केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने माँ भारती के वीर सपूत शहीद उधम सिंह जी की जयंती पर उन्हें नमन किया

नई दिल्ली – X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “अमर शहीद उधम सिंह जी ने एक ओर जलियांवाला बाग में शहीद हुए देशवासियों का प्रतिशोध लेने के लिए अदम्य साहस व पराक्रम का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर गदर आंदोलन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को विदेशों तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनकी पराक्रम गाथा देश के युवाओं के लिए मातृभूमि के प्रति समर्पण का अक्षय कोष है। माँ भारती के वीर सपूत शहीद उधम सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।”
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प्रधानमंत्री ने वीर बाल दिवस पर वीर साहिबजादों के बलिदान का स्मरण किया

नई दिल्ली –  वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीर साहिबजादों के बलिदान का स्मरण किया। श्री मोदी ने कहा कि यह दिन साहस, दृढ़ संकल्प और धर्मनिष्ठा से जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

“वीर बाल दिवस श्रद्धा का दिन है, जो वीर साहिबजादों के बलिदान के स्मरण के लिए समर्पित है। हम माता गुजरी जी की अडिग आस्था और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर शिक्षाओं को स्मरण करते हैं। यह दिन साहस, दृढ़ संकल्प और धर्मनिष्ठा से जुड़ा हुआ है। उनके जीवन और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।”

“ਵੀਰ ਬਾਲ ਦਿਵਸ ਸ਼ਰਧਾ ਦਾ ਅਜਿਹਾ ਮੌਕਾ ਹੈ, ਜੋ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬਜ਼ਾਦਿਆਂ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨ ਲਈ ਸਮਰਪਿਤ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਮਾਤਾ ਗੁਜਰੀ ਜੀ ਦੇ ਅਟੁੱਟ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਅਤੇ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀਆਂ ਸਦੀਵੀ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਇਹ ਦਿਨ ਹਿੰਮਤ, ਦ੍ਰਿੜ੍ਹਤਾ ਅਤੇ ਸਚਿਆਈ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਤੱਕ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੇ ਰਹਿਣਗੇ।”

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्‍य में आयोजित सुशासन दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में भाग लिया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित सुशासन दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में भाग लिया।

 

कार्यक्रम के दौरान, उपराष्ट्रपति ने दूरदृष्‍टा, कवि और समर्पित जनसेवक के तौर पर श्री वाजपेयी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि श्री वाजपेयी के बेमिसाल वाक-चातुर्य, विनम्रता और लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता ने जटिल घरेलू और विदेशी चुनौतियों के दौर में देश का मार्गदर्शन किया साथ ही सुशासन ने मज़बूत और खुशहाल भारत की नींव रखी। श्री वाजपेयी का शासन दर्शन पारदर्शिता, जवाबदेही, समावेशिता और समाज के सभी तबकों की सेवा पर आधारित था।

उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान की गई खास पहलों को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्री वाजपेयी का शासन दर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक नैतिकता और राष्ट्रीय सर्वस‍म्‍मति पर आधारित था।

सुशासन को साझा ज़िम्मेदारी करार देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकारें, प्रशासक, संस्थाएं, सिविल सोसाइटी और नागरिक सभी पारदर्शी, नैतिक और जवाबदेह शासन सुनिश्‍चित करने में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जनता से विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप विकसित, समावेशी और मज़बूत भारत का निर्माण करने के लिए इन सिद्धांतों को बनाए रखने का अनुरोध किया।

इस कार्यक्रम के दौरान सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र पर एक नाट्य प्रस्तुति भी पेश की गई, जिसमें श्री वाजपेयी के जीवन को इस महान सम्राट के सच्चाई, ईमानदारी और निस्‍वार्थ सेवा के आदर्शों से प्रतीकात्‍मक रूप से जोड़ा गया।

यह कार्यक्रम गांधी स्मृति और दर्शन समिति ने हेरिटेज इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कॉर्पोरेट कार्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा; दिल्ली विधानसभा के अध्‍यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता; गांधी स्मृति और दर्शन समिति के उपाध्‍यक्ष श्री विजय गोयल; और अन्‍य विशिष्‍ट व्‍यक्ति सम्मिलित हुए।

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डिब्रूगढ़ खेल महोत्सव में सरबानंद सोनोवाल ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेलों को जन आंदोलन बना दिया’

नई दिल्ली – कंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल डिब्रूगढ़ डिब्रूगढ़ में सांसद खेल महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने खेल को एक विशिष्ट गतिविधि से राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।

एथलीटों, छात्रों एवं स्थानीय निवासियों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें फिटनेस, अनुशासन और युवा सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिटनेस और खेल उत्कृष्टता को जन आंदोलन में बदलकर भारत के विकास पथ में खेलों को केंद्रीय स्थान प्रदान किया है। मैं अपने देश के युवाओं एवं नागरिकों से ‘खेलो भारत – खेलो देश’ की भावना से प्रेरित होकर एक स्वस्थ, फिट और खेल-उन्मुख राष्ट्र के निर्माण में शामिल होने का आह्वान करता हूं।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि ‘सांसद खेल महोत्सव’ ने युवा प्रतिभाओं की पहचान करके और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “यह पहल जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं का पोषण कर रही है, सामुदायिक संबंधों को मजबूत कर रही है और हमारे युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और चरित्र का विकास कर रही है।”

निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर समर्थन की घोषणा करते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि डिब्रूगढ़ के होनहार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन में सुधार के लिए लक्षित सहायता प्रदान की जाएगी।

श्री सोनोवाल ने कहा, “डिब्रूगढ़ के प्रतिभाशाली एथलीटों को विशेष प्रोत्साहन एवं संस्थागत सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और असम एवं राष्ट्र का नाम रोशन कर सकें।”

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले ‘सुशासन दिवस’ का उल्लेख करते हुए, श्री सोनोवाल ने 2014 से शुरू किए गए खेल सुधारों पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा, “2014 से, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने खेल अवसंरचना में अभूतपूर्व विस्तार, व्यापक भागीदारी एवं देश के हर कोने से प्रतिभा की व्यवस्थित खोज देखी है।”

राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख कार्यक्रमों की बात करते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि खेलो इंडिया, फिट इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) ने एथलीटों के लिए संरचित मार्ग तैयार किया है।

उन्होंने कहा, “इन पहलों ने विश्व स्तरीय सुविधाएं एवं पेशेवर प्रशिक्षण सुनिश्चित किया है, जिससे देश के युवाओं को खेल को एक प्रमुख करियर के रूप में अपनाने में मदद मिली है।” श्री सोनोवाल ने आगे कहा कि असम ने खेल महोत्सव जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ अपने प्रयासों को संरेखित किया है।

श्री सोनोवाल ने कहा, “खेल महोत्सव के माध्यम से हम गांवों, चाय बागानों एवं दूरदराज के क्षेत्रों से प्रतिभाओं की पहचान कर रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि डिब्रूगढ़ में बेहतर इनडोर एवं आउटडोर स्टेडियम अवसंरचना ने खेल को करियर के रूप में अपनाने में माता-पिता का विश्वास बढ़ावा दिया है।

इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य लोगों में असम के मंत्री प्रशांत फुकन, डिब्रूगढ़ नगर निगम (डीएमसी), महापौर डॉ. सैकत पात्रा, उप महापौर उज्जल फुकन, असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एपीएल) के अध्यक्ष बिकुल डेका, भाजपा जिला अध्यक्ष दुलाल बोरा, डिब्रूगढ़ विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष असीम हजारिका, बीवीएफसीएल के प्रबंध निदेशक प्रांजल बर्मन, श्री श्री अनिरुद्धदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र नाथ सरमा, डिब्रूगढ़ जिला खेल संघ (डीडीएसए) के अध्यक्ष निरंजन सैकिया, सचिव कामाख्या सैकिया, डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त बिक्रम कैरी और अन्य विशिष्ट अतिथि एवं नागरिक शामिल हुए।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वैश्विक हिंदू प्रेरणा महोत्सव को संबोधित किया

नई दिल्ली – अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब देश कोरोना की दूसरी लहर से गुजर रहा था, उस समय पूज्यश्री द्वारा लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट्स ने न केवल लाखों लोगों के जीवन को बचाया, बल्कि उनका उपयोग आज भी अनेक अस्पतालों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय प्रत्येक अनुयायी को धर्ममय और अनुरागपूर्ण जीवन की प्रेरणा देता है, साथ ही शांति, संतुलन और अस्तित्व के त्रिवेणी संस्कार को भी पुष्टिमार्गियों के मन में स्थापित करता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 21 से 29 दिसंबर, 2025 के दौरान वडोदरा, विश्व की वैष्णव राजधानी के रूप में उभरकर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान विश्व के 25 देशों से आए वैष्णव एक ही मंच पर, एक ही भावना और एक ही भक्ति भाव के साथ कथा का अमृत पान करेंगे, जिससे निश्चित रूप से आने वाले समय में सेवा के सभी क्षेत्रों में लाभ होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पूज्यश्री व्रजराज कुमारजी महाराज जी के नेतृत्व में इस महोत्सव के दौरान पाँच बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त विश्व, भूखे को भोजन, हर घर गौ सेवा, हिंदू विद्यालय परियोजना और राष्ट्र सेवा परियोजना रूपी इन पाँच परियोजनाओं के माध्यम से न केवल देशवासियों में धर्म के प्रति अनुराग दृढ़ होगा, बल्कि नर ही नारायण है” के सेवा भाव को पुनः स्थापित करने में भी यह अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पूज्यश्री ने अपने 15 वर्षों की यात्रा में 15 से अधिक देशों और 46 से अधिक शहरों में लाखों समर्पित स्वयंसेवकों को गति देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मात्र 39 वर्ष की आयु में 25 देशों में पुष्टिमार्ग की ध्वजा फहराने का कार्य और पाँच लाख से अधिक लोगों को ब्रह्मसंबंध देकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का पुण्य कार्य पूज्यश्री के करकमलों से ही संपन्न हुआ है। श्री शाह ने कहा कि धर्म, करुणा, सेवा और समाज के साथ धर्म को जोड़ने का पूज्यश्री का यह पुरुषार्थ निश्चय ही अत्यंत महान है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि “वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाणे रे” की उक्ति को चरितार्थ करते हुए पूज्यश्री द्वारा शुरू किए गए ये 5 प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारत और संपूर्ण विश्व के पुष्टिमार्गियों के लिए अनुकरणीय सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में कथा का अर्थ है मन की शुद्धि, विवेक का जागरण और जीवन की दिशा का परिवर्तन और स्वकेंद्रित जीवन से समाजकेंद्रित जीवन की ओर अग्रसर होना। श्री शाह ने कहा कि पूज्यश्री व्रजराज कुमार जी महाराज जी ने इस परंपरा को विश्व के अनेक स्थानों पर पुनर्जीवित किया है। आठ देशों में 250 से अधिक कथाओं के माध्यम से उन्होंने लाखों अनुयायियों को जोड़ा है और पाँच लाख से अधिक लोगों के ब्रह्म से जुड़ने का माध्यम बने हैं।

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मूलभूत सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित रखते हुए और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर भारत ने परंपरा के साथ आधुनिकता को सफलतापूर्वक जोड़ा है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आज आयोजित भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने मूलभूत सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करते हुए और साथ ही अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर परंपरा के साथ आधुनिकता को सफलतापूर्वक जोड़ा है, जिसका अंतिम लक्ष्य आम नागरिक के लिए जीवन को सुगम बनाना है।

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत का वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभर कर सामने आना शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व द्वारा प्रदान किए गए निर्णायक नीतिगत समर्थन के कारण संभव हो पाया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में, विशेषकर 2014 से, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अभूतपूर्व नीतिगत प्राथमिकता और बजटीय समर्थन में मिला है, जिससे उन दीर्घकालिक बाधाओं को दूर किया गया है जो पहले भारत की वैज्ञानिक क्षमता को सीमित करती थीं। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कभी कमी नहीं थी, बल्कि सक्षम इकोसिस्‍टम और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था, जिसे अब निर्णायक रूप से दूर कर दिया गया है।

भारत में नवाचार की तीव्र प्रगति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में लगभग 300-400 से बढ़कर आज लगभग दो लाख हो गई है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो गया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग 81 से सुधरकर 38 हो गई है, जबकि पेटेंट दाखिल करने के मामले में भारत अब विश्व में छठे स्थान पर है, जिसमें आधे से अधिक पेटेंट रेजिडेंट इंडियन्‍स द्वारा दाखिल किए जा रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की उपलब्धियों ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने देश के चंद्र अभियानों का उदाहरण दिया, जिनसे चंद्रमा पर पानी की पहली पुष्ट उपस्थिति का प्रमाण मिला और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट विश्व की पहली लैंडिंग हुई। उन्होंने भारत के स्वदेशी रक्षा इकोसिस्‍टम की बढ़ती मजबूती पर भी प्रकाश डाला और बताया कि रक्षा निर्यात 23,662 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें लगभग 100 देशों भारतीय निर्मित प्रणालियों की आपूर्ति की जा रही है।

हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का उल्‍लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की स्वदेशी मिसाइल और रक्षा प्रौद्योगिकियों ने अपनी विश्वसनीयता और भरोसे को प्रदर्शित किया है, जिसके कारण इनकी अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि ये क्षमताएं पिछले एक दशक में परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और उन्नत अनुसंधान में किए गए निरंतर निवेश का परिणाम हैं।

स्वास्थ्य सेवा के संबंध में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत निवारक स्वास्थ्य सेवा और किफायती चिकित्सा समाधानों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में उभरा है। कोविड-19 टीकों के विकास और उन्हें दुनिया के साथ साझा करने से लेकर प्रतिवर्ष अरबों डॉलर के चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपणों के निर्यात तक भारत के स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्‍टम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास और मान्यता प्राप्त की है।

मंत्री महोदय ने वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रकाशनों में भारत के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वैज्ञानिक शोध पत्रों के आउटपुट में देश अब वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है और उद्धरण इम्‍पैक्‍ट में तीसरे स्थान पर है, जो अनुसंधान में मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों प्रकार की प्रगति को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारत में विज्ञान अब केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्मार्ट शहरों, टेलीमेडिसिन, उपग्रह आधारित संचार, जियोटैगिंग और डिजिटल शासन प्लेटफार्मों जैसी पहलों के माध्यम से जीवन को सुगम बनाने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, गहरे समुद्र की खोज, हिमालयी अनुसंधान और अरोमा मिशन सहित प्रमुख राष्ट्रीय मिशन आर्थिक विकास और युवा उद्यमिता के लिए नए क्षितिज खोल रहे हैं।

मंत्री महोदय ने घोषणा की कि वैज्ञानिक ज्ञान और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए पिछले दशक में विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों का क्षेत्रीय भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में सहभागी बन सके।

