नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 13 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप के कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में भारतीय नौसेना की ओर से आयोजित लगभग एक सप्ताह के संयुक्त सेवा बहु-विशेषज्ञता शिविर को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा, “सरकार देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ और द्वीपीय क्षेत्रों में रहने वालों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।” यह शिविर इन द्वीपों में पहली बार आयोजित किया गया था। उन्होंने इस पहल को समुद्री सुरक्षा से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण और मानवीय सहायता में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के तीनों सेवाओं के दल ने उन्नत निदान सुविधाएं और विशेषज्ञ देखभाल सुविधा सीधे लोगों के घर तक पहुंचाई है जिनमें नियोजित शल्य चिकित्सा और मोतियाबिंद के ऑपरेशन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि व्यापक रूप से जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सा सलाह, चिकित्सा हस्तक्षेप और दवाओं का निःशुल्क वितरण इन द्वीपों के समुदायों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ में योगदान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि “हम स्वस्थ भारत के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। हमने न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में भौतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया है बल्कि आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से लोगों के कल्याण का भी ध्यान रखा है।”
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने शिविर का औपचारिक उद्घाटन करते हुए इस पहल को तीन मायनों में अद्वितीय बताया – ‘तालमेल’, क्योंकि यह शिविर तीनों सेनाओं और स्थानीय प्रशासन के पेशेवरों के साथ मिलकर किया गया एक सच्चा संयुक्त प्रयास है; ‘दायरा’, क्योंकि इसमें हृदय रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा, गुर्दे की बीमारी, तंत्रिका विज्ञान, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, त्वचा रोग और अंतःस्रावी रोग जैसे विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी है और ‘व्यापकता’, क्योंकि इस शिविर के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सा जगत के पेशेवरों और सहायक कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह की संयुक्त पहल सेवाओं के बीच आपसी तालमेल और नागरिक-सैन्य सहयोग को मजबूत करती है और साथ ही नागरिकों के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
उद्घाटन समारोह के बाद, नौसेना प्रमुख ने मरीजों से बातचीत की और मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा के लाभार्थियों को चश्मे, आई ड्रॉप और दवाइयां सौंपीं। उद्घाटन समारोह में दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, प्रशासक के सलाहकार श्री साई बी दीपक के साथ-साथ सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय जनता के बीच से भी लोग उपस्थित थे।
रक्षा मंत्री की परिकल्पना के अनुसार, भारतीय नौसेना पांच द्वीपों – अमिनी, एंड्रोथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय – में बहु-विशेषज्ञता शिविर आयोजित कर रही है ताकि वहां के निवासियों को व्यापक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके तथा अधिकतम पहुंच और सुगमता सुनिश्चित की जा सके। जिन रोगियों को आवश्यकता है, उनके मोतियाबिंद की सर्जरी करने के लिए कवरत्ती में एक समर्पित नेत्र रोग टीम तैनात की गई है।
इस शिविर के अंतर्गत देशभर के विभिन्न प्रतिष्ठानों से सशस्त्र बलों के 29 चिकित्सा अधिकारी, दो नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात किए गए हैं। लक्षद्वीप में पहले से स्थापित सरकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है जिसमें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। इन सेवाओं में सहायता के लिए चिकित्सा उपकरण, भंडार और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है जिससे संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञों और विशिष्ट रोगों के विशेषज्ञों की देखभाल तक पहुंच संभव हो सके। अगत्ती और मिनिकॉय में ऑपरेशन और प्रक्रिया संबंधी आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए समर्पित शल्य चिकित्सा दलों को भी तैनात किया गया है।
इस शिविर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें केवल दो दिनों के भीतर लगभग 50 ऐसी शल्य चिकित्सा की गई जिससे लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकी। इसमें आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञों की ओर से द्वीप के निवासियों को विश्व स्तरीय नेत्र चिकित्सा देखभाल सुविधा प्रदान की जा रही है और आने वाले कुछ दिनों में इस तरह की और भी कई सर्जरी की जाएंगी।
बुजुर्गों को आंखों की रोशनी वापस मिली (कवरत्ती द्वीप)
अमिनी के स्थानीय निवासी 65 वर्षीय कुनी कोया मोतियाबिंद से पीड़ित थे जिसके कारण वे लगभग अंधे हो गए थे। उनकी सफल सर्जरी इस शिविर के मूल उद्देश्य को दर्शाती है – यह सुनिश्चित करना कि भारत के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश के निवासी कभी भी अंधेरे में न रह जाएं।
अगत्ती में महत्वपूर्ण सफलता (खालिद सी, 68)
कई वर्षों तक खालिद की दुनिया अपने पुराने स्वरूप की धुंधली परछाई मात्र रह गई थी। आज वह इस ऐतिहासिक मिशन का प्रतीक बन गया क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक का पहली बार अगत्ती की धरती पर प्रयोग किया गया। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे लगा जैसे समुद्र का कोहरा मेरी आत्मा में समा गया हो,” उसकी आँखें एक दशक में पहली बार साफ थीं। उसने कहा, “आज, नौसेना ने मुझे मेरे घर का नीला रंग लौटा दिया”।
इस शिविर में चिकित्सकीय उपचार के अतिरिक्त समग्र स्वास्थ्य पर भी विशेष बल दिया गया है जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि अच्छा स्वास्थ्य केवल रोगों से मुक्ति ही नहीं, बल्कि सभी के लिए संपूर्ण कल्याण और खुशहाली की गारंटी है। नागरिकों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी और पोषण संबंधी परामर्श दिए गए। भारत की पारंपरिक और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के अंतर्गत बाजरा के लाभों पर प्रकाश डालते हुए आहार संबंधी मार्गदर्शन, साथ ही योग और स्वास्थ्य संबंधी अभ्यास भी प्रदान किए गए ताकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकें।
यह पहल प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसके अंतर्गत देश के सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की समान पहुंच सुनिश्चित की जाती है। आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की भावना को दर्शाते हुए यह शिविर उपचारात्मक देखभाल को निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ कर देश के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ को रेखांकित करता
नई दिल्ली – नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 9 से 12 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय युवा महोत्सव (एनवाईएफ) 2026 का आयोजन किया गया। इसमें भारत के युवाओं की भावना, नवाचार और आकांक्षाओं का उत्सव मनाया गया। इस महोत्सव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पना के अनुरूप भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख शिक्षा और कौशल विकास अवसरों को प्रदर्शित करने के लिए एक जीवंत मंच के रूप में कार्य किया।
राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2026 का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय है, जो युवाओं को पुस्तकों और शिक्षण संसाधनों के एक समृद्ध डिजिटल भंडार तक पहुंच प्रदान कर रहा है। दीक्षा, वर्चुअल लैब्स और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) समाधानों के साथ मिलकर ऐसे गहन प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण अनुभवों का प्रदर्शन कर रही है जो वैचारिक समझ और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाते हैं।
पीएम ई-विद्या पहल को एकीकृत डिजिटल शिक्षा मंच के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है जो ऑनलाइन/ऑन-एयर, डिजिटल और प्रसारण मोड के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है। डिजिटल पहल जैसे कि ‘माई करियर एडवाइजर’ ऐप के माध्यम से करियर की तैयारी और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो युवाओं को करियर विकल्पों और रोजगार क्षमता की ओर मार्गदर्शन करता है।
यह महोत्सव उल्लास {यूएलएलएएस} (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने को समझना) के माध्यम से आजीवन सीखने पर भी जोर देता है और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से वयस्क शिक्षा को प्रोत्साहित करता है। ई-जादुई पिटारा के माध्यम से मूलभूत शिक्षा को मजबूत किया जा रहा है, जो मूलभूत स्तर पर युवा शिक्षार्थियों की देखभाल करने वालों के लिए आनंदमय, खेल-आधारित डिजिटल सामग्री प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ऑनलाइन विद्यालय स्वयंसेवी पहल विद्यांजलि को युवाओं, विद्यालय के पूर्व छात्रों, पेशेवरों, संस्थानों और समाज के लिए स्वयंसेवकों के रूप में सक्रिय रूप से भाग लेने और सरकारी स्कूलों में सीखने को बेहतर बनाने में योगदान देने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। विद्यांजलि पोर्टल स्वयंसेवकों को सरकारी स्कूलों से जुड़ने और सामाजिक भागीदारी, सीएसआर भागीदारी और मार्गदर्शन के माध्यम से स्कूली शिक्षा को मजबूत करने में अपने कौशल, ज्ञान और संसाधनों को साझा करने में सक्षम बनाता है।
इन उपक्रमों के माध्यम से एनवाईएफ 2026 युवाओं के लिए समावेशी, प्रौद्योगिकी संचालित और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सक्रिय रूप से मजबूत कर रहा है और एनईपी-2020 के लक्ष्यों को साकार करने में मदद कर रहा है।
नई दिल्ली – भारत और जर्मनी ने 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में, जर्मनी के संघीय गणराज्य के संघीय चांसलर महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के दौरान, दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर व आदान-प्रदान करके डाक, एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
हस्ताक्षर किए गए दस्तावेजों में शामिल हैं: (i) भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग और जर्मनी के संघीय गणराज्य के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा के संघीय मंत्रालय के बीच एक संयुक्त आशय घोषणा (जेडीओआई); और (ii) डाक विभाग और डॉयचे पोस्ट एजी, जो जर्मनी का नामित डाक संचालक है, के बीच एक आशय पत्र (एलओआई)।
संयुक्त आशय घोषणा पर भारत सरकार की ओर से सचिव (डाक) सुश्री वंदिता कौल और जर्मनी सरकार की ओर से भारत में जर्मनी के संघीय गणराज्य के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने हस्ताक्षर किए। आशय पत्र पर डाक विभाग की ओर से महानिदेशक डाक सेवाएं श्री जितेंद्र गुप्ता और डॉयचे पोस्ट की ओर से डॉयचे पोस्ट एजी / डीएचएल ग्रुप के सीईओ श्री टोबियास मेयर ने हस्ताक्षर किए।
इस सहयोग में डाक, एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं को कवर करने वाली एक व्यवस्थित साझेदारी की कल्पना की गई है, जिसमें सीमा-पार ई-कॉमर्स और निर्धारित समय पर अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी पर खास ध्यान दिया जाएगा। यह संयुक्त उत्पाद एवं सेवाओं को विकसित करने, नेटवर्क कनेक्टिविटी एवं अंतिम-छोर तक सहयोग को मजबूत करने और पत्र एवं पार्सल के लिए द्विपक्षीय दर व्यवस्था के निर्धारण हेतु एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है। यह साझेदारी डिजिटलीकरण, संचालन संबंधी दक्षता, स्थिरता और हरित लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर भी जोर देती है।
