नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा लेखा विभाग की 275 वर्षों से अधिक की समृद्ध विरासत है और यह सरकार के सबसे पुराने विभागों में से एक है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर देश के इस स्वप्न को साकार करने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उपराष्ट्रपति ने अमृतकाल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान का स्मरण दिलाते हुए जोर देकर कहा कि यह विकास समावेशी और अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों की ऊर्जा और नवोन्मेषी विचार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से “सेवा भाव और कर्तव्य बोध” को मार्गदर्शक मंत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
भारतीय रक्षा लेखा सेवा के महत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधन प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि रक्षा सेवाओं के लेखा और वित्तीय प्राधिकृत संस्थान के अधिकारियों के रूप में उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सशस्त्र बलों की चुनौतियों को समझना और आत्मसात करना आवश्यक है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी बल दिया कि सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता सुनिश्चित करने के लिए विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन ज़रूरी है।
श्री राधाकृष्णन ने सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, सतर्कता और उत्तरदायित्व के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर बल दिया, क्योंकि सार्वजनिक धन करदाताओं के कठिन परिश्रम से अर्जित होता है।
उपराष्ट्रपति ने तेज़ी से बदलती तकनीक और वैज्ञानिक प्रगति के इस युग में निरंतर क्षमतावर्धन पर भी बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को आजीवन सीखने के लिए आईगॉट कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया।
सार्वजनिक सेवा में आदर्श मूल्यों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान आवश्यक है, पर चरित्र सर्वोपरि है। उन्होंने अधिकारियों को स्मरण कराया कि देश के 140 करोड़ नागरिकों में से समाज में उन्हें सकारात्मक परिवर्तन लाने का दुर्लभ अवसर मिला है और उन्हें इस दायित्व को विनम्रता और समर्पण से निभाना चाहिए।
विकसित भारत की ओर बढ़ते देश में सिविल सेवकों से अपेक्षाओं के बारे में एक प्रशिक्षु अधिकारी के प्रश्न का उत्तर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे नवीन विचारों से प्रेरित रहने, आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने, काम के प्रति उत्साह बनाए रखने, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखने और प्रशासनिक नैतिकता अपनाने को कहा।
कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, रक्षा लेखा महानिदेशक श्री विश्वजीत सहाय, रक्षा सेवा वित्तीय सलाहकार श्री राज कुमार अरोड़ा और अन्य विशिष्ट जन उपस्थित थे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान से सोमवार को भोपाल में अलग-अलग राज्यों के रोजगार सहायकों ने मुलाकात की और प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% किए जाने पर आभार व्यक्त किया, केन्द्रीय मंत्री को धन्यवाद दिया। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, रोजगार सहायकों, पंचायत सचिवों और तकनीकी स्टाफ को समय पर वेतन न मिलना एक बड़ी चिंता थी, जिसे दूर करने के लिए प्रशासनिक व्यय बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
केन्द्रीय मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पहले प्रशासनिक व्यय 6 प्रतिशत था, जिसे अब बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी इसे डेढ़ गुना किया गया है। इसका सीधा लाभ ये होगा कि, कुल प्रस्तावित बजट 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये में से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि यह राशि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त होगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशासनिक खर्च में किसी भी प्रकार का अपव्यय न हो। श्रीशिवराज सिंह ने कहा कि, जीप-गाड़ी या अन्य अनावश्यक मदों में खर्च न हो, इस पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि, रोजगार सहायकों ने वेतन में देरी और भुगतान रोके जाने की समस्याएं सामने रखी गई थीं, जिसके बाद नियमों में ऐसा प्रावधान किया गया है कि पहले वेतन का भुगतान हो और उसके बाद अन्य आवश्यक खर्च किए जाएं। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय कर आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, मनरेगा के तहत अब 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी है। साथ ही, खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को अधिकार दिया गया है कि वो कटाई-बुवाई के समय अधिकतम 60 दिन तक मजदूरों को कृषि कार्य में लगाने के लिए अधिसूचना जारी कर सकें, ताकि किसानों को भी श्रमिकों की कमी न झेलनी पड़े। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, पुरानी कमियों को दूर कर VB- G RAM G योजना को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर जमीनी स्तर पर काम कर रहे साथियों की परेशानियों को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। वहीं शिवराज सिंह ने रोजगार सहायकों से कहा कि, इस संदेश को सही तरीके से नीचे तक पहुंचाया जाए और भरोसा दिलाया कि सुझावों पर राज्य सरकारों से चर्चा कर आगे भी सुधार किए जाते रहेंगे, ताकि पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारी पूरी क्षमता से काम कर सकें।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, विकसित भारत जी राम जी, एक ऐतिहासिक योजना है, जो अब विधेयक से आगे बढ़कर अधिनियम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जरूरी है कि, सच्चाई को समझा जाए और सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए। श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, अब तक मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, जिसे विकसित भारत रोजगार योजना के तहत बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि रोजगार की गारंटी को और मजबूत बनाया गया है। यदि किसी कारणवश रोजगार नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान पहले की तुलना में कहीं अधिक पुख्ता किया गया है। उन्होंने कहा कि, मजदूरी भुगतान को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि 15 दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं होता है और राशि लंबित रहती है, तो मजदूर को अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जाएगा। अब यह नहीं चलेगा कि मजदूरी महीनों तक अटकी रहे। मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया है। मौजूदा मजदूरी दरें जारी रहेंगी और हर साल मजदूरी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पिछले पांच वर्षों में मजदूरी में करीब 29% की बढ़ोतरी की है और आगे भी एक तय फार्मूले के आधार पर हर साल वृद्धि होती रहेगी।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, इस योजना के तहत चार प्रकार के काम किए जाएंगे। इनमें जल संरक्षण और पानी बचाने से जुड़े कार्य, जैसे तालाब, चेक डैम और अन्य संरचनाएं शामिल होंगी। इसके अलावा स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी, सड़क, नाली और गांव के अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े काम किए जाएंगे। आजीविका मिशन से जुड़ी बहनों और एफपीओ के लिए जरूरी संरचनाएं भी इसमें शामिल होंगी। तीसरे प्रकार के काम आजीविका आधारित होंगे, जो रोजगार को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे, जबकि चौथे प्रकार के काम प्राकृतिक आपदाओं से बचाव से जुड़े होंगे, जैसे रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज सिस्टम और नदी-नालों से संबंधित संरचनाएं। श्रीशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच है कि विकास के काम जमीन पर दिखें। विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत सभी योजनाएं बैठकर बनाई जाएंगी और गांव के विकास का फैसला गांव ही करेगा।
नई दिल्ली – दिव्यांगता को सहानुभूति नहीं बल्कि समान अवसर और सम्मान की आवश्यकता है। इसी विचार को केंद्र में रखकर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) की ओर से आयोजित नौ दिवसीय ‘दिव्य कला मेला’ का आज इंडिया गेट स्थित कर्तव्य पथ पर सफलतापूर्वक समापन हुआ। 13 से 21 दिसंबर 2025 तक आयोजित यह मेला देश भर के दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की उद्यमशीलता की क्षमता, रचनात्मक उत्कृष्टता और आर्थिक योगदान को प्रदर्शित करने वाले एक प्रभावशाली राष्ट्रीय मंच के रूप में उभर कर सामने आया।
दिसंबर 2022 में इसी कर्तव्य पथ से शुरू हुई दिव्य कला मेला की यात्रा अपने 28वें पड़ाव पर दिल्ली लौटते हुए एक परिपक्व और प्रभावशाली राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है, जो एक सतत आंदोलन के रूप में मेले के विकास को रेखांकित करता है। अब तक देशभर में आयोजित 28 मेलों के माध्यम से 2,362 से अधिक दिव्यांग शिल्पियों और उद्यमियों ने भाग लिया है और कुल 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। दिल्ली में आयोजित मेले में देश के 20 राज्यों से आए लगभग 100 दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों और कौशल से आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। होम डेकोर, ऑर्गेनिक फूड और हस्तशिल्प उत्पादों की भारी मांग के चलते लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया गया, जो दिव्यांग-नेतृत्व वाले उद्यमों में बढ़ते जन विश्वास को दर्शाती है।
इस मेले ने रोजगार और वित्तीय समावेशन के रास्ते भी मजबूत किए। 16 दिसंबर को आयोजित एक विशेष रोजगार मेले में 157 दिव्यांग युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 99 को चुना गया और कई को प्रतिष्ठित कंपनियों से मौके पर ही नौकरी के प्रस्ताव मिले। उद्यमिता को और बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय दिव्यांग वित्त और विकास निगम (एनडीएफडीसी) ने दिव्यांग उद्यमियों को 1.05 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए, जबकि एएलआईएमसीओ ने सहायक उपकरणों के वितरण और पंजीकरण को सुगम बनाया, जिससे व्यावहारिक स्वतंत्रता और उत्पादकता में वृद्धि हुई।
