राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी शताब्दी समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (29 दिसंबर, 2025) झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में भाग लिया और उसे संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, एक शताब्दी पूर्व संथाली भाषा के लिए लिपि के अभाव में रोमन, देवनागरी, ओडिया और बंगाली जैसी विभिन्न लिपियों का प्रयोग किया जाता था। इन लिपियों में कई संथाली शब्दों का सही उच्चारण नहीं हो पाता था। वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने ओल चिकी लिपि का सृजन किया। तब से यह लिपि संथाल पहचान का एक सशक्त प्रतीक बन गई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर ओल चिकी लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत के संविधान को जारी करने का मौका मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब संथाली भाषी लोग अपनी मातृभाषा और ओल चिकी लिपि में लिखे संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी अन्य भाषा में शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ ओल चिकी लिपि में मातृभाषा संथाली सीखना भी संथाल समुदाय के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि लेखक और भाषा प्रेमी संथाली भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली संथाली समुदाय और अन्य जनजातीय समुदायों से सीखी जा सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संथाली साहित्य को संथाली समुदाय की मौखिक परंपराओं और गीतों से शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि कई लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से संथाली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के लोगों को जागृत करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने लेखकों से अपने लेखन के माध्यम से ऐसा करने का आग्रह किया।

श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भाषा और साहित्य समुदायों को आपस में जोड़ते हैं। विभिन्न भाषाओं के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान उन भाषाओं और समुदायों को समृद्ध करता है। अनुवाद इस आदान-प्रदान को संभव बनाते हैं। इसलिए, संथाली भाषा के छात्रों को अन्य भाषाओं से परिचित कराने की आवश्यकता है। संथाली साहित्य को अन्य भाषाओं के छात्रों तक पहुंचाने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अखिल भारतीय संथाली लेखक संघ इस कार्य को प्रभावी ढंग से करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, स्नातकों को ‘विकसित भारत @2047’ का शिल्पकार बताया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पुदुचेरी विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और स्नातक विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को ‘विकसित भारत @2047’ का शिल्पकार बताते हुए देश के भविष्य को गढ़ने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया।

स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक सफलता का उत्सव नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर क्षण है, जो अधिक ज़िम्मेदारी की ओर बढ़ने का आभास कराता है. उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि उनकी डिग्रियों के साथ यह दायित्व भी जुड़ा है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करें।

पुदुचेरी को सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत की भूमि बताते हुए उपराष्ट्रपति ने सुब्रमण्यम भारती, भरथिदासन और श्री अरबिंदो जैसे महान कवियों और विचारकों के स्थायी प्रभाव को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो का दर्शन आज भी उच्च शिक्षा को दिशा देता है, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और कर्म का समन्वय करता है तथा ऐसे मस्तिष्क तैयार करता है, जो राष्ट्रीय प्रगति और वैश्विक सद्भाव में योगदान देने में सक्षम हों।

उपराष्ट्रपति ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय को NAAC के पांचवें मूल्यांकन चक्र में प्रतिष्ठित A+ ग्रेड प्राप्त करने पर बधाई दी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए 113 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) सहित इसके वैश्विक सहयोग की सराहना की। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में विश्वविद्यालय के 28 संकाय सदस्यों के शामिल होने को भी शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण बताया।

विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टि एक समृद्ध, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण के लिए समग्र रोडमैप प्रदान करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक मौलिक परिवर्तन का संकेत है-रटंत विद्या से आलोचनात्मक सोच की ओर, कठोर विषय सीमाओं से बहुविषयक अध्ययन की ओर और परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से समग्र विकास की ओर और स्नातकों से इसके भाव के दूत बनने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहलों- पीएम-उषा (PM-USHA), स्वयं (SWAYAM), दीक्षा (DIKSHA) और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालयका भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये पहलें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाती हैं और इस विश्वास को दर्शाती हैं कि शिक्षा कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सभी का अधिकार होनी चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से दुनिया में हो रहे तेज़ बदलावों को लेकर छात्रों को आगाह करते हुए उन्होंने तकनीकी उत्साह और नैतिक सजगता के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से यह भी आग्रह किया कि वे मज़बूती से “नशे को ना” कहें और अपने दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

प्राचीन तमिल ग्रंथ नालडियार (Naladiyar) का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों को याद दिलाया कि ज्ञान असीम है, लेकिन उसे अर्जित करने का समय सीमित है। उन्होंने स्नातकों से सूचना के विशाल सागर में से वही चुनने और आत्मसात करने का आग्रह किया जो मूल्यवान, नैतिक और सार्थक हो।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन का समापन करते हुए स्नातकों से आग्रह किया कि उनकी शिक्षा उन्हें अच्छे इंसान, जिम्मेदार नागरिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील पेशेवर बनाएं जहां ज्ञान विनम्रता से निर्देशित हो, तकनीक मानवीय मूल्यों से संचालित हो और सफलता सामाजिक जिम्मेदारी से परिभाषित हो।

इस कार्यक्रम में पुदुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री श्री एन. रंगासामी और पुदुचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. प्रकाश बाबू सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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राँची जिला प्रशासन द्वारा शीतलहर से बचाव हेतु जिले भर में अलाव की व्यापक व्यवस्था

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले भर में अलाव की व्यापक व्यवस्था

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी

जिला प्रशासन की अपील शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें

रांची,29.12.2025 – राज्य सरकार के निर्देशों के अनुपालन तथा रात के तापमान में निरंतर गिरावट और शीतलहर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने जिले के सभी जरूरतमंद नागरिकों के लिए बड़े स्तर पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

इस विशेष अभियान के तहत राँची शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन परिसर तथा खुले में रात बिताने वाले लोगों की बस्तियों में अलाव जलाए जा रहे हैं। साथ ही जिले के सभी प्रखंडों में भी यह व्यवस्था व्यापक रूप से की गई है।

प्रखंड मुख्यालयों, पंचायत भवन परिसरों, ग्रामीण हाट-बाजारों, धार्मिक स्थलों के निकट, मजदूर चौकियों तथा बेघर एवं दिहाड़ी मजदूरों की अधिकता वाले स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जल रहे हैं।

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी

सभी अंचल अधिकारियों तथा प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले से ही कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि लकड़ी एवं कोयले की किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था की जाए।

“ठंड के इस मौसम में किसी भी नागरिक, विशेष रूप से बेघर लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा-ठेला चालकों तथा रात में ड्यूटी करने वालों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें

जिला प्रशासन आमजन से अपील करता है कि शीतलहर से बचाव के लिए सतर्क रहें तथा जरूरतमंदों को अलाव स्थलों का लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित करें।

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नव वर्ष 2026 के स्वागत एवं वर्ष 2025 के अंतिम दिन लोक शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम

जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई

रांची,29.12.2025 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार नव वर्ष 2026 के स्वागत एवं 31 दिसंबर 2025 को वर्षांत के अवसर पर लोक शांति, सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के संधारण हेतु व्यापक तैयारी की गई है। हर वर्ष की भांति इस बार भी विभिन्न डैम, नदी, जलाशय, जलप्रपात एवं पर्यटक स्थलों (जैसे दशम फॉल, जोन्हा फॉल, हुंडरू फॉल आदि) पर पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना है।

जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई

पिकनिक के दौरान बिना लाइफ जैकेट के बोटिंग, तैराकी या जलक्रीड़ा तथा रेस ड्राइविंग जैसी गतिविधियों से दुर्घटना की आशंका रहती है। साथ ही असमाजिक तत्वों द्वारा मौके का फायदा उठाने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारी ससमय अपने स्थल पर पहुंचकर सघन गश्ती एवं सक्रिय निगरानी सुनिश्चित करेंगे।

मुख्य सुरक्षा निर्देशः

1. नशे की हालत में वाहन चलाने वालों की सघन जांच की जाएगी। ऐसे वाहनों को जब्त कर चालक को पैदल जाने दिया जाएगा एवं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

2. रेस ड्राइविंग करने वालों के वाहन जब्त किए जाएंगे एवं पैदल जाने दिया जाएगा।

3. महिलाओं/युवतियों से छेड़छाड़ करने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी एवं पकड़े जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

4. जलाशयों में बोटिंग केवल लाइफ जैकेट पहनने वालों को ही अनुमति होगी। बिना लाइफ जैकेट के तैराकी/जलक्रीड़ा पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।

5. जलप्रपात के गिरने वाले स्थान के आसपास लोगों को जाने से रोका जाएगा, ताकि फिसलन से होने वाली दुर्घटना रोकी जा सके।

6. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बुंडू द्वारा दशम फॉल में स्थानीय गोताखोरों की व्यवस्था एवं खतरनाक स्थलों को चिन्हित कर निषेध व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

7. सदर अनुमंडल के सभी पुलिस उपाधीक्षक विभिन्न जलाशयों, डैम एवं तालाबों में गोताखोरों की तैनाती एवं खतरनाक स्थलों पर निषेध व्यवस्था करेंगे।

8. सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी अपने क्षेत्र के पिकनिक स्थलों पर समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

9. सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी प्रत्येक 02 घंटे में खैरियत प्रतिवेदन अनुमंडल पदाधिकारी/नगर नियंत्रण कक्ष को भेजेंगे।

यातायात एवं चिकित्सा व्यवस्थाः

यातायात पुलिस की पर्याप्त तैनाती की गई है।

सिविल सर्जन, रांची द्वारा 04 एम्बुलेंस चिकित्सकों, मेडिकल दल एवं जीवन रक्षक दवाओं सहित 31 दिसंबर 2025 की पूर्वाह्न 07:00 बजे से 01 जनवरी 2026 तक जिला नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त की गई हैं।

जिला प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन सभी नागरिकों से अपील करता है कि नव वर्ष का उत्सव सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं तथा सुरक्षा नियमों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में नियंत्रण कक्ष या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।

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माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन कल मोरहाबादी मैदान में JSSC CGL-2023 के चयनित अभ्यर्थियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र : नए साल से पूर्व युवाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अभ्यर्थियों को यह सौगात सौंपेंगे। यह आयोजन नए साल के पूर्व राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा उपहार साबित होगा

वित्त सचिव, श्री प्रशांत कुमार एवं डी.जी.पी. झारखंड, श्रीमती तदाशा मिश्रा ने भी कार्यक्रम के पूरी रूप रेखा को देखा और कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया

कार्यक्रम की सफलता एवं सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल मोरहाबादी का क्रमवार निरीक्षण किया

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं

रांची, 29.12.2025 – झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 में सफल अभ्यर्थियों को  30 दिसंबर 2025 को रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में एक भव्य समारोह में नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अभ्यर्थियों को यह सौगात सौंपेंगे। यह आयोजन नए साल से पूर्व राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा उपहार साबित होगा।

वित्त सचिव, श्री प्रशांत कुमार एवं डी.जी.पी. झारखंड, श्रीमती तदाशा मिश्रा ने भी कार्यक्रम के पूरी रूप रेखा को देखा और कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया।

आवश्यक तैयारियों का जायजा

कार्यक्रम की सफलता एवं सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल मोरहाबादी का क्रमवार निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मंच व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक तैयारियों का जायजा लिया।

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं

जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। चयनित अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि वे निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित हों तथा कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखें।

यह आयोजन राज्य सरकार की युवा सशक्तिकरण एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निम्न पदों में चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा

सहायक प्रशाखा पदाधिकारी,

प्रखण्ड कल्याण पदाधिकारी,

प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी,

श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक-सह-कानूनगो, कनीय सचिवालय सहायक, प्लानिंग असिस्टेंट।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनीया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर, श्री उत्कर्ष कुमार, अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला नजारत उप समाहर्ता राँची, डॉ. सुदेश कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि यद्यपि संसदीय भाषण परंपरागत रूप से जन कल्याणकारी योजनाओं और शासन संबंधी उपायों पर केंद्रित रहा है लेकिन राष्ट्र का दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक स्वरूप विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सुधारों से अधिकाधिक निर्धारित होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तीसरा कार्यकाल, मोदी 3.0 की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया है।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक विज्ञान आधारित सुधारों को राष्ट्रीय परिवर्तन के केंद्र में रखकर परंपरा से एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस विधेयक को मोदी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के विकास, उद्योग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर इसके निर्णायक प्रभाव के बावजूद भारत ने कभी भी वैज्ञानिक प्रगति को सुधार के दायरे में नहीं रखा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शांति विधेयक को मोदी 3.0 के व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जहां सुधार के पिछले चरण ऐतिहासिक राजनीतिक और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े थे, वहीं मोदी 3.0 को उन क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए याद किया जाएगा जो भारत के तकनीकी और आर्थिक भविष्य को निर्धारित करते हैं।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक भारत के परमाणु क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार है जो सुरक्षा, संप्रभुता और जनहित के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण, स्वच्छ और सतत ऊर्जा की इसकी अपार संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा सुधार छह दशकों से अधिक समय तक अकल्पनीय था और प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी रूढ़ियों को तोड़ने और भारत की नीतियों को वैश्विक सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के अनुरूप ढालने की क्षमता के कारण ही संभव हो पाया है।

भारत की शांतिपूर्ण परमाणु उपयोग के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि डॉ. होमी भाभा के समय से ही भारत के परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना विकास, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि शांति विधेयक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा अनुप्रयोगों और उन्नत अनुसंधान जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए विस्तार को सक्षम बनाकर इस मूलभूत दर्शन को मजबूत करता है, जबकि शांतिपूर्ण इरादे से किसी भी विचलन को पूरी तरह से रोकता है।

उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और डेटा-आधारित अर्थव्यवस्था की मांगों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के अनिरंतर विद्युत उत्‍पादन के विपरीत परमाणु ऊर्जा निरंतर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति के लिए अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत जीवाश्म ईंधन और कोयले से दूर होता जा रहा है, परमाणु ऊर्जा उन्नत प्रौद्योगिकियों, डिजिटल बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षेत्रों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण गुणात्मक भूमिका निभाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2014 में लगभग 4.4 गीगावाट से बढ़कर आज लगभग 8.7 गीगावाट हो गई है और आने वाले वर्षों में इसमें काफी वृद्धि करने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना है जिससे परमाणु ऊर्जा भारत की लगभग 10 प्रतिशत विद्युत आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगी और राष्ट्रीय नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा में परमाणु विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिलाया, विशेष रूप से परमाणु चिकित्सा और आइसोटोप के माध्यम से कैंसर के निदान और उपचार में। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी जीवन रक्षक चिकित्सा उपायों में तेजी से योगदान दे रही है जिससे यह स्पष्ट होता है कि परमाणु विज्ञान आज मानव कल्याण और सामाजिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

