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खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुलमर्ग लेग की तारीखों की घोषणा करते हुए कहा, ‘खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के लिए यह बिल्कुल सही समय है’

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बुधवार को खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के गुलमर्ग लेग की तिथियों की घोषणा की। ये खेल 23 से 26 फरवरी तक जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित किए जाएंगे। यह खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का छठा संस्करण होगा।

आइस खेलों को शामिल करते हुए खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 का पहला लेग 20 से 26 जनवरी तक लद्दाख में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया जबकि गुलमर्ग में स्‍नो खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में अपने समग्र चैम्पियनशिप खिताब का बचाव करेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “गुलमर्ग लेग शीतकालीन ओलंपिक के तुरंत बाद हो रहा है और खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की मेजबानी के लिए यह बिल्कुल सही समय है। लेह (लद्दाख) में हमारा पहला लेग बहुत सफल रहा और निश्चित रूप से, जम्मू-कश्मीर में भी हमें वैसा ही उत्साह देखने को मिलेगा क्योंकि एथलीट एक बार फिर प्रकृति और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के हर सीजन में रोमांचक प्रदर्शन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। लेह में फिगर स्केटिंग के जुड़ने से प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई और गुलमर्ग में हम कोंगदूरी की ढलानों पर कुछ प्रभावशाली समय की उम्मीद कर रहे हैं।”

खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की शुरुआत से पहले, भारत में शीतकालीन खेलों को देखने वालों की संख्‍या, जागरूकता और व्‍यवस्थित प्रतियोगिता बहुत सीमित थी। आइस और स्‍नो से जुड़े खेल काफी हद तक सीमित रुचियों तक ही सीमित थे। इनमें आम जनता की भागीदारी बहुत कम थी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी भी कम थी।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों ने आइस और स्‍नो खेलों दोनों के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मंच बनाकर भारत के शीतकालीन खेल तंत्र को बदल दिया है। इससे भागीदारी, प्रदर्शन मानकों और जन जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जो खेल कभी हाशिए पर था, वह अब धीरे-धीरे एक सुनियोजित प्रतिभा विकास केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

यह बदलाव अंतर्राष्ट्रीय परिणामों में पहले से ही झलक रहा है। भारतीय शीतकालीन एथलीट विदेशों में पोडियम पर जगह बनाने और प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करने लगे हैं। यह प्रतिभा की एक नई पीढ़ी के उदय का संकेत है। विशेष रूप से, भारतीय फिगर स्केटर तारा प्रसाद ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले प्रदर्शन किए हैं, जबकि भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने 2025 आईएचएफ महिला एशिया कप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। यह किसी अंतर्राष्ट्रीय आइस हॉकी चैंपियनशिप में भारत का पहला पोडियम प्रदर्शन था। टीम ने टूर्नामेंट के दौरान कई महत्वपूर्ण जीत भी दर्ज की। यह विश्‍व स्तर पर आइस स्पोर्ट्स में हो रही तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

ये उपलब्धियां इस बात को दर्शाती हैं कि खेलो इंडिया शीतकालीन खेल किस प्रकार निरंतर अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी के लिए नींव रख रहे हैं, जिससे भारत उस दौर से आगे बढ़ रहा है जब शीतकालीन ओलंपिक में भागीदारी अक्सर एक या शून्य एथलीटों तक ही सीमित रहती थी। नियमित घरेलू प्रतियोगिताओं, उच्च दबाव वाले वातावरणों के अनुभव और विभिन्न खेलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ, आने वाले वर्षों में इस प्रगति के और मजबूत होने की उम्मीद है।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के गुलमर्ग लेग का समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शीतकालीन ओलंपिक मिलानो कोर्टिना 2026 के समापन के तुरंत बाद हो रहा है, जिनमें भारत का प्रतिनिधित्व अल्पाइन स्कीयर आरिफ खान और क्रॉस-कंट्री स्कीयर स्टैनज़िन लुंडुप कर रहे हैं। इससे वैश्विक गति, उत्साह और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा को घरेलू शीतकालीन खेल कैलेंडर में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और खिलाड़ियों की प्रेरणा, लोगों की रुचि और शीतकालीन खेलों के विकास पर राष्ट्रीय ध्यान में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

गुलमर्ग में चार पदक-योग्य स्पर्धाएं होंगी, जिनमें स्की पर्वतारोहण, अल्पाइन स्कीइंग, नॉर्डिक स्कीइंग (क्रॉस-कंट्री) और स्नोबोर्डिंग शामिल हैं, जिनमें लगभग 400 एथलीटों के भाग लेने की उम्मीद है और अल्पाइन स्कीइंग में सबसे अधिक भागीदारी होगी।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2025 सीजन के समापन पर, भारतीय सेना ने 18 पदकों के साथ टीम तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्‍त किया, जबकि हिमाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, उसके बाद लद्दाख, महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान रहा। खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के लद्दाख लेग के अंत में, हरियाणा ने चार स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, ये सभी स्वर्ण पदक उसके फिगर और आइस स्केटर्स ने जीते थे, उसके बाद लद्दाख, महाराष्ट्र और तेलंगाना का स्थान रहा।

पदक तालिका के लिए: https://www.winter.kheloindia.gov.in/medal-tally पर क्लिक करें।

खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया www.winter.kheloindia.gov.in पर क्लिक करें।

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ट्राई ने ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘टेलीकॉम में उत्तरदायी एआई’ सत्र आयोजित किया, जो डिजिटल लचीलापन, शासन और नेटवर्क परिवर्तन पर रहा फोकस

नई दिल्ली – भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में “टेलीकॉम में उत्तरदायी एआई” विषय पर इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत एक सत्र आयोजित किया। इस सत्र में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, उद्योग संघों और सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्र हुए, जिन्होंने दूरसंचार नेटवर्क और उपभोक्ता-उन्मुख अनुप्रयोगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग के लिए नीतिगत और परिचालन दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श किया।
यह सत्र व्यापक शिखर सम्मेलन कार्यक्रम का हिस्सा था और इसमें अंतरराष्ट्रीय उद्योग संगठनों तथा वैश्विक हितधारकों की भागीदारी भी रही। कार्यक्रम ने शासन संबंधी प्राथमिकताओं—जैसे विश्वास, जवाबदेही और सुरक्षा—पर चर्चा के साथ-साथ नेटवर्क संचालन, उपभोक्ता संरक्षण और सेवा प्रदायगी में एआई के उत्तरदायी विस्तार के लिए नवाचारी मार्गों पर विचार का मंच प्रदान किया। चर्चाओं में एआई और दूरसंचार के बढ़ते अभिसरण को स्वीकार किया गया, जिसे नेटवर्क डिज़ाइन, संचालन और ग्राहक अनुभव को आकार देने वाली एक आधारभूत परत के रूप में देखा जा रहा है।

सत्र का शुभारंभ TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी द्वारा उद्घाटन एवं स्वागत संबोधन के साथ हुआ। अपने प्रारंभिक वक्तव्य में श्री लाहोटी ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब दूरसंचार के लिए कोई परिधीय तकनीक नहीं रही; यह नेटवर्क के डिज़ाइन, प्रबंधन और उपयोग के तरीके का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। जैसे-जैसे एआई प्रणालियाँ जनसंख्या स्तर पर निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं, उनके कार्यान्वयन के लिए विश्वास मूलभूत बन जाता है। दक्षता में वृद्धि के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, मानवीय निगरानी और स्पष्ट रूप से परिभाषित सुरक्षा-सीमाएँ भी आवश्यक हैं, जो निष्पक्ष और पूर्वाग्रह-रहित परिणाम सुनिश्चित करें। हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि दूरसंचार में एआई समावेशी, लचीला, सुरक्षित और जनहित के अनुरूप बना रहे।”

उन्होंने आगे कहा कि दूरसंचार नेटवर्क भारत के एआई अवसंरचना का एक केंद्रीय स्तंभ हैं, और भारत के विशाल दूरसंचार ग्राहक आधार को देखते हुए एआई-आधारित स्वचालन अनिवार्य होता जा रहा है। नेटवर्क प्रदर्शन को अनुकूलित करने, खराबियों का पूर्वानुमान लगाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, ग्राहक अनुभव सुधारने तथा धोखाधड़ी और स्पैम संचार से निपटने के लिए एआई का उपयोग पहले से किया जा रहा है। सुदृढ़ प्रवर्तन और एआई-आधारित फ़िल्टरिंग तंत्र के माध्यम से स्पैम से जुड़े कनेक्शनों पर कार्रवाई संभव हुई है, और वाणिज्यिक संचार में सत्यापनीय उपभोक्ता सहमति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल कंसेंट ढाँचे लागू करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने नवाचार को सक्षम बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता अधिकारों और जनहित की रक्षा हेतु जोखिम-आधारित नियामकीय दृष्टिकोण और रेगुलेटरी सैंडबॉक्स-आधारित परीक्षण के प्रति ट्राई की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में दूरसंचार में एआई एकीकरण के महत्वपूर्ण आयामों पर केंद्रित दो विशेष पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं—पहली में यह विचार किया गया कि नेटवर्क को उत्तरदायी रूप से एआई क्षमताओं को समाहित करने के लिए किस प्रकार विकसित होना चाहिए, और दूसरी में एआई-आधारित दूरसंचार संचालन में उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने के महत्वपूर्ण प्रश्न पर चर्चा की गई। दोनों पैनलों ने मिलकर नेटवर्क बुद्धिमत्ता को सुदृढ़ करने और एआई-सक्षम पारितंत्र में उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने की दोहरी प्राथमिकता को रेखांकित किया।

पहली पैनल चर्चा, “प्रिपेरिंग टेलीकॉम नेटवर्क फॉर एआई एरा” की अध्यक्षता रितु रंजन मित्तारसदस्यट्राई ने की। पैनल में Ericsson के सीटीओ श्री मैग्नस एवेरब्रिंगQualcomm के वीपी पीएम श्री विनेश सुकुमारनोकिया के एसवीपी स्ट्रैटेजिक गवर्नमेंट एंड इंडस्ट्री इनिशिएटिव्स श्री पासी टोइवानन तथा तेजस नेटकवर्क्स के सीनियर वीपी एवं हेड एनएमएस श्री शांति ग्राम जगन्नाथ शामिल थे। चर्चा का केंद्र दूरसंचार नेटवर्क में एआई के अपनाने और एआई-आधारित प्रणालियों में पारदर्शिता तथा व्याख्येयता बढ़ाने पर रहा। साथ ही, एआई परिनियोजन में “डिज़ाइन द्वारा उत्तरदायित्व” को समाहित करने, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा और संरक्षा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने इस पर विचार किया कि बुद्धिमान स्वचालन और एआई-नेटिव आर्किटेक्चर किस प्रकार विस्तारित हो रहे 5G पारितंत्रों में नेटवर्क प्रबंधन को रूपांतरित कर रहे हैं।