इस सहयोग का एक मुख्य अपेक्षित परिणाम संयुक्त प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस उत्पाद का शुभारंभ है, जिसमें एक निश्चित समय आधारित अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शामिल है। यह सेवा इंडिया पोस्ट की बड़े पैमाने पर अंतिम छोर तक पहुंच और डॉयचे पोस्ट-डीएचएल समूह के वैश्विक एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का फायदा उठाएगी। उम्मीद है कि यह समन्वित तरीका भारत से भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय खेपों के लिए ट्रांजिट टाइम, विश्वसनीयता और एक छोर से दूसरे छोर तक दृश्यता में उल्लेखनीय सुधार करेगा।
यह पहल भारत सरकार के निर्यात को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप है। खासकर एमएसएमई, स्टार्टअप, कारीगरों एवं छोटे निर्माताओं को भरोसेमंद, किफायती एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करके, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाकर और भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करके, इस सहयोग से अधिक निर्यात, गुणवत्तापूर्ण सेवा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारतीय व्यवसायों की अधिक भागीदारी होने की उम्मीद है।
इन समझौतों पर हस्ताक्षर भारत और जर्मनी की आर्थिक सहयोग को घनिष्ठ बनाने, डाक एवं और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थायी विकास का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं,
नई दिल्ली – 9 जनवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुआ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी 2026) का दूसरा संस्करण आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर राष्ट्रीय युवा दिवस पर खत्म हुआ। चार दिन के इस कार्यक्रम का आखिरी हिस्सा बहुत ज्यादा ऊर्जा और जोश भरे माहौल में हुआ, जब युवा लीडर्स ने डायलॉग के बहुप्रतीक्षित भाग का अनुभव किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, युवाओं से बातचीत की और सीधे उनसे जुड़कर विकसित भारत बनाने के लिए उनके विचार और नजरिए सुने।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया। इस मौके पर श्री मोदी ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तब आज के कई युवा नागरिक पैदा भी नहीं हुए थे, और जब उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभाला, तब उनमें से ज्यादातर बच्चे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना समय बीतने के बावजूद, युवा पीढ़ी पर उनका भरोसा हमेशा बना रहा है और कभी कम नहीं हुआ। श्री मोदी ने कहा, “मैंने हमेशा आपकी काबिलियत, आपकी प्रतिभा, आपकी ऊर्जा से ही ऊर्जा ली है। और, आज देखिए, आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर संभाल रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2047 तक का समय, जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, देश और उसके युवाओं दोनों के लिए एक निर्णायक दौर है। उन्होंने कहा कि युवा भारतीयों की ताकत और काबिलियत भारत की ताकत को आकार देगी और उनकी सफलता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के प्रतिभागियों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के विजन को हासिल करने में युवा नेतृत्व की अहम भूमिका पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर हो रहा है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए, हम हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर, विकसित भारत युवा नेता संवाद के लिए 12 जनवरी का दिन चुना गया है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हम सभी के लिए एक महान मार्गदर्शक है।”
विकसित भारत युवा नेता संवाद की तेजी से हो रही ग्रोथ पर संतोष जताते हुए, श्री मोदी ने इसे एक शक्तिशाली मंच बताया जो भारत के विकास एजेंडा को आकार देने में युवाओं की सीधी भागीदारी को संभव बनाता है। श्री मोदी ने कहा, “इस पहल से करोड़ों युवाओं का जुड़ना, 5 मिलियन से ज्यादा पंजीकरण, 3 मिलियन से ज्यादा युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, और देश के विकास के लिए अपने विचार साझा करना, युवा शक्ति की इतनी बड़े पैमाने पर भागीदारी अभूतपूर्व है।”
इनपुट की गुणवत्ता की तारीफ करते हुए, प्रधानमंत्री ने खास तौर पर महिला-नेतृत्व वाले विकास और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे मुख्य विषयों पर पेश किए गए विचारों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान दिए गए प्रस्तुतीकरण का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि वे एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए भारत की अमृत पीढ़ी के मजबूत संकल्प को दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने भारत की जेन जेड की रचनात्मकता और नवाचार की भावना पर भी जोर दिया और इस बातचीत को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए सभी युवा प्रतिभागियों और मेरा युवा भारत संगठन के सदस्यों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने भारत की अपनी विरासत को महत्व देते हुए वैश्विक ज्ञान के प्रति खुले रहने के महत्व पर जोर दिया, और वैदिक वाक्य “आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का हवाला दिया, जिसका मतलब है कि शुभ, फायदेमंद और बेहतरीन विचार सभी दिशाओं से हमारे पास आएं। श्री मोदी ने कहा, “आपको दुनिया भर की सबसे अच्छी प्रथाओं से सीखना चाहिए, लेकिन अपनी विरासत और विचारों को कम आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी न होने दें।”
श्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद का जिक्र किया, जिन्होंने वैश्विक विचारों को अपनाया लेकिन भारत के बारे में गलतफहमियों को चुनौती दी, और एक बेहतर राष्ट्र के लिए एक विजन को प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं को जोश के साथ आगे बढ़ने, फिटनेस बनाए रखने और खुशी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, और उनकी क्षमता पर अटूट विश्वास जताया। प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे आप सभी पर, आपकी काबिलियत और ऊर्जा पर पूरा भरोसा है। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं एक बार फिर आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।”
प्रधानमंत्री ने 10 थीम पर प्रतिभागियों द्वारा लिखे गए सबसे अच्छे निबंधों का एक संग्रह भी जारी किया। इन थीम में प्रौद्योगिकी, ,स्थायित्व, महिला सशक्तिकरण, विनिर्माण और कृषि जैसे अलग-अलग क्षेत्र शामिल हैं।
आखिरी दिन की शुरुआत विकसित भारत ट्रैक के फाइनलिस्ट के प्रस्तुतीकरण से हुई, जिन्होंने 10 थीम वाले एरिया में अपने आइडिया पेश किए। हर फाइनलिस्ट ने जाने-माने केंद्रीय मंत्रियों के सामने नवाचार और समाधान आधारित प्रस्ताव दिखाए, जो भारत के युवाओं की सोच की गहराई, लीडरशिप की क्षमता और राष्ट्रीय विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। थीम इस प्रकार हैं:
ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए लोकतंत्र और सरकार में युवा
इस सत्र में “लोकतंत्र और सरकार के लिए युवा” विषय पर युवाओं द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिसमें लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यावहारिक शासन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। स्थानीय विकास के लिए ग्राम कार्य योजनाएं, जिला प्रशासन के साथ काम करने वाली समस्या-समाधान इकाइयां, शासन में युवाओं की भागीदारी को गहरा करने के लिए नीति और करियर लैब, और सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षित युवाओं को शामिल करने के लिए फेलोशिप मॉडल आदि के संबंध में दी गई प्रस्तुतियों में कार्रवाई योग्य पहलों की रूपरेखा बताई गई। इस सत्र में केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; युवा कार्य और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे; और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री जयंत चौधरी शामिल हुए, जिन्होंने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की और युवाओं द्वारा संचालित शासन विचारों की सराहना की।
ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व वाला विकास: विकसित भारत की कुंजी
युवा प्रतिनिधियों ने महिला नेतृत्व वाले विकास के लिए एक रोडमैप पेश किया, जिसमें भारत की ग्रोथ के ड्राइवर के तौर पर महिलाओं पर फोकस करने की बात कही गई। प्रस्तुतीकरण में “आरआईएसई (RISE)” फ्रेमवर्क – रिप्रेजेंटेशन और अधिकार, समावेशन और नवाचार, कौशल और आत्मनिर्भरता, और आर्थिक सशक्तिकरण को 2047 तक भारत की यात्रा के लिए एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में बताया गया।
संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री श्री किरेन रिजिजू और कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी वाले मंत्रिस्तरीय पैनल ने युवाओं के विचारों की सराहना की और महिलाओं को निर्णय लेने वाली और उद्यमी बनाने के सरकार के विजन के साथ उनके विचारों के तालमेल की पुष्टि की।
युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने महिलाओं की फिटनेस और उद्यमिता पर जोर दिया, और अस्मिता लीग जैसी पहलों के साथ इसकी तुलना की।
ट्रैक 3 – फिट भारत हिट भारत
ट्रैक 3 में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ आबादी ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव है। चर्चाओं में पोषण, खेल, शिक्षा और टेक्नोलॉजी को मिलाकर एक इंटीग्रेटेड नेशनल वेलनेस फ्रेमवर्क की जरूरत पर जोर दिया गया, जिसमें डेटा-आधारित सिस्टम और कम्युनिटी के नेतृत्व वाली पहलों पर ध्यान दिया गया। इस सेशन का मूल्यांकन केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और श्री जयंत चौधरी ने किया। “प्ले इन इंडिया, प्ले फॉर इंडिया,” एग्रो ओलंपिक्स और न्यूट्री-स्मार्ट कैंटीन मिशन जैसे नवीन प्रस्ताव पेश किए गए। यह ट्रैक इस संदेश के साथ खत्म हुआ, “सेहत मजबूत, भारत मजबूत।”
ट्रैक 4 – भारत को दुनिया की स्टार्टअप राजधानी बनाना
‘दुनिया की स्टार्टअप राजधानी’ ट्रैक में ऐसे प्रस्ताव शामिल थे जिनमें फेलियर को नॉर्मल बनाने और पहले-फेल होने वाले फाउंडर्स का नेटवर्क बनाने के लिए “एक दिन में एग्जिट और एक हफ्ते में रीस्टार्ट” फ्रेमवर्क, खास स्टार्टअप बैंकों की स्थापना, एक स्टार्टअप हेल्थ इंडेक्स, और हर सरकारी विभाग में डेडिकेटेड स्टार्टअप सेल शामिल थे। प्रतिभागियों ने प्री-लॉन्च परीक्षण के लिए आइडिया लैब स्थापित करने, नागरिकों को माइक्रो-इन्वेस्टर के रूप में सक्षम बनाने, प्रकृति से प्रेरित स्टार्टअप और बायोफाउंड्री को बढ़ावा देने और खेलो इंडिया मॉडल की तर्ज पर जमीनी स्तर पर स्टार्टअप चैलेंज आयोजित करने का भी सुझाव दिया। यूपीआई जैसे ग्लोबल-टू-लोकल स्केलिंग मॉडल को बेंचमार्क के तौर पर बताया गया।
प्रस्तुतियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल और श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “हमारे स्टार्टअप और इनोवेशन भारतीय मॉडल पर आधारित होने चाहिए। हमें पश्चिम के मॉडल को आँख बंद करके कॉपी नहीं करना चाहिए। इनोवेशन को भारत की स्थानीय और देसी ज़रूरतों के हिसाब से विकसित किया जाना चाहिए। मोटे तौर पर, इनोवेशन दो तरह के होते हैं—एक जो दुनिया की ज़रूरतों को पूरा करता है, और दूसरा जो भारत की अपनी जरूरतों को पूरा करता है। दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नींव भारतीय होनी चाहिए।”
ट्रैक 5 – भारत की सॉफ्ट पावर: विकसित भारत के लिए सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव
ट्रैक 5, भारत की सॉफ्ट पावर: विकसित भारत के लिए सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव के तहत, सत्र में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल और श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के सचिव श्री एस. कृष्णन और युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री एन. के. मिश्रा मौजूद थे। प्रस्तुतकर्ताओं ने संस्कृति, प्रौद्योगिकी और सहयोग को सामंजस्यपूर्ण ढंग से एकीकृत करके भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के लिए एक दूरदर्शी, युवा-नेतृत्व वाली दृष्टि की रूपरेखा प्रस्तुत की।
