केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन ने भारत सरकार के कैलेंडर 2026 का अनावरण किया

नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज भारत सरकार के कैलेंडर 2026 का अनावरण किया। इस अवसर पर डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि यह कैलेंडर केवल तारीखों और महीनों का वार्षिक प्रकाशन मात्र नहीं है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो भारत की परिवर्तनकारी यात्रा को दर्शाता है, गवर्नेंस की प्राथमिकताओं को उजागर करता है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर हमारे सामूहिक संकल्प को नया उत्साह प्रदान करता है।

कैलेंडर का विषय “भारत@2026: सेवासुशासन और समृद्धि”, एक ऐसे भारत को प्रस्तुत करता है जो अपनी पहचान के प्रति सुरक्षित है, अपनी संस्थाओं में मजबूत है और अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण में स्पष्ट है। डॉ. एल. मुरुगन ने इस बात पर जोर दिया कि यह कैलेंडर देश के आत्मविश्वास की उस भावना को दर्शाता है, जो जन-केंद्रित शासन,  मजबूत सर्विस डिलीवरी और उन सुधारों पर आधारित है जिन्हें प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नागरिकों एवं सरकार के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

वर्ष 2025 में किए गए प्रमुख सुधारों का उल्लेख करते हुए, डॉ. मुरुगन ने कहा कि संरचनात्मक उपायों ने भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाया है और यह सुनिश्चित किया है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने उल्लेख किया कि नई कर व्यवस्था के तहत कर राहत, जीएसटी 2.0 को सरल बनाने, चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और केंद्रित रोजगार सृजन पहल ने उत्पादकता, जीवन की सुगमता और समावेशी समृद्धि को गति प्रदान की है।

इस अवसर पर बोलते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, श्री संजय जाजू ने कहा कि भारत सरकार का कैलेंडर वास्तव में सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है और यह एक शक्तिशाली संचार माध्यम के रूप में विकसित हुआ है, जो राष्ट्र की प्राथमिकताओं और मूल्यों को दर्शाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि “भारत@2026: सेवासुशासन और समृद्धि” विषय पर आधारित 2026 का यह कैलेंडर सुधार, समावेशिता और आकांक्षा के माध्यम से भारत के आत्मविश्वासपूर्ण सुदृढ़ीकरण को दर्शाता है।

कैलेंडर 2026 में बारह विषयगत मासिक पृष्ठ दिए गए हैंजो राष्ट्रीय प्रगति के प्रमुख स्तंभों को चित्रित करते हैं और बदलते भारत की भावना को दर्शाते हैं। इनमें जनवरी का विषय ‘आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास’ है, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्वावलंबन को उजागर करता है; फरवरी का ‘समृद्ध किसान, समृद्ध भारत’ किसानों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है; मार्च का ‘नए भारत के लिए नारी शक्ति’ महिलाओं को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में सम्मानित करता है और अप्रैल का विषय ‘सरलीकरण से सशक्तिकरण’ है, जो प्रक्रियाओं के सरलीकरण और शासन सुधारों पर केंद्रित है। अन्य विषयों में मई का ‘वीरता से विजय तक: ऑपरेशन सिंदूर’ सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को नमन करता है; जून में ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ और जुलाई में ‘वंचितों का सम्मान’ समाज के सबसे कमजोर वर्गों के स्वास्थ्य, कल्याण और गरिमा पर जोर देते हैं। अगस्त का विषय ‘युवा शक्ति, राष्ट्र शक्ति’ और सितंबर का ‘गति, शक्ति, प्रगति’ युवाओं की ऊर्जा तथा फिजिकल एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दर्शाते हैं। अक्टूबर का ‘परंपरा से प्रगति तक’ और नवंबर का ‘सबका साथ, सबका सम्मान’ भारत के सभ्यतागत मूल्यों और समावेशी प्रगति के संकल्प को दोहराते हैं; तथा दिसंबर का विषय ‘विश्व बंधु भारत’ एक जिम्मेदार और विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को उजागर करता है।

