चेन्नई में अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप-उद्यमिता सम्मेलन 2026 संपन्न

नई दिल्ली – चेन्नई स्थित ट्रेड सेंटर में दो दिवसीय अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप-उद्यमिता (आरआईएसई) सम्मेलन 2026 आज संपन्न हो गया। इसमें शैक्षिक जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में सरकार ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप नवाचार-आधारित विकास सुदृढ़ करने और वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों में प्रयुक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

राइज़ 2026 चार महत्वपूर्ण स्तंभ अनुसंधान, उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमिता का अनूठा संगम है जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आवश्यक हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 फरवरी 2026 को इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के अनुसंधान-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में स्टार्टअप की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्टार्टअप एक्सपो का भी उद्घाटन किया और प्रतिभागी उद्यमियों से बातचीत की।

सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण स्टार्टअप एक्सपो में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएलआरआई), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय विद्युत रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीईसीआरआई) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एसईआरसी) सहित वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी से जुड़े 100 से अधिक स्टार्टअप शामिल हुए। एक्सपो में उन्नत सामग्री, विद्युत रासायनिक प्रौद्योगिकियों, अवसंरचना प्रणालियों, सतत विनिर्माण और गहन तकनीकी समाधानों के क्षेत्र में अत्याधुनिक नवाचार प्रदर्शित किये गये। यह सीएसआईआर के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण प्रयासों के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई विषयगत सत्र आयोजित किए गए। विज्ञान संचार पर एक पैनल परिचर्चा में वैज्ञानिक सोच प्रोत्साहित करने और अनुसंधान एवं नवाचार में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रभावी संचार के महत्व पर विमर्श हुआ। अकादमी-संस्थान-उद्योग साझेदारी पर एक अन्य पैनल परिचर्चा में वैज्ञानिक ज्ञान और कौशल के उपयोग, व्यावसायीकरण और उद्योग-अनुकूल समाधानों को गति देने तथा राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के सहयोगात्मक ढांचे पर बातचीत हुई।

कार्यक्रमों में विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी विशेषज्ञों की उद्योग वार्ता भी हुई, जिसमें उन्होंने सिस्टम इंजीनियरिंग (जटिल प्रणालियों के विकास, एकीकरण और प्रबंधन पर केंद्रित अंतर्विषयक क्षेत्र), उत्पाद विकास, इंजीनियर निर्माण समाधान और उद्यमशीलता के अनुभवों पर अपने विचार साझा किए। इन चर्चाओं ने सतत अनुसंधान-उद्योग सहयोग के महत्व और भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता विकसित करने में एकीकृत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

सम्मेलन के समापन सत्र में सीएसआईआर-सीएलआरआई निदेशक डॉ. पी. थानिकैवेलन, सीएसआईआर-एसईआरसी निदेशक डॉ. एन. आनंदवल्ली और सीएसआईआर-सीईसीआरआई निदेशक डॉ. के. रामेशा ने प्रतिभागी स्टार्टअप्स और छात्रों की विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किये। कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीएलआरआई के उत्कृष्ट वैज्ञानिक और पूर्व निदेशक डॉ. केजे श्रीराम ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच समन्वय और साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकी के व्यावसायिक अनुप्रयोग, उद्यमिता और नवाचार-संचालित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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एनबीए ने भारत के 24 जिलों में जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए एबीएस वितरण के माध्यम से ₹10.40 लाख की राशि जारी की

नई दिल्ली – जैव-विविधता के संरक्षण को मजबूती प्रदान करने और स्थानीय समुदायों का समर्थन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण(एनबीए) ने देशभर के लाभार्थियों को पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) ढांचे के तहत 10.40 लाख रूपए की राशि जारी की है।
एबीएस ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के संरक्षण में लगे समुदायों को उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ का न्यायसंगत हिस्सा प्राप्त हो, और यह भारत की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करता है।

वर्तमान एबीएस वितरण से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, मेघालय, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और हरियाणा सहित नौ-राज्यों और एक-केंद्र शासित प्रदेश के 24 जिलों के जैव-विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को लाभ मिलेगा।

ये बीएमसी ग्रामीण गांवों, तटीय क्षेत्रों और शहरी स्थानीय निकायों सहित विविध पारिस्थितिक परिदृश्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां स्थानीय समुदाय जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा, हरियाणा में डेयरी फार्म चलाने वाले किसान को भारत की प्रसिद्ध मुर्रा नस्ल के भैंस प्रदान करने के लिए एबीएस राशि दी गई, जिससे देशी जानवरों के महत्व को मान्यता मिली।

एबीएस निधि कई जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से बनाई गई थी, जो भारत के बायो-आर्थिक क्षेत्र के विकास में मदद करती हैं। इनमें जैव-प्रौद्योगिकी और दवाईयों में उपयोग किए जाने वाले सूक्ष्मजीव जैसे लाभकारी बैक्टीरिया, पौष्टिक-औषधीय पदार्थों और टिकाऊ जैव-उत्पादों में लगाए जाने वाले समुद्री सूक्ष्म शैवाल एवं कृषि, प्रसाधन सामग्री और खाद्य उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले सीवीड शामिल हैं।

प्राप्त जैविक संसाधनों में तुलसी के पत्ते, सहजन (मोरिंगा) के बीज, नीम के बीज, रीठा के बीज, रोज़मेरी के पत्ते, अश्वगंधा की जड़ें, मशरूम से प्राप्त कीटोसैन, और पैसिफिक व्हाइट श्रिम्प शामिल हैं। ये उदाहरण दिखलाते हैं कि जैव विविधता न सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में योगदान देता है, बल्कि वैज्ञानिक नवाचार, उद्योगों के विकास और ग्रामीण आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एबीएस तंत्र के माध्यम से, जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं द्वारा होने वाले लाभ का एक हिस्सा उन स्थानीय समुदायों के साथ साझा किया जाता है, जो इन जैविक संसाधनों का संरक्षण करते हैं। यह प्रणाली संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को भी बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय स्तर पर एबीएस वितरण का संचयी मूल्य ₹145 करोड़ (लगभग 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुका है, जो भारत के जैव-विविधता शासन ढांचे के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) भारत की पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) के लिए जैव-विविधता पर सम्मेलन और नागोया प्रोटोकॉल के तहत प्रतिबद्धताओं को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है, साथ ही राष्ट्रीय जैव-विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा में भी योगदान दे रहा है।

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रांची प्रेस क्लब मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट की चैंपियन बनी स्वर्णरेखा

टीम स्वर्णरेखा ने टीम गंगा को 7 रन से हराया

शिव राम बने मैन ऑफ द मैच

रांची,16.02.2026 –  रांची प्रेस क्लब मीडिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में टीम गंगा को सात रन से हराकर टीम स्वर्णरेखा चैंपियन बनी।

जेके इंटरनेशनल क्रिकेट एकेडमी में आयोजित इस मुकाबले में ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए स्वर्णरेखा के शिव राम को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

वहीं, पूरे टूर्नामेंट में अपने बल्ले, गेंद से कमाल करने वाले मोनू कुमार को मैन ऑफ द सीरीज, बेस्ट बैट्समैन, बेस्ट बॉल का खिताब मिला।

दोनों फाइनलिस्ट टीम के सभी सदस्यों का 10-10 लाख का दुर्घटना बीमा भी कराया गया।

गंगा और स्वर्णरेखा के बीच खेले गए फाइनल मुकाबले में गंगा की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी स्वर्णरेखा की टीम ने निर्धारित 16 ओवरों में 6 विकेट खोकर 133 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया।

स्वर्णरेखा की ओर से विजय कुमार ने सर्वाधिक 49 रनों का योगदान दिया, जबकि शिव राम ने 36 रन और मोनू कुमार ने 24 रन की उपयोगी पारी खेली। गंगा की ओर से गेंदबाजी में ओम प्रकाश झा सबसे सफल रहे। उन्होंने 2 विकेट झटके, वहीं दिवाकर और संतोष को 1-1 विकेट मिला।

134 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गंगा की टीम 16 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 126 रन ही बना सकी और लक्ष्य से चूक गई. गंगा की तरफ से ओम प्रकाश झा ने 52 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी और समीर सृजन ने 38 रन की पारी खेली, लेकिन वे अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए।

स्वर्णरेखा की ओर से आसिफ नईम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन ओवर में 18 रन देकर दो विकेट लिये, जबकि मोनू कुमार और शिव राम को 1-1 विकेट मिला। शिव राम को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

फाइनल मुकाबले का उद्घाटन झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने किया। उन्होंने दोनों टीम के खिलाड़ियों के परिचय प्राप्त किया, जबकि टॉस कराकर विधिवत उद्घाटन किया।

फाइनल के समापन पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने खिलाड़ियों को खिताब और अन्य पुरस्कार दिये।

जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव, टाटा के कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन हेड राजेश रंजन, टाटा स्पोट्स हेड मनीष सिन्हा, टाटा के मीडिया रिलेशन एसोसिएट डायरेक्टर अमित गुप्ता, मैनेजर, कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन निभा शर्मा, टाटा स्टील के सीनियर मैनेजर सीएम एंथोनी, टाटा स्टील सीआरई ऑफिस सूरज कुमार शर्मा समेत अन्य मौजूद थे।

फाइनल : स्वर्णरेखा – गंगा

विजयी टीम : स्वर्ण रेखा (छह रन से जीती)

मैन ऑफ द मैच : शिव राम

मैन ऑफ द सीरीज : मोनू कुमार

बेस्ट बैट्समैन : मोनू कुमार

बेस्ट बॉलर : मोनू कुमार

बेस्ट फिल्डर : संतोष सिन्हा

बेस्ट विकेटकीपर : विजय कुमार

वेटरन प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट : ओपी झा

बेस्ट डिसिप्लिन टीम : अमानत

मीडिया कप क्रिकेट प्रतियोगिता 2026 के आयोजन को सफल बनाने में जुटे सभी 421 खिलाड़ी व उनके परिजन, दर्शक, सभी गण्यमान अतिथितिगण, संसाधन उपलब्ध करानेवाले समस्त वेंडर-संस्थाएं, सभी अंपायर-स्कोरर-कैमरामैन, सफाई में जुटे सभी साथी, सुरक्षा प्रहरी, जेके स्टेडियम के ग्राउंडसमैन व अन्य सभी स्टाफ और प्रतियोगिता के सभी प्रायोजकों का हृदय से आभार।

आप सभी की मेहनत व सहयोग के बगैर ये आयोजन संभव नहीं था।

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उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत सत्र 2026-27 में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया

सभी आवेदन जिला की आधिकारिक RTE वेबसाइट www.rteranchi.in पर भरे जाएंगे

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ 16 फरवरी 2026 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 दस्तावेज़ सत्यापन 16 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026, लॉटरी द्वारा चयन सूची प्रकाशन 28 मार्च 2026 (संभावित)

हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिले:- उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री

राँची,16.02.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अंतर्गत सत्र 2026-27 में निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया।

इस दौरान जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज एवं जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी राँची, श्री राजीव कुमार एवं इससे सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राँची जिला प्रशासन द्वारा समाज के कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री, के निर्देशन में राँची जिले के CBSE/ICSE एवं अन्य मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग , अभिवंचित समूह तथा दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत प्रवेश स्तर की कक्षाओं (नर्सरी/एल.के.जी./यू.के.जी./कक्षा-1) में कुल 1176 सीटें 25% आरक्षण के अंतर्गत आरक्षित की गई हैं।

इस वर्ष सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, ऑनलाइन एवं रैंडमाइज्ड लॉटरी सिस्टम पर आधारित होगी, ताकि किसी भी प्रकार की पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश न रहे। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे भी उत्कृष्ट निजी विद्यालयों में पढ़ाई कर सकें और मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें।