समापन अवसर पर आयोजित ‘दिव्य कला शक्ति’ सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। दिल्ली-एनसीआर से आए दिव्यांग कलाकारों ने नृत्य और संगीत की सशक्त प्रस्तुतियों के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि कलात्मक अभिव्यक्ति किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। इसके साथ ही मेले में स्थापित ‘एक्सपीरियंस ज़ोन’ तथा ब्लाइंड क्रिकेट और बोचिया जैसे दिव्यांग खेलों ने आगंतुकों को दिव्यांगजनों की चुनौतियों के साथ-साथ उनकी क्षमताओं और आत्मविश्वास को नज़दीक से समझने का अवसर दिया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और एनडीएफडीसी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए दिल्ली के लोगों, स्थानीय प्रशासन और कर्तव्य पथ के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विभाग ने देश भर में इसी तरह की पहल आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। इसका उद्देश्य समावेशी, गरिमामय और अवसर-संचालित समाज का निर्माण करना है, जहां दिव्यांगजनों को भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में समान भागीदार के रूप में मान्यता दी जाए।
मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, रांची,22.25.2025 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में “ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन” एवं “जाहेरथान कमेटी” के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को आगामी 29 दिसंबर, 2025 को जमशेदपुर (दिशोम जाहेर, करनडीह) में आयोजित होने वाले 22वें संथाली “पारसी माहा” तथा ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।
इस अवसर पर ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन के महासचिव श्री रविंद्र नाथ मुर्मू, सहायक महासचिव, श्री मानसिंह मांझी, जाहेरथान कमेटी के कार्यकारी सदस्य श्री सागेन हंसदा एवं श्री शंकर हेंब्रम उपस्थित थे।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मध्य प्रदेश के इंदौर में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी समारोहों में भाग लिया। यह कार्यक्रम अटल फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था।
तमिल क्लासिक तिरुक्कुरल के एक दोहे को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जन्म से सभी मनुष्य समान होते हैं, जबकि महानता अपने कर्मों से प्राप्त की जाती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे बल्कि स्वयं एक मिशन थे, जो सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में हमेशा “अटल” बने रहे। उन्होंने देखा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक राजनेता, प्रशासक, सांसद, कवि के रूप में उनके उदाहरणीय कार्यों के लिए याद किया जाता है और सम्मानित किया जाता है, और सबसे ऊपर, एक महान मानव के रूप में।
उपराष्ट्रपति ने नोट किया कि श्री वाजपेयी संवाद, समावेशी विकास और मजबूत लेकिन मानवीय शासन में गहराई से विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा कि श्री अटल जी ने गरिमा और शालीनता के साथ सार्वजनिक विमर्श को ऊंचा उठाया और यह प्रदर्शित किया कि राजनीति सिद्धांतपूर्ण और करुणामय हो सकती है। उन्होंने जोड़ा कि यही कारण है कि श्री वाजपेयी का जन्मदिन अच्छे शासन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने याद किया कि श्री वाजपेयी सांसदों के लिए हमेशा सुलभ रहते थे और राष्ट्र-निर्माण के लिए सभी पक्षों से सुझावों के प्रति खुले रहते थे। उन्होंने श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्यों के गठन का उल्लेख किया, इसे शासन और प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए दूरदर्शी कदम बताते हुए।
राष्ट्र-निर्माता के रूप में श्री वाजपेयी के योगदान को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल परियोजना जैसे ऐतिहासिक पहलों का उदाहरण दिया।
1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी के नेतृत्व ने भारत को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दृढ़ता से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का विज्ञान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर राष्ट्र को निर्देशित कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के तमिलनाडु से गहरे जुड़ाव को भी याद किया, उनकी भाषाई विविधता, सांस्कृतिक बहुलता और संवाद के प्रति सम्मान का उल्लेख करते हुए, जिसने उन्हें राजनीतिक और वैचारिक सीमाओं को पार करते हुए प्रशंसा दिलाई।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी को आधुनिक भारत को ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटल प्रतिबद्धता के साथ ढालने वाली एक ऊंचा व्यक्तित्व बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र की याद दिलाता है कि नेतृत्व केवल सत्ता के बारे में नहीं, बल्कि सेवा, जिम्मेदारी और लोगों के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में है।
उपराष्ट्रपति ने डेली कॉलेज परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का भी अनावरण किया। उपराष्ट्रपति ने अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा के उद्घाटन का हिस्सा बनने पर गौरवान्वित महसूस करने की बात कही। उन्हें लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए निस्वार्थ रूप से जीवन समर्पित करने वाली दूरदर्शी शासिका बताते हुए उन्होंने इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में लगातार शीर्ष स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी और इसे सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी का प्रतिबिंब बताया।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मांगूभाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, साथ ही अन्य गरिमामय व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने पूरे एक वर्ष के अनुभव को एक संक्षिप्त अपडेट में बताया। उन्होंने इस रविवार की सुबह एक्स पर लिखा: “2 लाख से अधिक स्थान, 20 लाख से अधिक लोग। एक मिशन – फिट इंडिया। #SundaysOnCycle के एक वर्ष पूरा होने का उत्सव मना रहे है।”
स्कूल के विद्यार्थियों, नमो साइकिलिंग क्लब, पुडुचेरी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा कई अन्य लोगों सहित जीवन के विभिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1500 से अधिक साइकिल चलाने वालों ने पुडुचेरी के खूबसूरत रॉक बीच को फिटनेस के एक जीवंत उत्सव में बदल दिया; जोकि इस आंदोलन के बढ़ते राष्ट्रीय महत्व और देश में साइकिल चालन के प्रति बढ़ते प्रेम को दर्शाता है।
पद्म भूषण से सम्मानित व खेल रत्न पुरस्कार विजेता पी. आर. श्रीजेश और शरथ कमल युवाओं के साथ साइकिल चलाकर प्रतिभागियों को खेल तथा फिटनेस को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
हर मामले में, पुडुचेरी में आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल की पहली वर्षगांठ का यह विशिष्ट संस्करण पूरी तरह से फिटनेस कार्निवल जोन बन गया क्योंकि जुम्बा, कैरम, शतरंज, मल्लखंब, सिलांबम, योग, रस्सी कूद जैसे कई मजेदार खेल एवं गतिविधियां भी आकर्षण का केन्द्र रहीं। संयोग से, 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस होने के कारण, सामूहिक रूप से यह संदेश भी दिया गया कि फिटनेस वास्तव में गति में ध्यान है!
आज पुडुचेरी में रविवार सुबह की सभा में उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन. रंगासामी, विधानसभा अध्यक्ष आर. सेल्वम और पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमस्सिवयम और अन्य प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी शामिल थे। साथ ही, माननीय केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी मौजूद थे – जिन्होंने एक वर्ष पहले नई दिल्ली में पहले आयोजन को हरी झंडी दिखाई थी।
सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. मांडविया ने बताया कि कैसे फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल एक छोटी सी शुरुआत से आगे बढ़कर एक देशव्यापी जन आंदोलन बन गया है।
उन्होंने कहा, “जब हमने एक वर्ष पहले यह पहल शुरू की थी, तो इसे मात्र पांच स्थानों पर लगभग 500 लोगों के साथ आयोजित किया गया था। आज, देश भर में 10,000 से अधिक स्थानों पर हर रविवार को इसमें हिस्सा लिया जाता है। इसमें 10 लाख से अधिक नागरिक नियमित रूप से जुड़ते हैं। यह एक जुनून, एक संस्कृति और प्रदूषण से निपटने का एक सशक्त समाधान बन गया है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस आंदोलन को मोटापे के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई बनाने में मदद की है।”
पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने इस पहल को समाज के लिए एक सही समय पर दिया गया संदेश बताया।
उन्होंने कहा, “गुजरात के भावनगर में स्थित डॉ. मांडविया के अपने गांव में मात्र 4000 लोग रहते हैं। और वहां हर कोई साइकिल से यात्रा करता है, कोई दूसरा दो-पहिया या चार-पहिया वाहन नहीं है। एक नागरिक के तौर पर, हम अक्सर यह महसूस नहीं कर पाते कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव मिलकर पर्यावरण, खासकर कार्बन के उत्सर्जन को कम करने के मामले में कितना बड़ा अंतर ला सकते हैं।”
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने आसान फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए फिट इंडिया आंदोलन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “स्वस्थ रहने के लिए साइकिल चलाना सबसे आसान और कारगर तरीकों में से एक है। जब हमारा शरीर फिट होगा, तभी हम ज़िंदगी में अपने लक्ष्य हासिल कर पाएंगे। मैं पूरे फिट इंडिया आंदोलन के पीछे प्रधानमंत्री के विजन की सही मायने में सराहना करता हूं।”
आज देश में 10000 से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित हुए इन गतिविधियों को भारतीय खेल प्राधिकरण और हजारीबाग, कारगिल, पटियाला, लखनऊ, गोलाघाट, छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव, हिसार, तिनसुकिया, विशाखापत्तनम, उत्तराखंड के काशीपुर, कटक तथा कई अन्य स्थानों पर स्थित खेलो इंडिया केन्द्रों ने देश भर के विभिन्न बैंकों, जो विशेष सहयोगी थे, के साथ मिलकर आयोजित किया।
