सीबीसी ने “दक्ष पीएसई@2047 के जरिए भारत की विकास यात्रा को आकार देना” विषय पर भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन का आयोजन किया

नई दिल्ली – क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) ने सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय के सहयोग से आज नई दिल्ली में ‘भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन’ का आयोजन किया। “दक्ष पीएसई @2047 के माध्यम से भारत की विकास गाथा को आकार देना” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), केंद्रीय मंत्रालयों और प्रमुख संस्थागत हितधारकों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन ‘मिशन कर्मयोगी’—सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम—के अनुरूप सीपीएसई के लिए एक साझा और संरचित क्षमता निर्माण रोडमैप विकसित करने के उद्देश्य से किया गया था। इसका लक्ष्य सीपीएसई की मानव पूंजी रणनीतियों में सुशासन (गुड गवर्नेंस) के सिद्धांतों को एकीकृत करना, नेतृत्व और उत्तराधिकार योजना  को मजबूत करना और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को समर्थन देने के लिए अंतर-सीपीएसई सहयोग को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का संचालन क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अल्का मित्तल द्वारा किया गया। सम्मेलन का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए, डॉ. मित्तल ने राष्ट्र-निर्माण के लिए सीपीएसई की रणनीतिक भूमिका पर जोर दिया और कहा कि उनकी भूमिका केवल व्यावसायिक लक्ष्यों तक सीमित नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि सीपीएसई न केवल आर्थिक विकास के इंजन हैं, बल्कि सार्वजनिक मूल्यों, शासन मानकों और दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता के संरक्षक भी हैं।

क्षमता निर्माण आयोग  की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान ने भारत के व्यापक सिविल सेवा सुधार एजेंडे के हिस्से के रूप में सीपीएसई के भीतर योग्यता-आधारित शासन, नेतृत्व विकास और परफार्मेंस लिंक्ड लर्निंग  को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासन के विकेंद्रीकरण (विभागीय सीमाओं को खत्म करने) और सीखने के लोकतंत्रीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा के प्रत्येक वितरण में ‘कर्मयोगी’ का भाव समाहित होना चाहिए।

उद्घाटन भाषण सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव श्री के. मोजेज चैल्लई द्वारा दिया गया, जिन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमें दूरदर्शी नेताओं की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि हमें बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए और अच्छे बदलावों को अपनाना चाहिए।

लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीएसईबी) के सदस्यों, श्री अल्केश कुमार शर्मा और श्री रूप नारायण सुंकर ने भी अपने प्रमुख विचार साझा किए।

लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) लिमिटेड के कार्यकारी उपाध्यक्ष और कॉर्पोरेट मानव संसाधन प्रमुख डॉ. सी. जयकुमार ने “उद्देश्य-प्रेरित नेतृत्व के लिए एचआर रणनीतियाँ” विषय पर एक रणनीतिक मुख्य सत्र को संबोधित किया। उनका ध्यान लचीली नेतृत्व पाइपलाइन बनाने और संगठनात्मक मूल्यों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने पर केंद्रित था।

इसके बाद स्कोप के महानिदेशक श्री अतुल सोबती द्वारा ‘दक्ष’ (डेवलपमेंट ऑफ एस्पैरेशन, नॉलेज, सक्सेसन एंड हारमोनी) पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें सीपीएसई में नेतृत्व विकास, उत्तराधिकार योजना और एचआर सुधारों के लिए एक संरचित ढांचे की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

उद्घाटन सत्र के दौरान एमएनआरई  के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी, सीबीसी के सदस्य (एचआर) डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम, कर्मयोगी भारत (केबी) की सीईओ सुश्री छवि भारद्वाज, तथा डीपीई, विभिन्न मंत्रालयों और सीबीसी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस सम्मेलन में “उच्च-प्रभाव वाले सीबीएसई प्रदर्शन के लिए एचआर प्रणालियों की पुनर्कल्पना” और “दृष्टिकोण को क्रियान्वयन में बदलना: सीपीएसई एचआर रणनीति” विषयों पर केंद्रित राउंडटेबल चर्चाएं आयोजित की गईं। इन चर्चाओं ने नेतृत्व विकास, सीखने और विकास प्रणालियों, उत्तराधिकार योजना और शासन एवं प्रदर्शन परिणामों के साथ एचआर नीतियों के तालमेल पर सीपीएसई के बीच ‘पीयर लर्निंग’  को सक्षम बनाया।

प्रतिभागियों ने वित्तीय लाभ से इतर दक्षता, नवाचार और सार्वजनिक मूल्य निर्माण को बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग, साझा ज्ञान मंचों और एकीकृत क्षमता-निर्माण प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने मिशन कर्मयोगी के तहत सीपीएसई की मानव पूंजी रणनीतियों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं और शासन सुधारों के साथ जोड़ने के महत्व को सुदृढ़ किया।

उम्मीद है कि यह सम्मेलन एक “सीपीएसई क्षमता निर्माण संग्रह” के विकास के साथ संपन्न होगा, जो अगले 6-12 महीनों में सर्वोत्तम प्रथाओं, क्षमता अंतराल और अंतर-सीपीएसई क्षमता विकास के लिए सहयोगी मॉडलों को संकलित करेगा।

सीबीसी शासन के क्षेत्र में कर्मयोगी क्षमता निर्माण प्रयासों के अनुरूप सहयोग के लिए प्रशिक्षण संस्थानों, पीएसयू और राज्यों को भी एक साझा मंच पर लाएगा।

इस सम्मेलन के फालो अप के रूप में सीबीसी द्वारा सीपीएसई के क्षमता निर्माण के लिए निम्नलिखित विषयगत कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है:

· वित्तीय प्रबंधन: दीर्घकालिक पूंजी नियोजन, जोखिम ढांचा, शासन उत्कृष्टता (एफएसआईबी क्षेत्र सहित)।

· आरएंडडी, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्टम: तकनीक अपनाने के मार्ग, नवाचार साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन (अकादमिक जगत, एएनआरएफ और अनुसंधान परिषदों के साथ)।

· सी.एस.आर, ई.एस.जी और स्थिरता नेतृत्व: जिम्मेदार व्यवसाय, ईएसजी मानक, जलवायु-अनुकूल रणनीतियाँ।

· इंजीनियरिंग, परियोजना और संपत्ति प्रबंधन उत्कृष्टता: सर्वश्रेष्ठ परियोजना प्रबंधन मॉडल, मेगा-प्रोजेक्ट निष्पादन, परिचालन लचीलापन।

· सीखना, विकास और प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र: क्षमताओं को सुदृढ़ करना, अंतर-पीएसई ज्ञान का आदान-प्रदान, अनुसंधान-आधारित प्रशिक्षण मॉडल।

कार्यक्रम का समापन क्षमता निर्माण आयोग  के सचिव श्री एस. पी. रॉय के समापन भाषण के साथ हुआ, जिन्होंने कहा कि सीबीसी सदैव सीपीएसई की क्षमता निर्माण पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। धन्यवाद ज्ञापन क्षमता निर्माण आयोग की निदेशक सुश्री नवनीत कौर द्वारा दिया गया।

‘भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन’ भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के अनुरूप सीपीएसई के नेतृत्व, शासन और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

*******************************

 

 

असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा

नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने पिछले 29 केंद्रीय श्रम अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को समेकित, सरलीकृत और तर्कसंगत बनाकर चार श्रम संहिताएं तैयार की हैं, जिनके नाम हैं: मजदूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता, 2020। देश भर में चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं।

चारों श्रम संहिताएं परिभाषाओं और प्राधिकरणों की बहुलता को कम करती हैं, प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाती हैं तथा प्रवर्तन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाती हैं। साथ ही, यह असंगठित श्रमिकों सहित श्रमिकों को उपलब्ध सुरक्षा को मजबूत करती है। श्रम संहिता में देश के असंगठित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान हैं।

सामाजिक सुरक्षा संहिता2020 के अंतर्गत:

• असंगठित श्रमिकों, गिग (अस्थायी) और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है।

• रोजगार के नए स्वरूपों को ध्यान में रखते हुए, एग्रीगेटर (एक डिजिटल मध्यवर्ती या मार्केट प्लेस जहां कोई खरीदार या सेवा का उपयोगकर्ता विक्रेता या सेवा प्रदाता से जुड़ सकता है), गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों की परिभाषाएं प्रस्तुत की गईं।

• वर्तमान में केवल अधिसूचित जिलों/क्षेत्रों तक सीमित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के कवरेज को बढ़ाकर पूरे भारत में सार्वभौमिक रूप से लागू किया गया है।

• कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सुविधाएं 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों तक स्वैच्छिक आधार पर विस्तारित की गई हैं।

• अगर खतरनाक व्यवसाय करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान में चाहे उसमें एक भी कर्मचारी कार्यरत हो, उसमें ईएसआईसी कवरेज अनिवार्य है।

• कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सार्वभौमिक कवरेज अब 20 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होती है।

• सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 45 के अनुसार, केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा असंगठित श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों के लिए निगम द्वारा अध्याय IV (ईएसआईसी) के तहत स्वीकार्य लाभ प्रदान करने हेतु योजना बना सकती है।

वेतन संहिता 2019 के अंतर्गत:

• पूर्व अधिनियम में अनुसूचित रोजगारों के विपरीत, सभी रोजगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी का सार्वभौमीकरण।

• न्यूनतम मजदूरी को वैधानिक बना दिया गया है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। संबंधित सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगी।

• लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाए और भर्ती एवं वेतन भुगतान में भेदभाव को प्रतिबंधित किया जाए, जिसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हों।

• सभी कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान।

• वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक भत्ते वेतन का हिस्सा बनाए जाएंगे, जिससे मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) अंशदान आदि में वृद्धि होगी।

ओएसएच और डब्ल्यूसी संहिता 2020 के अंतर्गत:

• नियोक्ता को निर्धारित आयु से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच प्रदान करनी होगी।

• अंतर-राज्यीय प्रवासी कामगार की परिभाषा का विस्तार किया गया है जिसमें ठेकेदार द्वारा नियोजित प्रवासी कामगार और स्व-प्रवासन करने वाले श्रमिक भी शामिल हैं। वे (क) वार्षिक एकमुश्त यात्रा भत्ता और (ख) लाभों की पोर्टेबिलिटी पाने के हकदार हैं।

अधिसूचित जिलों/क्षेत्रों तक सीमित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के कवरेज को बढ़ाकर पूरे भारत में सार्वभौमिक रूप से लागू किया गया है। इसके अलावा, 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए स्वैच्छिक आधार पर ईएसआईसी कवरेज की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित खतरनाक व्यवसाय करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान में, चाहे उसमें एक भी कर्मचारी कार्यरत हो, ईएसआईसी के तहत लाभ लागू किए जा सकते हैं।

**********************

 

नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के साथ मिलकर पीएम मित्र पार्कों के विकास के लिएपरामर्श किया

नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के साथ मिलकर पीएम मित्र पार्कों के विकास के लिए डिवेलपर्स के साथ परामर्श किया, ताकि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत साझेदारी की संभावनाओं को तलाशा जा सके

नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत स्थापित किए जा रहे पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्कों के विकास के लिए भागीदारी के अवसरों का पता लगाने के लिए हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। बाजार संबंधी जानकारियों की श्रृंखला के तहत इस परामर्श बैठक का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन का सहयोग करने के लिए एक मजबूत, बाजार-अनुकूल ढांचा तैयार करना है।

डीबीएफओटी के अंतर्गत पीएम मित्र पार्क (पीपीपी – ग्रीनफील्ड)

परामर्श बैठक में विशेष रूप से पीपीपी/डीबीएफओटी के तहत प्रस्तावित तीन ग्रीनफील्ड पार्कों के लिए संभावित मास्टर डिवेलपर्स को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • लखनऊ, उत्तर प्रदेश (1,000 एकड़): प्रमुख परिवहन केंद्रों से निकटता सहित मजबूत बहु-मार्गी पहुंच।
  • कलबुर्गी, कर्नाटक (1,000 एकड़): यह स्थल NH-50 के निकट स्थित है और प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
  • नवसारी, गुजरात (1,142 एकड़): बंदरगाहों/लॉजिस्टिक्स से रणनीतिक संपर्क; सड़क, रेल और हवाई अड्डे तक पहुंच।

परामर्श के मुख्य बिंदु

वस्त्र मंत्रालय (एमओटी) की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने अपने संबोधन में भागीदारों के साथ अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और पीएम मित्र पार्कों के सफल विकास और कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत, सहयोगात्मक ढांचा तैयार करने में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।

एमओटी के अतिरिक्त सचिव श्री रोहित कंसल ने एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में पीएम मित्र के रणनीतिक इरादे को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम 1,000 एकड़ के बड़े, एकीकृत कपड़ा पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड के तहत प्रस्तावित 3 राज्यों में लगभग 5,567 करोड़ रुपये के डीपीआर को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।

