टला नहीं संकट

यह अच्छी बात है कि कई राज्यों में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की तीव्रता कम होने के बाद कई तरह के प्रतिबंधों में ढील दी गई है। कुछ राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही है। कोरोना संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में राजनीतिक विरोध के बावजूद स्कूल खोल दिये गये हैं। हालांकि, दिल्ली में सम-विषम के आधार पर दुकानों की बंदी और सप्ताहांत का कर्फ्यू हटाने के साथ कुछ अन्य छूट दी गई हैं लेकिन स्कूलों को खोलने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया। दिल्ली सरकार का मानना है कि किशोरों का टीकाकरण हो जाने के बाद स्कूल खोलने का उचित माहौल बन पायेगा। यह अच्छी बात है कि कुछ राज्यों में कोरोना के मामलों में गिरावट के बाद प्रतिबंधों का दायरा सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया आरंभ हुई है। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कोरोना संकट के चलते स्कूल बंद होने का बच्चों के मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों में प्राकृतिक तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। लेकिन बच्चों से अधिक भावनात्मक लगाव के कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं। तभी सरकारों ने तय किया है कि विद्यार्थी अभिभावकों की सहमति से स्कूल जा सकेंगे। स्कूलों को भी कोरोना से बचाव के उपायों पर सख्ती बरतने को कहा गया है। कोरोना संक्रमण रोकने को लगी बंदिशों का दायरा घटाने की खबरें ऐसे समय में आ रही हैं जब इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोम कंसोर्शियम के अनुसार, कोविड-19 भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति में पहुंच गया है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके बावजूद ओमीक्रोन के ज्यादा मामले हल्के-बिना लक्षण वाले हैं, जिसमें यह पता लगाना कठिन होता है कि व्यक्ति किसके संपर्क में आने से संक्रमित हुआ।
बहरहाल, ऐसी स्थिति में समाज के बीच मौजूद वायरस के संक्रमण की चेन तोडऩा कठिन होता है। यह तेजी से प्रसार करता है। तभी स्वास्थ्य मंत्रालय टेस्टिंग-टीकाकरण के साथ ही टेली कंसल्टेशन पर जोर दे रहा है, ताकि अस्पतालों में ज्यादा भीड़ संक्रमण की वाहक न बने। इसके बावजूद कई राज्यों में बंदिशों में ढील देकर जान के साथ जहान बचाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। दरअसल, पहली कोरोना लहर में सख्त बंदिशों के चलते अर्थव्यवस्था ने तेजी से गोता लगाया और करोड़ों लोग बेरोजगारी की कगार पर जा पहुंचे थे। अब संकट के बीच जीवन जीने को न्यू नॉर्मल बनाने की कोशिश हो रही है। हरियाणा में भी दसवीं से बारहवीं तक के स्कूल एक फरवरी से खोले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ठंड व कोरोना प्रकोप के चलते स्कूलों को 31 जनवरी के बाद भी 15 फरवरी तक के लिये बंद कर दिया गया है। वहीं उत्तराखंड में नौवीं तक के स्कूल जनवरी के अंत तक बंद रहेंगे। झारखंड में फरवरी से स्कूल खोले जायेंगे। इसके बावजूद सामुदायिक संक्रमण की खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं। इसके शहरों के बाद ग्रामीण इलाकों में पांव पसारने की आशंका बनी हुई है। लेकिन राहत की बात यह है कि जनवरी के तीसरे सप्ताह में संक्रमण की आर वैल्यू में गिरावट आई है जो अभी डेढ़ के करीब है और उसके एक से कम होने पर महामारी के खत्म होने का संकेत माना जायेगा। वहीं आईआईटी मद्रास के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, अगले पखवाड़े में महामारी की तीसरी लहर अपने पीक पर पहुंच सकती है। वहीं इसी बीच केंद्र सरकार ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन को कुछ शर्तों के साथ बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। ये टीके अस्पताल व क्लीनिक में उपलब्ध रहेंगे और 18 वर्ष या उससे अधिक का व्यक्ति कोविन पोर्टल पर जानकारी देकर व पंजीयन करवाकर टीके खरीद सकता है। इसके बावजूद जब देश में संक्रमितों का आंकड़ा प्रतिदिन ढाई लाख से अधिक है और चार सौ जिलों में संक्रमण की दर दस फीसदी से अधिक है तो हर स्तर पर सावधानी जरूरी है। यही वजह है कि केंद्र ने कोरोना प्रतिबंधों को 28 फरवरी तक बढ़ाया है।

बेवजह का गुस्सा बिगाड़ सकता है काम, इन प्राणायामों के अभ्यास से खुद को रखें शांत

अगर आप अपने गुस्से को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं और अपने आस-पास की वस्तुओं को तोडऩे या चिल्लाने लगते हैं, तो इससे आप खुद को ही मानसिक और शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाते हैं। इतना ही नहीं, गुस्सा आपके काम और निजी संबंधों में तनाव पैदा करता है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे प्राणायामों के अभ्यास का तरीका बताते हैं, जो गुस्से को नियंत्रित करने के साथ आपको शांत रखने में मदद कर सकते हैं।

नाड़ी शोधन प्राणायाम

नाड़ी शोधन प्राणायाम के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सुखासन की मुद्रा में बैठें, फिर दाएं हाथ की पहली दो उंगलियों को माथे के बीचों-बीच रखें। अब अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करके नाक के बाएं छिद्र से सांस लें, फिर अनामिका उंगली से नाक के बाएं छिद्र को बंद करके दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। इस दौरान अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी सांस पर ध्यान दें। कुछ देर बाद प्राणायाम छोड़ दें।

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास के लिए पहले योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठें और अपने दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। इसके बाद अपनी दोनों आंखों को बंद करें और अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़कर नाक से गहरी सांस लें, फिर पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए इस सांस को छोड़ें। कुछ मिनट तक इस प्रक्रिया को दोहराते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे अपनी आंखों को खोलें और प्राणायाम का अभ्यास बंद कर दें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लिए पहले योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठें और अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें। अब अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करके नाक के बाएं छिद्र से सांस लें, फिर अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली से नाक के बाएं छिद्र को बंद करके दाएं छिद्र से सांस छोड़ें। कुछ मिनट इस प्रक्रिया दोहराने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलें और प्राणायाम का अभ्यास छोड़ दें।

उद्गीथ प्राणायाम

सबसे पहले योगा मैट पर पद्मासन या सुखासन की मुद्रा में बैठें और अपने दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रख लें। अब दोनों आंखों को बंद करके गहरी सांस लें और इसे धीरे-धीरे छोड़ते हुए ओम का जाप करें। ध्यान रखें की जब आप यह उच्चारण कर रहे हों, तब आपका ध्यान आपकी सांसों पर केंद्रित हो। शुरूआत में इस प्राणायाम का अभ्यास 5-10 मिनट तक करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। (एजेंसी)

श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा के साथ सुरक्षित जलार्पण कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता – उपायुक्त

*बसंत पंचमी को लेकर उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने किया रुटलाइन

क्यू कॉम्प्लेक्स, बाबा मंदिर प्रांगण व आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण

*मास्क व साफ-सफाई का अनुपालन को हर हाल में करें लागू

*सेवा भाव व आपसी समन्वय के साथ कार्यों को तय समय के अनुरूप कर लें पूर्ण

*शीघ्र दर्शनम सुविधा को व्यवस्थित और कतारबद्ध करने का दिया निर्देश

*उपायुक्त ने बीएड कॉलेज परिसर में होल्डिंग पॉइंट और रुटलाइन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश

Deoghar (Divya Rajan)

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री व पुलिस अधीक्षक श्री धनंजय कुमार सिंह द्वारा पैदल भर्मण कर आगामी बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य-व्यवस्था को लेकर रुटलाइन, बाबा मंदिर प्रांगण व आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर की जाने वाली तैयारियों का जायजा लिया गया। इस दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा सरकार भवन मोड़, बीएड कॉलेज, तिवारी चैक, नेहरू पार्क, क्यू कॉम्प्लेक्स, फुट ओवरब्रिज, बाबा मंदिर प्रांगण व आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर विधि-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशानिर्देश दिया गया।

इसके अलावे रूटलाइन निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त श्री मंजुनाथ भजंत्री द्वारा बीएड कॉलेज परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु होल्डिंग पॉइंट बनाने के अलावा रुटलाइन में अतिक्रमण, साफ-सफाई, सड़क किनारे नालों की सफाई व स्लैब की आवश्यकताओं को दुरुस्त करने का निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिया। साथ ही बाबा मंदिर में जलार्पण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु क्यू काॅम्प्लेक्स के हाॅलों में स्पाईरल की व्यवस्था, सभी शौचालय की सफाई, शुद्ध पेयजल की व्यापक व्यवस्था के साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश नगर निगम के वरीय अधिकारियों को दिया, ताकि आने वाले श्रद्धालु बाबा का जलार्पण के पश्चात एक सुखद अनुभूति प्राप्त कर अपने गंतव्य की ओर प्रास्थान करें। साथ ही उपायुक्त ने रुटलाइन, क्यू कॉम्प्लेक्स, मानसिंघी फुट ओवर ब्रिज, मंदिर प्रांगण का निरीक्षण कर विद्युत एवं जलापूर्ति संबंधी कार्यों का अवलोकन कर उसे समेकित ढंग से सम्पादित कराते हुए इधर-उधर दिख रहे बिजली के तारों को सुव्यवस्थित कराने का निर्देश कार्यपालक अभियन्ता विद्युत को दिया गया।

*मनसिंघी तालाब व आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई को रखें दुरुस्त

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजुनाथ भजंत्री ने मनसिंघी तालाब व आसपास के क्षेत्रों की सफाई और मनसिंघी तालाब को स्वच्छ रखने के संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर के साथ-साथ मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान रखें। इसके अलावे बाबा मंदिर में साफ-सफाई, सुरक्षा-व्यवस्था, सुलभ जलार्पण, शीघ्र दर्शनम व्यवस्था को लेकर दण्डाधिकारियों व पुलिस प्रतिनियुक्ति के साथ मंदिर प्रांगण व आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे की उपलब्धता एवं अन्य सुरक्षा मानकों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा निर्देश दिया गया।
इसके अलावे निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री संबंधित अधिकारियों को निदेशित किया कि आने वाले दिनों में बसंत पंचमी, महाशिवरात्री को लेकर देवतुल्य श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होगा। ऐसे में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों के साथ मास्क की अनिवार्यता मंदिर प्रांगण में पूर्ण रूप से लागू हो, ताकि सभी की बेहतरी का ख्याल रखा जा सके। साथ हीं उपायुक्त ने शीघ्र दर्शन कूपन काउंटर की व्यवस्था व मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को दिन प्रतिदिन और भी बेहतर करने का निर्देश दिया गया। साथ ही उपायुक्त ने शीघ्र दर्शनम सुविधा हेतु व्यवस्थित कतार को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा निर्देश दिया।

*श्रद्धालुओं को न हो पेयजल व शौचालय से जुड़ी समस्या

इस दौरान विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निदेशित किया कि क्यू काॅम्प्लैक्स, रूट लाईन, बीएड काॅलेज क्षेत्र में पेयजल व साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ शौचालय में हाथ धोने हेतु साबुन की समुचित व्यवस्था करने का निदेश दिया। इसके अलावे निरीक्षण के क्रम में पुलिस अधीक्षक श्री धनंजय कुमार सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। साथ ही आवश्यक सुरक्षा बिंदुओं की वस्तुस्थिति का जायजा लेते हुए उन्होंने अतिरिक्त पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति को लेकर विभाग को पत्राचार करने का निर्देश दिया।

इस दौरान उपरोक्त के अलावे नगर आयुक्त श्री शैलेंद्र कुमार लाल, बाबा मंदिर प्रभारी सह अनुमंडल पदाधिकारी श्री दिनेश यादव, प्रशिक्षु आईएएस श्री अनिकेत सच्चान, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्री रवि कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्री पवन कुमार, एनडीसी श्री परमेश्वर मुंडा, गोपनीय प्रभारी श्री विवेक मेहता, संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी रोहित कुमार विद्यार्थी, सहायक नाजिर समीर चैबे एवं संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मी आदि उपस्थित थे।