दूसरी पैनल चर्चा, “बिल्डिंग कस्टमर ट्रस्ट एआई ड्रिवन ऑप्शन्स” की अध्यक्षता डॉ. एमपी टंगीराला, सदस्य, ट्राई ने की। पैनल में जुलियन गोर्मैन, एपीएसी प्रमुख, जीएसएमए; डॉ. राजकुमार उपाध्याय, सीईओ एवं चेयरमैन (बोर्ड), C-DOT; श्री मथान बाबू कासीलंगम, सीटीएसओ एवं डेटा प्राइवेसी अधिकारी, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड; तथा श्री सईद तौसिफ अब्बास, वरिष्ठ डीडीजी एवं प्रमुख, दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र, दूरसंचार विभाग शामिल थे। विचार-विमर्श में स्वचालित नेटवर्क निर्णयों में जवाबदेही, एआई-आधारित ग्राहक संवाद में पारदर्शिता, स्पैम रोकथाम में उत्तरदायी एआई के तंत्र, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए नैतिक शासन ढाँचे, तथा एआई-संबंधित विफलताओं—विशेषकर दूरसंचार और महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना में—के विश्लेषण हेतु एक व्यापक एआई घटना डेटाबेस विकसित करने के मानकों की आवश्यकता पर चर्चा की गई। पैनल ने उभरते 5G और भविष्य के 6G परिवेश में, विशेष रूप से धोखाधड़ी पहचान और ग्राहक-उन्मुख विश्लेषण के लिए, उत्तरदायी ढंग से एआई के विस्तार पर भी विचार किया।

इन सत्रों में उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की भागीदारी रही, जिन्होंने एआई-सक्षम दूरसंचार प्रणालियों में नवाचार को बढ़ावा देते हुए उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के उपायों पर अपने विचार साझा किए। चर्चाओं ने इस बात पर बल दिया कि दूरसंचार में एआई का परिनियोजन संतुलित और सुरक्षित बना रहे, इसके लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। प्रतिभागियों ने उल्लेख किया कि विश्वसनीय एआई अपनाने के लिए नियामकों, उद्योग और प्रौद्योगिकी हितधारकों के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा।

इस सेशन में हुई बातचीत इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बड़े मकसद में मदद करेगी, और टेलीकॉम सेक्टर में ज़िम्मेदार, सबको साथ लेकर चलने वाले और डेवलपमेंट पर ध्यान देने वाले AI को अपनाने के भारत के विज़न को सपोर्ट करेगी।

ज़्यादा जानकारी या क्लैरिफिकेशन के लिए, कृपया TRAI के एडवाइजर (नेटवर्क्स, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग (NSL) श्री समीर गुप्ता से adv-nsl1@trai.gov.in पर कॉन्टैक्ट करें।

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री एंटोनियो गुटेरस ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आज (20 फरवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

नई दिल्ली – राष्ट्रपति ने महासचिव गुटेरेस की उस पहल का स्वागत किया जिसमें मानवता के हित में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक वैश्विक वैज्ञानिक पैनल बनाने की बात कही गई है।

 

महासचिव गुटेरेस ने सफल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के आयोजन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे सहयोग की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में, बहुपक्षवाद को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें विश्वास की कमी का बढ़ता स्तर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा पुराने ढांचे में समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए सुधार की आवश्यकता है, और विकासशील देशों को निर्णय लेने में अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि ‘यूएन-80’ पहल सुधारों के लिए एक अच्छा मंच प्रदान करती है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में विकासशील देशों की विकासात्मक प्राथमिकताओं की रक्षा की जाए।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में श्री गुटेरस के शेष कार्यकाल के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं और बहुपक्षवाद के प्रति भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराया।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री श्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दीर्घकालिक द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी के ढांचे के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान आधारित नवाचार में भारत-ब्रिटेन सहयोग को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत और ब्रिटेन विज्ञान एवं नवाचार परिषद (एसआईसी) के अंतर्गत एक संस्थागत तंत्र के तहत काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग की समीक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था है। एसआईसी की अगली बैठक अप्रैल 2026 में भारत में आयोजित होने वाली है।

दोनों पक्षों ने अप्रैल 2023 में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन अनुसंधान एवं नवाचार समझौता ज्ञापन के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की, जो दीर्घकालिक सतत विकास के लिए सरकारी एजेंसियों, उच्च शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की तीव्र प्रगति के बारे में बताया, जो वैश्विक नवाचार सूचकांक में 2015 में 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंचने में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल आकार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बढ़ता स्टार्टअप आधार और मजबूत अनुसंधान क्षमता इसे वैश्विक प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए एक पसंदीदा भागीदार बनाती है।

चर्चा में दूरसंचार अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि, महासागर और जलवायु विज्ञान, उन्नत सामग्री और विनिर्माण तथा क्वांटम प्रौद्योगिकियों में चल रही संयुक्त पहलों को शामिल किया गया। डीएसटी-यूकेआरआई दूरसंचार सहयोग के तहत, अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गई हैं। औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में, दोनों देश नेट जीरो प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और सतत प्रणालियों में परियोजनाओं का समर्थन कर रहे हैं।

भारत-ब्रिटेन नेट ज़ीरो इनोवेशन पार्टनरशिप, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइड्रोजन, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और कार्बन कैप्चर पहलों सहित स्केलेबल स्वच्छ प्रौद्योगिकी समाधानों को बढ़ावा दे रही है। ये सहयोग भारत के हरित विकास और सतत विकास के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

बैठक में दोनों देशों के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, इनोवेशन हब और उद्योग के बीच साझेदारी को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक अनुसंधान और नवाचार गलियारे की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस पहल से प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को मजबूती मिलने और सहयोगात्मक उद्यमिता को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

भारत ने अपने प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों पर प्रकाश डाला, जिनमें अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणाली पर राष्ट्रीय मिशन, क्वांटम प्रौद्योगिकी मिशन, भू-स्थानिक मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल, डीप ओशन मिशन और बायोमैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम शामिल हैं, जो वैश्विक साझेदारी के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमासुंदरम शामिल थे। और डॉ. सुलक्षणा जैन, वैज्ञानिक एफ, डीएसटी।

ब्रिटेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री कनिष्क नारायण ने किया, जो ब्रिटेन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों, सेमीकंडक्टर, बौद्धिक संपदा, तकनीकी विकास और ऑनलाइन सुरक्षा की देखरेख करते हैं, उनके साथ ब्रिटिश उच्चायोग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी नेटवर्क की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री सोफिया नेस्टियस-बूथ, विज्ञान और नवाचार प्रमुख श्री जैक लैंडर्स; और मंत्री के निजी सचिव श्री जैक कॉलिन्स भी थे।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत भारत और ब्रिटेन की अग्रणी प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने और अप्रैल 2026 में होने वाली विज्ञान और नवाचार परिषद की बैठक से पहले नीतिगत संवाद को ठोस परिणामों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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केंद्रीय अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू द्वारा चिंतन शिविर के औपचारिक उद्घाटन

केंद्रीय अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज चिंतन शिविर के औपचारिक उद्घाटन के दौरान मंत्रालय के निगरानी ऐप, हज कलाई पट्टी (रिस्ट बैंड) और एआई चैटबॉट लॉन्च किए
नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का समापन किया। इसमें केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर अल्पसंख्यक कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नीति-आधारित कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया गया।

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने पीएमजेवीके, पीएमविकास, एनएमडीएफसी, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल, हज आधुनिकीकरण और डिजिटल पहलों जैसी अपनी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से अपनी प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया और प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के अपने दृष्टिकोण को भी प्रस्तुत किया।

 

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने पीएमजेवीके योजना के तहत निगरानी ऐप का शुभारंभ किया, जो देश भर में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने में योगदान देगा। उन्होंने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की हज कलाई पट्टी (रिस्ट बैंड) और एआई चैटबॉट का भी शुभारंभ किया।

श्री रिजिजू ने नालंदा विश्वविद्यालय में चिंतन शिविर के आयोजन के लिए मंत्रालय की टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि नालंदा देश की प्राचीन सभ्यतागत विरासत का प्रतीक और उत्कृष्टता का एक प्रमुख केंद्र है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि चिंतन शिविर की चर्चाओं से केंद्र-राज्य समन्वय को सुव्यवस्थित करने, हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने और जमीनी स्तर पर सफल कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।

अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएमजेवीके योजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना ने देश भर के अल्पसंख्यक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया है। मंत्रालय की पीएमविकास, एनएमडीएफसी, उम्मीद केंद्रीय पोर्टल और हज पहल अल्पसंख्यक कल्याण और विकास में योगदान दे रही हैं।

अल्पसंख्यक मंत्रालय में सचिव श्री चंद्र शेखर कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया और चिंतन शिविर को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार और नालंदा स्थित अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व और उसकी अहमियत पर भी जोर दिया।

चिंतन शिविर का उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के माध्यम से विकसित भारत के लिए नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘सुधार, क्रियान्वयन, रूपांतरण और सूचना’ का लक्ष्य सार्वजनिक-निजी-सामुदायिक भागीदारी और जन भागीदारी के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागालैंड के विधायक और रेशम उत्पादन विभाग एवं अल्पसंख्यक कार्य सलाहकार श्री इम्कोंग मार ने भारत में अल्पसंख्यक कल्याण की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने नागालैंड के अल्पसंख्यक समुदायों की सांस्कृतिक और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बुनियादी ढांचे और कौशल विकास में आई कमियों को दूर करने के लिए पीएमजेवीके और पीएमविकास योजनाओं की सराहना की।

अरुणाचल प्रदेश के खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री श्री केंटो जिनी ने मंत्रालय की योजना और बुनियादी ढांचे एवं सामुदायिक कमियों को दूर करने में मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और सचिव डॉ. सी. एस. कुमार को निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

सिक्किम के समाज कल्याण मंत्री श्री समदुप लेपचा ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की योजनाओं के जमीनी स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव पर जोर दिया और कहा कि चिंतन शिविर अल्पसंख्यकों के कल्याण और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

त्रिपुरा के सहकारिता, जनजातीय कल्याण (टीआरपी एवं पीटीजी) और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री शुक्ला चरण नोतिया ने कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है।

इसके अलावा, कार्यक्रम में पांच विषयों पर केंद्रित समूह चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल थे:

i. अवसंरचना विकास (पीएमजेवीके)

ii. सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण (पीएमविकास + एनएमडीएफसी)

iii. वक्फ प्रबंधन

iv. हज प्रबंधन

v. छात्रवृत्ति योजनाएं

यह सत्र संवादात्मक प्रारूप में आयोजित किया गया था, जिसमें सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। प्रतिभागियों ने निर्देशित प्रश्नों और समूह अभ्यासों के माध्यम से अनुभवों, चुनौतियों और समाधानों को जानने के लिए पांच विषयगत क्षेत्रों में सुगम और समयबद्ध चर्चाओं में भाग लिया।

इन सत्रों में सहकर्मी अभ्यास, सहयोगात्मक समस्या-समाधान और आम सहमति निर्माण पर जोर दिया गया, जिससे ठोस अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई। इसे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की नीति और कार्यक्रम सुधारों में शामिल किया जाएगा।

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नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कृषि ड्रोन का वितरण

नई दिल्ली – सरकार ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹1261 करोड़ के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए ‘नमो ड्रोन दीदी’ को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी है। उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1094 ड्रोन वितरित किए हैं। वितरित किए गए इन 1094 ड्रोनों में से 500 ड्रोन ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत वितरित किए गए हैं। ड्रोन प्राप्त करने वाली ड्रोन दीदियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत विभिन्न रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) में ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जनवरी 2026 तक एलएफसी (एलएफसी) द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण अनुलग्नक-I में दर्शाया गया है।

