कोलकाता के जीआरएसई द्वारा निर्मित चौथी पनडुब्बी रोधी उथले पानी की नौका-एग्रे नौसेना में शामिल

नई दिल्ली – कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में से चौथा, ‘एग्रे’, 30 मार्च 2026 को कोलकाता में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

कोलकाता के जीआरएसई द्वारा भारतीय जहाजरानी रजिस्टर (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार इन एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी का डिजाइन और निर्माण किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण की सफलता को रेखांकित करता है।

लगभग 77 मीटर लंबे ये जहाज जलजेट द्वारा संचालित भारतीय नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोत हैं और अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार से सुसज्जित हैं, जो पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम बनाते हैं। इस जहाज के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी और बारूदी सुरंग रोधी क्षमताओं के साथ-साथ तटीय निगरानी में और वृद्धि होगी।

यह जहाज पूर्व के आईएनएस एग्रे का पुनरोद्धार है, जो 1241 पीई श्रेणी के गश्ती पोतों में से चौथा था और जिसे वर्ष 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। इस प्रकार यह प्रतिष्ठित विरासत वाले नामों को बनाए रखने की नौसेना की परंपरा को जारी रखता है।

एग्रे की डिलीवरी भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती शक्ति और आयात पर निर्भरता कम करने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।

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दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा

पहली बार, जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, और पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना, और 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक ‘मकान सूचीकरण और आवास जनगणना’ आयोजित की जाएगी

स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा के माध्यम से होगी, उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे

प्रगणक (Enumerators) अपने स्मार्टफ़ोन का उपयोग करके, सीधे मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे और जमा करेंगे

डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं

पूरे देश में जनगणना 2027 में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे

भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज नई दिल्ली में जनगणना-2027 पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसका पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। पहली बार, जनगणना डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, और पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना और 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और आवास जनगणना आयोजित की जाएगी।

भारत की जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 (समय-समय पर संशोधित) के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है। भारत की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। जनगणना 2027 श्रृंखला की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।

भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 आयोजित करने के आशय को 16 जून, 2025 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया है। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की 00:00 बजे होगी (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की 00:00 बजे होगी)।जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी।

पहला चरण  – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO), जो अप्रैल से सितंबर, 2026 के दौरान राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही मकान सूचीकरण कार्य से पूर्व 15 दिनों की स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा उनके पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। पहले चरण के प्रश्न जनवरी 2026 में अधिसूचित किए जा चुके हैं।

दूसरा चरण – जनसंख्या गणना (Population Enumeration) फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में आयोजित होगा)। CCPA के निर्णयानुसार, इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी।

इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। जनसंख्या गणना की सटीक तिथियां एवं प्रश्नावली समयानुसार अधिसूचित की जाएगी।

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगर पालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा तथा सिक्किम में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 अप्रैल से 15 मई, 2026 के बीच आयोजित होगी, तथा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़,छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा में यह कार्य 1 मई से 30 मई, 2026 तक होगा तथा 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की अवधि रहेगी। राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार विस्तृत कार्यक्रम परिशिष्ट में संलग्न है।

भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें प्रगणकों के मानदेय, प्रशिक्षण, आईटी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स आदि के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।

जनगणना 2027 को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा।

 प्रगणक मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने स्मार्टफोन द्वारा सीधे डेटा एकत्र एवं प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में स्व-गणना के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप एवं स्व-गणना पोर्टल हिंदी एवं अंग्रेज़ी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। जनगणना से संबंधित विभिन्न गतिविधियों जैसे— प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के नियुक्ति पत्र एवं पहचान पत्र का निर्माण, कार्य आवंटन, प्रशिक्षण प्रबंधन, HLB निर्माण, डैशबोर्ड के माध्यम से कार्य की निगरानी, कुछ जनगणना अभिलेखों सारांशों का स्वतः निर्माण आदि के लिए एक पोर्टल विकसित किया गया है। मकानसूचीकरण ब्लॉक, HLB वेब मैपिंग एप्लिकेशन के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। डेटा सुरक्षा हेतु आवश्यक सभी उपाय किए गए हैं।

स्व-गणना के लिए, व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर एवं अन्य मूलभूत विवरणों के माध्यम से पोर्टल में लॉगइन कर अपनी सुविधा अनुसार जनगणना प्रपत्र भर सकते हैं। सफल सबमिशन के पश्चात एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी (SE ID) प्राप्त होगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करना होगा। स्व-गणना सुविधा से लोगों को प्रगणक के आगमन से पूर्व अपनी सुविधा अनुसार जानकारी भरने की स्वतंत्रता मिलेगी। पूर्व की भांति प्रगणक अपने आवंटित ब्लॉकों में घर-घर जाकर गणना करेंगे, जबकि स्व-गणना इस बार एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में प्रदान की गई है।

(एसई पोर्टल पर जाएं (se.census.gov.in)  मोबाइल नंबर से लॉगइन करें  मानचित्र पर स्थान चिन्हित करें  परिवार का विवरण भरें  जानकारी सबमिट करें  SE ID प्राप्त करें  प्रगणक को SE ID दें  डेटा को पुष्टि कर जनगणना में सम्मिलित किया जाएगा)

जनगणना के प्रथम चरण (HLO) का पूर्व-परीक्षण नवंबर 2025 में सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में लगभग 5000 ब्लॉकों में किया गया। इसमें गणना पद्धति, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण, प्रश्नावली,ऐप एवं पोर्टल सहित डेटा संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण तक सभी गतिविधियों का परीक्षण किया गया।

01.01.2026 से 31.03.2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों को स्थिर (फ्रीज़) कर दिया गया है। जनगणना 2027 का संचालन 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों, 7,092 उप-जिलों, 5,128 सांविधिक नगरों, 4,580 जनगणना नगरों तथा लगभग 6,39,902 गांवों में किया जाएगा।

जनगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु व्यापक व्यवस्था की गई है। 100राष्ट्रीय प्रशिक्षकों को विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिन्होंने लगभग 2000 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया है। ये मास्टर ट्रेनर्स लगभग 45,000 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जो आगे लगभग 31 लाख प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को लगभग 80,000 बैचों में प्रशिक्षण देंगे। सभी प्रशिक्षण सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की गई है ताकि अंतिम स्तर पर कार्यरत प्रगणक एवं पर्यवेक्षक समय पर गुणवत्तापूर्ण डेटा एकत्र कर सकें।

 अनुलग्नक

राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्रवार मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना  तथा स्व-गणना अवधि

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र स्व-गणना (Self-Enumeration) अवधि मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (Houselisting & Housing Census) अवधि
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 16 अप्रैल से 15 मई
गुजरात*, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव 5 अप्रैल से 19 अप्रैल 20 अप्रैल से 19 मई
उत्तराखंड 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 25 अप्रैल से 24 मई
मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 1 मई से 30 मई
बिहार 17 अप्रैल से 1 मई 2 मई से 31 मई
तेलंगाना 26 अप्रैल से 10 मई 11 मई से 9 जून
पंजाब 30 अप्रैल से 14 मई 15 मई से 13 जून
दिल्ली (दिल्ली नगर निगम), महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान और झारखंड** 1 मई से 15 मई 16 मई से 14 जून
उत्तर प्रदेश 7 मई से 21 मई 22 मई से 20 जून
जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी 17 मई से 31 मई 1 जून से 30 जून
हिमाचल प्रदेश 1 जून से 15 जून 16 जून से 15 जुलाई
केरल और नागालैंड 16 जून से 30 जून 1 जुलाई से 30 जुलाई
तमिलनाडु और त्रिपुरा 17 जुलाई से 31 जुलाई 1 अगस्त से 30 अगस्त
असम 2 अगस्त से 16 अगस्त 17 अगस्त से 15 सितंबर
मणिपुर 17 अगस्त से 31 अगस्त 1 सितंबर से 30 सितंबर
पश्चिम बंगाल निर्धारित किया जाना है

* गुजरात – परिवर्तन संभव

** झारखंड – जनगणना कराने की मंशा की अधिसूचना जारी, HLO अवधि अधिसूचित की जाएगी

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जनता दरबार में दिखी Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजन्त्री की सख्ती और संवेदनशीलता

जनता दरबार में आये दिव्यांग को मिली इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल

लंबित म्यूटेशन के मामलों को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री का कड़ा रुख

कई अंचल अधिकारियों को लगायी फटकार, समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश

रांची,31.03.2026 समाहरणालय में आयोजित साप्ताहिक जनता दरबार(30.03.2026) में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक बार फिर संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की।

जहां एक ओर दिव्यांग को त्वरित सहायता देकर उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाई गई, वहीं दूसरी ओर राजस्व एवं जनकल्याणकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। जनता दरबार में प्राप्त प्रत्येक शिकायत पर गंभीरता से सुनवाई करते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दिव्यांग को मिली नई इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल

रामबाबू शर्मा जब जनता दरबार में अपनी समस्या लेकर समाहरणालय पहुंचे तो दूसरे तल्ले तक आने में उन्हें काफी कठिनाई हुई। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने उनकी परेशानी को समझते हुए तत्काल इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। समाहरणालय से लौटते समय उनके चेहरे की मुस्कान प्रशासन की संवेदनशीलता की गवाही दे रही थी। उन्होंने उपायुक्त द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

माण्डर अंचल में लंबित म्यूटेशन पर सख्त रुख

उपायुक्त न्यायालय के आदेश के बावजूद नामांतरण लंबित रहने की शिकायत पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा माण्डर सीओ से जवाब-तलब किया गया। दो दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश के साथ चेतावनी दी गई कि लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।

नगड़ी अंचल में बार-बार म्यूटेशन अस्वीकृति पर जवाबदेही तय

दाखिल-खारिज आवेदन को बार-बार अस्वीकृत किए जाने पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सीओ नगड़ी को फाइल के साथ समाहरणालय तलब किया। साथ ही संबंधित सीआई एवं कर्मचारी को शो-कॉज जारी करने का निर्देश दिया गया।

सिल्ली अंचल में लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश

लंबित दाखिल-खारिज के मामले में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सीओ को निर्देश दिया कि आवेदक से मिलकर नियमानुसार शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

नामकुम अंचल में ऑनलाइन रसीद निर्गत नहीं होने पर जांच

लंबे समय से ऑनलाइन रसीद निर्गत नहीं होने की शिकायत पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जांच के आदेश दिए और संबंधित कर्मियों को शोकॉज करने का निर्देश दिया।

मंईयां सम्मान योजना से वंचित महिलाओं को राहत

राहे प्रखंड के होटलो पंचायत की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलने पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बीडीओ को निर्देशित किया कि सत्यापन कर लाभ पुनः शुरू कराया जाए।

गंभीर बीमारी के इलाज हेतु राशन कार्ड में नाम जोड़ने का निर्देश

सदर अंचल की मशुदा के आवेदन पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित पदाधिकारी को निर्देशित किया। राजस्व एवं कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ीं अन्य शिकायतों पर भी उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

जनता दरबार के माध्यम से उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि आमजनों की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की प्राथमिकता है कि हर पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ समय पर मिले तथा राजस्व से जुड़े मामलों का पारदर्शी एवं त्वरित निष्पादन सुनिश्चित हो।

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LPG सिलेंडरों की कमी को देखते हुए स्थानीय एवं आम जनता के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, की अध्यक्षता में बैठक

जिले में वर्तमान समय में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता में आई कमी तथा इससे प्रभावित आम नागरिकों, छोटे-बड़े होटल-रेस्तरां, ढाबा संचालकों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा

किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी

CCL अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी उत्पादन क्षमता, परिवहन व्यवस्था और वितरण नेटवर्क को मजबूत करें ताकि राँची जिले में कोयले की कोई कमी न रहे

