X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “जन औषधि दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के सभी लाभार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। मोदी सरकार की इस पहल ने देश के गरीबों को दवाइयों के आर्थिक बोझ से राहत दिलाने और जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। आज देश में लगभग 18,000 जन औषधि केंद्र गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ती व सुलभ दवाइयाँ उपलब्ध करा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से देशवासियों के ₹40 हजार करोड़ से अधिक की बचत हो चुकी है।”
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जन औषधि दिवस 2026 पर शुभकामनाएं दीं
श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के बदलाव लाने वाले असर की झलक भी साझा की।
प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;
“#JanAushadhiDiwas2026 पर, उन सभी को मेरी शुभकामनाएं जिन पर प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का अच्छा असर हुआ है। यह पहल यह सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती है कि हर नागरिक को सस्ती कीमतों पर अच्छी दवाइयां मिलें। जन औषधि केंद्रों के ज़रिए, अनगिनत परिवार स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च बचा रहे हैं और सही उपचार करवा रहे हैं।”
#JanAushadhiDiwas2026”
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मानेकशॉ सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह की शोभा बढ़ाएंगी
इस कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, श्रीमती सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में किया जाएगा।
विश्व स्तर पर 8 मार्च को मनाए जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान का उत्सव मनाता है। यह दिवस जेंडर इक्वालिटी, सुरक्षा, गरिमा और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को पुन: दोहराने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव, श्री अनिल मलिक के स्वागत भाषण के साथ होगा। इसके पश्चात, विभिन्न ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की कार्यबल में बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करेंगी और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से बनाई गई सरकार की प्रमुख नीतियों एवं योजनाओं का प्रदर्शन करेंगी।
इस अवसर पर, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु अपना मुख्य संबोधन देंगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी भी समारोह को संबोधित करेंगी और देश में महिला-नेतृत्व वाले विकास को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालेंगी।
उद्घाटन समारोह के पश्चात, कार्यक्रम में दो पैनल चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। पहली पैनल चर्चा का विषय “श्रम संहिता – महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा” होगा, जबकि दूसरी पैनल चर्चा का विषय “उद्यमी के रूप में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं” होगा।
इस कार्यक्रम में 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों की लगभग 1,000 महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल और अन्य क्षेत्रों की महिला प्रतिनिधि शामिल होंगी, जो पूरे देश में महिलाओं के विविध योगदानों और महिला-नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने के प्रति भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं।
इस कार्यक्रम को नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से लाइव वेबकास्ट के जरिए भी देखा जा सकता है:
कर्तव्य पथ पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होगी ‘शक्ति वॉक-#SheLeadsBharat’
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जो 8 मार्च को वैश्विक रूप से मनाया जाता है, जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और योगदान का उत्सव मनाता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, गरिमा और सशक्तिकरण की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दोहराता है। इसी भावना में, शक्ति वॉक का आयोजन प्रगतिशील और समावेशी भारत को आकार देने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करने के लिए किया जा रहा है।
शक्ति वॉक का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व और योगदान का उत्सव मनाना, महिलाओं की सुरक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करना, महिलाओं के लाभार्थी प्रमुख योजनाओं और पहलों को प्रदर्शित करना, विविध पृष्ठभूमि से महिलाओं के बीच एकजुटता और सामूहिक गौरव को बढ़ावा देना तथा राष्ट्रीय प्रगति में महिला-नेतृत्व वाले विकास के संदेश को प्रोत्साहित करना है।वॉक सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक चलेगी, जो कार्तव्य पथ पर इंडिया गेट से विजय चौक तक लगभग 2 किलोमीटर के खिंचाव को कवर करेगी।
इस आयोजन में 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों से लगभग 3000 महिलाओं के भाग लेने की उम्मीद है, जिसमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल, सरकारी संस्थानों, उद्योग और जमीनी स्तर के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिभागी #SheLeadsBharat थीम के तहत एक साथ चलेंगी, जो प्रगतिशील और समावेशी भारत को आकार देने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करेगी।भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की महिला अधिकारियों को भी भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की भी उम्मीद है।वॉक का नेतृत्व महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद, विधायक तथा विविध क्षेत्रों से अन्य विशिष्ट महिला नेता और प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।कार्यक्रम की शुरुआत गरिमामंडलों के संक्षिप्त संबोधनों से होगी, उसके बाद वॉक का धार्मिक ध्वजारोहण किया जाएगा।कार्तव्य पथ पर महिलाओं के लिए प्रमुख सरकारी योजनाओं को प्रदर्शित करने वाली स्थापनाएं तथा विविध क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इंडिया गेट पर एक क्यूरेटेड सांस्कृतिक प्रस्तुति महिला भावना और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव मनाएगी। प्रदर्शन में डोल्लू कुणित, कलारीपयट्टु, श्रीनगरिमेलम, रणचंडी और घूमर शामिल होंगे, जो भारत भर में महिलाओं की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और शक्ति का प्रतिनिधित्व करेंगे।इंडिया गेट पर एक क्यूरेटेड सांस्कृतिक प्रस्तुति महिला भावना और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव मनाएगी, जो वंदे मातरम की सामूहिक प्रस्तुति से शुरू होगी। “शक्ति वॉक – #SheLeadsBharat” संदेश वाले गुब्बारे भी छोड़े जाएंगे।ये उत्सव विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देते हैं।
चुनाव आयोग ने केरल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनावी तैयारियों की समीक्षा की
- मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर आज कोच्चि में आगामी केरल विधानसभा चुनावों को लेकर चुनावी तैयारियों की विस्तृत और व्यापक समीक्षा की।
- समीक्षा के दौरान आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों जैसे आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राज्य की मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल जैसे कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस (एम) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी से सुझाव मांगे।
- अधिकांश राजनीतिक दलों ने केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन के लिए भारत निर्वाचन आयोग की सराहना की। कुछ दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संचालन में बीएलओ द्वारा किए गए अच्छे काम की प्रशंसा भी की।
- कुछ राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि चुनाव की तारीखें तय करते समय आगामी स्थानीय त्योहारों को ध्यान में रखा जाए।
- कुछ पार्टियों ने आयोग से बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
- राजनीतिक दलों ने आयोग से चुनाव के दौरान धनबल के इस्तेमाल और शराब/मुफ्त चीजों के वितरण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया।
- कुछ दलों ने चुनावी माहौल को दूषित करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री के उपयोग पर चिंता जताई।
- मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर का संचालन अत्यंत पारदर्शी तरीके से किया गया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और साथ ही कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी प्रकार के समावेशन/हटाने/परिवर्तन के लिए फॉर्म 6/7/8 अभी भी दाखिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आरपी अधिनियम 1950 के अनुसार डीएम/सीईओ के पास अपील दायर की जा सकती है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने सभी राजनीतिक दलों को आश्वासन दिया कि चुनाव कानून के अनुसार निष्पक्ष, स्वतंत्र, न्यायसंगत और पारदर्शी तरीके से आयोजित किए जाते हैं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने राजनीतिक दलों को चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन की किसी भी शिकायत को दर्ज करने के लिए चुनाव आयोग के ईसीआईएनईटी प्लैटफॉर्म के सीवीआईजीआईएल (सीविजिल) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- सीईसी ने सभी राजनीतिक दलों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि केरल में चुनाव हमेशा की तरह न केवल पूरे देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल हो।
- बाद में आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों/नोडल अधिकारियों, आईजी, डीआईजी, डीईओ, एसपी के साथ चुनाव योजना, ईवीएम प्रबंधन, लॉजिस्टिक सम्बंधी, चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण, जब्ती, कानून व्यवस्था, मतदाता जागरूकता और संपर्क गतिविधियों के हर पहलुओं पर विस्तृत समीक्षा की।
- आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों के सभी प्रमुखों/नोडल अधिकारियों को पूर्ण निष्पक्षता के साथ कार्य करने और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से संबंधित सभी गतिविधियों पर सख्ती से नकेल कसने का निर्देश दिया।
- आयोग ने सभी मतदान अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए सभी मतदान केंद्रों पर रैंप, व्हीलचेयर और पीने के पानी सहित न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (एएमएफ) उपलब्ध कराई जाए।*************************
भारत और केन्या के बीच संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की चौथी बैठक संपन्न हुई
दोनों देशों ने पिछली जेडीसीसी बैठक के बाद हुई प्रगति पर खुशी जताई और रक्षा सहयोग को और गहरा करने और बढ़ाने के लिए पांच साल का रोडमैप बनाने पर सहमत हुए। दोनों पक्ष अपनी-अपनी नौसेना के बीच व्यवस्थित संवाद शुरू करने सहित सर्विस-टू-सर्विस जुड़ाव का दायरा बढ़ाने पर सहमत हुए।
