इस कार्यशाला का आयोजन सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी उपायों के समान और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। यह आयोजन समावेशिता को बढ़ावा देने और वित्तीय सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी पुख्ता करता है।
इस कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, 7 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और 7 सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सुगम्य भारत पहल के तहत, सुगम्यता मानकों (एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स) और कम्प्लायंस आवश्यकताओं पर एक सेंसिटाइज़ेशन सेशन आयोजित किया गया। इसके बाद सुगम्यता से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर एक राउंडटेबल चर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक चुनौतियों, निर्धारित लक्ष्यों और वास्तविक स्थिति पर विचार-विमर्श किया और विभिन्न संस्थानों में सुगम्यता बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।
कार्यशाला का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने ऑपरेशनल संबंधी चुनौतियों और वित्तीय सेवा इकोसिस्टम में समावेशिता, सुगम्यता और आरक्षण नीतियों के समान कार्यान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु व्यावहारिक उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया।
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