बेंगलुरु स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट एंड रूरल ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर (एडीआरटीसी) ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए इन 500 ड्रोनों के संचालन की आर्थिक और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वयं सहायता समूह पहले मुख्य रूप से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए थे, और उन्हें दिए गए ड्रोनों ने ड्रोन तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों तक उनकी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, ड्रोन को अपनाने से स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

अनुलग्नक-I

जनवरी 2026 तक लीड फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण

क्रम संख्या  राज्य का नाम  एलएफसी द्वारा ड्रोन प्रदान किए गए एसएचजी की संख्या और ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित महिला एसएचजी के सदस्यों की संख्या
1 आंध्र प्रदेश 108
2 असम 28
3 बिहार 32
4 छत्तीसगढ़ 15
5 गोवा 1
6 गुजरात 58
7 हरियाणा 102
8 हिमाचल प्रदेश 4
9 जम्मू और कश्मीर 2
10 झारखंड 15
11 कर्नाटक 145
12 केरल 51
13 मध्य प्रदेश 89
14 महाराष्ट्र 60
15 ओडिशा 16
16 पंजाब 57
17 राजस्थान 40
18 तमिलनाडु 44
19 तेलंगाना 81
20 उत्तर प्रदेश 128
21 उत्तराखंड 3
22 पश्चिम बंगाल 15
कुल 1094

 

यह जानकारी आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 : मतदान हेतु पोलिंग पार्टियों की विधिवत रवानगी

* जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने डिस्पैच सेंटर पहुंचकर संपूर्ण व्यवस्था का किया गहन निरीक्षण

* सामग्री वितरण काउंटर, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन प्रबंधन, हेल्प डेस्क, चिकित्सा सहायता काउंटर तथा नियंत्रण कक्ष का लिया जायजा, संबंधित पदाधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

* मतदान कर्मियों से बैलट बॉक्स खोलने एवं बंद करने की सही तकनीक के संबंध में ली जानकारी

* मतदान के दौरान निष्पक्षता, गोपनीयता एवं शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता हो – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

” किसी भी अप्रिय स्थिति या विधि-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम एवं संबंधित दंडाधिकारी को दें “

* जिला प्रशासन की मतदाताओं से अपील, 23 फरवरी 2026 को अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाएं

रांची,22.02.2026 – नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 अंतर्गत दिनांक 23.02.2026 को निर्धारित मतदान को लेकर आज मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम अवस्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों को विधिवत रूप से उनके निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने डिस्पैच सेंटर पहुंचकर संपूर्ण व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने निर्वाचन सामग्री वितरण काउंटर, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन प्रबंधन, हेल्प डेस्क, चिकित्सा सहायता काउंटर तथा नियंत्रण कक्ष का जायजा लिया और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इस दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सभी पोलिंग पार्टियों को बैलट बॉक्स, मतपत्र, सील, प्रपत्र, निर्वाचन रजिस्टर, पहचान पत्र सूची सहित सभी सामग्री सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाए तथा सामग्री प्राप्ति के उपरांत उसका मिलान कर ही प्रस्थान सुनिश्चित किया जाए।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने मतदान कर्मियों से बैलट बॉक्स खोलने एवं बंद करने की सही तकनीक के संबंध में जानकारी ली तथा कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करते हुए सीलिंग एवं सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जाए।

पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश:-

• सभी पोलिंग पार्टियां अपने निर्धारित वाहन से समय पर प्रस्थान करें एवं मार्ग में अनुशासन बनाए रखें।

• मतदान केंद्र पहुंचते ही सामग्री का पुनः सत्यापन करें तथा किसी भी कमी/त्रुटि की सूचना तत्काल सेक्टर पदाधिकारी को दें।

• मतदान के दौरान निष्पक्षता, गोपनीयता एवं शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता हो।

• किसी भी अप्रिय स्थिति या विधि-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम एवं संबंधित दंडाधिकारी को दें।

• मतदान समाप्ति के उपरांत बैलट बॉक्स की विधिवत सीलिंग कर निर्धारित स्ट्रांग रूम में सुरक्षित जमा सुनिश्चित करें।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी मतदान कर्मियों से कर्तव्यनिष्ठा, सतर्कता एवं संयम के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

जिला प्रशासन द्वारा सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, पेयजल, शौचालय, विद्युत, रैम्प सहित मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि मतदाता निर्भीक एवं सुगम वातावरण में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

जिला प्रशासन ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे 23 फरवरी 2026 को अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र को सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाएं।

इस अवसर पर उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक यातायात, श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी श्री राजेश्वरनाथ आलोक, जिला उप निर्वाचन-सह-पंचायती राज पदाधिकारी श्री राजेश कुमार साहू सहित विभिन्न कोषांगों के वरीय एवं नोडल पदाधिकारी उपस्थित थे।

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नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026 को लेकर : आम सूचना

रांची,22.02.2026 – कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के अधिसूचना संख्या 886 दिनांक 13.02.2026 एवं अधिसूचना संख्या 887 दिनांक 13.02.2026 के द्वारा मतदान के अवसर पर निगोशिएबुल इन्स्ट्रूमेंट् एक्ट, 1881 की धारा-25 के तहत् मतदान की तिथि अर्थात दिनांक 23.02.2026 (सोमवार) को संबंधित नगरपालिका क्षेत्रों में अवस्थित सभी सरकारी कार्यालय / सार्वजनिक प्रतिष्ठान दिनांक-23.02.2026 (सोमवार) को बंद रहेंगे।

अतएव उक्त अधिसूचना के आलोक में राँची जिला के अन्तर्गत पड़ने वाले 02 (दो) नगरपालिका क्षेत्र राँची नगर निगम एवं नगर पंचायत बुण्डू में दिनांक 23 फरवरी 2026 (सोमवार) को मतदान के अवसर पर सभी सरकारी कार्यालय / सार्वजनिक प्रतिष्ठान में अवकाश घोषित किया जाता है। उक्त के संबंध में निम्नांकित निर्णय संसूचित है :-

(क) मतदान के दिन अर्थात 23.02.2026 (सोमवार) को राँची नगर निगम एवं नगर पंचाय बुण्डू निर्वाचन क्षेत्र में सभी दुकान एवं प्रतिष्ठान बन्द रहेंगे।

(ख) कभी-कभी ऐसी भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि कोई व्यक्ति सामान्य तौर पर नगर निकाय क्षेत्र में निवास करता हो और उस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता भी हो, परन्तु वह नगर निकाय क्षेत्र के बाहर के औद्योगिक इकाई, प्रतिष्ठान या दुकान में कार्यरत हो या अपनी सेवाएँ दे रहा हो, तो उसे भी मतदान के दिन नियोक्ता द्वारा सवैतनिक अवकाश मंजूर किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त वैसे कामगार जो Casual Worker के रूप में निर्वाचन क्षेत्र के बाहर के संस्थान, प्रतिष्ठान आदि में कार्यरत हैं, एवं यदि वे उक्त निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता है, तो उन्हें भी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B (1) सहपठित झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 590 (3)

(क) के तहत सवैतनिक अवकाश की मंजूरी दी जाएगी।

(ग) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B (1) के अनुसार Daily Wage/Casual Workers को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।

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भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साथ एक संयुक्त इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया

नई दिल्ली – भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 09 से 12 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साथ एक इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग सुदृढ़ हुआ और पारस्परिक समझ में वृद्धि हुई।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहभागिता को वायु युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में क्रियान्वित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के एसयू-30एमकेआई बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान तथा रॉयल थाई एयर फोर्स (आरटीएएफ) के साब (एसएएबी) ग्रिपेन जेट सम्मिलित थे। समुद्री क्षेत्र के ऊपर आईएएफ विमानों की विस्तृत दूरी की परिचालन क्षमता को आईएएफ के आईएल-78 मिड एयर रीफ़्यूलिंग टैंकर विमानों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास आईएएफ के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) विमानों की उन्नत निगरानी एवं कमान क्षमताओं तथा आरटीएएफ के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (जीसीआई) एलीमेंट के अंतर्गत संचालित किया गया।

आईएएफ की प्रतिभागी सेनाओं ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित एयरबेस से संचालन किया, जबकि थाई ग्रिपेन विमानों ने थाईलैंड स्थित एयरबेस से उड़ान भरी। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मैत्रीपूर्ण विदेशी देश के साथ आईएएफ की पहुँच तथा पारस्परिक कार्य-संगतता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस अभ्यास से प्रतिभागी सेनाओं को परिचालन अनुभव प्राप्त हुआ तथा आईएएफ और आरटीएएफ के बीच सर्वोत्तम पद्धतियों का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहन होती “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को प्रतिबिंबित करता है, जो अब एयरोस्पेस क्षेत्र तक विस्तृत हो रही है।

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आधार-आधारित प्रमाणीकरण, बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी-रोधी उपाय

आधार-आधारित प्रमाणीकरण, बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी-रोधी उपायों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में 3.03 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय की गईं, जिससे असली उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध बुकिंग सुनिश्चित हुई

नई दिल्ली – भारतीय रेल की आरक्षण टिकट बुकिंग प्रणाली एक सुदृढ़ और अत्यंत सुरक्षित सूचना प्रौद्योगिकी मंच है, जो उद्योग-मानक, अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा नियंत्रणों से सुसज्जित है। इंटरनेट के माध्यम से तत्काल टिकट बुकिंग में हैकिंग उपकरणों द्वारा स्वचालित ढंग से फॉर्म भरे जाने से रोकने तथा धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और प्रणाली को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने हेतु भारतीय रेल द्वारा निम्नलिखित उपाय किए गए हैं :

1. तत्काल टिकट बुकिंग हेतु आधार प्रमाणीकरण – तत्काल बुकिंग में दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग हेतु आधार-आधारित वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन लागू किया गया है। तत्काल टिकट बुकिंग की समय-संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आधार प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता की अनन्‍यता का त्वरित सत्यापन करता है। यह अनन्‍यता की शर्त लागू कर फर्जी अथवा अनधिकृत एजेंट-नियंत्रित मल्‍टी-यूज़र अकाउंट के सृजन एवं संचालन को रोकने में सहायक है। यह उपाय अकाउंट-मल्‍टीप्लिकेशन और स्वचालित दुरुपयोग के विरुद्ध एक प्रभावी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है, जिससे तत्काल टिकटों का निष्पक्ष आवंटन सुनिश्चित होता है। इससे वास्तविक यात्रियों के लिए टिकट उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा ऑनलाइन तत्काल बुकिंग प्रणाली में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया गया है।

2. एप्लिकेशन स्तर सुरक्षा नियंत्रण – स्क्रिप्टिंग, ब्रूट-फोर्स अटैक तथा डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमलों की रोकथाम हेतु बहु-स्तरीय कैप्चा (कम्प्लीटली ऑटोमेटेड पब्लिक ट्यूरिंग टेस्ट टू टेल कम्प्यूटर्स एंड ह्यूमन्स अपार्ट) तंत्र सहित विभिन्न एप्लिकेशन-स्तरीय सुरक्षा नियंत्रण लागू किए गए हैं।

