डीआरआई ने लाल चंदन की संगठित तस्करी को नाकाम किया; चेन्नई में 6.26 करोड़ रुपये  मूल्य का 15 एमटी लाल चंदन जब्त किया; चार गिरफ्तार

नई दिल्ली – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 6.26 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित/वर्जित लाल चंदन का अवैध रूप से निर्यात करने के प्रयास को नाकाम कर दिया है। अलग-अलग गोदामों से कुल 15 एमटी लाल चंदन जब्त किया गया और इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। लाल चंदन (टेरोकार्पस सैंटालिनस) सीआईटीईएस के परिशिष्ट II और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-IV में सूचीबद्ध है और विदेश व्यापार नीति के तहत इसके निर्यात पर प्रतिबंध/रोक है।
डीआरआई के अधिकारियों को खास जानकारी मिली थी कि चेन्नई और उसके आस-पास के इलाकों में अलग-अलग गोदामों में लाल चंदन छिपाकर रखा जा रहा है और उसे चेन्नई से दिल्ली के रास्ते निर्यात करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद, डीआरआई के अधिकारियों ने 09.12.2025 से 11.12.2025 तक तीन जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

एक जगह से ग्रेड ए क्वालिटी के कुल 169 लाल चंदन के लट्ठे बरामद किए गए, जिनका वजन 5.55 एमटी  था। इनमें से 76 लट्ठों को सफेद एचडीपीई पैकिंग सामग्री में लपेटकर  छुपाया गया था और उन्हें ‘घरेलू सामान’ की आड़ में अवैध रूप से दिल्ली ले जाने के लिए ट्रक में लादने की तैयारी थी। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत अवैध निर्यात के लिए रखे गए सामान और कवर सामान को जब्त कर लिया गया। अन्य दो जगहों से लट्ठों, जड़ों और फर्नीचर के रूप में 9.55 एमटी लाल चंदन बरामद और जब्त किया गया।

गिरफ्तार किए गए चार लोगों में मुख्य संचालक, लाल चंदन की पैकिंग एवं परिवहन में शामिल उसके दो साथी और आपूर्तिकर्ता पक्ष का एक बिचौलिया शामिल है। आगे की जांच जारी है।

 

राजस्व खुफिया निदेशालय भारत की आर्थिक सीमाओं से खिलवाड़ करने और देश की समृद्ध जैव विविधता को खतरे में डालने वालों के विरुद्ध अपनी कार्रवाई लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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उप राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैय्यर के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन में तमिल सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैय्यर द्वितीय (सुवरण मारन) के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।

 

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा तमिल संस्कृति और भाषा के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने काशी तमिल संगमम् जैसी पहलों की प्रशंसा की और उन तमिल राजाओं, नेताओं तथा स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान और सम्मान देने के प्रयासों की भी भूरि-भूरि सराहना की, जिन्हें पहले पर्याप्त सम्मान और मान्यता नहीं मिली थी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैय्यर पर जारी किया गया यह स्मारक डाक टिकट तमिल विरासत को मान्यता प्रदान करने की इसी निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है।

सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैय्यर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे प्राचीन तमिलनाडु के सबसे प्रतिष्ठित शासकों में से एक थे और वह प्रतिष्ठित मुथरैय्यर वंश से संबंध रखते थे, जिसने 7वीं से 9वीं सदी तक तमिलनाडु के केंद्रीय क्षेत्रों पर शासन किया। उन्होंने उल्लेख किया कि सम्राट ने लगभग चार दशक तक तिरुचिरापल्लि से शासन किया और उनका शासन प्रशासनिक स्थिरता, क्षेत्रीय विस्तार, सांस्कृतिक संरक्षण और सैन्य कौशल के कारण प्रमुख रूप से जाना जाता था।

सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैय्यर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे प्राचीन तमिलनाडु के सबसे प्रतिष्ठित शासकों में से एक थे और वे उस सुप्रसिद्ध मुथरैय्यर वंश से संबंधित थे, जिसने 7वीं से 9वीं सदी सी ई काल में मध्य तमिलनाडु में शासन किया। उन्होंने यह भी बताया कि सम्राट ने लगभग चार दशक तक तिरुचिरापल्ली से शासन किया, और उनके शासनकाल को प्रशासनिक स्थिरता, क्षेत्रीय विस्तार, सांस्कृतिक संरक्षण और सैन्य कौशल जैसी विशेषताओं के लिए जाना जाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिलनाडु में कई स्थानों पर पाए गए शिलालेख सम्राट मुथरैय्यर के मंदिरों के लिए किए गए कार्यों, सिंचाई से जुड़ी योजनाओं और तमिल साहित्य के प्रति उनके योगदान का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि सम्राट का शासन दक्षिण भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

‘2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने’ के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और महान नेताओं की धरोहर का दस्तावेजीकरण, उनका सम्मान और उनकी विरासत का संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान तमिलनाडु सहित देश के सभी क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों और महान शासकों को सम्मानित करने के सरकारी प्रयासों को रेखांकित किया। उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि चोरी की गई लगभग 642 मूर्तियों और प्राचीन कलाकृतियों को 2014 के बाद वापस लाकर सुरक्षित किया गया है, जिनमें से कई तमिलनाडु से हैं। उप राष्ट्रपति ने इन प्रयासों को सराहनीय बताया।

इस अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; राज्यसभा के उपाध्यक्ष श्री हरिवंश; तथा सूचना एवं प्रसारण और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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मिजोरम को पहली बार रेल से कारें मिलीं, जो इस क्षेत्र के परिवहन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है

नई दिल्ली – सैरांग रेलवे स्टेशन पर पहली बार सीधे ऑटोमोबाइल रैक आया, जिसमें गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारें थीं। यह ऐतिहासिक कदम आइजोल में गाड़ियों की उपलब्धता बढ़ाएगा, लंबे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगा, और मिजोरम के ऑटोमोबाइल सेक्टर, जिसमें डीलर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और ग्राहक शामिल हैं, उन्हें फायदा पहुंचाएगा, जो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि इंडियन रेलवे की कनेक्टिविटी बढ़ाने, क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करने और पूरे देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

 

बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन मिजोरम के लिए बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुर्गम भूभाग से सावधानीपूर्वक काटकर बनाई गई यह लाइन 51.38 किलोमीटर लंबी है और 45 सुरंगों से होकर गुजरती है। यह रेलवे लाइन क्षेत्र के देश के शेष भाग के साथ रणनीतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस रेल लाइन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को किया था। इस अवसर पर उन्होंने आइजोल (सैरांग) और दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के बीच राजधानी एक्सप्रेस, आइजोल (सैरांग) और गुवाहाटी के बीच मिजोरम एक्सप्रेस और आइजोल (सैरांग) और कोलकाता के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही मिजोरम का भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पूर्ण एकीकरण हो गया।

नई रेल सेवाओं को लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। तीनों ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं, जिनमें सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस 147 प्रतिशत, सैरांग-गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस 115 प्रतिशत और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस 139 प्रतिशत शामिल हैं। यात्रियों के लिए ये ट्रेनें सुविधाजनक, किफायती और समय बचाने वाली हैं। रेल संपर्क से प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक यात्रा आसान हो गई है। साथ ही, आसपास के राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

बैराबी-सैरांग लाइन पर माल ढुलाई का काम उद्घाटन के तुरंत बाद शुरू हो गया। 14 सितंबर 2025 को पहली माल ढुलाई में असम से आइजोल तक 21 सीमेंट वैगन ले जाए गए। तब से, इस मार्ग पर सीमेंट, निर्माण सामग्री, वाहन, रेत और पत्थर के टुकड़े जैसी आवश्यक वस्तुओं का परिवहन किया जा रहा है।

सैरांग से पहली पार्सल खेप भी 19 सितंबर 2025 को बुक की गई थी, जब एंथुरियम के फूलों को पार्सल वैन (सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस) के माध्यम से आनंद विहार टर्मिनल तक पहुंचाया गया था। 17 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 17 रेक संचालित किए गए। ये विकासक्रम दर्शाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन रही है, जिससे परिवहन लागत कम हो रही है और मिजोरम के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास में समर्थन मिल रहा है।

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प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर आज हुए भयावह आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह हमला यहूदी त्योहार हनुक्का के पहले दिन का उत्सव मना रहे लोगों को निशाना बनाकर किया गया था।

इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए, श्री मोदी ने भारत के लोगों की ओर से उन परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भारत ऑस्ट्रेलिया के लोगों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है।

इस मुद्दे पर भारत के अटूट रुख को पुनः स्पष्ट करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रखता है और आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ वैश्विक संघर्ष का दृढ़तापूर्वक समर्थन करता है।

एक्स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

“ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर आज हुए भयावह आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूँ, जिसमें यहूदी त्योहार हनुक्का के पहले दिन का उत्सव मना रहे लोगों को निशाना बनाया गया। भारत के लोगों की ओर से, मैं उन परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। दुख की इस घड़ी में हम ऑस्ट्रेलिया के लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रखता है और आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करता है।”

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नागर विमानन मंत्री ने आगामी कोहरे की अवधि के लिए तैयारियों का आकलन करने हेतु समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – नागर विमानन मंत्री श्री राममोहन नायडू ने आज आगामी शीतकालीन सत्र के कोहरे वाले समय के लिए तैयारियों का आकलन करने के लिए नागर विमानन महानिदेशक (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), हवाई अड्डा संचालकों, एयरलाइनों और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) सहित सभी प्रमुख हितधारकों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

 

श्री राम मोहन नायडू ने सभी हितधारकों को निर्देश दिया कि वे पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें, जवाबदेही तय करें और कोहरे के संचालन के लिए एसओपी को लागू करें।