दोनों देशों ने कस्टमाइज्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग, सैन्य अभ्यास शुरू करने, सीमा प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में क्षमता विकास, सैन्य चिकित्सा सेवाओं में सहयोग, जिसमें प्रशिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान शामिल हैं, पर बातचीत की।
बैठक के को-चेयर संयुक्त सचिव (आईसी) श्री अमिताभ प्रसाद और केन्या के असिस्टेंट चीफ ऑफ़ डिफेंस फोर्सेज मेजर जनरल फ्रेडरिक एल. लुरिया रहे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा विभाग, सेवाएं और डीजीएएफएमएस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। केन्या में भारत के राजदूत डॉ. आदर्श स्वैका और केन्या में भारत के डिफेंस अटैची भी बैठक में शामिल हुए।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज जनरल चार्ल्स कहारिरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी डिफेंस डॉ. पैट्रिक मारिरू से मुलाकात की और उन्हें चौथे भारत-केन्या जेडीसीसी के खास नतीजों के बारे में जानकारी दी। बातचीत में भारत-केन्या रक्षा सहयोग को बढ़ाने और गहरा करने पर फोकस रहा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के एनडीसी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल जुमा शी म्विन्यकाई से बातचीत की, जिन्होंने उन्हें केन्या के रक्षा बलों और आम लोगों को उनके भविष्य की बड़ी भूमिकाओं में रणनीतिक और जरूरी फैसले लेने के लिए तैयार करने में एनडीसी केन्या की भूमिका के बारे में जानकारी दी। दोनों पक्षों ने भारत और केन्या के बीच रक्षा प्रशिक्षण सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मटोंगवे नेवल बेस पर केन्या की नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो से भी मुलाकात की। उन्होंने दोनों नौसेनाओं के बीच गहरे जुड़ाव के जरिए नौसेना सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरे के हिस्से के तौर पर, प्रतिनिधिमंडल ने मटोंगवे में सीटी स्कैन रेडियोलॉजी सेंटर का दौरा किया और मिलिट्री मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सहयाक सेवाओं में चल रही कोशिशों और नेवल बेस पर केन्या नेवल ट्रेनिंग कॉलेज के बारे में जानकारी हासिल की।
संयुक्त सचिव (आईसी) ने केन्या के टैटा तवेता काउंटी में माइल 27 पर संयुक्त भारत-अफ्रीका शहीद स्मारक (कमेमोरेटिव मेमोरियल) पर भी श्रद्धांजलि दी। यह उन अनजान भारतीय और अफ्रीकी सैनिकों की बहादुरी और सबसे बड़े बलिदान को सम्मान देने के लिए किया गया, जिन्होंने पहले विश्व युद्ध के दौरान ईस्ट अफ्रीकन थिएटर में अपनी जान दी थी। इससे भारतीय और अफ्रीकी सैनिकों के बलिदान के लिए साझा सम्मान दिया गया।
भारत केन्या के साथ अपने रिश्तों को बहुत अहमियत देता है, जो ऐतिहासिक रिश्तों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच करीबी रिश्तों पर आधारित हैं।
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भारतीय सेना ने “युद्धक खेलों एवं मिथ्याभास के माध्यम से सैन्य निर्णय-निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
भारतीय सेना द्वारा आज नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में “युद्धक खेलों एवं मिथ्याभास के माध्यम से सैन्य निर्णय-निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करना – ज्ञान और उद्योग के अंतर को पाटना” विषय पर एक वॉरगेमिंग सेमिनार का आयोजन किया गया। वॉरगेमिंग डेवलपमेंट सेंटर (डब्ल्यूएआरडीईसी) द्वारा आयोजित इस सेमिनार ने रणनीतिक संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया, जिसमें भारत के वॉरगेमिंग इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, शिक्षाविद, रणनीतिक चिंतक तथा प्रौद्योगिकी उद्योग के विशेषज्ञ शामिल थे।
इस आयोजन ने समकालीन और भविष्य के बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्रों के संदर्भ में परिचालन योजना, नेतृत्व विकास तथा सैन्य सिद्धांतों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वॉरगेमिंग के बढ़ते महत्व को उजागर किया।
सम्मेलन का उद्घाटन सेना प्रशिक्षण कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि वॉरगेमिंग केवल एक प्रक्रियात्मक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह निर्णय क्षमता को परिष्कृत करने, मान्यताओं का परीक्षण करने और अनुकूलनशील सोच को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन है।
देवेंद्र शर्मा ने परिचालन तत्परता, निर्णय लेने में बढ़त और जटिल तथा गतिशील परिचालन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की भारतीय सेना की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए संस्थागत योजना प्रक्रियाओं में सिमुलेशन-आधारित विश्लेषण को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बढ़ते जोर का भी उल्लेख किया और स्वदेशी रूप से उन्नत क्षमताओं के डिजाइन, विकास एवं तैनाती हेतु भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
इस संगोष्ठी में परिचालन, शैक्षणिक और औद्योगिक दृष्टिकोणों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सैन्य परिप्रेक्ष्य से इसका मुख्य उद्देश्य बहु-क्षेत्रीय सिमुलेशन की क्षमता का प्रभावी उपयोग करना, वॉरगेमिंग को एक प्रमुख पेशेवर क्षमता के रूप में संस्थागत स्वरूप प्रदान करना और कमांडरों को गति, अनिश्चितता व तकनीकी व्यवधान से युक्त जटिल परिचालन वातावरण के लिए तैयार करना था।
शैक्षणिक दृष्टिकोण से, सम्मेलन ने मानव पूंजी के विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण, व्यवहार विज्ञान और सिस्टम इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अंतःविषय अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा वॉरगेमिंग पद्धतियों को आगे बढ़ाने हेतु उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने में विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उद्योग जगत के दृष्टिकोण से, संगोष्ठी में सैन्य–असैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करने, सह-विकास ढांचों को प्रोत्साहित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा एनालिटिक्स, वर्चुअल रियलिटी तथा ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को परिचालन दृष्टि से प्रासंगिक सिमुलेशन वातावरण में एकीकृत करने पर विशेष बल दिया गया। सम्मेलन के साथ आयोजित प्रदर्शनी में उन्नत सिमुलेशन प्लेटफॉर्म व नवोन्मेषी तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने भारतीय वॉरगेमिंग पारिस्थितिकी तंत्र की सहयोगात्मक भावना और साझा दृष्टिकोण को और सुदृढ़ किया।
सेमिनार के दौरान वॉरगेमिंग डेवलपमेंट सेंटर द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित तीन सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन भी जारी किए गए। इनमें ऑटो इवैल्यूएशन मैप मार्किंग टूल, कॉम्बैट डिसीजन रिजॉल्यूशन – वर्जन 9 तथा ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस प्रिपरेशन ऑफ द बैटलफील्ड शामिल हैं। ये एप्लिकेशन भारतीय सेना की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होंगे और सभी स्तरों के कमांडरों के लिए एक संरचित एवं प्रभावी निर्णय-सहायता ढांचा उपलब्ध कराएंगे।
एकीकृत रक्षा स्टाफ के उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला ने समापन सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने सैद्धांतिक नवाचार, विश्लेषणात्मक मूल्यांकन और नेतृत्व विकास के लिए आत्मनिर्भर तथा भविष्य के लिए तैयार वॉरगेमिंग प्रणाली के महत्व पर बल दिया। लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए. मिनवाला ने कहा कि ऐसी प्रणाली पूर्वानुमानित योजना निर्माण की क्षमताओं को विकसित करने, कमांडरों को बहु-क्षेत्रीय परिचालन चुनौतियों के लिए तैयार करने और यह सुनिश्चित करने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है कि भारत सैन्य चिंतन व तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बना रहे।
इस संगोष्ठी ने भौतिक आधुनिकीकरण के साथ-साथ बौद्धिक तैयारी के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को उजागर किया। सशस्त्र बलों, शिक्षाविदों एवं उद्योग जगत को एक साझा मंच पर लाकर इसने एक लचीली, आत्मनिर्भर व भविष्य के लिए तैयार वॉरगेमिंग प्रणाली की नींव को और सुदृढ़ किया। इससे भारत की परिचालन क्षमता को मजबूती मिली है और राष्ट्रीय सुरक्षा को बल मिला है। इस आयोजन ने तेजी से जटिल होते परिचालन परिवेशों में कमांडरों को प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करने में सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण, विश्लेषणात्मक मूल्यांकन और निर्णय-सहायता उपकरणों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, इसने सहयोगात्मक नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारत के दृढ़ संकल्प को भी प्रदर्शित किया।
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रांची के होटल में अपराधियों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग, वेटर की मौत
रांची,08.03.2026 – रांची के कुतियातु चौक स्थित होटल टीटॉस में शनिवार रात अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। अपराधियों ने होटल परिसर में घुसकर करीब तीन से चार राउंड फायर किए। इस घटना में होटल का वेटर मनीष गंभीर रूप से घायल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर बाइक पर सवार थे और उन्होंने अचानक होटल को निशाना बनाया। गोलीबारी के दौरान होटल में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल मनीष को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार इलाज के दौरान मनीष की मौत हो गई।
पुलिस ने घटनास्थल से खोखे बरामद किए हैं और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए क्षेत्र में नाकेबंदी की गई है। शुरुआती जांच में पुलिस ने एक मुख्य संदिग्ध की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापामारी जारी है।
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होली के अवकाश के बाद समाहरणालय स्थित विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संध्या चार बजे के बाद समाहरणलय ब्लॉक-ए के सभी कार्यालयों का किया गया औचक निरीक्षण
अवकाश में रहनेवाले कर्मचारियों के आवेदन की जांच
कार्यालय प्रधान को पूर्व जानकारी दिये बिना अनुपस्थित रहनेवाले कर्मचारियों को शो-कॉज करने का निर्देश
बिना पहचान पत्र कार्य करनेवाले कर्मचारियों एवं टेबल पर नेमप्लेट प्रदर्शित नहीं करने पर सख्त चेतावनी
मातहत कर्मचारी अनुशासित रहें, कार्यालय प्रधानों को सुनिश्चित करने का निर्देश
समाहरणालय परिसर में लगाये गये पौधों की नियमित देखरेख एवं साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश
रांची,07.03.2026 – होली अवकाश के पश्चात कार्यालयों में कार्य व्यवस्था को सुदृढ़ एवं अनुशासित बनाए रखने के उद्देश्य से उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज समाहरणालय परिसर स्थित विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। संध्या लगभग चार बजे के बाद उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा समाहरणालय ब्लॉक-ए के सभी कार्यालयों का निरीक्षण कर उपस्थित कर्मियों की कार्यप्रणाली एवं कार्यालय व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस दौरान उन्होंने कार्यालयों में उपस्थित कर्मचारियों से कार्य संबंधी जानकारी भी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
