नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज भोपाल में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति की 89वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों और उसके आसपास स्थित वन्यजीव संरक्षण और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा की। पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और निर्धारित जोखिमों को कम करने या रोकने के उपायों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों की जांच पड़ताल की गई।
समिति ने संचार अवसंरचना, ऑप्टिकल फाइबर केबल, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, सड़क परियोजनाएं, पेयजल आपूर्ति, तापीय ऊर्जा, रक्षा, सिंचाई और अन्य अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में कुल 58 नए प्रस्तावोंपर विचार किया।
समिति ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों पर भी विचार-विमर्श किया। इनमें डॉल्फिन, घड़ियाल आदि जैसे जलीय जीवों के संरक्षण के लिए चंबल नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बनाए रखने का पारिस्थितिक महत्व, बाघ अभ्यारण्यों के भीतर स्थित गांवों के सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक पहलुओं की स्थिति, वन्यजीव प्रबंधन के लिए घास के मैदानों का महत्व और मानव-तेंदुआ संबंधों की वर्तमान चुनौतियों के प्रबंधन की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
बैठक में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद और केंद्रीय जल आयोग सहित वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों की भागीदारीपर भी जोर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संरक्षण नीतियों को मजबूत अनुसंधान और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय द्वारा समर्थित किया जा सके।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसे वन्यजीवों और वनों के संरक्षण और सुरक्षा से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी इसका दायित्व है कि संरक्षित क्षेत्रों में और उसके आसपास विकास गतिविधियों को स्थायी और संतुलित तरीके से किया जाए।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आज भोपाल में केंद्रीय प्लेटफॉर्म (तीसरा चरण – क्षमता विकास सहायता) के अंतर्गत उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सभी एनआईआरएएनटीएआर संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
क्षमता विकास खंड के प्रमुख संस्थान के रूप में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल ने उठाए गए क्षमता निर्माण पहलों एवं एनआईआरएएनटीएआर प्लेटफॉर्म के अंतर्गत भविष्य की विस्तृत योजना प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति में अल्पकालिक एवं मध्यकालिक कार्य योजनाओं, वैज्ञानिक विकास कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं शामिल होने वाले संस्थानों के बीच सहयोगात्मक पहलों का विवरण दिया गया। समन्वित प्रशिक्षण प्रयासों को मजबूत करने, मिश्रित प्रशिक्षण योजनाओं को विकसित करने और संस्थानों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनआईआरएएनटीएआर को संस्थागत तालमेल बढ़ाने, मांग-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा वानिकी एवंपर्यावरण क्षेत्रों में पेशेवर क्षमता निर्माण के लिए एक सहयोगात्मक तंत्र के रूप में परिकल्पित किया गया है।
श्री भूपेंद्र यादव ने सतत वन प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन सहित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संस्थागत प्रयासों के एकीकृत नियोजन, नवाचार एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी संस्थानों प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का
नई दिल्ली – वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), भारत सरकार ने 27-28 फरवरी, 2026 को बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) अकादमी, अहमदाबाद में एक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएबी), सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों (पीएसआईसी), क्षेत्रीय नियामकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) में भारत सरकार की आरक्षण नीति के कार्यान्वयन तथा दिव्यांगजनों के लिए वित्तीय सेवाओं की सुगम्यता बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित थी।
इस कार्यशाला का आयोजन सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी उपायों के समान और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। यह आयोजन समावेशिता को बढ़ावा देने और वित्तीय सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी पुख्ता करता है।
इस कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, 7 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और 7 सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सुगम्य भारत पहल के तहत, सुगम्यता मानकों (एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स) और कम्प्लायंस आवश्यकताओं पर एक सेंसिटाइज़ेशन सेशन आयोजित किया गया। इसके बाद सुगम्यता से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर एक राउंडटेबल चर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक चुनौतियों, निर्धारित लक्ष्यों और वास्तविक स्थिति पर विचार-विमर्श किया और विभिन्न संस्थानों में सुगम्यता बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।
कार्यशाला का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने ऑपरेशनल संबंधी चुनौतियों और वित्तीय सेवा इकोसिस्टम में समावेशिता, सुगम्यता और आरक्षण नीतियों के समान कार्यान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु व्यावहारिक उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली – माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय मार्च 2026 में कई ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहलों का आयोजन कर रहा है। ये सभी पहलें मिलकर जनजातीय विरासत के संरक्षण, रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, उद्यमिता को सशक्त करने, बाज़ार तक पहुंच का विस्तार करने तथा सतत जनजातीय विकास के लिए कॉरपोरेट साझेदारियों को मज़बूत करने का एक समेकित ढांचा प्रस्तुत करती हैं।
