केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने तिरुवल्लुवर दिवस के अवसर पर महान संत तिरुवल्लुवर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – X पर पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता श्री अमित शाह ने कहा, “तिरुवल्लुवर दिवस पर महान संत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। तिरुवल्लुवर जी का जीवन और कार्य हमारी सभ्यता के सर्वोच्च गुणों का प्रतीक रहे हैं और उन्होंने पवित्र जीवन और सद्भावपूर्ण समाज निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी विरासत महानता की ओर देश की यात्रा में हम सभी का मार्गदर्शन करती रहेगी ।”

 

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सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल: भारत के कुशल कार्यबल को सशक्त बनाना

नई दिल्ली – सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल, भारत के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संगठन, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य एक ओर वैज्ञानिक अनुसंधान और दूसरी ओर उद्योग की आवश्यकताओं तथा रोजगार योग्य कौशलों के बीच के अंतर को कम करना है। इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य सीएसआईआर के विशाल अनुसंधान अवसंरचना, व्यापक नेटवर्क और देश भर में फैले गहन वैज्ञानिक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए कौशल विकास को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से एकीकृत करना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, युवा शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मचारियों, कामकाजी पेशेवरों से लेकर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों, आईटीआई डिप्लोमा धारकों, किसानों और ग्रामीण समुदायों तक, लाभार्थियों के विविध समूह को समावेशी पहुंच प्रदान करता है। इस पहल का प्राथमिक महत्त्व कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक दुनिया की औद्योगिक, सामाजिक और उद्यमशीलता की मांगों के साथ संरेखित करने पर है।

प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्रमाणन पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रयोगशाला अनुभव से युक्त संरचित अल्पकालिक और दीर्घकालिक कौशल विकास मॉड्यूल के माध्यम से, यह पहल प्रतिभागियों को उद्योग की आवश्यकताओं से जुड़ी उन्नत और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों में व्यापक कौशल विकास प्रदान करती है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (एनएसडीएम) द्वारा पहचाने गए 36 प्रमुख क्षेत्रीय कौशलों में से 18 को सम्मिलित करता है, जिनमें एयरोस्पेस और विमानन, कृषि, ऑटोमोटिव, निर्माण, पूंजीगत वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, हरित रोजगार, हाइड्रोकार्बन, स्वास्थ्य सेवा, हस्तशिल्प और कालीन, लोहा और इस्पात, रबर, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, चमड़ा, जीवन विज्ञान, प्रबंधन और उद्यमिता, खनन, वस्त्र और आईटी एवं आईटीईएस प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षार्थी न केवल मजबूत सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और समग्र कैरियर विकास में सहायक व्यावहारिक दक्षता भी विकसित करें।

सीएसआईआर की एकीकृत कौशल पहल के चरण – I व II के दौरान, ग्रामीण नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष लक्षित पहलों सहित 5200 से अधिक कौशल-आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से 1.90 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया है। इस पहल के तीसरे चरण का आधिकारिक शुभारंभ जून 2025 में सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी द्वारा किया गया था, जिसमें उन्नत कौशल विकास, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच की खाई को पाटने और विकास एवं वृद्धि को गति देने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पहल के तीसरे चरण के पहले वर्ष में ही देशभर में स्थित सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाओं में 425 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके 14,000 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), जो सीएसआईआर की केंद्रीकृत प्रशिक्षण इकाई और सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल का नोडल कार्यालय है, इस पहल के प्रदर्शन की समय-समय पर निगरानी, ​​समन्वय और मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गुणवत्ता, प्रासंगिकता और प्रभाव पर विशेष जोर देते हुए, यह पहल एक कुशल, ज्ञानवान और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए समर्पित है।

 

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गांवों का संरक्षण एक महान सांस्कृतिक जागरण है – डॉ. सच्चिदानंद जोशी

नई दिल्ली – मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर, जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, और देशभर में यह त्योहार मकर संक्रांति, उत्तरायण, बिहू, पोंगल और खिचड़ी जैसे विभिन्न रूपों में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है, उसी अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) प्रभाग ने अपना स्थापना दिवस एक गरिमामय एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम के साथ मनाया। यह कार्यक्रम 14 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के समवेत सभागार में आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राजेश कुमार सिंह थे, जबकि विशिष्ट अतिथि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव डॉ. शाह फैसल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की और स्वागत भाषण कला निधि प्रभाग के प्रमुख और एनएमसीएम के प्रभारी प्रो. (डॉ.) आर.सी. गौर ने दिया। एनएमसीएम के निदेशक डॉ. मयंक शेखर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे बिहू, कुछ स्थानों पर पोंगल, कुछ स्थानों पर संक्रांति और अन्य स्थानों पर उत्तरायण कहा जाता है। अलग-अलग तरीकों से मनाए जाने के बावजूद, पूरा देश एक ही समय पर इस त्योहार को मनाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में इस त्योहार को मनाने की परंपराओं, जिनमें खान-पान, वस्त्र, रीति-रिवाज और परंपराएं शामिल हैं, का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएसआई) से आग्रह किया कि वे अगले वर्ष अपने वार्षिक दिवस के अवसर पर भारत भर में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है, इस पर एक प्रकाशन प्रकाशित करें।

उन्होंने एनएमसीएम की चुनौतियों और उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए कहा, “जब हमें यह कार्य सौंपा गया था, तब यह अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी। 650,000 गांवों का दस्तावेजीकरण करना आसान काम नहीं है। लेकिन एनएमसीएम ने जिस तरह से अपना काम शुरू किया, यहां सभी की कड़ी मेहनत और विभिन्न एजेंसियों से मिले सहयोग के कारण आज हम 623,000 गांवों का दस्तावेजीकरण कर चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच, हम अक्सर अपने गांवों को याद करते हैं, जहां हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आज भी मौजूद हैं। अगर हम इन गांवों को संरक्षित करते हैं, तो निस्संदेह हम इस दौर में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक जागृति में योगदान देंगे।

मुख्य अतिथि श्री राजेश सिंह ने कहा कि गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण सरकार की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना है और यह अत्यंत आवश्यक भी है। उन्होंने कहा कि किसी गांव को देखने और उसकी विरासत को समझने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए एक ही स्थान पर प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध होने से बढ़कर कोई सुविधा नहीं हो सकती। जब हम अपनी विरासत के बारे में जानेंगे तभी हम उस पर चर्चा कर सकेंगे और उस पर गर्व कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान में पंचायतों के लिए 29 कार्य निर्धारित हैं, जिनमें से एक सांस्कृतिक गतिविधियां भी हैं। इस पहलू को अब तक नजरअंदाज किया गया था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘पंचायत विरासत’ कार्यक्रम शुरू किया है।

विशिष्ट अतिथि शाह फैसल ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति का सार पीढ़ियों से लिखित संहिताओं के माध्यम से नहीं, बल्कि मौखिक परंपरा और ऐतिहासिक कथाओं के माध्यम से हस्तांतरित होता रहा है। इसलिए, इस जीवंत संस्कृति का दस्तावेजीकरण करना कई चुनौतियों से भरा है। मध्य पूर्व या यूरोप जैसी अन्य सभ्यताओं में लिखित ग्रंथों का अत्यधिक महत्व रहा है, जिससे परिवर्तन की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। इसके विपरीत, भारतीय संस्कृति लचीली और निरंतर विकसित होती रही है। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजीकरण में त्रुटियां हों, अधूरी जानकारी हो, या प्रमाणीकरण में चूक हो, तो यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं रह जाती, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ अन्याय बन जाती है। इसलिए, इस संपूर्ण कार्य में प्रामाणिकता और अखंडता सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रोफेसर रमेश गौर ने कहा कि भारत त्योहारों की भूमि है। जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है (उत्तरायण), तब मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल जैसे त्योहार पूरे देश में मनाए जाते हैं। राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) का शुभारंभ भी 2021 में मकर संक्रांति के अवसर पर किया गया था। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने एनएमसीएम की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईएनजीसीए) को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी थी। इसके बाद डॉ. मयंक शेखर ने विभाग की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पोर्टल के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण भारतीय पारंपरिक वाद्य संगीत ‘पंचवाद्यम’ की प्रभावशाली प्रस्तुति से हुआ, जिसने एक शुभ वातावरण का निर्माण किया। इसके बाद, एनएमसीएम ब्रोशर और इसकी अर्धवार्षिक पत्रिका ‘माटी’ का दूसरा अंक जारी किया गया, जिसे सांस्कृतिक अनुसंधान और जनसंपर्क के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में, आओ नागा जनजाति द्वारा पारंपरिक नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इसके बाद, प्रज्ञा आर्ट्स की प्रस्तुति और श्री नीतीश कुमार के संगीत कार्यक्रम ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए और सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम के बाद, सभी अतिथियों और आगंतुकों ने मकर संक्रांति के विशेष भोज, चपटे चावल और दही (चूड़ा-दही) का आनंद लिया।

एनएमसीएम का यह स्थापना दिवस न केवल मकर संक्रांति की सांस्कृतिक भावना से जुड़ा हुआ था, बल्कि भारत की विविध लोक, जनजातीय और शास्त्रीय परंपराओं को एक ही मंच पर एकत्र कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी देता है।

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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऑपरेशन सिंदूर एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया थी – रक्षा मंत्री

 यह भारत के साहस, शक्ति, संयम एवं राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक है: सेना दिवस पर जयपुर में रक्षा मंत्री

नई दिल्ली – “ऑपरेशन सिंदूर दुनिया भर में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, और इसे इतिहास में भारत के साहस, शक्ति, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा,” रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को राजस्थान के जयपुर में 78वें भारतीय सेना दिवस समारोह के दौरान यह बात कही। सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने के उनके तरीके की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और मानवीय मूल्यों का उचित सम्मान करते हुए की गई।

 