चेहरों पर सिमटती पंजाब की चुनावी जंग

राजकुमार सिंह –
पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान अभी दूर है, लेकिन मुफ्त-रेवडिय़ों की राजनीति से शुरू हुई चुनावी जंग तेजी से चेहरों तक सिमटती दिख रही है। प्रकाश सिंह बादल परिवार के वर्चस्व वाले शिरोमणि अकाली दल और उसके गठबंधन के चेहरे को लेकर कभी संदेह नहीं रहा। पिछले विधानसभा चुनाव तक बिना घोषणा के भी यह सभी को पता रहता था कि बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही होंगे। 94 वर्ष की उम्र में प्रकाश सिंह बादल इस बार भी लंबी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव तो लड़ रहे हैं, लेकिन पिछले मुख्यमंत्रित्वकाल में ही शिरोमणि अकाली दल की कमान अपने बेटे सुखबीर सिंह बादल को सौंप चुकने के बाद इस बार सत्ता की बागडोर भी उन्हें सौंप उत्तराधिकार की राजनीतिक प्रक्रिया पूरी कर देना चाहते हैं। तीन दर्जन से भी ज्यादा सीटों पर असरदार भूमिका वाले हिंदू मतों के समर्थन के लिए भाजपा से गठबंधन की जरूरत प्रकाश सिंह बादल को भी पड़ती थी। फिर सुखबीर बादल को तो पंजाब की राजनीति में अपनी व्यापक स्वीकार्यता अभी साबित करना शेष है। इसीलिए भाजपा से अलगाव के बाद शिरोमणि अकाली दल, 25 साल लंबे अंतराल के बाद फिर बसपा से गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरा है।
यह पहेली व्यापक राजनीतिक-सामाजिक चिंतन-मनन की मांग करती है कि उत्तर भारत में दलितों की राजनीतिक अस्मिता की पहचान बन कर उभरी बसपा, देश में सर्वाधिक दलित आबादी (लगभग 32 प्रतिशत) पंजाब में होने के बावजूद, यहां अपनी बड़ी लकीर क्यों नहीं खींच पायी—जबकि उसके संस्थापक कांशीराम मूलत – यहीं के निवासी थे? बहरहाल अकाली-बसपा गठबंधन ने ऐलान किया है कि बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री तो सुखबीर बादल ही होंगे, लेकिन दलित और हिंदू समुदाय से एक-एक उपमुख्यमंत्री बनाया जायेगा। अब जबकि उतावले नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने कैप्टन अमरेंद्र सिंह को अपमानजनक ढंग से हटाते हुए दलित समुदाय से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री ही बना दिया है, यह देखना दिलचस्प होगा कि अकाली-बसपा गठबंधन का दलित उपमुख्यमंत्री का दांव चुनाव में कितना प्रभावी होगा। चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह तथ्य बार-बार रेखांकित किया जा रहा है कि पंजाब में सर्वाधिक आबादी होने के बावजूद इससे पहले ज्ञानी जैल सिंह के रूप में सिर्फ एक बार ही दलित को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि जैल सिंह को मुख्यमंत्री बनाये जाने के वास्तविक कारण पंजाब की तत्कालीन, खासकर कांग्रेसी राजनीति पर करीबी नजर रखने वाले बखूबी जानते-समझते हैं, लेकिन कांग्रेस आज चुनाव प्रचार में यह दावा तो कर ही सकती है कि राज्य में दोनों बार दलित मुख्यमंत्री देने का श्रेय उसे ही प्राप्त है। हालांकि हर दांव के दोनों तरह के परिणाम निकल सकते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि कांग्रेस चुनाव प्रचार में दलित मुख्यमंत्री का अपना ट्रंप कार्ड ही खुल कर नहीं चल पा रही, क्योंकि चंद महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष बनने को आतुर सिद्धू अब मुख्यमंत्री का चेहरा बनने को उतावले हैं।
दरअसल सिद्धू को यह अहसास ही नहीं था कि कैप्टन अमरेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटवाने में उन्हें इतनी जल्दी सफलता मिल जायेगी, वरना वह प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए आलाकमान पर इतना दबाव नहीं बनाते। अब सिद्धू को लगता है कि कैप्टन अमरेंद्र सिंह की बेआबरू विदाई की पटकथा तो उन्होंने लिखी; तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ समेत तमाम दिग्गजों को विरोधी भी बना लिया— पर फलस्वरूप मुख्यमंत्री का पद चन्नी की झोली में जा गिरा। न सिर्फ तब जा गिरा, बल्कि पंजाब के राजनीतिक-सामाजिक समीकरण का चुनावी दबाव ऐसा है कि भविष्य में अवसर आने पर उसके फिर उसी झोली में गिरने की प्रबल संभावना है। इसलिए अब चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने से पहले ही सिद्धू की सुई एक बार फिर ‘दूल्हा कौन’ पर अटक गयी है। ज्यादातर राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि कांग्रेस के लिए आदर्श स्थिति मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किये बिना ही चुनाव लडऩे की होगी, क्योंकि तब उसे दलित मुख्यमंत्री का तो लाभ मिलेगा ही, सिद्धू के चेहरे से जट्ट सिख समुदाय समेत युवा भी आकर्षित हो सकते हैं। लेकिन बृहस्पतिवार को पंजाब दौरे पर आये पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की बात कह कर विवाद को नये सिरे से हवा दे गये हैं। बेशक अब ऐसा करने का दबाव सिद्धू और चन्नी, दोनों की ओर से है। सिद्धू बेचैन हैं कि अगर उन्हें चेहरा घोषित किये बिना ही लड़े चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिल गया तो चन्नी के दावे को नजरअंदाज कर पाना मुश्किल होगा, क्योंकि पार्टी उन्हीं के 111 दिन के शासन के आधार पर वोट मांग रही है। चन्नी को भी लगता है कि खुद को चेहरा घोषित करवाने का उनके पास चुनाव पूर्व से बेहतर मौका दूसरा नहीं हो सकता, क्योंकि ऐतिहासिक राजनीतिक पराभव के दौर से गुजर रही कांग्रेस मौजूदा दलित मुख्यमंत्री को नजरअंदाज करने का जोखिम कम से कम चुनाव के दौरान तो नहीं ही उठायेगी।
वैसे सिद्धू के दावे के मद्देनजर दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सत्ता के तमाम प्रमुख दावेदार लगभग 20 प्रतिशत आबादी वाले जट्ट सिख मतदाताओं पर ही दांव खेलने को बेताब हैं। अकाली-बसपा गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा सुखबीर बादल इसी समुदाय से आते हैं तो मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता में राय शुमारी से जिन भगवंत मान को चेहरा चुनने का दावा किया है, वह भी जट्ट सिख ही हैं। आबादी के आंकड़ों की दृष्टि से यह स्थिति चौंकाने वाली लग सकती है, लेकिन वास्तविकता यही है कि खासकर 1966 में विभाजन के बाद से पंजाब की सत्ता में जट्ट सिख समुदाय का ही दबदबा रहा है। दलित समुदाय से चन्नी के रूप में दूसरा मुख्यमंत्री पंजाब को मिला है तो हिंदू मुख्यमंत्री का दांव चलने का राजनीतिक साहस अभी तक कोई राजनीतिक दल नहीं दिखा पाया है। जबकि लगभग सवा करोड़ सिख मतदाताओं के मुकाबले हिंदू मतदाताओं की संख्या 82 लाख है। 117 विधानसभा सीटों में से 78 सीटें सिख बहुल हैं, तो 37 हिंदू बहुल, जबकि शेष दो मुस्लिम बहुल। कैप्टन अमरेंद्र सिंह की पहले मुख्यमंत्री पद और फिर कांग्रेस से भी विदाई के बाद बागी अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ मिल कर भाजपा ने जो गठबंधन बनाया है, उसने मुख्यमंत्री के चेहरे पर अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। पंजाब में सत्ता संघर्ष के चौथे कोण के रूप में उभर रहे इस गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ा दल है, जो दशकों तक शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में जूनियर पार्टनर रहा। अगर राहुल गांधी के संकेत के मुताबिक कांग्रेस ने वाकई मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया तो उसकी पार्टी के अंदर क्या प्रतिक्रिया होगी, और उसके बाद क्या भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस- अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन भी मुख्यमंत्री चेहरे का दांव चलेगा— यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

बहुत लोगों को लगता है मैं अब भी सलमान पर निर्भर हुं, पर ऐसा नहीं है  –  जरीन खान

अभिनेत्री जरीन खान भले ही लंबे समय से बॉलीवुड में हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने इंडस्ट्री में खुद की कोई पहचान नहीं बनाई है। जरीन को बॉलीवुड में सलमान खान लेकर आए थे। सलमान ने उसके बाद भी जरीन को मौके दिए, लेकिन जरीन अपना जादू नहीं चला पाईं। हाल ही में जरीन ने कहा कि बहुत से लोगों को लगता है कि वह अब भी सलमान पर निर्भर हैं, जबकि ऐसा नहीं है।
जरीन ने कहा, बहुत से लोगों की अब भी यह धारणा है कि सलमान मेरी मदद करते रहे हैं। मैं सलमान का शुक्रिया अदा करती हूं, क्योंकि उन्होंने ही मुझे इंडस्ट्री में घुसने का मौका दिया, लेकिन मेरा संघर्ष तब शुरू हुआ, जब मैं इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनी। उस समय मैं कुछ नहीं जानती थी। जरीन ने यह भी कहा, जब तक आप ए-लिस्टर नहीं होंगे, लोग आपका इंतजार नहीं करेंगे।
जरीन ने कहा, सलमान बेहद व्यस्त रहते हैं। मैं हर छोटी बात के लिए सलमान और उनके भाइयों की पीठ पर बंदर नहीं बन सकती। आज तक बहुत से लोग सोचते हैं कि मैं जो भी काम करती हूं, वह सलमान के जरिए होता है, जबकि यह सच नहीं है। उन्होंने कहा, सलमान एक दोस्त हैं और बस एक फोन कॉल दूर हैं, लेकिन मैं उन्हें परेशान नहीं करती हूं। ऐसा करना मेरे संघर्ष, कड़ी मेहनत को कमजोर करता है।
जरीन कहती हैं, मेरे पिताजी ने हमें छोड़ दिया था, इसलिए मैं ही थी, जिसने अपने परिवार की जिम्मेदारी ली। मेरे पास मेरी मदद करने या मेरा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा, कई बार ऐसा भी हुआ, जब मैंने इंडस्ट्री में खुद को खोया हुआ महसूस किया। मैं अच्छा काम करना चाहती थी, लेकिन मुझे अपना एक्टिंग टैलेंट दिखाने की अनुमति नहीं मिली। लोगों ने अनुमान लगा लिया कि मैं बस खूबसूरत हूं। इससे ज्यादा कुछ नहीं।
इससे पहले जरीन ने कहा था, काम के लिए फिल्ममेकर बोल्ड तस्वीरों की डिमांड करते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी लोग बड़े चेहरे को देखना चाहते हैं। मुझे जो भी प्रोजेक्ट मिलता है, उसके लिए मुझसे हॉट तस्वीरें दिखाने को कहा जाता है या तो बोल्ड सीन से भरे प्रोजेक्ट ही मिलते हैं। उन्होंने कहा था, मैं अब तब तक अभिनय नहीं करूंगी, जब तक मुझे मेरी पसंद का प्रोजेक्ट नहीं मिल जाता, जिसे करने में मैं सहज महसूस करूं। (एजेंसी)

 श्री अमित शाह ने गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर मिट्टी के कुल्हड़ों से बने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के भित्ति चित्र का अनावरण किया

New Delhi, 2975 लाल रंग की ग्लेज्ड मिट्टी के कुल्हड़ों से दीवार पर बना 100 वर्ग मीटर भित्ति चित्र भारत में अपनी तरह का केवल दूसरा और गुजरात में पहला है

स्मारक भित्ति चित्र देशभर से एकत्र की गई मिट्टी से बनाया गया है और इसमें इस्तेमाल किए गए कुल्हड़ KVIC की “कुम्हार सशक्तिकरण योजना” के तहत प्रशिक्षित 75 कुम्हारों द्वारा बनाए गए हैं

