नई दिल्ली – केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (सीपीईएस) और भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं और उनके निर्णय एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों को आकार देने और सुधारों को लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और उत्साह की भावना से कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने सफर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ये चुनौतियां राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अपार अवसर प्रदान करती हैं। उन्हें हमेशा जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की तत्परता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विद्युत, औद्योगिक विकास, नवाचार, जीवन स्तर में सुधार और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति का मुख्य प्रेरक तत्व है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा विद्युत प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्रों में नियोजन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ अभियांत्रिकी पद्धतियों और नवोन्मेषी समाधानों के माध्यम से राष्ट्र के विद्युत अवसंरचना को सुदृढ़ करने में केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में, सार्वजनिक सेवा में आर्थिक नियोजन और कार्यान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि सतत विकास सुनिश्चित करने, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसरों को बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में आईईएस अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी छिपी होती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक नीति का सही माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है। इससे लोगों, विशेषकर सबसे कमजोर वर्ग के जीवन में सुधार होना चाहिए।
नई दिल्ली – कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष प्राधिकरण (आईईपीएफए) के माध्यम से देश भर में निवेशक जागरूकता कार्यक्रम (आईएपी) आयोजित कर रहा है। इन कार्यक्रमों के उद्देश्य और मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :
वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना: हितधारकों को बुनियादी वित्तीय अवधारणाओं, उत्तरदायी वित्तीय व्यवहार और वित्तीय सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के बारे में शिक्षित करना है।
निवेशकों में जागरूकता बढ़ाना: निवेशकों के अधिकारों, निवेश जोखिमों और सोच-समझकर निर्णय लेने के बारे में जानकारी को बढ़ावा देना है।
वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बारे में जागरूक करना: घोटालों, धोखाधड़ी कर बैंक खातों से रािश निकालने का प्रयास करने वालों से सतर्क करने, धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं और डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
IV. सुरक्षित डिजिटल वित्तीय कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना: डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल भुगतान और ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग को प्रोत्साहित करना।
आम लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना: आम लोगों को धोखाधड़ी वाली वित्तीय गतिविधियों की पहचान करने, उनसे बचने और उनकी रिपोर्ट करने के लिए उन्हें जागरूक करना है।
ये आईएपी कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किए जाते हैं। इनमें ग्रामीण और अल्प सुविधा वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आईएपी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का चयन विशिष्ट मानदंडों के आधार पर किया जाता है, जैसे कि अल्प सुविधा वाले क्षेत्रों, दूरस्थ क्षेत्र जिनमें टियर-2 और टियर-3 के कस्बे और गांव शामिल हैं। इन स्थानों पर लगभग 75% कार्यक्रम इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करके संचालित किए जाते हैं।
आईईपीएफए द्वारा पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान इस उद्देश्य के लिए उपयोग की गई धनराशि का विवरण 16.92 करोड़ रुपये है और चालू वित्तीय वर्ष में (अब तक) 2.69 करोड़ रुपये है।
यह जानकारी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का अग्रणी निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, आईएनएस त्रिकंद, दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के अंतर्गत 26 मार्च, 2026 को मोजाम्बिक के मापुटो पहुंचा। यह यात्रा भारत और मोजाम्बिक के बीच समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में क्षेत्रीय साझेदारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, यह जहाज आपदा राहत सामग्री का वितरण करेगा और सामुदायिक सेवा, चिकित्सा शिविर, योग सत्र, मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं एवं प्रशिक्षण गतिविधियों सहित विभिन्न पेशेवर व सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेगा। जहाज के कमान अधिकारी, कैप्टन सचिन कुलकर्णी, मोजाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग और मोजाम्बिक नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
आईएनएस त्रिकंद का यह बंदरगाह आगमन ‘महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) की भारतीय परिकल्पना के अनुरूप है।
नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने गोवा और महाराष्ट्र में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पंद्रहवें वित्त आयोग के अप्रतिबंधित अनुदान (विकासात्मक धन जिसके व्यय के लिए कोई विशिष्ट नियम या बंधन नहीं होते) अनुदान स्वीकृत और जारी किए हैं। इसके तहत, महाराष्ट्र के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त का रूका हुआ हिस्सा, 79.82 करोड़ रुपये 12 पात्र जिला पंचायतों, 125 पात्र प्रखंड पंचायतों और 27 पात्र ग्राम पंचायतों को जारी कर दिया गया है।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त का 221.82 करोड़ रुपये का रूका हुआ हिस्सा राज्य में अतिरिक्त 12 जिला पंचायतों, 125 प्रखंड पंचायतों और 5249 ग्राम पंचायतों को जारी किया गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए महाराष्ट्र को भी बंधित अनुदान (विशिष्ट विकास कार्यों पर खर्च करने की बाध्यता होती है) जारी कर दिए हैं। इसमें पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान की पहली किस्त का रूका हुआ हिस्सा 159.32 करोड़ रुपये, अतिरिक्त 12 पात्र जिला पंचायतों 125 पात्र प्रखंड पंचायतों और 1120 पात्र ग्राम पंचायतों के लिए जारी किया गया है।
इसके अलावा, दूसरी किस्त का रूका हुआ हिस्सा 118.69 करोड़ रुपये, भी अतिरिक्त 12 पात्र जिला पंचायतों, 125 प्रखंड पंचायतों और 183 ग्राम पंचायतों के लिए जारी कर दिया गया है। वहीं, गोवा के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त 12.40 करोड़ रुपये, जारी की गई है, जिसमें राज्य की 2 पात्र जिला पंचायतों और सभी 191 पात्र ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।
भारत सरकार – पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं। अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थानों/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लेखित 29 विषयों के अंतर्गत, वेतन और अन्य स्थापन लागतों को छोड़कर, स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। बंधित अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति, घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव अपशिष्ट प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।
नई दिल्ली – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और बालिकाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद करता है। यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित और सशक्त बनाकर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2021-22 से 2025-26) में बीबीबीपी योजना का पुनर्गठन किया गया है और अब यह ‘मिशन शक्ति’ की ‘संभल’ उप-योजना का एक घटक है। बीबीबीपी का विस्तार देश के सभी जिलों में कर दिया गया है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से उन गतिविधियों पर अधिक खर्च करने को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।
बीबीबीपी के तहत इन पहलों ने एक रिकॉल वैल्यू स्थापित की है और विभिन्न हितधारकों—जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता शामिल है—को लामबंद करके इसे एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तत्काल चिंताओं को दूर करना है, बल्कि बालिकाओं को महत्व देने और उनके अधिकारों व अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना भी है।
मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित इसके घटकों सहित मंत्रालय की योजनाओं का दो बार—2020 में और पुनः 2025 में—नीति आयोग के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया गया है। इन अध्ययनों ने योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया है।
सरकार देश भर में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के समाधान हेतु एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है।
समग्र शिक्षा प्री-स्कूल से कक्षा XII तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, एक समग्र और समावेशी पाठ्यक्रम, लर्निंग आउटकम में सुधार, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को पाटने, और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करने पर जोर देती है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना कक्षा XII तक की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूली सुविधाएँ प्रदान करके स्कूली शिक्षा में लैंगिक और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को पाटने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक समुदायों और बीपीएल परिवारों की 10-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को शामिल किया जाता है।
विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लैंगिक संतुलन में सुधार के लिए लड़कियों को स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कक्षा IX से कक्षा XII तक की मेधावी छात्राओं को लक्षित करता है और इसमें छात्र-अभिभावक परामर्श, करियर परामर्श, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, टिंकरिंग गतिविधियां, विशेष व्याख्यान, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों के भ्रमण और विज्ञान शिविर व कार्यशालाएं शामिल हैं।
बालिकाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने व्यापक कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया मिशन शुरू किया है। सरकार ने देश भर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कौशल केंद्र’ भी स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत महिलाओं को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
सरकार ने देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं हेतु कई पहल/उपाय किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया योजना, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव आदि शामिल हैं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह रोजगार और स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) संचालित है।
सरकार महिलाओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए महिला-केंद्रित योजनाएं भी लागू कर रही है, जैसे कि नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग- किरण (डब्लूआईएसई-किरण), सर्ब-पावर (खोजपूर्ण अनुसंधान में महिलाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा देना) आदि।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन 28 मार्च 2026 को झारखंड का दौरा करेंगे। पदभार ग्रहण करने के बाद यह राज्य का उनका पहला दौरा होगा।
उपराष्ट्रपति इस दौरान खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थान पर जाएंगे, जहां वे श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से परस्पर बातचीत करेंगे।
उपराष्ट्रपति इसके बाद रांची में आईआईएम रांची के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।
रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कारों के 20वें संस्करण में उपराष्ट्रपति
रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार पेशेवर उपलब्धियों और निडर, सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता की भावना का कीर्तिगान करते हैं: उपराष्ट्रपति
चर्चा, बहस और असहमति का उद्देश्य राष्ट्रीय हित में निर्णय लेना होना चाहिए, न कि व्यवधान उत्पन्न करना: उपराष्ट्रपति
समाचार पत्रों को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होने के प्रयास का नेतृत्व करना चाहिए: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में द इंडियन एक्सप्रेस समूह द्वारा आयोजित रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कारों के 20वें संस्करण को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये पुरस्कार केवल पेशेवर उपलब्धियों का ही नहीं, बल्कि निडर और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता की स्थायी भावना का भी कीर्तिगान करते हैं। उन्होंने कहा कि इन पुरस्कारों की स्थापना को 20 वर्ष हो चुके हैं और ये श्री रामनाथ गोयनका की विरासत को सम्मानित करते हैं, जो विशेषकर भारत के इतिहास के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में साहस, स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता से परिभाषित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब मीडिया शक्तिशाली भी है और गहन जांच के दायरे में भी है, श्री गोयनका के आदर्श आज भी मार्गदर्शक बने हुए हैं।
उपराष्ट्रपति ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान श्री रामनाथ गोयनका की भूमिका को रेखांकित किया, जब उन्होंने ब्रिटिश सेंसरशिप के विरोध में समाचार पत्र को बंद करने का निर्णय लिया था। उन्होंने संविधान सभा के सदस्य के रूप में श्री गोयनका के योगदान को भी याद किया, जिसमें समाचार पत्रों पर कराधान जैसे मुद्दों पर उनके हस्तक्षेप शामिल थे।
भारत में आपातकाल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रामनाथ गोयनका ने खाली संपादकीय प्रकाशित करके मौन की शक्ति का प्रदर्शन किया, जो प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार का सशक्त प्रतीक बन गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संपादकों की गिरफ्तारी, बिजली आपूर्ति में बाधा, आर्थिक नुकसान और उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद श्री गोयनका लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रामनाथ गोयनका के जीवन की यात्रा —दरभंगा से चेन्नई तक और बाद में विदिशा से सांसद के रूप में—भारत की विविधता में एकता की भावना को दर्शाती है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि श्री गोयनका ने व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अंग्रेज़ी के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी समाचार पत्र प्रकाशित किए, और उनके मूल्य आज भी द इंडियन एक्सप्रेस को निष्पक्षता, साहस और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में परिभाषित करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चर्चा, बहस और यहां तक कि असहमति का परिणाम भी अंतत: राष्ट्रहित में निर्णय लेना होना चाहिए, न कि व्यवधान उत्पन्न करना।
उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने के प्रधानमंत्री के आह्वान को भी याद किया और कहा कि वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाक्रमों को देश के सभ्यतागत मूल्यों से जुड़े भारतीय नज़रिए से दिखाने में द इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उपराष्ट्रपति ने प्रगति, नवाचार और जमीनी स्तर पर हो रहे परिवर्तन की कहानियों को प्रमुखता से उजागर करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संतुलित दृष्टिकोण में चुनौतियों के साथ-साथ उपलब्धियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन के समापन पर उपराष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और पत्रकारिता में उत्कृष्टता को सम्मानित करने की परंपरा को बनाए रखने के लिए आयोजकों की सराहना की।
नई दिल्ली – स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत (डब्ल्यूएफएस) के प्रभावी उपयोग के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है।
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए, भारतीय फाउंड्रीमैन संस्थान (आईआईएफ) ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और सुयोग एलिमेंट्स के साथ सीएसआईआर विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली में एक सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) समझौता किया है। यह समझौता वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग – डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी की गरिमामय उपस्थिति में हुआ। इस साझेदारी का उद्देश्य कोयंबटूर क्लस्टर के डब्ल्यूएफएस (वर्किंग स्ट्रक्चरल स्ट्रक्चर) के सड़क अवसंरचना में उपयोग के लिए नवीन, टिकाऊ और व्यापक समाधान विकसित करना और उन्हें सुगम बनाना है।
सीएसआईआर-सीआरआरआई, आईआईएफ और सुयोग एलिमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान।
इस कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए डॉ. कलाइसेल्वी ने बताया कि
सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत जैसे औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग सतत विकास और चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रति सीएसआईआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह की सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास पहल अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदलने में मदद करेगी और साथ ही राष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी सहयोग प्रदान करेगी।
सीएसआईआर विज्ञान केंद्र में सभा को संबोधित करते हुए, सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी।
धातु ढलाई उद्योग का उप-उत्पाद, अपशिष्ट फाउंड्री रेत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और निपटान की आवश्यकताओं के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां पैदा करता है। सड़क निर्माण में इस सामग्री का उपयोग संसाधन दक्षता, अपशिष्ट न्यूनीकरण और सतत विकास पर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने आगे कहा , “सीएसआईआर-सीआरआरआई टिकाऊ और नवोन्मेषी सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी रहा है। अपशिष्ट फाउंड्री रेत का उपयोग औद्योगिक उप-उत्पादों को मूल्यवान निर्माण सामग्री में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
इस अवसर पर आईआईएफ के अध्यक्ष श्री सुशील शर्मा ने बताया कि “कोयंबटूर फाउंड्री क्लस्टर भारत का सबसे बड़ा फाउंड्री क्लस्टर है, जिसमें लगभग 800-1000 फाउंड्री इकाइयां शामिल हैं, जो विभिन्न घरेलू क्षेत्रों और निर्यात बाजारों को ढलाई की आपूर्ति करती हैं। हालांकि, यह बड़ी मात्रा में फाउंड्री रेत अपशिष्ट भी उत्पन्न करता है, जिससे निपटान और पर्यावरण प्रबंधन में चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। इस परियोजना का उद्देश्य सड़क निर्माण में फाउंड्री रेत के वैज्ञानिक पुन: उपयोग को सक्षम बनाकर इन चुनौतियों का समाधान करना है, जिससे अपशिष्ट को एक मूल्यवान इंफ्रास्ट्रक्चर संसाधन में परिवर्तित किया जा सके।”
सीआरआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे ने बताया कि इस सहयोग का उद्देश्य एक संरचित अनुसंधान कार्यक्रम तैयार करना है, जिसमें ग्रीन सैंड और रेजिन बॉन्डेड सैंड सहित विभिन्न प्रकार की फाउंड्री सैंड का विश्लेषण करना और सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त अनुकूलित प्रसंस्करण और उपयोग प्रोटोकॉल विकसित करना शामिल है।श्री सतीश पांडे इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। सीएसआईआर और सीआरआरआई का वैज्ञानिक प्रयास स्टील स्लैग रोड तकनीक के सफल मॉडल को दोहराना है, ताकि फाउंड्री उद्योगों के लिए भी अपशिष्ट को धन में परिवर्तित किया जा सके।
इस पहल से निम्नलिखित लाभ होने की उम्मीद है:
पर्यावरण के अनुकूल सड़क निर्माण पद्धतियों को बढ़ावा
प्राकृतिक समुच्चयों पर निर्भरता कम करें
औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक प्रभावी समाधान प्रदान करें
भारत सरकार के सर्कुलर अर्थव्यवस्था और हरित इंफ्रास्ट्रक्चर के दृष्टिकोण का समर्थन।