मंत्री महोदय ने कहा कि सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए वास्तविक समय में डेटा के आदान-प्रदान, युद्ध कक्षों को सक्रिय करने और योग्य चालक दल के साथ सीएटी-II/III मानकों के अनुरूप विमानों की तैनाती पर जोर देना होगा।

सुरक्षित, सुचारू और सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही यात्रियों को समय पर अपडेट की जानकारी दी जाएगी ताकि वे पहले से अच्छी तैयारी कर सकें। प्रत्येक यात्री महत्वपूर्ण है और असुविधा की किसी भी स्थिति में स्पष्ट जवाबदेही के साथ कार्रवाई की जाएगी।

नागर विमानन सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा, डीजीसीए श्री फैज अहमद किदवई, एएआई अध्यक्ष श्री विपिन कुमार और एमओसीए, हवाई अड्डा संचालकों, एयरलाइंस और सीआईएसएफ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी समीक्षा बैठक में उपस्थित रहे।

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प्रधानमंत्री ने हॉर्नबिल महोत्सव को भारत की सांस्कृतिक भव्यता और पूर्वोत्तर के बढ़ते आत्मविश्वास का उत्सव बताने वाले एक लेख को साझा किया

नई दिल्ली –  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव की जीवंत भावना की सराहना की और इसे भारत की सांस्कृतिक समृद्धि तथा इसकी जनजातीय विरासत की चिरस्थायी जीवंतता का एक शक्तिशाली प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज पूर्वोत्तर एक नए, आत्मविश्वासी भारत का चेहरा प्रस्तुत करता है। नागालैंड की अनूठी सांस्कृतिक पहचान की सराहना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह राज्य केवल एक महोत्सव की मेज़बानी नहीं करता, बल्कि यह स्वयं में एक उत्सव का प्रतीक है, जो वास्तव में ‘त्योहारों की भूमि’ के अपने गौरवशाली नाम को सही सिद्ध करता है।

केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा:

“इस मन को छू लेने वाले लेख में, केंद्रीय मंत्री श्री @JM_Scindia नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव को मानवीय भावना के विविध रंग और प्राचीन तथा आधुनिकता के अद्भुत समन्वय के रूप में चित्रित करते हैं। उन्होंने इस अटल सत्य को दोहराया है कि जब हमारा पूर्वोत्तर प्रकाशमान होगा, तभी समूचा राष्ट्र उन्नति की ऊंचाइयों को छूएगा।

पूर्वोत्तर को एक नए, आत्मविश्वासी भारत का चेहरा बताते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि नागालैंड केवल एक उत्सव नहीं मनाता—बल्कि वह स्वयं उत्सव को साकार करता है, जो वास्तव में इसे ‘त्योहारों की भूमि’ कहे जाने को सही सिद्ध करता है।”

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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अथानी में छत्रपति शिवाजी महाराज की 25 फुट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया

नई दिल्ली –  केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने  रविवार को कर्नाटक के बेलगावी स्थित अथानी में मराठा शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज की 25 फुट ऊँची भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए सिंधिया ने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान, साहस और हिंदवी स्वराज की चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि “जय भवानी, जय शिवाजी” का उद्घोष आज भी हर भारतीय के भीतर निर्भीकता, राष्ट्रधर्म और आत्मगौरव की ऊर्जा भर देता है। कार्यक्रम के दौरान मंजूनाथ भारती स्वामी जी, संभाजी भिड़े गुरु जी, कर्नाटक सरकार में मंत्री संतोष लाड़ एवं सतीश जारकिहोली, कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सवादी, कोल्हापुर सांसद श्रीमंत शाहू छत्रपति महाराज, कर्नाटक सरकार में पूर्व मंत्री श्रीमंत बी पाटिल और पीजीआर सिंधे सहित अन्य नेतागण मंच पर उपस्थित रहे।

हिंदवी स्वराज के शिल्पकार और राष्ट्रधर्म के प्रतीक हैं शिवाजी महाराज

अपने संबोधन में केन्द्रीय मंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में हिंदवी स्वराज का संकल्प लेने वाले शिवाजी महाराज ने साहस, रणनीति और दूरदृष्टि से आक्रांताओं को पराजित कर भारत के स्वाभिमान की रक्षा की। सिंधिया ने कहा कि बेलगावी और अथानी की भूमि शिवाजी महाराज के पराक्रम की साक्षी रही है।

दक्षिण भारत में उनके अभियानों के दौरान इस क्षेत्र का सामरिक महत्व अत्यंत रहा, जहाँ से दक्कन, कोंकण और गोवा मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि आज इसी धरती पर शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण होना इतिहास, परंपरा और वर्तमान को जोड़ने वाला गौरवपूर्ण क्षण है। सिंधिया ने कहा कि आज बेलगावी की धरती पर शौर्य, स्वाभिमान और असीम साहस की अमर गाथा सजीव हो उठी है।

शिवाजी महाराज की प्रेरणा पर अग्रसर है आधुनिक भारतः सिंधिया

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आज जब भारत आत्मगौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मार्ग पर अग्रसर है, तब छत्रपति शिवाजी महाराज का चरित्र और अधिक प्रासंगिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रधर्म की जो चेतना देश में आगे बढ़ रही है, उसकी जड़ें शिवाजी महाराज की उसी विचारधारा में हैं।

यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, साहस कभी थमता नहीं और स्वराज की भावना कभी पुरानी नहीं होती।

गौरतलब है कि केन्द्रीय मंत्री अपने दो दिवसीय महाराष्ट्र-कर्नाटक के दौरे पर हैं।

इससे पहले शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में बॉम्बे जिमखाना के 150 वर्ष पूर्ण होने पर डाक टिकट का विमोचन किया, तत्पश्चात वे ग्रामीण डाक सम्मेलन में शामिल हुए जहां उन्होंने ग्रामीण डाक सेवकों से संवाद किया।

उसके बाद आज सिंधिया बेलगावी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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“एक साथ आगे बढ़ने वाला राष्ट्र किसी को भी पीछे नहीं छोड़ता”: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिव्य कला मेला 2025 को संबोधित किया

नई दिल्ली – “हमारे दिव्यांग भाई-बहन हमसे अलग नहीं हैं – वे समाज में हमारे साथी हैं। किसी को भी पीछे छोड़कर कोई भी राष्ट्र सही मायने में प्रगति नहीं कर सकता।” दिल्ली की माननीया मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ में आयोजित दिव्य कला मेला 2025 के दिल्ली संस्करण को संबोधित करते हुए इन सशक्त शब्दों के माध्यम से एक भावपूर्ण एवं समावेशी संदेश दिया। उन्होंने इस बात को दोहराया कि सच्ची राष्ट्रीय प्रगति सामूहिक उत्थान में ही निहित है।

अपने दृष्टिकोण को विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सुलभ भारत अभियान, कौशल विकास कार्यक्रम, छात्रवृत्तियां, रोजगार मेले और दिव्या कला मेला जैसे समावेशी मंच दिव्यांगजनों के लिए गरिमा, अवसर और समान भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल   दिया कि वास्तविक परिवर्तन के लिए साहस और सामूहिक सोच की आवश्यकता होती है, जहां समाज व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सभी के कल्याण के लिए मिलकर काम करे। सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, माननीय केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और अधिकारियों के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली मेले में भाग लेने वाले दिव्यांगजन अधिक आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सफलता के साथ लौटेंगे।

 

इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए माननीय केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि एक सच्चे शक्तिशाली राष्ट्र की क्षमता  प्रत्येक नागरिक को गरिमा, समानता और अवसर प्रदान करने की उसकी प्रतिबद्धता से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि “सक्षम भारत, समर्थ भारत” का सपना तभी साकार हो सकेगा जब दिव्यांगजनों को राष्ट्र की प्रगति में समान भागीदार के रूप में मान्यता दी जाए। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिव्यांग समुदाय के साथ निरंतर रहे गहरे भावनात्मक एवं परिवर्तनकारी जुड़ाव को भी याद किया।

सरकार के संकल्प को दोहराते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मंत्र से प्रेरित होकर मोदी सरकार ने 2014 से अब तक देशभर में 32 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण एवं यंत्र उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय दिव्यांगजनों, जिनकी भूमिका 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण होगी, को सशक्त बनाने हेतु आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रहा है। इस आयोजन की भावना को व्यक्त करते हुए, उन्होंने दिव्य कला मेला और दिव्य कला शक्ति को “दिव्यांगता के भीतर क्षमता” का उत्सव बताया, जो दिव्यांग कलाकारों, उद्यमियों और कलाकारों को अपनी असाधारण प्रतिभा को आत्मविश्वास एवं गौरव के साथ प्रदर्शित करने हेतु एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) की सचिव श्रीमती वी. विद्यावती ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दिव्य कला मेला सशक्तिकरण का एक राष्ट्रव्यापी उत्प्रेरक बन गया है। उन्होंने बताया कि 2022 से अब तक आयोजित 27 मेलों में 20 करोड़ रुपये से अधिक की  बिक्री हुई है, लगभग 1,000 दिव्यांग उद्यमियों को 18 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है और विशेष रोजगार मेलों के माध्यम से 310 दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने प्रत्येक दिव्यांग नागरिक के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और दीर्घकालिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने वाले शिक्षा, कौशल विकास, सुलभता, सहायक प्रौद्योगिकी और आजीविका के अवसरों का एक अनुकूल इकोसिस्टम बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, श्रीमती ऋचा शंकर, डीडीजी ने दिव्य कला मेला को महज एक आयोजन से कहीं बढ़कर बताते हुए इसे देश भर के दिव्यांगजनों के “आत्मविश्वास, क्षमता और रचनात्मकता का उत्सव” कहा। उन्होंने दिव्यांग कलाकारों, उद्यमियों और सहयोगी संगठनों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके समर्पण और लगन ने इस मेले को समावेशन और प्रेरणा के राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मंच में बदल दिया है।