भारत की सॉफ्ट पावर के सार पर बोलते हुए, डॉ. मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि ‘सेवा’ भारत के संस्कारों में गहराई से बसी हुई है और यह मुनाफे से चलने वाली कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के मानवीय प्रयासों को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि सेवा भारतीय सभ्यता की एक नैतिक और सांस्कृतिक ज़िम्मेदारी को दिखाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सेवा संस्कारों से निर्देशित होती है, तो यह एक जीवित परंपरा बन जाती है जो करुणा, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण को बढ़ावा देती है।
ट्रैक 6 – परंपरा के साथ नवाचार: एक आधुनिक भारत का निर्माण
इस सत्र में स्थायी और समावेशी विकास के लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के भारत के विज़न पर जोर दिया गया। चर्चा एआई-सक्षम शहरी स्वास्थ्य और जल इंटेलिजेंस सिस्टम, ग्रीन बिल्डिंग, जैव विविधता-एकीकृत बुनियादी ढाँचे, प्रकृति-आधारित समाधान, और समुदाय-आधारित विकास के लिए स्थानीय स्तर पर स्थिरता-केंद्रित पाठ्यक्रम और मज़बूत सहकारी समितियों की जरूरत पर केंद्रित थी। इस सत्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव; कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान; और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल शामिल हुए।
ट्रैक 7 – आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड
आत्मनिर्भर भारत ट्रैक के तहत, प्रतिभागियों ने रक्षा विनिर्माण और आर्थिक विकास में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला, और मेक इन इंडिया 3.0, पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत टियर-2 और टियर-3 शहरों में विनिर्माण केंद्रों का विस्तार, नीतिगत सुधारों के माध्यम से पूंजी की सुविधा, और स्वदेशी उत्पादों के वैश्विक प्रचार जैसे विचारों का प्रस्ताव दिया। प्रस्तुतियों में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को स्थानीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस सत्र में डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल और श्रम और रोजगार मंत्री; श्रीमती रक्षा खडसे, युवा मामले और खेल राज्य मंत्री; श्री एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) ने भाग लिया, जिन्होंने आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के लिए युवाओं के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण की सराहना की।
ट्रैक 8 – स्मार्ट और टिकाऊ खेती के ज़रिए उत्पादकता बढ़ाना
इस सत्र में स्मार्ट और टिकाऊ खेती के जरिए उत्पादकता बढ़ाने पर युवाओं के नेतृत्व वाले नवीन समाधान दिखाए गए। युवा इनोवेटर्स ने केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भविष्य की सोच वाले आइडिया पेश किए, जिन्होंने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और क्षमता की तारीफ की और 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया। नौकरी खोजने वालों से नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, मंत्री ने युवा नेताओं से एग्री-स्टार्टअप्स की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया और जमीनी स्तर पर नवाचार और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार सरकारी समर्थन का आश्वासन दिया।
ट्रैक 9 – एक टिकाऊ और हरित विकसित भारत का निर्माण
प्रतिभागियों ने टिकाऊ विकास में भारत की प्रगति का आकलन किया और एक हरित और लचीले भविष्य की दिशा में रास्ते बताए। चर्चाओं में भारत की नवीकरणीय और सौर ऊर्जा के एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक के रूप में स्थिति, साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहल, वन्यजीव संरक्षण में नेतृत्व और रामसर स्थलों के विस्तार पर प्रकाश डाला गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान-केंद्रित सुधारों और वैज्ञानिकों और किसानों के बीच मजबूत सहयोग के महत्व पर जोर दिया। युवा प्रतिनिधियों ने उभरती हुई ग्रीन-कॉलर नौकरियों, एआई-सक्षम शहरी जल और स्वास्थ्य प्रणालियों, हरित बुनियादी ढांचे, प्रकृति-आधारित समाधानों और सहकारी समितियों के माध्यम से समुदाय-नेतृत्व वाली स्थिरता पर जोर दिया।
ट्रैक 10 – विकसित भारत के लिए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाना
इस ट्रैक में रोजगार पाने की क्षमता और युवाओं के लिए तैयार कौशल व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। इस सत्र में केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और श्री जयंत चौधरी शामिल हुए। इसमें नौकरी से जुड़े प्रशिक्षण, नेशनल स्किल पासपोर्ट, गिग-टू-जॉब ट्रांज़िशन के रास्ते, वन नेशन-वन स्किल आइडेंटिटी, और महिलाओं के लिए विलेज स्किल बैंक और वर्क नियर होम क्लस्टर जैसी कम्युनिटी-आधारित पहलों पर युवाओं के सुझावों पर चर्चा हुई। यह ट्रैक विकसित भारत के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए एक समावेशी, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने के लिए युवाओं की मजबूत सोच को दिखाता है।
विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 का दूसरा संस्करण एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के तौर पर खत्म हुआ, जिसने राष्ट्रीय विकास के जरूरी क्षेत्रों में युवाओं की उम्मीदों को काम करने लायक नीतिगत आइडिया में बदला। इस डायलॉग ने गवर्नेंस और नीति बनाने में युवाओं की भागीदारी को संस्थागत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्थता को फिर से पक्का किया, साथ ही भारत की युवा प्रतिभाओं की गहराई, विविधता और गतिशीलता को भी दिखाया। राष्ट्रीय युवा दिवस पर इसका समापन स्वामी विवेकानंद के आदर्शों की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है और इस विश्वास को मज़बूत करता है कि सशक्त, प्रेरित और जुड़े हुए युवा भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की यात्रा में प्रेरक शक्ति होंगे।
नई दिल्ली – नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार पर अंतर-मंत्रालयी संवाद को संबोधित करते हुए, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु अनुकूलता और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को कृषि एवं खाद्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया।
समागम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब भारत वैश्विक मंचों पर बोलता है, तो वह मानवता का लगभग एक–छठा हिस्सा और दुनिया के कुछ सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक का भी। भारत की कृषि–प्रधान भावना पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि अन्नदाता के रूप में पूजनीय किसान वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के माध्यम से भोजन और स्वच्छ ऊर्जा दोनों के प्रदाता, अर्थात् ऊर्जादाता बनते जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा पहुंच, जलवायु कार्रवाई, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को एक साथ प्रदान करने की बहुआयामी वैश्विक चुनौती का एक एकीकृत समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण महत्वाकांक्षा के साथ कार्यान्वयन पर आधारित है, जो मजबूत नीतियों, विकेंद्रीकृत कार्रवाई, समावेशी डिजाइन और मजबूत अंतर–मंत्रालयी समन्वय द्वारा समर्थित है।प्रमुख पहलों का विवरण देते हुए, श्री जोशी ने 2019 में शुरू की गई पीएम–कुसुम योजना का उल्लेख किया, जो स्टैंडअलोन सौर पंप, ग्रिड–कनेक्टेड पंपों के सौरकरण और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से कृषि में सौर ऊर्जा का एकीकरण करती है।
देश में 2025 के अंत तक, लगभग 10 लाख स्टैंडअलोन सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 11 लाख से अधिक ग्रिड–कनेक्टेड पंप सौर ऊर्जा से संचालित किए गए हैं, जो 10,200 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना ने डीजल पर निर्भरता कम की है, सिंचाई लागतों को स्थिर किया है, उत्सर्जन घटाया है और पुनरावर्ती सब्सिडी से दीर्घकालिक संपत्ति–आधारित निवेश की ओर वित्तीय समर्थन को स्थानांतरित किया है।
निजी निवेश को अनलॉक करने पर, श्री जोशी ने कहा कि नीतिगत स्थिरता और राष्ट्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि मांग के समूहन ने पैमाने, बैंक योग्यता और व्यावसायिक व्यवहार्यता में सुधार किया है। किसानों द्वारा अधिशेष सौर ऊर्जा की बिक्री, कृषि अवशेषों को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम, और छत पर सौर ऊर्जा के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसे प्रयासों ने आय के नए स्रोत बनाए हैं, आयात कम किए हैं और ग्रामीण ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।
भविष्य की योजनाओं पर नजर डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत पीएम–कुसुम 2.0 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें विकेंद्रीकृत सौर समाधानों और कृषि–फोटोवोल्टिक्स (agri-PV) पर नया जोर होगा, जो कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ संचालित करने की अनुमति देगा।
उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से डिजाइन किया गया एग्री पीवी (agri-PV ) सिस्टम फसल उपज को बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं, सूक्ष्म जलवायु को संतुलित कर सकते हैं, स्वच्छ बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और किसानों की आय को विविधीकृत कर सकते हैं।
अपने संबोधन के समापन पर, श्री जोशी ने आपसी साझेदारियों को गहरा करने और समाधानों को विस्तार देने के लिए भारत की तत्परता की पुनः पुष्टि की, यह नोट करते हुए कि प्रचुर सूर्य प्रकाश और 14.6 करोड़ से अधिक छोटे जोतों के साथ, देश नवीकरणीय ऊर्जा–सक्षम कृषि–खाद्य प्रणालियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए एक अच्छी स्थिति में है।
अंतर्राष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं सभा के साइडलाइन्स पर, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग की महानिदेशक सुश्री एलिन रोस के साथ एक भविष्योन्मुखी बैठक की। चर्चाओं का मुख्य फोकस भारत में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के हिस्से के रूप में जियोथर्मल ऊर्जा तैनाती को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।
अंतरराष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) सभा के साइडलाइन्स पर आयोजित एक अन्य प्रमुख द्विपक्षीय बैठक में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने यूरोपीय आयोग में ऊर्जा की महानिदेशक सुश्री डिट्टे जूल जोर्गेंसन के साथ एक रचनात्मक बैठक की। चर्चाओं में भारत–यूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी के निरंतर गहन होने की समीक्षा की गई, जिसमें जमीन पर ठोस परिणाम देने पर साझा जोर दिया गया।
श्री प्रह्लाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात के निवेश मंत्री माननीय मोहम्मद हसन अल–सुवैदी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ अवसंरचना में भारत–यूएई सहयोग को मजबूत करने पर भी एक सकारात्मक चर्चा की। इस संवाद ने द्विपक्षीय निवेश साझेदारियों में मजबूत गति को पुनः परिभाषित किया, जो भारत के गैर–जीवाश्म ईंधन क्षमता के तेजी से विस्तार, विस्तारित घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तथा दीर्घकालिक निवेशों के लिए अनुकूल स्थिर एवं अनुमानित नीति वातावरण पर आधारित है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अबू धाबी के लुव्र संग्रहालय का भी दौरा किया, जिसे उन्होंने सांस्कृतिक संवाद और साझा मानवीय विरासत का शक्तिशाली प्रतीक बताया। केंद्रीय मंत्री ने संग्रहालय में क्यूरेटेड कलाकृतियों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदर्शित भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की गहन सभ्यतागत विरासत को प्रतिबिंबित करता है।
