नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, बिहार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय कर रहा है  ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय 18-19 फरवरी 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, बिहार में दो दिवसीय महत्वपू्र्ण ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन कर रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और विभिन्न राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा हितधारकों की उपस्थिति होगी, जो अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कार्रवाई-उन्मुख रोडमैप तैयार करेंगे।

 

इस चिंतन शिविर में अरुणाचल प्रदेश से मंत्री श्री एडवोकेट केंटो जिनी; नागालैंड से मंत्री (सलाहकार एवं विधायक) श्री इमकोंगमार; सिक्किम से सामाजिक कल्याण विभाग के मंत्री श्री समदुप लेप्चा; त्रिपुरा सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री श्री शुक्‍ल चरण नोआतिया; तथा बिहार से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री मोहम्‍मद ज़मा खान सहित राज्‍य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों की भी भागीदारी होगी। इस कार्यक्रम में मंत्रालय तथा विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी भी रहेगी।

चर्चा के लिए पाँच प्रमुख विषयगत क्षेत्र:

चिंतन शिविर में पाँच महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित सामूहिक चर्चा आयोजित की जाएगी, जो अल्पसंख्यक कल्याण की आधारशिला का निर्माण करते हैं, जैसे: अवसंरचना विकास (प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम – पीएमजेवीके), सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण (पीएम विकास + राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम), वक्फ प्रबंधन, हज प्रबंधन आदि।

ये संवादपूर्ण सत्र सभी हितधारकों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेंगे, जिसमें सुव्यवस्थित चर्चाओं, साथ मिलकर सीखने और सहयोगात्मक समस्या-समाधान के माध्यम से कार्यान्वयन में अंतराल, सर्वोत्तम पद्धतियों और कार्रवाई योग्य अनुशंसाओं की पहचानी की जाएगी।

प्रमुख प्रौद्योगिकीय पहलें, जो लॉन्‍च की जाएंगी:

19 फरवरी को उद्घाटन सत्र में तीन अत्याधुनिक डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया जाएगा:

• पीएमजेवीके मोबाइल एप्लिकेशन – बेहतर परियोजना निगरानी और पारदर्शिता को के लिए

• हज सुविधा स्मार्ट रिस्ट बैंड – हज यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए

• एआई-संचालित चैटबॉट – नागरिक सेवाओं और प्रश्न समाधान के लिए मंत्रालय के पोर्टल पर

कार्यक्रम संरचना:

पहले दिन (18 फरवरी 2026) चिंतन शिविर के दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली पर संक्षिप्‍त परिचय सत्र, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विषयगत प्रस्तुतियाँ, तथा इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (आईएफ़सीआई), फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफ़आईटीटी) आईआईटी दिल्ली, और सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा विशेष प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी। दिन का समापन बिहार की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होगा।

दूसरे दिन  (19 फरवरी 2026) की शुरुआत योग सत्र से होगी, जिसके बाद उद्घाटन समारोह होगा जिसमें केंद्रीय और राज्य सरकारों के माननीय मंत्रियों की उपस्थिति रहेगी। यह दिन केंद्रित सामूहिक चर्चाओं, विषयगत समेकनों और नीति दिशा एवं कार्यक्रम सुधार के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें तैयार करने के लिए समर्पित रहेगा।

कार्यक्रम स्‍थल का महत्व:

नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुनने का प्रतीकात्मक महत्व है। नालंदा, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, भारत की प्राचीन ज्ञान, शिक्षा और समावेशी संवाद की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है – ऐसे मूल्य जो इस चिंतन शिविर के उद्देश्यों के साथ गहराई से मेल खाते हैं। ऐतिहासिक परिवेश अल्पसंख्यक कल्याण और राष्ट्रीय विकास पर विचार-विमर्श के लिए प्रेरणादायक पृष्ठभूमि प्रदान करता है।

चिंतन शिविर से अपेक्षित है कि यह कार्यक्रम कार्यान्वयन को बेहतर बनाने के लिए ठोस कार्रवाई बिंदु, अल्पसंख्यक समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचारी उपाय, सशक्त अंतर-सरकारी समन्वय तंत्र और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को तेज करने के लिए व्यापक रोडमैप प्रदान करेगा।

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते के तीन शावकों के जन्म की जानकारी दी

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज जानकारी दी कि कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते के तीन शावकों का जन्‍म हुआ है।

श्री भूपेन्‍द्र यादव ने एक्‍स पोस्ट में बताया कि ये शावक दक्षिण अफ्रीका की चीता गामिनी के हैं, जो दूसरी बार मां बनी है। इन शावकों का जन्म दक्षिण अफ्रीका से भारत में चीतों के आगमन के तीन वर्ष पूरे होने पर हुआ है।

इसके साथ ही, भारत में चीतों के नौ शावकों का जन्म दर्ज किया गया है। भारत में जन्मे जीवित चीता शावकों की संख्या अब बढ़कर 27 हो गई है। इन शावकों के जन्म के बाद, भारत में चीतों की कुल संख्या 38 हो गई है।

श्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि प्रत्येक शावक का जन्म चीता परियोजना को मजबूती प्रदान करता है और इसमें शामिल फील्ड स्टाफ तथा पशु चिकित्सा टीमों के निरंतर प्रयासों और समर्पण को दर्शाता है।

श्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा, “कुनो उद्यान और भारत के लिए यह गर्व का क्षण है – ईश्वर करे गामिनी और उसके तीनों नन्हे शावक बड़े होकर देश में चीता पुनरुद्धार की कहानी को गरिमा के साथ आगे बढ़ाएं।”

विश्व में पहली बार किसी विशाल मांसाहारी जानवर का अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण सफल रहा है, जिसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीते वर्ष 2022-23 में भारत लाए गए थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 17 सितंबर 2022 को पहले आठ चीतों को भारत लाए जाने की प्रक्रिया में शामिल थे।

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प्रधानमंत्री ने एएनआई के साथ साक्षात्कार में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान वैश्विक एआई क्रांति में भारत की भूमिका को रेखांकित किया

नई दिल्ली – भारत दिल्ली में प्रतिष्ठित एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी कर रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परिवर्तनकारी क्षमता और वैश्विक एआई क्रांति को आकार देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।

एएनआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, प्रधानमंत्री ने एआई के इस युग में नवाचार, प्रतिभा और नैतिक नेतृत्व के केंद्र के रूप में भारत की बेजोड़ स्थिति पर प्रकाश डाला।

श्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

“दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान, मैंने एएनआई के साथ इस साक्षात्कार में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता, एआई क्रांति में भारत की भूमिका और अन्य विषयों पर अपने विचार साझा किए हैं।”

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जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एआई-आधारित जनजातीय विकास पहलों का प्रदर्शन किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के समावेशी शासन और अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने के लिए प्रौद्योगिकी को एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में उपयोग करने के विज़न के अनुरूप, जनजातीय कार्य मंत्रालय दूरस्थ और सबसे निर्बल जनजातीय समुदायों तक विकास सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों को बढ़ावा दे रहा है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम के नेतृत्व और मार्गदर्शन में नवाचार, पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी को संयोजित करने वाले संरचित डिजिटल उपायों के माध्यम से इस विज़न को क्रियान्वित किया जा रहा है।

