मायावती ने अखिलेश यादव पर किया कटाक्ष

कहा- मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी याद कर लेना चाहिए

लखनऊ 28 March, Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । उत्तर प्रदेश के आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के घर हुए हमले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 30 वर्ष पुरानी घटना का जिक्र करते हुए पश्चाताप करने की मांग की है।

मायावती ने शुक्रवार सुबह एक्स पर दो पोस्ट किए। पहली पोस्ट में मायावती ने कहा, “आगरा की हुई घटना के साथ-साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव को इनकी सरकार में 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में इस पार्टी द्वारा मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी इनको जरूर याद कर लेना चाहिए तथा इसका पश्चाताप भी जरूर करना चाहिए।”

उन्होंने दूसरी पोस्ट में कहा, “अतः आगरा घटना की आड़ में अब सपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे और आगरा की हुई घटना की तरह यहां दलितों का उत्पीड़न और ज्यादा न कराए।”

इससे पहले गुरुवार को भी मायावती ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा था, “सपा अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके जो घिनौनी राजनीति कर रही है अर्थात उनको नुकसान पहुंचाने में लगी है, यह उचित नहीं। दलितों को इनके सभी हथकंडों से सावधान रहना चाहिए। आगरा की हुई घटना अति चिंताजनक है।”

उन्होंने कहा था, “साथ ही, सपा को अपने स्वार्थ में किसी भी समुदाय का अपमान करना ठीक नहीं, जिसके तहत अब इनको किसी समुदाय में दुर्गंध व किसी में सुगंध आ रही है। इससे समाज में अमन-चैन व सौहार्द बिगड़ेगा, जो ठीक नहीं।”

बता दें कि आगरा में दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने राणा सांगा के बारे में विवादित बयान देने वाले सपा के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर बुधवार को हमला किया था।

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क्रिप्टो माइनिंग : क्या भारत डिजिटल क्रांति का बड़ा मौका गंवा रहा है?

नई दिल्ली, 27 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। क्रिप्टो माइनिंग वह प्रक्रिया है जिसका उपयोग बिटकॉइन और कई अन्य क्रिप्टो संपत्तियां नए टोकन बनाने और लेनदेन को सत्यापित करने के लिए करती हैं। यह पूरी तरह विकेंद्रीकृत (Decentralized) नेटवर्क होता है, जिसमें विशेष कंप्यूटरों का उपयोग किया जाता है।

ये मशीनें जटिल गणनाएँ करती हैं, जिसे आमतौर पर क्रिप्टोग्राफ़िक पहेलियाँ हल करना कहा जाता है, ताकि हर लेनदेन की पुष्टि हो सके और इसे ब्लॉकचेन में सुरक्षित रूप से जोड़ा जा सके। ब्लॉकचेन एक डिजिटल खाता बही की तरह काम करता है, जिसमें हर लेनदेन दर्ज होता है। इस प्रक्रिया में योगदान देने वाले माइनर्स को नए टोकन के रूप में इनाम दिया जाता है, जिससे न केवल नेटवर्क सुरक्षित रहता है, बल्कि माइनर्स को भी इसे लगातार सक्रिय बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

दुनिया के कई देश पहले ही इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। अमेरिका, कनाडा और कजाकिस्तान ने अपने ऊर्जा संसाधनों, अनुकूल नीतियों और तकनीकी बुनियादी ढांचे का लाभ उठाकर क्रिप्टो माइनिंग को बड़े स्तर पर अपनाया है। अमेरिका फिलहाल वैश्विक बिटकॉइन माइनिंग का 37.8% हिस्सा संभाल रहा है, जो वहां की सस्ती ऊर्जा और उदार बाजार नीतियों का नतीजा है। वहीं, भूटान जैसे छोटे देशों ने भी अपने जलविद्युत संसाधनों का उपयोग करके संप्रभु माइनिंग संचालन विकसित कर लिया है

। टेक्सास में तो बिटकॉइन माइनिंग न केवल आर्थिक लाभ पहुंचा रही है, बल्कि ऊर्जा ग्रिड को स्थिर करने, गैस-आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं के लिए बिजली लागत को कम करने में भी मदद कर रही है।इसके विपरीत, भारत अब भी इस उभरते उद्योग में पीछे छूटा हुआ है। देश में 11% वैश्विक आईटी कार्यबल है और हर साल 15 लाख से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक तैयार होते हैं, फिर भी भारत की हिस्सेदारी वैश्विक क्रिप्टो माइनिंग में 1% से भी कम है।

यह स्थिति इसलिए नहीं है क्योंकि भारत में क्रिप्टो माइनिंग प्रतिबंधित है। वास्तव में, इस पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है, लेकिन नीतिगत अस्थिरता, भारी कराधान और सहयोगी ढांचे की कमी इस क्षेत्र के विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है। 2022 में क्रिप्टो आय पर 30% कर और लेनदेन पर 1% टीडीएस लागू करने के बाद कई स्टार्टअप भारत से बाहर निकलकर दुबई, सिंगापुर और एस्टोनिया जैसी जगहों पर बस गए, जहां नियामक नीतियां अधिक अनुकूल हैं। क्रिप्टो माइनिंग सिर्फ एक सट्टा बाजार नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वित्तीय समावेशन का एक नया रास्ता खोल सकता है।

भारत ने अब तक इस अवसर का पूरी तरह से लाभ नहीं उठाया है, लेकिन इसके पास विशाल तकनीकी प्रतिभा, बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं, जो इसे वैश्विक दक्षिण में डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करने की क्षमता प्रदान करती हैं। सवाल यह नहीं है कि भारत ने यह अवसर खो दिया है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या भारत समय रहते निर्णायक कदम उठाएगा या नहीं।

यदि देश अपने नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का सही उपयोग करता है और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपनाता है, तो भारत अभी भी वैश्विक क्रिप्टो माइनिंग क्षेत्र में अपनी जगह बना सकता है। अब जरूरत है सही दिशा में कदम बढ़ाने की।

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लोकसभा में इमिग्रेशन बिल पास: शाह बोले- देश में विकास के लिए स्वागत पर भारत धर्मशाला नहीं

नई दिल्ली 27 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)- आव्रजन और विदेशी नागरिकों से संबंधित विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में अल्पसंख्यक समूह सबसे सुरक्षित हैं और सरकार ने शरणार्थियों को हमेशा सुरक्षा प्रदान की है।

अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि आव्रजन राष्ट्रीय सुरक्षा से निकटता से जुड़ा हुआ है और देश की सीमाओं में प्रवेश करने वालों की निगरानी करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है।

देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि देश की सीमाओं में कौन प्रवेश करता है। हम देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर भी कड़ी नजर रखेंगे। यह ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025’ एक विधायी प्रस्ताव है, जो हमारी प्रणाली को सरल बनाएगा, इसे व्यवस्थित और सुरक्षित भी बनाएगा।”

सताए गए समुदायों को शरण देने में भारत की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा, “भारत एक भू-सांस्कृतिक राष्ट्र है, न कि भू-राजनीतिक राष्ट्र। फारसी लोग भारत आए और आज देश में सुरक्षित हैं। दुनिया का सबसे छोटा अल्पसंख्यक समुदाय केवल भारत में सुरक्षित है।

यहूदी इजरायल से भागकर यहां रह गए। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में पड़ोसी देशों के छह उत्पीड़ित समुदायों के लोग सीएए के जरिए देश में शरण ले रहे हैं।” इस विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार उन प्रवासियों का स्वागत करती है, जो भारत के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “जो लोग देश में शिक्षा, व्यापार या रिसर्च के लिए आते हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। पीएम मोदी का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बने, और इसी वजह से हमने कई पुराने कानूनों को खत्म किया है।” उन्होंने कहा, “यहां शरण के लिए नहीं बल्कि स्वार्थी उद्देश्यों से आने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

