केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मध्य प्रदेश के धार और बेतूल में पीपीपी मॉडल आधारित चिकित्सा महाविद्यालयों के भूमि पूजन में भाग लिया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज धार और बेतूल जिलों में अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के आधार पर दो नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण कार्य की शुरुआत के उपलक्ष्य में आयोजित भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। ये संस्थान राज्य में विकसित किए जा रहे चार पीपीपी आधारित चिकित्सा महाविद्यालयों (धार, बेतूल, कटनी और पन्ना) का हिस्सा हैं, जो मौजूदा जिला अस्पतालों से जुड़े हुए हैं ताकि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा वितरण दोनों को मजबूत किया जा सके।

 

इस मॉडल के आधार पर राज्य सरकार ने 25 एकड़ तक की भूमि पट्टे पर दी है, जबकि निजी सेवा प्रदाता चिकित्सा महाविद्यालय भवन, छात्रावास, प्रयोगशालाएं और आवासीय परिसरों सहित शैक्षणिक और नैदानिक ​​अवसंरचना का निर्माण करेंगे। संबद्ध जिला अस्पतालों का उन्नयन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानदंडों के अनुसार किया जाएगा, जबकि निर्बाध जन स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए वे राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेंगे।

श्री नड्डा ने मध्य प्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस अवसर को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। स्वास्थ्य मंत्री महोदय ने कहा कि पीपीपी मॉडल चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा वितरण के विस्तार के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली, जो कभी मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2017 से एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुज़री है, और अब निवारक, संवर्धक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल सेवा की ओर अग्रसर है।

श्री नड्डा ने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ, विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, गर्भावस्था से लेकर सुरक्षित संस्थागत प्रसव और टीकाकरण की सुविधा प्रदान करने में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित यू-विन पोर्टल की सफलता का भी उल्लेख किया, जो देश भर में लगभग 2.5 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.5 करोड़ बच्चों के लिए वास्तविक समय में टीकाकरण निगरानी को सक्षम बनाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री महोदय ने मध्य प्रदेश के बेतूल में अपने संबोधन के दौरान प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण देश में संस्थागत प्रसव लगभग 89 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में गिरावट वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक है। 40 करोड़ से अधिक लोगों की उच्च रक्तचाप की जांच की गई है, जिनमें से 6.80 करोड़ लोगों का निदान किया गया है और उनका उपचार चल रहा है। 40 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह की जांच की गई है, जिनमें से 4.60 करोड़ लोगों का निदान किया गया है और उन्हें उपचार मिल रहा है। कैंसर स्क्रीनिंग पहलों के माध्यम से लाखों लोगों की जांच की गई है, जिससे हजारों मामलों की शीघ्र पहचान हुई है। श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि व्यवस्थित स्क्रीनिंग और शीघ्र निदान से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व वृद्धि पर भी प्रकाश डाला:

  • चिकिस्ता महाविद्यालयों की संख्या वर्ष 2014 में 387 से बढ़कर वर्तमान में 819 हो गई है।
  • एमबीबीएस की सीटें दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 51,000 से 1.28 लाख से अधिक हो गई हैं।
  • सरकार वर्ष 2029 तक 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के मानव संसाधनों को मजबूती मिलेगी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने में केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नए चिकिस्ता महाविद्यालयों को जिला अस्पतालों से जोड़ने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में विशेषज्ञ और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं विस्तारित होंगी और उन्नत उपचार के लिए रोगियों को बड़े शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम होगी। यह पहल राज्य के “स्वस्थ जीवन समृद्धि का आधार” के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना और नर्सिंग, पैरामेडिकल और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना है।

इस समारोह में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइकले, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और राज्य स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य के अन्य प्रतिष्ठित नेता उपस्थित थे।

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संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आधुनिकीकरण को गति देने के लिए सभी डाक सर्किल के प्रदर्शन की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने भारतीय डाक विभाग को व्यावसायिक प्रगति के लिए सक्रिय और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया है, जिसमें उच्च वस्तु और सेवा कर भुगतान करने वाले व्यवसायों और संस्थाओं तक पहुंच बनाना शामिल है। उन्होंने प्रत्येक डाक मंडल में उत्पाद या सेवा में रुचि दिखाने वाले व्यक्तियों और कंपनियों को भुगतान करने वाले ग्राहक में बदलने और अर्जित राजस्व की दैनिक स्तर पर निगरानी के लिए समर्पित मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव टीमों की स्थापना की वकालत की। साथ ही उन्होंने डाक मंडल प्रमुखों से स्थानीय स्थिति, कारोबार और व्यावसायिक क्षमता अनुरूप वहां की क्षेत्रीय शक्ति का लाभ उठाकर अनुकूलित विकास रणनीतियां लागू करने का आह्वान किया।

संचार राज्य मंत्री प्रमुख डाक सर्किलों के कामकाज पर नज़दीकी नज़र रखने के लिए मासिक स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर रहे हैं। संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा निर्धारित त्रैमासिक निगरानी ढांचे के अंतर्गत इन बैठकों का नेतृत्व हर महीने डॉ. चंद्र शेखर स्वयं करते हैं ताकि इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित हो। इन समीक्षाओं का उद्देश्य समस्याओं की शीघ्र पहचान, त्वरित सुधार और सुनिश्चित करना है कि भारतीय डाक विभाग अपने सेवा और प्रदर्शन लक्ष्यों को निरंतर पूरा करे।

सभी 24 डाक सर्किलों से संबंधित चर्चा में परिचालन दक्षता, वित्तीय समावेशन, प्रचालन विस्तार और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत दृष्टिकोण के अनुरूप प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का उल्लेख करते हुए संचार राज्य मंत्री ने वितरण सेवा मजबूत करने और बचत एवं बीमा पॉलिसी विस्तारित करने के लिए संसाधनों के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया, जिससे देश की परिचालन संबंधी आवश्यकताएं पूरी की जा सकें। उन्होंने सभी प्रदर्शन मापदंडों – डाक और पार्सल संचालन, बचत और बीमा सेवाओं में – जन कल्याण के साथ ही वित्तीय समझदारी का संतुलन बनाए रखने का भी निर्देश दिया।

संचार राज्य मंत्री ने कर्नाटक सर्कल के बेहतर प्रदर्शन और नए ग्राहकों और बाजार पहुंच की सराहना की। उन्होंने पूर्वोत्तर सर्कल द्वारा एक लाख 54 हज़ार नए बचत खाते खोलने, डाक जीवन बीमा/ग्रामीण डाक जीवन बीमा के तहत 276 करोड़ रुपये जुटाने और सुनियोजित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तक संरचित पहुंच बनाने की भी प्रशंसा की।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि डाक नेटवर्क द्वारा 1.4 अरब से अधिक लोगों को कुशल सेवा प्रदान करना दायित्व और अवसर दोनों है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत डाक विभाग को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार संस्था बनाने में कुशल सेवा, डिजिटल सत्यनिष्ठा और वित्तीय समझदारी की अहम भूमिका है।

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काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय चरण की शुरुआत ; काशी से 300 छात्रों का दल तमिलनाडु रवाना

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय चरण के तहत वाराणसी से 300 छात्रों का एक विशेष दल तमिलनाडु के लिए रवाना हुआ। इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने छात्रों के दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। छात्रों के प्रस्थान से पहले काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में वाराणसी के विभिन्न विश्वविद्यालयों से चयनित 300 छात्र और 5 शिक्षक शामिल हुए। ओरिएंटेशन सत्र के दौरान छात्रों को इस यात्रा के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक लक्ष्यों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नोडल ऑफिसर प्रो. अंचल श्रीवास्तव ने काशी तमिल संगमम् की अवधारणा, उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं, बल्कि भारत की एकता और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझने का अवसर है।

 

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष काशी तमिल संगमम् 4.0 की थीम तमिल करकलाम-आओ तमिल सीखें रखी गई है। इसके तहत छात्र तमिल भाषा, साहित्य, संस्कृति और शैक्षणिक परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे। दल में शामिल काशी के छात्र, तमिलनाडु के विभिन्न विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण करेंगे।

यह काशी तमिल संगमम् के इतिहास में पहली बार है जब काशी से छात्रों का एक संगठित समूह तमिलनाडु की यात्रा पर जा रहा है। यह पहल युवाओं के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देगी। यह पहल “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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अंतर-पीढ़ीगत संबंधों का उत्सव कार्यक्रम आयोजित