इसी संदर्भ में, मंत्रालय नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित हो रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग ले रहा है। मंत्रालय के विशेष प्रदर्शनी स्टॉल की थीम है समावेशी और सशक्त जनजातीय समुदायों के लिए एआई”। यह स्टॉल एक ऐसे एकीकृत डिजिटल इको सिस्‍टम को प्रस्तुत करता है जिसे शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल असमानताओं को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह शिखर सम्मेलन विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है। अपनी भागीदारी के माध्यम से, मंत्रालय यह प्रदर्शित कर रहा है कि किस प्रकार एआई-सक्षम प्रौद्योगिकियों को जनजातीय विकास ढाँचों में समाहित किया जा रहा है ताकि प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाया जा सके, भाषाई समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके, वन अधिकारों के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित किया जा सके और योजनाओं तथा सेवाओं तक नागरिक-केंद्रित पहुँच सुनिश्चित की जा सके।

जनजातीय आबादी के भौगोलिक विस्‍तार और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने उभरते एआई उपकरणों के साथ एकीकृत एक समुदाय-संचालित मॉडल अपनाया है। शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय और वैश्विक एआई विशेषज्ञों के साथ होने वाली चर्चा से इन उपायों को और परिष्कृत और विस्तारित करने की उम्मीद है।

एकीकृत एआई गवर्नेंस प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन

मंत्रालय के स्टॉल में इसके प्रमुख एआई-सक्षम प्लेटफार्मों का लाइव प्रदर्शन किया गया है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित शासन ढांचे के परस्पर जुड़े घटकों के रूप में कार्य करते हैं:

आदि वाणी

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित अनुवाद और भाषाई संरक्षण प्‍लेटफॉर्म जनजातीय भाषाओं और बोलियों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रचार के लिए डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली टेक्‍स्‍ट-टू-टेक्‍स्‍ट और टेक्‍स्‍ट-टू-स्‍पीच अनुवाद, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर) की सुविधा प्रदान करती है और जनजातीय भाषाओं में सरकारी योजनाओं और सूचना संसाधनों तक पहुंच को सुगम बनाती है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच में भाषाई बाधाएं कम होती हैं।

ट्राइबॉट चैटबॉट

एक बहुभाषी संवादात्मक एआई सहायक जो मंत्रालय की योजनाओं और सेवाओं पर वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करता है। संवादमूलक और त्वरित प्रश्न समाधान सक्षम करके, ट्राइबॉट नागरिकों की सहभागिता को मजबूत करता है और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में पहुंच को बेहतर बनाता है।

वन अधिकार अधिनियम (एफआरएडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

एक एआई-सक्षम शासन समाधान जो वन अधिकार अधिनियम के तहत दावा प्रस्तुत करने, सत्यापन, जीआईएस-आधारित मानचित्रण, कार्यप्रवाह निगरानी और शिकायत निवारण को सुव्यवस्थित करता है। यह प्लेटफॉर्म पारदर्शिता बढ़ाता है और वन अधिकारों के कार्यान्वयन में डेटा-आधारित निर्णय लेना सुनिश्चित करता है।

ये सभी प्लेटफॉर्म मिलकर पारंपरिक सेवा वितरण से भविष्यसूचक, पारदर्शी और प्रतिक्रियाशील डिजिटल शासन की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रौद्योगिकी-आधारित सांस्कृतिक संरक्षण: जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय

इस स्टॉल की एक प्रमुख विशेषता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय पहल का डिजिटल प्रदर्शन है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से परिकल्पित, इन संग्रहालयों को प्रौद्योगिकी-आधारित सांस्कृतिक संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में, आगंतुक एआई द्वारा संकलित अभिलेखीय सामग्री, प्रोजेक्शन-आधारित कहानी कहने की कला, आकर्षक ऑडियो-विजुअल मॉड्यूल और देश भर के सात जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों के लिए डिज़ाइन किए गए संवादमूलक व्याख्या प्रणालियों का अनुभव करेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संवर्धित वास्तविकता घटकों और डिजिटल कथा उपकरणों को एकीकृत करके, मंत्रालय संग्रहालयों को अनुभवात्मक ज्ञान केंद्रों में परिवर्तित कर रहा है जो जनजातीय विरासत को समकालीन, भविष्य के लिए तैयार प्रारूप में संरक्षित और प्रस्तुत करते हैं।

इंटरैक्टिव टेक्नोलॉजी एक्सपीरियंस ज़ोन

इस प्रदर्शनी में एक समर्पित “टेक एक्सपीरियंस” इंटरफ़ेस शामिल है जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैं:

  • लाइव आदि वाणी डेमोंस्‍ट्रेशन – जनजातीय भाषाओं में वास्तविक समय अनुवाद और योजना तक पहुंच।
  • ट्राइबॉट लाइव इंटरैक्शन – बहुभाषी संवादात्मक एआई-आधारित प्रश्न समाधान।
  • एफआरए इंटरएक्टिव कियोस्क – दावा ट्रैकिंग और गवर्नेंस एनालिटिक्स के लिए डिजिटल डैशबोर्ड।
  • एआर सेल्फी एक्‍पीरिएंस – जनजातीय सांस्कृतिक परिधानों की संवर्धित वास्तविकता-सक्षम खोज।
  • एनामॉर्फिक 3डी विजुअल प्रोजेक्शन – एआई-आधारित उपायों की गहन दृश्य कहानी।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मंत्रालय की भागीदारी एक दूरदर्शी शासन प्रतिमान को दर्शाती है जो प्रौद्योगिकी को सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ एकीकृत करती है। जनजातीय विकास पहलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल करके, जनजातीय कार्य मंत्रालय संस्थागत वितरण प्रणालियों को सुदृढ़ करता है, साथ ही पूरे भारत में जनजातीय समुदायों के लिए समावेशी, पारदर्शी और सतत सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है।

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प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने कर्नाटक के वेमगल में एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की अंतिम असेंबली लाइन का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया

नई दिल्ली – 17 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई से वर्चुअल माध्यम से कर्नाटक के वेमेगल स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के एयरबस एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया। वर्चुअल उद्घाटन के दौरान फाइनल असेंबली लाइन परिसर में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, फ्रांस की सशस्त्र सेना और वयोवृद्ध मामलों की मंत्री कैथरीन वाउटरिन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री केआर नायडू तथा कर्नाटक सरकार के बड़े एवं मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल भी उपस्थित थे।

 

अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एच-125 हेलीकॉप्टरों की फाइनल असेंबली लाइन को भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “फ्रांस के साथ हमारा सहयोग असीमित है, जहां हमारी परस्पर लाभकारी साझेदारी के लिए आसमान भी सीमा नहीं है।” उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस  हेलीकॉप्टर को एच-125 पहल के लिए बधाई दी, जो इससे पहले भारत में सी-295 परिवहन विमान के निर्माण हेतु उनके सहयोग के बाद शुरू किया गया है। रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को इस बात का प्रतीक बताया कि किस प्रकार भारत अंतरराष्ट्रीय मूल उपकरण निर्माता(ओईएम) के साथ सहयोग कर मेक-इन-इंडिया  विजन में प्रभावी योगदान दे सकता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि, मेक-इन-इंडिया  और आत्मनिर्भर भारत  को वर्ष 2014 से भारत की आर्थिक नीति के प्रमुख स्तंभ रहे हैं, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता की प्रमुख उपलब्धियों में से एक बताया, जिसके तहत मित्र देशों के साथ परस्पर लाभकारी साझेदारियों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा उच्च-स्तरीय उत्पादों और उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि एच-125 में 1,000 करोड़ रूपए से अधिक का निवेश होने की संभावना है और इससे कुशल एवं मेहनती युवाओं के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने एच-125 हेलीकॉप्टरों को उनकी असाधारण विश्वसनीयता, बहु-उपयोगिता और विविध परिचालन परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध मंच बताया। उन्होंने कहा, “एच-125 विश्व स्तर पर सबसे प्रभावी और भरोसेमंद सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टरों में से एक साबित हुआ है।”

