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कंप्यूटर या मोबाइल देखने से आंखों में होता है दर्द तो अपनाएं यह घरेलू नुस्खे

02.10.2022  – आंखें हमारे शरीर के सबसे नाजुक और सेंसिटिव हिस्सों में आती है, इस बात को तो आप सभी मानते ही होंगे। आँखों में थोड़ी सी चूक भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। वहीं कई बार इंफेक्शन और आंख में चोट लगने से आंखों में दर्द हो जाता है हालाँकि कुछ उपाय करने के बाद वह ठीक हो जाता है।

हालाँकि आजकल कंप्यूटर, टीवी और खासकर मोबाइल फोन के कारण स्क्रीन टाइम बढऩे से आंखों में हर समय दर्द और जलन की समस्या से अधिकतर लोग परेशान हैं, जिसमें लगभग हर उम्र के व्यक्ति शामिल है। वहीं कभी-कभी आंखों का दर्द इतना बढ़ जाता है कि सहना मुश्किल हो जाता है। हालाँकि कुछ घरेलू उपचार आपको राहत दिला सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

आंखों में दर्द होने के कारण :

* आंखों में इन्फेक्शन* बिना चश्मा लगाए तेज धूप में ज्यादा वक्त बिताना

* आंखों में खुजली और तेज मलने के कारण

* गलत चश्मा लगाना* ज्यादा देर कॉन्टेक्ट लेंसेस लगाना

* वायरल इंफेक्शन जैसे सर्दी जुकाम* डिहाइड्रेशन

* ज्यादा वक्त स्क्रीन के सामने रहना

आंखों में दर्द के घरेलू उपचार :

खीरा-जी दरअसल खीरा हमारे शरीर पर ठंडा प्रभाव डालता है। आंखों के ऊपर भी खीरा लगा सकते हैं। जी दरअसल यह आंखों को आराम प्रदान करता है और आंखों में किसी भी तरह की जलन और दर्द को कम करने में मदद करता है।

एलोवेरा जेल-एलोवेरा जेल का उपयोग आंखों को आराम देने के लिए कर सकते हैं। जी दरअसल एलोवेरा के अर्क से युक्त आई ड्रॉप आंखों में सूजन का इलाज करने में मदद कर सकता है। एलवोरा आंखों का रूखापन, दर्द और जलन को कम करने में काफी फायदेमंद है।

कैस्टर ऑयल-कैस्टर ऑयल कई आई ड्रॉप में इस्तेमाल किया जाता है। जी दरअसल यह आंखों के दर्द को आराम देता है और आंखों की जलन को कम करता है।

सेब का सिरका-यह आंखों में इन्फेक्शन की वजह से होने वाले दर्द को कम करता है। जी दरअसल इसमें जीवाणुरोधी गुण होते हैं। यह संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ता है। आप सेब के सिरके को पानी में मिलाकर कॉटन से आंखों की सिकाई करें। (एजेंसी)

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पानी पीकर भी हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकते हैं आप, जानिए क्या है सही तरीका

02.10.2022  –  पानी पीने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है। हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए पानी में विटामिन और मैग्नीशियम मिलाएं।हाई ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है पानीहर तीसरा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान है।

हाई बीपी लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है, इसे कंट्रोल करने के लिए हेल्दी डाइट के साथ-साथ उन्हें दवा का सहारा लेना पड़ता है। रक्तचाप की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन अधिक उम्र में यह हृदय की समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है। हाई बीपी को कंट्रोल करने के कई तरीके हैं, जिनमें सबसे अहम है हेल्दी लाइफस्टाइल।

नियमित रूप से व्यायाम करने से हृदय भी स्वस्थ रहता है और तनाव का स्तर कम होता है। स्वस्थ आहार के साथ पानी पीने और हाइड्रेटेड रहने से भी उच्च रक्तचाप को कम किया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है, जिससे दिल की समस्या होने की संभावना कम हो जाती है।

आइए जानते हैं हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए कितना पानी जरूरी है।निर्जलीकरण और रक्तचापसंपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हाइड्रेटेड रहना बहुत महत्वपूर्ण है। वेरवेल हेल्थ के अनुसार, निर्जलीकरण और रक्तचाप के बीच एक संबंध है। जब शरीर ठीक से हाइड्रेटेड होता है, तो हृदय प्रभावी ढंग से पंप करने में सक्षम होता है।

जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। डिहाइड्रेशन की स्थिति में हृदय को पंप करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे रक्त की मात्रा कम होने लगती है। जब रक्त की मात्रा कम होती है, तो रक्तचाप और हृदय गति दोनों उच्च हो जाते हैं।पानी और हृदय स्वास्थ्यकार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य में सुधार के लिए पर्याप्त पानी पीना महत्वपूर्ण है।

एक अध्ययन के अनुसार, कैल्शियम और मैग्नीशियम के साथ मिश्रित पानी पीने से उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। पानी के माध्यम से इन पोषक तत्वों का सेवन करने से शरीर इन्हें आसानी से अवशोषित कर सकता है।

विटामिन और मैग्नीशियम के लिए पानी में पुदीना, खीरा, नींबू और जामुन मिला सकते हैं।रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए पानी की मात्रा– महिलाओं के लिए- महिलाओं को प्रतिदिन लगभग 11 कप या 2.7 लीटर पानी का सेवन करना चाहिए। , पुरुषों के लिए- पुरुषों को रोजाना 15 कप यानी 3.7 लीटर पानी पीना चाहिए। (एजेंसी)

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स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये मेकअप रिमूविंग मिसटेक्स, जानें और बचें इनसे

01.10.2022 – मेकअप आज के समय में महिलाओं के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका हैं। महिलाएं अपनी नेचुरल स्किन को और भी ज्यादा ब्यूटीफुल दिखाने के लिए मेकअप का सहारा लेती हैं। मेकअप महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं के आत्मविश्वाश को भी बढ़ाने का काम करता है। हर महिला के लिए मेकअप को सही तरह से अप्लाई करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है उसे रिमूव करना।

मेकअप रिमूव करते समय महिलाएं अनजाने में कुछ आम गलतियां कर बैठती हैं जिसका खामियाजा उनकी त्वचा को भुगतना पड़ सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही मेकअप रिमूविंग मिसटेक्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपनी त्वचा को डैमेज होने से बचा सकती हैं।

आइये जानते हैं इन मिसटेक्स के बारे में…केवल फेशियल वाइप्स का इस्तेमाल करनाएक लंबे और थका देने वाले दिन के बाद यकीनन आप मेकअप रिमूव करने में बहुत अधिक समय और मेहनत नष्ट नहीं करना चाहेंगी। हो सकता है कि आप इसे जल्दी रिमूव करने के लिए फेशियल या क्लींजिंग वाइप्स का इस्तेमाल करती हों।

लेकिन यह पूरी तरह से आपके मेकअप को क्लीन नहीं करते। इतना ही नहीं, फेशियल वाइप्स के इस्तेमाल के कारण चेहरे के एक क्षेत्र से दूसरे हिस्से में गंदगी स्थानांतरित करने का जोखिम अधिक होता है। यदि आप अपने चेहरे को क्लींजर और पानी से धोना नहीं चाहती हैं तो ऐसे में मिसेलर वाटर का इस्तेमाल करें।

यह बेहद प्रभावी तरीके से चेहरे से मेकअप को हटा देता है। इतना ही नहीं, आपको बाद में अपना चेहरा धोने की आवश्यकता नहीं है।बहुत जोर से रब करनाकुछ महिलाएं आई मेकअप करते हुए काफी जल्दी में होती हैं और इसलिए वह मेकअप को क्लीन करने के लिए बहुत जोर से रब करती हैं।

अगर आप भी ऐसा ही करती हैं तो समझ लीजिए कि आप बहुत बड़ी गलती कर रही हैं। ध्यान रखें कि आंखों के आसपास की त्वचा बहुत ही डेलीकेट होती हैं। इसे आगे और पीछे रगडऩे से त्वचा में कोलेजन और इलास्टिन टूट सकते हैं, जिससे आप आंखों में लकीरें और महीन रेखाएं आ सकती हैं।

जिससे आप समय से पहले ही बूढ़ी दिखने लगेंगी। इतना ही नहीं, जब आप जोर से रब करके आईमेकअप रिमूव करती हैं, तो इससे आंखों में दर्द, जलन व रेडनेस आदि की समस्या भी उत्पन्न होती है। इसलिए अपने आई मेकअप को हटाते समय ज्यादा दबाव डालने से बचें।सही प्रोडक्ट का करें इस्तेमालमेकअप रिमूव करने के लिए अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रखकर किसी अच्छे ब्रांड के प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करें।

इसके अलावा हाईड्रेटिंग तत्वों से भरपूर मेकअप रिमूवर प्रोडक्ट का प्रयोग करने को ही तवज्जो दें। इससे आपकी स्किन फ्रेश और ग्लोइंग बनी रहेगी।लिपस्टिक को लास्ट में क्लीन करनाआपको लिप मेकअप बाद में रिमूव करना चाहिए या नहीं, यह आपके लिप कलर पर भी निर्भर करता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आपने बोल्ड लिपस्टिक को अप्लाई किया है तो ऐसे में बाद में लिपस्टिक को क्लीन करने की भूल ना करें। अगर आप ऐसा करेंगी तो मेकअप रिमूव करते समय लिपस्टिक आपके फेस पर फैल जाएगी और आपका काम बढ़ जाएगा। इसलिए लिपस्टिक को पहले क्लीन करें।इन्स्ट्रक्शन को नजरअंदाज करनायूं तो अधिकतर मेकअप रिमूवर एक ही तरह से काम करते हैं।

लेकिन फिर भी कुछ मेकअप रिमूवर ऐसे होते हैं, जो एक अलग तरह से प्रभाव डालते हैं और इसलिए आपको पैकेजिंग पर लिखे इन्स्ट्रक्शन को एक बार अवश्य पढऩा चाहिए। मसलन, अगर आप वाटरप्रूफ मेकअप का उपयोग कर रही हैं तो आपको विभिन्न प्रकार के मेकअप रिमूवर की आवश्यकता होगी।

इसके अलावा, यदि आपका मेकअप रिमूवर बोतल में आता है, तो उपयोग करने से पहले उसे हिलाना ना भूलें और निर्देश पढऩे के बाद ही इस्तेमाल करें।होममेड मेकअप रिमूवर को कहें नावैसे तो होममेड मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल त्वचा के लिए कैमिकल फ्री होता है। मगर, कुछ महिलाएं जानकारी के अभाव में घर पर मेकअप रिमूवर बनाते समय त्वचा को सूट ना करने वाली चीजों को भी इसमें एड कर लेती हैं।

जिससे त्वचा पर खुजली और जलन होने लगती है। साथ ही होममेड मेकअप रिमूवर से मेकअप उतारने के लिए त्वचा को काफी रगडऩा भी पड़ सकता है। जिससे स्किन ढीली होने लगती है।आखिरी में फेस वॉश ना करनायह तो हम सभी जानते हैं कि मेकअप क्लीन करने के लिए मार्केट में अलग मेकअप रिमूवर अवेलेबल हैं, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आप केवल मेकअप रिमूवर से ही पूरी तरह मेकअप को क्लीन कर सकती हैं।

अगर आप लास्ट में फेस वॉश नहीं करतीं, तो इससे मेकअप के कुछ पार्टिकल्स व गंदगी आदि चेहरे पर रह जाती है, जो वास्तव में उसे डैमेज कर सकती है। इसलिए पहले मेकअप को रिमूव करें और फिर फेस वॉश करें।

अगर संभव हो तो आप गर्म तौलिये से भाप लेने की भी कोशिश करें। यह आपकी स्किन को अतिरिक्त लाभ पहुंचाएगा। (एजेंसी)

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घुंघराले बालों की समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं ये घरेलू नुस्खे