नई दिल्ली – भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) की वैश्विक पहचान और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लगातार प्रयासों के अंतर्गत, शिक्षा मंत्रालय ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग पर एचईआई के कुलपति और नोडल अधिकारियों के लिए आधे दिवस की ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की। यह वर्कशॉप क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स की ओर से आयोजित की गई और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुसार, वैश्विक रैंकिंग पैमानों, बेहतर अभ्यास और रणनीतिक तरीकों के बारे में संस्थानों की समझ को बेहतर बनाना था।
इस वर्कशॉप में देश भर के केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों, जिनमें स्वायत्त संस्थान भी शामिल हैं, ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। लगभग 400 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जबकि 60 से अधिक प्रतिभागियों ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा), ने भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए वैश्विक बेंचमार्किंग और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस पहल की सराहना की और उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) को अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए वैश्विक रैंकिंग फ्रेमवर्क के साथ सक्रिय तौर पर जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री आर्मस्ट्रांग पामे ने मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीयकरण पहलों का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें एसपीएआरसी, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अतिरिक्त सीटें और स्टडी इन इंडिया (एसआईआई) पोर्टल शामिल हैं। उन्होंने बेहतर वैश्विक दृश्यता की जरूरत पर प्रकाश डाला, यह देखते हुए कि अंतर्राष्ट्रीयकरण से संबंधित संकेतक वैश्विक रैंकिंग परिणामों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय छात्र जुड़ाव, संकाय विकास कार्यक्रमों, दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग और बेहतर संस्थागत आउटरीच पर ध्यान केंद्रित करने को प्रोत्साहित किया।
वर्कशॉप दो चरणों में क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्विन फर्नांडिस की ओर से आयोजित की गई थी। पहले चरण में क्यूएस रैंकिंग कार्यप्रणाली, पात्रता मापदंड, और विश्व, विषय, क्षेत्रीय, व्यापार और संपोषण रैंकिंग के माध्यम से संस्थान की विजिबिलिटी के लिए कई प्रवेश बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, साथ ही क्यूएस हब के माध्यम से डेटा जमा करने पर गाइडेंस भी दी गई।
दूसरे चरण में अनुसंधान के असर और प्रतिष्ठा संकेतकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें क्यूएस की ओर से सालाना आधार पर किए जाने वाले अकादमिक और नियोक्ता प्रतिष्ठा सर्वेक्षण और अनुसंधान विजिबिलिटी और साइटेशन प्रदर्शन को बेहतर बनाने की रणनीति शामिल थीं।
भारतीय एचईआई ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अपनी मौजूदगी को काफी मजबूत किया है, 2026 संस्करण में रिकॉर्ड 54 संस्थानों को रैंक मिली है, जबकि 2014 में सिर्फ 12 संस्थानों को रैंक मिली थी। यह लगातार ऊपर की ओर जाता हुआ रास्ता भारत की बढ़ती वैश्विक अकादमिक पहचान और प्रदर्शन को दिखाता है।
हालांकि, ये उपलब्धियां ध्यान देने लायक हैं, लेकिन कई पहल करने की जरूरत है, खासकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर (अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी और संकाय), प्रति संकाय अनुसंधान साइटेशन, और संकाय विद्यार्थी अनुपात जैसे क्षेत्रों में, जिनका रैंकिंग कार्यप्रणाली में काफी महत्व है।
इसलिए, इस तरह की वर्कशॉप संस्थागत क्षमता को मजबूत करके और वैश्विक अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में भारत के सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाकर इन कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया।
श्री अमित शाह ने X पर किए गए एक पोस्ट में कहा, “राजमाता जीजाबाई जी ने छत्रपति शिवाजी महाराज जी में बाल्यकाल से ही साहस, स्वाभिमान और स्वसंस्कृति की रक्षा के संस्कार भरे। उन्होंने शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया। राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन।”
नई दिल्ली,13.01.2026 – युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 का तीसरा दिन भारत मंडपम में बड़े उत्साह और जोश के साथ प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का प्रेरक संबोधन, इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ संवादात्मक सत्र, और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने उन्हें पूरे देश के लगभग 50 लाख युवाओं में से चुने जाने पर बधाई दी और बताया कि उन्हें उनके संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपालों द्वारा भेजा गया है, जो राज्यों और राष्ट्र द्वारा उनमें जताए गए विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि वी.बी.वाय.एल.डी. के माध्यम से युवा सीधे भारत सरकार से जुड़े हैं और जल्द ही वे अपने विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संवाद बस इस कार्यक्रम के साथ खत्म नहीं हो जाता, बल्कि विकसित भारत के विज़न को वास्तविकता में बदलने की यात्रा अब शुरू होती है।
केंद्रीय मंत्री ने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे माई (एम.वाय.) भारत प्लेटफॉर्म के माध्यम से सक्रिय बने रहें और अपने राज्यों में लौटने के बाद जिला युवा अधिकारियों के साथ जुड़े रहें। उन्हें नशा मुक्त युवा जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करते हुए, उन्होंने नशे को एक गंभीर चुनौती बताया और विश्वविद्यालयों तथा स्कूलों में युवा कनेक्ट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थायी पहुँच बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को युवा भागीदारी जुटाने, विकसित भारत पर प्रस्तुतियों को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचाने, और एक करोड़ युवाओं को माई भारत प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। युवाओं में अपने विश्वास को दोहराते हुए डॉ. मंडाविया ने कहा कि वी.बी.वाय.एल.डी. युवा नेताओं को अपने विचार और क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर देता है। उन्होंने सफलता की नींव के रूप में अनुशासन और प्रतिबद्धता पर जोर दिया, यह विश्वास व्यक्त करते हुए कि सामूहिक प्रयास विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे।
युवा प्रतिनिधियों का ध्यान वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने की ओर आकर्षित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने उन्हें इस पर संसद में हुई चर्चाओं से स्वयं को परिचित रखने का आग्रह किया, जिससे वे इस संवाद में अधिक जागरूकता के साथ भाग ले सकें।
दिन की शुरुआत इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों और माई (एम.वाय.) भारत स्वयंसेवकों के साथ प्रेरक संवाद के साथ हुई, जिसमें प्रतिष्ठित अंतरिक्ष यात्री नामांकित ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर ने देश भर से आए युवा नेताओं के साथ बातचीत की। दोनों अधिकारी भारतीय वायु सेना के दक्ष पायलट हैं, जिन्हें भारत के प्रमुख गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उनके सफर, पेशेवर दृष्टिकोण और राष्ट्र के भविष्य के लिए उनके विज़न से प्रेरणा लेने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया।
एक अत्यंत प्रेरक संवाद में, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने अंतरिक्ष उड़ान के अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने माइक्रोग्रेविटी की अद्भुत प्रकृति का वर्णन किया, जहाँ पारंपरिक दिशा की धारणा अस्तित्वहीन हो जाती है। पृथ्वी की कक्षा से लिए गए भारत के अद्भुत चित्र प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने कहा कि उनका यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सपने सच होते हैं। सफलता की कुंजी के रूप में लचीलेपन पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि असली मंत्र विफलताओं से सीख लेना, मजबूत होकर वापसी करना और संतोष से कभी संतुष्ट न होना है। भारतीय युवाओं का वर्णन “निर्भीक और प्रभावशाली” जैसे शब्दों में करते हुए, उन्होंने युवा नेताओं से दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहने का आग्रह किया।
असीमित महत्वाकांक्षा पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा, “उड़ान की कभी कोई सीमा नहीं थी – न मेरे लिए, न आपके लिए, और न ही भारत के लिए।” उन्होंने युवाओं को साहसिक सपने देखने और राष्ट्र के भविष्य में योगदान देने में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
एक माई भारत स्वयंसेवक द्वारा संचालित किए गए संवादात्मक सत्र के दौरान, ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा के बढ़ते वैश्विक महत्व को उजागर किया और कहा कि दुनिया अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत को वैश्विक दक्षिण की प्रतिनिधि आवाज़ के रूप में देखती है। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय परिवार और मित्रों के अडिग समर्थन और भगवद गीता से प्राप्त प्ररेणा को दिया। अपने वैश्विक अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत इसके अनूठे मूल्यों और स्वाभाविक क्षमताओं में निहित है, और युवाओं को जीवन भर सीखते रहने और “विद्यार्थी अवस्था” में बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस दिन विकसित भारत के रंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जो युवाओं की रचनात्मक और कलात्मक अभिव्यक्तियों का उत्सव था। इस कार्यक्रम में बेहतरीन संगीत, नृत्य और कविता प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की गईं। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और योगदानों को मान्यता देते हुए और उत्कृष्टता तथा युवा-नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने विजेताओं को सम्मानित किया।
प्रतिभागियों ने दिन का समापन राज्य की टीमों के रूप में पुनः समूह बनाकर और केंद्रीय मंत्रियों तथा सांसदों के निवास स्थलों पर रात्रि भोजन के कार्यक्रम में भाग लेकर किया, जिससे साझा चिंतन और राष्ट्र सेवा के प्रति वचनबद्धता के माहौल में सार्थक संवाद, दिशा-निर्देश और अनौपचारिक मार्गदर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।
विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 का अंतिम दिन, जो संयोग से स्वामी विवेकानंद जयंती की स्मृति के रूप में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय युवा दिवस के साथ ही है, इस चार दिवसीय युवा महोत्सव को सम्पन्न करेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति कार्यक्रम के राष्ट्रीय महत्व और युवाओं के नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करेगी। एक भव्य सर्व-सत्रीय कार्यक्रम, जिसमें टाउन हॉल शैली की बातचीत शामिल होगी, प्रधानमंत्री और युवा नेताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद की सुविधा प्रदान करेगा, जिसमें वे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले विषयों के अनुरूप दस उच्च-प्रभाव वाले आइडिया प्रस्तुत करेंगे। समापन कार्यक्रम से यह अपेक्षा है कि युवा सक्रिय रूप से भारत को विकसित भारत@2047 की ओर ले जाने में योगदान करेंगे, और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में युवा नेताओं की केंद्रीय भूमिका को पुष्ट करेंगे।
रांची प्रेस क्लब में विशिष्ट व्यक्तित्वों के साथ संवाद की शृंखला की हुई शुरुआत