नई दिल्ली – केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 22 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में महल गेट स्थित पुराने तहसील परिसर में अंतर-पीढ़ीगत संबंधों का उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य विभिन्न पीढ़ियों के बीच भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन सुदृढ़ करना और सक्रिय तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था सुनिश्चत करना था।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं उनके माता-पिता और परिवार के वृद्धजनों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य परिवार में पीढ़ियों के बीच स्नेह, संवाद, सहयोग और परस्पर सम्मान की भावना प्रगाढ़ बनाना था। ऐसी पहल समाज को जोड़ने, मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाने और सामूहिक सामाजिक चेतना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम से अंतर-पीढ़ीगत सहभागिता, सामुदायिक भागीदारी और सक्रिय वृद्धावस्था को प्रोत्साहित कर समावेशी और बुजुर्ग-हितैषी समाज निर्मित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इससे रेखांकित हुआ कि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, ज्ञान और मूल्य, बच्चों और युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और जिज्ञासा के साथ मिलकर संतुलित, संवेदनशील और प्रगतिशील समाज के निर्माण में योगदान देते हैं।

कार्यक्रम में अंतर-पीढ़ीगत सद्भाव और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने से संबंधित कई तरह की गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवादात्मक सत्र, सामूहिक संकल्प और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के नेतृत्व में पदयात्रा हुई।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि वरिष्ठ नागरिक अनुभव, परंपरा और मूल्यों के संरक्षक के साथ ही राष्ट्र की अमूल्य शक्ति हैं। श्री वीरेंद्र कुमार ने सामुदायिक पहल और अंतर-पीढ़ीगत सहभागिता द्वारा सक्रिय, स्वस्थ और गरिमामय वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने मंत्रालय की कई महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय वयोश्री योजना भी शामिल है। इस योजना में वरिष्ठ नागरिकों को चलने-फिरने और देखने-सुनने से संबंधित सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे सम्मानपूर्वक स्वतंत्र और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकें। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि देश भर में अब तक 72 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। श्री वीरेंद्र कुमार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन एल्डरलाइन 14567 को और सुदृढ़ बनाने की बात कही। इस हेल्पलाइन पर बुजुर्गों द्वारा 27 लाख से अधिक कॉल किये गये हैं, जिससे उन्हें सहायता, मार्गदर्शन और आपातकालीन सहायता प्रदान की गई है। इसी कड़ी में देश भर में सांस्कृतिक, सामुदायिक और जनसंपर्क कार्यक्रमों द्वारा अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने और विद्यालयों में दादा-दादी दिवस मनाने का प्रावधान भी किया गया है।

छतरपुर के महल गेट स्थित पुराने तहसील परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, युवा और समुदाय के सदस्य सम्मान, सहभागिता और सहयोग की साझा भावना के साथ एकजुट हुए। सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, संवाद, शारीरिक गतिविधियां और सामूहिक प्रतिबद्धता के माध्यम से, इस आयोजन ने यह संदेश और सुदृढ़ किया कि एक स्वस्थ, समावेशी और करुणापूर्ण समाज निर्मित करने के लिए अंतर-पीढ़ीगत सद्भाव आवश्यक है।

विकसित भारत@2047 की भविष्य योजना अनुरूप, इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों की मार्गदर्शक और आदर्शवादी अहम भूमिका रेखांकित हुई। साथ ही इसने युवा पीढ़ी को वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों से सीखने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित किया। यह आयोजन वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के राष्ट्रीय उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और सामंजस्यपूर्ण, सशक्त और समावेशी भारत को बढ़ावा देने की दिशा में एक और सार्थक कदम रहा।

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विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव का ऊर्जा से भरपूर पेसा रन और दिनभर चले आदिवासी खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ शुभारंभ हुआ

नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आज से दो दिवसीय पेसा महोत्सव (23-24 दिसंबर 2025) का शुभारंभ प्रतिष्ठित रामकृष्ण बीच पर पेसा दौड़ के साथ हुआ। पेसा महोत्सव पंचायती राज मंत्रालय द्वारा मनाया जाने वाला एक वार्षिक उत्सव है, जो पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत जनजातीय समुदायों के स्वशासन और सशक्तिकरण का जश्न मनाता है, जिसमें पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है

सुबह आयोजित पेसा दौड़ में सभी आयु वर्ग के लोगों, विशेषकर आदिवासी युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौड़ को अर्जुन पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध भारतीय तीरंदाज सुश्री ज्योति सुरेखा वेन्नम ने पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, आंध्र प्रदेश राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान एवं पंचायती राज आयुक्त श्री मुत्यालाराजू रेवु, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं निदेशक श्री वी.आर. कृष्ण तेजा मैलावरपु, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. एम. सुधाकर राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर शुरू किया। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पेसा की भावना और अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सामुदायिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने तथा ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

पेसा रन के बाद पेसा महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन श्रीमती मुक्ता शेखर, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, डॉ. बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय और श्री वी.आर. कृष्णा तेजा मैलावरपु, आयुक्त एवं निदेशक (पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास), आंध्र प्रदेश सरकार ने किया। इस कड़ी में दिन भर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। आयोजन में शिल्प बाजार और खाद्य महोत्सव सहित प्रदर्शनी स्टालों में आदिवासी हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित किए गए। कबड्डी और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। कबड्डी के सेमीफाइनल मैच दिन भर चले और तीरंदाजी प्रतियोगिताएं क्वालीफाइंग, एलिमिनेशन और मेडल राउंड के माध्यम से आगे बढ़ीं।

कार्यक्रम के पहले दिन के दूसरे भाग में कई पेसा राज्यों की टीमों ने आदिवासी खेलों का प्रदर्शन किया, जिसमें चोलो, येदु पेनकुलता, गेडी दौद, रस काशी, उप्पन्ना बारेलू, पिथूल, सिकोर, मल्लखंबा और चक्की खेल जैसे पारंपरिक स्वदेशी खेल प्रस्तुत किये गये। ये आदिवासी समुदायों की समृद्ध खेल विरासत को दर्शाते हैं।

इसके साथ ही अल्लूरी सीताराम राजू जिले के अंतर्गत दस पीईएसए ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजन की गईं, जिनमें ग्राम सभाओं को सुदृढ़ बनाने, भूमि हस्तांतरण रोकने, लघु वन उत्पादों के स्वामित्व, लघु खनिजों पर नियंत्रण, सामुदायिक संसाधनों और लघु जल निकायों के प्रबंधन, मादक पदार्थों और साहूकारी प्रथा पर नियंत्रण तथा रीति-रिवाजों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

पीईएसए महोत्सव में कल तकनीकी सत्र, महत्वपूर्ण पहल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण समारोह और समापन सत्र होंगे, जो पेसा दिवस उत्सव मनाते हुए, अनुसूचित क्षेत्रों में सहभागी शासन के संदेश को सुदृढ़ और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ पुस्तक का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने  नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति निवास में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने श्री देवनानी को पुस्तक लिखने के लिए बधाई दी और इसे एक समयोचित एवं महत्वपूर्ण योगदान कहा, विशेषकर तब जब देश पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी मना रहा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं में एक संस्था थे, जिनका जीवन और नेतृत्व सिद्धांतों एवं मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि उन्हें 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए उनसे सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने जनसंघ के दिनों की सुखद यादें साझा कीं, जिनमें आपातकाल से पहले कोयंबटूर में श्री वाजपेयी के लिए एक बड़े सार्वजनिक सम्मेलन का आयोजन करना शामिल था, यह अनुभव उनके जीवन में गहरा एवं अमिट छाप छोड़ा।