अवकाश आवेदनों की जांच, बिना सूचना अनुपस्थित रहनेवालों को शो-कॉज करने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों के आवेदन पत्रों की भी जांच की तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये कि सभी कर्मचारी नियमानुसार अवकाश आवेदन प्रस्तुत करें। जिन कर्मचारियों के बारे में यह पाया गया कि वे कार्यालय प्रधान को पूर्व सूचना दिए बिना अनुपस्थित रहे, उनके विरुद्ध संबंधित कार्यालय प्रधानों को शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। अर्जुन मुण्डा, सहायक, सामान्य शाखा, लनिता कुमार महतो एवं विकास जायसवाल जिला कल्याण शाखा को शोकॉज करने का निर्देश उपायुक्त द्वारा दिया गया।
आईडी कार्ड एवं नेमप्लेट नहीं लगाने पर चेतावनी
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने निरीक्षण के दौरान कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों को पहचान पत्र (आईडी कार्ड) अनिवार्य रूप से धारण करने तथा अपने-अपने टेबल पर नेमप्लेट प्रदर्शित करने का निर्देश दिया। जिन कर्मचारियों द्वारा इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा था, उन्हें सख्त चेतावनी दी गई और भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होने देने की हिदायत दी गई।
‘‘ कर्मचारी अनुशासित रहें, कार्यालय प्रधान सुनिश्चित करें ’’
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सभी मातहत कर्मचारी अनुशासित एवं जिम्मेदार ढंग से अपने दायित्वों का निर्वहन करें। इसके लिए कार्यालय प्रधानों को भी अपने अधीनस्थ कर्मियों की नियमित उपस्थिति एवं कार्यप्रणाली पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया।
स्वच्छता पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समाहरणालय परिसर में लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख, स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि परिसर की स्वच्छता और हरियाली बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस दौरान अपर समाहर्त्ता, रांची श्री रामनारायण सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), रांची श्री राजेश्वरनाथ आलोक, उपसमाहर्त्ता नजारत श्री सुदेश कुमार तथा जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री राजेश कुमार साहू उपस्थित थे।
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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजंत्री से मिले श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर ट्रस्ट के सदस्य
आगामी रामनवमी पर्व आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन से आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध
जिला प्रशासन द्वारा यथासंभव सहयोग प्रदान किये जाने का आश्वासन
रांची,07.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से 07.03.2026 को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर ट्रस्ट, निवरणपुर के सदस्यों ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
इस दौरान ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने आगामी रामनवमी पर्व के अवसर पर श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर, निवरणपुर में आयोजित होने वाले श्रीराम जन्मोत्सव एवं संबंधित धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
ट्रस्ट के सदस्यों ने आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन से आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने ट्रस्ट के सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि रामनवमी के आयोजन को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा यथासंभव आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
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नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन को हवाई अड्डा लाइसेंस प्रदान किया गया
इस विमानपत्तन का विकास ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वाईआईएपीएल द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत किया गया है। इसके लिए रियायत अवधि 1 अक्टूबर, 2021 से 40 वर्षों के लिए शुरू हुई।
इस विमानपत्तन को सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के अंतर्गत सभी मौसमों में संचालन के लिए लाइसेंस प्राप्त है। इसमें 10/28 दिशा वाला 3,900 मीटर × 45 मीटर का रनवे है, जो इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एयरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सुसज्जित है, जिससे चौबीसों घंटे संचालन संभव है। विमानपत्तन पर 24 कोड सी और 2 कोड डी/एफ विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड हैं और यह एआरएफएफ श्रेणी 9 की सुविधाओं से लैस है जो बोइंग 777-300ईआर जैसे बड़े आकार के विमानों को संभालने में सक्षम है।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन का विकास चार चरणों में एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ किया जा रहा है। पहले चरण में, एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ, विमानपत्तन की वार्षिक क्षमता लगभग 12 मिलियन यात्रियों को संभालने की होगी। सभी चरणों के पूरा होने पर, विमानपत्तन प्रति वर्ष 70 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, जिससे यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में उभरेगा।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन का विकास नागर विमानन मंत्रालय के एक मजबूत विमानन इकोसिस्टम के निर्माण के व्यापक विजन का हिस्सा है। पिछले एक दशक में, भारत के नागर विमानन क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, परिचालन वाले विमानपत्तनों की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर आज 164 हो गई है, साथ ही भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है।
भारत, उड़ान योजना जैसी पहलों के समर्थन से, नए ग्रीनफील्ड विमानपत्तनों के विकास और मौजूदा ब्राउनफील्ड हवाई अड्डों एवं क्षेत्रीय हवाई पट्टियों के उन्नयन के संतुलित दृष्टिकोण के माध्यम से अपने विमानन नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। भविष्य में, देश के दीर्घकालिक रोडमैप का लक्ष्य 2047 तक 400 से अधिक विमानपत्तनों का विकास करना है, जिससे कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकता को और मजबूती मिलेगी।
नागर विमानन मंत्री श्री राममोहन नायडू किंजरापु ने उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई देते हुए कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन का विकास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विमानन संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह विश्व स्तरीय विमानपत्तन क्षेत्रीय आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देगा, साथ ही स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य सत्कार के संयोजन से यात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा और क्षेत्र के मौजूदा विमानपत्तनों पर भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगा।
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संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति पोर्टल के संस्करण 2.0 का शुभारंभ किया
भारतीय संस्कृति पोर्टल को मूल रूप से दिसंबर 2019 में इस उद्देश्य से शुरू किया गया था कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, इतिहास, साहित्य, कला और विरासत के बारे में सभी जानकारी हासिल कर सकें। यह देशभर के संग्रहालयों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों और सांस्कृतिक संस्थानों के डिजिटल संसाधनों को एक ही एकीकृत मंच पर एकत्रित करता है। उपयोग करने वालों बढ़ती संख्या और विकसित होती तकनीकी अपेक्षाओं के साथ पोर्टल को व्यापक रूप से अपग्रेड किया गया है ताकि शीघ्र, उच्च गुणवत्ता वाला प्रदर्शन और उपयोगकर्ता के अनुकूल अनुभव प्रदान किया जा सके।
संस्करण 2.0 एक आधुनिक संरचना का परिचय देता है, जो एक ड्रुपल बैकएंड के साथ रिएक्ट-आधारित फ्रंटएंड का संयोजन करता है, जिससे गति, मापनीयता और सिस्टम प्रदर्शन में काफी सुधार होता है। यह नई संरचना पहले की विशालकाय प्रणाली का स्थान लेती है और उच्च ट्रैफिक के दौरान भी शीघ्र लोडिंग, बेहतर प्रतिक्रियाशीलता और बढ़ी हुई विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है। इस प्लैटफॉर्म को आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके विकसित किया गया है ताकि लाखों उपयोग करने वालों को सहायता मिल सके और भविष्य की डिजिटल सेवाओं को आसानी से एकीकृत किया जा सके।
उन्नत पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में से एक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम उपकरणों का एकीकरण, जिन्हें उपयोगकर्ता की सहभागिता और सांस्कृतिक सामग्री की खोज को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। भारती नामक एक एआई-संचालित चैटबॉट को पोर्टल पर उपयोगकर्ताओं की सहायता करने, प्रश्नों के उत्तर देने, सांस्कृतिक सामग्री का सारांश प्रस्तुत करने और उपयोगकर्ताओं को प्रासंगिक संसाधनों तक मार्गदर्शन करने के लिए पेश किया गया है। यह चैटबॉट भारत सरकार के भाषिनी प्लैटफॉर्म के साथ एकीकृत है, जिससे 22 भारतीय भाषाओं में प्रतिक्रियाएं संभव हो पाती हैं और इस प्रकार भाषाई समुदायों के उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंच में काफी सुधार होता है।
इस पोर्टल में एक उन्नत बहुस्तरीय वैश्विक खोज प्रणाली भी शामिल है, जो फुल टेक्स्ट (पूर्ण-पाठ) खोज क्षमताओं के साथ-साथ इंटेलीजेंट मेटाडेटा फिल्टर और पहलूबद्ध नेविगेशन प्रदान करती है, जिससे उपयोगकर्ता सांस्कृतिक संसाधनों को अधिक कुशलता से खोज सकते हैं।
उन्नत पोर्टल एक प्रोग्रेसिव वेब ऐप (पीडब्ल्यूए) के रूप में कार्य करता है। इससे यूजर्स बिना ऐप स्टोर से डाउनलोड किए बिना ही ऐप जैसे अनुभव के साथ विभिन्न उपकरणों पर प्लैटफॉर्म को इंस्टॉल और एक्सेस कर सकते हैं। यह पीडब्ल्यूए डेस्कटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन पर निर्बाध प्रदर्शन सुनिश्चित करता है। इसमें सांस्कृतिक अनुभवों को भी शामिल किया गया है, जिसमें विरासत स्मारकों के 3डी वॉकथ्रू और 360-डिग्री वर्चुअल टूर शामिल हैं, जिससे उपयोगकर्ता भारत के स्थापत्य और ऐतिहासिक स्थलों को डिजिटल रूप से देख सकते हैं।
उन्नत पोर्टल में 46 चुनिंदा सांस्कृतिक श्रेणियां हैं, जो समृद्ध ज्ञान संसाधन और भारत के प्रतिष्ठित युद्ध, भारत की लोककथाएं, युगों-युगों से चली आ रही चिकित्सा पद्धतियां, भारत के पौराणिक व्यक्तित्व, भारत के शास्त्रीय नृत्य आदि जैसे नए मूल खंडों की पेशकश करती हैं। इन खंडों का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत के बारे में आकर्षक विवरण प्रदान करना है साथ ही भारतीय विरासत में रुचि रखने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और नागरिकों का सहयोग करना है। सहभागिता के माध्यम से सीखने को प्रोत्साहित करने के लिए पोर्टल में सभी आयु वर्ग के यूजर्स के लिए डिजाइन किए गए इंटरैक्टिव सांस्कृतिक खेल, प्रश्नोत्तरी, पहेलियां और क्रॉसवर्ड शामिल हैं।
