उपराष्ट्रपति बेलगावी के यदुर स्थित श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेकम समारोह के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन आज कर्नाटक के बेलगावी जिले के यदुर स्थित श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेकम समारोह के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

 

श्री क्षेत्र यदुरू में सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आध्यात्मिक पुनर्जागरण और सभ्यतागत गौरव के पुनर्मूल्यांकन का क्षण बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यता है—सिंधु घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक प्रवाहित होने वाली चेतना की एक अखंड धारा। उन्होंने रेखांकित किया कि यह वह पवित्र भूमि है जहाँ वेदों के शाश्वत ज्ञान को पहली बार सुना गया था और जहाँ श्रीमद्भगवद्गीता का गहन संदेश आज भी मानवता को साहस के साथ कर्म करने, धर्मपरायणता के साथ जीने और पूर्ण श्रद्धा के साथ समर्पण करने का मार्ग दिखा रहा है।

 

यह रेखांकित करते हुए कि हिंदू चेतना केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है, उपराष्ट्रपति ने “वसुधैव कुटुम्बकम” यानि संपूर्ण विश्व एक परिवार है के कालातीत दर्शन और भारत की उस आध्यात्मिक दृष्टि पर बल दिया जो प्रकृति और प्रत्येक मनुष्य में दिव्यता के दर्शन करती है।

वीर-शैव लिंगायत परंपरा का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान में इसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वीर-शैव मठों और मंदिरों ने श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता के मूल्यों को पोषित करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।

उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कदासिद्धेश्वर स्वामीजी की आध्यात्मिक दृष्टि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने समय के साथ ओझल हो चुके इस पवित्र स्थल को पुनः खोजा और उसका पुनरुद्धार किया, जिससे सनातन धर्म की शाश्वत ज्योति एक बार फिर प्रज्वलित हुई। उन्होंने अटूट विश्वास के साथ कहा कि सनातन धर्म की समय द्वारा परीक्षा ली जा सकती है, लेकिन इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने दैनिक पूजा-अर्चना, अनुष्ठान, जीर्णोद्धार कार्यों और आध्यात्मिक सेवा को अक्षुण्ण बनाए रखने में श्री कदासिद्धेश्वर मठ के उत्तराधिकारी पीठाधीश्वरों के अथक प्रयासों की सराहना की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित “विकास भी, विरासत भी” के विजन का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का विकास और उसकी विरासत साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि आज का भारत एक तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जबकि अपनी सभ्यतागत मूल्यों और लोकाचार में उसकी जड़ें आज भी उतनी ही गहरी हैं।

राजगोपुरम के उद्घाटन को आस्था के पुनर्मूल्यांकन और परंपरा की निरंतरता के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि पवित्र स्थलों का पुनरुद्धार केवल वास्तुकला का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता को पुनर्स्थापित करने का माध्यम है।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, कर्नाटक सरकार के भारी एवं मध्यम उद्योग और अवसंरचना मंत्री श्री एम. बी. पाटिल, श्री श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी, राज्यसभा सांसद श्री ईरन्ना कडाडी, धर्मगुरु और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए।

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स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भारत के कार्यक्रमों का नेतृत्व किया

नई दिल्ली – संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत के कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। इसमें उन्होंने जीएसएमए मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम और एमडब्ल्यूसी मेन स्टेज में उच्च स्तरीय भागीदारी निभाते हुए सस्ती, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भारत के दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की।

लागत में बाधा को खत्म करना‘ विषय पर आयोजित जीएसएमए मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम में समापन भाषण

श्री सिंधिया ने ‘लागत में बाधा को खत्म करना’ विषय पर आयोजित सत्र के दौरान मंत्रिस्तरीय मंच पर समापन भाषण दिया। इस सत्र में उन किफायती चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनके कारण वैश्विक स्तर पर 3.1 अरब लोग सार्थक डिजिटल भागीदारी से वंचित हैं।

उपयोग के अंतर को पाटने की तात्कालिकता पर जोर देते हुए मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि उपकरणों और सेवाओं का सामर्थ्य डिजिटल समावेशन के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कनेक्टिविटी को सही मायने में परिवर्तनकारी बनना है, तो इसे सभी के लिए आसान बनाना होगा। हमारे सामने चुनौती प्रौद्योगिकी की कमी नहीं है, बल्कि लागत संबंधी बाधाएं हैं जो अरबों लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने से रोकती हैं।

नीतिगत सुधार, प्रतिस्पर्धा और व्यापकता के माध्यम से डेटा लागत को कम करने में भारत के अनुभव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा यह दर्शाती है कि व्यापकता, नवाचार और स्थिर नीतिगत ढांचे लागत को प्रभावशाली तरीके से कम कर सकते हैं। हमारी सामूहिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी – 5जी से लेकर उभरते 6जी इकोसिस्टम तक – किफायती, समावेशी और विस्तार योग्य बनी रहे।

श्री सिंधिया ने उपकरणों की सामर्थ्य, नवीन वित्तपोषण मॉडल, और स्थायी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने के लिए सरकार, उद्योग जगत, वित्तीय संस्थानों और वैश्विक निकायों को शामिल करते हुए एक समन्वित, बहु-हितधारक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

बिल्ट फॉर वॉट्स नेक्स्ट‘ विषय पर एमडब्ल्यूसी मेन स्टेज पर भाषण

बाद में केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने ‘बिल्ट फॉर वॉट्स नेक्स्ट’ विषय पर आयोजित सत्र में एमडब्ल्यूसी मंच को संबोधित किया। इस दौरान एआई, क्लाउड-नेटिव प्रौद्योगिकियों और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे द्वारा संचालित इंटेलीजेंट, अनुकूलनीय और मानव-केंद्रित प्लैटफॉर्मों में नेटवर्क के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कनेक्टिविटी महज पहुंच का साधन होने से आगे बढ़कर अवसरों का एक शक्तिशाली इंजन बन गई है, जो नवाचार, आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को गति प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां नेटवर्क इंटेलीजेंट, स्वायत्त और पूर्वानुमानित हैं। एआई-संचालित प्रणालियां, क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र लोगों के कनेक्टिविटी अनुभव और उद्यमों के नवाचार के तरीके को फिर से परिभाषित कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कनेक्टिविटी का भविष्य केवल तेज गति में ही नहीं, बल्कि सहज डिजिटल अनुभवों, अनुकूल बुनियादी ढांचे और स्थायी विकास में निहित है। प्रौद्योगिकी को आम लोगों को सशक्त बनाना चाहिए, व्यवसायों को मजबूत करना चाहिए और समाजों को समृद्ध होने में सक्षम बनाना चाहिए।

इस संबोधन में भारत ने सुरक्षित, भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

भारत पवेलियन का उद्घाटन

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत पवेलियन का उद्घाटन रहा। इसमें भारत की बढ़ती दूरसंचार विनिर्माण क्षमताओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया गया। इस वर्ष पवेलियन में 40 भारतीय कंपनियां और नवप्रवर्तक एमडब्ल्यूसी में भाग ले रहे हैं।

इस पवेलियन में अग्रणी भारतीय कंपनियों ने 4जी  और 5जी रेडियो नेटवर्क, ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम, आईपी/एमपीएलएस राउटिंग, ब्रॉडबैंड एक्सेस, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, एआई-संचालित नेटवर्क प्रबंधन, आईओटी एप्लिकेशन, सेमीकंडक्टर-सक्षम हार्डवेयर और अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में समाधानों का प्रदर्शन किया गया।

यह पवेलियन डिजाइन-आधारित विनिर्माण केंद्र और लागत प्रभावी और सुरक्षित कनेक्टिविटी समाधानों में एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत के उदय को दर्शाता है।