दिसंबर 2022 में अपनी स्थापना के बाद से, दिव्य कला मेला ने दिव्यांगजनों के लिए उद्यमिता, दृश्यता और मुख्यधारा में भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एडीआईपी योजना के तहत, 2014 से अब तक 32 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण एवं यंत्र प्राप्त हुए हैं, जबकि 934 दिव्यांगजनों को सूक्ष्म उद्यमों और आजीविका संबंधी गतिविधियों के विस्तार के लिए 18.05 करोड़ रुपये के ऋण के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, इन मेलों के साथ आयोजित रोजगार मेलों के जरिए 310 दिव्यांगजनों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

वर्तमान में कर्तव्य पथ पर जारी दिव्य कला मेला 2025, दिव्यांगजनों की सुदृढ़ता, कलात्मकता और उद्यमशीलता की भावना को एक जीवंत नमन है। हस्तशिल्प, गृह सज्जा, वस्त्र और रचनात्मक उत्पादों की प्रदर्शनियों के साथ-साथ, दिव्य कला शक्ति खंड देश भर के दिव्यांग कलाकारों द्वारा प्रेरणादायक संगीत, सांस्कृतिक और कलात्मक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। “वोकल फॉर लोकल” की भावना को प्रतिध्वनित करते हुए, यह मेला नागरिकों से दिव्यांगजनों की उद्यमशीलता एवं रचनात्मकता का समर्थन करने का आह्वान करता है। सरकार, समुदाय और नागरिकों के सामूहिक संकल्प के साथ, दिव्य कला मेले का यह संस्करण एक ऐसे संवेदनशील, सशक्त और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में एक और सार्थक कदम है, जहां प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को मान्यता, सम्मान और उन्नति के लिए समान अवसर प्राप्त हों।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को ‘जिज्ञासा’ नामक विज्ञान प्रचार कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी, जिससे 14 लाख स्कूली बच्चों को लाभ मिल रहा है

नई दिल्ली –  राज्यसभा में बोलते हुए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का “जिज्ञासा” छात्र-वैज्ञानिक संपर्क कार्यक्रम स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए सबसे प्रभावशाली पहलों में से एक बनकर उभरा है।

मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम से अब तक देश भर में 14 लाख से अधिक स्कूली बच्चों और लगभग 80,000 शिक्षकों को लाभ हुआ है, जिससे उन्हें अत्याधुनिक वैज्ञानिक कार्यों से अवगत कराया गया है और कम उम्र से ही अनुसंधान में रुचि विकसित की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के सहयोग से 2017 में शुरू की गई “जिज्ञासा” पहल, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के दौरे, वैज्ञानिकों के साथ संवाद और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को विज्ञान और नवाचार के परिवेश से सीधे जोड़ती है। लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यानों, कार्यशालाओं, आवासीय शिक्षण कार्यक्रमों, हैकथॉन और प्रयोग-आधारित गतिविधियों के माध्यम से छात्र वैज्ञानिक विधियों और वास्तविक दुनिया में उनके अनुप्रयोगों की जानकारी प्राप्त करते हैं। अब तक 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में 3,900 से अधिक जिज्ञासा गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं, जो इस पहल के व्यापक भौगोलिक और संस्थागत विस्तार को दर्शाती हैं।

मंत्री महोदय ने आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से 2021 में विकसित “जिज्ञासा वर्चुअल लैब” के प्रभाव पर भी जोर दिया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सिमुलेशन, एनिमेशन और इंटरैक्टिव लर्निंग मॉड्यूल प्रदान करता है, जिसमें भारतीय सांकेतिक भाषा में उपलब्ध 401 सामग्रियां शामिल हैं, जो दिव्यांगजन शिक्षार्थियों के लिए समावेशिता सुनिश्चित करती हैं। वर्चुअल लैब ने जिज्ञासा की पहुंच में एक महत्वपूर्ण डिजिटल आयाम जोड़ा है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के छात्र बिना किसी भौतिक बाधा के उच्च गुणवत्ता वाली वैज्ञानिक सामग्री तक पहुंच सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल के अंतर्गत प्रमुख कार्यक्रमों में व्यापक भागीदारी का उल्लेख किया। “जिज्ञासा विज्ञान महोत्सव 2022” को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसमें 30,000 से अधिक प्रतिभागियों और 3,000 कंटेंट सबमिशन प्राप्त हुए, जिनमें से 75 प्रविष्टियों को पुरस्कृत किया गया। इसी प्रकार, इपिक हैकाथॉन 2024 के लिए देश भर के छात्रों से 960 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 47 छात्रों ने सीएसआईआर की 18 प्रयोगशालाओं में ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप की, जहां उन्हें सीएसआईआर-आईजीआईबी, नई दिल्ली में आयोजित अंतिम दौर में प्रतिस्पर्धा करने से पहले व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। डॉ. सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों ने छात्रों को वास्तविक प्रयोगशाला वातावरण में समस्या-समाधान, प्रयोग और नवाचार से परिचित कराया है।

सदन में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले पांच वर्षों के जिज्ञासा कार्यक्रम के वित्तीय विवरण साझा किए। उन्होंने बताया कि 2021-22 में 597.10 लाख रु, 2022-23 में 1,392.63 लाख रु, 2023-24 में 1,650.00 लाख रु, 2024-25 में 1,900.00 लाख रु, और 2025-26 में 1,850.00 लाख रु, आवंटित किए गए। उन्होंने आगे कहा कि निधि में यह निरंतर वृद्धि जिज्ञासा कार्यक्रम की पहुंच बढ़ाने और इसके वैज्ञानिक एवं शैक्षिक घटकों को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सीएसआईआर ने 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान कार्यक्रम को लागू करने वाली अपनी प्रयोगशालाओं को जारी की गई धनराशि का राज्यवार विवरण भी प्रदान किया। महाराष्ट्र की प्रयोगशालाओं को सबसे अधिक धनराशि (क्रमशः 200.30 लाख रु, 215.90 लाख रु, और 224.35 लाख रु) प्राप्त हुए, इसके बाद तेलंगाना, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश का स्थान रहा, जिन्हें लगातार पर्याप्त धनराशि प्राप्त हुई। असम, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य क्षेत्रों की प्रयोगशालाओं को भी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कार्यक्रम देश भर के छात्रों और शिक्षकों तक पहुंचे।

करनाल में दिव्यांगजन छात्रों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा से सुसज्जित भारत की पहली खगोल विज्ञान प्रयोगशाला जैसी पहलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जो समावेशिता और सुलभता पर कार्यक्रम के जोर को दर्शाती है। इसी प्रकार, 21-25 जुलाई 2025 के बीच आयोजित राष्ट्रव्यापी “एक दिन वैज्ञानिक सप्ताह” में सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं के लगभग 14,000 छात्रों ने भाग लिया, जिससे उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

मंत्री जी ने यह भी उल्लेख किया कि जिज्ञासा ने नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), अटल इनोवेशन मिशन, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, कर्नाटक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अकादमी, आईआईटी बॉम्बे, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री और सीआईपीएलए फाउंडेशन के साथ मजबूत सहयोग स्थापित किया है। इन साझेदारियों से संसाधनों का आदान-प्रदान बढ़ा है और कार्यक्रम की पहुंच व्यापक हुई है, जिससे अधिक छात्र वैज्ञानिक अवधारणाओं से सार्थक रूप से जुड़ पा रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने निष्कर्ष निकाला कि जिज्ञासा कार्यक्रम एक सशक्त राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हो चुका है जो जिज्ञासा को प्रेरित करता है, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देता है और युवाओं को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। व्यावहारिक शिक्षा, डिजिटल नवाचार और व्यापक भागीदारी के माध्यम से, जिज्ञासा भारत के वैज्ञानिक रूप से जागरूक और नवाचार-प्रेरित समाज के निर्माण के दृष्टिकोण को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।

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केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कोल्हापुर, महाराष्ट्र में ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन को संबोधित किया और ग्रामीण डाक सेवकों को प्रेरित किया

नई दिल्ली – संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 13 दिसंबर 2025 को कोल्हापुर में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में गोवा और पुणे क्षेत्र के लगभग 6,000 ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) की विशाल सभा को संबोधित किया।

 

मराठी भाषा में अपने प्रेरणादायक संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने डाक कर्मचारियों की अटूट सेवा भावना की सराहना की और डाकियों को “भरोसे के सेतु के रूप में वर्णित किया जो न केवल पत्र, बल्कि बैंकिंग, बीमा और सरकारी सेवाओं को भारत के हर घर तक पहुंचाते हैं।” उन्होंने ग्रामीण भारत को जोड़ने और राष्ट्र के विकास को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया।

डाक कर्मचारियों के लिए लागू किए गए कई कल्याणकारी सुधारों को याद करते हुए, श्री सिंधिया ने जीडीएस के बच्चों को केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश, भत्तों में वृद्धि, नई वर्दी और जैकेट डिज़ाइन की शुरुआत, और ‘प्रोजेक्ट ऐरो’ जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये सुधार सरकार की अपनी क्षेत्रीय कार्यबल की बातों को सुनने और उन्हें सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता से उपजे हैं।

लगभग 6.5 लाख गाँवों की सेवा करने वाले 1.65 लाख से अधिक डाकघर वाले इंडिया पोस्ट की अतुलनीय उपस्थिति को उजागर करते हुए मंत्री ने नवाचार, विश्वसनीयता और एक मजबूत मूल्य-आधारित दृष्टिकोण द्वारा संचालित डाक विभाग को एक आधुनिक लॉजिस्टिक्स और सेवा शक्ति केंद्र में बदलने का आह्वान किया। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डाकिया अब बैंक लाया” के विज़न को याद करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंडिया पोस्ट मेल वितरण से आगे बढ़कर वित्तीय समावेशन और नागरिक सेवाओं का एक विश्वसनीय समर्थक कैसे बन गया है, जबकि इसने सेवा भाव” — लोगों की सेवा — के अपने मूल लोकाचार को भी दृढ़ता से संरक्षित रखा है।