रांची, 12.01.2026 । हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने सोमवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाद कार्यक्रम में “राजनीति और मीडिया” विषय पर पत्रकारों से विचार साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीति और मीडिया के बीच परस्पर पूरक संबंध है। दोनों की भूमिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि राजनीति शासन की दिशा तय करती है, जबकि मीडिया शासन के निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है। राजनीति की हर गतिविधि पर मीडिया की पैनी निगाह रहती है और जब राजनीति अपनी दिशा से भटकती है, तब मीडिया उस पर अंकुश लगाने की भूमिका निभाती है। यही कारण है कि मीडिया को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है।
उन्होंने कहा कि मीडिया की आलोचना तथ्यपरक और संतुलित होनी चाहिए। यदि तथ्य मजबूत हों तो उन्हें प्रकाशित-प्रसारित करने से डरना नहीं चाहिए, लेकिन जबरन मसाला डालकर किसी के चरित्र पर हमला करना उचित नहीं है। कभी-कभी पत्रकारिता में त्रुटियां हो जाती हैं, ऐसे में उन्हें स्वीकार कर आत्ममंथन करना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजनीति की तरह मीडिया भी विचारधाराओं में बंटती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता अब मूलतः नौकरी बनकर रह गई है। पत्रकारों पर खबरों के साथ-साथ विज्ञापनों का दबाव रहता है, जिसके कारण उन्हें राजनेताओं और नौकरशाही से संबंध बनाए रखने की मजबूरी होती है। इसका सीधा असर खबरों की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी निजी विचारधारा से बड़ा राष्ट्र और समाज है, इस तथ्य को सदैव ध्यान में रखना चाहिए। पारदर्शिता और परस्पर संवाद से ही लोकतंत्र और समाज का सुदृढ़ निर्माण संभव है।
अध्यक्षीय उद्गार में वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि बाजारवाद के बढ़ते दबाव के कारण मीडिया का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है, जिससे पत्रकारिता की आत्मा को नुकसान पहुंच रहा है।
विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने भारत में ढाई सौ वर्षों के पत्रकारिता इतिहास और उसकी वर्तमान स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि की जीवन यात्रा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान का भी परिचय दिया।
रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने संवाद शृंखला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीति, प्रशासन, समाज और मीडिया से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक, निष्पक्ष और वैचारिक विमर्श को बढ़ावा देना है, ताकि पत्रकारों और समाज दोनों को व्यापक दृष्टि और नई समझ मिल सके।
स्वागत भाषण में सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि रांची प्रेस क्लब पत्रकारों के बौद्धिक विकास, पेशेवर मूल्यों के संरक्षण और लोकतांत्रिक संवाद को सशक्त करने के लिए ऐसे विचारोत्तेजक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करता रहेगा। धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय ने किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा, डॉ. रामाज्ञा तिवारी, सुमन श्रीवास्तव, ओमरंजन मालवीय, राजेश कुमार सिन्हा, विनय चतुर्वेदी, क्लब के संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य, कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, कार्यकारिणी सदस्य राजन बॉबी, संतोष कुमार सिन्हा, अशोक गोप, संजय सुमन, प्रतिमा कुमारी, निर्भय कुमार, चंदन वर्मा, अमित कुमार, विजय गोप, सौरभ शुक्ला, आनंद मोहन, भीष्म सिंह, प्रशांत शरण, राजीव मिश्र, अखिलेश सिंह सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बहुआयामी व्यक्तित्व, विचारधारा और राजनीतिक जीवन को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री विजय त्रिवेदी की नवीन पुस्तक का आज औपचारिक विमोचन किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए पुस्तक को उनके जीवन और कार्यों का एक प्रेरक दस्तावेज बताया
समारोह में लेखक विजय त्रिवेदी के लेखन की सराहना करते हुए कहा गया यह पुस्तक नई पीढ़ी को अटल जी के विचारों, मूल्यों और नेतृत्व से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और कार्यों को 12 अध्यायों में रोचक, तथ्यपरक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन से लेकर एक स्वयंसेवक से राष्ट्रीय नेता बनने की यात्रा, कारगिल युद्ध, परमाणु परीक्षण, आर्थिक उदारीकरण, नई टेलीकॉम नीति में उनकी भूमिका, आपातकाल का दौर, पाकिस्तान से मैत्री की पहल, भाषा-प्रेम और कवि मन की अभिव्यक्ति, राजनीति से संन्यास तथा महाप्रयाण तक के सभी प्रमुख पड़ावों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
लेखक ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, विचारधारा और नेतृत्व क्षमता को सरल, सहज और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को गहराई से समझ सकें।
पत्रकारिता के लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ श्री विजय त्रिवेदी टेलीविजन और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित ‘हार नहीं मानूँगा’, ‘यदा यदा ही योगी’, ‘बीजेपी: कल, आज और कल’ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर केंद्रित ‘संघम् शरणं गच्छामि’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रकाशनविभाग की नई संस्कृत- हिन्दी द्विभाषी पत्रिका ‘संगमनीप्रभा’ के प्रथमअंक का भी लोकार्पण किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली ने पत्रिका का लोकार्पण किया।
‘संगमनीप्रभा’ प्रकाशन विभाग की पहली त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका है। पत्रिका में प्रकाशित मूल सामग्री संस्कृत भाषा में होगी, जबकि हिन्दी भाषी पाठकों के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर संस्कृत सामग्री का हिन्दी अनुवाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अनूठे प्रयास का उद्देश्य संस्कृत वाङ्मय की अमूल्य ज्ञान-परंपरा से नई पीढ़ी के पाठकों को परिचित कराना और उन्हें संस्कृत भाषा से जोड़ना है।
पत्रिका का मूल्य 25 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि इसकी वार्षिक सदस्यता 100 रुपये में उपलब्ध होगी।पत्रिका के प्रथम अंक की सराहना करते हुए प्रो. बिमली ने कहा कि विषय वस्तु और डिज़ाइन के स्तर पर यह पत्रिका प्रकाशन विभाग के उत्कृष्ट प्रकाशनों की शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग विविध विषयों पर श्रेष्ठ पुस्तकों के साथ-साथ योजना, कुरुक्षेत्र, बालभारती और आजकल जैसी प्रतिष्ठित मासिक पत्रिकाओं तथा इम्प्लॉयमेंटन्यूज़ के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। अब त्रैमासिक ‘संगमनीप्रभा’ के प्रकाशन के साथ विभाग की पहचान और सशक्त होगी।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक श्री विजय त्रिवेदी, प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैन्थोला सहित अनेक प्रतिष्ठित लेखक, साहित्यकार एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम 4.0 में भाग लेने वाले 200 छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रयागराज पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्यएक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अनुरूप काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना है।
यह प्रतिनिधिमंडल संगम पहुंचा और प्रयागराज जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। प्रत्येक छात्र को भगवद् गीता का तमिल संस्करण भेंट किया गया।
संगम के किनारे आयोजित एक सांस्कृतिक संध्या में दोनों क्षेत्रों की कलात्मक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में कजरी, भजन और कथक के साथ-साथ तमिल लोक कला रूपों को भी प्रस्तुत किया गया। यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सद्भाव को दर्शाता है।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद, छात्रों ने संगम का दर्शन किया और गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के आध्यात्मिक महत्व का अनुभव किया। बाद में उन्होंने श्री बड़े हनुमान जी मंदिर जाकर प्रार्थना की।
इस प्रतिनिधिमंडल ने बाद में स्वामीनारायण मंदिर का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, छात्रों को प्रयागराज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का समृद्ध अनुभव प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर बोलते हुए महापौर उमेश चंद्र ने इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के उनके दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि संगम एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान का प्रतीक है।
नई दिल्ली – युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद का दूसरा दिन आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक भव्य उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोवाल, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, युवा मामलों के विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल और युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ, जिनके युवा सशक्तिकरण, नेतृत्व एवं राष्ट्रीय सेवा के शाश्वत आदर्श पूरे देश के युवा नेताओं को प्रेरित करते रहते हैं, इसके बाद पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित किया गया।
आरंभिक सत्र को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस पहल पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक क्विज़ राउंड में लगभग 50 लाख युवा शामिल हुए, जिनमें से तीन लाख को 10 पहचाने गए थीमेटिक ट्रैक्स में से किसी एक पर निबंध प्रस्तुत करने के लिए चयनित किया गया। इन निबंधों का मूल्यांकन प्रख्यात प्रोफेसरों द्वारा किया गया, जिसके बाद 30,000 युवाओं को राज्य स्तर पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। इस समूह में से, अंततः 3,000 युवा नेताओं का चयन किया गया ताकि वे अपने विचारों को परिष्कृत कर सकें और सीधे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सामने प्रस्तुत कर सकें, जिन्होंने नौजवान भारतीयों पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है जो विकसित भारत की यात्रा का नेतृत्व करेंगे और राष्ट्रीय युवा दिवस पर कई घंटे युवा नेताओं के साथ सीधे संवाद करेंगे और उनके विचार को सुनेंगे।
राष्ट्र की गतिशील शक्ति के रूप में युवाओं की बात करते हुए, डॉ. मंडाविया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ एक ऐसा प्रक्रिया है जो नेतृत्व को जमीनी स्तर से आगे बढ़ने मदद करता है, राजनीतिक समर्थन के बिना और राष्ट्र के भविष्य के नेताओं को पोषित करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयास से प्राप्त नहीं होगा बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से प्राप्त होगा जो राष्ट्र के लिए कल्पित पांच ‘संकल्पों’ द्वारा मार्गदर्शित हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ के मंत्र पर बल देते हुए, उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों को अनुशासन एवं समर्पण के साथ पूरा करें। भारत के अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि देश कोविड महामारी के बाद स्थिर रूप से प्रगति कर रहा है और बेरोजगारी दर में महत्वपूर्ण कमी ला रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल ने अपने मुख्य भाषण में अपने युवावस्था पर बात की और व्यक्तिगत जीवन एवं राष्ट्रों के निर्माण के लिए अपने निर्णय पर लंबी चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी के जीवन की गति एवं दिशा उस रोज़ाना लिए जाने वाले निर्णयों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे इस क्षमता को प्रारंभिक अवस्था से ही विकसित करें। उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति सही निर्णय लेने में निहित है और कहा कि अगर वे भारत को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें निर्णय लेने में दूरदर्शी, अनुशासित और क्रियान्वयन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए बलिदानों को भी याद किया और एक मजबूत एवं आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करने के लिए इतिहास से सीखने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि कि प्रेरणा क्षणिक होती है लेकिन अनुशासन स्थायी होता है। उन्होंने युवा नेताओं को अनुशासन को दैनिक जीवन में बदलने और बिना देरी किए कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास से भरपूर रहने के लिए प्रोत्साहित किया और उनसे अपने निर्णयों के प्रति पांच साल की प्रतिबद्धता अपनाने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि अटूट इच्छाशक्ति समय के साथ अजेयता का निर्माण करती है। श्री डोभाल ने एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान युवा प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की, जहां उन्होंने दबाव को संभालने और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के बारे में अपने विचार साझा किए।