जो लोग देश की अर्थव्यवस्था और विकास में योगदान देने के लिए यहां आते हैं, उनका हमेशा स्वागत किया जाता है। लेकिन चाहे रोहिंग्या हों या बांग्लादेशी, अगर आप शांति भंग करने के लिए यहां आए हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसलिए हमें इस विधेयक में लचीलापन और दृढ़ता दोनों की आवश्यकता है।”

शाह ने कहा, “आव्रजन और विदेशी विधेयक के साथ, हम देश में प्रवेश करने वाले प्रत्येक विदेशी पर नजर रखने के लिए एक विस्तृत प्रणाली स्थापित करेंगे। इससे हमें देश का विकास करने और व्यापार के लिए आने वालों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे हम उन व्यक्तियों पर भी पैनी नजर रख सकेंगे जो हमारी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।”

शाह ने आव्रजन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए इसकी गंभीरता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। यह देश के कई मुद्दों से जुड़ा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारी सीमाओं में कौन प्रवेश कर रहा है। जो लोग देश की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे, उन पर कड़ी नजर रखी जाएगी।” उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक स्थिति और आव्रजन पर इसके प्रभाव के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक उज्ज्वल स्थान बन गया है। भारत विनिर्माण का केंद्र बन गया है और दुनिया भर के लोगों का यहां आना स्वाभाविक है। हालांकि, निजी लाभ के लिए शरण लेने और अस्थिरता पैदा करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।”

अमित शाह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों को देश में घुसने नहीं दिया जाएगा। देश कोई धर्मशाला नहीं है। अगर कोई देश के विकास में योगदान देने के लिए यहां आता है, तो उसका हमेशा स्वागत है।”

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देश सेवा सर्वोपरि, ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का करें निर्वहन : CM योगी

लखनऊ  27 March, (rns) । गुरुवार को लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष विभाग और गृह विभाग के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) एवं उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा चयनित 283 चिकित्सा अधिकारियों और कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

इस दौरान सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सेवा नारों या भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से होती है।

उन्होंने नवचयनितों से अपील की कि वे पूरी तत्परता और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, ताकि उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

इस समारोह में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित 283 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

इनमें आयुष विभाग के 163 चिकित्सा अधिकारी, 2 रीडर (आयुर्वेद), 19 प्रोफेसर, 3 प्रवक्ता (होम्योपैथी) और गृह विभाग के तहत विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के 96 कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायक शामिल हैं। नियुक्ति पत्र पाकर सभी नवचयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खिल उठे।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए सीएम योगी की पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की जमकर सराहना की। सीएम योगी ने इस अवसर पर यूपीपीएससी और यूपीएसएसएससी को शासन की मंशा के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को ईमानदारी से संपन्न करने के लिए धन्यवाद दिया और सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई दी।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में पिछले 8 वर्षों की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 8 वर्षों में हमने प्रदेश में 8.30 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। अगर यह नियुक्तियां शुचिता और पारदर्शिता के साथ नहीं होतीं, तो ये सभी मामले कोर्ट में लंबित हो जाते और एक भी भर्ती पूरी नहीं हो पाती।

उन्होंने कहा कि इन 8 वर्षों में 1,56,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई, 60,200 पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है और साथ ही बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई है।

अन्य विभागों में भी इसी तत्परता के साथ भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। आज जब प्रशिक्षित और दक्ष कार्मिक शासकीय सेवा का हिस्सा बनते हैं, तो कार्य पद्धति में तेजी आती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

सीएम योगी ने 2017 से पहले की प्रदेश की स्थिति और पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 8 वर्ष पहले यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी और पुलिस भर्ती बोर्ड की कार्य पद्धति पर गंभीर सवाल उठते थे। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं लंबित रहती थीं। तत्कालीन सरकार और आयोगों की कार्य पद्धति पर माननीय न्यायालय ने भी सवाल खड़े किए थे।

उस समय उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, लेकिन असल में बीमारू तत्कालीन व्यवस्था थी। अनिर्णय की स्थिति के कारण समाज का हर तबका तबाह था। उन्होंने कहा कि आज सरकार की तत्परता, सुचिता और पारदर्शिता के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश नए भारत का नया उत्तर प्रदेश बनकर उभरा है, जो देश की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए तैयार है।

सीएम योगी ने आयुष विभाग में नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष, आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां भारत की प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए अलग मंत्रालय बनाया और आज इसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना हो चुकी है।

वर्तमान में 2,114 आयुर्वेद, 254 यूनानी और 1,585 होम्योपैथी चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं। लखनऊ और पीलीभीत में निर्माणाधीन आयुष चिकित्सालयों का कार्य अंतिम चरण में है।

15 जनपदों में 50 सैया वाले इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल शुरू हो चुके हैं, जबकि 3 जनपदों में निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं और 225 आयुष चिकित्सालयों में योग व वेलनेस सेंटर शुरू किए गए हैं।

सीएम योगी ने आयुष के क्षेत्र में हेल्थ टूरिज्म की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में शुद्ध वातावरण और प्रचुर जल संसाधन हेल्थ टूरिज्म के लिए अनुकूल हैं। हमने धार्मिक टूरिज्म में उत्तर प्रदेश को नंबर एक बनाया है, अब हेल्थ टूरिज्म में भी इसे शीर्ष पर ले जाएंगे।

आयुष हॉस्पिटल और वेलनेस सेंटर इसके नए केंद्र बन सकते हैं। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों से अपील की कि वे आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों और दादी के नुस्खों को संरक्षित करें और लोगों को प्राकृतिक खेती व संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूक करें।

उन्होंने एफएसएल लैब के 96 कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि जुलाई 2024 में लागू तीन नए कानूनों में एफएसएल लैब की भूमिका अहम है। किसी भी पीड़ित को समय से न्याय मिले और अपराधी को सजा दिलाने के लिए साक्ष्य जरूरी हैं।

पहले प्रदेश में केवल 4 एफएसएल लैब थीं, अब 12 हैं और 6 निर्माणाधीन हैं। हर रेंज स्तर पर एफएसएल लैब स्थापित करने और हर जनपद में 2-2 मोबाइल लैब उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है, जहां डिप्लोमा और डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं। सीएम योगी ने कहा कि अगले 10 वर्षों में इस इंस्टीट्यूट से निकलने वाले छात्रों के लिए देश-दुनिया में नौकरी की कमी नहीं होगी।

सीएम योगी ने आस्था और विरासत के सम्मान से रोजगार सृजन की बात करते हुए कहा कि महाकुंभ की सफलता में सभी विभागों के कार्मिकों की मेहनत दिखी। 45 दिनों के इस आयोजन में दुनिया भर से लोग आए और इसकी तारीफ की।

काशी, अयोध्या, चित्रकूट, गोरखपुर, नैमिषारण्य, मथुरा-वृंदावन और सुख तीर्थ जैसे क्षेत्रों में आस्था के सम्मान से लाखों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जब हम अपनी विरासत पर गर्व करते हैं, तो दुनिया उससे जुड़ती है। पहले लोग योग को हेय दृष्टि से देखते थे, लेकिन आज 193 देश विश्व योग दिवस मनाते हैं।

सीएम योगी ने आजमगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले आजमगढ़ के नौजवानों को होटल या धर्मशाला में जगह नहीं मिलती थी, लेकिन आज वहां से एफएसएल लैब के लिए टेक्निकल स्टाफ का चयन हो रहा है।

आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव विश्वविद्यालय, एयरपोर्ट और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ एक नई पहचान बन रही है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारें पहचान का संकट खड़ा करती थीं, लेकिन आज हमारी सरकार युवाओं को नई पहचान के साथ वैश्विक मंच पर स्थापित कर रही है।

सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों से अपील करते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यह न सोचें कि ड्यूटी न करना आपका अधिकार है। जैसा करेंगे, वैसा फल पाएंगे। देश की सेवा नारों या भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से होती है।

जो काम कल करना है, उसे आज ही निपटा लें। उन्होंने कहा कि तत्परता और पारदर्शिता से काम करने पर जनता उनकी कार्य पद्धति को स्वीकार करेगी और वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे।

सीएम योगी ने नवचयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने में अपना योगदान देंगे।

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भाजपा नेता की हत्या के बाद रांची बंद, जगह-जगह सड़क जाम

कई नेता गिरफ्तार

रांची  27 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। रांची में स्थानीय भाजपा नेता और जिला परिषद के पूर्व सदस्य अनिल टाइगर की हत्या के खिलाफ गुरुवार को आहूत रांची बंद का व्यापक असर दिख रहा है। रांची शहर में 15 से भी अधिक स्थानों पर बंद समर्थकों ने सड़कों पर जाम लगा दिया है। शहर के कई प्रमुख बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद करा दिए गए हैं। रांची पुलिस ने बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे 20 से अधिक भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ भाजपा नेता की हत्या के विरोध में रातू रोड में बीच सड़क पर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे हैं। रांची के कांके चौक पर भाजपा नेता अनिल महतो टाइगर की हत्या बुधवार की शाम करीब चार बजे उस वक्त गोली मारकर कर दी गई थी, जब वह एक होटल में बैठे थे। वारदात को अंजाम देकर बाइक से भाग रहे अपराधियों का स्थानीय लोगों ने पीछा किया था और इसी दौरान पुलिस ने शूटर रोहित वर्मा को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दूसरा अपराधी अमन कुमार भागने में सफल रहा था।

इस घटना के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी, आजसू पार्टी, जदयू और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने बंद बुलाया है। बंद समर्थक सुबह आठ बजे से ही रांची में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने बूटी मोड़, पिठोरिया, पिस्का मोड़, रातू रोड, कांके चौक समेत कई प्रमुख इलाकों की सड़कों को जाम कर दिया गया है।

पुलिस ने बीजेपी के कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया। इनमें भैरो सिंह, प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, बीजेपी धुर्वा मंडल के अध्यक्ष उमेश यादव, वरिष्ठ भाजपा नेता कामेश्वर सिंह शामिल हैं। इसी तरह सड़क पर बंद कराने उतरे भाजपा के हटिया मंडल अध्यक्ष राम मनोज साहु, प्रवीण झा और मोहन सिंह सहित कुछ अन्य को जगन्नाथपुर थाने की पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

कानून-व्‍यवस्‍था बनाए रखने के ल‍िए रांची शहर में 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। 12 डीएसपी और थाना प्रभारी समेत दो दर्जन से इंस्पेक्टरों को शहर के अलग-अलग इलाकों में विधि-व्यवस्था पर निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

डीआईजी सह एसएसपी चंदन सिन्हा ने कहा कि सीसीटीवी के कंट्रोल रूम से शहर में निगरानी रखी जा रही है। गड़बड़ी फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई जगहों पर महिला बटालियन, वज्र वाहन, रंगीन पानी का टैंकर, अश्रु गैस दस्ते और फायर ब्रिगेड की तैनाती की गई है।

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मूवी लवर के लिए आमिर खान ने लॉन्च किया ‘आमिर खान टॉकीज’

27.03.2025 – अभिनेता आमिर खान ने अपने प्रोडक्शन हाउस का यूट्यूब चैनल ‘आमिर खान टॉकीज’ लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह चैनल खासकर उन लोगों के लिए है, जो फिल्मों की दुनिया को करीब से जानना चाहते हैं। यहां पर्दे के पीछे की अनदेखी कहानियां, शूटिंग के मजेदार किस्से और फिल्मों को लेकर गहरी चर्चाएं देखने को मिलेंगी।

इस चैनल पर सिर्फ फिल्मों के बनने की कहानी नहीं, बल्कि एक्टर्स की बातें, ग्रुप डिस्कशन और फिल्ममेकिंग पर खुलकर चर्चा भी होगी। आमिर खान प्रोडक्शंस से जुड़े कलाकार अपने अनुभव बताएंगे, जिससे फैन्स को सिनेमा के अंदर की दुनिया को और करीब से समझने का मौका मिलेगा।

इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए लोग सिर्फ फिल्म बनाने की बारीकियां नहीं सीखेंगे, बल्कि इसकी कलात्मकता और तकनीकी कमाल को भी महसूस कर पाएंगे। अभिनेता आमिर खान अपने यूट्यूब चैनल के बारे में कहते हैं यह एक ऐसी जगह होगी, जहां स्टोरीटेलिंग और रियलिटी का मिलन होगा। यहां आपको पर्दे के पीछे के अनदेखे लम्हों से लेकर उन फिल्मों पर गहरी बातचीत तक सब कुछ मिलेगा, जिन फिल्मों ने हमें पहचान दी है।

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने 30 साल के कैरियर में अपनी फिल्मों से हमेशा लोगों का दिल जीता है। शानदार एक्टिंग के अलावा, प्रोड्यूसर के तौर पर भी उन्होंने आमिर खान प्रोडक्शंस के जरिए कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, जो सिनेमा की दुनिया में नया मुकाम बना चुकी हैं। प्रयोगात्मक दौर में आमिर खान के द्वारा लॉन्च किया गया ‘आमिर खान टॉकीज’ निःसंदेह सिनेप्रेमियों के लिए एक शानदार तोहफ़ा साबित होगा।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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जस्टिस वर्मा के घर नोट मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका

जल्द सुनवाई की मांग

नई दिल्ली,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां मिलने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता मैथ्यू नेदुम्पारा द्वारा दाखिल इस याचिका में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से संपर्क करने को कहा है ताकि मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन जजों की समिति बनाने का कोई औचित्य नहीं है और इसकी जांच पुलिस को करनी चाहिए।

याचिका में न्यायपालिका के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रभावी और सार्थक कार्रवाई की जरूरत बताई गई है। इसके तहत सरकार को न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक, 2010 को दोबारा लाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो पहले ही लैप्स हो चुका है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच तथा कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

इसके साथ ही यह मामला संसद से सड़क तक चर्चा का विषय बन गया है। खासकर विपक्ष के नेताओं ने इस मामले को काफी जोर-शोर से उठाया है, उनकी मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एस.एन. ढींगरा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर यह बरामदगी वास्तविक है, तो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना चाहिए था।

जस्टिस ढींगरा ने कहा, यह भ्रष्टाचार का एक ज्वलंत उदाहरण है। हमारी न्यायपालिका में कितना भ्रष्टाचार है, आप इसे इस मामले से समझ सकते हैं। इसके अलावा, कोई नहीं जानता कि और कितने जज हैं, जिनके पास ऐसी नकदी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जज होने का मतलब यह नहीं है कि वह कानून से ऊपर हैं। पुलिस को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और केवल उनका ट्रांसफर करना समस्या का हल नहीं है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवासीय बंगले में आग लगने से एक बड़ा खुलासा हुआ था। इस घटना ने न्यायिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था। जज के घर से भारी मात्रा में नोटों की अधजली गड्डियों की बरामदगी हुई थी। इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को भी तत्काल कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। इस मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया।

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कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

नईदिल्ली ,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह पर सोनिया गांधी का अपमान करने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश की ओर से सौंपे गए नोटिस में कहा गया है कि यद्यपि अमित शाह ने उच्च सदन में अपने उत्तर के दौरान सोनिया गांधी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के पूर्व नियोजित उद्देश्य से उनके विरुद्ध निराधार आरोप लगाए हैं।

जयराम ने पत्र राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को दिया है।

राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम ने पत्र में लिखा, 25 मार्च को अमित शाह ने आपदा प्रबंधन विधेयक 2024 पर बहस का जवाब देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष कांग्रेस के शासन में बना और पीएम केयर्स नरेंद्र मोदी एनडीए के शासन में बना।

कांग्रेस के शासन में एक ही परिवार का नियंत्रण होता था, इसके अंदर कांग्रेस के अध्यक्ष सदस्य होते थे। कांग्रेस अध्यक्ष सरकारी फंड में, क्या जवाब दोगे देश की जनता को?