30 जनवरी को, 1857 से लेकर 1947 तक आज़ादी के आंदोलन में जिन लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी स्मृति में पूरा राष्ट्र आज शहीद दिवस मनाता है

यह वर्ष हमारी आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है और 75वें साल को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अत्यंत उत्साह के साथ मनाने का निर्णय लिया

इस निर्णय के पीछे दो उद्देश्य हैं- पहला, नई पीढ़ी को आज़ादी के संग्राम – 1857 से 1947 तक की लड़ाई के हर संघर्ष के महत्व के बारे में बताया जाए और आज़ादी के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, अपार यातनाएं सहीं, उनके संघर्ष की जानकारी भी नई पीढ़ी तक पहुंचा कर राष्ट्र के पुनर्निर्माण का एक संकल्प नई पीढ़ी के मन में जागृत किया जाए

दूसरा उद्देश्य- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के सामने एक विचार रखा है कि हम आज आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और जब आज़ादी के 100 साल होंगे, तब हर क्षेत्र में भारत कहां होगा, उसका लक्ष्य तय करना है और उसका संकल्प लेना है

आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष संकल्प लेने का वर्ष है और 75वें साल से 100 साल तक की हमारी यात्रा, संकल्प यात्रा है जिसमें हमें अपने लक्ष्य तय करने हैं और भारत की जनता को उन लक्ष्यों की सिद्धि के लिए तैयार भी करना है

बापू ने ना सिर्फ आज़ादी की लड़ाई की शुरूआत की, बल्कि आज़ादी की लड़ाई में, स्वराज की लड़ाई के दौरान कई ऐसे विचार रखे जो आज़ादी पाने के लिए तो ज़रूरी थे ही, परंतु आज़ादी के बाद भारत के पुनर्निर्माण के लिए भी आवश्यक है

स्वदेशी, स्वभाषा, सत्याग्रह, प्रार्थना, उपवास, साधनशुद्धि, अपरिग्रह, सादगीयह सिद्धांत गांधीजी ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान देश की जनता के भीतर सींचे और इनके आधार पर ही भारत के पुनर्निर्माण की शुरूआत हुई

दुर्भाग्य की बात थी कि अनेक सालों तक बापू की तस्वीर को तो श्रद्धांजलि दी गई, प्रवचनों में बापू का जिक्र तो हुआ, किंतु खादी, हस्तशिल्प, स्वभाषा के उपयोग और स्वदेशी की बात को भुला दिया गया

श्री नरेन्द्र मोदी ने देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद बापू के इन सारे सिद्धांतों को पुनर्जीवित करने का काम किया

आज़ादी के अमृत महोत्सव में नई शिक्षा नीति लाई गई, जिसने ये बताया कि ज्ञान पाने के लिये स्वभाषा से मजबूत और कोई साधन नहीं हो सकता, भारतीय भाषाएं सदैव विश्व के विकास में योगदान दे सकें, ऐसी व्यवस्था नई शिक्षा नीति में भारत के प्रधानमंत्री ने की

मेक इन इन्डिया, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकलस्वदेशी की नई परिभाषा है, भारत के आर्थिक उत्थान के लिए आत्मनिर्भरता की कल्पना, भारत को विश्व में उत्पादन का केन्द्र बनाने की कल्पना और 130 करोड़ भारतीय, भारतीय उत्पादों का ही इस्तेमाल करें, ऐसा आग्रहयह तीनों बातें बापू के स्वदेशी के सिद्धांत से ही निकली हुई हैं

खादी को पुनर्जीवित करने का काम भी देश के प्रधानमंत्री ने किया है, जब श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से उन्होंने खादी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने का काम शुरू किया

मैं गुजरात की जनता से अपील करता हूं कि आप अपने घर और जीवन में ज़्यादा से ज़्यादा खादी का इस्तेमाल करें

खादी का उपयोग सिर्फ गरीब व्यक्ति के रोजगार का साधन है, बल्कि देश के स्वाभिमान का प्रतीक है और महात्मा गांधी ने आज़ादी के आंदोलन के समय खादी का विचार, विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार से शुरू किया था और वो विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है

खादी के इस विचार को, स्वदेशी के विचार को और स्वभाषा को सम्मान देने का कार्य देश के प्रधानमंत्री और गुजरात के सुपुत्र श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया, विश्व के किसी भी मंच पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हिन्दी में ही बोलते हैं

अपनी भाषा को जानते ही बच्चा अपनी संस्कृति और भारत के इतिहास के साथ अपना नाता जोड़ लेता है और जब एक बच्चा अपनी भाषा से रिश्ता तोड़ लेता है, तब भारतीय संस्कृति और भारत के इतिहास से भी उसका रिश्ता तूट जाता है

स्वभाषा को मजबूत बनाने की नींव श्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति में रखी है और मुझे विश्वास है कि देश जब आज़ादी की शताब्दी मना रहा होगा, तब निश्चय ही हर भारतीय भाषा का गौरव शीर्ष पर होगा

आज महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का एक बहुत सुंदर कार्यक्रम खादी ग्रामोद्योग आयोग ने किया है जिसमें कुल्हड़ों से बना महात्मा गांधी का भित्ति चित्र दर्शाया गया है और इसके लिए जगह भी ऐसी चुनी गई है कि ज्यादा से ज्यादा युवा और बच्चे यहां आते हैं और महात्मा गांधी के संदेश के साथ ही खादी और स्वदेशी का संदेश भी उन तक पहुंचेगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए संबद्ध व्यवसाय किस तरह से बढ़ाने हैं, इस पर काफी जोर दिया है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के कुल्हड़ों से बने भित्तिचित्र का अनावरण किया। श्री अमित शाह ने प्रशिक्षित कुम्हारों और मधुमक्खी पालकों को 200 इलेक्ट्रिक पॉटर व्हील और 400 मधुमक्खी बक्से भी वितरित किए। स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा ये भित्ति चित्र तैयार किया गया है। 2975 लाल रंग की ग्लेज्ड मिट्टी के कुल्हड़ों से दीवार पर बना 100 वर्ग मीटर भित्ति चित्र भारत में अपनी तरह का केवल दूसरा और गुजरात में पहला है। स्मारक भित्ति चित्र देशभर से एकत्र की गई मिट्टी से बनाया गया है और इसमें इस्तेमाल किए गए कुल्हड़ KVIC द्वारा “कुम्हार सशक्तिकरण योजना” के तहत प्रशिक्षित 75 कुम्हारों द्वारा बनाए गए हैं। इस अवसर पर केन्‍द्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री नारायण राणे, केन्‍द्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।


इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज 30 जनवरी बापू का भी स्मृति दिन है, इसीलिए 30 जनवरी को 1857 से लेकर 1947 तक आज़ादी के आंदोलन में जिन लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी स्मृति में पूरा राष्ट्र आज शहीद दिवस मनाता है। आज के दिन ही साबरमती के जिस तट पर बापू ने आज़ादी के आंदोलन का आयोजन किया, उसी तट से आज उनके दिए आत्मनिर्भरता के मंत्र को साकार करते हुए मिट्टी के कुल्हड़ों से तैयार भित्ति चित्र के उदघाटन का कार्यक्रम आयोजित हुआ है और बापू को इससे बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। श्री शाह ने कहा कि इस स्मृति दिन पर इस श्रद्धांजलि का एक और भी महत्व है कि यह वर्ष हमारी आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है। देश की आज़ादी का 75वां साल है और 75वें साल को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अत्यंत उत्साह के साथ मनाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे दो उद्देश्य हैं- पहला, नई पीढ़ी, जो भविष्य के भारत की रचना करेगी, उन्हें आज़ादी के समग्र संग्राम – 1857 से 1947 तक की लड़ाई के हर संघर्ष के महत्व के बारे में बताया जाए और आज़ादी के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया और अपार यातनाएं भुगतीं, उनके संघर्ष की जानकारी भी नई पीढ़ी तक पहुंचा कर राष्ट्र के पुनर्निर्माण का एक संकल्प नई पीढ़ी के मन में जागृत किया जाए। दूसरा उद्देश्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के सामने एक विचार रखा है कि हम आज आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और जब आज़ादी के 100 साल होंगे, तब हर क्षेत्र में भारत कहां होगा, उसका लक्ष्य तय करना है और उसका संकल्प लेना है। 25 साल बाद आज़ादी के 100 साल पूरे होने पर आर्थिक, रोजगार, शिक्षा के क्षेत्रों में कौन-कौन से लक्ष्य सिद्ध करने हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रमें भारत को विश्व में सर्वोच्च स्थान पर स्थापित करने के लिए क्या संकल्प लेना है, पर्यावरण जागरुकता और  पूरी पृथ्वी

के वातावरण को अच्छा रखने के लिए भारत का क्या योगदान रहेगा, इन सारे क्षेत्रों में भारत की आज़ादी के  100 साल पूरे होने पर हम कहां

होंगे और वहां पहुंचने के लिए हमें आज क्या संकल्प करना है, उसका निर्णय करना है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष संकल्प लेने का वर्ष है और 75वें साल से 100 साल तक की हमारी यात्रा, संकल्प यात्रा है जिसमें हमें अपने लक्ष्य तय करने हैं और भारत की जनता को उन लक्ष्यों की सिद्धि के लिए तैयार भी करना है। महात्मा गांधी के स्मृति दिन पर साबरमति रिवरफ्रन्ट पे साबरमति नदी में बहते हुए नर्मदा के जल को देखते हुए ये विचार आ रहा है कि बापू ने उस जमाने में कैसे माहौल में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई शुरू की होगी। एक निशस्त्र व्यक्ति जब अंग्रेजों के पूरे साम्राज्य को उखाड़ फेंकने का संकल्प करता है, उस संकल्प की शक्ति कहां से आई होगी, वह हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है। बापू ने ना सिर्फ आज़ादी की लड़ाई की शुरूआत की, बल्कि आज़ादी की लड़ाई में, स्वराज की लड़ाई के दौरान कई ऐसे विचार रखे जो आज़ादी पाने के लिए तो ज़रूरी थे ही, परंतु आज़ादी के बाद भारत के पुनर्निर्माण के लिए भी आवश्यक है। स्वदेशी, स्वभाषा, सत्याग्रह, प्रार्थना, उपवास, साधनशुद्धि, अपरिग्रह, सादगी – यह सिद्धांत गांधीजी ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान देश की जनता के भीतर सींचे और इनके आधार पर ही भारत के पुनर्निर्माण की शुरूआत हुई।

 

 

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया

New Delhi,प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी को उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। आज शहीद दिवस पर, प्रधानमंत्री ने उन सभी महान लोगों को भी श्रद्धांजलि दी है,जिन्होंने साहसपूर्वक हमारे देश की रक्षा की।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा;

“बापू को उनकी पुण्य तिथि पर स्मरण कर रहा हूँ। उनके महान आदर्शों को और लोकप्रिय बनाना, हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए।

आज शहीद दिवस पर, उन सभी महान लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने साहसपूर्वक हमारे देश की रक्षा की। उनकी सेवा और बहादुरी को हमेशा याद किया जाएगा।”

राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया

रांची  (Divya Rajan) – 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सर्वोदय आश्रम (तिरिल, धुर्वा) स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित की।  राज्यपाल श्री रमेश बैस ने कहा कि देश की आजादी के लिए कई आंदोलन हुए , लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य एवं अहिंसा के रास्ते पर चलकर  देश को आज़ादी दिलाई।  बापू ने सत्य एवं अहिंसा के रास्ते पर चलने का मंत्र पूरा विश्व को दिया । उन्होंने कहा कि आज हम  खुले आसमां में सांस ले रहे हैं, इसमें  बापू का सबसे अहम योगदान  है।

 मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है, इसकी प्रेरणा बापू ने देशवासियों को दी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बदौलत दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र वाला देश भारत  है। ऐसे महापुरुषों का मार्गदर्शन निश्चित रूप से किसी भी राष्ट्र के लिए वरदान होता है। आज हमसभी बापू को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन कर रहे हैं।

 मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री नितिन मदन कुलकर्णी, उपायुक्त रांची श्री छवि रंजन, एसएसपी रांची श्री सुरेंद्र कुमार झा, सर्वोदय आश्रम के संरक्षक श्री अभय कुमार चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

जारा के हौसलों ने नाप दी दुनिया

अरुण नैथानी –
आमतौर पर भारत में जिस उम्र में बेटियां पढ़ाई पूरी कर करिअर की दिशा तलाश रही होती हैं, उस छोटी-सी उम्र में बेल्जियम की जारा रदरफोर्ड ने पूरी दुनिया का चक्कर लगा दिया। वह भी अकेले अपने छोटे से हवाई जहाज से। उसने दुष्यंत के कथन को सार्थक कर दिया कि तबीयत से पत्थर उछालो तो आसमान में भी छेद हो सकता है। जारा विश्व में सबसे कम उम्र में दुनिया का चक्कर लगाने वाली महिला बन गई हैं। मगर पांच माह का यह सफर कम खतरों से भरा नहीं था। कहीं रक्त जमाती ठंड, कहीं ज्वालामुखी के ऊपर से उडऩा, कहीं ठहरी तो भूकंप के झटकों से हिल गई। मगर खतरों की यह खिलाड़ी थमी नहीं। मौसम की खराबियों से उसका तीन माह का सफर तब पांच माह में पूरा हुआ जब वह पिछले दिनों बेल्जियम के कॉर्टिज्क-वेवेलगेम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी, जहां उसके परिवार व देशवासियों ने उसका जोरदार स्वागत किया।
महज उन्नीस साल की उम्र में अकेले दुनिया घूमने वाली पायलट जारा तमाम झंझावातों से गुजरते हुए इस मुकाम तक पहुंची। कई बार तो उसे लगा कि अब जीवन खत्म होने को है। वह बर्फीले बियाबान इलाकों में फंसी। एक महीने उसे अलास्का के नोम और करीब इकतालीस दिन रूस के अयान में बर्फीले तूफान के कारण फंसना पड़ा। वहीं एक बार तूफान के चलते कोलंबिया में रुकना पड़ा तो कहीं नौकरशाही की जटिलताओं से वीजा की दिक्कतों के कारण फंसना पड़ा। बेहद हल्के शार्क यूएल अल्ट्रालाइट स्पोर्ट प्लेन के जरिये अपने भारी-भरकम इरादों को पूरा करने के लिये निकली जारा ने आखिर अपने जुनून को हकीकत में बदला। वह पांच महीनों में पांच महाद्वीपों की यात्रा पूरी कर पायी। उसने करीब 51 हजार किलोमीटर का सफर बावन देशों से गुजर कर पूरा किया। वह 18 अगस्त, 2021 को अपने इस जुनून भरे सफर पर निकली थी।
जारा कहती है कि यह अनुभव रोमांचित करने वाला था। वह अलास्का में मौसम खराब होने के कारण फंसी। पूर्वी रूस में तूफान आने के कारण उलझकर रह गई। आइसलैंड में ज्वालामुखी की चुनौती का सामना किया। साइबेरिया व उत्तरी कोरिया के हवाई स्पेस से निकलते हुए लगा कि कहीं जीवन खत्म न हो जाये। इस दौरान उत्तरी कोरिया मिसाइल परीक्षण कर रहा था, लेकिन किसी तरह की चेतावनी नहीं दी थी। इस यात्रा में पृथ्वी के दो विपरीत सिरों को छूने की जिद में वह इंडोनेशिया के जांबी और कोलंबिया के टुमाको में उतरी। इस तरह जारा ने अमेरिका की अफगान मूल की शाइस्ता वैस का वह रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो उसने तीस साल की उम्र में बनाया था। वैसे पुरुषों में यह रिकॉर्ड 18 साल के एक युवक का है। लेकिन पुरुष और महिलाओं की उम्र का जो फासला पहले ग्यारह साल का था, उसे जारा ने महज ग्यारह महीने का कर दिया।
दरअसल, जारा रदरफोर्ड पायलट मां-बाप की बेटी है। ऊंची उड़ान के सपने उसने बचपन में ही देखने शुरू कर दिये थे। ब्रिटेन में हैंपशायर के एक स्कूल में जारा ने प्रारंभिक पढ़ाई की, लेकिन उसका परिवार बेल्जियम में रहता है। उसने चौदह साल की उम्र में हवाई जहाज उड़ाने का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। वर्ष 2020 में ही उसे पायलट का लाइसेंस मिला और 2021 में वह विश्व जीतने निकल पड़ी। अब उसका सपना एक सफल अंतरिक्ष यात्री बनने का है। वह कहती है कि उसकी यह सफल उड़ान निश्चय ही महिलाओं को विज्ञान, तकनीक और हवाई क्षेत्र में उम्दा करने के लिये प्रेरित करेगी। वह कहती है कि आमतौर पर लड़कियों से उम्मीद की जाती है कि वे सुंदर बनें, दयालु बनें तथा दूसरों की सहायता करने वाली बनें, लेकिन मैंने सिद्ध किया कि यदि मौका मिले तो वे अपनी तमाम महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकती हैं। प्रफुल्लित जारा मानती है कि यह अनुभव उद्वेलित करने वाला था। हालांकि, राह में बाधाएं कम न थीं। खासकर साइबेरिया की ठंड में, जहां यदि इंजन बंद हो जाता तो बचना मुश्किल था। लेकिन इसके बावजूद हमें रोमांच की राह चुनने से कतराना नहीं चाहिए। वह कहती है कि इस यात्रा का एक मकसद है कि लड़कियां विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग व गणित के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाशें।
जारा की इस यात्रा के लिये परिवार व प्रायोजकों का भरपूर साथ मिला। उनके स्कूल ने भी उनका मनोबल बढ़ाया। वहीं शार्क अल्ट्रालाइट विमान बनाने वाली स्लोवानिया की कंपनी शार्क ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस तरह जारा के नाम कई रिकॉर्ड बन गये हैं। वह सबसे छोटी उम्र की अकेली दुनिया का सफर तय करने वाली पहली महिला के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गई हैं। वह विमान से दुनिया घूमने वाली बेल्जियम की पहली नागरिक भी बन गई हैं लेकिन यह यात्रा इतनी आसान भी नहीं थी।
साइबेरिया में एक समय वहां का तापमान सतह पर माइनस 35 डिग्री व और हवा में माइनस 20 डिग्री था। इसी तरह इंडोनेशिया में खराब मौसम के कारण दो दिन रुकना पड़ा और टर्मिनल में ही सोना पड़ा क्योंकि वहां से बाहर निकलने के दस्तावेज नहीं थे। कैलिफोर्निया में जंगल की आग के धुएं में विमान उड़ाया, मैक्सिको में उनके विमान में खराबी आ गई, सिंगापुर में उनके विमान का टायर फट गया। उसे यह भी खला कि वह क्रिसमस व नये साल पर परिवार से दूर है। सफर में गाने सुनकर वह अपना मन बहलाती रही। सोशल मीडिया में अपने वीडियो पोस्ट करके अपने परिजनों के साथ जुड़ी रही।

सभी बिरसा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराएँ – श्री बादल, कृषि मंत्री

*हर दो पंचायत पर एक लैम्प-पैक्स की उपलब्धता करें सुनिश्चित

रांची,   माननीय कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि राज्य के सभी बिरसा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना  है। सभी बिरसा कृषक चाहे वे पी.एच कार्ड, हरा राशन कार्ड, सफेद राशन कार्ड धारक हों अथवा बटाईदार हों उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़कर लाभांवित कराना हमारा लक्ष्य है। श्री बादल ने कहा कि बैंक से सामंजस्य स्थापित कर अधिक से अधिक जरूरतमंद कृषकों को इसका लाभ दिलवाएं, बेवजह किसी का आवेदन बैंक द्वारा रिजेक्ट न किया जाए। वे आज नेपाल हाउस में आयोजित प्रमण्डलस्तरीय समीक्षा बैठक में दक्षिण छोटानागपुर प्रमण्डल के विभिन्न जिलों के उपायुक्तों के साथ कृषि विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

श्री बादल ने कहा कि राज्य में हर दो पंचायत पर एक धान अधिप्राप्ति केंद्र खोला जाए तथा उसे लैंप्स पैक्स से जोड़ा जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था कराई जाए जिससे किसानों को उनके आवास के निकट ही धान के सैंपल को चेक किया जा सके। श्री बादल ने कहा कि मत्स्य उत्पादन के लिये तालाबों की नीलामी में पारदर्शिता लाई जाए जिससे इसमें अधिक लोग शामिल हो सकें। अधिक लोगों के शामिल होने से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी ।

माननीय मंत्री ने कहा कि राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिये नए तालाबों के निर्माण के साथ-साथ पुराने तालाबों के जिर्णोद्धार पर भी विशेष ध्यान देना है। डोभा निर्माण एवं डीप बोरिंग सिस्टम की व्यवस्था भी किसानों को कराई जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पशुधन योजना से लोगों को जोड़ें जिससे कृषकों के सर्वांगीण विकास में सहायता प्राप्त होगी।

उपायुक्तों द्वारा कृषि विभाग में मैन पावर की कमी कि ओर विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया जिस वजह से योजनाओं को मूर्त रूप देने में समस्या आ रही है। इसपर कृषि सचिव ने कहा कि नियमावली के अनुसार ऑऊटसोर्स से भी मैनपॉवर बहाल कर लें एवं झारखण्ड बनने के बाद के जो नए जिले बने हैं वे कृषि विभाग के सैंक्सन पद हेतु आवेदन मुख्यालय को उपलब्ध करा दें।

समीक्षा बैठक में कृषि निदेशक श्रीमती निशा उरांव, पशुपालन निदेशक श्री शशिप्रकाश झा, मत्स्य निदेशक श्री एच.एन.द्विवेदी, सहकारिता निबंधक श्री मृंत्यजंय वर्णवाल, समिति निदेशक श्री सुभाष सिंह एवं विशेष सचिव श्री प्रदीप हजारे सहित विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।

अपर समाहर्ता ने टीबी जागरूकता रथ को किया रवाना

पिरामल स्वास्थ्य द्वारा 100 दिनों तक रामगढ़ जिले के गोला एवं

पतरातू प्रखंड में चलाया जाएगा  जागरूकता एवं जांच अभियान

 

रामगढ़, भारत सरकार के निर्देश पर टीबी रोग उन्मूलन हेतु देशभर के 100 अनुसूचित जनजाति बहुल जिलों में संचालित 100 दिन का 100 जिला अभियान के तहत बृहस्पतिवार को जिले के अपर समाहर्ता श्री नेल्सम एयोन बागे द्वारा समाहरणालय परिसर से फीता काटकर के उपरांत जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

100 दिन 100 जिला अभियान के तहत पीरामल स्वास्थ्य द्वारा रामगढ़ जिले के गोला एवं पतरातू प्रखंड में बृहद रूप से लोगों को टीवी रोग एवं कोरोना टिकाकरण के फायदों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस दौरान टीम के द्वारा गांव स्तर पर टीबी के संभावित मरीजों की सक्रिय खोज अभियान के माध्यम से पहचान करने के उपरांत संबंधित मरीज के लक्षणों के आधार पर बलगम की जांच की जाएगी। रोग की पुष्टि होने के उपरांत मरीज को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निशुल्क रूप से टीबी का उपचार प्रदान किया जाएगा एवं दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी।

टीबी जैसे संक्रामक रोग को फैलने से रोकने हेतु पिरामल स्वास्थ्य द्वारा विशेष पहल करते हुए मरीज के घर पर ही उसके जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही जागरूकता वाहन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच कोरोना टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का कार्य किया जा रहा है एवं उन्हें अनिवार्य रूप से कोरोना का टीका लेने हेतु प्रेरित किया जा रहा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पिरामल स्वास्थ्य से डॉक्टर अजय नारायण दुबे द्वारा बताया गया कि जागरूकता कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों, जनप्रतिनिधियों एवं परंपरागत चिकित्सकों की भी सहायता ली जाएगी।

गौरतलब हो कि भारत सरकार द्वारा 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इसी उद्देश्य से देशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों एवं अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को जागरूक एवं संभावितों की जांच की जा रही है।

