राँची जिला प्रशासन द्वारा सर्वधर्म सदभावना समिति के सहयोग की सराहना
आगामी पर्व-त्योहारों की शांतिपूर्ण तैयारी पर विस्तृत चर्चा
सोशल मीडिया पर गलत संदेशों से सावधान रहने की अपील
रांची,20.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक राँची श्री राकेश रंजन ने आज संयुक्त रूप से सर्वधर्म सदभावना समिति द्वारा आयोजित सदभावना सम्मान समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर आगामी पर्व-त्योहारों की तैयारी, शांतिपूर्ण आयोजन एवं समाज में भाईचारे को बनाए रखने हेतु विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची श्री कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वर नाथ, उप प्रशासक राँची नगर निगम राँची, श्री गौतम कुमार, सर्वधर्म सदभावना समिति के प्रमुख सदस्य डॉ. अजीत सहाय, श्री जय सिंह यादव, मो. इस्लाम, बार एसोसिएशन के सचिव और मुमताज़ खान, श्री परमजीत सिंह टिंकू, श्री तपेश्वर केसरी, अकीलुल रहमान एवं समाज के अन्य प्रबुद्धजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सर्वधर्म सदभावना समिति के निरंतर सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा,“सर्वधर्म सदभावना समिति के सदस्यों का जिला प्रशासन को लगातार मिलता रहा सहयोग सराहनीय है। इसी सहयोग के कारण राँची जिले में सभी पर्व-त्योहार भाईचारे एवं शांति के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो रहे हैं। मैं सभी सदस्यों से अपील करता हूँ कि आगामी सभी पर्वों में भी अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएँ, ताकि राँची जिला हर वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से सभी त्योहार मना सके।”
केवल सत्यापित एवं सकारात्मक संदेशों का ही आदान-प्रदान करें, ताकि समाज में शांति एवं सद्भाव बना रहे
उपायुक्त ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर विशेष चिंता जताते हुए कहा, “सोशल मीडिया पर अफवाहें, गलत एवं भड़काऊ संदेश समाज में अराजकता फैला सकते हैं। कृपया केवल सत्यापित एवं सकारात्मक संदेशों का ही आदान-प्रदान करें, ताकि समाज में शांति एवं सद्भाव बना रहे।”
वरीय पुलिस अधीक्षक राँची ने अपने संबोधन में कहा,“राँची पुलिस को सर्वधर्म सदभावना समिति एवं समाज के प्रबुद्धजनों का हमेशा पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहा है। इसी सहयोग के बल पर हम राँची जिले में सभी पर्व-त्योहारों को बेहतरीन ढंग से संपन्न कर पाते हैं। हम सभी से अपेक्षा करते हैं कि आगे भी यह सहयोग जारी रहेगा।”
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण बनाने हेतु प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की पहल
*जनता दरबार में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों की विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं जिनमें भूमि विवाद एवं दाखिल-खारिज,जाति, आय, आवासीय एवं स्थानीय प्रमाण-पत्र निर्गमन एवं सुधार एवं अन्य शिकायत
“जनता दरबार प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारा प्रयास है कि कोई भी नागरिक बिना वजह परेशान न हो और उसकी शिकायत का समाधान पारदर्शी एवं त्वरित रूप से हो:- उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची, 20.01.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार का लगातार आयोजन किया जा रहा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की समस्याओं को सुनना, उनका त्वरित निस्तारण करना तथा प्रशासन को जन-केंद्रित एवं पारदर्शी बनाना है।
जनता दरबार में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों की विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
भूमि विवाद एवं दाखिल-खारिज संबंधी मामले
जाति, आय, आवासीय एवं स्थानीय प्रमाण-पत्र निर्गमन एवं सुधार
पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग) से जुड़ी शिकायतें
मनरेगा, कृषि ऋण माफी, केसीसी एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लंबित भुगतान
अन्य राजस्व एवं प्रशासनिक मामलों से संबंधित परेशानियाँ
इनमें से अधिकांश मामलों का त्वरित गति से निष्पादन किया जा रहा है। कई शिकायतों का मौके पर ही समाधान हुआ। जो मामले जटिल हैं, लंबित हैं या तुरंत समाधान संभव नहीं है, उन पर नियम-संगत कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों/कार्यालयों को अग्रसारित कर दिया जाता है।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जनता दरबार के दौरान प्रखंड एवं अंचल कार्यालय में वे स्वयं उपस्थित रहें। इससे आम नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी तथा उनकी समस्याओं का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा।
विभिन्न अंचलों में निष्पादित आवेदनों का विवरण निम्नलिखित है:
अंचल कार्यालय, राहे
कुल निष्पादित मामले: -58
1. पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र: 01
2. ऑनलाइन पंजी-II सुधार: 02
3. जाति प्रमाण पत्र: 10
4. आय प्रमाण पत्र: 15
5. आवासीय प्रमाण पत्र: 30
अंचल कार्यालय, अनगड़ा
निष्पादित आवेदन: 106
1. दाखिल-खारिज: 32
2. आवासीय प्रमाण पत्र: 20
3.जाति प्रमाण पत्र: 15
4. आय प्रमाण पत्र: 25
5. पंजी-II सुधार: 09
6. परमिशन: 04
7. पारिवारिक सदस्यता: 01
अंचल कार्यालय, खलारी
कुल निष्पादित आवेदन: *28
1. जाति प्रमाण पत्र: 04
2. आवासीय प्रमाण पत्र: 09
3. तत्काल आवेदन: 06
4. आय प्रमाण पत्र: 06
5. पारिवारिक प्रमाण पत्र: 02
6. आचरण प्रमाण पत्र: 01
अंचल कार्यालय, सिल्ली
कुल निष्पादित आवेदन: 42
1. तत्काल (जाति, आय, आवासीय): 05
2. आचरण प्रमाण पत्र: 04
3. आवासीय प्रमाण पत्र: 11
4. जाति प्रमाण पत्र: 07
5. आय प्रमाण पत्र: 15
अंचल कार्यालय, नगड़ी
कुल निष्पादित आवेदन: 160
1. तत्काल (जाति, आय, आवासीय): 01
2. आवासीय प्रमाण पत्र: 24
3. जाति प्रमाण पत्र: 54
4.+आय प्रमाण पत्र: 69
5. पारिवारिक सदस्यता: 03
6. दाखिल-खारिज: 01
7. सुधार वशुधा: 08
अंचल कार्यालय, बेड़ो
कुल निष्पादित आवेदन: 80
1. दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र: 12
2. पंजी-II सुधार: 01
3. पारिवारिक सदस्यता: 01
4. EWS प्रमाण पत्र: 08
5. आवासीय प्रमाण पत्र: 16
6. जाति प्रमाण पत्र: 17
7.आय प्रमाण पत्र: 10
8.:तत्काल आवेदन: 11
9.परमिशन: 04
अंचल कार्यालय, चान्हो
कुल निष्पादित आवेदन: 136
1. दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र: 09
2. पारिवारिक सदस्यता: 08
3. आवासीय प्रमाण पत्र: 45
4. जाति प्रमाण पत्र: 30
5. आय प्रमाण पत्र: 30
6. तत्काल आवेदन: 14
अंचल, कार्यालय बुढमू
कुल निष्पादित आवेदन की क्रमवार संख्या- 60
1. आवासीय प्रमाण पत्र- 10
2. जाति प्रमाण पत्र- 8
3. आय प्रमाण पत्र- 21
4. पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र – 03
5. DCLR Module- 4
6. 46(i) a अनुमति वाद – 1
7. दाखिल खारिज- 11
8. पंजी II सुधार – 2
श्री भजन्त्री ने कहा, “जनता दरबार प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारा प्रयास है कि कोई भी नागरिक बिना वजह परेशान न हो और उसकी शिकायत का समाधान पारदर्शी एवं त्वरित रूप से हो। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
यह पहल राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों के अनुरूप है तथा जिला प्रशासन द्वारा लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। नागरिकों से अपील है कि वे अपनी समस्याओं के साथ निकटतम प्रखंड/अंचल कार्यालय में हर मंगलवार को जनता दरबार में पहुंचें तथा लाभ उठाएं।
अंचल अधिकारी इटकी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज किया एवं नगड़ी के राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई करने का निर्देश
अंचल अधिकारी सोनाहातु एवं कर्मचारी को शो-कॉज करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया
16 परिवारों के लोग पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश
100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत पर कार्रवाई
रांची,20.01.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने 19 जनवरी 2025 को समाहरणालय अवस्थीत कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन किया।
इस दरबार में जिले के सुदूर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में नागरिक अपनी विभिन्न समस्याओं एवं फरियाद लेकर पहुंचे।
लोगों ने मुख्य रूप से भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े मामले, प्रमाण-पत्रों का निर्गमन, राजस्व संबंधी प्रकरण, जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ में विलंब तथा विकास कार्यों से जुड़ी अन्य शिकायतें उपायुक्त के समक्ष रखीं।
श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रत्येक आवेदक की समस्या को पूर्ण गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण एवं समय-सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, विलंब या लंबित शिकायत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
उपायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा कि जनता दरबार का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को एक ही मंच पर सभी विभागों की उपस्थिति में त्वरित, सरल, पारदर्शी और न्यायसंगत समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर स्वयं स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच करें तथा गंभीर प्रकृति के मामलों में तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।
श्री भजन्त्री ने आगे कहा, “शासन प्रणाली को जन-केन्द्रित एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में जनता दरबार एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। किसी भी शिकायत का अनावश्यक लंबित रहना प्रशासन के लिए स्वीकार्य नहीं है।”
अंचल अधिकारी इटकी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज किया एवं नगड़ी के राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई करने का निर्देश
अली हसन उम्र -90 वर्ष स्व. पिता शहादत अली इनलोगों में सारें वारिसों में सम्पति का बंटवारा हो चुका है, सभी अपने-अपने हिस्से में काबिज हैं। इन्होंने अपनी पूर्वजों से मिली जमीन का जमाबन्दी कराने के लिए इटकी अंचल में आवेदन दिया। लेकिन इन्हें अंचल अधिकारी और कर्मचारी द्वारा बार-बार दौड़ने की बात उपायुक्त से कही गई, जिसपर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अंचल अधिकारी इटकी मो. अनीश को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज करते हुए, साथ ही नगड़ी के सम्बंधित राजस्व कर्मचारी अनीता हेमरोम पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अंचल अधिकारी सोनाहातु एवं कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया
प्रकाश कुमार महतो पिता स्व. निशिकांत ग्राम+पोस्ट – सोनाहातु ने सोनाहातु अंचल में पंजी -2 सुधार के लिए अगस्त 2024 में आवेदन दिया। लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी इनके पंजी- 2 में सुधार नही किया गया। जनता दरबार में आई शिकायत पर उपायुक्त ने कार्रवाई करते हुए अंचल अधिकारी सोनाहातु श्री मनोज कुमार महथा एवं कर्मचारी को शो-कॉज करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया।
सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामलें को गंभीरता पूर्वक देखने का निर्देश दिया गया