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी — कोई भी आवेदन ऑफलाइन नहीं लिया जाएगा।

चयन प्रक्रिया — रैंडमाइज्ड लॉटरी (कंप्यूटरीकृत रैंडम सिलेक्शन) के माध्यम से विद्यालय आवंटन।

सहायता व्यवस्था — अभिभावकों की सुविधा हेतु जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), राँची के कार्यालय में हेल्प डेस्क/सहायता काउंटर स्थापित किया गया है, जहाँ आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की जाएगी।

चयन सूची का प्रकाशन — निर्धारित तिथि पर आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी।

आवेदन पोर्टल — सभी आवेदन जिला की आधिकारिक RTE वेबसाइट www.rteranchi.in पर भरे जाएंगे।

महत्वपूर्ण तिथियाँ (सत्र 2026-27)

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ : 16 फरवरी 2026
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि : 15 मार्च 2026
दस्तावेज़ सत्यापन : 16 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026
लॉटरी द्वारा चयन सूची प्रकाशन : 28 मार्च 2026 (संभावित)
प्रथम चरण नामांकन : 31 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026

पात्रता मानदंड निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चे इस योजना के लिए पात्र हैं (आयु की गणना 31 मार्च 2026 के आधार पर की जाएगी)

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग — परिवार की वार्षिक आय ₹72,000/- से कम।
अभिवंचित समूह — अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि।
दिव्यांग बच्चे — 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले बच्चे।
-बच्चे का निवास राँची जिले के निर्धारित क्षेत्र में होना चाहिए।

आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज़

– बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र/आयु प्रमाण।
– आय प्रमाण पत्र
– निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, आधार आदि)।
– दिव्यांगता प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

पूर्ण विवरण एवं आवेदन प्रक्रिया के लिए कृपया आधिकारिक वेबसाइट www.rteranchi.in पर जाएँ। गलत या अपूर्ण जानकारी/दस्तावेज़ देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा की शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार आइए मिलकर साकार करें। हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिले। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के अनुपालन में, राँची जिला प्रशासन द्वारा सत्र 2026-27 के लिए CBSE/ICSE/निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं (नर्सरी/एल.के.जी./यू.के.जी./कक्षा-1) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन प्रक्रिया का शुभारंभ किया।

इस वर्ष राँची जिले में कुल 1176 सीटें RTE कोटे के अंतर्गत आरक्षित हैं, जिन पर बीपीएल (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग), वंचित समूहों तथा 40% या अधिक दिव्यांगता वाले बच्चों को निःशुल्क एवं उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

जिला प्रशासन, राँची सभी योग्य अभिभावकों से अपील करता है कि वे निर्धारित अवधि (16 फरवरी से 15 मार्च 2026) के भीतर अपना आवेदन अवश्य जमा करें और इस जनहितकारी योजना का लाभ उठाएँ। शिक्षा हर बच्चे का है अधिकार आइए, मिलकर करें साकार।

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026: सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु (नगर निगम क्षेत्र) ने सामग्री कोषांग का किया निरीक्षण

सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु (नगर निगम क्षेत्र) ने सामग्री कोषांग का किया निरीक्षण

मतदान दलों को उपलब्ध कराए जाने वाली सामग्री का सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश

नई दिल्ली –  नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 के सफल, निष्पक्ष एवं पारदर्शी संचालन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां जारी हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23.02.2026 को मतदान संपन्न कराया जाएगा, जबकि 21.02.2026 को फुटबॉल स्टेडियम अवस्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों को मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए सामग्री कोषांग में सभी आवश्यक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

इसी क्रम में रांची नगर निगम क्षेत्र के सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु द्वारा सामग्री कोषांग का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मतदान में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की उपलब्धता, पैकेजिंग, लेबलिंग, सीलिंग एवं सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था का जायजा लिया।

सामान्य प्रेक्षक श्री संदीप कुमार दोराईबुरु द्वारा मतदान दलों को उपलब्ध कराए जाने वाले किट की तैयारी, स्टेशनरी सामग्री की समुचित पैकिंग तथा प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए सामग्री का सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिया गया। उन्होंने डिस्पैच के दिन किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए चेकलिस्ट आधारित सत्यापन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रत्येक स्तर पर सतर्कता एवं समन्वय आवश्यक है।

इस अवसर पर वरीय पदाधिकारी कार्मिक कोषांग-सह-उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया, नोडल पदाधिकारी श्रीमती मनीषा तिर्की सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे। अधिकारियों द्वारा सामान्य प्रेक्षक को सामग्री संधारण, अभिलेखीकरण, सुरक्षा प्रबंध तथा मतदान दलों को सामग्री वितरण की चरणबद्ध प्रक्रिया से अवगत कराया गया।

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झारखंड विधानसभा के पंचम (बजट) सत्र को लेकर निषेधाज्ञा

झारखंड विधानसभा परिसर (नया विधानसभा) के 750 मीटर के दायरे में (माननीय उच्च न्यायालय झारखंड, रांची को छोड़कर) निषेधाज्ञा

दिनांक 18.02.2026 के प्रातः 08:00 बजे से दिनांक 19.03.2026 के रात्रि 10:00 तक के लिए निषेधाज्ञा लागू

रांची,16.02.2026 – षष्ठम झारखंड विधानसभा का पंचम (बजट) सत्र रांची में दिनांक 18.02.2026 से 19.03.2026 तक आहूत है। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची एवं अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था, राँची के संयुक्तादेश में निहित निर्देश के आलोक में विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में किसी तरह के जुलूस, रैली, प्रदर्शन, घेराव आदि आयोजित नहीं किये जा सकेंगे।

इसके मद्देनजर सुरक्षा की दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बी०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झारखंड विधानसभा (नया विधानसभा) परिसर के 750 मीटर के दायरे में (माननीय उच्च न्यायालय झारखंड, रांची को छोड़कर) निषेधाज्ञा जारी की गई है, जो निम्न है :-

1. उक्त क्षेत्र में पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

2. किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे बंदूक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

3. किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।

4. किसी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली या आम सभा का आयोजन करना।

5. किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोडकर)।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 18.02.2026 के प्रातः 08:00 बजे से दिनांक 19.03.2026 के रात्रि 10:00 तक के लिए तक प्रभावी रहेगा।

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भारत सरकार ने गुजरात में सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड कूपन पायलट की शुरुआत की

नई दिल्ली – भारत सरकार ने गुजरात में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी, गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया भी उपस्थित रहीं।

 

इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) की शुरुआत भारत की खाद्य सुरक्षा संरचना में पारदर्शिता, दक्षता और लाभार्थियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। गुजरात में सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट परियोजना का शुभारंभ करते हुए उन्होंने जोर दिया कि 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सेवा प्रदान करने वाली भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी खाद्य वितरण व्यवस्था है, जो तकनीक-आधारित सुधारों के माध्यम से निरंतर विकसित हो रही है। “हर दाना, हर रुपया, हर अधिकार” का नारा देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल पात्रता संबंधी जागरूकता को बढ़ाएगी, लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगी तथा रियायती खाद्यान्न के वितरण में जवाबदेही को सुदृढ़ करेगी।

श्री जोशी ने जानकारी दी कि सीबीडीसी ढांचे के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तैयार किया गया डिजिटल कूपन लाभार्थियों के खातों में प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा (ई रुपया) के रूप में सीधे जमा किए जाएंगे। लाभार्थी अपने निर्धारित खाद्यान्न की मात्रा को उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) पर सीबीडीसी कूपन अथवा वाउचर कोड के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा ई-पीओएस संचालन से संबंधित चुनौतियों का समाधान करेगी और साथ ही सुरक्षित, ट्रैसेबल तथा वास्तविक समय (रियल-टाइम) लेनदेन सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि इस पायलट परियोजना का विस्तार शीघ्र ही चंडीगढ़, पुडुचेरी तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी किया जाएगा।

यह पहल भारत सरकार द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक तथा गुजरात सरकार के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अहमदाबाद, आणंद, वलसाड और सूरत जिलों में प्रारंभ की गई है। इसके विस्तार की रणनीति के अंतर्गत अगले चरणों में इस पहल को पुडुचेरी, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा।

इस अवसर पर श्री अमित शाह ने कहा कि सीबीडीसी पायलट योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ‘डिजिटल इंडिया’ की परिकल्पना का एक महत्वपूर्ण विस्तार है। उन्होंने इस प्रणाली को अधिक पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और त्रुटि-रहित बनाने में सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की तथा उल्लेख किया कि आज विश्व के लगभग आधे डिजिटल लेनदेन भारत में संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीडीसी ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की सरकार की परिकल्पना को और सुदृढ़ करेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि लाभार्थियों को उनके निर्धारित खाद्यान्न अधिक पारदर्शिता और अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ प्राप्त हों। उन्होंने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के क्रियान्वयन में सीबीडीसी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

सीबीडीसी-सक्षम प्रणाली के अंतर्गत लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया उपलब्ध रहेगा, जिससे वे उचित मूल्य दुकानों पर अपने निर्धारित खाद्यान्न की खरीद के लिए क्यूआर कोड अथवा कूपन कोड आधारित निर्बाध लेनदेन कर सकेंगे। यह प्रणाली बार-बार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता को समाप्त करती है, लेनदेन की दक्षता में सुधार लाती है तथा वास्तविक समय में डिजिटल ट्रेल तैयार करती है, जिससे पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को सुदृढ़ किया जा सके। उचित मूल्य दुकान संचालकों को भी उनका कमीशन वास्तविक समय के आधार पर प्राप्त होगा, जिससे एक पारस्परिक रूप से लाभकारी तंत्र का निर्माण होगा।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक डिजिटल रूपांतरण की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पहलों में राशन कार्डों का एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण तथा ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) ढांचे के अंतर्गत देशव्यापी पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करना, आधार-सक्षम प्रमाणीकरण एवं वास्तविक समय में लेनदेन अभिलेखन हेतु ई-पीओएस उपकरणों की तैनाती, तथा ‘राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड’ के माध्यम से डेटा-आधारित सत्यापन व्यवस्था का कार्यान्वयन शामिल है। ‘अन्न चक्र’ के माध्यम से डिजिटल आपूर्ति-श्रृंखला का अनुकूलन तथा ‘अन्न सहायता’ जैसे सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्रों ने पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रदायगी को और अधिक सशक्त बनाया है। सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की संरचना में एक प्रोग्रामेबल संप्रभु डिजिटल भुगतान व्यवस्था को एकीकृत करते हुए, इस सुधार के प्रयास के अगले चरण का प्रतिनिधित्व करता है।

लाभार्थियों की सीमित संख्या के साथ प्रारंभ की गई इस पायलट योजना से प्रौद्योगिकी को कल्याणकारी वितरण प्रणाली के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध होने की अपेक्षा है। यह पहल पारदर्शिता को सुदृढ़ करने तथा अंतिम छोर तक सेवा वितरण के लिए अधिक दक्ष और जवाबदेह शासन ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सीबीडीसी-आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट योजना का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष साँघवी, गुजरात के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमणभाई भिकाभाई सोलंकी, गुजरात के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री पूनमचंद छानाभाई बरांडा तथा गांधीनगर की महापौर मीराबेन पटेल की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार, गुजरात सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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आईआईटी मद्रास द्वारा शुरू किया गया कंसोर्टियम-संचालित नवाचार मॉडल तत्काल और उपयुक्त प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण को सक्षम बनाता है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आईआईटी मद्रास अनुसंधान पार्क में स्थित इमर्सिव टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप लैब्स (आईटीईएल) फाउंडेशन और आईआईटी मद्रास में विभिन्न उन्नत अनुसंधान सुविधाओं का दौरा किया, जहां उन्होंने शहरी गतिशीलता, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, चिकित्सा उपकरण और मस्तिष्क अनुसंधान से संबंधित चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की।