इंडियन कल्चर पोर्टल अब आकार परिवर्तन करने में सक्षम (स्केलेबल,), भविष्य के लिए तैयार डिजिटल प्लैटफॉर्म के रूप में स्थापित है जो उभरती प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने, सामग्री साझेदारी का विस्तार करने और भारत के सांस्कृतिक ज्ञान संसाधनों के लिए व्यापक पहुंच का सहयोग करने में सक्षम है। उन्नत प्लैटफॉर्म चुनिंदा सांस्कृतिक सामग्री, बेहतर खोज क्षमताओं और बहुभाषी डिजिटल जुड़ाव तक तेजी से पहुंच प्रदान करके नागरिकों, शोधकर्ताओं, सांस्कृतिक संस्थानों और नीति निर्माताओं को लाभान्वित करेगा।
संस्कृति मंत्रालय भारत और दुनिया भर के दर्शकों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच को डिजिटल बनाने, संरक्षित करने और सबके लिए सुलभ बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता और प्रयास जारी रखता है।
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मनातू थाना क्षेत्र में 04 एकड़ अवैध अफीम/पोस्ता की खेती विनष्ट
पलामू,07.03.2026 – पुलिस अधीक्षक, पलामू के निर्देशानुसार जिले में अवैध अफीम/पोस्ता की खेती के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 07.03.2026 को मनातू थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम एप्टी के जंगली क्षेत्र में छापामारी एवं विनष्टीकरण अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान वन भूमि पर करीब 04 एकड़ क्षेत्रफल में अवैध रूप से लगी अफीम/पोस्ता की फसल को चिन्हित कर मनातू थाना के पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों द्वारा मौके पर ही विनष्ट कर दिया गया।
इस अवैध खेती में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान एवं सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। संलिप्त लोगों का नाम-पता सत्यापित कर उनके विरुद्ध वन अधिनियम के अंतर्गत वन वाद दर्ज करते हुए विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस विनष्टीकरण अभियान में मनातू थाना के पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस बल शामिल थे।
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 25 मार्च से 6 अप्रैल के बीच; खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया बोले: ‘अवसर और दायरे को बढ़ाने का हिस्सा’
इन खेलों में सात पदक स्पर्धाएँ – एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती- शामिल होंगी। इसके अलावा दो डेमो गेम– मल्लखंभ और कबड्डी – भी आयोजित किए जाएंगे। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) में भारत के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) का लोगो, थीम सॉन्ग और मैस्कॉट 23 दिसंबर को बिलासपुर के स्वर्गीय बी. आर. यादव स्पोर्ट्स स्टेडियम में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था। इस समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव भी उपस्थित थे।
डॉ. मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि ये खेल आदिवासी क्षेत्रों से उभर रही प्रतिभाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा, “आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद अहम है और हमारे खिलाड़ी आधार का लगातार विस्तार समय की आवश्यकता है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आदिवासी समुदायों के प्रतिभाशाली युवाओं की जल्द पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित तरीके से समर्थन मिले और उन्हें राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए।”
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय ओलंपिक संघ, राष्ट्रीय खेल महासंघों और छत्तीसगढ़ राज्य आयोजन समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। इन खेलों के तकनीकी मानक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप रखे जाएंगे।
आधिकारिक मैस्कॉट ‘मोरवीर’ का नाम छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। यह दो शब्दों से बना है – ‘मोर’, जिसका छत्तीसगढ़ी में अर्थ ‘मेरा’ या ‘हमारा’ होता है, और ‘वीर’, जो साहस और पराक्रम का प्रतीक है। मोरवीर भारत के आदिवासी समुदायों की भावना, गर्व और पहचान का प्रतिनिधित्व करता है।
आदिवासी खिलाड़ियों को समर्पित इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बन गया है, जो भारत की खेल यात्रा में आदिवासी सशक्तिकरण और जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स, भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की प्रमुख खेलो इंडिया योजना का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी बढ़ाना और खेलों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। वर्ष 2020 में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट, 2007 के तहत खेलो इंडिया गेम्स को ‘राष्ट्रीय महत्व का आयोजन’ घोषित किया गया था।
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इस्पात, लौह अयस्क और उर्वरक यातायात में मजबूत वृद्धि से भारतीय रेल को फरवरी में 14,571 करोड़ रुपये का माल ढुलाई राजस्व प्राप्त हुआ
फरवरी 2026 के दौरान , भारतीय रेल ने 137.72 मिलियन टन माल ढुलाई की। फरवरी 2025 में 132.48 मिलियन टन की तुलना में 3.96 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस माह के दौरान माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व 14,571.99 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष के इसी माह के 14,151.96 करोड़ रुपये से 2.97 प्रतिशत अधिक है।
परिवहन उत्पादन के मामले में भारतीय रेल के प्रदर्शन में भी मजबूती दर्ज की गई है। माल ढुलाई का एक प्रमुख सूचक, नेट टन किलोमीटर (एनटीकेएम) , फरवरी 2026 में 76,007 मिलियन एनटीकेएम तक पहुंच गया, जबकि फरवरी 2025 में यह 72,955 मिलियन एनटीकेएम था। इसमें 4.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
प्रमुख वस्तुओं से संचालित वृद्धि
माल ढुलाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी प्रमुख क्षेत्र की वस्तुओं द्वारा संचालित है। इस माह के दौरान, भारतीय रेल ने बड़ी मात्रा में कोयला, लौह अयस्क, तैयार इस्पात, उर्वरक, सीमेंट और कंटेनर ढुलाई की। तैयार इस्पात, लौह अयस्क और उर्वरक जैसी वस्तुओं में वृद्धि ने समग्र माल ढुलाई प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रमुख वस्तुओं के क्षेत्र में भी प्रदर्शन उत्साहजनक बना रहा। दैनिक माल ढुलाई की स्थिति में, लौह अयस्क, कच्चा लोहा और तैयार इस्पात, इस्पात संयंत्रों के लिए कच्चा माल (लौह अयस्क को छोड़कर), उर्वरक, खनिज तेल और कंटेनर ईएक्सआईएम यातायात जैसी वस्तुओं में साल-दर-साल उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। लौह अयस्क का लदान पिछले वर्ष के 0.529 मिलियन टन की तुलना में इस वर्ष 0.675 मिलियन टन रहा (27.6 प्रतिशत की वृद्धि), जबकि कच्चा लोहा और तैयार इस्पात का लदान पिछले वर्ष के 0.284 मिलियन टन की तुलना में 0.343 मिलियन टन रहा (20.8 प्रतिशत की वृद्धि)। इस्पात संयंत्रों के लिए कच्चे माल (लौह अयस्क को छोड़कर) का लदान 0.096 मिलियन टन से बढ़कर 0.141 मिलियन टन हो गया (46.9 प्रतिशत की वृद्धि)। इसी प्रकार, उर्वरक का लदान 0.167 मिलियन टन से बढ़कर 0.184 मिलियन टन (10.2 प्रतिशत की वृद्धि), खनिज तेल का लदान 0.146 मिलियन टन से बढ़कर 0.172 मिलियन टन (17.8 प्रतिशत की वृद्धि) और कंटेनर एक्सआईएम यातायात 0.213 मिलियन टन से बढ़कर 0.251 मिलियन टन (17.8 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया।
फरवरी के मासिक संचयी प्रदर्शन में, कई वस्तुओं ने पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। उर्वरक का लदान 4.224 मिलियन टन से बढ़कर 5.396 मिलियन टन (27.7 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है, जबकि क्लिंकर 5.421 मिलियन टन से बढ़कर 6.508 मिलियन टन (20.1 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया। पिग आयरन (कच्चा लोहा) और तैयार स्टील का लदान 5.522 मिलियन टन से बढ़कर 6.237 मिलियन टन (12.9 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया, और लौह अयस्क 14.925 मिलियन टन से बढ़कर 16.370 मिलियन टन (9.7 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया। कंटेनर एक्स-इम यातायात (5.432 मिलियन टन बनाम 5.142 मिलियन टन, 5.6 प्रतिशत की वृद्धि) और कंटेनर घरेलू यातायात (2.015 मिलियन टन बनाम 1.970 मिलियन टन, 2.3 प्रतिशत की वृद्धि) में भी वृद्धि देखी गई। यह प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निरंतर मांग को दर्शाता है।
रेल माल ढुलाई थोक वस्तुओं के परिवहन के सबसे किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साधनों में से एक बनी हुई है। इससे उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों को लंबी दूरी तक विश्वसनीय और लागत प्रभावी तरीके से ले जाने में मदद करती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में माल ढुलाई का संचयी प्रदर्शन मजबूत रहा।
भारतीय रेल ने चालू वित्त वर्ष के दौरान संचयी माल ढुलाई प्रदर्शन में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।
1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 की अवधि के दौरान, भारतीय रेल ने 1,503.80 मिलियन टन माल ढुलाई की। पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 1,456.07 मिलियन टन थी, यानी 3.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस अवधि के दौरान माल ढुलाई से होने वाली आय 1,60,987 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 1,58,539.86 करोड़ रुपये थी, यानी यह 1.54 प्रतिशत की वृद्धि है।
एनटीकेएम में मापी गई कुल माल ढुलाई 840,000 मिलियन रही, जबकि पिछले वर्ष यह 826,586 मिलियन एनटीकेएम थी, जो 1.62 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है ।
आर्थिक विकास और राष्ट्रीय रसद का समर्थन करना
भारतीय रेल क्षमता वृद्धि, बेहतर टर्मिनल बुनियादी ढांचे, समर्पित माल गलियारों और डिजिटल माल प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से माल ढुलाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन पहलों से उद्योगों और व्यवसायों को माल की आवाजाही अधिक कुशलतापूर्वक करने और साथ ही माल ढुलाई लागत को कम करने में मदद मिल रही है।
बुनियादी ढांचे और माल ढुलाई संचालन में निरंतर निवेश के साथ, भारतीय रेलवे देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ के रूप में अपनी भूमिका को बढ़ाने और देश के आर्थिक विकास का सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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एआई रोबोट ने तिरुवनंतपुरम में शहरी स्वच्छता की अगली पीढ़ी को शक्ति दी
हाथ से मैला ढोने की प्रथा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और उच्च जोखिम वाले और दुर्गम क्षेत्रों में अपशिष्ट हटाने के काम में सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बडा कदम उठाते हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम ने थंपानूर में रेलवे स्टेशन परिसर के पास अमायिझंचन नहर में एआई-संचालित रोबोटिक नहर-सफाई प्रणाली ‘जी-स्पाइडर’ तैनात किया है।