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों को उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए सम्मानित करना था। केंद्रीय मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक पुरस्कार विजेता से बातचीत की और अपने हाथों से उन्हें नई इंडिया पोस्ट जैकेट, टोपी और डाकिया बैग पहनाया, जो डाक सेवा में गरिमा, पहचान और गौरव का प्रतीक था। इस भाव को बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं से ज़ोरदार तालियाँ और हार्दिक सराहना मिली।

जीडीएस सम्मेलन कोल्हापुर में डाक नायकों का सम्मान

कोल्हापुर के सांसद श्री छत्रपति शाहू महाराज, कोल्हापुर के सांसद श्री धनंजय महादिक, डाक सेवा महानिदेशक श्री जितेंद्र गुप्ता, डाक सेवा बोर्ड के सदस्य (कार्मिक) श्री सुवेंदु कुमार स्वाइन, और महाराष्ट्र सर्किल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री अमिताभ सिंह ने मंच साझा किया।

इवेंट के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत विकसित एआई-संचालित “भाषिनी” प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया। इस पहल ने भाषाई और सांस्कृतिक विभाजनों को पाटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने के सरकार के विज़न को प्रदर्शित किया, जिससे एक सच्चे समावेशी और बहुभाषी डिजिटल इंडिया की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

अपने समापन टिप्पणी में, श्री सिंधिया ने सभी डाक कर्मचारियों से गर्व, समर्पण और नवाचार के साथ सेवा करना जारी रखने का आग्रह किया, ताकि परिवर्तन और राष्ट्र सेवा की भावना को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए अपने संबोधन का समापन किया, और कहा — “धन्यवाद, जय हिन्द।”

 

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माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के निदेशानुसार रांची शहर को सुंदर, सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में की जाएगी ठोस पहल

आवागमन और नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

आयुक्त, रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन सहित वरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक

शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने, यातायात व्यवस्था सुचारु करने, बिजली के खंभों एवं उन पर लटके तारों को व्यवस्थित करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश

महिला सुरक्षा को लेकर बाजारों, शिक्षण संस्थानों व संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी एवं नियमित पेट्रोलिंग करने के निर्देश

शहर की सुंदरता, सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा कार्य

रांची,14.12.2025 – माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के निदेशानुसार रांची शहर में आवागमन व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं तथा आमजन के जीवन को और अधिक सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई।

उपायुक्त कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में आयुक्त, रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक नगर श्री गौतम राणा, पुलिस अधीक्षक यातायात श्री राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री पुष्कर राणा, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता, रांची श्री राम नारायण सिंह, उपसमाहर्ता नजारत श्री सुदेश कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार सहित नगर निगम एवं सूडा के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने, प्रमुख सड़कों एवं चौक-चौराहों पर यातायात को सुचारु करने, बेतरतीब ढंग से लगे बिजली के खंभों एवं उन पर लटके तारों को व्यवस्थित करने तथा विभिन्न मार्गों पर अनावश्यक कट्स को बंद करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस क्रम में उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा गया कि शहर की सुंदरता, सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बिजली के खंभों पर लटके अव्यवस्थित तारों को शीघ्र व्यवस्थित करने हेतु टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके और शहर की छवि बेहतर बनाई जा सके।

इसके अतिरिक्त, शहर में टोटो परिचालन के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसे लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिला परिवहन पदाधिकारी को टोटो संघ के साथ बैठक कर मार्ग निर्धारण, परिचालन अनुशासन एवं यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य टोटो चालकों एवं आम नागरिकों के बीच संतुलन बनाते हुए सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा पुनः टोटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म और वाहन के पीछे चालक का नाम और मोबाइल नंबर बड़े अक्षरों में लिखवाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

महिला सुरक्षा को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने विशेष निर्देश देते हुए कहा कि भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों के आसपास एवं रात्रिकालीन समय में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने महिला सुरक्षा से संबंधित मामलों पर त्वरित कार्रवाई, नियमित पेट्रोलिंग, संवेदनशील स्थानों की पहचान तथा आवश्यकतानुसार निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए संबंधित अंचल अधिकारियों को नगर निगम की टीम के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया, ताकि सड़कों, फुटपाथों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अवैध अतिक्रमण हटाकर आमजन को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन रांची शहर को अतिक्रमण मुक्त, यातायात की दृष्टि से सुगम, नागरिकों के लिए सुरक्षित तथा सौंदर्यपूर्ण बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य करेगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि हर शहरवासी को सम्मान के साथ बेहतर जीवन सुविधाएँ उपलब्ध हों और रांची एक सुव्यवस्थित एवं आदर्श शहर के रूप में विकसित हो।

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द रांची प्रेस क्लब का चुनाव संपन्न अध्यक्ष बने शंभू नाथ और अभिषेक को मिली सचिव की जिम्मेवारी

843 सदस्यों ने किया अपने मताधिकार का प्रयोग, 93 प्रतिशत बम्पर वोटिंग

रांची,14.12.2025 –  द रांची प्रेस क्लब का आम चुनाव संपन्न हो गया। चुनाव में कुल 843 मतदाता शामिल हुए। 781 वोटरों ने चुनाव प्रक्रिया में भाग लिया और बंपर वोटिंग हुई।

मतदान के बाद देर रात तक चले मतगणना में अध्यक्ष के रूप में शम्भूनाथ चौधरी, महासचिव अभिषेक सिन्हा, उपाध्यक्ष विपिन उपाध्याय, कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, संयुक्त सचिव के रूप में चंदन भट्टाचार्य निर्वाचित घोषित हुए। वहीं 10 कार्य समिति सदस्यों में प्रतिमा कुमारी, संजय सुमन, सौरभ शुक्ला, विजय गोप, अशोक गोप, चंदन वर्मा, राजन बॉबी निर्भय कुमार, संतोष कुमार सिन्हा, अमित कुमार ने बाजी मारी। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद सेवानिवृत्ति विश्वनाथ साहू ने सभी विजेता अधिकारी वर्ग और कार्य समिति सदस्यों को प्रमाण पत्र प्रदान किया।

चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में चुनाव संचालन समिति के आरओ के रूप में सेवानिवृत्त जज विश्वनाथ साहू, एआरओ प्रभात सिंह, संचालन समिति में कन्वेनर के रूप में प्रमोद सिंह, आरजे अरविंद, रेखा पाठक, मोनू कुमार, अशोक द्विवेदी, गुलाम शाहिद, रंजीत कुमार, पिसी झा ने अपनी प्रमुख भूमिका निभाई।

चुनाव संचालन समिति ने चुनाव को सफल बनाने के लिए रांची प्रेस क्लब के सभी पत्रकार सदस्यों का आभार जताया।

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केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधि आयोग में “मानवाधिकार- भारतीय परंपरा की निरंतरता” पर विशेष सत्र को संबोधित किया

 

नई दिल्ली – भारत के विधि आयोग (एलसीआई) ने 12 दिसंबर की दोपहर को एक विशेष कार्यक्रम के साथ अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया। इसमें विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम का मुख्य विषय था “मानवाधिकार- भारतीय परंपरा की” जो मानव की गरिमा और उसके अधिकारों के प्रति भारत के सभ्यतागत दृष्टिकोण को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम के पाठ से हुआ, जिसके बाद विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिनेश महेशवरी ने स्वागत भाषण दिया। अपने भाषण में उन्होंने समकालीन मानवाधिकार विमर्श को आकार देने में भारत की सांस्कृतिक और कानूनी परंपराओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री मेघवाल ने महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महान विचारकों और नेताओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए भारत की सभ्यतागत यात्रा में मानवीय गरिमा और नैतिक आचरण के विचारों को जिस प्रकार प्रतिपादित किया गया है, उसका वर्णन किया। श्री मेघवाल ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारत में मानवाधिकारों का महारथी बताया।

विचार-विमर्श में इस बात पर और जोर दिया गया कि भारत में मानवाधिकार लंबे समय से देश की दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग रहे हैं। सार्वभौमिक मानव गरिमा, वसुधैव कुटुंबकम, बंधुत्व और कर्तव्य जैसी अवधारणाओं का संविधान में निहित मूल्यों के साथ स्पष्ट संबंध पाया गया।

इस अवसर के उपलक्ष्य में, विधि आयोग ने 10 दिसंबर को अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए “रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को सुनिश्चित करना: सभी के लिए सार्वजनिक सेवाएं और गरिमा” विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया था। श्री मेघवाल ने विजेताओं को सम्मानित किया और आयोग से जुड़े अधिकारियों, कानूनी सलाहकारों और प्रशिक्षुओं से प्राप्त विचारोत्तेजक निबंधों की सराहना की। उन्होंने आयोग के अधिकारियों के साथ संवाद भी किया।

कार्यक्रम का समापन विधि आयोग के सदस्य प्रो. डी. पी. वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन और उसके बाद वंदे मातरम के पाठ के साथ हुआ। भारतीय विधि आयोग ने श्री मेघवाल की गरिमामय उपस्थिति और उनके संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण से चर्चा को संचालित करने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 2001 में संसद पर हुए हमले में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमले में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी।

X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा,

“आज का दिन आतंकवाद के खिलाफ हमारे सुरक्षा बलों के उस अदम्य शौर्य व साहस को फिर से स्मरण करने का दिन है, जब वर्ष 2001 में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर, हमारे संसद भवन पर हुए कायराना आतंकी हमले को उन्होंने अपने जज्बे से नाकाम किया। आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को नमन करता हूँ। यह राष्ट्र वीर सेनानियों के त्याग व बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।”

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शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय भाषा उत्सव 2025 का आयोजन किया

