इस कार्यक्रम का आयोजन नौसैनिक परंपराओं के साथ किया गया। इस अवसर पर नौसेना, रक्षा मंत्रालय और जीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एनजीओपीवी का निर्माण दो शिपयार्डों (जीएसएल, गोवा और जीआरएसई, कोलकाता) में एक साथ किया जा रहा है। स्वदेशी रूप से निर्मित ये जहाज रक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री आपदा जोखिम प्रबंधन (एचएडीआर) और समुद्री लूट विरोधी अभियानों जैसे बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए मौजूदा 10 ओपीवी/एनओपीवी की संख्या को बढ़ाएंगे। इन जहाजों के नाम देश की पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं, जिनमें से पहले जहाज (पूर्व-जीएसएल) का नाम ‘शाची‘ रखा गया है, जिसका मतलब है सहायता प्रदान करने वाला। एनजीओपीवी के प्रतीक चिन्ह में सप्तर्षि तारामंडल और एक लाल एवं सफेद प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है।
नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में उठाया गया यह एक और महत्वपूर्ण कदम है और यह भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और ‘मेक इन इंडिया‘ पहलों के अनुरूप है।
***********************