उद्घाटन सत्र में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शिक्षाविद और देश भर के वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2025 का आयोजन 26 से 29 दिसंबर तक तिरुपति में हो रहा है, जिसमें हितधारक भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के भावी रोडमैप पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आ रहे हैं।

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एनआईएफटीईएम-के ने पीएम विकास योजना को लागू करने के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), कुंडली का “पीएम विकास” योजना के कार्यान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए) के रूप में चयन किया है। इस संबंध में संस्थान ने 22 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की क्षमता का विकास करना है।  इसके अंतर्गत उन्हें आवश्यकता-आधारित पाठ्यक्रमों में कौशल प्रशिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी और उनके लिए रोजगार/आजीविका के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। एनआईएफटीईएम कुंडली राष्ट्रीय महत्व के उन चुनिंदा संस्थानों में से एक है जिसका इस योजना के लिए पीआईए के रूप में चयन किया गया है।

इस परियोजना के अंतर्गत, निफ्टेम-के चार राज्यों झारखंड, बिहार, पंजाब और हरियाणा में सात स्थलों पर तीन श्रेणियों-बहु कौशल तकनीशियन (खाद्य प्रसंस्करण), श्रीअन्न उत्पाद प्रसंस्करण और सहायक बेकिंग तकनीशियन के तहत अल्पसंख्यक समुदाय के कुल 2110 लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस हस्तक्षेप का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें आर्थिक मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिए बाजार और ऋण संपर्क प्रदान करके बेहतर आजीविका के अवसरों का सृजन करना है।

यह परियोजना एनसीवीईटी (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद) अनुमोदित पाठ्यक्रमों के माध्यम से लाभार्थियों को एनएसक्यूएफ (राष्ट्रीय कौशल योग्यता प्रारूप) के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगी, और संगठित क्षेत्र में अवसरों सहित रोजगार के किसी न किसी रूप में पात्र कुशल लाभार्थियों की नियुक्ति की सुविधा प्रदान करेगी। सभी लाभार्थियों को एमएसडीई (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय)/एनसीवीईटी द्वारा अनुमोदित संस्थानों से प्रमाणन प्राप्त होगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ जनवरी 2026 में होने की संभावना है।

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राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (26 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले सभी बच्‍चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता बच्चों ने अपने परिवारों, समुदायों और पूरे देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश भर के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्‍य से प्रदान किए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व सिख धर्म के दसवें गुरु और सभी भारतीयों द्वारा श्रृद्धेय  गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चार पुत्रों ने सत्य और न्याय के समर्थन में संघर्ष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि दो सबसे छोटे साहिबजादों की वीरता का सम्‍मान और आदर भारत और विदेश दोनों में किया जाता है। उन्होंने उन महान बाल नायकों को श्रद्धापूर्वक याद किया जिन्‍होंने सत्य और न्याय के लिए गर्व के साथ अपने प्राणों की आहुति दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश की महानता तब निश्चित होती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से परिपूर्ण होते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों ने वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रग्निका जैसे प्रतिभाशाली बच्‍चों के कारण ही भारत को विश्व पटल पर शतरंज की महाशक्ति माना जाता है। अजय राज और मोहम्मद सिदान पी, जिन्होंने अपनी वीरता और सूझबू    झ से दूसरों की जान बचाई, प्रशंसा के पात्र हैं। नौ वर्षीय बेटी व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय बहादुर बेटे कमलेश कुमार ने अपने साहस से दूसरों की जान बचाते हुए अपनी प्राण गंवा दिए। दस वर्षीय श्रवण सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध से जुड़े जोखिमों के बावजूद अपने घर के पास सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई। वहीं, दिव्यांग बेटी शिवानी होसुरू उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए खेल जगत में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। वैभव सूर्यवंशी ने अत्‍यंत प्रतिस्पर्धी और प्रतिभा-समृद्ध क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है और कई रिकॉर्ड स्‍थापित किए। श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे आगे भी अच्छे कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।

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एनसीएम ने भारत के इतिहास के युवा नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और वीरता को सम्मानित एवं स्मरण करने के लिए वीर बाल दिवस का आयोजन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने आज अपने कार्यालय परिसर में वीर बाल दिवस का आयोजन किया। इसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को साहिबजादों के असाधारण साहस और सर्वोच्च बलिदान के बारे में सूचित और शिक्षित करना था। साथ ही, भारत के इतिहास के युवा नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और शौर्य का सम्मान और स्मरण करना भी था ।

40 से अधिक बच्चों ने कहानी सुनाने, कविता पाठ, चित्रकारी, पोस्टर बनाने और वाद-विवाद जैसे कई रोचक और शिक्षाप्रद कार्यकलापों में सक्रिय रूप से भाग लिया । बच्चों ने ‘स्वच्छ भारत’ और स्वस्थ भारत पर इसके प्रभावों पर निबंध लिखे।

इन कार्यकलापों ने बच्चों को अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने, भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानने और वीरता, देशभक्ति और नैतिक शक्ति के मूल्यों को आत्मसात करने के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया।

एनसीएम की सचिव ने सभी प्रतिभागी बच्चों के उत्साह और प्रयासों की सराहना की। विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए , जिससे युवा प्रतिभागियों के बीच उत्कृष्टता और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिला।

उन्होंने अपने समापन भाषण में कहा कि देश के बच्चों और युवाओं को प्रधानमंत्री के उस आह्वान का पालन करना चाहिए जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने की बात कही है।

यह आयोजन वास्तव में प्रधानमंत्री की वीर बाल दिवस मनाने की अपील भावना को दर्शाता है। इसमें भारत के बच्चों की रचनात्मकता, आकांक्षाओं और क्षमता को प्रदर्शित किया गया, जो राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन स्कोप फॉर चेंज’ के सहयोग से किया गया था ।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इन पहलों के माध्यम से सभी समुदायों के बच्चों के बीच समावेशी भागीदारी, ऐतिहासिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने हेतु अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का नया मानक जारी किया

नई दिल्ली – उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का भारतीय मानक आईएस 19412:2025 – अगरबत्ती – विनिर्देशन जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी किया गया।

नए अधिसूचित मानक में अगरबत्तियों में कुछ कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम सुगंधित पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है , जो मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, आईएस 19412:2025 में अगरबत्तियों में उपयोग के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की सूची दी गई है। इसमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन , साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन जैसे कृत्रिम सुगंधित पदार्थ शामिल हैं। इनमें से कई पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित यौगिकों और रसायनों पर लगे प्रतिबंधों को देखते हुए—अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह मानक अगरबत्ती को मशीन से बनी, हाथ से बनी और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है, और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक मापदंडों के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद बीआईएस मानक चिह्न प्राप्त करने के पात्र होंगे , जिससे उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे। आईएस 19412:2025 की अधिसूचना से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ने, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

यह मानक बीआईएस की सुगंध एवं स्वाद अनुभागीय समिति (पीसीडी 18) द्वारा हितधारक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमएपी), सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआर), कन्नौज स्थित सुगंध एवं स्वाद विकास केंद्र (एफएफडीसी) और अखिल भारतीय अगरबत्ती निर्माता संघ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस मानक को तैयार करने में योगदान दिया है।