एप्लिकेशन सुरक्षा कमजोरियों के प्रबंधन के लिए ओडब्ल्युएएसपी (ओपन वेब एप्लिकेशन सिक्योरिटी प्रोजेक्ट) दिशानिर्देशों के अनुसार कई सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।

सिस्टम प्रदर्शन को अनुकूलित करने के लिए भारतीय रेल ने स्थिर सामग्री को ऑफ़लोड करने और इंटरनेट टिकट बुकिंग वेबसाइट प्रणाली पर सीधे ट्रैफ़िक को कम करने हेतु कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन) लागू किया है। इसके अलावा, एंटी-बॉट समाधान जैसे कि एकामाई (AKAMAI) का प्रयोग किया गया है, जो असत्यापित उपयोगकर्ताओं को फ़िल्टर करता है और इंटरनेट टिकट बुकिंग वेबसाइट प्रणाली पर दुर्भावनापूर्ण / संदिग्ध प्रयासों को कम करने में मदद करता है, जिससे वास्तविक यात्रियों के लिए सुचारू बुकिंग सुनिश्चित होती है। इससे दुर्भावनापूर्ण ट्रैफ़िक की निगरानी और नियंत्रण में सहायता मिलती है।

सिस्टम को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क फायरवॉल, घुसपैठ रोकथाम प्रणाली, एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसे कई सुरक्षा परतों का उपयोग किया गया है।

3. नेटवर्क और अवसंरचना स्तर सुरक्षा नियंत्रण – पूरे आईसीटी (इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज) अवसंरचना को उच्च उपलब्धता मोड पर तैनात किया गया है, जिससे विफलताओं को न्यूनतम किया जा सके।

सिस्टम को उद्योग-मानकों के अनुरूप, अत्याधुनिक और डेटा सेंटर ग्रेड नेटवर्क एवं सुरक्षा उपकरणों द्वारा सुरक्षित किया गया है, जिनमें नेटवर्क फायरवॉल, नेटवर्क घुसपैठ रोकथाम प्रणाली, एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल शामिल हैं।

सिस्टम को वॉल्यूम-आधारित डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमलों से भी सुरक्षित किया गया है, जिसमें इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) स्तर, डीडीओएस डिटेक्शन और शमन सेवाओं का उपयोग किया गया है। यह बहु-आईएसपी तंत्रों के माध्यम से संचालित होता है, जिनकी संयुक्त डीडीओएस शमन क्षमता लगभग 30 जीबीपीएस है।

उन्नत सुरक्षा, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, वेब ट्रैफ़िक लोड में कमी, संसाधन अनुकूलन और खतरे को कम करने के लिए एंटरप्राइज स्तर की कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन), एंटी-बॉट, सुरक्षित डीएनएस और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (डब्ल्यूएएफ) सेवाएँ तैनात की गई हैं।

व्यापक साइबर खतरा खुफिया सेवाओं के लिए, रेलटेल को डीप-डार्क वेब निगरानी, डिजिटल जोखिम सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया सुधार के कार्यों के लिए नियुक्त किया गया है।

4. भौतिक सुरक्षा नियंत्रण – सिस्टम नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित कैप्टिव डेटा सेंटर सुविधा में स्‍थापित किया गया है, जिसे सीसीटीवी निगरानी और सीमित भौतिक प्रवेश के माध्यम से सुरक्षित किया गया है। यह सुविधा आईएसओ 27001 (आईएसएमएस) प्रमाणित है।

5. सुरक्षा ऑडिट और निगरानी – सुरक्षा संबंधी घटनाओं और घटनाक्रम की 24×7 निगरानी के लिए सिस्टम को सीईआरटी-इन टीएसएपी (थ्रेट एवं सिचुएशनल अवेयरनेस प्रोजेक्ट्स) के साथ एकीकृत किया गया है।

सिस्टम को सीईआरटी-इन के “मधु-संजाल” के साथ एकीकृत किया गया है, जिसमें सीईआरटी-इन ने हमलावरों के व्यवहार, संदिग्ध घटनाओं/घुसपैठ प्रयासों की निगरानी, उनकी रणनीतियों का अध्ययन करने और साइबर खतरों के खिलाफ रक्षा को सुदृढ़ करने के लिए हनीपॉट सेंसर तैनात किया है।

सुरक्षा घटनाओं का पता लगाने और इन्हें न्‍यूनतम करने के लिए परिसर में तैनात सुरक्षा टीम द्वारा सिस्टम की सुरक्षा लॉग निगरानी की जा रही है।

6. प्रशासनिक उपाय – अनधिकृत पहुँच को रोकने और वास्तविक उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध बुकिंग सुनिश्चित करने हेतु कई धोखाधड़ी-रोधी उपाय अपनाए गए हैं।

– यूज़र अकाउंट्स का सख्त पुनःसत्यापन और जाँच की गई है। वर्ष 2025 में लगभग 3.03 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय की गई हैं।

–   आरक्षण प्रणाली के नियमित सुरक्षा ऑडिट सीईआरटी-इन द्वारा नामांकित सूचना सुरक्षा ऑडिट एजेंसियों द्वारा किए जाते हैं। इसके अलावा, टिकटिंग प्रणाली से संबंधित इंटरनेट ट्रैफ़िक की लगातार निगरानी सीईआरटी-इन और नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) द्वारा साइबर हमलों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए की जाती है।

– राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर 3.99 लाख संदिग्ध बुकिंग से संबंधित 376 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

– वर्ष 2025 में 12,819 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए हैं।

पिछले छह महीनों के दौरान ई-टिकटिंग प्रणाली तक पहुँचने के संदर्भ में असत्यापित प्रयासों के अस्वीकृत होने का विवरण इस प्रकार है:

दिसम्‍बर 2025 14.28 अरब अनुरोधों में से  07.25 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
नवम्‍बर 2025 20.07 अरब अनुरोधों में से 14.03 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
अक्‍तूबर 2025 24.04  अरब अनुरोधों में से 17.00  अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
सितम्‍बर 2025 19.04   अरब अनुरोधों में से 12.05 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
अगस्‍त 2025 11.04   अरब अनुरोधों में से 05.07 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।
जुलाई 2025 09.06   अरब अनुरोधों में से 05.03 अरब अनुरोध स्वचालित बॉट्स द्वारा किए गए थे।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा प्रदान की गई।

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पर्यटन के लिए गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए नए प्रयास

नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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रांची नगर निगम एवं नगर पंचायत बुंडू चुनाव 2026: मतदाताओं से अपील

अपना नाम, मतदान केंद्र और एपिक नंबर तुरंत जांचें; आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर उपलब्ध जानकारी

ranchi.nic.in पर सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध

मतदाता को अपने वार्ड सेक्शन में जाकर सर्च टूल का उपयोग करना होगा। यहां एपिक नंबर दर्ज करके सर्च किया जा सकता है

रांची,21.02.2026 – 23 फरवरी 2026 को होने वाले नगर निगम चुनाव को लेकर जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से सभी मतदाताओं से अपील की जाती है कि वे अपना वोटर लिस्ट में नाम, मतदान केंद्र (बूथ लोकेशन) और एपिक नंबर (वोटर आईडी) की जांच कर सकते है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और हर मतदाता बिना किसी परेशानी के अपना वोट डाल सके, आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

वेबसाइट पर चेक करें

मतदाता सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ranchi.nic.in पर जाएं। होमपेज पर ‘MUNICIPAL ELECTION RANCHI 2026’ सेक्शन में क्लिक करें। यहां ‘VOTER LIST RANCHI 2026’ या ‘Voter List BUNDU’ का विकल्प उपलब्ध होगा।

वार्ड-वार बूथ लिस्ट का उपयोग

वेबसाइट पर वार्ड नंबर के अनुसार बूथ लिस्ट डाउनलोड या देखने की सुविधा है। मतदाता अपना वार्ड नंबर चुनें (उदाहरण: वार्ड 1 से वार्ड 53 तक, रांची नगर निगम के अनुसार)। प्रत्येक वार्ड की लिस्ट में बूथ नंबर, लोकेशन (जैसे स्कूल, सामुदायिक केंद्र आदि) और मैप लिंक उपलब्ध है। इससे मतदाता आसानी से अपने मतदान केंद्र तक पहुंच सकेंगे।

एपिक नंबर द्वारा जांच

मतदाता को अपने वार्ड सेक्शन में जाकर सर्च टूल का उपयोग करना होगा। यहां एपिक नंबर दर्ज करके सर्च किया जा सकता है यदि नाम सूची में है, तो एपिक नंबर (EPIC Number) दिखाई देगा। एपिक नंबर एक 10-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड है, जो वोटर आईडी कार्ड पर अंकित होता है।

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नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026: कल 22 फरवरी को मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर से पोलिंग पार्टियों की रवानगी

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर का गहन निरीक्षण किया

सभी तैयारियां पूर्ण, राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी प्रक्रिया

रांची नगर निगम क्षेत्र तथा बुंडू नगर पंचायत क्षेत्र के मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को कल दिनांक 22 फरवरी 2026 को रवाना किया जाएगा

रांची,21.02.2026 – नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026 के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु रांची जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

इस निर्वाचन के अंतर्गत रांची नगर निगम क्षेत्र तथा बुंडू नगर पंचायत क्षेत्र* के मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को दिनांक 22 फरवरी 2026 को रवाना किया जाएगा। रवानगी का मुख्य केंद्र मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम डिस्पैच सेंटर बनाया गया है।

डिस्पैच सेंटर में मतदान सामग्री, बैलेट पेपर, सुरक्षा उपकरण, आवश्यक रिकॉर्ड, वाहन व्यवस्था, मतदान कर्मियों के लिए बैठने एवं प्रतीक्षा की उचित व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा बलों की तैनाती सहित सभी मूलभूत सुविधाएं पूर्ण रूप से सुनिश्चित कर ली गई हैं।

आज देर रात जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने मोरहाबादी फुटबॉल स्टेडियम स्थित डिस्पैच सेंटर का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया तथा संबंधित पदाधिकारियों, नोडल अधिकारियों एवं टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों, प्रक्रियाओं एवं समय-सारिणी का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मालूम हो क़ि निर्वाचन प्रक्रिया को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं निर्भय वातावरण में संपन्न कराना है। पोलिंग पार्टियों की समयबद्ध एवं सुचारु रवानगी, मतदान दिवस (23 फरवरी 2026) को शांतिपूर्ण मतदान तथा मतगणना तक की सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तरीय निगरानी में की जा रही हैं।

मतदान 23 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। रांची नगर निगम के 53 वार्डों में कुल 909 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।

जिला प्रशासन सभी मतदाताओं, प्रत्याशियों, राजनीतिक दलों एवं आम जनता से अपील करता है कि वे निर्वाचन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें, शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करें तथा राज्य निर्वाचन आयोग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी किसी भी निर्देश का पालन करें।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं यातायात, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।

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23 फरवरी 2026 को होने वाले राँची नगर निगम एवं बुण्डू नगर पंचायत निर्वाचन 2026 के सम्पूर्ण तैयारी विधि व्यवस्था संधारण को लेकर चुनाव से जुड़े सभी सम्बंधित पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक

उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर निगम चुनाव 2026), श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे, जो मोरहाबादी के रेड क्रॉस सोसाइटी में स्थापित किए गए है

राँची नगर निगम क्षेत्र के कुल 909 मतदान केंद्रों पर कुल – 422 एवं नगर पंचायत बुंडू क्षेत्र के कुल – 16 बूथों पर कुल -16 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है