एनआईसीडीसी के सीईओ और एमडी श्री रजत कुमार सैनी ने पीएम मित्र पार्कों के 5एफ विजन और पीएम मित्र पहल के प्रति उद्योग की मजबूत प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। इसमें तीन राज्यों में निवेशकों की रुचि 20,054 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो मुख्य रूप से मिश्रित वस्त्र क्षेत्र से प्रेरित है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने पर सरकार के फोकस की रूपरेखा प्रस्तुत की। इनमें प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक सुविधाएं, परीक्षण प्रयोगशालाएं, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, एकीकृत लॉजिस्टिक्स, सामाजिक बुनियादी ढांचा और विश्वसनीय ग्रिड-कनेक्टेड स्वच्छ ऊर्जा शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीएम मित्र पार्क संपूर्ण मूल्य शृंखला एकीकरण और वैश्विक स्तर पर मानकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

 

हितधारकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस परामर्श में भावी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रमुख विकासकर्ताओं (मास्टर डिवेलपर्स) और उद्योग जगत के हितधारकों ने व्यापक रूप से भाग लिया। चर्चाओं में उपयोगिता नियोजन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें स्टीम सिस्टम, सीईटीपी/जेडएलडी एकीकरण, मॉड्यूलर प्लॉट विकास और एमएसएमई और बड़े यूनिट दोनों का समर्थन करने वाले एक पारिस्थितिकी तंत्र को सुनिश्चित करना शामिल था।

श्री कंसल ने कहा कि इस तरह के परामर्श उन कमियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिन पर विचार-विमर्श करके वस्त्र क्षेत्र के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जा सकता है, साथ ही उन्होंने वस्त्र मंत्रालय द्वारा इस क्षेत्र को मजबूत करने और आजीविका में सुधार लाने के प्रयासों की सराहना की।

श्री सैनी ने संकेत दिया कि यह कवायद बाजार की दिलचस्पी के सत्यापन, मास्टर डिवेलपर मॉडल के परिष्करण, बेहतर परियोजना संरचना और बैंक क्षमता, प्रारंभिक जोखिम पहचान, बुनियादी ढांचे के चरणबद्ध कार्यान्वयन, निवेशक आकर्षण रणनीतियों, वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणाली के साथ बेंचमार्किंग और बोली लगाने की बेहतर तैयारी से पीएम मित्र पार्कों के समय पर विकास और सफल संचालन में योगदान मिलेगा।

कुल मिलाकर यह परामर्श पीएम मित्र योजना में हितधारकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। इसके डिजाइन और कार्यान्वयन दृष्टिकोण को लेकर प्रतिभागी आशान्वित दिखे। परामर्श सत्र को रचनात्मक प्रतिक्रिया और कार्रवाई योग्य सुझावों से लाभ हुआ, जो रूपरेखा को और परिष्कृत करने और पीएम मित्र पार्कों के सफल वितरण के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करने में मदद करेगा।

पीएम मित्रा पार्क्स के बारे में

तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सात पीएम मित्र (पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान ) पार्क की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री के 5एफ विजन ((फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन, फैशन से फॉरेन) से प्रेरित इन पार्कों का उद्देश्य पूर्णतः एकीकृत, बड़े पैमाने पर वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इनसे सामूहिक रूप से लगभग ₹70,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। प्रत्येक पार्क से लगभग 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। प्रत्येक पार्क में कताई और बुनाई से लेकर प्रसंस्करण, रंगाई, छपाई और वस्त्र निर्माण तक की संपूर्ण वस्त्र मूल्य शृंखला एक ही स्थान पर मौजूद होगी। विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना से सुसज्जित, पीएम मित्र पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सक्षम बनाएंगे, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और घरेलू निवेश को बढ़ावा देंगे और लॉजिस्टिक लागत को काफी कम करेंगे, जिससे भारत के कपड़ा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

एनआईसीडीसी के बारे में

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के तहत नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनआईसीडीसी) को विश्व स्तरीय ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों का विकास करने का दायित्व सौंपा गया है जो विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाते हैं, निवेश आकर्षित करते हैं और रोजगार के अवसर सृजित करते हैं। एनआईसीडीसी भारत के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परिवर्तन का सहयोग करने के लिए 13 राज्यों में 20 परियोजनाओं और यूएलआईपी, एलडीबी और आईआईएलबी जैसे डिजिटल उपक्रमों को लागू कर रहा है।

वस्त्र मंत्रालय पीएम मित्र योजना के लिए नोडल मंत्रालय है, जबकि एनआईसीडीसी परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) के रूप में कार्य कर रहा है। एनआईसीडीसी राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत औद्योगिक स्मार्ट शहरों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के अपने अनुभव का लाभ उठाता है और पीएम मित्र पार्कों के लिए संपूर्ण तकनीकी, वित्तीय और कार्यक्रम प्रबंधन सहायता प्रदान करता है। इसमें डीपीआर और मास्टर प्लान की समीक्षा, डीबीएफओटी ढांचे के तहत पीपीपी संरचना, नीलामी प्रक्रिया प्रबंधन, गुणवत्ता और समयसीमा की निगरानी और राज्यों, प्रमुख विकासकर्ताओं और निवेशकों के साथ समन्वय शामिल है।

*****************************

 

ट्राई ने सूरत शहर और आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल की गुणवत्ता का आकलन किया

नई दिल्ली – भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई-ट्राई) ने नवंबर 2025 के दौरान गुजरात के सूरत शहर में आयोजित स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष दूरसंचार उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) की मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है।

आईडीटी (आईडीटी) के दौरान, ट्राई सभी सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क के लाइव प्रदर्शन डेटा को कॉल सेटअप सफलता दर, डेटा डाउनलोड एवं अपलोड गति, ध्वनि गुणवत्ता आदि जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) पर एकत्रित करता है। इसके लिए कई उन्नत परीक्षण हैंडसेट का उपयोग किया जाता है और सत्रों की तत्‍क्षण निगरानी की जाती है। इसमें उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके उनका विश्लेषण किया जाता है। आईडीटी के परिणाम ट्राई की वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को सूचित किया जा सके और टीएसपी को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

ट्राई के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से 3 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2025 के दौरान गुजरात एलएसए में 412 किलोमीटर के शहरी ड्राइव, 14 हॉटस्पॉट स्थानों और 2.0 किलोमीटर के वॉक टेस्ट सहित विस्तृत ड्राइव टेस्ट आयोजित किए। सूरत शहर में ओपन मोड ( 5जी/4जी/3जी/2जी) में मोबाइल सेवाओं के आईडीटी निष्कर्षों का सारांश नीचे दिया गया है:

(i) वॉइस सेवाएं:

क्र.सं. प्रमुख संकेतक
(3जी/2जी मोड)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 99.55 92.82 100.00 100.00
2 ड्रॉप कॉल दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 4.10 0.15 0.00
3 कॉल सेटअप समय औसत (सेकंड) सेकंड 1.24 1.15 0.56 0.66
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.62 7.14 0.76 0.92
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 4.01 3.40 3.86 4.48

(ii) डाटा सेवाएं

 

क्र.सं. प्रमुख संकेतक
(ऑटो सेक्‍शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड क्षमता (मेगाबिट्स/सेकंड) 149.11 4.83 279.36 45.02
2 औसम अपडोड क्षमता (मेगाबिट्स/सेकंड) 39.01 6.60 46.54 23.24
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 40.73 41.88 22.74 21.36

 

सूरत में आयोजित ड्राइव टेस्ट में सूरत शहर के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे। इनमें डायमंड नगर, अंबाबा कॉमर्स कॉलेज, ट्रांसपोर्ट नगर, पर्वत पाटिया, डिंडोली, उधना बस डिपो, भेस्तान, उन्‍न पाटिया, सचिन आईएनए, शिव नगर, राज नगर, दिलदार नगर, बमरोली, न्यू सिटी लाइट, गांधी कुटीर, पांदेसरा, पार्ले पॉइंट, गावियर, वेसु, अडाजन गांव, इच्छापुर, भेसान, पाल गांव, रंदर, कतरगाम, मोटा वराछा, पटेल नगर, वनकला आदि शामिल हैं।

इस आईडीटी रिपोर्ट के निष्कर्ष संबंधित टीएसपी के साथ साझा किए गए हैं ताकि वे आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई कर सकें। आईडीटी की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी के लिए, ट्राई जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय के आईडी adv.jaipur@trai.gov.in पर ईमेल भेजा जा सकता है।

**********************

 

सोशल मीडिया से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म तक: सरकार ने अश्लीलता, भ्रामक सूचना और ऑनलाइन साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त जवाबदेही लागू की

नई दिल्ली  –  सरकार की नीतियों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों सहित इसके उपयोगकर्ताओं के लिए एक मुक्त, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है।

सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत में इंटरनेट किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सामग्री या जानकारी, विशेष रूप से अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से मुक्त हो।

डिजिटल प्लेटफार्मों पर गैरकानूनी सामग्री का मुकाबला करने के लिए कानूनी ढांचा

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000

आईटी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम, 2021) ने संयुक्त रूप से डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए एक सख़्त ढांचा तैयार किया है।

यह मध्यस्थों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दायित्व डालता है।

आईटी अधिनियम विभिन्न साइबर अपराधों जैसे निजता का उल्लंघन (धारा 66ई), अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित करना या प्रसारित करना (धारा 67, 67ए, 67बी) के लिए दंड का प्रावधान करता है।

यह पुलिस को अपराधों की जांच करने (धारा 78), सार्वजनिक स्थान में प्रवेश करने और संदिग्ध व्यक्ति की तलाशी लेने और उसे गिरफ्तार करने (धारा 80) का अधिकार भी देता है।

आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021

आईटी नियम, 2021 सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित मध्यस्थों पर उचित सावधानी बरतने का दायित्व डालते हैं और उनसे यह अपेक्षा करते हैं कि वे गैरकानूनी सामग्री के प्रसारण को रोकने के लिए इन दायित्वों को प्रभावी ढंग से लागू करें।

आईटी नियम, 2021 के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान:

प्रावधान विवरण
प्रतिबंधित जानकारी

नियम 3(1)(ख) के अंतर्गत

ऐसी जानकारी/सामग्री को होस्ट करने, स्टोर करने, प्रसारित करने, प्रदर्शित करने या प्रकाशित करने पर प्रतिबंध लगाता है जो अन्य बातों के अलावा, निम्न प्रकार की हो:
  • अश्लील, पोर्नोग्राफिक, किसी दूसरे की निजता का उल्लंघन करने वाला, लिंग के आधार पर अपमानजनक या उत्पीड़न करने वाला, नस्लीय या जातीय रूप से आपत्तिजनक, या घृणा या हिंसा को बढ़ावा देने वाला;
  • बच्चे के लिए हानिकारक;
  • धोखा देना या गुमराह करना, जिसमें डीपफेक के माध्यम से भी शामिल है;
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित अन्य लोगों का रूप धारण करता है;
  • राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा;
  • किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करता है।
उपयोगकर्ता जागरूकता

दायित्वों

मध्यस्थों को सेवा की शर्तों और उपयोगकर्ता समझौतों के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को गैरकानूनी सामग्री साझा करने के परिणामों के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करना चाहिए, जिसमें सामग्री को हटाना, खाते को निलंबित करना या समाप्त करना शामिल है।
सामग्री हटाने में जवाबदेही मध्यस्थों को अदालती आदेशों, सरकार से प्राप्त तर्कसंगत सूचना या उपयोगकर्ता की शिकायतों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर गैरकानूनी सामग्री को हटाने के लिए शीघ्रता से कार्रवाई करनी चाहिए।
शिकायत निवारण
  • मध्यस्थों को शिकायत अधिकारी नियुक्त करने होंगे
  • अवैध सामग्री को 72 घंटों के भीतर हटाकर शिकायतों का समाधान करने का आदेश दिया गया है।
  • निजता का उल्लंघन करने वाली, व्यक्तियों का रूप धारण करने वाली या नग्नता दिखाने वाली सामग्री को ऐसी किसी भी शिकायत के खिलाफ 24 घंटों के भीतर हटा दिया जाना चाहिए।
शिकायत अपीलीय समितियों (जीएसी) की कार्यप्रणाली यदि मध्यस्थों के शिकायत अधिकारी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं करते हैं, तो उपयोगकर्ता www.gac.gov.in पर ऑनलाइन अपील कर सकते हैं । जीएसी सामग्री मॉडरेशन संबंधी निर्णयों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
 

सरकारी एजेंसियों को मध्यस्थों द्वारा सहायता

मध्यस्थों को पहचान सत्यापन के लिए, या साइबर सुरक्षा घटनाओं सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच या अभियोजन के लिए अधिकृत सरकारी एजेंसियों को अपने नियंत्रण में मौजूद जानकारी या सहायता प्रदान करनी होगी अतिरिक्त दायित्व

महत्वपूर्ण सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

(एसएसएमआई) (अर्थात, सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

जिनमें 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार हो

भारत)

अतिरिक्त दायित्व

महत्वपूर्ण सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

(एसएसएमआई) (अर्थात, सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

जिनमें 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार हो

भारत)

  • संदेश भेजने की सेवाएं प्रदान करने वाले सामाजिक-आर्थिक माध्यमों (एसएसएमआई) को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर या संवेदनशील सामग्री के मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करनी चाहिए।
  • सामाजिक सुरक्षा और प्रबंधन संस्थान (एसएसएमआई) कुछ गैरकानूनी सामग्री के प्रसार का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का उपयोग करेंगे।
  • सामाजिक एवं माध्यमिक शिक्षा संस्थानों (एसएसएमआई) को अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी, स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी और अनुपालन एवं कानून प्रवर्तन समन्वय के लिए भारत में स्थित  पते साझा करने होंगे।
  • सामाजिक सुरक्षा और प्रबंधन संस्थाओं (एसएसएमआई) को स्वैच्छिक उपयोगकर्ता सत्यापन, आंतरिक अपील और स्वतः संज्ञान लेने से पहले निष्पक्ष सुनवाई की पेशकश करनी होगी।