इन आयोजनों में भाग लेने वाले प्रसिद्ध हस्तियों में साई सोनीपत के अर्जुन पुरस्कार विजेता तीरंदाज ज्योति सुरेखा और अभिषेक वर्मा भी शामिल थे। ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान का एक अहम हिस्सा रहने वाले नमो फिट इंडिया साइकिलिंग क्लब और माय भारत वॉलंटियर्स ने इस अभियान को काफी बढ़ावा दिया है।
पुडुचेरी में सुबह के कार्यक्रम में बहुप्रतीक्षित फिट इंडिया मोबाइल ऐप कार्बन क्रेडिट प्रोत्साहन का शुभारंभ भी किया गया, जिससे साइकिल चालन के प्रेमियों को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक कार्बन क्रेडिट हासिल करने वाले तीन साइकिल चालकों – भरतभाई परमार, शशिकांत वीरकर और गोविंद सिंह – को सम्मानित किया गया।
नागरिक साइकिल चलाकर कार्बन क्रेडिट कमा सकते हैं, जिन्हें बाद में भुनाया जा सकता है। डॉ. मांडविया ने आगे कहा, “अब से, हर महीने, हर राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेश के साइकिल चलाने वालों को फिट इंडिया मोबाइल ऐप के जरिए पहचाना जाएगा और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन लोगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह कदम नागरिकों को साइकिल चालन को रोजाना की आदत बनाने के लिए प्रोत्साहित करने और इनाम देने हेतु है।”
‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान में अहम रहने और इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाले फिट इंडिया एंबेसडरों और इन्फ्लुएंसरो को भी सम्मानित किया गया। इनमें निधि निगम, ऐश्वर्या राज (चैंपियन) और एंबेसडर डॉ. शिखा गुप्ता, युक्ति आर्य, पर्वतारोही दिव्या अरुल, तमिलनाडु में साइकिल चालन की राज्य चैंपियन शिवा सेंथिल के नाम शामिल हैं।
साइकिल चालन आंदोलन की पूरी यात्रा को भारतीय हॉकी के ‘वॉल’ पी.आर. श्रीजेश ने बहुत अच्छे से बताया।
पद्म भूषण से सम्मानित इस खिलाड़ी ने कहा, “फिट रहने का मतलब सिर्फ पदक के लिए ट्रेनिंग करना नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में अनुशासन और संतुलन बनाना है। साइकिल चलाना एक आसान आदत है, लेकिन जब इसे सब मिलकर अपनाते हैं, तो इससे एक स्वस्थ समाज और एक मजबूत देश बनता है। मुझे खुशी है कि केन्द्रीय खेल मंत्री की फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल पहल ने फिटनेस को एक ऐसे जन आंदोलन में बदल दिया है, जिसमें परिवार, युवा और पेशेवर लोग समान उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं।”
जैसे ही पुडुचेरी में खूबसूरत समुद्र तट के किनारे साइकिल चालकों को हरी झंडी दिखाई गई, वर्षगांठ वाले इस संस्करण ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ‘संडे ऑन साइकिल’ महज एक आयोजन से बदलकर एक ऐसी देशव्यापी संस्कृति बन गया है, जो देश भर में फिटनेस, स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है।
नई दिल्ली, 21 दिसंबर: आज भारत मंडपम में आयोजित इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) एक्सपो के अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से लेकर रोजगार सृजन तक, इलेक्ट्रिक वाहन भारत की अगली विकास गाथा को गति दे रहे हैं।
मंत्री ने प्रदर्शकों से बातचीत की और घरेलू कंपनियों द्वारा प्रदर्शित इलेक्ट्रिक परिवहन समाधानों और मेक इन इंडिया ईवी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला का अवलोकन किया।
अपने दौरे के दौरान, मंत्री ने प्रदर्शनी में कई स्टालों का दौरा किया और इलेक्ट्रिक वाहनों, पुर्जों और स्वच्छ गतिशीलता प्रौद्योगिकियों में भारतीय निर्माताओं द्वारा की जा रही तीव्र प्रगति को सराहा। उन्होंने स्वदेशी ईवी कंपनियों के बढ़ते आत्मविश्वास और क्षमता की प्रशंसा करते हुए इस क्षेत्र को भारत के स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर संक्रमण का एक प्रमुख स्तंभ बताया।
मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही पर्यावरण संरक्षण और ई-मोबिलिटी के बारे में व्यापक जन जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया है, साथ ही वैश्विक स्तर पर उपलब्ध नए तकनीकी विकल्पों की भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल इन वैश्विक नवाचारों से लाभान्वित हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन की दिशा में इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक सक्रिय भागीदार के रूप में भी उभर रहा है।
मंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा तंत्र में सुधारों और हालिया नीतिगत पहलों के बीच समानता बताते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शांति विधेयक, 2025 का पारित होना स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी स्वच्छ ऊर्जा की ओर वैश्विक बदलाव के अनुरूप है और साथ ही भारत के विकासात्मक और पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रकृति के बारे में बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईवी पारंपरिक वाहनों की तुलना में ड्राइविंग में काफी आसानी प्रदान करते हैं, जिनमें शारीरिक श्रम कम होता है और संचालन सरल होता है। उन्होंने ईवी की बहुपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि एम्बुलेंस, ई-रिक्शा, यात्री वाहन और वाणिज्यिक उपयोगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इनका उपयोग बढ़ रहा है। इस प्रकार ये विविध परिवहन आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त हैं।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी न केवल परिवहन, पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि विशेष रूप से युवाओं के लिए उद्यमिता, रोजगार और आजीविका का एक शक्तिशाली इंजन बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में निर्मित तंत्र ने युवा उद्यमियों को सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहायता प्राप्त करते हुए मामूली निवेश के साथ इलेक्ट्रिक वाहन से संबंधित उद्यम शुरू करने और उन्हें कम समय में उच्च कारोबार वाले उद्यमों में बदलने में सक्षम बनाया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अवसरों के बारे में युवाओं के बीच जागरूकता और व्यापक पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नवाचार-आधारित विकास, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का एक आशाजनक मार्ग है।
भारत मंडपम में आयोजित हो रहे ईवी एक्सपो में अग्रणी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी प्रदाता और नीतिगत हितधारक एक मंच पर एकत्रित हुए हैं ताकि नवाचारों का प्रदर्शन किया जा सके, विचारों का आदान-प्रदान किया जा सके और मेक इन इंडिया और विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप स्वच्छ और स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में भारत की प्रगति को गति दी जा सके।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28वीं बैठक और परियोजना हाथी की 22वीं संचालन समिति की बैठक 21 दिसंबर 2025 को पश्चिम बंगाल के सुंदरबन बाघ अभ्यारण्य में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इन बैठकों में बाघ और हाथी बहुल राज्यों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों और क्षेत्र विशेषज्ञों के साथ-साथ प्रमुख संरक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने परियोजना बाघ और परियोजना हाथी की प्रगति की समीक्षा करने और भारत में बाघों और हाथियों के संरक्षण के लिए भावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए भाग लिया।
एनटीसीए की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, श्री यादव ने भारत के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त बाघ संरक्षण मॉडल पर जोर दिया और विज्ञान-आधारित प्रबंधन, भू-भाग स्तर की योजना, सामुदायिक भागीदारी, अंतर-राज्यीय समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व का उल्लेख किया।
18 अप्रैल 2025 को आयोजित 27वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई और उसमें लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा की गई। चार क्षेत्रीय बैठकों के परिणामों पर चर्चा की गई जिसमें बाघ अभ्यारण्यों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। मानव-बाघ संघर्ष से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई जिसमें एक त्रिपक्षीय रणनीति और ‘बाघ अभ्यारण्यों के बाहर बाघों का प्रबंधन’ परियोजना का शुभारंभ शामिल है। कर्मचारियों की कमी, वित्तीय बाधाओं, पर्यावास क्षरण और आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की गई और राज्यों तथा संबंधित अधिकारियों को उचित अनुवर्ती कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए गए।
इस बैठक में एनटीसीए की तकनीकी समिति की बैठकों के निर्णयों की पुष्टि की गई जिनमें बाघ संरक्षण योजनाओं की स्वीकृति; चीता परियोजना का विस्तार और विकास; बाघों का स्थानांतरण; शिकार संवर्धन; भूदृश्य प्रबंधन योजना; मांसाहारी जानवरों के स्वास्थ्य प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम; और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति को परियोजना प्रस्तावों पर एनटीसीए द्वारा दिए गए सुझाव शामिल हैं।
7वें राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन पर अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई जिसमें गुजरात के गांधीसागर वन्यजीव अभ्यारण्य और बन्नी घास के मैदान में चीता परियोजना का विस्तार और कैम्पा के तहत समर्थित पहलों की प्रगति शामिल है। प्रस्तावित ग्लोबल बिग कैट समिट के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
मंत्री ने अखिल भारतीय बाघ गणना के छठे चक्र में हुई प्रगति, विभिन्न क्षेत्रों में भू-स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों, नवंबर 2025 से जमीनी सर्वेक्षणों की शुरुआत और प्रोजेक्ट चीता के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग सहित एनटीसीए की प्रमुख चल रही गतिविधियों की समीक्षा की। इन गतिविधियों में दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना के प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं भी शामिल थीं। बैठक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी ध्यान दिया गया और बाघ संरक्षण एवं प्रबंधन पर इसके प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रोजेक्ट एलिफेंट की संचालन समिति की बैठक 21 वीं संचालन समिति की बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट की पुष्टि के साथ शुरू हुई जिसके बाद संचालन समिति के सदस्यों और स्थायी आमंत्रितों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी भारत में हाथी संरक्षण के लिए क्षेत्रीय कार्य योजनाओं की स्थिति पर प्रस्तुतियाँ दी गई जिसमें हाथी के आवास वाले राज्यों द्वारा हासिल की गई प्रगति पर प्रकाश डाला गया और अंतर-राज्यीय समन्वय के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।