जनता दरबार में ग्राम बादालु निवासियों ने बसंतपुर से ग्राम बादालु में आदिवासी सरना पूजा स्थल घेराव अनियमिता की शिकायत किया। जिसपर उपायुक्त ने तत्काल निर्देश देते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामलें को गंभीरता पूर्वक देखने का निर्देश दिया।
त्वरित संज्ञान लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामले को की जाँच करने के निर्देश
बुढ़मू निवासी भुटकी देवी ने जनता दरबार में उपायुक्त से शिकायत करते हुए कहा की बुढ़मू थाना में दर्ज कांड में बनाए आरोपी कामेश्वर यादव पिता लुरका यादव, द्वारा दुर्व्यवहार एवं शोषण करने की शिकायत की जिसपर उपायुक्त द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामले को की जाँच करने के निर्देश दिया।
16 परिवारों के सदस्य पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश
गेतलसुद डैम से 1962 में विस्थापित 16 परिवारों द्वारा 1966 में बुड़मू अंचल, मौजा साड़म में कुल 104.67 एकड़ जमीन खरीदी गई (खाता 22, 48, 78, 91, 94-96, 100-104, 109, 112, 170 आदि) जिसपर 1966 से निरंतर कब्जा एवं खेती किया जा रहा हैं। 2014 से भूमि अभिलेख ऑनलाइन नहीं हो पाया है, जिस कारण भू-माफियाओं द्वारा वर्तमान में 15-20 एकड़ पर JCB, ट्रेक्टर से अवैध समतलीकरण, घेराबंदी एवं सरकारी तालाब नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। 16 परिवारों के सदस्य पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई एवं भूमि रिकॉर्ड शीघ्र ऑनलाइन करने की मांग करने की मांग उपायुक्त से की जिसपर उनके द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक राँची एवं अनुमंडल पदाधिकारी को जाँच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
वरीय पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए
जनता दरबार में पुनम देवी राँची जिले के बुडमू थाना क्षेत्र के ग्राम साइम की निवासी ने बताया कि इनके पैतृक धार्मिक भूमि पर चोरी हुई, साथ ही इनके मार-पीट की गई जिससे इनके गर्भ में पल रहें चार महीने का गर्भ गिर गया जिसको लेकर इन्होंने स्थानीय थाने में FIR दर्ज कराई लेकिन आरोपी के प्रभावशाली होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसपर उपायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया।
आवेदक द्वारा अंचल अधिकारी नामकुम पर मनगढ़ंत आरोप लगाने वाले आवेदक पर जाँच कर कार्रवाई करने के निर्देश
जनता दरबार में सुरेखा कुमारी पिता /पति विनोद यादव ग्राम डुंगरी थाना नामकुम, अंचल नामकुम अपने दाखिल ख़ारिज वाद को लेकर अंचल अधिकारी नामकुम के ऊपर आरोप लगाया, जिसपर उपायुक्त ने तत्काल सत्यता की जाँच करने पर पाया की लगाया गया आरोप सही नही है। इस तरह के आरोप पर उपायुक्त ने सम्बंधित अधिकारी को जाँच करने के निर्देश दिया। ताकि कोई आवेदक ऐसा मनगढ़ंत आरोप किसी भी पदाधिकारी के ऊपर न लगा पाए।
100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत पर कार्रवाई
जनता दरबार में वार्ड नंबर 53 के वासियों ने वार्ड संख्या-53 के 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत की जिसपर उपायुक्त ने इसे गंभीरता पूर्वक लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को तत्काल जाँच कर अविलंब कार्य रोकने का निर्देश दिया।
जनता दरबार के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों में राहत एवं संतोष की भावना दिखाई दी। लोगों ने उपायुक्त की इस पहल की खुलकर सराहना की तथा कहा कि इस प्रकार का सीधा संवाद जिला प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत करता है।
जिला प्रशासन की यह निरंतर प्रयास आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में तेजी लाने एवं प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सराहनीय कदम साबित हो रहा है।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 20 जनवरी 2026 को लोकायन 26 की अपनी मुख्य यात्रा पर निकलेगा, जो 10 महीने का एक ट्रांसओशनिक अभियान है। भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और वसुधैव कुटुंबकम की सोच को समुद्रों के पार दर्शाते हुए, यह शिप 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों से गुजरते हुए 22,000 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा करेगा।
इस तैनाती का एक मुख्य आकर्षण आईएनएस सुदर्शिनी का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप कार्यक्रमों–एस्केल ए सेट फ्रांस में और अमेरिका के न्यूयॉर्क में एसएआईएल 250 में हिस्सा लेना होगा। इन दोनों कार्यक्रमों में, आईएनएस सुदर्शिनी भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत और समुद्री परंपराओं का प्रतिनिधित्व करेगा।
यात्रा के दौरान, 200 से अधिक भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के प्रशिक्षु गहन सेल प्रशिक्षण लेंगे, जिससे उन्हें लंबी दूरी के समुद्री नेविगेशन और समुद्र में पारंपरिक नौकायन का अमूल्य अनुभव मिलेगा। यह तैनाती प्रशिक्षुओं को बड़े जहाज पर जीवन की बारीकियों से परिचित कराएगी और उन्हें दूसरी नौसेनाओं के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत करने के अवसर प्रदान करेगी, जिससे पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और दोस्ती के स्थायी बंधन बनेंगे।
आईएनएस सुदर्शिनी आने वाले देशों की नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण क्रियाकलाप और समुद्री साझेदारी कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेगी, जिससे सामुद्रिक सहयोग मजबूत होगा और महासागर के विजन को आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह यात्रा सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जो देशों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास के पुल बनाने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
आईएनएस सुदर्शिनी, भारतीय नौसेना का दूसरा सेल प्रशिक्षण जहाज अब तक 1,40,000 नॉटिकल मील से अधिक की दूरी तय कर चुका है। लोकायन 26 के जरिए यह वैश्विक मंच पर भारत की सामुद्रिक शक्ति, व्यावसायिकता और सद्भावना की मिसाल बनी हुई है।
केवल दो सप्ताह में 4.5 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन प्रदान किया
नई दिल्ली – भारतीय रेल ने मौनी अमावस्या के दौरान रेल यातायात का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया और 3 जनवरी 2026 से देशभर में 244 विशेष रेलगाडि़यां चलाईं, जिससे श्रद्धालुओं की सुगम और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित हुई। उत्तरी रेलवे (एनआर) की 31, उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की 158 और उत्तर पूर्वी रेलवे (एनईआर) की 55 रेलगाडि़यों द्वारा संचालित इन रेलगाडि़यां से लगभग 4.5 लाख यात्रियों ने यात्रा की। त्योहारों के दौरान परेशानी मुक्त और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सेवाओं की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई और उनका प्रबंधन किया गया।
प्रयागराज में 18 जनवरी को त्यौहार से जुड़ी सर्वाधिक भीड़-भाड़ रही, जिस दौरान 40 विशेष रेलगाडि़यां चलाई गईं, जिनमें 11 एनआर (राष्ट्रीय रेलवे), 22 एनसीआर (राष्ट्रीय रेलवे) और 7 एनईआर (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र) की रेलगाडि़यां शामिल थीं, जिनसे लगभग 1 लाख यात्रियों ने यात्रा की। उल्लेखनीय रूप से ,सभी नियमित रेलगाडि़यां निर्धारित समय पर चलीं, जो भारतीय रेल की प्रभावी योजना और परिचालन दक्षता को दर्शाती हैं।
इन विशेष रेलगाडि़यां का सफल संचालन त्यौहारों के सर्वाधिक व्यस्त समय में यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रेलवे व्यापक स्तर पर यात्री आवागमन को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए प्रौद्योगिकी, संसाधन योजना निर्माण और विभिन्न जोनों के बीच समन्वय का निरंतर लाभ उठा रहा है।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की 88वीं बैठक आज नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
इस बैठक में स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत, संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में और उसके आसपास स्थित सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और अवसंरचना विकास से संबंधित 70 प्रस्तावों पर विचार किया। इन प्रस्तावों पर पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श किया गया।
समिति ने जिन प्रमुख सार्वजनिक उपयोगिता प्रस्तावों पर चर्चा की, उनमें जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावर की स्थापना और ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण शामिल था। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश में मध्यम सिंचाई परियोजना से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार किया गया। यह परियोजना एक तरफ बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की बेहतर आपूर्ति प्रदान करने का उद्देश्य रखती है, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए उन्नत जल प्रबंधन को बढ़ावा देने में सहायक है।
स्थायी समिति ने लद्दाख और सिक्किम में स्थित सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रणनीतिक अवसंरचना से संबंधित 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, वन्यजीव संरक्षण उपायों और पर्यावरण सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए, समिति के निर्देशों और लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप इन प्रस्तावों की अनुशंसा की गई।
समिति ने पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों और जारी किए गए निर्देशों पर आधारित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) की समीक्षा की। इसमें विशेष रूप से नीतिगत सुधारों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें ‘परिवेश पोर्टल’ को बेहतर बनाना भी शामिल है। यह निर्णय लिया गया कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी नीतियों, कार्यक्रमों और एससी-एनबीडब्ल्यूएल के निर्देशों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आगामी बैठकों में और गहन चर्चा की जाएगी।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसका उद्देश्य सरकार को वन्यजीवों और वनों के संरक्षण एवं सुरक्षा से जुड़े मामलों में उचित परामर्श देना है। इसके साथ ही, यह समिति संरक्षित क्षेत्रों और उनके आसपास विकास गतिविधियों को संतुलित और टिकाऊ तरीके से सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाती है।
नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ. सिंह ने श्री विजयपुरम में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र का दौरा करते हुए द्वीपों की जैव विविधता के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।
इस अवसर पर वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह “जैव विविधता की एक जीवंत प्रयोगशाला” है, जहां अत्याधुनिक विज्ञान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जेडएसआई जैसे संस्थान प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और महासागर आधारित आर्थिक विकास पर राष्ट्रीय नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं।