यदि मध्यस्थ आईटी नियम, 2021 में दिए गए कानूनी दायित्वों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो वे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत प्रदान की गई तृतीय पक्ष सूचना से छूट खो देते हैं।

वे किसी भी मौजूदा कानून के तहत प्रदान की गई परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए उत्तरदायी हैं।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023

बीएनएस, 2023 ऑनलाइन नुकसान, अश्लीलता, भ्रामक सूचना और अन्य साइबर- अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करता है, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से किए गए अपराध भी शामिल हैं।

  • यह विधेयक अश्लील कृत्यों (धारा 296), अश्लील सामग्री की बिक्री, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऐसी सामग्री का प्रदर्शन भी शामिल है (धारा 294) जैसे अपराधों के लिए दंड का प्रावधान करता है।

इसी प्रकार, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हानिकारक सामग्री के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए, सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत 25.02.2021 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया, आचार संहिता) नियम, 2021 को अधिसूचित किया है।

  • नियमों के भाग-III में डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड सामग्री (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए एक आचार संहिता का प्रावधान है।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यह दायित्व है कि वे ऐसी कोई भी सामग्री प्रसारित न करें जो वर्तमान में लागू कानून द्वारा प्रतिबंधित है।
  • सरकार ने अब तक अश्लील सामग्री प्रदर्शित करने वाले 43 ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री निशिकांत दुबे द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

***************************

 

‘मिशन शक्ति’ का लक्ष्‍य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हस्‍तक्षेपों को सुदृढ़ करना है

नई दिल्ली – केन्‍द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा महिलाओं के वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनमें विधवाएं, एकल माताएं और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली महिलाएं शामिल हैं।

इस संबंध में केन्‍द्र सरकार की प्रमुख योजनाएं और कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:

(i) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान, वित्तीय वर्ष 2022-23 से प्रभावी, देश में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है, जिन्हें तीन श्रेणियों के अंतर्गत रखा गया है, अर्थात्: (1) मिशन शक्ति, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए; (2) सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, देश में पोषण एवं स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए; और (3) मिशन वात्सल्य, कठिन परिस्थितियों में कमजोर बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए। योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

(क) मिशन शक्ति : ‘मिशन शक्ति’ का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हस्‍तक्षेपों को मजबूत करना है। इसमें महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए दो उप-योजनाएं ‘संबल’ और और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ‘समर्थ्य’ शामिल हैं। ‘संबल’ उप-योजना महिलाओं की सुरक्षा और सरंक्षा के लिए है और इसके प्रमुख घटक हैं, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), जो जिला स्तर पर स्थित एक संस्था है और महिलाओं को एक ही छत के नीचे तत्काल सहायता प्रदान करती है, जैसे कि अस्थायी आश्रय, चिकित्सा एवं पुलिस सहायता, परामर्श और कानूनी सहायता। महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल) 181 महिलाओं को सहायता और जानकारी प्राप्त करने के लिए 24 घंटे टोल-फ्री दूरसंचार सेवा प्रदान करती है। ‘समर्थ्य’ उप-योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित घटक शामिल हैं: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई), जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले बच्चे के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 5,000/- रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक/डाकघर खाते में जमा की जाती है। पीएमएमवीवाई के तहत पात्र लाभार्थियों को दूसरे बच्चे (यदि वह लड़की हो) के लिए 6,000/- रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। शक्ति सदन संकटग्रस्त और कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं, जिनमें तस्करी की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, के लिए एक एकीकृत राहत एवं पुनर्वास केंद्र है। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में विधवाओं के लिए कृष्ण कुटीर‘ नामक एक गृह स्थापित किया गया है, जिसमें 1,000 निवासियों को रहने की सुविधा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, पौष्टिक भोजन, कानूनी और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सखी निवास (कार्यरत महिला छात्रावास) का उद्देश्य शहरी, अर्ध-शहरी और यहां तक ​​कि ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक स्‍थानों पर आवास की उपलब्धता को बढ़ावा देना है, जहां महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर मौजूद हैं। पालना डे-केयर क्रेच सुविधाओं का एक हिस्सा है, जो बच्चों के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित स्थान प्रदान करता है। क्रेच सेवाएं उन शिशु देखभाल सुविधाओं को औपचारिक रूप देती हैं, जिन्हें अब तक घरेलू कार्य का हिस्सा माना जाता था और आंगनवाड़ी के बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अंतिम छोर तक देखभाल सुविधाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करती हैं। संकल्प: महिला सशक्तिकरण केंद्र (एचईडब्‍ल्‍यू) महिलाओं के लिए उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी और ज्ञान के बीच के अंतर को पाटने का एक साधन है।

(ख) मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को 3 प्राथमिक श्रेणियों में पुनर्गठित किया गया है: (i) 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों (14-18 वर्ष) के लिए पोषण संबंधी स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना; (ii) प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा [3-6 वर्ष] और (iii) आधुनिक, उन्नत सक्षम आंगनवाड़ी सहित आंगनवाड़ी अवसंरचना।

(ii) गृह मंत्रालय निर्भया निधि के अंतर्गत मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण‘ नामक परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है। अब तक देश भर में 827 एएचटीयू कार्यरत हैं, जिनमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 807, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 15 और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में 5 शामिल हैं। एसएसबी ने एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1903 भी स्थापित किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि पुलिस स्टेशन महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल और सुलभ हों, क्योंकि वे किसी भी संकटग्रस्‍त महिला के लिए, जिनमें तस्करी और शोषण की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, पुलिस स्टेशन में प्रवेशन करने पर पहला और एकमात्र संपर्क बिंदु होंगी, निर्भया निधि के अंतर्गत 14,658 महिला सहायता डेस्क (डब्ल्यूएचडी) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 13,743 का नेतृत्व महिला पुलिस अधिकारी कर रही हैं। जरूरतमंद और संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए विभिन्न आपात स्थितियों के लिए सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) स्थापित की गई है, जिसमें फील्ड/पुलिस संसाधनों की कंप्यूटर-सहायता प्राप्त तैनाती की सुविधा है। ईआरएसएस के अतिरिक्त, एक समर्पित महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल-181) देश भर में कार्यरत है।

(iii) आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार 1200 से अधिक चिकित्सा पैकेजों के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान कर रही है। इनमें से 141 से अधिक चिकित्सा पैकेज विशेष रूप से महिलाओं की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत सात प्रकार की जांच (टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और मोतियाबिंद) उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनसे करोड़ों महिलाओं को लाभ हुआ है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में 1,50,000 से अधिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) हैं, जिन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में भी जाना जाता है और ये स्वास्थ्य सेवा को समुदाय के करीब लाते हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएमजेएवाई) विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका विशेष ध्यान गरीब और वंचित महिलाओं पर है। देश भर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (पीएमबीजेके) कार्यरत हैं। बीमा कवरेज और पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) लागू की गई है।

(iv) पैन कार्ड नियमों में संशोधन किया गया है, ताकि यह प्रावधान किया जा सके कि यदि माता एकल अभिभावक है, तो आवेदक आवश्यक विवरण प्रदान करके पैन कार्ड पर केवल माता का नाम दर्ज कराने का विकल्प चुन सकता है। पहले, पैन आवेदन प्रपत्रों में पिता का नाम देना अनिवार्य था।

(v) एकल माताओं के हित में पासपोर्ट नियमों में संशोधन किया गया है। अब पासपोर्ट आवेदन पत्र में माता या पिता दोनों में से किसी का भी नाम दिया जा सकता है और आवेदन के दौरान विवाह/तलाक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। पहले पासपोर्ट आवेदन पत्रों में पिता का नाम देना अनिवार्य था।

(vi) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) योजना जिसके तहत विधवाओं, एकल माताओं और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं सहित गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को बिना जमा के एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए जाते हैं। इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना, लकड़ी और गोबर जैसे पारंपरिक ईंधनों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना, घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करना, महिलाओं के श्रम को कम करना और वनों की कटाई को रोकने में मदद करना है।

(vii) केन्‍द्र सरकार ने सार्वजनिक खरीद नीति के माध्यम से यह अनिवार्य कर दिया है कि सभी केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त करें।

(viii) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा संचालित “कौशल उन्नयन एवं महिला कॉयर योजना” कॉयर विकास योजना के अंतर्गत कॉयर क्षेत्र में कार्यरत महिला कारीगरों के कौशल विकास हेतु एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है। एमएसएमई के अंतर्गत पीएम विश्वकर्मा योजना 18 व्यवसायों में कार्यरत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को अनेक लाभ प्रदान करती है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना के तहत एमएसएमई ने 1.12.2022 से सूक्ष्म एवं लघु महिला उद्यमियों के लिए उन्नत प्रावधान लागू किए हैं, जिनमें अन्य उद्यमियों के लिए 75 प्रतिशत की तुलना में 90 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज और वार्षिक गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट शामिल है। एमएसएमई ने “यशस्विनी” नामक एक जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में मौजूदा और इच्छुक महिला उद्यमियों में जागरूकता पैदा करना है और उन्हें मार्गदर्शन, सलाह और क्षमता निर्माण के माध्यम से निरंतर सहायता प्रदान करना है।

(ix) मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) आदि जैसी योजनाएं रोजगार/स्वरोजगार के अवसर और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों में अधिकांश महिलाएं हैं।

केन्‍द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

*************************

 

प्रधानमंत्री ने इथोपिया में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज इथोपिया की संसद के संयुक्‍त सत्र को संबोधित किया। यह प्रधानमंत्री के लिए एक विशेष सम्मान था, जो इथोपिया की अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा पर हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के लोगों की ओर से इथोपिया के सांसदों को दोस्ती और सद्भावना की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि संसद को संबोधित करना और लोकतंत्र के इस मंदिर के जरिए इथोपिया के आम लोगों, किसानों, उद्यमियों, गर्वित महिलाओं और युवाओं से बात करना उनके लिए सौभाग्य की बात है, जो देश के भविष्य को आकार दे रहे हैं। उन्होंने इथोपिया के लोगों और सरकार को उन्हें सर्वोच्च सम्‍मान यानी ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथोपिया देने के लिए धन्‍यवाद दिया। संबंधों के महत्व को देखते हुए, प्रधानमंत्री ने गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला गया है।

भारत और इथोपिया के बीच सभ्यतागत संबंधों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश प्राचीन ज्ञान को आधुनिक महत्वाकांक्षा के साथ जोड़ते हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और इथोपिया का राष्‍ट्र गान दोनों अपनी भूमि को माता के रूप में संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के साझा संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि 1941 में इथोपिया की मुक्ति हेतु भारतीय सैनिकों ने वहां के सैनिकों के साथ मिलकर लड़ाई में अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि इथोपिया के लोगों के बलिदानों का प्रतीक अदवा विजय स्मारक को श्रद्धांजलि देना उनके लिए सम्मान की बात है।

प्रधानमंत्री ने भारत-इथोपिया साझेदारी को बढ़ाने और मजबूत बनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताई। इस संबंध में, उन्होंने इथोपिया के विकास और समृद्धि में भारतीय शिक्षकों और भारतीय व्यापारियों के योगदान को याद किया। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य प्रसंस्‍करण और नवाचार सहित भारत के विकास के अनुभवों को साझा किया और इथोपिया की प्राथमिकताओं के अनुसार उसे विकास संबंधी सहायता जारी रखने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। “वसुधैव कुटुंबकम” [पूरी दुनिया एक परिवारहै] के सिद्धांत में निहित मानवता की सेवा करने की भारत की प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए, उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान इथोपिया को वैक्सीन की आपूर्ति करना भारत के लिए सौभाग्य की बात थी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील देशों के तौर पर भारत और इथोपिया को विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने में एकजुटता दिखाने के लिए इथोपिया को धन्यवाद दिया।

अफ्रीकी एकता के सपनों को साकार करने में अफ्रीकी संघ के मुख्यालय, अदीस अबाबा की अहम भूमिका पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान जी20 में अफ्रीकी संघ का स्थायी सदस्य के तौर पर स्वागत करते हुए गर्व महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के 11 सालों में भारत-अफ्रीका संबंध कई गुना बढ़े हैं और दोनों पक्षों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों के स्तर पर 100 से अधिक दौरे हुए हैं। उन्होंने अफ्रीका के विकास के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता पर बात करते हुए जोहान्सबर्ग जी-20 शिखर सम्मेलन में महाद्वीप में दस लाख प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए “अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव” शुरू करने के अपने प्रस्ताव पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने एक साथी लोकतांत्रिक देश के साथ भारत की यात्रा साझा करने का मौका देने के लिए माननीय स्पीकर को धन्यवाद देते हुए कहा कि विकासशील देश अपना भविष्य खुद लिख रहे हैं।

*********************

 

राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 दिसंबर, 2025) विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का उद्घाटन किया।

