पर जोर दिया

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के शासी निकाय (जीबी) की आज नई दिल्ली में हुई बैठक में देश भर में अनेक अवसंरचना विकास और उन्नयन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

डॉ मांडविया ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय खेल परिवेश अब अपनी युवावस्था में पहुंच चुका है। इसे हर संभव तरीके से मजबूत करना वक्त की जरूरत है ताकि इसका भविष्य उज्जवल हो। उन्होंने कहा, ‘‘हम आज जो फैसले कर रहे हैं वे एथलीट केंद्रित हैं। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों को उनकी जरूरत के अनुसार सर्वश्रेष्ठ अवसंरचना मिले ताकि हमने राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक के लिए पदकों का जो लक्ष्य सोचा है उस तक पहुंच सकें।’’

शासी निकाय ने जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सिफारिश की उनमें एसएआई नेताजी सुभाष दक्षिण केंद्र (एनएसएससी), बेंगलूरू के लिए पोलीग्रास पेरिस जीटी जीरो हॉकी टर्फ की खरीद शामिल है। एनएसएससी का उपयोग भारतीय पुरुष और महिला राष्ट्रीय और ‘ए’ हॉकी टीमों के प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर किया जाता है।

शासी निकाय भारतीय दिग्गज और उदीयमान निशानेबाजों के प्रशिक्षण केंद्र कर्णी सिंह शूटिंग रेंज (केएसएसआर) में मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक शूटिंग टारगेट की जगह लेजर टारगेट प्रणाली लगाने पर भी सहमत हुआ।

इन महत्वपूर्ण फैसलों के अलावा शासी निकाय ने गहन प्रशिक्षण और व्यापक एथलीट विकास के लिए एसएआई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) छत्रपति संभाजीनगर, एसएआई नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएसएनआईएस) पटियाला और एसएआई लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एलएनसीपीई) त्रिवेंद्रम में तीन बहुउद्देश्यीय हॉल के निर्माण को भी मंजूरी दी।

एसएआई एनसीओई छत्रपति संभाजीनगर में निर्मित हॉल में एक मौसमरोधी मुक्केबाजी प्रशिक्षण क्षेत्र, शक्ति और अनुकूलन क्षेत्र तथा वॉलीबॉल और बैडमिंटन के लिए इंडोर क्षेत्र होंगे। एसएआई एनएसएनआईएस पटियाला के हॉल से संस्थान की इंडोर प्रशिक्षण क्षमता बढ़ेगी तथा खेल प्रदर्शन, खेल विज्ञान सहयोग, अनूकूलन और स्वास्थ्यलाभ के लिए एक आधुनिक और समेकित परिवेश मिलेगा।

भारत के प्रमुख शैक्षिक संस्थान और उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र एलएनसीपीई त्रिवेंद्रम को समूचे साल निर्बाध प्रशिक्षण और शिक्षण गतिविधियां सुनिश्चित करने के लिए एक नया बहुउद्देश्यीय हॉल प्रदान किया गया है।

शासी निकाय ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) में 400 मीटर के 8 लेन वाले सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक के निर्माण को भी मंजूरी दे दी। निकाय ने इस बात पर गौर किया कि एसटीसी जलपाईगुड़ी एथलीटों के प्रशिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। इसने सीमित अवसंरचना के बावजूद क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर लगातार सराहनीय प्रदर्शन किया है।

एसटीसी जलपाईगुड़ी के अलावा एसएआई मध्य क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी) भोपाल में भी नया सिंथेटिक ट्रैक लगाने को मंजूरी दी गई। इस केंद्र में कई खेलों से जुड़े एथलीट प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह देश को लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट देता रहा है जिनमें दो ओलंपियन भी शामिल हैं।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी और विदेशी बैंकों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं

नई दिल्ली – केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एमएसएमई बैंकिंग उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी और विदेशी बैंकों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हुए देखना उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मजबूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों के रूप में उभरे हैं, जो भारत के विकास में सहयोग देने के लिए निजी और विदेशी बैंकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

 श्री गोयल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का सहयोग करने में बैंकिंग प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने  कहा कि समय पर और पर्याप्त ऋण तक पहुंच छोटे उद्यमियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि बैंकों ने एमएसएमई को संस्थागत वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें छोटे उधारकर्ता भी शामिल हैं, जो पहले ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर थे। अब वे व्यवसाय शुरू करने, संचालन का विस्तार करने और अपनी आजीविका में सुधार करने में सक्षम हुए हैं।

