केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल जाने को
भारत के लिए गर्व का क्षण है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा,
“यह भारत के लिए गर्व का क्षण है कि दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया गया है। यह आधुनिक युग में भी हमारे प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों की महत्ता को दर्शाता है।
रौशनी का यह त्योहार प्राचीन काल से हमें अच्छाई और धर्म की विजय में विश्वास दिलाता आया है। यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि अब यह वैश्विक कल्याण को प्रेरित करेगा।”
नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम् 4.0 में तमिलनाडु से काशी आने वाले समूह का सिलसिला जारी है। तमिलनाडु से काशी तमिल संगमम् 4.0 में शामिल होने के लिए पांचवां दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा। जिसमें बड़ी संख्या में पेशेवर और कारीगर शामिल थे। स्टेशन पर उतरते ही मेहमानों का पारंपरिक तरीके से डमरू वादन,पुष्प वर्षा और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘वणक्कम् काशी’ के उद्घोष से भव्य स्वागत किया गया। इन मेहमानों के स्वागत के लिए पुलिसकर्मी स्टेशन पर मौजूद रहे।
स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत देखकर तमिल दल के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने कहा कि काशी में मिल रही गर्मजोशी और आध्यात्मिक वातावरण उनके लिए अविस्मरणीय है। डमरू वादन की ध्वनि से पूरा परिसर शिवमय हो गया और काशी व तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता की झलक साफ दिखाई दी।
इस दल में शामिल लोगों ने कहा कि काशी आध्यात्मिक नगरी है। यहां बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद हम लोग एकेडमिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहां बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलेगा। कुछ ऐसे भी डेलीगेट दिखे जो काशी की धरती पर उतरते ही दंडवत लेट गए उन्होंने कहा कि यह पवित्र धरती है यहां आकर बहुत खुशी हुई है दो राज्यों के संस्कृति और भाषा का मिलन हो रहा है यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना एक भारत श्रेष्ठ भारत का मजबूत स्तंभ है।
काशी तमिल संगमम् 4.0 का आयोजन 2 दिसंबर से हो रहा है। इस आयोजन में तमिलनाडु से अलग-अलग समूह काशी, प्रयागराज और अयोध्या का भ्रमण करेगा। इस दौरान तमिल समूह को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से रुबरु कराया जाएगा।
नई दिल्ली – केंद्रीय बंदरगाह , जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज मुंबई में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नेविगेशन सहायता संगठन (आईएएलए) की तीसरी काउंसिल सत्र का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने लाइटहाउस टूरिज़्म के लिए डिजिटल टिकटिंग पोर्टल भी लॉन्च किया, जो भारत में लाइटहाउस स्थलों तक बेहतर पहुंच के लिए डिजिटल विज़िटर सर्विसेज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह प्रतिष्ठित वैश्विक कार्यक्रम 8 से 12 दिसंबर के बीच आयोजित किया जा रहा है जिसे बंदरगाह,जहरजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के तहत लाइटहाउस एवं लाइटशिप महानिदेशालय (डीजीएलएल) द्वारा आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में 42 आईएएलए काउंसिल के सदस्य, तीन एआईएमजी सदस्य, 11 पर्यवेक्षक, आईएएलए सचिवालय के प्रतिनिधि तथा 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि मुंबई में इस काउंसिल की मेजबानी करना वैश्विक समुद्री मानकों को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
श्री सोनोवाल ने भारत की समुद्री विरासत का हवाला दिया जो सिंधु घाटी सभ्यता के समय से चली आ रही है।
उन्होंने लोथल में राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएमएचसी) के विकास का जिक्र किया।
इसमें एक समर्पित लाइटहाउस संग्रहालय भी शामिल है, जो भारत के समुद्री अतीत और भविष्य का उत्सव मनाता है।
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक सहयोग की बढ़ती प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि नयी प्रौद्योगिकी समुद्री नौवहन को नया रूप दे रही है, जिसमें स्वायत्त शिपिंग, उपग्रह-सक्षम सिस्टम और डिजिटल जहाज प्रबंधन शामिल हैं।
श्री सोनोवाल ने वैश्विक रूप से नौवहन मानकों के समन्वय में भारत की आई एएलए के नेतृत्व के महत्व को रेखांकित किया और सुरक्षित, कुशल और स्थायी समुद्री नौवहन के लिए भारत के सहयोग की पुनः पुष्टि की।
कार्यक्रम में बोलते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत का समुद्री क्षेत्र एक रूपांतरणशील बदलाव से गुजर रहा है —
इसमें बुनियादी संरचना के विस्तार और डिजिटल नवाचार से लेकर हरित और टिकाऊ शिपिंग तक सभी शामिल है ।
उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी जी की रणनीतिक दिशा ने भारत को न केवल एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है, बल्कि वैश्विक मानकों,सुरक्षा और सहयोग में एक विश्वसनीय योगदानकर्ता के रूप में भी खड़ा किया है।”इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने लाइटहाउस टूरिज्म के लिए डिजिटल टिकटिंग पोर्टल लॉन्च किया, जो 75 लाइटहाउस स्थलों पर डिजिटल पहुंच, पारदर्शिता और सुविधाजनक सेवा प्रदान करता है। मंत्री ने बताया कि भारत के सभी लाइटहाउस अब सौर ऊर्जा से चलाए जाते हैं और पिछले दशक में इन स्थलों पर पर्यटन भी काफी बढ़ा है।
सर्बानंद सोनोवाल ने इस आयोजन को संबोधित करते हुए कहा, “मुंबई में तीसरे आई ए एल ए काउंसिल सत्र की मेजबानी करना भारत के लिए गर्व का विषय है। जैसे-जैसे स्वायत्त शिपिंग,उपग्रह आधारित नेविगेशन सिस्टम और डिजिटलीकरण जैसी तकनीकें तेजी से विकसित हो रही हैं, नेविगेशन मानकों के वैश्विक समन्वय में आई ए एल ए की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ नौवहन के लिए भारत आई ए एल ए के साथ मजबूती से खड़ा है।”राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख पहलों को उजागर करते हुए श्री सोनोवाल ने मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मेरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत हुए सुधारों का उल्लेख किया, जो बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने, जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स की दक्षता सुधारने, हरित शिपिंग को बढ़ावा देने और डिजिटल परिवर्तन को तेज़ करने पर केंद्रित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति को दर्शाती हैं।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि नेविगेशन सहायता हमारी समुद्री सुरक्षा के केंद्र में बनी हुई हैं, और भारत आधुनिक एटीओएन सिस्टम, डिजिटल नेविगेशन समाधान तथा विकासशील समुद्री देशों के लिए क्षमता निर्माण में निवेश करता रहता है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “हमारे गतिशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने साहसिक सुधारों और अमृत काल के भविष्य दृष्टिकोण के साथ भारत के समुद्री मार्ग को फिर से परिभाषित किया है। चाहे वह लाइटहाउस टूरिज्म के लिए डिजिटल टिकटिंग हो,आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हो या हरित शिपिंग हों, हर उपलब्धि हमारी इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ समुद्री संचालन में अग्रणी बने।
”भारत आई ए एल ए काउंसिल का सक्रिय सदस्य है जो तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और वैश्विक मानक निर्धारण में योगदान देता है, और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर सुरक्षित नेविगेशन प्रथाओं को बेहतर बनाने में सहयोग करता है।
मुंबई में तीसरे आई ए एल ए काउंसिल सत्र की मेजबानी भारत की वैश्विक समुद्री सहयोग को मजबूत करने और नेविगेशन,सुरक्षा और स्थिरता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को आगे बढ़ाने हेतू हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राज्यसभा में एक गैर-तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने बताया कि ओडिशा राज्य में स्वीकृत 111 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में से 47 कार्यरत हैं और 64 विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं।
ईएमआरएस के निर्माण में देरी के मुख्य कारण बाधा मुक्त भूमि की अनुपलब्धता, उचित पहुंच मार्गों का अभाव, भौगोलिक चुनौतियां आदि हैं।
राष्ट्रीय जनजातीय छात्र शिक्षा समिति (एनएसईटीएस) ने अखिल भारतीय स्तर पर ईएमआरएस कर्मचारी चयन परीक्षा(ईएसएसई)-2023 के माध्यम से 10391 पदों की सीधी भर्ती के लिए अपना पहला अभियान चलाया और चयनित शिक्षण एवं गैर शिक्षण कर्मचारियों को विभिन्न ईएमआरएस में तैनात किया गया है।
7267 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों को भरने के लिए ईएसएसई-2025 की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों को प्रतिनियुक्ति और आउटसोर्सिंग के आधार पर भी कर्मचारियों को नियुक्त करने की सलाह दी गई है ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बाधित न हों।