राष्ट्रनिर्माण में श्री वाजपेयी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी की दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को कई क्षेत्रों में रूपांतरित किया। मई 1998 में ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में सफल परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का निर्णायक नेतृत्व वैश्विक मंच पर भारत के आत्मविश्वास एवं संकल्प को प्रदर्शित करता है। उन्होंने अटलजी के प्रेरणादायक नारे “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” को भी याद किया, जो राष्ट्रीय शक्ति के लिए उनकी समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड राज्यों के गठन में श्री वाजपेयी की दूरदर्शिता को भी रेखांकित किया, जो क्षेत्रीय आकांक्षाओं तथा विकेंद्रीकृत एवं उत्तरदायी शासन की आवश्यकता की उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना भी श्री वाजपेयी की समावेशी विकास एवं सबसे दूरदराज़ लोगों के लिए न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इन दूरदर्शी निर्णयों के दूरगामी प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी हमेशा सुशासन पर बल देते थे, यही कारण है कि उनका जन्मदिवस ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और विद्युत क्षेत्र में सुधार जैसी महत्वपूर्ण पहलों का उल्लेख किया, जिन्होंने भारत के विकास के लिए मजबूत नींव रखी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और पुस्तक के लेखक श्री वासुदेव देवनानी सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए।

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सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान ने 25 ट्रांसजेंडरों को उद्यमिता प्रशिक्षण दिया

नई दिल्ली – 25 ट्रांसजेंडरों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का समापन हो गया है। यह प्रशिक्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा प्रायोजित और कौशल एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा आयोजित किया गया। नई दिल्ली के शास्त्री भवन स्थित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सम्मेलन कक्ष में आज इसके समापन समारोह की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत ने और सह-अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री मोनाली पी. ढाकाटे और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान की महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा ने की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सामुदायिक संगठन ट्वीट फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री अभिना अहेर भी समापन समारोह में उपस्थित रहीं।

 एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक श्री बृजेश कुमार ने राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा दिये गये प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। इसमें भाग लेने वाली प्रतिभागियों मानवी, ज़िया खान, आर्यन, राहत सिंह और कथा ने अपने प्रशिक्षण अनुभव सुनाए। नौकरी चाहने की बजाय रोजगार देने वाले बनने के लिए उद्यमिता को जीवन वृत्ति के रूप में अपनाने में रुचि दिखाते हुए, प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण मॉड्यूल के बाद दिए गए मार्गदर्शन की सराहना की। कुछ प्रतिभागी पहले से ही बेकरी, कृत्रिम आभूषण आदि के लघु व्यवसाय में शामिल हैं और वे इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्राप्त कौशल द्वारा इसे और आगे ले जाने की योजना बना रहे हैं। ट्वीट फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी सुश्री अभिना अहेर ने एनआईईएसबीयूडी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के इस संयुक्त प्रशिक्षण के लिए धन्यवाद देते हुए सुझाव दिया कि ऐसे प्रशिक्षण को अन्य मंत्रालयों और विभागों की कल्याणकारी योजनाओं में भी शामिल किया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत ने उद्यमिता को करियर के रूप में अपनाने और भारत सरकार द्वारा ट्रांसजेंडरों के सामाजिक स्तर को मुख्यधारा में लाने तथा उनके उत्थान के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह छोटा लेकिन काफी अहम प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण पूरे देश में आयोजित होने चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षित ट्रांसजेंडरों का डेटा एनआईईएसबीयूडी के पास रखने का सुझाव दिया और कहा कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों की नौकरी या स्वरोजगार में प्रगति की समय-समय पर निगरानी रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडरों के उद्यमिता विकास प्रशिक्षण का अगला बैच मुंबई में आयोजित करने की योजना है।

समापन समारोह में एनआईएसईबीयूडी की निदेशक डॉ. शिवानी डे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। समारोह में डीओएसजेई, एनआईएसईबीयूडी और ट्वीट फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित हुए।

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सीएक्यूएम ने 26वीं बैठक में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की और संशोधित जीआरएपी को स्वीकृति दी

नई दिल्ली – वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा ने 22.12.2025 को आयोग की 26वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में एजेंडे के निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और उनकी समीक्षा की गई:
  • आयोग की वार्षिक रिपोर्ट (2024-25) और लेखा परीक्षा के बाद वार्षिक खातों (2024-25) को अलग लेखा परीक्षा रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट के साथ संलग्न कार्रवाई योग्य बिंदुओं के साथ स्वीकार करना।
  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दिनांक 21.11.2025 की संशोधित श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) का अनुमोदन। आयोग ने इसकी रूपरेखा की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि जीआरएपी के उच्च चरणों के अंतर्गत किए जाने वाले उपायों में पूर्ववर्ती चरणों के अंतर्गत आने वाली कार्रवाइयों को शामिल किया जाए। साथ ही, वर्तमान मौसम के दौरान जीआरएपी के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई जिसमें विभिन्न चरणों के अंतर्गत की गई कार्रवाइयां और जीआरएपी के चरण-1 और 2 के अंतर्गत अतिरिक्त उपायों पर विचार-विमर्श शामिल है, जैसे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, यातायात में भीड़भाड़ को कम करना, लोगों के लिए परामर्श जारी करना और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि।
  • गाड़ियों के उत्सर्जन से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन के संबंध में दिनांक 10.12.2025 के कार्यालय आदेश का अनुमोदन। समिति की अध्यक्षता आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला करेंगे। समिति के कार्यों में उत्सर्जन के मूल्यांकन, स्वास्थ्य पर प्रभाव, स्वच्छ आवागमन से संबंधित रणनीतियां, इलेक्ट्रिक वाहन से संबधित तैयारी और नियामक उपायों को शामिल करते हुए संदर्भ की परिभाषित शर्तें शामिल हैं।
  • मोटर वाहन एग्रीगेटरों, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स संस्थाओं की ओर से शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए दिनांक 03.06.2025 के निर्देश संख्या 94 में संशोधन पर चर्चा हुई। आयोग ने हितधारकों के सुझावों पर विचार किया और 31.12.2026 तक मौजूदा बेड़े में बदलाव करके पेट्रोल से चलने वाले बीएस-VI दोपहिया वाहनों को शामिल करने की अनुमति देने के संबंध में प्रावधानों का प्रस्ताव रखा जबकि अन्य निर्दिष्ट श्रेणियों में 01.01.2026 से पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले वाहनों को शामिल करने पर प्रतिबंध जारी रखा गया है।
  • 2025 के दौरान धान की पराली जलाने की स्थिति की समीक्षा: आयोग ने पाया कि एकीकृत निगरानी और ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई के प्रयासों के कारण उनमें उल्लेखनीय कमी आई है। उनमें समग्र रूप से 2021 की तुलना में एनसीआर में लगभग 92% कमी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को 2026 के कटाई मौसम के लिए गेहूं की पराली जलाने के संबंध में निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया जिसके आधार पर वैधानिक निर्देश जारी किए जाएंगे।
  • प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की ओर से औद्योगिक इकाइयों को बंद करने और पुनः शुरू करने की स्थिति और शिकायतों/अभियोजन की स्थिति सहित प्रवर्तन कार्रवाइयों की समीक्षा।
  • निर्माण और तोड़फोड़ (सी एंड डी) के अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा: आयोग ने पाया कि दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों से निकलने वाली धूल पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण है और धूल पर नियंत्रण के उपायों के अनुपालन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। आयोग ने नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों की ओर से देखरेख की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर बल दिया और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि तोड़फोड़ से पैदा अपशिष्ट के संग्रहण केंद्र, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था की जाए, निर्माण की अनुमति देने से पहले अपशिष्ट के निपटान की जांच़-पड़ताल के लिए तंत्र स्थापित किया जाए तथा निर्माण और तोड़फोड़ से पैदा अपशिष्ट का पर्यावरणीय प्रबंधन किया जाए।
  • हाल में हुए न्यायिक निर्णयों के आलोक में गाड़ियों के जीवनकाल समाप्त होने (ईओएल) के मुद्दे की समीक्षा की गई। आयोग ने पाया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 17.12.2025 के आदेश के अनुसार, बीएस-IV और उसके बाद के उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के संबंध में दंडात्मक कार्रवाई से बचाव जारी है जबकि अत्यधिक प्रदूषण वाली बीएस-III और उससे नीचे के उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों के विरुद्ध कार्रवाई पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। प्रवर्तन एजेंसियों को संबंधित आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

आयोग ने विशेष रूप से शीत ऋतु के दौरान सभी क्षेत्रों में निरंतर कड़ी निगरानी, ​​समन्वित कानूनी कार्रवाई और वैधानिक निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की नियमित समीक्षा करने और जीआरएपी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई

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एसएआई शासी निकाय ने अनेक अवसंरचना विकास और उन्नयन परियोजनाओं को मंजूरी दी, केंद्रीय खेल मंत्री ने युवा खेल परिवेश को समर्थन देने के लिए एथलीट केंद्रित फैसलों पर जोर दिया

नई दिल्ली – केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के शासी निकाय (जीबी) की आज नई दिल्ली में हुई बैठक में देश भर में अनेक अवसंरचना विकास और उन्नयन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

डॉ मांडविया ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय खेल परिवेश अब अपनी युवावस्था में पहुंच चुका है। इसे हर संभव तरीके से मजबूत करना वक्त की जरूरत है ताकि इसका भविष्य उज्जवल हो। उन्होंने कहा, ‘‘हम आज जो फैसले कर रहे हैं वे एथलीट केंद्रित हैं। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों को उनकी जरूरत के अनुसार सर्वश्रेष्ठ अवसंरचना मिले ताकि हमने राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक के लिए पदकों का जो लक्ष्य सोचा है उस तक पहुंच सकें।’’

शासी निकाय ने जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सिफारिश की उनमें एसएआई नेताजी सुभाष दक्षिण केंद्र (एनएसएससी), बेंगलूरू के लिए पोलीग्रास पेरिस जीटी जीरो हॉकी टर्फ की खरीद शामिल है। एनएसएससी का उपयोग भारतीय पुरुष और महिला राष्ट्रीय और ‘ए’ हॉकी टीमों के प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर किया जाता है।

शासी निकाय भारतीय दिग्गज और उदीयमान निशानेबाजों के प्रशिक्षण केंद्र कर्णी सिंह शूटिंग रेंज (केएसएसआर) में मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक शूटिंग टारगेट की जगह लेजर टारगेट प्रणाली लगाने पर भी सहमत हुआ।

इन महत्वपूर्ण फैसलों के अलावा शासी निकाय ने गहन प्रशिक्षण और व्यापक एथलीट विकास के लिए एसएआई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) छत्रपति संभाजीनगर, एसएआई नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएसएनआईएस) पटियाला और एसएआई लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एलएनसीपीई) त्रिवेंद्रम में तीन बहुउद्देश्यीय हॉल के निर्माण को भी मंजूरी दी।

एसएआई एनसीओई छत्रपति संभाजीनगर में निर्मित हॉल में एक मौसमरोधी मुक्केबाजी प्रशिक्षण क्षेत्र, शक्ति और अनुकूलन क्षेत्र तथा वॉलीबॉल और बैडमिंटन के लिए इंडोर क्षेत्र होंगे। एसएआई एनएसएनआईएस पटियाला के हॉल से संस्थान की इंडोर प्रशिक्षण क्षमता बढ़ेगी तथा खेल प्रदर्शन, खेल विज्ञान सहयोग, अनूकूलन और स्वास्थ्यलाभ के लिए एक आधुनिक और समेकित परिवेश मिलेगा।

भारत के प्रमुख शैक्षिक संस्थान और उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र एलएनसीपीई त्रिवेंद्रम को समूचे साल निर्बाध प्रशिक्षण और शिक्षण गतिविधियां सुनिश्चित करने के लिए एक नया बहुउद्देश्यीय हॉल प्रदान किया गया है।

शासी निकाय ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) में 400 मीटर के 8 लेन वाले सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक के निर्माण को भी मंजूरी दे दी। निकाय ने इस बात पर गौर किया कि एसटीसी जलपाईगुड़ी एथलीटों के प्रशिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। इसने सीमित अवसंरचना के बावजूद क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर लगातार सराहनीय प्रदर्शन किया है।

एसटीसी जलपाईगुड़ी के अलावा एसएआई मध्य क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी) भोपाल में भी नया सिंथेटिक ट्रैक लगाने को मंजूरी दी गई। इस केंद्र में कई खेलों से जुड़े एथलीट प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। यह देश को लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट देता रहा है जिनमें दो ओलंपियन भी शामिल हैं।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी और विदेशी बैंकों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं

नई दिल्ली – केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एमएसएमई बैंकिंग उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी और विदेशी बैंकों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हुए देखना उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मजबूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों के रूप में उभरे हैं, जो भारत के विकास में सहयोग देने के लिए निजी और विदेशी बैंकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

 श्री गोयल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का सहयोग करने में बैंकिंग प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने  कहा कि समय पर और पर्याप्त ऋण तक पहुंच छोटे उद्यमियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि बैंकों ने एमएसएमई को संस्थागत वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें छोटे उधारकर्ता भी शामिल हैं, जो पहले ऋण के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर थे। अब वे व्यवसाय शुरू करने, संचालन का विस्तार करने और अपनी आजीविका में सुधार करने में सक्षम हुए हैं।

इससे पहले दिन में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ सातवां एफटीए है। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। यह उन देशों के साथ साझेदारी की ओर बदलाव को दर्शाता है जो पूरक शक्तियां और महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर प्रदान करते हैं।

श्री गोयल ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते आज व्यापक प्रकृति के हैं। इनमें न केवल वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच शामिल है बल्कि  नवोन्मेषकों, किसानों और उद्यमियों का सहयोग करने के लिए तकनीकी सहयोग भी शामिल हैं, जिससे उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि  न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में निवेश किए गए 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने कहा कि समझौते में निवेश प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने पर रियायतों को वापस लेने के प्रावधान शामिल हैं, जिससे यह केवल एक समझौता ज्ञापन के बजाय एक गंभीर और लागू करने योग्य प्रतिबद्धता बन जाती है।

मंत्री ने कहा कि इस समझौते से नवाचार, विनिर्माण और निर्यात में पर्याप्त निवेश होने की उम्मीद है, जिससे भारत न केवल न्यूजीलैंड बल्कि अन्य वैश्विक बाजारों के लिए भी एक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विकासों से सबसे ज्यादा लाभ एमएसएमई क्षेत्र को ही होगा।

उन्होंने हितधारकों से एफटीए से उत्पन्न होने वाले अवसरों को तेजी से प्राप्त करने और वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, तीन गुना और यहां तक कि चार गुना करने का लक्ष्य रखने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को लेकर पूरी तरह से महिला अधिकारियों की टीम द्वारा बातचीत की गई थी, जिससे यह महिलाओं द्वारा अंतिम रूप दिया गया पहला ऐसा समझौता बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की राजदूत भी एक महिला हैं, जो भारत के विकास पथ में महिलाओं द्वारा निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।

मंत्री ने यह भी कहा कि आज का यह दिन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसे संख्याओं के प्रबंधन में बैंकरों की भूमिका से जोड़ा जाता है जो अंततः एमएसएमई के लिए आर्थिक अवसर में बदल जाता है।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एमएसएमई, स्टार्टअप, संवर्धन केंद्र और युवा उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से मजबूत सहयोग मिलता रहेगा साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलता रहेगा।

छोटे उद्यमियों के लिए ऋण तक पहुंच को आसान बनाने के लिए की गई पहलों को याद करते हुए श्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के पहले वर्ष में शुरू की गई मुद्रा ऋण योजना और कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए ऋण गारंटी उपायों का उल्लेख किया, जिसके तहत सरकार बिना किसी अतिरिक्त गारंटी के एमएसएमई ऋणों के लिए गारंटर बन गई। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुद्रा ऋणों का लगभग 70 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिया गया है। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया कि कैसे 10,000 रुपये के छोटे ऋण, जिन्हें बाद में पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर बढ़ाकर 20,000 रुपये और 50,000 रुपये कर दिया गया, ने रेहड़ी-पटरी वालों को शोषक साहूकारों से बचने और उनकी आजीविका में सुधार करने में मदद की है।

छोटे कर्जदारों को सहायता प्रदान करने में बैंकों के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री गोयल ने कहा कि ऐसी पहलें प्रधानमंत्री के ‘एमएसएमई’ यानी ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिकतम सहयोग’ के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत को लोकतंत्र, कानून के शासन, निवेशकों के साथ घरेलू व्यवहार और निर्णायक नेतृत्व की पेशकश करने वाले एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखती है। उन्होंने भारत के विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था और शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने का श्रेय यहां के लोगों और संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनुमानों के अनुसार भारत 2047 तक 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30-35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो आठ गुना वृद्धि का अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि बैंकों ने पिछले साल लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो ईमानदार उधारकर्ताओं को ऋण देने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एमएसएमई ऋण में लगभग 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है, जिसमें और भी अधिक अवसर हैं क्योंकि भारत किसानों, एमएसएमई, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए अपनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था का विस्तार कर रहा है।

