सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 1 जनवरी 2026 को अपने नए लोगो और शुभंकर का अनावरण किया।
यह अनावरण सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा अपनी संस्थागत पहचान को आधुनिक बनाने, लोक संपर्क बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में आधिकारिक आंकड़ों की भूमिका को सुदृढ़ करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का नया लोगो राष्ट्र के विकास में आंकड़ों के महत्व को दर्शाता है और भारत के डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता तथा प्रगति को सुगम बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक सांख्यिकी विज्ञान से प्रेरित यह लोगो मंत्रालय के “विकास के लिए डेटा” के संदेश को दर्शाता है।
लोगो में अशोक चक्र, सत्य, पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक है। मध्य में स्थित रुपये का चिह्न आर्थिक नियोजन, नीति निर्माण और राष्ट्रीय विकास में आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। संख्याओं और प्रतीकों का उपयोग आधुनिक डेटा प्रणालियों तथा सांख्यिकी विज्ञान को दर्शाता है।
ऊपर की ओर बढ़ती विकास रेखा प्रगति को दर्शाती है और बताती है कि विश्वसनीय डेटा सतत आर्थिक विकास की कैसे सहायता करता है। केसरिया, सफेद, हरा और गहरा नीला रंग भारत के राष्ट्रीय मूल्यों – विकास, सत्य, स्थिरता, स्थायित्व और ज्ञान – का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आधिकारिक आंकड़ों के भरोसे और विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपना नया शुभंकर, “सांख्यिकी” प्रस्तुत किया है। यह एक मैत्रीपूर्ण और लोक-केंद्रित चरित्र है, जिसे देश भर के लोगों के लिए आंकड़ों को सरल, समझने योग्य और आकर्षक बनाने के लिए बनाया गया है। यह शुभंकर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के मूल मूल्यों – सटीकता, पारदर्शिता और डेटा-आधारित शासन – को दर्शाता है और आंकड़ों को इस तरह से प्रस्तुत करता है जो आम जनता के लिए समझना सरल है।
एक भरोसेमंद और बुद्धिमान आकृति के रूप में डिज़ाइन किया गया, “सांख्यिकी” जटिल सांख्यिकीय अवधारणाओं को सरल और दृश्य तरीके से समझाने में मदद करता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की सार्वजनिक पहचान के रूप में, इस शुभंकर का उपयोग राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों, जागरूकता अभियानों, शैक्षिक सामग्री, डिजिटल प्लेटफार्मों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में किया जाएगा। इसका परिचय एनएसओ सर्वेक्षणों में जनता की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और एक सुसंगत तथा पहचानने योग्य दृश्य उपस्थिति के माध्यम से आधिकारिक आंकड़ों में विश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली – रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली के रेल भवन में आयोजित बैठक में नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए घोषणा की कि असम के गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का संचालन शुरू होगा। उन्होंने बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का संपूर्ण परीक्षण, जांच और प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। जनवरी माह में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस मार्ग पर पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रेल, राष्ट्र और इसके रेल यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि 2026 में कई यात्री-केंद्रित पहल शुरू की जाएंगी और यह भारतीय रेल के लिए बड़े सुधारों वाला वर्ष होगा।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से असम राज्य के कामरूप महानगरपालिका और बोंगाई गांव और पश्चिम बंगाल के कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्वी बर्धमान, हुगली और हावड़ा जैसे जिलों को लाभ मिलेगा। ट्रेन में 16 कोच होंगे, इनमें 11 थ्री-टियर एसी कोच, 4 टू-टियर एसी कोच और 1 फर्स्ट-क्लास एसी कोच शामिल हैं। इसकी कुल क्षमता लगभग 823 यात्रियों की होगी।
श्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पूरी तरह से नए सस्पेंशन वाली एक नई बोगी विकसित की गई है। डिजाइन के मानकों को नए स्तर पर ले जाया गया है। इसके आंतरिक भाग और सीढ़ियां एर्गोनॉमिक डिजाइन पर आधारित हैं, और सुरक्षा के लिए विशेष मापदंड लागू किए गए हैं।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रात्रिकालीन यात्राओं के लिए आरामदायक, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता का अनुभव प्रदान करेगी। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की समय सारिणी इस प्रकार बनाई गई है कि यह शाम को अपने प्रस्थान स्थल से रवाना होकर अगली सुबह अपने गंतव्य पर पहुंचेगी।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को क्षेत्र विशेष व्यंजनों का आनंद मिलेगा। गुवाहाटी से शुरू होने वाली ट्रेन में प्रामाणिक असमिया व्यंजन परोसे जाएंगे, जबकि कोलकाता से शुरू होने वाली ट्रेन में पारंपरिक बंगाली व्यंजन परोसे जाएंगे। इससे रेल में आनंददायक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भोजन मिलना सुनिश्चित होगा।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की विशेषताएं:
180 किमी प्रति घंटे तक की गति वाली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन
बेहतर तकिए के साथ एर्गोनॉमिक (ऐसे उत्पाद, जो आरामदायक, सुरक्षित और कुशल हों) रूप से डिज़ाइन किए गए बर्थ
सुगम आवागमन के लिए प्रवेश द्वारों सहित स्वचालित दरवाजे
बेहतर सस्पेंशन और शोर कम करने की क्षमता के साथ बेहतर यात्रा का आनंद लें।
कवच से सुसज्जित
उच्च स्वच्छता बनाए रखने के लिए कीटाणुनाशक तकनीक
उन्नत नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियों से सुसज्जित ड्राइवर केबिन
वायुगतिकीय बाहरी बनावट और स्वचालित बाहरी यात्री दरवाजे
दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था
आपातकालीन स्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/लोको पायलट के बीच संचार के लिए आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट।
सभी कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
विद्युत कैबिनेट और शौचालयों में एरोसोल आधारित अग्नि पहचान और शमन प्रणाली से अग्नि सुरक्षा में सुधार हुआ है।
पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेल के एक नए युग की शुरुआत है। यह रात भर की यात्रा के लिए गति, आराम और आधुनिक सुविधाओं का संगम है। यह भारतीय रेल की यात्री-केंद्रित सेवाओं, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय संपर्क पर केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यात्रियों को एक सुरक्षित, तेज, सुविधाजनक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध यात्रा प्रदान करती है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 3 जनवरी, 2026 को सुबह लगभग 11 बजे राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे, जिसका शीर्षक द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन है।
यह प्रदर्शनी पहली बार उन पिपरहवा अवशेषों को एक साथ लाती है, जिन्हें एक सदी से भी अधिक समय के बाद स्वदेश वापस लाया गया है और साथ ही पिपरहवा से प्राप्त उन प्रामाणिक अवशेषों और पुरातात्विक सामग्रियों को भी प्रदर्शित करती है जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रह में संरक्षित हैं।
1898 में खोजे गए पिपरहवा के अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में एक केंद्रीय स्थान रखते हैं। ये भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से हैं। पुरातात्विक प्रमाण पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचाना जाता है जहाँ भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था।
यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत जुड़ाव को उजागर करती है और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन अवशेषों को हाल ही में स्वदेश वापस लाना निरंतर सरकारी प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से संभव हुआ है।
प्रदर्शनी को विषयगत रूप से व्यवस्थित किया गया है। इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित व्याख्यात्मक मॉडल है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों के प्रामाणिक अवशेष और स्वदेश वापस लाए गए रत्न एक साथ रखे गए हैं। अन्य सेक्शन में पिपरहवा रिविजिटेड, बुद्ध के जीवन की झलकियाँ, मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की सौंदर्यपरक भाषा, सीमाओं के पार बौद्ध कला और आदर्शों का विस्तार और सांस्कृतिक पुरावशेषों की वापसी: निरंतर प्रयास शामिल हैं।
जनसामान्य की समझ को बढ़ाने के लिए, इस प्रदर्शनी को एक व्यापक ऑडियो-विज़ुअल कॉम्पोनेंट का सहयोग मिला है, जिसमें इमर्सिव फिल्में, डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन, इंटरप्रिटिव प्रोजेक्शन और मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन शामिल हैं। ये तत्व भगवान बुद्ध के जीवन, पिपरहवा अवशेषों की खोज, उनके विभिन्न क्षेत्रों में उनकी यात्रा और उनसे जुड़ी कला परंपराओं के बारे में सुलभ और गहरी जानकारी प्रदान करते हैं।
नई दिल्ली – केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 1 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने दौरे के दौरान कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों/उपकरणों से लैस करके भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए डीआरडीओ की सराहना की करते हुए उन्होंने कहा डीआरडीओ के उपकरणों ने इस ऑपरेशन के दौरान निर्बाध रूप से काम किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।
रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस 2025 के अपने संबोधन में घोषित सुदर्शन चक्र के निर्माण में डीआरडीओ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “इस पहल के तहत डीआरडीओ अगले दशक में पूर्ण हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने के लिए जिम्मेदार है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को देखा। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को जल्द ही हासिल करने के लिए पूरी लगन से काम करेगा।”
