केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने हेतु अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का नया मानक जारी किया

नई दिल्ली – उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का भारतीय मानक आईएस 19412:2025 – अगरबत्ती – विनिर्देशन जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी किया गया।

नए अधिसूचित मानक में अगरबत्तियों में कुछ कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम सुगंधित पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है , जो मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, आईएस 19412:2025 में अगरबत्तियों में उपयोग के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की सूची दी गई है। इसमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन , साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन जैसे कृत्रिम सुगंधित पदार्थ शामिल हैं। इनमें से कई पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित यौगिकों और रसायनों पर लगे प्रतिबंधों को देखते हुए—अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह मानक अगरबत्ती को मशीन से बनी, हाथ से बनी और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है, और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक मापदंडों के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद बीआईएस मानक चिह्न प्राप्त करने के पात्र होंगे , जिससे उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे। आईएस 19412:2025 की अधिसूचना से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ने, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

यह मानक बीआईएस की सुगंध एवं स्वाद अनुभागीय समिति (पीसीडी 18) द्वारा हितधारक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमएपी), सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआर), कन्नौज स्थित सुगंध एवं स्वाद विकास केंद्र (एफएफडीसी) और अखिल भारतीय अगरबत्ती निर्माता संघ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस मानक को तैयार करने में योगदान दिया है।

भारत विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस उद्योग का वार्षिक अनुमानित मूल्य लगभग 8,000 करोड़ रुपये है और लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निर्यात 150 से अधिक देशों को किया जाता है। यह क्षेत्र कारीगरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमियों के एक बड़े समूह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्ती भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग है और घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में इसका उपयोग किया जाता है। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अगरबत्ती उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली – शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन कार्य की समीक्षा करने और रणनीतियों को अंतिम रूप देने हेतु 6 दिसंबर 2025 को राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

मंत्रालय ने कार्यशाला की शुरुआत में राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह योजना मंत्रालय की प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं में से एक है, जिसके तहत समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) से संबंधित मेधावी छात्रों को प्रतिवर्ष एक लाख नई छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इस योजना का उद्देश्य आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या को कम करना और छात्रों को बारहवीं कक्षा तक अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस कार्यशाला में केंद्र सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, पात्र लाभार्थियों तक योजना की प्रभावी पहुंच बढ़ाने और वितरण में सुधार लाने संबंधी सुझाव दिए गए।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें वर्ष 2021-22 से वर्ष 2024-25 तक के प्रदर्शन की समीक्षा, कोटा का उपयोग, एनएमएमएसएस परीक्षा का संचालन और छात्रवृत्ति के नवीनीकरण में आने वाली चुनौतियों को शामिल किया गया। इसके बाद हाइब्रिड मोड में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों और हितधारकों के साथ परामर्श किया गया।

राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना एक केंद्रीय योजना है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत नवी कक्षा तक के छात्रों को प्रतिवर्ष एक लाख छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं, जिनका नवीनीकरण दसवीं से बारहवीं कक्षा तक के लिए किया जा सकता है। सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र इसके लिए पात्र हैं। छात्रवृत्ति की राशि 7,12,000 रुपये  प्रति वर्ष है, और जिन छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 3,50,000 रुपये से अधिक नहीं है, वे भी इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। चयन परीक्षा के लिए, छात्रों को सातवीं कक्षा में कम से कम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त होने चाहिए, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए 5 प्रतिशत अंकों की छूट है।

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने संथाली भाषा में अनुवादित और विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा पहली बार प्रकाशित भारतीय संविधान का विमोचन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 25 दिसंबर, 2025  को , सुशासन दिवस और पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा 1925 में ओल चिकी लिपि विकसित किए जाने के शताब्दी वर्ष के अवसर पर  संथाली भाषा में अनुवादित भारतीय संविधान का राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में विमोचन किया। इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा पहली बार प्रकाशित किया गया है।

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल संथाली भाषा,  भारत की सबसे प्राचीन इस्‍तेमाल हो रही भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय द्वारा बोली जाती है।

संथाली भाषा में अनुवादित संविधान की प्रति के विमोचन के अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और संथाली भाषी समुदाय के सदस्यों सहित आमंत्रित गणमान्‍य व्‍यक्ति मौजूद थे।

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रांची प्रेस क्लब में दिवंगत प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि

रांची,26.12.2025 – वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद दिवंगत प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण को शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए दिन करीब 12 बजे से 12.30 बजे तक रांची प्रेस क्लब परिसर में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और शुभचिंतकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में रांची प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री बलबीर दत्त, वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र, अनुज कुमार सिन्हा, वाईएन झा, अनिल कुमार सिंह, रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी, सचिव अभिषेक सिन्हा, कोषाध्यक्ष कुबेर, संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य, कार्यकारिणी सदस्य अशोक गोप, प्रतिमा कुमारी, निर्भय कुमार, चंदन वर्मा, पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, पूर्व सचिव अमरकांत, पूर्व कोषाध्यक्ष सुशील सिंह ‘मंटू’, नवल किशोर सिंह, प्रभात कुमार सिंह, राजेश तिवारी, आलोक सिन्हा, विजय मिश्रा, राकेश सिंह, देवेंद्र सिंह, अशोक द्विवेदी, रविचंद कपूर, जावेद अख्तर, रंजीत कुमार,वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट दिवाकर प्रसाद, निशिथ सिन्हा, प्रशांत मित्रा सहित कई पत्रकार मौजूद थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भी रांची प्रेस क्लब पहुंचकर दिवंगत प्रो. शरण को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। पद्मश्री बलबीर दत्त, बैजनाथ मिश्र, अनुज कुमार सिन्हा, शंभु नाथ चौधरी, अभिषेक सिन्हा और अमरकांत ने अपने वक्तव्यों में रांची प्रेस क्लब की स्थापना, उसके निर्माण और पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण के योगदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा के बाद उनकी अंतिम यात्रा हरमू मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई, जहां उनके भतीजे ने उन्हें मुखाग्नि दी। प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश शरण का निधन गुरुवार तड़के करीब 3 बजे रांची के दीपाटोली स्थित एक निजी अस्पताल में हो गया था। वे 80 वर्ष के थे। परिजनों के अनुसार वे वर्ष 2021 से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और लंबे समय से उपचाररत थे।

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस विजन के तहत आयोजित यह वार्षिक सम्मेलन उभरते खतरों से निपटने के लिए भारत की अगली पीढ़ी की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच बन गया है। यह सम्मेलन ऑपरेशनल फोर्सो, तकनीकी, कानूनी और फोरेंसिक विशेषज्ञों और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में लगी एजेंसियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों और आतंकवाद से उत्पन्न होने वाले खतरों पर विचार-विमर्श करने के एक मंच के रूप में उभरा है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘Whole of the Government approach’ की भावना से आतंकवाद के खतरे के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के लिए औपचारिक और अनौपचारिक चैनल स्थापित करके विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल विकसित करना और भविष्य की नीति निर्माण के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत करना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और विचार-विमर्श का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी (CT) मुद्दों से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुभवों और अच्छी प्रथाओं (good practices) और आतंकी जांच से मिली सीख को साझा करना है।

इस सम्मेलन में विदेशी न्यायक्षेत्रों से साक्ष्य एकत्र करने, आतंकवाद विरोधी जांच में डिजिटल फोरेंसिक और डेटा विश्लेषण, मुकदमे का प्रभावी प्रबंधन, कट्टरता से निपटना, जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उभरते hybrid खतरों सहित आतंकवाद से संबंधित अन्य विषयों पर सत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो दिन के सम्मेलन में, आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने के टूल्स, तकनीक और केस स्टडी, भविष्य के लिए आतंकवाद विरोधी रणनीतियों का निर्माण और उभरते राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से निपटने के लिए संस्थागत क्षमताओं के निर्माण पर सत्रों को भी शामिल किया गया है।

सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, आतंकवाद विरोधी मुद्दों से निपटने वाली केंद्रीय एजेंसियों/विभागों के अधिकारी और कानून, फोरेंसिक, प्रौद्योगिकी आदि जैसे संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

