फाइलेरिया उन्मूलन हेतु मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन 2026 की द्वितीय बैठक

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में बैठक

फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का शत प्रतिशत लक्षित जनसंख्या आच्छादित करने का निर्देश

ससमय फाइलेरिया रोधी दवा वितरण नही करने वाले दवा प्रशासकों को शो कॉज करने के निर्देश

रांची,28.02.2026 – फाइलेरिया उन्मूलन हेतु मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन 2026 की द्वितीय बैठक उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार उप विकास आयुक्त के कार्यालय कक्ष में आज दिनांक -28 फरवरी 2026 को उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का शत प्रतिशत लक्षित जनसंख्या आच्छादित करने का निर्देश

जिसमें फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का शत प्रतिशत लक्षित जनसंख्या आच्छादित करने का निर्देश दिया गया ।

ससमय फाइलेरिया रोधी दवा वितरण नही करने वाले दवा प्रशासकों को शो कॉज करने के निर्देश

उप विकास आयुक्त ने ससमय फाइलेरिया रोधी दवा वितरण नही करने वाले दवा प्रशासकों को शो कॉज करने का निर्देश दिया गया।

उप विकास आयुक्त ने दवा प्रशासको को निर्देश देते हुए कहा की सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कांके के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके को छुटे हुए जनसंख्या को 15 मार्च 2026 तक दवा खिलाना सुनिश्चित करने को कहा। एवं छूटे हुए छात्रों को स्कूल में और बाहर से पर्व के दौरान आने वाले लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाने को कहा। अभी कुल जनसंख्या के अनुरूप कांके का 84 प्रतिशत, सोनाहातु का 90 प्रतिशत एवं तमाड़ का 93 प्रतिशत आच्छादित की गई है। जिसमें कुल 88 प्रतिशत लोगों ने फाईलेरिया रोधी दवा का सेवन किया है।

फाइलेरिया जैसी विकलांगता पैदा करने वाली बीमारी को जड़ से समाप्त करने की दिशा में जिला प्रशासन की सार्थक पहल

यह बैठक फाइलेरिया जैसी विकलांगता पैदा करने वाली बीमारी को जड़ से समाप्त करने की दिशा में जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जनसहभागिता, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रियता और समयबद्ध क्रियान्वयन से राँची जिला तथा समूचे झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।
सभी नागरिकों से अपील: फाइलेरिया रोधी दवा सुरक्षित एवं प्रभावी है। यदि आपने अभी तक दवा नहीं ली है, तो निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, आशा कार्यकर्ता या बूथ पर संपर्क कर अवश्य सेवन करें। एक छोटी सी खुराक से हम सब मिलकर फाइलेरिया मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।

बैठक में सिविल सर्जन सदर राँची, डॉ. प्रभात कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके, श्री विजय कुमार, प्रभारी चिकत्सा पदाधिकारी सोनाहातु, JSLPS के पदाधिकारी, जिला भी.वी. ड़ी. पदाधिकारी, एफ. एल. ए. एवं पिरामल के प्रतिनिधि उपस्थित थे

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गोरखपुर में आयोजित मेगा सर्जिकल नेत्र शिविर के दौरान सैन्य डॉक्टरों ने 374 मरीजों की आंखों की रोशनी वापस दिलाई

नई दिल्ली – पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित 12 वायु सेना अस्पताल में आयोजित प्रथम मेगा एडवांस्ड सर्जिकल नेत्र शिविर का समापन 27 फरवरी, 2026 को हुआ। चार-दिवसीय इस शिविर के दौरान भारतीय सेना और वायु सेना के उच्च विशिष्ट नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने 374 सफल शल्य चिकित्साएं कीं, जिनसे नेत्र रोगियों की जिंदगी बदल गई। समापन समारोह में केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल बी मणिकांतन उपस्थित थे। इसके अलावा, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन और चिकित्सा सेवा महानिदेशक (वायु) एयर मार्शल संदीप थरेजा द्वारा उच्च-स्तरीय निरीक्षण भी किया गया।

यह शिविर पूरे क्षेत्र के लिए आशा की किरण बन गया। सिद्धार्थनगर, आज़मगढ़, देवरिया, महाराजगंज और गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों के अलावा नेपाल से नेत्र रोगी इस शिविर में आए। इस मिशन का प्रभाव गोरखपुर निवासी 69 वर्षीय श्री अमरनाथ गुप्ता की आंखों में देखा जा सकता है। वर्षों से, उनकी आंखों की रोशनी कमज़ोर होने के कारण वे अपने पोते-पोतियों के चेहरे देखने की खुशी से वंचित थे। सफल सर्जरी के बाद भावुक होकर श्री गुप्ता उन सैकड़ों लोगों में शामिल हैं जिन्हें नई रोशनी मिली है।

इस टीम का नेतृत्व आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा ने किया, जिन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल रवि चौहान और मेजर अमृता जोशी सहित शल्य चिकित्सा विशेषज्ञों की एक कुशल टीम का सहयोग से और इनके अथक प्रयासों से शिविर की सफलता सुनिश्चित हुई। टीम ने सर्जरी करने के लिए विश्व-स्तरीय चिकित्सा उपकरणों का उपयोग किया, जिन्हें भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा क्षेत्र में पहुंचाया गया था।

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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू 2) पर अंतर्देशीय जलमार्ग को बढ़ावा देने के लिए तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया

नई दिल्ली –  केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर तीन प्रमुख अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “विकास एवं विरासत” के संतुलित दृष्टिकोण पर बल दिया।

इन परियोजनाओं में बोगीबील स्थित सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर, धुबरी स्थित सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर और डिब्रूगढ़ में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की हेरिटेज भवन शामिल हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन चौकडिंगी मैदान में किया गया जिसमें असम के विद्युत मंत्री प्रशांत फुकन, लोक निर्माण मंत्री जोगेन मोहन, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री बिमल बोराह सांसद रामेश्वर तेली, विधायक तेराश गोवाला, चक्रधर गोगोई, बिनोद हजारिका, पोनाकन बरुआ, तरंगा गोगोई, संजय किशन और भास्कर शर्मा उपस्थित हुए। इनके अलावा लोक निर्माण मंत्रालय के सचिव, विजय कुमार और आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष सुनील पालीवाल सहित मंत्रालय और आईडब्ल्यूएआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।

केंद्रीय मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील शासन मॉडल को दर्शाती हैं, जो सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए तीव्र विकास सुनिश्चित करता है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में हम विकास एवं विरासत की स्पष्ट दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहे हैं। हम अपनी जड़ें, अपनी विरासत एवं अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए प्रगति एवं आर्थिक विकास की दिशा में अग्रसर हैं। ब्रह्मपुत्र केवल एक नदी नहीं है बल्कि यह हमारी जीवनरेखा, हमारा इतिहास और हमारा भविष्य है।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि नयी अवसंरचना रसद को मजबूत करेगी, आवागमन को बढ़ावा देगी और पूर्वोत्तर में व्यापार एवं पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगी।

बोगीबील में सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर को एक आधुनिक पर्यटन-सह-कार्गो टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया है, जो सीमा शुल्क, आव्रजन एवं आईडब्ल्यूएआई प्रशासनिक कार्यों को एक ही परिसर में एकीकृत करता है।

इस सुविधा में समर्पित आगमन एवं प्रस्थान प्रतीक्षा हॉल, कार्गो भंडारण क्षेत्र, प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों के लिए सुविधाएं एवं एकीकृत सुरक्षा प्रणाली शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एनडब्ल्यू-2 के साथ परिचालन दक्षता में सुधार करना तथा भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्गों के अंतर्गत व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।

धुबरी सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर को पश्चिमी असम में नियामक निरीक्षण को बढ़ावा देने एवं आयात-निर्यात-आयात परिचालन को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है, जिससे इस शहर को अंतर्देशीय जल परिवहन और बांग्लादेश एवं भूटान की सीमा पार व्यापार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया जा सके।

डिब्रूगढ़ में पुनर्निर्मित हेरिटेज भवन में स्थापत्य विशेषताओं एवं जीर्णोद्धार के साथ-साथ उन्नत परिचालन अवसंरचना भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यह भवन एनडब्ल्यू-2 पर आईडब्ल्यूएआई की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा तथा नदी पर्यटन को बढ़ावा देगा और क्षेत्र की स्थापत्य विरासत को संरक्षित करेगा।

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत, पूर्वोत्तर की 20 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है, जिनमें ब्रह्मपुत्र (उत्तर-पश्चिम-2), बराक (उत्तर-पश्चिम-16), धनसिरी (उत्तर-पश्चिम-31) और कोपिली (उत्तर-पश्चिम-57) नदियों का सक्रिय रूप से विकसित किया जा रहा है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव, विजय कुमार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष, सुनील पालीवाल ने परिवहन के एक व्यावहारिक वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों को मजबूत करने तथा व्यापार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक नदी-आधारित संपर्क को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री ने आशा व्यक्त किया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर विकसित की जा रही अवसंरटना पूर्वोत्तर को विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की कोशिश को बढ़ावा देगी।

इन परियोजनाओं के माध्यम से रसद लागत में कमी आने, सीमा पार व्यापार मजबूत होने, यात्री एवं माल ढुलाई में सुधार होने तथा पूर्वोत्तर में एक भरोसेमंद एवं सतत आर्थिक गलियारे के रूप में ब्रह्मपुत्र की भूमिका को सुदृढ़ बनाने की उम्मीद है।

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प्रधानमंत्री ने एंटिओक और समस्‍त पूर्व के पैट्रिआर्क परम पूज्य मोरन मोर इग्नाटियस अफ्रेम II से मुलाकात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज कहा कि उन्हें एंटिओक और समस्त पूर्व के पैट्रिआर्क एवं सार्वभौमिक सिरियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च के सर्वोच्च प्रमुख परम पूज्य मोरन मोर इग्नाटियस अफ्रेम II से मिलकर सम्मानित महसूस हुआ।

प्रधानमंत्री और परम पावन ने बैठक के दौरान विविध मुद्दों पर गहन चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर साझा किया;

मैंने एंटिओक और समस्त पूर्व के पैट्रिआर्क एवं सार्वभौमिक सिरियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च के सर्वोच्च प्रमुख परम पूज्य मोरन मोर इग्नाटियस अफ्रेम II से मिलकर सम्‍मानित महसूस किया।

हमने विविध मुद्दों पर गहन चर्चा की।

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चेन्नई में आईएनएस अंजदीप का जलावतरण किया गया

नई दिल्ली – चेन्नई बंदरगाह पर 27 फरवरी 2026 को आयोजित एक आधिकारिक समारोह में एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) परियोजना के चौथे युद्धपोत, आईएनएस अंजदीप को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस जलावतरण समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने की।  इस युद्धपोत का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और तटीय निगरानी को बढ़ाना है।

इस कार्यक्रम की मेजबानी पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने की। समारोह में वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, पूर्ववर्ती ‘अंजदीप’ के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता और लार्सन एंड टुब्रो शिपबिल्डिंग, कट्टुपल्ली के प्रतिनिधि तथा अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अपने संबोधन में नौसेना प्रमुख ने युद्धपौत के शामिल होने के सामरिक महत्व पर प्रकाश डाला, साथ ही पोत निर्माताओं की प्रतिबद्धता और सहयोग तथा जहाज के चालक दल के समर्पण की सराहना की, जिसकी बदौलत पोत का समय पर जलावतरण संभव हो सका।

आईएनएस अंजदीप नाम कारवार के तट पर स्थित ऐतिहासिक द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह उथले तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए युद्धपोतों की श्रृंखला में नवीनतम पोत है। इस पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो युद्धपोत डिजाइन और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इसमें प्रमुख स्वदेशी प्रणालियों का एकीकरण शामिल है।

‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में जाना जाने वाला यह 77 मीटर लंबा और 1400 टन वजनी यह पोत तटीय वातावरण में त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए तैयार किया गया है। जहाज एक आधुनिक एएसडब्ल्यू सुइट और एक एकीकृत उन्नत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है, जो पानी के भीतर के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने, ट्रैक करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है।

अपने पूर्ववर्ती जहाजों- आईएनएस अरनाला और एंड्रोथ के बाद आईएनएस अंजदीप का कमीशनिंग, भारतीय नौसेना के सैन्य बल स्तर में वृद्धि और क्षमता विस्तार की योजनाबद्ध यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह भारत के समुद्री व्यापार मार्गों और तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस पोत को राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी नौसैनिक क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के परिचालन और प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया है।

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राष्ट्रपति ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (27 फरवरी, 2026) राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी। इससे पहले, उन्होंने क्रमशः 2023 और 2025 में सुखोई 30 एमकेआई और राफेल में उड़ानें भरी थीं।

यह मिशन दो विमानों के एलसीएच फॉर्मेशन के रूप में क्रियान्वित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ पहले विमान में उड़ान भरी, जबकि वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए महेंद्र दूसरे विमान में नंबर 2 के रूप में सवार थे। लगभग 25 मिनट के इस मिशन के दौरान, उन्होंने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक टैंक लक्ष्य पर हमला किया।

बाद में आगंतुक पुस्तिका में, राष्ट्रपति ने एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा, “भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।”

शाम को राष्ट्रपति जैसलमेर में भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का अवलोकन करेंगी।

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रोशनी खलखो रांची की मेयर बनी, बन्ना गुप्ता की पत्नी ने मानगो में चुनाव जीता

रांची,28.02.2026 – : झारखंड में नगर निकाय चुनाव के परिणाम आ गए है। रांची से बीजेपी समर्थित रोशनी खलको ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलको को 14,363 वोट से चुनाव हरा दिया। दिलचस्प बात ये रही कि इस जीत के अंतर से ज्यादा वोट जेएमएम समर्थक सुजित विजय आपंन कुजूर को 19,305 वोट मिले।

आदित्यपुर से संजय सरदार और मेदिनीनगर से अरुणा शंकर ने चुनाव जीत गई है। दोनों बीजेपी समर्थित उम्मीदवार है। रांची  में वार्ड 18 से  जेएमएम के राज्यसभा सांसद महुआ माजी के बेटे सोमवित माजी चुनाव हार गये, इस वार्ड में आशा देवी लगातार तीसरी बार विजय घोषित हुई।

जमशेदपुर के मानगो नगर निगम में पहली बार चुनाव हुए और कांग्रेस समर्थित सुधा गुप्ता (पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी) ने इतिहास रचा। उन्होंने भाजपा समर्थित संध्या सिंह को 18,601 वोटों से हराया।

चक्रधरपुर नगर परिषद को अध्यक्ष के रूप में एक युवा और सुलझा हुआ नेतृत्व मिल गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समर्थित उम्मीदवार सन्नी उरांव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी विजय सिंह गागराई को 1061 मतों के अंतर से पराजित कर जीत हासिल की। चुनाव परिणाम के अनुसार सन्नी उरांव को कुल 11,331 वोट हासिल हुए, जबकि दूसरे स्थान पर रहे विजय सिंह गागराई को 10,270 वोटों से संतोष करना पड़ा। तीसरे स्थान पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अनुप्रिया सोय को 2,036 वोट मिले। वहीं चौथे स्थान पर 327 वोट के साथ निर्दलीय प्रत्याशी विजय सिंह सुम्बरूई रहे, जबकि पांचवें स्थान पर उत्तम कुमार बालमुचु को 303 मत प्राप्त हुए। सन्नी उरांव, चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव के सुपुत्र हैं। वहीं उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी विजय सिंह गागराई, खरसावां के विधायक दशरथ गागराई के छोटे भाई हैं। ऐसे में यह चुनाव दो राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा था।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) समर्थित प्रमिला मेहरा ने गिरिडीह नगर निगम में शानदार जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा समर्थित डॉ. शैलेंद्र कुमार चौधरी को 14,599 वोटों के बड़े अंतर से हराया।प्रमिला को 38,091 वोट मिले, जबकि चौधरी को 23,493 वोटों पर संतोष करना पड़ा। निर्दलीय अर्जुन बैठा तीसरे स्थान पर रहे।जानकारों का कहना है कि स्थानीय विधायक सुदिव्य सोनू की रणनीति ने यहां JMM को मजबूती दी। प्रमिला पूर्व में जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों की घोषणा कर दी गई है। भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशी संजय सरदार ने बड़ी जीत दर्ज की है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित प्रत्याशी भुगलू सोरेन को 7,795 मतों के अंतर से पराजित किया है। अंतिम मतगणना परिणामों के अनुसार संजय सरदार को कुल 24,615 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इस आंकड़े तक पहुंचने में असफल रहे।हजारीबाग नगर निगम में भाजपा बागी अरविंद राणा (पत्रकार) ने कांग्रेस समर्थित सरफराज अहमद को 4,657 वोटों से हराकर मेयर का ताज हासिल किया।यह सबसे पहले घोषित रिजल्ट था। राणा की जीत से भाजपा खेमे में जश्न है, हालांकि वे आधिकारिक रूप से बागी थे।