नई दिल्ली – शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने 11 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के राष्ट्रीय बाल भवन में भारतीय भाषा उत्सव (बीबीयू) 2025 का समापन समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव श्री संजय कुमार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए, डीओएसईएल के सचिव श्री संजय कुमार ने भारतीय भाषा उत्सव के तीन वर्षों के आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के जीवन और आदर्शों का स्मरण करते हुए स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और बहुभाषावाद में उनके योगदान को रेखांकित किया।

श्री संजय कुमार ने पढ़ने के महत्व और मातृभाषा में सीखने पर केंद्रित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण पर बल देते हुए, विद्यार्थियों और शिक्षकों को कई भाषाओं को अपनाने, अपनी शब्दावली को समृद्ध करने और स्पष्टता एवं सटीकता के साथ संवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और सभी भाषाओं तथा समुदायों का सम्मान करने से प्राप्त होने वाली सांस्कृतिक शक्ति पर बल दिया।

प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कई भाषाएँ सीखने के उद्देश्य को उजागर किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और नवाचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रोफेसर कुमार ने कहा कि बहुभाषावाद के माध्यम से मजबूत होने वाली संज्ञानात्मक सुगमता विविध दृष्टिकोणों की सराहना करने में सक्षम बनाती है और युवा शिक्षार्थियों को विकसित भारत 2047 में योगदान देने के लिए तैयार करती है।

एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का शानदार प्रदर्शन किया केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

(ईएमआरएस)और राष्ट्रीय बाल भवन (एनबीबी) के विद्यार्थियों ने गीत, शास्त्रीय और लोक नृत्य, बहुभाषी देशभक्ति गीत,

नुक्कड़ नाटक और कविता पाठ  प्रस्तुत किए।

इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक सद्भाव का वातावरण बनाया और विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित किया।

 

विभिन्न भाषाओं में विकसित शिक्षण और अधिगम सामग्री प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए गए थे। भाषा संबंधी खेल भी आयोजित किए गए, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

इस वर्ष का उत्सव “भाषाएँ अनेक, भाव एक” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो 11 दिसंबर 2025 को सुब्रमण्यम भारती की जयंती के उपलक्ष्य में था। भारत भर के विद्यालयों में 4 से 11 दिसंबर तक सप्ताहभर चलने वाले उत्सवों में बहुभाषावाद और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाली अंतःक्रियात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

भारतीय भाषा उत्सव 2025 ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में परिकल्पित भारत की भाषाई विरासत के संरक्षण और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस उत्सव ने सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया और युवा शिक्षार्थियों को भारत की भाषाई समृद्धि को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में श्री धीरज साहू, अपर सचिव, शिक्षा एवं साक्षरता विभाग; श्री आनंदराव वी पाटिल, अपर सचिव, शिक्षा एवं साक्षरता विभाग; श्रीमती अर्चना अवस्थी, संयुक्त सचिव, शिक्षा एवं साक्षरता विभाग; श्रीमती ए श्रीजा, आर्थिक सलाहकार, शिक्षा एवं साक्षरता विभाग; प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी, निदेशक, एनसीईआरटी; श्री पंकज अरोड़ा, अध्यक्ष, एनसीटीई; श्री राजेश लखानी, आयुक्त, नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस); श्री विकास गुप्ता, आयुक्त, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस); शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; भारतीय भाषा समिति के अधिकारी; स्वायत्त निकायों के प्रमुख; शिक्षाविद; देश भर से शिक्षक और स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे।

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अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय रांची में जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन का आयोजन किया गया

जिला के पदाधिकारी शामिल हुए

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर शिक्षा को मजबूत बनाने में मुखियाओं की भूमिका अहम:- उप विकास आयुक्त

अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय रांची में आज दिनांक 13 दिसंबर 2025 को जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन का आयोजन किया गया।

रांची – उपायुक्त के दिशा निर्देश पर जिला के पदाधिकारी शामिल हुए आयोजन में उप विकास आयुक्त मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुखिया सम्मेलन में उप विकास आयुक्त ने सभी प्रखंडों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मुखियाओं को शाल ओढ़ाकर, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा की इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर शिक्षा को मजबूत बनाने में मुखियाओं की भूमिका को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम में सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सभी सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी तथा जिले के अन्य कर्मी उपस्थित रहे। उप विकास आयुक्त ने मुखियाओं से शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।

यह सम्मान शिक्षा के प्रति समर्पित पंचायत प्रतिनिधियों के योगदान को सराहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में उपाध्यक्ष जिला परिषद, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, श्री राजेश कुमार साहू, जिला शिक्षा अधीक्षक, राँची, श्री बादल राज, जिले के सभी पंचायत के मुखियागणों शामिल हुए।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है कि पंचायती राज के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक सुधार एवं विकास के साथ साथ विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा उपस्थित सभी मुखियागणों से अनुरोध किया गया कि वे विद्यालय के विकास में अपना अपेक्षित योगदान दें। विद्यालय के कार्यक्रमों में अपनी अमूल्य उपस्थिति दें। साथ ही विद्यालय के सुचारू संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का भी अनुरोध किया गया। जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा उपस्थित सभी मुखियागणों को संबोधित करते हुए कहा गया कि हमारे जीवन में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।

बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में विद्यालय मुख्य कड़ी हैं। सभी मुखिया अपने क्षेत्र में पड़ने वाले विद्यालयों में पठन-पाठन का सुचारू संचालन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करावें। जिला पंचायत राज पदाधिकारी के द्वारा जानकारी दी गई कि पंचायतों में ज्ञान केंद्र स्थापित किया जा रहा है जहां कंप्यूटर टेलीविजन और लाइब्रेरी बुक की सुविधा उपलब्ध है। सभी मुखिया इस ज्ञान केंद्र की चर्चा विद्यालय एवं शिक्षकों से करें। ताकि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे उन ज्ञान केंद्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष जिला परिषद द्वारा सभी मुखिया को संबोधित करते हुए कहा गया कि विद्यालयों को संसाधन युक्त करने से ही समाज का विकास होगा। हमारा यह प्रयास रहना चाहिए कि जिन विद्यालयों में संसाधन जर्जर अवस्था में है अथवा उनका अभाव है तो उनके विकास एवं उपलब्धता के लिए अपने स्तर से आवश्यक कारवाई करें।

उनके द्वारा जिले में जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा किए जा रहे अभिनव प्रयासों की भी प्रशंसा की गई। उप विकास आयुक्त द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी मुखिया को संबोधित कर कहा गया कि शिक्षा का विकास करना सिर्फ एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है बल्कि हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि शिक्षा के विकास एवं उसके संवर्धन की दिशा में कार्य करें।

सभी मुखिया नियमित रूप से विद्यालयों का भ्रमण करें एवं विद्यालय में जो भी कमियां अथवा संसाधनों का अभाव है इसका एक प्रतिवेदन बनाकर प्रखंड एवं जिला स्तर पर संबंधित पदाधिकारी को उपलब्ध करा दें ताकि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा सके। सभी मुखिया की व्यक्तिगत जवाब है कि वे रांची जिले में शिक्षा के उत्कृष्ट विकास के लिए कार्य करें।

साथ ही उन्होंने कहा कि सभी पंचायत में अवस्थित विद्यालयों का सभी मुखिया एक माह में भ्रमण करते हुए विद्यालयों की आवश्यकताओं की विवरणी तैयार कर उसकी उपलब्धता के लिए अनुशंसा जिला कार्यालय को उपलब्ध करा दें ताकि विद्यालयों में संबंधित संसाधनों की उपलब्धता की दिशा में आवश्यक कार्य किया जा सके।

हम सभी को मिलकर एकजुट होकर शिक्षा के विकास हेतु निरंतर कृत संकल्पित रहना होगा तभी इस क्षेत्र में गुणात्मक विकास परिलक्षित हो सकेगा और इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्ण होगा। विभाग द्वारा पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यालयों में अवस्थित संसाधनों के संबंध में सभी मुखिया को आवश्यक जानकारी दी गई।

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राष्ट्रपति ने मणिपुर के सेनापति में एक सार्वजनिक समारोह की शोभा बढ़ाई

नई दिल्ली –  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (12 दिसंबर, 2025) मणिपुर के सेनापति में एक सार्वजनिक समारोह की शोभा बढ़ाई। उन्होंने इस अवसर पर विकास की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी, साथ ही कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।

 

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर के आदिवासी समुदायों के लिए सम्मान, सुरक्षा और विकास के अवसर तथा देश की प्रगति में उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारत सरकार मणिपुर में समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय नेताओं, नागरिक समाज और समुदायों के साथ मिलकर काम कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार देश के हर कोने तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हाल के वर्षों में, मणिपुर के पहाड़ी जिलों को सड़क और पुल संपर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों सहित, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में किए गए लक्षित निवेशों से लाभ हुआ है। कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह और वन धन जैसी आजीविका योजनाओं से लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। ये प्रयास आदिवासी समुदायों की अनूठी पहचान और परंपराओं का सम्मान करते हुए उनका समर्थन करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर की ताकत उसकी विविधता, उसकी संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं में निहित है। पहाड़ और घाटी हमेशा से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, मानो एक ही खूबसूरत भूमि के दो पहलू हों। उन्होंने सभी समुदायों से शांति, समझ और सुलह के प्रयासों में सहयोग जारी रखने का आग्रह किया। भारत सरकार मणिपुर के लोगों की आकांक्षाओं को समझती है। उन्होंने मणिपुर के लोगों के कल्याण और प्रगति के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिनमें इस क्षेत्र के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमें एक शांतिपूर्ण और समृद्ध मणिपुर के लिए मिलकर निरंतर काम करना चाहिए।

इससे पहले, राष्ट्रपति ने इम्फाल स्थित नुपी लाल स्मारक परिसर में मणिपुर की वीर महिला योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक परिसर मणिपुरी महिलाओं के बलिदान की स्‍मृति है। यह उनके उन विद्रोहों की याद दिलाता है जिनमें उन्होंने अंग्रेजों और सामंती शक्तियों को अदम्य साहस के साथ चुनौती दी थी।