इससे पहले दिन में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ सातवां एफटीए है। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। यह उन देशों के साथ साझेदारी की ओर बदलाव को दर्शाता है जो पूरक शक्तियां और महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर प्रदान करते हैं।

श्री गोयल ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते आज व्यापक प्रकृति के हैं। इनमें न केवल वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच शामिल है बल्कि  नवोन्मेषकों, किसानों और उद्यमियों का सहयोग करने के लिए तकनीकी सहयोग भी शामिल हैं, जिससे उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि  न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में निवेश किए गए 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने कहा कि समझौते में निवेश प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने पर रियायतों को वापस लेने के प्रावधान शामिल हैं, जिससे यह केवल एक समझौता ज्ञापन के बजाय एक गंभीर और लागू करने योग्य प्रतिबद्धता बन जाती है।

मंत्री ने कहा कि इस समझौते से नवाचार, विनिर्माण और निर्यात में पर्याप्त निवेश होने की उम्मीद है, जिससे भारत न केवल न्यूजीलैंड बल्कि अन्य वैश्विक बाजारों के लिए भी एक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विकासों से सबसे ज्यादा लाभ एमएसएमई क्षेत्र को ही होगा।

उन्होंने हितधारकों से एफटीए से उत्पन्न होने वाले अवसरों को तेजी से प्राप्त करने और वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, तीन गुना और यहां तक कि चार गुना करने का लक्ष्य रखने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को लेकर पूरी तरह से महिला अधिकारियों की टीम द्वारा बातचीत की गई थी, जिससे यह महिलाओं द्वारा अंतिम रूप दिया गया पहला ऐसा समझौता बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की राजदूत भी एक महिला हैं, जो भारत के विकास पथ में महिलाओं द्वारा निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।

मंत्री ने यह भी कहा कि आज का यह दिन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसे संख्याओं के प्रबंधन में बैंकरों की भूमिका से जोड़ा जाता है जो अंततः एमएसएमई के लिए आर्थिक अवसर में बदल जाता है।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एमएसएमई, स्टार्टअप, संवर्धन केंद्र और युवा उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से मजबूत सहयोग मिलता रहेगा साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलता रहेगा।

छोटे उद्यमियों के लिए ऋण तक पहुंच को आसान बनाने के लिए की गई पहलों को याद करते हुए श्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के पहले वर्ष में शुरू की गई मुद्रा ऋण योजना और कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ऋण गारंटी उपायों का उल्लेख किया, जिसके तहत सरकार बिना किसी अतिरिक्त गारंटी के एमएसएमई ऋणों के लिए गारंटर बन गई। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुद्रा ऋणों का लगभग 70 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिया गया है। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया कि कैसे 10,000 रुपये के छोटे ऋण, जिन्हें बाद में पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर बढ़ाकर 20,000 रुपये और 50,000 रुपये कर दिया गया, ने रेहड़ी-पटरी वालों को शोषक साहूकारों से बचने और उनकी आजीविका में सुधार करने में मदद की है।

छोटे कर्जदारों को सहायता प्रदान करने में बैंकों के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री गोयल ने कहा कि ऐसी पहलें प्रधानमंत्री के ‘एमएसएमई’ यानी ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिकतम सहयोग’ के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत को लोकतंत्र, कानून के शासन, निवेशकों के साथ घरेलू व्यवहार और निर्णायक नेतृत्व की पेशकश करने वाले एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखती है। उन्होंने भारत के विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था और शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने का श्रेय यहां के लोगों और संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनुमानों के अनुसार भारत 2047 तक 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30-35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो आठ गुना वृद्धि का अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि बैंकों ने पिछले साल लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो ईमानदार उधारकर्ताओं को ऋण देने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एमएसएमई ऋण में लगभग 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है, जिसमें और भी अधिक अवसर हैं क्योंकि भारत किसानों, एमएसएमई, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए अपनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था का विस्तार कर रहा है।