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सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों पर भ्रामक विज्ञापन देने वाले कोचिंग संस्थान पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2022 और 2023 के परिणामों से संबंधित अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए विजन आईएएस (अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड) पर 11 लाख रूपए का जुर्माना लगाया है

संस्थान ने “सीएसई 2023 में शीर्ष 10 में 7 और शीर्ष 100 में 79 चयन” और “सीएसई 2022 में शीर्ष 50 में 39 चयन” जैसे दावों का विज्ञापन किया था, जिसमें सफल उम्मीदवारों के नाम, तस्वीरें और रैंक प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे।

जांच करने पर, सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने श्री शुभम कुमार (यूपीएससी सीएसई 2020 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले) द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम, अर्थात् जीएस फाउंडेशन बैच (कक्षा छात्र) का खुलासा तो किया, लेकिन जानबूझकर अन्य सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी छिपा दी, जिनके नाम और तस्वीरें उसी वेबपेज पर उनके साथ प्रदर्शित की गई थीं।

इस छिपाव से यह भ्रामक धारणा बनी कि शेष सभी उम्मीदवार भी जीएस फाउंडेशन बैच क्लासरूम कोर्स में नामांकित थे, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं था। इसके अतिरिक्त, उसी विज्ञापन में संस्थान ने अपने “फाउंडेशन कोर्स” का प्रमुखता से प्रचार किया, जिसकी फीस लाखों रुपये में है। इस प्रकार के आचरण से छात्रों को झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए और असत्यापित दावों के आधार पर संस्थान के कार्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया गया।

विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने यूपीएससी सीएसई 2022 और 2023 में 119 से अधिक सफल उम्मीदवारों का दावा किया था। हालांकि, केवल तीन उम्मीदवारों ने फाउंडेशन कोर्स में दाखिला लिया था, जबकि शेष 116 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज, अभ्यास टेस्ट (एक बार के टेस्ट) और मॉक इंटरव्यू प्रोग्राम जैसी सेवाओं का विकल्प चुना था। महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने से उम्मीदवारों और अभिभावकों को यह विश्वास हो गया कि विजन आईएएस यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सभी चरणों में उम्मीदवारों की सफलता के लिए जिम्मेदार था, जिससे यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के तहत एक भ्रामक विज्ञापन बन गया।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों के साथ बड़े दावों वाले विज्ञापन भ्रामक थे। छात्रों की उचित अनुमति या सहमति के बिना ऐसे दावे प्रदर्शित करके संस्थान ने संभावित उम्मीदवारों को गुमराह किया। प्रिंट मीडिया के विपरीत वेबसाइट वैश्विक स्तर पर सुलभ होती है और लंबी अवधि तक उपलब्ध रहती है। यह वह प्राथमिक मंच भी है जिसके माध्यम से उम्मीदवार, विशेष रूप से डिजिटल युग में, कोचिंग संस्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, उनके दावों का मूल्यांकन करते हैं और सूचित विकल्‍प चुनते हैं।

सीसीपीए ने यह भी संज्ञान लिया कि विजन आईएएस के खिलाफ पहले भी भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए कार्रवाई की जा चुकी है। नियामक हस्तक्षेप और सावधानी के बावजूद संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के दावे करना जारी रखा, जो उचित सावधानी और नियामक अनुपालन की कमी को दर्शाता है। उल्लंघन की पुनरावृत्ति को देखते हुए वर्तमान मामले को बाद के उल्लंघन के रूप में माना गया, जिसके चलते उपभोक्ताओं के संरक्षण के हित में अधिक जुर्माना लगाना उचित था।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में, जहां लाखों उम्मीदवार पर्याप्त समय, प्रयास और वित्तीय संसाधन निवेश करते हैं, इस तरह के अधूरे और चयनात्‍मक खुलासे छात्रों और अभिभावकों को परिणामों और कोचिंग सेवाओं की प्रभावशीलता के बारे में झूठी उम्मीदें पैदा करके गुमराह करते हैं।

अब तक सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए हैं। 28 कोचिंग संस्थानों पर 1,09,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, साथ ही ऐसे भ्रामक दावों को बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में जानकारी का सत्य और पारदर्शी प्रकटीकरण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि छात्र निष्पक्ष और सूचित शैक्षणिक निर्णय ले सकें।

(अंतिम आदेश केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://doca.gov.in/ccpa/orders-advisories.php?page_no=1 )

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के रीवा में कृषक सम्मेलन को संबोधित किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के रीवा में कृषक सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बसावन मामा गोवंश वनविहार प्राकृतिक खेती के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को समृद्ध बनाने का सफल प्रयोग है। उन्होंने कहा कि रीवा क्षेत्र में स्थापित मॉडल फार्म लाखों किसानों का न केवल मार्गदर्शन करेगा, बल्कि प्राकृतिक खेती की दिशा में पथप्रदर्शक की भूमिका भी निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा परंपरागत प्रयोग है जिसे हम भूल चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा प्रयोग है जिसमें गौ माता के गोबर और मूत्र के उपयोग से एक ऐसी व्यवस्था बनती है जो किसान की आय को भी कम नहीं होने देती और उपज भी शुद्ध होती है। एक ही देसी गाय से 21 एकड़ खेत में खाद और पेस्टिसाइड्स के बिना प्राकृतिक खेती होती है। श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ेगी, पानी बचेगा और अनाज खाने वाले लोगों को कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज देश के 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं और इससे उनका उत्पादन बढ़ रहा है।

 

श्री अमित शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों के सर्टिफिकेशन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से दो बड़ी कोऑपरेटिव्स ने प्राकृतिक खेती की उपज का सर्टिफिकेशन, विश्व की सबसे आधुनिक लैब में इसका परीक्षण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसानों को सर्टिफिकेट देंगी कि उनका खेत और उपज दोनों प्राकृतिक हैं जिससे किसानों की आय लगभग डेढ़ गुना बढ़ेगी। श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों का दुनियाभर में बहुत बड़ा बाज़ार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया मानती है कि ऑर्गेनिक खाना खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। पूरी दुनिया के बाज़ार में हमारे किसानों का ऑर्गेनिक उत्पाद अच्छे से पहुंचे इसके लिए सर्टिफिकेशन, साइंटिफिक टेस्टिंग, आकर्षक पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था चाहिए और इन सभी के माध्यम से किसान की आय बढ़ाने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रकृति की सेवा का संकल्प लें और सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाले पीपल के कम से कम पाँच वृक्ष लगायें।

 

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज मध्य प्रदेश का रीवा क्षेत्र धीरे धीरे एक विकसित क्षेत्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज एशिया का सबसे बड़ा सौर प्लांट रीवा में है, रीवा से प्रयागराज या जबलपुर हो, बहुत अच्छी चार लेन की सड़कों का विकास हुआ है।

गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती है और रीवा उनके प्रिय स्थानों में से एक था। श्री शाह ने  कहा कि अटल जी ने न सिर्फ उनकी पार्टी बल्कि पूरे देश के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता को बहुत महत्व दिया। अटल जी एक ऐसे नेता की श्रेणी में आते हैं जिन्होंने जो बोला वह कर दिखाया। श्री शाह ने कहा कि अटल जी जैसे नेता बहुत कम होते हैं, जिनका कथन और जीवन दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

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प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लोकार्पण के विशेष क्षण साझा किए

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और आदर्शों को सम्मान देने के लिए नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन की झलकियां साझा कीं। श्री वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लखनऊ की यह पावन धरती एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। इस दौरान उन्होंने देश और दुनिया को क्रिसमस की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 25 दिसंबर का दिन देश की दो महान विभूतियों की जयंती का एक अद्भुत अवसर लेकर आता है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी और भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय जी ने अपना संपूर्ण जीवन भारत की पहचान, एकता और गौरव की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि इन दोनों महान हस्तियों ने अपने योगदान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट की एक श्रृंखला में उल्लेख किया:

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल में कमल पुष्प के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय निस्वार्थ नेतृत्व और सुशासन की भावना को सजीव रूप में सामने लाता है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे जननायकों के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल में कमल पुष्प के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय निस्वार्थ नेतृत्व और सुशासन की भावना को सजीव रूप में सामने लाता है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे जननायकों के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता रहेगा।”