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत पिछले एक दशक से अधिक समय से बड़े पैमाने पर अवसंरचना निर्माण, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना जैसी अनेक पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पूंजी निवेश, तथा निवेश को सुगम बनाने के लिए उदारीकृत व्यवस्था अपनाकर तेज औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लघु एवं मध्यम उद्योगों(एमएसएमई) को समर्थन देने और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर हमारा उद्देश्य समग्र औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना है, जो न सिर्फ हमारी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि अन्य देशों की जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम हो।”

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख किया। इनमें आयुध कारखानों का निगमितकरण, उदारीकृत निवेश योजनाएं तथा रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत का रक्षा उत्पादन कई कारणों, जैसे उच्च पूंजी निवेश की आवश्यकता और लंबी परिपक्वता अवध, के चलते मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र पर केंद्रित रहा, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन और निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप अब कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई तक पहुंच गई है, और रक्षा निर्यात में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस विकास पथ ने एमएसएमई और सहायक क्षेत्रों को व्यापक प्रोत्साहन दिया है, जिनकी संख्या आज बढ़कर 16,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में अनेक विदेशी कंपनियां भारतीय एमएसएमई से कई चीजें प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे सार्थक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से इस साझेदारी को और मजबूत करें तथा अन्य देशों की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत समाधान भी प्रदान करें।

इस कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

एच125एम को कई जरूरी मिशन में ऊंचाई पर प्रभावी फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में कार्य करने के लिए अनुकूलित किया गया है। यह बहुउपयोगी प्लेटफॉर्म अपनी कम ध्वनिक और तापीय पहचान का लाभ उठाते हुए सामरिक टोही और निगरानी अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया है।  इसके साथ ही, एच125एम ऊंचाई पर लॉजिस्टिक्स में निर्णायक बढ़त प्रदान करता है, जिससे दूरस्थ अग्रिम चौकियों तक आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित होती है। साथ ही, यह खोजी एवं बचाव अभीयान तथा चिकित्सीय निकासी अभियानों के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया संसाधन के रूप में भी कार्य करता है।

एच125 इतिहास का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर है जो माउंट एवरेस्ट की चोटी पर उतर चुका है, जिससे इसकी प्रदर्शन सीमा मौजूदा लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बेड़ों से कहीं अधिक बेहतर साबित होती है। भारतीय सेना के लिए, जो दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई और उच्च-तापमान वातावरण में काम करती है, यह असाधारण प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण निर्णायक बढ़त प्रदान कर सकता है।

सी295 सैन्य परिवहन विमान अंतिम असेंबली लाइन के बाद, यह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस का दूसरा प्रमुख औद्योगिक सहयोग है, जो भारत में एक समग्र सैन्य एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करेगा।

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रक्षा मंत्री और उनके फ्रांसीसी समकक्ष ने बेंगलुरु में छठे वार्षिक रक्षा वार्ता की सह-अध्यक्षता की

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सशस्त्र सेना और वयोवृद्ध मामलों की मंत्री कैथरीन वाउटरिन ने 17 फरवरी 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरू में आयोजित छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता की सह-अध्यक्षता की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें उपकरणों के सह-विकास एवं सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्र शामिल थे। उन्होंने विशेषकर बेहतरीन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा दोनों देशों के उद्योगों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों मंत्रियों ने रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में सेना-से-सेना सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उल्लेख किया कि हालिया भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी सामूहिक सहभागिता को और अधिक गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों मंत्रियों ने इस ढांचे का उपयोग द्विपक्षीय स्तर पर तथा व्यापक यूरोपीय संदर्भ में करने पर भी सहमति व्यक्त की, ताकि ठोस परिणाम हासिल किए जा सके, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता सुदृढ़ हो, संयुक्त क्षमताओं में वृद्धि हो और भारत-फ्रांस के स्थायी रणनीतिक समन्वय को और अधिक मजबूती मिले।

 

दोनों देशों ने भारतीय सेना और फ्रांसीसी थल सेना प्रतिष्ठान में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती की घोषणा की। इसके साथ ही 10 वर्षों के रक्षा सहयोग समझौते के नवीनीकरण पर भारतीय पक्ष की ओर से रक्षा सचिव तथा फ्रांसीसी पक्ष की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रणनीति के उप महानिदेशक ने हस्ताक्षर किए गए।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड(बीईएल) के प्रबंध निदेशक और सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष के बीच भारत में हैमर मिसाइलों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

कैथरीन वाउटरिन को फ्रांस की रक्षा मंत्री का पदभार संभालने पर बधाई देते हुए और भारत की उनकी पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुश्री वॉट्रिन का कार्यकाल यूरोप और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय में शुरू हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, रणनीतिक स्वायत्तता तथा सुदृढ़ यूरोपीय रक्षा दृष्टिकोण के प्रति फ्रांस की अटल प्रतिबद्धता की गहराई से सराहना करता है। फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने सेना के साथ होने वाले ‘अभ्यास शक्ति’ को द्वि-वार्षिक से वार्षिक आयोजन में बदले जाने की सराहना की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारत हिंद-महासागर क्षेत्र के देशों के लिए ‘प्रथम प्रत्युत्तरदाता (First Responder)’ और ‘मूल सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider)’ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इन देशों की क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा किसी भी प्रतिकूल चुनौती से निपटने में सहायता प्रदान के लिए रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में सदैव सहयोग प्रदान करता रहा है।

आतंकवाद के मुद्दे पर, श्री राजनाथ सिंह  ने कहा कि पाकिस्तान का सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने, संरक्षण देने और प्रोत्साहित करने का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में अशांति और हिंसा फैलाना है।, इससे क्षेत्र में शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

वार्षिक रक्षा संवाद एक मंत्री-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक है जिसका उद्देश्य रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग की समीक्षा करने और उसे दिशा देना है। बैठक से पूर्व, भारत आगमन पर फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन को एचएएल एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

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भारतीय वायु सेना का अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हवाई अग्निशमन अभियान

नई दिल्ली – भारतीय वायु सेना (आईएएफ) पूर्वोत्‍तर क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में जंगल की आग पर काबू पाने के लिए निरंतर हवाई अग्निशमन अभियान चला रही है।

भारतीय वायु सेना के अरुणाचल प्रदेश के वालॉन्ग में हेलीकॉप्टरों ने जंगल में लगी भीषण आग पर नियंत्रण पा लिया है। प्रभावित क्षेत्र में आग पर काबू पाने और उसे पूरी तरह से बुझाने के लिए कई उड़ानों के दौरान कुल 139,800 लीटर पानी गिराया गया।

इसी बीच नागालैंड की ज़ुकोऊ घाटी में भी अग्निशमन अभियान जारी है। भारतीय वायु सेना के एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर दीमापुर स्थित पदुम्पोखिरी झील के पानी से जाप्फू शिखर के आसपास लगी आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं।