अपने स्वागत संबोधन में, डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उल्लेख किया कि यह संवाद लगभग 50 लाख युवाओं को शामिल करने वाली पांच महीने लंबी राष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है, जिसके परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उत्कृष्ट युवा नेताओं का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि वीबीवाईएलडी एक ऐसा मंच है जहां युवा आवाजों को सुना जा सके और उनके विचारों को नीति निर्धारण में डिज़ाइन-सोच, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से शामिल किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि 144 शहरों में भारतीय प्रवासी समुदाय की भागीदारी के साथ आयोजित विकसित भारत रन, भारत की सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने वाली एक प्रमुख पहल थी।
उद्घाटन सत्र का समापन युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मंच पर उपस्थित गणमान्य लोगों, वक्ताओं, आयोजकों और युवा प्रतिभागियों के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सतत संवाद एवं विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद जैसे सहभागी मंचों के माध्यम से युवा नेतृत्व को पोषित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया और प्रतिभागियों को आगामी सत्रों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
संपूर्ण सत्र के समापन के बाद, प्रतिभागी अपने-अपने स्थानों पर गहन थीम आधारित सत्रों के लिए गए, जो कि 10 पहचानी गई थीमों के लिए आयोजित किए गए थे। इन सत्रों का संचालन मार्गदर्शकों द्वारा किया गया जिन्होंने प्रत्येक थीम का ढांचा एवं उद्देश्य प्रस्तुत किया, इसके बाद विशिष्ट विषय विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई। इन संवादों ने सहयोगात्मक शिक्षा का एक मंच तैयार किया, जिससे प्रतिभागियों को मुद्दों का गंभीरता से विश्लेषण करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और केंद्रित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिली। थीम इस प्रकार हैं
ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए लोकतंत्र एवं सरकार में युवाओं की भूमिका
इस सत्र का केंद्र युवाओं, लोकतंत्र और शासन पर आधारित था, जिसमें विशेष जूरी में श्री हेमांग जोशी, वडोदरा से सांसद, और सुश्री भक्ति शर्मा, पूर्व सरपंच और जमीनी स्तर की नेता शामिल थीं। प्रतिभागियों ने नवोन्मेषी शासन मॉडल प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य युवाओं को सार्वजनिक प्रशासन में एकीकृत करना था, जिसमें गांव स्तर की कार्य योजना, जिला प्रशासन के साथ समस्या-समाधान इकाइयां, नीति और करियर लैब, और संरचित नागरिक सहभागिता पहल शामिल थीं।
ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व वाला विकास: विकसित भारत की कुंजी
यह सत्र ‘विकसित भारत @2047’ की परिकल्पना के अनुरूप, शासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं को अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित था। इस सत्र में भारत मंडपम में भारत की पहली एमबीए सरपंच सुश्री छवि राजवत, अर्जुन पुरस्कार विजेता और विधानसभा सदस्य सुश्री श्रेयासी सिंह और किश्तवार से विधायक सुश्री शगुन परिहार सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ संवाद हुए।
ट्रैक 3 – फिट भारत, हिट भारत
इस सत्र का मुख्य विषय एक सशक्त और सशक्त भारत के निर्माण में स्वास्थ्य, कल्याण, खेल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर केंद्रित था। सत्र में प्रख्यात खिलाड़ियों श्री लिएंडर पेस और श्री पुलेला गोपीचंद के साथ संवाद हुए, जिन्होंने शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और योग एवं ध्यान जैसी भारत की पारंपरिक प्रथाओं को एकीकृत करके समग्र कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला।
ट्रैक 4 – भारत को विश्व की स्टार्टअप राजधानी बनाना
इस विषय के अंतर्गत, युवा नेताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र में शामिल हुए। इससे प्रतिभागियों को व्यापक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सत्र में आंध्र प्रदेश के सांसद श्री हरीश बालायोगी, ज़ेप्टो के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री कैवल्य वोहरा, आंध्र प्रदेश सरकार में युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री रामप्रसाद रेड्डी और आंध्र प्रदेश खेल प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रवि नायडू भी शामिल हुए।
ट्रैक 5 – भारत की सॉफ्ट पावर: सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव
इस सत्र में भारत के सॉफ्ट पावर एवं सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। विशिष्ट वक्ताओं म श्री रोमालो राम, जमीनी स्तर के शासन एवं सामुदायिक विकास से जुड़े लोक सेवक; श्रीमती पाल्की शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं टेलीविजन एंकर; श्री सतीश शर्मा, कैबिनेट मंत्री जिनके पास जम्मू और कश्मीर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवा एवं खेल, तथा एआरआई और प्रशिक्षण से संबंधित विभाग हैं; और श्री अर्पित तिवारी, उपनिदेशक, नेहरू युवा केंद्र संगठन शामिल थे। इन वक्ताओं ने सत्र का संचालन किया और प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।
ट्रैक 6 – परंपरा के साथ नवाचार: आधुनिक भारत का निर्माण
इस सत्र का मुख्य उद्देश्य नवाचार एवं युवा सशक्तिकरण के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना था। सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम और एनएएसी के अध्यक्ष श्री अनिल सहस्रबुद्धे, शिक्षाविद, लेखक और पूर्व सांसद श्री विनय सहस्रबुद्धे और वहदम इंडिया के संस्थापक और सीईओ श्री बाला सरदा जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने किया।
ट्रैक 7 – आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड
इस सत्र में नवाचार आधारित विकास और भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक श्री सिबाब्रता दास और एडवर्ब के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन ने सत्र का नेतृत्व किया और प्रतिभागियों के साथ व्यापक संवाद किया।
ट्रैक 8 – स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना
यह सत्र स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित था, जिसमें भारतीय खेती के आधुनिकीकरण में व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई। पांच शॉर्टलिस्ट किए गए टीमों ने अपने उत्कृष्ट विचारों को एक पैनल के सामने प्रस्तुत किया, जिसका नेतृत्व श्री अतुल पाटीदार, जमीनी स्तर पर सुशासन के विशेषज्ञ और श्री राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया।
ट्रैक 9 – एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण
इस सत्र का मुख्य विषय “एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण” था, जिसमें एक लचीले एवं समावेशी भविष्य को आकार देने में वर्तमान कार्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। चर्चा का नेतृत्व बीच प्लीज इंडिया के संस्थापक श्री मल्हार कलांबे, छत्तीसगढ़ के पूर्व सिविल सेवक श्री ओ. पी. चौधरी और इकोसेंस के संस्थापक और सीईओ श्री अभिषेक मंगलिक ने किया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सतत भारत की परिकल्पना को दैनिक जीवन, शासन और तकनीकी नवाचार में स्थिरता को समाहित करके ही प्राप्त किया जा सकता है तथा स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
ट्रैक 10 – विकसित भारत के लिए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण
इस सत्र का मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को बदलते कार्यक्षेत्र के लिए तैयार करना था। इस सत्र का संचालन प्रख्यात शिक्षाविद और सुपर 30 के संस्थापक श्री आनंद कुमार और लोक नीति विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता श्री अनिकेत देब ने किया। चर्चा में इस बात पर बल दिया गया कि वर्तमान में रोजगार योग्यता केवल डिग्री तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें कौशल, अनुकूलन क्षमता और भविष्य के लिए तत्परता भी शामिल है। इसमें स्व-विकास, अनुशासित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकी चुनौतियों से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।
आधिकारिक कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रतिभागियों ने दो समूहों में प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय का दौरा किया, जहां उन्हें भारत की नेतृत्व विरासत और लोकतांत्रिक विकास की गहरी समझ प्राप्त हुई। इसके बाद प्रतिभागियों को राज्य टीमों में पुनर्गठित किया गया और वे केंद्रीय मंत्रियों और संसद सदस्यों के आवासों पर रात्रिभोज के लिए रवाना हुए, जहाँ साझा चिंतन और राष्ट्रीय सेवा के माहौल में सार्थक संवाद, मार्गदर्शन और अनौपचारिक सलाह-मशविरा का अवसर मिला।
विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2026 का दूसरा दिन एक केंद्रित और अग्रसर दृष्टिकोण के साथ संपन्न हुआ, जिससे सरकार की यह प्रतिबद्धता दोहराई गई कि युवाओं को भारत के राष्ट्र निर्माण यात्रा के केंद्र में रखा जाएगा। थीम आधारित ट्रैकों में समृद्ध विचार-विमर्श और युवा नेताओं द्वारा नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ सक्रिय सहभागिता ने डायलॉग को विचारों, नेतृत्व और सहभागी शासन के लिए एक मजबूत मंच के रूप में और भी सशक्त किया। इस कार्यक्रम का समापन 12 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें प्रधानमंत्री देश भर के युवा नेताओं से बातचीत करेंगे। संवाद के तीसरे दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रेरणादायक बातचीत, विषयवार प्रस्तुतियाँ और विकसित भारत की भावना और विविधता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया जाएगा।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ यात्रा की कुछ झलकियां साझा की।
श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:
‘‘सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। यह हमारे सभ्यतागत साहस का गौरवशाली प्रतीक है।
यह यात्रा #सोमनाथस्वाभिमानपर्व के दौरान हो रही है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एकजुट हुआ है।
लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभारी हूं।’’
“जय सोमनाथ!
आज का स्वागत बहुत विशेष था।”
“आज शाम सोमनाथ में, मैंने श्री सोमनाथ न्यास की एक बैठक की अध्यक्षता की। हमने मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और भी यादगार बनाने के तरीकों की समीक्षा की।”
“ॐ हमारे वेदों का, शास्त्रों का, पुराणों का, उपनिषदों और वेदांत का सार है।
ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है।
ॐ ही साधना में साध्य है।
ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है।
ॐ से ही हमारे मंत्र प्रारंभ एवं पूर्ण होते हैं।
आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में 1000 सेकंड्स तक ओंकार नाद के सामूहिक उच्चार का सौभाग्य मिला। उसकी ऊर्जा से अंतर्मन स्पंदित और आनंदित हो रहा है।
ॐ तत् सत्!!”