रांची,21.02.2026 – जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा 23 फरवरी 2026 को होने वाले राँची नगर निगम एवं बुण्डू नगर पंचायत निर्वाचन 2026 के सम्पूर्ण तैयारी विधि व्यवस्था संधारण को लेकर चुनाव से जुड़े सभी सम्बंधित पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की गई।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं यातायात, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल तैनात किया जाए।

चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या बाधा न आने पाए।
मतदाताओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं। जानकारी हो कि कल दिनांक 22 फरवरी 2026 को मोरहाबादी अवस्थित डिस्पैच सेंटर से मतदान कर्मियों को रवाना किया जाएगा।

जानकारी हो क़ि मतदान केंद्रों में व्हील चेयर भी उपलब्ध कराया गया है। राँची नगर निगम क्षेत्र के कुल 909 मतदान केंद्रों पर कुल – 422 एवं नगर पंचायत बुंडू क्षेत्र के कुल – 16 बूथों पर कुल -16 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है। कुल – 438 व्हील चेयर उपलब्ध कराया गया है।

07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे

राँची नगर निगम में कुल 53 वार्डों के लिए 909 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 07 मतदान केंद्र पूर्ण रूप से महिला संचालित केंद्र रहेंगे, जो मोरहाबादी के रेड क्रॉस सोसाइटी में स्थापित रहेंगे।

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रांची प्रेस क्लब में 27 और 28 फरवरी को दो दिवसीय “वसंत मेला” का आयोजन किया जा जा रहा है

द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी की महिला पत्रकारों ने मंत्री दीपिका व नेहा शिल्पी तिर्की को दिया वसंत मेला में आने का आमंत्रण

द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी कर रही है दिवसीय बसंत मेले का आयोजन

रांची,21.02.2026। रांची प्रेस क्लब में 27 और 28 फरवरी को दो दिवसीय “वसंत मेला” का आयोजन किया जा जा रहा है। मेले की तैयारियों को लेकर वूमेंस वेलफेयर कमिटी जोर शोर से लगी हुई है।

इसी क्रम में आज द रांची प्रेस क्लब की वूमेंस वेलफेयर कमिटी की वरिष्ठ पत्रकार रेखा पाठक, प्रतिमा सिंह, और नेहा वारसी ने ग्रामीण विकास एवं पंचयती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की को मेला में आने का आमंत्रण विधान सभा परिसर के कार्यालय में दिया। इन्होने मेला में शिरकत करने का आश्वासन दिया है।

आयोजन को सफल और व्यवस्थित रूप देने के लिए एक सब-कमेटी का गठन भी क्लब में किया गया है। इसमें राजन बॉबी, अशोक गोप, चंदन वर्मा और विजय गोप शामिल हैं।

दो दिवसीय इस मेले में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में लगभग 35 स्टॉल लगाए जाएंगे. आगंतुकों के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों के फूड स्टॉल, आकर्षक परिधानों और हस्तशिल्प से सजे बुटीक स्टॉल, हेल्थ एवं वेलनेस से संबंधित काउंटर, बच्चों और युवाओं के लिए गेम्स जोन सहित कई अन्य स्टॉल उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा महिलाओं और परिवारों की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से कई मनोरंजक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा, जिनमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

स्टॉल बुकिंग के इच्छुक व्यवसायी और उद्यमी रांची प्रेस क्लब कार्यालय अथवा सदस्यों से संपर्क कर सकते हैं। स्टाल बुकिंग 24 फरवरी तक जारी रहेगा , उसके उपरांत लॉटरी सिस्टम से स्टॉल धारको को स्टॉल आवंटित किया जायेगा।

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वस्त्र मंत्रालय ने बजट के बाद उद्योग जगत के साथ पहला राष्ट्रीय विमर्श किया

वस्त्र मंत्रालय ने 19 फरवरी, 2026, गुरुवार को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में बजट उपरांत पहली राष्ट्रीय उद्योग विमर्श बैठक आयोजित की।  इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, विकास साझेदार और टेक्सटाइल वैल्यू चेन के प्रतिनिधि केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं के बाद कार्यान्वयन प्राथमिकता पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर आए।

विचार विमर्श बैठक में बजट में घोषित की गई दो विशेष पहलों – वस्त्र विस्तार एवं रोज़गार (टीईईएम) स्कीम और टेक्स इको पहल – को संचालित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इनका उद्देश्य टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में प्रतिस्पर्धा क्षमता, आधुनिकीकरण, स्थिरता और रोज़गार सर्जन को मज़बूत करना है।

 

वस्त्र मंत्रालय में अपर सचिव श्री रोहित कंसल ने स्वागत और विषय की शुरुआत संबंधी भाषण दिया। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि केंद्रीय बजट खास तौर पर वस्त्रकेंद्रित रहा है, जिसमें रोज़गार सर्जन और विनिर्माण वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा वैल्यू चेन में निवेश, नीति समर्थन और सांस्थानिक प्रयासों को अलाइन करने के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराती है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बजट विनिर्माण को व्यापक करने, घरेलू क्षमता को मज़बूत करने और वस्त्र को समावेशी वृद्धि और रोज़गार सर्जन के मुख्य चालक के तौर पर स्थापित करने के स्पष्ट इरादे का संकेत देता है।

विशेष भाषण में वस्त्र मंत्रालय में सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने बताया कि वैश्विक मुश्किलों के बीच मज़बूती से चलने वाले एक वर्ष के बाद, भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए उम्मीदें तेज़ी से बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि अब लागू हुए विशेष मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाज़ार के अवसर खोल रहे हैं, शुल्क प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ा रहे हैं और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की जगह मज़बूत कर रहे हैं।

उन्होंने ज़ोर दिया कि इन व्यापार समझौतों का विशेष  वस्त्रकेंद्रित केन्द्रीय बजट के साथ मिलना इस क्षेत्र के लिए समय पर और रणनीतिक फ़ायदा देता है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई बाज़ार पहुंच, नीतिगत स्पष्टता और फोकस्ड सरकारी समर्थन के साथ, उद्योग उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बनाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

वस्त्र विस्तार और रोज़गार मिशन पर विस्तृत प्रस्तुति में सिलाई, प्रोसेसिंग और गारमेंटिंग सेगमेंट को आधुनिक बनाने, निवेश जुटाने, एमएसएमई साझेदारी को मज़बूत करने और बड़े पैमाने पर रोज़गार सर्जन के लिए रूपरेखा बताई गई  है। इसके बाद टेक्स इको इनिशिएटिव की संक्षिप्त जानकारी दी गई।

उसका उद्देश्य टेक्सटाइल वैल्यू चेन में स्थिरता, सर्कुलरिटी, संसाधन दक्षता और हरित विनिर्माण परिपाटियों को मुख्यधारा में शामिल करना है।

इस विचार-विमर्श सत्र में संबंधित पक्षों ने अतिसक्रिय और रचनात्मक तरीके से हिस्सा लिया। उन्होंने टीईईएम और टेक्स इको के  भावी सोच वाले डिज़ाइन की तारीफ़ की और संरचनात्मक कमियों को दूर करने और वैश्विक अवसरों का फ़ायदा उठाने के लिए एकीकृत ढांचे का समर्थन किया।

उद्योग जगत ने व्यावहारिक सुझाव दिए, जिनमें समयबद्ध ढंग से अनुमति, बेहतर एमएसएमई फाइनेंसिंग, क्लस्टर अवसंरचना, लक्षित कौशल प्रदान करना, डिजिटल निगरानी और स्थिरता से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हैं।

इसके साथ ही राज्य के नीति और निर्यात उपायों के साथ तालमेल बिठाने की भी अपील की गई। ​​कई प्रतिभागियों ने व्यापक और एकीकृत वस्त्र पैकेज शुरू करने में सरकार की कोशिशों की तारीफ़ की।

श्री रोहित कंसल ने सारांश रूप में नीति के इरादे को ज़मीन पर ठोस, मापने लायक नतीजों में बदलने के लिए मिलकर काम करने के तरीके के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।

उन्होंने उद्योग जगत की अतिसक्रिय भागीदारी और साफ़ फ़ीडबैक के लिए तारीफ़ की उन्होंने कहा कि इस तरह के रचनात्मक विमर्श असरदार और जवाबदेह नीति बनाने को आकार देते रहेंगे।

उन्होंने उद्योग जगत से संबंधित पक्षों से मंत्रालय की टीम के साथ विस्तृत लिखित इनपुट और विशेष सुझाव साझा करने का आग्रह किया ताकि समय पर उन्हें अंतिम रूप दिया जा सके और असरदार तरीके से लागू किया जा सके।

सत्र का अंत वस्त्र आयुक्त श्रीमती वृंदा मनोहर देसाई के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने संबंधित पक्षों के कीमती योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने मंत्रालय के समय-बद्ध और परिणाम-उन्मुख कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

बजट के बाद राष्ट्रीय उद्योग विमर्श, संरचनात्मक सरकार, उद्योग संवाद को मजबूत करने और भरोसेमंद, प्रतिस्पर्धी और सतत वैश्विक वस्त्र केंद्र के तौर पर भारत की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए समन्वित रूपरेखा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम है।

चर्चाओं में सरकार और उद्योग के बीच भारत को भरोसेमंद और विश्वसनीय वैश्विक वस्त्र साझेदार के तौर पर स्थापित करने के साझा इरादे को दिखाया गया, जो स्केल, स्थिरता और विश्वसनीयता पर आधारित हो।

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आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड (आईसीपी) 2026 की समीक्षा की

नई दिल्ली – अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट समीक्षा (आईएफआर) 2026 के हिस्से के रूप में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड (आईसीपी) में जनता की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। यह एक प्रमुख जनसंपर्क पहल के रूप में कार्य करती है जो परिचालन क्षमता, औपचारिक प्रदर्शन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भारत के समुद्री लोकाचार को दर्शाती है।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस अब्दुल नज़ीर मुख्य इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित थे  और कार्यक्रम का संचालन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने किया। इस कार्यक्रम में राज्य के मंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख नौसेना प्रमुख और भाग लेने वाले मित्र देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख, भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक भी शामिल हुए।

भारतीय नौसेना, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और कर्मियों से युक्त परेड में शामिल टुकड़ियों के साथ-साथ भाग लेने वाली विदेशी नौसेनाओं, सी कैडेट कोर, राष्ट्रीय कैडेट कोर और राज्य पुलिस की टुकड़ियों ने परेड का मुख्य आकर्षण प्रस्तुत किया। पूर्ण वर्दी युक्‍त इन परेड और सांस्कृतिक टुकड़ियों ने विश्व भर की नौसेनाओं की साझा समुद्री परंपराओं, अनुशासन और पेशेवर सौहार्द को प्रतिबिंबित किया, जो एकता और सहयोग का प्रतीक था।

अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड की भव्यता में वृद्धि करते हुए  नौसेना और वायु सेना ने प्रदर्शन किया, जो भारतीय नौसेना की एकीकृत और बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं को दर्शाता है। नौसेना की विमान इकाइयों की भागीदारी ने समुद्री और हवाई अभियानों के बीच निर्बाध तालमेल को दर्शाया जिससे दर्शकों को नौसेना की पहुंच, बहुमुखी प्रतिभा और समुद्री हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की झलक मिली।