“लखनऊ के मेरे परिवारजनों का उत्साह और उमंग इस बात का प्रमाण है कि देश की महान विभूतियों के आदर्श, मूल्य और राष्ट्रसेवा की भावना आज भी जन-जन का मार्गदर्शन कर रही है।”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस सोच का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। यहां डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमाएं हमें संदेश देती हैं कि हमारा हर कदम और हर प्रयास राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित हो।”

“डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी थी। उनकी प्रेरणा से आज हम उसे और सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।”

“पंडित दीनदयाल जी का विजन था कि कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक हर सुविधा पहुंचे। आज जब हम हर जरूरतमंद तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं, तो अंत्योदय का उनका ये सपना साकार हो रहा है।”

“अटल जी की जयंती सुशासन का उत्सव मनाने का भी दिन है। भाजपा-NDA सरकार ने सुशासन की जो विरासत बनाई है, उसे आज हम एक नया विस्तार दे रहे हैं।”

“कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक रूप से भाजपा को हमेशा अछूत बनाए रखा। लेकिन भाजपा के संस्कार ने हमें सबका सम्मान करना सिखाया है, जिसके एक नहीं अनेक उदाहरण हैं…”

“राष्ट्र प्रेरणा स्थल हमारे देश की महान विभूतियों के जीवन, उनके आदर्शों और अमूल्य विरासत को समर्पित एक प्रेरणादायी स्मारक है। आज सुशासन दिवस पर लखनऊ में इसका लोकार्पण कर अपार गौरव और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई।”

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत करने के लिए पांच परिवर्तनकारी डिजिटल सुधारों का शुभारंभ किया

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय,  कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में सुशासन प्रथाएं 2025 पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और हितधारकों को प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले सुशासन दिवस के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित वितरण पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया और जनहितैषी शासन की नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुशासन का विचार पहले भी व्यक्त किया गया था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के मंत्र के मार्गदर्शन में इसे अक्षरशः और भावपूर्ण ढंग से लागू किया गया है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) इस सुशासन दिवस पर पांच प्रमुख पहलों की शुरूआत कर रहा है, जिनका उद्देश्य मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, प्रमुख हितधारक समूहों का समर्थन करना और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करना है।

पहले डिजिटल सुधार में केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का एक संकलन शामिल है, जिसमें सभी मौजूदा निर्देशों को एक ही, अद्यतन और उपयोगकर्ता अनुकूल संदर्भ में समेकित किया गया है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह कदम आरक्षण संबंधी लाभों की स्पष्टता, एकरूपता और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करके पूर्व सैनिकों की सेवा का सम्मान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही मंत्रालयों और विभागों में कार्यान्वयन में अस्पष्टता और त्रुटियों को कम करता है।

दूसरी पहल में एआई-संचालित भर्ती साधन शामिल है, जिसे भर्ती नियम निर्माण, संशोधन एवं निगरानी प्रणाली (आरआरएफएएमएस) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भर्ती नियम निष्पक्ष भर्ती और करियर विकास का आधार है और यह नया एआई-सक्षम साधन सरल प्रश्नों के माध्यम से उपयोगकर्ताओं का मार्गदर्शन करके, उपयुक्त भर्ती विधियों का सुझाव देकर और निर्धारित प्रारूप में मसौदा नियम स्वचालित रूप से तैयार करके विभाग के दिशानिर्देशों के अनुरूप देरी और विसंगतियों को काफी हद तक कम करेगा।

तीसरी पहल में ई-एचआरएमएस 2.0  मोबाइल एप्लिकेशन शामिल है, जो एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध है। यह एप्लिकेशन सरकारी कर्मचारियों को प्रमुख मानव संसाधन सेवाएं सीधे उपलब्ध कराता है। मिशन कर्मयोगी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित, ई-एचआरएमएस 2.0 सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति, तबादले, प्रतिनियुक्ति, प्रशिक्षण और सेवानिवृत्ति जैसी मानव संसाधन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है, साथ ही एसपीएआरआरडब्ल्यू पीएफएमएस और भविष्य जैसे प्लेटफार्मों से भी जुड़ा हुआ है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मोबाइल ऐप कागजी कार्रवाई को कम करेगा, अनुमोदन में तेजी लाएगा और कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाएगा।

इन डिजिटल सुधारों में आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर नई एआई-सक्षम सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इनमें प्रासंगिक शिक्षण संसाधनों की खोज के लिए आईजीओटी एआई सारथी, पाठ्यक्रम के दौरान व्यक्तिगत सहायता के लिए आईजीओटी  एआई ट्यूटर, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संरचित शिक्षण मार्ग प्रदान करने वाला आईजीओटी विशेषज्ञता कार्यक्रम और मंत्रालयों और राज्यों को भूमिकाओं, दक्षताओं और प्रशिक्षण आवश्यकताओं का व्यवस्थित रूप से आकलन करने में मदद करने के लिए एआई-आधारित क्षमता निर्माण योजना उपकरण शामिल हैं।

पांचवीं पहल कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 की शुरूआत आधुनिक तकनीकों जैसे एआर/वीआर, गेमिफिकेशन और इंटरैक्टिव सिमुलेशन का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए की गई है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह उन्नत कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 लोक सेवाओं में सर्वोत्तम विधियों, सुधारों और कौशल के व्यापक प्रसार को सक्षम बनाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन क्षमता मजबूत होगी।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव सुश्री रचना शाह ने कहा कि सुशासन दिवस अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल, पारदर्शी और मानवीय शासन के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सुशासन सप्ताह के दौरान चलाए गए राष्ट्रव्यापी ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत 700 से अधिक जिलों में जमीनी स्तर पर शिकायतों के निवारण, सेवा वितरण और सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए हजारों शिविर आयोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से शुरू किए गए विशेष अभियानों ने प्रशासनिक संस्कृति को लंबित प्रक्रियाओं से परिणाम-उन्मुख शासन में बदल दिया है, जिससे दक्षता, स्थान अनुकूलन और राजस्व सृजन में मापने योग्य परिणाम प्राप्त हुए हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि ये सभी पहल शासन में सुधार के लिए एक सुसंगत, भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। नागरिकों तथा लोक सेवकों को परिवर्तन के केंद्र में रखने वाली ये पहल प्रौद्योगिकी के माध्यम से संस्थानों को मजबूत बनाती हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन दिवस के अवसर पर शुरू किए गए ये डिजिटल सुधार अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत की सच्ची भावना के अनुरूप हैं और देश को अधिक उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार शासन ढांचे की ओर अग्रसर करने में सहायक होंगे।

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विज्ञापन केवल भावना या बाज़ार की भाषा नहीं है; यह साहित्य का एक जीवंत, समकालीन रूप है – रमा पांडे

नई दिल्ली – भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के मीडिया केंद्र ने समवेट सभागार में ‘विज्ञापनों में सितारों की चमक: एक अनूठी विज्ञापन प्रदर्शनी’ शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। प्रदर्शनी का उद्घाटन फिल्म एवं रंगमंच निर्देशक और लेखिका सुश्री रमा पांडे, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और संचार योजनाकार श्री सुशील पंडित ने किया। मीडिया केंद्र के नियंत्रक श्री अनुराग पुनेथा ने उद्घाटन भाषण दिया। प्रदर्शनी का संयोजन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र के श्री इकबाल रिजवी ने किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत इस विषय पर एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया।

प्रदर्शनी ने सिनेमा जगत से परे जाकर इस बात पर प्रकाश डाला कि विज्ञापन ने सिनेमाई हस्तियों को रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म सितारों ने जनमानस की पसंद, फैशन और आकांक्षाओं को आकार दिया और उनके द्वारा जगाए गए भरोसे ने उन्हें भारतीय विज्ञापन के विकास का केंद्र बना दिया। उत्पादों के साथ उनका संबंध भारत के दृश्य और सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण को प्रदर्शित करता है, जिससे पता चलता है कि लोकप्रिय छवि और व्यावसायिक संचार ने मिलकर सामाजिक स्मृति और उपभोक्ता संस्कृति को किस प्रकार प्रभावित किया। यह उचित होगा कि हम स्वर्गीय पीयूष पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित करें, जिन्होंने विज्ञापन जगत में योगदान भारतीय संचार की भाषा, कल्पना और सांस्कृतिक प्रतिध्वनि को नया रूप दिया।