श्रीमती कंचन प्रसाद, महानिदेशक (सीबीसी) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह कैलेंडर 13 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किया गया है। कैलेंडर की यह समावेशिता हर भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के नागरिकों के साथ जुड़ने के सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपर सचिव श्री प्रभात, पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की महानिदेशक श्रीमती अनुपमा भटनागर के साथ-साथ मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2026 एक समृद्ध, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत की दिशा में एक और निर्णायक कदम साबित होगा।

भारत सरकार का कैलेंडर 2026 डाउनलोड करने के लिए, नीचे दिये गये क्यूआर कोड को स्कैन करें:

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आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) भारत में आईस्टेंट के साथ पहली 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी की

नई दिल्ली  – दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र रोग विभाग ने भारतीय चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए उन्नत इमेजिंग तकनीक और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी को मिलाकर भारत में पहली बार आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक संपन्न की है। नए स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रालिस सिस्टम और अत्याधुनिक 3डी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप से संचालित यह अभूतपूर्व प्रक्रिया सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं को वैश्विक नेत्र चिकित्सा देखभाल में अग्रणी स्थान पर रखती है।

ग्लूकोमा, जो अपूरणीय अंधापन का एक प्रमुख कारण है, अपनी धीमी प्रगति के कारण लंबे समय से चिकित्सकों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। यह अभूतपूर्व तकनीक जलीय द्रव प्रवाह मार्गों का अभूतपूर्व वास्तविक समय दृश्य प्रदान करती है, जिससे सर्जन सटीक और लक्षित उपचार कर सकते हैं और रोगियों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं।

देश में अपनी तरह की पहली पहल के रूप में न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी, आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी का एकीकरण ग्लूकोमा के उपचार में एक नया मानदंड स्थापित करता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान बेहतर इमेजिंग और दीर्घकालिक बेहतर परिणाम सुनिश्चित होते हैं। सशस्त्र बलों के लिए यह न केवल एक चिकित्सा उपलब्धि है बल्कि दृष्टि सुरक्षा और परिचालन तत्परता में एक रणनीतिक छलांग भी है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सामाजिक कल्याण के लिए सुभाषितम के माध्यम से परोपकारी विचारों की शक्ति पर जोर दिया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सामाजिक कल्याण को आगे बढ़ाने में परोपकारी सोच के महत्व पर जोर दिया है।

श्री मोदी ने इस बात का उल्‍लेख किया कि अच्‍छी सोच और सकारात्मक संकल्प को बढ़ावा देने से सभी प्रयासों की पूर्ति होती है, जो इस शाश्वत संदेश को सुदृढ़ करती है कि व्यक्तिगत सद्गुण सामूहिक प्रगति में योगदान देता है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्राचीन ज्ञान का संदर्भ देते हुए कहा :

“कल्याणकारी विचारों से ही हम समाज का हित कर सकते हैं।

यथा यथा हि पुरुषः कल्याणे कुरुते मनः।

तथा तथाऽस्य सर्वार्थाः सिद्ध्यन्ते नात्र संशयः।।”

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भारतीय रेलवे ने अपने सबसे कठिन घाट खंडों में से एक, सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड का विद्युतीकरण पूरा किया

नई दिल्ली – भारतीय रेलवे ने सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट खंड के विद्युतीकरण को पूरा करके इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह खंड भारतीय रेलवे नेटवर्क के सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भूभागों में से एक है।

28 दिसंबर 2025 को सफल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परीक्षण के साथ यह उपलब्धि हासिल हुई। इसके साथ ही, यह खंड अब  इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के परिचालन के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस घाट खंड के विद्युतीकरण के साथ, समूचा बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग अब पूर्णतः विद्युतीकृत हो गया है। इससे क्षेत्र में रेल संपर्क, परिचालन दक्षता और स्थिरता में सुधार होगा। यह परियोजना वंदे भारत और अन्य तीव्र गति वाली इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के परिचालन को भी सक्षम बनाएगी, जिससे तटीय क्षेत्र में तेज़, स्वच्छ और अधिक विश्वसनीय यात्रा संभव हो सकेगी।