01.10.2022 – आमतौर पर ज्यादातर महिलाएं अपने बालों को घुंघराले यानी कर्ली लुक देने की कोशिश करती हैं। जबकि कुछ महिलाओं के बाल प्राकृतिक रूप से घुंघराले होते हैं और उन्हें उलझाव, रूखापन और टूटने जैसी बालों की समस्याओं का काफी सामना करना पड़ता है। अगर आप भी अपने घुंघराले बालों के साथ इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो इनसे छुटकारा दिलाने में ये पांच घरेलू नुस्खे आपकी मदद कर सकते हैं। सेब का सिरका आएगा कामसेब का सिरका एक प्राकृतिक हेयर क्लेरिफायर के रूप में काम करता है और आपके घुंघराले बालों को मुलायम बनाने के साथ चमक देता है। लाभ के लिए सेब के सिरके और पानी की बराबर मात्रा को मिला लें और फिर अपने बालों को अच्छी तरह से शैंपू करके इस घोल से अपने बालों को धो लें। इसके बाद अपने सिर को ठंडे पानी से फिर से धो लें। महीने में दो बार इस नुस्खे को दोहराएं। अंडे का करें इस्तेमालअंडे प्रोटीन समेत कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो घुंघराले बालों का टूटना रोकने के साथ उन्हें मुलायम भी बना सकते हैं। लाभ के लिए एक कटोरे में एक अंडा फेंट लें। अब इसमें एक बड़ी चम्मच मेयोनीज और एक बड़ी चम्मच जैतून का तेल मिलाएं। इसके बाद इसे अपने बालों में लगाकर 30 मिनट के बाद सिर को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें। हफ्ते में एक बार इस प्रक्रिया को दोहराने से बड़ा लाभ मिलेगा। बीयर है प्रभावीबीयर घुंघराले बालों को आसानी से सुलझाने से लेकर इनके टूटने की संभावना कम होने जैसे कई लाभ मिल सकते हैं। लाभ के लिए सबसे पहले अपने बालों को शैंपू और पानी से धो लें। अब धीरे-धीरे अपने बालों पर बीयर डालें और इसे लगभग पांच मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद सिर को फिर से ठंडे पानी से धो लें। हफ्ते में दो बार इसका इस्तेमाल करें। इससे बालों की चमक और बढ़ जाएगी। एवोकाडो करेगा मददएवोकाडो में विटामिन- ई एक प्रमुख पोषक तत्व है। यह आपके घुंघराले बालों को मजबूती प्रदान करने के साथ उन्हें चमकदार बनाने में मदद कर सकता है। लाभ के लिए एक एवोकाडो को मैश करके इसके साथ दो बड़ी चम्मच दही मिलाएं। अब इस पेस्ट को अपने बालों में लगाएं और लगभग एक घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद सिर को पानी से धो लें और फिर हमेशा की तरह शैंपू करें। एलोवेरा जेल लगाएंएलोवेरा स्कैल्प के पीएच स्तर को संतुलित करता है, जिससे बालों का झडऩा रूकता है। इसके अतिरिक्त, यह बालों से डैंड्रफ दूर करने समेत इन्हें हाइड्रेट रखता है। लाभ के लिए हफ्ते में दो बार ताजे एलोवेरा जेल से अपने बालों में मालिश करें। फिर इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद हल्के शैंपू और गुनगुने पानी से सिर को धो लें। इस प्रक्रिया को अपनाने से आपके बाल चमकदार और मजबूत बनेंगे। (एजेंसी)

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मॉर्निंग वॉक के बाद इन व्यंजनों का करें सेवन

*आसान हैं इनकी रेसिपी*

30.09.2022 – मॉर्निंग वॉक पर जाने से आप फिट और स्वस्थ रहते हैं, लेकिन दौडऩे के ठीक बाद शरीर को प्रोटीन और कार्ब्स के संतुलित मिश्रण के साथ फिर से भरना महत्वपूर्ण है। ये पोषक तत्व मांसपेशियों को नुकसान से बचाने और आपको ऊर्जावान बनाए रखने में काफी मदद कर सकते हैं। आइये हम आपको पांच ऐसे व्यंजनों की रेसिपी बताते हैं, जिनका सेवन मॉर्निंग वॉक के बाद करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

फ्रूट योगर्टसामग्री: आधा कप ब्लूबेरी, आधा कप रसभरी, आध कप ग्रीक योगर्ट और एक चम्मच शहद। रेसिपी: सबसे पहले एक कटोरे में ग्रीक योगर्ट और शहद को डालकर अच्छे से मिलाएं और फिर इसमें सारी बेरीज मिलाएं। अब एक कटोरी फ्रूट योगर्ट का सेवन करें और बाकि मिश्रण को अन्य लोगों को परोस दें। ध्यान रखें कि इस फ्रूट योगर्ट को बनाते समय फ्रोजन बेरीज का इस्तेमाल नहीं करना है।

इसके लिए हमेशा ताजी बेरीज समेत शुद्ध शहद ही लें। उबले अंडे, एवोकाडो और शकरकंद का मिश्रणसामग्री: एक शकरकंद, एक एवोकाडो, दो अंडे, नमक और मिर्च। रेसिपी: मध्यम आंच पर अंडे उबालें, फिर इन्हें छिलकर इन्हें बीच में से काटें। इसके बाद एवोकाडो और उबली शकरकंद को छीलकर काटें। कितना सेवन करें: मॉर्निंग वॉक के बाद रोजाना आधा शकरकंद, एक या दो अंडे और एक चौथाई एवोकाडो के मिश्रण पर नमक और मिर्च छिड़ककर इसका सेवन करें।

नट बटर और बेरीज वाला ओपन सैंडविचसामग्री: व्हीट ब्रेड, आधा कप बेरीज जैसे ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी, अखरोट का मक्खन। रेसिपी: सबसे पहले एक ब्रेड की स्लाइस पर एक बड़ी चम्मच अखरोट का मक्खन फैलाकर लगाएं और फिर इसके ऊपर अपनी पसंदीदा बेरीज के टुकड़े रखें। बस फिर यह तैयार है। कितना सेवन करें: ब्रेड के ज्यादा से ज्यादा दो स्लाइस, दो बड़ी चम्मच अखरोट का मक्खन और एक छोटी मु_ी बेरीज का सेवन करें।

बादाम के मक्खन वाले बनाना पैनकेकसामग्री: आधा पका हुआ केला, एक अंडा, आधा कप गेहूं का आटा, एक छोटी चम्मच बेकिंग पाउडर, एक चौथाई कप दूध, एक चुटकी नमक और डेढ़ बड़ी चम्मच बादाम का मक्खन। रेसिपी: सबसे पहले एक कटोरे में सभी सामग्रियों को मिलाएं। इसके बाद एक फ्राइंग पैन को कुकिंग स्प्रे से चिकना करके इस पर मिश्रण की एक-दो करछी डालें, फिर इसे गोल्डन ब्राउन होने तक सेंके।

इसी तरह पूरे मिश्रण से पैनकेक बनाकर इन पर मेपल सिरप डालें और खाएं। स्प्राउट्स सलादसामग्री: आधा कप मूंग स्प्राउट्स, आधा कप उबले चने, आधा खीरा (कटा हुआ), थोड़े पालक के पत्ते, आधे नींबू का रस, नमक (स्वादानुसार), आधी छोटी चम्मच जीरा पाउडर, एक चौथाई छोटी चम्मच काली मिर्च का पाउडर।

रेसिपी: सबसे पहले अंकुरित साबुत मूंग को स्टीम करके एक कटोरे में डालें, फिर इसमें चने, खीरा, पालक, जीरा पाउडर, काली मिर्च का पाउडर और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं।

अंत में स्प्राउट्स सलाद में भुनी हुई मूंगफली डालकर इसे खाएं। (एजेंसी)

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सिर्फ विज्ञापन देखकर न खरीदें शैंपू, इन बातों का रखें खास ध्यान

30.09.2022 – कई लोग केवल विज्ञापन देखकर शैंपू खरीद लेते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। आजकल बाजार में कई तरह के शैंपू उपलब्ध हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर तरह का शैंपू आपके इस्तेमाल के लिए सही हो। इसलिए जब भी शैंपू खरीदने जाएं तो कुछ बातों का खास ध्यान रखें ताकि उसके इस्तेमाल से आपके बालों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

आइये जानते हैं कि शैंपू खरीदते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। बालों के प्रकार पर ध्यान देना है जरूरीहर किसी के बाल अलग-अलग प्रकार और बनावट के होते हैं और हर शैंपू आपके बालों के प्रकार के लिए उपयुक्त नहीं होता है।

हमेशा अपने बालों के प्रकार के अनुसार ही शैंपू चुनें। रूखे बालों वाले लोग मॉइश्चराइजिंग शैंपू का इस्तेमाल करें, जबकि तैलीय प्रकार के बालों वाले लोग सल्फेट और सैलिसिलिक एसिड युक्त शैंपू खरीदें। हल्के बालों के लिए नॉन-क्रीमी शैंपू, घुंघराले बालों के लिए हाई प्रोटीन शैंपू और कलर वाले बालों के लिए कलर-सेफ शैंपू चुनें।

अपनी जरूरत को समझेंआजकल बाजार में बालों से जुड़ी हर एक समस्या के हिसाब से शैंपू उपलब्ध हैं और यह सिर्फ आपके ऊपर निर्भर करता है कि समस्याओं का निवारण करते हुए कौनसा शैंपू आपके बालों को स्वस्थ और खूबसूरत बनाए रख सकता है। जैसे- डैंड्रफ से राहत दिलाने वाले एंटी-डैंड्रफ शैंपू और अगर आपके बाल ज्यादा टूटते हैं तो इसके लिए एंटी-हेयरफॉल शैंपू लेना चाहिए।

इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी जरूरत से हिसाब से ही शैंपू खरीदें। आपके शैंपू में नहीं होनी चाहिए ये सामग्रियांशैंपू खरीदने से पहले उसमें शामिल सामग्रियों को चेक करना जरूरी है। कई शैंपू बहुत ही हानिकारक रसायन से बने होते हैं और उनके इस्तेमाल से स्कैल्प पर जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हमेशा ऐसे शैंपू खरीदने चाहिए, जिसमें अल्कोहल, मिनरल ऑयल, सल्फेट, सोडियम क्लोराइड, फॉर्मलडिहाइड, प्रोपलीन ग्लाइकोल, आर्टिफिशियल रंग समेत आर्टिफिशियल सुगंध शामिल न हो। ये सामग्रियां स्कैल्प और बालों को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकती हैं।

अच्छी रिसर्च के बाद करें शैंपू का चुनावअगर आप किसी शैंपू की खरीदारी के लिए स्टोर पर जाने वाले हैं तो इससे पहले उस शैंपू के बारे में अच्छी तरह ऑनलाइन रिसर्च कर लें और उससे जुड़े कुछ रिव्यू पढ़ लें। इससे आपको दूसरों का अनुभव का पता चल जाएगा और आप शैंपू खरीदने के दौरान सही फैसला ले पाएंगे।

इसके अलावा, बेहतर होगा कि आप ऑनलाइन शैंपू खरीदने से बचें। एक्सपायरी डेट करें चेकशैंपू या फिर कोई अन्य हेयर केयर प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट को चेक करना जरूरी है। शैंपू सिर के साथ-साथ चेहरे और आंखों के संपर्क में भी आ जाता है।

ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आप एक्सरपायरी डेट चेक किए बिना इसे न खरीदें। एक्सरपायर शैंपू को लगाने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

इस तरह जिस शैंपू की एक्सपायरी डेट 7-8 महीने बाद हो, केवल उसे ही खरीदें। (एजेंसी)

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सबकॉन्शियस माइंड को मजबूत बनाए रखने के लिए अपनाएं ये पांच तरीके

21.09.2022 – सबकॉन्शियस माइंड यानी अवचेतन मन एक तरह की मार्गदर्शन प्रणाली है, जो हमारे पिछले अनुभव, विश्वास, याद और कौशल को इक_ा करती है। इससे मतलब है कि जो कुछ आपने देखा, किया या सोचा वह सब आपके सबकॉन्शियस माइंड में स्टोर हो जाता है। अगर आप जीवन में सफलता और आनंद पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपके सबकॉन्शियस माइंड का मजबूत होना जरूरी है। आइए सबकॉन्शियस माइंड को मजबूत बनाए रखने में मदद करने वाले पांच तरीके जानते हैं।

अच्छी चीजों की सराहना करें और अपनी संतुष्टी जताएंजीवन में आपके पास जो कुछ भी है, उसके लिए धन्यवाद करें और अच्छी चीजों की सराहना करें। हमेशा कुछ चाहने या चीजों को बदलने का प्रयास करने की बजाय अपने पास उपलब्ध चीजों के लिए खुश रहें।

इसके लिए आप एक पत्रिका में अपना आभार व्यक्त करें और अपने सबकॉन्शियस माइंड को यह विश्वास दिलाना शुरू करें कि आपको अधिक की आवश्यकता नहीं है और आपके पास जो कुछ भी है वह अभी के लिए पर्याप्त है। हमेशा खुद को सकारात्मक रखने का प्रयास करेंहर दिन खुद को आगे बढऩे के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करें, क्योंकि कुछ छोटी-छोटी बातें आपके जीवन में सकारात्मकता और खुशियां लाने में मदद कर सकती हैं।

नकारात्मक सोच या विचारों से बचें और अपने आप को सकारात्मक रखने की भरपूर कोशिश करें। इसके अलावा अपने लक्ष्यों, खुशी और सकारात्मक चीजों को लेकर अपनों से बातचीत करते रहें। इसी तरह सकारात्मक रहने वाले लोगों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का प्रयास करें। विजुअलाइजेशन का अभ्यास करेंकान और नाक जैसी अपनी कुछ इंद्रियों का इस्तेमाल करके विजुअलाइजेशन का अभ्यास करें।

जीवन दृष्टि पर स्पष्टता प्राप्त करने के लिए धीरे-धीरे चीजों की बनावट, रंग, स्पर्श और स्वाद को समझें और फिर तय करें कि आप अपने जीवन में क्या चाहते हैं। इसी तरह यह भी समझें कि आप अपनी जिंदगी कैसे जीना चाहते हैं और इसकी एक स्पष्ट छवि की कल्पना करें। यह तरीका आपको सटीक फैसला लेने में मदद कर सकता है।

खुद पर उंगली न उठाएंआपके आस-पास के कुछ लोग आपकी क्षमताओं पर संदेह कर आपको खुद पर उंगली उठाने पर मजबूर कर सकते हैं, लेकिन आपको इन सब से बचना चाहिए। नकारात्मकता से बचने के लिए आपको अपने स्वयं के निर्णयों पर ध्यान देना होगा। जब आप किसी काम से डरते हैं या असहज महसूस करते हैं तो अपने आप से सवाल करें कि आप ऐसा क्यों महसूस कर रहे हैं।

इसके बाद शांत होकर अपने काम को फिर से करने की कोशिश करें। नियमित रूप से मेडिटेशन करेंसबकॉन्शियस माइंड मजबूत करने के लिए एक्सरसाइज के रूप में मेडिटेशन करना भी अच्छा उपाय है।