भविष्य की तैयारियों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की ओर भी अग्रसर है, जो घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों और उभरते आर्थिक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि ये रिएक्टर पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक को वैज्ञानिक समुदाय, उद्योग जगत, स्टार्टअप और नवाचार तंत्र में व्यापक स्वीकृति मिली है, जो भारत के परमाणु क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मोदी 3.0 के सुधार-प्रथम दृष्टिकोण का उदाहरण है जिसके तहत विज्ञान आधारित नीतिगत निर्णय 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया X पर लिखा:

“दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।”

 

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

 मिशन मोड में स्वास्थ्य सुधार और टीबी मुक्त भारत अभियान का आह्वान किया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का आकलन करने और प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, रोगी संतुष्टि बढ़ाने, नियामक निगरानी में सुधार करने और तपेदिक (टीबी) को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

श्री नड्डा ने सुदृढ़ औषधि विनियमन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर वितरण तक संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला की निरंतर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने विनियमन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया और रोगी संतुष्टि में सुधार, नियामक पर्यवेक्षण और अनुपालन को सुदृढ़ करने को एक सतत मिशन के रूप में लेने का आग्रह किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मुफ्त औषधि और मुफ्त निदान योजनाओं के संबंध में दोनों राज्यों को आपूर्ति श्रृंखला प्रणालियों को सुदृढ़ करने और निगरानी संबंधी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि मंत्रालय औषधि और निदान संबंधी खरीद में रसद, पारदर्शिता और जवाबदेही को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद के साथ मिलकर काम कर रहा है।

श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण निदान और समय पर परीक्षण प्रभावी स्वास्थ्य सेवा वितरण का आधर हैं और इन्हें प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि चिकित्सक नैदानिक ​​देखभाल के केंद्र में हैं, अस्पताल प्रशासन और नियामक अनुपालन के लिए समर्पित पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता है। रक्त बैंकों, अस्पताल प्रणालियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के विनियमन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टेलीमेडिसिन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने का, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में एक प्रभावी साधन है। उन्होंने दोनों राज्यों को विशेषज्ञ परामर्श तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए टेलीमेडिसिन प्लेटफार्मों को नियमित सेवा वितरण में अधिक गहराई से एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

श्री नड्डा ने टीबी उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए गहन स्क्रीनिंग, निदान, उपचार अनुपालन और पोषण संबंधी सहायता सहित जिला-विशिष्ट हस्तक्षेपों का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी उन्मूलन को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए और जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकों के लिए जागरूकता कार्यशालाओं का भी प्रस्ताव रखा और उन्हें नियमित समीक्षाओं के माध्यम से ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य परिणामों में सुधार, जवाबदेही सुनिश्चित करने और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए जन भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकारें कार्यान्वयन और परिणामों को मजबूत करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेंगी।

श्री नड्डा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में सुलभ, किफायती और आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हस्तक्षेप, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल, चिकित्सा शिक्षा विस्तार, व्यवहार्यता अंतर निधि और अवसंरचना सहायता तंत्र के माध्यम से केंद्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र कुष्ठ रोग प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को सभी आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र सुधारों के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण के तहत आने वाले दिनों में अन्य राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की परामर्श बैठकें आयोजित की जाएंगी।

बैठक का समापन औषधि विनियमन को सुदृढ़ करने, निदान में सुधार करने, अस्पताल प्रशासन को पेशेवर बनाने, चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार करने और टीबी मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को गति देने के साझा संकल्प के साथ हुआ, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहकारी संघवाद की भावना को बल मिला।

मध्य प्रदेश प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला; उपमुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी श्री देवेंद्र द्विवेदी; स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री तरुण राठी; और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की प्रबंध निदेशक डॉ. सलोनी सिदाना शामिल थीं।

छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव श्री अमित कटारिया; राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)  के प्रबंध निदेशक श्री रणबीर शर्मा; चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री रितेश अग्रवाल; और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित थे। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल; अतिरिक्त सचिव और प्रबंध निदेशक (एनएचएम) सुश्री आराधना पटनायक; भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री राजित पुन्हानी; और भारतीय महाऔषधि नियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी आदि शामिल थे।

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उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में 31 क्षेत्रों में 45 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलवाई

नई दिल्ली – भारत सरकर के उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख पहल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच), देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रभावी, समयबद्ध और मुकदमेबाजी से पहले निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 तक आठ महीने की अवधि के दौरान, हेल्पलाइन ने 31 क्षेत्रों में राशि वापिस दिलवाने के दावों से संबंधित 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए 45 करोड़ रुपये की राशि के वापिस दिलवाई है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुकदमेबाजी से पहले, एनसीएच विवादों के त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण समाधान को सक्षम बनाती है जिससे उपभोक्ता आयोगों पर बोझ कम होता है।

क्षेत्रवार निष्पादन

 -कॉमर्स क्षेत्र में शिकायतों और वापिस दिलवाई गई राशि की मात्रा और संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई जिसमें 39,965 शिकायतों के परिणामस्वरूप 32 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई। इसके बाद यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का स्थान रहा जिसमें 4,050 शिकायतें दर्ज की गई और 3.5 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई।

ई-कॉमर्स क्षेत्र से राशि वापिस दिलवाने से संबंधित शिकायतें देश के सभी हिस्सों से प्राप्त हुई जिनमें प्रमुख महानगरों से लेकर दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। यह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की राष्ट्रव्यापी पहुंच, सुगमता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

कुल वापिस दिलवाई गई राशि में 85 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले शीर्ष पांच क्षेत्रों, प्राप्त शिकायतों की संख्या और संबंधित वापिस दिलवाई गई राशि का विवरण नीचे दिया गया है:

क्रम संख्या क्षेत्र कुल शिकायतें कुल वापसी राशि ( रुपये में )
1 ई-कॉमर्स 39,965 320,680,198
2 यात्रा पर्यटन 4,050 35,222,102
3 एजेंसी सेवाएं 957 13,497,714
4 इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 635 11,725,231
5 एयरलाइंस 668 9,556,843
  कुल 46,275 39,06,82,088

 

इस उपलब्धि के पीछे का एक प्रमुख कारण साझेदारों की संख्या में विस्तार है जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की सामूहिक क्षमता में वृद्धि हुई है। यह संबंधित हितधारकों की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है जो उपभोक्ता कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए उनकी जवाबदेही की पुष्टि करता है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 की अवधि में 45 करोड़ रुपये की राशि की त्वरित वापसी न केवल हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और तत्परता दर्शाती है बल्कि समयबद्ध और परेशानी मुक्त शिकायत निवारण सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी दर्शाती है। यह मुकदमेबाजी से पहले के चरण में एक आवश्यक माध्यम के रूप में एनसीएच के महत्व को और मजबूत करता है जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

उपभोक्ता पर प्रभाव – उदाहरण:

राजस्थान के जोधपुर के एक उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खराब कुर्सियाँ प्राप्त करने के बाद शिकायत दर्ज कराई। समाधान चाहा, उपभोक्ता ने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन लगातार पाँच बार समान वापिस लेना रद्द कर दिया गया जिससे मामला अनसुलझा रह गया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के हस्तक्षेप से मामले का तुरंत समाधान हुआ और उपभोक्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई। उपभोक्ता ने हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे जैसे ठगे गए उपभोक्ताओं की सहायता करने के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन का बहुत-बहुत धन्यवाद… आपका बहुत-बहुत आभार।”