इस गैलरी में परम वीर चक्र से सम्मानित सभी 21 विजेताओं के चित्र प्रदर्शित हैं। गैलरी का उद्देश्य आगंतुकों को हमारे उन राष्ट्रीय नायकों के बारे में जानकारी प्रदान करना है जिन्होंने हमारे राष्ट्र की रक्षा में अदम्य संकल्प और साहस का प्रदर्शन किया। यह उन वीर योद्धाओं की स्मृति को सम्मान देने की एक पहल है जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी।

जिन गलियारों में यह परम वीर दीर्घा बनाई गई है, वहां पहले ब्रिटिश सहायक अधिकारियों के चित्र लगे होते थे। भारतीय राष्ट्रीय नायकों के चित्र प्रदर्शित करने की यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है जो युद्ध के दौरान असाधारण वीरता, साहस और आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है।

**************************

 

प्रधानमंत्री ने विजय दिवस पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विजय दिवस के अवसर पर उन वीर सैनिकों को याद किया जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। श्री मोदी ने कहा कि वीर सैनिकों के पक्के इरादे और निस्वार्थ सेवा ने राष्ट्र की रक्षा की और भारत के इतिहास में गौरव का एक पल दर्ज किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजय दिवस पर उनकी बहादुरी को सलाम है और आज का दिन उनकी बेमिसाल भावना की याद दिलाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों की वीरता देश की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा:

“विजय दिवस पर हम उन वीर सैनिकों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनके दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ सेवा ने हमारे राष्ट्र की रक्षा की और हमारे इतिहास में गौरव का एक पल अंकित किया। यह दिन उनके बेमिसाल साहस की याद दिलाता है। उनकी वीरता देश की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

 

************************

 

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक- 2025 पेश किया

नई दिल्ली –  केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज लोकसभा में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआईएस) को प्रभावी समन्वय और मानकों के निर्धारण के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को व्यापक राष्ट्रव्यापी परामर्शों के माध्यम से तैयार किया गया था और जैसा कि अध्याय 18 में परिकल्पित है यह उच्च शिक्षा नियामक प्रणाली में मौलिक परिवर्तन का आह्वान करती है। एनईपी मसौदा समिति के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व प्रमुख स्वर्गीय डॉ. के. कस्तूरीरंगन के दूरदर्शी नेतृत्व में यह नीति एक समग्र और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण द्वारा निर्देशित है जो भारतीय मूल्यों में निहित अकादमिक स्वायत्तता, बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान उत्कृष्टता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर देती है। इस समावेशी परामर्श प्रक्रिया के आधार पर विधेयक तैयार किया गया और इसमें प्रासंगिक वैश्विक सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इनका सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया और उन्हें प्रासंगिक बनाया गया। साथ ही  और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और डॉ. कस्तूरीरंगन के न्यायसंगत, लचीली और नवाचार-संचालित शिक्षा प्रणाली के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय उच्च शिक्षा संदर्भ में उपयुक्त रूप से अनुकूलित किया गया है।

12 दिसंबर, 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में पेश करने के लिए विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 को मंजूरी दी।

यह विधेयक भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची की प्रविष्टि 66 के प्रावधानों के तहत पेश किया जा रहा है। इसमें ‘उच्च शिक्षा या अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में समन्वय और मानकों के निर्धारण’ का प्रावधान है।

विधेयक में तीन परिषदों के साथ एक शीर्ष निकाय के रूप में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान की स्थापना का प्रावधान है: इसमें विकसित भारत शिक्षा विनियमन परिषद (नियामक परिषद), विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (मान्यता परिषद), और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (मानक परिषद) शामिल हैं। इस विधेयक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम (यूजीसी), 1956, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अधिनियम (एआईसीटीई), 1987 और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम (एनसीटीई), 1993 को निरस्त करने का भी प्रावधान है। शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के दायरे में आने वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थान मानकों के निर्धारण के लिए विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के दायरे में होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित वास्तुकला परिषद (सीओए) व्यावसायिक मानक निर्धारण निकाय (पीएसएसबी) के रूप में कार्य करेगी। यह विधेयक राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को दी गई स्वायत्तता के वर्तमान स्तर को बनाए रखने को सुनिश्चित करता है।

अधिष्ठान उच्च शिक्षा के समग्र विकास के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा और परिषदों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा। मानक परिषद उच्च शिक्षा संस्थानों में न्यूनतम शैक्षणिक मानकों के समन्वय और निर्धारण के लिए जिम्मेदार होगी। नियामक परिषद इन मानकों के समन्वय और रखरखाव को सुनिश्चित करेगी और मान्यता परिषद एक मजबूत और विश्वसनीय मान्यता  पारिस्थितिकी तंत्र की देखरेख करने वाले एक स्वतंत्र मान्यता  प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगी।

नियामक परिषद का सार्वजनिक पोर्टल जो उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा शासन, वित्तीय, शैक्षणिक और संस्थागत प्रदर्शन डेटा के प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाता है मान्यता के लिए मूलभूत आधार के रूप में भी कार्य करेगा। यह एकीकृत दृष्टिकोण पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करेगा साथ ही उच्च शिक्षा में भागीदारों के लिए व्यवस्थाओं को सरल बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

अधिष्ठान और विभिन्न परिषदों की सदस्यता में मुख्य रूप से प्रख्यात शिक्षाविद, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जो संतुलित प्रतिनिधित्व और बेहतर निर्णय लेने को सुनिश्चित करते हैं।

वर्तमान परिदृश्य में उच्च शिक्षण संस्थानों को विभिन्न नियामक निकायों से कई स्वीकृति प्राप्त करने, कई तरह के निरीक्षण से गुजरने आदि की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र का अत्यधिक विनियमन और नियंत्रण का दोहराव होता है। देश में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए सरलीकृत नियामक प्रणाली उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

ऐसे में प्रस्तावित विधेयक एक एकीकृत और सुव्यवस्थित नियामक संरचना को लागू करके जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करता है। संपूर्ण नियामक ढांचा प्रौद्योगिकी-संचालित, फेसलेस, सिंगल विंडो इंटरएक्टिव सिस्टम के माध्यम से संचालित होगा, जो सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण और विश्वास-आधारित विनियमन के सिद्धांतों पर आधारित होगा।

नियामक परिषद एक व्यापक सार्वजनिक डिजिटल पोर्टल का रखरखाव करेगी। यहां उच्च शिक्षा संस्थानों को वित्तीय ईमानदारी, शासन व्यवस्था, वित्त, लेखापरीक्षा, प्रक्रियाओं, बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और कर्मचारियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों और शैक्षिक परिणामों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इस सार्वजनिक पोर्टल पर प्रस्तुत डेटा मान्यता के प्राथमिक आधार के रूप में भी काम करेगा, जिससे उच्च शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और एकरूपता सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित विधेयक के प्रमुख परिणाम

1. युवा सशक्तिकरण

पारदर्शी और छात्र-केंद्रित व्यवस्था गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेंगी, जिससे बेहतर पहुंच और उच्च सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राप्त होगा।

शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण छात्रों के बीच विवेचनात्मक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को पोषित करते हुए अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अंतःविषय और लचीला शैक्षणिक ढांचा शिक्षार्थियों को विविध विषयों का पता लगाने और निरंतर कौशल विकास और उन्नयन करने की अनुमति देंगे।

अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर देने से युवाओं में समस्या-समाधान की क्षमता, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।

छात्र शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, शासन और समग्र शिक्षण अनुभव पर संरचित प्रतिक्रिया के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग और मूल्यांकन में सक्रिय रूप से योगदान देंगे, जिससे जवाबदेही और निरंतर सुधार सुनिश्चित होगा।

एक निष्पक्ष, पारदर्शी और सशक्त शिकायत निवारण तंत्र छात्रों की समस्याओं का समय पर और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करेगा, जिससे संस्थागत कार्य प्रणालियों में विश्वास सुदृढ़ होगा।

इस विधेयक का उद्देश्य ऐसे जानकार, कुशल, जिम्मेदार और वैश्विक स्तर पर सक्षम नागरिक तैयार करना है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक योगदान देने में सक्षम हों।

2. विश्व की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को अपनाना

उच्च शिक्षा में विश्व की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को अपनाने से भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।

इससे देश के भीतर वैश्विक स्तर पर मानकीकृत संस्थानों की स्थापना में सुविधा होगी, जिससे भारत को ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही घरेलू प्रतिभा को बनाए रखा जा सकेगा और अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शिक्षकों को आकर्षित किया जा सकेगा।

3. नियामक सुधार

स्वतंत्र परिषदों के माध्यम से मानक निर्धारण, विनियमन और मान्यता का स्पष्ट कार्यात्मक पृथक्करण निष्पक्षता, विश्वसनीयता और हितों के टकराव से मुक्ति सुनिश्चित करेगा।

नियमन के लिए सामंजस्यपूर्ण मानदंड न्यूनतम गुणवत्ता मानकों में एकरूपता सुनिश्चित करेंगे, साथ ही संस्थागत उद्देश्यों और शैक्षणिक प्रस्तावों में लचीलापन और विविधता की अनुमति भी देंगे।

उद्देश्यपूर्ण, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम, फेसलेस सिंगल विंडो सिस्टम, जो सार्वजनिक परीक्षण के लिए खुली है वह प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी, मनमानी को कम करेगी और दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाएगी।

सार्वजनिक प्रकटीकरण पर आधारित, उत्तरदायी और न्यूनतम विनियमन संस्थानों को प्रक्रियात्मक अनुपालन के बजाय अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाएगा।

एक पारदर्शी और सुदृढ़ मान्यता ढांचा गुणवत्ता विश्वास तंत्र को और मजबूत करेगा।

अच्छी तरह से प्रदर्शन करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बढ़ी हुई स्वायत्तता उन्हें स्वतंत्र और स्व-शासित संस्थानों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाएगी, जिससे नवाचार, दक्षता (कुशलता) और बेहतर शैक्षणिक परिणामों को बढ़ावा मिलेगा।

**************************

 

क्षमता विकास आयोग ने “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली – क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने आज नई दिल्ली में “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों (सीटीआई) की भविष्य की तैयारी” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में सिविल सेवाओं के प्रशिक्षण के भविष्य पर नए सिरे से सोचने और शासन संबंधी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीबीसी की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी की सफलता के लिए प्रशिक्षण संस्थान बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण संस्थानों को बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए अलग दिखना होगा, और कहा कि उन्हें लगातार बदलते प्रशिक्षण इकोसिस्टम, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, में अपनी भूमिकाओं के बारे में नए सिरे से सोचना, उन्हें नया रूप देना और पुनर्परिभाषित करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण को गतिशील होना चाहिए और सीखने, भुलाने एवं  फिर से सीखने पर ध्यान देना चाहिए। अध्यक्ष महोदया ने मानवीय तत्व के महत्व को रेखांकित किया, जिसे तकनीक द्वारा संचालित माहौल में विकसित भारत के लिए नागरिक-केन्द्रित शासन के लक्ष्य को पूरा करने में अपनी भूमिका निभानी होगी।

इस कार्यशाला का संदर्भ बताते हुए, सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी ने केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि अब एनएससीएसटीआई 2.O फ्रेमवर्क के अनुसार पांच (5) सीटीआई को 5-सितारा वाली  रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि अब ध्यान रेटिंग से हटकर उत्कृष्टता केन्द्र, योग्यता-संचालित प्रशिक्षण और नागरिक-केन्द्रित नतीजों पर दिया जा रहा है। सुश्री मुखर्जी ने अगले चरण के लिए प्रशिक्षण संस्थानों में ऐसे बदलावों की जरूरत पर बल दिया, जिसमें भूमिकाओं और मेंटरशिप के बारे में नए सिरे से सोचने, तकनीक का इस्तेमाल करने और संसाधनों, फैकल्टी, कंटेंट एवं बुनियादी ढांचे को मिलकर साझा करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विशिष्ट डोमेन–केन्द्रित क्षमता की बढ़ती मांग, शासन में बदलाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, लगातार मूल्यांकन एवं अनुकूलन संबंधी कार्यप्रणाली की जरूरत और डेटा-आधारित जानकारियों की जरूरत को पूरा करने के लिए नए मानक स्थापित करने की आवश्यकता है।

ऑनलाइन माध्यम से दर्शकों को संबोधित करते हुए, सीबीसी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदिल जैनुलभाई ने प्रशिक्षण संस्थानों को उनके अब तक की यात्रा के लिए बधाई दी। भविष्य की तैयारियों के संदर्भ में संस्थानों के लिए तीन लक्ष्य बताते हुए, उन्होंने कहा कि आगे चलकर उन सभी को पांच-सितारा रेटिंग वाले विश्वस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनने का लक्ष्य रखना चाहिए; आपस में और अकादमिक संस्थानों व थिंक टैंक के साथ सहयोग करना चाहिए; तीसरा लक्ष्य वास्तविक और डिजिटल प्रशिक्षण इकोसिस्टम को निर्बाध तरीके से एकीकृत करने में अग्रणी बनना और अंततः इसे दुनिया में सबसे अच्छा बनाना है।