जयराम ने पत्र में लिखा कि शाह ने सोनिया का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफतौर पर उनका उल्लेख किया था और प्रधानमंत्री राहत कोष के कामकाज के संबंध में उनकी मंशा पर संदेह जताया था।

उन्होंने लिखा, यह सर्वविदित है कि सदन के किसी भी सदस्य पर टिप्पणी करना या अपमानजनक बातें कहना विशेषाधिकार का हनन और सदन की अवमानना है। गृह मंत्री का बयान सरासर झूठा और मानहानिकारक है, जो सोनिया गांधी के विशेषाधिकार का हनन है।

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दिल्ली में कमल खिला अब बंगाल की बारी

लोकसभा में बोले गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में एक प्रकार से हर परिवार को छूता है। हर गांव में कोई न कोई ऐसी इकाई है, जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के काम में जुटी हुई है और देश के विकास में योगदान करती है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, और सामाजिक समावेशन बढ़ेगा।

गृह मंत्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यों का परिणाम है कि आज दिल्ली में भी कमल खिल गया और यहां भी आयुष्मान भारत योजना आ गई। देश के हर गरीब को इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक खर्च की चिंता नहीं करनी है।

अब बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा और आयुष्मान भारत आ जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड को एक राष्ट्रीय कोऑपरेटिव संस्था बनाया है। इनके माध्यम से देश के किसानों का उत्पाद विदेशों में निर्यात करने का काम चल रहा है।

अब तक 12 लाख टन सामग्री दुनिया के विभिन्न बाजारों में बेचकर इसका मुनाफा सीधा किसानों के पास पहुंचाया गया है।

अमित शाह ने कहा कि कई साल तक बड़े-बड़े कोऑपरेटिव लीडर कृषि मंत्री रहे, लेकिन सहकारी चीनी मिलों के समक्ष इनकम टैक्स की जो समस्या थी, वह कभी समाप्त नहीं होती थी।

सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद साल 2022 में एक असेसमेंट की समस्या को मोदी सरकार ने हमेशा के लिए समाप्त कर दिया, जो 2016 से चल रही थी।

उन्होंने कहा कि सहकार से समृद्धि सिर्फ एक नारा नहीं है, इसे जमीन पर उतारने के लिए साढ़े तीन साल में सहकारिता मंत्रालय ने दिन-रात एक किया है।

आने वाले दिनों में कुछ ही महीनों में कोऑपरेटिव बेसिस पर ओला-ऊबर जैसी एक बहुत बड़ी कोऑपरेटिव सहकार टैक्सी आने वाली है और इसका मुनाफा किसी धन्नासेठ के हाथ में नहीं जाएगा, वह ड्राइवर के पास जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। जब भी देश का इतिहास लिखा जाएगा, यह 10 साल का कालखंड इस देश के गरीबों के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

मोदी सरकार ने देश के गरीबों को घर देने का काम किया, शौचालय देने का काम किया, पीने का शुद्ध पानी देने का काम किया, हर महीने पांच किलोग्राम अनाज मुफ्त देने का काम किया, और गरीबों के घर गैस और बिजली पहुंचाने का काम किया।

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वक्फ विधेयक को लेकर पटना में मुस्लिम संगठनों का प्रदर्शन

लालू-तेजस्वी भी शामिल हुए

पटना ,26 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देशभर में प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में आज बिहार की राजधानी पटना में भी प्रदर्शन किया गया।

पटना के गर्दनी बाग में मुस्लिम संगठनों ने विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसे राष्ट्रीय जनता दल ने अपना समर्थन दिया। प्रदर्शन में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव भी शामिल हुए।

इस दौरान तेजस्वी ने कहा कि राजद हमेशा मुस्लिमों के साथ खड़ी रही है।

तेजस्वी ने कहा, जो विधेयक लाया गया है, इसके विरोध में आप सब लोगों का महाजुटान हुआ है। हमारी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, हम लोगों के नेता लालू प्रसाद यादव जी बीमार अवस्था में भी यहां आप लोगों का साथ देने पहुंचे हैं।

हम लोग किसी भी कीमत पर, चाहे सत्ता रहे या जाए, हम लोगों को इसकी परवाह नहीं है। आप लोगों की इस लड़ाई में हम लोग पूरी मजबूती के साथ आपके साथ खड़े हैं।
लालू यादव ने कहा, यह विधेयक अन्यायपूर्ण है और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। हम इसके विरोध में हैं। यह गलत हो रहा है, जनता सब समझ रही है।

प्रदर्शन को कई पार्टियों का भी समर्थन मिला। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी पटना पहुंचे। उन्होंने कहा, जिनके भी अधिकारों पर हमला होगा, उसकी रक्षा के लिए आगे आएंगे।

विकासशील इंसान पार्टी ने भी विधेयक को संविधान के खिलाफ बताया।

भाजपा सांसद और वक्फ संशोधन विधेयक पर बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो देश के मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहा है।

उन्होंने कहा, सरकार की ओर से लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के हित में है। खासकर गरीबों, पसमांदा, महिलाओं, विधवाओं और बच्चों के लिए। विधेयक से कोई भी धार्मिक स्थल, मस्जिद या कब्रिस्तान प्रभावित नहीं होगा, जैसा कि बोर्ड आरोप लगा रहा है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, 90 प्रतिशत से अधिक संपत्तियां मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह और इमामबाड़ों के रूप में हैं। इन संपत्तियों से कोई आय नहीं होती है।

इसलिए, इसमें आपत्तियां उठाने का कोई कारण नहीं है। सैकड़ों वर्षों से मुस्लिम समुदाय इन संपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है। इसलिए सरकार की ओर से किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईद के बाद सरकार संसद में वक्फ विधेयक को पेश कर सकती है। अगल हफ्ते ईद है, ऐसे में अगले हफ्ते विधेयक के पेश किए जाने की संभावना है।

इससे पहले मंत्रिमंडल ने जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक में प्रस्तावित 23 में से 14 बदलावों को मंजूरी दी थी। तब विपक्षी सांसदों ने कहा था कि उनके एक भी बदलाव को स्वीकार नहीं किया गया।

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अब मैदानी इलाकों में कहर बरपाएगी गर्मी, राजस्थान में पारा 40 डिग्री के पार

नईदिल्ली,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। पश्चिमी विक्षोभ से पिछले कुछ दिनों से मैदानी इलाकों में गर्मी से मिली राहत अब तापमान में इजाफा होने से खत्म हो जाएगी। पहाड़ों पर बारिश से तापमान सामान्य रहेगा, लेकिन मैदानों में पारा चढऩे से लोगों को पसीने छूटने वाले हैं।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिम में अगले 2 दिनों में तापमान 2-3 डिग्री, पश्चिम और पूर्वोत्तर हिस्सों में अगले 4-5 दिनों में 4-6 डिग्री के अलावा मध्य में 2-4 डिग्री बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में 25 और 26 मार्च को मौसम साफ रहने से तापमान में बढ़ोतरी होने के आसार हैं। प्रदेश में अगले 4 दिनों में पारा 4-6 डिग्री तक ऊपर जा सकता है।

इसी के साथ राजस्थान में भी भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर और चित्तौडग़ढ़ में तापमान 40 डिग्री के पार जाने से लू के हालात बने हुए हैं।