राँची,31.03.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, की अध्यक्षता में आज समाहरणालय ब्लॉक-ए स्थित सभागार में LPG सिलेंडरों की कमी को देखते हुए स्थानीय एवं आम जनता के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिले में वर्तमान समय में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता में आई कमी तथा इससे प्रभावित आम नागरिकों, छोटे-बड़े होटल-रेस्तरां, ढाबा संचालकों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। LPG की कमी के कारण कई क्षेत्रों में कोयले की मांग बढ़ी है, जिसके दृष्टिगत जिला प्रशासन ने कोयले की नियमित, पर्याप्त और सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का निर्णय लिया है।

श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने देना चाहता। LPG संकट की स्थिति में कोयला एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम आ सकता है, इसलिए कोयले की सप्लाई चेन को मजबूत करना और कालाबाजारी को रोकना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने जोर दिया कि कोयले की उपलब्धता न केवल मात्रा में पर्याप्त हो, बल्कि गुणवत्ता वाली और उचित मूल्य पर आम जनता तक पहुंचे।

बैठक में श्री के. दीपाकृष्णन, महाप्रबंधक सेल, श्री दिनेश गुप्ता, महाप्रबंधक NK क्षेत्र, श्री विशंभर प्रबंधक सेल, जिला खनन पदाधिकारी राँची, मो. अबु हुसैन और मुख्यालय के सभी संबंधित Central Coalfields Limited (CCL) अधिकारियों शामिल हुए।

जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु निम्नलिखित निर्देश देते हुए इन बिंदुओं पर चर्चा की गई :

– कोयले की उपलब्धता बढ़ाने संबंधी प्रासंगिक योजनाएँ और कार्यक्रम।

– स्थानीय स्तर पर कोयला वितरण की व्यवस्था।

– *CSR गतिविधियों* के अंतर्गत आम जनता, छोटे व्यापारियों और प्रभावित समुदायों के लिए सहयोगात्मक पहल।

– कालाबाजारी और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र।

सभी पक्षों ने समन्वय बनाकर त्वरित समाधान निकालने पर सहमति जताई।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने CCL अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी उत्पादन क्षमता, परिवहन व्यवस्था और वितरण नेटवर्क को मजबूत करें ताकि राँची जिले में कोयले की कोई कमी न रहे। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिया कि बैठक में उठाए गए सभी बिंदुओं पर शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए और उसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी

जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि LPG की कमी की स्थिति में आम नागरिकों को वैकल्पिक ईंधन (कोयला) की सुविधा प्रदान करना हमारा दायित्व है। साथ ही, किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह बैठक जिला प्रशासन की जनहितैषी सोच और त्वरित प्रतिक्रिया का उदाहरण है, जिसमें आम जनता की सुविधा को सर्वोपरि रखा गया है।

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जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची की शासी निकाय एवं कार्यकारिणी समिति की संयुक्त वार्षिक बैठक सम्पन्न

पर्यटन स्थलों पर सौर ऊर्जा लाइट, सुरक्षा व्यवस्था एवं विकास कार्यों को गति देने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय

*राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर

“झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है:- उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,30.03.2026 – उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय ब्लॉक – ए स्थित सभागार में जिला पर्यटन संवर्धन परिषद्, राँची की शासी निकाय एवं कार्यकारिणी समिति की संयुक्त वार्षिक बैठक आयोजित की गई।

बैठक में माननीय लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों के प्रतिनिधि, माननीय विधायकों के प्रतिनिधि तथा उप विकास आयुक्त, राँची, श्री सौरभ भुवनिया, वन प्रमंडल पदाधिकारी/वन संरक्षक, राँची, श्रीकांत, वन प्रमंडल पदाधिकारी, खूँटी, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर राँची, श्री कुमार रजत, जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची, श्री अखिलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक मुख्यालय -1, श्री अमर कुमार पांडेय, सहायक नगर आयुक्त, राँची नगर निगम; कार्यपालक अभियंता, NREP-I एवं NREP-II, राँची; कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्, राँची; जिला अभियंता, जिला परिषद्, राँची एवं अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हुए।

राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर

बैठक में विगत वर्षों में पर्यटन विकास हेतु किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी योजनाओं पर गहन चर्चा हुई। राँची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक विकसित करने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया।

बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं अनुशंसाएँ:

(1) विगत वर्षों के कार्यों की समीक्षा: बैठक में पिछले वर्षों में पर्यटन विकास के अंतर्गत कराए गए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।

(2) कार्य योजना की समीक्षा: गत वर्ष जिला के पर्यटकीय स्थलों के विकास एवं पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था हेतु तैयार की गई कार्य योजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

(3) सौर ऊर्जा संचालित लाइटों का अधिष्ठापन: राँची जिले अंतर्गत सभी अधिसूचित पर्यटक स्थलों पर आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा से संचालित लाइटें लगाने का निर्णय लिया गया। इससे पर्यटक स्थलों पर रात्रिकालीन सुविधा बढ़ेगी तथा पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित होगा।

(4) मारशली पहाड़ का पर्यटकीय विकास: राँची जिले में स्थित मारशली (मारसिल्ली) पहाड़ में हाई मास्ट लाइट लगाने एवं समग्र पर्यटकीय विकास करने संबंधी विस्तृत योजना तैयार करने की अनुशंसा की गई। यह पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण एवं धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।

(5) सूचना पट्टों का अधिष्ठापन: सभी पर्यटक स्थलों पर पर्यटन स्थल की जानकारी, निकटवर्ती क्षेत्र के पुलिस पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूचना वाले सूचना पट्ट शीघ्रातिशीघ्र स्थापित करने की अनुशंसा की गई। इससे पर्यटकों को आवश्यक जानकारी एवं आपात स्थिति में मदद आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

(6) देवड़ी मंदिर का विकास: राँची जिले अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध देवड़ी (देवरी) मंदिर के पर्यटकीय विकास को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण करने की अनुशंसा की गई। यह 700 वर्ष पुराना मंदिर 16 भुजाओं वाली मां देवरी (दुर्गा का रूप) को समर्पित है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं।

(7) तकनीकी जाँच समिति का गठन: उपायुक्त ने सभी माननीयों से प्राप्त पर्यटन विकास संबंधी प्रस्तावों का स्थलीय निरीक्षण कर उनके क्रियान्वयन की संभावनाओं पर प्रतिवेदन तैयार करने हेतु जिला स्तर पर एक तकनीकी विशेषज्ञों की जाँच समिति गठित करने की अनुशंसा की।

(8) सुरक्षा एवं गुणवत्ता पर जोर: उपायुक्त ने सभी पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही, वर्तमान में क्रियान्वित पर्यटकीय विकास योजनाओं की गुणवत्ता को उच्च मानक स्तर पर बनाए रखने हेतु कार्यकारी एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए गए।

बैठक में राँची जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों जैसे दशम जलप्रपात, हुंडरू जलप्रपात, जोन्हा जलप्रपात, टैगोर हिल, रॉक गार्डन, देवड़ी मंदिर, मारशली पहाड़ आदि के समग्र विकास पर चर्चा हुई। इन स्थलों को और अधिक आकर्षक बनाने, बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, प्रकाश, शौचालय, बैठने की व्यवस्था तथा सुरक्षा को मजबूत करने पर सहमति बनी।

“झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है

उपायुक्त, राँची ने कहा कि राँची को “झरनों का शहर” के रूप में और अधिक प्रसिद्ध बनाने तथा पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। बैठक में लिए गए निर्णयों को शीघ्र क्रियान्वित किया जाएगा ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और जिले का पर्यटन उद्योग फले-फूले।

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संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा 2023 के माध्यम से नियुक्त उप समाहर्ताओं को जिला प्रशिक्षण हेतु राँची में पदस्थापित किया गया है

नवपदस्थापित अधिकारियों ने आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की

जिला प्रशासन और नवप्रशिक्षित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

सभी अधिकारियों को जिला प्रशिक्षण के दौरान सक्रिय रहते हुए स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रोत्साहित किया

रांची,30.03.2026 – संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, 2023 के माध्यम से चयनित एवं नियुक्त उप समाहर्त्ताओं को जिला प्रशिक्षण प्राप्त करने के उद्देश्य से राँची जिले में पदस्थापित किया गया है।

जिसपर नवपदस्थापित अधिकारियों ने आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने नवपदस्थापित अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा जिला प्रशासन में अपनी भूमिका निभाते हुए जनसेवा के प्रति समर्पित रहने के साथ-साथ विभिन्न दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, निष्ठा तथा तेज गति से कार्य संपादन पर जोर दिया।

मुलाकात के दौरान उपस्थित नवपदस्थापित अधिकारी निम्न हैं:

1. श्री प्रिंस कुमार

2. श्री दीपक कुमार बर्णवाल

3. श्रीमती दीपमाला

4. सुश्री प्रियंका भारती

5. सुश्री कुमारी श्रेया

6. श्री सतीश कुमार रजक

7. सुश्री अंजली रानी

8. सुश्री पिंकी प्रियंका हेम्ब्रम

9. श्री अनिल कुमार चौधरी

10. श्री पुनीत लॉरेंस एक्का

उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को जिला प्रशिक्षण के दौरान सक्रिय रहते हुए स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रोत्साहित किया।

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अग्निवीर तथा महिला मिलिट्री पुलिस (WMP) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अप्रैल 2026 कर दी गई है

Join Indian Army (JIA) पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण अवश्य पूरा कर लें। देरी से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन करें

भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं मेरिट के आधार पर होती है

किसी भी प्रकार की अनुचित सलाह या दलाली से बचें

रांची,30.03.2026 – आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस (ARO) रांची ने अग्निवीर जनरल ड्यूटी तथा महिला मिलिट्री पुलिस (Women Military Police – WMP) भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब अभ्यर्थी 10 अप्रैल 2026 तक अपना ऑनलाइन पंजीकरण पूर्ण कर सकते हैं।

जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे अंतिम तिथि से पहले Join Indian Army (JIA) पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण अवश्य पूरा कर लें। देरी से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन करें।

सूचना एवं सहायता के लिए संपर्क करें:

* JIA पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें

* कार्यालय समय के दौरान *ARO रांची कार्यालय* में व्यक्तिगत रूप से संपर्क करें

* अंतिम तिथि: 10 अप्रैल 2026 (शाम तक)

* आधिकारिक वेबसाइट: www.joinindianarmy.nic.in

*भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं मेरिट के आधार पर होती है।

* किसी भी प्रकार की अनुचित सलाह या दलाली से बचें।

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नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वाले सावधान: रांची ट्रैफिक पुलिस का सख्त अभियान

रांची,29.03.2026 – : राजधानी रांची में वाहन नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक इस मामले में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और कुछ आरोपियों को जेल भी भेजा गया है।

हाल के दिनों में शहर के पुनदाग, खेलगांव और टाटीसिलवे थाना क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लूट की कई घटनाएं सामने आई हैं। जांच में यह बात सामने आई कि अपराधियों ने जिन वाहनों का इस्तेमाल किया, उनकी नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी या कई मामलों में नंबर प्लेट गायब थी, जिससे सीसीटीवी कैमरों में उनकी पहचान नहीं हो सकी।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार पहले लोग ऑनलाइन चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट में बदलाव करते थे, लेकिन अब अपराधी भी इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

इस मामले पर राकेश सिंह ने कहा कि बीते 2-3 महीनों में 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं। 4 लोगों को जेल भेजा गया है, जबकि करीब 50 वाहनों को जब्त कर कोर्ट में कार्रवाई के लिए भेजा गया है।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि नंबर प्लेट में छेड़छाड़ करना एक आपराधिक अपराध है और इसमें कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

राजधानी में ट्रैफिक पुलिस द्वारा सभी चौक-चौराहों पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे वाहनों को तुरंत पकड़कर कोर्ट प्रॉसिक्यूशन के लिए भेजा जाए।

दरअसल, अब शहर में अधिकांश जगहों पर कैमरों के जरिए स्वचालित चालान काटे जा रहे हैं। इससे बचने के लिए कुछ लोग नंबर प्लेट पर कपड़ा या अन्य चीजें लगाकर नंबर छिपाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब इस तरह की हरकतों पर पुलिस की नजर है।