इस अवसर पर सीआरआरआई के मुख्य वैज्ञानिक और टीएमबीडी प्रमुख डॉ. विनोद करार ने बताया कि “इस सहयोगात्मक परियोजना के तहत, सीएसआईआर-सीआरआरआई तकनीकी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक सत्यापन प्रदान करेगा, जबकि आईआईएफ उद्योग तक पहुंच और ज्ञान प्रसार में सहायता करेगा। सुयोग एलिमेंट्स विकसित प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन और विस्तार में योगदान देगा।”
डॉ. एन. कलाइसेल्वी, महानिदेशक सीएसआईआर, सीआरआरआई, आईआईएफ और सुयोग के अधिकारियों के साथ।
यह साझेदारी औद्योगिक कचरे को मूल्यवान निर्माण संसाधनों में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सड़क निर्माण प्रौद्योगिकियों में सीएसआईआर-सीआरआरआई के नेतृत्व को और मजबूत करती है। यह सहयोग उद्योग-अनुसंधान समन्वय के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने और देश भर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों को अपनाने में तेजी लाने के लिए तैयार है।
इस कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमेन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें मानद सचिव श्री प्रयुत भामावत, मानद कोषाध्यक्ष एस मुथुकुमार, सलाहकार डॉ. शीला भिडे, कार्यकारी निदेशक डॉ. अभिषिक्ता रॉयचौधरी, आईआईएफ दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राजेश गोयल, एफआईसी और आईआईएफ उत्तरी क्षेत्र के निदेशक संजीव कुमार, एफआईसी दिल्ली के संयुक्त निदेशक बसंत कुमार, सीआरआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. के. रविंदर, डॉ. नसीम अख्तर, डॉ. पी.एस. प्रसाद, डॉ. प्रदीप कुमार, सुयोग एलिमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के उद्योग प्रतिनिधि श्री योगेश वर्षादा, अध्यक्ष श्री योगेश वर्षादा, उपाध्यक्ष श्री जील वर्षादा और उपाध्यक्ष श्री नरेश ताहिलरामानी, और सड़क एवं इस्पात क्षेत्रों के हितधारक शामिल थे। इस कार्यक्रम में भारत में स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए विज्ञान-आधारित समाधानों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला गया।
नई दिल्ली – रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे की स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित रेलगाड़ी सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली कवच की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में तैनाती में तेजी लाने और अधिक कुशल रेलगाड़ी संचालन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कवच को आगे बढ़ाने वाली तकनीकी प्रगति
भारतीय रेलवे ने कवच में कई अत्याधुनिक सुधार किए हैं। यूनिवर्सल ब्रेकिंग प्रणाली (यूबीए), जो विभिन्न निर्माताओं के ब्रेकिंग कर्व्स को मानकीकृत करता है, अंतरसंचालन सुनिश्चित करता है और बार-बार होने वाले परीक्षणों को समाप्त करता है। बेसलाइन सॉफ्टवेयर, एआई-संचालित डिजाइन स्वचालन और लोकोमोटिव, इंटरलॉकिंग प्रणाली और ट्रैक मशीनों के लिए एकीकरण इंटरफेस में महत्वपूर्ण उन्नयन प्रणाली की मजबूती को और बढ़ा रहे हैं।
कवच तैनाती की वास्तविक समय की निगरानी और पूर्वानुमानित रखरखाव को सक्षम करने के लिए एक एकीकृत संचालन प्रबंधन प्रणाली के रूप में एक केंद्रीकृत निगरानी मंच, सुरक्षा, विकसित किया जा रहा है।
अब तक की प्रगति
अब तक कवच को 3,103 किलोमीटर मार्ग पर स्थापित किया जा चुका है। उच्च घनत्व और उच्च उपयोग वाले गलियारों सहित 24,427 किलोमीटर मार्ग पर कवच का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।
कवच संस्करण 4.0 के कार्यान्वयन के अंतर्गत:
दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख गलियारों पर 1,638 किलोमीटर मार्ग पर पहले ही यह प्रणाली चालू हो चुकी है।
भारतीय रेलवे ने हाल ही में, दिल्ली-हावड़ा उच्च घनत्व गलियारे के प्रयागराज-कानपुर खंड के 190 किलोमीटर मार्ग पर कवच प्रणाली चालू की है।
7,100 किलोमीटर मार्ग पर ट्रैक के किनारे इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है।
8,921 किलोमीटर पर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई जा चुकी है, जिसे 1,183 दूरसंचार टावरों और 767 स्टेशनों पर कवच डेटा सेंटर इंस्टॉलेशन द्वारा सपोर्ट किया जा रहा है।
4,277 इंजनों पर कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है।
8,979 इंजनों पर काम जारी है।
विस्तार योजनाएँ
कवच लगाना एक जटिल प्रक्रिया है। इसके कार्यान्वयन को और आगे बढ़ाने के लिए, रेलवे अगले दो वर्षों में कवच नेटवर्क को 9,000 किलोमीटर तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है और उसके बाद प्रति वर्ष 10,000 किलोमीटर तक बढ़ने की संभावना है।
नई दिल्ली – भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव सुश्री दीप्ति गौर मुखर्जी ने 24 मार्च 2026 को कर्तव्य भवन-I, नई दिल्ली में कॉर्पोरेट कानून और प्रबंधन में एलएलएम कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। यह दो वर्षीय पूर्णतया आवासीय कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय एवं न्यायिक अकादमी असम द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाएगा।
शुभारंभ कार्यक्रम में श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए; प्रो. केवीएस शर्मा, कुलपति, एनएलयूजेएए; श्री शांतनु मित्रा, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार, एमसीए; श्री शेखर श्रीवास्तव, उप सचिव, एमसीए; श्री गुनाजीत रॉय चौधरी, रजिस्ट्रार, एनएलयूजेएए; कर्नल अमनदीप सिंह पुरी, सीएओ; श्री सुधाकर शुक्ला, प्रमुख, दिवालियापन एवं दिवालियापन केंद्र, आईआईसीए; और डॉ. पायला नारायण राव, प्रमुख, कॉर्पोरेट विधि संकाय, आईआईसीए सहित कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति, साथ ही दोनों संस्थानों के वरिष्ठ संकाय सदस्य और अधिकारी उपस्थित थे।
सभा को संबोधित करते हुए, एमसीए के सचिव ने आईआईसीए और एनएलयूजेएए को बहुत कम समय में कॉर्पोरेट कानून में एक उच्च विशिष्ट मास्टर कार्यक्रम की सफलतापूर्वक परिकल्पना और शुरुआत करने के लिए बधाई दी और कहा कि यह माननीय वित्त मंत्री द्वारा आईआईसीए के पूर्वोत्तर केंद्र के उद्घाटन के बाद एक ऐतिहासिक पहल के रूप में काम करेगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम की संरचना सोच-समझकर तैयार की गई है और यह एमसीए की नियामक संरचना से मजबूती प्राप्त करती है तथा छात्रों को उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और नियामकों के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी।
श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए ने कहा कि दो वर्षीय कार्यक्रम को कॉर्पोरेट कानून, शासन और नियामक ढांचों में व्यावसायिक दक्षताओं को मजबूत करने के लिए विशिष्ट रूप से तैयार किया गया है। उन्होंने छात्रों को, विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के छात्रों को, अकादमिक ज्ञान और बदलते कॉर्पोरेट परिदृश्य के अनुरूप व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करने में इसके महत्व पर बल दिया।
एनएलयूजेएए के कुलपति प्रोफेसर केवीएस सरमा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य कानूनी शिक्षा को प्रबंधकीय और अनुपालन-उन्मुख दृष्टिकोणों के साथ एकीकृत करना है। उन्होंने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के सहयोग को स्वीकार किया और इस पहल को आकार देने में आईआईसीए के नेतृत्व, संकाय और संस्थागत भागीदारों के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।
एल.एल.एम. कार्यक्रम को दो वर्षीय पूर्णकालिक आवासीय पाठ्यक्रम के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें चार सेमेस्टर में कुल 54 क्रेडिट शामिल हैं, और शैक्षणिक गतिविधियाँ आईआईसीए और एनएलयूजेए असम के परिसरों के बीच साझा की जाती हैं। पाठ्यक्रम का पहला वर्ष एनएलयूजेएए में और दूसरा वर्ष आईआईसीए परिसर, आईएमटी मानेसर में आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में शुरुआत में प्रति बैच 60 सीटें उपलब्ध होंगी। आवेदन प्रक्रिया 24 मार्च 2026 से शुरू होगी और 24 जून 2026 तक खुली रहेगी। शैक्षणिक सत्र 10 अगस्त 2026 से एनएलयूजेए असम परिसर में शुरू होने वाला है। इच्छुक उम्मीदवार एनएलयूजेए असम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव के लिए 15 मार्च, 2026 को होने वाले चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया है कि आयोग ने चुनाव वाले 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके 12 सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सीईओ, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की थी, जिसमें तैयारियों की समीक्षा की गई, समन्वय को बढ़ाया गया और उन्हें 24 मार्च, 2026 को हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।
इसे सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5,173 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं ताकि शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया जा सके। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर अचानक नाकेबंदी करने के लिए 5,200 से अधिक स्टैटिक सर्विलांस टीम (एसएसटी) भी तैनात की गई हैं ।
26 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ईएसएमएस) के सक्रिय होने के बाद से, 25 मार्च, 2026 तक, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कई प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से 408.82 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध वस्तुएं जब्त की गई हैं, जिनमें 17.44 करोड़ रुपये नकद, 37.68 करोड़ रुपये (16.3 लाख लीटर) की शराब, 167.38 करोड़ रुपये की ड्रग्स, 23 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं और 163.30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अन्य मुफ्त वितरण वाली वस्तुएं शामिल हैं।
आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि प्रवर्तन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन निर्देशों के प्रवर्तन के लिए की जाने वाली जांच और निरीक्षण के दौरान आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। इस संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत के निवारण के लिए जिला शिकायत समितियां भी गठित की गई हैं।
नागरिक/राजनीतिक दल सी-विजिल मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकते हैं।
ईसीआईएनईटी.