कर्मयोगी भारत के मुख्य संचालन अधिकारी श्री राकेश वर्मा ने एआई-केन्द्रित क्षमता निर्माण  योजना (सीबीपी) उपकरण पेश किया और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों, मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों की बदलती ज़रूरतों के अनुरूप योग्यता-संचालित प्रशिक्षण योजना को डिजाइन करने में संस्थानों को समर्थन देने की इसकी क्षमता पर बल दिया।

इस कार्यशाला की मुख्य विशेषता तीन समानांतर सत्र थे, जिनके माध्यम से भविष्य की तैयारी के अहम पहलुओं पर चर्चा हुई। इन विषयों में भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और तकनीक-आधारित गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के जरिए उत्कृष्टता हासिल करना, एनएससीएसटीआई  फ्रेमवर्क को मजबूत करना एवं संसाधनों के साझाकरण को संभव बनाना और एआई उपकरणों एवं डोमेन कोर्स आइडेंटिफिकेशन के जरिए आईजीओटी पर पाठ्यक्रम को बेहतर बनाना शामिल था। इन सत्रों का संचालन सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी और केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ फैकल्टी ने किया, जिनमें सुश्री एनसीए-एफ की महानिदेशक माधवी दास, एलबीएसएनएए की उप निदेशक (वरीय) सुश्री शनमुगा प्रिया मिश्रा, आरएकेएनपीए की संयुक्त निदेशक सुश्री अर्चना गोपीनाथ, केबी के सीओओ श्री राकेश वर्मा, सीबीसी की सलाहकार सुश्री उमा एस., और सीबीसी टीम के अन्य सदस्य शामिल थे। चर्चाओं में संस्थानों के लिए उत्कृष्टता हासिल करने के बाद की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और रास्तों में बदलाव, प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग, भविष्य के लिए तैयार प्रशिक्षण मानक, समग्र सरकार वाला दृष्टिकोण, सीबीपी और संस्थान के संदर्भ में इसके उपयोग के तरीकों और पाठ्यक्रम की पहचान एवं मानकों पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

तीनों सत्रों के निष्कर्षों को दर्शकों के सामने पेश किया गया, जिससे कार्रवाई योग्य सिफारिशों और लागू करने के तरीकों पर सहमति बनी।

समापन सत्र के दौरान, सीबीसी की सदस्य (एचआर) डॉ. अलका मित्तल ने चर्चाओं के दौरान सक्रिय भागीदारी के लिए सभी समूहों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि आगे बढ़ने के लिए बहुत सारे सुझाव मिले हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता मंजिल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थानों को न सिर्फ स्तरीयता बनाए रखनी चाहिए, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका भी निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सब एक साथ आएं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का भविष्य पाठ्यक्रमों की संख्या पर नहीं, बल्कि हमारी बनाई गई क्षमताओं पर निर्भर करता है और यह भूमिका संस्थानों को निभानी होगी।

कार्यशाला का समापन सीबीसी के सचिव श्री एस. पी. रॉय के समापन भाषण के साथ हुआ। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों को चुस्त, तकनीक–संचालित और भविष्य के लिए तैयार संस्थान बनाने में सीबीसी की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। उन्होंने संसाधनों के साझाकरण और क्षमता की जरूरत पर आधारित प्रशिक्षण पर बल दिया।

*********************

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “वर्ष 1971 में आज ही के दिन सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और सटीक रणनीति के बल पर पाकिस्तानी सेना को परास्त कर उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया था। इस विजय ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ ढाल बन, विश्वभर में मानवता की रक्षा का आदर्श उदाहरण पेश किया और भारतीय सेनाओं की अद्वितीय सैन्य क्षमता और पराक्रम का लोहा मनवाया। विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन करता हूँ।”

 

*****************************

 

मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश

नई दिल्ली – वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 2012 में मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों पर राष्ट्रीय नीति तैयार की है। इसमें मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों के चिकित्सीय और वैज्ञानिक उपयोग को विनियमित करने के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान किया गया है इसके साथ  ही इनके दुरुपयोग, तस्करी और अवैध व्यापार को रोकने के लिए कड़े नियंत्रण सुनिश्चित किए गए हैं। यह नीति जागरूकता सृजन, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को शामिल करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण पर बल देती है। इसे सरकारी अस्पतालों और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा समर्थित गैर-सरकारी संगठनों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से प्रदान किया जाता है। यह मादक पदार्थों के दुरुपयोग के रुझानों की निगरानी करने और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों का मार्गदर्शन करने के लिए नियमित राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के संस्थागतकरण को भी अनिवार्य बनाती है।

सरकार ने कृत्रिम दवाओं के उत्पादन और तस्करी पर अंकुश लगाने और मादक द्रव्यों के दुरुपयोग का मुकाबला करने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

    1. कृत्रिम दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले 18 नए पूर्ववर्ती रसायनों को 23.01.2025 को नियंत्रित पदार्थों के विनियमन (आरसीएस) आदेश की अनुसूची बी और सी में अधिसूचित किया गया है, जिससे नियंत्रित पदार्थों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।
    2. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा अग्रदूत रसायनों के लिए जारी किए गए विशिष्ट पंजीकरण संख्या (यूआरएन) वाली कंपनियों की सूची सभी राज्यों, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और खुफिया ब्यूरो के साथ साझा की गई है और अग्रदूत रसायनों के दुरुपयोग की कड़ी निगरानी करने का अनुरोध किया गया है।
    3. तटीय क्षेत्रों के माध्यम से कृत्रिम दवाओं सहित मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए समुद्री निगरानी प्रणालियों को मजबूत किया गया है।
    4. भारत कृत्रिम मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए वैश्विक गठबंधनों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। इसमें सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाना, संयुक्त अभियान चलाना और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को ट्रैक करने और बाधित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयास करना शामिल है।
    1. कृत्रिम ड्रग्स और उनसे संबंधित डेटा साझा करने और प्राप्त करने तथा आगे उचित कार्रवाई करने के लिए आईएनसीबी  के इंटरनेशनल ऑपरेशन ऑन एनपीएस  इंसिडेंट कम्युनिकेशन सिस्टम (आईओएनआईसीएस) और प्रीकर्सर इंसिडेंट कम्युनिकेशन सिस्टम (पीआईसीएस) पोर्टलों का बेहतर उपयोग।
    2. मेथम्फेटामाइन और एमडीएमए जैसी कृत्रिम दवाओं की तस्करी को रोकने के लिए, डीआरआई और सीमा शुल्क क्षेत्र की इकाइयां लगातार निगरानी रखती हैं और परिचालन उपाय करती हैं।
    3. देश के सभी जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) शुरू किया गया है। इसके माध्यम से 24.9 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा जा चुका है, जिनमें 8.7 करोड़ युवा और 6 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
    4. सरकार देशभर में 349 एकीकृत नशामुक्ति केंद्रों (आईआरसीए), 45 सामुदायिक आधारित सहकर्मी नेतृत्व हस्तक्षेप (सीपीएलआई) केंद्रों, 76 आउटरीच और ड्रॉप इन केंद्रों (ओडीआईसी), 154 नशा उपचार सुविधाओं (एटीएफ) और 139 जिला नशामुक्ति केंद्रों (डीडीएसी) को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
    5. सरकार ने 1933-मानस हेल्पलाइन शुरू की है, जिसे नागरिकों के लिए कई संचार माध्यमों के जरिए नशीली दवाओं से संबंधित मुद्दों की रिपोर्ट करने के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में डिजाइन किया गया है।
    6. नशामुक्ति के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14446 संचालित की जाती है, जो मदद चाहने वाले व्यक्तियों को प्राथमिक परामर्श और तत्काल सहायता प्रदान करती है।
    7. एनएमबीए को सहयोग देने और जन जागरूकता गतिविधियों का संचालन करने के लिए आध्यात्मिक संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

सरकार मादक पदार्थों की तस्करी को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रयास कर रही है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

    1. अंतर्राष्ट्रीय महत्व रखने वाले मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए म्यांमार, ईरान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सिंगापुर, अफगानिस्तान, श्रीलंका आदि जैसे पड़ोसी और अन्य देशों के साथ महानिदेशक स्तर की वार्ता/द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की जाती है।
    2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के एक भाग के रूप में, भारत ने मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों (एनडीपीएस) और रासायनिक अग्रदूतों की अवैध तस्करी के साथ-साथ संबंधित अपराधों से निपटने के लिए 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों और 19 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
    3. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ- ड्रग अपराध निगरानी डेस्क (SAARC-SDOMD), ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (BRICS), कोलंबो योजना, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN), ASEAN वरिष्ठ अधिकारी मादक पदार्थों से संबंधित मामले (ASOD), बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC), शंघाई सहयोग संगठन (SCO), संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC), अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (INCB), आदि के साथ समन्वय करता है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए सूचना और खुफिया जानकारी साझा की जा सके।
    1. एनसीबी परिचालन और खुफिया जानकारी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (डीईए), यूनाइटेड किंगडम की नेशनल क्राइम एजेंसी, कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी), ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (एएफपी), फ्रांस के ऑफिस एंटी-स्टुपिफिएंट्स (ओएफएएसटी) आदि जैसे अन्य देशों के विभिन्न ड्रग संपर्क अधिकारियों के साथ वास्तविक समय में सूचना साझा करने में भाग लेता है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही।

***************************

 

अल्जाइमर रोग के बेहतर और व्यापक उपचार के लिए एक नई विधि विकसित

नई दिल्ली – ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले पॉलीफेनॉल, न्यूरोट्रांसमीटर और अमीनो एसिड को एकीकृत करने वाले नैनोकणों से जुड़ा एक नया तरीका अल्जाइमर रोग (एडी) के उपचार की क्षमता रखता है। इससे रोग के बढ़ने की राह बदलकर, इसे धीमा करके, स्मृति में सुधार करके और विचार कौशलों की सहायता करके इसका उपचार किया जा सकता है।

अल्जाइमर रोग एक बढ़ती हुई वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह रोग रोगी देखभाल और आर्थिक बोझ के संदर्भ में महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करता है, जो प्रभावी उपचार और निवारक रणनीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

अल्जाइमर के पारंपरिक उपचार अक्सर केवल एक ही रोग संबंधी विशेषता, जैसे कि एमिलॉयड का जमाव या ऑक्सीडेटिव तनाव, को लक्षित करते हैं, जिससे सीमित नैदानिक ​​लाभ मिलता है। हालांकि, अल्जाइमर रोग एक बहुआयामी रोग है, इसलिए एक ऐसे बहुक्रियाशील नैनोप्लेटफ़ॉर्म की आवश्यकता है जो एक साथ कई रोग तंत्रों का निदान करने में सक्षम हो।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, मोहाली स्थित नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर रोग के लिए एक बहुआयामी चिकित्सा पद्धति विकसित करने के लिए नैनो तकनीक, आणविक जीव विज्ञान और कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग को समेकित किया है।

इस उपचार में एपिगैलोकैचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी), जो हरी चाय में पाया जाने वाला एक एंटीऑक्सीडेंट है, डोपामाइन (जो मूड के लिए महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है) और ट्रिप्टोफैन (जो कई कोशिकीय कार्यों में शामिल एक अमीनो एसिड है), को ईजीसीजी-डोपामाइन-ट्रिप्टोफैन नैनोकणों (ईडीटीएनपी) नामक नैनोकणों में एकीकृत किया जाता है। इससे यह उपचार एक साथ एमाइलॉइड एग्रीगेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और न्यूरोनल डिजनरेशन को लक्षित करने में सक्षम होता है, जो अल्जाइमर रोग के चार प्रमुख रोग संबंधी लक्षण हैं।

चित्र नैनोकणों के संश्लेषण और अल्जाइमर रोग से लड़ने में उनकी बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है

न्यूरॉन्स के अस्तित्व, विकास और कार्य के लिए महत्वपूर्ण प्रोटीन, ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (बीडीएनएफ) को ईडीटीएनपी (बी-ईडीटीएनपी) में शामिल करने से एक दोहरी क्रियाशील नैनोप्लेटफॉर्म बनता है जो न केवल न्यूरोटॉक्सिक एमिलॉयड बीटा एग्रीगेट्स (प्रोटीन के गुच्छे जो तंत्रिका कार्य को बाधित करते हैं और अल्जाइमर रोग की विकृति को बढ़ाते हैं) को साफ करता है बल्कि न्यूरोनल पुनर्जनन को भी बढ़ाता है। अल्जाइमर के उपचार में यह एक दुर्लभ दृष्टिकोण है जो चिकित्सा के लिए एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-एमिलॉयड और न्यूरोट्रॉफिक क्रियाओं को विशिष्ट रूप से जोड़ता है।

मोहाली स्थित इंस्टिट्यूट विश्वविद्यालय के डॉ. जिबन ज्योति पांडा और उनकी टीम (हिमांशु शेखर पांडा और सुमित) द्वारा डॉ. अशोक कुमार दतुसलिया (एनआईपीईआर रायबरेली) और डॉ. निशा सिंह (गुजरात जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) के सहयोग से किए गए शोध कार्य में एंटीऑक्सीडेंट, न्यूरोट्रांसमीटर और अमीनो एसिड घटकों को संयोजित करने के लिए दबाव-समर्थित हाइड्रोथर्मल और इलेक्ट्रोस्टैटिक आधारित सह-इनक्यूबेशन विधियों जैसी जैव-अनुकूल संयोजन तकनीकों का उपयोग करके ईडीटीएनपी का संश्लेषण शामिल है। इन नैनोकणों को बाद में बीडीएनएफ के साथ क्रियाशील किया गया, जिससे बढ़ी हुई न्यूरोप्रोटेक्टिव क्षमता वाले बी-ईडीटीएनपी का उत्पादन हुआ।