अमायिझंचन नहर, विशेष रूप से थंपानूर रेलवे स्टेशन के नीचे स्थित ढका हुआ हिस्सा, कई परिचालन चुनौतियां प्रस्तुत करता है। यहां ऊंचाई की सीमित जगह, लगातार जल प्रवाह, संकुचित कार्य क्षेत्र और सुरक्षित मानव प्रवेश बिंदुओं की अनुपस्थिति जैसी समस्याएं है। इन कारणों से पारंपरिक तरीकों से इस हिस्से की नियमित सफाई और रखरखाव अत्यंत कठिन हो गया था।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्व-शासन मंत्री श्री एम.बी. राजेश द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित रोबोटिक नहर सफाई प्रणाली का शुभारंभ किया गया। यह पहल तिरुवनंतपुरम नगर निगम और टेक्नोपार्क-स्थित जेनरोबोटिक इनोवेशन्स के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है, जिन्होंने स्केवेंजर ‘बैंडिकूट’ भी विकसित किया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस उन्नत रोबोटिक प्रणाली की शुरुआत से श्रमिकों को खतरनाक और अस्वच्छ वातावरण में प्रवेश करने की आवश्यकता प्रभावी रूप से समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इस पहल को एक क्रांतिकारी कदम बताया, जो परिचालन दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ अपशिष्ट प्रबंधन में सुरक्षा मानकों को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है।
जेनरोबोटिक इनोवेशन्स द्वारा निर्मित जी-स्पाइडर स्वचालित नहर सफाई रोबोट को जटिल और जोखिम भरे नहर वातावरण में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह केबल-ड्रिवन पैरेलल रोबोटिक्स (सीडीपीआर) आर्किटेक्चर पर आधारित और एआई-सक्षम विजन और सेंसर इंटेलिजेंस से लैस है, जो जमा हुए कचरे की सटीक पहचान, आकलन करने और उसे हटाने में सक्षम बनाता है।
उन्नत मशीन विज़न का उपयोग करते हुए यह प्रणाली अलग-अलग प्रकार के कचरे, जल प्रवाह की स्थिति और संरचनात्मक चुनौतियों को वास्तविक समय में पहचान कर अपने संचालन को स्वत: अनुकूलित कर लेती है। इसकी पांच-डिग्री-स्वतंत्रता वाली रोबोट प्रणाली बायोमिमेटिक क्लॉ-टाइप ग्रैबर से सुसज्जित है, जो मिश्रित और अनियमित मलबे की सटीक पहचान और सुरक्षित हैंडलिंग सुनिश्चित करता है। निकाले गए कचरे को सीधे निर्दिष्ट संग्रहण वाहनों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जिससे पहचान से लेकर सुरक्षित निपटान तक नहर की सफाई की पूरी प्रक्रिया पूर्णत: सम्पर्क-रहित हो जाती है।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम द्वारा तैनात जी-स्पाइडर – एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित रोबोटिक प्रणाली – शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी कदम है। नहर सफाई के स्वचालन से स्वच्छता से जुडे कर्मियों की सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, क्योंकि इससे विषैली गैसों, दूषित पानी और खतरनाक कचरे के सीधे संपर्क की संभावना कम हो जाती है। उच्च जल स्तर और निरंतर प्रवाह की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया जी-स्पाइडर शहरी जलमार्गों के निरंतर और नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करता है। यह प्लास्टिक, नुकीले मलबे और अन्य हानिकारक सामग्री सहित मिश्रित और खतरनाक कचरे को सुरक्षित रूप से निकालने में सक्षम है, जिससे समग्र स्वच्छता मानकों में सुधार होता है। नियमित और व्यवस्थित सफाई के माध्यम से यह रोबोटिक प्रणाली जल निकासी क्षमता को भी मजबूत करती है, जो शहरी बाढ़ की रोकथाम और स्वच्छ, सुरक्षित शहरी वातावरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जी-स्पाइडर स्वचालित नहर सफाई रोबोट की तैनाती सुरक्षित, यंत्रीकृत और प्रौद्योगिकी-आधारित नहर रखरखाव की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है। यह पहल खतरनाक वातावरण में स्वच्छता से जुडे कर्मियों के प्रवेश की आवश्यकता समाप्त कर उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, परिचालन दक्षता बढ़ाती है और सतत शहरी अवसंरचना प्रणालियों को मजबूत बनाती है। यह मॉडल राज्य की अन्य उच्च जोखिम वाली नहरों और जल निकासी नेटवर्क में भी अपनाने के लिए विस्तार योग्य और पुनरूत्पादित करने योग्य एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
स्वच्छ भारत मिशन की परिकल्पना के अनुरूप ऐसी प्रौद्योगिकी-आधारित पहलें यह दर्शाती है कि राज्य किस प्रकार नवाचार को अपनाकर शहरी स्वच्छता प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और साथ-साथ स्वच्छता से जुडे कर्मियों की गरिमा, सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
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खदान बंद करने और पुनर्उपयोग विषय पर देश की पहली राष्ट्रीय कार्यशाला का नेवेली में आयोजन
इस कार्यशाला में बंद किए जाने वाली खानों के 147 नोडल अधिकारियों के साथ-साथ कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी खनन कंपनियों, नियामक निकायों, गैर सरकारी संगठनों, नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, शिक्षाविदों, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस विविध भागीदारी ने खानों को बंद करने की प्रक्रिया को अनुपालन-आधारित प्रक्रिया से बदलकर दीर्घकालिक क्षेत्रीय पुनरुत्थान के उत्प्रेरक के रूप में विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया।
कार्यशाला के दौरान आयोजित नौ विषयगत सत्रों में सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, विकास संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के 29 प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने खदानों को बंद करने और खनन के बाद के बदलावों के बारे में अपने व्यावहारिक अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा की, जिससे नोडल अधिकारियों और प्रतिभागियों को टिकाऊ, समुदाय-उन्मुख खदान बंद करने की रणनीतियों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
इन सत्रों में खनन के बाद के विभिन्न विकल्पों पुनर्योजी कृषि, कृषि वानिकी, पशुपालन आधारित आजीविका, खनन क्षेत्रों में मत्स्य पालन, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण, पर्यटन विकास, सांस्कृतिक उद्यम, कौशल विकास केंद्र, नीतिगत समन्वय, अंतरराष्ट्रीय वित्त तक पहुंच और संरचित खदान बंद करने में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं आदि पर चर्चा की गई। विचार-विमर्श में खनन के बाद के क्षेत्रों में विविध और टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी और आजीविका सृजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि खदानों को बंद करना खनन गतिविधि का अंत नहीं, बल्कि खनन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए नए सामाजिक-आर्थिक अवसरों की शुरुआत है। उन्होंने वैज्ञानिक पुनर्स्थापन, पर्यावरण बहाली, खदान बंद करने के लिए आवंटित धनराशि का प्रभावी उपयोग और खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में, प्रतिभागियों ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड के पुनर्निर्मित और कोयला-मुक्त क्षेत्रों का भी दौरा किया, जहां खनन की गई भूमि को नौका विहार सुविधाओं, पुनर्जीवित जल निकायों और समृद्ध पक्षी आवासों वाले पर्यावरण-पर्यटन स्थलों में परिवर्तित कर दिया गया है। इस भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को यह जानने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक पुनर्निर्माण और एकीकृत योजना विक्षुब्ध खनन क्षेत्रों को जैव विविधता से समृद्ध और आर्थिक रूप से उत्पादक भूदृश्यों में परिवर्तित कर सकती है।
कार्यशाला में बताया गया कि 25 खानों को वैज्ञानिक तरीके से सफलतापूर्वक बंद किया जाना एक राष्ट्रीय उपलब्धि है, जो देश में व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेही शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, कोयला मंत्रालय कई महत्वपूर्ण पहलों को लागू कर रहा है, जिनमें सामुदायिक विकास के लिए एस्क्रो फंड का 25 प्रतिशत अनिवार्य आवंटन शामिल है। इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए, मंत्रालय ने पहले ही रिक्लेम फ्रेमवर्क (रीच आउट, एनविज़न, को-क्रिएट, लोकलाइज़, एक्ट, इंटीग्रेट और मेंटेन) जारी कर दिया है, जो खनन प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका है।
मंत्रालय ने, खनन से क्षतिग्रस्त भूमि के सतत पुनर्उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, पहले एलआईवीईएस फ्रेमवर्क पेश किया था और इंटरैक्टिव ऑनलाइन टूल सुविकल्प विकसित किया था, ताकि परियोजना प्रस्तावक उपयुक्त पुनर्उपयोग परियोजनाओं की पहचान और कार्यान्वयन में सहायता कर सकें।
कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन कार्यशाला से मिली गति को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय वेबिनारों की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना बना रहा है। इन वेबिनारों में आजीविका विविधीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, अंतरराष्ट्रीय वित्त तक पहुंच, पर्यटन आधारित विकास, कौशल इकोसिस्टम और हितधारकों के बीच सतत ज्ञान आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने जैसे विशिष्ट विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इस कार्यशाला का सफल संचालन सरकार की इस प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है कि खदानों को बंद करना केवल एक वैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि इसे देश भर के खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय बहाली, समावेशी विकास और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लचीलेपन के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर बनाना है।
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रातू रोड के गैलेक्सिया मॉल स्थित पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी
रांची,06.03.2026 – रांची सिविल कोर्ट के बाद रातू रोड के गैलेक्सिया मॉल स्थित पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस और बीडीएस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है पुलिस की टीम पासपोर्ट ऑफिस के हर कोने की तलाशी ले रही है।
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ब्रह्मपुत्र नदी पर भारत का पहला नदी-आधारित प्रकाशस्तंभ बनेगा (उत्तर पश्चिम-2), सर्बानंदा सोनोवाल ने आधारशिला रखी
ये चारों स्थल – डिब्रूगढ़ जिले में बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) जिले में पांडू, नागांव जिले में सिलघाट (सभी नदी के दक्षिणी तट पर स्थित), और बिश्वनाथ जिले में बिश्वनाथ घाट (उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र स्थल) – ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के रणनीतिक बिंदुओं पर स्थित हैं, जो भारत के सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय माल और यात्री गलियारों में से एक है। चारों प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है। प्रत्येक प्रकाशस्तंभ 20 मीटर ऊंचा होगा, जिसकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील और प्रकाशीय सीमा 8-10 समुद्री मील होगी, और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा। नौवहन अवसंरचना के साथ-साथ, प्रत्येक स्थल पर एक संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों का खेल क्षेत्र, स्मारिका दुकान और सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थान होंगे, जो प्रत्येक प्रकाशस्तंभ को एक पर्यटन स्थल के साथ-साथ एक कार्यात्मक समुद्री संपत्ति के रूप में स्थापित करेंगे।