मंत्री महोदय ने आईआईटी रिसर्च पार्क द्वारा शुरू किए गए कंसोर्टियम आधारित नवाचार मॉडल की प्रशंसा की, जो प्रौद्योगिकी के तत्काल और उचित व्यावसायीकरण को संभव बनाता है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल को अब अन्य शैक्षणिक संस्थान और विश्वविद्यालय भी तेजी से अपना रहे हैं।

आईटीईएल फाउंडेशन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त और जुलाई 2024 में स्थापित एक धारा 8 के अंतर्गत आने वाली गैर-लाभकारी संस्था है, जो गहन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देकर और उद्योग-अकादमिक संघों का निर्माण करके भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह मॉडल शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत के नेताओं और निवेशकों को एक साथ लाकर प्रौद्योगिकियों का सह-विकास करने और उन्हें सीधे वाणिज्यिक क्षेत्र में स्थानांतरित करने का अवसर प्रदान करता है।

शोधकर्ताओं और स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कंसोर्टियम दृष्टिकोण-जिसमें उद्योग की भागीदारी विकास के चरण से ही शुरू हो जाती है- यह सुनिश्चित करता है कि नवाचार वास्तविक दुनिया की जरूरतों के अनुसार हों। उन्होंने कहा कि इस तरह की एकीकृत कार्यप्रणाली से शोध परिणामों को तेजी से लागू करने योग्य समाधानों में परिवर्तित करना संभव होता है।

प्रमुख प्रदर्शनों में से एक एचएएसएचटीआईसी मोबिलिटी पहल थी, जिसका उद्देश्य भारतीय शहरों में भीषण यातायात जाम की समस्या का समाधान करना है। इस परियोजना का लक्ष्य मौजूदा सड़कों के ऊपर बने एलिवेटेड ट्रैक पर चलने वाले AI-सक्षम, छोटे आकार के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सिस्टम के माध्यम से 15 किलोमीटर की शहरी यात्रा को लगभग 20 मिनट में पूरा करना है। यह अवधारणा भीड़भाड़ वाले महानगरीय क्षेत्रों में पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्टिविटी प्रदान करने, यात्रा के समय को कम करने और सड़क बुनियादी ढांचे पर दबाव कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। टीम ने मंत्री महोदय को बताया कि यह सिस्टम विशेष रूप से भारतीय शहरी परिस्थितियों के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसमें सामर्थ्य, विस्तारशीलता और स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत विकसित निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप अग्निकुल कॉस्मो के कार्यों की भी समीक्षा की। यह कंपनी लचीले और मांग के अनुरूप उपग्रह प्रक्षेपण करने के लिए डिज़ाइन किए गए प्रक्षेपण यान बनाती है। 30 मई, 2024 को, अग्निकुल ने इन-स्पेस और इसरो के सहयोग से अपना पहला सफल प्रक्षेपण किया और अपनी मुख्य तकनीक का प्रदर्शन किया। कंपनी इस वर्ष के अंत में अपने पुन: प्रयोज्य रॉकेट के वाणिज्यिक प्रक्षेपण की तैयारी कर रही है। अधिकारियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऐसे स्टार्टअप भारत के बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं।

मंत्री जी ने आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल का दौरा किया, जिसने जलवायु प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, डीप-टेक और एआई-आधारित समाधानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में 500 से अधिक स्टार्टअप को बढ़ावा दिया है। यह इनक्यूबेशन सेल स्टार्टअप को मार्गदर्शन, प्रयोगशालाओं तक पहुंच, वित्तीय सहायता और उद्योग नेटवर्क प्रदान करता है, जिससे स्टार्टअप प्रोटोटाइप से लेकर बाजार में बिकने योग्य उत्पादों तक पहुंचने में सक्षम होते हैं।

स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (एचटीआईसी) में मंत्री जी को लगभग 40 चिकित्सा संस्थानों, उद्योग भागीदारों और सरकारी एजेंसियों के सहयोग से किफायती, स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के विकास के बारे में जानकारी दी गई। जैव प्रौद्योगिकी विभाग से प्राप्त प्रारंभिक सहायता से 2011 में स्थापित होने के बाद से, एचटीआईसी ने 12 व्यावसायिक रूप से सफल ‘मेड-इन-इंडिया’ उत्पादों को विकसित किया है, जो भारत और विदेशों में दो करोड़ से अधिक रोगियों तक पहुंच चुके हैं। यह केंद्र चिकित्सा संबंधी अधूरी जरूरतों को पूरा करने और आयातित चिकित्सा प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

इस दौरे में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का दौरा भी शामिल था, जहां शोधकर्ता संपूर्ण मानव मस्तिष्क की कोशिका-स्तरीय डिजिटल 3डी छवियां तैयार कर रहे हैं। अधिकारियों ने मंत्री जी को बताया कि भारत में इस स्तर पर इतने व्यापक मानव मस्तिष्क छवि डेटा का निर्माण पहली बार हुआ है। सेंटर की “धरणी” नामक द्वितीय तिमाही मानव भ्रूण मस्तिष्क एटलस परियोजना ने मस्तिष्क मानचित्रण अनुसंधान को काफी आगे बढ़ाया है और अग्रणी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग प्राप्त किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये पहलें दर्शाती हैं कि शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच समन्वित प्रयास शहरी गतिशीलता और स्वास्थ्य सेवा से लेकर अंतरिक्ष और तंत्रिका विज्ञान तक, नागरिकों को सीधे प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकास को कैसे गति दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शुरुआत से ही अनुसंधान संस्थानों को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना भारत के नवाचार इको सिस्टम को मजबूत करता है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने की देश की क्षमता को बढ़ाता है।

यह दौरा शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के साथ बातचीत के साथ समाप्त हुआ, जिसमें सफल मॉडलों को बड़े पैमाने पर लागू करने और देश के अन्य संस्थानों में इस तरह के सहयोगात्मक ढांचे को दोहराने पर बातचीत की गयी।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (PDS) का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित पारदर्शी, आधुनिक व सरल सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (PDS) का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से आज डिजिटल इंडिया का विस्तार खाद्य और आपूर्ति की व्यवस्था तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों को दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में 60 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके पूरे परिवार में एक भी बैंक खाता नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन्स में से आधे भारत में हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज वही डिजिटल इंडिया, देश के गरीबों को सस्ता अनाज देने के क्षेत्र में पदार्पण कर रहा है। श्री शाह ने कहा कि इस पद्धति से गरीबों को राशन देने के सिस्टम में से भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश में कनेक्टिविटी के विस्तार से अब डिजिटल तरीके से गरीबों को सीधे अनाज मिलने की व्यवस्था हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने देश में से घपले-घोटालों को समाप्त कर दिया, उसी प्रकार खाद्य आपूर्ति मंत्रालय का यह कदम आने वाले दिनों में पारदर्शी वितरण प्रणाली सुनिश्चित करेगा। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मंत्र, Minimum Government, Maximum Governance, को आज एक नए क्षेत्र में ज़मीन पर उतारने का काम हो रहा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी और प्रधानमंत्री मोदी जी की गरीबों के प्रति संवेदना का अनूठा संगम यह वितरण प्रणाली सुरक्षित, पारदर्शी तरीके से गरीबों के अधिकार की सुरक्षा का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि आज अन्नपूर्ति मशीन का भी लोकार्पण हुआ है, जो 35 सेकंड में 25 किलो अनाज का वितरण कर रही है।श्री शाह ने कहा कि 3-4 साल में ही पूरे देश में यह प्रणाली लागू हो जाएगी।उन्होंने कहा कि यह अनाज वितरण प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी होगी और इसके लागू होने के बाद देश के हर गरीब को 5 किलो मुफ्त अनाज मिल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर गुणवत्ता, सटीक मात्रा और पारदर्शी वितरण में अन्नपूर्ति मशीन सहायक सिद्ध होगी। श्री शाह ने कहा कि धीरे-धीरे कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक हमारे विशाल देश में इस प्रणाली को लागू करना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज देश के 1 लाख 7 हज़ार गांवों में कनेक्टिविटी पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के 80 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो मुफ्त अनाज देने का काम किया है। श्री शाह ने कहा कि यह खाद्य सुरक्षा अब पारदर्शी हो गई है। उन्होंने कहा कि देश के 1 करोड़ 9 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को स्वनिधि योजना का फायदा प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ठोस नीतियों से 10 वर्ष में 60 करोड़ से अधिक लोगों के जीवनस्तर को ऊपर उठाने और 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के ऊपर लाने का काम भी मोदी सरकार ने किया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी और उनकी सरकार हमेशा झूठ बोलकर जनता को गुमराह करते हैं। श्री शाह ने कहा कि पिछली सरकार में कृषि बजट मात्र 26 हज़ार करोड़ रूपए था जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने बढ़ाकर 1 लाख 29 हज़ार करोड़ रूपए कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 70 साल में सिर्फ एक बार कर्ज़ माफी से किसानों को गुमराह करने का काम किया जबकि प्रधानमंत्री मोदी जी 10 साल से हर किसान के बैंक खाते में 6 हज़ार रुपए हर साल भेजकर ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं कि किसान को कर्ज लेना ही न पड़े।

श्री अमित शाह ने कहा कि यूरोपीय संघ और इंग्लैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर विपक्ष देश को गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने डंकल प्रस्ताव पर साइन कर किसानों को असुरक्षित किया था। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और इंग्लैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारत के डेयरी क्षेत्र को भी सुरक्षित करने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया है। श्री शाह ने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से हमारे कृषि और मछुआरों के उत्पाद पूरी दुनिया में पहुंचने का रास्ता खुल गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी कभी भी किसानों, मछुआरों, पशुपालकों के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी आज भी देश के किसानों की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज अन्न वितरण और अन्न सुरक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता को समाप्त करने का काम हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे हर गरीब नागरिक को अनाज प्राप्त करने के अधिकार की सुरक्षा होगी औऱ बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

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ग्राम पंचायतों के लिए नई क्षमता-निर्माण श्रृंखला शुरू होने से उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान को बढ़ावा मिला

नई दिल्ली – उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 2024 और 2025 के दौरान आयोजित अपने वर्चुअल क्षमता-निर्माण पहलों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए अपने राष्ट्रव्यापी वर्चुअल क्षमता-निर्माण कार्यक्रम की दूसरी श्रृंखला शुरू की है। इस श्रृंखला का उद्घाटन 13 फरवरी, 2026 को पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से किया गया जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ाना और संरक्षण तंत्र को मजबूत करना है।

 

इस नई पहल के तहत पहली बातचीत बिहार, झारखंड और ओडिशा राज्यों के साथ हुई। इस सत्र में 1,011 ऑनलाइन लिंक के माध्यम से भागीदारी हुई, जिससे पंचायत स्तर पर हजारों हितधारकों तक पहुंचा जा सका। प्रतिभागियों को प्रमुख उपभोक्ता अधिकारों, उभरते उपभोक्ता मुद्दों और शिकायत निवारण के लिए उपलब्ध संस्थागत तंत्रों के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम ने प्रत्यक्ष संवाद को भी संभव बनाया जिससे पंचायत प्रतिनिधियों को जमीनी स्तर की चिंताओं को उठाने और स्पष्टीकरण मांगने का अवसर मिला।

इस सत्र में उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा देने, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर अंकुश लगाने और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे शिकायत निवारण मंचों तक पहुंच को सुगम बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। अपने पूर्व चरण में, विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता अधिकारों, जिम्मेदारियों और निवारण ढांचों पर पंचायती राज प्रतिनिधियों के लिए वर्चुअल जागरूकता सत्रों की एक व्यापक श्रृंखला आयोजित की। यह अभियान 20 दिसंबर, 2024 को शुरू हुआ और 22 अगस्त, 2025 को समाप्त हुआ जिसमें दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों को शामिल किया गया। दिल्ली और चंडीगढ़ में पंचायती राज संस्थाएं गठित नहीं हैं।