परिचालन और औपचारिक प्रदर्शनों के बाद, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सभा को संबोधित किया और अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड के महत्व को भारतीय नौसेनाभाग लेने वाली विदेशी नौसेनाओं और नागरिकों के बीच एक अद्वितीय संपर्क के रूप में रेखांकित किया। समुद्री सहयोग के स्थायी महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड समुद्र में अंतर्राष्ट्रीय सौहार्द की भावना को दर्शाती है और सहयोगविश्वास और सामूहिक समुद्री सुरक्षा के प्रति नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन पेशेवर संबंधों को मजबूत करके और इसमें शामिल होने वाले देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ाकर परिचालन संबंधी संवाद को पूरक बनाते हैं।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने अपने संबोधन में विशाखापत्तनम के एक प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड न केवल भारत की समुद्री शक्ति और व्यावसायिकता को प्रदर्शित करती हैबल्कि समुद्री और रक्षा क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की बढ़ती प्रमुखता को भी दर्शाती है।‘ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के समुद्री दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने में ऐसे वैश्विक आयोजनों के सकारात्मक प्रभाव का भी उल्‍लेख किया।

अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड का समापन बंदरगाह पर खड़े जहाजों की रोशनी से हुआ, जिसके बाद लेजर और ड्रोन शो और आतिशबाजी से एक शानदार दृश्य का निर्माण हुआ। इस आयोजन के दौरान तटवर्ती क्षेत्र और परेड मार्गों पर भारी भीड़ देखी गई। अंतर्राष्ट्रीय सिटी परेड का सफल आयोजन सुनियोजित योजना, प्रभावी अंतर-एजेंसी समन्वय और मजबूत जन सहयोग का प्रमाण था। नागरिक प्रशासन ने भारतीय नौसेना के साथ बेहतर समन्वय में व्यापक प्रशासनिक, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन व्यवस्था लागू की  जिससे कार्यक्रम का सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित हुआ।

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डॉ. मनसुख मांडविया दिल्ली में ईएसआईसी के साथ साइकिल पर 62वीं फिट इंडिया संडेज का नेतृत्व करेंगे, रूपिंदर पाल सिंह और रोहित टोकस भी शामिल होंगे

नई दिल्ली – भारत को 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का सफलतापूर्वक अधिकार मिलने का जश्न मनाते हुए, 22 फरवरी 2026 को देशभर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के सहयोग से 62वीं फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल का आयोजन किया जाएगा।
यह आयोजन ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के जश्न के साथ भी मेल खाता है, जो स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली के माध्यम से फिट इंडिया की भावना को मजबूत करता है।माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत 2019 में शुरू किया गया फिट इंडिया आंदोलन, भारत सरकार के एक स्वस्थ और सक्रिय राष्ट्र निर्माण के मिशन का आधार स्तंभ है, जो 2047 तक भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने के दीर्घकालिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ है। इस यात्रा में, अहमदाबाद, गुजरात को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का अधिकार दिया गया है, जबकि भारत ने 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अपनी बोली भी प्रस्तुत की है।

“भारत 20 वर्षों के अंतराल के बाद 2030 में एक बहु-विषयक आयोजन, कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। मोदी सरकार नीति सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास, प्रतिभा पहचान और एथलीट पोषण को कवर करने वाले एक सतत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के माध्यम से भारत को खेल शक्ति में बदलने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। हम माननीय प्रधानमंत्री के 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के दृष्टिकोण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे,” युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा।

“इसके साथ ही, फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल जैसी पहलें, जिसमें आगामी संस्करण ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के हिस्से के रूप में आयोजित हो रहा है, सामूहिक भागीदारी के माध्यम से एक फिट, सक्रिय और स्वस्थ भारत बनाने पर हमारे जोर को दर्शाती हैं।उन्होंने जोड़ा ऐसे कार्यक्रम फिटनेस को जन आंदोलन बनाने और भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए अविभाज्य हैं,” ।

गुजरात सरकार ने अहमदाबाद को विश्व स्तरीय खेल शहर में बदलने के उद्देश्य से खेल-केंद्रित बजट पेश किया है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को केवल एक खेल आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत की व्यापक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो शहरी बुनियादी ढांचे, गतिशील प्रणालियों और भविष्य के मेगा खेल आयोजनों के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करेगा।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा के लिए भारत की तैयारियां विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर योजना और संलग्नता के माध्यम से आकार ले रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय खेल शासन और ओलंपिक से जुड़े मंचों ने हाल की टिप्पणियों में भारत के प्रमुख खेल आयोजनों को शहरी गतिशीलता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक शहर नियोजन से जोड़ने के दृष्टिकोण को नोट किया है।भारत के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशनों के साथ जुड़ाव में भी अंतरराष्ट्रीय रुचि है, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आयोजन प्रोग्रामिंग और अनुशासन समावेशन से संबंधित विचार-विमर्श शामिल हैं।

ऐसे संपर्क भारत के मेजबानी योजनाओं को वैश्विक खेल ढांचों के साथ संरेखित करने और विभिन्न अनुशासनों में एथलीट भागीदारी को व्यापक बनाने के प्रयासों को दर्शाते हैं। ये विकास दर्शाते हैं कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स को व्यापक और सतत तरीके से आयोजित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बुनियादी ढांचागत क्षमताओं का निर्माण कर रहा है, जबकि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा को आगे बढ़ा रहा है।

“भारत 20 वर्षों के अंतराल के बाद 2030 में एक बहु-अनुशासनिक आयोजन, कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। मोदी सरकार नीति सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास, प्रतिभा पहचान और एथलीट पोषण को कवर करने वाले एक सतत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के माध्यम से भारत को खेल शक्ति में बदलने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। हम माननीय प्रधानमंत्री के 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के दृष्टिकोण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे,” युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा।“इसके साथ ही, फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल जैसी पहलें, जिसमें आगामी संस्करण ईएसआईसी की सेवा और सामाजिक सुरक्षा के 75 वर्षों के हिस्से के रूप में आयोजित हो रहा है, सामूहिक भागीदारी के माध्यम से एक फिट, सक्रिय और स्वस्थ भारत बनाने पर हमारे जोर को दर्शाती हैं। ऐसे कार्यक्रम फिटनेस को जन आंदोलन बनाने और भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए अविभाज्य हैं,” उन्होंने जोड़ा।

गुजरात सरकार ने अहमदाबाद को विश्व स्तरीय खेल शहर में बदलने के उद्देश्य से खेल-केंद्रित बजट पेश किया है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को केवल एक खेल आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत की व्यापक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जो शहरी बुनियादी ढांचे, गतिशीलता प्रणालियों और भविष्य के मेगा खेल आयोजनों के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करेगा।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा के लिए भारत की तैयारियां विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर योजना और संलग्नता के माध्यम से आकार ले रही हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल शासन और ओलंपिक से जुड़े मंचों ने हाल की टिप्पणियों में भारत के प्रमुख खेल आयोजनों को शहरी गतिशीलता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक शहर नियोजन से जोड़ने के दृष्टिकोण को नोट किया है।भारत के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशनों के साथ जुड़ाव में भी अंतरराष्ट्रीय रुचि है, जिसमें 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आयोजन प्रोग्रामिंग और अनुशासन समावेशन से संबंधित विचार-विमर्श शामिल हैं। ऐसे संपर्क भारत के मेजबानी योजनाओं को वैश्विक खेल ढांचों के साथ संरेखित करने और विभिन्न अनुशासनों में एथलीट भागीदारी को व्यापक बनाने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

ये विकास दर्शाते हैं कि भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को व्यापक और सतत तरीके से आयोजित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बुनियादी ढांचागत क्षमताओं का निर्माण कर रहा है, जबकि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा को आगे बढ़ा रहा है।डॉ. मांडविया द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू की गई फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल फिटनेस, पर्यावरण चेतना और सतत गतिशीलता को बढ़ावा देती है। यह पहल एक राष्ट्रीय जन आंदोलन में विकसित हो चुकी है, जिसमें 2 लाख से अधिक स्थानों पर 25 लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया है।

इस रविवार, डॉ. मांडविया प्रतीकात्मक मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम से एक बड़ी साइकिलिस्ट समूह का नेतृत्व करेंगे, जिसमें ओलंपिक कांस्य पदक विजेता रूपिंदर पाल सिंह और कॉमनवेल्थ गेम्स कांस्य पदक विजेता रोहित टोकस भी शामिल होंगे। सभी आयु वर्गों, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित योग, रस्सी कूद और जुम्बा जोन भी स्थापित किए जाएंगे।रूपिंदर पाल सिंह भारत की पुरुष हॉकी टीम के प्रमुख सदस्य थे, जिसने टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता।

उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण (2014) और कांस्य (2018) पदक, 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक, तथा एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग और एशियन चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट्स में कई पोडियम फिनिश हासिल किए हैं। 223 अंतरराष्ट्रीय मैचों और 125 गोलों के साथ, रूपिंदर को अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिक विशेषज्ञों में से एक माना जाता है।रोहित टोकस, एक कुशल भारतीय मुक्केबाज, ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता है और वर्तमान में अपने टोकस बॉक्सिंग क्लब के माध्यम से युवा एथलीटों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जो अगली पीढ़ी के कॉम्बैट-स्पोर्ट एथलीटों के विकास में योगदान दे रहे हैं।

फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल के पूर्व संस्करणों में भारतीय सेना, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू), जीएसटी काउंसिल और भारत फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन (पीईएफआई) जैसे संगठनों के कर्मियों ने उत्साहपूर्ण भागीदारी की है। इस पहल को ग्रेट खली, लवलीना बोरगोहैन, प्रियंका गोस्वामी, रानी रामपाल, दीपिका कुमारी, अतनु दास, तथा पेरिस पैरालंपिक पदक विजेता नितेश कुमार, मनीषा रामदास, रुबीना फ्रांसिस और सिमरन शर्मा जैसे प्रसिद्ध खिलाड़ियों का भी समर्थन प्राप्त है।

प्रसिद्ध फिल्म हस्तियां आयुष्मान खुराना, रोहित शेट्टी, सैयामी खेर, शर्वरी, अमित सियाल, राहुल बोस, मधुरिमा तुली, मिया मेल्जर और गुल पनाग ने भी फिट इंडिया आइकॉन के रूप में अपना समर्थन दिया है।फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल का आयोजन युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) द्वारा इंडियन साइक्लिंग फेडरेशन (सीएफआई), इंडियन रोप स्किपिंग फेडरेशन, योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन, एमवाई बाइक्स और एमवाई भारत के सहयोग से किया जाता है। साइकिलिंग अभियान सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में एक साथ आयोजित किया जाता है, जिसमें एसएआई क्षेत्रीय केंद्र, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी), खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (केआईएससीई) और खेलो इंडिया केंद्र (केआईसी) शामिल हैं।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन ने कृषि कौशल और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन (डीआरएफ) ने हैदराबाद स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (आईसीएआर-एनएएआरएम) कार्यालय में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना, किसान विस्तार सेवाओं को मजबूत करना और आधुनिक कृषि पद्धतियों में क्षमता निर्माण करना है।

 