संचालन समिति ने अखिल भारतीय समन्वित हाथी गणना पर अद्यतन जानकारी की समीक्षा की जो प्रमाण-आधारित योजना और निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। नीलगिरी हाथी अभ्यारण्य के लिए आदर्श हाथी संरक्षण योजना के तहत हुई प्रगति और बंदी हाथियों के डीएनए प्रोफाइलिंग पर चल रहे कार्यों पर भी चर्चा की गई जिसमें वैज्ञानिक प्रबंधन और कल्याण मानकों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
देश भर में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। समिति ने संघर्ष के कारणों और निवारण उपायों पर चल रहे अध्ययनों के निष्कर्षों के साथ-साथ हाथियों के क्षेत्र वाले राज्यों द्वारा अपनाए गए मुआवज़ा व्यवस्था की स्थिति और पर्याप्तता पर चर्चा की।
बैठक में हाथियों की गणना का आकलन करने की विधियों के मूल्यांकन, रिपु-चिरंग हाथी अभ्यारण्य के लिए एकीकृत संरक्षण और प्रबंधन रणनीतियों की प्रगति और भावी कार्य योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें कैम्पा द्वारा वित्त पोषित सभी हाथी अभ्यारण्यों के लिए प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन का संचालन और बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथी गलियारों, पर्यावास उपयोग और संघर्ष के प्रमुख क्षेत्रों पर प्रस्तावित अध्ययन शामिल हैं।
संचालन समिति ने हाथियों और हाथियों के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने हेतु विज्ञान-आधारित संरक्षण, अंतर-राज्यीय समन्वय, तकनीकी नवाचार और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोणों के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर श्री यादव ने छह प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें शामिल हैं: भारत में परियोजना चीता, जिसमें वैज्ञानिक प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से परियोजना चीता के तहत हासिल की गई प्रगति पर प्रकाश डाला गया है; एनटीसीए की प्रचार पत्रिका स्ट्राइप्स का नवीनतम अंक, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी, बाघों के फैलाव और अखिल भारतीय बाघ गणना (एआईटीई) के छठे चक्र के प्रारंभ पर केंद्रित है; भारत के बाघ संरक्षण ढांचे और संस्थागत उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एनटीसीए की एक पुस्तिका; टाइगरवर्स – भारत के बाघ अभ्यारण्यों के कुछ अनसुने तथ्य, जो देश भर के बाघ अभ्यारण्यों से जैव विविधता, संस्कृति और संरक्षण की कहानियों को प्रदर्शित करता है; हाथी संचालकों के लिए बंदी हाथी प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाएं और ट्रम्पेट त्रैमासिक पत्रिका का दिसंबर 2025 अंक।
नई दिल्ली – भारत और नीदरलैंड ने समुद्री विरासत के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और डच विदेश मंत्री डेविड वैन वील के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान समझौते ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता ज्ञापन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत विकसित किए जा रहे एनएमएचसी और एम्स्टर्डम स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय को साथ लाता है।
समझौते के तहत, दोनों पक्ष समुद्री संग्रहालयों के डिजाइन, क्यूरेशन और संरक्षण में ज्ञान, विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर सहयोग करेंगे। यह साझेदारी संयुक्त प्रदर्शनियों, अनुसंधान परियोजनाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी सुगम बनाएगी साथ ही आगंतुकों के अनुभव, शिक्षा और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए नए पहलुओं का पता लगाएगी।
लोथल स्थित एनएमएचसी की भारत की 4,500 साल पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने वाले विश्व स्तरीय धरोहर परिसर के रूप में परिकल्पना की गई है। एम्स्टर्डम स्थित संग्रहालय के साथ सहयोग से इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूती मिलने, समावेशी शिक्षा और पर्यटन को बढ़ावा मिलने और विद्यार्थियों, स्थानीय समुदायों और वंचित समूहों के लिए किफायती पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) और एम्स्टर्डम स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय के बीच हस्ताक्षर किया गया समझौता ज्ञापन भारत की 4,500 साल पुरानी समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह साझेदारी संरक्षण, क्यूरेशन और संग्रहालय डिजाइन में विश्व स्तरीय विशेषज्ञता लाएगी साथ ही भारत और नीदरलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी। यह साझेदारी समावेशी शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ावा देने के लिए विरासत को नवाचार से जोड़ने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है।”
यह समझौता ज्ञापन समुद्री विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है साथ ही दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है। मंत्रालय समझौते के प्रावधानों को लागू करने के लिए घनिष्ठ सहयोग की आशा करता है।
भारत और नीदरलैंड के लंबे समुद्री इतिहास को याद करते हुए, दोनों मंत्रियों ने साझेदारी का स्वागत किया और समुद्री और नौपरिवहन क्षेत्रों में चल रहे सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा की जिसमें हरित नौपरिवहन पहल, बंदरगाह विकास और जहाज निर्माण शामिल हैं।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन की भव्य झलकियाँ साझा कीं। यह नया टर्मिनल असम की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने, आर्थिक विकास को गति देने और वैश्विक स्तर पर राज्य की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:
“गुवाहाटी में आज एयरपोर्ट की जिस टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ है, उसमें कदम रखते ही ये पता चल जाता है कि ‘विकास भी और विरासत भी’ का मंत्र कितना महत्वपूर्ण है।”
“आज असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट भारत के विकास और पर्यटन का नया प्रवेशद्वार बन रहा है। वाराणसी से डिब्रूगढ़ के गंगा विलास क्रूज से नॉर्थ ईस्ट, ग्लोबल क्रूज टूरिज्म के मानचित्र पर स्थापित हो गया है।”
“कांग्रेस की सरकारों ने असम और पूर्वोत्तर को विकास से दूर रखने का जो पाप किया था, उसका बहुत बड़ा खामियाजा देश की सुरक्षा को उठाना पड़ा। बीते 10-11 वर्षों में हमारे प्रयासों से यह सुनिश्चित हो रहा है कि असम के संसाधन असम के लोगों के ही काम आएं।”
“गुवाहाटी हवाई अड्डे पर लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा का अनावरण किया। उनका जीवन और आदर्श, साथ ही असम की प्रगति में उनका योगदान, आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”
“गुवाहाटी के लिए यह एक विशेष दिन है, क्योंकि लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को आज नया टर्मिनल भवन मिला है। यह नया टर्मिनल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा और पर्यटन को बढ़ावा देगा। इस भवन में तकनीकी नवाचारों पर जोर देने के साथ प्रकृति और सस्टेनेबिलिटी के साथ जो तालमेल दिखाया गया है, वह भी अत्यंत सराहनीय है।”
“इस शानदार स्वागत के लिए गुवाहाटी का हृदय से आभार। इस जीवंत शहर में आना हमेशा एक सुखद अनुभव होता है।”
“আজি গুৱাহাটীত উদ্বোধন হোৱা বিমানবন্দৰৰ টাৰ্মিনেল ভৱনত ভৰি দিয়াৰ লগে লগে উপলব্ধি হয় যে ‘উন্নয়নৰ লগতে ঐতিহ্য’ৰ মন্ত্ৰটো কিমান গুৰুত্বপূৰ্ণ।”
“আজি অসমকে ধৰি সমগ্ৰ উত্তৰ-পূব ভাৰতৰ উন্নয়ন আৰু পৰ্যটনৰ এক নতুন প্ৰবেশদ্বাৰ হৈ পৰিছে। বাৰাণসীৰ পৰা ডিব্ৰুগড়লৈ গংগা বিলাস ক্ৰুজে বিশ্ব ক্ৰুজ পৰ্যটন মানচিত্ৰত উত্তৰ-পূবক প্ৰতিষ্ঠা কৰিছে।”
“গুৱাহাটীৰ বাবে আজি এক বিশেষ দিন কাৰণ লোকপ্ৰিয় গোপীনাথ বৰদলৈ আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰে নতুন টাৰ্মিনেল লাভ কৰিলে। এই নতুন টাৰ্মিনেলটোৱে স্থানীয় অৰ্থনীতিক উন্নীত কৰাৰ লগতে পৰ্যটনক উৎসাহিত কৰিব। প্ৰযুক্তিগত উদ্ভাৱনৰ ওপৰত গুৰুত্ব দিয়াৰ লগতে প্ৰকৃতি আৰু বহনক্ষমতাৰ সৈতে সংযোগ স্থাপন কৰাটোও গভীৰভাৱে প্ৰশংসনীয়।”
“এই ব্যতিক্ৰমী আদৰণিৰ বাবে গুৱাহাটীক ধন্যবাদ। এই স্পন্দনশীল চহৰখনত উপস্থিত হৈ সদায় আনন্দিত হওঁ ৷”
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्लू) सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असम और पूर्वोत्तर के परिवर्तन के पथ–प्रदर्शक और वास्तुकार हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सहभागिता की। श्री मोदी ने हवाई अड्डे पर भारत रत्न लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की मूर्ति का भी अनावरण किया।
प्रधानमंत्री की असम यात्रा को याद करते हुए, सोनोवाल ने कहा कि 2014 से, मोदी के सक्षम नेतृत्व में असम और पूरे पूर्वोत्तर का विकास–परिदृश्य तेजी से बदल गया है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा क्षेत्र, जो कांग्रेस सरकारों के दौरान पहले उपेक्षित था, अब भारत की आर्थिक वृद्धि की प्रमुख ताकतों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर, राष्ट्र की “अष्टलक्ष्मी” और नये भारत के नये इंजन के रूप में उभरा है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “नई टर्मिनल का उद्घाटन असम में अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क के एक नए अध्याय की शुरुआत को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में, इस टर्मिनल के निर्माण का निर्णय 2018 में पहले एडवांटेज असम सम्मेलन के दौरान हुए समझौता ज्ञापन के माध्यम से लिया गया था और उसी वर्ष इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी।”
मोदी के “परिवहन के माध्यम से परिवर्तन” पर जोर का उल्लेख करते हुए, सोनोवाल ने कहा कि आज जिस नई टर्मिनल भवन का उद्घाटन हुआ है, वह समृद्धि और प्रगति की दिशा में असम की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक राज्य का प्रमुख हवाई अड्डा सीमित क्षमता के साथ संचालित होता रहा। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया के लिए प्रवेश द्वार के रूप में गुवाहाटी की बढ़ती भूमिका ने इस विस्तार को हवाई संपर्क और गतिशीलता मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बना दिया है।