चित्र 2. एनपी [टीआरकेबी (ट्रोपोमायोसिन रिसेप्टर किनेज बी)पीआई3के (फॉस्फोइनोसिटाइड 3-किनेज)एमएपीके (माइटोजेनसक्रिय प्रोटीन किनेज)पीएलसीवाई (फॉस्फोलिपेज़ सीगामा)पीपी (पाइरोफॉस्फेट)] की क्रियाविधि को दर्शाते हुए

प्रयोगशाला प्रयोगों और चूहे के मॉडलों में, इन नैनोकणों ने विषाक्त प्लाक को विघटित किया, सूजन को कम किया, मस्तिष्क कोशिकाओं के भीतर संतुलन बहाल किया और यहां तक ​​कि स्मृति और सीखने की क्षमता में भी सुधार किया। कंप्यूटर सिमुलेशन ने आगे पुष्टि की कि नैनोकण हानिकारक एबी तंतुकों से जुड़ जाते हैं और उन्हें आणविक स्तर पर अलग कर देते हैं।

जर्नल “स्मॉल” में प्रकाशित यह शोध, अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के लिए एक बहुआयामी उपचार प्रदान करके उनकी मदद कर सकता है। नैनोकण न केवल हानिकारक प्रोटीन प्लाक को हटाते हैं, बल्कि मस्तिष्क के तनाव और सूजन को भी कम करते हैं और बीडीएनएफ के माध्यम से तंत्रिका कोशिकाओं के विकास में सहायता करते हैं। दीर्घकाल में, यह चिकित्सा रोगियों के जीवन को बेहतर बना सकती है, देखभाल करने वालों का बोझ कम कर सकती है और अल्जाइमर रोग के लिए अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत उपचारों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1002/smll.202411701

**************************

 

पीएम सूर्य घर: निशुल्‍क बिजली योजना ने 7.7 लाख से अधिक घरों को शून्य बिजली बिल प्रदान किया

नई दिल्ली – भारत सरकार ने फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री सूर्य घर: निशुल्‍क बिजली योजना (पीएमएसजी: एमबीवाई) शुरू की, जिसका लक्ष्य 75,021 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2026-27 तक आवासीय क्षेत्र में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर (आरटीएस) इंस्टॉलेशन अर्जित करना है।

09.12.2025 तक, देश भर में कुल 19,45,758 आरटीएस सिस्टम संस्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे 24,35,196 परिवारों को लाभ मिला है। आरटीएस सिस्टम संस्थापित होने के बाद शून्य बिजली बिल प्राप्त करने वाले लाभार्थियों, आवासीय उपभोक्ताओं को वितरित सब्सिडी और योजना के तहत स्वीकृत बिना गारंटी वाले ऋणों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण परिशिष्ट में दिया गया है।

लाभार्थियों के लिए आरटीएस प्रणालियों की आर्थिक लाभप्रदता और लागत-प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए, केंद्रीय वित्तीय सहायता के अतिरिक्‍त, आरटीएस प्रणालियों की स्थापना के लिए 5.75 प्रतिशत (रेपो दर प्लस 0.50 बीपीएस) की ब्याज दर पर बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध है।

इसके अतिरिक्त, ग्रामीण परिवारों या आर्थिक रूप से निर्बल वर्गों के लिए पीएमएसजी: एमबीवाई के अंगीकरण को बढ़ावा देने के लिए, मंत्रालय ने यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन (यूएलए)/आरईएससीओ मॉडल के तहत आरटीएस सिस्टम की संस्थापना के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

अनुलग्नक

पीएमएसजी के अंतर्गत हुई प्रगति का राज्यवार विवरण: एमबीवाई (दिनांक 09 दिसम्‍बर, 2025 तक)

क्रमांक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश आरटीएस संस्‍थापना (संख्या) परिवारों को लाभ हुआ

(संख्या)

शून्य ऊर्जा शुल्क वाले उपभोक्ता* (संख्या) आरटीएस संस्‍थापना के लिए संवितरित सीएफए (संख्या) सीएफए राशि (करोड़ रुपये में) स्वीकृत ऋण आवेदनों की संख्या (संख्या)
1 आंध्र प्रदेश 76,617 79,210 36,381 66,070 511.11 61,607
2 अरुणाचल प्रदेश 1 1 1 0.01 74
3 असम 63,887 64,525 4,973 51,894 442.26 69,883
4 बिहार 13,649 14,096 12,640 97.50 9,204
5 छत्तीसगढ 16,498 17,847 987 10,900 84.42 16,121
6 गोवा 1,304 1,596 798 1,110 8.78 264
7 गुजरात 4,93,161 7,10,102 3,62,675 4,74,051 3,714.47 42,408
8 हरियाणा 44,937 50,434 1,575 41,921 310.16 18,717
9 हिमाचल प्रदेश 5,556 5,679 502 5,018 42.94 2,994
10 झारखंड 1,308 1,310 357 1,146 8.89 997
11 कर्नाटक 14,471 22,833 245 13,456 108.68 4,426
12 केरल 1,69,227 1,74,097 1,17,697 1,55,907 1,216.82 76,421
13 मध्य प्रदेश 78,062 81,361 40,594 73,299 570.24 37,602
14 महाराष्ट्र 3,63,811 5,80,271 1,05,003 3,28,640 2,613.21 1,38,592
15 मणिपुर 680 680 139 629 5.37 296
16 मेघालय 32 32 2 26 0.15 692
17 मिजोरम 727 729 156 649 5.49 4
18 नागालैंड 129 129 121 1.01 28
19 ओडिशा 23,774 24,125 3,949 19,763 151.20 22,324
20 पंजाब 10,456 10,566 9,488 73.85 4,140
21 राजस्थान 1,08,584 1,11,521 8,472 98,064 763.80 65,455
22 सिक्किम 23 23 14 0.12 12
23 तमिलनाडु 48,652 56,258 44,355 334.85 11,801
24 तेलंगाना 23,675 34,110 10,234 21,215 168.51 12,060
25 त्रिपुरा 1,603 1,614 178 1,344 11.28 1,366
26 उत्तराखंड 55,229 55,391 23,367 48,214 413.50 32,016
27 उत्‍तर प्रदेश 3,02,140 3,05,397 42,707 2,71,181 2,074.53 1,86,297
28 पश्चिम बंगाल 1,107 1,170 20 330 2.46 1,006
29 अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह 147 166 24 128 1.08 93
30 चंडीगढ़ 957 957 148 695 5.31 121
31 जम्मू-कश्मीर 15,985 15,985 3,958 13,616 116.55 10,993
32 लद्दाख 1,077 1,077 2,744 944 8.10 26
33 लक्षद्वीप 685 685 1,126 651 5.59 260
34 दिल्ली एनसीटी 5,059 8,671 1,733 4,349 36.27 1,228
35 पुदुचेरी 2,066 2,066 785 1,849 14.22 961
36 डीएनएच और डीडी 482 482 51 453 3.52 128
  कुल 19,45,758 24,35,196 7,71,580 17,74,131 13,926.25 8,30,617

* डिस्‍कॉम द्वारा रिपोर्ट किए गए किसी भी महीने/बिलिंग अवधि के दौरान

*************************

 

केंद्रीय सूचना आयोग में आठ नए सूचना आयुक्तों को पद की शपथ दिलाई गई

नई दिल्ली – श्री राज कुमार गोयल को आज केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है और उन्होंने आज अपना पदभार ग्रहण किया। आज केंद्रीय सूचना आयोग में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने दो वर्तमान सूचना आयुक्तों, श्रीमती आनंदी रामलिंगम और श्री विनोद कुमार तिवारी की उपस्थिति में आठ नए सूचना आयुक्तों को पद की शपथ दिलाई जिनमें श्री सुरेंद्र सिंह मीना, श्री आशुतोष चतुवेर्दी, श्री स्वागत दास, सुश्री सुधा रानी रेलांगी, श्री पी.आर. रमेश, श्री खुशवंत सिंह सेठी, सुश्री जया वर्मा सिन्हा और श्री संजीव कुमार जिंदल शामिल हैं।

 आठ नए सूचना आयुक्तों की संक्षिप्त पृष्ठभूमि इस प्रकार है:

श्री सुरेंद्र सिंह मीना, झारखंड कैडर के 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं।

वह झारखंड सरकार के श्री कृष्णा लोक प्रशासन संस्थान में महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे।

उन्होंने धातु विज्ञान में इंजीनियरिंग स्नातक (बी.ई.) की है। उन्होंने भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अपर/संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया है और झारखंड सरकार में विभिन्न पदों पर रहे हैं।

उन्हें समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के कल्याण के लिए नीति निर्माण, कानून निर्माण एवं योजनाओं के कार्यान्वयन का व्यापक अनुभव है।

श्री अशुतोष चतुर्वेदी, एक प्रसिद्ध पत्रकार हैं। वह प्रभात खबर, रांची के एडिटर-इन-चीफ रहे हैं।

उन्होंने रसायन विज्ञान में एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने अमर उजाला के एग्जिक्यूटिव एडिटर, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के निर्माता/संवाददाता सहित विभिन्न पदों पर काम किया।

उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में भारत और विदेश में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में संपादन का 35 वर्षों का अनुभव प्राप्त है।

श्री स्वागत दास छत्तीसगढ़ कैडर के 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं।

वह कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके पास बी.ए. ऑनर्स की डिग्री है।

उन्होंने गृह मंत्रालय में विशेष सचिव के रूप में और खुफिया ब्यूरो में विभिन्न पदों पर भी कार्य किया है।

उन्हें संकट प्रबंधन, खुफिया जानकारी, कानून-व्यवस्था और पुलिस कर्मियों के प्रशासन में 37 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है।

सुधा रानी रेलंगी भारतीय विधि सेवा अधिकारी रही हैं और विधि एवं न्याय मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुईं हैं।

उन्होंने बीएससी और विधि स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। वे डीएसएनएलयू से शोधार्थी भी रही हैं।

उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्रालय में विधायी परामर्शदाता और केंद्रीय जांच ब्यूरो में अभियोजन निदेशक के रूप में कार्य किया है।

उन्हें आरटीआई अधिनियम, 2005 सहित कानून बनाने का व्यापक अनुभव है।

श्री पी. आर. रमेश वरिष्ठ पत्रकार हैं और दिल्ली स्थित ‘ओपन’ पत्रिका के प्रबंध संपादक रह चुके हैं। उन्होंने अंग्रेजी में स्नातकोत्तर किया है।

वे ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में राष्ट्रीय राजनीतिक संपादक और राजनीतिक ब्यूरो में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं।

वह गहन राजनीतिक विश्लेषण एवं राष्ट्रीय राजनीति पर अंतर्दृष्टिपूर्ण के लिए जाने जाते हैं।

इन्हें पत्रकारिता और संपादन के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है।

श्री खुशवंत सिंह सेठी, त्रिपुरा कैडर के 1990 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी हैं।

उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन बल प्रमुख और प्रधान सचिव, वन विभाग के पद पर कार्य किया है।

वह विज्ञान में स्नातकोत्तर, वानिकी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और दर्शनशास्त्र में एम.फिल. किया है।

उन्हें वानिकी, जैव विविधता, वन्यजीव एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में नीति निर्माण, कार्यक्रम कार्यान्वयन और जन जागरूकता अभियान में 34 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

सुश्री जया वर्मा सिन्हा भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (आईआरएमएस) की 1988 बैच की अधिकारी हैं।

वह रेल मंत्रालय के अंतर्गत रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष एवं सीईओ रह चुकी हैं।

उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की है।

उन्हें यारेलवे में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए तायात, वाणिज्य एवं परिवहन से संबंधित नीति निर्माण सहित प्रशासनिक, वित्तीय और  तकनीकी मामलों में 36 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

श्री संजीव कुमार जिंदल केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) के 1989 बैच के अधिकारी हैं।

उन्होंने गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्य किया है। उनके पास लेखांकन में बी.कॉम. और वित्त में एमबीए किया है।

उन्हें आपदा प्रबंधन, जनगणना संचालन, गृह मामलों, उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण आदि विभिन्न क्षेत्रों में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है।

*******************************

 

 

राँची शहर के जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ online बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

जिले के विभिन्न जलाशयों (वाटर बॉडीज) में हो रहे अतिक्रमण को पूर्णतया मुक्त कराने तथा जल स्रोतों के संरक्षण हेतु ठोस कार्य योजना तैयार किया जा रहा है

जलाशयों के आसपास अवैध अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:- उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,16.12.2025  –  राँची जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज दिनांक-16 दिसंबर 2025 को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में सभी संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ जूम प्लेटफॉर्म पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजित की गई।

बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता राँची, श्री रामनारायण सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक एवं सम्बंधित सभी अंचल अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित थे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के विभिन्न जलाशयों (वाटर बॉडीज) में हो रहे अतिक्रमण को पूर्णतया मुक्त कराने तथा जल स्रोतों के संरक्षण हेतु ठोस कार्य योजना तैयार करना था।