कठिन भूभाग, कम दृश्यता और उच्च ऊंचाई पर कम वायु जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान चलाए जा रहे हैं। इन बाधाओं के बावजूद, भारतीय वायु सेना के दल नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के साथ घनिष्ठ समन्वय में सटीकता और प्रतिबद्धता के साथ अभियान चला रहे हैं।

भारतीय वायु सेना और स्थानीय नागरिक प्रशासन, आग पर काबू पाने, आग फैलने से रोकने और प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने, जीवन, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा में नागरिक अधिकारियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धत हैं।

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एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अपनी तरह का पहला ‘मधुमक्खी गलियारा’ विकसित करेगा

नई दिल्ली – सतत अवसंरचना विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे परागणकारी या मधुमक्खी गलियारे विकसित करने की एक अनूठी पहल की घोषणा की है।
सजावटी वृक्षारोपण से पारिस्थितिक वृक्षारोपण की ओर बदलाव को दर्शाते हुए इस ‘मधुमक्खी गलियारे’ में मधुमक्खी-अनुकूल वनस्पतियों, जिसमें फूलों के पेड़ और पौधे शामिल होंगे, की निरंतर रैखिक श्रृंखला होगी जो पूरे वर्ष मकरंद और पराग की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण परागणकारी संरक्षण में सहयोग करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह पहल मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों पर बढ़ते पारिस्थितिक तनाव को कम करने में मदद करेगी, जो परागण सेवाओं, कृषि और बागवानी उत्पादकता और समग्र पारिस्थितिक संतुलन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपनी वृक्षारोपण गतिविधियों को समर्पित परागणकारी या ‘मधुमक्खी गलियारे’ बनाने की दिशा में संरेखित करेगा। इस अनूठी पहल में वृक्षों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और घासों का मिश्रण शामिल होगा, जो मकरंद और पराग से भरपूर प्रजातियों को लगाकर जंगली तत्वों को संरक्षित करेगा। साथ ही, परागणकारी जीवों के लिए लाभकारी मृत लकड़ी और खोखले तने भी लगाए जाएंगे।

पौधों की प्रजातियों का चयन इस प्रकार किया जाएगा कि विभिन्न ऋतुओं में फूलों का खिलना अलग-अलग समय पर हो, जिससे पूरे वर्ष लगभग निरंतर फूल खिलने का चक्र बना रहे। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस सहित देशी प्रजातियों के पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे।

कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय उपयुक्तता के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों और एनएचएआई के अन्य खाली भू खंडो पर ऐसे गलियारे विकसित किए जाएंगे। देशभर में स्थित एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय उन राष्ट्रीय राजमार्ग के खंडों की पहचान करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलों वाले पेड़ों के समूह लगाए जा सकें, जो मधुमक्खियों और जंगली मधुमक्खियों की औसत चारा खोजने की दूरी के अनुरूप है।

एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय 2026-27 के दौरान कम से कम तीन परागणकारी गलियारों की योजना बनाएंगे और उन्हें विकसित करेंगे। एनएचएआई का लक्ष्य  वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख पेड़ लगाने का है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत वृक्ष ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल के अंतर्गत लगाए जाएंगे।

यह अनुठी ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल पारिस्थितिक परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करेगी, परागणकर्ताओं के संरक्षण में योगदान देगे और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए एनएचएआई की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।

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केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बिहार के उप-मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, बिहार सरकार में उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, बिहार सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी एवं खेल मंत्री सुश्री श्रेयासी सिंह, राज्यसभा सांसद श्री संजय कुमार झा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पंचायती राज मंत्रालय का यह पवेलियन जमीनी स्तर पर शासन में पारदर्शिता, सटीकता और दक्षता बढ़ाने के लिए मंत्रालय द्वारा विकसित एआई-सक्षम प्लेटफार्मों को प्रदर्शित कर रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो 2026 के दौरान सभासार, प्रमाण (पीआरएएमएएन) और ईग्रामसाथी का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “सरपंच की चौपाल, एआई का कमाल” शीर्षक से नुक्कड़ नाटक है, जिसमें दर्शाया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस प्रकार ग्रामसभा की कार्य प्रणाली को संरचित दस्तावेज़ीकरण और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से सुदृढ़ कर सकती है। शिखर सम्मेलन के विषय “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के तहत मंत्रालय के हस्तक्षेप ग्राम सभा की कार्यवाही के विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड को संस्थागत बनाने, परिसंपत्ति निगरानी में प्रामाणिकता सुनिश्चित करने और वास्तविक समय में शासन सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं।

सभासार ग्राम स्थानीय भाषाओं में ग्रामसभा की बैठकों की एआई आधारित रिकॉर्डिंग, ट्रांसक्रिप्शन और संरचित बैठकों के कार्यवृत्त को स्वाचालित रूप से तैयार करने की सुविधा प्रदान करता है। प्रमाण (पीआरएएमएएन) विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत परिसंपत्ति की तस्वीरों के स्वचालित सत्यापन और गुणवत्ता जांच के लिए इमेज एनालिटिक्स का उपयोग करता है। ईग्रामसाथी पंचायत पदाधिकारियों और नागरिकों को एआई-संचालित, वास्तविक समय की सूचना सहायता प्रदान करता है। ये प्रौद्योगिकी-आधारित पहलें प्रधानमंत्री के उस विजन के अनुरूप हैं, जिसमें डिजिटल नवाचार का लाभ उठाकर सहभागी लोकतंत्र को गहरा करना और देश भर में अंतिम छोर तक शासन को मजबूत करना शामिल है।

आगंतुक 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम (हॉल 5, बूथ 5F5 एवं 5F9) में पंचायती राज मंत्रालय के पवेलियन का अनुभव कर सकते हैं। पवेलियन में “सरपंच बनें” नामक एक प्रत्यक्ष इंटरैक्टिव सिमुलेशन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पारंपरिक नुक्कड़ नाटक प्रारूप के माध्यम से एआई-सक्षम निर्णय दस्तावेजीकरण का प्रदर्शन किया जाता है, साथ ही मंत्रालय के एआई प्लेटफार्म के लाइव मार्गदर्शित प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।

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उपराष्ट्रपति ने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को उनकी पुण्य तिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

 

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने श्री कर्पूरी ठाकुर को एक सच्चे ‘जन नायक’ के रूप में याद किया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय, वंचितों के सशक्तिकरण और जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी सादगी, ईमानदारी और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता राष्ट्र को प्रेरित करती रहेगी और हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगी।

 

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए जनहित में बुद्धि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुणों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज के लिए सही मायने में उपयोगी बनाने में बुद्धिमत्ता, तर्कशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता के महत्व पर जोर दिया। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नागरिकों के कल्याण के लिए कैसे किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स  पर प्राचीन ज्ञान का हवाला देते हुए बुद्धि के शाश्वत गुणों पर विचार व्यक्त किया:

“बुद्धिमत्ता, तर्कशीलता और निर्णय-क्षमता विज्ञान और टेक्नोलॉजी को जन-जन के लिए उपयोगी बनाती हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्देश्य भी यही है कि कैसे एआई का इस्तेमाल सर्वजन के हित में हो।

शुश्रूषा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणां तथा।

ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः॥”