 

 

 

 

 

 

 

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय समावेशिता पर इसका जोर देना रहा है। प्रभावी संचार, व्यापक भागीदारी और जमीनी स्तर पर बेहतर समझ सुनिश्चित करने के लिए सत्र संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किए गए। संबंधित राज्य भाषाओं में निपुण अधिकारियों द्वारा कार्यवाही की अध्यक्षता की गई जिससे प्रतिभागियों के साथ सीधा संवाद और सार्थक बातचीत संभव हो सकी। इस दृष्टिकोण ने जवाबदेही को काफी बढ़ाया और जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।

इस पहल ने पंचायत प्रतिनिधियों की अपने समुदायों में उपभोक्ता संरक्षण के सूत्रधार के रूप में क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उपभोक्ता अधिकारों और निवारण प्रणालियों के व्यावहारिक ज्ञान से स्थानीय संस्थानों को सुसज्जित करके, कार्यक्रम ने अधिक जागरूक और सशक्त ग्रामीण उपभोक्ता आधार के निर्माण में सहायता की है।

वर्चुअल प्रारूप ने लागत दक्षता, विस्तारशीलता और देशव्यापी स्तर पर त्वरित पहुंच के लाभों को और भी बेहतर ढंग से प्रदर्शित किया है जिससे कम समय में बड़े पैमाने पर सहभागिता संभव हो पाई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त सकारात्मक परिणामों और रचनात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से कार्यक्रम को जारी रखने और विस्तार करने का निर्णय लिया है जिसमें अंतिम छोर के उपभोक्ता जागरूकता को गहरा करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है।

इस निरंतर प्रयास के माध्यम से, विभाग यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है कि उपभोक्ता जागरूकता शासन के हर स्तर तक पहुंचे जिससे नागरिकों को, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, ज्ञात विकल्प चुनने और समय पर शिकायत निवारण प्राप्त करने का अधिकार मिले।

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वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय के दो दिवसीय चिंतन शिविर का आज कर्नाटक के कूर्ग में सफलतापूर्वक समापन

नई दिल्ली – वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय ने 13 और 14 फरवरी 2026 को कर्नाटक के कूर्ग में एक चिंतन शिवि‍र का आयोजन किया। इस शिविर में वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू, सभी वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, पीएसआईसी और डीएफआई संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञों और वित्तपोषण के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए साथ ही बैंकिंग और वित्त के क्षेत्र में सार्वजनिक नीति संबंधी चुनौतियों के लिए सहयोगात्मक और नवोन्मेषी समाधानों को बढ़ावा देने में विभाग की भूमिका पर चर्चा की।

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने और वित्तीय संस्थानों की भूमिका को लेकर नए दृष्टिकोण और रचनात्मक विचारों को प्रोत्साहित करना था। इस शिविर में सभी हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विकसित भारत के रणनीतिक संदर्भ में बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं के प्रतिभागियों को जिन महत्वपूर्ण कदमों को उठाने की आवश्यकता है, उन पर गहन चर्चाएं हुई।

 

अपने संबोधन में, वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू ने विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुरूप, सकल घरेलू उत्‍पादन में साख के अनुपात को बढ़ाने, वित्तीय संस्थानों को अधिक चुस्त बनाने और बड़े पैमाने पर वित्तपोषण के नए तरीके तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया। सचिव ने कहा कि सत्र के दौरान प्राप्‍त विचार विभाग और उसके वित्तीय संस्थानों के लिए एक साझा दृष्टिकोण और कार्य योजना का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. के. पी. कृष्णन ने अपने भाषण में भारत में कुछ और गिफ्ट-शहरों की आवश्यकता, एक मजबूत और समृद्ध बॉन्ड बाजार, मध्यस्थता की लागत में कमी आदि पर जोर दिया।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ श्री अमिताभ कांत ने सभा को संबोधित करते हुए एमएसएमई के वित्तपोषण में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका, जन आधार की तर्ज पर जन व्यापार की आवश्यकता और व्यापार करने की लागत को और कम करने के लिए उपयुक्त नियम-आधारित साधनों के विकास के बारे में बताया।

अन्य प्रख्यात विशेषज्ञों, पैनलिस्टों और प्रतिभागियों ने बैंकिंग और साइबर सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, 2047 तक पूर्णतः बीमित और पेंशनभोगी समाज सुनिश्चित करने जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। चर्चा के दौरान शैडो सीईओ की अवधारणा को दोहराना, स्वायत्त संगठन, डिजिटल ट्रस्ट, नॉलेज हाफ लाइफ, निवेश बढ़ाने के नवीन तरीके, नए बीमा और पेंशन उत्पादों की खोज, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में अधिक लचीली वित्तीय प्रणाली बनने के तरीकों सहित कई विचार सामने आए।

शीर्ष टीम प्रभावशीलता, सचेतनता और कल्याण पर सत्र भी आयोजित किए गए जिनमें प्रतिभागियों ने उच्च प्रदर्शन करने वाली टीमों के निर्माण, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ तनाव प्रबंधन के लिए सचेतनता का अभ्यास करने और सतत संगठनात्मक विकास को गति देने के लिए कल्याण की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व का अनुभव किया।

चिंतन शिविर, 2026 ने इस बात पर फिर से जोर दिया कि भारतीय वित्तीय संस्थानों का भविष्य बड़ी महत्वाकांक्षाओं और परिवर्तनकारी उद्देश्य से आकार लेगा जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थानों के रूप में उभरने की आकांक्षा रखने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।

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“यह सिर्फ़ एक प्रदर्शनी नहीं है, यह इज्ज़त, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है” – डॉ. वीरेंद्र कुमार

 डॉ. वीरेंद्र कुमार ने चंडीगढ़ में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – “यह सिर्फ़ एक प्रदर्शनी नहीं है; यह इज्ज़त, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है।” इन प्रभावशाली शब्दों के साथ, माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज चंडीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने मेले को बदलाव लाने वाला आंदोलन बताया जो देश भर के दिव्यांगजनों की ज़िंदगी में आशा की नई किरण बनकर उभरा है, जो सबको साथ लेकर चलने और समान अवसर के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है।

2014 से सशक्तिकरण की यात्रा की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असंवेदनशील टर्मिनोलॉजी से सम्मानजनक शब्द “दिव्यांगजन” में बदलाव ने न सिर्फ़ शब्दकोश में बदलाव किया, बल्कि दृष्टिकोण में भी बदलाव किया।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का लागू होना, दिव्यांगजनों की श्रेणी का विस्तार, और सुगम्य भारत अभियान को लागू करने ने मिलकर सुगम्यता, प्रतिष्ठा और भागीदारी की नींव रखी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सच्चा सम्मान शब्दों से कहीं ज़्यादा होता है — इसे आर्थिक मज़बूती, सामाजिक समावेश और स्वावलंबन में बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्य कला मेला, दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की प्रतिभा को सीधे भारत भर के बाज़ार से जोड़कर इस जीवनदर्शन को दिखाता है।

 

इस अवसर पर माननीय राज्यसभा सांसद श्री सतनाम सिंह संधू  ने कहा कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के हिसाब से दिव्यांगजनों को सम्मान देना ऐतिहासिक कदम है। यद्यपि, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सशक्तिकरण के साथ सम्मान भी होना चाहिए।  उन्होंने कहा, “रोज़ी-रोटी और आत्मनिर्भरता के बिना इज़्ज़त अधूरी रहती है।” उन्होंने दिव्य कला मेले जैसे प्लेटफ़ॉर्म बनाने के लिए मंत्रालय की तारीफ़ की। इससे उन विशेषरूप से उन दिव्यांग युवाओं को अपने उत्पाद अपने घर के आसपास दिखाने और बेचने में सहायता मिलती है जो दूर नहीं जा सकते।

चंडीगढ़ के माननीय महापौर श्री सौरभ जोशी ने इस अवसर को प्रतिभा, आत्मविश्वास और इंसानी काबिलियत का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में दिव्य कला मेला, दिव्य कला शक्ति और रोज़गार मेला आयोजित करना सबको साथ लेकर चलने की शहर की प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह इस विश्वास को मज़बूत करता है कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं बल्कि विशेष काबिलियत है जो समाज को बेहतर बनाती है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा ने स्वागत भाषण में इस पहल के असल आर्थिक असर पर ज़ोर दिया। पिछले तीन वर्ष में, अलग-अलग शहरों में लगाए गए दिव्य कला मेलों में ₹2366.43 लाख के बिज़नेस लेनदेन हुए हैं, जो साफ़ तौर पर बाज़ार में बढ़ती मंज़ूरी और दिव्यांग कारीगरों की बढ़ती उद्यमिता क्षमता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि ये मेले सिर्फ़ प्रदर्शनी नहीं हैं, बल्कि आर्थिक समावेश और आत्मनिर्भरता के मज़बूत माध्यम हैं।

29वां दिव्य कला मेला चंडीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें चंडीगढ़ के सामाजिक कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती अनुराधा एस. चगती; एनडीएफडीसी के मुख्य महाप्रबंधक श्री विनीत राणा; एनडीएफडीसी सहायक महाप्रबंधक श्री एम. के. साहू; और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित जाने-माने लोगों की शानदार मौजूदगी देखी गई।  अब तक, देश भर में 28 जगहों पर दिव्य कला मेले लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 2,362 दिव्यांग उद्यमियों ने हिस्सा लिया है। इससे कुल मिलाकर ₹23 करोड़ से ज़्यादा की आय हुई है। यह समावेशी उद्यमिता में बड़ी उपलब्धि है।

मार्केटिंग प्लेटफॉर्म देने के अलावा, सरकार ने दिव्यांगजनों की उद्यमिता को और मज़बूत करने के लिए इन कोशिशों के ज़रिए ₹20 करोड़ से ज़्यादा के ऋण मंज़ूर किए हैं। समानांतर रोज़गार मेलों में 3,131 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से ज़्यादा को पहले ही जॉब ऑफ़र मिल चुके हैं। यह इस कोशिश के रोज़गार देने वाले पहलू को दिखाता है।

चंडीगढ़ मेले में करीब 75 स्टॉल हैं, जिनमें दिव्यांग उद्यमी, भारत सरकार के संस्थानों और एनजीओ के स्टॉल शामिल हैं। दिव्यांगजनों को जाने-माने संगठनों और कंपनियों से जोड़ने के लिए 19 फरवरी 2026 को विशेष रोज़गार मेला तय किया गया है।  आगंतुक एएलआईएमसीओ स्टॉल पर असिस्टिव डिवाइस के लिए भी पंजीकरण कर सकते हैं, जबकि कई संस्थान सशक्तिकरण के उद्देश्य से नवाचार और नई पहल दिखा रहे हैं। बोशिया और ब्लाइंड क्रिकेट जैसी विशिष्ट खेल गतिविधियों के साथ ही रोज़ाना दिव्यांग कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन में जान डाल रहे हैं। 21 फरवरी 2026 को, “दिव्य कला शक्ति” नाम की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दिव्यांग कलाकारों की असाधारण कलात्मक क्षमताओं का उत्सव मनाएगी।

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केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने एमडीओएनईआर पहल के तहत होजाई में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) की पहल के तहत होजाई में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अवसंरचना, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और बुनियादी सेवा वितरण सहित प्रमुख क्षेत्रों में केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था।

बैठक के दौरान, केंद्रीय राज्य मंत्री ने क्षेत्रवार प्रदर्शन की समीक्षा की और जमीनी स्तर की चुनौतियों और अवसरों को समझने के लिए जिला अधिकारियों और हितधारकों से बातचीत की।