बैठक में उपायुक्त ने जिले के प्रमुख जलाशयों जैसे कांके डैम, हटिया डैम, गेतलसूद डैम, हरमू नदी, हिनू नदी, तथा अन्य तालाबों एवं जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अंचल अधिकारियों तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों से अतिक्रमण की स्थिति, अब तक की गई कार्रवाइयों तथा आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

जलाशयों के आसपास अवैध अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जलाशयों के आसपास अवैध अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई त्वरित गति से पूरी करनी है। उन्होंने अपर समाहर्ता को सभी अंचल अधिकारियों के लिए रोस्टर तैयार करने तथा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, जलाशयों की मूल सीमा (राजस्व नक्शे के अनुसार) को चिह्नित कर अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र को संरक्षित करने पर बल दिया गया।

राँची जिले के सभी जलाशयों को एक सप्ताह में अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा

उपायुक्त ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अतिक्रमण न केवल जल भंडारण को प्रभावित करता है बल्कि पर्यावरण एवं भूजल स्तर पर भी प्रतिकूल असर डालता है। जिला प्रशासन दृढ़ संकल्पित है कि राँची जिले के सभी जलाशयों को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा तथा इनका सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।”

नागरिकों से अनुरोध है कि वे जलाशयों के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें तथा प्रशासन को सहयोग प्रदान करें

जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण अभियान में जन सहयोग की भी अपील की गई है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे जलाशयों के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें तथा प्रशासन को सहयोग प्रदान करें।

************************

 

सरकार लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है

नई दिल्ली – सरकार ने 1 जुलाई 2020 को ऑनलाइन उद्यम पंजीकरण पोर्टल की शुरुआत की थी। इस पोर्टल पर अब तक 72.8 करोड़ से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पंजीकृत हैं और औपचारिक ऋण और सरकारी खरीद के अवसरों सहित सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे है। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों और निकायों के साथ 50 से अधिक एपीआई एकीकृत किए गए हैं। पोर्टल के माध्यम से एकत्र आंकड़ो का उपयोग नीति निर्माण और प्रभावशीलता में सुधार के लिए किया जा रहा है।

सरकार लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के हितधारकों की क्षेत्रीय विकास में आने वाली बाधाओं और समस्याओं  को दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इनमें सेवाओं/कार्यक्रमों का डिजिटलीकरण, एकल विंडो को मंजूरी और व्यापार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस) के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है। डिजिटलीकरण, वित्तपोषण और स्थिरता के लिए लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की पहलों में एमएसएमई संबंध, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम – परिवर्तन के लिए हरित निवेश और वित्तपोषण योजना (एमएसई-गिफ्ट योजना), प्रोत्साहन और निवेश के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्यम योजना (एमएसई-स्पाइस योजना), लघु एवं लघु उद्यम सतत जेडईडी प्रमाणन योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), एमएसएमई समाधान, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम – क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) आदि शामिल हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर 30.11.2025 तक कुल 2.86 करोड़ महिला नेतृत्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यम विभिन्न लाभों के लिए पंजीकृत हैं। मंत्रालय की यह पहलें सामूहिक रूप से ऋण अंतराल और कौशल की कमी को दूर करते हैं, जिससे सूक्ष्म एवं महिला नेतृत्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों को वित्त, बाजार और प्रौद्योगिकी तक पहुंच तथा प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद मिलती है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

****************************

 

हज 2026 के लिए एचजीओ/पीटीओ के माध्यम से बुकिंग के संबंध में हजयात्रियों के लिए सुझाव

नई दिल्ली – सभी इच्छुक हजयात्रियों को सूचित किया जाता है कि सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्रालय द्वारा जारी समय-सीमा के अनुसार, हज-2026 के लिए आवास और सेवाओं के अनुबंध को अंतिम रूप देने की अंतिम तिथि 1 फरवरी, 2026 है। ये अनिवार्य अनुबंध व्यवस्थाएं सऊदी अरब में हजयात्रियों के लिए आवास, परिवहन और अन्य लॉजिस्टिक सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

उपर्युक्‍त समय-सीमा को ध्‍यान में रखते हुए और हज ग्रुप ऑर्गनाइजर (एचजीओ) और प्राइवेट टूर ऑपरेटरों (पीटीओ) द्वारा पूरी की जाने वाली अलग-अलग तैयारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इन एचजीओ/पीटीओ के जरिए हज करने की इच्छा रखने वाले सभी संभावित हजयात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बुकिंग काफी पहले से करवा लें। बुकिंग समय पर पूरी करना जरूरी है ताकि सऊदी अरब द्वारा हज-2026 के लिए तय समय-सीमा के अंदर आवास, परिवहन के अनुबंध को अंतिम रूप देने सहित सभी प्रक्रियात्मक नियमों का पालन किया जा सके।

इसलिए, सभी हजयात्रियों को सुझाव दिया जाता है कि वे 15 जनवरी, 2026 को या उससे पहले अपनी बुकिंग की औपचारिकताएं पूरी कर लें ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर जरूरी आवास और सेवा संबंधी अनुबंध को अंतिम रूप दिया जा सके और आखिरी समय की असुविधाओं से बचा जा सके तथा सभी अनिवार्य प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

हजयात्रियों को यह भी सलाह दी जाती है कि बुकिंग करने से पहले संबंधित एचजीओ/पीटीओ का रजिस्ट्रेशन स्टेटस, कोटा और अप्रूवल वेरिफाई कर लें और केवल अधिकृत एचजीओ के माध्यम से ही बुकिंग करें।

***********************

 

सर्वे ऑफ इंडिया 17 दिसंबर 2025 को यशोभूमि, नई दिल्ली में भू-स्थानिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने पर “भू-स्थानिक मिशन: विकसित भारत का एक सहायक” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन करेगा

नई दिल्ली – विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का सर्वे ऑफ इंडिया भू-स्थानिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने के उद्देश्य से 17 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में सेक्टर 25, द्वारका में स्थित यशोभूमि में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। इस कार्यशाला का नाम है “भू-स्थानिक मिशन: विकसित भारत का एक सहायक”। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा ताकि भविष्य में भारत के भू-स्थानिकी को आकार देने वाले नवाचार पर चर्चा की जा सके।

इस कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. जितेंद्र सिंह माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय करेंगे। इस कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र सिंह की मुख्य अतिथि के तौर पर गरिमामय उपस्थिति रहेगी। डॉ. जितेंद्र सिंह भारत की भू-स्थानिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने पर सरकार के लक्ष्यों और तेज़ी से विकसित हो रहे इस क्षेत्र की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए मिलकर किए जाने वाले प्रयासों की आवश्यकता पर बाल देंगे।

राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी, जो शहरी नियोजन, पर्यावरण निगरानी और बुनियादी ढांचा विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अत्याधुनिक भू-स्थानिक प्रद्योगिकी को एकीकृत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

यह कार्यशाला 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भू-स्थानिक ढांचे को मजबूत करने और सभी क्षेत्रों में आधुनिक प्रद्योगिकी को एकीकृत किए जाने पर चर्चा की जाएगी।

इवेंट की खास बातें:

इस कार्यशाला में भू-स्थानिक संबंधी प्राथमिकताओं के व्यापक दायरे को कवर करने वाले महत्वपूर्ण सत्र होंगे। कार्यशाला में निम्नलिखित मुख्य फोकस क्षेत्र होंगे:

राष्ट्रीय जियोडेटिक रेफरेंस फ्रेम का आधुनिकीकरण और मज़बूती

भू-स्थानिक डेटा और मैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना

भू-स्थानिक ढांचे को एक जैसा बनाने में मानकों की भूमिका

भू-स्थानिक क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाना

कार्यशाला में विषय केंद्रित सत्र सभी संबंधित पक्षों को नए मौकों पर ध्यान देने, भू-स्थानिक तरीकों को वैश्विक मानकों के साथ जोड़ने और सभी क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकी को अपनाने में तेज़ी लाने में मदद करेंगे।

विशेषज्ञ भू-स्थानिक क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे प्रौद्योगिकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे, विशेषकर डेटा संकलन करने, आंकड़ों के प्रशंसकरण, एनालिटिक्स और नई डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों पर जोर रहेगा।

उद्देश्य और महत्व

यह पहल सर्वे ऑफ इंडिया की एक मज़बूत, मानकीकृत और भविष्य के लिए तैयार भू-स्थानिक पारिस्थिकी निर्मित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो देश की विकास संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम हो। यह कार्यशाला सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत से जुड़े संबंधित पक्षों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाएगी जिसका लक्ष्य भारत के भू-स्थानिक पारिस्थितिकी को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों में सोच-समझकर निर्णय लेने को प्रक्रिया को तेज करना है।

यह कार्यक्रम भू-स्थानिक जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, और हम यशोभूमि, नई दिल्ली में सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत से जुड़े लोगों और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

***********************

 

एनईएसटीएस ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में नेतृत्व और प्रशासन को मजबूत करने के लिए 2-दिवसीय प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय जनजातीय विद्यार्थी शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) देश भर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के प्रधानाचार्यों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय और नेतृत्व क्षमताओं को मजबूत करने के मकसद से एक बड़ी क्षमता निर्माण की पहल के तौर पर, 16-17 दिसंबर 2025 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी), नई दिल्ली में दो-दिवसीय प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव का आयोजन कर रही है।

इस कॉन्क्लेव में ईएमआरएस के 499 प्रधानाचार्य एक साथ आएंगे, जो EMRS के तेजी से विस्तार और विद्यालय प्रबंधन की बढ़ती जटिलता को देखते हुए स्कूल लीडरशिप को मजबूत करने पर एनईएसटीएस के लगातार फोकस को दिखाता है। यह कार्यक्रम प्रधानाचार्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और एनईएसटीएस की रणनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से अपडेटेड जानकारी, प्रक्रिया की स्पष्टता और नेतृत्व कौशल को सिखाने के लिए तैयार किया गया है।

इस कॉन्क्लेव का मुख्य विषय ईएमआरएस में चल रही परियोजनाओं, फ्लैगशिप पहलों और पार्टनर-समर्थित कार्यक्रमों के बारे में प्रधानाचार्यों को जानकारी देना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल लीडर्स को इन पहलों के उद्देश्यों, महत्व और अपेक्षित नतीजों की साफ समझ हो, ताकि जमीनी स्तर पर इन्हें समय पर, प्रभावी ढंग से और एक समान तरीके से लागू किया जा सके। यह कॉन्क्लेव एनईएसटीएस द्वारा राष्ट्रीय संस्थानों और विशेषज्ञ संगठनों के सहयोग से शुरू की गई कई शैक्षणिक, डिजिटल, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य और क्षमता-निर्माण पहलों के बारे में प्रधानाचार्यों के बीच जागरूकता में देखी गई कमियों को दूर करने की भी कोशिश करता है।

इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य राष्ट्रीय संस्थानों और विशेषज्ञ संगठनों के साथ मिलकर एनईएसटीएस द्वारा शुरू की गई कई शैक्षणिक, डिजिटल, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य और क्षमता-निर्माण पहलों के बारे में प्रधानाचार्यों के बीच जागरूकता में देखी गई कमियों को दूर करना भी है।

चर्चा में शैक्षणिक सुधार, सीबीएसई की दो-परीक्षा प्रणाली, पाठ योजना (लेसन प्लानिंग), कक्षा प्रक्रियाएं, छात्रों के सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने की रणनीतियां, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक बेहतरी, तलाश, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, कौशल्या, भाषा दक्षता, और वंचित छात्रों को सहायता देने के लिए संरचित तंत्र सहित कई तरह के शैक्षणिक और छात्र-केंद्रित विषयों को शामिल किया जाएगा।

एपीएआर, प्रोबेशन क्लीयरेंस, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), सुरक्षा उपाय और स्कूल के प्रदर्शन की समीक्षा जैसे प्रशासन और मानव संसाधन से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, वित्तीय साक्षरता, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) प्रक्रियाओं, खरीद प्रणाली, बुनियादी ढांचे का रखरखाव और निर्माण एजेंसियों से बिल्डिंग लेने के प्रोटोकॉल से जुड़े सत्र प्रधानाचार्य को वित्तीय और बुनियादी ढांचे के गवर्नेंस के बारे में ज़्यादा स्पष्टता देंगे।

एनईएसटीएस के वरिष्ठ अधिकारी, सीबीएसई के विषय विशेषज्ञ, यूनिसेफ के प्रतिनिधि और दूसरे क्षेत्र विशेषज्ञ सत्र की अगुआई करेंगे, जो विद्यालय प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए नीति-स्तर गाइडेंस, तकनीक इनपुट और व्यावहारिक समाधान देंगे। इस कॉन्क्लेव में चर्चा, सवाल-जवाब सेशन और पीयर-लर्निंग फोरम के जरिए एक मजबूत इंटरैक्टिव भाग होगा, जिससे प्रधानाचार्य अपने क्षेत्र के अनुभव साझा कर सकेंगे, चिंताएं सामने रख सकेंगे और मिलकर चुनौतियों और समाधानों की पहचान कर सकेंगे।

प्रधानाचार्य, नीति बनाने वालों, विशेषज्ञ और भागीदार संगठनों के बीच सीधे बातचीत को आसान बनाकर, इस कॉन्क्लेव से नेतृत्व की तैयारी को बेहतर बनाने, जवाबदेही को मजबूत करने, बेहतरीन तरीकों के मानकीकरण को बढ़ावा देने और ईएमआरएस में नियामकीय ढांचे का लगातार पालन सुनिश्चित करने की उम्मीद है।