श्री राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवादियों ने कभी उस बहादुरी और तत्परता की कल्पना भी नहीं की होगी जिसके साथ भारतीय सशस्त्र बलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सैनिकों की वीरता ही थी जिसने दुश्मन को किसी भी प्रकार की शरारत करने से रोका। उन्होंने कहा, “स्थिति कठिन थी और दबाव भी था, लेकिन हमारे सैनिकों ने जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय था।” उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, और शांति के लिए भारत के प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक कि आतंकवादी विचारधारा का जड़ से सफाया नहीं हो जाता।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन के दौरान स्वदेशी हथियारों के उपयोग ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भरता की राह पर एक लंबी दूरी तय कर चुका है, जिसमें सशस्त्र बल इस प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने आने वाले समय में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने युद्ध के बदलते आयामों को देखते हुए सेना के तीनों अंगों के बीच आपसी समन्वय  को बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सशस्त्र बलों को भारत की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी, अत्याधुनिक हथियारों और प्लेटफार्मों से लैस कर रही है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयास रंग ला रहे हैं, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने आगे कहा कि रक्षा निर्यात, जो 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब आसमान छूते हुए रिकॉर्ड लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

भारतीय सेना द्वारा एक सैनिक को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी अपडेट होना चाहिए’ के मंत्र को अपनाने की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने नवीनतम तकनीकी प्रगति के कारण उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों को निरंतर मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ सभी स्थापित धारणाओं को चुनौती दी जा रही है। ऐसी स्थिति में, सशस्त्र बलों को सशक्त बनाना और उनकी आधुनिकता व आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हमने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने सैनिकों की क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।”

श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अद्वितीय बलिदान की मशाल और विविधता में एकता का एक शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश भर के अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के सैनिक कम उम्र में ही एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना ने राष्ट्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया है। यह केवल एक सैन्य बल नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है। दुनिया भर के अधिकांश सैन्य बल एक अलग क्षेत्र  के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन भारत में सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता का अटूट विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है। विश्वास का यही बंधन राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है।”

रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों के अमूल्य योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने न केवल शांति बनाए रखी है, बल्कि विभिन्न देशों के नागरिकों को चिकित्सा सहायता, बुनियादी ढांचे का विकास और मानवीय सहायता भी प्रदान की है। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “हमारी सेना दुनिया के लिए शांति के दूत के रूप में उभरी है। इसने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारत के दर्शन को और भी मजबूत किया है।”

श्री राजनाथ सिंह ने वेटरन्स के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने जीवन के अमूल्य वर्ष समर्पित किए हैं। सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा: “पहले, महिलाओं को सशस्त्र बलों में सहायक भूमिकाओं में भर्ती किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी भूमिका का विस्तार करने की परिकल्पना की। अब, सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन  दिया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ने भी महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। हमारा प्रयास सशस्त्र बलों में महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों के समान निरंतर समान अवसर प्रदान करना है।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से सशस्त्र बलों में शामिल होने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “सेना में शामिल होने के लिए केवल शारीरिक शक्ति ही पर्याप्त नहीं है। मानसिक क्षमता, नैतिक साहस, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व जैसे गुणों की भी आवश्यकता होती है। युवाओं को ये गुण विकसित करने चाहिए।” श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि यह जनता का कर्तव्य है कि वे सैनिकों के परिवारों का ख्याल रखें; राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखें ताकि सशस्त्र बलों का बलिदान व्यर्थ न जाए; और देश की प्रगति में योगदान दें क्योंकि केवल एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र ही अपनी सेना को मजबूत कर सकता है।

श्री राजनाथ सिंह की जयपुर यात्रा में जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सैनिकों के साथ बातचीत शामिल थी जिसके बाद दक्षिण-पश्चिमी कमान के तत्वावधान में सेना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, सवाई मानसिंह स्टेडियम में शौर्य संध्या का आयोजन किया गया। यह शाम भारतीय सेना की वीरता, परंपरा और परिचालन तत्परता के प्रदर्शन को समर्पित थी। इस कार्यक्रम ने भारतीय सेना की बहादुरी, बलिदान और अडिग भावना को सम्मानित किया, साथ ही सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच के अटूट बंधन को और मजबूत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पैरामोटर शो और गुब्बारे छोड़ने के साथ हुई। कलारीपयट्टू और मल्लखंब जैसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले मार्शल आर्ट्स और पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन ने भारतीय सेना की शारीरिक शक्ति, अनुशासन और समृद्ध युद्ध विरासत को दर्शाया। इस शो का एक मुख्य आकर्षण नेपाली सेना के 30 सदस्यीय बैंड का प्रदर्शन था। इस अवसर पर रक्षा मंत्री द्वारा बैंड को सम्मानित भी किया गया।

शाम का समापन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शानदार मंचन, एक सिंक्रोनाइज्ड ‘लाइट एंड साउंड’ शो और उसके बाद एक प्रभावशाली ड्रोन डिस्प्ले के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को प्रेरित और मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, 50 नमन केंद्रों का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया गया। ‘प्रोजेक्ट नमन’ को सेना के पूर्व सैनिकों, पेंशनभोगियों, वीर नारियों और शहीदों के परिजनों (एनओके) को समर्पित सहायता और सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक ही सुविधाजनक स्थान पर स्पर्श- सक्षम पेंशन सेवाएं, ‘सरकार से नागरिक’  सेवाएं और ‘व्यवसाय से उपभोक्ता’  सेवाएं प्रदान करता है। यह मुख्य रूप से स्पर्श (पेंशन प्रशासन प्रणाली रक्षा) नामक डिजिटल पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन पर केंद्रित है, जो देश भर में पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के लिए सुलभ सुविधा केंद्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है। इसके अंतर्गत स्वागत और सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाती है।

इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागड़े, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी और श्री प्रेम चंद बैरवा, दक्षिण-पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मंजींदर सिंह, अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, एनओके, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वें राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 के पुरस्कार वितरित किए

जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वें राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर सभागार में आयोजित किया गया।

कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने समारोह की अध्यक्षता की तथा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विजयी जवाहर नवोदय विद्यालयों की टीमों को पुरस्कार वितरित किए।

मंत्री महोदय ने कार्यक्रम के दौरान छात्रों से भी संवाद किया तथा छात्र जीवन को आकार देने में शिक्षकों के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के शब्दों का स्मरण कराया कि सपने वे नहीं होते जो सोते समय आते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सोने न दें। इस अवसर पर मंत्री महोदय ने सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए “जीवन प्रतिज्ञा” भी दिलाई।

स्वागत भाषण देते हुए संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने छात्रों से आशा, नवाचार एवं परिवर्तन के ध्वजवाहक बनने तथा 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र) के छात्रों ने “युवा संसद” का पुनरावृत्त प्रदर्शन किया, जिसकी गरिमामय सभा द्वारा उच्च प्रशंसा की गई।

नवोदय विद्यालय समिति (मुख्यालय) के संयुक्त आयुक्त डॉ. समीर पांडे ने युवा संसद की बैठकों के उल्लेखनीय प्रस्तुतीकरण के लिए विजयी टीम को बधाई दी। उन्होंने छात्रों द्वारा संसदीय प्रक्रियाओं को प्रभावी एवं गरिमापूर्ण ढंग से प्रदर्शित करने की प्रशंसा की तथा जवाहर नवोदय विद्यालयों के छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करने एवं आत्मसात करने के लिए मूल्यवान मंच प्रदान करने हेतु संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

न्याय विभाग के सचिव तथा संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव (अतिरिक्त प्रभार) श्री नीरज वर्मा ने जवाहर नवोदय विद्यालयों में युवा संसद कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रशंसनीय प्रयासों की सराहना की। उन्होंने युवा संसद कार्यक्रम को युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों को पोषित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया तथा संसदीय कार्य मंत्रालय को छात्रों के लिए संसद को अधिक सुलभ बनाने वाली योजनाओं के लिए बधाई दी।

संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताएं आयोजित करता आ रहा है। जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता योजना के तहत, श्रृंखला की 26वीं प्रतियोगिता 2024-25 के दौरान नवोदय विद्यालय समिति के 8 क्षेत्रों में फैले 88 विद्यालयों के बीच आयोजित की गई।

युवा संसद योजना राष्ट्रव्यापी जवाहर नवोदय विद्यालयों के युवा मनों को एक मंच प्रदान करती है जहां वे अपनी वाक्पटुता, समीक्षात्मक चिंतन तथा नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन कर सकें। इसके अलावा, यह योजना छात्रों को संसद की प्रक्रियाओं एवं कार्यवाहियों, चर्चा एवं बहस की तकनीकों से परिचित कराती है तथा उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व गुणों तथा प्रभावी वाक्पटुता की कला एवं कौशल के विकास में सहायक होती है। यह प्रतिष्ठित आयोजन जवाहर नवोदय विद्यालयों के सबसे प्रतिभाशाली एवं वाक्यवादी छात्रों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व के मुद्दों पर उत्साही बहस में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए रनिंग शील्ड तथा ट्रॉफी पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र) को प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित 7 क्षेत्रीय विजयी विद्यालयों को भी मंत्री महोदय द्वारा पुरस्कार दिए गए

विद्यालय का नाम क्षेत्र का नाम
1 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, वलसाड, गुजरात पुणे

 

2 पीएम श्री जवाहर विद्यालय, आंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश लखनऊ
3 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश चण्डीगढ़
4 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बीरभूम,पश्चिम बंगाल पटना
5 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, गोलघाट, असम शिलांग
6 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मेडक, तेलंगाना हैदराबाद
7 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, महासमुंद, छत्तीसगढ़

भोपाल

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प्रधानमंत्री ने काशी तमिल संगम के विकास पर बल देते हुए अपने विचार साझा किए

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पोंगल के शुभ अवसर पर काशी तमिल संगम की उल्लेखनीय प्रगति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच बन गई है और यह भारत की विविधता में एकता का महोत्‍सव मनाते हुए परंपराओं, भाषाओं और समुदायों को जोड़ती है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में सोमनाथ की अपनी हाल की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से बातचीत की, जिन्होंने काशी तमिल संगम और सौराष्ट्र तमिल संगम जैसी पहलों की सराहना की।