इस अवसर पर रमा पांडे ने कहा, “विज्ञापन की दुनिया को केवल भावनाओं का क्षेत्र या बाज़ार की भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह अपने आप में साहित्य का एक नया, जीवंत और समकालीन रूप है।” जिस प्रकार कविता कुछ शब्दों में गहरी भावनाओं को व्यक्त करती है, कहानियां सामान्य जीवन को अर्थ देती हैं और नाटक संवादों के माध्यम से मनुष्यों को एक दूसरे से जोड़ता है, उसी प्रकार विज्ञापन भी कुछ पंक्तियों, कुछ दृश्यों और क्षणभंगुर पलों के माध्यम से समाज से संवाद करता है।

विज्ञापन का उद्देश्य केवल उत्पाद बेचना नहीं है; यह उपभोक्ताओं के मन में विश्वास, अपनेपन की भावना और संबंध स्थापित करना है। जब विज्ञापन आम आदमी की भाषा में प्रस्तुत किया जाता है, जो उनके अनुभवों, यादों और जीवन से जुड़ता है, तो यह बाजार की सीमाओं को पार करके एक सांस्कृतिक दस्तावेज बन जाता है। यही कारण है कि कई विज्ञापन वर्षों तक हमारे मन में बसे रहते हैं—वे हमें मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं, चिंतन करने के लिए प्रेरित करते हैं और अक्सर अपने समय की भावना को परिभाषित करते हैं।

आज, रेडियो से टेलीविजन, प्रिंट से डिजिटल और मोबाइल स्क्रीन तक, विभिन्न माध्यमों के तेजी से विकास के साथ, विज्ञापन की चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। ऐसे समय में, विज्ञापन के सफर को संरक्षित करना, उसका संग्रह करना और उसे समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, क्योंकि यह न केवल ब्रांडों के इतिहास को दर्शाता है, बल्कि समाज की बदलती प्रकृति, आकांक्षाओं और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी प्रतिबिंबित करता है। यह प्रदर्शनी विज्ञापन को एक रचनात्मक और बौद्धिक विधा के रूप में देखने का अवसर प्रदान करती है—एक ऐसा माध्यम जो भावनाओं से जन्मा, भाषा द्वारा आकारित हुआ और साहित्य की तरह ही समय के साथ अपना महत्व को स्थापित करता है।

इस अवसर पर श्री सुशील पंडित ने कहा, “वर्षों पहले, जब मैंने इंडियन एक्सप्रेस और बाद में द टेलीग्राफ के लिए लिखा था, तब उनके जीवन और कार्य को समझते हुए मुझे गहराई से यह अहसास हुआ कि विज्ञापन केवल उत्पादों को बेचने का एक माध्यम नहीं है – इसने हमेशा अपने समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित किया है।”

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब अखबार एक या डेढ़ रुपये में बिकते थे और उस कीमत में तो छपाई का खर्च भी पूरा नहीं होता था। ऐसे में, प्रिंट मीडिया को सहारा देने वाली असली ताकत विज्ञापन ही रहे। पत्रकारों की स्वतंत्रता, लेखन की निरंतरता और अखबारों व पत्रिकाओं का अस्तित्व ही विज्ञापन पर निर्भर रहा। विज्ञापन न केवल समाचार उद्योग को सहारा देते रहे, बल्कि साहित्य, कविता और सांस्कृतिक चर्चा को भी पोषण प्रदान करते रहे। रेडियो और अखबारों के युग से लेकर टेलीविजन के आगमन तक, विज्ञापन रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बन गए और धीरे-धीरे सामूहिक स्मृति में समा गए।

श्री पंडित ने कहा, “पीयूष पांडे का सबसे बड़ा योगदान विज्ञापन की भाषा को औपचारिकताओं से निकालकर सरल, आत्मीय और रोजमर्रा की बातचीत के अंदाज में बदलना था। यह ऐसी भाषा थी जो विश्वास पैदा करती है, जैसे दोस्तों के बीच बातचीत हो रही हो, उपभोक्ताओं से बराबरी का व्यवहार किया जाता है।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा, “प्रौद्योगिकी, उत्पाद और सुविधाएं समय के साथ बदल सकती हैं और उनकी नकल भी की जा सकती है, लेकिन ब्रांड और उसके उपभोक्ता के बीच का भावनात्मक बंधन अमूर्त है—इसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता। विज्ञापन की असली ताकत इसी रिश्ते को बनाने में है, जो मात्र आवश्यकता से परे जाकर इच्छा, वफादारी और विश्वास पैदा करता है।” डिजिटल युग पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, “आज विज्ञापन के माध्यम बदल गए हैं और संचार अधिक नियोजित हो गया है, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। नई पीढ़ी की भाषा, आकांक्षाएं और विश्वदृष्टि अलग हैं। उनसे जुड़ने के लिए यह समझना आवश्यक है कि संचार केवल कही गई बातों के बारे में नहीं है, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि उन्हें कैसे कहा गया है।”

श्री पंडित ने संबोधन के समापन में कहा, “यह प्रदर्शनी भारतीय विज्ञापन के लंबे सफर को समझने का अवसर प्रदान करती है, जिसने उपभोक्ता संस्कृति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार को आकार दिया है। मैं इस प्रयास के लिए आयोजकों को बधाई देता हूं, क्योंकि अतीत को समझे बिना भविष्य की दिशा तय करना कठिन है।”

इस अवसर पर अपने उद्घाटन भाषण में श्री अनुराग ने कहा कि आईजीएनसीए की विज्ञापन संग्रह पहल इस बहुमूल्य दृश्य अभिलेख को समृद्ध और विस्तारित करने के लिए समर्पित है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से, यह पहल न केवल विज्ञापनों को संरक्षित करती है, बल्कि भारत की रचनात्मक विपणन यात्रा का एक संरचित संग्रह भी तैयार करती है—जिसमें इसकी सौंदर्यशास्त्र, भाषा, हास्य, सामाजिक प्रभाव और पुरानी यादें शामिल हैं। इस अवसर पर विज्ञापन के छात्र, शोधकर्ता, उत्साही और दर्शक उपस्थित हुए।

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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित रचनाओं की  अंतिम श्रृंखला ‘महामना वांग्मय’ का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संकलित रचनाओं की अंतिम श्रृंखला “महामना वांग्मय” का विमोचन किया।

 

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने महामना मालवीय को एक महान राष्ट्रवादी, पत्रकार, समाज सुधारक, अधिवक्‍ता, राजनेता, शिक्षाविद और प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक प्रतिष्ठित विद्वान के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक दुर्लभ दूरदर्शी थे, जिनका दृढ़ विश्वास था कि भारत का भविष्य उसके अतीत को नकारने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में निहित है, इस प्रकार उन्‍होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का कार्य किया।

पंडित मालवीय की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति महादोय ने कहा कि यह प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सर्वोत्तम तत्वों का सामंजस्य स्थापित करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।

औपनिवेशिक शासन के दौरान राष्ट्रीय जागरण के सबसे सशक्त साधन के रूप में शिक्षा में महामना मालवीय के विश्वास को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना उनके इस विश्‍वास का एक जीवंत प्रमाण है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति को साथ विकसित होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामना मालवीय की एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रबुद्ध भारत के विजन की अनुगूंज समकालीन पहलों जैसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और 2047 तक विकसित भारत के मिशन में गहराई से महसूस की जाती है, जिसका नेत़त्‍व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, जो पंडित मालवीय जी की चिर स्‍थायी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि महामना मालवीय का समावेशी, मूल्य-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा पर जोर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दृढ़ता से परिलक्षित होता है।