इस दौरान सिविल सर्जन रामगढ़ डॉ प्रभात कुमार, जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर स्वराज, डीपीएम एनएचएम श्री देवेंद्र भूषण श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम समन्वयक श्री रंजीत कुमार, पिरामल स्वास्थ्य से जिला समन्वयक डॉ अजय नारायण दुबे, श्री अनूप सिंह, श्री सुभाष कुमार एवं कीर्ति कुमार वार्ष्णेय सहित अन्य उपस्थित थे।

बालों के लिए सबसे बेहतरीन है चुकंदर, जानिए इसके फायदे

आजकल बालों का झडऩा लोगों के लिए बहुत आम हो चुका है। यह समस्या महिला हो या पुरुष सभी में नजर आती है। जी हाँ और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें खराब लाइफस्टाइल और वातावरण को होने वाला नुकसान भी शामिल हैं। हालाँकि आप इन सभी से राहत पाने के लिए चुकंदर का इस्तेमाल कर सकते हैं। आज हम आपको चुकंदर के रस से बालों के लिए होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे जानकर आपको यकीन नहीं होगा।

ड्राईनेस- ठंड के मौसम में बालों में नमी की कमी हो जाती है और ऐसे में ड्राईनेस का आना आम होता है। ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए आप चुकंदर के रस को स्कैल्प में लगा सकते हैं। आप सभी को बता दें कि चुकंदर में मौजूद विटामिन ई और ए बालों की ड्राईनेस को दूर करने में कारगर होते हैं। इसके लिए चुकंदर को कद्दूकस करके इसका रस निकालें और स्कैल्प में इसे 30 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद नहाते समय इसे गुनगुने पानी से रिमूव करें।

डैंड्रफ- बालों में डैंड्रफ के कारण खुजली की समस्या भी होने लगती है और ऐसे में डैंड्रफ से निजात पाने के लिए भी स्कैल्प में चुंकदर का रस लगाना बेस्ट रहते हैं। जी दरअसल इसके लिए चुकंदर के रस को बालों में शैंपू करने से ठीक 15 मिनट पहले लगाएं और फिर नहा लें।
ब्लड सर्कुलेशन करें ठीक- चुकंदर के रस का सेवन करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, हालाँकि अगर स्कैल्प में इसे नियमित रूप से लगाया जाए, तो ऊपर से भी ब्लड सर्कुलेशन में सुधार लाता है। अगर आप चाहे तो गुनगुने पानी में चुकंदर के रस को मिलाकर इसकी सिर में मालिश करें।

हेयर फॉल- इस समस्या के लिए भी आप चुकंदर के रस की मदद ले सकते हैं। चुकंदर के रस को लगाने से बालों की जड़े मजबूत होती है। जी दरअसल इसमें पोटेशियम भी मौजूद होता है, जो बालों को पतला और कमजोर होने से बचाता है।  (एजेंसी)

25 फरवरी को रिलीज होगी आलिया की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी

आलिया भट्ट पिछले काफी समय से फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इसमें आलिया एक अनदेखे अवतार में नजर आने वाली हैं। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की रिलीज कई बार टल चुकी है। पिछले साल नवंबर में फिल्म की रिलीज डेट 18 फरवरी, 2022 तय की गई थी, हालांकि, अब इसे फिर आगे बढ़ा दिया गया है।
निर्देशक संजय लीला भंसाली ने सोशल मीडिया पर फिल्म की नई रिलीज डेट का ऐलान किया है। कई बार फिल्म की रिलीज टलने के बाद अब आखिरकार यह 25 फरवरी को रिलीज हो रही है। इसके एक दिन पहले यानी 24 फरवरी को भंसाली का जन्मदिन होता है। फिल्म की शूटिंग 2019 में ही शुरू हो गई थी। पहले यह फिल्म 11 सितंबर, 2020 को रिलीज होने वाली थी। कोरोना महामारी के चलते फिल्म की रिलीज में देरी हुई है।
गंगूबाई काठियावाड़ी एक असल जिंदगी से प्रेरित कहानी है। इसमें मुंबई के कमाठीपुरा की माफिया क्वीन गंगूबाई की कहानी को दिखाया गया है। गंगूबाई को कम उम्र में कोठे पर बेच दिया गया था। तमाम संघर्ष के बाद वह मुंबई की माफिया क्वीन बनी थीं। फिल्म में इस किरदार को आलिया ने निभाया है। वह पहली बार अपने करियर में लेडी डॉन की भूमिका निभाने जा रही हैं। अजय देवगन और इमरान हाशमी भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।
गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास था, जो गुजरात के काठियावाड़ी की रहने वाली थीं। उन्हें 16 साल की उम्र में अपने पिता के अकाउंटेट से प्यार हो गया था और वह उससे शादी करके मुंबई भाग आई थीं। कहा जाता है कि उनके पति ने उन्हें 500 रुपये में बेच दिया था। इसके बाद वह वेश्यावृत्ति करने लगीं। उन्होंने बाद में अपने जीवन में महिलाओं के हित में कई काम किए और गंगूबाई काठियावाड़ी के नाम से मशहूर हुईं।
भले ही गंगूबाई कोठे चलाती थीं, लेकिन उन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल वेश्यालयों की हालत सुधारने में भी किया था। वह किसी को भी जबरन अपने कोठे में नहीं रखती थीं। जो भी इस धंधे से बाहर जाता था, वह उसकी मदद भी करती थीं।
आलिया फिल्म आरआरआर से साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने वाली हैं। उन्हें निर्देशक अयान मुखर्जी की फिल्म ब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर के साथ देखा जाएगा। आलिया करण जौहर की फिल्म तख्त में भी एक अहम भूमिका निभाएंगी। वह शाहरुख खान के होम प्रोडक्शन में बन रही फिल्म डार्लिंग्स का हिस्सा हैं। इससे पहले दोनों डियर जिंदगी में साथ काम कर चुके हैं। करण जौहर की रोमांटिक फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में भी आलिया अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी।  (एजेंसी)

इस साल काफी व्यस्त रहेगीं रकुलप्रीत सिंह, रिलीज को तैयार हैं सात फिल्में

अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के लिए वर्ष 2022 काफी व्यस्त साल है। इस साल रकुल की 7 फिल्में रिलीज के लिए तैयार है, जिनमें से छह हिंदी फिल्में हैं। बॉलीवुड में उनके शीर्षकों में आयुष्मान के साथ ‘डॉक्टर जीÓ, अमिताभ बच्चन और अजय देवगन के साथ ‘रनवे 34Ó, अजय देवगन और सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ ‘थैंक गॉडÓ, ‘छतरीवालीÓ, ‘अटैकÓ और अक्षय कुमार के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म शामिल हैं।
उत्साहित रकुल ने साझा किया कि मैं उम्मीद कर रही हूं कि 2022 मेरे सबसे अच्छे वर्षों में से एक होगा। मैं वास्तव में 2022 का इंतजार कर रही थी, क्योंकि 7 फिल्में हैं जो रिलीज के लिए तैयार हैं, 6 हिंदी में। मुझे उन सभी की शूटिंग करने में एक अद्भुत अनुभव हुआ है। प्रत्येक चरित्र एक दूसरे से बहुत अलग है, प्रत्येक फिल्म एक अलग शैली की है।
रकुलप्रीत सिंह कहती है कि अटैक एक एक्शन फिल्म है तो रनवे 34 में मैं एक पायलट की भूमिका निभा रही हूं तो डॉक्टर जी में मैं एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की भूमिका निभा रही हूं, थैंक गॉड कमर्शियल है। वह आगे कहती हैं, मुझे उम्मीद है कि लोग वास्तव में इसे पसंद करेंगे। इन फिल्मों के लिए शूटिंग करना एक अद्भुत अनुभव रहा है और अब उनके बाहर आने का समय है। मैं बस इन फिल्मों के शुरू होने का इंतजार कर रही हूं। (एजेंसी)

कैसे कपड़ों से हटा सकते हैं रोएं, अपनाएं ये घरेलू उपाय

आज के समय में कई ऐसे कपड़ें हैं जिनके रोएं बहुत जल्दी आ जाते हैं और फिर वह कपड़े अच्छे नहीं लगते हैं। कई लोग ऐसे कपड़े पहनना छोड़ देते हैं तो कई लोग कपड़ों से रोएं निकालने के लिए नए-नए तरीके खोजने लगते हैं। ऐसे में अगर आप भी इन रोएं से परेशान हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं आज कुछ टिप्स जिससे आप इन रोएं से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं।
घरेलू सामानों की मदद से रोएं को हटाएं-

रेगमाल का इस्तेमाल करें –  अगर आप कपड़ों को इससे रगड़ेंगे, तो कपड़ों का रुआँ निकल जाएगा!

कैंची से रोएं को काटें –  अगर रोएं की मात्रा और आकार अधिक है तो उन्हें ध्यान में रखते हुए, आप इसको कैंची से भी काट सकते हैं। जी दरअसल इसके लिए कपड़ों को किसी सपाट जगह पर फैलाया जाए। उसके बाद एक-एक रोएं को हाथ से उठाकर कैंची से काट दिया जाए। वैसे आप एक हाथ कपड़ों के नीचे डाल सकते हैं, ताकि रोएं को अच्छे से ऊपर उठाया जा सके और फिर इसको आसानी से काटा जा सके।

शेविंग रेजऱ का इस्तेमाल करें –  इसके लिए एक डिस्पोजेबल रेजऱ लिया जाए और कपड़े को किसी सपाट जगह पर बिछा दिया जाए। उसके बाद रेजऱ को इस्तेमाल करने वाली जगह पर कपड़े को एक हाथ से खींचकर पकड़ें, ऐसा करने से कपड़े को रेजऱ से नुकसान नहीं पहुंचेगा। ध्यान रहे थोड़ा-थोड़ा करके बहुत आराम से रेजर से इसको साफ किया जाए।

स्वेटर कॉम्ब खरीदें –  अगर आप रोएं से परेशान हैं तो स्वेटर कॉम्ब लें जो एक छोटा सा कंघा होता है। इसके दाँते खासतौर पर कपड़ों का रुआँ निकालने के लिए बनाए जाते हैं। जी हाँ और यह कंघा बालों वाले कंघे से पूरी तरह अलग होता है, क्योंकि इसके दांते छोटे और एक दूसरे के करीब होते हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए कपड़े को तान कर रखें और फिर रोएं वाली जगह पर इसको आराम से चलाएं।

(एजेंसी)

एयर फ्रायर में बहुत आसानी से बनाए जा सकते हैं ये स्वादिष्ट व्यंजन, जानिए रेसिपी

एयर फ्रायर की मदद से डीप फ्राई व्यंजनों को कम तेल में बनाया जाता है, जिसके कारण ऐसे व्यंजनों का सेवन सेहत को नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि, अगर आपने हाल ही में एयर फ्रायर खरीदा है और आपको समझ नहीं आ रहा है कि इसमें क्या-क्या बनाया जा सकता है तो आपकी इस उलझन को हम दूर किए देते हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे स्वादिष्ट व्यंजनों की रेसिपी बताते हैं, जिन्हें एयर फ्रायर में बनाना आसान है।

फ्रेंच फ्राइज

सबसे पहले एयर फ्रायर को प्रीहीट करें और इसकी टोकरी में नॉन-स्टिक स्प्रे छिड़कें। इसके बाद आवश्यकतानुसार आलू को पानी से धोकर छिलें, फिर सारे आलू को फ्रेंच फ्राइज की तरह काट लें। इसके बाद आलू को पेपर से थपथपा कर सुखाएं। अब एक बड़े कटोरे में सारे कटे आलू, एक चम्मच तेल और स्वादानुसार नमक को मिलाकर एयर फ्रायर की टोकरी में रखें और जब फ्रेंच फ्राइज क्रिस्पी दिखें तो एयर फ्रायर को बंद करके इसे परोसें।

गार्लिक ब्रेड

गार्लिक ब्रेड बनाने के लिए सबसे पहले एयर फ्रायर को प्रीहीट करें। इसके बाद एक कटोरे में मक्खन, परमेसन चीज़, बारीक पीसी लहसुन की कुछ कलियां और बारीक कटा पार्सले और स्वादानुसार नमक मिलाएं। अब इस मिश्रण को ब्रेड की स्लाइस पर समान रूप से फैलाएं और इन्हें एयर फ्रायर की टोकरी में रखकर इसे चालू कर दें। दो से तीन मिनट के अंदर गर्लिक ब्रेड बनकर तैयार हो जाएगीं, जिसे आप टोमैटो सॉस के साथ परोस सकते हैं।