एनडब्ल्यू-2 पर नदी प्रकाशस्तंभों का चालू होना ब्रह्मपुत्र जलमार्ग पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में माल ढुलाई में 53 प्रतिशत की वृद्धि का सीधा परिणाम है, जैसा कि आईडब्ल्यूएआई द्वारा दर्ज किया गया है। एनडब्ल्यू-2 पर माल ढुलाई में लगातार वृद्धि हो रही है और ब्रह्मपुत्र गलियारा अब यात्री और पर्यटन यातायात के अलावा असम के चाय, कोयला और उर्वरक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखलाओं का अभिन्न अंग बन गया है। नए प्रकाशस्तंभ 24×7 सुरक्षित नौवहन को सक्षम बनाएंगे, मौसम अवलोकन सेंसरों को समायोजित करेंगे और नदी पर माल और यात्री दोनों की आवाजाही की सतत वृद्धि के लिए आवश्यक नौवहन बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल सड़क और रेल परिवहन का विकल्प हैं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक शक्ति गुणक के रूप में सक्रिय और सक्षम बनाए जा रहे हैं। जलमार्ग से एक टन माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में बहुत कम है, कार्बन उत्सर्जन भी नगण्य है, और इससे हमारे राजमार्ग यात्रियों और समयबद्ध वस्तुओं के लिए मुक्त रहते हैं। ब्रह्मपुत्र पर बने ये प्रकाशस्तंभ इस इरादे का प्रमाण हैं कि भारत की नदियां चौबीसों घंटे व्यापार के लिए खुली हैं।”
आधारशिला समारोह में असम सरकार के पर्यटन मंत्री रणजीत कुमार दास, परिवहन मंत्री चरण बोरो, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री जयंता मल्लाबरुआ, गुवाहाटी सांसद बिजुली कलिता मेधी और पूर्वी गुवाहाटी विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य उपस्थित थे। इस अवसर पर बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार (आईएएस) और डीजीएलएल के महानिदेशक एन. मुरुगनंदम सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
सोनोवाल ने कहा, “जलमार्गों से लागत में निर्णायक लाभ मिलता है। अंतर्देशीय जलमार्ग से एक टन माल परिवहन की लागत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग एक तिहाई और रेल परिवहन की तुलना में आधी होती है। पूर्वोत्तर भारत जैसे क्षेत्र के लिए, जहां यातायात और भूभाग दोनों के कारण सड़क अवसंरचना पर लगातार दबाव बना रहता है, ब्रह्मपुत्र को पूर्ण पैमाने पर माल ढुलाई गलियारे के रूप में सक्रिय करना कोई विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है।”
पूर्वोत्तर में नदी प्रकाशस्तंभों की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए मंत्री कार्यालय की पहल के बाद इस परियोजना की परिकल्पना की गई थी। 8 अप्रैल, 2025 को आईडब्ल्यूएआई और डीजीएलएल के बीच सभी चार स्थलों को शामिल करते हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। नौवहन सहायता के लिए केंद्रीय सलाहकार समिति के समक्ष एक तकनीकी प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद, जून 2025 में निष्पादित उपयोग के अधिकार समझौतों के तहत स्थलों को औपचारिक रूप से डीजीएलएल को हस्तांतरित कर दिया गया। भू-तकनीकी जांच, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और विस्तृत डिजाइन के बाद, प्रत्येक प्रकाशस्तंभ का निर्माण अनुबंध दिए जाने के 24 महीनों के भीतर पूरा होने का लक्ष्य है।
सोनोवाल ने कहा, “जैसे-जैसे एनडब्ल्यू-2 पर यातायात बढ़ता है, पर्यावरण और यातायात जाम से जुड़े लाभ भी बढ़ते जाते हैं – कम उत्सर्जन, सड़कों का कम घिसाव, दुर्घटनाओं का कम जोखिम और पूर्वोत्तर के लिए अधिक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला। दीपस्तंभ प्रकाशस्तंभ रात्रि नौकायन को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएंगे, जिससे चौबीसों घंटे जलमार्ग संचालन में आने वाली सबसे बड़ी बाधा दूर हो जाएगी।”
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाशयान महानिदेशालय (डीजीएलएल) भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा और अब अंतर्देशीय जलमार्गों पर नौवहन में सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार वैधानिक प्राधिकरण है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) भारत के 20,000 किलोमीटर से अधिक लंबे राष्ट्रीय जलमार्गों के नेटवर्क का प्रशासन और विकास करता है, और देश की नदियों, भीतरी जलमार्ग और खाड़ियों में माल और यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बुनियादी ढांचे, टर्मिनलों और नौवहन सुविधाओं का प्रबंधन करता है।
एनडब्ल्यू-2 पश्चिम बंगाल के धुबरी को ऊपरी असम के सादिया से 891 किलोमीटर की नौगम्य लंबाई में जोड़ता है – जो किसी भी भारतीय जलमार्ग का सबसे लंबा नौगम्य खंड है और भारत के पूर्वोत्तर के मध्य से होकर गुजरता है। चार प्रकाशस्तंभ उस व्यापक कार्यक्रम की शुरुआत का प्रतीक हैं जिसे एमओपीएसडब्ल्यू भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों को उसी नौगम्य सुरक्षा अवसंरचना से लैस करने के लिए वर्णित करता है जो लंबे समय से इसके तटीय क्षेत्रों को नियंत्रित करती रही है।
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केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने एशियाई खेल 2026 की तैयारियों की समीक्षा की; भारतीय एथलीटों को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया
एशियाई खेल 2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए गठित 15 सदस्यीय समिति में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के सचिव श्री हरि रंजन राव, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा, एशियाई खेलों के मिशन प्रमुख श्री सहदेव यादव, मिशन उप प्रमुख शरथ कमल और अन्य सदस्य शामिल हैं। इस समिति ने प्रशिक्षण, रसद, खिलाड़ियों के कल्याण और प्रतियोगिता की तैयारियों से संबंधित योजनाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए दिसंबर 2025 से अब तक चार बैठकें की हैं। यह समिति खेलों में भारत के अभियान के लिए रणनीतिक रोडमैप की देखरेख कर रही है।
बैठक के दौरान बोलते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने एथलीटों के कल्याण और प्रदर्शन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “हमारे एथलीट हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। प्रशिक्षण और खेल विज्ञान से लेकर रसद, किट सहायता, भोजन सहायता और चिकित्सा देखभाल तक, हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे बिना किसी बाधा के तैयारी कर सकें और एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। हमारा उद्देश्य किसी भी कीमत पर उन्हें कष्ट न पहुंचाना और यह सुनिश्चित करना है कि वे प्रतियोगिता में हमारे पदकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित रखें।”
केंद्रीय मंत्री ने सभी हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि सुनियोजित तैयारी, मजबूत समर्थन प्रणाली और समय पर योजना बनाना 2026 एशियाई खेलों में भारत को नए मुकाम हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एशियाई खेल की तैयारियों के तहत, प्रत्येक राष्ट्रीय सुरक्षा संघ (एनएसएफ) द्वारा एजी टेक्निकल हैंडबुक के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है ताकि संबंधित एनएसएफ के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों को खेलों में सर्वोत्तम प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए अनुशासन-वार तकनीकी विवरणों के बारे में जानकारी दी जा सके और उन्हें प्रशिक्षित किया जा सके। टीमों को काफी पहले ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को केंद्रित तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके और चिकित्सा टीमों सहित सहायक कर्मचारियों की क्षमता को मजबूत करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, साथ ही विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ रसद संबंधी सुविधाओं के लिए सुचारू समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। महासंघों को अनुभव प्राप्ति के लिए दौरा और प्रतियोगिता कार्यक्रम की योजना पहले से बनाने की स्वतंत्रता दी गई है। जिन खेलों में परिचालन योजना अधिक चुनौतीपूर्ण है, उनके लिए कई स्थानों पर सहायता की व्यवस्था की जाएगी और प्रत्येक स्थल पर समर्पित सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। भोजन और पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे अनुकूलन पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है और खेलों से पहले भारत में प्रतियोगिता के माहौल को अनुकरण करने के उपाय तलाशे जा रहे हैं।
देश का लक्ष्य रणनीतिक योजना, समर्पित तैयारी और सभी हितधारकों के बीच एकीकृत समन्वय के साथ हांगझोऊ एशियाई खेलों 2022 में हासिल किए गए ऐतिहासिक 106 पदकों के रिकॉर्ड को तोड़ना है। 2026 के खेलों में 40 से अधिक खेल विधाओं में 700 से अधिक भारतीय एथलीटों के भाग लेने की उम्मीद है।
बैठक में आज इस बात पर प्रकाश डाला गया कि आइची-नागोया एशियाई खेलों में एक अनोखी पांच-समूह प्रतियोगिता प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें एथलीट एक ही ओलंपिक-विलेज शैली के आवास में रहने के बजाय कई प्रान्तों में प्रतिस्पर्धा करते हैं। आयोजन स्थल आइची, गिफू, शिज़ुओका और एयरपोर्ट-एक्सपो ज़ोन जैसे समूहों में फैले हुए हैं, जिसके लिए यात्रा, रसद, चिकित्सा सहायता और एथलीटों के आराम के लिए विस्तृत योजना की आवश्यकता होती है।
खिलाड़ियों को खेलों के दौरान आवास की व्यवस्थाओं के अनुकूल ढलने में मदद करने के लिए, पटियाला और बेंगलुरु स्थित एसएआई के क्षेत्रीय केंद्रों में विशेष अस्थायी कंटेनर इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे खिलाड़ी खेलों के दौरान अपेक्षित कंटेनर-शैली की रहने की व्यवस्था से परिचित हो सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि इस उपाय से खिलाड़ियों को जल्दी अनुकूलन करने और प्रतियोगिता के दौरान ध्यान भटकने से बचने में मदद मिलेगी।
बैठक में जनवरी में आईओए प्रतिनिधिमंडल द्वारा जापान में किए गए चार दिवसीय सर्वेक्षण की भी समीक्षा की गई, जिसमें प्रमुख प्रतियोगिता स्थलों, खिलाड़ियों की सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का निरीक्षण किया गया था। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर, क्लस्टर-वार योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत प्रत्येक क्लस्टर में समर्पित लॉजिस्टिक्स अधिकारी, चिकित्सा दल और सहायक कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि भारतीय खिलाड़ियों के लिए सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