श्री राजनाथ सिंह ने प्रौद्योगिकी के सृजन के साथ-साथ विश्वास निर्माण में डीआरडीओ की भूमिका की भी सराहना की, जिसके कारण लोग आशा, विश्वास और निश्चय के साथ इस संगठन की ओर देखते हैं। निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स के साथ बढ़ी सहभागिता से एक समन्वित रक्षा इकोसिस्टम का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा, “डीआरडीओ ने अपनी प्रणालियों, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली में लगातार सुधार किया है। खरीद से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग जगत सहभागिता से लेकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई के साथ सहयोग- कार्य को सरल, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए स्पष्ट प्रयास दिखाई देते हैं।”
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकीय इकोसिस्टम के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ते रहने और बदलते समय के अनुरूप उत्पाद लाते रहने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन से नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने वाले अधिक क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया। डीआरडीओ द्वारा गहन प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होगी, बल्कि रक्षा इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सीखने का युग है। उन्होंने कहा कि इस बदलती दुनिया में प्रौद्योगिकी स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब केवल शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया हर दिन बदल रही है। प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा नए युद्ध क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान अप्रचलित हो रहा है। हमें कभी यह नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हमें निरंतर सीखते रहना चाहिए और खुद को चुनौती देते रहना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके।”
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने चल रही अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, 2025 में संगठन की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों तथा 2026 के रोडमैप के बारे में जानकारी दी। श्री राजनाथ सिंह को 2026 के लिए निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों और संगठन की बेहतरी के लिए डीआरडीओ द्वारा किए जा रहे विभिन्न सुधारों से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री, महानिदेशक, कॉर्पोरेट निदेशक और अन्य वरिष्ठ डीआरडीओ वैज्ञानिक तथा अधिकारी भी उपस्थित थे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र प्रवास के दौरान अहिल्यानगर के बालेश्वर में कृषि विकास केन्द्र का भ्रमण कर किसानों से संवाद किया। शिवराज सिंह ने साल के अंतिम दिन खेत-खलिहान से जुड़े मुद्दों पर किसानों के साथ संवाद करते हुए कहा कि, केंद्र सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। साथ ही केन्द्रीय मंत्री हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और किसान उसके प्राण। किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने और गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। शिवराज सिंह ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
साल के पहले दिन करेंगे ग्रामीणों से चर्चा
वहीं केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने नए साल के पहले दिन, 1 जनवरी को ग्राम लोणी बुदरुक में ग्राम सभा कार्यक्रम में शामिल होंगे और ग्रामीणों से संवाद करेंगे, जहां गांवों के विकास, रोजगार, कृषि, सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर केन्द्रीय मंत्री चर्चा करेंगे।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में एमएसडीई की एसओएआर (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) पहल के तहत #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने वर्चुअली ओडिशा के रायरांगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और कौशल केंद्र का भी उद्घाटन किया।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया आकार दे रही है। यह हमारे सीखने, काम करने, आधुनिक सेवाओं तक पहुँचने और मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करने के तरीकों को बदल रही है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए एआई केवल एक प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का एक विशाल अवसर है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यही रहा है कि प्रौद्योगिकी लोगों को सशक्त बनाए, समावेशन को बढ़ावा दे और सभी के लिए अवसरों का विस्तार करे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सामाजिक, आर्थिक और प्रौद्योगिकी विभाजनों को पाटने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ सभी पृष्ठभूमि और आयु वर्ग के लोगों तक पहुंचें, विशेष रूप से वंचित समुदायों तक।
राष्ट्रपति ने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छात्र संभावनाओं और अवसरों से भरे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सदैव स्मरण रखें कि प्रौद्योगिकी, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा, चुनौतियों का समाधान खोजने तथा दूसरों को सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने एआई लर्निंग मॉड्यूल पूरा करने वाले सांसदों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में स्वयं सीखकर उन्होंने सीखने के माध्यम से नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में एआई देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), रोजगार और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश के एआई प्रतिभा भंडार के विकास में एक अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी को अपनाए, बल्कि इसके माध्यम से एक जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। उन्होंने सभी से एक विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को एक ज्ञान महाशक्ति बनाने तथा एक प्रौद्योगिकी संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में हम सभी को योगदान देना चाहिए।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भारत के कार्यबल को एआई-संचालित भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने समुद्र के बीच यात्रा पर निकले आईएनएसवी कौंडिन्य के चालक दल (क्रू) से प्राप्त एक तस्वीर पर प्रसन्नता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने टीम के उत्साह की सराहना की और देश द्वारा वर्ष 2026 के स्वागत की तैयारियों के बीच उन्हें अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा:
“आईएनएसवी कौंडिन्य की टीम से यह तस्वीर प्राप्त कर अत्यंत प्रसन्नता हुई! उनका उत्साह देखकर मन हर्षित है। जब हम सभी वर्ष 2026 का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, तो खुले समुद्र की लहरों पर सवार आईएनएसवी कौंडिन्य की टीम को मेरी विशेष शुभकामनाएं। कामना करता हूँ कि उनकी आगे की यात्रा भी हर्षोल्लास और सफलता से परिपूर्ण हो।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम उच्च गति परीक्षण रेल सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की देखरेख में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण कोटा-नागदा खंड पर किया गया और इस दौरान ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की, जो उन्नत और आत्मनिर्भर रेल प्रौद्योगिकी की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन
परीक्षण के दौरान, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किए गए, जिनमें यात्रा स्थिरता, कंपन व्यवहार, ब्रेकिंग प्रणाली का प्रदर्शन, आपातकालीन ब्रेकिंग प्रणाली, सुरक्षा प्रणाली और अन्य अहम मापदंड शामिल थे। उच्च गति पर ट्रेन का प्रदर्शन पूरी तरह संतोषजनक पाया गया और सीआरएस द्वारा परीक्षण को सफल घोषित किया गया।
रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर हाई-स्पीड ट्रायल का एक वीडियो साझा किया, जिसमें कोटा-नागदा खंड पर 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के सफल सीआरएस ट्रायल को दिखाया गया है। वीडियो में पानी से भरे गिलासों की स्थिरता का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें पानी से भरे ये गिलास तेज रफ्तार होने के बावजूद बिना छलके स्थिर रहे। यह इस नई पीढ़ी की ट्रेन की उन्नत सवारी गुणवत्ता, बेहतर सस्पेंशन और तकनीकी मजबूती को दर्शाता है।
परीक्षण में इस्तेमाल की गई 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, लंबी दूरी की यात्रा में जाने वाले मुसाफिरों को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इसमें अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, उन्नत सस्पेंशन सिस्टम, स्वचालित दरवाजे, आधुनिक शौचालय, अग्नि सुरक्षा और निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली और ऊर्जा-कुशल तकनीकें शामिल हैं। इन सुविधाओं का मकसद यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में मौजूद व्यापक तकनीकी प्रगति और सुरक्षा सुविधाएं नीचे दी गई हैं।
कवच से सुसज्जित
दुर्घटना-प्रतिरोधी और झटके-रहित अर्ध-स्थायी कपलर और एंटी-क्लाइम्बर
प्रत्येक कोच के अंत में अग्निरोधक द्वार
विद्युत कैबिनेट और शौचालयों में बेहतर अग्नि सुरक्षा के लिए एरोसोल आधारित अग्नि पहचान और शमन प्रणाली
ऊर्जा दक्षता के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली
स्वदेशी रूप से विकसित यूवी-सी लैंप आधारित कीटाणुशोधन प्रणाली से सुसज्जित एयर कंडीशनिंग इकाइयाँ
केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित प्लग द्वार और पूरी तरह से सीलबंद चौड़े गलियारे
सभी कोचों में सीसीटीवी
आपात स्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/लोको पायलट के बीच संचार के लिए आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट
दिव्यांगजन यात्रियों के लिए प्रत्येक छोर पर ड्राइविंग कोचों में विशेष शौचालय
एयर कंडीशनिंग, सैलून लाइटिंग आदि जैसी यात्री सुविधाओं की बेहतर स्थिति निगरानी के लिए केंद्रीकृत कोच निगरानी प्रणाली
ऊपरी बर्थ पर चढ़ने में आसानी के लिए एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ी