आदिवासी छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए, इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक पुस्तकालय, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, छात्रों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, खेल, कला और संगीत जैसी पाठ्येतर गतिविधियों की सुविधाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी विभिन्न सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाती हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री, डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 के अंतिम दौर में पहुँचने वाले प्रतिभागियों के साथ बातचीत की। उन्होंने देश के इस सबसे बड़े छात्र-प्रेरित नवोन्मेष पहल में भाग ले रहे युवा अन्वेषकों को प्रोत्साहित और प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्रीय महत्व की वास्तविक चुनौतियों के लिए रचनात्मक समाधान विकसित करने में अंतिम चयनित प्रतिभागियों की प्रतिबद्धता की सराहना की और भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में युवा-नेतृत्व वाले नवोन्मेष की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया।
डॉ. मजूमदार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि इसमें विभिन्न राज्यों के छात्र हिस्सा लेते हैं और प्रौद्योगिकी तथा विचार-विमर्श के एकीकृत मंच पर आपस में सहयोग करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ समस्याओं, उनके प्रस्तावित समाधानों और विभिन्न मंत्रालयों, उद्योगों तथा विभागों के लिए उनकी अनुप्रयोग प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से संवाद किया और प्रश्न पूछे।
सात नोडल केंद्रों के प्रतिभागियों के साथ व्यक्तिगत बातचीत के दौरान, डॉ. मजूमदार ने छात्र टीमों द्वारा संबधित समस्याओं के लिए विकसित किए गए नवीन समाधानों को ध्यान से सुना। सातों नोडल केंद्रों को सीधे मंत्री महोदय के साथ बातचीत करने और अपनी परियोजनाओं के उद्देश्यों, प्रभाव और तकनीकी दृष्टिकोण को साझा करने का अवसर मिला। शिलांग में मौजूद मणिपुर की टीम ने मंत्री को अपने एआई-सक्षम जियो-फेंसिंग पर्यटक सुरक्षा प्रणाली के बारे में जानकारी दी। यह प्रणाली पर्यटकों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए वास्तविक समय की निगरानी, अधिक खतरे के समय चेतावनी देने और घटना की लाइव रिपोर्टिंग प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
आईआईटी खड़गपुर में, हैदराबाद के छात्रों ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के लिए विकसित किए गए सोने की शुद्धता का परीक्षण करने वाले पोर्टेबल उपकरण के बारे में बताया। यह उपकरण तेज़ और अत्यधिक सटीक मूल्यांकन सुनिश्चित करता है। इसी तरह, बीएचयू वाराणसी में तमिलनाडु के प्रतिभागियों ने अपने एआई-आधारित वर्गीकरण पारिस्थितिक तंत्र का प्रदर्शन किया, जो वस्त्र मंत्रालय के लिए काम करता है और साथ ही सूक्ष्म समुद्री जीव विज्ञान अध्ययनों में भी सहायता करता है। इस बीच, वीएसएसयूटी संबलपुर में इंदौर की टीम ने अपने डिजिटल भूमि अभिलेख प्रबंधन समाधान पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य 51,63,000 से अधिक वनवासी आदिवासियों को लाभ पहुंचाना और आदिवासी भूमि अधिकारों को मजबूत करना है।
मंत्री महोदय ने ओरिएंटल यूनिवर्सिटी, इंदौर में बिलासपुर की टीम के साथ भी बातचीत की। इस टीम ने ‘प्रशिक्षण’ नामक एक सुरक्षित, मापनीय और सरकार द्वारा सत्यापित डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया। यह प्लेटफॉर्म एनडीएमए कार्यकर्ताओं के लिए है, जो कुशल क्षमता निर्माण करता है। बन्नारी अम्मन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एरोड में, कोलकाता के छात्रों ने एक उपकरण के विवरण साझा किए। इस उपकरण को 2 मीटर की दूरी से आक्रामक पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस खरपतवार को दूर से उखाड़ने और इस बायोमास को अल्कोहल में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे एक हानिकारक पौधे को एक लाभकारी संसाधन में बदला जा सके। बातचीत के अंत में आईआईटी जम्मू में वीजीटीई मुंबई की टीम ने अपना स्वचालित साइबर सुरक्षा समाधान पेश किया। इसे वेबसाइटों को हैकिंग के प्रयासों से बचाने और डेटा सम्बन्धी उल्लंघनों को रोकने के लिए विकसित किया गया है।
मंत्री महोदय ने प्रत्येक टीम के प्रयास की सराहना की और भारत के डिजिटल एवं विकासात्मक परिदृश्य की सुरक्षा में निरंतर किये जा रहे नवाचार और तकनीकी उन्नति के महत्व पर जोर दिया।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, “स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से प्रेरित एक दूरदर्शी पहल है। वह हमें याद दिलाते हैं कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं है, बल्कि एक कालातीत सभ्यता है जो अपने वैश्विक नेतृत्व को पुनः प्राप्त करने के लिए फिर से उठ रही है। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारे युवा हैं और नवाचार, संकल्प और भारतीय संस्कृति में उनका विश्वास है।”
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का भव्य समापन (ग्रैंड फिनाले) 8 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था। यह देश भर के 60 नोडल केंद्रों पर एक साथ आयोजित किया जा रहा है, जो शिक्षा क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े सहयोगी नवाचार कार्यक्रम के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत बनाता है। स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के 8वें संस्करण में इस वर्ष पहले के मुकाबले सबसे अधिक भागीदारी देखी गई है। कुल 271 समस्या विवरण प्राप्त हुए, जिसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 15 राज्य सरकार के विभागों और 7 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और कॉर्पोरेट भागीदारों ने हिस्सा लिया, यह छात्र-नेतृत्व वाले समाधानों में सरकार और उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
पूरे देश से, 68,766 छात्र टीमों ने 72,165 सुझाव प्रस्तुत किए, जो नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में छात्रों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। एक कठोर बहु-चरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद, 1,360 शीर्ष प्रदर्शन करने वाली टीमें अंतिम चरण (ग्रैंड फिनाले) में पहुँच चुकी हैं। इनमें 8,160 छात्र अंतिम सूची में शामिल किये गए हैं, जो 201 शहरों के 727 संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन छात्रों को शिक्षा जगत और उद्योग के 1,365 विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन किया जा रहा है।
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 की एक उल्लेखनीय विशेषता इसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रही। इसमें 2,993 महिला फाइनलिस्ट शामिल हैं, जिनमें 53 ‘केवल-महिला’ टीमें भी हैं। यह भारत के नवाचार परिदृश्य में महिलाओं की विस्तारित भूमिका को रेखांकित करता है।
नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) का स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अपतटीय गश्ती पोत (ओपीवी) सार्थक खाड़ी क्षेत्र में अपनी विदेशी तैनाती (ओएसडी) के तहत 09 दिसंबर, 2025 को कुवैत के सुवैख बंदरगाह पर पहुंचा। यह पहला बंदरगाह दौरा भारत–कुवैत समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय साझेदारी को सशक्त करने के प्रति भारत की वचनबद्धता को रेखांकित करता है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा समुद्री संबंधों को और मजबूत करना, समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, संरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा सुरक्षित, संरक्षित व स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करना है।
कुवैत में चार दिवसीय प्रवास के दौरान, आईसीजीएस सार्थक का चालक दल कुवैत तटरक्षक बल तथा अन्य समुद्री हितधारकों के साथ कई महत्वपूर्ण पेशेवर गतिविधियों में भाग लेगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शिष्टाचार भेंट, प्रमुख समुद्री सुविधाओं का परिचयात्मक दौरा और समुद्री प्रदूषण रोधी कार्रवाई, समुद्री खोज एवं बचाव तथा समुद्री कानून प्रवर्तन पर केंद्रित संयुक्त प्रशिक्षण सत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संयुक्त योग सत्रों व मैत्रीपूर्ण खेल स्पर्धाओं सहित सांस्कृतिक एवं खेल आदान-प्रदान दोनों देशों की समुद्री सेनाओं के बीच पारस्परिक संबंधों को और मजबूत करेंगे। इससे आपसी समझ व विश्वास और गहरा होगा।
आईसीजीएस सार्थक का आगमन ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुआ है, जब दिसंबर 2024 में कुवैत की भारत के प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते ने भारत-कुवैत की उभरती रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा और समुद्री सहयोग के व्यापक विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है। जहाज की वर्तमान यात्रा इन साझा उद्देश्यों को न केवल सुदृढ़ करती है, बल्कि दोनों देशों की इस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है कि वे सशक्त परिचालन तालमेल विकसित करेंगे, आपसी सहभागिता को बढ़ाएंगे और खाड़ी क्षेत्र में एक सुरक्षित एवं स्थिर समुद्री वातावरण को प्रोत्साहित करेंगे।
आईसीजीएस सार्थक कुवैत यात्रा के बाद अपनी विशेष कार्य तैनाती को आगे बढ़ाते हुए ईरान और सऊदी अरब के बंदरगाहों पर नियोजित प्रवास करेगा। इन दौरों से पश्चिम एशिया में समुद्री सहयोग को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक समुद्री शासन को आगे बढ़ाने के भारत के समग्र दृष्टिकोण का प्रतिबिंब मिलता है।
नई दिल्ली – केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में आयोजित सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 में लखपति दीदियों के हाथों से बने विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया।
इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरस फ़ूड फेस्टिवल भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और महिला सशक्तिकरण का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता का भी जीवंत उदाहरण है। यहां पर आकर लोगों ने पूरे देश के विभिन्न स्वादों को चखा है जिससे यहां आने वाले भी खुश थे और यहां आई महिला उद्यमी दीदियां भी खुश थी। उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं, वेश-भूषाओं और खान-पान की विविधताओं के बावजूद एक राष्ट्र के रूप में एकजुट है, और यह फूड फेस्टिवल उसी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि अभी हमारे देश में अब तक दो करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, और हमारा लक्ष्य यह संख्या तीन करोड़ तक पहुंचाने का है। और आशा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ाते हुए हम जल्द ही दस लखपति दीदियों भी बनाएगें।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज संस्थान व कुटुंब श्री के सहयोग से 11 दिन चले सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 में देश भर की स्वयं सहायता समूहों की लखपति दीदियों ने अपने-अपने राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ 62 स्टॉल लगाए थे , जिनमें से 50 लाइव फूड स्टॉल और 12 प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के स्टॉल थे।
नई दिल्ली – नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा एवं कौशल परिषद (एआईईएससी) की तीसरी बैठक हुई जिसकी भारत की तरफ से अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और कौशल विकास एवं उद्यमिता एवं शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने की। ऑस्ट्रेलिया की ओर से इस बैठक की अध्यक्षता ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर एमपी और कौशल एवं प्रशिक्षण मंत्री श्री एंड्रयू जाइल्स एमपी ने की।
इस बैठक में शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार; ऑस्ट्रेलिया के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा सहायक मंत्री जूलियन हिल एमपी; स्कूल शिक्षा सचिव श्री संजय कुमार; उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी; कौशल विकास एवं उद्यमिता सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी; दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
इस तीसरी एआईईएससी बैठक में स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के अंतर्गत चल रही पहलों की समीक्षा की गई और संस्थागत संबंधों को गहरा करने, गतिशीलता मार्गों का विस्तार करने और नियामक सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। एआईईएससी एक द्वि-राष्ट्रीय निकाय है जो शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और कौशल परितंत्र के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रणनीतिक दिशा का मार्गदर्शन करता है और साझेदारी को मज़बूत करता है।
इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि तीसरी एआईईएससी बैठक, एआईईएससी की उद्घाटन बैठक के बाद से हुई प्रगति को आगे बढ़ाने, ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा, कौशल और अनुसंधान साझेदारी में नई जमीन तैयार करने, भारत के युवाओं के लिए व्यापक अवसर खोलने तथा शिक्षा और कौशल विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकता के क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने का एक बड़ा अवसर है।
श्री प्रधान ने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और अनुसंधान एवं कौशल पर ठोस चर्चा के लिए ऑस्ट्रेलियाई मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल की सराहना की तथा एआईईएससी मंच को उच्च स्तर तक बढ़ाने के लिए उनके जोरदार प्रयासों की भी सराहना की।
श्री प्रधान ने यह भी कहा कि शिक्षा, कौशल और अनुसंधान भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, प्रौद्योगिकी उपयोग बढाने, खेल शिक्षा, संस्थागत क्षमता निर्माण, शिक्षकों को सशक्त बनाने, युवाओं को एआई, उन्नत सामग्री, सेमीकंडक्टर, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार करने और नवीन कौशल साझेदारी के लिए मिलकर काम करने और अधिक सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सहयोग और महत्वाकांक्षा की भावना को आगे बढ़ाते हुए सभी हितधारकों से स्कूल, उच्च और कौशल शिक्षा में आज आयोजित परिणाम-केंद्रित और गहन चर्चाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के साथ ही यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि आज बनाए गए पुल आने वाले वर्षों में और मजबूत होते रहें।
श्री प्रधान ने बताया कि आज का एजेंडा स्कूली और उच्च शिक्षा में खेल पाठ्यक्रम को एकीकृत करने पर केंद्रित था। यह खेल के क्षेत्र में एक व्यापक साझेदारी की शुरुआत का प्रतीक है। श्री प्रधान ने कहा कि दोनों पक्षों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से निपटने के लिए स्कूल और उच्च शिक्षा, दोनों स्तरों पर हैकाथॉन के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की भी तलाश करनी चाहिए।
इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर एमपी ने कहा, “यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। यह ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के लिए अच्छा है। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों की मजबूती का एक बड़ा संकेत है।”
भारत-ऑस्ट्रेलिया कौशल साझेदारी की मजबूती और विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए श्री जयंत चौधरी ने कहा कि दोनों देश एक अद्वितीय संस्थागत मंच साझा करते हैं जो संरचित ढांचे के माध्यम से चर्चाओं को ठोस परिणामों में बदल रहा है। इनमें योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) 2023, मांग मूल्यांकन के लिए एक समर्पित कौशल मानचित्रण रूपरेखा, और सहयोग को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर शामिल है।
श्री चौधरी ने कहा कि कृषि जैसे क्षेत्रों ने पहले ही मान्यता प्राप्त योग्यताओं के उपयोग के लिए कार्यात्मक गतिशीलता के रास्ते तैयार कर लिए हैं और इस सफलता को उभरते क्षेत्रों में दोहराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवा-केंद्रित सहयोग पर ज़ोर दिया और कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि खेल सहयोग का, विशेष रूप से निकट भविष्य में दोनों देशों के प्रमुख वैश्विक खेल आयोजनों के संदर्भ में, एक प्रमुख क्षेत्र है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के कौशल एवं प्रशिक्षण मंत्री एंड्रयू जाइल्स एमपी ने कहा कि “ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी है जो दोनों देशों के कौशल और प्रशिक्षण क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए अमूल्य है। हमारे देश का बढ़ता प्रभाव इस रिश्ते की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।”
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा सहायक मंत्री जूलियन हिल एमपी ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा, “आज की घोषणा ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा संबंधों की मज़बूती को दर्शाती है। विश्वस्तरीय ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा को सीधे भारत में लाकर, यूएनएसडब्ल्यू ने अन्य ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों द्वारा भारतीय छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने में सहायता और शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को और मज़बूत किया है।”
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष जेसन क्लेयर एमपी और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा सहायक मंत्री जूलियन हिल एमपी के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी की। दोनों मंत्रियों ने शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान में मौजूदा सहयोग की समीक्षा की और ‘प्री-स्कूल से पीएचडी’ तक के संबंधों को और गहरा करने पर सार्थक चर्चा की। श्री प्रधान ने ज़ोर देकर कहा कि हमारे छात्रों में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना और एआई-तैयार पीढ़ी का निर्माण करना भारत की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने आगे कहा कि दोनों मंत्री जीवंत भारत-ऑस्ट्रेलिया शैक्षिक साझेदारी में नई गतिशीलता जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें दोनों देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग, रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान निधि और दो-तरफ़ा गतिशीलता के लिए सुगम मार्ग शामिल हैं।
दिन का प्रमुख आकर्षण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों की स्थापना और संचालन) विनियम, 2023 के अंतर्गत उच्च शिक्षा सचिव और यूजीसी के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी द्वारा न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (यूएनएसडब्ल्यू) को आशय पत्र (एलओआई) सौंपना था। यूएनएसडब्ल्यू ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है और क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में वैश्विक स्तर पर शीर्ष–20 में शामिल है। यूएनएसडब्ल्यू को दिया गया यह आशय पत्र ला ट्रोब विश्वविद्यालय, विक्टोरिया विश्वविद्यालय, वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय सहित 4 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए दिए गए आशय पत्र के अतिरिक्त है। इस एलओआई के साथ, अब हमारे पास देश भर में 8 परिसरों के साथ 7 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय हैं।
इस बैठक में निम्नलिखित विषयगत स्तंभों पर चर्चा आयोजित की गई:
A. स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान
● प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और देखभाल सहयोग
● शिक्षक व्यावसायिक विकास
● स्कूली शिक्षा में खेल एकीकरण
● ऑस्ट्रेलिया में सीबीएसई से संबद्ध स्कूल के लिए अवसर
● विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों पर अपडेट
● ऑनलाइन और मिश्रित शिक्षा
● एआई, क्वांटम, जैव विविधता, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, स्थिरता, स्मार्ट गतिशीलता और अंतरिक्ष जैसे अग्रणी क्षेत्रों में 10 नए स्पार्क-वित्त पोषित भारत-ऑस्ट्रेलिया अनुसंधान परियोजनाओं की घोषणा (9.84 करोड़ रुपये स्वीकृत, यानी 1.64 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर)। इसके साथ, कुल 865 परियोजनाओं में से 129 शीर्ष ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के साथ हैं, जिनका संयुक्त वित्तीय मूल्य एक करोड़ 60 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है।
बी. कौशल,प्रशिक्षण और कार्यबल विकास
• प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संयुक्त पाठ्यक्रम
• ब्रिज कोर्स और पारस्परिक मान्यता मार्ग
• एनएसटीआई और ऑस्ट्रेलियाई टीएएफई के बीच साझेदारी
• आतिथ्य, निर्माण, कृषि, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और स्वास्थ्य विज्ञान में नए अवसर
• एनसीओई एजेंडा सहित उत्कृष्टता केंद्रों का संचालन
दिन के दौरान, कई भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई उच्च शिक्षण संस्थानों और कौशल निकायों ने सहयोग को गहरा करने के लिए समझौता ज्ञापनों/आशय पत्रों का आदान-प्रदान किया:
प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा पर आशय पत्र (भारत सरकार एवं ऑस्ट्रेलिया): सीबीएसई ईसीसीई पाठ्यक्रम को ऑस्ट्रेलिया के ईसीईसी में सर्टिफिकेट III के साथ मिलाना जिससे कार्यबल विकास और पाठ्यक्रम नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
जेम्स कुक विश्वविद्यालय और ओडिशा सरकार: ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार गलियारे से जुड़े एक समुद्री पारिस्थितिक अनुसंधान केंद्र की स्थापना।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय,भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खान विद्यालय) धनबाद: खनन अन्वेषण, खनन लॉजिस्टिक्स और खनन स्वचालन और स्थिरता में सहयोग।
डीकिन विश्वविद्यालय एवं भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई): भारतीय शिक्षार्थियों के लिए रोजगारपरक परिणामों में सुधार लाने के लिए डीकिन के वैश्विक नौकरी तत्परता कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार।
डीकिन विश्वविद्यालय एवं आईआईटी रुड़की: आपदा प्रतिरोधकता में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय एवं आंध्र प्रदेश सरकार: डब्ल्यूएसयू को आंध्र प्रदेश केरतन टाटा इनोवेशन हब से जोड़कर कृषि अनुसंधान एवं नवाचार ।
मोनाश विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश सरकार: बड़े पैमाने पर शिक्षक व्यावसायिक विकास के लिए एक शिक्षण उत्कृष्टता अकादमी की स्थापना।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय (यूडब्ल्यूए) और खनन क्षेत्र के लिए कौशल परिषद: ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच एक वैश्विक खनन प्रतिभा पूल का विकास।
ऑस्ट्रेलिया के मंत्री जेसन क्लेयर ने श्री धर्मेंद्र प्रधान को ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाली चौथी एआईईएससी बैठक के लिए आमंत्रित किया। दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि एक स्पष्ट समय-सीमा के भीतर अधिक से अधिक उपलब्धियां और परिणाम प्राप्त किए जाने चाहिए।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 09 से 12 दिसंबर 2025 तक ब्राजील की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं।
इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना और ब्राजील की नौसेना के बीच मजबूत और बढ़ती समुद्री साझेदारी को सुदृढ़ करना है। यह भारत-ब्राजील व्यापक सामरिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
नौसेना प्रमुख इस यात्रा के दौरान, ब्राज़ील के वरिष्ठ नेतृत्व ब्राज़ील के रक्षा मंत्री श्री जोस मुसियो, ब्राज़ील सशस्त्र बलों के संयुक्त स्टाफ प्रमुख एडमिरल रेनाटो रोड्रिग्स डी अगुइर फ़्रेयरऔर ब्राज़ील के नौसेना कमांडर एडमिरल मार्कोस सम्पायो ओलसेन के साथ विचार-विमर्श करेंगे। विचार-विमर्श वर्तमान द्विपक्षीय समुद्री सहयोग की समीक्षा करने, परिचालन-स्तरीय सम्बंधों को बढ़ाने और दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर प्रदान करेगा।
इस यात्रा में परिचालन कमांडों के साथ बैठकें, नौसैनिक अड्डों और ब्राजील की नौसेना के शिपयार्डों का दौरा शामिल है।
बातचीत के दौरान साझा समुद्री प्राथमिकताओं, नौसैनिक अंतर-संचालन, क्षमता निर्माण और व्यापक दक्षिण-दक्षिण सहयोग सहित बहुपक्षीय ढांचे के भीतर सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
नौसेना प्रमुख की यह यात्रा, समुद्री सुरक्षा, व्यावसायिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में ब्राजील की नौसेना के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। इससे वैश्विक समुद्री क्षेत्र में स्थिरता लाने में योगदान मिलेगा।
काशी – काशी-तमिल संगमम् 4.0 की पहल ‘तमिल करकलाम’ यानी आइए तमिल सीखें के अंतर्गत जिले के 50 स्कूलों में तमिल भाषा की कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। तमिलनाडु से आए 50 शिक्षकों ने अलग-अलग स्कूलों में छात्रों को तमिल भाषा की बुनियादी जानकारी दी। इनमें माध्यमिक और बेसिक स्कूलों के साथ-साथ जिले के निजी और कॉन्वेंट स्कूल भी शामिल हैं।
दो विभिन्न पालियों में तमिल शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को तमिल पढ़ाया। इसके अंतर्गत तमिल बोलने के साथ अक्षर ज्ञान भी कराया जा रहा है। छात्रों को स्कूल में तमिल वर्णमाला, स्वर और व्यंजन की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा रोजमर्रा में उपयोग होने वाले वाक्यों जैसे आपका नाम क्या है?, आप किस स्कूल में पढ़ते हैं?, मेरा नाम… है, आदि का तमिल में उच्चारण भी सिखाया जा रहा है।
शिक्षकों के एक दल ने बंगाली टोला इंटर कॉलेज में स्पेशल क्लास आयोजित की। लगभग दो घंटे चली इस कक्षा में छात्रों को तमिल लिखना और बोलना सिखाया गया। छात्रों ने बताया कि उनके घर के आसपास तमिलनाडु से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, ऐसे में यदि वे तमिल भाषा सीख जाएँगे तो उन पर्यटकों से बातचीत कर सकेंगे और उनकी बातों को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे। छात्रों ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय की यह पहल अत्यंत उपयोगी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयोजित यह संगमम् उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के संगम का श्रेष्ठ उदाहरण बन चुका है। प्रतिभागियों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना इस आयोजन में सजीव रूप से दिखाई देती है।
2 दिसंबर से प्रारंभ हुआ यह दो-सप्ताह का कार्यक्रम तमिलनाडु और काशी के बीच सेतु बनकर सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। इस आयोजन में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि सात विभिन्न श्रेणियों छात्र, शिक्षक, लेखक, मीडिया प्रतिनिधि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पेशेवर एवं शिल्पकार, महिलाएँ तथा आध्यात्मिक विद्वान भाग ले रहे हैं।
केरल – भारतीय डाक ने केरल के कोट्टायम स्थित सीएमएस कॉलेज में अपनी तरह के पहले जेन-जेड डाकघर विस्तार काउंटर का उद्घाटन किया। यह नई पीढ़ी के लिए आवश्यक आधुनिक डाक सेवाओं से जुडाव को परिभाषित करेगा। इस सुविधा का उद्घाटन केरल मध्य क्षेत्र के डाक निदेशक (डीपीएस) श्री एन.आर. गिरि ने किया।
भारतीय डाक और सीएमएस कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों द्वाराजेन जेड डाकघर विस्तार काउंटर का उद्घाटन
‘छात्रों का, छात्रों द्वारा, छात्रों के लिए’ के मूल दर्शन के साथ परिकल्पित इस पूरे स्थान की कल्पना, योजना और सह-निर्माण सीएमएस कॉलेज के छात्रों द्वारा भारतीय डाक अधिकारियों के सहयोग से किया गया, जो रचनात्मकता, स्थिरता और सेवा का एक आदर्श मिश्रण प्रस्तुत करता है।
यह डाक विस्तार काउंटर एक जीवंत, युवा, प्रकृति से ओतप्रोत स्थान है जो आंतरिक और बाहरी क्षेत्रों का सहज मिश्रण है। इसका परिणाम एक आधुनिक डाक विस्तार काउंटर है जो एक कार्य कैफ़े, एक हरित कोना और एक सामुदायिक केंद्र के रूप में कार्य करता है—और साथ ही प्रकृति के साथ सामंजस्य के कॉलेज के सिद्धांतों के प्रति भी समर्पित है।
सीएमएस कॉलेज में नवनिर्मित जेन जेड थीम वाला डाक विस्तार काउंटर।
जेन जेड डाकघर विस्तार काउंटर की मुख्य विशेषताएं
पिकनिक-टेबल शैली की व्यवस्था और एक ऊर्ध्वाधर उद्यान के साथप्रकृति-थीम वाला बैठने का क्षेत्र, एक ताज़ा और शांत वातावरण प्रदान करता है। नवीनीकृतटायरों से बनी अतिरिक्त बैठने की व्यवस्था, स्थिरता और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं के प्रति छात्रों कीप्रतिबद्धता को दर्शाती है।
लैपटॉप और मोबाइल उपकरणों के लिए चार्जिंग पॉइंट से सुसज्जित कार्य–अनुकूल काउंटर हैं।
मनोरंजन और विश्राम का कोना, जिसमें पुस्तकों और बोर्ड गेम्स से युक्त एक बुकशेल्फ़ है, तथा शांत चिंतन के लिए एक इनडोर रीडिंग नुक्कड़ भी है।
पैकेजिंग सामग्री और माईस्टाम्प प्रिंटर के साथपूर्णतः सुसज्जित एमपीसीएम बुकिंग काउंटर, सेवा की सुगमता को बढ़ाता है।
कला से सुसज्जित आंतरिक भाग, जिसमें छात्रों और कर्मचारियों द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो भारतीय डाक, कोट्टायम की सांस्कृतिक विरासत – साहित्य की भूमि, केरल की विरासत, सीएमएस कॉलेज के लोकाचार और प्रकृति से प्रेरित रूपांकनों को दर्शाती है।
यह जेन जेड शैली का विस्तार काउंटर सिर्फ एक कार्यात्मक सेवा केंद्र नहीं है – यह एक कार्यस्थल, बैठक स्थल, रचनात्मक केंद्र, विश्राम क्षेत्र और सामुदायिक कोना है, जो भारतीय डाक की विरासत को भविष्य में गर्व से आगे ले जा रहा है।
आउटडोर कैफे हरियाली शैली का विस्तार है।
सौंदर्यपूर्ण ढंग से डिजाइन किया गया इंटीरियर और काउंटर क्षेत्र।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (9 दिसंबर, 2025), नई दिल्ली में वर्ष 2023 और 2024 के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि कला हमारे अतीत की स्मृतियों, वर्तमान के अनुभवों और भविष्य की आकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करती है। प्राचीन काल से ही मनुष्य चित्रकला या मूर्तिकला के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करता रहा है। कला लोगों को संस्कृति से जोड़ती है। कला लोगों को एक-दूसरे से भी जोड़ती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा के जीवंत और संरक्षित रहने का श्रेय, पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे कारीगरों की प्रतिबद्धता को जाता है। हमारे कारीगरों ने अपनी कला और परंपरा को समय के साथ ढाला है और साथ ही मूल भावना को भी जीवित रखा है। उन्होंने अपनी प्रत्येक कलात्मक रचना में देश की मिट्टी की खुशबू को संजोकर रखा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हस्तशिल्प न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। यह क्षेत्र देश में 32 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देता है। उल्लेखनीय है कि हस्तशिल्प से रोज़गार और आय प्राप्त करने वाले ज़्यादातर लोग ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। यह क्षेत्र रोज़गार और आय का विकेंद्रीकरण करके समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक सशक्तिकरण के लिए हस्तशिल्प को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लोगों को सहायता प्रदान करता रहा है। हस्तशिल्प न केवल कारीगरों को आजीविका का साधन प्रदान करता है, बल्कि उनकी कला उन्हें समाज में पहचान और सम्मान भी दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल में 68 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी है और इस क्षेत्र के विकास से महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि हस्तशिल्प उद्योग की सबसे बड़ी ताकत प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों पर इसकी निर्भरता है। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल है और इसमें कार्बन उत्सर्जन कम होता है। आज, दुनिया भर में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ जीवनशैली की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। ऐसे में, यह क्षेत्र स्थायित्व में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
राष्ट्रपति ने जीआई टैग द्वारा दुनिया भर में भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की पहचान को मज़बूत करने की उपलब्धियों पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने सभी हितधारकों से अपने अनूठे उत्पादों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग उनके उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विश्वसनीयता को बढ़ाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल हमारे क्षेत्रीय हस्तशिल्प उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय पहचान को भी मज़बूत कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे कारीगरों के पीढ़ी दर पीढ़ी संचित ज्ञान, समर्पण और कड़ी मेहनत के बल पर, भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय हस्तशिल्प की मांग में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवा उद्यमियों और डिज़ाइनरों को उद्यम स्थापित करने के बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।
नई दिल्ली – सरकार प्रत्येक वर्ष, राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अभिमतों पर विचार करने के पश्चात कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है।
वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर रखने के पूर्व-निर्धारित सिद्धांत की घोषणा की गई थी। तदनुसार, सरकार ने वर्ष 2018-19 से सभी अधिदेशित खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ के साथ वृद्धि की है।
एमएसपी नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, एमएसपी की घोषणा के पश्चात, सरकार किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य नामित राज्य एजेंसियों के माध्यम से अनाज और मोटे अनाज की खरीद करती है। जब दलहन, तिलहन और कोपरा का बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो जाता है, तब संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से इन उत्पादों की खरीद, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समग्र योजना के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत की जाती है। पीएम-आशा योजना के तहत खरीद एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) हैं। सरकार द्वारा कपास और पटसन की खरीद भी क्रमशः भारतीय कपास निगम (सीसीआई) और भारतीय पटसन निगम (जेसीआई) के माध्यम से एमएसपी पर की जाती है।
सरकार निर्दिष्ट खरीद एजेंसियों के माध्यम से कृषि फसलों की खरीद करने की पेशकश करती है और किसानों के पास अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को या खुले बाजार में जो भी उनके लिए लाभप्रद हो, बेचने का विकल्प है।
बढ़ी हुई एमएसपी से देश के किसान लाभान्वित हुए हैं, जो खरीद के आंकड़ों और किसानों को दी गई एमएसपी राशि से स्पष्ट है। 2024-25 (फसल वर्ष) के दौरान खरीद और किसानों को दी गई एमएसपी राशि का विवरण निम्नानुसार है:
कुल खरीद (एलएमटी में)
कुल एमएसपी मूल्य (लाख करोड़ में)
1,223
3.47
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहल, वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी), भारत की उभरती रचनात्मक प्रतिभाओं को दुनिया के सामने ला रही है। दो चुनौतियों, बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेता, राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल (एनएसएसएफ) के 15वें संस्करण में मुख्य आकर्षण बन रहे हैं। यह दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक है, जो भारत के समृद्ध पाक कला परिदृश्य का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जाता है। यह उत्सव क्षेत्रीय व्यंजनों से लेकर लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड तक, विविध स्वादों को एक साथ लाता है।
इस वर्ष, यह महोत्सव 12 से 14 दिसंबर, 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्रिएट इन इंडिया चैलेंज – सीजन 1 के विजेताओं की समृद्ध और विविध प्रतिभा का प्रदर्शन किया जाएगा, साथ ही प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर, अभिनेता आशीष विद्यार्थी, श्रीलंकाई पॉप कलाकार योहानी, गीतकार और गायक अमिताभ एस वर्मा और हिप-हॉप कलाकार एमसी स्क्वायर और कुल्लर जी भी प्रस्तुति देंगे।
तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह में रोमांचक सीआईसी संगीत कार्यक्रम शामिल होंगे:
1. बैंड शिवोहम (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – सदस्य पैडी, सनी, आशु और हितेश सूफ़ी धुनें और बॉलीवुड के क्लासिक गाने प्रस्तुत करेंगे।
2. चिराग तोमर (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – तालवादक साहिल वर्मा के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड हिट गाने प्रस्तुत करेंगे।
3. निशु शर्मा (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुत करेंगे।
4. नयन कृष्णा (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – बाँसुरी वादन प्रस्तुत करेंगे।
5. मालदीव का एक विजेता बैंड पहली बार भारत में प्रस्तुति देगा, जिससे इस कार्यक्रम में एक अंतर्राष्ट्रीय आयाम जुड़ जाएगा।
सीआईसी और वेव्स पहल के तहत विकसित यह युवा कलाकार राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेताओं ने वेव्स, मुंबई में अपनी कलात्मक विविधता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और मेलबर्न में प्रमुख वेव्स बाज़ार ग्लोबल आउटरीच इवेंट्स, ओसाका वर्ल्ड एक्सपो और टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड महोत्सव में उनकी भागीदारी उनकी रचनात्मक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो उन्हें और भी व्यापक और विविध दर्शकों से जुड़ने में मदद करती है।
भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
यह पहल कलाकारों और उत्साही लोगों को अपनी रचनात्मकता को निखारने, उसे वेव्स मंच के माध्यम से प्रदर्शित करने और अपनी प्रतिभा व रचनात्मकता से धन कमाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच बनाने के अवसर प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिससे भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) के बारे में
क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख ‘वेव्स’ पहल के अंतर्गत एक पहल है, जिसका उद्देश्य संगीत, फिल्म, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, कॉमिक्स, एआई, एक्सआर और डिजिटल मीडिया जैसे विभिन्न मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों में भारत की रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान, पोषण, चयन और प्रदर्शन करना है।
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नई दिल्ली – भारत सरकार ने बैंक जमा, बीमा, डिविडेंड, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन समेत अदावाकृत वित्तीय संपत्तियों को उनके वैध दावेदारों तक पहुंचाने के लिए “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।
4 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क – जागरूकता, पहुंच और कार्यवाही पर आधारित है। यह तीन महीने का अभियान (अक्टूबर-दिसंबर 2025) सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाएगा। अक्टूबर से 5 दिसंबर 2025 तक, 477 जिलों में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भागीदारी से शिविर आयोजित किए गए हैं।
अभियान के दौरान पहुंच को उच्चतम करने के लिए, मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू), और प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री, साथ ही लघु वीडियो संदेश, का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया गया है। दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जिला-स्तरीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें जमीनी स्तर पर डिजिटल प्रदर्शन, हेल्पडेस्क और निर्देशित सहायता शामिल है।
इस अभियान में वित्तीय क्षेत्र के सभी प्रमुख निधि नियामकों – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की सहयोगी भागीदारी शामिल है। आरबीआई के उद्गम (अदावाकृत बैंक जमाओं के लिए), आईआरडीएआई के बीमा भरोसा (अदावाकृत बीमा राशि के लिए) और सेबी के मित्रा (अदावाकृत म्यूचुअल फंडों के लिए) जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म ने नागरिकों को अपनी अदावाकृत संपत्तियों का अधिक कुशलता से पता लगाने में योग्य बनाया है। अभियान के पहले दो महीनों के दौरान, लगभग ₹2,000 करोड़ मूल्य की अदावाकृत धनराशि पर उनके वास्तविक स्वामियों की ओर से दावा किया गया है।
यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
नई दिल्ली – रेल और जल शक्ति राज्यमंत्री श्री वी सोमन्ना ने तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस का नई दिल्ली स्थित रेल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखा कर शुभारंभ किया।
तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस शुरू किए जाने से कई दूरगामी लाभ होंगे। इससे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच रेल संपर्क को काफी मजबूती मिलेगी। यह श्रद्धालुओं के लिए आंध्र प्रदेश की दक्षिण तटीय पट्टी से शिरडी के लिए पहली सीधी ट्रेन सेवा है। यह ट्रेन भारत के दो प्रमुख तीर्थ स्थलों, तिरुपति और शिरडी को सीधे जोड़ कर तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी।
इस नई ट्रेन से इसके मार्ग में तीर्थ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा यह क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी। यह यात्रियों को सुरक्षित, आरामदेह और निर्बाध अंतरराज्यीय यात्रा का विकल्प मुहैया कराएगी। इससे तीर्थयात्रियों के समग्र रेल यात्रा अनुभव में वृद्धि होगी। इस साप्ताहिक ट्रेन से तीर्थयात्री निर्बाध यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन को एक तरफ की यात्रा पूरी करने में लगभग 30 घंटों का समय लगेगा।
श्री वी सोमन्ना ने तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस के शुभारंभ को चार राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं है। यह देश की जीवन रेखा के रूप में क्षेत्रों और संस्कृतियों को जोड़ती भी है।
रेल और जल शक्ति राज्यमंत्री ने कहा कि अब तिरुपति और शिरडी सीधी ट्रेन सेवा से जुड़ गए हैं। यह ट्रेन नेल्लोर, गुंटूर, सिकंदराबाद, बीदर और मनमाड़ समेत 31 महत्वपूर्ण स्थानों पर रुकेगी। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन से तीर्थ पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने के साथ ही इसके मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन महाराष्ट्र, उत्तर कर्नाटक और सिकंदराबाद से सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराएगी। अपने मार्ग में यह एक महत्वपूर्ण शैव मंदिर परली वैजनाथ को भी जोड़ेगी।
श्री वी सोमन्ना ने कहा कि आंध्र प्रदेश में 2014 से रेल अवसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2009 से 2014 तक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का साझा औसत रेल बजट 886 करोड़ रुपए का था। यह 11 गुना बढ़ कर 2025-26 में 9417 करोड़ रुपए का हो गया। राज्य में 93000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं पर काम जारी है। आंध्र प्रदेश में 2014 से अब तक 1580 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गईं और 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा किया गया। राज्य में वर्तमान में 73 अमृत स्टेशन हैं। श्री सोमन्ना ने 800 फ्लाईओवरों और पुलों के निर्माण, 110 लिफ्ट और 40 एस्केलेटर लगाए जाने तथा 16 वंदे भारत (8 जोड़ी) और 6 अमृत भारत (3 जोड़ी) ट्रेन सेवाओं की शुरुआत का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे तिरुपति में तिरुपति अमृत स्टेशन समेत 312 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। प्रमुख जारी परियोजनाओं में तिरुपति-पकाला-कटपड़ी मार्ग पर 105 किलोमीटर का दोहरीकरण 1215 करोड़ रुपए के खर्च से किया जा रहा है। कुल 83 किलोमीटर की गुडूर-रेनिगुंटा तीसरी लाइन पर 875 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नादिकुड़ी-श्रीकालाहस्ती 310 किलोमीटर नई लाइन पर 5900 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसके अलावा, 287 किलोमीटर की विजयवाड़ा-गुडूर तीसरी लाइन पर 6235 करोड़ रुपए और 25 किलोमीटर की येरपेडु-पुडी बाईपास लाइन पर 490 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
आंध्र प्रदेश के सड़क और भवन तथा अवसंरचना और निवेश मंत्री श्री बीसी जनार्दन रेड्डी ने मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह में हिस्सा लिया। इसमें उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में तिरुपति के सांसद डॉ मदिला गुरुमूर्ति, विधान परिषद सदस्य श्री बी कल्याण चक्रवर्ती, तिरुपति से विधानसभा सदस्य श्री ए श्रीनिवासुलु तथा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) बोर्ड के सदस्य श्री भानु प्रकाश रेड्डी भी शामिल थे।
नुक्कड़ पर मिल गए, रामखेलावन भाई हमारे घर से थोड़ी दूर पर इनका भी घर है. अक्सर हम लोगों की मुलाकात नुक्कड़ पर ही हो जाती है क्योंकि उनका ड्यूटी से लौटना और मेरा ड्यूटी पर जाने का वक़्त एक ही है, रास्ते में ही दुआ सलाम हो जाता है. आज भी वही मुलाकात हुई, हमने पूछा रामखेलावन भाई चलो चाय पी लेते हैं. बगल में चाय की टपरी है हम लोग अक्सर वही चाय पीते हैं.
बात दो दिन पहले की है, रामखेलावन भाई की पत्नी(मेरी भाभी) एक दिन मिल गई, बोली– भैया थोड़ा इनको समझाते काहे नहीं है? , आजकल चुनाव लड़ने की बात करते हैं, साथ में रात में सोते – सोते बड़बडाते हैं कि हमरा कट मनी काहे नहीं दिया,अगला बार तेरा टेंडर बंद.
हमने सोचा कि आज रामखेलावन भाई को समझाते हैं.
ए रामखेलावन भाई सुन रहे हैं कि आप चुनाव लड़ रहे हैं. तो तपाक से रामखेलावन भाई बोले – हां भैया सच तो सुन रहे हैं ।
हम बोले – रामखेलावन भाई अपना अच्छा खासा जिंदगी काहे बर्बाद करने पर तुले हुए हैं इतना अच्छा खासा नौकरी है यहां कम से कम आपका घर द्वार है अगर मैनेजमेंट को पता चल गया तो आपका प्रमोशन करके बहुत दूर भेज देगा.तब आपको समझ में आएगा.
आपको (पाठकों को) एक राज की बात बताता हूँ हमारे यहाँ प्रोमोशन का मतलब सजा है. इतना दूर आपका ट्रान्सफर कर देगा कि या तो नौकरी से इस्तीफा दीजिये या सब कुछ छोड़ कर दूर प्रान्त में नौकरी कीजिये.
रामखेलावन भाई थोड़ा सोच में पड़ गए. अक्सर ऐसा होता है कि मैनेजमेंट या संपादक/ मैनेजमेंट का दरबारी के आंखों में अगर हम खटक गए तो हमारा बड़ी जल्दी प्रमोशन कर देगा और यहां से इतना दूर भेज देता है कि आपके पास इस्तीफा देने के अलावा और कोई रास्ता बचता नही है ।(कोई यूनियन काम नहीं आता है काहे कि उसका नेता ही मैनेजमेंट या संपादक का दरबारी होता है..)
खैर रामखेलावन भाई से हम पूछे– अचानक चुनाव लड़ने का बात मन में कैसे आया?
तो रामखेलावन भाई ठहरे सीधे साधे तपाक से बोले– भैया देख नहीं रहे हैं चुनाव में जीत जाने के बाद सब अपना वोटिंग सेटिंग करते रहता है कभी मंत्री के साथ तो कभी गवर्नर के साथ तो कभी मुख्यमंत्री के साथ बड़का बड़का फोटो खिंचवा के सोशल मीडिया में डालते रहता है, हमारा पत्नी बोलती है देखिए आप ही लोग का दोस्त है कितना बड़ा-बड़ा से जान पहचान है देखो आपसे तो रोड पर एगो कुत्ता भी नहीं डरता है. यही बात हमारे दिल में लगा तो हम भी चुनाव लड़ने के लिए सोच रहे हैं साथ में बहुतों के मुंह से सुन रहे हैं कि कट मनी करके भी कुछ होता है जो टेंडर लेने वालों से लिया जाता है तो इससे दो काम ना हो जाएगा भाई.. ।
हम रामखेलावन भाई को बोले– रामखेलावन भाई कि बताइए चुनाव तो ऐसे लड़ा नहीं जाता है चुनाव में मुर्गा दारू पार्टी दिया जाता है कहां से पैसा आएगा? सबसे बढ़कर बात कि आपको हर जगह जाकर हाथ जोड़कर वोट मांगना पड़ेगा।
थोड़ी देर मेरा मुंह ताकते रहे रामखेलावन भाई और बोले – भैया ई तो हमसे ना होगा काहे कि ना तो दारू का पैसा है और ना हीं हाउस – हाउस जाकर हाथ जोड़ने का कला हमारे पास है..।
हम बोले– रामखेलावन भाई मेरा एक बात मानिए जहां चुनाव हो रहा है ना वहां आप एक वोटर की हैसियत से जाइए और दिन भर बैठे रहिए देखिएगा सब लोग आपके पास हाथ जोड़कर वोट मांगने आ जाएंगे जो आपको पीठ पीछे गरियाता रहता है..वह भी ऐसा दिखाएगा जैसे वो आपका सगा भाई है..।
यह बात रामखेलावन भाई को दिल में लग गया अब वह चुनावी दरबार में जाकर एक वोटर की हैसियत से बैठ गए हैं और अब हर प्रत्याशी उनको हाथ जोड़कर वोट मांग रहा है .