खेलों से पहले के महीनों में सुचारू तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए एथलीटों पर केंद्रित कई उपायों पर चर्चा की गई। इनमें दल के लिए एक मुख्य चिकित्सा चिकित्सक की नियुक्ति, एसएआई के नामित पाक कला कर्मचारियों की सहायता से एथलीटों के लिए भारतीय भोजन विकल्पों को अंतिम रूप देना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि एथलीटों को उनकी आधिकारिक किट समय से पहले मिल जाए। अनुशासनवार प्रदर्शन समीक्षा, टीम का शीघ्र चयन और चिकित्सा एवं पुनर्प्राप्ति टीमों सहित सहायक कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के महत्व पर भी चर्चा की गई।
अगली समिति की बैठक 20 मार्च को निर्धारित है, जहां भारत द्वारा महाद्वीपीय खेल आयोजन की तैयारियों के निर्णायक चरण में प्रवेश करने के साथ ही दल के आकार, रसद, यात्रा व्यवस्था और परिचालन तत्परता पर अंतिम चर्चा की जाएगी।
आईआईसीए ने पीजीआईपी के सातवें बैच के लिए जीएसटी और पीएमएलए-आईबीसी के अंतर्संबंध पर “मीट द लेजेंड” सत्र आयोजित किया
श्री जेपी सिंह ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे तथा दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (आईबीसी) के तहत दिवाला कार्यवाही के साथ इसके अंतर्संबंधों पर एक व्यापक विहंगावलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने “आपूर्ति,” “प्रतिफल,” कर योग्य घटनाओं, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और रिवर्स चार्ज तंत्रों का पुनरावलोकन किया। साथ ही, उन्होंने अंत:राज्यीय और अंतर-राज्यीय लेनदेन को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे की व्याख्या की।
उन्होंने स्विस रिबन्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और घनश्याम मिश्रा एंड संस प्राइवेट लिमिटेड बनाम एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड सहित महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि एक बार समाधान योजना स्वीकृत हो जाने के बाद योजना में शामिल नहीं किए गए दावे (वैधानिक बकाय सहित) समाप्त हो जाते हैं।
इस सत्र में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के दौरान व्यावहारिक अनुपालन भी चर्चा की गई, जैसे कि आईआरपी/आरपी द्वारा नया जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करना, आईटीसी की उपलब्धता और वसूली कार्यवाही पर आईबीसी की धारा 14 के तहत स्थगन का प्रभाव।
श्री बालेश कुमार ने आईबीसी और धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के बीच के अंतर्संबंधों पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने “अपराध की कमाई” की अवधारणा को स्पष्ट किया और धन शोधन के तीन चरणों – प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन – को रेखांकित किया।
इस चर्चा में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और पीएमएलए अधिकारियों के बीच क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलताओं की जांच की गई, विशेष रूप से उन मामलों में जहां सीआईआरपी से गुजर रही कॉर्पोरेट देनदार संस्थाओं की सम्पत्तियों को कुर्क किया जाता है। उन्होंने आईबीसी की धारा 32ए और समाधान प्रक्रियाओं की सुरक्षा के इसके उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा की।
मनीष कुमार बनाम भारत संघ मामले सहित न्यायिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने विकसित हो रहे कानून पर ध्यान आकर्षित किया, जिसका उद्देश्य धन शोधन रोधी प्रवर्तन के साथ दिवाला समाधान के उद्देश्यों में सामंजस्य स्थापित करना है। उन्होंने हालिया न्यायिक टिप्पणियों पर भी प्रकाश डाला जो समाधान के उद्देश्यों को समर्थन देने में धारा 32ए की प्रधानता को स्वीकार करती हैं।
इस संवादात्मक सत्र ने पीजीआईपी प्रतिभागियों को उन रणनीतिक और व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में जानकारी दी, जिनका सामना दिवाला पेशेवर अक्सर विभिन्न कानूनों के टकराव के दौरान करते हैं। इन चर्चाओं ने प्रभावी समाधान परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए कराधान, दिवाला और प्रवर्तन कानूनों के समन्वय को समझने के महत्व को रेखांकित किया।
पीजीआईपी केंद्र के प्रमुख श्री सुधाकर शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और छात्रों को बहुमूल्य अंतर्दृष्टि तथा मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए विशिष्ट वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
“मीट द लीजेंड” श्रृंखला प्रतिभागियों को प्रमुख न्यायिक और विनियामक विशेषज्ञों के साथ जोड़कर अकादमिक उत्कृष्टता और पेशेवर क्षमता निर्माण के प्रति आईआईसीए की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश भर के 26 युवा चिकित्सा पेशेवरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का आयोजन करने वाले मीडिया हाउस की डॉक्टरों को सम्मानित करने के निर्णय की सराहना की और कहा कि अपने करियर के शिखर पर प्रवेश कर रहे हैं इन युवा डॉक्टरों को इस स्तर पर पुरस्कार मिलना उनके लिए एक बड़ी पहचान और प्रोत्साहन है, जो करियर के बाद के चरण में मिलने वाले पुरस्कार की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को मजबूत करने के लिए युवा डॉक्टरों को उनके करियर के प्रारंभिक चरण में ही पहचान देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक वर्षों में चिकित्सा पेशेवरों को प्रोत्साहित करने से उन्हें उत्कृष्टता प्राप्त करने और तेजी से विकसित हो रहे चिकित्सा परिदृश्य में अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करने की प्रेरणा मिलती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रतिभा को जल्दी पहचानना न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि युवा चिकित्सा पेशेवरों को समाज में अधिक प्रतिबद्धता के साथ योगदान जारी रखने के लिए प्रेरित भी करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा पद्धति के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि नई तकनीकों और एआई के आगमन से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे है। उन्होंने कहा कि हालांकि तकनीक ने निदान और उपचार में काफी सुधार किया है, फिर भी एक डॉक्टर की भूमिका अपरिहार्य बनी हुई है क्योंकि अनुभव और नैदानिक अंतर्ज्ञान रोगी की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा विज्ञान में दशकों में हुए विकास पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि पहले चिकित्सा शिक्षा कुछ विशेष रोगों, जैसे कि सिफलिस या मधुमेह, का गहन अध्ययन करने तक ही सीमित थी, लेकिन आज चिकित्सा का दायरा अनेक विशेषज्ञताओं और नई उपचार पद्धतियों के उभरने के साथ-साथ बहुत व्यापक हो गया है, और साथ ही एआई पारंपरिक शिक्षा का कार्यभार संभालती जा रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह कहा कि तकनीकी प्रगति, नए रोगों और बदलती स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के संयोजन ने इस क्षेत्र को पहले से कहीं अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे परिदृश्य में, तेजी से उभरते विकल्पों और प्रौद्योगिकियों के साथ, प्रत्येक युवा चिकित्सक को चिकित्सा विशेषज्ञता के एक विशिष्ट क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते रहने का प्रयास करना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड महामारी के बाद के स्वास्थ्य सेवा परिवेश में संक्रामक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए चुनौतियां से चिकित्सा पेशेवरों के लिए विशेष ज्ञान और निरंतर सीखने का महत्व और भी बढ़ गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मानित किए गए युवा डॉक्टरों पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इनमें से कई अपने करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने के साथ चिकित्सा क्षेत्र में अपने योगदान के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान भी प्राप्त करेंगे।
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उपराष्ट्रपति बेलगावी के यदुर स्थित श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेकम समारोह के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए
श्री क्षेत्र यदुरू में सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आध्यात्मिक पुनर्जागरण और सभ्यतागत गौरव के पुनर्मूल्यांकन का क्षण बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यता है—सिंधु घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक प्रवाहित होने वाली चेतना की एक अखंड धारा। उन्होंने रेखांकित किया कि यह वह पवित्र भूमि है जहाँ वेदों के शाश्वत ज्ञान को पहली बार सुना गया था और जहाँ श्रीमद्भगवद्गीता का गहन संदेश आज भी मानवता को साहस के साथ कर्म करने, धर्मपरायणता के साथ जीने और पूर्ण श्रद्धा के साथ समर्पण करने का मार्ग दिखा रहा है।
यह रेखांकित करते हुए कि हिंदू चेतना केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है, उपराष्ट्रपति ने “वसुधैव कुटुम्बकम” यानि संपूर्ण विश्व एक परिवार है के कालातीत दर्शन और भारत की उस आध्यात्मिक दृष्टि पर बल दिया जो प्रकृति और प्रत्येक मनुष्य में दिव्यता के दर्शन करती है।
वीर-शैव लिंगायत परंपरा का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान में इसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वीर-शैव मठों और मंदिरों ने श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता के मूल्यों को पोषित करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।
उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कदासिद्धेश्वर स्वामीजी की आध्यात्मिक दृष्टि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने समय के साथ ओझल हो चुके इस पवित्र स्थल को पुनः खोजा और उसका पुनरुद्धार किया, जिससे सनातन धर्म की शाश्वत ज्योति एक बार फिर प्रज्वलित हुई। उन्होंने अटूट विश्वास के साथ कहा कि सनातन धर्म की समय द्वारा परीक्षा ली जा सकती है, लेकिन इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।
उन्होंने दैनिक पूजा-अर्चना, अनुष्ठान, जीर्णोद्धार कार्यों और आध्यात्मिक सेवा को अक्षुण्ण बनाए रखने में श्री कदासिद्धेश्वर मठ के उत्तराधिकारी पीठाधीश्वरों के अथक प्रयासों की सराहना की।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित “विकास भी, विरासत भी” के विजन का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का विकास और उसकी विरासत साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि आज का भारत एक तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जबकि अपनी सभ्यतागत मूल्यों और लोकाचार में उसकी जड़ें आज भी उतनी ही गहरी हैं।
राजगोपुरम के उद्घाटन को आस्था के पुनर्मूल्यांकन और परंपरा की निरंतरता के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार केवल वास्तुकला का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता को पुनर्स्थापित करने का माध्यम है।
इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, कर्नाटक सरकार के भारी एवं मध्यम उद्योग और अवसंरचना मंत्री श्री एम. बी. पाटिल, श्री श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी, राज्यसभा सांसद श्री ईरन्ना कडाडी, धर्मगुरु और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए।