उन्होंने उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना, मार्गदर्शन प्रदान किया और सेवा वितरण और विकास परिणामों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों के समय पर समाधान के लिए केन्‍द्र सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने असम और उत्तर पूर्वी क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय बजट के प्रमुख प्रावधानों का उल्‍लेख का उल्‍लेख किया और बुनियादी ढांचे, आजीविका तथा सामाजिक सेवाओं को मजबूत करने में उनकी भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन, कार्यों के समय पर पूरा होने और विभिन्न योजनाओं के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिला प्रशासन की सराहना की।

बैठक में कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने, योजनाओं के बीच समन्वय में सुधार करने और जिले में समग्र एवं समावेशी विकास में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

समीक्षा बैठक में होजाई के जिला आयुक्त श्री बिद्युत बिलाश भगवती के साथ-साथ जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और स्नातक छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर बधाई दी।

सभा को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने दीक्षांत समारोह को विशेष और महत्वपूर्ण बताया—विशेष इसलिए क्योंकि यह वर्षों के समर्पण, दृढ़ता और परिश्रम का प्रतीक है और महत्वपूर्ण इसलिए क्योंकि यह पेशेवर जिम्मेदारी और सेवा के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने स्नातकों से चिकित्सा पेशे के सर्वोच्च आदर्शों को बनाए रखने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और अपने कौशल और ज्ञान को मानवता की सेवा में समर्पित करने का आग्रह किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले ग्यारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास के बारे में बताते हुए कहा कि एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है जिससे पूरे देश में उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़कर लगभग 89 प्रतिशत हो गई है जो मातृ स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण को दर्शाती है।

 

मंत्री ने उल्लेख किया कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एक दशक पहले प्रति लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर प्रति लाख जीवित जन्मों पर 88 हो गई है जबकि शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति हजार जीवित जन्मों पर 39 से घटकर प्रति हजार जीवित जन्मों पर 27 हो गई है जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुमानों का उल्‍लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में वैश्विक औसत की तुलना में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में काफी तेजी से गिरावट दर्ज की है जो लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों और स्वास्थ्य सेवा तक विस्तारित पहुंच के प्रभाव को दर्शाती है। तपेदिक नियंत्रण प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने सतत सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से तपेदिक के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है जो वैश्विक औसत कमी से कहीं बेहतर है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारत के ऐतिहासिक कोविड-19 टीकाकरण अभियान का भी उल्‍लेख किया। इसके तहत एहतियाती और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक टीके देश भर में लगाए गए जो भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के पैमाने, प्रतिरोधक्षमता और दक्षता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए श्री नड्डा ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बारे में बताया जिसमें प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस योजना से अब लगभग 62 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्‍या को कवर करता है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं और स्वतंत्र मूल्यांकनों से प्राप्त प्रमाणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एबी-पीएमजेएवाई ने समय पर कैंसर उपचार तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार किया है और देश भर में पात्र लाभार्थियों के लिए वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ किया है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है। वैश्विक जनसंख्या के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद, भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा रिपोर्ट किए गए रुझानों के अनुरूप निरंतर वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण प्रयासों के माध्यम से मलेरिया के मामलों और मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

मंत्री जी ने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के महत्व का उल्‍लेख करते हुए बताया कि देशभर में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर नागरिकों के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु के रूप में चल रहे हैं। इनमें से 50,000 केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्‍यूएएस) के तहत प्रमाणित किया जा चुका है, और निकट भविष्य में यह संख्‍या 1 लाख तक करने का लक्ष्य है।

श्री नड्डा ने अपने संबोधन का समापन करते हुए दोहराया कि भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की ताकत अंततः इसके चिकित्सा पेशेवरों की प्रतिबद्धता, सक्षमता और करुणा पर निर्भर करती है।

इस अवसर पर बोलते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्नातक छात्रों को बधाई दी और विशेष रूप से दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना, चिकित्सा शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने राज्य और राष्ट्र के लिए कुशल स्वास्थ्य सेवा कार्यबल विकसित करने में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की भूमिका पर बल दिया।

उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री धान सिंह रावत ने भी सभा को संबोधित किया और चिकित्सा एवं उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना की। उन्होंने स्नातकों को अनुसंधान, नवाचार और जन स्वास्थ्य सेवाओं, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

स्वास्थ्य सेवा और उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दृष्टि से स्थापित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय हिमालयी क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में उभरा है जो चिकित्सा, पैरामेडिकल, नर्सिंग, प्रबंधन, इंजीनियरिंग और संबद्ध विज्ञानों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।

इस समारोह में विभिन्न विषयों में डिग्री प्रदान की गई, जो स्नातक होने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है।

इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना, कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति, संकाय सदस्य, अभिभावक और छात्र उपस्थित थे।

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (शी-बॉक्स) का आयोजन किया

नई दिल्ली – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने (14 फरवरी 2026) विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (शी-बॉक्स) पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी; महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर और संसद सदस्यों- श्री सुधांशु त्रिवेदी, श्रीमती रेखा शर्मा, श्रीमती लवली आनंद और श्रीमती शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी; आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) के अध्यक्ष और सदस्य; नोडल अधिकारी; अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि; उद्योग जगत के प्रमुख; नागरिक समाज के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक भी शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने ‘शी-बॉक्स’ के माध्यम से हुई संस्थागत प्रगति का उल्‍लेख करते हुए कहा कि 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को इसमें शामिल किया गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियां सक्रिय हैं जिससे एक राष्ट्रव्यापी सुरक्षा ढांचे की स्थापना हुई है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी 42 प्रतिशत है और 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं इसलिए व्यापक कवरेज और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

इसके बाद “महिलाओं की समानता और आर्थिक भागीदारी के माध्यम से विकसित भारत के चालक के रूप में सुरक्षित कार्यस्थल” शीर्षक वाली एक विषयगत फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

उद्घाटन सत्र के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने शी-बॉक्स लोगो, पॉश स्वैच्छिक अनुपालन जाँच सूची, मिशन शक्ति ऐप के साथ शी-बॉक्स का एकीकरण और शी-बॉक्स पोर्टल पर कर्मयोगी भारत पॉश प्रशिक्षण लिंक प्रारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा शपथ भी दिलाई जिससे देशभर में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को बल मिला।

अपने मुख्य भाषण में श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल एक वैधानिक आवश्यकता नहीं है बल्कि न्याय और समानता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल पर 1.48 लाख से अधिक संस्थान पंजीकृत हैं, 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और पिछले छह वर्षों में महिला श्रम बल की भागीदारी 23 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई है। इससे पता चलता है कि भारत उत्तरदायी और महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में निर्णायक बदलाव देख रहा है। 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऐतिहासिक लैंगिक बजट आवंटन का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने दोहराया कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का केंद्रबिंदु हैं और वास्‍तव में एक विकसित भारत वह होगा जहां हर महिला बिना किसी डर के काम कर सके और नेतृत्व कर सके।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने अपने विशेष संबोधन में कार्यस्थल सुरक्षा को मौलिक अधिकार बताया। उन्होंने सशक्तिकरण के व्यापक तंत्र के बारे में बताया जिससे अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी मजबूत हुई है – 2023-24 में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी बढ़कर लगभग 41.7 प्रतिशत होने से लेकर मुद्रा ऋणों का 70 प्रतिशत महिलाओं को दिये जाने, पीएम स्वनिधि लाभार्थियों में 44 प्रतिशत महिलाएं होने और 90 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक महिलाओं का जुड़ा होना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये आंकड़े प्रगति दर्शाते हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक महिला जीवन के हर क्षेत्र में सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

इन्हीं भावनाओं को दोहराते हुए, राज्यसभा सांसद श्री सुधांशु त्रिवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की समानता और न्याय के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि पॉश अधिनियम और शी-बॉक्स पोर्टल जैसे विधायी और संस्थागत तंत्र सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास को मजबूत करते हैं।

देशव्यापी पॉश प्रशिक्षण वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सुरक्षित कार्यस्थलों को बढ़ावा देने में नए श्रम संहिता की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

“अनुपालन को मजबूत करना और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति का निर्माण करना” विषय पर एक पैनल चर्चा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, संसद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय, संयुक्त राष्ट्र महिला और अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी), विश्व बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ-साथ कार्यस्थल सुरक्षा और लैंगिक अधिकारों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य संस्थागत उत्तरदायित्‍व को मजबूत करना, वैश्विक सर्वोत्तम व्‍यवस्‍थाओं को साझा करना और संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में अनुपालन तंत्र को बढ़ाना था ताकि सुरक्षित और अधिक समावेशी कार्यस्थलों का निर्माण किया जा सके।

इस सम्मेलन में सरकारी और निजी क्षेत्रों के 160 से अधिक संगठनों के लगभग 1,500 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से वर्चुअली जुड़े जिससे व्यापक स्तर पर इसकी पहुंच सुनिश्चित हुई।

इस पहल का उद्देश्य पॉश प्रावधानों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना, अनुपालन को मजबूत करना, शी-बॉक्स को अपनाने को बढ़ाना और देश भर में कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

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हजारीबाग में भीषण सड़क हादसा — हाथियों को खदेड़ने जा रही टीम दुर्घटनाग्रस्त

क्यूआरटी (QRT) टीम के दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य सदस्य घायल हो गए

हजारीबाग – हजारीबाग  जिले के चरही एवं आंगो थाना क्षेत्र में हाथियों के बढ़ते आतंक के बीच चरही घाटी में एक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में क्यूआरटी (QRT) टीम के दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य सदस्य घायल हो गए। सभी घायलों को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां गंभीर रूप से घायल कर्मियों को रेफर करने की प्रक्रिया चल रही है।

जानकारी के अनुसार, वन विभाग रामगढ़ के बुलावे पर पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले से नौ सदस्यीय क्यूआरटी टीम हाथियों को खदेड़ने के लिए चरही जा रही थी। इसी दौरान उनकी गाड़ी की कंटेनर वाहन से जोरदार टक्कर हो गई।

हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी पिंटू कर्मकार और वाहन चालक शहादत अंसारी की मौके पर ही मौत हो गई।
डीएफओ विकास कुमार उज्ज्वल ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।

उन्होंने बताया कि एक ओर टीम हाथियों को नियंत्रित करने के अभियान में लगी हुई है, वहीं दूसरी ओर घायल कर्मियों का इलाज कराया जा रहा है।

गौरतलब है कि हजारीबाग इन दिनों हाथियों के आतंक से दहशत में है। पिछले दो दिनों में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

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विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा एक केन्द्रीय योजना, न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना(DISHA), लागू की जा रही है

नई दिल्ली – भारत सरकार ने पिछले पांच वर्षों में न्याय तक पहुंच को सुदृढ़ बनाने तथा विधिक एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए विभिन्न पहल की हैं, ताकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों की पूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा एक केंद्रीय योजना, “न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना(DISHA)”, वर्ष 2021–2026 की पांच वर्ष की अवधि के लिए कुल 250 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा विधिक साक्षरता एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर न्याय तक पहुंच के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत समाधान प्रदान करना है। यह एक नागरिक-केंद्रित एवं समावेशी योजना है, जो लाभार्थियों को न्याय सुलभ कराने हेतु प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करती है। टेली-लॉ कार्यक्रम के अंतर्गत नागरिकों को मुकदमे से पूर्व निःशुल्क विधिक परामर्श वीडियो एवं टेलीफोनिक माध्यम से प्रदान किया जाता है। यह सुविधा सामान्य सेवा केंद्र(सीएससी), टेली-लॉ मोबाइल एप्लीकेशन तथा समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14454 के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। टेली-लॉ देश के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 776 जिलों में स्थित 2,50,000 सामान्य सेवा केंद्र में संचालित है, जिनमें 112-आकांक्षी जिले तथा 500-आकांक्षी ब्लॉक भी शामिल हैं। अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2024 से न्याय सहायकों को 500 आकांक्षी ब्लॉकों में घर-घर जाकर मुकदमे से पूर्व विधिक सहायता प्रदान करने हेतु नियुक्त किया गया है। 31 जनवरी, 2026 तक देशभर में 1.12 करोड़ से अधिक पूर्व-विवाद विधिक परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं।