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रांची में सभी पर्व-त्योहार अभूतपूर्व शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता के साथ सम्पन्न

*ऐतिहासिक एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन के लिए समस्त राँचीवासियों का जिला प्रशासन ने जताया हृदय से आभार

* केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, तपोवन मंदिर पूजा समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, चैती दुर्गा पूजा समिति,केन्द्रीय सरना समिति, सभी सरना समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति सहित सभी पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों के समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट समन्वय की सराहना

* जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों, लाइन डिपार्टमेंट, नगर निगम, बिजली एवं अन्य संबंधित विभाग तथा मीडिया प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही महत्वपूर्ण

* सभी के समन्वय, सतर्कता एवं समर्पण से पूरे जिले में विधि-व्यवस्था सुदृढ़ बनी रही – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

* हमारी साझा संस्कृति, परस्पर विश्वास और सामाजिक एकजुटता के सशक्त उत्सव ने रांची को एक आदर्श सामाजिक समरसता के रूप में स्थापित किया – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,29.03.2026 – राँची जिला में रामनवमी, चैती छठ पूजा, ईद, सरहुल एवं रमजान जैसे पर्व-त्योहार जिस गरिमा, अनुशासन, पारस्परिक सम्मान एवं अद्वितीय भाईचारे के साथ सम्पन्न हुए, वह न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण बनकर उभरा है। इन अवसरों पर सम्पूर्ण राँचीवासियों ने गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत परंपरा को सशक्त करते हुए सामाजिक एकता, धार्मिक सहिष्णुता एवं सौहार्द का अनुपम परिचय दिया।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने इस ऐतिहासिक एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन के लिए समस्त राँचीवासियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्वों का आयोजन नहीं, बल्कि हमारी साझा संस्कृति, परस्पर विश्वास और सामाजिक एकजुटता का सशक्त उत्सव है, जिसने रांची को एक आदर्श सामाजिक समरसता के रूप में स्थापित किया है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, तपोवन मंदिर पूजा समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, चैती दुर्गा पूजा समिति, केन्द्रीय सरना समिति, सभी सरना समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति सहित सभी पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों के समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट समन्वय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन सभी संगठनों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अत्यंत संवेदनशीलता, परिपक्वता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ करते हुए शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

साथ ही उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों, बिजली विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मियों (लाइन डिपार्टमेंट), नगर निगम तथा मीडिया प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी, सतत निगरानी एवं कर्तव्यनिष्ठा को इस सफलता का आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय, सतर्कता एवं समर्पण का परिणाम है कि पूरे जिले में विधि-व्यवस्था सुदृढ़ बनी रही और आम नागरिकों ने निर्भय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में अपने-अपने पर्व मनाए।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने विश्वास व्यक्त किया कि रांचीवासी भविष्य में भी इसी प्रकार आपसी विश्वास, भाईचारे, सहिष्णुता एवं समरसता की भावना को अक्षुण्ण रखते हुए हर पर्व-त्योहार को शांति, गरिमा और उल्लास के साथ मनाते रहेंगे तथा रांची की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त करेंगे।

जिला प्रशासन समस्त नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक तंत्र एवं मीडिया के अमूल्य सहयोग के लिए आभार प्रकट करता है।

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गैर मान्यता प्राप्त निजी/गैर सरकारी विद्यालयों का 08 अप्रैल 2026 तक मान्यता हेतु आवेदन देना अनिवार्य

08 अप्रैल 2026 तक मान्यता हेतु आवेदन अनिवार्य

नियमों का उल्लंघन करने पर विद्यालय बंद करने की कार्रवाई संभव

विभागीय पोर्टल https://rte.jharkhand.gov.in पर किया जा सकता है आवेदन

विद्यालयों की सुविधा हेतु यूजर मैनुअल एवं मान्यता प्रमाण-पत्र का प्रारूप भी पोर्टल से किया जा सकता है डाउनलोड

रांची,29.03.2026 – सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड, राँची के निदेश के आलोक राज्य के सभी गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय, जहाँ कक्षा 1 से कक्षा 8 तक शिक्षण कार्य संचालित है, उन्हें झारखंड निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 (संशोधित 2019 एवं 2025) के प्रावधानों के अनुरूप अनिवार्य रूप से मान्यता प्राप्त करना है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार जिला के सभी संबंधित विद्यालय प्राचार्य/प्रबंधन समिति/संचालकों को निर्देशित किया जाता है कि वे विभागीय पोर्टल https://rte.jharkhand.gov.in
पर जाकर अपने विद्यालय का पंजीकरण कर ऑनलाइन आवेदन पत्र दिनांक 08.04.2026 तक अनिवार्य रूप से जमा (Submit) करना सुनिश्चित करें।

विद्यालयों की सुविधा हेतु यूजर मैनुअल एवं मान्यता प्रमाण-पत्र का प्रारूप भी उक्त पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।

🔹 प्रमुख निर्देश

यह आदेश सभी गैर मान्यता प्राप्त निजी/गैर सरकारी विद्यालयों पर लागू होगा, जहाँ कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई हो रही है।

सभी विद्यालय प्रबंधन को समय-सीमा के भीतर आवेदन पूर्ण रूप से भरकर जमा करना सुनिश्चित करना होगा।

आवेदन के दौरान विद्यालय से संबंधित सभी आवश्यक विवरण

➤ आधारभूत संरचना

➤ योग्य शिक्षक

➤ छात्र नामांकन

➤ सुरक्षा व्यवस्था

➤ शौचालय एवं पेयजल सुविधा

सही एवं अद्यतन रूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा।

⚠️ नियम उल्लंघन पर विधिसम्मत कार्रवाई

यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित तिथि तक आवेदन प्रस्तुत नहीं किया जाता है या विद्यालय निर्धारित मानकों/शर्तों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो अधिसूचना संख्या 1291, दिनांक 11.05.2011 की कंडिका-12(6) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय को बंद भी किया जा सकता है।

जिला प्रशासन की अपील

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सभी विद्यालय संचालकों एवं प्राचार्यों से अपील की है कि वे इस निर्देश को गंभीरता से लें और समय-सीमा के भीतर आवेदन कर अपने विद्यालयों का संचालन विधिसम्मत बनाएं, ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सुरक्षित रह सकें।

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मन की बात की 132वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।

‘मन की बात’ में एक बार फिर आप सभी का स्वागत है। मार्च का ये महीना, वैश्विक स्तर पर बहुत ही हलचल भरा रहा है। हम सबको याद है कि पूरा विश्व भूतकाल में कोविड के कारण एक लंबे समय तक अनेक समस्याओं से गुजरा था। हम सभी की अपेक्षा थी कि कोरोना के संकट से निकलने के बाद  दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी। लेकिन, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियाँ बनती चली गईं। वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध चल रहा है। हमारे लाखों परिवारों के सगे-संबंधी इन देशों में रहते हैं, खासतौर पर खाड़ी देशों में काम करते हैं। मैं Gulf Countries का बहुत आभारी हूँ, वे ऐसे एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों को वहाँ पर हर प्रकार की मदद दे रहे हैं।

साथियो,

जिस क्षेत्र में अभी युद्ध चल रहा है, वह क्षेत्र हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है। हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है, इनकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है।

साथियो,

निश्चित तौर पर यह चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से फिर यह आग्रह करूंगा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, इसमें स्वार्थ भरी राजनीति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में जो भी लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। मैं सभी देशवासियों से अपील भी करूंगा कि वो जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में ना आएं। सरकार की तरफ से जो आपको निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं। मुझे हर बार की तरह इस बार भी विश्वास है कि जैसे हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।

मेरे प्यारे देशवासियो,

भारत की ताकत यहाँ के कोटि–कोटि लोगों में निहित है। आज ‘मन की बात’ में एक ऐसे प्रयास के बारे में बताना चाहता हूं, जो देशवासियों की जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है।  ये प्रयास है – ज्ञान भारतम सर्वे, जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद manuscripts यानि पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है।  इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम ऐप है। आपके पास अगर कोई manuscript है, पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। हर entry से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है। मुझे इस बात की खुशी है कि अब तक हजारों manuscripts पांडुलिपि लोगों ने शेयर की हैं। उदाहरण के तौर पर अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग जी ने ताई लिपि में पांडुलिपियाँ साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है। कुछ संस्थाओं ने palm leaf यानि ताड़ के पत्तों पर लिखी manuscripts दी हैं। राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने copper plates पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियाँ share की हैं। वहीं, लद्दाख की Hamis Monastery ने तिब्बती में बहुमूल्य पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है। यहाँ पर मैंने कुछ ही उदाहरण दिए हैं। यह survey, जून के मध्य तक जारी रहने वाला है। आप सभी से मेरा आग्रह है कि अपनी संस्कृति से जुड़े पहलुओं को सामने लाएं और share करें।

मेरे प्यारे देशवासियो,

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। देश के युवा की ताकत जब राष्ट्र निर्माण में जुड़ती है, तो बहुत बड़ी मदद मिलती है। राष्ट्र निर्माण के इस दायित्व को निभाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है, मेरा युवा भारत यानि MY Bharat संगठन। ये संगठन देश के युवाओं को अलग – अलग positive गतिविधियों से जोड़ रहा है। हाल ही में MY Bharat द्वारा Budget Quest का आयोजन किया गया। इसका मकसद था देशभर के युवाओं को budget प्रक्रिया और नीति निर्माण से जोड़ना। इससे जुड़ी quiz में देशभर से करीब 12 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया। Quiz के बाद करीब एक लाख साठ हजार प्रतिभागियों को निबंध प्रतियोगिता के लिए चुना गया। मुझे इनमें से कुछ निबंध पढ़ने का अवसर भी मिला। इनसे पता चलता है कि मेरे युवा साथी देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए कितना तत्पर हैं। तेलंगाना के सूर्यापेट से कोटला रघुवीर रेड्डी, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सौरभ बैसवार और बिहार के गोपालगंज से सुमित कुमार ने किसान कल्याण से जुड़े topic पर लिखा है । पंजाब के मोहाली से आंचल और ओडिशा के केंद्रपाड़ा से ओम प्रकाश रथ ने, women – led development को आगे बढ़ाने के तरीकों पर अपने विचार प्रकट किए हैं।

हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि Green और Clean Bharat ही समृद्ध भारत का मार्ग है । इससे उनकी गहरी सोच का पता चलता है । दिल्ली के शंख गुप्ता का सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए और अधिक प्रयास होने चाहिए।

हमारे युवा साथियों ने skill development और ease of doing business पर भी अपने विचार साझा किए हैं। मैं उन सभी युवाओं की सराहना करता हूं, जो अपने ideas share कर रहे हैं। ये विचार देश को आगे ले जाने में बहुत अहम हैं।

 

मेरे प्यारे देशवासियो,

देशभर के cricket fans के लिए यह महीना जोश और उत्साह से भर देने वाला रहा है। जब भारत ने T20 World Cup में ऐतिहासिक जीत दर्ज की तो देश में हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। अपनी team की इस शानदार सफलता पर हम सभी को बहुत गर्व है। पिछले महीने के आखिर में कर्नाटक के हुबली में एक बहुत ही रोचक मुकाबला देखने को मिला, इस मुकाबले को जीतकर जम्मू-कश्मीर की cricket team ने रणजी trophy को अपने नाम कर लिया। सबसे खुशी की बात है कि करीब 7 दशकों के लंबे इंतजार के बाद इस team ने अपना पहला रणजी खिताब हासिल किया। यह अभूतपूर्व सफलता खिलाड़ियों के कई बरसों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। टीम के कप्तान पारस डोगरा ने अद्भुत कौशल दिखाया। अपने नेतृत्व से इस जीत में उन्होंने अहम योगदान दिया। आज देश में कश्मीर के युवा गेंदबाज आकिब नबी के प्रदर्शन की भी चर्चा हो रही है, जिन्होंने रणजी सीजन में 60 विकेट लिए हैं। इस जीत से टीम के खिलाड़ी और coaching staff के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के लोग बहुत रोमांचित हैं। Cricket के मैदान में इस शानदार प्रदर्शन के बाद वहां के युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और बढ़ गया है। आने वाले समय में यह कई युवाओं को sports को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। जम्मू-कश्मीर के लोगों में खेलों को लेकर गजब का जज्बा रहा है। मुझे खुशी है कि अब यह बड़े खेल आयोजनों का हब भी बनता जा रहा है। Khelo India Winter Games के लिए गुलमर्ग तो पहले ही अपनी पहचान बना चुका है। Football जैसे sports भी यहां के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। मुझे आशा है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों की जीत का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