नई सुविधा 1.40 लाख वर्ग मीटर में फैली हुई है और पिछली टर्मिनल से लगभग सात गुना बड़ी है, जो हवाई अड्डे की यात्री संभालने की वार्षिक क्षमता को 34 लाख से बढ़ाकर 1.3 करोड़ से अधिक कर देगी। सोनोवाल ने कहा कि लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह टर्मिनल गुवाहाटी को विश्व स्तरीय विमानन सेवाओं से जोड़ता है।
मंत्री ने गुवाहाटी के हवाई अड्डे पर भारत रत्न लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई की मूर्ति के अनावरण का भी स्वागत किया। बोरदोलोई का विज़न, साहस और निर्णायक नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में असम की पहचान और अस्तित्व को सुरक्षित रखा तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “एक महान नेता, जिन्होंने असम के भविष्य को सुरक्षित किया, अब भारत के दक्षिण–पूर्व एशिया के प्रवेश–द्वार पर एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने आगे कहा कि बोरदोलोई की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विकास के लिए उत्कृष्ट सेवा, आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत और विकसित भारत बनाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वस्त्र अनुसंधान संघों (टीआरए) की समन्वय समिति की पहली बैठक बुलाई। यह बैठक केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में और सचिव (वस्त्र) श्रीमती नीलम शमी राव की अध्यक्षता में हुई। यह देश में वस्त्र अनुसंधान और विकास गतिविधियों के समन्वय, प्रभावशीलता और परिणामोन्मुखीकरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, वस्त्र अनुसंधान संघ, ईपीसी, आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने भाग लिया। यह पूरे दिन चली गहन विचार-मंथन बैठक थी।
समिति ने फाइबर विज्ञान, तकनीकी वस्त्र, स्थिरता और नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाने में वस्त्र अनुसंधान संघ (टीआरए)) की रणनीतिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया। “उद्योग के लिए अनुसंधान” दृष्टिकोण पर जोर दिया गया, जिसमें विशेष रूप से स्थिरता और रीसाइक्लिंग के क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों को मजबूत करने पर केंद्रित चर्चा हुई। चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों तक अपग्रेड करना, उद्योग-संचालित और अनुप्रयोगउन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देना, टिकाऊ और चक्रीय वस्त्र समाधानों का विकास, और समन्वित राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान ढांचे का निर्माण शामिल था।
मंत्रालय ने स्मार्ट टेक्सटाइल के बढ़ते महत्व की जानकारी दी सीएसआईआर के अंतर्गत योजनाओं सहित अन्य सरकारी अनुसंधान एवं विकास पहलों के साथ तालमेल के माध्यम से अनुसंधान को बढ़ाने और प्रभावी ज्ञान प्रसार के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग पर बल दिया गया। भविष्य की जानकारी देने वाली मॉडलिंग, पर्यावरण-कुशल सामग्री मिश्रण, इलेक्ट्रॉनिक फाइबर, और स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और इंटेलीजेंट वातावरण के लिए उन्नत ई-टेक्सटाइल सिस्टम जैसे उभरते अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम), पी एम मित्र पार्क्स, और अलग-अलग निर्यात संवर्धन और समर्थन योजनाओं जैसी प्रमुख सरकारी पहल नवाचार को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने और भारत को वस्त्र क्षेत्र में ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित करने के लिए मुख्य साधन हैं।
वस्त्र अनुसंधान संघों के बीच समन्वय को मजबूत करने और भारतीय वस्त्र उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि और वैश्विक स्थिति को समर्थन करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और सहयोग का लाभ उठाने के साझा संकल्प के साथ बैठक संपन्न हुई।
नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने, केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा के साथ, आज कर्नाटक के विजयनगर जिले के हम्पी में वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की।
वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के सभी सचिव, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीडीटी) चेयरमैन, और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी मौजूद थे, साथ ही वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
“एआई, ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और विकसित भारत के लिए फाइनेंसिंग” के कार्यक्रम में, चर्चा इस विषय पर केंद्रित थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड सिस्टम और प्रक्रिया सुधार का इस्तेमाल करके ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत क्षमता और पॉलिसी बनाने को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
चर्चा में प्रक्रियाओं को आसान बनाने, नियामक पूर्वानुमेयता, विभागों के बीच तालमेल से काम करना, कुशल फंड फ्लो, भविष्य के लिए तैयार कर प्रशासन, लगातार प्रगति के लिए फाइनेंसिंग के तरीके, और पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करना शामिल था।
अपने संबोधन में, वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने विजयनगर क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर बात की, और कहा कि यह लगभग 500 वर्ष पहले अपने चरम पर रहे एक भारतीय साम्राज्य के सबसे करीबी उदाहरणों में से एक है, जिसके निशान पूरे उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों में दिखाई देते हैं।
उन्होंने उसी ज़िले के अंदर मौजूद विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया — जहां शानदार स्मारक सूखे की चपेट में आने वाले इलाकों के साथ मौजूद हैं, जहाँ खेती की पैदावार कम है और इंसान-जानवर संघर्ष होता है — जो आज की डेवलपमेंट की असलियतों से जुड़े रहने की जरूरत को दिखाता है।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज हैदराबाद में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया और भारत की शासन प्रणाली की गुणवत्ता, ईमानदारी और प्रभावशीलता को आकार देने में लोक सेवा आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया ।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह भारत विकसित भारत@2047 के विज़न की ओर बढ़ रहा है,ऐसे में शासन की गुणवत्ता, और उससे भी कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण संस्थानों को चलाने वाले लोगों की गुणवत्ता निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने लोक सेवा आयोगों को संवैधानिक संस्थाएँ करार दिया, जिन्हें देश की सेवा करने के लिए योग्य, निष्पक्ष और नैतिक लोगों को चुनने की अहम ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में प्रतिष्ठापित लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता, सरकारी भर्ती में योग्यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। उन्होंने कहा कि दशकों से, केंद्र और राज्य स्तर पर आयोगों ने प्रशासनिक निरंतरता, संस्थागत स्थिरता और लोक सेवकों का तटस्थ चयन सुनिश्चित करते हुए जनता के भरोसे को मज़बूत किया है।
लोक सेवाओं के संबंध में बदलती मांगों पर ज़ोर देते हुए उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि डिजिटल शासन, सामाजिक समावेशन, अवसंरचना विकास, जलवायु कार्रवाई और आर्थिक परिवर्तन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को कुशलतापूर्वक कार्यान्वित करना आज चुने गए प्रशासनिकों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
नैतिक मानकों के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि निष्पक्षता सरकारी भर्ती का नैतिक आधार है और भेदभाव खत्म करने के लिए पारदर्शिता ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि छोटी-मोटी गड़बड़ियाँ भी संस्थानों की विश्वसनीयता कम कर सकती हैं, और उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी को कतई बर्दाश्त न करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आज प्रभावशाली शासन के लिए शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ मज़बूत नैतिक फ़ैसले, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता और टीमवर्क वाले लोक सेवकों की ज़रूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोक सेवा आयोग ज्ञान पर आधारित परीक्षाओं के साथ-साथ व्यवहार और नैतिक योग्यता के निष्पक्ष और सुनियोजित आकलन की संभावनाओं के बारे में विचार कर सकते हैं।
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि केवल भर्ती आजीवन बेहतरीन कार्य किया जाना सुनिश्चित नहीं कर सकती, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संस्थागत ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रदर्शन का आकलन, सतर्कता एवं निगरानी और समय-समय पर समीक्षा करने के तरीकों को बिना किसी भेदभाव के तथा पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चरित्र और नैतिक व्यवहार राष्ट्र निर्माण और जनता के भरोसे की बुनियाद हैं।
भारत के जनसांख्यिकीय लाभाँश का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोक सेवा आयोगों को प्रतिभा मानचित्रण और रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिभा सेतु जैसी पहल सहित नवोन्मेषी तरीके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि सही प्रतिभा को सही भूमिका मिल सके।
अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि लोक सेवा आयोग सुशासन की नींव मज़बूत करते रहेंगे तथा विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 दिसंबर, 2025) हैदराबाद में ब्रह्मा कुमारीज शांति सरोवर द्वारा अपनी 21वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘भारत का शाश्वत ज्ञान: शांति और प्रगति के मार्ग’ विषय पर सम्मेलन को संबोधित किया।