बैंकों से एमएसएमई विकास का सहयोग करने के लिए उदारतापूर्वक और जिम्मेदारी से ऋण देने का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने कहा कि बैंक अब सशक्त हो गए हैं और उन्हें ईमानदारी और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने त्वरित और पारदर्शी ऋण अनुमोदन और वितरण, पूंजीगत व्यय, परिचालन व्यय और कार्यशील पूंजी के लिए पर्याप्त पूंजी की उपलब्धता और एमएसएमई को सक्रिय मार्गदर्शन देने को प्रोत्साहित किया ताकि वे विकास के दौरान सरकारी योजनाओं और पूंजी बाजारों का लाभ उठा सकें।

मंत्री ने कहा कि आज कई बड़ी कंपनियों ने अपनी यात्रा एमएसएमई के रूप में शुरू की थी और एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती ही अंततः भारत के भविष्य के विकास को निर्धारित करेगी। उन्होंने बैंकों से इस यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया और एमएसएमई और बैंकों को अविभाज्य जुड़वां बताया, जिनकी संयुक्त वृद्धि भारत को 2047 तक विकसित भारत की ओर ले जाएगी।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को एक बार फिर बधाई देते हुए अमृत काल के दौरान त्वरित, समावेशी और सतत विकास का आह्वान करते हुए वर्ष 2026 के लिए सभी बैंकरों और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

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Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजंत्री से जिला परिषद सदस्यों ने की मुलाकात

जिला परिषद सदस्यों ने क्षेत्र की जनसमस्याओं से कराया अवगत

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग का दिया आश्वासन

रांची, 24.12.2025  –  उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से 23.12.2025 को जिला परिषद सदस्यों ने समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान जिला परिषद सदस्यों ने उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री को अपने-अपने क्षेत्र की जन समस्याओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों से से अवगत कराया।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की मजबूत कड़ी हैं, और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना संभव है। उन्होंने जिला परिषद सदस्यों को जिला प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

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महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट भव्यता के साथ सम्पन्न

26 महिला पत्रकार खिलाड़ियों ने किया शानदार खेल का प्रदर्शन

ट्रस्ट के चेयरमैन शुभ नारायण दत्त ने की रांची प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कमिटी की प्रशंसा

रांची,23.12.2025 – सुधा एंड अरमान चैरिटेबल ट्रस्ट और रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट पूरी भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ. टूर्नामेंट में 26 महिला पत्रकार खिलाड़ियों ने शामिल होकर शानदार खेल का प्रदर्शन किया और साबित कर दिया कि बीट रिपोर्टिंग और पत्रकारिता के ऑफिसियल कार्यों के दवाब के बीच भी खेल के मैदान में महिला पत्रकार कहीं किसी से एक कदम भी पीछे नहीं हैं.

टूर्नामेंट में रांची के सांसद संजय सेठ और विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय रहे. मौके पर दोनों ही अतिथियों ने बैडमिंटन में दो दो हाथ भी आजमाए. अतिथियों में सुनील सहाय और प्रणव कुमार बब्बू शामिल हुए.

ट्रस्ट के चेयरमैन शुभ नारायण दत्त और सचिव मनोज श्रीवास्तव ने इस मौके पर रांची प्रेस क्लब की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने कम समय में प्रेस क्लब ने बेहतरीन तरीके से टूर्नामेंट का आयोजन किया है और आगे भी ट्रस्ट और प्रेस क्लब मिलकर कई नए प्रयासों का आगाज़ करेंगे. शुभ नारायण दत्त ने कहा कि महिला पत्रकारों के लिए परिवार के साथ पत्रकारिता को मैनेज करना काफी मुश्किल होता है और यह सबकुछ उन्होंने स्व सुधा सिन्हा जी को लगातार करते हुए देखा है.

इस मौके पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने कहा कि रांची प्रेस क्लब के लिए यह सुखद अवसर है कि झारखंड की राजनीति के दो बड़े चेहरे इस आयोजन शामिल हुए और दोनों ने प्रेस क्लब को सहायता करने की बात कही है. वहीं, प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि हमारा का प्रयास होगा कि अक्षमाशील समय के साथ संघर्ष करते पत्रकारों के लिए खेल कूद से लेकर संवाद, सेमिनार का आयोजन लगातार किया जाता रहे.