भारत विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस उद्योग का वार्षिक अनुमानित मूल्य लगभग 8,000 करोड़ रुपये है और लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निर्यात 150 से अधिक देशों को किया जाता है। यह क्षेत्र कारीगरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमियों के एक बड़े समूह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्ती भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग है और घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में इसका उपयोग किया जाता है। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अगरबत्ती उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली – शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन कार्य की समीक्षा करने और रणनीतियों को अंतिम रूप देने हेतु 6 दिसंबर 2025 को राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

मंत्रालय ने कार्यशाला की शुरुआत में राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह योजना मंत्रालय की प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं में से एक है, जिसके तहत समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) से संबंधित मेधावी छात्रों को प्रतिवर्ष एक लाख नई छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इस योजना का उद्देश्य आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या को कम करना और छात्रों को बारहवीं कक्षा तक अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस कार्यशाला में केंद्र सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, पात्र लाभार्थियों तक योजना की प्रभावी पहुंच बढ़ाने और वितरण में सुधार लाने संबंधी सुझाव दिए गए।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें वर्ष 2021-22 से वर्ष 2024-25 तक के प्रदर्शन की समीक्षा, कोटा का उपयोग, एनएमएमएसएस परीक्षा का संचालन और छात्रवृत्ति के नवीनीकरण में आने वाली चुनौतियों को शामिल किया गया। इसके बाद हाइब्रिड मोड में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों और हितधारकों के साथ परामर्श किया गया।

राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना एक केंद्रीय योजना है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत नवी कक्षा तक के छात्रों को प्रतिवर्ष एक लाख छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं, जिनका नवीनीकरण दसवीं से बारहवीं कक्षा तक के लिए किया जा सकता है। सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र इसके लिए पात्र हैं। छात्रवृत्ति की राशि 7,12,000 रुपये  प्रति वर्ष है, और जिन छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 3,50,000 रुपये से अधिक नहीं है, वे भी इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। चयन परीक्षा के लिए, छात्रों को सातवीं कक्षा में कम से कम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त होने चाहिए, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए 5 प्रतिशत अंकों की छूट है।

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने संथाली भाषा में अनुवादित और विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा पहली बार प्रकाशित भारतीय संविधान का विमोचन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 25 दिसंबर, 2025  को , सुशासन दिवस और पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा 1925 में ओल चिकी लिपि विकसित किए जाने के शताब्दी वर्ष के अवसर पर  संथाली भाषा में अनुवादित भारतीय संविधान का राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में विमोचन किया। इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा पहली बार प्रकाशित किया गया है।

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल संथाली भाषा,  भारत की सबसे प्राचीन इस्‍तेमाल हो रही भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय द्वारा बोली जाती है।

संथाली भाषा में अनुवादित संविधान की प्रति के विमोचन के अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और संथाली भाषी समुदाय के सदस्यों सहित आमंत्रित गणमान्‍य व्‍यक्ति मौजूद थे।

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रांची प्रेस क्लब में दिवंगत प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि

रांची,26.12.2025 – वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद दिवंगत प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण को शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए दिन करीब 12 बजे से 12.30 बजे तक रांची प्रेस क्लब परिसर में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और शुभचिंतकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में रांची प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री बलबीर दत्त, वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र, अनुज कुमार सिन्हा, वाईएन झा, अनिल कुमार सिंह, रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी, सचिव अभिषेक सिन्हा, कोषाध्यक्ष कुबेर, संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य, कार्यकारिणी सदस्य अशोक गोप, प्रतिमा कुमारी, निर्भय कुमार, चंदन वर्मा, पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, पूर्व सचिव अमरकांत, पूर्व कोषाध्यक्ष सुशील सिंह ‘मंटू’, नवल किशोर सिंह, प्रभात कुमार सिंह, राजेश तिवारी, आलोक सिन्हा, विजय मिश्रा, राकेश सिंह, देवेंद्र सिंह, अशोक द्विवेदी, रविचंद कपूर, जावेद अख्तर, रंजीत कुमार,वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट दिवाकर प्रसाद, निशिथ सिन्हा, प्रशांत मित्रा सहित कई पत्रकार मौजूद थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भी रांची प्रेस क्लब पहुंचकर दिवंगत प्रो. शरण को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। पद्मश्री बलबीर दत्त, बैजनाथ मिश्र, अनुज कुमार सिन्हा, शंभु नाथ चौधरी, अभिषेक सिन्हा और अमरकांत ने अपने वक्तव्यों में रांची प्रेस क्लब की स्थापना, उसके निर्माण और पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण के योगदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा के बाद उनकी अंतिम यात्रा हरमू मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई, जहां उनके भतीजे ने उन्हें मुखाग्नि दी। प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण का निधन गुरुवार तड़के करीब 3 बजे रांची के दीपाटोली स्थित एक निजी अस्पताल में हो गया था। वे 80 वर्ष के थे। परिजनों के अनुसार वे वर्ष 2021 से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और लंबे समय से उपचाररत थे।

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस विजन के तहत आयोजित यह वार्षिक सम्मेलन उभरते खतरों से निपटने के लिए भारत की अगली पीढ़ी की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच बन गया है। यह सम्मेलन ऑपरेशनल फोर्सो, तकनीकी, कानूनी और फोरेंसिक विशेषज्ञों और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में लगी एजेंसियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों और आतंकवाद से उत्पन्न होने वाले खतरों पर विचार-विमर्श करने के एक मंच के रूप में उभरा है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘Whole of the Government approach’ की भावना से आतंकवाद के खतरे के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के लिए औपचारिक और अनौपचारिक चैनल स्थापित करके विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल विकसित करना और भविष्य की नीति निर्माण के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत करना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और विचार-विमर्श का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी (CT) मुद्दों से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुभवों और अच्छी प्रथाओं (good practices) और आतंकी जांच से मिली सीख को साझा करना है।

इस सम्मेलन में विदेशी न्यायक्षेत्रों से साक्ष्य एकत्र करने, आतंकवाद विरोधी जांच में डिजिटल फोरेंसिक और डेटा विश्लेषण, मुकदमे का प्रभावी प्रबंधन, कट्टरता से निपटना, जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उभरते hybrid खतरों सहित आतंकवाद से संबंधित अन्य विषयों पर सत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो दिन के सम्मेलन में, आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने के टूल्स, तकनीक और केस स्टडी, भविष्य के लिए आतंकवाद विरोधी रणनीतियों का निर्माण और उभरते राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से निपटने के लिए संस्थागत क्षमताओं के निर्माण पर सत्रों को भी शामिल किया गया है।

सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, आतंकवाद विरोधी मुद्दों से निपटने वाली केंद्रीय एजेंसियों/विभागों के अधिकारी और कानून, फोरेंसिक, प्रौद्योगिकी आदि जैसे संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

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सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों पर भ्रामक विज्ञापन देने वाले कोचिंग संस्थान पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2022 और 2023 के परिणामों से संबंधित अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए विजन आईएएस (अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड) पर 11 लाख रूपए का जुर्माना लगाया है

संस्थान ने “सीएसई 2023 में शीर्ष 10 में 7 और शीर्ष 100 में 79 चयन” और “सीएसई 2022 में शीर्ष 50 में 39 चयन” जैसे दावों का विज्ञापन किया था, जिसमें सफल उम्मीदवारों के नाम, तस्वीरें और रैंक प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे।

जांच करने पर, सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने श्री शुभम कुमार (यूपीएससी सीएसई 2020 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले) द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम, अर्थात् जीएस फाउंडेशन बैच (कक्षा छात्र) का खुलासा तो किया, लेकिन जानबूझकर अन्य सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी छिपा दी, जिनके नाम और तस्वीरें उसी वेबपेज पर उनके साथ प्रदर्शित की गई थीं।