प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव एनईएसटीएस की लगातार क्षमता निर्माण, गुणवत्ता बढ़ाने और आदिवासी छात्रों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। उम्मीद है कि यह कार्यक्रम प्रधानाचार्यों को बेहतर विजन, आत्मविश्वास और प्रशासनिक प्रभावशीलता के साथ अपने संस्थानों का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाकर ईएमआरएस इकोसिस्टम को मजबूत करेगा, जिससे आखिरकार सभी छात्रों के लिए बेहतर सीखने के परिणाम और एक सुरक्षित, समावेशी और समृद्ध शैक्षिक माहौल सुनिश्चित होगा।

*****************************

 

*

प्रधानमंत्री ने सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी होने का स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा आज सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरन मारन) के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की।

श्री मोदी ने कहा कि सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय सशक्त प्रशासक थे, जो अद्भुत विजन, दूरदृष्टि, और रणनीतिक कौशल से सम्‍पन्‍न थे। उन्होंने न्याय के प्रति सम्राट की अटूट प्रतिबद्धता और तमिल संस्‍कृति के महान संरक्षक के तौर पर उनकी विशिष्‍ट भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र—विशेष रूप से युवाओं से—पूज्य सम्राट के असाधारण जीवन और विरासत के बारे में और अधिक जानने का आह्वान किया, जिनके योगदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।

एक्‍स पर अलग-अलग की गई पोस्टों में श्री मोदी ने कहा:

“उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा सम्राट पेरुम्बिडुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरन मारन) के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने की मुझे प्रसन्‍नता है। वह महान प्रशासक थे, जो अद्भुत विजन, दूरदृष्टि, और रणनीतिक कौशल से सम्‍पन्‍न थे। वह न्‍याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए विख्‍यात थे। वे तमिल संस्‍कृति के भी महान संरक्षक थे। मैं अधिक से अधिक युवाओं से उनके असाधारण जीवन के बारे में पढ़ने का आह्वान करता हूँ।

@VPIndia

@CPR_VP”

 

“பேரரசர் இரண்டாம் பெரும்பிடுகு  முத்தரையரை (சுவரன் மாறன்)  கௌரவிக்கும் வகையில் சிறப்பு அஞ்சல் தலையைக் குடியரசு துணைத்தலைவர் திரு சி.பி. ராதாகிருஷ்ணன் அவர்கள் வெளியிட்டது மகிழ்ச்சி அளிக்கிறது. ஆற்றல்மிக்க நிர்வாகியான  அவருக்குப் போற்றத்தக்க தொலைநோக்குப்  பார்வையும், முன்னுணரும் திறனும்,  போர்த்தந்திர ஞானமும் இருந்தன. நீதியை நிலைநாட்டுவதில் அவர் உறுதியுடன் செயல்பட்டவர். அதேபோல் தமிழ் கலாச்சாரத்திற்கும் அவர் ஒரு மகத்தான பாதுகாவலராக  இருந்தார். அவரது அசாதாரண வாழ்க்கையைப் பற்றி அதிகமான இளைஞர்கள் படிக்க வேண்டும் என்று நான் கேட்டுக்கொள்கிறேன்.

@VPIndia

@CPR_VP”

 

**********************

 

विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल का 53वां संस्करण गोवा में संपन्न हुआ

नई दिल्ली – विजय दिवस के उपलक्ष्य में, सशस्त्र बलों के विशेष सहयोग से, आज गोवा के कोंकण तट पर फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल का 53वां संस्करण आयोजित किया गया।

इस विशाल साइक्लिंग आयोजन ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से परे जाकर देशव्यापी फिटनेस पहल को आगे बढ़ाते हुए फिट इंडिया आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की और देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसके बढ़ते प्रभाव का संकेत दिया।

इस आयोजन ने फिट इंडिया आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाया और फिटनेस को एक जन आंदोलन के रूप में बढ़ावा देने के अपने मकसद की पुष्टि की।

साइकिल रैली को मीरामार बीच सर्कल से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और यह खूबसूरत मार्गों से होते हुए डोना पाउला तक जाकर वापसी के लिए रवाना हुई, जिसमें नागरिकों, रक्षा कर्मियों, एनसीसी कैडेटों, एथलीटों, अभिनेताओं और फिटनेस के शौकीनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सुबह के कार्यक्रम में योग प्रदर्शन, ज़ुम्बा सत्र, गोवा का लाइव संगीत और व्यापक जनभागीदारी शामिल थी, जिससे लोगों को ये साफ संदेश दिया गया कि फिटनेस की जीवनशैली समावेशी, आनंददायक और सतत् हो सकती है।

इस कार्यक्रम में गोवा सरकार के माननीय खेल मंत्री डॉ. रमेश तावडकर, गोवा सरकार के सचिव (खेल) आईएएस संतोष गुणवंतराव सुखदेव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अभिनेताओं, खिलाड़ियों, रक्षाकर्मियों और फिट इंडिया एंबेसडर सहित कई प्रख्यात हस्तियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. रमेश तावडकर ने शारीरिक शिक्षा शिक्षक और साइक्लिंग के शौकीन के रूप में अपने दो दशकों से ज्यादा के सफर के बारे में बताया। खेल व्यवस्था को और मजबूत करने और फिटनेस की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे कई यूरोपीय देशों में साइकिल चलाना दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि भारत को भी ऐसी ही संस्कृति विकसित करनी चाहिए और जब आबादी का एक बड़ा हिस्सा फिटनेस को जीवनशैली के रूप में अपनाता है, तो व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना संभव है।

उन्होंने गोवा सहित सभी राज्यों में नियमित रूप से ‘रविवार को साइक्लिंग’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और माननीय केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री के नेतृत्व की सराहना की।

इस कार्यक्रम में तेलुगु फिल्म अभिनेता श्री मंचू मनोज कुमार, अभिनेता मोहम्मद अली, सूबेदार मनीष कौशिक, अर्जुन पुरस्कार विजेता ब्रूनो कौटिन्हो, पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता ब्रह्मानंद संखवालकर और भारतीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व मुख्य कोच मैमोल रॉकी सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया।

इस मौके पर अभिनेता मोहम्मद अली ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को फिटनेस के लिए एक साथ आते देखकर खुशी जताई और नागरिकों को एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली इस पहल की सराहना की।

अभिनेता मंचू मनोज कुमार ने अनुशासन और निरंतरता के ज़रिए फिटनेस बनाए रखने के बारे में अपने विचार साझा किए और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए फिट इंडिया मूवमेंट की सराहना की। उन्होंने देश भर में फिटनेस से संबंधित पहलों को बढ़ावा देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।

एनसीसी इकाइयों, सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों, फिट इंडिया एंबेसडर और फिटनेस इन्फ्लुएंसरों की सक्रिय भागीदारी के साथ, गोवा में आयोजित फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल के 53वें संस्करण ने नेतृत्व और सामूहिक भागीदारी द्वारा समर्थित सामुदायिक फिटनेस पहलों के प्रभाव को बखूबी प्रदर्शित किया।

यह पहल योगासन भारत और माय भारत के नियमित साझेदारों के साथ आयोजित की जाती है, जो देश भर में फिटनेस और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के प्रयासों को और मजबूत करती है।

***************************

 

श्री संजय कुमार ने गौतम बुद्ध नगर के पीएम श्री नवोदय विद्यालय में माइक्रोफॉरेस्ट का उद्घाटन किया

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीएसईएलके सचिव श्री संजय कुमार ने 14 दिसंबर2025 को पीएम श्री नवोदय विद्यालयगौतम बुद्ध नगरउत्तर प्रदेश में विशेष अभियान  5.0 के तहत विकसित किए गए फलोद्यान एवं परागण उद्यान युक्त एक सूक्ष्म वन यानी माइक्रोफ़ॉरेस्ट का उद्घाटन किया।

इस पहल ने मिशन लाइफ हेतु इको क्लब्स के तत्वावधान में 3,200 वर्ग मीटर से ज़्यादा बंजर ज़मीन को जीवंत पारिस्थितिक शिक्षण स्थान में बदल दिया है। इस आयोजन  में श्री राजेश लखानीआयुक्त नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस); डॉअमरप्रीत दुग्गलसंयुक्‍त सचिवडीएसईएलश्री ज्ञानेंद्र कुमारसंयुक्त आयुक्त एनवीएसश्रीमती वंदना तुम्मलपल्लीसरकारी और सार्वजनिक भूमि अधिग्रहण प्रमुखसे ट्रीज़सुश्री मोनीथानॉलेज हेडसे ट्रीज़मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीविद्यार्थी शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए।

श्री संजय कुमार ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा की असली महत्व इस बात में है कि वह  प्रसन्नमानसिक रूप से स्वस्थ और सर्वांगीण विकास वाले व्यक्तियों का पोषण करेशिक्षण को पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन के अनुभवों तक ले जाएजैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी2020 में दृष्टिगत किया गया है। उन्होंने कहा कि खुशनुमासमावेशी और प्रकृति से जुड़ा शिक्षण वातावरण विद्यार्थियों में मानवीय मूल्योंसार्थक रिश्तों और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने में मदद करता है।

पर्यावरणीय जागरूकता और अनुभवात्मक शिक्षा के संबंध में एनईपी 2020 के विज़न को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि मिशन लाइफ हेतु इको क्लबजो अब 9.23 लाख से ज़्यादा स्कूलों में चलाए जा रहे हैंमिशन लाइफ के सात विषयों के अनुरूप गतिविधियों के जरिए व्यावहारिक शिक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से शिक्षण को प्रकृति के साथ जोड़ने का आग्रह करते हुए स्कूल के विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

 

 

उन्होंने एनवीएस से देश भर में साफ़सुथरेहरेभरे और सुव्यवस्थित परिसर विकसित करने को कहाजहाँ मिशन लाइफ हेतु इको क्लब फलफूल सकें तथा विद्यार्थियों की भलाई और उन्हें ज़िम्मेदार नागरिक बनाने में योगदान दे सकें।

एनवीएस के आयुक्त श्री राजेश लखानी ने विद्यालय के विद्यार्थियों से वृक्षों  की देखभाल की सामूहिक ज़िम्मेदारी लेने का आग्रह करते हुए कहा कि परिसर में फलदायी वृक्षों की देखभाल करने से टिकाऊ जीवनस्वस्‍थ आदतों और पारिस्थितिकीय संतुलन कायम करने में मदद मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से वृक्षों का पोषण और हिफाजत करते हुए नई विकसित हरीभरी जगहों की देखभाल करने की भावना विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित कियाजिससे पर्यावरणीय स्थिरता और उनके स्वयं के समग्र विकास में योगदान मिल सके।

विशेष अभियान  5.0 के अंतर्गत डीएसईएल ने स्वच्छता दक्षता और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया। स्कूलों और कार्यालयों में 6.16 लाख से ज़्यादा स्वच्छता अभियान चलाए गए। अक्टूबर2025 को ईअपशिष्ट जागरूकता और प्रबंधन पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। उसके बाद एक ईअपशिष्ट संग्रह अभियान चलाया गयाजिसमें लाख से ज़्यादा विद्यार्थियों  ने हिस्सा लिया और 4,000 किग्रा से ज़्यादा ईअपशिष्ट इकट्ठा किया गया। इकट्ठा किए गए लगभग 100 किग्रा ईअपशिष्ट का रचनात्मक  तरीके से दोबारा इस्तेमाल करके नई दिल्ली के शास्त्री भवन में जागरूकता बढ़ाने वाला एक भित्ति चित्र  बनाया गया।

 

एनवीएस गौतम बुद्ध नगर में फलोद्यान युक्त नए माइक्रोफ़ॉरेस्ट में 500 से ज़्यादा फलदायी वृक्ष हैंजबकि  परागण उद्यान में 350 से ज़्यादा परागकण अनुकूल  पौधे हैंजो मधुमक्खियोंतितलियों और दूसरी ज़रूरी प्रजातियों के लिए पर्यावास उपलब्ध कराते हैं। इस पहल से जैव विविधता बढ़ेगी और विद्यालय परिसर के वातावरण की गुणवत्ता बेहतर होगी।

इसे गैरलाभकारी संगठन से ट्रीज़ की सहायता लागू किया गया हैजिसने पूरे भारत में पाँच मिलियन से ज़्यादा पेड़ लगाए हैं और 50 से ज़्यादा झीलों का कायाकल्प किया है। फलोद्यान और परागण उद्यान विद्यालय परिसर का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे तथा एसडीजी (गुणवत्तापूर्ण शिक्षाऔर एसडीजी 13 (जलवायु कार्रवाईके अनुरूप जलवायु कार्रवाई में लगातार सहभागिता को बढ़ावा देंगे।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग देश भर के स्कूलों में पर्यावरण के बारे में जागरूकता फैलानेपर्यावरण के अनुकूल व्यवहारस्वच्छता और टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल को देश भर के दूसरे नवोदय विद्यालयोंकेंद्रीय विद्यालयों और स्कूलों में भी विस्तारित किया जाएगाजिससे पूरे देश में हरित शिक्षण वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।

**************************