आलू के चिप्स

इसके लिए भी सबसे पहले एयर फ्रायर को प्रीहीट करें। इसके बाद आवश्यकतानुसार आलू को पानी से धोकर छिलें, फिर सब्जी के छिलके छिलने वाले चाकू का इस्तेमाल करके आलू पतला-पतला काट लें। अब सारी आलू की स्लाइस को एक बड़े बाउल में बर्फ के पानी में 15 मिनट के लिए भिगो दें, फिर सारी स्लाइस को छानकर सुखाएं, फिर इन पर कुकिंग ऑयल और नमक छिड़ककर पांच से आठ मिनट के लिए एयर फ्रायर में पकाएं।

स्टफ शकरकंद

सबसे पहले एयर फ्रायर को प्रीहीट करें और इसकी टोकरी में चार शकरकंद को रखकर ब्रश से जैतून का तेल लगाएं, फिर एयर फ्रायर को शकरकंद के गलने तक चलाएं। इसके बाद शकरकंद को लंबाई में काटकर इनका गूदा एक कोटरे में निकालें, फिर कटोरे में पालक, पनीर, प्याज को स्वादानुसार नमक और एक चुटकी काली मिर्च के साथ मैश करें। अब इस मिश्रण को शकरकंद के छिलके में डालकर एयर फ्रायर में 10 मिनट तक पकाने के बाद परोसें।
(एजेंसी)

इन पर राजनीति ना हो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्मतिथि के मौके पर उनकी होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि देश अतीत की गलतियों को दुरुस्त करने की राह पर है। उनका मतलब आजादी के योद्धाओं की आजाद भारत में हुई उपेक्षा से था। इस क्रम में उन्होंने इंडिया गेट पर नेताजी की भव्य मूर्ति स्थापित करने की घोषणा के साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बिरसा मुंडा जैसी विभूतियों की स्मृतियों को सम्मान देने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र किया।
इसमें संदेह नहीं कि देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानियां दीं और इन सबकी तपस्या के परिणाम के रूप में देश को आजादी हासिल हुई। खास तौर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की बात की जाए तो यह सच है कि आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को उस रूप में मान्यता नहीं मिल सकी, जैसी मिलनी चाहिए थी। कांग्रेस और महात्मा गांधी के नेतृत्व में चली आंदोलन की अहिंसक धारा की बहुत ज्यादा चर्चा हुई, इस मुकाबले नेताजी और उनकी आजाद हिंद फौज की प्रभावी भूमिका काफी हद तक पृष्ठभूमि में रह गई। मगर इसके बावजूद देश के आम जनमानस में नेताजी का स्थान कहीं से भी कम महत्वपूर्ण नहीं रहा। आज भी देशवासियों के मन में नेताजी के लिए वैसा ही आदर और सम्मान है जैसा गांधी, नेहरू और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के लिए।
दूसरी बात यह कि आजादी की लड़ाई के दौरान इसमें अलग-अलग तरह से योगदान कर रहे इन व्यक्तित्वों में विभिन्न बिंदुओं पर असहमतियों के बावजूद आपसी तालमेल और परस्पर सम्मान की भावना लगातार बनी रही। उन सबको पता था कि रास्तों को लेकर उनकी प्राथमिकताओं में भले अंतर हो, मंजिल सबकी एक है। वे सब भारत को एक स्वतंत्र, सम्मानित और संपन्न देश के रूप में देखना चाहते थे। इसलिए चाहे नेताजी हों या स्वतंत्रता संग्राम के अन्य सेनानी, उनके योगदान को रेखांकित करना, उनके लिए अलग-अलग तरह से सम्मान प्रदर्शित करना तो स्वाभाविक है, हर कृतज्ञ राष्ट्र ऐसा करता है, लेकिन गलती से भी इसे राजनीति का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए। ऐसा हुआ तो यह एक गलत और खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है। ये स्वतंत्रता सेनानी देशवासियों की साझा विरासत का हिस्सा हैं।

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किसानों के लिये चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ससमय दिलाना प्राथमिकता – श्री बादल

कृषि मंत्री ने की प्रमण्डीय स्तरीय समीक्षा बैठक

केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिये चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को ससमय पूरा करायें ताकि किसानों को उन योजनाओं का लाभ मिल सके। इन योजनाओं को धरातल पर उतराने हेतु विभिन्न आयामों का प्रयोग करते हुये योजनाओ को पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उक्त निदेश कृषि मंत्री श्री बादल ने वीडियो कॉन्फ्रसिंग के माध्यम से पलामू, लातेहार एवं गढ़वा उपायुक्त एवं कृषि विभाग के पदाधिकारियों को दी। वे आज नेपाल हाउस में आयोजित प्रमण्डीय स्तरीय समीक्षा बैठक में पलामू प्रमण्डल में कृषि विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

कृषि ऋण माफी सरकार की प्राथमिकता

कृषि मंत्री श्री बादल ने अधिकारियों निदेश दिया कि कृषि ऋण माफी योजना में लाभुकों के चयन में तेजी लायें ताकि अधिक से अधिक किसानों का ऋण माफ किया जा सके। उन्होंने निदेश दिया कि इस कार्य को अभियान चलाकर पूरा करें।

योजनाओं का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें

कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी किसानों तक पंहुचे, इस हेतु प्रयास करें। प्रत्येक प्रखण्ड में योजनाओं की जानकारी दें। इसके लिये प्रखण्ड के प्रमुख स्थानों को चिहिन्त करें एवं वहां पर फ्लैक्स लगाकर सरकार द्वारा किसानों के लिये चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओ की जानकारी दें। जिला,प्रमण्डल एवं प्रखण्ड स्तर पर कृषि विभागों के भवनों के दीवारों पर दीवार लेखन कर योजनाओं की जानकारी दे सकतें हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि कोविड गाईडलाईन का पालन करते हुये  स्थानीय कलाकारों का सहयोग लेकर नुक्कड़-नाटक के माध्यम से भी लोगों को योजनाओं की जानकारी दे सकते हैं। इस तरह से प्रचार-प्रसार होने से अधिक से अधिक किसान योजनाओं के प्रति जागरुक होकर उन योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।

बीज वितरण का कार्य ससमय सुनिश्चित करें

समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि बीज वितरण का कार्य ससमय सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन प्रमण्डल में जिस बीज की मांग अधिक है उसे ध्यान में ही रखकर बीज वितरण कार्य किया जाये। बैठक में बतलाया गया कि लातेहार में 7 दाल मिल, पलामू में 8 और गढ़वा मे 7 दाल मिल लगाया जायेगा। कृषि मंत्री ने पलामू उपायुक्त को निदेश दिया कि पलामू का दाल कॉफी प्रसिद्ध है इसे विदेशों तक पंहुचायें और इस कार्य में विभाग पूरी मदद करेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना को धरातल पर उतारने के जिसे उसके विभिन्न आयामों को पूराकर इस योजना को शत-प्रतिशत पूरा करायें।

केसीसी कार्ड बनाने में तेजी लायें

कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि राज्य के सभी किसानों का केसीसी कार्ड बनना हैं। उन्होंने पलामू प्रमण्डल के सभी उपायुक्तों को निदेश दिया कि पलामू प्रमण्डल में सभी किसानों का केसीसी कार्ड बनना है इसे सुनिश्चित करें। इस कार्य के लिये बैंक के साथ बात करें साथ ही उन्हें जल्द से जल्द इस कार्य मे तेजी लाने का निदेश दें।

कृषि विभाग सुझावों पर करेगा अमल

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में तीनों जिले ने लक्ष्य के विरुद्ध काफी कम प्रगति की है इसे जल्द से जल्द पूरा करायें। मिट्टी संरक्षण योजना में तालाबों के जीर्णोंद्धार का काम जल्द से जल्द पूरा करायें साथ ही डीप बोरिंग का काम पूरा करायें। बैठक में कृषि मंत्री ने तीनों जिलों के उपायुक्तों से सुझाव मांगा कि तालाब जीर्णोंद्धार योजना के लक्ष्य को बढ़ाया जाये या नहीं। सभी उपायुक्तों ने कहा कि जितने तालाब मिले है उससे ज्यादा लाभुक हो जाते हैं, अतः लक्ष्य बढ़ाने से ही अधिक से अधिक लाभुकों को ही इसका लाभ मिलेगा।

प्रत्येक पंचायत स्तर पर बनाई जाये मत्स्य सहयोग समिति

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना एवं फीड बेस्ड फिशरीज योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई जिसमें केज कल्चर को बढ़ावा देने पर विचार किया गया। इस चर्चा में कृषि मंत्री ने निदेश दिया कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर मत्स्य सहयोग समिति बनाई जाये  साथ ही माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता एवं विभागीय मंत्री की उपाध्यक्षता में राज्य में वन एवं कृषि उपज को बढ़ाव देने एवं उचित बाजार उपलब्ध कराने हेतु राज्य स्तरीय सिदो-कान्हू सहकारी समिति एवं जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सहकारी समिति के गठन का निर्णय लिया। जिला स्तरीय सहकारी समिति के सदस्यों का चयन मनोनयन/चुनाव हेतु अविलंब आवश्यक कार्रवाई करने का निदेश सभी उपायुक्तों को दिया।

पलामू एवं लातेहार पशुपालन पदाधिकारी को शॉ-काज

मुख्यमंत्री पशुधन योजना की समीक्षा में पलामू एवं लातेहार जिला द्वारा लक्ष्य के विरुद्ध कम लाभुकों को गाय वितरित करने पर कृषि मंत्री ने दोनो जिलों के जिला पशुपालन पदाधिकारी को शॉ-काज करने का निदेश दिया। साथ ही पलामू प्रमण्डल के तीनों जिलों के जिला पशुपालन पदाधिकारी को निदेश दिया कि सुकर पालन,बकरा पालन,ब्रायलर-कुकुक्ट पालन, बत्तख पालन में शत-प्रतिशत लाभुकों का चयन कर येाजना को पूर्ण करें ।

अधिक से अधिक लाभुकों को लाभ दिलाना प्राथमिकता

कृषि सचिव श्री अबु बकर सिद्दकी ने पलामू प्रमण्डल के उपायुक्तों एवं कृषि विभाग के पदाधिकारियों को निदेश दिया कि कृषि विभाग चलाई जा रही योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लेकर इसे पूर्ण करायें ताकि अधिक से अधिक लाभुकों को इसका लाभ मिल सके। इस दिशा में विभाग का पूरा सहयोग मिलेगा। हमारी प्राथमिकता अधिक से अधिक लाभुकों को लाभ दिलाना हैं ।

समीक्षा बैठक में कृषि निदेशक श्रीमती निशा उरांव, पशुपालन निदेशक श्री शशिप्रकाश झा,मत्स्य निदेशक श्री एच.एन.द्विवेदी, सहकारिता निबंधक श्री मृंत्यजंय वर्णवाल, समिति निदेशक श्री सुभाष सिंह एव विशेष सचिव श्री प्रदीप हजारे सहित विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कानून व्यवस्था परअधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

रांची, मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आज राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने एवं हर हाल में अपराध रोकने का निर्देश पुलिस पदाधिकारियों को दिया है। उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुलिस पेशेवर अपराधियों को चिन्हित कर उनसे सख्ती से निपटने का कार्य करे। राज्य में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस संवेदनशील और तत्पर रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की अहम जिम्मेदारी है। अपराध नियंत्रण एवं कानून व्यवस्था के सख्त होने से राज्य में चल रहे विकास कार्यों की गति बढ़ेगी तथा योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों को मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने रांची के मोरहाबादी मैदान में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना को लेकर चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि मोरहाबादी घटना में शामिल अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नही जाना चाहिए जाए। दोषियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी-कार्रवाई सुनिश्चित हो।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह, डीजीपी श्री नीरज सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव-सह-गृह विभाग के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, नगर आयुक्त श्री मुकेश कुमार, एसएसपी रांची श्री सुरेंद्र कुमार झा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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वेब-सीरीज ‘फाडू’ में नज़र आएगी सैयामी खेर