न्याय बंधु(प्रो बोनो विधिक सेवाएं) कार्यक्रम के अंतर्गत इच्छुक प्रो बोनो अधिवक्ताओं का पंजीकरण किया जाता है तथा उन्हें उन लाभार्थियों से जोड़ा जाता है, जो विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत निःशुल्क विधिक सहायता के पात्र हैं। यह प्रक्रिया न्याय बंधु एप्लीकेशन (iOS/Android/उमंग प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध) के माध्यम से संचालित की जाती है। इसके अलावा, लाभार्थियों को प्रो बोनो विधिक सेवाएं सुदृढ़ रूप से प्रदान करने हेतु 23-उच्च न्यायालयों में प्रो बोनो अधिवक्ताओं का एक पैनल भी गठित किया गया है, जिससे संस्थागत तंत्र को और मजबूत बनाया जा सके। 31 जनवरी, 2026 तक न्याय बंधु प्लेटफ़ॉर्म पर कुल 10,133 अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से पंजीकरण कराया है। इसके अलावा, विधि छात्रों में प्रो बोनो कार्य की भावना विकसित करने तथा विधिक सेवाओं के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देश के 109-विधि महाविद्यालयों में प्रो बोनो क्लब स्थापित किए गए हैं। विधिक साक्षरता एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिष्ठित सरकारी एवं निजी संस्थानों के साथ संस्थागत सहयोग कर पुस्तकों, प्रशिक्षण मॉड्यूल, कार्यशालाओं आदि के रूप में सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री तैयार की जाती है, ताकि विधिक साक्षरता और जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके। 31 जनवरी, 2026 तक इस कार्यक्रम के माध्यम से 1.20 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित की जा चुकी है।

केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत संचालित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय(FTSCs) योजना के तहत 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय, जिनमें 398 विशिष्ट पॉक्सो(ई-पॉक्सो) न्यायालय शामिल हैं, बलात्कार एवं पॉक्सो अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए कार्यरत हैं। 31 दिसंबर 2025 तक इन न्यायालयों द्वारा स्थापना के बाद से सामूहिक रूप से 3,66,124 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत कुल 1,952.23 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान है, जिसमें से 1,207.24 करोड़ रुपये केन्द्रीय अंश के रूप में निर्भया फंड से (सीएसएस पैटर्न पर) व्यय किए जाने हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में योजना के आरंभ से अब तक यानि 05 फरवरी 2026 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एफटीएससी के संचालन हेतु कुल 1,156.99 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना की है, ताकि अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत आने वाले समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान की जा सकें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अथवा अन्य किसी भी प्रकार की अक्षमता के कारण किसी भी नागरिक को न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न होना पड़े, तथा समान अवसरों के आधार पर न्याय प्रणाली के संचालन को बढ़ावा देने हेतु लोक अदालतों का आयोजन किया जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विधिक सेवा संस्थानों की स्थापना तालुक न्यायालय स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक की गई है। विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा संचालित प्रमुख गतिविधियों/कार्यक्रमों में निःशुल्क विधिक सहायता एवं परामर्श, विधिक जागरूकता कार्यक्रम, विधिक सेवा/सशक्तिकरण शिविर, विधिक सेवा क्लीनिक, विधिक साक्षरता क्लब, लोक अदालतों का आयोजन, पीड़ित मुआवजा योजना का क्रियान्वयन शामिल है।

लोक अदालत आम जनता के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र है, जहां न्यायालयों में लंबित अथवा मुकदमे से पूर्व (प्री-लिटिगेशन) चरण में स्थित विवादों/मामलों का सौहार्दपूर्ण समझौते के माध्यम से निस्तारण किया जाता है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत लोक अदालत द्वारा दिया गया फैसला सिविल न्यायालय के आदेश के समान माना जाता है। यह सभी पक्षकारों पर अंतिम एवं बाध्यकारी होता है तथा इसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील का प्रावधान नहीं है।राष्ट्रीय लोक अदालतें पूर्व-निर्धारित तिथि पर देशभर के सभी तालुक, जिला न्यायालयों एवं उच्च न्यायालयों में पहले से तय तारीख पर आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2016 से दिसंबर 2025 तक लोक अदालतों में निपटाए गए मामलों की जानकारी नीचे दी गई है:

लोक अदालत मुकदमे से पहले निपटाए गए मामले लंबित मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत 33,80,76,089 8,45,59,866
राज्य लोक अदालत 39,33,548 67,03,159
स्थायी लोक अदालत 14,58,389
(सार्वजनिक उपयोगिता सेवा से संबंधित मामले)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 39A के अनुरूप तथा निवारक एवं रणनीतिक विधिक सहायता के अंतर्गत, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(एनएएलएसए) द्वारा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों(डीएलएसए) के माध्यम से देशभर में अनेक विधिक सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ताकि विधिक सहायता गरीब एवं वंचित वर्गों तक पहुंच सके। आपराधिक न्यायालय-आधारित विधिक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से न्याय विभाग एक केंद्रीय योजना, “कानूनी सहायता रक्षा वकील प्रणाली योजना”, लागू कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ताओं की पूर्णकालिक नियुक्ति, सहायक स्टाफ सहित, की जाती है। दिसंबर 2025 तक देशभर के 680 जिलों में कानूनी सहायता रक्षा वकील(LADC) कार्यालय कार्यरत हैं। एलएडीसी योजना को तीन वित्तीय वर्षों (2023–24 से 2025–26) की अवधि के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसका कुल वित्तीय प्रावधान 998.43 करोड़ रुपये है। जनवरी 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 643.755 करोड़ रुपये की राशि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(एनएएलएसए) को जारी की जा चुकी है। पिछले तीन वर्षों के दौरान LADCs द्वारा आवंटित एवं निस्तारित आपराधिक मामलों का विवरण निम्न अनुसार है: –

वित्तीय वर्ष आवंटित आपराधिक मामले निस्तारित आपराधिक मामले निस्तारण दर
2023-24 3,36,830 2,12,505 63%
2024-25 5,32,413 3,72,750 70%
2025-26 (दिसंबर 2025) 3,93,614 2,86,326 73%
कुल 12,62,857 8,71,581 69%

ई-कोर्ट परियोजना के चरण-III (2023–2027) को 13 सितंबर 2023 को 7,210 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के साथ स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसका उद्देश्य न्याय वितरण प्रणाली को क्रमिक रूप से अधिक सुदृढ़, सरल और सुलभ बनाना है। 31 दिसंबर, 2025 तक ई-कोर्ट परियोजना के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं:

  1. उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुल 3,93,22,695 मामलों की वर्चुअल सुनवाई की गई।
  2. सभी उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम लागू कर दिए गए हैं।
  3. लगभग सभी उच्च न्यायालयों में ई-फाइलिंग के नियम, ई-भुगतान की सुविधा तथा आईसीजेएस(अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली) लागू कर दी गई है।
  4. देशभर में संचालित 29 वर्चुअल न्यायालयों के माध्यम से कुल 94,55,288 चालानों का भुगतान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 9,73,25,50,414 रुपये की चालान राशि प्राप्त हुई है।
  5. उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में ई-फाइलिंग के माध्यम से कुल 1,03,96,720 मामले दायर किए गए हैं।
  6. ई-कोर्ट सेवा मोबाइल ऐप के कुल डाउनलोड की संख्या 3,54,86,435 है, जबकि ई-कोर्ट सेवा JustIS ऐप के डाउनलोड की संख्या 22,090 है।
  7. उच्च न्यायालयों में 2,36,96,50,903 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है, जबकि जिला न्यायालयों में 4,00,89,15,374 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है।
  8. 37 उच्च न्यायालयों तथा 30 जिला न्यायालयों में न्याय घड़ियां स्थापित की गई हैं।
  9. देशभर के उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों में कुल 2,331 ई-सेवा केंद्र कार्यरत हैं, जिनसे बड़ी संख्या में वादियों को लाभ प्राप्त हो रहा है।
  10. सभी न्यायालय परिसरों में सीआईएस 4.0 लागू कर दिया गया है तथा ई-समिति द्वारा सीआईएस 4.0 पर उपयोगकर्ता मार्गदर्शिका भी जारी किया गया है।
  11. ई-कोर्ट पहल के अंतर्गत मामलों की स्थिति, कारण सूची, फैसला आदि का लगभग वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने हेतु सात प्लेटफ़ॉर्म स्थापित किए गए हैं। ये सूचनाएं अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को एसएमएस पुश एवं पुल सेवा (प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस प्रेषित), ई-मेल(प्रतिदिन 6 लाख से अधिक प्रेषित), बहुभाषी ई-न्यायालय सेवा पोर्टल(प्रतिदिन 35 लाख हिट्स), न्यायिक सेवा केंद्र तथा सूचना कियोस्क के माध्यम से प्रदान की जा रही हैं।
  12. न्यायालयी की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग कई उच्च न्यायालयों में भी प्रारंभ किया गया है, जिनमें गुजरात, गुवाहाटी, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पटना, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड तथा कलकत्ता के उच्च न्यायालय शामिल हैं। इससे मीडिया तथा अन्य इच्छुक पक्षों को भी कार्यवाही में सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ है।
  13. न्यायालय परिसरों में सौर ऊर्जा सुविधाओं की स्थापना के निर्धारित लक्ष्य का कुल 96.1% प्राप्त कर लिया गया है।
  14. मोटर दुर्घटना दावा याचिकाओं के त्वरित, ऑनलाइन एवं असमकालिक निस्तारण को सुगम बनाने हेतु इलेक्ट्रॉनिक मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण(ई-MACT) प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है। ई-MACT परियोजना को 07 मई 2025 से पायलट न्यायालय में लाइव शुरू किया गया।
  15. राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड(एनजेडीजी) को एक उन्नत डैशबोर्ड के साथ अपग्रेड किया गया है, जो मामलों की लंबित संख्या की पहचान, प्रबंधन एवं कमी के लिए एक निगरानी उपकरण के रूप में कार्य करता है। यह विभिन्न मानकों के आधार पर वर्गीकृत मामलों के निस्तारण में विलंब के कारणों संबंधी जानकारी भी प्रदान करता है।

यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोक सभा में दी।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) पहल के तहत उच्च प्रभाव वाले जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को बढ़ावा देने के सन्दर्भ में बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के लिए पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लॉन्च विज्ञान के नेतृत्व वाले विकास के लिए भारत के दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है और संकेत देता है कि देश अब देर से प्रवेश नहीं कर रहा है, बल्कि उभरती प्रौद्योगिकियों में शुरुआत से ही कार्यरत है।

इस शुभारंभ कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल; डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग; डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, बीआईआरएसी; डीएसटी और एएनआरएफ के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यम पूंजी प्रतिनिधि और वैज्ञानिक समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने जैवप्रौद्योगिकी से जुड़ी नीति में हिचकिचाहट के स्थान पर नीति में तेजी की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार में देखा जा सकता है, जिनकी संख्या 2014 के लगभग 50 जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गयी है। यह पैमाने और महत्वाकांक्षा में एक बड़े छलांग को प्रतिबिंबित करता है। जैव अर्थव्यवस्था, जो 2014 में लगभग 8 अरब डॉलर की थी, ने तेजी से विस्तार किया है, जिससे भारत को वैश्विक अग्रणी देशों में स्थान मिला है।