सीआरएस हाई-स्पीड ट्रायल का सफल समापन एक अहम तकनीकी उपलब्धि है और इसके साथ ही वंदे भारत स्लीपर सेवाओं की शुरुआत के लिए रास्ता साफ हो गया है। यह विकास आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत नवाचार, सुरक्षा और स्वदेशी रेल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
03 से 04 जनवरी 2026 तक रांची के खेलगांव में होगा आयोजन
देशभर के 09 उच्च न्यायालयों के 30 से ज्यादा माननीय न्यायाधीश प्रतियोगिता में लेंगे हिस्सा
रांची,01.01.2025 – माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड के तत्वावधान में 2nd All India Judges Badminton Tournament का आयोजन दिनांक 03 से 04 जनवरी 2026 तक झारखंड की राजधानी रांची में किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रांची स्थित खेल गांव परिसर के ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव इंडोर स्टेडियम में किया जाना निर्धारित है। 1st All India Judges Badminton Tournament का आयोजन 04-05 जनवरी 2025 को ओडिशा में आयोजित किया गया था।
इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न 09 उच्च न्यायालयों के 30 से ज्यादा माननीय न्यायाधीश भाग लेंगे। टूर्नामेंट का उद्देश्य न्यायपालिका से जुड़े माननीय पदाधिकारियों के बीच खेल भावना, आपसी सौहार्द, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता के सफल एवं सुचारु संचालन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। खेल गांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बैडमिंटन कोर्ट, खिलाड़ियों के विश्राम, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
प्रतियोगिता के दौरान चार श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। मेन सिंगल, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में देशभर से आए न्यायाधीश अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
टूर्नामेंट के समापन पर विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने की मुलाकात
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक ने माननीय मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर दीं नव वर्ष की शुभकामनाएं
रांची,01.01.2026 – माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड श्री हेमंत सोरेन से उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने आज शिष्टाचार मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान उपायुक्त एवं वरीय पुलिस अधीक्षक ने माननीय मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने दोनों पदाधिकारियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए रांची जिले के समग्र विकास, सुशासन एवं बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए दायित्वों के सफल निर्वहन की कामना की।
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने की मुलाकात
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने माननीय राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर दीं नव वर्ष की शुभकामनाएं
रांची,01.01.2026 – माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार से उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने आज राजभवन में शिष्टाचार मुलाकात की।
इस अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने माननीय राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। माननीय राज्यपाल ने भी दोनों पदाधिकारियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उनके दायित्व निर्वहन में सफलता की कामना की।
नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज भारत सरकार के कैलेंडर 2026 का अनावरण किया। इस अवसर पर डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि यह कैलेंडर केवल तारीखों और महीनों का वार्षिक प्रकाशन मात्र नहीं है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो भारत की परिवर्तनकारी यात्रा को दर्शाता है, गवर्नेंस की प्राथमिकताओं को उजागर करता है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर हमारे सामूहिक संकल्प को नया उत्साह प्रदान करता है।
कैलेंडर का विषय “भारत@2026: सेवा, सुशासन और समृद्धि”, एक ऐसे भारत को प्रस्तुत करता है जो अपनी पहचान के प्रति सुरक्षित है, अपनी संस्थाओं में मजबूत है और अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण में स्पष्ट है। डॉ. एल. मुरुगन ने इस बात पर जोर दिया कि यह कैलेंडर देश के आत्मविश्वास की उस भावना को दर्शाता है, जो जन-केंद्रित शासन, मजबूत सर्विस डिलीवरी और उन सुधारों पर आधारित है जिन्हें प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नागरिकों एवं सरकार के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
वर्ष 2025 में किए गए प्रमुख सुधारों का उल्लेख करते हुए, डॉ. मुरुगन ने कहा कि संरचनात्मक उपायों ने भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाया है और यह सुनिश्चित किया है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने उल्लेख किया कि नई कर व्यवस्था के तहत कर राहत, जीएसटी 2.0 को सरल बनाने, चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और केंद्रित रोजगार सृजन पहल ने उत्पादकता, जीवन की सुगमता और समावेशी समृद्धि को गति प्रदान की है।
इस अवसर पर बोलते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, श्री संजय जाजू ने कहा कि भारत सरकार का कैलेंडर वास्तव में सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है और यह एक शक्तिशाली संचार माध्यम के रूप में विकसित हुआ है, जो राष्ट्र की प्राथमिकताओं और मूल्यों को दर्शाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि “भारत@2026: सेवा, सुशासन और समृद्धि” विषय पर आधारित 2026 का यह कैलेंडर सुधार, समावेशिता और आकांक्षा के माध्यम से भारत के आत्मविश्वासपूर्ण सुदृढ़ीकरण को दर्शाता है।
कैलेंडर 2026 में बारह विषयगत मासिक पृष्ठ दिए गए हैं, जो राष्ट्रीय प्रगति के प्रमुख स्तंभों को चित्रित करते हैं और बदलते भारत की भावना को दर्शाते हैं। इनमें जनवरी का विषय ‘आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास’ है, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्वावलंबन को उजागर करता है; फरवरी का ‘समृद्ध किसान, समृद्ध भारत’ किसानों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है; मार्च का ‘नए भारत के लिए नारी शक्ति’ महिलाओं को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में सम्मानित करता है और अप्रैल का विषय ‘सरलीकरण से सशक्तिकरण’ है, जो प्रक्रियाओं के सरलीकरण और शासन सुधारों पर केंद्रित है। अन्य विषयों में मई का ‘वीरता से विजय तक: ऑपरेशन सिंदूर’ सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को नमन करता है; जून में ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ और जुलाई में ‘वंचितों का सम्मान’ समाज के सबसे कमजोर वर्गों के स्वास्थ्य, कल्याण और गरिमा पर जोर देते हैं। अगस्त का विषय ‘युवा शक्ति, राष्ट्र शक्ति’ और सितंबर का ‘गति, शक्ति, प्रगति’ युवाओं की ऊर्जा तथा फिजिकल एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दर्शाते हैं। अक्टूबर का ‘परंपरा से प्रगति तक’ और नवंबर का ‘सबका साथ, सबका सम्मान’ भारत के सभ्यतागत मूल्यों और समावेशी प्रगति के संकल्प को दोहराते हैं; तथा दिसंबर का विषय ‘विश्व बंधु भारत’ एक जिम्मेदार और विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को उजागर करता है।
श्रीमती कंचन प्रसाद, महानिदेशक (सीबीसी) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह कैलेंडर 13 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किया गया है। कैलेंडर की यह समावेशिता हर भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के नागरिकों के साथ जुड़ने के सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपर सचिव श्री प्रभात, पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की महानिदेशक श्रीमती अनुपमा भटनागर के साथ-साथ मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2026 एक समृद्ध, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत की दिशा में एक और निर्णायक कदम साबित होगा।
भारत सरकार का कैलेंडर 2026 डाउनलोड करने के लिए, नीचे दिये गये क्यूआर कोड को स्कैन करें:
नई दिल्ली – दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र रोग विभाग ने भारतीय चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए उन्नत इमेजिंग तकनीक और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी को मिलाकर भारत में पहली बार आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक संपन्न की है। नए स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रालिस सिस्टम और अत्याधुनिक 3डी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप से संचालित यह अभूतपूर्व प्रक्रिया सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं को वैश्विक नेत्र चिकित्सा देखभाल में अग्रणी स्थान पर रखती है।
ग्लूकोमा, जो अपूरणीय अंधापन का एक प्रमुख कारण है, अपनी धीमी प्रगति के कारण लंबे समय से चिकित्सकों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। यह अभूतपूर्व तकनीक जलीय द्रव प्रवाह मार्गों का अभूतपूर्व वास्तविक समय दृश्य प्रदान करती है, जिससे सर्जन सटीक और लक्षित उपचार कर सकते हैं और रोगियों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं।
देश में अपनी तरह की पहली पहल के रूप में न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी, आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी का एकीकरण ग्लूकोमा के उपचार में एक नया मानदंड स्थापित करता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान बेहतर इमेजिंग और दीर्घकालिक बेहतर परिणाम सुनिश्चित होते हैं। सशस्त्र बलों के लिए यह न केवल एक चिकित्सा उपलब्धि है बल्कि दृष्टि सुरक्षा और परिचालन तत्परता में एक रणनीतिक छलांग भी है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक कल्याण को आगे बढ़ाने में परोपकारी सोच के महत्व पर जोर दिया है।
श्री मोदी ने इस बात का उल्लेख किया कि अच्छी सोच और सकारात्मक संकल्प को बढ़ावा देने से सभी प्रयासों की पूर्ति होती है, जो इस शाश्वत संदेश को सुदृढ़ करती है कि व्यक्तिगत सद्गुण सामूहिक प्रगति में योगदान देता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्राचीन ज्ञान का संदर्भ देते हुए कहा :