भारतीय सिनेजगत की चर्चित फिल्मकार अश्विनी अय्यर तिवारी के द्वारा सोनी लिव के सहयोग से डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए बनाई जा रही वेब-सीरीज ‘फाडू’ में अभिनेत्री सैयामी खेर तेज तर्रार युवती मंजिरी की भूमिका में नज़र आएंगी। आज के प्रयोगात्मक दौर में अश्विनी अय्यर तिवारी को मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हृदयस्पर्शी सम्मोहक कहानियों को सेल्युलाइड के कैनवास पर चित्रित करने में माहिर फिल्मकार के रूप में जाना जाता है। ‘नील बटे सन्नाटा’, ‘बरेली की बर्फी’ और ‘पंगा’ जैसी शानदार फिल्मों की निर्देशिका अश्विनी अय्यर तिवारी ने हाल ही में अपना पहला उपन्यास मैपिंग लव लॉन्च भी किया है। उनकी खेल-आधारित श्रृंखला, ब्रेक प्वाइंट को आलोचकों और दर्शकों से काफी सराहना मिली है। अब वो फिल्म प्रोडक्शन हाउस सोनी लिव के साथ अपनी नवीनतम प्रोजेक्ट ‘फाडू’ को  डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी में लगी हुई हैं। इस वेब सीरीज की शूटिंग जारी है। अभिनेत्री सैयामी खेर को इस शो से काफी उम्मीद है। इस शो के अलावा सैयामी खेर ताहिरा कश्यप की अपकमिंग फिल्म ‘शर्माजी की बेटी’ में नजर आने वाली है  तथा ‘न्यू सीजन  ब्रीद : इनटू द शैडो’ और आनंद देवरकोंडा के साथ ‘हाईवे’ में भी दिखाई देंगी।

प्रस्तुति – काली दास पाण्डेय

सोलर पावर प्लांट के माध्यम से रोशन हो रहे दुर्गम गांव

*246 गांवों में सोलर पावर प्लांट से पहुंची बिजली

*साहेबगंज के बरहेट स्थित चपेल पहाड़, बास्को पहाड़ और टेंगरा पहाड़ गांव हुए रोशन

*हजारीबाग का इचाक, चतरा के सिमरिया के एक-एक गांव एवं सिमडेगा के चार गांवों को सौर ऊर्जा से

आच्छादित करने का कार्य जारी

रांची, सौर ऊर्जा से झारखण्ड के सुदूर और दुर्गम स्थानों पर स्थित गांव अब रोशनी से जगमग हो रहे हैं। झारखण्ड राज्य के ये वैसे गांव हैं, जहां ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकरण संभव नहीं हो पाया था। अंततः  कुल 246 गांवों में सोलर पावर प्लॉट (मिनी और माइक्रो), सोलर स्टैण्ड एलोन सिस्टम से विद्युतीकरण किया गया है। वहीं वैसे अविद्युतीकृत घर, जिसके रहवासी विद्युत से वंचित रह गये थे, ऐसे 209 गांवों में क्रमश: 3494 एवं 4245 अविद्युतीकृत घरों अर्थात कुल 7740 घरों को सोलर स्टैण्ड ऍलोन सिस्टम से विद्युतीकृत किया गया है।

चिह्नित हुए गांव, पहुंची बिजली

झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा वैसे सुदूरवर्ती गांवों को चिह्नित किया गया, जहां अबतक पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत आपूर्ति या दुर्गम पहाड़ियों एवं वनों से आच्छादित होने के कारण पारंपरिक ऊर्जा स्रोत से विद्युत आपूर्ति बहाल करना वित्तीय एवं भौगोलिक दृष्टिकोण से व्यवहार्य नहीं था। ऐसी स्थिति में वैसे गांवों को सोलर एनर्जी के माध्यम से विद्युतीकृत किया गया, जिससेे न सिर्फ उक्त ग्रामों की ऊर्जा की आवश्यकता को पूर्ण किया जा सका, बल्कि ऐसे गांवों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने हेतु ग्रामीण औधोगिकीकरण की संभावनाओं को देखते हुए विद्युत की आवश्यकता को पूर्ण किया जा रहा है।

इस लक्ष्य से कार्य कर रही सरकार

राज्य सरकार का लक्ष्य हरेक गांव, कस्बों, टोलों का विद्युतीकरण  करना है। कई गांवों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परंपरागत विद्युत आपूर्ति तकनीकी और व्यावहारिक रूप से सहज नहीं है। ऐसे में सरकार का मानना है कि वहां अक्षय ऊर्जा परियोजना स्थानीय जरूरतों के अनुरूप एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। ऐसे गांवों या कस्बों को 100 प्रतिशत सब्सिडी के तहत स्थापित मिनी ग्रिड अथवा सोलर स्टैंड एलोने होम लाइटिंग सिस्टम के जरिए विद्युतीकृत करने की योजना पर कार्य हो रहा है, जिससे हर गरीब के घर तक बिजली पहुंच सके।

दो माध्यम से हो रहा विद्युतीकरण

सरकार दो माध्यम से सुदूरवर्ती गांवों को रोशन कर रही है।पहला सोलर स्टैण्ड एलोन सिस्टम के जरिये 50 से कम घर होने अथवा गांव की भौगोलिक स्थिति में गांव का विस्तार, ग्रामीण जनसंख्या का घनत्व विभिन्न टोलों में बांटकर दूर दूर होने की स्थिति में उस ग्राम को सोलर स्टैण्ड एलोन सिस्टम के माध्यम से विद्युतीकृत किया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत प्रत्येक घर में 200-250 वाट का मॉड्यूल 9 वाट के 4 अदद एल.ई.डी. लाईट, 1 अदद डी०सी० पंखा उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही एक मोबाईल चार्जिंग प्वाइंट एवं 1 एल.ई.डी. टी०वी० हेतु उपयुक्त क्षमता के पावर प्वाईंट की व्यवस्था के साथ विद्युतकृत किया जायेगा। उक्त के अतिरिक्त यदि ग्राम में सामुदायिक भवन अथवा विद्यालय उपलब्ध है, तो उसमें भी उपयुक्त क्षमता के अनुसार सोलर स्टैण्ड एलोन सिस्टम के माध्यम से विद्युत आपूर्ति किया जाना प्रस्तावित है। प्रत्येक 10 घरों की आबादी पर एक अदद 12 वाट एल.ई.डी. सोलर स्ट्रीट लाईट लगाकर गांव की गलियों को रोशन किया जायेगा। दूसरा, मिनी/माईक्रो ऑफ ग्रिड सोलर पावर प्लांट के तहत घरों की संख्या 50 से अधिक होने पर एवं ग्राम का वास्तविक फैलाव, आबादी का घनत्व सघन होने की स्थिति में उस ग्राम को मिनी, माईक्रो ग्रिड सोलर पावर प्लांट के माध्यम से प्रत्येक घर में 200-250 वाट क्षमता का विद्युत लोड निर्धारित करते हुए पोल एवं तार के माध्यम से प्रत्येक घर में विद्युत आपूर्ति किया जाना प्रस्तावित है।

ये गांव हुए रोशन

साहेबगंज के बरहेट स्थित चपेल पहाड़, बास्को पहाड़ और टेंगरा पहाड़ स्थित गांव सौर ऊर्जा से रोशन हो चुके हैं।  वहीं पतना प्रखंड के छः गांवों में सौर ऊर्जा का कार्य जारी है। जबकि हजारीबाग के इचाक, चतरा के सिमरिया के एक-एक गांव एवं सिमडेगा के चार गांवों को सौर ऊर्जा से आच्छादित करने का कार्य जारी है।

जनता पर मार और नेता का रोजगार

आलोक पुराणिक –
कई राज्यों में चुनावी मंडियां सज चुकी हैं, दुकानदार हुंकारे लगा रहे हैं। दुकानदारी की एक तरकीब यह भी है कि पड़ोसी दुकानदार का माल घटिया बताया जाये और अपना माल चकाचक बताया जाये। मेरे घर के करीब की सब्जी मंडी में एक आलूवाला पड़ोसी के आलुओं की ओर इशारा करते हुए हुंकारा लगाता है-घटिया आलू उधर हैं, बढिय़ा आलू इधर हैं। और कमाल यह है कि कभी घटिया आलू वाले से आलू उधार लेकर अपनी दुकान पर रखता है, अगर मांग बहुत ही ज्यादा हो जाये उसकी दुकान पर। उधर का घटिया आलू इधर आते ही बढिय़ा हो जाता है।
वादे उड़ रहे हैं मक्खियों की तरह, गिनती मुश्किल है। अगर वैज्ञानिक कुछ जुगाड़ ऐसा कर दें कि कोरोना के सारे वायरस चुनावी झूठ से मरने लगें, तो कम से कम पंजाब, उत्तराखंड, यूपी में तो कोरोना रातों रात गायब हो जायेगा। झूठ से अब कोई नहीं मरता, बल्कि झूठ से तो कइयों को रोजगार-धंधे मिल रहे हैं। टीवी चैनलों को इश्तिहार मिल रहे हैं, प्रिंटिंग प्रेसों को पोस्टर छापने का रोजगार मिल रहा है। झूठों की इतनी वैरायटी है इन दिनों कि झूठ की रेंज आश्चर्यचकित करती है।
22 करोड़ की कुल जनसंख्या वाले राज्य में कोई कह रहा है कि 50 करोड़ रोजगार दे दिये जायेंगे। गंजों को हेयर ड्रायर बेचे जा सकते हैं। कमाल यह है कि रोजगार के वादे करके नेता का रोजगार चलता जाता है। नेता तो आम तौर पर टॉप रोजगार अपनी फैमिली के लिए ही सुरक्षित रखता है। वादे अलबत्ता सबके लिए हैं और मुफ्त हैं। इतने रोजगार पैदा हो सकते हैं यह बात नेताओं को चुनावों में ही क्यों समझ में आती है, पहले क्यों नहीं बताते। चुनाव से पहले इस मारधाड़ में लगी रहती हैं कई पार्टियां कि जीजाजी ज्यादा कमा गये या बहू जी ज्यादा कमा गयीं। चुनाव से पहले परिवार ही कारोबार होता है, चुनाव के ठीक पहले जनता में परिवार दिखने लगता है।
चुनाव है जी चुनाव है, कोरोना का इस्तेमाल हम कैसे करें—एक नेता ने मुझसे पूछा। मैंने बताया कि सिंपल—दूसरी पार्टी से जब बंदों को तोड़कर लाओ, तो बताओ कि नये मंत्रालय बनाये जायेंगे, नये मंत्री बनाये जायेंगे। कोरोना इतने लंबे समय से है, अभी लंबा चलेगा, तो हम कोरोना मंत्रालय बनायेंगे, कोरोना मंत्रालय में एक कैबिनेट रैंक का मंत्री होगा और कम से कम तीन उपमंत्री होंगे। कोरोना कैबिनेट मंत्री-कोरोना उपमंत्री-अल्फा वेरिएंट, कोरोना उपमंत्री डेल्टा वेरिएंट, कोरोना उपमंत्री ओमीक्रोन वेरिएंट। कोरोना आम आदमी को भले ही बेरोजगार कर रहा हो, पर नेता इसमें भी रोजगार तलाश सकता है। कामयाब नेता दरअसल कामयाब दुकानदार होता है, माल बेचना आता है उसे।