मेदिनीनगर में बीजेपी समर्थित अरुणा शंकर ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार नम्रता त्रिपाठी को शिकस्त दी। इस सीट पर गठबंधन दलों के वोटों के बिखराव का फायदा बीजेपी को हुआ। नम्रता त्रिपाठी पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी की बेटी है।धनबाद की सीट पर बीजेपी के बागी उम्मीदवार और पूर्व विधायक संजीव सिंह से आगे चल रहे है, बीजेपी का उम्मीदवार तीसरे नंबर पर है। देवघर सीट पर जेएमएम समर्थित उम्मीदवार रवि राउत को बीजेपी के वोट बिखराव का फायदा हुआ और उन्होंने बीजेपी समर्थित रीता चौरसिया को चुनाव में हराया। चतरा नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में अताउर रहमान उर्फ बाबू भाई ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अमन यादव को 1492 वोटों से पराजित कर जीत दर्ज की। चास नगर निगम में मेयर के पद पर भोलू पासवान ने जीत दर्ज की है।

रामगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार कुसुमलता कुमारी (पति हितलाल मुंडा) ने 6492 मतों से जीता. कुसुमलता कुमारी को 17605 मत और दूसरे स्थान पर रहने वाली भाजपा समर्थित उम्मीदवार प्रिया कुमारी को 11113 मत मिले।कुसुमलता 6492 मतों से जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद के लिए आजसू समर्थित रेणु देवी 9401 को मत मिले।जेएलकेएम समर्थित उम्मीदवार अनिता कुमारी को 8232 मत मिले।

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झारखंड विधानसभा में होली मिलन समारोह का हुआ आयोजन

विधानसभा अध्यक्ष श्री रबीन्द्र नाथ महतो एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के साथ तमाम विधायकों ने खेली फूलों की होली

रंगों के त्योहार की दी बधाई और शुभकामनाएं

सभी की जिंदगी में खुशियों का रंग हमेशा रहे बरकरार – श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड

झारखण्ड विधानसभा,रांची,27.02.2026 – झारखंड विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में आज की शाम कुछ विशेष थी। अवसर था- होली मिलन समारोह का। विधानसभा अध्यक्ष श्री रबीन्द्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री श्री हेमन्त के साथ मंत्री गणों तथा विधायक गणों ने फूलों की होली खेली और एक -दूसरे को रंगों के त्योहार की बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने राज्य वासियों को होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपकी जिंदगी में खुशियों का रंग हमेशा बरकरार रहे। उन्होंने कहा कि होली पारस्परिक प्रेम, आपसी भाईचारा और सौहार्द -सदभाव का पर्व है। इस त्योहार को हम सभी उमंग और उत्साह के साथ मनाएं।

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महिला उद्यमियों के हुनर का मंच बना रांची प्रेस क्लब का वसंत मेला, मंत्री शिल्पी ने किया उद्घाटन

रांची, 27.02.2026 – रांची प्रेस क्लब में महिला पत्रकारों की संस्था ‘वीमेन्स वेलफेयर कमेटी’ की ओर से आयोजित दो दिवसीय वसंत मेला शुक्रवार को शुरू हुआ। मेले का औपचारिक उद्घाटन राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने किया। उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि महिला शक्ति और उद्यमिता का जीवंत उदाहरण है।

मंत्री ने कहा कि महिला पत्रकारों की पहल पर आयोजित इस वसंत मेले में महिला उद्यमियों ने अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रही है और ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपने हुनर को मंच मिलता है।

मेले में लाइफ स्टाइल, परिधान, फूड, खिलौने और जेवरात के 40 से ज्यादा आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। आदिवासी परिधान और हस्तशिल्प से लेकर खादी, गुजराती, कच्छी और बांग्ला परिधानों तक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। रंग, रौनक और रचनात्मकता से सजे इस मेले में स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू और रंग-बिरंगे स्टॉल आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं।

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने मेले के आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच महिला पत्रकारों और उद्यमियों के बीच सहयोग और सशक्तिकरण का सेतु बनेगा। वरिष्ठ पत्रकार शर्मिष्ठा मजुमदार ने मेले की परिकल्पना और इसके उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि वसंत मेला महिलाओं की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को समर्पित है।

इस अवसर पर प्रेस क्लब की कार्यकारिणी सदस्य प्रतिमा कुमारी, नेहा वारसी और नीलू मिश्रा ने मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। स्वागत भाषण क्लब के कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन करबी दत्ता ने किया।

इस मौके पर कार्यकारिणी सदस्य चंदन वर्मा, अशोक गोप, सौरभ शुक्ला सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन मृदुला संतोष ने किया।

मेले के दौरान शाम में आदिवासी थीम पर फैशन शो का भी आयोजन हुआ, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। पहले दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और महिला उद्यमियों के प्रयासों की सराहना की।

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खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा: केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान

नई दिल्ली – राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टम–कुंडली) में उभरते और बेहतर स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के लिए उन्नत अगली पीढ़ी की परिकल्पना पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (अन्वेष–2026) का आज उद्घाटन किया गया। तीन दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 25 से अधिक देशों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि, निर्यातक, उद्यमी और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अरब 40 करोड़ लोगों के देश के लिए प्रौद्योगिकी आधारित विकास अत्यावश्यक है। गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने के लिए नवाचारों, अनुसंधान और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों तक पहुंचाना होगा।

श्री पासवान ने उपभोक्ता जीवनशैली में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए रेडी-टू-ईट (आरटीई) और रेडी-टू-कुक उत्पादों की बढ़ती मांग का जिक्र किया, जो खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विस्तार के लिए अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि भारत में उत्पादन की पर्याप्त मात्रा होने के बावजूद, मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने याद दिलाया कि 11 वर्ष पूर्व, मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और भारत को वैश्विक खाद्य भंडार के रूप में स्थापित करने के लिए, भारत में निर्मित या उत्पादित खाद्य उत्पादों के व्यापार, जिसमें ई-कॉमर्स भी शामिल है, में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी गई थी।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि भारतीय खाद्य उत्पाद विश्व भर के हर भोजनालय में मौजूद हों। यदि भारतीय मानकों को वैश्विक मान्यता प्राप्त करनी है तो गुणवत्ता और नियामक मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत ने किसानों के हितों की रक्षा करते हुए 23 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बारे में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का आह्वान किया।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने इस अवसर पर कहा कि ‘अन्वेष’ का अर्थ है “अन्वेषण और अधिग्रहण”। उन्होंने निफ्टम को सतत विकास और स्वस्थ खाद्य प्रणालियों का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) 14 योजनाओं में से एक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली योजना है।

श्री जोशी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के लिए पीएलआई योजना के तहत कुल 10,900 करोड़ रुपये के आवंटन में से अब तक 2,625.04 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जो कुल आवंटन का लगभग 24 प्रतिशत है। योजना के तहत 2.5 लाख रोजगार सृजन के लक्ष्य के मुकाबले 3.29 लाख रोजगार पहले ही सृजित किए जा चुके हैं, जो लक्ष्य का 131 प्रतिशत है और योजना की महत्वपूर्ण सफलता को दर्शाता है।

विश्व खाद्य पुरस्कार विजेता शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड ने खाद्य प्रसंस्करण में कार्रवाई-उन्मुख और समाधान-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के पूर्व अध्यक्ष टीजी सीताराम ने कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है, जो एक विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप है।

निफ्टम-कुंडली के निदेशक हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस बात का उल्लेख किया कि अन्वेष-2026 ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और साझा शिक्षण के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने के लिए भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग आवश्यक है।