मेरे प्यारे देशवासियो,

मैं अक्सर कहता हूं, जो खेलेगा, वो खिलेगा। मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि हमारे देश के युवा, अब उन खेलों को भी खूब अपना रहे हैं, जो पहले उतने लोकप्रिय नहीं थे। उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली Athlete गुलवीर सिंह ने ऐसे ही एक खेल में कमाल कर दिखाया है। उन्होंने कुछ ही हफ्ते पहले New York City Half Marathon में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच डाला। वे एक घंटे से कम समय में Half Marathon पूरा करने वाले पहले भारतीय Athlete बने। Squash खिलाड़ी बेटी अनाहत सिंह ने Squash on Fire Open का बड़ा अंतर्राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने ये सफलता हासिल की। इसके साथ ही वे PSA World Ranking में Top-20 में जगह बनाने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई महिला खिलाड़ी बन गई हैं। मुझे अस्मिता Athletics League की जानकारी भी मिली है। इसमें 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर कई sporting events का शानदार आयोजन किया गया। League में करीब 02 लाख बेटियों ने भागीदारी की। ये देखकर अच्छा लगता है कि भारत की नारीशक्ति देश में हो रहे इस sporting transformation में अहम भूमिका निभा रही है।

साथियों,

मेरा हमेशा से यह आग्रह रहा है कि आप सभी अपनी fitness पर जरूर ध्यान दें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में अब 100 दिनों से भी कम समय बचा है, पूरी दुनिया में योग के प्रति आकर्षण भी लगातार बढ़ रहा है। अफ्रीका के जिबूती में अल्मिस जी अपने अरविंद योग सेंटर के जरिए योग को बढ़ावा दे रहे हैं। वे यहां की कई और जगहों पर भी लोगों को योग सिखाते हैं। आपमें से कई लोगों ने Instagram Content Creator युवराज दुआ की post पर मेरे से reply को लेकर comments किए हैं। उन्होंने मुझसे आग्रह किया था कि मैं उनके पिता से कहूं कि वे sugar intake कम करें। मुझे खुशी है कि मेरे अनुरोध का उनके पिता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि आप भी sugar intake को कम करें और जैसा मैंने पहले भी कहा है, हमें खाने के तेल में 10 प्रतिशत की कटौती भी करनी है। इन छोटे-छोटे प्रयासों से आप मोटापे और lifestyle से जुड़ी बीमारियों से दूर रहेंगे।

मेरे प्यारे देशवासियों,

एक पुरानी कहावत है ‘करत करत अभ्यास के, जड़मत होत सुजान’ यानी हम जब निरंतर अभ्यास करते हैं तो उतनी ही ज्यादा बुद्धिमता हासिल करते जाते हैं। लोग भी सबसे बेहतर तब सीखते हैं जब उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। मुझे बेंगलुरु में शिक्षा से जुड़े एक unique प्रयास के बारे में जानकारी मिली है। यहां एक टीम Prayog Institute of Education Research चला रही है। इस टीम का Research Projects पर विशेष focus है। यह टीम school level पर science education को लोकप्रिय बनाने में जुटी है। उन्होंने ‘अन्वेषण’ नाम का एक प्रयोग किया है, इसके जरिए 9वीं से 12वीं class तक के students को Chemistry, Earth Science और Wellness जैसे क्षेत्रों में Innovation करने का मौका मिलता है – इससे Students  को research का बहुत अच्छा अनुभव हासिल होता है साथ ही अपने Projects को publish करने का platform भी मिलता है।

साथियो,

परीक्षा पर चर्चा के दौरान कुछ Students ने मुझे बताया था कि वह science पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें इससे डर भी लगता है। इस दिशा में Prayog की टीम का प्रयास बहुत ही सराहनीय है, यह पहल, Students को science के साथ जुडने और Practically कुछ करके दिखाने का मौका देती है। जब हम किसी चीज को खुद करके देखते हैं – जिज्ञासा और रुचि पैदा होती है। कौन जानता है कि मेरे इन युवा साथियों में ही कोई आने वाले समय का बेहतरीन scientist हो।

 

साथियो,

शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य को तैयार करने का एक प्रयास नागा समुदाय भी कर रहा है। इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं। वो इस पर गर्व तो करते ही हैं साथ ही अपनी approach को आधुनिक भी रखते हैं। Naga tribes में मोरूंग लर्निंग की एक पारंपरिक व्यवस्था थी, इसमें, बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और life skills  के बारे में बताते थे। समय के साथ यह system अब मोरूंग concept of education में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है। इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियाँ, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ life skills सिखाते हैं। इस तरह हमारा नागालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए, बच्चों की शिक्षा को आगे ले जा रहा है। आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयासो के बारे में पता चले, तो मुझे जरूर share कीजिएगा।

मेरे प्यारे देशवासियो,

देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है यानि ये समय जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का है। पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को बहुत जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश-भर में करीब 50 लाख Artificial Water Harvesting Structure बनाए गए हैं। मुझे ये देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, कहीं बरसात के जल को सहेजने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इन सरोवरों की साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। आज मैं आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।

साथियो,

त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव 3000  फीट की ऊंचाई पर बसा है। ये गाँव पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा था। गर्मियों के दिनों में गाँव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। आखिरकार गाँव के लोगों ने बारिश की हर बूंद को सहेजने का निर्णय किया। आज वांगमुन गाँव के लगभग हर घर में Rooftop Rainwater Harvesting System स्थापित हो गया है। जो गाँव कभी पानी की कमी से जूझ रहा था, वो जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

साथियो,

इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली। यहां के किसानों ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली idea पर काम किया। यहां के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे recharge तालाब और सोखता गड्ढे बनाएँ जिससे बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे वह जमीन के अंदर जाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस model को अपना चुके हैं और गाँव का ground water level बहुत बेहतर हो गया है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में soak pit बनाया और water conservation का जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का ground water level बेहतर हुआ है, साथ ही प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली बीमारियाँ बहुत कम हो गई हैं।

 

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे मछुआरे भाई-बहन सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं। वे सुबह होने से पहले समन्दर की लहरों से जूझते हुए, अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। ऐसे मेहनतकश मछुआरों का जीवन आज कई तरह से आसान बनाया जा रहा है। चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा, ऐसी कई पहल उनके बहुत काम आ रही है। हम जानते हैं कि समन्दर में उनकी गतिविधियों को मौसम का रुख बहुत प्रभावित करता है। इसे देखते हुए Technology के जरिए भी उनकी पूरी मदद की जा रही है। मुझे बेहद खुशी है कि ऐसे प्रयासों से हमारा fisheries sector न केवल समृद्ध हो रहा है, बल्कि कुछ नया करने का जज्बा भी भर रहा है।  आज fisheries और seaweed के क्षेत्र में नए-नए innovation हो रहे हैं, और हमारे मछुआरे भाई-बहन आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ओडिशा के सम्बलपुर की सुजाता भूयान जी एक गृहणी थीं, लेकिन वो कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं। इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड reservoir में Fish-Farming शुरू की। शुरुआती  दिन उनके लिए आसान नहीं थे। मौसम में होने वाले बदलाव, मछलियों के खाने का प्रबंध और घर की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने जैसी कई चुनौतियाँ थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते business में बदल दिया। आज उनकी सफलता समुदाय की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई।

साथियो,

लक्षद्वीप में मिनीकॉय के हाव्वा गुलजार जी की कहानी हमारी माताओं-बहनों की अद्भुत संकल्प-शक्ति को सामने लाती है। दरअसल वे एक Fish Processing Unit चलाती थीं। लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास एक अच्छा Cold Storage हो तो वे और बेहतर कर सकती हैं,  इसलिए, उन्होंने Cold Storage Unit लगाने का फैसला किया। आज यही उनकी ताकत बन चुका है। अब वे बेहतर Planning के साथ कारोबार कर पा रही हैं।

साथियो,

देश में आज हर तरफ ऐसे प्रयास हो रहे हैं, जो प्रेरित करने वाले हैं। बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना। इसके लिए उन्होंने एक Pond Farm बनाया। इस कारोबार के लिए उन्हें training भी मिली। अब अपने Pond से मछलियों की बिक्री कर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। वहीं Seaweed की मांग को देखते हुए कई लोगों ने Seaweed Cultivation को भी अपनाया है। इसका उन्हें बड़ा लाभ भी हो रहा है। मैं एक बार फिर Fisheries Sector से जुड़े सभी लोगों की सराहना करता हूं। हमारी Economy को सशक्त बनाने के लिए उनका प्रयास बेहद प्रशंसनीय है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब समाज खुद आगे आता है, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन जाते हैं। हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं, जो हमें यही सिखाते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक प्रेरक प्रयास देखने को मिला। वहाँ एक ही घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए और एक नया Guinness World Record बना। इस प्रयास की सबसे खास बात ये रही कि इसमें हजारों लोग एक साथ जुड़े। छात्र, जवान, स्वयंसेवी संगठन, अलग-अलग संस्थाएं, सबने मिलकर इस काम को संभव बनाया। जनभागीदारी का यही स्वरूप ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के दौरान भी दिखता है। इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं।

साथियो,

 

नागालैंड के चिजामी गाँव से भी एक बहुत प्रेरक प्रयास सामने आया है। चिजामी गाँव की महिलाएं मिलकर 150 से अधिक variety के पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रख रही हैं। इन बीजों को एक community seed bank में संरक्षित किया जा रहा है, जिसे गाँव की महिलाएं ही चलाती हैं। इनमें चावल, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियाँ और कई तरह की जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं। यह एक ऐसा प्रयास है, जिसमें ज्ञान भी सुरक्षित है, परंपरा भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।

 

साथियो,

आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं।

 

मेरे प्यारे देशवासियो,

आज आप देश के किसी छोटे-बड़े शहर में जाएंगे तो एक बदलाव आप जरूर notice करेंगे। आपको बड़ी संख्या में घरों की छत पर solar panel लगे हुए दिखाई देंगे। कुछ साल पहले तक ये इक्का-दुक्का घरों पर ही दिखता था। लेकिन आज ‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का प्रभाव देश के कोने-कोने में दिखने लगा है। इस योजना की वजह से, गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने सूर्य पहल के माध्यम से solar power technology की training ली और 4 महीने का Solar PV technician का course पूरा किया। अब वो एक कुशल solar technician बन गई हैं। पायल एक सोलर उद्यमी के तौर पर अपनी पहचान बना रही हैं। वो आस-पास के जिलों में solar rooftop installation का काम करती हैं और इससे उन्हें हर महीने हजारों रुपए की आय होती है।

 

साथियो,

मेरठ के अरुण कुमार भी अब अपने इलाके में ऊर्जा दाता बन गए हैं। हाल ही में, दिल्ली में हुए कार्यक्रम में अरुण कुमार ने हिस्सा लिया था और अपने अनुभव साझा किये थे। उन्होंने बताया था कि वो न केवल बिजली बिल की बचत कर रहे हैं, बल्कि अपनी अतिरिक्त बिजली बेच भी रहे हैं।

 

साथियो,

जयपुर के मुरलीधर जी की सफलता भी कुछ ऐसी ही है। पहले उनकी खेती डीजल पंप पर निर्भर थी, जिसमें हर साल हजारों रुपए खर्च होते थे। जब उन्होंने solar pump अपनाया, तो उनकी खेती का तरीका ही बदल गया। अब उन्हें ईंधन की चिंता नहीं रहती, सिंचाई समय पर होती है, और उनकी सालाना आय भी बढ़ गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि अब उनका परिवार साफ ऊर्जा के साथ, बेहतर जीवन जी रहा है।