आईएमसी 2026 कर्टेन रेजर का अनावरण

केंद्रीय मंत्री ने जीएसएमए इनसाइट्स हब में इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के लिए कर्टेन रेजर का भी अनावरण किया। उन्होंने घोषणा की कि आईएमसी 2026 का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा, जिससे उन्नत दूरसंचार, एआई-संचालित नेटवर्क और उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

तेजस नेटवर्क्स का शुभारंभ

तेजस नेटवर्क्स के स्टॉल का जायजा लेते हुए मंत्री ने टीजे1600-डी3 हाइपर-स्केलेबल डीसीआई प्लैटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो भारत में विकसित उन्नत ऑप्टिकल नेटवर्किंग समाधानों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस शुभारंभ ने उच्च क्षमता वाले डेटा सेंटर इंटरकनेक्ट प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित किया।

सामरिक बैठकें और प्रौद्योगिकी संबंधी बातचीत

एमडब्ल्यूसी कार्यक्षेत्र (एरिना) में अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री को आईटीयू की महासचिव सुश्री डोरेन बोगदान-मार्टिन से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला। आईटीयू के महासचिव ने जीएसएमए मंत्रिस्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेने और वैश्विक मंच पर भारत के जीवंत दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र और डिजिटल परिवर्तनकारी यात्रा को प्रस्तुत करने के लिए मंत्री जी को बधाई दी।

मंत्री ने भारत के लिए सार्वभौमिक, सार्थक और अनुकूल कनेक्टिविटी ढांचे को आगे बढ़ाने के उपायों को समझने के लिए यूटेलसैट और वियासैट के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।

दोनों कंपनियों ने भारत भर में सुरक्षित, उच्च गति और सार्वभौमिक एवं सार्थक कनेक्टिविटी पहल के लिए मंत्री के दृष्टिकोण की सराहना की।

श्री सिंधिया ने सुनील भारती मित्तल के नेतृत्व वाले भारती समूह के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की। इससे भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल को बल मिला।

श्री सिंधिया ने प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी नेतृत्व टीमों के साथ बातचीत की। मेटा में उन्हें एआई-सक्षम वियरेबल और न्यूरल इंटरफेस तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई और उन्होंने मेटा रे-बैन डिस्प्ले का अनुभव किया। उन्होंने चश्मे के ‘कन्वर्सेशन फोकस’ फीचर का भी परीक्षण किया, यह एक महत्वपूर्ण एक्सेसिबिलिटी फंक्शन है जो शोरगुल वाले या भीड़भाड़ वाले वातावरण में सामने वाले व्यक्ति की आवाज को अलग करता है।

राकुटेन में उन्होंने स्केलेबल 5जी परिनियोजन के लिए सॉफ्टवेयर-परिभाषित, एआई-नेटिव नेटवर्क आर्किटेक्चर देखे और सीईओ हिरोशी मिकितानी से भी मुलाकात की। वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज में उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित एआई-संचालित वाई-फाई और नेटवर्क समाधानों को देखा।

एरिक्सन में केंद्रीय मंत्री के साथ एरिक्सन बोर्ड के अध्यक्ष जान कार्लसन भी मौजूद थे, जहां उन्होंने उन्नत नेटवर्क प्रौद्योगिकियों और उभरती 6जी क्षमताओं पर प्रदर्शन का अवलोकन किया। इस दौरान तीन महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया गया  इनमें सीएमवेव पर 6जी डेटा कॉल, अनुभवात्मक 6जी प्रदर्शन और भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष रूप से तैयार किए गए नए रेडियो समाधान शामिल रहा।

नोकिया स्टॉल की अपनी यात्रा के दौरान मंत्री ने जनरेटिव एआई-सक्षम एज एप्लिकेशन और इमर्सिव 6जी उपयोग के मामलों का अनुभव किया। उन्होंने नोकिया के स्टॉल पर नोकिया के अध्यक्ष और सीईओ जस्टिन हॉटार्ड के साथ विस्तृत चर्चा भी की।

इंटेल के बूथ पर श्री सिंधिया ने अगली पीढ़ी के प्रोसेसर द्वारा संचालित एआई-अनुकूलित वर्चुअल आरएएन समाधानों का अवलोकन किया।

सिस्को स्टॉल के दौरे में एआई-संचालित एज कंप्यूटिंग और नेटवर्क स्वचालन के प्रदर्शन शामिल थे, जबकि क्वॉलकॉम में उन्हें एआई-संचालित आरएएन स्वचालन, उन्नत 5जी मॉडेम सिस्टम और एज एआई प्लेटफार्मों के बारे में जानकारी दी गई।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने 2 मार्च 2026 को वैश्विक और भारतीय सीईओ के साथ उच्च स्तरीय रात्रिभोज वार्ता के साथ एमडब्ल्यूसी 2026 में भारत की गतिविधियों का शुभारंभ किया। भारत द्वारा आयोजित इस रात्रिभोज ने डिजिटल साझेदारी को मजबूत करने, नवाचार को गति देने और विश्वसनीय प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया।

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में किए गए प्रयास दूरसंचार और डिजिटल नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी को दर्शाते हैं। साथ ही समावेशी विकास के लिए सुरक्षित, किफायती और भविष्य के लिए तैयार कनेक्टिविटी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं।

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत के दूरसंचार नवोन्मेषकों की भागीदारी का आयोजन दूरसंचार उपकरण एवं सेवा निर्यात संवर्धन परिषद(टीईपीसी) द्वारा किया जा रहा है, जिसे भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग(डीओटी) का समर्थन प्राप्त है।

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 के बारे में

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 2 से 5 मार्च, 2026 तक स्पेन के बार्सिलोना में फिरा बार्सिलोना ग्रैन वाया में किया जा रहा है। जीएसएमए द्वारा आयोजित एमडब्ल्यूसी 2026 मोबाइल और प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सम्मेलन है, जो 109,000 से अधिक आगंतुकों और लगभग 2,900 प्रदर्शकों, प्रायोजकों और भागीदारों को आकर्षित करता है।

एमडब्ल्यूसी 2026 का आधिकारिक विषय ‘द आईक्यू एरा’ है, जो स्मार्ट नेटवर्क, व्यावसायिक नवाचार और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कनेक्टिविटी के एकीकरण पर प्रकाश डालता है।

दूरसंचार उपकरण और सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (टीईपीसी) के बारे में

भारत सरकार की विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) के दायरे में दूरसंचार उपकरण और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए भारत सरकार द्वारा दूरसंचार उपकरण और सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (टीईपीसी) की स्थापना की गई है।

टीईपीसी एक परिषद के रूप में भारत से दूरसंचार निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और निर्यात को सुगम बनाने में अपनी सदस्य कंपनियों की सहायता करता है। टीईपीसी भारतीय दूरसंचार निर्यातकों के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ भारत सरकार के विभिन्न विभागों के साथ मिलकर संपूर्ण दूरसंचार समाधान प्रदान करने का काम करता है।

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गुजरात एंटरटेनमेंट एंड मीडिया इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित सेमिनार संपन्न…..!