बैंकों से एमएसएमई विकास का सहयोग करने के लिए उदारतापूर्वक और जिम्मेदारी से ऋण देने का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने कहा कि बैंक अब सशक्त हो गए हैं और उन्हें ईमानदारी और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने त्वरित और पारदर्शी ऋण अनुमोदन और वितरण, पूंजीगत व्यय, परिचालन व्यय और कार्यशील पूंजी के लिए पर्याप्त पूंजी की उपलब्धता और एमएसएमई को सक्रिय मार्गदर्शन देने को प्रोत्साहित किया ताकि वे विकास के दौरान सरकारी योजनाओं और पूंजी बाजारों का लाभ उठा सकें।

मंत्री ने कहा कि आज कई बड़ी कंपनियों ने अपनी यात्रा एमएसएमई के रूप में शुरू की थी और एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती ही अंततः भारत के भविष्य के विकास को निर्धारित करेगी। उन्होंने बैंकों से इस यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया और एमएसएमई और बैंकों को अविभाज्य जुड़वां बताया, जिनकी संयुक्त वृद्धि भारत को 2047 तक विकसित भारत की ओर ले जाएगी।

श्री गोयल ने पुरस्कार विजेताओं को एक बार फिर बधाई देते हुए अमृत काल के दौरान त्वरित, समावेशी और सतत विकास का आह्वान करते हुए वर्ष 2026 के लिए सभी बैंकरों और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

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Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजंत्री से जिला परिषद सदस्यों ने की मुलाकात

जिला परिषद सदस्यों ने क्षेत्र की जनसमस्याओं से कराया अवगत

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग का दिया आश्वासन

रांची, 24.12.2025  –  उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से 23.12.2025 को जिला परिषद सदस्यों ने समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान जिला परिषद सदस्यों ने उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री को अपने-अपने क्षेत्र की जन समस्याओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों से से अवगत कराया।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की मजबूत कड़ी हैं, और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना संभव है। उन्होंने जिला परिषद सदस्यों को जिला प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

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महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट भव्यता के साथ सम्पन्न

26 महिला पत्रकार खिलाड़ियों ने किया शानदार खेल का प्रदर्शन

ट्रस्ट के चेयरमैन शुभ नारायण दत्त ने की रांची प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कमिटी की प्रशंसा

रांची,23.12.2025 – सुधा एंड अरमान चैरिटेबल ट्रस्ट और रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट पूरी भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ. टूर्नामेंट में 26 महिला पत्रकार खिलाड़ियों ने शामिल होकर शानदार खेल का प्रदर्शन किया और साबित कर दिया कि बीट रिपोर्टिंग और पत्रकारिता के ऑफिसियल कार्यों के दवाब के बीच भी खेल के मैदान में महिला पत्रकार कहीं किसी से एक कदम भी पीछे नहीं हैं.

टूर्नामेंट में रांची के सांसद संजय सेठ और विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय रहे. मौके पर दोनों ही अतिथियों ने बैडमिंटन में दो दो हाथ भी आजमाए. अतिथियों में सुनील सहाय और प्रणव कुमार बब्बू शामिल हुए.

ट्रस्ट के चेयरमैन शुभ नारायण दत्त और सचिव मनोज श्रीवास्तव ने इस मौके पर रांची प्रेस क्लब की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने कम समय में प्रेस क्लब ने बेहतरीन तरीके से टूर्नामेंट का आयोजन किया है और आगे भी ट्रस्ट और प्रेस क्लब मिलकर कई नए प्रयासों का आगाज़ करेंगे. शुभ नारायण दत्त ने कहा कि महिला पत्रकारों के लिए परिवार के साथ पत्रकारिता को मैनेज करना काफी मुश्किल होता है और यह सबकुछ उन्होंने स्व सुधा सिन्हा जी को लगातार करते हुए देखा है.

इस मौके पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने कहा कि रांची प्रेस क्लब के लिए यह सुखद अवसर है कि झारखंड की राजनीति के दो बड़े चेहरे इस आयोजन शामिल हुए और दोनों ने प्रेस क्लब को सहायता करने की बात कही है. वहीं, प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि हमारा का प्रयास होगा कि अक्षमाशील समय के साथ संघर्ष करते पत्रकारों के लिए खेल कूद से लेकर संवाद, सेमिनार का आयोजन लगातार किया जाता रहे.

तनाव के बीच खेलकूद से पत्रकारों को होगा लाभ: सुबोध कांत सहाय

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि पत्रकारों को आज काम का काफी दवाब रहता है. ऐसे में प्रेस क्लब और ट्रस्ट के द्वारा खेलकूद का आयोजन कराना पत्रकारों के तनाव को कम करने वाला साबित होगा. उन्होंने कहा कि फील्ड में रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों को बेहतरीन बैडमिंटन खेलते देख काफी प्रसन्नता हो रही है. सुबोध कांत सहाय ने प्रेस क्लब के विकास के लिए झारखंड सरकार से भी हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए बातचीत और प्रयास करने की बात कही.

भारी संख्या में पत्रकार हुए शामिल, कार्यक्रम को बनाया सफल

महिला पत्रकार बैडमिंटन टूर्नामेंट को सफल बनाने में प्रेस क्लब कमिटी से कुबेर सिंह, चन्दन भट्टाचार्य, विपिन उपाध्याय, प्रतिमा कुमारी, राजन बॉबी, चन्दन वर्मा, निर्भय कुमार, अमित कुमार, अशोक गोप , विजय कुमार गोप, सौरभ शुक्ला, संजय सुमन, संतोष सिन्हा समेत भारी संख्या में क्लब के पत्रकार सदस्य शामिल हुए. इनमें मुख्य रूप से आनंद मोहन, ॐ रंजन मालवीय, रेखा पाठक, कौरवी दत्ता, प्रदीप जायसवाल, शशि पाण्डेय, मोनू कुमार, पिंटू दूबे, किसलय सानू, अखिलेश सिंह, संतोष कुमार गुप्ता, सुशील सिंह मंटू, सत्यप्रकाश पाठक, अमलेश नंदन, अमरकांत, राकेश सिंह, मनोरंजन सिंह, विवेक कुमार, प्रदीप ठाकुर, आलोक सिन्हा, विकास कुमार, जगदीश सिंह, पंकज जैन, राजकुमार समेत कई पत्रकार शामिल हुए. आयोजन की सफलता में फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

विनर सिंगल्स
करिश्मा

रनर सिंगल्स
पूजा बोस

विनर डबल्स
मुस्कान और अदिति

रनर डबल्स
आशिया नजली और रूपम

प्रथम रनर अप
रोमिता और करिश्मा

द्वितीय रनर अप
जयंती और आरती

कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार रेखा पाठक ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने किया.

 

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रांची जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के सख्त पालन हेतु विशेष वाहन जाँच अभियान चलाया गया

अभियान के दौरान कुल 123 वाहनों की गहन जाँच की गई

जाँच में पाया गया कि 15 वाहनों के कागजात पूर्ण नहीं थे तथा कई वाहन ओवरलोडिंग में पाए गए। इन उल्लंघनों के लिए संबंधित वाहन मालिकों/चालकों पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंड अधिरोपित किया गया तथा कुल 2,87,550 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया

राँची, 23.12.2025  –  उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार सड़क सुरक्षा को मजबूत करने तथा यातायात नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला परिवहन विभाग द्वारा निरंतर विशेष जाँच अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज दिनांक 23.12.2025 को जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व एवं पर्यवेक्षण में रिंग रोड़, रातु क्षेत्र में सघन वाहन जाँच अभियान चलाया गया।

इस अभियान के दौरान कुल 123 वाहनों की गहन जाँच की गई, जिसमें वाहनों के पथकर (टैक्स), फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC), परमिट, ओवरलोडिंग तथा चालकों के अनुज्ञप्ति (ड्राइविंग लाइसेंस) आदि की बारीकी से पड़ताल की गई। जाँच में पाया गया कि 15 वाहनों के कागजात पूर्ण नहीं थे तथा कई वाहन ओवरलोडिंग में पाए गए। इन उल्लंघनों के लिए संबंधित वाहन मालिकों/चालकों पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंड अधिरोपित किया गया तथा कुल 2,87,550 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया।