महामना वांग्मय को केवल लेखों का संग्रह से कहीं अधिक बताते हुए उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए एक खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने महामना मालवीय मिशन और प्रकाशन विभाग को उनके इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए बधाई दी तथा विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन ग्रंथों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया, ये उल्‍लेख करते हुए कि इसमें समकालीन चुनौतियों के स्थायी समाधान निहित हैं।

‘महामना वांग्मय’ की दूसरी और अंतिम श्रृंखला में लगभग 3,500 पृष्ठों में फैले 12 खंड शामिल हैं, जिनमें पंडित मदन मोहन मालवीय के लेखन और भाषणों का एक व्यापक संकलन प्रस्‍तुत किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन महामना मालवीय मिशन द्वारा किया गया, जबकि इन पुस्तकों का प्रकाशन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा किया गया है। संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा किया गया था।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल; संसद सदस्‍य श्री अनुराग सिंह ठाकुर; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय; महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष श्री हरि शंकर सिंह  तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैंथोला शामिल थे।

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प्रतिनिधिमंडल के पहले बैच ने केदार घाट पर नमामि गंगे के स्वयंसेवकों के साथ स्वच्छता अभियान में भाग लिया

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण के अंतर्गत, तमिल प्रतिनिधिमंडल ने 1 दिसंबर 2025 को केदार घाट पर आयोजित मां गंगा आरती में भाग लिया और नमामि गंगे स्वयंसेवकों के साथ मिलकर काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक एकता की सामूहिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। प्रतिनिधिमंडल ने घाट पर स्वच्छता अभियान में भी हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में द्वादश ज्योतिर्लिंग और गंगाष्टकम का सामूहिक पाठ शामिल था, इसके बाद गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की प्रतिज्ञा ली गई।

इस कार्यक्रम में नमामि गंगा के अधिकारियों, आध्यात्मिक नेताओं और तमिल प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो काशी तमिल संगमम 4.0 के सांस्कृतिक उद्देश्यों के प्रति प्रबल उत्साह को दिखाता है।

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जनजातीय पहचान और सामूहिक अधिकारों का संरक्षण

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में एक गैर-तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों द्वारा वन भूमि और संसाधनों पर उनके अधिकारों की लंबे समय से चली आ रही अवहेलना को दूर करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था। अधिनियम की धारा 3(1)(i) में स्पष्ट रूप से “किसी भी सामुदायिक वन संसाधन की रक्षापुनर्जननसंरक्षण या प्रबंधन के अधिकार” का प्रावधान हैजिसे वे पारंपरिक रूप से सतत उपयोग के लिए संरक्षित और सुरक्षित करते आ रहे हैं।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को सामुदायिक वन अधिकारों (सीएफआर) की सुरक्षा और मान्यता सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी किया है, ताकि वन संरक्षण अधिनियम (एफआरए) को अक्षरशः लागू करते हुए जनजातीय पहचान, पारंपरिक शासन प्रणाली और वन संसाधनों तक उनकी सामूहिक पहुंच की रक्षा की जा सके। इसके अलावा, मंत्रालय ने प्रभावी सीएफआर प्रशासन को सुगम बनाने के लिए 2023 में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इसके अतिरिक्त, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के अंतर्गत राज्य सरकारों को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदाय के नेतृत्व में वन प्रबंधन योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन के लिए ग्राम सभाओं और सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को मजबूत करना है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के कार्यान्वयन की निगरानी करने और लंबित दावों के निपटान में तेजी लाने के लिए समय-समय पर समीक्षा बैठकों के माध्यम से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा है। लंबित दावों की उच्च दर वाले राज्यों को विशेष रूप से लंबित दावों के त्वरित निपटान के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, मंत्रालय ने राज्य सरकारों को दावों की समयबद्ध जांच और निपटान के लिए ग्राम सभाओं, उप-मंडल स्तरीय समितियों (एसडीएलसी) और जिला स्तरीय समितियों (डीएलसी) की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने की सलाह दी है। राज्य स्तरीय निगरानी समितियों (एसएलएमसी) से भी अधिनियम के प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए जमीनी स्तर के मुद्दों की सक्रिय रूप से समीक्षा करने और उनका समाधान करने का आग्रह किया गया है।

यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से संबंधित था और इसका समाधान हो चुका है। जनजातीय कार्य मंत्रालय वन अधिकार अधिनियम, 2006 की भावना की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ नियमित परामर्श और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। समय-समय पर राज्यों को क्षमता विकास कार्यक्रम, तकनीकी सहायता और परामर्श जारी किए जाते हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय प्रगति की निगरानी भी करता है और डीए-जेजीयूए जैसी योजनाओं के तहत लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान करता है।

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काशी-तमिल सांस्कृतिक और अकादमिक संगम का वाराणसी के वसंत कॉलेज में..

नई दिल्ली  –  काशी-तमिल संगमम 4.0 के अंतर्गत 26 नवंबर, 2025 को वाराणसी के वसंत महिला महाविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों की एक श्रृंखला शुरू हुई। इस पहल का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के बीच लम्‍बे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करना और दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक व शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

 

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सहायक प्रोफेसर (भारतीय भाषाएं) डॉ. जगदीशन टी. ने “तमिल करकलाम – आइए तमिल सीखें” विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के बारे में बात की। उन्होंने भारत की भाषाई विविधता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि भारतीय भाषाओं को सीखने से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना में सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। सत्र का समापन तमिल भाषा और उसकी विरासत पर छात्रों के साथ एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।

काशी-तमिल संगमम 4.0 का आधिकारिक उद्घाटन 2 दिसंबर को होगा। हालांकि, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और वाराणसी के अन्य संस्थानों में अकादमिक, सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करना और देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच अधिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।

 

 

वसंत कॉलेज फॉर विमेन में आयोजित कार्यक्रम का समापन वंदनम के साथ हुआ, जिसने प्रतिभागियों को काशी और तमिलनाडु की साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। छात्रों, संकाय सदस्यों और आमंत्रित अतिथियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। आने वाले दिनों में अकादमिक, संवादात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेंगे, जो दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत को और उजागर करेंगे तथा भारत की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेंगे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति पर श्री आंद्रेज बाबिश को बधाई दी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति पर श्री आंद्रेज बाबिश को आज बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने एक एक्स पर पोस्ट में कहा:

चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में आपकी नियुक्ति पर आपको हार्दिक बधाई, महामहिम आंद्रेज बाबिश। भारत और चेक गणराज्‍य के बीच सहयोग और मित्रता को और मजबूत करने के लिए आपके साथ काम करने की आशा करता हूं।

@AndrejBabis

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प्रधानमंत्री ने ‘सदैव अटल’ पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर उनके स्मृति स्थल ‘सदैव अटल’ पर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि अटल जी का जीवन जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित था तथा वे देशवासियों को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर आज दिल्ली में उनके स्मृति स्थल ‘सदैव अटल’ जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य मिला। जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित उनका जीवन देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।”

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काशी तमिल संगम 4.0 का प्रथम छात्र प्रतिनिधि समूह वाराणसी पहुँचा

नई दिल्ली – काशी तमिल संगम 4.0 के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए छात्रों से मुख्य रूप से मिलकर बना प्रथम प्रतिनिधि समूह 1 दिसम्बर 2025 को वाराणसी पहुँच गया। प्रतिनिधि समूह का रेलवे स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत किया गया, जिसमें माला पहनाना और औपचारिक स्वागत मंत्रोच्चार शामिल थे।

प्रतिनिधि समूह का प्रथम दर्शन श्री काशी विश्वनाथ धाम में निर्धारित है, जहाँ छात्रों को मंदिर की आध्यात्मिक परंपराओं और स्थापत्य विरासत को देखने का अवसर मिलेगा। दर्शन के बाद, यह समूह गंगा नदी में क्रूज पर सवार होगा, जो अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट की ओर प्रस्थान करेगा।

छात्र नदी से गंगा आरती का साक्षात्कार भी करेंगे, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव है। यह उन्हें नदी तट के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा।काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन नमो घाट पर होगा, जहाँ केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।