रोजाना मेडिटेशन करने से मस्तिष्क के तंत्रिका मार्ग बदल जाते हैं, जो नकारात्मक कारकों को दूर करने में सहायता करते हैं। इसके लिए सबसे पहले जमीन या कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं और अपनी आंखों को बंद कर तेजी से ? का जाप करें या सकारात्मक सोचें। रोजाना इस प्रक्रिया को पांच-छह बार दोहराएं। (एजेंसी)

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स्विमिंग करते समय अपने बालों को क्लोरीन युक्त पानी से इन तरीकों से बचाएं

21.09.2022 – स्विमिंग सबसे अच्छी एरोबिक एक्सरसाइज में से एक है, जो न केवल आपके फिटनेस स्तर को बढ़ाती है बल्कि दिमाग और शरीर को भी आराम देती है। लेकिन पूल के पानी में क्लोरीन की मात्रा के कारण बालों को नुकसान हो सकता है। अगर आप रोजाना स्विमिंग करते हैं तो आइए आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बालों को क्लोरीन युक्त पानी के नुकसान से बचा सकते हैं।

अपने सिर पर तेल लगाएंअपने बालों को क्लोरीन युक्त पानी से बचाने के लिए तेल लगाना पहला और सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। तेल सिर के रोमछिद्रों पर एक सुरक्षित परत बना देता है, जिससे क्लोरीन युक्त पानी स्कैल्प में नहीं घुसता। इसलिए स्विमिंग से पहले अपने सिर पर पर्याप्त मात्रा में तेल लगाकर कुछ मिनट हल्के हाथों से मसाज करें।

इसके लिए आप नारियल के तेल या फिर जैतून के तेल का इस्तेमाल करें। नॉन क्लोरीन वाले पानी से अपना सिर गीला करेंअगर आप स्विमिंग से पहले सामान्य पानी से अपने सिर को गीला कर लेते हैं तो इसकी मदद से क्लोरीन युक्त पानी को अपने बालों में प्रवेश करने से रोक सकते हैं। तेल कोटिंग के साथ गीले बाल पूल के पानी से कम क्लोरीन को अवशोषित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बालों को किसी भी तरह का नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है।

लीव-इन कंडीशनर लगाएंलीव-इन कंडीशनर की मदद से भी आप अपने बालों को क्लोरीन के पानी से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। यह न केवल आपके बालों को पोषण देता है बल्कि पूल के क्लोरीन और अन्य हानिकारक रसायनों के खिलाफ सिर पर एक सुरक्षात्मक परत भी बनाता है। इसके अतिरिक्त, अगर आप किसी आउटडोर पूल में स्विमिंग करने वाले हैं तो अपने सिर पर सन प्रोटेक्टेंट हेयर स्प्रे का इस्तेमाल जरूर करें। स्विमिंग कैप पहनेंबालों को क्लोरीन युक्त पानी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्विमिंग कैप पहनना सबसे अच्छा तरीका है।

यह पूरे सिर को ढकता है और पानी को बालों के संपर्क में आने से रोकता है। साफ शब्दों में कहें तो इसकी मदद से आप अपने बालों को क्लोरीन युक्त पानी सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए बस अपने स्विम वियर की मैचिंग कैप पहनकर स्विमिंग करें। इससे आप स्टाइलिश लगेंगे। अपने सिर को माइल्ड क्लींजर से धोएंजब आप एक बार अपना स्विमिंग सेशन खत्म कर लें तो इसके बाद अपने सिर को सामान्य पानी से गीला कर लें।

इसके बाद अपने सिर पर एंटी-क्लोरीन शैंपू का इस्तेमाल करके अच्छे से धो लें। यह न केवल बालों और खोपड़ी से क्लोरीन के जमाव को हटाएगा बल्कि बालों को पोषण भी देता है। इसके अतिरिक्त, आप शैंपू के बाद लिव-इन कंडीशनर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। (एजेंसी)

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अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड के इस्तेमाल से त्वचा को मिल सकते हैं ये पांच फायदे

20.09.2022 – अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड (एएचए) प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक यौगिकों का एक समूह है, जो त्वचा को पोषित करने के साथ ही स्वस्थ रखने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। यही कारण है कि अधिकतर स्किन केयर प्रोडक्ट्स को बनाते समय अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड का इस्तेमाल किया जाता है।

आइए जानते हैं कि एएचए युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। एक शोध के अनुसार, एएचए त्वचा पर जमी गंदगी और कीटाणु को हटाने में मदद कर सकता है।

यही नहीं, त्वचा पर डेड स्किन सेल्स से छुटकारा दिलाने में भी यह कारगर है। यह एक प्रभावी एस्ट्रिंजेंट भी है, जो त्वचा को जवां और स्मूद बनाकर रोमछिद्रों को छोटा करने में मदद कर सकता है। इसलिए एएचए युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना लाभदायक है।

शोध के अनुसार, एएचए एंटी-एजिंग गुणों से समृद्ध होता है, जो त्वचा के कोलेजन उत्पादन को बढ़ाकर महीन रेखाओं और झुर्रियों को कम करने में मदद कर सकता है।

बता दें कि कोलेजन प्राकृतिक रूप से त्वचा में मौजूद होता है, जो त्वचा को टाइट और मुलायम रखता है, लेकिन अगर किसी कारणवश इसका उत्पादन कम हो जाए तो त्वचा पर समय से पहले बढ़ती उम्र के प्रभाव उभारने लगते हैं।अगर आप हाइपरपिग्मेंटेशन और किसी भी तरह के दाग-धब्बों आदि से छुटकारा चाहते हैं तो एएचए युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दें।

दरअसल, यह आपकी त्वचा को जवां बनाने के साथ-साथ रंगत को सुधारने में मदद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, यह मेलास्मा (त्वचा की बीमारी) का भी इलाज कर सकता है।

कई शोध के अनुसार, एएचए चार हफ्तों में मेलास्मा को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है। शोध के मुताबिक, एएचए मुंहासों से राहत दिलाने में भी काफी मदद कर सकता है। दरअसल, एएचए में एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज मौजूद होती हैं, जो त्वचा से अतिरिक्त तैलीय प्रभाव को कम करके मुंहासों को प्रभावी ढंग से दूर करने में काफी मदद कर सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, यह ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स से छुटकारा दिलाने में काफी सहयोग प्रदान कर सकता है।अगर सूरज के अधिक संपर्क में आने के कारण आपकी त्वचा जल गई है तो आप इसे ठीक करने के लिए भी एएचए युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

दरअसल, इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट और हीलिंग गुण शामिल होते हैं, जो सूरज के संपर्क में आने की वजह से जली त्वचा को जल्द ठीक करने में मदद कर सकते हैं। इसी के साथ यह त्वचा को हाइड्रेट रखने में भी सहायक साबित हो सकता है। (एजेंसी)

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आंखों के मेकअप का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं आई लैशेज

*कर्ल करते समय रखें इन बातों का ध्यान*

20.09.200 – चेहरे का आकर्षण बढाने में आंखों का बहुत महत्व होता हैं और इसलिए इसके मेकअप पर भी ध्यान देना जरूरी हो जाता हैं। मगर कुछ महिलाएं आंखों के मेकअप पर उतना ध्यान नहीं देती जितना कि देना चाहिये।

अगर आप आंखों का मेकअप नहीं करना चाहती हैं तो सिर्फ आईलैशेज लगाने से भी आंखों को खूबसूरत दिखा सकती हैं। आज के समय में आई मेकअप में आई लैशेज का इस्तेमाल खूब किया जाने लगा है।

आईलैशेज आपके चेहरे के आकर्षण को बढ़ाते हुए खूबसूरती को बढ़ाता हैं। महिलाएं आईलैशेज का इस्तेमाल करते समय कुछ गलतियां कर बैठती हैं जिसकी वजह से वह लुक नहीं मिल पाता हैं जिसकी चाहत होती हैं।

आज यहां हम आपको आईलैशेज को कर्ल करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए, उसकी जानकारी देने जा रहे हैं।सही आईलैशेज का करें चुनाव फॉल्स आईलैशेज ओकेजन के अनुसार तय करें।

यदि आप ऑफिस जा रहीं तो बहुत डेंस फॉल्स आईलैशेज यूज न करें, बल्कि आप आईलैशेज को काट कर अपनी ओरिजनल लैशेज के बीच में लगाएं। इससे ये ओवरपावर नहीं होंगी।

वहीं, शादी या फोटोशूट के लिए आपको हमेशा डेंस फॉल्स आईलैशेज यूज करना चाहिए।बेस मेकअप से पहले ही कर लें आईलैशेज को कर्ल ज्यादातर महिलाएं पहले बेस मेकअप करती हैं और फिर आंखों के मेकअप के बाद सबसे अंत में आईलैशेज को कर्ल करती हैं।

जिससे आंखों की खूबसूरती छिप जाती है। यदि आप चाहती हैं की आपकी आंखें सुंदर दिखें तो बेस मेकअप से पहले ही आईलैशेज को कर्ल कर लें।

ऐसा करने से आंखें की शेप के अनुसार मेकअप करने में आसानी होती है।लैशेज को पहले से रखें तैयार अगर आप हीटेड आईलैश कर्लर का इस्तेमाल करती हैं तो यह जरूरी है कि पहले आप अपनी लैशेज पर अतिरिक्त ध्यान दें।

इसके लिए आप पहले अपनी लैशेज को क्लीन करें और उसके पूरी तरह सूखने के बाद ही लैशेज पर हीटेड आईलैश कर्लर का इस्तेमाल करें।

दरअसल, अगर आपकी लैशेज गीली या नम होगी तो इससे कर्लर अधिक प्रभावी तरीके से काम नहीं करेगा और आपकी लैशेज फिर से वापिस अपने आकार में आ जाएगी।लैशेज को कर्ल करने से पहले मस्कारा ना लगाएं आंखों के मेकअप के लिए काजल और मस्कारा का अहम रोल होता है।

कुछ महिलाएं मस्कारा और काजल लगाने के बाद आई लैशेज को कर्ल करती हैं। ऐसा करने से लैशेज चिपचिपी हो जाती हैं और मस्कारा बाहर निकलने लगता है और आंखों का मेकअप खराब हो जाता है।

इसलिए लैशेज को कर्ल करने के बाद ही काजल और मस्कारा लगाएं।बहुत अधिक जोर ना लगाएं आई लैशेज को कर्ल करने के लिए बहुत अधिक जोर लगाने से आई लैशेज टूट जाती हैं या बाहर निकलने लगती हैं। इसलिए महिलाओं को कर्लर का इस्तेमाल हल्के हाथों से और बिल्कुल आराम से करना चाहिए।

साथ ही कर्लर पर हमेशा ऊपर की तरफ दबाव देना चाहिए।फॉल्स लैशेज उतारते समय सावधानीग्लू फॉल्स आईलैशेज को हमेशा गीले कॉटन से नम करके उतारें।

एक बार यूज होने के बाद दोबारा यूज न करें। वहीं मैग्नेटिक फॉल्स आईलैशेज को आप सूखे हाथों से उतारें और संभाल कर रखें, क्योंकि इन्हें आप दोबारा पहन सकती हैं। कोशिश करें कि लैशेज लगाकर मुंह धोने से बचें।

क्योंकि इससे आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।आईलैशेज कर्लर को गर्म करें कुछ लड़कियां आई लैशेज कर्लर का इस्तेमाल तो करती हैं लेकिन उन्हें इसे सही तरह इस्तेमाल करने का तरीका नहीं मालूम होता है, जिससे आंखों का मेकअप सुंदर नहीं दिखता है।

वास्तव में कर्लर का इस्तेमाल करने से पहले इसे ब्लो ड्रायर से हल्का गर्म कर लेना चाहिए। हल्के गर्म कर्लन से आईलैशेज अच्छी तरह कर्ल होती हैं और आंखों की खूबसूरती देखते ही बनती है। (एजेंसी)

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पाना चाहते हैं सिर की जुओं से छुटकारा, आजमाए ये घरेलू उपाय

16.09.2022 – लम्बे बालों की सही देखभाल करना बहुत जरूरी होता हैं क्योंकि मौसम में बदलाव से बालों में कई तरह की परेशानियां सामने आने लगती हैं। ऐसी ही एक समस्या हैं जुओं की जो चिंता का विषय भी बन जाता हैं। जूं एक परजीवी हैं जो सर के बालों में पनपती हैं। मनुष्य के सिर से खून चूसने वाला ये कीट किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। ये एक इंसान से दूसरे इंसान के सिर में बड़ी तेजी से चले जाते हैं। जीवनशैली में व्यक्तिगत साफ-सफाई की कमी के कारण भी जुएं पड़ जाती हैं और खुजली की समस्या बढ़ जाती हैं। इसकी वजह से आपको दूसरों के सामने शर्मिंदा होना पड़ सकता हैं। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो सिर की जुओं से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होंगे। आइये जानते हैं इन उपायों के बारे में…

प्याज का रस

प्याज का रस जुएं कि समस्या को खत्म करने में कारगर साबित हो सकता है। सबसे पहले आप जरूरत के अनुसार प्याज के रस को लें उसके बाद इसे बालों में अच्छे से जड़ से लगाएं पर लगभग तीन से चार घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद धीरे-धीरे कंघी कर जुवें को निकाल लें। और बालों को किसी भी माइल्ड शैम्पू से अच्छे से साफ़ करें। आप हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार ऐसा कर सकते हैं।

ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल यानी जैतून के तेल से जुओं का दम घुट जाता है और वो मर जाते हैं। इस उपाय से जुएं दोबारा नहीं आते हैं। आप सौंफ के तेल और जैतून के तेल को मिलाकर भी लगा सकते हैं। ये जुओं को खत्म करने का असरदार तरीका है। जैतून के तेल से बालों और स्कैल्प को भी फायदा होगा।

लहसुन

जुएं कि समस्या को खत्म करने के लिए लहसुन काफी हद तक कारगर साबित हो सकता है। इसके लिए आप लहसुन कि लगभग पांच से सात कलियाँ लें, फिर इसे अच्छे से पीस लें। पीसने के बाद इनमें नींबू के रस को भी मिलाएं। उसके बाद बालों पर इसी पेस्ट को लगा लें। कम से कम 25 मिनट तक इस पेस्ट को लगा रहने दें। फिर किसी भी माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। इसके बाद आप बालों में कोई भी बेबी ऑइल को भी यूज़ कर सकते हैं। ये बालों में जुएं कि समस्या को कम करने में कारगर साबित होगा।

नीम

जब सिर में ढेर सारी जुंए पड़ जाएं, तो एंटी-बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक नीम की शक्ति पर भरोसा करें। एक कप नीम की पत्तियों को उबालें और पेस्ट बना लें। इसे अपने बालों पर लगाएं और 2 घंटे के लिए छोड़ दें। फिर इसे गर्म पानी से अच्छी तरह से धो लें। नीम में एक प्रकार का कीटनाशक पाया जाता है, जो जूं को नष्ट करता है।

टी ट्री ऑइल

टी ट्री ऑइल कि बात करें तो इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल जैसे अनेकों तत्त्व होते हैं जो कि जुवों को नष्ट करने में आपकी सहायता कर सकते हैं। इस तेल को आप हल्का सा गर्म करके अपने बालों में जड़ से लगा लें उसके बाद हलके हाथों से कंघी करें, इसकी महक से जुवें बेहोस हो जाते हैं और आसानी से सिर से निकल जाते हैं। हफ्ते में दो बार आप टी ट्री ऑइल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये आपके बालों के ग्रोथ के लिए भी अच्छा साबित होगा।

नींबू और अदरक

दो चम्मच नींबू के रस में एक चम्मच अदरक का पेस्ट मिलाएं और इसको अपने सिर में 20 मिनट के लिए लगा रहने दें और सूख जाने पर ठण्डे पानी से धो लें। यह प्रक्रिया हफ्ते में दो बार करने से बेहतर परिणाम मिलता है।

विनेगर

बालों में डिस्टिल्ड विनेगर का इस्तेमाल करें और कुछ देर इसे यूहीं बालों में लगा रहने दें, लगभग 25 मिनट बाद आप अपने बालों को अच्छे से गुनगुने पानी से धो लें। आप अपने मन के अनुसार एप्पल साइडर विनेगर का भी यूज़ का सकते हैं। इसे हफ्ते में लगभग दो से तीन बार लगाने से सारे जुवें खत्म हो जाएंगें। और आपके साफ़ भी हो जाएंगें।

तुलसी

तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाएँ और इसे सिर में लगा कर 20 मिनट तक सूखने दें। सूख जाने पर सिर को धो लें तथा सोने से पहले भी कुछ पत्तियों को तकिए के नीचे रखें। जूं की दवा के लिए तुलसी औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। (एजेंसी)

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क्या आपको भी रहती हैं बदन दर्द की समस्या

*इसके पीछे छुपे होते हैं ये कारण*

16.09.2022 – देखा जाता हैं कि पूरे दिन काम करने के बाद लोगों को बदन दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ता हैं जो कि स्वाभाविक हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता हैं कि आपको बिना किसी शारीरिक श्रम के भी बदन दर्द की समस्या का सामना करना पड़ जाता हैं।

ऐसे में लोग बेधड़क बिना सोचे-समझे पेनकिलर का सेवन करते नजर आते हैं जो कि सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं।

ऐसे में आपको सबसे पहले जरूरत होती हैं यह जानने की कि आखिर बदन दर्द की समस्या के पीछे का कारण क्या हैं और फिर उसके अनुरूप इसका इलाज किया जाना चाहिए। आज हम आपको उन छुपे रहस्यों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बदन दर्द का कारण बनते हैं। आइये जानते हैं…

नींद की कमी

आपको हर रात कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद की जरूरत होती है। सोते समय, शरीर अपने ऊर्जा संसाधनों को पुन: उत्पन्न करता है जिससे आपको अगले दिन तरोताजा महसूस हो पाता है। नींद की कमी आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति में रूकावट पैदा कर सकती है। जिसके वजह से आप बॉडी पेन का अनुभव कर सकते हैं।

डिहाइड्रेशन

डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी। शरीर में पानी की कमी भी शरीर में दर्द का कारण बन सकता है। डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर श्वास और पाचन सहित कई प्रक्रियाओं को ठीक से नहीं कर पाता है, इससे शारीरिक दर्द महसूस हो सकता है। पीला पेशाब, चक्कर आना, थकावट और बार-बार प्यास लगना डिहाइड्रेशन के लक्षण होते हैं। डायरिया की स्थिति शरीर में दर्द पैदा कर सकती है, क्योंकि डायरिया की वजह से भी शरीर में पानी की कमी हो जाती है।

खून में आयरन की कमी

रक्त में आयरन की कमी को एनीमिया कहते हैं। जब रक्त में आयरन की कमी हो जाती है तब शरीर को इस अवस्था का सामना करना पड़ता हैं। इसके कमी से शरीर को ऑक्सीजन और पौष्टिकता की प्राप्ति कम हो पाती है जिसके कारण शरीर को थकान और दर्द का अनुभव होता है।

तनाव लेने से होता है बॉडी पेन

शरीर में दर्द का एक प्रमुख कारण तनाव है। तनाव सीधे तौर पर हमारी जीवनशैली को प्रभावित करता है। तनाव शरीर में उच्च हृदय गति, रक्तचाप में वृद्धि और सिरदर्द पैदा कर सकता है। तनाव की वजह से कंधे, पैरों और कमर की मांसपेशियों में दर्द का अहसास हो सकता है। इसलिए इससे बचना चाहिए।

विटामिन डी की कमी

यह एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो हड्डी के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, विटामिन डी कैंसर कोशिका वृद्धि को कम करने, संक्रमण को नियंत्रित करने और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसे में विटामिन डी का निम्न स्तर शरीर में लगातार और क्रोनिक दर्द का कारण बन सकता है।

गठिया है बदन में दर्द की वजह

गठिया की गंभीरता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और यहां तक कि दिन-प्रतिदिन भिन्न होती है। कुछ लोगों में केवल कुछ जोड़ प्रभावित होते हैं। वहीं, अन्य लोगों में संपूर्ण शरीर प्रणाली प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि गठिया या जोड़ों की सूजन भी दर्द और दर्द का कारण बन सकती है।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम

क्रोनिक थकान सिंड्रोम में शारीरिक या मानसिक गतिविधि के साथ लक्षण अक्सर खराब हो जाते हैं। गंभीर थकान के अलावा, लक्षणों में हल्की संवेदनशीलता, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, मिजाज और अवसाद शामिल हैं।

फ्लू और अन्य संक्रमण

फ्लू हमारे शरीर में बुखार का कारण बनता है। इससे हमारे पीठ, पैरों और बाहों की मांसपेशियों में दर्द का अहसास हो सकता है। (एजेंसी )

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रेड वाइन सेहत के लिए वरदान साबित हो सकती है

30.08.2022 – रेड वाइन के साथ जिसकी एक नियत मात्रा सेहत के लिए वरदान साबित हो सकती है। शराब और नशीले पदार्थों का सेवन सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। लेकिन वहीँ यह भी कहा जाता हैं कि किसी भी चीज का सेवन नियत मात्रा में किया जाए तो यह फायदा भी पहुंचाती हैं। ऐसा ही कुछ हैं रेड वाइन के साथ जिसकी एक नियत मात्रा सेहत के लिए वरदान साबित हो सकती है। जी हां, रेड वाइन में मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो आपकी कई बीमारियों को शांत करने में मददगार साबित होती हैं।

हम आपको यहां रेड वाइन से मिलने वाले उन्हीं फायदों की जानकारी देने जा रहे हैं। आइये जानते हैं इनके बारे में…हृदय रोग में फायदेमंद इतने सालों में रेड वाइन को लेकर कई अध्ययन हुए हैं, जिनमें सीमित मात्रा में रेड वाइन पीना और हृदय की अच्छी सेहत के बीच अहम लिंक पाया गया है। हाल ही में, 2019 की समीक्षा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि रेड वाइन पीने से कोरोनरी हृदय रोग का खतरा कम होता है, जो दुनियाभर में बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।

स्टडी के ऑथर ने बताया कि हो सकता है कि रेड वाइन में कार्डियोप्रोटेक्टिव यानी हृदय को बीमारी से बचाने वाले असर पाए जाते हों।डायबिटीज मरीजों के लिए लाभकारी यदि आप डायबिटीज के पेशेंट्स हैं तो आपको रेड वाइन का सेवन अवश्य करना चाहिए, इसके सेवन से शुगर का लेवल नियंत्रण में रहता है वहीं ये बढ़ते शुगर के लेवल को कम करके रखने में भी असरदार होता है,इसलिए यदि आप डायबिटीज के पेशेंट्स हैं तो आपको रेड वाइन को डेली के डाइट में शामिल कर सकते हैं।

वहीं इसकी मात्रा के ऊपर भी आपको ध्यान देना चाहिए क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।कैंसर से बचाएवाइन पीने से प्रोस्टेट कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी ठीक हो जाती है। इसमें पाया जाने वाला रिजवेट्रॉल, न केवल जवां बनाता है बल्कि यह कैंसर की सेल को ग्रो होने से भी रोकता है। पौरुष ग्रंथि के उतकों में पनपने वाला यह कैंसर अक्सर उम्रदराज लोगों में पाया जाता है। आमतौर पर पौरुष ग्रंथि अखरोट जैसी होती है, लेकिन कैंसर की चपेट में आने के बाद इसके आकार में वृद्धि होने लगती है और पेशाब का प्रवाह रुकने लगता है।

पर अगर आप वाइन पीने वालों में से हैं तो आओ काफी हद तक सुरक्षित हैं।लिवर की सेहत के लिए अच्छी यदि आप लिवर को स्वस्थ बना के रखना चाहते हैं तो रेड वाइन का सेवन बहुत ही ज्यादा बेहतरीन होता है, इसके सेवन से लिवर से जुड़ी कई प्रोब्लेम्स भी दूर हो जाती हैं, रेड वाइन की बात करें तो ये एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं जो लिवर से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में असरदार होते हैं,इसलिए यदि आप लिवर की सेहत को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो आपको रेड वाइन का सेवन अवश्य करना चाहिए।

डाइजेस्टिव सिस्टम सुधारेडेली माइनर क्वांटिटी में वाइन पीने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। इससे पेट में बना हुआ अल्सर भी काफी हद तक कम हो जाता है। रेड वाइन, पेट में पनप रहे कुछ खतरनाक तरह के बैक्टीरिया को भी ढूढ़ कर मारता है। जिससे आप काफी हद तक स्वस्थ और हेल्दी महसूस करते हैं।आंखों की सेहत के लिए फायदेमंदयदि आप आंखों की रोशनी को तेज बना के रखना चाहते हैं या इसे बढ़ाना चाहते हैं तो रेड वाइन का सेवन बहुत ही ज्यादा लाभदायक हो सकता है, इसमें ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो आपकी आंखों की दृष्टि को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

वहीं इसके सेवन से आंखों की रोशनी तो तेज होती ही है साथ ही साथ आंखों में कई इन्फेक्शन्स से भी ये दूर रखता है। इसलिए आंखों की रोशनी को बढ़ा के रखने के लिए आपको रेड वाइन का सेवन करना चाहिए।कोलेस्ट्रॉल लेवल को करें कम कम या सीमित मात्रा में रेड वाइन का सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल का ऑक्सीकरण 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है और खून में गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल का लेवल कायम रहता है।

ऐसे में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होने से भी हृदय रोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा एक और स्टडी की मानें तो हफ्ते के 3-4 दिन रोजाना 1 से 3 गिलास रेड वाइन का सेवन करने से मध्य उम्र के पुरुषों में स्ट्रोक होने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोल साल 2006 में वैज्ञानिकों ने यह रिपोर्ट दी थी कि रेड वाइन में मौजूद कम्पाउंड्स प्रोसाइनिडिन्स रक्त धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

इसके अलावा साल 2012 की एक स्टडी में यह बात भी सामने आयी थी कि बिना अल्कोहल वाली रेड वाइन भी ब्लड प्रेशर को कम करने और कंट्रोल करने में मदद करती है और यह एक हेल्दी विकल्प हो सकता है.(एजेंसी)

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क्या मेकअप के दौरान आपकी आंखों से आता हैं पानी

30.08.2021 – खूबसूरत दिखना और इसके लिए मेकअप करना हर महिला को पसंद होता हैं। मेकअप की मदद से खूबसूरती में और ज्यादा निखार लाया जा सकता है। मेकअप के दौरान खासतौर से आंखों को आकर्षक बनाने की कोशिश की जाती हैं। लेकिन कई बार मेकअप के दौरान कुछ गलतियां करने की वजह से आंखों से पानी आने लगता हैं। यह समस्या कई बार फेस मेकअप के दौरान भी होती है। ऐसे में मेकअप को लेकर कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है।