15 मार्च से 25 मार्च तक, आम चुनाव और उपचुनाव वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सी-विजिल ऐप के माध्यम से 70,944 शिकायतें दर्ज की गई हैं । इनमें से 70,831 शिकायतों का निपटारा हो चुका है और 67,899 शिकायतें, यानी 95.8 प्रतिशत शिकायतें, 100 मिनट के भीतर हल हो गईं।
शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की गई है जिसमें कॉल सेंटर नंबर 1950 भी शामिल है, जिसके माध्यम से जनता का कोई भी सदस्य या राजनीतिक दल संबंधित डीईओ/आरओ के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।
नई दिल्ली – पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी खुदरा ईंधन दुकानों में पर्याप्त आपूर्ति है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे जानबूझकर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं के सुनियोजित अभियान से गुमराह न हों, इसका उद्देश्य अनावश्यक दहशत फैलाना है।
पेट्रोल और डीजल: कोई कमी नहीं, वितरण में कोई रोक नहीं
1. भारत ऊर्जा सुरक्षा का अगुआ है। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करता है। विश्व का शुद्ध निर्यातक होने के कारण भारत में घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। देश भर में एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन दुकानें खुली हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति कर रही हैं। किसी भी दुकान को आपूर्ति सीमित करने के लिए नहीं कहा गया है। विश्व भर में कई देश मूल्य वृद्धि, सीमित आपूर्ति, विषम-सम वाहन प्रतिबंध और जबरन स्टेशन बंद करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ ही देशों ने “राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल” घोषित किया है। भारत में ऐसे किसी भी उपाय की आवश्यकता नहीं है। जहां अन्य देश सीमित आपूर्ति कर रहे हैं, वहीं भारत में आपूर्ति की कोई कमी नहीं है। कुछ चुनिंदा पंपों पर छिटपुट रूप से घबराहट में खरीदारी की गई है, वे सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो द्वारा फैलाई गई जानबूझकर गलत सूचना के कारण हुईं। ऐसे पंपों पर मांग में वृद्धि के बावजूद, सभी उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति की गई और तेल कंपनियों के डिपो आपूर्ति बढ़ाने के लिए रात भर चालू रहे। पेट्रोल पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी संबंधी समस्याओं के कारण किसी भी पंप पर पेट्रोल और डीजल की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंपों को दी जाने वाली क्रेडिट अवधि को पहले की एक दिन की अनुमति से बढ़ाकर 3 दिन से अधिक करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
कच्चे तेल की आपूर्ति: कमी की भरपाई से कहीं अधिक आपूर्ति हो गई है
2. होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर के अपने 41 से अधिक आपूर्तिकर्ता देशों से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से पश्चिमी देशों से उपलब्ध उच्च मात्रा ने किसी भी व्यवधान की भरपाई कर दी है। भारत की सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। इंडियन ऑयल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।
सामरिक भंडार: संपूर्ण और सटीक जानकारी
3. कुछ लेखों और सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से गलत सूचना फैलाई जा रही है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि देश में केवल 6 दिनों का ही भंडार है। भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है और पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार लगभग 60 दिनों का है (जिसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में समर्पित रणनीतिक भंडारण शामिल है)। वैश्विक स्तर पर चाहे जो भी हो, प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए लगभग दो महीने की स्थिर आपूर्ति उपलब्ध है। अगले दो महीनों के कच्चे तेल की खरीद भी सुनिश्चित कर ली गई है। भारत अगले कई महीनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और ऐसी आपूर्ति स्थिति में रणनीतिक भूमिगत गुफाओं में भंडार की मात्रा गौण हो जाती है। इसलिए, भारत के भंडार के समाप्त या अपर्याप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह से खारिज किया जाता है।
एलपीजी: उत्पादन में वृद्धि, आयात की आवश्यकता में कमी, कार्गो सुरक्षित
4. एलपीजी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय द्वारा जारी एलपीजी नियंत्रण आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे दैनिक एलपीजी उत्पादन 50 टीएमटी (हमारी आवश्यकता का 60 प्रतिशत से अधिक) तक पहुंच गया है, जबकि कुल दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी है। परिणामस्वरूप, शुद्ध दैनिक आयात आवश्यकता घटकर केवल 30 टीएमटी रह गई है – यानी भारत अब आयात की आवश्यकता से कहीं अधिक उत्पादन कर रहा है। घरेलू उत्पादन के अतिरिक्त, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से 800 टीएमटी एलपीजी कार्गो पहले से ही सुरक्षित हैं और भारत के 22 एलपीजी आयात टर्मिनलों पर पहुंच रहे हैं – जो 2014 में मौजूद 11 टर्मिनलों की तुलना में दोगुने हैं। लगभग एक महीने की आपूर्ति की पूरी व्यवस्था हो चुकी है और अतिरिक्त खरीद को लगातार अंतिम रूप दिया जा रहा है। तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक सिलेंडर सफलतापूर्वक वितरित कर रही हैं। उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में ऑर्डर देने के कारण सिलेंडर की मांग 89 लाख सिलेंडर तक पहुंच गई थी और अब घटकर फिर से 50 लाख सिलेंडर रह गई है। जमाखोरी या कालाबाजारी से बचने के लिए राज्य सरकारों से परामर्श करके वाणिज्यिक सिलेंडरों का आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
पीएनजी को प्रोत्साहन: पहले से चल रही प्रक्रिया, संकट की वजह से उठाया गया कदम नहीं
5. राज्य सरकारों के पूर्ण समन्वय से पाइपलाइन द्वारा प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि यह भारतीय घरों के लिए सस्ती, स्वच्छ और सुरक्षित है। भारत पहले से ही 191 प्रतिदिन मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर की दैनिक आवश्यकता में से 92 प्रतिदिन मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन करता है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में पीएनजी पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है। शहरी गैस वितरण क्षेत्र वर्ष 2014 में 57 भौगोलिक क्षेत्रों से बढ़कर आज 300 से अधिक हो गया है। घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से अधिक हो गए हैं। पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने की यह प्रक्रिया वर्तमान स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही अच्छी तरह से चल रही थी और यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को दर्शाती है। यह दावा कि एलपीजी के खत्म होने के कारण पीएनजी को बढ़ावा दिया जा रहा है, गलत जानकारी है। एलपीजी की आपूर्ति सुरक्षित है। पीएनजी भारत के घरों के लिए एक बेहतर, अधिक किफायती और अत्यधिक सुविधाजनक ईंधन है।
सरकार की चेतावनी: भ्रम फैलाने पर कार्रवाई
6. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक वीडियो और पोस्टों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिनमें चुनिंदा रूप से कतारों की तस्वीरें, अन्य देशों में सीमित आपूर्ति के वैश्विक समाचार फुटेज और भारत में आसन्न लॉकडाउन तथा आपातकालीन ईंधन उपायों के पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत दावों का उपयोग करके कमी की पूरी तरह से झूठी धारणा पैदा की गई है।
7. कुछ पोस्टों में जानबूझकर सरकारी आदेशों – जिनमें प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश और एलपीजी नियंत्रण आदेश शामिल हैं – को संकट का संकेत देने वाली आपातकालीन घोषणाओं के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जबकि वास्तव में वे आपूर्ति प्राथमिकता के लिए मानक प्रशासनिक उपकरण हैं जो एक विवेकपूर्ण और पहले से तैयारी उपाय के रूप में जारी किए जाते हैं।
8. यह गलत सूचना शरारती तत्वों द्वारा फैलाई जा रही है और कुछ स्वार्थी तत्व इसे और भी बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे आम जनता में अनावश्यक चिंता पैदा हो रही है। मंत्रालय सभी नागरिकों से आग्रह करता है कि वे ईंधन और गैस की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के संबंध में गलत जानकारी फैलाना मौजूदा कानूनों के तहत अपराध है और सरकार जानबूझकर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगी।
नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के उद्घाटन संस्करण को संबोधित किया, जिसकी शुरुआत आज छत्तीसगढ़ के तीन शहरों में हुई और यह 3 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा।
डॉ. मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स(केआईटीजी) 2026 छत्तीसगढ़ के लिए एक स्थायी मेजबान के रूप में ऐतिहासिक शुरुआत का प्रतीक है, और इन खेलों का आयोजन बस्तर, सरगुजा और रायपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिवर्ष किया जाएगा।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिभा सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों, तटीय इलाकों और देश के दूरदराज भागों में भी मौजूद है।
उन्होंने कहा, “खेल प्रतिभा सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है; यह जनजातीय गांवों और देश के विविध क्षेत्रों में फल-फूल रही है। खेलो इंडिया जनजातीय खेलों की शुरुआत का उद्देश्य इस अप्रयुक्त क्षमता की पहचान करना और उसे बढ़ावा देना है।”