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केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने केन्या के नैरोबी में आयोजित यूएनएए-7 सम्मेलन के उच्च स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनएए-7) के 7वें सत्र के उच्च स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने पर्यावरण संबंधी समाधानों के लिए भारत के जन-केंद्रित दृष्टिकोण, महत्वपूर्ण घरेलू उपलब्धियों और समानता तथा सामान्य लेकिन विभिन्न जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं (सीबीडीआर-आरसी) के सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

श्री सिंह ने व्यवस्थाओं के लिए केन्या और यूएनईपी के प्रति भारत की कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यूएनईए-7 का विषय-एक अनुकूल पृथ्वी के लिए सतत समाधानों को आगे बढ़ाना- भारत के लंबे समय से चले आ रहे लोकाचार के साथ मजबूती से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि यह विषय ‘प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और समावेशी, सतत और जलवायु-अनुकूलन विकास के हमारे राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ के अनुरूप है।

मंत्री ने मिशन लाइफ पर भी प्रकाश डाला और इसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक वैश्विक आंदोलन बताया, जो सवाधानी से उपभोग को बढ़ावा देता है और टिकाऊ जीवन शैली अपनाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करता है। मंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत की पर्यावरणीय आकांक्षाएं इसके विविध परिदृश्यों और सामुदायिक आवश्यकताओं से उत्पन्न होती हैं और ये लोगों की ‘स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी, स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र और अगली पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित भविष्य’ की निरंतर मांग को दर्शाती हैं।

श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत यूएनईए-7 में इस दृढ़ विश्वास के साथ भाग ले रहा है कि वैश्विक पर्यावरणीय समाधान जन-केंद्रित और समानता, सीबीडीआर-आरसी और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत महत्वाकांक्षा को सक्षम बनाते हैं, विश्वास को बढ़ावा देते हैं और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाते हैं।

श्री सिंह ने पिछले दशक में भारत के मजबूत घरेलू प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश पहले ही 50% गैर-जीवाश्म स्थापित बिजली क्षमता तक पहुंच चुका है, जो हमारे लक्ष्य से काफी आगे है। उन्होंने कहा कि सौर, पवन, जलविद्युत, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण सहित भारत का ऊर्जा परिवर्तन हमारे ऊर्जा परिदृश्य को नया आकार दे रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसे प्रमुख कार्यक्रम परिवारों और किसानों को विश्वसनीय और किफायती स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच प्रदान करने के साथ-साथ जलवायु क्रियाशीलता में सक्रिय जनभागीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

भारत के व्यापक स्तर पर किए जा रहे पारिस्थितिक प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने प्रमुख पौधरोपण और पुनर्स्थापन कार्यक्रमों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी आंदोलन ‘एक पेड़ मां के नाम’ एक जन आंदोलन है जो हमारी माताओं की देखभाल करने और धरती माता का पोषण करने के बीच एक सशक्त समानता स्थापित करता है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत देश भर में 26 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

श्री सिंह ने नमामि गंगे सहित भारत के नदी कायाकल्प प्रयासों का भी उल्लेख किया, जो ‘पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए विज्ञान-आधारित और समुदाय-संचालित दृष्टिकोण की प्रभावशीलता’ को दर्शाता है। संसाधन दक्षता के विषय पर उन्होंने कहा कि भारत के सर्कुलर अर्थव्यवस्था उपाय और प्लास्टिक, बैटरी, ई-कचरा और उम्र पूरी कर चुके वाहनों में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) ढांचे टिकाऊ उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं।

श्री सिंह ने बहुपक्षीय मंचों में भारत के नेतृत्व की पुष्टि करते हुए अंतरराष्ट्रीय सौर संबंध, वैश्विक जैव ईंधन समझौता, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना समझौता और अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस के माध्यम से चल रहे सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये मंच दक्षिण-दक्षिण सहयोग और वैश्विक पर्यावरणीय समाधानों को आकार देने में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं।

मंत्री ने वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कई विकासशील देशों के लिए ये प्रभावी कार्यान्वयन के आवश्यक साधन बने हुए हैं। उन्होंने यूएनईए के ऐसे परिणामों का आह्वान किया जो मौजूदा बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों (एमईए) के पूरक हों, अतिरिक्त रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को प्रबंधनीय बनाए रखें और सभी सदस्य देशों के लिए व्यावहारिक और कार्यान्वयन योग्य बने रहें।

जंगल में आग लगने के बढ़ते खतरे को पहचानते हुए भारत ने एकीकृत अग्नि प्रबंधन पर एक प्रस्ताव का प्रायोगिक परीक्षण किया है। श्री सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम प्रस्ताव पर रचनात्मक सहयोग और समर्थन के लिए सह-प्रायोजकों और अन्य सदस्य देशों को धन्यवाद देते हैं।

अपने भाषण का समापन करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के लिए की जाने वाली कार्रवाई को केवल एक नीतिगत अनिवार्यता के रूप में नहीं, बल्कि गरिमा, अवसर और कल्याण के मार्ग के रूप में देखता है। वसुधैव कुटुंबकम की भावना से प्रेरित होकर – यानी विश्व एक परिवार है – भारत ने एक स्थायी भविष्य और एक अनुकूल पृथ्वी के लिए सभी सदस्य देशों के साथ रचनात्मक रूप से काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।

 

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भारत-इटली व्यवसाय मंच 2025 से द्विपक्षीय व्यापार, नवोन्मेष और रणनीतिक आर्थिक सहयोग को मिली मजबूती

नई दिल्ली – भारत-इटली व्यवसाय मंच की बैठक इतालवी उपप्रधानमंत्री श्री एंटोनियो तेजानी की आधिकारिक यात्रा के हिस्से के रूप में 11 दिसंबर, 2025 को मुंबई में आयोजित की गई। श्री तेजानी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। श्री तेजानी इटली के उपप्रधानमंत्री के साथ ही विदेश मामले और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री भी हैं। मंच की बैठक में भारत और इटली के वरिष्ठ सरकारी नेताओं, उद्योग संघों, यूनिकॉर्न संस्थानों के संस्थापकों और 150 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया।

भारत और इटली, दोनों ही प्रौद्योगिकी आधारित प्रगति और संवहनीय औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके अनुरूप ही व्यवसाय मंच में वाहन, कचरा जनित और नवीकरणीय ऊर्जा, खेल प्रौद्योगिकी, कृषि-आहार और कनेक्टिविटी समेत प्राथमिकता के क्षेत्रों में औद्योगिक सहयोग मजबूत करने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और श्री तेजानी ने मुंबई में द्विपक्षीय बैठक भी की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत व्यापार के विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाने, प्रौद्योगिकी में सहयोग के संवर्द्धन तथा स्वच्छ परिवहन, हरित ऊर्जा, उन्नत मैनुफैक्चरिंग और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित रही।

इस मंच की शुरुआत समानांतर क्षेत्रीय गोलमेज बैठकों और प्रस्तुतीकरण सत्रों से हुई। इनमें उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और निवेश के तरीकों पर चर्चाएँ की गईं। इन क्षेत्रों में ऑटोमोटिव, कचरे से ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, खेल प्रौद्योगिकी और खेल वस्त्र और कृषि-खाद्य शामिल थे।

इन सत्रों से उद्योग-से-उद्योग संवाद, इतालवी कंपनियों द्वारा अपनी परियोजनाओं को प्रस्तुत करना और संयुक्त उद्यमों, सह-विकास मार्ग की पहचान, अनुसंधान एवं विकास साझेदारियां और मूल्य-श्रृंखला एकीकरण करना संभव हो पाया।

इटली-भारत व्यवसाय मंच के मुख्य सत्र में दोनों मंत्री उपस्थित थे। इस सत्र में क्षेत्रीय प्रमुखों ने ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, स्पोर्ट्स  टेक और कृषि-खाद्य क्षेत्रों में हुई चर्चाओं के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। वक्ताओं में सीडीपी, इन्वेस्ट इंडिया, एसएसीइ, एसोचैम, सिमेस्ट, सीआईआई, कॉन्फिंडस्ट्रिया और इटालियन व्यापार एजेंसी के प्रतिनिधि शामिल थे।

श्री एंटोनियो तेजानी ने विशेष वक्तव्य दिया और इसके बाद श्री पीयूष गोयल ने समापन भाषण दिया जिसमें उन्होंने मजबूत व्यापार और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों मंत्रियों ने डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप परिवेश, एआई, डीपटेक, फिनटेक और औद्योगिक प्रौद्योगिकी के समाधानों में सहयोग की संभावनाएँ तलाशने के लिए भारत की अग्रणी यूनिकॉर्न कंपनियों के साथ मुलाकात की।

इस मंच में एक बड़ा बी2बी  मैचमेकिंग सत्र भी आयोजित किया गया, जहाँ मैनुफैक्चरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, खेल नवाचार, और परिवहन प्रणालियों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय और इतालवी कंपनियों के बीच 100 से अधिक व्यापारिक मुलाकातें हुईं।

इस विचार विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम भारत-इटली आर्थिक सहयोग संयुक्त आयोग (जेसीईसी) के 22वें सत्र के सहमत कार्यवृत्त पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करना था। इस हस्ताक्षर से जेसीईसी सत्रों में हुई सफल चर्चाओं को कार्यान्वित करने का रास्ता खुल गया है और यह दोनों देशों के बीच भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करेगा।

आज की चर्चाओं को मार्च 2023 में इतालवी प्रधानमंत्री महामहिम जियोर्जिया मेलोनी की नई दिल्ली यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ऊपर उठाने से मिली गति को और बढ़ावा मिला।