इस यात्रा के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह का स्वागत वैज्ञानिक-एफ और प्रभारी अधिकारी डॉ. सी. शिवपेरुमन ने किया। उन्होंने क्षेत्रीय केंद्र के उद्देश्य, हाल जारी अनुसंधान कार्यक्रमों और द्वीपों की अनूठी जीव विविधता के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और निगरानी में इसके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी। उन्हें विशेषकर वर्गीकरण, आणविक प्रणाली विज्ञान, डीएनए बारकोडिंग, जैव विविधता मूल्यांकन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में जेडएसआई के कार्यों की जानकारी दी गई।
1977 में स्थापित, जेडएसआई के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र ने निरंतर वैज्ञानिक सेवा के पांच दशक पूरे कर लिए हैं। यह उष्णकटिबंधीय द्वीप जैव विविधता अनुसंधान के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है, जिसने विभिन्न जीव समूहों में लगभग 90 अनुसंधान कार्यक्रम पूरे किए हैं। इस केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 85 पुस्तकें और 850 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, जिससे भारत के जैव विविधता ज्ञान भंडार में महत्वपूर्ण योगदान हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने द्वीपसमूह के प्रमुख पर्यटन और शैक्षिक स्थलों में से एक जेडएसआई संग्रहालय का भी दौरा किया जिसमें 22 जीव-जंतु समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 3,500 नमूने रखे गए हैं। उन्हें जन-जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में संग्रहालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई, जहां छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों सहित प्रतिवर्ष 75,000 से 1,00,000 आगंतुक आते हैं। डॉ. सिंह ने द्वीपसमूह के स्थानिक, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त जीव-जंतुओं को प्रदर्शित करने वाले संदर्भ संग्रह, नमूनों और प्रदर्शनियों में गहरी रुचि दिखाई।
उन्हें जानकारी दी गई कि केंद्र के वैज्ञानिकों ने विज्ञान के लिए 20 से अधिक नई प्रजातियों की पहचान की है, जिनमें नारकोंडम ट्री श्रू भी शामिल है। इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण पूर्व एशिया से करीब 900 नए जीव-जंतुओं के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। यह खोज इस क्षेत्र की जैव विविधता के वैश्विक महत्व को उजागर करती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह को पोर्ट ब्लेयर स्थित जेडएसआई की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई जो भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआरआई) का नोडल केंद्र है। इसका उद्देश्य भारतीय जलक्षेत्र में प्रवाल भित्ति अनुसंधान और निगरानी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशिष्ट संस्थान नाजुक समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित समुद्री शासन को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से बातचीत करते हुए सार्वजनिक नीति, संरक्षण योजना और सामुदायिक जागरूकता के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के अधिक एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने और सतत तरीके से समुद्री अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का एहसास कराने के लिए सशक्त वैज्ञानिक संस्थान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं
इस केंद्र में हो रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने विस्तृत जानकारी और संग्रहालय के भ्रमण के लिए डॉ. शिवपेरुमान और जेडएसआई टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस यात्रा को एक “अत्यधिक ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद अनुभव” के रूप में वर्णित किया। डॉ. सिंह ने कहा कि सुव्यवस्थित प्राणी संग्रह न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि भारत की समृद्ध जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के वीर कर्मियों के साहस, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इसके स्थापना दिवस के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
एक एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा:
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के स्थापना दिवस के अवसर पर, हम उन सभी पुरुष तथा महिलाओं के प्रति अपनी गहन सराहना व्यक्त करते हैं, जिनकी पेशेवर दक्षता और दृढ़ संकल्प संकट की घड़ियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। आपदा के समय सदैव अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर, एनडीआरएफ के कर्मचारी अपने परिश्रम से मानव जीवन की रक्षा, राहत कार्यों का संचालन तथा अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आशा का संचार करते हैं। उनका कौशल और कर्तव्यनिष्ठा सेवा के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करती है। इन वर्षों के दौरान, एनडीआरएफ ने आपदा के लिए तैयारी एवं आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया के क्षेत्र में एक मानक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान अर्जित किया है।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवानों को बल के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी है।
X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “NDRF के कर्मियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं। आपदा-प्रतिरोधी भारत बनाने के मोदी सरकार के संकल्प को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के जरिए NDRF आज विश्वास का वह स्तंभ बन गया है जिस पर देश आपदाओं के दौरान भरोसा करता है। दूसरों की सुरक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले शहीदों को नमन।”
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना ने 16 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप के द्वीपों में पांच दिवसीय संयुक्त सेवा मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक समापन किया। कावारत्ती, अगात्ती, अमीनी, एंड्रोथ और मिनिकॉय द्वीपों पर आयोजित इस कैंप ने बिना किसी रुकावट के इंटर-सर्विसेज सहयोग के ज़रिए दूरदराज के द्वीपीय समुदायों को अच्छी क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा और निवारक सेवाएं देने के लिए सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस कैंप का उद्घाटन 12 जनवरी 2026 को हुआ था और इसे लक्षद्वीप केन्द्र शासित प्रदेश के नागरिक प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा विभागों का पूरा समर्थन मिला।
इस कैंप को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली, 4,719 मरीज़ों ने स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से सलाह ली। लक्षद्वीप में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मेडिकल कैंप लगाया गया, जिसमें स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की एक बड़ी श्रृंखला उपलब्ध थी, जिससे एडवांस्ड हेल्थकेयर तक पहुंच में काफी सुधार हुआ। टीम में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के एक्सपर्ट शामिल थे, जिन्हें मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, ऑप्थल्मोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, डेंटल सर्जरी, रेडियोलॉजी और कम्युनिटी मेडिसिन के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का सपोर्ट मिला।
मेडिकल टीमों और उपकरणों की तेज़ी से तैनाती, साथ ही हर द्वीप पर पूरी तरह से काम करने वाली मेडिकल सुविधाओं की स्थापना ने तीनों सेनाओं के बीच उच्च स्तर के तालमेल और एकजुटता को दिखाया। कर्मियों और संवेदनशील मेडिकल उपकरणों की योजनाबद्ध एयरलिफ्ट और सीलिफ्ट ने प्रभावी इंटर-सर्विसेज तालमेल का प्रदर्शन किया।
सभी द्वीपों पर व्यापक मेडिकल और सर्जिकल सेवाएं प्रदान की गईं। कुल 51 सामान्य सर्जिकल प्रक्रियाएं की गईं, जिससे भूमि के मुख्य अस्पतालों में रेफरल की आवश्यकता कम हो गई। नेत्र विज्ञान में, 71 मोतियाबिंद सर्जरी की गईं, जिससे कई बुजुर्ग मरीजों की रोशनी वापस आ गई। उन्नत डायग्नोस्टिक्स में 50 से अधिक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, 50 से अधिक इकोकार्डियोग्राफिक जांच और कार्डियक मूल्यांकन के लिए कई ट्रेडमिल टेस्ट शामिल थे। रेडियोलॉजी सेवाओं में 250 से अधिक अल्ट्रासाउंड जांच दर्ज की गईं, जबकि 100 से अधिक डेंटल प्रक्रियाएं और 30 से अधिक छोटी त्वचा संबंधी प्रक्रियाएं की गईं। सभी सेवाएं और दवाएं मुफ्त में प्रदान की गईं।
एक स्थायी योगदान के तौर पर, भारतीय नौसेना ने अगाती और अमीनी में हेल्थकेयर सुविधाओं को दो ईसीजी मशीनें दान कीं। निवारक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन शैली, कैंसर जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) प्रशिक्षण को कवर करते हुए व्यापक सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
लक्षद्वीप के लोगों और केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा व्यापक रूप से सराहे गए, संयुक्त सेवा बहु-विशिष्ट चिकित्सा शिविर अपनी व्यापकता, व्यावसायिकता और ठोस प्रभाव के लिए सबसे अलग रहा। एक एकीकृत त्रि-सेवा प्रयास के माध्यम से उन्नत चिकित्सा देखभाल प्रदान करके और निवारक स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करके, भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर देश के दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और अंडमान एवं निकोबार केंद्र शासित प्रदेश सरकार के बीच सहयोग होगा
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अंडमान सागर से भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के विशाल समुद्री संसाधनों के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को साकार करने की दिशा में पहले बड़े कदमों में से एक बताया, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी और लगातार इस पर जोर दिया गया है। इस परियोजना का शुभारंभ अंडमान सागर के खुले जल क्षेत्र के फील्ड दौरे के दौरान, नॉर्थ बे, श्री विजया पुरम में साइट पर ही किया गया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल भारत के समुद्रों की आर्थिक क्षमता के द्वार खोलने के लिए उठाए गए शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के समुद्रों में भी, हिमालय और मुख्य भूमि के संसाधनों की तरह ही, विशाल और विविध आर्थिक संभावनाएं मौजूद हैं, जिन पर दशकों तक उचित ध्यान नहीं दिया गया था।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लगभग सत्तर वर्षों तक, भारत के समुद्री संसाधन काफी हद तक अनछुए रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2014 के बाद से, राष्ट्रीय सोच में एक बुनियादी बदलाव आया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक विकास के लिए समान रूप से संपदा और अवसर रखता है। उन्होंने आगे भारत के समुद्रों की विशिष्ट और विविधतापूर्ण प्रकृति पर प्रकाश डाला और कहा कि पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तटों में से प्रत्येक की अपनी अलग विशेषताएं हैं और वे देश के विकास में अद्वितीय योगदान देने की क्षमता रखते हैं।
इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, इसकी तकनीकी शाखा राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन के बीच सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। यह पायलट पहल प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों में समुद्री फिनफिश और समुद्री शैवाल की ओपन-सी खेती पर केंद्रित है, जो वैज्ञानिक नवाचार को आजीविका सृजन के साथ जोड़ती है।
फील्ड विजिट के दौरान, आजीविका को बढ़ावा देने वाले दो प्रमुख कार्य शुरू किए गए। समुद्री वनस्पति के तहत, डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा स्थानीय मछुआरा समुदायों को समुद्री शैवाल के बीज सौंपे गए ताकि खुले समुद्र के गहरे पानी में इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा सके। समुद्री जीव वाले हिस्सों में पिंजरा-आधारित पालन के लिए फिनफिश के बीज प्रदान किए गए, जिसे एनआईओटी द्वारा विकसित उन ओपन-सी केज का सपोर्ट प्राप्त है जिन्हें प्राकृतिक समुद्री वातावरण में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि वर्तमान परियोजनाएं सरकार के नेतृत्व वाले सहयोग के माध्यम से संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनसे प्राप्त अनुभव और फिजिबिलिटी असेसमेंट भविष्य में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से ऐसी पहलों के विस्तार को सक्षम बना सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि यह दृष्टिकोण तकनीक की तैनाती को तेज करने, आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और भारत के ब्लू इकोनॉमी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।
बाद में, अपनी अंडमान द्वीप यात्रा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांडूर के पास स्थित महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान (एमजीएमएनपी) का भी दौरा किया। यह 1983 में स्थापित देश के अपनी तरह के पहले समुद्री उद्यानों में से एक है। 15 द्वीपों में फैले और वांडूर जेट्टी के माध्यम से सुलभ, यह पार्क जॉली बॉय और रेड स्किन जैसे अपने संरक्षित द्वीपों के लिए प्रसिद्ध है। डॉ. सिंह ने पार्क के समृद्ध और आत्मनिर्भर समुद्री इकोसिस्टम का अवलोकन किया, जिसमें जीवंत मूंगा चट्टानें, मैंग्रोव और कछुए व मछलियों की विभिन्न प्रजातियों जैसे विविध समुद्री जीवन शामिल हैं।
नॉर्थ बे से इस परियोजना का शुभारंभ विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सीधे कार्यक्षेत्र तक ले जाने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सुनिश्चित करता है कि तटीय और द्वीप समुदाय भारत के समुद्र-आधारित आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें।
नई दिल्ली – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) का भारत का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि, 17 जनवरी 2026 कोदक्षिणीनौसेनाकमान, कोच्चिसेसागरमैत्री (SM5) पहलकेपांचवेंसंस्करण के लिए रवाना हुआ।
इस पोत को माननीयसंसदसदस्यऔररक्षासंबंधीसंसदीयस्थायीसमितिकेअध्यक्षश्रीराधामोहनसिंहने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के माननीय सदस्य, डॉ. समीर वी. कामत, सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग और अध्यक्ष डीआरडीओ; रियर एडमिरल उपल कुंडू, चीफ ऑफ स्टाफ, दक्षिणी नौसेना कमान; डॉ. आर. वी. हारा प्रसाद, महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री); और डॉ. दुव्वुरी शेषागिरी, निदेशक, एनपीओएल के साथ भारतीय नौसेना और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
सागर मैत्री भारतीय नौसेना और डीआरडीओ की प्रमुख सहयोगी पहल है, जो भारत सरकार के ‘क्षेत्रोंमेंसुरक्षाऔरविकासकेलिएआपसीऔरसमग्रउन्नति (MAHASAGAR)’ के विजन के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर रिम (आईओआर) देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक पहलुओं में घनिष्ठ सहयोग और विशेष रूप से समुद्र अनुसंधान में अधिक वैज्ञानिक बातचीत को बढ़ावा देना है।
नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल), कोच्चि, आईओआर देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से सागर मैत्री कार्यक्रम के तहत समुद्र विज्ञान मिशन चला रही है। इस कार्यक्रम के तहत, डीआरडीओ ने समुद्र अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में आईओआर देशों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करने के लिए ‘ मैत्री‘ MAITRI यानीमरीनएंडएलाइडइंटरडिसिप्लिनरीट्रेनिंगएंडरिसर्चइनिशिएटिव)’ नामक वैज्ञानिक घटक शुरू किया है।
सागर मैत्री कार्यक्रम के तहत, आईएनएससागरध्वनिआईएनएसकृष्णाकेऐतिहासिकरास्तोंपरफिरसेचलेगी, जिसने 1962-65 केदौरानअंतरराष्ट्रीयहिंदमहासागरअभियानमेंहिस्सालियाथा। इस पहल का उद्देश्य आठआईओआरदेशों, यानीओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशियाऔरम्यांमार के साथ लगातार वैज्ञानिक सहयोग करना है। यह मिशन मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों की शुरुआत करता है, जिससे आईओआर देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त अनुसंधान और पेशेवर आदान-प्रदान संभव होगा।
सागर मैत्री भारतीय नौसेना के लिए प्रासंगिक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (यूडीए) हासिल करने की दिशा में डीआरडीओ के प्रयासों का मुख्य केंद्र है। इन मिशनों के दौरान, डीआरडीओ के अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि द्वारा तय किए गए ऑब्जर्वेशनल ट्रैक पर महत्वपूर्ण समुद्र विज्ञान और ध्वनिक डेटा इकट्ठा किया जाता है, जो यूडीए से संबंधित नियोजित वैज्ञानिक उद्देश्यों के अनुरूप होता है।
आईएनएस सागरध्वनि विशेष समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है जिसे एनपीओएल ने डिज़ाइन किया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाया है। जुलाई 1994 में कमीशन किया गया यह जहाज तीन दशकों से अधिक समय से समुद्री अवलोकन और समुद्री अनुसंधान के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में काम कर रहा है, जिसने भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल का जहाज (आईसीजीएस) संकल्प, जो एक अपतटीय गश्ती पोत है, 17 जनवरी, 2026 को मॉरीशस के पोर्ट लुइस पहुंचा। यह हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ चल रही अपनी विदेशी तैनाती का भाग है। यह यात्रा समुद्री सहयोग को मजबूत करने, अंतर-संचालनीयता बढ़ाने और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह तैनाती भारत के सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के समुद्री दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारतीय तटरक्षक बल द्वारा समुद्री अभियानों में लैंगिक समावेशिता पर दिए जा रहे जोर को ध्यान में रखते हुए, आईसीजीएस संकल्प पर दो महिला अधिकारियों को तैनात किया गया है जो सेवा में उनकी बढ़ती भूमिका और समुद्री क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पोर्ट लुई में अपने प्रवास के दौरान, यह जहाज मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल और मॉरीशस की अन्य समुद्री एजेंसियों के साथ कई पेशेवर वार्ताएं करेगा। इन वार्ताओं का उद्देश्य सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना और प्रमुख परिचालन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना बनाई गई है, जिसमें समुद्री और बंदरगाह अभ्यास, तेल प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास, क्षति नियंत्रण (एनबीसीडी) अभ्यास, साथ ही अग्निशमन अभ्यास शामिल हैं। प्रशिक्षण गतिविधियों में परिचालन समन्वय और तत्परता को बढ़ाने के लिए विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर (वीबीसीसी) संयुक्त प्रशिक्षण, नेविगेशन ब्रिज और मशीनरी कंट्रोल रूम (एमसीआर) एकीकरण अभ्यास भी शामिल होंगे।
परिचालन संबंधी गतिविधियों के अलावा, बंदरगाह पर होने वाले इस प्रवास में सौहार्दपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का आयोजन किया जाएगा जिसका उद्देश्य सौहार्द और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देना है। चालक दल के सदस्य सामुदायिक सेवा गतिविधियों में भी भाग लेंगे जो भारत के रचनात्मक सहयोग और सद्भावना के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। यह यात्रा भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करेगी जिससे आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को बल मिलेगा।
आईसीजीएस संकल्प की यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय समुद्री भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हुए समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मॉरीशस की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद, आईसीजीएस संकल्प हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी निरंतर विदेशी तैनाती के भाग के रूप में सेशेल्स के लिए रवाना होगा जिससे प्रमुख द्वीप देशों के साथ भारत की समुद्री पहुंच और सहयोग का और विस्तार होगा।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सरुसजाई स्टेडियम, गुवाहाटी में बागुरुम्बा दहोउ 2026 को संबोधित किया, जो बोडो समुदाय की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने वाला ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि असम संस्कृति और बोडो समुदाय की परंपराओं को नजदीक से देखने का अवसर पाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने रेखांकित किया कि कोई अन्य प्रधानमंत्री इतनी बार असम नहीं आये हैं, जितनी बार वे आये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को एक बड़ा मंच मिले और भव्य उत्सवों के माध्यम से इसे पूरे देश और विश्व में मान्यता मिले। उन्होंने उल्लेख किया कि इस दिशा में निरंतर प्रयास किये गये हैं, उदहारण के तौर पर – बड़े पैमाने पर बिहू उत्सव, झुमोइर बिनोन्दिनी की अभिव्यक्ति, सवा साल पहले नई दिल्ली में आयोजित भव्य बोडो महोत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वे असम की कला और संस्कृति की अनूठी विशेषताओं का अनुभव करने का कोई अवसर नहीं चूकते। उन्होंने कहा कि एक बार फिर, बागुरुम्बा उत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसका वर्णन बोडो पहचान के एक जीवंत उत्सव और असम की विरासत के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में किया। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों, विशेष रूप से कलाकारों को अपनी शुभकामनाएं और बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बागुरुम्बा दहोउ केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महान बोडो परंपरा को सम्मानित करने और बोडो समाज की महान विभूतियों को याद करने का एक माध्यम है। उन्होंने बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा, गुरुदेव कालीचरण ब्रह्मा, रूपनाथ ब्रह्मा, सतीश चंद्र बसुमतारी, मोरदाम ब्रह्मा, और काणकेश्वर नार्जारी जैसी विभूतियों को याद किया और सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राजनीतिक जागरूकता में उनके योगदान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बोडो समुदाय के सभी महान व्यक्तित्वों को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी असम की संस्कृति को पूरे देश का गर्व मानती है और भारत का इतिहास असम के अतीत और विरासत के बिना पूरा नहीं हो सकता है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार के तहत बागुरुम्बा दहोउ जैसे भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, बिहू को राष्ट्रीय मान्यता दी गई है और चारईदेन मोईदम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि असमी भाषा को प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है, और बोडो भाषा को असम की सहायक आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है, और बोडो शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए एक अलग निदेशालय स्थापित किया गया है। पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रतिबद्धता के कारण बथोऊ धर्म को पूर्ण सम्मान और मान्यता दी गई है, और बथोऊ पूजा को राज्य अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार के तहत योद्धा लचित बोरफुकन की भव्य मूर्ति स्थापित की गई है और बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा की मूर्ति का अनावरण किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि श्रीमंत शंकरदेव की भक्ति और सामाजिक सद्भाव की परंपराओं तथा ज्योति प्रसाद अग्रवाल की कला और चेतना को असम की विरासत के रूप में सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि है और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।