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स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भारत के कार्यक्रमों का नेतृत्व किया
‘लागत में बाधा को खत्म करना‘ विषय पर आयोजित जीएसएमए मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम में समापन भाषण
श्री सिंधिया ने ‘लागत में बाधा को खत्म करना’ विषय पर आयोजित सत्र के दौरान मंत्रिस्तरीय मंच पर समापन भाषण दिया। इस सत्र में उन किफायती चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनके कारण वैश्विक स्तर पर 3.1 अरब लोग सार्थक डिजिटल भागीदारी से वंचित हैं।
उपयोग के अंतर को पाटने की तात्कालिकता पर जोर देते हुए मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि उपकरणों और सेवाओं का सामर्थ्य डिजिटल समावेशन के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कनेक्टिविटी को सही मायने में परिवर्तनकारी बनना है, तो इसे सभी के लिए आसान बनाना होगा। हमारे सामने चुनौती प्रौद्योगिकी की कमी नहीं है, बल्कि लागत संबंधी बाधाएं हैं जो अरबों लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने से रोकती हैं।
नीतिगत सुधार, प्रतिस्पर्धा और व्यापकता के माध्यम से डेटा लागत को कम करने में भारत के अनुभव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा यह दर्शाती है कि व्यापकता, नवाचार और स्थिर नीतिगत ढांचे लागत को प्रभावशाली तरीके से कम कर सकते हैं। हमारी सामूहिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी – 5जी से लेकर उभरते 6जी इकोसिस्टम तक – किफायती, समावेशी और विस्तार योग्य बनी रहे।
श्री सिंधिया ने उपकरणों की सामर्थ्य, नवीन वित्तपोषण मॉडल, और स्थायी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने के लिए सरकार, उद्योग जगत, वित्तीय संस्थानों और वैश्विक निकायों को शामिल करते हुए एक समन्वित, बहु-हितधारक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
‘बिल्ट फॉर वॉट्स नेक्स्ट‘ विषय पर एमडब्ल्यूसी मेन स्टेज पर भाषण
बाद में केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने ‘बिल्ट फॉर वॉट्स नेक्स्ट’ विषय पर आयोजित सत्र में एमडब्ल्यूसी मंच को संबोधित किया। इस दौरान एआई, क्लाउड-नेटिव प्रौद्योगिकियों और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे द्वारा संचालित इंटेलीजेंट, अनुकूलनीय और मानव-केंद्रित प्लैटफॉर्मों में नेटवर्क के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कनेक्टिविटी महज पहुंच का साधन होने से आगे बढ़कर अवसरों का एक शक्तिशाली इंजन बन गई है, जो नवाचार, आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को गति प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां नेटवर्क इंटेलीजेंट, स्वायत्त और पूर्वानुमानित हैं। एआई-संचालित प्रणालियां, क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र लोगों के कनेक्टिविटी अनुभव और उद्यमों के नवाचार के तरीके को फिर से परिभाषित कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कनेक्टिविटी का भविष्य केवल तेज गति में ही नहीं, बल्कि सहज डिजिटल अनुभवों, अनुकूल बुनियादी ढांचे और स्थायी विकास में निहित है। प्रौद्योगिकी को आम लोगों को सशक्त बनाना चाहिए, व्यवसायों को मजबूत करना चाहिए और समाजों को समृद्ध होने में सक्षम बनाना चाहिए।
इस संबोधन में भारत ने सुरक्षित, भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
भारत पवेलियन का उद्घाटन
एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत पवेलियन का उद्घाटन रहा। इसमें भारत की बढ़ती दूरसंचार विनिर्माण क्षमताओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया गया। इस वर्ष पवेलियन में 40 भारतीय कंपनियां और नवप्रवर्तक एमडब्ल्यूसी में भाग ले रहे हैं।
इस पवेलियन में अग्रणी भारतीय कंपनियों ने 4जी और 5जी रेडियो नेटवर्क, ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम, आईपी/एमपीएलएस राउटिंग, ब्रॉडबैंड एक्सेस, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, एआई-संचालित नेटवर्क प्रबंधन, आईओटी एप्लिकेशन, सेमीकंडक्टर-सक्षम हार्डवेयर और अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
यह पवेलियन डिजाइन-आधारित विनिर्माण केंद्र और लागत प्रभावी और सुरक्षित कनेक्टिविटी समाधानों में एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत के उदय को दर्शाता है।
आईएमसी 2026 कर्टेन रेजर का अनावरण
केंद्रीय मंत्री ने जीएसएमए इनसाइट्स हब में इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के लिए कर्टेन रेजर का भी अनावरण किया। उन्होंने घोषणा की कि आईएमसी 2026 का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा, जिससे उन्नत दूरसंचार, एआई-संचालित नेटवर्क और उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
तेजस नेटवर्क्स का शुभारंभ
तेजस नेटवर्क्स के स्टॉल का जायजा लेते हुए मंत्री ने टीजे1600-डी3 हाइपर-स्केलेबल डीसीआई प्लैटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो भारत में विकसित उन्नत ऑप्टिकल नेटवर्किंग समाधानों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस शुभारंभ ने उच्च क्षमता वाले डेटा सेंटर इंटरकनेक्ट प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित किया।
सामरिक बैठकें और प्रौद्योगिकी संबंधी बातचीत
एमडब्ल्यूसी कार्यक्षेत्र (एरिना) में अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री को आईटीयू की महासचिव सुश्री डोरेन बोगदान-मार्टिन से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला। आईटीयू के महासचिव ने जीएसएमए मंत्रिस्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेने और वैश्विक मंच पर भारत के जीवंत दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र और डिजिटल परिवर्तनकारी यात्रा को प्रस्तुत करने के लिए मंत्री जी को बधाई दी।
मंत्री ने भारत के लिए सार्वभौमिक, सार्थक और अनुकूल कनेक्टिविटी ढांचे को आगे बढ़ाने के उपायों को समझने के लिए यूटेलसैट और वियासैट के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
दोनों कंपनियों ने भारत भर में सुरक्षित, उच्च गति और सार्वभौमिक एवं सार्थक कनेक्टिविटी पहल के लिए मंत्री के दृष्टिकोण की सराहना की।
श्री सिंधिया ने सुनील भारती मित्तल के नेतृत्व वाले भारती समूह के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की। इससे भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल को बल मिला।
श्री सिंधिया ने प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी नेतृत्व टीमों के साथ बातचीत की। मेटा में उन्हें एआई-सक्षम वियरेबल और न्यूरल इंटरफेस तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई और उन्होंने मेटा रे-बैन डिस्प्ले का अनुभव किया। उन्होंने चश्मे के ‘कन्वर्सेशन फोकस’ फीचर का भी परीक्षण किया, यह एक महत्वपूर्ण एक्सेसिबिलिटी फंक्शन है जो शोरगुल वाले या भीड़भाड़ वाले वातावरण में सामने वाले व्यक्ति की आवाज को अलग करता है।
राकुटेन में उन्होंने स्केलेबल 5जी परिनियोजन के लिए सॉफ्टवेयर-परिभाषित, एआई-नेटिव नेटवर्क आर्किटेक्चर देखे और सीईओ हिरोशी मिकितानी से भी मुलाकात की। वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज में उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित एआई-संचालित वाई-फाई और नेटवर्क समाधानों को देखा।
एरिक्सन में केंद्रीय मंत्री के साथ एरिक्सन बोर्ड के अध्यक्ष जान कार्लसन भी मौजूद थे, जहां उन्होंने उन्नत नेटवर्क प्रौद्योगिकियों और उभरती 6जी क्षमताओं पर प्रदर्शन का अवलोकन किया। इस दौरान तीन महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया गया इनमें सीएमवेव पर 6जी डेटा कॉल, अनुभवात्मक 6जी प्रदर्शन और भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष रूप से तैयार किए गए नए रेडियो समाधान शामिल रहा।
नोकिया स्टॉल की अपनी यात्रा के दौरान मंत्री ने जनरेटिव एआई-सक्षम एज एप्लिकेशन और इमर्सिव 6जी उपयोग के मामलों का अनुभव किया। उन्होंने नोकिया के स्टॉल पर नोकिया के अध्यक्ष और सीईओ जस्टिन हॉटार्ड के साथ विस्तृत चर्चा भी की।
इंटेल के बूथ पर श्री सिंधिया ने अगली पीढ़ी के प्रोसेसर द्वारा संचालित एआई-अनुकूलित वर्चुअल आरएएन समाधानों का अवलोकन किया।
सिस्को स्टॉल के दौरे में एआई-संचालित एज कंप्यूटिंग और नेटवर्क स्वचालन के प्रदर्शन शामिल थे, जबकि क्वॉलकॉम में उन्हें एआई-संचालित आरएएन स्वचालन, उन्नत 5जी मॉडेम सिस्टम और एज एआई प्लेटफार्मों के बारे में जानकारी दी गई।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने 2 मार्च 2026 को वैश्विक और भारतीय सीईओ के साथ उच्च स्तरीय रात्रिभोज वार्ता के साथ एमडब्ल्यूसी 2026 में भारत की गतिविधियों का शुभारंभ किया। भारत द्वारा आयोजित इस रात्रिभोज ने डिजिटल साझेदारी को मजबूत करने, नवाचार को गति देने और विश्वसनीय प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया।
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में किए गए प्रयास दूरसंचार और डिजिटल नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी को दर्शाते हैं। साथ ही समावेशी विकास के लिए सुरक्षित, किफायती और भविष्य के लिए तैयार कनेक्टिविटी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं।
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत के दूरसंचार नवोन्मेषकों की भागीदारी का आयोजन दूरसंचार उपकरण एवं सेवा निर्यात संवर्धन परिषद(टीईपीसी) द्वारा किया जा रहा है, जिसे भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग(डीओटी) का समर्थन प्राप्त है।
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 के बारे में
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 2 से 5 मार्च, 2026 तक स्पेन के बार्सिलोना में फिरा बार्सिलोना ग्रैन वाया में किया जा रहा है। जीएसएमए द्वारा आयोजित एमडब्ल्यूसी 2026 मोबाइल और प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सम्मेलन है, जो 109,000 से अधिक आगंतुकों और लगभग 2,900 प्रदर्शकों, प्रायोजकों और भागीदारों को आकर्षित करता है।
एमडब्ल्यूसी 2026 का आधिकारिक विषय ‘द आईक्यू एरा’ है, जो स्मार्ट नेटवर्क, व्यावसायिक नवाचार और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कनेक्टिविटी के एकीकरण पर प्रकाश डालता है।
दूरसंचार उपकरण और सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (टीईपीसी) के बारे में
भारत सरकार की विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) के दायरे में दूरसंचार उपकरण और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए भारत सरकार द्वारा दूरसंचार उपकरण और सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (टीईपीसी) की स्थापना की गई है।
टीईपीसी एक परिषद के रूप में भारत से दूरसंचार निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और निर्यात को सुगम बनाने में अपनी सदस्य कंपनियों की सहायता करता है। टीईपीसी भारतीय दूरसंचार निर्यातकों के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ भारत सरकार के विभिन्न विभागों के साथ मिलकर संपूर्ण दूरसंचार समाधान प्रदान करने का काम करता है।
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