इस अवसर पर श्रीमती मुर्मु ने कहा कि वैश्विक समुदाय अनेक परिवर्तनों से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों के साथ-साथ हमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, सामाजिक संघर्ष, पारिस्थितिक असंतुलन और मानवीय मूल्यों का क्षरण जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए सम्मेलन का विषय अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि केवल भौतिक विकास से ही सुख और शांति नहीं मिलती। आंतरिक स्थिरता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा ने हमें सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का संदेश दिया है। हमारी आध्यात्मिक विरासत विश्व की मानसिक, नैतिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम हमारी सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति है। वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा—संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने का विचार—आज वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि आध्यात्मिकता सामाजिक एकता और राष्ट्रीय प्रगति की मजबूत नींव है। जब व्यक्ति में मानसिक स्थिरता, नैतिक मूल्य और आत्म-नियंत्रण विकसित होता है, तो उसका व्यवहार समाज में अनुशासन, सहिष्णुता और सहयोग को बढ़ावा देता है। आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित लोग अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय योगदान देते हैं।
राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि ब्रह्मा कुमारीज संगठन दशकों से विभिन्न देशों में सार्वभौमिक भारतीय मूल्यों का प्रसार कर रहा है। यह संगठन लोगों में शांति और सकारात्मकता को बढ़ावा देकर समाज के नैतिक और भावनात्मक ताने-बाने को मजबूत कर रहा है। इस प्रकार, संगठन यह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को अल्पसंख्यक दिवस मनाया। इस अवसर पर छह अल्पसंख्यक समुदायों – मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी (ज़ोरोस्ट्रियन) के समुदायिक नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
माउंट कार्मेल स्कूल के अतिथि वक्ता डॉ. माइकल वी. विलियम्स ने सभा को याद दिलाया कि अल्पसंख्यक दिवस क्यों महत्वपूर्ण है, और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में ईसाई समुदाय के लंबे और मौन योगदान को रेखांकित किया – ये ऐसी संस्थाएं हैं जो सांप्रदायिक सीमाओं से कहीं आगे बढ़कर सेवा करती हैं।
जामिया हमदर्द के मोहम्मद तौहीद आलम ने ‘सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास’ के व्यापक ढांचे के भीतर अल्पसंख्यक कल्याण पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि आज के शासन का मूल आधार समावेश है। खालसा कॉलेज के प्रोफेसर हरबंस सिंह ने गुरुबानी से प्रेरणा लेते हुए समझाया कि सहअस्तित्व और सामूहिक समृद्धि केवल नारे नहीं बल्कि जीवंत परंपराएं हैं।
आचार्य येशी फुंटसोक और डॉ. इंदु जैन ने बौद्ध और जैन समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से उचित समाधान की मांग की। अनुभवी पारसी नेता श्री मराज़बान नरीमन ज़ैवाला ने अल्पसंख्यक-केंद्रित कार्यक्रमों और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की भूमिका का विस्तार से वर्णन करते हुए अपने संबोधन का समापन किया। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग भारत के विभिन्न समुदायों को एक साझा नागरिक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अल्पसंख्यक समुदाय के लिए खुला सत्र
अल्पसंख्यक समुदायों के काफी संख्या में प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। खुले सत्र के दौरान, अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन तक के मुद्दों पर कई प्रश्न उठाए गए। इस संवाद में सशक्त भागीदारी और संवाद के माध्यम से चिंताओं के समाधान के प्रति साझा प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
एक समावेशी समाज का निर्माण
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) की सचिव सुश्री अलका उपाध्याय ने अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान के उद्देश्य से चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों ने राष्ट्र के समृद्ध सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने में अमूल्य योगदान दिया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक समावेशी और न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिए अथक प्रयास कर रहा है।
उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों के बारे में बात की, जिनमें शिक्षा, कौशल विकास, वित्तीय सहायता और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी पीछे न छूटे और सभी समुदायों को, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, प्रगति और समृद्धि के समान अवसर प्राप्त हो। उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच निरंतर संवाद के महत्व को भी रेखांकित किया।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव सुश्री उपाध्याय ने कहा कि अपनी स्थापना से ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण, कल्याण और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकारों, हितधारकों और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ निरंतर संपर्क के माध्यम से अल्पसंख्यकों की आवाज़ सुनी जाती है, उनकी समस्याओं का समाधान किया जाता है और उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया जाता है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन समारोह की कुछ झलकियाँ साझा की हैं।
श्री मोदी ने एक्स पर एक अलग पोस्ट में कहा;
“पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा में, हमारा ध्यान वर्तमान आवश्यकताओं से परे होना चाहिए। भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति भी हमारी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।”
“भारत कई स्तरों पर निरंतर प्रयासों के माध्यम से यह प्रदर्शित कर रहा है कि गंभीर परिस्थितियों में भी, पारंपरिक चिकित्सा एक प्रभावी और सार्थक भूमिका निभा सकती है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन में आयोजित प्रदर्शनी में दुनिया भर से हर्बल उपचार और प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया जो आधुनिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उनकी बढ़ती प्रासंगिकता और क्षमता को दर्शाता है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन में अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया।
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आज विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के साथ एक सार्थक चर्चा हुई। हमने समग्र स्वास्थ्य, निवारक देखभाल और कल्याण को बढ़ावा देने में पारंपरिक चिकित्सा की अपार संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, पारंपरिक चिकित्सा में प्रमाण-आधारित पद्धतियों और वैश्विक सहयोग के महत्व पर भी बल दिया।
नई दिल्ली – भारत के कृषि निर्यात को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, कर्नाटक के विजयपुरा जिले से जीआई-टैग प्राप्त ‘इंडी लाइम’ की 3 मीट्रिक टन (एमटी) मात्रा 19 दिसंबर 2025 को ओमान को निर्यात की गई। इसके साथ ही इस विशिष्ट खट्टे फल ने एक और वैश्विक बाजार में प्रवेश कर लिया।
ओमान को यह खेप भेजे जाने से पहले, 24 अगस्त 2025 को जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम की 3-मीट्रिक टन(एमटी) की पहली निर्यात खेप दुबई भेजी गई थी। यूएई के बाजार में इस उत्पाद को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जिसके परिणामस्वरूप दुबई को लगभग 12-एमटी का निर्यात किया गया, जो शुरुआती मात्रा से चार गुना अधिक है।
बाजार विविधीकरण के प्रयासों के तहत, जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम की 350-किलोग्राम मात्रा को यूनाइटेड किंगडम भेजने के लिए भी एक और खेप को रवाना किया गया। अब तक विजयपुरा जिले से कुल मिलाकर लगभग 12.35-एमटी इंडी लाइम का निर्यात किया जा चुका है।
भारत–ओमान के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA)/मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को देखते हुए ओमान को इंडी लाइम का यह निर्यात और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना और भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच का विस्तार करना है।
इससे कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, पशु उत्पादों सहित कई प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे ओमानी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम की सफल खेप सुदृढ़ व्यापार ढांचे के अंतर्गत भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बढ़ते अवसरों को दर्शाती है।
अपनी विशिष्ट सुगंध, अधिक रस की मात्रा और लंबा शेल्फ लाइफ के लिए प्रसिद्ध इंडी लाइम की जीआई स्थिति ने इसे वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी रूप से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) जीआई-टैग प्राप्त कृषि उत्पादों के प्रचार, ब्रांडिंग और निर्यात को सक्रिय रूप से समर्थन दे रहा है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना और वैश्विक गुणवत्ता एवं पादप-स्वास्थ्य (फाइटोसैनिटरी) मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।
विजयपुरा से जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम के निर्यात से इस जीआई उत्पाद से जुड़े किसानों को प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिली है, जिससे उनकी आय में सुधार हुआ है और घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भरता कम हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जीआई-टैग प्राप्त इंडी लाइम की लगातार सफलता उच्च गुणवत्ता वाले, क्षेत्र-विशिष्ट कृषि उत्पादों के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की क्षमता को सुदृढ़ करती है, इससे किसानों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं और यह देश के कृषि-निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करती है।
नई दिल्ली – दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय ने, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से आज नई दिल्ली में “एडवांसिंग सर्कुलर इकॉलॉमी इन द टेलीकॉम सेक्टर: इनेबलिंग पॉलिसी एंड प्रैक्टिस’’ शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में नीति निर्माता, उद्योग नेता, प्रौद्योगिकी प्रदाता, शिक्षाविद, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और मूल्य श्रृंखला के हितधारक शामिल हुए, जिससे भारत के दूरसंचार क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था पद्धतियों को तेज़ी से अपनाने पर विचार-विमर्श किया जा सके।
इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोणों को एक साथ लेकर आना और दूरसंचार मूल्य श्रृंखला में परिपत्रता को समाहित करने के लिए क्रियान्वयन योग्य मार्ग की पहचान करना था, जिसमें टिकाऊ उत्पाद डिजाइन, संसाधनों का कुशल उपयोग, जीवनचक्र प्रबंधन, डिजिटल उपकरण और वित्तपोषण तंत्र शामिल हैं। चर्चाएँ नीति ढांचे, उद्योग पद्धतियों और प्रौद्योगिकी समाधानों को समन्वित करने पर केंद्रित थीं, जिससे क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित किया जा सके।
उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. शिल्पी कर्मकार, परियोजना प्रबंधक, यूएनडीपी ने किया, जिन्होंने इसके उद्देश्यों का अवलोकन प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण और संदर्भ प्रस्तुति डॉ. आशीष चतुर्वेदी, प्रमुख – एसीई, यूएनडीपी द्वारा दी गई। इसके बाद श्रीमती सुनीता वर्मा, वैज्ञानिक ‘जी’, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय; श्री कमेन्द्र कुमार, पूर्व निदेशक, टीसीआईएल और अध्यक्ष, तमिलनाडु दूरसंचार लिमिटेड; और डॉ. एंजेला लुसिगी, निवासी प्रतिनिधि, यूएनडीपी ने बहु-हितधारक सहयोग के महत्व को उजागर करते हुए विशेष भाषण दिया।
उद्घाटन भाषण देते हुए, श्री आर. एन. पालाई, सदस्य (प्रौद्योगिकी), डिजिटल कम्युनिकेशन्स कमीशन (डीसीसी) और भारत सरकार के कार्यकारी सचिव, दूरसंचार विभाग ने जोर दिया कि दूरसंचार में स्थिरता और परिपत्रता अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि, हालांकि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र का भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में दो प्रतिशत से भी कम का योगदान रहता है, लगभग 1.2 बिलियन उपयोगकर्ताओं तक इसकी पहुंच के चलते क्षेत्र पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार पद्धतियों को अपनाने में नेतृत्व करने की जिम्मेदारी है।
श्री पालाई ने कहा कि दूरसंचार आधुनिक अर्थव्यवस्था का अदृश्य आधारभूत ढांचा है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी तथा विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता सुधार करने वाला जलवायु कार्रवाई का मूक सक्षमकर्ता है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार नेटवर्क में अक्षय ऊर्जा की ओर बदलाव नया सामान्य बनता जा रहा है, लेकिन स्थिरता केवल ऊर्जा दक्षता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि और विस्तृत करके इसमें दूरसंचार उत्पादों तथा अवसंरचना के पूरे जीवनचक्र को शामिल किया जाना चाहिए। ई-कचरा प्रबंधन, राइट-टू-रिपेयर और टिकाऊ डिजाइन जैसे मुद्दों पर जोर देते हुए, उन्होंने भारत के व्यापक स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप पारंपरिक ‘उपयोग करो और फेंको’ मॉडल से पुनर्योजी तथा संसाधन-कुशल प्रणाली की ओर बदलाव का आह्वान किया।
डॉ. एंजेला लुसिगी ने अपने संबोधन में यूएनडीपी के भारत सरकार के साथ निकट सहयोग से काम करने का उल्लेख किया, जिसमें दूरसंचार क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को बढ़ावा देना भी शामिल है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था योजना तैयार करने में दूरसंचार विभाग का समर्थन करने में यूएनडीपी की भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. लुसिगी ने हितधारकों से आग्रह किया कि वे कार्यशाला का उपयोग दूरसंचार क्षेत्र के लिए ऐसा समयबद्ध रोडमैप विकसित करने के लिए करें, जिसे स्पष्ट नीति ढांचे, उद्योग प्रतिबद्धता, नवाचार और अवसंरचना में निवेश, मजबूत निगरानी तथा जवाबदेही तंत्र द्वारा समर्थित किया जाए।
कार्यशाला की एक मुख्य विशेषता श्री अरुण अग्रवाल, डीडीजी (सैटेलाइट), दूरसंचार विभाग द्वारा भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था कार्य योजना पर दी गई प्रस्तुति (प्रेज़ेंटेशन) थी। प्रस्तुति में नीतियों की दिशाओं और व्यावहारिक हस्तक्षेपों के सुझाव दिए गए, जिनमें टिकाऊ डिजाइन और निर्माण, दूरसंचार संपत्तियों का जीवनचक्र प्रबंधन, ई-कचरे में कमी, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को अपनाना और पारदर्शी तथा लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना शामिल था।
तकनीकी विचार-विमर्श में सत्र I में “रीथिंकिंग द टेलीकॉम सप्लाई चेन फॉर सर्कुलैरिटी एंड सस्टेनिबिलिटी” पर पैनल चर्चा शामिल थी, जिसका संचालन श्री अरुण अग्रवाल ने किया, पैनल में श्री सुरेंद्र कुमार गोथरवाल, वैज्ञानिक ‘ई’, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय; डॉ. अंजलि तनेजा, नियामक मामलों की प्रमुख, इंटर आईकिया (IKEA) ग्रुप; सुश्री जसरूप संधू, उपाध्यक्ष, वोडाफोन आइडिया; डॉ. रेव प्राकाश, सलाहकार, जीआईज़ेड; और डॉ. संदीप चटर्जी, वरिष्ठ सलाहकार, एसईआरआई इंडिया शामिल थे। पैनल ने परिपत्रता हासिल करने के लिए सरकारी पहल, परिपत्र दूरसंचार आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियाँ और उन्हें दूर करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप, मूल्य श्रृंखला के प्रमुख पहलू, दूरसंचार में परिपत्रता के लिए डिजाइन और घटक संग्रहण, टिकाऊ खरीदारी, उद्योग में मौजूदा परिपत्र पद्धतियों आदि पर चर्चा की।
इसके बाद सत्र II में “डिजिटल टूल्स फॉर ट्रांज़ीशन टुवर्डस सर्कुलर इकॉनॉमी” पर पैनल चर्चा हुई, जिसका संचालन डॉ. शिल्पी कर्मकार, यूएनडीपी ने किया। पैनल में श्री राकेश देसाई, डीडीजी, टीईसी, दूरसंचार विभाग; सुश्री दीप्ति कपिल, अतिरिक्त निदेशक, सीपीसीबी; डॉ. प्रियंका कौशल, प्रोफेसर, आईआईटी दिल्ली; श्री प्रांशु सिंघल और करो सम्भव (संगठन) शामिल थे। सत्र में चर्चा भारत में अधिक परिपत्र दूरसंचार क्षेत्र का समर्थन करने वाले डिजिटल उपकरणों, ईपीआर कार्यान्वयन में डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा टूल्स के उपयोग में सीपीसीबी के दृष्टिकोण, सामग्री पुनर्प्राप्ति और पारदर्शिता सुधारने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसबिलिटी, परिपत्रता सक्षम करने के लिए डेटा एनालिटिक्स, एआई और आईओटी (IoT) के एकीकरण आदि पर केंद्रित रही।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने जोर दिया कि भारत के दूरसंचार क्षेत्र को संवाद से क्रियान्वयन की ओर बढ़ना चाहिए। चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि परिपत्रता को समन्वित पारिस्थितिकी-स्तरीय कार्रवाई के माध्यम से अपनाया जाना चाहिए और इसे मापनीय तथा चिरस्थायी व्यापार मॉडल द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, इन चर्चाओं में समन्वित, पारिस्थितिकी-स्तरीय कार्रवाई की आवश्यकता; सक्षम ढांचा बनाना; बहु-हितधारक सहयोग प्लेटफॉर्म को मजबूत करना; पायलट-टु-स्केल मार्गों को प्राथमिकता देना; साझा स्वामित्व—जहाँ सरकार दिशा और सक्षम परिस्थितियाँ प्रदान करे, उद्योग नवाचार के विकास और उसके अंगीकरण को आगे बढ़ाए, और साझेदार क्रियान्वयन, क्षमता निर्माण और वित्तपोषण का समर्थन करें, इस बात पर जोर दिया गया।
कार्यशाला का समापन दूरसंचार विभाग, यूएनडीपी और हितधारकों द्वारा सहयोग को मजबूत करने और भारत में अधिक परिपत्र, चिरस्थायी और लचीले दूरसंचार क्षेत्र की ओर तेज़ी से रुख़ करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में नए उद्घाटन किए गए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ) भवन का दौरा किया और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों के मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया। सामूहिक कदम उठाने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि साझा सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए देशों के बीच मिलकर, तालमेल से और लगातार प्रयास करने की जरूरत है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ बिल्डिंग सिर्फ एक भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लोगों की साझा उम्मीदों और सामूहिक संकल्प का एक मजबूत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा सार्वजनिक स्वास्थ्य और भलाई को आगे बढ़ाने में साझेदारी और एकजुटता की भावना को दिखाती है, जो इस क्षेत्र में लगभग आधे अरब लोगों को सेवाएं देती है।
इस मौके पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ भवन को मानवता की सेवा के लिए साझा मकसद और सामूहिक प्रतिबद्धता का एक मजबूत प्रतीक बताया। उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय की मेजबानी करने के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दिल से आभार व्यक्त किया। डॉ. टेड्रोस ने कहा कि यह नई सुविधा क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने में विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार के बीच स्थायी और भरोसेमंद साझेदारी का सबूत है।
इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
नई दिल्ली – प्रथम परीक्षण पाठ्यक्रम (मानवरहित हवाई प्रणाली) [1 टीसी(यूएएस)] और 25वें उत्पादन परीक्षण पायलट (पीटीपी) पाठ्यक्रम का समापन समारोह 19 दिसंबर, 2025 को विमान एवं प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान (एएसटीई) स्थित वायु सेना परीक्षण पायलट स्कूल में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर एयर मार्शल के.ए.ए. संजीव, वीएसएम, महानिदेशक (विमान) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में भारतीय वायु सेना, डीआरडीओ, एचएएल, सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट्स (एसईटीपी) और सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स (एसएफटीई) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
समारोह के दौरान मेधावी छात्र अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए ट्राफियां प्रदान की गईं। पीटीपी और टीसी (यूएएस) पाठ्यक्रमों से स्नातक होने वाले अधिकारी उत्पादन विमानों की परीक्षण उड़ान गतिविधियों के साथ विकासाधीन स्वदेशी मानवरहित विमानों एवं प्रणालियों के परीक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इससे रक्षा विमानन क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ के प्रयासों को और अधिक गति मिलेगी।
विमान एवं प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान (एएसटीई) के तत्वावधान में स्थापित एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल (एएफटीपीएस) देश का एकमात्र संस्थान है, जो फिक्स्ड विंग, रोटरी विंग और मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए प्रायोगिक व उत्पादन उड़ान परीक्षण दलों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