 

साथियो,

‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का फायदा North East के इलाकों में भी मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गाँव ऐसे थे, जहाँ बिजली की समस्या थी। अब solar mini-grid के माध्यम से वहाँ के घरों में रोशनी रहती है। वहाँ बच्चे अब शाम के बाद भी पढ़ पा रहे हैं। लोग mobile charge कर पा रहे हैं और गाँव का सामाजिक जीवन भी बदल गया है।

 

साथियो,

देश में solar ऊर्जा क्रांति के ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं। आप भी इस क्रांति से जुड़िये और दूसरों को भी जोड़िये।

 

मेरे प्यारे देशवासियो

‘मन की बात’ के लिए मुझे हर महीने देश के अलग–अलग हिस्सों से ढ़ेरों संदेश मिलते हैं। इन संदेशों से ये भी पता चलता है कि दूर–दराज के क्षेत्रों में बैठे लोग कितने चाव से इस कार्यक्रम को सुनते हैं। जब मैं आपके सुझाव पढ़ता हूँ, तो मुझे लगता है कि ये सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, ये हम सबका एक साझा संवाद बन गया है। आपके विचार, आपके अनुभव, इस कार्यक्रम को लगातार बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं। आप अपने आसपास की प्रेरक गाथाएं यूं ही साझा करते रहिए। हो सकता है, आपकी एक छोटी सी कोशिश, किसी और के जीवन में बड़ा बदलाव ले आए, किसी को आगे बढ़ने का नया हौसला दे दे – यही तो रेडियो की असली ताकत है। ये देश के अलग–अलग कोने में बैठे लोगों का एक विचार, एक भावना और एक उद्देश्य जोड़ देता है। अगले महीने फिर मिलेंगे, कुछ नए प्रेरक व्यक्तित्वों के साथ, कुछ ऐसे प्रयासों के साथ, जो हमें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देंगे। तब तक, आप अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें – स्वस्थ रहें, खुश रहें।

 

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत पर उसके असर की समीक्षा के लिए आईजीओएम की पहली बैठक की अध्यक्षता की

श्री राजनाथ सिंह ने कहा – मध्यम से लंबी अवधि की तैयारी का नजरिया अपनाना और तेजी से फैसले लेना जरूरी है

रक्षा मंत्री ने कहा – पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय लोगों को किसी भी तरह के असर से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है

आईजीओएम ने राज्यों और जिला प्रशासन के साथ करीबी तालमेल के महत्व को दोहराया

मंत्रालयों और विभागों को अफवाहों, गलत जानकारियों और फेक न्यूज का मुकाबला करने के लिए जानकारी साझा करने का निर्देश दिया गया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 28 मार्च, 2026 को पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर नजर रखने और वहां हो रहे घटनाक्रमों के जवाब में सक्रिय उपायों की सिफारिश करने के लिए गठित ‘मंत्रियों के अनौपचारिक समूह’ (आईजीओएम) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित इस बैठक में वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भाग लिया।

 

आईजीओएम ने बदलती स्थिति और भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर इसके प्रभाव का समग्र रूप से जायजा लिया। रक्षा मंत्री ने एक सक्रिय, समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और बदलते परिदृश्य को देखते हुए सतर्क रहने के महत्व को रेखांकित किया।

बैठक के हिस्से के तौर पर, सचिवों के सात अधिकार प्राप्त समूहों (ईजीओएस) ने प्रस्तुतीकरण दिए, जिनमें चिह्नित प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों और स्थिति को संभालने के लिए पहले से लागू नीतिगत उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। श्री राजनाथ सिंह ने ईजीओएस को स्थिति की बारीकी से निगरानी जारी रखने, मध्यम से दीर्घकालिक तैयारी का दृष्टिकोण अपनाने, उच्च-स्तरीय समन्वय बनाए रखने और त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी नीतिगत प्रयास आपस में तालमेल के साथ होने चाहिए और उन्हें समय-सीमा के भीतर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित मंत्रियों से रचनात्मक सुझाव भी मांगे कि भारत मजबूत और तैयार बना रहे।

आईजीओएम ने राज्यों और जिला प्रशासनों के साथ करीबी तालमेल की अहमियत को फिर से दोहराया, साथ ही अहम नीतिगत पहलों की जानकारी समय पर जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। अलग-अलग उद्योगों पर मौजूदा हालात के असर का आकलन करने की जरूरत पर भी चर्चा की गई। यह निर्देश भी दिया गया कि सभी मंत्रालय और विभाग मौजूदा हालात से जुड़ी जरूरी जानकारी, नए घटनाक्रम और सलाह एमआईबी व्हाट्सऐप चैनल के जरिए साझा करें, ताकि नागरिकों तक सही जानकारी पहुंचे और अफवाहों, गलत जानकारियों और फेक न्यूज का असरदार तरीके से मुकाबला किया जा सके।

बैठक के बाद एक्स पर एक पोस्ट में, रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार, भारतीय लोगों को संघर्ष के किसी भी प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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राँची के रेस्तरां और बार में छापेमारी,नियमों का उल्लंघन कर शराब परोसा जा रहा था

राँची,29.03.2026 – राँची के रातू रोड स्थित मॉल ऑफ राँची के एक रेस्तरां ”लार्ड ऑफ ड्रिंक” (LOD) एवं गोंदा थाना क्षेत्र के कांके रोड स्थित पंचरत्न हाइट के रोमियोलेन बार में देर रात पुलिस ने छापेमारी की है।

बताया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन कर शराब परोसा जा रहा था वही हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करके उच्च ध्वनि में डीजे भी बजाया जा रहा था।सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंची।छापेमारी और कई बार में हुई है।देर रात तक छापेमारी जारी रहा।

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घरेलू गैस की कालाबाजारी पर रांची जिला प्रशासन की कार्रवाई

हरिहर सिंह रोड, मोरहाबादी में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की सूचना पर छापेमारी

दुकान में घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का अवैध रूप से किया जा रहा था भंडारण

कई सिलेंडर और गैस रिफिलिंग उपकरण जब्त

संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश

रांची,29.03.2026 – जिला प्रशासन द्वारा घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हरिहर सिंह रोड, मोरहाबादी में छापेमारी की गई। जिसमें अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का भंडारण एवं रिफिलिंग कर कालाबाजारी किए जाने की पुष्टि हुई।

निर्धारित समय पर पहुंची जिला प्रशासन की टीम द्वारा मौके पर जांच के दौरान पाया गया कि उक्त दुकान पर घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का अवैध रूप से भंडारण किया गया था तथा बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस रिफिल कर अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था। मौके से गैस रिफिलिंग में प्रयुक्त मशीन, पाइप एवं अन्य उपकरण भी बरामद किए गए।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि उक्त गतिविधि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है, क्योंकि इस प्रकार की अवैध रिफिलिंग से किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यह कार्य आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एवं एलपीजी (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) आदेश, 2000 के तहत दंडनीय अपराध है।

छापेमारी के उपरांत सभी जब्त गैस सिलेंडरों एवं उपकरणों को विधिवत जब्ती सूची तैयार कर अधिकृत गैस एजेंसी को सुरक्षित अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की गैस कालाबाजारी की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने हिंदू कॉलेज के पूर्वोत्तर सांस्कृतिक महोत्सव को संबोधित करते हुए पूर्वोत्तर को भारत के विकास का इंजन बताया

“आठ राज्य, एक असाधारण क्षमता का भंडार, पूर्वोत्तर, भारत का वैश्विक दक्षिण का प्रवेश द्वार है”: सिंधिया ने अष्टलक्ष्मी राज्यों के लिए अपने दृष्टिकोण पर जोर दिया

93 प्रतिशत साक्षरता और अतुलनीय संस्कृति के साथ, पूर्वोत्तर को, सभी मोर्चों पर भारत का नेतृत्व करना चाहिए

केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर), ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव एनईटीवाईएम 2026 के 15वें संस्करण को संबोधित किया। यूटी पूर्वोत्तर क्षेत्र की भावना, प्रतिभा और क्षमता का जश्न मनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

 

आयोजकों और छात्रों को निमंत्रण के लिए धन्यवाद देते हुए केंद्रीय मंत्री ने एनईटीवाईएम की सराहना करते हुए इसे एक गतिशील मंच बताया जो पूर्वोत्तर की क्षमता, ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। इसे भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में श्रद्धापूर्वक जाना जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में डीओएनईआर  मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने इस क्षेत्र की अपार क्षमता के बारे में उनकी समझ को, न केवल भारत के लिए बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया और वैश्विक परिदृश्य के लिए एक रणनीतिक सेतु के रूप में भी और व्यापक किया है।

 

अपने 125वें वर्ष के करीब पहुंच रहे एक समृद्ध विरासत वाले संस्थान के विषय पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर की असाधारण मानव पूंजी पर उल्लेख किया। उन्होंने इसकी उल्लेखनीय साक्षरता दर की ओर इशारा किया जो औसतन लगभग 93% है और इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र के युवाओं को सभी क्षेत्रों में भारत के विकास की गाथा का नेतृत्व करना चाहिए।

पूर्वोत्तर से अपने गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव को याद करते हुए श्री सिंधिया ने इस क्षेत्र से अपने पारिवारिक संबंधों और आठों राज्यों की अपनी लगातार यात्राओं के बारे में बताया जो इसके विकास के लिए उनके दृष्टिकोण को प्रेरित और ऊर्जावान बनाए रखती हैं। उन्होंने इस क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई पर भी प्रकाश डाला और असम तथा अन्य राज्यों के प्रदर्शनों को “मंत्रमुग्ध” बताया जहाँ हर हावभाव और गतिविधि में पीढ़ियों की परंपरा और अर्थ समाहित होता है। उन्होंने भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग जैसे सांस्कृतिक दिग्गजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर अद्वितीय कलात्मक और सांस्कृतिक संपदा का भंडार बना हुआ है।

 

केंद्रीय मंत्री ने इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भारत और वैश्विक दक्षिण के बीच एक प्राकृतिक सेतु बताया जो वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में सक्षम है। मंत्रालय की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंधिया ने इस क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार के केंद्रित प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने एनई स्पार्क्स कार्यक्रम, अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम और एनईआर पोर्टल को आगे बढ़ाने के बारे में भी बात की।

एनई स्पार्क्स कार्यक्रम: इसरो के सहयोग से कार्यान्वित यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष 800 छात्रों (प्रत्येक पूर्वोत्तर राज्य से 100) को अंतरिक्ष विज्ञान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से परिचित होने का अवसर प्रदान करता है। इसके आठ बैच पहले ही पूरे हो चुके हैं।

अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम: पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों के छात्रों के बीच संवाद को बढ़ावा देने वाली एक सुनियोजित सांस्कृतिक आदान-प्रदान पहल। इस कार्यक्रम के तहत 32 बैचों में कुल 1,280 छात्र शामिल हैं और 2030 तक इसका विस्तार करके 8,000 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र पोर्टल का विकास: अप्रैल 2026 में शुरू होने वाला यह डिजिटल प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय कैरियर सेवा के साथ एकीकृत होकर, पूर्वोत्तर क्षेत्र में 1,000 से अधिक रोजगार के अवसर, 300 से अधिक कैरियर मार्ग, 200 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं, 3,000 से अधिक पाठ्यक्रम और 800 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंच प्रदान करेगा। इस पोर्टल का उद्देश्य कौशल और रोजगार के अवसरों के बीच की खाई को कम करना है।

 

श्री सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर के प्रति दृष्टिकोण के इरादे से कार्यान्वयन की ओर अग्रसर हुआ है, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि अवसरों को पहुंच और समावेशन द्वारा परिभाषित किया जाए। अपने संबोधन के समापन में, श्री सिंधिया ने पूर्वोत्तर के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि चर्चा इस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति से हटकर इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि यह क्या बन रहा है और इसके युवा इसे क्या बनाने में सक्षम हैं। उन्होंने एनईटीवाईएम को केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि पहचान, आकांक्षा और विकसित भारत की ओर भारत की सामूहिक यात्रा की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