इस छिपाव से यह भ्रामक धारणा बनी कि शेष सभी उम्मीदवार भी जीएस फाउंडेशन बैच क्लासरूम कोर्स में नामांकित थे, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं था। इसके अतिरिक्त, उसी विज्ञापन में संस्थान ने अपने “फाउंडेशन कोर्स” का प्रमुखता से प्रचार किया, जिसकी फीस लाखों रुपये में है। इस प्रकार के आचरण से छात्रों को झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए और असत्यापित दावों के आधार पर संस्थान के कार्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया गया।

विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने यूपीएससी सीएसई 2022 और 2023 में 119 से अधिक सफल उम्मीदवारों का दावा किया था। हालांकि, केवल तीन उम्मीदवारों ने फाउंडेशन कोर्स में दाखिला लिया था, जबकि शेष 116 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज, अभ्यास टेस्ट (एक बार के टेस्ट) और मॉक इंटरव्यू प्रोग्राम जैसी सेवाओं का विकल्प चुना था। महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने से उम्मीदवारों और अभिभावकों को यह विश्वास हो गया कि विजन आईएएस यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सभी चरणों में उम्मीदवारों की सफलता के लिए जिम्मेदार था, जिससे यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के तहत एक भ्रामक विज्ञापन बन गया।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों के साथ बड़े दावों वाले विज्ञापन भ्रामक थे। छात्रों की उचित अनुमति या सहमति के बिना ऐसे दावे प्रदर्शित करके संस्थान ने संभावित उम्मीदवारों को गुमराह किया। प्रिंट मीडिया के विपरीत वेबसाइट वैश्विक स्तर पर सुलभ होती है और लंबी अवधि तक उपलब्ध रहती है। यह वह प्राथमिक मंच भी है जिसके माध्यम से उम्मीदवार, विशेष रूप से डिजिटल युग में, कोचिंग संस्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, उनके दावों का मूल्यांकन करते हैं और सूचित विकल्‍प चुनते हैं।

सीसीपीए ने यह भी संज्ञान लिया कि विजन आईएएस के खिलाफ पहले भी भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए कार्रवाई की जा चुकी है। नियामक हस्तक्षेप और सावधानी के बावजूद संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के दावे करना जारी रखा, जो उचित सावधानी और नियामक अनुपालन की कमी को दर्शाता है। उल्लंघन की पुनरावृत्ति को देखते हुए वर्तमान मामले को बाद के उल्लंघन के रूप में माना गया, जिसके चलते उपभोक्ताओं के संरक्षण के हित में अधिक जुर्माना लगाना उचित था।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में, जहां लाखों उम्मीदवार पर्याप्त समय, प्रयास और वित्तीय संसाधन निवेश करते हैं, इस तरह के अधूरे और चयनात्‍मक खुलासे छात्रों और अभिभावकों को परिणामों और कोचिंग सेवाओं की प्रभावशीलता के बारे में झूठी उम्मीदें पैदा करके गुमराह करते हैं।

अब तक सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए हैं। 28 कोचिंग संस्थानों पर 1,09,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, साथ ही ऐसे भ्रामक दावों को बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में जानकारी का सत्य और पारदर्शी प्रकटीकरण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि छात्र निष्पक्ष और सूचित शैक्षणिक निर्णय ले सकें।

(अंतिम आदेश केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://doca.gov.in/ccpa/orders-advisories.php?page_no=1 )

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के रीवा में कृषक सम्मेलन को संबोधित किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के रीवा में कृषक सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बसावन मामा गोवंश वनविहार प्राकृतिक खेती के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को समृद्ध बनाने का सफल प्रयोग है। उन्होंने कहा कि रीवा क्षेत्र में स्थापित मॉडल फार्म लाखों किसानों का न केवल मार्गदर्शन करेगा, बल्कि प्राकृतिक खेती की दिशा में पथप्रदर्शक की भूमिका भी निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा परंपरागत प्रयोग है जिसे हम भूल चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा प्रयोग है जिसमें गौ माता के गोबर और मूत्र के उपयोग से एक ऐसी व्यवस्था बनती है जो किसान की आय को भी कम नहीं होने देती और उपज भी शुद्ध होती है। एक ही देसी गाय से 21 एकड़ खेत में खाद और पेस्टिसाइड्स के बिना प्राकृतिक खेती होती है। श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ेगी, पानी बचेगा और अनाज खाने वाले लोगों को कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज देश के 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं और इससे उनका उत्पादन बढ़ रहा है।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों के सर्टिफिकेशन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से दो बड़ी कोऑपरेटिव्स ने प्राकृतिक खेती की उपज का सर्टिफिकेशन, विश्व की सबसे आधुनिक लैब में इसका परीक्षण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसानों को सर्टिफिकेट देंगी कि उनका खेत और उपज दोनों प्राकृतिक हैं जिससे किसानों की आय लगभग डेढ़ गुना बढ़ेगी। श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों का दुनियाभर में बहुत बड़ा बाज़ार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया मानती है कि ऑर्गेनिक खाना खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। पूरी दुनिया के बाज़ार में हमारे किसानों का ऑर्गेनिक उत्पाद अच्छे से पहुंचे इसके लिए सर्टिफिकेशन, साइंटिफिक टेस्टिंग, आकर्षक पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था चाहिए और इन सभी के माध्यम से किसान की आय बढ़ाने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रकृति की सेवा का संकल्प लें और सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाले पीपल के कम से कम पाँच वृक्ष लगायें।

 

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज मध्य प्रदेश का रीवा क्षेत्र धीरे धीरे एक विकसित क्षेत्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज एशिया का सबसे बड़ा सौर प्लांट रीवा में है, रीवा से प्रयागराज या जबलपुर हो, बहुत अच्छी चार लेन की सड़कों का विकास हुआ है।

गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती है और रीवा उनके प्रिय स्थानों में से एक था। श्री शाह ने  कहा कि अटल जी ने न सिर्फ उनकी पार्टी बल्कि पूरे देश के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता को बहुत महत्व दिया। अटल जी एक ऐसे नेता की श्रेणी में आते हैं जिन्होंने जो बोला वह कर दिखाया। श्री शाह ने कहा कि अटल जी जैसे नेता बहुत कम होते हैं, जिनका कथन और जीवन दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

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प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लोकार्पण के विशेष क्षण साझा किए

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और आदर्शों को सम्मान देने के लिए नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन की झलकियां साझा कीं। श्री वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लखनऊ की यह पावन धरती एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। इस दौरान उन्होंने देश और दुनिया को क्रिसमस की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 25 दिसंबर का दिन देश की दो महान विभूतियों की जयंती का एक अद्भुत अवसर लेकर आता है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी और भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय जी ने अपना संपूर्ण जीवन भारत की पहचान, एकता और गौरव की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि इन दोनों महान हस्तियों ने अपने योगदान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट की एक श्रृंखला में उल्लेख किया:

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल में कमल पुष्प के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय निस्वार्थ नेतृत्व और सुशासन की भावना को सजीव रूप में सामने लाता है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे जननायकों के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल में कमल पुष्प के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय निस्वार्थ नेतृत्व और सुशासन की भावना को सजीव रूप में सामने लाता है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे जननायकों के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।”

