अपने उद्घाटन भाषण के दौरान, उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) किफायती दरों पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बुनकरों के बच्चों तथा समाज के अन्य वर्गों के छात्रों को इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि हथकरघा बुनकरों को अपने पारंपरिक कौशल और तकनीकों को बनाये रखते हुए, अपनी उत्पादन गतिविधियों को समकालीन बाजार की मांग के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और आय सृजन में वृद्धि हो सके।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 56 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) न केवल वस्त्र क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगे, बल्कि चमड़ा और अन्य विनिर्माण उद्योगों जैसे सहायक क्षेत्रों के लिए भी विकास के अवसर उत्पन्न करेंगे। हालिया व्यापार वार्ताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ चर्चा से पहले लागू शुल्क (टैरिफ) काफी अधिक थे।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री, श्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आईआईएचटी सेलम में नए अकादमिक ब्लॉक का उद्घाटन केवल एक भवन का उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह बुनकरों को सशक्त बनाने और हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के विज़न को मजबूत करने हेतु एक कदम है। उन्होंने कहा कि सादगी, परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आईआईएचटी सेलम तमिलनाडु के वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने और हथकरघा उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी वैश्विक व्यापार भागीदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है; साल 2014 तक भारत ने 19 देशों के साथ 10 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए थे, जबकि वर्तमान में भारत ने 56 देशों के साथ 18 एफटीए किए हैं, जिससे भारतीय वस्त्र और हथकरघा उत्पादों के लिए बाजार की पहुँच में सुधार हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में, बदलते वैश्विक तथा आर्थिक परिप्रेक्ष्य के बावजूद, भारत के वस्त्र और हथकरघा निर्यात ने लगातार स्थिर प्रदर्शन और वृद्धि दर्ज की है और भारत सरकार तमिलनाडु के वस्त्र उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है तथा राज्य में हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील उपाय लागू कर रही है।
अपने दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री के साथ नए उद्घाटित अकादमिक ब्लॉक का दौरा किया और बुनकरों, संकाय सदस्यों तथा छात्रों के साथ संवाद किया, साथ ही हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को सुदृढ़ करने के लिए संस्थागत पहल का अवलोकन किया। इस अवसर पर, भारत के माननीय उपराष्ट्रपति ने भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, सेलम के प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और असाधारण प्रदर्शन के सम्मान स्वरूप पदक और प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत प्रतिष्ठित संस्थानों का एक राष्ट्रीय तन्त्र है, जो हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान प्रदान करने में संलग्न हैं। इन संस्थानों की स्थापना स्पष्ट उद्देश्य के साथ की गई है कि वे हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र के लिए संरचित तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास प्रदान करें।
इन संस्थानों में से, नए अकादमिक भवन का निर्माण संस्थागत अवसंरचना को सुदृढ़ करने और शिक्षण, अनुसंधान तथा कौशल विकास के लिए बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने हेतु किया गया है। इस भवन में आधुनिक संवादपूर्ण कक्षाएं, सुसज्जित पुस्तकालय तथा डिजिटल पुस्तकालय, सेमिनार हॉल, संकाय कक्ष, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और बोर्ड रूम शामिल हैं। साथ ही, इसमें सभी ग्यारह भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय और अन्य आवश्यक शैक्षणिक तथा प्रशासनिक सुविधाएं भी मौज़ूद हैं। उन्नत कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण स्थान शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ, छात्रों में नवाचार, उद्यमिता और उद्योग के लिए कौशल को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा रखते हैं।
आईआईएचटी सेलम का जनता के लिए खुलना बुनकरों के बच्चों के लिए सार्थक शैक्षणिक अवसरों की दिशा में एक प्रगति का कदम है, साथ ही यह हथकरघा क्षेत्र को भी सुदृढ़ करता है। वस्त्र मंत्रालय, हथकरघा को भविष्य–उन्मुख उद्योग के रूप में स्थापित करते हुए, सतत् विकास, बाजार विस्तार और बुनकरों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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