सकलेशपुर और सुब्रमण्य रोड के बीच स्थित घाट खंड का विद्युतीकरण 55 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह भूभाग अत्यंत जटिल है और रेलवे ट्रैक तक पहुँचने के लिए कोई सड़क नहीं है। इसमें 1:50 की तीव्र ढलान, 57 सुरंगें, 226 पुल और 108 कठिन मोड़ शामिल हैं। यह क्षेत्र मानसून के दौरान भूस्खलन के लिए भी अत्यधिक संवेदनशील है। इसलिए इस खंड का विद्युतीकरण करना एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग चुनौती थी।

विद्युतीकरण का कार्य दिसंबर 2023 में शुरू हुआ। इस परियोजना में पांच स्विचिंग स्टेशनों का निर्माण और पूर्ण ओवरहेड विद्युतीकरण शामिल था। सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, ट्रैक्शन पोल के बीच अधिकतम दूरी 67.5 मीटर रखी गई थी।

सुरंगों के विद्युतीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता थी। 57 सुरंगों में 427 मुख्य ब्रैकेट और 427 अतिरिक्त ब्रैकेट लगाए गए हैं। राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान और बैंगलोर विश्वविद्यालय के सहयोग से विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन किए गए। दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एंकरिंग की मजबूती की जांच करने हेतु प्रत्येक ब्रैकेट के स्थान पर पुल-आउट परीक्षण किए गए।

तीव्र ढलानों के लिए विशेष उपकरणों और मजबूत इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता थी। भारी वर्षा, भूस्खलन, मिट्टी के कटाव और चट्टान गिरने से कार्य  में कई बार व्यवधान आया। कई स्थानों पर, दूरस्थ और दुर्गम स्थलों तक सामान पहुँचाने के लिए रेल परिवहन का सहारा लेना पड़ा। पूरी परियोजना के दौरान कड़े सुरक्षा उपायों का पालन किया गया। तीव्र ढलानों के कारण, परियोजना  के दौरान सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करते हुए, काम को सावधानीपूर्वक योजना बनाकर पूरा किया गया।

विद्युतीकरण पूरा होने और परीक्षणों के सफल होने के साथ, घाट खंड अब पूरी तरह से इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के लिए तैयार है। इससे ईंधन की खपत कम होगी, उत्सर्जन घटेगा और परिचालन अधिक कुशल होगा। यह क्षेत्र में वंदे भारत सेवाओं सहित आधुनिक इलेक्ट्रिक सुपरफास्ट रेल सेवाओं की शुरुआत में भी सहायक होगा।

घाट के इस महत्वपूर्ण हिस्से के विद्युतीकरण से देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु और बंदरगाह शहर मंगलुरु के साथ-साथ अन्य तटीय वाणिज्यिक केंद्रों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध मजबूत होंगे। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के शुरू होने से लोगों और व्यावसायिक यात्राओं की सुगमता बढ़ेगी, जिससे तटीय क्षेत्र में व्यापार, सेवाओं और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

इस उपलब्धि के महत्व का उल्लेख करते हुए, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “अब हम इस मार्ग से मंगलुरु तक वंदे भारत ट्रेन चला सकेंगे।”

भारतीय रेलवे  ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99% से अधिक हिस्से का पहले ही विद्युतीकरण कर लिया है।  2014 से पहले के लगभग छह दशकों में केवल 21,801 किलोमीटर मार्ग की  तुलना में 2014 से अब तक 46,900 किलोमीटर से अधिक मार्ग का विद्युतीकरण किया जा चुका है।  2019 से 2025 के बीच लगभग 33,000 किलोमीटर मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जो लगभग जर्मनी के समूचे रेलवे नेटवर्क के बराबर है।

एक बार शेष छोटे खंडों के विद्युतीकरण पूरा होने के बाद, भारत  विश्व के सबसे बड़े पूर्णतः विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क में से एक होगा। यह स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिदिन लाखों यात्रियों के लिए विश्वसनीय रेल यात्रा के प्रति भारतीय रेलवे की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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