आज आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने इन पहलों की व्यापक रूपरेखा और रणनीतिक दृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आगामी कार्यक्रमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि जनजातीय समुदायों को सांस्कृतिक संरक्षण, उद्यम विकास और राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में रखते हुए दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर माननीय केंद्रीय मंत्री ने ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट’, ‘लिविंग रूट्स फेस्टिवल – साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया’ और ‘भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026’ के लोगो (Logo) का भी औपचारिक अनावरण किया।
इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके, रंजना चोपड़ा (सचिव), श्री अनंत प्रकाश पांडेय (संयुक्त सचिव), श्री एम. राजा मुरुगन (प्रबंध निदेशक, टीआरआईएफईडी ) तथा पत्र सूचना कार्यालय के श्री धर्मेंद्र तिवारी भी मौजूद रहे।
ट्राइब्स आर्ट फेस्ट (टीएएफ ) 2026|तिथि: 02–13 मार्च 2026| स्थान: त्रावणकोर पैलेस, नई दिल्ली
इस उत्सव में देशभर से 70 से अधिक प्रतिष्ठित जनजातीय कलाकारों को एक मंच पर लाएगा तथा 30 विशिष्ट जनजातीय कला शैलियों से जुड़ी लगभग 1,000 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। भारत की जनजातीय दृश्य कला परंपराओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित इस महोत्सव में क्यूरेटेड वॉकथ्रू, लाइव पेंटिंग डेमोंस्ट्रेशन, चित्रात्मक व्याख्यान, मेंटरशिप कार्यशालाएं, सहभागितापूर्ण सत्र और पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें कलाकारों, क्यूरेटरों, डिज़ाइनरों और संग्रहकर्ताओं की भागीदारी होगी।
विशेष आकर्षणों में समकालीन कलाकारों के साथ सहयोग, महिला-नेतृत्व वाली लाइव पेंटिंग प्रस्तुतियां और विरासत से बाजार तक के रास्तों पर संरचित संवाद शामिल हैं। प्रदर्शनी, बाजार सुविधा और क्षमता निर्माण के माध्यम से जनजातीय कलाकारों को राष्ट्रीय व वैश्विक मंचों से जोड़ते हुए यह महोत्सव दृश्यता, सम्मान और सतत आजीविका के अवसर बढ़ाने का प्रयास करता है, साथ ही जनजातीय कला को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग स्थापित करता है।
इस प्रदर्शनी में कलाकारों को अपनी पेंटिंग्स की प्रत्यक्ष बिक्री की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे आगंतुक और संग्रहकर्ता सीधे सृजनकर्ताओं से कलाकृतियां खरीद सकेंगे और कलाकारों को उचित पारिश्रमिक व मज़बूत बाजार संपर्क मिलेगा।
लिविंग रूट्स फेस्टिवल – साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया
*तिथि: 13–15 मार्च 2026, स्थान: बीकानेर हाउस एवं इंडिया गेट*
लिविंग रूट्स फेस्टिवल भारत की जीवंत जनजातीय संगीत परंपराओं का तीन दिवसीय उत्सव होगा। इसका उद्देश्य जनजातीय संगीत को एक समकालीन, सम्मानित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य सांस्कृतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है, साथ ही सामुदायिक स्वामित्व से जुड़े मूल्यों को बनाए रखना है। दिन में आयोजित सत्र (दोपहर 1:30 से शाम 5:00 बजे तक) बीकानेर हाउस में आयोजित होंगे, जिनमें मुख्य भाषण, बेहतरीन प्रस्तुतियां, संरक्षण और नवाचार पर पैनल चर्चाएं तथा बौद्धिक संपदा अधिकार, स्वामित्व और नैतिक सहयोग पर केंद्रित सत्र शामिल होंगे। संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम (शाम 5:00 से रात 9:15 बजे तक) कर्तव्य पथ पर आयोजित किए जाएंगे, जहां तीन दिनों में 15 चयनित प्रस्तुतियां होंगी। ये प्रस्तुतियां देश के विविध क्षेत्रों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करेंगी और जनजातीय संगीत को भारत के सबसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्थलों में से एक तक पहुंचाएंगी। इस उत्सव का उद्देश्य प्रदर्शन, संवाद और मेंटरशिप के माध्यम से जनजातीय संगीतकारों के लिए स्थायी पहचान और अवसर सुनिश्चित करना है।
भारत ट्राइब्स फेस्ट (बीटीएफ ) 2026|तिथि: 18–30 मार्च 2026| स्थान: सुंदर नर्सरी
भारत ट्राइब्स फेस्ट (बीटीएफ ) 2026 एक व्यापक राष्ट्रीय बाज़ार और सांस्कृतिक मंच के रूप में आयोजित होगा, जिसमें 1,000 से अधिक जनजातीय कारीगर, वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके ), जनजातीय शेफ और सांस्कृतिक दल भाग लेंगे। 200 से अधिक क्यूरेटेड स्टॉल्स के माध्यम से कला, शिल्प और व्यंजन प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रमुख आकर्षणों में उच्च-स्तरीय जनजातीय उत्पादों के लिए सिग्नेचर पवेलियन और मंत्रालय के “आरआईएसए” ब्रांड का शुभारंभ शामिल है, जिसका उद्देश्य जनजातीय फैशन और शिल्प को प्रीमियम तथा वैश्विक बाज़ारों में स्थापित करना है। अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में ऑस्ट्रेलिया, फिजी और वियतनाम जैसे देशों के स्वदेशी कारीगर भाग लेंगे, जिससे वैश्विक जनजातीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। 21 राज्यों का प्रतिनिधित्व करता जनजातीय फूड कोर्ट, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस उत्सव को एक समृद्ध अनुभवात्मक क्षेत्र बनाएंगी। यह महोत्सव जनजातीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष बाज़ार पहुंच प्रदान करने और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
जनजातीय व्यापार सम्मेलन- भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026 के हिस्से के रूप में का एक महत्वपूर्ण स्तंभ 14-दिवसीय राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन होगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और जनजातीय उद्यमों को घरेलू व वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। इसमें वन-आधारित खाद्य मूल्य श्रृंखलाएं, सतत वस्त्र व हस्तशिल्प, नैतिक लक्ज़री बाज़ार, नवाचार व तकनीक एकीकरण, कौशल विकास व रोज़गार, बौद्धिक संपदा संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान का नैतिक व्यावसायीकरण और समुदाय-आधारित पर्यटन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे।