“लखनऊ के मेरे परिवारजनों का उत्साह और उमंग इस बात का प्रमाण है कि देश की महान विभूतियों के आदर्श, मूल्य और राष्ट्रसेवा की भावना आज भी जन-जन का मार्गदर्शन कर रही है।”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस सोच का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। यहां डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमाएं हमें संदेश देती हैं कि हमारा हर कदम और हर प्रयास राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित हो।”

“डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी थी। उनकी प्रेरणा से आज हम उसे और सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।”

“पंडित दीनदयाल जी का विजन था कि कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक हर सुविधा पहुंचे। आज जब हम हर जरूरतमंद तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं, तो अंत्योदय का उनका ये सपना साकार हो रहा है।”

“अटल जी की जयंती सुशासन का उत्सव मनाने का भी दिन है। भाजपा-NDA सरकार ने सुशासन की जो विरासत बनाई है, उसे आज हम एक नया विस्तार दे रहे हैं।”

“कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक रूप से भाजपा को हमेशा अछूत बनाए रखा। लेकिन भाजपा के संस्कार ने हमें सबका सम्मान करना सिखाया है, जिसके एक नहीं अनेक उदाहरण हैं…”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल हमारे देश की महान विभूतियों के जीवन, उनके आदर्शों और अमूल्य विरासत को समर्पित एक प्रेरणादायी स्मारक है। आज सुशासन दिवस पर लखनऊ में इसका लोकार्पण कर अपार गौरव और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई।”

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत करने के लिए पांच परिवर्तनकारी डिजिटल सुधारों का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय,  कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में सुशासन प्रथाएं 2025 पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और हितधारकों को प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले सुशासन दिवस के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित वितरण पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया और जनहितैषी शासन की नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुशासन का विचार पहले भी व्यक्त किया गया था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के मंत्र के मार्गदर्शन में इसे अक्षरशः और भावपूर्ण ढंग से लागू किया गया है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) इस सुशासन दिवस पर पांच प्रमुख पहलों की शुरूआत कर रहा है, जिनका उद्देश्य मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, प्रमुख हितधारक समूहों का समर्थन करना और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करना है।

पहले डिजिटल सुधार में केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का एक संकलन शामिल है, जिसमें सभी मौजूदा निर्देशों को एक ही, अद्यतन और उपयोगकर्ता अनुकूल संदर्भ में समेकित किया गया है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह कदम आरक्षण संबंधी लाभों की स्पष्टता, एकरूपता और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करके पूर्व सैनिकों की सेवा का सम्मान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही मंत्रालयों और विभागों में कार्यान्वयन में अस्पष्टता और त्रुटियों को कम करता है।

दूसरी पहल में एआई-संचालित भर्ती साधन शामिल है, जिसे भर्ती नियम निर्माण, संशोधन एवं निगरानी प्रणाली (आरआरएफएएमएस) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भर्ती नियम निष्पक्ष भर्ती और करियर विकास का आधार है और यह नया एआई-सक्षम साधन सरल प्रश्नों के माध्यम से उपयोगकर्ताओं का मार्गदर्शन करके, उपयुक्त भर्ती विधियों का सुझाव देकर और निर्धारित प्रारूप में मसौदा नियम स्वचालित रूप से तैयार करके विभाग के दिशानिर्देशों के अनुरूप देरी और विसंगतियों को काफी हद तक कम करेगा।

तीसरी पहल में ई-एचआरएमएस 2.0  मोबाइल एप्लिकेशन शामिल है, जो एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध है। यह एप्लिकेशन सरकारी कर्मचारियों को प्रमुख मानव संसाधन सेवाएं सीधे उपलब्ध कराता है। मिशन कर्मयोगी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित, ई-एचआरएमएस 2.0 सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति, तबादले, प्रतिनियुक्ति, प्रशिक्षण और सेवानिवृत्ति जैसी मानव संसाधन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है, साथ ही एसपीएआरआरडब्ल्यू पीएफएमएस और भविष्य जैसे प्लेटफार्मों से भी जुड़ा हुआ है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मोबाइल ऐप कागजी कार्रवाई को कम करेगा, अनुमोदन में तेजी लाएगा और कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाएगा।

इन डिजिटल सुधारों में आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर नई एआई-सक्षम सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इनमें प्रासंगिक शिक्षण संसाधनों की खोज के लिए आईजीओटी एआई सारथी, पाठ्यक्रम के दौरान व्यक्तिगत सहायता के लिए आईजीओटी  एआई ट्यूटर, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संरचित शिक्षण मार्ग प्रदान करने वाला आईजीओटी विशेषज्ञता कार्यक्रम और मंत्रालयों और राज्यों को भूमिकाओं, दक्षताओं और प्रशिक्षण आवश्यकताओं का व्यवस्थित रूप से आकलन करने में मदद करने के लिए एआई-आधारित क्षमता निर्माण योजना उपकरण शामिल हैं।

पांचवीं पहल कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 की शुरूआत आधुनिक तकनीकों जैसे एआर/वीआर, गेमिफिकेशन और इंटरैक्टिव सिमुलेशन का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए की गई है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह उन्नत कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 लोक सेवाओं में सर्वोत्तम विधियों, सुधारों और कौशल के व्यापक प्रसार को सक्षम बनाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन क्षमता मजबूत होगी।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव सुश्री रचना शाह ने कहा कि सुशासन दिवस अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल, पारदर्शी और मानवीय शासन के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सुशासन सप्ताह के दौरान चलाए गए राष्ट्रव्यापी ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत 700 से अधिक जिलों में जमीनी स्तर पर शिकायतों के निवारण, सेवा वितरण और सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए हजारों शिविर आयोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से शुरू किए गए विशेष अभियानों ने प्रशासनिक संस्कृति को लंबित प्रक्रियाओं से परिणाम-उन्मुख शासन में बदल दिया है, जिससे दक्षता, स्थान अनुकूलन और राजस्व सृजन में मापने योग्य परिणाम प्राप्त हुए हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि ये सभी पहल शासन में सुधार के लिए एक सुसंगत, भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। नागरिकों तथा लोक सेवकों को परिवर्तन के केंद्र में रखने वाली ये पहल प्रौद्योगिकी के माध्यम से संस्थानों को मजबूत बनाती हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन दिवस के अवसर पर शुरू किए गए ये डिजिटल सुधार अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत की सच्ची भावना के अनुरूप हैं और देश को अधिक उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार शासन ढांचे की ओर अग्रसर करने में सहायक होंगे।

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विज्ञापन केवल भावना या बाज़ार की भाषा नहीं है; यह साहित्य का एक जीवंत, समकालीन रूप है – रमा पांडे

नई दिल्ली – भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के मीडिया केंद्र ने समवेट सभागार में ‘विज्ञापनों में सितारों की चमक: एक अनूठी विज्ञापन प्रदर्शनी’ शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। प्रदर्शनी का उद्घाटन फिल्म एवं रंगमंच निर्देशक और लेखिका सुश्री रमा पांडे, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और संचार योजनाकार श्री सुशील पंडित ने किया। मीडिया केंद्र के नियंत्रक श्री अनुराग पुनेथा ने उद्घाटन भाषण दिया। प्रदर्शनी का संयोजन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र के श्री इकबाल रिजवी ने किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत इस विषय पर एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया।