05.03.2026 – वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्युसर्स एसोसिएशन (WIFPA),मुंबई और सर्विस एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (SEPC), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) की एक इकाई गुजरात एंटरटेनमेंट एंड मीडिया इंडस्ट्रीज ने पिछले दिनों अहमदाबाद में गुजरात विश्वविद्यालय परिसर में गुजरात की मनोरंजन और मीडिया उद्योग पर एक सम्मेलन का आयोजन किया।

इस सेमिनार में सरकारी अधिकारी, फिल्म जगत के दिग्गज, निर्माता, कलाकार, तकनीज्ञ और गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रों ने भाग लिया। गुजरात सरकार की सिनेमा और पर्यटन नीति फिल्म निर्माण के लिए सुविधाएं प्रदान करने का उद्देश्य रखती है, जिसमें वित्तीय प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे का विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर शामिल हैं।

इस उद्देश्य की पूर्ति और प्रचार प्रसार हेतु आयोजित इस कार्यक्रम में प्रख्यात वक्ताओं डॉ. जयंतीलाल गडा, डॉ. अभय सिन्हा, संदीप पटेल, डॉ. नेत्री त्रिवेदी, अभिषेक शाह, अभिषेक जैन ने अवसरों और मनोरंजन क्षेत्र में चुनौतियों पर अपने मूल्यवान सुझाव दिए। परिषद के मुख्य आयोजक सर्विस एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिलn के निदेशक डॉ. अभय कुमार सिन्हा, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्युसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संग्राम शिर्के ने सुपरहिट फिल्म ‘लालो’ का उदाहरण देते हुए गुजराती फिल्म इंडस्ट्री के बारे मे कहा कि आने वाले समय मे गुजराती फिल्म जगत एक अलग मुकाम हासिल करेगी।

गुजरात युनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को उन्होंने प्रोत्साहन दिया और कार्यक्रम के आयोजक विफ्पा उपाध्यक्ष डॉ. हिराचंद दंड ने भी मनोरंजन उद्योग के भविष्य पर अपने मूल्यवान सुझाव दिए। इस कार्यक्रम में गुजराती फिल्म उद्योग, फिल्म निर्माण के मुद्दे, सरकारी सब्सिडी, लेखकों और निर्देशकों की भूमिका और गुजरात में सिनेमा हॉल से जुड़ी समस्याओं व अन्य अतिरिक्त विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।

गुजराती फिल्म स्टार हितेश कनोडिया, फिल्म ‘लालो’ की पूरी टीम और अन्य कलाकारों ने इस सेमिनार और कांफ्रेंस में भाग लिया। वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्युसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती अंजना शर्मा, मानद महासचिव दिनेश आशिवाल, संयुक्त सचिव चांदनी गुप्ता, धर्मेंद्र मेहरा, मानद महासचिव फिल्म मेकर्स कॉम्बाइन और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया, अमित कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष – फिल्म मेकर्स कॉम्बाइन, डॉ. प्रल्हाद खंडारे, कोषाध्यक्ष, श्रीमती चंदा पटेल, अखिल कोटक, कार्यकारी समिति सदस्य एवं गुजरात कार्यालय व्यवस्थापक हितेश आनंद उपस्थित थे।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा में आयोजित ‘बाहा पर्व’ में हुए सम्मिलित

 मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जाहेर थान में पूजा-अर्चना कर राज्यवासियों की सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उन्नति की कामना की।

नेमरा, रामगढ,05.03.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन सपरिवार अपने पैतृक गांव नेमरा में आयोजित ‘बाहा पर्व’ में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ग्रामीणों के साथ नेमरा गांव स्थित जाहेर थान पहुंचे। मुख्यमंत्री वहां पारम्परिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर राज्यवासियों की सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उन्नति की कामना की। परंपरा के अनुरूप पूजन कार्य गांव के नाइके बाबा (पाहन) श्री चैतन टुडू एवं कुडम नाइके बाबा (उप पाहन) श्री छोटू बेसरा ने संपन्न कराया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन नेमरा के ग्रामीणों के साथ ‘बाहा पूजा’ के लिए अपने निवास स्थान से पदयात्रा करते हुए जाहेर थान पहुंचे।

मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का उत्साह चरम पर

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘बाहा पर्व’ में शामिल होने अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर नेमरा सहित आस-पास क्षेत्र के लोग काफी उत्साहित नजर आए। संस्कृति के अनुरूप नेमरा के ग्रामीण ढोल-नगाड़ा एवं मांदर बजाते हुए मुख्यमंत्री के साथ जाहेर थान पहुंचे। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने स्वयं मांदर बजाकर ग्रामीणों का उत्साहवर्द्धन किया। मौके पर उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया।

मुख्यमंत्री सपरिवार पहुंचे नेमरा

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन अपनी धर्मपत्नी विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन सहित सपरिवार दो दिवसीय दौरे पर नेमरा पहुंचे। मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में आस-पास क्षेत्र के लोग नेमरा गांव पहुंचे तथा मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री भी आत्मीयता के साथ लोगों से मिले एवं उनकी बातों को सुना। मौके पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘बाहा पर्व’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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भारत-जापान सीईपीए की सातवीं संयुक्त समिति की बैठक टोक्यो में आयोजित हुई; वाणिज्य विभाग सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने बैठक की सह-अध्यक्षता की

नई दिल्ली – भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के अंतर्गत सातवीं संयुक्त समिति की बैठक 2 मार्च, 2026 को जापान के टोक्यो में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार में वाणिज्य विभाग सचिव श्री राजेश अग्रवाल और जापान सरकार में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप मंत्री ने की।

दोनों पक्षों ने सीईपीए के कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक के दौरान, वाणिज्य विभाग सचिव श्री अग्रवाल ने अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) के उप मंत्री से मुलाकात की। द्विपक्षीय व्यापार और निवेश, व्यापारिक माहौल में सुधार और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आगामी 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन समेत कई विषयों पर चर्चा हुई।

एमईटीआई के उप मंत्री के साथ बैठक के दौरान, श्री अग्रवाल ने अगस्त 2025 में वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के नेताओं की ओर से व्यक्त किए गए साझा दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढ़ाने और विविधता लाने की जरूरतों पर जोर दिया। उन्होंने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत पूरकता, जैसे जापान की प्रौद्योगिकी, पूंजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती, और भारत की कुशल कार्यबल, विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, पर जोर दिया। उन्होंने नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान विचार किए गए लोगों की आने-जाने के साथ-साथ सीईपीए के पूरे अवसरों का इस्तेमाल करने के महत्व पर जोर दिया।

श्री अग्रवाल ने कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और सेवा क्षेत्रों में जापान को भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अधिक संतुलित द्विपक्षीय व्यापार संबंध प्राप्त करने के महत्व पर भी बल दिया।

वाणिज्य सचिव ने एक गोलमेज सम्मेलन के दौरान जापानी उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी बातचीत की। शाम को, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और केइदानरेन के सहयोग से जापान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से एक व्यापार और निवेश रोडशो का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य भारत से व्यापार को प्रोत्साहन देना और जापानी कंपनियों से अधिक निवेश प्रवाह को सुगम बनाना था।

श्री अग्रवाल ने प्रतिभागियों को व्यापार और निवेश के लिए भारत के अनुकूल नीतिगत वातावरण से अवगत कराया, जिसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चल रहे उपाय शामिल हैं। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि सीईपीए एक स्थिर ढांचा प्रदान करता है, जो शुल्क की निश्चितता और नियामकों के पूर्वानुमान को सुनिश्चित करता है, जिससे वैश्विक मूल्य और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वसनीय साझेदारों के रूप में भारत और जापान के बीच गहन सहयोग के लिए एक सहायक वातावरण बनता है।

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प्रधानमंत्री ने फिनलैंड के राष्ट्रपति श्री अलेक्जेंडर स्टब का भारत में स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज फिनलैंड गणराज्य के राष्ट्रपति श्री अलेक्जेंडर स्टब का स्वागत किया, जो भारत की राजकीय यात्रा पर हैं।

श्री मोदी ने विश्वास प्रकट किया कि इस यात्रा से भारत और फिनलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

राष्ट्रपति श्री स्टब ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट में कहा था कि वह भारत की राजकीय यात्रा कर रहे हैं और भारत की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ  अन्य नेताओं से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंध और मजबूत होंगे।

फिनलैंड के राष्ट्रपति की  X पर पोस्ट का जवाब देते हुए, श्री मोदी ने कहा;

“भारत में आपका स्वागत है, राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब। मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ, आपकी यात्रा भारत-फिनलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। मैं कल हमारी बैठक और रायसीना डायलॉग 2026 में आपके मुख्य संबोधन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ।

@alexstubb”

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केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत पवेलियन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज स्पेन के बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत पैवेलियन का उद्घाटन किया। यह विश्व के अग्रणी प्रौद्योगिकी और दूरसंचार मंचों में से एक है।

 

मीडिया को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जब विश्व “आईक्यू युग” में कनेक्टिविटी के भविष्य पर विचार कर रहा है, तब भारत बुद्धिमत्ता और अवसंरचना के उस मोड़ पर खड़ा है—जहां कनेक्टिविटी क्षमता से मिलती है और नवाचार समावेशन से जुड़ता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का दूरसंचार परिवर्तन स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास, विश्वसनीय दूरसंचार पारितंत्र, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में गहन एकीकरण पर आधारित रहा है।

केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने कहा, “आज, जब हम बार्सिलोना में खड़े हैं, संदेश स्पष्ट है। भारत न सिर्फ अपने 1.4 अरब नागरिकों के लिए नेटवर्क का निर्माण कर रहा है, बल्कि विश्व के लिए विश्वसनीय डिजिटल सेतु भी बना रहा है,” “‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के दर्शन से प्रेरित होकर हमारा मानना है कि कनेक्टिविटी मानवता को सशक्त बनाए, साझेदारियों को मजबूत करे और साझा समृद्धि का सृजन करे।”

इस वर्ष भारत पवेलियन में मूल्य शृंखला के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 से अधिक भारतीय दूरसंचार नवोन्मेषकों को एक साथ लाया गया है, जो 4जी/5जी तथा उभरते 6जी प्रौद्योगिकियों, ओपन RAN, ऑप्टिकल एवं उपग्रह संचार, सेमीकंडक्टर डिजाइन, एआई-आधारित नेटवर्क इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, दूरसंचार सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इस विस्तारित भागीदारी से भारत की दूरसंचार क्षमताओं और तेजी से सुदृढ़ होते नवाचार इकोसिस्टम के प्रति वैश्विक विश्वास में निरंतर वृद्धि दिखाई देता है।

भारत पवेलियन के अपने दौरे के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने विभिन्न कंपनियों के स्टॉलों का अवलोकन किया और अनंत सिस्टम्स, एक्सएस इंफोसोल प्राइवेट लिमिटेड, सिग्नलचिप, RV सॉल्यूशंस, नियोसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज, सेलकॉम, सी-डॉट, तथा जीएक्स इंडिया सहित अन्य प्रतिनिधियों से बात-चीत किया। उन्होंने दूरसंचार हार्डवेयर, सेमीकंडक्टर डिजाइन, एआई-सक्षम प्लेटफॉर्म और अगली पीढ़ी के नेटवर्क अवसंरचना के क्षेत्र में उनकी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और नवाचारी समाधानों का अवलोकन किया तथा भारत के आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि पवेलियन में भारतीय नवोन्मेषकों की सशक्त उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत सुरक्षित नेटवर्क के निर्माण, एआई-संचालित दूरसंचार अवसंरचना को आगे बढ़ाने, विश्वसनीय इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने और वैश्विक स्तर पर दूरसंचार निर्यात का विस्तार करने के प्रति प्रतिबद्ध है।

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में भारत के दूरसंचार नवोन्मेषकों की भागीदारी का आयोजन दूरसंचार उपकरण एवं सेवा निर्यात संवर्धन परिषद(टीईपीसी) द्वारा किया जा रहा है, जिसे भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग(DoT) का समर्थन प्राप्त है।

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नीतीश कुमार और नितिन नवीन सहित बिहार से NDA के राज्यसभा उम्मीदवारों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया

पटना, नीतीश कुमार और नितिन नवीन सहित बिहार से NDA के राज्यसभा उम्मीदवारों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया।

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पटना के JDU कार्यालय में तोड़फोड़, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर भड़के समर्थक, पटना पहुंचे अमित शाह

पटना – नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर सकते हैं. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा.

इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी.

गृह मंत्री अमित शाह पटना पहुंच गए हैं. वह बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के घर जा सकते हैं और इसके बाद एनडीए के राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन में भी शामिल हो सकते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.

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एकीकृत उद्योग क्षमता, कौशल और प्रौद्योगिकी अपनाना रेलवे बुनियादी ढांचे के विस्तार की कुंजी: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली  – रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज बजट वेबिनार श्रृंखला के दूसरे भाग को संबोधित किया, जिसका विषय “आर्थिक विकास को बनाए रखना और मजबूत करना: बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स एवं माल ढुलाई” था।वेबिनार के दौरान, संघ मंत्री ने क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख फोकस क्षेत्रों पर प्रकाश डाला: समन्वित तरीके से क्षमता बढ़ाना, गुणवत्ता और योग्यता मानकों को मजबूत करना, तथा विवादों को कम करने और परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजीकरण और संविदात्मक ढांचे में सुधार।

रेलवे बुनियादी ढांचे का समन्वित विस्तार

श्री वैष्णव ने पिछले एक दशक में भारत के रेल नेटवर्क की अभूतपूर्व वृद्धि पर जोर दिया। लगभग 35,000 किमी नई पटरियां जोड़ी गईं, जो जर्मनी के कुल रेल नेटवर्क से अधिक है। इसके अलावा, 55,000 किमी कवर करने वाले नेटवर्क का लगभग 99% विद्युतीकृत हो चुका है, जो जर्मनी, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क के संयुक्त रेल नेटवर्क से अधिक है।संघ मंत्री ने कहा कि इतनी तेजी से विस्तार एक प्रमुख चुनौती पैदा करता है:

सरकारी विस्तार के साथ उद्योग क्षमता और संसाधनों को तालमेल में बढ़ाना। उन्होंने जोर दिया कि रेलवे विकास मूल रूप से उद्योग और सरकार के बीच साझेदारी है। परियोजना के पैमाने में अचानक वृद्धि या कमी उद्योग की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए, कौशल विकास, पर्यवेक्षण, गुणवत्ता मानक और प्रौद्योगिकी अपनाना बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ तालमेल में बढ़ना चाहिए। उद्योग हितधारकों के इनपुट भविष्य के सुधारों को आकार देने में मदद करेंगे।

हाई-स्पीड रेल दृष्टि और परिवर्तनकारी परियोजनाएं

हाई-स्पीड रेल विकास पर संबोधित करते हुए, श्री वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को एक कठिन सीखने का अनुभव बताया। उन्होंने नोट किया कि 160 किमी प्रति घंटा से अधिक गति पर ट्रेन संचालन डिजाइन और परिचालन जटिलता को घातांकीय रूप से बढ़ा देता है।