“कल्याणकारी विचारों से ही हम समाज का हित कर सकते हैं।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे ने सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट खंड के विद्युतीकरण को पूरा करके इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह खंड भारतीय रेलवे नेटवर्क के सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भूभागों में से एक है।
28 दिसंबर 2025 को सफल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परीक्षण के साथ यह उपलब्धि हासिल हुई। इसके साथ ही, यह खंड अब इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के परिचालन के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस घाट खंड के विद्युतीकरण के साथ, समूचा बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग अब पूर्णतः विद्युतीकृत हो गया है। इससे क्षेत्र में रेल संपर्क, परिचालन दक्षता और स्थिरता में सुधार होगा। यह परियोजना वंदे भारत और अन्य तीव्र गति वाली इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के परिचालन को भी सक्षम बनाएगी, जिससे तटीय क्षेत्र में तेज़, स्वच्छ और अधिक विश्वसनीय यात्रा संभव हो सकेगी।
सकलेशपुर और सुब्रमण्य रोड के बीच स्थित घाट खंड का विद्युतीकरण 55 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह भूभाग अत्यंत जटिल है और रेलवे ट्रैक तक पहुँचने के लिए कोई सड़क नहीं है। इसमें 1:50 की तीव्र ढलान, 57 सुरंगें, 226 पुल और 108 कठिन मोड़ शामिल हैं। यह क्षेत्र मानसून के दौरान भूस्खलन के लिए भी अत्यधिक संवेदनशील है। इसलिए इस खंड का विद्युतीकरण करना एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग चुनौती थी।
विद्युतीकरण का कार्य दिसंबर 2023 में शुरू हुआ। इस परियोजना में पांच स्विचिंग स्टेशनों का निर्माण और पूर्ण ओवरहेड विद्युतीकरण शामिल था। सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, ट्रैक्शन पोल के बीच अधिकतम दूरी 67.5 मीटर रखी गई थी।
सुरंगों के विद्युतीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता थी। 57 सुरंगों में 427 मुख्य ब्रैकेट और 427 अतिरिक्त ब्रैकेट लगाए गए हैं। राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान और बैंगलोर विश्वविद्यालय के सहयोग से विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन किए गए। दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एंकरिंग की मजबूती की जांच करने हेतु प्रत्येक ब्रैकेट के स्थान पर पुल-आउट परीक्षण किए गए।
तीव्र ढलानों के लिए विशेष उपकरणों और मजबूत इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता थी। भारी वर्षा, भूस्खलन, मिट्टी के कटाव और चट्टान गिरने से कार्य में कई बार व्यवधान आया। कई स्थानों पर, दूरस्थ और दुर्गम स्थलों तक सामान पहुँचाने के लिए रेल परिवहन का सहारा लेना पड़ा। पूरी परियोजना के दौरान कड़े सुरक्षा उपायों का पालन किया गया। तीव्र ढलानों के कारण, परियोजना के दौरान सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करते हुए, काम को सावधानीपूर्वक योजना बनाकर पूरा किया गया।
विद्युतीकरण पूरा होने और परीक्षणों के सफल होने के साथ, घाट खंड अब पूरी तरह से इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों के लिए तैयार है। इससे ईंधन की खपत कम होगी, उत्सर्जन घटेगा और परिचालन अधिक कुशल होगा। यह क्षेत्र में वंदे भारत सेवाओं सहित आधुनिक इलेक्ट्रिक सुपरफास्ट रेल सेवाओं की शुरुआत में भी सहायक होगा।
घाट के इस महत्वपूर्ण हिस्से के विद्युतीकरण से देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु और बंदरगाह शहर मंगलुरु के साथ-साथ अन्य तटीय वाणिज्यिक केंद्रों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध मजबूत होंगे। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के शुरू होने से लोगों और व्यावसायिक यात्राओं की सुगमता बढ़ेगी, जिससे तटीय क्षेत्र में व्यापार, सेवाओं और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
इस उपलब्धि के महत्व का उल्लेख करते हुए, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णवने कहा, “अब हम इस मार्ग से मंगलुरु तक वंदे भारत ट्रेन चला सकेंगे।”
भारतीय रेलवे ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99% से अधिक हिस्से का पहले ही विद्युतीकरण कर लिया है। 2014 से पहले के लगभग छह दशकों में केवल 21,801 किलोमीटर मार्ग की तुलना में 2014 से अब तक 46,900 किलोमीटर से अधिक मार्ग का विद्युतीकरण किया जा चुका है। 2019 से 2025 के बीच लगभग 33,000 किलोमीटर मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जो लगभग जर्मनी के समूचे रेलवे नेटवर्क के बराबर है।
एक बार शेष छोटे खंडों के विद्युतीकरण पूरा होने के बाद, भारत विश्व के सबसे बड़े पूर्णतः विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क में से एक होगा। यह स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिदिन लाखों यात्रियों के लिए विश्वसनीय रेल यात्रा के प्रति भारतीय रेलवे की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नई दिल्ली – पिनाका लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर 120) का पहला उड़ान परीक्षण 29 दिसंबर, 2025 को चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस रॉकेट का परीक्षण उसकी 120 किलोमीटर की अधिकतम सीमा के लिए किया गया, जिसमें इसने योजना के अनुसार उड़ान के दौरान सभी युद्धाभ्यासों का प्रदर्शन किया। एलआरजीआर ने ‘टेक्स्टबुक प्रिसिजन’ के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार किया।
परीक्षण के दौरान तैनात किए गए सभी रेंज उपकरणों ने रॉकेट के पूरे ट्रैजेक्टरी पर नज़र रखी। इस रॉकेट को आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट द्वारा हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी के सहयोग और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी व रिसर्च सेंटर इमारत के सहयोग से डिजाइन किया गया है।
उड़ान परीक्षण का समन्वय आईटीआर और प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टेब्लिशमेंट द्वारा किया गया था। एलआरजीआर को वर्तमान में सेवा में मौजूद पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया, जो इसकी बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करता है और एक ही लॉन्चर से विभिन्न रेंज के पिनाका वेरिएंट लॉन्च करने की क्षमता प्रदान करता है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेटों का सफल डिजाइन और विकास सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाएगा और इसे उन्होंने ‘गेम चेंजर’ करार दिया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने परीक्षण का अवलोकन किया और मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सभी टीमों को बधाई दी।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का नौकयन पोत कौंडिन्य, जो भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से बनाया गया पारंपरिक नौकायन पोत है, 29 दिसम्बर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से ओमान सल्तनत के मस्कट के लिए अपनी पहली विदेशी यात्रा पर रवाना हुआ। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को एक जीवित समुद्री यात्रा के माध्यम से पुनर्जीवित करने, समझने और मनाने के प्रयासों में एक प्रमुख मील का पत्थर है।
इस पोत को औपचारिक रूप से वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान ने, भारत में ओमान सल्तनत के राजदूत महामहिम इस्सा सालेह अल शिबानी और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट मेहमानों की गरिमामयी उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
आईएनएसवी कौंडिन्य का निर्माण पारंपरिक सिलाई वाली जहाज निर्माण तकनीकों का उपयोग करके किया गया है, जिसमें प्राकृतिक सामग्री और तरीकों का इस्तेमाल किया गया है जो कई सदियों पुराने हैं। ऐतिहासिक स्रोतों और चित्रात्मक साक्ष्यों से प्रेरित, यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण, नाविकता और समुद्री नेविगेशन की समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। यह यात्रा उन प्राचीन समुद्री मार्गों का अनुसरण करती है जो कभी भारत के पश्चिमी तट को ओमान से जोड़ते थे, जिससे हिंद महासागर में व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और निरंतर सभ्यतागत बातचीत संभव होती थी।
इस अभियान से साझा समुद्री विरासत को मज़बूत करके और सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देकर भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी सुधार होने की उम्मीद है। मस्कट में आईएनएसवी कौंडिन्य का आगमन दोस्ती, आपसी विश्वास और सम्मान के स्थायी बंधन का एक शक्तिशाली प्रतीक होगा, जिसने सदियों से इन दोनों समुद्री देशों को जोड़ा है। यह यात्रा गुजरात और ओमान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को भी उजागर करती है, जो अब तक जारी सहयोग की एक विरासत को दर्शाती है।
इस अभियान के माध्यम से, भारतीय नौसेना समुद्री कूटनीति, विरासत संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आईएनएसवी कौंडिन्य की यात्रा भारत के सभ्यतागत समुद्री दृष्टिकोण और हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी समुद्री राष्ट्र के रूप में उसकी भूमिका का प्रमाण है।
कमांडर विकास शेओरान जहाज के कप्तान होंगे, जबकि कमांडर वाई हेमंत कुमार, जो इस परियोजना की शुरुआत से ही इससे जुड़े हुए हैं, अभियान के ऑफिसर-इन-चार्ज के रूप में काम करेंगे। चालक दल में चार अधिकारी और तेरह नौसैनिक शामिल हैं।
नई दिल्ली – केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन करने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को मजबूत करने हेतु आज हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के मुख्य विषयों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना, मरीज-केन्द्रित देखभाल, नियामक पर्यवेक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती के तौर पर क्षय रोग (टीबी) का उन्मूलन शामिल था।