प्रदर्शनी ने सिनेमा जगत से परे जाकर इस बात पर प्रकाश डाला कि विज्ञापन ने सिनेमाई हस्तियों को रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म सितारों ने जनमानस की पसंद, फैशन और आकांक्षाओं को आकार दिया और उनके द्वारा जगाए गए भरोसे ने उन्हें भारतीय विज्ञापन के विकास का केंद्र बना दिया। उत्पादों के साथ उनका संबंध भारत के दृश्य और सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण को प्रदर्शित करता है, जिससे पता चलता है कि लोकप्रिय छवि और व्यावसायिक संचार ने मिलकर सामाजिक स्मृति और उपभोक्ता संस्कृति को किस प्रकार प्रभावित किया। यह उचित होगा कि हम स्वर्गीय पीयूष पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित करें, जिन्होंने विज्ञापन जगत में योगदान भारतीय संचार की भाषा, कल्पना और सांस्कृतिक प्रतिध्वनि को नया रूप दिया।

इस अवसर पर रमा पांडे ने कहा, “विज्ञापन की दुनिया को केवल भावनाओं का क्षेत्र या बाज़ार की भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह अपने आप में साहित्य का एक नया, जीवंत और समकालीन रूप है।” जिस प्रकार कविता कुछ शब्दों में गहरी भावनाओं को व्यक्त करती है, कहानियां सामान्य जीवन को अर्थ देती हैं और नाटक संवादों के माध्यम से मनुष्यों को एक दूसरे से जोड़ता है, उसी प्रकार विज्ञापन भी कुछ पंक्तियों, कुछ दृश्यों और क्षणभंगुर पलों के माध्यम से समाज से संवाद करता है।

विज्ञापन का उद्देश्य केवल उत्पाद बेचना नहीं है; यह उपभोक्ताओं के मन में विश्वास, अपनेपन की भावना और संबंध स्थापित करना है। जब विज्ञापन आम आदमी की भाषा में प्रस्तुत किया जाता है, जो उनके अनुभवों, यादों और जीवन से जुड़ता है, तो यह बाजार की सीमाओं को पार करके एक सांस्कृतिक दस्तावेज बन जाता है। यही कारण है कि कई विज्ञापन वर्षों तक हमारे मन में बसे रहते हैं—वे हमें मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं, चिंतन करने के लिए प्रेरित करते हैं और अक्सर अपने समय की भावना को परिभाषित करते हैं।

आज, रेडियो से टेलीविजन, प्रिंट से डिजिटल और मोबाइल स्क्रीन तक, विभिन्न माध्यमों के तेजी से विकास के साथ, विज्ञापन की चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। ऐसे समय में, विज्ञापन के सफर को संरक्षित करना, उसका संग्रह करना और उसे समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, क्योंकि यह न केवल ब्रांडों के इतिहास को दर्शाता है, बल्कि समाज की बदलती प्रकृति, आकांक्षाओं और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी प्रतिबिंबित करता है। यह प्रदर्शनी विज्ञापन को एक रचनात्मक और बौद्धिक विधा के रूप में देखने का अवसर प्रदान करती है—एक ऐसा माध्यम जो भावनाओं से जन्मा, भाषा द्वारा आकारित हुआ और साहित्य की तरह ही समय के साथ अपना महत्व को स्थापित करता है।

इस अवसर पर श्री सुशील पंडित ने कहा, “वर्षों पहले, जब मैंने इंडियन एक्सप्रेस और बाद में द टेलीग्राफ के लिए लिखा था, तब उनके जीवन और कार्य को समझते हुए मुझे गहराई से यह अहसास हुआ कि विज्ञापन केवल उत्पादों को बेचने का एक माध्यम नहीं है – इसने हमेशा अपने समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित किया है।”

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब अखबार एक या डेढ़ रुपये में बिकते थे और उस कीमत में तो छपाई का खर्च भी पूरा नहीं होता था। ऐसे में, प्रिंट मीडिया को सहारा देने वाली असली ताकत विज्ञापन ही रहे। पत्रकारों की स्वतंत्रता, लेखन की निरंतरता और अखबारों व पत्रिकाओं का अस्तित्व ही विज्ञापन पर निर्भर रहा। विज्ञापन न केवल समाचार उद्योग को सहारा देते रहे, बल्कि साहित्य, कविता और सांस्कृतिक चर्चा को भी पोषण प्रदान करते रहे। रेडियो और अखबारों के युग से लेकर टेलीविजन के आगमन तक, विज्ञापन रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बन गए और धीरे-धीरे सामूहिक स्मृति में समा गए।

श्री पंडित ने कहा, “पीयूष पांडे का सबसे बड़ा योगदान विज्ञापन की भाषा को औपचारिकताओं से निकालकर सरल, आत्मीय और रोजमर्रा की बातचीत के अंदाज में बदलना था। यह ऐसी भाषा थी जो विश्वास पैदा करती है, जैसे दोस्तों के बीच बातचीत हो रही हो, उपभोक्ताओं से बराबरी का व्यवहार किया जाता है।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, “प्रौद्योगिकी, उत्पाद और सुविधाएं समय के साथ बदल सकती हैं और उनकी नकल भी की जा सकती है, लेकिन ब्रांड और उसके उपभोक्ता के बीच का भावनात्मक बंधन अमूर्त है—इसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता। विज्ञापन की असली ताकत इसी रिश्ते को बनाने में है, जो मात्र आवश्यकता से परे जाकर इच्छा, वफादारी और विश्वास पैदा करता है।” डिजिटल युग पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, “आज विज्ञापन के माध्यम बदल गए हैं और संचार अधिक नियोजित हो गया है, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। नई पीढ़ी की भाषा, आकांक्षाएं और विश्वदृष्टि अलग हैं। उनसे जुड़ने के लिए यह समझना आवश्यक है कि संचार केवल कही गई बातों के बारे में नहीं है, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि उन्हें कैसे कहा गया है।”

श्री पंडित ने संबोधन के समापन में कहा, “यह प्रदर्शनी भारतीय विज्ञापन के लंबे सफर को समझने का अवसर प्रदान करती है, जिसने उपभोक्ता संस्कृति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार को आकार दिया है। मैं इस प्रयास के लिए आयोजकों को बधाई देता हूं, क्योंकि अतीत को समझे बिना भविष्य की दिशा तय करना कठिन है।”

इस अवसर पर अपने उद्घाटन भाषण में श्री अनुराग ने कहा कि आईजीएनसीए की विज्ञापन संग्रह पहल इस बहुमूल्य दृश्य अभिलेख को समृद्ध और विस्तारित करने के लिए समर्पित है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से, यह पहल न केवल विज्ञापनों को संरक्षित करती है, बल्कि भारत की रचनात्मक विपणन यात्रा का एक संरचित संग्रह भी तैयार करती है—जिसमें इसकी सौंदर्यशास्त्र, भाषा, हास्य, सामाजिक प्रभाव और पुरानी यादें शामिल हैं। इस अवसर पर विज्ञापन के छात्र, शोधकर्ता, उत्साही और दर्शक उपस्थित हुए।

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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित रचनाओं की  अंतिम श्रृंखला ‘महामना वांग्मय’ का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संकलित रचनाओं की अंतिम श्रृंखला “महामना वांग्मय” का विमोचन किया।

 

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने महामना मालवीय को एक महान राष्ट्रवादी, पत्रकार, समाज सुधारक, अधिवक्‍ता, राजनेता, शिक्षाविद और प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक प्रतिष्ठित विद्वान के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक दुर्लभ दूरदर्शी थे, जिनका दृढ़ विश्वास था कि भारत का भविष्य उसके अतीत को नकारने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में निहित है, इस प्रकार उन्‍होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का कार्य किया।