इसके अतिरिक्त गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 03 वाहनों को जप्त कर सुरक्षार्थ रातु थाना में रखा गया है।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे। उन्होंने वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण रखें, ओवरलोडिंग न करें तथा यातायात नियमों का पालन करें, ताकि सड़कें सुरक्षित रहें और अनावश्यक दंड से बचा जा सके।

जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार ने बताया कि विभाग की टीम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के अभियान जारी रहेंगे, जिससे यातायात अनुशासन मजबूत हो तथा सड़क सुरक्षा में वृद्धि हो।

यह अभियान जिला प्रशासन की सड़क सुरक्षा एवं नियम पालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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भू-अर्जन से संबंधित मामलों की समीक्षात्मक बैठक

उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक

रैयतों को मुआवजा भुगतान में तेजी लाते हुए ससमय परियोजनाओं को पूरा करने का निर्देश

रांची, 23.12.2025 – रांची जिले में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं से संबंधित भू-अर्जन मामलों की समीक्षा को लेकर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा गया कि जिले में संचालित सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित कार्यकारी एजेंसियों एवं पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजनाओं में आ रही बाधाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने भू-अर्जन से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए रैयतों को देय मुआवजा राशि के भुगतान में तेजी लाने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुआवजा भुगतान में अनावश्यक विलंब से परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित होती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान उपायुक्त द्वारा एनएचएआई (NHAI) के माध्यम से रांची जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं की विशेष समीक्षा की गई। उन्होंने एनएचएआई के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मुआवजा मामलों का शीघ्र निष्पादन करते हुए रैयतों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि निर्माण कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।

साथ ही, उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सिरम टोली फ्लाईओवर सहित अन्य फ्लाईओवर परियोजनाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यकारी एजेंसियों को सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिया। उन्होंने इंटरचेंज परियोजना के अंतर्गत सभी प्रभावित रैयतों को निर्धारित दरों के अनुसार मुआवजा भुगतान शीघ्र करने तथा निर्माण कार्य में और तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

उपायुक्त ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित रैयतों के अधिकारों की रक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी रांची, सदर श्री उत्कर्ष कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री के.के. राजहंस, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय, एनएचएआई के संबंधित पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे

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उपायुक्त-सह जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में शहर को सुंदर, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में पूर्व निर्देशों की प्रगति की समीक्षा

आवागमन, अतिक्रमण, महिला सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों की समीक्षा, संबंधित अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

रांची, 23.12.2025 – रांची शहर को सुंदर, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति की समीक्षा हेतु आज दिनांक 23.12.2025 को उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने, यातायात व्यवस्था को सुचारु करने, बिजली के खंभों पर लटके अव्यवस्थित तारों को व्यवस्थित करने, अनावश्यक कट्स को बंद करने तथा महिला सुरक्षा को सुदृढ़ करने को लेकर पूर्व में दिए गए दिशा-निर्देशों पर की गई कार्रवाई की बिंदुवार समीक्षा की गई।

उपायुक्त-सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को और अधिक प्रभावी एवं सतत बनाया जाए, ताकि सड़कों, फुटपाथों एवं सार्वजनिक स्थलों पर आम नागरिकों को सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके। उपायुक्त द्वारा अतिक्रमण हटाने से पूर्व नोटिस देने का निर्देश दिया गया, उन्होंने संबंधित अंचल अधिकारियों को नगर निगम के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया।

बिजली के खंभों पर लटके अव्यवस्थित तारों के संबंध में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अब तक की गई पहल की समीक्षा करते हुए टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय को और मजबूत करने तथा निर्धारित समय-सीमा में बेतरतीब तारों को हटाने का कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका समाप्त हो और शहर की सौंदर्यात्मक छवि में सुधार हो।

यातायात व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने टोटो परिचालन को लेकर पुलिस अधीक्षक (यातायात) एवं जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ली तथा टोटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म, मार्ग निर्धारण, परिचालन अनुशासन एवं वाहन के पीछे चालक का नाम व मोबाइल नंबर बड़े अक्षरों में अंकित कराने के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।

महिला सुरक्षा को लेकर भी बैठक में विशेष रूप से समीक्षा की गई। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों एवं रात्रिकालीन समय में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए। उन्होंने नियमित पेट्रोलिंग, संवेदनशील स्थानों की पहचान एवं निगरानी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जिला प्रशासन द्वारा रांची शहर को अतिक्रमण मुक्त, यातायात की दृष्टि से सुगम, महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए सुरक्षित तथा सौंदर्यपूर्ण बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से निरंतर कार्य किया जा रहा है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में आयुक्त, रांची नगर निगम श्री सुशांत गौरव, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता श्री राम नारायण सिंह, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री केके राजहंस, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय सहित बिजली विभाग, भवन निर्माण एवं एनएचएआई के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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क्रिसमस से पहले महिलाओं को राज्य सरकार का उपहार

राज्य सरकार की महत्वकांक्षी “झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना” अंतर्गत लाभुकों को सम्मान राशि का भुगतान

रांची जिले में योजना अंतर्गत नवंबर महीने की सम्मान राशि (2500 रूपये) का भुगतान

रांची जिला में 3 लाख 93 हजार 84 लाभुकों के खाते में आधार बेस्ड भुगतान

लाभुकों के मध्य 98 करोड़ 27 लाख 10 हजार की राशि का भुगतान

रांची, 23.12.2025  –  क्रिसमस के पावन अवसर पर राज्य सरकार द्वारा झारखंड की महिलाओं को विशेष उपहार स्वरूप मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत नवंबर माह की सम्मान राशि का भुगतान किया जा रहा है।

इस योजना के तहत रांची जिले की कुल 03 लाख 93 हजार 84 महिलाओं के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 2500 रुपये प्रति लाभुक की दर से कुल 98 करोड़ 27 लाख 10 हजार रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया है।

विभिन्न प्रखंड एवं शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति (नवंबर माह)

अनगड़ा – 16,935 लाभुक

अरगोड़ा (शहरी क्षेत्र) – 13,207 लाभुक

बड़गाईं (शहरी क्षेत्र) – 9702 लाभुक

बेड़ो – 20,761 लाभुक

बुण्डू – 8,552 लाभुक

बुण्डू (नगर पंचायत) – 3,574 लाभुक

बुढ़मू – 18,152 लाभुक

चान्हो – 19,851 लाभुक

हेहल (शहरी क्षेत्र) – 15,537 लाभुक

ईटकी – 10,466 लाभुक

कांके – 31,781 लाभुक

कांके (शहरी क्षेत्र) – 1,336 लाभुक

खलारी – 9,699 लाभुक

लापुंग – 11,473 लाभुक

माण्डर – 23,308 लाभुक

नगड़ी – 18,084 लाभुक

नगड़ी (शहरी क्षेत्र) – 8,184 लाभुक

नामकुम – 18,053 लाभुक

नामकुम (शहरी क्षेत्र) – 9,151 लाभुक

ओरमांझी – 18,342 लाभुक

राहे – 9,691 लाभुक

रातू – 18,790 लाभुक

सिल्ली – 21,390 लाभुक

सोनाहातू – 13,269 लाभुक

तमाड़ – 18,758 लाभुक

सदर (शहरी क्षेत्र) – 25,038 लाभुक

उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि क्रिसमस का पर्व प्रेम, सेवा और खुशियाँ बांटने का संदेश देता है। इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत महिलाओं को सम्मान राशि का भुगतान राज्य सरकार की ओर से एक स्नेहपूर्ण उपहार है। यह सहायता महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल देती है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी सुदृढ़ करती है।

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चुनाव आयोग ने प्रमुख राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की