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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने संशोधित झरिया मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने धनबाद दौरे के दूसरे दिन झरिया कोयला क्षेत्र में पुनर्वास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) के अंतर्गत बेलगरिया और करमाटांड पुनर्वास स्थलों पर जनहितैषी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। श्री रेड्डी को बीसीसीएल गेस्ट हाउस में सीआईएसएफ कर्मियों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने  25 जून 2025 को संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) अनुमोदित किया था जिसका उद्देश्य झरिया कोयला क्षेत्र में खदानों में आग लगने, भूमि धंसने और पुनर्वास से संबंधित दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करना है। आरजेएमपी के अंतर्गत संकटग्रस्त क्षेत्रों से गैर-बीसीसीएल परिवारों का पुनर्वास राज्य सरकार के अधीन झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) अपने परिचालन क्षेत्रों के भीतर परिवारों के पुनर्वास के लिए जिम्मेदार है।

 

बेलगारिया पुनर्वास टाउनशिप

श्री रेड्डी ने बेलगारिया पुनर्वास टाउनशिप में, जेआरडीए के प्रशासनिक भवन और एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान का उद्घाटन किया जिसे निवासियों के लिए चौबीसों घंटे शासन, कुशल कॉलोनी प्रबंधन और समयबद्ध शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है।

श्री रेड्डी ने प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए सड़क चौड़ीकरण कार्य (चरण II और III) शामिल हैं; सुरक्षा में सुधार और पर्यावरण के अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए 500 एलईडी सौर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना; चरण IV, VI, VII और VIII के लिए शेष विकास कार्य; और प्राथमिक विद्यालय को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण सुविधाओं, स्वच्छता अवसंरचना, बिजली बैकअप और बेहतर शैक्षिक सुविधाओं के साथ एक आदर्श विद्यालय में उन्नत करना शामिल है।

जेआरडीए द्वारा विकसित सबसे बड़ी पुनर्वास बस्ती बेलगारिया को एक व्यापक पुनर्वास केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। आठ चरणों में 1,191 ब्लॉकों के साथ विकसित इस बस्ती में कुल 18,272 घर हैं, जिन्हें मजबूत नागरिक, सामाजिक और सामुदायिक बुनियादी ढांचे  है। जेआरडीए प्रशासनिक भवन और पीडीएस दुकान ₹1.23 करोड़ की परियोजना लागत से बनकर तैयार हो चुके हैं।

आजीविका सहायता की एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत, बीसीसीएल के सीएसआर कार्यक्रम के तहत पुनर्वासित परिवारों को 11 ई-रिक्शा वितरित किए गए, जिससे स्थायी आय सृजन और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

श्री रेड्डी ने बेलगारिया में की गई प्रगति की सराहना की और  परिवारों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ जीवन स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन, उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण और आजीविका-उन्मुख पुनर्वास के महत्व पर जोर दिया।

कर्मतांड पुनर्वास स्थल

संकटग्रस्त क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों के लिए बीसीसीएल द्वारा विकसित कर्मतांड पुनर्वास स्थल पर, श्री रेड्डी ने उल्लेख किया कि सुनिश्चित जल और बिजली आपूर्ति, चौड़ी आंतरिक सड़कों, स्ट्रीट लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था के साथ 4,008 घरों का निर्माण किया गया है।

करमाटांड में सभा को संबोधित करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि संशोधित झरिया मास्टर प्लान (आरजेएमपी) असुरक्षित आवास, खदानों में आग और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने व्यापक और जन-केंद्रित पुनर्वास दृष्टिकोण के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीसीसीएल ने आरजेएमपी के तहत कई पुनर्वास स्थल विकसित किए हैं, जिनमें करमाटांड एक प्रमुख पुनर्वास केंद्र के रूप में उभरा है।

मंत्री महोदय ने करमाटांड में स्थित मिडिल/हाई स्कूल का उद्घाटन किया, जिसे लोदना क्षेत्र से एक नए पुनर्निर्मित भवन में स्थानांतरित किया गया है। यह विद्यालय 1 नवंबर 2025 से कार्यरत है और आधुनिक साज-सामान और सुविधाओं से सुसज्जित उन्नत बुनियादी ढांचे के माध्यम से पुनर्वासित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है।

मंत्री ने करमाटांड में विविध-कौशल विकास संस्थान (एमएसडीआई-IV) का भी उद्घाटन किया। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) के सहयोग से 27 नवंबर 2025 से कार्यरत ये संस्थान ग्राहक सेवा कार्यकारी, ब्यूटीशियन और सहायक फिटर जैसे व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है, और बाजार की मांग के आधार पर इसके विस्तार की भी संभावना है।

श्री रेड्डी ने  कहा कि करमाटांड में मुफ्त ई-बस परिवहन सेवाएं, एक बाजार परिसर और शिकायत निवारण तंत्र पहले से ही मौजूद हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सुविधाओं, सामुदायिक बुनियादी ढांचे और आंगनवाड़ी केंद्रों को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।

अपनी यात्रा के दौरान, श्री रेड्डी ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) का उद्घाटन किया जो सीसीटीवी निगरानी, ​​आरएफआईडी-आधारित एक्सेस कंट्रोल, वाहन ट्रैकिंग सिस्टम और स्वचालित वजन सुविधाओं सहित उन्नत डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करता है, जिससे बीसीसीएल के संचालन में सुरक्षा, पारदर्शिता और परिचालन दक्षता में वृद्धि होती है।

श्री रेड्डी ने बीसीसीएल के दुग्ध सौर ऊर्जा संयंत्र का भी उद्घाटन किया, जो स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ संचालन के लिए बीसीसीएल की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ये सभी पहलें मिलकर झारिया कोयला क्षेत्र में खनन गतिविधियों से प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास, बेहतर जीवन स्तर, आजीविका के अधिक अवसर और सतत विकास सुनिश्चित करने के प्रति भारत सरकार, जेआरडीए और बीसीसीएल की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, स्वच्छ ऊर्जा और स्मार्ट बुनियादी ढांचे को शामिल करने वाला यह एकीकृत दृष्टिकोण संशोधित झारिया मास्टर प्लान के अंतर्गत पुनर्वास प्रक्रिया को गति देते हुए जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, एलवीएम3 ने सबसे भारी पेलोड की सफलता के साथ विश्व स्तरीय विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर इसरो टीम को बधाई दी। केन्द्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती ताकत, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करते हुए लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत में एलवीएम3-एम6 मिशन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन में भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा अब तक के सबसे भारी उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत करता है और भारी-भारित प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने की उल्लेखनीय सफलता दर्शाता है।

अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसए) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने घोषणा की कि एलवीएम3-एम6 प्रक्षेपण यान ने सफल प्रदर्शन करते हुए ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित निम्न पृथ्वी कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है और एलवीएम3 का तीसरा पूर्णतः वाणिज्यिक मिशन है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन प्रक्षेपण यान की उत्कृष्ट विश्वसनीयता और विश्वस्तरीय प्रदर्शन को दर्शाता है, इससे यह वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हो गया है।

इस मिशन में उपयोग किया गया उपग्रह, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, अगली पीढ़ी के उपग्रह समूह का हिस्सा है। इसे विशेष उपयोगकर्ता उपकरणों की आवश्यकता के बिना, सामान्य मोबाइल स्मार्टफोन को सीधे अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक वाणिज्यिक समझौते के तहत शुरू किया गया है। यह उन्नत वैश्विक संचार मिशनों के लिए एक विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

लॉन्च व्हीकल मार्क-3 की सफल उड़ान के साथ, भारत ने एक बार फिर जटिल भारी-भरकम मिशनों में अपनी तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया है। इससे स्वदेशी प्रक्षेपण प्रणालियों में विश्वास मजबूत हुआ है और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

 

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भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में विकसित अपने पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत – समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया

नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजीने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएलकी 2 पीसीवी परियोजना के तहत 23 दिसंबर 2025 को पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी)– समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से युक्त इस पोत का आईसीजी बेड़े में शामिल होना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। यह तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा पोत है, जो तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा, 4,170 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 30 मिमी सीआरएन91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोटनियंत्रित तोपें, स्वदेशी रूप से विकसित एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली और एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पोत भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा पोत है जो डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता (डीपी1) से लैस है और इसे एफआईएफआई2/एफएफवी2 प्रमाणन प्राप्त है। यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर और पीसी लैब उपकरण, जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों को चला सकता हैं। यह उच्च परिशुद्धता संचालन करने, गाढ़े तेल से प्रदूषकों को पुनर्प्राप्त करने, संदूषकों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है।