असम का दौरा करने को लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि वे यह देखकर बहुत प्रभावित हैं कि राज्य कितनी प्रगति कर चुका है। उन्होंने याद किया कि ऐसा समय भी था, जब रक्तपात आम था, लेकिन आज संस्कृति के रंग चमक रहे हैं; ऐसा समय था, जब बंदूक की गोली गूँजती थी, लेकिन अब खाम और सिफुंग की मधुर ध्वनियाँ गूंजती हैं; ऐसा समय था, जब कर्फ्यू से सन्नाटा छा जाता था, लेकिन अब संगीत गूँज रहा है; अशांति और अस्थिरता का समय था, लेकिन अब बागुरुम्बा के मनोरम प्रदर्शन हो रहे हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ऐसा भव्य उत्सव केवल असम की उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की उपलब्धि है, और देश का हर नागरिक असम के बदलाव पर गर्व महसूस करता है।
प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि असम की जनता और उनके बोडो भाइयों और बहनों ने उन पर विश्वास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में उनकी सरकारों को शांति और विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और लोगों के आशीर्वाद से उस जिम्मेदारी को पूरा किया गया। श्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि 2020 के बोडो शांति समझौते ने दशकों से चल रहे संघर्ष को समाप्त किया, विश्वास को बहाल किया और हजारों युवाओं को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद बोडो क्षेत्र में शिक्षा और विकास में नए अवसर उभरे और शांति रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई, जिसमें लोगों के प्रयासों ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि असम की शांति, विकास और गर्व के केंद्र में उसके युवा हैं, जिन्होंने शांति का मार्ग चुना है, श्री मोदी ने कहा कि इसे उज्जवल भविष्य की ओर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शांति समझौते के बाद से सरकार लगातार बोडोलैंड के विकास के लिए काम कर रही है, पुनर्वास प्रक्रिया को गति दे रही है और हजारों युवाओं को नई शुरुआत करने में मदद करने के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार के प्रयासों के परिणाम आज दिखाई दे रहे हैं, प्रतिभाशाली बोडो युवा असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं, खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, नए आत्मविश्वास के साथ सपने देख रहे हैं, उन सपनों को पूरा कर रहे हैं और असम की प्रगति को गति दे रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि जब भी असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान किया जाता है, कुछ लोग परेशान हो जाते हैं। यह पूछते हुए कि असम के सम्मान की सराहना कौन नहीं करता, श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी पार्टी ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का विरोध किया और ये वही लोग थे जिन्होंने असम में सेमीकंडक्टर इकाई का विरोध किया था। श्री मोदी ने कहा कि आज भी, जब वे असम की संस्कृति से जुड़ी कोई वस्तु पहनते हैं, तो वही विपक्ष इसका मज़ाक उड़ाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि असम और बोडोलैंड दशकों तक केवल विपक्ष के कारण मुख्यधारा से कटे रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए असम में अस्थिरता पैदा की और राज्य को हिंसा की आग में धकेल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद असम को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन समाधान खोजने के बजाय, उस समय की सत्तारूढ़ व्यवस्था ने उन समस्याओं का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए दुरुपयोग किया। विपक्षी पार्टी की आलोचना करते हुए, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भरोसे की जरूरत थी, तब उन्होंने विभाजन बोया; जब संवाद की जरूरत थी, तब उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और संचार के द्वार बंद कर दिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बोडोलैंड की आवाज कभी ठीक से सुनी नहीं गई। उन्होंने कहा कि जब असम को उपचार और सेवा की जरूरत थी, तब उन्होंने इसके बजाय घुसपैठियों के लिए द्वार खोल दिए और उनके स्वागत पर ध्यान केंद्रित किया।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि विपक्षी पार्टी असम के लोगों को अपना नहीं मानती, बल्कि विदेशी घुसपैठियों को तरजीह देती है जो उसके वफादार वोट बैंक बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के शासन में घुसपैठिए आते रहे, लाखों बीघा जमीन पर कब्जा किया और उन्हें सरकारों की मदद मिलती रही। पीएम मोदी ने खुशी जताई कि आज, श्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, सरकार लाखों बीघा जमीन को घुसपैठियों से मुक्त करवा रही है और इसे असम के योग्य लोगों को वापस कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष हमेशा असम और पूरे उत्तर-पूर्व को नजरअंदाज करता रहा, जानबूझकर इस क्षेत्र को कठिनाइयों में धकेलता रहा और उसने कभी इसके विकास को महत्वपूर्ण नहीं माना।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विपक्ष के पापों को साफ करने का काम उनकी केंद्र और राज्य की सरकारें कर रही हैं और आज दिखाई दे रही विकास की रफ्तार इसका प्रमाण है। उन्होंने बोडो-कचारी कल्याण स्वायत्त परिषद के गठन, बोडोलैंड के लिए 1500 करोड़ रुपये के विशेष विकास पैकेज का आवंटन, कोकराझार में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना और तामुलपुर में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की गति तेज करने का उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि नर्सिंग कॉलेज और पैरा-मेडिकल संस्थान युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं, जबकि गोबरधना, पर्वतझोरा और होरिसिंगा में पॉलिटेक्निक और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए गए हैं।
श्री मोदी ने यह रेखांकित किया कि एक पृथक कल्याण विभाग और बोडोलैंड प्रशासनिक कर्मचारी कॉलेज भी स्थापित किए गए हैं, जिससे बोडो समुदाय के कल्याण के लिए बेहतर नीति निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बेहतर अवसंरचना के माध्यम से दूरी को पाट दिया है—दिलों के बीच, असम और दिल्ली के बीच, और असम के भीतर भी। पहले जहां पहुंचना कठिन था, अब वहां राजमार्ग हैं, और नई सड़कें अवसर प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कोकराझार को भूटान सीमा से जोड़ने वाली बिशमुरी-सरलपारा सड़क परियोजना का उदाहरण दिया, जिसके लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए हैं, और प्रस्तावित कोकराझार–गेलेफु रेलवे परियोजना का भी जिक्र किया, जिसे विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया गया और एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा बनाया गया है, जो व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगी।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, जब संवाद और विश्वास मजबूत होते हैं, और जब समान अवसर सभी वर्गों तक पहुँचते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है। उन्होंने कहा कि असम और बोडोलैंड इस दिशा में प्रगति कर रहे हैं, असम का आत्मविश्वास, क्षमता और प्रगति भारत की विकास गाथा में नई ताकत जोड़ रही है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि असम खुद को सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में स्थापित कर रहा है, इसकी अर्थव्यवस्था की गति तेज हो रही है, और बोडोलैंड और इसके लोग इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर से सभी को इस दिन के भव्य उत्सव के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, श्री पवित्रा मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री ने ‘‘बागुरुम्बा दहोउ 2026’’ में भाग लिया, जो एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम है और जिसे गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में बोडो समुदाय की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया।
इस अवसर पर, बोडो समुदाय के 10,000 से अधिक कलाकारों ने एक ही, समन्वित प्रस्तुति में बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया। राज्य के 23 जिलों के 81 विधानसभा क्षेत्रों के कलाकारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
बागुरुम्बा बोडो समुदाय के लोक नृत्यों में से एक है, जो प्रकृति से अत्यधिक प्रभावित है। यह नृत्य खिलते फूलों का प्रतीक है और मानव जीवन तथा प्राकृतिक दुनिया के बीच सामंजस्य को दर्शाता है। पारंपरिक रूप से इसे युवा बोडो महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, और पुरुष संगीतकार के रूप में साथ देते हैं। इस नृत्य में कोमल, प्रवाहमान भंगिमाएं होती हैं जो तितलियों, पक्षियों, पत्तियों और फूलों का अनुकरण करती हैं। प्रदर्शन आमतौर पर समूहों में आयोजित किए जाते हैं, प्रदर्शन में वृत्त या रेखाओं का निर्माण किया जाता है, जो इसकी दृश्य सुंदरता को बढ़ाते हैं।
बागुरुम्बा नृत्य का बोडो लोगों के लिए गहरा सांस्कृतिक महत्व है। यह शांति, उर्वरता, आनंद और सामूहिक सद्भाव का प्रतीक है, और यह बिसागु, बोडो नववर्ष, और डोमासी जैसे त्योहारों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
नई दिल्ली – रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने आज दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) 2026 का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत किए गए शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन कैडेट्स की लगन, प्रतिभा, अनुशासन और उत्साह को दर्शाता है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और एनसीसी के ध्येय वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ का जीवंत प्रतिबिंब है।