आज इस कड़ी में हम आपको उन्हीं सावधानियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं…मेकअप से पहले आई ड्रॉप यूज करें अगर आपकी आंखों से बहुत पानी आता है तो जाहिर है इससे आपका मेकअप बार-बार बिगड़ जाता होगा। अगर आप इससे बचना चाहती हैं तो मेकअप शुरु करने के आधे घंटे पहले आखों में एंटी एलर्जिक आई ड्रॉप डाल लें। इससे आपकी आंखों में मेकअप के दौरान पानी नहीं आएगा। हाईजीन का रखें ध्यानमेकअप के दौरान अगर आप साफ- सफाई का ध्यान नहीं रखती हैं तो आंखों को नुकसान हो सकता है।

ऐसे में मेकअप करते समय अपने चेहरे और हाथों को अच्छी तरह से धो लें और इसके बाद मेकअप अप्लाई करें। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो हाथ के बैक्टीरियां आंख के संपर्क में आ सकते है। मेकअप को खुले में न रखें।हाइपोएलर्जेनिक मेकअप यूज करें आपने लिए बाजार से जब कॉस्मेटिक प्रोडक्ट चुने तो एक बार उनमें मौजूद तत्वों को जरूर पढ़ लें हमेशा हाइपोएलर्जेनिक कॉस्मेटिक आइटम ही चुने। खासतौर पर काजल, मस्कारा, आइलाइनर और आईशैडो चुनते वक्त काफी सावधानी बरतें।

सस्ता कॉसमेटिक खरीदने के चक्कर में न रहें, इससे आपकी आंखें खराब भी हो सकती हैं। सस्ते प्रोडक्ट में अधिक केमिकल का इस्तेमाल करने से आंखों में पानी आता है। खासकर काजल और मस्कारा अच्छे ब्रांड का इस्तेमाल करना चाहिए। आप हर्बल काजल और मस्कारा का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर्बल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से आंखों से पानी नहीं आएगा।मेकअप ब्रश साफ रखें जो मेकअप ब्रश आप इस्तेमाल करती हैं उसे एक बार इस्तेमाल के बाद यूं ही न रख दें बल्कि ब्रश को अच्छे से साफ करें।

ब्रश को आप शौंपू से साफ कर सकती हैं और शैंपू के बाद उसमें कंडीशनर भी लगा सकती हैं। इससे ब्रश के बाल मुलायम हो जाते हैं। खराब ब्रश से बार-बार मेकअप करने से भी कई बार आंखों से पानी आने लगता है। मेकअप प्राइमर का करें यूज फेस पर मेकअप यूज करने से पहले प्राइमर का यूज जरूर करें। यह न केवल आपकी त्वचा के लिए सुरक्षा कवच होता है बल्कि आपकी आपकी आंखों को भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में मौजूद कैमिकल्स से बचाता है। फेस प्राइमर ना केवल स्किन बल्कि आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

मेकअप करने से पहले अपनी त्वचा पर प्राइमर का इस्तेमाल करें। प्राइमर लगाने के बाद ही चेहरे पर फाउंडेशन और कंसीलर का बेस लगाएं। अगर आपकी आंखों से पानी आता है आप मेकअप करने से पहले चेहरे पर प्राइमर लगाएं।अपनी लोअर लैश पर न लगाएं लाइनर अगर आपकी आंखों से बहुत पानी आता है तो आपको अपनी लोअर लैशेज पर किसी भी तरह का कॉस्मेटिक प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। आप चाहे तो बाजार में आने वाले आई प्राइमर का यूज करके आइलाइनर और मस्कारे का इस्तेमाल आंखों पर कर सकती हैं।

चेहरे को उठा कर करें मेकअप अगर आपकी आंखें मेकअप के दौरान बहुत ज्याद ब्लिंक होती है तब भी आपकी आंखों से पानी आ सकता है। ऐसा आपके साथ होता है तो मेकअप के दौरान आपको थोड़ा चेहरा उठा लेना चाहिए। चेहरा उठाने पर आपकी आंखे ज्यादा नहीं झपकतीं और इससे आपकी आंखों से ज्यादा पानी भी नहीं आता है।

रात में मेकअप हटा कर सोएं अगर आप रोज मेकअप करती हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आपको रोज रात में सोने से पहले अपना मेकअप साफ करना है। अगर आप रात में बिना मेकअप रिमूव किए सो जाती हैं तो यह आपकी स्किन और आंखों दोनों के लिए ही हानिकारक है। (एजेंसी)

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आयुर्वेद के अनुसार पानी पीने से जुड़े इन नियमों को अपनाना स्वास्थ्य के लिए है लाभदायक

28.08.2022 – अच्छे स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना अत्यंत आवश्यक है। इसका मुख्य कारण है कि यह पाचन को स्वस्थ रखने, शरीर को हाइड्रेटेड करने समेत कई तरह के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लाभ प्रदान करने में सक्षम है। हालांकि, आयुर्वेद की मानें तो पानी के सेवन से जुड़े कुछ नियम होते हैं, जिन्हें अपनाकर पानी समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत प्रभावी साबित होता है।

आइए उन्हीं नियम के बारे में जानते हैं।

नियम-

पानी के सेवन से जुड़े पांच आयुर्वेदिक नियम

1) पानी को हमेशा घूंट-घूंट करके पिएं।

2) फ्रिज के ठंडे पानी की बजाय गर्म या कमरे के तापमान वाला पानी पिएं क्योंकि ठंडा पानी पाचन को धीमा कर देता है।

3) मिट्टी के बर्तन, तांबे या स्टील की चीजों में स्टोर किए गए पानी का सेवन करें।

4) पाचन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उबला हुआ पानी कमरे के तापमान पर ठंडा करके पिएं।

5) रोजाना अपने दिन की शुरुआत एक गिलास हल्का गर्म पानी पीकर करें।

मात्रा –

रोजाना कितना पानी पीना स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त है?

खुद को स्वस्थ रखने के लिए आपको ज्यादा पानी के सेवन की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेद बताता है कि पानी को भी पचाने की जरूरत होती है। हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पानी का सेवन करना चाहिए। हर किसी के लिए रोजाना 8’0 गिलास पानी का सेवन करना पर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, अन्य स्वास्थ्यवर्धक पेय को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।

समय-

पानी कब पीना चाहिए?

खाने के 30 मिनट बाद या पहले पानी का सेवन करना सही है। यह तरीका एक वात दोष वाले व्यक्ति के लिए आदर्श है। वहीं, कफ दोष वाले व्यक्ति के लिए भोजन से 30 मिनट पहले पानी पीना सही है। हालांकि, अगर आप या आपके परिवार या दोस्तों में से कोई खाना खाने के दौरान पानी पीता है तो उसे ऐसा करने पर टोकें क्योंकि इस तरह से पानी पीना कई बीमारियों को न्यौता देता है।

जानकारी

पानी से संबंधित जानकारी का अभाव हो सकता है नुकसानदायक सुनने में भले ही आपको अजीब लगे लेकिन गलत समय, गलत तरीके और गलत मात्रा में पानी पीने से पाचन संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं। इससे शरीर मधुमेह, ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, भारीपन, किडनी में दिक्कत और सुस्ती जैसी कई समस्याओं की चपेट में आ सकता है। इसलिए आपको पानी पीने से संबंधित हर जरूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि आप शारीरिक समस्याओं की चपेट में आने से बच सकें। (एजेंसी)

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हाथों में मौजूद होते हैं दबाव बिंदु

*कई समस्याओं का कर सकते हैं निवारण*

28.08.2022 – दबाव बिंदु हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील लेकिन शक्तिशाली हिस्से माने जाते हैं, जो शारीरिक दर्द को कम करने, शरीर को आराम पहुंचाने और दबाए जाने पर संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं। बता दें कि हमारे हाथों पर कुल आठ दबाव बिंदु होते हैं, जिनमें से हर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए आज हम आपको आपको हाथों के प्रमुख पांच दबाव बिंदुओं के लाभ और उनके इस्तेमाल का तरीका बताते हैं। दबाव बिंदु कैसे काम करते हैं?

दबाव बिंदु रिफ्लेक्सोलॉजी और एक्यूप्रेशर चिकित्सा का हिस्सा है।

रिफ्लेक्सोलॉजी चिकित्सकों के अनुसार, अपने हाथ में कुछ जगहों पर धीरे से दबाव डालने से आंतरिक अंगों सहित शरीर के अन्य हिस्सों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। ये बिंदु दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने में भी मदद करते हैं और उन पर दबाव डालने से आपको दर्द से काफी राहत मिल सकती है।

हार्ट-7हार्ट 7 दबाव बिंदु आपकी कलाई लाइन पर छोटी उंगली और अनामिका के बीच मौजूद होता है। रिफ्लेक्सोलॉजी चिकित्सकों के अनुसार, इस बिंदु पर धीरे से दबाव डालने से अनिद्रा, दिल की धड़कन, अवसाद और चिंता से राहत मिल सकती है। तनाव होने पर विशेषज्ञ इस दबाव बिंदु पर एक मिनट तक मालिश करने की सलाह देते हैं। हालांकि, इस दबाव बिंदु पर विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही दबाव डालें।

स्माल इंटेस्टिन 3स्माल इंटेस्टिन 3 दबाव बिंदु हथेली के पिछले हिस्से पर मौजूद होता है। यह बिंदु छोटी उंगली के ठीक नीचे स्थित है। इस बिंदु पर दबाव डालने से कान का दर्द, गर्दन का दर्द, कंधे का दर्द और यहां तक कि सिरदर्द से भी राहत मिल सकती है। यह बिंदु मतली, रात को पसीने आने और गैस्ट्रिक समस्या से भी राहत प्रदान करने के लिए जाना जाता है।

एल14एल14 यानि हे गु प्वाइंट अंगूठे और तर्जनी के बीच में मौजूद होता है, जिसे दबाकर गर्दन के दर्द से राहत मिल सकती है। कई रिफ्लेक्सोलॉजिस्ट का दावा है कि इस बिंदु को दूसरे हाथ के अंगूठे से दबाकर गर्दन सहित शरीर के कई अलग-अलग हिस्सों को दर्द से राहत मिल सकती है। वहीं, अगर सोकर उठने के बाद गर्दन में अकडऩ महसूस हो तो भी इस बिंदु को दबाकर राहत मिल सकती है।

इनर गेट प्रेशर प्वाइंटयह दबाव बिंदु आपको अपच, मतली और पेट दर्द से राहत दिलान में मदद कर सकता है। इस बिंदु के लिए अपने हाथ को सीधा करें और कलाई के नीचे तीन उंगुलियों के बाद बीच में अपने दूसरे हाथ के अंगूठे से हल्का दबाएं क्योंकि यहीं पर इनर गेट प्रेशर प्वाइंट है। इसके बाद अपने अंगूठे को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशाओं में घुमाएं ताकि उस जगह की अच्छी तरह से मालिश की जा सके।

आउटर गेट प्रेशर प्वाइंटयह दबाव बिंदु बांह के पिछले हिस्से के दो टेंडन के बीच पाया जाता है। इसके लिए अपनी तीन उंगुलियों को ठीक वहीं रखें जहां कलाई समाप्त होती है क्योंकि बिंदु तीसरी उंगली के अंत में स्थित होता है। इस बिंदु पर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए दबाव डालें। इसके अलावा, इस दबाव बिंदु की मालिश करने से आपको भरपूर ऊर्जा भी मिल सकती है। (एजेंसी)

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कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने के दौरान ना करें ये गलतियां

*आंखों को होता है नुकसान*

26.08.2022 – लोग अपनी आंखों के लिए चश्मे की जगह कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने लगे हैं।  हर कोई तकनिकी का इस्तेमाल करते हुए खुद को अपडेट रखना चाहता हैं। ऐसे में देखने को मिलता हैं कि  खासतौर से महिलाएं चश्मा लगाने से कतराती हैं क्योंकि वे अपनी पर्सनैलिटी को बेहतर दिखाने की कोशिश में लगी रहती हैं।

लेकिन कई बार महिलाएं कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने के दौरान कुछ गलतियां कर बैठती हैं जिसकी वजह से आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसे में आज हम आपको कुछ बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें कॉन्टेक्ट लेंस लगाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए। आइये जानते हैं इनके बारे में…लगाने से पहले हाथों को धोएंकई बार महिलाएं इतनी जल्दी में होती हैं कि हाथों को बिना धोएं आंखों में लेंस लगा लेती हैं। इससे आपकी आंखों में इंफेक्शन हो सकता है। जी हां हाथों से आंखों में बैक्टीरिया और कीटाणु बहुत आसानी से चले जाते हैं।

इसलिए जब भी लेंस लगाएं उससे पहले अपने हाथों को जरुर धो लें। ज्यादा तेल वाले साबुन का इस्तेमाल ना करें और एक बार हाथ धोने के बाद टॉवल की हेल्प से हाथों को जरुर ड्राई कर लें। हाथों को पोंछने के लिए रोंए वाले टॉवल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