सीएसआर शिखर सम्मेलन| तिथि: 24 मार्च 2026 | जगह : सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली
मंत्रालय 24 मार्च 2026 को एक राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें कॉरपोरेट जगत के नेता, सीएसआर प्रमुख, क्रियान्वयन साझेदार और राज्य जनजातीय कल्याण विभाग एक मंच पर आएंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य सीएसआर सहयोग की आवश्यकता वाले प्राथमिक क्षेत्रों को प्रस्तुत करना, जनजातीय विकास में योगदान देने वाले कॉरपोरेट साझेदारों को सम्मानित करना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संरचित सहयोग को बढ़ावा देना है।
मीडिया को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि ये सभी पहलें संस्कृति, वाणिज्य और कॉरपोरेट साझेदारी को एकीकृत करने वाले समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने मीडिया से जनजातीय कार्यक्रमों और पहलों को मुख्यधारा में लाने में सहयोग का अनुरोध किया, ताकि आम जनता में व्यापक जागरूकता उत्पन्न हो सके।
*सामूहिक रूप से, ये पांचों पहलें—ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026, लिविंग रूट्स फेस्टिवल, भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026, ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव और सीएसआर समिट—सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय संरचना का निर्माण करती हैं। ये पहलें माननीय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो जनजातीय समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ता और आर्थिक योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करती हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 28 फरवरी, 2026 को बोत्सवाना से प्राप्त नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बने संगरोध बाड़ों में छोड़ा। इन चीतों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने से पहले अनुकूलन और स्वास्थ्य निगरानी के चरण से गुजरना होगा।
श्री यादव ने अपनी एक एक्स सोशल मीडिया पोस्ट में बोत्सवाना से नौ चीतों (6 मादा और 3 नर) के मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आगमन की घोषणा की।
मंत्री महोदय ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में चीता परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। भारत में अब 48 चीतों की अच्छी-खासी आबादी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं।
यात्रा
दिसंबर 2024 में, भारत सरकार ने चीतों की खरीद के लिए बोत्सवाना गणराज्य की सरकार के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की, ताकि भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट चीता’ को और मजबूत किया जा सके। यह प्रस्ताव बोत्सवाना गणराज्य के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री श्री बोइपुसो विंटर ममोलोत्सी के परामर्श से श्री भूपेंद्र यादव द्वारा औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया था।
भारत की चीता पुनर्प्रवेश योजना को ध्यान में रखते हुए बोत्सवाना ने भारत के साथ साझेदारी करने पर सहमति जताई। यह सहयोग वैश्विक चीता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और अफ्रीका में इसके पारंपरिक क्षेत्र से बाहर इस प्रजाति की एक अतिरिक्त सुरक्षित आबादी बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे इसकी दीर्घकालिक सहनशीलता में वृद्धि होगी।
इस साझेदारी को क्रियान्वित करने के लिए, एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सितंबर 2025 में बोत्सवाना का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण मानकों के अनुरूप परिचालन तौर-तरीकों, परिवहन व्यवस्था और नियामक स्वीकृतियों का प्रारूप तैयार करना था। उचित वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद, बोत्सवाना के ग़ांज़ी क्षेत्र से आठ चीतों की पहचान करते हुए उन्हें पकड़ा गया। बाद में, पशु चिकित्सा की निरंतर निगरानी में चीतों को लगभग 700 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से गैबोरोन ले जाया गया।
नवंबर 2025 में, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना यात्रा के दौरान, आठ चीतों को औपचारिक रूप से भारत सरकार को सौंप दिया गया। उन्हें मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य में संगरोध बाड़ों में छोड़ दिया गया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2025 में संगरोध व्यवस्था की समीक्षा करने, बाड़ों की स्थिति का आकलन करने और अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए बोत्सवाना का दौरा किया। दिसंबर 2025 में, बोत्सवाना प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम रसद संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने और मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जारी चीता संरक्षण प्रयासों का अवलोकन करने के लिए भारत का दौरा किया।
27 फरवरी, 2026 को चीतों को मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य से गैबोरोन हवाई अड्डे तक ले जाया गया। भारतीय वायु सेना के सहयोग से, चीतों को नियंत्रित और निगरानी वाले वातावरण में भारत के ग्वालियर ले जाया गया ताकि यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित हो सके। भारत पहुंचने पर, चीतों को हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित कर दिया गया।
एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में, श्री यादव ने भारतीय वायु सेना द्वारा प्रदर्शित निर्बाध समन्वय, सटीक उड़ान और अटूट प्रतिबद्धता के लिए अपनी सराहना व्यक्त की, जिसने इन चीतों की भारत तक सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की।
India’s sky high efforts for cheetahs 🐆 🇮🇳!
The cheetahs from Botswana were extended a smooth air ride to India by IAF’s C17 Globemaster from 81 squadron (the Skylords), and further to Kuno by IAF’s helicopters.
हार्दिक प्रयास से संचालित प्रोजेक्ट चीता को मजबूत वैश्विक साझेदारियों और ठोस वैज्ञानिक निगरानी के साथ निरंतर प्रगति प्राप्त हो रही है। बोत्सवाना के चीतों का सफल आगमन भारत के इस संकल्प को और मजबूत करता है कि वह एक स्थायी, स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली चीता आबादी का निर्माण करे और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में सार्थक योगदान दे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अजमेर में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने आज के दिन को राजस्थान के विकास पथ में बड़ा पड़ाव बताया। प्रधानमंत्री ने सुरसुरा के तेजाजी धाम और मेजर दलपत सिंह की वीरता सहित इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वीरता की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी हाइफ़ा को मुक्त कराने में भूमिका को आज भी इज़राइल में सम्मानित किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि राजस्थान में “दो इंजन वाली सरकार” ने तीव्र प्रगति के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “सरकार विकास के उन वादों को पूरा कर रही है जो उन्होंने जनता से किए थे, और आज का दिन विकास के इस अभियान को और तेज करने का दिन है।” प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि आज के कार्यक्रम में सड़क, बिजली, जल, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 17,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया, जिनसे राजस्थान के लोगों की सुविधा बढ़ेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अपार अवसर पैदा होंगे।
श्री मोदी ने आज 21,000 से अधिक नए रंगरूटों को नियुक्ति पत्र सौंपकर राज्य के युवाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत का जिक्र किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने अजमेर से राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया और इसे भारत की ‘नारी शक्ति’ को सशक्त बनाने और माताओं तथा बेटियों के स्वास्थ्य को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। श्री मोदी ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि जब परिवार में मां बीमार पड़ती है, तो घर बिखर जाता है। मां स्वस्थ रहती है, तो परिवार हर संकट का सामना करने में सक्षम रहता है। इसी भावना के साथ सरकार ने महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं।”
प्रधानमंत्री ने शौचालयों, सैनिटरी पैड्स और उज्ज्वला गैस योजना के लिए “मिशन मोड” समाधानों के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा के प्रति सरकार के संवेदनशील दृष्टिकोण का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने सुरक्षित मातृत्व योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए बहनों के खातों में 5,000 रुपये जमा किए जाते हैं, जो उपेक्षा की संस्कृति से संवेदनशीलता की संस्कृति की ओर एक कदम है।
बुनियादी ढांचे पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सड़क, रेल और हवाई मार्ग के माध्यम से आधुनिक संपर्क राजस्थान का भविष्य बदल रहा है। उन्होंने बताया कि कैसे बेहतर यात्रा व्यवस्था अजमेर-पुष्कर जैसे स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों और टैक्सी चालकों को सीधा लाभ मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के आसपास बन रहा बुनियादी ढांचा राजस्थान को वैश्विक निवेश के लिए ‘अवसरों की भूमि’ बना रहा है।”
भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित विश्व के सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलन और इज़राइल की अपनी यात्रा का जिक्र किया, जहां भारत की प्रगति और कौशल की सराहना की गई। श्री मोदी ने कहा, “इसमें दुनिया के कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आए; बड़ी कंपनियों के प्रमुख आए; सभी ने खुले मन से भारत की प्रशंसा की।”
पिछले 11 वर्षों में भारत के सशस्त्र बलों की सफलता को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा, “भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर आतंकवादियों और देश के दुश्मनों पर करारा प्रहार किया है। हमारी सेना हर मोर्चे पर, हर अभियान में विजयी रही है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है।”
किसानों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का समाधान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ईआरसीपी परियोजना को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदियों को जोड़ने का अभियान झालावाड़, बारां, कोटा और बूंदी के किसानों को निश्चित और महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में संशोधित ‘पार्वती-कालीसिंध-चंबल’ और ‘यमुना-राजस्थान’ लिंक परियोजनाएं शामिल हैं,
प्रधानमंत्री ने सूर्य से समृद्धि अर्जित करने की राजस्थान की क्षमता पर प्रकाश डाला। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, सरकार छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए 78,000 रुपये की सहायता प्रदान करती है। राजस्थान में 1.25 लाख से अधिक परिवार पहले ही इस योजना से जुड़ चुके हैं, जिससे कई परिवारों के बिजली बिल लगभग शून्य हो गए हैं। श्री मोदी ने “विकसित राजस्थान से विकसित भारत” के मंत्र को दोहराते हुए अपने संबोधन का समापन किया। उन्होंने राज्य के प्रत्येक परिवार के लिए एक समृद्ध जीवन की परिकल्पना प्रस्तुत की।