एक दिन हम सोचे कि आजकल रामखेलावन भाई कहां है दिख नहीं रहे हैं तो सोचा कि फोन लगा लिया जाए जब फोन लगाए कि कहां है….
रामखेलावन भाई बोले उनको बहुत मजा आ रहा है सारे प्रत्याशी हाथ जोड़कर मिल रहे हैं।
फोन रखने के बाद हम मन ही मन ही सोचने लगे कि आज सभी प्रत्याशी हाथ जोड़ रहा है…. चुनाव जीत जाने के बाद आप दो साल तक उनके पास हाथ जोड़ते व मिमयाते रहिएगा वह कान में तेल डालकर सोते रहेंगे..ना तो आपके चिट्टी पत्री का कभी जबाब मिलेगा और ना ही आपके मुसीबत में खड़ा मिलेंगे….हमलोग अपने आप को कोसते हुए अगले दो साल इंतजार करते रहेंगे…जो उनका राग दरबारी होगा उसके लिए….बाकि आप खुद समझदार हैं……!!!
नई दिल्ली – सरकार ने देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं।
एमएसएमई को परिभाषित करने के लिए वर्ष 2020 में नए संशोधित मानदंड अपनाए गए। जिन्हें 01.04.2025 से पुन:संशोधित किया गया है।
i. 01.07.2020 से व्यापार में आसानी के लिए एमएसएमई के लिए उद्यम पंजीकरण।
02.07.2021 से खुदरा और थोक व्यापारियों को एमएसएमई के रूप में शामिल किया गया है।
एमएसएमई की स्थिति में परिवर्तन होने पर गैर-कर लाभ 3 वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया।
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक दायरे में लाने के लिए 11.01.2023 को उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया जाएगा।
v. एमएसएमई में इक्विटी निवेश के लिए आत्मनिर्भर भारत कोष का परिचालन।
एमएसएमई सहित व्यवसायों के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की आपद्कालिक ऋण-व्यवस्था गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की शुरूआत की गई थी। यह योजना 31.03.2023 तक लागू थी। ईसीएलजीएस पर भारतीय स्टेट बैंक की 23.01.2023 की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खाते, जिनमें से लगभग 98.3% खाते सूक्ष्म और लघु उद्यम श्रेणियों में थे को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में जाने से बचाया गया।
चमड़ा और वस्त्र क्षेत्र सहित विभिन्न एमएसएमई को पर्याप्त वित्तीय, प्रौद्योगिकी तथा व्यापार सहायता प्रदान करने के लिए कई उपाय किए गए हैं, जिनमें बैंक ऋण पर मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करके गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, संयंत्र और मशीनरी/उपकरण की खरीद के लिए संस्थागत वित्त पर एससी/एसटी एमएसई को 25% सब्सिडी के प्रावधान के साथ विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना, 10 करोड़ रुपये तक के गारंटी कवरेज के साथ सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए संपार्श्विक मुक्त ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों के लिए 20 लाख रुपये तक के संपार्श्विक मुक्त ऋण, पीएम विश्वकर्मा योजना, मुद्रा ऋण आदि जैसी योजनाएं शामिल हैं।
एमएसएमई चैंपियंस योजना का उद्देश्य प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, अपव्यय को कम करना, उद्यमों की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और उनकी राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहुँच एवं उत्कृष्टता को सुगम बनाना है। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने एमएसएमई को तकनीकी रूप से विकसित करने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायता करने के लिए देश भर में प्रौद्योगिकी केंद्र (टीसी) और विस्तार केंद्र (ईसी) स्थापित किए हैं। ये टीसी/ईसी एमएसएमई और कौशल इच्छुकों को प्रौद्योगिकी सहायता, कौशल विकास, इनक्यूबेशन और परामर्श जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं।
यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
रांची,09.12.2025 – आरपीएफ रांची के कमांडेंट श्री पवन कुमार के निर्देश पर आरपीएफ हटिया और फ्लाइंग टीम रांची द्वारा दिनांक 08.12.2025 को हटिया रेलवे स्टेशन में संयुक्त कार्रवाई के दौरान बड़ी सफलता हासिल की गई।
ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह और फ्लाइंग टीम ने संदिग्ध रूप से बैठे दो व्यक्तियों की जांच की, जिनके बैगों से प्लास्टिक में पैक कुल 23 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹11,50,000 है। आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त, रांची श्री अशोक कुमार सिंह की उपस्थिति में सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए चारों पैकेटों की DD किट से जांच की गई, जो पॉजिटिव पाए गए।
बाद मे उक्त गांजे को जब्त कर उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु जीआरपी हटिया को सुपुर्द कर दिया गया। इस कार्रवाई में आरपीएफ हटिया के उपनिरीक्षक एस.के. सिंह तथा फ्लाइंग टीम रांची के स्टाफ दिनेश प्रसाद, आर.के. सिंह, हेमंत और वी.एल. मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कोहिमा – ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भारत की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सतत ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, कोहिमा के नागा सॉलिडेरिटी पार्क में राज्य स्तरीय वाटरशेड महोत्सव 2025 का शुभारंभ किया।
यह कार्यक्रम जल-अभावग्रस्त क्षेत्रों को जल-सुरक्षित, जलवायु-अनुकूल परिदृश्यों में रूपांतरित करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता में एक प्रमुख उपलब्धि है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अनुरूप है, जिन्होंने उत्तर पूर्वी राज्यों को निरंतर भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है।
डॉ. पेम्मासानी ने मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान का शुभारंभ करते हुए रेखांकित किया कि जल सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा है। यह मिशन पारंपरिक जल निकायों को पुनर्जीवित करने, बंजर भूमि को बहाल करने, जल संचयन प्रणालियों को मजबूत करने और सामुदायिक भागीदारी तथा मनरेगा जैसी योजनाओं के साथ संयोजन के माध्यम से स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो अपनी प्राकृतिक नींव को संरक्षित रखते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाटरशेड विकास का मतलब सिर्फ जल प्रबंधन नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की पारिस्थितिकी बुनियाद का पुनर्निर्माण करना, आजीविका का सृजन करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ, नागालैंड समुदाय-नेतृत्व वाले वाटरशेड प्रबंधन में अग्रणी है। यहां झरनों का जीर्णोद्धार, जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण और भूमि संसाधनों का पुनरुद्धार केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं है – यह भावी पीढ़ियों के लिए जीवन रेखा है।
नागालैंड मानवीय भावना और सांस्कृतिक गतिशीलता का एक सशक्त प्रतीक है। इसकी समृद्ध परंपराएं, विविध भाषाएं, जीवंत संगीत, जटिल शिल्प और मनाए जाने वाले प्रसिद्ध त्यौहार, गरिमा और साहस में निहित एक सभ्यता को दर्शाते हैं और साथ-साथ विश्व के समक्ष असाधारण गर्मजोशी भी प्रदर्शित करते हैं। नागालैंड का अनुभव करने के लिए यह अवलोकन करना आवश्यक है कि किस प्रकार नागालैंडवासी गर्व के साथ अपनी पहचान को संजोते हैं, साथ ही एकता, परंपरा और अपनी पैतृक विरासत से अटूट जुड़ाव के माध्यम से जीवन का निरंतर उत्सव मनाते हैं।
दशकों तक, पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से अलग-थलग समझा जाता रहा। विकास के वर्तमान विजन के तहत, नागालैंड को अब एक दूरस्थ सीमा के रूप में नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में एक केंद्रीय भागीदार के रूप में देखा जाता है। बढ़ती कनेक्टिविटी, मज़बूत बुनियादी ढांचे और बेहतर डिजिटल पहुंच के साथ, यह राज्य पर्यटन, व्यापार, कृषि और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहा है। यह सिद्ध करता है कि इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी गहरी विरासत में निहित है, जो भविष्य के नए अवसरों से सुसज्जित है।
पीएमकेएसवाई और वाटरशेड विकास के अंतर्गत नागालैंड में प्रमुख उपलब्धियां:
राज्य में 14 वाटरशेड परियोजनाओं को मंजूरी
140 करोड़ रुपए स्वीकृत, जिसमें से 80 करोड़ रुपए पहले ही जारी किए जा चुके हैं
555 जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण
6,500 से अधिक किसान लाभान्वित
पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण 120 झरनों का जीर्णोद्धार