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चेन्नई में कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में प्रथम कैडेट प्रशिक्षण पोत – कृष्णा को लॉन्च किया गया

नई दिल्ली – तमिलनाडु में चेन्नई के कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में निर्माणाधीन तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों (सीटीएस) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपराओं के अनुरूप, श्रीमती अनुपमा चौहान ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उपस्थिति में इस जहाज को लॉन्च किया। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी और मेसर्स एल एंड टी शिपबिल्डिंग, चेन्नई के अधिकारी उपस्थित थे।

इस जहाज को स्वदेशी रूप से मेसर्स एल एंड टी ने डिजाइन और निर्मित किया है। इस जहाज को औपचारिक तौर पर वर्ष 2026 के अंत में भारतीय नौसेना को सौंपना है। इन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों का उपयोग बुनियादी प्रशिक्षण के बाद समुद्र में अधिकारी कैडेटों (महिलाओं सहित) और मित्र देशों के कैडेटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा।

स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में यह भारतीय नौसेना के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्वदेशी जहाज का यह लॉन्च भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है।

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वायु सेना प्रमुख मार्शल एपी सिंह का दक्षिणी वायु कमान कमांडरों के सम्मेलन के लिए मुख्यालय एसएसी का दौरा

नई दिल्ली – वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 16 फरवरी 2026 को दक्षिणी वायु कमान (एसएसी) के वार्षिक कमांडर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय पहुंचे। उनका स्वागत एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, एसएसी एयर मार्शल मनीष खन्ना ने किया और उनके आगमन पर उन्हें औपचारिक सलामी गारद दी गई।

सीएएस को जारी पहलों, दक्षिणी क्षेत्र की वायु रक्षा सहित प्रचालनगत तत्परता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय वायु सेना की पहुंच और क्षमताओं के निरंतर विस्तार के बारे में जानकारी दी गई। सम्मेलन की थीम ‘निर्णय स्वायत्तता के माध्यम से प्रचालनगत दक्षता’ थी, जिसने विकेंद्रीकृत नेतृत्व के माध्यम से आधुनिक युद्ध के प्रति भारतीय वायु सेना के विकसित होते दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान, सीएएस ने एसएसी के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों के फील्ड कमांडरों से परस्‍पर बातचीत की और गतिशील सुरक्षा वातावरण में त्वरित प्रतिक्रिया, मिशन की सफलता और प्रचालनगत लाभ बनाए रखने में विकेंद्रीकृत निर्णय लेने की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने अपील की कि विश्वास, जवाबदेही और स्पष्ट इरादे कमांडरों को रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुए स्वायत्तता का प्रयोग करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कमांडरों से नवोन्‍मेषण को  बढ़ावा देने, संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और संयुक्तता को सुदृढ़ करने का आग्रह किया जिससे कि भारतीय वायु सेना एक शक्तिशाली और भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस शक्ति बनी रहे।

 

 

 

 

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प्रधानमंत्री ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति से भेंट की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से भेंट की।

एक्स पर एक पोस्ट में, श्री मोदी ने लिखा:

“पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी से शानदार मुलाक़ात। विभिन्न विषयों पर उनकी अन्‍तर्दृष्टि सदैव विचारशील और समृद्ध करने वाली होती है।”

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प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज शाम उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन जी से मुलाकात की।

एक्‍स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

“आज शाम उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन जी से मुलाकात की।

“Called on Vice President Thiru CP Radhakrishnan Ji at Uprashtrapati Bhavan earlier this evening.

@VPIndia

@CPR_VP”

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रक्षा मंत्री ने बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में मिसाइल एकीकरण सुविधा का उद्घाटन किया

उन्होंने आकाश तृतीय एवं चतुर्थ रेजिमेंट की युद्ध प्रणालियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अत्याधुनिक माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का अनावरण भी किया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 16 फरवरी, 2026 को बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का दौरा किया और परिसर में स्थापित मिसाइल एकीकरण सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आकाश तृतीय एवं चतुर्थ रेजिमेंट की युद्ध प्रणालियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अत्याधुनिक माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का अनावरण किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पुणे स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एआई) का सुदूर से उद्घाटन किया और कंपनी की एआई नीति का औपचारिक रूप से शुभारंभ भी किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित एआई-आधारित समाधानों सहित अनेक उन्नत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी गई, जो रक्षा क्षेत्र में नवाचार एवं स्वदेशीकरण पर बढ़ते ध्यान को दर्शाती है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों, एवियोनिक्स, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स तथा टैंक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रगति के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) की सराहना की। उन्होंने कहा, “बीईएल ने नेटवर्क-केंद्रित संचालन को सशक्त बनाया है। इसकी एकीकृत प्रणालियां, वास्तविक समय में डेटा साझा करने की क्षमता तथा निर्णय समर्थन प्रणालियाँ हमारी युद्धक क्षमता को एक नए स्तर तक ले गई हैं।”

 

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) में संचालित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के बारे में अवगत कराया गया, जो प्रमुख राष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रमों के अनुरूप हैं। इनमें त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (क्यूआरएसएएम), लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट मार्क-II (एलसीए एमके-II), एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए), प्रोजेक्ट कुशा (एमआर-एसएएम/एलआर-एसएएम), काउंटर-ड्रोन प्रणाली, नौसेना हथियार नियंत्रण प्रणाली आदि शामिल हैं। प्रस्तुतीकरण में इस तथ्य पर विशेष बल दिया गया कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास पहल थल, वायु, नौसेना और रणनीतिक क्षेत्रों में परिचालन तत्परता को सुदृढ़ कर रही हैं, साथ ही विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता को कम कर रही हैं। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वायु क्षेत्र रक्षा तथा ड्रोन-रोधी अभियानों हेतु विकसित प्रणालियों ने भारत के स्वदेशी समाधान वैश्विक मानकों के अनुरूप सिद्ध किया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खतरों को निष्प्रभावी करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया गया। श्री सिंह ने कहा कि एआई के माध्यम से खतरे की भविष्यवाणी, पूर्व चेतावनी और प्रतिक्रिया तंत्र में हुई प्रगति से हमारे सैनिकों में परिचालन आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। उन्हें यह भरोसा है कि एक सशक्त वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रणाली सदैव उनके साथ खड़ी है। श्री सिंह ने वर्तमान समय में स्वदेशी हथियारों एवं प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विजय प्राप्त करने के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केवल आत्मनिर्भरता से अर्जित जीत ही राष्ट्र को नया आत्मविश्वास प्रदान करती है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग अब केवल भविष्य की अवधारणाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि वास्तविक समय में निर्णय-निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर रक्षा तथा सटीक अभियानों में इनके उपयोग से युद्धक्षेत्र की प्रकृति में व्यापक परिवर्तन आ रहा है। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में उन्होंने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), अन्य रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और उद्योग भागीदारों से आग्रह किया कि वे आने वाली नई तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने बीईएल के अनुसंधान एवं विकास समुदाय को प्रोत्साहित किया कि वह एआई व स्वायत्त प्रणालियों में नवीनतम प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए स्टार्टअप्स, उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर चुस्त उत्पाद विकास को बढ़ावा दे। इसके साथ ही, श्री सिंह ने बीईएल द्वारा विश्व-स्तरीय उत्पाद विकसित करने हेतु अंतर-विषयक सहयोग, नवाचार तथा तीव्र प्रोटोटाइपिंग को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह प्रयास ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप हो।