नई दिल्ली – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट से दूर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) के तीन सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। ये परीक्षण विभिन्न गति, दूरी और ऊंचाई पर उड़ने वाले उच्च गति वाले खतरों को बेअसर करने में वीएसएचओआरएडीएस मिसाइल प्रणाली की क्षमता को पुनः सत्यापित करने के लिए किए गए थे।
इन परीक्षणों में यह देखा गया कि टेस्ट मिसाइल तेज रफ्तार से उड़ने वाले दुश्मन के विमानों व अन्य लक्ष्यों को अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर कितने प्रभावी तरीके से मार गिरा सकती है। हर बार मिसाइल ने अपने निशाने पर सटीक वार किया और लक्ष्य को हवा में ही नष्ट कर दिया। खास बात यह रही कि ये परीक्षण उसी अंतिम तैनाती रूप में किए गए, जिसमें सेना के जवान खुद लक्ष्य साधने और मिसाइल दागने की प्रक्रिया में शामिल थे।
चांदीपुर स्थित आईटीआर द्वारा तैनात टेलीमेट्री, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और रडार जैसे विभिन्न उपकरणों द्वारा प्राप्त उड़ान डेटा ने हवाई खतरों की एक विस्तृत शृंखला के खिलाफ वीएसएचओआरएडीएस की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया गया। परीक्षण के दौरान संयुक्त बलों के प्रतिनिधि, डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी और इस सिस्टम के उत्पादन से जुड़े हितधारक भी मौजूद रहे।
वीएसएचओआरएडीएस एक मानव-चालित वायु रक्षा प्रणाली है जिसे अनुसंधान केंद्र इमारत द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और विकास सह उत्पादन भागीदारों के सहयोग से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। यह मिसाइल प्रणाली सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं, जैसे भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखती है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सिस्टम के सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वीएसएचओआरएडीएस के लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण एक बड़ी सफलता है और इस प्रणाली को जल्द ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा सकता है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने सिस्टम के डिजाइन और विकास में शामिल संपूर्ण डीआरडीओ टीम, सशस्त्र बलों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (27 फरवरी, 2026) राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण फायरिंग रेंज में ‘वायु शक्ति-2026’ अभ्यास का अवलोकन किया। वायु शक्ति अभ्यास में एक सुनियोजित परिचालन रणनीति का पालन किया गया, जिसमें वास्तविक, एकीकृत युद्ध क्षेत्र का अनुकरण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह शामिल थे।
वायु शक्ति-2026 अभ्यास ने भारतीय वायु सेना के साहस, समर्पण और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्धकालीन परिस्थितियों में त्वरित और सटीक हमले करने की क्षमता का प्रदर्शन करना था। इस अभ्यास में विभिन्न लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हमलावर हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाया।
रेगिस्तान में विमानों की गर्जना और सटीक बमबारी ने भारतीय वायु सेना की आधुनिक युद्ध क्षमता और परिचालन तत्परता का जीवंत प्रदर्शन किया। राफेल, सुखोई एसयू-30एमकेआई, एचएएल तेजस और मिराज 2000 सहित भारतीय वायु सेना के उन्नत लड़ाकू विमानों ने वायु से जमीन पर मार करने वाले निर्देशित बमों और मिसाइलों का उपयोग करते हुए सटीक हमले किए और दुश्मन के बंकरों, रनवे और कमान केंद्रों को सटीक रूप से निशाना बनाया। बोइंग अपाचे और बोइंग चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भी कम ऊंचाई पर रॉकेट और तोप चलाने का अभ्यास किया, घायलों को निकालने के अभियान चलाए और कठिन युद्धक्षेत्रों में उपकरण पहुंचाए।
वायु शक्ति-2026 अभ्यास में सैन्य शक्ति प्रदर्शन के अलावा प्रौद्योगिकी, एकीकरण और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं का समन्वित प्रदर्शन भी शामिल है। इस अभ्यास में दिन और रात दोनों परिस्थितियों में युद्ध अभियानों के लिए तत्परता प्रदर्शित की गई। साथ ही, इसने वायु श्रेष्ठता, जमीनी सहायता और रसद सहायता जैसे एकीकृत युद्धकालीन अभियानों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। वायुशक्ति-2026 ने बहु-क्षेत्रीय बल और राष्ट्रीय प्रतिरोध के प्रमुख स्तंभ के रूप में भारतीय वायु सेना की तत्परता को पुनः स्थापित किया।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
स्नातक होने वाले छात्रों को हार्दिक बधाई देते हुए, उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि आईआईएमसी की स्थापना लगभग छह दशक पहले हुई थी और तब से इसने पत्रकारों और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स की ऐसी पीढ़ियां तैयार की हैं, जिन्होंने विशिष्टता के साथ भारत के लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में अपनी सेवाएं दी हैं।
