The Capacity Building Commission organized a national workshop on the theme of Future Preparedness of Central Training Institutions.

क्षमता विकास आयोग ने “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली – क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने आज नई दिल्ली में “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों (सीटीआई) की भविष्य की तैयारी” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में सिविल सेवाओं के प्रशिक्षण के भविष्य पर नए सिरे से सोचने और शासन संबंधी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीबीसी की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी की सफलता के लिए प्रशिक्षण संस्थान बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण संस्थानों को बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए अलग दिखना होगा, और कहा कि उन्हें लगातार बदलते प्रशिक्षण इकोसिस्टम, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, में अपनी भूमिकाओं के बारे में नए सिरे से सोचना, उन्हें नया रूप देना और पुनर्परिभाषित करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण को गतिशील होना चाहिए और सीखने, भुलाने एवं  फिर से सीखने पर ध्यान देना चाहिए। अध्यक्ष महोदया ने मानवीय तत्व के महत्व को रेखांकित किया, जिसे तकनीक द्वारा संचालित माहौल में विकसित भारत के लिए नागरिक-केन्द्रित शासन के लक्ष्य को पूरा करने में अपनी भूमिका निभानी होगी।

इस कार्यशाला का संदर्भ बताते हुए, सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी ने केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि अब एनएससीएसटीआई 2.O फ्रेमवर्क के अनुसार पांच (5) सीटीआई को 5-सितारा वाली  रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि अब ध्यान रेटिंग से हटकर उत्कृष्टता केन्द्र, योग्यता-संचालित प्रशिक्षण और नागरिक-केन्द्रित नतीजों पर दिया जा रहा है। सुश्री मुखर्जी ने अगले चरण के लिए प्रशिक्षण संस्थानों में ऐसे बदलावों की जरूरत पर बल दिया, जिसमें भूमिकाओं और मेंटरशिप के बारे में नए सिरे से सोचने, तकनीक का इस्तेमाल करने और संसाधनों, फैकल्टी, कंटेंट एवं बुनियादी ढांचे को मिलकर साझा करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विशिष्ट डोमेन–केन्द्रित क्षमता की बढ़ती मांग, शासन में बदलाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, लगातार मूल्यांकन एवं अनुकूलन संबंधी कार्यप्रणाली की जरूरत और डेटा-आधारित जानकारियों की जरूरत को पूरा करने के लिए नए मानक स्थापित करने की आवश्यकता है।

ऑनलाइन माध्यम से दर्शकों को संबोधित करते हुए, सीबीसी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदिल जैनुलभाई ने प्रशिक्षण संस्थानों को उनके अब तक की यात्रा के लिए बधाई दी। भविष्य की तैयारियों के संदर्भ में संस्थानों के लिए तीन लक्ष्य बताते हुए, उन्होंने कहा कि आगे चलकर उन सभी को पांच-सितारा रेटिंग वाले विश्वस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनने का लक्ष्य रखना चाहिए; आपस में और अकादमिक संस्थानों व थिंक टैंक के साथ सहयोग करना चाहिए; तीसरा लक्ष्य वास्तविक और डिजिटल प्रशिक्षण इकोसिस्टम को निर्बाध तरीके से एकीकृत करने में अग्रणी बनना और अंततः इसे दुनिया में सबसे अच्छा बनाना है।

कर्मयोगी भारत के मुख्य संचालन अधिकारी श्री राकेश वर्मा ने एआई-केन्द्रित क्षमता निर्माण  योजना (सीबीपी) उपकरण पेश किया और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों, मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों की बदलती ज़रूरतों के अनुरूप योग्यता-संचालित प्रशिक्षण योजना को डिजाइन करने में संस्थानों को समर्थन देने की इसकी क्षमता पर बल दिया।

इस कार्यशाला की मुख्य विशेषता तीन समानांतर सत्र थे, जिनके माध्यम से भविष्य की तैयारी के अहम पहलुओं पर चर्चा हुई। इन विषयों में भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और तकनीक-आधारित गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के जरिए उत्कृष्टता हासिल करना, एनएससीएसटीआई  फ्रेमवर्क को मजबूत करना एवं संसाधनों के साझाकरण को संभव बनाना और एआई उपकरणों एवं डोमेन कोर्स आइडेंटिफिकेशन के जरिए आईजीओटी पर पाठ्यक्रम को बेहतर बनाना शामिल था। इन सत्रों का संचालन सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी और केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ फैकल्टी ने किया, जिनमें सुश्री एनसीए-एफ की महानिदेशक माधवी दास, एलबीएसएनएए की उप निदेशक (वरीय) सुश्री शनमुगा प्रिया मिश्रा, आरएकेएनपीए की संयुक्त निदेशक सुश्री अर्चना गोपीनाथ, केबी के सीओओ श्री राकेश वर्मा, सीबीसी की सलाहकार सुश्री उमा एस., और सीबीसी टीम के अन्य सदस्य शामिल थे। चर्चाओं में संस्थानों के लिए उत्कृष्टता हासिल करने के बाद की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और रास्तों में बदलाव, प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग, भविष्य के लिए तैयार प्रशिक्षण मानक, समग्र सरकार वाला दृष्टिकोण, सीबीपी और संस्थान के संदर्भ में इसके उपयोग के तरीकों और पाठ्यक्रम की पहचान एवं मानकों पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

तीनों सत्रों के निष्कर्षों को दर्शकों के सामने पेश किया गया, जिससे कार्रवाई योग्य सिफारिशों और लागू करने के तरीकों पर सहमति बनी।

समापन सत्र के दौरान, सीबीसी की सदस्य (एचआर) डॉ. अलका मित्तल ने चर्चाओं के दौरान सक्रिय भागीदारी के लिए सभी समूहों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि आगे बढ़ने के लिए बहुत सारे सुझाव मिले हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता मंजिल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थानों को न सिर्फ स्तरीयता बनाए रखनी चाहिए, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका भी निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सब एक साथ आएं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का भविष्य पाठ्यक्रमों की संख्या पर नहीं, बल्कि हमारी बनाई गई क्षमताओं पर निर्भर करता है और यह भूमिका संस्थानों को निभानी होगी।

कार्यशाला का समापन सीबीसी के सचिव श्री एस. पी. रॉय के समापन भाषण के साथ हुआ। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों को चुस्त, तकनीक–संचालित और भविष्य के लिए तैयार संस्थान बनाने में सीबीसी की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। उन्होंने संसाधनों के साझाकरण और क्षमता की जरूरत पर आधारित प्रशिक्षण पर बल दिया।

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