इससे पहले, श्री पासवान ने अन्वेष-2026 प्रदर्शनी का दौरा किया और इस आयोजन में प्रदर्शित नई प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और उत्पादों की समीक्षा की।

इस सम्मेलन में 1,000 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। अगले तीन दिनों में पूर्ण सत्र, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, प्रदर्शनियाँ और उद्योग जगत के साथ संवाद आयोजित किए जाएँगे। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, डिजिटल अनुपालन प्रणाली, सतत आपूर्ति श्रृंखला, निर्यात-उन्मुख नवाचार, उत्पाद विविधीकरण, खाद्य सुरक्षा, पता लगाने की क्षमता और भविष्य के लिए तैयार कृषि-खाद्य उद्यमशीलता क्षेत्र में उभरते विकास पर विचार-विमर्श करना है।

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भारत सरकार और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान मिलने का उत्सव मनाया

नई दिल्ली – लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म ‘बूंग’ ने बीएफटीए फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता। भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के साथ मिलकर फिल्मनिर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और ‘बूंग’ की पूरी टीम को बीएएफटीए फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीतने पर बधाई देता है। यह बड़ी कामयाबी भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल है और भारत की विविधतापूर्ण और सार्थक कहानी कहने की परंपराओं के लिए दुनिया भर में बढ़ती सराहना को दिखाता है।

 

फिल्म के सफर को भारत के फिल्म विकास और महोत्सव इकोसिस्टम ने समर्थन दिया है। बूंग को 2023 में वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में बनाया गया था। ये पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक उद्योग से जुड़ाव को मुमकिन बनाने के लिए की गई हैं। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया, जिससे इसकी समालोचक प्रशंसा और पक्की हो गई।

भारत सरकार और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, फिल्म बाजार और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हैं जो फिल्म निर्माताओं को मजबूत बनाते हैं, रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं और भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं तक पहुंचने के रास्ते बनाते हैं।

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“राज्यों के नवाचार से भारत की प्रगति बढ़ती है”: डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा में भारत के पहले राज्य नवाचार मिशन (एसआईएम) का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 26 फरवरी, 2026 को अगरतला में भारत के पहले राज्य नवाचार मिशन (एसआईएम) का शुभारंभ करते हुए कहा कि नवाचार को प्रयोगशालाओं और महानगरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जिलों, गांवों और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचना चाहिए, जिनकी आकांक्षाएं एक नए भारत के विचार को परिभाषित करती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्वोत्तर को भारत के विकास का “नया इंजन” बताते हुए कहा कि त्रिपुरा की यह पहल प्रौद्योगिकी के विकेंद्रीकरण और अवसरों के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

त्रिपुरा में एसआईएम के शुभारंभ के अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा, नीति आयोग के अध्यक्ष श्री सुमन बेरी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, योजना एवं समन्वय मंत्री श्री प्राणजीत सिंह रॉय, मुख्य सचिव श्री जितेंद्र कुमार सिन्हा, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री राजीव कुमार सेन, नेजीडी के प्रबंध निदेशक श्री किरण गिट्टे सहित वरिष्ठ अधिकारी, स्टार्टअप संस्थापक, नवप्रवर्तक, छात्र और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा में एसआईएम के शुभारंभ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित अटल नवाचार मिशन (एआईएम) की स्वाभाविक प्रगति बताया। उन्होंने याद दिलाया कि नवाचार मिशन की अवधारणा कभी सरकारी प्रणालियों में अपरिचित थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एआईएम एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में परिवर्तित हो गया है। लगभग 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) की स्थापना से लेकर हाल ही में 50,000 और लैब्स तक विस्तार करने के निर्णय तक, नवाचार प्रणाली अब जिलों और छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है, जो देश भर के स्कूली छात्रों को प्रेरित कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एआईएम और एसआईएम का विस्तार करने तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य नवाचार मिशनों को बढ़ावा देने का निर्णय सहयोगात्मक एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना को दर्शाता है। मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने इसे “दोहरे इंजन” दृष्टिकोण का उदाहरण बताया, जहां राष्ट्रीय दृष्टिकोण और राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एक साथ मिलकर काम करते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले दशक में पूर्वोत्तर के परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 2014 से इसी बात पर जोर दिया है कि संतुलित राष्ट्रीय विकास के लिए सभी क्षेत्रों में समान प्रगति आवश्यक है। उन्होंने बेहतर संपर्क, रेल और हवाई अवसंरचना के विस्तार, बढ़ते पर्यटन और अधिक राष्ट्रीय एकता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अलगाव से निकलकर भारत के विकास में मुख्यधारा की भागीदारी की ओर अग्रसर हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा में उद्यमिता के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में आज 150 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, और पिछले पांच वर्षों में स्टार्टअप मान्यता में औसतन लगभग 66 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं द्वारा संचालित है, जो पूर्वोत्तर में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले नवाचार में त्रिपुरा को अग्रणी बनाता है। उन्होंने कहा कि एसआईएम के शुभारंभ से नवोन्मेषी विचारों के व्यावसायीकरण को और बढ़ावा मिलेगा और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने त्रिपुरा के मजबूत एमएसएमई आधार की ओर भी इशारा किया, जिसके अनुसार 2026 की शुरुआत तक उद्यम पोर्टल पर 3.13 लाख से अधिक पंजीकृत एमएसएमई थे। इनमें 1.18 लाख से अधिक औपचारिक उद्यम पंजीकरण और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से समर्थित लगभग दो लाख सूक्ष्म उद्यम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एसआईएम के माध्यम से एमएसएमई के ​​विकास को नई गति मिलेगी, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार में योगदान मिलेगा।

उन्होंने देश के व्यापक स्टार्टअप विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में 2014 में कुछ सौ स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर दो लाख से अधिक हो गए हैं। इन स्टार्टअप्स से 21 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं, जिनमें से लगभग आधे द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों से हैं। इनमें से काफी संख्या में महिला नेतृत्व वाले उद्यम हैं, जो पूरे देश में बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने त्रिपुरा की अनूठी शक्तियों, विशेष रूप से बांस और रबर संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे उच्च मूल्य वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है, जिसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुप्रयोग, एयरोस्पेस के लिए जैव ईंधन और विशेष सामग्री शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए स्थानीय शक्तियों का लाभ उठाना ही विकास के अगले चरण को परिभाषित करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में गहन प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित उद्यमों को समर्थन देने वाली नीतिगत पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें गहन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स, सीएसआईआर समर्थित स्टार्टअप्स के लिए स्थिरता शर्तों में ढील और उद्यमों को विस्तार देने में सहायता के लिए एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड का शुभारंभ शामिल है। उन्होंने कहा कि ये उपाय जोखिम लेने, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उन्होंने नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का जिक्र करते हुए कहा कि शासन और उद्यम का भविष्य ऐसी तकनीक से तय होगा जो मानवता की सेवा करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एसआईएम त्रिपुरा, डिजिटल इंडिया और सुगम जीवन स्तर जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप, राज्य कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक को वंचितों तक पहुंचकर और वंचितों को सशक्त बनाकर समानता को बढ़ावा देना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसका लक्ष्य एक ऐसा प्रणाली तंत्र बनाना है जहां दूरदराज के गांव का छात्र, छोटे शहर का स्टार्टअप संस्थापक और राज्य विश्वविद्यालय का शोधकर्ता भारत के विकास में समान रूप से योगदान देने के लिए सशक्त महसूस करें। उन्होंने निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का आग्रह करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा सहित जिन क्षेत्रों को कभी बंद माना जाता था, वे अब व्यापक सहयोग के लिए खुल गए हैं।

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की यात्रा एक सशक्त संदेश देती है: जब दूरदृष्टि क्रियान्वयन से मिलती है और नीति में भागीदारी जुड़ती है, तो परिवर्तन अपरिहार्य हो जाता है। उन्होंने केंद्र और राज्य, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों तथा विज्ञान और समाज के बीच निरंतर सहयोग का आह्वान किया ताकि भारत का नवाचार दशक देश की निर्णायक शताब्दी बन सके।