दवाओं के मजबूत विनियमन की जरूरत पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के हेतु फार्मास्यूटिकल आपूर्ति श्रृंखला में निरंतर निगरानी अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से नियामक संबंधी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली को संस्थागत बनाने और मरीजों की संतुष्टि, नियामक संबंधी निगरानी एवं अनुपालन में सुधार को लगातार प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
मुफ्त दवाएं एवं नैदानिकी योजना के संबंध में, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मजबूत आपूर्ति-श्रृंखला प्रणाली और प्रभावी निगरानी की जरूरत को रेखांकित किया।
नैदानिकी की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि समय पर और गुणवत्तापूर्ण जांच सभी स्तर पर कारगर सवास्थ्य सेवा का आधार है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नियामक संबंधी अनुपालन में पेशेवर प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने ब्लड बैंकों, अस्पताल प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर कड़ी निगरानी रखने पर भी जोर दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में नैदानिकी संबंधी जांच की उपलब्धता बढ़ाने हेतु, प्रयोगशाला में उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मकों एवं अन्य वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एक मजबूत प्रणाली बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के अधिकारियों से यह भी कहा कि वे राज्य के हर जिला अस्पताल में अमृत रिटेल फार्मेसी स्टोर स्थापित करने हेतु एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के साथ मिलकर काम करें।
तकनीक पर आधारित स्वास्थ्य सेवा के महत्व पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि टेलीमेडिसिन, खासकर दूरदराज एवं पिछड़े इलाकों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता से संबंधित कमियों को दूर करने का एक कारगर साधन है। उन्होंने टेलीमेडिसिन की सुविधा को सक्रियतापूर्वक और कुशलता से अपनाने व लागू करने के लिए राज्य की सराहना की।
श्री नड्डा ने क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन के सरकार के संकल्प को दोहराया और जांच, नैदानिकी, इलाज का पालन तथा पोषण संबंधी सहायता पर अधिक ध्यान देते हुए लक्षित एवं जिला-स्तर पर उपायों की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्तर पर क्षय रोग की जांच को मजबूत करने के लिए एआई-आधारित एक्स-रे इकाइयां शुरू की गई हैं, जबकि दवा-प्रतिरोधी क्षयरोग सहित विभिन्न प्रकार के क्षय रोग का जल्दी पता लगाने हेतु प्रखंड स्तर पर एनएएटी मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। सामुदायिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि हरियाणा के 350 से अधिक माय भारत स्वयंसेवक नि-क्षय मित्र पहल में शामिल हुए हैं और उन्होंने मनोवैज्ञानिक-सामाजिक सहायता के साथ-साथ लगातार सामुदायिक स्तर पर जागरूकता पैदा करने हेतु क्षय रोग के मरीजों के साथ उनके प्रभावी जुड़ाव को सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जिला और प्रखंड स्तर पर कड़ी निगरानी के साथ मिशन मोड में क्षय रोग के उन्मूलन का कार्य किया जाना चाहिए।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित करने का आह्वान किया ताकि जिला परिषदों तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) के साथ नियमित जुड़ाव को बढ़ावा दिया जा सके और समीक्षा तंत्र को मजबूत किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं के नतीजों को बेहतर बनाने, जवाबदेही और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जनता का भरोसा बढ़ाने हेतु जन भागीदारी बेहद जरूरी है।
पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए, हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कार्यान्वयन को मजबूत बनाने और पूरे राज्य में स्वास्थ्य संबंधी बेहतर नतीजे देने हेतु केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम करती रहेगी।
केन्द्र-राज्य सहयोग पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने एनएचएम से जुड़े कदमों, पीपीपी मॉडल, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग) और आधुनिक एवं किफायती स्वास्थ्य सेवा देने हेतु अवसंरचना संबंधी सहयोग के जरिए हरियाणा को केन्द्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केन्द्र राज्य को सभी जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण एवं सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण के तहत आने वाले दिनों में दूसरे राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की परामर्श बैठकें की जाएंगी। श्री नड्डा ने पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्रियों से मुलाकात की थी।
बैठक का समापन दवाओं के विनियमन को मजबूत करने, नैदानिकी सेवाओं को बेहतर बनाने, अस्पताल प्रशासन को पेशेवर बनाने, चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने और क्षय रोग के उन्मूलन की दिशा में प्रगति को तेज करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को रेखांकित करता है।
हरियाणा राज्य की ओर से इस बैठक में हरियाणा सरकार की माननीया स्वास्थ्य मंत्री सुश्री आरती सिंह राव; अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) श्री सुधीर राजपाल; खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त श्री मनोज कुमार; राज्य औषधि नियंत्रक श्री ललित गोयल; स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव; पं. नेकी राम शर्मा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, भिवानी के निदेशक डॉ. धीरज परिहार; चिकित्सा शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. मालती; संयुक्त आयुक्त (खाद्य) श्री पृथ्वी सिंह; और पं. नेकी राम शर्मा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, भिवानी, हरियाणा के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार सिहमार शामिल हुए।
इस बैठक में केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; अतिरिक्त सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ. विनोद कोटवाल; अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक (एनएचएम) सुश्री आराधना पटनायक; भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रजित पुन्हानी; और भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी सहित केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज असम के नगांव जिले में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की जन्मस्थली बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का लोकार्पण किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल और विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वर्षों से घुसपैठियों के कब्जे में रहे नगांव में विश्व प्रसिद्ध श्रीमंत शंकरदेव जी के जन्म-स्थान को खाली करा कर उसे फिर से विकसित करने का काम आज पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी ने जन्म लिया और जहां से नव-वैष्णव धर्म को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में धर्म के रूप में प्रचारित करने का काम किया, उस नगांव की भूमि पर आना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी बात है। श्री शाह ने भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई जी का स्मरण करते हुए कहा कि अगर वे नहीं होते तो हमारा असम और पूरा उत्तर-पूर्व भारत का हिस्सा न होता। गोपीनाथ जी ने असम को भारत में रखने के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री को मजबूर कर दिया।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बटाद्रवा थान में महापुरुष शंकरदेव जी का आविर्भाव क्षेत्र भी बनाया गया है। जहां महापुरुष शंकरदेव जी का जन्म हुआ, वहाँ सदियों तक नव वैष्णव धर्म का डंका बजा है। उन्होंने कहा कि इस स्थान का निर्माण तीन फेज में किया गया। इसमें ₹222 करोड़ से अधिक की लागत आई और 162 बीघा भूमि पर यह निर्माण कार्य किया गया। श्री शाह ने कहा कि इसमें सभी नव वैष्णव धर्म की परंपराओं को जमीन पर उतारने का काम किया गया है। श्रीमद भागवत के सभी धार्मिक चिह्नों का बहुत बारीकी से अध्ययन कर उन्हें मूर्त रूप देने का काम किया गया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि बटाद्रवा थान कोई साधारण स्थान नहीं रहा; यह अब हमें 500 वर्षों की विरासत से जोड़ने वाला पवित्र तीर्थस्थल बन चुका है। गृह मंत्री ने कहा कि 26 दिसंबर 2020 को इसका भूमिपूजन भी उन्हीं के हाथों हुआ था और इसके लोकार्पण का सौभाग्य भी उन्हें ही प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने नव-वैष्णव धर्म की स्थापना करके पूरे पूर्वोत्तर भारत में इसे प्रस्थापित करने का महान कार्य किया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भागवत में बताए गए मार्गों पर ईश्वर की भक्ति करना, अच्छा जीवन जीना तथा धर्म के आधार पर इस देश को अपनी मातृभूमि मानकर चलने का संदेश श्रीमंत शंकरदेव जी ने दिया। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान केवल एक पूजाघर और नामघर ही नहीं है, बल्कि यह असमिया सद्भाव का जीवंत प्रतीक है। श्री शाह ने कहा कि यह स्थान असम की साझा संस्कृति को आगे बढ़ाने वाला केन्द्र और सामूहिक भक्ति का भी स्थान बनेगा। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी की ‘एकशरण नाम धर्म’ परंपरा को आगे बढ़ाने में यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महापुरुष शंकरदेव जी ने हमें मानवता और मातृभूमि दोनों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह युग धन्य है, मानव जीवन स्वयं में महान है और भारत-भूमि में जन्म लेना सबसे बड़े सौभाग्य की बात है।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारत को तोड़ने की चाह रखने वालों को श्रीमंत शंकरदेव जी ने 500 साल पहले ‘एक भारत’ का संदेश दिया था, जिसे आज हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकरदेव जी के पवित्र स्थान पर घुसपैठिए कब्जा कर बैठे थे, क्या यह ठीक था? श्री शाह ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा को हृदय से बधाई दी कि उन्होंने इन पवित्र स्थानों से घुसपैठियों को निकालकर नाम घर की पुनः स्थापना का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरे असम में जारी है। राज्य में 1.29 लाख बीघा से अधिक भूमि घुसपैठियों से मुक्त कराई गई है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में भी घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया था, लेकिन असम सरकार ने उन्हें खदेड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने वर्षों तक इन घुसपैठियों को संरक्षण दिया। विपक्षी पार्टियां असम की संस्कृति की बात तो करती थीं, लेकिन 1983 में Illegal Migrants Determination by Tribunals (IMDT) कानून लाकर उन्होंने घुसपैठियों को यहां बसने का कानूनी रास्ता दे दिया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि हम न केवल असम, बल्कि पूरे देश से चुन-चुनकर घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि असम की संस्कृति इन घुसपैठियों के दबाव में दबती जा रही थी, लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में यहां हिमंत बिस्वा सरमा ने इस संस्कृति को घुसपैठियों के प्रभाव से मुक्त कराया है। आज मृदंग और ताल की आवाज के साथ नामघर में भक्ति संगीत गूंजता है।