श्री मोदी ने एक्‍स  पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान सोमनाथ की अपनी हाल की यात्रा में, मैंने उन लोगों से भेंट की जिन्होंने काशी तमिल संगम और सौराष्ट्र तमिल संगम जैसे प्रयासों की सराहना की। आज, पोंगल के विशेष अवसर पर, मैंने काशी तमिल संगम की प्रगति और यह किस प्रकार ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को परिपुष्‍ट करता है, इस पर अपने विचार साझा किए।”

https://www.narendramodi.in/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat

 


हाल ही में मुझे #सोमनाथस्वाभिमानपर्व के सिलसिले में सोमनाथ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान मेरी मुलाकात उन लोगों से भी हुई जिन्होंने काशी-तमिल संगम और सौराष्ट्र-तमिल संगम के प्रयासों की बहुत सराहना की। आज, पोंगल के विशेष अवसर पर, मैंने काशी-तमिल संगम की अब तक की यात्रा और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए हैं 

https://www.narendramodi.in/hi/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat


 

“சோம்நாத் சுயமரியாதைப் பெருவிழாவை முன்னிட்டு #SomnathSwabhimanParv அண்மையில் நான் சோம்நாத்திற்குச் சென்றிருந்தபோது, நான் சந்தித்த மக்கள், காசி தமிழ் சங்கமம், சௌராஷ்ட்ர தமிழ் சங்கமம் போன்ற முயற்சிகளைப் பாராட்டினார்கள். இன்று சிறப்புமிக்க பொங்கல் பண்டிகையின் போது, காசி தமிழ் சங்கமத்தின் வளர்ச்சி குறித்தும், ‘ஒரே பாரதம் உன்னத பாரதத்தின்’ உணர்வை அது எவ்வாறு வலுப்படுத்துகிறது என்பது பற்றியும் எனது கருத்துக்களைப் பரிமாறிக் கொண்டேன்.

https://www.narendramodi.in/ta/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat

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प्रधानमंत्री ने सेना दिवस पर भारतीय सेना के शौर्य को सलाम किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता को हृदय से नमन किया है।

श्री मोदी ने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक जवानों के अटूट समर्पण की सराहना करते हुए इस भाव से जुड़े संस्कृत के एक सुभाषितम को साझा किया।

प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना को सलाम करते हुए उनके शौर्य और बलिदान के लिए राष्ट्र की ओर से शाश्वत कृतज्ञता व्यक्त की।

एक्स पर अलग-अलग पोस्ट साझा करते हुए श्री मोदी ने कहा:

“सेना दिवस के अवसर पर, हम भारतीय सेना के साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं।”

हमारे सैनिक निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं, जो सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र की रक्षा करते हैं। कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता की भावना जगाती है।

हम उन सभी को अत्यंत श्रद्धापूर्वक स्‍मरण करते हैं जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

@adgpi”

“दुर्गम स्थानों से लेकर बर्फीली चोटियों तक हमारी सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। सरहद की सुरक्षा में डुटे किले का दिल से समर्पण!

अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वसमाकं या ईशावस्ता जयन्तु।

अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥”

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भारत भर में वेटरन्स डे मनाया गया: जयपुर में सेना अलंकरण समारोह आयोजित

नई दिल्ली –  भारतीय सेना ने वेटरन्स डे को देशभर के अपने सैन्य स्टेशनों और प्रतिष्ठानों में पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये कार्यक्रम नई दिल्ली, जयपुर, अमृतसर, लखनऊ, रांची और राजौरी सहित कई स्थानों पर हुए। जयपुर सैन्य स्टेशन में दक्षिण पश्चिम कमान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने की। दिन में बाद में थल सेनाध्यक्ष ने एक अलग अलंकरण समारोह में वीर सैनिकों और सैन्य इकाइयों को वीरता पुरस्कार, थल सेनाध्यक्ष प्रशस्ति पत्र और सम्मान भी प्रदान किए।

थल सेनाध्यक्ष (COAS) ने जयपुर सैन्य स्टेशन के पोलो ग्राउंड में आयोजित आर्मी वेटरन्स डे लंच में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से संवाद किया और सेना की गौरवशाली परंपरा तथा देश की सुरक्षा में उनके अमूल्य योगदान को सराहा। जनरल द्विवेदी ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने वाले जिला सैनिक बोर्डों के अधिकारियों को भी सम्मानित किया और भारतीय सेना पूर्व सैनिक निदेशालय द्वारा तैयार की गई पत्रिका सम्मान’ का विमोचन किया। इस अवसर पर आर्मी वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष सुश्री सुनीता द्विवेदी ने वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया।

अपने संबोधन में थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दोहराया कि पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का कल्याण भारतीय सेना की प्राथमिकता और उसकी निरंतर जिम्मेदारी है। युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सेना आधुनिकीकरण, नई तकनीकों के समावेश और ऑपरेशनल तैयारियों पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही सम्मान, साहस और कर्तव्य जैसे अपने मूल मूल्यों को बनाए हुए है। थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों को सेना की विचारधारा के आदर्श प्रतीक और आजीवन दूत बताते हुए युवाओं और समाज के साथ उनके निरंतर जुड़ाव का आह्वान किया, ताकि राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और मजबूती को और सशक्त किया जा सके। उन्होंने पूर्व सैनिकों से जुड़ी पहलों और कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत करने में सहयोग के लिए नागरिक प्रशासन और सभी हितधारकों का आभार भी व्यक्त किया।

सेना अलंकरण समारोह में थल सेनाध्यक्ष ने विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए। समारोह की प्रमुख उपलब्धियों में 10 सेना मेडल (वीरता) और 49 थल सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशस्ति पत्र शामिल रहे। इसके अलावा 60 यूनिटों को थल सेनाध्यक्ष प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर के लिए 26 यूनिटें शामिल थीं। ये सम्मान सभी कमानों की यूनिटों के उत्कृष्ट प्रयासों को मान्यता देने के लिए दिए गए। इन सम्मानों के माध्यम से उन कार्मिकों के साहस, समर्पण और उत्कृष्ट सेवा को सम्मानित किया गया, जो निरंतर देश की सेवा में तत्पर हैं। युद्धक्षेत्र से इतर योगदान को भी मान्यता देते हुए छह पूर्व सैनिक उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं और तीन नागरिकों को भारतीय सेना के समर्थन में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

ये समारोह 15 जनवरी 2026 को भी जारी रहेंगे। इस दिन आर्मी डे परेड का आयोजन जयपुर के महल रोड पर किया जाएगा। इसके बाद सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में शौर्य संध्या कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता, ऑपरेशनल तैयारी और जनता के साथ उसके मजबूत जुड़ाव का प्रदर्शन किया जाएगा।

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69वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता (SGFFI) 2025-26 के अंतर्गत ट्रैक साइक्लिंग प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया

ट्रैक साइक्लिंग स्पर्धाएं विशेष रूप से 14 से 19 जनवरी 2026 तक निर्धारित हैं

69वीं राष्ट्रीय स्कूली ट्रैक साइक्लिंग में झारखंड के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन

दो स्वर्ण एवं एक रजत पदक जीतकर राज्य का बढ़ाया मान

रांची,15.01.2026 – झारखंड सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:-उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची की मेजबानी में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूली ट्रैक साइक्लिंग प्रतियोगिता का आज खेलगांव स्थित सिद्धू कानू वेलोड्रोम स्टेडियम में शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन किया।

उन्होंने अपने संबोधन में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सभी खिलाड़ी स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करें और भविष्य में राज्य व देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में झारखंड में खेल अधोसंरचना (Infrastructure) का तीव्र विकास हुआ है और जिला प्रशासन खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का भी सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी रांची श्री कुमार रजत, झारखंड ओलंपिक संघ के महासचिव श्री मधुकांत पाठक, एथलेटिक संघ के श्री एस. के. पांडेय, जिला खेल पदाधिकारी श्री शिवेंद्र सिंह, श्री सुरेश कुमार, श्री शैलेंद्र पाठक, श्री सुरजीत सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

सभी अतिथियों का स्वागत राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह आयोजन सचिव श्री धीरसेन ए. सोरेंग द्वारा पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया।

आज हुए साइकिलिंग ट्रैक प्रतियोगिता के मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न आयु वर्गों की आईटीटी स्पर्धाओं में देशभर के प्रतिभाशाली साइकिलिस्टों ने अपनी उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया। जिसमें आईटीटी 500 मीटर (बालक अंडर–14) वर्ग में मणिपुर के पोइरेंगानबा चानमबाम ने स्वर्ण, मणिपुर के मयेंगबाम हेंथोई सिंह ने रजत तथा राजस्थान के अभिनव बिश्नोई ने कांस्य पदक जीता।

आईटीटी 500 मीटर (बालक अंडर–17) वर्ग में दिल्ली के नरेंगमाम मैक्सन सिंह ने स्वर्ण, मणिपुर के युमनाम सुशील सिंह ने रजत तथा अंडमान एवं निकोबार के लियोनाल्ड बैकर ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

आईटीटी 500 मीटर (बालिका अंडर–17) वर्ग में अंडमान एवं निकोबार की नमिता वॉयलेट ने स्वर्ण, महाराष्ट्र की गायत्री चंद्रशेखर तंबवेकर ने रजत तथा अंडमान एवं निकोबार की आई. एस. ब्रिडनी ने कांस्य पदक जीता।

आईटीटी 500 मीटर (बालिका अंडर–19) वर्ग में झारखंड की सबिना कुमारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया।

इस स्पर्धा में अंडमान एवं निकोबार की ब्रिटनी को रजत तथा पंजाब की प्रभजोत कौर बेहनीवाल को कांस्य पदक मिला।

वहीं आईटीटी 1000 मीटर (बालक अंडर–19) वर्ग में झारखंड के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। बिकास उरांव ने स्वर्ण तथा नारायण महतो ने रजत पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया, जबकि पंजाब के अरशदीप सिंह को कांस्य पदक प्राप्त हुआ।

उपायुक्त ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजन्त्री से डैंजर्स ऐडवेंचर्स स्पोर्ट्स लॉगेस्ट वर्ल्ड टूर टीम ऑन फुट जर्नी ने की शिष्टाचार मुलाकात

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से टीम ने साझा किये अपने अनुभव

केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु देशभर में जन-जागरूकता अभियान चला रही है टीम

विश्व के 11 देशों में लगभग 4 लाख 54 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी है टीम