इस बात पर जोर देते हुए कि खेल सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं हैं, मंत्री ने कहा कि खेल अनुशासन, संतुलन और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं, जो देश में मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण(एसएआई) के कोच खेल स्थल पर मौजूद रहेंगे और खेलो इंडिया केंद्रों तथा उत्कृष्टता केंद्रों सहित संरचित व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रतिभाओं की पहचान करेंगे। खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ओलंपियन दीपिका कुमारी जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने भारत की खेल विरासत में जनजातीय समुदायों के लंबे समय से चले आ रहे योगदान पर प्रकाश डाला।
डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि केआईटीजी न सिर्फ खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि बल्कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा, जिससे आने वाले वर्षों में पूरे देश और दुनिया भर से प्रतिभागी और ध्यान आकर्षित होगा।
पारदर्शिता और सुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि ‘खेल शासन विधेयक’ तथा आगामी खेलो भारत नीति जैसे सुधारों का उद्देश्य निष्पक्ष चयन प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना, समावेशिता को बढ़ावा देना और महिला तथा जनजातीय खिलाड़ियों के लिए अधिक-से-अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शन हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए और चयन प्रक्रियाएं निष्पक्ष, पारदर्शी तथा निगरानी के अधीन होंगी।
मंत्री ने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, जिनमें एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स(राष्ट्रमंडल खेल) शामिल हैं, में भारत के शानदार प्रदर्शन पर भी विश्वास व्यक्त किया और कहा कि भारत एशियाई खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने खेल के क्षेत्र में व्यापक और सुव्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाकर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा है। फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसी पहल मिलकर भागीदारी बढ़ाने और देशभर में प्रतिभा को निखारने में सहायक रही हैं।
डॉ. मांडविया ने वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की भारत की आकांक्षा को दोहराया और तब तक विश्व में शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में स्थान पाने का लक्ष्य व्यक्त किया, साथ हीवर्ष 2047 तक शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में शामिल होने का विजन भी रखा।
नई दिल्ली – स्टार्टअप और नवाचार परितंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देश भर में स्टार्टअप, नवोन्मेषकों और उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक डिजिटल मनोरंजन कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस सहयोग का उद्देश्य डिजिटल मनोरंजन, ऑनलाइन गेमिंग, ई-स्पोर्ट्स, संवादात्मक मीडिया और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले उत्पाद स्टार्टअप्स के विकास को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य संरचित उद्योग सहभागिता के माध्यम से स्टार्टअप्स को भविष्य में बढ़े हुए काम को सम्भालने और उद्योग-प्रासंगिक समाधान विकसित करने में सक्षम बनाना है।
इस पहल के तहत, स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, उद्योग जगत की जानकारी, ज्ञान आदान-प्रदान के प्लेटफॉर्म और चुनिंदा सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह साझेदारी स्टार्टअप्स को प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (पीओसी) विकास, बाजार तक पहुंच और उद्योग परितंत्र में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता करेगी।
डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव श्री संजीव ने इस अवसर पर कहा कि यह सहयोग भारत की डिजिटल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस तरह की साझेदारियां स्टार्टअप्स को उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार करने, विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित करने में सक्षम बनाती हैं।
इस सहयोग के तहत, डीपीआईआईटी क्राफ्टन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर भारत स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के तहत नवाचार चुनौतियों के आयोजन की संभावनाओं का पता लगाएगा। इसके साथ ही यह गेम डिजाइन, एनीमेशन, इमर्सिव टेक्नोलॉजीज, ई-स्पोर्ट्स प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में लक्षित हैकाथॉन, कार्यशालाओं और मास्टरक्लास का आयोजन करेगा।
इस सहयोग से स्टार्टअप्स को उद्योग जगत के लोगों के बीच आपसी संवाद, ज्ञान का आदान-प्रदान और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। चयनित स्टार्टअप्स को प्रायोगिक सहयोग के अवसर मिल सकते हैं और परिणामों के आधार पर आगे भी सहयोग जारी रहने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त, यह पहल स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रमों में भागीदारी और संपर्क प्रयासों के माध्यम से एक परितंत्र के निर्माण में सहयोग करेगी ताकि स्टार्टअप जगत में सहभागिता को बढ़ाया जा सके।
दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में डीपीआईआईटी के उप सचिव श्री टीएलके सिंह और क्राफ्टन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सरकारी संबंध प्रमुख श्री विभोर कुकरेती ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।
9 अप्रैल, 2026 को होने वाले असम और केरल राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के लिए तथा 4 राज्यों के उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च, 2026 थी।
नामांकन पत्रों की जांच पीठासीन अधिकारियों (आरओ) द्वारा 24 मार्च को की गई थी और आज मतदान वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उपचुनावों के लिए यह प्रक्रिया पूरी हो गई है। जांच के बाद मैदान में बचे उम्मीदवारों की कुल संख्या का विवरण इस प्रकार है:
क्र.सं.
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नाम
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की सं.
उम्मीदवारों की सं.
आम चुनाव
1.
असम
126
789
2.
केरल
140
985
3.
पुडुचेरी
30
366
कुल
296
2,140
उप-चुनाव
1.
गोवा
1
3
2.
कर्नाटक
2
50
3.
नगालैंड
1
7
4.
त्रिपुरा
1
6
कुल
5
66
नामांकन पत्रों की जांच उम्मीदवारों/उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में क्षेत्रीय निरीक्षकों द्वारा की गई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई ताकि अधिकतम पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
ईसीआई के निर्देशों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी (आरओ) ने वैध रूप से नामांकित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार की और नोटिस बोर्ड पर उम्मीदवारों के नामों के सामने उनकी तस्वीरों के साथ सूची प्रदर्शित की।
नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 26 मार्च, 2026 को दोपहर 3:00 बजे तक है।
नई दिल्ली – भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) की परामर्शदात्री समिति की बैठक आज नई दिल्ली के नई संसद भवन में केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज के सचिव श्री कमरान रिजवी; नीति आयोग की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. अंशु भारद्वाज; तथा बीएचईएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर श्री के. सदाशिव मूर्ति, साथ ही एमएचआई, नीति आयोग और बीएचईएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान, केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा, “प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के मार्गदर्शन में, भारत एक सतत भविष्य की ओर अग्रसर हो रहा है। ‘विकसित भारत-2047’ भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति और उच्च मूल्य के निर्यात केंद्र के रूप में परिवर्तित करने का एक व्यापक रोडमैप है। ध्यान स्वदेशी नवाचार और बड़े पैमाने पर विनिर्माण उत्कृष्टता के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में राष्ट्र को एक महत्वपूर्ण नोड के रूप में स्थापित करने पर है। दृष्टिकोण स्पष्ट है: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड।” उन्होंने राष्ट्र निर्माण में बीएचईएल के योगदान की भी सराहना की।
बैठक के दौरान, बीएचईएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर श्री के. सदाशिव मूर्ति द्वारा वंदे भारत की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण विकास और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।इसके बाद, नीति आयोग की प्रोजेक्ट डायरेक्टर (एनर्जी, ग्रीन ट्रांजिशन एंड क्लाइमेट चेंज) डॉ. अंशु भारद्वाज द्वारा “सतत हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण” पर प्रस्तुति दी गई, जिसमें भारत के सतत, कम-कार्बन और ऊर्जा-कुशल भविष्य को प्राप्त करने की रणनीतिक दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समिति के सदस्यों ने विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया और चर्चित मुद्दों पर मूल्यवान सुझाव एवं अंतर्दृष्टि प्रदान कीं।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना-पीएमएसजी:एमबीवाई के तहत, यह अनुमान लगाया गया है कि एक करोड़ घरों में आरटीएस (रूफटॉप सोलर) लगाने से 1,000 बिलियन यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन होगा, जिसके परिणामस्वरूप रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के 25 वर्षों के जीवनकाल के दौरान 720 मिलियन टन सीओ2ईक्यू उत्सर्जन में कमी आएगी।