अगले 2 दिनों तक उत्तर-पूर्वी हवाओं से तापमान में उतार-चढ़ाव होगा।

उत्तराखंड में शुष्क मौसम होने के चलते तापमान में 3-4 डिग्री तक बढ़ गया है। 27 और 28 मार्च को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में गर्मी बढऩे लगी है, जबकि पहाड़ों पर सुबह-शाम ठंड का अहसास हो रहा है। आज लाहुल स्पीति और चंबा में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।

जम्मू-कश्मीर के अधिकांश इलाकों में बादल छाए रहने के साथ पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी या बारिश हो सकती है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में आज मौसम साफ रहेगा, जिससे अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम 17 डिग्री तक जा सकता है।

26 और 27 मार्च को गर्मी के तेवर तीखे होंगे। 27 मार्च को दोपहर बाद तेज हवा चल सकती है। दोनों दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।

इसके बाद 28 से 30 मार्च तक बादल छाने और 20-30 किमी/घंटा की हवा चलने से तापमान में थोड़ी कमी आएगी।

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सड़क दुर्घटनाओं के कारण जीडीपी में तीन प्रतिशत का नुकसान: नितिन गडकरी

नई दिल्ली, 25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि हम सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत का नुकसान हो रहा है।

नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजधानी में सड़क सुरक्षा के लिए तकनीकी हस्तक्षेप : भारत-अमेरिका साझेदारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं हमारी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक हैं। हर साल देश में 4,80,000 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें 1,88,000 लोगों की मौत होती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, जान गंवाने वाले लोगों में 18 से 45 वर्ष की आयु के 66 प्रतिशत लोग होते हैं। युवा, प्रतिभाशाली, इंजीनियरिंग स्नातक, मेडिकल छात्रों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। वहीं, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का यह आंकड़ा 10,000 है।

अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं स्कूलों के आसपास वाले इलाकों में होती हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हम इन दुर्घटनाओं के साथ अपनी जीडीपी का तीन प्रतिशत खो रहे हैं।

उन्होंने सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय परिदृश्य में एक समस्या यह है कि हम डीपीआर सलाहकार के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिसमें कभी-कभी लागत और बचत आदि पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सकता है। इन सुधारों के साथ मौजूदा सरकार ने सड़क हादसों में मौत के आंकड़ों में 48 प्रतिशत और सड़क दुर्घटनाओं में 49 प्रतिशत की कमी की है।

उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को 100 प्रतिशत सही बनाने के लिए सड़क इंजीनियरिंग में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब दुर्घटनाओं के आंकड़े में 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए उनके सही कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों का लाभ उठाते हुए, अब हम बेहतरीन यातायात प्रणाली के संबंध में बहुत सारे कदम उठा रहे हैं। इसके कार्यान्वयन के संबंध में बहुत सारे निर्णय लिए गए हैं।

गडकरी ने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए स्कूली शिक्षा में यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी देने की जरूरत पर जोर दिया।

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कठुआ में तीसरे दिन भी सेना का ऑपरेशन जारी

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

कठुआ,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के सानियाल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों का आतंकियों के खिलाफ अभियान तीसरे दिन भी जारी है. सुरक्षा बल, जिनमें सेना, पुलिस स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और अन्य सुरक्षा बल शामिल हैं, 5 से 6 आतंकियों की तलाश में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.

इस ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को भी शामिल किया गया है. सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने अपने ठिकाने बदले हैं, लेकिन सेना के जवान पूरे इलाके को घेरे हुए हैं और उन्हें पकडऩे के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

यह अभियान रविवार शाम 6:30 बजे हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद शुरू हुआ था. लगभग तीन घंटे तक चली यह मुठभेड़ कम दृश्यता के कारण रोक दी गई थी. सुबह होते ही ऑपरेशन फिर से शुरू हुआ और आज यह तीसरे दिन भी जारी है. इलाके में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जो आतंकियों को पकडऩे के लिए कोई भी कसर नहीं छोडऩा चाहते.

सुरक्षाबलों को अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगभग 5 किलोमीटर दूर सान्याल गांव में 4-5 आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी. इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया. बताया जा रहा है कि आतंकियों ने एक पति-पत्नी को बंधक बना लिया था. मौका मिलने पर महिला भागने में सफल रही, हालांकि आतंकियों ने उसे गोली मारने की धमकी दी. महिला के भागने के बाद, उसका पति भी आतंकियों के चंगुल से भाग निकला. इस घटना में एक बच्ची को मामूली चोटें आई हैं.

इस पूरे ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी नलिन प्रभात स्वयं ग्राउंड से मॉनिटर कर रहे हैं, वे खुद भी जवानों के साथ इस ऑपरेशन में शामिल हुए हैं. ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है. घटनास्थल से चार एम-4 राइफल मैगजीन, 4 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस पैक, बुलेटप्रूफ जैकेट, कई जोड़ी जूते, स्लीपिंग बैग और ट्रैक सूट बरामद हुए हैं. इससे आतंकियों की तैयारी और उनके नापाक मंसूबों का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी की याचिका खारिज की

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड

नई दिल्ली,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में पूर्व उत्तर प्रदेश मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. मधुमिता शुक्ला, जो उस समय गर्भवती थीं, की 9 मई 2003 को लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने कवि की बहन निधि शुक्ला को इस मामले में संबंधित उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश दिया. पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से यह भी पूछा कि कौन से मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है, और कहा कि राज्य के फैसले को चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.

अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को उत्तर प्रदेश कारागार विभाग द्वारा 2018 की छूट नीति के अनुसार समयपूर्व रिहाई का आदेश दिया गया था, क्योंकि उन्होंने 16 साल की सजा पूरी कर ली थी.

यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि अमरमणि त्रिपाठी उस समय मंत्री थे और मधुमिता शुक्ला के साथ उनके संबंध बताए जाते हैं.

त्रिपाठी को सितंबर 2003 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में अक्टूबर 2007 में देहरादून की एक अदालत ने उन्हें और उनकी पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. नैनीताल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने बाद में सजा को बरकरार रखा. इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी.

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दिल्ली से बेंगलुरु जा रही फ्लाइट की ईंधन कम होने के कारण चेन्नई में इमरजेंसी लैंडिंग?

चेन्नई,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली के डोमेस्टिक एयरपोर्ट से हर रोज भारत के विभिन्न हिस्सों के लिए 100 से अधिक उड़ानें संचालित हो रही हैं. इनमें कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट भी शामिल है, जिसने सोमवार दोपहर दिल्ली से 172 यात्रियों के साथ उड़ान भरी.

उड़ान भरने के बाद बीच हवा में उड़ते समय पायलट को एहसास हुआ कि विमान में ईंधन कम हो रहा है. इसको लेकर उसने हवाई अड्डे के कंट्रोल रूम को सूचित किया और कहा कि इससे विमान को बेंगलुरु में उतारने में समस्या होगी. इसके बाद कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने तुरंत विमान को चेन्नई की ओर मोडऩे और वहां ईंधन भरने का आदेश दिया.

इसके बाद पायलट ने विमान को कल दोपहर करीब 1 बजे चेन्नई एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार और उसमें ईंधन भरा, जिस समय एयर इंडिया के विमान में ईंधन भरा जा रहा था, उस समय सभी यात्री विमान में बैठे हुए थे. इसके बाद विमान दोपहर करीब 2 बजे चेन्नई एयरपोर्ट से रवाना हुआ. यह दोपहर करीब 3 बजे बेंगलुरु पहुंचा.

वहीं, विमान के बेंगलुरु पहुंचने में देरी होने से यात्री नाराज हो गए. हालांकि, यात्रियों सहित सभी ने विमान में ईंधन कम होने का एहसास होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के लिए पायलट की सराहना की.

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आपदा प्रबंधन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, 10 सालों में बेहतरी काम हुआ

संसद में बोले गृह मंत्री अमित शाह 

नई दिल्ली ,25 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। आपदा प्रबंधन में आर्थिक सहायता देने में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन के मामले में राष्ट्रीय ही नहीं क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा है तथा इसे दुनिया भी यह स्वीकार कर रही है.