क्योंकि सूक्ष्म रोंए आंखों में जाकर आपके लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकता है।पाउडर और आईशैडो का नहीं करें उपयोगएक बार अगर आपने कांटेक्ट लेंस लगा लिया है। तो इसके बाद आप पाउडर और आईशैडो का उपयोग नहीं करें तो बहुत अच्छा है। क्योंकि कई बार पाउडर आंखों के अंदर जाने से आंखों में खुजली और जलन की समस्या हो जाती है।

ऐसे में आपको पाउडर और आईशैडो दोनों के उपयोग से बचना चाहिए। दरअसल आईबॉल के पास ऑयल ग्लैंड होता है। अगर इस जगह पर मेकअप अप्लाई किया तो लेंस जल्दी गंदा हो सकता है और आंखें ड्राई हो सकती है।

इसलिए आंखों से किनार में मेकअप लगाने से परहेज करें।ऐसे समय में लेंस पहनने से बचेंस्वीमिंग करते समय, बाइक चलाते समय, तेज आंधी के वक्त कांटेक्ट लेंस का उपयोग नहीं करना चाहिए। दरअसल बाइक पर या तेज आंधी में आंखों में धूल जाती है, जिससे लेंस में स्क्रेच आ सकते हैं और इनके खराब होने डर तो रहता ही है साथ ही इंफेक्शन का डर भी बना रहता है।

लेंस लगाकर सोने से बचेंकॉन्टेक्ट लेंस लगाने से पर्यावरण में ड्राईनेस और आंखों तक कम ऑक्सीजन पहुंचने की वजह से आंखों में इंफेक्शन होने का ज्यादा खतरा होता है। जब आप सोती हैं तो आंखें बंद होती हैं जिससे लेंस से बैक्टीरिया आंखों में आ जाते हैं और जलन होने लगती है।

इसलिए सोते समय अपनी आंखों से लेंस लगाकर ही सोएं।लेंस बॉक्स को साफ करना ना भूलेंलेंस के साथ उसे रखने वाले बॉक्स का भी उतना ही ध्यान रखना चाहिए। जब भी लेंस का इस्तेमाल करें उसके बाद सॉल्यूशन को बदलकर बॉक्स को अच्छे से सुखा लें। इसके लिए सबसे अच्छा होगा कि आप लेंस रखने वाले बॉक्स को 3 महीने बाद बदल लें।

और हर बार लेंस को स्टोर करते समय बॉक्स में नए सॉल्यूशन का इस्तेमाल करें। कॉस्मेटिक लोशन, क्रीम या स्प्रे के संपर्क में न आने दें।

लेंस को साफ करने के बाद गीला न रखें, क्योंकि नमी में सूक्ष्मजीवों के पनपने का खतरा रहता है।आंखों को नहीं मसलेकांटेक्ट लेंस लगाने के बाद अगर आप आंखों पर और कुछ लगाते हैं। तो इससे कई बार खुजली चलने की संभावना बढ़ जाती है।

खुजली करने से आपकी आंखों में लगा लेंस खराब होने और आंखों में इंफेक्शन का भय हो जाता है। इसलिए कोशिश करें कि एक बार कांटेक्ट लेंस लग जाए तो उसके बाद आंखों में कुछ नहीं लगाएं।

तय समय पर बदलें लेंसजब तक लेंस लगाने की सलाह दी गई है, उसे तब तक ही लगाएं। तय समय के बाद तक इसे उपयोग करने पर आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। लेंस केस को भी तीन महीने बाद बदल देना चाहिए।

इसे हर दिन साफ करें और अच्छे से इसके लिक्विड में ही इसे रखें।लेंस से आंखों में ड्राईनेसप्लास्टिक होने के कारण आंखों को डायरेक्ट लुब्रिकेट नहीं मिल पाता है।

ऐसे में लंबे समय तक कॉन्टेक्ट लैंस लगाने से ड्राइनेस की समस्या बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए बाहर निकलते समय धूप का चश्मा लगाएं, लंबे समय तक कॉन्टेक्ट लेंस न लगाएं, पंखे की डायरेक्ट हवा ना लगे, आंखों में जलन होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

बेहतर साफ-सफाई रखनी चाहिए और इस लेंस को एक महीने के बाद फेंक देना चाहिए। (एजेंसी)

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स्वीमिंग थैरेपी की तरह काम करती है , सेहत को पहुंचाती हैं इस तरह फायदे

26.08.2022 -स्वीमिंग : सेहतमंद रहने के लिए अपनी दिनचर्या में आपको व्यायाम और एक्सरसाइज़ को शामिल करने की जरूरत होती हैं ताकि शरीर के सभी अंग उचित तरीके से काम करें। ऐसे में आप अपनी दिनचर्या में स्विमिंग को शामिल कर सकते हैं जो शरीर के लिए एक संपूर्ण व्यायाम है। स्वीमिंग एक थैरेपी की तरह काम करती है जो शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी बढ़ाने के साथ ही फिटनेस में सुधार लाने का काम करती हैं। 25 से 30 मिनट रोज स्विमिंग आपको कई तरह के फायदे पहुंचाती हैं जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। अगर आपने कभी भी स्विमिंग नहीं की है तो आपको स्विमिंग के ये फायदे जरूर जान लेने चाहिए।

पूरे शरीर का वर्कआउटस्विमिंग में आपके शरीर के सभी अंग शामिल होते हैं आप किसी भी प्रकार से स्विमिंग करें आपके पूरे शरीर का एक साथ व्यायाम हो सकता है। इसके अलावा, पानी में की जाने वाली गतिविधियां आपके शरीर से अधिक मेहनत करवाती हैं इसलिए पानी में किया गया 30 मिनट का व्यायाम जमीन पर 40 मिनट तक किए जाने वाली एक्सरसाइज के बराबर होता है। अगर आप स्वीमिंग करते हैं तो आपकी शरीर की एक्सरसाइज के साथ ही अन्य रोगों से भी राहत मिलती है।

वजन पर नियंत्रणयह शरीर की एक्सट्रा कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। इससे व्यक्ति को डिहाइड्रेशन का सामना नहीं करना पड़ता और बॉडी शेप में रहती है। शरीर में लचीलापन लाने के लिए यह बेहतर व्यायााम है। अच्छी तरह स्विमिंग की जाए तो लगभग आधे घंटे में 200 कैलोरीज बर्न की जा सकती हैं जो व्यायाम के तौर पर पैदल चलने की मात्रा में दोगुना है तेजी से स्विमिंग करना दौडऩे और साइकिल चलाने की तुलना में ज्यादा कैलोरी बर्न करके आपको फिट बनाने में मदद करता है।हृदय गति बनती हैं बेहतरदूसरी मांसपेशियों की ही तरह हमारा हार्ट भी एक तरह का मसल्स ही होता है, जिसे आप मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

प्रत्येक धड़कन के साथ हार्ट ब्लड पम्प करता है और पूरे शरीर में ब्लड सप्लाई करता है। लोअर रेस्टिंग हार्ट के स्वास्थ्य लाभ का मतलब है कि आपको दिल की बीमारियों का खतरा कम है और तैराकों की लोअर रेस्टिंग हार्ट रेट 40 हार्ट बीट प्रति मिनट होती है। एक औसत व्यक्ति के लिए लोअर रेस्टिंग हृदय गति 60-70 बीट प्रति मिनट होती है। साथ ही इससे शरीर के लिए जरूरी हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है। ये बैड कोलेस्ट्रॉल बढऩे से रोकता है।मजबूत होंगे आपके मसल्सयदि रोजाना नियमित रूप से स्विमिंग की जाए जो किसी और एक्सरसाइज या कसरत का करना जरुरी नहीं होता तैराकी आपकी मांसपेशियों को बढ़ाने और उनमें मजबूती पैदा करने में मदद करती है आपकी मांसपेशियां बढ़ती हैं और मजबूत भी होती हैं।

तैराकी के लिए एक्सरसाइज की तुलना में अधिक मेहनत की जरुरत होती है यही वजह है कि यह अधिक मेहनत आपके शरीर में मसल्स को सेहतमंद बनाने में बहुत मददगार साबित होती हैं।डायबिटीज का खतरा होगा कम डायबिटीज टाइप’ व 2 दोनों के मरीजों के लिए स्वीमिंग एक थैरेपी की तरह काम करती है। तैराकी से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने लगती है जिससे वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इस वजह से शुगर लेवल में भी उतार-चढ़ाव नहीं होता है।ब्लड सर्कुलेशन में होता हैं सुधारतैरने से आपकी हृदय गति में सुधार होता है, जिससे शरीर में रक्त की आपूर्ति बढ़ जाती है।

बढ़े हुए ब्लड सर्कुलेशन से उन क्षेत्रों में सुन्नता और झुनझुनी की समस्या कम होती है, जहां ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाने के कारण ये समस्याएं महसूस होती हैं।स्ट्रेस और तनाव कम करने में मददगारजब आप किसी भी चीज के कारण तनाव में हों या आमतौर पर आपका मूड अच्छा न हो तो स्विमिंग के लिए जाएं नियमित रूप से तैरने पर तनाव का स्तर कम किया जा सकता है, डिप्रेशन की समस्या और एंग्जायटी की समस्या में कमी लाई जा सकती है और बेहतर नींद प्राप्त की जा सकती है मानसिक फायदे प्राप्त करने के लिए हल्की-फुल्की स्विमिंग करें। (एजेंसी)

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स्तनपान कराने वाली महिलाएं ना करें इन 10 चीजों का सेवन, बच्चे को पहुंचता हैं नुकसान

22.08.2022 – स्तनपान :  किसी भी नवजात बच्चे के लिए शुरुआत के 6 महीने में उसकी मां का दूध ही सबसे पौष्टिक आहार माना जाता हैं जिससे उसका सर्वांगीण विकास होता हैं। ऐसे में मां बनने के बाद महिला पर बच्चे का पेट भरने और उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जिम्मेदारी आ जाती है। महिलाएं जो खाती हैं उसका शरीर में बनने वाले दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर असर पड़ता हैं जो सीधे तौर पर बच्चों को प्रभावित करता हैं। ऐसे में स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपने आहार पर ध्यान देने की जरूरत होती हैं और उन चीजों को अवॉयड करना होता हैं जो बच्चों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।

आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिनका सेवन स्तनपान कराने वाली मां को नहीं करना चाहिए।सी-फूडअगर आप सी-फूड खाती हैं तो आपको कुछ दिनों के लिए फिश आदि खाने से बचना चाहिए। एक धातु के रूप में, पारा बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है। पारा के उच्च स्तर के लगातार संपर्क में आने से आपके बच्चों के नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। इससे उनका विकास प्रभावित हो सकता है। खासतौर से, आप ऐसी मछली खाने से बचें जिसमें मर्करी अधिक है जैसे- टूना, शार्क, और स्वार्ड फिश आदि। शेलफिश से जब तक संभव हो, बचने का प्रयास करें।सी-फूडअगर आप सी-फूड खाती हैं तो आपको कुछ दिनों के लिए फिश आदि खाने से बचना चाहिए।

एक धातु के रूप में, पारा बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है। पारा के उच्च स्तर के लगातार संपर्क में आने से आपके बच्चों के नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। इससे उनका विकास प्रभावित हो सकता है। खासतौर से, आप ऐसी मछली खाने से बचें जिसमें मर्करी अधिक है जैसे- टूना, शार्क, और स्वार्ड फिश आदि। शेलफिश से जब तक संभव हो, बचने का प्रयास करें।खट्टे फलखट्टे फल विटामिन सी का एक स्रोत हैं, लेकिन उनके अम्लीय घटक शिशु का पेट खराब कर सकते हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विटामिन सी की पूर्ति के नींबू, अंगूर या संतरे की जगह एक अन्य विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे पपीता, अनानास, स्ट्रॉबेरी या पत्तेदार साग और आम का सेवन करना फायदेमंद होता है।

गेहूंगेहूं में ग्लूटन नामक प्रोटीन होता है जो कई बार नवजात शिशुओं को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए विशेषज्ञ स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गेंहू का सेवन नहीं करने की सलाह देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्तनपान करने वाले शिशु के स्टूल में खून दिखता है तो ऐसा ग्लूटन इनटॉलरेंस के कारण हो सकता है। साथ ही, उन्हें पेट में दर्द और चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।अजमोद और पुदीनाअजमोद और पुदीना दो जड़ी बूटियां हैं, जो ज्यादा मात्रा में लिए जाने पर स्तन के दूध को कम कर सकते हैं।

जब भी आप इन जड़ी-बूटियों को खाते हैं, तो अपने दूध की आपूर्ति की निगरानी करें, खासकर जब आपका बच्चा विकास की गति में है – वह चरण जब उसे सामान्य से अधिक दूध की आवश्यकता होती है। वास्तव में, माताएं अक्सर पुदीने की चाय पीती हैं, जोकि दूध उत्पादन को रोकती है।कॉफी और चॉकलेटकॉफी और चॉकलेट में कैफीन होता है, और इसलिए एक ब्रेस्टफीडिंग मदर को इसे ना ही लेने की सलाह दी जाती है। दरअसल, कैफीन स्तन के दूध में रिस सकता है और यह आपके बच्चे के शरीर तक पहुंच सकता है।