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के सुअवसर पर सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्यता और दिव्यता से भरा ड्रोन शो देखने का सौभाग्य मिला। इस अद्भुत शो में हमारी प्राचीन आस्था के साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।”
नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी, मणिपुर के राज्यपाल, गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा आर्थिक मामलों, व्यय और राजस्व विभागों के सचिवों और केंद्रीय वित्त मंत्रालय तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
प्रतिभागियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से कई प्रतिभागियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) को अधिक आवंटन के साथ जारी रखा जाना चाहिए क्योंकि यह परिसंपत्ति निर्माण में तेजी लाने में मदद करती है और राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी निवेश का समर्थन करती है।
गौरतलब है कि 2020-21 से केंद्र सरकार ने एसएएससीआई के तहत राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों की विधिवत जांच की जाएगी और बजट 2026-27 तैयार करते समय उन पर उचित रूप से विचार किया जाएगा
नई दिल्ली – तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन–2026 का उद्घाटन सत्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वैश्विक हिन्दी परिवार, और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषाओं और साहित्यिक अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष और प्रख्यात विद्वान, पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने की। श्री श्याम परांडे, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव, और प्रसिद्ध जापानी भाषाविद् पद्म श्री टोमियो मिसोकामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. सचिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए, और प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी, विभागाध्यक्ष, भारतीय भाषा और साहित्यिक अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, भी इस अवसर पर मौजूद थे। सत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के निदेशक अनिल जोशी ने किया।
तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन में बोलते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भाषाएँ सभ्यता की जीवंत चेतना हैं, क्योंकि वे सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि स्मृति, संस्कृति, परंपरा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले मूल्यों की वाहक भी हैं। भारत की एकता कभी समानता पर आधारित नहीं रही; बल्कि यह कई भाषाओं के आपसी सम्मान से बनी है, जो साझा सभ्यतात्मक दृष्टि और धर्म द्वारा एक-दूसरे से बंधी हुई हैं। भारतीय भाषाएँ विरोधाभासी नहीं हैं; बल्कि ये लगातार एक-दूसरे में योगदान देती हैं, जिससे दर्शन, ज्ञान और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति समृद्ध होती है।
प्राचीन शिलालेखों और ताड़पत्र की पांडुलिपियों से लेकर आज के डिजिटल रूपों तक, भाषाओं ने सोच को आकार दिया है, ज्ञान को सहेजा है और सामूहिक कल्पना को पल्लवित-पोषित किया है। चूंकि भाषाएँ हमेशा सीमाओं से परे यात्रा करती रही हैं, यहाँ तक कि कूटनीति से भी बहुत पहले, इसलिए आज हमारा कर्तव्य सिर्फ भाषाई विविधता की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि लुप्तप्राय भाषाओं को समर्थन देना और उन्हें शिक्षा व तकनीक के माध्यम से आत्मविश्वासके साथ भविष्य में ले जाना भी है। इस तरह, हरेक भाषा का जश्न मनाते हुए हम हर भारतीय की गरिमा को बनाए रखते हैं, क्योंकि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।
इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएँ सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और सामाजिक मूल्यों की वाहक हैं।
डॉ. निशंक ने यह भी बताया कि हमारी भाषाओं ने मानव चेतना और परंपराओं को संरक्षित किया है, साथ ही पूरी दुनिया में भारत की सभ्यता और ज्ञान का प्रचार किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि योग, आयुर्वेद, साहित्य और दर्शन जैसी अमूल्य धरोहरें हमारी भाषाओं के माध्यम से विश्वभर में फैली हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाएँ संघर्ष नहीं सिखातीं, बल्कि सह-अस्तित्व, समानता और सामंजस्य का पाठ भी पढ़ाती हैं। ये सिर्फ संचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज और व्यक्ति के विकास की आधारशिला भी हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएँ एकता और ज्ञान को बढ़ावा देती हैं, न कि विभाजन को, और यही उनकी शक्ति और गौरव का स्रोत है।
अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री राम बहादुर राय ने कहा कि यह सम्मेलन भाषाओं पर विचार करने और उनके विकास के लिए कार्य करने का एक अवसर है। उन्होंने बताया कि कुछ भ्रमित विद्वानों और भाषाविदों ने यह विचार फैलाया कि भारतीय भाषाएँ चार परिवारों में विभाजित हैं। हालांकि, अब यह स्थापित हो चुका है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार से संबंधित हैं। इसे पहचानने से कृत्रिम विभाजन खत्म होता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। जैसे-जैसे संवाद बढ़ेगा, यह एक लहर पैदा करेगा—भाषाओं की लहर, भाषाई एकता की लहर और सांस्कृतिक एकता की लहर। यह लहर वही भावना होगी जो भाषाओं को जोड़ती है और भाषाई समुदायों को एक साथ लाती है। विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए, पद्म श्री टोमियो मिसोकामी ने उपस्थित दर्शकों को हिन्दी में संबोधित करते हुए कहा, “लोग कहते हैं कि मैं भारतीय हूँ, हालाँकि मैं गलती से जापान में पैदा हुआ था।”
तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं के वैश्विक प्रचार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, नीदरलैंड, फ्रांस, मॉरिशस, थाईलैंड और जापान सहित 70 से अधिक देशों के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, भारत के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और बोलियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 से अधिक प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और भाषायी कार्यकर्ताओं ने भी सम्मेलन की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान दिया।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ के ऐतिहासिक महत्व को पुनः रेखांकित करते हुए इसे भारत की आध्यात्मिक शक्ति और अटूट श्रद्धा का शाश्वत स्वरूप बताया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सोमनाथ केवल एक पवित्र तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रकाश स्तंभ भी है, जो अपनी आस्था, अटूट जीवटता और एकता के संदेश से पीढ़ियों को प्रेरित करता आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में उल्लेख किया:
“भगवान श्री सोमनाथ सृष्टि के कण-कण में विराजते हैं। उनकी अखंड आस्था अनंत काल से निरंतर प्रवाहित हो रही है। वे सदैव भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक रहेंगे।”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और युवाओं से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा में पेशेवर उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।
विकसित भारत @2047 के विजन के बारे में बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी आजादी की शताब्दी की दिशा में बढ़ते हुए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी लेकिन हासिल किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि यह विजन सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास भी शामिल है। इस विजन की सफलता काफी हद तक युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करती है।
एक बड़ी वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरने की भारत की आकांक्षा को स्पष्ट करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उद्देश्य छोटे देशों पर अपनी शर्तें थोपना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य देश भारत पर अपनी शर्तें न थोप सके।
तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जो चीज पांच वर्ष पहले जरूरी थी, वह जल्द ही अपनी प्रासंगिकता खो सकती है। उन्होंने कहा कि बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है और निरंतर सफलता के लिए अनुकूलनशीलता एवं आजीवन सीखते रहने की ललक आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से कभी न करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग जीवन यात्रा और गति होती है। अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, लगन और ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को साधारण शुरुआत से बड़ी जिम्मेदारी वाले पदों तक ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ अपने लिए ही जीने से जीवन का बड़ा उद्देश्य खत्म हो जाता है।
विद्यार्थियों के लिए आवश्यक तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों के बारे में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे समय का प्रभावी प्रबंधन करने, दीर्घकालिक सफलता को नुकसान पहुंचाने वाले शॉर्टकट से बचने तथा कभी हार न मानने का आग्रह किया और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक कथन – “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – की याद दिलाई।
उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी की जय जवान स्कॉलरशिप की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के जवानों एवं उनके परिवारों के बलिदानों को सार्थक शैक्षिक सहायता देकर सम्मानित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिवर्सिटी के काम का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी पहलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि विश्वविद्यालय सिर्फ सीखने के केन्द्र भर नहीं होते, बल्कि वे ऐसी संस्थाएं हैं जो राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में मदद करती हैं।
विश्वविद्यालय परिसरों में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए, उपराष्ट्रपति ने इसे युवाओं और समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया और विद्यार्थियों से अनुशासन, सार्थक उद्देश्य और स्वास्थ्य जीवनशैली चुनकर मादक पदार्थों को साफ और सीधे तौर पर “ना” कहने की अपील की।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति सदा आभारी रहें, जिनका मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्य उनके चरित्र एवं भविष्य को आकार देते हैं।
दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया; पंजाब सरकार में रक्षा सेवा कल्याण, स्वतंत्रता सेनानी तथा बागवानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत; और सांसद (राज्यसभा) तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए
उपायुक्त ने अधिकारियों को तैयारी से संबंधित दिये आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश
झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन
रांची,10.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह-2026 की तैयारियों को लेकर आज दिनांक 10 जनवरी 2026 को समाहरणालय ब्लॉक ए स्थित सभागार में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक (शहर) रांची एवं ट्रैफ़िक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), रांची, श्री कुमार रजत, निदेशक आइटीडीए, श्री संजय कुमार भगत, निदेशक डी.आर.डी.ए., श्री सुदर्शन मुर्मू, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी राँची, श्रीमती मोनी कुमारी, ज़िला परिवहन पदाधिकारी, श्री अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी राँची, श्री सुरभि सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, एल. आर. डी.सी. रांची, श्री मुकेश कुमार , जिला नजारत उपसमाहर्त्ता रांची, डॉ सुदेश कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 एवं कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची, टाटीसिलवे रांची, समादेष्टा सी.आई.एस.एफ., एच.ई. सी., अग्निश्मन पदाधिकारी रांची, कमांडिंग ऑफिसर एन. सी. सी. रांची, सहित संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी और सफल संचलान को लेकर विचार-विमर्श करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये
मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी पर विचार विमर्श करते हुए उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 को आगन्तुकों के लिए मैदान के दोनों ओर वाटरप्रूफ पण्डाल/गैलरी/कुर्सी की व्यवस्था, मैदान समतलीकरण एवं बैरिकेटिंग, स्टेज एवं साउंड बॉक्स के लिए टॉवर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची द्वारा जिला नजारत उपसमाहर्त्ता को मंच के दोनों तरफ वाटरप्रूफ पंडाल, मंच पर वीवीआईपी के बैठने की व्यवस्था, मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम, परेड में शामिल कैडेटों के लिए अल्पाहार एवं पुष्प सज्जा की व्यवस्था आदि से संबंधित तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची को विद्युत व्यवस्था एवं साउण्ड प्रूफ जेनरेटर की व्यवस्था को लेकर अंतिम रुप से तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यक्रम स्थल में पेयजल आपूर्ति, वीआईपी टॉयलेट की व्यवस्था, परेड पूर्वाभ्यास में भाग लेने वाले कैडेटों के लिए मोरहाबादी मैदान में अस्थायी शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निदेश कार्यपालक अभियंता, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग वितरण प्रमण्डल गोंदा को निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा मोरहाबादी की ओर जानेवाली सड़कों की मरम्मती एवं साफ-सफाई, चिकित्सा मेडिकल कैंप और अग्निशमन की व्यवस्था को लेकर ससमय पूरी तैयारी करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया गया।
उपायुक्त द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में आयोजित होने वाले झांकी और परेड से संबंधित जानकारी भी संबंधित पदाधिकारी से ली गयी।
उपायुक्त रांची, द्वारा पार्किंग व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक (यातायात) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे मोरहाबादी मैदान में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था, झांकी के लिए ट्रेलर/ बड़े वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
उपायुक्त रांची, द्वारा सिविल सर्जन (सदर) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे चिकत्सा व्यवस्था / मेडिकल कैंप एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराने कहा।
उपायुक्त रांची, द्वारा नगर निगम रांची को निर्देश देते हुए कहा की वे समारोह स्थल की सफाई एवं आस-पास की सफाई एवं समाहरोह स्थल की तरफ आने वाली सभी प्रमुख सड़को की सफाई कराना सुनिश्चित करेंगे।
मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी से संबंधित अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने ससमय तैयारी पूरी करने के निर्देश सभी सम्बंधित पदाधिकारियों को दिया गया।
झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन
उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया इस बार गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में मुख्य आकर्षण यहाँ की झांकियों का प्रदर्शन रहेगा एवं गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया जाएगा। जिससे यहाँ के लोग सरकार के सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं/ नीतियों पर आधारित तथा झारखण्ड की उत्कृष्ट कला, संस्कृति, परम्परा एवं धरोहर का दीदार इन झांकी के माध्यम से करेंगे।
झांकियों का प्रदर्शन विभागवार
गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में इस बार कुल-12 विभागों की झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। जो निम्नवत है-
1. वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
2. ग्रामीण विकास विभाग
3. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग
4. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग
5. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग
6.सूचना एवं जन संपर्क विभाग
7. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग
8. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग
9. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड
10. परिवहन विभाग
11. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग
12.उच्च तकनिकी शिक्षा विभाग
लगभग 15 प्लाटून के द्वारा परेड
उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया की गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में हो रहा है, इस बार लगभग 15 प्लाटून और 03 बैन्ड़ के द्वारा किया जाएगा।
18 जनवरी 2026 से दिनांक 23 जनवरी 2026 तक, दिनांक 24 जनवरी 2026 तक अंतिम रिहार्सल पूरा लिया जाएगा।
नई दिल्ली, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में गुजरात एवं पंजाब के कृषि मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY), कृषोन्नति योजना (KY) सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं के तहत राज्यों में हो रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान योजनाओं के राज्यवार क्रियान्वयन, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों तथा बजट उपयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जारी की गई धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों द्वारा धनराशि का प्रभावी एवं समय पर उपयोग किया जाएगा, उन्हें आगामी बजट में पर्याप्त एवं निर्बाध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रांश के ब्याज की निर्धारित राशि समय पर जमा करना अनिवार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की देरी से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है और इसका प्रतिकूल प्रभाव अगली किस्त की स्वीकृति पर भी पड़ सकता है।
बैठक के दौरान श्री चौहान ने गुजरात में दलहन एवं तिलहन की उत्पादन क्षमता, किसानों की भागीदारी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उड़द की खरीद को और अधिक गति देने तथा किसानों तक खरीद प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा, आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवंटित बजट का प्रभावी, योजनाबद्ध एवं परिणामोन्मुखी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। समय पर एवं उचित वित्तीय उपयोग से ही योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का सही आकलन किया जा सकता है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार द्वारा अगली किस्त समय पर जारी की जा सकेगी।
बैठक में पंजाब के कृषि मंत्री श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, गुजरात के कृषि राज्य मंत्री श्री रमेशभाई कटारा, कृषि मंत्रालय के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
नई दिल्ली – चौथे काशी तमिल संगमम के अंतर्गत आयोजित ऐतिहासिक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान (एसएवीई) दल नौ दिवसीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर आज काशी पहुंचा। वाराणसी के आयुक्त श्री एस. राजलिंगम ने नमो घाट पर प्रतिभागियों का स्वागत किया।
अभियान यात्रा के दौरान ऋषि अगस्त्य से संबंधित मार्ग का अनुसरण कर लगभग 100 प्रतिभागियों ने तेनकासी से काशी तक 2,460 किलोमीटर की दूरी तय की।
गांवों, कस्बों और शहरों से गुज़रते हुए अभियान दल का विभिन्न समुदायों के लोगों ने गर्मजोशी और उत्साह से स्वागत किया। इस अभियान से सिद्ध चिकित्सा के प्रति जागरूकता भी बढ़ी, जिसमें इसके निवारक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली को बल मिला।
नई दिल्ली – आईएनएस चिल्का में प्रशिक्षुओं के बैच 02/25 की पासिंग आउट परेड 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण की सफल समाप्ति का प्रतीक है। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य समारोह में प्रशिक्षुओं ने परेड में हिस्सा लिया जो उनके अनुशासित, दृढ़ और युद्ध के लिए तैयार नौसैनिक पेशेवर बनने की प्रक्रिया का प्रतीक था। इस पासिंग आउट बैच में 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे। इनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (चिकित्सा सहायक), भारतीय नौसेना के 44 खेल प्रवेश कर्मी और भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना परेड के मुख्य अतिथि और निरीक्षण अधिकारी थे। आईएनएस चिल्का के कमान अधिकारी, कमोडोर बी दीपक अनील, संचालन अधिकारी थे। समारोह में विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रसिद्ध खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य व्यक्ति और उत्तीर्ण होने वाले प्रशिक्षुओं के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
परेड में प्रशिक्षुओं ने अपने अभ्यास, अनुशासन और पेशेवर कौशल के उत्कृष्ट मानकों का शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष साथियों के साथ महिला अग्निवीरों की भागीदारी ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशिता और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दर्शाया है।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने परेड को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने पेशेवर कौशल को निखारने और तकनीकी रूप से जागरूक होने के साथ-साथ कर्तव्य, सम्मान और साहस जैसे नौसेना के मूल मूल्यों को आत्मसातकरने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने प्रशिक्षुओं को साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने रास्ते को चुनते हुए देश की शान बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने अग्निवीरों के अभिभावकों के राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना की। मुख्य अतिथि ने नौसेना और राष्ट्र के परिवर्तन को आकार देने में टीम चिल्का के अथक प्रयासों और महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
मुख्य अतिथि ने मेधावी अग्निवीरों को पदक और ट्राफियां प्रदान कीं। शशि बी. केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनीता यादव को समग्र योग्यता क्रम में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। केशव सूर्यवंशी और सोनेंद्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) चुना गया।
समापन समारोह के पहले, खारवेला डिवीजन को समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन को उपविजेता के तौर पर चुना गया। इसी अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के दूसरे संस्करण का भी विमोचन हुआ। इस पत्रिका में अग्निवीरों के अनुभवों और उनके प्रेरणादायक बदलाव के सफर को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
नई दिल्ली – भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने आज गुवाहाटी में “भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ और सशक्त बनाना” विषय पर एक उच्च स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन ने नीतिगत समन्वय, निवेश प्रोत्साहन, कौशल विकास, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से उत्तर-पूर्वी राज्यों में वस्त्र क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान किया।
इस सम्मेलन में माननीय केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह, माननीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र एवं उद्योग मंत्री, संसद सदस्य और पूर्वोत्तर राज्यों तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा वस्त्र क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के वस्त्र क्षेत्र का अभिन्न अंग है और केंद्र सरकार इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
विचार-विमर्श के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनूठी खूबियों-इसकी समृद्ध हथकरघा विरासत, जीआई-टैग वाले उत्पाद, रेशम की विविध किस्में, बांस शिल्प और महिला कारीगरों और बुनकरों की सशक्त भागीदारी पर प्रकाश डाला गया।
सम्मेलन में मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजाइन नवाचार और बाजार संबंधों के साथ संयोजित करने के लिए एक समन्वित और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली – 25वें अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 2025-26 का उद्घाटन गुरुवार को पारादीप पत्तन के जयदेव सदन में किया गया। इस चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पारादीप पत्तन प्राधिकरण द्वारा मेजर पोर्ट्स स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के तत्वाधान में किया जा रहा है।
पारादीप पत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पी. एल. हरनाध ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति मानवीय भावना की आंतरिक सुंदरता को दर्शाती है और एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में सांस्कृतिक सम्मेलन के 25वें संस्करण की मेज़बानी करना पारादीप पत्तन के लिए गर्व की बात है, ओडिशा एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शास्त्रीय ओडिसी नृत्य और कलात्मक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।
उन्होंने देश भर के प्रमुख पत्तनों की टीमों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और कहा कि रंगारंग उद्घाटन परेड, इस सम्मेलन के लिए प्लान किए गए शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दर्शाती है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि भागीदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रतिस्पर्धा से अधिक महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि भारत में पत्तन कर्मचारियों में पेशेवर भूमिकाओं के अलावा भी ज़बरदस्त सांस्कृतिक प्रतिभा है।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भरोसा दिलाया कि उनके आराम के लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम किए गए हैं और सभी को एक यादगार व अच्छा अनुभव मिले, इसकी शुभकामनाएं दीं। इन बातों के साथ, उन्होंने सम्मलेन के शुभारंभ की घोषणा की।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री हिमांशु शेखर राउत ने की। इस अवसर पर एफए एवं सीएओ श्री अशोक कुमार साहू; मुख्य यांत्रिक अभियंता श्री सुशील चंद्र नाहक; और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विभूति भूषण दास भी उपस्थित थे। आयोजन समिति के सचिव डॉ. डी. पी. सेठी ने स्वागत भाषण दिया।
इस सम्मेलन में चेन्नई, कोचीन, दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण, कोलकाता, मुंबई, विशाखापत्तनम, वी.ओ. चिदंबरनार और मेजबान पारादीप पत्तन सहित नौ प्रमुख पत्तनों के 200 से ज़्यादा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। क्लासिकल वोकल, लाइट वोकल, इंस्ट्रूमेंटल म्यूज़िक, डांस और ड्रामा कैटेगरी में प्रतियोगिताएं हो रही हैं।
मुंबई पत्तन प्राधिकरण द्वारा उद्घाटन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद विशाखापत्तनम पत्तन प्राधिकरण ने अगले कुछ दिनों में होने वाले शानदार कार्यक्रमों के लिए माहौल तैयार किया।
25वां अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 11 जनवरी, 2026 को एक समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ संपन्न होगा।
नई दिल्ली – सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के कल्याण और पुनर्वास’ पर एक बैठक कल नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई।
बैठक में चर्चा छह महानगरों- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूरू और हैदराबाद को भिखारी मुक्त बनाने पर केंद्रित रही। इस उद्देश्य के लिए अभियान नगर निगमों, शहरी स्थानीय निकायों, राज्य समाज कल्याण विभागों, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच नजदीकी तालमेल से चलाया जाएगा।
हाइब्रिड तरीके से आयोजित इस बैठक में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और बेंगलूरू के नगर निगमों और संबंधित राज्य समाज कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।
बैठक में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव ने सूचित किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 के लागू होने के बावजूद, प्रमुख महानगरों में ट्रैफिक सिग्नलों पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के भिक्षावृत्ति में निरंतर संलिप्त रहने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में पहले भी चिंता जताई गई थी। सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखते हुए, यह तय किया गया कि शुरुआत में छह पहचान किये गए मेट्रो शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि वहां भिक्षावृति समाप्त की जा सके।
सरकार की मुख्य पहलों पर भी ज़ोर दिया गया, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति (2024), नेशनल ट्रांसजेंडर पोर्टल, ट्रांसजेंडर पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड जारी करना, गरिमा गृहों की स्थापना और स्माइल योजना (आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता योजना) का कार्यान्वयन शामिल है। इसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति दोनों उप-योजनाएं शामिल हैं। बैठक में देशव्यापी अभियान “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” की भी समीक्षा की गई जिसके पहले चरण में 181 शहर शामिल हैं।
कल्याणकारी उपायों को लागू करने की स्थिति, भीख मांगने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास में आने वाली चुनौतियों और ‘स्माइल’ (भिक्षावृत्ति) योजना के तहत हुई प्रगति पर बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन दिए गए। यह योजना अभी दिल्ली और हैदराबाद में लागू है और इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने का प्रस्ताव है।
मंत्री महोदय ने राज्यों को गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से एक महीने का गहन अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसमें ट्रैफिक सिग्नलों पर भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा समन्वित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में भिक्षावृत्ति-मुक्त दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों को पुरस्कृत करने का भी संकेत दिया गया।
बैठक का समापन सभी हितधारकों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता के दोहराव के साथ हुआ, जिसमें शहरों को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों एवं भिक्षुओं के सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया.