उन्होंने कहा कि यह रिएक्टर तरल सोडियम को शीतलक के रूप में उपयोग करते हुए प्लूटोनियम का प्रयोग करता है, जिससे कम लागत में अधिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित होता है और भारत के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाते हुए थोरियम आधारित रिएक्टरों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विकास भारत की क्षमता को मजबूत करता है और दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अपरिहार्य है और शासन तथा दैनिक कार्यों का अभिन्न अंग बनती जाएगी। उन्होंने कहा कि एआई एक शक्तिशाली सहायक उपकरण के रूप में अनुसंधान, विश्लेषण और निर्णय लेने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि मानवीय बुद्धिमत्ता दब न जाए। उन्होंने इसे एक संकर मॉडल बताया जहां प्रौद्योगिकी मानवीय क्षमताओं की पूरक है।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश अब वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्टार्टअप देशों में शुमार है, और पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है, जिसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन स्टार्टअप्स में से लगभग 50% सोनीपत, पानीपत और सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, जो अवसरों के लोकतंत्रीकरण और महानगरों से परे नवाचार के प्रसार को दर्शाता है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में विस्तार से बताते हुए इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया, जिसने छात्रों को शैक्षणिक मार्ग चुनने और बदलने की स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र अब कठोर विषय धाराओं से बंधे नहीं हैं और अंतर्विषयक शिक्षा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे वे अपनी शिक्षा को अपनी विकसित रुचियों और योग्यताओं के अनुरूप ढाल सकते हैं।
प्रतिभा और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने “वैभव” कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को घरेलू संस्थानों से जोड़ना और सहयोग के अवसर पैदा करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाने में मदद कर रही हैं जहां वैश्विक विशेषज्ञता भारत के वैज्ञानिक विकास में योगदान दे सकती है।
उन्होंने “प्रतिभा सेतु” पोर्टल के बारे में भी बात की, जिसे यूपीएससी परीक्षा के उन्नत चरणों में पहुंचने वाले उम्मीदवारों को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म संगठनों को सत्यापित उम्मीदवारों की प्रोफाइल तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन लोगों के लिए अवसर पैदा होते हैं जो अंतिम चयन में भले ही न पहुंच पाएं लेकिन उनमें मजबूत क्षमताएं हों।
छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, मंत्री जी ने मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में विकास अलग-थलग रहकर नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों को पारंपरिक करियर विकल्पों से परे विविध अवसरों का पता लगाने और उपलब्ध तकनीकी उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना की सुलभता, तकनीकी प्रगति और नीतिगत सुधारों के कारण वर्तमान युग युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों से इस अनुकूल वातावरण का भरपूर लाभ उठाने और भारत की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
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