इससे बच्चे को चिड़चिड़ापन और नींद के पैटर्न में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि आप इन दो खाद्य पदार्थों के बिना नहीं रह सकते हैं, तो उनका सेवन सीमित करने का प्रयास करें। मसलन, दिन में एक या दो कप से अधिक कॉफी ना लें। इसी तरह, चॉकलेट के एक या दो टुकड़े लेने से नुकसान नहीं होगा।गैसीय खाद्य पदार्थआमतौर पर कहा जाता है कि अगर मां को गैस की समस्या है, तो बच्चे को भी गैस हो सकती है। ऐसे में हमें यह जानने की जरूरत है कि मां ने क्या खाया है, जिससे ऐसे प्रभाव नजर आ रहे हैं। कुछ खाद्य पदार्थ जो गैस पैदा कर सकते हैं जैसे ब्रोकली, गोभी, राजमा, छोले, काले चने, दाल, मूंगफली, आलू और मकई।

मसालेदार भोजन स्तनपान के दौरान मसालेदार भोजन से भी बचना अच्छा माना जाता है। अगर आपके शिशु को बार-बार पेट में दर्द की शिकायत होती है या उसे हर बार दस्त लग जाते हैं, तो ऐसे में आपको अपने आहार में मसालों को थोड़ा बैलेंस करके खाना चाहिए।शराबशराब से पूरी तरह से बचना चाहिए, लेकिन अगर आप शराब पीने के लिए बहुत ज्यादा बेचैन हैं, तो आपको एक से दो पैग से आगे नहीं बढऩा चाहिए। सुनिश्चित करें कि आप अपने शिशु को अंतिम पेय के कम से कम चार घंटे बाद तक दूध न पिलाएं।

हमेशा अपने बच्चे को स्तनपान कराने के बाद ही शराब का सेवन करें। शराब स्तन के दूध में अच्छी मात्रा में प्रवेश करती है और बच्चे को सुला सकती है।डेयरी प्रोडक्टस यदि आपको डेयरी प्रोडक्टस से एलर्जी की समस्या रहती है तो इनसे दूर बनाए रखें।जब माँ डेयरी उत्पाद खाती है या दूध पीती है, तो एलर्जी स्तन के दूध में प्रवेश कर सकती है और बच्चे को परेशान कर सकती है। यदि आप डेयरी उत्पादों का सेवन करने के बाद अपने बच्चे में उल्टी और दस्त जैसे लक्षणों का निरीक्षण करती हैं, तो इसका मतलब है कि आपको कुछ समय के लिए उन्हें खाना बंद करने की आवश्यकता है।

लहसुन स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए लहसुन का सेवन नुकसान तो नहीं करता है लेकिन इसमें पाए जाने वाले तत्व एलिसिन की गंध कई लोगों को परेशान करती है। मां अगर लहसुन खाती हैं तो संभव है कि ये स्मेल ब्रेस्ट मिल्क में भी मिल सकती है जो बच्चों को नापसंद हो सकती है। ऐसे में शिशु दूध पीने से कतराने लग सकता है। (एजेंसी)

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इन पांच यूनिक तरीकों से पहनें साड़ी, लगेंगी बहुत ही खूबसूरत

22.08.2022 – स्वतंत्रता दिवस की समाप्ति के साथ ही फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है। गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और दिवाली का उत्साह कुछ ही समय में वातावरण को सुशोभित कर देगा। ऐसे में अगर महिलाएं यह सोच-सोचकर परेशान हो रही हैं कि किस अवसर पर क्या पहना जाए तो इन सभी के लिए साड़ी एकदम बेहतरीन विकल्प है, जिसे वे एक या दो नहीं बल्कि पांच तरह से अपने स्टाइल का हिस्सा बना सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे।

जानकारीइंडस्ट्री एक्सपर्ट ने शेयर किए पांच तरह से साड़ी स्टाइल करने के तरीकेभारतीय महिलाओं के लिए साड़ी कभी भी आउट ऑफ फैशन नहीं होती है और हाल ही में अच्हो ग्रुप की संस्थापक रिमझिम हाडा ने साड़ी की ड्रेपिंग को बेहतर बनाने के लिए पांच स्टाइल आइडिया साझा किए हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं। धोती या पंत स्टाइल साड़ीसबसे पहले अपनी साड़ी के रंग से मैच करती हुई लेगिंग पहनें, फिर साड़ी के पल्लू का आखिरी हिस्सा लेकर उसकी प्लेट्स बनाकर इसे अपने बाएं कंधे पर रखें।

अब साड़ी के दूसरे सिरे को पकड़कर इसे एक बार लपेटते हुए दाएं ओर से कमर टक इन करें। इसके बाद साड़ी के ढीले हिस्से की प्लेट्स बनाएं और इसे बीच से साड़ी में डालें, फिर कंधे वाली प्लेट्स पर पिन लगाएं। अंत में एक डिजाइनर बेल्ट कमर पर बांधे। लहंगा स्टाइल साड़ीअपनी लहंगा चोली के ऊपर, एक लंबे दुपट्टे या साड़ी के एक सिरे को लेकर प्लेट्स बनाएं और लंबे हिस्से को पीछे छोड़ते हुए इसे बाएं कंधे पर रखें। अब पल्लू के दूसरे सिरे की प्लेट्स बनाएं और इसे अपनी कमर की दाईं ओर से टक इन करें।

इस तरह से आपके पल्लू को पीछे की तरफ यू-आकार मिलेगा। इसके बाद सामने की तरफ से अपने पल्ले को सेट करें और कंधे की तरफ से इस पर पिन लगाएं। नेक ड्रेप स्टाइल स्टाइलइस स्टाइलिश लुक में साड़ी के पल्लू को अपने गले में दुपट्टे की तरह लपेटना होता है। इस साड़ी स्टाइल के लिए अपनी साड़ी को सामान्य तरीके से लपेट लें, लेकिन इस दौरान एक लंबा पल्लू जरूर छोड़े। बेहतर होगा कि आप इसके लिए ऐसी साड़ी चुनें, जो सामान्य से अधिक लंबी हो।

साड़ी लपेटने के बाद पल्लू की प्लेट्स बनाकर इसे अपनी गर्दन के चारों ओर बाएं से दाएं स्कार्फ की तरह लपेंटे। डबल साड़ी ड्रेपिंग स्टाइलसबसे पहले दो साड़ी लें, फिर इसकी छह प्लेट्स बनाएं और इसे पेटीकोट के अंदर बीच में बाईं ओर से लाते हुए डालें। अब इसके पल्लू से प्लेट्स बनाएं और इसे बाएं कंधे पर लटकाते हुए पीछे की ओर से सामने लाएं, फिर अपनी दूसरी साड़ी को दाईं ओर रखते हुए इसकी पांच प्लेट्स बनाकर इसे बीच में टक इन करें।

अंत में इसके पल्लू की प्लेट्स बनाकर इसे पीछे से सामने से दूसरी तरफ से दाहिने कंधे पर रखें। मरमेड स्टाइल साड़ीसबसे पहले साड़ी के एक किनारे को दाईं ओर से अंदर करें, फिर साड़ी को अपने चारों तरफ एक बार लपेटें, फिर साड़ी के पल्लू की पलटें बनाएं और इसे कंधे पर रखें और साड़ी के बीच के हिस्से की पलटें बनाकर साड़ी में डालें।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी साड़ी की पलटें लंबे समय तक इसी तरह सेट रहे तो इस पर सेफ्टी पिन लगाएं। आप चाहें तो साड़ी ब्रॉच भी लगा सकते हैं। (एजेंसी)

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कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाने के लिए दिनचर्या में शामिल करें ये 6 योगासन

17.08.2022 – कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के अन्दर बनने वाली फैट होती हैं जो कि दो तरह की होती हैं गुड कोलेस्ट्रॉल और दूसरा बैड कोलेस्ट्रॉल। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढऩे पर हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने लगती हैं जो खून के परिसंचरण में परेशानी का कारण बनते हैं। कोलेस्ट्रॉल की वजह से आपको ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर की समस्या का खतरा रहता है।इन समस्याओं से उभरने और कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाने के लिए योग का अभ्यास बहुत उपयोगी है। आज इस कड़ी में हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं जो कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाने में मददगार साबित होंगे।

आइये जानते हैं इन योगासन के बारे में-:

चक्रासन

एक मध्यम श्रेणी का योगासन है जिसका नियमित अभ्यास शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए फायदेमंद माना जाता है।चक्रासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं। अपने घुटनों को मोड़ें और सुनिश्चित करें कि आपके पैर फर्श पर मजबूती से रखे हों। अपनी हथेलियों को अपने कानों के बगल में रखें, उँगलियाँ आगे की ओर। श्वास लें, अपनी हथेलियों और पैरों पर दबाव डालें और अपने पूरे शरीर को ऊपर उठाएं। अपने सिर को धीरे से पीछे गिरने दें और अपनी गर्दन को आराम से रखें।शरीर के वजन को अपने चार अंगों के बीच समान रूप से वितरित रखें।

पश्चिमोत्तासन

कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए योग की सूची में पश्चिमोत्तासन का नाम भी शामिल है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, मोटापा के कारण कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है और पश्चिमोत्तासन करने से मोटापा नियंत्रित हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले जमीन पर पैरों को आगे की ओर फैलाकर बैठ जाएं। ध्यान रहे कि ऐसा करते वक्त घुटने सीधे रहें और पैर आपस में सटे हों। सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और हाथों से पैरों के अंगुठों को पकडऩे का प्रयास करें। ध्यान रहे कि घुटने मुड़ें नहीं। अब कुछ सेकंड इसी अवस्था में बने रहने का प्रयास करें और धीरे-धीरे सांस लेते रहें। इसके बाद एक गहरी सांस लेते हुए सीधे हो जाएं।

सर्वांगासन

का नियमित अभ्यास करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में फायदा मिलता है। इसके लिए लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटें। इसके बाद दोनों हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब अपने पैरों को जमीन से ऊपर की तरफ उठायें और सीधा करें। इसके बाद अपने पेल्विक को जमीन से ऊपर की तरफ उठाएं। कंधे, सिर, पेल्विक और पैरों को एक सीधी रेखा में रखें। शोल्डर यानी कंधे के सहारे उल्टा जमीन पर खड़े होने की मुद्रा में रहें।

अर्धमत्स्येन्द्रासन

अगर किसी का कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ है, तो हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज के लिए योग का भी सहारा ले सकते हैं। चयापचय दर बेहतर होने से नुकसानदायक कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है। इसे करने के लिए पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाकर बैठ जाएं। अब अपने दाएं घुटने को मोड़ते हुए बाएं पैर के घुटने के साइड में बाहर की ओर रखें। फिर बाएं घुटने को मोड़ते हुए, बाईं एड़ी को दाएं कूल्हे के नीचे रखें। ध्यान रहे कि इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी सीधी रहे। अब बाईं बाजू को दाएं घुटने के बाहर रखते हुए दाएं टखने को पकडऩे का प्रयास करें। फिर गर्दन और कमर को दाहिनी ओर घुमाएं। कुछ सेकंड के लिए इसी स्थिति में बने रहें। बाद में इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

वज्रासन

का अभ्यास सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल में रखने के लिए इस तरीके से वज्रासन का अभ्यास करें। इसके लिए सबसे पहले दण्डासन की मुद्रा में बैठें। अब अपने हाथों को अपने कूल्हों के पास रखें। अब अपने दांए पैर को मोड़ें और दाएं कूल्हे के नीचे रखें और फिर अपना बांया पैर मोड़कर बांए कुल्हे के नीचे रखें। सुनिश्चित करें कि आपकी जांघे सटी हुई हों और आपके अंगूठे आपस में जुड़े हुए हों। अब अपने हाथों को घुटनों पर रखें। सुनिश्चित करें कि आपकी ठोड़ी आपके समानान्तर हो। अपना मेरूदंड सीधा रखें और शरीर को ढीला छोड़ें। अब सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें। और कुछ देर तक आराम से रहें।

शलभासन

कोलेस्ट्रॉल को कम करने और संतुलित रखने के लिए बहुत फायदेमंद योगासन है। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों पैरों को सीधा रखें और अपने पैर के पंजों को बाहर की ओर फैलाएं। अब अपने दोनों हाथों से मुट्ठी बनाकर जांघों के नीचे दबा लें। फिर सिर और मुंह को सीधा रखें और सामने की ओर देखें। अब गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करें। ध्यान रहे कि घुटनों को न मोड़ें। जितना संभव हो पैरों को अधिकतम ऊंचाई तक ले जाएं। जब तक संभव हो इसी स्थिति में बने रहने का प्रयास करें। समय पूरा होने पर धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे लाते हुई अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस आएं। इस अभ्यास को एक बार में करीब तीन से चार बार दोहराएं।

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कच्चा नारियल पोषक तत्वों से भरपूर सुपरफूड है

*सेवन से मिलेंगे सेहत को ये फायदे*

17.08.2022 – श्रीफल अर्थात नारियल का स्वाद आपने कई बार लिया होगा जिसे आमतौर पर प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किया जाता है। कोई भी शुभ काम हो उससे पहले भी नारियल फोड़ा जाता हैं। बीते दिनों में रक्षाबंधन पर भी बहनों ने अपने भाइयों को नारियल दिया। इसके पीछे का कारण यह भी होता हैं कि आप इसका सेवन करें और अपनी सेहत को स्वस्थ बनाए रखें। नारियल में विटामिन, खनिज, एमिनो एसिड, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कॉपर, सेलेनियम, आयरन, फास्फोरस, पौटेशियम, मैग्नीशियम और जिंक आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

आज इस कड़ी में हम आपको कच्चे नारियल से सेहत को मिलने वाले फायदों की जानकारी देने जा रहे हैं।