रांची,15.01.2026 – डैंजर्स ऐडवेंचर्स स्पोर्ट्स लॉगेस्ट वर्ल्ड टूर ऑन फुट जर्नी के सदस्य व पर्वतारोही, गिनीज बुक, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर टीम के चार सदस्य श्री अवध बिहारी लाल, श्री जितेन्द्र प्रताप, श्री महेन्द्र प्रताप एवं श्री गोविन्द चन्द्र ने आज उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर टीम के सदस्यों ने अपनी विश्वशांति विश्वपदयात्रा/स्थलयात्रा के अनुभव साझा किए तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु देशभर में किए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों की जानकारी दी। टीम द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मतदाता जागरूकता सहित अन्य सामाजिक विषयों पर किए जा रहे कार्यों से उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री को अवगत कराया गया। 20 सदस्यीय टीम झारखण्ड में दिनांक 15.01.2026 से 20.01.2026 तक अपने विभिन्न कार्यक्रमों को संपन्न करेगी।

टीम सदस्यों ने बताया कि अब तक वे पूर्ण कर चुके हैं तथा इस दौरान लाखों पौधों का वृक्षारोपण एवं विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। झारखंड राज्य के सभी 24 जिलों में भी उनकी यात्रा के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने टीम के सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया तथा उनके अभियान को सफल बनाने हेतु शुभकामनाएँ दीं।

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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान आंरभ किया

नई दिल्ली – दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य विविधतापूर्ण और संवहनीय आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना है। इसके लिए गैर-कृषि क्षेत्र के ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण उपाय है। पिछले कुछ वर्षों में, स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम सहित कई गैर-कृषि आजीविका योजनाओं ने प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से सफल उद्यम मॉडल प्रस्तुत किए हैं। ये कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर उत्प्रेरक के रूप में उद्यम की पहचान, स्टार्टअप सहायता, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग देते हैं।

मंत्रालय ने कम से कम 3 करोड़ स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों- को  लखपति दीदियां बनाने का संकल्प लिया है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक होगी। इस  लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस समूह का बड़े पैमाने पर उन्नयन आवश्यक है।

इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग अपर सचिव ने 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान आंरभ किया। कार्यक्रम में नीति आयोग के विकास एवं जनसंपर्क सलाहकार, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक- नाबार्ड  के अध्यक्ष, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, आईएफएमआर लीड (केआरईए विश्वविद्यालय), भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान- ईडीआईआई और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के प्रतिनिधि और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के वरिष्ठ निदेशक/सीईओ ने अपनी टीम के साथ भाग लिया।

 

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का मुख्य उद्देश्य 50 हजार सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों (सीआरपी) को उद्यम प्रोत्साहन प्रशिक्षण देकर और उनका क्षमता वर्धन तथा दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 50 लाख स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्रदान करना है।

 

 

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम विकास, स्थानीय आर्थिक विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की उद्यमशीलता क्षमता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। यह लक्षित अभियान हजारों सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियां तैयार करने के साथ ही लाखों ग्रामीण उद्यमियों को प्रेरित करेगा, जिससे सुदृढ़, समावेशी और आत्मनिर्भर गैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था निर्मित होगी और जमीनी स्तर के उद्यमों और उद्यम ऋणों के लिए औपचारिक वित्तीय संस्थानों से संपर्क के अवसर खुलेंगे।

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केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश और सहयोग पर फोकस के साथ अबू धाबी का दौरा पूरा किया

नई दिल्ली – केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की। यात्रा के दौरान इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं असेंबली में हिस्सा लेना और भारत के तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए अन्य उच्च-स्तरीय बैठकें शामिल थीं।

 

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आधारित और वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेशकों और रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर के साथ एक रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टमेंट राउंडटेबल की अध्यक्षता की। चर्चा में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर, ईपीसी, क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, वेस्ट-टू-एनर्जी और सस्टेनेबल फाइनेंस जैसे स्वच्छ ऊर्जा के कई खंड शामिल थे। श्री जोशी ने भारत में अक्षय ऊर्जा के विकास की गाथा को साझा किया और मेक इन इंडिया पहल के तहत परियोजना विकास, वित्त पोषण और विनिर्माण के क्षेत्र में उपलब्ध महत्वपूर्ण अवसरों पर प्रकाश डाला, जिससे भारत दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बन गया है।

 

श्री जोशी ने अबू धाबी सस्टेनेबिलिटी वीक में भी हिस्सा लिया। यह संयुक्त अरब अमीरात का एक वैश्विक मंच है। यह मंच सरकार, व्यापार, वित्त और नागरिक समाज के दिग्गजों को एक साथ लाता है ताकि सतत विकास को आगे बढ़ाया जा सके और आपस में जुड़े सेक्टर में भविष्य के लिए तैयार समाधानों को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरान, उन्होंने ग्लोबल क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ बातचीत की और एक न्यायसंगत, समावेशी तथा मापनयोग्य ऊर्जा परिवर्तन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

संयुक्त अरब अमीरात में अपने कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में श्री जोशी ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की, जिसमें जीवंत कन्नड़ समुदाय भी शामिल था। उन्होंने कन्नड़ पाठशाला जैसी पहलों के जरिए भाषा और संस्कृति को बनाए रखने के उनके प्रयासों की सराहना की, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ में भी किया था।

इस दौरे के अवसर पर श्री जोशी ने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर, दुबई के जेबेल अली गांव में हिंदू मंदिर और दुबई में गुरुनानक दरबार गुरुद्वारे जैसे प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का भी दौरा किया और प्रार्थना की। इन मुलाकातों से भारत और संयुक्त अरब अमीरात में जन-जन के बीच मजबूत संबंध और सद्भाव, समावेशिता और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों की झलक मिली।

इससे पहले, अबू धाबी में इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं असेंबली के प्लेनरी सेशन को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने दोहराते हुए कहा था कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के सिद्धांत पर आधारित है, जो समानता, समावेशिता और दीर्घकालिक स्थायी नीति पर टिका है। इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी और खाद्य तथा कृषि संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने पर अंतर-मंत्रालयी संवाद में, श्री जोशी ने जलवायु-अनुकूल कृषि और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका पर बल दिया।

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी हस्तियों और प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों के साथ बातचीत भी की। इस यात्रा ने नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और स्वच्छ इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सहयोग को और मजबूत किया। इतना ही नहीं, इस यात्रा ने नवाचार, निवेश और दीर्घकालिक सहयोग के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ काम करने की भारत की तत्परता को भी दर्शाया।

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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने फरीदाबाद नगर निगम द्वारा रख-रखाव किए गए सड़क खंडों का निरीक्षण किया

नई दिल्ली – एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत अपने गहन प्रवर्तन के हिस्से के रूप में फरीदाबाद नगर निगम (एमसीएफ) द्वारा रखरखाव किए गए सड़क खंडों और सड़क धूल शमन उपायों का आकलन करने के लिए 13 जनवरी, 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद में एक निरीक्षण अभियान चलाया।

यह निरीक्षण ऑपरेशन क्लीन एयर के तहत सड़क सफाई और झाड़ू लगाने के उपायों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन का आकलन करने और धूल, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट संचय और संबंधित समस्याओं से ग्रस्त स्थानों की पहचान करने के लिए किया गया था।

निरीक्षण के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारियों सहित कुल 9 टीमें तैनात की गईं। टीमों ने 127 सड़क खंडों का निरीक्षण किया और समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के हिस्से के रूप में निरीक्षण के दौरान एकत्र किए गए भू-टैग और समय-मुहर लगे फोटोग्राफिक साक्ष्य आयोग को प्रस्तुत किए।

निरीक्षण के निष्कर्षों से पता चला कि सड़क के कई हिस्सों में धूल का स्तर कम या न के बराबर था, लेकिन कुछ हिस्सों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। निरीक्षण किए गए कुल हिस्सों में से 17 में धूल का स्तर अधिक और 25 में मध्यम पाया गया, जबकि 66 हिस्सों में धूल का स्तर कम था और 19 हिस्सों में धूल बिल्कुल नहीं थी। अधिक धूल वाले हिस्से कई मामलों में ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के जमाव से संबंधित थे, विशेष रूप से प्रमुख गलियारों, चौराहों और सेवा सड़कों के किनारे खुले में कचरा जलाने के छिटपुट मामले भी देखे गए।

आयोग ने चिन्हित प्रदूषणकारी क्षेत्रों में तत्काल और निरंतर सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें गहन सफाई, नियमित जल छिड़काव, ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का शीघ्र संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान तथा अपशिष्ट डंपिंग और खुले में जलाने से रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन शामिल है। एमसीएफ को निगरानी तंत्र को मजबूत करने और धूल के पुनः संचय को रोकने के लिए सभी सड़क खंडों पर धूल नियंत्रण उपायों के एकसमान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।

‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान पूरे क्षेत्र में नियमित रूप से जारी रहेंगे ताकि वैधानिक निर्देशों और जीआरएपी प्रवर्तन उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। सीएक्यूएम पूरे क्षेत्र में स्वच्छ, धूलरहित और सुव्यवस्थित सड़क अवसंरचना सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

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देशी पशुधन किसानों की समृद्धि की कुंजी: श्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने आज नई दिल्ली स्थित ए. पी. शिंदे ऑडिटोरियम में पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जानवरों की इकोलॉजिकल अहमियत और भारत की देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। श्री चौहान ने कहा कि जानवरों के साथ भारत का रिश्ता सिर्फ़ आर्थिक या न्यूट्रिशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि असल में इकोलॉजिकल है।

उन्होंने कहा, “यह बैलेंस का रिश्ता है। इस बैलेंस में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर पर्यावरण और आखिर में, धरती की भलाई पर पड़ता है।” उन्होंने देसी नस्लों को बचाने के लिए देश भर में काम कर रहे साइंटिस्ट, इंस्टीट्यूशन और किसान समुदायों की बहुत तारीफ की।

उन्होंने कहा, “उनकी कोशिशें जानवरों को बचाने से कहीं आगे हैं। वे बायोडायवर्सिटी की रक्षा कर रहे हैं, गांवों की रोजी-रोटी को मजबूत कर रहे हैं और सस्टेनेबल खेती के भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं।”

देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए 2019 में शुरू की गई नेशनल पहल का ज़िक्र करते हुए, मंत्री ने इसे एक अहम और तारीफ़ के काबिल कदम बताया। उन्होंने कहा, “देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले जानवर हमारी खेती की इकॉनमी की रीढ़ हैं। उनका विकास सीधे किसानों की खुशहाली, मजबूती और इनकम सिक्योरिटी से जुड़ा है।”

श्री चौहान ने ज़ोर दिया कि इस मिशन को पॉलिसी और कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़कर एक जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह काम सिर्फ़ पॉलिसी फ्रेमवर्क या कॉन्फ्रेंस प्लेटफॉर्म तक ही सीमित नहीं रह सकता। इसे गांवों, खेतों और किसान परिवारों तक पहुंचना चाहिए और एक सच्चा जन आंदोलन बनना चाहिए।”

उन्होंने इस नेशनल कोशिश में योगदान देने वालों को पहचानने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “लोगों की पहचान से हिस्सा लेने की प्रेरणा मिलती है, और हिस्सा लेने से लंबे समय तक असर के लिए रफ़्तार बनती है।” मीडिया से एक कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाने की अपील करते हुए, श्री चौहान ने बचाव और सस्टेनेबिलिटी में पॉज़िटिव काम के लिए ज़्यादा विज़िबिलिटी की अपील की। उन्होंने आखिर में कहा, “ज़िंदगी, प्रकृति एवं हमारे साझा भविष्य की रक्षा करने वालों का काम देखा, सुना और मनाया जाना चाहिए।”

डॉ. जाट ने कहा कि विकसित भारत – पशु धन का विज़न लंबे समय तक संरक्षण के साथ-साथ ज़िम्मेदारी से रिसोर्स का इस्तेमाल करने पर केन्द्रित है। उन्होंने पिछले पंद्रह सालों में किसानों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया, और कहा कि वे नस्ल संरक्षण की कोशिशों के केंद्र में बने हुए हैं। 2008 से, 242 जानवरों की नस्लें रजिस्टर की गई हैं। 2047 तक विकसित भारत को पाने के लिए, भाकृअनुप का लक्ष्य सभी देसी जानवरों की नस्लों का 100 परसेंट रजिस्ट्रेशन करना है।

डॉ. जाट ने आर्थिक कारणों से भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता जताई और सुधार पर ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नस्ल रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ संरक्षण से कहीं ज़्यादा है, यह बायोलॉजिकल रिसोर्स पर सॉवरेन अधिकार, किसानों के लिए फायदा-शेयरिंग तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों की सुरक्षा को मुमकिन बनाता है। ज़ीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट एनिमल्स मिशन इन लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है।

डेलीगेट्स का स्वागत करते हुए, डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप-महानिदेशक (पशुविज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने पार्टिसिपेंट्स को रजिस्टर्ड नस्लों के बारे में जानकारी दी और एक सस्टेनेबल एनवायरनमेंट के लिए उनके संरक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया।

इस इवेंट में भारत सरकार के देसी जानवरों के जेनेटिक रिसोर्स (एएनजीआर) के बचाव, पहचान और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए पक्के वादे को दिखाया गया। सेरेमनी के दौरान, नई पहचानी गई जानवरों तथा पोल्ट्री नस्लों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया गया, और किसानों, ब्रीडर्स एवं संस्थाओं को उनके शानदार योगदान के लिए ब्रीड कंजर्वेशन अवार्ड दिया गया।

इस सेरेमनी में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का पशुधन सेक्टर को मज़बूत करने, किसानों को मज़बूत बनाने, इनकम बढ़ाने तथा सस्टेनेबल खेती के विकास की बुनियाद के तौर पर बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन को बढ़ावा देने का विज़न दिखा। इस कार्यक्रम में देश भर के सीनियर अधिकारियों, साइंटिस्ट्स, रिसर्चर्स, प्रोग्रेसिव किसानों एवं स्टेकहोल्डर्स ने शिरकत की।

नस्ल संरक्षण पुरस्कार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उनके उत्कृष्ट योगदान को पहचानते हुए वर्ष 2025 के लिए व्यक्तियों और संस्थानों को नस्ल संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया।

व्यक्तिगत श्रेणी में, श्री जीतुल बुरागोहेन को लुइट भैंस के संरक्षण में उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि श्री कुडाला राम दास को पुंगनूर मवेशियों के संरक्षण के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। नस्ल संरक्षण में उनके सराहनीय कार्य के लिए श्री तिरुपति तथा श्री रामचंद्रन काहनार को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

संस्थागत श्रेणी में, बिनझारपुरी मवेशी प्रमोटर्स एंड प्रोड्यूसर्स सोसाइटी को बिनझारपुरी मवेशियों के संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुलिक्कुलम मवेशियों के संरक्षण के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि गाओलाओ मवेशियों के संरक्षण के प्रयासों के लिए तृतीय पुरस्कार दिया गया। मेचेरी भेड़ के संरक्षण में योगदान के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को भी एक सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

पृष्ठभूमि

भारत दुनिया के सबसे समृद्ध पशु आनुवंशिक संसाधनों के भंडार में से एक का घर है, जो स्थायी पशुधन उत्पादन, किसानों की आजीविका एवं राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसे पहचानते हुए, भाकृअनुप ने 2008 में पशु नस्ल पंजीकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें भाकृअनुप–एनबीएजीआर नोडल एजेंसी थी।

इसकी शुरुआत से अब तक, कई प्रजातियों की 242 स्वदेशी पशु नस्लों को पंजीकृत किया गया है। कानूनी मान्यता और संप्रभु सुरक्षा प्रदान करने हेतु, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) ने राजपत्र अधिसूचनाएं शुरू कीं, जिसमें 2019 से आठ अधिसूचना जारी की गई, जिनमें 229 स्वदेशी नस्लों को शामिल किया गया है। ये उपाय बायोपायरेसी से सुरक्षा प्रदान करते हैं, लाभ-साझाकरण का समर्थन करते हैं और नस्ल-विशिष्ट विकास नीतियों को सक्षम बनाते हैं।

इसके समानांतर, भाकृअनुप 2017 से किसानों, प्रजनकों और संस्थानों द्वारा स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में किए गए अनुकरणीय प्रयासों को पहचानने के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार प्रदान कर रहा है। पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाण पत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण समारोह – 2025 भारत के पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, संरक्षण-आधारित विकास को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के निरंतर प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास में पोंगल पर्व मनाया

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान आज चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में पोंगल उत्सव में शामिल हुए। आईआईटी मद्रास ने श्री धर्मेंद्र प्रधान का हार्दिक स्वागत किया और पारंपरिक पोंगल उत्सव का आयोजन किया।

श्री धर्मेंद्र प्रधान कृतज्ञता, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक फसल उत्सव मनाने के लिए संस्थान के परिसर सामुदायिक हॉल में आईआईटी मद्रास परिवार में शामिल हुए।

श्री प्रधान ने हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए तमिलनाडु की जनता और देश भर में पोंगल का त्योहार मनाने वाले सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जीवंत संस्कृति का पर्याय बन चुका पोंगल समृद्धि, सद्भाव और एकजुटता की भावना को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री ने आईआईटी मद्रास परिवार के साथ पोंगल मनाने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह त्योहार समृद्धि, स्नेह और एकजुटता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कामना की कि यह अवसर सभी के लिए अच्छे स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव लेकर आए।

इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री विनीत जोशी, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटि, संकाय सदस्य, छात्र, कर्मचारी और परिसर समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।

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एक साल, कई यात्राएं हुईं आसान: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की टोल नीतियां राजमार्ग पर सफर का नया अनुभव करा रही हैं

नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजमार्गों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण टोल प्लाजों पर लगने वाली लंबी कतारों से आम यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। हालांकि, पिछले एक दशक में टोल प्रणाली में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव हुए हैं, जिससे आवागमन तेज हुआ है और सड़क यात्रियों को काफी सुविधा मिली है। इस रूख को आगे बढ़ाते हुए, वर्ष 2025 में जनहितकारी सुधारों और नवाचारों को लागू किया गया, जिससे राजमार्ग यात्रा और भी सुगम और कुशल हो गई है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एनएचएआई के साथ मिलकर यात्रियों की असल चिंताओं को कम करने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर लगन से काम किया है।

फास्‍टैग वार्षिक पास

15 अगस्त 2025 को शुरू किए गए फास्‍टैग वार्षिक पास के साथ, अब यात्रियों को देश भर के 1,159 टोल प्लाजा पर 200 टोल ट्रिप या पूरे एक वर्ष की यात्रा सुविधा, जो भी पहले हो, प्राप्त करने के लिए केवल 3,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

उन्नाव के कुशेहरी निवासी ने कहा, “मैंने हाल ही में फास्‍टैग वार्षिक पास लिया है क्योंकि मैं रोजाना उन्नाव से लखनऊ जाता हूं। पहले मुझे टोल शुल्क के रूप में प्रतिदिन लगभग 90 रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब वार्षिक पास लेने के बाद मेरा दैनिक खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है। समय की भी बचत होती है क्योंकि मैं टोल प्लाजा को मुश्किल से एक मिनट में पार कर लेता हूं।”

देश के अन्य हिस्सों में भी राजमार्गों का नियमित उपयोग करने वालों को इसी तरह की राहत मिल रही है। कई लोगों के लिए, इस वार्षिक पास ने न केवल दैनिक यात्रा खर्च को कम किया है, बल्कि नियमित आवागमन को तनावमुक्त भी बना दिया है।

हरियाणा में यमुना नगर के एक निवासी ने बताया, “मुझे नियमित रूप से चंडीगढ़ जाना पड़ता है। पहले मुझे आने-जाने के लिए कुल 150 रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन वार्षिक पास बनवाने के बाद मेरा खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है, जिससे मुझे बहुत राहत मिली है।”