आईआईटी, उद्योग साझेदारों और रेलवे इंजीनियरों के सहयोग से, भारत ने इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया। जापानी साझेदारों ने शुरू में प्रति माह दो किमी निर्माण का अनुमान लगाया था, लेकिन भारत ने 15 किमी प्रति माह हासिल किया, जिससे जापान भविष्य के कॉरिडोरों के लिए रुचि लेने लगा।इस सफलता का उल्लेख करते हुए संघ मंत्री ने घोषणा की कि माननीय प्रधानमंत्री ने सात नई हाई-स्पीड पैसेंजर कॉरिडोरों को मंजूरी दी है, जो 4,000 किमी फैले हुए हैं जो 16 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ अगले 10 वर्षों में पूरे होने वाले हैं।इसके लिए प्रति वर्ष लगभग 500 किमी कमीशनिंग की आवश्यकता है, जो मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के पैमाने के बराबर है। अन्य 3,000 किमी को मंजूरी देने की योजनाएं चल रही हैं, जिसका लक्ष्य 2039-40 तक 7,000 किमी नेटवर्क है, जबकि लंबी अवधि की दृष्टि 15,000-21,000 किमी हाई-स्पीड रेल की योजना है।

श्री वैष्णव ने जोर दिया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रेलवे, उद्योग, आपूर्ति श्रृंखलाओं, उपकरण निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं, संचालन और रखरखाव टीमों, सिग्नलिंग विशेषज्ञों, रोलिंग स्टॉक निर्माताओं और विशेष विद्युत चालकों के उत्पादकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी। उन्होंने प्रमुख निर्माण और डिजाइन फर्मों को इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए केंद्रित कार्यशालाओं में आमंत्रित किया।

गुणवत्ता, योग्यता और टेंडर मानकों को मजबूत करना

श्री वैष्णव ने योग्यता मानदंडों को कड़ा करने और अत्यधिक उप-ठेकेदारी को कम करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देखा कि व्यापक टेंडर मानक अक्सर 20-30 बोलीदाताओं की भागीदारी का कारण बनते हैं, जिससे रूढ़िगत लागत अनुमानों से 20-30% नीचे बोली लगती है। ऐसी प्रथाएं अक्सर लागत कटौती, विवाद और मध्यस्थता का कारण बनती हैं।श्री वैष्णव ने कहा कि उप-ठेकेदारी 40% से अधिक नहीं होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में यह जटिल कार्यों के लिए आमतौर पर 20-30% तक सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं को गुणवत्ता और जवाबदेही के और भी सख्त मानकों का पालन करना चाहिए, ताकि सरकारी धन का कुशल उपयोग हो और विवाद न्यूनतम रहें।

बहुआयामी जटिलता और डोमेन विशेषज्ञता की आवश्यकता

रेलवे परियोजनाओं की जटिलता को रेखांकित करते हुए, संघ मंत्री ने समझाया कि राजमार्गों के विपरीत, रेलवे परियोजनाएं छह महत्वपूर्ण घटकों को समेटती हैं:

पटरी संरचना,

  • ओवरहेड विद्युतीकरण प्रणाली (पावर ग्रिड के समकक्ष),
  • सिग्नलिंग और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के समान),
  • स्टेशन विकास (बड़े रियल एस्टेट इकोसिस्टम के समान),
  • रोलिंग स्टॉक संचालन
  • एकीकृत संचालन और रखरखाव

उन्होंने जोर दिया कि अनुबंध प्रदान करते समय डोमेन विशेषज्ञता और क्षेत्र-विशिष्ट अनुभव आवश्यक हैं। सिविल एविएशन और जलमार्गों में भी इसी तरह के दृष्टिकोण की आवश्यकता है, क्योंकि प्रासंगिक विशेषज्ञता न होने वाली एजेंसियां देरी, लागत वृद्धि और मुकदमेबाजी का सामना करती हैं।

उद्योग सहयोग और हितधारक संलग्नता

श्री वैष्णव ने उद्योग पेशेवरों, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिभागियों, कार्यान्वयन एजेंसियों और हितधारकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने बजट-पूर्व वेबिनार के दौरान अपनी अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने कहा कि ये सुझाव क्षेत्र भर में सुधारों की नींव बनेंगे।

संघ मंत्री ने बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग; ऊर्जा; तथा सिविल एविएशन के मंत्रियों श्री मनोहर लाल खट्टर, श्री सरबानंद सोनोवाल और श्री के. राम मोहन नायडू तथा साथ ही उनके सचिवों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने वेबिनार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श और संघ बजट घोषणाओं के अनुरूप नवीन समाधानों के विकास के लिए प्रभावी मंच बताया।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजंत्री ने जिला के वरीय पदाधिकारियों के साथ उत्साहपूर्ण होली समारोह मनाया

सभी पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर रंग लगाकर त्योहार की खुशियां बाँटीं और आपसी सद्भावना को मजबूत किया

प्रशासन हर स्तर पर सतर्क है ताकि जनता पूर्ण सुरक्षा के साथ त्योहार मना सके

हम सबने मिलकर होली खेलकर न केवल त्योहार मनाया, बल्कि कार्यालयीन तनाव से मुक्ति पाकर नई ऊर्जा के साथ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।”:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री

रांची,04.03.2026 – होली के पावन अवसर पर राँची जिला प्रशासन में खुशियों और भाईचारे का रंग छाया रहा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज उपायुक्त आवास में जिला के वरीय पदाधिकारियों के साथ होली खेली। यह आयोजन पारंपरिक होली मिलन के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें सभी पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर रंग लगाकर त्योहार की खुशियां बाँटीं और आपसी सद्भावना को मजबूत किया।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तथा यह त्योहार प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है

इस अवसर पर उपायुक्त, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तथा यह त्योहार प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक कार्यों के बीच ऐसे अवसर हमें एक परिवार की तरह जोड़ते हैं। आज हम सबने मिलकर होली खेलकर न केवल त्योहार मनाया, बल्कि कार्यालयीन तनाव से मुक्ति पाकर नई ऊर्जा के साथ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।” उन्होंने सभी पदाधिकारियों, कर्मचारियों और राँची जिला वासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा अपील की कि सभी लोग त्योहार को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाएं।

सभी ने परंपरा का सम्मान करते हुए रंगों के साथ-साथ गुलाल, अबीर और होलियाना गीतों पर थिरकते हुए उत्साहपूर्ण माहौल बनाया।

श्री भजंत्री ने इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से होली एवं आगामी त्योहारों के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने, अफवाहों पर नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनाती तथा शांति समितियों की सक्रियता सुनिश्चित करने के निर्देशों की पुनः पुष्टि की। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर स्तर पर सतर्क है ताकि जनता पूर्ण सुरक्षा के साथ त्योहार मना सके।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन एवं जिला के सभी वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

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रक्षा मंत्रालय ने एएलएच एमके-II (एमआर) और वीएल-एसएचटीआईएल मिसाइलों के लिए 5,083 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – रक्षा मंत्रालय ने 3 मार्च, 2026 को भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके-II (समुद्री भूमिका) और भारतीय नौसेना के लिए सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइल (एसटीआईएल) की खरीद के लिए कुल 5,083 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।

एएलएच एमके-III (एमआर)

परिचालन भूमिका उपकरण, इंजीनियरिंग सहायता पैकेज और प्रदर्शन-आधारित लॉजिस्टिक सहायता सहित एएलएच एमके-III (एमआर) के लिए 2,901 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु के साथ खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के तहत हस्ताक्षर किए गए हैं।

ये दोहरे इंजन वाले हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और वर्तमान में उपयोग में आने वाले हवाई प्लेटफार्मों से कहीं बेहतर हैं। ये तटवर्ती हवाई अड्डों के साथ-साथ समुद्र में जहाजों से भी समुद्री सुरक्षा संबंधी कई मिशनों को अंजाम देने में सक्षम हैं। इनके शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की कृत्रिम द्वीपों, अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और संरक्षण तथा मछुआरों और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के कर्तव्यों को पूरा करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इस परियोजना में 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से उपकरणों की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है और इससे लोगों के लिए लगभग 65 लाख घंटे का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है, साथ ही देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को और मजबूत बनाता है।