 

इस कार्यक्रम में छात्रों, कलाकारों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक जीवंतता और आकांक्षाओं का जश्न मनाया।

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स्मार्ट पुलिस क्षमताओं को सशक्त करने के लिए टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) ने दिल्ली पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

दिल्ली पुलिस विभाग (सी डॉट) ने प्रौद्योगिकी आधारित पुलिस, जन सुरक्षा और भविष्य के लिए तैयार कानून प्रवर्तन प्रणाली के साथ “आत्मनिर्भर भारत” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए दिल्ली पुलिस को अपनी तकनीकी क्षमता का विस्तार प्रदान किया है।

सीडीओटी ने सुरक्षित संचार, चेहरे की पहचान, साइबर सुरक्षा और क्वांटम सुरक्षा सहित स्वदेशी तकनीकी समाधानों का एक व्यापक समूह पेश किया है, जिसे दिल्ली पुलिस के लिए तैनात किया जाएगा।

नई दिल्ली – भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डॉट) के अंतर्गत आने वाले प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्थान, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी- डॉट) ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित, स्वदेशी और सुरक्षित पुलिस के समाधानों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दिल्ली पुलिस के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस युक्तिपूर्ण सहयोग का उद्देश्य दिल्ली पुलिस की परिचालन दक्षता, सुरक्षित संचार, निगरानी, ​​साइबर सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए सी-डीओटी के अत्याधुनिक, स्वदेशी तकनीकी समाधानों के पोर्टफोलियो का लाभ उठाना है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मजबूत किया जा सके।

समझौते के अंर्तगत, पुलिस विभाग आधुनिक पुलिस आवश्यकताओं के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए नौ उन्नत समाधानों को तैनात करेगा। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस)/फ्रॉडप्रो उपलब्ध डेटाबेस के साथ फोटो मिलान के माध्यम से संदिग्धों, लापता व्यक्तियों और बार-बार अपराध करने वालों की पहचान करने में सक्षम बनाएगा, जिससे कानून-व्यवस्था तैनाती के दौरान जांच प्रक्रियाओं, भीड़ निगरानी और पहचान सत्यापन को मजबूती मिलेगी। पुलिस विभाग का एकीकृत संचार समाधान, समवाद , व्यक्तिगत और समूह चैट, ऑडियो/वीडियो कॉल और आधिकारिक डेटा साझाकरण के लिए एक सुरक्षित मंच प्रदान करेगा, जिससे नियमित संचालन और आपात स्थितियों के दौरान इकाइयों, जिलों और विशेष शाखाओं के बीच निर्बाध और सुरक्षित समन्वय सुनिश्चित होगा। इसके पूरक के रूप में, समवाद प्राइम , एक समर्पित विशेष हैंडसेट-आधारित सुरक्षित संदेश प्रणाली, वरिष्ठ अधिकारियों और परिचालन टीमों के बीच महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान गोपनीयता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए तैनात की जाएगी।

सी-डॉट मीट, एक सुरक्षित वेब-आधारित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समाधान है जिसमें मल्टी-कैमरा एक्सेस, प्रेजेंटेशन शेयरिंग और सहयोगी व्हाइटबोर्ड जैसी सुविधाएं हैं, जो ब्रीफिंग, अंतर-इकाई समन्वय और प्रशिक्षण सत्रों को सरल बनाएगी। सी-डॉट मिशन क्रिटिकल सर्विसेज (एमसीएक्स) प्लेटफॉर्म सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन अभियानों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सुरक्षित, निजी और कम देरी वाले संचार को सक्षम करेगा, जिससे बड़े पैमाने पर होने वाली घटनाओं, आपदा प्रतिक्रिया और कानून-व्यवस्था की स्थितियों के दौरान फील्ड अधिकारियों के बीच वास्तविक समय समन्वय सुनिश्चित होगा। चेहरे की पहचान द्वारा संचालित सी-डॉट इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम , सटीक उपस्थिति रिकॉर्डिंग, प्रॉक्सी मार्किंग की रोकथाम और संवेदनशील पुलिस प्रतिष्ठानों पर मजबूत एक्सेस कंट्रोल के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगा।

सी-डॉट सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन मोबाइल उपकरणों और सार्वजनिक डिस्प्ले सिस्टम में महत्वपूर्ण अलर्ट के भू-लक्षित प्रसार को सक्षम करेगा, सार्वजनिक सलाह, यातायात अलर्ट, लापता व्यक्ति सूचनाओं और आपातकालीन चेतावनियों का समर्थन करेगा।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, त्रिनेत्रा ईएसओसी , एक एआई-संचालित एकीकृत सुरक्षा संचालन प्लेटफॉर्म, एंडपॉइंट्स की निगरानी करेगा, कमजोरियों की पहचान करेगा और विसंगतियों का पता लगाएगा, जिससे दिल्ली पुलिस के आईटी बुनियादी ढांचे, जिसमें आंतरिक इकोसिस्टम और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम शामिल हैं, की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। वहीं, त्रिनेत्रा 360 साइबर इंटेलिजेंस, ब्रांड मॉनिटरिंग, अटैक सरफेस मॉनिटरिंग और एआई-संचालित डिजिटल रिस्क मैनेजमेंट प्रदान करेगा। तैनाती को पूरा करते हुए, सी-डीओटी के क्वांटम-आधारित सुरक्षा समाधान , जिनमें कॉम्पैक्ट एन्क्रिप्शन मॉड्यूल (सीईएम), क्वांटम सिक्योर स्मार्ट वीडियो फोन (क्यूएसएसवीआईपी) और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (क्यूकेडी) शामिल हैं, दिल्ली पुलिस के वातावरण के लिए भविष्य के लिए तैयार, क्वांटम-प्रतिरोधी सुरक्षित वॉयस, वीडियो और डेटा संचार प्रदान करेंगे।

इस अवसर दिल्ली परिवहन विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा,  दिल्ली पुलिस के साथ यह साझेदारी स्वदेशी नवाचार को वास्तविक दुनिया में प्रभावी बनाने के लिए सी- डॉट की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सुरक्षित संचार, एआई-संचालित निगरानी, ​​साइबर सुरक्षा और क्वांटम सुरक्षा के क्षेत्र में अपने उन्नत समाधानों को लागू करके, हम दिल्ली में एक सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक सुगम ईको सिस्टम के निर्माण में योगदान देने पर गर्व महसूस करते हैं। यह सहयोग प्रौद्योगिकी-सशक्त, आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में दिल्ली के पुलिस आयुक्त श्री सतीश गोलछा और पुलिस विभाग के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय के साथ-साथ दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने दिल्ली में एक मजबूत, प्रौद्योगिकी-आधारित पुलिस प्रणाली के निर्माण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि यह साझेदारी देश भर में कानून प्रवर्तन में प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य करेगी।

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उपराष्ट्रपति ने आईआईएम रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

छात्रों से ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ नेतृत्व करने का आग्रह किया

प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से आगे बढ़ना चाहिए: उपराष्‍ट्रपति

शॉर्टकट की बजाय चरित्र और लाभ की बजाय उद्देश्य को चुनें: उपराष्‍ट्रपति

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन आज झारखंड के रांची स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीन साल के अंतराल के बाद संस्थान का दौरा करना उनके लिए खुशी की बात है। झारखंड के पूर्व राज्यपाल के रूप में अपने जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस संस्थान की प्रगति को बड़ी दिलचस्पी से देखते रहे हैं और इस दौरान आईआईएम रांची द्वारा हासिल की गई प्रगति वास्तव में उल्लेखनीय रही है।

उपराष्ट्रपति ने सामाजिक रूप से उत्तरदायी शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से परे जाना चाहिए एवं समाज के साथ जुड़ना चाहिए, वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करना चाहिए और समावेशी विकास में योगदान देना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अकादमिक केस स्टडी विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करती हैं, जबकि जीवन में ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो लोगों की आजीविका, विश्वास और व्यापक सामाजिक हित को प्रभावित करते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन मूल्यों और नैतिकता से परिभाषित करें जिनका अनुसरण करते हुए उपलब्धियां हासिल हुईं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नैतिक नेतृत्व, ईमानदारी और विश्वास ही स्थायी संस्थानों की नींव हैं। उन्होंने छात्रों को शॉर्टकट की बजाय चरित्र और लाभ की बजाय उद्देश्य को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से 2047 में विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में योगदान देने का आह्वान करते हुए उनसे “वैश्विक स्तर पर सोचने, स्थानीय स्तर पर कार्य करने” और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनके कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखे।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्‍हें सफलता, पूर्णता और उद्देश्यपूर्ण जीवन की शुभकामनाएं दीं, साथ ही उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि सफलता का सच्चा मापदंड इस बात में नहीं है कि कोई क्या अर्जित करता है, बल्कि इस बात में है कि कोई समाज को क्या देता है।

इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार; राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश; केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ; झारखंड सरकार में मंत्री श्री सुदिव्य कुमार; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इससे पहले दिन में, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्‍णन ने देश के उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद राज्य की अपनी इस पहली यात्रा के दौरान खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थान का दौरा किया और इस महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि उलिहातु की दोबारा यात्रा करके वे अत्यंत भावुक हो गए और झारखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के पहले ही दिन की अपनी यात्रा को उन्होंने स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से भी बातचीत की।

उपराष्ट्रपति ने रांची के भगवान बिरसा चौक पर भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि भी अर्पित की।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किए गए नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन के प्रथम चरण का उद्घाटन किया

नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन के प्रथम चरण का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की विकास गाथा और भारत के विमानन भविष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है: प्रधानमंत्री

उत्तर प्रदेश अब भारत में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों वाले राज्यों में से एक बन गया है: प्रधानमंत्री

विमान पत्तन किसी भी देश में केवल बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे प्रगति को उड़ान देते हैं: प्रधानमंत्री

हमारी सरकार एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रही है: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपनी खुशी और गर्व व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत अभियान’ में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों की सबसे अधिक संख्या वाले राज्यों में से एक बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें दोहरी खुशी है, पहली इस विमान पत्तन की नींव रखने और अब इसका उद्घाटन करने पर, और दूसरी इस भव्य विमान पत्तन का नाम उत्तर प्रदेश से जुड़ने पर। श्री मोदी ने कहा, “यह वही राज्य है जिसने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना और सांसद बनाया, और अब इसकी पहचान इस शानदार विमान पत्तन से जुड़ गई है।”

नए विमान पत्तन के दूरगामी प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नोएडा विमान पत्तन से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर और फरीदाबाद सहित विशाल क्षेत्र को लाभ होगा। उन्होंने जोर दिया कि यह विमान पत्तन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और युवाओं के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा। श्री मोदी ने राज्य के लोगों, विशेष रूप से पश्चिमी यूपी के लोगों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा, “यहां से विमान दुनिया भर के लिए उड़ान भरेंगे, और यह विमान पत्तन विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का प्रतीक बनेगा।”

वर्तमान वैश्विक स्थिति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में एक महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध के कारण आज पूरा विश्व गहरी चिंता में है। इस युद्ध के चलते कई देशों में भोजन, पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत इस युद्ध ग्रस्त क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है। श्री मोदी ने आश्वासन दिया, “सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है कि इस संकट का बोझ आम परिवारों और किसानों पर न पड़े।”

वैश्विक संकट के दौर में भी भारत की तीव्र विकास गति का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही हाल के हफ्तों में यह चौथी बड़ी परियोजना है जिसका या तो उद्घाटन किया गया है या नींव रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस दौरान नोएडा में एक बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री की नींव रखी गई, देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो भारत ट्रेन ने रफ्तार पकड़ी, मेरठ मेट्रो का विस्तार हुआ और आज नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन का उद्घाटन किया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के विकास में इन उल्लेखनीय उपलब्धियों का श्रेय वर्तमान सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर फैक्ट्री भारत को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है, मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल तेज और स्मार्ट संपर्क का माध्‍यम बन रही हैं, और जेवर विमान पत्तन पूरे उत्तर भारत को विश्व से जोड़ रहा है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “वर्तमान सरकार के नेतृत्व में यही नोएडा उत्तर प्रदेश के विकास का एक शक्तिशाली इंजन बन रहा है।”