कर्नाटक के बेंगलुरु निवासी एक उपभोक्ता ने वार्षिक इंटरनेट प्लान खरीदा था और उसके खाते से राशि काट ली गई थी। हालांकि, कनेक्शन कभी लगाया ही नहीं गया। जब उसने ग्राहक सेवा से संपर्क किया तो उसे आश्वासन दिया गया कि 10 कार्य दिवसों के भीतर राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। कई बार कॉल करने और शिकायत करने के बावजूद, उपभोक्ता को चार महीने बाद भी राशि वापिस नहीं मिली। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के प्रभावी हस्तक्षेप से कंपनी ने तुरंत राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी। समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “यह एक अच्छा अनुभव रहा। अन्यथा, राशि वापिस पाना मुश्किल था।”

तमिलनाडु के चेन्नई के एक उपभोक्ता ने उड़ान से 96 घंटे से अधिक पहले अपना टिकट रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, उपभोक्ता के बार-बार अनुरोध करने पर भी कंपनी ने राशि वापिस नहीं लौटाई। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के त्वरित हस्तक्षेप से राशि वापिस लौटा दी गई। एनसीएच के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “एनसीएच को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद। मैं आपके प्रयासों से बहुत प्रसन्न हूं।”

ये मामले मुकदमेबाजी से पहले की प्रभावी व्यवस्था के रूप में एनसीएच की भूमिका को दर्शाते हैं जो उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी कार्यवाही के बिना सुलभ और समय पर शिकायत निवारण प्रदान करता है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन तक पहुंच

यह हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए मुकदमेबाजी से पहले ही शिकायतों के निवारण हेतु एक सुलभ केंद्र के रूप में उभरी है । उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतें एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम) के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं। यह एक सर्वसुलभ, सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम केंद्रीय पोर्टल है। इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध हैं,

जिनमें व्हाट्सएप (8800001915), एसएमएस (8800001915), ईमेल (nch-ca[at]gov[dot]in), एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल ( www.consumerhelpline.gov.in ) और उमंग ऐप शामिल हैं जो उपभोक्ताओं को लचीलापन और सुविधा प्रदान करते हैं।

विभाग उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है और सभी उपभोक्ताओं से अपने अधिकारों की रक्षा करने और समय पर निवारण प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन का उपयोग करने का आग्रह करता है।

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सीमा शुल्क मंजूरी सुविधा समिति की बैठक ने हितधारकों के विश्वास को मजबूत किया

नई दिल्ली – दिल्ली सीमा शुल्क विभाग द्वारा इंदिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे के कल्पना चावला सम्मेलन कक्ष में दिल्ली जोन के मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त की अध्यक्षता में सीमा शुल्क मंजूरी सुविधा समिति (सीसीएफसी) की बैठक आयोजित की गई ।

इस बैठक में एफएसएसएआई, प्लांट क्वारंटाइन और ड्रग कंट्रोलर सहित सहयोगी सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ कस्टम्स ब्रोकर, एसोचैम और जीजेईपीसी जैसे व्यापार संघों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सीमा शुल्क मंजूरी प्रणाली में शामिल हितधारकों की व्यापक विविधता को दर्शाते हुए, इसमें संरक्षक, आयातक, निर्यातक और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

विचार-विमर्श के दौरान, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा शुरू की गई हालिया नीति और डिजिटल पहलों का उल्‍लेख किया गया। जिसमें दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र के भीतर उनके कार्यान्वयन ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया। हितधारकों ने प्रमुख परिचालन संबंधी मुद्दे उठाए जिन पर रचनात्मक रूप से चर्चा की गई, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे व्यावहारिक परिणाम निकले जो इस सुविधा को मजबूत करेंगे और दक्षता में सुधार करेंगे। बैठक के पारदर्शी और सहयोगात्मक संचालन की व्यापक रूप से सराहना की गई, जिससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में विश्वास बढ़ा और निर्यात एवं आयात समुदाय में समन्वय को बढ़ावा मिला।

दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र ने व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और कानून के दायरे में व्यापार सुविधा को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र का मार्गदर्शक सिद्धांत पारदर्शितासुलभता और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है। ये मूल्य न केवल सीमा शुल्क के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि विश्वास निर्माण और यह सुनिश्चित करने के लिए भी आधार का काम करते हैं कि हितधारक प्रशासन के साथ खुलकर संवाद करने में सक्षम महसूस करें।

भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सीमा शुल्क क्षेत्र ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यापार में सुगमता एक निरंतर प्रक्रिया है जिसके लिए सीमा शुल्क विभाग, सहयोगी एजेंसियों, संरक्षकों और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। निर्णय लेने में पारदर्शिता, प्रक्रियाओं में सुगमता और संवाद एवं समस्या-समाधान के लिए खुली नीति को अपनाकर, दिल्ली सीमा शुल्क विभाग विश्वास, दक्षता और साझा उत्तरदायित्व की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है। सीसीएफसी बैठक के परिणाम इन मूल्यों को संस्थागत रूप देने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम हैं कि निर्यात, आयात और आयात (एक्जिम) समुदाय सुविधा ढांचे पर अपना भरोसा बनाए रखे।

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सीएक्यूएम ने 26.12.2025 को गुरुग्राम में एमसीजी के रखरखाव वाले 125 सड़क खंडों का व्यापक निरीक्षण किया

नई दिल्ली – दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने गुरुग्राम में 26.12.2025 को सड़क सफाई और झाड़ू लगाने के कार्यों की समीक्षा करने और गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) के रखरखाव वाले 125 सड़क खंडों की जांच के लिए एक व्यापक अभियान चलाया।

यह निरीक्षण मौजूदा श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के वैधानिक ढांचे के तहत निरंतर निगरानी और प्रवर्तन प्रयासों के हिस्से के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य धूल कम करने के उपायों के साथ जमीनी स्तर पर अनुपालन का मूल्यांकन करना और सड़क की धूल, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू), निर्माण और तोड़फोड़ से संबंधित (सी एंड डी) अपशिष्ट और खुले में जलाने के मामलों जैसे संबंधित मुद्दों की पहचान करना था।

आयोग ने गुरुग्राम में एमसीजी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 125 सड़क खंडों के निरीक्षण के लिए कुल 17 निरीक्षण दल गठित किए, जिनमें हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की 15 टीमें और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की दो टीमें शामिल थीं। निरीक्षण दलों द्वारा भू-टैग और समय-चिह्नित फोटोग्राफिक दस्तावेज एकत्र किए गए और समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के भाग के रूप में आयोग के समक्ष प्रस्तुत किये।

निष्कर्षों से पता चला कि निरीक्षण किए गए 125 सड़क खंडों में से 34 खंडों में धूल का स्तर अत्यधिक था, 58 खंडों में मध्यम स्तर की धूल थी, 29 खंडों में धूल की तीव्रता कम थी, जबकि केवल चार खंड पूरी तरह धूल रहित थे। अत्यधिक धूल वाले कई खंडों में ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं तोड़फोड़ अपशिष्ट का भारी संचय पाया गया। इसके साथ ही खुले में जलाने के कई मामले भी सामने आए, जो सड़क रखरखाव, अपशिष्ट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर प्रवर्तन में गंभीर कमियों को दर्शाते हैं।