वर्टिकल लॉन्च – एसएचटीआईएल मिसाइलें

सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइलों (एसएचटीआईएल) और उनसे जुड़े मिसाइल होल्डिंग फ्रेम की खरीद के लिए 2,182 करोड़ रुपये का अनुबंध रूसी संघ की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया है। इस खरीद का उद्देश्य हवाई खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ अग्रणी युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाना है।

 

यह प्रणाली भारतीय नौसेना के हवाई अड्डों पर मौजूद बहुस्तरीय वायु रक्षा संरचना को सुदृढ़ करेगी। इससे त्वरित कार्रवाई, हर मौसम में प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता और चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में बेहतर कार्य निष्पादन संभव होगा। यह अनुबंध आपसी विश्वास और रणनीतिक तालमेल पर आधारित भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही और सिद्ध रक्षा साझेदारी को और भी मजबूत करता है।

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विश्व वन्यजीव दिवस पर प्रधानमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने वाली और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को कायम रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। उन्होंने कहा कि यह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने और उनके संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और प्राकृतिक निवास की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है ताकि वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणियों का निवास है और उनका पालन-पोषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में बाघों की विश्व की 70% से अधिक और साथ ही एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी पायी जाती है तथा एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी यहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां जंगल के राजा एशियाई शेरों की संख्या बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल और स्लॉथ बियर के संरक्षण के उद्देश्य से की गई पहल के साथ-साथ चीतों का स्थानांतरण भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने भारत के सांस्कृतिक लोकाचार पर बल देते हुए कहा कि हमारे शास्त्र सभी जीवित प्राणियों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशीलता को प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस अवसर पर संस्कृत का नीतिपरक श्लोक साझा किया जिसमें कहा गया है-

“निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”

उक्त सुभाषितम् का संदेश यह है कि जंगलों के बिना बाघ विलुप्त हो जाते हैं और बाघों के बिना जंगल नष्ट हो जाते हैं। इसलिए, बाघ जंगल की रक्षा करते हैं और जंगल बाघ की रक्षा करते हैं जो प्रकृति में परस्पर गहरी निर्भरता को रेखांकित करता है।

श्री मोदी ने X पर अपने कई पोस्टों की श्रृंखला में कहा-

विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध बनाने और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने वाली अद्भुत जीव विविधता का उत्सव मनाने का दिन है। यह वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में काम करने वाले सभी लोगों को सम्मानित करने का दिन है। हम संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और आवासों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं ताकि हमारे वन्यजीव फलते-फूलते रहें।

हमें इस बात पर गर्व है कि भारत में विश्व के कुछ सबसे अद्भुत वन्य प्राणी पाए जाते हैं। विश्व में 70% से अधिक बाघों का निवास हमारे यहां है। हमारे यहां एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी और एशियाई हाथियों की अधिकतम संख्या भी है। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां वनराज एशियाई शेर फल-फूल रहे हैं।

एनडीए सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कई प्रयास किए हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना शामिल है जो अन्य देशों के साथ सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए एक अद्वितीय मंच है। अन्य प्रयासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, घड़ियाल, स्लॉथ बियर की सुरक्षा और चीतों का स्थानांतरण शामिल हैं।

 

 

“आज विश्व वन्यजीव दिवस है। हमारे शास्त्रों में सभी जीवों के कल्याण की कामना की गई है। उनसे हमें प्राणियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशील होने की प्रेरणा भी मिलती है। उसका एक उदाहरण यह है…

निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।

तस्माद् व्याघ्रो वनं रक्षेद् वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥”

 

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रंगों और सौहार्द के पावन पर्व होली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ — हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखण्ड

जोहार!

रंगों और सौहार्द के पावन पर्व होली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह शुभ अवसर आपके जीवन में उमंग, भाईचारा और खुशहाली के नए रंग भर दे।

इस होली पर भी झारखण्ड की अबुआ सरकार राज्य की बहनों को मंईयां सम्मान योजना की सम्मान राशि पर्व से पूर्व सीधे उनके खातों में भेज रही है, ताकि हर घर की खुशियाँ दोगुनी हों।

अबुआ सरकार समस्त झारखण्डवासियों की सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है।

— हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री, झारखण्ड

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पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में समुद्री स्थिति की समीक्षा की; भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई गई

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) फारस की खाड़ी में विकसित हो रही समुद्री सुरक्षा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस क्षेत्र में कार्यरत भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपायों को मजबूत किया है।

केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोणोवाल ने आज फारस की खाड़ी में मौजूदा सुरक्षा माहौल का आकलन करने और भारतीय समुद्री संपत्तियों और कर्मियों पर इसके प्रभावों की जांच करने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, नौवहन महानिदेशक ने मंत्री को क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय नाविकों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी।

बैठक के बाद बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “हम बदलती हुई स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और अपने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण तथा अपनी समुद्री संपत्तियों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती, निगरानी और समन्वय तंत्र सक्रिय कर चुके हैं। हम संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और किसी भी नए घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं।”

फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधि, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और अन्य समुद्री सुरक्षा चिंताओं सहित खतरों की रिपोर्ट के जवाब में, मंत्रालय ने नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) के माध्यम से भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों के संबंध में बढ़ी हुई निगरानी और सुरक्षा निरीक्षण को सक्रिय कर दिया है।

मंत्रालय ने डीजीएस के माध्यम से भारतीय ध्वज वाले जहाजों की वास्तविक समय में निगरानी शुरू कर दी है और रिपोर्टिंग की आवृत्ति बढ़ा दी है। साथ ही, एमएमडीएसी डीजीकॉम सेंटर के माध्यम से चौबीसों घंटे सातों दिन निगरानी की व्यवस्था की गई है। जहाजों, उनके मालिकों और प्रबंधकों के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल भी निर्धारित किए गए हैं।

भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय, सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी आईओआर), समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा जा रहा है। नौवहन कंपनियों और भर्ती एवं नियुक्ति सेवा लाइसेंसधारियों को चालक दल की तैनाती में सावधानी बरतने और नाविकों और उनके परिवारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है।

निदेशालय, आईएफसी-आईओआर और अन्य एजेंसियां ​​उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को सभी ज़रूरी मदद और सहायता दी जा रही है।

अधिकारियों के बीच समय पर समन्वय स्थापित करने, उभरती परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने और भारतीय नाविकों और उनके परिवारों को शीघ्र सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्विक रिस्पांस टीम) का गठन किया गया है। हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय कर दिए गए हैं और आरपीएसएल के माध्यम से नाविकों के परिवारों के साथ साझा किए गए हैं।

सभी संबंधित पक्षों को उच्च सतर्कता बरतने और यात्रा-विशिष्ट जोखिम आकलन करने की सलाह दी गई है।

क्षेत्र में चलने वाले जहाजों को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और ब्रिज वॉच बनाए रखने, निरंतर संचार तत्परता सुनिश्चित करने और संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने का निर्देश दिया गया है।

सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “भारत अपने नाविकों और समुद्री क्षेत्र के हितधारकों के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय भारतीय जहाजों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक परिचालन, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है और भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय समन्वय जारी रखेगा।”

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जीपीएस कार निकोबार में मछुआरा समुदाय का जीवन बदल रहा है

नई दिल्ली – कार निकोबार में मछुआरों के लिए शुरू किए गए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरणों ने कुशल और सटीक मछली पकडने की तकनीक को सक्षम बनाया है, जिससे स्‍थानीय लोगों के लिए मछली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।