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में इस बैठक का आयोजन करना, सीधे व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने और निवेश के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के प्रति दोनों सरकारों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दोनों मंत्रियों की यह बैठक और 22वें जेसीईसी कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर करना, रणनीतिक साझेदारी को वास्तविक आर्थिक लाभों में बदलने के पक्के इरादे को दिखाता है जिससे दोनों देशों के लोगों और व्यवसायों को लाभ होगा।

यूरोपीय संघ में इटली भारत के लिए एक अति महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोगी बना हुआ है। आज की बैठक ने व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा दिया जिसका उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत पूरक शक्तियों का लाभ उठाना है।

भारतीय और इतालवी कंपनियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन की सूची  में सीमेस्ट और आईसीसी  के बीच रणनीतिक ज्ञापन समझौता किया गया जिसका उद्देश्य भारत में विस्तार कर रही इतालवी कंपनियों के लिए समर्थन को मजबूत करना, द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।।

भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने तीन बड़ी इस्पात सयंत्र परियोजनाओं के लिए  लगभग 50 करोड़ यूरो का अनुबंध इटली के डेनिएली ग्रुप को सौंपा है। यह ग्रुप  ब्लास्ट फर्नेस, स्लैब कास्टर मशीन और हॉट स्ट्रिप मिल के लिए अत्याधुनिक हरित प्रौद्योगिकी की आपूर्ति करेगा। इन इस्पात सयंत्रों की सयुक्त क्षमता 40 लाख टन प्रति वर्ष से ज्यादा होगी।

प्रादा एसपीए, लिडकॉम और लिडकार ने पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों से प्रेरित सीमित संस्करण वाली सैंडल श्रृंखला बनाने के लिए एक करार किया है। इसमें इतालवी डिजाइन और भारतीय पारंपरिक शिल्प का संगम देखने को मिलेगा।

कुवेरा एसपीए और नियोपोलिस ब्रांड्स प्राइवेट लिमिटेड ने भारत में कार्पिसा के खुदरा व्यवसाय के विस्तार के लिए समझौता किया है। इसके तहत 2045 तक 100 स्टोर खोलने की दीर्घकालिक योजना है।

कैवेग्ना ग्रुप ने श्री गेटेला के साथ एक नया संयुक्त उद्यम स्थापित किया है। इस उद्यम का नाम कैवेग्ना ग्रुप एस ब्रास टेक प्राइवेट लिमिटेड होगा। कुल 50 लाख यूरो के इतालवी निवेश वाले इस उद्यम में कैवेग्ना की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी।

इटली-भारत व्यापार मंच 2025 का समापन सकारात्मक और भविष्य-उन्मुख रहा। इसमें मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएँ बनाने, स्थायी विकास को बढ़ावा देने और उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दोनों देशों की इच्छा पर ज़ोर दिया गया।

इस मंच ने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है, जिससे गहरे आर्थिक जुड़ाव, बाज़ार तक बेहतर पहुँच, और नवाचार-आधारित उद्योगों में विस्तारित सहयोग के लिए ज़मीन तैयार हुई है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू किया

नई दिल्ली –  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन पर महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर एक माह की दिल्ली मेट्रो अभियान की शुरुआत की। 10 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य मेट्रो ट्रेनों और चुनिंदा स्टेशनों पर प्रदर्शित संदेशों के माध्यम से लाखों यात्रियों तक पहुंचना है। इन संदेशों में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला गया है; डिजिटल विभाजन को कम करना; महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की पहुंच में सुधार करना; प्रसवोत्तर रोग निवारण एवं बाल रोग निवारण और तपेदिक के बारे में जागरूकता फैलाना शामिल है।

 

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं के स्वस्थ होने के बिना कोई भी परिवार या राष्ट्र सही मायने में प्रगति नहीं कर सकता। महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। दिल्ली मेट्रो के इस अभियान के माध्यम से हम इस संदेश को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाना चाहते हैं। यह संदेश को सीधे लोगों तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।

उन्होंने यह भी बताया कि टीबी जागरूकता, डिजिटल विभाजन को कम करने गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 और अन्य प्रमुख मुद्दों पर संदेश मेट्रो के डिब्बों के अंदर और बाहर दोनों जगह प्रदर्शित किए गए हैं।

लिंग निर्धारण और चयन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों की बढ़ती सुलभता पर बोलते हुए  केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि पहले लोग भ्रूण का लिंग निर्धारित करने के लिए अल्ट्रासाउंड पर निर्भर थे। अब इसी उद्देश्य के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रथाओं को बंद करना होगा और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन, दक्षिण पूर्व एशिया की प्रभारी अधिकारी डॉ. कैथरीना बोहेम ने कहा कि इस मेट्रो स्टेशन पर कुछ यात्राएं समाप्त होती हैं और कुछ शुरू होती हैं। आज लैंगिक हिंसा के खिलाफ 16 दिनों के अभियान का अंतिम दिन है। और जैसे ही यह अभियान समाप्त होता है, एक नया अभियान शुरू होता है। हमें महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू करते हुए गर्व हो रहा है, जो दो सरल और चिरस्थायी सत्यों पर आधारित है: स्वस्थ महिलाएं = स्वस्थ राष्ट्र, और #क्योंकि वह महत्वपूर्णहै।

डॉ. बोहेम ने आगे कहा कि स्वस्थ महिलाएं एक स्वस्थ परिवार, समुदाय और एक स्वस्थ राष्ट्र के स्तंभ हैं। इसलिए महिलाओं और लड़कियों का स्वास्थ्य, जिसमें उनका मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है, न केवल उनके कल्याण के लिए, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण रूप से हमारे कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारत, स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृव अभियान, मिशन शक्ति, निर्भया कोष और आयुष्मान भारत जैसी विभिन्न राष्ट्रीय पहलों के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तीकरण को लगातार मजबूत कर रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव सुश्री पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी एजेंसियों के साथ मिलकर इस पहल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस शुभारंभ कार्यक्रम में महिलाओं के बैंड वेबहोर की प्रस्तुति भी शामिल थी, जो अभियान की सामूहिक भावना को दर्शाती है और महिलाओं के लचीलेपन, गरिमा और सशक्तीकरण का जश्न मनाती है। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों ने उद्घाटन अभियान की सवारी में भाग लिया, जो महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण को बढ़ावा देने की साझा जिम्मेदारी को दर्शाती है।

दिल्ली मेट्रो को पूरे शहर में इन सशक्त संदेशों को प्रसारित करने के लिए धन्यवाद देते हुए  डॉ. बोहेम ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, “इस महत्वपूर्ण यात्रा में सहयात्री बनने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करती हूं। इस संदेश को फैलाने में मदद करें और एकजुट हों क्योंकि स्वस्थ महिलाएं स्वस्थ राष्ट्रों का निर्माण करती हैं।”

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मीरा श्रीवास्तव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती गीतू जोशी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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काशी तमिल संगमम् 4.0 में थंजावुर की पारंपरिक ‘थलैयाट्टी बोम्मई’ कला ने मोहा मन

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम् 4.0 में नमो घाट पर चल रही प्रदर्शनी में स्टॉल संख्या–28 ‘थंजावुर थलैयाट्टी बोम्मई’ पारंपरिक हस्तशिल्प प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल के संचालक श्री हरि प्रसंथ बूपाथी, जो तमिलनाडु के थंजावुर से आए हैं, पहली बार वाराणसी पहुंचे हैं और अपने साथ दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत लेकर आए हैं।

थलैयाट्टी बोम्मई (हिलने-डुलने वाली गुड़िया) का यह पारंपरिक शिल्प उनके परिवार की छठी पीढ़ी द्वारा संरक्षित और संवर्धित किया जा रहा है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। श्री हरि प्रसंथ बूपाथी इन गुड़ियों का अमेरिका, कनाडा सहित कई देशों में निर्यात करते हैं।

 

इन पारंपरिक गुड़ियों की विशेषता यह है कि ये थंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित हैं और उसी की तरह आपदा-प्रतिरोधक (डिजास्टर प्रूफ) मानी जाती हैं। मुख्य रूप से ये गुड़ियां राजा–रानी की आकृतियों पर आधारित होती हैं, जो दक्षिण भारतीय संस्कृति और शाही परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।

श्री हरि प्रसंथ बूपाथी न केवल व्यवसाय में अग्रणी हैं, बल्कि कला के प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे स्कूलों, कॉलेजों में कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करते हैं तथा केंद्र सरकार के हस्तशिल्प प्रशिक्षण मंच पर सरकारी मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित करते हैं। उनका संपूर्ण व्यवसाय B2B मॉडल पर आधारित है और वे थंजावुर में इस कला के प्रमुख उद्यमियों में गिने जाते हैं।

काशी तमिल संगमम् 4.0 के दौरान उनके स्टॉल पर आने वाले दर्शक और पर्यटक इन गुड़ियों को देखकर अत्यंत उत्साहित नज़र आए और बड़ी संख्या में लोग इस अनूठी कला के प्रति आकर्षित हुए।

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बायो गैस उत्पादन करने वाले अत्याधुनिक बायो-CNG प्लांट का प्रयागराज में शुभारंभ किया गया

प्रयागराज का अत्याधुनिक Bio-CNG प्लांट

नई दिल्ली –  स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन 2.0 के तहत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से लगातार प्रयासों को रफ्तार दी जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में बायो गैस उत्पादन करने वाले अत्याधुनिक बायो-CNG प्लांट का प्रयागराज में शुभारंभ किया गया। यह देश के आधुनिक वेस्ट टू एनर्जी मॉडल्स में शामिल है। यह संयंत्र न केवल शहर को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वच्छ और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय किसानों को सशक्त करने का भी एक बड़ा माध्यम बन रहा है।

 

 

 