श्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष की सरकार इतने साल रही, लेकिन उन्होंने असम आंदोलन के शहीदों के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन राज्य की मौजूदा सरकार ने असम आंदोलन के शहीदों की याद में भव्य ’शहीद स्मारक क्षेत्र’ का निर्माण किया है। असम की जनता 70 साल की ऐसी उपेक्षा कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर-पूर्व और विशेषकर असम के विकास के लिए मोदी जी के नेतृत्व में 11 प्रकार के विकास कार्य हुए हैं। असम में पहले पांच साल सर्बानंद सोनोवाल जी के नेतृत्व में और अब पांच साल हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, पिछले 10 वर्ष असम के विकास के लिए स्वर्णकाल साबित होंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी जी कुल मिलाकर उत्तर-पूर्व में 80 बार और असम में 11 साल में 36 बार आए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व और असम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले यदि कोई व्यक्ति हैं, तो वह हमारे मोदी जी हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री को असम से राज्यसभा भेजा था, लेकिन 10 साल में वे असम केवल 7 बार आए, जिनमें से दो बार तो सिर्फ राज्यसभा का पर्चा जमा करने आए थे। उनके लिए असम का पुनर्निर्माण, असम की संस्कृति, असम का विकास और असम की शांति सिर्फ भाषणों का मुद्दा रही। श्री शाह ने कहा कि सालों से असम में कई प्रकार के आंदोलन हुए, हमारे युवा हाथ में बंदूक लेकर खून की नदियाँ बहाते रहे। लेकिन भारत सरकार ने मोदी जी के नेतृत्व में 2020 में बोडो समझौता किया, 2021 में कार्बी समझौता किया, 2022 में आदिवासी समझौता किया, 2023 में DNLA समझौता किया और 2023 में ही ULFA समझौता किया। उन्होंने कहा कि पहले बम धमाकों से गूंजने वाले असम में आज श्रीमंत शंकरदेव जी के नाम-स्मरण से हमारे कान पवित्र हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इन 11 सालों में असम और पूर्वोत्तर की शांति के लिए श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई कदम उठाए हैं, और ये सभी समझौते सिर्फ कागज पर नहीं रहे—पांचों समझौतों में शामिल 92 प्रतिशत मुद्दे क्लियर हो चुके हैं। एक बार और हमारी सरकार बनी, तो हम शत-प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर देंगे।
श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ढेर सारे कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज 11 हजार से अधिक कलाकारों ने एक साथ बीहू नृत्य किया, जिसे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया देख रही है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ‘चराईदेव मोइदम’ को शामिल कराकर विश्व भर के पर्यटकों को असम लाने का कार्य किया गया है। लचित बरफुकन को पहले केवल असम जानता था, लेकिन मोदी जी ने उन्हें पूरे देश में पहुँचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि पहले लचित बरफुकन जी की वीरगाथा असम तक सीमित थी, हमारी सरकार ने उनकी जीवन गाथा को 23 भाषाओं में देश-दुनिया तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि ‘गमोसा’ को जीआई टैग दिलाने का काम भी मोदी जी और श्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने किया है। 16वीं शताब्दी का ‘वृंदावनी वस्त्र’, जिस पर वृंदावन में श्रीकृष्ण के बचपन के जीवन के सारे प्रसंग उकेरे जाते हैं और जिसे एक प्रकार से श्रीमंत शंकरदेव ने डिज़ाइन किया था, उस वस्त्र को भी प्रदर्शनियों के माध्यम से पूरे देश में लोकप्रिय बनाने का काम मोदी जी ने किया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि असम का बोगीबील ब्रिज आज देखने के लिए पूरी दुनिया उमड़ पड़ती है। हमने 7 हजार करोड़ रुपये से असम में एनएच-715 के 85 किलोमीटर कालीबोर-नुमालिगढ़ सेक्शन को चार लेन बनाने का काम किया। 3,400 करोड़ रुपये से सिलचर-चुराईबाड़ी कॉरिडोर को स्वीकृत किया। 22,864 करोड़ रुपये से मेघालय से असम के पंचग्राम तक 166.80 किलोमीटर रोड को स्वीकृत किया। 6 हजार करोड़ रुपये से भारत के सबसे बड़े रेल-सड़क बोगीबील पुल का निर्माण पूरा किया गया। 5 हजार करोड़ रुपये से ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लेन का दुबरी-फुलबाड़ी पुल शुरू हो चुका है। 2,000 करोड़ रुपये से ढोला-सदिया पुल का निर्माण 2017 में पूरा किया गया। North East Special Infrastructure Development Scheme (NESIDS) के तहत 646 करोड़ रुपये से 19 सड़क और पुल की योजनाएँ शुरू की। ब्रह्मपुत्र पर छह लेन का एक अन्य पुल बन रहा है। रेलवे, एयरवेज और कई जलमार्गों के माध्यम से भी असम की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 8 हजार करोड़ रुपये खर्च कर भारत सरकार ने जलमार्ग विकास परियोजना के तहत देशभर के यात्रियों को असम तक जलमार्ग से लाने का काम किया है। लचित बरफुकन की 84 फीट ऊँची प्रतिमा बन चुकी है। भारत में निर्मित पहला स्वदेशी क्रूज ‘एमवी गंगा विलास’ वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक यात्रा कर चुका है। AIIMS सहित कई मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई है, नवोदय विद्यालय खोले गए हैं। मोदी जी ने लगभग 1,123 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 750 बेड वाला AIIMS असम में समर्पित किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि असम में 27 हजार करोड़ रुपये के लागत से टाटा का सेमिकंडक्टर यूनिट स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड (BVFCL) के परिसर में नया अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स 10,601 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है, जिसकी क्षमता ₹11 हजार करोड़ से 13 लाख मेट्रिक टन यूरिया उत्पादन प्रतिवर्ष होगी। साथ ही ढेर सारी प्राइवेट इंडस्ट्रीज असम में आ रही हैं। उन्होंने कहा कि असम अब आंदोलनों की जगह विकास की भूमि बन चुका है। दिल्ली में एक समय असम को समस्या खड़ी करने वाला राज्य माना जाता था, लेकिन आज असम पूरे पूर्वोत्तर का ग्रोथ इंजन बनकर देश को विकास के रास्ते पर ले जा रहा है। यह परिवर्तन पिछले 11 साल में मोदी जी की सरकार और असम में उनकी पार्टी की सरकार के दस साल के कार्यकाल में आया है। श्री शाह ने कहा कि विपक्ष ने घुसपैठियों को घुसाया, वोट बैंक बढ़ाने के लिए असम की संस्कृति का हनन किया, असम के संस्कारों, साहित्य, परंपराओं और राज्य की पूरी संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का काम किया। श्री अमित शाह ने राज्य के लोगों से अपील की कि वे एक बार और उनकी पार्टी की सरकार को मौका दें, हमारा यह संकल्प है कि हम असम को घुसपैठियों से पूरी तरह मुक्त करा देंगे। जो लोग घुसपैठियों को वोट बैंक समझते हैं, वे यह नहीं कर सकते। श्री शाह ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए और असम की संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में एक नागरिक अभिनंदन समारोह को संबोधित किया और स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत एक आवासीय परियोजना का उद्घाटन किया, जिसमें उन्होंने 216 नए बने घरों की चाबियां लाभार्थियों को सौंपी, और समावेशी व स्थायी शहरी विकास के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
यह नागरिक अभिनंदन समारोह पुदुचेरी के विभिन्न संगठनों की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें पुदुचेरी नागरिक मंच के सदस्य, धार्मिक नेता, और अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, वाणिज्य और कारीगर संघों, बार काउंसिल और होटल संघों के प्रतिनिधि शामिल थे, और यह आयोजन उपराष्ट्रपति जी के पद संभालने के बाद पहली यात्रा के मौके पर किया गया था, इससे पहले वे पुदुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके हैं।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने अपने उपराज्यपाल के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल को याद किया और केंद्र शासित प्रदेश को अनूठी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व वाली भूमि बताया। रोमन दुनिया के साथ भारत के समुद्री संबंधों को दर्शाने वाले अरिकामेडु के प्राचीन बंदरगाह का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि पुदुचेरी हमेशा एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर दुनिया के लिए खुला रहा है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ऐतिहासिक कीझूर जनमत संग्रह का जिक्र किया, जहां भारी बहुमत ने पुदुचेरी के भारत में विलय के पक्ष में मतदान किया, जो लोगों की गहरी देशभक्ति और स्वतंत्रता की इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।
आवासीय परियोजना के जल्दी पूरा होने पर संतोष जताते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि घर केवल एक भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का जरिया है। उपराज्यपाल के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस परियोजना पर करीब से नजर रखी थी।
उपराष्ट्रपति जी ने कुमारगुरु पल्लम साइट पर सौंपे गए घरों का दौरा भी किया और लाभार्थियों से बातचीत की, जिन्होंने परियोजना को जल्दी पूरा करवाने के लिए उनका धन्यवाद किया।