इससे न केवल उनके ताजे प्रोटीन और महत्‍वपूर्ण पोषक तत्वों के सेवन में वृद्धि हुई है, बल्कि टीटॉप गांव के श्री जुनैद और चुचुचा गांव के श्री अब्दुल सत्तार जैसे कुछ मछुआरों ने बाजारों में अपनी मछली बेचना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।

निकोबारी समुदायों का जीवन और आजीविका पारंपरिक मछली पकडने पर आधारित है। उनकी मछली पकडने की तकनीक अनुभव से परिष्‍कृत तो है, लेकिन समुद्र और मौसम की अप्रत्‍याशित प्रकृति के साथ-साथ सटीक नेविगेशन उपकरणों की कमी के कारण सीमित रही है। अक्सर, मौसम की खराबी के कारण नावें रास्‍ता भटक जाती हैं, जिससे उत्पादकता का नुकसान होता है और कभी-कभी जान का जोखिम भी बन जाता है।

इस चुनौती से निपटने के लिए सेंट्रल आइलैंड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एसईईडी प्रभाग कार्यक्रम के तहत स्थानीय समुद्री वातावरण और मछली पकड़ने की पद्धतियों के अनुकूल जीपीएस उपकरण पेश किए हैं।

मछुआरों को जीपीएस नेविगेशन और आधुनिक मछली पकड़ने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे जीपीएस उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। उनकी जरूरतों और चुनौतियों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण किए गए और जनजातीय परिषद के माध्यम से इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित किया गया।

जीपीएस प्रौद्योगिकी की शुरूआत ने मछुआरों द्वारा मछली पकड़ने के स्थानों को खोजने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे उनके लिए सर्वोत्‍तम स्थानों तक पहुंचना बहुत आसान और तेज़ हो गया है। इन उपकरणों की मदद से मछली पकड़ने की उनकी क्षमता में काफी सुधार हुआ है, जिससे उनके परिवारों और व्यापक समुदाय के लिए भरपूर भोजन उपलब्ध हो पा रहा है।

कार निकोबार द्वीप पर तटीय मत्स्य पालन सूचना केंद्र स्थापित किया गया है। कार निकोबार के जनजाति मछुआरों को कुल 5 जीपीएस उपकरण प्रदान किए गए हैं और अन्य 5 जीपीएस उपकरण मछुआरों के सामान्य उपयोग के लिए रखे गए हैं।

इन प्रयासों से दैनिक मछली पकड़ने की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। सटीक नेविगेशन और उत्पादक क्षेत्रों की पहचान के कारण मछुआरे अब मछली पकड़ने में कम समय बिताते हुए भी अपनी पकड में औसतन लगभग 168 प्रतिशत की वृद्धि का अनुभव कर रहे हैं।

मछलियों की बढती उपलब्धता ने परिवारों और समुदाय में पोषण के स्‍तर को सुधारा है। उच्च आय ने विविध खाद्य स्रोतों तक बेहतर पहुंच प्रदान की है, जो बेहतर स्वास्थ्य और पोषण में योगदान दे रही है।

अधिक जानकारी के लिए डॉ. आर. किरुबा शंकर से rkirubasankar[at]gmail[dot]com पर संपर्क करें।

 

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने डोल जात्रा और डोला पूर्णिमा के अवसर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के लोगों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज डोल जात्रा और डोला पूर्णिमा के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

X पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा, “डोल जात्रा के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मेरी बहनों और भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं। इस पर्व की भव्यता हमारी संस्कृति और विरासत से हमारी जड़ों को जोड़कर और सुदृढ़ करे तथा सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “डोल पूर्णिमा के अवसर पर ओडिशा के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान कृष्ण के साथ आनंदमय मिलन का यह पर्व सभी के लिए सुख और सौभाग्य लेकर आए।”

श्री अमित शाह ने कहा “डोल जात्रा के पावन अवसर पर असम की मेरी बहनों और भाइयों को शुभकामनाएं। भक्ति और रंगों का यह पर्व सभी के जीवन को उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण करे।”

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इस्पात मंत्रालय ने ‘भारत स्टील 2026’ से पहले वैश्विक राजनयिकों के साथ उच्च-स्तरीय संवाद सत्र आयोजित किया

नई दिल्ली – भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने इस्पात क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने तथा अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम ‘भारत स्टील 2026’ की रूपरेखा प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विश्व भर के वरिष्ठ राजनयिकों के साथ एक उच्च-स्तरीय संवाद सत्र आयोजित किया।

राजनयिक समुदाय को संबोधित करते हुए इस्पात मंत्रालय के सचिव ने भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक रूपांतरण को गति देने में इस्पात उद्योग की केन्द्रीय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने इस क्षेत्र की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन(एमटी) और वर्ष 2035 तक 400-मिलियन टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे भारत को वैश्विक इस्पात उत्पादन में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

जा क्षेत्र के तीव्र आधुनिकीकरण पर बल देते हुए श्री पौंड्रिक ने वैश्विक साझेदारों को भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित किया, क्योंकि देश का घरेलू इस्पात उद्योग निम्न-कार्बन उत्पादन प्रक्रियाओं और उन्नत प्रौद्योगिकीय विधियों की ओर अग्रसर है। उन्होंने नवाचार, दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व पर आधारित सुदृढ़ एवं सतत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

 

16-17 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी ‘भारत स्टील 2026’ की झलक प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने दीर्घकालिक एवं सतत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। भारत की रणनीति कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने, हरित एवं सतत इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने तथा सार्थक वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर केन्द्रित है।

इस सत्र में राजनयिक समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिसमें प्रतिनिधियों ने भारत की दूरदर्शी सोच की सराहना की और ‘भारत स्टील 2026’ में भागीदारी के प्रति उत्साह व्यक्त किया। आगामी शिखर सम्मेलन इस्पात क्षेत्र में संवाद, नवाचार के आदान-प्रदान और रणनीतिक साझेदारियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के राजा से बात की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के राजा, महामहिम किंग अब्दुल्ला II से बात की।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बदलते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जॉर्डन के लोगों की शांति, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपने समर्थन की पुनः दोहराया।

प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में जॉर्डन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों का ख्याल रखने के लिए महामहिम का आभार भी व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने एक्स (X) पर साझा करते हुए लिखा;

“मैंने जॉर्डन के राजा, महामहिम किंग अब्दुल्ला II, से बात की। क्षेत्र में बदलते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। हम जॉर्डन के लोगों की शांति, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपने समर्थन को पुनः दोहराते हैं। इस कठिन समय में जॉर्डन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों का ख्याल रखने के लिए मैंने उनका आभार व्यक्त किया।”

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उपराष्ट्रपति जी ने तमिल विद्वानों, विरासत और संस्कृति को समर्पित 16 प्रकाशनों का विमोचन किया

नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग की ओर से प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें तमिल के विख्यात विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित हैं। विमोचित पुस्तकों में से 13 तमिल भाषा पर आधारित हैं।

 

तमिल शीर्षकों में रामेश्वरम्, रामानुजार, नादुकल, अरिकाइमेडु, बक्थी इलक्कियाम, इयारकई वेलनमई, पजंथामिजान इसई करुविगल, तमिझागा नत्तार देवंगल, पुधिया अरिवियाल थोझिलनुतपंगल, बंकिम चंद्र चटर्जी, मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तंजावुर पेरुवुदयार कोइल, मणिमेगलाई और महाविद्वान मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई शामिल हैं।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विमोचित पुस्तकें मंदिर परंपराओं, दर्शन, साहित्य, संगीत और विज्ञान के साथ तमिल धरोहर की गहराई, विविधता और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं। तमिल को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, लेकिन साथ ही साथ उसकी आत्मा एक है। उन्होंने वैश्विक मंच पर तमिल को हमेशा सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की और युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पढ़ने का आग्रह करते हुए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक शक्ति पर भी बल दिया।