प्रधानमंत्री ने विमान पत्तन परियोजना के इतिहास के बारे में विस्तार से बताते हुए याद दिलाया कि जेवर विमान पत्तन को अटल जी ने 2003 में ही मंजूरी दे दी थी। श्री मोदी ने कहा, “वर्तमान सरकार के गठन के तुरंत बाद इसकी नींव रखी गई, निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब इसका  परिचालन शुरू हो चुका है।”

क्षेत्र के एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरती भूमिका की ओर ध्यान दिलाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि यह क्षेत्र दो प्रमुख माल ढुलाई गलियारों का केंद्र बन रहा है। ये विशेष रेल पटरियां मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई हैं, जिनसे उत्तर भारत का बंगाल और गुजरात के समुद्रों से संपर्क बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दादरी वह महत्‍वपूर्ण केंद्र है जहां ये दोनों गलियारे मिलते हैं, जिसका अर्थ है कि यहां के किसान जो कुछ भी उगाते हैं और उद्योग जो कुछ भी उत्पादित करते हैं, वह अब सड़क और वायु मार्ग से विश्‍व के हर कोने तक तेजी से पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस तरह का बहुआयामी संपर्क उत्तर प्रदेश को दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना रहा है।”

क्षेत्र की छवि में आए बदलाव के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज नोएडा पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। यह पूरा क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत कर रहा है।”

प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को साकार करने के लिए अपनी जमीनें देने वाले किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि कृषि और खेती इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्व रखती है। श्री मोदी ने कहा कि आधुनिक संपर्क के विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को और बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने आगे कहा, “यहां के कृषि उत्पाद अब वैश्विक बाजारों तक अधिक कुशलता से पहुंच सकेंगे।”

भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में गन्ना किसानों के योगदान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने गन्ने से उत्पादित इथेनॉल की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि और पेट्रोल में इसके मिश्रण के बिना, भारत को प्रतिवर्ष लगभग साढ़े चार करोड़ बैरल (लगभग 700 करोड़ लीटर) अतिरिक्त कच्चे तेल का आयात करना पड़ता। उन्होंने आगे कहा, “हमारे किसानों की मेहनत ने संकट के इस समय में देश को यह अपार राहत प्रदान की है।”

प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि इथेनॉल से न केवल देश को लाभ हुआ है, बल्कि किसानों को भी बहुत फायदा हुआ है। इससे लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। उन्होंने उन पुराने दिनों को याद किया जब गन्ना किसानों को अपने बकाया के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था। श्री मोदी ने कहा, “आज, वर्तमान सरकार के प्रयासों के कारण, गन्ना किसानों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि विमान पत्तन केवल सुविधाएँ नहीं बल्कि प्रगति में सहायक हैं और भारत के विमानन अवसंरचना के उल्लेखनीय विस्तार की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि आज भारत में 160 से अधिक विमान पत्तन हैं और वायु संपर्क अब न केवल महानगरों तक बल्कि छोटे कस्बों तक भी पहुँच रहा है। श्री मोदी ने कहा, “वर्तमान सरकार ने आम भारतीय के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बना दिया है,” और साथ ही यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में विमान पत्तनों की संख्या बढ़कर सत्रह हो गई है।

उड़ान योजना के प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विमान पत्तनों के निर्माण के साथ-साथ हवाई यात्रा का किराया आम परिवारों की पहुंच में रहे। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि उड़ान योजना के तहत टिकट बुक करके एक करोड़ साठ लाख से अधिक नागरिकों ने किफायती दरों पर हवाई यात्रा की है। उन्होंने कहा, “हाल ही में केंद्र सरकार ने लगभग 29,000 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ उड़ान योजना का और विस्तार किया है, जिसके तहत आने वाले वर्षों में छोटे शहरों में 100 नए विमान पत्तन और 200 नए हेलीपैड बनाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश को भी इससे बहुत लाभ होगा।”

भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि नए विमान पत्तनों के निर्माण के साथ-साथ नए विमानों की मांग भी बढ़ रही है और विभिन्न एयरलाइंस सैकड़ों नए विमानों के ऑर्डर दे रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इससे पायलटों, केबिन क्रू और रखरखाव पेशेवरों सहित युवाओं के लिए अपार अवसर पैदा हो रहे हैं, और उन्होंने आगे कहा कि “हमारी सरकार इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विमानन क्षेत्र में प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार भी कर रही है।”

भारत के विमानन क्षेत्र में मौजूद एक गंभीर कमी का उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (एमआरओ) क्षेत्र की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि 85 प्रतिशत भारतीय विमानों को अभी भी एमआरओ सेवाओं के लिए विदेश भेजना पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने एमआरओ क्षेत्र में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है और बताया कि आज जेवर में एक एमआरओ सुविधा केंद्र की नींव रखी गई है। श्री मोदी ने घोषणा की, “तैयार होने पर, यह केंद्र भारत और विदेश के विमानों को सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे देश को राजस्व प्राप्‍त होगा, हमारा पैसा भारत में ही रहेगा और युवाओं के लिए अनेक रोजगार सृजित होंगे।”

नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने और उनके समय और धन की बचत करने को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए, प्रधानमंत्री ने मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं के विस्तार के बारे में बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल में ढाई करोड़ से अधिक यात्री यात्रा कर चुके हैं। दिल्ली और मेरठ के बीच की यात्रा, जिसमें पहले घंटों लगते थे, अब मिनटों में पूरी हो जाती है।”

विकसित भारत के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में किए जा रहे अभूतपूर्व निवेश पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में बुनियादी ढांचे के बजट में छह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है जिसमें राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर 17 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और एक लाख किलोमीटर से अधिक राजमार्गों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि रेल विद्युतीकरण 2014 से पहले 20,000 किलोमीटर से बढ़कर अब 40,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है, और अब लगभग 100 प्रतिशत ब्रॉड-गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पहली बार कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जबकि पिछले एक दशक में पत्तनों की क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई है और अंतर्देशीय जलमार्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। श्री मोदी ने कहा, “भारत विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हर क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है।”

वैश्विक चुनौतियों के सामने सामूहिक प्रयास और राष्ट्रीय एकता का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद में विस्तार से बात की है और मुख्यमंत्रियों के साथ मौजूदा संघर्ष से उत्पन्न संकट से निपटने के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जनता से इस संकट का सामना शांत मन और धैर्य से करने की अपील की और इसे भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि जो भारतीयों और भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि सभी राजनीतिक दल देश के एकजुट प्रयासों को मजबूती प्रदान करेंगे।”

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राँची जिला प्रशासन की सघन वाहन जांच अभियान: 167 वाहनों की जाँच, 8 पर 2.03 लाख का जुर्माना, 7 वाहन जप्त

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर सघन वाहन दस्तावेज जांच अभियान चलाया गया

टैक्स फेल गाड़ियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। ऐसे वाहनों की पहचान के लिए संघन जाँच अभियान और भी किया जाएगा

रांची,28.03.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आज जिला परिवहन पदाधिकारी राँची श्री अखिलेश कुमार के पर्यवेक्षण में कांके रोड़, रिंग रोड़, मेसरा, ओरमांझी एवं तुपुदाना क्षेत्रों में सघन वाहन दस्तावेज जांच अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान कुल 167 वाहनों के कागजातों की विस्तृत जाँच

अभियान के दौरान कुल 167 वाहनों के कागजातों की विस्तृत जाँच की गई, जिसमें टैक्स, फिटनेस प्रमाण-पत्र, इंश्योरेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC), परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, ओवरलोडिंग आदि शामिल थे।

जाँच में कागजात अपूर्ण या अनुपालन न करने पाए जाने पर 8 वाहनों पर कुल 2,03,000 रुपये* का दंड अधिरोपित किया गया। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले 04 वाहनों* को ओरमांझी थाना और 03 वाहनों को मेसरा ओपी में जप्त कर सुरक्षित रखा गया है।

टैक्स फेल गाड़ियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। ऐसे वाहनों की पहचान के लिए संघन जाँच अभियान और भी तेज किया जाएगा

जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार ने बताया कि टैक्स फेल गाड़ियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। ऐसे वाहनों की पहचान के लिए संघन जाँच अभियान और भी तेज किया जाएगा। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने और सड़क सुरक्षा बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों के सभी दस्तावेज अपडेट रखें तथा ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस या बिना इंश्योरेंस के वाहन न चलाएं। उन्होंने कहा कि जिले में यातायात अनुशासन बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे।

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भारत निर्वाचन आयोग ने हावड़ा में सुव्‍यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता कार्यक्रम “चुनाव का पर्व, पश्चिम बंगाल का गर्व” का आयोजन किया

  1. भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) के कार्यालयों के समन्वय से, राज्यव्यापी मतदाता जागरूकता गतिविधियां शुरू की हैं। इनका उद्देश्य शांतिपूर्ण वातावरण में लोकतंत्र के पर्व को मनाना है।
  2. इन पहलों के तहत, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान को बढ़ावा देने के लिए आज पश्चिम बंगाल के हावड़ा और सभी जिलों में सुव्‍यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता कार्यक्रम (स्‍वीप) का आयोजन किया गया।
  3. हावड़ा जिले में, इस कार्यक्रम का शुभारंभ साइक्लोथॉन से हुआ, जिसमें स्कूल और कॉलेज के छात्रों, पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाताओं के साथ-साथ चुनाव आयोग के अधिकारियों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय, डीईओ और अन्य विभागों के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साइक्लोथॉन सुबह 7:00 बजे हावड़ा ब्रिज चेक पोस्ट से शुरू हुई और रेल संग्रहालय से होते हुए रामकृष्णपुर फेरी घाट पर समाप्त हुई। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकगीतों, नृत्य और नाटक के माध्यम से मतदान के महत्व को दर्शाया गया। इसके अतिरिक्‍त मतदाता जागरूकता नौका सेवा सहित विभिन्न स्‍वीप पहलों का भी शुभारंभ किया गया।
  4. लोकप्रिय एनिमेटेड पात्र छोटा भीम और चुटकी की उपस्थिति इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रही। उन्होंने विशेष रूप से युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को जागरूक करने के लिए इस कार्यक्रम में भाग लिया।
  5. इन पहलों का उद्देश्य मतदाताओं को मतदान के महत्व के बारे में शिक्षित और सूचित करना है, साथ ही उन्हें मतदान केंद्रों और मतदान से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्रदान करना है। इन प्रयासों का लक्ष्य मतदान में शहरी मतदाताओं, महिलाओं, दिव्यांगों, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच भागीदारी को बढ़ाना तथा नागरिकों और अन्य हितधारकों को जागरूक करना।
  6. पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत , जिसमें कालीघाट चित्रकला, पट्टाचित्र कला, छऊ नृत्य, जात्रा थिएटर और बाउल लोक परंपराएं शामिल हैं, को मतदाता जागरूकता संचार में एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा ।
  7. इन पहलों में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदान को आसान बनाने और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए शुरू किए गए हालिया उपायों पर भी प्रकाश डाला जाएगा, जिनमें मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल जमा करने की सुविधा ईसीआईएनईटी ऐप , शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग, बेहतर मतदाता सूचना पर्ची और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
  8. पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए, राज्य भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव साक्षरता क्लब (ईएलसी) छात्रों के बीच मतदाता जागरूकता को बढ़ावा देंगे। राज्य की सांस्कृतिक विशेषताओं के माध्‍यम से युवाओं को सूचित और प्रेरित करने के लिए एक प्रभावी सोशल मीडिया अभियान चलाया जाएगा।
  9. सरकारी विभागों और कॉर्पोरेट संगठनों के सहयोग से जनसंपर्क प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
  10. इन पहलों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में सभी हितधारकों की भयमुक्त और प्रलोभनमुक्त भागीदारी को सुदृढ़ करना है। स्‍वीप कार्यक्रम चुनाव का पर्वपश्चिम बंगाल का गर्व” विषय के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली और पी8आई विमान के डिपो स्तरीय निरीक्षण के लिए 858 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद और पी8आई दीर्घ-श्रेणी समुद्री टोही विमान के निरीक्षण (डिपो स्तर) के लिए कुल 858 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन अनुबंधों पर 27 मार्च, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए।

तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली

भारतीय सेना के लिए रूस की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ रुपये के तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम की खरीद का अनुबंध पर रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किये गये। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों सहित हवाई खतरों से लड़ने के लिए भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएंगी। यह समझौता भारत-रूस रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगा।

P8आई विमान का निरीक्षण

भारतीय नौसेना के लिए शत-प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ P8आई दीर्घ-श्रेणी समुद्री टोही विमान के निरीक्षण (डिपो स्तर) हेतु 413 करोड़ रुपये के अनुबंध पर बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ हस्ताक्षर किए गए। यह अनुबंध बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी है। इस अनुबंध के तहत P8आई बेड़े का डिपो स्तर का रखरखाव देश के भीतर स्थित एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा केंद्र में सुनिश्चित किया जाएगा। यह भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

 

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सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई विधायी और नीतिगत उपाय किए गए हैं

नई दिल्ली – राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) महिलाओं के खिलाफ अपराधों सहित अन्य अपराधों पर आंकड़े संकलित और प्रकाशित करता है। यह आंकड़ा “क्राइम इन इंडिया” में प्रकाशित होता है, जिसमें राज्यवार और श्रेणीवार विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हैं। यह एनसीआरबी की आधिकारिक वेबसाइट (https://ncrb.gov.in) पर उपलब्ध है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) की नवीनतम रिपोर्ट में 2019-2021 की अवधि के आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि 18-49 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं में से ऐसी महिलाओं का प्रतिशत, जिन्होंने अपने पति द्वारा शारीरिक और/या यौन हिंसा का सामना किया है, घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया है। 2015-2016 में यह 31.2 प्रतिशत था।

घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम (पीडब्ल्यूडीवीए), 2005 को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अधिनियमित किया गया है ताकि नागरिक कानून के तहत एक उपाय प्रदान किया जा सके। इसका उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार होने से बचाना और समाज में घरेलू हिंसा की घटनाओं को रोकना है।

संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत “पुलिस” और “सार्वजनिक व्यवस्था” राज्य के विषय हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने, साथ ही महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की जांच और अभियोजन चलाने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की है। वे मौजूदा कानूनों के प्रावधानों के तहत ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सक्षम हैं।

फिर भी, केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई विधायी और नीतिगत उपाय किए हैं। घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम (पीडब्ल्यूडीवीए), 2005 की धारा 8 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में आवश्यकतानुसार सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति करने और उन क्षेत्रों को अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया है, जिनके अंतर्गत एक सुरक्षा अधिकारी को अपने अधिकार और कर्तव्य निभाने होंगे। घरेलू हिंसा की शिकायतें प्राप्त होने पर सुरक्षा अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह मजिस्ट्रेट को मामलों की सूचना दे और मजिस्ट्रेट को उनके कार्यों के निर्वहन में सहायता करे। पीडब्ल्यूडीवीए के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, अभिरक्षा आदेश, आर्थिक सहायता और मुआवजा जैसे उपाय उपलब्ध कराए गए हैं।

मिशन शक्ति योजना के तहत, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए दो शाखाओं – संबल और समर्थ्य के माध्यम से एकीकृत सेवाएं प्रदान की जाती हैं। वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) संबल शाखा का एक घटक है जो हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को पूरे देश में निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर एक ही छत के नीचे एकीकृत और तत्काल सहायता प्रदान करता है। यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनोसामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। वर्तमान में  देश भर में ऐसे 926 वन स्टॉप सेंटर कार्यरत हैं। 31 दिसंबर 2025 तक, ओएससी ने देश में 13.37 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता की है।

महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल-181) आपातकालीन और गैर-आपातकालीन दोनों स्थितियों में महिलाओं की सहायता के लिए 24 घंटे टोल-फ्री दूरसंचार सेवाएं प्रदान करती है। यह हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता प्रदान करती है और देश भर में सरकारी योजनाओं और सेवाओं के बारे में जानकारी देती है। महिला हेल्पलाइन 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत है और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) से भी जुड़ी हुई है। 28 फरवरी 2026 तक, डब्ल्यूएचएल ने देश भर में 99.09 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता की है।

नारी अदालत योजना ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए वैकल्पिक शिकायत निवारण का मंच प्रदान करती है। इन अदालतों को पंचायत स्तर पर संकटग्रस्त महिलाओं को घरेलू हिंसा और अन्य लिंग आधारित हिंसा से संबंधित छोटे-मोटे मुद्दों को बातचीत, मध्यस्थता और आपसी सहमति से सुलह के माध्यम से सुलझाने में मदद करने का दायित्व सौंपा गया है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

मिशन शक्ति के समर्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत, शक्ति सदन की स्थापना मानव तस्करी और घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए एक एकीकृत राहत एवं पुनर्वास केंद्र के रूप में की गई है। इसका गठन स्वाधार गृह और उज्ज्वला जैसी पूर्व योजनाओं के विलय से हुआ है। इसका उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाना है, ताकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों से उबर सकें। 23 मार्च 2026 तक, देश भर में 416 शक्ति सदन कार्यरत हैं।

संकटग्रस्त महिलाओं को राहत और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 22 जनवरी 2025 को मिशन शक्ति पोर्टल (https://missionshakti.wcd.gov.in/) का शुभारंभ किया। मिशन शक्ति पोर्टल का डेटा अब बहुभाषी सुविधा वाले मिशन शक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ताओं की पहुंच और सुविधा का विस्तार हुआ है। पोर्टल पर दिव्यांगजन वर्ग एवं महिला कल्याण अधिनियम के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों की सार्वजनिक सूची उपलब्ध है। 23 मार्च 2026 तक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 2,428 संरक्षण अधिकारियों का विवरण अपडेट किया जा चुका है।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर सामग्री की सुलभता संबंधी दिशानिर्देश जारी किए; श्रवण और दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए सुविधाओं को अनिवार्य किया

नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 06.02.2026 को श्रवण एवं दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट प्रकाशकों के प्लेटफार्मों (ओटीटी प्लेटफॉर्म) पर सामग्री की सुलभता संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।

ये दिशानिर्देश मंत्रालय की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं: https://mib.gov.in → होम → दस्तावेज़ → अधिनियम, नीतियां और दिशानिर्देश

इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऑडियो-विजुअल सामग्री श्रवण और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सुलभ हो और इसके लिए एक कार्यान्वयन कार्यक्रम भी प्रदान किया गया है।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित होने वाली सभी नई सामग्री में श्रवण बाधित (क्लोज्ड कैप्शनिंग/ओपन कैप्शनिंग/भारतीय सांकेतिक भाषा) और दृष्टि बाधित दर्शकों (ऑडियो डिस्क्रिप्टर) के लिए निर्धारित कार्यान्वयन अनुसूची के अनुसार कम से कम एक सुभलता सुविधा होनी चाहिए।

यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में श्रीमती माया नारोलिया द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में दी।

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महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (एम जी जी एस आई)

नई दिल्ली – महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (एम जी जी एस आई) एक व्यापक ढांचा है, जिसका उद्देश्य खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प में ग्रामीण आत्मनिर्भरता का निर्माण करना है। यह ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाता है, प्रशिक्षण और कौशल विकास समर्थन को सुव्यवस्थित करता है, ताकि प्रक्रिया और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो और वैश्विक बाजार से जुड़ाव और ब्रांडिंग हासिल की जा सके।

यह पहल बुनकरों, ग्रामीण उद्योगों और ग्रामीण युवाओं को लाभ पहुँचाएगी, रोजगार-उन्मुख विकास को प्रोत्साहित करके ग्रामीण उद्यमों को स्केलेबल, निर्यात-उन्मुख इकाइयों में विकसित करने में मदद करेगी। इसका उद्देश्य खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प के मूल्य श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण पिछड़े और आगे के लिंक बनाना है, जिसमें स्थानीय स्रोत शामिल हैं, जो सीधे स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों का समर्थन करते हैं। इसमें एक जिला, एक उत्पाद (ओ डी ओ पीपहल भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह ग्रामीण युवाओं के लिए लक्ष्यपूर्ण आजीविका सृजित करने का प्रयास करता है, ताकि हस्तनिर्मित क्षेत्र को दीर्घकालीन, व्यावसायिक करियर विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

(i) वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त का कार्यालय (हस्तशिल्प) दो योजनाएँ संचालित करता है – राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एन एच डी पी) और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (सी एच सी डी एस) – जो पूरे देश में हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास और संवर्धन के लिए हैं। इन योजनाओं के तहत शिल्पकारों को अंत से अंत तक सहायता दी जाती है, जैसे:

  • विपणन कार्यक्रम
  • कौशल विकास
  • क्लस्टर विकास
  • उत्पादक कंपनियों का गठन
  • शिल्पकारों को प्रत्यक्ष लाभ
  • आधारभूत संरचना और तकनीकी सहायता
  • अनुसंधान और विकास
  • डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में हस्तशिल्प उत्पादों का विपणन

ये प्रयास पारंपरिक शिल्प को सशक्त बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करते हैं, जिसमें तेलंगाना राज्य भी शामिल है।

एन एच डी पी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी 2026 तक) में तेलंगाना में 38 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 4.95 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई और 1,242 शिल्पकार लाभान्वित हुए। सी एच सी डी एस परियोजना वित्तीय वर्ष 2022-23 से लगभग 4,000 शिल्पकारों को कवर करते हुए 5.76 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ स्वीकृत की गई।

(ii) विकास आयुक्त का कार्यालय (हथकरघा) राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एन एच डी पी) लागू करता है, जिसके तहत तेलंगाना के बुनकरों, विशेषकर मेदक, वारंगल और नलगोंडा जिलों में योजनागत सहायता प्रदान की गई।

समर्थः कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण की योजना के अंतर्गत 2020-21 से 2025-26 (अब तक) के दौरान तेलंगाना राज्य में कुल 2,066 हथकरघा कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया, जिसमें से मेदक में 72वारंगल में 176, और नलगोंडा में 96 प्रशिक्षित हुए।

क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक तेलंगाना में 26 क्लस्टरों के लिए 1,223.97 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिनमें 4,971 लाभार्थी शामिल हैं। इसमें उन्नत लूम और सहायक उपकरण, कार्यशालाएँ, सोलर लाइटिंग यूनिट्स, उत्पाद और डिज़ाइन विकास जैसी पहलें शामिल हैं।

हथकरघा विपणन सहायता के तहत, बुनकरों और हथकरघा एजेंसियों को प्रदर्शनियों, शिल्प मेलों और अन्य विपणन कार्यक्रमों में भागीदारी के माध्यम से विपणन प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जाते हैं। 2022-23 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) तक तेलंगाना में 15 एक्सपो आयोजित करने की मंजूरी दी गई, कुल 2.56 करोड़ रुपये की फंड स्वीकृति के साथ, जिसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में वारंगल और नलगोंडा में 01-01 एक्सपो आयोजित किए गए। इसके अलावा, हथकरघा उत्पादों के ऑनलाइन विपणन के लिए ई-कॉमर्स पोर्टल (https://www.indiahandmade.com/) भी लॉन्च किया गया है।

डिजाइन उन्मुख उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए, देशभर में 16 डिज़ाइन संसाधन केंद्र (डी आर सी) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से हैदराबाद, तेलंगाना में 01 डी आर सी शामिल है।

हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए इंडिया हैंडलूम ब्रांड और हैंडलूम मार्क जैसे प्रमाणन पहलों को लागू किया गया। वर्तमान में तेलंगाना में 228 इंडिया हैंडलूम ब्रांड और 1,337 हैंडलूम मार्क पंजीकरण पूर्ण हो चुके हैं।

यह जानकारी वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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