Dr Jitendra Singh announces first national call of Rs 2,000 crore BIRAC-RDI Fund under Rs 1 lakh crore RDI initiative to boost biotechnology sector

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) पहल के तहत उच्च प्रभाव वाले जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को बढ़ावा देने के सन्दर्भ में बीआईआरएसी-आरडीआई फंड के लिए पहले राष्ट्रीय आह्वान की घोषणा की। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लॉन्च विज्ञान के नेतृत्व वाले विकास के लिए भारत के दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है और संकेत देता है कि देश अब देर से प्रवेश नहीं कर रहा है, बल्कि उभरती प्रौद्योगिकियों में शुरुआत से ही कार्यरत है।

इस शुभारंभ कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल; डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग; डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, बीआईआरएसी; डीएसटी और एएनआरएफ के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यम पूंजी प्रतिनिधि और वैज्ञानिक समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने जैवप्रौद्योगिकी से जुड़ी नीति में हिचकिचाहट के स्थान पर नीति में तेजी की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार में देखा जा सकता है, जिनकी संख्या 2014 के लगभग 50 जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गयी है। यह पैमाने और महत्वाकांक्षा में एक बड़े छलांग को प्रतिबिंबित करता है। जैव अर्थव्यवस्था, जो 2014 में लगभग 8 अरब डॉलर की थी, ने तेजी से विस्तार किया है, जिससे भारत को वैश्विक अग्रणी देशों में स्थान मिला है।

उन्होंने कहा कि जैवप्रौद्योगिकी अगले चरण के औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाएगी, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी ने भारत के पिछले बदलाव को आकार दिया था। उनके अनुसार, आने वाली औद्योगिक क्रांति जैवप्रौद्योगिकी नवोन्मेष, उन्नत निर्माण और नई पीढ़ी की उद्यमशीलता द्वारा संचालित होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान पहल भारत की क्षमता को केवल विचार उत्पन्न करने में ही नहीं, बल्कि उन्हें औद्योगिक रूप देने में भी मजबूत करती है।

उभरते क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत पहले ही अंतरिक्ष जैवप्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है और भविष्य के क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष चिकित्सा की तैयारी कर रहा है। घरेलू रूप से विकसित किट का उपयोग करके अंतरिक्ष में जैवप्रौद्योगिकी प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनमें पौधों के विज्ञान और जीवन विज्ञान अनुसंधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास भारत को वैश्विक प्रासंगिकता वाले ज्ञान और अनुप्रयोगों में योगदान देने की स्थिति प्रदान करते हैं, जिससे वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और भू-राजनीतिक स्थिति दोनों बढ़ती हैं।

डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग; महानिदेशक, बीआरआईसी और अध्यक्ष बीआईआरएसी ने कहा कि आरडीआई फंड की संरचना लंबी अवधि, उच्च जोखिम वाले अनुसंधान का समर्थन करने के लिए बनायी गयी है, जिसमें धैर्यपूर्ण पूंजी और उन्नत अवसंरचना की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल बायो ई 3 नीति की पूरक है और बायोफार्मा, जैव-औद्योगिक उत्पादन, जैव ऊर्जा, नीली अर्थव्यवस्था और बायो-कंप्यूटेशन में अगली पीढ़ी के उत्पादों का निर्माण करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि अनुसंधान परिणामों से बड़े पैमाने पर औद्योगिक परिणामों तक पहुंचा जाए।

डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) ने कहा कि बीआईआरएसी को आरडीआई फ्रेमवर्क के तहत द्वितीय-स्तर के फंड प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया है और यह अगले पांच वर्षों में ₹2,000 करोड़ की राशि का निवेश करेगा, जिसमें आगे विस्तार की संभावना है। उन्होंने कहा कि बीआईआरएसी ने पिछले दशक में पूरे देश में एक नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण किया है, जिसमें 100 से अधिक बायो-इन्क्यूबेशन केंद्र, 10 लाख वर्ग फीट से अधिक इन्क्यूबेशन स्पेस और 15 लाख से अधिक स्टार्टअप उद्यमियों के साथ सहभागिता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2012 के 28 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है, और इसका लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना है।

बीआईआरएसी – आरडीआई फंड राष्ट्रीय आरडीआई पहल का हिस्सा है जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई थी और नवंबर 2025 में अनुसंधान राष्ट्रिय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के तहत लॉन्च किया गया था, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। इस फंड का उद्देश्य प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक स्तर के निर्माण के बीच की खाई को पाटना है, और यह प्रौद्योगिकी को इक्विटी, परिवर्तनीय दस्तावेज और दीर्घकालिक ऋण के मिश्रण के जरिये टीआरएल-4 से टीआरएल-9 तक समर्थन देता है।

आवेदन के लिए राष्ट्रीय आह्वान अब खुल गया है। पात्र स्टार्टअप, लघु और मध्यम उद्यम (एस एम ई), और उद्योग भागीदार आधिकारिक पोर्टल https://biracrdif.org के माध्यम से प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। चरण 1 के लिए अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लॉन्च एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत जैव प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करने के लिए तैयार है, जो वैज्ञानिक गहराई, उद्यमशील ऊर्जा और नीति समर्थन को जोड़कर वैश्विक औद्योगिक रूपांतरण के अगले चरण को आकार में सक्षम है।