आइये जानते हैं इनके बारे में…वजन घटाने में मिलती है मदद कच्चा नारियल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए जाना जाता है। नारियल में मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स शरीर की चर्बी को तेजी से जलाने और भूख को कम करने के लिए जाने जाते हैं। जब कम वसा वाले आहार की बात आती है तो यह एक अच्छा विकल्प है। इससे वजन कम करने में मदद मिलती है।कब्ज रोकता हैकच्चा नारियल एक प्राकृतिक उपचार है जो कब्ज को रोकने में मदद करता है। कच्चे नारियल में उच्च फाइबर होता है जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। ये पाचन क्रिया को बनाए रखता है।

ये पाचन संबंधित कई समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है। कच्चा नारियल हमारे पेट को स्वस्थ रखता है।खून की कमी पूरी करेशरीर में खून की कमी होना कई बार जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में सूखा नारियल खाने से एनीमिया से राहत मिलती है। दरअसल, सूखे नारियल में आयरन बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यदि हर रात सोने से पहले इसका एक टुकड़ा खा लिया जाए, तो एनीमिया की समस्या से बहुत जल्दी छुटकारा मिल सकता है।

आपको बेहतर नींद में मदद करता हैआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद न आने की समस्या आम हो गई है। सोने से करीब आधा घंटा पहले कच्चा नारियल खाने से आपको अच्छी नींद आने में मदद मिल सकती है। दरअसल, कच्चा नारियल मैग्नीशियम और पौटेशियम से भरपूर होता है। ये दोनो मिनरल मांसपेशियों पर रिलेक्सिंग इफेक्ट डालते हैं जिससे आपको आरामदायक नींद में मदद मिलती है। इसके अलावा, नारियल में विटामिन बी होता है जो तनाव के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है।आपका हृदय स्वस्थ रखता हैसोने से पहले कच्चा नारियल खाना भी हृदय को स्वस्थ रखता है।

इसमें मौजूद सेचूरेटेड फैट शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। इस तरह नारियल हृदय से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम कर सकता है। ये हृदय के लिए बहुत फायदेमंद है। इसलिए हृदय को स्वस्थ रखने के लिए आप नारियल का सेवन कर सकते हैं।त्वचा और बालों के लिए फायदेमंदअगर आप रूखी त्वचा और रूखे बालों से परेशान हैं तो इस समस्या को दूर करने में नारियल आपकी मदद करेगा। नारियल में मौजूद फैट कंटेंट आपकी त्वचा को पोषण देता है, इसे हाइड्रेटेड और कोमल रखता है। इसके अलावा, नारियल में मोनोलॉरिन और लॉरिक एसिड होता है जो इसे एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल बनाता है।

इसलिए मुंहासे जैसी समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।अन्य फायदे पेट में कीड़े होने पर रोजाना नाश्ते के समय एक चम्मच पिसा हुआ नारियल का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। नारियल व पुदीने की चटनी खाने से पेट से जुड़े कई रोगों में राहत मिलती है। स्त्रियों की मासिक धर्म अनियमितता से जुड़ी कोई भी समस्या हो तो रोजाना लगभग दस ग्राम गीला नारियल खाएं व साथ में गाय का दूध पिएं। नाक से खून निकलने पर कच्चे नारियल का पानी नियमित रूप से पीना चाहिए।

साथ ही खाली पेट नारियल के सेवन से भी रक्त का बहाव रुक जाता है। नारियल की गिरी में बादाम, अखरोट एवं मिश्री मिलाकर सेवन करने से स्मृति में वृद्धि होती है। नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।

पुरुषों में यदि शीघ्र पतन की समस्या हो तो रोज सुबह दस ग्राम नारियल की सूखी गिरी खाने और साथ ही एक गिलास गाय का दूध पीने से रोग खत्म हो सकता है।(एजेंसी)

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बदलती जीवनशैली का हिस्सा बन चुका हैं फ्रोजन फूड, सेहत के लिए हैं बहुत नुकसानदायक

12.08.2022 – वर्तमान समय की बदलती जीवनशैली में लोगों के पास पर्याप्त समय नहीं हैं जिसे मैनेज करने के लिए आजकल घरों में फ्रोजन फूड का इस्तेमाल बहुतायत से किया जाता हैं। खासतौर से शहरी क्षेत्रों में फ्रोजन फूड का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक इन फ्रोजन फूड का इस्तेमाल सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाता हैं। इन फूड्स को लंबे समय फ्रेश रखने के लिए इनमें हाइड्रोजेनेटेड पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें हानिकारक ट्रांस फैट होते हैं।

इसके अलावा इनमें नुकसानदायक स्टार्च और ग्लूकोज भी मिलाए जाते हैं। आइए जानते हैं कि फ्रोजन फूड का अधिक सेवन आपकी सेहत को किस तरह से नुकसान पहुंचा रहा हैं…खाने की पौष्टिकता समाप्त फ्रोजन सब्जियों में केमिकल्स की वजह से लगभग 50त्न पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं। खासतौर इन सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन बी और सी तो पूरी तरह सब्जियों में नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही इन सब्जियों के स्वाद में भी काफी ज्यादा अंतर हो जाता है।डायबिटीज का होता है खतराफ्रोजन फूड्स को फ्रेश दिखाने के लिए इसमें स्टार्च का इस्तेमाल किया जाता है।

यह स्टार्च फूड को दिखने में फ्रेश बनाता है, साथ-साथ स्वाद भी बढ़ता है। इन फूड्स को पचाने के लिए हमारा शरीर फूड में मौजूद इन स्टार्ट को शुगर में बदलता है। ऐसे में शरीर में शुगर बढऩे से डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। इसके साथ ही यह स्टार्च शरीर के टिश्यूज को भी नुकसान पहुंचाते हैं।हाई ब्लड प्रेशर की समस्यासीडीसी के अनुसार, फ्रोजन फूड में सोडियम का इस्तेमाल करीब 70त्न तक अधिक मात्रा में किया जाता है।

ऐसे में फ्रोजन फूड का अधिक मात्रा में सेवन करने से आपके शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ सकता है। बहुत अधिक सोडियम खाने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है, जिसकी वजह से स्ट्रोक और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।बढ़ता है हार्ट अटैक का खतराफ्रोजन फूड्स के सेवन से हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ता है। फ्रोजन और पैक्ड फूड में मौजूद ट्रांस फैट्स बंद धमनियों की परेशानियां बढ़ाते हैं। शरीर में इन ट्रांस फैट्स से कोलेस्ट्रॉल बढऩे की संभावना ज्यादा होती है।

इसके साथ ही यह गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी घटाता है, जिससे दिल से संबंधित परेशानियां बढऩे की संभावना ज्यादा होती है। इन फूड्स में सोडियम की मात्रा भी ज्यादा होती है, जो शरीर का ब्लड प्रेशर बढ़ाता है।सिरदर्द व सूजन की समस्याफ्रोजन खाद्य पदार्थों में एमएसजी काफी ज्यादा होता है। इसके प्रति संवेदनशील लोगों के लिए यह काफी हानिकारक हो सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि इससे सिरदर्द, सूजन और पूरे शरीर से पसीना आना जैसी परेशानी हो सकती है।बढ़ सकता है वजनबढ़ते वजन को कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारण माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड आइटम्स के अधिक सेवन को वजन बढ़ाने वाला कारक मानते हैं। फ्रोजन आइटम्स में वसा की मात्रा अधिक होती है। यही वजह है कि ये कैलोरी में अधिक होते हैं और मोटापा बढ़ा देते हैं। इसके अलावा भोजन को लंबे समय तक फ्रीज करने से वस्तुओं में मौजूद कुछ महत्वपूर्ण विटामिन्स और खनिज भी नष्ट हो सकते हैं।

इसलिए इन्हें पौष्टिक नहीं माना जाता है।मांसपेशियों को नुकसानकई तरह के फ्रोजन फूड में कैलोरी की मात्रा कम होती है, जैसे- लीन डिशेज इत्यादि। इनमें कैलोरी कामी कम होता है। ऐसे में जब आपके शरीर को पर्याप्त रूप से ऊर्जा नहीं मिलती है, जो यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। कम कैलोरी युक्त आहार का अधिक सेवन करने से शरीर की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने लगता है।कैंसर का बन सकते हैं कारककई शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि फ्रोजन फूड आइटम्स अग्नाशयी कैंसर का जोखिम बढ़ा देते हैं।

आमतौर पर फ्रोजन खाद्य पदार्थों में उपयोग किए जाने वाले प्रीजर्वेटिव्स के कारण कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इस तथ्य की पुष्टि के लिए और विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन बहुत कम करें, और इन्हें उपयोग में लाने से पहले अच्छी तरह से पानी से धोएं जरूर। (एजेंसी)

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बालों के लिए किस तरह फायदेमंद हैं बियर, जानें फायदे और शैंपू करने का तरीका

12.08.2022 – सभी चाहते हैं कि उनके बाल स्वस्थ, मुलायम और घने बने। आज के समय में धूल, प्रदूषण और नमी के कारण बालों को काफी तकलीफें उठानी पड़ती हैं। खासतौर से मॉनसून के दिनों में बालों को खास देखभाल की जरूरत होती हैं। इसके लिए कई लोग बियर का इस्तेमाल का सकते हैं जिसमें विटामिन बी, माल्टोज और ग्लूकोज की प्रचुर मात्रा होती है। बियर प्रोडक्ट के रूप में आजकल बाजार में शैंपू मिल जाता हैं जो बालों को पोषण देने के साथ ही कई तरह से फायदे पहुंचाता हैं।

आज हम आपको बियर शैंपू लगाने के तरीके और इससे मिलने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं इसके बारे में…बालों को मजबूत बनाए बालों को मजबूत बनाने के लिए बियर शैंपू बहुत फायदेमंद माना जाता है। आजकल प्रदूषण, धूल और गर्मी के कारण बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं। इस वजह से बाल टूटने झडऩे लग जाट हैं। ऐसे में बियर शैंपू का इस्तेमाल करने से बाल मजबूत बनते हैं। इसमें विटामिन बी12 है जो बालों को मजबूती देता है। अगर आप भी मजबूत बाल चाहते हैं तो बियर शैंपू का इस्तेमाल करें।

रूसी की समस्या दूर करे बालों की रूसी की समस्या में भी आप बियर शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन बी पाया जाता है जो रूसी की समस्या को दूर करने में मदद करता है। बियर शैंपू का इस्तेमाल करने से बाल सिल्की और शाइनी बनते हैं।बालों को वॉल्यूम दे अगर आपके बाल पतले हैं तो बालों को वॉल्यूम देने के लिए बियर शैंपू का इस्तेमाल करें। इसके इस्तेमाल से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इससे बाल मजबूत और बाउंसी बनते हैं।

बियर शैंपू में कॉपर, मैग्नीशियम और आयरन जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो बालों को बहुत फायदा पहुंचाते हैं। यदि आपके बाल पतले हैं, तो चिंता न करें! बीयर शैंपू यहां अद्भुत काम करता है। अगर आपको बाहर जाना है और कुछ ग्लैमरस लुक चाहिए, तो बीयर शैम्पू से अपने बालों को शैम्पू करें। बीयर में एक्टिवेटिड यीस्ट होता है जो, रोम से बालों के हर स्ट्रैंड को ऊपर उठाने में मदद करता हैकंडीशनर के तौर पर करें इस्तेमाल आप बियर शैंपू का इस्तेमाल कंडीशनर के तौर पर भी कर सकते हैं।

बियर शैंपू लगाने से बाल सिल्की और मजबूत बनते हैं। इस शैंपू का इस्तेमाल करने के बाद आपको कंडीशनर की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आप खूबसूरत और शाइनी बाल चाहते हैं तो बियर शैंपू का इस्तेमाल करें।सिर की तैलीय त्वचा से छुटकारा दिलाए बियर में एसिड होता है, जो सिर की तैलीय और ग्रीसी त्वचा से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। ये सिर की त्वचा में तेल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अधिक गंदगी को साफ़ करता है।बालों में चमक लाता हैयदि आपके बाल बेजान हैं, तो आप बीयर शैम्पू का उपयोग करके बहुत खुश होंगी।

इसमें मौजूद विटामिन- बी बालों में शाइन लाता है। बीयर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो आपके लॉक्स में चमक जोड़ता है। यह बालों को एक आकर्षक अपील देता है। यदि आपके बाल बहुत शुष्क हैं, तो आप अपने बालों को शैम्पू करने से पहले बियर हेयर मास्क का उपयोग कर सकती हैं।कैसे करें बालों को शैंपूआप अपने बालों को धोने के लिए जिस भी शैंपू का इस्तेमाल करते हैं उससे शैंपू कर लें। लेकिन ऐसा करते समय ध्यान रखें, कि कंडीशनर करने से बचें। बालों को कंडीशनर करने के लिए आप बीयर का इस्तेमाल करने वाले हैं।

शैंपू से अच्छी तरह बालों को धो लेने के बाद फ्लैट बीयर को अपने बालों में डालें और कुछ मिनट तक स्कैल्प पर रहने दें। लगभग 1 मिनट तक हल्के हाथों से बालों की मसाज करें। इसके बाद अपने बाल धो लें। ध्यान रहे, बीयर को पूरी तरह बालों पर से न धोएं, उसकी थोड़ी मात्रा बालों पर शेष रहने दें।

बाद में बालों को सुखा लें। अच्छे रिजल्ट्स के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार बालों को बीयर से वॉश करें। (एजेंसी)

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