पिछले सात दशकों में एनसीसी द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना करते हुए, रक्षा सचिव ने रेखांकित किया कि एनसीसी ने युवा मानस को अनुशासन, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों के साथ ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में संगठन के सक्रिय योगदान पर जोर दिया। रक्षा सचिव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नागरिक सुरक्षा कर्तव्यों में एनसीसी कैडेट्स द्वारा दिखाए गए असाधारण साहस और समर्पण की प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने यमुना सफाई अभियान, रक्तदान शिविर और केरल के वायनाड में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यों जैसी सरकारी पहलों में उनके उत्कृष्ट योगदान को भी सराहा। कैडेट्स की बहुमुखी प्रतिभा का उल्लेख करते हुए उन्होंने शूटिंग, हॉकी और घुड़सवारी जैसे खेलों में उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने पर्वतारोहण, नौकायन और पैराशूटिंग जैसी साहसिक गतिविधियों पर एनसीसी के ध्यान की भी प्रशंसा की, जो युवाओं को फिटनेस, अनुशासन और दृढ़ता की ओर प्रेरित करने में मदद करते हैं।
अपने संबोधन के समापन में, श्री राजेश कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीसी द्वारा विकसित किए गए मूल्य जीवन भर बने रहते हैं और ऐसे जिम्मेदार नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करते हैं जो स्पष्ट सोच रख सकते हैं, न्यायपूर्ण कार्य कर सकते हैं और ईमानदारी व सत्यनिष्ठा को बनाए रख सकते हैं। कैडेट्स को विकसित भारत के वास्तुकार के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने उन्हें विनम्र, साहसी, जिज्ञासु और राष्ट्रीय आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के भाग के रूप में, रक्षा सचिव को कैडेट्स द्वारा विभिन्न सामाजिक जागरूकता विषयों पर आधारित ‘फ्लैग एरिया’ और ‘हॉल ऑफ फेम’ में प्रदर्शित एनसीसी के समृद्ध इतिहास और उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कैडेट्स ने स्टैटिक फंक्शनल शिप और एयरो मॉडलिंग के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात आज अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (ACOSTI) के दौरे के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में ब्लू इकोनॉमी और आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रमुख समुद्री प्रौद्योगिकी पहलों का शुभारंभ किया तथा उनकी समीक्षा की।
इस अवसर पर वैज्ञानिकों, अधिकारियों और हितधारकों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत तेजी से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, देश के भविष्य का आर्थिक मूल्य संवर्धन बड़े पैमाने पर अब तक अप्रयुक्त समुद्री संसाधनों से प्राप्त होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्लू इकोनॉमी पर सरकार का मजबूत फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसके अनुसार केवल मुख्य भूमि पर ध्यान केंद्रित कर तथा द्वीप क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रों को पीछे छोड़कर भारत का समग्र विकास संभव नहीं है।
यह कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) की इकाई अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स में, डॉलीगंज, श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से माननीय सांसद श्री बिष्णु पद राय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, NIOT एवं अन्य अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक, तथा स्थानीय विभागों और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
संसद में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के निरंतर और ऊर्जावान प्रतिनिधित्व की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि सतत पक्षधरता के कारण द्वीप विकास की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान और संसाधनों का प्रवाह सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और द्वीप क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसका प्रभाव अब क्षेत्र में वैज्ञानिक, प्रशासनिक और मंत्रिस्तरीय सहभागिता के बढ़ते स्तर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
डीप ओशन मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से इस मिशन की घोषणा एक बार नहीं बल्कि दो बार की, जो ब्लू इकोनॉमी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कम अन्वेषित रहे समुद्री संसाधन, पारंपरिक संसाधनों के क्षीण होने के साथ, भारत की विकास यात्रा को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ब्लू इकोनॉमी रोजगार सृजन, निर्यात, पर्यावरणीय सततता और समग्र आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान शुरू की गई और प्रदर्शित की गई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें समुद्री मछलियों की पायलट स्तर की ओपन-सी केज कल्चर और बड़े पैमाने पर समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहले ही हो चुका है, जो विकसित भारत के निर्माण की दिशा में “समग्र सरकार, समग्र समाज” दृष्टिकोण को दर्शाता है। स्थानीय अनुकूलता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार क्षेत्र की विशिष्ट समुद्री प्रजातियां और तटीय विशेषताएं ऐसे परियोजनाओं के लिए इसे सबसे उपयुक्त स्थान बनाती हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने महासागर विज्ञान के साथ जैव प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास जैव प्रौद्योगिकी के लिए समर्पित नीति—बायोE3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी)—है। उन्होंने बताया कि समुद्री जैव-संसाधन प्लास्टिक के जैव-अपघटनीय विकल्प, नई औषधीय यौगिकों और उच्च मूल्य वाले जैव-उत्पादों का स्रोत बन सकते हैं। ऐसी पहलें एक साथ रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और बायोइकोनॉमी को सशक्त करेंगी।
मंत्री ने गैर-पशु आधारित खाद्य उत्पादों, वैकल्पिक समुद्री पोषण, वेस्ट-टू-वेल्थ प्रौद्योगिकियों और निर्यातोन्मुख समुद्री उत्पादों जैसे उभरते क्षेत्रों का भी उल्लेख किया और कहा कि विशेषकर यूरोप में इनके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वयं सहायता समूहों और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि ये पहलें घरेलू आय में वृद्धि करें और “वोकल फॉर लोकल” तथा “लोकल फॉर ग्लोबल” के दृष्टिकोण को मजबूत करें।
अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों और स्थानीय हितधारकों के उत्साह और समर्पण की सराहना की और कहा कि सीएसआईआर तथा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्रों की संभावित भागीदारी सहित संस्थागत सहयोग के माध्यम से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत की ब्लू इकोनॉमी पहलों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने क्षेत्र के साथ सतत जुड़ाव के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रयास द्वीपसमूह के लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ प्रदान करेंगे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया। गृह मंत्री ने वंदे मातरम पवेलियन और ऑपरेशन सिंदूर पवेलियन का भी दौरा किया। गृह मंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
X पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट्स में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “पुस्तकें ज्ञान प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम हैं, और उम्र चाहे जो भी हो, पढ़ते रहना चाहिए। पढ़ने की आदत तेजी से कम होती जा रही है, और मुझे विश्वास है कि डिजिटल हो या प्रिंट, पुस्तकें अभी भी ज्ञान अर्जित करने का सबसे अच्छा तरीका हैं। आज भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया।”
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बच्चों को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भी वितरित कीं। उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित साहित्यिक कृति ‘आनंद मठ’ ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने और ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के लिए प्रेरित कर इतिहास रचा। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में बच्चों को ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भेंट कीं ताकि उनके मन में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों की ज्योति जलाई जा सके।”
श्री अमित शाह ने आगे कहा, “आज विश्व पुस्तक मेले में नेशनल बुक ट्रस्ट के वंदे मातरम पवेलियन का दौरा किया। जब राष्ट्र वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहा है, यह पवेलियन हमारे राष्ट्रीय गीत की गौरवशाली गाथा को प्रदर्शित कर रहा है, जिसने स्वतंत्रता सेनानियों में औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकने की देशभक्ति की भावना जगाई थी।”
श्री अमित शाह ने पुस्तक मेले में सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा, “आज ‘नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला’ में सरदार साहब के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। टुकड़ों-टुकड़ों में बँटे देश को एकीकृत कर एक भारत का निर्माण करने वाले सरदार साहब का 150वाँ जयंती वर्ष मनाकर मोदी सरकार उनके महान व्यक्तित्व व विशाल कृतित्व को नई पीढ़ी में अजर-अमर बना रही है। यह प्रदर्शनी युवाओं में देश की रक्षा व अखंडता के संकल्प को और भी मजबूत बनाएगी।”
गृह मंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर प्रधानमंत्री मोदी जी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, हमारी सशस्त्र सेनाओं की निर्णायक प्रहार क्षमता और सटीक खुफिया जानकारी से संचालित भारत की अजेय सैन्य शक्ति का प्रमाण था। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पवेलियन का दौरा किया। यह पवेलियन युवा पीढ़ी को देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उत्तराखंड के देहरादून में जागरण फोरम का उद्घाटन किया, जिसका आयोजन राज्य के गठन के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने उत्तराखंड को त्याग, सहनशक्ति और राष्ट्र सेवा की भूमि बताया और इस महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी।
उत्तराखंड के निर्माण को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य का गठन पहाड़ के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं के प्रति एक लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया थी और इसने भारत की संघीय प्रणाली की ताकत को फिर से साबित किया। उन्होंने इस प्रक्रिया के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को भी साझा किया, क्योंकि लोकसभा सदस्य के रूप में सेवा करते हुए उन्होंने उत्तराखंड के निर्माण के विधेयक के पक्ष में वोट दिया था।
देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह राज्य भारत की सभ्यतागत चेतना में एक विशेष स्थान रखता है। वैदिक और पौराणिक परंपराओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सत्यम, शिवम और सुंदरम के सार को दर्शाता है। उन्होंने राज्य के पारिस्थितिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसके ग्लेशियर, नदियाँ और जंगल इसकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे जीवन को बनाए रखते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में, राज्य ने सड़क, रेल, हवाई और संचार कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व प्रगति देखी है।