दीक्षांत समारोह में डीआईजी वीके परमार, पीडी (एमएटी), आईसीजी; श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीएसएल और आईसीजी तथा जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आरंभ आदिवासी पहलों की जानकारी दी

नई दिल्ली – संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज जनजातीय समुदायों की गरिमा, पहचान और वास्तविक सशक्तिकरण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज का योगदान बहुत बड़ा है, फिर भी दशकों तक उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में ‘भारतीय जनजातीय समाज’ (शिक्षित एवं सशक्त भूमिका में आत्मनिर्भरता की ओर) पुस्तक के विमोचन और चर्चा के अवसर पर यह बात कही।

 

 

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आरंभ की गई कई पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहली बार जनजातीय समुदायों के तीन सदस्यों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान को मान्यता देने पर प्रधानमंत्री के जोर और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित करने का भी जिक्र किया जिसे देश भर के सभी जनजातीय समुदायों का सम्मान बताया।

 

 

श्री रिजिजू ने यह भी कहा कि जनजातीय समुदायों ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन समुदाय के कई लोग अपने ऐतिहासिक योगदान और अंदरूनी ताकत से अनजान हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने ऐसे विद्वानों के काम के प्रकाशन को बहुत महत्वपूर्ण बताया, लेखक की प्रशंसा की और इस पुस्तक को बढ़ावा देने के लिए समर्थन का आश्वासन दिया।

श्री रिजिजू ने कहा कि आज़ादी के लगभग 60-70 वर्ष तक, जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व ज़्यादातर प्रतीकात्मक ही रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय में अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि कुछ ही संगठन और व्यक्ति थे जो सच में जनजातीय समाज को समझते थे और ईमानदारी से उनके बीच काम करते थे। उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम को ऐसा ही एक संगठन बताया जिसने समुदायों के साथ रहते हुए सेवा की। उन्होंने धर्मांतरण के बहाने सेवा के नाम पर जनजातीय समुदायों के साथ जुड़ने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं उनकी संस्कृति को कमजोर करती हैं और उनकी मूल पहचान को खत्म करती हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनजातीय समाज के लिए पहचान और सम्मान सबसे ज़रूरी हैं।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम आईजीएनसीए के जनपद संपदा प्रभाग ने अपनी ज्ञानपथ श्रृंखला के तहत आयोजित किया। श्री रिजिजू इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य विशिष्ट अतिथि थे। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लाकड़ा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रही।

 

एनसीएसटी के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने जनजातीय समाज से जुड़े समकालीन मुद्दों, नीतिगत हस्तक्षेपों और स्थायी सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर बात की। डॉ. आशा लाकड़ा ने कहा कि पुस्तक के विषय सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के व्यापक ढांचे में हैं।

यह पुस्तक जानी-मानी समाजशास्त्री और शिक्षाविद डॉ. स्वीटी तिवारी ने लिखी है। उन्होंने अपने काम के बारे में बात करते हुए जनजातीय समाज की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा पर बात की। उन्होंने कहा कि सबसे मुश्किल समय में भी जनजातीय समाज की लौ कभी धीमी नहीं पड़ी। सामाजिक उपेक्षा की ओर ध्यान दिलाते हुए, उन्होंने कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब के बारे में तो बहुत बात होती है, लेकिन गंगा-दामोदर तहज़ीब के बारे में कम बात होती है। उन्होंने कहा कि दामोदर नदी झारखंड से बहती है, जो ऐसा राज्य है जहाँ बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी रहती है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शिक्षा सिर्फ़ साक्षरता नहीं है, बल्कि अधिकारों के बारे में जागरूकता है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जनपद संपदा प्रभाग के चेयरमैन प्रो. के. अनिल कुमार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने ज्ञानपथ श्रृंखला की अवधारणा को समकालीन बौद्धिक चर्चा के लिए मज़बूत मंच बताया। इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के श्री सुरेश कुलकर्णी भी मौजूद थे।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों ने हिस्सा लिया, और भारतीय जनजातीय समाज की गहरी, बहुआयामी समझ में योगदान दिया।

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युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के खेल पेशेवरों को तैयार करने हेतु व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की

नई दिल्ली –  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) ने आज युवा प्रतिभाओं को निखारने और   भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने हेतु एक व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने का प्लेटफॉर्म बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की।

‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और उसके स्वायत्त निकायों के लिए व्यापक इंटर्नशिप नीति’ कॉलेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मंत्रालय और उसके स्वायत्त निकायों में सार्थक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी, जिससे उन्हें खेलों से जुड़े शासन एवं  प्रशासन और संबंधित पेशेवर क्षेत्रों का सीधा अनुभव हासिल हो सकेगा।

केन्द्रीय  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यह पहल युवा प्रतिभाओं  को भारत की खेल यात्रा में सार्थक योगदान देने हेतु सशक्त बनाएगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “भारत के खेल इकोसिस्टम को बदलने के लिए कुशल पेशेवरों और युवा प्रतिभाओं के साथ-साथ मजबूत संस्थागत समर्थन की जरूरत है। इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के जरिए, हम अपने युवाओं के लिए खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन के दरवाजे खोल रहे हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके और वे खेल के जरिए राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक असर डाल पायें।”

नई नीति के तहत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) जैसे इसके मुख्य संस्थानों में हर वर्ष 452 इंटर्नशिप प्रदान की जायेंगी।

इस पहल का उद्देश्य खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन, खेल विज्ञान, डोपिंग-रोधी, प्रतियोगिता  प्रबंधन और एथलीट खेल सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिभाओं का एक मजबूत समूह तैयार करना है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति 2025 के उद्देश्यों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें युवा सशक्तिकरण, क्षमता विकास और खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने पर जोर दिया गया है।

यह नीति भारत के उस दीर्घकालिक विजन का भी समर्थन करती है, जिसमें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक ऐसा खेल इकोसिस्टम विकसित करना है जो बेहतरीन प्रदर्शन को बनाए रख सके और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सके।

डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि यह कार्यक्रम पेशेवर रूप से प्रशिक्षित जनशक्ति की बढ़ती जरूरत को पूरा करता है, क्योंकि भारत अपने खेल अवसंरचना का विस्तार कर रहा है, शासन संबंधी सुधारों को मजबूत कर रहा है और वैश्विक स्तर पर खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ा रहा है।

प्रशिक्षुओं को व्यवस्थित ऑनबोर्डिंग, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और नीतियां  बनाने एवं उन्हें लागू करने का वास्तविक अनुभव मिलेगा। वे खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप (टैग) जैसी प्रमुख पहलों में सीधे योगदान देंगे और साई स्टेडियम, क्षेत्रीय केन्द्रों (आरसी) और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों (एनसीओई) में अनुभव प्राप्त करेंगे।

ये इंटर्नशिप खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, प्रतियोगिता संचालन, मीडिया एवं संचार, कानूनी मामले, आईटी प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन और डोपिंग-रोधी सहित 20 कार्यात्मक क्षेत्रों में होंगी। खेल विज्ञान अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, आंकड़ों के विश्लेषण और एथलीटों को वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नाडा में रखे गए इंटर्न डोपिंग-रोधी  जागरूकता, कानूनी अनुपालन, मामलों का प्रबंधन और नीतिगत सहायता में सहयोग करेंगे, जबकि एनडीटीएल में काम करने वालों को नमूनों का विश्लेषण एवं शोध सहित उन्नत प्रयोगशाला-आधारित डोपिंग-रोधी प्रक्रियाओं का अनुभव मिलेगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी, डिजिटल जानकारी, रचनात्मकता और उद्यमिता  को बढ़ावा देना है। साथ ही, ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम तैयार करना है जो नीति, अवसंरचना विकास, मीडिया संपर्क, वैधानिक ढांचे, खेल विज्ञान और खेल प्रबंधन में योगदान दे सकें।