उच्च सदन में शाह ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसमें सत्ता के केंद्रीयकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में इस विधेयक में न केवल प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने बल्कि पहले से तैयारी करने, अभिनव प्रयासों वाले और सभी की भागीदारी वाले रवैये को अपनाने पर जोर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा के जोखिमों को घटाने के लिए विश्व के समक्ष जो 10 सूत्री एजेंडा रखा है, उसे 40 देशों ने अपना लिया है और उसका पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विधयक में न केवल राज्य सरकारों बल्कि आम लोगों की भागीदारी का प्रावधान किया गया है.

शाह ने कहा, ”पिछले दस सालों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, हम राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरे हैं, यह पूरी दुनिया स्वीकार करती है. भारत की सफलता गाथा को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सफलता गाथा सरकार की नहीं पूरे देश की है.

शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन की लड़ाई संस्थाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ-साथ जवाबदेह बनाये बिना नहीं लड़ी जा सकती है. उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है.

उन्होंने कहा कि आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है. उन्होंने कहा कि आपदा रोकने के लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जाए और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए. उन्होंने वेदों का जिक्र किया और कहा कि इसमें न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष तक को बचाने की बात कही गयी है. गृह मंत्री ने सृष्टि को बचाने के लिए भारत द्वारा प्राचीन समय से किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए हड़प्पा सभ्यता का भी उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि सदस्यों ने सत्ता के केंद्रीयकरण को लेकर चिंता व्यक्त की है किंतु यदि विधेयक को ध्यान से देखा जाए तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है जो राज्य सरकार के तहत आता है. शाह ने कहा कि विधेयक में कहीं भी संघीय ढांचे को नुकसान करने की संभावना ही नहीं है.

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‘सिकंदर’ का ट्रेलर जारी….. 30 मार्च को रिलीज होगी फिल्म……!

फिल्मी हलचल

अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित एक्शन थ्रिलर ‘सिकंदर’ का धमाकेदार ट्रेलर प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला के द्वारा जारी कर दिया गया है।

25.03.2025  –  3 मिनट 39 सेकंड के इस ट्रेलर में सलमान खान ‘सिकंदर’ के रोल में नज़र आ रहे हैं, जो एक मिशन पर निकला ऐसा शख्स, जिससे दुश्मनों का बच पाना नामुमकिन लगता है और यही चीज इस फिल्म को एक जबरदस्त सिनेमैटिक एक्सपीरियंस बनाने का वादा करती है। ट्रेलर एकदम परफेक्ट बैलेंस दिखाता है, जहां हाई-स्टेक ड्रामा है, दिल छू लेने वाले इमोशंस हैं और धुआंधार एक्शन है। सलमान खान अपने हर अवतार में छा गए हैं—चाहे वो ग्रिटी वन-लाइनर्स हों या इंटेंस फाइट सीन्स, हर सीन में वो फुल ऑफर्स में नजर आते हैं।

ये ट्रेलर साफ-साफ बता देता है कि सिकंदर एक मास एंटरटेनर है, जो बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने वाला है। वहीं, रश्मिका मंदाना भी ट्रेलर में पूरी तरह छा गई हैं। उनकी एफर्टलेस चार्म और स्क्रीन प्रेजेंस जबरदस्त है, जो हर सीन में ध्यान खींच लेती है। खूबसूरत विजुअल्स के साथ उनकी नैचुरल ब्यूटी इस फिल्म के ट्रेलर में अलग ही ग्लो लाती है।

इस फिल्म के निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस, जो गजनी (2008) जैसी जबरदस्त फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, ‘सिकंदर’ में भी अपना सिग्नेचर स्टाइल लेकर आए हैं। ‘सिकंदर’ में फैमिली ड्रामा, रोमांस, एक्शन और सस्पेंस का जबरदस्त मिक्स है, जो हर तरह के दर्शकों को पसंद आने वाला है। यह फिल्म 30 मार्च को देश के सभी सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

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एक्सेल एंटरटेनमेंट की एक्शन थ्रिलर ‘ग्राउंड जीरो’ 25 अप्रैल को होगी रिलीज………’सिकंदर’ के साथ अटैच हुआ टीजर……….!

एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्मित और तेजस देवस्कर द्वारा निर्देशित एक्शन थ्रिलर ‘ग्राउंड जीरो’ के टीज़र को सलमान खान की नवीनतम फिल्म ‘सिकंदर’ के साथ मेकर्स ने अटैच कर दिया है। BSF के वीरों की अनसुनी कहानी बयां करती फिल्म ‘ग्राउंड जीरो’ में अभिनेता इमरान हाशमी एक दमदार किरदार में नज़र आने वाले हैं।

फिल्म की कहानी एक BSF डिप्टी कमांडेंट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दो साल तक एक हाई-स्टेक्स नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट की जांच करता है। एक ऐसी अनकही लड़ाई से प्रेरित, जो सालों तक जनता की नज़रों से छुपी रही, ये फिल्म BSF के अब तक के सबसे बेहतरीन ऑपरेशन को दिखाती है, जिसे 2015 में आधिकारिक तौर पर सम्मानित भी किया गया था।

जबरदस्त एक्शन, गहरे इमोशंस और देशभक्ति से भरी ग्राउंड जीरो हिम्मत, बलिदान और उन अनदेखी चुनौतियों को सामने लाने वाली है, जिनसे हमारे जवान रोज़ाना जूझते हैं।

25 अप्रैल को रिलीज़ हो रही ये फिल्म जबरदस्त एक्शन और इमोशंस से भरी होने वाली है, जो दर्शकों को एक इंटेंस सिनेमैटिक एक्सपीरियंस देने का वादा करती है। हाई-ऑक्टेन एक्शन और इमोशन से भरपूर ये कहानी सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन निजी बलिदानों को भी दिखाएगी, जो सरहद पर तैनात हमारे जवान देते हैं।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में सरकार ने अब तक झुग्गीवासियों को वितरित किए 90 लाख घर

नई दिल्ली ,24 मार्च (एजेंसी)। सरकार द्वारा सोमवार को संसद में कहा गया कि 3 मार्च 2025 तक प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत शहरों में झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों को 90.60 लाख घर दिए गए हैं।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि पीएमएवाई-यू के तहत मंत्रालय द्वारा कुल 118.64 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 112.46 लाख मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 3 मार्च 2025 तक 90.60 लाख मकान पूरे हो चुके हैं या लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि फंडिंग पैटर्न और कार्यान्वयन पद्धति में बदलाव किए बिना स्वीकृत घरों को पूरा करने के लिए योजना की अवधि 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दी गई है।

राज्य मंत्री ने कहा कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) 25 जून, 2015 से पीएमएवाई-यू के तहत केंद्रीय सहायता प्रदान करके राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता कर रहा है, जिससे देश भर में मलिन बस्तियों सहित शहरी क्षेत्रों में पक्के मकान उपलब्ध कराए जा सकें।

राज्य मंत्री साहू ने कहा कि पीएमएवाई-यू के कार्यान्वयन के नौ वर्षों के अनुभवों से सीख लेकर मंत्रालय ने इस योजना को नया रूप दिया है और एक करोड़ अतिरिक्त पात्र लाभार्थियों के लिए 1 सितंबर, 2024 से पीएमएवाई-यू 2.0 ‘सभी के लिए आवास’ मिशन शुरू किया है।

राज्य मंत्री ने कहा कि अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए हैं और ऐसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 6.77 लाख घरों की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 1.39 करोड़ परिवारों के कुल 6.54 करोड़ लोग झुग्गियों में रह रहे हैं। झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले परिवारों का यह आंकड़ा 2011 में की गई अंतिम जनगणना पर आधारित है।