फरवरी 2024 में पीएमएसजी:एमबीवाई के लॉन्च के बाद से, 20.03.2026 तक देश भर में कुल 9,566.89 मेगावाट रूफटॉप सोलर (आरटीएस) क्षमता जोड़ी गई है।
पीएमएसजी: एमबीवाई के लागू होने से अनुमान है कि विनिर्माण, लॉजिस्टिक, आपूर्ति श्रृंखला, बिक्री और स्थापना, संचालन एवं रखरखाव सेवाएं, वित्तीय सेवाएं आदि क्षेत्रों में लगभग 17 लाख नौकरियां सृजित होंगी।
पीएमएसजी: एमबीवाई एक मांग-आधारित योजना है जिसके तहत देश के सभी आवासीय उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम का ग्रिड से जुड़ा बिजली कनेक्शन है, योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करके आरटीएस सिस्टम की स्थापना के लिए योजना का लाभ उठा सकते हैं।
मंत्रालय ने इस योजना के तहत देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लक्ष्य को प्राप्त करने और रूफटॉप सोलर पैनल को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:
आवेदन से लेकर सब्सिडी का वितरण सीधे आवासीय उपभोक्ता के बैंक खाते में राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है।
• राष्ट्रीयकृत बैंकों से रियायती ब्याज दर पर बिना किसी गारंटी के ऋण की उपलब्धता, जो रेपो दर से 50 बीपीएस अधिक है, यानी वर्तमान में 5.75 प्रतिशत प्रति वर्ष, जिसकी अवधि 10 वर्ष है।
• तकनीकी व्यवहार्यता की आवश्यकता को समाप्त करके और 10 किलोवाट तक ऑटो लोड वृद्धि की शुरुआत करके नियामक अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया।
• नेट मीटरिंग समझौते को राष्ट्रीय पोर्टल में आवेदन का हिस्सा बना दिया गया है।
• इसमें रेस्को/यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल शामिल हैं।
• पर्याप्त और योग्य विक्रेताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विक्रेताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
कुशल मानव संसाधन सृजन के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
देश भर में प्रमुख समाचार पत्रों में मुद्रित विज्ञापन, टीवी विज्ञापन अभियान, क्षेत्रीय चैनलों सहित एफएम स्टेशनों पर रेडियो अभियान आदि जैसे जागरूकता और प्रचार कार्यक्रमों के माध्यम से योजना के बारे में जागरूकता पैदा करना।
• राज्यों/डिस्कॉमों सहित विभिन्न स्तरों पर योजना की प्रगति की नियमित निगरानी।
• समय-समय पर क्षेत्रीय समीक्षा बैठकें आयोजित कीं।
शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित किया गया है। 15555 नंबर वाला एक कॉल सेंटर 12 भाषाओं में कार्यरत है।
इसके अतिरिक्त, एमएनआरई और आरईसी लिमिटेड, पीएमएसजी: एमबीवाई के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसी (एनपीआईए) के रूप में, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी डीएसकॉम के साथ घनिष्ठ समन्वय में काम करते हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि प्रश्न का विषय पंचायती राज मंत्रालय से संबंधित है। पंचायती राज मंत्रालय ने सूचित किया है कि:
ओडिशा सरकार ने ओडिशा के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पीईएसए), 1996 के प्रावधानों को लागू करने के लिए, पीईएसए अधिनियम के प्रावधानों को अपने राज्य पंचायती राज अधिनियम, अर्थात् उड़ीसा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 में शामिल किया है।
ओडिशा सरकार ने सूचित किया है कि ओडिशा ग्राम पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) नियम, 2023 का मसौदा अधिसूचना 10.11.2023 को ओडिशा राजपत्र में प्रकाशित किया गया है और इससे प्रभावित होने वाले सभी व्यक्तियों से आपत्तियां/सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
इसके बाद, राज्य सरकार ने उक्त मसौदा अधिसूचना पर आपत्तियां/सुझाव प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों/संगठनों की व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई की है। इसके अलावा, पंचायती राज और पेयजल विभाग (ओडिशा) के प्रधान सचिव ने विभिन्न हितधारक विभागों के साथ कई परामर्श बैठकें की हैं। आपत्तियों/सुझावों पर विचार करने के बाद, राज्य सरकार ने पीईएसए नियमों के मसौदे में संशोधन किया है और समीक्षा और रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए इसे सभी हितधारक विभागों के साथ साझा किया है।
पंचायत, जिसे स्थानीय सरकार भी कहा जाता है, राज्य का विषय है और भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची का हिस्सा है। पंचायतों की स्थापना और संचालन संबंधित राज्य पंचायती राज अधिनियमों के माध्यम से होता है, जो संविधान के प्रावधानों के अधीन, राज्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। तदनुसार, पंचायतों से संबंधित सभी मामले राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिनमें ग्राम स्तर पर पीईएसए नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना, ग्राम सभा, लघु वन उपज और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे पीईएसए प्रावधानों के अनुपालन की निगरानी और समीक्षा करना शामिल है।
हालांकि, ओडिशा राज्य में पीईएसए के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, पंचायती राज मंत्रालय राष्ट्रीय/क्षेत्रीय सम्मेलनों, कार्यशालाओं, लेखन कार्यशालाओं आदि के माध्यम से समय-समय पर पीईएसए प्रावधानों के अनुपालन की निगरानी करता है। हाल ही में, मंत्रालय ने पीईएसए अधिनियम के कार्यान्वयन में राज्यों द्वारा की गई प्रगति का आकलन करने और जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव पर एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से 11 और 12 जनवरी, 2024 को पुणे, महाराष्ट्र में और 4 और 5 मार्च, 2024 को रांची, झारखंड में पीईएसए पर दो क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए।
मंत्रालय ने 26 सितंबर, 2024 को नई दिल्ली में ‘पीईएसए अधिनियम पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ भी आयोजित किया। पुणे में 13 और 14 मई, 2025 को एक राष्ट्रीय पीईएसए लेखन कार्यशाला भी आयोजित की गई। अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए आंध्र प्रदेश में पीईएसए दिवस के अवसर पर पीईएसए महोत्सव 2025 मनाया गया। इस आयोजन में खेल प्रतियोगिताएं, पारंपरिक आदिवासी खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और एक शिल्प बाजार और खाद्य महोत्सव शामिल थे, जिसमें आदिवासी कला, हस्तशिल्प और स्वदेशी व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया था।
पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में राज्य सरकारों को प्रदर्शन का आकलन करने, कमियों की पहचान करने और राज्य में पंचायती राज व्यवस्था (पीईएसए) के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए उचित उपाय करने में सुविधा प्रदान करने हेतु 10 पीईएसए संकेतक विकसित किए हैं।
ये 10 पीईएसए संकेतक हैं- राज्य पंचायती राज अधिनियमों का पीईएसए प्रावधानों के अनुरूप होना; राज्य पीईएसए नियमों का अधिसूचित होना; राज्य पीईएसए नियमों में पीईएसए अधिनियम के अनुरूप प्रावधान; पीईएसए अधिनियम का अनुपालन करने के लिए राज्य अधिनियमों/नियमों/विनियमों, नीतियों/अन्य संबंधित विभागों के कार्यकारी निर्देशों में संशोधन; पीईएसए ग्राम सभाओं की ग्राम विकास योजना अपलोड करना; स्थानीय निकाय निर्देशिका में पीईएसए गांवों/पंचायतों का मानचित्रण; राज्य स्तर पर पीईएसए कर्मचारियों की तैनाती; पीईएसए प्रशिक्षण; स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था (आरजीएसए) के अंतर्गत पीईएसए ग्राम सभा का अभिविन्यास और ‘पंचायत निर्णय’ पोर्टल पर ग्राम सभा की तस्वीरें/वीडियो और कार्यवृत्त अपलोड करना।
नई दिल्ली – सागरमाला योजना के तहत पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने 3,346 करोड़ रुपये की धनराशि सहित कुल 9,053.56 करोड़ रुपए की 129 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से 5,356.89 करोड़ रुपए की लागत वाली 78 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं। इनके लिए मंत्रालय ने 1,801.10 करोड़ रुपए का वित्त पोषण किया था।
सागरमाला योजना का तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने किया है। रिपोर्ट में योजना के व्यापक परिणामों का सारांश दिया गया है। इसमें बताया गया है कि इन परियोजनाओं ने रोजगार सृजन, आय में सुधार, परिचालन समय में सुधार और बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में बढ़ोतरी में प्रत्यक्ष योगदान दिया है। इन सभी उपायों और क्रियाकलापों के परिणामस्वरूप लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है।
सागरमाला योजना के तहत, 1,496.97 करोड़ रुपए की लागत से 19 सड़क और रेल संपर्क परियोजनाओं को 365.56 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता से स्वीकृत किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख बंदरगाहों और अन्य गैर-प्रमुख बंदरगाहों के आसपास माल ढुलाई की दक्षता में सुधार करना और यातायात की बाधाओं को कम करना है।
यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में लिखित उत्तर मेंदी।
नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर परिस्थिति में किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और अन्नदाता को संकट से उबारने के लिए किसी भी स्तर पर कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीदी, पीएम‑आशा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावांतर भुगतान और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से किसान की आय को मज़बूत सुरक्षा‑कवच प्रदान किया है और किसानों की आय दोगुनी हुई है।