डॉ. पेम्मासानी ने रेखांकित किया कि अन्य राज्यों के विपरीत, जहां परियोजना वित्तपोषण 60:40 केन्द्र-राज्य अनुपात पर आधारित है, नागालैंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों को 90 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता प्राप्त होती है, जो इस क्षेत्र में विकास को गति देने पर सरकार के विशेष फोकस को दर्शाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में विश्व का केवल 4 प्रतिशत नवीकरणीय ताज़ा पानी उपलब्ध है, लेकिन वैश्विक जनसंख्या में उसकी 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए देश को अनिवार्य रूप से प्रणालीगत जल संरक्षण और कुशल संसाधन प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए। वर्तमान में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता पहले से ही जल-संकट के मानक से नीचे है, ऐसे में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और वाटरशेड कार्यक्रम कदम जैसे कि- किसानों की आय में वृद्धि, भूजल स्तर में सुधार और बहु-फसल चक्रों को सक्षम बनाना-रूपांतरकारी साबित हुए हैं।
डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री श्री नेफ्यू रियो के मार्गदर्शन में नागालैंड सरकार के नेतृत्व, इसके प्रभावी कार्यान्वयन और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए सराहना की। उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रभावशाली बदलाव लाने के लिए डॉ. जी. हुकुघा सेमा, आईआरएस और श्री जी. इकुतो झिमोमी सहित अधिकारियों के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
जनभागीदारी के माध्यम से अधिकाधिक सामुदायिक भागीदारी की अपील करते हुए डॉ. पेम्मासानी ने नागरिकों से जल और भूमि संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया।
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के जल सुरक्षित भारत के विजन को साकार करने के लिए सहकारी संघवाद की भावना से केन्द्र और राज्य द्वारा मिलकर काम करने का एक सशक्त उदाहरण है।
उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश में राँची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वाहनों (ट्रक,
हाइवा, डंपर आदि) के विरुद्ध अभियान चलाया गया
कागजात पूर्ण नहीं रखने पर 72,650 रुपये का जुर्माना, 05 वाहन जप्त
नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी
रांची,08.12.2025 – उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश में आज दिनांक 08.12.2025 को जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व एवं पर्यवेक्षण में राँची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वाहनों (ट्रक, हाइवा, डंपर आदि) के विरुद्ध अभियान चलाया गया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना, ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाना तथा मोटरयान अधिनियम एवं नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना रहा।
निम्न स्थानों में चला वाहन जाँच अभियान
मोरहाबादी, बोडया, रिंग रोड,बीआईटी मेसरा,सिल्ली थाना क्षेत्र
जाँच के दौरान पाई गई प्रमुख अनियमितताएँ
टैक्स अपडेट नहीं
फिटनेस प्रमाण-पत्र समाप्त
वैध बीमा (इंश्योरेंस) का अभाव
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) नहीं
परमिट के बिना संचालन
वैध ड्राइविंग लाइसेंस का अभाव
निर्धारित भार से अधिक माल लादकर ओवरलोडिंग
कुल 05 व्यवसायिक वाहनों पर मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कुल रु. 72,650/- (बहत्तर हजार छह सौ पचास रुपये) का दण्ड अधिरोपित किया गया।
गम्भीर अनियमितताओं के कारण निम्नलिखित वाहनों को जप्त कर सुरक्षित स्थानों पर रखा गया :
01 हाइवा → मोराहबादी TOP पर जप्त।
01 वाहन → सिल्ली थाना में जप्त
03 वाहन → बीआईटी मेसरा TOP पर जप्त
नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी
जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न प्रकार वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेज (टैक्स, फिटनेस, इंश्योरेंस, PUC, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस) को सदैव अद्यतन रखें तथा निर्धारित भार से अधिक माल नहीं लादें। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) रांची द्वारा अगस्त–सितंबर 2025 में आयोजित भर्ती रैली में सफल हुए अग्निवीर अभ्यर्थियों का रेजिमेंटल सेंटरों के लिए चरणबद्ध डिस्पैच जारी
अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी में अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है
रांची,08.12.2025 – झारखंड — झारखंड के युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का मार्ग लगातार आगे बढ़ रहा है। आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) रांची द्वारा अगस्त–सितंबर 2025 में आयोजित भर्ती रैली में सफल हुए अग्निवीर अभ्यर्थियों का रेजिमेंटल सेंटरों के लिए चरणबद्ध डिस्पैच जारी है।
अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी में अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है
अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जिनमें अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी शामिल हैं।
सभी को एक बार में नहीं भेजा जा रहा है, बल्कि प्रतिदिन छोटे-छोटे बैचों में उम्मीदवारों का डिस्पैच किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनी रहे।
ARO रांची की टीम डॉक्यूमेंटेशन, मेडिकल वेरिफिकेशन, क्लियरेंस और रेजिमेंट-वार अलॉटमेंट की प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और निरंतर प्रयासों के साथ पूरा कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि चरणबद्ध डिस्पैच का उद्देश्य है कि हर उम्मीदवार को सही मार्गदर्शन और व्यक्तिगत सहायता मिल सके।
दूसरी मेरिट लिस्ट जल्द होगी जारी होगी
ARO रांची ने यह भी बताया है कि दूसरी मेरिट लिस्ट शीघ्र जारी की जाएगी। इसके अंतर्गत और भी योग्य उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा।
अभ्यर्थियों अपने सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें
अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें, क्योंकि मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद डिस्पैच के लिए समय कम मिलेगा और प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जाएगी।
चरणबद्ध डिस्पैच के माध्यम से ये युवा विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और भारतीय सेना की शक्ति में नया जोश भरेंगे
अग्निवीर योजना ने झारखंड के युवाओं को न केवल रोजगार का अवसर दिया है, बल्कि अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की राह भी प्रदान की है। चरणबद्ध डिस्पैच के माध्यम से ये युवा विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और भारतीय सेना की शक्ति में नया जोश भरेंगे।
ARO रांची ने सभी चयनित उम्मीदवारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और अभ्यर्थियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
रांची – जेसीआई रांची की टीम 2026 का गठन हुआ, जिसमें जेसी अभिषेक जैन सर्वसम्मति से नव निर्वाचित अध्यक्ष वहीं साकेत अग्रवाल सचिव घोषित हुए। नई टीम 2026 के उपाध्यक्ष के पद पर आदित्य जालान, अनुभव अग्रवाल, अनिमेष निखिल, रवि आनंद, निशांत मोदी और निखिल अग्रवाल चुने गए। सह सचिव मनदीप सिंह व कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन चुने गए। साथ ही संस्था के निदेशक ऋषभ जालान, अमन सिंघानिया, निखिल मोदी, ऋषभ छापड़िया, नितिन पोद्दार, उदित तुलस्यान, अमन पोद्दार, अग्निश मित्रा, किशन अग्रवाल, अनीश जैन, मयंक अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, दीपक कुमार पटेल, रविकांत समोटा, अभिषेक नर्नोली, शुभम बुधिया, मोहित बागला, अंकित अग्रवाल, सृजन हेतमसरिया व अंकित मोदी चुने गए।
चुनाव प्रक्रिया में मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार पूर्व अध्यक्ष विक्रम चौधरी, अमित खोवाल व गौरव अग्रवाल ने निष्ठापूर्वक निभाया।
तत्कालीन अध्यक्ष प्रतीक जैन ने नव निर्वाचित अध्यक्ष को माला पहना कर उन्हें बधाई दी, वही साकेत अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन कर सभी का धन्यवाद किया।
चुनाव प्रक्रिया में पूर्व अध्यक्ष राकेश जैन, आनंद धानुका, अभिषेक केडिया, मनीष रामसिसरिया, नारायण मुरारका, अरविंद राजगढ़िया, दीपक कुमार अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।
यह जानकारी संस्था के प्रवक्ता आदित्य जालान ने सांझा की।
नई दिल्ली – वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में, भारत सरकार ने घोषणा की, कि जनजातीय बच्चों को उनके अपने वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए, 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी और कम से कम 20,000 जनजातीय लोगों (2011 की जनगणना के अनुसार) वाले प्रत्येक प्रखंड में ईएमआरएस स्थापित किए जाएंगे। बिहार के भागलपुर जिले का कोई भी प्रखंड इन दोहरे मानदंडों को पूरा नहीं करता है।
बिहार में स्वीकृत ईएमआरएस का ब्यौरा निम्नानुसार है:
1. झाझा, जमुई जिला
2. रामनगर, पश्चिम चंपारण जिला
3. अधौरा, कैमूर जिला
पूर्णिया, बांका और मुंगेर जिलों का कोई भी प्रखंड, ईएमआरएस मंज़ूरी के लिए आवश्यक दोहरे मापदंडों को पूरा नहीं करता है।
ईएमआरएस की आवश्यकता की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।