इस ब्रीफिंग के दौरान, बेल्जियम और यूरोपीय संघ (बीईएल) की केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं, सीओई-इलेक्ट्रॉनिक्स वॉरफेयर एंड फोटोनिक्स, सीओई-कम्युनिकेशन, सीओई-रडार एंड वेपन सिस्टम्स और उत्पाद विकास एवं नवाचार केंद्र द्वारा किए गए स्वदेशीकरण संबंधी उपायों को प्रदर्शित किया गया। स्टार्टअप्स और उद्योग भागीदारों ने भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने स्टार्टअप्स एवं युवा वैज्ञानिकों से संवाद किया और उन्हें अधिक से अधिक उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, अपर सचिव एवं अधिग्रहण महानिदेशक ए. अनबरासु और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मनोज जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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हेलेनिक नौसेना के जनरल स्टाफ प्रमुख वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस का भारत दौरा  

नई दिल्ली – हेलेनिक नौसेना के जनरल स्टाफ के प्रमुख, वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास, समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से 16 से 19 फरवरी 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं।

वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास ने नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जिसका उद्देश्य संयुक्त अभियान, क्षमता निर्माण, संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर महत्व के अन्य मुद्दों सहित समुद्री गतिविधियों को आगे बढ़ाना था।

वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने गुरुग्राम स्थित इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर फॉर इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) का भी दौरा किया।

अपनी यात्रा के दौरान वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारास विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और मिलान-2026 में भाग लेंगे।

हेलेनिक नौसेना भारतीय नौसेना की एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है और वाइस एडमिरल दिमित्रियोस एलेफ्थेरियोस कटारस की यह यात्रा भारत-हेलेनिक नौसेना संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि है और इसका उद्देश्य साझा हितों और समग्र समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

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भारत सरकार ने आंशिक रूप से चालू राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए शुल्क नियमों में संशोधन किया

भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया।

इसके तहत जब कोई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक नहीं खोला जाता है, तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नियमों के अनुसार केवल पूर्ण किए गए राजमार्ग के लिए ही टोल शुल्क वसूला जाएगा।

संशोधित नियम 15 फरवरी, 2026 से प्रभावी होंगे।

नई दिल्ली – भारत सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (जो केवल आंशिक रूप से चालू हैं) के उपयोगकर्ताओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।

वर्तमान में राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर उपयोगकर्ता शुल्क पूरी लंबाई के लिए सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ता शुल्क से 25% अधिक है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का उद्देश्य आवागमन को नियंत्रित, तेज और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना है जो यात्रियों को आरामदायक यात्रा की सुविधा देता है।

यह शुल्क पूरे हो चुके हिस्से के लिए लिया जाता है, भले ही एक्सप्रेसवे अपनी पूरी लंबाई में शुरू से अंत तक पूरी तरह से खुला न हो।

नए प्रावधान के तहत जब तक राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पूरी तरह से नहीं खुल जाता, तब तक पूरी हो चुकी लंबाई के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के लिए लागू कम दर पर टोल शुल्क वसूला जाएगा।

इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के उपयोग को बढ़ावा देना है ताकि उपयोगकर्ताओं को खुले हुए हिस्सों से यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

इससे एक्सप्रेसवे के समानांतर मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग मार्गों पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी, माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी और साथ ही पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात जाम के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रह) (संशोधन) नियम, 2026 नामक संशोधित नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। यह नियम संशोधन के लागू होने की तारीख से एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से चालू होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

यह संशोधन भारत सरकार की एक और पहल है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के उपयोगकर्ताओं के लिए यात्रा को अधिक सुगम और किफायती बनाना है।

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संसद में प्रश्न: मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता

नई दिल्ली – भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मॉनसून के दौरान वर्षा के लिए सरलीकृत पूर्वानुमान रणनीति का पालन करता है। इस रणनीति के अनुसार यह अलग-अलग समय-सीमाओं और अलग-अलग स्थानिक-सीमाओं के लिए पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है।
मौसम पूर्वानुमान से सभी जिलों और लगभग 1200 स्टेशनों पर सभी प्रकार की गंभीर मौसम स्थितियों के लिए छह घंटे तक का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। यह शहरों, ब्लॉकों, जिलों और मौसम विज्ञान उपखंडों में वर्षा के लिए अल्प से मध्यम अवधि (7 दिनों तक) का पूर्वानुमान जारी करता है। 36 मौसम विज्ञान उपखंडों के लिए विस्तारित अवधि (4 सप्ताह तक) का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। पूरे देश और एक समान क्षेत्रों के लिए वर्षा के मासिक और मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान भी जारी किए जाते हैं।

वर्ष 2025 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए इसके मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान की सटीकता के नवीनतम आकलन से पता चलता है कि यह अत्यधिक सटीक था। अप्रैल 2025 में जारी पूर्वानुमान देश भर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) की वर्षा के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 105% था, जबकि देश भर में वास्तविक मौसमी वर्षा एलपीए का 108% थी, जो पूर्वानुमान त्रुटि की सीमा के भीतर है। देश के अधिकांश हिस्सों में पूर्वानुमान काफी हद तक सटीक थे। इसी प्रकार मासिक वर्षा का पूर्वानुमान भी काफी हद तक वास्तविक वर्षा से मेल खाता था और पूर्वानुमानित सीमा के भीतर ही रहा।

भारी वर्षा के पूर्वानुमान के प्रदर्शन की नवीनतम समीक्षा से पता चलता है कि 2025 में भारी वर्षा के पूर्वानुमान ने उच्च दक्षता का प्रदर्शन किया, जिसमें 0.85 की पहचान संभावना समग्र रूप से अच्छी सटीकता का संकेत देती है।

आईएमडी ने 2021 से मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) दृष्टिकोण पर आधारित मासिक और मौसमी पूर्वानुमान के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में विभिन्न वैश्विक जलवायु पूर्वानुमान और अनुसंधान केंद्रों के संयुक्त वैश्विक जलवायु मॉडल (सीजीसीएम) का उपयोग किया जाता है, जिसमें आईएमडी की मॉनसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) भी शामिल है। एमएमई-आधारित पद्धति को अपनाने के बाद से आईएमडी की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। वर्ष 2021 से 2025 की अवधि के लिए अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के आईएमडी के मौसम पूर्वानुमान के सत्यापन विवरण नीचे दिए गए हैं:

 

वर्ष अखिल भारतीय मॉनसून वर्षा (एलपीए)
वास्तविक (%) पूर्वानुमान (%) टिप्पणी
2021 99 101 सही
2022 106.5 103 सही
2023 95 96 सही
2024 108 106 सही
2025 108 106 सही
***मॉडल त्रुटि ± एलपीए का 4 प्रतिशत है

मौसमी और अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान के लिए आईएमडी अपने परिचालन पूर्वानुमान ढांचे के तहत कई उन्नत उपकरणों, मॉडलों और अवलोकन प्रणालियों का उपयोग करता है। मिशन मौसम के तहत भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS), एक उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया गया है, जो 6 किमी की बहुत उच्च स्थानिक रेजोल्यूशन पर पहले से ही संचालित है। इसमें 10 दिनों तक वर्षा घटनाओं की भविष्यवाणी करने की क्षमता है, जो अल्पकालिक और मध्यम-सीमा पूर्वानुमानों को कवर करती है।