लोकसभा में सांसदों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और उनके हितों की रक्षा के लिए श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बीते वर्षों में कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादन में लगभग 44 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और किसानों की उत्पादकता तथा आमदनी को समानांतर रूप से बढ़ाने का व्यापक अभियान चलाया गया है। श्री चौहान ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के नाम पर सिर्फ बहाने बनाए गए, यहाँ तक कि यह तक कहा गया कि लागत से 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी देने से बाज़ार विकृत हो जाएगा। इसके विपरीत, श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभ को ध्यान में रखकर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का निर्णय लिया और लगातार उसे लागू किया है, जिससे किसान को उसकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिल सका है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि केवल एमएसपी घोषित कर देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पर वास्तविक खरीदी कराना ज़्यादा महत्वपूर्ण है और इस दिशा में सरकार ने गेहूँ, धान, दलहन और तिलहन के साथ‑साथ विभिन्न फसलों की एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी कर किसानों को सीधा लाभ पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि दलहन, तिलहन, फल और सब्ज़ियों तक के लिए भी सक्रिय हस्तक्षेप कर रही है ताकि किसी भी फसल के दाम गिरने पर किसान को नुक़सान न उठाना पड़े।
श्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान– पीएम‑आशा योजना, प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है जिसके अंतर्गत उन फसलों को सुरक्षा दी जाती है जिनके दाम अक्सर एमएसपी के नीचे चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम‑आशा के तहत तीन प्रकार की व्यवस्थाएँ बनाई गई हैं– प्राइस सपोर्ट स्कीम के माध्यम से दलहन और तिलहन की सीधी खरीद, मूल्य‑अंतर भुगतान व्यवस्था के ज़रिए एमएसपी और बाज़ार भाव के बीच की खाई को पाटना, और ज़रूरत पड़ने पर अन्य माध्यमों से भी किसानों को संरक्षण देना।
महाराष्ट्र के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि हाल की प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य सरकार ने केंद्र की नीति‑समर्थित डिजिटल व्यवस्था का भरपूर उपयोग किया और मात्र पाँच दिनों के भीतर फार्मर आईडी के माध्यम से 14,000 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में भेजकर त्वरित राहत पहुँचाई। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकारें एसडीआरएफ जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से फसल‑क्षति की भरपाई करती हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा‑कवरेज और मुआवज़ा दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है।
श्री चौहान ने सोयाबीन सहित दलहन और तिलहन की फसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि दाम गिरने की स्थिति में सरकार केवल खरीद पर निर्भर नहीं रहती बल्कि भावांतर जैसी व्यवस्था के माध्यम से एमएसपी और बाज़ार भाव के बीच की पूरी की पूरी राशि सीधे किसान के खाते में डालने का विकल्प भी अपनाती है। उन्होंने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भावांतर भुगतान योजना के जरिए बिना लाइन में लगवाए, बिना अतिरिक्त लॉजिस्टिक लागत के, किसानों की आय को संरक्षण दिया गया है, और यही मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के माध्यम से जल्दी खराब होने वाले फल और सब्ज़ियों के लिए भी एक मॉडल रेट तय कर, या तो सीधे खरीद की व्यवस्था की है या फिर मॉडल रेट और बाज़ार भाव के अंतर को किसान के खाते में जमा करने का निर्णय किया है। अंगूर, मिर्च, आलू, प्याज़, टमाटर जैसी उत्पादों के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों के क्षेत्र में दाम बहुत कम हों और किसान अपना माल बड़े शहरों की मंडियों तक ले जाना चाहें तो ऐसे मामलों में परिवहन लागत तक का भार केंद्र सरकार उठा रही है, जिससे किसान दूर की मंडियों में बेहतर दाम प्राप्त कर सकें।
लोकसभा में जवाब देते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि किसान का पूरा उत्पाद ढंग से खरीदा जाए, इसके लिए एफसीआई, नेफेड, राज्य सरकारों की एजेंसियाँ और अन्य संस्थाएँ समन्वित ढंग से काम कर रही हैं और जहाँ जितने खरीद केंद्रों की आवश्यकता है, वहाँ उसी के अनुसार केंद्र खोले जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन की पारदर्शिता और सटीकता पर जोर देते हुए श्री शिवराज सिंह ने बताया कि हर पंचायत स्तर पर फसल‑कटाई प्रयोग (crop cutting experiments) किए जाते हैं और प्रत्येक क्लस्टर/पंचायत में ऐसे चार प्रयोग अनिवार्य रूप से कराए जाते हैं ताकि उपज के आंकड़ों के अनुमान में किसी प्रकार की शंका न रहे। उन्होंने कहा कि अब टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग करते हुए सैटेलाइट‑आधारित रिमोट सेंसिंग की पद्धति भी अपनाई गई है जिससे वास्तविक उपज और नुकसान का बेहतर आकलन हो सके और बीमा दावों का भुगतान अधिक वैज्ञानिक और निष्पक्ष आधार पर किया जा सके; नई फसल बीमा व्यवस्था में इसका लाभ सीधे किसानों को मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में किसानों ने कुल लगभग 36,055 करोड़ रुपये का प्रीमियम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जमा किया है, जिसके बदले में लगभग 1,92,477 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि किसानों के खातों में जमा की गई है; यह इस बात का प्रमाण है कि योजना किसानों के पक्ष में अत्यंत लाभकारी रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले स्थानीय स्तर की आपदा या किसी एक किसान की फसल‑क्षति सामान्यतः कवर नहीं मानी जाती थी और मुख्यतः तहसील/ब्लॉक इकाई पर आकलन होता था, लेकिन अब प्रावधान बदलकर यह सुनिश्चित किया गया है कि यदि किसी एक किसान की फसल भी क्षतिग्रस्त हो और उपज के आंकड़े इसे साबित करें, तो उसके नुकसान की भरपाई भी फसल बीमा योजना के माध्यम से की जाएगी; कोई भी किसान बीमा‑सुरक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल कागज़ी योजनाएँ नहीं हैं बल्कि ज़मीनी स्तर पर लागू किए गए ठोस कदम हैं जिनका सीधा लाभ किसानों की आय और सुरक्षा में दिखाई दे रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि पीएम मोदी की सरकार किसान‑हितैषी है जो हर संकट में अन्नदाता और जीवनदाता किसान के साथ मज़बूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि हम किसी भी हालत में किसान को उनके पसीने की पूरी कीमत देने के संकल्प से कभी पीछे नहीं हटेंगे; किसान की मेहनत और सम्मान की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नई दिल्ली – रेल मंत्रालय ने पश्चिमी और पूर्वी रेलवे में दो महत्वपूर्ण रेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनका उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, भीड़भाड़ कम करना और परिचालन क्षमता में सुधार करना है। इन परियोजनाओं में गुजरात के कोसंबा-उमरापाड़ा गेज रूपांतरण खंड से कनेक्टिविटी के लिए कोसंबा में रेल-ओवर-रेल (आरओआर) फ्लाईओवर का निर्माण और बिहार के भागलपुर में एक नए रेल बाईपास का विकास शामिल है। दोनों परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 647.58 करोड़ रूपये है।
पश्चिमी रेलवे के कोसांबा-उमरापाड़ा जीसी खंड पर 9.20 किमी रेल-ओवर-रेल फ्लाईओवर की स्वीकृति
भारतीय रेलवे ने कोसांबा-उमरापाड़ा गेज रूपांतरण (जीसी) खंड को निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए 9.20 किमी रेल-ओवर-रेल फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की अनुमानित कुल लागत 344.38 करोड़ रूपये है। कोसांबा-उमरापाड़ा खंड मुंबई-वडोदरा मुख्य लाइन के पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसका गेज रूपांतरण कार्य वर्तमान में चल रहा है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अलाइनमेंट की मौजूदगी के कारण, गेज परिवर्तित लाइन को मुख्य लाइन से सीधे जोड़ने के लिए सतही क्रॉसिंग संभव नहीं है। स्वीकृत रेल-ओवर-रेल फ्लाईओवर से सतही क्रॉसिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और गेज रूपांतरण खंड का मुंबई-वडोदरा मुख्य लाइन के साथ निर्बाध एकीकरण संभव हो सकेगा। इससे इन महत्वपूर्ण मार्गों पर रेलगाडि़यों का निर्बाध और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा और गेज रूपांतरण परियोजना के सभी लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
पूर्वी रेलवे द्वारा भागलपुर 13.38 किमी बाईपास की स्वीकृति
मंत्रालय ने पूर्वी रेलवे में 13.38 किमी लंबे भागलपुर बाईपास के निर्माण को भी मंजूरी दे दी है, जिसकी अनुमानित लागत 303.20 करोड़ रुपये है। यह बाईपास बरहट-भागलपुर खंड पर स्थित गोनुधाम हॉल्ट को भागलपुर-साहिबगंज खंड पर स्थित सबौर से जोड़ेगा, जिससे भागलपुर जंक्शन पर यातायात की भीड़ कम होगी।
वर्तमान में, बरहट-भागलपुर खंड 125 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जिससे भारी भीड़भाड़ हो रही है। बरहट-भागलपुर और भागलपुर-साहिबगंज खंडों के बीच चलने वाली रेलगाडि़यों को भागलपुर में इंजन बदलना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप देरी और परिचालन में अक्षमताएं उत्पन्न होती हैं। स्वीकृत बाईपास से परिचालन सुगमता और समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इन बुनियादी ढांचागत कार्यों से गुजरात और बिहार में रेल संपर्क मजबूत होगा, सुरक्षा बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और रेल परिचालन की क्षमता में सुधार होगा। रेल मंत्रालय देश की बढ़ती यात्री और माल ढुलाई मांगों को पूरा करने के लिए क्षमता विस्तार और नेटवर्क में भीड़ कम करने को प्राथमिकता देता रहेगा।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने असम राइफल्स के वीर जवानों और उनके परिवारों को ‘स्थापना दिवस’ की बधाई दी।