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने टीईआरआई के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2026 और एमओईएफसीसी के हिम-कनेक्ट प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज टीईआरआई के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) और हिम-कनेक्ट के रजत जयंती संस्करण का शुभारंभ किया। हिम-कनेक्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा आयोजित एक समर्पित मंच है।  इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं को स्टार्ट-अप, उद्योग जगत के प्रमुखों, निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ना है।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव; टीईआरआई के अध्यक्ष श्री नितिन देसाई; टीईआरआई की महानिदेशक डॉ. विभा धवन; और टाटा ट्रस्ट के सीईओ श्री सिद्धार्थ शर्मा शामिल थे।

केंद्रीय मंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टीईआरआई) के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया और कहा कि डब्ल्यूएसडीएस पिछले 25 वर्षों में वैश्विक दक्षिण से एक अद्वितीय मंच के रूप में विकसित हुआ है।

यह सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदायों को एक साथ लाता है ताकि स्थिरता के विज्ञान को नीति, साझेदारी और व्यावहारिक कार्रवाई में बदला जा सके।

श्री यादव ने डब्ल्यूएसडीएस  2026 के अंतर्गत मंत्रालय की इस पहल पर कहा कि ‘हिम कनेक्ट’ को एक संरचित मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के अंतर्गत समर्थित अनुसंधान को व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में परिवर्तित करना है। उन्होंने हिम-कनेक्ट में भाग लेने वाले हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शकों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी उपस्थिति पर्वतीय इकोसिस्टम से उभरने वाले नवाचार की शक्ति को दर्शाती है।

हिम कनेक्ट शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, निवेशकों, विकास एजेंसियों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाकर विज्ञान और समाज के बीच एक सेतु का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि यह पहल अनुसंधान और वास्तविक दुनिया पर इसके प्रभाव के बीच संबंध को मजबूत करती है और पर्यावरण संबंधी कार्यों के केंद्र में समुदायों को रखने के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

श्री यादव ने वैश्विक जलवायु चुनौती को ध्यान में रखते हुए कहा कि पेरिस समझौते के अंतर्गत पहली वैश्विक समीक्षा से यह स्पष्ट हो गया है कि वैश्विक स्तर पर हम वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए आवश्यक दिशा में अग्रसर नहीं हैं। उत्सर्जन में कमी अपर्याप्त है। अनुकूलन के लिए वित्तपोषण भी अपर्याप्त है। सतत विकास लक्ष्यों का कार्यान्वयन असमान है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि परिवर्तन को केवल नीतिगत बदलावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऊर्जा प्रणालियों, आर्थिक मॉडलों, उपभोग के तरीकों और वैश्विक शासन ढाँचों में संरचनात्मक बदलाव लाना चाहिए।

शिखर सम्मेलन के विषय – परिवर्तन: सतत विकास के लिए दृष्टि, आवाज और मूल्य – का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह मानवता और ग्रह के लिए इस निर्णायक क्षण में एक रणनीतिक आवश्यकता को दर्शाता है।

श्री यादव ने रूपांतरण का अर्थ समझाते हुए कहा कि अंग्रेजी में इसका अर्थ संरचनात्मक परिवर्तन होता है, जबकि भारतीय चिंतन में  “परिवर्तन” चेतना के गहन विकास को दर्शाता है। भारत के लिए, स्थिरता एक सभ्यतागत नैतिकता है। उन्होंने कहा कि रूपांतरण का अर्थ विकास को त्यागना नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक सीमाओं के भीतर, सामाजिक न्याय और अंतर-पीढ़ीगत समानता के साथ इसे पुनर्परिभाषित करना है।

केंद्रीय मंत्री ने भारत के विज़न की रूपरेखा प्रस्तुत की : 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना, 2030 तक जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत तक कम करना, 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाना और जलवायु-लचीले अवसंसचना  का निर्माण करना।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर परिवर्तन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को तीन गुना, ऊर्जा दक्षता को दोगुना, अनुकूलन वित्त को बढ़ाना और जलवायु वित्त को सुगम बनाने के लिए बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जलवायु महत्वाकांक्षा और जलवायु वित्त को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने विषय के दूसरे स्तंभ ‘आवाज़ें’ पर बोलते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण विकास यात्रा जारी रखते हुए जलवायु प्रभावों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।

भारत ने साझा लेकिन अलग उत्तरदायित्वों, जलवायु न्याय, न्यायसंगत कार्बन क्षेत्र और समावेशी कार्बन बाज़ारों के सिद्धांतों को निरंतर कायम रखा है।

उन्होंने कहा कि छोटे द्वीप राज्यों, सबसे कम विकसित देशों, स्वदेशी समुदायों और युवाओं की आवाज़ें वैश्विक ढाँचों को आकार देना

चाहिए।

श्री यादव ने ‘मूल्यों’ पर बोलते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी परिवर्तन को गति दे सकती है और वित्त इसे संभव बना सकता है, लेकिन मूल्यों से ही इसकी निष्पक्षता निर्धारित होती है।

भारत की जी20 अध्यक्षता के विषय ‘वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सतत विकास के ढांचे निष्पक्ष, पारदर्शी होने चाहिए और विभिन्न विकास वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने चाहिए।

श्री यादव ने कहा कि एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध राष्ट्र के रूप में , भारत ऊर्जा परिवर्तन, चक्रीय अर्थव्यवस्था संक्रमण, प्रकृति-आधारित समाधान और डिजिटल पर्यावरण शासन – इन चार स्तंभों में सुधार ला रहा है ।

उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में प्रतिज्ञाओं से प्रदर्शन की ओर, लक्ष्यों से लक्ष्यों की ओर और महत्वाकांक्षा से जवाबदेही की ओर बढ़ना

होगा ।

उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएसडीएस की रजत जयंती इस दिशा में गति का प्रतीक होनी चाहिए और उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि भारत एक सतत और लचीले भविष्य के लिए सभी देशों के साथ साझेदारी करने के लिए तत्पर है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ‘हिमकनेक्ट’ प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा प्रदर्शित विभिन्न वस्तुओं की समीक्षा की।

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(एमओआरटीएच) ने “पीएम राहत” – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के नकदरहित उपचार पर हितधारकों को संवेदनशील बनाया

नई दिल्ली – सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ( एमओआरटीएच )  ने माननीय केंद्रीय मंत्री श्री नितिन जयराम गडकारी की अध्यक्षता में तथा माननीय राज्य मंत्रियों श्री अजय टमटा एवं श्री हर्ष मल्होत्रा की उपस्थिति में हाइब्रिड मोड में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 13.02.2026 को लॉन्च की गई पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का अस्पताल एवं सुनिश्चित उपचार) योजना के राष्ट्रव्यापी सहज कार्यान्वयन के लिए उठाए जा रहे कदमों की स्थिति का आकलन किया गया।

बैठक का उद्देश्य संबंधित हितधारकों के बीच समग्र तैयारी एवं समन्वय की समीक्षा करना था, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकरण, प्लेटफॉर्म ऑनबोर्डिंग एवं प्रणाली की तैयारी, नामित अस्पताल नेटवर्क का विस्तार एवं तैयारी, तथा प्रभावी एवं समयबद्ध नकदरहित उपचार सुनिश्चित करने के लिए शासन एवं शिकायत निवारण ढांचा शामिल था।

भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में काफी संख्या में मौतें दर्ज की जाती हैं, जिनमें से कई समयबद्ध चिकित्सा हस्तक्षेप से रोकी जा सकती हैं। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यदि पीड़ितों को पहले घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया जाए तो लगभग 50% सड़क दुर्घटना मौतों को रोका जा सकता है।आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण सुनिश्चित करता है कि दुर्घटना पीड़ित स्वर्णिम घंटे के भीतर निकट के अस्पताल पहुंचें।

सड़क दुर्घटना पीड़ित, राहवीर (अच्छे समारिटन), या दुर्घटना स्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 डायल करके निकटतम नामित अस्पताल का विवरण प्राप्त कर सकता है तथा एम्बुलेंस सहायता का अनुरोध कर सकता है, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रियाकर्ताओं, पुलिस अधिकारियों एवं अस्पतालों के बीच त्वरित समन्वय संभव होता है।

इस योजना के तहत, किसी भी श्रेणी की सड़क पर होने वाली हर पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों के लिए प्रति पीड़ित अधिकतम ₹1.5 लाख तक नकदरहित उपचार का हकदार होगा। गैर-प्राणघातक मामलों में 24 घंटे तक तथा प्राणघातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा, जो एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगा।