जनवरी 2024 में आईआईएमसी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान देश के अग्रणी जनसंचार संस्थान के रूप में अपनी विरासत को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने मीडिया नवाचार और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए कैंपस इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की भी सराहना की।
मीडिया परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और सोशल प्लेटफॉर्म्स ने कहानियों के सृजन और उन्हें देखने व पढ़ने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने एवीजीसी क्षेत्र—एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स—और व्यापक क्रिएटर इकोनॉमी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार ने विश्व स्तरीय प्रतिभा और नवाचार को पोषित करने के लिए नेशनल एवीजीसी-एक्सआर मिशन और सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहल शुरू की हैं। उन्होंने इच्छुक छात्रों को संसद टीवी के साथ इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के अवसरों को तलाशने के लिए भी आमंत्रित किया।
लेखनी की शक्ति पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रबुद्ध वर्ग विशुद्ध रूप से सत्य पर आधारित सही और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाकर राष्ट्र का नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे विद्यार्थियों से कहा, “निर्भीक होकर सत्य लिखें और आप विकसित भारत का निर्माण करेंगे।” उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे रेटिंग या शॉर्टकट के पीछे न भागें, बल्कि अपने लेखन की शुद्धता और ईमानदारी को आधार बनाएँ। दिनमणि के पूर्व संपादक और दिग्गज पत्रकार ए.एन. शिवरामन के प्रति अपने सम्मान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से जागरूक और सूचनात्मक पत्रकारिता नेतृत्व को आकार दे सकती है और नए लीडर्स बना सकती है।
डिजिटल युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहाँ सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के रास्तों का विस्तार किया है, वहीं इसने भ्रामक सूचनाओं और पोलराइजेशन को भी बढ़ावा दिया है, जो समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शब्दों के परिणाम होते हैं, छवियाँ धारणाएँ बनाती हैं और विमर्श विचारों को प्रभावित करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक खबरों और मनगढ़ंत विमर्श के खिलाफ भी उतनी ही महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ी जा रही थी। उन्होंने पत्रकारों से समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत के रूप में कार्य करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनका लेखन राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों के दौरान सशस्त्र बलों के मनोबल का समर्थन करे।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विस्तार लेते डिजिटल इकोसिस्टम और बढ़ते वैश्विक प्रभाव का अवलोकन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दूरियां मिटाने और एक जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देने में कम्युनिकेटर्स की निर्णायक भूमिका होगी। उन्होंने मीडिया संस्थानों से अपनी अपील दोहराते हुए कहा कि वे आर्थिक विकास, नवाचार और राष्ट्रीय प्रगति की सकारात्मक कहानियों को विशेष स्थान दें। उन्होंने कहा कि संतुलित पत्रकारिता को चुनौतियों के साथ-साथ उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालना चाहिए। विज्ञापन और जनसंपर्क के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मकता का उपयोग ईमानदारी और उद्देश्य के साथ परिवर्तन के माध्यम के रूप में किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहाँ एक ओर तकनीक और प्लेटफॉर्म विकसित होते रहेंगे, वहीं पत्रकारिता के मूल मूल्य—सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही—हमेशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहने का आह्वान करते हुए कहा, “यदि आप सत्य के प्रति अपना विश्वास अडिग रखें, तो कोई भी आपको पराजित नहीं कर सकता।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये छात्र एक जागरूक, मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे।
उपराष्ट्रपति ने आईआईएमसी, नई दिल्ली के नए शैक्षणिक ब्लॉक और छात्रावास की आधारशिला भी रखी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये नई सुविधाएँ डिजिटल लैब, एआई बेस्ड लर्निंग, डेटा पत्रकारिता और आधुनिक स्टूडियो को सुदृढ़ करेंगी, जिससे छात्र केवल तकनीक का अनुसरण करने के बजाय नवाचार का नेतृत्व करने में सक्षम बनेंगे।
इस दीक्षांत समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेल और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री तथा आईआईएमसी के कुलाधिपति, श्री अश्विनी वैष्णव; आईआईएमसी की कुलपति, डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़; आईआईएमसी सोसाइटी के अध्यक्ष, श्री राघवन जगन्नाथन; वरिष्ठ संकाय सदस्य, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी और ग्रेजुएट हो रहे छात्रों के परिवारजन उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन् ने आज तमिलनाडु के सेलम में भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) के नवनिर्मित शैक्षणिक भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री, श्री गिरिराज सिंह; श्री आर. राजेंद्रन्, राज्य पर्यटन मंत्री; श्री टी. एम. सेल्वागणपति, सांसद; श्री एस. आर. सिवालिंगम, सांसद; श्री ई. बालासुब्रमणियन्, विधायक; तथा डॉ. एम. बीना, आईएएस, विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय उपस्थित थे।