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, असम राइफल्स के वीर जवानों और उनके परिवारों को ‘स्थापना दिवस’ की बधाई। उन्होंने कहा कि वे पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं, अपनी वीरता और देशभक्ति का परिचय देते हुए मानवीय सहायता के माध्यम से विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास भी कायम करते हैं। श्री शाह ने कहा कि राष्ट्र सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले असम राइफल्स के वीर जवानों को नमन।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘इंडिया एंड द वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित टीवी 9 समिट को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने विश्व की अभूतपूर्व और गंभीर परिस्थितियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाने के लिए टीवी 9 नेटवर्क की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “आज, विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह अभूतपूर्व और बेहद गंभीर हैं, और इन परिस्थितियों के बीच टीवी 9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है।”
संघर्षों से घिरी दुनिया में भारत की स्थिति के बारे में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से प्रगति कर रही है। 2014 से पहले की परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए भारत नये आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद चुनौतियों के बढ़ने के बावजूद, 140 करोड़ देशवासी एकजुट रहे, जिससे भारत ने हर कठिनाई को पार किया। श्री मोदी ने कहा, “28 फरवरी के बाद इन 23 दिनों में भारत ने अपनी संबंध निर्माण क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और संकट प्रबंधन की क्षमता दिखाई है।”
बँटी हुई वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीतिक पहुँच के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने गल्फ से लेकर ग्लोबल वेस्ट तक, और ग्लोबल साउथ से लेकर पड़ोसी देशों तक अभूतपूर्व संबंध बनाए हैं, और खुद को सभी के लिए भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है। भारत किसके साथ है, इस प्रश्न का साफ और स्पष्ट जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा, “हम भारत के साथ हैं, भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं और संवाद के साथ हैं।”
संकट के इस समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ डगमगा रही हैं, भारत द्वारा पेश किए गए विविधीकरण और लचीलापन के मॉडल को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे ऊर्जा हो, उर्वरक हों या आवश्यक वस्तुएँ, यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं कि नागरिकों को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े। श्री मोदी ने कहा, “भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है, और यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारे नागरिकों को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े, हमने इस संबंध में निरंतर प्रयास किया है।”
पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर प्रभाव के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में दिए अपने वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि युद्ध भौगोलिक रूप से भारत की सीमाओं से दूर है, फिर भी आज की परस्पर संबद्ध दुनिया में कोई भी देश युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। श्री मोदी ने कहा, “यह संयम और संवेदनशीलता का समय है; जब देशवासी एकजुट होकर किसी संकट का सामना करते हैं, तो परिणाम हमेशा सार्थक होते हैं।”
प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि दुनिया की उथल-पुथल के बावजूद भारत ने अपनी प्रगति की गति को बनाए रखा है, 28 फरवरी के बाद के 23 दिनों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो रेल के प्रमुख कॉरिडोर के लोकार्पण, सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर और नए कोटा हवाई अड्डे के शिलान्यास तथा मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्रदान किए जाने को रेखांकित किया। उन्होंने 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों को स्वीकृति दिए जाने, 1,500 मेगावाट नई क्षमता जोड़ने के लिए लघु जल विद्युत विकास योजना को मंजूरी दिए जाने, जल जीवन मिशन का 2028 तक विस्तार करने, पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि के सीधे हस्तांतरण और एमएसएमई व निर्यातकों के लिए 500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “ये सभी कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।”
प्रबंधन के सिद्धांतों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध कहावत ‘जिसका आकलन किया जाता है, उसे प्रबंधित किया जाता है’ को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिसका आकलन किया जाता है, उसमें सुधार भी होता है और अंततः वह परिवर्तित भी होता है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि राजमार्ग निर्माण की गति 11–12 किमी/दिन से बढ़कर लगभग 30 किमी/दिन हो गई है; बंदरगाहों पर जहाजों का टर्नअराउंड समय 5–6 दिन से घटकर 2 दिन से भी कम हो गया है; पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या 400–500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है; एमबीबीएस सीटें 50–55 हजार से बढ़कर 1.25 लाख से अधिक हो गई हैं; बैंक खातों की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 80 करोड़ से अधिक हो गई है (जिनमें 55 करोड़ जन धन खाते शामिल हैं); और हवाई अड्डों की संख्या 70 से कम थी, जो बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। श्री मोदी ने कहा, “आज, भारत फास्ट ट्रैक पर है, आज, संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने वर्तमान में जारी महत्वपूर्ण परिवर्तनों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस असम में कभी गोलियों की आवाज़ सुनाई देती थी, आज वहाँ सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है; ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक क्षेत्रों का विकास हो रहा है; बिहार में पिछले दशक में 5 से अधिक नए पुलों का निर्माण हुआ है; और उत्तर प्रदेश मोबाइल फोन निर्माण के एक वैश्विक केंद्र में बदल हो चुका है। श्री मोदी ने कहा, “भारत अतीत में उत्पन्न हुए विकास असंतुलनों को भविष्य के अवसरों में बदल रहा है।”
पश्चिम बंगाल का रुख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में यह संस्कृति, शिक्षा, उद्योग और व्यापार का केंद्र हुआ करता था। उन्होंने पिछले 11 वर्षों में पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण निवेशों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “देश हित को दल हित से ऊपर रखना आवश्यक है, क्योंकि राष्ट्र और उसका विकास राजनीति से ऊपर होता है।”
आज शहीद दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और आज डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती भी है। इस अवसर पर अपना संबोधन समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इन महान हस्तियों से प्रेरणा ली, जिन्होंने हमेशा देश को स्वयं से ऊपर रखा। उन्होंने इस बात पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि टीवी 9 समिट भारत के आत्मविश्वास तथा भारतीयों के प्रति दुनिया के भरोसे को और सशक्त करेगा। श्री मोदी ने कहा, “देश हित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाएगी।”
भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ), पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और पुलिस आयुक्तों (सीपी) तथा अन्य अधिकारियों के लिए आज एक ऑनलाइन समीक्षा और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया।
आपको याद होगा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने 9 मार्च, 2026 को पश्चिम बंगाल के समीक्षा दौरे के समय इस बात पर ज़ोर दिया था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव हिंसा-मुक्त, भयमुक्त और प्रलोभन-मुक्त तरीके से कराए जाएंगे, ताकि प्रत्येक मतदाता बिना किसी डर या पक्षपात के मतदान कर सके ।
इस संबंध में, आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज पश्चिम बंगाल विधानसभा के आम चुनावों के लिए जिला प्रशासन और कानून एवं व्यवस्था तंत्र की तैयारियों की समीक्षा की।
वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य के चुनाव अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों के साथ विस्तार से ऑनलाइन समीक्षा की। जिसके तहत चुनाव योजना के हर पहलू, सभी मतदान केंद्रों पर एएमएफ सुनिश्चित करने, ईवीएम प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण, ज़ब्ती, कानून-व्यवस्था, मतदाता जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों के बारे में चर्चा की गई।
राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनरों (एनएलएमटी) ने प्रतिभागियों को चुनाव संचालन के लिए कानून-व्यवस्था लागू करने, संवेदनशीलता मानचित्रण तथा अन्य तैयारियों के बारे में प्रशिक्षण दिया, साथ ही व्यय की निगरानी और आदर्श आचार संहिता लागू करने के बारे में भी प्रशिक्षण प्रदान किया।
भारत निर्वाचन आयोग 25 मार्च 2026 को पूर्वाह्न 11:00 बजे से पश्चिम बंगाल के रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) का उनके संबंधित मंडलीय मुख्यालयों पर भी प्रशिक्षण आयोजित करेगा।