एएफटीपीएस ने वर्षों के दौरान अत्यंत कुशल परीक्षण दल तैयार किए हैं, जिन्होंने न केवल भारत की रक्षा विमानन परियोजनाओं में, बल्कि प्रतिष्ठित गगनयान कार्यक्रम सहित अंतरिक्ष से जुड़ी परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस संस्थान ने मित्र देशों के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया है।
अब तक एएफटीपीएस द्वारा कुल 47 फ्लाइट टेस्ट कोर्स, 24 प्रोडक्शन टेस्ट पायलट कोर्स और 4 आरपीए टेस्ट कोर्स सफलतापूर्वक संपन्न कराए जा चुके हैं।
यह उल्लेखनीय है कि एएफटीपीएस विश्व के कुछ चुनिंदा मान्यता प्राप्त टेस्ट पायलट स्कूलों में से एक है, जिसके कार्य एवं प्रतिष्ठा को सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट्स (एसईटीपी), सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स (एसएफटीई) और एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (एएसआई) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त है।
नई दिल्ली – जम्मू और कश्मीर सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध एक क्षेत्र मात्र नहीं है; बल्कि प्राचीन काल से ही यह भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसी मूल भाव को रेखांकित करते हुए ‘संस्कृति: जम्मू और कश्मीर’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण फिल्म और कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र द्वारा किया गया। इस फिल्म का निर्माण आईजीएनसीए ने किया है। फिल्म के लेखक एवं सह-निर्माता श्री राजन खन्ना हैं, जबकि इसके निर्देशक और संपादक शिवांश खन्ना हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखक एवं प्रसारक श्री गौरीशंकर रैना, फिल्म के लेखक श्री राजन खन्ना तथा मीडिया केंद्र के नियंत्रक श्री अनुराग पुनेठा उपस्थित थे। ‘संस्कृति: जम्मू और कश्मीर’ विषय पर एक सार्थक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद जोशी, श्री राजन खन्ना और श्री गौरीशंकर रैना ने अपने विचार साझा किए।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि ‘संस्कृति: जम्मू और कश्मीर’ में दिखाए गए कई स्थानों पर शूटिंग करना आसान नहीं था, क्योंकि ये क्षेत्र न सिर्फ भौगोलिक रूप से दुर्गम इलाके हैं, बल्कि हाल के दिनों में वहां पहुंचना भी बहुत मुश्किल हो गया है। इनमें से कई स्थानों की तस्वीरें बहुत कम देखने को मिलती हैं। फिल्म में ऐसे दुर्लभ स्थलों पर किए गए शूट के दृश्य शामिल हैं। फिल्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने और खत्म करने तथा हमारी परंपरागत आस्थाओं को मिटाने के निरंतर प्रयासों के बीच यह फिल्म एक प्रकाशस्तंभ की तरह खड़ी होगी। यह बताएगी कि हमारी परंपराएं क्या हैं और हमारा इतिहास क्या है? इस फिल्म के माध्यम से वे युवा, जो जम्मू और कश्मीर के वास्तविक इतिहास को नहीं जानते हैं लेकिन उसे जानना-समझना चाहते हैं, निश्चित रूप से जुड़ सकते हैं।
आखिर में, उन्होंने फिल्म के निर्देशक शिवांश खन्ना से आग्रह किया कि वे महत्वपूर्ण मंदिरों के कुछ प्रभावशाली शॉट्स और दृश्य छोटे रील्स के रूप में प्रसारित करें। इससे लोगों की रुचि पूरी फिल्म देखने में बढ़ेगी और इसके व्यापक प्रचार में भी सहायता मिलेगी।
फिल्म के लेखक श्री राजन खन्ना ने कहा कि जिस प्रकार शरीर और आत्मा का संबंध होता है, उसी प्रकार राष्ट्र, संस्कृति और भूगोल का भी संबंध होता है। शरीर नश्वर है, लेकिन राष्ट्र और संस्कृति शाश्वत हैं। भारत फूलों के एक गुलदस्ते की तरह है और उसमें जम्मू-कश्मीर की संस्कृति एक विशिष्ट पुष्प के समान है, जिसमें अध्यात्म, इतिहास और चिंतन समाहित है। जब कोई इस क्षेत्र की यात्रा करता है, तो वह सिर्फ मंदिरों के दर्शन भर नहीं करता, बल्कि भारतीय संस्कृति की नींव बनाने वाले वेदों के भजन वहां लिखे हुए हैं, और उनकी संपूर्ण दार्शनिक परंपरा का अनुभव किया जा सकता है। हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई महान संस्कृति की झलक जम्मू और कश्मीर में साफ दिखाई देती है।
उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर का नाम आते ही प्रायः चर्चा आतंकवाद, जिहाद या लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन जब कश्मीर पर बात होती है, तो इसके 10,000 वर्ष पुराने इतिहास का उल्लेख क्यों नहीं होता? विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक माने जाने वाले अनंतनाग पर चर्चा क्यों नहीं होती? कश्मीर का इतिहास सिर्फ 1339 से 1819 की अवधि तक ही क्यों सीमित कर दिया गया है? कश्मीर का इतिहास ऋग्वेद से भी जुड़ा हुआ है। यदि हम स्वयं अपनी सभ्यतागत नींव को पुनः स्थापित नहीं करेंगे, तो हम किसे दोष देंगे? भविष्य भी हमें माफ नहीं करेगा।
श्री गौरीशंकर रैना ने कहा कि इस प्रकार की फिल्म बनाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने स्वयं इस प्रक्रिया से गुजरते हुए अनुभव किया है कि विशेष रूप से मंदिरों पर फिल्म बनाना कितना कठिन होता है, क्योंकि इसके लिए अनेक अनुमतियों की आवश्यकता होती है और कई बार ऐसे स्थानों तक पहुंचना पड़ता है, जहां जाना काफी मुश्किल होता है। इसमें अनेक प्रकार की कठिनाइयां आती हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी फिल्मों से जुड़ा शोध कार्य भी बहुत ज़्यादा समय लेने वाला और परिश्रमपूर्ण होता है। आज इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का युग है और ऐसे समय में फिल्म एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है, जिसके जरिए सार्थक कहानियों को आम-जन तक पहुंचाया जा सकता है।
इससे पहले अपने उद्घाटन वक्तव्य में श्री अनुराग पुनेठा ने कहा कि जब भी कोई फिल्म ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से किसी विषय का दस्तावेजीकरण करती है, तो वह एक अत्यंत महत्वपूर्ण काम करती है। विशेष रूप से ऐसे समय में, जब पिछले तीन-चार दशकों से कश्मीर को मुख्यतः एक संघर्ष क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है, तब आईजीएनसीए और फिल्म द्वारा दृश्य के माध्यम से देश को यह बताना बहुत आवश्यक है कि जम्मू और कश्मीर की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, जो आज भी जीवित है। वहां की वास्तुकला हमारी सामूहिक स्मृति का अभिन्न अंग है। जो समाज अपनी विरासत को भूलकर बाकी सब कुछ याद रखता है, वह गंभीर संकट का सामना करता है। यह फिल्म उस स्मृति को फिर से सबके सामने वापस लाने का एक छोटा सा प्रयास है।
अंत में, श्री पुनेठा ने वक्ताओं, अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार करते हुए अपना भाषण समाप्त किया। कार्यक्रम का संचालन मीडिया केंद्र के श्री नरेंद्र सिंह ने किया।
फिल्म के बारे में
फिल्म ‘संस्कृति: जम्मू और कश्मीर’ जम्मू और कश्मीर के मनोहारी नजारों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसकी शुरुआत क्षेत्र की प्राचीन आध्यात्मिक चेतना के शांत और गहन स्मरण से होती है—एक ऐसी भूमि जिसे इतिहासकार कल्हण ने अपनी ‘राजतरंगिणी’ में असंख्य मंदिरों से सुसज्जित बताया था। आज भी इनमें से कुछ मंदिर अपनी गरिमामय उपस्थिति के साथ खड़े हैं, जबकि कई अन्य खंडहरों के रूप में समय और ऐतिहासिक उथल-पुथल के मूक साक्षी बने हुए हैं।
सशक्त और जीवंत दृश्यों के माध्यम से यह फिल्म सिख और डोगरा शासकों द्वारा मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार के प्रयासों को सामने लाती है। यह श्रीनगर के हरवन मठ में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति(परिषद) की दार्शनिक और बौद्धिक विरासत के साथ-साथ गुरु हरगोबिंद जी के आगमन से जुड़ी सिख परंपरा को भी रेखांकित करती है।
फिल्म जम्मू और कश्मीर क्षेत्र की उन कम-ज्ञात आध्यात्मिक परंपराओं पर भी प्रकाश डालती है, जिन्हें ज्यादातर नजरअंदाज किया गया है- पहलगाम के प्राचीन ममलेश्वर मंदिर से लेकर गुलमर्ग के आस-पास के भूले हुए तीर्थस्थलों और जम्मू के ऐतिहासिक मंदिरों तक। ‘संस्कृति: जम्मू और कश्मीर’ एक सिनेमाई पुनःखोज के रूप में उभरती है, जो दर्शकों को एक लंबे समय से दबाई गई सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कहानी से फिर से जुड़ने के लिए आमंत्रित करती है। यह फिल्म दर्शकों को उस भूमि से परिचित कराती है, जहां हर पत्थर अपने भीतर यादों, भक्ति और सांस्कृतिक निरंतरता का भार समेटे हुए है।
नई दिल्ली – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के लिए संसद सदस्यों की संसदीय परामर्श समिति की बैठक आज नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में मिशन वात्सल्य योजना पर चर्चा हुई।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर भी उपस्थित थीं। लोकसभा और राज्यसभा दोनों के संसद सदस्यों ने बैठक में भाग लिया, जिनमें डॉ. बच्छाव शोभा दिनेश, श्रीमती जोबा मांझी, डॉ. सुधा मूर्ति और श्रीमती मंजू शर्मा शामिल थीं, जिन्होंने अपने विचार और अवलोकन साझा किए।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक ने समिति को मिशन वात्सल्य योजना के उद्देश्यों, कार्यक्षेत्र और प्रगति के बारे में जानकारी दी। इसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अजीत कुमार ने विस्तृत प्रस्तुति दी।
बैठक के दौरान, संसद सदस्यों ने देश भर में मिशन वात्सल्य के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहुमूल्य सुझाव और विचार साझा किए। श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने रचनात्मक सुझावों के लिए संसद सदस्यों को धन्यवाद दिया और अधिकारियों को इन सुझावों की जांच करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने और भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए सांसदों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने सांसदों को जमीनी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करने और उन्हें उजागर करने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि मंत्रालय लक्षित लाभार्थियों तक सेवाओं की सुचारू और प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा सके।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर के समापन भाषण के साथ बैठक समाप्त हुई, जिसमें उन्होंने सभी सदस्यों को उनसे प्राप्त बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं और सुझावों के लिए धन्यवाद दिया।