गुरुग्राम के विभिन्न वार्डों और सेक्टरों में कई सड़क खंडों, जिनमें आवासीय कॉलोनियां, आंतरिक सड़कें और मुख्य मार्ग शामिल हैं जिन पर लगातार धूल जमा होने और कचरा फेंके जाने की समस्या पाई गई। कई स्थानों पर खुले में कचरा जलाने और अव्यवस्थित कचरे ने धूल की समस्या को और भी बदतर बना दिया जिससे तत्काल सुधारात्मक उपायों और संबंधित एजेंसी द्वारा कड़ी निगरानी की आवश्यकता महसूस की गई है।

आयोग ने पाया कि समग्र निरीक्षण परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि एमसीजी की ओर से जमीनी स्तर पर कार्यों को काफी मजबूत करने की आवश्यकता है। इसमें विशेष रूप से नियमित यांत्रिक सफाई, एकत्रित धूल और कचरे को समय पर उठाकर वैज्ञानिक तरीके से निपटाने, सक्रिय जल छिड़काव और धूल-नियंत्रण उपायों के संबंध में, और खुले में आग जलाने पर सख्त रोक लगाने के संबंध में ध्यान दिया गया है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सड़कों की स्थिति में स्पष्ट सुधार सुनिश्चित करने और धूल एवं कचरे के पुनः संचय को रोकने के लिए निरंतर और केंद्रित प्रयास आवश्यक हैं।

आयोग ने दोहराया कि धूल नियंत्रण और खुले में आग जलाने की रोकथाम के लिए वैधानिक निर्देशों और जीआरएपी उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने हेतु ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान पूरे एनसीआर में नियमित रूप से जारी रहेंगे। आयोग क्षेत्र में स्वच्छ, हरित और धूल रहित सड़कों को सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है।

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प्रधानमंत्री ने पवित्र प्रकाश उत्सव पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को नमन किया

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पवित्र प्रकाश उत्सव के अवसर पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को नमन किया। श्री मोदी ने कहा कि वे साहस, करुणा और बलिदान के प्रतीक हैं। श्री मोदी ने कहा, “उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए खड़ा होने की प्रेरणा देती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की दृष्टि पीढ़ियों को सेवा और निःस्वार्थ कर्तव्य करने का मार्गदर्शन देती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उनके सामने श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। वे साहस, करुणा और त्याग के प्रतीक रहे हैं। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें सत्य, न्याय, धर्म और मानव गरिमा की रक्षा के लिए खड़ा होने की प्रेरणा देती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की दृष्टि पीढ़ियों को सेवा और निःस्वार्थ कर्तव्य करने का मार्गदर्शन देती है।

यहाँ इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब की मेरी यात्रा की कुछ तस्वीरें हैं, जहाँ मैंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के पवित्र जोरे साहिब का भी दर्शन किया था।

 

 

“ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਤਸਵ ‘ਤੇ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰਧਾ ਸਹਿਤ ਪ੍ਰਣਾਮ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਉਹ ਹਿੰਮਤ, ਹਮਦਰਦੀ ਅਤੇ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਕ ਹਨ।ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਸਾਨੂੰ ਸੱਚ, ਨਿਆਂ, ਧਰਮ ਲਈ ਖੜ੍ਹੇ ਹੋਣ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖੀ ਮਾਣ-ਸਨਮਾਨ ਦੀ ਰਾਖੀ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਸੇਵਾ ਅਤੇ ਨਿਰਸਵਾਰਥ ਕਰਤੱਵ ਦੇ ਰਾਹ ‘ਤੇ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਕਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ।

ਇਸ ਸਾਲ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿੱਚ ਤਖ਼ਤ ਸ੍ਰੀ ਹਰਿਮੰਦਰ ਜੀ ਪਟਨਾ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਮੇਰੀ ਯਾਤਰਾ ਦੀਆਂ ਇੱਥੇ ਤਸਵੀਰਾਂ ਹਨ, ਜਿੱਥੇ ਮੈਨੂੰ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਅਤੇ ਮਾਤਾ ਸਾਹਿਬ ਕੌਰ ਜੀ ਦੇ ਪਵਿੱਤਰ ਜੋੜਾ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਦਰਸ਼ਨ ਵੀ ਹੋਏ ਸਨ।”

 

 

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एआरओ रांची में अग्निवीर भर्ती : द्वितीय चरण की डिस्पैच प्रक्रिया जारी

इस चरण के अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 100 से 150 अभ्यर्थियों को विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों के लिए डिस्पैच किया जा रहा है। यह प्रक्रिया मध्य जनवरी तक लगातार चलती रहेगी

कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) से लगभग 800 से 900 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है

एआरओ रांची ने सभी शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से पूर्ण एवं तैयार रखें, ताकि रैली और आगे की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो

सेना भर्ती कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित सभी आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और निर्देशों पर ही भरोसा करें

रांची,28.12.2025 – आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (एआरओ), रांची के माध्यम से अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया का द्वितीय चरण सफलतापूर्वक जारी है। इस चरण के अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 100 से 150 अभ्यर्थियों को विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों के लिए डिस्पैच किया जा रहा है। यह प्रक्रिया मध्य जनवरी तक लगातार चलती रहेगी।

एआरओ रांची से झारखंड राज्य के चयनित अभ्यर्थियों को चरणबद्ध तरीके से भेजा जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण केंद्रों में समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके।

सेना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण डिस्पैच प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से प्रतिदिन छोटे-छोटे समूहों में किया जा रहा है।

इसके साथ ही, पिछली कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) से लगभग 800 से 900 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों की भर्ती रैली मार्च माह में गया (बिहार) में आयोजित की जाएगी।

एआरओ रांची ने सभी शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से पूर्ण एवं तैयार रखें, ताकि रैली और आगे की प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सेना भर्ती कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित सभी आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और निर्देशों पर ही भरोसा करें।

यह भर्ती प्रक्रिया युवाओं के लिए भारतीय सेना में सेवा का सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उत्साहपूर्वक इसमें भाग ले रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित वीर बाल दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित वीर बाल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। श्री मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए उन 20 बच्चों से भी संवाद किया, जिन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। श्री मोदी ने कहा, “उनसे संवाद करना अत्यंत सुखद अनुभव रहा।”

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“नई दिल्ली के भारत मंडपम में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम में हमारे नौनिहालों के जोश और उत्साह ने नई ऊर्जा से भर दिया।”

“वीर बाल दिवस पर हमारे बेटे-बेटियों को शौर्य-पराक्रम और मानवता की शिक्षा देने वाली नाट्य प्रस्तुति ‘नए भारत के नन्हे रक्षक’ ने हृदय को छू लिया।”

“इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आज उनसे संवाद कर अत्यंत प्रसन्नता हुई है।”

“वीर बाल दिवस में सर्वोच्च बलिदान का गौरव है तो भविष्य की प्रेरणा भी है। औरंगजेब की क्रूरता के खिलाफ छोटी सी उम्र में वीर साहिबजादों ने जिस पराक्रम और शौर्य का परिचय दिया, वो देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।”

“अब भारत ने तय किया है कि आने वाले 10 वर्षों में देश को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह से मुक्त करना है। 140 करोड़ देशवासियों का यही संकल्प होना चाहिए।”

“आज की पीढ़ी ही देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। मुझे उनकी योग्यता और आत्मविश्वास पर पूरा भरोसा है।

 

“आज का युवा ऐसे समय में बड़ा हो रहा है, जब अवसर पहले से कहीं ज्यादा हैं। इसलिए उन्हें ही राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखकर हम नई पॉलिसी बनाने में जुटे हैं।”