इसके अलावा, फास्‍टैग वार्षिक पास ने अनिश्चित मासिक टोल खर्चों को एक निश्चित, तनाव-मुक्त लागत में बदल दिया है, जिससे दैनिक यात्रियों को पूरे वर्ष निश्चितता, बचत तथा सुगम यात्रा मिलती है, और उन्हें अपने फास्‍टैग को लगातार रिचार्ज करने की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती।

महज कुछ महीनों में ही 40 लाख से अधिक फास्‍टैग वार्षिक पास बिक ​​चुके हैं, और लगभग 20 प्रतिशत कार वालों  ने इसे अपना लिया है, जो इस बात का प्रमाण है कि किफायती और सुविधाजनक दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना

टोल प्लाजा पर, कभी नकद भुगतान सबसे धीमा और अव्यवस्थित विकल्प हुआ करता था। लंबी कतारें, खुले पैसे की समस्या और विवाद आम बात थी। इस समस्या को दूर करने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले नॉन-फास्टैग भुगतानों पर 2 गुना शुल्क लगाया था, जिससे कुछ वाहन वालों के लिए भुगतान महंगा हो जाता था। अब, यूपीआई भुगतानों के लिए इसे घटाकर केवल 1.25 गुना कर दिया गया है, जिससे यह काफी किफायती हो गया है और नकद का यह एक वास्तविक विकल्प बन गया है। पहले, नकद भुगतान का मतलब इंतजार करना और कभी-कभी बहस होना होता था। आज, यूपीआई भुगतानों पर 2 गुना से 1.25 गुना तक की छूट के साथ, यात्रियों को बस स्कैन करना, भुगतान करना और आगे बढ़ना है – जिससे डिजिटल भुगतान सरल, त्वरित और सार्थक हो गया है।

15 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच टोल प्लाजा पर 15 लाख से अधिक यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल राशि 19.44 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, नकद वसूली में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे टोल प्लाजा पर भीड़ कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।

वर्तमान में, 98 प्रतिशत वाहन पहले से ही फास्‍टैग का उपयोग करते हैं, और शेष अंतर न केवल जुर्माने के माध्यम से, बल्कि उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रोत्साहनों के माध्यम से भी लगातार कम हो रहा है।

अब रुकने की कोई ज़रूरत नहीं – टोल प्रणाली का नया रूप आ गया है।

टोल प्लाजा पर रुकने और फिर से चलने वाले ट्रक चालक ईंधन की बर्बादी, थकान और देरी से परेशान रहते थे। हर बार रुकने पर डीजल और समय दोनों की खपत होती है और लंबे मार्गों पर तो यह खर्च और भी बढ़ जाता है।

अब इस समस्या का समाधान भारत की पहली बाधा-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे गुजरात में एनएच-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा में लागू करने के लिए पहले ही ठेका दिया जा चुका है और इसके 2026 में चालू होने की उम्मीद है। इसके समानांतर, एनएचएआई ने 5 और बाधा-मुक्त टोलिंग प्रणालियों के लिए ठेके दिए हैं, जो आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एक बार लागू हो जाने के बाद, वाहन राजमार्ग की गति से गुजर सकेंगे, और टोल की कटौती बिना किसी बाधा या कतार के स्वचालित रूप से होगी।

निर्माण के दौरानयात्रियों को केवल 50 प्रतिशत टोल का भुगतान करना होगा

राजमार्गों के नवीनीकरण से अक्सर असुविधा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, सड़क परिवहन मंत्रालय के अद्यतन नियम के अनुसार, जब किसी सड़क को पक्के शोल्डर वाली दो लेन से चार, छह या उससे अधिक लेन में अपग्रेड किया जा रहा हो, तो काम पूरा होने तक वाहन वालों को पहले के टोल का केवल आधा (50 प्रतिशत) ही भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बहु-लेन विस्तार के दौरान टोल दर 50 रुपये है, तो निर्माण अवधि के दौरान वाहन वालों को केवल 25 रुपये का भुगतान करना होगा। यह स्पष्ट रूप से सड़क की गुणवत्ता में सुधार के प्रति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण के दौरान यात्रियों से अधिक शुल्क न लिया जाए और यात्रा अधिक किफायती और लोगों के लिए सस्ती बनी रहे।

टोल लागत के अलावा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने फास्‍टैग व्यवस्था को निम्नलिखित तरीकों से मजबूत किया है:

  • दुरुपयोग रोकने के लिए एक वाहनएक फास्‍टैग
  • वाहन श्रेणी में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए फास्‍टैग जारी करने की प्रक्रिया को वीएएचएएन से जोड़ा गया है।
  • सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए लूज़ फास्‍टैग के लिए शुल्क दोगुना किया गया।
  • शिकायत निवारण के लिए कई चैनल उपलब्ध हैं — 1033 हेल्पलाइनईमेल सहायताबैंक हेल्पलाइन और राजमार्ग यात्रा ऐप।

देश के राजमार्गों पर गुपचुप बदलाव

ये पहलें शायद हमेशा सुर्खियों में न रहें, लेकिन इनका असर हर दिन महसूस होता है, जैसे कि कतारें छोटी होना, खर्च का अनुमान लगाना, यात्रा का सुगम होना और टोल बूथों पर अधिक सहज अनुभव मिलना।

पिछले एक वर्ष में अपनाए गए दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि सुशासन को जनसुविधा और आर्थिक विकास में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। स्मार्ट नीति, डिजिटल उपकरणों और सड़क यात्रियों के प्रति सहानुभूति के साथ, दोनों को प्राप्त करना संभव है।

सड़क पर लगातार यात्रा कर रहे लाखों भारतीयों के लिए, निरंतर सुधार और आराम की दिशा में एक यात्रा शुरू हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन में सुगमता आएगी।

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प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में पोंगल उत्सव की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल उत्सव की झलकियां साझा कीं।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“यहां केंद्रीय मंत्री श्री एल. मुरुगन जी के आवास पर पोंगल उत्सव की कुछ झलकियां हैं।

“श्री एल. मुरुगन जी के घर पर पोंगल का जश्न पोंगल की गर्मजोशी और रौनक को दिखाता है। यह त्योहार सभी के जीवन में खुशियां लाए।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देशवासियों को ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज देशवासियों को ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की शुभकामनाएं दी। गृह मंत्री ने कर्नाटक के लोगों को भी मकर संक्रांति, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के लोगों को भोगी, संक्रांति और कनुमा, गुजरात के लोगों को उत्तरायण और असम के लोगों को माघ बिहू की भी शुभकामनाएं दी।

X पर किए गए एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, “ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह उत्सव आप सभी के जीवन में असीम खुशियाँ और समृद्धि लेकर आए।”

एक अन्य पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर कर्नाटक के हमारे सभी बहनों और भाइयों को शुभकामनाएँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह पवित्र त्योहार नई उमंग लाए और हमारे रिश्तों को मज़बूत करे, मैं सभी के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूँ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि हमारे तेलुगु बहनों और भाइयों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ। भोगी, संक्रांति और कनुमा के त्योहार हर घर में खुशहाली, सुख और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद बरसाएँ।

श्री अमित शाह ने एक अन्य पोस्ट में उत्तरायण के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह भगवान सूर्य नारायण से सभी के कल्याण की कामना करते हैं।

X पर किए गए एक और पोस्ट में गृह मंत्री ने असम के लोगों को माघ बिहू की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि असम में हमारे सभी बहनों और भाइयों को माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह फसल का त्योहार हमारी एकता को मज़बूत करे और सभी को समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशी का आशीर्वाद दे।

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जी-राम-जी अनुमानों या आशंकाओं पर नहीं बल्कि साक्ष्य एवं अनुभव पर आधारित है; सरकार ग्रामीण मिशनों में पारदर्शी संवाद के लिए प्रतिबद्ध है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – एक उत्तरदायी सरकार का यह कर्तव्य है कि वह तथ्यों को बिना किसी प्रकार का राजनीतिक रंग दिए हुए स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे, विशेषकर तब जब नीतियां सीधे गांवों, आजीविका एवं दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिणामों को प्रभावित करती हों। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत ऊर्जा रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे लोकप्रिय एवं संक्षिपित रूप में जी-राम-जी के नाम से भी जाना जाता है, पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल अनुमानों या आशंकाओं के बजाय साक्ष्य, अनुभव एवं जमीनी हकीकतों पर आधारित है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जी-राम-जी को पूर्व के रोजगार कार्यक्रमों से सीख लेकर एक डिजिटल रूप से संचालित, विस्तारित एवं परिणाम-उन्मुख संरचना के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संपत्ति सृजन में सुधार लाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन सार्थक, मापनीय एवं ग्रामीण समुदायों के लिए प्रत्यक्ष रूप से लाभकारी हो। यह मिशन आधुनिक तकनीक जैसे जीपीएस-आधारित मॉनिटरिंग एवं एआई-संचालित मॉडल को एकीकृत करता है ताकि कार्यों और धन के उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी की एक मुख्य शक्तियों में से एक इसका सम्मिलित दृष्टिकोण है जो उन विभिन्न सार्वजनिक कार्यों को एक साथ लाता है जो पहले अलग-अलग लागू होते थे। योजना, क्रियान्वयन एवं परिणामों को एकरूप करके, यह मिशन कार्यों के दोहराव, धन के दुरुपयोग और अल्पकालिक परिसंपत्तियों को रोकने का लक्ष्य निर्धारित करता है जबकि जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना एवं कृषि श्रमिकों की उपलब्धता जैसी दीर्घकालिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ी है ताकि सार्वजनिक व्यय से सतत सामुदायिक परिसंपत्तियां प्राप्त हो।

श्री सिंह ने प्रमुख संरचनात्मक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना में गारंटीकृत वेतन रोजगार दिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है जो आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। फर्जी लाभार्थियों एवं फर्जी नौकरी कार्डों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समाप्त करने के लिए संपूर्ण प्रणाली का डिजिटलीकरण मजबूत नियंत्रण एवं संतुलन के साथ किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार की समाप्ति हो।