अदालत का सुझाव स्थाई व्यवस्था बने

अनूप भटनागर
राजीव गांधी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1985 में देश में पहली बार बनाया गया दल बदल कानून विवादों के निपटारे में अत्यधिक विलंब की वजह से अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। दसवीं अनुसूची के तहत बने इस कानून के अभी तक के अनुभव और दल बदल के खिलाफ याचिकाओं के निपटारे के मामले में अध्यक्षों की भूमिका के परिप्रेक्ष्य में अब इसमें व्यापक संशोधन करने और ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए एक स्थाई न्यायाधिकरण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सदन का अध्यक्ष भी चूंकि राजनीतिक दल का ही सदस्य होता है, इसलिए दल बदल संबंधी विवादों के निष्पादन में निष्पक्षता की कमी महसूस होती है। इस बाबत शीर्ष अदालत ने दो साल पहले सुझाव दिया था कि संसद को दसवीं अनुसूची के तहत ऐसे विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी अर्द्ध न्यायाधिकरण के रूप में अध्यक्षों को सौंपने के प्रावधान पर नये सिरे से विचार करना चाहिए।
इसकी एक प्रमुख वजह दल बदल करने वाले सांसदों और विधायकों को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बने कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की याचिकाओं के निपटारे के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होने की वजह से अध्यक्ष द्वारा ऐसे मामलों में फैसला करने में अत्यधिक विलंब भी है। इस संबंध में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मणिपुर सहित अनेक विधान सभा अध्यक्षों के समक्ष लंबित ऐसे मामलों का उदाहरण दिया जा सकता है।
राज्यों की विधान सभाओं में दल बदल करने वाले सदस्यों को अयोग्य घोषित करने के लिए मूल राजनीतिक दल की याचिकाओं पर निपटारे में अत्यधिक विलंब की वजह से कई बार ये मामले सर्वोच्च अदालत तक पहुंचे। शीर्ष अदालत ने पिछले साल जुलाई में ही एक मामले में दल बदल कानून के तहत लंबित याचिकाओं के निपटारे के लिए समय सीमा और दिशा-निर्देश प्रतिपादित करने से इंकार कर दिया था। न्यायालय का स्पष्ट मत था कि यह काम संसद का है और उसे ही इस पर विचार करना होगा। यही नहीं, कर्नाटक विधान सभा में हुए दल बदल से संबंधित मामले में 2019 में शीर्ष अदालत ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा था कि सदन का अध्यक्ष अगर तटस्थ रहने का संवैधानिक दायित्व नहीं निभा सकता है तो वह इस पद के योग्य नहीं है।
संसद और विधानमंडल में निर्वाचित सदस्यों की आया राम-गया राम की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए 1985 में संविधान में संशोधन कर दल बदल कानून बनाया गया था। इस कानून में हालांकि, कुछ संशोधन भी किए गए लेकिन इसके बाद भी सदन में पाला बदलने वाले सांसदों और विधायकों के बारे निर्णय का अधिकार पूरी तरह से अध्यक्ष के पास ही था। ऐसे मामलों के निपटारे में हो रहे विलंब का ही नतीजा था कि 21 जनवरी, 2020 को सर्वोच्च अदालत ने सुझाव दिया कि संसद को दल बदल कानून के तहत सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित विवाद सुलझाने के लिए संविधान में संशोधन करके एक स्थाई न्यायाधिकरण की स्थापना करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
न्यायालय का विचार था कि संसद को दल बदल करने वाले सदस्य के मामले में फैसला करने का अधिकार एक अर्द्ध-न्यायाधिकरण के रूप में अध्यक्ष को सौंपने संबंधी व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। दरअसल, ऐसे विवाद का निपटारा करते समय भी अध्यक्ष एक राजनीतिक दल विशेष का ही सदस्य होता है।
इसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायाधिकरण का अध्यक्ष शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को बनाने का प्रावधान किया जा सकता है।
दरअसल, आज जहां दल बदल करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों के मामले में फैसला होने में अत्यधिक समय लग रहा है तो दूसरी ओर दल बदल कानून की मार से बचने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि सदन के कार्यकाल के अंतिम साल में चुनाव नजदीक आने पर पाला बदलने का रास्ता अपना रहे हैं। चुनावी साल में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अपने राजनीतिक दल से इस्तीफा देकर दूसरे दल में शामिल होने की इस बीमारी से हालिया दिनों में सभी दल पीडि़त हैं। अक्सर ऐसी गतिविधियां भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती हैं।
सरकार अगर वास्तव में दल बदल जैसी समस्या पर अंकुश पाना चाहती है तो उसे कानून में यह प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए कि चुनावी साल में सदन और मूल राजनीतिक दल से इस्तीफा देने वाला व्यक्ति कम से कम एक साल तक किसी अन्य राजनीतिक दल का प्रत्याशी बनने के अयोग्य होगा।
यह सर्वविदित है कि न्यायिक हस्तक्षेप से ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्वच्छता, पारदर्शिता और पवित्रता बनाये रखने और इससे संदिग्ध छवि वाले व्यक्तियों को बाहर रखने में काफी सफलता मिली है। उम्मीद है कि सरकार सर्वोच्च अदालत के सुझावों पर और समय गंवाए बगैर ही उचित कदम उठायेगी।

गुणवत्ता की मुफ्त शिक्षा का वादा करें दल

भरत झुनझुनवाला –
चुनाव के इस माहौल में मुफ्त बांटने के वादे करने की होड़ मची हुई है। कोई साड़ी बांटता है, कोई साइकिल, कोई लैपटॉप और कोई मुफ्त में बस यात्रा। यहां तक कि कहीं तो शराब भी मुफ्त बांटने की बात की जा रही है। कुछ मतदाता मानते हैं कि कम से कम जनता को 5 साल में एक बार ही सही, कुछ तो हासिल हो। सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसी नीतियां लागू कर जनता के रोजगार और धंधे को पस्त कर दिया है इसलिए मुफ्त में जो मिले कुछ लोग उसका स्वागत करते हैं। लेकिन विचारणीय यह है कि मुफ्त क्या बांटा जाए? ऐसे में यदि सच्ची अंग्रेजी शिक्षा को ही मुफ्त बांट दीजिए तो जनता भी सुखी हो जाएगी और पार्टी को संभवत: जीत भी हासिल हो जाए? कहावत है कि किसी व्यक्ति को मछली देने के स्थान पर मछली पकडऩा सिखाना ज्यादा उत्तम है क्योंकि यदि मछली पकडऩा सीख लेगा तो वह आजीवन अपनी आय अर्जित कर सकता है। इसी प्रकार यदि हम युवाओं को मुफ्त साइकिल और लैपटॉप वितरित करने के स्थान पर यदि मुफ्त अंग्रेजी शिक्षा दें तो वे साइकिल और लैपटॉप स्वयं खरीद लेंगे और आजीवन अपनी जीविका भी चला सकेंगे।
जनता में अंग्रेजी शिक्षा की गहरी मांग है। शहरों में घरों में काम करने वाली सहायिकाओं द्वारा भी अपने बच्चों को 1,500 से 2,000 रुपए प्रतिमाह की फीस देकर अच्छी अंग्रेजी के लिए प्राइवेट स्कूल में भेजने का प्रयास किया जाता है। वे अपनी आय का लगभग तिहाई हिस्सा बच्चों की फीस देने में व्यय कर देती हैं। इससे प्रमाणित होता है कि शिक्षा की मांग है लेकिन अच्छी शिक्षा खरीदने की उनकी क्षमता नहीं है। दिल्ली की आप सरकार ने सरकारी शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन इसके बावजूद सरकारी विद्यालयों के हाई स्कूल में 72 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए जबकि प्राइवेट स्कूलों में 93 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। दूसरे राज्यों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति बहुत अधिक दुरूह है जबकि इन पर सरकार द्वारा भारी खर्च किया जा रहा है।
वर्ष 2016-17 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में प्रति छात्र 25,000 रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे थे। वर्तमान वर्ष 2021-22 में यह रकम लगभग 30,000 रुपये हो गई होगी। इसमें भी सरकारी विद्यालयों में तमाम दाखिले फर्जी किए जा रहे हैं। बिहार के एक अध्ययन में 9 जिलों में 4.3 लाख फर्जी विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में पाए गए। इन फर्जी दाखिलों को दिखाकर स्कूल के कर्मचारी मध्यान्ह भोजन और यूनिफॉर्म इत्यादि की रकम को हड़प जाते हैं। किसी अन्य आकलन के अभाव में हम मान सकते हैं कि 20 प्रतिशत विद्यार्थी फर्जी दाखिले के माध्यम से दिखाए जाते होंगे। इन्हें काट दें तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रति सच्चे विद्यार्थी पर 37,000 रुपये प्रति वर्ष खर्च किया जा रहा है। नेशनल सैंपल सर्वे के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत बच्चे वर्तमान में सरकारी विद्यालयों में जा रहे हैं। अत: यदि इस 37,000 रुपये प्रति सच्चे छात्र की रकम को प्रदेश के सभी छात्रों यानी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल दोनों में पढऩे वाले छात्रों में वितरित किया जाए तो प्रत्येक छात्र पर उत्तर प्रदेश सरकार लगभग 20,000 रुपये प्रति वर्ष खर्च रही है।
चुनाव के समय पार्टियां वादा कर सकती हैं कि इस 20,000 रुपये की रकम में से 12,000 रुपये प्रदेश के सभी छात्रों को मुफ्त वाउचर के रूप में दे दिये जाएंगे। इस वाउचर के माध्यम से वे अपने मनचाहे विद्यालय में फीस अदा कर सकेंगे। यह 12,000 रुपये प्रति वर्ष प्रति छात्र सरकारी शिक्षकों के वेतन में से सीधे कटौती करके किया जा सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकारी अध्यापकों का वेतन वास्तव में कम हो जाएगा। वे अपने विद्यालय को आकर्षक बना कर पर्याप्त संख्या में छात्रों को आकर्षित करेंगे तो वे अपने वेतन में हुई इस कटौती की भरपाई वाउचर से मिली रकम से कर सकते हैं। जैसे वर्तमान में तमाम विश्वविद्यालयों में सेल्फ फाइनेंसिंग कोर्स चलाए जा रहे हैं। इन कोर्सों में छात्र द्वारा भारी फीस दी जाती है, जिससे पढ़ाने वाले अध्यापकों के वेतन का पेमेंट किया जाता है। इसी तर्ज पर सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, छात्रों को आकर्षित कर उनके वाउचर हासिल कर अपने वेतन की भरपाई कर सकते हैं।
ऐसा करने से सरकारी तथा निजी दोनों प्रकार के विद्यालयों को लाभ होगा। सरकारी विद्यालयों के लिए अनिवार्य हो जाएगा कि वे अपनी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएं, जिससे कि वे पर्याप्त संख्या में छात्रों को आकर्षित कर सकें, उनके वाउचर हासिल कर सकें और अपने वेतन में हुई कटौती की भरपाई कर सकें। प्राइवेट विद्यालयों के लिए भी यह लाभप्रद हो जाएगा क्योंकि उनमें दाखिला लेने वाले छात्र 1,000 रुपये प्रति माह की फीस इन वाउचरों के माध्यम से कर सकते हैं और शेष फीस वह अपनी आय से दे सकते हैं। जो सहायिका अपने 6,000 रुपये के मासिक वेतन में से वर्तमान में 1,500 रुपये अंग्रेजी स्कूल में बच्चे की फीस अदा करने के लिए कर रही है उसे अपनी कमाई में से केवल 500 रुपये ही देने होंगे। जिस प्राइवेट विद्यालय द्वारा आज 600 रुपये प्रति माह फीस के रूप में लिए जा रहे हैं उसे वाउचर के माध्यम से 1,000 रुपये मिल जायेंगे और कुल 1,600 रुपये की रकम से वे अच्छे अध्यापक की नियुक्ति कर सकेंगे। प्राइवेट विद्यालयों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
वर्तमान समय में रोबोट और बड़ी कंपनियों द्वारा सस्ते माल का उत्पादन किए जाने से आम आदमी के रोजगार का भारी हनन हो रहा है। इसके सतत जारी रहने का अनुमान है। इसलिए आम आदमी की जीविका को आगे आने वाले समय में बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वह अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करें, जिससे इंटरनेट आदि के माध्यम से वे सॉफ्टवेयर, संगीत, अनुवाद इत्यादि सेवाओं की बिक्री कर सकें और अपनी जीविका चला सकें। वर्तमान चुनाव के माहौल में पार्टियों को चाहिए कि साड़ी, साइकिल और लैपटॉप बांटने के वादों के स्थान पर सच्ची शिक्षा को मुफ्त बांटने पर विचार करें, जिससे उन्हें चुनाव में जीत हासिल हो और सरकार पर आर्थिक बोझ भी न पड़े। वहीं जनता को आने वाले समय में और रोजगार भी उपलब्ध हो जाए।
(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं।)

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