इसके अलावा नियमित रूप से चलने वाले ऐसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल का समर्थन करने के लिए, कंप्यूटिंग सुविधाओं में भी काफी वृद्धि की गई है ताकि विशाल डेटा को एकीकृत किया जा सके और मेसो-स्केल, क्षेत्रीय और वैश्विक मॉडलों को उच्च रिजॉल्यूशन पर चलाया जा सके। हाल ही में उच्च शक्ति कंप्यूटिंग सिस्टम ‘अरुणिका’ और ‘अर्का के कार्यान्वयन के साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2025 में अपनी कुल कंप्यूटिंग क्षमता को 28 पेटा एफएलओपी तक बढ़ा दिया है, जो 2014 में पिछली क्षमता 6.8 पेटा एफएलओपी से काफी अधिक है।

आईएमडी मॉडल के प्रदर्शन को बेहतर बनाने, मॉडल आउटपुट की पोस्ट-प्रोसेसिंग, पैटर्न रिकग्निशन, बायस करेक्शन और प्रोबेबिलिस्टिक फोरकास्ट इंटरप्रिटेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित तरीकों को धीरे-धीरे एकीकृत कर रहा है। वर्तमान में मौसम अवलोकन प्रणाली में 48 डॉप्लर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) शामिल हैं जो देश के लगभग 92% हिस्से को कवर करने के साथ ही उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह-आधारित निगरानी और लगभग 6,300 वर्षामापी स्टेशन के साथ मिलकर काम करते हैं।

भारत में कुल 48 डीडब्ल्यूआर स्थापित और कार्यरत हैं। देश भर में जहां-जहां डीडब्ल्यूआर नेटवर्क स्थापित किया गया है, उन स्थानों की सूची परिशिष्ट-1 में दी गई है। इससे आईएमडी को बादल फटने, गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और चक्रवात जैसी गंभीर घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान में सुधार करने में मदद मिली है।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 12 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी थी।

परिशिष्ट-1

देश में वर्तमान डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) नेटवर्क के स्थान:

क्र.सं. राज्य स्थान
आंध्र प्रदेश मछलीपट्टनम
आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम
आंध्र प्रदेश श्रीहरिकोटा, इसरो
असम मोहनबाड़ी
असम जोरहाट
बिहार पटना
छत्तीसगढ़ रायपुर
गोवा गोवा
गुजरात भुज
हिमाचल प्रदेश जोत
हिमाचल प्रदेश मुरारी देवी
हिमाचल प्रदेश कुफरी
कर्नाटक मंगलौर
केरल कोच्चि
केरल वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम (इसरो)
मध्य प्रदेश भोपाल
मध्य प्रदेश सिलखेड़ा (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई
महाराष्ट्र नागपुर
महाराष्ट्र आईआईटीएम सोलापुर
महाराष्ट्र वेरावली
महाराष्ट्र मुंबई, जुहू (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, पनवेल (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, कल्याण, डोंबिवली (आईआईटीएम)
महाराष्ट्र मुंबई, वसई, विरार (आईआईटीएम)
 
महाराष्ट्र महाबलेश्वर (आईआईटीएम)
मेघालय चेरापूंजी (इसरो)
ओडिशा गोपालपुर
ओडिशा पारादीप
पंजाब पटियाला
राजस्थान जयपुर
तमिलनाडु चेन्नई
तमिलनाडु कराईकल
तमिलनाडु एनआईओटी चेन्नई
तेलंगाना हैदराबाद
त्रिपुरा अगरतला
उत्तराखंड लैंसडाउन
उत्तराखंड मुक्तेश्वर
उत्तराखंड सुरकंडा देवी
उत्तर प्रदेश लखनऊ
पश्चिम बंगाल कोलकाता
जम्मू एवं कश्मीर बनिहाल टॉप
जम्मू एवं कश्मीर जम्मू
जम्मू एवं कश्मीर श्रीनगर
दिल्ली आयानगर
दिल्ली पालम
दिल्ली मुख्यालय मौसम भवन
लद्दाख लेह

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एनसीडीसी के अंतर्गत रोग निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम

नई दिल्ली – केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) वायरल हेपेटाइटिस की निगरानी के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (2012), राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (2017), लेप्टोस्पाइरोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्यक्रम (2013), जूनोसिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम (2013) चलाता है।
इसके लिए यह एनसीडीसी शाखाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण (2015) को लागू करता है और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) योजना के केंद्रीय क्षेत्र घटक के अंतर्गत संक्रामक रोगों की निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शाखाओं, जैव सुरक्षा स्तर-3 प्रयोगशाला (बीएसएल-3), एनसीडीसी क्षेत्रीय शाखाओं, महानगरीय निगरानी इकाइयों की स्थापना, एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) को सुदृढ़ करने और एनसीडीसी मुख्यालयों को सुदृढ़ और उन्नत करने के लिए कार्यक्रम लागू करता है।

इसके अतिरिक्त, एनसीडीसी कई अन्य कार्यक्रम भी चलाता है, जिनमें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी), सांप के काटने से होने वाले विष के निवारण एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, और जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) शामिल हैं। ये सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत आते हैं। एनसीडीसी के कार्यक्रमों/योजनाओं का विवरण निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है: https://ncdc.mohfw.gov.in/

सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि जारी करती है। (राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार पीआईपी का विवरण इस लिंक पर देखा जा सकता है: https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=1377&lid=744 

एनसीडीसी देश में रोग निगरानी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई उपाय करता है, जिनमें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) का कार्यान्वयन; कागज रहित, केस-आधारित तथा लगभग वास्तविक समय की निगरानी के लिए 2021 में एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) में संक्रमण; केंद्रीय, राज्य और जिला निगरानी इकाइयों की स्थापना; जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं (डीपीएचएल) को मजबूत करना; महानगरीय निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना; एनसीडीसी में वायरल हेपेटाइटिस प्रयोगशाला को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित करना और एनसीडीसी की राज्य तथा क्षेत्रीय शाखाओं की स्थापना और उन्हें मजबूत करना शामिल है।

महानगर निगरानी इकाइयों (एमएसयू) की स्थापना के लिए स्थानों की पहचान हेतु अपनाए गए मानदंडों में जनसंख्या का आकार और घनत्व, उच्च रोग भार और प्रकोप की संवेदनशीलता, शहरीकरण स्तर (टियर-I और टियर-II शहर), मौजूदा रोग निगरानी अवसंरचना में कमियां, सहायक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता शामिल हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्‍तर में यह बात कही।

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भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा और भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

नई दिल्ली – भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा और भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में चयन से उन्हें राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलता है। उन्होंने उन्हें यह याद रखने की सलाह दी कि ऐसे बहुत से युवा हैं जो ये सेवा करने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ को अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि वे कई लोगों के लिए प्रेरणा और रोल मॉडल बन सकते हैं और उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी उनके पूरे कार्यकाल के दौरान उनके साथ रहेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि उनके जैसे अधिकारी देश के विकास और प्रत्येक नागरिक की भलाई के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे तो हमारा राष्ट्र वैश्विक मंच पर मजबूत, अधिक सक्षम और अधिक सम्मानित होता रहेगा। उन्‍होंने कहा कि इन सेवाओं के अधिकारी जिस जुनून के साथ काम करते हैं, वह एक ऐसी ताकत है जो कल के भारत को बदल सकती है।

भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वे जनता के विश्वास और वित्तीय विवेक के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि शासन प्रणाली पर जवाबदेही के ढांचे का प्रभाव और मूल्यवर्धन तब बढ़ता है जब कार्यकारी और लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच तालमेल होता है। लेखा परीक्षा और कार्यकारी के बीच एक प्रभावी साझेदारी सार्वजनिक व्यय की प्रभावकारिता को बढ़ाने में मदद करती है और वांछित परिणामों की प्राप्ति में सहायता करती है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे हमेशा संविधान और सेवा की परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखने का प्रयास करें।

भारतीय व्यापार सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वे निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन करने और भारतीय व्यवसाय वैश्विक स्तर पर नवाचार, विस्तार और प्रतिस्पर्धा कर सकने योग्‍य वातावरण को बढ़ावा देने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शक दिशा-निर्देश हमेशा देश का राष्ट्रीय हित होना चाहिए। उन्होंने उन्हें यह याद रखने की सलाह दी कि वे जिस भी नीति को लागू करते हैं, प्रत्येक व्यापार बाधा को दूर करते हैं, प्रत्येक समझौता जिसका वे समर्थन करते हैं – भारत को एक मजबूत और विश्व स्तर पर अधिक सम्मानित व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरने में योगदान देगा।

 

रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि यह उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है कि वे हमारे रक्षा बलों के लिए तकनीकी रूप से उन्नत और विश्व स्तरीय हथियारों और गोला-बारूद के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करें। उनकी भूमिका उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और राष्ट्रीय रक्षा के एक महत्‍वपूर्ण  स्‍थान पर रखती है। उन्होंने अधिकारियों से सशस्त्र बलों को बहु-डोमेन एकीकृत संचालन में सक्षम तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध-तैयार बल में बदलने में योगदान देने के लिए नवीन दृष्टिकोण के साथ आने का आग्रह किया।

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भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास मिलन 2026 के अंतर्गत मिलन विलेज का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना ने अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 के अंतर्गत 15 फरवरी 2026 को पूर्वी नौसेना कमान में मिलन विलेज का अनावरण किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता वाइस एडमिरल संजय भल्ला, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान ने की। उन्होंने भाग लेने वाली मित्र नौसेनाओं के लिए औपचारिक रूप से मिलन विलेज का शुभारंभ किया और वैश्विक समुद्री सहयोग को प्रोत्साहित करने हेतु विकसित की गई सुविधाओं का निरीक्षण किया।

काफी विचार-विमर्श व सोच-समझ के बाद विकसित किया गया मिलन विलेज एक विशिष्ट अनुभव क्षेत्र है, जिसे 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और नौसेना कर्मियों को सौहार्द एवं मित्रता के वातावरण में एक साथ लाने के उद्देश्य से परिकल्पित व निर्मित किया गया है। यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र है, जो पेशेवर सीमाओं से आगे बढ़कर आपसी जुड़ाव और समझ को सशक्त बनाता है।

मिलन विलेज की एक प्रमुख विशेषता सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर इसका विशेष बल है, जो भारत की विविधतापूर्ण विरासत और परंपराओं की समृद्ध एवं जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। यह गांव गायकों की सजीव प्रस्तुतियों, पारंपरिक लोक नृत्य कार्यक्रमों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की मेजबानी करेगा, जो भारत की जीवंत व बहुरंगी कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करेंगे।

मिलन विलेज में नौसेना से संबंधित स्मृति चिन्हों के साथ-साथ हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों की अनेक दुकानें स्थापित की गई हैं, जो देशभर की समृद्ध कारीगरी का सुंदर प्रदर्शन करती हैं। इसके अतिरिक्त, आगंतुकों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के स्वादिष्ट एवं पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर भी प्राप्त होगा।

पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि मिलन विलेज सौहार्द और सांस्कृतिक जुड़ाव की उस भावना का प्रतीक है, जो पेशेवर नौसैनिक सहयोग को सुदृढ़ बनाती है। विशाखापत्तनम में आईएफआर, मिलन और आईओएनएस का क्रमिक आयोजन भारत की समुद्री पहुंच के विस्तार व मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोगात्मक जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मिलन विलेज के उद्घाटन के साथ ही भारतीय नौसेना द्वारा विशाखापत्तनम में आयोजित किए जाने वाले व्यापक कार्यक्रमों और गतिविधियों की श्रृंखला का शुभारंभ हो गया है। 15 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास मिलन 2026, अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (आईएफआर) 2026 और आयन्स कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स के साथ मिलकर भारत के ऐतिहासिक समुद्री अभिसरण का एक प्रमुख स्तंभ बनेगा।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आयोजित होने वाले सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक मिलन 2026 विश्व की अनेक नौसेनाओं को एक मंच पर लाएगा, ताकि आपसी सहभागिता, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ किया जा सके। अभ्यास के बंदरगाह और समुद्री चरण पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा, खोज व बचाव तथा सहयोगात्मक सुरक्षा अभियानों सहित जटिल समुद्री परिचालनों पर केंद्रित होंगे, जो स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं नियम-आधारित समुद्री सीमा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करेंगे।

मिलन 2026 के सांस्कृतिक केंद्रबिंदु के रूप में मिलन विलेज “भाईचारा, सहयोग और सहभागिता” की विषय-वस्तु को सजीव रूप प्रदान करता है। यह पारस्परिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने, मित्रता के सेतु को सुदृढ़ करने और सामूहिक समुद्री साझेदारी को मजबूत करने हेतु भाग लेने वाली नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का स्वागत किया।

“सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम पर आधारित यह शिखर सम्मेलन, मानव-केंद्रित प्रगति और समावेशी विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित विभिन्न सेक्‍टरों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं एआई के नवाचार, सहयोग और जिम्मेदार उपयोग पर वैश्विक विमर्श को समृद्ध करेंगी, जिससे एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक एआई परिवर्तन में भारत के नेतृत्व पर बल दिया, जो इसकी 1.4 बिलियन की जनसंख्या, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान की शक्ति से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई में भारत की प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है, जिसने देश को प्रौद्योगिकीय उन्नति में अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है।

श्री मोदी ने एक्स पर एक थ्रेड पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“एआई पर चर्चा करने के लिए पूरी दुनिया ए‍कत्रित है!”

आज से भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है। मैं इस समिट में वैश्विक नेताओं, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकीय को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। समिट की थीम “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

“आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई सेक्‍टरों में बदलाव ला रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट एआई के विविध पहलुओं, जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा। मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।”

उन्‍होंने कहा, “भारत की 1.4 बिलियन जनता की बदौलत हमारा देश एआई परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।”

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प्रधानमंत्री ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट को युवाओं की शक्ति और तकनीकी प्रगति का प्रमाण बताते हुए सराहा और एक संस्कृत सुभाषित साझा किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारत में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर से आए नेताओं, नवप्रवर्तकों और विशेषज्ञों के एकत्र होने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण पल बताते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के युवाओं में मौजूद अपार क्षमता तथा वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के बढ़ते कद को साफ तौर पर दिखाता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक प्राचीन श्लोक का संदर्भ देते हुए X पर लिखा:

“यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है।

“दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये।

विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”

 

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