एक केन्द्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर वर्ष भर्ती के दो चक्र होंगे; जनवरी और जुलाई में, जिससे पारदर्शिता, समावेशन और योग्यता पर आधारित चयन सुनिश्चित होगा।

यह व्यापक इंटर्नशिप कार्यक्रम स्वच्छ खेल, पारदर्शी शासन और वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो निष्पक्ष खेल, एथलीटों के कल्याण और खेल प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

इस व्यापक इंटर्नशिप नीति के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह थर्मल पावर प्लांटों को बायोमास को-फायरिंग मानदंडों का पालन न करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है

नई दिल्ली – एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस पर्यावरण (तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के तहत अधिसूचित फसल अवशेषों से बने पेलेट या ब्रिकेट के सह-दहन से संबंधित अनिवार्य प्रावधानों का अनुपालन न करने के लिए जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2024-25 के अनुपालन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई है।

पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांट द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के अनुसार, सभी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले के साथ फसल अवशेषों से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का न्यूनतम 5% मिश्रण उपयोग करना अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सह-दहन की न्यूनतम सीमा 3% से अधिक निर्धारित की गई है ताकि पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) से बचा जा सके। इन वैधानिक प्रावधानों को धान के पराली के बहिर्गमन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। आयोग ने 2021 से कई वैधानिक निर्देश जारी किए हैं, जिनमें 17.09.2021 का निर्देश संख्या 42 भी शामिल है, और आवधिक समीक्षाओं और निरीक्षणों के माध्यम से कार्यान्वयन की लगातार निगरानी की है।

इन उपायों के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान निम्नलिखित थर्मल पावर प्लांटों की अनुपालन स्थिति असंतोषजनक पाई गई है, जिसमें बायोमास सह-दहन का स्तर निर्धारित सीमा से काफी नीचे रहा है। परिणामस्वरूप, संबंधित संयंत्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें ईसी लागू करने का प्रस्ताव है, जैसा कि नीचे विस्तार से बताया गया है:

  • तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल – वेदांता), मानसा, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹33.02 करोड़;
  • पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस), पानीपत, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹8.98 करोड़;
  • दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन (डीसीआरटीपीएस), यमुनानगर, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹6.69 करोड़;
  • राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (आरजीटीपीपी), हिसार, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹5.55 करोड़;
  • पीएसपीसीएल – गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट, लेहरा मोहब्बत, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹4.87 करोड़;
  • हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन, यूपीआरवीयूएनएल, उत्तर प्रदेश – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹2.74 करोड़।
  • इन 6 थर्मल पावर प्लांट परियोजनाओं में प्रस्तावित कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगभग ₹61.85 करोड़ है।

निर्देश संख्या 42 जारी होने के बाद से, आयोग ने थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) सहित सभी संबंधित हितधारकों के साथ इस मामले की गहन समीक्षा की। अनुपालन में भारी देरी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए, आयोग ने 2024 की शुरुआत में सीएक्यूएम अधिनियम, 2021 की धारा 14 के तहत 4 थर्मल पावर प्लांटों को नोटिस जारी किए, जिनका प्रदर्शन इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से लगातार खराब रहा है। आयोग ने 7 थर्मल पावर प्लांटों और सभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांटों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की चिंता भी व्यक्त की। यहां तक ​​कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि के लिए गैर-अनुपालन करने वाले थर्मल पावर प्लांटों (यदि कोई हो) के अभ्यावेदनों की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया।

संबंधित टीपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।

आयोग इस बात को दोहराता है कि तापसंधि संयंत्रों में बायोमास का सह-दहन, फसल अवशेषों के प्रभावी बहिर्गमन प्रबंधन और एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय है। आयोग सभी विनियमित संस्थाओं द्वारा समय पर और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक निर्देशों का कड़ाई से प्रवर्तन जारी रखेगा।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025” प्रदान किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित दूसरे “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” समारोह में प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। देश की चर्चित “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर उद्यमिता को गति प्रदान करने वाली उद्यमी विज्ञान टीम सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को “राष्ट्रीय विज्ञान टीम पुरस्कार 2025” या विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों के 24 वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को पुरस्कार प्रदान किए ।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना मोदी सरकार द्वारा की गई थी।

‘X’ पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विश्व को ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ की अवधारणा से परिचित कराने और ‘लैवेंडर’ को कृषि-उद्यमिता के एक नए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने में आपके योगदान को मान्यता देते हुए, प्रतिष्ठित #राष्ट्रीयविज्ञानपुरस्कार 2025 के लिए ‘टीम अरोमा’ को बधाई… हिमालय के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी आकर्षक आजीविका की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए।”

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत अरोमा मिशन टीम को हिमालयी क्षेत्र में सुगंधित फसलों, विशेष रूप से लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर के परिणामों में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके कार्य ने जम्मू और कश्मीर के किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार खोले, आवश्यक तेलों के आयात पर निर्भरता कम की और यह प्रदर्शित किया कि समन्वित वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

इस मान्यता से राष्ट्रीय पुरस्कारों के ढांचे के केंद्र में सहयोगात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख विज्ञान को स्थान मिलता है। जम्मू-कश्मीर के भदेरवाह और गुलमर्ग कस्बों से शुरू हुई लैवेंडर की खेती और उद्यमशीलता अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की नई संरचना के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य जीवन भर की उपलब्धियों से लेकर प्रारंभिक करियर की उत्कृष्टता और टीम आधारित नवाचार तक, विज्ञान के सभी क्षेत्रों में किए गए कार्यों को मान्यता देना है। इस वर्ष का समारोह पुरस्कारों का दूसरा संस्करण था। यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक संरचित, समकालीन प्रारूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान प्रदान करने के सरकार के इरादे को रेखांकित करता है।

प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया और कई विज्ञान श्री और विज्ञान युवा पुरस्कारों ने भौतिकी, कृषि, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान को मान्यता दी गई। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ 45 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ता भी शामिल हैं, जो अनुभव और उभरती प्रतिभा दोनों पर पुरस्कार के जोर को दर्शाता है।

विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती विज्ञान श्री श्रेणी के अंतर्गत डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), डॉ. के. थंगराज (जीव विज्ञान), प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), प्रो. महान एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान), और श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह विभिन्न विषयों में उनके निरंतर और क्षेत्र-परिभाषित कार्य को उजागर करते हैं।

विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिकों के लिए है। यह नवोन्मेषी योगदान देने वाले उभरते शोधकर्ताओं को सम्मानित करता है। पुरस्कार पाने वालों में भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुरहुद श्रीकांत मोरे; कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीश गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौथिया; जीव विज्ञान में डॉ. दीपा अगाशे और श्री देबरका सेनगुप्ता; रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास; भूविज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान; इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अर्कप्रवा बसु; गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल; चिकित्सा में डॉ. सुरेश कुमार; अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में श्री अंकुर गर्ग; और प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम शामिल हैं।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका रही। इन्हें कई श्रेणियों और विषयों में मान्यता मिली। डॉ. दीपा अगाशे और प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल जैसी शोधकर्ताओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह देश के वैज्ञानिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों में देश की वैज्ञानिक प्रतिभा की गहराई और विविधता झलकती है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया है।

राष्ट्रपति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की उपस्थिति को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और इसके सार्वजनिक उपयोग को दी जाने वाली राष्ट्रीय प्राथमिकता को सुदृढ़ करने वाला माना गया। पुरस्कारों के ढांचे का उद्देश्य आयु और उपलब्धि मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके श्रेणियों, विशेष रूप से युवा वैज्ञानिक वर्ग, में स्पष्टता लाना भी है।

अरोमा मिशन को मिली मान्यता के साथ, समारोह ने रेखाकिंत किया की कैसे सरकार समर्थित वैज्ञानिक कार्यक्रम, जब स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों और टीम वर्क के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएं, तो प्रयोगशालाओं और पत्रिकाओं से परे परिणाम दे सकते हैं। भारत अपने विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर प्रभाव से जोड़ने वाले एक मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी)-2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं की सूची

 

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