प्रयागराज में विकसित यह प्रोजेक्ट विविध प्रकार के कार्बनिक कचरे को संसाधित कर Bio-CNG उत्पन्न करने में सक्षम है। इस संयंत्र में प्रतिदिन कुल 343 टन ऑर्गेनिक वेस्ट को प्रोसेस करने की क्षमता है, जिससे लगभग 21 टन प्रतिदिन बायो-CNG का उत्पादन हो रहा है। कृषि अवशेष—जैसे कि धान की पुआल, गोबर और मुर्गी शाला के अवशेष से कंप्रेस्ड बायो-गैस उत्पादित हो रही है। नगर निगम प्रयागराज के इस सराहनीय कदम के  फलस्वरूप  वर्तमान में लगभग 125 मैट्रिक टन गीला कचरा उपलब्ध कराया जा रहा है जो शुरुआती दौर में मात्र 7-8 मीट्रिक टन ही था। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका मल्टी-फीडस्टॉक मॉडल है, जिसमें नगर निगम का ठोस कचरा, पुआल, गोबर और पोल्ट्री लिटर सभी का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाता है। इससे न केवल स्वच्छ ईंधन का उत्पादन हो रहा है, बल्कि पराली जलाने जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। साथ ही, यह परियोजना प्रतिदिन 28 टन उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट भी तैयार कर रही है। यह कम्पोस्ट स्थानीय किसानों को उपलब्ध करा, Regenerative Farming को भी बढ़ावा मिल रहा है।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित यह संयंत्र शहर के होटलों, रेस्टोरेंट्स, अपार्टमेंट और अन्य संस्थानों से उत्पन्न होने वाले थोक कचरे का समाधान प्रदान करता है। तैयार बायो-CNG को CBG-CGD Synchronization Scheme के तहत बिक्री की जा रहा है, जिसमें ईंधन कैस्केड रूट के माध्यम से वितरित किया जा रहा है। यह स्वच्छ ऊर्जा शहर के परिवहन में काम आ रहा है, एवं आगामी समय में 45,000 घरों को भी पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। जिससे शहर में ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में 57000 MT वार्षिक उल्लेखनीय कमी आएगी।

इस बायो-CNG प्लांट की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश ने हरित ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, बल्कि कचरे से कंचन बनाने के मिशन को भी साकार करती है।

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काशी तमिल सांस्कृतिक सेतु को साकार करता ‘ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान’ काशी पहुंचा, नमो घाट पर हुआ भव्य स्वागत

नई दिल्ली – तमिल और भारतीय परंपरा की प्राचीन सभ्यागत यात्रा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से निकला सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE) काशी तमिल संगमम् 4.0 का प्रमुख आकर्षण—अपनी नौ दिवसीय यात्रा पूर्ण करते हुए 10 दिसंबर को वाराणसी स्थित नमो घाट पहुंचा। यह ऐतिहासिक कार रैली 2 दिसंबर को ‘दक्षिण काशी’ तिरुनेलवेली (तेनकासी) से प्रारंभ हुई थी और लगभग 2,460 किलोमीटर की दूरी तय कर तमिलनाडु से उत्तर भारत तक सांस्कृतिक, भाषाई और आध्यात्मिक एकात्म की अविच्छिन्न धारा की स्मृति को पुनर्जीवित करती आगे बढ़ी।

 

रैली में शामिल 15–20 वाहनों और लगभग 100 प्रतिभागियों का भव्य स्वागत मोहन सराय काशी द्वार पर किया गया, जहां एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर अगवानी की। इसके बाद नमो घाट पर पहुँचने पर मंडलायुक्त, वाराणसी मण्डल, श्री एस. राजलिंगम (आईएएस) और जिलाधिकारी श्री सत्येन्द्र कुमार (आईएएस) ने दल का औपचारिक स्वागत किया।

मंडलायुक्त श्री एस. राजलिंगम ने सेव टीम को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा न केवल तमिल और काशी की सांस्कृतिक निकटता का उत्सव है, बल्कि भारत की उस आध्यात्मिक एकता की जीवंत अनुभूति भी है। जिसने सदियों से उत्तर और दक्षिण को एक सूत्र में बांध रखा है। SAVE अभियान युवा पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अद्भुत प्रयास है, और काशी इस ऐतिहासिक संगम की साक्षी बनकर गौरवान्वित है।

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने चेरा, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर जैसे महान राजवंशों की संस्कृति, वास्तुकला और ज्ञान–परंपराओं की विरासत से जुड़े स्थलों का अध्ययन करते हुए स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित किया। कारवां ने तमिल प्रदेश से लेकर उत्तर भारत तक फैली हुई सभ्यागत निरंतरता, कलात्मक परंपराओं, शिल्प, साहित्य एवं सिद्ध चिकित्सा परंपराओं के जीवंत सूत्रों को खोजने और दस्तावेजीकृत करने का कार्य किया।

मोहन सराय काशी द्वार पर एम. एल. सी.  हंसराज विश्वकर्मा रैली का स्वागत के बाद कहा कि
यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम पांड्य राजा ‘आदि वीर पराक्रम पांडियन’ की उस ऐतिहासिक परंपरा को भी स्मरण करना था, जिन्होंने उत्तर भारत की यात्रा कर सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की—इसी प्रसंग से तेनकासी को “दक्षिण काशी” नाम की व्युत्पत्ति जुड़ी मानी जाती है।

इस अवसर पर अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि को रेखांकित किया, जिसमें भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय विभेदों के नाम पर उत्पन्न भ्रांतियों को दूर करते हुए भारत की सांस्कृतिक एकता को पुनः जागृत करने का आह्वान किया गया है।

तमिल संगमम् यात्रा हमारे एकता, समरसता और सांस्कृतिक गौरव का अद्वितीय उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में कभी भाषा या जातीयता के नाम पर विभाजन का उन्माद नहीं रहा। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना हमें जोड़ती है और यह यात्रा उसी सनातन चेतना का प्रतीक है। काशी तमिल संगमम यात्रा उत्तर से दक्षिण तक फैली हमारी आध्यात्मिक एकात्मता का सजीव प्रतीक है। हमारे लिए यह गौरव का विषय है कि यह कारवां काशी पहुँचा और सांस्कृतिक आदान–प्रदान का ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया।

यात्रा से जुड़े सदस्य बताते हैं कि सेव अभियान का उद्देश्य भारत की युवा पीढ़ी को यह समझाना है कि हमारी समकालीन पहचानें सदियों पुरानी सभ्यागत यात्रा का परिणाम हैं और इस सांस्कृतिक निरंतरता को समझना भविष्य के भारत निर्माण की आधारशिला है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मानवाधिकार दिवस समारोह में शामिल हुईं

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु (10 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मानवाधिकार दिवस समारोह में शामिल हुईं और उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

 

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सर्व-जन मानवाधिकार अलग नहीं किए जा सकते हैं और वे एक न्यायपूर्ण, समतावादी और करुणामय समाज की आधारशिला हैं। सतहत्तर वर्ष पहले, विश्व एक सरल लेकिन क्रांतिकारी सत्य को व्यक्त करने के लिए एकजुट हुआ था कि प्रत्येक मनुष्य गरिमा और अधिकारों में स्वतंत्र और समान पैदा होता है। मानवाधिकारों के वैश्विक ढांचे को आकार देने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने मानवीय गरिमा, समानता और न्याय पर आधारित विश्व की कल्पना की थी।

राष्ट्रपति ने अंत्योदय दर्शन के अनुरूप, वंचित लोगों सहित सभी के मानवाधिकारों की गारंटी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में राष्ट्र के विकास पथ में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। तभी विकास को सही मायने में समावेशी कहा जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार हमारे संविधान की परिकल्पना में निहित हैं। मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं। मानवाधिकारों में भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार, बाधाओं के बिना शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, शोषण मुक्त होकर काम करने का अधिकार और गरिमापूर्ण तरीके से वृद्धावस्था गुजारने का अधिकार शामिल है। हमने विश्व को यह याद दिलाया है कि मानवाधिकारों को विकास से अलग नहीं किया जा सकता। साथ ही, भारत ने हमेशा इस चिरस्थायी सत्य का पालन किया है: ‘न्याय के बिना शांति नहीं और शांति के बिना न्याय नहीं।’

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज, सभी ने मिलकर हमारे संवैधानिक विवेक के सतर्क प्रहरी के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों से संबंधित कई मुद्दों का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार आयोग ने इस वर्ष अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान कैदियों के मानवाधिकारों के विषय पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन चर्चाओं से उपयोगी परिणाम प्राप्त होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण और उनका कल्याण मानवाधिकारों के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा पर एक सम्मेलन का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से प्राप्त निष्कर्ष महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) राज्य और समाज के कुछ आदर्शों को साकार रूप देता है। भारत सरकार इन आदर्शों को अभूतपूर्व पैमाने पर क्रियान्वित कर रही है। पिछले एक दशक में हमने अपने राष्ट्र को एक अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए देखा है – विशेषाधिकार से सशक्तिकरण की ओर और दान से अधिकारों की ओर। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि स्वच्छ जल, बिजली, खाना पकाने की गैस, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग सेवाएं, शिक्षा और बेहतर स्वच्छता जैसी दैनिक आवश्यक सेवाएं सभी को उपलब्ध हों। इससे प्रत्येक परिवार का उत्थान होता है और उनकी गरिमा सुनिश्चित होती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हाल ही में सरकार ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा एवं व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों से संबंधित चार श्रम संहिताओं के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सुधार को लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह क्रांतिकारी बदलाव भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और अधिक सुदृढ़ उद्योगों की नींव रखता है।

राष्ट्रपति ने प्रत्येक नागरिक से यह समझने का आह्वान किया कि मानवाधिकार केवल सरकारों, एनएचआरसी, नागरिक समाज संगठनों और ऐसे अन्य संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अपने नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना एक साझा कर्तव्य है। एक दयालु और जिम्मेदार समाज के सदस्य के रूप में यह कर्तव्य हम सबका है।

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