वित्तीय सुधार पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी मांग-आधारित एवं असीमित आवंटन से अलग वस्तुनिष्ठ मापदंडों पर आधारित राज्य-वार आवंटन मॉडल की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि धन का आवंटन केंद्र और राज्य में 60:40 अनुपात में होगा, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवश्यकतानुसार विशेष प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि यह संरचना न केवल वित्तीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है बल्कि कार्यान्वयन में राज्य की भागीदारी एवं जवाबदेही को भी बढ़ावा देती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रोजगार कार्यों को स्थानीय कृषि कैलेंडर के अनुरूप बनाने के महत्व पर भी बल दिया, ताकि ग्रामीण श्रमिक बिना किसी बाधा के कृषि कार्यों एवं मजदूरी रोजगार के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। इस प्रणाली में मौसमी लचीलापन एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसी आपात स्थितियों में 60 दिनों तक काम रोकने का प्रावधान शामिल किया गया है जिससे संवेदनशीलता और मजबूती दोनों सुनिश्चित होती हैं। मिशन के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान अब साप्ताहिक आधार पर होगा जिससे श्रमिकों की आय स्थिरता में बहुत हद तक सुधार होगा।

मिशन के मूल सिद्धांत को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईमानदार, पारदर्शी एवं उत्पादक रोजगार के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाना महात्मा गांधी के ग्रामीण सशक्तिकरण के दृष्टिकोण की भावना के साथ पूर्ण रूप से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि यह मिशन प्रतीकात्मक उपायों के बजाय वास्तविक विकास एवं उत्तरदायी शासन के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

केंद्रीय मंत्री डॉ सिंह ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा कि सरकार राष्ट्रीय हित में जी-राम-जी से संबंधित तथ्यों को निष्पक्ष रूप से संचारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह मिशन राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना, गांवों, श्रमिकों एवं देश के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए प्रतिक्रियाओं एवं सुधारों के माध्यम से निरंतर विकसित होता रहेगा।

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प्रधानमंत्री ने उत्तरायण और माघ बिहू के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज उत्तरायण और माघ बिहू के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

सभी को उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनाएं!

सभी देशवासियों को माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएं!

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प्रधानमंत्री ने मकर संक्रांति के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री ने मकर संक्रांति पर बल देते हुए कहा कि मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है, जो  भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समृद्धि को दर्शाता है  और सद्भाव, समृद्धि एवं एकजुटता की भावना का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तिल और गुड़ की मिठास सभी के जीवन में प्रसन्‍नता और सफलता लाएगी। साथ ही, उन्‍होंने राष्ट्र के कल्याण के लिए सूर्य देव का आशीर्वाद भी मांगा।

श्री मोदी ने भगवान सूर्य का आशीर्वाद मांगते हुए एक संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया, जो इस त्योहार के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करता है।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:

“सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की असीम शुभकामनाएं। तिल और गुड़ की मिठास से भरा भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का यह दिव्य अवसर हर किसी के जीवन में प्रसन्नता, संपन्नता और सफलता लेकर आए। सूर्यदेव सबका कल्याण करें।”

“संक्रांति के इस पावन अवसर को देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। मैं सूर्यदेव से सबके सुख-सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

सूर्यो देवो दिवं गच्छेत् मकरस्थो रविः प्रभुः।

उत्तरायणे महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्॥”

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फ्रांस के राष्‍ट्रपति के राजनयिक सलाहकार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – फ्रांस के राष्‍ट्रपति के राजनयिक सलाहकार श्री इमैनुएल बॉन ने आज नई दिल्‍ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की।

श्री मोदी ने एक्‍स पर एक पोस्‍ट में लिखा :

फ्रांस के राष्‍ट्रपति श्री मैक्रों के राजनयिक सलाहकार श्री इमैनुएल बॉन से मिलकर बहुत प्रसन्‍नता हुई। हमने कई कार्यक्षेत्रों में घनिष्‍ठ सहयोग से चिन्हित एक मजबूत और भरोसेमंद भारत- फ्रांस रणनीतिक साझीदारी की पुष्टि की। विशेष रूप से जब हम भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष मना रहे हैं तो यह देखकर प्रसन्‍नता हुई कि हमारा सहयोग नवोन्‍मेषण, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। हमने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया। शीघ्र ही राष्‍ट्रपति श्री मैक्रों का भारत में स्‍वागत करने की उम्‍मीद है।

@EmmanuelMacron”

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असम और पश्चिम बंगाल को भारत के कोने-कोने से जोड़ने वाली नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को जल्द ही हरी झंडी दिखाई जाएगी

नई दिल्ली – रेल यात्रा के अनुभव के मामले में नया साल परिवर्तनकारी साबित हो रहा है। चाहे आम आदमी हो या प्रीमियम यात्री, भारतीय रेलवे पूरे भारत में यात्रियों को किफायती, आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पश्चिम बंगाल और असम से जल्द ही नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पूरे भारत में शुरू की जाएंगी, जिससे आधुनिक और किफायती ट्रेनों का दायरा बढ़ेगा। ये ट्रेनें इन दोनों राज्यों से किफायती और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे आबादी वाले राज्य शामिल होंगे। ये तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दूर-दराज के राज्यों को भी कवर करेंगी, जिससे देश के कई हिस्सों को जोड़ा जा सकेगा। ये सेवाएं रेल यात्रा की बढ़ती मांग को कम करेंगी और यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेंगी।

भारत में पहली ट्रेन यात्रा के लगभग दो सदियों बाद, भारतीय रेलवे ने उन लाखों लोगों के लिए आवागमन को फिर से परिभाषित किया है जो दैनिक आवश्यकताओं के लिए ट्रेनों पर निर्भर हैं। लक्जरी यात्रा से जुड़ी सुविधा और आराम को आम यात्रियों तक पहुंचाकर,  इसने धीरे-धीरे आधुनिक, यात्री-अनुकूल सेवाओं का विस्तार किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि विश्वसनीयता, सुरक्षा और  आराम अब केवल प्रीमियम यात्रियों तक ही सीमित नहीं हैं।

इसी विज़न के तहत, अमृत भारत एक्सप्रेस रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए एक वरदान बनकर उभरी है। अमृत काल की एक विशेष पेशकश के रूप में शुरू की गई ये ट्रेनें बिना किसी रुकावट के, नॉन-एसी लंबी दूरी की स्लीपर श्रेणी की यात्रा की सुविधा देती है, जिसका किराया लगभग 500 रुपये प्रति 1000 किलोमीटर है, तथा छोटी और मध्यम दूरी की यात्राओं का किराया उसी हिसाब से  कम होता है, जो अक्सर भूगोल और अवसरों की कमी के कारण अलग-थलग पड़े इलाकों को जोड़ती है। किराये की संरचना सरल और पारदर्शी है, जिसमें कोई डायनामिक प्राइसिंग नहीं है, जो इसे आम आदमी के लिए सुलभ बनाता है।

दिसंबर 2023 में इसकी शुरुआत के बाद से, 30 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, और सिर्फ़ एक हफ़्ते में नौ नई सेवाएं जोड़ी जाएंगी। अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओँ का एक नया सेट पूर्वी और उप-हिमालयी क्षेत्रों से दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य भारत के प्रमुख गंतव्य-स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा।

ये नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुज़रने वाले रूटों पर शुरू की जा रही हैं, ये ऐसे क्षेत्र है जहां भारत के प्रवासी मज़दूरों और लंबी दूरी के रेल यात्रियों की एक बड़ी संख्या रहती हैं। अधिक यात्रियों को सुविधा देने के लिए डिज़ाइन की गई ये ट्रेनें, खासकर त्योहारों के मौसम और ज्यादा भीड़भाड़ वाले समय, देश के अलग-अलग हिस्सों में रोज़गार, शिक्षा और पारिवारिक ज़रूरतों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को भरोसेमंद, किफायती और आरामदायक कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

किफायती, लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे के निरंतर प्रयास के तहत, नौ अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं प्रमुख कॉरिडोर में शुरू की जा रही हैं। रूट इस प्रकार हैं:

1. गुवाहाटी (कामाख्या)– रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस

2. डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस

3. न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस

4. न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

5. अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस

6. अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस

7. कोलकाता (संतरागाछी) – तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस

8. कोलकाता (हावड़ा) – आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस

9. कोलकाता (सियालदह) – बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस

न्यू जलपाईगुड़ी से, ट्रेनें सीधे उत्तर बंगाल को देश के दक्षिणी छोर और सेंट्रल तमिलनाडु से जोड़ेंगी, जिससे विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के कॉरिडोर बनेंगे। इन रूटों के प्रवासी मजदूरों, छात्रों, व्यापारियों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनने की उम्मीद है, जो नियमित रूप से पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के शैक्षिक, औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों के बीच यात्रा करते हैं।

इसी तरह, अलीपुरद्वार से नई सेवाएं पूर्वोत्तर भारत के दुआर क्षेत्र और देश के दक्षिणी एवं पश्चिमी हिस्से में प्रमुख महानगरीय एवं औद्योगिकी केन्द्रों के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूत करेंगी। जो क्षेत्र भौगोलिक रूप से दूरस्थ हैं लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए ये ट्रेनें मजबूत आर्थिक और सामाजिक कनेक्टर का काम करेंगी, जिससे रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा व बाज़ारों तक पहुंच बढ़ेगी।

बेंगलुरु और चेन्नई जैसे दक्षिणी शहरों की ओर विस्तार करने वाली सेवाएं पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों को प्रमुख विनिर्माण, आईटी और शिक्षा केंद्रों से जोड़कर कार्यबल के आवागमन और छात्रों की यात्रा में मदद करेंगी। मुंबई और पनवेल से सीधी कनेक्टिविटी पूर्व-पश्चिम एकीकरण को मजबूत करेगी, जिससे बिजनेस संबंधी यात्रा और प्रमुख वाणिज्यिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक पहुंच आसान होगी।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गुज़रने वाले रूट ईस्टर्न कॉरिडोर पर निर्बाध आवाजाही को बेहतर बनाएंगे, जिससे औद्योगिक, तटीय और तीर्थयात्रा वाले इलाकों को लाभ होगा।