उन्होंने कहा कि जैवप्रौद्योगिकी अगले चरण के औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाएगी, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी ने भारत के पिछले बदलाव को आकार दिया था। उनके अनुसार, आने वाली औद्योगिक क्रांति जैवप्रौद्योगिकी नवोन्मेष, उन्नत निर्माण और नई पीढ़ी की उद्यमशीलता द्वारा संचालित होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान पहल भारत की क्षमता को केवल विचार उत्पन्न करने में ही नहीं, बल्कि उन्हें औद्योगिक रूप देने में भी मजबूत करती है।

उभरते क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत पहले ही अंतरिक्ष जैवप्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है और भविष्य के क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष चिकित्सा की तैयारी कर रहा है। घरेलू रूप से विकसित किट का उपयोग करके अंतरिक्ष में जैवप्रौद्योगिकी प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनमें पौधों के विज्ञान और जीवन विज्ञान अनुसंधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास भारत को वैश्विक प्रासंगिकता वाले ज्ञान और अनुप्रयोगों में योगदान देने की स्थिति प्रदान करते हैं, जिससे वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और भू-राजनीतिक स्थिति दोनों बढ़ती हैं।

डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग; महानिदेशक, बीआरआईसी और अध्यक्ष बीआईआरएसी ने कहा कि आरडीआई फंड की संरचना लंबी अवधि, उच्च जोखिम वाले अनुसंधान का समर्थन करने के लिए बनायी गयी है, जिसमें धैर्यपूर्ण पूंजी और उन्नत अवसंरचना की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल बायो ई 3 नीति की पूरक है और बायोफार्मा, जैव-औद्योगिक उत्पादन, जैव ऊर्जा, नीली अर्थव्यवस्था और बायो-कंप्यूटेशन में अगली पीढ़ी के उत्पादों का निर्माण करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि अनुसंधान परिणामों से बड़े पैमाने पर औद्योगिक परिणामों तक पहुंचा जाए।

डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) ने कहा कि बीआईआरएसी को आरडीआई फ्रेमवर्क के तहत द्वितीय-स्तर के फंड प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया है और यह अगले पांच वर्षों में ₹2,000 करोड़ की राशि का निवेश करेगा, जिसमें आगे विस्तार की संभावना है। उन्होंने कहा कि बीआईआरएसी ने पिछले दशक में पूरे देश में एक नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण किया है, जिसमें 100 से अधिक बायो-इन्क्यूबेशन केंद्र, 10 लाख वर्ग फीट से अधिक इन्क्यूबेशन स्पेस और 15 लाख से अधिक स्टार्टअप उद्यमियों के साथ सहभागिता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2012 के 28 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है, और इसका लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना है।

बीआईआरएसी – आरडीआई फंड राष्ट्रीय आरडीआई पहल का हिस्सा है जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई थी और नवंबर 2025 में अनुसंधान राष्ट्रिय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के तहत लॉन्च किया गया था, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। इस फंड का उद्देश्य प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक स्तर के निर्माण के बीच की खाई को पाटना है, और यह प्रौद्योगिकी को इक्विटी, परिवर्तनीय दस्तावेज और दीर्घकालिक ऋण के मिश्रण के जरिये टीआरएल-4 से टीआरएल-9 तक समर्थन देता है।

आवेदन के लिए राष्ट्रीय आह्वान अब खुल गया है। पात्र स्टार्टअप, लघु और मध्यम उद्यम (एस एम ई), और उद्योग भागीदार आधिकारिक पोर्टल https://biracrdif.org के माध्यम से प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। चरण 1 के लिए अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लॉन्च एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत जैव प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करने के लिए तैयार है, जो वैज्ञानिक गहराई, उद्यमशील ऊर्जा और नीति समर्थन को जोड़कर वैश्विक औद्योगिक रूपांतरण के अगले चरण को आकार में सक्षम है।

गंगा नदी में ड्रेजिंग कार्य

नई दिल्ली – ड्रेजिंग कार्य का उद्देश्य गंगा नदी के जलमार्ग में मालवाहक जहाजों के सुचारू संचालन के लिए 45 मीटर चौड़े नौवहन चैनल में 3 मीटर की नौवहन गहराई बनाए रखना है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली) घोषित किया गया है। घोषित 1620 किलोमीटर के विस्तार में से, कहलगांव से सुल्तानगंज तक का लगभग 56 किलोमीटर का हिस्सा भागलपुर जिले के अंतर्गत आता है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्लूएआई), इस क्षेत्र में ड्रेजिंग करने के लिए अपने विभागीय ड्रेजर तैनात करता रहा है, जहाँ भी न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) 3 मीटर से कम होती है।

जहाजों के आवागमन को सुगम बनाने और सुचारू नौवहन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता के आधार पर ड्रेजिंग कार्य किया जाता है। रेल और सड़क मार्ग की तुलना में अंतर्देशीय जल परिवहन पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और ईंधन-कुशल है, जिससे देश को समग्र आर्थिक लाभ होता है।

यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रमंडलीय आयुक्त, दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल, राँची श्री मनोज कुमार से शिष्टाचार मुलाकात की

राँची,136.02.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने 13 फरवरी 2026 को प्रमंडलीय आयुक्त, दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल, राँची श्री मनोज कुमार से उनके कार्यालय में शिष्टाचार मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रमंडलीय आयुक्त को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान व्यक्त किया।

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सागरमाला परियोजना का देश के समुद्री व्यापार पर प्रभाव

नई दिल्ली – सागरमाला परियोजना पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य देश में बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना में मंत्रालय पांच स्तंभों के अंतर्गत परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिनमें बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह आधारित औद्योगीकरण, तटीय समुदाय विकास और तटीय जहाजरानी एवं अंतर्देशीय जल परिवहन शामिल हैं।
योजना की शुरुआत से अब तक, तटीय जहाजरानी एवं अंतर्देशीय जल परिवहन स्तंभ के अंतर्गत 385.5 करोड़ रुपये  की लागत से तटीय बर्थ निर्माण की 6 परियोजनाओं को वित्त पोषित किया गया है। इनमें से 320.5 करोड़ रुपये की लागत वाली 5 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
 इन पूर्ण परियोजनाओं से तटीय माल ढुलाई क्षमता में लगभग 6.5 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, बंदरगाह आधुनिकीकरण स्तंभ के अंतर्गत वित्त पोषित 1033.43 करोड़ रुपये की लागत वाली 24 परियोजनाओं में से 852.4 करोड़ रुपये की लागत वाली 17 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन पूर्ण परियोजनाओं के परिणामस्वरूप स्वचालन, आधुनिकीकरण, सुरक्षा उपायों और सतत विकास पहलों का कार्यान्वयन हुआ है।

उपर्युक्त 22 पूर्ण परियोजनाओं ने माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाकर, तटीय जहाजरानी को बढ़ावा देकर, रसद लागत और टर्नअराउंड समय को कम करके भारत की समुद्री व्यापार प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है, जिससे देश के निर्यात, आयात और आयात व्यापार और आर्थिक विकास में योगदान मिला है।

सागरमाला परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित करना, इससे जुड़ी अवसर लागतों से कहीं अधिक लाभदायक है। यह निवेश सागरमाला के विभिन्न स्तंभों, जैसे-  बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, तटीय समुदाय विकास, तटीय जहाजरानी और अंतर्देशीय जल परिवहन, जहाज मरम्मत और पुनर्चक्रण, और द्वीप विकास से संबंधित परियोजनाओं में रणनीतिक रूप से किया जाएगा।

ये सभी स्तंभ मिलकर डिजिटल अवसंरचना का विकास, तटीय समुदायों के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन, अंतर्देशीय जल परिवहन और निर्यात-आयात व्यापार प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए बंदरगाह से जुड़ी अवसंरचना का विकास करते हैं। इससे तटीय समुदायों को सहायता मिलेगी और बहु-आयामी लॉजिस्टिक्स पार्क, जहाज मरम्मत क्लस्टर और हरित हाइड्रोजन ईंधन हब जैसे सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इन पहलों से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर मजबूत प्रभाव पड़ेगा, साथ ही आजीविका, क्षेत्रीय विकास और समुद्री क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और समुद्री अमृत काल विजन (एमएकेवी) 2047 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा – भारतनेट भारत को डिजिटल रूप से एक सशक्त समाज में बदल रहा है

नई दिल्ली – ब्रॉडबैंड अवसंरचना के विस्तार की वजह से भारत ने एक अरब इंटरनेट ग्राहकों का आंकड़ा पार कियासंचार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संसद को बताया कि भारतनेट, दुनिया के सबसे बड़े सरकारी नेतृत्व वाले कनेक्टिविटी कार्यक्रमों में से एक, डिजिटल विभाजन को पाटने और ग्रामीण भारत में ब्रॉडबैंड पहुंच का विस्तार करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है।राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि भारतनेट भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है।श्री सिंधिया ने कहा “पिछले ग्यारह वर्षों में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने मोबाइल और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व विस्तार देखा है, जो ऐतिहासिक डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है,”

मंत्री ने उल्लेख किया कि मोबाइल ग्राहकों की संख्या 2014 में 930 मिलियन से बढ़कर आज 1.2 अरब हो गई है, जबकि मोबाइल पहुंच 75 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 2014 में 250 मिलियन से बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है, जबकि पहुंच 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 71.8 प्रतिशत हो गई है। ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या भी 61 मिलियन से बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है, जबकि औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड अब लगभग 61.55 एमबीपीएस है।

भारटनेट: भारत के ग्राम पंचायतों को जोड़ना

भारटनेट ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाकर कनेक्टिविटी प्रदान करता है। देश की 2,56,000 ग्राम पंचायतों में से लगभग 2,14,000 को भारतनेट चरण I और II के तहत ऑनलाइन किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत ₹42,000 करोड़ है।तमिलनाडु में, राज्य ने बीएसएनएल के बजाय अपनी विशेष प्रयोजन वाहन तनफिनेट के माध्यम से परियोजना को लागू करने का विकल्प चुना। राज्य की 12,525 ग्राम पंचायतों में से 10,869 जुड़ चुकी हैं। शेष ग्राम पंचायतें और 4,767 गैर-ग्राम पंचायत गांव संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत कवर किए जाएंगे, जो $16.9 अरब लागत की पहल है और वैश्विक रूप से सबसे बड़ा सरकारी नेतृत्व वाला कनेक्टिविटी कार्यक्रम है।

राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन 2.0: 2030 के लक्ष्य

मंत्री ने सदन को आगे सूचित किया कि 1 अप्रैल 2025 को लॉन्च किए गए राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 ने 2030 के लिए सात प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

दिसंबर 2025 तक 42,000 गांवों में 95 प्रतिशत अपटाइम के साथ ओएफसी कनेक्टिविटी हासिल की गई है, 2030 तक 2.7 लाख गांवों का लक्ष्य।

स्कूलों, आंगनवाड़ियों और पंचायत कार्यालयों जैसी एंकर संस्थानों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी 68.8 प्रतिशत पहुंच गई है, 2030 तक 90 प्रतिशत का लक्ष्य।

राष्ट्रीय औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 61.55 एमबीपीएस है, 2030 तक 100 एमबीपीएस का लक्ष्य।

औसत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) आवेदन निस्तारण समय 455 दिनों से घटकर 30.4 दिन हो गया है, जो 2030 के लक्ष्य से पहले हासिल हो गया।

पीएम गतिशक्ति, एनएमपी प्लेटफॉर्म के तहत सरकारी पीएसयू में फाइबर मैपिंग 94 प्रतिशत पहुंच गई है, मार्च तक 100 प्रतिशत का लक्ष्य।

प्रति 100 आबादी पर ग्रामीण इंटरनेट ग्राहक 47.16 हैं, 2030 तक 60 का लक्ष्य।

मोबाइल टावरों में सतत ऊर्जा का उपयोग वर्तमान में 12.38 प्रतिशत है, 2030 तक 30 प्रतिशत का लक्ष्य।