“आज कार्यक्रम में युवाओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी।”

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर रांची में सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां तेज

रांची जोनल आईजी श्री मनोज कौशिक, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन द्वारा पुलिस पदाधिकारियों, दंडाधिकारियों एवं जवानों की संयुक्त ब्रीफिंग

रांची जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा शहर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है

जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो तथा सभी कार्यक्रम सुचारू रूप सें संपन्न हों

रांची,27.12.2025 – माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू 28 से 30 दिसंबर 2025 तक झारखंड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए रांची जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को पूर्णतया चाक-चौबंद बनाया गया है।

रांची जोनल आईजी श्री मनोज कौशिक, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन द्वारा 27 दिसंबर 2025 को पुलिस पदाधिकारियों, दंडाधिकारियों एवं जवानों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित की गई। इस ब्रीफिंग में सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया तथा सभी संबंधित पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंपी गईं।

प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान

ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति के रूट, कार्यक्रम स्थलों, सुरक्षा प्रोटोकॉल एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारियां प्रदान की गईं। विशेष रूप से सड़क मार्ग के प्रमुख चौराहों, कट्स एवं संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों को वायरलेस सेट के साथ मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो

राष्ट्रपति के आगमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से संबंधित रूटों पर नो फ्लाई जोन सहित अन्य आवश्यक प्रतिबंध लागू किए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो तथा सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हों।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन को दें

रांची जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सभी नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन को दें।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने माँ भारती के वीर सपूत शहीद उधम सिंह जी की जयंती पर उन्हें नमन किया

नई दिल्ली – X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “अमर शहीद उधम सिंह जी ने एक ओर जलियांवाला बाग में शहीद हुए देशवासियों का प्रतिशोध लेने के लिए अदम्य साहस व पराक्रम का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर गदर आंदोलन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को विदेशों तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनकी पराक्रम गाथा देश के युवाओं के लिए मातृभूमि के प्रति समर्पण का अक्षय कोष है। माँ भारती के वीर सपूत शहीद उधम सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।”
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प्रधानमंत्री ने वीर बाल दिवस पर वीर साहिबजादों के बलिदान का स्मरण किया

नई दिल्ली –  वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीर साहिबजादों के बलिदान का स्मरण किया। श्री मोदी ने कहा कि यह दिन साहस, दृढ़ संकल्प और धर्मनिष्ठा से जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

“वीर बाल दिवस श्रद्धा का दिन है, जो वीर साहिबजादों के बलिदान के स्मरण के लिए समर्पित है। हम माता गुजरी जी की अडिग आस्था और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर शिक्षाओं को स्मरण करते हैं। यह दिन साहस, दृढ़ संकल्प और धर्मनिष्ठा से जुड़ा हुआ है। उनके जीवन और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।”

“ਵੀਰ ਬਾਲ ਦਿਵਸ ਸ਼ਰਧਾ ਦਾ ਅਜਿਹਾ ਮੌਕਾ ਹੈ, ਜੋ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬਜ਼ਾਦਿਆਂ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨ ਲਈ ਸਮਰਪਿਤ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਮਾਤਾ ਗੁਜਰੀ ਜੀ ਦੇ ਅਟੁੱਟ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਅਤੇ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀਆਂ ਸਦੀਵੀ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਇਹ ਦਿਨ ਹਿੰਮਤ, ਦ੍ਰਿੜ੍ਹਤਾ ਅਤੇ ਸਚਿਆਈ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਤੱਕ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੇ ਰਹਿਣਗੇ।”

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्‍य में आयोजित सुशासन दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में भाग लिया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित सुशासन दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में भाग लिया।

 

कार्यक्रम के दौरान, उपराष्ट्रपति ने दूरदृष्‍टा, कवि और समर्पित जनसेवक के तौर पर श्री वाजपेयी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि श्री वाजपेयी के बेमिसाल वाक-चातुर्य, विनम्रता और लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता ने जटिल घरेलू और विदेशी चुनौतियों के दौर में देश का मार्गदर्शन किया साथ ही सुशासन ने मज़बूत और खुशहाल भारत की नींव रखी। श्री वाजपेयी का शासन दर्शन पारदर्शिता, जवाबदेही, समावेशिता और समाज के सभी तबकों की सेवा पर आधारित था।

उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान की गई खास पहलों को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्री वाजपेयी का शासन दर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक नैतिकता और राष्ट्रीय सर्वस‍म्‍मति पर आधारित था।

सुशासन को साझा ज़िम्मेदारी करार देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकारें, प्रशासक, संस्थाएं, सिविल सोसाइटी और नागरिक सभी पारदर्शी, नैतिक और जवाबदेह शासन सुनिश्‍चित करने में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जनता से विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप विकसित, समावेशी और मज़बूत भारत का निर्माण करने के लिए इन सिद्धांतों को बनाए रखने का अनुरोध किया।

इस कार्यक्रम के दौरान सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र पर एक नाट्य प्रस्तुति भी पेश की गई, जिसमें श्री वाजपेयी के जीवन को इस महान सम्राट के सच्चाई, ईमानदारी और निस्‍वार्थ सेवा के आदर्शों से प्रतीकात्‍मक रूप से जोड़ा गया।

यह कार्यक्रम गांधी स्मृति और दर्शन समिति ने हेरिटेज इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कॉर्पोरेट कार्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा; दिल्ली विधानसभा के अध्‍यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता; गांधी स्मृति और दर्शन समिति के उपाध्‍यक्ष श्री विजय गोयल; और अन्‍य विशिष्‍ट व्‍यक्ति सम्मिलित हुए।

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डिब्रूगढ़ खेल महोत्सव में सरबानंद सोनोवाल ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेलों को जन आंदोलन बना दिया’

नई दिल्ली – कंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल डिब्रूगढ़ डिब्रूगढ़ में सांसद खेल महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने खेल को एक विशिष्ट गतिविधि से राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।

एथलीटों, छात्रों एवं स्थानीय निवासियों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसमें फिटनेस, अनुशासन और युवा सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिटनेस और खेल उत्कृष्टता को जन आंदोलन में बदलकर भारत के विकास पथ में खेलों को केंद्रीय स्थान प्रदान किया है। मैं अपने देश के युवाओं एवं नागरिकों से ‘खेलो भारत – खेलो देश’ की भावना से प्रेरित होकर एक स्वस्थ, फिट और खेल-उन्मुख राष्ट्र के निर्माण में शामिल होने का आह्वान करता हूं।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि ‘सांसद खेल महोत्सव’ ने युवा प्रतिभाओं की पहचान करके और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “यह पहल जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं का पोषण कर रही है, सामुदायिक संबंधों को मजबूत कर रही है और हमारे युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और चरित्र का विकास कर रही है।”

निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर समर्थन की घोषणा करते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि डिब्रूगढ़ के होनहार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन में सुधार के लिए लक्षित सहायता प्रदान की जाएगी।

श्री सोनोवाल ने कहा, “डिब्रूगढ़ के प्रतिभाशाली एथलीटों को विशेष प्रोत्साहन एवं संस्थागत सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और असम एवं राष्ट्र का नाम रोशन कर सकें।”

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले ‘सुशासन दिवस’ का उल्लेख करते हुए, श्री सोनोवाल ने 2014 से शुरू किए गए खेल सुधारों पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा, “2014 से, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने खेल अवसंरचना में अभूतपूर्व विस्तार, व्यापक भागीदारी एवं देश के हर कोने से प्रतिभा की व्यवस्थित खोज देखी है।”

राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख कार्यक्रमों की बात करते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि खेलो इंडिया, फिट इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) ने एथलीटों के लिए संरचित मार्ग तैयार किया है।

उन्होंने कहा, “इन पहलों ने विश्व स्तरीय सुविधाएं एवं पेशेवर प्रशिक्षण सुनिश्चित किया है, जिससे देश के युवाओं को खेल को एक प्रमुख करियर के रूप में अपनाने में मदद मिली है।” श्री सोनोवाल ने आगे कहा कि असम ने खेल महोत्सव जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ अपने प्रयासों को संरेखित किया है।

श्री सोनोवाल ने कहा, “खेल महोत्सव के माध्यम से हम गांवों, चाय बागानों एवं दूरदराज के क्षेत्रों से प्रतिभाओं की पहचान कर रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि डिब्रूगढ़ में बेहतर इनडोर एवं आउटडोर स्टेडियम अवसंरचना ने खेल को करियर के रूप में अपनाने में माता-पिता का विश्वास बढ़ावा दिया है।

इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य लोगों में असम के मंत्री प्रशांत फुकन, डिब्रूगढ़ नगर निगम (डीएमसी), महापौर डॉ. सैकत पात्रा, उप महापौर उज्जल फुकन, असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एपीएल) के अध्यक्ष बिकुल डेका, भाजपा जिला अध्यक्ष दुलाल बोरा, डिब्रूगढ़ विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष असीम हजारिका, बीवीएफसीएल के प्रबंध निदेशक प्रांजल बर्मन, श्री श्री अनिरुद्धदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र नाथ सरमा, डिब्रूगढ़ जिला खेल संघ (डीडीएसए) के अध्यक्ष निरंजन सैकिया, सचिव कामाख्या सैकिया, डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त बिक्रम कैरी और अन्य विशिष्ट अतिथि एवं नागरिक शामिल हुए।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वैश्विक हिंदू प्रेरणा महोत्सव को संबोधित किया

नई दिल्ली – अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब देश कोरोना की दूसरी लहर से गुजर रहा था, उस समय पूज्यश्री द्वारा लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट्स ने न केवल लाखों लोगों के जीवन को बचाया, बल्कि उनका उपयोग आज भी अनेक अस्पतालों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय प्रत्येक अनुयायी को धर्ममय और अनुरागपूर्ण जीवन की प्रेरणा देता है, साथ ही शांति, संतुलन और अस्तित्व के त्रिवेणी संस्कार को भी पुष्टिमार्गियों के मन में स्थापित करता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 21 से 29 दिसंबर, 2025 के दौरान वडोदरा, विश्व की वैष्णव राजधानी के रूप में उभरकर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान विश्व के 25 देशों से आए वैष्णव एक ही मंच पर, एक ही भावना और एक ही भक्ति भाव के साथ कथा का अमृत पान करेंगे, जिससे निश्चित रूप से आने वाले समय में सेवा के सभी क्षेत्रों में लाभ होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पूज्यश्री व्रजराज कुमारजी महाराज जी के नेतृत्व में इस महोत्सव के दौरान पाँच बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त विश्व, भूखे को भोजन, हर घर गौ सेवा, हिंदू विद्यालय परियोजना और राष्ट्र सेवा परियोजना रूपी इन पाँच परियोजनाओं के माध्यम से न केवल देशवासियों में धर्म के प्रति अनुराग दृढ़ होगा, बल्कि नर ही नारायण है” के सेवा भाव को पुनः स्थापित करने में भी यह अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पूज्यश्री ने अपने 15 वर्षों की यात्रा में 15 से अधिक देशों और 46 से अधिक शहरों में लाखों समर्पित स्वयंसेवकों को गति देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मात्र 39 वर्ष की आयु में 25 देशों में पुष्टिमार्ग की ध्वजा फहराने का कार्य और पाँच लाख से अधिक लोगों को ब्रह्मसंबंध देकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का पुण्य कार्य पूज्यश्री के करकमलों से ही संपन्न हुआ है। श्री शाह ने कहा कि धर्म, करुणा, सेवा और समाज के साथ धर्म को जोड़ने का पूज्यश्री का यह पुरुषार्थ निश्चय ही अत्यंत महान है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि “वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाणे रे” की उक्ति को चरितार्थ करते हुए पूज्यश्री द्वारा शुरू किए गए ये 5 प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारत और संपूर्ण विश्व के पुष्टिमार्गियों के लिए अनुकरणीय सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में कथा का अर्थ है मन की शुद्धि, विवेक का जागरण और जीवन की दिशा का परिवर्तन और स्वकेंद्रित जीवन से समाजकेंद्रित जीवन की ओर अग्रसर होना। श्री शाह ने कहा कि पूज्यश्री व्रजराज कुमार जी महाराज जी ने इस परंपरा को विश्व के अनेक स्थानों पर पुनर्जीवित किया है। आठ देशों में 250 से अधिक कथाओं के माध्यम से उन्होंने लाखों अनुयायियों को जोड़ा है और पाँच लाख से अधिक लोगों के ब्रह्म से जुड़ने का माध्यम बने हैं।

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मूलभूत सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित रखते हुए और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर भारत ने परंपरा के साथ आधुनिकता को सफलतापूर्वक जोड़ा है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आज आयोजित भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने मूलभूत सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करते हुए और साथ ही अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर परंपरा के साथ आधुनिकता को सफलतापूर्वक जोड़ा है, जिसका अंतिम लक्ष्य आम नागरिक के लिए जीवन को सुगम बनाना है।

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत का वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभर कर सामने आना शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व द्वारा प्रदान किए गए निर्णायक नीतिगत समर्थन के कारण संभव हो पाया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में, विशेषकर 2014 से, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अभूतपूर्व नीतिगत प्राथमिकता और बजटीय समर्थन में मिला है, जिससे उन दीर्घकालिक बाधाओं को दूर किया गया है जो पहले भारत की वैज्ञानिक क्षमता को सीमित करती थीं। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कभी कमी नहीं थी, बल्कि सक्षम इकोसिस्‍टम और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था, जिसे अब निर्णायक रूप से दूर कर दिया गया है।

भारत में नवाचार की तीव्र प्रगति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में लगभग 300-400 से बढ़कर आज लगभग दो लाख हो गई है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो गया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग 81 से सुधरकर 38 हो गई है, जबकि पेटेंट दाखिल करने के मामले में भारत अब विश्व में छठे स्थान पर है, जिसमें आधे से अधिक पेटेंट रेजिडेंट इंडियन्‍स द्वारा दाखिल किए जा रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की उपलब्धियों ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने देश के चंद्र अभियानों का उदाहरण दिया, जिनसे चंद्रमा पर पानी की पहली पुष्ट उपस्थिति का प्रमाण मिला और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट विश्व की पहली लैंडिंग हुई। उन्होंने भारत के स्वदेशी रक्षा इकोसिस्‍टम की बढ़ती मजबूती पर भी प्रकाश डाला और बताया कि रक्षा निर्यात 23,662 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें लगभग 100 देशों भारतीय निर्मित प्रणालियों की आपूर्ति की जा रही है।

हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का उल्‍लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की स्वदेशी मिसाइल और रक्षा प्रौद्योगिकियों ने अपनी विश्वसनीयता और भरोसे को प्रदर्शित किया है, जिसके कारण इनकी अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि ये क्षमताएं पिछले एक दशक में परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और उन्नत अनुसंधान में किए गए निरंतर निवेश का परिणाम हैं।