यात्री कई आधुनिक सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं, जिनमें फोल्डेबल स्नैक टेबल, मोबाइल और बोतल होल्डर, रेडियम फ्लोर स्ट्रिप्स, आरामदायक सीटें और बर्थ, इलेक्ट्रो-न्यूमेटिक फ्लशिंग वाले आधुनिक टॉयलेट, आग बुझाने के सिस्टम और दिव्यांग यात्रियों के लिए भी सुविधाएं शामिल हैं। फास्ट चार्जिंग पॉइंट व पैंट्री कार लंबी दूरी की यात्रा को और भी आरामदायक बनाते हैं।

आम यात्रियों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, अमृत भारत एक्सप्रेस यह साबित करती है कि आधुनिक डिज़ाइन, भरोसेमंद और बेहतर सुविधाएं किफायती किराए पर उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए नॉन-एसी लंबी दूरी की यात्रा को फिर से परिभाषित करके, यह समावेशी, यात्री-केंद्रित रेल आधुनिकीकरण के लिए एक मिसाल कायम करती है। अमृत भारत ट्रेन  भविष्य के लिए तैयार रेलवे सिस्टम को दर्शाती है, जहां बेहतर डिज़ाइन, स्वदेशी तकनीक और बेहतरीन परिचालन मिलकर आरामदायक, भरोसेमंद और सभी के लिए रेल यात्रा को नया राष्ट्रीय मानक बनाते हैं।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय का कौशल विकास पहल ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स’ के लिए नेटफ्लिक्स के साथ सहयोग

नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय का नेटफ्लिक्स के साथ सहयोग नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी द्वारा विकसित कौशल विकास पहल ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स – नए भारत की नई पहचान’ परिणति के रूप में सामने आई है। ग्राफीटी स्टूडियोज की साझेदारी में कार्यान्वित यह पहल, कहानी कहने और व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण द्वारा सामाजिक तौर पर प्रासंगिक नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए भारत के नवाचार और रचनात्मक परितंत्र को साथ जोड़ती है।
इस पहल में नवोन्मेष से सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा चयनित आठ भारतीय स्टार्टअप्स के योगदान को प्रदर्शित किया गया है। ये स्टार्टअप्स देश भर के आठ विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई आठ लघु एनिमेटेड फिल्मों द्वारा दर्शाए गए हैं। फिल्म निर्माण में राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान, चितकारा विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान, और कई अन्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। फिल्मों के लिए वॉइसओवर-पार्श्व स्वर, नेटफ्लिक्स और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम -एनएफडीसी के सहयोग से आरंभ की गई कौशल विकास पहल ‘वॉइसबॉक्स’ के प्रतिभागियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए हैं।

 

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी के तहत कहानी कहने और कौशल विकास पर आधारित इस कार्यक्रम ने भारत के विभिन्न हिस्सों से आए 26 छात्रों को व्यावहारिक रचनात्मक अनुभव प्रदान कराया। प्रतिभागियों में 50 प्रतिशत महिलाएं थीं और इनमें से कई प्रतिभागी श्रेणी-दो के शहरों से आए थे। उन्हें अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान-एनआईडी और ग्राफिटी स्टूडियो के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उद्योग प्रक्रियाओं का व्यावहारिक और वास्तविक अनुभव प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक और रचनात्मक आयाम जोड़ते हुए शंकर महादेवन अकादमी के विद्यार्थियों ने पहल का मूल गान प्रस्तुत किया।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध कथा कहने की परंपरा में हमारे फिल्मकारों के पास आज भारतीय कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर है, जिसमें बौद्धिक संपदा ढांचे को सुदृढ़ करने और भविष्य के लिए तैयार सृजनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र सक्षम बनाने के लिए सरकार का सहयोग प्राप्त है। डॉ. मुरुगन ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित यह पहल भारत में सृजन और विश्व के लिए सृजन करने का सही समय है, जिसमें विषयवस्तु, रचनाशीलता और संस्कृति भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब फिल्मकारों द्वारा कथा कहने के तरीके उभरती प्रौद्योगिकियों द्वारा आकारित नए युग में प्रवेश कर रही है, इंस्पायरिंग इनोवेटर्स जैसी पहल दर्शाती हैं कि सृजनशीलता का उपयोग समाज सेवा में किस तरह हो सकता है।”

 

 

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने अपने संबोधन में कहा कि इंस्पायरिंग इनोवेटर्स कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक महत्व वाले नवाचारों को सामने लाना तथा कौशल एवं ज्ञान के विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सृजनात्मक प्रक्रिया द्वारा स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों को साथ लाकर, और नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी तथा उद्योग मार्गदर्शन के माध्यम से कौशल विकास सहायता प्रदान कर, यह भारत के नवाचार परितंत्र निर्मित करने का समग्र दृष्टिकोण दर्शाता है, जो नीतिगत उद्देश्यों को प्रतिभा विकास और वास्तविक दुनिया में उपयोग से जोड़ता है।

 

केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू ने कहा कि भारत में कई उल्लेखनीय नवाचार हो रहे हैं, जिनमें आमतौर पर सामाजिक नवप्रवर्तक रोजमर्रा की चुनौतियों का प्रभावशाली और उद्देश्यपूर्ण समाधान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में नेटफ्लिक्स के एक दशक पूरा होने पर, ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स’ इसका एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे कहानी कहने की कला दृश्य-श्रव्य निर्माण से आगे बढ़कर सार्थक कौशल विकास और सशक्तिकरण मंच के रुप में विकसित हो सकती है। यह देश भर की युवा प्रतिभाओं के आत्मविश्वास और उनकी व्यावसायिकता को दर्शाती है। यह वास्तव में सृजनकारों और उनके कथ्य कहने का युग है, और जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कथाओं को आकार देने के युग में प्रवेश कर रहे हैं, अगली पीढ़ी के विकास और प्रगति को सक्षम बनाने वाली नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। श्री जाजू ने कहा कि भारत की प्रासंगिक, उद्देश्यपूर्ण कहानियों को दूर-दराज के दर्शकों तक पहुंचते देखना उत्साहजनक है।”

 

 

नेटफ्लिक्स इंडिया की ग्लोबल अफेयर्स डायरेक्टर महिमा कौल ने कहा कि हम भारत के युवा और जीवंत रचनात्मक परितंत्र के कौशल विकास और इसके उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इंस्पायरिंग इनोवेटर्स वास्तविक सामाजिक सहयोग प्रदान करने वाले नवाचार को मान्यता देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है।

 

मंथन-प्रेरित नवाचार

मंथन एक राष्ट्रीय डिजिटल आधार के रूप में कार्य करता है जो उच्च श्रेणी के नवाचारों की पहचान कर, उन्हें सुव्यवस्थित बनाता है और विस्तार के अवसर प्रदान करता है। मंथन प्लेटफॉर्म द्वारा आठ सामाजिक नवाचार स्टार्टअप्स की खोज की गई और उन्हें सहयोग दिया गया। इस पहल के तहत निर्माण की गई आठ फिल्में निम्नलिखित हैं:

  1. नियोमोशन
    यह फिल्म उन नवप्रवर्तकों के बारे में बताता है जो दिव्यांगों को स्वतंत्र रूप से चलने और सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनाने के लिए अनुकूलित व्हीलचेयर और गतिशीलता समाधान प्रदान करते हैं।

2. ब्लाइंड विजन फाउंडेशन ने
इस फिल्म दिखाया गया है कि ब्लाइंड विजन फाउंडेशन ने कृत्रिम बुद्धिमता-संचालित स्मार्ट चश्मे बनाए हैं जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पढ़ने, रास्ता खोजने, चेहरों को पहचानने और आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र रूप से जीवन जीने में सक्षम बनाता है।

3. हेल्थकेयर ग्लोबल एंटरप्राइजेज (इनौमेशन)
यह कम कीमत वाली वॉइस प्रोस्थेसिस की कहानी बताती है जो लैरिंजेक्टोमी के बाद गले के कैंसर से बचे लोगों के लिए संवाद, गरिमा और आजीविका पाने में मदद करती है।

4. इनोगल
इसमें भारत की जलजनित अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री सुरक्षा, मत्स्य पालन उत्पादकता, महासागर सुरक्षा और आपदा निगरानी में सुधार लाने वाली एआई और जलमग्न प्रौद्योगिकियों की कहानी बताई गई है।

  1. कल्टीवेट
    इसमें स्वयं में पूर्ण, कृत्रिम बुद्धिमता-संचालित सिंचाई प्रणालियों को दर्शाया गया है जो किसानों को जल बचाने, पैदावार बढ़ाने और जलवायु-अनुकूल, कृषि पद्धतियां अपनाने में मदद करती हैं।

6. वीईवीओआईएस लैब्स
इसमें तकनीक-सक्षम अपशिष्ट प्रबंधन दर्शाया गया है जो पृथक्करण, पुनर्चक्रण, सम्मानजनक स्वच्छता कार्य और चक्रीय अर्थव्यवस्था समाधानों के माध्यम से शहरों में बदलाव रहा है।

7. ग्रीनजीन एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज
इस फिल्म में सूक्ष्म शैवाल आधारित कार्बन कैप्चर नवाचारों की खोज के बारे में बताया गया है, जो औद्योगिक उत्सर्जन में कमी लाकर  CO₂ को जैव-संसाधनों में स्थायी रूप से परिवर्तित करते हैं।

8. एलसीबी फर्टिलाइजर्स
इस फिल्म में कृषि और औद्योगिक कचरे को बायो-नैनो उर्वरक में परिवर्तित करने की प्रक्रिया दर्शाई गई है, जिससे मृदा स्वास्थ्य, किसानों की आय और संधारणीय कृषि में सुधार हो रहा है।

ये आठों फिल्में नेटफ्लिक्स इंडिया के यूट्यूब चैनल पर देखी जा सकती हैं ।

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी मनोरंजन जगत के कम संसाधन वाले सृजनकारों को सहायता देने का समर्पित प्रयास है। टेलीविजन और फिल्म उद्योगों में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच बनाने के लिए प्रतिबद्ध बाहरी संगठनों का समर्थन करने के साथ ही, यह कोष नेटफ्लिक्स के उन विशेष कार्यक्रमों को भी सहयोग देता है जो वैश्विक स्तर पर उभरती प्रतिभाओं की पहचान कर, उन्हें प्रशिक्षित करने और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए तैयार किए गए हैं।

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