यह पहल कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट के समग्र मार्गदर्शन में की जा रही है। इस साझेदारी के लिए रणनीतिक समन्वय और संस्थागत अभिसरण को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (समन्वय) डॉ. अनिल कुमार द्वारा सुगम बनाया जा रहा है।

हैदराबाद के राजेंद्र नगर स्थित आईसीएआर-एनएएआरएम में दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते को औपचारिक रूप दिया गया जो कृषि विकास और कौशल संवर्धन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

समझौता ज्ञापन के दस्तावेज औपचारिक रूप से डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के निदेशक (ग्रामीण आजीविका) श्री सुमन एस. और आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह द्वारा आईसीएआर-एनएएआरएम हैदराबाद के निदेशक, आईसीएआर-एटीआरआई हैदराबाद के निदेशक, आईसीएआर-एटीआरआई बेंगलुरु के निदेशक और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन, हैदराबाद के वरिष्ठ तकनीकी सहयोगियों की उपस्थिति में एक-दूसरे को सौंपे गए।

सहयोग का रणनीतिक ढांचा

इस समझौता ज्ञापन के तहत आईसीएआर और डॉ. रेड्डी फाउंडेशन कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विकास और वितरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए कई मोर्चों पर सहयोग करेंगे। छोटे और सीमांत किसानों की क्षमता निर्माण के लिए डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के लीड फार्मर्स प्लेटफॉर्म (एलएफपी) मॉडल का उपयोग किया जाएगा।

जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और टिकाऊ खेती के तरीकों पर संयुक्त अनुसंधान पहलों को आईसीएआर की तकनीकी विशेषज्ञता को डीआरएफ के समुदाय-आधारित विस्तार मॉडल के साथ एकीकृत करके बढ़ाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी और कृषि और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

पूरक शक्तियों का लाभ उठाना

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान, विस्तार, ज्ञान प्रबंधन, क्षमता निर्माण और नीतिगत वकालत में लगभग दस दशकों की विशेषज्ञता रखता है। परिषद भारत भर में फैले तकनीकी मार्गदर्शन, पाठ्यक्रम विकास सहायता और अपने कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करेगी।

डॉ. रेड्डी फाउंडेशन ने अपने एकीकृत विकास कार्यक्रमों के माध्यम से 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है जिसमें विशेष रूप से युवाओं, दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) और ग्रामीण समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। फाउंडेशन के प्रमुख एमआईटीआरए कार्यक्रम ने कई राज्यों में 80 हजार से अधिक किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने में सफलतापूर्वक सक्षम बनाया है, जो इसके किसान-से-किसान विस्तार मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

अपेक्षित परिणाम

यह सहयोग कई प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:

  • व्यावसायिक कौशल विकास : राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा डीआरएफ को हाल ही में एक पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था (मानक) के रूप में मान्यता मिलने के आधार पर, यह साझेदारी उद्योग-संरेखित कृषि-कौशल कार्यक्रमों का विकास और वितरण करेगी।
  • मृदा स्वास्थ्य से एक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर संक्रमण : यह साझेदारी एक स्वास्थ्य प्रणाली के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए बायोचार-आधारित और मृदा जैविकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देगी, साथ ही जलवायु-टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन और कार्बन प्रोत्साहन को आगे बढ़ाएगी।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए लचीलापन : यह सहयोग प्रौद्योगिकी-सक्षम विस्तार, कार्बन-प्रोत्साहित-संसाधन-कुशल प्रथाओं और स्थानीय रूप से अनुकूलित जलवायु-जोखिम शमन रणनीतियों के माध्यम से किसानों को जलवायु-स्मार्ट, पुनर्योजी कृषि अपनाने में मार्गदर्शन करेगा।
  • कृषि विस्तार सेवाएं एवं बाज़ार संपर्क : यह सहयोग लीड फार्मर्स प्लेटफॉर्म को व्यापक स्तर पर विस्तारित करेगा ताकि सीमांत तक पहुंचने वाली विस्तार सेवाओं की कमियों को दूर किया जा सके और साथ ही छोटे एवं सीमांत किसानों के बाज़ार संपर्कों, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता को मजबूत किया जा सके और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संरेखण

यह साझेदारी देश के कृषि कार्यबल के लिए समावेशी, लचीले और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण मार्ग बनाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है। यह सहयोग कौशल भारत मिशन और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति, किसानों की आय दोगुनी करने की पहल, जलवायु-अनुकूल कृषि और सतत विकास लक्ष्यों सहित प्रमुख सरकारी पहलों के अनुरूप है। राष्ट्रीय ऋण ढांचा (एनसीआरएफ) के साथ एनसीवीईटी के माध्यम से यह तालमेल शिक्षार्थियों को क्रेडिट अर्जित करने और स्थानांतरित करने में सक्षम बनाएगा जिससे कृषि में व्यावसायिक विकास और निरंतर शैक्षणिक उन्नति दोनों को समर्थन मिलेगा।

इस समझौता ज्ञापन के तहत विकसित कार्यक्रम उन अनेक राज्यों में लागू किए जाएंगे जहां दोनों संगठनों की परिचालन उपस्थिति है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश पर प्रारंभिक ध्यान केंद्रित होगा।

नेतृत्व से उद्धरण

इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन कृषि में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीएआर की अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं को डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के सिद्ध सामुदायिक सहभागिता मॉडल के साथ मिलाकर, हमारा लक्ष्य ग्रामीण आजीविका और कृषि स्थिरता पर स्थायी प्रभाव पैदा करना है।

डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि 80 हजार से अधिक किसानों के साथ काम करने के हमारे अनुभव ने हमें गुणवत्तापूर्ण विस्तार सेवाओं और कौशल विकास के महत्व को दिखाया है।

आईसीएआर के साथ यह साझेदारी हमें तकनीकी सटीकता और राष्ट्रीय ढांचों के साथ तालमेल सुनिश्चित करते हुए अपने प्रभाव को बढ़ाने में मदद करेगी। हम विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों, जिनमें दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल हैं, के लिए इससे उत्पन्न होने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

कार्यान्वयन समयरेखा और निगरानी

यह समझौता ज्ञापन 16 फरवरी, 2026 से प्रभावी है। प्रारंभ में यह समझौता 5 वर्षों के लिए वैध रहेगा जिसमें आपसी सहमति और प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर नवीनीकरण का प्रावधान है। दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त निगरानी समिति कार्यान्वयन की देखरेख करेगी, सहमत लक्ष्यों के सापेक्ष प्रगति पर नजर रखेगी और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने को सुनिश्चित करेगी।

यह साझेदारी जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए आईसीएआर अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और ग्रामीण भारत में डॉ. रेड्डी फाउंडेशन के क्षेत्रीय केंद्रों के नेटवर्क सहित मौजूदा बुनियादी ढांचे का भी लाभ उठाएगी।

संगठनों के बारे में

आईसीएआर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भारत में एक स्वायत्त निकाय है जो कृषि अनुसंधान और शिक्षा के समन्वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। 16 जुलाई, 1929 को स्थापित  इस संस्थान का  मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह विश्व की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि प्रणालियों में से एक का संचालन करता है जिसमें 113 संस्थान और 74 विश्वविद्यालय शामिल हैं।

आईसीएआर का जनादेश कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशु विज्ञान में अनुसंधान और शिक्षा को शामिल करता है ताकि खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और इसने हरित क्रांति और उसके बाद के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे खाद्यान्न, दूध और मछली उत्पादन में भारी वृद्धि संभव हुई है। यह कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के अधीन कार्यरत है। केंद्रीय कृषि मंत्री आईसीएआर सोसायटी के अध्यक्ष हैं।

डीआरएफ: डॉ. रेड्डीज़ फाउंडेशन (डीआरएफ) डॉ. रेड्डीज़ परिवार द्वारा स्थापित एक पारिवारिक ट्रस्ट है जो 1996 से शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक विकास में स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए कार्यरत है। फाउंडेशन ने युवाओं, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ग्रामीण कृषि समुदायों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 20 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्रमों में मित्रा (ग्रामीण आजीविका), सशक्त (बालिका शिक्षा), ग्रो (व्यावसायिक प्रशिक्षण) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) शामिल हैं। दिसंबर 2025 में, फाउंडेशन को एनसीवीईटी द्वारा एक पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई जिससे यह अनुमोदित योग्यताओं में शिक्षार्थियों को पुरस्कार प्रदान करने, उनका मूल्यांकन करने और उन्हें प्रमाणित करने में सक्षम हो गया।

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सेशेल्स गणराज्य के उपराष्ट्रपति, महामहिम सेबेस्टियन पिल्लई ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की

नई दिल्ली – सेशेल्स गणराज्य के उपराष्ट्रपति, महामहिम सेबेस्टियन पिल्लई ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में माननीय उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन से भेंट की।

 

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा में सहयोग बढ़ाने, ट्रांसशिपमेंट के अवसरों को तलाशने और दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच में सुधार के महत्व पर जोर दिया। नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत के व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, पूरे सेशेल्स में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के विस्तार पर भी चर्चा की।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य और आवास क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें जन-केंद्रित और  सस्टेनेबल डेवलपमेंट पहलों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो सीधे नागरिकों को लाभान्वित करती हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि भारत और सेशेल्स इस वर्ष राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने दोनों राष्ट्रों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रवासी संबंधों और सुदृढ़ सांस्कृतिक एवं आपसी जन-संपर्क की सराहना की और आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को इसकी पूर्ण क्षमता तक ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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MSP पर खरीद को और सुदृढ़, पारदर्शी एवं समयबद्व करने के निर्देश – श्री शिवराज सिंह चौहान

 नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान  ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास 12, सफदरजंग पर National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India Ltd (NAFED) (नाफेड) की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में दलहन एवं तिलहन की खरीद व्यवस्था, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ सुनिश्चित करने तथा संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान मूल्य समर्थन योजना (PSS) एवं मूल्य स्थिरीकरण निधि (PSF) के अंतर्गत संचालित खरीद कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि MSP पर खरीद को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य बिना किसी विलंब के प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर बल दिया कि खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध हों और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विशेष रूप से तुअर, उड़द तथा मसूर जैसी प्रमुख दलहनों के उत्पादन एवं खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। इन फसलों के लिए प्रस्तावित 6 वर्षीय “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” के तहत उत्पादन वृद्धि, उन्नत बीजों की उपलब्धता, तकनीकी सहयोग एवं प्रभावी विपणन तंत्र विकसित करने पर चर्चा हुई। इस मिशन का उद्देश्य देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।

 

श्री चौहान ने कहा कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्यों के साथ समन्वय मजबूत किया जाए तथा खरीद एवं भंडारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहे और किसानों के हितों की रक्षा हो सके।

बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव  डॉ देवेश चतुर्वेदी, अपर सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा,  अपर सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी,  नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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जनजातीय विरासत के संरक्षण हेतु ‘मेरी परंपरा-मेरी विरासत’ विषय पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया

नई दिल्ली – पंचायती राज मंत्रालय ने नई दिल्ली में “मेरी परंपरा- मेरी विरासत” विषय पर एक दिवसीय विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), शिक्षाविदों, विद्वानों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों, पंचायत प्रतिनिधियों और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के नेताओं ने भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन पंचायती राज मंत्रालय ने IGNCA, संस्कृति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से किया।