भारत सरकार की कल्याणकारी पहलों पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का जिक्र किया, और कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली ने पारदर्शिता और सहायता की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की है।
उन्होंने “सभी के लिए आवास” के मिशन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुदुचेरी सरकार के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
इसके बाद, भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में पेटिट सेमिनार सीबीएसई स्कूल के सीनियर सेकेंडरी ब्लॉक का उद्घाटन किया। उन्होंने संस्थान की 181 साल पुरानी विरासत पर आधारित संपूर्ण शिक्षा और मूल्य-आधारित अध्यापन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
शिक्षा को एकमात्र अविनाशी संपत्ति बताते हुए, उपराष्ट्रपति जी ने छात्रों से ज्ञान को गहराई, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ हासिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी के मेल से बनेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बदलाव लाने वाले असर पर भी जोर दिया, जिसने भारत की शिक्षा प्रणाली को रटने की बजाय आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और सर्वांगीण विकास की ओर मोड़ा है।
बाद में, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुदुचेरी में भारतीयार मेमोरियल में महाकवि सुब्रमण्यम भारतीयार की प्रतिमा का अनावरण किया, और उस महान कवि को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने निडर शब्दों, क्रांतिकारी विचारों और तमिल व भारत के प्रति असीम प्रेम से एक राष्ट्र को जगाया।
गहरी प्रसन्नता जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि उस धरती पर मूर्ति का अनावरण किया जा रहा है, जहां महाकवि सुब्रमण्य भारती ने लगभग एक दशक तक स्वतंत्र विचार और रचनात्मक प्रतिभा के साथ जीवन बिताया। उन्होंने कहा कि पुदुचेरी में भारतीयार के साल, जो गहरी दार्शनिक खोज और ज्ञान की तलाश से भरे थे, उन्हें आधुनिक तमिल साहित्य का सुनहरा दौर माना जाता है।
इस कार्यक्रम में पुदुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी, जन प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य शामिल हुए।
नई दिल्ली – देश में सार्वजनिक सेवा वितरण को पुनर्परिभाषित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम उठाते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (आईसीसीएफजी) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। आज नई दिल्ली में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) ईपीएफओ अधिकारियों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता के साथ नैतिक नेतृत्व और नैतिक अखंडता को एकीकृत करने हेतु एक व्यापक ढांचे को संस्थागत रूप देता है।
इस समझौता ज्ञापन पर पीडीयूएनएएसएस के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-प्रथम श्री राम आनंद और आईसीसीएफजी के महासचिव श्री शांति नारायण ने पीडीयूएनएस के निदेशक श्री कुमार रोहित की उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस समारोह में आईसीसीएफजी के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें उपाध्यक्ष श्री महेश कपूर और भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री बलविंदर कुमार और श्री अनुराग गोयल शामिल थे। इस मौके पर वरिष्ठ सदस्य ब्रिगेडियर राजेंद्र कुमार, श्री राजीव सचदेवा, श्री सुनील कुमार, सुश्री अर्चना दुबे, श्री विनोद के. मौर्य और सुश्री रणनाही द्विवेदी भी उपस्थित थे। पीडीयूएनएस प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त श्री प्रशांत शर्मा, श्री हरीश यादव और श्री अंकुर पी. गुप्ता शामिल थे।
यह गठबंधन एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर किया गया है, जब ईपीएफओ द्वारा व्यापक “ईज़ ऑफ लिविंग” सुधारों और डिजिटल परिवर्तनों को लागू किया जा रहा है, जिसके लिए ऐसे कार्यबल की आवश्यकता है जो न केवल डिजिटल रूप से कुशल हो, बल्कि नैतिक रूप से सुदृढ़ भी हो।
‘भविष्य के लिए तैयार’ सिविल सेवा हेतु एक रणनीतिक गठबंधन
इस सहयोग का उद्देश्य नियम-आधारित अनुपालन से हटकर भूमिका-आधारित नैतिक दक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हुए “मिशन कर्मयोगी” की परिकल्पना को साकार करना है। यह लाखों भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सहानुभूति की बढ़ती आवश्यकता को संबोधित करता है।
पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने इस साझेदारी की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत के सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में परिवर्तनकारी सुधारों के बीच ईपीएफओ की जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में हमारे अधिकारियों को केवल प्रक्रियात्मक दक्षता ही नहीं, बल्कि नैतिक योग्यता की भी आवश्यकता है। आईसीसीएफजी के साथ यह गठबंधन मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देगा, जिससे ऐसे सिद्धांतनिष्ठ नेतृत्वकर्ता तैयार होंगे जो संस्थागत विश्वसनीयता और जन-विश्वास को बनाए रखेंगे। हम कौशल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं।”
संरचित प्रशिक्षण व्यवस्था
यह समझौता ज्ञापन एक स्तरीय वार्षिक प्रशिक्षण ढांचा स्थापित करता है। इसमें समूह ‘ए’ के अधिकारियों के लिए आईसीसीएफजी केंद्रों में नेतृत्व और नीति पर केंद्रित विशेष आवासीय कार्यक्रम और समूह ‘बी’ के अधिकारियों के लिए पीडीयूएनएएसएस में पेशेवर आचरण और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर केंद्रित समर्पित परिसर-आधारित प्रशिक्षण शामिल है। यह खंडित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि निर्णय लेने वालों से लेकर फील्ड फोर्स तक संपूर्ण कार्यबल उत्तरदायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए सुसज्जित हो।
सार्वजनिक शक्ति के लिए आंतरिक संरेखण
आईसीसीएफजी के अध्यक्ष, पूर्व कैबिनेट सचिव और झारखंड के पहले राज्यपाल श्री प्रभात कुमार ने इस पहल के दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सत्यनिष्ठा एक निजी सद्गुण और एक सार्वजनिक शक्ति दोनों है। हम अधिकारियों से कर्तव्य और अंतरात्मा के बीच आंतरिक सामंजस्य स्थापित करने का आग्रह करते हैं। जब कोई सिविल सेवक नैतिक समन्वय के साथ कार्य करता है, तब शासन एक दायित्व न रहकर सेवा बन जाता है। यह साझेदारी प्रत्येक अधिकारी के भीतर निहित ‘कर्मयोगी’ को जागृत करने के बारे में है।”
सुधारों की पृष्ठभूमि
यह पहल ईपीएफओ द्वारा 2025 में शुरू किए गए हालिया परिचालन सुधारों, जिनमें सरलीकृत निकासी ढांचा और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली शामिल है, का पूरक है। जैसे-जैसे संगठन स्वचालन के माध्यम से मैन्युअल प्रक्रियाओं को कम कर रहा है, जटिल मामलों में विवेकाधीन शक्तियों के प्रयोग हेतु उच्च नैतिक विवेक की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। पीडीयूएनएएसएस-आईसीसीएफजी साझेदारी यह सुनिश्चित करती है कि शासन का मानवीय पहलू डिजिटल पहलू के साथ तालमेल बनाए रखे।
संस्थानों के बारे में
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) के बारे में: पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला प्रमुख शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान है। अधिकारियों के सतत व्यावसायिक विकास को सुगम बनाने के उद्देश्य से स्थापित यह अकादमी नए श्रम संहिताओं तथा डिजिटल इंडिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप मानव संसाधनों को संरेखित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आईसीसीएफजी के बारे में: आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (आईसीसीएफजी) एक प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संस्था है, जो लोक प्रशासन के नैतिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित है। कार्यकारी शिक्षा और नीतिगत संवाद के माध्यम से यह संस्था आईएएस अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नेतृत्व सहित वरिष्ठ सिविल सेवकों के लिए उच्च-प्रभावशाली कार्यक्रम संचालित करती है। इसके “लोक शासन में नैतिकता” मॉड्यूल अपनी व्यावहारिक प्रासंगिकता और परिवर्तनकारी क्षमता के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त हैं।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने तीनों सेनाओं से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों, जिनकी कुल लागत लगभग 79,000 करोड़ रुपए है, के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान कर दी है। 29 दिसंबर, 2025 को हुई बैठक में भारतीय सेना के लिए आर्टिलरी रेजिमेंट हेतु लॉइटर मुनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (एमआरएलएस) के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट गोला बारूद तथा एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली एमके-II की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई।
सामरिक लक्ष्यों पर सटीक हमले के लिए लोइटर मुनिशन का उपयोग किया जाएगा, जबकि लो लेवल लाइट वेट रडार छोटे आकार के, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मानवरहित हवाई प्रणालियों (एमआरएलएस) का पता लगाकर उन पर नज़र रखेंगे। लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट पिनाका एमआरएलएस की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाएंगे, जिससे उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकेगा। उन्नत मारक क्षमता वाली एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली एमके-II सामरिक युद्ध क्षेत्र और भीतरी इलाकों में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण संपत्तियों की रक्षा करेगी।
भारतीय नौसेना को बोलार्ड पुल (बीपी) टग्स, उच्च आवृत्ति सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एचएफ एसडीआर) मैनपैक और पट्टे पर हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज (एचएएलई) रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस) की खरीद के लिए एओएन प्रदान किया गया। बीपी टग्स के शामिल होने से नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को संकरे जलक्षेत्र/बंदरगाहों में बर्थिंग, अनबर्थिंग और युद्धाभ्यास में सहायता मिलेगी। एचएफ एसडीआर बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशन के दौरान लंबी दूरी के सुरक्षित संचार को बढ़ाएगा, जबकि एचएएलई आरपीएएस हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही तथा विश्वसनीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता सुनिश्चित करेगा।