चुनाव आयोग ने प्रमुख राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की
  1. निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षकों (एसआरओ) की नियुक्ति की है।
  2. एसआरओ ने अपना काम शुरू कर दिया है और वे फरवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक इन राज्यों में सप्ताह में दो दिन मौजूद रहेंगे।
  3. एसआरओ सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के साथ राज्य और जिला स्तरीय बैठकें करेंगे।
  4. एसआरओ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) के साथ बैठकों में व्यक्तिगत या वर्चुअल माध्यम से भी भाग लेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और सहभागिता के साथ सुचारू रूप से पूरी हो।
  5. एसआरओ विशेष गहन पुनरीक्षण का निरीक्षण करेंगे ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।

राँची पुलिस कप्तान के निर्देश पर भू-माफियाओं एवं आर्म्स एक्ट के अभियुक्तों पर कड़ी कार्रवाई जारी

गोन्दा थाना कांड सं0-158/25, दिनांक-22.12.25, धारा-25(1-B) a/26/25 (1A)/25(6)/35 आर्म्स एक्ट

रांची,23.12.2025 – राँची जिला अन्तर्गत वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची के निर्देशानुसार लगातार भू-माफियाओं एवं आर्म्स एक्ट के अभियुक्तों की गतिविधियों का सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 22.12.25 की रात्रि में वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची को गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि कांके एवं गोंदा थाना क्षेत्र में सक्रिय भू-माफिया, जिनमें कुछ न्यायिक हिरासत में है, के द्वारा अपने संगठित गिरोह के माध्यम से हथियार के बल पर भूविवाद को उत्पन्न कर अवैध कब्जा किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के नियंत्रण में वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मु०) प्रथम के नेतृत्व में कांके, गोंदा थाना एवं पिठौरिया थाना की एक संयुक्त छापामारी दल का गठन किया गया।

छापामारी के क्रम में दिनांक-22.12.25 की मध्य रात्रि को एतवा टोप्पो, पे० डहरू टोप्पो सा० भीठा बस्ती नियर, चांदनी चौक, थाना गोंदा जिला रॉची के घर पहुँचकर घर की तलाशी के क्रम में एतवा टोप्पो के घर से एक 9 एम०एम० पिस्टल पाया गया, जिसे अनलॉक करने पर पिस्टर के मैगजीन में चार अदद जिन्दा गोली लोड पाया गया, जिसके पश्चात एतवा टोप्पो के घर से पाये गये आग्नेयास्त्र, जिन्दा गोली एवं एतवा टोप्पो के पैकेट में रखे ओप्पो कंपनी का एंड्रॉवाएड फोन को विधिवत जप्त किया गया। एतवा टोप्पो के द्वारा भी जमीन की खरीद-बिक्री का अवैध कार्य किया जाता है तथा यह भू-माफिया सींडीकेट का एक सक्रिय सदस्य है।

अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया एवं अवैध आग्नेयास्त्र के स्रोत व आपूर्तिकर्ता के संबंध में छानबीन की जा रही है तथा घटना में शामिल अन्य अभियुक्तों के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा रही है।उसके पास से 9 एम०एम० पिस्टल 01 और जिन्दा कारतूस बरामद किया गया.

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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अवसंरचना, रसद लागत एवं कनेक्टिविटी पर उच्च स्तरीय कार्य बल की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने 22 दिसंबर, 2025 को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अवसंरचना, रसद लागत एवं कनेक्टिविटी पर उच्च स्तरीय कार्य बल (एचएलटीएफ) की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा और केंद्रीय मंत्रालयों तथा अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 एचएलटीएफ ने क्षेत्रीय रसद एवं कनेक्टिविटी चुनौतियों की समीक्षा की, अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक अवसंरचना प्राथमिकताओं का आकलन किया और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संस्थागत तंत्र एवं अंतर-मंत्रालयी समन्वय पर चर्चा की।

प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने रसद, बहुआयामी कनेक्टिविटी, सीमा पार व्यापार गलियारों, डिजिटल एवं विद्युत सुविधाओं तथा संस्थागत एवं वित्तीय तंत्रों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक, चरणबद्ध रोडमैप प्रस्तुत किया। उत्तर-पूर्व को एक एकीकृत क्षेत्र मानने की आवश्यकता पर बल देते हुए, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने सड़क एवं राजमार्ग, रेलवे, नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग, विद्युत, सूचना एवं दूरसंचार तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सहित प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वन एवं पर्यावरण मंजूरी से जुड़ी चुनौतियों का सक्रिय समाधान करने आवश्यकता पर भी बल दिया।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘’एक्ट ईस्ट पॉलिसी के अंतर्गत मिजोरम पड़ोसी देशों के लिए क्षेत्रीय प्रवेश द्वार के रूप में कार्य कर सकता है। उन्होंने कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट जैसी प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर त्वरित विचार-विमर्श करने सिफारिश की। उन्होंने कार्यबल के वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सीमा व्यापार, रसद एवं संस्थागत समर्थन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया।

केंद्रीय डोनर मंत्री ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री द्वारा एचएलटीएफ के अन्य सदस्यों के साथ परामर्श करके प्रस्तावित किए गए रोडमैप की सराहना की और इसे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में रसद एवं कनेक्टिविटी बढ़ाने की एक व्यापक रणनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की राज्य सरकारों के बीच सक्रिय सहयोग बहुत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यबल द्वारा प्रस्तावित संरचना की बहुक्षेत्रीय प्रकृति के मद्देनजर कार्यबल की रिपोर्ट को अंतिम रूप प्रदान करने पहले संबंधित मंत्रालयों जैसे कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय और नीति आयोग से सुझाव मांगे जा सकते हैं।

2025 की शुरुआत में, डोनर मंत्रालय ने आठ उच्च-स्तरीय कार्य बलों का गठन किया और प्रत्येक की अध्यक्षता उत्तर-पूर्वी राज्यों के एक-एक मुख्यमंत्री करते हैं और केंद्रीय डोनर मंत्री तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। इस पहल की शुरुआत 21 दिसंबर, 2024 को अगरतला में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के 72वें पूर्ण सत्र के दौरान बनी सहमति के आधार पर की गई।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने नई दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के 7वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज यहां वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के 7वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। जीजीएसआईपीयू के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) महेश वर्मा और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा भी इस अवसर पर मौजूद थीं।

 

सभा को संबोधित करते हुए, श्रीमती पटेल ने उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को बधाई दी और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत बनाने में सार्वजनिक चिकित्सा संस्थानों की अहम भूमिका पर जोर दिया। “आज आपको जो डिग्रियां मिलेंगी, वे योग्यता प्रमाण पत्र से कहीं बढ़कर हैं। वे करुणा, समर्पण और लगन जैसे गुण एवं विशेषताएं हैं, जिन्हें आप अब से अपने चिकित्सा के पेशे में अपनायेंगे।” उन्होंने युवा डॉक्टरों से नैतिक चिकित्सीय कार्यप्रणाली, करूणा और जरूरतमंद एवं हाशिये पर पड़े समुदायों की सेवा करने के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता बनाए रखने का आग्रह किया।

पिछले 11 वर्षों के दौरान देश की स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए, श्रीमती पटेल ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवा  की पूरी प्रणाली को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “प्राथमिक स्तर पर, देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं जो लोगों को प्राथमिक स्तर की देखभाल की पूरी सेवाएं दे रहे हैं, सरकार सीएचसी व जिला अस्पतालों जैसी द्वितीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में जरूरी कमियों को ठीक कर रही है और हम तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं के नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं तथा चिकित्सा शिक्षा के बारे में भी नए सिरे से सोच रहे हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “पिछले 11 वर्षों में, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है। अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,28,000 हो गई हैं और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर आज लगभग 82,000 हो गई हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत–पीएमजेएवाई योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोगों को, जो भारत की आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक हैं, 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवरेज दिया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य कवरेज योजना है। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना और अमृत फार्मेसी जैसी योजनाएं भी हैं जो दवाएं, चिकित्सीय उपकरण और सर्जिकल इम्प्लांट रियायती दरों पर प्रदान कर रही हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “आज, भारत डिजिटल स्वास्थ्य और अत्याधुनिक तकनीक के मामले में सबसे आगे है क्योंकि हम सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा के बड़े लक्ष्य को पूरा करना चाहते हैं”। अपने  भाषण का समापन करते हुए, उन्होंने उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान देने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे कहा, “चिकित्सक  के तौर पर आपने एक सामाजिक अनुबंध किया है, इसलिए मानवीयता का वह स्पर्श कहीं खोना नहीं चाहिए”।