स्वास्थ्य सेवा के संबंध में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत निवारक स्वास्थ्य सेवा और किफायती चिकित्सा समाधानों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में उभरा है। कोविड-19 टीकों के विकास और उन्हें दुनिया के साथ साझा करने से लेकर प्रतिवर्ष अरबों डॉलर के चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपणों के निर्यात तक भारत के स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्‍टम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास और मान्यता प्राप्त की है।

मंत्री महोदय ने वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रकाशनों में भारत के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वैज्ञानिक शोध पत्रों के आउटपुट में देश अब वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है और उद्धरण इम्‍पैक्‍ट में तीसरे स्थान पर है, जो अनुसंधान में मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों प्रकार की प्रगति को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारत में विज्ञान अब केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्मार्ट शहरों, टेलीमेडिसिन, उपग्रह आधारित संचार, जियोटैगिंग और डिजिटल शासन प्लेटफार्मों जैसी पहलों के माध्यम से जीवन को सुगम बनाने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, गहरे समुद्र की खोज, हिमालयी अनुसंधान और अरोमा मिशन सहित प्रमुख राष्ट्रीय मिशन आर्थिक विकास और युवा उद्यमिता के लिए नए क्षितिज खोल रहे हैं।

मंत्री महोदय ने घोषणा की कि वैज्ञानिक ज्ञान और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए पिछले दशक में विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों का क्षेत्रीय भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में सहभागी बन सके।

उद्घाटन सत्र में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शिक्षाविद और देश भर के वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2025 का आयोजन 26 से 29 दिसंबर तक तिरुपति में हो रहा है, जिसमें हितधारक भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के भावी रोडमैप पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आ रहे हैं।

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एनआईएफटीईएम-के ने पीएम विकास योजना को लागू करने के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), कुंडली का “पीएम विकास” योजना के कार्यान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए) के रूप में चयन किया है। इस संबंध में संस्थान ने 22 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की क्षमता का विकास करना है।  इसके अंतर्गत उन्हें आवश्यकता-आधारित पाठ्यक्रमों में कौशल प्रशिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी और उनके लिए रोजगार/आजीविका के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। एनआईएफटीईएम कुंडली राष्ट्रीय महत्व के उन चुनिंदा संस्थानों में से एक है जिसका इस योजना के लिए पीआईए के रूप में चयन किया गया है।

इस परियोजना के अंतर्गत, निफ्टेम-के चार राज्यों झारखंड, बिहार, पंजाब और हरियाणा में सात स्थलों पर तीन श्रेणियों-बहु कौशल तकनीशियन (खाद्य प्रसंस्करण), श्रीअन्न उत्पाद प्रसंस्करण और सहायक बेकिंग तकनीशियन के तहत अल्पसंख्यक समुदाय के कुल 2110 लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस हस्तक्षेप का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें आर्थिक मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिए बाजार और ऋण संपर्क प्रदान करके बेहतर आजीविका के अवसरों का सृजन करना है।

यह परियोजना एनसीवीईटी (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद) अनुमोदित पाठ्यक्रमों के माध्यम से लाभार्थियों को एनएसक्यूएफ (राष्ट्रीय कौशल योग्यता प्रारूप) के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगी, और संगठित क्षेत्र में अवसरों सहित रोजगार के किसी न किसी रूप में पात्र कुशल लाभार्थियों की नियुक्ति की सुविधा प्रदान करेगी। सभी लाभार्थियों को एमएसडीई (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय)/एनसीवीईटी द्वारा अनुमोदित संस्थानों से प्रमाणन प्राप्त होगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ जनवरी 2026 में होने की संभावना है।

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राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (26 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले सभी बच्‍चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता बच्चों ने अपने परिवारों, समुदायों और पूरे देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश भर के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्‍य से प्रदान किए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व सिख धर्म के दसवें गुरु और सभी भारतीयों द्वारा श्रृद्धेय  गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चार पुत्रों ने सत्य और न्याय के समर्थन में संघर्ष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि दो सबसे छोटे साहिबजादों की वीरता का सम्‍मान और आदर भारत और विदेश दोनों में किया जाता है। उन्होंने उन महान बाल नायकों को श्रद्धापूर्वक याद किया जिन्‍होंने सत्य और न्याय के लिए गर्व के साथ अपने प्राणों की आहुति दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश की महानता तब निश्चित होती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से परिपूर्ण होते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों ने वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रग्निका जैसे प्रतिभाशाली बच्‍चों के कारण ही भारत को विश्व पटल पर शतरंज की महाशक्ति माना जाता है। अजय राज और मोहम्मद सिदान पी, जिन्होंने अपनी वीरता और सूझबू    झ से दूसरों की जान बचाई, प्रशंसा के पात्र हैं। नौ वर्षीय बेटी व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय बहादुर बेटे कमलेश कुमार ने अपने साहस से दूसरों की जान बचाते हुए अपनी प्राण गंवा दिए। दस वर्षीय श्रवण सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध से जुड़े जोखिमों के बावजूद अपने घर के पास सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई। वहीं, दिव्यांग बेटी शिवानी होसुरू उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए खेल जगत में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। वैभव सूर्यवंशी ने अत्‍यंत प्रतिस्पर्धी और प्रतिभा-समृद्ध क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है और कई रिकॉर्ड स्‍थापित किए। श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे आगे भी अच्छे कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।

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एनसीएम ने भारत के इतिहास के युवा नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और वीरता को सम्मानित एवं स्मरण करने के लिए वीर बाल दिवस का आयोजन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने आज अपने कार्यालय परिसर में वीर बाल दिवस का आयोजन किया। इसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को साहिबजादों के असाधारण साहस और सर्वोच्च बलिदान के बारे में सूचित और शिक्षित करना था। साथ ही, भारत के इतिहास के युवा नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और शौर्य का सम्मान और स्मरण करना भी था ।

40 से अधिक बच्चों ने कहानी सुनाने, कविता पाठ, चित्रकारी, पोस्टर बनाने और वाद-विवाद जैसे कई रोचक और शिक्षाप्रद कार्यकलापों में सक्रिय रूप से भाग लिया । बच्चों ने ‘स्वच्छ भारत’ और स्वस्थ भारत पर इसके प्रभावों पर निबंध लिखे।

इन कार्यकलापों ने बच्चों को अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने, भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानने और वीरता, देशभक्ति और नैतिक शक्ति के मूल्यों को आत्मसात करने के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया।

एनसीएम की सचिव ने सभी प्रतिभागी बच्चों के उत्साह और प्रयासों की सराहना की। विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए , जिससे युवा प्रतिभागियों के बीच उत्कृष्टता और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिला।

उन्होंने अपने समापन भाषण में कहा कि देश के बच्चों और युवाओं को प्रधानमंत्री के उस आह्वान का पालन करना चाहिए जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने की बात कही है।

यह आयोजन वास्तव में प्रधानमंत्री की वीर बाल दिवस मनाने की अपील भावना को दर्शाता है। इसमें भारत के बच्चों की रचनात्मकता, आकांक्षाओं और क्षमता को प्रदर्शित किया गया, जो राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन स्कोप फॉर चेंज’ के सहयोग से किया गया था ।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इन पहलों के माध्यम से सभी समुदायों के बच्चों के बीच समावेशी भागीदारी, ऐतिहासिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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