विकास पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने हरित विकास को बढ़ावा देने में उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में, और सकल घरेलू उत्पाद के साथ-साथ सकल पर्यावरणीय उत्पाद की अवधारणा करने वाला देश का पहला राज्य होने के लिए राज्य की प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी उत्तराखंड से हैं।
उत्तराखंड के रणनीतिक महत्व का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने जीवंत सीमावर्ती गांवों को आखिरी चौकी नहीं, बल्कि ताकत, विरासत और लचीलेपन की पहली पंक्ति बताया, और माणा गांव को “भारत का पहला गांव” बताने की प्रधानमंत्री की कल्पना को याद किया।
2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनने की भारत की यात्रा को देखते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक कृषि, बागवानी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, आयुष, इकोटूरिज्म, स्टार्टअप और कौशल विकास में अपनी विशाल क्षमता के साथ एक अद्वितीय स्थान रखता है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह लोगों और सत्ता में बैठे लोगों के बीच एक पुल का काम करता है, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता मज़बूत होती है। विकास की सकारात्मक कहानियों को उजागर करने के लिए दैनिक जागरण की सराहना करते हुए, उन्होंने मीडिया संगठनों से नियमित रूप से कम से कम दो पेज सकारात्मक और विकास-उन्मुख खबरों के लिए समर्पित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अखबारों को जागृत होकर सकारात्मकता फैलानी चाहिए, खासकर युवाओं के बीच, क्योंकि रचनात्मक और प्रेरणादायक कथानकों के संपर्क में आने से युवा नागरिक राष्ट्र निर्माण में अधिक सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे।
अपने संबोधन के अंत में, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि जागरण फोरम में होने वाली चर्चाओं से उत्तराखंड की निरंतर प्रगति के लिए नए विचार उत्पन्न होंगे।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री गुरमीत सिंह; उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, श्री पुष्कर सिंह धामी; दैनिक जागरण के वरिष्ठ प्रतिनिधि, जिनमें प्रबंध संपादक श्री तरुण गुप्ता, निदेशक श्री सुनील गुप्ता; और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
नई दिल्ली – पिछले वर्ष मार्च में गुजरात के गिर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पहले दौर के गणना अनुमान के परिणाम जारी किए जाने के बाद अब देश में डॉल्फ़िन के संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज उत्तर प्रदेश के बिजनौर से प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत नदी एवं मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन का दूसरा व्यापक अनुमान शुरू किया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वन्यजीव सप्ताह के दौरान देहरादून में डॉल्फ़िन की अखिल भारतीय गणना और उसके गणना प्रोटोकॉल के दूसरे चरण का शुभारंभ किया था। इस कार्यक्रम का समन्वय भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून द्वारा राज्य वन विभागों और सहयोगी संरक्षण संगठनों डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आरण्यक और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के वन कर्मचारियों के लिए कल बिजनौर में एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें सर्वेक्षण की प्रगति के साथ-साथ मानकीकृत क्षेत्रीय क्षमता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक 10-15 जिलों के लिए समय-समय पर आगे प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
सर्वेक्षण की शुरुआत तीन नावों में सवार 26 शोधकर्ताओं के साथ हुई जिन्होंने पारिस्थितिक और पर्यावास संबंधी मापदंडों को रिकॉर्ड किया और जलमग्न ध्वनिक निगरानी के लिए हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया। पहले चरण में सर्वेक्षण बिजनौर से गंगा सागर तक गंगा के मुख्य भाग और सिंधु नदी क्षेत्र में किया जाएगा। दूसरे चरण में यह ब्रह्मपुत्र, गंगा की सहायक नदियों, सुंदरबन और ओडिशा को समाहित करेगा।
गंगा नदी डॉल्फिन के अलावा सर्वेक्षण में सिंधु नदी डॉल्फिन और इरावदी नदी डॉल्फिन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही उनके आवास की स्थिति खतरों और उनसे संबंधित संरक्षण-प्राथमिकता वाले जीवों का भी अध्ययन किया जाएगा। यह पहल भारत के नदी पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना और नीतिगत कार्रवाई का समर्थन करने के लिए ठोस वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करेगी।
पिछले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (2021-23) में भारत में लगभग 6,327 नदी डॉल्फ़िन की गणना कर उनकी संख्या दर्ज की गईं, जिनमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र नदियों में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फ़िन और ब्यास नदी में पाई जाने वाली सिंधु नदी डॉल्फ़िन की अपेक्षाकृत कम संख्या शामिल है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इनकी संख्या सबसे अधिक थी, उसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान था जो डॉल्फ़िन के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए गंगा बेसिन के महत्व को दर्शाता है।
वर्तमान सर्वेक्षण में पिछली बार की तरह ही मानकीकृत पद्धति का पालन किया जा रहा है लेकिन इसमें नए क्षेत्रों और परिचालन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जिसमें सुंदरबन और ओडिशा में पाई जाने वाली एक नई प्रजाति, इरावदी डॉल्फिन का अनुमान लगाना भी शामिल है। यह विस्तारित भौगोलिक कवरेज इस प्रजाति की जनसंख्या के अनुमानों को अद्यतन करने, खतरों और आवास की स्थितियों का आकलन करने और प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत बेहतर संरक्षण योजना बनाने में सहायक होगी।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा में 3,250 करोड़ रुपये की लागत वाली कई रेल और सड़क बुनियादी परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नींव रखी। इनका उद्देश्य पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में संपर्क को मजबूत करना और विकास को गति देना है। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आज मालदा से पश्चिम बंगाल की प्रगति को गति देने के अभियान को और गति मिली है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के विकास से संबंधित कई परियोजनाओं का अभी-अभी उद्घाटन और लोकार्पण किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं जिनसे लोगों की यात्रा आसान होगी और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जोर दिया कि यहां स्थापित नई रेल रखरखाव सुविधाएं बंगाल के युवाओं के लिए नए अवसर प्रदान करेंगी।
श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि से भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि आज से भारत में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन नागरिकों की लंबी यात्राओं को अधिक आरामदायक और शानदार बनाएगी।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत में ट्रेनों का स्वरूप इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में स्पष्ट रूप से झलकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ देर पहले उन्होंने मालदा स्टेशन पर कुछ यात्रियों से बातचीत की और सभी ने कहा कि इस ट्रेन में यात्रा करना एक असाधारण अनुभव था। उन्होंने याद दिलाया कि पहले लोग विदेशी ट्रेनों की तस्वीरें देखकर भारत में ऐसी ट्रेनों की कामना करते थे और आज उनका यह सपना साकार हो रहा है।
श्री मोदी ने आगे कहा कि हाल के दिनों में विदेशी पर्यटक भारतीय रेलवे में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों के वीडियो बना रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह वंदे भारत ट्रेन ‘मेड इन इंडिया’ है जो भारतीयों की मेहनत और समर्पण से बनी है। श्री मोदी ने कहा कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मां काली की भूमि को मां कामाख्या की भूमि से जोड़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में इस आधुनिक ट्रेन का पूरे देश में विस्तार होगा और उन्होंने इस आधुनिक स्लीपर ट्रेन के लिए बंगाल, असम और पूरे देश को बधाई दी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारतीय रेलवे विद्युतीकरण और स्टेशनों के आधुनिकीकरण के साथ परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि आज पश्चिम बंगाल सहित देश भर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही आधुनिक और उच्च गति वाली ट्रेनों का एक संपूर्ण नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे बंगाल के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को काफी लाभ मिल रहा है।
उन्होंने घोषणा की कि बंगाल को चार और आधुनिक अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें मिली हैं – न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस, न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस, अलीपुरद्वार-बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस और अलीपुरद्वार-मुंबई अमृत भारत एक्सप्रेस। उन्होंने जोर दिया कि ये ट्रेनें बंगाल, विशेष रूप से उत्तरी बंगाल, और दक्षिण और पश्चिमी भारत के बीच संपर्क को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से गंगासागर, दक्षिणेश्वर और कालीघाट जाने वाले तीर्थयात्रियों के साथ-साथ तमिलनाडु और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों की यात्रा भी आसान हो जाएगी।
श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय रेलवे न केवल आधुनिक बन रहा है बल्कि आत्मनिर्भर भी हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के रेल इंजन, कोच और मेट्रो कोच भारत की प्रौद्योगिकी के प्रतीक के रूप में उभर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अमेरिका और यूरोप से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर रहा है और कई देशों को यात्री ट्रेन और मेट्रो ट्रेन कोच निर्यात करता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को काफी लाभ होता है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन इस बात पर जोर देते हुए किया कि भारत को जोड़ना एक प्राथमिकता है और दूरियों को कम करना एक मिशन है जो आज के कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सी.वी. आनंद बोस, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, श्री शांतनु ठाकुर, श्री सुकांत मजूमदार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन का दौरा किया जहां उन्होंने हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलने वाली भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने गुवाहाटी (कामाख्या)-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को वर्चुअल रूप से भी हरी झंडी दिखाई।