पीएम राहत को एक मजबूत, प्रौद्योगिकी संचालित ढांचे के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (eDAR) प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) के साथ एकीकृत किया गया है। यह एकीकरण दुर्घटना रिपोर्टिंग से अस्पताल भर्ती, पुलिस प्रमाणीकरण, उपचार प्रशासन, दावा प्रसंस्करण एवं अंतिम भुगतान तक सहज डिजिटल लिंकेज प्रदान करता है। पुलिस को निर्धारित समयसीमा के भीतर पुष्टि करनी होगी – गैर-प्राणघातक मामलों में 24 घंटे तथा प्राणघातक मामलों में 48 घंटे – जो जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए आपातकालीन देखभाल को बाधित होने से रोकती है।

अस्पतालों को मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से प्रतिपूर्ति की जाएगी। अपराधी वाहन बीमित होने की स्थिति में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से भुगतान किया जाएगा। बीमित न होने तथा हिट एंड रन मामलों में भारत सरकार के बजटीय आवंटन से भुगतान किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा अनुमोदित दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिससे अस्पतालों को वित्तीय निश्चितता मिलेगी तथा निर्बाध उपचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों की शिकायतों का निपटारा जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / उपायुक्त की अध्यक्षता वाले जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जो जिला स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।

 

बैठक में विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के माननीय परिवहन एवं स्वास्थ्य मंत्री, परिवहन एवं स्वास्थ्य सचिव, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के डीजीपी, साथ ही MoRTH, MHA, MoHFW, DFS, NHA, NIC, PFMS, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी एवं अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय एवं रचनात्मक भागीदारी की।

राज्यों ने TMS 2.0 पर ऑनबोर्डिंग, जिला कलेक्टरों द्वारा PFMS क्रेडेंशियल निर्माण एवं योजना कार्यान्वयन तैयारी के अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों सहित कार्यान्वयन तैयारी पर प्रोत्साहनजनक प्रगति साझा की।

विचार-विमर्श के दौरान प्रदर्शित सामूहिक प्रतिबद्धता “पूरी सरकार के दृष्टिकोण” को प्रतिबिंबित करती है तथा देश भर में पीएम राहत योजना को प्रभावी रूप से परिचालन करने की तैयारी दर्शाती है, जिससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध नकदरहित उपचार समर्थन सुनिश्चित होगा।

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“टीडीबी ‘ऑटोस्कोप’ के विकास के लिए आयुक्रियम इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड का समर्थन करता है – एक एआई-संचालित होल स्लाइड इमेजिंग डायग्नोस्टिक सिस्टम”

नई दिल्ली – स्वास्थ्य सेवा में डीप-टेक इनोवेशन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने “ऑटोस्कोप: ए फुलली ऑटोमेटेड होल स्लाइड इमेजिंग एंड एआई-ड्रिवेन डायग्नोस्टिक सिस्टम” नामक परियोजना के लिए मैसर्स आयुक्रियम इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है।

आयुक्रियम इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में जैव रासायनिक इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग में आणविक इमेजिंग और डायग्नोस्टिक्स लैब से एक डीप-टेक स्पिन-ऑफ है।

कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ एकीकृत अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी सिस्टम के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल निदान को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है, ताकि संक्रामक रोगों के तेज़, सटीक और तैनाती योग्य निदान को सक्षम किया जा सके, विशेष रूप से संसाधन-सीमित परिस्थिति में।

ऑटोस्कोप प्लेटफॉर्म को एआई संचालित नैदानिक क्षमताओं के साथ संयुक्त पूरी तरह से स्वचालित संपूर्ण स्लाइड इमेजिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य उच्च-थ्रूपुट, मानकीकृत और स्केलेबल डायग्नोस्टिक वर्कफ़्लो की पेशकश करके पैथोलॉजी अवसंरचना  में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करना है। स्वदेशी अनुसंधान और विकास और एआई-सक्षम छवि विश्लेषण का लाभ उठाकर, यह तकनीक आयातित हाई-एंड इमेजिंग सिस्टम पर निर्भरता को कम करते हुए नैदानिक सटीकता को बढ़ाने का प्रयास करती है।

टीडीबी से स्वीकृत सहायता एक समर्पित विनिर्माण सुविधा की स्थापना, कई उत्पाद बैचों के उत्पादन और व्यापक क्षेत्र प्रदर्शन मूल्यांकन में सहायता करेगी। इस परियोजना से स्वदेशी रूप से विकसित डीप टेक प्लेटफॉर्म के व्यावसायीकरण की सुविधा प्रदान करने, देश के डायग्नोस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करने और किफायती और सुलभ स्वास्थ्य देखभाल समाधानों में योगदान करने की उम्मीद है।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा की “देश के स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने वाले उन्नत डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म का स्वदेश में विकास महत्वपूर्ण है।

इसके माध्यम से टीडीबी का उद्देश्य प्रयोगशाला नवाचार को बाजार के लिए तैयार समाधानों में बदलने में तेजी लाना, आयात निर्भरता को कम करना और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना है।

आयुक्रियम इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने समर्थन के लिए टीडीबी का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता ऑटोस्कोप प्लेटफॉर्म की विनिर्माण तैयारी और फील्ड डिप्लॉयमेंट में काफी तेजी लाएगी। इससे देश भर में विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-संचालित निदान तक व्यापक पहुंच संभव हो सकेगी।

यह परियोजना इन हाउस अनुसंधान और विकास तथा संस्थागत संबंधों के माध्यम से विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए टीडीबी के जनादेश को मजबूत करती है और स्वास्थ्य सेवा तथा चिकित्सा उपकरणों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

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“शिल्प समागम केवल मेला नहीं, आत्मनिर्भरता और सम्मान का सेतु है” – डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘शिल्प समागम–2026’ का किया उद्घाटन

नई दिल्ली – “यह केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण का उत्सव है।” इन शब्दों के साथ केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज अहमदाबाद के ‘वल्लभ सदन’, साबरमती रिवरफ्रंट में आयोजित ‘शिल्प समागम मेला–2026’ का उद्घाटन किया।

उन्होंने सभी उपस्थितजनों को आगामी होली पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह मेला देश के लक्षित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मंत्रालय की सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा लगभग 100 शिल्प मेलों का आयोजन किया जा चुका है अथवा उनमें सहभागिता की गई है। वर्ष 2025–26 में पाँच (05) मेलों का आयोजन किया गया है तथा वर्ष 2026–27 में इससे भी अधिक मेलों के आयोजन की योजना है।

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद, जो स्वतंत्रता आंदोलन, महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम तथा सरदार वल्लभभाई पटेल की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है, ऐसे समावेशी आयोजन के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थल है।

मंत्रालय अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों, दिव्यांगजनों, विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT/NT/SNT), वरिष्ठ नागरिकों तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु विभिन्न योजनाएँ संचालित कर रहा है। मंत्री ने कहा कि शिल्प समागम जैसे मेले इन वर्गों के दस्तकारों एवं लाभार्थियों को प्रत्यक्ष विपणन मंच (मार्केटिंग प्लेटफॉर्म) उपलब्ध कराते हैं।

26 फरवरी से 4 मार्च तक आयोजित इस मेले में 14 राज्यों से आए शिल्पकारों को 75 स्टॉल आवंटित किए गए हैं, जिनमें लखनवी चिकनकारी, बनारसी साड़ी, चंदेरी एवं माहेश्वरी वस्त्र, भागलपुरी तसर सिल्क, जयपुरी एवं कोल्हापुरी जूती, अकीक स्टोन वर्क, बांस उत्पाद, कोटा डोरिया तथा कालीन सहित विविध हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि जिन शिल्पकारों को प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर नहीं मिल पाता, उनके उत्पादों की बिक्री हेतु ‘भारत ट्यूलिप’ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जिसे विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इस मेले में ‘भारत ट्यूलिप शोरूम’ की भी शुरुआत की गई है, जिससे अधिकाधिक लाभार्थियों को बाजार से जोड़ा जा सके।

विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु संचालित ‘सीड (SEED) योजना’ के अंतर्गत 8 राज्यों में 5,581 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इन्हें रिवॉल्विंग फंड, एंट्री पॉइंट फंड तथा कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। स्वास्थ्य घटक के तहत लगभग 75,000 आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं।