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वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का कार्य निर्णायक दौर में : राष्ट्रपति मुर्मू

नई दिल्ली ,24 मार्च(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत जय जोहार के साथ की।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में लोकतंत्र के इस उत्सव में आप सबके साथ शामिल होकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के असाधारण मार्गदर्शन में संपन्न हुई थी।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम सब उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनके सम्मान में सादर नमन करते हैं। आप सबके बीच आकर मुझे ओडिशा विधानसभा में विधायक के रूप में अपने समय की यादें ताजा हो गई हैं।

मैं अपने अनुभव से यह कह सकती हूं कि विधायक की जिम्मेदारी निभाना, जन-सेवा की भावना से प्रेरित व्यक्ति के लिए बड़े सौभाग्य की बात होती है। विधानसभा, राज्य के निवासियों की आकांक्षाओं को व्यक्त करती है और उन्हें कार्यरूप देती है। विधानसभा राज्य की संस्कृति से प्रभावित भी होती है और उसे दिशा भी प्रदान करती है।

रजत जयंती वर्ष समारोह के तहत विधानसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का कार्य अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच गया है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग विकास के मार्ग पर आगे बढऩा चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ को उग्रवाद से पूर्णतया मुक्त करने के प्रयास में आप सब शीघ्र ही सफलता प्राप्त करेंगे और राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेंगे।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा ने लोकतांत्रिक परंपराओं के सर्वोच्च मानदंड स्थापित किए हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सदन की कार्यवाही के दौरान वेल में आने वाले सदस्यों को स्वत: निलंबित करने का असाधारण नियम बनाया है और इसका पालन किया है।

उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि पिछले 25 वर्षों के दौरान यहां के विधानसभा में कभी भी मार्शल का उपयोग नहीं करना पड़ा। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने न केवल देश के लिए बल्कि विश्व की सभी लोकतांत्रिक प्रणालियों के समक्ष उत्कृष्ट संसदीय आचरण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति ने महिला विधायकों से सभी महिलाओं का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब वे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं को प्रोत्साहित करेंगी, तब सभी का ध्यान उन महिलाओं की ओर जाएगा और उनके विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

चाहे वे शिक्षक हों या अधिकारी, समाजसेवी हों या उद्यमी, वैज्ञानिक हों या कलाकार, मजदूर हों या किसान, अक्सर हमारी बहनें दिन-प्रतिदिन की घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए और कठिन संघर्ष करते हुए बाहरी दुनिया में अपना स्थान बनाती हैं। जब सभी महिलाएं एक-दूसरे को सशक्त बनाएंगी, तो हमारा समाज और अधिक मजबूत और संवेदनशील बनेगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की असीम संभावनाएं हैं। सीमेंट, खनिज उद्योग, इस्पात, एल्युमीनियम और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में विकास के भरपूर अवसर हैं। यह खूबसूरत राज्य हरे-भरे जंगलों, झरनों और अन्य प्राकृतिक सौगातों से भरपूर है।

उन्होंने राज्य के नीति निर्माताओं से विकास के पथ पर आगे बढ़ते हुए पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को आधुनिक विकास की यात्रा से जोडऩे की जिम्मेदारी भी नीति निर्माताओं की है।

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सुनी आमजन की समस्या

अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के दिए निर्देश

जयपुर ,24 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर जनसुनवाई की। उन्होंने वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति से आत्मीयता से मुलाकात की तथा उनकी समस्याओं को सुना। शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं के शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी, सार्वजनिक निर्माण एवं चिकित्सा सहित विभिन्न विभागों की आमजन से संबंधित समस्याएं सुनी तथा कई समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर परिवादी को राहत दी। जनसुनवाई के दौरान आमजन ने राज्य बजट वर्ष 2025-26 में दी गई सौगातों के लिए श्री शर्मा का आभार जताया तथा दुपट्टा ओढ़ाकर उनका अभिनन्दन किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित रहे।
बबीता कुमारी को चिकित्सा सहायता, गायत्री को कैंसर की दवा
जनसुनवाई में बालोतरा की बबीता कुमारी ने मुख्यमंत्री को दांतों से संबंधित बीमारी से अवगत करवाया तथा शीघ्र इलाज के लिए निवेदन किया। इस पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बबीता कुमारी को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
पाली से आई कैंसर रोग से ग्रसित गायत्री ने कैंसर की दवा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया। इस पर शर्मा ने गायत्री को नि:शुल्क कैंसर की दवा उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। बबीता और गायत्री अपनी परिवेदनाओं के त्वरित निस्तारण से बेहद खुश नजर आई और मुख्यमंत्री को बार-बार धन्यवाद दिया।

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बीमारू राज्य से अर्थ शक्ति बनकर उभरा यूपी : सीएम योगी

लखनऊ ,24 मार्च(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के आठ वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उनके साथ दोनों उप मुख्यमंत्री, मंत्री और संगठन के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले यूपी को बीमारू राज्य माना जाता था। लेकिन आज अर्थ शक्ति बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पहले दंगे व आतंक को लोगों ने देखा। आठ वर्ष पहले यूपी बीमारू राज्य माना जाता था। आज वही प्रदेश अर्थ शक्ति के रूप में उभरा है। पहले यूपी विकास का ब्रेकर माना जाता था। आज वही प्रदेश विकास का उदाहरण बनकर उभरा है। प्रदेश वही है, जनता वही है, सिस्टम वही है, सिर्फ सरकार बदलने मात्र से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति क्या थी, आप सभी जानते हैं कि यहां की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर क्या था, यह किसी से छिपा नहीं है। यही प्रदेश है, जहां किसान आत्महत्या करता था। युवाओं के सामने पहचान का संकट था। इसी प्रदेश में दंगा व अराजकता था। इन्हें प्रदेश ने झेला था। प्रदेश और तंत्र वही है, केवल सरकार बदलने से व्यापक बदलाव कैसे होता है, इसको महसूस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया गया, उसकी वजह से जो प्रदेश बीमारू था, आज वही प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन के रूप में जाना जा रहा है। आज प्रत्येक सेक्टर में प्रदेश देश के विकास में ब्रेक थ्रू के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी प्राचीन समय से ही कृषि प्रधान रहा। हमारे पास प्रकृति की ओर से प्रचुर मात्रा में अवसर था, हम इसको आगे बढ़ सकते थे। 2017 के पहले किसान आत्महत्या करता था, कृषि सेक्टर में एक वीरानी छाई हुई थी। आज व्यापक बदलाव हुए, कृषि विकास दर 13.5 फीसदी से अधिक हुई, इससे प्रदेश के जीडीपी में 28 फीसद की बढोत्तरी हुई, इसकी शुरुआत हमारी पहली कैबिनेट ने किया था। 36 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी की गई।

उन्होंने कहा कि 2017 से 2023 तक हमने ढाई गुना ज्यादा गेहूं की खरीदारी की। 43 हजार 424 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसी प्रकार धान की खरीदारी के लिए 88 हजार 746 करोड़ डीबीटी के माध्यम से दिया गया। सरकार ने 32 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को बाढ़ से बचाने का कार्य किया गया।

योगी ने कहा कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश के लिए 7700 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख 50 हजार से अधिक गोवंश का संरक्षण सरकार कर रही है, साथ ही सहभागिता योजना के माध्यम से 1 लाख 5 हजार पशुपालकों को 1 लाख 63 हजार गोवंश उनकी सुपुर्दगी में दिया गया है। जिसके लिए सरकार 1500 रुपये प्रति गोवंश प्रति माह कर रही है।

इस मौके पर उन्होंने सरकार के आठ वर्षों की उपलब्धियों पर जारी एक पुस्तिका का विमोचन किया। इसके बाद सरकार की सेवा, सुरक्षा और सुशासन नीति पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की।

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केंद्र ने राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के मानकों में छूट दी