इस अवसर पर, 217 से अधिक पोस्टग्रेजुएट छात्रों, 136 अंडरग्रेजुएट छात्रों एवं 40 सुपर-स्पेशियलिटी छात्रों को डिग्रियां दी गईं और 43 छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं समर्पण  के लिए पदकों से सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. मनस्वी कुमार; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) संदीप बंसल; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) गीतिका खन्ना; वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) चारू बंबा तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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‘जिलों का समग्र विकास’ विषय पर आधारित राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार श्रृंखला 2025-26 का 33वां वेबिनार 22 दिसंबर 2025 को सर्वोत्तम तौर-तरीकों के प्रसार और अनुकरण के लिए आयोजित किया गया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) को विभिन्न जिलों के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल सम्मेलन/वेबिनार आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसमें लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार के पूर्व विजेताओं को आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे अपने अनुभव साझा कर सकें। इसका उद्देश्य व्यापक प्रसार और अनुकरण करना है।

प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसरण में, डीएआरपीजी ने अप्रैल 2022 से अब तक राष्ट्रीय सुशासन पर 33 वेबिनार आयोजित किए हैं। इसके तहत प्रत्येक महीने एक वेबिनार का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार योजना के तहत पुरस्कार विजेता नामांकनों के प्रसार और प्रसार को प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में सम्बंधित विभागों, राज्य सरकारों, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।

ये वेबिनार न केवल पहल के संस्थागतकरण/स्थिरता की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि इसके दोहराव/विस्तार की स्थिति के बारे में भी जानकारी प्रदान करते हैं।

33 वां वेबिनार 22 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसमें ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 के लिए लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों के बारे में नीचे दिए गए विवरण के अनुसार पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी:

  1. श्री शशांक शुभंकर, जिला मजिस्ट्रेट, गया, बिहार द्वारा बिहार की नालंदा जिला पहल
  2. श्री आयुष गर्ग, उपायुक्त, शिवसागर, असम द्वारा असम की बारपेटा जिला पहल

वेबिनार की अध्यक्षता डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव श्री पुनीत यादव ने की और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। वेबिनार में देश भर के 800 से अधिक स्थानों से राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक सुधार विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, राज्य और जिला अधिकारियों, केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारियों ने भाग लिया।

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चुटिया मेन रोड रांची में फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला

राँची,23.12.2025  – चुटिया मेन रोड में फिर तेज रफ्तार का कहर।सोमवार की देर रात करीब एक बजे कार चालक जिसका गाड़ी नंबर है JH-01FB-5790 WagonR वाले ने दूसरे खड़ी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतना जोरदार था की आस-पास के लोग आवाज सुनकर जग गए।लोग जब तक गाड़ी के पास पहुँचे कार चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार को जब्त कर लिया।इस मामले में दुकानदार ने बताया कि उनकी कार दुकान के आगे सेड में खड़ी थी।रात में आवाज सुनकर बाहर निकले थे एक दूसरी कार ने जोरदार टक्कर मार दी।वहीं कार चालक लोगों की भीड़ जुटता देखकर गाड़ी छोड़कर भाग गया।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का अंतरक्षेत्रीय समन्वय द्वारा इन्फ्लूएंजा से निपटने की तैयारी मजबूत करने के लिए दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन

नई दिल्ली – श्वसन तंत्र (नाक, गला और फेफड़े) को प्रभावित करते वाले अत्यधिक संक्रामक इन्फ्लूएंजा (फ्लू) से बचाव और इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र – एनसीडीसी, विश्व स्वास्थ्य संगठन – भारत के सहयोग से, 22 से 23 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में इन्फ्लूएंजा की तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय सुदृढ़ करने विषय पर दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य देश में आगामी इन्फ्लूएंजा के मौसम से पहले तैयारी और इससे निपटने के तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रमुख हितधारकों के बीच विचार-विमर्श करने का संरचित मंच प्रदान करना है। इन्फ्लूएंजा से ग्रस्त होने पर बुखार, खांसी, शरीर दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिसके हल्के से लेकर गंभीर परिणाम तक हो सकते हैं।

 

चिंतन शिविर उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि यह शिविर सभी हितधारकों के लिए इन्फ्लूएंजा से बचने और उससे निपटने के अनुकूलन तैयारियों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का एक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन्फ्लूएंजा के आगामी मौसम में तैयारियों और निपटने की योजना में आपातकालीन क्षमताएं भी शामिल हैं, जिनका सुचारू समन्वय आवश्यक है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम – आईडीएसपी के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश भर में मजबूत और सहयोगात्मक निगरानी प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के समन्वित और सहक्रियात्मक प्रयास आवश्यक हैं।

 

चिंतन शिविर में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों के लगभग 110 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जो बहुक्षेत्रीय सहभागिता को दर्शाता है। इसमें भाग लेने वालों में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय – डीजीएचएस, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद – आईसीएमआर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – आईसीएआर, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान – एनआईवी तथा सहयोगी संगठन और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हैं। इसमें ग्यारह राज्यों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से, जबकि अन्य राज्य आभासी माध्यम से भाग ले रहे हैं। बैठक में इन्फ्लूएंजा से बचाव और निपटने के सर्वोत्तम प्रचलन और अनुभव को साझा किए जा रहे हैं।

भारत और वैश्विक स्तर पर इन्फ्लूएंजा जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, जिसके समय-समय पर प्रकोप ​​से गंभीर रुग्णता और मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को प्रभावित करता है। इसी दृष्टिगत चिंतन शिविर आयोजित किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय आईडीएसपी नेटवर्क माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौसमी इन्फ्लूएंजा के रुझानों की वास्तविक समय के साथ निकटता से निगरानी रख रहा है। बैठक में इस बात को रेखांकित किया गया कि इन्फ्लूएंजा की तैयारी अलग-थलग नहीं रखा जा सकती और इसके लिए निगरानी, ​​​​प्रारंभिक चेतावनी, प्रयोगशाला जांच तैयारी, नैदानिक ​​तत्परता और जोखिम के बारे में प्रभावी संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।

 

 

चिंतन शिविर के प्रमुख उद्देश्य-परिणाम राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संस्थानों की तैयारियों की समीक्षा के लिए अधिक संरचित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। इसमें तैयारियों के आकलन में सहायता, कमियों की पहचान और समयबद्ध अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक व्यावहारिक तैयारी संबंधी जांच सूची तैयार करना शामिल है। चर्चा में समय पर सूचना साझा करने, भूमिकाओं और उत्तरदायित्व की स्पष्टता और विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।

 

 

इन्फ्लूएंजा से बचाव और निपटने के चिंतन शिविर मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य प्रणालियों को आपस में समन्वित कर एक स्वास्थ्य आधारित तैयारियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के माध्यम से सरकार के समग्र समन्वय को बढ़ावा देकर, यह पहल वसुधैव कुटुंबकम की भावना अनुरूप भारत की महामारी से निपटने की तैयारियों और बचाव क्षमता मजबूत करने तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में योगदान देती है।

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भारतीय नौसेना में तीसरी पनडुब्बी रोधी उथले पानी का जहाज ‘अंजदीप’ शामिल किया गया

नई दिल्ली – गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई)कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आठ एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी पनडुब्बी रोधी उथले पानी के जहाजों में से एक यानी तीसरा अंजदीप जहाज, 22 दिसंबर 2025 को चेन्नई में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी जहाजों को जीआरएसई और मेसर्स एल एंड टी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) के तहत इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह सहयोगी रक्षा विनिर्माण की सफलता को दर्शाता है।

लगभग 77 मीटर लंबाई वाले ये जहाज भारतीय नौसेना के सबसे बड़े वाटरजेट युद्धपोत हैं और अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडोस्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी के सोनार से सुसज्जित हैं।  यह पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम हैं। ये जहाज नौसेना की पनडुब्बी रोधी, तटीय निगरानी और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को मजबूत करेंगे।

यह जहाज 2003 में सेवामुक्त पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत आईएनएस अंजदीप का पुनर्जन्म है। जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार तट पर स्थित अंजदीप द्वीप से लिया गया है, जो भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

अंजदीप का शामिल किया जाना भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करती है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण इको-सिस्टम के विकास और आयात पर निर्भरता कम करने का प्रमाण है।

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