अपने उद्घाटन भाषण के दौरान, उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) किफायती दरों पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बुनकरों के बच्चों तथा समाज के अन्य वर्गों के छात्रों को इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि हथकरघा बुनकरों को अपने पारंपरिक कौशल और तकनीकों को बनाये रखते हुए, अपनी उत्पादन गतिविधियों को समकालीन बाजार की मांग के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और आय सृजन में वृद्धि हो सके।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 56 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) न केवल वस्त्र क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगे, बल्कि चमड़ा और अन्य विनिर्माण उद्योगों जैसे सहायक क्षेत्रों के लिए भी विकास के अवसर उत्पन्न करेंगे। हालिया व्यापार वार्ताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ चर्चा से पहले लागू शुल्क (टैरिफ) काफी अधिक थे।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री, श्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आईआईएचटी सेलम में नए अकादमिक ब्लॉक का उद्घाटन केवल एक भवन का उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह बुनकरों को सशक्त बनाने और हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के विज़न को मजबूत करने हेतु एक कदम है। उन्होंने कहा कि सादगी, परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आईआईएचटी सेलम तमिलनाडु के वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने और हथकरघा उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी वैश्विक व्यापार भागीदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है; साल 2014 तक भारत ने 19 देशों के साथ 10 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए थे, जबकि वर्तमान में भारत ने 56 देशों के साथ 18 एफटीए किए हैं, जिससे भारतीय वस्त्र और हथकरघा उत्पादों के लिए बाजार की पहुँच में सुधार हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में, बदलते वैश्विक तथा आर्थिक परिप्रेक्ष्य के बावजूद, भारत के वस्त्र और हथकरघा निर्यात ने लगातार स्थिर प्रदर्शन और वृद्धि दर्ज की है और भारत सरकार तमिलनाडु के वस्त्र उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है तथा राज्य में हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील उपाय लागू कर रही है।
अपने दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री के साथ नए उद्घाटित अकादमिक ब्लॉक का दौरा किया और बुनकरों, संकाय सदस्यों तथा छात्रों के साथ संवाद किया, साथ ही हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को सुदृढ़ करने के लिए संस्थागत पहल का अवलोकन किया। इस अवसर पर, भारत के माननीय उपराष्ट्रपति ने भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, सेलम के प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और असाधारण प्रदर्शन के सम्मान स्वरूप पदक और प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत प्रतिष्ठित संस्थानों का एक राष्ट्रीय तन्त्र है, जो हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान प्रदान करने में संलग्न हैं। इन संस्थानों की स्थापना स्पष्ट उद्देश्य के साथ की गई है कि वे हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र के लिए संरचित तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास प्रदान करें।
इन संस्थानों में से, नए अकादमिक भवन का निर्माण संस्थागत अवसंरचना को सुदृढ़ करने और शिक्षण, अनुसंधान तथा कौशल विकास के लिए बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने हेतु किया गया है। इस भवन में आधुनिक संवादपूर्ण कक्षाएं, सुसज्जित पुस्तकालय तथा डिजिटल पुस्तकालय, सेमिनार हॉल, संकाय कक्ष, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और बोर्ड रूम शामिल हैं। साथ ही, इसमें सभी ग्यारह भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय और अन्य आवश्यक शैक्षणिक तथा प्रशासनिक सुविधाएं भी मौज़ूद हैं। उन्नत कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण स्थान शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ, छात्रों में नवाचार, उद्यमिता और उद्योग के लिए कौशल को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा रखते हैं।
आईआईएचटी सेलम का जनता के लिए खुलना बुनकरों के बच्चों के लिए सार्थक शैक्षणिक अवसरों की दिशा में एक प्रगति का कदम है, साथ ही यह हथकरघा क्षेत्र को भी सुदृढ़ करता है। वस्त्र मंत्रालय, हथकरघा को भविष्य–उन्मुख उद्योग के रूप में स्थापित करते हुए, सतत् विकास, बाजार विस्तार और बुनकरों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली – केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार ने आज नई दिल्ली में आयोजित ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टीईआरआई) के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) 2026 के रजत जयंती संस्करण के समापन भाषण दिया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की सद्भावना राजदूत सुश्री दीया मिर्जा, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की उप-प्रतिनिधि सुश्री इसाबेल त्सचान, टीआरआई के अध्यक्ष श्री नितिन देसाई और टीआरआई की महानिदेशक डॉ. विभा धवन आदि शामिल थे।
उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए श्री कुमार ने कहा कि भारत विकास के ऐसे मॉडल का अनुसरण कर रहा है जो विकास, गरीबी उन्मूलन, शहरीकरण, औद्योगीकरण और कार्बन उत्सर्जन में कमी को एक साथ समाहित करता है, जो विकसित देशों द्वारा अपनाए गए ऐतिहासिक उच्च-उत्सर्जन वाले मार्गों से भिन्न है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, शासन, सुरक्षा और मानव कल्याण की एक निर्णायक चुनौती बन गया है।
सचिव ने उल्लेख किया कि पेरिस समझौते के पहले ग्लोबल स्टॉकटेक में 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन में 43 प्रतिशत की कमी का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि विशेषकर विकसित देशों की निष्क्रियता के कारण हालांकि वैश्विक रुझान एक महत्वपूर्ण अंतर दर्शाते हैं। श्री कुमार ने बताया कि 1850 और 2019 के बीच, विकसित देशों ने वैश्विक कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग आधा योगदान दिया, जबकि भारत का योगदान ऐतिहासिक रूप से नगण्य रहा है।
सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में विश्व की 17 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन लगभग दो टन प्रति वर्ष है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है। उन्होंने कहा कि जहां विकसित देशों ने कोयला आधारित विकास, तेल से चलने वाले परिवहन और वनों की कटाई के माध्यम से औद्योगीकरण किया, वहीं भारत शुरू से ही स्वच्छ तरीके से औद्योगीकरण कर रहा है।
श्री कुमार ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य एक ऐसे विकसित भारत का निर्माण करना है जो अतीत की हूबहू नकल न हो। इसमें परिवहन-उन्मुख शहर, हरित ऊर्जा से संचालित होने वाले कुशल उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण को एकीकृत करने वाला विद्युत ग्रिड और सामग्री की खपत को कम करने वाली चक्रीय अर्थव्यवस्था शामिल है।
समानता और अंतरपीढ़ीगत न्याय पर जोर देते हुए श्री कुमार ने कहा कि भारत कल की गरीबी की समस्या का समाधान भविष्य के पारिस्थितिक संकट को पैदा करके हल नहीं करेगा और एक ऐसे विकास मॉडल को आगे बढ़ाना जारी रखेगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए गरिमा, समावेशिता, उत्पादकता और स्थिरता की रक्षा करता है।
भारत की पर्यावरणीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री कुमार ने कहा कि एफएओ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत वन क्षेत्र में विश्व स्तर पर नौवें और वार्षिक शुद्ध वन वृद्धि में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने इसे विकास के साथ-साथ निरंतर संरक्षण प्रयासों का प्रमाण बताया। उन्होंने आर्द्रभूमि संरक्षण के तीव्र विस्तार का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 2025 में 11 नए रामसर स्थल जोड़े गए, जिससे रामसर स्थलों की कुल संख्या 98 हो गई है, जो एशिया में सबसे अधिक है।
सचिव ने हाल के वर्षों में मंत्रालय द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों पर जोर दिया, जिनमें ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम, वन संरक्षण एवं संवर्धन नियम, 2025; पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025; पर्यावरण लेखापरीक्षा नियम, 2025 और परिवेश 2.0 शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये पहलें सतत आर्थिक गतिविधियों और समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए पारदर्शी, कुशल और दूरदर्शी पर्यावरण शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं पर श्री कुमार ने कहा कि भारत 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी लाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से संचयी विद्युत उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत प्राप्त करने का संशोधित लक्ष्य जून 2025 में निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) को संशोधित करने की प्रक्रिया में भी है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, सचिव ने कहा कि जहां विकसित दुनिया ने उच्च प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और शुद्ध वन हानि के साथ ‘‘कोयला-प्रधान औद्योगीकरण’’ मॉडल का अनुसरण किया, वहीं भारत का मार्ग कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन, सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा विस्तार, वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि तथा मिशन लाइफ के माध्यम से जीवनशैली-आधारित दृष्टिकोण पर केंद्रित है।
टीईआरआई के डब्ल्यूएसडीएस के दौरान, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हिम-कनेक्ट का आयोजन किया, जो हिमालयी क्षेत्र में काम कर रहे शोधकर्ताओं को स्टार्ट-अप, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ने के लिए एक विशेष मंच है। इस शिखर सम्मेलन में एक्ट4अर्थ घोषणापत्र भी जारी किया गया, जो सम्मेलन से उत्पन्न त्वरित जलवायु कार्रवाई के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धताओं को मजबूत करता है।