भीलवाड़ा 24 March, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । राजस्थान में अत्यधिक गर्मी और बारिश के चलते गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए निर्धारित मानकों में कुछ छूट दी है। इससे किसानों को राहत मिलेगी ।

भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के निर्णय के अनुसार, रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए राजस्थान के किसानों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों में ढील प्रदान की गई है। राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया।

अत्यधिक गर्मी और बारिश से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है जिससे गेहूं के दाने सिकुड़ने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।सरकारी खरीद में गेहूं के सिकुड़े या टूटे दाने पहले 6 प्रतिशत तक मान्य थे, इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है।

क्षतिग्रत व आंशिक क्षतिग्रत दानों का अंश संयुक्त रूप से 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।चमकविहीन (लस्टर लॉस) दाने 10 प्रतिशत तक मान्य होंगे।इन मानको की छूट पर किसी प्रकार की कटौती सरकार द्वारा नहीं की जाएगी।

मानकों में रियायत के तहत खरीदे जाने वाले गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखने के निर्देश दिए गये हैं। इस प्रकार खरीदे गए गेहूं को राज्य से बाहर नहीं भेजा जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर सामान्य गुणवत्ता के गेहूं से पहले निकाला जाएगा।इस साल केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।

इस पर राजस्थान सरकार ने 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया है। इस तरह राजस्थान के किसान गेहूं की फसल 2575 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर बेच सकेंगे।

भारतीय खाद्य निगम के मण्डल प्रबन्धक श्री राकेश कुमार ने बताया कि जिले में भारतीय खाद्य निगम के छ: खरीद केंद्र कृषि उपज मंडी भीलवाड़ा,शाहपुरा,जहाजपुर,मांडलगढ़ कोटडी एवं गुलाबपुरा है।

गेहूं की खरीद ई प्रोक्योरमेंट मोडुयल के माध्यम से की जाएगी किसान अपना पंजीकरण पोर्टल mspproc.rajasthan.gov.in ,ईमित्र,अटल सेवा केंद्र एवं भारतीय खाद्य निगम के मंडियो मे तैनात गुणवत्ता निरीक्षक के द्वारा किसान के जनाधार के माध्यम से निःशुल्क करवा सकते हैं किसान गेहूं बेचते समय पंजीकरण पोर्टल से टोकन जारी कराने से पहले जन आधार कार्ड बैंक अकाउंट में यदि मिसमैच है तो त्रुटि को ठीक करवा ले।

जमीन की गिरदावरी संबंधी विसंगतियों को भी ठीक करवा ले न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल है जो कि गत वर्ष से 150 रुपए अधिक है इसके अतिरिक्त राजस्थान सरकार ने 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की है कुल मिलाकर मूल्य ₹2575 प्रति क्विंटल का भुगतान किसान को किया जाएगा।

उपज का भुगतान भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहु तुलाई के 24 से 48 घंटे में कर दिया जाएगा अगर किसी को कोई समस्या या कठिनाई आ रही हो तो भारतीय खाद्य निगम के मण्डल प्रबन्धक,नोडल अधकरी या मंडी मे तैनात गुणवत्ता निरीक्षक से संपर्क कर सकते है ।

अब तक मांडलगढ़ मे 242, कोटडी मे 59, भीलवाड़ा मे 28, जहाजपुर मे 28 ,शाहपुरा मे 18 एवं गुलाबपुरा मे 24 किसानो ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है।

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राजीव चंद्रशेखर चुने गए केरल भाजपा के नए अध्यक्ष

शशि थरूर ने दी बधाई

नई दिल्ली ,24 मार्च(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भाजपा की केरल इकाई का नया अध्यक्ष चुना गया है। सोमवार को भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रह्लाद जोशी ने पार्टी की राज्य परिषद की बैठक के दौरान यह घोषणा की।

वहीं, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और अपने लोकसभा प्रतिद्वंद्वी राजीव चंद्रशेखर को भाजपा की केरल राज्य इकाई का नया अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भाजपा के नवनिर्वाचित केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को बधाई और शुभकामनाएं। एक बार फिर आमने-सामने आने की उम्मीद है।

राजीव चंद्रशेखर को 2024 के लोकसभा चुनावों में तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद शशि थरूर से हार का सामना करना पड़ा था।

राजीव 16,077 मतों के अंतर से हार गए, फिर भी उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया तथा 35.52 प्रतिशत वोट प्राप्त किए, जो इस सीट पर पार्टी के लिए अब तक का सर्वाधिक वोट शेयर है, तथा ओ. राजगोपाल द्वारा स्थापित 32.32 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व युवाओं के बीच चंद्रशेखर की अपील और विकास पर उनके फोकस पर दांव लगा रहा है, ताकि केरल में पार्टी की संभावनाओं को मजबूत किया जा सके, खासकर स्थानीय चुनावों के मद्देनजर।

प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार चंद्रशेखर ने औपचारिक रूप से एक समारोह में कार्यभार संभाला, जिसमें निवर्तमान अध्यक्ष के सुरेंद्रन और राज्य प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर सहित वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए। पार्टी का झंडा सौंपते हुए सुरेंद्रन ने कहा कि भाजपा ने पिछले एक दशक में केरल में अभूतपूर्व विकास देखा है और विश्वास व्यक्त किया कि चंद्रशेखर के नेतृत्व में पार्टी और मजबूत होगी।

कर्नाटक से तीन बार राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते है। वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं। उन्होंने मोदी सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास और उद्यमिता, और जल शक्ति जैसे प्रमुख विभागों को संभाला था।

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डॉ. रवि भगत ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में पदभार संभाला

चंडीगढ़ ,24 मार्च (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  शानदार सेवाएं निभाने वाले आई.ए.एस. अधिकारी डॉ. रवि भगत ने आज अपने कार्यालय में पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।

गौरतलब है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. रवि भगत ने राज्य सरकार में विभिन्न पदों पर सेवा दी है। वर्ष 2006 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी डॉ. रवि भगत हमेशा आम जनता को नागरिक-केंद्रित सेवाओं का लाभ देने के लिए नवाचार लागू करने के प्रति तत्पर रहते हैं। वे सार्वजनिक सेवाओं के प्रति अपनी सक्रिय और जवाबदेह कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

‘एम.एस.पी. ऑफ जियोपॉलिटिक्स’ में डॉक्टरेट डॉ. रवि भगत ने वर्ष 2008-2009 में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट मलोट के रूप में प्रशासनिक सेवाओं की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने फरीदकोट, अमृतसर और लुधियाना में डिप्टी कमिश्नर के रूप में कार्य किया।

उन्होंने पंजाब शहरी विकास प्राधिकरण और गमाडा के मुख्य प्रशासक, सचिव मंडी बोर्ड, सी.ई.ओ. ई-गवर्नेंस, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क, सचिव नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2021 से अब तक वे मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव के रूप में अपनी सेवाएं कुशलता और प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं।

इस अधिकारी को स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गवर्नेंस के क्षेत्रों में कई नवीन और प्रभावशाली योजनाएं लागू करने का श्रेय जाता है।

डॉ. रवि भगत द्वारा कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में सार्वजनिक सेवाओं को सुचारू बनाकर लोगों की सुविधा के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों की सभी ने सराहना की थी। इस युवा अधिकारी को अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं।

इसी तरह, उनकी अगुवाई में वर्ष 2015 में एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था, जब 10,000 विद्यार्थियों ने नशा विरोधी अभियान में भाग लिया था। वर्ष 2018 में एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तब बना, जब 82 देशभक्तों ने शांति के लिए एक गीत गाया था।

आज अपने कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की जन-हितैषी और विकासोन्मुखी नीतियों को लागू करना उनकी प्राथमिकता होगी।

डॉ. रवि भगत ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक-केंद्रित सेवाओं का लाभ जनता तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने को सुनिश्चित किया जाएगा।

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