राज्यों से आरओडब्ल्यू पर सहयोग की अपील

36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 33 ने दूरसंचार राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) नियम, 2024 को लागू कर दिया है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल हैं जहां अभी तक अनुपालन लंबित है।राष्ट्रीय स्तर पर आरओडब्ल्यू आवेदनों के निस्तारण का औसत समय 30.4 दिन है।

तमिलनाडु में औसत निस्तारण समय 85 दिन है, जो राष्ट्रीय औसत का लगभग तीन गुना है।”राइट ऑफ वे विनियमों और पोर्टलों के कार्यान्वयन में राज्यों का सहयोग ब्रॉडबैंड विस्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करेगा और नागरिकों को समय पर लाभ प्रदान करेगा,” श्री सिंधिया ने जोर दिया।मंत्री ने फिर से कहा कि 2030 तक ब्रॉडबैंड लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में समावेशी डिजिटल विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर केंद्र-राज्य सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।

“तमिलनाडु में राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन” पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का विस्तृत लिखित उत्तर:

राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) का उद्देश्य डिजिटल संचार अवसंरचना के त्वरित विस्तार को तेज करना, डिजिटल और सामाजिक-आर्थिक विभाजन को पाटना और ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों सहित देश भर में उच्च-गति ब्रॉडबैंड और सार्थक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

तमिलनाडु में राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के मुख्य घटकों की वर्तमान स्थिति निम्नानुसार है:

जनवरी 2026 तक तमिलनाडु के 4,325 गांवों में 95% अपटाइम के साथ संचालनात्मक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

दिसंबर 2025 तक तमिलनाडु में स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), आंगनवाड़ी केंद्रों और पंचायत कार्यालयों सहित एंकर संस्थानों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी 84.74% है।

दिसंबर 2025 तक ओकला के वैश्विक स्पीडटेस्ट इंडेक्स के अनुसार, तमिलनाडु सहित राष्ट्रीय औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 61.55 एमबीपीएस है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तमिलनाडु में राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) आवेदनों का औसत निस्तारण समय 84.9 दिन है।

सितंबर 2025 तक तमिलनाडु में प्रति 100 आबादी पर ग्रामीण इंटरनेट ग्राहक 54.53 हैं।

दूरसंचार अवसंरचना, जिसमें बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) और ओएफसी शामिल हैं, निजी सुविधा प्रदाताओं (एफपी) द्वारा और सरकार द्वारा वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं/योजनाओं के तहत राज्य में स्थापित की गई है, जिससे उच्च-गति ब्रॉडबैंड/इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है।

ग्रामीण, दूरस्थ और अल्पसेवित क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार में आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार ने कई नीतिगत सुधार और परियोजनाएं शुरू की हैं।

नीतिगत सुधारों और सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं का विवरण निम्नानुसार है:

सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम, 2024 के माध्यम से आरओडब्ल्यू नियमों में एकरूपता लाई है (1 जनवरी 2025 से प्रभावी)। तमिलनाडु से भी राइट ऑफ वे नियम, 2024 को लागू करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

ओएफसी बिछाने और दूरसंचार टावर स्थापना जैसी दूरसंचार अवसंरचना की तैनाती के लिए आरओडब्ल्यू अनुमतियों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए तमिलनाडु ने आरओडब्ल्यू नियम, 2024 के अनुसार केंद्रीय आरओडब्ल्यू पोर्टल से जुड़ा एक आरओडब्ल्यू पोर्टल तैनात किया है।

4जी संतृप्ति परियोजना के तहत 31.12.2025 तक 255 4जी बीटीएस तैनात किए गए हैं, जिससे 297 गांवों को मोबाइल कवरेज प्रदान किया गया है।

तमिलनाडु में राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल के तहत, 31.12.2025 तक 12,525 में से 10,869 ग्राम पंचायतों (ब्लॉक मुख्यालयों को छोड़कर) को भारतनेट परियोजना के तहत सेवा तैयार बना दिया गया है। सभी एफपी द्वारा लगभग 3,08,907 मार्ग किलोमीटर ओएफसी बिछाई गई है, जिसमें भारतनेट परियोजना के तहत लगभग 55,000 मार्ग किलोमीटर ओएफसी शामिल है। तमिलनाडु में भारतनेट के माध्यम से 808 फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।

तमिलनाडु में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) 5,27,506 घरों को एफटीटीएच कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाता है। यह कार्यक्रम राज्य द्वारा अगले 10 वर्षों में लागू किया जाएगा। 31.12.2025 तक विभिन्न परियोजनाओं/योजनाओं, जिनमें भारतनेट चरण II शामिल है, के तहत तमिलनाडु में दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए कुल ₹1,883.17 करोड़ आवंटित/वितरित और उपयोग किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के लिए 10 वर्ष के लिए ओपेक्स सहित ₹1,632 करोड़ (जीएसटी को छोड़कर) आवंटित करने का इरादा रखती है, जिसे तमिलनाडु सरकार द्वारा लागू किया जाएगा।

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सुरक्षा बलों की युद्धक तत्परता बढ़ाने के लिए डीएसी ने 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 12 फरवरी, 2026 को लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य पर सेवाओं के विभिन्न प्रस्तावों के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए, मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) {राफेल}, लड़ाकू मिसाइलों और एयर-शिप आधारित उच्च ऊंचाई वाले छद्म उपग्रह (एएस-एचएपीएस) की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई।

एमआरएफए की खरीद से युद्ध की सभी स्थितियों में हवाई वर्चस्व स्थापित करने की क्षमता बढ़ेगी और लंबी दूरी के आक्रामक हमलों के साथ वायु सेना की निवारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। खरीदी जाने वाली अधिकांश एमआरएफए मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। ये लड़ाकू मिसाइलें गहरी मारक क्षमता और अत्यधिक सटीकता के साथ जमीनी हमले की क्षमता को बढ़ाएंगी। एएस-एचएपीएस का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही, इलेक्ट्रॉनिक खुफिया, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए किया जाएगा।

भारतीय सेना को विभव (एंटी-टैंक माइंस) की खरीद और बख्तरबंद रिकवरी वाहनों (एआरवी), टी-72 टैंकों और पैदल सेना लड़ाकू वाहनों (बीएमपी-II) के वाहन प्लेटफार्मों के नवीनीकरण के लिए मंजूरी दी गई है। विभव माइंस को दुश्मन की मशीनीकृत सेनाओं की बढ़त में देरी करने के लिए एंटी-टैंक बाधा प्रणाली के रूप में बिछाया जाएगा। एआरवी, टी-72 टैंकों और बीएमपी-II के वाहन प्लेटफार्मों के नवीनीकरण से उपकरणों का सेवा जीवन बढ़ेगा। इससे भारतीय सेना की तत्परता और परिचालन प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी।

भारतीय नौसेना को 4 मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर और पी8आई लम्‍बी दूरी के समुद्री टोही विमान के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत 4 मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर के शामिल होने से विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय नौसेना की बिजली उत्पादन आवश्यकताओं में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी। पी8आई विमान के अधिग्रहण से नौसेना की लम्‍बी दूरी की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) को डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड प्रणाली की खरीद के लिए मंजूरी दी गई है। यह खरीद आईसीजी की समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगी।

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सरकार दिव्यांग युवाओं के लिए कल्याण और खेल अवसरों को मजबूत कर रही है

नई दिल्ली – युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में देश भर में दिव्यांग युवाओं के सशक्तिकरण, पहुंच, कौशल विकास और खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक उपाय किए हैं।

खेलो इंडिया योजना के तहत, दिव्यांगजनों के बीच खेलों को बढ़ावा देने वाले घटक के माध्यम से विशेष सहायता प्रदान की जाती है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के दो संस्करण दिसंबर 2023 और मार्च 2025 में दिल्ली में आयोजित किए गए थे। 2023 संस्करण में 1,068 पैरा एथलीटों ने भाग लिया, जबकि 2025 संस्करण में विभिन्न खेल विधाओं में 1,233 एथलीटों ने प्रतिस्पर्धा की। कुल मिलाकरइन खेलों के माध्यम से 2,000 से अधिक पैरा एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त हुआ।

भारतीय खेल प्राधिकरण पैरा एथलीटों की पहचान और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए देश भर में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर रहा है। गांधीनगर को पैरा खेलों के लिए नोडल केंद्र नामित किया गया है। वर्तमान में, 286 पैरा एथलीटों के लिए स्थान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 183 आवासीय एथलीट पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी, फेंसिंग, तैराकी, पावरलिफ्टिंग, टेबल टेनिस और अन्य खेलों में संरचित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

एलीट पैरा एथलीटों को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस – टॉप्स) के तहत सहायता प्रदान की जाती है। वर्तमान में, आठ विधाओं में 21 महिलाओं और 40 पुरुषों सहित 61 पैरा एथलीट टॉप्स कोर ग्रुप का हिस्सा हैं। इनमें सबसे अधिक भागीदारी पैरा एथलेटिक्स में है, इसके बाद पैरा बैडमिंटन और पैरा तीरंदाजी का स्थान आता है। पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में 24 खेलो इंडिया पैरा एथलीटों ने भाग लिया और भारत के लिए छह पदक जीते।

राष्ट्रीय खेल संघों को सहायता योजना के तहत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल संघों जैसे कि भारतीय पैरालंपिक समितिअखिल भारतीय बधिर खेल परिषद और स्पेशल ओलंपिक्स भारत को प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

खेलों के अलावा, पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना के तहत, 2020-21 में जारी की गई धनराशि 83.18 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 139.86 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे हाल के वर्षों में प्रतिवर्ष 34,000 से अधिक लोगों को लाभ मिला है।

दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की व्यापक योजना के तहत, अकेले 2022-23 में 145.20 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया, जिससे प्री-मैट्रिकपोस्ट-मैट्रिकउच्च स्तरीय शिक्षाफेलोशिप और विदेशी छात्रवृत्ति सहित विभिन्न घटकों के माध्यम से 44,162 छात्रों को लाभ हुआ।

दिव्यांगजनों को चिकित्सा सहायता उपकरण खरीदने या लगवाने में सहायता प्रदान करने वाली योजना का दायरा काफी बढ़ गया है। 2023-24 में 3,46,273 लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया और 368.44 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया गया।

व्यावसायिक पुनर्वास सेवाओं में भी काफी मजबूती आई है। देशभर में दिव्यांगों के लिए चौबीस राष्ट्रीय कैरियर सेवा केंद्र कार्यरत हैं। लाभार्थियों की संख्या 2020-21 में 6,999 से बढ़कर 2024-25 में 47,166 हो गई है , जो विस्तारित पहुंच और बेहतर सेवा वितरण को दर्शाती है।

स्किल इंडिया मिशन के तहत, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजनाराष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समावेशी कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है । शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत दिव्यांग लोगों के लिए रोजगार क्षमता बढ़ाने हेतु पांच पाठ्यक्रम विशेष रूप से तैयार किए गए हैं।

क्रॉस-डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स ने अपनी स्थापना के बाद से लगभग 19.70 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किया है। ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र ने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 3,000 से अधिक पैरा एथलीटों को लाभान्वित किया है। इसके अतिरिक्त, 2025-26 के दौरान निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लगभग 66,900 लाभार्थियों को नामांकित किया गया है, जिसमें प्रति वर्ष लाख रुपये तक का कवरेज शामिल है।

भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा निर्मित खेल अवसंरचना में रैंप और बाधा-मुक्त सुविधाओं सहित सुलभ सुविधाएं शामिल हैं। सरकार देश भर में दिव्यांग युवाओं के लिए इन पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन और मापने योग्य प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर समीक्षा, निगरानी और तृतीय-पक्ष मूल्यांकन करती रहती है।

यह जानकारी युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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