सत्र को संबोधित करते हुए श्री विवेक भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि परंपराएं और रीति-रिवाज किसी समुदाय की पहचान होते हैं और इनके लुप्त होने से उसका विशिष्ट चरित्र नष्ट हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यह पहल अपने समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए उल्लेखनीय है, जो जनजातीय विरासत के सभी पहलुओं को व्यापक रूप से कवर करती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समुदायों द्वारा स्वयं दस्तावेजीकृत और संरक्षित विरासत प्रामाणिक और स्थायी मूल्य रखती है, और उन्होंने साझा उद्देश्य से प्रेरित सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह ने राज्य के कार्यान्वयन ढांचे को प्रस्तुत किया और इस पहल में भागीदार बनने की तत्परता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की समृद्ध जनजातीय विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराएं इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि जनजातीय परंपराओं का दस्तावेजीकरण स्थानीय स्तर पर, उन लोगों द्वारा किया जाना जो इन परंपराओं को जानते और जीते हैं, प्रामाणिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय परंपराओं का डिजिटलीकरण जीवित विरासत को संरक्षित करने, युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी सांस्कृतिक कथा पर समुदाय के स्वामित्व को मजबूत करने में सहायक होगा।

राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन के अंतर्गत ‘मेरा गाँव मेरी धरोहर (एमजीएमडी)’ पोर्टल के उन्नयन पर भी एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें इसे संस्कृति मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में उजागर किया गया। इसके तहत, ग्राम सभा को ग्राम-स्तरीय सांस्कृतिक प्रलेखन के प्राथमिक मंच के रूप में अपनाया गया है, और पंचायतों में संरचित ग्राम सभा बैठकों के माध्यम से व्यवस्थित डेटा संग्रह और सत्यापन संभव हो पाता है।

विचार-विमर्श सत्र दो व्यापक विषयों पर केंद्रित था: छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रलेखन और डिजिटल संरक्षण, और परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कार्यान्वयन ढांचे को अंतिम रूप देना। दस विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा आयोजित की गई: ज्ञान परंपराएँ (दर्शन, मौखिक परंपराएँ, चिकित्सा पद्धतियाँ); दृश्य और भौतिक कलाएँ (मूर्तिकला, वस्त्र); प्रदर्शन कलाएँ (नृत्य, संगीत, कठपुतली); प्रथाएँ और अनुष्ठान (त्योहार, व्यंजन, जीवन-चक्र अनुष्ठान); इतिहास (स्थान, आंदोलन, सामाजिक परिवर्तन); साहित्य और भाषाएँ (लेखक, रचनाएँ, भाषा इतिहास); निर्मित स्थान (पूजा स्थल, स्मारक, ऐतिहासिक स्थल); प्राकृतिक पर्यावरण (पारिस्थितिकी तंत्र, देशी प्रजातियाँ, राष्ट्रीय उद्यान); संस्थान (संग्रहालय, विश्वविद्यालय, सांस्कृतिक केंद्र); और लोग (कलाकार, विद्वान, व्यवसायी)।

पृष्ठभूमि

“मेरी परंपरा- मेरी विरासत” पहल पंचायती राज मंत्रालय द्वारा परिकल्पित और समर्थित है। इसे राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का व्यापक दस्तावेजीकरण और डिजिटल संरक्षण करना है, जिसमें उनके लोकगीत, त्योहार, पूजा पद्धतियाँ, मौखिक परंपराएँ, कला रूप और पारंपरिक शासन प्रणाली शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ इस पहल को अपनाने वाला दूसरा राज्य है। जनसंपर्क मंत्रालय द्वारा परिकल्पित और समर्थित यह अभियान सर्वप्रथम झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा 26 जनवरी 2025 को “हमारी परंपरा हमारी विरासत” विषय के अंतर्गत शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों की पारंपरिक शासन प्रणाली से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। छत्तीसगढ़ में 42 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियाँ हैं, जिनमें विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (पीवीटीजी) भी शामिल हैं, जो इस प्रयास के लिए एक समृद्ध और विविधतापूर्ण पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता।

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संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील के संचार मंत्री श्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो ने भारत-ब्राजील दूरसंचार सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय बैठक की

नई दिल्ली – दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए आज संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील गणराज्य के संचार मंत्री श्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो के बीच एक द्विपक्षीय बैठक हुई।

इन चर्चाओं से भारत और ब्राजील के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि हुई और समावेशी विकास, सामाजिक-आर्थिक विकास और तकनीकी संप्रभुता के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी को एक मूलभूत स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया। ब्रिक्स ढांचे में प्रमुख साझेदारों के रूप में, दोनों पक्षों ने लचीले, भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल इको-सिस्टम को आकार देने के महत्व पर बल दिया।

 

ब्राज़ील के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने ब्राज़ील पक्ष को भारत सरकार द्वारा पिछले ग्यारह वर्षों में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामर्थ्य को बढ़ावा देने और समावेशी कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए किए गए व्यापक प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सबसे कम डेटा दरों इंटरनेट सुविधा प्रदान करने की भारत की उपलब्धि के बारे में बताया और नागरिकों को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए “सेवाओं का एक व्यापक पैकेज” सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

उपग्रह संचार एक प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में उभरा। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया में उपग्रह संचार एक रणनीतिक भूमिका निभाएगा, और भारत में उपग्रह आधारित सेवाएं शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि भारत और ब्राजील जैसे भौगोलिक रूप से विशाल देशों के लिए, कम सेवा वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का विस्तार करना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि एक दायित्व है।

श्री सिंधिया ने भारतनेट परियोजना की प्रगति के बारे में बताया कि यह विश्व के सबसे बड़े ग्रामीण ऑप्टिकल फाइबर वितरण कार्यक्रमों में से एक है और इसका उद्देश्य देश भर की ग्राम पंचायतों को जोड़ना है। इस परियोजना में महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश का सहयोग प्राप्त है। उन्होंने आधार और यूपीआई सहित इंडिया स्टैक पहलों के बारे में भी विस्तार से बताया और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के परिणामस्वरूप मोबाइल आधारित डिजिटल लेनदेन में हुई तीव्र वृद्धि का उल्लेख किया।

 

ब्राजील की ओर से भारत की डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के परिचालन ढांचे को समझने में रुचि व्यक्त की गई, और श्री सिंधिया ने इसके वित्तपोषण तंत्र के बारे में विस्तार से बताया। इसमें 5 प्रतिशत समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) योगदान मॉडल भी शामिल है और यह ग्रामीण और दूरस्थ कनेक्टिविटी परियोजनाओं का समर्थन करता है।

ब्राजील के मंत्री ने दूरसंचार क्षेत्र में सुनियोजित सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि व्यक्त की और डिजिटल समावेशन के लिए ब्राजील की पहलों के बारे में बताया, जिनमें अमेज़न क्षेत्र में लगभग 40,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के लिए लगभग 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश वाला एक बड़ा कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने पीआईएक्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में ब्राजील की सफलता को भी रेखांकित किया और उपग्रह और पनडुब्बी कनेक्टिविटी पहलों में देश की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।

श्री सिंधिया ने 5जी नवाचार और इसके उपयोग के पहलुओं पर भारत के विशेष ध्यान पर बल दिया। इसमें उद्योग-अकादमिक सहयोग और अनुप्रयोग-आधारित तैनाती को बढ़ावा देने के लिए देश भर में 5जी के लिए 100 उपयोग केस प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल है। साइबर सुरक्षा को सहयोग के एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया, इसमें भारत ने सुरक्षित नेटवर्क, दूरसंचार धोखाधड़ी की रोकथाम और लचीले डिजिटल बुनियादी ढांचे में ब्राजील के साथ सहयोग को मजबूत करने की तत्परता व्यक्त की। ब्राजील के बढ़ते 5जी ग्राहक आधार को ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के अवसर के रूप में देखा गया।

दोनों पक्षों ने नियमित आधिकारिक स्तर के परामर्शों, संयुक्त कार्य योजना के विकास और परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख हितधारकों की पहचान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही समावेशी, नवाचार-संचालित और सुरक्षित डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में एआई और डीपटेक स्टार्टअप्‍स के सीईओ के साथ गोलमेज सम्मेलन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने  सेवा तीर्थ में एआई और डीपटेक स्टार्टअप के सीईओ के साथ एक गोलमेज बैठक की।

नई दिल्ली – इस गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने वाले स्टार्टअप्‍स प्रमुख सेक्‍टरों में जनसंख्या-स्तरीय चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा में, वे उन्नत निदान, जीन थेरेपी और कुशल रोगी रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए एआई का उपयोग करते हैं जिससे कि अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचाई जा सके।

कृषि में, वे उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु जोखिमों के प्रबंधन में सहायता के लिए भू-स्थानिक और अंडरवॉटर इंटेलीजेंस का लाभ उठाते हैं। इस समूह में साइबर सुरक्षा, नैतिक एआई, अंतरिक्ष, न्याय और शिक्षा तक स्थानीय भाषा में पहुंच के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण और उद्यम उत्पादकता को सुदृढ़ करने के लिए पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित उद्यम भी शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक ऐसे इकोसिस्‍टम का प्रतिनिधित्व करते हैं जो स्थानीय आवश्‍यकताओं को पूरा करते हुए एआई-संचालित नवोन्‍मेषण में वैश्विक नेतृत्व का निर्माण करता है।

एआई स्टार्टअप्स ने भारत द्वारा अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस सेक्‍टर के तीव्र विस्तार और अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई नवोन्‍मेषण और तैनाती की वैश्विक गति तेजी से भारत की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि देश अब एआई विकास के लिए एक सहायक और गतिशील वातावरण प्रदान करता है, जिससे वैश्विक एआई परिदृश्य में इसकी मजबूत उपस्थिति स्थापित हो रही है। उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की भी प्रशंसा की और इसे एआई से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को आकार देने में देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब बताया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने साहसिक कदम उठाने और प्रभावशाली समाधान विकसित करने वाले नवप्रवर्तकों को बधाई दी। उन्होंने कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न सेक्‍टरों में एआई प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, जिसमें मृदा स्वास्थ्य की रक्षा के लिए फसल उत्पादकता और उर्वरक उपयोग की निगरानी शामिल है। भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए एआई टूल्‍स के विस्तार का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ डेटा प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया, गलत सूचनाओं के प्रति सावधान किया और भारत की आवश्‍यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने का आग्रह किया।

यूपीआई को सरल और विस्तार योग्य डिजिटल नवोन्‍मेषण का एक मॉडल बताते हुए, उन्होंने भारतीय कंपनियों में विश्वास जताया और घरेलू उत्पादों पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अंतरिक्ष सेक्‍टर में निजी भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही और भारतीय स्टार्टअप्‍स में निवेशकों की मजबूत रुचि का उल्लेख किया।

इस बैठक में एब्रिज, अदालत एआई, ब्रेनसाइटएआई, क्रेडो एआई, एका केयर, ग्लीन, इनोगल, इनवीडियो, माइको, ओरिजिन, प्रोफेज़, रासेन, रूब्रिक, सैटश्योर, सुपरनोवा और साइफा एआई के सीईओ और संस्थापक उपस्थित थे। प्रधान सचिव श्री पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 श्री शक्तिकांत दास और राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद भी बैठक में उपस्थित थे।

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