पंडित मालवीय की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति महादोय ने कहा कि यह प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सर्वोत्तम तत्वों का सामंजस्य स्थापित करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।

औपनिवेशिक शासन के दौरान राष्ट्रीय जागरण के सबसे सशक्त साधन के रूप में शिक्षा में महामना मालवीय के विश्वास को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना उनके इस विश्‍वास का एक जीवंत प्रमाण है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति को साथ विकसित होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामना मालवीय की एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रबुद्ध भारत के विजन की अनुगूंज समकालीन पहलों जैसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और 2047 तक विकसित भारत के मिशन में गहराई से महसूस की जाती है, जिसका नेत़त्‍व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, जो पंडित मालवीय जी की चिर स्‍थायी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि महामना मालवीय का समावेशी, मूल्य-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा पर जोर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दृढ़ता से परिलक्षित होता है।

महामना वांग्मय को केवल लेखों का संग्रह से कहीं अधिक बताते हुए उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए एक खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने महामना मालवीय मिशन और प्रकाशन विभाग को उनके इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए बधाई दी तथा विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन ग्रंथों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया, ये उल्‍लेख करते हुए कि इसमें समकालीन चुनौतियों के स्थायी समाधान निहित हैं।

‘महामना वांग्मय’ की दूसरी और अंतिम श्रृंखला में लगभग 3,500 पृष्ठों में फैले 12 खंड शामिल हैं, जिनमें पंडित मदन मोहन मालवीय के लेखन और भाषणों का एक व्यापक संकलन प्रस्‍तुत किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन महामना मालवीय मिशन द्वारा किया गया, जबकि इन पुस्तकों का प्रकाशन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा किया गया है। संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा किया गया था।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल; संसद सदस्‍य श्री अनुराग सिंह ठाकुर; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय; महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष श्री हरि शंकर सिंह  तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैंथोला शामिल थे।

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प्रतिनिधिमंडल के पहले बैच ने केदार घाट पर नमामि गंगे के स्वयंसेवकों के साथ स्वच्छता अभियान में भाग लिया

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण के अंतर्गत, तमिल प्रतिनिधिमंडल ने 1 दिसंबर 2025 को केदार घाट पर आयोजित मां गंगा आरती में भाग लिया और नमामि गंगे स्वयंसेवकों के साथ मिलकर काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक एकता की सामूहिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। प्रतिनिधिमंडल ने घाट पर स्वच्छता अभियान में भी हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में द्वादश ज्योतिर्लिंग और गंगाष्टकम का सामूहिक पाठ शामिल था, इसके बाद गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की प्रतिज्ञा ली गई।

इस कार्यक्रम में नमामि गंगा के अधिकारियों, आध्यात्मिक नेताओं और तमिल प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो काशी तमिल संगमम 4.0 के सांस्कृतिक उद्देश्यों के प्रति प्रबल उत्साह को दिखाता है।

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जनजातीय पहचान और सामूहिक अधिकारों का संरक्षण

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में एक गैर-तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों द्वारा वन भूमि और संसाधनों पर उनके अधिकारों की लंबे समय से चली आ रही अवहेलना को दूर करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था। अधिनियम की धारा 3(1)(i) में स्पष्ट रूप से “किसी भी सामुदायिक वन संसाधन की रक्षापुनर्जननसंरक्षण या प्रबंधन के अधिकार” का प्रावधान हैजिसे वे पारंपरिक रूप से सतत उपयोग के लिए संरक्षित और सुरक्षित करते आ रहे हैं।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को सामुदायिक वन अधिकारों (सीएफआर) की सुरक्षा और मान्यता सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी किया है, ताकि वन संरक्षण अधिनियम (एफआरए) को अक्षरशः लागू करते हुए जनजातीय पहचान, पारंपरिक शासन प्रणाली और वन संसाधनों तक उनकी सामूहिक पहुंच की रक्षा की जा सके। इसके अलावा, मंत्रालय ने प्रभावी सीएफआर प्रशासन को सुगम बनाने के लिए 2023 में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इसके अतिरिक्त, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के अंतर्गत राज्य सरकारों को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदाय के नेतृत्व में वन प्रबंधन योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन के लिए ग्राम सभाओं और सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को मजबूत करना है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के कार्यान्वयन की निगरानी करने और लंबित दावों के निपटान में तेजी लाने के लिए समय-समय पर समीक्षा बैठकों के माध्यम से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा है। लंबित दावों की उच्च दर वाले राज्यों को विशेष रूप से लंबित दावों के त्वरित निपटान के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, मंत्रालय ने राज्य सरकारों को दावों की समयबद्ध जांच और निपटान के लिए ग्राम सभाओं, उप-मंडल स्तरीय समितियों (एसडीएलसी) और जिला स्तरीय समितियों (डीएलसी) की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने की सलाह दी है। राज्य स्तरीय निगरानी समितियों (एसएलएमसी) से भी अधिनियम के प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए जमीनी स्तर के मुद्दों की सक्रिय रूप से समीक्षा करने और उनका समाधान करने का आग्रह किया गया है।

यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से संबंधित था और इसका समाधान हो चुका है। जनजातीय कार्य मंत्रालय वन अधिकार अधिनियम, 2006 की भावना की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ नियमित परामर्श और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। समय-समय पर राज्यों को क्षमता विकास कार्यक्रम, तकनीकी सहायता और परामर्श जारी किए जाते हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय प्रगति की निगरानी भी करता है और डीए-जेजीयूए जैसी योजनाओं के तहत लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान करता है।

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काशी-तमिल सांस्कृतिक और अकादमिक संगम का वाराणसी के वसंत कॉलेज में..

नई दिल्ली  –  काशी-तमिल संगमम 4.0 के अंतर्गत 26 नवंबर, 2025 को वाराणसी के वसंत महिला महाविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों की एक श्रृंखला शुरू हुई। इस पहल का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के बीच लम्‍बे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करना और दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक व शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

 

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सहायक प्रोफेसर (भारतीय भाषाएं) डॉ. जगदीशन टी. ने “तमिल करकलाम – आइए तमिल सीखें” विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के बारे में बात की। उन्होंने भारत की भाषाई विविधता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि भारतीय भाषाओं को सीखने से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना में सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। सत्र का समापन तमिल भाषा और उसकी विरासत पर छात्रों के साथ एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।

काशी-तमिल संगमम 4.0 का आधिकारिक उद्घाटन 2 दिसंबर को होगा। हालांकि, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और वाराणसी के अन्य संस्थानों में अकादमिक, सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करना और देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच अधिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।

 

 

वसंत कॉलेज फॉर विमेन में आयोजित कार्यक्रम का समापन वंदनम के साथ हुआ, जिसने प्रतिभागियों को काशी और तमिलनाडु की साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। छात्रों, संकाय सदस्यों और आमंत्रित अतिथियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। आने वाले दिनों में अकादमिक, संवादात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेंगे, जो दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत को और उजागर करेंगे तथा भारत की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेंगे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति पर श्री आंद्रेज बाबिश को बधाई दी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति पर श्री आंद्रेज बाबिश को आज बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने एक एक्स पर पोस्ट में कहा:

चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में आपकी नियुक्ति पर आपको हार्दिक बधाई, महामहिम आंद्रेज बाबिश। भारत और चेक गणराज्‍य के बीच सहयोग और मित्रता को और मजबूत करने के लिए आपके साथ काम करने की आशा करता हूं।

@AndrejBabis

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