आधुनिक भारत की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई, पूरी तरह से वातानुकूलित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को किफायती किराए पर हवाई यात्रा जैसा अनुभव प्रदान करेगी। यह लंबी दूरी की यात्राओं को तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक बनाएगी। हावड़ा-गुवाहाटी (कामाख्या) मार्ग पर यात्रा के समय को लगभग 2.5 घंटे तक कम करके, यह ट्रेन धार्मिक यात्रा और पर्यटन को भी काफी बढ़ावा देगी।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में चार प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की नींव रखी जिनमें बलुरघाट और हिली के बीच नई रेल लाइन, न्यू जलपाईगुड़ी में अगली पीढ़ी की माल ढुलाई रखरखाव सुविधाएं, सिलीगुड़ी लोको शेड का उन्नयन और जलपाईगुड़ी जिले में वंदे भारत ट्रेन रखरखाव सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल हैं। इन परियोजनाओं से यात्री और माल ढुलाई परिचालन मजबूत होगा, उत्तरी बंगाल में रसद दक्षता में सुधार होगा और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने न्यू कूचबिहार-बमनहाट और न्यू कूचबिहार-बॉक्सिरहाट के बीच रेल लाइनों के विद्युतीकरण को राष्ट्र को समर्पित किया, जिससे तेज, स्वच्छ और अधिक ऊर्जा-कुशल ट्रेन संचालन संभव हो सकेगा।
प्रधानमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया – न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस; न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस। इससे किफायती और विश्वसनीय लंबी दूरी के रेल संपर्क में सुधार होगा। ये सेवाएं आम नागरिकों, छात्रों, प्रवासी श्रमिकों और व्यापारियों की आवागमन संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगी और साथ ही अंतर-राज्यीय आर्थिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करेंगी।
प्रधानमंत्री ने एलएचबी कोचों से सुसज्जित दो नई ट्रेन सेवाओं – राधिकापुर-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस और बालुरघाट-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस – को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये ट्रेनें क्षेत्र के युवाओं, छात्रों और आईटी पेशेवरों को बेंगलुरु जैसे प्रमुख आईटी और रोजगार केंद्रों तक सीधी, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31डी के धूपगुड़ी-फलाकाटा खंड के पुनर्निर्माण और चार लेन के निर्माण के लिए नींव रखी। यह एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है जो क्षेत्रीय सड़क संपर्क में सुधार लाएगी और उत्तरी बंगाल में यात्रियों और माल की सुगम आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगी।
ये परियोजनाएं आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और बेहतर संपर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र राष्ट्र के प्रमुख विकास इंजन के रूप में मजबूत होंगे।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस), जिसमें आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी शामिल हैं, 15 जनवरी 2026 को चांगी नेवल बेस, सिंगापुर पहुंचा। स्क्वाड्रन दक्षिण पूर्व हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में प्रशिक्षण तैनाती पर है।
यह तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वर्ष 2026 को ‘दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संघ (आसियान) – भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026’ के रूप में मनाया जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना (आरएसएन) के कर्मी क्षमता बढ़ाने और समुद्री सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई बंदरगाह से संबंधित कार्यों और पेशेवर बातचीत में शामिल होंगे। दोनों नौसेनाओं के प्रशिक्षुओं के बीच व्यवस्थित प्रशिक्षण का आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र और खेल आयोजनों की एक भी योजना बनाई गई है।
सांस्कृतिक बातचीत में सिंगापुर में प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भारतीय नौसेना बैंड द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा। ये जहाज स्कूली बच्चों के प्रवास के दौरान उनके दौरे के लिए खुले रहेंगे।
सिंगापुरमेंभारतकेउच्चायुक्तडॉ. शिल्पकअंबुले ने आगमन पर 1टीएस के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की। वरिष्ठ अधिकारी 1टीएस और कमांडिंग अधिकारियों ने समुद्री प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान (एमटीडीसी) के कमांडर से भी मुलाकात की। इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों की एक टीम द्वारा यात्रा के दौरान पेशेवर अनुभव साझा किए गए।
यात्रा के दूसरे दिन कम्युनिटी से और रिपब्लिक ऑफ़ सिंगापुर नेवी के साथ बातचीत हुई। इन्फॉर्मेशन फ़्यूज़न सेंटर और आरएसएन संग्रहालय का भ्रमण, मैत्रीपूर्ण खेल कार्यक्रम, और श्री नारायण ओल्ड एज एंड नर्सिंग होम में एक आउटरीच कार्यक्रम मुख्य आकर्षण थे।
यह यात्रा भारत की एक्टईस्टनीति को आगे बढ़ाने के लिए दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ मजबूत समुद्री साझेदारी और निरंतर जुड़ाव को मजबूत करती है। यह दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी बढ़ाता है, इंडियन ओशियन नेवल सिम्पोजियम(आईओएनएस) के लिए भारत के नेतृत्व और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है, साथ ही साथ यह महासागर (क्षेत्रोंमेंसुरक्षाऔरविकासकेलिएपारस्परिकऔरसमग्रउन्नति) के दृष्टिकोण के अनुरूप समुद्री सहकारी जुड़ाव को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में संसद भवन परिसर के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं।
श्री मोदी ने X पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:
“नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर साझा करना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।”
“Democratic Spirit हमारी रगों में, हमारे मन में और हमारे संस्कारों में है और ये संस्कार हमें हमारे लोकतंत्र से मिले हैं।”
“आज जब दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, तब भारत हर प्लेटफॉर्म पर ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है।”
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तिरुवल्लुवर दिवस के अवसर पर बहुमुखी प्रतिभा के धनी तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके कालजयी कार्य और आदर्श पीढ़ियों से अनगिनत लोगों को प्रेरणा देते हैं।
श्री मोदी ने कहा कि तिरुवल्लुवर ने सद्भाव और करुणा पर आधारित समाज की परिकल्पना की थी और ये मूल्य आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि तिरुवल्लुवर तमिल संस्कृति के सर्वोत्तम पहलुओं एवं ज्ञान तथा एकता के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से कवि रूपी संत की गहन शिक्षाओं से जुड़ने का आग्रह किया।
एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में श्री मोदी ने कहा:
आज तिरुवल्लुवर दिवस पर, हम बहुमुखी प्रतिभा के धनी तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके कार्यों और आदर्शों से अनगिनत लोग प्रेरित होते हैं। वे एक सद्भाव और करुणामय समाज में विश्वास रखते थे। वे तमिल संस्कृति के सर्वोत्तम स्वरूप का प्रतीक हैं। मैं आप सभी से तिरुक्कुरल पढ़ने का आग्रह करता हूँ, जो महान तिरुवल्लुवर के असाधारण ज्ञान की झलक प्रस्तुत करता है।
“திருவள்ளுவர் தினமான இன்று, ஏராளமான மக்களுக்கு உத்வேகம் அளிக்கும் படைப்புகளையும் சிந்தனைகளையும் கொண்ட பன்முக ஆளுமை திருவள்ளுவருக்கு மரியாதை செலுத்துகிறேன். நல்லிணக்கமும் கருணையும் நிறைந்த ஒரு சமூகத்தின் மீது அவர் நம்பிக்கை வைத்தார். தமிழ்க் கலாச்சாரத்தின் சிறந்த அம்சங்களுக்கு அவர் எடுத்துக்காட்டாகத் திகழ்கிறார். திருவள்ளுவப் பெருந்தகையின் சிறப்பான அறிவாற்றலை வெளிப்படுத்தும் திருக்குறளை நீங்கள் அனைவரும் படிக்க வேண்டும் என்று நான் கேட்டுக்கொள்கிறேன்.”
नई दिल्ली – गुजरात के राजकोट में मारवाड़ी विश्वविद्यालय में 11 से 15 जनवरी 2026 तक आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्जिबिशन (वीजीआरई) 2026 का समापन भारत और विदेश से आए आगंतुकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हुआ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ने हॉल संख्या 6 में एक व्यापक स्वास्थ्य पवेलियन के माध्यम से प्रदर्शनी में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई।
लगभग 700 वर्ग मीटर में बनाया गया यह स्वास्थ्य मंडप “स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित है और इसमें भारत सरकार के जन स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया। इस मंडप का उद्घाटन 11 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकार के अधिकारियों और जिला स्वास्थ्य एजेंसियों के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस पवेलियन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 12 कार्यक्रम विभागों के 26 स्टॉल लगाए गए थे जिनमें राज्य सरकार और जिला स्वास्थ्य एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी रही। पांच दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान, पवेलियन ने आम जनता के लिए व्यापक स्तर पर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं, जांच, परामर्श और जागरूकता गतिविधियां प्रदान कीं। इनमें एचआईवी और मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श; आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई), फ्लोरोसिस की रोकथाम, ईट राइट इंडिया, वन हेल्थ और भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन पर जागरूकता सत्र के साथ ही रक्तचाप, रक्त शर्करा, रक्त समूह, मुख कैंसर, नेत्र और कान के स्वास्थ्य की जांच भी शामिल थी। वृद्धावस्था संबंधी आकलन और बुनियादी वृद्धावस्था पुनर्वास से संबंधित सेवाएं भी प्रदान की गईं।
नैदानिक और सूचनात्मक सेवाओं के अलावा, इस पवेलियन में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई आकर्षक पहुंच गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें गुजरात सरकार की तपेदिक और टीकाकरण टीमों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रदर्शन, नजफगढ़, नई दिल्ली स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र द्वारा लाइव सीपीआर प्रदर्शन और पुरस्कार वितरण के साथस्वास्थ्य संबंधी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता शामिल थी। आगंतुकों, विशेष रूप से बच्चों को आकर्षित करने और स्वस्थ मनोरंजन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए पारंपरिक, स्क्रीन-मुक्त खेलों के लिए एक विशेष स्थल भी बनाया गया था।
स्वास्थ्य मंडप को विदेशी नागरिकों सहित आगंतुकों से जबरदस्त और उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और यह वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय प्रदर्शनी 2026 के प्रमुख आकर्षणों में से एक बनकर उभरा। मजबूत जनभागीदारी ने सरकारी स्वास्थ्य पहलों के प्रति बढ़ती जागरूकता और विश्वास को दर्शाया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच और प्रभाव को उजागर किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सतत नवाचार, राज्यों और हितधारकों के साथ सहयोगात्मक प्रयासों और देश भर में समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहलों के निरंतर कार्यान्वयन के माध्यम से “स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।