तनाव के बीच खेलकूद से पत्रकारों को होगा लाभ: सुबोध कांत सहाय

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि पत्रकारों को आज काम का काफी दवाब रहता है. ऐसे में प्रेस क्लब और ट्रस्ट के द्वारा खेलकूद का आयोजन कराना पत्रकारों के तनाव को कम करने वाला साबित होगा. उन्होंने कहा कि फील्ड में रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों को बेहतरीन बैडमिंटन खेलते देख काफी प्रसन्नता हो रही है. सुबोध कांत सहाय ने प्रेस क्लब के विकास के लिए झारखंड सरकार से भी हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए बातचीत और प्रयास करने की बात कही.

भारी संख्या में पत्रकार हुए शामिल, कार्यक्रम को बनाया सफल

महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट को सफल बनाने में प्रेस क्लब कमिटी से कुबेर सिंह, चन्दन भट्टाचार्य, विपिन उपाध्याय, प्रतिमा कुमारी, राजन बॉबी, चन्दन वर्मा, निर्भय कुमार, अमित कुमार, अशोक गोप , विजय कुमार गोप, सौरभ शुक्ला, संजय सुमन, संतोष सिन्हा समेत भारी संख्या में क्लब के पत्रकार सदस्य शामिल हुए. इनमें मुख्य रूप से आनंद मोहन, ॐ रंजन मालवीय, रेखा पाठक, कौरवी दत्ता, प्रदीप जायसवाल, शशि पाण्डेय, मोनू कुमार, पिंटू दूबे, किसलय सानू, अखिलेश सिंह, संतोष कुमार गुप्ता, सुशील सिंह मंटू, सत्यप्रकाश पाठक, अमलेश नंदन, अमरकांत, राकेश सिंह, मनोरंजन सिंह, विवेक कुमार, प्रदीप ठाकुर, आलोक सिन्हा, विकास कुमार, जगदीश सिंह, पंकज जैन, राजकुमार समेत कई पत्रकार शामिल हुए. आयोजन की सफलता में फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

विनर सिंगल्स
करिश्मा

रनर सिंगल्स
पूजा बोस

विनर डबल्स
मुस्कान और अदिति

रनर डबल्स
आशिया नजली और रूपम

प्रथम रनर अप
रोमिता और करिश्मा

द्वितीय रनर अप
जयंती और आरती

कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार रेखा पाठक ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने किया.

 

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रांची जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के सख्त पालन हेतु विशेष वाहन जाँच अभियान चलाया गया

अभियान के दौरान कुल 123 वाहनों की गहन जाँच की गई

जाँच में पाया गया कि 15 वाहनों के कागजात पूर्ण नहीं थे तथा कई वाहन ओवरलोडिंग में पाए गए। इन उल्लंघनों के लिए संबंधित वाहन मालिकों/चालकों पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंड अधिरोपित किया गया तथा कुल 2,87,550 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया

राँची, 23.12.2025  –  उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार सड़क सुरक्षा को मजबूत करने तथा यातायात नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला परिवहन विभाग द्वारा निरंतर विशेष जाँच अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज दिनांक 23.12.2025 को जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व एवं पर्यवेक्षण में रिंग रोड़, रातु क्षेत्र में सघन वाहन जाँच अभियान चलाया गया।

इस अभियान के दौरान कुल 123 वाहनों की गहन जाँच की गई, जिसमें वाहनों के पथकर (टैक्स), फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC), परमिट, ओवरलोडिंग तथा चालकों के अनुज्ञप्ति (ड्राइविंग लाइसेंस) आदि की बारीकी से पड़ताल की गई। जाँच में पाया गया कि 15 वाहनों के कागजात पूर्ण नहीं थे तथा कई वाहन ओवरलोडिंग में पाए गए। इन उल्लंघनों के लिए संबंधित वाहन मालिकों/चालकों पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंड अधिरोपित किया गया तथा कुल 2,87,550 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया।

इसके अतिरिक्त गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 03 वाहनों को जप्त कर सुरक्षार्थ रातु थाना में रखा गया है।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे। उन्होंने वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण रखें, ओवरलोडिंग न करें तथा यातायात नियमों का पालन करें, ताकि सड़कें सुरक्षित रहें और अनावश्यक दंड से बचा जा सके।

जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार ने बताया कि विभाग की टीम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के अभियान जारी रहेंगे, जिससे यातायात अनुशासन मजबूत हो तथा सड़क सुरक्षा में वृद्धि हो।

यह अभियान जिला प्रशासन की सड़क सुरक्षा एवं नियम पालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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भू-अर्जन से संबंधित मामलों की समीक्षात्मक बैठक

उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक

रैयतों को मुआवजा भुगतान में तेजी लाते हुए ससमय परियोजनाओं को पूरा करने का निर्देश

रांची, 23.12.2025 – रांची जिले में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं से संबंधित भू-अर्जन मामलों की समीक्षा को लेकर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा गया कि जिले में संचालित सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित कार्यकारी एजेंसियों एवं पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजनाओं में आ रही बाधाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने भू-अर्जन से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए रैयतों को देय मुआवजा राशि के भुगतान में तेजी लाने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुआवजा भुगतान में अनावश्यक विलंब से परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान उपायुक्त द्वारा एनएचएआई (NHAI) के माध्यम से रांची जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं की विशेष समीक्षा की गई। उन्होंने एनएचएआई के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मुआवजा मामलों का शीघ्र निष्पादन करते हुए रैयतों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि निर्माण कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।

साथ ही, उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सिरम टोली फ्लाईओवर सहित अन्य फ्लाईओवर परियोजनाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यकारी एजेंसियों को सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिया। उन्होंने इंटरचेंज परियोजना के अंतर्गत सभी प्रभावित रैयतों को निर्धारित दरों के अनुसार मुआवजा भुगतान शीघ्र करने तथा निर्माण कार्य में और तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

उपायुक्त ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित रैयतों के अधिकारों की रक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी रांची, सदर श्री उत्कर्ष कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री के.के. राजहंस, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय, एनएचएआई के संबंधित पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे

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उपायुक्त-सह जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में शहर को सुंदर, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में पूर्व निर्देशों की प्रगति की समीक्षा

आवागमन, अतिक्रमण, महिला सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों की समीक्षा, संबंधित अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

रांची, 23.12.2025 – रांची शहर को सुंदर, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति की समीक्षा हेतु आज दिनांक 23.12.2025 को उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने, यातायात व्यवस्था को सुचारु करने, बिजली के खंभों पर लटके अव्यवस्थित तारों को व्यवस्थित करने, अनावश्यक कट्स को बंद करने तथा महिला सुरक्षा को सुदृढ़ करने को लेकर पूर्व में दिए गए दिशा-निर्देशों पर की गई कार्रवाई की बिंदुवार समीक्षा की गई।

उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को और अधिक प्रभावी एवं सतत बनाया जाए, ताकि सड़कों, फुटपाथों एवं सार्वजनिक स्थलों पर आम नागरिकों को सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके। उपायुक्त द्वारा अतिक्रमण हटाने से पूर्व नोटिस देने का निर्देश दिया गया, उन्होंने संबंधित अंचल अधिकारियों को नगर निगम के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया।

बिजली के खंभों पर लटके अव्यवस्थित तारों के संबंध में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अब तक की गई पहल की समीक्षा करते हुए टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय को और मजबूत करने तथा निर्धारित समय-सीमा में बेतरतीब तारों को हटाने का कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका समाप्त हो और शहर की सौंदर्यात्मक छवि में सुधार हो।

यातायात व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने टोटो परिचालन को लेकर पुलिस अधीक्षक (यातायात) एवं जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ली तथा टोटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म, मार्ग निर्धारण, परिचालन अनुशासन एवं वाहन के पीछे चालक का नाम व मोबाइल नंबर बड़े अक्षरों में अंकित कराने के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।

महिला सुरक्षा को लेकर भी बैठक में विशेष रूप से समीक्षा की गई। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों एवं रात्रिकालीन समय में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए। उन्होंने नियमित पेट्रोलिंग, संवेदनशील स्थानों की पहचान एवं निगरानी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जिला प्रशासन द्वारा रांची शहर को अतिक्रमण मुक्त, यातायात की दृष्टि से सुगम, महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए सुरक्षित तथा सौंदर्यपूर्ण बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से निरंतर कार्य किया जा रहा है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में आयुक्त, रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता श्री राम नारायण सिंह, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री केके राजहंस, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय सहित बिजली विभाग, भवन निर्माण एवं एनएचएआई के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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