पुस्तकों के विमोचन के मौके पर अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त समृद्ध और प्राचीन संस्कृति वाली शास्त्रीय भाषा के तौर पर तमिल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग की पुस्तकें इस गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाती हैं।

इस कार्यक्रम में डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित रहे। उन्होंने तमिल संगम साहित्य के महत्त्व के बारे में बात की और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को उजागर किया।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्री एस. के. बोस की ओर से लिखित बंकिम चंद्र चटर्जी की पुस्तक का अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में विमोचन था। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित इस समृद्ध संस्करण में इस प्रख्यात साहित्यकार के जीवन और काल तथा भारतीय साहित्यिक आंदोलन में उनके योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है। अंग्रेजी संस्करण में एक नया आवरण, अतिरिक्त अभिलेखीय तस्वीरें और चित्र शामिल हैं। इस आवरण को विशेष रूप से आईआईटी दिल्ली के सहयोग से एक स्टार्टअप की मदद से डिजाइन किया गया है, जिसमें समकालीन सौंदर्यशास्त्र और शास्त्रीय भावना का अद्भुत मिश्रण है। हिंदी और तमिल अनुवादों के एक साथ विमोचन से वंदे मातरम के पूजनीय रचयिता की विरासत व्यापक पाठकों तक पहुंच गई है।

रामेश्वरम्‌ पर आधारित यह पुस्तक पुराणों और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजी संदर्भों को प्रस्तुत करती है, जिसमें रामेश्वरम मंदिर परिसर के पवित्र स्थलों, स्थापत्य कला की भव्यता, मूर्तियों और देवी-देवताओं का विशेष वर्णन किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मंदिर के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व की व्यापक समझ प्रदान करना है।

 

पुस्तक के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कृपया यहां क्लिक करें

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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित जीपीओए में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के नए कार्यालय का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज नई दिल्ली में नेताजी नगर के सामान्य पूल कार्यालय आवास (जीपीओए) में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के नए कार्यालय का उद्घाटन किया, जो मंत्रालय के नए परिसर में स्थानांतरित होने का प्रतीक है।

इस मौके पर, डॉ. मांडविया ने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और भरोसा जताया कि सुव्यवस्थित और कार्यात्मक कार्यक्षेत्र खेल विकास और युवा मामलों से जुड़ी प्रमुख पहलों के कार्यान्वयन में दक्षता, समन्वय और तालमेल को बेहतर करेगा।

युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भी नए कार्यालय में कार्यभार ग्रहण किया और सुव्यवस्थित एवं आधुनिक कार्य वातावरण की सराहना की। उन्होंने नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए और समर्पण भाव से मंत्रालय के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

उद्घाटन समारोह में सचिव (खेल), श्री हरि रंजन राव; सचिव (युवा कार्यक्रम), डॉ. पल्लवी जैन गोविल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों ने सेवा संकल्प शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली – भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री कामरान रिजवी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री के नए कार्यालय, सेवा तीर्थ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।

सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक भारत के शासन सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह इस सामूहिक संकल्प को मजबूत करती है कि सुदृढ़ नीति, ईमानदार इरादे और निर्णायक नेतृत्व के साथ, विकसित भारत के निर्माण का मार्ग दृढ़ और प्रकाशमय बना रहेगा। सेवा तीर्थ की भावना से प्रेरित कार्य संस्कृति भारत को एक सक्षम, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में मजबूत बनाने में मार्गदर्शक आधार का काम करेगी।

इस अवसर पर, इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया गया। सेवा तीर्थ की स्थापना ब्रिटिश काल की अस्थायी बैरकों के स्थान पर की गई है। इस स्थल का राष्ट्रीय शासन के एक गतिशील संस्थान में परिवर्तन नए भारत की प्रगति और नवीनीकरण का एक सशक्त प्रतीक है।

सेवा तीर्थ में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया कि लिए गए प्रत्येक निर्णय 1.4 अरब नागरिकों की सेवा की अटूट भावना से प्रेरित होंगे और राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के व्यापक उद्देश्य के साथ दृढ़ता से जुड़े होंगे।

प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेवा तीर्थ को संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक प्रतीक में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। भारत के 2047 तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ, यह नया परिसर राष्ट्रीय आकांक्षा, सेवा और परिवर्तनकारी कार्यों के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में खड़ा होगा।
इस राष्ट्रीय परिकल्पना के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, सचिव ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके, उन्नत प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर, सतत औद्योगिक विकास का समर्थन करके और स्वच्छ एवं हरित परिवहन की ओर संक्रमण को गति देकर विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। नीतिगत हस्तक्षेपों और उद्योग जगत के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से, एमएचआई आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक आधार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित किया। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भारत की शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव का उल्लेख किया और कहा कि भारत शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति और गुणवत्ता, नवाचार तथा सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

 

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगी। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सीखने, अनुसंधान, नवाचार और उसे लागू करने के अपार अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। श्री प्रधान ने कहा कि भारत नई शिक्षा नीति 2020 और ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर से लेकर सतत ऊर्जा तक, भारत एक विश्वसनीय नवाचार भागीदार के रूप में उभर रहा है और सहयोग, क्षमता निर्माण तथा साझा ज्ञान पर आधारित वैश्विक दक्षिण मॉडल को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनिश्चितता और तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा ही समाजों के बीच सबसे मजबूत सेतु है और भारत सहयोगी देशों के साथ ज्ञान के मजबूत सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने राजनयिकों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-प्रेरित, बहुविषयक और सुलभ शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पिछले छह वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा सुधारों, विशेष रूप से बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास को शिक्षा के साथ एकीकृत करने और अंतर्राष्ट्रीयकरण को मजबूत करने के संदर्भ में स्पष्ट दिशा प्रदान की है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय संस्थान संयुक्त, द्विभाषी और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव को गहरा कर रहे हैं, जबकि प्रमुख विश्वविद्यालय अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में सुविधा हो रही है, और ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल भारत के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी वैश्विक शिक्षा साझेदारी का खुला निमंत्रण है।

इस सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए:

  • भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में
  • एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
  • भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लिए यूजीसी विनियम 2023
  • अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर और सहायक ढांचे
  • भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
  • भारत इनोवेट्स 2026

 

सम्मेलन के दौरान भारत के विकसित हो रहे उच्च शिक्षा तंत्र पर प्रकाश डाला गया जिनमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग छात्र गतिशीलता, संयुक्त कार्यक्रम, अनुसंधान साझेदारी और परिसरों की स्थापना शामिल हैं।

स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में राजनयिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भागीदार देशों के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा और अल्पकालिक कार्यक्रमों में भाग लेने, संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने और विश्व स्तरीय दर्जा प्राप्त विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया।

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राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और एलबीएसएनएए में 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों ने राष्ट्रपति से भेंट की

नई दिल्ली – राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज (2 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे समावेशी विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित राष्ट्र के रूप में भारत का रूपांतरण तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। उन्होंने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करने का आग्रह किया कि कोई भी समुदाय भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे न छूटे। उन्होंने स्थिरता और जलवायु लचीलापन को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में, उन्हें हरित प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहिए, जलवायु-अनुकूल शासन को प्रोत्साहित करना चाहिए और सतत विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।

 

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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