मंत्री ने बताया कि 13 मार्च 2024 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘पीएम–सूरज पोर्टल’ राष्ट्र को समर्पित किया गया, जिसके माध्यम से मंत्रालय की रियायती ऋण योजनाएँ लक्षित वर्गों तक पारदर्शी एवं सुगम तरीके से पहुँच रही हैं। ‘पीएम–दक्ष पोर्टल’ कौशल प्रशिक्षण के लिए तथा छात्रवृत्ति हेतु ‘एसएफएमपी पोर्टल’ भी विकसित किए गए हैं। इन डिजिटल पहलों से पारदर्शिता और कार्यनिष्पादन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने आगे बताया कि मंत्रालय की ‘विश्वास’ योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को बैंकों से लिए गए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, ‘नमस्ते’ योजना के माध्यम से सेप्टिक टैंक एवं सीवर कार्य से जुड़े श्रमिकों को सुरक्षा और गरिमा प्रदान की जा रही है। मंत्रालय के शीर्ष निगमों द्वारा अब तक लगभग 60 लाख व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को ऋण सहायता तथा 6 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘शिल्प समागम मेला अहमदाबाद’ न केवल दस्तकारों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मान और नई संभावनाओं से भी जोड़ेगा। अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सफलता की कामना की तथा आश्वस्त किया कि मंत्रालय हाशिए पर खड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के अपने मिशन में निरंतर अग्रसर रहेगा।

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प्रधानमंत्री ने वीर सावरकर जी के जीवन से मिली शिक्षाओं का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीर सावरकर जी के जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं का उल्‍लेख करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया।

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री ने कहा कि मां भारती के परिश्रमी और समर्पित पुत्र वीर सावरकर जी के जीवन से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्पित रहने की शिक्षा मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका साहस, संयम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना देशवासियों का सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

मां भारती के कर्मठ सपूत वीर सावरकर जी के जीवन से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने संकल्प पर अडिग रहने की सीख मिलती है। उनका साहस, संयम और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव सदैव देशवासियों का पथ प्रदर्शित करता रहेगा।

धीराः शोकं तरिष्यन्ति लभन्ते सिद्धिमुत्तमाम्।

धीरैः सम्प्राप्यते लक्ष्मीर्धैर्यं सर्वत्र साधनम्॥

“साहसी और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति दुःख पर विजय प्राप्त करने और अपने जीवन में सफलता हासिल करने में सक्षम होते हैं। ऐसे व्यक्ति सम्‍पन्‍न और समृद्ध बनते हैं। इसलिए, धैर्य और साहस सदैव जीवन में सफलता प्राप्त करने के सर्वोत्तम साधन होते हैं।”

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झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के अंतर्गत मतगणना की प्रक्रिया आज 27 फरवरी 2026 को सुबह 8:00 बजे से शुरू हो गई है

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज मतगणना स्थल का दौरा किया और चल रही मतगणना प्रक्रिया का विस्तृत निरीक्षण किया

राज्य निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करने के निर्देश दिए गए

झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के अंतर्गत मतगणना की प्रक्रिया आज दिनांक 27 फरवरी 2026 को सुबह 8:00 बजे से शुरू हो गई है। मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है।

रांची,27.02.2026 – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज मतगणना स्थल का दौरा किया और चल रही मतगणना प्रक्रिया का विस्तृत निरीक्षण किया।

उन्होंने पूरी प्रक्रिया को देखते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए, जिसमें मतगणना की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करना।

राज्य निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करने के निर्देश दिए

किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत पर तत्काल कार्रवाई, एजेंटों, पर्यवेक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ उचित समन्वय बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और अन्य सुविधाओं का निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, PDITDA राँची, श्री संजय कुमार भगत, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पंचायत राज पदाधिकारी राँची, श्री राजेश कुमार साहू एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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रांची जिला प्रशासन ने नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 की मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कीं

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजुनाथ भजन्त्री ने देर रात मतगणना स्थलों एवं अन्य व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया

 27 फरवरी 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतगणना, पारदर्शिता और सुरक्षा पर जोर

मतगणना में भाग लेने वाले प्रत्याशियों के एजेंटों को मतगणना स्थल पर प्रवेश के लिए निर्वाची पदाधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र लाना अनिवार्य

मतगणना स्थल पर मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा

मतगणना से मतगणना के परिणाम तक पुरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने के निर्देश

मतगणना स्थल में भी पर्याप्त संख्या में पुलिस फ़ोर्स मजिस्ट्रेट के प्रतिनियुक्ति क़ि गई है। सभी तत्वों पर जिला प्रशासन क़ि पैनी निगाहें रखी गई है

रांची,26.02.2026 – झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के अंतर्गत मतगणना की प्रक्रिया कल दिनांक 27 फरवरी 2026 को सुबह 8:00 बजे से शुरू होगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजुनाथ भजंत्री ने देर रात मतगणना स्थल एवं अन्य व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया समयबद्ध, गंभीरता एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाए।

जिला प्रशासन द्वारा मतगणना के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिसमें सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, मीडिया कक्ष, कंट्रोल रूम एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। मतगणना हॉल की तैयारियां अंतिम रूप ले चुकी हैं।

मतगणना में भाग लेने वाले प्रत्याशियों के एजेंटों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश:

*मतगणना स्थल पर प्रवेश के लिए निर्वाचि पदाधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र अनिवार्य होगा।

* प्रत्याशियों के एजेंटों को अलग से फोटो युक्त पहचान पत्र साथ रखना भी अनिवार्य है।

*मतगणना स्थल पर मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजुनाथ भजन्त्री ने कहा कि मतगणना की प्रक्रिया निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कदम उठाए गए हैं। सभी एजेंटों, प्रत्याशियों एवं अन्य संबंधित पक्षों से अपील की गई है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

पुरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने के निर्देश

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त रांची, श्री मंजुनाथ भजन्त्री ने कहा क़ि मतगणना से मतगणना के परिणाम के बाद पुरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए गए ताकि असामाजिक तत्वों द्वारा कोई भी घटना को अंजाम नहीं दिया जा सकें। मतगणना स्थल में भी पर्याप्त संख्या में पुलिस फ़ोर्स मजिस्ट्रेट के प्रतिनियुक्ति क़ि गई है। सभी तत्वों पर जिला प्रशासन क़ि पैनी निगाहें रखी गई है। जिला प्रशासन 24×7 नजर बना कर रखी है।

जिला प्रशासन सभी नागरिकों से शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील करता है।

इस दौरान उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, PDITDA राँची, श्री संजय भगत, अनुमंडल पदाधिकारी बुंडू, श्री किस्टो बेसरा, पंचायत राज पदाधिकारी राँची, श्री राजेश कुमार साहू एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।

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माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिलापट्ट का अनावरण कर श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखी

माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार, माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, माननीय केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में मरीन ड्राइव (कदमा) जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण हेतु आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम हुआ संपन्न।

इस अवसर पर माननीय सांसद श्री बिद्युत बरन महतो, माननीय विधायक श्री सरयू राय, माननीय विधायक श्रीमती पूर्णिमा साहू सहित अन्य गणमान्य लोग हुए सम्मिलित।

माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिलापट्ट का अनावरण कर श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखी।

श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का संचालन श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट द्वारा की जाएगी।

कुछ संस्थाएं स्वयं के साथ-साथ मानव जीवन को तराशती हैं,

श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना सराहनीय कदम – श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री

कदमा, जमशेदपुर,26.02.2026 – माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार, माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, माननीय केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में मरीन ड्राइव (कदमा) जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण हेतु आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक पुरोहितों के द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न कराया गया।

माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिलापट्ट का अनावरण कर श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखी। इस अवसर पर माननीय सांसद श्री बिद्युत बरन महतो, माननीय विधायक श्री सरयू राय, माननीय विधायक श्रीमती पूर्णिमा साहू सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का संचालन श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट द्वारा की जाएगी। लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस केंद्र की रूप-रेखा ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर होगी।

इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जय जगन्नाथ का उद्घोष करते हुए अपने संबोधन में कहा कि निश्चित रूप से देश और दुनिया में ऐसी कई संस्थाएं हैं जहां अलग-अलग उद्देश्य और अलग-अलग विचारों के साथ कुछ चीजें स्थापित की जाती है। इन संस्थाओं के माध्यम से हम स्वयं के साथ साथ-साथ मानव जीवन को भी तराशते हैं। इसी कड़ी में आज सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समन्वय के भव्य जीवंत केंद्र के स्थापना की नींव रही जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना होना सराहनीय पहल है।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज हम सभी लोग यहां श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए आयोजित भूमि पूजन समारोह का साक्षी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट की सोच एवं उद्देश्य की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि ट्रस्ट के माध्यम से आने वाले समय में यहां एक अभूतपूर्व और भव्य केंद्र मूर्त रूप लेगी। मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर सीईओ एवं एमडी टाटा स्टील श्री टी०वी० नरेंद्रन, मैनेजिंग ट्रस्टी श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर श्री एस० के० बेहरा, ट्रस्टी श्री मनोरंजन दास एवं श्री श्रीधर प्रधान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत अपराध से हुई हानि/ क्षति के लिए दी जाएगी मुआवजा की राशि

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित/ आश्रित को मुआवजा का किया गया है प्रावधान

झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत अपराध से हुई हानि/ क्षति के लिए दी जाएगी मुआवजा की राशि

मुआवजा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समक्ष आवेदन किया जा सकता है

रांची,26.02.2026  –  झारखंड सरकार ने झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत किसी भी प्रकार के अपराध से हुई हानि या क्षति के लिए पीड़ित या आश्रित को यथोचित मुआवजा भुगतान का प्रावधान किया है । इसके लिए पीड़ित या उसके आश्रित को न्यूनतम राशि का भुगतान किया जाना है ।

अपराध से हुई हानि या क्षति पर तय की गई है न्यूनतम राशि

विभिन्न प्रकार के अपराध यथा तेजाब हमला से घायल व्यक्ति को क्षति या हानि होने पर प्रतिकर की न्यूनतम राशि 3 लाख रुपये है वहीं बलात्कार के लिए भी 3 लाख रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान है जबकि नाबालिग का शारीरिक शोषण के लिए 2 लाख, मानव तस्करी से पीड़ित का पुनर्वास के लिए 1 लाख , यौन प्रताड़ना (बलात्कार नहीं) के लिए 50 हज़ार ,किसी भी अपराध में हुई मृत्यु में 2 लाख ,स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक )में भी 2 लाख , आंशिक विकलांगता(40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत ) में 1 लाख रुपये, शरीर का 25 प्रतिशत से अधिक जलना (तेज़ाब हमला को छोड़कर) में 2 लाख रुपये, भूर्ण हानि में 50 हज़ार रुपये, प्रजनन क्षमता की हानि में 1.5 लाख रुपये, सीमा पर दो तरफ़ा फ़ायरिंग से पीड़ित महिला के स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक) या मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता (40 प्रतिशत या अधिक) पर 1 लाख रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान किया गया है साथ ही किसी भी अपराध में यदि शरीर के किसी भाग या अंग की हानि हो जिसके चलते 40 प्रतिशत से कम विकलांगता होने पर 50 हज़ार रुपये , बाल पीड़ित की साधारण हानि या क्षति 10 हज़ार रुपये और कोई अन्य पीड़ित का पुनर्वास पर 50 हज़ार रुपये की मुआवजा राशि का प्रावधान किया गया है ।

मुआवजा राशि का निर्धारण

मुआवजा राशि का निर्धारण पीड़ित व्यक्ति को हुई हानि या क्षति , उपचार में हुए व्यय,अन्त्येष्टि में हुए खर्च आदि के रूप में अनुषंगिक व्यय सहित पुनर्वास के लिए अपेक्षित न्यूनतम रकम के आधार पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा किया गया है ।

झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत मुआवज़ा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सक्षम आवेदन किया जा सकता है।

योजना में यह भी प्रावधान है कि यदि पीड़ित व्यक्ति की उम्र 14 वर्ष से कम है तो प्रतिकर की रकम में विनिर्दिष्ट रकम से 50 प्रतिशत अधिक की बढ़ोतरी की जा सकेगी ।

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने पारदर्शी और त्वरित एनओसी अनुमोदन के लिए संशोधित राजमार्ग प्रवेश पोर्टल का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ईंधन स्टेशनों, सड़क किनारे की सुविधाओं, निजी संपत्तियों, विश्राम  परिसरों, संपर्क सड़कों और ऐसी अन्य सुविधाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आसानी से प्राप्त करने के लिए उन्नत राजमार्ग प्रवेश वेब पोर्टल का शुभारंभ किया।

सरकार की व्यापार सुगमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप, मंत्रालय ने अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इस  पोर्टल का विकास किया है। पोर्टल को http://rajmargpravesh.morth.gov.in पर एक्सेस किया जा सकता है।

 

नए राजमार्ग प्रवेश पोर्टल के माध्यम से नागरिक, व्यवसाय और संगठन, राष्ट्रीय राजमार्गों से आने जाने तथा उसके आसपास निजी संपत्तियों, उद्योगों और राजमार्ग किनारे की सुविधाओं से सम्बन्धित अनुमतियों के लिए सरल तरीके से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पोर्टल का उपयोग सरकारी और निजी संगठन राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ साथ या उसके आसपास पानी की पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, विद्युत लाइनें और अन्य सेवाएं बिछाने की अनुमति प्राप्त करने के लिए भी कर सकते हैं।

नया पोर्टल अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा, जिससे नागरिकों और व्यवसायों को समय और प्रयास बचाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में सचिव (सड़क परिवहन) वी उमाशंकर, महानिदेशक (सड़क परिवहन) और विशेष सचिव विनय कुमार राजवत, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सदस्य (प्रशासन) विशाल चौहान और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने श्री बांके बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना की; हाथरस में कोल्ड स्टोरेज सुविधा का जायजा लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम ने आज मथुरा जिले के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर का दौरा किया और देश के सभी नागरिकों के लिए शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना की।

 

इसी बीच केंद्रीय मंत्री ने हाथरस जिले के सदाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बांस अमरू गांव में स्थित आलू के शीत भंडारण केंद्र का भी निरीक्षण किया। अपने दौरे के दौरान उन्होंने भंडारण व्यवस्था, शीत श्रृंखला प्रणाली और किसानों को प्रदान की जा रही अन्य सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और प्रबंधन को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, भंडारण क्षमता बढ़ाने और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बांस अमरू गांव में स्थानीय निवासियों और आलू किसानों से भी बातचीत की। इस अवसर पर किसानों ने कृषि उपज के उचित मूल्य, भंडारण सुविधाओं के विस्तार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनते हुए, उन्हें आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण, आय वृद्धि और कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस दौरे से सरकार की आध्यात्मिक मूल्यों, ग्रामीण विकास और किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

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केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने असम के माजुली में “एक पेड़ माँ के नाम” नामक वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने 25 फरवरी, 2026 को माजुली जिले के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान विभिन्न विकासात्मक और जन-संपर्क कार्यक्रमों में भाग लिया।

श्री कमलेश पासवान ने गरामुर स्थित कोर्ट फील्ड के समीप “एक पेड़ माँ के नाम” नामक वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके पश्चात, श्री पासवान ने गुबिनपुर मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र (AWC) और गुबिनपुर एल.पी. स्कूल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने वहाँ उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया, बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया और जमीनी स्तर पर शिक्षा एवं बाल कल्याण सेवाओं को मजबूत करने में अभिभावकों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, पोषण और बुनियादी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

 

इसके बाद श्री पासवान ने एकीकृत उपायुक्त कार्यालय (Integrated DC Office), गरामुर के सभागार में “विकसित भारत – रोजगार की गारंटी और आजीविका मिशन – ग्रामीण (VB-G RAM-G)” विषय पर आयोजित एक सेमिनार में भाग लिया । इस कार्यक्रम में माजुली के पंचायती राज संस्था (PRI) के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के कर्मचारी उपस्थित थे। सेमिनार के दौरान, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

सेमिनार के बाद, केंद्रीय राज्य मंत्री ने मीडिया को संबोधित किया और अपने दौरे के परिणामों के बारे में प्रेस को जानकारी दी । उन्होंने माजुली में विभिन्न ग्रामीण विकास पहलों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और समग्र एवं समावेशी ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग को दोहराया।

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