भारतीय वायु सेना के लिए स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, एस्ट्रा एमके-II मिसाइलें, फुल मिशन सिमुलेटर और एसपीआईसीई-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट आदि की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई। स्वचालित टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम के शामिल होने से लैंडिंग और टेक-ऑफ की उच्च-स्तरीय, हर मौसम में स्वचालित रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराकर एयरोस्पेस सुरक्षा वातावरण में मौजूद कमियों को दूर किया जा सकेगा। बढ़ी हुई रेंज वाली एस्ट्रा एमके-II मिसाइलें लड़ाकू विमानों की क्षमता को बड़े स्टैंडऑफ रेंज से दुश्मन के विमानों को बे-असर करने के लिए बढ़ाएंगी। हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए फुल मिशन सिमुलेटर पायलटों के प्रशिक्षण को किफायती और सुरक्षित तरीके से बेहतर बनाएगा, जबकि एसपीआईसीई-1000 भारतीय वायु सेना की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को बढ़ाएगा।
नई दिल्ली – उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा 11 निजी संस्थाओं को 12 सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (जीएटीसी) प्रमाणपत्र प्रदान करना महत्वपूर्ण कदम है। इससेसंरचित सार्वजनिक-निजी भागीदारी ढांचे के माध्यम से देश के कानूनी माप सत्यापन तंत्र को मजबूती मिली है । माननीय केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने ये प्रमाणपत्र 24 दिसंबर 2025 को प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा भी उपस्थिति रहे।
यह ऐतिहासिक कदम देश की कानूनी माप प्रणाली में एक क्रांतिकारी सुधार का प्रतीक है, इसके तहत सत्यापन क्षमता को सार्वजनिक क्षेत्र से आगे बढ़ाकर योग्य निजी संस्थाओं की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाया गया है। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उपभोक्ता लेन-देन में प्रयुक्त वजन और माप की सटीकता और विश्वसनीयता को मजबूत करना, साथ ही व्यापार करने में सुगमता और नियामक दक्षता में सुधार करना है।
23 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित कानूनी मापन (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन किया गया था और अब निजी संस्थाओं को सरकारी मापन केंद्रों (जीएटीसी) के रूप में मान्यता दी गई है । संशोधित नियमों ने जीएटीसी के दायरे को काफी हद तक विस्तारित किया है और निर्धारित तकनीकी मानदंडों को पूरा करने वाली निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम तौर-तरीकों के अनुरूप वजन और मापन उपकरणों के सत्यापन और पुनः सत्यापन का कार्य करने में सक्षम बनाया है।
अब 18 श्रेणियों के उपकरणों को शामिल किया गया है।
संशोधित ढांचे के तहत अब वजन और माप उपकरणों की 18 श्रेणियां शामिल की गई हैं। यह स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और उपभोक्ता सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रही तकनीकी और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इनमें शामिल हैं:
पानी के मीटर, ऊर्जा मीटर, गैस मीटर
प्रवाह मीटर, नमी मीटर
स्फिग्मोमैनोमीटर और क्लिनिकल थर्मामीटर
सांस विश्लेषक और वाहन गति मीटर
बहुआयामी मापन उपकरण
स्वचालित रेल वजन पुल
टेप मापक यंत्र, गैर-स्वचालित वजन मापने के उपकरण
लोड सेल, बीम स्केल, काउंटर मशीनें
सभी श्रेणियों का भार
संशोधित नियमों की अधिसूचना के बाद, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने जीएटीसी मान्यता के लिए पात्र निजी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। आवेदन प्रक्रिया 30 नवंबर 2025 तक खुली रही। इससे पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित हुई और इसके परिणामस्वरूप त्वरित अनुमोदन और बेहतर सेवा वितरण संभव हुआ।
निजी जीएटीसी को मान्यता मिलने से सत्यापन सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होने, प्रक्रिया में लगने वाले समय में कमी आने और देश भर के निर्माताओं, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए तेजी से अनुपालन सुनिश्चित होने की उम्मीद है। वजन मापने की मशीन, पानी के मीटर और ऊर्जा मीटर जैसे उपभोक्ता-उन्मुख उपकरणों का नियमित और विकेंद्रीकृत सत्यापन त्रुटियों को कम करेगा। इससे उपभोक्ताओं को दैनिक लेन-देन में पूरा लाभ मिलना और बाजार में विश्वास मजबूत होना सुनिश्चित होगा।
यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप है । यह घरेलू तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठाती है और निजी संस्थाओं को एक समान, पारदर्शी और विनियमित ढांचे के भीतर भारत के विस्तारित सत्यापन नेटवर्क में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।
क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (आरआरएसएल) और राष्ट्रीय परीक्षण गृह (एनटीएच) प्रयोगशालाओं को जीएटीसी के रूप में निरंतर मान्यता मिलने से एक मजबूत राष्ट्रव्यापी सत्यापन प्रणाली सुनिश्चित होती है। सत्यापन गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से, यह सुधार राज्य विधिक मापन विभागों के लिए एक बल गुणक के रूप में कार्य करता है। इससे विधिक मापन अधिकारी निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
इन सुधारों के माध्यम से, सरकार वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और भविष्य के लिए तैयार कानूनी माप प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के अनुरूप है। इससे उपभोक्ता विश्वास, नियामक दक्षता और व्यापार में निष्पक्षता मजबूत होती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड की झलकियां साझा कीं।
नई दिल्ली – श्री मोदी ने एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में कहा:
“140 करोड़ भारतीयों की शक्ति और कौशल की बदौलत, हमारे देश ने 2025 में विभिन्न सेक्टरों में बहुत कुछ अर्जित किया है।”
#MannKiBaat
“विकसित भारत युवा नेता संवाद राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने का एक शानदार मंच है। मैं 12 जनवरी 2026 को इस कार्यक्रम में भाग लेने और हमारे युवा शक्ति के विचारों और सुझावों को सुनने के लिए उत्सुक हूं।”
#MannKiBaat
“स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन हमारे युवाओं और नवोन्मेषकों को प्रमुख राष्ट्रीय और सामाजिक चुनौतियों के समाधान प्रदान करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।”
#MannKiBaat
“भारत के युवा सतत विकास के प्रति असीम उत्साह प्रदर्शित कर रहे हैं। इस संदर्भ में, मणिपुर के मोइरांगथेम सेठ द्वारा सौर ऊर्जा का उपयोग करके समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों की सराहना की।”
#MannKiBaat
“अगले महीने हम पार्बती गिरि जी की जन्म शताब्दी मनाएंगे, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया और गरीबों एवं हाशिए पर रहने वाले लोगों के उत्थान पर भी ध्यान केंद्रित किया। आज मन की बात के दौरान हमने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।”
#MannKiBaat
“रण पुकार रहा है!”
कच्छ आइए और रण उत्सव का आनंद लीजिए।
आइए, लोक परंपराओं की लय, स्थानीय शिल्प कौशल की प्रतिभा और कच्छ की शाश्वत सुंदरता के साक्षी बनें।
#MannKiBaat
“दुबई में एक सराहनीय प्रयास को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच खूबसूरत कन्नड़ भाषा को लोकप्रिय बनाना है।”
#MannKiBaat
“नरसपुरम में किए गए इस प्रयास ने स्थानीय लेस शिल्प को पुनर्जीवित किया है और इस प्रकार कई लोगों को सशक्त बनाया है।”
#MannKiBaat
“ದುಬೈನಲ್ಲಿ ನೆಲೆಸಿರುವ ಭಾರತೀಯ ಅನಿವಾಸಿಗಳು, ಸುಂದರವಾದ ಕನ್ನಡ ಭಾಷೆಯನ್ನು ಜನಪ್ರಿಯಗೊಳಿಸಲು ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಶ್ಲಾಘನೀಯ ಪ್ರಯತ್ನದ ಬಗ್ಗೆ ಒತ್ತಿ ಹೇಳಿದೆ”
#MannKiBaat
“నరసాపురంలో చేపట్టిన ఈ ప్రయత్నం స్థానిక లేస్ క్రాఫ్ట్ కు మళ్లీ ప్రాణం పోసి అనేక మందికి సాధికారత చేకూర్చింది…”
“फिजी में तमिल भाषा की लोकप्रियता बढ़ते देखना अच्छा लगता है, यह एक ऐसा राष्ट्र है जिसके साथ हमारे मजबूत सांस्कृतिक संबंध हैं।”
#MannKiBaat
“काशी के लोगों के बीच तमिल भाषा की लोकप्रियता को बढ़ते हुए देखना उत्साहजनक है, जो काशी तमिल संगमम के दौरान स्पष्ट रूप से देखा गया।”
#MannKiBaat
“நாம் வலுவான கலாச்சாரத் தொடர்புகளைக் கொண்டுள்ள நாடான ஃபிஜியில் தமிழ் பிரபலம் அடைவதைக் காண்பதும் மகிழ்ச்சி அளிக்கிறது.”
#MannKiBaat
“காசி தமிழ் சங்கமத்தின் போது, காசி மக்களிடையே தமிழ் பிரபலமடைந்து வருவது தெளிவாகக் காணப்பட்டது. இது மனநிறைவைத் தருகிறது.”
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“बारामूला के जेहनपोरा का बौद्ध परिसर बताता है कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान कितनी प्राचीन और समृद्ध रही है। यहां के बौद्ध स्तूपों का पता जिस तरह से चला, उसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है!”
#MannKiBaat
“भारत से हजारों किलोमीटर दूर फिजी हो या फिर हमारी काशी, यहां जिस तरह से तमिल भाषा के प्रसार के लिए सराहनीय पहल हो रही है, वो हृदय को छू लेने वाली है। मुझे खुशी है कि आज देश के कई और हिस्सों में भी दुनिया की इस सबसे प्राचीन भाषा को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है।”
#MannKiBaat
“आईसीएमआर यानि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की हाल ही की एक रिपोर्ट बताती है कि निमोनिया और यूटीआई जैसी बीमारियों में एंटीबॉयोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। इसका एक बड़ा कारण बिना सोचे-समझे इनका सेवन है। इसलिए मेरा आग्रह है कि डाक्टरों की सलाह के बिना एंटीबॉयोटिक दवाएं ना लें।”
#MannKiBaat
“मणिपुर के चुराचंदपुर की मार्गरेट रामथार्सीम पर गर्व है, जिन्होंने मणिपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प को लोकप्रिय बनाने और दूसरों के जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम किया है।”
#MannKiBaat
“मणिपुर के सेनापति जिले के, के. चोखोने कृचेना ने पुष्पकृषि के क्षेत्र में असाधारण कार्य किया है और कई किसानों के जीवन को भी बदल दिया है।”